UP Crime News : प्रेमिका संग बनाए संबंध फिर चाकू मारकर किया कत्ल

UP Crime News : बीएससी में पढ़ने वाली सीमा एक होशियार लड़की थी. वह मोहम्मद कैफ से बहुत प्यार करती थी. इसी प्यार और सैक्स के चक्कर में वह एक दिन ऐसी फंसी कि..

‘‘सी मा, देखो शाम का समय है. मौसम भी मस्तमस्त हो रहा है. घूमने का मन कर रहा है. चलो, हम लोग कहीं घूम कर आते हैं.’’ लखनऊ के स्कूटर इंडिया के पास रहने वाली सीमा नाम की लड़की से उस के बौयफ्रैंड कैफ ने मोबाइल पर बात करते हुए कहा.

‘‘कैफ, अभी तो कोई घर में है नहीं, बिना घर वालों के पूछे कैसे चलें?’’ सीमा ने अनमने ढंग से मोहम्मद कैफ को जबाव दिया.

‘‘यार जब घर में कोई नहीं है तो बताने की क्या जरूरत है? हम लोग जल्दी ही वापस आ जाएंगे. जब तक तुम्हारे पापा आएंगे उस के पहले ही हम वापस लौट आएंगे. किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.’’ कैफ को जैसे ही यह पता चला कि घर में सीमा अकेली है, वह जिद करने लगा. सीमा भी अपने प्रेमी कैफ को मना नहीं कर पाई. सीमा के पिता सीतापुर जिले के खैराबाद के रहने वाले थे. लखनऊ में इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्राइवेट कंपनी में वह शिफ्ट के हिसाब से काम करते थे. सीमा ने पिछले साल बीएससी में एडमिशन लिया था. इसी बीच कोरोना के कारण स्कूलकालेज बंद हो गए. इस के बाद वह अपने पिता रमेश कुमार के पास रहने चली आई थी. सीमा के एक छोटा भाई और एक बहन भी थी.

घर में वह बड़ी थी. इसलिए पिता की मदद के लिए उस ने पढ़ाई के साथ नादरगंज में चप्पल बनाने की एक फैक्ट्री में नौकरी कर ली. गांव और शहर के माहौल में काफी अंतर होता है. लखनऊ आ कर सीमा भी यहां के माहौल में ढलने लगी थी. चप्पल फैक्ट्री में काम करते समय वहां कैफ नाम के लड़के से उस की दोस्ती हो गई. यह बात फैक्ट्री के गार्ड को पता चली तो वह भी उसे छेड़ने की कोशिश करने लगा. यह जानकारी जब सीमा के पिता को हुई तो उन्होंने चप्पल फैक्ट्री से बेटी की नौकरी छुड़वा दी. नौकरी छोड़ने के बाद सीमा ज्वैलरी शौप पर नौकरी करने लगी. कैफ के साथ दोस्ती प्यार में बदल चुकी थी. अब वह घर वालों को बिना बताए उस से मिलने जाने लगी थी. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन चुके थे.

12 जून की शाम करीब साढ़े 7 बजे सीमा के पिता रमेश कुमार अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे. सीमा उस समय शौप से वापस आ चुकी थी. रमेश कुमार ने सीमा को समझाते कहा, ‘‘बेटी रात में कहीं जाना नहीं. कमरे का दरवाजा बंद कर लो. खाना खा कर चुपचाप सो जाना.’’

‘‘जी पापा, आप चिंता न करें. मैं कहीं नहीं जाऊंगी. घर पर ही रहूंगी.’’

इस के बाद पिता के जाते ही कैफ का फोन आ गया और सीमा उसे मना करती रही पर उस की जबरदस्ती के आगे वह कुछ कर नहीं सकी. शाम 8 बजे के करीब कैफ सीमा के घर के पास आया और उसे बुला लिया. मां ने शाम 5 बजे के करीब बेटी से फोन पर बात की थी. उसे हिदायत दी थी कि कहीं जाना नहीं. पिता ने भी उसे समझाया था कि घर में ही रहना, कहीं जाना नहीं. इस के बाद भी सीमा ने बात नहीं मानी. वह अपने प्रेमी मोहम्मद कैफ के साथ चली गई. पिता जब अगली सुबह 8 बजे ड्यूटी से वापस घर आए तो सीमा वहां नहीं थी. उन्होंने सीमा के फोन पर काल करनी शुरू की तो उस का फोन बंद था. यह बात उन्होंने अपनी पत्नी को बताई तो बेटी की चिंता में वह सीतापुर से लखनऊ के लिए निकल गई.

इस बीच पिपरसंड गांव के प्रधान रामनरेश पाल ने सरोजनीनगर थाने में सूचना दी कि गहरू के जंगल में एक लड़की की लाश पड़ी है. लड़की के कपडे़ अस्तव्यस्त थे. देखने में ही लग रहा था कि पहले उस के साथ बलात्कार किया गया है. गले में दुपट्टा कसा हुआ था. पास में ही शराब, पानी की बोतल, 2 गिलास, एक रस्सी और सिगरेट के टुकड़े भी पड़े थे. घटना की सूचना पुलिस कमिश्नर डी.के. ठाकुर, डीसीपी (सेंट्रल) सोमेन वर्मा और एडिशनल डीसीपी (सेंट्रल) सी.एन. सिन्हा को भी दी गई. पुलिस ने छानबीन के लिए फोरैंसिक और डौग स्क्वायड टीम को भी लगाया.

इस बीच तक सीमा के मातापिता भी वहां पहुंच चुके थे. पुलिस ने अब तक मुकदमा अज्ञात के खिलाफ कायम कर के छानबीन शुरू कर दी थी. सीमा के घर वालों ने पुलिस को बताया कि मोहम्मद कैफ नाम के लड़के पर उन्हें शक है. दोनों की दोस्ती की बात सामने आई थी. पुलिस ने मोहम्मद कैफ के मोबाइल और सीमा के मोबाइल की काल डिटेल्स चैक करनी शुरू की. पुलिस को कैफ के मोबाइल को चैक करने से पता चला कि उस ने सीमा से बात की थी. उस के बाद से सीमा का फोन बंद हो गया. अब पुलिस ने कैफ को पकड़ा और उस से पूछताछ की तो प्यार, सैक्स और हत्या की दर्दनाक कहानी सामने आ गई.

12 जून, 2021 की शाम मोहम्मद कैफ अपने 2 दोस्तों विशाल कश्यप और आकाश यादव के साथ बैठ कर ताड़ी पी रहा था. ये दोनों दरोगाखेड़ा और अमौसी गांव के रहने वाले थे. ताड़ी का नशा तीनों पर चढ़ चुका था. बातोंबातों में लड़की की बातें आपस में होने लगीं.  कैफ ने कहा, ‘‘ताड़ी पीने के बाद तो लड़की और भी नशीली दिखने लगती है.’’

आकाश बोला, ‘‘दिखने से काम नहीं होता. लड़की मिलनी भी चाहिए.’’

कैफ उसे देख कर बोला, ‘‘तुम लोगों का तो पता नहीं, पर मेरे पास तो लड़की है. अब तुम ने याद दिलाई है तो आज उस से मिल ही लेते हैं.’’

यह कह कर कैफ ने सीमा को फोन मिलाया और कुछ देर में वह सीमा को बुलाने चला गया. इधर आकाश और विशाल को भी नशा चढ़ चुका था. दोनों भी इस मौके का लाभ उठाना चाहते थे. उन को पता था कि कैफ कहां जाता है. ये दोनों जंगल में पहले से ही पहुंच गए और वहीं बैठ कर पीने लगे. सीमा और कैफ ने जंगल में संबंध बनाए. तभी विशाल और आकाश वहां पहुंच गए. वे भी सीमा से संबंध बनाने के लिए दबाव बनाने लगे. पहले तो कैफ इस के लिए मना करता रहा, बाद में वह भी सीमा पर दबाव बनाने लगा. जब सीमा नहीं मानी तो तीनों ने जबरदस्ती उस के साथ बलात्कार करने का प्रयास किया. अब सीमा ने खुद को बचाने के लिए शोर मचाना चाहा और कच्चे रास्ते पर भागने लगी. इस पर विशाल ने सीमा की पीठ पर चाकू से वार किया. सीमा इस के बाद भी बबूल की झडि़यों में होते हुए भागने लगी.

‘‘इसे मार दो नहीं तो हम सब फंस जाएंगे.’’ विशाल और आकाश ने कैफ से कहा.

सीमा झाडि़यों से निकल कर जैसे ही बाहर खाली जगह पर आई, तीनों ने उसे घेर लिया. ताबड़तोड़ वार करने के साथ ही साथ उस के गले को भी दबा कर रखा. मारते समय चाकू सीमा के पेट में होता हुआ पीठ में फंस गया और वह टूट गया. 15 से 20 गहरे घाव से खून बहने के कारण सीमा की मौत हो गई. पेट में चाकू के वार से सीमा का यूरिनल थैली तक फट गई थी. 2 महीने पहले जब सीमा ने मोहम्मद कैफ से दोस्ती और प्यार में संबंध बनाए थे, तब यह नहीं सोचा था कि एक दिन उसे यह दिन देखना पड़ेगा.

लखनऊ पुलिस ने एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह की अगुवाई में बनी पुलिस टीम को पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की. पुलिस ने मोहम्मद कैफ और उस के दोनों साथी विशाल और आकाश को भादंवि की धारा 302 में गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. UP Crime News

(कथा में सीमा और उस के परिजनों के नाम बदल दिए गए हैं

Crime Story : प्रेमिका की हत्या कर पिता को फंसाने की रची चाल

Crime Story : कृष्णा कुमारी की हत्या के बाद पुलिस को जांच में जो सबूत मिल रहे थे, उस से मामला औनर किलिंग का लग रहा था, लेकिन कृष्णा कुमारी के पिता और भाई खुद को बेकसूर ही बताते रहे. इसी दौरान कृष्णा कुमारी के प्रेमी संजय चौहान से पूछताछ की तो न सिर्फ केस का खुलासा हो गया बल्कि इस की कहानी भी प्यार के इर्दगिर्द की निकली…

30 मई, 2021 की सुबह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के गांव तुमान में दिगपाल सिंह वैष्णव जब अपनी कोरा बाड़ी की ओर हमेशा की तरह दातून कर के चहलकदमी करते हुए पहुंचा था तो उस ने देखा कि उस की बेटी कृष्णा बेसुध पड़ी हुई है. गले में साड़ी का फंदा फंसा हुआ है. दिगपाल यह देखते ही घबरा गया. उस ने दातून एक तरफ फेंकी और तेजी से बेटी कृष्णा के पास पहुंच गया. उस ने सब से पहले उस के गले में पड़ी साड़ी की गांठ खोल दी. उस ने अपनी बेटी को खूब हिलायाडुलाया. लेकिन उस में कोई हरकत नहीं हुई तो वह घबरा गया. उस के आंसू टपकने लगे. उसे लगा कि कहीं कृष्णा ने आत्महत्या तो नहीं कर ली है या फिर उस की यह हालत किस ने की है.

वह समझ गया कि कृष्णा की सांसें थम चुकी हैं. दिगपाल चिल्लाता हुआ अपने घर की ओर भागा, ‘‘कृष्णा की मां… कृष्णा की मां, देखो यह कैसा अनर्थ हो गया है. किसी ने हमारी बेटी को मार कर घर के पिछवाड़े बाड़ी में फेंक दिया है.’’

यह सुन कर दिगपाल की पत्नी भी रोने लगी. कहने लगी कि किस ने मार दिया बेटी को. थोड़ी ही देर में यह खबर तुमान गांव में फैल गई. इस के बाद तो दिगपाल के घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी. उसी समय गांव के सरपंच सचिन मिंज ने कटघोरा थाने फोन कर के घटना की जानकारी थानाप्रभारी अविनाश सिंह को दे दी. थानाप्रभारी अविनाश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हुए और सुबह लगभग 8 बजे तुमान गांव पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना करने में जुट गए. थानाप्रभारी ने घटनास्थल से ही अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) रामगोपाल कारियारे, एसपी अभिषेक सिंह मीणा को घटना की जानकारी दे दी.

कुछ ही देर में कोरबा से डौग स्क्वायड टीम वहां पहुंच गई. जांच के लिए खोजी कुत्ता बाघा को मृत शरीर के पास ले जा कर अपराधी को पकड़ने के लिए छोड़ दिया गया. यह अजूबा पहली बार गांव वालों ने देखा. जब खोजी कुत्ता अपराधी को पकड़ने के लिए शव को सूंघ रहा था तो लोग यह मान रहे थे कि अब जल्द ही वह आरोपी को पकड़ लेगा. मगर लोगों ने आश्चर्य से देखा कुत्ता इधरउधर घूमते हुए मृतका कृष्णा कुमारी के पिता दिगपाल वैष्णव और भाई राजेश के आसपास मंडराने लगा. यह देखते ही थानाप्रभारी अविनाश सिंह ने कृष्णा के पिता दिगपाल और राजेश को हिरासत में लेने का निर्देश दिए.

दिगपाल वैष्णव स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कंपाउंडर था. क्षेत्र में उस की अच्छी इज्जत थी. इसलिए वह थानाप्रभारी से गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘साहब, मैं भला क्यों अपनी ही बेटी को मारूंगा. आप यकीन मानिए, मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है.’’

वह बारबार कह रहा था, मगर 2 सिपाहियों ने उसे हिरासत में ले लिया और एक कमरे में ले जा कर के उस से इकबालिया बयान देने को कहा. तब वह आंसू बहाते हुए हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘साहब, मैं बिलकुल सच कह रहा हूं कि मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है, कृष्णा मुझे जान से भी ज्यादा प्यारी थी, मैं उसे नहीं मार सकता.’’

इस पर अविनाश सिंह ने कहा, ‘‘देखो, पुलिस के सामने सचसच बता दो, जितना हो सकेगा हम तुम्हारे साथ रियायत करेंगे. खोजी डौग गलत नहीं हो सकता, यह जान लो.’’

इस पर आंसू बहाते हुए दिगपाल वैष्णव ने कहा, ‘‘साहब, मेरा यकीन मानिए मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है. मैं तो  सुबह जब गया तो उसे मृत अवस्था में देखा था और उसे अपनी गोद में ले कर के रोता रहा था.’’

दिगपाल को याद आया कि यही कारण हो सकता है कि कुत्ते ने उसे आरोपी माना है. जब यह बात उस ने जांच अधिकारी अविनाश सिंह को बताई तो उन्हें समझ में आया. उन्होंने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘तुम्हारी बात सही हो सकती है, मगर यह जान लो कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. हमारी जांच में और भी बहुत सारे ऐसे सबूत हमें आखिर मिल ही जाएंगे, जिस से यह सिद्ध हो जाएगा कि आरोपी कौन है. अच्छा है कि अभी भी अपना अपराध कबूल कर लो.’’

‘‘नहींनहीं साहब, मैं ने यह कर्म नहीं किया है.’’ दिगपाल ने कहा.

विवेचना अधिकारी और अन्य पुलिस जो जांच कार्य में लगी हुई थी, ने यह निष्कर्ष निकाला कि हो सकता है सुबह जब कृष्णा की लाश दिगपाल ने देखी तो उसे स्पर्श किया होगा. शायद यही कारण है कि खोजी कुत्ता उसे आरोपी मान रहा है. इस तरह जांच आगे एक नई दिशा में आगे बढ़ने लगी. जांच में पता चला कि पिछले लंबे समय से कृष्णा कुमारी का प्रेमसंबंध पास के गांव पुटुंवा निवासी संजय चौहान (23 साल) नामक युवक से था और उन के संबंध इतने मजबूत थे कि कृष्णा कुमारी ने संजय चौहान को एक बाइक और मोबाइल भी गिफ्ट किया था. जांच अधिकारी अविनाश सिंह ने गौर किया. जब संजय चौहान घटनास्थल पर पहुंचा था तो उस समय उस का चेहरा उतरा हुआ था और आंखें लाल थीं, ऐसा लग रहा था कि वह बहुत रोया हो.

अविनाश सिंह ने जब उस से पूछताछ की तो उस ने उन के सामने अपना मोबाइल रख दिया, जिसे देख कर थानाप्रभारी चौंक गए. उस मैसेज से यह बात स्पष्ट थी कि हत्यारा दिगपाल वैष्णव ही है. संजय चौहान के मोबाइल में कृष्णा कुमारी का  मैसेज था, जिस में लिखा था, ‘आज की रात मैं नहीं बच पाऊंगी, मेरे पिता मुझे मार डालेंगे, मुझे बचा लो…’

यह मैसेज यह बता रहा था कि हत्या दिगपाल ने ही की है. इस सबूत के बाद अविनाश सिंह ने दिगपाल को फिर तलब किया और उसे मैसेज दिखाते हुए कठोर शब्दों में कहा, ‘‘दिगपाल, अब तुम सचसच बता दो, अब हमारे हाथ में सबूत आ गया है. यह देखो, तुम्हारी बेटी ने कल रात संजय को यह मैसेज किया था. बताओ, रात को क्याक्या हुआ था.’’

यह सुन कर दिगपाल भयभीत होते हुए बोला, ‘‘साहब, क्या मैसेज लिखा है मुझे बताया जाए.’’

इस पर थानाप्रभारी ने संजय के मोबाइल में लिखा हुआ मैसेज उसे पढ़ कर सुना दिया. उसे सुन कर वह आंसू बहाने लगा और सिर पकड़ कर बैठ गया. थानाप्रभारी ने थोड़ी देर बाद उस से कहा, ‘‘अब बताओ, तुम स्वीकार करते हो कि कृष्णा की हत्या तुम्हीं ने की है. हमें यह जानकारी भी मिली है कि तुम उस का विवाह दूसरी जगह करने वाले थे, जिस से वह बारबार मना भी कर रही थी. मगर इस बात पर घर में विवाद भी चल रहा था. इन सब बातों को देखते हुए स्पष्ट है कि हत्या कर के तुम्हीं लोगों ने की है.’’

दिगपालरोआंसा हो गया. उस ने कहा, ‘‘साहबजी, मैं फिर हाथ जोड़ कर बोल रहा हूं कि कृष्णा मेरी जान से भी प्यारी थी. मैं ने उसे नहीं मारा है.’’

यह सुन कर जांच अधिकारी अविनाश सिंह ने कहा, ‘‘तुम चाहे जितना भी कहो, सारे सबूत चीखचीख कर तुम्हें हत्यारा बता रहे हैं. साक्ष्य तुम्हारे खिलाफ हो चुके हैं. तुम बताओ, तुम्हारे पास ऐसा क्या सबूत है, जिस से यह सिद्ध हो सके कि तुम ने बेटी की हत्या नहीं की.’’

यह सुन कर दिगपाल बोला, ‘‘मैं क्या बताऊं मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है. मगर मैं यही कहूंगा कि मैं ने अपनी बेटी को नहीं मारा है.’’

इस पर अविनाश सिंह ने गुस्से में कहा, ‘‘तुम पुलिस को चाहे कितना ही चक्कर पर चक्कर लगवाओ, मैं यह जान चुका हूं कि कृष्णा का मर्डर तुम्हारे ही हाथों से हुआ है. तुम बड़े ही शातिर और चालाक हत्यारे हो.’’

थानाप्रभारी अविनाश सिंह ने वहां मौजूद अपने स्टाफ से कहा, ‘‘इसे हिरासत में ले कर  थाने ले चलो, बापबेटे से आगे की पूछताछ वहीं पुलिसिया अंदाज में करेंगे.’’

छत्तीसगढ़ का औद्योगिक जिला कोरबा ऊर्जा राजधानी के रूप में जाना जाता है. इस के अलावा यह कोयला खदानों के कारण एशिया भर में विख्यात है. कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर तुमान गांव स्थित है. यह ऐतिहासिक तथ्य है कि तुमान छत्तीसगढ़ यानी दक्षिण कौशल की प्रथम राजधानी हुआ करती थी. यहां का एक रोमांचक इतिहास अभी भी लोगों को पर्यटनस्थल के रूप में तुमान की ओर आकर्षित करता है. इतिहास के अनुसार, सन 850-1015 के मध्य कलचुरी राजाओं का शासन था. वर्तमान जिला बिलासपुर की रतनपुर नगरी  राजा रत्नसेन प्रथम का प्राचीन काल में यहां शासन था और हैहय वंश ने यहां अपनी राजधानी बनाई थी. यहीं से पूरे छत्तीसगढ़ का राजकाज संभाला जाता था.

