Rajasthan News : देवर के साथ मिलकर पति की सुपारी देकर कराई हत्या

Rajasthan News : आवारा सन्नी की नजर अपने ताऊ के एकलौते बेटे कृष्णकुमार की करोड़ों रुपए की संपत्ति पर थी, इसलिए उस ने कृष्णकुमार की पत्नी कुसुमलता को अपने प्यार के जाल में फांस लिया. फिर कुसुमलता को अपने विश्वास में ले कर उस ने ऐसी चाल चली कि…

पहली अप्रैल, 2021 को सुबह के करीब पौने 8 बज रहे थे. राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ थाने के थानाप्रभारी विनोद सांखला को फोन पर सूचना मिली कि जखराना बसस्टैंड के पास एक बाइक और स्कौर्पियो गाड़ी की भिड़ंत हो गई है. सूचना मिलते ही विनोद सांखला पुलिस टीम ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर काफी भीड़ जमा थी. पुलिस को देखते ही थोड़ा हट गई. पुलिस ने देखा कि वहां एक व्यक्ति की दबीकुचली लाश सड़क पर पड़ी थी. थोड़ी दूरी पर मृतक की मोटरसाइकिल गिरी पड़ी थी. घटनास्थल पर प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि नीमराना की तरफ से स्कौर्पियो गाड़ी आई थी.

स्कौर्पियो में सवार लोगों ने जानबूझ कर मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी. बाइक सवार स्कौर्पियो की टक्कर से उछल कर दूर जा गिरा. तब स्कौर्पियो यूटर्न ले कर आई और बाइक से गिरे युवक को कुचल कर चली गई. गाड़ी के टायर युवक के सिर पर से गुजरे तो सिर का कचूमर निकल गया. जब स्कौर्पियो सवार निश्चिंत हो गए कि बाइक सवार की मौत हो गई है, तब वे वापस उसी रोड से भाग गए. वहां मौजूद लोगों ने थानाप्रभारी विनोद सांखला को बताया कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है. स्कौर्पियो में सवार अज्ञात लोगों ने बाइक सवार को जानबूझ कर टक्कर मार कर हत्या की है.

थानाप्रभारी ने घटना की खबर उच्च अधिकारियों को दे दी. खबर पा कर बहरोड़ के सीओ और एसडीएम घटनास्थल पर आ गए. बाइक सवार युवक की पहचान कृष्णकुमार यादव निवासी भुंगारका, महेंद्रगढ़, हरियाणा के रूप में हुई. कृष्णकुमार यादव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जखराना में अपर डिविजन क्लर्क के पद पर कार्यरत था. कृष्णकुमार के एक्सीडेंट होने की खबर पा कर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि कृष्णकुमार यादव अपने पिताजी की औन ड्यूटी मृत्यु होने पर उन की जगह मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पर लगा था.

कृष्णकुमार अपने मांबाप का इकलौता बेटा था. वह अपने गांव भुंगारका से रोजाना बाइक द्वारा ड्यूटी आताजाता था. सीओ देशराज गुर्जर ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और उपस्थित लोगों से जानकारी ली. जानकारी में यही सामने आया कि कृष्णकुमार की साजिशन हत्या की गई है. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज निकाले. फुटेज से पता चला कि प्रत्यक्षदर्शियों ने जो बातें बताई थीं, वह सच थीं. हत्यारे कृष्णकुमार की हत्या को दुर्घटना दिखाना चाह रहे थे. मगर लोगों ने यह सब अपनी आंखों से देखा था.

मृतक के परिजनों को भी हत्या की खबर दे दी गई. खबर मिलते ही मृतक के घर वाले एवं रिश्तेदार घटनास्थल पर आ गए. उन से भी पुलिस ने पूछताछ की और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद वह परिजनों को सौंप दिया. मृतक के परिजनों की तरफ से कृष्णकुमार की हत्या का मामला बहरोड़ थाने में दर्ज करा दिया गया. बहरोड़ थानाप्रभारी विनोद सांखला, एसआई सुरेंद्र सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर स्कौर्पियो गाड़ी के नंबरों के आधार पर जांच शुरू की. पुलिस ने स्कौर्पियो गाड़ी का नंबर दे कर सभी थानों से इस नंबर की गाड़ी की जानकारी देने को कहा.

तभी जयपुर पुलिस ने सूचना दी कि इस नंबर की स्कौर्पियोगाड़ी पावटा जयपुर में खड़ी है. पुलिस टीम ने पावटा जयपुर पहुंच कर वहां से स्कौर्पियो गाड़ी सहित 2 युवकों अशोक और पवन को भी हिरासत में ले लिया. गाड़ी के मालिक अजीत निवासी भुंगारका सहित कुछ और संदिग्ध युवकों को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए उठा लिया. थाने में इन सभी से पूछताछ की. अशोक व पवन मेघवाल एक ही रट लगाए थे कि उन की कृष्णकुमार से कोई दुश्मनी नहीं थी. अचानक वह गाड़ी से टकरा गया था. बाइक के एक्सीडेंट के बाद हड़बड़ाहट में गाड़ी घुमाई तो कृष्णकुमार पर गाड़ी चढ़ गई.

उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात का डर लग रहा था कि लोग उन्हें पकड़ कर मार न डालें, इस डर के कारण वे गाड़ी भगा ले गए. मगर आरोपियों की यह बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. भुंगारका निवासी अजीत ने पुलिस को बताया कि उस ने अपनी स्कौर्पियो गाड़ी 1 लाख 80 हजार में सन्नी यादव को बेच दी. सन्नी ने अशोक के नाम पर यह गाड़ी खरीदी थी. अजीत ने पुलिस को सन्नी का नाम बताया. तब तक पुलिस को लग रहा था कि अजीत का इस मामले से कोई संबंध नहीं है.

अशोक और पवन मेघवाल 4 दिन तक पुलिस को एक ही कहानी बताते रहे कि अचानक बाइक से गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया था. पुलिस को भी लगने लगा था कि मामला कहीं दुर्घटना का ही तो नहीं. मगर सीसीटीवी फुटेज में जो एक्सीडेंट का दृश्य था, वह बता रहा था कि कृष्णकुमार की साजिश के तहत हत्या की गई थी. हत्या को उन्होंने साजिश के तहत दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की थी. तब पुलिस अधिकारियों ने अपना पुलिसिया रूप दिखाया. बस फिर क्या था. पुलिस का असली रूप देख कर वे टूट गए और स्वीकार कर लिया कि उन्होंने जानबूझ कर कृष्णकुमार यादव की हत्या की थी, फिर उन्होंने हत्या की कहानी बता दी.

हरियाणा के नांगल चौधरी इलाके के भुंगारका गांव में कृष्णकुमार यादव अपनी पत्नी कुसुमलता (35 वर्ष) के साथ रहता था. कृष्णकुमार की 4 बहनें हैं, जिन की शादी हो चुकी थी. वे सब अपनी ससुराल में हैं. पिता की औनड्यूटी मृत्यु होने के बाद आश्रित कोटे के तहत कृष्णकुमार की क्लर्क पद पर सरकारी स्कूल में नौकरी लग गई थी. वह अपने मातापिता का इकलौता बेटा था. कृष्णकुमार के पड़ोस में उस के चाचा मुकेश यादव रहते थे. उन का बड़ा बेटा सन्नी 10वीं कक्षा में फेल हो गया तो उस ने स्कूल छोड़ दिया. वह कोई कामधंधा नहीं करता था. कृष्णकुमार के परिवार के ठाठबाट देखता तो उसे जलन होती थी. क्योंकि कृष्णकुमार के पास करोड़ों की संपत्ति थी.

कृष्णकुमार के नाम करीब 50 बीघा जमीन थी. जोधपुर, राजस्थान के फलोदी में 17 बीघा जमीन, बहरोड़ में 2 कामर्शियल प्लौट, भुंगारका गांव में 32 बीघा जमीन व आलीशान मकान था. यह सब कृष्णकुमार के नाम था. सन्नी ने योजना बनाई कि अगर कुसुमलता को वह प्यार के जाल में फंसा क र कृष्णकुमार को रास्ते से हटा दे तो वह कुसुमलता से विवाह कर के करोड़ों की प्रौपर्टी का मालिक बन सकता है. आज से 3 सल पहले सन्नी ने कुसुमलता पर डोरे डालने शुरू किए. कुसुमलता रिश्ते में उस की भाभी लगती थी. सन्नी से कुसुमलता उम्र में 10 साल बड़ी थी. मगर वह जायदाद हड़प कर करोड़पति बनने के चक्कर में अपने से 10 साल बड़ी भाभी के आसपास दुम हिलाने लगा.

कृष्णकुमार ड्यूटी पर चला जाता तो कुसुमलता घर में अकेली रह जाती थी. कृष्णकुमार की गैरमौजूदगी में सन्नी उस की बीवी के पास चला आता था. सन्नी कुसुमलता के चाचा ससुर का बेटा था. वह भाभी से हंसीमजाक करतेकरते उसे बांहों में भर कर बिस्तर तक ले आया. कुसुमलता भी जवान देवर की बांहों में खेलने लगी. वह सन्नी की दीवानी हो गई. सन्नी की मजबूत बांहों में कुसुमलता को जो शारीरिक सुख का चस्का लगा, वह दोनों को पतन के रास्ते पर ले जा रहा था. सन्नी ने कुसुमलता को अपने रंग में ऐसा रंगा कि वह उस के लिए पति के प्राण तक लेने पर आमादा हो गई. आज से करीब डेढ़ साल पहले सन्नी ने कुसुमलता से कहा,

‘‘कुसुम, तुम रात में कृष्णकुमार को बिजली के करंट का झटका दे कर मार डालो. इस के बाद हम दोनों के बीच कोई तीसरा नहीं होगा. पति की जगह तुम्हारी नौकरी भी लग जाएगी. मैं तुम से विवाह कर लूंगा और फिर हम मौज की जिंदगी जिएंगे.’’

‘‘ठीक है सन्नी, मैं पति के रास्ते से हटाने का इंतजाम करती हूं.’’ कुसुमलता ने हंसते हुए कहा.

वह देवर के प्यार में पति की हत्या करने करने का मौका तलाशने लगी. एक दिन कृष्णकुमार रात में गहरी नींद में था. तब कुसुमलता ने उसे बिजली का करंट दिया. करंट का कृष्णकुमार को झटका लगा तो वह जाग गया. तब बीवी ने कूलर में करंट आने का बहाना बना दिया. कृष्णकुमार को करंट का झटका लगा जरूर था, मगर वह मरा नहीं.

यह सुन कर सन्नी बोला, ‘‘कुसुम, जल्द से जल्द कृष्ण का खात्मा करना होगा.’’

‘‘तुम ही यह काम किसी से करा दो. मैं तुम्हारे साथ हूं मेरी जान.’’ कुसुमलता बोली.

कुसुमलता और सन्नी जल्द से जल्द कृष्णकुमार को रास्ते से हटाना चाहते थे. कृष्ण के ड्यूटी जाने के बाद वाट्सऐप कालिंग पर दोनों बातचीत करते थे. सन्नी ने अपने छोटे भाई की शादी कर दी थी. खुद शादी नहीं की थी. उस का मकसद कुसुमलता से शादी करना था. सन्नी भाभी से शादी कर के जल्द से जल्द करोड़पति बनना चाहता था. सन्नी और कुसुमलता के संबंधों की जानकारी किसी ने कृष्णकुमार को दे दी. बीवी और चचेरे भाई के संबंधों की बात सुन कर कृष्णकुमार को बहुत गुस्सा आया. उस ने अपनी बीवी से इस बारे में बात की तो वह त्रियाचरित्र दिखाने लगी. आंसू बहाने लगी. मगर कृष्णकुमार के मन में संदेह पैदा हुआ तो वह उन दोनों पर निगाह रखने लगा.

इस के बाद कुसुमलता ने सन्नी को सचेत कर दिया. दोनों छिप कर मिलने लगे. मगर उन्हें हर समय इसी बात का डर लगा रहता कि कृष्णकुमार को कोई बता न दे. कृष्णकुमार ने सन्नी से भी कह दिया था कि वह उस के घर न आए. यह बात कृष्ण, कुसुम और सन्नी के अलावा कोई नहीं जानता था. किसी को पता नहीं था कि कृष्ण अपनी बीवी और सन्नी पर शक करता है. ऐसे में कुसुमलता और सन्नी ने उसे एक्सीडेंट में मारने की योजना बनाई ताकि उन पर कोई शक भी न करे और राह का कांटा भी निकल जाए. सन्नी ने इस काम में कुछ खर्चा होने की बात कही तो कुसुमलता ने खुद के नाम की 4 लाख रुपए की एफडी मार्च 2021 के दूसरे हफ्ते में तुड़वा दी. 4 लाख रुपए कुसुम ने सन्नी को दे दिए.

सन्नी ने 18 मार्च, 2021 को भुंगारका के अजीत से 1 लाख 80 हजार रुपए में एक स्कौर्पियो गाड़ी एग्रीमेंट के तहत अशोक कुमार के नाम से खरीदी. अशोक को उस ने 2 छोटे मोबाइल व सिम दिए. इन्हीं सिम व मोबाइल के जरिए अशोक की बात सन्नी से होती थी. कृष्णकुमार को मारने के लिए सन्नी ने अशोक को डेढ़ लाख रुपए भी दे दिए. उसी स्कौर्पियो गाड़ी से अशोक ने सन्नी के कहने पर कृष्णकुमार का एक्सीडेंट करने की कई बार कोशिश की मगर वह सफल नहीं हुआ. तब 26 मार्च, 2021 को राहुल अपने दोस्त पवन मेघवाल को भुंगारका के हरीश के होटल पर ले आया. यहां अशोक से पवन की जानपहचान कराई. रात में तीनों शराब पी कर खाना खा कर होटल पर रुके और सुबह चले गए.

30 मार्च, 2021 को अशोक ने पवन से कहा कि मुझे स्कौर्पियो से एक आदमी का एक्सीडेंट करना है. तुम मेरे साथ गाड़ी में रहोगे तो मैं तुम्हें 40 हजार रुपए दूंगा. पवन की अशोक से नई दोस्ती हुई थी और वैसे भी पवन को सिर्फ गाड़ी में बैठे रहने के 40 हजार रुपए मिल रहे थे, इसलिए 40 हजार रुपए के लालच में पवन ने हां कर दी. 31 मार्च, 2021 को अशोक और पवन मेघवाल स्कौर्पियो गाड़ी ले कर जखराना आए लेकिन उस दिन कृष्णकुमार ड्यूटी पर नहीं गया. अशोक रोजाना की बात सन्नी को बता देता था. सन्नी अपनी प्रेमिका भाभी कुसुमलता को सारी बात बता देता था.

पहली अप्रैल 2021 को सुबह साढ़े 7 बजे कृष्णकुमार अपने गांव भुंगारका से ड्यूटी पर जखराना निकला. यह जानकारी कुसुमलता ने अपने देवर प्रेमी सन्नी को दी. सन्नी ने अशोक को यह सूचना दे दी. अशोक कुमार गाड़ी में पवन को ले कर जखराना बसस्टैंड पहुंच गया. जैसे ही कृष्णकुमार मोटरसाइकिल से जखराना बसस्टैंड से स्कूल की ओर जाने लगा, अशोक ने गाड़ी से कृष्णकुमार को सीधी टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही कृष्णकुमार दूर जा गिरा. इस के बाद अशोक ने गाड़ी को यूटर्न लिया और कृष्ण के ऊपर एक बार चढ़ा दी, जिस के बाद उस की मौके पर ही मौत हो गई.

इस के बाद सूचना पा कर बहरोड़ पुलिस आई. प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे हत्या बताया. तब पुलिस ने जांच कर हत्या के इस राज से परदा हटाया. अशोक कुमार और पवन मेघवाल से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल रहे सन्नी और उस की प्रेमिका कुसुमलता को भी गिरफ्तार कर लिया. इन दोनों ने भी कृष्णकुमार की हत्या में शामिल होने का अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद कुसुमलता, सन्नी यादव, अशोक यादव और पवन मेघवाल को बहरोड़ कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Rajasthan News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Family Dispute : संपत्ति पाने की लालच में देवर ने भाभी की गोली मार कर दी हत्या

Family Dispute :  घर वालों के विरोध के बावजूद फौजी चंद्रशेखर ने अपनी ममेरी बहन वर्षा से शादी कर ली थी. कुछ दिनों बाद संदिग्ध परिस्थितियों में चंद्रशेखर की मृत्यु हो गई तो वर्षा के साथ ऐसी घटना घटी कि…

वर्षा से शादी के बाद से ही खफा चल रहे उस के देवर कृष्णकांत को जब यह पता चला की वर्षा किसी और के साथ लिवइन में रह रही है तो यह उस से सहा नहीं गया. बड़े भाई चंद्रशेखर की मौत के बाद उस का सारा पैसा भी उस की भाभी वर्षा ही ले गई थी. भाई के बदले वह सेना में नौकरी चाह रहा था. यह मामला भी कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका था. भाभी के लिवइन में रहने की खबर के बाद कृष्णकांत को लगा कि भाभी उस के भाई की ही संपत्ति और पैसे पर ऐश कर रही है. तब कृष्णकांत ने अपनी भाभी को सदा के लिए मौत की नींद सुला देने का भयानक निर्णय ले लिया.

मध्य प्रदेश के जिला बैतूल से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर बसा है आमला कस्बा. आदिवासी बाहुल्य यह कस्बा ज्यादा बड़ा तो नहीं है पर आसपास के गांव वाले यहां खरीदारी करने आया करते हैं. लिहाजा शाम तक यहां के बाजार भीड़ से भरे होते हैं. ऐसे में पुलिस को भी कानूनव्यवस्था के लिए चुस्त रहना पड़ता है. 6 फरवरी, 2021 को रात करीब 9 बजे का वक्त रहा होगा. आमला के टीआई सुनील लाटा शहर में भ्रमण पर थे. इसी बीच उन्हें पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि कनौजिया गांव में गोली चली है, इस में एक महिला गंभीर रूप से घायल है.

सूचना मिलते ही टीआई कनौजिया गांव पहुंचे, इस इलाके में गोली चलने की वारदात अमूमन कम ही होती है. बरहाल, टीआई ने इस घटना की जानकारी एसपी सिमाला प्रसाद को दी. साथ ही एसडीपीओ मुलताई नम्रता सोंधिया समेत फोरैंसिक टीम के सदस्यों को दी और वह तत्काल कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. आमला से कनौजिया की दूरी करीब 5 किलोमीटर है, लिहाजा पुलिस को यहां पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगा. पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तब तक भीड़ काफी जमा हो चुकी थी. कनौजिया गांव के जिस मकान में गोली चलने की घटना हुई थी, वहां करीब 4-5 कमरे थे.

पहले कमरे में बैड पर खून से लथपथ एक 27-28 वर्षीय युवती का शव पड़ा था. पास में ही उस का मोबाइल पड़ा था. पुलिस ने अनुमान लगाया कि घटना के समय युवती मोबाइल पर बात कर रही होगी. टीआई सुनील लाटा अभी मौकामुआयना कर ही रहे थे कि इतने में एसडीपीओ (मुलताई) नम्रता सोंधिया भी मौके पर आ गईं. इस के बाद एसपी सिमाला प्रसाद भी वहां पहुंच गईं. पूछताछ में पता चला कि मृतका का नाम वर्षा नागपुरे है और वह बोखड़ी कस्बे की रहने वाली थी. सुबह ही वह अपनी मां के पास कनोजिया आई थी. पुलिस ने यहां लोगों से प्रारंभिक पूछताछ भी की, पर वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं थे.

उन का कहना था कि कौन आया, किस ने वर्षा को गोली मारी, पता ही नहीं चला. वे तो गोली चलने की आवाज के बाद अपने घरों से बाहर आए थे. वर्षा की हत्या की वजह पुलिस को भी समझ नहीं आ रही थी. पुलिस समझ नहीं पा रही थी कि मायके में आने के बाद उस की हत्या किस ने की? एफएसएल टीम द्वारा जांच करने के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने इस के बाद वर्षा के मायके वालों से पूछताछ की तो वर्षा के भाई कृष्णा पवार ने बहन वर्षा की हत्या का संदेह उस के देवर कृष्णकांत नागपुरे और महेश नागपुरे निवासी बोडखी पर व्यक्त किया था.

इधर पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि वर्षा किसी के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी. बहरहाल, सारी जानकारी जुटाने के बाद टीआई सुनील लाटा आमला लौट आए. उन के सामने जिन लोगों के नाम संदेह के तौर पर सामने आए थे, उन पर नजर रखने के लिए उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों को लगा दिया. पुलिस को अपनी जांच में यह भी पता चला कि अपनी ससुराल वालों से वर्षा के रिश्ते ठीक नहीं थे, लिहाजा उन्होंने जांच का रुख ससुराल वालों की तरफ मोड़ लिया. इस बीच टीआई सुनील लाटा को खबर मिली कि वर्षा का देवर कृष्णकांत घटना से कुछ दिनों से गांव बोडखी में ही देखा गया था.

