Love Story: प्रेमी को समर्पण में जल्दबाजी नहीं

Love Story: पति मनमुताबिक न निकला तो 37 वर्षीय आंगनवाड़ी सुपरवाइजर मुकेश कुमारी जाट ने उसे तलाक दे दिया था. फिर वह पत्नी से परेशान रहने वाले 38 वर्षीय शादीशुदा सरकारी टीचर मानाराम के संपर्क में आई और दोनों के बीच नजदीकी संबंध बन गए. वह उस पर शादी का दबाव बनाने लगी, लेकिन मानाराम पत्नी से तलाक के बाद शादी करने को कहता. यह विवाद एक दिन इतना खतरनाक हो गया कि…

आंगनवाड़ी सुपरवाइजर प्रेमिका मुकेश कुमारी की लगातार शादी करने की जिद से सरकारी टीचर मानाराम परेशान हो गया. उस ने प्रेमिका को लाख समझाया कि वह पत्नी को तलाक देने के बाद उस से शादी अवश्य करेगा, लेकिन वह उस की बात किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं थी. उस की जिद से परेशान हो कर मानाराम प्रेमिका से छुटकारा पाने के उपाय खोजने लगा. उस रोज 10 सितंबर, 2025 का दिन था. टीचर मानाराम ड्यूटी से बाड़मेर स्थित शिवनगर अपने घर लौट आया था. वह आराम कर रहा था. तभी कालबेल बजी.

मानाराम ने सोचा कि कोई पड़ोसी होगा. उस ने मुख्य गेट खोला तो सामने मुकेश कुमारी को देख वह आश्चर्यचकित रह गया. उसे घूरते देख मुकेश कुमारी बोली, ”आठवां अजूबा तो हूं नहीं, जो मुझे घूरघूर कर देख रहे हो. अंदर आने को नहीं कहोगे.’’

तब मानाराम साइड में हो गया और बोला, ”बगैर कोई जानकारी दिए आ गई, मानना पड़ेगा. आओ, अंदर आओ.’’

दोनों घर में आ गए. मानाराम चाय बना कर ले आया. दोनों चाय पीते हुए बतियाने लगे. मुकेश कुमारी ताना मारते हुए बोली, ”मुझ से मन भर गया है क्या, जो मेरे नंबर भी ब्लौक कर रखे हैं. मगर मैं भी पीछा छोडऩे वाली नहीं हूं. मैं ने तुम पर विश्वास कर तनमन तुम्हें समर्पित किया. तुम ने शादी करने का वादा किया था, अब तुम मुकर रहे हो. बहाने कर रहे हो. मगर बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, जितनी जल्द हो मुझ से शादी करो.’’

”मैं ने शादी करने से मना थोड़ी किया है. मेरा तो यह कहना है कि मेरा अपनी पत्नी से तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है. उस से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. जब तक पत्नी से तलाक नहीं हो जाता, तब तक मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अपना पक्ष रखते हुए मानाराम ने कहा.

इस पर गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी तुनकते हुए बोली, ”तुम्हारा पत्नी से तलाक 10 साल तक नहीं होगा. कोर्ट में केस चलता रहेगा तो ऐसे में मैं इंतजार थोड़े करूंगी. तुम्हारी बातों में आ कर अपना तन भी तुम्हें सौंप चुकी. अब मैं किसी अन्य व्यक्ति से शादी भी तो नहीं कर सकती. तुम अपने फेमिली वालों से मिलाओ मुझे. मैं उन्हें सारी बात बता कर शादी के लिए राजी कर लूंगी.’’

”मैं शादी के लिए मना नहीं कर रहा, जो तुम्हें मेरे परिवार से मिलना पड़े. वकील ने कहा है कि थोड़े दिनों में तलाक हो जाएगा. तब तक तुम्हें सब्र रखना होगा. पत्नी से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. तुम पढ़ीलिखी समझदार हो, फिर भी बेवजह शादी के लिए बहस कर कर रही हो. ठंडे दिमाग से सोचो, तब समझ में आ जाएगा कि मैं सही कह रहा हूं.’’ मानाराम ने उसे समझाया.

मुकेश कुमारी भी जानती थी कि जब तक मानाराम का पत्नी के साथ तलाक नहीं होगा, तब तक उन की शादी मान्य नहीं होगी. फिर भी वह उस पर शादी का दबाव डाल रही थी, ताकि वह उसे भूले नहीं. मुकेश कुमारी जिला झुंझुनंू की सूरजगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर खड़ेला, जिला सीकर में कार्यरत थी. मुकेश कुमारी तलाकशुदा थी. उस ने 2019 में पति से तलाक ले लिया था. तलाक के बाद खड़ेला में रह कर अपनी नौकरी कर रही थी. मुकेश कुमारी की शादी उस की इच्छा से नहीं हुई थी. इस कारण वह पति को पसंद नहीं करती थी. बस, इसी कारण उस ने पति से तलाक ले लिया था.

मुकेश कुमारी 2019 से 2024 तक अकेली रही तो उसे जीवनसाथी की जरूरत महसूस हुई. तब उस ने अगस्त 2024 में अखबार में विज्ञापन दिया कि तलाकशुदा हूं और आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हूं. तलाकशुदा सरकारी नौकरी वाले से शादी करना चाहती हूं. वैवाहिक विज्ञापन में मुकेश कुमारी ने अपने मोबाइल नंबर दे रखे थे. बाड़मेर जिले के चवा गांव निवासी मानाराम जो पेशे से सरकारी टीचर है, उस ने अखबार में विज्ञापन देख कर मुकेश कुमारी से संपर्क साधा.

उस ने मुकेश कुमारी से अक्तूबर, 2024 में मुलाकात की. दोनों ने एकदूसरे से बात की. मानाराम भी पहले से शादीशुदा था, उस के 2 बेटियां थीं, मगर पत्नी टीपू देवी से बनती नहीं थी. पत्नी उसे छोड़ कर मायके शिवकर जा कर रह रही थी. ऐसे में मानाराम ने पत्नी से तलाक का कोर्ट में मामला दाखिल कर दिया था. दोनों ही तलाक लेना चाहते थे. मानाराम अपनी पत्नी से 2013 से ही अलग रह रहा था. वह भी चाहता था कि उस की किसी तलाकशुदा हमउम्र महिला से शादी हो जाए तो उस की दोबारा गृहस्थी बस जाए.

ऐसे में मुकेश कुमारी का वैवाहिक विज्ञापन अखबार में देखा तो वह अपने को रोक नहीं पाया और मुकेश कुमारी से संपर्क साध कर उस से जा मिला. मानाराम जहां 38 साल का था, वहीं मुकेश कुमारी उस से एक साल छोटी थी. दोनों सरकारी नौकरी में थे. वह देखने में खूबसूरत थी. मुकेश कुमारी को मानाराम पसंद आ गया. मानाराम ने उसी समय बता दिया था कि पत्नी से तलाक के बाद ही वह उस से शादी करेगा. उस की बात से वह भी सहमत थी. दोनों ने एकदूसरे के फोन नंबर लिए और बातचीत करने लगे. सोशल मीडिया पर चैट करने लगे. आंगनवाड़ी में छुट्टी होती, तब मुकेश कुमारी खड़ेला से बाड़मेर चली जाती थी. मानाराम के परिवार के लोग चवा गांव में रहते थे.

मानाराम बाड़मेर शहर स्थित शिवनगर कालोनी में अपने घर में अकेला रहता था. वह बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में टीचर था. वह बाड़मेर से जसाई गांव रोजाना आनाजाना किया करता था. मुकेश कुमारी जब भी बाड़मेर मानाराम से मिलने आती थी, वह शिवनगर स्थित उस के घर पर उस के साथ में ही रुकती थी. दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे और शादी करने वाले थे. ऐसे में उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे. कभी मानाराम बाड़मेर से 600 किलोमीटर दूर खड़ेला, सीकर प्रेमिका से मिलने चला जाता तो कभीकभार मुकेश कुमारी बाड़मेर चली जाती थी.

दोनों के बीच बिना शादी किए संबंध बन गए तो थोड़े वक्त बाद वे खुल कर मिलने लगे और मौजमस्ती करने लगे. उन के लव अफेयर को 6 माह ही बीते थे कि मानाराम को प्रेमिका बासी लगने लगी. उस का मन भर गया. इस के बावजूद भी वह ‘शादी करूंगा’, कह कर मुकेश कुमारी के जिस्म से खेलता रहा. करीब 4 महीने पहले मुकेश कुमारी ने जब मानाराम पर शादी का दबाव डाला तो उस ने वही राग अलापा कि पत्नी से तलाक के बाद ही शादी करेगा. ऐसे में मुकेश कुमारी उस पर बिफर गई. उस ने धमकी दी कि अगर उस ने उस से शादी नहीं की तो अंजाम ठीक नहीं होगा.

मानाराम जानता था कि अगर मुकेश कुमारी ने उस पर रेप या यौन शोषण का केस कर दिया तो उस की सामाजिक प्रतिष्ठा एवं नौकरी चली जाएगी. तब उस ने उस से किनारा करना शुरू कर दिया. मगर मुकेश कुमारी उस का पीछा छोडऩे वाली नहीं थी. मानाराम ने उस के फोन नंबर ब्लौक कर दिए तो वह दूसरे नंबर से फोन कर उसे धमकाती थी. उस का कहना था कि उस ने उस पर विश्वास कर के उसे जिस्म सौंपा था. मेरे तन को भोग कर तुम मुझे छोड़ दो, यह मैं होने नहीं दूंगी. लिहाजा दोनों के बीच दूरियां बढऩे लगी थीं.

इस के बावजूद मुकेश कुमारी उस के पीछे पड़ी थी. उस ने एक ही रट लगा रखी थी कि मुझ से शादी करो. मानाराम तलाक होने के बाद शादी करने की बात कहता था. मानाराम के रूखे व्यवहार से मुकेश कुमारी को लगने लगा था कि वह शादी को जानबूझ कर टाल रहा है. उसे लग रहा था कि वह उस से शादी नहीं करेगा. मगर मुकेश कुमारी ने भी ठान लिया था कि वह मानाराम से शादी कर के ही दम लेगी. मानाराम की मजबूरी यह थी कि वह पत्नी से तलाक लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता था.

मुकेश कुमारी की जिद से मानाराम परेशान हो गया था. बस, इसी कारण उस ने कन्नी काटनी शुरू की थी. यह मुकेश कुमारी को अखर रहा था. उस ने इस बार निश्चय किया कि वह मानाराम के फेमिली वालों से मिल कर अपने और मानाराम के संबंधों के बारे में बता कर शादी की बात पक्की कर के ही लौटेगी. 10 सितंबर को मुकेश कुमारी खंडेला, सीकर से बाड़मेर पहुंची और प्रेमी मानाराम से मिली. उस से शादी की बात की. वह 4 दिन बाड़मेर में प्रेमी के साथ रही. दोनों में संबंध भी बने.

14 सितंबर, 2025 की शाम को मुकेश कुमारी अपनी आल्टो कार ले कर बाड़मेर से मानाराम के गांव चवा पहुंच गई. उस ने मानाराम से कहा कि वह उसे अपने फेमिली वालों से मिलाए, उन से उसे शादी की बात पक्की करनी है. मानाराम ने फेमिली वालों से मिलाने से मना कर दिया तो मुकेश कुमारी गुस्से में लालपीली पुलिस चौकी चवा पहुंची. उस ने गांव चवा के रहने वाले प्रेमी टीचर मानाराम निवासी पर आरोप लगाया कि उस ने उसे शादी का झांसा दिया है. अब अपने परिवार से मुझे मिला नहीं रहा है. इस पर चौकी इंचार्ज ने फोन कर मानाराम को पुलिस चौकी बुलाया.

मानाराम पुलिस चौकी पहुंचा. उस ने पुलिस से कहा, ”मेरा तलाक का प्रोसेस चल रहा है. अभी परिवार से नहीं मिला सकता हूं. पत्नी से तलाक के बाद मैं मुकेश कुमारी से शादी कर लूंगा.’’

चौकी इंचार्ज एवं अन्य ने भी मानाराम की बात को सही ठहराया. ऐसे में मुकेश कुमारी बिना कोई परिवाद या शिकायत दर्ज करवाए पुलिस चौकी से मानाराम के साथ निकल गई. दोनों गांव चवा से शिवनगर, बाड़मेर मानाराम के घर पर आ गए. मुकेश कुमारी बिना बताए मानाराम के गांव चवा भी गई थी. वह पुलिस चौकी भी शादी का दबाव डलवाने पहुंच गई थी. इस बात से मानाराम खफा था. उस ने उसे घर पर ला कर समझाया, मगर मुकेश कुमारी इस बात से नाराज थी कि उस ने अपने फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलाया. उस की सोच थी कि मानाराम उस से शादी नहीं करना चाहता.

इस पर मानाराम ने कहा, ”तुम मुझे बिना बताए मेरे गांव चवा क्यों गई थी? मैं शादी से मना करता तो गांव जा कर फेमिली वालों से मिलती, मगर तुम पर तो जैसे भूत सवार है. पढ़ीलिखी हो कर भी मेरी मजबूरी नहीं समझ रही. कैसी महिला हो?’’

”मैं सब समझती हूं, मगर फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलने दिया. तुम्हारे दिल में जरूर कोई खोट है.’’ प्रेमिका ने जवाब में कहा.

तब मानाराम ने उसे समझाबुझा कर शांत किया. रात साथ में बिताई. अगले रोज 15 सितंबर, 2025 को अलसुबह मानाराम का मुकेश कुमारी से फिर शादी को ले कर झगड़ा हुआ. झगड़ा इतना बढ़ गया कि मानाराम ने घर में रखा लोहे का मोटा सरिया उठा कर मुकेश कुमारी के सिर पर दनादन कई वार कर दिए. मुकेश कुमारी के सिर से खून का फव्वारा बह निकला. थोड़ी देर तड़प कर वह मर गई. मुकेश कुमारी की लाश देख कर वह डर गया.

उसे जेल की सींखचे नजर आने लगीं. उस ने प्लान बनाया कि अब शव को ठिकाने लगा दूं, ताकि जेल जाने से बच जाए. उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी का शव उठा कर घर के बाहर खड़ी मृतका की आल्टो कार में ड्राइविंग सीट पर रखा और गाड़ी का दरवाजा बंद कर गाड़ी को धक्का मार कर सड़क से नीचे उतार दी. मानाराम को कार चलानी नहीं आती थी, इस कारण वह शव को दूर नहीं ले जा सका. गाड़ी को सड़क से उतार कर वह वापस घर पर आया. उस का शरीर डर के मारे थरथर कांप रहा था. उसे कुछ भी सूझ नहीं रहा था. तब उसे खयाल आया कि वकील से सलाह लूं.

सुबह पौने 7 बजे वकील को मानाराम ने कौल कर कहा, ”वकील साहब, मेरे हाथ एक महिला का मर्डर हो गया है. अब आप ही राय दें कि क्या करूं.’’

सुन कर वकील ने कहा, ”पुलिस के सामने सरेंडर कर दो. मैं पुलिस को घटना की खबर देता हूं.’’

कहने के साथ वकील ने सोमवार, 15 सितंबर की सुबह साढ़े 7 बजे फोन द्वारा थाना रीको बाड़मेर में अपने परिचय के साथ घटना की खबर देते हुए कहा, ”सर, शिवनगर कालोनी में मुकेश कुमारी नामक महिला का मर्डर हुआ है. मृतका का शव आल्टो कार में पड़ा है. यह हत्या सरकारी टीचर मानाराम जाट ने की है. आप जल्दी घटनास्थल पर पहुंच जाइए.’’

सुबहसवेरे महिला की हत्या की खबर पा कर एसएचओ मनोज कुमार सामरिया पुलिस बल के साथ 15 मिनट में घटनास्थल पर जा पहुंचे. सड़क पर आल्टो कार में ड्राइवर की सीट पर एक महिला का खून सना शव पड़ा था. घटनास्थल पर मृतका का मोबाइल भी था. एसएचओ मनोज कुमार सामरिया ने घटना की खबर उच्चाधिकारियों को दी. खबर पा कर सीओ (सिटी) रमेश कुमार, एएसपी जसाराम बोस, एसपी नरेंद्र सिंह मीणा थोड़ी देर में घटनास्थल पर पहुंचे. एफएसएल एवं एमओबी टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं और सुबूत इकट्ठा किए. पुलिस ने घटनास्थल का मौकामुआयना किया.

शव देख कर लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के शव को ड्राइवर की सीट पर रखा गया था. पुलिस को गाड़ी के पास खून के धब्बे मिले. तब पुलिस पास में मानाराम के घर गई. घर में भी खून दिखाई दिया. पुलिस को समझते देर न लगी कि हत्या घर में की गई थी, बाद में शव को गाड़ी में ले जा कर रखा गया था. गाड़ी को सड़क से नीचे उतारा गया था, ताकि मामला एक्सीडेंट का लगे. पुलिस ने मौके की काररवाई निबटा कर शव बाड़मेर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया.

मृतका के बारे में सामने आया कि उस का नाम मुकेश कुमारी था. वह झुंझुनंू जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह तलाकशुदा थी और खड़ेला जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थी. वह अपने प्रेमी टीचर मानाराम से मिलने बाड़मेर 10 सितंबर को आल्टो कार ले कर आई थी. पता चला कि वह प्रेमी टीचर पर शादी का दबाव बना रही थी. पुलिस ने झुंझुनंू एसपी औफिस में संपर्क कर घटना की खबर मृतका के परिजनों को दी.

मुकेश कुमारी की हत्या की खबर मिलते ही काशनी गांव में मातम छा गया. मृतका के घर में रुदन शुरू हो गया. मृतका के भाई अन्य परिजनों के साथ बाड़मेर के लिए रवाना हो गए. 600 किलोमीटर दूर बाड़मेर था तो उन्हें आने में समय लगना था. रीको थाना पुलिस ने आरोपी टीचर मानाराम को 15 सितंबर, 2025 को डिटेन कर लिया था. उस ने पुलिस पूछताछ में गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी की हत्या करने का गुनाह कुबूल कर लिया था.

16 सितंबर, 2025 को मृतका के फेमिली वाले बाड़मेर पहुंचे और एसएचओ मनोज कुमार से मिले. एसएचओ उन्हें घटनास्थल पर ले गए और मौका दिखाया. मृतका का शव मोर्चरी में देख कर उस के भाई धर्मपाल एवं सुरेंद्र रो पड़े. 16 सितंबर, 2025 को धर्मपाल निवासी गांव काशनी, थाना सूरजगढ़, जिला झुंझुनू ने अपनी छोटी बहन मुकेश कुमारी जाट की हत्या की रिपोर्ट टीचर मानाराम जाट निवासी चवा के खिलाफ दर्ज कराई. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी मानाराम को गिरफ्तार कर लिया. मृतका के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया. पोस्टमार्टम के बाद शव उस के फेमिली वालों को सौंप दिया गया. वह उसे गांव काशनी ले गए और वहां अंतिम संस्कार कर दिया.

आरोपी टीचर मानाराम को 17 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश कर पुलिस रिमांड पर मांगा. मजिस्ट्रैट ने आरोपी को 2 दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया. रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने आरोपी से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

राजस्थान के बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर एक गांव चवा आता है. सदर थाना बाड़मेर के अंतर्गत आने वाले इस गांव में किरताराम जाट अपने परिवार के साथ रहते हैं. खेतीकिसानी कर के किरताराम ने अपने बेटे मानाराम को खूब पढ़ाया. इसी का परिणाम था कि पढ़लिख कर वह टीचर बन गया. सरकारी टीचर की नौकरी मिली तो शादी के लिए रिश्ते आने लगे. 2008 में मानाराम की शादी बाड़मेर जिले के शिवकर गांव की टीकू देवी के साथ कर दी गई. शादी के बाद सुहागरात पर मानाराम ने नई दुलहन टीकू को देखा तो उसे गहरा आघात लगा. जैसी सुंदर पत्नी उसे चाहिए थी, वैसी टीकू नहीं थी.

मानाराम मन मसोस कर रह गया. टीकू से वह शादी तो कर चुका था, ऐसे में उसे निभाना तो था ही. मानाराम को टीकू से 2 बेटियां हुईं, जो इस समय 16 साल एवं 14 साल की हैं. बेटियों के जन्म के बाद पतिपत्नी में मनमुटाव बढ़ गया. मानाराम अपनी पत्नी को ज्यादा महत्त्व नहीं देता था. वह बातबात पर उसे ताने मारता था. उस के रंगरूप को ले कर तंज कसता था. दोनों में मनमुटाव इतना बढ़ा कि 2013 में टीकू अपने मायके शिवकर गांव जा बैठी. मानाराम ने पत्नी की तरफ मुड़ कर नहीं देखा. टीकू भी पति को मन से निकाल चुकी थी. सामाजिक पंचायत भी हुई, मगर दोनों के दिल नहीं मिले. दोनों ने अलग रहना ठीक समझा.

टीकू मायके में रह रही थी. मानाराम की इच्छा थी कि वह दोबारा शादी कर ले. मगर पहली पत्नी टीकू से जब तक तलाक नहीं होता, तब तक शादी करना संभव नहीं था. मानाराम ने फेमिली कोर्ट में टीकू से तलाक का केस दायर कर दिया. तलाक का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. मानाराम की ड्यूटी बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में थी. वह बाड़मेर से जसाई आनाजाना करता था.

झुंझुनूं जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत एक गांव काशनी आता है. काशनी गांव में लिखमाराम जाट अपने परिवार के साथ रहता था. वह सेना से रिटायर थे, उन के 8 बच्चे थे. मुकेश कुमारी 8 भाईबहनों में सातवें नंबर की थी. सभी भाईबहनों मे मुकेश कुमारी होशियार थी. काशनी गांव से उस ने आठवीं तक पढ़ाई की. इस के बाद उसे पढऩे के लिए शहर भेज दिया. पढ़ाई के दौरान ही मुकेश कुमारी का चयन राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद पर हो गया. बेटी की नौकरी लगने से पेरेंट्स बहुत खुश थे. उन्होंने उस के योग्य घरवर की खोज शुरू की.

मुकेश कुमारी की 9 जुलाई, 2011 को पिलानी थाना क्षेत्र के लिखवा गांव निवासी विकास जाट से शादी कर दी गई. शादी के बाद मुकेश कुमारी ससुराल गई तो उसे ससुराल पसंद नहीं आई. उसे पति विकास भी पसंद नहीं आया. बेटी की शादी के 3 साल बाद 2014 में हार्ट अटैक से लिखमाराम की मौत हो गई. जैसा जीवनसाथी मुकेश को चाहिए था, वैसा विकास नहीं था. मुकेश कुमारी अपनी ड्यूटी पर रहती थी. वह ससुराल नहीं जाती थी. विकास शादी कर के भी कुंवारा था. वह पत्नी को घर ले जाना चाहता था, मगर वह राजी नहीं थी.

एक दिन मुकेश ने पति विकास से कहा, ”मैं ने परिवार वालों का मन रखने के लिए तुम से शादी की थी. मगर अब मैं तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहती.’’

विकास ने उसे समझाया. मगर वह नहीं मानी. मुकेश कुमारी का पुलिस की नौकरी से मन भर गया था. उस ने आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर पद के लिए आवेदन किया. वहां उस का चयन हो गया, तब उस ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और खड़ेला, जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगी. मुकेश कुमारी ने पति विकास से 2019 में तलाक ले लिया. अब वह खड़ेला में रहने लगी. पति से तलाक के बाद मुकेश कुमारी को एक अच्छे जीवनसाथी की जरूरत महसूस होने लगी थी. ऐसे में वर्ष 2024 के अगस्त महीने में उस ने अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया कि तलाकशुदा महिला को तलाकशुदा सरकारी नौकरी करने वाला हमउम्र जीवनसाथी चाहिए.

इस वैवाहिक विज्ञापन को टीचर मानाराम जाट ने देखा. उस ने दिए गए फोन नंबर पर मुकेश कुमारी से संपर्क किया. मुकेश कुमारी के पास कई लोगों के फोन आए थे, मगर उसे पसंद आया मानाराम. वह सरकारी टीचर था. दोनों की उम्र भी बराबर थी. इस तरह दोनों बेहद करीब आ गए. मानाराम ने गत 3-4 महीने से मुकेश कुमारी को साइड में करना शुरू कर दिया था. मगर मुकेश कुमारी उसे किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी. 15 सितंबर, 2025 की अलसुबह दोनों में शादी की बात पर फिर से झगड़ा हुआ. मानाराम को प्रेमिका पर इतना गुस्सा आया कि उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी पर मोटे सरिए से कई वार कर हत्या कर दी.

रिमांड अवधि पूरी होने पर 19 सितंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपी मानाराम को फिर से कोर्ट में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया और थाने ला कर पूछताछ की. आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का सरिया बरामद कर लिया. आरोपी की निशानदेही पर पर खून से सनी निवार एवं बिस्तर के जले टुकड़े भी बरामद किए. पुलिस ने 20 सितंबर, 2025 को उसे न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश किया, जहां से उसे बाड़मेर जेल भेजने का आदेश दिया गया. Love Story

 

 

Crime Story: लव सैक्स और मर्डर

Crime Story: फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई कर चुकी अमृता चौधरी यूपीएससी की पढ़ाई कर रहे रामकेश मीणा के प्यार में इतना डूब चुकी थी कि वह उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान रामकेश ने उस के आपत्तिजनक स्थिति के वीडियो बना लिए थे. इन दोनों के बीच वीडियो डिलीट करने का मुद्दा ऐसा बवाल बना कि…

सुबह का वक्त था. मुरादाबाद की एक गैस एजेंसी पर गैस सिलेंडर लेने वालों की अच्छीखासी भीड़ लगी हुई थी. सुमित कश्यप ग्राहकों की गैस कौपी में एंट्री कर के अपने नौकर को इशारे से कह रहा था, ”इन्हें गैस का सिलेंडर दे दो.’’ नौकर सिलेंडर देने का काम कर रहा था.

