Crime Story: रसीली नहीं थी रशल कंवर

Crime Story: डूंगरदान पत्नी को सुखी और खुश रखने के लिए गांव से शहर ले आया था. वह जितना कमाता था, उतने में गृहस्थी आराम से चल जाती थी, लेकिन दिन भर घर में अकेली रहने वाली पत्नी रसाल कंवर ने अपना सुख खोजा पति के दोस्त मोहन सिंह राव में. इस के चलते कुछ न कुछ तो गलत होना ही था. आखिर…

रविवार 14 जुलाई, 2019 का दिन था. दोपहर का समय था. जालौर के एसपी हिम्मत अभिलाष टाक को फोन पर सूचना मिली कि बोरटा-लेदरमेर ग्रेवल सड़क के पास वन विभाग की जमीन पर एक व्यक्ति का नग्न अवस्था में शव पड़ा है.

एसपी टाक ने तत्काल भीनमाल के डीएसपी हुकमाराम बिश्नोई को घटना से अवगत कराया और घटनास्थल पर जा कर काररवाई करने के निर्देश दिए. एसपी के निर्देश पर डीएसपी हुकमाराम बिश्नोई तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हो गए, साथ ही उन्होंने थाना रामसीन में भी सूचना दे दी. उस दिन थाना रामसीन के थानाप्रभारी छतरसिंह देवड़ा अवकाश पर थे. इसलिए सूचना मिलते ही मौजूदा थाना इंचार्ज साबिर मोहम्मद पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

घटनास्थल पर आसपास के गांव वालों की भीड़ जमा थी. वहां वन विभाग की खाई में एक आदमी का नग्न शव पड़ा था. आधा शव रेत में दफन था. उस का चेहरा कुचला हुआ था. शव से बदबू आ रही थी, जिस से लग रहा था कि उस की हत्या शायद कई दिन पहले की गई है. वहां पड़ा शव सब से पहले एक चरवाहे ने देखा था. वह वहां सड़क किनारे बकरियां चरा रहा था. उसी चरवाहे ने यह खबर आसपास के लोगों को दी थी. कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को खबर कर दी.

मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को खाई से बाहर निकाल कर शिनाख्त कराने की कोशिश की, मगर जमा भीड़ में से कोई भी मृतक की शिनाख्त नहीं कर सका. शव से करीब 20 मीटर की दूरी पर किसी चारपहिया वाहन के टायरों के निशान मिले. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि हत्यारे शव को किसी गाड़ी में ले कर आए और यहां डाल कर चले गए. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए. शव के पास ही खून से सनी सीमेंट की टूटी हुई ईंट भी मिली. लग रहा था कि उसी ईंट से उस के चेहरे को कुचला गया था. कुचलते समय वह ईंट भी टूट गई थी.

मौके की सारी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय चिकित्सालय की मोर्चरी भिजवा दिया. डाक्टरों की टीम ने उस का पोस्टमार्टम किया. जब तक शव की शिनाख्त नहीं हो जाती, तब तक जांच आगे नहीं बढ़ सकती थी. शव की शिनाख्त के लिए पुलिस ने मृतक के फोटो वाट्सऐप पर शेयर कर दिए. साथ ही लाश के फोटो भीनमाल, जालौर और बोरटा में तमाम लोगों को दिखाए. लेकिन कोई भी उसे नहीं पहचान सका.

सोशल मीडिया पर मृतक का फोटो वायरल हो चुका था. जालौर के थाना सिटी कोतवाली में 2 दिन पहले कालेटी गांव के शैतानदान चारण नाम के एक शख्स ने अपने रिश्तेदार डूंगरदान चारण की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. कोतवाली प्रभारी को जब थाना रामसीन क्षेत्र में एक अज्ञात लाश मिलने की जानकारी मिली तो उन्होंने लाश से संबंधित बातों पर गौर किया. उस लाश का हुलिया लापता डूंगरदान चारण के हुलिए से मिलताजुलता था. कोतवाली प्रभारी बाघ सिंह ने डीएसपी भीनमाल हुकमाराम को सारी बातें बताईं.

मारा गया व्यक्ति डूंगरदान चारण था

इस के बाद एसपी जालौर ने 2 पुलिस टीमों का गठन किया, इन में एक टीम भीनमाल थाना इंचार्ज साबिर मोहम्मद के नेतृत्व में गठित की गई, जिस में एएसआई रघुनाथ राम, हैडकांस्टेबल शहजाद खान, तेजाराम, संग्राम सिंह, कांस्टेबल विक्रम नैण, मदनलाल, ओमप्रकाश, रामलाल, भागीरथ राम, महिला कांस्टेबल ब्रह्मा शामिल थी. दूसरी पुलिस टीम में रामसीन थाने के एएसआई विरधाराम, हैडकांस्टेबल प्रेम सिंह, नरेंद्र, कांस्टेबल पारसाराम, राकेश कुमार, गिरधारी लाल, कुंपाराम, मायंगाराम, गोविंद राम और महिला कांस्टेबल धोली, ममता आदि को शामिल किया गया.

डीएसपी हुकमाराम बिश्नोई दोनों पुलिस टीमों का निर्देशन कर रहे थे. जालौर के कोतवाली निरीक्षक बाघ सिंह ने उच्चाधिकारियों के आदेश पर डूंगरदान चारण की गुमशुदगी दर्ज कराने वाले उस के रिश्तेदार शैतानदान को राजदीप चिकित्सालय की मोर्चरी में रखी लाश दिखाई तो उस ने उस की शिनाख्त अपने रिश्तेदार डूंगरदान चारण के रूप में कर दी. मृतक की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उस के परिजनों से संपर्क किया तो इस मामले में अहम जानकारी मिली. मृतक की पत्नी रसाल कंवर ने पुलिस को बताया कि उस के पति डूंगरदान 12 जुलाई, 2019 को जालौर के सरकारी अस्पताल में दवा लेने गए थे.

वहां से घर लौटने के बाद पता नहीं वे कहां लापता हो गए, जिस की थाने में सूचना भी दर्ज करा दी थी. रसाल कंवर ने पुलिस को अस्पताल की परची भी दिखाई. पुलिस टीम ने अस्पताल की परची के आधार पर जांच की. पुलिस ने राजकीय चिकित्सालय जालौर के 12 जुलाई, 2019 के सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो पता चला कि डूंगरदान को काले रंग की बोलेरो आरजे14यू बी7612 में अस्पताल तक लाया गया था. उस समय डूंगरदान के साथ उस की पत्नी रसाल कंवर के अलावा 2 व्यक्ति भी फुटेज में दिखे. उन दोनों की पहचान मोहन सिंह और मांगीलाल निवासी भीनमाल के रूप में हुई. पुलिस जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही थी.

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जांच के बाद गांव के विभिन्न लोगों से पूछताछ की तो सामने आया कि मृतक डूंगरदान चारण की पत्नी रसाल कंवर से मोहन सिंह राव के अवैध संबंध थे. इस जानकारी के बाद पुलिस ने रसाल कंवर और मोहन सिंह को थाने बुला कर सख्ती से पूछताछ की. मांगीलाल फरार हो गया था. रसाल कंवर और मोहन सिंह राव ने आसानी से डूंगरदान की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. केस का खुलासा होने की जानकारी मिलने पर पुलिस के उच्चाधिकारी भी थाने पहुंच गए. उच्चाधिकारियों के सामने आरोपियों से पूछताछ कर डूंगरदान हत्याकांड से परदा उठ गया.

पुलिस ने 16 जुलाई, 2019 को दोनों आरोपियों मृतक की पत्नी रसाल कंवर एवं उस के प्रेमी मोहन सिंह राव को कोर्ट में पेश कर 2 दिन के रिमांड पर ले लिया. रिमांड के दौरान उन से विस्तार से पूछताछ की गई तो डूंगरदान चारण की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी. मृतक डूंगरदान चारण मूलरूप से राजस्थान के जालौर जिले के बागौड़ा थानान्तर्गत गांव कालेटी का निवासी था. उस के पास खेती की थोड़ी सी जमीन थी. वह उस जमीन पर खेती के अलावा दूसरी जगह मेहनतमजदूरी करता था. उस की शादी करीब एक दशक पहले जालौर की ही रसाल कंवर से हुई थी.

करीब एक साल बाद रसाल कंवर एक बेटे की मां बनी तो परिवार में खुशियां बढ़ गईं. बाद में वह एक और बेटी की मां बन गई. जब डूंगरदान के बच्चे बड़े होने लगे तो वह उन के भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगा. गांव में अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था नहीं थी, लिहाजा डूंगरदान अपने बीवीबच्चों के साथ गांव कालेटी छोड़ कर भीनमाल चला गया और वहां लक्ष्मीमाता मंदिर के पास किराए का कमरा ले कर रहने लगा. भीनमाल कस्बा है. वहां डूंगरदान को मजदूरी भी मिल जाती थी. जबकि गांव में हफ्तेहफ्ते तक उसे मजदूरी नहीं मिलती थी.

डूंगरदान के पड़ोस में ही मोहन सिंह राव का आनाजाना था. मोहन सिंह राव पुराना भीनमाल के नरता रोड पर रहता था. वह अपराधी प्रवृत्ति का रसिकमिजाज व्यक्ति था. उस की नजर रसाल कंवर पर पड़ी तो वह उस का दीवाना हो गया. मोहन सिंह ने इस के लिए ही डूंगरदान से दोस्ती की थी. इस के बाद वह उस के घर आनेजाने लगा. मोहन सिंह रसाल कंवर से भी बड़ी चिकनीचुपड़ी बातें करता था. जब डूंगरदान मजदूरी करने चला जाता और उस के बच्चे स्कूल तो घर में रसाल कंवर अकेली रह जाती. ऐसे मौके पर मोहन सिंह उस के यहां आने लगा. मीठीमीठी बातों में रसाल को भी रस आने लगा. मोहन सिंह अच्छीखासी कदकाठी का युवक था.रसाल और मोहन के बीच धीरेधीरे नजदीकियां बढ़ने लगीं.

थोड़े दिनों के बाद दोनों के बीच अवैध संबंध कायम हो गए. इस के बाद रसाल कंवर उस की दीवानी हो गई. डूंगरदान हर रोज सुबह मजदूरी पर निकल जाता तो फिर शाम होने पर ही घर लौटता था. रसाल और मोहन पूरे दिन रासलीला में लगे रहते. डूंगरदान की पीठ पीछे उस की ब्याहता कुलटा बन गई थी. दिन भर का साथ उन्हें कम लगने लगा था. मोहन चाहता था कि रसाल कंवर रात में भी उसी के साथ रहे, मगर यह संभव नहीं था. क्योंकि रात में पति घर पर होता था.

ऐसे में एक दिन मोहन सिंह ने रसाल कंवर से कहा, ‘‘रसाल, जीवन भर तुम्हारा साथ तो निभाऊंगा ही, साथ ही एक प्लौट भी तुम्हें ले कर दूंगा. लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम्हारे बदन को अब मेरे सिवा और कोई न छुए. तुम्हारे तनमन पर अब सिर्फ मेरा अधिकार है.’’

‘‘मैं हर पल तुम्हारा साथ निभाऊंगी.’’ रसाल कंवर ने प्रेमी की हां में हां मिलाते हुए कहा.

रसाल के दिलोदिमाग में यह बात गहराई तक उतर गई थी कि मोहन उसे बहुत चाहता है. वह उस पर जान छिड़कता है. रसाल भी पति को दरकिनार कर पूरी तरह से मोहन के रंग में रंग गई. इसलिए दोनों ने डूंगरदान को रास्ते से हटाने का मन बना लिया. लेकिन इस से पहले ही डूंगरदान को पता चल गया कि उस की गैरमौजूदगी में मोहन सिंह दिन भर उस के घर में पत्नी के पास बैठा रहता है. यह सुनते ही उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. गुस्से से भरा डूंगरदान घर आ कर चिल्ला कर पत्नी से बोला, ‘‘मेरी गैरमौजूदगी में मोहन यहां क्यों आता है, घंटों तक यहां क्या करता है? बताओ, तुम से उस का क्या संबंध है?’’ कहते हुए उस ने पत्नी का गला पकड़ लिया.

रसाल मिमियाते हुए बोली, ‘‘वह तुम्हारा दोस्त है और तुम्हें ही पूछने आता है. मेरा उस से कोई रिश्ता नहीं है. जरूर किसी ने तुम्हारे कान भरे हैं. हमारी गृहस्थी में कोई आग लगाना चाहता है. तुम्हारी कसम खा कर कहती हूं कि मोहन सिंह से मैं कह दूंगी कि वह अब घर कभी न आए.’’

