सोने की चेन ने बनाया कातिल – भाग 2

इस के बाद पुलिस ने पंफलेट में छपे मोबाइल नंबर और पते के आधार पर कूलर बनाने वाले को पकड़ लिया. वह पास के ही तिलक नगर का रहने वाला था. उस से पूछताछ की गई तो उस ने स्वयं को निर्दोष बताया. इस के बाद उस की शिनाख्त उन लड़कियों से कराई गई तो उन्होंने भी कहा कि यह वह आदमी नहीं है.

इस के बाद पुलिस ने सामने वाले घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी. उस में लाल रंग की शर्ट पहने एक आदमी साइकिल ले कर जाता हुआ दिखाई दिया. उस की साइकिल के पीछे एक बाक्स जैसा कुछ बंधा था. लड़कियों ने बताया था कि शकुंतला बुआ के घर आने वाला आदमी लाल रंग की शर्ट पहने था. वह आया भी साइकिल से था और उस की साइकिल में वेल्डिंग करने वाली मशीन बंधी थी.

पुलिस को लगा कि यही आदमी हो सकता है, जो मृतका बहनों के यहां कूलर बनाने आया था. लेकिन फुटेज में उस का चेहरा स्पष्ट नहीं था, इसलिए यह फुटेज पुलिस के किसी काम की नहीं निकली थी. थाना पलासिया पुलिस ने लूट और शकुंतला मिश्रा एवं अनिता दुबे की हत्या का मुकदमा दर्ज कर अनिता के गायब मोबाइल को आधार बना कर जांच आगे बढ़ाई.

पुलिस ने उस मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में आखिरी फोन उन्हीं के विभाग के एक चपरासी को किया गया था. चपरासी को बुला कर पूछताछ की गई तो उस ने बताया, ‘‘मैडम ने ही मुझे फोन कर के बुलाया था. दरअसल मेरी साइकिल चोरी हो गई थी. तब मैडम ने कहा था कि उन के यहां एक पुरानी साइकिल पड़ी है. उसी को देने के लिए उन्होंने बुलाया था. जब मैं वहां पहुंचा तो उन्होंने मुझे छुट्टी की अर्जी भी दी थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें बुखार है, इसलिए वह औफिस नहीं आएंगी.’’

पूछताछ के बाद पुलिस ने चपरासी के बारे में उस के औफिस में पता किया तो पता चला कि वह सच कह रहा था. उस दिन वह पूरे समय औफिस में ही रहा था. छुट्टी के बाद वह घर चला गया था. हत्या की खबर मिलने पर वह आया भी था.

पड़ोसियों के अनुसार दोनों बहनों का व्यवहार बहुत अच्छा था. दोनों ही बहनें सब से हिलमिल कर रहती थीं. कालोनी के सभी बच्चे उन्हें बुआ कहते थे. इस की वजह यह थी कि उन के मायके वाले भी उसी कालोनी में रहते थे. पुलिस ने यह भी पता किया था कि कहीं प्रौपर्टी का कोई झंझट तो नहीं था. लेकिन इस मामले में भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा था. क्योंकि उन के घर वाले इतने संपन्न थे कि वे उन की संपत्ति से कोई मतलब नहीं रखते थे.

Indore-me-chakka-jaam-double-murder-2014-crime

संयोग से 1 मई को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इंदौर में ही थे. वह मजदूर दिवस के अवसर पर किसी कार्यक्रम में भाग लेने आए थे. इस लूटपाट और 2-2 हत्याओं की सूचना उन्हें मिली तो वह पुलिस अधिकारियों पर काफी नाराज हुए. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को जल्द से जल्द हत्यारों को पकड़ने के आदेश दिए.

हत्यारे तक पहुंचने के लिए पुलिस ने अनिता के मोबाइल फोन का सहारा लिया. उसे तत्काल सर्विलांस पर लगवा दिया गया. वह फोन कभी बंद हो रहा था तो कभी चालू. एक बार फोन की लोकेशन इंदौर के बाणगंगा इलाके की मिली. लेकिन जल्दी ही फोन का स्विच औफ हो गया, इसलिए पुलिस कोई काररवाई नहीं कर पाई. इस के बाद फोन की लोकेशन निमाड़ जिले के ठीकरी कस्बे की मिली.

जब सर्विलांस के माध्यम से हत्यारे तक नहीं पहुंचा जा सका तो पुलिस ने दूसरी तकनीक अपनाई. यह तकनीक थी पीएसटीएन (पब्लिक स्विच्ड टेलीकौम नेटवर्क). पुलिस ने इस तकनीक से पता किया कि उस समय (एक निश्चित समय में) वहां कितने मोबाइल चल रहे थे. सर्विलांस के माध्यम से अनिता के मोबाइल की आखिरी  लोकेशन निमाड़ जिले के थाना ठीकरी की मिली थी.

पुलिस को लगा कि अनिता का मोबाइल ठीकरी के आसपास का ही कोई आदमी ले गया है. और जो भी वह फोन ले गया है, उसी आदमी ने इस वारदात को अंजाम दिया है. उस आदमी के बारे में पता करने के लिए पुलिस ने अनिता के घर के पास घटना के समय संचालित होने वाले मोेबाइल फोनों के नंबर निकलवाए. पता चला कि वारदात के समय यानी 3 घंटे के बीच वहां से 3 लाख फोन संचालित हुए थे.

इस के बाद पुलिस ने ठीकरी के टावर से होने वाले मोबाइल नंबरों को निकलवाए. इस के बाद दोनों सूचियों की स्कैनिंग की गई. इन में अनिता के मोबाइल नंबर के अलावा पुलिस को ऐसा मोबाइल नंबर मिला, जो दोनों सूचियों में था.

पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर ठीकरी के पास घटवा गांव रहने वाले हरि सिंह का था. इस के बाद पुलिस ने हरि सिंह के बारे में पता किया. अब पुलिस को उसे गिरफ्तार करना था. थाना पलासिया की एक टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए निमाड़ के लिए रवाना हो गई.

थानाप्रभारी शिवपाल सिंह कुशवाह ने स्थानीय थाना ठीकरी पुलिस और पटवारी से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वहां वर्दी में जाने पर मामला बिगड़ सकता है. गांव वाले उसे बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. उस स्थिति में उसे पकड़ा नहीं जा सकता. फिर जब उस के यहां विवाह समारोह चल रहा हो तो पुलिसिया काररवाई और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती थी.

इस स्थिति में थानाप्रभारी शिवपाल सिंह 4 सिपाहियों के साथ पुलिस वर्दी उतार कर बाराती बन कर गांव घटवा जा पहुंचे. हरि सिंह की पहचान के लिए वे अपने साथ बगल के गांव का एक आदमी ले आए थे.

उस आदमी ने जिस आदमी को हरि सिंह बताया, वह लाल रंग की शर्ट पहने था. कैमरे की फुटेज में पुलिस को साइकिल लिए जो आदमी दिखाई दिया था, वह भी लाल रंग की शर्ट पहने था. बाराती बनी पुलिस उस के पीछे लग गई.

साजिश का तोहफा – भाग 3

अदालत में मौजूद सभी लोगों की नजरें नवीन पर जम गईं. सभी उन्हें शक की नजरों से देख रहे थे. नवीन के लिए अब यह मामला मनोज की ही नहीं, अपनी भी इज्जत का सवाल बन गया था.

उस ने रमेश गायकवाड़ को कठघरे में बुला कर जिरह शुरू की, ‘‘क्या यह सही नहीं है कि मनोज सोलकर को इंस्टीटयूट में आते जाते देख कर आप ने खुद नौकरी के लिए औफर दिया था? क्या आप इस वास्तविकता से परिचित नहीं थे कि वह संस्था के संस्थापक सोमनाथ सोलकर का पोता है?’’

‘‘जी हां, इसीलिए तो मैं ने औफर दी थी. किसी छोटे मोटे झगड़े की वजह से दादा पोते एक दूसरे से दूर हो गए थे, इसलिए मैं ने सोचा कि यहां आने पर दोनों कभी मिल सकते हैं. लेकिन वह तो चोर निकला.’’

इस के बाद लंबी सांस ले कर उस ने घटना के बारे में बताना शुरू किया, ‘‘एक दिन मेरे पास आ कर उस ने कहा कि वह शादी कर रहा है. मैं ने उसे मुबारकबाद देने के साथ एक सप्ताह की छुट्टी दे दी. उसी बीच एक जरूरी काम से मैं औफिस से 1-2 मिनट के लिए बाहर जाना पड़ा. जरूरत के लिए कुछ रकम हमारे औफिस की तिजोरी में पड़ी रहती है. मैं वापस आया तो वह काफी घबराया हुआ लग रहा था.

उस समय मैं ने ध्यान नहीं दिया. लेकिन अगले दिन रकम गिनी तो उस में 10 हजार रुपए कम निकले. तब मेरा ध्यान मनोज पर गया. उस की घबराहट से मुझे लगा कि वह रकम उसी ने ली है, इसीलिए वह परेशान था.’’