दिन के 11 बजे तक सुमित और उस के नौकर को सांस लेने की फुरसत नहीं मिली. साढ़े 11 बजे के करीब भीड़ खत्म हुई तो सुमित ने लंबी सास भर कर कहा, ”सर्दी में भी पसीना आ गया है बनवारी. जा, अब चाय बनवा कर ले आ. हां, चाय में अदरक अच्छे से डलवाना और देख बिसकुट भी लेते आना.’’

”ठीक है भैया.’’ सुमित से 50 रुपए का नोट लेते हुए बनवारी बोला और एजेंसी से बाहर निकल गया. जैसे बनवारी बाहर निकला था, वैसे ही उलटे पांव लौट आया. सुमित कुरसी पर कमर सीधी करने के लिए पीछे झुका ही था कि फिर सीधा हो गया.

”क्या हुआ? तू वापस क्यों आ गया? क्या चाय की दुकान बंद है?’’

”अभी मैं वहां पहुंचा ही कहां हूं भैया, वो बात यह है कि बाहर एक युवती आप को पूछ रही है.’’

”सिलेंडर लेने आई होगी, अंदर भेज दे उसे.’’ सुमित ने लापरवाही से कहा.

”सिलेंडर नहीं चाहिए उसे, वह तो आप को पूछ रही है कि क्या आप एजेंसी में आए हैं. आप की पहचान वाली लगती है.’’

”अंदर भेज दे, देखूं कौन है.’’ सुमित ने कहा और कुरसी पर ठीक से बैठ गया.

बनवारी बाहर निकल गया. थोड़ी देर में ही अंदर एक 20-21 साल की खूबसूरत युवती ने प्रवेश किया. सुमित उसे देखते ही हैरानी से कुरसी छोड़ कर खड़ा हो गया.

”त… तुम यहां!’’ सुमित के मुंह से हैरत भरा स्वर निकला, ”आज तुम इधर का रास्ता कैसे भूल गई?’’

”क्या मेरा आना तुम्हें अच्छा नहीं लगा है सुमित’’ लड़की ने गंभीर स्वर में पूछा.

”अच्छा क्यों नहीं लगा अमृता. हां, तुम्हें देख कर मुझे गहरा आश्चर्य हो रहा है. तुम ने मुझ से ब्रेकअप कर लिया था, फिर अचानक तुम्हें मैं कैसे याद आ गया?’’

”मैं बहुत परेशानी में हूं सुमित,’’ युवती जिस का नाम अमृता चौधरी था, बहुत गंभीर स्वर में बोली.

”ओह!’’ सुमित मुसकराया, ”तभी मैं तुम्हें याद आया हूं अमृता! चलो, अब आ गई हो तो बैठो और बताओ तुम्हें किस परेशानी ने आ घेरा है?’’

”बात थोड़ा राज वाली है. मैं एकांत में ही तुम्हें बताऊंगी.’’ अमृता ने धीरे से कहा, ”क्या हम कहीं बाहर नहीं चल सकते सुमित?’’

सुमित ने कुछ क्षण सोचा फिर बोला, ”लंबे ब्रेकअप के बाद तुम मेरे पास आई हो अमृता. मैं तुम्हारी परेशानी सुनूंगा और उसे हल भी करने की कोशिश करूंगा. पहले तुम बैठ जाओ. मेरे साथ चायनाश्ता करो, फिर हम बाहर चलेंगे.’’

”ठीक है.’’ अमृता ने कहा और कुरसी पर बैठ गई.

थोड़ी ही देर में बनवारी चायबिस्कुट ले कर आ गया. बह चाय ज्यादा ले कर आया था. उस ने 3 कपों में चाय डाली और सुमित तथा अमृता को दी. बिसकुट भी उस ने एक प्लेट मे खोल कर रख दिए.

”लो अमृता, चाय पिओ.’’ सुमित ने कप उठा कर अमृता की तरफ बढ़ाया. अमृता ने चाय ले ली और पीने लगी.

ऐसे बना खूनी प्लान

बनवारी दूर जा बैठा था. चाय पी लेने के बाद सुमित ने उठते हुए कहा, ”बनवारी, मैं बाहर जा रहा हूं. कोई ग्राहक आए तो संभाल लेना.’’

”ठीक है भैया,’’ बनवारी ने सिर हिलाया.

सुमित अमृता को ले कर गैस एजेंसी से बाहर आ गया. उस ने अपनी बाइक निकाली और अमृता को बिठा कर एक पार्क में आ गया.

यहां ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी. कुछ प्रेमी जोड़े पेड़ों के नीचे या बेंच पर बैठे नजर आ रहे थे. सुमित एक पेड़ के नीचे आ कर बैठ गया. यहां दूरदूर तक सन्नाटा था.

”बताओ अमृता, तुम्हें क्या परेशानी है?’’ सुमित ने अमृता के गंभीर चेहरे पर नजरें जमाते हुए पूछा

”सुमित, मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगी.’’ अमृता का स्वर गंभीर था.

”ये पुरानी बातें हैं अमृता. छोड़ो, वह बताओ जिस के लिए तुम्हें एकांत चाहिए था.’’

”वही बता रही हूं सुमित. मैं ने अपनी कालेज की पढ़ाई के कारण तुम से किनारा किया था, लेकिन तुम से जुदा हो कर मैं किसी दूसरे लड़के के प्रेमजाल में फंस गई. मैं जिस लड़के से प्यार करने लगी थी, उस के प्यार में मैं इतना पागल हो गई कि उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी.’’

कुछ क्षण चुप रहने के बाद अमृता ने गहरी सांस ली, ”सुमित, मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगी. उस लड़के के साथ मेरे संबंध भी बन गए और यही गलती मुझ से ऐसी हुई कि मैं आज परेशान खड़ी हूं.’’

”क्या तुम उस लड़के के बच्चे की मां बनने वाली हो अमृता?’’ सुमित ने अनुमान लगाते हुए पूछा.

”अरे नहीं. यह बात नहीं है सुमित, उस हरामजादे ने हमारे बीच बने अंतरंग क्षणों की वीडियो बना ली. वह वीडियो मेरे मांगने पर भी मुझे नहीं दे रहा है. जब भी मैं उस से वीडियो डिलीट करने या मुझे देने की बात करती हूं, वह टालमटोल करता है. मुझे अब उस से डर लगने लगा है. वह मेरी वीडियो द्वारा कहीं मुझे ब्लैकमेल न करने लगे.’’

”मामला गंभीर है अमृता,’’ सुमित लंबी सांस भर कर बोला, ”तुम्हारी बात से साफ दिखाई दे रहा है वह तुम्हें कभी न कभी अच्छी तरह बदनाम करेगा या तुम से रुपए ऐंठेगा.’’

”यही तो डर मेरी नींद उड़ाए हुए है सुमित, मैं तुम से इसीलिए मिलने आई हूं. तुम किसी भी तरह मुझे यह वीडियो दिलवा दो. मैं जिंदगी भर तुम्हारा अहसान मानूंगी.’’

”यह इतना सरल काम नहीं है अमृता, इस के लिए तुम्हारे उस पार्टनर के हाथपांव तोडऩे पड़ेंगे मुझे. जरूरत पड़ी तो उस की हत्या भी करनी पड़ सकती है.’’ सुमित कुछ सोचने के बाद गंभीर स्वर में बोला.

”खत्म कर दो उसे. मेरा अब उस से मोह भंग हो गया है सुमित. वह मरेगा, तभी अब मुझे सुकून मिलेगा. वह वीडियो जो उस ने अपने कंप्यूटर की हार्डडिस्क में डाल रखी है, मुझे वह हार्डडिस्क कुछ भी कर के मिलनी चाहिए.’’

”ठीक है, तुम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे जाओ. मैं कुछ करता हूं.’’

अमृता ने अपना मोबाइल नंबर सुमित को दे दिया.

इस के बाद उन दोनों के बीच आगे की प्लानिंग बनती रही, फिर अमृता को ले कर सुमित कश्यप मुरादाबाद बस अड्ïडा के लिए निकल गया. क्योंकि अमृता को वहां से बस पकड़ कर दिल्ली जाना था.

आग ऐसे बनी काल

5 अक्तूबर की आधी रात बीत गई थी. अब 6 अक्तूबर का दिन शुरू हो गया था, जो गांधी विहार वालों के लिए सनसनी ले कर आया.

रात करीब 3 बजे के आसपास ई ब्लौक 60 नंबर के फ्लैट के सामने रहने वाले एक सज्जन बाथरूम करने इसी समय उठे थे तो उन्होंने अपने वाशरूम की खिड़की से ई-60 नंबर वाले फ्लैट की चौथी मंजिल पर आग की ऊंचीऊंची लपटें उठती देखीं तो घबरा कर अपने घर से बाहर आ गए और जोरजोर से चिल्लाने लगे, ”आग लग गई है… आग लग गई है.’’

उन के चीखने पर कई घरों के खिड़की और दरवाजे खुल गए. लोग अपने घरों से बाहर आ गए. मोहल्ले में हल्ला मच गया. और भी घरों में जाग हो गई. आग लगी है का शोरगुल जोरजोर से उभरने लगा. ई-60 नंबर के फ्लैट के निचले तलों पर रहने वाले भी जाग गए और गली में आ कर ऊपरी मंजिल पर लगी भयानक आग को देख कर सहम गए.

किसी ने फायर बिग्रेड को फोन कर दिया था. करीब 15-20 मिनट में दमकल की गाडिय़ों की घंटियां वातावरण में सुनाई देने लगीं. दमकल की गाडिय़ां उस क्षेत्र के पास पहुंची ही थीं कि आग लगने वाली चौथी मंजिल के फ्लैट में जोरदार धमाका हुआ. इस के बाद आग और तेजी से भड़क उठी. आग की लपटें आसमान छूती नजर आने लगीं.

”लगता है, कमरे में सिलेंडर फट गया है.’’ भीड़ में कई स्वर उभरे, ”अरे इस में तो एक लड़का रहता है कोई रामकेश नाम का स्टूडेंट है, जो सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहा है. मेरी एकाध बार उस से बात हुई है.’’

एक व्यक्ति दुखी स्वर में बोला, ”बेचारा, पता नहीं कहीं गया हुआ है क्या. घर का सारा सामान जल गया है.’’

”गया है या घर में ही था,’’ दूसरा व्यक्ति बोला, ”उस के साथ तो एक लड़की भी रहती देखी है मैं ने. उस की रिश्तेदार होगी. एकदो दिन से तो मैं ने उसे नहीं देखा है.’’ एक अन्य युवक बोला.

तभी फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां वहां आ गई. दमकलकर्मी जल्दी से गाडिय़ों से बाहर कूदे और फिर अपने काम में लग गए. आग बुझाने के लिए पानी का प्रेशर पाइपों द्वारा फेंका जाने लगा. कुछ देर में वहां तिमारपुर थाने की पुलिस वैन भी आ गई. इस में थाने के एसएचओ प्रवीण कुमार, एसआई दीपक शर्मा, एसआई मोहित उज्जवला, हेडकांस्टेबल राहुल, टिंकू यादव, कांस्टेबल मनोज और महिला कांस्टेबल रजनी थे.

थोड़ी देर में उस फ्लैट की आग पर काबू पा लिया गया. दमकलकर्मी अपने इंचार्ज के साथ उस ऊपरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां का दृश्य बहुत भयावह और दिल को झकझोर देने वाला था. पूरे कमरे में एक युवक के शरीर के चीथड़े बिखरे हुए थे. सिलेंडर फटने से उस कमरे का सामान भी चारों तरफ बिखरा पड़ा था. मानव न मांस की सड़ांध वहां भयंकर रूप से फैली पड़ी थी.

कमरे में पानी काफी भर गया था, जो धीरेधीरे नाली के पाइप से निकल कर कम होने लगा था. वहां कुछ भी सामान सही स्थिति में नहीं था. पहली ही नजर में देखने से समझा जा सकता था कि कमरे में आग लगने के बाद तेजी से फैली थी, फिर सिलेंडर फटने से वहां पर फंसा युवक जो शायद नींद में रहा होगा और निकल पाने में सफल न हो सका हो, उस के चीथड़े उड़ गए थे.

यह बहुत भयानक मंजर था. दमकलकर्मी अपने इंचार्ज के साथ थोड़ी देर में ही वापस नीचे आ गए और नीचे मौजूद तिमारपुर थाना इंचार्ज से दमकल इंचार्ज ने बात की.

”यह एक हादसा है श्रीमान. आग रात को कब लगी, वहां मौजूद युवक को शायद मालूम नहीं हुआ, वह धुएं से बेहोश हो गया होगा, फिर सिलेंडर फटने से इस के चीथड़े उड़ गए. आप मालूम कीजिए, वह युवक कौन है, जो इस कमरे में रहता रहा है.’’

”हां, आगे की ड्यूटी अब हमारी है.’’ एसएचओ प्रवीण कुमार बोले और अपने साथ एसआई मोहित उज्जवल तथा दीपक शर्मा को ले कर चौथी मंजिल पर आ गए. वह भयानक मंजर देख कर उन के भी रोंगटे खड़े हो गए. मानव मांस की दुर्गंध से उबकाई आने लगी, फिर भी मुंह पर रुमाल बांध कर उन्होंने वहां का बारीकी से मुआयना क्रिया.

युवक की मौत आग लगने से हुई या आग लगने के बाद धुएं से दम घुटने से हुई, अब यह बताने वाला वहां कोई नहीं था. हां, मौत के बाद वहां रखा सिलेंडर फटने से उस के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे, यह समझा जा सकता था. वहां अधजला कंप्यूटर, किताबें कौपी और खानेपीने का सामान इधरउधर फैला पड़ा था. साथ में अटैच किचन भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया था.

यह पढऩे वाला स्टूडेंट था. एसएचओ प्रवीण कुमार बोले, ”इस के विषय में मकान मालिक से मालूम कर के परिजनों को सूचित करना होगा. दीपक शर्मा, आप यह काम निपटाइए. मैं फोरैंसिक टीम को बुलवा कर यहां की काररवाई पूरी करवाता हूं. उज्जवल, आप फोरैंसिक टीम को फोन कर दीजिए.’’

”ओके सर.’’ एसआई मोहित उज्जवल ने कहा और वह जेब से फोन निकाल कर फोरैंसिक स्क्वायड को फोन मिलाने लगे.

इंसपेक्टर प्रवीण कुमार वहां से बालकनी में आ गए और उन्होंने इस घटना की जानकारी नार्थ जिले के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी शशिकांत गौड़ को दे दी. उन दोनों ने लाश की शिनाख्त करने और उस के परिजन को सूचना देने की हिदायत के साथ लाश को पोस्टमार्टम के लिए हिंदू राव हौस्पिटल भेजने की सलाह दे दी.

फोरैंसिक टीम वहां आधा घंटे में पहुंच गई और अपने काम में जुट गई. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद लाश के सभी हिस्सों को, जो कमरे में बिखर गए थे, समेट कर पोस्टमोर्टम के लिए हिंदू राव अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया.

सुबह तक यह भी पता हो गया कि इस कमरे में रहने वाले युवक का नाम रामकेश मीणा था, वह यहां किराए पर रह कर यूपीएससी की पढ़ाई कर रहा था.

मृतक निकला स्टूडेंट

मकान मालिक और आसपड़ोस से पूछताछ में मालूम हुआ कि रामकेश मीणा के साथ कुछ महीनों से अमृता नाम की लड़की भी रह रही थी. दोनों में क्या संबंध थे, यह तो कोई नहीं बता सका. हां, यह जरूर मालूम हुआ कि वह फोरैंसिक साइंस की बीएससी की पढ़ाई कर चुकी थी. अब उस ने फोरैंसिक साइंस में कंप्यूटर का कोर्स करने के लिए दाखिला लिया हुआ था. 2-3 दिन से वह कमरे में नजर नहीं आई थी. शायद वह अपने घर गई हुई थी.

आजकल युवा लड़केलड़कियों का लिवइन रिलेशन में रहने का नया फैशन चला हुआ है. इसलिए इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने बहुत गंभीरता से इस विषय को नहीं लिया. रामकेश मीणा मूलरूप से राजस्थान का रहने वाला था. परिवार में उस के मम्मीपापा के अलावा एक भाई है. उन्हें इस दुर्घटना की खबर भेज दी गई. पूरी काररवाई निपटा कर सुबह तिमारपुर थाने की पुलिस टीम वापस लौट आई.

सुबह थाना तिमारपुर के एसएचओ धूप में बैठे अखबार पढ़ रहे थे. तब उन के फोन की घंटी बजने जगी. फोन उन के कक्ष में लैंडलाइन पर था. इंसपेक्टर प्रवीण कुमार उठ कर कमरे में आ गए. उन्होंने रिसीवर उठा कर कहा, ”हैलो, मैं एसएचओ प्रवीण कुमार बोल रहा हूं. आप?’’

”गुड मार्निंग सर!’’ दूसरी ओर से गंभीर स्वर उभरा, ”मैं फोरैंसिक टीम का इंचार्ज भट्ट बोल रहा हूं. सर, कल रात को हम ने तिमारपुर के गांधी विहार में फ्लैट नंबर ई-60 में घटनास्थल का निरीक्षण किया था. आप भी तब वहां थे.’’

”हां, मुझे याद है, अभी मुश्किल से इस बात को 5 घंटे का समय ही बीता है. बोलिए, आप क्या कहना चाहते हैं?’’

”सर, मेरा और मेरी पूरी टीम का कहना है कि वह महज एक दुर्घटना वाला मामला नहीं है. उस युवक रामकेश मीणा की पूरी प्लानिंग के साथ हत्या की गई है.’’

इंसपेक्टर प्रवीण कुमार हैरानी से बोले, ”आप की जांच से क्या ऐसा साबित हो रहा है मिस्टर भट्ट?’’

”जी हां. तभी तो मैं ने पूरे विश्वास के साथ आप को फोन मिलाया है.’’

”आप को इस मामले में कहां पर शक हो रहा है. वह तो सीधासीधा आग लगने और उस में सिलेंडर ब्लास्ट होने का मामला था. मैं ने स्वयं देखा है. सिलेंडर फटने से युवक के शरीर के चीथड़े उड़ थे.’’

”यह तो मैं भी मान रहा हूं सर, किंतु मुझे यह हत्या का ही मामला लग रहा है. क्योंकि जो सिलेंडर रसोई घर में गैस चूल्हे से लगा होना चाहिए था, वह किचन से अटैच्ड कमरे में मिला है. आप सोचिए सिलेंडर का कमरे में क्या काम?’’

”ओह!’’ इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने उतावलेपन से कहा, ”मान गया मैं आप को भट्ट साहब, आप ने कितनी बारीकी से इस बात को पकड़ा है. यह बात हमारे किसी के दिमाग में नहीं आई. आप ठीक कह रहे हैं, कमरे में सिलेंडर किस मकसद से लाया गया. यदि चाय या अन्य किसी चीज को बनाने के लिए सिलेंडर को किचन से कमरे में लाना आवश्यक था तो उस के साथ गैस चूल्हा भी होना जरूरी था. वह तो किचन में ही दिखाई दे रहा था.’’

”यहीं से मुझे इस मामले में संदिग्ध होने की बू आने लगी थी. मैं ने अपना विचार अपनी टीम के साथ शेयर किया तो सभी को कहना पड़ा, यह सोचीसमझी हत्या की साजिश बुनी गई है. युवक यदि बेहोश था तो उस के चीथड़े उड़ाने का मकसद यह हो सकता है कि पहले युवक की हत्या की गई, फिर सिलेंडर ब्लास्ट कर के इसे दुर्घटना बनाने की प्लानिंग रची गई.’’

”आप का सोचना ठीक है. मैं डीसीपी साहब से बात कर के उस स्थान की फिर से जांच करने की इजाजत ले लेता हूं. फिर देखता हूं कि मामला क्या है.’’

”जी ठीक है.’’ भट्ट ने कह कर संपर्क काट दिया.

इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने तुरंत डीसीपी राजा बांटिया को फोन लगा कर उन्हें फोरैंसिक इंचार्ज श्री भट्ट के संदेह का कारण बताते हुए इस मामले में फिर से जांच करने की इजाजत मांगी. श्री राजा बांटिया ने उन्हें इजाजत देते हुए इस मामले को गंभीरता से देखने के लिए उन के सुपरविजन में एक टीम का गठन कर दिया.

साजिश का मिला सुराग

तिमारपुर थाने के एसएचओ प्रवीण कुमार के साथ ला ऐंड और्डर इंसपेक्टर पंकज तोमर, एसआई दीपक शर्मा, एसआई मोहित उज्जवल, हैडकांस्टेबल राहुल, रामरूप, टिंकू यादव, मनोज और महिला कांस्टेबल रजनी को टीम में शामिल किया गया. यह टीम एसीपी शशिकांत गौड़ के दिशानिर्देश पर काम करने के लिए नियुक्त की गई. टीम ने घटनास्थल पर जा कर जब बारीकी से वहां का निरीक्षण किया तो उन्हें श्री भट्ट की बात में दम नजर आया.

सिलेंडर कमरे में ब्लास्ट हुआ था और उस के टुकड़े कमरे में फैले हुए थे. कमरे की दीवारों का सिलेंडर ब्लास्ट होने से काफी क्षति पहुंची थी. उस का प्लास्टर जगहजगह से उखड़ गया था. टीम ने किचन में जा कर देखा, वहां चूल्हा अव्यवस्थित पड़ा था. उस के पाइप से रबड़ का पाइप लगा था, लेकिन रेगुलेटर निकाला हुआ था. कमरे में रेगुलेटर सिलेंडर के मुंह पर लगा देख लिया गया था. ब्लास्ट से मुंह वाला हिस्सा एक कोने में पड़ा था.

कमरे में उन्हें केरोसिन, शराब की गंध भी महसूस हो रही थी. कोर्स की किताबें अधजली कुछ बैड पर पड़ी थीं. कुछ कमरे में फैली दिख रही थीं. इंसपेक्टर पंकज तोमर ने कमरे को देख लेने के बाद कहा, ”यहां पर क्राइम सीन हुआ है. युवक की पहले हत्या की गई, फिर आग लगा कर यहां सिलेंडर छोड़ दिया गया, ताकि गरम होने पर यहां ब्लास्ट हो और यह हादसा लगे.

युवक के चीथड़े होने से उस के शव की जांच भी नहीं की जा सकती है. सब सोचीसमझी प्लानिंग के तहत हुआ है. हमें अब यह देखना है कि इस कमरे में घटना से पहले कौन आया था. यहां आसपास सीसीटीवी कैमरे होंगे तो यह मालूम हो जाएगा.

”चलिए सीसीटीवी कैमरों की तलाश करते हैं.’’ श्री प्रवीण कुमार ने कहा.

वह सब बाहर आ कर सीसीटीवी तलाश करने लगे. उन्हें गली में बिजली के पोल पर सीसीटीवी कैमरा लगा दिखाई दे गया. उस की फुटेज चैक की गई तो उन को ई-60 के फ्लैट के चौथी मंजिल की वीडियो मिल गई. रात 5 अक्तूबर को चौथी मंजिल पर रात लगभग साढ़े 8 बजे 2 व्यक्ति अंदर जाते नजर आए. इस के 39 मिनट बाद यानी 9 बज कर 9 मिनट पर एक युवक मुंह ढंक कर कमरे से बाहर निकलते दिखा.

फिर 6 अक्तूबर लगने पर 2.57 बजे 2 युवक कमरे से बाहर आते दिखे. इन्होंने मुंह ढंक रखे थे. इन में एक युवक लड़की की तरह दिखाई दिया. उस की चाल और शरीर की बनावट से ही ऐसा संदेह हुआ. इस के बाद कमरे में से आग की लपटें निकलती दिखाई देने लगीं. पुलिस टीम के सामने यह स्पष्ट हो गया कि 5 अक्तूबर की रात ही ई-60 की मंजिल 6 पर 3 लोग घुसे. एक जल्दी बाहर आ गया, 2 आग लगने से कुछ ही मिनट पहले मुंह ढक कर कमरे से निकले. कल रात यहां प्लानिंग रच कर युवक रामकेश मीणा की हत्या की गई.

यह मालूम हो चुका था कि रामकेश के साथ 3-4 महीने से अमृता चौहान नाम की युवती भी रह रही थी. वह इस घटना से 3 दिन पहले ही यहां से गायब हो गई थी और लौटी नहीं थी. पुलिस का शक उसी पर गहराया. उस का मोबाइल नंबर मकान मालिक से मिल गया. यह भी मालूम हो गया कि अमृता मुरादाबाद में पीतल नगरी की रहने वाली है और उस के पिता का नाम राजवीर सिंह है. पुलिस टीम ने अमृता का मोबाइल नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ आ रहा था. उस की 5 अक्तूबर की लोकेशन ट्रेस की गई तो वह रात को ई-60 की ही मिली. इस से अमृता संदेह के घेरे में आ गई.

श्री पंकज तोमर को वादी बना कर यह केस धारा 287/106 (1) बीएनएस के तहत दर्ज कर लिया गया. दोपहर को रामकेश के मम्मीपापा भी रोते हुए राजस्थान से दिल्ली आ गए. उन का भी यही कहना था कि उन का बेटा साहसी और निडर था, वह आत्महत्या नहीं कर सकता. उन के बेटे को मारा गया है. यह उसी लड़की का काम हो सकता है, जो उन के बेटे के साथ रहती थी.

बौयफ्रेंड का किया मर्डर

पुलिस ने अब सारा ध्यान अमृता पर केंद्रित कर दिया. उस को हिरासत में लेने के लिए पुलिस टीम मुरादाबाद भेजी गई. पुलिस ने उस के घर और रिश्तेदारियों में छापे मारे, लेकिन अमृता वहां नहीं थी. उस के दिल्ली के छतरपुर में छिपे होने की जानकारी मिलने पर छतरपुर में छापा डाला गया, लेकिन वह वहां से निकल कर कुछ समय पहले ही कहीं चली गई थी.