थाना कटघोरा में जब दिगपाल और उन के बेटे राजेश से पूछताछ की गई तो वह एक ही बात कहते रहे कि उन्होंने कृष्णा को नहीं मारा है… नहीं मारा है. मगर विवेचना के बाद सारे सबूत यही कह रहे थे कि मामला सीधेसीधे औनर किलिंग का है. पुलिस यह मान कर चल रही थी कि कृष्णा कुमारी की हत्या पिता दिगपाल और भाई राजेश ने ही की है. जांच अधिकारी अविनाश सिंह यही सब सोचते हुए अपने कक्ष में बैठे कुछ दस्तावेजों को देख रहे थे कि थोड़ी देर में एक एसआई ने उन के सामने मृतका कृष्णा के एक दूसरे प्रेमी नेवेंद्र देवांगन को सामने ला कर खड़ा कर दिया.

कटघोरा निवासी नेवेंद्र देवांगन जोकि रायपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका था. कृष्णा उस से भी कुछ समय से वाट्सऐप पर चैट यानी बातचीत करती थी. नेवेंद घबराया हुआ सामने खड़ा था. अविनाश सिंह ने उस की आंखों में देखते हुए  कहा, ‘‘कृष्णा कुमारी को तुम कब से जानते हो? सब कुछ सचसच बताओ, कोई भी बात छिपाना नहीं. देखो तुम पढ़ेलिखे नौजवान हो और मामला हत्या का है.’’

यह सुन कर उस ने डरतेडरते कहा, ‘‘सर, लगभग एक महीने से एक लूडो गेम में खेलते हुए कृष्णा से मेरा परिचय हुआ था. इस के बाद हमारी अकसर मोबाइल पर ही बात होती थी. मैं कभी उस से आमनेसामने नहीं मिला हूं. मगर हां, बीती रात उस का यह मैसेज आया था.’’ कह कर उस ने अपना मोबाइल अविनाश सिंह के समक्ष रख दिया. थानाप्रभारी अविनाश सिंह ने देखा, मैसेज जैसा संजय चौहान के मोबाइल में था, ठीक वैसा ही नेवेंद्र के मोबाइल में भी आया था. सब कुछ साफ था. अब तो अविनाश सिंह के सामने पूरा चित्र स्पष्ट था कि हत्या औनर किलिंग में दिगपाल और उस के बेटे ने ही की है.

उन्होंने नेवेंद्र का पूरा बयान रिकौर्ड किया. उच्च अधिकारियों को सारी जानकारी से अवगत कराते हुए बताया कि मामला लगभग स्पष्ट हो चुका है हत्या बाप और बेटे ने ही की है. दिगपाल और राजेश को कृष्णा कुमारी के हत्या के आरोप में पुलिस न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर रही थी कि इस बीच अविनाश सिंह के दिमाग में एक आइडिया कौंध गया. उन्होंने दिगपाल और राजेश को फिर से अपने कक्ष में बुलाया और सामने बैठा कर के पानी और चाय पिलवाई और फिर धीरे से कहा, ‘‘देखो दिगपाल, तुम जिन परिस्थितियों में थे, वैसे में कोई भी बेटी की करतूत को बरदाश्त नहीं कर सकता. मैं जानता हूं, गलती तुम से हो गई है.

यह मैं भलीभांति समझ रहा हूं. अच्छा है कि पुलिस को सहयोग करो और सारी परिस्थितियों को हमारे सामने साझा करो, ताकि मैं तुम्हारी ज्यादा से ज्यादा मदद कर सकूं.’’

यह एक पुलिसिया पासा था. मगर इस के बाद भी दिगपाल ने भीगी पलकों से कहा, ‘‘साहब, मैं अपनी बेटियों की कसम खा कर कहता हूं कि मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है. अगर यह काम मुझ से हुआ होता तो मैं अवश्य आप को बता देता.’’

कृष्णा कुमारी के भाई राजेश से भी अलग से पूछताछ की गई. उस ने भी साफसाफ यही कहा कि उस ने कृष्णा को नहीं मारा है. अब अविनाश सिंह के सामने एक ऐसा मोड़ था, जहां से रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था. उन्हें बापबेटे की बातों में सच्चाई का एहसास हो रहा था. मगर लाख टके का सवाल यह था कि आखिर जब इन लोगों ने हत्या नहीं की तो फिर हत्यारा कौन है? कृष्णा की हत्या में सारे साक्ष्य साफ कह रहे थे कि हत्या पिता और पुत्र ने ही की है. वह कुछ समय तक अपने कक्ष में सिर पर हाथ रख कर आंख मूंद कर बैठ गए और सोचते रहे कि आखिर क्या हो सकता है, आखिर कृष्णा की हत्या कौन कर सकता है?

जांच अधिकारी के दिमाग में अब एक ही संदिग्ध सामने था और वह था कृष्णा का प्रेमी संजय चौहान. अगर कोई हत्या कर सकता था तो वह संजय हो सकता था. मगर उस के खिलाफ कोई भी सबूत पुलिस के पास नहीं था. इस के बावजूद संजय चौहान को उन्होंने तलब किया और उस से एक बार फिर पूछताछ शुरू की गई. 23 वर्षीय संजय चौहान ने बताया कि लगभग 8 साल से उस के कृष्णा के साथ शारीरिक संबंध हैं. लेकिन अलगअलग जाति के होने के कारण उन का विवाह नहीं हो पाया था. मगर जल्द ही वे आर्यसमाज मंदिर, बिलासपुर में विवाह भी करने वाले थे. उस ने जोर दे कर यह भी कहा कि हमारे विवाह में सब से बड़ी बाधा कृष्णा के पिता दिगपाल वैष्णव थे, जो उस का विवाह कहीं दूसरी जगह करने के लिए अकसर कृष्णा पर दबाव डालते थे, उस से झगड़ा करते थे.

पुलिस के सामने एक बार फिर यह तथ्य भी सामने आ गए कि हत्या दिगपाल और उस के भाई राजेश ने ही की है. अविनाश सिंह के समक्ष दिगपाल का मासूम चेहरा घूम रहा था, जो बड़े ही दुख के साथ यह कह रहा था कि उस ने हत्या नहीं की है. अविनाश सिंह ने अंतिम जांच प्रक्रिया के तहत मनोवैज्ञानिक तरीके से संजय चौहान से पूछताछ करने का निर्णय किया और 3 अलगअलग अधीनस्थ अधिकारियों को कहा कि इस से थोड़ीथोड़ी देर में मिलना है और इस के बयान लेना है. हमें देखना है यह बयान में क्या कहता है. संजय चौहान ने एक एसआई से जांच के दौरान कहा, ‘‘कृष्णा और उस का बहुत पुराना प्रेम संबंध है.’’

एसआई ने जब उस से पूछा कि उस ने घटना के दिन अपना फोन बंद क्यों रखा था. इस के जवाब में उस ने कहा, ‘‘सर, मेरी उस रात तबीयत ठीक नहीं थी.’’

एक एएसआई से जब संजय का अलग से सामना हुआ तो बातोंबातों में उस ने कहा, ‘‘साहब, उस दिन मोबाइल की बैटरी लो हो गई थी. इसलिए मोबाइल बंद हो गया था.’’

जबकि तीसरे अधिकारी को उस ने अपने बयान में कहा, ‘‘सर, मोहल्ले में झगड़ा होने के कारण मैं ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था.’’

तीनों अधिकारियों ने संजय के तीनों अलगअलग बयानों के बारे में बताया तो वह खुशी से उछल पड़े और बोले कि अब बहुत कुछ स्पष्ट हो चुका है. कृष्णा की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि संजय ने ही की है. उन्होंने संजय को बुला कर बातचीत की तो उन्होंने यह नोट किया कि बात करते समय वह उन से आंखें चुरा लेता. जांच अधिकारी अविनाश सिंह ने उस से पूछा, ‘‘मैं ने गौर किया कि जब तुम सुबह घटनास्थल पर आए थे तो तुम्हारी आंखें लाल थीं. इस का क्या कारण है?’’

इस पर संजय ने कहा, ‘‘साहब मेरी तबीयत ठीक नहीं थी. रात को मैं सो भी नहीं पाया था.’’

अविनाश सिंह ने कहा, ‘‘हम ने तुम्हारे मोबाइल फोन की जांच करवाई है और यह जानकारी सामने आई है कि तुम कभी भी अपना मोबाइल रात को बंद नहीं करते थे. फिर उस रात आखिर मोबाइल क्यों बंद किया.

‘‘अगर मोबाइल बंद भी कर दिया तो फिर सुबह उस में सारे मैसेज को तुम ने डिलीट क्यों किया था? हमें अब विश्वास है कि हत्या तुम ने ही की है. सबूत हमें मिल चुका है, तुम सचसच बताओ. इसी में तुम्हारी भलाई है.’’

इस पर संजय चौहान गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘साहब, कृष्णा की हत्या की बात सुन कर मैं घबरा गया था, इसलिए अपने मोबाइल का सारा मैसेज डिलीट कर दिया था.’’

संजय चौहान को घूरते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जब तुम घर में थे तो तुम्हें कैसे पता चल गया कि कृष्णा की हत्या हुई है, बिना देखे जाने?’’

संजय चौहान ने घबरा कर आंखें चुराते हुए कहा, ‘‘मैं ने सुना तो मुझे लगा कि जरूर परिवार वालों ने उसे मार कर फेंक दिया है.’’

‘‘देखो, तुम पुलिस को धोखा नहीं दे सकते, तुम ने बारबार अपना बयान बदला है और तीनों बातें सही नहीं हो सकतीं. अब साफसाफ बता दो, हम ने तुम्हारे मोबाइल की काल डिटेल्स भी चैक करवाई है.’’ थानाप्रभारी ने कहा. अब संजय चौहान टूट गया और बोला, ‘‘सर…गलती मुझ से हुई है. मैं बताता हूं उस रात क्या हुआ था.’’

और उस ने जो कहानी बताई, उस के अनुसार कृष्णा कुमारी और वह दोनों आर्यसमाज मंदिर, बिलासपुर में जल्द ही शादी करने वाले थे कि नेवेंद्र की उन के बीच एंट्री हुई. अकसर कृष्णा नेवेंद्र से मोबाइल पर बात करती थी, एक दिन जब वह रात को कृष्णा से मिलने गया तो मोबाइल मैं उस ने नेवेंद्र का चैट पढ़ लिया. चैट पढ़ कर उस का दिमाग घूमने लगा. उस ने उसी समय स्वयं कृष्णा के रूम में रात को जब वाट्सऐप पर नेवेंद्र से बातें की तो उस के सामने खुलासा हो गया कि कृष्णा का उस से कुछ ज्यादा ही गहरा संबंध हो चुका है. दोनों आपस में अश्लील बातें भी किया करते थे.

इस पर एक दिन कृष्णा से झगड़ा कर के संजय चौहान ने कहा, ‘‘सारी सच्चाई मैं जान गया हूं. तुम अगर अब आगे उस के साथ बात करोगी तो ठीक नहीं होगा.’’

इस पर कृष्णा कुमारी ने तुनक कर कहा, ‘‘मैं किसी की जायजाद नहीं हूं. ऐसा है तो अभी से संबंध खत्म समझो.’’

संजय को भी गुस्सा आ गया. उस ने गुस्से में कहा, ‘‘कृष्णा, अगर तुम मेरी नहीं होगी तो मैं किसी की तुम्हें नहीं होने दूंगा, मैं तुम्हें मार दूंगा.’’

संजय ने बताया कि एक टीवी सीरियल में उस ने ऐसी ही कहानी देखी थी, वही सीरियल देख कर उस ने प्रेमिका कृष्णा की हत्या कर उस के पिता को फंसाने की योजना बनाई. योजनानुसार, 29 मई 2021 की रात को जब संजय चौहान कृष्णा से  मिलने गया तो अपनी बाइक को दूर झाडि़यों के पास खड़ी कर गया था और पैदल बिना चप्पल के धीरेधीरे उस के घर की ओर गया. रात को लगभग 12 बजे उस ने एक पत्थर इशारे के रूप में कृष्णा की छत पर फेंका. बाद में थोड़ी देर में कृष्णा आई और दोनों एक कमरे में बैठ कर के आपस में बातचीत कर रहे थे. इसी तरह से वह पहले भी कृष्णा से मिलता था.

संजय ने उसे फुसला कर कहा, ‘‘कृष्णा, तुम एक मैसेज लिखो कि मुझे मेरे पिता मार डालेंगे, मुझे बचा लो. और यह मैसेज मुझे और नेवेंद्र को भेज दो.’’

कृष्णा ने विश्वास में आ कर ऐसा ही किया. बाद में कृष्णा ने वह मैसेज अपने फोन से डिलीट कर दिया. आगे बातों ही बातों में जब उसे यह समझ में आया कि कृष्णा अब उस के हाथ से पूरी तरह निकल चुकी है तो उस ने वहीं पास में रखी हुई एक साड़ी उस के गले में डाल कर उस का गला घोंट दिया फिर लाश उठा कर के बाड़ी में फेंक कर अपने घर चला गया. पुलिस ने संजय चौहान के इकबालिया बयान के बाद उसे कृष्णा कुमारी वैष्णव की हत्या के आरोप में 31 मई, 2021 को भादंवि की धारा 302, 120बी के तहत गिरफ्तार कर लिया. फिर उसे प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी, कटघोरा की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Crime Story

 

 

Crime Story Hindi : बेटी और प्रेमी संग मिलकर कर डाला पति का कत्ल

Crime Story Hindi : लौकडाउन में पति अशोक घर पर रहा तो उस की पत्नी राजबाला की परेशानी बढ़ गई, क्योंकि पति के रहते हुए वह प्रेमी वीरेंद्र उर्फ ढिल्लू से नहीं मिल पा रही थी. प्रेमी के सिंदूर के लिए बेटी शीतल के साथ मिल कर राजबाला ने इस का ऐसा रास्ता निकाला कि…

17 मई की शाम करीब साढ़े 5 बजे थे जब दिल्ली में द्वारका सेक्टर 29 से सटे छावला के थाने के टेलीफोन की घंटी बजी. ड्यूटी औफिसर ने तुरंत फाइल समेटते हुए अपना हाथ टेलीफोन का रिसीवर उठाने के लिए आगे बढ़ाया. जैसे ही ड्यूटी औफिसर ने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से किसी ने घबराते हुए बोला, ‘‘छावला पुलिस स्टेशन?’’

ड्यूटी औफिसर, ‘‘मैं छावला थाने से बोल रहा हूं. बताइए आप क्या कहना चाहते हैं?’’ ड्यूटी औफिसर ने कहा.

‘‘साहब, निर्मलधाम के पास सड़क किनारे एक आदमी की लाश पड़ी है. मैं यहां से गुजर रहा था तो मैं ने देखा. आप यहां आ कर देख लीजिए.’’

ड्यूटी औफिसर ने फोन के रिसीवर को अपने दांए कंधे और कान के सहारे दबाया, अपने दोनों हाथों को आजाद किया और टेबल पर कहीं पड़े नोट्स वाली डायरी ढूंढने लगे. वह लगातार फोन पर उस राहगीर से वारदात की घटना के बारे में पूछ रहे थे और डायरी ढूंढ रहे थे. टेबल पर बिखरे सारे सामान को उलटने पुलटने के बाद जब डायरी नहीं मिली तो एक फाइल के पीछे ही उन्होंने वारदात की जगह समेत बाकी जरूरी जानकारियां लिख डालीं. ड्यूटी औफिसर ने उस राहगीर को वारदात की जगह से कहीं भी हिलने से मना कर दिया और फोन काट दिया. ये सारी जानकारी ड्यूटी औफिसर ने उस समय थाने में मौजूद थानाप्रभारी राजवीर राणा को दी. राजवीर राणा बिना किसी देरी के थाने में मौजूद स्टाफ को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

वहां पहुंचते ही पुलिस की टीम ने उस सुनसान सी सड़क के एक किनारे पर एक बाइक खड़ी देखी. बाइक के बिलकुल बगल में खून से लथपथ एक व्यक्ति की लाश पड़ी थी. लाश को देखते ही वहां मौजूद पुलिस टीम चौकन्नी हो गई और सबूत जमा करने के मकसद से घटनास्थल के इर्दगिर्द फैल गई. थानाप्रभारी राजवीर राणा जब लाश का मुआयना करने के लिए बौडी के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उस के बदन पर किसी धारदार हथियार से कई वार किए गए थे. जो साफ दिखाई दे रहे थे. उन्होंने लाश के अगलबगल नजर घुमाई तो एक मोबाइल फोन वहीं पास में पड़ा था, जो कि संभवत: मरने वाले शख्स का रहा होगा. रात होने को थी.

मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने बिना किसी देरी के बाइक और मोबाइल जब्त कर लिया और लाश की काररवाई आगे बढ़ाने के लिए क्राइम इनवैस्टीगैशन टीम के आने का इंतजार करने लगे. उस सड़क से पैदल आने जाने वाले लोगों ने पुलिस और वहां मौजूद लाश को देख कर घटनास्थल पर जमावड़ा लगा दिया. सब टकटकी लगाए पुलिस को अपना काम करते देख आपस में फुसफुसाहट करने लगे. जब वहां मौजूद पुलिस ने आसपास के मूकदर्शक बने लोगों से लाश की पहचान करने के लिए पूछताछ की तो कुछ लोगों ने लाश की शिनाख्त करते हुए कहा कि इस का नाम अशोक कुमार है और यह पेशे से टैक्सी ड्राईवर है.

तब तक मौके पर क्राइम इनवैस्टीगैशन टीम भी आ पहुंची. टीम ने अपना काम शुरू किया. उन्होंने सब से पहले लाश की फोटोग्राफी की. उन्होंने सबूत के तौर पर घटनास्थल से खून लगी मिट्टी के नमूने इकट्ठा कर लिए. यह सब काम कर लेने के बाद थानाप्रभारी राजवीर राणा ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए मौर्चरी भेज दिया. सारे काम निपटा लेने के बाद पुलिस की टीम थाने लौट आई तथा इस केस के संबंध में काम आगे बढ़ाने लगी. पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया और जांच की जिम्मेदारी थानाप्रभारी राजवीर राणा ने स्वयं संभाली. केस की तफ्तीश को आगे बढ़ाने के लिए थानाप्रभारी राणा ने सब से पहले घटनास्थल से बरामद किए गए मोबाइल फोन को निकलवाया. यह फोन टूटा नहीं था. सिर्फ बैटरी चार्जिंग खत्म होने की वजह से बंद हो गया था.

उस की काल डिटेल्स निकलवाई और देखा कि आखिरी बार एक नंबर से अशोक कुमार को कई बार काल की गई थी. इस के कुछ देर बाद ही अशोक कुमार की हत्या हो गई थी. शक की सूई अब इसी आखिरी नंबर पर आ कर रुक गई थी. राजवीर राणा ने अपने फोन से इस नंबर को डायल किया तो दूसरी तरफ से किसी महिला की आवाज आई. थानाप्रभारी ने पहले अपना परिचय दिया और उस के बाद उस महिला से अशोक कुमार के रिश्ते के बारे में पूछा. महिला ने अपना नाम शीतल और खुद को अशोक कुमार की बेटी बताया. राजवीर ने फोन पर बड़े दु:ख के साथ शीतल को बताया कि उस के पिता सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हो चुके हैं, यह जानने के बाद शीतल उसी समय ही बिलखने लगी.

उन्होंने उस से उस की मां के बारे में पूछा तो शीतल ने अपनी मां राजबाला से उन की बात करा दी. थानाप्रभारी ने राजबाला को अशोक की मौत की खबर देते हुए उन से शीघ्र ही थाने पहुंचने को कहा 2-3 घंटे बाद जब राजबाला थाने पहुंची तो वह राजवीर राणा को देखते ही फफकफफक कर रोने लगी. अपने पति की हत्या की खबर सुन कर वह आहत थी. राजवीर राणा ने राजबाला को हौसला रखने को कहा और उस से उस के पति से किसी से साथ दुश्मनी होने के बारे में पूछा. राजबाला ने रोते हुए कहा कि अशोक की किसी के साथ भी कोई दुश्मनी नहीं थी. राजबाला से बात करते समय थानाप्रभारी राजवीर राणा को उस की बातों से ऐसा नहीं लग रहा था कि उसे पति की मौत का दुख है. बेशक राजबाला राजवीर राणा के सामने रो रही थी और दुखी दिखाई दे रही थी. लेकिन राजवीर को राजबाला पर शक हो चुका था.

