UP News: मोहब्बत में क्राइम हरगिज नहीं

UP News: 35 साल की सुनीता भले ही 5 बच्चों की मां बन चुकी थी, लेकिन उस के गठीले बदन की कसावट पर गांव के अनेक युवा आहें भरते थे. गांव का 22 वर्षीय आशीष कुमार उर्फ अंशु तो उसे अपना दिल दे चुका था. अमरबेल की तरह दोनों की मोहब्बत बढ़ती गई. मोहब्बत के इसी समंदर में डूब कर एक दिन दोनों ऐसा खतरनाक क्राइम कर बैठे कि…

आशीष उर्फ अंशु और उस की प्रेमिका सुनीता ने वीरपाल की हत्या करने की ठान ली, क्योंकि वह उन दोनों की मोहब्बत में रोड़ा बन रहा था. वीरपाल सुनीता का पति था. वे दोनों यही सोच रहे थे कि उस की हत्या कब और कैसे की जाए? तय किया कि आधी रात के बाद वीरपाल की गोली मार कर हत्या घर में ही कर दी जाए. फिर शोर मचा दिया जाएगा कि बदमाश आए थे. घर का सामान भी बिखेर दिया जाएगा और लूट की घटना बनाने के लिए जेवर और नकदी लूट कर ले जाने का नाटक किया जाएगा.

तभी अंशु बोला, ”तमंचा और कारतूस का इंतजाम कहां से होगा?’’

सुनीता ने कहा, ”यह इंतजाम तुम्हें ही करना पड़ेगा. इस के लिए रुपयों की जरूरत भी पड़ेगी.’’

”रुपए का तो मैं इंतजाम कर लूंगा, लेकिन तमंचा और कारतूस मिलना इतना आसान नहीं है. चलो, मान लिया जाए कि ये चीजें मिल भी गईं तो वीरपाल को गोली कौन मारेगा?’’ अंशु बोला.

”तुम ठीक कह रहे हो. यदि उस समय बच्चे उठ गए, उन्होंने देख लिया तो हम दोनों पकड़े जाएंगे. फिर बिना सजा के नहीं बचेंगे. इस तरह हमारी प्रेम कहानी तो अधूरी रह जाएगी.’’ सुनीता ने आशंका जताई.

इस के बाद उन्होंने दूसरी योजना तैयार की. गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए सल्फास की गोलियों का प्रयोग होता है. अकसर यह सुनने में आता है कि लोग आत्महत्या के लिए इन गोलियों का सेवन करते हैं. उन्होंने सोचा कि क्यों न ये गोलियां किसी तरह वीरपाल को खिला दी जाएं.

यह तरीका दोनों को अच्छा लगा. फिर एक दिन सल्फास की गोलियों का पैकेट अंशु ने सुनीता को ला कर दे दिया. दोनों ने तय किया कि जब भी शराब के नशे में वीरपाल आएगा, खाने में मिला कर सल्फास की गोलियां उसे दे दी जाएंगी. इस से पहले कि योजना को अंजाम दिया जाता, सल्फास की गोलियों का पैकेट बच्चों के हाथ लग गया. बच्चे समझे कि पैकेट पापा लाए हैं. वीरपाल के सामने ले जा कर बच्चे पूछने लगे, ”पापा, ये गोलियां काहे की हैं?’’

वीरपाल गोलियों का पैकेट देख कर सन्न रह गया. वीरपाल ने पैकेट उलटपलट कर देखा तो उसे पता चला कि यह तो गेहूं को सुरक्षित रखने वाली सल्फास की गोलियां हैं.

गुस्से से आगबबूला होते हुए वीरपाल ने सुनीता से पूछा, ”सल्फास का पैकेट कौन लाया है?’’

सुनीता ने झूठ बोलते हुए कहा, ”गेहूं में घुन लगने लगे थे. इसलिए मैं ने ही यह पैकेट मंगाया है.’’

वीरपाल की हत्या करने का यह प्लान भी फेल हो गया. बात आईगई हो गई. कुछ समय बाद धान की फसल तैयार होने लगी. उस की रखवाली के लिए वीरपाल अकसर खेत पर जाया करता था. ग्रामीण क्षेत्र में कई तरह के जंगली जानवर फसलों को क्षति पहुंचाते हैं. उन से फसल को बचाने के लिए रात को भी अनेक किसान खेतों पर डेरा डाले रहते हैं.

वीरपाल भी धान की फसल की रखवाली के लिए खेत पर जाता था. नींद आने पर वह वहीं सो जाया करता था. शातिर दिमाग अंशु ने सुनीता से कहा, ”अब मौका आ गया है, वीरपाल को ठिकाने लगाया जा सकता है. जिस वक्त वीरपाल रात को खेत पर सोया हो, तभी उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया जाएगा.’’ सुनीता को योजना सही लगी और वह राजी हो गई. उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में थाना हयात नगर क्षेत्र में एक गांव स्थित है सहजना. इस गांव में दलवीर सिंह का परिवार निवास करता है. दलवीर सिंह के 5 बेटे और 5 बेटियां थीं. चौथे नंबर की बेटी सुनीता थी.

सुनीता का विवाह साल 2008 में जनपद मुरादाबाद के थाना बिलारी क्षेत्र के गांव अलेहदादपुर देवा नगला निवासी वीरपाल था. वीरपाल खेतीकिसानी के साथसाथ मजदूरी भी करता था. कभीकभी हरिद्वार में स्थित फैक्ट्री में मजदूरी करने भी चला जाता था. वीरपाल का एक बड़ा भाई है कुंवरपाल. वीरपाल की मां ज्ञानवती है, जो एक गृहिणी हैं. वीरपाल और सुनीता का वैवाहिक जीवन ठीकठाक गुजर रहा था. इस दौरान उन के 5 बच्चे हुए, जिन में 4 बेटियां और एक बेटा था.

5 बच्चों की मां होने के बावजूद सुनीता के हंसीमजाक में एक बेकाबू आग छिपी थी. उस के चेहरे पर जवानी की नैचुरल चमक थी. गालों की मुलायम लकीरों में मासूमियत और आत्मविश्वास दोनों एक साथ झलकते थे. उस की आंखें बड़ी साफ और गहरी थीं, मानो किसी के बोलने से पहले ही उस का मन पढ़ लेती हों. उस का शरीर किसी कठोर मेहनत से तराशा हुआ नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से सधे हुए अनुपातों वाला था. कंधे हलके चौड़े, कमर में नजाकत और चाल में लयबद्ध कोमलता, जिसे देख कर कोई भी तुरंत समझ जाए कि यह महिला तन से ही नहीं, मन से भी मजबूत है.

वह मध्यम कद की थी. उस का रंग गेहुंआ और चेहरा गोल था. उस की आंखें बड़ी और ध्यान खींचने वाली थीं, जिन में आत्मविश्वास का भाव दिखता था. बाल पूरी तरह से सिर को ढकने वाले दुपट्टे के नीचे छिपे रहते थे, जो पारंपरिकता और शालीनता दर्शाते थे. उस की नाक में एक छोटा नथ उस की पहचान को और उभारता था. होंठ थोड़े मोटे जरूर थे, लेकिन उन पर हलकी मुसकान दिखाई देती, जो उस में छिपी ममता और दृढ़ इच्छाशक्ति की झलक देती थी. उस की आंखों की चमक देखने वालों को भटकाने वाली पहेली सी लगती थी.

गांव की गलियों में जब भी सुनीता का नाम लिया जाता, लोग धीरे से मुसकरा देते. कोई जलन से, कोई तजुर्बे से. 5 बच्चों की मां होते हुए भी उस में कुछ ऐसा था, जो जवान दिलों को बेचैन कर देता था. उस की चाल, उस की बातों की मिठास और उस की आंखों में छिपी कामुक शरारत की वजह से 35 वर्षीय सुनीता गांव की अन्य महिलाओं से अलग पहचानी जाती थी. सब जानते थे कि वह साधारण महिला नहीं.

गांव में कुंवरपाल का परिवार भी निवास करता था. कुंवरपाल अलेहदादपुर गांव का दामाद था. करीब 2 दशक पहले इसी गांव में घरजमाई बन कर आया था. फिर गांव में ही बस गया था. उस के 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. एक बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी है. कुंवरपाल का बेटा आशीष कुमार उर्फ अंशु करीब 22 साल का एक कुंवारा नौजवान था. अंशु अपनी जवानी के चरम पर पहुंच चुका था. 22 साल की उम्र उस के चेहरे पर एक अलग ही चमक ले कर आई थी. वह चमक जो मेहनत, आत्मविश्वास और युवापन के मिलन से पैदा होती है.

उस के नैननक्श साधारण होते हुए भी बेहद आकर्षक थे. माथे पर गिरती हलकी बिखरी लटें और आंखों में मौजूद सहज चमक उसे अलग पहचान देती थी. उस का शरीर एकदम सधा हुआ था. न बहुत भारी, न बहुत पतला. छाती में कसावट और बांहों में हलकी उभरी नसें, उस के मेहनत भरे जीवन की गवाही देती थीं. चलते समय उस का आत्मविश्वास साफ दिखता था. कदमों में सधी हुई लय और शख्सियत में एक ऐसी गरिमा जो बिना बोले ही लोगों को उस की तरफ देखने पर मजबूर कर देती थी. अंशु की मुसकान उस के पूरे चेहरे को रोशन कर देती थी. उस की जवानी में एक तरह की साफगोई थी, वही मासूम पर दृढ़ ऊर्जा जो केवल 21-22 की उम्र में ही दिखाई देती है.

कुंवरपाल के साले का नाम भूप सिंह था. वह इस समय गांव के मौजूदा प्रधान है. असरदार व्यक्ति है. गांव में उस का काफी मानसम्मान भी है. अंशु का दिल किसी रिश्ते की बंदिश नहीं मानता था.

अंशु अपनी नानी के घर रहता था. उस की पैदाइश भी यहीं पर हुई थी, जहां उस की जवानी बेलगाम घोड़े सी दौड़ रही थी. उस के अय्याशी के किस्से भी कम न थे. मामला पकड़े जाने पर पंचायतें भी हुईं. उस के मामा को मामला लेदे कर निपटाना पड़ा. कई बार उस के मामा को काफी रकम मुआवजे के रूप में गांव की गरीब लड़कियों को देनी पड़ी. अकसर लड़की वाले बदनामी के डर से प्रधान के रुतबे और प्रभाव के कारण कानूनी काररवाई के लिए आगे नहीं बढ़े. इस का फायदा अंशु उठाता रहा और कई घटनाएं गांव में अंजाम दे दीं.

जब सुनीता और अंशु की राहें टकराईं, तो जैसे दो चिंगारियां एक ही पल में भड़क उठीं. फिर रिश्ता रिश्ता नहीं, एक अंधी ललक बन गया, जहां उम्र, रिश्तेदारी और समाज सब पीछे छूट गया. कहानी यहीं से मोड़ लेती है. प्यार और पागलपन के इस खेल में वह सुनीता अपने पति से तंग आ चुकी थी, और अंशु उस की चाहत में अंधा हो गया था. शाम का वक्त था. खेतों से किसानों की वापसी हो रही थी, ढलती धूप में चलती बकरियों की आवाजें, ऐसा लग रहा था कि उन्हें भी घर वापस ले जाया जा रहा है.

बीच में एक महिला जो अपने आंगन में पानी भर रही थी. उस के बच्चे पास ही खेल रहे थे, गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था, लेकिन इस शांति के पीछे एक तूफान पनप रहा था. अंशु गांव का मनचला, दुबलापतला मगर तेज नजर वाला जवान था. सब जानते थे कि अंशु की नजरें मासूम नहीं हैं और सुनीता भी यह बात समझती थी, मगर न जाने क्यों, उसे अब फर्क नहीं पड़ता था.

अंशु ने पहली बार बिना झिझक के उस से कहा, ”नानी, इतना पानी रोज क्यों भरती हो? कोई समंदर बनाना है क्या?’’

सुनीता मुसकराई, ”तेरे काम का समंदर नहीं है, डूब जाएगा तू इस में.’’

अंशु हंसा, ”डूबने का तो मन है ही, बस कोई मौका डूबने का मिल जाए.’’

उन के बीच का यह मजाक गांव के माहौल से ज्यादा गर्म था. दोनों जानते थे कि वो किस ओर बढ़ रहे हैं, मगर किसी को रोकने की हिम्मत न थी. धीरेधीरे ये मुलाकातें बढ़ीं. कभी खेत के किनारे, कभी सूनी पगडंडी पर तो कभी मकानों के पीछे के बाग में, जहां हवस और हंसी एक साथ घुलमिल जाती.

सुनीता अब अपने पति वीरपाल से ऊब चुकी थी. बच्चों और घर के झगड़ों ने उन के रिश्ते की जान निकाल दी थी. एक रात वीरपाल ने उसे रोकते हुए कहा, ”तू अब पहले जैसी नहीं रही, सुनीता.’’

तो उस ने ठंडे लहजे में जवाब दिया, ”हां, और तू भी मर्द जैसा नहीं रहा.’’

वीरपाल ने गुस्से में थप्पड़ मारा, मगर उस थप्पड़ की गूंज ने सुनीता के भीतर का सब कुछ तोड़ दिया. उसी रात वो चुपके से घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर निकली. अंशु उस का इंतजार कर रहा था.

”अंशु, मुझ से अब और नहीं सहा जाता,’’ सुनीता ने उस से कहा.

अंशु ने उस की आंखों में झांकते हुए फुसफुसाया, ”तो फिर खत्म कर देते हैं उसे, हमेशा के लिए.’’

सुनीता चौंकती हुई बोली, ”क्या मतलब?’’

”मतलब साफ है. तुम्हारे रास्ते में बस वो वीरपाल ही तो दीवार है. गिरा देंगे, उस दीवार को.’’

सुनीता चुप रही, मगर उस के दिल में डर और चाहत दोनों एक साथ पनपने लगे. बड़ी हिम्मत करने के बाद सुनीता सीधेसीधे प्रेमी को चुनौती देती हुई बोली, ”अगर तुम को मेरे साथ रहना है तो कुछ तो करना ही होगा, मगर उस के बाद क्या तुम मुझे पत्नी के रूप में स्वीकार करोगे?’’

”सुनीता, मैं ने तुम से प्यार किया है. पत्नी मान भी लिया है. अब तुम बताओ उस के बाद तुम्हारी क्या भूमिका होगी?’’

”मैं जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगी, तुम्हारा खयाल रखूंगी.’’

”अगर तुम मुझे पाना चाहते हो तो अब अपने नाना का काम तमाम कर ही दो.’’

अंशु का मामा प्रधान भूप सिंह जाति से जाटव है. एक ही बिरादरी के होने के नाते से प्रधान भूप सिंह, वीरपाल को गांव के रिश्ते में चाचा कहता था. इसी रिश्ते से अंशु वीरपाल को नाना और सुनीता को नानी कह कर संबोधित करता था. दोनों के संबंध जगजाहिर हो चुके थे. फिर भी गांव के लोगों को यकीन नहीं होता था कि दोनों की उम्र में इतना अंतर होने के बाद इन के बीच अवैध संबंध होंगे. वीरपाल 12 अक्तूबर, 2025 की रात को अपने धान के खेत पर सोने के लिए गए थे. अगले दिन जब गांव के लोग खेतों पर सुबहसुबह अपने काम के लिए निकले, तब उन्होंने देखा कि वीरपाल खेत में अपनी चारपाई पर लेटा हुआ था.

वीरपाल अकसर सुबहसुबह 5 बजे उठ कर घर आ जाता था. फ्रैश हो कर फिर से काम के लिए खेत पर आ जाता था, लेकिन उस दिन वह इतनी देर तक खेत में क्यों सो रहा है, लोग समझ नहीं पाए. पास जा कर लोगों ने देखा तो वह एकदम बेसुध सा लेटा हुआ था. उन्हें वीरपाल के शरीर पर कोई हरकत नहीं दिखी.  इस दौरान हड़कंप मच गया तो यह बात गांव तक पहुंची. काफी संख्या में ग्रामीण लोग उस के खेत पर पहुंच गए. गांव के एक डौक्टर को भी बुला लिया. उस ने नब्ज टटोलते ही वीरपाल को मृत घोषित कर दिया.

वीरपाल की पत्नी सुनीता भी खूब रोते हुए दहाड़े मारते हुए खेत पर पहुंच गई. पूरा चेहरा ढके हुए खूब रोए जा रही. उस को रोता देख कर लोगों का दिल पसीज गया कि अब इस बेचारी के बच्चों का क्या होगा? यह बात 13 अक्तूबर, 2025 की है. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को खबर देने की बात कही तो सुनीता कहने लगी कि मैं अपने पति की मिट्टी को खराब नहीं होने दूंगी. पुलिस हमारे पति का शरीर ले कर जाएगी. पोस्टमार्टम को भेजेगी. वहां चीरफाड़ होगी. पूरे शरीर को बरबाद कर देगी.

मैं अपने पति के साथ यह नहीं होने दूंगी. लेकिन कोई व्यक्ति पहले ही कोतवाली बिलारी में फोन कर के यह सूचना पुलिस को दे चुका था. सूचना पाते ही कोतवाल उदय प्रताप मलिक मय फोर्स के घटना स्तर पर पहुंच गए. शुरुआती जांच में मामला हत्या का प्रतीत हुआ, क्योंकि मृतक के गले पर दबाने के निशान थे. थोड़ीबहुत हलकीफुलकी छीनाझपटी जैसे निशान भी थे. इस से प्रतीत हो रहा था कि मृतक ने हत्यारों से थोड़ा बहुत संघर्ष भी किया है. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. घटनास्थल के आसपास का बड़ी बारीकी से मुआयना किया गया. आवश्यक सबूत इकट्ठे किए गए. मौके की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय मुरादाबाद भेज दिया.

कोतवाल उदय प्रताप मलिक ने मामले की जानकारी सीओ अशोक कुमार और एसपी (ग्रामीण) कुंवर आकाश सिंह को दे दी. अधिकारियों ने जांच के लिए पुलिस की दो टीमें गठित कर दीं. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी. गांव के लोगों ने पोस्टमार्टम से लाश आने के बाद वीरपाल का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस अपनी जांच कर ही रही थी. उसी दिन सुनने में आया कि वीरपाल की पत्नी सुनीता ग्रामीणों से लाश का पोस्टमार्टम कराने को मना कर रही थी. उस का कहना था कि ज्यादा शराब पी लेने से इस की स्वाभाविक मौत हुई होगी.

यह बात सुन कर पुलिस को वीरपाल की हत्या करने का शक उस की पत्नी सुनीता पर हो गया. सुनीता ने अपने पति की हत्या क्यों कराई? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए पुलिस ने जब छानबीन की तब पता चला कि गांव का ही एक युवक अंशु है, जिस से सुनीता का प्रेम प्रसंग चल रहा है. इतनी जानकारी मिलने पर अंशु भी पुलिस के शक के दायरे में आ गया. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया. इस के बाद उन से जब पूछताछ की गई तो उन्होंने पहले तो बातें गोलमोल करने की कोशिश की, लेकिन जब सख्ती की गई तब दोनों ने ही सच उगल दिया.

दोनों की उम्र में 13 से 14 साल का अंतर था. लोगों को जब इस बात का पता चला कि वास्तव में इन दोनों के बीच में प्रेम प्रसंग चल रहा था तो कोई इस बात को मानने को तैयार नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है, लेकिन जब सच सामने आया तो सब हैरान रह गए. इस दौरान सुनीता ने अपने आप को बचाने के लिए खूब प्लानिंग की थी. पहली प्लानिंग तो उस ने पुलिस को बुलाने से मना किया. लेकिन जब उसे लगा कि पुलिस आ गई है तो पोस्टमार्टम न हो पाए, इस के लिए उस ने पूरी कोशिश की.

पुलिस ने लाश को जब पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. तब सुनीता ने भागने का भी प्लान बना रखा था. जब उस के रिश्तेदार आए. दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक व झगड़ा चल रहा था तो एक रिश्तेदार सुनीता को अपनी बाइक पर बिठा कर वहां से निकलने वाला था, लेकिन जैसे ही सुनीता बाइक पर बैठी, गांव के लोगों ने देख लिया और उसे दौड़ कर पकड़ लिया. उस के बाद ग्रामीणों ने कहा कि जब तक पुलिस नहीं आएगी, तब तक कोई नहीं जाएगा. पुलिस को आने दो. उस के बाद जिस को जहां जाना हो, वो चला जाए.

पुलिस ने सुनीता और उस के प्रेमी आशीष कुमार उर्फ अंशु से पूछताछ की तो वीरपाल की हत्या के पीछे की ऐसी प्रेम कहानी सामने आई, जिस ने सभी को चौंका कर रख दिया. सुनीता गांव के रिश्ते में अंशु की नानी लगती थी. दोनों के खेत आसपास ही थे, इसलिए उन के बीच बातचीत होना आम बात थी. उसी दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया. और जल्द ही उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. सुनीता अंशु के प्यार की कायल हो गई थी. उस के सामने अपना पति वीरपाल फीका लगने लगा था. इसलिए जब भी उन का शारीरिक संबंध बनाने का मन होता था, तो सुनीता वीरपाल को शराब पिला कर धान की रखवाली करने के लिए रात को खेत पर भेज देती थी.

फिर अंशु को फोन कर के रात को अपने घर पर बुला लेती थी. फिर रात भर दोनों मौजमस्ती करते थे. इस तरह सुनीता अविवाहित अंशु के प्यार में डूब चुकी थी, लेकिन यह खेल ज्यादा दिनों तक छिप न सका. एक दिन इसी बीच रात में एक बार वीरपाल धान के खेत से घर वापस आया तो उस ने दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया. यह देख कर वीरपाल का खून खौल गया. अंशु तो फटाफट वहां से भाग गया, लेकिन सुनीता कहां जाती. तब वीरपाल ने उस दिन सुनीता की खूब पिटाई की. सुनीता ने उसी दिन सोच लिया था कि वीरपाल हमारे प्यार के बीच में रोड़ा बन रहा है. इसे तो निपटवाना ही पड़ेगा.

सुनीता ने उस समय तो पति से हाथ जोड़ कर माफी मांग ली थी. वीरपाल ने यह बात किसी को बदनामी की वजह से नहीं बताई. 2-4 दिन बाद सुनीता और अंशु का चोरीछिपे मिलनाजुलना जारी रहा. एक दिन सुनीता ने अशु को बताया कि वीरपाल हम दोनों के प्यार में रोड़ा बन रहा है. इसे ठिकाने लगाना है. इतना ही नहीं, उस ने धमकी भी दी कि अगर तूने इसे ठिकाने नहीं लगाया तो मैं जहर खा कर अपनी जान दे दूंगी, लेकिन तेरे बिना नहीं जी सकती.

यह सुन कर अंशु के जवान खून में उबाल आ गया. उसे लगा कि उस की प्रेमिका उस के लिए जान देने के लिए तैयार है. उस की जुदाई बरदाश्त नहीं कर पा रही. लिहाजा अंशु ने कहा, ”तुम ऐसा मत करो. हम वीरपाल को ठिकाने लगा देंगे.’’

12 अक्तूबर को सुबह करीब 8 बजे सुनीता अपने खेत पर धान झाड़ रही थी. वहां पर उस की फेमिली के कुछ लोग भी मौजूद थे. उस समय अंशु भी अपने खेत पर था. सुनीता ने अंशु को अपने पास बुलाया. उस के साथ वह बात कर रही थी, तभी वीरपाल वहां पर आ गया. उस ने दोनों को बात करते देखा तो वीरपाल दोनों पर आगबबूला हो गया गालीगलौज करने लगा. अंशु उसी समय वहां से अपने घर चला गया. उस के कुछ देर बात वीरपाल भी चला गया तो सुनीता ने अंशु को फिर से बुला लिया.