पुलिस उस की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाथपांव मारती रही, लेकिन उस ने अपना मोबाइल फोन औन नहीं किया. आखिर 18 अक्तूबर को उसे मुरादाबाद से गिरफ्तार करने में पुलिस कामयाब रही. उसे दिल्ली लाया गया और सख्ती से पूछताछ की गई. उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उस ने रामकेश मीणा की हत्या करने के लिए अपने पूर्वप्रेमी सुमित कश्यप, निवासी मोहल्ला वाल्मीकि बस्ती, बंगला गांव, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) की मदद ली थी.

”लेकिन हम ने ई-60 की चौथी मंजिल से 3 युवकों को कमरे से मुंह ढक कर निकलते देखा था. वह तीसरा कौन था और उन 3 में तुम कहां थी?’’ इंसपेक्टर प्रवीण कुमार में पूछा.

”तीसरा युवक संदीप कुमार था सर. इसे सुमित ने मुरादाबाद से ही बुलाया था. वह रामकेश की हत्या होते ही मुंह ढक कर निकल गया था. मैं और सुमित रात 2 बज कर 57 मिनट पर कमरे में आग लगाने के बाद निकले थे. मैं ने तब खुद को छिपाने के लिए रामकेश की पहन रखी थी.’’

इंसपेक्टर पंकज तोमर ने अमृता से पूछा, ”तुम्हें रामकेश की हत्या क्यों करनी पड़ी, तुम तो 4-5 महीने से उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही थी?’’

”सर, मैं ने फोरैंसिक साइंस में बीएससी की थी. मई में मैं रामकेश के संपर्क में आई तो वह मिलनसार और अच्छा लगा. हम में प्यार हो गया तो मैं रामकेश के कमरे में साथ आ कर रहने लगी. रामकेश ने द्वारका के एक कालेज से बीटेक किया था. इन दिनों वह यूपीएससी की तैयारी कर रहा था. वह आईएएस बनना चाहता था. मैं ने फोरैंसिक साइंस में कंप्यूटर कोर्स ले लिया था.

”एक साथ रहते हुए मेरे रामकेश से संबंध बन गए. उस ने न जाने कैसे अंतरंग क्षणों के वीडियो बना लिए थे. मुझे जब पता चला तो मैं ने उस से वे तमाम वीडियो डिलीट करने के लिए कहा, लेकिन उस ने नहीं की.

”बारबार कहने पर भी वह मुझे न तो हार्डडिस्क दे रहा था न वीडियो डिलीट कर रहा था. तब मैं गुस्से में अपने मुरादाबाद के पूर्वप्रेमी सुमित कश्यप से मिली. वह मुरादाबाद में गैस एजेंसी चलाता है. उस ने कहा कि वह रामकेश से किसी भी तरह हार्डडिस्क दिलवा देगा.

”मुझे अपने वीडियो चाहिए थे. बेशक इस के लिए रामकेश की हत्या भी करनी पड़े तो मैं करने को तैयार थी. मैं फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई कर रही हूं. मुझे हत्या को हादसा कैसे दिखाया जाना है, मालूम था. मैं ने रामकेश की हत्या को खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई क्राइम वेब सीरीज देखीं और पूरी प्लानिंग के साथ 5 अक्तूबर को सुमित कश्यप के साथ रामकेश के कमरे में गई. तब संदीप भी हमारे साथ था.

”सुमित और संदीप ने रामकेश को डरायाधमकाया, मारापीटा, लेकिन वह हार्डडिस्क देने को तैयार नहीं हुआ तो सुमित ने उस का गला घोंट दिया. संदीप यह देख कर भाग गया. सुमित और मैं ने रामकेश की लाश पलंग पर लिटा कर उस पर तेल, केरोसिन, घी, शराब और रामकेश के कोर्स की किताबें भी डाल दीं.

”सुमित किचन से सिलेंडर निकाल लाया. उस के रेगुलेटर को थोड़ा सा खोल कर गैस को रिसने के लिए छोड़ कर हम बाहर निकले. दरवाजे पर जाली लगी थी, उसे काट कर अंदर हाथ डाला गया और कुंडी अंदर से लगाई गई ताकि पुलिस सोचे रामकेश ने खुद को खत्म किया है. बाहर से ही कमरे में माचिस की तीली जला कर फेंकने के बाद मुंह ढक कर हम निकल भागे.’’

”वह हार्डडिस्क तुम्हें मिल गई, जिस के लिए तुम ने यह जुर्म किया है.’’ डीसीपी राजा बांटिया ने प्रश्न किया. वह बहुत देर से अमृता का बयान सुन रहे थे.

”हां सर, मैं ने कंप्यूटर से हार्डडिस्क निकाल ली थी. वहां से मैं ने रामकेश के ट्रौली बैग में रामकेश के 2 मोबाइल भी उठा कर रख लिए थे. मैं समझ रही थी कि पुलिस इसे हादसा ही मानेगी, किंतु मैं फंस गई. इतनी चालाकी के बाद भी.’’ अमृता ने गहरी निराशा के साथ कहा.

श्री प्रवीण कुमार ने चुटकी ली, ”अभी तुम्हारी फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई अधूरी जो है अमृता, तुम ने अपना करिअर तो खराब किया ही, सुमित और संदीप जो मेहनत से एसएससी की तैयारी कर रहे थे और ग्रैजुएशन कर चुके हैं, उन की भी जिंदगी पर कालिख पोत दी है.

अमृता के बताए पते पर पुलिस ने छापे मार कर 21 अक्तूबर को मुरादाबाद से सुमित कश्यप (27 साल) और 23 अक्तूबर को 23 वर्षीय संदीप को गिरफ्तार कर लिया. अमृता से ट्रौली बैग, रामकेश की शर्ट और दोनों मोबाइल फोन पुलिस ने कब्जे में ले लिए. तीनों को सक्षम न्यायालय में पेश कर के 2 दिन की पुलिस रिमांड पर ले कर पूछताछ पूरी की गई, फिर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

अपने होनहार बेटे को खोने का गम लिए उस के पेरेंट्स बेटे का अंतिम संस्कार करने के बाद भारी मन से अपने घर राजस्थान लौट गए. Crime Story

 

 

Love Crime: प्रेमिका का सिर कलम

Love Crime: पति जौनी को छोडऩे के बाद 30 वर्षीय उमा को 25 वर्षीय बिलाल से मोहब्बत हो गई थी. उस के बाद वह लिवइन रिलेशन में रहने लगी. फिर एक दिन जंगल में उमा की सिरविहीन और निर्वस्त्र लाश मिली. उमा की जब किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी तो आखिर किस ने और क्यों किया उस का मर्डर? पढ़ें, लव क्राइम की यह हैरतंगेज कहानी.

उमा को खत्म करने की बिलाल की योजना किसी कागज पर नहीं थी, वह उस के दिमाग में बनी एक अंधेरी भूलभुलैया थी. उस ने सोचा कि पहले उमा को भरोसे में लिया जाए, फिर उसे सुनसान जगह ले जा कर उसे खत्म किया जाए. फिर उस की लाश के टुकड़े कर अलगअलग फेंक दिया जाए. इस से उस की शिनाख्त भी नहीं हो पाएगी और यह राज भी राज ही बन कर रह जाएगा. प्रेमिका को ठिकाने लगाने का बिलाल ने यही प्लान बना लिया.

14 दिसंबर, 2025 को बिलाल की शादी होने जा रही थी. बारात उतराखंड के रुड़की जानी थी. लेकिन इस निकाह में बिलाल की हिंदू प्रेमिका बाधा बन सकती थी और ऐसे में उस ने प्रेमिका उमा को रास्ते से हटाने का प्लान तैयार कर लिया था.

बिलाल ने अपनी शादी से ठीक 8 दिन पहले यानी 6 दिसंबर को उस ने उमा से कहा, ”चलो, कहीं घुमा कर लाता हूं.’’

उस के खौफनाक इरादों से अनजान उमा राजी हो गई. शाम का वक्त था, अंधेरा हो चला था. उमा रोमांच महसूस कर रही थी, जबकि उस के मन में कुछ और ही चल रहा था. 6 दिसंबर, 2025 को शाम करीब 6 बजे स्विफ्ट कार ले कर वह उमा के कमरे पर गया था. बोला, ”सरप्राइज है, चलो तुम्हें बाहर घुमा कर लाता हूं.’’

हथिनीकुंड बैराज में यूपी और हरियाणा को जोडऩे वाला पुल है. वह उसी रास्ते से कार लाया. पहले हिमाचल की तरफ कार घुमाई, फिर उस ने पहले हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब की तरफ कार मोड़ ली. उमा लगातार उस से बातें किए जा रही थी. वह उसे प्यारभरे अंदाज में उस की बातों का जवाब दे रहा था. दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था.

रात के करीब 8 बज गए थे. रात का स्याह अंधेरा छा गया था. कलेसर नैशनल पार्क से गुजर रहे थे. नैशनल हाइवे से गाडिय़ां आजा रही थीं. उस दिन शनिवार था. वीकेंड पर अकसर पर्यटक इस इलाके में ज्यादा घूमने जाते हैं. उस ने कहा कि कोई होटल देखते हैं, वहां शाम बिताएंगे. पांवटा में रूम तलाशने की कोशिश की, लेकिन पर्यटक काफी थे. कहीं कोई कमरा किराए पर नहीं मिला. उसे डर लगा कि कहीं पकड़ा न जाए. अचानक प्लान बदल दिया.

इस के बाद उस ने हरियाणा की सीमा की तरफ कार मोड़ ली. बोला कि चलो, जंगल की तरफ चलते हैं, उधर भी अच्छे होटल हैं. उमा तो उस पर आंखें मूंद कर भरोसा करती थी, इसलिए राजी हो गई. कलेसर जंगल के एरिया से निकलते ही आबादी शुरू हो जाती है. यहां प्रतापनगर के गांव बहादुरपुर की सीमा से पहले ही उस ने कार रोक ली. उमा ने पूछा कि कार क्यों रोक दी?

उस ने कहा कि आबादी आने वाली है. सीट बेल्ट लगाना जरूरी है. यह बहाना बना कर वह पिछली सीट पर चला गया. उस वक्त उमा अगली सीट पर बैठी अपनी धुन में मस्त थी. तभी अचानक (25 वर्षीय) बिलाल ने 30 वर्षीय प्रेमिका उमा के गले में सीट बेल्ट डाल दी और गला घोंटने लगा. उमा के पास बचने या चिल्लाने का ज्यादा मौका नहीं था. उमा का शरीर बेजान हो गया. उसे मरा मान बिलाल तुरंत अगली सीट पर आया. उस ने कार आगे बढ़ा दी. करीब आधा किलोमीटर दूर गया तो सामने गांव बहादुरपुर की लाइटें नजर आने लगीं.

बिलाल को अब शव ठिकाने लगाने की जल्दी थी. उस के मन में पकड़े जाने का भी डर था, इसलिए उस ने गरदन से सिर काटने की सोची. साथ में वह मीट काटने वाला छुरा ले कर आया था. लाश को सड़क किनारे खेतों में बनी पौपुलर की नर्सरी में ले गया. वहां सिर धड़ से अलग किया और लाश के कपड़े उतार लिए, ताकि उस की पहचान न हो. कटे सिर और उतारे गए कपड़ों को पौलीथिन के थैले में डाल कर अगली सीट पर रख लिया. सिर कटी लाश उस ने वहीं छोड़ दी थी.

उस वक्त रात के करीब 11-साढ़े 11 बजे होंगे. अब उसे ऐसी जगह की तलाश थी, जहां सिर व कपड़े फेंक सके ताकि शिनाख्त की संभावना न बचे. बिलाल ने सिर फेंकने के लिए इसी जगह को चुना. यहां सिर फेंकने के बाद बिलाल ने कार घुमाई और हथिनीकुंड बैराज के पुल से होते हुए अपने घर चला गया.

बिलाल ने मर्डर के बाद घर पहुंच कर सब से पहले अपना मोबाइल फारमेट कर दिया, जिस से कि उस के मोबाइल में उमा की फोटो और कौन्टैक्ट नंबर सब डिलीट हो गए. आधी रात के बाद बिलाल सो गया और सुबह फेमिली वालों से कहा कि अब निकाह की तैयारियों में रहूंगा. अब कहीं नहीं जाऊंगा.’’ योजना पर अमल कर के उस ने उमा की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म कर दी. यह मामला हरियाणा के यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जुड़ा एक सनसनीखेज हत्याकांड है, जिस में प्रेम प्रसंग, लिवइन रिलेशनशिप और शादी के दबाव के चलते बेरहमी से हत्या की गई है.

सहारनपुर के हलालपुर गांव में एक परिवार रहता है. उस परिवार की उमा 18 साल की हो चुकी थी. उस की जवानी अब फूल की तरह पूरी तरह खिल चुकी थी. उमा के घर से सिर्फ 2-4 घर छोड़ कर  एक 19 साल का युवक जौनी रहता था. पेशे से मजदूर था और रंगाईपुताई का काम किया करता था. जौनी मामूली सा विकलांग था. उस की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि कोई उस की कमजोरी पर ध्यान ही नहीं देता. जौनी मेहनती और हंसमुख था.

उमा के घर में रंगाईपुताई का काम चल रहा था. उमा के पापा ने जौनी को बुलाया था, क्योंकि वह पड़ोस में ही रहता था. पहली बार जब जौनी उमा के घर आया तो वह सीढ़ी पर चढ़ कर दीवारों को रंग रहा था. विकलांग होने के बावजूद वह बड़े सलीके से काम कर रहा था, जैसे कोई कलाकार अपनी पेंटिंग बना रहा हो. उमा उस वक्त घर में थी. बचपन से ही वो जौनी को ‘जानी वाकर’ कह कर चिढ़ाती थी और जौनी मुसकरा कर उस की कलाई पकड़ लेता. दोनों साथ खेलते हुए बड़े हुए.

परंपरा, मानवता और पड़ोसी होने के नाते वह चाय ले कर किचन से बाहर आई और जौनी को देखा. उस के माथे पर पसीने की बूंदें, हाथों में ब्रश और चेहरे पर एक हलकी मुसकान.

”ओए जौनी, ले चाय पी ले,’’ उमा ने शरमाते हुए कहा.

जौनी ने मुड़ कर देखा और उस की आंखें उमा की मासूमियत पर ठहर गईं.

”धन्यवाद, उमा. लेकिन मैं तो मजदूर हूं.’’ उस ने हंसते हुए कहा.

”मजदूर को भी हमारी परंपरा के अनुसार दिन में 2 बार चाय पिलाते हैं.’’

उमा की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि वह छोटीछोटी बातों से प्रभावित हो जाती थी. जौनी की सादगी और मेहनत ने उसे छू लिया. उस दिन से दोनों की बातचीत शुरू हुई. बचपन की पुरानी यादें, यही सब बातों के विषय होते. धीरेधीरे ये मुलाकातें रोमांटिक रंग लेने लगीं. इस के बाद उन की मुलाकातें भी होने लगीं. जौनी उमा को अपनी जिंदगी की कहानियां सुनाता, कैसे वह विकलांग होने के बावजूद कभी हारा नहीं, कैसे वह सपने देखता है एक बेहतर जिंदगी के. उमा उस की ताकत से प्रभावित होती और उसे चूमती, पहले गाल पर, फिर होंठों पर.

उन के चुंबन में एक जुनून था, जैसे दोनों की आत्माएं मिल रही हों. जौनी की मजबूत बांहें उमा को घेर लेतीं और उमा की नरम अंगुलियां उस के बालों में घूमतीं. वे घंटों बातें करते, हंसते और कभीकभी चुपके से एकदूसरे को छूते, एक स्पर्श जो बिजली सी दौड़ाता.

जौनी ने उमा का हाथ पकड़ा और बोला, ”उमा, तुम मेरी जिंदगी हो. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

उमा ने उस के सीने पर सिर रखा और कहा, ”जौनी, तुम्हारी कमजोरी मेरी ताकत है. हम साथ हैं, हमेशा.’’

उन का रोमांस अब गहरा हो गया था. उमा और जौनी के बीच का प्यार एक खामोश नदी की तरह बहता था. गहरा, शांत और हर किसी की नजरों से छिपा हुआ.

शादी के दिन हुई फरार

रातें उन की थीं. जब मोहल्ला सो जाता, उमा अपनी छत पर आती. जौनी दीवार फांद कर उस के पास पहुंच जाता. ऐसे ही 5 साल गुजर गए. 5 साल की अनगिनत रातें, अनकही बातें, चुराए गए चुंबन और वो सांसें जो सिर्फ एकदूसरे के लिए रुकी थीं. उमा के फेमिली वाले उमा की शादी के लिए बहुत चिंतित थे. आखिरकार एक लड़का उमा के लिए फेमिली वालों ने पसंद कर के शादी तय कर दी. यह बात सन 2010 की है. सभी धार्मिक औपचारिकताओं के बाद बारात आने की तारीख तय हो गई. अभी तक उमा की तरफ से किसी तरह का कोई विरोध फेमिली वालों के सामने नहीं आया.

सूरज की पहली किरणों ने अभीअभी गांव की सड़कों को छुआ था, जब उमा के घर में हलचल मच गई. आज वह दिन था, जिस का इंतजार पूरे परिवार को था. उमा की शादी. लेकिन कमरे में सन्नाटा था. जब मां ने दरवाजा खटखटाया और भीतर झांका तो पल भर में सब कुछ समझ में आ गया. अलमारी खुली थी, कुछ कपड़े गायब थे, उमा भी गायब थी. दुलहन का लहंगा बिस्तर पर बिखरा पड़ा था. मेज पर रखा वह छोटा सा कागज, ‘मम्मी, हम मजबूर थे. माफ करना.’

जौनी और उमा, 2 प्रेमी दिल, रात की आड़ में घर से निकल चुके थे. उन के पैरों की धूल अब दूर किसी अनजान रास्ते पर उड़ रही थी, जहां प्यार की उड़ान ने परिवार की इज्जत को पीछे छोड़ दिया था. पापा की आंखें फैल गईं, भाई दौड़ कर बाहर निकले. ”कहां गई वो? जौनी भी गायब है!’’ चाचा की आवाज कांप रही थी.

पूरे गांव में तलाश शुरू हो गई. कुएं के पास, मंदिर में, बस स्टैंड पर. सभी रिश्तेदार मिल कर तलाश कर रहे थे. पड़ोसी जुट गए, फोन घूमने लगे. उन के मुंह से एक ही बात निकली, ‘भाग गए दोनों…’

ये शब्द हवा में जहर की तरह फैल गए, उमा के पापा का चेहरा पीला पड़ गया, मम्मी रोरो कर बेहाल हो रही थी.

‘उमा और जौनी की प्यार की आग में सब जल गया. अब इज्जत का क्या होगा?’ सोच कर पापा ने सिर थाम लिया.

तभी मामामामी आगे आए. उन की आवाज कांपी, पर नीयत मजबूत थी. दोनों ने उमा की मम्मी और पापा को समझाया. कहा, ”हम हैं आप के साथ. चिंता की कोई बात नहीं है. मेरी बेटी है. अगर आप कहें तो आज हम उमा की जगह अपनी बेटी को विदा कर देंगे. पूरे समाज में आप की इज्जत का सवाल है. यह त्याग हम कर सकते हैं.’’

दोनों में से किसी ने आंखें उठा कर नहीं देखा. अब हर तरफ फुसफुसाहटें थीं. उमा की मम्मी आंसू पोंछते हुए बोली, ”भाभी, क्या करूं? मेरी बेटी ने तो हमें डुबो दिया. बारात लौट गई तो गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’

आंसू बिना आवाज के गिरते रहे. मां ने एक पल को भाई की ओर देखा और फिर धीरे से सिर हिला दिया. समय बीतता गया, सूरज चढ़ता गया. बारात की धुन दूर से सुनाई देने लगी. ढोल की थाप, शहनाई की मधुर स्वरलहरियां. दूल्हा, घोड़ी पर सजाधजा, मुसकराता हुआ आ रहा था अनजान इस तूफान से. घर के दरवाजे पर बारात रुकी. बारात आई. ढोलनगाड़ों की आवाज ने उस खालीपन को ढक लिया, जो आंगन में पसरा था. स्वागत हुआ, आवभगत निभाई गई. सभी के चेहरे पर नकली मुसकानें थीं, पर आंखों में प्रश्न.

परंपराएं चलीं, फेरों का समय आया. मामा की बेटी लाल जोड़े में आई. कांपती नहीं, बल्कि विश्वास से भरी थी. फेमिली वालों के चेहरे पर मुसकान चिपकी हुई थी, लेकिन आंखें बता रही थीं कि दिल टूटा हुआ है.

पापा ने आगे बढ़ कर दूल्हे का स्वागत किया, ”आओ जी, स्वागत है!’’

बाहर बारात नाच रही थी, अंदर फैसला हो चुका था. मामामामी की बेटी को बुलाया गया. वह हैरान थी, लेकिन परिवार की इज्जत के लिए तैयार हो गई.

”अगर इस से सब की लाज बचती है तो मैं कर लूंगी,’’ उस ने धीरे से कहा.

मेकअप किया गया. उमा का ही लहंगा पहनाया गया. अब  मंडप सजा, पंडितजी मंत्र पढऩे लगे. दूल्हे को बताया गया कि ‘परिवार की रस्म है, दुलहन का नाम बदल गया.’ वह मुसकराया. शायद अनजान, शायद समझदार. फेरों के समय उमा की मम्मी की आंखों से आंसू बह रहे थे, खुशी के नहीं, दर्द के. पापा ने दुलहन का हाथ दूल्हे को सौंपा, मन में उमा की याद थी, ‘बेटी, तू जहां भी है, खुश रह,’ उन्होंने मन ही मन कहा.

इस तरह अपनी इज्जत की आरती को बचा कर इस घर से उमा की जगह उस की ममेरी बहन को विदा कर दिया गया. शादी संपन्न हुई. बारात विदा हुई. लेकिन घर में सन्नाटा था. रात को जब सब सो गए तब उमा की मम्मी ने पति से कहा, ”क्या हम ने सही किया?’’

उन्होंने सिर हिलाया, ”हां, इज्जत बचाई. लेकिन दिल टूटा है. जौनी और उमा, काश वे समझते.’’

इस अप्रत्याशित मोड़ ने एक नई कहानी शुरू की, दर्द की, बलिदान की और उम्मीद की.

निर्वस्त्र मिली लाश

हरियाणा के यमुनानगर के प्रताप नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव पड़ता है बहादुरपुर. 7 दिसंबर, 2025 की सुबह के करीब  9 बजे के आसपास इसी बहादुरपुर गांव के एक व्यक्ति ने प्रताप नगर थाने में फोन कर कहा, ”साहब, मेरे गांव के बाहर पौपुलर की एक नर्सरी है. एक महिला की डैडबौडी पड़ी है, जिस का न तो वहां पर सिर मौजूद है और न ही उस के शरीर पर कोई कपड़ा मौजूद है.’’

एसएचओ नरसिंह गुर्जर को जैसे ही सूचना मिली, वह फौरन अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां पर पहले से ही काफी तादाद में लोग मौजूद थे. पुलिस भीड़ को हटा कर डैडबौडी के पास पहुंची. डैडबौडी को देखने के बाद खुद पुलिस भी एकदम से चौंक गई. पुलिस ने घटनास्थल का बड़ी बारीकी से मुआयना किया, लेकिन महिला का सिर बरामद नहीं हुआ.

पर सवाल यह था कि आखिरकार वह मरने वाली महिला कौन थी? घटनास्थल पर काफी सारे लोग मौजूद थे. उन सभी से पूछताछ की, पर कोई भी व्यक्ति उस डैडबौडी की शिनाख्त नहीं कर सका. घटनास्थल पर कोई ऐसा डौक्यूमेंट्स और न ही कोई ऐसा पहचानपत्र मिला, जिस से उस मरने वाली महिला के बारे में कुछ पता चल सके. उस के शरीर पर भी कहीं कोई टैटू, नाम या अन्य कोई चिह्नï या गुदा नहीं था.

पुलिस ने डैडबौडी को अपने कब्जे में लेने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसएचओ नरसिंह गुर्जर ने तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी. यमुनानगर के एसपी कुलदीप गोयल घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी बुला लिया गया. पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के बाद केस की जांचपड़ताल शुरू कर दी. 72 घंटे का समय बीत जाने के बावजूद मृतका की शिनाख्त नहीं हुई तो इस सिरविहीन धड़ का अंतिम संस्कार सेवा समिति के माध्यम से करा दिया गया.

एसपी कुलदीप गोयल ने केस का खुलासा करने के लिए एसआईटी का गठन कर दिया. साथ ही सर्विलांस टीम, फोरैंसिक टीम, डौग स्क्वायड सभी अपनीअपनी तरह से प्रयास करने में जुट गए, ताकि इस हत्याकांड का खुलासा हो सके. यह एक तरह से ब्लाइंड मर्डर था और इस का पता चल पाना मुश्किल हो रहा था. एसपी कुलदीप गोयल ने एसआईटी के हैड डीएसपी रजत गुलिया को नियुक्त किया था. रजत गुलिया के नेतृत्व में पुलिस ने प्रयास करने शुरू कर दिए. 500 से ज्यादा  सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. पुलिस द्वारा उन्हें बारबार देखा जा रहा था.

इस केस की जांचपड़ताल करते हुए 3 दिन का समय गुजर गया, लेकिन पुलिस के हाथ कोई सबूत नहीं मिला. 3 दिनों के बाद पुलिस फिर से उस घटनास्थल पर गई. जब आसपास के लोगों से पूछताछ की तो बहादुरपुर गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस से कहा कि साहब मैं दावे के साथ तो नहीं कह सकता, लेकिन ठीक एक दिन पहले 6 दिसंबर, 2025 को रात के करीब 11-साढ़े 11 बजे इस रोड पर मैं ने एक कार को देखा था. मुझे उस कार का नंबर तो याद नहीं है, लेकिन उस कार के नंबर प्लेट पर यूपी का नंबर लिखा हुआ था.