पत्नी की यह बात सुन कर डूंगरदान को लगा कि शायद रसाल सच कह रही है. कोई जानबूझ कर उन की गृहस्थी तोड़ना चाहता है. डूंगरदान शरीफ व्यक्ति था. वह बीवी पर विश्वास कर बैठा. रसाल कंवर ने अपने प्रेमी मोहन को भी सचेत कर दिया कि किसी ने उस के पति को उस के बारे में बता दिया है. इसलिए अब सावधान रहना जरूरी है. उधर डूंगरदान के मन में पत्नी को ले कर शक उत्पन्न तो हो ही गया था. इसलिए वह वक्तबेवक्त घर आने लगा. एक रोज डूंगरदान मजदूरी पर गया और 2 घंटे बाद घर लौट आया. घर का दरवाजा बंद था. खटखटाने पर थोड़ी देर बाद उस की पत्नी रसाल कंवर ने दरवाजा खोला. पति को अचानक सामने देख कर उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

डूंगरदान की नजर कमरे में अंदर बैठे मोहन सिंह पर पड़ी तो वह आगबबूला हो गया. उस ने मोहन सिंह पर गालियों की बौछार कर दी. मोहन सिंह गालियां सुन कर वहां से चला गया. इस के बाद डूंगरदान ने पत्नी की लातघूंसों से खूब पिटाई की. रसाल लाख कहती रही कि मोहन सिंह 5 मिनट पहले ही आया था. मगर पति ने उस की एक न सुनी. पत्नी के पैर बहक चुके थे. डूंगरदान सोचता था कि गलत रास्ते से पत्नी को वापस कैसे लौटाया जाए. वह इसी चिंता में रहने लगा. उस का किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था. वह चिड़चिड़ा भी हो गया था. बातबात पर उस का पत्नी से झगड़ा हो जाता था.

आखिर, रसाल कंवर पति से तंग आ गई. यह दुख उस ने अपने प्रेमी के सामने जाहिर कर दिया. तब दोनों ने तय कर लिया कि डूंगरदान को जितनी जल्दी हो सके, निपटा दिया जाए. रसाल कंवर पति के खून से अपने हाथ रंगने को तैयार हो गई. मोहन सिंह ने योजना में अपने दोस्त मांगीलाल को भी शामिल कर लिया. मांगीलाल भीनमाल में ही रहता था.

साजिश के तहत रसाल और मोहन सिंह 12 जुलाई, 2019 को डूंगरदान को उपचार के बहाने बोलेरो गाड़ी में जालौर के राजकीय चिकित्सालय ले गए. मांगीलाल भी साथ था. वहां उस के नाम की परची कटाई. डाक्टर से चैकअप करवाया और वापस भीनमाल रवाना हो गए. रास्ते में मौका देख कर रसाल कंवर और मोहन सिंह ने डूंगरदान को मारपीट कर अधमरा कर दिया. फिर उस का गला दबा कर उसे मार डाला.

इस के बाद डूंगरदान की लाश को ठिकाने लगाने के लिए बोलेरो में डाल कर बोरटा से लेदरमेर जाने वाले सुनसान कच्चे रास्ते पर ले गए, जिस के बाद डूंगरदान के शरीर पर पहने हुए कपड़े पैंटशर्ट उतार कर नग्न लाश वन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर डाल कर रेत से दबा दी. उस के बाद वे भीनमाल लौट गए. भीनमाल में रसाल कंवर ने आसपास के लोगों से कह दिया कि उस का पति जालौर अस्पताल चैकअप कराने गया था. मगर अब उस का कोई पता नहीं चल रहा. तब डूंगरदान की गुमशुदगी उस के रिश्तेदार शैतानदान चारण ने जालौर सिटी कोतवाली में दर्ज करा दी.

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी मोहन सिंह आपराधिक प्रवृत्ति का है. उस ने अपने साले की बीवी की हत्या की थी. इन दिनों वह जमानत पर था. मोहन सिंह शादीशुदा था, मगर बीवी मायके में ही रहती थी. भीनमाल निवासी मांगीलाल उस का मित्र था. वारदात के बाद मांगीलाल फरार हो गया था. थाना रामसीन के इंचार्ज छतरसिंह देवड़ा अवकाश से ड्यूटी लौट आए थे. उन्होंने भी रिमांड पर चल रहे रसाल कंवर और मोहन सिंह राव से पूछताछ की.

रिमांड अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने 19 जुलाई, 2019 को दोनों आरोपियों रसाल कंवर और मोहन सिंह को फिर से कोर्ट में पेश कर दोबारा 2 दिन के रिमांड पर लिया और उन से पूछताछ कर कई सबूत जुटाए. उन की निशानदेही पर मृतक के कपड़े, वारदात में प्रयुक्त बोलेरो गाड़ी नंबर आरजे14यू बी7612 बरामद की गई. मृतक डूंगरदान के कपडे़ व चप्पलें रामसीन रोड बीएड कालेज के पास रेल पटरी के पास से बरामद कर ली गईं.

पूछताछ पूरी होने पर दोनों आरोपियों को 21 जुलाई, 2019 को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. पुलिस तीसरे आरोपी मांगीलाल माली को तलाश कर रही है. Crime Story

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Dispute: सौतिया डाह में पत्नी ने लिया बदला

62 वर्षीय रामविलास साह जिला सीतामढ़ी के डुमरा थाना क्षेत्र में आने वाले गांव बनचौरी में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में दूसरी पत्नी सुनीता के अलावा 2 बेटे थे. पहली पत्नी मनतोरिया से उस के 6 बच्चे थे. लेकिन मनतोरिया अपने बच्चों के साथ दूसरे मकान में रहती थी. एक तरह से उस का पति रामविलास से कोई संबंध नहीं था. रामविलास के पास खेती की अच्छीखासी जमीन थी. डुमरा इलाके में वह बड़े काश्तकारों में शुमार था. रामविलास के दिन बड़ी खुशहाली में कट रहे थे. अपने नियमानुसार वह सुबह 5 बजे बिस्तर त्याग देता था.

4 जून, 2018 को सुबह के 9 बजे गए थे. उस दिन न तो रामविलास उठा और न ही उस की पत्नी सुनीता और न ही उस के दोनों बेटे. घर में भी कोई हलचल नहीं हो रही थी. यह देख कर पड़ोस में रहने वाले रामविलास के भतीजे श्रवण को बड़ा अजीब लगा. इस के पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि चाचा या चाची इतनी देर तक सोते रहे हों. यह देख कर श्रवण से नहीं रहा गया तो वह चाचाचाची को आवाज लगाते हुए उन के घर के अंदर दाखिल हो गया. घर का मुख्य दरवाजा यूं ही भिड़ा हुआ था, हलका सा धक्का देते ही किवाड़ खुल गई. श्रवण आवाज देते हुए चाचाचाची के कमरे में पहुंच गया.

कमरे में जा कर उस की नजर बिस्तर पर पड़ी तो उस का दिल दहल गया. बिस्तर पर रामविलास साह और उस की पत्नी सुनीता देवी की रक्तरंजित लाशें पड़ी थीं. श्रवण चिल्लाते हुए उलटे पांव बाहर आ गया. उस के चीखने की आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग भी वहां आ गए. जब वे लोग रामविलास के घर में गए तो पतिपत्नी की लाशें देख कर हैरत में रह गए. उन के दोनों बच्चे घर में दिखाई नहीं दे रहे थे. लोगों ने जब दूसरे कमरे में देखा तो उन के दोनों बेटों नवल और राहुल की लाशें भी खून से लथपथ पड़ी मिलीं.

हत्यारों ने चारों की हत्या बड़ी बेरहमी से गला रेत कर की थी. थोड़ी देर में ही 4-4 लाशें पाए जाने की खबर बनचौरी गांव में ही नहीं बल्कि पूरे डुमरा क्षेत्र में फैल गई. जिस ने भी सुना दौड़ा चला आया. देखतेदेखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी. इसी बीच किसी ने घटना की सूचना थाना डुमरा को दे दी थी. एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी विकास कुमार सिंह तुरंत पुलिस टीम के साथ बनचौरा के लिए रवाना हो गए. जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो रामविलास के घर के बाहर लोगों का हुजूम लगा था.

उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना देने के बाद थानाप्रभारी घटनास्थल का निरीक्षण करने लगे. घटना की सूचना मिलते ही एसपी विकास बर्मन, एएसपी संदीप कुमार नीरज, डीएसपी (सदर) कुमार वीर वीरेंद्र, डीएसपी राजवंश सिंह, नगर थाने के इंसपेक्टर मुकेश चंद कुंवर, एसआई शशि भूषण सिंह आदि घटनास्थल पर पहुंच गए. छानबीन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने पाया कि हत्यारों ने चारों को गोली मारी थी. बाद में उन्होंने सब के गले रेते थे. ऐसा काम वही कर सकता था, जो उन से सख्त नफरत करता हो. मतलब यह कि हत्यारा नहीं चाहता था कि उन में से कोई भी जिंदा बचे. वह उन्हें आखिरी सांस तक मरते देखना चाहता था.

छानबीन के दौरान पुलिस ने मौके से 4 खोखे बरामद किए. हत्यारों ने घर में रखे किसी भी सामान को हाथ नहीं लगाया था, कमरे का सारा सामान अपनी जगह रखा था. इस से साफ जाहिर हो रहा था कि हत्यारों का मकसद सिर्फ हत्या करना था. इस का मतलब रामविलास साह और उस के परिवार की हत्या किसी साजिश के तहत की गई थी. निश्चित रूप से हत्यारे परिचित रहे होंगे, जिन्हें घर के कोने की जानकारी थी. तभी वह बड़ी आसानी से अपना काम कर के निकल गए और किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगी.

घटना की सूचना मृतक रामविलास के साले यानी सुनीता के भाई बिरजू साह को मिली तो वह भी बनचौरी पहुंच गया. बहनोई और भांजों की लाशें देख वह दहाड़ मार कर रोने लगा. उस की बहन के घर में कोई दीया जलाने वाला तक नहीं बचा था. पड़ोसियों, गांव वालों आदि से बात करने के बाद पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर चारों लाशें पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दीं. पुलिस ने मृतका सुनीता के भाई बिरजू को थाने बुलवा कर पूछताछ की तो उस ने इस सामूहिक नरसंहार के लिए अपने बहनोई की पहली बीवी मनतोरिया देवी और उस के 3 बेटों बिटटू कुमार, विक्रम कुमार उर्फ पप्पू और रोहित कुमार को जिम्मेदार मानते हुए नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी.

बिरजू साह की तहरीर पर पुलिस ने नामजद लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 120बी, 34 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया. घटना की मौनिटरिंग एसपी विकास बर्मन खुद कर रहे थे. उन्होंने सदर डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र को निर्देश दिया कि पुलिस की एक टीम बना कर आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें ताकि वे भाग न सकें.

डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक स्पैशल टीम गठित की, जिस में तेजतर्रार और विश्वासपात्र पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. नामजद चारों आरोपी गांव बनचौरी के ही रहने वाले थे. पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि आरोपी गांव में ही छिपे हैं और भाग निकलने का मौका ढूंढ रहे हैं. मुखबिर की सूचना पर पुलिस अविलंब बनचौरी पहुंची और रामविलास की पत्नी मनतोरिया के घर दबिश दी. घर खुला हुआ था लेकिन वहां कोई नहीं मिला. तभी पुलिस को पता चला कि चारों आरोपी अभीअभी घर छोड़ कर फरार हुए हैं.

आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस गांव के बाहर पहुंची. पुलिस को देखते ही आरोपी बिट्टू, विक्रम और रोहित भागने लगे. पुलिस ने दौड़ कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया. ये तीनों भाई थे. इन की मां मनतोरिया उन के साथ नहीं थी. शायद वह किसी दूसरे रास्ते से निकल गई थी. पुलिस तीनों आरोपियों को थाने ले आई. थानाप्रभारी विकास कुमार सिंह ने आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र सिंह और एसपी विकास बर्मन को दे दी.

दोनों अधिकारी थाने पहुंच गए. एसपी और डीएसपी के समक्ष थानाप्रभारी ने तीनों आरोपियों से चौहरे हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपना जुर्म कबूल कर लिया. चारों की हत्या किए जाने का उन्हें कोई मलाल नहीं था. उन के चेहरों पर कोई अफसोस नहीं दिख रहा था बल्कि उन की आंखों में मृतकों के प्रति नफरत की चिंगारी फूट रही थी. पुलिस ने जब उन से हत्याओं की वजह पूछी तो उन्होंने विस्तार से कहानी सुनाई. पता चला कि इस खूनी कहानी की काली दास्तान पारिवारिक रंजिश की बुनियाद पर लिखी जा गई थी.

तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद एसपी विकास वर्मन ने पुलिस लाइंस में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया. तीनों आरोपियों ने पत्रकारों के सामने अपने पिता, सौतेली मां और दोनों सौतेले भाइयों की हत्या किए जाने का जुर्म कबूल किया. इस के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस खूनी कहानी को विस्तार से जानने के लिए हमें 30 साल पीछे जाना होगा, जब इस कहानी की बुनियाद रखी गई.

रामविलास साह अपने पिता के साथ खेतीकिसानी का काम करता था. करीब 40 साल पहले उस के पिता ने उस का विवाह मनतोरिया के साथ कर दिया था. रामविलास की जिंदगी में मनतोरिया बहार बन कर छा गई. समय के साथ मनतोरिया 6 बच्चों की मां बनी. जिन में 3 बेटे और 3 बेटियां थीं. करीब 30 साल पहले रामविलास साह ने सुनीता से दूसरी शादी रचा ली थी. पति के इस फैसले पर मनतोरिया आगबबूला हो गई. बच्चे भी पिता की दूसरी शादी से खुश नहीं थे, उन्होंने सुनीता को मां मानने से इनकार कर दिया. यहीं से रामविलास साह के जीवन में महाभारत की शुरुआत हो गई. रामविलास ने सुनीता से किस विवशता अथवा मजबूरी के तहत शादी की थी, इसे रामविलास ही जानता होगा.