फिर दोनों ने मिल कर वीरपाल की हत्या करने की योजना बनाई. वारदात की अन्य योजना पर सहमति नहीं बनी तो सुनीता ने अंशु को बताया कि वीरपाल रात में धान की रखवाली करने के लिए खेत पर जा कर सोता है. वहीं पर उस की हत्या करना आसान रहेगा. अंशु उस की इस बात पर राजी हो गया. 13 अक्तूबर को रात में करीब साढ़े 12 बजे वीरपाल खेत पर सोने गया. तभी सुनीता ने यह जानकारी प्रेमी अंशु को दे दी.

इस के बाद जब अंशु रात में वीरपाल के खेत पर पहुंचा तो उस समय वीरपाल शराब के नशे में चारपाई पर सो रहा था. अंशु ने उस का गला दबाना शुरू कर दिया. तभी वीरपाल का एक हाथ अचानक अंशु के मुंह पर लगा तो वह घबरा गया. अंशु को लगा कि अब यदि वह जिंदा बच गया तो मामला बहुत गड़बड़ हो जाएगा. वीरपाल ने उठने की कोशिश की, लेकिन नशा अधिक होने के कारण वह उठ नहीं सका. अंशु ने फिर से वीरपाल को अपने काबू में किया और गला दबाने लगा. उस के गले को वह तब तक दबाए रखा, जब तक कि वीरपाल की सांसों की डोर हमेशा के लिए टूट नहीं गई.

जब वीरपाल निढाल हो गया, उस का छटपटाना बंद हो गया, उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई, तब कहीं अंशु को तसल्ली हुई. फिर भी अंशु ने उस की नाक पर हाथ रख कर एक बार चैककिया कि वह मर चुका है कि नहीं.

जब उसे विश्वास हो गया कि अब इस का काम तमाम हो गया है तो अंशु वहां से सीधे अपनी प्रेमिका सुनीता के घर पहुंचा. उस ने प्रेमिका को खुशखबरी देते हुए कहा कि तुम्हारे पति का मैं ने काम तमाम कर दिया है. अब वो तुम्हें कभी परेशान नहीं करेगा. इस मर्डर की खुशी में दोनों ने रात भर मौजमस्ती की. इस के बाद उन्होंने पुलिस से बचने का प्लान बनाया. फिर रात में ही अंशू अपने घर चला गया. दूसरे दिन अंशु भीड़ के साथ घटना स्थल पर पहुंचा और परिवार के लोगों के साथ रहा. पोस्टमार्टम से ले कर अंतिम संस्कार तक हर कार्यक्रम में वह वीरपाल के फेमिली वालों के साथ ही रहा, ताकि किसी को उस पर कोई शक न हो, लेकिन इस के बावजूद वह पुलिस के शक के दायरे में आ गया.

मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या कर देना आया. जिस के बाद मृतक के बड़े भाई कुंवरपाल की तहरीर के आधार पर धारा 103 (1)/61(2) (क) बीएनएस के तहत आशीष कुमार उर्फ अंशु और सुनीता को नामजद किया गया. 24 घंटे के भीतर पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझा दी. पूछताछ के बाद सुनीता और उस के प्रेमी आशीष कुमार उर्फ अंशु को जेल भेज दिया गया. बच्चों की परवरिश मृतक के बड़े भाई कुंवरपाल कर रहे हैं. कथा लिखे जाने तक अंशु और उस की प्रेमिका दोनों ही जेल में थे. UP News

 

 

MP News: जब सताए – पुराने प्रेमी की याद

MP News: 21 वर्षीय इकलौती बेटी निधि धानुक की शादी उस के पेरेंट्स ने देबू धानुक से कर जरूर दी थी, लेकिन वह अपने पुराने प्रेमी और रिश्ते के चाचा सूरज के प्यार को भुला नहीं पा रही थी. लिहाजा शादी के एक महीने बाद ही वह सूरज के साथ ससुराल से भाग गई. नवविवाहिता के इस कदम के बाद ऐसा खूनी खेल खेला गया कि…

14 जनवरी, 2026 की बात है. सुबह कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद कुछ लोग रोजाना की तरह उठ कर अपने मवेशियों को जगंल में चराने के लिए घर से निकले, तभी रास्ते में उन्होंने सरसों के खेत में एक युवती की रक्तरंजित लाश पड़ी देखी. जब उन्होंने लाश को करीब से जा कर देखा तो लाश देख कर उन सभी की घिग्गी बंध गई. उन्होंने हिम्मत कर के उस युवती के चेहरे पर नजर डाली तो उन्हें उसे पहचानने में देर नहीं लगी. वह लाश गांव के ही मुनेश धानुक की नवविवाहिता बेटी निधि की थी.

यह बात उन्होंने गांव के लोगों को बताई. पुलिस के आने तक गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई कि मुनेश धानुक की नवविवाहित बेटी निधि को किसी ने सरसों के खेत में गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया है. इस घटना ने सर्द मौसम के बावजूद गांव के माहौल में गरमाहट पैदा कर दी थी. थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर ग्रामीणों की अच्छीखासी भीड़ लग गई. सब एकदूसरे के कान में खुसुरफुसुर कर रहे थे. उन में इस घटना को ले कर काफी गुस्सा था. वे निधि के हत्यारे को जल्द से जल्द पकडऩे की मांग कर रहे थे. इसी दौरान किसी ग्रामीण ने भिंड जिले के मेहगांव थाने में फोन कर के इस हत्या की सूचना दे दी.

पुलिस के पहुंचने से पहले ही मृतका की पहचान निधि धानुक के रूप में हो चुकी थी. उधर सूचना मिलते ही एसएचओ महेश शर्मा कुछ सिपाहियों को साथ ले कर मौके पर पहुंच गए. उन्होंने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि उस की हत्या सीने में गोली मार कर की गई है. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर ग्रामीणों ने मृतका की शिनाख्त मुनेश धानुक की नवविवाहित बेटी निधि के रूप में कर दी थी.

पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि निधि की हत्या किन परिस्थितियों में किस ने और क्यों की? एसएचओ ने लाश को पोस्टमार्टम के निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और थाने आ कर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीम को मृतका के पापा मुनेश की तलाश में लगा दिया था. काफी खोजबीन के बाद भी जब पुलिस को मुनेश का कुछ पता नहीं चला. संयोग से उसी दिन एक व्यक्ति बदहवास हालत में हड़बड़ाता हुआ थाने आया. वह बुरी तरह से हांफ रहा था. उस के कपड़ों पर खून भी लगा था. थाने में मौजूद एसएचओ ने उस के भागते हुए आने का कारण पूछा.

तब उस व्यक्ति ने बताया, ”साहब, आप मुझे हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लीजिए. मैं ने अपनी शादीशुदा बेटी की रात को गोली मार कर हत्या कर दी है.’’

उस की बात सुन कर एसएचओ चौंकते हुए उस की ओर देखते हुए पूछा, ”लाश कहां है?’’

”साहब, सरसों के खेत में.’’

”तुम्हारा नाम क्या है और कहां के रहने वाले हो?’’

”साहब, मेरा नाम मुनेश धानुक है और में खिरिया थापक गांव का रहने वाला हूं.’’

उस ने यह भी बताया कि बेटी को मारने के बाद उस ने खुदकुशी करने का प्रयास किया था, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया तो हत्या करने के 8 घंटे तक फरार रहने के बाद वह थाने में अपने आप को कानून के हवाले करने चला आया.

उस की बात सुन कर एसएचओ समझ गए कि यह वही मुनेश धानुक है, जिस की उन्हें तलाश थी. उन्होंने थाने में सिर झुका कर खड़े मुनेश धानुक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. इस के तुरंत बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. इस सनसनीखेज हत्या का खुलासा होने के बाद जांच की जिम्मेदारी एसएचओ महेश शर्मा ने स्वयं संभाली, साथ ही मुनेश को घटनास्थल पर ले जा कर पूरा क्राइम सीन रीक्रिएट कर साक्ष्य जुटाए.

निधि के पोस्टमार्टम के बाद पुलिस उस के ससुराल वालों के आने का इंतजार करती रही, लेकिन जब काफी इंतजार के बावजूद वे लोग नहीं आए तो निधि के कुछ रिश्तेदारों को एक कांस्टेबल के साथ अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया, जहां निधि की लाश रखी थी. औपचारिक काररवाई के बाद निधि की लाश उस के करीबी रिश्तेदारों को सौंप दी गई. उसी दिन कुछ रिश्तेदारों की मदद से निधि का अंतिम संस्कार कर दिया. निधि की हत्या का जुर्म मुनेश कुबूल कर चुका था. पुलिस ने निधि की मम्मी पूजा धानुक को वादी बना कर एक तहरीर लिखवा ली.

पुलिस ने हिरासत में लिए गए मुनेश से निधि की हत्या का कारण जानने के लिए पूछताछ की तो मुनेश धानुक ने बिना कुछ छिपाए बेटी की हत्या के पीछे की जो खौफनाक कहानी बताई, वह हैरान कर देने वाली निकली. मध्य प्रदेश के जिला भिंड के मेहगांव थाने के अंतर्गत एक गांव है खिरिया थापक. इसी गांव में मुनेश धानुक अपनी पत्नी पूजा और बेटी निधि के साथ रहता था. मुनेश खेतीबाड़ी कर के गुजारा करता था. बेटी के शादी लायक होने पर उस ने उस की शादी 11 दिसंबर, 2025 को ग्वालियर के गुड़ागुड़ी का नाका निवासी देबू धानुक से कर दी थी.

निधि ने फेमिली वालों के दबाव में देबू से शादी तो कर ली थी, लेकिन वह प्यार तो सूरज से ही करती थी, निधि के देबू के साथ सात फेरों के बंधन में बंधने के बावजूद आशिकी का जनून धीरेधीरे खतरनाक मोड पर पहुंच रहा था. 28 दिसंबर, 2025 की शाम निधि अपने पति के साथ महाराज बाड़े पर शौपिंग करने गई थी. वहां छोलेभटूरे खाने के बाद उस ने योजनाबद्ध ढंग से अपने पति को पानी की बोतल लाने के लिए भेज दिया.

जब निधि का पति पानी की बोतल खरीद कर वापस लौटा तो निधि छोलेभटूरे की दुकान से बिना बताए नदारद थी. वह अपने प्रेमी सूरज के साथ फरार हो चुकी थी. उस ने अपना फोन भी बंद कर दिया था. अपनी पत्नी को वहां न पा कर देबू का माथा ठनका. बुरी तरह घबराए देबू ने अपने नातेरिश्तेदारों और जानपहचान वालों के यहां निधि को तलाशने के बाद उस के बारे में कुछ भी पता न चलने पर देर रात हुजरात कोतवाली में जा कर उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी थी.

अपने प्रेमी के साथ इंदौर भाग जाने के दौरान निधि ने कभी भी नहीं जानना चाहा कि उस के इस कदम से उस के पेरेंट्स का क्या हाल हुआ, किस तरह से वह अपनी तारतार हुई इज्जत के साथ जी रहे होंगे. गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के एक पखवाड़े बाद इत्तफाक से जैसे ही निधि ने अपने फोन में जैसे ही नई सिम एक्टिव की तो साइबर सेल को तुरंत उस की लोकेशन मिल गई. पुलिस ने निधि से फोन द्वारा संपर्क किया तो पुलिस के कहने पर 7 जनवरी, 2026 को वह स्वयं अपने प्रेमी सूरज के साथ हुजरात कोतवाली में पहुंच गई.

उस ने हुजरात कोतवाली के कोतवाल द्वारा पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपनी मरजी से अपने प्रेमी सूरज के साथ इंदौर चली गई थी. वह बालिग है, अत: अपना अच्छाबुरा समझती है, अब वह अपने प्रेमी सूरज के साथ ही रहना चाहती है. उधर निधि के कोतवाली में पहुंचने की भनक लगते ही निधि के पापा और नातेरिश्तेदारों ने कोतवाली पहुंच कर निधि को अपनी ससुराल वापस जाने के काफी समझाया-बुझाया, लेकिन वह इस जिद पर अड़ी रही कि वह किसी भी सूरत में अपनी ससुराल लौट कर नहीं जाएगी.

निधि के इस रुख से उस के पापा मुनेश का खून खौल गया बेटी की इस जिद से मुनेश की सामाजिक प्रतिष्ठा को काफी ठेस लगी थी. बेटी की जिद मुनेश को काफी नागवार गुजरी. बेटी की यह जिद मुनेश के बरदाश्त के बाहर थी. इस के बाद ही उस ने खतरनाक फैसला ले लिया था. ग्वालियर के हुजरात कोतवाली थाना परिसर में ही मुनेश ने सोच लिया था कि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. निधि के अपने प्रेमी सूरज के साथ जाने के बाद से ही मुनेश उस से सतत संपर्क बनाए हुए था. अपने मकसद को पूरा करने के लिए 14 जनवरी, 2026 को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाने के बहाने उस ने उसे 10 जनवरी को इंदौर से अपने गांव खिरिया थापक बुला लिया.

इस के बाद योजना को अंजाम देने के लिए मुनेश बेटी निधि को 13 तारीख की रात खाना खाने के बाद टहलने के बहाने सरसों के खेत में ले गया, जहां वह एकटक उसे निहारने लगा. निधि ने इस तरह अपने पापा को निहारते देखा तो बोली, ”पापा, आप आज मुझे इस तरह क्यों देख रहे हैं. आप के दिल में जो भी बात हो बिना किसी हिचकिचाहट के कह दो.’’

मुनेश को लगा कि यह उचित मौका है, बेटी से अपने दिल की बात कहने का. मुनेश ने निधि को समझाते हुए प्यार से कहा, ”बेटी, घर की इज्जत का ध्यान रखते हुए मकर संक्रांति का त्यौहार मनाने के बाद तुम चुपचाप मायके से अपनी ससुराल चली जाना, इसी में तुम्हारी भलाई है.’’

निधि मुंहफट थी. पापा की बात का विरोध करते हुए उस ने दो टूक शब्दों में कहा, ”पापा, मैं किसी भी सूरत में अपनी ससुराल नहीं जाऊंगी, आप मुझ पर ज्यादा दबाव डालेंगे तो मैं बिना मकर संक्रांति का त्यौहार मनाए अभी रात में ही अपने सूरज के पास इंदौर जाने के लिए घर से निकल लूंगी.’’

बेटी के मुंह से ऐसा सुनते ही मुनेश का माथा ठनक गया. इस से पहले कि निधि कुछ समझ पाती, मुनेश ने अपनी कमर में खोंसा देशी कट्टा निकाल कर निधि के सीने में गोली मार दी. गोली लगते ही निधि कटे पेड़ की तरह खेत में गिर पड़ी और मौके पर ही उस ने दम तोड़ दिया, इस के बाद पूरे इत्मीनान के साथ मुनेश बेटी की लाश को खेत में लावरिस पड़ी छोड़ कर फरार हो गया.

विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने मुनेश धानुक को अदालत में पेश किया, जहां कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. इस से पूर्व एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने निधि की हत्या और हत्यारे की गिरफ्तारी से संबंधित जानकारी मीडिया के लोगों से साझा की. निधि की हत्या से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन दुखद बात यह रही की जिस बेटी को ब्याह कर उस के जीवन को संवारने का सपना पेरेंट्स ने पाल रखा था, वह निधि की नासमझी या यूं कहिए कि उस की शर्मनाक करतूत की वजह से चकनाचूर हुआ ही, उस की खुशहाल गृहस्थी भी उजड़ गई. इस के अलावा उस के पापा मुनेश धानुक बेटी की हत्या के जुर्म में जेल चले जाने से मम्मी का भविष्य भी चौपट हो गया.

हालांकि बेटी की हत्या के आरोप में मुनेश के जेल जाने से उस के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि उस के चेहरे पर इस बात का संतोष साफ झलक रहा था कि बदनामी का दाग लगाने वाली बेटी को उस ने अच्छा सबक सिखाया. MP News

 

 

Family Crime: प्यार में छली गई कांस्टेबल

Family Crime: पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की एक्सीडेंट में मृत्यु के बाद ओडिशा के कांस्टेबल दीपक राउत (39 वर्ष) ने बीमा कंपनी से डेढ़ करोड़ रुपए का क्लेम लिया. इस के बाद उस ने कांस्टेबल शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को प्रेम जाल में फांस कर उस से कोर्टमैरिज कर ली. फिर एक दिन उस ने शुभमित्रा को भी ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने जब जांच कर गड़े मुर्दे खोदे तो ऐसी सच्चाई जगजाहिर हुई कि…

महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपने दोस्त कांस्टेबल दीपक राउत के साथ गुपचुप तरीके से की गई कोर्ट मैरिज को जल्द से जल्द सार्वजनिक करना चाहती थी, जबकि 39 वर्षीय दीपक राउत अब शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को अपनी जिंदगी से हमेशाहमेशा के लिए निकालने का प्लान बना चुका था.

अपने इसी प्लान को आखिरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उस ने 6 सितंबर, 2025 की तारीख को चुना. शुभमित्रा साहू की ड्यूटी डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय में थी. शाम 7 बजे उस की ड्यूटी खत्म हुई तो दीपक राउत ने फोन कर के उसे एक अनजान जगह मिलने के लिए बुलाया. जब शुभमित्रा 7 बज कर 10 मिनट पर उस की बताई गई जगह पर पहुंची तो दीपक राउत अपनी होंडा सिटी कार से उस का इंतजार कर रहा था.

दीपक उसे कार में बिठा कर भीड़भाड़ से दूर एक सुनसान जगह पर ले गया और फिर जंगल के सुनसान इलाके में उस ने कार रोक दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक से अपने उधार के 20 लाख रुपयों की मांग की, क्योंकि वह अपनी शादी को सार्वजनिक कर एक ग्रांड पार्टी देना चाहती थी. जबकि दीपक शुभमित्रा को एक पाई तक देने के मूड में नहीं था. वह तो केवल कोर्ट मैरिज की आड़ में उस के शरीर और भावनाओं से खेल रहा था.

पैसे मांगने पर दोनों के बीच विवाद हो गया. कांस्टेबल दीपक ने उसे गालियां देनी शुरू कर दीं तो शुभमित्रा भी जवाब में उसे गालियां देने लगी. इस पर दीपक ने उस के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक को जोर से एक लात मार दी. गुस्से में आ कर दीपक ने शुभमित्रा का गला पकड़ लिया और तब तक दबाता रहा, जब तक वह बेसुध हो कर नीचे नहीं गिर गई. कुछ ही पलों में शुभमित्रा की मौत हो गई.

शुभमित्रा की हत्या करने के बाद दीपक ने उस का शव अपनी कार की डिक्की में रखा. पूरे एक दिन तक वह शुभमित्रा का शव अपनी कार की डिक्की में रख कर सामान्य तरीके से ही घूमता रहा. यहां तक कि वह अपनी ड्यूटी करने थाने भी गया. इस के बाद उस ने अपने चचेरे भाई को पैसे देने का लालच दे कर उसे और उस के ड्राइवर को जेसीबी ले कर शव को 170 किलोमीटर दूर क्योंझर जिले के घाटगांव क्षेत्र के पास जंगल में भेज दिया. वहां उन्होंने सुनसान जगह पर जेसीबी से गहरा गड्ढा खोद कर शुभमित्रा साहू को दफना दिया.

25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उस समय कोरडा टाउन, पिचकुली, सूर्यनगर, भुवनेश्वर में किराए के मकान में रहती थी. उस के औफिस से उस के कमरे का रास्ता बमुश्किल आधे घंटे का था. शुभमित्रा की मम्मी सुकीर्ति साहू उस के साथ में रहती थीं. जब शाम को 8 बजे तक भी शुभमित्रा साहू अपने घर नहीं पहुंची तो उस की मम्मी एकदम से घबरा गईं. उन्होंने तुरंत अपने पति और बेटी को इस बारे में सूचना दी और अपने पड़ोस की एक महिला के साथ शुभमित्रा का पता लगाने उस के औफिस में चली गईं.

औफिस से पता चला कि शुभमित्रा साहू तो रोजाना की तरह आज शाम को 7 बजे अपनी ड्यूटी खत्म कर के अपने घर की ओर निकल गई थी. अब तक पुलिस महकमे में भी इस खबर को सुन कर हड़बड़ी मच गई थी. शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू ने तुरंत कैपिटल थाने में अपनी बेटी शुभमित्रा साहू के लापता होने की सूचना दर्ज करा दी.

पुलिस अब तुरंत हरकत में आ गई थी. दूसरे दिन लापता शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू और पापा धुरयदान साहू ने पुलिस कमिश्नर (भुवनेश्वर) सुरेश देव दत्ता सिंह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बेटी को तलाशने में त्वरित जांच की मांग की. पुलिस कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को लापता ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की खोज के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए.

पुलिस टीमें लगातार शुभमित्रा साहू की तलाश में जुटी हुई थीं. इस के लिए पुलिस ने अपनी कई टीमें बना रखी थीं, लेकिन हफ्ता गुजरने के बाद भी पुलिस के पास कोई भी सुराग हाथ नहीं आ पाया था. पुलिस टीम को शुभमित्रा के किराए के घर पर उस का खुद का मोबाइल भी सुरक्षित हालत में बरामद हुआ था.

अब पुलिस टीम को यह बात साफ नहीं हो पा रही थी कि लापता महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपना मोबाइल अपने ही घर में जल्दबाजी में भूल गई थी या जानबूझ कर छोड़ गई थी. एक महिला कांस्टेबल रहस्यमय तरीके से ड्यूटी के स्थान से ले कर अपने किराए के मकान के बीच भला कैसे गायब हो सकती थी. यह प्रश्न अब ओडिशा पुलिस के लिए खुद एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था.

अपनी इसी प्रतिष्ठा को बरकरार रखने के लिए आखिरकार डीसीपी भुवनेश्वर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर शुभमित्रा की फोटो और उस की पूरी डिटेल्स को शेयर करते हुए एक पोस्ट में लिखना पड़ा था कि क्या आप ने हमारी महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू, जिस की उम्र 25 वर्ष और लंबाई लगभग 5 फुट है, जिस ने ड्यूटी से अपने घर को निकलते समय बैंगनी रंग का टौप और सफेद सलवार पहनी हुई थी, उसे कहीं पर देखा है?

यदि किसी ने इन महिला कांस्टेबल को कहीं पर भी आतेजाते या टहलते हुए कहीं पर देखा है तो कृपया हमें हमारे मोबाइल नंबर 7008264419 और 8280338022 पर सूचित करें. सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी. इस के अतिरिक्त भुवनेश्वर पुलिस ने लापता शुभमित्रा की सूचना देने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी कर दी थी.

भुवनेश्वर पुलिस पूरे जोरशोर से शुभमित्रा की तलाश कर रही थी. इस के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरे और शुभमित्रा के घर से बरामद उस के मोबाइल फोन को भी अनलौक करने में जुटी जुटी हुई थी, लेकिन पुलिस को अभी तक कोई भी सूत्र हाथ नहीं लग पाया था. शुभमित्रा अपने औफिस से शाम को 7 बजे के बाद अपने घर आने के रास्ते में अचानक कहां लापता हो गई थी, यह प्रश्न बारबार पुलिस को परेशान कर रहा था.

जांच के दौरान पुलिस के सामने यह बात साफ हो चुकी थी कि शुभमित्रा के गायब होने में उस के किसी खास परिचित, प्रेमी आदि का हाथ हो सकता है, इसलिए अब पुलिस इस केस की जांच ‘लव एंगल’ से भी करने लगी. आखिरकार, भुवनेश्वर पुलिस के कैपिटल पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों को अपनी विस्तृत जांच करने के दौरान यह पता चला कि भुवनेश्वर में शुभमित्रा साहू के साथ आखिरी बार पुलिस कमिश्नरेट में तैनात पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को देखा गया था.

पुलिस टीम ने तत्काल दीपक राउत को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. इसी दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि पिछले साल दीपक और शुभमित्रा ने गुपचुप कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिस के बारे में दोनों के फेमिली वालों को पता तक नहीं था. अब पुलिस का शक दीपक पर पूरी तरह से बढ़ गया था. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर संदिग्ध दीपक राउत शुभमित्रा के गायब होने के बाद दुखी होने का दिखावा करता रहा. यहां तक कि वह शुरू में परिवार और पुलिस के साथ उसे ढूंढने में मदद करने का झूठा दिखावा करता रहा.

