Family Crime : पत्नी को भांग की गोली खिलाकर हत्या की फिर शव के टुकड़े कर झाड़ियों में फेंके

Family Crime : बिना छानबीन के हुई शादी के बाद जब पति या पत्नी की हकीकत सामने आनी शुरू होती है तो विवाद बढ़ना स्वाभाविक होता है. कई बार इस विवाद में किसी एक की जान भी दांव पर लग जाती है. अमित और कोमल के मामले में भी…

भिवाड़ी राजस्थान ही नहीं, उत्तरी भारत का प्रमुख औद्योगिक इलाका है. भिवाड़ी और हरियाणा के बीच केवल एक सड़क का फासला है. भिवाड़ी में सुई से ले कर अंतरिक्ष यान तक के कलपुर्जे बनाने वाले उद्योग हैं. भिवाड़ी वैसे तो अलवर जिले में आता है, लेकिन अपराधों के नजरिए से महत्त्वपूर्ण होने के कारण साल भर पहले अलवर जिले में भिवाड़ी को नया पुलिस जिला बना दिया गया था. राजस्थान में केवल अलवर ही ऐसा जिला है, जहां अलगअलग जिलों के नाम से 2 एसपी हैं. राज्य के कुछ जिलों में ग्रामीण और शहर एसपी हैं. जबकि जयपुर और जोधपुर शहर में पुलिस कमिश्नरेट है.

अपराधों के लिहाज से 2 महीने पहले भिवाड़ी में दबंग और इंटेलीजेंट एसपी के रूप में राममूर्ति जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. बात 14 अगस्त की है. एसपी साहब जब अपने औफिस में स्वतंत्रता दिवस पर पुलिस की ओर से किए जाने वाले इंतजामों की फाइल देख रहे थे, तभी उन के मोबाइल पर यूआईटी फेज थर्ड थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार का फोन आया. थानाप्रभारी ने कहा, ‘‘सर, खिदरपुर गांव के सरकारी स्कूल के पास सड़क किनारे एक महिला के शव के अलगअलग टुकड़े मिले हैं.’’

महिला के शव के टुकड़े मिलने की बात सुन कर एसपी साहब चौंके. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने थानाप्रभारी को कुछ जरूरी निर्देश दे कर कहा, ‘‘आप शव के बाकी टुकड़े तलाश कराओ, मैं मौके पर आता हूं.’’

एसपी साहब ने अपने पीए को एडिशनल एसपी अरुण माच्या से बात कराने और तुरंत गाड़ी लगवाने को कहा. पीए ने फोन पर लाइन दी, तो एसपी साहब ने एडिशनल एसपी को महिला के शव के टुकड़े मिलने की बात बता कर तुरंत मौके पर चलने को कहा और खुद औफिस के बाहर खड़ी गाड़ी में सवार हो कर खिदरपुर स्कूल की ओर चल दिए. कुछ ही देर में वह खिदरपुर गांव पहुंच गए. स्कूल के पास तमाशबीन खड़े थे. वहां सड़क किनारे झाडि़यां उगी हुई थीं. थानाप्रभारी और कई पुलिसकर्मी भी वहां मौजूद थे. एसपी जोशी के पहुंचने के 2-4 मिनट बाद ही एडिशनल एसपी अरुण माच्या भी पहुंच गए. पुलिस के आला अधिकारियों को देख कर लोगों की भीड़ एक तरफ हट गई.

थानाप्रभारी ने आगे आ कर एसपी और एडिशनल एसपी को सैल्यूट किया. फिर बताया कि सब से पहले कमर से नीचे और जांघों से ऊपर का हिस्सा मिला. इस के बाद आसपास तलाश कराई गई तो कुछ दूर झाडि़यों में अलगअलग जगह पर दोनों हाथ मिले. एक जगह पर बालों में उलझा इंसानी मांस का टुकड़ा मिला. शव के ये अलगअलग टुकड़े महिला के थे, जो करीब 200 मीटर के दायरे में मिले थे. टुकड़ों से पता लगाना मुश्किल था एसपी राममूर्ति जोशी ने शव के टुकड़ों का निरीक्षण किया. वे 4-5 दिन पुराने लग रहे थे. जांघ और कमर से नीचे के हिस्से पर कोई कपड़ा नहीं था. शव के टुकड़े आवारा जानवरों के नोंचने और फूल जाने के कारण उम्र का अंदाज भी नहीं लग सका.

जहांजहां शव के टुकड़े मिले, वहां तेज बदबू आ रही थी. मौकामुआयना कर जोशी समझ गए कि महिला की बेरहमी से हत्या कर उस के शव को टुकड़ों में काट कर अलगअलग जगह फेंका गया है. यह भी आशंका थी कि महिला के साथ दुष्कर्म किया गया हो. चिंता की बात यह थी कि सिर सहित शव के अन्य टुकड़े नहीं मिले थे. जोशीजी ने थानाप्रभारी और एडिशनल एसपी को आसपास के इलाकों में शव के बाकी हिस्से तलाशने के निर्देश दिए. इसी के साथ उन्होंने अलवर से विधि विज्ञान विशेषज्ञों और डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया.

अलवर से एफएसएल के विशेषज्ञ और डौग स्क्वायड मौके पर पहुंच गया. पुलिस ने खोजी कुत्ते को शव के टुकड़े सुंघा कर बाकी टुकड़ों की तलाश कराई, लेकिन पुलिस को शव का कोई अन्य हिस्सा नहीं मिला. इस का कारण यह था कि 2-3 दिन से हो रही बारिश ने सुराग मिटा दिए थे. फोरैंसिक विशेषज्ञों ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए, लेकिन 8-10 घंटे की खोजबीन के बाद भी पुलिस को न तो महिला के बारे में कोई सुराग मिला और न ही कातिलों के बारे में कोई जानकारी. पुलिस ने जगहजगह से एकत्र किए शव के टुकड़े सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिए. भिवाड़ी के यूआईटी फेज थर्ड पुलिस थाने में इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर रेंज के आईजी एस. सेंगाथिर के निर्देश पर एसपी (भिवाड़ी) राममूर्ति जोशी के निर्देशन में विशेष जांच टीम का गठन किया गया. इस टीम को एडिशनल एसपी अरुण माच्या के नेतृत्व में काम करना था. टीम में डीएसपी (भिवाड़ी) हरिराम कुमावत और यूआईटी फेज थर्ड थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार सहित कई अफसरों और जवानों को शामिल किया गया. पुलिस ने तेजी से जांचपड़ताल शुरू की, लेकिन कहीं कोई ओरछोर नहीं मिल पा रहा था. इस का कारण यह था कि औद्योगिक इलाका होने के कारण भिवाड़ी में रोजाना राजस्थान के ही नहीं बल्कि हरियाणा के गुड़गांव, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, बावल, फरीदाबाद, पलवल और दिल्ली तक के रोजाना हजारों लोग नौकरी और कामकाज के सिलसिले में भिवाड़ी आतेजाते हैं.

यह भी आशंका थी कि हरियाणा में हत्या करने के बाद शव के टुकड़े राजस्थान के भिवाड़ी में फेंके गए हों. हत्या के ऐसे एकदो मामले पहले भी सामने आए थे. दूसरी बड़ी समस्या यह थी भिवाड़ी में देश के विभिन्न राज्यों के लाखों श्रमिक काम करते हैं, इन श्रमिकों की भिवाड़ी सहित आसपास के गांवों में बड़ीबड़ी बस्तियां हैं. साथ ही भिवाड़ी में भी सैकड़ों बहुमंजिला सोसायटियां हैं. इन सभी इलाकों में एक महिला के बारे में खोजबीन करना चुनौती भरा काम था.

एसपी राममूर्ति जोशी पहले भी अलवर में विभिन्न पदों पर रह चुके थे. इसलिए उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर भिवाड़ी और आसपास के इलाकों से पिछले दिनों लापता हुई महिलाओं का रिकौर्ड मंगवाया. इन महिलाओं की गुमशुदगी के बारे में जांचपड़ताल की गई, लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिस से पुलिस को शव के टुकड़ों की शिनाख्त में मदद मिलती. इलाके की सोसायटियों में पिछले दिनों मकान खाली कर जाने वाले किराएदारों का भी पता लगाया गया. इस के अलावा घटनास्थल के निकटवर्ती सांथलका गांव में पिछले दिनों मकान खाली करने

वाले किराएदारों और कंपनियों से अचानक नौकरी छोड़ने वाले महिलापुरुषों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए डोर टू डोर सर्वे किया गया. यह काम भूसे के ढेर में सूई खोजने जैसा था. पचासों पुलिस वाले इस काम में सुबह से शाम तक जुटे रहते. एसपी साहब इस काम में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते थे. वह हर संभव प्रयास से मृतका की शिनाख्त और कातिलों तक पहुंचना चाहते थे. इसलिए रोजाना शाम को एडिशनल एसपी और डीएसपी से रिपोर्ट लेते और उन्हें जरूरी निर्देश देते. पुलिस को मिली जांच की राह 2 सप्ताह से भी ज्यादा समय तक चली इस भागदौड़ में पुलिस को पता चला कि गांव सांथलका की विनोद कालोनी में रहने वाले अमित गुप्ता और उस की पत्नी कोमल पिछले कुछ दिनों से बिना किसी को बताए अचानक कमरा खाली कर चले गए.

पुलिस ने कालोनी के दूसरे लोगों से पूछताछ की, तो जानकारी मिली कि अमित और कोमल में आपस में झगड़ा होता रहता था. दोनों अलगअलग फैक्ट्रियों में काम करते थे. पुलिस को अमित का पता तो नहीं मिला. अलबत्ता यह जरूर पता लगा कि वह भरतपुर का रहने वाला है. यह सुराग मिलने पर पुलिस को उम्मीद की कुछ किरण नजर आई. अब पुलिस अमित और कोमल को तलाशने में जुट गई. इसी दौरान 3 सितंबर को यूआईटी फेज थर्ड पुलिस थाने पर डाक से एक पत्र आया. पत्र में अमित गुप्ता ने अपनी पत्नी कोमल के गायब होने की बात लिखी थी. पत्र में अमित का मोबाइल नंबर और कोमल का कानपुर का पता लिखा था.

पुलिस ने मामले की पड़ताल करने के लिए अमित के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन वह स्विच्ड औफ मिला. चूंकि अमित और उस की पत्नी अचानक मकान खाली कर के गए थे और अब अमित ने खुद थाने आने के बजाय पत्र लिख कर अपनी पत्नी की गुमशुदगी की बात कही थी. इस से पुलिस को संदेह हुआ.
थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार ने एसपी राममूर्ति जोशी को पूरी बात बताई. जोशी को भी मामले में संदेह नजर आया. उन्होंने भी अमित के मोबाइल नंबर पर कई बार काल की. लेकिन उस का फोन हर बार स्विच्ड औफ मिला. मोबाइल स्विच्ड औफ होने से उस की लोकेशन का भी पता नहीं चल पा रहा था. सच्चाई का पता लगाने के लिए एसपी ने थानाप्रभारी को पत्र में लिखे कोमल के कानपुर के पते पर पुलिस टीम भेजने के निर्देश दिए.

भिवाड़ी से पुलिस टीम कानपुर में मीरपुर कैंट स्थित कोमल के घर पहुंची. वहां पूछताछ में पता चला कि कोमल की अपने परिजनों से 11 अगस्त के बाद से कोई बात नहीं हुई थी. उन्हें न तो कोमल का कुछ पता था और न ही अमित का. कोमल के परिजनों ने पुलिस को बताया कि दोनों मियांबीवी में आए दिन झगड़ा होता था. यह भी बताया कि अमित ने कोमल से धोखे से शादी की थी. उन से यह जानकारी भी मिली कि अमित ने अपनी किसी महिला दोस्त की हत्या भी की थी. उन्हें शंका थी वह कोमल की भी हत्या कर सकता है. कानपुर में कोमल के घर वालों से मिली जानकारी के बाद अमित पर पुलिस का शक पक्का हो गया. साथ ही यह अनुमान भी लग गया कि 14 अगस्त को खिदरपुर स्कूल के पास मिले शव के टुकड़े कोमल के ही हो सकते हैं.

अब अमित को तलाशना जरूरी था, क्योंकि उसी से सारी सच्चाई का पता लग सकता था. एसपी राममूर्ति जोशी ने भिवाड़ी पुलिस की साइबर सेल को अमित गुप्ता के मोबाइल नंबर का तकनीकी अनुसंधान करने का निर्देश दिया. साइबर सेल के हैड कांस्टेबल मोहनलाल, कांस्टेबल संदीप और नीरज ने अमित का मोबाइल लगातार स्विच्ड औफ मिलने पर उस की पुरानी काल डिटेल्स निकलवा कर उन का विश्लेषण किया. पुलिस ने इन काल डिटेल्स के आधार पर पहले से अमित के संपर्क में रहे लोगों से उस की पूरी जन्मकुंडली हासिल की. तमाम प्रयासों के बाद पुलिस ने 7 सितंबर को अमित गुप्ता को भिवाड़ी के ही सांथलका इलाके से गिरफ्तार कर लिया. उसे पुलिस थाने ला कर पूछताछ की गई. पहले तो वह पुलिस को यह कह कर गुमराह करता रहा कि कोमल लापता है.

मैं उस की तलाश कर रहा हूं. लेकिन कड़ाई से पूछताछ में उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया.
पुलिस पूछताछ में कोमल की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

अमित गुप्ता राजस्थान के भरतपुर शहर का रहने वाला था. उस की शादी 13 दिसंबर, 2019 को कानपुर निवासी हरिप्रसाद गुप्ता की बड़ी बेटी कोमल से भरतपुर में हुई थी. कोमल की यह दूसरी शादी थी. उस की पहली शादी 2004 में कानपुर के संजय से हुई थी, लेकिन टीबी की बीमारी के कारण उस के पति संजय की 4 साल बाद 2008 में मौत हो गई थी. लौकडाउन में भुखमरी की नौबत ले आई भिवाड़ी अमित भरतपुर में ई मित्र की दुकान करता था. अमित और कोमल भरतपुर में कुम्हेर गेट पर रहते थे. कोमल अपने पहले पति संजय के भांजे लाली गुप्ता से फोन पर बात करती थी. इस पर अमित को ऐतराज था. इसी बात पर दोनों में आए दिन झगड़ा होता था.

कोरोना संक्रमण के कारण लौकडाउन होने से अमित का ई मित्र का कामकाज ठप हो गया. वह बेरोजगार हुआ, तो रोजीरोटी की तलाश में भरतपुर से भिवाड़ी आ गया. अमित और कोमल भिवाड़ी में सांथलका गांव की विनोद कालोनी में किराए का कमरा ले कर रहने लगे. अमित सेंट गोबेन कंपनी में नौकरी करने लगा. केवल अमित की नौकरी से घर का खर्च नहीं चल पाता था. इसलिए उस ने कोमल को भी नौकरी करने को कहा. कोमल ने प्रयास किया, तो उसे भिवाड़ी के पास चौपानकी में क्लच वायर बनाने वाली कंपनी में नौकरी मिल गई. भले ही पतिपत्नी दोनों नौकरी करने लगे थे, लेकिन उन के बीच झगड़े खत्म नहीं हुए. परेशान हो कर कोमल ने 11 अगस्त को अमित को कमरे से निकाल दिया. अमित कमरे से चला गया, उस के कुछ देर बाद कोमल अपनी नौकरी पर चली गई.

पत्नी से झगड़े के बाद अमित ने एक बार तो अपने घर भरतपुर जाने का विचार बनाया. फिर उस ने रोजरोज का झगड़ा खत्म करने के लिए कोमल का ही खेल खत्म करने की योजना बना डाली. उस ने बाजार से एक लुहार से तेज धारदार वाला बड़ा चाकू खरीदा और वापस कमरे पर आ गया. कमरे की एक चाबी अमित के पास पहले से ही रहती थी. इसलिए उसे कोई परेशानी नहीं हुई. शाम को कोमल अपनी नौकरी से वापस कमरे पर लौटी, तो अमित ने कमरे का गेट बंद कर उसे तरंग नामक भांग की गोलियां खिला दीं.
भांग के नशे में कोमल को कुछ होश नहीं रहा. अमित ने उस के हाथपैर बांध दिए और गला दबा कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद उस ने तेज धार वाले लंबे चाकू से उस के शरीर के अलगअलग टुकड़े किए. टुकड़े करने के दौरान कमरे के फर्श पर बिछी दरी पर खून फैल गया. इस पर उस ने दरी को एक तरफ रख कर बाकी खून के निशान पानी से धो दिए. इस काम में उसे करीब 3 घंटे लगे. कोमल के शव के टुकड़ों को प्लास्टिक के 3 अलगअलग बोरों में भर कर वह रात को कमरे पर ही सो गया. दूसरे दिन सुबह जब कालोनी के लोग अपनेअपने कामों पर चले गए, तब वह कमरे से एकएक बोरा निकाल कर ले गया और कच्चे रास्ते से हो कर खिदरपुर स्कूल के पास अलगअलग जगहों पर फेंक दिए.

उस ने खून से लथपथ वह दरी भी फेंक दी. दूसरे दिन वह अपना थोड़ाबहुत घरेलू सामान ले कर बिना किसी को कुछ बताए किराए का कमरा खाली कर फरार हो गया. बाद में 7 सितंबर को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. फरारी के दौरान वह भिवाड़ी के अलावा पलवल, भरतपुर और जयपुर में रहा. अमित की गिरफ्तारी के बाद उस की निशानदेही पर पुलिस ने 7 सितंबर को ही कोमल के सीने से ऊपर का हिस्सा बरामद कर लिया. इस के अगले दिन 8 सितंबर को पुलिस ने खिदरपुर गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर झाडि़यों से वह दरी भी बरामद कर ली, जिस पर कोमल की हत्या की गई थी. दरी पर खून के निशान सूख चुके थे. 9 सितंबर को पुलिस ने अमित की निशानदेही पर सिर का हिस्सा भी बरामद कर लिया.

पुलिस की सूचना पर कोमल के घर वाले 8 सितंबर को कानपुर से भिवाड़ी पहुंचे. पुलिस ने कोमल के भाई और बहन के डीएनए के सैंपल लिए ताकि कोमल के शव की अधिकृत पुष्टि की जा सके. पूछताछ में यह भी पता चला कि अमित ने सन 2013 में भरतपुर में दुष्कर्म करने के बाद एक महिला होमगार्ड की हत्या कर दी थी. इस मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. करीब डेढ़ साल तक वह भरतपुर जिले की सेवर जेल में बंद रहा. इस मामले में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा दी थी. सन 2014 में हाईकोर्ट से उस की जमानत हो गई थी.

अमित ने जो अपराध किया, उस की सजा उसे कानून देगा. लेकिन कोमल की मौत से उस के पिता हरिप्रसाद टूट गए हैं. कानपुर में चाय की थड़ी लगाने वाले हरिप्रसाद की 3 बेटियों में कोमल सब से बड़ी थी. पहले पति की मौत के बाद से कोमल कानपुर में अपने पिता के पास रह कर जौब करती थी. सुमन ने फंसाया था कोमल को हरिप्रसाद का कहना है कि इस दौरान कोमल के संपर्क में सुमन नाम की महिला आई. सुमन धीरेधीरे उन के घर भी आने लगी. फिर वह कोमल का रिश्ता भरतपुर के अच्छे परिवार में कराने की बात कहने लगी. भरतपुर ज्यादा दूर होने के कारण उन्होंने मना कर दिया. फिर भी सुमन ने पता नहीं कब कोमल का भरतपुर के अमित से संपर्क करा दिया.

जल्दी ही अमित ने कोमल को पूरी तरह अपने झांसे में ले लिया. इस का उन्हें पता भी नहीं चला. बाद में सुमन ने कहा कि एक बार भरतपुर जा कर लड़का देख आओ, पसंद आए तभी रिश्ता करना. बेटी की खुशी के लिए हरिप्रसाद भरतपुर गए. वहां देखा तो पहले से ही शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी. अनजान शहर में वे अकेले पड़ गए. बेटी की सहमति से उन्होंने अगले ही दिन 13 दिसंबर, 2019 को भरतपुर में कोमल की शादी अमित से कर दी. बाद में उन्हें पता चला कि यह शादी कराने के एवज में सुमन ने अमित से एक लाख रुपए लिए थे. कोमल शादी के बाद केवल एक बार होली पर अपने घर कानपुर गई थी.
कोमल अपनी छोटी बहन काजल को फोन पर बताती थी कि अमित का चालचलन ठीक नहीं है. वह उस पर शक करता है और आए दिन झगड़ता है.

कोमल की छोटी बहन काजल की 10 अगस्त को अमित से फोन पर बात हुई थी, तब अमित ने कहा था कि आज के बाद तुम से हमारा कोई रिश्ता नहीं रहेगा और न ही तुम कोमल से बात कर सकोगी. इस के बाद से लगातार संपर्क करने के बाद भी जब परिजनों की कोमल से बात नहीं हुई तो हरिप्रसाद ने अमित के पिता को फोन किया. उन्होंने कहा कि उन का बेटे और बहू से कोई संबंध नहीं है. इस संबंध में वे अखबार में विज्ञापन भी छपवा चुके हैं. हरिप्रसाद का कहना है कि बेटी तो चली गई, लेकिन अमित जैसे जल्लाद से कोमल का रिश्ता कराने वाली सुमन के खिलाफ भी काररवाई हो, जो पैसे कमाने के लिए जरूरतमंद युवतियों को झांसे में ले कर उन की जिंदगी बरबाद कर देती हैं.

Hindi Story : डिप्रेशन से जूझ रही नाबालिग बेटी ने मां और भाई को मारी गोली

Hindi Story : रेलवे के एक सीनियर अफसर की बेटी दीपा राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज थी. लेकिन लौकडाउन में उस ने भूतप्रेतों की कहानियों पर आधारित अंग्रेजी उपन्यास पढ़े. इन सब का उस पर ऐसा प्रभाव पड़ा कि उस का कैरियर तो दांव पर लग ही गया साथ में मां और भाई को भी जान गंवानी पड़ी.