हालांकि रामविलास दोनों पत्नियों को बराबर प्यार देता था. पहली पत्नी के बच्चों को वही दुलार देता था जो उन्हें देता आया था. बच्चों के साथ उस ने कभी भेदभाव नहीं किया. लेकिन बच्चे पिता से नाखुश रहते थे और अपनी मां का ही साथ देते थे.

खैर, आगे चल कर सुनीता भी 2 बच्चों नवल कुमार उर्फ भोलू और राहुल कुमार की मां बन गई. नवल और राहुल के पैदा होने के बाद तो घर में कलह और बढ़ गई. पहली पत्नी मनतोरिया और उस के बच्चे रामविलास पर दबाव बना रहे थे कि वह सुनीता से संबंध तोड़ दे. लेकिन रामविलास ने मनतोरिया और बच्चों से दो टूक कह दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह सुनीता से कभी अलग नहीं हो सकता. पति का यह जवाब सुन कर मनतोरिया मन मसोस कर रह गई.

आखिर रामविलास ने इस कलह से निबटने के लिए अपनी संपत्ति 2 बराबर भागों में बांट दी. एक हिस्सा मनतोरिया के नाम लिख दिया और दूसरा हिस्सा सुनीता के नाम. यही नहीं उस ने पुस्तैनी मकान भी पहली पत्नी को दे दिया और उसी गांव में घर से थोड़ी दूरी पर एक नया घर बना कर सुनीता और दोनों बच्चों के साथ रहने लगा. लेकिन उस का यह पूरा खेल उल्टा पड़ गया. मनतोरिया और उस के तीनों बच्चों को ये सब इसलिए नागवारा गुजरा कि रामविलास ने सौतेली मां को अपनी जायदाद में से हिस्सा क्यों दिया. उन्होंने पिता से कहा कि वह सौतेली मां का हिस्सा उन्हें दे दें, नहीं तो इस का अंजाम बुरा हो सकता है. लेकिन रामविलास ने पत्नी और बच्चों की बातों पर ध्यान नहीं दिया.

बात इसी साल मार्चअप्रैल महीने की है. मनतोरिया और उस के तीनों बेटों बिट्टू, विक्रम और रोहित के मन में लालच आ गया. उन्होंने धोखे से सुनीता के हिस्से की 12 कट्ठे जमीन में से 4 कट्ठा जमीन 4 लाख रुपए में बनचौरी गांव के पवन साह को बेच  दी. पवन साह के नाम जमीन का बैनामा होने तक सुनीता या रामविलास को कानोंकान खबर तक नहीं हुई. लेकिन यह बात छिपने वाली नहीं थी. आखिरकार रामविलास को पता चल ही गया कि मनतोरिया ने धोखे से सुनीता के हिस्से की 4 कट्ठा जमीन गांव के पवन साह को बेच दी है. इस बात को ले कर मनतोरिया और सुनीता के बीच विवाद छिड़ गया.

रामविलास सुनीता का ही साथ दे रहा था. उस ने मनतोरिया को इस के लिए खूब खरीखोटी सुनाई. इस पर मनतोरिया के सब से छोटे बेटे रोहित ने पिता को भलाबुरा कह दिया. बेटे की बात रामविलास के दिल में चुभ गई. उस ने आव देखा न ताव, उस के गाल पर 2 थप्पड़ रसीद कर दिया. बेटे पर हाथ उठाने वाली बात न तो मनतोरिया को अच्छी लगी और न ही बिट्टू और विक्रम को. 2 थप्पड़ों से उस के सीने में धधक रही नफरत की आग ज्वाला बन गई. यह बात तीनों बेटों को नागवार गुजरी कि पिता ने कैसे हाथ उठाया. उन्होंने ठान लिया कि इस का परिणाम उन्हें भुगतना ही होगा. सुनीता जब तक जिंदा रहेगी तब तक उन्हें चैन नहीं मिलेगा.

उस रोज के बाद से तीनों भाइयों के सिर पर खून सवार हो गया. वह पिता, सौतेली मां और उस के दोनों बेटों को मौत के घाट उतारने की योजना बनाने लगे. बिट्टू और विक्रम ने रुपयों का बंदोबस्त कर के आर्म्स सप्लायर वीरेंद्र ठाकुर से 25 हजार रुपए में 2 पिस्टल और कारतूस खरीद लिए. उस के बाद बेटों ने मां को बता कर उसे भी अपनी योजना में शामिल कर लिया. मनतोरिया तो चाहती ही थी कि उस की सौतन सुनीता उस के रास्ते से हट जाए. उस ने बच्चों को डांटने के बजाए उन की पीठ थपथपाई. मां के योजना में शामिल हो जाने से बेटों के हौसले बुलंद हो गए. बिट्टू और रोहित ने साथ देने के लिए खोया गांव में रहने वाले ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह को भी योजना में शामिल कर लिया.

अब वह जल्द से जल्द अपनी योजना को अंजाम देना चाहते थे. आखिर इस के लिए उन्होंने 3 जून, 2018 की रात तय की. योजना को अंजाम देने से पहले तीनों भाइयों ने रात में शराब पी. 3-4 जून, 2018 की रात करीब 12 बजे बिट्टू, विक्रम और रोहित हथियार ले कर अपने पिता रामविलास साह के घर की ओर बढ़े. बिट्टू और विक्रम ने खिड़की से भीतर झांक कर देखा तो रामविलास और सुनीता गहरी नींद में सोए थे. दूसरे कमरे में नवल और राहुल भी सो रहे थे.

बिट्टू और विक्रम के मुख्य शिकार नवल और राहुल ही थे. उन्होंने पहले उन्हीं की हत्या करने की योजना बनाई थी. विक्रम ने खिड़की से ही नवल और राहुल के सीने में 1-1 गोली उतार दी, जबकि बिट्टू ने पिता रामविलास और सौतेली मां सुनीता को गोली मारी, रोहित बाहर खड़ा पहरा दे रहा था. गोली मारने के बाद बिट्टू और विक्रम घर में घुस गए और दोनों ने फलदार चाकू से चारों के गले रेत दिए. इस के बाद इन लोगों ने सीने पर ताबड़तोड़ वार कर अपने आक्रोश को ठंडा किया. जब उन्हें विश्वास हो गया कि चारों के जिस्म ठंडे पड़ गए हैं, तो उन्हें तसल्ली हुई.

इस खूनी खेल को अंजाम देने में उन्हें केवल आधा घंटा लगा. इस के बाद वे अपने घर पहुंचे और खून से सने अपने हाथपैर धोए. फिर मां को बता दिया कि उन्होंने उन चारों को मौत के घाट उतार दिया. अब उन के रास्ते का कांटा सदा के लिए हट गया है. उसी रात उन्होंने अपनी मां को ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह के साथ भेज दिया. वहां से दोनों मनतोरिया को कहां ले गए अब तक पता नहीं चला. 4 जून, 2018 को ही तीन आरोपी गिरफ्तार कर लिए. मनतोरिया कथा लिखने तक पुलिस की गिरफ्त से दूर थी.

पुलिस ने बिट्टू कुमार, विक्रम और रोहित की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और चाकू भी बरामद कर लिए. इस के अलावा उन्हें पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराने वाले बिट्टू के ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह को 6 जून, 2018 को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने तीनों आरोपियों से पूछताछ कर के उन्हें जेल भेज दिया. Family Dispute

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Stories: शादी पर दिया मौत का तोहफा

Crime Stories: ‘‘मैं जया को बेइंतहा चाहता था, बहुत प्यार करता था उस से. इतना प्यार कि मैं पागल हो गया था उस के लिए. अपने जीतेजी मैं उसे किसी और की जागीर बनते नहीं देख सकता था. इसलिए मैं ने उसे मौत के घाट उतार दिया.’’ कहतेकहते अनुराग पलभर के लिए रुका, फिर आगे बोला, ‘‘अब ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, फांसी हो जाएगी. मुझे फांसी भी मंजूर है. कम से कम एक बार में ही मौत तो आ जाएगी. वह किसी और की हो जाती तो मुझे रोजरोज मरना पड़ता.’’

पुलिस हिरासत में यह सब कहते हुए अनुराग नामदेव अपना गुनाह कुबूल कर रहा था या फिर अपनी मोहब्बत की दास्तां सुना कर दिल की भड़ास निकाल रहा था, समझ पाना मुश्किल था. उस की ये बातें सुन कर वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी हैरान थे. वजह यह कि इस कातिल के चेहरे पर शर्मिंदगी या पछतावा तो दूर की बात, किसी भी तरह का डर नहीं था.पुलिस हिरासत में अच्छे अच्छे अपराधियों के कसबल ढीले पड़ जाते हैं, पर अनुराग का आत्मविश्वास वाकई अनूठा था. उस की हर बात जया से अपनी मोहब्बत के इर्दगिर्द  घूम रही थी. मानों दुनिया में उस के लिए जया और उस के प्यार के अलावा और कुछ था ही नहीं.

लालघाटी क्षेत्र भोपाल का वह हिस्सा है, जहां शहर खत्म हो जाता है और उपनगर बैरागढ़ शुरू होता है. लालघाटी का चौराहा और रास्ता दोनों भोपाल-इंदौर मार्ग पर पड़ते हैं, जहां चौबीसों घंटे आवाजाही रहती है. एयरपोर्ट भी इसी रास्ते पर है और शहर का चर्चित वीआईपी रोड भी इसी चौराहे पर आ कर खत्म होता है.पिछले 15 सालों में लालघाटी चौराहे और बैरागढ़ के बीच करीब 2 दर्जन छोटेबड़े मैरिज गार्डन बन गए  . इन्हीं में एक है सुंदरवन मैरिज गार्डन. शादियों के मौसम में यह इलाका काफी गुलजार हो उठता है. रास्ते के दोनों तरफ बारातें ही बारातें दिखती हैं. घोड़ी पर सवार दूल्हे, उन के आगे नाचतेगाते बाराती और आसमान छूती रंगबिरंगी आतिशबाजी. नजारा वाकई देखने वाला होता है. शादियों के चलते इस रास्ते पर ट्रैफिक जाम की समस्या आम बात है.

8 मई को सुंदरवन मैरिज गार्डन में रोजाना के मुकाबले कुछ ज्यादा रौनक और चहलपहल थी. रात 8 बजे से ही मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था. इस मैरिज गार्डन में डा. जयश्री नामदेव और डा. रोहित नामदेव की शादी होनी थी. वरवधू दोनों ही भोपाल के हमीदिया अस्पताल में कार्यरत थे. डा. जयश्री बाल रोग विभाग में थीं और डा. रोहित सर्जरी डिपार्टमेंट में कार्यरत थे.

जयश्री और रोहित की शादी एक तरह से अरेंज मैरिज थी. जयश्री नामदेव 4 साल पहले ही जबलपुर मेडिकल कालेज से पीजी की डिग्री ले कर भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के पद पर तैनात हुई थीं. जयश्री के आने से पहले हमीदिया अस्पताल में एक ही डाक्टर नामदेव थे डा. रोहित. अब दूसरी नामदेव डा. जयश्री आ गई थीं. डा. जयश्री स्वभाव से बेहद हंसमुख और मिलनसार थीं. अस्पताल में स्वाभाविक तौर पर उन की खूबसूरती की चर्चा भी होती रहती थी.

अस्पताल में नामदेव सरनेम वाले 2 डाक्टर थे और दोनों कुंवारे. अगर दोनों शादी कर लें तो कितना अच्छा रहेगा. जयश्री और रोहित को ले कर अस्पताल में अकसर इस तरह का हंसीमजाक होता रहता था. डा. जयश्री के पिता घनश्याम नामदेव को जब पता चला कि उन्हीं की जाति का एक लड़का हमीदिया अस्पताल में डाक्टर है तो उन्होंने अपने स्तर पर पता लगा कर जयश्री की शादी की बातचीत चलाई.रोहित के पिता रघुनंदन नामदेव जिला हरसूद के गांव छनेरा के रहने वाले थे और सिंचाई विभाग में कार्यरत थे. जयश्री और  की शादी की बात चली तो रोहित के घर वाले भी तैयार हो गए. दोनों ही परिवारों के लिए यह खुशी की बात थी, क्योंकि नामदेव समाज में गिनती के ही लड़के लड़कियां डाक्टर हैं.

घनश्याम नामदेव मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के कर्मचारी थे, जो रिटायरमेंट के बाद भोपाल के करोंद इलाके में बस गए थे. करोंद में उन्होंने खुद का मकान बनवा लिया था. उन की पत्नी लक्ष्मी घरेलू लेकिन जिम्मेदार महिला थीं. नामदेव दंपति की एक ही बेटी थी जयश्री. होनहार और मेधावी जयश्री ने 2003 में प्री मेडिकल परीक्षा पास करने के बाद भोपाल के गांधी मैडिकल कालेज से एमबीबीएस किया था और फिर जबलपुर मैडिकल कालेज से पोस्ट ग्रेजुएट.