‘‘तुम ने उसे चोरी में फंसाने के लिए तिजोरी खुली छोड़ी थी. जबकि 10 हजार रुपए तुम ने खुद उसे यह कह कर दिए थे कि संस्थान की परंपरा है कि कर्मचारी की शादी पर रुपए उपहार में देता है.’’

‘‘यह झूठ है,’’ रमेश ने थोड़ी ऊंची आवाज में कहा, ‘‘मनोज हनीमून से वापस आया तो मैं ने उसे बताया कि उस की चोरी पकड़ी जा चुकी है. अपनी हरकत की वजह से वह जेल जा सकता है. लेकिन अगर वह चोरी की गई रकम वापस कर दे तो मैं उस के खिलफ कोई कारर्रवाई नहीं करूंगा. उस ने भी यही बात कह कर बरगलाने की कोशिश की थी, जो आप कह रहे हैं. फिर भी उस ने 10 हजार रुपए भिजवा दिए. अब ऐसे आदमी को कौन नौकरी पर रखेगा, मैं ने भी उसे नौकरी से निकाल दिया.’’

‘‘योर औनर, हकीकत यह थी कि इन लोगों को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं दादा और पोते की मुलाकात हो गई और फिर उन में मेलजोल हो गया तो…?’’ नवीन ने कहा, ‘‘लेकिन इस डर का भी कोई न कोई आधार होगा? यह आदमी इंस्टीटयूट में सब से बड़े पद पर आसीन है और यह काला सफेद कुछ भी कर सकता है. मुझे लगता है कि इंस्टीटयूट में जरूर कोई गड़बड़ी हो रही है. इसलिए मैं दरख्वास्त करता हूं कि इंस्टीटयूट के आर्थिक और इंतीजामी मामलों की कायदे से जांच कराई जाए.’’

इस पर इंस्टीटयूट के कानूनी सलाहकार शशांक ठाकरे ने कहा, ‘‘माननीय अदालत को यह बताना जरूरी है कि हर साल इंस्टीटयूट का एकाउंटस सही समय पर आडिट कराया जाता है. इसी के साथ यह भी बता दूं कि पिछले कई सालों से रमेशजी इंस्टीटयूट को कायदे से चला रहे हैं. आज तक इन पर कोई दाग नहीं लगा है. इन का रहन सहन भी अपनी आमदनी के हिसाब से ही है.’’

इस जिरह से इस मुकदमे में जान तो पैदा हो गई थी, लेकिन न्यायाधीश ने यह कहते हुए इंस्टीटयूट के खातों की जांच कराने से मना कर दिया कि वह जरा से संदेह पर इंस्टीटयूट के एकाउंटस की जांच और उस के मामलों में दखल देने की इजाजत नहीं दे सकते.

बहरहाल, नवीन ने कुछ तर्क दे कर अगले दिन सुनवाई के लिए न्यायाधीश को तैयार कर लिया. उन्होंने वादा किया कि कल वह मनोज को अदालत में अवश्य पेश करेंगे. उन की पत्नी अवंतिका को पूरा विश्वास था कि मनोज लोनावाला में अपनी मां के पास गया होगा. अगर वहां नहीं हुआ तो उस की मां को जरूर मालूम होगा कि वह कहां है.

मनोज सचमुच मां के यहां ही था. नवीन और आवंतिका को वहां देख कर वह हैरान रह गया था. पहले तो उस का मन हुआ था कि वह उन से मिले ही न. लेकिन उसे लगा कि एक गलती तो उस ने पहले ही की है. अब उन से मुंह छिपा कर दोबारा गलती करना ठीक नहीं है. वह शर्मिंदा तो था ही, फिर भी मिला.

लेकिन नवीन और अवंतिका उस से जिस तरह मिले थे, उस से उस की सारी झिझक और शर्मिंदगी दूर हो गई थी. उन्हें अंदर ला कर उस ने अपनी मां का परिचय कराया. मां के बालों में भले ही सफेदी झलक रही थी, मगर वह अब भी एक आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामिनी थीं. उन का नाम सावित्री सोलकर था.

स्वाति भी आ गई थी. सावित्री अभी तक मनोज के हालात से अनजान थीं. जब नवीन ने उन्हें सारी बात बताई तो लंबी सांस लेते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इसे देख कर ही मुझे लग रहा था कि यह मुझ से कुछ छिपा रहा है.’’

इस के बाद नवीन ने मनोज की ओर देखते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे चले आने के बावजूद मैं ने तुम्हारे पत्र के आधार पर अदालती काररवाई शुरू करा दी है, क्योंकि मुझे पूरा विश्वास है कि वह पत्र तुम ने अपनी मर्जी से नहीं लिखा था.’’

अय्याशी में डबल मर्डर : होटल मालिक और गर्लफ्रेंड की हत्या – भाग 2

पुलिस कैसे पहुंची हत्यारों तक

सरिता ठाकुर इंदौर में ही एक ब्यूटीपार्लर चलाती थी. सरिता ठाकुर का ब्यूटीपार्लर भी ठीकठाक चलता था. ब्यूटीपार्लर चलाने के दौरान उस के पास हर तरह की महिलाएं आती थीं. यही कारण था कि सरिता ठाकुर अधिकांश महिलाओं की कुंडली भलीभांति जानती थी.

सरिता ठाकुर और रवि ठाकुर के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चला आ रहा था. उसी के चलते सरिता रवि ठाकुर के पैसे से मालामाल हो गई थी. यही कारण था कि सरिता ठाकुर हर वक्त रवि ठाकुर के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती थी.

रवि ठाकुर काफी पैसे वाला था. अपना पैसा वह ब्याज पर भी देने का काम करता था. इस सब में सरिता ठाकुर की ही भागीदारी होती थी. वही उस के लिए ऐसे ग्राहक ढूंढ कर लाती थी, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी.

सरिता ठाकुर के पास हर रोज ऐसी कई महिलाएं आती थीं, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी. उस के बाद सरिता उन को रवि ठाकुर के पास ले जा कर उस से मिलवाती और फिर उसे उस की जरूरत के हिसाब से उसे पैसा दिलवाती थी. उस पैसे की वापसी की जिम्मेदारी भी सरिता ठाकुर की ही होती थी.

अगर कोई महिला उस का पैसा नहीं लौटा पाती तो वह उसे अपने होटल पर बुलाता और फिर उस की मजबूरी का फायदा उठा कर उस के साथ अवैध संबंध बना लेता था. वह इसी धंधे के सहारे अपनी मनमाफिक महिलाओं के साथ अवैध संबंध बना कर अपनी हवस को मिटाने लगा था.

धीरेधीरे रवि ठाकुर और सरिता ठाकुर के बीच बने संबंध इतने मजबूत हो गए थे कि वह अपने घर भी बहुत ही कम जाता था. उस का सरिता के पास ही ज्यादातर आनाजाना था. सरिता ने अशोक नगर में एक 3 मंजिला मकान में ऊपर का फ्लोर ले रखा था. वह अधिकांश रातें उसी के पास गुजारता था.

सरिता ठाकुर रवि के पास क्यों लाती थी नईनई महिलाएं

ममता देवी भी सरिता ठाकुर की जानपहचान की थी. उस की जानपहचान भी उसी के ब्यूटीपार्लर में हुई थी. सरिता ठाकुर का व्यवहार ममता को बहुत ही अच्छा लगा था. यही कारण था कि कुछ ही दिनों में दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई.

उसी दौरान ममता को किसी काम के लिए कुछ पैसों की जरूरत आ पड़ी. उस के लिए उस ने सरिता से जिक्र किया तो सरिता ने कहा, ”बहन, तुम्हें मेरे होते परेशान होने की जरूरत नहीं. तुम्हें जितने पैसे चाहिए, मैं उस की व्यवस्था करा दूंगी.’’

उस के बाद वह एक दिन टाइम निकाल कर उसे साथ ले कर रवि ठाकुर के होटल पहुंची. ममता देखने भालने में सुंदर थी. उस को देखते ही रवि ठाकुर उस की खूबसूरती पर मर मिटा.

सरिता ने रवि ठाकुर से ममता का परिचय कराया. उस के बाद सरिता के कहने पर उस ने उसे कुछ रुपए उधार दे दिए. ममता को पैसे देते वक्त रवि ठाकुर ने उस का मोबाइल नंबर भी ले लिया था.

ममता के मोबाइल लेने के बाद रवि ठाकुर उसे टाइम बेटाइम फोन करता रहता था. जिस के कारण ममता भी खुश थी कि कई होटलों का मालिक होते हुए भी रवि उसे फोन कर उस की खैर खबर लेता रहता है, जिस के कारण ममता भी उस पर बहुत विश्वास करने लगी थी.

उसी विश्वास के चलते एक दिन रवि ठाकुर ने ममता को अपने होटल में बुलाया और उस के साथ शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए. उस समय तो ममता ने उस का विरोध नहीं किया, लेकिन इस के बाद में रवि ठाकुर आए दिन उस को होटल में बुलाने लगा था, जो बाद में ममता को खलने लगा. वह उस के पास जाने से आनाकानी करती तो वह उस से अपने रुपए वापस करने की धौंस देने लगा था.