पर घटना के बाद से वह गायब है. पुलिस ने अब अपना ध्यान कृष्णकांत की ओर लगा दिया. पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो यह भी पता चला कि कृष्णकांत का अपनी भाभी वर्षा से काफी समय से विवाद चल रहा था. जब से उस ने कृष्णकांत के बड़े भाई चंद्रशेखर नागपुरे से लवमैरिज की थी, तभी से ससुराल वाले उस से नाराज चल रहे थे. जिस से वह शादी के बाद से ही ससुराल वालों से अलग पति के साथ रह रही थी. वह भी उस से खुश नहीं थे. पुलिस ने वर्षा की सास और जेठ से भी पूछताछ की. उन्होंने बताया कि वर्षा उन से अलग रहती थी. लिहाजा उन्होंने भी उस से रिश्ता लगभग खत्म कर रखा था. इस मामले में पता चला कि कीर्ति नाम की युवती से मृतका के देवर की मित्रता थी.

पुलिस ने कीर्ति के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि उस का कृष्णकांत से मिलनाजुलना था. पुलिस ने कीर्ति से पूछताछ की और उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि घटना के दिन कई बार उस की कृष्णकांत से बात भी हुई थी. कीर्ति से जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती से पूछताछ की तो उस ने बताया कि कृष्णकांत अकसर उस से वर्षा के बारे में पूछता रहता था. तब वह उसे वर्षा की लोकेशन बता देती थी. कीर्ति ने पुलिस को बताया कि अब कृष्णकांत कहां है, इस बारे में उसे कुछ भी पता नहीं है. कृष्णकांत का मोबाइल फोन भी बंद था. पुलिस ने अपने मुखबिरों को लगातार इस मामले में नजर रखने को कहा था. इस का परिणाम यह हुआ की पुलिस को जानकरी मिली कि कृष्णकांत भोपाल में है.

पुलिस को यह भी पता चला कि वह कोर्ट के काम से आमला आने वाला है. लिहाजा पुलिस मुस्तैद हो कर उस के आने का इंतजार करने लगी. अगले दिन जैसे ही वह आमला आया, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने थाने ले जा कर जब कृष्णकांत से पूछताछ की तो वह खुद को बेगुनाह बताने लगा. उस ने बताया कि घटना वाली तारीख को वह भोपाल में था. पुलिस ने जब उसे बताया कि घटना की रात उस का मोबाइल देर रात तक आमला के आसपास ही लोकेशन दिखा रहा था. उसे उस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स दिखाई तो वह टूट गया. उस ने कबूल कर लिया कि उस ने अपनी दोस्त कीर्ति की मदद से अपनी भाभी वर्षा की हत्या की है.

वर्षा ने हालात ही ऐसे बना दिए थे, जिस से उसे उस की हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा. कृष्णकांत ने पुलिस को जो बताया उस के अनुसार कहानी कुछ इस प्रकार सामने आई—

बैतूल जिले के आमला गांव के समीप बोडखी में रहने वाले आर.के. नागपुरे के 3 बेटों में सब से बड़ा चंद्रशेखर नागपुरे था. इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद चंद्रशेखर सेना में भरती हो गया. नौकरी से छुट्टी मिलने पर जब वह घर आता तो कनोजिया में रहने वाले अपने मामा के यहां भी जाता था. उस के मामा की बेटी वर्षा उस समय जवानी की दहलीज पर कदम रख ही रही थी और महज 16 साल की थी. इधर चंद्रशेखर 27 की उम्र छू रहा था. पर सेना में होने के कारण उस का बदन गठीला था और सेना में होने का रौब तो उस पर था ही. उसी दौरान वर्षा से उसे प्यार हो गया. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे.

रिश्ते मे वर्षा चंद्रशेखर की ममेरी बहन थी, पर इस के बाद भी दोनों रिश्तों की मर्यादा भूल गए और प्यार की पींगे बढ़ाने लगे. जब इस बात की भनक चंद्रशेखर के घर वालों को लगी तो वे उस पर नाराज हुए. उन को कतई गवारा नहीं था कि उन का बेटा ऐसी युवती से प्रेम करे, जो उस के सगे रिश्ते में आती हो. वे चंद्रशेखर का रिश्ता कहीं दूसरी जगह करने की योजना बना रहे थे. उन्होंने चंद्रशेखर को काफी समझाया पर वह नहीं माना. चंद्रशेखर ने घर वालों के विरोध की परवाह नहीं की ओर वर्षा से मिलना जारी रखा. वर्षा भी उस के प्यार में दीवानी थी. लिहाजा उस ने नजदीकी रिश्ते से ज्यादा अपने प्यार को अहमियत दी.

नतीजा यह हुआ कि घर वालों के विरोध के बावजूद चंद्रशेखर और वर्षा ने शादी का फैसला कर लिया और घर वालों के विरोध के बावजूद उन्होंने शादी कर ली. शादी चूंकि चंद्रशेखर ने घर वालों के विरोध के बावजूद की थी, लिहाजा शादी के बाद वह घर से अलग हो गया और बोखड़ी में ही अलग मकान ले कर रहने लगा. समय अपनी गति से बीतता रहा. कुछ समय बाद वर्षा एक बेटे की मां भी बन गई. बात 2013 के आसपास की है. चंद्रशेखर की जहर खाने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. उस ने जहर कैसे खाया, इस बात का खुलासा तो नहीं हो पाया, पर कहा यह जाता है कि चंद्रशेखर अपने घर वालों के व्यवहार से दुखी था और घर वालों द्वारा उसे स्वीकार नहीं किया तो उस ने यह कदम उठा लिया.

हालांकि उस ने जहर खाया था या उसे दिया गया था, यह भी एक रहस्य था. चंद्रशेखर की मृत्यु के बाद उस की सारी संपत्ति की वारिस उस की पत्नी वर्षा बन गई. चंद्रशेखर के घर वाले वर्षा को पहले ही नापसंद करते थे. उन्होंने इस शादी को भी मान्यता नहीं दी थी, लिहाजा वे इस के खिलाफ हो गए कि वर्षा को उस की संपत्ति में से कुछ मिले. पर उन के चाहने से कुछ नहीं हुआ. सेना ने वर्षा को उस की पत्नी मानते हुए उस की मौत के बाद उस के सारे देय दे दिए. बताया जाता है कि वर्षा को चंद्रशेखर की मौत के बाद करीब 30 लाख रुपए मिले थे. चंद्रशेखर का भाई कृष्णकांत इसे अपनी संपत्ति मान रहा था और उस का मानना था कि इस से उस के घर वालों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

उस ने सेना मुख्यालय में भी पत्र लिख कर इस धनराशि में अपना अधिकार बताया. कृष्णकांत ने कहा कि चंद्रशेखर का वर्षा के साथ कभी विवाह हुआ ही नहीं था. दोनों भाईबहन थे, लिहाजा उस की संपत्ति पर घर वालों का अधिकार है. उस ने चंद्रशेखर की मौत के बाद खुद को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने की मांग भी सेना से की थी. जब यह बात नहीं बनी तो वह कोर्ट चला गया. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी थी. अब बात करते हैं हत्या के कारणों की. बड़े भाई चंद्रशेखर की मौत के बाद कृष्णकांत भोपाल आ गया और यहां एक कंपनी में मोटरसाइकिल राइडर बन गया. वह कंपनी के निर्देश पर लोगों को लाने ओर छोड़ने का काम करने लगा.

इस दौरान वह जब भी गांव जाता तो वर्षा के शानोशौकत भरे खर्चे देख कर उसे बेहद पीड़ा होती थी. उसे लगता था कि उस का परिवार आर्थिक दिक्कत झेल रहा है और वर्षा उस के भाई की मौत के बाद मिले पैसों से ऐश कर रही है. कुछ दिनों बाद कृष्णकांत को पता चला की वर्षा किसी और व्यक्ति के साथ लिवइन में रहने लगी है तो उसे और बुरा लगा. उसे लगा कि अब तो वर्षा की संपत्ति उसे कभी नहीं मिलेगी. लाखों के लालच में उस ने वर्षा को मारने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने कीर्ति को अपने विश्वास में लिया और उस से दोस्ती कर ली. कीर्ति को उस ने यह जिम्मेदारी दी कि वर्षा की हर गतिविधि पर नजर रखे और उस की हर गतिविधि की उसे फोन द्वारा जानकारी देती रहे.

6 फरवरी, 2021 को वर्षा अपनी मां के यहां आई थी. कीर्ति ने इस की जानकारी फोन पर कृष्णकांत को दी. कृष्णकांत को लगा कि अच्छा मौका है. शाम के समय वैसे भी गांव में अंधेरा छा जाता है और अधिकांश लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं. ऐसे मे वर्षा की हत्या करना कृष्णकांत को आसान लगा. उस ने अपने एक मित्र से एक तमंचे का जुगाड़ किया और शाम को मोटरसाइकिल से सीधा कनौजिया गांव पहुंचा और वर्षा के घर के सामने जा कर खड़ा हो गया. वहां उस समय कुछ लोग उसे दिखे और घर का दरवाजा भी बाहर से बंद था. लिहाजा वह घर के पीछे गया. वहां वर्षा की दादी बरतन साफ कर रही थीं. बूढ़ी होने के कारण उन्हें कम दिखाई और कम सुनाई देता था.

उन्हें चकमा दे कर वह पीछे के दरवाजे से अंदर घुस गया. वर्षा कमरे में किसी से फोन पर बात कर रही थी. कृष्णकांत ने बिना समय गंवाए उस पर गोली चला दी. गोली लगते ही वर्षा ढेर हो गई. उधर अपना काम करने के बाद कृष्णकांत पीछे के दरवाजे से फरार हो गया. उसी रात वह मोटरसाइकिल से भोपाल आ गया. कोर्ट के काम से उसे फिर आमला जाना पड़ा. हालांकि वह 2 दिन में निश्चिंत हो चुका था कि उसे किसी ने नहीं देखा होगा. इस कारण वह पकड़ा नहीं जाएगा.

लेकिन कहते हैं न कि जुर्म कहीं न कहीं अपने निशान छोड़ ही जाता है. कृष्णकांत के साथ भी यही हुआ. पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ी तो उस का जुर्म सामने आ गया. पुलिस ने कृष्णकांत और कीर्ति से पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Family Dispute

MP News : सरकारी नौकरी की चाहत में पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर ले ली पति की जान

MP News : सोशल मीडिया कुछ नासमझ औरतों के लिए जहर की तरह है. मनीषा भी उन्हीं में थी. फेसबुक पर उस ने खेमचंद उर्फ राज से जो दोस्ती की, उस ने उस का घर तो उजाड़ ही दिया. साथ ही…

अरविंद राजपूत का घर मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के घमापुर इलाके में सरकारी कुआं के पास था. 49 साल का अरविंद राजपूत जबलपुर नगर निगम के आधारताल जोन में बतौर डाक रनर काम करता था. उस के परिवार में 30 साल की पत्नी मनीषा, 7 साल की बेटी और 5 साल का एक बेटा था. करीब 10 साल पहले जब अरविंद के मातापिता जीवित थे तो घर की माली हालत अच्छी नहीं थी. घर अरविंद के बड़े भाई की कमाई से चलता था. जब बड़े भाई की शादी हो गई तो वह अपनी पत्नी के साथ अलग रहने लगा. हायर सेकेंडरी तक पढ़े अरविंद की उम्र बढ़ती जा रही थी, पर न ही उसे कहीं कामधंधा मिल रहा था और न ही उस की शादी हो पा रही थी.

आखिरकार 2012 में अरविंद को जबलपुर नगर निगम में दैनिक वेतन पर काम मिल गया. अरविंद जब  40 साल का था तो सन 2012 में उस की शादी मनीषा ठाकुर से हो गई, जिसे बबली भी कहते थे. उस की उम्र 21 साल थी. मनीषा की मां का बचपन में ही निधन हो गया था. उस के पिता ने उस की सगी मौसी से शादी कर ली थी, जिसे उस ने सगी बेटी की तरह पाला था. मैट्रिक तक पढ़ी मनीषा सुडौल काया और सुंदर आंखों की वजह से बहुत सुंदर लगती थी. मनीषा के 2 भाई थे. छोटा ग्वारीघाट में रेस्टोरेंट चलाता था, जबकि बड़े भाई ने दूसरी जाति की लड़की से लव मैरिज कर ली थी. वह परिवार से अलग रहता था.

अरविंद मनीषा का बहुत खयाल रखता. मनीषा चंचल और खुले विचारों वाली लड़की थी उसे सजनासंवरना और घूमनाफिरना पसंद था. लेकिन अपने से दोगुनी उम्र के पुराने खयालात के सादगी पसंद पति अरविंद के साथ वह मन मार कर दिन काट रही थी. सन 2016 में नगर निगम ने अरविंद की डाक रनर की नौकरी स्थाई कर दी. वक्त के साथ अरविंद के परिवार में एक बेटी और एक बेटा आ गया. जब तक घर में अरविंद के मातापिता जीवित रहे, मनीषा उन की देखरेख में लगी रही. अरविंद टिफिन ले कर सुबह औफिस निकल जाता तो शाम को ही लौटता. मनीषा का जब भी मन होता अपने बच्चों को ले कर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां चली जाती.

जब वह लोगों को स्मार्टफोन पर फेसबुक, यूट्यूब चलाते देखती तो उस का मन भी करता कि उस के पास भी स्मार्टफोन होता तो कितना अच्छा होता. एक दिन उस ने अरविंद से स्मार्टफोन की डिमांड रख दी. अरविंद के पास कोई सेलफोन नहीं था, न ही ऐसी हैसियत थी कि महंगा स्मार्टफोन खरीद सके. इस के बावजूद उस ने पत्नी को खुश रखने के लिए स्मार्टफोन ला कर दे दिया. अरविंद ने मनीषा को औफिस के अपनेएकदो साथियों के नंबर भी दे दिए .जब भी मनीषा को अरविंद से बात करनी होती वह उस के दोस्तों के फोन पर काल कर के पति से बात कर लेती. मनीषा की अंगुलियां पूरे दिन स्मार्टफोन पर घूमती रहतीं.

उस ने फेसबुक पर अपना एकाउंट बनाया और प्रोफाइल में अपनी खूबसूरत अदाओं वाली तसवीरें अपलोड कर दीं. उसे बहुत सारे लाइक और कमेंट्स मिलने लगे. उस ने बहुत सारे लोगों की फ्रैंड रिक्वेस्ट भी स्वीकार कर ली थी. अरविंद थकाहारा जब काम से लौटता तो घर पर मनीषा को बच्चों के साथ मोबाइल में बिजी देख कर खुश हो जाता. अरविंद 49 साल की उम्र पार कर चुका था, जबकि मनीषा अभी 29 साल की जवान औरत थी. बढ़ती उम्र, शराब की लत और नौकरी के बोझ ने अरविंद को जिस्मानी तौर पर  कमजोर बना दिया था. उसे महसूस होने लगा था कि अब वह मनीषा को शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं कर पा रहा है.

औरत की शारीरिक जरूरतें पति पूरी करने में सक्षम न हो तो कई बार औरत के कदम बहक जाते हैं. ऐसा ही मनीषा के साथ हुआ. मनीषा फेसबुक की दुनिया में इस तरह खो गई थी कि वह बिना जांचपड़ताल के किसी भी लड़के को अपना फ्रैंड बना लेती थी. फेसबुक पर नएनए दोस्त बनाना और सोशल मीडिया पर चैटिंग करना उस का शगल बन गया था . 2019 के मार्च महीने में एक दिन मनीषा दोपहर में घर के कामकाज से निपट कर बिस्तर पर लेटी थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने जैसे ही हैलो बोला दूसरी तरफ से किसी लड़के की आवाज आई, ‘‘हाय मनीषा, मैं राज बोल रहां हूं.’’

‘‘कौन राज?’’ मनीषा ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘मनीषा, मैं राज यादव हूं. फेसबुक पर तुम्हें फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी, जिसे तुम ने स्वीकार कर लिया था.’’

‘‘पर तुम्हें मेरा मोबाइल नंबर किस ने दिया?’’ मनीषा ने हैरानी से पूछा .

‘‘हम जिसे दिल से चाहते हैं, उस का मोबाइल नंबर तो क्या उस की पूरी खोजखबर रखते हैं.’’ राज ने दीवानगी के साथ जवाब दिया. मनीषा को किसी अपरिचित लड़के का इस तरह बात करना अच्छा नहीं लगा. उस ने थोड़ी सी बात कर के फोन काट दिया. फिर उसे याद आया कि कुछ दिन पहले उस ने राज यादव नाम के लड़के की फ्रैंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की थी. उसे यह उम्मीद कतई नहीं थी कि कोई फेसबुक फ्रैंड उसे फोन मिला कर इस तरह बातचीत करेगा. मनीषा की फेसबुक की यह दोस्ती धीरेधीरे मनोरंजन का साधन बन गई. पति अरविंद दिन भर औफिस में रहता और मनीषा का समय सोशल मीडिया पर बीतता. उस ने उस दिन भले ही फोन डिसकनेक्ट कर के राज से तौबा कर ली थी, लेकिन वह हाथ धो कर उस के पीछे पड़ गया था.

वह रोज ही किसी न किसी बहाने उसे फोन करने लगा. वह मनीषा के फेसबुक मैसेंजर पर कभी प्यारभरी शेरोशायरी भेजता तो कभी उस की पोस्ट पर कमेंट कर के प्यार जताता. धीरेधीरे मनीषा को भी राज से फोन पर बातचीत करने में मजा आने लगा. फोन पर शुरू हुआ बातचीत का यह सिलसिला कब प्यार में बदल गया, मनीषा को पता ही नहीं चला. अब वह रोज राज के फोन का इंतजार करती. कभी राज फोन करना भूल जाता तो मनीषा उसे काल कर के उस से प्यार भरी बातें करती. कभीकभी दोनों वीडियो काल के जरिए भी एकदूजे का दीदार करके मस्तीभरी बातें कर लेते थे.

राज और मनीषा का प्यार परवान चढ़ा तो एक दिन वह मनीषा से मिलने जबलपुर आ गया. उस समय अरविंद काम पर गया हुआ था और उस के दोनों बच्चे अरविंद के बड़े भाई के घर गए हुए थे. मनीषा ने 25 साल के गोरेचिट्टे गबरू जवान राज को देखा तो पलभर के लिए तो वह सपनों की दुनिया में खो गई. राज ने बताया कि उस का नाम खेमचंद यादव है, लेकिन उसे घर वाले राज कहते हैं. राज ने मनीषा से फेसबुक मैसेंजर और वीडियो काल के जरिए तो कई बार बातें की थी, लेकिन खूबसूरत मनीषा को पहली बार नजरों के सामने देखा तो अपना आपा खो बैठा.

मनीषा कब से उस से मिलने के सपने संजोए थी, उसे मौका मिला तो उस ने भी राज का पूरे मन से साथ दिया. शाम को जब अरविंद काम से घर लौटा तो घर में नए मेहमान को देख मनीषा से पूछा, ‘‘अरे मनीषा, मेहमान कहां से आए हैं?’’

मनीषा ने खेमचंद का परिचय कराते हुए कहा, ‘‘ये मेरी बचपन की सहेली के जीजा हैं. नाम है राज यादव. यूपी के बांदा से किसी काम के सिलसिले में जबलपुर आए हैं.’’ अरविंद ने गर्मजोशी से राज का स्वागत किया और उस की खूब मेहमाननवाजी भी की. दूसरे दिन अरविंद उसे भेड़ाघाट घुमाने ले गया और वहां का धुआंधार जलप्रपात दिखाया. शाम को बैठ कर दोनों ने जाम छलकाए. राज यादव महीने दो महीने में काम का बहाना बना कर मनीषा से मिलने जबलपुर आने लगा. जब वह जबलपुर आता तो अरविंद के साथ  बैठ कर खूब शराब पीता और मनीषा के बच्चों पर पैसे खर्च करता.

लेकिन मनीषा और राज की प्रेम कहानी समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक न छिप सकी. जब अरविंद के बड़े भाई को इस बात का पता चला तो उस ने राज के इस तरह मनीषा से मिलनेजुलने पर आपत्ति उठाई. अरविंद के मन में भी शक का कीड़ा कुलबुलाता था, लेकिन वह यह सोच कर तसल्ली कर लेता कि मनीषा उसे और उस के बच्चों को कितना प्यार करती है. 22 जनवरी, 2021 सुबह के 9 बजे थे. कैंट पुलिस थाने में फोन द्वारा सूचना मिली कि सदर इलाके के मुर्गी मैदान पर कोई युवक नशे में बेसुध पड़ा है. कैंट थाने में इस तरह की सूचनाएं आए दिन मिलती रहती थीं, इसलिए ड्यूटी पर मौजूद एसआई कन्हैया चतुर्वेदी अपने एक साथी पुलिसकर्मी के साथ मुर्गी मैदान की ओर रवाना हो गए.

वह मुर्गी मैदान पहुंचे तो उन्होंने देखा कि 24-25 साल का एक युवक औंधे मुंह जमीन पर पड़ा है. पुलिस टीम ने पास जा कर जैसे ही उसे सीधा किया तो युवक का चेहरा और सिर खून से सना हुआ है. वह मर चुका था. स्थिति को समझ कर कन्हैया चतुर्वेदी ने तत्काल टीआई विजय तिवारी समेत पुलिस के आला अधिकारियों को सूचना दी और आसपास के लोगों से पूछताछ करने लगे. कुछ ही देर में फोरैंसिक टीम के साथ टीआई विजय तिवारी घटनास्थल पहुंच गए. घटनास्थल पर शराब की बोतल और पानी के पाउच के साथ चखना के खाली पैक पड़े थे. डैडबौडी के पास ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा मिला, जिस पर खून के निशान थे. शायद इसी पत्थर से सिर पर वार कर युवक की हत्या की गई थी.