निकाह से पहले अरेस्ट

पुलिस ने इसी को आधार बना कर जब इस केस की जांचपड़ताल करते हुए आगे जा कर जब रोड पर लगे हुए सीसीटीवी की फुटेज को चैक किया तो आखिरकार एक सीसीटीवी में वह कार जाते हुए दिखाई दी. उस का नंबर भी साफसाफ दिखाई दे गया. पुलिस गाड़ी के उस नंबर के माध्यम से उस के मालिक तक पहुंच गई. कार के मालिक से पता चला कि उस गाड़ी के ड्राइवर का नाम बिलाल है, जो मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नकुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत टिडोली गांव का रहने वाला है.

13 दिसंबर, 2025 को शाम के करीब 7 बजे के आसपास हरियाणा की पुलिस अपनी टीम के साथ बिलाल के घर पहुंच गई. उस दिन बिलाल की छोटी बहन की बारात आई हुई थी. कुछ बाराती चले गए थे. कुछ बाराती वहां मौजूद थे. उस वक्त बिलाल की बहन की विदाई का कार्यक्रम चल रहा था. बड़ी संख्या में पुलिस बल देख कर घर में अफरातफरी मच गई. पुलिस ने बिलाल के अब्बा फुरकान से संपर्क किया. उन से पूछा कि आज तुम्हारे यहां क्या फंक्शन है? उन्होंने बता दिया कि आज उन की बेटी की विदाई हो रही है.

पुलिस के कहने पर फुरकान ने अपने बेटे बिलाल को पुलिस के सामने पेश कर दिया.  पुलिस वालों ने जब उस से सवाल करने शुरू किए तो बिलाल सवालों के जवाब नहीं दे पा रहा था. सर्दी में भी उसे पसीना आने लगा. फुरकान समझ गया कि कुछ न कुछ उस के बेटे ने गड़बड़ की है. तभी बिलाल ने वहां से भागने की कोशिश की. उसे पता नहीं था कि चारों तरफ से वह पुलिस से घिरा हुआ है.

पुलिस ने बिलाल को गिरफ्तार कर लिया. तभी काफी संख्या में मौजूद रिश्तेदार पुलिस का विरोध करने लगे. सभी रिश्तेदार जानना चाहते थे कि बिलाल को पुलिस क्यों गिरफ्तार करने आई है. तब पुलिस ने उन्हें बता दिया कि इस ने एक महिला की हत्या की है. पुलिस उसे गिरफ्तार कर लौट आई. थाने में जब उस महिला की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने उमा नाम की महिला की हत्या कर उस की सिरविहीन लाश हरियाणा के यमुना नगर क्षेत्र में डाल दी थी और उस का सिर हरियाणा हिमाचल प्रदेश के बौर्डर पर कलेसर जंगल में एक खाई में डाल दिया था.

पुलिस ने रविवार 14 दिसंबर, 2025 को बिलाल की निशानदेही पर हरियाणा हिमाचल के बौर्डर पर कलेसर जंगल में स्थित लालढांग की खाई से उमा का सिर बरामद किया गया. हालांकि वहां छुरा बरामद नहीं हुआ. पुलिस ने अदालत में पेश कर के बिलाल को 4 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया था. रिमांड अवधि पर उस ने पुलिस को उमा की हत्या करने की जो कहानी बताई, वह हैरान करने वाली निकली—

हमदर्दी ने प्यार जगाया

बिलाल 4 भाईबहन हैं. वह पहले ट्रक और डंपर चलाता था. इन दिनों कार की ड्राइविंग कर रहा था. पेशेवर तरीके से कार की बुकिंग कर के यात्रियों को उन की बताई हुई मंजिल तक पहुंचाता था. रोज की तरह उस दिन भी वह एक फैक्ट्री में किसी सवारी को छोडऩे आया था. फैक्ट्री के गेट के बाहर एक महिला बेंच पर बैठी हुई थी. करीब 30 साल की, उस का चेहरा पीला था. आंखों में थकान और बेचैनी साफ झलक रही थी.

बिलाल का ध्यान उस पर चला गया. वह आदतन संवेदनशील था. उस ने पास जा कर उस से धीरे से पूछा, ”आप ठीक तो हैं? कुछ परेशान लग रही हैं.’’

महिला ने कमजोर सी मुसकान के साथ कहा, ”बुखार आ रहा है, सिर घूम रहा है. इसी फैक्ट्री में काम करती हूं. छुट्टी ले कर घर जा रही थी. चला नहीं गया, इसलिए अकेली बैठी हूं. अगर हो सके तो मुझे गंगोत्री कालोनी में घर तक छोड़ दीजिए.’’

घर पहुंचने पर बिलाल ने मैडिकल स्टोर से ला कर बुखार की दवा भी खिला दी. 2 घंटे में बुखार उतर गया तो बिलाल अपने घर चला गया. अगले कुछ दिनों में बिलाल हालचाल पूछने आने लगा. कभी दवा लाता, कभी फल. बातचीत का सिलसिला बढ़ा तो अहसासों की गरमाहट भी. दोनों ने अपनेअपने संघर्ष, अकेलापन और सपने साझा किए. उमा को बिलाल की सादगी और ईमानदारी भा गई और बिलाल को उमा की समझदारी और आत्मसम्मान.

एक दिन उमा ने बिलाल को अपनी जिंदगी की दुखभरी कहानी सुनाई. 13 साल पहले की बात है. मैं ने अपने पड़ोस के एक युवक जौनी के साथ भाग कर शादी की थी. मेरे एक बेटा भी है, जो अपने पापा के साथ रहता है. घर से बाहर 10 साल हम ने इधरउधर बिताए. उस के बाद हम लौट कर सहारनपुर आ गए. मेरे फेमिली वालों ने मुझ से संबंध खत्म कर दिए थे.

सहारनपुर आने पर मैं अपने पति के साथ  रमजानपुर में रहती थी. मैं काफी गुरबत में समय बिता रही थी. मोहल्ले के ही एक युवक से मेरा संपर्क हुआ. उस ने मुझे सहारनपुर में एक फैक्ट्री में नौकरी दिला दी. एक मोहल्ले के ही होने के कारण कभीकभी मैं उस के साथ चली जाती और कभीकभी वापसी में भी हम साथसाथ ही आ जाते. इस से पति मेरे ऊपर शक करने लगा. मैं ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पति जौनी के दिमाग से शक दूर नहीं हुआ.

इस बात को ले कर हम दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. दिलों में खटास पैदा हो गई. मैं ने गंगोत्री में किराए पर मकान लिया और पति से अलग इस किराए के मकान में अकेली रहने लगी. बात तलाक तक पहुंच गई. इस तरह हम दोनों के बीच संबंध विच्छेद हो गया. कुछ दिनों बाद युवक ने फैक्ट्री से काम छोड़ दिया. मेरा संपर्क उस से टूट गया. पति ने मेरी कभी कोई खबर नहीं ली. इस तरह मैं अकेली पड़ गई.

मैं एक दिन अपने पति के कमरे पर अपने बेटे से मिलने के इरादे से गई. पता चला कि वह मकान खाली कर के अपने गांव वापस चला गया है. उमा की आंखों में आंसू आ गए. दोनों एकदूसरे के करीब आए. उन के दिलों में एक नई गरमाहट जाग रही थी. धीरेधीरे मामला प्यार में बदल गया.

सहारनपुर की गलियों में एक नई कहानी शुरू हो चुकी थी 2 अकेले दिलों के मिलन की. बिलाल और उमा अब साथ थे. वे लिवइन में रहने लगे. बिलाल अपने घर कोई न कोई बहाना बना कर उमा के साथ रातें बिताया करता था. घर का सारा खर्च बिलाल ही उठाता था.

परिजनों ने तोड़ा संबंध

बिलाल को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने सब से पहले उस से सवाल किया कि यह महिला कौन है और इस की हत्या क्यों की? बिलाल ने पुलिस को अपनी मोहब्बत की शुरुआत की सारी कहानी बता दी. सिर को भी पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. शेष धड़ का तो पहले ही पोस्टमार्टम हो चुका था. सिरविहीन धड़ लावारिस घोषित हो जाने के कारण सेवा समिति ने बगैर सिर के अज्ञात मान कर पश्चिम यमुना नहर के पास श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया था.

क्योंकि अब उमा की शिनाख्त हो गई थी. उस के परिवार का पता लग गया था, इसलिए पुलिस पोस्टमार्टम के बाद सिर को ले कर उमा के गांव हलालपुर पहुंची तो उस का भाई टिंकू मिला. टिंकू ने बताया कि साहब करीब 15 साल पहले उमा की शादी हो रही थी. हम लोगों को पता ही नहीं चला, जिस दिन उस की बारात आने वाली थी, उसी दिन मौका पाते ही वो जौनी के साथ घर से भाग गई थी. उसी रात हम ने फैसला ले लिया था कि हम अब उमा को कभी याद नहीं करेंगे. उमा से हमारा कोई वास्ता नहीं है. उमा से हमारा कोई रिश्तानाता नहीं है.

पुलिस वाले जब उस का सिर ले कर पहुंचे तो इंसानियत के नाते टिंकू ने पुलिस वालों और रिश्तेदारों के कहने पर सिर का अंतिम संस्कार कर दिया. गांव के लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि आखिरकार यह सब कैसे हो गया. फिर पुलिस उस के पति जौनी के पास गई. जौनी बोला कि मुझे पता चला है कि वह किसी बिलाल नाम के युवक के साथ रह रही थी. उस ने ही उस का कत्ल कर दिया है. जौनी ने कहा कि मुझे उस के मर्डर का दुख तो है, लेकिन मेरा उस से कोई वास्ता या सरोकार नहीं रहा. कानूनन मेरा उमा से तलाक हो चुका था.

बिलाल इस समय जेल में है. पुलिस का दावा है कि उस ने सारे सबूत एकत्र कर लिए हैं. आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी. Love Crime

 

 

Love Story Hindi Kahani: प्रेमिका ही क्यों झेले शक के ताने

Love Story Hindi Kahani: 29 वर्षीय रितिका सेन को 2 बच्चों के बाप सचिन राजपूत से प्यार हो गया. सचिन भी रितिका को अपना दिल दे बैठा. सचिन उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगा. एकदूसरे को दिलोजान से चाहने वाले इस प्रेमी युगल के संबंधों में कड़वाहट भी पैदा हो गई. फिर एक दिन यही कलह उस मुकाम पर पहुंची कि…

27 जून, 2025 की रात को भी रितिका देर से घर लौटी तो उस के चरित्र को ले कर सचिन ने एक बार फिर से गंभीर टीकाटिप्पणी की तो रितिका की उस से तीखी नोकझोंक हो गई.

”मैं जानता हूं कि तू अपने बौस के साथ गुलछर्रे उड़ा कर आ रही है, इसी कारण घर आने में देर हुई.’’

”तुम्हें शर्म आनी चाहिए ऐसी बात कहते हुए.’’ रितिका कह देती, ”कोई एक बात तो बताओ जो मुझे चरित्रहीन साबित कर दे. कम से कम तोहमत लगाने से पहले मेरी नौकरी करने वाली कंपनी में जा कर लोगों से पूछ तो लेते मेरा चरित्र कैसा है. मैं नौकरी सिर्फ इसलिए करती हूं कि जब तक तुम बेरोजगार हो, तब तक घर अच्छे से चल सके.’’ रितिका ने समझाया.

”मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं है, मैं सब जानता हूं. तुझे घर चलाने की फिक्र नहीं, बौस से मिलने की फिक्र ज्यादा होती है.’’ सचिन ने ताना दिया.

उसी समय सचिन ने एक खतरनाक फैसला ले लिया था. सचिन देर रात तक जागता रहा. रात तकरीबन 12 बजे का समय था, समूचे गायत्री नगर में सन्नाटा पसरा हुआ था, तभी सचिन ने पूरी ताकत से रितिका का गला दबा दिया. उस की चीख भी नहीं निकल सकी. सचिन के शक्की मिजाज ने उसे हैवान बना दिया था. लगभग साढ़े 3 साल से सचिन राजपूत के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही रितिका को मौत के घाट उतारते वक्त उस के हाथ नहीं कांपे. हत्या करने के बाद उस की लाश चादर में लपेट कर बैड पर रख दिया और 2 दिनों तक लाश के बगल में शराब पी कर बिना किसी हिचकिचाहट के सोता रहा.

अपनी प्रेमिका की हत्या करने के बाद जैसे ही सचिन राजपूत नशे की हालत से बाहर आया तो उस ने मिसरोद में रहने वाले अपने दोस्त अनुज उपाध्याय को फोन कर अपनी प्रेमिका रितिका की हत्या की सूचना दे दी. रितिका की हत्या बात सुन कर पहले तो अनुज को सचिन की बात पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब सचिन ने जोर दे कर कहा तो अनुज उपाध्याय ने बिना देरी किए बजरिया थाने की एसएचओ शिल्पा कौरव को इस की सूचना दे दी. हत्या की सूचना पा कर एसएचओ शिल्पा कौरव तुरंत अपने सहायकों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गईं. रास्ते में ही उन्होंने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

कुछ देर में वह गायत्री नगर, भोपाल के फ्लैट नंबर 34 पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण किया. रितिका की लाश 48 घंटे से ज्यादा समय तक चादर में लिपटे पड़े रहने से डीकंपोज (खराब) होने लगी थी, अत: उन्होंने जरूरी काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और फ्लैट में ही मौजूद मृतका के हत्यारे लिवइन पार्टनर सचिन राजपूत को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी. पूछताछ में सचिन ने अपनी प्रेमिका रितिका सेन की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

उधर जिस फ्लैट में रितिका और सचिन पिछले 9 महीने से किराए पर रह रहे थे, उस के मालिक शैलेंद्र वर्मा ने पुलिस को बताया कि वह तो दोनों को पतिपत्नी ही समझते थे. फ्लैट किराए पर लेते वक्त सचिन ने रितिका को अपनी पत्नी बताया था. हालांकि रितिका की मांग में सिंदूर भरा न देख मेरी पत्नी ने रितिका को टोका भी था. तब रितिका ने कहा था कि आंटीजी, मैं प्राइवेट कंपनी में काम करती हूं, वहां कोई भी शादीशुदा महिला मांग भर कर नहीं आती, इसलिए मैं भी नहीं भरती. वैसे भी मैं नए खयालातों की हूं. गहनता से की गई पूछताछ में ऐसी कहानी निकल कर सामने आई कि पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो गई. चौंकाने वाली बात यह थी कि सचिन राजपूत ऐसा हैवान था, जिसे अपनी प्रेमिका की हत्या करने का तनिक भी मलाल नहीं था.

29 वर्षीय रितिका सेन और सचिन राजपूत के बीच शुरुआत में मोबाइल पर प्यार भरी बातों का सिलसिला शुरू हुआ, फिर छोटीछोटी मुलाकातें जब आगे बढ़ीं तो दोनों के दिलों में प्यार का अंकुर फूटने लगा. कुछ ही दिनों में उस ने वृक्ष का रूप अख्तियार कर लिया. कुछ समय तक पिकनिक स्पौट, कैफे और पार्क में मुलाकातें करने के बाद दोनों ने बिना किसी हिचकिचाहट के लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला कर लिया. यह बात जैसे ही दोनों के फेमिली वालों को मालूम हुई तो उन्होंने इस का विरोध किया. क्योंकि रितिका सेन समाज की थी, जबकि सचिन जाति से राजपूत था. इतना ही नहीं, वह 2 बच्चों का बाप था और रितिका के चक्कर में पत्नी से तलाक लेने की कोशिश कर रहा था. दोनों के फेमिली वाले उन की आशिकी को ले कर परेशान थे.

फेमिली वालों ने उन्हें हर तरह से समझाया. ऊंचनीच का वास्ता दिया, लेकिन फेमिली वालों के विरोध की परवाह किए बिना ही दोनों भोपाल के गायत्री नगर इलाके में किराए पर फ्लैट ले कर रहने लगे. शुरुआत के दिनों में दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहते हुए बेहद खुश थे. सचिन विदिशा जिले के सिरोंज का रहने वाला था, जबकि रितिका भोपाल की. वह अपने फेमिली वालों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी. इस का असर यह हुआ कि वे एकदूसरे की अच्छाइयों और कमजोरी को जान गए. समय अपनी गति से गुजरता रहा. इस बीच सचिन रितिका के मोबाइल फोन के हर वक्त बिजी रहने से काफी तनावग्रस्त रहने लगा था. क्योंकि वह जब भी उसे फोन करता, उस का मोबाइल व्यस्त ही आता था. सचिन समझ नहीं पा रहा था कि वह हर वक्त किस से बात करती है.

इसी हकीकत को जानने के लिए सचिन ने एक दिन उस का मोबाइल चैक किया तो पता चला कि वह घंटों अपने बौस से बातें करती है. सचिन समझ गया कि रितिका और उस के बौस के बीच अवश्य चक्कर है. चरित्र पर संदेह करने की वजह से दोनों में अकसर लड़ाई होने लगी थी. यह लड़ाई कभीकभी मारपीट तक पहुंच जाती थी. सचिन बेरोजगार था. रितिका के नौकरी करने से किसी तरह उस की गृहस्थी की गाड़ी चल रही थी. रितिका को प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने की वजह से घर आने में अकसर देर हो जाती थी. उधर अकसर उस का मोबाइल फोन भी व्यस्त रहता था.

यह बात सचिन को कतई पसंद नहीं थी. रितिका जिस दिन भी घर देर से आती, सचिन जरूर उस से झगड़ा करता. अनेक बार रितिका ने सचिन को समझाया भी कि देखो, तुम्हारा शक झूठा है. तुम्हें घर पर निठल्ले बैठेबैठे शक करने की बीमारी हो गई है. इस उम्र में मैं अपने बौस से इश्क लड़ा कर क्या अपना भविष्य चौपट करूंगी.

”मैं सब जानता हूं, तुम जैसी लड़कियां अपने प्रेमी को बहलाने के लिए इसी तरह की नौटंकियां किया करती हैं,’’ सचिन ने गहरी नजर से घूरते हुए कहा.

रितिका ने कहा, ”तुम्हें तो कोई चिंता है नहीं, तुम यूं ही शक करते रहे तो न जाने एक दिन क्या होगा.’’

सचिन अपने शक से बाहर निकलने को कतई तैयार नहीं था. रितिका सचिन को समझातेसमझाते थक चुकी थी, लेकिन उस पर कोई असर नहीं होता था.

27 जून, 2025 की रात रितिका ने सचिन से दोटूक शब्दों में कहा, ”आए दिन तुम मेरे चरित्र पर तोहमत लगाते रहते हो, यह अच्छी बात नहीं है.’’

रितिका की बात पर सचिन को ताव आ गया. बोला, ”तेरी जुबान आजकल कुछ ज्यादा ही चलने लगी है,’’ कहते हुए उस ने रितिका पर हाथ छोड़ दिया. कहते हैं कि शक इंसान को किसी भी हद तक सोचने पर मजबूर कर देता है, एक बार शक ने पैर जमाए तो वह दिमाग में घर कर के बैठ गया, लाख समझाने के बाद भी सचिन का शक बढ़ता गया तो वह खोयाखोया रहने लगा. शक पूरी तरह से उस की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. जिस दिन भी रितिका देर शाम अपनी नौकरी से घर वापस आती, सचिन ने घर में तूफान खड़ा कर देता.

बात 26 जून, 2025 की है. शाम के 6 बजे थे. उस दिन सचिन का मन रितिका से तकरार हो जाने की वजह से कुछ उखड़ा हुआ था, लेकिन इस के बावजूद भी वह अपने मित्र अनुज उपाध्याय को ले कर अपने फ्लैट पर आया था. फ्लैट के भीतर कदम रखते ही सचिन ने मित्र को बैठक में बिठा दिया और रितिका को आवाज लगाई. कई बार आवाज लगाने के बावजूद रितिका ने कोई जवाब नहीं दिया, इस पर सचिन बैडरूम का दरवाजा धकेल कर जैसे ही बैडरूम में घुसा, उस ने रितिका को गहरी नींद में सोता हुआ पाया. तब वह बोला, ”रितिका डार्लिंग, देखो मेरे साथ कौन आया है?’’

फिर भी रितिका ने कोई उत्तर नहीं दिया. तब सचिन अपने दोस्त की ओर मुंह कर धीरे से बोला, ”गहरी नींद में सो रही है.’’

जबकि असलियत यह थी कि उसे नींद से जगाने का साहस सचिन जुटा नहीं पा रहा था. इस की वजह थी, बीती रात रितिका के साथ हुई उस की तीखी नोकझोंक. रितिका के चरित्र को ले कर शुरू हुई नोकझोंक में जितना सचिन ने कहा, उस से कहीं ज्यादा जलीकटी बातें रितिका ने उसे सुना दी थीं. एक तरह से रितिका ने अपना सारा गुस्सा उस पर उतार दिया था. सुबह होने पर सचिन ने रितिका को गुस्से के मूड में ही पाया. वह अपनी नौकरी पर जाने से पहले गुमसुम रह कर किचन में अपने लिए लंच तैयार करने में जुटी हुई थी. इस दौरान न तो सचिन ने रितिका से एक भी शब्द बोला और न रितिका ने अपनी जुबान खोली. यहां तक कि उस ने बेमन से नाश्ता तैयार किया.

दरअसल, रितिका अपना काम मेहनत और लगन से करती थी, जिस से उस के बौस उस से काफी खुश थे. रितिका का अपने बौस से बेझिझक और खुल कर बातें करना सचिन के संदेह का कारण बन गया, जो वक्त के साथ गंभीर होता जा रहा था. सचिन इस के लिए रितिका को कई बार समझा भी चुका था, लेकिन रितिका ने उस पर ध्यान नहीं दिया था. उस का कहना था कि कंपनी में वह जिस माहौल में काम करती है, उस में बौस से ले कर अन्य कर्मचारियों से संपर्क में रहना ही पड़ता है. मगर सचिन यह मानने को तैयार नहीं था. रितिका के चरित्र को ले कर सचिन राजपूत का संदेह दिनप्रतिदिन गहरा होता जा रहा था.

सचिन बीती रात से ले कर सुबह होने तक की यादों से तब बाहर निकला, जब उस के दोस्त अनुज ने आवाज लगाई, ”सचिन, क्या हुआ, सब खैरियत तो है न? रितिका भाभी कहीं गई हैं क्या?’’

”अरे नहीं यार, अभी तक वह सो रही है. लगता है गहरी नींद में है, उसे गहरी नींद से जगाना उचित नहीं होगा.’’ सचिन वहीं से तेज आवाज में बोला.

”कोई बात नहीं, तुम यहां आ जाओ.’’ अनुज बोला और सचिन ने बैडरूम का दरवाजा खींच कर बंद कर दिया.

संयोग से दरवाजे के हैंडल पर उस का हाथ लग गया और दरवाजा खट से तेज आवाज के साथ बंद हो गया. इसी खटाक की आवाज से रितिका की नींद भी खुल गई. सचिन बैडरूम से निकल कर अपने दोस्त अनुज के पास आ कर बैठ गया. कुछ देर में रितिका भी आंखें मलती हुई बैडरूम से किचन में चली गई. किचन में जाते हुए उस की नजर बैठक में बैठे सचिन के दोस्त अनुज उपाध्याय पर पड़ गई थी. अनुज ने भी रितिका को देख लिया था और देखते ही तुरंत बोल पड़ा, ”भाभीजी नमस्ते, कैसी हैं आप?’’

थोड़ी देर में रितिका ने एक ट्रे में पानी से भरे 2 गिलास टेबल पर रख दिए. अनुज ने भी पानी पीने के बाद खाली गिलास ट्रे में रख दिया. रितिका अनुज से परिचित थी और यह भी जानती थी कि यह सचिन का करीबी दोस्त है. इस कारण उस के मानसम्मान में कभी कोई कमी नहीं रखती थी. अनुज से अनौपचारिक बातें करने के बाद दोबारा वह किचन में चली गई. कुछ मिनट में ही रितिका अनुज और सचिन के पास 3 कप चाय के ट्रे में ले कर उन के सामने ही सोफे पर बैठ गई थी. हकीकत में अनुज को सचिन के साथ आया देख कर रितिका कुछ सुकून महसूस कर रही थी. वह भी बीती रात से ले कर कुछ समय पहले तक के मानसिक तनाव से उबरना चाह रही थी.

रितिका ने चाय का कप उठा कर मुसकराते हुए अनुज की ओर बढ़ा दिया. अनुज हाथ में कप लेते हुए बोला, ”भाभीजी, आप ठीक तो हैं न? कैसी हालत बना रखी है आप ने? लगता है, सारी रात ठीक से सो नहीं पाई हो?’’

रितिका मौन बनी रही. उधर सचिन भी मौन रहा. कुछ पल बाद रितिका धीमे स्वर में बोली, ”यह अपने जिगरी दोस्त से पूछो, तुम्हारे सामने ही बैठा है.’’

”क्यों भाई सचिन, क्या बात है?’’

”अरे यह क्या बोलेगा, इस ने तो मेरी जिंदगी में तूफान ला दिया है. अब शेष बचा ही क्या है, अपने दोस्त को तुम ही समझाओ.’’ रितिका थोड़ा तल्ख आवाज में बोली.

”क्या बात हो गई? क्या तुम दोनों के बीच फिर से तूतूमैंमैं हुई है?’’ अनुज बोला.

”आप तूतूमैंमैं की बात करते हो,’’ कुछ देर मौन रह कर रितिका ने फिर बोलना शुरू किया, ”साढ़े 3 साल मेरे साथ गुजारने के बाद तुम्हारा मित्र कहता है कि मैं चरित्रहीन हूं, मेरा अपने बौस के साथ चक्कर चल रहा है. मुझे अब भलीभांति समझ में आ गया है कि तुम्हारे बेरोजगार दोस्त को सिर्फ मेरे कमसिन जिस्म और पैसों में दिलचस्पी थी. उसे न मेरी जिंदगी से कोई मतलब और न ही मेरी भावनाओं से, वह तो सिर्फ मेरे जिस्म से अपनी कामोत्तेजना शांत कर मेरे द्वारा नौकरी कर के मेहनत से लाए पैसों से मौज कर रहा है.