रवि ठाकुर अय्याशी केवल ममता के साथ ही नहीं करता था. बल्कि उस ने इसी तरह से कई महिलाओं को अपने जाल में फंसा रखा था. उन महिलाओं की मजबूरी ही ऐसी थी कि वह न तो रुपए ही लौटा सकती थीं और न ही उस के पास जाने से मना कर सकती थीं.

ममता को यह भी पता चल गया था कि इस सब में सरिता ठाकुर की मिलीजुली साजिश थी. वो ही औरतों को फंसाती और फिर रवि ठाकुर के सामने परोस देती थी. उसे इस दलदल से निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था.

एक दिन रवि ठाकुर ने ममता को फोन मिलाया तो वह उस वक्त टायलेट में गई हुई थी. रवि ठाकुर ने कई बार उसे फोन मिलाया, लेकिन वह उसे उठा नहीं पाई. उसी वक्त उस का पति नितिन बाहर से घर आ गया. ममता का फोन बारबार बजने के कारण नितिन ने ही उसे रिसीव किया. नितिन के रिसीव करते ही रवि ठाकुर ने फोन काट दिया.

उस के बाद नितिन ने अपनी ओर से उसे फोन लगाया तो उस ने रिसीव नहीं किया, जिस से नितिन को कुछ शक हो गया. तब तक ममता भी टायलेट से बाहर आ गई थी. नितिन ने उस के आते ही बताया कि रवि ठाकुर का फोन था.

रवि ने ममता के पास क्यों भेजी अश्लील वीडियो

तब ममता ने बात टालने के लिए कह दिया कि वह अपने पैसे वापस मांग रहा है. तब नितिन ने ममता से कहा कि उस से कह देना कि उस के पैसे वापस करने में कुछ और वक्त लगेगा. उस के बाद नितिन कुछ काम से घर से निकल गया.

तब ममता ने रवि ठाकुर को फोन किया तो उस ने रिसीव करते हुए कहा कि आज शाम वक्त निकाल कर कुछ समय के लिए होटल आ जाना. ममता ने आने से मना किया तो थोड़ी देर बाद ही रवि ठाकुर ने उस के मोबाइल पर एक वीडियो सेंट कर दी. ममता ने उसे देखा तो उस के होश ही उड़ गए.

यह वीडियो उसी के साथ बनाए गए संबंधों की थी. उस के थोड़ी देर बाद ही रवि ठाकुर का फोन आ गया, ”ममता रानी, हमारी वीडियो आप को कैसी लगी? अगर आप को सही लगी तो यह आप के पति के नंबर पर भी भेज दूं. शायद उसे भी पसंद आ जाए.’’

यह बात सुनते ही ममता को दिन में तारे नजर आ गए. उस ने सोचा कि यह वीडियो उस के पति ने देख ली तो वह तो उस की जान ही ले लेगा.

उस दिन उसे पहली बार लगा कि वह बुरी तरह से फंस चुकी है. उस ने इस बात की शिकायत सरिता से की तो सरिता ने भी उसे उलटा जबाव दिया, ”अगर तुम्हें यह सब बुरा लग रहा है तो रवि बाबू के पैसे लौटा दो.’’

सरिता की यह बात ममता को बहुत ही बुरी लगी. फिर वह सरिता से भी नफरत करने लगी थी, लेकिन उसे उस दलदल से निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था.

साजिश का तोहफा – भाग 4

एक पल की खामोशी के बाद मनोज दबी आवाज में बोला, ‘‘कल शाम 7 बजे के आसपास रमेश ने मुझे फोन कर के कहा कि वह नहीं चाहता कि उस की वजह से उसे और उस की मां को तकलीफ पहुंचे. इस के बाद उस ने जो कुछ कहा, मैं उसी के शब्दों में आप को बता रहा हूं.

उस ने कहा था, ‘‘तुम्हारा बाप नंबर एक का बदमाश और जालसाज था. लेकिन उस की मृत्यु के बाद इस बात को दबा दिया गया था. अगर तुम चाहते हो कि यह बात अभी भी उसी तरह दबी रहे तो तुरंत किसी आदमी के हाथ अपने वकील को एक पत्र भेज कर उसे यह मुकदमा वापस लेने को कह दो और शहर छोड़ कर चले जाओ. अगर तुम ने ऐसा नहीं किया तो जहां तुम्हारी मां रहती है, उस पूरे इलाके में उन के बारे में बता कर उन्हें बदनाम कर दिया जाएगा. उस के बाद तुम्हारी मां की क्या हालत होगी, यह तुम जानते ही हो.’’

‘‘मैं ने और स्वाति ने इस बात पर गहराई से विचार किया. हम ने सोचा कि इस उम्र में मां को क्यों परेशान किया जाए. वह चैन से रह रही हैं तो उन्हें उसी तरह चैन से रहने दिया जाए. यही सोच कर हम यहां चले आए. लेकिन जब आप यह मुकदमा लड़ ही रहें हैं और मां को सच्चाई का पता चल ही गया है तो अब आप जो कहेंगे, हम वही करेंगे.’’

‘‘एक घंटे पहले रमेश का फोन यहां भी आया था. इत्तेफाक से फोन मैं ने रिसीव किया था. वह मनोज से बात करना चाहता था, स्वाति ने कहा, लेकिन मैं ने डांट कर फोन काट दिया.’’

‘‘बहुत अच्छा किया,’’ सावित्री सोलकर ने कहा, ‘‘बेटा, यह तुम्हारा फर्ज था कि मेरे बारे में सोच कर तुम ने यह मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया. लेकिन जो गलत है, उस से भी भागना ठीक नहीं है. मैं अभी भी अपनी समस्याओं से निपटने की क्षमता रखती हूं. मुझे इस बात का दुख है कि तुम ने रमेश की बात पर विश्वास कर लिया कि वह तुम्हारे पिता के बारे में जो कहा, वह सही है.’’

‘‘पापा की जिंदगी पर सदैव रहस्य का परदा पड़ा रहा, शायद इसीलिए ऐसा हुआ.’’ मनोज ने सिर झुका कर कहा, ‘‘बहरहाल, मैं अपनी इस गलती पर शर्मिंदा हूं.’’

‘‘क्या आप मनोज के पिता के बारे में मुझे कुछ बताएंगी?’’ नवीन ने कहा.

‘‘क्यों नहीं,’’ सावित्री ने कहा. इस के बाद वह अतीत में खो गईं. थोड़ी देर बाद वह संभल कर बोलीं, ‘‘जब अनिल से मेरी शादी हुई, वह अपने पिता की ही कंपनी में काम करते थे, जिस में उन के पिता सोमनाथ सोलकर के आविष्कार किए हुए बिजली के सामान बनते थे. मेरे ससुर का सोचना था कि मैं ने उन के बेटे को बरबाद कर दिया है. मेरी वजह से वह निकम्मा हो गया है. जबकि सच्चाई यह थी कि अनिल को घूमने फिरने और उन स्थानों के बारे में लिखने का शौक था. अपने इसी शौक की वजह से उन्होंने कंपनी छोड़ने का निर्णय लिया.

‘‘जबकि उन के इस निर्णय में मेरी कोई भूमिका नहीं थी. उन के निर्णय पर सोमनाथ सोलकर ने खूब हंगामा किया. उन का कहना था कि मेरी वजह से उन का एकलौता बेटा अपनी राह से भटक गया है. कंपनी से अलग हो कर अनिल ने एक हवाई जहाज खरीदा और इधर उधर की यात्रा करने लगे. ट्रैवल से संबंधित उन के अनेक लेख विभिन्न पत्रिकाओं में छपने लगे.

‘‘मनोज के जन्म के बाद मेरा उन के साथ जाना कम हो गया. अब वह अकसर अकेले ही जाने लगे थे. 1985 के अप्रैल में जयपुर से आगे रेगिस्तान में उड़ते समय अनिल का जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस दुर्घटना में केवल जहाज का मलबा मिला था, अनिल की लाश नहीं मिली थी.’’

पल भर की चुप्पी के बाद सावित्री सोलकर ने आगे कहा, ‘‘मुझे जो याद आता है, उस के हिसाब से रमेश गायकवाड़ का मेरे ससुर सोमनाथ सोलकर से दूर का कोई संबंध है. वह उन दिनों कंपनी में ही काम करता था. अनिल की मौत के बाद वह मेरे पास आया था. उस ने मुझ से कहा था कि अनिल के बारे में कुछ ऐसी सच्चाई सामने आई है, जिस का राज बना रहना ठीक है.

‘‘उस ने मुझे कुछ पैसे देते हुए कहा कि इन्हें मेरे ससुर ने भेजे हैं और उन्होंने कहा है कि भविष्य में वह मुझ से कोई संबंध नहीं रखना चाहते. मैं ने पैसे वापस करते हुए कहा था कि मैं वे बातें जरूर जानना चाहूंगी, जिन की वजह से मेरे ससुर मुझ से संबंध खत्म करना चाहते हैं. अनिल ने ऐसा क्या किया था, जिस से उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है.