राजबाला के आंसू घडि़याली लग रहे थे. दाल में कहीं तो कुछ काला जरुर था, जिस का पता लगाना जल्द से जल्द जरुरी था. आखिर एक व्यक्ति का कत्ल जो हुआ था. राजबाला से पूछताछ खत्म होने पर वह अपने घर के लिए रवाना हो गई और पीछे कई तरह के शक और सवाल छोड़ गई. इन सभी शकों को दूर करने के लिए और इस मामले से जुडे़ सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिए थानाप्रभारी ने शीतल और राजबाला की काल डिटेल्स मंगवाई. उन्होंने दोनों की काल डिटेल्स को बेहद बारीकी से परखी और उस की जांच की तो वह बेहद हैरान रह गए.

काल डिटेल्स से उन्हें यह पता लगा कि शीतल जिस समय अशोक को लगातार काल कर रही थी उस के ठीक बाद उस ने एक अन्य नंबर पर काफी देर तक बातचीत की थी. यह सब देख कर पुलिस ने यह अनुमान लगाया कि यदि इस मामले में शीतल को थोडा ढंग से कुरेदा जाए तो शायद इस केस में एक और लीड मिल सकती है. राजवीर ने बिना देरी किए फिर से एक बार राजबाला और शीतल को थाने बुला लिया. उन्होंने इस बार दोनों से अलगअलग पूछताछ की. उन्होंने पहले शीतल से इस घटना के बारे में विस्तार से पूछा. शीतल का बयान लेने के बाद उन्होंने राजबाला से इस मामले में फिर से पूछताछ की. क्रास पूछताछ में दोनों की चोरी पकड़ी गई.

दोनों के बयान एक दूसरे से अलग थे. जब राजवीर राणा ने दोनों को कानून का थोड़ा डर दिखा कर उन पर दबाव बनाया तो शीतल ज्यादा देर टिक नहीं सकी. शीतल ने रोतेबिलखते, अपने हाथ से अपना सिर पीटते हुए अपनी मां राजबाला और उस के प्रेमी वीरेंद्र उर्फ ढिल्लू के साथ साजिश रच कर अपने पिता की हत्या कराने की बात कबूल कर ली. यह सब सुनते ही बेटी के सामने राजबाला का चेहरा पीला पड़ गया. उसे जैसे न तो कुछ सुनाई दे रहा था और न ही कुछ दिखाई दे रहा था. थाने में शीतल के सामने राजबाला अपनी बेटी को घूरे जा रही थी. वह उसे ऐसे घूर रही थी जैसे मानो अगर उसे मौका मिलता तो वह वहीं पर शीतल का भी कत्ल कर बैठती.

शीतल द्वारा जुर्म कबूल करते ही पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. फिर राजबाला की निशानदेही पर उस के प्रेमी वीरेंद्र को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. वीरेंद्र से पूछताछ की गई तो उस ने अशोक की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया. वीरेंद्र के बताए हुए पते पर जा कर पुलिस टीम ने अशोक कुमार की हत्या में इस्तेमाल किए जाने वाले चाकू और उस की कार बरामद कर ली. तीनों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अशोक कुमार की हत्या के पीछे अवैध संबंधों की जो सनसनीखेज दास्तान सामने आई, कुछ इस तरह थी—

अशोक कुमार दिल्ली के नजफगढ़ के नजदीक भरथल गांव में अपने परिवार के साथ रहता था. उस का 3 सदस्यों का छोटा परिवार था जिस में अशोक, उस की पत्नी राजबाला और बेटी शीतल ही थी. अशोक की कमाई का जरिया उस की टैक्सी थी. वह बेटी शीतल की शादी जाफरपुर कला के पास इशापुर गांव के रहने वाले हिमांशु से कर चुका था. शीतल अपने पति के साथ बेहद खुश थी. बेटी की शादी के बाद अशोक के सिर पर अब कोई और जिम्मेदारी नहीं थी. लेकिन पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से पूरे देश में लौकडाउन लगा तो ज्यादातर लोगों की तरह अशोक भी अपने घर में कैद हो कर रह गया. उस का काम न के बराबर रह गया. घर पर रहने पर अशोक बहुत ज्यादा परेशान नहीं था.

अशोक को महसूस हुआ कि वैसे भी अपने काम के दौरान वह अकसर अपने घर से बाहर ही रहता है, ऐसे में न जाने कितने अरसे बाद उसे इतने लंबे समय के लिए घर में रहना नसीब हुआ है. अपने काम से हमेशा बाहर रहने वाले व्यक्ति को जब घर में कैद होना पड़ जाए तो जाहिर सी बात है कि वह घर की हर एक चीज को बारीकी से परखता है, गौर करता है. ऐसे ही लौकडाउन के एक दिन अशोक घर का सामान लेने के लिए गांव में निकला तो दुकानदार से बातचीत के दौरान उस ने जो सुना उस से उस के होश ही उड़ गए. दुकानदार ने कहा, ‘‘क्या भई अशोक. मजा आ रहा है घर में कैद हो कर?’’

‘‘कैद होना किस को अच्छा लगता है भला. अब समस्या सिर पर बैठी है तो हम बस उसे झेलने को मजबूर हैं. घर में रहने के अलावा और कुछ कर भी तो नहीं सकते.’’ अशोक बोला.

‘‘अब तो तुम्हारी महरिया भी तुम्हारे साथ कैद हो गई होगी. अब तो लोग आ जा भी नहीं सकते तुम्हारे घर. दुकानदार ने जोर देते हुए कहा.’’

‘‘वो घर में कैद हो गई…? क्या मतलब. और घर में लोगों के आने की क्या बात कह रहे हो.’’ अशोक भौंहें चढ़ाते हुए बोला.

दुकानदार ने धीमी, दबी आवाज में कहा, ‘‘अरे वो तो लौकडाउन लग गया तब जा कर तुम्हारी महरिया घर पर रुकने को मजबूर है. नहीं तो तुम्हारे घर से निकलते ही तुम्हारी महरिया आशिकी करने निकल जाती थी.’’

‘‘यह तुम कैसी बातें कर रहे हो. कौन है उस का आशिक?’’ अशोक ने गुस्से से पूछा.

दुकानदार दबी आवाज में बोला, ‘‘अरे ढिल्लू का नाम सुना है न तुम ने? वीरेंद्र का? वही तो है जो शीतल की मां के साथ आशिकी करता फिरता है. यह बात तो पूरे गांव वालों को पता है. चाहे तो पूछ लो.’’

ये सब सुनते ही अशोक के दाएं हाथ में थामी पौलिथिन थैली छूट गई. थैली फटने से चीनी, आटा, दाल और घर का कुछ और सामान नीचे पथरीली सड़क पर गिर कर फैल गया. अशोक को इस बात पर जितना सदमा लगा था उस से कहीं ज्यादा उसे इस बात को सुन कर गुस्सा आ रहा था. लोग उस की पत्नी राजबाला और गांव के बदमाश वीरेंद्र के बारे में उलटी सीधी बातें कर रहे थे. दुकानदार से यह सब सुन कर उस ने 2-4 और लोगों से इस बारे में पूछताछ की. हर किसी ने दबी आवाज में अशोक को वही बताया जो कि उस दुकानदार ने बताया था. दरअसल 43 वर्षीय वीरेंद्र उर्फ ढिल्लू भरथल का ही निवासी था. वीरेंद्र उस इलाके का नामचीन बदमाश था. दिल्ली के कई थानों में उस के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे. एक तरह से जेल उस का दूसरा घर था.

लोगों के अनुसार जब अशोक घर पर नहीं रहता था तब उस के पीठ पीछे वीरेंद्र राजबाला के साथ गुलछर्रे उड़ाता था. अशोक ने बिना किसी हिचकिचाहट के राजबाला से इस बारे में पूछा. लेकिन राजबाला ने पति की बात से कन्नी काट ली. उस ने उस की बात से साफ इनकार कर दिया. लेकिन उस दिन के बाद राजबाला अशोक की नजरों का ज्यादा देर तक सामना नहीं कर पाई. राजबाला के मोबाइल पर जब कभी भी वीरेंद्र का फोन आता तो वह पति से दूर जा कर बात करती, जब अशोक उस से पूछता कि किस का फोन आया था तो वह रिश्तेदार होने का बहाना बनाने लगती. यह सब कुछ देख कर अशोक को यह यकीन जरूर हो गया कि दाल में जरूर कुछ काला है.

अकसर पति के घर पर रहने से पत्नी को खुशी होती है लेकिन अशोक के घर पर होने से राजबाला की खुशियों पर मानो बादल छा गए थे. राजबाला वीरेंद्र से मिलने के लिए तड़पने लगी. उसे अपने पति से ज्यादा वीरेंद्र पसंद था. वीरेंद्र के साथ मां की आशिकी के किस्से बेटी शीतल से भी नहीं छिपे थे. वह भी उन के रिश्ते के बारे में बखूबी जानती थी और वह भी तो वीरेंद्र से पिता का महत्त्व देती थी. शीतल वीरेंद्र को पिता अशोक से ज्यादा पसंद करती थी. क्योंकि अशोक जब घर पर नहीं रहता था, उस समय वीरेंद्र राजबाला से मिलने आता तो शीतल के लिए महंगे तोहफे साथ लाता था. दरअसल लौकडाउन की वजह से अशोक अपनी पत्नी राजबाला, बेटी शीतल और वीरेंद्र के लिए गले की हड्डी बन गया था.

लौकडाउन के चलते जेल में बंद वीरेंद्र को भी पैरोल पर छोड़ दिया गया था. एक दिन अशोक की नजरों से बचते बचाते वीरेंद्र राजबाला से मिला. उस दिन राजबाला ने वीरेंद्र पर इस कदर प्यार लुटाया जैसे वीरेंद्र के पर लग गए हों. शारीरिक सुख भोग लेने के बाद जब राजबाला और वीरेंद्र एकदूसरे से अलग हुए तो उस ने वीरेंद्र्र से कहा कि अगर उस ने उस के पति अशोक को जल्द ठिकाने नहीं लगाया तो वह आत्महत्या कर लेगी. तब वीरेंद्र ने प्रेमिका से कहा, ‘‘तुम्हें आत्महत्या करने की जरूरत नहीं है. मैं उसे ही निपटा दूंगा.’’

इस के बाद राजबाला और वीरेंद्र ने योजना बनाई. इस योजना में उन्होंने शीतल को शामिल कर लिया. शीतल इस काम के लिए खुशी से तैयार हो गई. 17 मई, 2021 को शीतल ने अपने पिता अशोक को मिलने के लिए निर्मलधाम बुलाया. अशोक अपनी बाइक से निर्मलधाम के रास्ते में ही था. शीतल पलपल पिता को काल कर उस से खबर लेती रही. जब अशोक निर्मलधाम के नजदीक पहुंचा तो शीतल ने वीरेंद्र को काल कर यह बात बता दी. वीरेंद्र अपनी हुंडई कार से वहां पहुंच गया और अशोक को सड़क किनारे रोक कर चाकू से गोद दिया. अशोक की लाश को वहीं छोड़ कर वीरेंद्र्र वहां से फरार हो गया. काम हो जाने पर वीरेंद्र्र ने राजबाला और शीतल को इस बात की जानकारी फोन कर के दी.

राजबाला, शीतल और वीरेंद्र्र तीनों अपनी कामयाबी का जश्न मना रहे थे लेकिन पुलिस ने अपनी सूझबूझ के साथ 12 घंटे के अंदर ही अशोक कुमार हत्याकांड का परदाफाश कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. मामले की तफ्तीश थानाप्रभारी राजवीर राणा कर रहे थे. Crime Story Hindi

 

Social Stories in Hindi : बेटी ने मातापिता को नींद की गोलियां देकर कराई 13 लाख की चोरी

Social Stories in Hindi : मांबाप के मना करने के बावजूद भी खूशबू अपने प्रेमी विनय यादव को छोड़ना नहीं चाहती थी. फिर एक दिन उस ने अपने प्यार के लिए अपने ही घर में एक ऐसा अपराध किया कि…

गांव की एक बहुत प्रचलित कहावत है, ‘भूख न देखे रूखा भात, प्यार न जाने जातपात और नींद न देखे टूटी खाट’. वास्तव में पे्रम जाति और धर्म का बंधन नहीं देखता है. कई बार वह ऊंचनीच और नातेरिश्तों को भी भूल जाता है. ऐसे में प्यार की पगडंडी पर चल कर कभीकभी ऐसे कदम भी उठ जाते हैं, जो अपराध को भी बढ़ावा देने से पीछे नहीं हटते. लखनऊ शहर के रसूलपुर आशिक अली के रहने वाले मनोज कुमार की 19 साल की बेटी खुशबू कुमार की कहानी भी कुछ इसी तरह की है. खुशबू की शहर के ही लालशाह का पुरवा मलौली के रहने वाले विनय यादव के साथ दोस्ती हो गई थी. 21 साल का विनय खुशबू को बेहद प्यार करता था.

लेकिन उन के बीच जातपात की गहरी खाई थी. दोनों ही परिवारों को इन की दोस्ती पसंद नहीं थी. इस के बाद भी विनय और खुशबू किसी भी तरह एकदूसरे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे. लेकिन परेशानी यह थी कि उन्हें साथ रहने का रास्ता नहीं दिख रहा था. अच्छी बात यह थी कि विनय और खुशबू के बीच एक सामंजस्य बना हुआ था. दोनों ही मिल कर अपने दिल की बात कर लेते थे. इस बात की खबर जब खुशबू के घर वालों को होती तो वे विनय के घर वालों से शिकायत करते, जिस से दोनों परिवारों के बीच तनातनी हो जाती थी. जिसे प्रेमी युगल भी घबरा जाते. खुशबू पर भी मनोज इस बात का दबाव बनाता कि वह विनय से मिलना छोड़ दे.

एक दिन खुशबू ने विनय से कहा, ‘‘विनय, तुम अब यह देखो कि हम लोग कैसे एक साथ रह सकते हैं. क्योंकि अब घर में परेशानियां बढ़ने लगी हैं. हमारा तुम्हारा इस तरह मिलना संभव नहीं हो पाएगा. मैं कब तक घर वालों से झगड़ा करती रहूंगी.’’

‘‘खुशबू तुम्हें लगता है कि जैसे मैं कुछ सोचता नहीं. ऐसी बात नहीं है. पर मेरी समझ में कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा. पहले तो सिटी में नौकरी कर लेता था. लौकडाउन हुआ तो नौकरी चली गई. अब तो अपने खर्च उठाना और भी मुश्किल हो गया है. अपने पास घर और नौकरी दोनों नहीं होगी तो काम ही नहीं चलेगा.’’ विनय ने खुशबू को अपनी परेशानी से अवगत कराते हुए समझाया. खुशबू को वह समय याद आ रहा था जब उस की पहली मुलाकात विनय से हुई थी. विनय उसे हर लड़के से अलग लगता था. हमेशा उस का खयाल रखता और बहुत सारी चीजें भी देता रहता था. खुशबू और विनय के बीच जब थोड़ी दोस्ती बढ़ गई तो खुशबू उस के साथ शादी और बाकी जीवन गुजरबसर करने के सपने देखने लगी.

खुशबू ने सोचा था कि जब उस के घर परिवार के लोग इस दोस्ती और प्यार को शादी के रिश्ते में बदलने नहीं देंगे तो वह गांव छोड़ कर विनय के साथ शहर चली जाएगी. वहां दोनों साथसाथ रहेंगे. विनय नौकरी करेगा और वह घर को संभालेगी. विनय के वापस आने का इंतजार करेगी. ऐसे ही हसीन सपनों में दोनों का समय गुजर रहा था. अब दोनों ही अपनी दोस्ती को रिश्ते में बदलने का इंतजार कर रहे थे. इसी बीच पिछले साल कोरोना महामारी बढ़ने पर लौकडाउन लग गया तो दुकानें, होटल, फैक्ट्री आदि पिछले साल बंद हो गईं, जिस से बहुत सारे लोग घर बैठ गए. शुरुआत में लगा कि 10-20 दिनों में लौकडाउन खत्म जाएगा. उस के बाद बाजार और कामधंधे शुरू हो जाएंगे. लेकिन धीरेधीरे करीब 3 माह का समय बीत गया था. सारा कारोबार चौपट हो चुका था.

3 माह के बाद जब विनय अपने काम पर वापस गया तो उसे बताया गया कि अब औफिस में काम कम हो गया है. लिहाजा अब उस की वहां जरूरत नहीं रह गई. उस के बाद जब विनय ने अपने 3 माह का बकाया वेतन मांगा तो कहा गया कि जब तुम ने काम हीं नहीं किया तो वेतन किस बात का. तुम ने मार्च महीने में 20 दिन काम किया था. उन 20 दिनों का पैसा ले लो और अब नौकरी पर नहीं आना है. विनय का गांव तो लखनऊ से 20-22 किलोमीटर ही दूर था. ऐसे में वह रोज साइकिल और आटो से आताजाता था. खुशबू को साथ रखने की योजना की वजह से उस ने उस समय लखनऊ में एक कमरा किराए पर ले लिया था.

इस का भी 5 हजार रुपए देना पड़ता था. ऐसे में जब वह वहां अपना रखा सामान लेने गया तो मकान मालिक ने 15 हजार रुपए किराए के मांगे. विनय के पास उतना तो नहीं था. उसे 10 हजार औफिस से मिले थे, उसी में से 8 हजार मकान मालिक को दे कर अपना सामान साथ ले आया. कोरोना के बाद शहर से जैसे उस का नाता टूट गया. कोरोना ने जिस तरह से काम धंधों पर रोक लगाई, उस से विनय और खुशबू जैसे युवाओं के सामने भी अपने भविष्य को ले कर प्रश्नचिह्न लगा दिए. बेरोजगारी ने आगे के सभी रास्ते बंद कर दिए. यह उम्मीद थी कि 3 महीने के बाद जब लौकडाउन खुलेगा तो सब कुछ पटरी पर आ जाएगा. लेकिन इस के बाद भी कोई कामधंधा नहीं बढ़ा. मार्च, 2021 में जब कोरोना का संकट फिर से बढ़ा तो विनय को जो कामधंधा मिल जाता था, वह भी बंद हो गया.

विनय और खुशबू अपने जीवन को ले कर गंभीर थे. एक दिन विनय ने कहा, ‘‘खुशबू, अगर हमारे पास 15-20 लाख रुपए होते तो हम अपना काम भी शुरू कर लेते और एक रहने की जगह भी बना लेते, जिस से कम से कम हमें किराया तो नहीं देना पड़ता.’’

‘‘विनय, पैसे तो मिल सकते हैं. बस सावधानी बरतने की जरूरत है. और यदि हम पकड़े न जाएं तो मदद हो सकती है.’’ खुशबू ने कहा.

‘‘तुम रास्ता बताओ. बाकी हम कर लेंगे. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.’’ विनय ने उत्सुकता दिखाई और खुशबू को पूरा भरोसा दिलाते हुए कहा.

‘‘देखो विनय, मेरे घर में इतने रुपए और जेवर रखे हैं, जिन को मिला कर जितने पैसों की तुम बात कर रहे हो उतने हो जाएंगे. हम लोग एक दिन वह रुपए किसी तरह चोरी कर लें. चोरी होने से यह भी नहीं पता चलेगा कि किस ने यह काम किया है. फिर जब सब काम हो जाएगा, तब हम साथसाथ रहने लगेंगे.’’ खुशबू बोली. खुशबू को उस के घर वाले भी मानसिक रूप से इतना परेशान करते थे कि वह किसी भी तरह से अपने घर में रहने को तैयार नहीं थी. अपने घर में चोरी की योजना बनाते समय उसे किसी भी तरह का डर या संकोच भी नहीं हुआ.