बहरहाल, डा. रोहित और डा. जयश्री की शादी तय हो गई. 3 फरवरी, 2014 को पुराने भोपाल के एक होटल में रोहित और जयश्री की सगाई की रस्म पूरी की गई. सगाई के बाद दोनों पक्ष शादी की तैयारियों में लग गए.घनश्याम की छोटी बहन अंगूरीबाई का विवाह सागर जिले के गढ़ाकोटा कस्बे में हुआ था. अब से डेढ़ साल पहले उस के पति कल्लूराम की कैंसर से मौत हो गई थी. बहनोई के अंतिम संस्कार का सारा  घनश्याम ने ही उठाया था. अंगूरीबाई के 2 बेटे थे अनुराग नामदेव और अंबर नामदेव. अंबर अभी पढ़ रहा था.  इस परिवार का खरचा कपड़ों के पुश्तैनी व्यापार से चलता था. लेकिन उन का यह व्यापार मामूली स्तर का था, जिसे कल्लूराम के छोटे भाई उमाशंकर नामदेव संभालते थे.

पति की मृत्यु के बाद अंगूरी की सारी दुनिया अपने दोनों बेटों के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई थी, क्योंकि वह खुद भी कैंसर की चपेट में आ गई थी. बहन की वजह से घनश्याम उस के और उस के बच्चों को ले कर चिंतित रहते थे. समयसमय पर वह उन की हर मुमकिन मदद भी करते रहते थे.जब कल्लूराम जीवित थे तो  दफा उन्होंने घनश्याम से अनुराग की नौकरी के लिए बात छेड़ी थी. इस पर उन्होंने उसे भोपाल आ कर बैंकिंग की कोचिंग लेने को कहा था. अनुराग को सहूलियत यह थी कि रहने और खानेपीने के लिए मामा का घर था. घनश्याम ने कोचिंग की फीस देने के लिए भी कह दिया था. यह सन 2005 की बात है. तब जयश्री एमबीबीएस के दूसरे साल में थी.

मामा से बातचीत के बाद अनुराग भोपाल आ गया और सबधाणी कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करने लगा. मामा मामी और ममेरी बहन जयश्री उस का पूरा खयाल रखती थी. सभी को उस के घर के हालात की वजह से सहानुभूति थी. कोचिंग के दौरान एक बार अनुराग गंभीर रूप से बीमार पड़ा तो जयश्री और उस के मामा मामी ने उसे हमीदिया अस्पताल में भरती करवाया. उस की देखभाल से ले कर उस के इलाज का सारा खर्च भी उन्होेंने ही उठाया. मामा के यहां रहते हुए अनुराग जयश्री को एकतरफा प्यार करने लगा था.

कोचिंग के बाद अनुराग का चयन एचडीएफसी बैंक में पीओ के पद पर हो गया. उसे पोस्टिंग मिली सागर में. नौकरी जौइन करने के बाद वह सागर के पौश इलाके सिविल लाइंस में किराए का मकान ले कर रहने लगा. लेकिन सागर जाने के बाद भी भोपाल से उस का नाता नहीं टूटा. अनुराग जयश्री को प्यार से जया कहता था, लेकिन उस का यह प्यार एक भाई का नहीं, बल्कि एक ऐसे आशिक का था, जिसे न तो रिश्तेनातों का लिहाज था और न मान मर्यादाओं की परवाह.

दरअसल अनुराग मन ही मन जयश्री को चाहने लगा था और यह मान कर चल रहा था कि वह भी उसे चाहती है. नजदीकी रिश्तों में इस उम्र में दैहिक आकर्षण स्वाभाविक बात है, पर समझ आने के बाद वह खुद ब खुद खत्म हो जाता है. लेकिन अनुराग यह बात समझने को तैयार नहीं था कि हिंदू सभ्यता में सामाजिक रूप से भी और कानूनी रूप से भी ऐसे रिश्तों में प्यार, सैक्स और शादी सब कुछ वर्जित है.

अनुराग ने जब अपना प्यार जयश्री पर जाहिर किया तो वह सकते में आ गई. अनुराग उस का फुफेरा भाई था और जयश्री को सपने में भी उस से ऐसी उम्मीद नहीं थी. जयश्री ने अपने स्तर पर ही अनुराग को समझाने की कोशिश की. लेकिन अनुराग आसानी से समझने वालों में नहीं था. जब भी मौका मिलता, वह उस से अपने प्यार की दुहाई दे कर शादी की बात कहता रहता. जब अनुराग जयश्री पर बराबर दबाव बनाने की कोशिश करने लगा तो मजबूरी में उस ने यह बात अपने मातापिता को बता दी.

हकीकत जान कर लक्ष्मी और घनश्याम के पैरों तले से जमीन खिसक गई. फिर भी उन्होंने बेटी को सब्र और समझदारी से काम लेने की सलाह दी और जल्दी ही इस परेशानी का हल निकालने का भरोसा दिलाया. निकट की रिश्तेदारी का मामला था. ऐसे में इस का एक ही रास्ता था कि अंगूरी से बात की जाए, ताकि संबंध खराब न हों. बात की भी गई. बड़े भाई के उपकारों तले दबी अंगूरी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह अनुराग को समझाएगी.

लेकिन अनुराग के तथाकथित प्यार का पागलपन समझने समझाने की हदें पार कर चुका था. मां के समझाने पर वह मान भी गया, पर दिखावे और कुछ दिनों के लिए. वक्त गुजरता रहा, लेकिन अनुराग के दिलोदिमाग से ममेरी बहन जयश्री की प्रेमिका की छवि नहीं मिट सकी. मायूस हो कर वह लुटेपिटे आशिकों की तरह दर्द भरे गानों और शेरोशायरी में अपने बीमार दिल की दवा ढूंढने लगा. लेकिन इस से उस का दर्द बढ़ता ही गया.

3 फरवरी को जयश्री और रोहित की सगाई थी. जयश्री के पिता घनश्याम ने इस की भनक अनुराग को नहीं लगने दी. लेकिन रोहित ने सगाई के 2 दिनों बाद 5 फरवरी को अपनी सगाई के फोटो फेसबुक पर शेयर किए तो उन्हें देख कर अनुराग बिफर उठा. उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उस के जख्मों पर नमक छिड़क दिया हो.

उस ने बगैर वक्त गंवाए घनश्याम और जयश्री से संपर्क कर के न केवल शादी की अपनी बेहूदी ख्वाहिश जाहिर की, बल्कि न मानने पर उन्हें देख लेने की धमकी भी दे डाली. उस की बात सुन कर घनश्याम चिंता में पड़ गए. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, क्योंकि कोई कानूनी काररवाई करते तो बदनामी का डर था. वैसे भी एक तो सगी बहन के लड़के का मामला था, दूसरे ऐसे मामलों में बात उछलने पर बदनामी लड़की की ही होती है.

डा. जयश्री इसलिए ज्यादा चिंतित नहीं थी, क्योंकि उन्होंने अपने मंगेतर डा. रोहित को अनुराग के बारे में सब कुछ बता दिया था. यह एक पढ़ीलिखी युवती का अपने भविष्य और दांपत्य के मद्देनजर समझदारी भरा कदम था. उधर फेसबुक पर जयश्री और राहुल की सगाई के फोटो देखदेख कर अनुराग का जुनून और बढ़ता जा रहा था. धमकी के बावजूद घनश्याम और जयश्री पर कोई असर न होता देख वह और भी बौखला गया था. उसे लग रहा था कि अब जयश्री उसे नहीं मिल पाएगी.

दूसरी ओर भोपाल में शादी की तैयारियों में लगे घनश्याम चिंतित थे कि कहीं अनुराग कोई बखेड़ा न खड़ा कर दे. उस की बेहूदी हरकतों के बारे में सोचसोच कर कभीकभी वह यह सोच कर गुस्से से भी भर उठते थे कि जिस भांजे को बेटे की तरह रखा, वही आस्तीन का सांप निकला. उन के दिमाग में अनुराग की यह धमकी बारबार कौंध जाती थी कि अगर मेरी बात नहीं मानी तो अंजाम भुगतने को तैयार रहना.

उन के डर की एक वजह यह भी थी कि वह अनुराग के स्वभाव को जानते थे. लेकिन जवान बेटी का बाप होने की बेबसी उन्हें कोई कदम नहीं उठाने दे रही थी. इसलिए शादी के कुछ दिनों पहले उन्होंने अपने भतीजे शैलेंद्र नामदेव से इस बारे में सलाहमशविरा किया तो उस ने फोन पर अनुराग को ऊंचनीच समझाने की कोशिश की. इस पर अनुराग का एसएमएस आया कि तू अपनी दोनों बेटियों का खयाल रख, उन्हें अभी बहुत जीना है.

आखिरकार डरते सहमते 8 मई आ गई. उस दिन जयश्री और रोहित की शादी थी. रात के करीब 8 बजे रोहित और जयश्री स्टेज पर बैठे थे. परिचित और रिश्तेदार आने शुरू हुए तो 9 बजे तक मैरिज गार्डन में काफी भीड़ जमा हो गई. हर कोई खुश था. खासतौर से दोनों के घर वाले और हमीदिया अस्पताल के बाल रोग विभाग और शल्य चिकित्सा विभाग के डाक्टर्स और कर्मचारी. खाने के पहले या बाद में लोग स्टेज पर जा कर वरवधू को शुभकामनाएं और आशीर्वाद दे रहे थे. घनश्याम और लक्ष्मी भी लोगों की शुभकामनाएं लेते यहां वहां घूम रहे थे. उन की जिंदगी का वह शुभ समय नजदीक आ रहा था, जब उन्हें एकलौती बेटी के कन्यादान की जिम्मेदारी निभानी थी.

तभी अचानक भीड़ में अनुराग को देख कर लक्ष्मी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं तो वह पति को ढूंढने लगी. घनश्याम नहीं दिखे तो कुछ सोच कर वह एकांत में जा कर खड़ी हो गईं. उसे इस तरह खड़ा देख, उस की एक पड़ोसन ने आ कर पूछा भी कि क्या हुआ जो इस तरह घबराई हुई हो. इस पर लक्ष्मी ने इशारा कर के पड़ोसन को दरवाजे के पास खड़े अनुराग के बारे में बताया.

अनुराग एकदम सामान्य नजर आ रहा था और मेहमानों की तरह ही घूम रहा था. उस के गले में सफेद रंग का गमछा लटका था. तब तक रात के 10 बज चुके थे और भीड़ छटने लगी थी. इस के बावजूद स्टेज के पास वरवधू के साथ फोटो खिंचवाने वालों की लाइन लगी हुई थी. दूसरी ओर अनुराग की निगाहें स्टेज पर ही जमी थीं.

अचानक अनुराग स्टेज की तरफ बढ़ा और पास जा कर रोहित को बधाई दी. इस से पहले कि डा. रोहित उसे धन्यवाद दे पाते, अनुराग ने फुरती से रिवाल्वर निकाला और जयश्री की तरफ तान कर 2 फायर कर दिए. दोनों गोलियां जयश्री के सीने में धंस गईं. कोई कुछ समझ पाता, इस के पहले ही डा. जयश्री स्टेज पर गिर  पड़ीं. इसी बीच अनुराग ने अविलंब रोहित को निशाने पर ले लिया, लेकिन तब तक वह संभल चुके थे. नतीजतन गोली स्टेज के पीछे जा कर लगी, जिस के कुछ छर्रे रोहित के दोस्त कचरू सिसोदिया के पैर में लगे.

करीब 2 मिनट सकते में रहने के बाद जब लोगों को समझ में आया कि दुलहन पर गोली चली है तो उन्होंने गोली चलाने वाले अनुराग को पकड़ कर उस की धुनाई शुरू कर दी. उधर स्टेज पर रोहित जयश्री को संभाल रहे थे. इस बीच वहां मौजूद लेगों में से किसी ने पुलिस और अस्पताल में खबर कर दी थी. जयश्री को तुरंत अस्पताल ले जाया गया. लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. फायर से भगदड़ मच गई थी. डर कर कई लोग वहां से भाग भी गए थे. जहां कुछ देर पहले तक हंसीमजाक चल रहा था, रौनक थी, वहां अब सन्नाटा पसर गया था. स्टेज पर रखे तोहफे और गुलदस्ते डा. जयश्री के खून से सन गए थे.

गुस्साई भीड़ ने अनुराग की जम कर धुनाई की थी, जिस से वह बेहोश हो कर गिर गया था. पुलिस आई तो पता चला कि वह जिंदा है. उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अब तक किसी को यह नहीं मालूम था कि अनुराग दुलहन का ममेरा भाई है. दूसरे दिन जिस ने भी सुना, स्तब्ध रह गया. अपनी ममेरी बहन को माशूका मानने वाले इस सिरफिरे आशिक की चलाई 2 गोलियों की गूंज भोपाल में ही नहीं, पूरे देश भर में सुनाई दी. जब जयश्री की मौत की पुष्टि हो गई तो रात 2 बजे रोहित और उस के पिता बारात वापस ले कर अपने गांव छनेरा चले गए. एक ऐसी बारात, जिस के साथ दुल्हन नहीं थी.

बाद में पता चला कि वारदात के दिन अनुराग सागर से अपने एक दोस्त की मोटरसाइकिल मांग कर लाया था और देसी रिवाल्वर उस ने कुलदीप नाम के एक दलाल से 17 हजार रुपए में खरीदी थी. कत्ल की सारी तैयारियां उस ने पहले ही कर ली थीं. सुंदरवन मैरिज गार्डन में प्रवेश के पहले ही वह पूरी रिहर्सल कर चुका था. उसे इंतजार बस मौका मिलने का था, जो उस वक्त मिल गया जब डा. रोहित और जयश्री स्टेज पर लोगों की शुभकामनाएं ले रहे थे.