घटनास्थल पर अब तक लोगों की काफी भीड़ जमा थी, लेकिन कोई भी मृतक को नहीं पहचान सका. एसआई कन्हैया चतुर्वेदी ने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो उन्हें मृतक की पैंट की जेब में नगर निगम की डाकबुक मिली. डाकबुक को उलटपलट कर देखा गया तो परची पर एक मोबाइल नंबर लिखा था. परची में लिखे मोबाइल नंबर पर टीआई विजय तिवारी ने फोन लगाया तो फोन रिसीव करने वाले ने अपना नाम मलखान और पता ग्वारघाट बताया. टीआई तिवारी ने जब उसे बताया कि मुर्गी मैदान पर एक डैडबौडी मिली है. उसी के कपड़ों की जांच में नगर निगम की डाकबुक और यह मोबाइल नंबर मिला है.

तब मलखान ने पुलिस को बताया कि उस का जीजा अरविंद राजपूत नगर निगम में डाक लाने ले जाने का काम करता था. मलखान ने जब मनीषा को फोन लगा कर बातचीत की तो उस ने बताया कि वह कल अरविंद को बता कर बच्चों के साथ एक गमी के कार्यक्रम में वेहिकल फैक्ट्री इलाके में आई है. मलखान ने मनीषा से अरविंद के साथ किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त की तो वह फोन पर रोने लगी. मलखान ने उसे समझाते हुए उस के साथ तत्काल मुर्गी मैदान चलने को कहा. मलखान कुछ ही देर में मनीषा और एक रिश्तेदार को आटो में बिठा कर सदर के मुर्गी मैदान पहुंच गया. वहां पहुंच कर मनीषा ने पति अरविंद को पहचान लिया.

लाश की पहचान होने पर पुलिस टीम ने शव पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दिया और आगे की काररवाई में जुट गई. स्थिति के मद्देनजर पुलिस मनीषा के बयान नहीं ले सकी. घटना को बीते 3 दिन हो चुके थे. इसी दौरान मनीषा ने एक बार घर पर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिस की जानकारी कैंट पुलिस को मिल गई थी. पुलिस सहानुभूति की वजह से उस के बयान नहीं ले पा रही थी. एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा के निर्देश पर नगर की सीएसपी भावना मरावी ने हत्या का राज जानने के लिए कैंट थाना पुलिस की एक टीम तैयार की. कैंट पुलिस थाना के टीआई विजय तिवारी ने जब मनीषा के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो 2 मोबाइल नंबर संदिग्ध पाए गए.

इन मोबाइल नंबरों की लोकेशन सर्च करने पर पुलिस को एक नंबर आकाश विनोदिया, सिविल लाइंस, जबलपुर का और दूसरा नंबर खेमचंद यादव, बांदा, उत्तर प्रदेश का था. कैंट पुलिस ने सब से पहले राज यादव के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया तो घटना वाले दिन 21 जनवरी को उस की लोकेशन सुबह के 6 बजे से रात के 9 बजे तक जबलपुर की मिली. पुलिस की टीम जब खेमचंद की खोजबीन के लिए बांदा पहुंची, तब तक वह अपने गांव बेनीपुर पहुंच चुका था. पुलिस ने उस की लोकेशन ट्रेस कर उस के घर पर मुंहअंधेरे दबिश तो यह पिछले दरवाजे से भाग निकला. आसपास के इलाकों में दिन भर उस की तलाश की गई, मगर राज नहीं मिला. उस के पिता ने बताया कि वह अपने बड़े भाई के पास सूरत जा सकता है.

पिता को राज और मनीषा के प्रेम संबंधों की पूरी जानकारी थी. पता चला कि मनीषा जून, 2020 में आंखों का इलाज करवाने के बहाने चित्रकूट आई थी और दोनों 5 दिनों तक एक होटल में रुके थे. तब उस ने मनीषा को समझाया था कि अपना वैवाहिक जीवन बरबाद न करे. मगर वह राज के प्यार में पागल हो गई थी. राज अपना मोबाइल घर पर छोड़ गया था, ऐसे में राज को खोजना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था. पुलिस उस का मोबाइल जब्त कर खाली हाथ लौट आई.

कैंट पुलिस पर जब पुलिस अधिकारियों का दबाव पड़ा तो आकाश विनोदिया की मोबाइल लोकेशन पर पहुंच गई. जबलपुर के सिविल लाइंस जा कर पता चला वह नंबर एक रिटायर्ड मैडिकल नर्स का है जो काफी बूढ़ी हो गई थीं. उन्होंने खुद को इलाके की भजन मंडली का अध्यक्ष बताते हुए मनीषा और अरविंद से किसी तरह की जानपहचान होने से इनकार किया. उन्होंने यह भी बताया कि यह सिमकार्ड उस के भतीजे आकाश ने ला कर दिया था, लेकिन इस सिमकार्ड का उपयोग आकाश कभी नहीं करता. पुलिस की समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अरविंद के मर्डर से नर्स का क्या कनेक्शन हो सकता है. पुलिस ने जब उन से पूछा, ‘‘आप के मोबाइल से कोई और शख्स बात तो नहीं करता?’’

उन्होंने बताया, ‘‘हां उन की भजन मंडली में ढोलक बजाने वाला विक्की पंडा अकसर उन के फोन से बात करता है. कभीकभी तो वह घंटे भर के लिए मोबाइल मांग कर ले जाता है.’’

पुलिस ने जब विक्की पंडा के बारे में पता किया तो शाम के समय विक्की पंडा देवी मंदिर की आरती के कार्यक्रम में मिल गया. उस ने मनीषा को अपनी ममेरी बहन बताया. पुलिस को अब दोनों पर अरविंद की हत्या का पूरा यकीन हो गया. पुलिस टीम ने विक्की पंडा और मनीषा को थाने बुला कर पूछताछ की तो पहले तो वे अनजान बने रहे. जब पुलिस टीम ने उन से अलगअलग कमरे में ले जा कर सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने सारा सच उगल दिया. मनीषा और विक्की के बताए अनुसार अरविंद की हत्या छतरपुर जिले के खेमचंद यादव उर्फ राज ने की थी.

घटना वाले दिन शाम को अरविंद को औफिस में फोन कर के मनीषा ने बुलाया था और विक्की पंडा हत्या के समय राज के साथ था. दोनों से पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह मानवीय रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली थी. खेमचंद गुड़गांव की एक कंपनी में नौकरी करता था. मनीषा की बुआ का लड़का प्रदीप ठाकुर उर्फ विक्की पंडा सिविल लाइंस के उपहार अपार्टमेंट में रहता था. वह अपने आप को देवी का भक्त बताता था. धार्मिक कर्मकांड और तंत्रमंत्र का झांसा दे कर लोगों से पैसे ऐंठ कर वह घर का खर्च चलाता था. वह स्थानीय भजन मंडली में ढोलक बजाता था.

विक्की पंडा अपनी ममेरी बहन मनीषा से 20 हजार रुपए और जीजा अरविंद से 13 हजार रुपए उधार ले चुका था, मगर लौटाने का नाम ही नहीं ले रहा था. जब भी अरविंद और मनीषा उस से पैसे वापस मांगते, वह अपनी तंगहाली का बहाना बना देता था. मनीषा और खेमचंद के नाजायज संबंधों की भनक विक्की को थी. एक बार तो उस ने मनीषा को चेतावनी भी दी थी कि यदि उस से पैसे मांगे तो वह उस के और राज के संबंधों की पूरी सच्चाई जीजा को बता देगा. इस डर से मनीषा उस से पैसा मांगने में संकोच करने लगी थी. अब मनीषा राज के साथ विक्की पंडा से मिलनेजुलने लगी थी. मनीषा और राज विक्की से शादी करने की बात बताते रहते थे. एक दिन विक्की पंडा ने मंदिर में पूरे विधिविधान से राज से मनीषा की मांग में सिंदूर भरवा कर शादी करा दी .

मनीषा और राज प्रेम में इस कदर अंधे हो चुके थे कि देह सुख के लिए किसी भी हद तक जाने तैयार थे. कभीकभी उन के मन में विचार आता कि दोनों घर से भाग जाएं, लेकिन मनीषा सोचती कि राज बेरोजगार है. आखिर उसे कितने दिनों तक बैठा कर खिलाएगा. मनीषा को अरविंद से ज्यादा अपने बच्चों की भी चिंता थी. वह जानती थी कि यदि वह बच्चों को छोड़ कर राज के साथ भाग गई तो अरविंद बच्चों का खयाल नहीं रख पाएगा और उस के बच्चे अनाथ हो जाएंगे. मनीषा के मन में कई बार अरविंद की हत्या करने का विचार आता, मगर अगले ही पल वह डर जाती.

आखिरकार मनीषा इस निर्णय पर पहुंच गई कि वह राज की मदद से अरविंद को रास्ते से हटा देगी. उस का सोचना था कि पति की मौत के बाद उस की सरकारी नौकरी उसे अनुकंपा नियुक्ति के रूप में मिल जाएगी और वह राज के संग अपनी जिंदगी खुशी से बिता सकेगी. बातचीत के बाद पहले अरविंद की हत्या के लिए उन्होंने पूजा के प्रसाद में जहर मिलाने की योजना बनाई, पर विक्की पंडा ने यह कह कर इस योजना को निरस्त कर दिया कि प्रसाद और भी लोग मांग सकते हैं. बाद में अरविंद को शराब पिला कर हत्या करने की योजना बनाई गई.

प्रदीप उर्फ विक्की पंडा अरविंद की हत्या की योजना में इसलिए शामिल हो गया क्योंकि वह चाहता था कि मनीषा और अरविंद से लिए गए 33 हजार रुपए के कर्ज से उसे मुक्ति मिल जाएगी. योजना के मुताबिक मनीषा ने राज को पूरी योजना समझाई और उस का बांदा से जबलपुर आने जाने का रिजर्वेशन करवा दिया. 21 जनवरी, 2021 की सुबह राज जबलपुर आ गया. दोपहर में टैगोर गार्डन में मनीषा राज और विक्की पंडा ने काफी देर बैठ कर अरविंद की हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया. तय हुआ कि पहले अरविंद को शराब पिलाई जाए और फिर उस की किसी तरह हत्या कर दी जाए.

योजना बनने के बाद विक्की अपने घर चला गया. जबकि मनीषा और राज आटो रिक्शा ले कर रेलवे स्टेशन आ गए. कुछ दिनों पहले अरविंद ने जबलपुर की एक मोबाइल शौप से किस्तों में राज को एक महंगा मोबाइल फोन दिलवाया था, जिस की किस्त वह हर महीने आ कर दे जाता था. रेलवे स्टेशन से ही मनीषा ने अरविंद के औफिस में फोन कर के कहा कि राज मोबाइल की किस्त देने जबलपुर आया है. वह रात की ट्रेन से निकल जाएगा, उस से जबलपुर स्टेशन जा कर मिल लो. जब अरविंद को राज के जबलपुर आने की खबर मिली, तब वह अधारताल जोनल औफिस में था. उस ने औफिस जा कर जल्दी से डाक वितरण का काम निपटाया और 5 बजे रेलवे स्टेशन पहुंच गया.

रेलवे स्टेशन पर उस की मुलाकात राज से हो गई. राज ने उसे बताया कि वह रात 9 बजे चित्रकूट एक्सप्रैस से वापस चला जाएगा. तब राज ने अरविंद के सामने प्रस्ताव रखा कि कहीं बैठ कर शराब पीते हैं फिर खाना खाने के बाद उसे स्टेशन छोड़ कर घर चले जाना. शराब पीने की बात पर अरविंद राजी हो गया. दोनों पैदल ही रेलवे स्टेशन से सदर की ओर आ गए. तब तक अंधेरा होने लगा था. एक वाइन शौप से राज ने शराब की बोतल खरीदी. पास की दुकान से पानी की बोतल, डिस्पोजल गिलास, चखना के पाऊच ले कर दोनों पैट्रोल पंप के पीछे मुर्गी मैदान में सुनसान जगह पर शराब पीने बैठ गए. तभी विक्की पंडा भी पहुंच गया.

सीधेसादे अरविंद को यह भान नहीं था कि जिस नौकरी को पाने के लिए उस ने जी तोड़ मेहनत की थी और कितने ही साल बेरोजगारी में काटे थे, वही नौकरी उस की जान की दुश्मन बन जाएगी. राज और विक्की चालाकी से इस तरह पैग बना रहे थे कि अरविंद ज्यादा से ज्यादा पी सके. शराब पीतेपीते लगभग साढ़े 7 का समय हो गया. इस बीच अरविंद का नशा पूरे शबाब पर पहुंच गया था, तभी राज ने पास में पड़े एक बड़े से पत्थर से अरविंद के सिर पर हमला कर दिया. उस के सिर से खून की धारा बहने लगी और थोड़ी देर तड़फड़ाने के बाद वह ढेर हो गया. जब दोनों को तसल्ली हो गई कि अरविंद मर चुका है तो राज और विक्की वहां से भाग निकले.

राज जल्दी से रेलवे स्टेशन आ गया. प्लेटफार्म पर चित्रकूट एक्सप्रैस लग चुकी थी. वह ट्रेन में सवार हो गया. रात 9 बजे ट्रेन जबलपुर स्टेशन से रवाना हो गई. 29 जनवरी, 2021 को जबलपुर के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर अरविंद की हत्या का खुलासा कर दिया. प्रैस कौन्फ्रैंस में बताया गया कि अरविंद की हत्या मनीषा के इशारे पर विक्की की मदद से राज यादव ने की थी. एसपी ने अरविंद की हत्या के मुख्य आरोपी राज यादव को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया. इस के बाद कैंट थाना पुलिस ने मनीषा और विक्की पंडा को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

मनीषा और विक्की को जेल भेजने के बाद जबलपुर पुलिस राज की तलाश में जुट गई. राज के घर से जब्त उस के मोबाइल की जांच की तो मोबाइल में मनीषा और उस के आपत्तिजनक हालत में फोटो मिले, जो उन के नाजायज संबंधों की कहानी बयां कर रहे थे. पुलिस टीम राज के पिता से सूरत में रहने वाले उस के बड़े बेटे का मोबाइल नंबर ले कर आई थी. पुलिस ने जब राज के भाई से बात की तो पहले तो उस ने राज के सूरत में न होने की जानकारी दी. जब पुलिस ने डर दिखाया तो उस ने पुलिस को भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही राज को ले कर जबलपुर आएगा.

राज और उस का बड़ा भाई 3-4 दिनों तक पुलिस टीम को गुमराह करते रहे. इस पर जबलपुर पुलिस की टीम ने सूरत जा कर छापामारी की तो राज यादव पुलिस की गिरफ्त में आ गया. पुलिस ने राज से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अरविंद की हत्या की पूरी कहानी पुलिस को बता दी. पुलिस ने अरविंद की हत्या के आरोपी खेमचंद यादव उर्फ राज पर आईपीसी की धारा 302,120 के तहत मामाला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया. अरविंद और मनीषा के दोनों बच्चों को जबलपुर के ग्वारीघाट में रहने वाली उस की नानी के सुपुर्द कर दिया गया. नौकरी की चाहत में अपने पति की हत्या करने वाली मनीषा का नौकरी पाने का सपना धरा का धरा रह गया.

क्षणिक शारीरिक सुख और सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपने मासूम बच्चों को बेसहारा करने वाली मनीषा अपने प्रेमी खेमचंद और भाई प्रदीप उर्फ विक्की पंडा के साथ जेल में है. MP News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Parivarik Kahani : पत्नी के कहने पर बेटे ने साड़ी से गला घोंटकर मां को मार डाला

parivarik kahani : मां जैसी भी हो, मां ही होती है. औलाद की जन्मदात्री. कंचन को क्या पता था कि जिस बेटे को 9 महीने कोख में रख कर अपना खून पिलाया, 24 साल पाला, एक दिन पराई औरत के लिए वही उस का दुश्मन बन कर…

अनीता शुक्रवार की शाम पौने 5 बजे अपनी भाभी कंचन वर्मा के घर पहुंची. उस ने दरवाजे पर लगी कालबेल बजाई. लेकिन कई बार घंटी बजाने के बाद भी जब अंदर कोई हलचल नहीं हुई तो उस ने दरवाजे को धक्का दिया. इस से दरवाजा खुल गया. अनीता अंदर पहुंची. उस ने भाभी को आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. बैडरूम में टीवी चल रहा था और मोबाइल भी बैड पर पड़ा था. तभी उस की नजर बाथरूम की ओर गई. उस ने बाथरूम का दरवाजा खोला तो वह हैरान रह गई. वहां फर्श पर भाभी कंचन बेहोश पड़ी थीं. घर का सामान अस्तव्यस्त पड़ा हुआ था.

यह सब देखते ही अनीता चीखती हुई बाहर की ओर भागी. उस ने यह जानकारी आसपास के लोगों व भाई कुलदीप वर्मा को दी. यह 19 फरवरी, 2021 की बात है. अनीता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर आसपास के लोग एकत्र हो गए. अनीता ने बगल में रहने वाली उस की दूसरी भाभी व भाई कुलदीप वर्मा को फोन कर बुलाया. इस बीच किसी ने यह सूचना थाना क्वार्सी को दे दी. तभी सर्राफा कारोबारी कुलदीप वर्मा अपने नौकर के साथ घर पहुंचे और अपनी पत्नी को मैडिकल कालेज ले जाने के साथसाथ अपनी दोनों बेटियों व बेटे को फोन किया. डाक्टरों ने जांच के बाद कंचन वर्मा को मृत घोषित कर दिया.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी छोटेलाल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. हत्या व लूट की घटना से सनसनी फैल गई थी. कुलदीप वर्मा प्रतिष्ठित सर्राफा कारोबारी थे. घटना की जानकारी होते ही व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथसाथ कुलदीप वर्मा की दोनों बेटियां, बेटा व शहर में रहने वाले अन्य परिजन व करीबी एकत्र हो गए. घनी आबादी वाले इलाके में हत्या व लूट की घटना पर लोग आक्रोशित हो कर हंगामा करने लगे. स्थिति की गंभीरता को भांप कर इंसपेक्टर ने अपने उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया.

आननफानन में अलीगढ़ के एसएसपी मुनिराज जी, एसपी (सिटी) कुलदीप सिंह गुनावत, एसपी (क्राइम) डा. अरविंद कुमार  सहित अन्य अधिकारी भी पहुंच गए. एसएसपी ने फोरैंसिक, क्राइम ब्रांच, सर्विलांस, फील्ड यूनिट और डौग स्क्वायड की टीमों को भी मौके पर बुला लिया. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के क्वार्सी थाना क्षेत्र की सरोज नगर कालोनी में प्रतिष्ठित सर्राफा व्यवसायी कुलदीप वर्मा अपनी पत्नी कंचन वर्मा के साथ रहते थे. उन का यह मकान एटा चुंगी चौराहे से करीब 100 मीटर की दूरी पर है. सर्राफा कारोबारी कुलदीप वर्मा रोजाना की तरह सुबह एटा चुंगी चौराहे के पास नौरंगाबाद स्थित अपने शोरूम पर चले गए थे. इस के बाद ही बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया था.

उच्चाधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. लूट और हत्या के बारे में जानकारी ली. कंचन के गले पर चोट के निशान थे. जबकि नाक से खून निकल रहा था. देखने से लग रहा था कि बदमाशों ने कालबैल बजा कर कंचन से दरवाजा खुलवाया और घर में घुस कर लूटपाट की, विरोध करने पर उन्होंने कंचन वर्मा की गला दबा कर हत्या कर दी. फिर उन को ले जा कर बाथरूम में बंद कर दिया. बाथरूम से गैस की बदबू आने पर पता चला कि गैस गीजर का पाइप कटा हुआ था, तुरंत गैस सिलिंडर को बंद किया गया. घर वालों ने पुलिस को बताया कि दूध वाले, नौकरानी, अपने बेटे व करीबी के अलावा मृतका किसी के लिए दरवाजा नहीं खोलती थीं. घर में कुत्ता भी है, जो घटना के समय मकान की पहली मंजिल के कमरे में बंद था.

यह भी पता चला कि नौकरानी काम कर के चली गई थी. दोपहर करीब डेढ़ बजे कंचन ने अपने छोटे दामाद पुनीत को जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया था. उन्होंने करीब 7 मिनट बात की थी. फिर यह कहते हुए बैड पर मोबाइल रख दिया कि दरवाजे पर कोई आया है. इस के बाद फोन कट गया था. काम किसी परिचित का था यही आखिरी काल थी. इसी दौरान बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया था. शाम पौने 5 बजे शहर के ही ऊपरकोट मोहल्ले में रहने वाली कुलदीप की बहन अनीता आई, तब घटना की जानकारी हुई थी. फोरैंसिक टीम ने कई स्थानों से फिंगरप्रिंट उठाए. घर में ऐसा कोई व्यक्ति आया था,  जिसे यह तक पता था कि घर में हथौड़ी और आरी कहां रखी थीं.

उसे यह जानकारी थी बैडरूम के अंदर एक छोटा कमरा है, जिस के अंदर तिजोरी है. पुलिस को आशंका थी कि वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों को घर की हर चीज की जानकारी थी. संभावना थी कि लुटेरे परिवार के नजदीकी रहे होंगे. दिनदहाड़े हुई इस वारदात की आसपास के किसी व्यक्ति को भनक तक नहीं लगी थी. जबकि घर वालों के मुताबिक हत्या व लूट की घटना दोपहर करीब डेढ़ बजे किसी के कालबैल बजाने के बाद हुई थी. बदमाशों ने घर के औजारों से ही छोटे कमरे तथा वहां रखी तिजोरी के ताले तोड़े थे. घर में जमीन, बीमा पौलिसी आदि के कागजात बिखरे पड़े थे. टूटी हुई चूडि़यां भी मिलीं. अंदर के कमरे की तिजोरी तोड़ कर बदमाश हीरे, सोने और चांदी के गहने लूट ले गए थे.