पुलिस पूछताछ में दीपक राउत ने सामान्य स्थिति का दिखावा करते हुए यह बात स्वीकार की कि उस के और शुभमित्रा के बीच में प्रेम प्रसंग था और उस ने शुभमित्रा के साथ 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज भी छिप कर कर ली थी. दीपक राउत ने पुलिस पूछताछ में आगे बताया कि वह 6 सितंबर, 2025 को जब शुभमित्रा एकाएक लापता हो गई थी तो वह अपने एक रिश्तेदार से मिलने क्योंझर गया था और उस ने अपनी प्रेयसी और पत्नी शुभमित्रा साहू की सकुशल व सुरक्षित वापसी के लिए वहां के तारिणी मंदिर में प्रार्थना भी की थी.

इस बात की पुष्टि करते हुए उस ने पुलिस टीम को अपने मोबाइल में खींची गई तसवीरें और पूजापाठ करते हुए ली गई सेल्फी भी दिखाई. इस के साथ ही उस ने सोशल मीडिया पर किया गया अपना पोस्ट भी दिखाया, जिस में उस ने शुभमित्रा के लापता होने की जानकारी पोस्ट की थी और लोगों से अपील भी की थी कि उस के बारे में किसी भी किस्म की जानकारी होने पर तुरंत पुलिस को दिए गए मोबाइल फोन पर सूचना दें.

शुभमित्रा साहू की जांच में एक अहम मोड़ तब आया, जब पुलिस ने लापता शुभमित्रा का फोन अनलौक करने के बाद उस के वाट्सऐप चैट्स को एक्सेस किया. इस में इस बात का पता चला कि शुभमित्रा ने 10 लाख रुपए कोर्ट मैरिज से पहले दीपक राउत को उधार दिए थे. उस के बाद शुभमित्रा दीपक से अपने 10 लाख रुपए लौटाने के साथसाथ 10 लाख रुपए अतिरिक्त देने की डिमांड कर रही थी, ताकि वह धूमधाम के साथ अपनी शादी की पार्टी अपने फेमिली वालों व परिचितों के बीच कर सके.

लेकिन दीपक इस विवाह को सार्वजनिक किए जाने के खिलाफ था. वह शुभमित्रा से बारबार यही कहता था कि वह अभी तक अपनी पहली पत्नी अपर्णा की मृत्यु से ठीक तरह से उबर नहीं पाया है. इस के अलावा दीपक बारबार इस बात का उलाहना भी शुभमित्रा को देता रहता था कि उस ने शुभमित्रा का एक करोड़ रुपए का बीमा करा रखा है, जिस की किश्त देना उसे भारी पड़ता जा रहा है, इसलिए दीपक उस के 10 लाख रुपए लौटाने के एकदम खिलाफ हो गया था.

इन सभी बातों से शुभमित्रा काफी तनाव में आ गई थी, जिस के कारण उस के वाट्सऐप मैसेज में पुरी, मथुरा और वाराणसी जाने की इच्छा जताई थी. शुरू में दीपक राउत ने पुलिस को यह कह कर गुमराह करने की कोशिश की थी कि शुभमित्रा की अपने मम्मीपापा के साथ अनबन रहती थी, जिस के कारण वह अपना घर छोड़ कर चली गई होगी. उस के बाद पुलिस टीम ने पुरी, वाराणसी और मथुरा में जा कर भी शुभमित्रा की तलाश की, लेकिन पुलिस टीम को शुभमित्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया था.

फिर पुलिस ने आरोपी दीपक राउत का पौलीग्राफ टेस्ट कराया. पौलीग्राफ टेस्ट के दौरान दीपक राउत के जवाब भ्रामक पाए गए. उस के बाद पुलिस ने जब उस के साथ सख्ती की तो फिर उस ने शुभमित्रा साहू की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. शुभमित्रा साहू और दीपक राउत की पहली मुलाकात किसी फिल्मी सीन की तरह घटित हुई थी. उस दिन शुभमित्रा को औफिस में ज्यादा काम हो गया था, जिस की वजह से वह शाम को 7 बजे अपने घर लौटने के बजाय रात लगभग 9 बजे अपने औफिस से स्कूटी से घर के लिए निकली थी.

जैसे ही शुभमित्रा एक अंधेरी सी सड़क से गुजरी तो उसे एक लड़की की चीख सुनाई पड़ी. चीख सुनते ही शुभमित्रा ने अपनी स्कूटी तत्काल उस तरफ मोड़ दी, जिधर से चीखने की आवाज आई थी. तभी उस की नजर एक अंधेरे कोने पर पड़ी तो उस ने देखा कि एक युवती को 4 युवकों ने चारों ओर से घेर रखा था और वे सब उस युवती को पकड़ कर उस के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे. शुभमित्रा खुद एक पुलिस वाली थी, इसलिए उस ने अपनी स्कूटी साइड में खड़ी की और तुरंत उस युवती को बचाने चली गई. पहले तो उन चारों युवकों ने शुभमित्रा को धमकाया, लेकिन जब शुभमित्रा ने उन में से 2 युवकों के चेहरों पर थप्पड़ जड़े तो उन के होश ठिकाने आ गए.

अब चारों युवक उस युवती को छोड़ कर शुभमित्रा से मारपीट करने लगे. पहले तो कुछ देर तक शुभमित्रा चारों से मुकाबला करती रही, लेकिन एक युवती अकेली उन चारों का मुकाबला भला कैसे कर सकती थी. इसलिए धीरेधीरे वे चारों युवक उस पर अब भारी पड़ते जा रहे थे. तभी उन में से एक युवक बोल पड़ा, ”इस के कारण हमारा शिकार देखो भाग गया. इतने दिन से हम उस के पीछे पड़े थे, उस की एकएक गतिविधि को देख रहे थे, आज हमें मौका मिला तो यह समाज सुधारक न जाने कहां से बीच में टपक पड़ी. चलो, कोई बात नहीं, अब इसी से मजे ले लेते हैं.’’

यह सुन कर सुमित्रा की रूह भी एकबारगी कांप सी उठी थी. वह अब सोचने लगी थी कि उस ने तो एक असहाय युवती को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन अब तो यहां पर दांव उलटा ही पड़ गया. वह अपनी ओर से उन चारों दरिंदों से फिर भी भिड़ रही थी और बीचबीच में वह मदद के लिए चीखपुकार भी रही थी. तभी उस सड़क से अपनी बाइक पर दीपक गुजर रहा था, उस ने जब अपने सामने एक युवती को अकेले 4 युवकों से मुकाबला करते देखा तो वह दंग रह गया. दीपक ने तुरंत अपनी बाइक रोकी और युवकों को ललकारने लगा. युवकों ने जब देखा कि अब मुकाबले में एक और आदमी शामिल हो गया है तो उन में से 2 युवकों ने चाकू निकाल लिए थे.

लेकिन जब दीपक कयामत बन कर उन सड़कछाप शोहदों पर एकाएक कर टूट पड़ा तो वे चारों शोहदे उस के ताइक्वांडो और जूडो कराटे का सामना चाह कर भी नहीं कर सके. दोनों चाकू वाले गुंडे तो दीपक के हाथों में पड़ गए, जिन की उस ने दिल से कुटाई की, लेकिन 2 शोहदे वहां से भागने में कामयाब हो गए. वहां पर ऐसा भी नहीं था कि अन्य लोग नहीं थे. दूर से तमाशा देखने वाले और उस घटना का वीडियो बनाने वाले भी उस भीड़ में शामिल थे, लेकिन उन लोगों ने न तो उस युवती की मदद की और न ही दीपक की सहायता करने के लिए आगे आए.

शुभमित्रा इस युवक के समय पर किए गए इस साहसिक कार्य को देख कर एकदम कायल हो गई थी. वह उस अनजान युवक को धन्यवाद देने के लिए जब उस के पास गई तो वह युवक किसी को फोन कर रहा था. उस के फोन कटते ही वहां पर पुलिस भी आ गई थी, जो उन दोनों शोहदों को पुलिस की गाड़ी में बिठा कर वहां से चली गई थी.

शुभमित्रा यह समझ चुकी थी कि यह युवक अवश्य कोई पुलिस वाला हो सकता है. जब उस ने अपनी नजरें उठा कर युवक की ओर देखा और दोनों की आंखें मिलीं तो पहला खयाल शुभमित्रा के दिल में यही आया था कि काश! ऐसा निडर पति मुझे भी मिल जाता तो पूरी जिंदगी कितनी आसानी से और बेफिक्री से गुजर जाती.

अपने मन की भावनाओं को किसी तरह शुभमित्रा ने काबू किया और उस अनजान व्यक्ति का धन्यवाद करते हुए बोली, ”सर, आज रात यदि आप यहां पर समय से नहीं आते तो ये चारों शोहदे मेरी जान अवश्य ले लेते. पता नहीं मेरी क्या हालत कर डालते. कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रह पाती मैं. आप का मैं किन शब्दों में धन्यवाद करूं, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है सर! क्या मैं जान सकती हूं कि आप किस विभाग में काम करते हैं?’’

”जी, इस में धन्यवाद वाली भला क्या बात है. एक पुलिसकर्मी होने के नाते तो यह मेरा फर्ज बनता भी है. वैसे मुझे यह लग रहा है कि मैं ने आप को कहीं देखा जरूर है. क्या मैं आप का परिचय जान सकता हूं.’’ उस युवक ने कहा.

”जी सर, मेरा नाम शुभमित्रा साहू है, मैं ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल हूं और डीसीपी (ट्रैफिक) में आजकल कंप्यूटर का काम देखती हूं. आप ने मुझे अवश्य देखा होगा, आप कहां पर हैं सर!’’ शुभमित्रा ने पूछा.

”शुभमित्राजी, मैं कमिश्नर औफिस में लेखा विभाग में पोस्टेड हूं. देखिए, आप भी हमारे डिपार्टमेंट से ही हैं, इसलिए यदि आप मुझे सर कह कर न पुकारें तो मुझे अच्छा लगेगा. मेरा नाम दीपक राउत है, आप मुझे यदि दीपक नाम से संबोधित करेंगी तो मुझे अच्छा लगेगा,’’ दीपक ने मुसकराते हुए कहा.

”वैसे आप काफी बहादुर हैं. आप ने उन चारों को ऐसी मार लगाई, जिस से मेरा तो दिल खुश हो गया दीपकजी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक भी पहली नजर में शुभमित्रा का दीवाना सा हो गया था. उस का मन कर रहा था कि वह इस शुभमित्रा जैसी हसीन युवती को जी भर कर देखता रहे और उस के साथ ढेर सारी बातें करता रहे.

तभी शुभमित्रा ने कहा, ”दीपकजी, देखिए अब यहां पर भीड़ काफी अधिक हो चुकी है. लोग तो केवल तमाशबीन बन कर वीडियो बनाते फिरते हैं. किसी ने हम दोनों का ही वीडियो बना लिया तो हम दोनों के लिए यह ठीक नहीं हो सकता. ये तमाशबीन लोग अपने आप कुछ करते नहीं हैं, लेकिन बात का बतंगड़ बनाने में हमेशा आगे रहते हैं.’’

”आप वाकई बहुत समझदार हैं, लेकिन मैं तो आप की बहादुरी और खूबसूरती का पहली नजर में ही कायल हो गया हूं. आप से दोबारा कब मुलाकात होगी? क्या आप का मोबाइल नंबर ले सकता हूं?’’ दीपक ने सीधेसीधे कह दिया था.

”दीपकजी, आप से मिल कर मुझे आज सचमुच बहुत खुशी हो रही है, आप मेरा मोबाइल नंबर नोट कर लीजिए. आप कौल कीजिए, मैं भी आप का मोबाइल नंबर सेव कर लूंगी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक ने तुरंत ही उस मोबाइल नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ से शुभमित्रा के मोबाइल पर घंटी बजने लगी थी. शुभमित्रा ने भी दीपक का नंबर सेव कर लिया. 25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उड़ीसा के जगतपुर जिले के पारादीप की रहने वाली थी. उस के पापा का नाम धुरयदान साहू और मम्मी का नाम सुकीर्ति साहू था. शुभमित्रा अपने परिवार में सब से बड़ी थी. उस के 2 छोटे भाई और एक बहन थी. बचपन से ही शुभमित्रा का सपना पुलिस की नौकरी करने का था, इसलिए वह पढ़ाई के साथसाथ खेलकूद में भी स्कूल और कालेज में सब से आगे रहती थी.

उस के पापा एक किसान थे, इसलिए शुभमित्रा नौकरी कर अपने मम्मीपापा और दोनों छोटे भाइयों को एक सुखद भविष्य देना चाहती थी. सुभमित्रा की कोशिशें रंग लाईं और उस ने इधर बीए में प्रवेश प्रवेश लिया तो दूसरी तरफ उस की नियुक्ति ओडिशा पुलिस में हो गई. यह साल 2018 की बात है.

उस के बाद शुभमित्रा की पोस्टिंग जनवरी 2024 में भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल के रूप में हो गई. शुभमित्रा की उम्र भी तब 24 साल की हो गई थी, इसलिए उस के पेरेंट्स उस से शादी करने के लिए दबाव बनाते रहते थे, लेकिन शुभमित्रा का अपना यह मानना था कि अभी उस की शादी की उम्र भी नहीं है. दूसरा वह अपनी पसंद से ही शादी करना चाहती थी. शुभमित्रा साहू के दिल में दीपक राउत ने एक बौलीवुड हीरो की तरह एंट्री कर के ऐसी छाप छोड़ दी थी, जिसे वह भूल नहीं पा रही थी. एक ही दिन और एक ही पल में वह अपना दिल दीपक को न्यौछावर कर चुकी थी.

इस घटना को 2 दिन हो चुके थे, लेकिन शुभमित्रा सोच रही थी कि 2 दिन हो चुके हैं, दीपक ने अभी तक भी उसे फोन नहीं किया.

उस समय रात के लगभग 10 बजे थे. शुभमित्रा खाना खा कर अपने कमरे में बैठी एक किताब पढ़ रही थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने स्क्रीन देखी तो पता चला कि वह कौल दीपक की ही है. शुभमित्रा के चेहरे पर मुसकान तैर गई. दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई. उस के बाद दीपक ने उसे सीधासीधा कह दिया कि वह उस से दोस्ती कर उसे सदा के लिए अपनाना चाहता है.

शुभमित्रा भी यही चाहती थी. लिहाजा उस ने भी दीपक के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी. इस के बाद तो दोनों के बीच मुलाकातें भी होने लगी थीं. दीपक ने शुभमित्रा को यह भी बता दिया था कि 2018 में उस की शादी अपर्णा से हुई थी, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उस की जुलाई 2024 में मौत हो गई थी. दीपक की इस ईमानदारी पर शुभमित्रा बहुत प्रभावित हुई.

शुभमित्रा अब जल्द से जल्द धूमधाम से दीपक से शादी करना चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ दीपक ने उस से कहा कि अभी हम लोग कोर्ट मैरिज कर लेते हैं, क्योंकि अभी वह अपनी पहली पत्नी के दुख से पूरी तरह से उबर नहीं पाया है. कुछ समय बाद जब सब नारमल हो जाएगा तो धूमधाम से सब के सामने सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह कर लेंगे.

उस के बाद शुभमित्रा और दीपक राउत ने अपने फेमिली वालों, परिचितों से छिप कर 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज कर ली. कोर्ट मैरिज के बाद शुभमित्रा अपने पेरेंट्स के पास ही रह रही थी और दीपक भी अकेले अपने घर में रह रहा था. कभीकभार वह घूमने का प्लान बना कर दूसरे शहर में साथ रह लेते थे. एक कहावत भी है कि आज की मतलब की दुनिया में कौन किसी का होता है, आज तो धोखा वही देता है, जिस पर भरोसा होता है.

उन के आपसी संबंध अब भले ही चाहे दुनिया से दूर थे, पर अब बद से बदतर होते जा रहे थे. दीपक राउत के मन में लालच की बेल पूरी तरह फैल चुकी थी, इसलिए उस ने एक फुलप्रूफ प्लान बना कर शुभमित्रा साहू की हत्या कर उस का शव ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने दीपक से पूछताछ के बाद उस की निशानदेही पर 17 सितंबर, 2025 बुधवार को मजिस्ट्रैट की निगरानी में जेसीबी की मदद से उस जगह की खुदाई कराई, जहां पर शुभमित्रा साहू का शव सीमेंट के एक बैरल में बंद और लगभग 10 फीट नीचे जमीन में दबा हुआ था. जरूरी काररवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस के बाद पुलिस ने आरोपी दीपक राउत की होंडा सिटी कार नंबर ओडी02आर 8494 को भी जब्त कर लिया. दीपक राउत के कुबूलनामे और साक्ष्यों के आधार पर भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में उस के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. साथ ही पुलिस ने शव को छिपाने के लिए आरोपी दीपक रावत के चचेरे भाई विनोद बिहारी भुइयां (38 वर्ष) और जेसीबी चालक शंभूनाथ महंत (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया.

महिला पुलिस कांस्टेबल शुभमित्रा मर्डर केस जब ओडिशा के लोगों के सामने जगजाहिर हुआ तो आरोपी दीपक राउत की मुश्किलें अब और भी बढ़ गई हैं. दीपक की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी के पेरेंट्स ने भी अब पुलिस के समक्ष अपर्णा की हत्या किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है. मृतका अपर्णा प्रियदर्शिनी की छोटी बहन रोजलिन ने मीडिया को बताया है कि शुरुआत में हमें यह लगा था कि हमारी बहन की मौत महज एक दुर्घटना थी. अब दीपक राउत की दूसरी पत्नी शुभमित्रा साहू की हत्या के बाद हमें यह पूरा यकीन है कि दीपक ने मेरी बहन की भी हत्या की होगी और हत्या को दुर्घटना का रूप दे दिया. अपर्णा की मौत की दोबारा जांच की मांग को ले कर ढेंकनाल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.

रोजलिन ने यह आरोप भी लगाया है कि अपने पति दीपक के साथ अपर्णा का वैवाहिक जीवन शुरू से ही समस्याओं, परेशानियों और अथाह दुखों से भरा था. शादी के कुछ महीनों बाद ही दीपक ने अपर्णा को परेशान और प्रताडि़त करना शुरू कर दिया था. इस संबंध में अपर्णा ने पुलिस कमिश्नरेट में औनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने दीपक के खिलाफ कोई भी काररवाई नहीं की.

रोजलिन ने यह राज भी खोला कि दीपक ने उस की बहन का एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था, जोकि बहन की मृत्यु के बाद उसे मिल भी चुका है. अब हमें उस के ऊपर यह शक है कि दीपक ने इंश्योरेंस क्लेम पाने के लिए अपर्णा की हत्या की थी. शुभमित्रा साहू के हत्यारे कांस्टेबल दीपक राउत की पहली शादी अपर्णा प्रियदर्शिनी के साथ 25 अप्रैल, 2018 को हुई थी. दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) थी और ढेंकनाल जिले में तैनात थी.

19 मार्च, 2022 को दीपक राउत ने खुंटुनी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उस की पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी (31 वर्ष) की 2 दिन पहले ट्रक नंबर ओडी02 एस 3486 की चपेट में आने से मौत हो गई थी. कथित दुर्घटना एनएच-55 पर राधा किशोरपुर चौक के पास हुई थी. घटना के बारे में दीपक राउत ने तब पुलिस को बयान दिया था कि घटना के दिन अपर्णा उस (दीपक) के साथ अपनी गाड़ी से अपने गृहनगर लौट रही थी, तब एक जगह गाड़ी को रुकवा कर अपर्णा ने दीपक से कहा कि उसे टायलट जाना है.

जब वह सड़क पार टायलेट में जाने के लिए सड़क पार कर रही थी तो कथित तौर पर रात को 9 से साढ़े 9 बजे के बीच एक ट्रक ने अपर्णा को टक्कर मार दी, जिस से उस के सिर में गंभीर चोटें आ गई थीं. उस के बाद दीपक उसे ले कर अस्पताल गया, जहां पर इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. उस समय खुंटुनी पुलिस ने इस केस की जांच की थी. जांच के दौरान पुलिस ने उक्त पंजीकरण वाले ट्रक का पता लगा लिया और चालक को हिरासत में ले लिया था. लेकिन पुलिस जांच में यह पाया गया कि दुर्घटना वाले दिन वह ट्रक उस इलाके में नहीं था.

उस के बाद दीपक राउत ने दावा किया कि शायद अंधेरा होने के कारण उस ने ट्रक का गलत नंबर नोट कर लिया होगा. वह शायद कोई दूसरे नंबर का वाहन हो सकता है. रिपोर्ट लिखाने वाला एक पुलिसकर्मी था, इसलिए उस की बातों पर यकीन कर के जांच अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस दुर्घटना के लिए एक अज्ञात वाहन ही जिम्मेदार था. उस के बाद कोई अन्य सुराग न मिल पाने के कारण जांच अधिकारी द्वारा अदालत में एक अंतिम सत्य रिपोर्ट (एफटीआर) प्रस्तुत की गई, जिस में यह संकेत दिया गया कि यह घटना वास्तविक थी, लेकिन उस विशेष ट्रक को दोषी ठहराने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे.

अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या फिर शिकायतकर्ता पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत झूठ बोल रहे थे और क्या पुलिस को उस समय अपर्णा प्रियदर्शिनी की मौत में किसी गड़बड़ी का संदेह था. जांच अधिकारी ने तब अदालत में बताया था कि इन सभी सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल पाएंगे. इस मामले में मृतका अपर्णा की बहन रोजलिन ने मीडिया और पुलिस को दिए अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि अपर्णा के पति दीपक राउत ने उन्हें फोन पर बताया था कि खुंटुनी के राधा दामोदरपुर के पास अपर्णा का एक्सीडेंट हुआ था.

पहले तो दीपक राउत ने मृतका अपर्णा के परिजनों को यह बताया था कि अभी हम दोनों दुर्घटनास्थल पर ही हैं. उस के बाद में उन के द्वारा यह बताया गया था कि दीपक अपर्णा को एससीबी मैडिकल कालेज और अस्पताल ले कर गया है. बाद में हमें दीपक राउत का एक और कौल आया, जिस में बताया गया कि अपर्णा को वह कटक के एक निजी अस्पताल ले कर गया है. इस मामले में कटक (ग्रामीण) के एसपी विनीत अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि हम ने अपर्णा प्रियदर्शिनी की हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और इस की जांच के लिए एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को नियुक्त कर दिया है.

भुवनेश्वर पुलिस द्वारा 19 सितंबर, 2025 को बताया गया कि 25 वर्षीय महिला ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की हत्या को रैड फ्लैग घोषित कर दिया गया है. अब यह जांच क्राइम ब्रांच (सीबी) के डीजीपी की निगरानी में होगी. भुवनेश्वर के कमिश्नरेट पुलिस के समन्वित सहयोग के साथ, एजेंसी कैपिटल थाना पुलिस और खुंटुनी पुलिस द्वारा पहले एकत्र किए गए सभी साक्ष्यों और आंकड़ों की जांच करेगी. इस के साथ ही सीएडब्लू (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) और सीडब्लू (साइबर विंग) दोनों ही इकाइयां इस मामले की बारीकी से जांच और छानबीन करेंगी.

ओडिशा पुलिस ने वर्ष 2014 में जांच की रेड फ्लैग श्रेणी शुरू की थी, जिस के तहत मामलों की जांच सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाती है. इस रेड फ्लैग जांच में महिला कांस्टेबल शुभमित्रा की हत्या के साथसाथ 17 मार्च, 2022 को ओडिशा के कटक के आधागढ़ के पास एक सड़क दुर्घटना में आरोपी कांस्टेबल दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की मृत्यु के बीच संभावित संबंध का भी पता लगाया जाएगा, जिस के लिए दीपक राउत की जीवन बीमा पौलिसी से डेढ़ करोड़ रुपए का भुगतान मिला था.