”साढ़े 3 साल तक मेरे साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद अब तुम्हारे दोस्त को मैं चरित्रहीन नजर आने लगी. इस के इश्क के चक्कर में मैं ने अपने घर वालों से नाता तोड़ लिया. और अब ये कह रहा है कि तू चरित्रहीन है, मैं अब तेरे साथ नहीं रह सकता, तू तो अपने बौस के साथ रह. अनुज, अब तुम ही बताओ कि मैं कहां जाऊं? क्या करूं? क्या जहर खा कर आत्महत्या कर लूं?’’

”भाभीजी, आप ऐसा कुछ भूल कर भी मत कर लेना वरना सचिन को जेल की हवा खानी पड़ेगी.’’ अनुज ने सचिन को समझाने का भरपूर प्रयास किया.

”यही तो मेरी जिंदगी बन गई है. कहां तो मुझ पर बड़ा प्यार उमड़ता था. कहता था जानेमन, तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता. कहां गईं वो प्यार की बातें? कहां गए वादे, जिस के भरोसे मैं ने अपने पेरेंट्स और भाई से नाता तोड़ दिया था.’’

रितिका भाभी ने जब अपने मन की भड़ास पूरी तरह से निकाल ली, तब अनुज सचिन से बोला, ”क्यों भाई सचिन, ये मैं क्या सुन रहा हूं? रितिका भाभी जो कुछ कह रही हैं, क्या वह सही है? यदि हां तो तुम्हें रितिका भाभी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए.’’

सचिन दोस्त अनुज की बातें चुपचाप सुनता रहा. उस की जुबान से एक शब्द नहीं निकला. सचिन की चुप्पी देख कर अनुज फिर बोलने लगा, ”तुम्हें रितिका भाभी के चरित्र पर संदेह करते हुए जरा भी शर्म नहीं आती?

”भाभी का अपने बौस के साथ चक्कर चलने का बेबुनियाद आरोप लगा कर तुम उन की चारित्रिक हत्या करने के साथ जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हो. देखो, तुम दोनों की भलाई इसी में है कि तुम जितनी जल्दी हो सके, रितिका भाभी से माफी मांगने के बाद विधिवत शादी कर लो और उन्हें समाज में सिर उठा कर पूरे मानसम्मान के साथ जीने का अधिकार दे दो.’’

मानसम्मान की बात सुनते ही सचिन बिफर पड़ा. तल्ख स्वर में बोला, ”अनुज, किस मानसम्मान की बात कर रहे हो, रितिका के चरित्र को ले कर इस के औफिस के लोगों से ले कर कालोनी के लोग क्या कुछ नहीं कहते हैं. ये भी रोज ताना मारती है कि मैं यदि नौकरी करने नहीं जा रही होती तो नानी याद आ जाती, कहां से देते फ्लैट का भाड़ा, लाइट का बिल, दूध और किराने वाले को पैसे. खुद बेरोजगार होते हुए भी काम की तलाश में नहीं जाते, सारा दिन मोबाइल फोन और टीवी सीरियल देखने में वक्त जाया करते रहते हो.’’

इतना सब सुनने के बाद अजीब दुविधा में फंसा अनुज समझ नहीं पा रहा था कि वह किस का पक्ष ले और किसे समझाए? फिर भी अनुज ने दोनों को बात का बतंगड़ न बनाने और प्रेम से मिल कर रहने की सलाह दे सचिन के घर से विदा ली. अनुज उपाध्याय के जाते ही दोनों आपस में फिर से उलझ गए. दोनों में तूतूमैंमैं होने लगी. दोनों तेज आवाज में एकदूसरे पर आरोपप्रत्यारोप लगाने लगे कि उन के आपसी विवाद में अनुज को क्यों लाया गया? इसी बात को ले कर रितिका और सचिन में नोकझोंक होती रही.

उन दोनों में नोकझोंक होने की आवाज पड़ोसियों को सुनाई दे रही थी, लेकिन उस के भाड़े के फ्लैट के आसपास कोई ऐसा पड़ोसी नहीं था, जो उन दोनों को झगडऩे से रोक सके, उन को शांत कर सके या फिर उन्हें समझा सके. पड़ोसियों के लिए तो उन के झगड़े आए दिन की बात हो चुकी थी. फिर रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर सचिन राजपूत ने रितिका सेन की हत्या कर दी. पूछताछ के बाद पुलिस ने सचिन राजपूत को अदालत में पेश किया, जहां से उसे हिरासत में जेल भेज दिया गया. सचिन ने यदि अपने शक्की मिजाज को काबू रख कर अपनी प्रेमिका की बात पर भरोसा कर के जिंदगी जी होती तो शायद जेल जाने की नौबत नहीं आती. Love Story Hindi Kahani

 

 

Hindi love Stories : जीजा संग मिलकर बॉयफ्रेंड का सर्जिकल ब्लेड से रेता गला

Hindi love Stories : बड़ी बहन से निकाह और छोटी से इश्क. इस कहानी में फसाद की जड़ सिर्फ इतनी ही नहीं है. इस में एक लिवइन का ट्विस्ट भी है. घर वालों के समझाने पर शबाना ने जीजा हाकिम के साथ चले इश्क को दफन तो कर दिया, मगर बाद में अपने शौहर को छोड़ प्रेमी संजय बामने के साथ लिवइन में चली गई. जब इस लिवइन में जीजा की घुसपैठ हुई तो…

खंडवा थाने की रामनगर चौकी के प्रभारी एसआई सुभाष नावडे, को 29 जून, 2021 की सुबह 9 बजे किसी ने सूचना दी कि चीराखदान तालाब में एक लाश तैर रही है. यह लाश तालाब के पास खेलते हुए बच्चों ने देखी थी. सूचना मिलने के बाद चौकी इंचार्ज सुभाष नावड़े ने सूचना टीआई बी.एल. मंडलोई को दे दी और वह टीम के साथ उस तालाब के पास पहुंच गए, जहां लाश पड़ी होने की खबर मिली थी. पुलिस ने सब से पहले लाश को पानी से बाहर निकलवाया. वह लाश चादर के साथ चटाई में लिपटी थी. थोड़ी देर में खंडवा थाने के टीआई बी.एल. मंडलोई वहां पहुंच गए.

वह अर्द्धनग्न लाश किसी युवक की थी. पुलिस उस लाश की जांच करने में जुट गई. उस के सिर, गले और हाथ पर धारदार हथियार के निशान थे. तब तक आसपास भीड़ भी लग चुकी थी. संयोग से भीड़ में से एक व्यक्ति ने लाश की पहचान संजय बामने उर्फ संजू के रूप में की. कुछ समय में वहां रोती हुई पहुंची महिला ने पुलिस को बताया कि लाश उस के पति की है और उस का नाम शबाना है. बरामद लाश को देख कर इतना तो साफ हो गया था कि उस की हत्या कर तालाब में फेंकी गई थी. उस का घर नजदीक के माता चौक पर मल्टी में बताया गया. इस की सूचना मिलते ही मृतक का भाई और परिवार के अन्य सदस्य भी वहां पहुंच गए.

उन्होंने ही बताया कि शबाना संजय की ब्याहता पत्नी नहीं है, बल्कि वह उस के साथ पिछले 2 सालों से लिव इन में रह रही थी. उन्होंने हत्या का सीधा आरोप शबाना पर ही मढ़ दिया. घर वालों से शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. एसपी (खंडवा) ललित गठरे ने इस केस का खुलासा करने के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया. टीम में टीआई बी.एल. मंडलोई, एसआई राजेंद्र सोलंकी, चौकी इंचार्ज (रामनगर) सुभाष नावड़े, परिणीता बेलेकर, एएसआई रमेश मोरे, हिफाजत अली, हैड कांस्टेबल ललित कैथवास, पंकज सोलंकी, कांस्टेबल ब्रजपाल चंदेल, आकाश जादौन, लक्ष्मी चौहान, निकता तिवारी आदि को शामिल किया.

आगे की जांच के लिए पुलिस मल्टी पहुंची, जहां मृतक संजय शबाना के साथ रहता था. टीआई मंडलोई ने उस के घर का बारीकी से मुआयना किया, वहां उन्हें खून के कुछ धब्बे मिले. उन में कुछ धब्बे मिटाने के भी निशान थे. वहीं शबाना की 13 वर्षीया बेटी मिली. वह काफी घबराई हुई थी. कुछ पड़ोसी भी मौजूद थे. पूछताछ में उन्होंने बताया कि शबाना और संजय के बीच अकसर झगड़ा होता रहता था. संजय खूब शराब पीता था, शराब के नशे में शबाना के साथ वह मारपीट किया करता था. इस के अलावा घर में शबाना के बहनोई हाकिम का भी आनाजाना था. यह बात संजय को पसंद नहीं थी. हाकिम के जाने के बाद संजय शबाना पर बेहद नाराज होता था.

इस जानकारी के आधार पर ही सीएसपी ललित गठरे ने शबाना और उस के बहनोई हाकिम को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. पूछताछ के दौरान दोनों ने घुमाफिरा कर जवाब दिए. उन की बातों से पुलिस ने अंदाजा लगा लिया कि यह दोनों बहुत कुछ छिपा रहे हैं और हत्या की जानकारी देने से बचना चाहते हैं. पुलिस ने जब उन के साथ थोड़ी सख्ती की और संजय के घर से बरामद सामान दिखाए तो वे दोनों टूट गए. फिर उन्होंने राज की सारी बातें बता दीं. उस में जीजासाली के बीच प्रेम कहानी का खुलासा हुआ. साथ ही उन की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए ब्लेड, खून लगा सिलबट्टा और खून सने कपड़े बरामद कर लिए.

शबाना और हाकिम की प्रेम कहानी के साथ शबाना और संजय के लिवइन रिलेशन की जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार है—

कहानी की शुरुआत शबाना, उस की 32 वर्षीया बड़ी बहन जायरा और 46 वर्षीय हाकिम से होती है. बात तब की है, जब शबाना महज 16 साल की थी. वह खुद से करीब दोगुने उम्र के हाकिम से इश्क कर बैठी थी.  उन की मोहब्बत पर उम्र के अंतर का कोई असर नहीं था. दोनों एकदूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे. शबाना हाकिम को अपना सब कुछ सौंप चुकी थी. वे निकाह भी करना चाहते थे, लेकिन जब इस की जानकारी उस के परिवार को हुई तब उन्होंने उम्र के अंतर को देखते हुए उस की बड़ी बहन जायरा का विवाह हाकिम से कर दिया.

उस के बाद हाकिम शबाना का प्रेमी से जीजा बन गया. हाकिम खूबसूरत जायरा को पा कर बेहद खुश हुआ, लेकिन उस के लिए शबाना को दिल से निकलना मुश्किल हो रहा था.  जायरा जीजासाली के प्रेम संबंध को जानती थी, फिर भी उस ने हाकिम के साथ निकाह इसलिए कर लिया था कि उस की छोटी बहन शबाना ने उस से वादा किया था कि वह उस की खुशी के लिए अपने इश्क को दफन कर देगी. वह उन की जिंदगी से दूर चली जाएगी. दूसरी तरफ जायरा ने हाकिम पर ऐसी लगाम लगाई कि वह चाह कर भी शबाना से नहीं मिल पाता था. जल्द ही शबाना का भी एक युवक के साथ निकाह हो गया, उस के बाद शबाना अपने वादे के मुताबिक जायरा और हाकिम की जिंदगी से दूर चली गई. उस की अपनी अलग गृहस्थी और दुनिया बस गई थी.

10 सालों के दौरान शबाना 3 बच्चों की मां भी बन गई. हालांकि शबाना अपने शौहर के व्यवहार से दुखी रहती थी, कारण शौहर को उस के निकाह से पहले के प्रेम संबंध की आधीअधूरी जानकारी हो चुकी थी. वह बारबार उस को अतीत के प्रेम को ले कर ताने देता था. जब भी किसी घरेलू मसले पर विवाद होता, तब बहस के दौरान कई बार उस ने गुस्से में कह दिया था कि वह अपने प्रेमी हाकिम के पास ही चली जाए. पति की यह बात शबाना को न केवल चुभ जाती थी, बल्कि इस से उस की पुरानी मोहब्बत की यादें भी ताजा हो जाती थीं. वह एकदम से तिलमिला जाती थी.

बारबार की इस चिकचिक से उस ने एक दिन शौहर से अलग रहने का निर्णय ले लिया और अपनी 10 साल की बेटी के साथ अलग रहने लगी. 2 बच्चे उस ने शौहर के पास ही छोड़ दिए. किशोरावस्था से ही इश्क का स्वाद ले चुकी शबाना के लिए किसी नए प्रेमी की तलाश करना मुश्किल नहीं था. जल्द ही उसे संजय बामने नाम का युवक मिल ही गया. संजय उम्र में छोटा था तो क्या हुआ वह उस की भावना को समझता था और उस के सेक्स की भूख भी मिटाता था. जल्द ही संजय भी खुद से बड़ी उम्र की प्रेमिका को जीजान से प्यार करने लगा. अपना घरबार छोड़ कर बगैर शादी किए हुए शबाना के साथ रामनगर मल्टी में किराए के मकान में रहने लगा था.

कुछ समय तक संजय और शबाना के बीच लिवइन की मधुरता बनी रही, लेकिन उन के रिश्ते में खटास तब आ गई जब शबाना का पूर्व प्रेमी यानी उस का जीजा हाकिम उस की जिंदगी में वापस आ गया. दरअसल, हाकिम ने जायरा से निकाह करना इसलिए स्वीकार कर लिया था, क्योंकि तब उसे लगा था कि शबाना उस से पहले की तरह ही मिलतीजुलती रहेगी. लेकिन ऐसा नहीं होने पर हाकिम उस की याद में बेचैन हो गया. जब उसे शबाना के अकेली रहने के बारे में मालूम हुआ, तब उस ने उस से मिलने की योजना बना ली. हालांकि शबाना और हाकिम के मिलने की राह में जायरा रोड़ा बनी हुई थी.

बावजूद इस के लंबे समय बाद जब हाकिम अपनी साली और पुरानी प्रेमिका शबाना से मिलने उस के पास गया तब उस ने उसे बाहों में भर लिया. उस ने हाकिम की खूब आवाभगत की. उस की खिदमतगारी में कोई कोर कसर नहीं रहने दी. उन का अधूरा मोहब्बतनामा फिर से लिखा जाने लगा. लेकिन इस की जानकारी भी संजय को जल्द हो गई. शबाना अब 2-2 प्रेमियों के साथ लिव इन में रह रही थी. लेकिन लंबे समय तक इस तरह रहना आसान नहीं था. संजय ही शबाना के घरेलू खर्च और उस की बेटी के पालनपोषण का जिम्मा उठाए हुए था. संजय को यह बात पता चल गई थी कि शबाना के पास उस का जीजा हाकिम भी आता है. इसलिए उस ने शबाना से साफसाफ कह दिया कि अपने घर में किसी दूसरे मर्द को वह नहीं देखना चाहता.

इस पर शबाना ने रिश्ते की बात कह कर कुछ समय तक संजय को बहला दिया. फिर भी संजय ने हिदायत दी कि उस के नाजुक रिश्ते में किसी की भी दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए. यदि ऐसा होता रहा तो वह हरगिज बरदाश्त नहीं करेगा. संजय की सख्ती और फरमानों को ले कर शबाना उस से नाराज रहने लगी. संजय की एक बुरी आदत शराब पीने की भी थी. शबाना उसे हमेशा कहती थी कि वह घर में शराब न पीए. उस की बड़ी हो रही बेटी भी साथ में रहती है. उस पर बुरा असर पड़ेगा. जब से संजय और शबाना के बीच हाकिम को ले कर मतभेद उभरे थे, तब से संजय के शराब पीने की आदत बढ़ गई थी. बाहर तो पीता ही था, रात में भी घर आ कर भी बोतल खोल लेता था.

एक दिन तो संजय ने हद ही कर दी. शराब पी कर आया और आते ही शबाना का गुस्सा उस की बेटी पर निकालने लगा. उसे बुरी तरह से डांटनेफटकारने लगा. उस के पकाए खाने में कमियां निकालने लगा. जब शबाना ने इस का विरोध किया और कहा कि वह ऐसा न करे, तब संजय ने उस पर हाथ उठा दिया. उस रोज संजय ने मांबेटी दोनों की शराब के नशे में पिटाई कर दी. इस मारपीट में शबाना की बेटी के सिर में चोट भी आ गई और शबान भी जख्मी हो गई. गनीमत यह रही कि घर में डिटौल रखी थी, जिस से अपने और बेटी की चोटों के खून को बंद करने में सफल रही. सुबह होने पर संजय ने उन से रात की मारपिटाई को ले कर माफी मांग ली और अच्छी तरह से मरहमपट्टी के लिए पैसे दे कर चला गया. साथ में हिदायत भी दी कि इस बारे में किसी को भी न बताए.

2 दिनों तक तो घर में शांति बनी रही, लेकिन तीसरे दिन संजय फिर शबाना से दिन में ही उलझ गया. पड़ोसियों ने आ कर उसे समझाया तब गुस्से में चला गया. उसी रोज हाकिम भी शबाना से मिलने आया. शबाना और उस की बेटी ने रोरो कर संजय की ज्यादती उस से बयां की. हाकिम यह सुन कर सन्न रह गया. उस ने शबाना को आस्वस्त किया कि वह इस का समाधान जल्द निकालेगा. इतना कह कर वह वहां से चला गया, लेकिन उस के मन में साजिश की योजना बन रही थी. उसी के अनुसार 28 जून, 2021 की तारीख मुकर्रर की गई. कैसे योजना को अंजाम देना है, इस बारे में शबाना से बात कर ली. फिर 22 तारीख की आधी रात को शबाना ने हाकिम को फोन कर के अपने घर बुला लिया.

हाकिम बताए समय पर आ गया. फिर उस ने गहरी नींद में सो रहे संजय के सिर पर मसाला पीसने वाला सिलबट्टा दे मारा. सिलबट्टे के हमले से संजय बेहोश हो गया. फिर हाकिम और शबाना ने मिल कर उस के गले को सर्जिकल ब्लेड से काट डाला. वह ब्लेड हाकिम अपने साथ ले कर आया था. संजय की हत्या के बाद सुबह के 4 बजे हाकिम ने संजय की लाश पहले अच्छी तरह चादर में लपेटी फिर चटाई में बांध कर पास के चीराखदान तालाब में फेंक आया. घर पर शबाना ने घर में बिखरे खून के धब्बे साफ किए. अगले रोज 29 जून, 2021 को पुलिस ने तालाब से संजय की लाश बरामद कर ली.

इस हत्याकांड की जांच पूरी होने के बाद हाकिम और शबाना पर हत्या एवं सबूत मिटाने की धाराएं लगा कर फाइल तैयार कर ली गई. जांचकर्ता पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, वहां से उन्हें अपराध का दोष साबित होने तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Hindi love Stories

 

Extramarital Affair : सरिता क्यों बनी पति की कातिल

Extramarital Affair : पति की एक्सीडेंट में मौत हो जाने के बाद 34 वर्षीय सरिता ने कुख्यात बदमाश सोनू नागर से शादी कर ली थी. कुछ दिनों बाद ही ऐसा क्या हुआ कि सरिता को सोनू नागर की हत्या की सुपारी देनी पड़ी? पढ़ें, फेमिली क्राइम की यह खास स्टोरी.

मोबाइल फोन की घंटी लगातार रुकरुक कर बज रही थी. गुरमीत उस समय बाथरूम में था. जैसे ही फोन की घंटी की आवाज गुरमीत के कानों में पड़ी तो वह फटाफट नहा कर बाथरूम से बाहर आ गया. गुरमीत ने मोबाइल की स्क्रीन पर फ्लैश होते नाम को देखा तो उस के चेहरे पर मुसकान तैर गई. उस ने तुरंत काल रिसीव कर ली.

”हैलो बग्गा! आज सुबहसुबह कैसे याद आ गई अपने यार की?’’ गुरमीत ने चहक कर पूछा.

”तुझे तो मैं हर वक्त दिल में रखता हूं गुरप्रीत.’’ बग्गा सिंह दूसरी ओर से बोला, ”फिर याद तो अपनों को ही किया जाता है.’’

”ठीक है.’’ गुरमीत हंसा, ”बोल, कैसे फोन किया?’’

”एक मुरगे को टपकाना है गुरमीत.’’

”टपका देंगे.’’ गुरमीत ने लापरवाही से गरदन झटकी, ”मुरगा वजनदार तो है ना?’’

”मैं वजनदार मुरगा ही हलाल करता हूं गुरमीत. पूरे डेढ़ लाख में सौदा किया है.’’

”वाह!’’ गुरमीत ने होंठों पर जुबान फिराई, ”मोटी कटेगी यार, लेकिन सौदा फिफ्टीफिफ्टी का रहेगा बग्गा भाई.’’

”नहीं, पार्टी मेरी है इसलिए मैं तुम्हें 50 हजार दूंगा.’’ बग्गा सिंह की आवाज में अडिय़लपन था, ”देख, जब तेरी पार्टी होती है तो मैं भी वही लेता हूं जो तू देता है.’’

गुरमीत ने बात काट दी, ”वो सब ठीक है बग्गा, लेकिन 50 कुछ कम है.’’

”चल मैं 10 हजार और बढ़ा देता हूं.’’ बग्गा ने कहा, ”अब कुछ नहीं कहना.’’

”ओके.’’ गुरमीत ने गहरी सांस ली, ”मुरगा कहां टपकाना है?’’

”दिल्ली में.’’ बग्गा सिंह ने धीमी आवाज में कहा, ”तू आज ही दिल्ली पहुंच. मैं भी घर से निकल रहा हूं.’’

”तू इस वक्त कहां है?’’

”मैं भटिंडा में हूं, लेकिन हर हाल में शाम तक दिल्ली पहुंच जाऊंगा. तू मुझे फोन कर लेना. हमें कहां मिलना है, कहां ठहरना है, मैं तुझे बता दूंगा. अब तू तैयार हो, मैं काल काट रहा हूं.’’ बग्गा की तरफ से कहा गया. फिर संपर्क काट दिया गया.

गुरमीत ने मोबाइल टेबल पर रखा और दिल्ली जाने की तैयारी करने लगा. आधा घंटा बाद ही वह बैग ले कर घर से निकला और बसअड्ïडे के लिए आटो से रवाना हो गया.

3 फरवरी, 2025 की सुबह उत्तरी दिल्ली में शक्ति नगर के एफसीआई गोदाम के पास बहने वाले नाले में एक युवक औंधे मुंह पड़ा हुआ था. वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने उस युवक को देखा तो वह ठिठक गया. उसे लगा कि शायद कोई शराबी नशे में गिर गया होगा. वह उसे गौर से देखने लगा. वह व्यक्ति नाले में औंधे मुंह पड़ा था, लेकिन उस के शरीर में कोई हरकत नहीं दिखी तो उस ने अनुमान लगा लिया कि शायद इस की मौत हो चुकी है. उस ने अपना शक दूर करने के लिए दूर खड़े 2 व्यक्तियों को इशारे से अपने पास आने को कहा. वे दोनों व्यक्ति आपस में बातें कर रहे थे. इशारा मिलने पर वह उस व्यक्ति के पास आ गए.

”क्या आप हमें जानते हैं?’’ उन में से एक व्यक्ति ने पूछा.

”नहीं भाई, मैं आप दोनों को नहीं जानता. मुझे तो यहां नाले में पड़े इस युवक को देख कर संदेह हो रहा है कि वह युवक जीवित भी है या नहीं. आप देख कर बताएं.’’

नाले में मिली लाश

दोनों व्यक्ति नाले में देखने लगे. वहां पड़े युवक को देख कर वे घबरा गए. उन में से एक बोला, ”नूर, सरक ले यहां से. यह लाश है, यदि पुलिस आ गई तो बेकार के लफड़े में फंस जाएंगे हम लोग.’’

उस के साथ वाला व्यक्ति यह सुनते ही तेजी से एक तरफ चल पड़ा. उस के साथ वाला व्यक्ति उस के पीछे लपका. वहां खड़ा पहले वाला व्यक्ति जिम्मेदार नागरिक था. वह वहां से नहीं भागा, बल्कि उस ने जेब से मोबाइल निकाल कर वहां पड़ी लाश की सूचना दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. कंट्रोल रूम से उसे वहीं खड़े रहने को कह दिया गया. करीब आधा घंटा बाद पुलिस वैन वहां सायरन बजाती हुई आ गई. इस वैन में रूपनगर थाने के एसएचओ रमेश कौशिक थे. उन के साथ पुलिस के 5 कांस्टेबल भी थे. सभी सावधानी से नाले में उतर गए. वह लाश औंधे मुंह पड़ी थी, उसे सीधा करने से पहले उस लाश की बहुत बारीकी से जांच की गई.

पीठ की ओर उन्हें कोई जख्म नजर नहीं आया. इसी एंगल से उस की मोबाइल द्वारा फोटो खींची गईं, फिर उसे सीधा किया गया. यह कोई 40-45 साल का व्यक्ति था. उस के शरीर पर पैंटशर्ट थी. उस के चेहरे पर गौर से देखने पर खिंचाव महसूस हो रहा था. एसएचओ रमेश कौशिक को लगा कि वह व्यक्ति जान निकलते समय बहुत तड़पा है. ऐसा उस हाल में होता है जब किसी का गला घोंटा जाता है. सांसें रुकने से व्यक्ति छटपटाता है और तड़पते हुए उस के प्राण निकलते हैं. कौशिक ने उस आदमी के गले का निरीक्षण किया तो उन का अनुमान सही साबित हुआ. उस के गले पर दबाब के कारण लाल निशान पड़ गए थे, जो साफ दिखाई दे रहे थे.

लाश की जेबों की तलाशी ली गई तो उस की जेब में कुछ नहीं मिला. इस से अनुमान लगाया गया कि इस की हत्या करने के बाद जेब से सारा सामान निकाल लिया गया है, ताकि कोई सुराग पुलिस के हाथ न आ पाए. रमेश कौशिक की सूचना पर नौर्थ डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी राजा बांठिया और एसीपी (सिविल लाइंस) विनीता त्यागी भी थोड़ी देर में मौके पर पहुंच गईं. उस से पहले एसएचओ रमेश कौशिक ने एक बार और मृतक की जेबें टटोलीं. हाथ की कलाई देखी, ताकि कोई गुदा हुआ नाम दिख जाए. लेकिन न जेबों में कुछ मिला, न उस की कलाई पर कुछ गुदा हुआ था.