‘‘मैं ने उन से संपर्क करने की कोशिश की, उन्हें पत्र लिखे, समय मांगा, फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. मजबूर हो कर मैं शांत हो गई. अनिल की मौत के एक साल बाद मुझे पता चला कि मेरे ससुर ने कोई इंस्टीटयूट बनवाया है, जिस का डायरेक्टर रमेश गायकवाड़ को बनाया है. इस से मुझे लगा कि उस ने अनिल पर जो आरोप लगाए थे, वे किसी साजिश के तहत लगाए थे. अब मनोज को वह चोर बता रहा है तो इस के पीछे भी कोई साजिश है.’’

‘‘मुझे लगता है कि अपनी वकील शशांक ठाकरे के साथ मिल कर वह इंस्टीटयूट में कुछ गड़बड़ कर रहा है,’’ नवीन ने कहा, ‘‘लेकिन दोनों यह काम इस तरह कर रहे हैं कि पकड़ में नहीं आ रहे हैं. रमेश रहता भी बहुत साधारण तरीके से है. शायद वे गड़बड़ी इस तरह कर रहे हैं कि इस का लाभ उन्हें भविष्य में मिले. मेरी समझ में यह नहीं आता कि सोमनाथ सोलकर अपने इंस्टीटयूट को पूरी तरह कैसे भूल गए. उन्हें इंस्टीटयूट के बारे में सब से ज्यादा मालूम होगा, क्योंकि यह उन्हीं का बनवाया है. वह कभी नहीं चाहेंगे कि उन का इंस्टीटयूट बरबाद हो. अगर किसी तरह मि. सोमनाथ सोलकर से संपर्क हो जाए तो…?

‘‘अब वह काफी बूढ़े हो चुके हैं, इसलिए बहुत कम लोगों से मिलते हैं?’’ सावित्री ने कहा, ‘‘उन का फोन नंबर भी डायरेक्टरी में नहीं है. लेकिन संयोग से मेरे पास है.’’

नवीन ने वह नंबर डायल किया तो दूसरी ओर से एक कमजोर सी आवाज आई, ‘‘सोमनाथ सोलकर स्पीकिंग.’’

नवीन ने अपना नाम बताया तो उस आवाज में थोड़ी तेजी आई, ‘‘तुम यकीनन गवाह के तौर पर मुझे अदालत में बुलाना चाहते होगे?’’

‘‘जी हां,’’ नवीन ने कहा, ‘‘इस के अलावा मैं आप को इस केस के बारे में भी कुछ बताना चाहता हूं.’’

‘‘मुझे केस के बारे में सब पता है और तुम्हारे बारे में भी.’’ सोमनाथ सोलकर ने बेरुखी से कहा, ‘‘बहरहाल मैं कल सुबह अदालत पहुंच जाऊंगा.’’

हीरा कारोबारी हत्याकांड में फंसी ‘गोपी बहू’ – भाग 1

29 नवंबर, 2018 को मुंबई के उपनगर घाटकोपर, कामा लेन, महालक्ष्मी अपार्टमेंट के रहने वाले राजेश्वर किशोरी लाल उदानी का बेटा रौनक उदानी अपने 2-3 सगे संबंधियों के साथ पंतनगर थाने पहुंचा. राजेश्वर उदानी एक बड़े बिजनैसमैन थे.

थानाप्रभारी रोहिणी काले राजेश्वर किशोरी लाल उदानी और उन के परिवार वालों को अच्छी तरह से जानते थीं. रोहिणी काले ने रौनक उदानी और उस के साथ आए लोगों को सामने रखी कुरसियों पर बैठने का इशारा किया. इस के बाद उन्होंने उन के आने का कारण पूछा. रौनक उदानी ने उन्हें जो कुछ बताया, उसे सुन कर थानाप्रभारी रोहिणी काले के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं.

रौनक उदानी ने उन्हें बताया कि उस के पिता राजेश्वर उदानी 28 नवंबर की रात करीब साढ़े 9 बजे अपने अंधेरी औफिस से घर के लिए निकले थे. रास्ते में उन्हें किसी का फोन आया. इस के बाद उन्होंने अपने ड्राइवर से विक्रोली हाइवे के पंतनगर मार्केट के पास कार रोकने को कहा. वह कार से उतर गए और करीब 50 गज की दूरी पर खड़ी एक दूसरी कार में बैठ कर कहीं चले गए.

जाते समय उन्होंने ड्राइवर से कहा कि वह कार ले जा कर घर पर खड़ी कर दे, वह कुछ देर बाद घर पर आ जाएंगे. लेकिन 24 घंटे का समय निकल जाने के बाद न तो वह घर आए और न ही उन का कोई फोन आया. उन का फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा है. उन्हें ले कर घर में सभी को बहुत चिंता हो रही है.

रौनक उदानी की शिकायत पर थानाप्रभारी ने उस के पिता की गुमशुदगी दर्ज कर ली और रौनक उदानी को आश्वासन दिया कि पुलिस जल्द से जल्द उन्हें ढूंढने की कोशिश करेगी.

राजेश्वर उदानी मुंबई के उपनगर घाटकोपर के बहुत बड़े हीरा व्यापारी थे. इस के अलावा उन का एक बड़ा कंस्ट्रक्शन प्रोजैक्ट भी चल रहा था. ऐसे आदमी का गायब होना पुलिस के लिए किसी परेशानी से कम नहीं था.

थानाप्रभारी ने इस बात को गंभीरता से लिया और मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पुलिस कंट्रोल रूम को भी दे दी. इस मामले की जांच पीआई लता सुतार को सौंप दी गई.

जांच अधिकारी ने गुमशुदा राजेश्वर उदानी की फोटो शहर के सभी पुलिस थानों को सर्कुलेट करने के साथसाथ सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और काल डिटेल्स खंगालनी शुरू कर दी. इस से पुलिस को जानकारी मिली कि वह जिस कार में थे, वह एलोरी टोल नाके से होते हुए नवी मुंबई की तरफ गई थी.

उन का फोन जिला रायगढ़, पनवेल में जा कर बंद हो गया था. इस जांच में पुलिस के 6 दिन निकल गए तो उदानी परिवार की चिंता और बढ़ गई थी.

4 दिसंबर, 2018 को रौनक उदानी वापस पुलिस थाने आया और उस ने थानाप्रभारी से अपने पिता के अपहृत होने की आशंका जताई.

हालांकि थानाप्रभारी रोहिणी काले और जांच अधिकारी पीआई लता सुतार भी समझ रही थीं कि इतने बड़े आदमी का गायब होना संयोग नहीं हो सकता. जरूर वह किसी षडयंत्र का शिकार हुए हैं. थानाप्रभारी ने अधिकारियों से विचारविमर्श करने के बाद राजेश्वर उदानी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली.

इस के दूसरे दिन ही पनवेल पुलिस को नेरे गांव के जंगलों में एक शव पड़ी होने की जानकारी मिली. शव इतना खराब हो चुका था कि उस की शिनाख्त करना मुश्किल था.

पनवेल पुलिस ने लाश बरामद करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दी थी. इस के बाद पनवेल पुलिस ने लाश के कपड़े, हुलिया आदि की सूचना कंट्रोलरूम से प्रसारित करा दी.

अज्ञात आदमी की लाश मिलने की जानकारी जब पंतनगर थानाप्रभारी रोहिणी काले को मिली तो वह चौकन्नी हो गईं. उन्होंने तुरंत राजेश्वर उदानी के परिवार वालों को थाने बुलाया और जांच अधिकारी पीआई लता सुतार के साथ नवी मुंबई के पनवेल थाने पहुंच गईं.

पनवेल पुलिस ने उदानी परिवार को लाश के फोटो और कपड़े आदि दिखाए. चूंकि लाश क्षतिग्रस्त थी, इसलिए चेहरा तो पहचान में नहीं आया. लेकिन कपड़ों, जूतों, बेल्ट, घड़ी आदि से रौनक उदानी ने उस लाश की शिनाख्त अपने पिता के रूप में कर दी. उदानी परिवार के सदस्यों का रोरो कर बुरा हाल था. पुलिस ने उन्हें सांत्वना दी.

मामला एक संभ्रांत परिवार के  बड़े हीरा कारोबारी का होने की वजह से पुलिस अधिकारी सक्रिय हो गए. उन्होंने इस मामले को ले कर मीटिंग की, जिस में तमाम संभावनाओं और इनवैस्टीगेशन के बिंदुओं पर बात हुई. एडीशनल सीपी ने थाना पुलिस के साथसाथ क्राइम ब्रांच को भी तफ्तीश में लगा दिया.

आजकल तकनीक इतनी एडवांस हो गई है कि अपराध कितना भी पेचीदा और रहस्यमय क्यों न हो, पुलिस शीघ्र से शीघ्र सौल्व कर ही लेती है. पीआई लता सुतार ने अपने सहयोगियों के साथ राजेश्वर उदानी हत्याकांड की तेजी से जांच करनी शुरू कर दी.