लूटे गए सामान की कीमत एक करोड़ से अधिक बताई. सर्राफ कुलदीप वर्मा की तरफ से पुलिस ने भादंवि की धारा 302, 394 के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी. मौके की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए अलीगढ़ भेज दिया. कुलदीप वर्मा का नौरंगाबाद देवी मंदिर के पास कुलदीप ज्वैलर्स के नाम से शोरूम है. घटना के समय वह अपने शोरूम पर कारीगर के साथ थे. सर्राफा कारोबारी की दोनों विवाहित बेटियों ने पुलिस को बताया कि इस वारदात में हो न हो, कोई ऐसा व्यक्ति शामिल है, जो या तो हमारा अपना है या फिर हमारे घर के बारे में बारीकी से जानता है कि कौन सी चीज कहां रखी है.

इस बारे में परिवार के करीबी सदस्यों, अकसर घर आने वालों के अलावा किसी को जानकारी नहीं थी. टूटी चूडि़यां देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि बदमाशों से संघर्ष के दौरान मृतका की चूडि़यां टूट गई होंगी. खोजी कुत्ता मकान के बाहर गली के मोड़ तक जाने के बाद ठिठक कर रह गया. इसे ले कर तमाम तरह के कयास लगाए जाने लगे. घर वालों ने बताया कि दुकान के कीमती जेवरातों के अलावा गिरवी रखे जेवरात भी टूटी तिजोरी में रखे थे. बदमाशों ने बैडरूम के अंदर वाले कमरे और उस के अंदर रखी तिजोरी के अलावा किसी चीज को हाथ नहीं लगाया था.

खानदानी काम था सर्राफा कुलदीप वर्मा मूलरूप से महेंद्रनगर के रहने वाले थे. कुलदीप 5 भाइयों में दूसरे नंबर के हैं. सब से बड़े भाई राजू की मृत्यु हो चुकी है जबकि तीसरे नंबर के संजय, चौथे नंबर के पंकज व सब से छोटा महेंद्र है. पिता ज्ञानचंद्र की भी ज्वैलरी की दुकान थी. इन का ज्वैलरी का काम खानदानी है. चारों भाई सन 2012 में नई विकसित हुई कालोनी सरोज नगर में अपनेअपने मकान बनवा कर रहने लगे थे. चारों का अपनाअपना सर्राफा का कारोबार है. जिस में कुलदीप का कारोबार सब से अच्छा था.  कुलदीप वर्मा के 2 बेटियां पायल व काजल हैं. दोनों बेटियों की शहर में ही अलगअलग इलाकों में शादियां कर दी गई थीं. बेटियों के अलावा इकलौता बेटा योगेश उर्फ राजा है. राजा ने करीब 6 महीने पहले शहर के ही कपड़ा व्यापारी की बेटी से प्रेम विवाह किया था.

युवती दूसरी बिरादरी की व उम्र में राजा से बड़ी होने के कारण मांबाप इस से नाखुश थे. बहनों ने भी इस प्रेम विवाह का विरोध किया था. इसलिए राजा अपनी पत्नी के साथ जीवीएम मौल के सामने किराए के मकान में रहने लगा था. घटना की जानकारी होने पर वह भी घर आ गया था. जानकारी होने पर कोल क्षेत्र के विधायक अनिल पाराशर, इगलास क्षेत्र के भाजपा विधायक राजकुमार पीडि़त परिवार से मिलने पहुंचे.  दिन भर सियासी लोगों की आवाजाही लगी रही. हत्या व लूट के विरोध में आक्रोशित सर्राफा कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं. दिनदहाड़े सर्राफा व्यवसाई की पत्नी की हत्या व लूट से नाराज व्यापार मंडल के पदाधिकारी व सर्राफा व्यवसायी एसएसपी व एसपी से मिले और वारदात के शीघ्र खुलासे की मांग की.

इस घटना से प्रशासन की चाकचौबंद व्यवस्था की पोल खुल गई थी. पुलिस जांच के दौरान सर्राफा व्यवसायी के घर वाली गली में लगे सीसीटीवी फुटेज में नीले सलवार सूट में ईयरफोन लगाए घूमती एक महिला और बाइक सवार 2 संदिग्ध युवक नजर आए. पुलिस इसी दिशा में जांच में जुट गई. घटना की खबर पर आईजी पीयूष मोर्डिया भी घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे. उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की और परिवार के सदस्यों से भी. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को जल्दी खुलासे के आदेश दिए. हत्या व लूट की घटना का परदाफाश करने के लिए एसएसपी मुनिराज जी.

ने एसपी (सिटी) कुलदीप सिंह गुनावत, एसपी (क्राइम) डा. अरविंद के नेतृत्व में 2 टीमों का गठन किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि कंचन की मृत्यु गला घोटने के कारण हुई थी. दूसरे दिन शनिवार की सुबह पोस्टमार्टम के बाद कंचन वर्मा का अंतिम संस्कार किया गया. शव को मुखाग्नि इकलौते बेटे राजा ने दी. सर्राफा व्यवसाई कुलदीप के साथ लूट की यह तीसरी वारदात थी. इस से पहले सन 2017 में बदमाशों ने उन की दुकान को निशाना बनाया था. बदमाशों ने दिनदहाड़े फायरिंग कर गहने लूटे थे. फायरिंग में कुलदीप को गोली भी लगी थी. उस घटना के समय कुलदीप अपने बेटे राजा व नौकर के साथ दुकान पर थे.

हालांकि कुछ दिन बाद घटना का मुख्य आरोपी बुलदंशहर के सिकंदराबाद में एक मुठभेड़ में मारा गया था. उस के कुछ साथी पकड़े गए थे उन्होंने कुलदीप के यहां लूट की बात स्वीकारी थी. खास बात यह है कि तब बुलदंशहर के एसएसपी मुनिराज ही थे. पिछले साल भी कुलदीप की आंखों में मिर्च झोंक कर लूट की घटना को अंजाम दिया गया था. उस घटना के बारे में पुलिस को बताने के बजाए परदा डाल दिया था. पुलिस ने इस हत्याकांड के खुलासे के लिए सिलसिलेवार जांच शुरू की. पुलिस के सामने 5 मुख्य बिंदु थे, जिन पर वह जांच कर रही थी. मृतका के घर वालों ने पुलिस को बताया कि दिन भर घर में बंद रहने वाली कंचन अपने परिचितों के लिए ही दरवाजा खोलती थीं.

सगेसंबंधियों व नौकरानी से पूछताछ दोपहर में 12 से एक बजे के बीच कामवाली के आने पर ही कंचन बाथरूम में नहाने जातीं थीं. तिजोरी तोड़ने को घर में रखे औजार किसी अपने ने ही उठाए होंगे. ऐसा भी अनुमान लगाया गया कि मृतका जब बाथरूम में नहाने गई हों, उसी समय घटना को अंजाम दिया गया हो. इस से नौकरानी अंजू पर भी शक की सुई घूम रही थी. पुलिस ने उस का मोबाइल भी कब्जे में ले लिया था. उस की काल डिटेल्स भी खंगाली गई. पुलिस के रडार पर अंजू  व उस के परिवार का कोई सदस्य था, क्योंकि अंजू का पेशेवर लुटेरा पति इस समय गैंगस्टर केस में जेल में है.

अंजू घटना से 20 दिन पहले ही आई थी. हालांकि 2 साल पहले वह कुलदीप के घर में काम कर चुकी थी, लेकिन एक साल पहले काम छोड़ कर चली गई थी. दुकान का नौकर या उस के परिवार के किसी सदस्य के अलावा कंचन के बेटे राजा के कुछ दोस्तों, जो राजा की गैरमौजूदगी में उस की मां के पास आया करते थे, उन के लिए भी दरवाजा खोल देती थीं. अब पुलिस यह पता लगाने में जुट गई कि मृतका ने अपने दामाद का फोन काट कर दरवाजा किस के लिए खोला था? दूसरे कंचन के दरवाजे से गली के मुहाने पर वह ईयरफोन वाली महिला चक्कर क्यों लगा रही थी?

उस महिला ने बाइक सवार युवकों को बैग में कुछ सामान भी दिया था.  इस के बाद युवक गली से बाहर चले गए थे. महिला भी पैदल चली गई. पुलिस युवकयुवती व बाइक की शिनाख्त के प्रयास में लग गई. इस हत्याकांड व लूट की वारदात ने क्वार्सी के पुलिस महकमे को हिला दिया था. घटना के दूसरे दिन भी खुलासा न होने से मृतका के सगेसंबंधी, सर्राफा व्यवसायी आक्रोशित थे. जिस से धरनेप्रदर्शनों का डर था. इलैक्ट्रौनिक और प्रिंट मीडिया में भी घटना सुर्खियों में थी, जिस से पुलिस पर दबाव बढ़ता जा रहा था. यह केस पुलिस के लिए चुनौती बन गया था, लेकिन पुलिस अपने काम में गोपनीय तरीके से जुटी रही. जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही थी. पुलिस के उच्चाधिकारी इस मामले पर नजर रखे थे.

पुलिस अब तक मिले साक्ष्यों पर काम कर ही रही थी. इसी बीच 20 फरवरी, 2021 को शाम 7 बजे पुलिस को राजा के मोबाइल पर एक काल उस की पत्नी की मिली. उस काल को ट्रैक किया गया तो पूरा भेद खुल गया. उस में राजा अपनी पत्नी को बेबी नाम से संबोधित करते हुए कह रहा था कि सब ठीक चल रहा है. पुलिस दूसरी दिशा में काम कर रही है. तुम अब अपना अच्छे से इलाज कराना. बेटा राजा ही निकला मां का हत्यारा. इस पर पुलिस का माथा ठनक गया और राजा को हिरासत में ले कर पुलिस थाने लाया गया. पुलिस पूछताछ में राजा ने सिर्फ इतना ही कहा कि मैं अलग रहता हूं. कुछ समझ में नहीं आ रहा है, ये क्या हुआ?

जब पुलिस ने उसे सीसीटीवी के वे फुटेज दिखाए, जिस में एक युवक व एक युवती बाइक पर आते व जाते दिखाई दे रहे थे. फुटेज देखते ही उस के चेहरे की रंगत उड़ गई. घटना के दिन एक बजे तक की गतिविधियों को तो उस ने सही बताया. लेकिन एक बजे के बाद की गतिविधियों पर वह चुप्पी साध गया. जबकि उस के मोबाइल की लोकेशन दोपहर डेढ़ बजे से घटनास्थल पर ही थी. वहां से निकल कर वह अपने किराए वाले घर तक गया और पिता के काल करने पर वहां से लौट कर आया. फुटेज में दिखे उस के साथियों के मोबाइल पर भी उस की बातचीत होने की पुष्टि हुई. इस के बाद राजा तोते की तरह बोलने लगा. उस ने खुद ही वारदात करने व इस में अपनी पत्नी, दोस्त व उस की प्रेमिका के शामिल होने की बात कबूली.

पुलिस ने रात में ही ताबड़तोड़ दबिशें देनी शुरू कर दीं. पुलिस ने इस वारदात में शामिल चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ करने पर आरोपियों ने अवना अपराध कबूल कर लिया. इस प्रकार 30 घंटे में ही पुलिस ने घटना का परदाफाश कर दिया. 21 फरवरी, 2021 रविवार को एसएसपी मुनिराज ने दोपहर को पुलिस लाइन सभागार में प्रैसवार्ता आयोजित कर घटना का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि प्रथमदृष्टया मिले संकेतों के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच कुलदीप वर्मा के परिचितों के साथ ही काम वाली की ओर मोड़ दी थी. पुलिस ने घटना के परदाफाश के लिए लगभग 50 सीसीटीवी खोजे थे.

घर के बाहर लगे सीसीटीवी की फुटेज से पुलिस को यह क्लू मिला कि एक महिला के हाथ से बाइक सवार बदमाशों ने कुछ सामान लिया. इस के बाद बाइक सवार बदमाश बाईपास के रास्ते कयामपुर, ग्लोबल रेजीडेंसी होते हुए शताब्दी नगर में घुस गए थे. इस के बाद पुलिस ने अलगअलग बिंदुओं पर गहन पड़ताल की. शनिवार की शाम एक फोन काल की मदद से मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने कंचन वर्मा के कत्ल व लूट के आरोप में उन के बेटे योगेश उर्फ राजा, उस की पत्नी सोनम उर्फ चित्रा, राजा के दोस्त तनुज चौधरी निवासी देवनगर कालोनी, बन्नादेवी व उस की प्रेमिका शेहजल चौहान उर्फ रिनी निवासी गूलर रोड बन्नादेवी को गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों की निशानदेही पर 2 बैग बरामद किए गए, जिन में लगभग एक करोड़ रुपए की कीमत के हीरे, सोने, चांदी के जेवरात, 2 बाइकें, एक लाख की नकदी व तिजोरी काटने वाला ग्राइंडर बरामद किया. राजा ने किराए के मकान से 2 पिट्ठू बैगों में पूरा माल बैड से बरामद कराया. वहीं से उस की पत्नी को गिरफ्तार किया गया. जबकि तनुज को उस के घर से गिरफ्तार कर लूटी रकम में से 50 हजार रुपए उस के कब्जे से बरामद करने के साथ रिनी को उस के घर से गिरफ्तार किया गया. चारों आरोपियों से पूछताछ के बाद इस मर्डर व लूटपाट की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

टीकाराम स्कूल के पास गारमेंट्स की दुकान चलाने वाली युवती सोनम उर्फ चित्रा से योगेश उर्फ राजा की कपड़े खरीदते समय नजदीकियां हो गई थीं. यह घटना से 6 महीने पहले की बात है. राजा को पता चला कि सोनम शादीशुदा है. उस का पति विहान अरोड़ा रेलवे रोड पर गारमेंट्स की दुकान चलाता है.  सोनम ने राजा को बताया कि उस का पति उस के साथ मारपीट करता है. इस के बाद सोनम और राजा की दोस्ती हो गई और दोनों में इस कदर नजदीकियां बढ़ गईं कि राजा उस का खर्चा उठाने लगा. सोनम ने अपने पति विहान से दूरी बना ली. बाद में राजा ने उसे रामघाट रोड पर मौल के सामने किराए पर मकान दिलवा दिया और 6 महीने पहले उस से कोर्ट में शादी कर ली.

दोस्तों से यह बात राजा के मातापिता को जब पता चली तो वे उस पर नाराज हुए. उन्होंने कहा, ‘‘तुम्हें वह शादीशुदा औरत ही मिली थी. हम तुम्हारी शादी किसी अच्छे खानदान में अच्छी लड़की से करते. इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुम ने उस का साथ नहीं छोड़ा तो तुम हमारे साथ नहीं रह पाओगे.’’

राजा ने कहा कि वह सोनम का साथ नहीं छोड़ सकता, अब वह उस की पत्नी है. इस बात पर कुलदीप ने बेटे राजा को घर से निकाल दिया. घर से निकाले जाने के बाद राजा का हाथ तंग रहने लगा. हालांकि बीचबीच में वह घर जा कर कंचन से लड़झगड़ कर रुपए ले आता था. राजा का हाथ तंग होने पर उस के पुराने दोस्त उस से हाथ खींचने लगे, जबकि साथ में जिम करने वाला दोस्त तनुज चौधरी, जो एक बड़े शराब कारोबारी का बेटा है, ने राजा की आर्थिक मदद की. 6 महीने तक सब कुछ ठीक चलता रहा. अब तनुज ने अपनी प्रेमिका शेहजल उर्फ रिनी से शादी करनी चाही तो उसे रुपयों की जरूरत पड़ी. यह बात उस ने राजा को बताई.

दोनों दोस्तों व उन की प्रेमिकाओं ने राजा के सामने अपने घर से जेवरात लाने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव में यह बात हुई कि जैसे लड़झगड़ कर रुपए लाते हो, ऐसे ही जेवरात ले आओ तो एक बार में काम बन जाएगा. मां किसी से कुछ कहेगी भी नहीं. घटना से 10 दिन पहले राजा अपने दोस्त तनुज के साथ मां से मिलने घर गया था. उस दिन उस ने मां से झगड़ा किया. कहा, ‘‘मेरी बीवी 3 महीने की गर्भवती है. उसे रुपयों की जरूरत है.’’

मगर कंचन ने साफ कह दिया कि वह किसी विवाहिता को अपनी बहू नहीं बना सकती, बाद में राजा दोस्त के साथ घर से चला गया था. मां को मार कर लूटी ज्वैलरी इस के बाद 19 फरवरी, 2021 को योजना के तहत सोनम को डाक्टर के यहां छोड़ कर दोपहर में राजा बाइक से अपनी मां के घर पहुंचा. योजना के तहत तनुज और रिनी भी अपनी बाइक पर वहां पहुंच गए. कालबेल बजाने पर कंचन ने दरवाजा खोल दिया. राजा व तनुज अंदर आ गए. राजा ने मां से जेवरात व रुपए की मांग की. मां ने विरोध शुरू कर दिया. इस पर राजा तो तिजोरी वाले कमरे में चला गया और तनुज उस की मां कंचन से उलझता रहा.

विरोध बढ़ता देख राजा के इशारे पर तनुज ने साड़ी से कंचन की गला घोट कर हत्या कर दी और शव को बाथरूम में बंद कर भ्रमित करने के इरादे से गैस पाइप काट दिया. हत्या व लूटपाट करने के बाद राजा व तनुज अपनीअपनी बाइकों से निकल गए, जबकि रिनी गली से निकलने के बाद आटो में बैठ कर अपने घर चली गई. पुलिस जांच में यह बात सामने आई और सोनम ने भी स्वीकार किया कि वह मूलरूप से बुलंदशहर की रहने वाली है. काफी समय पहले वह मां के साथ नगला मवासी अपनी ननिहाल में आ कर रहने लगी थी. यहां प्राइवेट नौकरी करतेकरते पहले उस ने एक मुसलिम युवक से फिर एक अन्य युवक से और तीसरी शादी गारमेंट दुकान संचालक विहान से की थी.

चौथी शादी योगेश उर्फ राजा से की और अब 3 माह की गर्भवती है. मामले का परदाफाश करने वाली टीम में इंसपेक्टर (क्वार्सी) छोटेलाल, थानाप्रभारी (जवां) अभय शर्मा, एसआई रणजीत सिंह, सर्विलांस प्रभारी संजीव कुमार, एसआई अरविंद कुमार, संदीप सिंह, विजय चौहान, रीतेश, अलका तोमर, गीता रानी, हैडकांस्टेबल जुलकार, देव, राकेश कुमार, दुर्गविजय सिंह, विनोद कुमार, मोहन लाल, याकूब, बृजेश रावत, कांस्टेबल शोएब आलम, मनोज कुमार, तरुणेश, ज्ञानवीर कुमार, पालेंद्र सिंह, सत्यपाल और अनित कुमार शामिल थे. मर्डर व लूट के चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

किसी ने सोचा भी नहीं था कि मां को मुखाग्नि देने वाले बेटे ने ही अपनी मां का कत्ल किया था. जिस मां ने 9 महीने अपनी कोख में पाला और फिर 24 साल पाल कर बड़ा किया, वही बेटा प्यार और पैसों की खातिर मां के खून का प्यासा बन गया. उस ने ऐसी घटना को अंजाम दिया, जिस से बेटे के नाम पर कंलक लग गया. parivarik kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Parivarik Kahani Hindi : जायदाद के लालच में पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को छत से धक्का देकर मार डाला

parivarik kahani hindi : नरेश ने अपनी पहली पत्नी रश्मि को छोड़ कर अपने से आधी उम्र की श्यामली से शादी कर ली. उसे क्या पता था कि श्यामली ने उस से नहीं उस की जायदाद से शादी की है. आखिर उस जायदाद को पाने के लिए उस ने…

नवंबर का महीना. ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था. रात के यही कोई 2 बज रहे थे. अचानक किसी के गिरने की तेज आवाज आई. आवाज के साथ ही दर्दभरी चीख उभरी. पड़ोस के अजीत सरकार बाथरूम में लघुशंका के लिए गए थे. घर के बाकी सदस्य गहरी नींद में सो रहे थे. तुरंत बाथरूम से निकल कर उन्होंने अपने परिवार के शेष सदस्यों को जगाया. वे सब भी सकते में आ गए. खिड़की से झांक कर इधरउधर नजरें दौड़ाईं. कुछ नहीं दिखा. फिर छत पर आए. मुंडेर से नीचे सड़क पर देखा तो चौंक गए. वहां एक व्यक्ति गिरा पड़ा था. उस के चारों तरफ खून फैला हुआ था. उन्होंने अपने आसपास रहने वाले पड़ोसियों को फोन कर के जगाया और इस की जानकारी दी.

वे सब बदन पर स्वेटर डाल कर अजीत सरकार के साथ सड़क पर पड़े व्यक्ति के करीब आए. तब तक कालोनी का गार्ड भी आ गया था. किसी को पहचानते देर न लगी कि वह व्यक्ति नरेश था. तभी रात के गश्त पर निकली पुलिस की गाड़ी से एक पुलिसकर्मी की नजर वहां जुटे लोगों पर गई. उस ने गाड़ी उधर घुमा दी. पास आ कर गाड़ी रोकी. उस में से 2 पुलिसकर्मी निकल कर करीब आए. उन्हें समझते देर नहीं लगी कि नरेश मर चुका है. पुलिस को देख कर बाकी लोग हटने की कोशिश करने लगे. एक पुलिसकर्मी ने लोगों से लाश के बारे में पूछताछ की. लोगों ने जो जाना था, उसे सचसच बताने में गुरेज नहीं किया.