18 सितंबर, 2025 को भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीणा ने आरोपी हत्यारे पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को उस की नौकरी से निलंबित कर दिया. उस के एक रिश्तेदार और एक अन्य सहयोगी को भी शुभमित्रा साहू के शव को ठिकाने लगाने में आरोपी दीपक राउत की मदद करने में गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी बीच मृतका शुभमित्रा के पोस्टमार्टम के नमूने भुवनेश्वर स्थित राज्य फोरैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं, क्योंकि क्योंझर जिला मुख्यालय अस्पताल में सड़ीगली लाशों की विस्तृत और सटीक रिपोर्ट देने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं.

मृतका कांस्टेबल शुभमित्रा साहू का पोस्टमार्टम उस के भाइयों का मौजूदगी में करा लिया गया है. पुलिस इस मामले की तफ्तीश गंभीरता से कर रही थी. Family Crime

 

Delhi Crime Story: प्यार में भटका पुजारी

Delhi Crime Story: मंदिर का पुजारी बन कर गजानन ने न जाने कितनी औरतों को पथभ्रष्ट किया, लेकिन जब उन में से एक सुनीता ने उस से अपनी देह की कीमत 10 लाख रुपए वसूल ली तो ऐसा क्या हुआ कि पुजारी को जान गंवानी पड़ी…

दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के नजदीक नांगली राजपुर स्थित यश गैस्टहाऊस में 27 अक्तूबर, 2015 को एक ऐसी घटना घटी कि गैस्टहाऊस के मैनेजर और कर्मचारी सिहर  उठे. शाम के करीब 4 बजे गैस्टहाऊस के कमरा नंबर 24 से अचानक चीखने की आवाजें आने लगीं. चीखें सुन कर मैनेजर सुमित कटियार 2 कर्मचारियों के साथ उस कमरे की ओर भागे. वहां पहुंच कर उन्होंने देखा कि कमरे से धुआं भी निकल रहा है.

उस कमरे में सुबह ही एक आदमी अपनी पत्नी के साथ आया था. कमरे से चीखने की जो आवाज आ रही थी, वह उसी आदमी की थी. मैनेजर की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उस आदमी के साथ ऐसा क्या हो गया, जो वह इस तरह चीख रहा है. चीखों और धुआं निकलने से उस ने यही अंदाजा लगाया कि शायद वह आदमी जल रहा है. यह सोच कर सुमित कटियार घबरा गए. कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. उन्होंने दरवाजा थपथपाया, लेकिन वह नहीं खुला. वह परेशान हो उठे. जब उन्हें कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने अन्य कर्मचारियों के साथ मिल कर कमरे का दरवाजा तोड़ दिया. कमरे के अंदर का खौफनाक दृश्य देख कर सब की घिग्घी बंध गई.

कमरे में पड़े बैड के नीचे एक आदमी आग में जलते हुए तड़प रहा था. उस के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. बैड के पास खड़ी उस की पत्नी हैरत से उसे जलता देख रही थी. वह भी उसी हालत में थी. सुमित कटियार ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के इस घटना की सूचना दे दी. थोड़ी ही देर में पुलिस कंट्रोल रूम की गाड़ी वहां पहुंच गई, जिस में 4 पुलिसकर्मी थे. यह क्षेत्र दक्षिणीपूर्वी दिल्ली के थाना सनलाइट कालोनी के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से इस घटना की सूचना थाना सनलाइट कालोनी को भी दे दी गई थी.

खबर मिलते ही थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल 2 हैडकांस्टेबलों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. निरीक्षण में उन्हें कमरे में एक अधेड़ आदमी फर्श पर झुलसा पड़ा मिला. वह बेहोशी की हालत में लगभग 90 प्रतिशत जला था. उस के कपड़े बैड के पास रखी मेज पर रखे थे. मेज के नीचे एक कोल्डड्रिंक्स की 2 लीटर की खाली बोतल रखी थी, जिस में थोड़ा पैट्रोल था. थानाप्रभारी ने एक हैडकांस्टेबल के साथ उस जले हुए आदमी को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया.

जिस व्यक्ति के साथ यह घटना घटी थी, वह कौन था, कहां का रहने वाला था और यह घटना कैसे घटी थी, इस बारे में थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल ने गैस्टहाऊस के मैनेजर सुमित कटियार से पूछा तो उन्होंने बताया कि जो आदमी आग से झुलसा है, उस का नाम गजानन है. वह सुबह साढ़े 10 बजे अपनी पत्नी सुनीता के साथ आया था. उस ने आईडी के रूप में अपने वोटर कार्ड की फोटोकौपी जमा कराई थी.

तब उसे कमरा नंबर 24 दे दिया गया था. इस के बाद अभी थोड़ी देर पहले कमरे से चीखने की आवाज सुनाई दी तो वह कुछ कर्मचारियों के साथ वहां पहुंचा. तब उस ने कमरे से धुआं निकलते देखा. उस ने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की. जब दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दरवाजा तोड़ दिया. इस के आगे मैनेजर ने बताया कि जब उस ने गजानन की पत्नी सुनीता से आग लगने के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि उस की शादी को 15 साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें संतान नहीं हुई. बड़ेबड़े डाक्टरों को दिखाया, तांत्रिकों के पास भी गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

संतान न होने की वजह से दोनों काफी परेशान थे. एक दिन पहले उस के पति ने उस से कहा कि कल उन्हें महाराष्ट्र के नागपुर शहर चलना है. वहां एक बहुत पहुंचे हुए फकीर हैं, जो दुआ पढ़ा हुआ पानी देते हैं. वह पानी पीने के बाद संतान सुख का लाभ मिलता है. चूंकि जिस ट्रेन से उन्हें नागपुर जाना था, वह रात 9 बजे की थी. इतना टाइम वे सड़क पर नहीं बिता सकते थे, इसलिए आराम करने के लिए इस गैस्टहाऊस में आ गए. शारीरिक संबंध बनाने के बाद पति पर न जाने क्या फितूर सवार हुआ कि उन्होंने साथ लाए कपड़े के बैग से 2 लीटर वाली प्लास्टिक की बोतल निकाली और उस में भरा पैट्रोल खुद पर उड़ेल लिया. वह कुछ समझ पाती पति ने माचिस की तीली जला कर खुद को आग लगा ली.

‘‘कहां है गजानन की पत्नी सुनीता?’’ ओमप्रकाश लेखवाल ने पूछा तो मैनेजर इधरउधर देखने लगा. उस ने पूरा गैस्टहाऊस छान मारा, लेकिन सुनीता कहीं नहीं मिली.

‘‘तुम्हारी लापरवाही की वजह से वह भाग गई,’’ ओमप्रकाश लेखवाल ने कहा, ‘‘तुम ने गजानन की उस पत्नी की कोई आईडी ली थी?’’

‘‘सर, पति की आईडी मिल गई तो मैं ने उस की आईडी लेना जरूरी नहीं समझा.’’ कह कर मैनेजर ने सिर झुका लिया.

‘‘वह गजानन की पत्नी ही थी, मुझे नहीं लगता. वह मौजमस्ती के लिए उस के साथ यहां आई थी. मुझे पूरा यकीन है कि वह पैट्रोल गजानन नहीं वही लाई थी. अपना काम कर के वह रफूचक्कर हो गई. उस ने तुम्हें झूठी कहानी सुना कर विश्वास में ले लिया और कपड़े पहन कर चली गई. लापरवाही तुम लोग करते हो और भुगतना पुलिस को पड़ता है.’’ ओमप्रकाश लेखवाल ने  नाराजगी प्रकट करते हुए कहा.

थानाप्रभारी ने गैस्टहाऊस का रजिस्टर चैक किया तो उस में गजानन का पता चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली का लिखा था. जबकि उस ने अपने वोटर आईडी कार्ड की जो छायाप्रति जमा कराई थी, उस में उस का पता गांव कामनवास, सवाई माधोपुर, राजस्थान लिखा था. पुलिस ने गैस्टहाऊस के मैनेजर को वादी बना कर भादंवि की धारा 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. गजानन का हाल जानने के लिए ओमप्रकाश लेखवाल अस्पताल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि गजानन की मौत हो चुकी है. मरने से पहले उस ने डाक्टरों को बताया था कि उसे सुनीता उर्फ रिंकू ने जलाया था.

गजानन की मौत की खबर उस के घर वालों को देना जरूरी था, इसलिए उस ने गैस्टहाऊस में दिल्ली का जो पता लिखाया था, पुलिस चांदनी चौक स्थित उस पते पर गौरीशंकर मंदिर पहुंची तो वहां से पता चला कि गजानन पहले इसी मंदिर में महंत था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे वहां से हटा दिया गया था. अब वह सवाई माधोपुर स्थित अपने गांव में रहता था. दिल्ली वह 10-15 दिनों में आताजाता रहता था. इस के बाद दिल्ली पुलिस ने राजस्थान पुलिस को गजानन की हत्या की खबर भिजवा कर संबंधित थाने द्वारा उस के घर वालों को उस की हत्या की खबर भिजवा दी. खबर सुन कर गजानन के घर वाले थाना सनलाइट कालोनी पहुंच गए.

डीसीपी संजीव रंधावा ने सुनीता की तलाश के लिए पुलिस की एक टीम बनाई, जिस में एसआई ललित कुमार, हैडकांस्टेबल मान सिंह, कांस्टेबल सूबे सिंह, महिला कांस्टेबल संगीता सिंह को शामिल किया गया. टीम का नेतृत्व ओमप्रकाश लेखवाल को सौंपा गया. गजानन चांदनी चौक के जिस गौरीशंकर मंदिर में महंत था, पुलिस टीम ने वहीं से जांच शुरू की. वहां से पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं. पता चला कि गजानन 10 साल पहले दिल्ली आया था और गौरीशंकर मंदिर का महंत बन गया था. मंदिर में पूजापाठ कराने के साथसाथ वह ज्योतिषी एवं तंत्रमंत्र का भी काम करता था. उस के पास अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पुरुषों के साथसाथ महिलाएं भी आती थीं.

इन में कुछ महिलाओं से उस की अच्छी जानपहचान हो गई थी. वह शराब भी पीने लगा था. इन में से कुछ महिलाओं से उस के अनैतिक संबंध भी बन गए थे. बाद में जब यह बात गौरीशंकर मंदिर की प्रबंधक कमेटी को पता चली तो कमेटी ने सन 2008 में गजानन को मंदिर से निकाल दिया था. इस के बाद गजानन ने मंदिर के बाहर फूल एवं पूजा सामग्री बेचने की दुकान खोल ली. उस की यह दुकान बढि़या चलने लगी थी. उस ने दुकान पर काम करने के लिए 2 नौकर रख दिए और खुद राजस्थान स्थित अपने घर चला गया. यह 2-3 साल पहले की बात है. वह हफ्तादस दिन में दुकान पर आता और नौकरों से हिसाब कर के चला जाता था. यह जानकारी हासिल कर के पुलिस टीम थाने लौट आई.

उधर पोस्टमार्टम के बाद 20 अक्तूबर, 2015 को लाश गजानन के परिजनों को सौंप दी गई. घर वालों ने निगमबोध घाट पर ही उस की अंत्येष्टि कर दी. एसआई ललित कुमार ने घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने किसी पर शक नहीं जताया. पुलिस ने गैस्टहाऊस में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी. फुटेज में सुनीता उर्फ रिंकू का चेहरा तो नजर आ रहा था, लेकिन पुलिस के लिए मुश्किल यह थी कि इतनी बड़ी दिल्ली में उसे कहां ढूंढ़ा जाए. पुलिस के पास सुनीता का कोई मोबाइल नंबर भी नहीं था, जिस से उस के द्वारा उसे ढूंढने में आसानी हो.

गैस्टहाऊस में गजानन के कपड़ों से एक मोबाइल फोन मिला था. घर वालों ने बताया था कि वह मोबाइल गजानन का ही है. ललित कुमार ने सुनीता का फोन नंबर जानने के लिए गजानन के मोबाइल की काल लौग देखी तो एक नंबर पर उन की नजर टिक गई. क्योंकि वह नंबर ‘माई लव’ के नाम से सेव था. ललित कुमार जानना चाहते थे कि यह नंबर किस का है. उन्होंने अपने सैल फोन से वह नंबर मिलाया. कुछ देर बाद एक महिला ने फोन रिसीव कर के ‘हैलो’ कहा तो ललित कुमार बोले, ‘‘कार में चलने का शौक है तो इस के लोन की किस्तें भी समय से जमा करा दिया करो. 3 महीने हो गए, आप ने अभी तक किश्तें नहीं जमा कीं.’’

‘‘अरे भाई, आप कौन बोल रहे हैं? मैं ने कार के लिए कब लोन लिया?’’ दूसरी ओर से महिला ने कर्कश स्वर में कहा.

‘‘आप रुखसार बोल रही हैं न?’’ ललित कुमार ने पूछा.

‘‘नहीं बाबा, मैं रुखसार नहीं, सुनीता हूं. रौंग नंबर.’’

‘‘सौरी मैडम, गलत नंबर लग गया.’’ ललित कुमार ने कहा. इस के बाद उन्होंने फोन काट दिया. इस बातचीत के बाद उन की आंखों में चमक आ गई. क्योंकि सुनीता के फोन नंबर की पुष्टि हो गई थी.

ललित कुमार ने सुनीता का फोन नंबर सर्विलांस पर लगवाया तो उस की लोकेशन लाल किला, रेलवे कालोनी की मिली. वह टीम के साथ रेलवे कालोनी पहुंचे तो वहां के लोगों से सुनीता के बारे में पूछने पर पता चला कि सुनीता का पति रेलवे में नौकरी करता है. वह पहले इसी कालोनी में पति के साथ रहती थी, पर 4 सालों से वह परिवार के साथ नोएडा में कहीं रहने चली गई है. पता चला कि रेलवे कालोनी का वह क्वार्टर उस ने किसी को किराए पर दे रखा था. किराएदार से वह उस दिन मिलने आई थी. उस से मिल कर वह नोएडा चली गई थी. नोएडा में सुनीता कहां रह रही है, यह बात रेलवे कालोनी में रहने वाला कोई नहीं बता सका.

अलबत्ता सुनीता ने जिस परिवार को अपना क्वार्टर किराए पर दिया था, उस ने पुलिस को बताया कि उस का कुछ जरूरी सामान एक कमरे में रहता है, जिस की चाबी सुनीता के पास रहती है. आज जब वह मिलने आई थी तो वहां से कुछ सामान अपने बैग में भर कर ले गई थी. इतनी जानकारी मिलने के बाद ललित कुमार ने सर्विलांस द्वारा सुनीता के फोन की लोकेशन पता की तो इस बार लोकेशन नोएडा सैक्टर-29 की निकली. 28 अक्तूबर, 2015 की सुबह ललित कुमार ने टीम में शामिल महिला कांस्टेबल के साथ नोएडा के सैक्टर- 29 स्थित एक मकान पर दबिश दी तो वहां सुनीता मिल गई.

थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, ‘‘मेरा गजानन से रिश्ता जरूर था, मगर मैं ने उन्हें जला कर नहीं मारा. उन्होंने खुद ही पैट्रोल डाल कर आग लगाई थी.’’

‘‘तो फिर तुम वहां से भागी क्यों?’’ थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल ने पूछा.

‘‘स…सर, मैं डर गई थी.’’ वह बोली.

‘‘गजानन भला खुद को आग क्यों लगाएगा?’’ ओमप्रकाश लेखवाल ने पूछा.

‘‘सर, बात यह है कि गजानन की पत्नी बीमार रहती है. जब मुझ से उन का रिश्ता बना तो वह मुझ पर शादी करने का दबाव बनाने लगे. मैं 2 बच्चों की मां हूं. बच्चों को छोड़ कर मैं ऐसा कैसे कर सकती थी?’’ कह कर सुनीता सिसकने लगी.

पलभर बाद वह हिचकियां लेते हुए बोली, ‘‘26 अक्तूबर की शाम गजानन ने  फोन कर के कहा कि मुझ से मिलने की उस की काफी इच्छा है. अगले दिन उन्होंने सुबह 10 बजे मुझे हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बाहर बुलाया. अगले दिन तयशुदा समय पर मैं स्टेशन के बाहर पहुंची तो उन्हें मैं ने इंतजार करते पाया. उन के कंधे पर कपड़े का एक बैग था.

‘‘गजानन मुझे यश गैस्टहाऊस ले गए. उन्होंने वहां मुझे अपनी पत्नी बताया था. कमरे में जा कर हम ने शारीरिक संबंध बनाए. उस के बाद गजानन ने साथ लाए बैग से प्लास्टिक की 2 लीटर की बोतल निकाली और उस का ढक्कन खोला. उस में पैट्रोल भरा था.

‘‘गजानन ने मुझ से कहा कि वह आखिरी बार पूछ रहा है कि मैं उस से शादी करूंगी या नहीं? मैं ने साफ इनकार कर दिया. तब उन्होंने कहा कि जब तुम नहीं मान रही तो मैं खुदकुशी कर लूंगा, लेकिन पुलिस यही समझेगी कि उसे तुम ने जलाया है. इस के बाद गजानन ने पूरा पैट्रोल अपने शरीर पर छिड़क कर आग लगा ली.’’

फिर सुनीता जोरजोर से रोते हुए बोली, ‘‘सर, मैं ने उन्हें नहीं मारा. मुझे फंसाने के लिए उन्होंने खुदकुशी की थी.’’

ओमप्रकाश लेखवाल को लगा कि सुनीता की आंखों के आंसू घडि़याली हैं, यह जरूर कुछ छिपा रही है. उन्होंने महिला कांस्टेबलों को इशारा किया. महिला कांस्टेबल ने सुनीता को एक अलग कमरे में ले जा कर थोड़ी सख्ती की तो उस ने सहजता से अपना जुर्म कबूल कर लिया. सुनीता उर्फ रिंकू मूलरूप से पटना, बिहार की रहने वाली थी. 13 साल पहले उस की शादी विजय कुमार के साथ हुई थी. विजय कुमार दिल्ली में रहता था और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर बतौर टैक्नीशियन नौकरी करता था. वह पति के साथ खुश थी. वह 2 बच्चों की मां बनी.

विजय कुमार को रेलवे की ओर से जामामस्जिद के पास बनी रेलवे कालोनी में क्वार्टर मिला था. उस में वह पत्नी सुनीता और बच्चों के साथ रहता था. सुनीता आजादखयालों की थी, जबकि विजय कुमार पंरपरावादी. सुनीता को घूमने एवं सिनेमाहौल में फिल्में देखने का शौक था. अपने शौक पूरे करने के लिए वह पति से अनापशनाप खर्च लेती रहती थी. सुनीता अकसर गौरीशंकर मंदिर भी जाया करती थी. वहीं 8 साल पहले उस की मुलाकात मंदिर के महंत गजानन से हुई. गजानन पुजारी होने के साथसाथ ज्योतिषी भी था. यही वजह थी कि उस के पास महिलाओं की भीड़ लगी रहती थी. सुनीता गजानन से मिली तो वह उस का दीवाना हो गया. इस के बाद दोनों के बीच संबंध बन गए.

कुछ दिनों बाद गजानन और सुनीता के संबंधों की बात मंदिर की प्रबंधक कमेटी को पता चली तो उसे मंदिर से निकाल दिया गया. तब वह मंदिर के बाहर फूल व पूजा सामग्री बेचने लगा. सुनीता और गजानन के संबंध पहले की ही तरह जारी रहे. गजानन ने चांदनी चौक में किराए का मकान ले रखा था. जब भी उस की इच्छा होती, वह सुनीता को अपने कमरे पर बुला लेता. वह सुनीता को शौक पूरे करने के लिए अच्छेखासे पैसे भी देता था. सन 2014 के अगस्त महीने में गजानन ने सवाई माधोपुर में अपना एक प्लौट 25 लाख रुपए में बेचा तो सुनीता के मांगने पर उस ने उसे 10 लाख रुपए उधार दे दिए. सितंबर, 2015 के अंतिम दिनों में गजानन ने उस से अपने रुपए मांगे तो सुनीता बहाने बनाने लगी.

दरअसल, अब तक गजानन का मन सुनीता से भर चुका था. वह अपने 10 लाख रुपए ले कर उस से हमेशा के लिए पीछा छुड़ाना चाहता था. लेकिन सुनीता की नीयत में खोट आ गई थी. वह गजानन के 10 लाख रुपए किसी भी सूरत में लौटाना नहीं चाहती थी. वह टालमटोल करने लगी तो गजानन धमकी देने लगा कि उस ने उस के अंतरंग क्षणों की वीडियो बना रखी है. अगर उस ने उस के पैसे नहीं लौटाए तो वह वीडियो उस के पति को दिखा देगा.

सुनीता डर गई. उस ने गजानन की हत्या करने की योजना बना डाली. सुनीता ने 26 अक्तूबर, 2015 की रात गजानन को फोन किया. उस समय गजानन सवाई माधोपुर स्थित अपने घर में था. सुनीता ने कहा, ‘‘कल सुबह तुम हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बाहर 11 बजे मिलना. मैं तुम्हारे 10 लाख रुपए लौटा दूंगी.’’

पैसों के लालच में गजानन रात में ही ट्रेन द्वारा राजस्थान से चल पड़ा और 27 अक्तूबर की सुबह 9 बजे हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंच गया. वह स्टेशन के बाहर खड़ा हो कर सुनीता का इंतजार करने लगा. 10 बजे के करीब सुनीता वहां पहुंची. वह गजानन को नांगली राजपुर स्थित यश गैस्टहाऊस ले गई. वहां गजानन ने एक कमरा बुक कराया. जैसे ही वे दोनों कमरे में पहुंचे, तभी सुनीता ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. मौके का फायदा उठाने के लिए गजानन ने उसे आगोश में ले लिया.

इस के बाद दोनों ने कपड़े उतार कर शारीरिक संबंध बनाए. हसरतें पूरी करने के बाद दोनों बिस्तर पर निर्वस्त्र लेटे थे, तभी गजानन ने उस से अपने 10 लाख रुपए मांगे. तब सुनीता ने कहा, ‘‘पंडितजी, 8-10 सालों से मैं तुम्हारी सेवा करती आ रही हूं. अब तो आप उन पैसों को भूल जाइए.’’

‘‘नहीं सुनीता, घर वालों को इस की जानकारी हो गई है. वे सब मुझ से झगड़ा करते हैं. इसलिए मैं  पैसे मांग रहा हूं.’’ गजानन ने कहा.

सुनीता उठी और साथ लाए बैग से पैट्रोल से भरी बोतल निकाल कर उस के ऊपर उड़ेल दी. इस से पहले कि गजानन कुछ समझ पाता, सुनीता ने उस पर आग लगा दी. जलता हुआ गजानन चीखने लगा. उस की चीख सुन कर गैस्टहाऊस का मैनेजर वहां आ पहुंचा. इस के बाद क्या हुआ, आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं. सुनीता से पूछताछ कर के पुलिस ने 29 अक्तूबर, 2015 को उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Delhi Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Haryana Crime News: दोस्त बना जीजा, खतरनाक नतीजा

सुबह का उजाला अभी फैलना शुरू हुआ था कि ‘बचाओ बचाओ’ की मर्मभेदी चीख ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. चीखने वाले पर तेजधार हथियार से एक युवक ने हमला किया था, जिस से गंभीर रूप से घायल हो कर वह चीखा था. चीखने के साथ ही वह सड़क पर गिर पड़ा था और गिरते ही बेहोश हो गया था.

उस युवक के गिरते ही उस पर हमला करने वाला युवक लंबे फल का खून सना चाकू हाथ में लिए भागा था. सुबह का समय होने की वजह से वहां बहुत कम लोग थे, लेकिन जो भी थे, वे उस का पीछा करने या पकड़ने की हिम्मत नहीं कर सके थे.

पर उन लोगों ने इतना जरूर किया कि हमलावर के भागने के बाद सड़क पर घायल पड़े युवक को पंचकूला के सैक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल पहुंचा दिया था. उसे देखते ही डाक्टरों ने मृत घोषित करने के साथ इस की सूचना पुलिस को दे दी थी.