उन्होंने जब राजेश्वर उदानी के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स की गहराई से जांच की तो उस में कुछ ऐसे नाम सामने आए, जिस से यह मामला हाईप्रोफाइल श्रेणी में आ कर खड़ा हो गया. मीडिया वाले भी केस को प्रमुखता से हाइलाइट कर रहे थे. पूरे शहर में इस मामले को ले कर तरहतरह की चर्चाएं चल रही थीं.

devoleena-bhattacharjee

प्रदेश के गृह निर्माण मंत्री प्रकाश मेहता का पूर्वसचिव सचिन पवार, स्टार टीवी के धारावाहिक ‘साथ निभाना साथिया’ की अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्य जो गोपी बहू के रूप में जानी जाती है, का नाम जुड़ने से लोग स्तब्ध थे.

राजेश्वर उदानी हत्याकांड की काल डिटेल्स में सचिन पवार और अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्य उर्फ गोपी बहू के नाम भी शामिल थे. जिस दिन राजेश्वर उदानी गायब हुए थे, उस दिन सचिन पवार ने उदानी को सुबह से ले कर शाम तक 13 काल्स की थीं, जिस की वजह से सचिन पवार जांच टीम के राडार पर आ गया था.

यह शक तब और गहरा गया जब सचिन पवार पुलिस टीम को अपने घर पर नहीं मिला. उस का फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा था. जांच में पता चला कि सचिन पवार 29 नवंबर, 2018 से ही घर नहीं आया था.

सचिन को घर पर न पा कर पुलिस को थोड़ी निराश हुई. यह निराशा अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्य की मदद से दूर हो सकती थी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

हनीमून पर दी हत्या की सुपारी – भाग 1

सन 2009 के जुलाई महीने में एनी हिंडोचा अपनी कजिन स्नेहा से मिलने ल्यूटोन गई तो वहीं उस की मुलाकात श्रीन देवानी से हुई. श्रीन स्नेहा का पारिवारिक मित्र था. श्रीन देवानी हेल्थकेयर बिजनैस का एक जानामाना नाम था. मूलरूप से भारत का रहने वाला श्रीन देवानी का परिवार लंदन के ब्रिस्टल शहर में रहता था. सालों पहले उस के घर वाले यहां आ कर रहने लगे थे. उस के पिता पीएसपी हेल्थकेयर कंपनी चलाते थे. श्रीन देवानी का जन्म वहीं हुआ था.

यूनिवर्सिटी औफ मैनचेस्टर से इकोनौमिक्स में ग्रैजुएशन कर के श्रीन वहीं एक कंपनी में एकाउंटेंट की नौकरी करने लगा था. इसी नौकरी के दौरान स्नेहा से उस की दोस्ती हुई थी. नौकरी कर के श्रीन को जब अच्छाखासा अनुभव हो गया तो उस ने अपना पारिवारिक कारोबार संभाल लिया था. नौकरी उस ने भले छोड़ दी थी, लेकिन दोस्तों से वह पहले की ही तरह मिलताजुलता रहता था.

दोस्तों से ही मिलने जुलने में श्रीन की मुलाकात स्नेहा की कजिन एनी हिंडोचा से हुई तो पहली ही मुलाकात में खूबसूरत एनी उसे कुछ इस तरह भायी कि एक बार उस के चेहरे पर उस की नजर पड़ी तो वह अपनी नजर को हटा नहीं सका.

एनी ने श्रीन देवानी के दिल में एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. अब तक उस के संपर्क में तमाम लड़कियां आई थीं, लेकिन जो बात उस ने एनी में पाई थी, शायद वह उन में से किसी में नहीं दिखी थी. इसीलिए वह उस पर से नजर नहीं हटा सका था.

श्रीन एनी को एकटक देख रहा था. उसे इस बात की भी परवाह नहीं थी कि वह जो कर रहा है, वह अभद्रता है और उस की इस अभद्रता पर लोग उस के बारे में क्या सोचेंगे.

एनी को उस के मन की बात भांपते देर नहीं लगी थी. श्रीन भी कम आकर्षक नहीं था. सुखी और संपन्न तो था ही. एक लड़की को जिस तरह का मर्द चाहिए, वे सारे गुण उस में थे. इसलिए उस का एकटक ताकना एनी को बुरा लगने के बजाय अच्छा ही लगा था. कहा जाए तो उस का हाल भी श्रीन से कुछ अलग नहीं था.

जब दोनों के ही दिलों की हालत एक जैसी हो गई तो वे एकदूसरे की आंखों में डूब गए. तभी स्नेहा ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘यहां तुम दोनों के अलावा भी तमाम लोग मौजूद हैं. उन लोगों की ओर भी देख लो.’’

श्रीन और एनी को अपनी अपनी गलती का अहसास हुआ. दोनों शरमा गए, इसलिए कुछ कह नहीं सके, सिर्फ मुसकरा कर रह गए. दोनों बातें भले ही अन्य लोगों से करते रहे, पर नजरें एकदूसरे को ही ताकती रहीं. इतना सब होने के बाद अब उन्हें एकदूसरे से यह कहने की जरूरत नहीं रह गई थी कि वे एकदूसरे के दिलों में बस चुके हैं. इस तरह उन के प्यार का इजहार नजरों से ही हो गया था.

वहां से विदा होने से पहले एनी और श्रीन ने एकदूसरे के नंबर ले लिए थे. इस के बाद उन की मोबाइल पर बात ही नहीं होने लगी, बल्कि दोनों ऐसी जगहों पर मिलने भी लगे, जहां सिर्फ वही दोनों होते थे. एकांत में मिल कर दोनों अपनेअपने दिलों की बात कह कर बेहद सुकून महसूस करते थे. ज्यादातर वे ब्रिस्टल और स्टाकहोम के बीच मिलते थे.

एकांत में एक दिन जब श्रीन ने एनी की ठोढ़ी उठा कर उस की आंखों में झांकते हुए कहा कि वह उसे बहुत प्यार करता है तो एनी उस की हथेली अपने हाथों में दबा कर बोली, ‘‘प्यार! मैं तुम्हें तुम से भी ज्यादा प्यार करती हूं. मेरी हर धड़कन, हर सांस अब तुम्हारे लिए है. तुम भले ही मुझ से दूर रहते हो, पर यादों की वजह से हर पल मेरे साथ होते हो.’’

‘‘एनी, सागर की गहराई को तो नापा जा सकता है, लेकिन दिल की गहराई को किसी भी तरह नहीं नापा जा सकता. वरना मैं भी दिखा देता कि मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं. तुम्हारे प्यार से इस जिंदगी को एक मकसद मिल गया है. अब इसे जीने में मजा आने लगा है. बाकी तो यह सूखी नदी जैसी थी.’’ श्रीन ने उसी तरह एनी की आंखों में झांकते हुए कहा.

‘‘तुम से प्यार करने के बाद ही मुझे भी पता चला है कि यह जिंदगी कितनी खूबसूरत होती है. तुम्हारे प्यार में बीतने वाला हर पल बहुत हसीन लगता है. मेरी जिंदगी में आ कर तुम ने इसे धन्य कर दिया. मैं तुम्हारा यह एहसान ताउम्र नहीं भूल सकती.’’ यह कहते हुए एनी भावुकता की गहराई में उतर गई.

‘‘एहसान तो तुम ने मुझ पर किया है, मेरी जिंदगी में आ कर. तुम्हारा यह प्यार मेरे लिए वह इबादत है, जो मैं मरते दम तक करता रहूंगा.’’ श्रीन ने कहा.

‘‘मुझे कभीकभी विश्वास ही नहीं होता कि मुझे तुम जैसा प्यार करने वाला मिला है. सचमुच तुम्हें पा कर मेरी जिंदगी बदल गई है.’’ एनी ने आंखें मूंद कर कहा.

प्यार मोहब्बत की बातों की कोई सीमा नहीं होती. इस के लिए तो कई जीवन भी कम पड़ जाएं. इसलिए  जब भी मिलते, इसी तरह की बातें करते रहते. मिलतेजुलते, ऐसी ही बातें करते डेढ़ साल कैसे गुजर गए, उन्हें पता ही नहीं चला.

गुजरे समय के साथ उन का प्यार गहरा होता गया. अब वे कईकई दिनों में कुछ घंटे के लिए मिलते तो उन का मन न भरता. वे चाहते थे कि उन का हर पल एकदूसरे की बांहों में गुजरे.

लेकिन इस के लिए एक बंधन की जरूरत थी. वह बंधन था शादी का और इस के लिए जरूरत थी दोनों के परिवारों की रजामंदी. दोनों भले ही पश्चिमी देशों में जन्मे और पलेबढ़े थे, लेकिन थे तो हिंदुस्तानी, जहां की संस्कृति आज भी उन के घर वालों पर हावी थी. शायद इसीलिए उन्होंने अपने प्यार को अभी तक घर वालों के सामने उजागर नहीं होने दिया था.

इसीलिए जब उन के मन में शादी का विचार आया तो एनी ने कहा, ‘‘श्रीन, शादी के लिए तुम अपने घर वालों से बात करो, क्योंकि मैं तो अपने घर वालों से कुछ कह नहीं सकती. लेकिन इतना जरूर जानती हूं कि तुम्हारे घर वाले मेरे घर रिश्ता ले कर आएंगे तो मेरे घर वाले मना नहीं करेंगे.’’