इस बीच नरेश की बीवी श्यामली भी आ चुकी थी. किसी ने उसे फाटक पीट कर जगाया था. तब उसे पता चला कि नरेश ने खुदकुशी कर ली है. वह दहाड़ मार कर रो रही थी. पुलिसकर्मियों ने संबंधित थाने में इस घटना की सूचना दी. इंसपेक्टर मिश्रा मुआयने के लिए आए. इधर लाश का पोस्टमार्टम करने की तैयारी की जा रही थी उधर इंसपेक्टर मिश्रा श्यामली से पूछताछ करने लगे.

‘‘आप को क्या लगता है कि आप के पति ने खुदकशी की है?’’ इंसपेक्टर मिश्रा ने पूछा.

‘‘जी ऐसा ही है,’’ सुबकते हुए श्यामली बोली.

‘‘किसी ने ढकेला तो नहीं?’’

‘‘कौन ढकेलेगा? यहां हम दोनों के अलावा कोई और है ही नहीं. इन्होंने खुदकुशी की है,’’ उस ने खुदकुशी पर जोर दिया.

मृतक की बीवी ही खुदकुशी पर जोर दे रही हो तो भला पुलिस को क्या गरज है कि किसी और एंगिल से जांच करे. वह भी झंझट से बचना चाहती है.

‘‘खुदकुशी की वजह?’’ इंसपेक्टर ने पूछा तो बोली, ‘‘कोरोना के चलते इन की नौकरी जाती रही.’’

‘‘करते क्या थे?’’

‘‘एक निजी स्कूल में टीचर थे. नौकरी जाने के बाद काफी परेशान थे. न कोरोना जा रहा था न स्कूल ही खुल रहा था. 8 महीने हो गए. वे अकसर डिप्रेशन में चले जाते. इसी कारण उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया.’’

‘‘क्या कभी आत्महत्या की चर्चा की थी?’’

‘‘जी नहीं. हां, रात में अकसर उठ कर टहलने लगते थे.’’

‘‘आप ने इन्हें निराशा से उबारने के लिए कोशिश नहीं की?’’

‘‘की. पर उस से हुआ क्या? जब तक स्कूल नहीं खुलता, इन को नौकरी नहीं मिलती. मेरे लाख समझाने के बाद भी यह समझने के लिए तैयार नहीं थे.’’ कह कर श्यामली सुबकने लगी. ऐसे गमगीन माहौल में इंसपेक्टर मिश्रा को ज्यादा पूछना मुनासिब नहीं लगा. वह फिर कभी आने को कह कर के चले गए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह छत से गिरना बताया गया. मिश्रा इस केस को बंद करने जा रहे थे क्योंकि इस में शक की गुंजाइश नजर नहीं आ रही थी. औपचारिकतावश एक हफ्ते बाद जब श्यामली कुछ संभली, तब इंसपेक्टर मिश्रा उस से मिलने आए. इंसपेक्टर को देखते ही श्यामली का चेहरा गमगीन हो गया.

‘‘आप को कोई औलाद नहीं है?’’

‘‘जी नहीं. हमारी शादी को 2 साल ही हुए थे.’’ नरेश और श्यामली की उम्र में 20 साल का अंतर था. यह बात इंसपेक्टर को अखर रही थी. परंतु यह उन का निजी मामला था लिहाजा कुछ और पूछना उचित नहीं लगा. इस तरह यह केस हमेशा के लिए बंद हो गया. इस घटना को एक महीना गुजर गया. एक दिन एक अधेड़ महिला इंसपेक्टर मिश्रा से मिलने थाने में आई. उस ने नरेश की मौत को ले कर चौंकाने वाले खुलासे किए. पूछने पर अपना नाम रोशनी देवी बताया.

‘‘नरेश की मौत एक महीने पहले हुई थी. अब तक आप कहां थीं?’’ इंसपेक्टर मिश्रा ने पूछा.

‘‘साहब, मुझे कल ही इस की जानकारी मिली,’’ उस ने बताया. वह कहती रही, ‘‘हमारी शादी को 25 साल हो गए. जब हमें कोई बच्चा न हुआ तो नरेश मुझ से कटे कटे से रहने लगे. इस बीच श्यामली से उन की मुलाकात हुई. वह एक मौल में सेल्सगर्ल का काम करती थी. नरेश श्यामली की छोटी बहन को ट्यूशन पढ़ाते थे. यहीं से श्यामली से उन की नजदीकियां बढ़ीं, जो शादी में तब्दील हो गईं.’’

‘‘नरेश और श्यामली की उम्र में तो काफी अंतर है.’’

‘‘वह तो है. श्यामली को जब पता चला कि नरेश के पास शहर में करोड़ों का मकान है तो वह धनसंपदा के लोभ में फंस गई.’’

‘‘आप ने शादी का विरोध नहीं किया?’’

‘‘किया. मगर सब व्यर्थ रहा. वे मुझ पर हाथ छोड़ने लगे. रोजरोज के लड़ाईझगड़े से तंग आ कर मैं मायके चली गई. इस बीच खबर लगी कि उन्होंने श्यामली से शादी कर ली. मेरे भाई मुकदमा करने जा रहे थे पर मैं ने मना कर दिया. कानूनन मैं ही उन की बीवी थी. यह सोच कर संतोष कर लिया. वैसे भी जब रिश्तों में गांठ पड़ जाए, तब संबंधों का कोई औचित्य नहीं रह जाता,’’ कह कर उस ने उसांस ली. रोशनी का मायका बनारस शहर से 16 किलोमीटर दूर दीनदयाल नगर में था. इस के बावजूद उस ने नरेश के खिलाफ कोई कानूनी काररवाई नहीं की. करती तो अधिक से अधिक नरेश और श्यामली की शादी अवैध हो जाती पर उस से क्या रोशनी की गृहस्थी आबाद हो पाती?

शायद नहीं. यही सोच कर रोशनी ने चुप रहना मुनासिब समझा. वह वापस अपने मायके चली गई. इस आश्वासन के साथ कि जब भी पुलिस को मदद की जरूरत होगी आ जाएगी. इंसपेक्टर मिश्रा ने तहकीकात की तो पता चला कि श्यामली की आर्थिक दशा कोई खास नहीं थी. उस के पिता एक सुनार की दुकान पर काम करते थे. श्यामली की कमाई से घर का खर्च चलता था. इंसपेक्टर मिश्रा ने रोशनी के कहने पर एफआईआर दर्ज कर ली, जिस में रोशनी देवी ने श्यामली पर नरेश की हत्या करने का आरोप लगाया था. अब यह कितना सही या गलत था, इस का पता लगाना उन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था.

इंसपेक्टर मिश्रा ने 2 पुलिसकर्मियों को सादा कपड़ों में श्यामली के घर यह पता लगाने के लिए भेज दिया कि वहां हो क्या रहा है. पता चला कि श्यामली ने एक युवक से शादी कर ली. पति के मरने के एक महीने बाद ही श्यामली का शादी करना चौंकाने वाली बात थी. इस खबर से मोहल्ले वाले भी खुश नहीं थे. सब श्यामली को बुराभला कह रहे थे. इस खबर ने इंसपेक्टर के मन में संदेह पैदा कर दिया. हो न हो नरेश की बीवी ने जो कहा था वही सच हो? वे और भी तत्परता से इस केस की जांच में जुट गए. इस बीच यह खबर भी आई कि श्यामली, नरेश का तीनमंजिला मकान बेचने की फिराक में है. मकान की कीमत करोड़ों में थी. इंसपेक्टर मिश्रा ने श्यामली को थाने बुला कर नए सिरे से पूछताछ शुरू की.

‘‘मैडम, आप के खिलाफ एफआईआर दर्ज है. हम दोबारा इस केस की जांच करने जा रहे हैं.’’

‘‘एफआईआर… किस ने किया?’’ उस की भृकुटि तन गई.

‘‘नरेश की पहली बीवी ने.’’

‘‘वह क्यों करेगी? उसे क्या लेनादेना? नरेश मेरे पति थे.’’

‘‘पति तो उस के भी थे?’’ इंसपेक्टर मिश्रा बोले.

‘‘थे,’’ वह चिढ़ कर बोली.

‘‘आप की जानकारी के लिए बता दूं कि नरेश ने अपनी पहली बीवी को तलाक नहीं दिया था. बल्कि छोड़ा था. या यूं कहें उन्होंने स्वेच्छा से मायके में रहना उचित समझा.’’

‘‘यह झूठ है.’’ वह उत्तेजित हो गई.

‘‘आप के पास तलाक के कागजात हैं?’’ इंसपेक्टर के इस सवाल पर वह बगलें झांकने लगी. जाहिर है उस के पास इतना दिमाग ही नहीं था कि नरेश से तलाक के कागजात के बारे में पूछती. जो नरेश ने कह दिया उसी पर विश्वास कर लिया. दोनों को शादी की जल्दी थी. दोनों के अपनेअपने स्वार्थ थे. स्वार्थ में अंधे लोगों की आंखों पर पट्टी बंधी होती है. यहां भी ऐसा ही था. इंसपेक्टर ने बातचीत का रुख बदला, ‘‘आप को दूसरी शादी की इतनी जल्दी क्या थी?’’

‘‘यह हमारा जाती मामला है,’’ श्यामली का स्वर तल्ख था.

‘‘वह तो है ही. मेरा मतलब है साल छ: महीना रुक जातीं.’’

‘‘किस के भरोसे रुकती? अकेली जवान महिला. उस पर इतना बड़ा घर. हमेशा मन में डर समाया रहता था.’’

‘‘इतनी जल्दी लड़का कैसे मिल गया?’’ इंसपेक्टर मिश्रा ने पूछा तो उस ने जवाब दिया, ‘‘लड़का मेरे मांबाप के जानपहचान का था.’’

‘‘मांबाप के या आप के?’’ इंसपेक्टर की इस बात पर वह चिढ़ गई और त्यौरियां चढ़ा कर बोली, ‘‘आप को इस से क्या लेनादेना?’’

कुछ सोच कर इंसपेक्टर मिश्रा बोले, ‘‘आप जा सकती हैं. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती यह शहर छोड़ कर नहीं जा सकतीं.’’

‘‘क्यों नहीं जा सकती. मैं ने किया ही क्या है?’’

‘‘नरेश ने खुदकुशी नहीं की है बल्कि उन की हत्या हुई है? ऐसा उन की पहली बीवी का कहना है. इसलिए जब तक आप बेकुसूर साबित नहीं हो जातीं, आप को इसी शहर में हमारा सहयोग करते रहना होगा.’’ मिश्रा के इस आदेश से उस की पेशानी पर बल पड़ गए. वह घर आई तो काफी परेशान थी. अपने नए पति संतोष से इस घटना का जिक्र किया.

‘‘घबराओ मत. कुछ नहीं होगा,’’ संतोष बोला.

पुलिस ने जांच में पाया कि श्यामली का चालचलन शादी से पहले भी ठीक नहीं था. उस के कई युवकोंे से संबंध थे. इन संबंधों की वजह आर्थिक थी. वह इन युवकों के जरिए धनोपार्जन करती थी. वह फैशनेबल लड़की थी. उसे बनावशृंगार पसंद थे. महंगे कपड़े, महंगी ज्वैलरी, बेहतरीन खाना उस की आदत में शुमार थे. जिस मौल में काम करती थी, उस के मालिक ने बताया कि वह अकसर बाहर से खाना मंगा कर खाती थी. इंसपेक्टर के इस सवाल पर कि क्या उस की तनख्वाह इतनी थी कि वह बाहर का खाना अफोर्ड कर सके, तो उस ने साफसाफ कहा कि बिलकुल नहीं.

इंसपेक्टर ने उस की एक सहकर्मी से भी पूछताछ की तो उस ने भी वही बताया जो मालिक ने. अब इंसपेक्टर को पूरा विश्वास हो गया कि वास्तव में श्यामली का चरित्र संदिग्ध है. महंगे शौक के चलते जब भी उसे रुपयों की जरूरत होती तो वह अपने किसी न किसी बौयफ्रैंड से ऐंठ लेती. नएनए लडकों को बौयफ्रैंड बनाना उस के लिए मुश्किल नहीं था. सुंदर तो थी ही, नौजवान लड़के बड़ी आसानी से उस के जाल में फंस जाते. इस के लिए मौल से बेहतर कोई जगह नहीं थी. श्यामली जब 30 साल की हो गई तो उसे भी शादी की चिंता सताने लगी. नरेश से शादी की वजह उस की अचल संपत्ति थी. उसे पूरा विश्वास था कि उम्र के लंबे फासले के चलते नरेश हमेशा उस का गुलाम बन कर रहेगा.

इस तरह वह मनमानी करती रहेगी. क्या यही वजह थी या कुछ और. इन्हें इसी का पता लगाना था. एक रोज इंसपेक्टर मिश्रा बिना किसी पूर्व सूचना के श्यामली के घर पहुंच गए. उन्हें इस तरह आया देख कर वह अचकचा गई. उन्होंने सारे घर का मुआयना किया. छत पर भी गए. कुछ सोच कर इंसपेक्टर मिश्रा ने श्यामली से पूछा, ‘‘आप के पति अकसर रात में छत पर टहलने चले जाया करते थे. क्या कभी वह आप से बता कर जाते थे?’’

‘‘जी नहीं. वे आहिस्ता से उठते और चुपचाप चले जाते. वे नहीं चाहते थे कि मेरी नींद खराब हो?’’

बगल में बैठा श्यामली का पति संतोष सब सुन रहा था. शक्ल से वह शातिर लग रहा था.

‘‘तुम करते क्या हो?’’ इंसपेक्टर मिश्रा ने संतोष से पूछा.

‘‘जी साडि़यों का बिजनैस करता हूं.’’

‘‘दुकान कहां है?’’ इस सवाल पर उसे कोई जवाब नहीं सूझा तो बात बदलते हुए बोला, ‘‘बनारसी साड़ी की गद्दी संभालता हूं.’’

‘‘यानी नौकर हो?’’ इंसपेक्टर मिश्रा ने पूछा तो संतोष ने हां में सिर हिलाया.

कुछ सोच कर इंसपेक्टर मिश्रा ने आगे सवाल दागा, ‘‘यहां से तुम्हारा घर कितने किलोमीटर दूर है.’’‘‘जी, 2 किलोमीटर.’’

‘‘यहां तक मोटरसाइकिल से आनेजाने में 10 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता होगा?’’

‘‘जी.’’ संतोष ने कहा तो इंसपेक्टर को यकीन हो गया कि हो न हो नरेश की हत्या ही हुई है. उन्होंने थोड़े सख्त लहजे में कहा, ‘‘आप दोनों अभी थाने चलिए. मुझे कुछ और जानकारी लेनी है.’’ लेकिन श्यामली जाने को तैयार न थी. वह हीलाहवाली करने लगी. मगर जब मिश्रा ने तेवर दिखाए तो नरम पड़ गई. थाने पहुंच कर पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के दौरान श्यामली ने जो कुछ बताया वह नैतिकता को तारतार कर देने वाला था. इंसपेक्टर मिश्रा सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि एक शादीशुदा स्त्री ऐसा भी कर सकती है. हमेशा की तरह उस रात भी नरेश उठ कर छत पर टहलने लगे थे. श्यामली को मौका मिला. उस ने तत्काल संतोष के मोबाइल पर फोन किया.

वह तैयार बैठा था. उस के आते ही श्यामली ने चुपके से फाटक खोला, फिर उसे अंदर ले गई. सब कुछ योजना के मुताबिक था. पहले श्यामली छत पर आई. जबकि संतोष छत की सीढ़ी के दरवाजे के पीछे छिपा था.

‘‘आप बेकार परेशान होते हैं. नौकरी मिल जाएगी. इस तरह रोजरोज उठना आप के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है,’’ श्यामली बोली.

‘‘तुम ऊपर क्यों आईं? जा कर सो जाओ. यह रोज का चक्कर है,’’ नरेश बोले.

‘‘मुझे अच्छा नहीं लगता कि मैं सोऊं और आप जागजाग कर अपनी सेहत खराब करें. आप व्यर्थ चिंता करते हैं. नौकरी मिल जाएगी. नहीं मिलेगी तो यह मकान है न, बेच क र कोई कामध्ांधा कर लीजिएगा. कोरोना हटने तो दीजिए,’’ श्यामली ने अपनापन जताया.

‘‘मकान बेच देंगे तो रहेंगे कहां. क्या व्यापार करना आसान होगा? इस उम्र में मुझे नहीं लगता कि व्यापार कर पाऊंगा?’’ बातचीत के बीच वह नरेश को छत की मुंडेर के पास ले आई. दोनों बातचीत कर ही रहे थे कि इशारे से उस ने संतोष को पास बुलाया. मौका देखते ही दोनों ने नरेश के पैरों को पकड़ कर उठाया और नीचे धक्का दे दिया. सब कुछ इतनी तेजी हुआ कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. वैसे भी वे हट्टेकट्टे संतोष व श्यामली का प्रतिरोध कर सकने में सक्षम नहीं थे. जब तक लोग जागते और कुछ समझ पाते संतोष बिजली सी तेजी दिखाते हुए मोटरसाइकिल स्टार्ट कर वहां से भाग निकला. वहीं श्यामली नीचे आ कर सोने का नाटक करने लगी.

यह जानकारी संतोष और श्यामली ने आसानी से नहीं दी. जब मिश्रा ने पुलिसिया हाथ दिखाया तब वे टूटे. इंसपेक्टर मिश्रा ने श्यामली के कथन को सच मानते हुए इस केस को रफादफा कर दिया था. अगर उस की पहली पत्नी ने आपत्ति न जताई होती तो यह सच कभी सामने नहीं आता. यहां भी झगड़ा संपत्ति का था. रोशनी देवी को जब खबर लगी कि नरेश नहीं रहे तो कानूनन उस के मकान पर अपना हक जमाने श्यामली के पास आई. पहले तो श्यामली ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया. मगर जब मोहल्ले वालों ने बताया कि यही नरेश की पहली पत्नी है तब उसे विश्वास हुआ. श्यामली आसानी से हार मानने वाली नहीं थी. उस ने साफसाफ कह दिया कि उन के पति ने उन को तलाक दे कर श्याम से शादी की थी लिहाजा इस मकान पर उस का हक है.

काम बनता न देख कर उस ने पुलिस में हत्या का मामला दर्ज करवाया. क्योंकि उसे शक था कि जवान खूबसूरत श्यामली ने अपने स्वार्थ के लिए नरेश की हत्या करवाई होगी. वह भला क्यों अपनी जवानी एक अधेड़ के साथ गुजारेगी? दरअसल नरेश की संपत्ति के लिए ही श्यामली ने उस से शादी की थी. इस बीच गार्ड ने भी एक युवक को नरेश के घर की तरफ उस रात जाते हुए देखा था. मगर रात होने के कारण वह उसे पहचान न सका. दोनों को हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

सवाल उठा कि इंसपेक्टर मिश्रा को ऐसा कौन सा पक्का सुबूत मिल गया, जिस के आधार पर उन्होंने दोनों को हत्या का संदिग्ध अपराधी माना. दरअसल, उन के पास उस रात दोनों के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत के सबूत मिले, जिस में उस ने संतोष को रात में बुलाया था.  बाद में संतोष से शादी भी कर ली. parivarik kahani hindi

Parivarik Kahani : ब्लेड से पत्नी के हाथों की काटी कलाई फिर रेत डाला गला

Parivarik Kahani  : अर्चना और चेतन के बीच का झगड़ा गंभीर नहीं था. दोनों चाहते तो समझदारी से निपटा सकते थे. लेकिन अर्चना के जिद्दी स्वभाव ने ऐसा नहीं होने दिया. इस का जो नतीजा निकला…

चेतन घोरपड़े और अर्चना घोरपड़े कोई नवदंपति नहीं थे. कई साल हो गए थे दोनों की शादी को. पतिपत्नी पिछले 3 सलों से कोल्हापुर जिले के तालुका शिरोल बाईपास स्थित जयसिंह सोसायटी में रह रहे थे. दोनों ही एमआईडीसी परिसर की एक गारमेंट कंपनी में काम करते थे. कंपनी 2 शिफ्टों में चलती थी इसलिए उन दोनों का काम अलगअलग शिफ्टों में था. अर्चना सुबह 8 बजे काम पर जाती और शाम 5 बजे तक घर आ जाती थी. लेकिन चेतन का काम ऐसा नहीं था. उस को कभीकभी दोनों शिफ्टों में काम करना पड़ता था. दोनों खुश थे. उन की लवमैरिज की जिंदगी सुकून से गुजर रही थी.

मगर इसी बीच कुछ ऐसा हुआ जो नहीं होना चाहिए था. दरअसल, 20 फरवरी, 2021 को अचानक 2 बजे के करीब एक ऐसी लोमहर्षक घटना घटी कि जिस ने भी देखा, उस का कलेजा मुंह को आ गया. कामकाज का दिन होने की वजह से सोसायटी के सभी पुरुष और महिलाएं अपनेअपने कामों के कारण घरों से बाहर थे. सोसायटी में सिर्फ बच्चे, कुछ बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष ही थे. दोपहर का खाना खा कर सभी अपनेअपने घरों में आराम कर रहे थे कि तभी चीखनेचिल्लाने और बचाओ… बचाओ की आवाजें आने लगीं. आवाजें पड़ोस के रहने वाले चेतन घोरपड़े के घर से आ रही थीं.