इधर विनय ने अपने साथी गांव के रहने वाले शुभम यादव को भी इस योजना में शामिल कर लिया. खुशबू के साथ योजना बनाते समय विनय ने उसेनींद की 8 गोलियां ला कर दीं और कहा कि 4-4 गोलियां काढे़ में डाल कर रात में अपने मम्मी और पापा को पिला देना. जिस से वे रात भर गहरी नींद में सोते रहेंगे. खुशबू ने 28 मई, 2021 की रात ऐसा ही किया. जब उस के मातापिता गहरी नींद में सो गए तो विनय और शुभम ने खुशबू के साथ मिल कर उस के घर से 13 लाख रुपए नकद और 3 लाख के जेवर चोरी कर लिए. जेवर और रुपए ले कर विनय और शुभम चले गए. सुबह जब खुशबू के पिता मनोज कुमार सो कर उठे तो देखा कि उन की अलमारी टूटी हुई थी और उस में रखी नकदी व जेवर गायब थे.

वह थाना गोसाईंगंज गए. वहां पर उन्होंने यह जानकारी थानाप्रभारी अमरनाथ वर्मा को दी तो थानाप्रभारी ने अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 457 और 380 आईपीसी के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया. लखनऊ के पुलिस कमिशनर धु्रवकांत ठाकुर के निर्देशन में डीसीपी ख्याति गर्ग, एडिशनल डीसीपी (साउथ) पुर्णेंदु सिंह, एसीपी स्वाति चौधरी, इंसपेक्टर गोसाईंगंज अमरनाथ वर्मा ने अपनी टीम के साथ चोरों को पकड़ने का काम शुरू किया. पुलिस टीम में एसआई जय सिंह, दीपक कुमार पांडेय, विवेक कुमार, फिरोज आलम सिद्दीकी, अनिल कुमार, हैडकांस्टेबल अमीर हमजा, अकबर, सुशील चौहान, अंकित यादव, राजेश कुमार, पूनम शर्मा, मजीत सिंह, सुनील कुमार और रवींद्र कुमार शामिल थे.

मोबाइल की काल डिटेल्स में खुशबू और विनय के बीच बातचीत और रात में दोनों की लोकेशन एक होने से पुलिस का शक खुशबू पर गया. पुलिस ने खुशबू से पूछताछ की तो उस ने सच कबूल लिया. खुशबू की बताई बातों के आधार पर पुलिस ने पहले विनय और फिर शुभम को हिरासत में ले लिया. सभी ने अपना अपराध कबूल कर लिया. पुलिस ने विनय, खुशबू और शुभम की निशानदेही पर चोरी गए रुपए और जेवर बरामद कर लिए. इस के बाद इन सभी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Social Stories in Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime Story Real : देवर संग मिलकर पत्नी ने रची साजिश फिर पति का गला दबाकर मार डाला

Crime Story Real :  दिव्यांग सिकंदर शरीर से कमजोर था पर मेहनतकश था. लेकिन काम के चक्कर में वह पत्नी ललिता की खुशियों का गला घोंटता रहा. सिकंदर की यह लापरवाही ललिता पर भारी पड़ने लगी. इसी दौरान ललिता ने अपने कदम देवर जितेंद्र की तरफ बढ़ा दिए. यहीं से ललिता की ऐसी खतरनाक लीला शुरू हुई कि… दे

32 वर्षीया ललिता झारखंड के कोडरमा जिले के गांव दौंलिया की रहने वाली थी. उस की मां का नाम राजवती और पिता का नाम दुल्ली था. वह 4 भाइयों की इकलौती बहन थी. इसलिए घर में सभी की लाडली थी. 16 साल की होते ही उस पर यौवन की बहारें मेहरबान हो गई थीं. बाद में समय ऐसा भी आया कि वह किसी प्रेमी की मजबूत बांहों का सहारा लेने की कल्पना करने लगी. गांव के कई नवयुवक ललिता पर फिदा थे. ललिता भी अपनी पसंद के लड़के से नैन लड़ाने लगी. इस के बाद तो दिन प्रतिदिन उस की आकांक्षाएं बढ़ने लगीं तो अनेक लड़कों के साथ उस के नजदीकी संबंध हो गए.

Ghar ki Kahaniyan

दुल्ली के कुछ शुभचिंतक उसे आईना दिखाने लगे, ‘‘तुम्हारी बेटी ने तो यारबाजी की हद कर दी. वह खुद तो खराब है, गांव के लड़कों को भी खराब कर रही है. लड़की जब दरदर भटकने की शौकीन हो जाए तो उसे किसी मजबूत खूंटे से बांध देना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके, ललिता का विवाह कर दो, वरना तुम बहुत पछताओगे.’’

अपमान का घूंट पीने के बाद दुल्ली ने एक दिन ललिता को समझाया. उसी दौरान मां राजवती ने ललिता की पिटाई करते हुए चेतावनी दी, ‘‘आज के बाद तेरी कोई ऐसीवैसी बात सुनने को मिली तो मैं तुझे जिंदा जमीन में दफना दूंगी.’’

उस समय ललिता ने कसम खा कर किसी तरह अपनी मां को यकीन दिला दिया कि वह किसी लड़के से बात नहीं करेगी. ललिता बात की पक्की नहीं, बल्कि ख्वाहिशों की गुलाम थी. कुछ समय तक ललिता ने अपनी जवानी के अरमानों को कैद रखा, लेकिन अरमान बेलगाम हो कर उस के जिस्म को बेचैन करते तो वह अंकुश खो बैठी और फिर से लड़कों के साथ मटरगश्ती करने लगी. लेकिन यह मटरगश्ती अधिक दिनोें तक नहीं चल सकी. इस की वजह थी कि उस के पिता दुल्ली ने उस का रिश्ता तय कर दिया था. ललिता का विवाह कोडरमा जनपद के ही गांव करौंजिया निवासी काली रविदास के बेटे सिकंदर रविदास से तय हुआ था.

सिकंदर किसान था और एकदम सीधासादा इंसान था. लेकिन एक पैर से दिव्यांग था. उस का एक छोटा भाई जितेंद्र रविदास था. सिकंदर की उम्र विवाह योग्य हो चुकी थी, इसलिए ललिता का रिश्ता सिकंदर के लिए आया तो काली रविदास मना नहीं कर सके.  12 साल पहले दोनों का विवाह बड़ी धूमधाम से हो गया. कालांतर में ललिता 3 बेटों की मां बन गई. विवाह के बाद से ही सिकंदर ललिता के साथ अलग मकान में रहने लगा था. सिकंदर का छोटा भाई जितेंद्र अपने मातापिता के साथ रहता था. सिकंदर दिव्यांग होने पर भी खेतों में दिनरात मेहनत करता रहता था. इसलिए जब वह घर पर आता तो थकान से चूर हो कर सो जाता था, जिस से ललिता की ख्वाहिशें अधूरी रह जाती थीं.

पति के विमुख होने से ललिता बेचैन रहने लगी. इस स्थिति में कुछ औरतों के कदम गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं, ऐसा ही ललिता के साथ भी हुआ. अब उसे ऐसे शख्स की तलाश थी, जो उसे भरपूर प्यार दे और उस की भावनाओं की इज्जत करे. उस शख्स की तलाश में उस की नजरों को अधिक भटकना नहीं पड़ा. घर में ही वह शख्स उसे मिल गया, वह था जितेंद्र. सिकंदर जहां अपने भविष्य के प्रति गंभीर तथा अपनी जिम्मेदारियों को समझने वाला था, वहीं जितेंद्र गैरजिम्मेदार था. जितेंद्र का किसी काम में मन नहीं लगता था.

जितेंद्र की निगाहें ललिता पर शुरू से थीं. वह देवरभाभी के रिश्ते का फायदा उठा कर ललिता से हंसीमजाक भी करता रहता था.  जितेंद्र की नजरें अपनी ललिता भाभी का पीछा करती रहती थीं. दरअसल जितेंद्र ने ललिता को विवाह मंडप में जब पहली बार देखा था, तब से ही वह उस के हवास पर छाई हुई थी. अपने बड़े भाई सिकंदर के भाग्य से उसे ईर्ष्या होने लगी थी. वह सोचता था कि ललिता जैसी सुंदरी के साथ उस का विवाह होना चाहिए था. काश! ललिता उसे पहले मिली होती तो वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाता और उस की जिंदगी इस तरह वीरान न होती, उस की जिंदगी में भी खुशियां होतीं.

ललिता के रूप की आंच से आंखें सेंकने के लिए ही वह ललिता के घर के चक्कर लगाता. चूंकि वह घर का ही सदस्य था, इसलिए उस के आनेजाने और वहां हर समय बने रहने पर कोई शक नहीं करता था. जितेंद्र की नीयत साफ नहीं थी, इसलिए वह ललिता से आंखें लड़ा कर और हंसमुसकरा कर उस पर डोरे डाला करता था. सिकंदर सुबह खेत पर जाता तो दीया बाती के समय ही लौट कर आता. जितेंद्र के दिमाग में अब तक ललिता के रूप का नशा पूरी तरह हावी हो गया था. इसलिए ललिता को पाने की चाह में उस के सिकंदर के घर के फेरे जरूरत से ज्यादा लगने लगे.

ललिता घर पर अकेली होती थी, इसलिए जितेंद्र के पास मौके ही मौके थे. एक दिन जितेंद्र दोपहर के समय आया तो ललिता दोपहर के खाने में तहरी बनाने की तैयारी कर रही थी, जिस के लिए आलू व टमाटर काट रही थी. जितेंद्र ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘लगता है, आज अपने हाथों से स्वादिष्ट तहरी बनाने जा रही हो.’’

‘‘हां, खाने का इरादा है क्या?’’

‘‘मेरा ऐसा नसीब कहां, जो तुम्हारे हाथों का बना स्वादिष्ट खाना खा सकूं. नसीब तो सिकंदर भैया का है, जो आप जैसी रूपसी उन को पत्नी के रूप में मिलीं.’’

यह सुन कर ललिता मुसकान बिखेरती हुई बोली, ‘‘ठीक है, मुझ से विवाह कर के तुम्हारे भैया ने अपनी किस्मत चमका ली तो तुम भी किसी लड़की की मांग में सिंदूर भर कर अपनी किस्मत चमका लो.’’

‘‘मुझे कोई दूसरी नहीं, तुम पसंद हो. भाभी, अगर तुम तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ अपना घर बसाने को तैयार हूं.’’

ललिता जितेंद्र के रोज हावभाव पढ़ती रहती थी. इसलिए जान गई थी कि जितेंद्र के दिल में उस के लिए नाजुक एहसास है. लेकिन वह इस तरह चाहत जाहिर कर के उस से प्यार की सौगात मांगेगा, ललिता ने सोचा तक न था. अचानक सामने आई ऐसी असहज स्थिति से निपटने के लिए वह उस से आंखें चुराने लगी और कटी हुई सब्जी उठा कर रसोई की तरफ चल दी. तभी उस के बच्चे भी घर आ गए. प्यार में विघ्न पड़ता देख कर जितेंद्र भी वहां से उठ गया. उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, वह ललिता के पास पहुंच जाता और अपने प्यार का विश्वास दिलाता. धीरेधीरे ललिता को उस के प्यार पर यकीन होने लगा. उसे भी अपने प्रति जितेंद्र की दीवानगी लुभाने लगी थी.

उस की दीवानगी को देख कर ललिता के दिल में उस के लिए प्यार उमड़ पड़ा. कल तक जो ललिता जितेंद्र के हवास पर छाई थी, अब जितेंद्र ललिता के हवास पर छा गया. एक दिन जितेंद्र ने फिर से ललिता के सामने अपने प्यार का तराना सुनाया तो वह बोली, ‘‘जितेंद्र, मेरे प्यार की चाहत में पागल होने से तुम्हें क्या मिलेगा. मैं विवाहित होने के साथसाथ 3 बच्चों की मां भी हूं. इसलिए मुझे पाने की चाहत अपने दिल से निकाल दो.’’

‘‘यही तो मैं नहीं कर पा रहा, क्योंकि यह दिल पूरी तरह से तुम्हारे प्यार में गिरफ्तार है.’’

ललिता कुछ नहीं बोल सकी. जैसे उस के जेहन से शब्द ही मिट गए थे. जितेंद्र ने अपने हाथ उस के कंधे पर रख दिए, ‘‘भाभी, कब तक तुम अपने और मेरे दिल को जलाओगी. कुबूल कर लो, तुम्हें भी मुझ से प्यार है.’’

ललिता ने सिर झुका कर जितेंद्र की आंखों में देखा और फिर नजरें नीची कर लीं. प्रेम प्रदर्शन के लिए शब्द ही काफी नहीं होते, शारीरिक भाषा भी मायने रखती है. जितेंद्र समझ गया कि मुद्दत बाद सही, ललिता ने उस का प्यार कुबूल कर लिया है. उस ने ललिता के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. ललिता भी सुधबुध खो कर जितेंद्र से लिपट गई. उस समय मन के मिलन के साथ तन की तासीर ऐसी थी कि ललिता का जिस्म पिघलने लगा.  इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. यह बात करीब 6 साल पहले की है. बाद में यह मौका मिलने पर चलता रहा.

13 मई, 2021 को दोपहर करीब 12 बजे सिकंदर दास लोचनपुर गांव के निजी कार चालक विजय दास के साथ चरवाडीह के संजय दास के यहां शादी समारोह में गया. सिकंदर और विजय दोनों कार से गए थे. कार विजय की थी. साढ़े 3 बजे शादी से दोनों निकल आए. लेकिन सिकंदर दास घर नहीं लौटा. उस के नंबर पर सिकंदर के चाचा ने फोन किया गया तो विजय ने उठाया. उस से पूछा गया कि सिकंदर कहां है तो विजय द्वारा अलगअलग ठिकाने का पता बताते हुए फोन काट दिया. इस के बाद सिकंदर की काफी तलाश की गई, वह नहीं मिला. 16 मई को ललिता ने कोडरमा के थानाप्रभारी और एसपी को एक पत्र दिया, जिस में उस ने अपने पति सिकंदर दास के लापता होने की बात लिखी. सिकंदर के गायब होने का आरोप उस ने कार चालक विजय दास पर लगाया था.

चूंकि मामला चांदवारा थाना क्षेत्र के करौंजिया गांव का था. इसलिए एसपी पुलिस ने मामला चांदवारा थाने में ट्रांसफर कर दिया. चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह ने पूरा मामला जान कर थाने में सिकंदर की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थानाप्रभारी सोनी प्रताप ने 20 मई को जामू खाड़ी से विजय दास को गिरफ्तार कर लिया. सख्ती से पुलिस ने पूछताछ की तो विजय ने सिकंदर की हत्या करने की बात स्वीकारी. उस ने इस हत्या में सिकंदर की पत्नी ललिता और भाई जितेंद्र का भी हाथ होने की बात बताई. 20 मई को विजय के बाद ललिता और जितेंद्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर रात में कोटवारडीह के बंद पड़े मकान से सिकंदर की लाश बरामद कर ली.

वह अर्द्धनिर्मित मकान सिकंदर का था. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह अभियुक्तों को ले कर थाने आ गए. थाने में सख्ती से की गई पूछताछ में उन्होंने हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयां कर दी. एक दोपहर को जितेंद्र और ललिता घर में बेधड़क रंगरलियां मना रहे थे कि अचानक किसी काम से सिकंदर खेतों से घर लौटा तो उस ने उन दोनों को रंगरलियां मनाते रंगेहाथों पकड़ लिया. यह देख कर उसे एक बार तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उस की पत्नी ऐसा भी कर सकती है. वह ललिता पर खुद से भी ज्यादा विश्वास करता था. लेकिन हकीकत तो सामने उस की दगाबाजी की तरफ इशारा कर रही थी.

दूसरी ओर सगा छोटा भाई जितेंद्र था, जिसे वह बहुत प्यार करता था, उस का खूब खयाल रखता था. वही उस की गृहस्थी में आग लगा रहा था. अपनों की इस दगाबाजी से सिकंदर इतना आहत हुआ कि उस ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया. ललिता और जितेंद्र ने भी उस से अपनी गलती की माफी मांग ली और भविष्य में ऐसा कुछ न करने का वादा किया तो सिकंदर शांत हुआ. जितेंद्र और ललिता ने उस समय तो अपनी जान छुड़ाने के लिए वादा कर दिया था, लेकिन वे इस पर अमल करने को कतई तैयार नहीं थे. लेकिन उन का भेद खुल चुका था, इसलिए मिलन में उन को बहुत ऐहतियात बरतनी पड़ती थी. वे चोरीछिपे फिर से मिल लेते थे.

सिकंदर ने देखा तो उस ने विरोध किया. मामला घर की चारदीवारी से निकल कर गांव के लोगों तक पहुंच गया. पंचायत तक बैठ गई. भरी पंचायत में ललिता ने जितेंद्र के साथ रहने की बात कही. लेकिन फैसला न हो सका. इस के बाद सिकंदर उन दोनों के बीच की एक बड़ी दीवार था, जिसे गिराए बिना वे हमेशा के लिए एक नहीं हो सकते थे. इसलिए ललिता और जितेंद्र ने सिकंदर की हत्या करने की ठान ली. सिकंदर दास ने विजय दास से लोन दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए लिए थे. सिकंदर ने जब लोन नहीं दिलाया तो विजय उस से अपने दिए रुपए वापस मांगने लगा. सिकंदर रुपए देने में टालमटोल कर रहा था. ऐसे में ललिता ने जितेंद्र से बात कर के विजय को अपने प्लान में शामिल करने की बात कही.

उस ने यह भी कहा कि सिकंदर का काम तमाम होने के बाद वह अकेले विजय को उस की हत्या में फंसवा देगी, जिस से वे दोनों बच जाएंगे. जितेंद्र को उस की बात सही लगी. दोनों ने विजय से बात की तो वह सिकंदर की हत्या में उन दोनों का साथ देने को तैयार हो गया. 13 मई, 2021 को एक शादी समारोह से लौटने के बाद विजय सिकंदर को ले कर कोटवारडीह में उस के अर्धनिर्मित मकान पर ले गया. वहां ललिता और जितेंद्र पहले से मौजूद थे. तीनों ने मिल कर सिकंदर की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश एक कमरे में डाल कर कमरा बंद कर दिया.

लेकिन सिकंदर की हत्या में विजय को फंसाने की योजना ही ललिता और जितेंद्र को भारी पड़ गई. ललिता ने उस पर शक जताया तो पुलिस विजय को पकड़ कर उन तक पहुंच गई. तीनों अभियुक्तों के खिलाफ हत्या व साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज कर के चांदवारा पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. Crime Story Real

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Ghar ki Kahaniyan : चाची के प्यार में भतीजे ने ताऊ की कर दी हत्या

Ghar ki Kahaniyan : रामपाल ने सविता से दूसरी शादी कर जरूर ली थी, लेकिन वह उस की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहा था. इसी दौरान सविता का दिल पति के भतीजे मंजीत पर आ गया. युवा मंजीत भी चाची की चाहत का ऐसा दीवाना हुआ कि रिश्ते की सारी दीवारें टूट गईं. और फिर…

14 जून, 2021 की सुबह के 5 बजे का वक्त रहा होगा. सचिन उठते ही सब से पहले अपने घेर की तरफ चला गया. सचिन के पिता चंद्रपाल घर के पीछे बने जानवरों के घेर में ही सोते थे. घेर में जाते ही सचिन की निगाह पिता की चारपाई पड़ी, तो उस की जोरदार चीख निकल गई. चंद्रपाल की चारपाई खून से लथपथ पड़ी थी. चंद्रपाल के ऊपर पड़ी चादर तो लहूलुहान थी ही, साथ ही तमाम खून उस की चारपाई के नीचे भी पड़ा था. सचिन की चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग भी जाग गए थे. देखते ही देखते चंद्रपाल के घेर में लोगों का जमावड़ा लग गया. चारपाई के पास खून से सनी एक ईंट भी पड़ी थी.