‘‘प्यार की पहल मैं ने की तो अब शादी की भी पहल मुझे ही करनी पड़ेगी.’’ श्रीन ने हंसते हुए कहा, ‘‘खैर, तुम्हारे लिए मैं यह भी करूंगा.’’

‘‘मुझ पर अधिकार पाना है तो तुम्हें यह भी करना होगा.’’

‘‘ठीक है, मैं जल्दी ही कुछ करता हूं, क्योंकि अब तुम से दूरी सहन नहीं हो रही है.’’ श्रीन ने कहा.

श्रीन ने एनी से वादा ही नहीं किया, बल्कि उस पर अमल भी किया. उस ने अपने घर वालों को अपने प्यार के बारे में बता कर एनी के घर जा कर रिश्ता मांगने के लिए कहा. उस के घर वालों को इस बात पर कोई ऐतराज नहीं था. वे बेटे की खुशी में खुश थे.

उन्हें सब से बड़ा संतोष इस बात का था कि एनी भारतीय मूल की थी. वह उन के परिवार में आराम से एडजस्ट हो जाएगी. लेकिन एनी के घर वालों से मिलने से पहले उन्होंने एनी और उस के घर वालों के बारे में पता करना जरूरी समझा.

सोने की चेन ने बनाया कातिल – भाग 1

मध्य प्रदेश के इंदौर का बख्तावर नगर एक ऐसा इलाका है, जहां ज्यादातर धनाढ्य लोग रहते हैं. यहां रहने वाले वे लोग हैं, जो सरकारी नौकरियों में हैं या फिर रिटायर हो चुके हैं. पौश होने की वजह से यह इलाका शांत रहता है. नौकरीपेशा होने की वजह से यहां रहने वाले लोग एकदूसरे की हर तरह से मदद करने को भी तैयार रहते हैं.

1 मई, 2014 की दोपहर के 2 बजे के आसपास दिव्य मिश्रा अपनी बुआ शकुंतला मिश्रा के यहां पहुंचा तो मकान का मुख्य दरवाजा खुला हुआ था. उसे यह देख कर हैरानी हुई, क्योंकि उस की बुआ का घर कभी इस तरह खुला नहीं रहता था. वह दरवाजा तभी खोलती थीं, जब आने वाले को दरवाजे में लगी जाली से देख कर पहचान लेती थीं.

62 वर्षीया शकुंतला मिश्रा उस मकान में अपनी बहन अनिता दुबे के साथ रहती थीं. उन के पति विक्रम मिश्रा की बहुत पहले एक सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी. पति की मौत के समय वह गर्भवती थीं. पति की मौत का सदमा उन्हें इतना गहरा था कि गर्भ में पल रही बेटी की भी मौत हो गई थी. इस के बाद उन्हें मृतक आश्रित कोटे से पति की जगह वन विभाग में नौकरी मिल गई थी. अब वह उस से भी रिटायर हो चुकी थीं.

Indore-2-sisters-double-murder-2014-shakuntala-anita-dubey

पति की मौत के बाद उस घर में शकुंतला अपनी मौसेरी बहन अनिता दुबे के साथ रहती थीं. अनिता उन्हीं के साथ रह कर पढ़ीलिखी थी. बाद में उसे नौकरी मिल गई. साथ रहते हुए उसे अपनी मौसेरी बहन से इतना लगाव हो गया था कि उस ने भी शादी नहीं की थी.

अनिता दुबे शिक्षा विभाग में संचालक थीं. दोनों ही बहनों की कोई औलाद नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति एकदूसरे के नाम कर रखी थी. उन के पास पड़ोस वालों से काफी अच्छे संबंध थे. मोहल्ले के सभी बच्चे उन्हें बुआ कहते थे. कभी कोई उन के चरित्र पर अंगुली नहीं उठा सका था, इसलिए सब उन की काफी इज्जत करते थे.

मकान मे उन के साथ कोई मर्द नहीं रहता था, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से वे हमेशा अपना दरवाजा बंद रखती थी. शकुंतला मिश्रा के पिता दूरसंचार विभाग में डाइरैक्टर के पद से रिटायर हुए थे. वह भी परिवार के साथ बख्तावरनगर में ही रहते थे.

दिव्य ने बुआ के घर का बाहरी दरवाजा खुला देखा तो उसे काफी हैरानी हुई थी. वह अंदर पहुंचा तो उसे कोई नहीं दिखाई दिया, किसी की आवाज भी सुनाई नहीं दी. घर में सन्नाटा पसरा था. उस ने आवाज भी दी, तब भी कोई जवाब नहीं मिला. थोड़ी देर वह असमंजस की स्थिति में खड़ा रहा, उस के बाद वह पहली मंजिल की सीढि़यां चढ़ने लगा.

ऊपर पहुंच कर उस ने देखा, कमरे की लकड़ी की अलमारियां खुली पड़ी थीं और उन का सारा सामान बिखरा पड़ा था. किसी अनहोनी से उस का दिल धड़कने लगा. तभी उस की नजर फर्श पर पड़ी तो उसे खून फैला दिखाई दिया. खून देख कर वह घबरा गया. उस ने तुरंत अपने दोस्तों और घर वालों को फोन कर दिया. दोस्त और घर वाले भी वहीं रहते थे, थोड़ी ही देर में सब आ गए.

फर्श पर घसीटने के निशान थे. निशान के अनुसार सभी बाथरूम में पहुंचे तो वहां शकुंतला और अनिता के शव एक दूसरे के ऊपर पड़े थे. स्थिति देख कर लोगों को समझते देर नहीं लगी कि लूटपाट के लिए लुटेरों ने दोनों की हत्या कर दी थी. तुरंत घटना की सूचना थाना पलासिया पुलिस को दी गई.

सूचना देने के थोड़ी देर बाद थानाप्रभारी शिवपाल सिंह कुशवाह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ गए. एक तो पौश इलाके का मामला था, दूसरे मृतका ही नहीं, उन के सारे नाते रिश्तेदार उच्च सरकारी पदों पर थे, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी शिवपाल सिंह ने पुलिस उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना दे दी. सुबूत जुटाने के लिए फोरैंसिक एक्स्पर्ट डा. सुधीर शर्मा को भी घटनास्थल पर बुला लिया गया था.

Indore-double-murder-parijan

डा. सुधीर शर्मा ने घटनास्थल एवं लाशों के निरीक्षण में पाया कि मृतका अनिता एवं हत्यारे के बीच जम कर संघर्ष हुआ था. क्योंकि उस के नाखून में हत्यारे की त्वचा एवं सिर के बाल मिले थे. उन्होंने उसे सुरक्षित कर लिया था. हत्यारे ने दोनों के सिर पर किसी भारी चीज से वार कर के उन्हें मारा था. उन के शरीर के कुछ गहने भी गायब थे. पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर दोनों लाशों की पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया था.

निरीक्षण में पुलिस ने देखा था कि कूलर खुला पड़ा था. शायद वह रिपेयरिंग के लिए खोला गया था. अलमारियों के सामान के बिखरे होने से साफ था कि मामला लूटपाट का था. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पता चला था कि कीमती गहने तो लौकर में रखे थे, रोजाना उपयोग में लाए जाने वाले गहने ही घर में थे. उन में से कितना गया था और उन की कीमत क्या रही होगी, यह कोई नहीं बता सका था. लेकिन इतना जरूर बताया गया था कि शकुंतला का मोबाइल तो है, जबकि अनिता का मोबाइल गायब है.

निरीक्षण में थानाप्रभारी शिवपाल सिंह ने देखा था कि दोनों लाशों के हाथों की अंगूठियां जस की तस थीं. इस से उन्होंने अंदाजा लगाया कि लुटेरा पेशेवर नहीं था. घर की सभी अलमारियों, बक्सों और लौकर के ताले टूटे पड़े थे. इस का मतलब लुटेरे के हाथ जो लगा था. उसे ले कर वह भाग निकला था. क्योंकि तलाशी में करीब 50 पर्स पाए गए थे और हर पर्स में कोई न कोई गहना और कुछ नकद रुपए मिले थे.

कूलर रिपेयर करने वाले का एक पंफलेट मिला था, कूलर भी खुला पड़ा था. इस से पुलिस को लगा कि कहीं कूलर बनाने वाले ने ही तो इस घटना को अंजाम नहीं दिया. पुलिस ने उस पंफलेट को अपने कब्जे में ले लिया. क्योंकि पुलिस का यह अंदाजा सही निकला.

दरअसल पड़ोस की छोटी छोटी 3 लड़कियों ने बताया था कि घटना से पहले वे वहां खेल रही थीं तो कूलर बनाने वाले ने उन्हें यह कह कर घर भेज दिया था कि कहीं करंट न लग जाए. इस बात से पुलिस की आशंका को बल मिला.