रेलवे विभाग में वरिष्ठ अधिकारी आर.डी. बाजपेई की तैनाती दिल्ली में थी. वह केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के सूचना अफसर के रूप में तैनात थे. जबकि उन का परिवार लखनऊ में रह रहा था. परिवार में उन की पत्नी मालिनी, बेटा सर्वदत्त और बेटी दीपा थी. उन की सरकारी कोठी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास से करीब 30 मीटर दूर थी. 29 अगस्त, 2020 की बात है. 15 वर्षीय दीपा ने घबराई सी आवाज में अपनी नानी को फोन किया, ‘‘नानी जल्दी से एंबुलैंस ले कर आ जाओ, मां और भाई को चोट लगी है.’’ नानी का घर दीपा के घर से केवल 5 किलोमीटर दूर लखनऊ के गोमतीनगर में था.

दीपा की घबराई आवाज में यह सूचना पाते ही नानी चिंतित हो गईं. वह उसी समय पति विजय मिश्रा के साथ चल पड़ीं. करीब 10 मिनट में वह विवेकानंद मार्ग स्थित कोठी नंबर 9 पर पहुंच गईं. वहां की हालत देख कर दोनों अवाक रह गए. कमरे में उन की 45 साल की बेटी मालिनी और 17 साल का नाती सर्वदत्त बैड पर खून में लथपथ पडे़ थे. दोनों की गोली मार कर हत्या की गई थी. सर्वदत्त को सिर पर गोली लगी थी, मालिनी को भी सिर के पास गोली लगी थी. वह करवट लेटी थीं. दीपा घबराई हुई थी और कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी.

नाना विजय मिश्रा ने तुरंत 112 नंबर पर डायल कर के इस की सूचना लखनऊ पुलिस को दी. इस के अलावा उन्होंने यह जानकारी दिल्ली में रह रहे अपने दामाद आरडी बाजपेई को भी दे दी. मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण पुलिस आननफानन में कोठी नंबर 9 की तरफ रवाना हुई. कोठी नंबर 9 अंगरेजों के जमाने की सरकारी कोठी है. यह रेलवे विभाग के अधिकारियोंं को ही रहने के लिए मिलती है. लालसफेद रंग में रंगी यह आलीशान कोठी दूर से ही नजर आती है. कोठी के सामने वीवीआईपी गेस्टहाउस है. बगल में लैरोटो स्कूल है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इतने सुरिक्षत इलाके में इस घटना से सभी के होश उड़ गए. वैसे भी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की हत्या एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है.

ऐसे में रेलवे में काम करने वाले ब्राह्मण जाति के एक बड़े अधिकारी के आवास में दिनदहाडे़ 2-2 हत्याएं होने से राजनीति गर्म हो गई. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने योगी सरकार में ब्राह्मण उत्पीड़न का मुद्दा उठा दिया. कांग्रेस नेता प्रिंयका गांधी ने महिलाओं के असुरक्षित होने का मुद्दा उठाया, जिस से योगी सरकार सकते में आ गई थी. आर.डी. बाजपेई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल के सूचना अफसर के पद पर तैनात हैं. अपने अफसर के परिवार में हुए हादसे को संज्ञान में लेते हुए खुद पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फोन कर पूरे मामले की जानकारी ली.

कुछ ही देर में लखनऊ से ले कर दिल्ली तक हड़कंप मच गया. लखनऊ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू है. पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने पूरे मामले की कमान स्वयं अपने हाथों में ले ली. लखनऊ पुलिस के सब से काबिल असफरों की टीम को इस मामले के खुलासे में लगाया दिया गया. उत्तर प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. डीसीपी (उत्तरी) शालिनी ने मामले में पूछताछ शुरू की. शनिवार-रविवार को उत्तर प्रदेश में 2 दिन का लौकडाउन होने के कारण दिल्ली से लखनऊ के बीच कोई हवाई सेवा नहीं थी. इस कारण आर.डी. बाजपेई को कार से सड़क मार्ग द्वारा लखनऊ के लिए निकलना पड़ा. पुलिस के लिए सब से अजीब बात यह थी कि कोठी के अंदर जाने के 4 रास्ते थे.

वहां आने और भागने का कोई सबूत पुलिस को नहीं दिख रहा था. घटना के समय घर में मां मालिनी, बेटा सर्वदत्त और बेटी दीपा ही मौजूद थी. उस समय दीपा बदहवास हालत में थी. घर के अंदर छानबीन से पुलिस को दीपा के बाथरूम में शीशे पर गोली चलने के निशान मिले. एक अलमारी खुली मिली. पर उस से कुछ गायब नहीं था. बाथरूम के अंदर शीशे पर खाने वाले जैम से ‘डिसक्वालीफाइड ह्यूमन’ लिखा था. उसी जगह पर गोली मारी गई थी, जिस से शीशा टूट गया था. वहां पास ही मेज पर .22 बोर की एक पिस्टल रखी मिली. इसे ले कर पुलिस का शक दीपा पर ही गहराने लगा.

पुलिस ने जब भी दीपा से बात करनी चाही, वह दीवार की तरफ देख कर ‘भूत…भूत…’ चिल्लाने लगती थी. दीपा ने अपने दोनों हाथ अपनी पैंट की जेब में डाल रखे थे. लग रहा था जैसे वह कुछ छिपाने का प्रयास कर रही हो. वह अंगरेजी में पुलिस को जो बता रही थी, उस का अर्थ यह था कि रेशू एक भूत है. वह कई दिनों से उस के सपने में आता है. उस ने ही कहा था कि ऐसा करो. इस के बाद उस ने पिस्टल निकाली और शीशे पर ‘डिसक्वालीफाइड ह्यूमन’ लिख कर गोली मार दी.

पुलिस ने जब दीपा से हाथ खोलने को कहा तो वह मना करने लगी. ऐसे में उस के नाना विजय मिश्रा की मदद से हाथ खोला गया तो हाथ में कटने के निशान मिले, जिसे पट्टी से बांधा गया था. उस के हाथ पर 50 से अधिक घाव के निशान थे. इन में से कुछ निशान ताजा थे. दीपा ने बताया, ‘‘यह काम उस ने किया है, यह काम कोई बड़ा नहीं है. दुनिया भर में लाखों लोग ऐसा करते हैं.’’

दीपा की बातों और उस के हावभाव से उस की हालत अच्छी नहीं लग रही थी. पुलिस को यह भी पता चला कि दीपा को डिप्रेशन की बीमारी है, जिस का इलाज भी चला था. ऐसे में पुलिस उस से ज्यादा पूछताछ करने लगी. पुलिस ने उस से पूछना शुरू किया कि उस ने हाथ कैसे और किस चीज से काटे?

इस पर दीपा ने पुलिस को माचिस की डिब्बी में रखा ब्लेड दिखाया. इस के बाद पुलिस को दीपा पर ही अपने भाई और मां को गोली मारने का शक गहराया. सारे सबूत दीपा की तरफ इशारा कर रहे थे. घटना के महज 4 घंटे के अंदर ही शाम के 7 बजे पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए दीपा को हत्या का आरोपी माना और उसे अपनी हिरासत में ले लिया. दीपा के नाबालिग होने के कारण उसे आगे की पूछताछ के लिए थाने के बजाय उस के घर में ही रखा गया. पुलिस ने दीपा को मानसिक रूप से बीमार मान कर बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पूछताछ शुरू की. मानसिक रोग के डाक्टर और काउंसलर से भी मदद ली गई.

शाम करीब 8 बजे दीपा के पिता आर.डी. बाजपेई जब दिल्ली से लखनऊ पहुंचे तो दीपा उन से लिपट कर रोने लगी. पिता के लिए यह बेहद मुश्किल समय था. वह पत्नी और बेटे के कत्ल के आरोप में अपनी ही बेटी को देख कर कुछ भी समझ पाने की हालत में नहीं थे. दीपा के लिए उन्होंने कितने सपने संजोए थे. वह उसे शूटिंग की दुनिया में नाम कमाते देखना चाहते थे. शूटिंग की शौकीन दीपा पदक जीतने की जगह अपने ही लोगों को निशाना बना देगी, किसी ने नहीं सोचा था. दीपा बहुत ही काबिल निशानेबाज थी. घरपरिवार ही नहीं, शूटिंग रेंज में उसे ट्रैनिंग देने वालों को भी यकीन था कि वह निशानेबाजी में बड़ा नाम कमाएगी. निशानेबाजी मंहगा खेल है, जिस में घरपरिवार का सहयोग ही नहीं आर्थिक रूप से सक्षम होना भी जरूरी होता है. दीपा के मामले में यह अच्छी बात थी. उस के पिता रेलवे के बड़े अधिकारी थे.

बेटी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए वह हर तरह की सुविधा जुटाने में सक्षम थे. आर.डी. बाजपेई का लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर हो गया था. वह जल्दी ही बेटी और परिवार को ले कर दिल्ली जाने वाले थे, जहां दीपा को शूटिंग की अच्छी ट्रेनिंग की सुविधा मिल जाती. लखनऊ में बेटी की अच्छी ट्रेनिंग हो सके, इस के लिए आर.डी. बाजपेई ने विवेकानंद मार्ग स्थित अपनी कोठी के पीछे 10 मीटर एयर पिस्टल की शूटिंग रेंज बनवा दी थी. दीपा केवल शूटिंग में ही अव्वल नहीं थी, उसे पेंटिंग, डांस और म्यूजिक का भी शौक था. 7वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान उस ने पेंटिग में बुक मार्क बनाने की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पुरस्कार हासिल किया था.

दीपा ने कुछ दिन शूटिंग की ट्रेनिंग दिल्ली के कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में की थी. वह अपनी मां मालिनी के ही साथ कार से दिल्ली आतीजाती थी. कभीकभी उस के पिता उसे छोड़ने आते थे. दीपा ने 10 साल की उम्र से शूटिंग करना शुरू किया था. 2 से 3 माह में ही वह राज्य स्तर की निशानेबाज बन गई थी. इस के बाद उस ने महाराष्ट्र और कोलकाता में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था. कई पदक जीते. दीपा शूटिंग में पश्चिम बंगाल की तरफ से खेलती थी. वह आसनसोल राइफल क्लब की मेंबर भी थी. बंगाल की राज्य निशानेबाजी प्रतियोगिता में उस ने कई पुरस्कार जीते थे. दीपा .22 की 25 मीटर स्पर्धा, 10 मीटर और 25 मीटर एयर राइफल में भी हिस्सा लेती थी.

22 की 25 मीटर स्पर्धा में जब दीपा ने राज्य स्तर पर चैंपियनशिप जीती और जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीता तो उसे अपना हथियार खरीदने का लाइसैंस मिल गया था. तभी पिता ने उस के लिए पिस्टल खरीद दी थी. दीपा को अंगरेजी उपन्यास पढ़ने का शौक था. कई बार वह खुद में गुमसुम सी दिखती थी. पिता के दिल्ली ट्रांसफर के समय स्कूल चल रहे थे. दीपा और उस का भाई सर्वदत्त बाजपेई स्कूल में पढ़ते थे. दीपा कक्षा 9 में थी और भाई कक्षा 12 में. बीच सत्र में दिल्ली में बच्चों के एडमिशन में दिक्कत आ रही थी, इस कारण आर.डी. बाजपेई ने सोचा था कि जुलाई से जब सत्र शुरू होगा, पत्नी और बच्चों को अपने पास दिल्ली बुला लेंगे.

इसी बीच कोविड 19 का संकट पूरे विश्व में छा गया. लौकडाउन हो जाने पर स्कूलकालेज बंद हो गए. दीपा भी अकेली पड़ गई थी. वैसे भी दीपा दोस्त कम बनाती थी. वह अपने आप में ही मस्त रहती थी. जैसेजैसे लौकडाउन खुल रहा था, घर में इस बात की खुशी थी कि जल्द ही सभी दिल्ली चले जाएंगे. घर में दिल्ली शिफ्ट होने की तैयारियां चल रही थीं. यह सोच रहा था. पर समय का चक्र किसी दूसरी दिशा में ही घूम रहा था, जिस का अंदाजा किसी को नहीं था. समय का तूफान अपनी गति से चल रहा था. घर में सभी लोग अपनेअपने सामान की पैकिंग करने लगे थे. दीपा ने भी अपने दोस्तों से अपने सामान की पैकिंग में मदद करने के लिए कहा था.

29 अगस्त, 2020 शनिवार को दीपा के पिता आर.डी. बाजपेई का जन्मदिन था. रात को ही परिवार ने फोन से बात कर के उन्हें बधाई दी थी. पत्नी मालिनी और दोनों बच्चों ने भी जन्मदिन की बधाई दी. आपस में तय हुआ कि आर.डी. बाजपेई शाम को दिल्ली में अपने जन्मदिन का केक काटेंगे और लखनऊ से घरपरिवार के लोग ‘हैप्पी बर्थडे’ का गीत गाएंगे. वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए बर्थडे पार्टी का पूरी थीम तैयार हो चुकी थी.

29 अगस्त की सुबह 9 बजे मालिनी ने अपनी बेटी दीपा और बेटे सर्वदत्त के साथ नाश्ता किया. इस के बाद दीपा अपने कमरे में चली गई. मालिनी और सर्वदत्त भी एक कमरे में ही बिस्तर पर सो गए. उस दिन शाम को बर्थडे पार्टी मनानी थी, लेकिन पार्टी मनाने की जगह दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जा रहे थे. हत्या का आरोप बेटी पर ही लगा, कोठी नंबर 9 में खुशियों की जगह मातम पसर गया. आर.डी. बाजपेई के लिए यह मुश्किल हो गया कि वह पत्नी और बेटे को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करें या बेटी को बचाने के लिए. आर.डी. बाजपेई व्यवहारकुशल और खुशदिल अफसरों में माने जाते हैं. वह उत्तर मध्य रेलवे जोन में सीपीआरओ के पद पर भी रह चुके हैं. बाजपेई 1998 बैच के आईआरटीएस अफसर हैं.

आगरा, मालदा, आसनसोल जगहों पर उन्होंने उच्च पदों पर काम किया. वह उत्तर रेलवे लखनऊ में सीनियर डीसीएम भी रहे. लखनऊ में ट्रै्रनिंग सेंटर के बाद वह रेलवे बोर्ड दिल्ली में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (इनफारमेशन) के पद पर काम कर रहे थे. उन की लोकप्रियता पूरे विभाग में थी. आर.डी. बाजपेई ने अपनी छवि के अनुकूल नाजुक हालत में भी बेहद समझदारी भरा फैसला लेते हुए बेटी का साथ देना स्वीकार किया. बेटी को दोष देने की जगह वह उस के डिप्रेशन को ही गुनहगार मान रहे थे. 30 अगस्त को जब पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने मालिनी और बेटे सर्वदत्त का शव अंतिम क्रिया के लिए उन्हें सौंपा तो कलेजे पर पत्थर रख कर उन्होंने उन का दाहसंस्कार किया.

इस के बाद भी वह बेटी को हत्यारा मानने को तैयार नहीं थे. लखनऊ पुलिस में आर.डी. बाजेपई ने अपनी पत्नी और बेटे की हत्या के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. उधर पुलिस ने दीपा को हत्या का आरोपी मान कर उसे इलाज के लिए लखनऊ मैडिकल कालेज में भरती कराया. यहां से डाक्टरों की राय पर उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया. पुलिस का दावा है कि दीपा मानसिक रूप से बीमार थी. उस का पहले इलाज भी चला था. लौकडाउन के समय उस ने भूतप्रेतों और अंधविश्वास के उपन्यास पढ़े, जिस से उस के मन में भूत की कहानियों ने घर बना लिया था, उसे लगता था कि उस के सपने में भूत आता है. वह जैसा कहता है, वह वैसा ही करती थी.

भूतप्रेत की कहानियां बच्चों के मन पर किस तरह से असर डालती हैं, लखनऊ का डबल मर्डर इस की मिसाल है. दीपा को लगता था कि रेशू नाम का भूत उस के सपने में आ कर उसे गाइड करता है. अपनी मां और भाई की हत्या के बाद भी दीपा कह रही थी कि ‘रेशू केम….एंड गाइड मी’. रेशू तो नहीं आया पर दीपा अपना सुनहरा भविष्य और अपनी मांभाई को हमेशा के लिए खो बैठी है. इस घटना से पता चलता है कि भूतप्रेत की बात करना और उन की उपस्थिति को मानना एक तरह से मानसिक बीमारी है. जब दीपा ने खुद अपने हाथ की नस काटनी शुरू की थी मानसिक बीमारी की वह खतरनाक अवस्था थी. उस समय अगर दीपा का उचित इलाज कराया गया होता तो अंत इतना खतरनाक नहीं होता.

—कहानी में नाबालिग दीपा की पहचान छिपाने के कारण उस का नाम बदला हुआ है.

 

Extramarital Affair : पत्‍नी के प्रेमी ने ही दुपट्टे से पति का गला घोंट डाला

Extramarital Affair : ड्राइवर नरेंद्र राठी शराब का इतना आदी हो गया था कि उस ने अपनी घरगृहस्थी की तरफ ध्यान नहीं दिया. इस का नतीजा यह हुआ कि उस की पत्नी पूजा राठी के पांव बहक गए. पूजा ने अपने प्रेमी अमन के साथ मिल कर ऐसी साजिश रची कि…

वह 10 जुलाई, 2020 का दिन था. दोपहर के 3 बज रहे थे. उत्तराखंड की योगनगरी ऋषिकेश के कोतवाल रीतेश शाह कोतवाली में ही थे. तभी एक महिला उन के पास पहुंची. महिला ने बताया, ‘‘सर, मैं गली नंबर 2, चंद्रशेखर नगर में रहती हूं और मेरा नाम कुसुम है. मेरा बेटा नरेंद्र राठी टैक्सी चलाता है. वह शादीशुदा है और उस के 2 बेटे हैं. वह पहली जुलाई को घर से निकला था, उस के बाद वह अभी तक नहीं लौटा है.’’

‘‘आप के बेटे की किसी से दुश्मनी तो नहीं थी?’ शाह ने पूछा

‘‘नहीं सर, उस की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, बल्कि वह तो अपने काम से काम रखता था.’’ कुसुम ने बताया.

‘‘तुम ने उसे कहांकहां तलाश किया है?’’ शाह ने पूछा.

‘‘सर पिछले 10 दिनों में मैं और मेरे रिश्तेदार नरेंद्र के दोस्तों और अपने सभी रिश्तेदारों के घर पर उसे तलाश कर चुके हैं, मगर हमें अभी तक उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. सर, मेरी आप से विनती है कि आप मेरे बेटे को तलाश करने में मेरी मदद करें.’’ कुसुम बोली.

इंसपेक्टर रीतेश शाह ने नरेंद्र राठी की गुमशुदगी दर्ज कर ली और जांच एसआई चिंतामणि को सौंप दी. एसआई चिंतामणि ने सब से पहले नरेंद्र राठी की पत्नी पूजा से पूछताछ की. इस के बाद उन्होंने नरेंद्र के पड़ोसियों से भी उस के बारे में जानकारी जुटाई. उन्हें पता चला कि नरेंद्र के अपनी पत्नी पूजा के साथ अच्छे संबंध नहीं थे. वह अकसर शराब पी कर उस से मारपीट करता था. इस के अलावा यह भी जानकारी मिली कि नरेंद्र की गैरमौजूदगी में उस के घर पर अमन नामक एक प्लंबर ठेकेदार अकसर आताजाता है.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने नरेंद्र के फोन को सर्विलांस पर लगा दिया. इस से पुलिस को जानकारी मिली कि नरेंद्र का मोबाइल 27 जून, 2020 से स्विच्ड औफ चल रहा था. इस बाबत पूजा ने बताया कि नरेंद्र का मोबाइल खराब हो गया है. उन्होंने सिम अपने पास रख कर मोबाइल को ठीक करने के लिए एक दुकानदार को दे रखा है. पुलिस के पास नरेंद्र तक पहुंचने का कोई जरिया नहीं था. पुलिस ने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उस के साथ कोई अप्रिय घटना हो गई हो और हत्यारे ने लाश गंगा नदी में बहा दी हो. इस आशंका को दूर करने के लिए एसएसआई ओमकांत भूषण ने जल पुलिस के साथ ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट से बैराज तक गंगा किनारे तलाश करवाई, मगर कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

अचानक 20 जुलाई, 2020 को नरेंद्र राठी की पत्नी पूजा राठी कोतवाली ऋषिकेश पहुंची. उस ने पुलिस को बताया कि 4 दिन पहले मेरे पति नरेंद्र राठी ने मुझे फोन कर के जान से मारने की धमकी दी थी. उस की धमकी के बाद मुझे बहुत डर लग रहा है. आप तुरंत उस के खिलाफ काररवाई करें. यह सुन कर पुलिस चौंकी. आखिर ऐसी कौन सी वजह है जो पति अपनी पत्नी को जान से मारने की धमकी दे रहा है. इस शिकायत से तो यही लग रहा था कि नरेंद्र जहां कहीं भी है, ठीकठाक है. इंसपेक्टर रीतेश शाह ने यह जानकारी एसपी (देहात) प्रमेंद्र डोवाल को दी. एसपी डोवाल ने एसएसआई को नरेंद्र राठी के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाने के निर्देश दिए ताकि उसकी लोकेशन पता चल सके.

एसएसआई ओमकांत भूषण ने तुरंत नरेंद्र राठी के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि नरेंद्र राठी के नंबर से 2 काल्स पूजा राठी को तथा 3 काल्स कुसुम राठी को की गई थीं. जिस वक्त ये काल्स की गई थी, उस समय उस के फोन की लोकेशन हरिद्वार की थी. इस के बाद उस का फोन स्विच्ड औफ हो गया था. जिस फोन से ये काल्स की गई थीं, पुलिस ने उस का आईएमईआई नंबर हासिल कर लिया था. जांच अधिकारी ने नरेंद्र की पत्नी पूजा के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी मिली.