हालांकि चंद्रपाल की हालत देखते हुए कहीं से भी नहीं लग रहा था कि उस की सांसें अभी भी चल रही होंगी, इस के बावजूद भी सचिन पिता को अस्पताल ले गया. जहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था. इस घटना की जानकारी पुलिस को अस्पताल के द्वारा ही पता चली थी. यह घटना उत्तराखंड के शहर जसपुर के थाना कुंडा की थी. सूचना पाते ही कुंडा थानाप्रभारी अरविंद चौधरी कुछ कांस्टेबलों को साथ ले कर सीधे काशीपुर एल.डी. भट्ट अस्पताल पहुंचे. सरकारी अस्पताल में ही पुलिस ने मृतक के परिजनों से घटना की जानकारी जुटाई. इस के बाद एसआई महेश चंद ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. बाद में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर खून से सनी ईंट और अन्य सबूत जुटाए.

पुलिस केस की जांच में जुट गई. सचिन ने पुलिस को बताया कि 2 दिन पहले ही उस के पिता के साथ उस की चाची सविता की किसी बात को ले कर तूतूमैंमैं हुई थी. लेकिन उसे उम्मीद है कि उस की चाची इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकती. यह जानकारी भले ही सचिन के लिए कोई मायने नहीं रखती थी. लेकिन पुलिस के लिए यह सूत्र अहम मायने रखता था. पुलिस ने सविता को पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में ले लिया. पूछताछ के दौरान सविता ने साफ शब्दों में जबाव दिया कि वह अपने जेठ का खून क्यों करेगी. उस के जेठ तो उस के बच्चों को बहुत ही प्यार करते थे. उसी दौरान चंद्रपाल के छोटे भाई ने बताया कि सविता का चालचलन ठीक नहीं है. वह 2 दिन पहले ही अपने भतीजे मंजीत को ले कर मुरादाबाद भाग गई थी. उसी बात को ले कर चंद्रपाल ने उसे काफी डांटफटकार लगाई थी.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस समझ गई कि माजरा क्या है. इस से पहले मंजीत कहीं भाग पाता, पुलिस ने उसे भी अपनी कस्टडी में ले लिया और दोनों को थाने ले आई. थाने ला कर दोनों से कड़ी पूछताछ हुई. पुलिस ने मंजीत से इस मामले में पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस रात तो वह फैक्ट्री में काम करने गया हुआ था. ऐसे में वह अपने ताऊ की हत्या कैसे कर सकता है. इस सच्चाई को जानने के लिए पुलिस की एक टीम उस फैक्ट्री में भी गई. वहां पर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो सचमुच मंजीत की एंट्री वहां दर्ज थी. उपस्थिति वाले रजिस्टर पर उस के हस्ताक्षर भी मौजूद थे. यह सब देख कर पुलिस की जांच पर पानी फिर गया. पुलिस ने इस बारे में सविता के पति रामपाल से पूछताछ की. रामपाल ने बताया कि वह सारे दिन मेहनतमजदूरी कर इतना थक जाता है कि सोने के बाद उसे होशोहवास नहीं रहता.

उसी जांचपड़ताल के दौरान पुलिस की नजर रामपाल के दरवाजे पर पड़ी. जिस पर खून की अंगुलियों के निशान साफ नजर आ रहे थे. फिर पूरे घर की तलाशी ली गई. तभी पुलिस को बाथरूम में खून से सना एक कपड़ा भी मिला, जिस से खून साफ किया गया था. यह सब तथ्य जुटाने के बाद पुलिस ने मंजीत और सविता से अलगअलग पूछताछ की. जिस के दौरान थानाप्रभारी ने सविता से सीधा प्रश्न किया, ‘‘हमें तुम्हारी सारी सच्चाई पता चल गई है. हमें बाथरूम में वह कपड़ा भी मिल गया, जिस से खून साफ किया गया था. यह बात तो पक्की है कि चंद्रपाल की हत्या में तुम्हारा पूरा हाथ है. तुम्हारे लिए यही सही है कि सीधेसीधे सब कुछ बता दो. तुम ने चंद्रपाल की हत्या क्यों की.’’

पुलिस पूछताछ में सविता ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई. उस ने बता दिया कि उस ने ही भतीजे के साथ मिल कर अपने जेठ की हत्या की है. सविता के बाद पुलिस ने मंजीत को अलग ले जा कर कहा कि तुम्हारी प्रेमिका चाची ने हमें सब कुछ बता दिया है. लेकिन हम तुम से केवल इतना जानना चाहते हैं कि तुम ने फैक्ट्री में ड्यूटी करते हुए भी किस तरह से चंद्रपाल की हत्या की? मंजीत भी कच्चा खिलाड़ी था. उस ने भी पुलिस को सब कुछ साफसाफ बताते हुए अपना जुर्म कबूल कर लिया था. इस केस के खुलने के बाद जो चाचीभतीजे की प्रेम कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी. यह मामला उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के कुंडा थाना से उत्तर दिशा में लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित गांव टीले का है.

बहुत पहले गांव मैरकपुर पाकवाड़ा, मुरादाबाद निवासी सुमेर सिंह रोजीरोटी की तलाश में यहां आए और यहीं के हो कर रह गए. सुमेर सिंह के 4 बेटे थे, जिन में चंद्रपाल सब से बड़ा, उस के बाद विक्रम तथा रामपाल सब से छोटा था. समय के साथ तीनों की शादियां भी हो गईं. शादी होते ही सभी भाइयों ने अपनी गृहस्थी संभाल ली और अलगअलग मकान बना कर रहने लगे थे. अब से 5 साल पहले चंद्रपाल का चचेरा भाई करन अपने परिवार से मिलने आया था. करन ने यहां का रहनसहन देखा तो वह भी यहीं का दीवाना हो गया. करन के परिवार से संबंध रखने के कारण चंद्रपाल ने उसे रहने के लिए अपने ही घर में शरण दी थी. रामपाल की शादी काशीपुर के टांडा उज्जैन से हुई थी. रामपाल शुरू से ही सीधेसरल स्वभाव का था.

जबकि रामपाल की बीवी शहर की रहने वाली और तेजतर्रार थी. शादी के बाद गांव का रहनसहन उसे पसंद नहीं था. एक साल उस ने जैसेतैसे उस के साथ काटा और फिर उस ने रामपाल से संबंध विच्छेद कर लिया. उस समय तक उस की बीवी के कोई औलाद पैदा नहीं हुई थी. रामपाल की बीवी उसे छोड़ कर चली गई तो रामपाल उदास रहने लगा. इस के बाद भाइयों ने फिर से रामपाल की शादी मुरादाबाद जिले के टांडा स्वार के मानपुर की रहने वाली सविता से करा दी. सविता के साथ दूसरी शादी हो जाने से रामपाल खुश रहने लगा था. रामपाल सुबह ही मेहनतमजदूरी करने के लिए घर से निकल जाता, फिर देर शाम ही घर पहुंच पाता था. गुजरते समय के साथ सविता 2 बच्चों की मां भी बन गई. हालांकि सविता पहले से ही देखनेभालने में सुंदर थी, लेकिन 2 बच्चों को जन्म देने के बाद तो उस की देह और भी चमक उठी थी.

रामपाल के मकान के सामने ही करन सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. उस वक्त करन का बड़ा बेटा मंजीत जवानी के दौर से गुजर रहा था. मंजीत आवारा किस्म का था. हर समय वह अपनी चाची सविता के पास ही पड़ा रहता था. उस के साथ रहने से सविता को एक सब से बड़ा फायदा था कि वह उस के बच्चों को संभालने में उस की मदद करता था. सविता को जब कभी भी अपने घर का कामकाज निपटाना होता था तो वह अपने बच्चों को मंजीत के पास ही छोड़़ देती थी. कुसगंति से मंजीत के मन में गंदगी पनपनी शुरू हुई तो चाची के प्रति उस की सोच भी बदल गई थी. हालांकि सविता उसे अपने भतीजे के रूप में ही देखती आ रही थी. लेकिन जैसे ही मंजीत का बदलता नजरिया देख कर सविता के मन में भी उथलपुथल पैदा हो गई.

उसे अब पति रामपाल का शरीर कुछ थकाथका सा महसूस होने लगा था. कई बार सविता बच्चों को मंजीत को सौंप कर उसी के सामने नहाने लगती थी, जिसे आंख चुरा कर देखने में मंजीत की आंखों को बहुत ही सुख मिलता था. सविता नहाने के बाद अपने तन को तौलिए से ढंक कर कमरे में जाती तो मंजीत की हवस भरी निगाहें उस के शरीर का पीछा करती रहती थीं. फिर एक दिन ऐसा भी आया कि सविता कमरे में तौलिए से अपने तन का पानी पोंछ रही थी, उसी दौरान उस के हाथ से तौलिया छूटा और नीचे गिर गया. सविता ने बड़ी ही फुरती से तौलिया उठाने की कोशिश की तो सामने दरवाजे के सामने ही मंजीत खड़ा देख रहा था.

‘‘अरे मंजीत, तुम यहां? तुम ने कुछ देखा तो नहीं?’’

‘‘नहींनहीं चाची, मैं ने कुछ नहीं देखा.’’

मंजीत की बात सुनते ही सविता मुसकराई, ‘बुद्धू कहीं का, पूरा सीन हो गया, लेकिन ये कुछ समझने को तैयार ही नहीं.’

एक दिन मंजीत जुलाई महीने में अपनी सविता चाची के घर पहुंचा. उस के परिवार वाले खेतों पर काम करने गए हुए थे. सविता के बच्चे सोए पड़े थे. सविता बच्चों के पास ही सोई हुई थी. उस समय नींद की आगोश में उस के अंगवस्त्र अस्तव्यस्त हो चुके थे. मंजीत ने अपनी चाची को इस हाल में सोते देखा तो उस के तनमन के तार झनझनाने लगे. उसी समय सविता की आंखें खुलीं तो उस ने सामने मंजीत को बैठे देखा. वह पहल करते हुए बोली, ‘‘मंजीत तू कब आया? तेरे आने का तो मुझे पता ही नही चला.’’

‘‘बस चाची, यूं समझो कि अभीअभी आया था. घर पर नींद नहीं आ रही थी तो सोचा चाची के पास थोड़ा वक्त काट आऊं. लेकिन यहां आ कर देखा तो आप गहरी नींद में सोई पड़ी थीं.’’

‘‘अरे नहीं, आजकल मुझे गहरी नींद कहां आ रही है. मेरी कमर में दर्द है. उसी से परेशान रहती हूं. कई बार तेरे चाचा से तेल की मालिश करने को कहती हूं, लेकिन उन के पास टाइम ही नहीं है.’’

‘‘कोई बात नहीं, चाचा के पास टाइम नहीं है तो मैं तो हर वक्त खाली ही रहता हूं. अगर आप कहें तो मैं ही आप की मालिश कर देता हूं.’’

सविता का निशाना बिलकुल सही लक्ष्य भेदने को तैयार था. मंजीत की बात सुनते ही सविता उठ खड़ी हुई. उस ने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया. फिर उस ने तेल की शीशी उस के हाथ में थमा दी और कंधे पर मालिश करने को कहा. मंजीत ने हाथ में तेल ले कर सविता के कंधों से मालिश शुरू की तो उस के हाथ धीरेधीरे कंधे से नीचे फिसलने लगे. सविता को भी उन्हीं पलों का इंतजार था. सविता की बीमारी का इलाज होना शुरू हुआ तो वह इतनी मदहोश हो गई कि उस ने अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और सीने के बल चारपाई पर लेट गई. धीरेधीरे मंजीत का धैर्य जबाव दे चुका था. दोनों की रगों में खून गर्म हो कर दौड़ने लगा था. अंत में वह पल भी आ गया कि दोनों ही कामवासना की आग से गुजर गए.

मंजीत ने उस दिन जिंदगी में पहली बार किसी औरत के शरीर का सुख पाया था. वहीं सविता भी बहुत खुश थी. उस दिन दोनों के बीच चाचीभतीजे के रिश्ते तारतार हुए तो यह सिलसिला अनवरत चलता गया. दोनों के बीच लगभग 3 साल से अनैतिक रिश्ते चले आ रहे थे. लेकिन जब दोनों के बीच नजदीकियां ज्यादा ही बढ़ गईं तो उन की प्रेम कहानी की चर्चा पूरे गांव में फैल गई. इस बात की जानकारी परिवार तक पहुंची तो चंद्रपाल ने करन से वह मकान खाली करा लिया. करन ने गांव के पास ही थोड़ी सी जमीन खरीद रखी थी, वह उसी में बच्चों को ले कर झोपड़ी डाल कर रहने लगा. इस बात को ले कर पंचायत हुई. पंचायत में सविता को भी बुलाया गया था. भरी पंचायत में सविता ने अपने ही जेठ पर उसे बदनाम करने का आरोप लगाया था.

बातों ही बातों में चंद्रपाल सविता पर गर्म पड़ा तो करन ने उसे मारने के लिए घर से कुल्हाड़ी तक निकाल ली थी. जिस के बाद से चंद्रपाल उस से डर कर रहता था. उस के बाद उस ने न तो कभी मंजीत को ही टोका और न ही सविता को. उस के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच फिर से खिचड़ी पकने लगी थी. चंद्रपाल ने कई बार रामपाल को टोका कि तेरी बीवी जो कर रही है वह ठीक नहीं है. उसे थोड़ा समझा कर रख. इन दोनों के कारण पूरे गांव में उन के परिवार की बदनामी होती है. लेकिन रामपाल तो अपनी बीवी से इतना दब कर रहता था कि उसे कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं कर पाता था.

मंजीत और सविता के बीच जो कुछ चल रहा था, रामपाल भी जानता था. लेकिन वह मजबूर था. उस के बाद तो सविता रामपाल पर इस कदर हावी हो चुकी थी कि उस के सामने ही मंजीत को अपने घर पर बुला लेती थी. इस बार देश में फिर से लौकडाउन लगा तो दोनों ही एकदूसरे से मिलने के लिए परेशान रहने लगे थे. उस दौरान दोनों के बीच जो भी बात होती थी, वह मोबाइल पर ही होती थी. लेकिन दोनों ही एकदूसरे की चाहत में बुरी तरह से परेशान थे. जब मंजीत की जुदाई सविता से सहन नहीं हो पाई तो उस ने उस के सामने एक प्रश्न रखा. अगर तुम मुझे दिल से प्यार करते हो तो दुनिया की चिंता क्यों करते हो. मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं. लेकिन यह जुदाई अब मुझ से सहन नहीं

होती. मैं तुम्हारे लिए यह घर छोड़ने को तैयार हूं. लेकिन मंजीत हमेशा उस की हिम्मत तोड़ देता था. अगर हम दोनों घर से भाग कर शादी कर भी लें तो तुम्हारे बच्चों का क्या होगा? फिर उस के बाद तो हम समाज में मुंह दिखाने लायक भी नही रहेंगे. मंजीत इस वक्त काशीपुर की एक पेपर मिल में काम करता था. काम करते हुए उस ने कुछ पैसे भी इकट्ठा कर लिए थे. उस ने सोचा उन पैसों के सहारे वह सविता के साथ बाहर कुछ दिन ठीक से काट लेगा. सविता ने भी काफी समय से रामपाल की चोरी से कुछ पैसे इकट्ठा किए थे. 2 जून, 2021 को दोनों ने घर से भागने का पूरा प्लान तैयार किया और काशीपुर से ट्रेन पकड़ कर घर वालों की चोरीछिपे मुरादाबाद जा पहुंचे. मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही दोनों जीआरपी की निगाहों में संदिग्ध के रूप में चढ़ गए.

जीआरपी ने उन से पूछताछ की तो मंजीत ने साफसाफ बता दिया कि वह उस की चाची है. हम दोनों किसी बीमार रिश्तेदार को देखने के लिए आए हुए हैं. लेकिन पुलिस को उन की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो उन्होंने परिवार वालों से बात कराने को कहा. तब मंजीत ने अपनी बुआ की नातिन से जीआरपी वालों की बात करा दी. जिस के बाद पुलिस वालों ने उन्हें सीधे घर जाने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया. रेलवे पुलिस से छूटने के बाद भी मंजीत बुरी तरह से घबराया हुआ था. उसे पता था कि इस वक्त देश बुरे हालात से गुजर रहा है. घर से जाने के बाद न तो उन्हें कहीं भी इतनी आसानी से नौकरी ही मिलने वाली है और न ही उस के बाद उस के घर वाले उसे शरण देने वाले हैं.

यह सब मन में विचार उठते ही सविता ने मंजीत के सामने एक प्रश्न किया, ‘‘मंजीत, मैं तेरी खातिर अपना घरबार, बच्चों तक को छोड़ आई. लेकिन तेरे अंदर इतनी भी हिम्मत नहीं कि तू अपने ताऊ को सबक सिखा सके. उस ने ही हम दोनों का जीना हराम कर रखा है. अगर वह न हो तो हमें घर से भागने की जरूरत भी नहीं होती.’’

सविता की बात मंजीत के दिल को छू गई, ‘‘चाची, तुम अब बिलकुल भी चिंता मत करो. मैं घर वापस जाते ही उस ताऊ का ऐसा इलाज करूंगा कि वह कुछ कहने लायक भी नहीं रहेगा.’’

सविता को विश्वास में ले कर मंजीत अपने घर वापस चला गया. घर जाने के बाद वही सब कुछ हुआ, जिस की उम्मीद थी. दोनों के घर पहुंचते ही परिवार वालों ने उन्हें उलटासीधा कहा. चंद्रपाल ने सविता को घर तक में नहीं जाने दिया था. जिस के कारण मंजीत ने उसी रात अपने ताऊ को मौत की नींद सुलाने का प्रण कर लिया था. 14 जून, 2021 की शाम को मंजीत अपने काम पर चला गया. लेकिन फैक्ट्री में काम करते वक्त भी उस की निगाहों के सामने उस के ताऊ की सूरत ही घूमती रही. उसी वक्त मशीनों में कोई तकनीकी खराबी आ गई, जिस के कारण मशीन बंद करनी पड़ी. मंजीत को लगा कि वक्त उस का साथ दे रहा है. उस ने तभी सविता को फोन मिलाया और आधे घंटे बाद ताऊ के घेर के पास मिलने को कहा. मंजीत की बात सुनते ही सविता के हाथपांव थरथर कांपने लगे थे.

उसे लगा कि आज वह जो काम करने जा रही है वह ठीक से हो पाएगा भी या नहीं. उस की चारपाई के पास ही पति रामपाल खर्राटे मार कर सो रहा था. रामपाल को सोते देख उस ने किसी तरह से हिम्मत जुटाई और धीरे से घर का दरवाजा खोल कर दबे पांव चंद्रपाल के घेर की तरफ बढ़ गई. मंजीत किसी तरह से फैक्ट्री की पिछली दीवार फांद कर बाहर आया और सीधे अपने ताऊ चंद्रपाल के घेर में पहुंचा. उस वक्त सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे. सविता मंजीत के पहुंचने से पहले ही वहां पहुंच चुकी थी. घेर में पहुंचते ही मंजीत ने घेर में जल रहे बल्ब को उतार दिया, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके. चंद्रपाल भी सारे दिन मेहनतमजदूरी कर के थक जाता था.

उसी थकान को उतारने के लिए वह अकसर ही रात में शराब पी कर ही सोता था. जिस वक्त मंजीत और सविता उस के पास पहुंचे, वह गहरी नींद में सोया हुआ था. चंद्रपाल को सोते देख मंजीत ने सविता को उस का मुंह बंद करने का इशारा किया, फिर उस ने अपने हाथ में थामी ईंट से लगातार कई वार कर डाले. मुंह बंद होने के कारण चंद्रपाल की चीख तक न निकल सकी. थोड़ी देर तड़पने के बाद उस की सांसें थम गईं. इस के बावजूद भी मंजीत बेरहमी दिखाते हुए उस के चेहरे व सिर पर कई वार ईंट से प्रहार किया. जब चंद्रपाल का शरीर पूरी तरह से शांत हो गया तो दोनों वहां से चले गए. सविता के हाथों पर खून लगा हुआ था, जो उस के घर के दरवाजे पर भी लग गया था.