लोगों को आश्चर्य हुआ क्योंकि पतिपत्नी दोनों अकसर अपने काम पर रहते थे. अर्चना घोरपड़े के चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुन कर लोग अपनेअपने घरों से बाहर आए तो उन्होंने देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था. लोगों ने दरवाजा थपथपाया, आवाजें दीं. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. इस से लोगों ने समझा कि हो सकता है पतिपत्नी का कोई मामला हो, जिसे ले कर दोनों के बीच झगड़ा हो गया हो. वैसे भी पतिपत्नी के झगड़े आम बात होते हैं. बहरहाल, उन्होंने पतिपत्नी का आपसी मामला समझ कर खामोश ही रहना उचित समझा. तभी बाहर शांति देख कर चेतन घोरपड़े ने धीरे से दरवाजा खोला. उस के कपड़ों पर खून लगा था.

इस के पहले कि पड़ोसी कुछ समझ पाते, चेतन दरवाजे की कुंडी लगा कर तेजी से सोसायटी के बाहर निकल गया और वहां से सीधे शिरोल पुलिस थाने पहुंचा. थाने की ड्यूटी पर तैनात एपीआई शिवानंद कुमार और उन के सहायकों ने थाने में चेतन घोरपड़े को देखा तो वह स्तब्ध रह गए. उस का हुलिया और उस के कपड़ों पर पड़े खून के छींटे किसी बड़ी वारदात की तरफ इशारा कर रहे थे. एपीआई शिवानंद कुमार उस से कुछ पूछते, उस के पहले ही उस ने उन्हें जो कुछ बताया, उसे सुन कर उन के होश उड़ गए. मामला काफी गंभीर था. एपीआई शिवानंद कुमार और उन के सहायकों ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. साथ ही साथ उन्होंने इस की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों के साथ पुलिस कंट्रोल रूम जयसिंहपुर को भी दे दिया.

शिवानंद पुलिस टीम ले कर घटनास्थल की ओर निकल ही रहे थे कि अचानक चेतन घोरपड़े की तबीयत बिगड़ने लगी. उस की बिगड़ती तबीयत को देख कर एपीआई शिवानंद कुमार ने अपने सहायकों के साथ उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल भेज दिया और खुद हैडकांस्टेबल डी.डी. पाटिल और सागर पाटिल को ले कर घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. जिस घर में घटना घटी थी, वहां पर काफी भीड़ एकत्र थी, जिसे हटाने में पुलिस टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी. भीड़ को हटा कर इंसपेक्टर शिवानंद कुमार जब घर के अंदर गए तो वहां का दृश्य काफी मार्मिक और डरावना था.

फर्श पर एक लहूलुहान युवती का शव पड़ा था. उस के पास ही 2 महिलाएं बैठी छाती पीटपीट कर रो रही थीं. पूछताछ में मालूम हुआ कि वे दोनों महिलाएं मृतका की मां और सास थीं, जिन का नाम वसंती पुजारी और आशा घोरपड़े था. पुलिस टीम ने दोनों महिलाओं को सांत्वना दे कर घर से बाहर निकला और अपनी काररवाई शुरू कर दी. अभी पुलिस घटना के विषय में पूछताछ कर ही रही थी कि वारदात की जानकारी पा कर कोल्हापुर के एसपी शैलेश वलकवड़े मौकाएवारदात पर आ गए. उन के साथ 2 फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो के लोग भी थे.

घर के अंदर का मंजर दिल दहला देने वाला था. पूरे फर्श पर खून ही खून फैला हुआ था. बैडरूम में युवती का शव पड़ा था, जिस की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस की कलाई और गालों पर किसी तेज धारदार वाले हथियार से वार किए गए थे. गले में मोबाइल चार्जर का वायर लिपटा था, जिसे देख कर सहज अंदाजा लगाया जा सकता था कि उस का गला घोंटने में इसी वायर का इस्तेमाल किया गया था. फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो का काम खत्म होने के बाद एसपी शैलेश वलकवड़े ने अपने सहायकों के साथ घटनास्थल की बारीकी से जांच की. इस के बाद उन्होंने जांचपड़ताल की सारी जिम्मेदारी एपीआई शिवानंद कुमार को सौंपते हुए उन्हें जरूरी निर्देश दिए.

एपीआई शिवानंद कुमार ने अपने सहायकों के साथ घटनास्थल पर पड़े ब्लेड और मोबाइल चार्जर के वायर को अपने कब्जे में ले लिया और मृतका अर्चना घोरपड़े के शव को पोस्टमार्टम के लिए जयसिंहपुर के जिला अस्पताल भेज दिया. वहां की सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के शिवानंद पुलिस थाने आ गए. साथ ही घटनास्थल पर आई मृतका की मां बसंती पुजारी को भी पुलिस थाने ले आए और उन की शिकायत पर अर्चना घोरपड़े के पति चेतन घोरपड़े के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. आगे की जांच के लिए उन्हें चेतन घोरपड़े के बयान का इंतजार था जो अभी अस्पताल में डाक्टरों की निगरानी में था.

पत्नी की हत्या के बाद अपराधबोध के कारण उस ने आत्महत्या के लिए घर में रखा कीटनाशक फिनायल पी लिया था और फिर पुलिस थाने आ गया था. डाक्टरों के अथक प्रयासों के बाद चेतन घोरपड़े को जब होश आया तो उस से पूछताछ की गई. उस ने जो कुछ बताया, उस से घटना का विवरण सामने आया. 25 वर्षीय अर्चना पुजारी जितनी सुंदर और स्वस्थ थी, उतनी ही खुले मन और आधुनिक विचारों वाली थी. वह किसी से भी बेझिझक बातें करती और उस के साथ घुलमिल जाती थी, लेकिन अपनी हद में रह कर. उस की मीठी और सीधीसरल बातें हर किसी के मन को मोह लेती थीं.

यही वजह थी जो उस की मौत का कारण बनी. उस के पिता रामा पुजारी की मृत्यु हो गई थी. घर की सारी जिम्मेदारी मां बसंती पुजारी के कंधों पर थी. घर की आर्थिक स्थिति कुछ खास नहीं थी, इसलिए उस की शिक्षादीक्षा ठीक से नहीं हो पाई थी. 30 वर्षीय चेतन मनोहर घोरपड़े ने सजीसंवरी अर्चना पुजारी को अपने एक दोस्त की पार्टी में देखा था और उस का दीवाना हो गया था. जब तक वह उस पार्टी में रही, तब तक चेतन की आंखें उसी पर टिकी रहीं. देर रात पार्टी खत्म होने के बाद चेतन घोरपड़े ने जब घर के लिए आटो लिया तब अपने दोस्त के कहने पर अर्चना पुजारी को उस के घर तक छोड़ते हुए गया.

उस रात आटो के सफर में दोनों ने एकदूसरे को जानासमझा. दोनों ने बेझिझक एकदूसरे से बातें कीं. घर पहुंचने के बाद अर्चना पुजारी ने चेतन का शुक्रिया अदा किया और अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया और उस का भी ले लिया. घर पहुंचने के बाद दोनों की एक जैसी ही स्थिति थी. रात भर दोनों सोच के दायरे में एकदूसरे के व्यक्तित्व को अपनेअपने हिसाब से टटोलते, तौलते रहे. दोनों की ही आंखों से नींद कोसों दूर थी. सारी रात उन की आंखों के सामने एकदूसरे का चेहरा नाचता रहा, जिस का नतीजा यह हुआ कि वे दोनों जल्दी ही एकदूसरे के करीब आ गए.

फोन पर लंबीलंबी बातों के बाद मुलाकातों से शुरू हुई दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई और कुछ महीनों बाद दोनों ने शादी का निर्णय ले लिया. उन के इस निर्णय से अर्चना पुजारी की मां को तो कोई ऐतराज नहीं था लेकिन चेतन की मां को इस शादी से आपत्ति थी. वह गैरजाति की लड़की को अपनी बहू बनाने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन चेतन घोरपड़े की पसंद के कारण मां की एक नहीं चली. 2013 के शुरुआती महीने में अर्चना बहू बन कर चेतन के घर आ गई. चेतन ने अपने कुछ रिश्तेदारों की उपस्थिति में अर्चना से लवमैरिज कर ली. लवमैरिज के बाद दोनों का सांसारिक जीवन हंसीखुशी से शुरू तो जरूर हुआ लेकिन कुछ ही दिनों के लिए.

शादी के बाद से ही अर्चना और चेतन की मां की किचकिच शुरू हो गई थी. चेतन अकसर दोनों को समझाबुझा कर शांत कर देता था. लेकिन कब तक, आखिरकार उन के झगड़ों से परेशान हो कर चेतन घोरपड़े अपनी मां का घर छोड़ कर अर्चना के साथ जयसिंहपुर में किराए के घर में आ कर रहने लगा. किराए के घर में आने के बाद अर्चना भी उसी कंपनी में सर्विस करने लगी, जिस में चेतन काम करता था. इस घर में आने के कुछ दिन बाद ही अर्चना का रहनसहन बदल गया था. हाथों में महंगा मोबाइल फोन, महंगे कपड़े उस के शौक बन गए. घूमनाफिरना, शौपिंग करना, ज्यादा समय फोन पर बातें करना उस की हौबी बन गई थी. चेतन जब भी उसे समझाने की कोशिश करता तो वह उस से उलझ जाती और उस की बातों पर ध्यान नहीं देती थी.

अर्चना की आए दिन की इन हरकतों से परेशान हो कर चेतन को लगने लगा था जैसे वह अर्चना से शादी कर के फंस गया है. अर्चना जैसी दिखती थी, वैसी थी नहीं. यह सोचसोच कर उस का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा था, जिसे शांत करने के लिए वह दोस्तों के साथ शराब पीने लगा था. इस से उस के घर का माहौल और खराब होने लगा था. अर्चना का खुले विचारों का होना और कंपनी के लोगों से हिलमिल जाना आग में घी का काम कर रहा था, जो अर्चना के चरित्र को कठघरे में खड़ा करता था. इसी सब को ले कर चेतन घोरपड़े शराब के नशे में अर्चना के साथ अकसर झगड़ा और मारपीट करने लगा था. इस से परेशान हो कर अर्चना अपने मायके शिरोल चली जाती थी और वहीं से काम पर कंपनी आती थी.

यह दूरियां तब और बढ़ गईं जब अर्चना अपनी शादी की सालगिरह के एक हफ्ते पहले चेतन से लड़ कर अपनी मां के पास चली गई और फिर वापस नहीं आई. इस बार चेतन घोरपड़े ने अर्चना से माफी मांग कर उसे घर लौट आने के लिए कहा लेकिन अर्चना ने उसे इग्नोर कर दिया. वह अपने मायके शिरोल से लंबी दूरी तय कर के कंपनी आती थी लेकिन चेतन घोरपड़े की लाख मिन्नतों के बाद भी उस के पास नहीं आई और न ही शादी की सालगिरह की बधाई का फोन ही उठाया. लाचार हो कर चेतन घोरपड़े ने अर्चना को शादी की सालगिरह का मैसेज भेज कर शुभकामनाएं दीं. लेकिन उस का भी कोई जवाब नहीं आया तो मजबूरन शादी की सालगिरह के 2 दिन बाद वह अर्चना के मायके गया.

जहां उस का स्वागत अर्चना की मां बसंती पुजारी ने किया और चेतन को काफी खरीखोटी सुनाई. साथ ही उसे पुलिस थाने तक ले जाने की धमकी भी दी. फिर भी चेतन घोरपड़े ने अर्चना से अपनी गलतियों की माफी मांगते हुए उसे अपने घर चलने के लिए कहा. मगर अर्चना पर उस की माफी का कोई असर नहीं पड़ा. नाराज हो कर चेतन अपने घर लौट आया. जब इस बात की जानकारी उस के दोस्तों को हुई तो उन्होंने उस के जले पर नमक छिड़क दिया, जिस ने आग में घी का काम किया था. उन्होंने बताया कि अर्चना का किसी कार वाले से अफेयर चल रहा है जो उसे अपनी कार से कंपनी लाता और ले कर जाता है. इस से चेतन के मन में अर्चना के प्रति उपजे संदेह को और हवा मिल गई.

वह जितना अर्चना के बारे में गहराई से सोचता, उतना ही परेशान हो जाता. इस का नतीजा यह हुआ कि उस के मन में अर्चना के प्रति घोर नफरत भर गई. उसके प्यार का दर्द छलक गया और उस ने एक खतरनाक निर्णय ले लिया. अपने निर्णय के अनुसार, घटना वाले दिन चेतन कंपनी में गया और अर्चना को कंपनी के बाहर बुला कर कुछ जरूरी काम के लिए घर चलने के लिए कहा. कंपनी में तमाशा न बने, इसलिए अर्चना बिना कुछ बोले उस के साथ घर आ गई. घर आने के बाद दोनों के बीच जोरदार झगड़ा हुआ तो पहले से ही तैयार चेतन ने अपनी जेब से ब्लेड निकाल कर अर्चना के हाथों की कलाई काट दी.

जब अर्चना चिल्लाई तो उस के गालों पर भी ब्लेड मार कर पास पड़े मोबाइल चार्जर से उस का गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया. अर्चना घोरपड़े की जीवनलीला खत्म करने के बाद अब उस के जीने का कोई मकसद नहीं बचा था. उस ने अपने जीवन को भी खत्म करने का फैसला कर अपनी चाची को फोन कर सारी कहानी बताई. फिर साफसफाई के लिए घर में रखी फिनायल पी कर पुलिस थाने पहुंच गया. जांच अधिकारी एपीआई शिवानंद कुमार और उन की टीम ने चेतन मनोहर घोरपड़े से विस्तृत पूछताछ करने के बाद मामले को भादंवि की धारा 302, 34 के तहत दर्ज कर के चेतन को न्यायिक हिरासत में जयसिंहपुर जेल भेज दिया. Parivarik Kahani

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8 फरवरी, 2021 की बात है सुबह के करीब 10 बजे थे. नासिर नाम का एक कबाड़ी जोया रोड के किनारे हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास से गुजर रहा था, तभी उस की नजर स्कूल के पास पड़े खाली प्लौट में चली गई. प्लौट में एक युवती की लाश पड़ी थी. लाश देखते ही नासिर ने शोर मचा दिया. उस की आवाज सुन कर तमाम लोग जमा हो गए. नासिर ने फोन कर के इस की सूचना अमरोहा देहात थाने में दे दी. युवती की लाश की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी सुरेशचंद्र गौतम अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वह जोया रोड स्थित हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास पहुंचे तो वहां एक प्लौट में काफी लोग जमा थे.

वहीं पर युवती की लाश पड़ी थी, जो खून से लथपथ थी. उस का सिर और मुंह कुचला हुआ था. लाश के पास ही खून से सनी एक ईंट पड़ी थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे ने इसी ईंट से युवती की हत्या की होगी. मृतका की उम्र लगभग 25 साल  थी. काले रंग की जींस, नारंगी टौप और सफेद जूते पहने वह युवती किसी अच्छे परिवार की लग रही थी. उस के गले पर भी चोट के निशान थे. लाश के पास 2 मोबाइल फोन और 2 पर्स भी पड़े थे. पुलिस ने उस के पर्स की तलाशी ली तो उस में एक आधार कार्ड मिला. आधार कार्ड पर नाम नेहा चौधरी लिखा था.

आधार कार्ड के फोटो से इस बात की पुष्टि हो गई कि लाश नेहा चौधरी की ही है. कार्ड पर लिखे एड्रैस के अनुसार, नेहा अमरोहा देहात थाने के पचोखरा गांव निवासी दिनेश चौधरी की बेटी थी. थानाप्रभारी ने एक कांस्टेबल को भेज कर यह खबर मृतका के घर तक पहुंचवा दी. सूचना पा कर एसपी सुनीति, एएसपी अजय प्रताप सिंह और सीओ विजय कुमार राणा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने भी लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. उधर खबर मिलते ही मृतका नेहा चौधरी की मां वीना चौधरी, छोटा भाई अंकित और  चाचा कमल सिंह गांव के कुछ लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

लाश देखते ही वीना चौधरी ने उस की शिनाख्त अपनी बेटी नेहा के रूप में कर दी. घर के सभी लोगों का रोरो कर बुरा हाल था. गांव वाले उन्हें सांत्वना दे कर चुप कराने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस ने मृतका के घर वालों से पूछा कि उन की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है. इस पर वीना चौधरी ने कहा कि हमारी गांव में क्या कहीं भी किसी से कोई रंजिश नहीं है. मौके पर पहुंची फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सुबूत जुटाए. इस के बाद पुलिस ने जरूरी लिखापढ़ी के बाद उस का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसपी सुनीति ने इस हत्याकांड को सुलझाने के लिए 3 पुलिस टीमों का गठन किया.

पुलिस ने वीना चौधरी से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि नेहा मेरठ की सुभारती यूनिवर्सिटी से एमबीए  कर रही थी. इस साल वह फाइनल की छात्रा थी. इस के अलावा वह पिछले 4 साल से नोएडा स्थित एक निजी बैंक में नौकरी भी कर रही थी और दिल्ली के लक्ष्मी नगर में किराए के मकान में रहती थी. 7 फरवरी यानी कल वह घर अमरोहा लौटने वाली थी. उस ने नोएडा से चलने के बाद अपने चाचा कमल सिंह को फोन कर के बता दिया था कि वह शाम तक अमरोहा पहुंच जाएगी. लेकिन वह घर नहीं पहुंची. पुलिस ने मृतका के चाचा कमल सिंह की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया. पोस्टमार्टम के बाद घर वाले लाश ले कर चले गए.

पुलिस की सभी टीमें जांच में जुट गईं. जिस जगह पर नेहा चौधरी की लाश मिली थी, पुलिस ने उस के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में 7 फरवरी को रात करीब 8 बजे नेहा चौधरी के साथ एक युवक भी दिखाई दिया. दूसरे दिन पुलिस ने वह फुटेज नेहा के घर वालों को दिखाई तो वीना चौधरी और देवर कमल सिंह ने युवक को पहचानते हुए बताया कि यह तो  नेहा का छोटा भाई अंकित है. यह सुन कर पुलिस हतप्रभ रह गई. वीना चौधरी के साथ अंकित भी घटनास्थल पर आया था और फूटफूट कर रो रहा था, जबकि उस की हत्या से कुछ घंटे पहले तक वह उस के साथ था. सोचने वाली बात यह थी कि हत्या से पहले आखिर वह उस के साथ क्या कर रहा था.

अब पुलिस का मकसद अंकित से पूछताछ करना था, लेकिन वह घर से गायब था. पुलिस उस की तलाश में जुट गई. अगले दिन यानी 9 फरवरी की रात 9 बजे अंकित को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह दिल्ली भागने की फिराक में था. थाने में पुलिस ने अंकित से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. अंकित ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपनी बड़ी बहन नेहा की हत्या की थी. आखिर छोटे भाई ने अपनी सगी बहन की  हत्या क्यों की, इस बारे में पुलिस ने जब अंकित से पूछा तो नेहा चौधरी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी—

25 वर्षीय नेहा चौधरी उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के गांव पचोखरा के रहने वाले दिनेश चौधरी की बेटी थी. पत्नी वीना चौधरी के अलावा दिनेश चौधरी के 2 बच्चे थे, बड़ी बेटी नेहा और छोटा अंकित चौधरी. करीब 20 साल पहले दिनेश चौधरी अचानक गायब हो गए थे. उन्हें बहुत तलाशा गया, लेकिन कहीं पता नहीं चला. उस समय नेहा की उम्र 5 साल और अंकित की 3 साल थी. पति के गायब हो जाने पर वीना चौधरी पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. दुख की इस घड़ी में उन का साथ दिया उन के देवर कमल सिंह ने. वह अमरोहा शहर के मोहल्ला पीरगढ़ में रहते थे. भाई के गायब हो जाने के बाद वह अपनी भाभी और दोनों बच्चों को अपने साथ ले आए और अपने घर पर ही रख कर न सिर्फ उन की परवरिश की, बल्कि पढ़ाईलिखाई भी पूरी कराई.

अंकित चौधरी की ननिहाल अमरोहा जिले के ही गांव सलामतपुर में थी. वह अकसर अपनी ननिहाल जाता रहता था. बताया जाता है कि उस ने अपने ममेरे भाई अक्षय के साथ मिल कर अपनी ननिहाल के गांव की रहने वाली एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उस के साथ बलात्कार किया था. लड़की के पिता ने 18 जनवरी, 2021 को थाना डिडौली में अंकित और अक्षय के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 363 376डी, 342, 516 पोक्सो ऐक्ट तथा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई. अमरोहा की अदालत में नाबालिग लड़की के बयान भी दर्ज कराए गए. जिस में उस ने साफ कहा कि अंकित और अक्षय ने उस का अपहरण करने के बाद उस के साथ दुष्कर्म किया था.