पता चला कि जिस फोन का प्रयोग पूजा को धमकी देने के लिए किया गया था, उसी फोन में कोई दूसरा सिमकार्ड डाल कर पूजा से पहले काफीकाफी देर तक बातें हुई थीं. पुलिस ने इस की जांच की तो वह मोबाइल नंबर उसी ठेकेदार का निकला, जिस का पूजा के घर आनाजाना था. अब पूजा और अमन पुलिस के शक के दायरे में आ गए. पुलिस को संदेह हो गया कि नरेंद्र राठी की गुमशुदगी में कहीं न कहीं पूजा व अमन का हाथ है. इस के बाद पुलिस ने अमन व पूजा को पूछताछ के लिए कोतवाली बुलवाया. जानकारी मिलने पर सीओ भूपेंद्र सिंह धोनी व एसपी (देहात) प्रमेंद्र डोवाल भी वहां पहुंच गए थे. पुलिस ने पूजा व अमन से नरेंद्र के गायब होने के मामले में गहन पूछताछ शुरू की.

पहले तो दोनों पुलिस को इधरउधर की बातें कर के गच्चा देते रहे,  मगर जब दोनों से अलगअलग ले जा कर पूछताछ की गई, तो दोनों के बयान भिन्नभिन्न निकले. इसी के मद्देनजर जब पुलिस ने उन से सख्ती की तो वे टूट गए और दोनों ने पुलिस के सामने नरेंद्र की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उन्होंने उस की हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली—

पूजा उत्तराखंड के शहर ऋषिकेश के मोहल्ला चंद्रशेखर नगर, शीशम झाड़ी के रहने वाले संतोष की बेटी थी. रुढि़वादी विचारों वाले संतोष ने वर्ष 2002 में नरेंद्र राठी से पूजा का विवाह तब कर दिया था, जब वह मात्र 13 साल की थी. नरेंद्र ड्राइवर था. वह जब ससुराल पहुंची तो पता चला उस का पति शराबी है और कुसुम उस की सौतेली मां है. पूजा ने जब पति को समझाने की कोशिश की तो उस पर समझाने का कोई असर नहीं हुआ. पूजा जब भी शराब पीने का विरोध करती तो वह उस की पिटाई कर देता था. पूजा ने यह बात जब अपनी सौतेली सास कुसुम को बताई, तो उस ने भी इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया.

इसी तरह कलह के साथ समय गुजरता गया और पूजा 2 बेटों की मां बन गई. शराब पी कर नरेंद्र अकसर पूजा की पिटाई करता था. करीब एक साल पहले पूजा राठी का सिटी गेट, ऋषिकेश में एक ट्रक से एक्सीडेंट हो गया था. एक्सीडेंट के समय उधर से बापू ग्राम निवासी प्लंबर अमन जा रहा था. उस ने पूजा को तत्काल ऋषिकेश के एक अस्पताल में भरती कराया. खबर मिलने पर पूजा के घर वाले भी अस्पताल पहुंच गए. उन सभी ने अमन की बहुत तारीफ की. जब तक पूजा अस्पताल में रही, अमन ने ही उस की सब से ज्यादा देखभाल की. दोनों में लंबीलंबी बातें होने लगीं और बाद में दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे. उसी दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए.

जब अमन का नरेंद्र के घर में ज्यादा आनाजाना हुआ तो नरेंद्र को पत्नी पर संदेह हो गया. इस के बाद वह पूजा से ज्यादा मारपीट करने लगा था. रोजरोज की पिटाई से पूजा आजिज आ चुकी थी. इस बारे में उसने प्रेमी अमन से बात की. दोनों ने मिल कर नरेंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. वह पहली जुलाई, 2020 का दिन था. उस दिन शाम को ही पूजा ने अमन को अपने मकान में बुला कर छिपा दिया था. इस के बाद रात को उस ने दोनों बच्चों का छत पर सुला दिया और ठंडी हवा के लिए कूलर चला दिया था. कूलर तेज आवाज करता था. रात को जब नरेंद्र शराब के नशे में घर आया तो उस ने पहले पत्नी से आमलेट बनवा कर खाया और फिर सो गया.

इस के बाद अमन ने दुपट्टे का फंदा बना कर गहरी नींद में सोए नरेंद्र का गला घोंट दिया. इस दौरान पूजा उस के पैर पकड़े रही थी. जब दोनों को यकीन हो गया कि नरेंद्र मर चुका है, तो उन्होंने उस की लाश प्लास्टिक के एक सफेद बोरे में छिपा कर घर में रख दी. अगले दिन अमन 2 मजदूरों को घर में ले कर आया. इस के बाद अमन ने मजदूरों की मदद से टौयलेट की शीट उखड़वाई और शौचालय के गड्ढे में लाश सहित बोरे को डाल दिया. फिर अमन ने वहां पर नई टौयलेट शीट व नई टाइल्स लगवा कर शौचालय सही कर दिया था. उधर हफ्ता भर तक जब कुसुम को नरेंद्र नहीं दिखा तो उस ने कुसुम से नरेंद्र के बारे में पूछा. पूजा ने अपनी सास को बताया कि वह पहली जुलाई को गाड़ी ले कर गए थे, लेकिन अभी तक नहीं लौटे हैं.

नरेंद्र इतने दिनों तक जब कभी घर के बाहर रहता तो कुसुम को फोन जरूर कर दिया करता था. लेकिन इस बार उस ने कोई फोन नहीं किया, जिस से कुसुम को उस की चिंता हुई और उस ने इस की सूचना पुलिस को दे दी. नरेंद्र के बारे में खोजबीन करते हुए 8 दिन बीत गए लेकिन पुलिस को कोई जानकारी नहीं मिल रही थी. नरेंद्र की हत्या करने के बाद उस के मोबाइल का सिम पूजा ने अपने पास रख लिया था. खुद को इस अपराध से बचाने व पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए उन दोनों ने एक ऐसी योजना बनाई जिस से पुलिस को उन पर शक न हो तथा नरेंद्र की सौतेली मां को यह भ्रम रहे कि नरेंद्र अभी जिंदा है. योजना के अनुसार 18 जुलाई को अमन ने अपने मोबाइल में नरेंद्र का सिम डाला और हरिद्वार जा कर उसी मोबाइल से 2 बार पूजा को फोन किया तथा 3 मिस काल कुसुम के मोबाइल नंबर पर की थीं.

पुलिस ने पूजा राठी और अमन से पूछताछ के बाद इस केस में भादंवि की धाराएं 302, 201 तथा 34 और बढ़ा दीं. इस के बाद पुलिस उन्हें ले कर पूजा के घर पहुंची और उन की निशानदेही पर शौचालय के गड्ढे की खुदाई कराई. खुदाई में गड्ढे में नरेंद्र का सड़ागला शव पुलिस ने बरामद कर लिया, जिसे उन्होंने पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया. काररवाई पूरी करने के बाद एसएसआई ओमकांत भूषण ने अमन के कब्जे से वह मोबाइल भी बरामद कर लिया, जिस में उस ने नरेंद्र का सिमकार्ड डाल कर हरिद्वार से पूजा और कुसुम को काल की थीं. उस मोबाइल में नरेंद्र का ही सिम था.

अमन के पास से पुलिस ने 2 कागज भी बरामद किए थे, जिन में क्रमश: नरेंद्र व कुसुम के फोन नंबर लिखे थे. पूजा राठी और अमन से विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया.

पुलिस ने नरेंद्र राठी के शव का विसरा और डीएनए टेस्ट के सैंपल जांच के लिए एफएसएल देहरादून भिजवा दिए. कथा लिखे जाने तक एसएसआई ओमकांत भूषण द्वारा इस केस की विवेचना की जा रही थी.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

करनाल में खौफनाक वारदात : बेटे ने ड्रिल मशीन से मां बाप को मारा

Haryana Crime : एक बेटे ने इंसानियत की सभी हदें पार कर अपने ही मम्मीपापा की बेरहमी से हत्या कर दी. यह खबर जिस ने भी सुनी वह हैरान रह गया.

घटना हरियाणा (Haryana Crime) के करनाल जिले की है, जिस में एक बेटे ने प्रौपर्टी के लालच में आ कर अपने ही मम्मीपापा की ड्रिल मशीन से हत्या कर दी. बेटे ने ड्रिल मशीन से पाप के सिर और गले में सुराख कर दिए और जब इस खौफनाक मंजर को देख मम्मी चिल्लाई तो उस ने पहले मम्मी का गला दबाया और फिर ड्रिल मशीन से मम्मी के गले में भी सुराख कर दिया. मम्मी और पापा की हत्या करने के बाद उस ने दोनों लाशों को नहर में फेंक दिया.

तफ्तीश में हुआ खुलासा

पुलिस ने जब जांच की तो एक बड़ा खुलासा हुआ जिस में पता चला कि मम्मीपापा की हत्या करने से पहले बेटे क्राइम पेट्रोल और मर्डर की वैब सीरीज भी देखी थी. बेटे ने वैब सीरीज से कत्ल से ले कर बचने तक का उपाय तलाशा. हालांकि जब मम्मी इस के प्लान में शामिल नहीं हुई तो बेटे की सारी पोल खुल गई.

पुलिस तक कैसे पहुंचा मामला

हरियाणा (Haryana Crime) के करनाल जिले के गांव मेंकमालपुर रोड़ान में महेंद्र अपनी पत्नी राजबाला के साथ रहता था. 13 मार्च, से ले कर 15 मार्च, 2025 तक जब महेंद्र का घर बंद दिखा तो परिजनों को शक हुआ.

इस के बाद जब परिजनों ने दीवार पर चढ़ कर घर के अंदर देखा तो लोगों के रौंगटे खड़े हो गए. चारों तरफ खून फैला हुआ था. इस के तुरंत बाद ही पुलिस को सूचना दी गई.

पुलिस पहले तो इस मामले को लूट से जोड़ कर देख रही थी, लेकिन बाद में अंदर लाश को देख कर मामला उलझ गया. करनाल पुलिस जब जांच में लगी तो पाया कि पानीपत में 16 मार्च, 2025 को एक महिला की लाश मिली है. पुलिस को पता चला कि यह तो करनाल से गायब हुई राजबाला है.

इकबालिया बयान

बेटे हिम्मत ने पुलिस को बताया कि मैं और पापा कोर्ट में पेश हुए थे. कोर्ट में उस ने पापा को समझाने की कोशिश की, लेकिन पापा अपनी बात पर अड़े रहे. पापा ने मुझ से कहा कि मैं तुझे अपनी प्रौपर्टी में से बिलकुल हिस्सा नहीं दूंगा. इसी बात से नाराज हिम्मत ने तय कर लिया कि अब पापा को रास्ते से हटाना ही होगा.

कोर्ट से लौटने के बाद हिम्मत पेशी स्कूल चला गया और वहां से एक मिस्त्री के पास पहुंच कर एक ड्रिल मशीन ले आया. उस ने उस से कहा कि यह मशीन कल वापस कर दूंगा, आज कुछ काम है.

वारदात की रात

रात को हिम्मत दीवार फांद कर घर के अंदर घुस आया. उस ने देखा कि पापा फर्राटा पंखा लगा कर सोए हुए हैं. महेंद्र ने पंखे का तार हटाया और ड्रिल मशीन के तार बिजली बोर्ड के शाकेट में लगा दिए. इस के बाद पापा के पास जा कर उस ने पहले उन का मुंह दबाया जिस से वह चिल्ला न सकें. इस के बाद उस ने ड्रिल मशीन से पापा के सिर और गले में सुराख कर दिए.

ड्रिल मशीन की आवाज सुन कर मम्मी राजबाला की आंखें खुल गईं और जब वह कमरे में पहुंची तो देखा कि बेटे के हाथ में ड्रिल मशीन है और वह उसे अपने पापा के गले पर चला रहा है.

हैरान रह गई मां

यह सब देख राजबाला हैरान रह गई और जोर से चिल्लाने लगी. लेकिन हिम्मत ने मम्मी का मुंह दबा दिया, जिस से कि वह जोर से चिल्ला न सके. हिम्मत ने मम्मी से कहा कि मेरा पाप गंदा था इसलिए मैं ने उन का कत्ल कर दिया.

इसी बात को ले कर राजबाला जोरजोर से चिल्लाने लगी. इस से हिम्मत डर गया और सोचने लगा कि मम्मी ऐसे जोरजोर से चिल्लाएगी तो आसपड़ोस में सभी को पता चल जाएगा.

इस के बाद हिम्मत ने मम्मी का भी गला घोंट दिया और जब वह बेहोश हो गई, तो ड्रिल मशीन से उस के सिर में सुराख कर दिया.

हत्या के बाद

मम्मी और पापा की हत्या करने बाद हिम्मत ने घर का मेन गेट अंदर से खोला और बाहर खङी कार को ले आया. इस के बाद उस ने लाश को दरी में लपेट दिया.

कार को अंदर ला कर उस ने पहले कार में रजाई बिछा दी जिस से खून न टपके. इस के बाद कार में पापा महेंद्र की लाश को रखा और उस के ऊपर मम्मी की लाश को भी रख दिया.
इस के बाद हिम्मत ने घर के गेट पर ताला लगा दिया जिस से सभी को लगे कि पतिपत्नी घर से बाहर गए हुए हैं. फिर उस ने मम्मी और पाप की लाश नहर में ठिकाने लगा दीं.

साजिश में मम्मी को शामिल करना चाहता था हिम्मत

हिम्मत ने पापा का कत्ल करने से पहले क्राइम पैट्रोल और मर्डर से जुड़ी वैब सीरीज को देखा, जिस से कि वह पकड़ा न जाए. जब हिम्मत पापा का कत्ल करने के लिए गया, तब उस ने अपना मोबाइल किराए के मकान पर ही छोड़ दिया था ताकि उस की लोकेशन ट्रेस न हो.

कैसे पकड़ा गया कातिल बेटा

पुलिस ने जांच करते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू की. इसी दौरान हिम्मत घर के आसपास नजर आया, जिस से पुलिस को लगा कि कातिल बेटा ही है.

पुलिस ने जब हिम्मत से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. (Haryana Crime) खबर लिखे जाने तक आरोपी हिम्मत से पूछताछ जारी थी.पुलिस के द्वारा अभी और मां के कातिल बेटे से पूछताछ जारी थी. पुलिस महेंद्र की लाश वरामद नहीं कर पाई थी.

Crime Stories : इलैक्ट्रिक कटर मशीन से सालियों ने किए जीजा के 6 टुकड़े

Crime Stories : सीमा, प्रियंका और बबीता सगी बहनें थीं. तीनों की जिंदगी भी मजे से गुजर रही थी, इन की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं थी. लेकिन तीनों बहनों ने जो जघन्य अपराध किया उसे जान कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाते. और वजह सिर्फ यह थी कि तीनों बहनों में से एक बहन सीमा गौना कर के ससुराल न जा पाए…

इसी 11 अगस्त की बात है. सुबह के करीब 9 बजे थे. सूर्यनगरी के नाम से विख्यात राजस्थान के जोधपुर शहर में नांदड़ी गोशाला के पीछे नगर निगम की एक टीम सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की हौदी की सफाई कर रही थी. सफाई करते समय टीम को कचरे की एक थैली मिली. इस थैली में इंसान के कटे हुए 2 हाथ और 2 पैर थे. कटे हाथपैर मिलने से वहां काम कर रहे सफाई कर्मचारियों में दहशत फैल गई. सफाई कर्मियों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. सूचना मिलते ही बनाड़ थाना पुलिस वहां पहुंच गई. वहां प्लांट सुपरवाइजर पूनमचंद बाल्मीकि और औपरेटर पप्पू मंडल ने बताया कि प्लांट में जाने वाली हौदी की सफाई करते समय कपड़े की एक थैली निकली.

थैली में किसी इंसान के कटे हुए 2 हाथ और 2 पैर हैं. सफेदलाल रंग इस थैली पर भाग्य लक्ष्मी टेक्सटाइल, कपड़े के व्यापारी, आनंदपुर कालू, जिला पाली छपा हुआ है. इंसान के कटे हाथपैर मिलने का मामला गंभीर था. पुलिस टीम ने संबंधित जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी. इस पर जोधपुर के डीसीपी (ईस्ट) धर्मेंद्र सिंह यादव, एडीसीपी (ईस्ट) भागचंद, मंडोर एसीपी राजेंद्र दिवाकर, बनाड़ थानाधिकारी अशोक आंजना मौके पर पहुंच गए. कटे हाथपैरों का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने अंदाजा लगाया कि अंग किसी पुरुष के हैं, जिन्हें किसी धारदार कटर मशीन से काटा गया है. निस्संदेह किसी व्यक्ति की निर्दयता से हत्या कर उस के शरीर के टुकड़ेटुकड़े कर फेंके गए थे.

पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि मृतक का सिर और धड़ कहां है? क्योंकि केवल हाथपैरों से उस की शिनाख्त मुश्किल थी और बिना शिनाख्त के केस आगे नहीं बढ़ सकता था. इसलिए अधिकारियों ने डौग स्क्वायड और एफएसएल टीम को मौके पर बुला लिया, लेकिन पुलिस को तत्काल ऐसी कोई जानकारी नहीं मिल सकी, जिस से मृतक या कातिल के बारे में कुछ पता चल पाता. पुलिस ने कटे हुए हाथपैर एमजीएच अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिए. सब से पहले मृतक का सिर और धड़ मिलना जरूरी था. इस के लिए पुलिस ने आसपास के इलाकों और ट्रीटमेंट प्लांट हौदी से जुड़ी सीवरेज पाइप लाइनों में जेट मशीनों से धड़ व सिर की तलाश शुरू कराई.

इस के अलावा आसपास के जिलों में वायरलैस संदेश भेज कर गुमशुदा लोगों की जानकारी भी मांगी गई. पुलिस जांचपड़ताल में जुटी थी कि उसी दिन शाम करीब 4 बजे सूचना मिली कि ट्रीटमेंट प्लांट की सीवरेज लाइन में एक और थैली मिली है, जिस में कटा हुआ सिर है. इस पर पुलिस अधिकारी दोबारा प्लांट पर पहुंचे. जिस थैली में सिर मिला, उस पर नागौर जिले के मेड़ता सिटी की एक दुकान का पता छपा था. जरूरी जांच पड़ताल के बाद कटा सिर भी अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया. बनाड़ पुलिस थाने में एएसआई गोरधन राम की रिपोर्ट पर अज्ञात मुलजिमों के खिलाफ अज्ञात व्यक्ति की हत्या कर सबूत नष्ट करने का केस दर्ज कर लिया गया.

अपराध की गंभीरता को देखते हुए जांच पड़ताल के लिए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर एडीसीपी भागचंद के नेतृत्व में एसीपी राजेंद्र दिवाकर, बनाड़ थानाधिकारी अशोक आंजना और डांगियावास थानाधिकारी लीलाराम की टीम गठित की गई. धड़ की तलाश जरूरी थी. इस के लिए अधिकारियों ने सीवरेज प्लांट में आने वाले नाले में आधुनिक तकनीकी मशीनों से धड़ की तलाश शुरू कराई. उसी दिन रात को जोधपुर पुलिस को नागौर जिले से सूचना मिली कि चरणसिंह उर्फ सुशील चौधरी 10 अगस्त से लापता है. उस की गुमशुदगी का मामला मेड़ता सिटी थाने में दर्ज है. जोधपुर पुलिस ने चरणसिंह के फोटो मंगा कर सीवरेज लाइन में मिले कटे सिर के फोटो से मिलान किया, तो दोनों में समानता पाई गई.

जोधपुर पुलिस ने मेड़ता सिटी थाना पुलिस को सूचना भेज कर चरणसिंह के परिजनों को बुलाया. दूसरे दिन यानी 12 अगस्त को मिले कटे अंगों की शिनाख्त मेड़ता के खाखड़की गांव निवासी 27 वर्षीय चरणसिंह उर्फ सुशील जाट के रूप में हो गई. चरणसिंह के मामा के बेटे राजेंद्र गोलिया ने की. राजेंद्र गोलिया ने जोधपुर पुलिस को बताया कि 2 महीने पहले ही चरणसिंह राजस्थान सरकार के कृषि विभाग में सहायक कृषि अधिकारी के रूप में नियुक्त हुआ था. उस की पोस्टिंग नागौर जिले के डेगाना तहसील के खुडि़याला गांव में थी. चरणसिंह 10 अगस्त को घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा. मिलने लगे सुराग कटे हुए अंगों की शिनाख्त हो जाने से पुलिस को तहकीकात में कुछ मदद मिली. पुलिस ने चरणसिंह के परिजनों से जरूरी पूछताछ की ताकि कत्ल के कारण और कातिलों का पता लगाया जा सके.

पूछताछ में पता चला कि 2013 में चरणसिंह की शादी बोरूंदा निवासी पोकर राम जाट की बेटी सीमा से हुई थी, लेकिन अभी गौना (शादी के बाद की एक रस्म) नहीं हुआ था. इन दिनों उस के गौने की बात चल रही थी. यह भी सामने आया कि चरणसिंह के परिवार और उस की ससुराल वालों के बीच बोरूंदा स्थित एक चूना भट्ठे को ले कर कुछ विवाद था. दरअसल, चरणसिंह के पिता नेमाराम कई सालों से बोरूंदा में पोकर राम के चूना भट्ठे पर काम करते थे. बाद में चरणसिंह की शादी पोकरराम की बेटी सीमा से हो गई. कुछ साल पहले पोकर राम को लकवा आ गया था, तब नेमाराम ने चूना भट्ठे का सारा काम संभाल लिया था.