नाले के ऊपर अब तक लाश की सूचना पा कर काफी लोग एकत्र हो गए थे. रमेश कौशिक ने ऊपर आ कर उन लोगों से लाश की पहचान करने को कहा, लेकिन किसी ने भी उस युवक को नहीं पहचाना. इस से यह अनुमान लगाया गया कि इस की हत्या कहीं और कर के उसे यहां ला कर फेंक दिया गया है, इस क्षेत्र में इस आदमी की लाश को शायद ही कोई पहचान पाएगा. यह व्यक्ति इस क्षेत्र का नहीं है. काफी पूछताछ करने के बाद भी उस व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई. उसी दौरान फिंगरप्रिंट्स एक्सपर्ट की टीम भी वहां पहुंच चुकी थी. 2 फोटोग्राफर्स भी इस टीम में थे.

आते ही यह टीम अपने काम में लग गई. एसएचओ ने डीसीपी को बताया कि लाश की शिनाख्त नहीं हो पा रही है, लगता है इसे कहीं और मारा गया है. पहचान न हो, इसलिए इस की लाश को यहां ला कर नाले में फेंक दिया गया है.

”इंसपेक्टर कौशिक, लाश की पहचान तो आवश्यक है. अपराधी तक हम तभी पहुंचेंगे, जब इस की पहचान होगी.’’ डीसीपी गंभीर स्वर में बोले.

”जी सर.’’ एसएचओ ने सिर हिलाया, ”हम पूरी कोशिश कर रहे हैं.’’

डीसीपी बांठिया ने युवक की लाश का निरीक्षण किया. गले पर लाल निशान देख कर वह समझ गए थे कि इस की हत्या गला घोंट कर की गई है. वहां ऐसे सुराग नजर नहीं आ रहे थे, जिस से समझा जा सके कि इसे यहीं खत्म किया गया है. हत्या कहीं और कर के इस की लाश को यहां फेंक दिया गया है.

पूरा निरीक्षण कर लेने के बाद डीसीपी ने इंसपेक्टर कौशिक से कहा, ”मामला पेचीदा लग रहा है. मैं आप की हैल्प के लिए स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर रोहित को भी बुला लेता हूं.’’

”यह उचित रहेगा सर. स्पैशल स्टाफ के आने से यह केस आसानी से सौल्व हो जाएगा. आप रोहितजी को बुलवा लीजिए.’’

डीसीपी बांठिया ने स्पैशल स्टाफ (नौर्थ डिस्ट्रिक्ट) के इंसपेक्टर रोहित से बात की और पूरी बात बता कर उन्हें घटनास्थल पर बुला लिया. इंसपेक्टर रोहित अपनी टीम के साथ कुछ ही देर में वहां आ गए. उन की टीम ने युवक की लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. इंसपेक्टर रोहित ने फिंगरप्रिंट्स एक्सपर्ट से बात कर के कुछ निर्देश दिए और इंसपेक्टर कौशिक को लाश पोस्टमार्टम हेतु हिंदूराव हौस्पिटल भेजने को कह दिया.

दिशानिर्देश दे कर डीसीपी और एसीपी भी घटनास्थल से चले गए. इंसपेक्टर कौशिक लाश का पंचनामा बनाने में जुट गए. यह काम पूरा होने तक स्पैशल स्टाफ वहां नहीं रुक सकता था, वे आगे की जांच के लिए वहां से निकल गए. इंसपेक्टर कौशिक ने लाश की शेष काररवाई निपटा कर पोस्टमार्टम के लिए हिंदूराव हौस्पिटल भेज दी और थाना रूपनगर लौट आए. यह केस बहुत पेचीदा था. मरने वाला व्यक्ति कौन है, उसे किस ने गला घोंट कर मारा, उस का कुसूर क्या था. इन सभी बातों का जवाब तभी मिल सकता था, जब उस की पहचान हो जाती. उस की लाश उस के परिजनों के लिए पोस्टमार्टम करवा कर सुरक्षित रखवा दी गई थी. अभी तक उस की पहचान नहीं हुई थी.

मृतक था दिल्ली का घोषित बदमाश

उस की पहचान करने के लिए इंसपेक्टर कौशिक और स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर रोहित पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन कोई सूत्र हाथ नहीं लग रहा था, लाश को ज्यादा दिनों तक रखा भी नहीं जा सकता था. पुलिस ने उस के शव की शिनाख्त के लिए पैंफ्लेट छपवा कर शक्ति नगर, रूपनगर और आसपास के क्षेत्र मे चस्पा कर दिए थे. अखबारों में भी शव की पहचान करने की अपील छपवाई गई, लेकिन कोई रिस्पौंस नहीं मिला. अब स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर रोहित सारस्वत ने आखिरी उपाय करने के लिए युवक के फिंगरप्रिंट्स को कमला मार्किट क्रिमिनल रिकौर्ड औफिस (सीआरओ) भेजा गया. आशा नहीं थी, यह उपाय कारगर सिद्ध होगा, लेकिन ऐसा करने से पुलिस को सफलता मिल गई. उस के फिंगरप्रिंट्स क्राइम रिकौर्ड ब्यूरो में पहले से दर्ज फिंगरप्रिंट्स से मेल खा गए.

पहले वाले फिंगरप्रिंट्स सोनू नागर नाम के अपराधी के थे. यह युवक हौजकाजी थाने का घोषित बदमाश था और इस पर 10 से अधिक आपराधिक मामले कई थानों में दर्ज थे, विशेष कर हौजकाजी थाने में. यहां से उस के घर का एड्रैस मिल गया. यह युवक गुलाबी बाग, सीनियर सैकेंड्री गवर्नमेंट स्कूल के पास टाइप वन के क्वार्टर में रहता था. क्वार्टर का नंबर 570 था. इंसपेक्टर रमेश कौशिक और स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर रोहित सारस्वत, मनोज कुमार और हैडकांस्टेबल जितेंद्र के साथ उस क्वार्टर पर पहुंच गए. क्वार्टर 570 में एक महिला मिली. इस का नाम सरिता था. उस की उम्र करीब 34 साल थी. दरवाजे पर पुलिस को देख कर उस के चेहरे का रंग सफेद पड़ गया, किंतु तुरंत ही उस ने खुद को संभाल कर प्रश्न कर दिया, ”आप कोई अच्छी खबर ले कर आए हैं मेरे लिए.’’

इंसपेक्टर रोहित सारस्वत उस महिला के चेहरे पर नजरें जमाए हुए थे. पुलिस को सामने वाले के चेहरे के उतारचढ़ाव से उस की मनोस्थिति का अनुमान लगाना सिखाया जाता है. इंसपेक्टर रोहित मन ही मन मुसकराए. प्रत्यक्ष में वह चौंकने का अभिनय करते हुए बोले, ”अच्छी खबर! क्या तुम्हें उम्मीद थी कि पुलिस तुम्हारे दरवाजे पर अच्छी खबर ले कर आने वाली है?’’

”जी हां.’’ सरिता ने सिर हिलाया, ”मेरे पति कुछ दिनों से गुम हैं. मैं समझ रही हूं कि आप उन के बारे में अच्छी खबर ले कर आए हैं.’’

”तुम्हारे पति गुम हैं?’’ इंसपेक्टर ने चौंकते हुए कहा, ”क्या नाम है तुम्हारे पति का?’’

”सोनू… सोनू नागर पूरा नाम है जी.’’

”वह कब से लापता है?’’

”2 फरवरी की रात से.’’ सरिता ने बताया.

”क्या तुम ने सोनू नागर के गुम होने की सूचना लिखवाई है?’’

”हां साहब,’’ सरिता ने सिर हिलाया, ”मैं ने 7 फरवरी को थाना गुलाबी बाग में पति के गुम होने की सूचना लिखवा दी थी. वह 2 फरवरी की रात 10 बजे घर से गए थे, तब से वापस नहीं लौटे हैं. क्या वह आप को मिल गए हैं?’’

”मिले तो हैं लेकिन,’’ इंसपेक्टर रोहित ने बात अधूरी छोड़ दी.

”लेकिन क्या साहब, जल्दी बताइए… मेरा दिल बैठा जा रहा है.’’

”तुम्हारा पति अब इस दुनिया में नहीं रहा है, उस की डैडबौडी हमें शक्तिनगर में गंदे नाले के पास मिली है.’’

”ओहऽऽ नहींऽऽ’’ सरिता जोर से चीखी और दहाड़े मार कर रोने लगी.

उस की रोने की आवाज सुन कर अंदर से एक महिला निकल कर बाहर आ गई. सरिता को रोती देख कर उस ने घबरा कर पूछा, ”क्या हुआ बहू, तू रो क्यों रही है?’’

”मांजी हम लुट गए, बरबाद हो गए. पुलिस को तुम्हारे बेटे की लाश मिल गई है.’’ सरिता ने रोते हुए बताया.

वह महिला भी रोने लगी. पुलिस ने उन का मन हलका होने दिया. फिर सरिता को टोका, ”हमें सोनू नागर की हत्या की जांच करनी है. तुम हमारे साथ थाने चलो, वहीं तुम से कुछ बात करनी है.’’

”चलिए साहब. अब तो यही सब होगा, मेरा पति जान से गया है. मुझे अन्य सभी टोकेंगे.’’

पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया कि वह क्या बोल रही है. वह तो दोनों को ले कर थाने में आ गए. सरिता की सास का नाम मिथिलेश था. फिलहाल उन दोनों का रोनाधोना थम गया था. इंसपेक्टर रोहित सारस्वत ने सरिता से पूछा, ”2 फरवरी की रात को तुम्हारा पति सोनू नागर घर से गया तो क्या वह तुम्हें कुछ बता कर गया था?’’

”सिर्फ इतना कहा था साहब, मैं बाहर ही हूं, इन से बात कर के मैं आ रहा हूं. फिर वह उन दोनों व्यक्तियों के साथ बाहर चले गए थे. तब से उन का कुछ पता नहीं चल रहा था.’’

”वह 2 व्यक्ति आखिर कौन थे

जिन के साथ तुम्हारे पति सोनू नागर बाहर

गए थे?’’ इंसपेक्टर रोहित सारस्वत ने पूछा.

”मैं उन्हें नहीं जानती. वे दोनों साढ़े 11 बजे बाइक से मेरे घर आए थे. उन से मेरे पति की कुछ बातें हुईं. क्या बातें हुईं, यह मैं नहीं सुन सकी. मेरे पति उन के साथ घर से निकलते हुए इतना ही बोले कि मैं थोड़ी देर में वापस आ रहा हूं. लेकिन काफी देर बीत जाने पर भी वह नहीं लौटे तो मुझे चिंता होने लगी. मैं ने उन्हें फोन लगाया, लेकिन उस वक्त उन की काल नहीं लगी. यह सोच कर कि वह किसी काम में उलझ गए होंगे, मैं सो गई थी.’’

”फिर अगले दिन तुम्हारे पति नहीं लौटे तो क्या तुम ने उन्हें तलाश करने की जरूरत नहीं समझी?’’ सारस्वत ने प्रश्न किया.

”दूसरे दिन मैं ने उन्हें तलाश किया था साहब. दोस्तों, रिश्तेदारी सब जगह तलाश किया था, लेकिन वह नहीं मिले.’’ सरिता ने बताया, ”उन को 2-4 दिन और ढूंढा, फिर हार कर गुलाबी बाग थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी.’’

”वह 2 व्यक्ति दिखने में कैसे लग रहे थे?’’ इंसपेक्टर रमेश कौशिक ने पूछा.

”उन की उम्र 35-40 के बीच की थी. रंग सांवला था. सामान्य कदकाठी के थे. एक के सिर पर ब्लैक कलर की कैप थी, जिस के हेड पर क्करू्र लिखा था.’’

”हूं, तुम मोबाइल इस्तेमाल करती हो?’’ कौशिक ने प्रश्न किया.

”जी हां.’’ सरिता ने कह कर अपना मोबाइल दिखाया.

मोबाइल फोन में मिले अहम सबूत

इंसपेक्टर कौशिक ने वह मोबाइल ले लिया और बाहर निकल गए. बाहर आ कर उन्होंने मोबाइल से की गई काल लिस्ट देखी, उस में काफी नंबर थे. इंसपेक्टर ने 2 और 3 तारीख की आउटगोइंग काल्स देखी. वह चौंक पड़े. 2 फरवरी की रात को सरिता की ओर से 12 बजे रात को किसी एक नंबर पर फोन किया गया था. वही नंबर बाद में भी था. यानी सरिता ने उस नंबर पर रात में 3-4 बार अलगअलग समय पर काल कर के काफी देरदेर तक बातें की थी.

इंसपेक्टर रमेश कौशिक के चेहरे पर कुटिल मुसकान तैर गई. वह अंदर आ गए और सरिता से बोले, ”तुम्हारा मोबाइल हम कस्टडी में ले रहे हैं. इस की जांच करनी है हमें.’’

”ज…जी, मेरे फोन में ऐसा क्या है साहब,’’ सरिता अचकचा कर बोली.

”वह बाद में मालूम हो जाएगा. तुम यह बताओ, यह सोनू नागर तुम्हारी जिंदगी में कैसे आया? यह तो यहां के हौजकाजी थाने का घोषित अपराधी था. इस पर 10 अपाराधिक मामले दर्ज हैं.’’

सरिता ने नीचे सिर झुका लिया. कुछ देर वह खामोश रही, फिर एक गहरी सांस भर कर वह बोली, ”साहब, मेरा नाम सरिता है. मेरी शादी पहले किसी और से हुई थी. उस से मुझे एक लड़की और एक लड़का हुआ. मेरा पति तीस हजारी कोर्ट के पास पान की दुकान लगाता था. यहां पर सोनू नागर आताजाता रहता था. यहीं से मैं सोनू नागर को जानने लगी.

”अभी 8 महीने पहले मेरे पति की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई. तब सोनू मेरी मदद के लिए आगे आया. मैं उस के अहसान तले दब गई और उस के सहारे रहने लगी. फिर मैं ने उस से शादी कर ली. नियति को मुझ से न जाने क्या नाराजगी है, उस ने मेरा यह दूसरा पति भी मुझ से छीन लिया.’’ कहतेकहते सरिता भावुक हो गई और रोने लगी.

”अपने आप को संभालो और घर जाओ, जरूरत पड़ी तो बुलवा लेंगे.’’ इंसपेक्टर रोहित सारस्वत ने उस से कहा और उठ कर खड़े हो गए.

सरिता अपनी सास के साथ थाने से बाहर निकल गई. उन के जाने के बाद इंसपेक्टर रमेश कौशिक ने कहा, ”मुझे सरिता पर संदेह है. इस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाइए. इस ने पति के लापता होने वाली रात यानी 2 फरवरी को रात में 3-4 बार एक ही नंबर पर बातें की थीं. मालूम करना है वह नंबर किस का और क्या सरिता पहले भी इस नंबर के संपर्क में रही है?’’

इंसपेक्टर सारस्वत ने हैडकांस्टेबल जितेंद्र कुमार को मोबाइल दे दिया और जनवरीफरवरी माह की तमाम काल डिटेल्स निकलवा कर लाने का आदेश दे दिया. अगले दिन उन की टेबल पर सरिता के मोबाइल की जनवरी-फरवरी माह की काल डिटेल्स रखी थी. उस को बहुत बारीकी से देखा गया. सरिता द्वारा एक नंबर पर जनवरी फरवरी माह की 10 तारीख तक कईकई बार बातें की गई थीं. इस नंबर की फोन प्रदाता कंपनी से जांच की गई तो यह नंबर पंजाब के किसी बग्गा सिंह नाम के व्यक्ति का निकला. उस का एड्रैस भी मिल गया. यह था गांव लांबी, जिला श्रीमुक्तसर साहिब, पंजाब. इस के बाद गुप्तरूप से सोनू नागर के घर गुलाबी बाग के आसपास इस नंबर की जांच की गई तो पुलिस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. 2 फरवरी की रात साढ़े 11 बजे से 12 बजे तक इस नंबर की लोकेशन वहां थी.

इस तरह सरिता ने खोला राज

यह विश्वास हो जाने के बाद कि बग्गा सिंह का सोनू नागर की हत्या में कोई न कोई रोल है, श्रीमुक्तसर साहिब जा कर बग्गा सिंह को घर से उठा लिया गया. उसे दिल्ली लाया गया. थाने में जब 19 वर्षीय बग्गा सिंह से सरिता से संबंध के विषय में पूछा गया तो पहले वह किसी सरिता को पहचानने से इंकार करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो वह कांपते हुए बोला, ”साहब, मैं सरिता को पहचानता हूं. उस से मेरी मुलाकात एक महीने पहले भटिंडा में हुई थी.’’

”सरिता वहां क्या करने गई थी?’’ इंसपेक्टर रोहित सारस्वत ने पूछा.

”वहां उस की बहन रहती है.’’

”हूं.’’ इंसपेक्टर ने सिर हिलाया, ”सरिता तुम से किस मकसद से मिली थी?’’

”साहब, वह मुझ से अपने पति का खून करवाना चाहती थी.’’ बग्गा सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा किया.

”ओह!’’ इंसपेक्टर हैरानी से बोले, ”यानी सरिता अपने पति सोनू नागर की हत्या तुम से करवाना चाहती थी.’’

”जी साहब.’’ बग्गा ने सिर हिलाया.

”इस सुपारी की तुम्हें कितनी रकम मिली बग्गाï?’’

”डेढ़ लाख रुपए में यह सौदा हुआ था. सरिता ने 50 हजार रुपए पेशगी दी थी.’’

”पेशगी लेने के बाद तुम ने सोनू की हत्या कैसे की, अब यह भी बता दो हमें.’’ बग्गा के चेहरे पर नजरें जमा कर इंसपेक्टर रमेश कौशिक ने पूछा.

”साहब, मेरा एक दोस्त है गुरमीत, वह भी सुपारी किलर है. मैं ने उसे फोन कर के 2 फरवरी को दिल्ली पहुंचने को कहा. मैं भी दिल्ली आ गया. हम कश्मीरी गेट बस अड्ïडा पर मिले, वहां से एक होटल में ठहर गए. सरिता से संपर्क कर के हम ने उसे बता दिया कि हम दिल्ली आ गए हैं. सरिता ने हमें सोनू नागर का काम तमाम करने के लिए रात को आने को कहा. हम ने दिन में ही सरिता के मकान की रेकी कर ली थी और रात को साढ़े 11 बजे हर ओर सन्नाटा होने पर उस के दरवाजे पर पहुंच गए.

”सरिता ने चुपके से घर का कुंडी खोल दी. हम दबे पांव अंदर घुसे. सोनू नागर उस वक्त सो चुका था. हम ने सोते हुए सोनू नागर को दबोच लिया. सरिता ने पांव पकड़े. गुरमीत ने सोनू नागर के हाथ पकड़े. मैं ने छाती पर चढ़ कर सोनू की गरदन दबा कर उस की हत्या कर दी.

”सोनू नागर की हत्या करने के बाद उस की लाश को हम ने बाइक पर बीच में इस तरह बिठा लिया, जैसे वह जीवित हो और हम कहीं जा रहे हों. हम सोनू की लाश ले कर शक्ति नगर के एरिया में आए और सुनसान पड़े नाले में इस लाश को फेंक दिया. इस के बाद सरिता को सब बता कर हम होटल चले गए. अगले दिन हम सरिता से रुपए ले कर श्रीमुक्तसर साहिब गुरमीत के घर आ गए.’’

बग्गा सिंह का यह बयान कलमबद्ध कर लिया गया. सरिता को पकड़ कर थाने लाने के लिए इंसपेक्टर रमेश कौशिक अपनी पुलिस टीम के साथ गुलाबी बाग पहुंच गए. सरिता घर में ही थी. उसे महिला पुलिस ने पकड़ कर पुलिस की गाड़ी में बिठा लिया. सरिता चिल्लाई, ”मुझे इस तरह पकड़ कर पुलिस की गाड़ी में क्यों बिठाया गया है? इंसपेक्टर साहब, यह कैसी बेहूदगी है?’’

”बेहूदगी कहां है सरिताजी, हम तो तुम्हें थाने ले जा रहे हैं, वहां हम ने तुम्हारे पति के कातिल को पकड़ कर बिठा लिया है. तुम्हें वही दिखाने ले जा रहे हैं.’’ इसपेक्टर कौशिक ने मुसकरा कर कहा. सरिता यह सुन कर खामोश बैठ गई.

थाने में उसे जब बग्गा सिंह के सामने ला कर खड़ा किया गया तो उस के चेहरे का रंग उड़ गया, वह धम्म से कुरसी पर बैठ गई. सरिता ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. पूछताछ में उस ने कहा कि पहले पति की मौत के बाद उस की जिंदगी में सोनू नागर आ गया. कुछ दिनों तक वह सोनू नागर के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रही, फिर उस से शादी कर ली. शादी के बाद उसे मालूम हुआ कि सोनू नागर अपराधी प्रवृत्ति का आदमी है, उस की नजर उस की दुकान और मकान पर थी. वह उन्हें बेचने के चक्कर में था.

उस ने मेरी बेटी, जो स्कूल में पढ़ती थी, उस की इज्जत पर भी हाथ डाला. मैं सोनू से डरती थी, इसलिए खून का घूंट पी कर रह गई. सोनू मुझ से गालीगलौज और मारपीट भी करने लगा था. मुझे यह भी लगा कि मेरी जायदाद के लिए वह मेरी हत्या कर सकता है, इसलिए तंग आ कर मैं ने बग्गा सिंह को उस के कत्ल की सुपारी डेढ़ लाख रुपए में दे दी.

बग्गा ने अपने साथी गुरमीत के साथ

सोनू की हत्या 2 फरवरी, 2025 की रात को कर दी और लाश शक्ति नगर ले जा कर नाले में फेंक दी, जो 3 फरवरी को रूपनगर पुलिस को मिली थी. सरिता के इकबालिया बयान के बाद इस अपराध को भारतीय न्याय संहिता की धारा-103(1) के तहत सरिता और सुपारी किलर बग्गा सिंह को सक्षम न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. गुरमीत को पकडऩे के लिए पुलिस टीम श्री मुक्तसर साहिब में छापेमारी करने गई तो वह फरार हो गया था. कथा लिखे जाने तक वह पुलिस के हाथ नहीं आया था.

 

 

Shraddha Murder Case : 35 टुकड़ों में बिखर गया अफताब का प्यार

श्रद्धा की आंखों पर सूरज की रोशनी पड़ रही थी. वह सो रही थी. रोशनी से उस की नींद में खलल पड़ गई थी. तभी मां सुमन की आवाज सुनाई दी, ‘‘बेटी श्रद्धा, उठ भी जाओ. दिन काफी निकल आया है.’’

‘‘ममा! मैं ने कितनी बार कहा है कि खिड़की मत खोला करो, अभी थोड़ा और सो लेने दो,’’ श्रद्धा नाराज होती हुई अलसाई आवाज में बोली.

‘‘अब कितना सोएगी. दिन के 11 बजने वाले हैं.’’ सुमन बोलीं.

‘‘…तो क्या हुआ?’’ कच्ची नींद में ही करवट बदलती हुई श्रद्धा बोली.

‘‘तुम्हारे मोबाइल में मैसेज पर मैसेज आ रहे हैं. देखो, पता नहीं किस के हैं,’’ मां बोलीं.

‘‘लाओ, इधर दो मोबाइल. मैसेज पढ़ा तो नहीं?’’ श्रद्धा ने मैसेज के बारे में सुनते ही हड़बड़ा कर बैड पर बैठती हुई मां की ओर हाथ फैला दिया.

‘‘यह ले देख ले तू ही, पता नहीं तू कौन कौन सा ऐप चलाती है…बंबल लिखा आ रहा है,’’ मां बोलीं.

‘‘अरे ममा तुम क्या समझोगी बंबल क्या है? यही तो मेरा यार है, मेरा प्यार है.’’ श्रद्धा चहकती हुई बोली.

‘‘यार है, प्यार है, मतलब?’’ मां आश्चर्य से बोली.

‘‘मतलब यह ममा कि ये न्यू जनेरशन का डेटिंग ऐप है. तुम ने भी तो प्यार के लिए पापा संग डेटिंग की होगी. तब सिक्का डालने वाले फोन से होता था, अब मोबाइल ऐप से. जमाना बदल गया है न.’’

‘‘तू बेशरम होती जा रही है आजकल.’’

‘‘अच्छाअच्छा, एक कप कौफी तो पिला दो,’’ कहती हुई श्रद्धा मोबाइल के मैसेज पढ़ने लगी.

‘‘…पता नहीं आजकल की लड़कियों को सोशल साइट और ऐप की कैसी बीमारी लग गई है. जब देखो तब इसी में लगी रहती हैं.’’ बुदबुदाती हुई मां वहां से रसोई में चली गईं.

इधर मैसेज पढ़ रही श्रद्धा का चेहरा चमक उठा. उस ने तुरंत जवाबी मैसेज लिख डाला, ‘‘एस, मे बी सम लेट…बाहर ही इंतजार करना.’’

डेटिंग ऐप बंबल पर आया मैसेज उस के प्रेमी आफताब का था. वह हाल में ही उस के संपर्क में आई थी. श्रद्धा ने उस के फूड ब्लौग से प्रभावित हो कर इसी ऐप के जरिए उस से दोस्ती कर ली थी. कुछ मैसेजिंग और फिजिकल डेटिंग में ही श्रद्धा को आफताब ने प्रभावित कर दिया था. उस के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी अकाउंट थे, लेकिन डेटिंग के लिए बंबल का ही इस्तेमाल करता था. वह इस के जरिए मुंबई के मीटिंग पौइंट पर मिलने का समय तय करता था.