इस केस से बचने के लिए अंकित चौधरी ने अमरोहा के कई बड़े वकीलों से राय ली. उन्होंने अंकित को बताया कि मामला बहुत गंभीर है. इस में तुम बच नहीं सकते, जेल तो जाना ही पड़ेगा. तब शातिर दिमाग अंकित चौधरी ने अपने आप को बचाने के लिए एक खौफनाक योजना तैयार की. योजना यह थी कि वह अपनी बड़ी बहन नेहा चौधरी की हत्या करने के बाद इस का आरोप उस लड़की के पिता पर लगा देगा, जिस ने उस के खिलाफ बेटी के अपहरण व बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. ऐसा करने से क्रौस केस बन जाएगा. इस के बाद केस को रफादफा करने के लिए समझौते की बात चलेगी. समझौता हो जाने पर वह जेल जाने से बच जाएगा.

उसे बहन की हत्या कैसे करनी है, इस की भी उस ने पूरी योजना बना ली थी. योजना के अनुसार 7 फरवरी, 2021 को अंकित चौधरी ने अपनी बहन नेहा चौधरी को किसी परिचित के मोबाइल से फोन किया. उस समय नेहा नोएडा में अपनी ड्यूटी पर थी. अंकित ने उस से  कहा कि बहन मेरे ऊपर जो मुकदमा चल रहा है उस में नाबालिग लड़की के पिता से बात हो गई है. वह फैसला करने को राजी है. लेकिन फैसले के समय तुम्हारा वहां रहना जरूरी है. इसलिए मैं अमरोहा से टैक्सी ले कर तुम्हें लेने के लिए नोएडा आ रहा हूं. नेहा ने सोचा कि एकलौता भाई है, फैसला हो जाए तो अच्छा है. यही सोच कर उस ने अमरोहा आने की हामी भर दी.

योजना के अनुसार 7 फरवरी, 2021 को अमरोहा के गांधी मूर्ति चौराहे के पास स्थित टैक्सी स्टैंड से एक गाड़ी बुक करा कर अंकित नोएडा के लिए रवाना हो गया. वह उस जगह पहुंच गया, जहां उस की बहन नेहा नौकरी करती थी. नेहा अंकित के साथ नोएडा से अमरोहा के लिए चल दी. रास्ते में नेहा ने अपने चाचा कमल सिंह को फोन कर के बता दिया था कि वह अमरोहा आ रही है और शाम 6 बजे तक घर पहुंच जाएगी. वापसी में अंकित टैक्सी ले कर अमरोहा से थोड़ा पहले स्थित जोया रोड पर पहुंचा तो उस ने अमरोहा ग्रीन से थोड़ा पहले टैक्सी रुकवा ली. नेहा ने टैक्सी रोकने की वजह पूछी तो अंकित ने बताया कि पुलिस मेरे पीछे पड़ी है. ऐसे में टैक्सी से घर जाना सही नहीं है.

हम लोग यहां से किसी दूसरे रास्ते से चलेंगे. उस ने टैक्सी वाले को पैसे दे कर वहां से भेज दिया. इस के बाद वह नेहा को हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास खाली पड़े प्लौट की तरफ ले गया. नेहा ने उस से पूछा भी कि मुझे इस अनजान, सुनसान जगह से कहां ले जा रहे हो. तब अंकित ने कहा कि इधर से शौर्टकट रास्ता है. मेनरोड पर पुलिस मुझे पकड़ सकती है इसलिए मैं शौर्टकट से जा रहा हूं. नेहा ने भाई की बात पर विश्वास कर लिया और उस के साथ चलने लगी. नेहा को क्या पता था कि जिस भाई की कलाई पर वह हर साल अपनी रक्षा के लिए राखी बांधती है, वही भाई उस की हत्या करने वाला है.

वह कुछ ही दूर चली थी कि अंकित रुक गया. वह नेहा से बोला कि मैं बाथरूम कर लूं, तुम पीछे मुंह कर के खड़ी हो जाओ. जैसे ही नेहा पीछे मुंह कर के खड़ी हुई, अंकित ने अपनी जेब से एक फीता निकाला और बड़ी फुरती से नेहा के गले में डाल कर कस दिया. नेहा बस इतना ही कह पाई कि भाई यह तुम क्या कर रहे हो? इस के बाद वह मूर्छित हो कर जमीन पर गिर गई. तभी अंकित ने पास पड़ी ईंट से बहन के सिर व चेहरे पर तमाम वार किए और वह उसे ईंट से तब तक कूटता रहा, जब तक कि उस की मौत न हो गई.

अपनी सगी बहन की हत्या के बाद वह वहां से चला गया. वह सीधा अमरोहा की आवास विकास कालोनी में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के घर गया. फिर वहां से अगली सुबह 5 बजे उठ कर चला गया. उस के कपड़ों, जूतों आदि पर खून लगा था. इसलिए उस ने अपने कपड़े, जैकेट, जूते, टोपा और गला घोंटने वाला फीता कल्याणपुर बाईपास के पास हमीदपुरा गांव के जंगल की झाडि़यों में छिपा दिए. इस के बाद वह अपने घर चला गया. सुबह होने पर एक सिपाही जब नेहा की हत्या की खबर देने उस के घर गया, तब वह अपनी मां और चाचा के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और वहां फूटफूट कर रोने का नाटक करने लगा.

अंकित से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर हमीदपुरा गांव के जंगल की झाडि़यों में छिपा कर रखे गए कपड़े, जैकेट, जूते, टोपा और फीता बरामद कर लिया. अंकित चौधरी की गिरफ्तारी के बाद सारे सबूत पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए. 10 फरवरी, 2021 को अमरोहा की एसपी सुनीति ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया. इस पूरे मामले में एसपी सुनीति को डिडौली थाने के दरोगा मुजम्मिल की लापरवाही नजर आई. मुजम्मिल ने नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार के आरोपी अंकित और उस के ममेरे भाई अक्षय को गिरफ्तार करने में लापरवाही दिखाई थी.

यदि वह इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लेते तो शायद नेहा की हत्या नहीं होती. इसलिए एसपी सुनीति ने लापरवाही के आरोप में एसआई मुजम्मिल को लाइन हाजिर कर दिया. अंकित चौधरी से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. parivarik kahani hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News : 10 लाख रुपए के लिए बचपन के दोस्त का किया कत्ल

UP News :  दोस्ती में एक विश्वास होता है, भरोसा होता है. लेकिन शैलेश प्रजापति और अर्श गुप्ता ने पैसे के लिए उस विश्वास की धज्जियां उड़ा दीं, जिस की वजह से विनय…

19 मार्च, 2021 की रात 10 बजे शीला देवी अपने देवर आनंद प्रजापति के साथ जनता नगर चौकी पहुंचीं. उस समय इंचार्ज ए.के. सिंह चौकी पर मौजूद थे. उन्होंने शीला देवी को बदहवास देखा, तो पूछा, ‘‘क्या बात है, तुम घबराई हुई क्यों हो? कोई गंभीर बात है क्या?’’

‘‘हां सर. हमें किसी अनहोनी की आशंका है.’’

‘‘कैसी अनहोनी? साफसाफ पूरी बात बताओ.’’

‘‘सर, दरअसल बात यह है कि रात 8 बजे मेरा बेटा शैलेश, उस का दोस्त अर्श गुप्ता व विनय घर पर नीचे कमरे में शराब पी रहे थे. कुछ देर बाद कमरे से चीखनेचिल्लाने की आवाजें आईं. फिर वे लोग बाइक से कहीं चले गए.

‘‘उन के जाने के बाद मैं कमरे में गई, तो वहां खून से सनी चादर देखी. अनहोनी की आशंका से मैं घबरा गई. मैं ने इस की जानकारी पड़ोस में रहने वाले अपने देवर आनंद को दी, फिर उन के साथ सूचना देने आप के पास आ गई. आप मेरी मदद करें.’’

शीला देवी की बात सुनकर ए.के. सिंह को लगा कि जरूर कोई अनहोनी घटना घटित हुई है. उन्होंने यह सूचना बर्रा थानाप्रभारी हरमीत सिंह को दी फिर 2 सिपाहियों के साथ शीला देवी के बर्रा भाग 8 स्थित मकान पर पहुंच गए. उन के पहुंचने के चंद मिनट बाद ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह भी आ गए. हरमीत सिंह ने ए.के. सिंह के साथ कमरे का निरीक्षण किया तो सन्न रह गए. कमरे के फर्श पर खून पड़ा था और पलंग पर बिछी चादर खून से तरबतर थी. कमरे का सामान भी अस्तव्यस्त था. खून की बूंदें कमरे के बाहर गली तक टपकती गई थीं.

निरीक्षण के बाद हरमीत सिंह ने अनुमान लगाया कि कमरे के अंदर कत्ल जैसी वारदात हुई है या फिर गंभीर रूप से कोई घायल हुआ है. शैलेश और उस का दोस्त या तो लाश को ठिकाने लगाने गए हैं या फिर अस्पताल गए हैं. कहीं भी गए हों, वे लौट कर घर जरूर आएंगे. अत: उन्होंने घर के आसपास पुलिस का पहरा लगा दिया तथा खुद भी निगरानी में लग गए. रात लगभग डेढ़ बजे शैलेश और उस का दोस्त अर्श गुप्ता वापस घर आए तो पुिलस ने उन्हें दबोच लिया और थाना बर्रा ले आए. दोनों के हाथ और कपड़ों पर खून लगा था. इंसपेक्टर हरमीत सिंह ने पूछा, ‘‘तुम दोनों ने किस का कत्ल किया है और लाश कहां है?’’

शैलेश कुछ क्षण मौन रहा फिर बोला, ‘‘साहब, मैं ने अपने बचपन के दोस्त विनय प्रभाकर का कत्ल किया है. वह बर्रा भाग दो के मनोहर नगर में रामजानकी मंदिर के पास रहता था. उस की लाश को मैं ने अर्श की मदद से रिंद नदी में फेंक दिया है. पैट्रोल खत्म हो जाने की वजह से हम ने विनय की मोटरसाइकिल खाड़ेपुर-फत्तेपुर मोड़ पर खड़ा कर दी और वापस लौट आए.’’

‘‘तुम ने अपने दोस्त का कत्ल क्यों किया?’’ थानाप्रभारी हरमीत सिंह ने शैलेश से पूछा. इस सवाल पर शैलेश काफी देर तक हरमीत सिंह को गुमराह करता रहा. पहले वह बोला, ‘‘साहब, नशे में गलती हो गई. हम ने उस का कत्ल कर दिया.’’

फिर बताया कि उस के मोबाइल फोन में उस की महिला मित्र की कुछ आपत्तिजनक फोटो थीं. उन फोटो को विनय ने धोखे से अपने मोबाइल फोन में ट्रांसफर कर लिया था. वह उन फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे कर ब्लैकमेल कर रहा था, इसलिए हम ने उसे मार डाला. लेकिन थानाप्रभारी हरमीत सिंह को उस की इन दोनों बातों पर यकीन नहीं हुआ. सच्चाई उगलवाने के लिए उन्होंने सख्ती की तो दोनों टूट गए. फिर उन्होंने बताया कि उन्होंने 10 लाख रुपए की फिरौती मांगने के लिए विनय की हत्या की योजना बनाई थी. कुछ माह पहले संजीत हत्याकांड की तरह शव को ठिकाने लगाने के बाद उसी के मोबाइल फोन से उस के घर वालों को फोन कर फिरौती मांगने की योजना थी.

उस ने दौलत की चाहत में दोस्त की हत्या की थी. लेकिन फिरौती मांगने के पहले ही वे पकड़े गए. शैलेश व अर्श की जामातलाशी में उन के पास से 3 मोबाइल फोन मिले, जिस में एक मृतक विनय का था तथा बाकी 2 शैलेश व अर्श के थे. उन के पास एक पर्स भी बरामद हुआ जिस में मृतक का फोटो, आधार कार्ड तथा कुछ रुपए थे. बरामद पर्स मृतक विनय प्रभाकर का था. शैलेश व अर्श गुप्ता की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल बांका तथा लाश ठिकाने लगाने में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद कर ली. बांका उस ने अपने कमरे में छिपा दिया था और पैट्रोल खत्म होने से उस ने मोटरसाइकिल खाड़ेपुर मोड़ पर खड़ी कर दी थी.

फिरौती और हत्या के इस मामले में थानाप्रभारी हरमीत सिंह कोई कोताही नहीं बरतना चाहते थे. क्योंकि इस के पहले संजीत अपहरण कांड में बर्रा पुलिस गच्चा खा चुकी थी. अपहर्त्ताओं ने फिरौती की रकम भी ले ली थी और उस की हत्या भी कर दी थी. इस मामले में लापरवाही बरतने में एसपी व डीएसपी सहित 5 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था. अत: उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. सूचना पा कर रात 3 बजे एसपी (साउथ) दीपक भूकर तथा डीएसपी विकास पांडेय थाना बर्रा पहुंच गए. उन्होंने घटना के संबंध में गिरफ्तार किए गए शैलेश व अर्श गुप्ता से विस्तार से पूछताछ की.

फिर दोनों को साथ ले कर रिंद नदी के पुल पर पहुंचे. इस के बाद कातिलों की निशानदेही पर नदी किनारे पड़ा विनय प्रभाकर का शव बरामद कर लिया. विनय की हत्या बड़ी निर्दयतापूर्वक की गई थी. उस का गला धारदार हथियार से काटा गया था, जिस से सांस की नली कट गई थी और उस की मौत हो गई थी. मृतक विनय की उम्र 26 वर्ष के आसपास थी और उस का शरीर हृष्टपुष्ट था. 20 मार्च की सुबह 5 बजे बर्रा थाने के 2 सिपाही मृतक विनय के घर पहुंचे और उस की हत्या की खबर घर वालों को दी. खबर पाते ही घर व मोहल्ले में सनसनी फैल गई. घर वाले रिंद नदी के पुल पर पहुंचे.

वहां विनय का शव देख कर मां विमला तथा बहन रीता बिलख पड़ीं. पिता रामऔतार प्रभाकर तथा भाई पवन की आंखों से भी अश्रुधारा बह निकली. पुलिस अधिकारियों ने उन्हे धैर्य बंधाया. पवन ने एसपी दीपक भूकर को बताया कल शाम साढ़े 7 बजे किसी का फोन आने पर उस का भाई विनय यह कह कर अपनी पल्सर मोटरसाइकिल से घर से निकला था कि अपने दोस्त से मिलने जा रहा है. उस के बाद वह घर नहीं लौटा. रात भर हम लोग उस के घर वापस आने का इंतजार करते रहे. उस का फोन भी बंद था. सुबह 2 सिपाही घर आए. उन्होंने विनय की हत्या की सूचना दी. तब हम लोग यहां आए. लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि विनय की हत्या किस ने और क्यों की?

‘‘तुम्हारे भाई की हत्या किसी और ने नहीं, उस के बचपन के दोस्त शैलेश प्रजापति व उस के साथी अर्श गुप्ता ने की है. वह तुम लोगों से फिरौती के 10 लाख रुपए वसूलना चाहते थे. लेकिन शैलेश की मां ने ही उस का भांडा फोड़ दिया और दोनों पकड़े गए.’’

यह जानकारी पा कर पवन व उस के घर वाले अवाक रह गए. क्योंकि वे सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि शैलेश ऐसा विश्वासघात कर सकता है. निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम हाउस हैलट अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद वह शैलेश के उस कमरे में पहुंचे, जहां विनय का कत्ल किया गया था. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने जहां घटनास्थल का निरीक्षण किया, वहीं फोरैंसिक टीम ने भी बेंजाडीन टेस्ट कर साक्ष्य जुटाए. चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल बांका भी बरामद करा दिया था, अत: थानाप्रभारी हरमीत सिंह ने मृतक के भाई पवन को वादी बना कर भादंवि की धारा 302/201 तथा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत शैलेश प्रजापति तथा अर्श गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

उन्हें न्यायसम्मत गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस पूछताछ में दौलत की चाहत में दोस्त की हत्या की सनसनीखेज घटना का खुलासा हुआ. कानपुर शहर का एक बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है-बर्रा. इस क्षेत्र के बड़ा होने से इसे कई भागों में बांटा गया है. रामऔतार प्रभाकर अपने परिवार के साथ इसी बर्रा क्षेत्र के भाग 2 में मनोहरनगर में जानकी मंदिर के पास रहते थे. उन के परिवार में पत्नी विमला के अलावा 2 बेटे पवन कुमार, विनय कुमार तथा बेटी रीता कुमारी थी. रामऔतार प्रभाकर आर्डिनैंस फैक्ट्री में काम करते थे. किंतु अब रिटायर हो चुके थे. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी.

फैक्ट्री में रामऔतार प्रभाकर के साथ सोमनाथ प्रजापति काम करते थे. सोमनाथ भी बर्रा भाग 8 में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शीला देवी के अलावा एकलौता बेटा शैलेश था. सोमनाथ भी रिटायर हो चुके थे. सोमनाथ बीमार रहते थे. उन्हें सुनाई भी कम देता था और दिखाई भी. उन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. रामऔतार और सोमनाथ इस के पहले अर्मापुर स्थित फैक्ट्री की कालोनी में रहते थे. 3 साल पहले दोनों ने बर्रा क्षेत्र में जमीन खरीद ली थी और अपनेअपने मकान बना कर रहने लगे थे. मकान बदलने के बावजूद दोनों की दोस्ती में कमी नहीं आई थी. दोनों परिवार के लोगों का एकदूसरे के घर आनाजाना था.

रामऔतार का बेटा विनय और सोमनाथ का बेटा शैलेश बचपन के दोस्त थे. दोनों एकदूसरे के घर आतेजाते थे. विनय ने हाईस्कूल पास करने के बाद आईटीआई से मशीनिस्ट का कोर्स किया था. वह नौकरी की तलाश में था. जबकि शैलेश ड्राइवर बन गया था. वह बुकिंग की कार चलाता था. शैलेश का एक अन्य दोस्त अर्श गुप्ता था. वह फरनीचर कारीगर था और गुजैनी गांव में रहता था. अर्श और शैलेश शराब के शौकीन थे. अकसर दोनों साथ पीते थे और लंबीलंबी डींग हांकते थे. उन दोनों ने विनय को भी शराब पीना सिखा दिया था. अब हर रविवार को शैलेश के घर शराब पार्टी होती थी. तीनों बारीबारी से पार्टी का खर्चा उठाते थे.

एक शाम खानेपीने के दौरान विनय ने शैलेश व अर्श को बताया कि उस की बहन रीता की शादी तय हो गई है. 27 अप्रैल को बारात आएगी. शादी में लगभग 10-12 लाख रुपया खर्च होगा. पिता व भाई ने रुपयों का इंतजाम कर लिया है. शादी की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. शैलेश व अर्श मामूली कमाने वाले युवक थे. वह शार्टकट से लखपति बनना चाहते थे. इस के लिए शैलेश उरई में पान मसाला का कारोबार करना चाहता था. उरई में वह जगह भी देख आया था. लेकिन कारोबार के लिए उस के पास पैसा नहीं था. पैसा कहां से और कैसे आए, इस के लिए शैलेश और अर्श ने सिर से सिर जोड़ कर विचारविमर्श किया तो उन्हें विनय याद आया.

विनय ने बताया था कि उस के यहां बहन की शादी है और घर वालों ने 10-12 लाख रुपए का इंतजाम किया है. दौलत की चाहत में शैलेश व अर्श ने दोस्त के साथ छल करने और फिरौती के रूप में 10 लाख रुपया वसूलने की योजना बनाई. संजीत हत्याकांड दोनों के जेहन में था. उसी तर्ज पर उन दोनों ने विनय की हत्या कर के उस के घर वालों से फिरौती वसूलने की योजना बनाई. योजना के तहत 19 मार्च, 2021 की रात पौने 8 बजे शैलेश ने अर्श के मोबाइल से विनय प्रभाकर के मोबाइल पर काल की और पार्टी के लिए घर बुलाया. विनय की 5 दिन पहले ही लोहिया फैक्ट्री में नौकरी लगी थी. फैक्ट्री से वह साढ़े 7 बजे घर लौटा था कि 15 मिनट बाद शैलेश का फोन आ गया. पार्टी की बात सुन कर वह शैलेश के घर जाने को राजी हो गया.

रात 8 बजे विनय अपनी पल्सर मोटरसाइकिल से बर्रा भाग 8 स्थित शैलेश के घर पहुंच गया. उस समय कमरे में शैलेश व अर्श गुप्ता थे और पार्टी का पूरा इंतजाम था. इस के बाद तीनों ने मिल कर खूब शराब पी. विनय जब नशे में हो गया तो योजना के तहत अर्श व शैलेश ने उसे दबोच लिया और उस की पिटाई करने लगे. विनय ने जब खुद को जाल में फंसा देखा तो वह भी भिड़ गया. कमरे से चीखनेचिल्लाने की आवाजें आने लगीं. इसी बीच शैलेश ने कमरे में छिपा कर रखा बांका निकाला और विनय की गरदन पर वार कर दिया. विनय का गला कट गया और वह फर्श पर गिर पड़ा.

इस के बाद अर्श ने विनय को दबोचा और शैलेश ने उस की गरदन पर 2-3 वार और किए. जिस से विनय की गरदन आधी से ज्यादा कट गई और उस की मौत हो गई. हत्या करने के बाद उन दोनों ने शव को तोड़मरोड़ कर चादर व कंबल में लपेटा और फिर विनय की मोटरसाइकिल पर रख कर रिंद नदी में फेंक आए. वापस लौटते समय उन की बाइक का पैट्रोल खत्म हो गया, इसलिए उन्होंने बाइक को खाड़ेपुर मोड़ पर खड़ा कर दिया. फिर पैदल ही घर आ गए. घर पर उन के स्वागत के लिए बर्रा पुलिस खड़ी थी, जिस से वे पकड़े गए. दरअसल, शैलेश की मां शीला ने ही कमरे में खून देख कर पुलिस को सूचना दी थी, जिस से पुलिस आ गई थी.