बाद में इस भट्टे के मालिकाना हक को ले कर नेमाराम और पोकर राम के बीच विवाद हो गया. नेमाराम अपने बेटे चरणसिंह का गौना करवाना चाहते थे, जबकि पोकर राम के परिवार वाले पहले भट्ठे का विवाद सुलझाना चाहते थे. एक तरफ पुलिस मामले की गहराई में जा कर हत्या के कारणों और हत्यारों की तलाश में जुटी थी, वहीं दूसरी तरफ सीवरेज प्लांट से जुड़े नालों और पाइप लाइनों में चरणसिंह के धड़ की तलाश की जा रही थी. इस बीच, जोधपुर पुलिस को सूचना मिली कि मेड़ता सिटी में पब्लिक पार्क के पास एक लावारिस मोटरसाइकिल खड़ी मिली है, जो चरणसिंह की है. पुलिस ने इस पब्लिक पार्क के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली.

इन फुटेज में 10 अगस्त की शाम करीब 4:50 बजे सलवारसूट पहने 2 युवतियां मोटर साइकिल खड़ी करती नजर आईं. चरणसिंह की बाइक पर सवार हो कर आई 2 युवतियों से पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्या की कडि़यां उस की ससुराल से जुड़ी हो सकती हैं. अब पुलिस ने अपनी जांच का फोकस मानव अंग मिलने वाले जोधपुर के नांदड़ी इलाके के साथसाथ मेड़ता और बोरूंदा पर केंद्रिंत कर दिया. इस में साइबर टीम के जरिए तकनीकी जानकारियां भी जुटाई गईं. 3 सगी बहनों के नाम आए सामने पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए चरणसिंह की पत्नी के अलावा 2 सालियों, एक साले और चूना भट्टे से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की.

गहन पूछताछ और जांच पड़ताल कर जरूरी सबूत जुटाने के बाद जोधपुर पुलिस ने 13 अगस्त को सहायक कृषि अधिकारी चरणसिंह उर्फ सुशील चौधरी की हत्या के मामले में उस की 23 वर्षीय पत्नी सीमा के अलावा 2 बड़ी सालियों 25 वर्षीया प्रियंका और 27 वर्षीया बबीता के साथ प्रियंका के बौयफ्रैंड भींयाराम जाट को गिरफ्तार कर लिया. भींया राम खींवसर थाना इलाके के गांव कांटिया का रहने वाला था जबकि तीनों बहनें सीमा, प्रियंका और बबीता बोरूंदा के डांगों की ढाणियों की रहने वाली थी. ये तीनों बहनें शादीशुदा थीं. पोकर राम जाट की इन तीनों बेटियों में सीमा का अभी गौना नहीं हुआ था. तीनों बहनों और भींयाराम की निशानदेही पर पुलिस ने उसी दिन शाम को मंडोर 9 मील इलाके में नाले की तलाशी करवाकर चरणसिंह का धड़ भी बरामद कर लिया.

पुलिस की पूछताछ में चरणसिंह की नृशंस हत्या के लिए राक्षसी बनीं तीनों सगी बहनों की सामने आई कहानी में फिल्मों की तरह थ्रिल भी था और सस्पेंस भी. इस में प्यार भी था और नफरत भी. कुल जमा 5 किरदारों की कहानी थी यह. ये किरदार थे पति चरणसिंह, उस की पत्नी सीमा, साली प्रियंका और बबीता. साथ ही प्रियंका से 15 साल बड़ा उस का बौयफ्रैंड भींयाराम. इसे कथा कहानी पटकथा कुछ भी कहें, इस में आजाद ख्याल तीनों बहनों की महत्वाकांक्षाएं शामिल थीं. अपनी इच्छा से आजाद जीवन जीने के लिए तीनों बहनों ने ऐसा खूनी खेल खेला, जिस के बारे में चरणसिंह तो क्या कोई भी सोच तक नहीं सकता था कि उस की पत्नी और सालियां ऐसी नृशंसता करेंगी. हत्या की आरोपी तीनों बहनों और भींयाराम से पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

बोरूंदा के डांगों के रहने वाले पोकर राम की 7 बेटियां हैं और एक बेटा. पोकर राम का बोरूंदा में चूना भट्टा था. इस से उस की ठीकठाक कमाई हो जाती थी. इसी कमाई से उस ने एकएक कर 7 बेटियों की शादी कर दी थी. इन में 4 बेटियां अपने ससुराल में पति और बच्चों के साथ सुखी हैं. बाकी रह गई 3 बेटियां सीमा, प्रियंका और बबीता. इन तीनों की भी शादी हो चुकी थी. इन में बबीता और प्रियंका ने अपनेअपने पति को छोड़ दिया था. सीमा सब से छोटी थी. उस की शादी 2013 में नागौर जिले के मेड़ता सिटी निवासी नेमाराम जाट के बेटे चरणसिंह उर्फ सुशील से हुई थी, लेकिन गौना नहीं होने के कारण सीमा अभी तक ससुराल नहीं गई थी.

तीनों बहनें पढ़ीलिखी थीं. सीमा वेटनरी (पशुपालन) सहायक थी. बबीता ने एएनएम (नर्सिंग) का कोर्स कर रखा था, लेकिन अभी उसे सरकारी नौकरी नहीं मिली थी. वह पटवारी भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रही थी. प्रियंका भी स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर चुकी थी. वह एक मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनी से जुड़ी हुई थी और सौंदर्य व स्वास्थ्य संबंधी प्रसाधन सामग्री औनलाइन मंगा कर बेचने का काम करती थी. नागौर जिले के खींवसर थाना इलाके के कांटिया गांव का रहने वाला भींयाराम प्रियंका के साथ काम करता था. इसीलिए प्रियंका और भींयाराम की दोस्ती थी. भींयाराम पूर्व फौजी था. हालांकि वह प्रियंका से 15 साल बड़ा था, फिर भी दोनों में दोस्ती थी. प्रियंका और बबीता पतियों से अलग होने के बाद जोधपुर शहर के नांदड़ी इलाके में किराए पर रहती थीं. हालांकि इस बीच बबीता का रिश्ता दूसरी जगह तय हो गया था.

अगर चरणसिंह की बात करें तो वह प्रतिभाशाली युवक था. 10वीं और 12वीं की परीक्षा में मेरिट हासिल करने के बाद उस ने बीएससी की पढ़ाई की थी. इसी दौरान उस की शादी सीमा से हो गई थी. बाद में चरणसिंह ने जोधपुर के मंडोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में एसआरएफ के रूप में काम किया. इसी दौरान चरणसिंह अच्छी नौकरी हासिल करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं देता रहा. इसी के चलते उस का चयन बैंक अधिकारी के रूप में हो गया. उसे पहली नियुक्ति उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मिली. करीब 10-12 महीने काम करने के दौरान चरणसिंह का चयन राजस्थान के कृषि विभाग में सहायक कृषि अधिकारी के रूप में हो गया. इसी साल 23 मई को उस ने नौकरी ज्वाइन की थी.

चरणसिंह की शादी हुए 7 साल हो चुके थे. उस की उम्र भी 27 साल हो गई थी. साथ ही अच्छी सरकारी नौकरी भी मिल गई थी, लेकिन विवाहित होने के बावजूद वह पत्नी सुख से वंचित था. चरणसिंह के परिवार वाले काफी दिनों से सीमा का गौना कराने का दबाव डाल रहे थे, लेकिन सीमा के कहने पर उस के परिजन हर बार टाल जाते थे जबकि सीमा भी 23 साल की हो चुकी थी. चूंकि सीमा पत्नी थी, इसलिए चरणसिंह कई बार उस से मोबाइल पर बात कर लेता था. सीमा वैसे तो हंसहंस कर प्यार की बातें करती थी, लेकिन गौने के नाम पर भड़क जाती थी. चरणसिंह हंसमुख, स्मार्ट, सरकारी अधिकारी था, फिर भी पता नहीं किन कारणों से सीमा उसे पसंद नहीं करती थी. कहा जाता है कि वह समलैंगिंक थी. उस के किसी महिला से संबंध थे. वह पुरुषों से दूर रहना पसंद करती थी. इसीलिए वह गौना करा कर ससुराल नहीं जाना चाहती थी.

आरोप है कि सीमा के व्यवहार से परेशान चरणसिंह अपनी बड़ी साली प्रियंका से फ्लर्ट करता था. प्रियंका जीजासाली के रिश्ते को देखते हुए इस का विरोध नहीं कर पाती थी, लेकिन वह चरणसिंह की बातों से परेशान जरूर हो जाती थी. षडयंत्र ऐसा कि पुलिस भी चकरा गई कुछ दिन पहले जब चरणसिंह के परिवार की ओर से गौने का ज्यादा दबाव पड़ा, तो सीमा ने अपनी दोनों बड़ी बहनों प्रियंका और बबीता से कहा कि वह आत्महत्या कर लेगी लेकिन चरणसिंह के साथ नहीं जाएगी. इस पर बबीता और प्रियंका ने उस से कहा कि उसे आत्महत्या करने की जरूरत नहीं है, हम मिल कर उसे ही निपटा देंगे, जिस से तू परेशान है.

इस के बाद तीनों बहनें चरणसिंह की हत्या की साजिश रचने लगी. काफी सोचविचार के बाद उन्होंने अपनी योजना को अंतिम रूप दे दिया. चरणसिंह की हत्या को अंजाम देने के लिए उन्होंने बाजार से इलैक्ट्रिक ग्राइंडर कटर मशीन खरीदी. यह मशीन जोधपुर में प्रियंका व बबीता के मकान पर रख दी गई. योजना के तहत सीमा ने फोन कर चरणसिंह को 10 अगस्त को जोधपुर बुलाया. चरणसिंह उसी दिन अपनी मोटर साइकिल से जोधपुर पहुंच गया. सीमा उसे इंतजार करती मिली. वह चरणसिंह की मोटर साइकिल पर बैठ कर उसे अपनी दोनों बहनों के मकान पर नांदड़ी ले गई. वहां सीमा, प्रियंका व बबीता ने कुछ देर तो इधरउधर की बातें की, फिर चरणसिंह को शराब पिलाई. बाद में कोल्डड्रिंक में नींद की गोलियां मिला कर उसे पिला दी गईं.

कुछ ही देर में चरणसिंह अचेत हो गया, तो उसे एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया गया ताकि उस के होश में आने की कोई गुंजाइश ही न रहे. बाद में तीनों बहनों ने उसे गला दबा कर उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया. इस के बाद तीनों ने इलैक्ट्रिक ग्राइंडर कटर मशीन से चरणसिंह के शव को 6 टुकड़ों में काटा. इन टुकड़ों को 3 थैलियों में भर दिया गया. शव के टुकड़े करने के दौरान फर्श पर फैले खून को साफ करने के लिए पूरे घर को धो दिया गया. इस सब के बाद तीनों बहनें मकान पर ताला लगा कर चरणसिंह की मोटर साइकिल से बोरूंदा पहुंची. वहां सीमा को उतार दिया गया. फिर प्रियंका और बबीता उसी मोटर साइकिल से मेड़ता सिटी गईं. वहां इन दोनों ने पब्लिक पार्क के बाहर चरणसिंह की मोटर साइकिल खड़ी कर दी.

मेड़ता सिटी से दोनों बहनें बस से जोधपुर आ गईं. इन बहनों के पास केवल एक स्कूटी थी. जिस पर शव के टुकड़ों को ले जा कर ठिकाने लगाना जोखिम भरा काम था. इसलिए प्रियंका ने अपने बौयफ्रैंड भींयाराम को फोन कर के जरूरी काम होने की बात कह कर बुलाया. भींयाराम 10 अगस्त की रात कार ले कर उन के मकान पर पहुंचा, तो प्रियंका और बबीता ने उसे चरणसिंह की हत्या कर टुकड़े थैलियों में भर कर रखने की बात बताई. साथ ही उस से उन्हें ठिकाने लगाने में मदद मांगी. भींयाराम ने इस काम में उन का साथ देने से इनकार कर दिया, तो प्रियंका व बबीता ने कहा कि अगर वह साथ नहीं देगा, तो तीनों बहनें सुसाइड कर लेंगी और सुसाइड नोट में मौत का जिम्मेदार उसे बता देंगी.

डरासहमा भींयाराम आखिर उन का साथ देने को राजी हो गया. उस ने तीनो थैलियां अपनी कार की पिछली सीट पर रखीं. दोनों बहनें आगे की सीट पर बैठ गईं. इन्होंने चरणसिंह के कटे हाथपैर और सिर वाली 2 थैलियां नांदड़ी में अपने घर से करीब 100 मीटर दूर सीवरेज लाइन में डाल दीं. धड़ वाली तीसरी थैली इन्होंने रातानाड़ा पुलिस लाइन के पीछे नाले में डालने की सोची, लेकिन वहां पुलिस का नाका देख कर वे लोग नागौर रोड़ की तरफ निकल गए, वहां नाले में तीसरी थैली फेंक दी. इस के बाद तीनों नांदड़ी आ गए. प्रियंका ने रात को डर लगने की बात कह कर भीयाराम को रोकने की कोशश की, लेकिन उस ने रुकने से इनकार कर दिया और अपने घर चला गया. हाथपैर व सिर वाली 2 थैलियां 11 अगस्त को नांदड़ी गोशाला के पीछे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की हौदी की सफाई के दौरान मिली थी. चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 13 अगस्त को उन की निशानदेही पर धड़ वाली थैली बरामद की गई.

पुलिस ने 14 अगस्त को जोधपुर के एमजीएच अस्पताल में 5 डाक्टरों के मेडिकल बोर्ड से शव के 6 टुकड़ों का पोस्टमार्टम कराया. डाक्टरों की टीम ने शव के सभी 6 टुकड़ों के डीएनए सैंपल लिए ताकि पुष्टि हो सके कि ये एक ही व्यक्ति के थे. तीनों बहनें इतनी शातिर निकली कि जब चरणसिंह के लापता होने और मेड़ता सिटी थाने में गुमशुदगी दर्ज होने की खबरें सोशल मीडिया पर चलने लगीं, तो उन्होंने चरणसिंह के रिश्तेदारों को फोन कर पूछा कि वे कहां गायब हो गए? पुलिस ने 12 अगस्त को जब तीनों बहनों से अलगअलग पूछताछ की, तो वे पूरे आत्मविश्वास से पुलिस को छकाती रहीं और चरणसिंह की हत्या में अपना हाथ होने से इनकार करती रहीं.

बाद में पुलिस ने भींयाराम को भी हिरासत में ले लिया और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य कई सबूत उन के सामने रख कर पूछताछ की, तो वे टूट गईं और चरणसिंह की हत्या कर उस के शव के टुकड़े कर सीवरेज के नालों में फेंकने की बात स्वीकार कर ली. इस के बाद 13 अगस्त को चारों को गिरफ्तार कर लिया गया. पति चरणसिंह से नफरत करने वाली सीमा ने अपनी आजादी और शौक पूरे करने के लिए उसे मौत के घाट उतार कर खुद के साथ अपनी 2 बड़ी बहनों और एक बहन के दोस्त का जीवन बरबाद कर दिया. अपने पतियों की ना हो सकी तीनों बहनों ने पिता पोकर राम को बुढ़ापे में ऐसा दर्द दिया है कि वह जीते जी उसे सालता रहेगा.

(कहानी पुलिस सूत्रों और विभिन्न रिपोर्ट्स पर आधारित)

नोट-पुलिस ने सीमा के समलैंगिक संबंधों की पुष्टि की है, समाचार पत्रों में भी सीमा के समलैंगिक होने की बात छपी है.

 

Emotional Story : मशहूर टिकटॉक स्टार ने जिंदगी से हताश होकर कर लिया सुसाइड

Emotional Story : तमाम लोगों के लिए टिकटौक न सिर्फ प्रतिभा दिखाने का प्लेटफार्म था बल्कि आय का स्रोत भी बन चुका था. इस पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार को चाहिए कि वह टिकटौक की तरह कोई दूसरा सोशल ऐप विकसित करे, जिस से लोगों को टिकटौक पर प्रतिबंध लगाने की कमी महसूस न हो.

कहते हैं जब इंसान जिंदगी से हताश और हर ओर से निराश हो जाता है तो वो मौत को गले लगाने की सोचने लगता है. सिया कक्कड़ ने कम उम्र में शोहरत और दौलत कमाने की उन ऊंचाइयों को छू लिया था, जहां तक कम लोग ही पहुंच पाते हैं. दिल्ली के गीता कालोनी इलाके की रहने वाली 16 साल की सिया कक्कड़ ने 24 जून, 2020 को अपने घर में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. सिया कक्कड़ वह लड़की थी, जिस ने कम उम्र में टिकटौक के कारण न सिर्फ शोहरत बटोरी थी बल्कि हर महीने कम से कम एकडेढ़ लाख रुपए कमा लेती थी. सिया कक्कड़ ने जिस दिन खुदकुशी की उस से एक दिन पहले ही 23 जून को टिकटौक पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिस के बाद परिजनों ने देखा कि वह बेहद खुश नजर आ रही है.

उसी रात को सिया की अपने मैनेजर अर्जुन सरीन से भी एक गाने के सिलसिले में बात हुई थी. उस समय वह अच्छे मूड में और एकदम नौर्मल थी. अर्जुन को भी समझ नहीं आया कि आखिर क्या हुआ, जिस की वजह से सिया ने आत्मघाती कदम उठाया. सिया ने 20 घंटे पहले ही इंस्टाग्राम पर टिकटौक के अपने डांस की वीडियो स्टोरी पोस्ट की थी. इंस्टाग्राम पर उस ने जो स्टोरी अपलोड की थी, उस में सिया ने टिकटौक के लिए फेमस पंजाबी रैप सिंगर बोहेमिया के गाने पर अपने डांस का वीडियो बनाया था. सिया की उस पोस्ट को देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वह किसी तनाव या परेशानी से जूझ रही थी. सिया कक्कड़ ने मरने से पहले कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था, इसलिए उस की खुदकुशी की जांच करने वाली प्रीत विहार थाने की पुलिस को तत्काल उस की आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिया के शरीर पर किसी तरह की भी चोट के निशान नहीं पाए गए और यह भी साफ हो गया कि उस की मौत गले में पड़े फंदे के कारण दम घुटने से ही हुई. हालांकि पुलिस ने सिया के कमरे से उस का मोबाइल, लैपटौप और कुछ दस्तावेज जांच के लिए कब्जे में जरूर लिए लेकिन उस से कोई ज्यादा मदद नहीं मिल सकी. टिकटौक वीडियो से सिया ने सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी थी. लोग उसे काफी पसंद करते थे. वह करीब 3 साल से वीडियो बना कर टिकटौक पर अपलोड करती थी और लाखों रुपए कमा रही थी. इंस्टाग्राम पर उसे 91 हजार लोग फौलो करते थे. टिकटौक पर सिया के 1.1 मिलियन फौलोअर्स थे. टिकटौक व इंस्टाग्राम के अलावा सिया, स्नैपचैट और यूट्यूब पर भी सक्रिय थी.

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी था कि आखिर सिया कक्कड़ ने खुदकुशी क्यों की? पुलिस ने इस मामले के हर बिंदु पर गहराई से पड़ताल की तो लगा कि लौकडाउन की वजह से कुछ महीनों से घर में थी और पिछले कुछ दिन से भविष्य को ले कर डिप्रेशन में थी. लेकिन इतनी कम उम्र में शोहरत और पैसा कमाने वाली सिया इस तरह दुनिया छोड़ जाएगी, किसी ने सोचा भी नहीं था. सिया को जानने वाले उस के दोस्तों का कहना है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से सिया काफी उदास रहने लगी थी. परिवार वालों को भी उस के डिप्रेशन में होने के बारे में पता चल गया था. क्योंकि उस के दादा और पिता पेशे से डाक्टर हैं, इसलिए सिया के डिप्रेशन को भांपना उन के लिए मुश्किल नहीं था. लेकिन उन्हें इस बात का एहसास बिलकुल भी नहीं था कि सिया डिप्रेशन के चलते इतना बड़ा कदम उठा लेगी.

दरअसल अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उस के मुताबिक सिया कक्कड़ भारत में टिकटौक पर बैन लगने के बाद से ज्यादा डिप्रेशन में थी, क्योंकि टिकटौक के जरिए पैसा कमाना और कैरियर बनाने को उस ने अपना लक्ष्य बना लिया था. अचानक हुए बैन से उस के मन में अपने भविष्य को ले कर इतना अवसाद भर गया कि उस ने मौत को गले लगा लिया. यहां यह बताना जरूरी है कि भारत और चीन के बीच लगातार चल रहे सीमा विवाद और सैन्य झड़प के बाद भारत सरकार ने टिकटौक समेत 59 चाइनीज ऐप को भारत में प्रतिबंधित कर दिया था. लेकिन इस में सब से ज्यादा लोकप्रिय टिकटौक ऐप था, जो न सिर्फ इस के यूजर्स को शोहरत दिलाता था बल्कि उन की कमाई का भी जरिया बन गया था.

सिया कक्कड़ की तरह ही कुछ रोज बाद मेरठ के पल्लवपुरम स्थित ग्रीन पार्क में रहने वाली टिकटौक की एक और स्टार संध्या चौहान ने डिप्रेशन के कारण फांसी लगा कर अपनी जान दे दी. एक पुलिस सबइंस्पेक्टर की 22 साल की बेटी संध्या चौहान दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी. लौकडाउन होने की वजह से वह अपने घर आई हुई थी, उस ने 6 जुलाई, 2020 को खुदकुशी का कदम उठाया. संध्या के पास से भी पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला. लेकिन परिजनों ने जो बताया, उस के मुताबिक संध्या पिछले 2-3 महीने से डिप्रेशन में थी और उदास रहती थी. पुलिस ने संध्या का फोन जब्त करने के साथ उस के टिकटौक एकाउंट की जो छानबीन की, उस से इस बात की संभावना ज्यादा है कि संध्या अचानक भारत में टिकटौक बैन होने से अपसेट थी.