साजिश का तोहफा – भाग 1

महाराष्ट्र सरकार के अटार्नी जनरल नण्वीन करमाकर की पत्नी अवंतिका ने रात का खाना तैयार कर के खाने को कहा तो उन्होंने टीवी पर से नजरें हटा कर कहा, ‘‘खाना हम थोड़ा देर से खाएंगे. अभी कुछ लोग आने वाले हैं.’’

‘‘कौन?’’ अवंतिका ने पूछा.

‘‘वही स्वाति और मनोज, जिन की इसी दिवाली पर तुम ने शादी कराई थी.’’

‘‘मैं किसी की शादी कराने वाली कौन होती हूं.’’ अवंतिका ने कहा, ‘‘मैं ने तो सिर्फ उन का परिचय कराया था, बाकी के सारे काम तो उन्होंने खुद किए थे. कुछ भी हो, दोनों हैं बहुत अच्छे.’’

‘‘अगर तुम कह रही हो तो अच्छे ही होंगे.’’ नवीन करमाकर ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘तुम्हें यह सुन कर दुख होगा कि मनोज जैसे ही हनीमून से लौटा, उसे नौकरी से निकाल दिया गया. सोचो, उस के साथ कितना बड़ा अन्याय हुआ. शायद इसी बारे में वह हम से मिलने आ रहा है?’’

‘‘शायद वे लोग आ भी गए.’’ अवंतिका ने कहा.

इतना कह कर अवंतिका बाहर आई और कुछ पल बाद लौटी तो उस के साथ मनोज और स्वाति थे. स्वाति छरहरे बदन की काफी सुंदर युवती थी तो मनोज भी उसी की तरह लंबे कद का मजबूत कदकाठी वाला युवक था. उस की काली आंखों से ईमानदारी साफ झलक रही थी. यह एक ऐसा जोड़ा था, जिसे देख कर कोई भी आकर्षित हो सकता था. लेकिन उस समय दोनों के चेहरों पर परेशानी साफ झलक रही थी.

औपचारिक बातचीत के बाद मनोज ने कहा, ‘‘आप तो अटार्नी जनरल हैं. मैं आप के पास इसलिए आया हूं कि आप मुझे पुलिस के हाथों पकड़वा दें.’’

मेहमान की इस इच्छा पर नवीन करमाकर ने हैरानी से कहा, ‘‘इस की भी कोई वजह होगी. बेहतर होगा कि पहले आप वजह बताएं. उस के बाद जो उचित होगा, वह किया जाएगा.’’

‘‘मेरा पूरा नाम मनोज सोलकर है,’’ मनोज ने कहा, ‘‘कोलाबा में जो सोलकर इंस्टीटयूट है, उसे तो आप जानते ही हैं, क्योंकि आप ने वहां पढ़ाई की थी.’’

मनोज के इतना कहते ही नवीन करमाकर को सोलकर इंस्टीटियूट याद आ गया. कोलाबा के उस वैभवशाली शिक्षा संस्थान और रिसर्च इंस्टीटयूट को सोमनाथ सोलकर ने सन 1970 में बनवाया था. वह खुद भी एक आविष्कारक थे. उन्हें नए नए आविष्कार करने में काफी दिलचस्पी रहती थी. उन्होंने काफी आविष्कार किए भी थे. इस संस्था की स्थापना उन्होंने विज्ञान और उद्योग के विकास के काम के लिए की थी.

‘‘मैं सोमनाथ सोलकर का पोता हूं.’’ मनोज सोलकर ने कहा तो नवीन करमाकर चौंके. वह कुछ कहते, उस के पहले ही मनोज ने कहा ‘‘लेकिन दुर्भाग्य से वह मेरे बारे में कुछ नहीं जानते. क्योंकि काफी समय पहले मेरे मातापिता से उन का झगड़ा हो गया था तो उन्होंने संबंध खत्म कर लिए थे.

मैं 4 साल का था, तभी प्लेन क्रैश में मेरे पिता की मौत हो गई थी. उन की मौत के बाद मेरे दादाजी का व्यवहार मेरे और मेरी मां के प्रति और ज्यादा कठोर हो गया था. उन्होंने हम दोनों से कभी कोई संबंध नहीं रखा. मेरी मां ने नौकरी कर के मुझे पढ़ाया लिखाया. मां के प्रयास से ही किसी तरह मैं ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की.’’

‘‘तुम ने मुझे बताया तो था कि तुम्हारी मां को शहरी जीवन से घबराहट होने लगी थी, इसलिए कई सालों पहले वह देहाती इलाके में रहने चली गई थीं.’’ अवंतिका ने कहा.

‘‘जी हां, उन्होंने लोनावाला में अपने लिए एक मकान खरीद लिया था क्योंकि वह उन का पैतृक गांव था.’’ मनोज ने कहा, ‘‘तब तक मेरी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी. उस के बाद मैं ने एक स्कूल में नौकरी कर ली थी. मुझे पढ़ने का शौक था. फिर बच्चों को पढ़ाने के लिए भी पढ़ना पड़ता था, इसलिए मैं किताबें लेने के लिए सोलकर इंस्टीटयूट की लाइब्रेरी जाता रहता था. पिछले साल दिसंबर में मैं लाइब्रेरी से लौट रहा था तो मेरी मुलाकात इंस्टीटयूट के डायरेक्टर रमेश गायकवाड़ से हो गई.’’

‘‘एक तरह से रमेश गायकवाड़ ही इंस्टीटयूट के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. इंस्टीटयूट का सारा काम वही देखते हैं. उन्होंने कई बार मुझे आते जाते देखा था. उन्हें मेरे बारे में काफी कुछ पता था. वह मेरा नाम भी जानते थे. उस दिन मिलने पर उन्होंने मुझ से पूछा, ‘मुझे पता चला है कि तुम इस इंस्टीट्यूट के संस्थापक सोमनाथ सोलकर के पोते हो?’

‘‘जी मैं उन का पोता हूं.’’

‘‘तब तो आप को हमारे साथ काम करना चाहिए. सोलकर परिवार का सदस्य होने के नाते तुम्हारी जगह यहां है.’’

‘‘उस दिन हम दोनों के बीच काफी लंबी बातचीत हुई. मैं ने हामी भर दी कि स्कूल का कौंट्रैक्ट खत्म होने के बाद मैं यहां आ जाऊंगा. मैं बहुत खुश था, क्योंकि स्कूल में पढ़ाने का मुझे बहुत ज्यादा शौक नहीं था. इंस्टीटयूट के स्टाफ में शामिल के लिए मैं लालायित रहता था.’’

‘‘तो तुम्हें स्टाफ में शामिल कर लिया गया था?’’ नवीन करमाकर ने पूछा.

‘‘नहीं, रमेश गायकवाड़ ने मुझे अस्थाई नौकरी पर रखा था. उसी बीच मैं ने और स्वाति ने शादी का निर्णय लिया. मैं ने गायकवाड़ को बताया कि मैं शादी कर रहा हूं तो उस ने खुशी प्रकट करते हुए मुझे मुबारकबाद दी और हनीमून के लिए एक सप्ताह की छुट्टी भी दे दी. लेकिन हनीमून से लौट कर जब मैं इंस्टीट्यूट पहुंचा तो मुझे चोर कह कर नौकरी से निकाल दिया गया.’’

इतना कह कर मनोज ने एक लंबी सांस ली. इस के बाद कुछ देर सोचता रहा. फिर बोला, ‘‘हुआ यह कि जब मैं उसे अपनी शादी के बारे में बताने गया था तो उस ने अपने औफिस में मौजूद तिजोरी खोल कर उस में से 10 हजार रुपए निकाल कर बड़ी शान से कहा था, ‘हमारे यहां हर कर्मचारी को शादी के समय कुछ रकम तोहफे में देने की परंपरा है.’

‘‘रकम थमाते समय जैसे उसे कुछ याद आया हो इस तरह घड़ी देखते हुए उस ने कहा, ‘मुझे जरा कस्टोडियन से बात करनी है. मैं बात कर के अभी आया.

‘‘अब कह रहा है कि जो रकम जो उस ने मुझे उपहार में दी थी, वह मैं ने चोरी की थी. उस का कहना है कि जब वह कस्टोडियन से मिलने चला गया था तो मैं ने तिजोरी से वह रकम चुरा ली थी, क्योंकि भूल से वह तिजोरी खुली छोड़ गया था.’

‘‘आज उस ने मुझ से कहा कि मैं सोलकर परिवार का सदस्य हूं, इसलिए वह मेरे खिलाफ कानूनी काररवाई नहीं करना चाहता, लेकिन बदले में मुझे यह शहर छोड़ कर जाना होगा. क्योंकि अगर कभी बात खुल गई तो इस से मेरी बड़ी बदनामी होगी.’’

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री के भाई का गोवा में मर्डर

अय्याशी में डबल मर्डर : होटल मालिक और गर्लफ्रेंड की हत्या – भाग 1

जैसे ही इशिका ने घर का दरवाजा खोला, सामने कमरे में उस की मम्मी सरिता और उस के अंकल रवि ठाकुर के शव पड़े हुए थे. यह देखते ही उस की चीख निकल गई. फर्श पूरी तरह से खून से लाल हुआ पड़ा था. सरिता और रवि ठाकुर दोनों के शरीर पूरी तरह से नग्न थे.