पुलिस हिरासत में अनुराग ने बताया कि जैसे ही जयश्री ने राहुल के गले में माला डाली, मैं ने अपना आपा खो दिया था. मुझे नहीं मालूम कि लोगों ने मुझे मारा भी था. मैं तो खुद को भी गोली मारने वाला था, लेकिन मौका नहीं मिला. घायल अनुराग को हमीदिया अस्पताल के बजाय दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. दरअसल पुलिस को डर था कि कहीं अस्पताल के लोग उसे मार न डालें. क्योंकि जयश्री वहां काम करती थी. इस बीच कोहेफिजा थाना पुलिस ने उस के खिलाफ जयश्री की हत्या का मामला दर्ज कर लिया था.

दूसरे दिन पोस्टमार्टम के बाद जब जयश्री की अर्थी उठी तो नामदेव दंपत्ति का दुख देख सारा मोहल्ला रो उठा. लक्ष्मी और घनश्याम रह रह कर बेटी की अर्थी पर सिर पटक रहे थे. हमीदिया अस्पताल में भी मातम छाया था. एकतरफा प्यार में डूबा अनुराग दरअसल मनोरोगी बन गया था. जिस जुनून में उस ने वारदात को अंजाम दिया था, उसे इरोटोमेनिया भी कहते हैं और डिल्यूजन औफ लव भी. इस रोग में मरीज अपनी बनाई मिथ्या धारणा को ही सच मान कर चलता है और किसी के समझाने पर भी नहीं मानता. ऐसा मरीज बेहद शातिर और खतरनाक होता है.

जयश्री और अनुराग के बीच में क्या कभी प्रेमिल संबंध रहे थे, जैसा कि अनुराग कह रहा है, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. बहरहाल सच जो भी रहा हो, जयश्री के साथ चला गया. घनश्याम नामदेव ने बदनामी से बचने की जो कोशिश की थी, वह उन्हें काफी महंगी पड़ी. अगर वह वक्त रहते भांजे के खिलाफ कानूनी काररवाई करते तो जयश्री बच सकती थी. Crime Stories

West Bengal News: गुस्सैल प्रेमी से रहें अलर्ट

West Bengal News: अधिकांश लड़कियां आजकल बहुत जल्द ही अपने प्रेमी पर विश्वास कर लेती हैं. बातचीत के दौरान वह उस के स्वभाव को नहीं समझ पातीं. नादिया की रहने वाली इशिता मलिक अपने क्लासमेट 23 वर्षीय देशराज सिंह के जिद और गुस्से वाले स्वभाव को पहचान लेती तो शायद उसे अपनी जान गंवानी नहीं पड़ती.

जब इशिता मलिक ने प्रेमी देशराज सिंह से दूरी बना ली और बात तक करने से मना कर दिया तो देशराज उस से चिढ़ गया और उस ने इशिता को देख लेने की धमकी तक दे डाली थी. इतना ही नहीं, देशराज ने इशिता को सदासदा के लिए हटा देने की एक भयंकर योजना भी बना ली थी. इस के लिए वह छिप कर इशिता की हर गतिविधि पर नजर रखने लगा था. इस काम के लिए उस ने हथियार और गोलियों की व्यवस्था भी कर ली थी.

25 अगस्त, 2025 की दोपहर को देशराज अपने इसी इरादे के साथ पश्चिम बंगाल के जिला नादिया के कृष्णानगर सिटी में रहने वाली प्रेमिका इशिता के घर के आसपास की रेकी कर रहा था, जब उसे इस बात की पुष्टि हो गई कि इस समय इशिता घर में अकेली है, उस के फेमिली वाले बाहर गए हुए हैं तो वह पिस्तौल ले कर सीधे उस के दोमंजिले घर में चला गया. इशिता उस समय कमरे में बैठी पढ़ाई कर रही थी.

देशराज को एकाएक अपने सामने देख कर इशिता ने उस से गुस्से में कहा, ”देशराज, अब तुम ने मेरे घर तक आने की हिम्मत भी कर डाली. निकल जाओ अभी मेरे घर से वरना मैं चिल्लाचिल्ला कर लोगों को यहां बुला लूंगी.’’

यह सुन कर देशराज ने अपनी कमर से पिस्तौल निकाल कर उसे धमकाते हुए कहा, ”इशिता, आखिरी फैसला करने आया हूं. तुम मुझ से फिर से दोस्ती कर लो या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ.’’

”देशराज, मैं तुम जैसे इंसान से प्यार करने की बात तो दूर, दोस्ती करना भी पसंद नहीं करती. मुझे तुम से और तुम्हारी सूरत तक से नफरत है. दफा हो जाओ अभी मेरी नजरों से.’’ इशिता ने चीखते हुए कहा.

यह सुन कर देशराज उस के पास आया और उस के सिर से सटा कर 2 गोलियां चला दीं. जब इशिता जमीन पर मुंह के बल गिर गई तो उस ने एक और गोली उस के सिर पर मार दी और वहां से भाग गया. इस प्रकार इस जुनूनी प्यार का भयंकर अंत हो गया.

इत्तफाक से उसी समय इशिता की मम्मी कुसुम मलिक अपने बेटे के साथ घर लौट रही थीं. उन्होंने जब अपने घर से धमाके की आवाजें सुनीं तो उन का दिल अनजानी आशंका से भयभीत हो गया था. उन्होंने उसी समय एक युवक को अपने घर से बाहर निकलते देखा. कुसुम ने उस युवक से पूछा, ”भाई, तुम कौन हो? हमारे घर में गोलियों की आवाज कैसे सुनाई दे रही है?’’

तब उस युवक ने कुसुम से कहा, ”देखो आंटी, अभी मुझ से बात मत करो. मैं अपने होशोहवास में नहीं हूं. इस के बाद कुसुम ने देखा कि उस के हाथ में एक पिस्तौल थी. उस युवक ने उस के बाद पिस्तौल से हवा में फायर करने के लिए 2 बार स्ट्रिगर दबाया, मगर शायद पिस्तौल में गोलियां खत्म हो चुकी थीं, इसलिए फायर नहीं हो सके.

तब तक कुसुम और प्रतीक समझ चुके थे कि कुछ अनहोनी सी बात हमारे घर में अवश्य हो चुकी है. इसलिए प्रतीक चाह रहा था कि उस की मम्मी कुसुम इस युवक से यदि दूर ही रहे तो अच्छा होगा. प्रतीक अपनी मम्मी को उस युवक से दूर ले जाने की कोशिश कर रहा था. जब सामने कोई नहीं रहा तो वह युवक अपनी पिस्तौल लहराता हुआ अगले ही पल वहां से फरार हो चुका था. कुसुम मलिक अब तेजी से जीना चढ़ कर जब ऊपर के कमरे में पहुंचीं तो दरवाजा आधा खुला हुआ था. उस के बाद जब उन की नजर अंदर कमरे में पड़ी तो खौफनाक दृश्य देख कर उन की आंखें फटी रह गई थीं.

वह जोरजोर से चिल्लाने लगीं. सामने उन की बेटी इशिता मलिक लहूलुहान पड़ी थी. कुसुम मलिक की दर्दनाक चीखों की आवाजों को सुन कर वहां पर आसपास के लोग अब तक काफी संख्या में एकत्रित हो चुके थे. तभी किसी ने कृष्णानगर कोतवाली में इस हादसे की सूचना दे दी थी. अगले ही पल पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की कोतवाली कृष्णानगर के एसएचओ अमलेंदु बिस्वास कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. दिन दोपहरी को हुई इस वारदात की सूचना पाते ही कृष्णानगर के एसपी के. अमरनाथ भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे.

ताज्जुब की बात तो यह थी कि जिस मकान में हत्या की गई थी, उस के बगल में ही एसपी और जिला मजिस्ट्रैट का औफिस था. दूसरी तरफ कृष्णानगर महाविद्यालय था. इतने हाईप्रोफाइल इलाके में घर में घुस कर की गई इस वारदात से स्थानीय निवासी आक्रोश और दहशत में आ गए थे. पुलिस ने विस्तृत छानबीन करनी प्रारंभ की तो उन्होंने देखा कि मृतका इशिता के सिर पर 3 गोलियां दागी गई थीं. 2 गोलियां दाईं ओर और एक गोली सिर के पीछे से मारी गई थी. एक घाव पर गन पाउडर स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि अन्य दोनों घावों पर गन पाउडर नहीं था.

अब तक घटनास्थल पर मृतका के पापा दुलाल मलिक भी पहुंच गए थे. पुलिस ने मृतका इशिता मलिक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और मृतका के फेमिली वालों से शुरुआती पूछताछ करनी शुरू कर दी. मृतका की मम्मी कुसुम ने गोलियों की आवाज और घर में मिले उस अनजान युवक के बारे में बता दिया. मृतका के भाई ने पुलिस को बताया कि वह उस युवक को पहचानता था. उस ने बताया कि पहले जब हम लोग कांचरापाड़ा में रहते थे तो वह युवक वहां मैदान में खेलने आया करता था. उस ने यह भी बताया कि वह युवक उस की बहन के साथ कांचरापाड़ा में एक ही स्कूल में पढ़ता था.

उस ने पुलिस को यह जानकारी भी दी कि उस युवक का नाम देशराज सिंह है. मृतका के पापा दुलाल मलिक ने पुलिस को बताया कि हमें इस बारे में कुछ भी पता नहीं था कि आरोपी हमारी बेटी का दोस्त था भी या नहीं. हमें इस बारे में भी कुछ पता नहीं कि लड़के ने हमारी लड़की को फोन किया था या नहीं या उन दोनों का पहले से एकदूसरे से कोई संपर्क या जानपहचान थी या नहीं. हम ने तो उन दोनों को कभी भी एकदूसरे के साथ नहीं देखा था. पुलिस ने दुलाल मलिक की ओर से धारा 103(1), 3 (5) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

कृष्णानगर के एसपी के. अमरनाथ इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करने के लिए तत्काल डीएसपी शिल्पी पाल के नेतृत्व में 15 सदस्यीय पुलिस टीम का गठन कर दिया और पूरी टीम को उचित दिशानिर्देश दे कर अपने खास मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. गठित टीम ने देशराज सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी एकत्रित की. जांच में पता चला कि उत्तर 24 परगना के जेठिया-धरमपुर में रहने वाला 23 वर्षीय देशराज सिंह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के करौता का रहने वाला था. उस के पापा राघवेंद्र प्रताप सिंह बीएसएफ में हैडकांस्टेबल हैं और वर्तमान में राजस्थान के जैसलमेर में पोस्टेड हैं. देशराज सिंह वर्तमान में अपनी मम्मी पूनम सिंह और बहन के साथ रहकर 24 परगना जेठिया-धरमपुर में पढ़ाई कर रहा था.

पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि देशराज के पापा राघवेंद्र प्रताप सिंह, चाचा सरजू सिंह तथा शैलेंद्र सिंह पर वर्ष 2020 में हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था. हालांकि जांच में आरोप सिद्ध न होने पर इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी. इस के बाद वर्ष 2024 में राघवेंद्र प्रताप सिंह और उस के भाई मनोज सिंह पर आईटी ऐक्ट के तहत 2 अलगअलग मुकदमे दर्ज हुए, जिस में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर रखा है. देशराज के पिता राघवेंद्र प्रताप सिंह 4 भाई हैं.

पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि आरोपी देशराज सिंह और इशिता मलिक सहपाठी थे. धीरेधीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए, लेकिन बाद में किसी बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया और वे अलग हो गए. शायद उसी प्रतिशोध की भावना से देशराज सिंह ने इस खूनी घटना को अंजाम दिया था. बंगाल के कृष्णानगर से 3 अलगअलग पुलिस टीमें उत्तर प्रदेश भेज दी गई. इस से पहले बंगाल पुलिस ने 29 अगस्त, 2025 को गुजरात के जामनगर से हत्यारे देशराज सिंह के मामा कुलदीप सिंह को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली थी. पता चला कि कुलदीप सिंह ने ही अपने जीजा राघवेंद्र प्रताप सिंह के कहने पर देशराज सिंह को हत्या के बाद फरजी दस्तावेजों के सहारे भागने में मदद की थी.

पुलिस ने कुलदीप सिंह से गहन पूछताछ की तो पुलिस को देशराज सिंह के ठिकाने के बारे में पता चला. इस के साथसाथ गहरे सदमे में होने के बावजूद भी मृतका इशिता मलिक के परिजन पुलिस को अपना पूरा सहयोग व कई जानकारियां उपलब्ध करा रहे थे. जिस के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश पुलिस के सहयोग से बंगाल पुलिस ने सोमवार पहली सितंबर, 2025 सुबहसुबह नेपाल सीमा के पास उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे से आरोपी देशराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

पकड़े जाने के समय हत्यारोपी देशराज सिंह फरजी दस्तावेजों के सहारे एक वाहन से नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था. पुलिस ने आरोपी देशराज सिंह को गिरफ्तार कर नादिया की अदालत में पेश किया. एसपी के. अमरनाथ ने मीडिया को बताया कि इशिता मलिक की हत्या करने के बाद देशराज सिंह अयोध्या गया और अपने अपराधी रिश्तेदारों की मदद से आधार कार्ड और सीमा सुरक्षा बल का एक फरजी पहचान पत्र जैसे कुछ फरजी दस्तावेज हासिल किए, ताकि नेपाल में शरण ले सके.