सूचना मिलते ही थाना मौलीजागरां के एएसआई गुरमीत सिंह सुबह 7 बजे के करीब अस्पताल पहुंच गए थे. घटना की जानकारी ले कर उन्होंने थानाप्रभारी इंसपेक्टर बलदेव कुमार को सूचित किया तो सिपाही अमित कुमार के साथ वह भी अस्पताल पहुंच गए थे.

जरूरी काररवाई कर के बलदेव कुमार ने उन लोगों से बात की, जो मृतक को अस्पताल ले कर आए थे. वे 2 लोग थे, जिन में एक 19 साल का मोहम्मद चांद था और दूसरा था ड्राइवर अशोक कुमार. पूछताछ में चांद ने बताया था कि वह पंचकूला के सैक्टर-16 की इंदिरा कालोनी के मकान नंबर 1821 में रहता था और सैक्टर-17 की राजीव कालोनी स्थित शरीफ हलाल मीट शौप पर नौकरी करता था.

सुबह जल्दी जा कर चांद ही दुकान खोलता था. मृतक को ही नहीं, उस पर हमला करने वाले को भी वह अच्छी तरह से पहचानता था. वह सुबह 5 बजे दुकान पर पहुंचा तो मुर्गा सप्लाई करने वाली गाड़ी आ गई. गाड़ी के ड्राइवर अशोक कुमार ने मोहम्मद चांद को आवाज दे कर गाड़ी से मुर्गे उतारने को कहा.

मोहम्मद चांद गाड़ी के पीछे पहुंचा तो गाड़ी में बैठा ड्राइवर का सहायक इरफान उतर कर उस के पास आ गया. जैसे ही वह जाली वाला दरवाजा खोल कर मुर्गे निकालने के लिए आगे बढ़ा, शाहबाज हाथ में चाकू लिए वहां आया और इरफान के सिर पर उसी चाकू से वार कर दिया.

वार होते ही इरफान पीछे की ओर घूमा तो शाहबाज ने कहा, ‘तुम ने मेरी भोलीभाली बहन को अपनी मीठीमीठी बातों में फंसा कर मेरी मरजी के खिलाफ उस से शादी की है न? तो आज मैं तुझे उसी का सबक सिखा रहा हूं. आज मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’

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इस के बाद शाहबाज ने इरफान की छाती, आंख के नीचे और कमर तथा पेट पर लगातार कई वार किए. इरफान ‘बचाओ…बचाओ’ की गुहार लगाते हुए नीचे गिर गया. शाहबाज का गुस्सा और उस के हाथ में चाकू देख कर कोई भी उस के पास जाने की हिम्मत नहीं कर सका.

लेकिन जैसे ही शाहबाज चला गया, मोहम्मद चांद और अशोक कुमार ने किसी तरह इरफान को अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे देखते ही मरा हुआ बताया. ऐसा ही कुछ अशोक कुमार ने भी बताया था, लेकिन उस का कहना था कि वह आगे था. शोर सुन कर पीछे आया. तब तक शाहबाज अपना काम कर के जा चुका था.

इंसपेक्टर बलदेव कुमार ने हत्याकांड के चश्मदीद मोहम्मद चांद के बयान के आधार पर शाहबाज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा कर के तहरीर थाना भेज दी, जहां एफआईआर नंबर 101 पर भादंवि की धारा 302 के तहत यह केस दर्ज कर लिया गया. यह घटना 4 जून, 2016 की है.

उसी दिन पुलिस की एक टीम शाहबाज की तलाश में जुट गई. उस के बारे में पता करने के लिए विश्वस्त मुखबिर भी सक्रिय कर दिए गए थे. मुखबिर की ही सूचना पर शाहबाज को उसी दिन रात में गांव मक्खनमाजरा से गिरफ्तार कर लिया गया.

अदालत से कस्टडी रिमांड ले कर सब से पहले शाहबाज से उस चाकू के बारे में पूछा गया, जिस से उस ने इरफान का कत्ल किया था. 6 जून को उस की निशानदेही पर वह चाकू मौलीजागरां की एक कब्रगाह से बरामद कर लिया गया. उस ने वहां चाकू को पत्थरों के नीचे दबा कर रखा था. लेकिन उस पर लगा खून उस ने साफ कर दिया था.

इस के बाद शाहबाज से इरफान की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर के रहने वाले शाहबाज और इरफान एक ही गांव के रहने वाले थे, इसलिए वे एक साथ खेलकूद कर बड़े हुए थे. कुछ दिनों पहले कामधंधे की तलाश में दोनों चंडीगढ़ आ गए. इरफान जहां अपने बड़े भाई के साथ आया था, वहीं शाहबाज अपने पूरे परिवार के साथ आया था. उस के परिवार में अब्बूअम्मी के अलावा एक छोटी बहन साहिबा थी.

चंडीगढ़ में दोनों पंचकूला की सीमा पर बसे गांव मौलीजागरां में थोड़ी दूरी पर अलगअलग किराए के मकान ले कर रहने लगे थे. मौलीजागरां जहां चंडीगढ़ में पड़ता है, वहीं मुख्य सड़क के उस पार की दुकानें हरियाणा के जिला पंचकूला के सैक्टर-17 की राजीव कालोनी के अंतर्गत आती हैं. उन्हीं में से एक दुकान पर शाहबाज जहां मुर्गे काटने का काम करने लगा था, वहीं इरफान को मुर्गे सप्लाई करने वाली गाड़ी पर सहायक की नौकरी मिल गई थी.

अपने हिसाब से दोनों का काम ठीकठाक चल रहा था. शाहबाज के अब्बू को भी नौकरी मिल गई थी. इरफान और शाहबाज हमउम्र थे. दोनों इतने गहरे दोस्त थे कि उन में सगे भाइयों जैसा प्यार था. एक दिन भी दोनों एकदूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे. एकदूसरे के यहां आनाजाना, खाना खा लेना या फिर कभीकभार सो जाना आम बात थी.

साहिबा भी दोनों के साथ बचपन से खेलतीकूदती आई थी. मगर अब वह जवान हो चुकी थी. घर वाले उस के निकाह के बारे में सोचने लगे थे. देखनेदिखाने की बात चली तो साहिबा ने हिम्मत कर के शरमाते हुए घर वालों से कहा कि वह इरफान से प्यार करती है और उसी से निकाह करना चाहती है.

साहिबा की इस बात से शाहबाज के घर में तूफान सा आ गया. घर का कोई भी आदमी इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था. शाहबाज ने साफ कहा, ‘‘इस से बड़ी जिल्लत मेरे लिए और क्या होगी कि लोग यह कह कर मेरा मजाक उड़ाएंगे कि अपनी बहन का निकाह करने के लिए ही मैं ने इरफान से दोस्ती की थी. क्या निकाह के लिए सिर्फ वही रह गया है? दुनिया में और कोई लड़का नहीं है? मैं यह निकाह किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगा.’’

शाहबाज ने साहिबा को तो लताड़ा ही, इरफान से भी झगड़ा किया. इरफान ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि जो भी होगा, घर वालों की रजामंदी से होगा. लेकिन शाहबाज ने साफ कह दिया कि वह साहिबा को भूल जाए और किसी अन्य लड़की से निकाह कर ले, वरना उस के लिए ठीक नहीं होगा.

शाहबाज की इस धमकी का नतीजा यह हुआ कि कुछ दिनों बाद इरफान साहिबा को भगा ले गया और एक धार्मिक स्थल पर दोनों ने निकाह कर लिया. वह वापस आया तो साहिबा को शरीकेहयात बना कर आया. शाहबाज को इस मामले में सारी गलती इरफान की नजर आ रही थी. उस ने अपने दिलोदिमाग में बैठा लिया कि इरफान ने साहिबा के भोलेपन का फायदा उठा कर उसे अपनी बातों में फंसा लिया है.

शाहबाज इरफान से पहले से ही नाराज था, जलती पर घी का काम किया उस ने साहिबा को भगा कर. उस के अब्बू ने इस से बहुत ज्यादा शर्मिंदगी महसूस की. इसी की वजह उन्होंने 2 दिनों बाद ही मौलीजागरां का अपना निवास छोड़ दिया था और वहां से 20 किलोमीटर दूर जा कर कस्बा डेराबस्सी में किराए का मकान ले कर रहने लगे थे. उन्होंने उधर जाना ही छोड़ दिया था. शाहबाज को नौकरी की वजह से उधर जाना पड़ता था.

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जिस मीट की दुकान पर शाहबाज काम करता था, इरफान रोजाना उधर मुर्गे की सप्लाई करने आता था. लेकिन निकाह के बाद वह उधर दिखाई नहीं दिया था. पता चला कि निकाह के दिन से ही उस ने छुट्टी ले रखी है.

4 जून, 2016 की बात है. साहिबा से इरफान को निकाह किए 5 दिन हो गए थे. सुबह के 5 बजे शाहबाज दुकान पर पहुंच कर मुर्गा काटने वाला चाकू तेज कर रहा था. तभी मुर्गेवाली गाड़ी आ कर उस की दुकान से थोड़ी दूरी पर सड़क के किनारे रुकी. इरफान उतर कर गाड़ी के पीछे की ओर आया.

शाहबाज ने उसे आते देखा तो उसे देख कर उस की आंखों में खून उतर आया. उस के पास सोचनेविचारने का वक्त नहीं था. वह मीट काटने वाला चाकू ले कर तेजी से भागता हुआ इरफान के पास पहुंचा और जरा सी देर में उसे मौत के घाट उतार कर भाग गया.

पहले तो उस ने कब्रिस्तान के पास एक जगह चाकू को साफ कर के पत्थरों के नीचे छिपा दिया. उस के बाद बचने के लिए इधरउधर छिपता रहा. लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया. उस ने कहा कि इरफान ने काम ही ऐसा किया था, जिस से उसे मारने का कोई अफसोस नहीं है. इरफान ने जो किया था, उस की उसे यही सजा मिलनी चाहिए थी.

पूछताछ के बाद पुलिस ने शाहबाज को फिर से अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया गया.

बलदेव कुमार ने उस के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर समय से निचली अदालत में दाखिल कर दिया, जहां से सैशन कमिट हो कर 13 सितंबर, 2016 से मामले की सुनवाई चंडीगढ़ के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कसाना की अदालत में शुरू हुई.

6 अक्तूबर को अदालत ने शाहबाज के खिलाफ धारा 302 का चार्ज फ्रेम कर दिया. उस ने अदालत में खुद को बेकसूर बताते हुए दरख्वास्त की थी कि पुलिस ने एक झूठी कहानी गढ़ कर इस केस में उसे बिना मतलब फंसा दिया है. वह अपने उन बयानों से भी मुकर गया, जो उस ने कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस को दिए थे.

मामले की विधिवत सुनवाई शुरू होते ही अभियोजन पक्ष ने डा. अमनदीप सिंह, डा. गौरव, मोहम्मद चांद, इंतजाम अली, अशोक कुमार, इंसपेक्टर बलदेव कुमार, फोटोग्राफर फूला सिंह, हवलदार सतनाम सिंह, रमेशचंद, धर्मपाल एवं यशपाल के अलावा सीनियर कांस्टेबल कृष्णकुमार, एसआई गुरमीत सिंह, एसआई गुरनाम सिंह और डा. मनदीप सिंह के रूप में 15 गवाह अदालत में पेश किए.

इस के बाद अतिरिक्त पब्लिक प्रौसीक्यूटर ने अभियोजन पक्ष की गवाहियों के पूरी होने के बाद सीआरपीसी की धारा 293 के तहत फोरैंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट के अलावा विसरा रिपोर्ट भी पेश की.

अभियोजन पक्ष की काररवाई पूरी होने के बाद 20 जनवरी, 2017 को कोड औफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 313 के तहत अभियुक्त शाहबाज का स्टेटमैंट रिकौर्ड किया गया. अभियुक्त ने उक्त सभी गवाहों को झूठ करार देते हुए यही कहा कि वह बेकसूर है. उसे झूठा फंसाया गया है.

बचाव पक्ष की ओर से साहिबा को पेश किया गया. कोड औफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 315 के अधीन दर्ज अपने बयान में साहिबा ने अदालत को बताया कि उस ने इरफान से प्रेम विवाह किया था, जिस का परिवार वालों ने पहले तो विरोध किया, लेकिन बाद में मान गए थे.

इरफान ने उसे बताया था कि उस की कुछ गलत लोगों से ऐसी दुश्मनी हो गई है कि वे मौका मिलने पर उस की जान ले सकते हैं. ऐसे में हो सकता है, इरफान को उन्हीं लोगों ने मारा हो, न कि शाहबाज ने.

बचाव पक्ष की ओर से अशोक कुमार को अविश्वसनीय करार देते हुए अदालत ने उसे मुकरा गवाह घोषित करने की गुहार लगाई गई, जो अदालत ने मान भी ली. यह भी दलील दी गई कि पुलिस द्वारा बरामद चाकू पर डाक्टर की रिपोर्ट के मुताबिक मानवीय खून नहीं लगा था.

31 जनवरी, 2017 को विद्वान जज अतुल कसाना ने इस मामले का फैसला सुनाते हुए खुली अदालत में कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों को ध्यानपूर्वक सुनने के अलावा सभी साक्ष्यों को गौर से जांचापरखा है, जिन से यह केस शीशे की तरह साफ है. अशोक कुमार को भले मुकरा गवाह करार दिया गया है, लेकिन उस की गवाही को नकारा नहीं जा सकता.

वह भी एक तरह से इस केस का चश्मदीद गवाह था. भले ही उस की गवाही में बाद में कुछ विपरीत बातें सामने आईं, जिस वजह से उसे मुकरा गवाह घोषित किया गया. लेकिन उस की शुरू की गवाही अभियोजन पक्ष को पूरी तरह मजबूती देने में सहायक सिद्ध हुई है.

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चाकू पर मानवीय खून का अंश होने की बात रिपोर्ट में पहले ही आ चुकी है. हालांकि अभियुक्त ने उसे फेंकने से पहले साफ कर दिया था. साहिबा को बचाव पक्ष ने गवाह के रूप में पेश कर के केस की दिशा बदलने का प्रयास किया. लेकिन उस की प्रेम विवाह वाली बात मान लेने से ही प्रौसीक्यूशन की कहानी को बल मिल जाता है.

लिहाजा यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में कामयाब रहा है और अभियुक्त शाहबाज खान मृतक मोहम्मद इरफान का कत्ल करने का दोषी पाया गया है. अभी वह जेल में है. सजा की बाबत सुनने के लिए उसे अगले दिन अदालत में पेश किया जाए.

अगले दिन शाहबाज को ला कर अदालत में पेश किया गया तो माननीय एडीजे अतुल कसाना ने उसे उम्रकैद के अलावा 10 हजार रुपए जुरमाने की सजा सुनाई. Haryana Crime News

– कथा अदालत के फैसले पर आधारित 

UP Crime: पत्नी को बनाया वेश्या

UP Crime: अधिकांश लोगों के लिए अपने घरपरिवार की इज्जतआबरू सर्वोपरि होती है. इसे बचाने के लिए वह अपनी जान तक की परवाह नहीं करते, लेकिन सलमान ऐसा शख्स था, जो अपनी पत्नी नरगिस से देह व्यापार कराता था, उस के लिए वह खुद ग्राहक लाता था. इस घुटनभरी जिंदगी से निकलने के लिए एक दिन नरगिस ने ऐसा काम किया कि…

इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या उस की पत्नी सोनम ने कराई थी, उस के भांतिभांति के समाचार अभी भी आ रहे हैं. इधर कुछ महीनों में पत्नियों द्वारा पति की हत्या के अनेक मामले सामने आए हैं. औरैया की प्रगति ने विवाह के 15 दिनों बाद ही पति दिलीप की हत्या करा दी थी. कर्नाटक में अधेड़ पल्लवी ने अपने पति रिटायर्ड डीजीपी ओमप्रकाश को छुरी मार कर मार डाला. मेरठ की मुसकान ने अपने पति सौरभ की हत्या करवा दी. मुंबई की रूपाली ने अपने पति की हत्या करा दी.

ये बड़ी घटनाएं थीं, इसलिए सभी की नजरों में आ गईं. इस के अलावा भी अन्य तमाम घटनाएं हैं, जिन में पता चलता है कि पतिपत्नी एकदूसरे के लिए जान देने के बजाय जैसे जान लेने की प्रतियोगिता चला रहे हैं. इस में लिवइन में रहने वाली लड़कियों की हत्या के समाचार तो रोज ही अखबारों में आते हैं. यह कहानी भी इसी तरह की हत्या की है. लेकिन यह कहानी उन सभी कहानियों से अलग है. उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर की इस कहानी में पत्नी ने अपने हाथों से पति की हत्या कर दी. लेकिन इस कहानी में ऐसे अनेक सवाल हैं, जो समाज की आंखें खोलने वाले हैं.

दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले नैशनल हाईवे पर बीच में पड़ता है उत्तर प्रदेश का जिला मुजफ्फरनगर. 21 जून, 2025 की आधी रात को मुजफ्फरनगर के खाईखेड़ा इलाके के मदीना चौक के पास चमन कालोनी में शोर मचने से कालोनी वालों की आंखें खुल गईं. 24 साल की नरगिस घर से निकल कर चिल्ला रही थी कि ‘कोई मेरे शौहर को बचा लो, उस ने गले में फांसी लगा ली है. वह फडफ़ड़ा रहा है.’

पड़ोसी तुरंत भाग कर आ गए. नरगिस और सलमान की शादी के अभी साढ़े 5 साल ही हुए थे. उन का 4 साल का एक बेटा भी था. ये तीनों चमन कालोनी के उस मकान में किराए पर रहते थे. पड़ोसियों ने देखा कि ऊपरी मंजिल के कमरे में सलमान चित पड़ा था. पड़ोसियों ने उसे उठा कर रिक्शे में डाला और सरकारी अस्पताल ले गए. वहां नरगिस ने डौक्टर से कहा कि गले में दुपट्टा बांध कर सलमान पंखे से लटक गया था. किसी तरह उस ने पति को पंखे से उतारा. वह कैसे भी उस के पति को बचा लें.

सलमान की प्राथमिक जांच कर के डौक्टर ने सिर हिलाते हुए कहा कि यह मर चुका है, लेकिन यह आत्महत्या का मामला है, इसलिए पुलिस को सूचना देनी पड़ेगी. अस्पताल प्रशासन ने इस की सूचना पुलिस को दी तो थोड़ी ही देर में थाना कोतवाली पुलिस आ पहुंची. कोतवाली प्रभारी ने नरगिस से पूछा, ”रात को पति से तुम्हारा झगड़ा हुआ था क्या? इस ने मर जाने की धमकी देते हुए तुम से अपना इरादा व्यक्त किया था क्या?’’

जवाब में नरगिस ने कहा, ”साहब, छोटामोटा, खट्टामीठा झगड़ा तो सभी घरों में होता है. इस तरह का झगड़ा तो हमेशा होता रहता था. पर बात इस हद तक पहुंच जाए, इस तरह का झगड़ा तो कभी नहीं हुआ था. हां, इन की कोई नौकरी नहीं थी, सो बेरोजगार होने की वजह से इन के दिमाग पर बहुत टेंशन रहती थी. शायद उसी वजह से इन्होंने यह कदम उठाया होगा. बाकी आप सारे पड़ोसियों से पूछ लीजिए, कभी हमारा कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ था.’’

इस के बाद पुलिस ने लाश कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. मदीना चौराहे और मोहल्ले में रहने वाले सभी लोगों को नरगिस पर दया आ रही थी. सभी यही कह रहे थे कि सलमान तो आत्महत्या कर के छुट्टी पा गया, अब यह बेचारी अकेली 4 साल के बच्चे को कैसे पाल कर बड़ा करेगी? सलमान के अम्मीअब्बू फर्रुखाबाद में रहते थे. सलमान का छोटा भाई फैजल मुजफ्फरनगर में ही दूसरे इलाके में अलग रहता था.

सलमान के आत्महत्या का समाचार पा कर सभी मदीना चौक के पास स्थित चमन कालोनी में नरगिस के घर आ गए थे. पोस्टमार्टम के बाद लाश सलमान के फेमिली वालों को सौंप दी गई थी. लाश मिलने के बाद पिता और भाई ने मिल कर उस की लाश को दफना दिया था. पुलिस और फेमिली वालों ने मान लिया था कि सलमान ने आत्महत्या ही की है. अगले दिन थाना कोतवाली में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसे देख कर कोतवाल चौंके. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सलमान ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि गला दबा कर उस की हत्या की गई थी. कोतवाल पूरी टीम के साथ चमन कालोनी के सलमान के घर पहुंचे.

पुलिस ने जब सलमान के फेमिली वालों को बताया कि उस ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की गला दबा कर हत्या की गई है तो पूरा परिवार सन्न रह गया. सलमान के भाई फैजल ने तो जरा भी शरम संकोच किए बगैर तुरंत खड़े हो कर कहा, ”साहब, आप मेरी शिकायत दर्ज कर लीजिए. मेरे भाई सलमान की हत्या मेरी भाभी नरगिस ने ही की है.’’

वैसे भी जब सलमान की मौत हुई थी, उस समय घर में केवल नरगिस और उस का छोटा सा बच्चा ही था. इसलिए नरगिस पर ही सलमान की हत्या का पूरा शक जाता था. आत्महत्या के बजाय अब मामला हत्या का हो गया था, इसलिए इस घटना की सूचना कोतवाली पुलिस ने सीओ (सिटी) राजू कुमार साव और एसएसपी संजय वर्मा को भी दे दी थी. इस के बाद पुलिस अधिकारियों के डायरेक्शन में नरगिस से पूछताछ शुरू की गई.

शुरुआती पूछताछ में नरगिस ने कहा, ”भला कौन औरत विधवा बनना चाहेगी? किसी भी औरत को विधवा बनने का शौक नहीं होता. मैं अपने पति को क्यों मारूंगी? मैं तो अपने बेटे को गोद में ले कर सोई थी. उस के सो जाने के बाद घर में क्या हुआ, मुझे पता नहीं है.’’

पति को खोने वाली नरगिस के प्रति सहानुभूति रखते हुए पुलिस ने 3 दिनों तक साधारण पूछताछ की, परंतु नरगिस का एक ही जवाब था कि यह जो कुछ भी हुआ है, उस की उसे बिलकुल खबर नहीं है. इस के बाद 24 जून, 2025 को पुलिस ने अपने तरीके से नरगिस से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई. नरगिस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने अपने पति सलमान को मौत के घाट उतारा था. उस ने बताया कि उस ने उस दिन सुबह ही सलमान से कहा था कि उसे रात में नींद नहीं आती, जिस की वजह से पूरे दिन बेचैनी रहती है. किसी डौक्टर से लिखवा कर वह उस के लिए नींद की दवा ला दे.

दोपहर को सलमान बाहर गया और नींद की दवा ला कर नरगिस को दे दी. रात को खाने में नरगिस ने रोटी और कीमा बनाया था. उस ने नींद की 7 गोलियां अच्छी तरह पीस कर सलमान के कीमा में मिला दी. रात को खाना खाने के बाद सलमान की कोल्डड्रिंक पीने की आदत थी. बची 3 गोलियां नरगिस ने कोल्डड्रिंक में मिला दीं. पेट भर कीमा खाने के बाद सलमान ने कोल्डड्रिंक भी पी ली थी, जिस से उसे गहरी नींद आ गई. रात 2 बजे नरगिस ने सलमान को झकझोर कर देखा. उस समय सलमान जरा भी होश में नहीं था. इस के बाद उस ने सलमान के गले में दुपट्टा लपेट कर पूरी ताकत से कस दिया. 5 मिनट छटपटाने के बाद सलमान की सांसें थम गईं.