21 मार्च, 2021 को थाना बर्रा पुलिस ने आरोपी शैलेश प्रजापति व अर्श गुप्ता को कानपुर कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. UP News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News : पिता ने तकिए से दबाया बेटे का मुंह, कहा मार नहीं रहा, मुक्ति दे रहा हूं

UP News : इंसपेक्टर महेश वीर सिंह ने उन सब को सांत्वना देते हुए उन्हें शव से दूर किया. उस के बाद निरीक्षण शुरू किया. रुशांक की हत्या संभवत: मुंह व गला दबा कर की गई थी. उस की नाक से खून रिस रहा था. पास में पड़े तकिए पर भी खून के निशान थे. तकिए को उन्होंने सबूत के तौर पर सुरक्षित कर लिया. मृतक की उम्र 7 वर्ष के लगभग थी.

सी सामऊ थानाप्रभारी के कक्ष में एक युवकयुवती बैठे थे. युवक का नाम अलंकार था जबकि युवती का नामसारिका. रिश्ते में दोनों पतिपत्नी थे. उन की आंखों से आंसू टपक रहे थे. सारिका की आंखों में बेटा खोने के आंसू थे, जबकि अलंकार की आंखों में पश्चाताप के. अलंकार ने सुबह 8 बजे थाने आ कर अपने 7 वर्षीय मासूम बेटे रुशांक उर्फ तारुष की हत्या का जुर्म कबूला था. कक्ष में वह थानाप्रभारी के आने का इंतजार कर रहा था. सारिका की नजरें जबजब पति से मिलतीं तो वह सिहर उठती. मानो पति से पूछ रही हो, ‘‘तारुष के पापा, कोई वजह नहीं… कोई नाराजगी नहीं, तो आखिर यह क्या था? तुम तो अपने इकलौते बेटे को अथाह प्यार करते थे. उसे जरा सी चोट लग जाती तो तड़प उठते थे.

‘‘बेटे के आंसू कभी बरदाश्त नहीं हुए. उसे कोई छू भी ले तो कलेजा फट जाता था. उसे अपने हाथों से खिलानापिलाना और हमेशा अपने पास सुलाना. आखिर ऐसा क्या रहस्य है कि तुम ने बेटे का गला घोंट दिया. मौत से पहले बच्चे की तड़प तुम ने कैसे देखी होगी. रुशांक छटपटाया होगा तो प्यारदुलार करने वाले हाथ कैसे ढीले नहीं पड़े? आखिर क्यों तुम ने बेटे की हत्या कर डाली?’’

सुबह लगभग 9 बजे इंसपेक्टर महेश वीर सिंह थाने पहुंचे. वहां कक्ष में मौजूद युवकयुवती उन्हें देख कर खड़े हो गए. युवक हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘सर, मेरा नाम अलंकार श्रीवास्तव है और यह मेरी पत्नी सारिका है. हम गांधीनगर मोहल्ले में रहते हैं. मैं ने अपने 7 साल के बेटे रुशांक को गला दबा कर मार डाला.’’

यह सुन कर महेश वीर सिंह विचलित हो उठे. उन्होंने अलंकार के ऊपर नजर डाली और एक कांस्टेबल को बुला कर उसे हिरासत में लेने के आदेश दिए. उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया. हत्या की वजह जानने के लिए उन्होंने सारिका से पूछताछ की तो वह फफक पड़ी, ‘‘सर, बीती शाम तक घर में सब कुछ सामान्य था. रात 10 बजे पति ने घर के सभी सदस्यों को दूध पीने कोे दिया. दूध पीने के बाद उसे तथा उस की बेटियों को नींद आ गई. शायद दूध में नींद की गोलियां घोली गई थीं. सुबह 5 बजे पति ने उसे जगाया और बोले, ‘‘अब सब ठीक हो गया है. अब कोई बेटे को परेशान नहीं कर पाएगा. बेटा चैन की नींद सो रहा है.’’

पति की अटपटी बातें सुन कर वह घबरा गई. वह बाहर वाले कमरे में गई तो देखा सोफे पर रुशांक का शव पड़ा है. उस के मुंह से चीख निकली तो दोनों बेटियां तूलिका व गीतिका आ गईं. घर में रोनापीटना शुरू हुआ तो पड़ोसी आ गए. फिर तो पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई और लोगों की भीड़ जमा हो गई. इसी बीच अलंकार उसे साथ ले कर थाने आ गए और समर्पण कर दिया. सर, पति कुछ महीने से तनावग्रस्त थे. इसी तनाव में उन्होंने बेटे को मार डाला. थानाप्रभारी महेश वीर सिंह ने पिता द्वारा मासूम बेटे की हत्या करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. फिर सारिका के साथ उस के गांधीनगर स्थित घर पहुंच गए. उस समय घर के बाहर भीड़ जमा थी.

सभी के मन में यही प्रश्न था कि आखिर अलंकार ने अपने एकलौते बेटे की हत्या क्यों की? घर के अंदर सोफे पर मासूम बालक रुशांक का शव पड़ा था. शव के पास ही उस की बहनें रो रही थीं. नानी, मामी, मौसी सभी सिसक रही थीं. इंसपेक्टर महेश वीर सिंह ने उन सब को सांत्वना देते हुए उन्हें शव से दूर किया. उस के बाद निरीक्षण शुरू किया. रुशांक की हत्या संभवत: मुंह व गला दबा कर की गई थी. उस की नाक से खून रिस रहा था. पास में पड़े तकिए पर भी खून के निशान थे. तकिए को उन्होंने सबूत के तौर पर सुरक्षित कर लिया. मृतक की उम्र 7 वर्ष के लगभग थी.

थानाप्रभारी अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (पश्चिम) डा. अनिल कुमार तथा डीएसपी श्वेता सिंह वहां आ गईं. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा घर वालों से घटना के संबंध में पूछताछ की. फोरैंसिक टीम ने भी निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए. कई जगह से फिंगरप्रिंट भी लिए. निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक रुशांक के शव को पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपत राय अस्पताल भिजवा दिया. उस के बाद एसपी(पश्चिम) डा. अनिल कुमार थाना सीसामऊ पहुंचे. वहां उन्होंने हत्यारे पिता अलंकार से दिन भर पूछताछ की, जिस में वह चकरा कर रह गए.

कभी नरमी से तो कभी सख्ती से सवाल पूछे गए, लेकिन अलंकार पर कोई असर नहीं पड़ा. इस बीच कभी वह सामान्य दिखा तो कभी फूटफूट कर रोया. थानाप्रभारी ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने रुशांक को क्यों मारा?’’

‘‘सर, अगर मैं ऐसा नहीं करता तो उसे वो मार देता. फिर हम बचा नहीं पाते सर.’’ अलंकार बोला.

‘‘कौन उसे मारने वाला था?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘मैं नहीं बताऊंगा वरना वह मुझे भी मारने की कोशिश करेगा.’’ अलंकार घबराते हुए बोला.

‘‘आखिर कौन हैं वो? हमें बताओ, तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा.’’

थानाप्रभारी की बात सुन अलंकार उन की तरफ देख कर हंसने लगा. उस की हरकतें देख कर थानाप्रभारी समझ गए कि जरूर यह मानसिक रोगी है. फिर उन्होंने पूछा, ‘‘अच्छा यह बताओ कि तुम ने रुशांक को कैसे मारा?’’

‘‘कैसे बताऊं? उन्हें कोई नहीं देख पाएगा. लेकिन वे मेरे परिवार को मार डालेंगे.’’ माथे पर हाथ रख कर वह बैठ गया. आंखें भर आईं, फिर बोला, ‘‘सर, हम ने उसे मारा नहीं बल्कि हम ने तो उसे बचा लिया. अब वह पूरी तरह सेफ है.’’

‘‘कैसे सेफ है? तुम ने तो उसे मार डाला.’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘मैं ने उसे सेफ कर दिया. अब वह उसे नहीं मार पाएगा.’’ अलंकार बोला.

‘‘उस वक्त कौनकौन था वहां?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘हम थे, रुशांक था. सब सो गए थे. हम जाग रहे थे.’’

‘‘बच्चे का गला कसते हुए तुम्हारे हाथ नहीं कांपे?’’ थानाप्रभारी ने पूछा तो अलंकार फफकफफक कर रोने लगा.

पूछताछ में अलंकार ने जिस तरह हर सवाल का अटपटा जवाब दिया, उस से एसपी डा. अनिल कुमार को भी लगा कि अलंकार श्रीवास्तव मानसिक रोगी है या फिर किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त है. उन्होंने इसी दिशा में अपनी जांच आगे बढ़ाई और आरोपी अलंकार श्रीवास्तव की पत्नी सारिका से विस्तृत पूछताछ की तथा उस का बयान दर्ज कराया. उन्होंने सारिका से रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा तो वह आनाकानी करते हुए बोली, ‘‘सर, बेटा तो चला ही गया. अब पति जेल चले गए तो सब खत्म हो जाएगा. बेटे के बाद पति के बिना हम कैसे जिएंगे?’’

काफी समझाने के बाद सारिका ने तहरीर दी. उस के बाद थानाप्रभारी महेश वीर सिंह ने सारिका की तरफ से भादंवि की धारा 302 के तहत अलंकार श्रीवास्तव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में एक ऐसे इंसान की कहानी प्रकाश में आई, जिस के जीवन में पश्चाताप के अलावा कुछ भी नहीं बचा. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर का एक घनी आबादी वाला मोहल्ला है-गांधीनगर. यह सीसामऊ थाने के अंतर्गत आता है. अलंकार श्रीवास्तव इसी मोहल्ले के मकान नंबर 106/92 में सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी सारिका के अलावा 2 बेटियां तथा एक बेटा रुशांक उर्फ तारुष था.

अलंकार श्रीवास्तव का अपना पुश्तैनी मकान था. मकान का आधा भाग उस ने किराए पर उठा रखा था और आधे भाग में वह स्वयं रहता था. अलंकार श्रीवास्तव के 2 अन्य भाई आलोक व अभिषेक श्रीवास्तव थे. आलोक मध्य प्रदेश में तथा अभिषेक मुंबई में परिवार सहित बस गए थे. मातापिता की मौत के बाद उन का कानपुर आनाजाना बहुत कम हो गया था. अलंकार के परिवार से उन का लगाव न के बराबर था. अलंकार श्रीवास्तव शेयर बाजार में ब्रोकर था. स्टाक मार्केट से वह अपनी फर्म के कई ग्राहकों को लाखों रुपए की कमाई कराता था और स्वयं भी कमाता था. उस की पत्नी सारिका पढ़ीलिखी थी. वह शिक्षिका थी. वह कन्नौज जिले के नदौरा गांव स्थित प्राथमिक पाठशाला में सरकारी टीचर थी.

उसे भी 30-35 हजार रुपया प्रतिमाह वेतन मिलता था. कुल मिला कर अलंकार की आर्थिक स्थिति मजबूत थी और परिवार खुशहाल था. चूंकि सारिका स्वयं पढ़ीलिखी थी. इसलिए वह अपने बच्चों को भी पढ़ालिखा कर योग्य बनाना चाहती थी. उस की 16 वर्षीया बड़ी बेटी वेस्ट कौट स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ रही थी, जबकि 10 वर्षीया छोटी बेटी इसी स्कूल में कक्षा 4 की छात्रा थी. सब से छोटा 7 वर्षीय रुशांक उर्फ तारुष अशोक नगर के किड्स प्री स्कूल में कक्षा 2 में पढ़ रहा था. अलंकार श्रीवास्तव अपने इकलौते बेटे रुशांक उर्फ तारुष से बहुत प्यार करता था. वह उसे अपने हाथ से खाना खिलाता, दूध पिलाता और अपने साथ ही सुलाता था.

तारुष की शैतानी पर बेटियां उसे डांट देतीं तो अलंकार तारुष का पक्ष ले कर बेटियों को ही डांटता. एक बार स्कूल टीचर ने तारुष को किसी बात पर थप्पड़ मार दिया तो जानकारी मिलने पर अलंकार ने स्कूल जा कर हंगामा खड़ा कर दिया. आखिर में स्कूल टीचर को माफी मांगनी पड़ी थी. सब कुछ ठीक चल रहा था. लेकिन मार्च 2020 में महामारी के चलते जब देश में लौकडाउन हुआ तो अलंकार का भी काम ठप्प हो गया और उस की नौकरी भी चली गई. नौकरी जाने से अलंकार परेशान रहने लगा. उसे अपने बेटे व बेटियों का भविष्य अंधकारमय लगने लगा. लौकडाउन के पहले उस ने अपनी फर्म के जिन ग्राहकों को लाखों रुपए कमवाए, जरूरत पड़ने पर उस की मदद को कोई खड़ा नहीं हुआ. इस बात को ले कर भी वह बहुत टेंशन में रहता था.

धीरेधीरे अलंकार इस कदर मानसिक बीमार हो गया कि वह आत्महत्या की बात करने लगा. वह इतना चिंतित रहने लगा कि सोते से अचानक जाग उठता और कहता, ‘‘वो मुझे मार डालेगा. मेरे बेटे को मार डालेगा.’’

वह चिड़चिड़ा हो गया. उस का ब्लडप्रैशर बढ़ गया और पड़ोसियों से भी झगड़ा करने लगा. वह कभी गुमसुम रहता तो कभी हंसतामुसकराता और कभी रोने भी लगता. कभी परिवार को सतर्क करते हुए कहता, ‘‘वो मार डालेगा.’’

पति की इन अजीबोगरीब हरकतों से सारिका की चिंता बढ़ने लगी. वह समझ नहीं पा रही थी कि अलंकार के दिमाग में आखिर चल क्या रहा है. कई बार उस ने इलाज कराने की बात कही, लेकिन अलंकार तैयार नहीं हुआ. बोला, ‘‘मुझे कोई बीमारी नहीं है. थोड़ा ब्लडप्रैशर बढ़ा है. होम्योपैथी दवा ले रहा हूं.’’

27 नवंबर, 2020 की रात 8 बजे सारिका की बड़ी बेटी ने मटर पनीर की सब्जी बनाई फिर रोटियां सेंकी. इस के बाद सभी ने बैठ कर खाना खाया. सोने के पहले सभी एकएक गिलास दूध पीते थे. उस रात भी सारिका दूध ले कर आई तो अलंकार बोला, ‘‘कोरोना बढ़ रहा है. दूध में हल्दी व अश्वगंधा मिला कर पीना चाहिए.’’

अलंकार ने सारिका से दूध भरे गिलास ले लिए और रसोई में चला गया. वहां उस ने दूध में हल्दी के साथ नशीली गोलियां घोल दीं और सब को दूध पिला दिया. तारुष को यह कह कर दूध नहीं दिया कि उस के पेट में दर्द है. दूध पीने के कुछ देर बाद सारिका व उस की बेटियां गहरी नींद में सो गईं. अलंकार ने तारुष को अपने साथ सोफे पर लिटा लिया. वह डिप्रेशन में था. उसे नींद नहीं आ रही थी. आधी रात के बाद वह उठा और तकिए से बेटे का मुंह दबाने लगा. तारुष छटपटा कर बोला, ‘‘पापा, मुझे मत मारो. मैं तो आप का दुलारा बेटा हूं.’’

‘‘बेटा, मैं तुझे मार नहीं रहा हूं. मुक्ति दिला रहा हूं. अगर मैं ने ऐसा नहीं किया तो वह मार डालेगा.’’

‘‘ कौन पापा?’’ तारुष ने पूछा.

‘‘तुम उसे नहीं जानते. वह बहुत खतरनाक है. वह मुझे भी मारना चाहता है.’’ कहते हुए अलंकार ने तारुष का तकिए से मुंह नाक दबाया फिर गला घोंट दिया. हत्या करने के बाद उस ने तारुष के शव को कंबल से ढंक दिया और वहीं बैठा रहा. सुबह 5 बजे अलंकार अपनी पत्नी सारिका के कमरे में पहुंचा और उसे जगा कर बोला, ‘‘सारिका, अब सब ठीक हो गया. अब कोई तारुष को परेशान नहीं कर पाएगा. वह चैन की नींद सो रहा है.’’

यह सुन कर सारिका का माथा ठनका. वह बदहवास कमरे के बाहर आई तो सोफे पर तारुष का शव पड़ा देखा. वह चीख पड़ी तो चीख सुन कर तूलिका व गीतिका आ गईं. भाई का शव देख कर वे दोनों भी सुबकने लगीं. दोनों ने पास खड़े पिता पर नजर डाली. मानो पूछ रही हों, ‘पापा, यह तुम ने क्या किया. भाई को मार डाला. अब मैं राखी किस को बांधूंगी. किस के माथे पर टीका करूंगी.’

सूर्य की पौ फटते ही पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई और लोग अलंकार के दरवाजे पर जुटने लगे. लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि अलंकार ने अपने एकलौते बेटे को मार डाला है. इसी बीच अलंकार पत्नी सारिका को ले कर थाना सीसामऊ पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया. 29 नवंबर, 2020 को पुलिस ने अलंकार श्रीवास्तव को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. जेल प्रशासन उस पर निगरानी रखे हुए है और उस का उचित इलाज हो रहा है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

 

 

Family Crime News : तानों से तंग आकर चाकू से काटी मां की गरदन

Family Crime News : फौजी राजेंद्र शाही के पास रुपएपैसों की कमी नहीं थी. इस के बावजूद भी उन के घर में क्लेश रहता था. इस की वजह थी उन की पत्नी हीरा देवी का व्यवहार. हीरा देवी के इसी व्यवहार ने एक दिन बेटे राहुल के हाथ खून से रंग दिए. और फिर…

20 दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर अपनी मां को खाने के लिए देती थी. उस ने सब से पहले वही बादाम छीले और अपनी मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन उस की मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह सीधे उन्हीं के कमरे में चली गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी. मां को सोता देख कर उसे हैरानी भी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि वह तो हर रोज घर में सब से पहले उठ जाती थीं.

अपनी मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश फाख्ता हो गए. मां को इस हालत में देख कर उस की जोरदार चीख निकली. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी. सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए थे. लेकिन हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल.

उस रात हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे. हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग ही था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा हुआ था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. इस बात से सभी परेशान थे. तुरंत ही इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की. पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की भांति सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो वह अपनी मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे. मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर पर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.

घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल करते हुए नमूने ले कर पैक कर लिए थे. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की. घटनास्थल से सब साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू सिंह की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा कोतवाली हल्द्वानी में दर्ज कर लिया. केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई करते हुए फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था. इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा ही तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही तो उस का सहारा थी. उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था.

घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया. पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे तो उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर एक पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की एक पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी. पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के तुरंत बाद ही उस ने अपनी मां की हत्या की बात कबूल ली. जिस मां ने अपने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक निकली.

उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव पड़ता है करायल जौलासाल. इसी गांव में रहता था राजेंद्र शाही का परिवार. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था. राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी बच्चों ने मन लगा कर पढ़ाई की, उस की परिणति सभी कामयाब भी हो गए थे.

राजेंद्र शाही ने बहुत पहले ही बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के पहले छोर पर ही काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने ही एक प्लौट और खरीद लिया था. जिस को उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था. ममता अपनी मां के साथ ही रहती थी. उस के बाद दूसरे नंबर की बेटी मंजू की भी शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था. रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में ही रहने लगी थी.

पांचवीं नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर हो गई. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था. इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद भी एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने जो प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना. हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी.

इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया. उसी मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे. सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी को घर खर्च देना भी बंद कर दिया था. उस के बाद हीरा देवी ने अदालत में अपने पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के बाद हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे. जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.

सन 2005 से ही राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. उस के बाद अपना घर होने के बावजूद भी राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद राजेंद्र सिंह ने रामनगर में भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ ही रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था. राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद भी उसे कहीं पर कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी भी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती चली गई.

उस की दिमागी हालत के खराब चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की अपनी मां से भी नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात में जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद भी राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रहती थी. गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.

दिल्ली में नौकरी करने के दौरान ही उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता रहता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर से अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों से लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी. उस के बाद उस की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस के कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उस के मन में नफरत पैदा हो गई थी.

अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन इस के बावजूद भी उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन खराब हो चला था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी. चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था. घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने भी सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली.

रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. रवींद्र सिंह अपने परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद भी परिवार में खुशियां बिलकुल भी नही थीं. 20 दिसंबर, 2020 को राहुल ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने को आदत जो पड़ गई है.’’

हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद भी राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे. क्या किया जाए इस बुढि़या का. इस ने तो मेरा जीना हराम कर रखा है. शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में ही सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद उस के कमरे में सुला दिया था.

हीरा देवी इस वक्त बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई थी. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत हुआ था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी. तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी चालें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, उस ने अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह उस वक्त गहरी नींद में सोई पड़ी थी. घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरे में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से एक चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. जिस के कारण दवाओं का नशा उस पर फौरन ही हावी हो जाता था.

अपनी मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन बैठा. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां हीरा देवी के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उस के प्राणपखेरू उड़ गए. मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर पर लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा. उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उस को बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे. वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुला दिया.

हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं. इस दर्दनाक घटना के बाद भी परिवार वाले एकदूसरे पर आरोप लगा कर लड़झगड़ रहे थे.