टिकटौक का बैन होना उन कलाकारों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ जिन्होंने इसे अपनी कमाई और कैरियर का जरिया बनाने का मन बना लिया था. ऐसे में अपना सपना टूटता देख उन्हें सदमा लगा. सिया कक्कड़ हो या संध्या चौहान, ऐसी तमाम किशोरियां जो टिकटौक पर वीडियो अपलोड कर के शोहरत और पैसा कमाने की हसरत रखती थीं, उन के लिए टिकटौक पर बैन मानो किसी हसीन सपने के टूट जाने जैसा था. इसलिए टिकटौक के दूसरे साइड इफैक्ट को जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर टिकटौक क्या बला है जो युवा पीढ़ी इस पर बैन लगने के बाद अवसाद में घिरती जा रही है.

टिकटौक आखिर क्या है?  टिकटौक एक सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन है, जिस के जरिए स्मार्टफोन यूजर छोटेछोटे वीडियो (15 सेकेंड तक के) बना और शेयर कर सकते हैं. इस के स्वामित्व वाली कंपनी बाइट डांस है जिस ने सितंबर, 2016 में चीन में टिकटौक लौंच किया था. साल 2018 में टिकटौक की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी और अक्तूबर 2018 में यह अमरीका में सब से ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया. गूगल प्ले स्टोर पर टिकटौक का परिचय शार्ट वीडियो फौर यू (आप के लिए छोटे वीडियो) कह कर दिया गया है.

टिकटौक मोबाइल से छोटेछोटे वीडियो बनाने में बनावटीपन नहीं है, ये रियल है और इस की कोई सीमाएं नहीं हैं. चाहे आप सुबह ब्रश कर रहे हों या नाश्ता बना रहे हों, आप जो भी कर रहे हों, जहां भी हों, टिकटौक पर आइए और 15 सेकेंड में दुनिया को अपनी कहानी बताइए. टिकटौक के साथ आप की जिंदगी और मजेदार हो जाती है. आप जिंदगी का हर पल जीते हैं और हर वक्त कुछ नया तलाशते हैं. आप अपने वीडियो को स्पेशल इफैक्ट फिल्टर, ब्यूटी इफैक्ट, मजेदार इमोजी स्टिकर और म्यूजिक के साथ एक नया रंग दे सकते हैं.

शोहरत और कमाई का जरिया बन गया टिकटौक भारत में टिकटौक के डाउनलोड का आंकड़ा 10 करोड़ से ज्यादा है. एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार इसे हर महीने लगभग 2 करोड़ भारतीय इस्तेमाल करते हैं. भारतीयों में टिकटौक की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 80 लाख लोगों ने गूगल प्ले स्टोर पर इस का रिव्यू किया है. दिलचस्प बात यह है कि टिकटौक इस्तेमाल करने वालों में एक बड़ी संख्या गांवों और छोटे शहरों के लोगों की है. इस से भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह भी है कि टिकटौक की दीवानगी 7-8 साल की उम्र के छोटेछोटे बच्चों तक के सिर चढ़ कर बोल रही थी.

इतना ही नहीं, लोकप्रियता के कारण अब यह इतना पसंद किया जाने लगा था कि श्रद्धा कपूर, टाइगर श्रौफ और नेहा कक्कड़ जैसे अधिकांश बौलीवुड सितारे भी टिकटौक पर आ गए थे. अब जरा जान लेते हैं कि टिकटौक की क्या खास बातें हैं. टिकटौक से वीडियो बनाते वक्त आप अपनी आवाज का इस्तेमाल नहीं कर सकते. आप को लिप सिंक करना होता है. जहां फेसबुक और ट्विटर पर ब्लू टिक पाने यानी अपना अकाउंट वेरिफाई कराने के लिए आम लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं टिकटौक पर वेरिफाइड अकाउंट वाले यूजर्स की संख्या बहुत बड़ी है.

इस में ब्लू टिक नहीं बल्कि औरेंज टिक मिलता है. जिन लोगों को औरेंज टिक मिलता है, उन के अकाउंट में पौपुलर क्रिएटर लिखा दिखाई पड़ता है. साथ ही अकाउंट देखने से यह भी पता चलता है कि यूजर को कितने दिल मिले हैं, यानी अब तक कितने लोगों ने उसके वीडियो पसंद किए हैं. गांव से ले कर खेत खलिहान तक पहुंच टिकटौक की लोकप्रियता का अहम कारण यह था कि गांव से ले कर छोटे शहरों में रहने वाले प्रतिभाशाली गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए यह प्लेटफौर्म बौलीवुड के समानांतर बन कर उभरा था जो उन्हें न केवल शोहरत दिलाता था, बल्कि उन की कमाई का जरिया भी बन गया था. गांव, कस्बे से ले कर छोटे शहरों तक के लोग टिकटौक के चलते फेमस ही नहीं हुए, बल्कि लाखों रुपए महीना कमाने भी लगे थे.

उन लोगों के लिए टिकटौक अपनी प्रतिभा दिखाने को बड़ा जरिया बन चुका था, जो सिनेमा के सुनहरे परदे पर अपना हुनर दिखाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिलता. मसलन अगर कोई अच्छी कौमेडी करता है या अच्छा डांस करता है तो उस के लिए टिकटौक अपनी प्रतिभा को दिखाने का अच्छा मंच था. ऐसे बहुत से प्रतिभाशाली लोग इस के जरिए खूब पैसे भी कमा रहे थे. हरियाणा जैसे छोटे राज्य के रहने वाले एक ग्रामीण मजदूर साहिल के टिकटौक पर 3,03,200 फालोअर थे. उसे अपने वीडियो के जरिए हर महीने 3,000-5,000 रुपए तक मिल जाते थे, जो साहिल के लिए बड़ी रकम थी. लेकिन साहिल इस कोशिश में था कि उन का अकाउंट वेरिफाई हो जाए और उस के फौलोअर्स 10 लाख तक पहुंच जाएं. लेकिन इसी दौरान भारत सरकार ने टिकटौक पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया.

लेकिन सिया कक्कड़ और संध्या चौहान की तरह हर कोई डिप्रेशन में नहीं गया. कुछ ऐसे भी स्टार हैं जिन्होंने टिकटौक से बतौर कलाकार अपनी पहचान बनाने के बाद अपनी तरक्की के लिए दूसरे दरवाजे तलाश कर लिए. समीक्षा सूद भी एक ऐसा ही नाम है. प्रोफैशनल मौडल और टीवी एक्ट्रैस बन चुकी समीक्षा सूद टिकटौक पर बेहतरीन वीडियो क्लिप और कौमेडी के जरिए अपनी खास पहचान रखती थी. उन्होंने टीवी सीरियल बाल वीर में अपने एक्टिंग के जौहर दिखाए हैं. टिकटौक पर उन के कुल सवा करोड़ फौलोअर्स हैं. जबकि इंस्टाग्राम पर उन के फौलोअर्स की संख्या 0.2 करोड़ है. वह हर महीने 8 से 10 लाख रुपए भी कमाती थीं. रानो निक नाम से टिकटौक पर पहचान बनाने वाली समीक्षा आज एक जानीमानी मौडल, फैशन ब्लौगर, यूट्यूबर और टिकटौक स्टार हैं.

इन दिनों वह कई टेलीविजन धारावाहिकों और विज्ञापनों में काम कर रही हैं. लेकिन समीक्षा सूद टिकटौक के बैन होने से निराश नहीं हैं क्योंकि उन्होंने पहचान बनाने के अब बहुत से रास्ते तलाश लिए हैं. दरअसल, टिकटौक ऐसा प्लेटफौर्म है, जहां कई आम यूजर्स ने बौलीवुड सेलेब्स से भी ज्यादा फैन फौलोइंग बना रखी है. कई ऐसे यूजर्स हैं, जिन के फौलोअर्स करोड़ों में हैं और उन के लाइक्स की संख्या अरबों में पहुंच गई है. वे हर माह लाखों रुपए कमाते थे. ऐसे में उन के लिए टिकटौक का भारत में बैन हो जाना किसी सदमे से कम नहीं है. लेकिन टिकटौक की इन सेलिब्रिटीज को अब इतनी पहचान मिल चुकी है कि बतौर कलाकार खुद को स्थापित करने में उन्हें ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

सिर्फ फायदे नहीं, खतरे भी हैं भले ही टिकटौक पर अब प्रतिबंध लगा हो लेकिन अश्लील वीडियो के कारण टिकटौक पर बैन लगाने की मांग कई बार उठ चुकी थी. अलगअलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में वीडियो ऐप टिकटौक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा चुकी थी. इस ऐप पर बेरोकटोक अश्लील विषयवस्तु अपलोड किए जाने से ले कर टिकटौक को अपराध के बढ़ावे की वजह बताया गया. ऐसा नहीं है कि टिकटौक में सब अच्छा ही है इस के कुछ दूसरे नुकसानदायक पहलू भी हैं. गूगल प्ले स्टोर पर कहा गया है कि इसे 13 साल से ज्यादा उम्र के लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन इस का पालन होता नहीं दिखा. भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में टिकटौक के जरिए जो वीडियो बनाए जाते हैं, उस में एक बड़ी संख्या 13 साल से कम उम्र के बच्चों की है.

इस के अलावा प्राइवेसी के लिहाज से भी टिकटौक खतरों से खाली नहीं है. क्योंकि इस में सिर्फ 2 प्राइवेसी सेटिंग की जा सकती है- पब्लिक और ओनली. यानी आप वीडियो देखने वालों में कोई फिल्टर नहीं लगा सकते. या तो आप के वीडियो सिर्फ आप देख सकेंगे या फिर हर वो शख्स जिस के पास इंटरनेट है. अगर कोई यूजर अपना टिकटौक अकाउंट डिलीट करना चाहता है तो वह खुद ऐसा नहीं कर सकता. इस के लिए उसे टिकटौक से रिक्वेस्ट करनी पड़ती है. चूंकि यह पूरी तरह सार्वजनिक है, इसलिए कोई भी किसी को फौलो कर सकता है, मैसेज कर सकता है.

ऐसे में आपराधिक या असामाजिक प्रवृत्ति के लोग छोटी उम्र के बच्चे या किशोरों को आसानी से गुमराह कर सकते हैं और आपत्तिजनक कमेंट कर सकते हैं. कई टिकटौक अकाउंट अडल्ट कंटेंट से भरे पड़े हैं. चूंकि इन में कोई फिल्टर नहीं है, इसलिए हर टिकटौक यूजर इन्हें देख सकता है, यहां तक कि बच्चे भी. टिकटौक जैसे चीनी ऐप्स के साथ सब से बड़ी दिक्कत यह है कि इस में किसी कंटेंट के लिए रिपोर्ट या फ्लैग का कोई विकल्प नहीं है. इसलिए सुरक्षा और निजता के लिहाज से यह खतरनाक हो सकता है. टिकटौक में दूसरी बड़ी समस्या साइबर बुलिंग की है. साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट पर लोगों का मजाक उड़ाना, उन्हें नीचा दिखाना, बुराभला कहना और ट्रोल करना. इसी वजह से टिकटौक पर कोई काबू नहीं था.

जुलाई, 2018 में इंडोनेशिया ने इसीलिए टिकटौक पर बैन लगा दिया था, साथ ही वहां किशोरों की एक बड़ी संख्या इस का इस्तेमाल पोर्न सामग्री अपलोड और शेयर करने के लिए कर रही थी. बाद में कुछ बदलावों और शर्तों के बाद इसे दोबारा लाया गया था. ट्रोलिंग के अलावा टिकटौक पर पिछले कुछ समय से फेक न्यूज के वीडियो भी तेजी से फैल रहे थे, जिसे देखते हुए टिकटौक देश के लिए खतरा बन गया था. इस के अलावा यह ऐप हमारे डाटा की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया था. मसलन, जब हम टिकटौक या उस जैसा कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो प्राइवेसी की शर्तों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. बस, यस और अलाउ पर टिक करते चले जाते हैं. हम अपनी फोटो गैलरी, लोकेशन और कौंटैक्ट नंबर, इन सब का एक्सेस दे देते हैं. इस के बाद हमारा डेटा कहां जा रहा, इस का क्या इस्तेमाल हो रहा है, हमें कुछ पता नहीं चलता.

यह बात अब जगजाहिर है कि आजकल ज्यादातर ऐप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से काम करते हैं. ऐसे में अगर आप इन्हें एक बार भी इस्तेमाल करते हैं तो ये आप से जुड़ी कई जानकारियां हमेशा के लिए अपने पास रख लेते हैं, इसलिए इन्हें ले कर ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है. जब अपराध की वजह बना टिकटौक अपराधों की वजह बना जैसे आरोपों में सच्चाई भी है, क्योंकि टिकटौक कई तरह के अपराध की कुछ घटनाओं की वजह बना है. जरूरी नहीं कि टिकटौक से सभी को शोहरत व दौलत ही मिली हो, कुछ लोगों को इस के कारण जान भी गंवानी पड़ी.

दिसंबर 2019 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गोदावरी नगर स्थित एक निजी हौस्टल में हुई 2 बहनों की हत्या इसी का परिणाम थी. इसी शहर की एक लड़की मंजू सिदार जो टिकटौक पर वीडियो बनाने के कारण चर्चित हुई थी, उसे शहर के राजगढ़ में रहने वाले अपने एक फैन शोएब अहमद अंसारी उर्फ सैफ से इश्क हो गया. 21 मई, 2019 को दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली. लेकिन यह शादी मंजू के परिवार को मंजूर नहीं थी. इस के बाद दोनों के बीच अलगाव हो गया. लेकिन बात तब बिगड़ी जब चंद रोज बाद ही मंजू ने एक दूसरे युवक के साथ टिकटौक में वीडियो बना कर फेसबुक पर अपलोड किया. इस वीडियो के कारण दोस्तों और परिचितों में हुई अपनी बदनामी के कारण सैफ बदले की आग में जलने लगा. उस ने अपने 2 दोस्तों को पैसे का लालच दे कर मंजू की हत्या करने की योजना बनाई.

सैफ ने मंजू को काल कर मिलने की इच्छा जताई, फिर गुलाम के साथ हौस्टल के कमरे में जा कर करीब घंटे भर बातचीत करता रहा. इस दौरान मंजू ने सैफ के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया. तब सैफ ने गुस्से में रोटी पकाने वाले लोहे के तवे से मंजू के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए. मंजू को बचाने के लिए उस की बहन मनीषा सिदार पर भी सैफ के साथी काली ने उसी तवे से हमला कर दिया. फिर आरोपितों ने गंभीर रूप से घायल बहनों का गला दबा कर हत्या कर दी. बाद में पुलिस ने इस हत्याकांड का परदाफाश करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था.

इसी तरह की एक घटना गाजियाबाद की है. दरअसल, टिकटौक पर चंद वीडियो डाल कर खुद को स्टार समझ लेने वाले कम उम्र के नौजवान इस ऐप के कारण खुद को फिल्मी हीरो और फिल्मी दुनिया का स्टार मानने की भूल करने लगते हैं. फिल्मी प्रेमकथाओं की तरह वे कभीकभी प्यार की दीवानगी में ऐसी जिद पर उतर जाते हैं, जो न सिर्फ उन की तबाही का सबब बन जाती है बल्कि उस से दूसरों की जान भी चली जाती है. मामला गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र का है, जहां 17 जून, 2020 को बीच सड़क पर एकतरफा प्यार में एक टिकटौक स्टार ने युवती को चाकू से गोद कर मौत के घाट उतार दिया. टिकटौक पर उस के चार लाख से अधिक फौलोअर्स थे.

घटनाक्रम कुछ यूं है कि टीला मोड़ थाना क्षेत्र के तुलसी निकेतन में बलदेव सिंह पत्नी और बेटी नैना (19) के साथ रहते थे. नैना 2019 में दिल्ली की सुंदर नगरी स्थित स्कूल से 12वीं पास कर नर्सिंग का प्रशिक्षण ले रही थी. 22 जून को उस की शादी थी. 17 जून, 2020 की रात करीब साढ़े 8 बजे नैना अपने मातापिता के साथ घर के पास ही दुकान से नया सिमकार्ड ले कर लौट रही थी. रास्ते में मांबेटी फास्टफूड खाने के लिए रुक गईं. इसी दौरान पीछे से आया सुंदर नगरी, दिल्ली निवासी शेरखान उर्फ शेरू नैना को खींच कर एक दुकान के किनारे ले गया और चाकुओं से गोद कर उस की हत्या कर दी. नैना की मां मदद के लिए चिल्लाती रहीं लेकिन लोग तमाशबीन बने रहे.

बाद में पुलिस ने शेरखान को गिरफ्तार कर लिया. पता चला वह टिकटौक सेलिब्रिटी है. टिकटौक पर शेरखान के 4 लाख से अधिक फौलोअर्स हैं और वह टीम-02 जिंदा जहर के नाम से अपना यूट्यूब अकाउंट भी चलाता है. नैना भी टिकटौक पर थी, लेकिन शेरखान और नैना एकदूसरे को फौलो नहीं करते थे. दोनों के बीच 2 साल पहले दोस्ती हुई. शेरखान का नैना के घर भी आनाजाना था. वह नैना से एकतरफा प्यार करने लगा था लेकिन नैना सिर्फ उसे अपना दोस्त मानती थी. इस बीच नैना के परिवार ने उस की शादी तय कर दी, जो 22 जून को होनी थी. शेरखान को गवारा नहीं था कि नैना किसी और की हो जाए. इसलिए उसने नैना से मिल कर अनुरोध किया कि वह शादी तोड़ दे. लेकिन नैना ने इनकार कर दिया.

नैना को अपनी बनाने के धुन में पहले तो उस ने फेसबुक पर नैना की फोटो डाल कर उसे बदनाम करना चाहा, लेकिन जब इस से भी बात नहीं बनी तो उस ने अपने एक दोस्त के साथ मिल कर नैना की हत्या कर दी. प्रेम अपराध भी नैना और मंजू की हत्या महज उदाहरण भर हैं. अगर खोज करें तो टिकटौक के कारण बहुत से घर तबाह हो रहे थे. क्योंकि कहीं पर पत्नी के टिकटौक वीडियो बनाने के जुनून से पति तलाक दे रहा था, तो कहीं लड़कियों के इस जुनून से परिवार की बदनामी हो रही थी. कुल मिला कर बच्चे हों या बूढ़े, आम हो या खास, पुलिस वाला या बस का चालक टिकटौक का नशा सभी के सिर चढ़ कर बोल रहा था.

कई राज्यों में महिला और युवा पुलिसकर्मियों को वरदी में टिकटौक वीडियो बना कर अपनी वरदी से हाथ धोना पडा. टिकटौक के जूनून में कुछ लोगों ने एडवेंचर वीडियो बनाने के चक्कर में कहीं अपनी तो कहीं दूसरे की जान तक दांव पर लगा दी. अब जबकि सरकार ने टिकटौक को बैन कर दिया है तो ऐसे में इस के जरिए लाखों कमाने वाले लोग भी सरकार के फैसले के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे टिकटौक की तरह ही ऐसा कोई प्लेटफौर्म चाहते हैं, जहां उन के टैलेंट को मौके मिलते रहें, कमाई भी होती रहे और चीन की दखलअंदाजी भी न हो. ज्यादा चिंता सिर्फ उन लोगों को है, जिन की रोजीरोटी टिकटौक बन गया था.

लोगों का मानना है कि हमारे देश में टैलेंट भरा पड़ा है, लेकिन ऐसे लोगों को कोई प्लेटफौर्म तो मिले. टिकटौक ने ऐसे सभी लोगों को एक मंच दया था. भारत में प्रतिबंधित किए जाने के बाद टिकटौक ऐप को सब से ज्यादा नुकसान हुआ है, इसलिए हो सकता है आने वाले दिनों में टिकटौक संचालित करने वाली बाइटडांस लिमिटेड चीन से ही अपना नाता तोड़ ले. क्योंकि कंपनी ने कहा है कि टिकटौक कारोबार के कारपोरेट ढांचे में परिवर्तन करने के बारे में सोचा जा रहा है.

जिस तरह से इस ऐप के मूलरूप से चीनी ओरिजिन को ले कर पूरे विश्व में इस के खिलाफ प्रतिबंध का माहौल बना है, उस के बाद टिकटौक के लिए एक नया प्रबंधन बोर्ड बनाने और चीन के बाहर ऐप के लिए एक अलग मुख्यालय स्थापित करने जैसे विकल्पों पर काम शुरू हो जाए. लेकिन फिलहाल तो यही सच है कि गरीबों के लिए सिनेमा का रूपहला परदा बन कर उन्हें शोहरत और कमाई देने वाला मंच उन से छिन गया है.

—कथा विभिन्न स्रोतों से संकलित

 

Kerala News : 32 किलो सोने की स्‍मलिंग से जुड़े थे हाईप्रोफाइल लोगों के तार

Kerala News : सोने की तसकरी कोई नई बात नहीं है. अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर प्राय रोज ही सोन पकड़ा जाता है. लेकिन यूएई से केरल के तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर जो 32 किलो सोना पकड़ा गया, उस का मामला इसलिए चिंता का विषय है, क्योंकि सोने की इस तसकरी के तार मंत्रालय और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से जुड़े पाए गए. इसी साल जुलाई के पहले सप्ताह की बात है. केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर कार्गो से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वाणिज्य दूतावास के नाम से कुछ बैगों में राजनयिक सामान आया था.

यूएई का वाणिज्य दूतावास तिरुवनंतपुरम शहर के मनाक में स्थित है. सामान क्या शौचालयों में उपयोग होने वाले उपकरण थे, जो खाड़ी देश से आई फ्लाइट से आए थे. विमान से आए बैग उतार कर कार्गो यार्ड में रख दिए गए. इन बैगों को लेने के लिए 2 दिनों तक कोई भी संबंधित व्यक्ति हवाई अड्डे नहीं पहुंचा, तो कस्टम अधिकारियों ने भारतीय विदेश मंत्रालय से इजाजत ले कर 5 जुलाई को बैगों की जांच की. जांच के दौरान एक बैग में छिपा कर रखा गया 30 किलो से ज्यादा सोना मिला. सोने को इस तरह पिघला कर रखा गया था कि वह शौचालय के सामानों में पूरी तरह फिट हो जाए.