घर का दृश्य देखते ही उस ने इस की सूचना सब से पहले पुलिस को दी. यह घटना मध्य प्रदेश के इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में स्थित अशोक नगर में हुई थी. यहीं पर सरिता तीसरी मंजिल पर किराए के मकान में रहती थी. डबल मर्डर की सूचना पाते ही एरोड्रम थाने के एसएचओ राजेश साहू तुरंत ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे.

ममता अपने घर के काम में बिजी थी. उसी वक्त उस के मोबाइल पर किसी की काल आई. जैसे ही ममता ने अपने मोबाइल पर नजर डाली, रवि ठाकुर का फोन था. रवि बाबू का फोन देखते ही उस का दिल तेजी से धड़कने लगा. वह समझ नहीं पा रही थी कि वह उस की काल रिसीव करे या काट दे.

ममता का पति नितिन उस समय घर पर ही था. उस वक्त तो उस ने रवि की काल रिसीव नहीं की, लेकिन जैसे ही उस का पति घर से काम के लिए निकला, ममता ने रवि बाबू को काल बैक कर दी.

ममता की काल रिसीव करते ही रवि ठाकुर बोला, ”और ममता रानी, कैसी हो? क्या बात है, आजकल तो तुम हमारा फोन भी रिसीव नहीं कर रही हो?’’

”ठाकुर साहब, ऐसी कोई बात नहीं. दरअसल, उस वक्त मेरे पति घर पर ही थे, जिस वजह से मैं फोन रिसीव नहीं कर सकी. बोलिए ठाकुर साहब, कैसे फोन किया?’’ ममता ने पूछा.

तभी रवि ठाकुर ने कहा, ”ममता रानी, आज शाम को टाइम निकाल कर होटल चली आना. तुम्हारी दावत है.’’

”नहीं…नहीं…ठाकुर साहब, आज मैं आप के पास नहीं आ सकती. आज मुझे घर पर जरूरी काम है.’’

”ममता रानी, जरूरी काम तो हर रोज होते ही रहते हैं. हमारा भी आज जरूरी काम है. अगर आज तुम नहीं आई तो हमारा जरूरी काम कैसे होगा. आज तो तुम्हें आना ही पड़ेगा.’’ रवि अपनी जिद पर अड़ गया तो ममता के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आए थे.

फिर भी उस ने मरे मन से कहा, ”ठीक है, मैं आने की कोशिश करूंगी. लेकिन मैं आप के होटल नहीं आ पाऊंगी. अगर हम दोनों सरिता दीदी के घर पर मिलें तो ज्यादा अच्छा रहेगा.’’

रवि ठाकुर को सरिता के घर जाने में भी कोई परेशानी नहीं थी, क्योंकि सरिता के साथ भी ममता की तरह उस के गहरे संबंध थे. ममता का आज कहीं भी जाने का मन तो नहीं था. लेकिन रवि ठाकुर को मना करने की उस की हिम्मत नहीं थी.

सरिता मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के अशोक नगर में अपनी बेटी इशिका और पति ऋषि के साथ रहती थी. दोपहर के कोई 11 बजे सरिता की बेटी इशिका कोचिंग जाने के लिए घर से निकली थी. पति भी किसी काम से घर से चला गया था. बेटी के घर से निकलते ही सरिता ने कहा था कि बेटी ठंड का मौसम है, टाइम से घर आ जाना.

इशिका को घर से निकले मुश्किल से एक घंटा भी नहीं हुआ था. तभी उस की मम्मी का उस के फोन पर मैसेज आ गया. उस ने जैसे ही मैसेज को पढ़ा तो वह हक्की बक्की रह गई. मैसेज में लिखा था, ‘बेटी कुछ लोग मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं. तू जल्दी से घर वापस आ जा.’

नग्न अवस्था में मिले रवि और ममता के शव

मैसेज पढ़ते ही इशिका बुरी तरह से घबरा गई. उस के बाद वह कामधाम छोड़ कर तुरंत ही घर पहुंची. घर पर अपनी मम्मी और अंकल की खून सनी लाशें देख कर वह घबरा गई. वह जोरजोर से चीखने लगी. कुछ देर बाद इशिका ने थाना एरोड्रम में फोन कर के इस मामले की सूचना दे दी.

घटनास्थल पर पहुंचते ही एसएचओ राजेश साहू ने कमरे की जांचपड़ताल की. सरिता और रवि ठाकुर के शव नग्न अवस्था में खून से लथपथ पड़े हुए थे. वहीं पर एक पुरानी तलवार भी पड़ी हुई थी.

पुलिस ने अपनी जांचपड़ताल की तो घर के दरवाजे पर भी जबरन प्रवेश के निशान पाए गए, जिस से पता चला कि हत्यारों की संख्या एक से अधिक थी. घर का दृश्य देख कर लगता था कि हत्यारों ने खून और सबूत को साफ करने की कोशिश भी की थी.

इस डबल मर्डर की सूचना पाते ही एडिशनल डीसीपी (जोन 1) आलोक शर्मा, एसीपी विवेक चौहान के साथ ही एफएसएल विशेशज्ञ भी मौके पर पहुंचे. विशेषज्ञों ने घटनास्थल से कुछ सबूत इकट्ठा किए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचते ही मृतका की बेटी इशिका से जानकारी ली. मृतका सरिता की बेटी इशिका ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि रवि बाबू का सरवटे बसस्टैंड इलाके में होटल है. उस की मम्मी सरिता एक ब्यूटीपार्लर चलाती थीं. दोनों में अच्छी जान पहचान और घरेलू संबंध थे, जिस के कारण दोनों ही रवि बाबू अकसर उन के घर पर आतेजाते रहते थे. रवि बाबू के 3 बच्चे थे.

इस जघन्य अपराध की तह तक पहुंचने के लिए एडिशनल डीसीपी आलोक शर्मा ने साइबर टीम के साथसाथ एक पुलिस टीम का भी गठन किया.

इस टीम में एसआई लक्ष्मण सिंह गौड़, रविराज सिंह बैस, हैडकांस्टेबल अरविंद तोमर, पवन पांडेय, कमलेश चावला, विलियम सिंह, जितेंद्र सांखला, विजय वर्मा, माखन चौधरी, कांस्टेबल संजय दांगी, विशाल दभाडे, महिला कांस्टेबल रितिका शर्मा आदि को शामिल किया गया था.

टीम का गठन होने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए इस क्षेत्र में लगे लगभग 50 सीसीटीवी कैमरे खंगाले, साथ ही लगभग 100 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ भी की.

कैमरों की जांच करने के बाद पुलिस को जानकारी मिली. इस दौरान मृतक रवि ठाकुर के अलावा 2 व्यक्ति (एक महिला और एक पुरुष) भी आए थे.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने रवि ठाकुर और सरिता ठाकुर के मोबाइलों की खोज की तो दोनों के मोबाइल ही गायब मिले.

पुलिस कैसे पहुंची हत्यारों तक

उस के बाद पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा कर उन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि इस हत्याकांड से कुछ देर पहले ही सरिता ने अपनी सहेली ममता के फोन पर बात की थी. उसी काल डिटेल्स के द्वारा पता चला कि रवि ठाकुर सरिता के साथसाथ ममता से भी बात करता था.

पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर ममता की शिनाख्त की तो पुलिस का शक उसी पर पक्का हो गया.

उसी शक के आधार पर पुलिस ने ममता के घर पर दबिश दी तो वह घर से गायब मिली. उस के बाद पुलिस ने उस के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो उस का मोबाइल भी बंद मिला. उस के मोबाइल को ट्रेस करते हुए पुलिस ने देर रात देवनगर (खजराना) से ममता उर्फ पिंकी और उस के पति नितिन को गिरफ्तार कर लिया था.

police-custory-me-aropi-indore-double-murder

दोनों पतिपत्नी को अपनी हिरासत में लेते ही पुलिस ने उन से इस हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की तो दोनों ने जल्दी ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया. ममता ने पुलिस को बताया कि काफी समय से रवि ठाकुर उस के साथ ब्लैकमेलिंग का खेल खेल रहा था.

पुलिस ने रवि ठाकुर के मोबाइल की गैलरी सर्च की तो उस में कई महिलाओं के अश्लील वीडियो मिले, जो सभी उसी के होटल में बनाए गए थे.

पुलिस को रवि ठाकुर के होटल में कई गुप्त कैमरे भी मिले, जिन के सहारे से ही वह महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करते हुए उन की अश्लील वीडियो बना कर उन के साथ अवैध संबंध बनाता था. पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी.

मध्य प्रदेश के जिला इंदौर के नंदानगर निवासी रवि ठाकुर ने सरवटे बस स्टैंड के पास स्थित 3 होटल मां वैष्णो पैलेस, हनी और होटल सागर ठेके पर ले रखे थे. इन होटलों से रवि ठाकुर को अच्छी कमाई होती थी. सरिता ठाकुर से रवि ठाकुर की पुरानी जानपहचान थी.