इस मामले में एक और नया मोड़ तब आया, जब आरोपी देशराज सिंह के पापा बीएसएफ के हैडकांस्टेबल राघवेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया. पुलिस इनवैस्टीगेशन में यह बात सामने आई कि राघवेंद्र ने अपने बेटे को पुलिस से छिपाने में मदद की थी. पुलिस को पूरा शक था कि हत्या के बाद भी बापबेटे के बीच में लगातार संपर्क बना हुआ था. राघवेंद्र प्रताप सिंह अपने साले कुलदीप सिंह के साथ लगातार फोन और वाट्सऐप पर संपर्क में रह कर आरोपी देशराज सिंह को भगाने में मदद कर रहा था.

इशिता मलिक हत्याकांड की जांच में ‘फ्री फायर’ नाम के एक मोबाइल गेम का खुलासा भी हुआ है. बंगाल पुलिस ने खुलासा किया कि आरोपी इस गेम के लिए जुनूनी हो गया था कि उस का मन हर समय एक आभासी दुनिया में भटकता रहता था. कल्पना और वास्तविकता की दुनिया उस के लिए इस कदर घुलमिल गई थी कि उसे अपनी प्रेमिका इशिता के सिर पर 3 गोलियां दागने में कोई दिक्कत नहीं हुई. इतना ही नहीं देशराज को वर्चुअल गेम्स में भी खून देखने की एक आदत सी हो गई थी. पुलिस इनवैस्टीगेशन और आरोपी देशराज सिंह से विस्तृत पूछताछ के बाद इशिता मर्डर की जो खौफनाक कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी.

पश्चिम बंगाल के जिला नादिया का कृष्णानगर एक बड़ी आबादी वाला शहर है. इसी शहर में मानिकपाड़ा के निवासी थे दुलाल मलिक. दुलाल मलिक पहले सेना में थे, जब उन के बच्चे स्कूल जाने के योग्य हुए तो उन्होंने कांचरपाड़ा के नजदीक एक मकान किराए पर ले लिया और वहां पर पत्नी कुसुम व बेटेबेटी के साथ रहने लगे. कांचरापाड़ा में केंद्रीय विद्यालय था, इसलिए दुलाल मलिक ने अपनी बेटी इशिता और प्रतीक का एडमिशन केंद्रीय विद्यालय कांचरापाड़ा में करा दिया था. वर्ष 2023 में इशिता जब हाईस्कूल में पढ़ रही थी, उसी समय उस की क्लास में देशराज सिंह ने भी एडमिशन लिया था.

देशराज के पापा बीएसएफ में थे, इसलिए उस का दाखिला भी केंद्रीय विद्यालय में आसानी से हो गया था. देशराज अपनी मम्मी पूनम सिंह व छोटी बहन सुहानी के साथ 24 परगना जेठिया धरमपुर में किराए के मकान में रहता था, जबकि उस के पापा बीएसएफ में हैडकांस्टेबल के पद पर सीमा पर तैनात थे. एक दिन इशिता की एक सहेली का जन्मदिन था, इसलिए उन्होंने एक कैफे में जन्मदिन की पार्टी रखी थी, जिस में क्लास के सभी लड़के और लड़कियां थे. वहां पर सहेली अपनी ओर से पार्टी दे रही थी.

थोड़ी देर के बाद जन्मदिन की पार्टी खत्म हो गई थी. सभी लड़केलड़कियां कैफे से बाहर निकल कर अपनीअपनी राह पर जाने लगे थे. कुछ के पास अपनी बाइक व स्कूटी थी. एकएक कर के सभी वहां से चले गए. वहां से इशिता का घर काफी दूरी पर था, इसलिए वह अपने घर जाने के लिए औटोरिक्शा तलाश करने लगी, लेकिन कोई औटो वाला नहीं मिल रहा था. इशिता को परेशान देख कर देशराज को लगा कि अभी इशिता से बात करने का सुनहरा अवसर है, इसे गंवाना नहीं चाहिए. इसलिए वह तुरंत इशिता के पास पहुंच गया और उस से बोला, ”इशिताजी, आप काफी परेशान दिखाई दे रही हैं, आखिर आप को अभी जाना कहा है?’’

”देशराजजी, आप यह बात खुद समझ सकते हैं कि अब शाम पूरी ढल चुकी है, लेकिन आटो वाले मेरे घर की तरफ जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं.’’ इशिता ने कहा.

”इशिताजी, आखिर आप रहती कहां पर हैं?’’ देशराज ने पूछा.

”वैसे तो हमारा पुश्तैनी घर कृष्णानगर मानिकपाड़ा में है. मेरे पापा आर्मी में थे, रिटायर हो गए हैं, इसलिए वहां पर पुराने घर को तोड़ कर नया घर बनवा रहे हैं. आजकल हम लोग कोचरापाड़ा में एक किराए के मकान में रह रहे हैं.’’ इशिता ने कहा.

अब देशराज का घर भी उसी तरफ था, इसलिए वह इस बात को सुन कर काफी खुश हो गया था. वह इशिता से बोला, ”अरे इशिताजी, यह तो सोने पे सुहागा जैसी बात हो गई है. देखो, कैसा संयोग है आप के पापा आर्मी में हैं दूसरी तरफ मेरे पापा बीएसएफ में हैं. मैं, मेरी मम्मी और मेरी छोटी बहन भी किराए पर जेठिया धरमपुर में रहते हैं. आप का घर पहले आएगा और मेरा बाद में. यदि आप को कोई आपत्ति न हो तो क्या आप मेरे साथ मेरी बाइक पर बैठ सकती हैं, मैं तुम्हें रास्ते में ही ड्रौप कर दूंगा.’’

”यह तो वाकई सोने में सुहागा हो गया है, जैसा कि अभीअभी आप ने भी कहा था. मुझे इस आप के नेक काम में भला क्या आपत्ति हो सकती है. आप की बाइक कहां है?’’ इशिता बोली.

”इशिताजी, मेरी बाइक देखिए, वह सामने खड़ी है. काले रंग की बुलेट है.’’ देशराज ने अपनी बाइक की तरफ बढ़ते हुए कहा.

”देशराजजी, आप तो बड़े दिलचस्प लगते हैं. बाइक चलाने के अलावा तुम्हारे और क्याक्या शौक हैं?’’ इशिता ने उस की बाइक पर बैठते हुए कहा.

”देखिए इशिताजी, अपना एक शौक तो आप जान ही चुकी हैं. दूसरा शौक ‘फ्री फायर’ वीडियो गेम है और तीसरा सब से महत्त्वपूर्ण शौक खूबसूरत लोगों से दोस्ती करना है.’’ यह कहते हुए देशराज ने अपनी बाइक आगे बढ़ा दी थी.

कुछ देर बाद इशिता ने बाइक रुकवाते हुए देशराज से कहा, ”देशराजजी, मेरा घर अब नजदीक में ही है, इसलिए मुझे आप यहीं पर उतार दीजिए.’’

”इशिता, मैं ने तो सोचा था कि तुम मुझे अपने घर में ले जाओगी, चायनाश्ता कराओगी, मगर तुम ने तो मेरा दिल ही तोड़ डाला.’’ देशराज ने कहा

”देशराजजी, यदि मेरे घर वालों ने या पड़ोसियों ने मुझे आप के साथ देख लिया तो लोग तरहतरह की बातें बनाएंगे. मैं क्या जवाब दूंगी उन सब को?’’ इशिता बोली

देशराज थोड़ी देर तक इशिता की आंखों में एकटक देखता रहा और उस के बाद उस ने अगले ही पल अपने दिल की बात जुबान से कह ही डाली, ”इशिता, तुम बहुत खूबसूरत हो, मुझे पहली ही नजर में तुम से प्यार हो गया है. आई लव यू इशिता.’’

यह सुनते ही इशिता के गोरेगोरे गालों पर लाज की एक अलग सी सुर्खी फैल गई. शरम के मारे उस की नजर झुक गई. वह धीमे से मुसकरा कर देशराज की बाइक से नीचे उतर गई.

”इशिता अब जातेजाते अपना मोबाइल नंबर तो बता दो,’’ देशराज ने विनयपूर्वक कहा.

इशिता ने जल्दी से अपना मोबाइल नंबर बताया, जिसे देशराज ने अपने मोबाइल में सेव कर लिया और इशिता मुसकराते हुए पलट कर तेजी से अपने घर की ओर बढ़ गई. देशराज उसे तब तक अपनी प्यासी नजरों से देखता रहा, जब तक इशिता उस की ओर से ओझल नहीं हो गई. उस दिन के बाद से क्लास में हो या कहीं बाहर अकेले, उन दोनों की नजदीकियां अब बढऩे लगी थीं. इधर इशिता अपनी पढ़ाई पर भी काफी फोकस बनाए रखती थी, क्योंकि 10+2 की परीक्षा पास करने के बाद उस का इरादा डौक्टरी की पढ़ाई करने का था, लेकिन दूसरी तरफ देशराज अपनी पढ़ाई की ओर अधिक ध्यान न दे कर मटरगश्ती करने में ज्यादा आगे रहा करता था.

इस के अलावा देशराज इशिता के प्रति कभीकभी काफी आक्रामक भी हो जाता था. वह चाहता था कि इशिता उस के अतिरिक्त किसी भी अन्य लड़के से दोस्ती करने की बात तो दूर बात भी न करे.

एक दिन की बात है. उस दिन शाम को इशिता लाइब्रेरी में जा कर अपनी पढ़ाई के लिए नोट्स तैयार कर रही थी. लाइब्रेरी में उस समय इशिता के अलावा और कोई नहीं था. देशराज उसे काफी समय से फोन कर रहा था, लेकिन उस ने अपना मोबाइल फोन पढ़ाई में व्यस्त होने के कारण साइलेंट मोड में रखा हुआ था. देशराज को पता था कि शाम को कभीकभी इशिता पढ़ाई करने लाइब्रेरी चली जाया करती है. इसलिए वह उसे ढूंढते हुए लाइब्रेरी पहुंच उस को पढ़ाई में व्यस्त देख कर देशराज उस पर भड़क गया.

”इशिता, मैं कब से तुम्हें फोन कर रहा हूं. क्या कर रही हो तुम यहां पर अकेले? चलो, मेरे साथ कहीं बाहर घूमने चलते हैं.’’

”देखो देशराज, हमारे फाइनल एग्जाम सिर पर हैं, इस के अलावा मैं नीट की परीक्षा की तैयारी में भी लगी हुई हूं. देख रहे हो न, मेरे आसपास किस तरह से किताबें फैली हुई हैं. तुम भी अभी अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो,’’ इशिता के उसे समझाते हुए कहा.

”अरे इशिता, क्या करोगी इतना सब पढ़लिख कर, हमारे पास में गांव में काफी खेती है. अपने घर का इकलौता बेटा हूं मैं, कोई बिजनैस कर लूंगा. ठाठ से रखूंगा तुम्हें, चलो तुम्हें चाट खिला कर लाता हूं.’’ देशराज ने कहा.

उस की इस बात को सुन कर इशिता को बड़ा गुस्सा आया, पर गुस्से पर काबू करते हुए वह बोली, ”देशराज, अब एग्जाम के केवल 5 दिन बाकी रह गए हैं. मुझे पढऩे दो, मैं अभी तुम्हारे साथ बिलकुल भी नहीं आ सकती.’’

”देखो इशिता, लोग इसलिए पढ़ाई करते हैं कि एक अच्छी नौकरी लग जाएगी ताकि ढेरों पैसे कमाए जा सकें, लेकिन मेरे घर में पैसों की कोई कमी नहीं है. जैसे ही मैं कोई नया बिजनैस शुरू करूंगा, तुम्हारे कदम पर दौलत का ढेर लगा दूंगा.’’ देशराज ने शेखी बघारते हुए कहा.

”देशराज, मेरे भी अपने खुद के सपने हैं, मैं अपने जीवन में अपने बलबूते पर कुछ बनना चाहती हूं. मेरी तो तुम से भी यही गुजारिश है कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो. अपने दम पर कुछ बन कर दिखाओ, फेमिली वालों के दम पर तो सभी शेखी बघारने लगते हैं.’’ इशिता ने उसे समझाया.

लेकिन दूसरी तरफ देशराज को इशिता की बात का बहुत बुरा लगा और उस ने अगले ही पल एक झन्नाटेदार थप्पड़ इशिता के गाल पर दे मारा. यह देखकर इशिता भी एक पल के लिए जैसे सहम सी गई थी. उस ने तुरंत वहां से अपनी किताबें इकट्ठा कीं और गुस्से से पैर पटकती हुई वहां से चली गई. रास्ते भर इशिता देशराज के इस कृत्य से रोती रही. बस उसी दिन और उसी पल मन देशराज के लिए खट्टा हो गया था. इशिता को उस समय इस बात का पूरापूरा अहसास हो चुका था कि देशराज को न तो इशिता की भावनाओं की चिंता है और न ही वह स्वयं कुछ करना चाहता है. उसे तो केवल अपने फेमिली वालों की दौलत का घमंड था.