घर पहुंच कर सविता ने एक कपड़े से हाथों का खून पोंछा. वह कपड़ा उस ने बाथरूम में डाल दिया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया था. ताऊ को  मौत की नींद सुला कर मंजीत सीधा फैक्ट्री में पहुंच गया, जिस के बाद उस ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन पुलिस के आगे उस की सारी होशियारी धरी की धरी रह गई. चंद्रपाल के बेटे सचिन की तरफ से भादंवि की धारा 302 व 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया था. Ghar ki Kahaniyan

 

Crime Kahani : बूढ़े आशिक संग रहने की खातिर मां ने बेटी का मुंह दबाकर मार डाला

Crime Kahani : वासना की आग में सुलगने वाली औरत बड़े से बड़ा गुनाह कर जाती है. नंदिनी हत्याकांड इस का उदाहरण है. टीना अपने बूढ़े आशिक प्रह्लाद सहाय के प्यार में ऐसी अंधी हुई कि उस ने पति और उस का घर तो छोड़ा ही, अपनी बेटी के खून से भी हाथ रंग दिए.

राजस्थान के कोटा जिले के थाना बुढ़ादीव के गांव बोरखेड़ा में सुमित पुत्र हरदेव यादव अपनी पत्नी पुष्पा यादव उर्फ टीना (25 वर्ष) और इकलौती बेटी नंदिनी (4 साल) के साथ रहता था. सुमित सीधासादा इंसान था. वहीं उस की पत्नी टीना उर्फ पुष्पा रंगीनमिजाज युवती थी. सुमित का दिन जहां मेहनतमजदूरी करने में बीतता था, वहीं टीना का दिन मोबाइल देख कर गुजरता था. सुमित और टीना की शादी को करीब 6 साल हो चुके थे. इन 6 सालों में टीना एक बेटी नंदिनी की मां बन गई थी. उस का बदन कसा था और हसरतें उफान पर थीं. वह चाहती थी कि सुमित उसे सारी रात बांहों में भर कर जन्नत की सैर कराए.

मगर इस के उलट सुमित दिन भर कामधंधे में खपने के कारण इतना थक जाता था कि शाम को घर लौट कर खाना खा कर बिस्तर पर जा पड़ता था. टीना जब रसोई का काम निपटा कर पति के पास आती तो वह नींद में खर्राटे भरता मिलता था. यह देख कर टीना का मन कसैला हो जाता था. वह दिन भर इसी सोच में रहती कि आज पति उसे शारीरिक सुख देगा. मगर रात में थकामांदा पति उसे सोता मिलता. वह कभीकभी सोचा करती कि कैसे मर्द से ब्याह किया जो घोड़े बेच कर हर रात सो जाता है. उसे तनिक भी बीवी को प्यार करने की इच्छा नहीं होती. औरत भूखी रह सकती है मगर वह बिना शारीरिक प्यार के नहीं रह सकती.

सुमित कभीकभार ही टीना से शारीरिक संबंध बनाता था. मगर टीना चाहती थी कि उसे पति हर रात प्यार करे. वह पति से शर्म के मारे कह नहीं पाती थी. समय का पहिया घूमता रहा. एक दिन टीना किसी रिश्तेदार को मोबाइल पर फोन लगा रही थी. 3-4 बार घंटी बजने के बाद फोन उठा कर कोई शख्स बोला, ‘‘हैलो.’’

‘‘हां जी, आप कौन बोल रहे हैं?’’ टीना ने कहा तो फोन उठाने वाला बोला, ‘‘आप कौन हैं?’’

‘‘मैं तो टीना बोल रही हूं बोरखेड़ा, कोटा से.’’

‘‘टीना जी, मैं प्रह्लाद सहाय जयपुर से बोल रहा हूं. कहिए मैं आप की क्या सेवा करूं. फोन कैसे किया?’’ उस शख्स ने कहा.

सुन कर टीना बोली, ‘‘सौरी, आप को रौंग नंबर लग गया. मैं कहीं और फोन लगा रही थी.’’

‘‘रौंग नंबर लगा तो कोई बात नहीं. हम दोस्त तो बन ही सकते हैं. फोन पर बात कर के अच्छा लगा. वैसे आप की आवाज बड़ी मीठी और प्यारी है.’’ प्रह्लाद बोला.

‘‘तारीफ के लिए शुक्रिया. वैसे बातें आप भी बड़ी प्यारी करते हैं. मैं नंबर सेव कर लेती हूं. फुरसत में बात करते हैं.’’

‘‘ओके, मैं भी आप का नंबर सेव कर लेता हूं.’’ प्रह्लाद सहाय बोला. टीना ने काल डिसकनेक्ट कर दी. दोनों ने एकदूसरे के नंबर सेव कर लिए. रौंग नंबर से शुरू हुई इस बातचीत के बाद वह दोनों अकसर फोन पर करने लगे. बात नहीं करने पर उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. एक दिन दोनों ने फोन पर बातों ही बातों में प्यार का इजहार कर दिया और टीना ने प्रेम आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया. प्रह्लाद को टीना ने बता दिया था कि वह एक 6 साल की बेटी नंदिनी की मां है. प्रह्लाद ने टीना से कहा कि वह नंदिनी को अपनी बेटी बना लेगा और पालनपोषण करेगा. टीना यादव यह जान कर बहुत खुश हुई कि उस का प्रेमी उस की बेटी को अपना रहा है. वह उस की प्यार भरी बातों के जाल में उलझती चली गई. वह भूल गई कि वह शादीशुदा और एक बेटी की मां है.

टीना भूल गई कि उस के मातापिता ने उसे डोली में बिठा कर विदा करते हुए कहा था, ‘‘बेटी, सुखदुख, अमीरीगरीबी आतेजाते रहेंगे. मगर ससुराल के घर से तेरी अर्थी ही उठनी चाहिए. इस के अलावा ससुराल के घर से कभी कदम बाहर नहीं रखना.’’

टीना प्रह्लाद पर इतना विश्वास करने लगी कि वह पति का घर छोड़ कर उस के पास जाने को तैयार हो गई थी. पति के साथ अग्नि के समक्ष सात फेरे ले कर जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाने वाली टीना शादी के मात्र 6 साल बाद ही पति की पीठ में खंजर घोंप कर प्रेमी का घर आबाद करने को उतावली हो रही थी.  सुमित को तो अपने कामधंधे से ही फुरसत नहीं थी. उसे पता नहीं था कि जिस की खुशी के लिए वह मेहनतमजदूरी करता है कि उसे किसी तरह की परेशानी नहीं हो. लेकिन वही बीवी किसी गैरमर्द को अपना बना चुकी है और वह घर से फुर्र होने वाली है. सुमित तो सोचता था कि टीना उस के साथ खुश है. वह उस की खुशी के लिए क्या कुछ नहीं करता था.

11 नवंबर, 2020 को भी हर रोज की तरह सुमित काम पर निकल गया. शाम को घर लौटा तो उस की बीवी टीना और बेटी नंदिनी घर पर नहीं थी. आसपड़ोस में सुमित ने बीवी और बेटी की खोजबीन की मगर वे नहीं मिलीं. सुमित ने टीना के मोबाइल पर भी फोन किया. मगर मोबाइल स्विच्ड औफ था. सुमित कई दिन तक अपने स्तर पर बीवी और बेटी की खोजबीन करता रहा. जब उन की कोई खोजखबर नहीं मिली तो थकहार कर वह 16 दिसंबर, 2020 को बुढ़ादीत थाने पहुंचा. सुमित ने थानाप्रभारी अविनाश कुमार को सारी बात बता कर पत्नी और बेटी नंदिनी की गुमशुदगी लिखा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस की बहुत दिन तक नींद नहीं खुली.

जब सुमित थाने के चक्कर पर चक्कर काटने लगा तो पुलिस हरकत में आई. इस के बाद इटावा डीएसपी विजयशंकर शर्मा के निर्देशन व थाना बुढ़ादीत थानाप्रभारी  अविनाश कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की गई. इस पुलिस टीम में थानाप्रभारी अविनाश कुमार के अलावा हैडकांस्टेबल सुरेशचंद्र वर्मा, सतपाल, प्रह्लाद, पूरन सिंह, महिला कांस्टेबल माली को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने मामले की जांच शुरू की. तकनीकी जांच और मुखबिर से पता चला कि सुमित की पत्नी टीना उर्फ पुष्पा जयपुर जिले के थाना मनोहरपुर के गांव उदावाला में प्रेमी प्रह्लाद सहाय के साथ रह रही है.

पुलिस टीम ने 13 मई, 2021 को सुमित की पत्नी टीना और उस के प्रेमी प्रह्लाद सहाय को हिरासत में ले लिया. लेकिन टीना के साथ उस की बेटी नंदिनी नहीं थी. टीना और प्रह्लाद से पुलिस टीम ने नंदिनी के बारे में पूछताछ की. टीना ने बताया कि नंदिनी अपने दादादादी के पास है. पुलिस ने पता किया. दादादादी के पास नंदिनी नहीं थी. तब पुलिस ने प्रह्लाद सहाय से और टीना से अलगअलग पूछताछ की. टीना ने बताया कि नंदिनी को बसस्टैंड पर अकेली छोड़ दिया था. पुलिस को उस की बातों पर यकीन नहीं था. इस कारण पुलिस ने गुमराह कर रहे प्रह्लाद व टीना से कड़ी पूछताछ की तो दोनों ने नंदिनी की हत्या की बात कबूल ली.

टीना को जब पता चला कि उस के प्रेमी ने नंदिनी की हत्या की स्वीकारोक्ति कर ली है, तब टीना भी टूट गई. उस ने भी बेटी की हत्या का गुनाह कबूल कर लिया. प्यार की खातिर मासूम बेटी की हत्या की बात सुन कर पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई. पूछताछ करने पर टीना की एक ऐसी कुमाता वाली छवि उभर कर सामने आई, जिस ने अपने से 20 बरस बड़े प्रेमी प्रह्लाद की खातिर इकलौती बेटी की हत्या कर उस का शव सरिस्का जंगल में फेंक दिया. दोनों आरोपियों से की गई पूछताछ के बाद प्यार में अंधी एक औरत की जो कहानी प्रकाश में आई, इस प्रकार है—

राजस्थान के कोटा जिले के बुढ़ादीत थानांतर्गत बोरखेड़ा गांव निवासी सुमित यादव से टीना उर्फ पुष्पा की शादी हो जरूर गई थी, लेकिन वह उस से खुश नहीं थी. क्योंकि वह उस की शारीरिक जरूरत को नहीं समझता था. इसीलिए वह अपने पति को पसंद नहीं करती थी. मगर लोकलाज के कारण वह उसे ढो रही थी. टीना की हसरतें उफान मारती थीं. मगर सुमित को इस की परवाह नहीं थी. टीना 4 साल की बेटी की मां हो गई थी, लेकिन वह इतनी खूबसूरत थी कि उस का गदराया बदन देख कर कोई भी मर्द उसे पाने को बेताब हो उठता था.

ऐसे में जयपुर के गांव उदावाला, निवासी प्रह्लाद सहाय से रौंग काल के जरिए उस की बात हुई तो उसे लगा कि प्रह्लाद उस के लिए ही बना है. इसलिए उस ने उस से नजदीकी बढ़ा ली. बातोंबातों में दोनों इतने खुल गए कि फोन पर प्यार का इजहार हो गया. इतना ही नहीं, दोनों ने जीवन भर साथ निभाने का फैसला भी ले लिया. एक दिन उस से प्रह्लाद ने कहा, ‘‘मैं तुम्हारी बेटी को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार कर लूंगा. तुम उसे ले कर जयपुर के लिए निकल जाओ. मैं तुम दोनों को घर ले आऊंगा.’’

यह सुन कर टीना खुश हो गई. फिर वह 11 नवंबर, 2020 को पति सुमित के काम पर जाने के बाद अपनी बेटी नंदिनी को ले कर बोरखेड़ा से जयपुर आ गई, जहां से प्रह्लाद टीना और नंदिनी को ले कर अपने गांव उदावाला आ गया. टीना और प्रह्लाद पतिपत्नी की तरह रहने लगे. प्रह्लाद ने आसपड़ोस में कहा कि उस ने टीना से लव मैरिज की है. प्रह्लाद अधेड़ उम्र का था वहीं टीना जवान थी. टीना जैसी सुंदर प्रेमिका पा कर प्रह्लाद निहाल हो गया था. प्रह्लाद ने टीना को तनमनधन से सुख दिया. टीना अपने प्रेमी की दीवानी हो गई. प्रह्लाद भी स्त्री सुख से वंचित था. अधेड़ उम्र में जब जवान प्रेमिका मिली तो वह रोजाना अपनी हसरतें पूरी करता.

दोनों मौजमस्ती से दिन गुजार रहे थे. 9 जनवरी, 2021 की शाम नंदिनी सीढि़यों से गिर कर घायल हो गई. अगले दिन 10 जनवरी को नंदिनी को प्रह्लाद और टीना शाहपुरा अस्पताल ले गए. डाक्टर ने नंदिनी को देख कर कहा कि उसे जयपुर ले जाओ. इस पर प्रह्लाद व टीना नंदिनी को उदावाला घर ले आए. प्रह्लाद ने टीना से कहा, ‘‘टीना, अगर नंदिनी को जयपुर ले जाएंगे तो लाखों रुपए इलाज में खर्च होंगे. इस के बाद भी क्या पता नंदिनी बचे कि नहीं. ऐसा करते हैं कि पैसा बचाने के लिए नंदिनी को ही मार डालते हैं.’’

सुन कर मां की ममता पसीजने के बजाय बोली, ‘‘सही कह रहे हैं, आप. वैसे सुमित के खून को हमतुम क्यों पालेंपोसें.’’

उसी रात नंदिनी को सोते हुए शाल मुंह पर दबा कर टीना और प्रह्लाद ने मार डाला. रात भर लाश वहीं पड़ी रही. अगले दिन 11 जनवरी, 2021 को नंदिनी का शव ले कर प्रह्लाद और टीना अलवर जिले के सरिस्का जंगल में पहुंचे और सुनसान जगह पर डाल कर वापस उदावला लौट आए. शाम को उदावला आने पर प्रह्लाद के आसपड़ोस के लोगों ने जब नंदिनी के बारे में पूछा. तब उन से कहा कि नंदिनी को दादादादी के पास छोड़ आए हैं. टीना ने अपनी 4 बरस की बेटी को मारने के बावजूद टीना सामान्य बनी रही. उस के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी. उलटे वह तो अपने को आजाद महसूस कर रही थी. उधर टीना और नंदिनी के 11 नवंबर, 2020 को घर से गायब होने पर टीना का पति सुमित यादव दोनों की रिश्तेदारी में एक महीने से ज्यादा समय तक खोजबीन करता रहा.

जब कहीं भी बीवी और बेटी का पता नहीं चला तब वह थकहार कर 16 दिसंबर, 2020 को थाना बुढ़ादीत पहुंच कर बीवी टीना उर्फ पुष्पा और बेटी नंदिनी की गुमशुदगी दर्ज कराई. यानी गुमशुदगी दर्ज कराने से पहले ही नंदिनी की हत्या कर दी गई थी. गुमशुदगी के बाद भी पुलिस की नींद देर से खुली. टीना और नंदिनी के गायब होने के तुरंत बाद अगर सुमित पुलिस थाने में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज करा देता और पुलिस समय पर काररवाई करती तो नंदिनी जिंदा होती. प्रह्लाद सहाय और टीना उर्फ पुष्पा से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Crime Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime ki Kahani : प्रेमी का अपहरण कर पेचकस से फोड़ डालीं दोनों आंखे

Crime ki Kahani : लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल उरांग जिस प्रियंका उर्फ दुलारी से प्यार करते थे, उस से पूर्णिया का शार्प शूटर अंकित यादव भी बेपनाह मोहब्बत करता था. इसी बीच ऐसा क्या हुआ कि यह हाथ ऐसा जुर्म कर बैठे कि…

लोक जनशक्ति पार्टी के आदिवासी प्रकोष्ठ के युवा प्रदेश अध्यक्ष 35 वर्षीय अनिल उरांव रोजाना की तरह उस दिन भी नाश्ता कर के क्षेत्र में भ्रमण के लिए तैयार हो कर ड्राइंगरूम में बैठे अपने भतीजे के आने का इंतजार कर रहे थे. तभी उन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. अपनी शर्ट की जेब से मोबाइल निकाल कर डिसप्ले पर उभर रहे नंबर पर नजर डाली तो वह नंबर जानापहचाना निकला. स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को देख कर अनिल उरांव का चेहरा खुशियों से खिल उठा था. उन्होंने काल रिसीव करते हुए कहा, ‘‘हैलो!’’

‘‘नेताजी, प्रणाम.’’ दूसरी ओर से एक महिला की मीठी सी आवाज अनिल उरांव के कानों से टकराई.

‘‘प्रणाम…प्रणाम.’’ उन्होंने जबाव दिया, ‘‘कैसी हो प्रियंकाजी?’’ उस महिला का नाम प्रियंका उर्फ दुलारी था.

‘‘ठीक हूं, नेताजी.’’ प्रियंका जबाव देते हुए बोली, ‘‘मैं क्या कह रही थी कि जनता की खैरियत पूछने जब क्षेत्र में निकलिएगा तो मेरे गरीबखाने पर जरूर पधारिएगा. मैं आप की राह तकूंगी.’’

‘‘सुबह….सुबह क्यों मेरी टांग खींच रही हैं प्रियंकाजी. कोई और नहीं मिला था क्या आप को टांग खींचने के लिए? आलीशान और शानदार महल कब से गरीबखाना बन गया?’’ अनिल ने कहा.

‘‘क्या नेताजी? क्यों मजाक उड़ा रहे हैं इस नाचीज का. काहे का शानदार महल. सिर ढंकने के लिए ईंटों की छत ही तो है. बहुत मजाक करते हैं आप मुझ से. अच्छा, अब मजाक छोडि़ए और सीरियस हो जाइए. ये बताइए कि दोपहर तक आ रहे हैं न मेरी कुटिया में, मुझ से मिलने. कुछ जरूरी मशविरा करना है आप से.’’ वह बोली.

‘‘ऐसा कभी हुआ है प्रियंकाजी कि आप बुलाएं और हम न आएं. फिर जब आप इतना प्रेशर मुझ पर बना ही रही हैं तो भला मैं कैसे कह दूं कि मैं आप की कुटिया पर नहीं पधारूंगा, मैं जरूर आऊंगा. मुझे तो सरकार के दरबार में हाजिरी लगानी ही होगी.’’

नेता अनिल उरांव की दिलचस्प बातें सुन कर प्रियंका खिलखिला कर हंस पड़ी तो वह भी अपनी हंसी रोक नहीं पाए और ठहाका मार कर हंसने लगे. उस के बाद दोनों के बीच कुछ देर तक हंसीमजाक होती रही. फिर प्रियंका ने अपनी ओर से फोन डिसकनेक्ट कर दिया तो अनिल उरांव ने भी मोबाइल वापस अपनी जेब के हवाले किया. फिर भतीजे राजन के साथ मोटरसाइकिल पर सवार हो कर वह मनिहारी क्षेत्र की ओर निकल पड़े. वह खुद मोटरसाइकिल चला रहे थे और भतीजा पीछे बैठा था. यह 29 अप्रैल, 2021 की सुबह साढ़े 10 बजे की बात है. अनिल उरांव को क्षेत्र भ्रमण में निकले तकरीबन 10 घंटे बीत चुके थे. वह अभी तक घर वापस नहीं लौटे थे और न ही उन का फोन ही लग रहा था. घर वालों ने साथ गए जब भतीजे से पूछा कि दोनों बाहर साथ निकले थे तो तुम उन्हें कहां छोड़ कर आए?

इस पर उस ने जबाव दिया, ‘‘चाचा को रेलवे लाइन के उस पार छोड़ कर आया था. उन्होंने कहा था कि वह प्रियंका के यहां जा रहे हैं, बुलाया है, मीटिंग करनी है. थोड़ी देर वहां रुक कर वापस घर लौट आऊंगा, तब मैं बाइक ले कर घर लौट आया था.’’

नेताजी अचानक हुए लापता भतीजे राजन के बताए अनुसार अनिल प्रियंका से मिलने उस के घर गए थे. राजन उस के घर के पास छोड़ कर आया था तो फिर वह कहां चले गए? अनिल के घर वालों ने प्रियंका को फोन कर के अनिल के बारे में पूछा तो उस ने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि नेताजी तो उस के यहां आए ही नहीं. यह सुन कर सभी के पैरों तले से जमीन खिसक गई थी. वह प्रियंका के यहां नहीं गए तो फिर कहां गए? लोजपा नेता अनिल उरांव और प्रियंका काफी सालों से एकदूसरे को जानते थे. दोनों के बीच संबंध काफी मधुर थे. यह बात अनिल के घर वाले और प्रियंका के पति राजा भी जानते थे. बावजूद इस के किसी ने कभी कोई विरोध नहीं जताया था.