भारतीय बाजार में इस सोने की कीमत करीब 15 करोड़ रुपए आंकी गई. यूएई के वाणिज्य दूतावास ने बैग में मिला सोना अपना होने से इनकार कर दिया. इस पर सोने को सीज कर सीमा शुल्क विभाग ने मामले की जांच शुरू की. प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को यह मामला सोने की तस्करी से जुड़ा होने का संदेह हुआ. अधिकारियों को शक हुआ कि इस संदिग्ध मामले में राजनयिक को मिलने वाली छूट का दुरुपयोग किया गया है. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा सम्मेलन में लिए गए फैसलों के तहत भारत सरकार की ओर से दूसरे देशों के राजनयिकों को कई तरह की छूट दी गई थीं. इस में उन की और उन के सामान की जांच पड़ताल की छूट भी शामिल है.

जांच शुरू करने के दूसरे दिन 6 जुलाई को कस्टम अधिकारियों ने संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास के एक पूर्व अधिकारी सरित पी.आर. से पूछताछ की. पूछताछ के बाद अधिकारियों को रहस्य की परतों में उलझा और दूसरे देशों से जुड़ा यह मामला काफी बड़ा होने का अंदाजा हो गया. इस मामले में एक महिला अधिकारी पर भी शक जताया गया. सीमा शुल्क अधिकारियों ने दूतावास के पूर्व अधिकारी सरित पी.आर. को गिरफ्तार कर शक के दायरे में आई महिला अधिकारी की तलाश शुरू कर दी. कस्टम अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि सरित पी.आर. ने पहले भी ऐसी कई खेप हासिल की थीं. इस मामले में केरल सरकार की एक महिला अधिकारी स्वप्ना सुरेश भी शामिल थी.

सोने की तस्करी का यह मामला केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की जानकारी तक भी पहुंच गया. मुख्यमंत्री को अपने स्तर पर पता चला कि इस मामले में संदेह के दायरे में आई महिला अधिकारी स्वप्ना के संबंध राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से हैं. मुख्यमंत्री खुद भी उस महिला से परिचित थे. हालांकि बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस बात से इनकार किया कि सीएम उस महिला को जानते थे. विपक्ष ने उठाई आवाज इस बीच, यह मामला राजनीतिक स्तर पर उछल गया. विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस ने प्रदर्शन करते हुए केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा की सरकार को घेरने की कोशिश शुरू कर दी.

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने 7 जुलाई को प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर मुख्यमंत्री कार्यालय में सोना तसकरी गिरोह के कथित प्रभाव की सीबीआई से जांच कराने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि एक महिला इस रैकेट की कथित सरगना है. यह महिला केरल सरकार के आईटी विभाग के तहत केरल राज्य सूचना प्रौद्योगिकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में आपरेशंस मैनेजर के तौर पर 6 जुलाई, 2020 तक कार्यरत थी. संदेह है कि इस तसकरी की मास्टरमाइंड वही है. इस महिला के केरल के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम. शिवशंकर के साथ घनिष्ठ संबंध हैं. यह महिला कई बार मुख्यमंत्री के महत्वपूर्ण आयोजनों में भी नजर आई थी.

महिला का नाम स्वप्ना सुरेश है. सोना तसकरी रैकेट में स्वप्ना सुरेश का नाम आने पर केरल के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय और आईटी सचिव ने स्वप्ना सुरेश का नाम हटाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया. शीर्ष स्तर पर संपर्कों के लिए जानी जाने वाली स्वप्ना सुरेश को आईटी सचिव एम. शिवशंकर संरक्षण दे रहे हैं. वे स्वप्ना के आवास पर अक्सर आते जाते हैं. सुरेंद्रन ने स्वप्ना की नियुक्ति की सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की. राजनीतिक स्तर पर इस मामले के तूल पकड़ने पर केरल सरकार ने 7 जुलाई को सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एम. शिवशंकर को मुख्यमंत्री के सचिव पद से हटा दिया. पद से हटाए जाने के बाद शिवशंकर एक साल की छुट्टी पर चले गए.

दूसरी ओर, सरकार ने स्वप्ना सुरेश को केरल स्टेट आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर से बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्वप्ना से किसी तरह के संबंध होने से इनकार किया. 8 जुलाई को केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने केरल सरकार की ओर से आयोजित स्पेस कौंक्लेव-2020 में पूरा ब्यौरा मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि इस कौंक्लेव का प्रबंधन स्वप्ना सुरेश ही संभाल रही थी. स्वप्ना ने ही राज्य सरकार की ओर से गणमान्य लोगों को आमंत्रण पत्र भेजे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इसरो से संबंधित एक संस्था में कार्यक्रम प्रबंधक के रूप में स्वप्ना की नियुक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है. सोना तस्करी का यह मामला देशभर में चर्चित हो जाने और इस घटना का राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की संभावना को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को इस की जांच एनआईए को सौंप दी.

वहीं, भूमिगत हुई स्वप्ना सुरेश ने इस मामले में पहली बार औडियो संदेश जारी कर चुप्पी तोड़ी. उस ने कहा कि इस में मेरी कोई भूमिका नहीं है. मैं ने यूएई के राजनयिक राशिद खमीस के निर्देशों के अनुसार काम किया है. कार्गो परिसर में सामान को जब क्लियर नहीं किया गया, तो राशिद ने मुझे सीमा शुल्क अधिकारियों से संपर्क करने को कहा था. तब तक मुझे पता नहीं था कि यह खेप कहां से आई थी और इस में क्या था? सोना जब्त किए जाने का पता लगने पर राशिद के कहने पर वे बैग वापस भेजने की कोशिश भी की गई थी.

दूसरी ओर, गिरफ्तारी की आशंका से स्वप्ना सुरेश ने 9 जुलाई को केरल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की. अगले दिन सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने यह याचिका 14 जुलाई तक के लिए टाल दी. एनआईए ने 10 जुलाई को सोने की तस्करी के मामले को आतंकवाद से जोड़ते हुए 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत सरित पीआर, स्वप्ना सुरेश, संदीप नैयर के अलावा एर्नाकुलम के फैसल फरीद को आरोपी बनाया गया. इस के दूसरे ही दिन 11 जुलाई को एनआईए ने स्वप्ना सुरेश को हिरासत में ले लिया. इस के अलावा संदीप नैयर को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

दोनों को अगले दिन 12 जुलाई को एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. विशेष अदालत ने एनआईए की अर्जी पर दोनों आरोपियों को 13 जुलाई को 8 दिन के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में दे दिया. कहानी में आगे बढ़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि सोना तसकरी के मामले में केरल में सियासी भूचाल लाने वाली हाई प्रोफाइल महिला स्वप्ना सुरेश है कौन? बहुत ऊंचे तक थी स्वप्ना सुरेश की पहुंच केरल के राजनीतिक गलियारों और ब्यूरोक्रेट्स के बीच अपना प्रभाव रखने वाली स्वप्ना सुरेश का जन्म यूएई के अबूधाबी में हुआ था. अबूधाबी में ही उस ने पढ़ाई की. इस के बाद उसे एयरपोर्ट पर नौकरी मिल गई. स्वप्ना ने शादी भी की, लेकिन जल्दी ही तलाक हो गया था.

इस के बाद वह बेटी के साथ रहने के लिए केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम आ गई. भारत आने के बाद स्वप्ना सुरेश ने तिरुवनंतपुरम में 2011 से 2 साल तक एक ट्रेवल एजेंसी में काम किया. वर्ष 2013 में उसे एयर इंडिया में एसएटीएस में एचआर मैनेजर पद पर नौकरी मिल गई. यह एयर इंडिया और सिंगापुर एयरपोर्ट टर्मिनल सर्विसेज का संयुक्त उद्यम है. साल 2016 में जब केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जालसाजी के एक मामले में उस की जांच शुरू की, तो वह अबूधाबी चली गई. फर्राटेदार अंग्रेजी और अरबी भाषा बोलने वाली स्वप्ना सुरेश ने अबूधाबी में यूएई महावाणिज्य दूतावास में नौकरी हासिल कर ली. पिछले साल यानी 2019 में उस ने यह नौकरी छोड़ दी.

कहा यह भी जाता है कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. बताया जाता है कि एयर इंडिया एसएटीएस और अबूधाबी में यूएई महावाणिज्य दूतावास में काम करते हुए स्वप्ना सुरेश हवाई अड्डों और सीमा शुल्क विभाग के कई अधिकारियों के संपर्क में आ गई थी. उसे राजनयिक खेपों की आपूर्ति और हैंडलिंग के सारे तौरतरीके पता चल गए थे. यूएई के महावाणिज्य दूतावास में की गई नौकरी स्वप्ना सुरेश को जिंदगी के एक नए मोड़ पर ले गई. वहां उस ने बड़ेबड़े लोगों से अपनी जानपहचान बना ली थी. इस दौरान उस के यूएई से केरल आने वाले कई प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व भी किया. अबूधाबी में नौकरी से हटने के बाद वह अपने संपर्कों की गठरी बांध कर वापस केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम आ गई.

यूएई के अपने संपर्कों के बल पर इस बार वह तिरुवनंतपुरम में हाई प्रोफाइल तरीके से सामने आई. उस ने राजनीतिज्ञों और ब्यूरोक्रेट्स से अच्छे संबंध बना लिए. केरल के मुख्यमंत्री के सचिव वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम. शिवशंकर से उस के गहरे ताल्लुकात बन गए. कहा जाता है कि शिवशंकर उस के घर भी आतेजाते थे. आरोप यह भी है कि शिवशंकर की सिफारिश पर ही स्वप्ना को केरल राज्य सूचना प्रौद्योगिकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में अनुबंध पर आपरेशंस मैनेजर की नौकरी मिली थी. स्वप्ना सुरेश केरल के बड़े होटलों में होने वाली पार्टियों में अकसर शामिल होती थी. अरबी समेत कई भाषाएं जानने वाली स्वप्ना केरल आने वाले अरब नेताओं की अगुवाई करने वाली टीम में शामिल रहती थी.

सोने की तस्करी का मामला सामने आने के बाद ऐसे कई वीडियो और फोटो वायरल हुए, जिन में स्वप्ना सुरेश केरल के मुख्यमंत्री, अरब नेताओं और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिवशंकर के साथ दिखाई दी. एनआईए की हिरासत में भेजे जाने के बाद स्वप्ना सुरेश के बुरे दिन शुरू हो गए. 13 जुलाई को उस के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस मामले में स्वप्ना के साथ 2 कंपनियों प्राइम वाटर हाउस कूपर्स और विजन टेक्नोलोजी को भी आरोपी बनाया गया. आरोप है कि स्वप्ना ने केरल के आईटी विभाग में नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी अकादमिक डिग्री का इस्तेमाल किया था.

स्वप्ना के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच करने की जिम्मेदारी कंसल्टिंग एजेंसी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स और विजन टैक्नोलोजी पर थी. केरल के आईटी विभाग के अधीन केरल राज्य सूचना प्रौद्योगिकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की शिकायत पर दर्ज इस मामले में स्वप्ना पर आरोप है कि उस ने महाराष्ट्र के डा. बाबा साहेब आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीकौम की फर्जी डिगरी से नौकरी हासिल की थी. मुख्यमंत्री सचिव शिव शंकर की करीबी थी स्वप्ना 14 जुलाई को यह बात काल डिटेल्स से सामने आई कि केरल के मुख्यमंत्री के सचिव पद से हटाए गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिवशंकर ने स्वप्ना सुरेश सहित सोने की तसकरी के 2 आरोपियों से फोन पर बातचीत की थी.

उसी दिन कस्टम अधिकारियों की एक टीम ने आईएएस अधिकारी शिवशंकर के घर जा कर उन्हें नोटिस दिया और उन से पूछताछ की. बाद में शिवशंकर उसी दिन शाम को तिरुवनंतपुरम में सीमा शुल्क विभाग के कार्यालय पहुंचे, अधिकारियों ने उन से शाम से रात 2 बजे तक 9 घंटे पूछताछ की. कोच्चि से कस्टम कमिश्नर और अन्य अधिकारियों ने भी वीडियो कौंफ्रेंस के जरीए शिवशंकर से पूछताछ की. रात 2 बजे पूछताछ पूरी होने के बाद कस्टम अधिकारियों ने उन्हें घर ले जा कर छोड़ दिया. पूछताछ में शिवशंकर ने स्वीकार किया कि स्वप्ना सुरेश ने उन के पास काम किया था, और सरित पीआर उन का दोस्त है.

कस्टम अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि आईएएस अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर सोना तस्करी के आरोपियों स्वप्ना सुरेश, संदीप नैयर और सरित पीआर को किसी तरह की मदद तो नहीं पहुंचाई थी. इस बीच, कस्टम अधिकारियों ने एक होटल के एक और 2 जुलाई के सीसीटीवी फुटेज हासिल किए, जहां आईएएस अधिकारी शिवशंकर और आरोपी ठहरे थे. कहा जाता है कि शिवशंकर के एक कर्मचारी ने इस होटल में कमरा बुक कराया था. शिवशंकर पर गंभीर आरोप लगने पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर केरल के मुख्य सचिव डा. विश्वास मेहता के नेतृत्व में अधिकारियों के एक पैनल ने जांच शुरू कर दी. सोना तस्करों से कथित रूप से तार जुड़े होने की बातें सामने आने के बाद केरल सरकार ने 16 जुलाई को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिवशंकर को निलंबित कर दिया.

इस मामले की जांच चल ही रही थी कि 17 जुलाई को यूएई वाणिज्य दूतावास से जुड़ा केरल पुलिस का एक जवान जयघोष अपने घर से करीब 150 मीटर दूर बेहोशी की हालत में पड़ा मिला. पुलिस ने संदेह जताया कि उस ने कलाई काट कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी. पुलिस ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जयघोष के परिजनों ने इस से एक दिन पहले ही उस के लापता होने की शिकायत थुंबा थाने में दर्ज कराई थी. परिजनों ने कहा था कि अज्ञात लोगों की ओर से धमकी दिए जाने के कारण वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा था. इस से पहले जयघोष ने वट्टियोरकावु थाने में अपनी सर्विस पिस्तौल जमा करा दी थी. जयघोष के मोबाइल पर जुलाई के पहले हफ्ते में स्वप्ना सुरेश ने भी फोन किया था.

केरल सोना तस्करी मामले की जांच कर रही एनआईए ने 18 जुलाई को आरोपी फैजल फरीद के खिलाफ इंटरपोल से ब्लू कौर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया. इस से पहले कोच्चि की विशेष एनआईए अदालत ने फरीद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था. एनआईए ने विशेष अदालत को बताया था कि वे वारंट को इंटरपोल को सौंप देंगे, क्योंकि फरीद के दुबई में होने का संदेह है. एनआईए ने दावा किया कि फरीद ने ही संयुक्त अरब अमीरात के दूतावास की फरजी मुहर और फरजी दस्तावेज बनाए थे. एनआईए और कस्टम विभाग की प्रारंभिक जांच में जो तथ्य उभर कर सामने आए, उन के मुताबिक यूएई के वाणिज्य दूतावास के नाम पर सोने की तसकरी करीब एक साल से हो रही थी. इस तसकरी में एक पूरा गिरोह संलिप्त था.

स्वप्ना सुरेश इस गिरोह की मास्टर माइंड थी और गिरोह से दूतावास के कुछ मौजूदा और पूर्व कर्मचारी जुड़े हुए थे. यह गिरोह डिप्लोमैटिक चैनल के जरीए पिछले एक साल में खाड़ी देशों से तस्करी का करीब 300 किलो सोना भारत ला चुका था. तस्करी के सोने की पहली खेप का कंसाइनमेंट डिप्लोमेटिक चैनल के जरीए पिछले साल जुलाई में तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर आया था. इस साल जुलाई के पहले हफ्ते में पकड़े गए सोने सहित 13 खेप लाई गई थीं. सोने की तस्करी के मामले में नाम उछलने पर तिरुवनंतपुरम स्थित यूएई के वाणिज्य दूतावास में तैनात राजनयिक अताशे राशिद खमिस जुलाई के दूसरे हफ्ते में भारत छोड़ कर स्वदेश चले गए.

स्वप्ना सुरेश ने राशिद के इशारे पर ही काम करने की बात कही है. हालांकि, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और कस्टम विभाग सोना तस्करी मामले की जांच कर रहे हैं. मामले में कुछ और प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं. लेकिन चिंता की बात यह है कि सोने की तस्करी में राजनयिक चैनल का दुरुपयोग किया जा रहा था. एक खास तथ्य यह भी है कि भारत में सोने की सब से ज्यादा तसकरी केरल में होती है. हालांकि अब जयपुर का एयरपोर्ट भी सोने की तस्करी का एक नया माध्यम बन कर उभर रहा है. जयपुर में जुलाई के ही पहले हफ्ते में 2 फ्लाइटों से लाया गया 32 किलो सोना पकड़ा गया था. इस मामले में 14 यात्रियों को गिरफ्तार किया गया था. सोने की तसकरी में केरल नंबर एक पर है. इस के अलावा मुंबई, दिल्ली, बैंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट पर सोने की तसकरी के सब से ज्यादा मामले पकड़े जाते हैं.

 

Murder Story : दोस्त को कर्ज के 20 लाख रुपए नहीं लौटाने पडे़ इसलिए किया कत्ल

Murder Story : लौकडाउन सब से बड़ी मुसीबत बना पीनेपिलाने वालों के लिए. लेकिन पैसे वाले अपने लिए कोई न कोई राह निकाल ही लेते हैं. आकाश गुप्ता ने शराब का जुगाड़ कर के अपने दोस्तों सौरभ और सुनील को पिलाने के लिए बुलाया. दोनों आ भी गए लेकिन…

छत्तीसगढ़ के सरगुजा का शहर अंबिकापुर.रात के लगभग 8 बजे थे, कोरोना महामारी के चलते देशभर में लौकडाउन चल रहा था. जिधर देखो, उधर ही सन्नाटा. छत्तीसगढ़़ सरगुजा संभाग के ब्रह्म रोड, अंबिकापुर स्थित अपने आवास के बाहर खड़े सौरभ अग्रवाल ने मोबाइल से अपने चचेरे भाई सुनील अग्रवाल को काल लगाई. काल रिसीव हुई तो उस ने पूछा, ‘‘क्या कर रहे हो भाई? वैसे कर ही क्या सकते हो, चारों ओर तो सन्नाटा पसरा है.’’

हैलो के साथ सुनील ने दूसरी ओर से कहा, ‘‘घर पर बैठा हूं, टीवी पर कोरोना की खबरों के अलावा कुछ है ही नहीं. देखदेख कर बोर हो रहा हूं. कभी मौतों के आंकड़े आते हैं तो कभी मरीजों के. देख कर लगता है, जैसे अगला नंबर मेरा ही है.’’

हलकी हंसी के साथ सौरभ बोला, ‘‘आओ, आकाश के यहां चलते हैं. कह रहा था, टाइम पास नहीं हो रहा, सारी व्यवस्था कर रखी है उस ने.’’

सौरभ ने इशारे में सुनील को बता दिया. लेकिन वह तल्ख स्वर में बोला, ‘‘तू आकाश के चक्कर में मत रहा कर. उस की जुबान की कोई कीमत नहीं है. पिछले डेढ़ साल से चक्कर पर चक्कर कटवा रहा है, एक नंबर का बदमाश है.’’

‘‘भाई, समयसमय की बात है, कभी करोड़ों का आसामी था, उस के पिता की तूती बोलती थी सरगुजा में… समय का मारा है बेचारा. रही बात मकान की तो चिंता क्यों करते हो, पक्की लिखापढ़ी है, मकान तो उस के पुरखे भी खाली करेंगे.’’ सौरभ ने आकाश का पक्ष रखने की कोशिश की.

‘‘ठीक है, मैं आता हूं.’’ सुनील अग्रवाल ने बात बंद कर दी. सुनील उस का चचेरा भाई था, उम्र लगभग 40 वर्ष. दोनों में खूब छनती थी. दोनों मिलजुल कर अंबिकापुर में बिल्डिंग वर्क और प्रौपर्टी डीलिंग का काम करते थे. सौरभ अपनी इनोवा सीजी 15डी एच8949 पर आ कर बैठ गया. थोड़ी देर में सुनील अग्रवाल आ गया. दोनों कार से शहर का चक्कर लगा कर आकाश गुप्ता के घर पहुंच गए. हमेशा की तरह आकाश ने मुसकरा कर दोनों का स्वागत किया. तीनों के आपस में मित्रवत संबंध थे, एक ही शहर एक ही मोहल्ले में रहने के कारण एकदूसरे के काफी करीब थे. आपस में लेनदेन भी चलता था.

वह आकाश का पुश्तैनी घर था, जो अकसर खाली रहता था. जब पीनेपिलाने का प्रोग्राम बनता था तो सब दोस्त अक्सर यहीं एकत्र होते थे. फिर कैरम खेलने और पीनेपिलाने का दौर चलता था, इसी के चलते आकाश ने यह मकान 2. 30 करोड़ में सौरभ को बेच दिया था और पैसे भी ले लिए थे, मगर वह मकान को सुपुर्द करने में आनाकानी कर रहा था. बहरहाल, इन सब बातों को दरकिनार कर सुनील और सौरभ आकाश गुप्ता के घर पहुंचे और महफिल सज गई. आकाश ने बेशकीमती शराब, मुर्गमुसल्लम वगैरह मंगा रखा था. लौकडाउन के समय में ऐसी बेहतरीन व्यवस्था देख कर सौरभ अग्रवाल चहका, ‘‘अरे भाई क्या इंतजाम किया है, लग ही नहीं रहा लौकडाउन चल रहा है.’’ इस पर आकाश गुप्ता और सुनील अग्रवाल दोनों हंसने लगे.