वह अपने आप को एक ऐसे वीडियो गेम के दुष्चक्र में फंसा चुका था कि वह कभी भी अपना और अपने साथसाथ इशिता का जीवन भी तबाह कर सकता था. धीरेधीरे इस का नतीजा यह हुआ कि देशराज अब इशिता के मन से काफी दूर जा चुका था. अब इशिता को यह महसूस होने लगा था कि उस ने देशराज के साथ प्रेम संबंध बढ़ा कर बहुत ही जल्दबाजी कर दी थी, क्योंकि देशराज कहीं से भी उस के सपनों का राजकुमार तो बिलकुल भी नहीं था. देशराज के लिए तो वीडियो गेम और उस के घर वालों की जमीन और दौलत का महत्त्व सर्वोपरि था.

इस के बाद देशराज ने कई बार इशिता से मिलने और बात करने की कोशिश भी की थी, लेकिन इशिता ने तो यह सोच लिया था कि जिस जीवनसाथी की उस ने अपने मनमस्तिष्क में कल्पना कर रखी थी, वह किसी भी रूप में उस का एक आदर्श प्रेमी या जीवनसाथी तो कतई नहीं हो सकता था. इसलिए इशिता ने इस भ्रमित प्रेम संबंध को तोडऩे के लिए देशराज से दूरी बनानी शुरू कर दी. देशराज बारबार उसे परेशान करता रहता था, इसीलिए अब इशिता ने अपना पुराना वाला सिम भी तोड़ कर फेंक दिया था.

धीरेधीरे समय गुजरता गया. 10+2 पास करने के बाद इशिता ने विक्टोरिया कालेज में दाखिला ले लिया था. यहां देशराज ने कई बार इशिता से मिल कर बात करने की कोशिशें की, परंतु इशिता ने उस से अब सारे रिश्ते ही खत्म कर लिए थे. वह अब पढ़ाई के साथ ही साथ नोट तैयार करने में भी लगी थी. इधर देशराज ने इशिता की एक सहेली से इशिता का नया मोबाइल नंबर भी ले लिया था. देशराज बारबार इशिता से बात कर माफी मांगा करता था, वह उस से अपने रिश्ते को दोबारा से बनाने के लिए हमेशा कहता रहता था. इशिता ने उसे इग्नोर कर दिया तो जुनूनी आशिक देशराज सिंह ने गोली मार कर उस की हत्या कर दी.

उस के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद से देशराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उस की निशानदेही पर एक 7 एमएम का पिस्तौल भी बरामद कर लिया. कहानी लिखे जाने तक पश्चिम बंगाल पुलिस उस के पापा राघवेद्र प्रताप सिंह को भी गिरफ्तार कर चुकी थी और दोनों को जेल भेज दिया गया था.

बच्चों पर दुष्प्रभाव डाल रहा हैगरेना फ्री फायरगेम

गरेना फ्री फायर गेम जिसे ‘फ्री फायर बैटलग्राउंड’ या ‘फ्री फायर’ गेम के नाम से भी जाना जाता है, जो ऐक्शन-एडवेंचर बैटल रोयल गेम है, जो मोबाइल के लिए उपलब्ध कराया गया है. इस गेम को 111 डौट्स स्टूडियो द्वारा विकसित किया गया है और गारिना द्वारा प्रकाशित किया गया है. यह मोबाइल गेम 20 नवंबर, 2017 को बीटा रिलीज किया गया था और 4 दिसंबर, 2017 को आधिकारिक तौर पर एंड्राइड और आईओएस के जरिए जारी किया गया था. इस मोबाइल गेम के 500 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं.

इस खेल में 50 से अधिक खिलाड़ी होते हैं, जो दूसरे खिलाडिय़ों को मारने के लिए हथियारों और उपकरणों की तलाश में एक द्वीप पर पैराशूट के सहारे गिरते हैं. इस में खिलाडिय़ों को अन्य खिलाडिय़ों को मार कर जीतना होता है. जो खिलाड़ी जीत जाता है उसे बूयाह (क्चह्रह्रङ्घ ्र॥) दिया जाता है. इस खेल में 4 नक्शे होते हैं. पहले का नाम बरमुडा है, जो सब से पुराना नक्शा है. दूसरे नक्शे का नाम परगेटारी है, तीसरा नक्शा कलाहारी है, जो हाल ही में प्रकाशित किया गया था. इस के अलावा बरमुडा का नया संस्करण लाया गया है. इस चौथे नक्शे का नाम बरमुडा रीमास्टर्ड है.

फ्री फायर एक वीडियो गेम है, जिस में विभिन्न प्रकार के इन-गेम इवेंट्स शामिल हैं. ये इवेंट्स पेड के रूप में हो सकते हैं या फिर खिलाडिय़ों को गेम में इनाम और बोनस कमाने का मौका दे सकते हैं. पेड इवेंट, जैसे कि एलिट पास के बाद बैटल पास की जगह आया है. डायमंड रौयल खिलाडिय़ों को एक्सक्लूसिव कौस्मेटिक्स और अन्य आइटम्स खरीदने की अनुमति दे देते हैं, जबकि दूसरे इवेंट्स में आमतौर पर सभी खिलाडिय़ों के लिए उपलब्ध रहते हैं और उन्हें भाग लेने के लिए कोई भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है. इन इवेंट्स में खिलाडिय़ों को गेम में बिना भुगतान किए बेहतर आइटम्स को अनलौक करने का मौका मिलता है. इन आयोजनों का विषय और समय अलगअलग हो सकता है.

फायर गेम खेलने के कई दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. इस से फायर गेम खेलने की लत लग सकती है, जिस के कारण वास्तविक दुनिया की गतिविधियों की उपेक्षा होती है. गेम को खेलने के कारण बच्चे चिड़चिड़े, आक्रामक, सामाजिक रूप से अलगथलग होने लग जाते हैं. इस के अतिरिक्त गेमिंग में पैसे खर्च करने, आंखों की रोशनी कम होने और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पडऩे जैसे खतरे भी सामने आने लगते है.ल इस गेम की लत से बच्चे दिन भर पढ़ाई करने के बजाय गेम खेलते रहते हैं और खेलना व परिवार के साथ वक्त बिताना छोड़ देते हैं. इस गेम को लंबे समय तक खेलने से मानसिक संतुलन तक बिगड़ सकता है.

बच्चे अपनी मनपसंद चीजें खरीदने के लिए खुद ही पैसे इस गेम में खर्च कर सकते हैं, जिस के कारण परिवार में वित्तीय संकट पैदा होने की आशंका बनी रहती है. इस से बच्चों को दूर रखने के लिए मातापिता को अपने बच्चों पर निगरानी रखने व बच्चों को ऐसे हिंसक गेम खेलने से रोकने के लिए बच्चों को समझाने की आज विशेष आवश्यकता है.

14 फरवरी, 2022 को भारत सरकार के इलेक्टौनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारत के संविधान के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत भारत की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले 53 अन्य ऐप्स के साथ ‘गरेना फ्री फायर’ गेम पर प्रतिबंध लगा दिया था, प्रतिबंध लगाने के बावजूद यह गेम आज भी युवाओं और बच्चों के द्वारा खेला जा रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाए जाने की विशेष जरूरत है. West Bengal News

 

Rajasthan News: तीसरी शादी की चाहत

Rajasthan News: अनीता राज चंचल स्वभाव की थी. सासससुर के खिलाफ मुकदमा लिखवाने के बाद वह पति के साथ अलवर में रहने लगी. यहां मकान मालिक मानसिंह उर्फ वीरू से प्यार हो जाने के बाद वह पति को छोड़ वीरू जाटव के संग रहने लगी. इसी दौरान उस के नैन काशीराम प्रजापति से लड़ गए तो नए प्रेमी के साथ रहने के लिए उस ने ऐसी खूनी वारदात को अंजाम दिया कि…

काशीराम प्रजापति जब कई दिनों बाद अनीता राज से मिलने आया, तब वह उलाहना देती हुई बोली, ”लगता है अब तुम्हारा मुझ से मन भर गया है, कोई दूसरी फंसा ली क्या?’’

”अरे नहीं डार्लिंग, वैसा कुछ नहीं है मेरे मन में, तुम्हारा दूसरा पति वीरू ही अड़चन बना हुआ है. बड़ी मुश्किल से

मैं ने उस की टूटी दोस्ती में अपनी गांठ बांधी है.’’

”ऐसा क्यों किया?’’

”उसे हमारे संबधों पर शक हो गया है. हम पर निगरानी रखे हुए है. इस कारण मैं कई दिनों तक तुम से मिलने नहीं आया. उसे विश्वास में लेने के लिए ही उस के साथ दोबारा दोस्ती का हाथ मिलाया है.’’ काशीराम ने समझाया.

”मगर उसे दोबारा हमारे संबंधों पर शक हुआ तो?’’ अनीता चिंता जताती हुई बोली.

”तब मैं उस का परमानेंट इलाज कर दूंगा यानी खल्लास,’’ काशीराम तपाक से आक्रोश के साथ बोल पड़ा.

”तो देर किस बात की? जल्दी ही कर दो यह काम.’’ अनीता बोली.

अनीता की यह बात सुन कर काशीराम खुश हो गया, क्योंकि अब अनीता भी उस का साथ देने को तैयार हो गई थी. वह अनीता के चेहरे को चाहत भरी नजरों से निहारने लगा.

”मुझे क्या घूर रहे हो…मैं ने हां कह तो दिया, किंतु उस की मौत नैचुरल दिखनी चाहिए.’’

”वह कैसे होगा?’’ काशीराम बोला.

”और पास आओ बताती हूं… मैं ने सारा प्लान सोच रखा है!’’ अनीता काशीराम के शर्ट का कौलर अपनी ओर खींचती हुई बोली.

फिर दोनों के बीच आधे मिनट तक खुसरफुसर होती रही. भावावेश में काशीराम ने अनीता के होंठों को चूम लिया था. अलग होती हुई अनीता बोली, ”फिर उस के बाद हम लोग शादी कर लेंगे.’’

किंतु अभी भी काशीराम के मन में प्लान की सफलता को ले कर संदेह दूर नहीं हुआ था. उस ने अपनी शंका अनीता से जाहिर की.

”तुम्हें जरा भी संदेह है तो सुपारी किलर हायर कर लो, मैं 2 लाख रुपए देती हूं.’’ वह बोली.

उस के बाद अनीता उठ कर दूसरे कमरे में चली गई. जब वापस लौटी, तब उस की हाथ में 5-5 सौ के कुछ नोट थे. प्लान के मुताबिक तय तारीख 7 जून, 2025 को काशीराम ने अनीता को कौल किया. उसे आधी रात को घर का मुख्य दरवाजा खुला रखने को कहा. अनीता की हामी मिलने पर काशीराम रात के करीब 2 बजे भाड़े के 4 साथियों के साथ वीरू के घर के करीब पहुंच गया. वीरू राजस्थान के अलवर जिले के खेड़ली कस्बे में बाईपास रोड पर स्थित अपने घर में सोया हुआ था.

घर का मेन गेट खुला था. उस से पांचों अंदर दाखिल हो गए. सभी कमरे के बाहर बाउंड्री के भीतर चारपाई पर सो रहे वीरू के पास जा पहुंचे. काशी ने मानसिंह उर्फ वीरू के सिरहाने से तकिया एक झटके में खींच लिया और उस से वीरू का मुंहनाक दबा दिया. बाकी चारों ने और अनीता ने एक साथ वीरू के हाथपैर दबोच लिए. वीरू कुछ सेकेंड तक छटपटाया और उस की मौत हो गई.

तभी एक व्यक्ति की नजर एक 9 बच्चे पर पर गई, जो आंखें मलते हुए उन्हें देख रहा था.

”अरे यह तो वीरू का बेटा है… इस ने हमें देख लिया है. अब क्या होगा?’’

काशीराम के मुंह से अचानक चिंता के ये शब्द निकल पड़े.

वह अनीता के साथ उस के पास गया. उस के कानों में फुसफुसाया और उसे उस के कमरे में जा कर सुला दिया. अनीता अपने कमरे में चली गई. 9 वर्षीय बेटे को जागते हुआ देखा. वह गुमसुम था. कुछ बोल नहीं पा रहा था. उसे पुचकारते हुए समझाने लगी. उस ने कहा कि जो कुछ देखा, किसी को नहीं बताए. कोई पूछे भी तो कहना है कि वह सो रहा था, उसे कुछ नहीं मालूम. प्लान के मुताबिक 8 जून, 2025 की सुबह करीब साढ़े 4 बजे अनीता ने अपनी जेठानी को कौल कर कहा कि जल्दी आओ, वीरू की तबीयत खराब हो गई है. अस्पताल ले जाना होगा.

जल्द ही परिवार के कई लोग वहां पहुंच गए. उसे तुरंत खेड़ली के उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया. अस्पताल में कुछ दूसरे परिजन भी पहुंच गए. उन में वीरू का भाई खेमचंद उर्फ गब्बर जाटव भी था. डौक्टर ने स्ट्रेचर पर वीरू की नब्ज टटोली और तुरंत मृत घोषित कर दिया. यह सुनते ही वहां मौजूद वीरू के फेमिली वाले सन्न रह गए. अनीता सदमे में आ कर वहीं धम्म से जमीन पर बैठ गई. उस के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी. आंखें पथराई जैसी हो गई थीं. एक बूंद आंसू नहीं निकले थे. उसे फेमिली वालों ने संभाला. इसी बीच वहां काशीराम प्रजापति भी पहुंच गया.