अनिल को ले कर घर वाले परेशान हो गए थे. उन के परिचितों के पास भी फोन कर के पता लगाया गया, लेकिन उन का कहीं पता नहीं चला. घर वालों को अंदेशा हुआ कि कहीं उन के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई. उसी दिन रात में नेता अनिल उरांव की पत्नी पिंकी कुछ लोगों को साथ ले कर हाट थाने पहुंची और पति की गुमशुदगी की एक तहरीर थानाप्रभारी सुनील कुमार मंडल को सौंप दी. तहरीर लेने के बाद थानाप्रभारी सुनील कुमार ने पिंकी को भरोसा दिलाया कि पुलिस नेताजी को ढूंढने का हरसंभव प्रयास करेगी. आप निश्चिंत हो कर घर जाएं. उस के बाद पिंकी वापस घर लौट आई.

मामला हाईप्रोफाइल था. लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के आदिवासी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल उरांव की गुमशुदगी से  जुड़ा हुआ मामला था. उन्होंने अनिल उरांव की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली और आवश्यक काररवाई में जुट गए. चूंकि यह मामला राज्य के एक बड़े नेता की गुमशुदगी से जुड़ा हुआ था, इसलिए उन्होंने इस बाबत एसपी दया शंकर को जानकारी दे दी थी. वह जानते थे कि अनिल उरांव कोई छोटीमोटी हस्ती नहीं है. उन के गुम होने की जानकारी जैसे ही समर्थकों तक पहुंचेगी, वो कानून को अपने हाथ में लेने से कभी नहीं हिचकिचाएंगे. इस से शहर की कानूनव्यवस्था बिगड़ सकती है, इसलिए किसी भी स्थिति से निबटने के लिए उन्हें मुस्तैद रहना होगा.

इधर पति के घर लौटने की राह देखती पिंकी ने पूरी रात आंखों में काट दी थी. लेकिन अनिल घर नहीं लौटे. पति की चिंता में रोरो कर उस का हाल बुरा था. दोनों बेटे प्रांजल (7 साल) और मोनू (2 साल) भी मां को रोता देख रोते रहे. रोरो कर सभी की आंखें सूज गई थीं. फिरौती की आई काल बात अगले दिन यानी 30 अप्रैल की सुबह की है. पति की चिंता में रात भर की जागी पिंकी की आंखें कब लग गईं, उसे पता ही नहीं चला. उस की आंखें तब खुलीं जब उस के फोन की घंटी की आवाज कानों से टकराई.  स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को देख कर हड़बड़ा कर वह नींद से उठ कर बैठ गई. क्योंकि वह फोन नंबर उस के पति का ही था. वह जल्दी से फोन रिसीव करते हुए बोली,

‘‘हैलो! कहां हो आप? एक फोन कर के बताना भी जरूरी नहीं समझा और पूरी रात बाहर बिता दी. जानते हो कि हम सब आप को ले कर कितने परेशान थे रात भर. और आप हैं कि…’’

पिंकी पति का नंबर देख कर एक सांस में बोले जा रही थी. तभी बीच में किसी ने उस की बात काट दी और रौबदार आवाज में बोला, ‘‘तू मेरी बात सुन. तेरा पति अनिल मेरे कब्जे में है. मैं ने उस का अपहरण कर लिया है.’’

‘‘अपहरण किया है?’’ चौंक कर पिंकी बोली.

‘‘तूने सुना नहीं, क्या कहा मैं ने? तेरे पति का अपहरण किया है, अपहरण.’’

‘‘तुम कौन हो भाई.’’ बिना घबराए, हिम्मत जुटा कर पिंकी आगे बोली, ‘‘तुम ने ऐसा क्यों किया? मेरे पति से तुम्हारी क्या दुश्मनी है, जो उन का अपहरण किया?’’

‘‘ज्यादा सवाल मत कर. जो मैं कहता हूं चुपचाप सुन. फिरौती के 10 लाख रुपयों का बंदोबस्त कर के रखना. मेरे दोबारा फोन का इंतजार करना. मैं दोबारा फोन करूंगा. रुपए कब और कहां पहुंचाने हैं, बताऊंगा. हां, ज्यादा चूंचपड़ करने या होशियारी दिखाने की कोशिश मत करना और न ही पुलिस को बताना. नहीं तो तेरे पति के टुकड़ेटुकड़े कर के कौओं को खिला दूंगा, समझी.’’ फोन करने वाले ने पिंकी को धमकाया.

‘‘नहीं…नहीं उन्हें कुछ मत करना.’’ पिंकी फोन पर गिड़गिड़ाने लगी, ‘‘तुम जो कहोगे, मैं वही करूंगी. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं. मैं पुलिस को कुछ नहीं बताऊंगी. प्लीज, उन्हें छोड़ दो. पैसे कहां पहुंचाने हैं, बता दो. तुम्हारे पैसे समय पर पहुंच जाएंगे.

‘‘तुम बहुत समझदार हो. बहुत जल्द मेरी बात समझ गई. रुपए का इंतजाम कर के रखना, जल्द ही फोन कर के बताऊंगा कि पैसे कब और कहां पहुंचाने हैं.’’ इस के बाद दूसरी ओर से फोन कट गया. अपहर्त्ताओं को दिए 10 लाख रुपए स्क्रीन पर जिस नंबर को देख कर पिंकी की आंखों में चमक जागी थी, वह नंबर उस के पति का था. बदमाशों ने अनिल के फोन से काल कर के फिरौती की रकम मांगी थी. ताकि पुलिस उन तक पहुंच न सके. खैर, पति के अपहरण की जानकारी पिंकी ने जैसे ही घर वालों को दी, उस की बातें सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. किंतु उन्हें इस बात से थोड़ी तसल्ली हुई थी कि अनिल जिंदा हैं और बदमाशों के कब्जे में हैं. अगर उन्हें फिरौती की रकम दे दी जाए तो उन की सहीसलामत वापसी हो सकती है.

अनिल उरांव की मिली लाश बदमाशों की धमकी सुन कर पिंकी और उस की ससुराल वालों ने पुलिस को बिना कुछ बताए 10 लाख रुपए का इंतजाम कर लिया और शाम होतेहोते बदमाशों के बताए अड्डे पर फिरौती के 10 लाख रुपए पहुंचा दिए गए. बदमाशों ने रुपए लेने के बाद देर रात तक अनिल को छोड़ देने का भरोसा दिया था. पूरी रात बीत गई, लेकिन अनिल उरांव लौट कर घर नहीं पहुंचे तो घर वाले परेशान हो गए. अनिल उरांव के फोन पर घर वालों ने काल की तो वह बंद आ रहा था. जिन दूसरे नंबरों से बदमाशों ने 3 बार काल की थी, वे नंबर भी बंद आ रहे थे. इस का मतलब साफ था कि फिरौती की रकम वसूलने के बाद भी बदमाशों ने अनिल उरांव को छोड़ा नहीं था. बदमाशों ने उन के साथ गद्दारी की थी. यह सोच कर घर वाले परेशान थे.

बात 2 मई, 2021 की सुबह की है. के. नगर थाने के झुन्नी इस्तबरार के डंगराहा गांव की महिलाएं सुबहसुबह गांव के बाहर खेतों में आई थीं. तभी उन्होंने खेत में जो दृश्य देखा, वह दंग रह गईं. किसी आदमी का एक हाथ जमीन के बाहर झांक रहा था. जमीन के बाहर हाथ देख कर महिलाएं उलटे पांव गांव की ओर भागीं और गांव पहुंच कर पूरी बात गांव के लोगों को बताई. खेत में लाश गड़ी होने की सूचना मिलते ही गांव वाले मौके पर पहुंच गए और इस की सूचना के. नगर थाने को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी डंगराहा पहुंच गए और गड्ढे से लाश बाहर निकलवाई. शव का निरीक्षण करने पर पता चला कि हत्यारों ने मृतक के साथ मानवता की सारी हदें पार कर दी थीं.

उन्होंने किसी नुकीली चीज से मृतक की दोनों आंखें फोड़ दी थीं और शरीर पर चोट के कई जगह निशान थे. डंगराहा में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना जैसे ही अनिल के घर वालों को मिली, वे भी मौके पर जा पहुंचे थे. उन्होंने लाश देखते ही पहचान ली. घर वाले चीखचीख कर प्रियंका उर्फ दुलारी के ऊपर हत्या का आरोप लगा रहे थे. लोजपा नेता की लाश मिलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी. घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. अपहर्त्ताओं ने धोखा किया था. रुपए लेने के बाद भी उन्होंने हत्या कर दी थी. जैसे ही नेताजी की हत्या की सूचना लोजपा कार्यकर्ताओं को मिली, वे उग्र हो गए और शहर के हर खास चौराहों को जाम कर आग के हवाले झोंक दिया तथा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे.

इधर पुलिस ने लाश अपने कब्जे में ले कर वह पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी और आगे की काररवाई में जुट गए. पुलिस ने मृतक के घर वालों के बयान के आधार पर उसी दिन दोपहर के समय मृतक की प्रेमिका प्रियंका उर्फ दुलारी को उस के घर से हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए के. हाट थाने ले आई. प्रियंका ने पहले तो पुलिस को खूब इधरउधर घुमाया, किंतु जब उस की दाल नहीं गली तो उस ने पुलिस के सामने अपने घुटने टेक दिए. प्रेमिका प्रियंका ने उगला हत्या का राज अपना जुर्म कबूल करते हुए प्रियंका ने कहा,

‘‘इस कांड को अंजाम देने में मैं अकेली नहीं थी. 4 और लोग शामिल थे. घटना का मास्टरमांइड अंकित यादव है और उसी ने योजना के तहत इस घटना को अंजाम दिया था.’’

प्रियंका के बयान के बाद उस की निशानदेही पर पुलिस ने 2 बदमाशों मोहम्मद सादिक उर्फ राहुल और चुनमुन झा उर्फ बटेसर को धर दबोचा और थाने ले आई. घटना का मास्टरमाइंड अंकित यादव और उस का भांजा मिट्ठू कुमार यादव उर्फ मिट्ठू फरार थे. आरोपी मोहम्मद सादिक और चुनमुन झा ने भी अपने जुर्म कबूल कर लिए थे. पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के स्थान पर उपर्युक्त सभी को नामजद करते हुए भादंवि की धारा 302, 120बी, 364ए और एससी/एसटी ऐक्ट भी लगाया. पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों प्रियंका उर्फ दुलारी, मोहम्मद सादिक उर्फ राहुल और चुनमुन झा उर्फ बटेसर को अदालत में पेश कर उन्हें जेल भेज दिया और फरार आरोपियों अंकित यादव और मिट्ठू कुमार यादव की तलाश में सरगर्मी से जुट गई थी.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में आरोपितों के बयान के आधार पर कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

35 वर्षीय अनिल उरांव मूलरूप से बिहार के पूर्णिया जिले के के. हाट थाना क्षेत्र स्थित जेपी नगर के रहने वाले थे. पिता जयप्रकाश उरांव के 2 बच्चे थे. बड़ी बेटी सीमा और छोटा बेटा अनिल. जयप्रकाश एक रिहायशी एस्टेट के मालिक थे. विरासत में मिली अरबों की संपत्ति पुरखों की जमींदारी थी. उन्हें अरबों रुपए की यह चलअचल संपत्ति विरासत में मिली थी. आगे चल कर यही संपत्ति उन के बेटे अनिल उरांव के नाम हो गई थी. क्योंकि पिता के बाद वही इस संपत्ति का इकलौता वारिस था.

जयप्रकाश एक बड़ी प्रौपर्टी के मालिक थे. उन का समाज में बड़ा नाम था. उन के घर से कोई गरीब दुखिया कभी खाली हाथ नहीं जाता था. गरीब तबके की बेटियों की शादियों में वह दिल खोल कर दान करते थे. गरीबों की दुआओं का असर था कि कभी घर में धन की कमी नहीं हुई. अगर यह कहें कि लक्ष्मी घर के कोनेकोने में वास करती थी तो गलत नहीं होगा. यही नहीं, उन्होंने अपनी बिरादरी के लिए बहुत कुछ किया था, इसलिए लोग उन का सम्मान करते थे. बाद के दिनों में जब जयप्रकाश का स्वर्गवास हुआ तो उन्हीं के नाम पर उस कालोनी का नाम जेपी नगर रख दिया गया था.

बहरहाल, अनिल को यह संपत्ति विरासत में मिली थी, इसलिए उस की कीमत वह नहीं समझ रहे थे. पुरखों की यह दौलत अपने दोनों हाथों से यारदोस्तों पर पानी की तरह बहाने में जरा भी नहीं हिचकिचाते थे.  समय के साथ अनिल की पिंकी के साथ शादी हो गई. गृहस्थी बसते ही वह 2 बच्चों प्रांजल और मोनू के पिता बने. अनिल की जिंदगी मजे से कट रही थी. खाने को अच्छा भोजन था, पहनने के लिए महंगे कपड़े थे और सिर ढकने के लिए शानदार और आलीशान मकान था. कहते हैं, जब इंसान के पास बिना मेहनत किए दौलत आ जाए तो उस के पांव दलदल की ओर बढ़ने में देरी नहीं लगती है. अनिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था.

जमींदार घर का वारिस तो थे ही वह. अरबों की अचल संपत्ति तो थी ही उन के पास. धीरेधीरे उन्होंने उन जमीनों को बेचना शुरू किया. बेशकीमती जमीनों के सौदों से उन के पास रुपए आते रहे. जब उन के पास रुपए आए तो राजनीति की चकाचौंध से आंखें चौधियां गई थीं. उन के रिश्ते के मामा राधा उरांव राजनीति के पुराने खिलाड़ी थे. राजनीति का ककहरा अनिल ने उसी मामा से सीखा और किस्मत आजमाने रामविलास पासवान के पास पहुंच गए. उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप अपना हाथ अनिल के सिर पर रख दिया और उन्हें आदिवासी प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. खद्दर का सफेद कुरता पायजामा पहन कर अनिल उरांव ताकतवर हो गए थे. यह घटना से 7 साल पहले की बात है.

अमीरों की तरह ठाठबाट थे प्रियंका के अनिल के पास अब पैसों के साथ साथ सत्ता की पावर थी और बड़ेबड़े माननीयों के बीच में उठनाबैठना भी. पहली बार अनिल ने सत्ता के गलियारे का मीठा स्वाद चखा था. माननीयों के सामने जब नौकरशाह सैल्यूट मारते थे, यह देख कर अनिल का दिल बागबाग हो जाता था. यहीं से प्रियंका उर्फ दुलारी नाम की महिला अनिल उरांव की किस्मत में दुर्भाग्य की कुंडली मार कर बैठ गई थी. तब कोई नहीं जानता था कि यही प्रियंका एक दिन नागिन बन कर अनिल को डस लेगी. 36 वर्षीया प्रियंका हाट थानाक्षेत्र में स्थित केसी नगर कालोनी में दूसरे पति राजा के साथ रहती थी. पहला पति उसे बहुत पहले तलाक दे चुका था. उस के कोई संतान नहीं थी लेकिन दोनों बड़े ठाठबाट से रहते थे, अमीरों की तरह.

कई कमरों वाले उस के शानदार और आलीशान मकान में सुखसुविधाओं की सारी चीजें मौजूद थीं. घर में कमाने वाला सिर्फ उस का पति था. एक आदमी की कमाई में ऐसी शानोशौकत देख कर मोहल्ले वाले दंग रहते थे. प्रियंका की शानोशौकत देख कर मोहल्ले वालों का दंग रहना जायज था. उस का पति राजा पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजनाथ यादव का एक मामूली सा कार ड्राइवर था. उस की इतनी आमदनी भी नहीं थी कि वह घर खर्च के अलावा नवाबों जैसी जिंदगी जिए. ये ऐशोआराम तो प्रियंका की खूबसूरती की देन थी. गोरीचिट्टी और तीखे नयननक्श वाली प्रियंका की मोहल्ले में बदनाम औरतों में गिनती होती थी. शहर के बड़ेबड़े धन्नासेठों, भूमाफियाओं और नेताओं का उस के घर पर उठनाबैठना था. उस में लोजपा का युवा नेता अनिल उरांव का नाम भी शामिल था.

शादीशुदा होते हुए भी अनिल उरांव प्रियंका की गोरी चमड़ी के इस कदर दीवाने हुए कि उसे देखे बिना रह नहीं पाते थे. लेकिन प्रियंका उन से तनिक भी प्यार नहीं करती थी. वह तो केवल उन की दौलत से प्यार करती थी. वह जानती थी कि अनिल एक एटीएम मशीन है. बस, उस से दौलत निकालते जाओ, निकालते जाओ और ऐश करते जाओ. प्रियंका ने बनाई योजना अनिल उरांव जिस प्रियंका के प्यार में दीवाने थे, पूर्णिया का शूटर अंकित यादव उर्फ अनंत भी उसी प्रियंका को बेपनाह चाहता था. अनिल का उस की प्रेमिका प्रियंका की ओर आकर्षित होना, अंकित के सीने पर सांप लोटने जैसा था.

उस ने प्रियंका से कह दिया था ‘‘तू अपने आशिक से कह देना कि मेरी चीज पर नजर न डाले, वरना जिस दिन मेरा भेजा गरम हो गया तो उस की खोपड़ी में रिवौल्वर की सारी गोलियां डाल दूंगा.’’

फिर उस ने अपने प्रेमी अंकित को समझाया, ‘‘देखो अंकित, तुम ठहरे गरम खून के इंसान. जब देखो गोली, कट्टा और बंदूक की बातें करते हो, कभी ठंडे दिमाग से काम नहीं लेते. जिस दिन से ठंडे दिमाग से सोचना शुरू कर दोगे, उस दिन बिना गोली, कट्टे के सारे काम बन जाएंगे. क्यों बेवजह परेशान हो कर अपना ब्लड प्रैशर बढ़ाते हो. मैं क्या कहती हूं, उसे ध्यान से सुनो. मेरे पास एक नायाब तरीका है. जिस से सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.’’

‘‘बता क्या कहना चाहती है तू.’’ अंकित ने पूछा.

‘‘यही कि अनिल उरांव का अपहरण कर लेते हैं और बदले में उस के घर वालों से फिरौती की एवज में मोटी रकम ऐंठ लेते हैं. नेताजी की जान के बदले उस के घर वालों के लिए 10-20 लाख देना कोई बहुत बड़ी बात नहीं होगी. बोलो क्या कहते हो?’’ प्रियंका ने प्लान बनाया.

‘‘ठीक है जो करना हो, जल्दी करना. उस गैंडे को तेरे नजदीक देख कर मेरे तनबदन में आग सी लग जाती है, कहीं ऐसा न हो कि मैं अपना आपा खो दूं और तू भी स्वाहा हो जाए. जो करना है, जल्दी करना, समझी.’’ अंकित बोला.

‘‘ठीक है, बाबा ठीक है. क्यों बिना मतलब के अपना खून जलाते हो. समझो कि काम हो गया और तुम्हारी राह का कांटा भी हट गया.’’ प्रियंका ने कहा.

प्रियंका और अंकित ने मिल कर अनिल के अपहरण की योजना बना ली. योजना के मुताबिक, 29 अप्रैल, 2021 की सुबह प्रियंका ने अनिल उरांव को फोन कर के अपने घर आने को कहा. अनिल भतीजे राजन को साथ ले कर मोटरसाइकिल से निकले और बीच रास्ते में खुद मोटरसाइकिल से नीचे उतर कर कहा प्रियंका के यहां जा रहा हूं. जब फोन करूं तो बाइक ले कर चले आना. फिरौती ले कर बदल गई नीयत अनिल प्रियंका के यहां पहुंचे तो उस के घर पर पहले से शूटर अंकित यादव उर्फ अनंत, उस का भांजा मिट्ठू कुमार यादव उर्फ मिट्ठू, मोहम्मद सादिक उर्फ राहुल और चुनमुन झा उर्फ बटेसर मौजूद थे.