बातचीत और पीनेपिलाने का दौर शुरू हुआ. इसी बीच अपने उग्र स्वभाव के मुताबिक सुनील अग्रवाल ने आकाश की ओर मुखातिब हो कर कहा, ‘‘यार, ये सब तो ठीक है मगर तू यह बता… सौरभ को मकान कब दे रहा है, 6 महीने हो गए.’’

यह सुन कर आकाश गुप्ता मुसकराते हुए बोला, ‘‘यार, तुम मौजमजा करने आए हो. मजे करो. कोरोना पर बात करो. ये मकान कहां जाएगा.’’

इस पर सौरभ बोला, ‘‘बात बिलकुल ठीक है. आज कोरोना की वजह से हुए लौकडाउन को 17वां दिन है. त्राहित्राहि मची है.’’

सौरभ की बात पर सुनील गंभीर हो गया और चुपचाप शराब का गिलास हाथों में उठा लिया. आकाश ने अपने एक साथी सिद्धार्थ यादव को भी बुला रखा था जो उन की सेवा में तैनात था, साथ ही हमप्याला भी बना हुआ था. हंसतेमुसकराते तीनों शराब पी रहे थे. तभी एकाएक सुनील अग्रवाल ने कहा, ‘‘यार, तूने यह आदमी कहां से ढूंढ निकाला, पहले तो तेरे यहां कभी नहीं देखा.’’

कुछ सकुचाते हुए आकाश गुप्ता ने कहा,

‘‘हां, नयानया रखा है  तुम्हारी सेवाटहल के लिए.’’

‘‘इसे कहीं देखा है…’’ सुनील ने शराब का घूंट गले से नीचे उतारते हुए कहा

‘‘हां देखा होगा. मैं यहीं का हूं भैया, पास में ही मेरा घर है.’’

‘‘नाम  क्या  है  तेरा?’’

‘‘सिद्धार्थ… सिद्धार्थ यादव.’’

‘‘हूं, तू जेल गया था न, कब छूटा?’’ सुनील ने उस पर तीखी नजर डालते हुए कहा

‘‘मैं…अभी एक महीना हुआ है.’’ सिद्धार्थ ने हकलाते हुए दोनों की ओर देख कर कहा.

‘‘अरे, तुम भी यार… सिद्धार्थ बहुत काम का लड़का है. अब सुधर गया है.’’ कहते हुए आकाश गुप्ता ने दोनों के खाली गिलास फिर से भर दिए. दोनों पीते रहे. जब नशा तारी हुआ तो अचानक आकाश गुप्ता जेब से पिस्तौल निकालते हुए बोला, ‘‘आज तुम दोनों खल्लास, मेरा… मेरा मकान चाहिए. ब्याज  पर ब्याज …ब्याज पर ब्याज… आज तुम दोनों को मार कर यहीं दफन कर दूंगा.’

आकाश का रौद्र रूप देख सौरभ और सुनील दोनों के होश उड़ गए. वे कुछ कहते समझते, इस से पहले ही आकाश ने गोली चला दी जो सीधे सुनील अग्रवाल के सिर में लगी. वह चीखता हुआ वहीं ढेर हो गया. सुनील को गोली लगते देख सौरभ कांप  उठा और वहां से भागने लगा. यह देख पास खड़े सिद्धार्थ यादव ने गुप्ती निकाली और सौरभ अग्रवाल के पेट में घुसेड़ दी. उस के पेट से खून का फव्वारा फूट पड़ा और वह वहीं गिर गया. आकाश ने उस पर भी एक गोली दाग दी. सुनील और सौरभ फर्श पर गिर कर थोड़ी देर तड़पते रहे और फिर मौत के आगोश में चले गए.

आकाश गुप्ता ने पिस्तौल जेब में रख ली. फिर उस ने सिद्धार्थ के साथ मिल कर सौरभ और सुनील की लाशों को घर में पहले से ही खोद कर रखे गए गड्ढे में डाल कर ऊपर से मिट्टी डाल दी. इस से पहले सिद्धार्थ यादव ने सौरभ और सुनील की जेब से पर्स, हाथ से अंगूठी, चेन, इनोवा गाड़ी की चाबी अपने कब्जे में ले ली थी. आकाश के निर्देशानुसार वह घर से निकला और इनोवा को चला कर आकाशवाणी मार्ग पर पहुंचा. उस ने इनोवा वहीं खड़ी कर उस में पर्स, मोबाइल रख दिया. लेकिन वह यह नहीं देख सका कि उस का चेहरा कैमरे की जद में आ गया है.

10 अप्रैल, 2020 शुक्रवार को देर रात तक जब सौरभ अग्रवाल और सुनील अग्रवाल घर नहीं पहुंचे तो घर वालों को चिंता हुई. देश के साथसाथ अंबिकापुर में भी लौकडाउन का असर था. सड़कें सूनी थीं. सौरभ के भाई सुमित अग्रवाल ने सौरभ व सुनील के कुछ मित्रों को उन के मोबाइल पर काल कर के दोनों के बारे में पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. दोनों के मोबाइल भी स्विच्ड औफ थे. इस से घर वाले चिंतातुर थे. अगले दिन सुबह सुमित अग्रवाल ने सौरभ के पिता बलराज अग्रवाल से आकाश गुप्ता का मोबाइल नंबर ले कर उसे काल की और सौरभ व सुनील के बारे में पूछा. आकाश गुप्ता ने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए पूछा, ‘‘क्या बात है?’’

यह बताने पर कि सौरभ व सुनील भैया दोनों रात भर घर नहीं आए तो आकाश ने नाटकीयता पूर्वक कहा, ‘‘अरे, यह तो चिंता की बात है… रुको, मैं पता लगाता हूं.’’

सभी को यह जानकारी थी कि आकाश गुप्ता से सौरभ के घनिष्ठ संबंध थे. ऐसे में आकाश ने उस के परिजनों का विश्वास जीतने का प्रयास किया. थोड़ी देर बाद वह स्वयं सौरभ अग्रवाल के घर आ पहुंचा और बातचीत में शामिल हो गया. जब सुबह भी सौरभ व सुनील का पता नहीं चल पाया तो तय हुआ कि इस बात की जानकारी पुलिस को दे दी जाए. सुनील और सौरभ के भाई सुमित थाने पहुंचे. उन्हें कोतवाल विलियम टोप्पो से मिल कर उन्हें पूरी बात बता दी. कोतवाल टोप्पो ने पूछा, ‘‘पहले कभी ऐसा हुआ था?’’

‘‘नहीं…सर, ऐसा कभी नहीं हुआ, दोनों रात 11 बजे तक घर आ जाया करते थे. दोनों के मोबाइल भी औफ हैं. हम ने सारे परिचितों से भी पूछताछ कर ली है.’’ सुमित अग्रवाल यह सब बताते हुए रुआंसा हो गया.

‘‘देखो, चिंता मत करो, तुम्हारी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर हम खोजबीन शुरू करते हैं.’’ कोतवाल  विलियम टोप्पो ने आश्वासन दिया. कोतवाल दोनों के घर पहुंचे और जरूरी बातें पूछने के बाद उच्चाधिकारियों एसपी आशुतोष सिंह, एडीशनल एसपी ओम चंदेल और एसपी (सिटी) एस.एस. पैकरा को इस घटना की जानकारी दे दी. मामला अंबिकापुर के धनाढ्य परिवार से जुड़ा था. सौरभ और सुनील के गायब होने की खबर बहुत तेजी से फैली. पुलिस पर सम्मानित लोगों का प्रेशर बढ़ने लगा. दोपहर होते होते एसपी आशुतोष सिंह और सभी अधिकारी व डीएसपी फोरैंसिक टीम के साथ सौरभ अग्रवाल व सुनील के घर पहुंच गए. इस के साथ ही जांच तेजी से शुरू हो गई.

इसी बीच खबर मिली कि सौरभ व सुनील जिस इनोवा कार में घर से निकले थे, वह अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक के पास खड़ी है. यह सूचना मिलते ही कोतवाल विलियम टोप्पो आकाशवाणी चौक पहुंचे और गाड़ी की सूक्ष्मता से जांच की. गाड़ी में सुनील और सौरभ के पर्स व मोबाइल मिल गए. इस से मामला और भी संदिग्ध हो गया. पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो एक शख्स गाड़ी पार्क करते और उस में से निकलते दिखाई दे गया. पुलिस ने तफ्तीश की तो पता चला वह शातिर अपराधी  सिद्धार्थ यादव उर्फ श्रवण है, जो फरवरी 2020 में ही एक अपराध में जेल से बाहर आया है. पुलिस ने उसे उस के घर से हिरासत में ले लिया और पूछताछ शुरू कर दी.

पहले तो सिद्धार्थ एकदम भोला बन कर कहने लगा, ‘‘मैं तो घर पर था, कहीं गया ही नहीं.’’

मगर जब उसे सीसीटीवी में कैद उस की फुटेज दिखाई गई तो उस का चेहरा स्याह पड़ गया. उस के कसबल ढीले पड़ गए. आखिर उस ने पुलिस को चौंकाने वाली बात बताई. उस ने कहा कि सौरभ व सुनील अग्रवाल की गोली मार कर हत्या कर दी गई है. सिद्धार्थ यादव के बयान के आधार पर पुलिस ने आकाश गुप्ता के यहां दबिश दी. वह शराब में डूबा घर पर बैठा था. पुलिस ने उसे गिरफ्त मे ले कर पूछताछ शुरू की. साथ ही सिद्धार्थ यादव की निशानदेही पर आकाश गुप्ता के घर में खोदे गए गड्ढे से सौरभ व सुनील की लाशें भी बरामद कर ली. हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी जब्त कर ली गई. तब तक यह खबर अंबिकापुर के कोनेकोने तक पहुंच गई थी. लौकडाउन के बावजूद आकाश गुप्ता के घर के बाहर लोगों का हुजूम जुट गया.

पुलिस हिरासत में आ कर आकाश गुप्ता का नशा हिरन हो गया था. थरथर कांपते हुए उस ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और पुलिस को सब कुछ बता दिया. आकाश के पिता काशी प्रसाद गुप्ता कभी शहर के बहुत बड़े आसामी थे, पांच बहनों में अकेले भाई आकाश को पिता की अर्जित धनसंपत्ति शौक में उड़ाने  के अलावा कोई काम नहीं था. धीरेधीरे वह करोड़ों की जमीनजायदाद बेचता रहा. उस ने अपना पुश्तैनी मकान भी सौरभ को 2 करोड़ 30 लाख रुपए में बेच दिया था. वह उस से रुपए भी ले चुका था, लेकिन उस की नीयत खराब हो गई थी.

वह चाहता था किसी तरह मकान उस के कब्जे में रह जाए. दूसरी तरफ 2016 में आकाश गुप्ता ने सौरभ के पिता बलराज अग्रवाल से 20  लाख रुपए का कर्ज  लिया था और इन 4 वर्षों में 50 लाख रुपए अदा करने के बावजूद उस से ब्याज के 50 लाख रुपए मांगे जा रहे थे. परेशान आकाश गुप्ता ने सिद्धार्थ को विश्वास में लिया. उसे सिद्धार्थ की आपराधिक पृष्ठभूमि पता थी. आकाश ने धीरेधीरे सिद्धार्थ से घनिष्ठ संबंध बनाए और उसे बताया कि वह किस तरह करोड़पति से बरबादी की ओर जा रहा है. इस पर सिद्धार्थ यादव ने आकाश गुप्ता के साथ हमदर्दी जताते हुए कहा, ‘‘ऐसा है तो क्यों ना सौरभ को रास्ते से हटा दिया जाए. आकाश को सिद्धार्थ की कही बात जम गई.

दोनों ने साथ मिल कर पहले सौरभ के अपहरण की योजना बनाई. लेकिन उस में बड़े पेंच देख कर तय किया कि हत्या ज्यादा आसान है. दोनों ने इसी योजना पर काम किया. सौरभ की हत्या की योजना बनने लगी तो सिद्धार्थ ने आकाश को पास के उपनगर  गंगापुर के रमेश अग्रवाल से मिलवाया. रमेश ने बरगीडीह निवासी शिव पटेल से 90 हजार रुपए में एक पिस्तौल व गोलियां दिला दीं. हत्या की योजना बना कर पहले ही यह तय कर लिया गया था कि सौरभ व सुनील को मार कर उन की लाशें घर में ही दफन कर दी जाएंगी. सिद्धार्थ और आकाश ने 4 अप्रैल से धीरेधीरे गड्ढा खोदने का काम शुरू कर दिया था.

आकाश गुप्ता ने सिद्धार्थ को मोटी रकम देने का लालच दे कर अपने साथ मिला लिया. सिद्धार्थ भी आकाश गुप्ता की रईसी से प्रभावित था और धारणा बना चुका था कि इस काम में उस की मदद कर के उस का जिंदगी भर का राजदार बन जाएगा और आगे की जिंदगी मौजमजे से गुजारेगा. 11 अप्रैल 2020 की देर शाम तक आकाश गुप्ता और सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने सौरभ अग्रवाल, सुनील अग्रवाल की हत्या के आरोप में आकाश और सिद्धार्थ के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 302, 201, 120बी 34,25, 27 आर्म्स एक्ट  के तहत मामला दर्ज कर के आरोपियों को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें अंबिकापुर कारागार भेज दिया गया.

Maharashtra News : सैक्स रैकेट और अवैध धंधों से वसूली करने वाली प्रीति की हैरान करने वाली दास्तां

Maharashtra News : खिलाड़ी औरतों के लिए हनीट्रैप कमाई का सब से अच्छा माध्यम है. लेकिन यह जरूरी नहीं कि इस में कामयाबी मिलेगी ही, क्योंकि पुलिस भी अपराधों की गंध सूंघती रहती है. प्रीति ने नेताओं और पुलिस के कंधों पर हाथ रख कर करोड़ों कमाए, लेकिन…

लौकडाउन से अनलौक की ओर कदम बढ़ते ही महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में यूं तो अपराध की जबरदस्त ताक धिना धिन सुनी जा रही थी. हत्याओं का सिलसिला सा बन गया था. राज्य के गृहमंत्री के गृहनगर की इस हालत पर राजनीतिक तीरतलवार चलाने वाले तरकश कसने लगे थे. पुलिस और प्रशासन पर तोहमत लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे. कोरोना योद्धा के तौर पर शाबासी लूट चुकी शहर पुलिस ऐसी किसी तोहमत को तवज्जो नहीं देना चाहती थी. दावा यही कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की न जरूरत थी न ही होनी चाहिए.

शहर पुलिस ने बड़ेबड़े अपराधियों के अपराध के आशियानों को कुछ समय में ही बड़े स्तर पर ध्वस्त कर दिया था. ऐसे में एक मामला अचानक चर्चा में हौट हुआ. यह मामला चार सौ बीसी के खेल में पकड़ी गई प्रीति का. राजनीति के गलियारे में चहलकदमी के साथ समाजसेवा का नया मौडल बनी घूमती उस महिला के बारे में बड़ी चर्चा ये थी कि कई पुलिस वाले साहब उस के दबेल यानी उस के दबाव में थे. लिहाजा उस ने शहर व शहर के आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दबावतंत्र बना कर कइयों की जिंदगी में जहर घोल दिया. पुलिस कभी उस का सत्कार करती थी तो कभी उस से सत्कार कराती थी.

समाजसेवा के चोले में हनी ट्रैपर घटना 5 जून, 2020 की है. एक शिकायतकर्ता पांचपावली पुलिस स्टेशन में बेबस मुद्रा में मदद की याचना ले कर पहुंचा. शिकायतकर्ता का नाम था उमेश उर्फ गुड्डू तिवारी. पांचपावली क्षेत्र में ही रहने वाले गुड्डू ने बताया कि उस का जीवन एकदम सामान्य था. वह एक स्कूल का कर्मचारी है. हर माह मिलने वाले वेतन से उस के परिवार का हंसीखुशी गुजारा हो रहा था. लेकिन जब से वह प्रीति की सोहबत में आया, उस की दुनिया लुटने लगी. उमेश उर्फ गुड्डू ने उस वक्त को कोसा है, जब वह फेसबुक पर प्रीति से जुड़ा था.

प्रीति का आकर्षक फोटो देख गुड्डू ने उस पर सहज कमेंट किया था. उस कमेंट के जवाब में प्रीति ने फेसबुक पर ही गुड्डू को पर्सनल मैसेज भेज कर मोबाइल फोन नंबर का आदानप्रदान कर लिया. गुड्डू इस बात को ले कर भी खुद को दोष देता है कि एकदो बार फोन पर बात के बाद वह उस अनजानी महिला के सामने पूरी तरह से खुल गया. उस ने अपने घरपरिवार की बातें साझा कर दीं. यहां तक कि वैवाहिक जीवन में भी उस ने अरमानों के सूखे कंठ की वेदना को स्वर दे दिया. प्रीति ने गुड्डू को बताया कि नागपुर के जिस इलाके में वह रहता है, उस के पास ही वह भी रहती है. उस ने अपनी पहचान के दायरे के ट्रेलर के तौर पर कुछ लोगों के नाम गिनाए.

कुछ दिनों बाद दोनों के मिलने का सिलसिला मोहब्बत की परवाज भरने लगा. कभी प्रीति मिलने पहुंचती तो कभी गुड्डू को बुला लेती थी. एक दिन प्रीति ने गुड्डू से साफ कह दिया कि वह उस के साथ जीवन गुजारने को तैयार है. बशर्ते उसे अपनी पत्नी को तलाक देना होगा. भविष्य की योजना भी उस ने गुड्डू से साझा की. 50 वर्षीय गुड्डू जिंदगी के नए सफर पर चलने के लिए न केवल राजी हुआ बल्कि अति उत्साहित भी था. माल मिलते ही बदला रंग गुड्डू की शिकायत का लब्बोलुआब यह था कि प्रीति मनचाहा धन मिलते ही तेवर बदलने लगती थी. बतौर गुड्डू प्रीति ने उस से फ्लैट खरीदने के लिए रुपयों की मांग की थी. उस का कहना था कि जब तक गुड्डू की पत्नी का तलाक नहीं हो जाता, तब तक दोनों उस फ्लैट में मिलतेजुलते रहेंगे.

गुड्डू ने अग्रिम के तौर पर प्रीति को फ्लैट के लिए 2.60 लाख रुपए दे दिए. तय समय पर फ्लैट नहीं लिया गया तो गुड्डू ने रुपए वापस मांगे. बस यहीं से गुड्डू पर दबाव का नया सिलसिला चल पड़ा. फ्लैट के नाम पर लिए गए रुपए वापस लौटाना तो दूर प्रीति ने रुपयों की नई पेशकश रख दी. उस ने कहा कि सोशल मीडिया पर जितनी भी हौट बातें हुई हैं और फोन पर लाइव चैटिंग हुई है, उन का सारा हिसाब उस के पास है. अगर वह उस रिकौर्डिंग को पुलिस को सौंप दे तो कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा. प्रीति की सीधी धमकी यह भी थी कि ज्यादा चूंचपड़ मत करना. मेरे हाथ काफी लंबे हैं. चुटकी बजा कर ऐसी जगह पर घुसेड़वा दूंगी, जहां से जीवन भर नहीं निकल पाएगा. और हां, अपनी इज्जत बचानी हो तो 5 लाख रुपए तैयार रखना.

प्रीति के ठग अंदाज का जिक्र करते हुए गुड्डू ने बताया कि उस ने डर के मारे प्रीति को 2.42 लाख रुपए और दिए, जिस से वह कहीं मुंह न खोले. लेकिन माल पाने के बाद तो वह और भी रंग बदलने लगी. रुपए और गिफ्ट ले कर यहांवहां बुलाने लगी. उस से दूर होने का प्रयास किया तो वह घर में आ कर पिटवा देने की धमकी देने लगी. कुछ ही दिनों में उस ने नकदी और गिफ्ट के रूप में 14.87 लाख रुपए ऐंठ लिए. आखिरकार उसे अपने बचाव में पुलिस की शरण लेनी पड़ी. पुलिस ने उस की शिकायत की शुरुआती पड़ताल करने के बाद प्रीति के खिलाफ भादंवि की धारा 420 व धारा 384 हफ्तावसूली के तहत केस दर्ज कर लिया.

मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने प्रीति के कामठी रोड स्थित प्रियदर्शिनी अपार्टमेंट के घर पर छापेमारी की. प्रीति वहां से चंपत हो गई थी. पुलिस ने उस के घर से काफी सामान और दस्तावेज बरामद किए. खुला भेद तो पुलिस भी रह गई दंग जिस पांचपावली पुलिस स्टेशन में प्रीति का आनाजाना लगा रहता था, उसी थाने की पुलिस उस के कारनामों की फेहरिस्त देख कर दंग रह गई. रिकौर्ड खंगालने पर पता चला कि प्रीति धोखाधड़ी के मामले में जेल की यात्रा कर चुकी है. उस के आपराधिक क्षेत्र के छोटेबड़े लोगों से भी करीबी संबंध है. उस के खिलाफ शहर के सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में भादंवि की धारा 420, 406, 468, 467, 506, 507, 34 के  तहत प्रकरण दर्ज है.

धोखाधड़ी का वह प्रकरण शहर में काफी चर्चित हुआ था. इस के अलावा भंडारा के पुलिस स्टेशन में भी भादंवि की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज था. शहर पुलिस के बड़े अधिकारियों के लिए यह जानकारी काफी चौंकाने वाली थी कि जिस महिला को वे केवल सामाजिक कार्यकर्ता समझ रहे थे वह ब्लैकमैलर है. यही नहीं वह पुलिस से संबंधों का नाजायज फायदा उठाती रहती है. शहर पुलिस की ओर से प्रीति के अपराधों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी गई. बाकायदा प्रैस नोट जारी कर आह्वान किया गया कि इस महिला ने किसी से धोखाधड़ी की हो, तो तत्काल पुलिस से संपर्क करे.