उस का पूरा नाम था आसिफ आफताब अमीन पूनावाला. वह एक शेफ और चर्चित फूड ब्लौगर था. हमेशा अपने ब्लौग ‘हंग्री छोकरो’ पर नईनई रेसिपी डालता रहता था. उस के चिकन करी रेसिपी की श्रद्धा दीवानी हो गई थी. उसे अपने घर में बनाना चाहती थी, लेकिन शाकाहारी मां की वजह से ऐसा नहीं कर पाती थी.

डेटिंग ऐप पर हुई थी दोस्ती

श्रद्धा मुंबई के मलाड के एक कालसेंटर में काम करने वाली 24 साल की युवती थी. एकदम से बिंदास अंदाज वाली लड़की. बेधड़क और मुंहफट. मांबाप के सामने भी कुछ भी बोलने से जरा भी नहीं हिचकती थी. अपने अधिकार के लिए उन से भी लड़ पड़ती थी. बातबात पर उन्हें एहसास दिलाती रहती थी कि वह अब बालिग हो गई है. अपनी जिंदगी का फैसला खुद लेने से कोई नहीं रोक सकता.

दुनिया भर की रेसिपी का मास्टरमाइंड आफताब उस के दिल में उतर चुका था. यह बात साल 2018 के मध्य की है. श्रद्धा प्यार की भूखी थी. उस के मातापिता के बीच मतभेद हो चुका था, जिस के चलते वह 2016 से ही मुंबई में इलैक्ट्रौनिक्स कारोबारी पिता विकास मदन वाकर से अलग हुई मां के साथ मलाड में रह रही थी. श्रद्धा के घर से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी ही आफताब पालघर के वसई स्थित हाउसिंग सोसाइटी में रहता था. उस की बिल्डिंग का नाम यूनिक था, जिस के 301 नंबर फ्लैट में आफताब का परिवार रहता था. श्रद्धा उस से कई बार मिलने भी जा चुकी थी.

उस की बात पिता से बहुत कम हो पाती थी. मांबाप की परवरिश में उसे प्यार के रूखेपन की अनुभूति भी होती थी. जब उस की मुलाकात आफताब से हुई, तब उस की बातों और व्यवहार में उसे ताजे प्यार की खुशबू का एहसास हुआ था. …और वह उस ओर खिंचती चली गई थी. जल्द ही इस की जानकारी उस की मां को हो गई. उन्होंने सिरे से आपत्ति जताई कि वह उस की जाति तो दूर समान धर्म का भी नहीं है. इसलिए उस के साथ दोस्ती भी ठीक नहीं, प्यारमोहब्बत तो काफी दूर की बात है.

इस बारे में सुमन ने श्रद्धा को काफी समझाया, किंतु श्रद्धा पर इस का कोई असर नहीं हुआ. उस की आफताब के साथ डिजिटल डेटिंग भी चलती रही और मुंबई में मिलनाजुलना भी होता रहा.

मां ने जब काफी विरोध किया और बात पिता तक जा पहुंची, तब श्रद्धा ने मां से खुलेआम विरोध जता दिया. वह आफताब के प्यार में अंधी हो चुकी थी. उसे अपना भविष्य और करिअर सिर्फ और सिर्फ प्रेमी आफताब में दिख रहा था. श्रद्धा से आफताब ने भावनात्मक दोस्ती कर ली थी. फिर दोनों ने तय किया कि लिवइन में रहेंगे. साल 2019 से दोनों लिवइन में रहने लगे. इस के लिए मलाड में ही किराए का एक कमरा ले लिया. मकान मालिक को उन्होंने पतिपत्नी बताया था.

यह श्रद्धा की मां सुमन को पता चली तो उन्होंने विरोध जताया तब श्रद्धा ने दोटूक जवाब दे दिया, ‘‘मैं 24 साल की हो गई हूं और मुझे अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है. मुझे आफताब  के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहना है. मैं आज से आप की बेटी नहीं, समझो.’’

यह बात कह कर श्रद्धा जब अपने घर से सामान ले कर जाने लगी थी, उस वक्त उस के पिता भी आए हुए थे. उसे मातापिता ने काफी समझाया था, लेकिन वह नहीं मानी. दोनों एक साथ लिवइन में रहने लगे. इधर, मांबाप परेशान. उन्हें बेटी के बारे में वाट्सऐप स्टेटस, फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए ही पता चल पाता था.

बेटी के गम में मां भी चल बसी

इस तरह एक साल का समय निकल गया. श्रद्धा की मां सुमन परेशान रहने लगीं. श्रद्धा ने मां को दोटूक सुना दिया था. सुमन अपनी बेटी के फैसले के आगे विरोध जताने की स्थिति में नहीं थीं. वह उस के स्वभाव से अच्छी तरह से वाकिफ थीं. आखिरकार श्रद्धा ने प्यार की खातिर अपने मांबाप की परवरिश को छोड़ दिया. सुमन अब अपने फ्लैट में अकेली रह गई थीं. उन की जिंदगी नौकरानी के भरोसे चल रही थी. बीमार भी रहती थीं. वैसे बीचबीच में श्रद्धा मां से फोन पर बात कर हालचाल ले लिया करती थी.

आखिरकार 23 जनवरी, 2020 को सुमन की मौत हो गई. इस की सूचना उसे पिता की मार्फत मिली. सुमन की मौत पर 4 साल पहले से अलग रहने वाले उन के पति और एक साल से लिवइन में रहने वाली बेटी श्रद्धा आखिरी बार मिले. बापबेटी के बीच तनाव का माहौल बना रहा.

मोहब्बत में आई खटास

मां के गुजर जाने के बाद श्रद्धा अपने भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगी थी. एक रोज सुबहसुबह चाय पीते हुए वह आफताब से अचानक पूछ बैठी, ‘‘फैमिली से हमारी शादी के बारे में कोई बात हुई?’’

कप में अपनी चाय निकालता हुआ आफताब अचानक यह सवाल सुन कर तिलमिला गया, ‘‘तुम्हें कितनी बार कहा है, उस बारे में कोई बात नहीं हुई है.’’

‘‘बात कब करोगे?’’श्रद्धा थोड़ी नाराजगी दिखाते हुई बोली.

‘‘वे लोग हमारे रिश्ते को ले कर ऐसे ही चिढ़े हुए हैं…और कोरोना भी है. लौकडाउन खत्म होते ही घर जा कर बात करूंगा.’’ आफताब टालने के अंदाज में बोला.

इस पर श्रद्धा चिढ़ती हुई बोली, ‘‘तुम मेरी कोई बात नहीं सुनते हो. हर बात को टाल देते हो. तुम्हारे चलते मैं ने अपना घरबार छोड़ा है …और तुम्हें जरा भी परवाह नहीं है.’’

उस के बाद श्रद्धा सांस लिए बगैर आफताब की खामियां गिनवाने लगी. चीखते हुए आफताब पर दनादन आरोप लगा दिए, जिस से वह भन्ना गया. गुस्से में उस ने चाय की प्याली श्रद्धा की ओर उछाल दी. गर्म चाय टेबल पर कुछ श्रद्धा के हाथों पर गिरी. वह गुस्से में आ कर और चीखने लगी, ‘‘जला दोगे क्या मुझे?’’

आफताब श्रद्धा के गर्म चाय से जले हाथ को देखने के बजाए कमरे में चला गया. गुस्से से भरी श्रद्धा तौलिए से हाथ पोंछती हुई उस के पीछेपीछे कमरे तक आ गई. आफताब ने उसे धक्का दे दिया. वह वहीं जमीन पर गिर पड़ी. आफताब का गुस्से से तमतमाया हुआ खौफनाक चेहरा देख श्रद्धा सहम गई. दोनों हाथों से चेहरा छिपा लिया और सिसकने लगी. थोड़ी देर बाद आफताब तैयार हो कर घर से बाहर चला गया. उदास श्रद्धा ने अपने क्लासमेट लक्ष्मण नाडर को फोन मिलाया. वह उस के बचपन का दोस्त था. उस से अपनी बातें बेहिचक शेयर कर लेती थी.

वह जब कभी किसी उलझन में होती थी, तब उस से सलाह लेती थी या फिर उस के जरिए अपनी कोई जरूरी बात मम्मीपापा तक पहुंचा दिया करती थी. उस रोज की घटना को ले कर श्रद्धा ने दोस्त को विस्तार से तो नहीं बताया, लेकिन इतना जरूर कहा कि आफताब उस से शादी करने में टालमटोल कर रहा है. इस बारे में बात करते ही गुस्से में आ जाता है. उस ने लक्ष्मण से यह भी बताया कि आफताब की क्या मजबूरी है, उसे नहीं मालूम, लेकिन उसे लगता है कि उस की मोहब्बत में खटास आ गई है.

इतना कहने के साथ ही वह फोन पर रोने लगी. तभी कालबेल बजी. उस ने फोन कट किया. आंसू पोंछे और आईव्यू से देखा. बाहर गार्ड खड़ा था. दरवाजा खोल कर उस के आने का कारण पूछने ही वाली थी कि उस ने पीले रंग की दवाई की ट्यूब उस ओर बढ़ा दी, ‘‘मैडम, सर ने आप को देने के लिए कहा है.’’

गार्ड ट्यूब दे कर चला गया. श्रद्धा ने उसे भरी नजर से देखा. वह जले में लगाने वाली दवा का ट्यूब था. वह समझ नहीं पाई कि जिसे वह कोस रही थी, आखिर वह उस से कैसी हमदर्दी भी रखता है. फिर भी श्रद्धा लिवइन पार्टनर के बारे में अपने पिता से बात करना चाहती थी. उसे भरोसा था कि उस के पिता आफताब के परिवार वालों को शादी के लिए राजी कर लेंगे. वह अकेली हिंदू लड़की नहीं है, जो मुसलिम युवक से प्रेम करती है और भी तो लिवइन में रह रही हैं.

करीना कपूर भी तो काफी समय तक शादीशुदा सैफ अली खान के साथ लिवइन पार्टनर बन कर रही. कई सालों बाद शादी की. उन्हें तो तब किसी ने कुछ नहीं कहा. इसलिए न, क्योंकि वे अमीर घराने की सेलिब्रेटी थे. हम साधारण लोगों पर ही पाबंदियां क्यों लगाते हैं लोग?

पिता से मांगा शादी कराने में सहयोग

इसी उधेड़बुन में खोई श्रद्धा के मन में कई तरह के खयाल आ रहे थे. आखिरकार उस ने अपने पिता से ही इस बारे में सलाह लेने और कोई रास्ता निकालने की सोची. वह अगले रोज ही सीधा पिता के पास जा पहुंची. उस ने पिता से सब कुछ सचसच बता दिया. उन से मदद मांगी कि चाहे जैसे भी हो, वह उस की आफताब से शादी करवाने की कोई तरकीब निकालें. उस के परिजनों को इस के लिए तैयार कर लें.

पिता ने आफताब को भी अपने घर बुलवाया. श्रद्धा खुश थी कि शायद कोई बात बन जाए. किंतु वह जैसा सोच रही थी, वैसा पिता ने नहीं किया. उन की शादी के लिए पहल करने के बजाय उन्होंने आफताब को ही बेटी से संबंध तोड़ लेने के लिए कहा. आफताब को अंतरधार्मिक भावना की बातें समझाने की कोशिश करने लगे. उन्होंने यहां तक कहा कि उस की शादी को लोग सिर्फ हिंदू और मुसलिम कीनजर से देखेंगे. वह नहीं चाहते कि उन की वजह से समाज परिवार में उन के उठनेबैठने पर असर पड़ जाए और उन का बिजनैस चौपट हो जाए.

पिता की इस पहल से श्रद्धा और भी आहत हो गई. वह असहाय और अकेला महसूस करने लगी. पिता ने तो दोनों पर अपनी राय के साथसाथ फैसला भी थोप दिया. और आगे का निर्णय उन पर छोड़ कर चले गए. दुखी मन से श्रद्धा ने आफताब को देखा. आफताब ने उसे गले लगा लिया. बीते दिनों की अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और भरोसा दिया कि अब उन्हें कोई सही राह निकालनी होगी.

इसी बीच कोरोना लहर का दूसरा दौर भी आ चुका था, जिस से काफी अफरातफरी मची हुई थी. लगातार मौतें हो रही थीं. मुंबई में भी मौतें हो रही थीं. लोग निगम से ले कर राज्य और केंद्र सरकार तक की पाबंदियां झेलने को मजबूर थे. श्रद्धा और आफताब को इस दौर में वर्क फ्रौम होम काम मिलता रहा. वे लौकडाउन की छूट का इंतजार करने लगे.

श्रद्धा धीरेधीरे मां की मौत के गम से उबर रही थी, लेकिन पिता द्वारा लाख मनाने के बाद भी वह आफताब के साथ रहती रही. हालांकि उन के रिश्ते की मधुरता में पहले जैसी ताजगी नहीं बची थी. दोनों एकदूसरे से खीझे रहते थे. श्रद्धा को एक ही गम खाए जा रहा था कि आखिर वह कब तक बिनब्याही लिवइन पार्टनर के साथ बनी रहेगी. उसे विवाहिता का अस्तित्व कैसे मिलेगा? मुश्किल यह थी कि आफताब कोर्टमैरिज के लिए भी राजी नहीं था.

दिन बीतते रहे और नोकझोंक के साथ श्रद्धा और आफताब की जिंदगी भी आगे बढ़ती रही. एक दिन आफताब के डेटिंग ऐप पर आफताब की तरफ किसी लड़की की रिक्वेस्ट देखी तो वह चौंक गई. उस बारे में श्रद्धा ने पूछा. आफताब ने इस का उस ने रूखेपन से जवाब दिया, ‘‘क्यों, कोई और मुझ से डेटिंग नहीं कर सकती क्या? तुम से अधिक मेरे इंस्टाग्राम पर फालोअर हैं. ब्लौग के व्यूअर्स लाख तक पहुंचने वाले हैं.’’

‘‘मेरे पूछने का तुम गलत अर्थ निकाल रहे हो, यह तो चोर की दाढ़ी में तिनका वाली बात हुई न,’’ श्रद्धा ने भी करारा जवाब दिया.

‘‘तुम को तो पता है न, बंबल पर फीमेल की रिक्वेस्ट ही मान्य होती है, मेल की नहीं. इस का मतलब तो साफ है न कि मैं ने उसे अप्रोच नहीं किया है, बल्कि उस ने मुझ से डेटिंग की रिक्वेस्ट की है. अब उसे रेसिपी सीखनी है तो इस में मैं क्या कर सकता हूं?’’ वह बोला.

बन गई नए ठिकाने की योजना

इस तकरार का अंत श्रद्धा के सौरी से हो गया, लेकिन मन अस्थिर बना रहा. दिमाग में संदेह के कुलबुलाते कीड़े को शांत नहीं कर पाई थी. साल 2022 आ गया. सब कुछ  पहले की तरह सामान्य होने लगा. घूमनेफिरने, बाजार, मौल, मल्टीप्लेक्स और टूरिज्म की मौजमस्ती के अड्डे  पर चहलपहल शुरू हो गई. आवागमन सामान्य हो गया. इन सब के बावजूद मुंबई में श्रद्धा और आफताब के लिए नया कुछ नजर नहीं आ रहा था. आफताब ने ही पहल की और श्रद्धा को खुश करने के लिए घूमने की योजना बनाई.

‘‘सुना है, दिल्ली में आईटी का अच्छा हब बन चुका है. एनसीआर गुड़गांव और नोएडा में आईटी प्रोफैशनल्स की मांग है. वहां रहने का खर्च भी कम है,’’ आफताब बोले जा रहा था और श्रद्धा उस के बोलने के अंदाज को प्यार से निहार रही थी.

बीच में ही बोल पड़ी, ‘‘…और वहां रेस्टोरेंट और फाइव स्टार होटलों में भी तुम जैसे शेफ की मांग है,’’ कहती हुई वह हंस पड़ी.

‘‘सही कहा तुम ने. आखिर वह कैपिटल है. वहां से हमें विदेश जाने के मौके मिल सकते हैं. कुछ नहीं तो स्टार्टअप तो शुरू कर ही सकते हैं. मल्टीनैशनल कंपनियां हैं, विदेशी पूंजी है..’’ आफताब बोला.

‘‘तो दिल्ली में रहने का इरादा है. वह मेरे लिए एकदम अनजाना मैट्रोपौलिटन है,’’ श्रद्धा ने चिंता जताई.

‘‘अनजाना है, लेकिन वहां के लोग बड़े दिलवाले हैं,’’ कहते हुए आफताब ने श्रद्धा को गले लगा लिया.

इस तरह दोनों ने जनवरी, 2022 में ही दिल्ली में जमने की नई योजना बना ली, लेकिन दिल्ली की सर्दी के बारे में सुन कर उन्होंने गरमी शुरू होने पर दिल्ली जाने का मन बनाया. आखिरकार योजना के मुताबिक दोनों 5 मई, 2022 को मुंबई से दिल्ली आ गए. उन्होंने पहाड़गंज के होटल में खुद को पतिपत्नी बता कर कमरा लिया. यहां एक दिन रहने के बाद वे हिमाचल प्रदेश चले गए और विभिन्न होटलों में छुट्टियां बिताते हुए दोबारा 8 मई को वापस दिल्ली आ गए. फिर उन्होंने पहाड़गंज के होटल में कमरा ले लिया और 11 मई तक वहीं ठहरे.

इस बीच दिल्ली में रहने के लिए कमरे की तलाश भी करते रहे. उन्हें महरौली के छतरपुर इलाके में  प्रौपर्टी डीलर के माध्यम से किराए का एक फ्लैट मिल गया. वहां वे 12 मई से रहने लगे. इस दौरान मिली खुशियों को श्रद्धा फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि में अपडेट करती जा रही थी. उस की आखिरी पोस्ट 11 मई को हुई थी. उस के बाद घर की व्यवस्था करने में समय ही नहीं मिल पाया था. जिंदगी की नई शुरुआत अच्छी हुई. अपनीअपनी उम्मीदें लिए हुए वे जोश से भरे हुए थे. श्रद्धा को उम्मीद थी कि निश्चित तौर पर वह यहां आफताब के साथ शादी रचा कर सेटल हो जाएगी, जबकि आफताब अभी भी लक्ष्य को ले कर दुविधा में था.

खासकर श्रद्धा के साथ निकाह के लिए घर वालों को मनाने में असफल रहा था और उस के पिता ने भी उस से संबंध तोड़ने का अपना फैसला सुना दिया था. यानी कुछ अच्छा और नया किया जाना था, किंतु उन की पुरानी जिंदगी भी पीछा नहीं छोड़ रही थी. हंसीखुशी में 6 दिन कैसे निकल गए, उन्हें पता ही नहीं चला. आफताब के मन में क्या चल रहा था, इस का श्रद्धा जरा भी अंदाजा नहीं लगा पर रही थी. करिअर और भविष्य को ले कर कभी कुछ तो कभी कुछ बातें करता था. शादी की बात जैसे ही होती, सिरे से गुस्से में आ जाता था.

चिंतित पिता ने की पहल

श्रद्धा नए शहर में अपनी नई जिंदगी की नई राह पर दौड़ लगाने को तैयार थी. जबकि मुंबई में उस के पिता विकास वाकर उसे ले कर चिंतित थे. उन की पिछले कई महीने से श्रद्धा से बात नहीं हुई थी. मई के बाद उन्होंने श्रद्धा का कोई नई पोस्ट भी नहीं देखी था. उन्होंने लक्ष्मण नाडर से बेटी के बारे में पूछा. इस पर लक्ष्मण ने बताया कि उस की भी श्रद्धा से 14 मई के बाद कोई बात नहीं हुई है और 4 माह बीत चुके हैं, इस बीच उस ने भी कोई फोन नहीं किया है. आज 14 सितंबर है. श्रद्धा दिल्ली जा कर इतनी लापरवाह कैसे हो गई?

विकास वाकर ने लक्ष्मण से उस के बारे में पता करने को कहा, लेकिन उस का कोई पता नहीं चल पाया. आफताब से बात हुई, तब उस ने बताया कि वह दिल्ली में उस के साथ नहीं है. कहां गई उसे नहीं मालूम. यह जान कर पिता और भी चिंतित हो गए कि पिछले कई महीनों से श्रद्धा की कोई अपडेट उस के दोस्त के पास नहीं थी और वह आफताब के साथ भी नहीं है. महीनों से उस का फोटो भी अपडेट नहीं हो रहा था. न वाट्सऐप पर और न ही फेसबुक पर. इसी अपडेट से उस के पिता अपनी बेटी की खोजखबर लेते थे.

तब वह अनहोनी की आशंकाओं से घिर गए कि कहीं न कहीं और कुछ न कुछ उन की बेटी के साथ गलत तो हुआ है. वह सीधे मुंबई के थाना वसई गए और श्रद्धा की गुमशुदगी की शिकायत की. करीब 50 दिन निकल गए, लेकिन मुंबई पुलिस को श्रद्धा के बारे में पता लगाने में रत्ती भर भी सफलता नहीं मिली. हार कर वह दिल्ली आए और 8 नवंबर को दिल्ली आ कर बेटी श्रद्धा के गुमशुदा होने की शिकायत की. उन के साथ बेटा भी आया था. उन्हें आफताब और श्रद्धा के फ्लैट का पता नहीं मालूम था. वे सिर्फ इतना जानते थे कि उन्होंने छतरपुर में कहीं किराए का फ्लैट लिया है, जो महरौली थानांतर्गत आता है.

विकास वाकर ने पुलिस को श्रद्धा और आफताब के लिवइन रिलेशन के बारे में पूरी जानकारी दी. उन के और श्रद्धा के अलावा आफताब की हुई बातचीत के बारे में भी विस्तार से बताया. उन के मोबाइल नंबर भी दिए. विकास और उन के बेटे से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने तहकीकात शुरू करते हुए दोनों के मोबाइल फोन की लोकेशन की जांच की, जो एक साथ कई दिनों तक दिल्ली के छतरपुर में मिली. किंतु बाद में श्रद्धा का फोन बंद मिला. उस के जरिए पुलिस ने छतरपुर में आफताब के एड्रैस का पता लगा लिया.

पुलिस जांच करते हुए उस पते पर पहुंची, जहां आफताब रहता था. वह पता दिल्ली के छतरपुर में गली नंबर-1 के एक मकान का था. पुलिस जब विकास को ले कर वहां गई, तब उन्हें उस मकान पर ताला लगा मिला. पुलिस को शक हुआ कि जरूर आफताब लड़की के साथ कुछ गलत करने के बाद फरार हो गया है. हिंदू लड़की और मुसलिम लड़के के बीच प्रेम संबंध और उन के परिजनों के विरोध को देखते हुए पुलिस लव जिहाद ऐंगल से भी जांचपड़ताल करने लगी.

सर्विलांस की मदद से आखिरकार शनिवार यानी 12 नवंबर, 2022 को आफताब दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आ गया. उस से पूछताछ की गई. पुलिस ने पाया कि उस के चेहरे पर किसी तरह की परेशानी या अफसोस नहीं था.  वह हर बात का जवाब अंगरेजी में दे रहा था. वह हिंदी जानता था, लेकिन अंगरेजी में बात करने में खुद को ज्यादा सहज महसूस कर रहा था. एसएचओ ने सीधा सवाल पूछा, ‘‘श्रद्धा कहां है?’’

उस ने भी सीधा सा जवाब दिया,‘‘आइ डोंट नो. मुझे नहीं मालूम.’’

‘‘नहीं मालूम. वह तुम्हारे साथ आई थी न? अब कहां है?’’ एसएचओ ने डांट लगाई.

‘‘चली गई?’’ आफताब के इतना बोलते ही एसएचओ ने उसे एक झापड़ लगाया, ‘‘कहां चली गई? तुम्हारी प्रेमिका है, लिवइन पार्टनर  है. ऐसे कहां चली जाएगी?’’

‘‘मुझे क्या पता? वह अब मेरे साथ नहीं है.’’ आफताब थोड़ा खीझता हुआ बोला.

‘‘…तो कहां है?’’ कहते हुए उन्होंने उस का कालर पकड़ा और तड़ातड़ 2-3 झापड़ लगा दिए.

‘‘आई किल्ड हर…उसे मार डाला मैं ने.’’ झापड़ की मार से तिलमिलाए हुए आफताब के मुंह से निकल गया.

आफताब ने स्वीकार कर लिया सच

इतना कह कर वह निश्चिंत हो गया. यह बता कर कि वह मर चुकी है उस के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं दिख रही थी. एसएचओ ने अगला सवाल किया, ‘‘क्यों और कैसे मारा?’’

‘‘उस ने मुझे काफी गुस्सा दिला दिया था. एक ही सवाल बारबार पूछती रहती थी.  गुस्से में उस का गला दबा दिया और मर गई.’’ आफताब बोला.

यह सुनते ही पास खड़े श्रद्धा के पिता अवाक रह गए. आफताब उन की तरफ देख कर बोलने लगा, ‘‘वह बारबार शादी की जिद करती थी. मैं उसे कितना समझाता कि आप लोगों को हमारी शादी मंजूर नहीं. उस रोज उस ने मुझे वही बात बोलबोल कर बेहद दुखी कर दिया था. तब मैं ने उस की हत्या कर दी.’’

यह सुन कर श्रद्धा के पिता और पुलिस वाले भी हैरान रह गए.

‘‘कब किया यह सब? डैडबौडी कहां है?’’ एसएचओ ने सवाल किया.

‘‘18 मई को… उस की बौडी जंगल में फेंक दी.’’ आफताब निश्चिंत हो कर महरौली के घने जंगल की ओर इशारा करता हुआ बोला.

‘‘जंगल में! अकेले? …और कोई था तुम्हारे साथ?’’

‘‘मैं ने अकेले ही श्रद्धा की बौडी को फेंका.’’

‘‘आश्चर्य है. पूरी बात विस्तार से बताओ. यह लो पहले पानी पियो…’’ कहते हुए एसएचओ ने उस की ओर पानी की बोतल बढ़ा दी.

उस के बाद आफताब ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर सभी के रोंगटे खड़े हो गए. कारण उस ने श्रद्धा की लाश के साथ जो किया था, वह कोई हैवान ही कर सकता है. वह एकदम अनहोनी और डरावनी खौफनाक हौलीवुड फिल्मों जैसी थी.