अंकित को देख कर अनिल घबरा गए और वापस लौटने लगे तो चारों ने लपक कर उन्हें पकड़ लिया. अनिल ने बदमाशों के चंगुल से बचने के लिए खूब संघर्ष किया. कब्जे में लेने के लिए बदमाशों ने अनिल को लातघूंसों से खूब मारा और कपड़े वाली मोटी रस्सी से उन के हाथपैर बांध कर उन्हें कमरे में बंद कर दिया और उन का फोन भी अपने कब्जे में ले लिया ताकि वह किसी से बात न कर सकें. फिर उन्हीं के फोन से अंकित ने अनिल के घर वालों को फोन कर के अपहरण होने की जानकारी देते हुए फिरौती के 10 लाख रुपए की मांग की. उस के बाद मोबाइल फोन से सिम निकाल कर तोड़ कर फेंक दिया ताकि पुलिस उन तक पहुंच न पाए.

30 अप्रैल, 2021 को फिरौती की रकम मिलने के बाद बदमाशों की नीयत बदल गई. चारों ने प्रियंका के घर पर ही अनिल की गला दबा कर हत्या कर दी और पेचकस जैसे नुकीले हथियार से अंकित ने अनिल की दोनों आंखें फोड़ दीं. फिर उसी रात अनिल की लाश के. नगर थाने के डंगराहा के एक खेत में गड्ढा खोद कर दफना दी. जल्दबाजी में लाश दफन करते समय मृतक का एक हाथ बाहर निकला रह गया और वे कानून के शिकंजे में फंस गए. कथा लिखे जाने तक फरार चल रहा मुख्य आरोपी अंकित यादव उर्फ अनंत और उस का भांजा मिट्ठू कुमार यादव दोनों दरभंगा जिले से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिए गए थे. दोनों आरोपियों ने लोजपा नेता अनिल उरांव के अपहरण और हत्या  करने का जुर्म स्वीकार लिया था.

जांचपड़ताल में प्रियंका के असम में करोड़ों रुपए संपत्ति का पता चला है, जो अपराध से कमाई गई थी. पुलिस ने संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. कथा लिखे जाने तक पुलिस पांचों आरोपियों प्रियंका उर्फ दुलारी, अंकित यादव, मिट्ठू कुमार यादव, मोहम्मद सादिक और चुनमुन झा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही थी. पांचों आरोपी जेल की सलाखों के पीछे अपने किए की सजा भुगत रहे थे. Crime ki Kahani

—कथा मृतक के रिश्तेदारों और पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Hindi love Story in Short : एक नेता की प्रेम कहानी

Hindi love Story in Short : सोनिया भारद्वाज को अपने 2 पतियों से वह नहीं मिला, जिस की उसे आकांक्षा थी. तभी तो उस ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्वमंत्री उमंग सिंघार को तीसरा पति बनाने के लिए कदम बढ़ाए. लेकिन शादी के बंधन में बंधने से पहले ही जिस तरह सोनिया ने नेताजी के बंगले में सुसाइड किया, उस से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं.

‘अब मैं और सहन नहीं कर सकती. मैं ने अपनी तरफ से सब कुछ किया लेकिन उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है. मुझे डर लगता है कि उमंग मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं देना चाहते… उन की किसी भी चीज को टच करो तो उन्हें बुरा लगता है. इस बार भी मैं खुद भोपाल आई, जबकि वह नहीं चाहते थे कि मैं आऊं. मैं कभी तुम्हारे जीवन का हिस्सा नहीं बन पाई. आर्यन सौरी, मैं तुम्हारी लाइफ के लिए कुछ नहीं कर पाई. मैं जो कुछ भी कर रही हूं अपनी मरजी से कर रही हूं, इस में किसी की कोई गलती नहीं है.

‘उमंग, आप के साथ मैं ने सोचा था कि लाइफ सेट हो जाएगी. आई लव यू. मैं ने बहुत कोशिश की एडजस्ट करने की, पर आप ने मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं दी. सौरी.’

यह लाइनें हैं उस पत्र की, जो सोनिया भारद्वाज ने एक पूर्वमंत्री के बंगले में आत्महत्या करने से पहले लिखा था. 37 वर्षीय सोनिया भारद्वाज की जिंदगी कई मायनों में आम औरतों से काफी अलग थी. बहुत कुछ होते हुए भी उस के पास कुछ नहीं था. वह निहायत खूबसूरत थी और उम्र उस पर हावी नहीं हो पाई थी. कोई भी उसे देख कर यह नहीं मान सकता था कि वह 19 साल के एक बेटे की मां भी है. औरत अगर खूबसूरत होने के साथसाथ विकट की महत्त्वाकांक्षी भी हो तो जिंदगी की बुलंदियां छूने से उसे कोई रोक नहीं सकता. लेकिन अगर वह अपनी शर्तों पर मंजिल और मुकाम हासिल करने की कोशिश करती है तो अकसर उस का अंजाम वही होता है जो सोनिया का हुआ.

बीती 16 मई की रात सोनिया ने आत्महत्या कर ली. भोपाल के पौश इलाके शाहपुरा के बी सेक्टर के बंगला नंबर 238 में फांसी के फंदे पर झूलने और सुसाइड नोट लिखने से पहले उस ने और क्याक्या सोचा होगा, यह तो कोई नहीं बता सकता. लेकिन अपने सुसाइड नोट में उस ने जो लिखा, उस से काफी हद तक यह समझ तो आता है कि वह अपने तीसरे प्रेमी और मंगेतर पूर्वमंत्री उमंग सिंघार की तरफ से भी नाउम्मीद हो चुकी थी. जिंदगी भर प्यार और सहारे के लिए भटकती सी रही हरियाणा के अंबाला के बलदेव नगर इलाके के सेठी एनक्लेव की रहने वाली सोनिया ने आखिरकार भोपाल आ कर एक पूर्व मंत्री उमंग सिंघार के बंगले पर ही खुदकुशी क्यों की, इस सवाल के जबाब में सामने आती है 2 अधेड़ों की अनूठी लव स्टोरी, जिसे शुरू हुए अभी बहुत ज्यादा वक्त नहीं हुआ था.

हालांकि 2 साल एकदूसरे को समझने के लिए कम नहीं होते, पर लगता ऐसा है कि उमंग और सोनिया दोनों ही एकदूसरे को समझ नहीं पाए थे और अगर समझ गए थे तो काफी दूर चलने के बाद कदम वापस नहीं खींच पा रहे थे. सोनिया की पहली शादी कम उम्र में अंबाला के ही संजीव कुमार से हो गई थी. शादी के बाद कुछ दिन ठीकठाक गुजरे. इस दौरान उस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम आर्यन रखा. 19 साल का हो चला आर्यन इन दिनों शिमला के एक इंस्टीट्यूट से होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कर रहा है. आर्यन के जन्म के बाद संजीव और सोनिया में खटपट होने लगी, जिस का दोष सोनिया के सिर ही मढ़ा गया. जिस का नतीजा अलगाव की शक्ल में सामने आया.

कुछ समय तनहा गुजारने के बाद सोनिया ने एक बंगाली युवक से दूसरी शादी कर ली. लेकिन उस का दूसरा पति भी उसे जल्द छोड़ कर भाग खड़ा हुआ. फिर जरूर हुई सहारे की अब सोनिया के सामने सब से बड़ी चुनौती आर्यन की परवरिश की थी, जिस के लिए उस ने एक नामी कौस्मेटिक कंपनी में नौकरी कर ली . थोड़ा पैसा आया और जिंदगी पटरी पर आने लगी तो सोनिया को फिर एक सहारे की जरूरत महसूस हुई. यह सहारा उसे दिखा और मिला भी 47 वर्षीय उमंग सिंघार में, जिन से उस की जानपहचान एक मैट्रीमोनियल पोर्टल के जरिए हुई थी. उमंग सिंघार की गिनती मध्य प्रदेश के दबंग जमीनी और कद्दावर नेताओं में होती है. वह निमाड़ इलाके की गंधवानी सीट से तीसरी बार विधायक हैं और कमलनाथ मंत्रिमंडल में वन मंत्री भी रह चुके हैं.

उमंग की बुआ जमुना देवी अपने दौर की तेजतर्रार आदिवासी नेता थीं. उन की मौत के बाद उमंग को उन की जगह मिल गई. निमाड़ इलाके में जमुना देवी के बाद उमंग कांग्रेस के प्रमुख आदिवासी चेहरा हो गए, जिन के राहुल गांधी से अच्छे संबंध हैं. कहा यह भी जाता है कि वह उन गिनेचुने नेताओं में से एक हैं, जिन की पहुंच सीधे राहुल गांधी तक है. विरासत में मिली राजनीति को उमंग ने पूरी ईमानदारी और मेहनत से संभाला और पार्टी आलाकमान को कभी निराश नहीं किया. झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें वहां की जिम्मेदारी भी दी थी, जिस पर वह खरे उतरे थे. वहां उन्होंने आदिवासी इलाकों में ताबड़तोड़ दौरे किए थे, नतीजतन कांग्रेस और जेएएम का गठबंधन भाजपा से सत्ता छीनने में सफल हो गया था.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी एक अंतरंग इंटरव्यू के दौरान, जो रांची में उन के घर पर लिया गया था, इस प्रतिनिधि से उमंग की भूमिका की तारीफ की थी. उमंग सिंघार भी आदिवासियों को हिंदू नहीं मानते और आदिवासी इलाकों में हिंदूवादी संगठनों की गतिविधियों का अकसर विरोध करते रहते हैं. पिछले साल तो उन्होंने इन इलाकों में रामलीला किए जाने का भी विरोध किया था. राजनीतिक जीवन में सफल रहे उमंग की व्यक्तिगत जिंदगी बहुत ज्यादा सुखी और स्थाई नहीं रही. सोनिया की तरह उन की भी 2 शादियां पहले टूट चुकी हैं. पहली पत्नी से तो उन्हें 2 बच्चे भी हैं. यानी सोनिया से शादी हो पाती तो यह उन की भी तीसरी शादी होती.

बहरहाल, दोनों की जानपहचान जल्द ही मेलमुलाकातों में बदल गई और दोनों अकसर मिलने भी लगे. दिल्ली, अंबाला और भोपाल में इन दोनों ने काफी वक्त साथ गुजारा और दिलचस्प बात यह कि किसी को इस की भनक भी नहीं लगी. और जब लगी तो खासा बवंडर मच गया. आत्महत्या करने से पहले सोनिया ने अपने सुसाइड नोट में उमंग की तरफ इशारा करते हुए जो लिखा, वह ऊपर बताया जा चुका है. कोरोना की दूसरी लहर के कहर और लौकडाउन के चलते भोपाल भी सन्नाटे और दहशत में डूबा था. लोग अपने घरों में कैद थे. जैसे ही उमंग के बंगले पर एक युवती के आत्महत्या करने की खबर आम हुई तो इस की हलचल सियासी हलकों में भी हुई.

पुलिस की जांच में उजागर हुआ कि सोनिया भोपाल करीब 25 दिन पहले आई थी और तब से यहीं रह रही थी. एक तरह से दोनों लिवइन रिलेशनशिप में थे.  हादसे के 3 दिन पहले ही दोनों के बीच कहासुनी भी हुई थी. इस के तुरंत बाद उमंग अपने विधानसभा क्षेत्र गंधवानी चले गए थे. नौकर के बयान पर मामला दर्ज बंगले पर ड्यूटी बजा रहे उमंग के नौकर गणेश और उस की पत्नी गायत्री ने अपने बयान में इन दोनों के बीच होने बाली कलह की पुष्टि की. 17 मई, 2021 की सुबह जब गायत्री उमंग के औफिस, जो सोनिया के कमरे में तब्दील हो गया था, पहुंची तो वह अंदर से बंद था. सोनिया चूंकि पहले भी 2 बार इस बंगले में आ चुकी थी, इसलिए दोनों उस की वक्त पर उठने और कसरत करने की आदत से वाकिफ हो गए थे.

गायत्री ने यह बात गणेश को बताई और गणेश ने मोबाइल पर उमंग को बताई तो उमंग ने अपने नजदीकियों को बंगले पर देखने जाने को कहा. उमंग के परिचितों ने जैसेतैसे जब कमरा खोला तो वह यह देख कर सन्न रह गए कि सोनिया ग्रिल पर लटकी है और उस के गले में फांसी का फंदा कसा हुआ है. तुरंत ही इस की खबर उन्होंने उमंग और फिर पुलिस को दी. घबराए उमंग बिना देर किए भोपाल रवाना हो लिए. अब तक मध्य प्रदेश में अटकलों और अफवाहों का बाजार गरमा चुका था और पुलिस बंगले को घेर चुकी थी. शुरुआती जांच और पूछताछ के बाद सोनिया की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई और उस की मौत की खबर अंबाला में रह रही उस की मां कुंती, बेटे आर्यन और भांजे दीपांशु को भी दी गई .

दीपांशु ने पुलिस को बताया कि पिछली रात को ही सोनिया ने घर वालों से वीडियो काल के जरिए बात की थी, लेकिन तब वह खुश दिख रही थी. ये लोग भी भोपाल के लिए चल दिए. उमंग ने दिया सधा हुआ बयान अब हर किसी को उमंग की प्रतिक्रिया का इंतजार था, जिन्होंने भोपाल आ कर बेहद सधे ढंग से कहा कि सोनिया उन की अच्छी मित्र थी. उस के यूं आत्महत्या करने से मैं हैरान हूं. हम दोनों जल्द ही शादी करने वाले थे. सोनिया के अंतिम संस्कार के वक्त वह उस की मां के गले से लिपट कर रोए तो बहुत कुछ स्पष्ट हो गया कि अब इस हाईप्रोफाइल मामले में कुछ खास नहीं बचा है सिवाय कानूनी खानापूर्ति करने के. क्योंकि सोनिया के परिजन उमंग को उस की आत्महत्या का जिम्मेदार नहीं मान रहे थे.

इधर फुरती दिखाते हुए पुलिस ने उमंग के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने आईपीसी की धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर लिया था, जिस का आधार सोनिया के सुसाइड नोट और नौकरों के बयानों को बनाया गया था. अब आर्यन का बयान अहम हो चला था उस ने कहा, ‘‘मेरी मां की पिछली रात ही नानी से बात हुई थी. बातचीत के दौरान उन्होंने खुशीखुशी बात की थी. अगर वह मानसिक तनाव में होतीं तो नानी को जरूर बतातीं और न भी बतातीं तो बातचीत से उन की तकलीफ उजागर जरूर होती. अगले महीने उमंग सिंघार मां से शादी करने बाले थे. हमें पिछले साल दिसंबर में इन के संबंधों के बारे में पता चला था. उमंग सिंघार पर हमें कोई शक नहीं है ऐसा कोई सबूत भी नहीं है.’’

आर्यन के बयान से मिला नेताजी को लाभ आर्यन का यह बयान उमंग की कई दुश्वारियां दूर करने वाला था, लिहाजा उन्होंने सरकार पर चढ़ाई करते कहा कि सरकार इस मामले पर राजनीति कर रही है. मैं पुलिस को अपना बयान दे चुका हूं. सोनिया से मेरी बात 15 मई को हुई थी, तब तक वह ठीक थी और उस ने खाना भी खाया था. मैं पुलिस को सहयोग कर रहा हूं. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह आला पुलिस अफसरों से भी मिले और दूसरे राजनैतिक हथकंडे भी इस्तेमाल किए. इसी दौरान सोनिया के भांजे दीपांशु ने यह भी उजागर किया कि उस की मौसी सोनिया डिप्रेशन की मरीज थीं और इस की गोलियां भी खा रहीं थीं.

दीपांशु की इस बात से उमंग का कानूनी पक्ष तो मजबूत हुआ, लेकिन वह पूरी तरह बेगुनाह हैं यह नहीं कहा जा सकता. मुमकिन है वह सोनिया से ऊब गए हों या फिर उस की उन्हीं बेजा हरकतों से आजिज आने लगे हों, जिन के चलते उस के दोनों पतियों ने उसे छोड़ दिया था. ऐसे में उन्हें अपनी प्रेमिका को सहारा देना चाहिए था, जो अगर चाहती तो उन्हें बदनाम भी कर सकती थी और सुसाइड नोट में सीधे भी उन्हें दोषी ठहरा सकती थी. लेकिन उस ने ऐसा कुछ किया नहीं. हालांकि सोनिया जैसी औरतें बहुत मूडी और जिद्दी होती हैं क्योंकि वे अपनी शर्तों पर जीने में यकीन करती हैं. लेकिन आत्महत्या कर लेने का उन का फैसला कतई समझदारी या बुद्धिमानी का नहीं माना जा सकता.

सफल और सुखी जिंदगी के लिए हर किसी को कई समझौते करने पड़ते हैं, यह बहुत ज्यादा हर्ज की बात भी नहीं. अगर सोनिया थोड़ा सब्र रखती तो मनचाही जिंदगी जी भी सकती थी. लेकिन डिप्रेशन उसे ले डूबा, जिस की सजा अगर कोई भुगतेगा तो वह उस का लाडला आर्यन होगा, जिसे कभी पिता का सुख मिला ही नहीं. Hindi love Story in Short

 

Delhi News : प्रेमिका की हत्या के आरोपी ने अस्पताल में की आत्महत्या

Delhi News : एक चौंकाने वाले मामले में 22 अप्रैल, 2025 को प्रेमिका की हत्या के आरोप में पकड़े गए एक सख्स ने अस्तपाल में फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली. पुलिस जब अस्पताल में पहुंची तो वह  फंदे पर लटका हुआ था. पुलिस भी उसे देख कर दंग रह गई. सवाल उठता है आखिर इस शख्स ने खुदखुशी अस्पताल में ही क्यों की? पढ़ते हैं पूरी घटना विस्तार से-

यह घटना 13 जुलाई, 2025 को दिल्ली के तिहाड़ जेल की है, जहां रमेश करमाकर नामक एक मुलजिम ने जेल के अस्पताल की खिड़की पर लटक कर आत्महत्या कर ली. बताया गया कि 28 मई से रमेश करमाकर जेल नंबर 4 में बंद था.  उसे तिहाड़ की जेल नम्बर 3  में स्थित अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था. कर्मचारी जब 14 जुलाई को सुबह अस्पताल के कमरे में पहुंचे तो देखा कि कैदी फंदे पर लटका हुआ था. लटके हुए शव को देख पुलिस भी हैरान थी.

पुलिस ने तुंरत रमेश के शव को खिड़की से नीचे उतारा. घटना की जानकारी जब पुलिस प्रशासन को मिली तो पूरे जेल परिसर में हड़कंप मंच गया. पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम रमेश  करमाकर था, जो होटल में साफ सफाई का काम किया करता था. उसे अपनी प्रेमिका की हत्या के आरोप में  तिहाड़ की 4 नम्बर की जेल लाया गया था.  जेल में रमेश को चक्कर आने की शिकायत होने लगी और उस के दाएं कान में दर्द होने लगा था. उस की सुनने की क्षमता कम होने के कारण उसे 28 मई, 2025 को तिहाड़ जेल के अस्पताल मे इलाज के लिए भरती कराया गया. जहां उस का इलाज चल रहा था, लेकिन 13 जलाई की सुबह पुलिस ने देखा कि रमेश ने सुसाइड कर लिया है.

पुलिस ने बताया कि रमेश को 22 अप्रैल को अपनी पार्टनर की हत्या के आरोप में अरेस्ट किया गया था. जांच में सामने आया रमेश की पार्टनर यानि उस की प्रेमिका उसे बारबार धमकी दे रही थी कि वह उन के रिश्ते की सच्चाई उस की पत्नी को बता देगी. इसी डर के कारण रमेश ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी थी.

प्रशासन पर उठे सवाल

तिहाड़ जेल में सख्त सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद भी रमेश के सुसाइड ने पुलिस प्रशासन पर अब सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस अब हर पहलू पर जांच की कर रही है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रही है कि रमेश को खुदखुशी क्यों  करनी पड़ी. पुलिस अधिकारी अब यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी कौन सी वजह थी, जिस ने रमेश को आत्महत्या करने के लिए मजबूर  कर दिया था. पुलिस इस मामले की  गहराई से जांच कर रही है. Delhi News