इस बीच प्रीति फरार हो गई थी. पुलिस उसे ढूंढती रही. करीब हफ्ते भर प्रीति बचाव का रास्ता खोजती रही. उस ने वकील के माध्यम से जिला सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. कोशिश यही थी कि पुलिस गिरफ्तारी से बचते हुए उसे न्यायालय से जमानत मिल जाए. लेकिन उस की कोशिशों पर पानी फिर गया. न्यायालय ने उस की अरजी खारिज कर दी. लिहाजा उस ने 13 जून को पांचपावली पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया. उसे पुलिस तक पहुंचाने वालों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा पुलिस के कुछ नुमाइंदे भी शामिल थे.

गिरफ्तारी के बाद प्रीति को पुलिस रिमांड पर लिया गया. उस के खिलाफ पुलिस ने सबूत जुटाने शुरू किए. जांच में जुटी पुलिस यह जान कर दंग रह गई कि कुछ समय पहले तक मामूली मोपेड पर घूमने वाली प्रीति अब करोड़पति हो गई है. वह महंगी कारों से घूमती है. उस ने अपने करीबियों व रिश्तेदारों के नाम पर बेनामी संपत्ति खरीद रखी है. बंगला, खेती की जमीन के अलावा वह एक कंपनी की भी संचालक भी थी. अवैध वसूली के लिए उस ने बाकायदा एक संस्था रजिस्टर्ड करा रखी थी. लिहाजा पुलिस ने धर्मदाय आयुक्तालय, विजिलैंस विभाग के अलावा अन्य विभागों को पत्र लिख कर उस के बारे में आवश्यक जानकारी मांगी.

घर में हुआ अपमान तो कर लिया सुसाइड प्रीति के कारनामों की जानकारी जुटाई ही जा रही थी कि पुलिस अधिकारियों तक एक गुहार और पहुंची. गुहार यह कि एक व्यक्ति ने प्रीति और उस के साथियों के डर से सुसाइड कर लिया था. मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए यह शिकायत जूनी मंगलवारी निवासी वैशाली पौनीकर की थी. शिकायत के अनुसार वैशाली के पति सुनील पौनीकर ने अक्तूबर 2019 में सतीश सोनकुसरे से कुछ रकम कर्ज ली थी. सुनील पौनीकर मेस संचालक था. काम में घाटे के कारण उसे कर्ज लेना पड़ा था. सतीश सोनकुसरे ने कर्ज वापसी के लिए सुनील पर दबाव बनाया. लेकिन समय पर रुपए नहीं लौटा पाने पर उस ने प्रीति की मदद ली.

प्रीति यह भी दावा करती थी कि वह कर्ज वसूली का काम भी करती है. शहर के सारे बड़े पुलिस अफसर व नेता उस के पहचान के हैं. बतौर वैशाली पौनीकर, प्रीति ने सतीश सोनकुसरे से कर्ज वसूली की सुपारी ली थी. वह कुछ पुलिस कर्मचारियों की मदद से सुनील को प्रताडि़त करती थी. प्रीति की धमकी से किया सुसाइड एक दिन प्रीति सतीश सोनकुसरे और मंगेश पौनीकर को साथ ले कर सुनील के घर पर पहुंच गई. प्रीति ने सुनील को कर्ज नहीं लौटाने पर धमकी दी. उस के साथ कुछ पुलिस वाले भी थे, जो घर में आ कर मांबहन की गालियां दे गए. यहीं नहीं, वह बस्ती में नंगा घुमाने की धमकी दे रहे थे. धमकी और घिनौनी बातों से सुनील बुरी तरह आहत हुआ.

लिहाजा उस ने 27 नवंबर, 2019 की दोपहर ढाई बजे लकड़गंज थाना क्षेत्र के बाबुलवन प्राथमिक शाला के मैदान में जहर पी लिया. मेयो अस्पताल में उपचार के दौरान 30 नवंबर, 2019 को सुनील ने दम तोड़ दिया था. पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच जारी रखी. अब वैशाली पौनीकर की शिकायत पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर लकड़गंज थाने की पुलिस ने प्रीति व उस के साथियों के खिलाफ सुनील आत्महत्या मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी. मेस संचालक को आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रकरण लकड़गंज थाने में दर्ज हो ही रहा था कि जरीपटका थाने में एक और शिकायत पहुंची.

शिकायत यह थी कि आरोपी प्रीति ने धौंस दिखा कर 25 हजार रुपए ऐंठ लिए. शिकायतकर्ता पूर्णाबाई सडमाके का बेटा नीतेश वायुसेना में लिपिक था. 8 मार्च, 2019 को उस की प्रणिता से शादी हुई थी. शादी के 2 माह बाद ही प्रणिता की अपनी सास पूर्णाबाई से अनबन होने लगी. प्रणिता अपना सामान ले कर मायके चली गई. समझाने पर भी वह नहीं मानी. उस ने पुलिस के भरोसा सेल में पूर्णाबाई की शिकायत दर्ज करा दी. भरोसा सेल में पूर्णाबाई की प्रीति से भेंट हुई. प्रीति भरोसा सेल की एजेंट बन कर घूमती थी. उस ने विवाद निपटाने का झांसा दे कर पूर्णाबाई से 25 हजार रुपए मांगे. रुपए नहीं देने पर उस के बेटे की नौकरी जाने का भय बताया. लिहाजा 17 अक्तूबर, 2019 को पूर्णाबाई ने प्रीति को 25 हजार रुपए दे दिए.

पूर्णाबाई ने प्रीति को फोन कर पूछताछ की. प्रीति ने बताया कि तुम्हारे बेटे का काम हो गया है. मैं ने मैडम को पैसे दे दिए हैं. बेटे से जुड़े मामले को ले कर एक बार पूर्णाबाई को भरोसा सेल की इंचार्ज इंसपेक्टर शुभदा शंखे ने पूछताछ के लिए बुलाया. उस दौरान पूर्णाबाई ने इंसपेक्टर शुभदा से सहज ही कह दिया कि मैं ने तो आप को 25 हजार रुपए दिए थे, फिर आप मुझ से इस तरह घुमावदार सवाल क्यों कर रही हो.  इंसपेक्टर शुभदा चौंकी. वह यह जान कर हैरान थी कि जिस प्रीति दास को वह सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सम्मान देती रही, वह तो उस के नाम पर ही अवैध वसूलियां करने लगी है. लिहाजा, इंसपेक्टर शंखे ने पूर्णाबाई को शहर पुलिस के जोन-5 के उपायुक्त नीलोत्पल के पास भेजा.

पूर्णाबाई की शिकायत पर जरीपटका पुलिस ने आरोपी प्रीति के खिलाफ हफ्ता वसूली का मामला दर्ज कर लिया. 2 दिन बाद शहर पुलिस के पास एक और शिकायत पहुंची. शिकायतकर्ता युवती उच्चशिक्षित थी. उस के अनुसार उस के साथ एक युवक ने विवाह का झांसा दे कर दुष्कर्म किया था. प्रीति दास ने युवती को यह कह कर मदद का आश्वासन दिया था कि उस की पुलिस के बड़े अधिकारियों से खासी पहचान है. वह दुष्कर्म के आरोपी को सजा दिलाएगी. इस कार्य के लिए उस ने युवती से 25 हजार रुपए मांगे. रुपए मिलने के बाद प्रीति उस युवती से मिलती भी नहीं थी. ऐसे में एक रोज युवती ने प्रीति से तल्खी के साथ सवाल किया तो वह उसे धमकाने लगी. साथ ही यह औफर देने लगी कि उस की गैंग में शामिल हो जाए.

उस युवती का आरोप था कि प्रीति अकसर खूबसूरत युवतियों की मजबूरियों का फायदा उठाती है. युवतियों को पेश कर के वह रसूखदारों से मनचाहा माल वसूलती रहती है. 2 से 3 पुलिस कर्मचारी व अधिकारी को हनीट्रैप में फंसा देने का डर दिखा कर उसने कथित तौर पर लाखों की वसूली की है. उस ने यह भी बताया कि नागपुर में पश्चिम महाराष्ट्र के कई पुलिस अधिकारी बैचलर रहते हैं. उन का परिवार उन के गांव या शहर में है. लिहाजा उन्हें रात रंगीन कराने के एवज में प्रीति लगातार ब्लैकमेल करती रही है.

भंडारा पुलिस थाने में प्रीति के विरुद्ध दर्ज धोखाधड़ी के मामले में बताया गया कि वह नागपुर के बाहर के जिलों में खुद को बैंकर के तौर पर प्रचारित करती रही है. जरूरतमंदों को आसानी से लाखों का कर्ज दिलाने का झांसा देती रही है. उस के इस चक्रव्यूह में कुछ बैंक कर्मचारी व अधिकारी भी शामिल रहे हैं. दीवाने ही दीवाने प्रीति अपना पूरा नाम प्रीति ज्योतिर्मय दास लिखती है. 40 की उम्र की हो चली इस महिला के चेहरे से ही सादगी व शिष्टता झलकती है. लेकिन उस के शिकायतकर्ताओं की मानें, तो वह जैसी दिखती है वैसी है नहीं. उस की मित्रमंडली की फेहरिस्त में दीवाने ही दीवाने हैं.

उस के कारनामों के तराने न जाने कहांकहां गूंज रहे हैं. शिकायतकर्ता गुड्डू तिवारी की सुनें तो प्रीति कपड़ों की तरह रिश्ते बदलती है. लिबास ही नहीं, जरूरत हो तो वह जाति और धर्म भी बदल लेती है. कभी वह मसजिदों के इर्दगिर्द नजर आती है तो कभी गुरुद्वारे के आसपास. फर्राटेदार अंगरेजी तो बोलती ही है , मराठी और हिंदी में भी उस के तेवर तने रहते हैं. उस के जीवन में 4 लोगों के नाम प्रमुखता से जुड़े हैं. इन में एक मराठी, दूसरे कारोबारी हैं तो 2 मुसलिम हैं. चर्चा है कि अपना उल्लू सीधा करने के लिए उस ने संदीप दुधे, महेश गुप्ता, रफीक अहमद व मकसूद शेख से अलगअलग शादी रचाई. फिर उन को उस ने छोड़ दिया.

शिकायतकर्ता गुड्डू की शिकायत में इन नामों का जिक्र है. फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि प्रीति अपने पति से क्यों और कैसे दूर हुई. परिवार में उस की बुजुर्ग मां व बेटा है. खबर है कि प्रीति के पिता सेना में थे. पिता की मृत्यु के बाद उस की मां को अब पेंशन मिलती है. घर में अनुशासन व शिष्टाचार का पाठ तो मिलता रहा, लेकिन कहा जाता है कि प्रीति की हसरतों ने उसे नई राह पर ला दिया. उस की सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तसवीर पर लिखा है, ‘मेरी सादगी ही गुमनाम रखती है मुझे, जरा सा बिगड़ जाऊं तो मशहूर हो जाऊं.’

उसे करीब से जानने वालों का कहना है कि वह आपराधिक प्रवृत्ति की नहीं थी. लेकिन शोहरत और दौलत पाने का जुनून कुछ ऐसा सवार है कि वह हर हद से गुजर जाने का दंभ भरती है. वह अपनी सोशल इमेज चमकाने का निरंतर प्रयास करती रही. हालत यह है कि अब भी कुछ लोग उसे धोखेबाज मानने को तैयार नहीं है. प्रीति एक भाजपा पार्षद की सामाजिक संस्था से भी जुड़ी थी. लौकडाउन में जरूरतमंदों को राहत सामग्री देने के अभियान में वह पूरी ताकत के साथ जुटी रही. लिहाजा उस संस्था से जुड़े नेता ने तो उसे निर्दोष ठहराने का अभियान ही शुरू कर दिया है. दावे के साथ सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है— हमारी ताई को फंसाया जा रहा है. उस ने कोई अपराध नहीं किया है.

यह भी सुना जा रहा है कि प्रीति स्वयं को बैंकर बताती रही है. वह खुद को एक राजनीतिक दल के पदाधिकारियों द्वारा संचालित एक बैंक की संचालक के रूप में भी प्रचारित करती रही है. सदर क्षेत्र में उस बैंक के कार्यालय में उस के कारनामों के किस्से हैं. बैंक का मैनेजर भी सिर पर हाथ धरे रहता है. बैंक अधिकारी बताते हुए सीज किए हुए वाहन सस्ते में दिलाने के दावे के साथ धोखाधड़ी करने के उस के किस्से भी सुने जा रहे हैं. खास बात है कि प्रीति अकसर सादे लिबास में रहती है. उस का बर्ताव उच्चशिक्षित सा आकर्षक है.

हमपेशेवर सहेलियों ने की चुगली यह चर्चा भी जोरों पर है कि प्रीति के कारनामों की चुगली उस की हमपेशेवर सहेलियों ने की. राजनीति से ले कर सामाजिक कार्यों में ऐसी कई नईपुरानी कार्यकर्ता हैं, जिन की पहचान वसूली एजेंट के तौर पर है. अब सब के काम और सोच के तरीके अलगअलग हो गए हैं. इन में से कुछ को केवल यह बात खटक रही है कि प्रीति कम समय में बहुतों की चहेती बन गई. नेता, पुलिस से ले कर अन्य क्षेत्र के बड़े लोग भी उस के साथ उठनेबैठने लगे. प्रीति का सोशल मीडिया पर इमेज चमकाने का तरीका भी कइयों की आंखों में चुभने लगा था.

लिहाजा प्रीति की चुगली भी होने लगी थी. कभी वह इंसपेक्टर स्तर के अफसर के साथ बदनाम होती तो कभी नेता के घर उस के नाम पर पारिवारिक झगड़ा होता था. बताते हैं कि चुगली के चक्कर में एक पुलिस वाले ने प्रीति से कुछ बातों को ले कर सवाल किए थे, जिस पर वह थाने में ही भड़क गई थी. उस ने उस अफसर को भी खरीखोटी सुनाते हुए ज्यादा चूंचपड़ नहीं करने को कहा था. थाने में सिपाहियों के सामने हुए उस अपमान को अफसर भूल नहीं पाया. शहर में हनीट्रैप के कारनामों में लिप्त कुछ महिलाओं के लिए भी प्रीति आंख का कांटा बनी है. उन्हें लगता है कि यह कल की आई महिला सब को पीछे छोड़ कर काफी आगे निकल चुकी है.

सैक्स रैकेट, भोजनालयों, अवैध धंधों के अड्डों से पुलिस के नाम पर वसूली कर गुजारा करने वालों के लिए यह बात और भी खटकने वाली है कि प्रीति तो सीधे पुलिस अफसरों की गाडि़यों में ही घूमने लगी. आइडियाज क्वीन प्रीति को पहचानने वाले उसे अवैध वसूली की आइडियाज क्वीन भी कहते हैं. अपनी सोशल इमेज बनाते हुए वह सत्कार कार्यक्रम का आयोजन करती रही है. चर्चा के अनुसार वह सत्कार के लिए ऐसे लोगों की तलाश करती रहती है जो कार्यक्रम में  शौल, श्रीफल मिलने के बदले 10 से 20 हजार रुपए खर्च कर सकें.

कार्यक्रम आयोजन के नाम पर सहयोग के तौर पर वह हजारों रुपए जमा कर लेती है. उन कार्यक्रमों में पुलिस के बड़े अधिकारी या अन्य क्षेत्र के सम्मानित लोगों को आमंत्रित करती रही है. सत्कार कराने के इस खेल में भी वह मोटी रकम बटोरती है. बड़े पुलिस अफसरों के लिए मुखबिरी कर के भी वह अपने स्वार्थ साधती रही है. इस के अलावा विविध मामलों को ले कर वह अफसरों व नेता, मंत्री को निवेदन सौंपने में भी आगे रही है. पुलिस मित्र के तौर पर शहर के सभी 33 पुलिस थानों में उस की खास पहचान है. अफसरों की निजी पार्टी के अलावा नेताओं की पर्सनल बैठकों में वह शामिल होती रही है.

खुशियों के मौकों पर मनपा के बड़े नेता भी उस के साथ ठुमके लगाते दिखे. लिहाजा कइयों को यही लगता है कि प्रीति की प्रीत केवल उस से है. उसे होनहार कार्यकर्ता मानने वालों की भी कमी नहीं है. सत्कार करनेकराने का दौर कुछ ऐसा चला है कि शहर में जिम्मेदार वर्ग कहलाने वाले सभी क्षेत्रों के प्रतिष्ठितों के साथ वह मंच साझा कर चुकी है. नगर सेवक, महापौर, विधायक स्तर के जनप्रतिनिधि उस की खास मित्रमंडली में शामिल हैं. वह सब से पहले अपने शिकार के बारे में जानकारी लेती है. मनचाही खुशियों का दाना फेंक कर शिकार फांसने का गुर वह जान चुकी है.

हनीट्रैप के मामलों में उत्तर नागपुर में ही एक गिरोह चर्चा में रहा है. प्रीति का नाम आते ही वह हवा हो गया था. इस के अलावा कुछ आपराधिक मामलों में उस का नाम थानों तक पहुंचा, लेकिन पुलिस के रिकौर्ड में दर्ज नहीं हो पाया. बहरहाल कहा जा रहा है कि प्रीति के चक्कर में दास बने लोगों की लंबी कतार है. इन में कई सफेदपोश लोग भी हैं. उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सारी हकीकत सामने आने लगेगी.

 

सैनिटरी पैड विवाद : प्रिंसिपल ने 68 लड़कियों के उतरवाए कपड़े

Social Crime : महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को ले कर केंद्र और गुजरात सरकार भले ही लाख दावे करे लेकिन स्थिति इस के एकदम उलट है. गुजरात सरकार लड़कियों के मामले में कितनी संजीदगी दिखाती है, इस की एक झलक वहां के कच्छ शहर में स्थित एक इंस्टीट्यूट में घटी घटना से साफ झलकती है. इंस्टीट्यूट की प्रिंसपल ने जांच के नाम पर 68 छात्राओं के कपड़े उतरवा दिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात के कच्छ शहर में स्वामी नारायण संप्रदाय का सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट है.

इस इंस्टीट्यूट का नियम यह है कि जिस छात्रा को पीरियड आता है वह हौस्टल के कमरे के बजाय बेसमेंट में रहती है. पीरियड के खत्म हो जाने के बाद ही वह हौस्टल के कमरे में आती है. इतना ही नहीं पीरियड के दिनों में उसे पूजा करने की इजाजत भी नहीं होती और वह रसोईघर में भी नहीं घुस सकती. इतना ही नहीं ऐसी लड़कियों को उन दिनों क्लास में भी अंतिम बेंच पर बैठना पड़ता है और वह किसी लड़की को छू भी नहीं सकती. लेकिन फरवरी 2020 के दूसरे सप्ताह में इस इंस्टीट्यूट में घटी एक घटना ने 68 लड़कियों को अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर होना पड़ा.

हुआ यह कि इंस्टीट्यूट के गार्डन में प्रयोग किया हुआ सैनेटरी पैड मिला. वार्डन की निगाह जब उस पैड पर पहुंची तो उस ने सोचा कि यह पैड किसी लड़की ने टायलेट की खिड़की से गार्डन में फेंका होगा. तब वार्डन ने इंस्टीट्यूट की छात्राओं से इस बारे में पूछताछ की, लेकिन किसी भी छात्रा ने वह पैड फेंकने की बात नहीं स्वीकारी. यह बात वहां की प्रिंसपल के कानों तक पहुंची तो उन्हें यह बात बुरी लगी. इंस्टीट्यूट की प्रिंसपल ने सच जानने के लिए 13 फरवरी को 68 छात्राओं के कपड़े उतरवा कर के कच्छे चैक किए कि किनकिन छात्राओं को पीरियड हो रहे हैं और वह छात्रा कौन सी है जिस ने उसी तरह का पैड लगाया हुआ है जो गार्डन में मिला था.

यह जानकारी कच्छ यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों को पता चली तो शर्मसार (Social Crime) कर देने वाली इस घटना को उन्होंने गंभीरता से लिया. इस के बाद तो सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में हड़कंप मच गया.  यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए 5 सदस्यों की एक कमेटी बनाई. इस कमेटी में शामिल वाइस चांसलर और 3 अन्य महिला प्रोफेसर ने सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट का दौरा कर अपनी जांच शुरू कर दी. इस जांच कमेटी ने छात्राओं आदि से पूछताछ करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट यूनिवर्सिटी प्रशासन को सौंप दी. रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने इंस्टीट्यूट की प्रिंसपल सहित हौस्टल वार्डन और 2 हौस्टल असिसटैंट को दोषी ठहराते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.

ज्ञात रहे कि स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायी ने सन 2012 में लड़कियों के लिए एक कालेज की स्थापना की थी. जिस में लड़कियां को बीएससी, बीकौम, बीए की पढ़ाई की व्यवस्था की गई थी. बाद में सन 2014 में यह कालेज स्वामीनारायण कैंपस में शिफ्ट हो गया था. जिस में 12वीं कक्षा तक की लड़कियां पहले से ही पढ़ रही थीं. कालेज में करीब 1500 लड़कियां पढ़ती हैं. इस कैंपस में उच्च शिक्षा पाने वाली लड़कियों के लिए अलग हौस्टल की व्यवस्था नहीं है. कालेज की 68 छात्राएं भी कैंपस में पढ़ने वाली अन्य लड़कियों के साथ ही हौस्टल में रहती हैं.

क्योंकि यह इंस्टीट्यूट धार्मिक संप्रदाय का है इसलिए वहां रहने वाली लड़कियों के लिए जो नियम बनाए हैं उन का पालन करना सभी के लिए जरूरी है. लेकिन इस इंस्टीट्यूट की प्रिंसपल द्वारा 13 फरवरी, 2020 को की गई शर्मशार हरकत ने इस इंस्टीट्यूट को चर्चा के घेरे में खड़ा कर दिया. जिस का खामियाजा प्रिंसपल, हौस्टल वार्डन् और 2 हौस्टल असिसटेंट को भुगतना पड़ा.