वह मर गया है, यह विश्वास होने के बाद नरगिस ने चीखतेचिल्लाते हुए पड़ोसियों से कहा कि सलमान ने पंखे से लटक कर आत्महत्या करने की कोशिश की है. उसे तुरंत अस्पताल ले जाना होगा. इस के बाद मोहल्ले के 2 लोग उसे अस्पताल ले गए थे. नरगिस द्वारा अपराध स्वीकार करने के बाद सीओ (सिटी) ने पूछा, ”तुम दोनों के बीच ऐसी क्या लड़ाई थी कि तुम्हें इस तरह का खतरनाक कदम उठाना पड़ा. पति से तुम्हारी ऐसी क्या दुश्मनी थी?’’

सहज संकोच के साथ नरगिस नीचे ताकने लगी. उस के बाद मन मजबूत कर के उस ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस वालों को जबरदस्त झटका लगा. उस ने एक भी शब्द छिपाए बगैर पति की हत्या की सही वजह बता दी. उस ने जो वजह बताई, वह इस तरह थी. मुजफ्फरनगर के मोरना ब्लौक के गांव ककराला का रहने वाला सलमान 3 भाइयों में सब से बड़ा था. उस की 4 बहनें हैं. अभी एक भाई और 2 बहनों की शादी नहीं हुई है. साल 2020 में इसी जिले ककरौली के खाईखेड़ा की रहने वाली नरगिस से उस का विवाह हुआ था. दोनों का इस समय 4 साल का एक बेटा है.

नरगिस को गांव में रहना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए शहर चल कर रहने के लिए वह अकसर सलमान से झगड़ती रहती थी. रोजरोज की किचकिच से तंग आ कर नरगिस के कहने पर सलमान 3 साल पहले नरगिस और बच्चे को ले कर मुजफ्फरनगर आ गया था. शहर के कई मोहल्लों में रहते हुए इस समय वह मदीना चौक के पास चमन कालोनी में किराए के मकान में पत्नी और बेटे के साथ रह रहा था.

उस की कोई नौकरी नहीं थी. वह इधरउधर मजदूरी करता था. खर्च ज्यादा था, जबकि कमाई कम थी. घर वाले चाहते थे कि वह गांव आ जाए, पर नरगिस गांव नहीं जाना चाहती थी. इसी बात को ले कर नरगिस नाराज हो कर डेढ़ साल तक मायके में रही थी. नरगिस ने बताया कि कामधंधा न होने की वजह से पैसों की तंगी रहती थी. उस का बेटा ढाई साल का हो गया था, उस के बाद यानी डेढ़ साल पहले सलमान ने उसे वेश्या बना दिया था. नएनए ग्राहक खोज कर वह नरगिस को उन के आगे परोसने लगा था. पति हो कर वह अपनी ही पत्नी की दलाली का धंधा करने लगा था.

पहली बार जब सलमान ने यह काम करने के लिए कहा था तो नरगिस ने जम कर विरोध किया था. पर सलमान ने मारपीट कर के उस से वही करवा लिया था, जो वह चाहता था. नरगिस के मायके में भी ऐसा कोई नहीं था, जो उस की मदद करता. इसलिए मार खा कर, बेबस हो कर नरगिस को सलमान का साथ देना पड़ रहा था, जिस से अंजान लोग उस की देह को नोच रहे थे.

सलमान ने दिल्ली, नोएडा से ले कर मणिपुर के इंफाल तक उस के लिए ग्राहक खोज रखे थे. वह नरगिस को ग्राहकों के पास ले जाता और बंद कमरे में जो प्रेमलीला होती, उस की वीडियो बनाता. अपनी ही पत्नी के उन वीडियो को बेच कर भी वह रुपए कमाता था. नरगिस की व्यथा सुन कर पुलिस वाले स्तब्ध थे. उस का कहना था कि इस तरह की घुटघुट कर जीने वाली जिंदगी जीने से तो मर जाना ही अच्छा था. लेकिन उसे अपने बेटे की चिंता थी कि उस के बाद उसे कौन संभालेगा?

उस का मुंह देख कर वह जलालतभरी जिंदगी जी रही थी, लेकिन धीरेधीरे उस की परेशानी बढ़ती ही जा रही थी और सहनशीलता घटती जा रही थी. फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब उस की सहनशीलता खत्म हो गई. इस की वजह यह थी कि पैसा देने वाले ग्राहक नरगिस को औरत नहीं, खिलौना मान कर उस के साथ तरहतरह की चित्रविचित्र हरकतें करते थे, जो उस के लिए असहनीय हो गई थीं. नरगिस को लगने लगा था कि वह इस यातना भरी जिंदगी से तभी छुटकारा पा सकती है, जब वह पति सलमान के शिकंजे से निकल पाए.

नरगिस ने इस के लिए बहुत सोचा. काफी सोचनेविचारने के बाद उसे लगा कि सलमान के शिकंजे से निकलने के लिए उस की मौत के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है. उस ने सोचा कि सलमान की हत्या तो उसे बहुत पहले ही कर देनी चाहिए थी. पर उस समय उस की मार के आगे उस की हिम्मत नहीं पड़ रही थी. नरगिस मानसिक और शारीरिक यातनाओं से तंग आ चुकी थी. शायद इसीलिए उस के अंदर पति सलमान की हत्या करने की हिम्मत आ गई थी. फिर उस ने सलमान से ही नींद की गोलियां मंगा कर उन्हें कीमा में मिला कर खिला दीं. उसे मौत के घाट उतार कर अपनी बेइज्जती का बदला ले लिया.

इस के बाद उस ने रोते हुए कहा था कि जेल की जिंदगी इस नरक भरी जिंदगी से सौ गुना अच्छी है. अपनी दुख भरी कहानी सुना कर नरगिस रो रही थी. पुलिस वाले मौन थे. 25 जून, 2025 को प्रेस कौंफ्रेंस में एसएसपी संजय वर्मा ने नरगिस द्वारा अपराध स्वीकार करने की बात कह कर हत्या करने की वजह बताई तो मीडिया वाले भी हैरान रह गए थे. सभी एकटक नरगिस को ताकते रह गए थे.

पुलिस ने बचा हुआ कीमा, वह गिलास, जिस में सलमान ने कोल्डड्रिंक पी थी, नींद की गोलियों का पत्ता, वह दुपट्टा, जिस से गला घोंटा गया था, कब्जे में ले लिया था. नरगिस को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. उस के बेटे को सलमान के पेरेंट्स अपने साथ फर्रुखाबाद ले गए थे. UP Crime

(कथा में नरगिस परिवर्तित नाम है)

 

 

Crime News: खुद को बचाने के लिए मार दिया दोस्त को

Crime News: कंधे पर बैग टांग कर घर से निकलते हुए राजा ने मां से कहा कि वह 2 दिनों के लिए बाहर जा रहा है तो मां ने पूछा, ‘‘अरे कहां जा रहा है, यह तो बताए जा.’’ लेकिन जब बिना कुछ बताए ही राजा चला गया तो माधुरी ने झुंझला कर कहा, ‘‘अजीब लड़का है, यह भी नहीं बताया कि कहां जा रहा है?’’

यह 19 अक्तूबर, 2016 की बात है. मीरजापुर की कोतवाली कटरा के मोहल्ला पुरानी दशमी में अशोक कुमार का परिवार रहता था. उन के परिवार में पत्नी माधुरी के अलावा 4 बेटों में राजन उर्फ राजा सब से छोटा था. उस की अभी शादी नहीं हुई थी. अशोक कुमार के परिवार का गुजरबसर रेलवे स्टेशन पर चलने वाले खानपान के स्टाल से होता था. अशोक कुमार के 2 बेटे उन के साथ ही काम करते थे, जबकि 2 बेटे गोपाल और राजा मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर स्थित होटल जननिहार में काम करते थे. चूंकि मीरजापुर और मुगलसराय स्टेशन के बीच बराबर गाडि़यां चलती रहती हैं, इसलिए उन्हें आनेजाने में कोई परेशानी नहीं होती थी.

राजा 2 दिनों के लिए कह कर घर से गया था, जब वह तीसरे दिन भी नहीं लौटा तो घर वालों ने सोचा कि किसी काम में लग गया होगा, इसलिए नहीं आ पाया. लेकिन जब चौथे दिन भी वह नहीं आया तो घर वालों को चिंता हुई. दरअसल इस बीच उस का एक भी फोन नहीं आया था. घर वालों ने फोन किया तो राजा का फोन बंद था. जब राजा से बात नहीं हो सकी तो उस की मां माधुरी ने उस के सब से खास दोस्त रवि को फोन किया. उस ने कहा, ‘‘राजा दिल्ली गया है. मैं भी इस समय बाहर हूं.’’

इतना कह कर उस ने फोन काट दिया था. राजा का फोन बंद था, इसलिए उस से बात नहीं हो सकती थी. उस के दोस्त रवि से जब भी राजा के बारे में पूछा जाता, वह खुद को शहर से बाहर होने की बात कह कर राजा के बारे में कभी कहता कि इलाहाबाद में है तो कभी कहता फतेहपुर में है. अंत में उस ने अपना मोबाइल बंद कर दिया.

जब राजा का कहीं पता नहीं चला तो परेशान अशोक कुमार मोहल्ले के कुछ लोगों को साथ ले कर कोतवाली कटरा पहुंचे और राजा के गायब होने की तहरीर दे कर गुमशुदगी दर्ज करा दी. कोतवाली पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज कर ली, लेकिन काररवाई कोई नहीं की. इस के बाद अशोक कुमार 26 अक्तूबर को समाजवादी पार्टी के युवा नेता और सभासद लवकुश प्रजापति के अलावा मोहल्ले के कुछ प्रतिष्ठित लोगों को साथ ले कर मीरजापुर के एसपी अरविंद सेन से मिले और उन्हें अपनी परेशानी बताई.

अशोक कुमार की बात सुन अरविंद सेन ने तत्काल कटरा कोतवाली पुलिस को काररवाई का आदेश दिया. कोतवाली पुलिस ने राजा के बारे में पता करने के लिए उस के दोस्त रवि से पूछताछ करनी चाही, लेकिन वह घर से गायब मिला. अब तक राजा को गायब हुए 10 दिन हो गए थे. रवि घर पर नहीं मिला तो पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिया, क्योंकि उस ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था.

पुलिस की लापरवाही से तंग आ कर बेटे के बारे में पता करने के लिए अशोक कुमार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. मामला न्यायालय तक पहुंचा तो पुलिस ने तेजी दिखानी शुरू की. 28 अक्तूबर, 2016 को राजा के दोस्त रवि और उस के पिता को एसपी औफिस के पास एक मिठाई की दुकान से पकड़ कर कोतवाली लाया गया. लेकिन उन से की गई पूछताछ में कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. इसी तरह अगले दिन भी हुआ.

संयोग से उसी बीच एसपी अरविंद सेन ही नहीं, कोतवाली प्रभारी का भी तबादला हो गया. मीरजापुर जिले के नए एसपी कलानिधि नैथानी आए. दूसरी ओर कटरा कोतवाली प्रभारी की जिम्मेदारी इंसपेक्टर अजय श्रीवास्तव को सौंपी गई. अशोक कुमार 9 नवंबर को नए एसपी कलानिधि नैथानी से मिले. एसपी साहब ने तुरंत इस मामले में काररवाई करने का आदेश दिया. उन्हीं के आदेश पर कोतवाली प्रभारी ने अपराध संख्या 1232/2016 पर भादंवि की धारा 364 के तहत मुकदमा दर्ज कर के काररवाई शुरू कर दी.

इस घटना को चुनौती के रूप में लेते हुए एसपी कलानिधि नैथानी ने कोतवाली प्रभारी कटरा, प्रभारी क्राइम ब्रांच स्वाट टीम एवं सर्विलांस को ले कर एक टीम गठित कर दी. इस टीम ने मुखबिरों द्वारा जो सूचना एकत्र की, उसी के आधार पर 14 नवंबर, 2016 को राजा के दोस्त रवि कुमार को मीरजापुर के नटवां तिराहे से गिरफ्तार कर लिया. उस से राजा के बारे में पूछा गया तो उस ने उस के गायब होने के पीछे की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस वाले जहां हैरान रह गए, वहीं रवि के पकड़े जाने की खबर सुन कर कोतवाली आए राजा के घर वाले रो पड़े. क्योंकि उस ने राजा की हत्या कर दी थी.

उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के थाना नरसैना के गांव रूखी के रहने वाले नरेश कुमार पीएसी में होने की वजह से मीरजापुर में परिवार के साथ रहते हैं. वह पीएसी की 39वीं वाहिनी में स्वीपर हैं. रवि कुमार उन्हीं का बेटा था. उस की दोस्ती राजा से हो गई थी, इसलिए कभी वह उस से मिलने मुगलसराय तो कभी उस के घर आ जाया करता था. दोनों में पक्की दोस्ती थी.

रवि का एक चचेरा भाई दीपेश उर्फ दीपू फिरोजाबाद के टुंडला की सरस्वती कालोनी में किराए का कमरा ले कर पत्नी के साथ रहता था. वह वहां दर्शनपाल उर्फ जेपी की गाड़ी चलाता था. जेपी की बहन राजमिस्त्री का काम करने वाले प्रवीण कुमार से प्यार करती थी. यह जेपी को पसंद नहीं था. उस ने बहन को समझाया . बहन नहीं मानी तो प्रेमी से उसे जुदा करने के लिए उस ने प्रवीण कुमार को ठिकाने लगाने का मन बना लिया.

यह काम वह अकेला नहीं कर सकता था, इसलिए उस ने अपने ड्राइवर दीपेश उर्फ दीपू को साथ मिलाया और 13 अक्तूबर, 2016 को बहन के प्रेमी प्रवीण कुमार को अगवा कर लिया. दोनों उसे शहर से बाहर ले गए और गोली मार कर हत्या कर दी. दोनों के खिलाफ इस हत्या का मुकदमा थाना टुंडला में दर्ज हुआ. चूंकि इस मुकदमे में एससी/एसटी एक्ट भी लगा था, इसलिए पुलिस दोनों के पीछे हाथ धो कर पड़ गई. दर्शनपाल उर्फ जेपी तो गिरफ्तार हो गया, लेकिन दीपेश उर्फ दीपू फरार चल रहा था.

पुलिस उस की गिरफ्तारी के लिए जगहजगह छापे मार रही थी. पुलिस दीपेश को तेजी से खोज रही थी. इस स्थिति में पुलिस से बचने के लिए वह मीरजापुर आ गया था. टुंडला में घटी घटना के बारे में उस ने चचेरे भाई रवि को बता कर कहा, ‘‘रवि, मैं बुरी तरह फंस गया हूं. अगर तुम मेरी मदद करो तो मैं बच सकता हूं.’’

इस के बाद राजा और दीपेश ने योजना बनाई कि किसी ऐसे आदमी को खोजा जाए, जिसे टुंडला ले जा कर हत्या कर के उस की लाश को जला दिया जाए और लाश के पास दीपेश अपनी कोई पहचान छोड़ दे, जिस से पुलिस समझे कि लाश दीपेश की है और उस की हत्या हो चुकी है. इस के बाद पुलिस उस का पीछा करना बंद कर देगी.

जब ऐसे आदमी की तलाश की बात आई तो रवि को अपने दोस्त राजा उर्फ राजन की याद आई. क्योंकि राजा का हुलिया दीपेश से काफी मिलताजुलता था. फिर क्या था, दोनों ने राजा को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली, उसी योजना के तहत उस ने 18 अक्तूबर को राजा को फोन कर के कहा, ‘‘राजा, हम लोगों ने किराए पर एक गाड़ी की है, जिस से कल यानी 19 अक्तूबर को दिल्ली घूमने चलेंगे. मेरा चचेरा भाई दीपेश भी आया हुआ है, वह भी साथ चलेगा. मैं चाहता हूं कि तुम भी चलो.’’

राजा तैयार हो गया तो रवि ने 19 अक्तूबर, 2016 को पीएसी कालोनी के एक परिचित की गाड़ी बुक कराई और राजा को साथ ले कर दिल्ली के लिए चल पड़ा. योजना के अनुसार रास्ते में पैट्रोल खरीद लिया गया. इस के बाद उन्होंने बीयर खरीदी और राजा को जम कर पिलाई. वह नशे में हो गया तो रात 11 बजे के करीब फिरोजाबाद के थाना पचोखरा के गांव सराय नूरमहल और गढ़ी निर्भय के बीच सुनसान स्थान पर पेशाब करने के बहाने गाड़ी रुकवाई और राजा को उतार कर मारपीट कर पहले उसे बेहोश किया, उस के बाद पैट्रोल डाल कर जला दिया.

जब उन्हें विश्वास हो गया कि राजा मर गया है तो पहचान के लिए दीपेश ने अपना जूता राजा की लाश के पास रख दिया, जिस से बाद में उस लाश की पहचान उस की लाश के रूप में हो. इस के बाद दीपेश ने फिरोजाबाद पुलिस को मोबाइल से फोन कर के कहा, ‘‘मैं दीपेश उर्फ बाबू बोल रहा हूं. 3-4 बदमाश मेरा पीछा कर रहे हैं. मुझे बचा लीजिए अन्यथा ये मुझे मार डालेंगे.’’

जिस जगह पर रवि और दीपेश ने राजा को जलाया था, दीपेश का घर वहां से करीब 8 किलोमीटर दूर था. दीपेश ने इस जगह को यह सोच कर चुना था, जिस से पुलिस को लगे कि वह चोरीछिपे अपने गांव आया था. बदमाशों को पता चल गया तो उन्होंने उसे मार डाला. पुलिस को फोन कर के रवि और दीपेश फरार हो गए. जबकि पुलिस सर्विलांस के माध्यम से लोकेशन के आधार पर उन की तलाश में मीरजापुर से फिरोजाबाद तक उन के पीछे लगी थी. दीपेश तो फरार हो गया, लेकिन रवि मीरजापुर तो कभी सोनभद्र तो कभी सिगरौली जा कर छिपा रहा. आखिर ज्यादा दिनों तक वह पुलिस की नजरों से बच नहीं पाया और 14 नवंबर को उसे पकड़ लिया गया.

पूछताछ के बाद रवि की निशानदेही पर पुलिस ने पैट्रोल का डिब्बा, वह गाड़ी जेस्ट कार संख्या यूपी 63जेड 8586, जिस से वे राजा को ले गए थे, बरामद कर ली. इस के बाद उसे उस स्थान पर भी ले जाया गया, जहां उस ने दीपेश के साथ मिल कर राजा को जलाया था. राजा के पिता अशोक कुमार भी साथ थे, इसलिए उन्होंने राजा के अधजले कपड़ों को पहचान लिया था. पुलिस ने रवि को प्रैसवार्ता में पेश किया, जहां उस ने अपना अपराध स्वीकार कर के हत्या की सारी कहानी सुना दी.

घटना का खुलासा होने के बाद कोतवाली पुलिस ने राजा उर्फ राजन की गुमशुदगी हत्या में तब्दील कर आरोपी रवि को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. दीपेश उर्फ दीपू की तलाश में पुलिस ने ताबड़तोड़ छापे मारने शुरू कर दिए तो दबाव में आ कर उस ने फिरोजाबाद की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. अदालत ने उसे जेल भेज दिया था. Crime News

Illicit Relationship: क्या करें जब पति बाहर मुंह मारे

Illicit Relationship: 33 साल की संगीता उर्फ पप्पी 35 वर्षीय महेंद्र गुर्जर की दूसरी पत्नी जरूर थी, लेकिन वह पूरी जिम्मेदारी के साथ घरगृहस्थी संभाले हुए थी. वह पति की इस आदत से परेशान रहती थी कि उस के दूसरी महिलाओं से भी अवैध संबंध थे. संगीता ने जब पति को समझाने की गुस्ताखी की तो…

रात के करीब 10 बजे महेंद्र गुर्जर जैसे ही अपने बैडरूम में दाखिल हुआ तो बिस्तर पर लेटी हुई पत्नी से बोला, ”पप्पी, मेरे पेट में बहुत दर्द हो रहा है.’’

”आप बिस्तर पर लेट जाइए, मैं तेल लगा कर मालिश कर देती हूं, इस से आराम मिल जाएगा,’’ कहते हुए संगीता उर्फ पप्पी अलमारी से तेल की शीशी निकालने चली गई.

”दर्द इतना तेज है कि मुझ से बरदाश्त नहीं हो रहा है, मालिश से कुछ नहीं होगा. जल्द ही मुझे डाक्टर को दिखाना होगा.’’ महेंद्र अपने पेट पर हाथ फेरते हुए बोला.

”रात के 10 बज रहे हैं, इतनी रात को शहर के हौस्पिटल कैसे जाओगे? हेमंत भैया को फोन लगा कर बुला लो, वह तुम्हें बाइक से डौक्टर के पास ले चलेंगे.’’ पत्नी ने सुझाव दिया.

”किसी को बुलाने की जरूरत नहीं है. तुम समझ नहीं रही हो पप्पी, यह दर्द साधारण पेट दर्द नहीं है, कोई गंभीर समस्या लग रही है. हो सकता है, डाक्टर मुझे एडमिट कर ले, इसलिए तुम मेरे साथ चलो.’’ महेंद्र ने कहा.

”लेकिन ऐसे में तुम बाइक चलाते हुए खंडवा तक कैसे चलोगे, रास्ते में तबियत और ज्यादा खराब हो गई तो क्या होगा?’’ पत्नी ने अंदेशा जताते हुए कहा.

”मैं बाइक चलाते हुए ले जाऊंगा, तुम तो कुछ पैसे रख कर जल्दी तैयार हो जाओ, तब तक मैं बाइक निकालता हूं.’’ महेंद्र पत्नी से बोला. संगीता उर्फ पप्पी ने जल्दी से अलमारी से कुछ पैसे निकाले और जरूरी सामान एक थैली में रख लिया. बगल के कमरे में पढ़ रहे बच्चों से पप्पी ने कहा, ”मैं पापा के साथ खंडवा इलाज के लिए जा रही हूं, तुम लोग अंदर से दरवाजा बंद कर ताला लगा कर सो जाना. हो सकता है, हम लोग सुबह लौटें.’’

इस के बाद वह तैयार हो कर घर से बाहर निकल आई. घर के बाहर महेंद्र बाइक ले कर खड़ा हुआ था. तब तक रात के करीब साढ़े 10 बज चुके थे. दोनों बाइक पर सवार हो कर खंडवा के लिए रवाना हो गए. यह 21 सितंबर, 2025 की बात है. महेंद्र ने रात करीब 11 बजे सब से पहले अपने साढ़ू विशाल को फोन कर के बताया, ”भैया, गांव के बाहर रास्ते में कुछ लोगों ने मुझे बंधक बना कर पप्पी को मार डाला है, आप तुरंत आ जाइए.’’

इतना सुनते ही विशाल के होश उड़ गए.  रात का वक्त होने से विशाल ने तुरंत गांव के कुछ लोगों को और फोन कर के बुला लिया और सभी मिल कर महेंद्र के बताई गई जगह पर पहुंच गए. घटनास्थल से ही विशाल ने 112 नंबर डायल कर के मर्डर होने की सूचना पुलिस को दी. इधर रात एक बजे खंडवा के पद्मनगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि डिगरीस और बावडिय़ाकाजी गांव के बीच एक महिला का कत्ल हो गया है. पद्मनगर थाने के टीआई प्रवीण आर्य ने तत्काल घटना की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी और पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

महेंद्र की बताई लोकेशन पर जब पुलिस टीम पहुंची तो महेंद्र बदहवास हालत में वहां मिला. सामने उस की पत्नी की लाश पड़ी हुई थी. महेंद्र ने पुलिस टीम को बताया कि वह बाइक से जिला अस्पताल जा रहा था. डिगरीस गांव के बाहर करीब 2 किलोमीटर निकले ही थे कि 3 बदमाश रास्ते में बाइक अड़ा कर शराब पी रहे थे. उस ने जैसे ही गाड़ी रोकी तो उन्हें देख कर पत्नी ने गुस्से में आ कर कहा, ”तुम लोगों को समझ नहीं आता कि रोड पर गाड़ी अड़ा कर बैठे हो.’’