आफताब द्वारा श्रद्धा की मौत और उस की लाश को ठिकाने लगाने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

श्रद्धा की गला घुटने से हुई मौत की वारदात 18 मई की आधी रात के समय हुई थी. दोनों के बीच शादी को ले कर हुए विवाद के बाद दोनों ने एकदूसरे को काफी भलाबुरा कहा था. इस दौरान गुस्से में आए आफताब पर श्रद्धा ने एक थप्पड़ जड़ दिया था. जिस से आफताब ने गुस्से में दोनों हाथों से श्रद्धा की गरदन पकड़ ली. जब श्रद्धा तेजी से चिल्लाने लगी, तब उस ने एक हाथ से उस का मुंह दबा दिया. जब उसे श्रद्धा की मौत हो जाने का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. श्रद्धा की नब्ज थमने पर उसे मालूम हुआ कि उस की मौत हो चुकी है.

फिर पकडे़ जाने के डर से उस ने लाश को ठिकाने लगाने की सोची. शांति से योजना बनाई. हौरर वेब सीरीज देखने लगा, ताकि बचाव का कोई तरीका मिल जाए. ओटीटी प्लेटफार्म पर सर्च करते हुए उस ने हौलीवुड वेब सीरीज ‘डेक्स्टर’ देखी. उस के सीरियल किलर के कैरेक्टर से लाश को ठिकाने लगाने का तरीका जाना. इस सीरीज में सीरियल किलर द्वारा लाश के टुकड़ों को अलगअलग जगहों पर फेंकते हुए दिखाया जाता है. उसे देख कर ही आफताब को आइडिया मिल गया.

वह लाश को ठिकाने लगाना चाहता था, लेकिन लाश को कैसे बाहर ले जाता. दिल्ली में उस के पास कार भी नहीं थी. अकेले लाश को कैसे ठिकाने लगाता. इसलिए सोचा कि अब उसे कई टुकड़ों में काट कर ठिकाने लगाया जाए. अब ऐसा करने के लिए उस ने अपने पुराने फूड ब्लौगर वाला तरीका चुना. उस ने तय कर लिया कि वह लाश के छोटेछोटे टुकड़े कर के फ्लैट में ही रख लेगा और फिर उन्हें थोड़ाथोड़ा कर के ठिकाने लगाता रहेगा. होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान उसे बताया गया था कि गोश्त को ज्यादा दिनों तक फ्रैश कैसे रखा जाता है. वही तरीका आफताब ने अपनाया.

अगले रोज 19 मई, 2022 को वह बाजार से पहले चापड़, आरी और 300 लीटर का फ्रिज खरीद लाया. साथ में कई रूम फ्रेशनर और गुलाब की पंखुडि़यां भी ले आया. तब तक लाश को 24 घंटे तक कमरे में ही छिपाए रखा. सारा सामान जुटाने के बाद लाश को कमरे से जुड़े बाथरूम में ले जा कर आरी से कई टुकड़े काटे. हाथपैर और धड़ के 35 टुकड़े किए. फिर वह पौलीथिन में पैक कर फ्रिज में रख दिए. रूम फ्रेशनर को कमरे में फैला दिया. थोड़े से पानी भरे बरतन में गुलाब की पंखुड़ी डाल कर वह बरतन बालकनी में रख दिया, ताकि कमरे से बदबू नहीं आए.

उस के बाद उस ने 18 दिनों तक यानी 5 जून तक श्रद्धा के 35 टुकड़ों में कटी लाश को ठिकाने लगाता रहा. वह टुकड़ों को बैग में डाल कर रोजाना आधी रात में महरौली के जंगल के अलगअलग हिस्से में फेंकता रहा. पुलिस की छानबीन से पाया गया कि उस ने करीब 20 किलोमीटर के दायरे में तमाम टुकड़े फेंके थे. उस ने 100 फुटा एमबी रोड, श्मशान के पास के नाले, महरौली के जंगल और छतरपुर में धान मिल परिसर में ये टुकड़े फेंके थे. जब तक फ्रिज में लाश रखी रही, तब वह औनलाइन खाना मंगा कर खाता रहा. बचा हुआ खाना भी उसी फ्रिज में रखता था, जिस में प्रेमिका की लाश के टुकड़े रखे थे. जब कभी उसे श्रद्धा के साथ गुजारे गए हसीन पलों की याद आती तो फ्रिज में रखे उस के सिर को बाहर निकाल कर गालों को स्पर्श कर लेता था.

फ्लैट में वह सामान्य तरह की दिनचर्या का पालन कर रहा था. जब तक लाश के टुकड़ों को ठिकाने नहीं लगा देता, तब तक नहीं सोता था. हालांकि लाश को काटते हुए आरी से उस का भी हाथ कट गया था. उस की मरहमपट्टी के लिए पास के ही डा. अनिल कुमार की क्लिनिक पर गया था. जख्मी आफताब के बारे में डाक्टर ने पुलिस को बताया कि वह 20 मई की सुबह के समय उन के क्लिनिक आया था. उस का हाथ कटा हुआ था और खून भी निकल रहा था. वह बहुत आक्रामक और बेचैन लग रहा था.

जब मैं ने चोट के बारे में उस से पूछा तो उस ने बताया कि फल काटते समय उस का हाथ कट गया था. वह बातें काफी कौन्फिडेंस के साथ आंखें मिला कर कर रहा था. वह अंगरेजी में बोल रहा था. उस ने बताया कि वह मुंबई से है और दिल्ली आया है, क्योंकि यहां आईटी सेक्टर में अच्छा अवसर है. उस ने श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े कर दिए थे, लेकिन वह सिर को क्षतविक्षत नहीं कर पाया था. फ्रिज में रखे सिर को अपने प्यार की याद में बारबार निहारता था. श्रद्धा के सिर को उस ने सब से आखिर में ठिकाने लगाया था.

श्रद्धा के शव को ठिकाने लगाने के दौरान आफताब बदबू से बचने के लिए कई कैमिकल्स का इस्तेमाल भी करता रहा. पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह आर्थोबोरिक ऐसिड (बोरिक पाउडर), फार्मेल्डिहाइड और सलफ्यूरिक एसिड खरीद कर लाया था. इस की जानकारी उस ने गूगल सर्च कर मालूम की थी. श्रद्धा की हत्या के बाद आफताब ने खुद को बचाने के लिए न केवल उस की लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाया, बल्कि किसी को शक न हो, इसलिए श्रद्धा का इंस्टाग्राम अकाउंट भी लगातार चलाता रहा. वह श्रद्धा बन कर उस के दोस्तों से चैटिंग करता था.

फिर उस ने 10 जून को इंस्टाग्राम चलाना बंद कर दिया. इसी तरह से आफताब ने श्रद्धा की हत्या के बाद उस के क्रेडिट कार्ड का बिल भी चुकाया. उसे यह डर था कि अगर उस के के्रडिट कार्ड का बिल नहीं चुकाया तो ड्यू डेट के बाद बैंक से श्रद्धा के घर वालों के पास काल जाएगी और फिर वे श्रद्धा से संपर्क करने की कोशिश करेंगे. दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज और महरौली के आसपास बेहद घने और 43 एकड़ में फैले जंगलों में श्रद्धा की लाश के टुकड़े की तलाश करना काफी चुनौती का काम है.

कथा लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस को महरौली के जंगल से लाश के 12 पार्ट ही मिले थे, जिन के बारे यह कहना मुश्किल था कि वह श्रद्धा के ही हो सकते हैं. पुलिस उस के सिर को तलाश नहीं कर पाई थी. सिर मिलने से मृतका की पहचान साबित हो सकती है, लेकिन पुलिस श्रद्धा के पिता के डीएनए से मिलान कर शव की शिनाख्त की कोशिश कर रही थी. हड्डियों को डीएनए सैंपलिंग के लिए भेजा गया था.

आफताब का शातिराना और संदिग्ध अंदाज

पुलिस ने बताया कि आफताब ने वारदात को अंजाम देने के बाद खून साफ करने के लिए फ्रिज और कमरे को सल्फर हाइपोक्लोरिक एसिड से साफ किया. इसी वजह से खून के धब्बे नहीं मिले. केवल एक धब्बा किचन में मिला था, पर जांच रिपोर्ट आने से पहले यह कहना मुश्किल है वो खून किस का है. दिल्ली पुलिस ने आरोपी आफताब को फ्लैट पर ले जा कर क्राइम सीन को रीक्रिएट कर हत्याकांड की तह में जाने की कोशिश की है. आफताब की आदतों और उस के दूसरी लड़कियों के साथ संबंध होने के खुलासे के बाद हत्याकांड के कई कारण बताए जा रहे हैं.

सीन रीक्रिएशन से यह पता चला कि वारदात की रात जब अफताब और श्रद्धा के बीच झगड़ा हुआ था, तब आफताब ने पहले श्रद्धा की जम कर पिटाई की थी. पिटाई से श्रद्धा बेसुध हो गई थी, जिस के बाद आफताब श्रद्धा की छाती पर बैठ गया था और उस का गला दबा कर मार डाला था. क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए दिल्ली पुलिस फ्लैट में एक पुतला ले कर गई थी. घटनास्थल पर आफताब को भी ले जाया गया था. आफताब अमीन पूनावाला मुंबई का रहने वाला है. कहने को तो वह एक बढि़या शेफ है. जिस तरह श्रद्धा ने मुंबई के एक नामी संस्थान से मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की थी तो आफताब ने भी मुंबई के एक नामी कालेज एल.एस. रहेजा से बैचलर इन मैनेजमेंट स्टडीज की पढ़ाई की थी.

आफताब को फूड ब्लौगिंग का शौक है. इस ने खुद का फूड ब्लौग वेबसाइट बनाया है. इस का सोशल मीडिया प्रोफाइल देखने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. उस के सोशल मीडिया प्रोफाइल से पता चला कि वह एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी यानी स्त्रीस्त्री, पुरुषपुरुष समलैंगिक और बाइसैक्सुअल समुदाय, एसिड विक्टिम और वीमन राइट्स का समर्थक है. दीपावली पर पटाखों की जगह अपने अंदर के अंहकार को जलाने की बात करने वाले आफताब ने अपने कई शातिराना और संदिग्ध अंदाज से पुलिस को चकमा देने की कोशिश की है. पुलिस इस ऐंगल से भी पुलिस जांच कर रही है कि कहीं ओपन रिलेशनशिप और गे लेस्बियन का शौक हत्या की वजह तो नहीं है.

उस ने हत्या की वारदात के 10-12 दिनों के बाद ही बंबल डेटिंग ऐप के जरिए ही एक युवती को दिल्ली के फ्लैट पर बुलाया था. उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए थे. उस दौरान श्रद्धा की लाश के टुकड़े फ्रिज में ही रखे हुए थे. आफताब ने मुंबई पुलिस को न केवल चकमा दिया, बल्कि अपने परिवार की नजरों में भी सहज और सामान्य बना रहा. इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस की निगाह में श्रद्धा मर्डर केस का एकमात्र आरोपी आफताब मानसिक तौर पर बेहद शातिर है. दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद उसे अपनी कंपनी से ईमेल पर नौकरी से निकाले जाने का नोटिस भी मिला. वह उस वक्त तक एक निजी कंपनी क्लाइंट सर्विसिंग वर्टिकल में एक एसोसिएट के तौर पर काम कर रहा था.

उस ने हत्या के करीब एकदो सप्ताह बाद ही कालसेंटर में काम करना शुरू कर दिया था. उस का काम कंपनी के उत्पादों और सेवाओं को बेचना था. लेकिन पिछले 8-9 दिनों से काम पर नहीं आने के कारण उसे टर्मिनेशन नोटिस भेज गया था. इस केस में नएनए खुलासे होने के क्रम में यह भी पता चला कि श्रद्धा को मई में मौत के घाट उतारने के बाद भी आफताब उस के एटीएम और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता रहा. इस के अलावा उस ने श्रद्धा के अकाउंट से औनलाइन पैसे भी ट्रांसफर किए. आफताब की इस एक गलती ने उस की पोल खोल दी और पुलिस को केस को सुलझाने में मदद मिली.

श्रद्धा का फोन 26 मई, 2022 को बंद हुआ था और पुलिस ने जांच में पाया कि श्रद्धा का फोन 22 मई से 26 मई के बीच औनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल हुआ. इस दौरान श्रद्धा के बैंक अकाउंट से 54 हजार रुपए आफताब के अकाउंट में ट्रांसफर हुए थे और जिस समय फोन से औनलाइन ट्रांजैक्शन हुआ, तब फोन की लोकेशन छतरपुर (दिल्ली) ही थी.

कथा लिखने तक पुलिस आफताब के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा सबूत जुटाने की कोशिश कर रही थी ताकि वह अदालत से उसे सख्त सजा दिलवाने में सफल हो सके. पुलिस उस का नारको टेस्ट भी कराने की तैयारी कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सनक में कर बैठी प्रेमी के दोस्त की हत्या

सनक में कर बैठी प्रेमी के दोस्त की हत्या – भाग 3

तान्या बहुत ही तेज तर्रार थी. वह जानती थी कि बाहर रह कर लड़कियों से दोस्ती करने से कोई लाभ नही, लड़कों से दोस्ती कर हर मकसद पूरा किया जा सकता है. क्योंकि अधिकांश लड़कियों में एकदूसरे से जलने की आदत होती है. यही कारण था कि उस ने इंदौर आते ही सब से पहले युवकों को ही निशाना बनाया था.

छोटू से दोस्ती करते ही उसे भरोसा हो गया था कि वह ही उसे उस की मंजिल तक पहुंचा सकता है. यही सोच कर उस ने छोटू के लिए अपने दिल के दरबाजे खोल दिए थे. उस के सहारे से ही उस की कई अवारा लड़कों से दोस्ती हो गई थी.

तान्या की हरकतों का पता रचित को लगा तो उस ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक भी बात नहीं मानी. बाद में रचित तान्या को बोझ लगने लगा था. उस ने रचित से साफ शब्दों में कह दिया था कि उसे उस की हमदर्दी की कोई जरूरत नही. तान्या की बात सुनते ही रचित ने उस की तरफ ध्यान देना बिल्कुल ही बंद कर दिया था. लेकिन फिर भी उसे एक चिंता लगी रहती थी कि वह गलत हाथों में पड़ कर अपना भविष्य खराब न कर ले.

हालांकि तान्या ने रचित से पूरी तरह से संबंध खत्म कर लिए थे, लेकिन फिर भी उस के दिल में रचित के लिए बेचैनी रहती थी. उस के दिल में उस के लिए अभी भी थोड़ी जगह खाली थी. लेकिन उस के छोटू से संबंध होते ही रचित ने उस से पूरी तरह से संबंध खत्म कर लिए थे. उस के बाद तान्या ने रचित से बदला लेने का पक्का प्लान बना लिया था. उस ने अपने इस मकसद को अंजाम देने के लिए छोटू के साथसाथ शोभित और उस के दोस्त को भी अपने साथ मिला लिया था.

पूर्व बौयफ्रैंड को सिखाना चाहती थी सबक

26 जुलाई, 2023 को तान्या अपने तीनों दोस्तों के साथ एक होटल में खाना खाने गई हुई थी. उसी दौरान तान्या को पता लगा कि रचित अपने दोस्तों मोनू, विशाल व रचित के साथ महाकाल दर्शन करने के लिए जा रहा है. यह जानकारी मिलते ही उस ने अपने तीनों दोस्तों से रचित को सबक सिखाने वाली बात कही.

उस के सभी दोस्त उस वक्त शराब के नशे में थे. तान्या के कहने मात्र से सभी ने उस की नजरों में हीरो बनते हुए उस की हां में हां कर दी. फिर जल्दी से तीनों ने एक्टिवा स्कूटी निकाली और लोटस चौराहे पर जा पहुंचे. तान्या जानती थी कि उन की कार उसी रास्ते से हो कर गुजरेगी.

लोटस चौराहे पर पहुंचते ही रचित की नजर सामने खड़ी स्कूटी पर पड़ी. उस वक्त तान्या स्कूटी पर सब से पीछे बैठी सिगरेट पी रही थी. इतनी रात गये तान्या को तीन युवकों के साथ इस तरह से घूमते हुए देख रचित को गुस्सा आ गया. रचित ने उस के पास जा कर ही कार रोकी.

तान्या को देखते ही रचित बोला, ”तान्या तुम्हें शर्म नहीं आती . इस तरह से तुम 3-3 लड़कों के साथ रात में आवारगर्दी करती फिर रही हो.”

रचित की बात सुनते ही तान्या को भी गुस्सा आ गया.”तू कौन होता है मुझे रोकने टोकने वाला. तुझ से मेरा क्या रिश्ता है?” उस ने चिल्लाते हुए कहा.

रचित की बात सुनते ही उस के साथी बौखला गए. उन्होंने कार की तरफ लपकने की कोशिश की तो रचित उर्फ टीटू ने कार आगे बढ़ा दी. कार के आगे बढ़ते ही चारों स्कूटी पर सवार हुए. फिर उन्होंने स्कूटी कार के पीछे लगा दी. फिर कार को आगे से घेर कर रचित व उस के साथियों पर हमला कर दिया.

इस केस के खुल जाने के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त एक्टिवा स्कूटी व चाकू भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने इस मामले में तान्या कुशवाह सहित उस के अन्य दोस्तों शोभित ठाकुर,छोटू उर्फ तन्यम व ऋतिक को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था.

हालांकि तान्या ने पुलिस के सामने सफाई देते हएु कहा कि रचित को मारने का उस का कोई इरादा नहीं था. वह केवल उसे डराना चाहती थी. फिर भी उस ने जेल जाने से पहले पुलिस के सामने कहा कि रचित ने कई साल उस का शोषण किया था. वह उसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगी. वह जब भी जेल से छूटेगी, उस से बदला जरूर लेगी.

आज की इस फैशनपरस्त दुनियां में लिवइन रिलेशनशिप में रहना युवकयुवतियों में क्रेज सा बन गया है. युवकयुवतियां अपना भविष्य बनाने के लिए बड़े शहरों में कोचिंग या पढ़ाई करने के नाम पर निकलते हैं, लेकिन मांबाप से दूर रह कर अधिकांश वहां पर जाते ही गलत रास्ता अपना लेतेे हैं.

शुरूशुरू में लिव इन रिलेशन में रहना अच्छा लगता है, लेकिन जैसे ही बात शादी की आती है तो उस प्रेमी युगल में एक शख्स पीछे हटने लगता है. जिस के कारण दोनों में मनमुटाव पैदा हो जाता है. फिर कुछ ही दिनों में दोनों प्रेमी युगल के रास्ते अलगअलग हो जाते हैं.

इस से युवकों को तो ज्यादा फर्क नही पड़ता, लेकिन युवतियों के आगे. खून के आंसू बहाने के अलाबा कोई रास्ता नहीं बचता. जिस के कारण उन की जिंदगी ही तबाह हो कर रह जाती है. तान्या के साथ भी यही हुआ. काश! वह समझदारी से काम लेती तो वह शायद जेल नहीं पहुंचती.

सनक में कर बैठी प्रेमी के दोस्त की हत्या – भाग 2

तान्या रचित और टीटू को बहुत पहले से जानती थी. फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसे इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा. पुलिस पूछताछ में तान्या व उसके दोस्तों से जो जानकारी प्राप्त हुई वह इस प्रकार थी.

मध्य प्रदेश के धार जिले के बागटांडा के बरोड़ निवासी तान्या कुछ समय पहले पढ़ाई करने के लिए इंदौर आई थी. इंदौर आते ही उस ने एक ब्रोकर के माध्यम से पलासिया इलाके के गायत्री अपार्टमेंट में एक किराए का फ्लैट लिया, और वहीं रह कर उस ने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी थी.

तान्या खातेपीते परिवार से थी. उस के पास रुपयोंपैसों की कमी नही थी. उस के मम्मीपापा उस का भविष्य सुधारने के लिए काफी रुपए खर्च कर रहे थे. खूबसूरत तान्या के कालेज में एडमिशन लेते ही उस के कई दीवाने हो गए थे. वह शुरू से ही बनठन कर रहती थी. मम्मीपापा खर्च के लिए पैसा भेजते तो वह खुले हाथ से पैसा खर्च भी करती थी.

इंदौर आते ही उस के जैसे पंख निकल आए थे. वह खुली हवा में घूमने लगी. उस की कुछ फ्रेंड गलत संगत में पड़ी हुई थीं. तान्या उन के संपर्क में आई तो उस पर भी उन का रंग चढ़ने लगा. वह भी अपनी दोस्तों के साथ शराब और सिगरेट का नशा करने लगी थी. उसी नशे के कारण उस की दोस्ती आवारा लड़कों से हो गई. जवानी के जोश में उस के कदम बहके तो वह पढ़ाई करना भूल गई.

उसी दौरान उस की मुलाकात रचित उर्फ टीटू से हुई. टीटू ने उसे एक बार प्यार से देखा तो देखता ही रह गया. दोनों के बीच परिचय हुआ और फिर जल्दी ही दोनों ने दोस्ती के लिए हाथ बढ़ा दिए थे. दोस्ती के सहारे ही उन के बीच प्यार बढ़ा और कुछ ही दिनों में वह एकदूसरे को दिलो जान से चाहने लगे.

तान्या से दोस्ती हो जाने के बाद रचित का उस के फ्लैट पर भी आनाजाना शुरू हो गया था. रचित घंटों उस के पास पड़ा रहता था. जिस के कारण उस के आसपास रहने वाले लोग परेशान रहने लगे थे. चूंकि तान्या ने वह फ्लैट किराए पर लिया था. इसी कारण उस के पड़ोसी उसे वहां से जाने के लिए भी नहीं कह सकते थे.

पहले तो उस के फ्लैट पर रचित ही आता था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद अन्य कई युवक भी आने लगे. थे. तान्या के फ्लैट में लडकों का आनाजान शुरू हुआ तो पड़ोसियों को परेशानी हुई. .उस की हरकतों से तंग आ कर पड़ोसियों ने उस फ्लैट के मालिक से उस की शिकायत कर उस से फ्लैट खाली कराने के लिए दबाव बनाया.

पड़ोसियों के दबाव में आ कर फ्लैट मालिक ने तान्या से तुरंत ही फ्लैट खाली करने को कहा. मालिक के कहने पर तान्या ने फ्लैट खाली करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा. तान्या ने यह बात अपने दोस्त रचित को बताई. साथ ही उसने उस से उस के लिए एक मकान ढूंढने को कहा, लेकिन इस मामले में रचित ने उस की कोई भी सहायता करने से साफ मना कर दिया था.

रचित ने तान्या को समझाने का किया प्रयास

रचित के अलाबा तान्या का एक ओर दोस्त था छोटू. उस का भी उस के पास बहुत आना जाना लगा रहता था. यह बात उस ने छोटू के सामने रखी तो उस ने उस के लिए फ्लैट ढूंढना शुरू कर दिया. छोटू परदेशीपुरा इलाके में रहता था. छोटू एक दबंग किस्म का युवक था. छोटेमोटे अपराध और मारपीट कर उस ने अपने इलाके में दहशत फैला रखी थी. उस पर 3 मुकदमे दर्ज थे.

कुछ सयम पहले ही तान्या की उस से मुलाकात हुई थी. छोटू को लड़कियों को परखने की महारत हासिल थी. उस ने तान्या के लिए कुछ ही दिनों में एक किराए के फ्लैट की व्यवस्था कर दी. उस के बाद वह उसी के इलाके में आ कर रहने लगी थी. तान्या की छोटू से दोस्ती पक्की हो गई थी. छोटू के साथ दोस्ती हो जाने के बाद तान्या को नशे की लत भी लग गई थी. जिस के बाद उसमें अच्छा बुरा सोचने की क्षमता भी खत्म हो गई. थी.

यह बात रचित को पता चली तो उस ने उसे समझाने की कोशिश की, ”तान्या तुम पढ़ीलिखी हो, तुम्हें ऐसे आवारा किस्म के साथ दोस्ती नही करनी चाहिए. छोटू के साथ दोस्ती करने के बाद तुम पछताओगी.”

लेकिन तान्या ने उस की एक न सुनी. फिर रचित ने भी उस से बात करनी ही बंद कर दी. फिर भी तान्या रचित को छोड़ने को तैयार न थी. वह बारबार रचित को फोन लगाती, लेकिन वह उस का फोन रिसीव नहीं कर रहा था. जिस के कारण वह उस से मिल भी नहीं पा रही थी.

उस के बाद तान्या ने छोटू सेे कहा कि वह किसी भी तरह से एक बार उसे रचित से मिलवा दे. छोटू ने रचित से मिलकर तान्या का मैसेज देते हुए. मिलने को कहा, लेकिन उस के बाद भी रचित उस से नहीं मिला.

जब रचित ने तान्या से रिश्ता तोड़ लिया तो तान्या ने उसे सबक सिखाने की योजना बनाई. छोटू पहले से ही आपराधिक प्रवृत्ति का था. हर वक्त उस के साथ कई आवारा किस्म के लड़के घूमते थे. एक दिन तान्या ने छोटू से कहा कि वह रचित को धमकाना चाहती है, जिस से घबरा कर वह उसके संपर्क में आ जाए.

तान्या पर मौडल बनने का भूत था सवार

छोटू अय्याश किस्म का था. उस से ज्यादा वह हवाबाज होने के बाद शेखी बघारने में भी कम नही था. यही कारण था कि सामने वाला जल्दी ही उस की बातों में आ जाता था. तान्या उस के सम्पर्क में आई तो उसे भी लगा कि छोटू जो कहता है, उसे कर भी देता है.

तान्या इंदौर आ कर हवा में उड़ने लगी और शीघ्र उच्च स्तर की मौडल बनने का सपना देखने लगी थी. छोटू से दोस्ती करते ही उसे लगने लगा था कि वह उस के सपनों को जल्दी ही पूरा कर सकता है. तान्या उस के संपर्क में आने के बाद कई बार उस से बोल चुकी थी कि उस की मुलाकात एक दो मौडल लड़कों से करवा देना.