इतना सुनते ही उन लोगों ने गालीगलौज शुरू कर दी. महेंद्र ने बताया कि रात के समय अंधेरे के कारण मैं उन लोगों को पहचान नहीं पाया और अनजान लोगों से मैं ने बहस करनी उचित नहीं समझी और पत्नी की तरफ से मैं ने उन से माफी मांगी, लेकिन वे लोग नहीं माने. वे लोग अलग ही भाषा बोल रहे थे, जो हमारी समझ से बाहर थी. इतने में 2 लोगों ने मुझे पकड़ा और एक व्यक्ति ने पत्नी को चाकू से गोदगोद कर मार डाला.

महेंद्र ने आगे बताया कि आंखों के सामने पत्नी का मर्डर होते देख मेरे हाथपांव फूल गए. मेरा मोबाइल भी कहीं गिर गया. इतना कहते ही महेंद्र फफकफफक कर रो पड़ा. सूचना मिलने पर एसपी मनोज कुमार राय समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस टीम ने घटनास्थल से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. मृतक महिला की पहचान 33 साल की संगीता उर्फ पप्पी  पति महेंद्र पटेल गुर्जर निवासी डिगरीस के रूप में हुई. पप्पी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उस के शरीर पर धारदार हथियार से करीब 40 बार वार किए गए थे.

35 साल के महेंद्र पटेल के पिता सखाराम पटेल की मौत के बाद महेंद्र ने अपने घर के बाड़े में एक मकान बना लिया था, जिस में वह अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ रहता था. महेंद्र की मां पास ही के पुश्तैनी मकान में अकेली रहती थी. महेंद्र की खंडवा जिले के डिगरीस गांव में किराना दुकान थी. महेंद्र किराना सामान के साथ अवैध रूप से शराब बेचने का काम भी करता है. संगीता महेंद्र के किराना व्यापार में हाथ बंटाती थी. संगीता आदिवासी समाज से थी. महेंद्र ने पहली पत्नी को तलाक दे कर उस से शादी की थी. पहली पत्नी से एक बेटी है, जो महेंद्र के साथ ही रहती है. संगीता से भी उस का एक बेटा है, जिस की उम्र करीब 11 साल है.

दोनों की शादी 2012 में हुई थी. महेंद्र से बेटे के अलावा संगीता की पहले पति से 12 साल की बेटी भी है. बेटी गर्भ में थी, तभी संगीता ने पहले पति से तलाक ले लिया था. महेंद्र की तहरीर पर थाना पद्मनगर में धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत रिपोर्ट दर्ज हो गई. इस मामले की जांच के लिए खंडवा जिले के एसपी मनोज कुमार राय ने एडिशनल एसपी (सिटी) महेंद्र तारनेकर के निर्देशन में 2 पुलिस टीमों का गठन कर दिया. एक टीम में पद्मनगर थाने के टीआई प्रवीण आर्य के साथ एसआई हर्ष सोनगरे, एएसआई केमर रावत, कांस्टेबल अजय एवं दूसरी टीम इंसपेक्टर धीरेश धारवाल के नेतृत्व में गठित की गई.

 

दूसरी टीम ने इस दौरान मुखबिर तंत्र और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के आधार पर जांच की, जिस के बाद एक संदेही हेमंत उर्फ कान्हा से पूछताछ की गई. गांव में रहने वाले सेवकराम पंचाल के 21 साल के बेटे हेमंत पंचाल की मम्मी डिगरीस गांव की थी, इस वजह से वह महेंद्र को मामा कह कर बुलाता था. हेमंत एक प्राइवेट हौस्पिटल में कंपाउंडर का काम करता था. गांव डिगरीस के लोगों ने पुलिस को बताया कि हेमंत अकसर महेंद्र के साथ ही रहता था. ताज्जुब की बात यह थी कि महेंद्र ने पेट दर्द होने पर हेमंत को क्यों नहीं बुलाया?

 

शक होने पर पुलिस ने हेमंत से पूछताछ की. पहले तो उस ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने में अनभिज्ञता व्यक्त की, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया और उस ने हत्या की पूरी कहानी बता दी. हत्या के पीछे की वजह सुन कर हर कोई हैरान रह गया. हेमंत ने सच उगलते हुए पुलिस को बताया कि मृतका के पति ने ही 50 हजार रुपए में सुपारी दे कर अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारने की साजिश रची थी, जिस में गांव जामली कलां के रहने वाले आर्यन यादव और राजेंद्र यादव के साथ मिल कर हत्या की थी.

हेमंत आर्यन के साथ पढ़ा था और उस से दांत काटी दोस्ती थी. आर्यन का दोस्त राजेंद्र था. इस वजह से तीनों आपस में संपर्क में थे. आर्यन और राजेंद्र के पास कोई काम नहीं था. आवारागर्दी करने और नशे की गिरफ्त में रहने की वजह से पैसों की तंगी बनी रहती थी, इसलिए पैसों की खातिर कोई भी काम करने को तत्पर रहते थे. 22 साल का आर्यन यादव और 35 साल का राजेंद्र रेलवे गेट के पास गांव जामली कलां के रहने वाले थे. पुलिस ने दोनों को 24 सितंबर, 2025 को गिरफ्तार कर लिया. इन के पास से सुपारी के 10 हजार रुपए भी बरामद कर लिए.

शुरुआत में पुलिस को मामला लूट का लग रहा था, लेकिन पुलिस ने जब बारीकी से पड़ताल की तो कई बातें मेल नहीं खा रही थीं. पत्नी की हत्या अपनी आंखों के सामने होते देखने वाले महेंद्र के शरीर पर किसी तरह की खरोंच तक का निशान नहीं था. पुलिस को सब से बड़ा सुराग तब मिला, जब हौस्पिटल के डौक्टरों ने साफ कर दिया कि महेंद्र को कोई पेट दर्द नहीं था. इसी से पुलिस का शक और गहरा हुआ. आगे की जांच में जब महेंद्र और उस के दोस्तों से पूछताछ की गई तो पूरा सच सामने आ गया. हत्या के पीछे का कारण पतिपत्नी के बिगड़े रिश्ते बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, महेंद्र का यह दूसरा विवाह था. वह पत्नी से बेहद परेशान था.

पत्नी अकसर उस से और परिवार वालों से झगड़ा करती थी. गालीगलौज भी करती थी. महेंद्र इस तनाव से बाहर निकलना चाहता था और आखिरकार उस ने अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने का खौफनाक रास्ता चुन लिया. उस ने अपने दोस्तों की मदद ली और सब ने मिल कर इस रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश को अंजाम दिया. फिर पत्नी को तड़पातड़पा कर मार डाला. पुलिस पूछताछ में उस ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस का शक यकीन में बदल गया. हेमंत के बताए अनुसार, पप्पी के पति महेंद्र ने ही एक लाख रुपए की सुपारी हेमंत को दी थी. हेमंत अकेले इस काम को अंजाम नहीं दे पा रहा था, लिहाजा उस ने 20-20 हजार रुपए दे कर गांव जामली कलां के रहने वाले आर्यन और राजेंद्र को भी इस में शामिल कर लिया.

महेंद्र का अपने गांव और आसपास की कई महिलाओं से अफेयर चल रहा था. युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही उसे अय्याशी का शौक चढ़ गया था. उस के पास पुश्तैनी करीब 10 एकड़ जमीन थी, इसी अय्याशी के चक्कर में उस ने धीरेधीरे कर के 8 एकड़ जमीन बेच दी. पहली पत्नी सजातीय थी, उस से तलाक के पीछे भी यही कारण था. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू और सुपारी के तौर पर दी गई 10 हजार रुपए की धनराशि आरोपियों से बरामद की. इस दौरान महेंद्र ने अपना मोबाइल आरोपी हेमंत को दे कर उस में दूसरी सिम डलवा कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की थी, उसे भी जब्त कर लिया गया.

महेंद्र गुर्जर टीवी पर ‘क्राइम पेट्रोल’ देख कर प्रभावित हुआ था और पत्नी से परेशान हो कर उस ने पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया. योजना के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह से ले कर रात तक महेंद्र और हेमंत एक साथ थे. हेमंत ने फोन कर के शाम को उस के दोस्तों को बुला लिया था और महेंद्र की दुकान से ही शराब और सिगरेट के पैकेट ले कर उन पर खर्च करने लगा था. इस के बाद रात 10 बजे महेंद्र ने पत्नी के सामने अपने पेट में दर्द होने का नाटक किया.  पति की लाचारी देख कर पत्नी भी साथ चलने को राजी हो गई.

हेमंत और उस के साथी आर्यन व राजेंद्र गांव से करीब एक किलोमीटर बाहर मेन रोड पर बाइक अड़ा कर बैठे हुए थे. महेंद्र और उस की पत्नी के आते ही वे उस की बाइक के आगे खड़े हो गए. फिर तीनों ने मिल कर महेंद्र की पत्नी के साथ मारपीट की और बारीबारी से चाकुओं से तब तक गोदा, जब तक उस की सांसें नहीं थम गईं. मुख्य रास्ता होने की वजह से आरोपियों ने वारदात में देरी नहीं की और महज 5 मिनट में ही संगीता उर्फ पप्पी का काम तमाम कर दिया. उस के बाद महेंद्र गुर्जर ने नाटकीय रूप से गांव के लोगों को फोन किया और कहा कि उस के साथ मारपीट हुई है. गांव वालों के पहुंचने पर पुलिस को इत्तला दी गई.

पुलिस ने हत्या के आरोपी हेमंत गुर्जर, उस के दोस्त आर्यन यादव और राजेंद्र यादव से संगीता उर्फ पप्पी के हत्या के बारे में विस्तार से पूछताछ कर जेल भेज दिया. Illicit Relationship

 

 

 

Love Crime: छलिया आशिक से रहें अलर्ट

Love Crime: 22 वर्षीय तैयबा ने फैसल चौधरी से इसलिए कोर्ट मैरिज कर ली थी, क्योंकि उस ने खुद को कुंवारा बताया था, जबकि हकीकत में वह 2 बच्चों का बाप था. प्यार में छली गई तैयबा के सामने पछतावे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस के बावजूद तैयबा ने छलिया फैसल से जब उस के घर में जगह मांगी तो…

रात के 8 बज गए थे, लेकिन तैयबा अभी तक अपने काम से घर नहीं लौटी थी. उस की अम्मी के पेशानी पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं. वह अपने बड़े बेटे अदनान के कमरे में पहुंची और परेशान होते हुए बोली, ”अदनान, अभी तक तैयबा घर नहीं लौटी है.’’

”अरे!’’ अदनान हैरान होते हुए बोला, ”तैयबा तो 7-साढ़े 7 बजे तक घर आ जाती है, क्या तुम ने उसे फोन नहीं किया?’’

”किया था. मैं ने साढ़े 7 बजे उसे फोन किया था तो कह रही थी थोड़ा लेट हो जाऊंगी, मैं 9 बजे तक आ जाऊंगी, लेकिन अब तो साढ़े 9 बज गए.’’

अदनान ने तैयबा का नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ घंटी बजने के थोड़ी देर बाद ही तैयबा ने फोन उठा लिया. उस ने पूछा, ”कैसे फोन कर रहे हो भाई, सब ठीक तो है?’’

”सब ठीक है यहां. अम्मी तुम्हें ले कर परेशान हैं. तुम कहां पर हो?’’

”मैं अपने काम पर ही हूं भाईजान. मुझे यहां थोड़ा वक्त और लगेगा. आप लोग मेरी चिंता मत करो. खाना खा कर सो जाओ. मेरा खाना अम्मी ढक कर रख देगी. आऊंगी तो गरम कर के खा लूंगी.’’ तैयबा ने कहने के बाद कौल डिसकनेक्ट कर दी.

”तुम बेकार में परेशान हो रही हो अम्मी. तैयबा अपनी ड्यूटी पर ही है. उसे आने में देर हो जाएगी.’’ अदनान ने अम्मी को समझाया.

अदनान के अब्बू अहमद भी घर आ गए थे. तैयबा के अभी तक घर न आने पर उन्होंने लापरवाही से कहा, ”कंपनी में काम निकल आया होगा, तैयबा पहले भी कई बार देर से घर लौटी है. चिंता मत करो, आ जाएगी.’’

रात 11 बजे तक सभी खाना खा कर चारपाई पर आ गए और उन्हें नींद भी आ गई. केवल तैयबा की अम्मी की आंखों से नींद उड़ी हुई थी. तैयबा के लिए वह बेचैन थी. लेकिन नींद तो नींद होती है, रात को कब उसे भी नींद आ गई, मालूम ही नहीं चला, वह अधकच्ची नींद में सोती रही.

अचानक पौने 3 बजे उस की नींद खुल गई. वह घबरा कर बिस्तर पर उठ बैठी. तैयबा अभी भी घर नहीं आई थी. सिरहाने रखा मोबाइल उठा कर तैयबा की अम्मी ने उसे फोन लगाया. घंटी बजी और फोन को तैयबा ने उठा कर कहा, ”हैलो अम्मी! आप अभी तक सोई नहीं हैं क्या?’’

”तू कहां पर है तैयबा?’’ अम्मी ने पूछा.

”मैं यहां एक दोस्त के साथ होटल में चाय पीने आई हूं अम्मी, यह मेरा दोस्त मेरे साथ ही काम करता है. चाय पी कर मैं बस घर के लिए ही निकलूंगी. आप सो जाइए.’’ तैयबा ने बताने के बाद फोन काट दिया. अम्मी को तसल्ली हुई कि बेटी ठीकठाक है और अब जल्दी घर भी आ जाएगी. फोन सिरहाने रख कर उन्होंने आंखें बंद कर लीं तो फिर नींद ने उन्हें अपने आगोश में समेट लिया.

सुबह का उजाला फैला, तब तैयबा की अम्मी की आंखें खुलीं. तैयबा आ गई होगी. यह सोच कर उन्होंने तैयबा के बिस्तर पर नजर दौड़ाई. वह खाली था. अम्मी ने तैयबा को फिर फोन मिलाया, लेकिन तैयबा के फोन के स्विच औफ होने की रिकौर्डिंग सुनाई देने लगी. अम्मी ने कई बार ट्राई किया, किंतु तैयबा का फोन नहीं लगा. घबरा कर अम्मी ने अदनान और पति को जगा दिया. अदनान के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वह बोला, ”अब्बा! मुझे अब तैयबा के लिए ज्यादा चिंता हो रही है. पूरी रात वह घर नहीं आई. आखिर वह कहां रुक गई है. मालूम करना पड़ेगा.’’

अदनान ने दूसरे कपड़े पहने और बोला, ”मैं उस की कंपनी में जा कर पता करता हूं.’’

अदनान स्कूटी ले कर बहन तैयबा का पता लगाने दिलशाद गार्डन चला गया. तैयबा दिलशाद गार्डन में स्थित एक कंपनी में काम करती थी. अदनान ने तैयबा की कंपनी में जा कर मालूम किया तो उसे बताया गया कि तैयबा शाम को ही कंपनी से छुट्टी कर के चली गई थी. अदनान की चिंता बढ़ गई. इस का मतलब तैयबा झूठ बोल रही थी कि कंपनी में ओवरटाइम है, जबकि वह 5 बजे ही कंपनी से छुट्टी कर के निकल गई थी. आखिर वह कहां गई?

अदनान ने तैयबा की कुछ परिचित सहेलियों के यहां जा कर मालूम किया. तैयबा उन से नहीं मिली थी. हर संभावित जगहों पर तलाश करने पर भी जब वह नहीं मिली तो अदनान घर लौट आया और अब्बू को साथ ले कर उत्तरपूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाने में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने चला गया. तैयबा 22 साल की जवान युवती थी. थाना दयालपुर में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली गई. यह सूचना 28 नवंबर को तैयबा के अब्बा अहमद की तरफ से लिखवाई गई थी. उन्हें तैयबा के अपहरण होने का शक था.

दयालपुर थाने के एसएचओ परमवीर दहिया ने तैयबा के लापता होने की घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने यह जानकारी उत्तरपूर्वी डीसीपी आशीष मिश्रा को भी दे दी. इंसपेक्टर परमवीर दहिया डीसीपी के निर्देश पर तैयबा की कंपनी में पहुंच गए और वहां तैयबा के बारे में कंपनी के मालिक से पूछताछ न कर, वहां तैयबा के साथ काम करने वाली एक अन्य युवती को अपने पास बुला कर बड़े प्यार से पूछा, ”तुम तैयबा के साथ काम करती हो, तुम्हारा नाम क्या है?’’

”जी, मेरा नाम रुखसाना है.’’ युवती ने बताया फिर पूछा, ”तैयबा के विषय में क्यों छानबीन कर रहे हैं साहब?’’

”तैयबा कल से घर नहीं लौटी है रुखसाना. उस के अब्बू ने उस की गुमशुदगी थाने में लिखवाई है. क्या तुम्हें लगता है तैयबा का कोई अपहरण कर सकता है?’’

”नहीं साहब,’’ रुखसाना बोली, ”भला उस का अपहरण कोई क्यों करेगा. तैयबा खुद उस के साथ चली गई होगी.’’

”किस के साथ?’’ इंसपेक्टर दहिया ने चौंकते हुए पूछा.

”जिसे वह प्यार करती है. क्या आप ने उस की इंस्टाग्राम पर होटल वाली रील नहीं देखी साहब?’’ कहने के बाद रुखसाना ने अपने मोबाइल में इंस्टाग्राम खोल कर एक रील इंसपेक्टर दहिया के सामने कर दी.

इस रील में तैयबा किसी होटल में एक युवक के साथ बैठी चाय पीती नजर आ रही थी. तैयबा अपने मोबाइल से उस युवक के साथ विभिन्न पोज में रील बना रही थी. युवक का चेहरा इस रील में काफी स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

”इस का नाम तुम्हें मालूम है रुखसाना?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

”फैसल चौधरी है इस का नाम, मुस्तफाबाद में कहीं रहता है. मुझे तैयबा ने यह बात बताई थी.’’

इंसपेक्टर दहिया ने डीसीपी आशीष मिश्रा को यह जानकारी थाने लौट कर दे दी. उन्होंने अपनी देखरेख में थाने के तेजतर्रार इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद की एक टीम बना कर इंसपेक्टर परमवीर दहिया को फैसल चौधरी को ढूंढ निकालने का आदेश दे दिया.

इंसपेक्टर परमवीर दहिया ने इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद को साथ ले कर पहले तैयबा के परिजनों से फैसल चौधरी के विषय में पूछताछ की. उन्होंने तैयबा द्वारा होटल में चाय पीने की वह इंस्टाग्राम वाली रील तैयबा के परिजनों को दिखा कर पूछा, ”क्या इस युवक को आप जानते हैं?’’

”यह तो फैसल चौधरी है.’’ अदनान ने तुरंत कहा, ”मैं ने इसे पहले भी देखा है. यह मुस्तफाबाद में रहता है. इस के पिता आलम चौधरी प्रौपर्टी का काम करते हैं. मैं एक परिचित के साथ इन के औफिस में गया था, परिचित को एक मकान खरीदना था, लेकिन यह फैसल मेरी बहन तैयबा के साथ कैसे?’’

”यह रील देख कर अदनान तुम्हें समझ लेना चाहिए कि तैयबा इस के संपर्क में थी और इस से उस का प्रेम संबंध भी था. यह रील खुद तैयबा ने अपने मोबाइल से बनाई है.’’ इंसपेक्टर दहिया ने गंभीर स्वर में कहा तो अदनान ने सिर झुका लिया और धीरे से बोला, ”मैं इस विषय में नहीं जानता.’’

पुलिस टीम अदनान को साथ ले कर मुस्तफाबाद आलम चौधरी के प्रौपर्टी डीलर वाले औफिस में पहुंच गई. आलम चौधरी अपने औफिस में ही मिल गए. पुलिस को अपने औफिस में देख कर वह चौंकते हुए कुरसी से खड़े हो गए.

”आप फैसल को जानते हैं?’’ इंसपेक्टर राजेश ने पूछा.

”फैसल मेरा बेटा है तो मैं क्या अपने बेटे को नहीं जानंूगा साहब.’’ आलम मुसकराने का प्रयास करते हुए बोले, ”आप उस के विषय में क्यों पूछताछ कर रहे हैं.’’

”वह एक लड़की तैयबा को ले कर आया है. हमें फैसल से मिलवाइए.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कड़क स्वर में कहा.

आलम चौधरी चौंक कर बोले, ”मेरा बेटा फैसल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है जनाब. वह किसी लड़की को क्यों ले कर आएगा? आप लोगों को अवश्य गलतफहमी हुई है.’’

”हमें फैसल से मिलवाओ. उसी के मुंह से हम उस की करतूत आप को सुनवाएंगे. बुलाइए उसे.’’ इंसपेक्टर दहिया शुष्क स्वर में बोले.

आलम चौधरी का घर पास में ही था. वह घर गए और कुछ ही देर में वापस आ गए.

”सर, अभी फैसल घर पर नहीं है…’’

”क्या सुबह वह घर पर था?’’ इंसपेक्टर दहिया ने पूछा.

”मुझे मालूम नहीं. मैं सुबह ही फ्रेश हो कर औफिस में आ जाता हूं. जब मैं घर से निकला था, शायद फैसल सो रहा होगा.’’

”क्या मैं उस की बीवी से पूछताछ कर सकता हूं?’’ इंसपेक्टर दहिया ने आलम चौधरी से पूछा.

”बेशक, आप आइए मेरे साथ.’’ आलम ने कहा.

इंसपेक्टर दहिया अकेले आलम चौधरी के साथ उस के घर की तरफ चले आए. बाकी दोनों इंसपेक्टर और पुलिस कांस्टेबल वहीं औफिस में बैठ गए.

आलम चौधरी ने घर आ कर इंसपेक्टर दहिया के सामने अपनी बहू को हाजिर कर दिया.

इंसपेक्टर दहिया ने सीधा सवाल किया, ”तुम्हारा पति फैसल कहां पर है?’’

”ज…जी, वह कल से ही घर नहीं आए हैं. शाम को कह कर गए थे कि किसी जरूरी काम से जा रहा हूं. क्या काम है और कहां पर जा रहे हैं, यह मैं कभी नहीं पूछती हूं उन से.’’ फैसल की बीवी ने जवाब में कहा. फिर पूछा, ”आप उन के बारे में क्यों पूछताछ कर रहे हैं?’’

”फैसल एक लड़की को ले कर गायब हुआ है. लड़की का नाम तैयबा है. यदि फैसल घर आए तो तुम हमें फोन करोगी. मैं तुम्हें फोन नंबर दे कर जा रहा हूं.’’

इंसपेक्टर दहिया ने अपना मोबाइल नंबर एक कागज पर लिख पर फैसल की बीवी को थमाया तो उन्होंने महसूस किया कि फैसल की बीवी धीरेधीरे सिसक रही थी. शायद पति की करतूत सुनने के बाद वह नर्वस हो गई थी. इंसपेक्टर दहिया आलम चौधरी के साथ औफिस में लौट आए. आलम चौधरी से फैसल के दोस्तों और रिश्तेदारों के पते नोट कर के पुलिस टीम ने उसी वक्त से इन पतों पर दबिश देनी शुरू कर दी. फैसल चौधरी इन पतों पर नहीं था.

पुलिस टीम ने फैसल के संभावित उठनेबैठने की जगहों पर भी छापेमारी की, लेकिन फैसल कहीं भी नहीं मिला. निराश हो कर पुलिस टीम वापस हो गई. पुलिस की छापेमारी जारी थी, तभी उन्हें कड़कडड़ूमा कोर्ट से मैसेज मिला कि फैसल चौधरी ने 25 नवंबर, 2025 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. पुलिस टीम ने कोर्ट में जा कर फैसल चौधरी को अपनी कस्टडी में ले लिया. उस का 2 दिन का रिमांड पुलिस ने कोर्ट से प्राप्त कर लिया. फैसल चौधरी को अपने साथ ले कर पुलिस दयालपुर थाने में आ गई.

इंसपेक्टर दहिया, इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद ने डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में फैसल चौधरी से तैयबा के संबंध में पूछताछ शुरू की तो फैसल ने चौंकाने और होश उड़ाने वाला राज खोलते हुए कहा, ”तैयबा की मैं ने गोली मार कर हत्या कर दी है साहब. वह अब इस दुनिया में नहीं है.’’

फैसल चौधरी के मुंह से यह सच्चाई सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. इंसपेक्टर दहिया ने फैसल को घूरते हुए पूछा, ”तुम ने यदि तैयबा की गोली मार कर हत्या कर दी है तो उस की लाश कहां पर है?’’

”तैयबा की लाश बागपत के पास सरूरपुर कलां के जंगल में मैं ने फेंक दी थी साहब.’’

”चलो, हमें तैयबा की लाश बरामद करवाओ.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कहा.

”ठीक है साहब,’’ फैसल चौधरी ने कहा.

पुलिस टीम फैसल चौधरी को वैन में बिठा कर बागपत पहुंची. सरूरपुर कलां के जंगल में तैयबा की लाश फैसल चौधरी ने जहां फेंकी थी, वह अभी भी वहीं पड़ी हुई थी, लेकिन लाश 3 दिन में काफी खराब हालत में हो गई थी. तैयबा की कनपटी पर गोली का सुराख था, जहां से खून बह कर काला पड़ चुका था. इंसपेक्टर दहिया ने बागपत पुलिस थाने से संपर्क कर के वहां से पुलिस और फोरैंसिक टीम बुलवा कर तैयबा की लाश की जांच करवाई. फिर कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को बागपत पुलिस से अपने अंडर में ले लिया.

तैयबा की लाश ले कर दयालपुर थाने की पुलिस टीम थाने में लौट आई. तैयबा की फैसल चौधरी ने हत्या कर दी है, यह जानकारी तैयबा के फेमिली वालों को दे दी गई. थोड़ी ही देर में तैयबा के फेमिली वाले थाना दयालपुर आ गए. तैयबा की अम्मी, अब्बू अहमद और भाई अदनान का रोरो कर बुरा हाल था. उन के सामान्य होने पर डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में एक बार फिर फैसल चौधरी से पूछताछ की गई. उस की तैयबा से क्या दुश्मनी थी और उस ने तैयबा की हत्या क्यों की? यह पूछे जाने पर फैसल ने बताया, ”साहब, तैयबा मेरी दूसरी पत्नी थी.’’

इस जानकारी पर तैयबा के फेमिली हैरान रह गए. उन्हें यह विश्वास ही नहीं हुआ कि 2 बच्चों के बाप फैसल से तैयबा ने शादी कर ली थी.

”यह झूठ बोल रहा है साहब. मेरी बहन तैयबा इतनी नादान नहीं थी कि वह 2 बच्चों के पिता को अपना शौहर बनाएगी.’’ अदनान ने गुस्से में कहा.

”मेरे पास कोर्ट का सार्टिफिकेट है साहब.’’

उस ने पुलिस के सामने अपने अब्बा को फोन कर कहा कि उस ने तैयबा नाम की लड़की से दूसरी शादी कर ली थी और कोर्ट द्वारा जारी मैरिज सर्टिफिकेट अलमारी के लौकर में रखा है. वह आप थाना दयालपुर में ले कर आ जाएं. यह सुन कर आलम चौधरी सकते में आ गए. फैसल की पहली बीवी ने सिर पीट लिया.

आलम चौधरी आधे घंटे में साकेत कोर्ट द्वारा तैयबा और फैसल की कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट ले कर थाने में आ गए. डीसीपी मिश्रा ने सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच करने के बाद फैसल से पूछा, ”यदि तुम ने तैयबा से छिप कर शादी कर ली थी तो तुम ने उस की हत्या क्यों कर दी?’’

”साहब, मेरी मुलाकात तैयबा से क्लब में हुई थी. तैयबा पहले वहीं काम करती थी. तैयबा खूबसूरत नवयौवना थी. मैं उस की खूबसूरती पर मर मिटा. मैं ने रोज क्लब में जाना शुरू किया और तैयबा से जानपहचान बनाने की कोशिश करने लगा.

”तैयबा थोड़े ही दिनों में मेरी तरफ आकर्षित हो गई. मेरी उस की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. तैयबा को मैं ने बताया था कि मैं कुंवारा हूं. मैं तैयबा पर खूब पैसा खर्च करने लगा. तैयबा मुझे दिल से चाहने लगी. उस ने मेरे साथ शादी का प्रस्ताव रखा तो मैं ने उस के साथ अप्रैल, 2025 में साकेत कोर्ट में शादी कर ली. मैं ने तैयबा से कहा कि यह शादी मेरे परिवार से छिपा कर की गई है, इसलिए मैं उसे तुरंत घर नहीं ले जा सकता. घर वालों को धीरेधीरे मैं समझा लूंगा तो तुम्हें वहां बहू का दरजा दिलवा दूंगा.

”मैं तैयबा से बाहर होटलों में मिलता रहा. हम अपनी हसरतें इन होटलों में पूरी करते रहे. धीरेधीरे समय गुजरने लगा तो तैयबा मुझ पर घर ले चलने का दबाब बनाने लगी. मैं उसे बहाने बना कर टालता रहा. तैयबा को घर ले जाना नहीं चाहता था मैं, क्योंकि घर में मेरी बीवी और 2 बच्चे थे.’’

फैसल कुछ देर के लिए रुका फिर बताने लगा, ”तैयबा 10-12 दिन से ज्यादा जिद करने लगी थी कि मैं उसे घर ले चलूं. मैं परेशान हो गया तो मैं ने तैयबा से पीछा छुड़ाने का उपाय तलाशना शुरू कर दिया. बहुत सोचने के बाद मैं ने निर्णय लिया कि मैं तैयबा की हत्या कर के उस से पिंड छुड़ा लूं.

”मैं ने योजना बना कर एक देशी रिवौल्वर खरीदा, फिर 22 नवंबर को मैं ने अपने एक दोस्त से आई20 कार मांग ली और शाम से पहले तैयबा की कंपनी के सामने दिलशाद गार्डन पहुंच गया. तैयबा को मैं ने फोन कर के बता दिया कि मैं कार लाया हूं, आज हम सैरसपाटा करेंगे. तुम घर में कोई बहाना बना डालो.

”तैयबा शाम को कंपनी से निकल कर मुझ से मिली. उस ने घर में कह दिया था कि आज कंपनी में काम ज्यादा है, देर से घर आएगी. मैं तैयबा को ले कर फिल्म देखने एक थिएटर में गया. मैं ने उस के साथ रात का शो देखा. फिर इधरउधर घूमने के बाद मैं तैयबा को एक होटल में ले गया. वहां हम ने चाय पी. तैयबा बहुत खुश थी. उस की अम्मी का होटल में फोन आया तो तैयबा ने कह दिया वह होटल में चाय पी रही है, जल्दी घर लौटेगी.

”चाय पी लेने के बाद मैं तैयबा को कार में बिठा कर बागपत की तरफ ले गया. रात काफी निकल चुकी थी. सरूरपुर कलां के पास सन्नाटा मिला तो मैं ने पास में बैठी तैयबा के सिर में गोली मार दी. वह मर गई तो मैं ने उस की लाश जंगल में फेंक दी और घर लौट आया. मुझे तैयबा की हत्या करने का बहुत अफसोस है साहब.’’

पुलिस ने फैसल चौधरी से रिवौल्वर और आई20 कार बरामद कर ली. कार की सीट धो कर खून साफ कर दिया गया था, किंतु फोरैंसिक टीम ने कार से तैयबा के खून के नमूने उठा लिए. पुलिस ने फैसल चौधरी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) 3, 5 लगाई गई और उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

तैयबा की लाश का पोस्टमार्टम करवा कर लाश उस के फेमिली वालों को सौंप दी गई. उस के परिजन चाहते थे उन की बेटी को धोखे में रख कर उस से शादी करने और उस की हत्या करने वाले फैसल चौधरी को फांसी की सजा मिले. Love Crime

 

 

UP Crime: जब पति की उम्र में हो ज्यादा अंतर

UP Crime: बच्चे की डिलीवरी के समय मनीष बाजपेई की पत्नी रीति की मृत्यु हो जाने के बाद उस की छोटी बहन काजल मिश्रा मनीष से ब्याह दी गई. 18 वर्षीय काजल 33 वर्षीय जीजा मनीष की पत्नी जरूर बन गई थी, लेकिन वह उस से खुश नहीं थी. दोनों की उम्र के बीच 15 साल के अंतर ने एक दिन उन की गृहस्थी में ऐसा भूचाल खड़ा कर दिया कि…

लखीमपुर खीरी रेलवे स्टेशन से सटी मनीष बाजपेई की चाय की दुकान पर भीड़ काफी कम हो गई थी. इक्कादुक्का ग्राहक चाय पी रहे थे. वह थोड़ा सुस्ताने के लिए बेंच पर बैठ गया था. बीड़ी निकाल ली थी. बीड़ी अभी सुलगाई ही थी कि जेब में रखे मोबाइल की घंटी बज उठी. सुलगी हुई बीड़ी को होंठों से दबाते हुए मनीष ने जेब से मोबाइल निकाल लिया. स्क्रीन पर उभरे नाम को पढ़ते ही उस के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान फैल गई.

कौल उस की पत्नी काजल ने की थी. उस ने तुरंत कौल रिसीव करते हुए कहा, ”हलो! बड़ी लंबी उम्र है तुम्हारी…मैं तुम्हें कौल करने ही वाला था.’’

”चलो, अच्छी बात है, कम से कम मेरी याद तो आई. कई दिन हो गए घर आए, क्यों नहीं आए.’’ पत्नी काजल नाराजगी जताते हुए बोली.

”इधर काम कुछ ज्यादा था. इस वजह से आ नहीं पाया,’’ मनीष ने सरलता से जवाब दिया.

”देखो, आज आप घर जरूर आ जाना.’’ काजल दबाव बनाती हुई बोली.

”ठीक है, आज मैं जरूर आऊंगा,’’ इतना कह कर मनीष ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. यह बात 25 नवंबर, 2025 की सुबह की है. उस रोज मनीष ने अपने होटल का काम निपटाया और कुछ देर बाद बस पकड़ कर सीधा जलालपुर पुल के निकट पहुंच गया. वहां पहुंचने की खबर मनीष ने काजल को फोन से दे दी थी. थोड़े समय में ही काजल स्कूटी से जलालपुर पुल के पास आ गई. उस वक्त रात के 8 बज रहे थे. काजल और मनीष स्कूटी से सीतापुर जिले के गांव निजामाबाद में स्थित अपने घर आ गए.

दोनों ने रात का खाना इकट्ठे खाया और बातें करने लगे. थोड़ी देर बाद दोनों सो गए. अगले दिन 26 नवंबर की सुबह 6 बजे के करीब काजल अपने पति को स्कूटी पर बिठा कर जलालपुर पुल के पास छोडऩे के लिए निकल पड़ी.

बरईखेड़ा तिराहे के पास काजल ने अचानक स्कूटी रोक दी तो मनीष ने पूछा, ”क्यों रोकी स्कूटी?’’

”अरे कुछ नहीं, स्कूटी में किसी चीज के फंसने की आवाज आ रही थी, इसलिए… तुम बैठे रहो.’’

उसी समय अचानक एक मोटे बरगद के पेड़ की आड़ से 2 लोग निकले. एक के हाथ में धारदार गंडासा था. दूसरा लोहे की रौड लिए था. इस से पहले कि मनीष कुछ समझ पाता, दोनों ने उस पर हमला कर दिया. मनीष इस के लिए पहले से तैयार नहीं था. वह अपना बचाव नहीं कर पाया. लहूलुहान हो कर वह स्कूटी से नीचे गिर पड़ा. काजल अपनी जान बचाने के लिए स्कूटी छोड़ कर भागी. मनीष गिर कर तड़पने लगा, जबकि काजल हमलावरों की नजर से बच कर रोड के किनारे नीचे की ओर ओट में छिप गई.

दोनों हमलावर घटना को अंजाम दे कर फरार हो गए. ओट ले कर छिपी काजल डरीसहमी बाहर निकली. लहूलुहान पति को बीच सड़क पर गिरे देख कर घबरा गई. पसीने से नहा गई. उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे, क्या नहीं? इसी बीच एक राहगीर चीखा, ”अरे इसे अस्पताल ले जाओ. एंबुलेंस बुलाओ!’’ काजल ने एंबुलेंस के लिए मोबाइल से इमरजेंसी नंबर 108 पर कौल कर दिया. फिर अपने फेमिली वालों को कौल किया. उन्हें घटना की सूचना दे दी. कुछ मिनटों में ही घटनास्थल पर एंबुलेंस आ गई. लहूलुहान मनीष को जिला अस्पताल सीतापुर पहुंचाया गया. वहां मौजूद डौक्टरों ने मनीष की गंभीर हालत देख कर तुरंत लखनऊ ले जाने को कह दिया.

लखनऊ के मैडिकल कालेज में जैसे ही मनीष को इमरजेंसी में ले जाया गया, वहां के डौक्टरों ने शुरुआती जांच में ही उसे मृत घोषित कर दिया. इस वारदात की जानकारी से आसपास के इलाके में कोहराम मच गया. मौके पर पहुंची थाना कमलापुर पुलिस ने इस घटना की सूचना पुलिस के आलाधिकारियों को दे दी. कुछ समय में ही एडिशनल एसपी (दक्षिणी) दुर्गेश कुमार सिंह, सीओ (सिधौली) कपूर कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. हर कोण से पुलिस ने मौकामुआयना किया. पुलिस के आलाधिकारियों ने एसएचओ इतुल चौधरी को जांच संबंधी जरूरी निर्देश दिए.

एसएचओ चौधरी ने अपनी जांच शुरू की. मुखबिरों को सचेत किया. पुलिस हत्या की वजह और हत्यारों की तलाश में जुट गई. मरने वाले व्यक्ति की पहचान मनीष बाजपेई कमलापुर थाना निवासी के तौर पर हुई. इस बाबत मृतक के पिता दयाशंकर बाजपेई ने पुलिस को तहरीर दी. अपनी तहरीर में उन्होंने लिखा कि उन का बेटा मनीष बाजपेई अपनी ससुराल निजामाबाद में अपनी पत्नी काजल बाजपेई के साथ रहता था. उस की जनपद लखीमपुर खीरी में रेलवे स्टेशन गेट के पास चाय की गुमटी है.

26 नवंबर की सुबहसुबह मनीष को गांव के समीप ही हत्या कर दी गई. उन्होंने हत्या का संदेह उस की पत्नी काजल समेत उस के पिता कपिल मिश्रा व कुछ अज्ञात लोगों पर जताया. उन्होंने अपने बेटे की हत्या के लिए काजल पर शंका जाहिर की. काजल का चालचलन ठीक नहीं होने की बात बताई, जो मनीष ने बताई थी. दयाशंकर बाजपेई की तहरीर पर 27 नवंबर की दोपहर ढाई बजे काजल बाजपेई और उस के पिता कपिल मिश्रा समेत अन्य अज्ञात हत्यारों के खिलाफ पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत एसपी अंकुर अग्रवाल ने जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच प्रभारी इतुल चौधरी को सौंप कर सहयोग के लिए एसओजी टीम को भी लगा दिया.

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जांच की प्रक्रिया जैसे ही आगे बढ़ी, पुलिस को मुखबिर द्वारा हत्यारे के बरईखेड़ा मोड़ तिराहे के पास मौजूद होने की सूचना मिली. कमलापुर पुलिस ने क्राइम ब्रांच टीम के साथ मिल कर 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए लोगों में मृतक मनीष बाजपेई की पत्नी काजल बाजपेई और उस के पापा कपिल मिश्रा के साथसाथ 28 साल का युवक अजीत कुमार भी था. हालांकि काजल अपनी गिरफ्तारी को ले कर पुलिस से उलझ गई. पति से बेहद प्रेम करने का हवाला देती हुई खुद को उस की भरोसेमंद पत्नी बताया, लेकिन जब बताया गया घटना की जांच के लिए उस से भी पूछताछ की जानी जरूरी है, तब वह शांत हुई और पुलिस की जांच में साथ देने लिए तैयार हो गई.

थाने में पूछताछ की शुरुआत काजल से हुई. उस से पति के साथ मधुर संबंधों, कामधंधे और घरेलू बातों को ले कर कई सवाल पूछे गए. उस की और पति की उम्र में 15 साल से अधिक का अंतर था. मनीष बाजपेई करीब 35 वर्ष का था. 20 वर्षीय काजल ने इस पर अफसोस जताते हुए बताया कि मनीष से उस की शादी अचानक हो गई थी. इस में काजल की मरजी की एक नहीं चली थी. मनीष उस का जीजा था. उस की बड़ी बहन रीति उस से ब्याही गई थी. वर्ष 2018 में प्रसव के दौरान रीति की आकस्मिक मौत हो गई थी. फिर फेमिली वालों ने 2021 में उस की जीजा मनीष के साथ शादी कर दी. मनीष के पसंद नहीं होने का एक बड़ा कारण उस का एक पैर से विकलांग होना भी था.

मनीष एक साधारण कारोबार करता था. उस की लखीमपुर रेलवे स्टेशन गेट के पास चाय की छोटी सी दुकान थी. उस की इतनी आमदनी हो जाती थी, जिस से वह अपना घरपरिवार किसी तरह चला लेता था. मनीष काजल का पूरा खर्च उठाता था. उसे किसी भी तरह की कमी नहीं होने देता था. वह दुकान में ही रहता था और बीचबीच में काजल के पास घर आ जाया करता था. कभीकभी काजल के मायके में ही ठहर जाता था. काजल ने मनीष के साथ अपने दांपत्य संबंधों के बारे में बताया कि मनीष से एक बेटी पैदा हुई. वह ढाई साल की है. पति की शारीरिक कमजोरी की वजह से काजल का झुकाव अजीत कुमार की तरफ हो गया था. वह लखीमपुर खीरी जनपद के गांव मूड़ाधामू टिकरा का रहने वाला है.

पति के कभीकभार घर आने से काजल का लगाव अजीत से हो गया था. बाद में दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए. दोनों के ये संबंध छिपे रहे. पति की गैरमौजूदगी में काजल और अजीत का मनमानापन बढ़ता चला गया. जब इस बारे में मनीष को संदेह हुआ, तब उस ने इस पर आपत्ति जताई. काजल और मनीष के बीच आए दिन इस बात को ले कर तकरार होने लगी. रोजरोज की किचकिच से छुटकारा पाने के लिए अजीत ने मनीष को ही रास्ते से हटाने का उपाय सोचा. उस बारे में काजल को बताया. उपाय सुनते ही काजल की आंखों में चमक आ गई. वह इस के लिए तुरंत तैयार हो गई.

उपाय के लिए योजना बनाना जरूरी था. काजल और अजीत योजना बनाने लगे. आपसी रायमशविरा करने के बाद दोनों ने योजना बना डाली. काजल ने उसी योजना के तहत मनीष को घर बुलवाया. उस के बाद अगले दिन 26 नवंबर को वापस लौटते हुए मनीष को मौत के घाट उतार दिया. काजल के बाद पुलिस ने अजीत से भी पूछताछ की. उस ने भी काजल की तरह मनीष की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया गंड़ासा, एक स्कूटी, खून सने कपड़े, 3 अदद मोबाइल फोन बरईखेड़ा तिराहे के पास मौजूद बरगद के पेड़ के निकट से बरामद कर लिए गए.

मौके से पुलिस द्वारा खून आलूदा एवं सादी मिट्टी का भी नमूना इकट्ठा कर लिया गया. गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों से फरार तीसरे अभियुक्त के बारे में पूछताछ की गई. उस के बारे में उन्होंने बताया कि मौके से वह अकेला ही फरार हो गया था. कमलापुर पुलिस व क्राइम ब्रांच फरार तीसरे अभियुक्त की तलाश में जुट गई. कथा लिखे जाने तक तीसरे अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी. उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव निजामाबाद थाना कमलापुर क्षेत्र में आता है. काजल के पापा कपिल मिश्रा इसी गांव के निवासी हैं. वह खेतीकिसानी कर अपने परिवार का भरणपोषण करते हैं.

कपिल मिश्रा का भरापूरा परिवार है. परिवार में 5 बेटियों के अलावा एक बेटा है. उन्होंने अपनी तीसरी बेटी रीति की शादी मनीष के साथ की थी, जिस की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी. काजल उन की 5वीं बेटी है, जिस की मनीष के साथ शादी की गई गई थी. वह मनीष के साथ अवस्थी टोला गंज बाजार महोली में रहने लगी थी. काजल हाईस्कूल पास है. वह शुरू से ही काफी चंचल, हंसमुख और तीखे नैननक्श वाली थी. वह किसी से भी बेझिझक बातें कर लेती थी. उस की अदाओं से हर कोई उस का दीवाना बन जाता था.

यौवन की उम्र आतेआते वह और भी दिलकश बन गई थी. काजल के कजरारे नैन, गुलाबी गाल, लंबे खूबसूरत बाल, गोल खूबसूरत चेहरा एक झलक में ही किसी को भी आकर्षित कर लेता था. वह सभी बहनों से सुंदर जरूर थी, लेकिन शादी का योग नहीं बन पा रहा था. एक तरफ उस की सुंदरता और बिंदास हरकतों से चौतरफा बदनामी हो रही थी, दूसरी तरफ उस के पेरेंट्स को शादी की चिंता सता रही थी. इसी बीच रीति की अचानक मौत के बाद कुछ ऐसी परिस्थिति बनी कि वह विकलांग मनीष बाजपेई से ब्याह दी गई.

काजल जब ब्याह कर ससुराल आई, तब आसपास की औरतों ने उस की खूबसूरती की खूब चर्चा की. ससुराल में ससुर दयाशंकर बाजपेई के अलावा उस की सौतेली सास, पति मनीष, सौतेला देवर सुमित बाजपेई और देवरानी रहते थे. ननद प्रीति उर्फ जुगनू और नेहा थीं. प्रीति की लखीमपुर खीरी में शादी कर दी गई थी. देवर सुमित बाजपेई का भी ब्याह कर दिया गया था. ससुराल में केवल काजल, सौतेली सास, ससुर, देवर व देवरानी ही रह गए थे.

काजल कहने को तो ससुराल में रहती थी, लेकिन उस का रहनसहन और गांव और बाजारहाट में घुमानाफिरना मायके की तरह ही होता था. वह अकसर सजधज कर कभी बाजार तो कभी आसपास के घरों में आतीजाती रहती थी. काजल की इन आदतों को देख कर उस की सौतेली सास रोकटोक करती रहती थी. यहां तक कि उसे डांट भी देती थी. सास जब भी उसे मर्यादा का पाठ पढ़ाती थी, वह तुनक जाती थी और उसी के साथ झगड़ पड़ती थी. काजल अपनी मनमानी पर उतारू थी. धीरेधीरे सासबहू में लड़ाईझगड़ा बढऩे लगा. तब काजल पति पर दबाव बना कर मायके में रहने लगी. मायके में ही उस ने बेटी को जन्म दिया.

काजल के मायके में रहते हुए मनीष कभीकभार ससुराल में आ कर रुकने लगा. मायके में काजल पर टीकाटिप्पणी करने वाला कोई नहीं था. इसलिए वह और भी स्वच्छंद हो गई थी. हंसीमजाक तक करने लगी थी. इसी बीच उस ने अजीत को अपना दिल दे दिया था. काजल की जिद पर मनीष ने उसे स्कूटी खरीद दी थी. स्कूटी मिलते ही मानो उस के पंख लग गए थे. वह अपनी मरजी की मालिक बन गई थी. यहां तक कि अपने मम्मीपापा तक से जुबान लड़ाने लगी थी. कहते हैं न हर गलत और मनमानी करने का नतीजा गलत ही निकलता है, जो कुछ सालों में ही काजल के सामने आ चुका था.

काजल एवं अजीत से एएसपी (दक्षिणी) दुर्गेश कुमार सिंह, सीओ (सिधौली) कपूर कुमार ने भी पूछताछ की. इस के बाद दोनों आरोपियों को धारा 103(1) बीएनएस व 4/25 शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. UP Crime

लेखक – शरीफ अहमद