वीरू के भाई गब्बर को यह बात गले नहीं उतर रही थी कि कुछ घंटे पहले ही रात के 10 बजे जब वह अपने नए घर में सोने गया था, तब तो वीरू एकदम भलाचंगा था. फिर अचानक उसे क्या हो गया? इस बारे में उस ने अनीता से जानना चाहा, किंतु वह कोई ठोस जवाब नहीं दे पाई. सकपकाती हुई सिर्फ इतना बताया कि खाना खाने के बाद वीरू सो गया था. आधी रात को उस की अचानक तबीयत बिगडऩे लगी थी. पहले तो उस ने गरमी से बेचैनी की शिकायत की थी. उसे खुली हवा में घर के बाहर बाउंड्री के खुले में सोने की इच्छा जताई और खुद वहां चारपाई पर जा कर लेट गया.

करीब 4 बजे उस ने आवाज लगाई और सीने में दर्द की शिकायत की. फिर उस ने अस्पताल ले जाने के लिए परिवार के सभी लोगों को फटाफट कौल कर बुलाया.  अनीता से बात करते हुए गब्बर वीरू की लाश को भी निहार रहा था. उसे उस के गले पर गहरा निशान नजर आया. जब इस बारे में अनीता से पूछा तो वह सकपका गई. उसी वक्त काशी का वहां पहुंचना भी गब्बर को कुछ अजीब लगा. उसे वीरू की मौत पर शक हो गया. उसे वीरू के चेहरे और गले पर जख्मों के निशान देख कर पहले ही उस की हत्या का संदेह हो गया था.

उस ने अस्पताल में मौजूद सभी लोगों के सामने एक तरह से अपना फरमान सुनाया, ”वीरू की लाश का पहले पोस्टमार्टम होगा, तभी उस का अंतिम संस्कार किया जाएगा.’’

इसी के साथ उस ने थाना खेड़ली को सूचना दे दी. सूचना पा कर एसएचओ धीरेंद्र सिंह गुर्जर अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने वीरू की लाश का मुआयना किया और वहां मौजूद फेमिली वालों से कुछ सवाल पूछे. गब्बर जाटव की शिकायत पर मानसिंह उर्फ वीरू की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया. उस के मुंह, नाक और गरदन पर चोट के निशान पाए गए. मुंह और नाक से बाहर निकला खून सूख चुका था. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

पुलिस टीम आगे की जांच के लिए मानसिंह उर्फ वीरू के घर यानी घटनास्थल पर भी गई. वहां से कई साक्ष्य जमा किए गए, जिस में वीरू के बिस्तर पर से मिला एक टूटा दांत भी था. पुलिस के लिए यह वीरू की हत्या का एक सबूत था. पुलिस टीम ने घटनास्थल के खड़ेली कस्बे में लगे करीब 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे गए. एक फुटेज में 7-8 जून की रात करीब 2 बजे एक बाइक पर कुछ लोग लद कर वीरू जाटव के घर की ओर जाते दिखाई दिए. उन में ही काशीराम प्रजापति भी नजर आया था. उसी रात 3 बजे के बाद वही लोग बाइक से वापस लौटते नजर आए.

वीरू के भाई गब्बर ने अपने भाई की हत्या का शक काशीराम और भाभी यानी वीरू की पत्नी अनीता पर ही जाहिर किया था. उस ने पुलिस को बताया था कि अनीता वीरू की दूसरी पत्नी है, जो बगैर ब्याहे उस के साथ कई सालों से रह रही थी. पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन की भी जांच की. काशीराम की लोकेशन घटनास्थल की मिली. कौल के डिटेल्स से पता चला कि अनीता और काशीराम के बीच हर रोज की तरह उस रात भी बातचीत हुई थी.

पुलिस ने इन तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने के बाद इस घटना की जानकारी अलवर जिले के आला पुलिस अधिकारियों को दे दी. एसपी संजीव नैन ने इस बाबत एडिशनल एसपी (रूरल) प्रियंका और सीओ (कठूमर) कैलाशचंद्र के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी. इस टीम में एसएचओ धीरेंद्र सिंह, एसएसआई रमेशचंद, कांस्टेबल राजवीर, भगत सिंह, प्रधान सिंह, सुरेश चंद, देवेंद्र सिंह शामिल किए गए थे. थाना खेड़ली की पुलिस टीम भी इस जांच में पहले से लगी हुई थी. जांच में अनीता और काशीराम के बीच लव अफेयर के बारे में भी पता चला, जबकि वह वीरू की दूसरी पत्नी थी.

वह करीब 4 साल से मानसिंह उर्फ वीरू के साथ खेड़ली कस्बे के बाइपास रोड पर वार्ड नंबर 19 स्थित नए मकान में रह रही थी. वहीं अनीता का 10 वर्षीय बेटा भी रहता था. जबकि वीरू की पहली पत्नी सपना देवी अपने 2 बेटों और एक बेटी के साथ खेड़ली में ही पुराने मकान में रहती थी. वीरू अपनी दोनों पत्नियों और उन के बच्चों का पूरा खयाल रखता था. हालांकि अपना अधिक समय अनीता के साथ ही गुजारता था. सपना से उस की बाकायदा शादी हुई थी, लेकिन अनीता के साथ वह लिवइन रिलेशनशिप में था.

अनीता पहले से शादीशुदा थी. उस का ससुराल राजस्थान के भरतपुर जिले में भुसावर के सेंदली गांव में थी. विवाह के कुछ समय बाद ही वह पति को अलवर जिले के खेड़ली कस्बे में ले आई थी. पति को अपने पक्ष में कर सासससुर एवं दूसरे परिजनों पर मुकदमा दर्ज कर दिया था. उस का पति फलों का ठेला लगता था. वहीं उस की मुलाकात वीरू से तब हुई थी, जब अनीता अपने पति के साथ उस के मकान में किराए पर रहने आई थी. वहीं रहते हुए अनीता के वीरू के साथ अवैध संबंध बन गए थे. पति को इस की जानकारी हुई तो उस ने विरोध किया, तब अनीता वीरू के साथ भाग गई. जिस से उस के पति की काफी जगहंसाई हुई.

अनीता भी एक बेटे की मां थी. उस ने पति के साथ अपने बेटे को भी ठुकरा दिया. वह 2 माह बाद वीरू के साथ गुजार कर वापस खेड़ली लौट आई थी. जबकि उस का पति अपने बेटे के साथ सेंदली लौट गया था. वीरू के एक गैरऔरत के साथ रहने का विरोध उस की ब्याहता सपना देवी और दूसरे करीबी परिजनों ने भी किया, लेकिन वह नहीं माना. वह अनीता के इश्क और हुस्न का दीवाना बना हुआ था. उस ने अपनी पत्नी सपना और भाई गब्बर की एक नहीं सुनी. यहां तक कि उस ने अनीता के लिए दूसरा घर दिलवा दिया और उस के साथ रहने लगा. आजीविका के लिए उस ने अनीता को जनरल स्टोर की दुकान भी खुलवा दी. अनीता वीरू से एक बेटे की मां भी बन गई.

वीरू और बेटे के साथ अनीता की जिंदगी मजे में गुजर रही थी. वह अपनी दुकान चलाती थी. जबकि वीरू अपने धंधे में घर से बाहर चला जाता था. एक बार अनीता की दुकान पर काशीराम आया. वह बातबात पर अनीता की दुकान, उस के काम करने के तौरतरीके, व्यवहार की तारीफ करता है. उस ने यह भी महसूस किया कि सामान खरीदने के बहाने से उस से दूसरी बातें भी करने लगा था, ताकि उस के साथ अधिक समय तक रह सके. अनीता को काशी की आंखों में अपने प्रति चाहत के डोरे नजर आए. जब कभी काशी उस के सामने होता तो उस के दिल की धड़कनें बढ़ जाती थीं. कई बार काशी सामान खरीदते हुए और पैसे के लेनदेन के बहाने से अनीता के हाथों को प्यार से छूनेसहलाने लगता था.

अनीता भी इस का बुरा नहीं मानती थी. एक बार तो हद हो गई, जब काशी उस की हथेली को पकड़ कर बोल पड़ा, ”इतनी अच्छी कलाई और हथेली है, छोडऩे को जी नहीं करता है.’’

इस तारीफ को सुन कर अनीता शरमा गई. उस ने झट से अपना हाथ खींच लिया और तेजी से मुड़ गई थी.

इस के जवाब में अनीता भी बोले बगैर नहीं रही, ”लगता है, तुम पहली बार किसी औरत को देख रहे हो?’’

यह कहना गलत नहीं था कि काशी ने अनीता के दिल में प्रेम की गुदगुदी के साथ देह में वासना की चिंगारी भड़का दी थी. आगे क्या होने वाला है, इस का उसे जरा भी अंदाजा नहीं था. दोनों जल्द ही एकदूसरे के साथ प्यार की रौ में बह गए. अनीता एक बार फिर गैरमर्द की बांहों में ऐसे समा गई थी, मानो उस का वीरू से मन भर गया हो. अनीता को उस वीरू का प्रेम फीका लगने लगा, जिस के साथ साल 2013 से ही रह रही थी. उसे छोड़ कर दमदार मर्दानगी वाले मर्द काशी के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी थी. करीब ढाई साल तो उन के अवैध रिश्ते वीरू की नजरों से छिपे रहे, लेकिन जब इस का उसे पता चला, तब उस ने विरोध जताना शुरू कर दिया.

विरोध में वह अनीता के साथ गालीगलौज और मारपीट करने लगा. यह सब अनीता के साथ आए दिन होने लगा था. यहां तक कि वीरू ने उस का मोबाइल फोन तक छीन लिया था और सिम तोड़ डाले थे, ताकि वह काशी से फोन पर भी बात नहीं कर सके. अनीता पर वीरू द्वारा की गई सख्ती को देखते हुए काशी ने एक तरीका निकाला. वह वीरू के पैरों पर जा गिरा और माफी मांग ली. कसम खाई कि वह अनीता से संबंध तोड़ लेगा. इसी के साथ उस ने वीरू के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया.

इस मेलमिलाप की खुशी में काशी ने वीरू को शराब की पार्टी दे डाली. वीरू ने पार्टी के जम कर मजे लिए और यह भूल गया कि काशी उस की प्रेमिका का प्रेमी है. वीरू को इस बात का जरा भी एहसास नहीं हुआ कि काशी की दोस्ती के पीछे अनीता की चाल है. पुलिस की जांच टीम ने वीरू के हत्यारों तक पहुंचने के लिए उस की पहली पत्नी सरिता देवी से भी पूछताछ की. उस ने बहुत दुखी मन से अपनी पीड़ा बताई, जिस से पुलिस को अंदाजा हुआ कि वीरू की हत्या में उस की भूमिका नहीं हो सकती है. जबकि पुलिस को अनीता में इस की कोई झलक नहीं दिखी. उसे वीरू की मौत का न कोई मलाल था और न ही कोई पीड़ा, सिर्फ चेहरे पर बनावटी उदासी थी.

पुलिस की पूछताछ का सिलसिला यहीं नहीं खत्म हुआ. घटना की रात घर में मौजूद अनीता के 9 वर्षीय बेटे से पूछताछ के लिए पुलिस उसे अकेले में ले गई और उसे हमदर्दी एवं प्यार दिखाते हुए वीरू के बारे में पूछताछ करने लगी. अनीता के बेटे ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस की आंखों में चमक आ गई. दरअसल, उस ने घटना की रात जो कुछ अनिद्रा में देखा था, सचसच बता दिया. यह भी बताया कि उसे किसकिस ने कुछ नहीं बोलने की हिदायत दी थी? किस ने धमकी दी थी और अनीता ने किस तरह से उसे चुप रहने के लिए समझाया था.

बच्चे ने 7 जून, 2025 की शाम की बात पापा से अखिर बार हुई बात बताई थी. उस ने बताया कि पापा जब उस रात काम से घर आए थे, तब उन्होंने उसे अपना मोबाइल फोन चार्ज के लिए बिजली बोर्ड के साकेट में लगाने के लिए दिया था. उसी रात मम्मी ने उस पर जल्द सोने का दबाव डाला था और वह सो गया था. आधी रात को अचानक उस की नींद खुल गई थी और उस ने पापा की हत्या करते हुए कई लोगों को देख लिया था. उन में उस की मम्मी भी थी.

पुलिस के लिए अनीता और वीरू का बेटा ही चश्मदीद गवाह निकला. उस ने हत्याकांड की बहुत सारी बातें बता दी थीं, जिस से अनीता और उस के नए प्रेमी काशीराम पर बना शक और मजबूत हो गया था. इस संबंध में पुलिस ने अनीता से सख्ती से पूछताछ की. तब उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया और दूसरे आरोपियों के बारे में बताया, जिस में मुख्य आरोपी काशीराम प्रजापति था. पुलिस ने काशीराम को 16 जून, 2025 को सुपारी किलर बृजेश जाटव के साथ गिरफ्तार कर लिया. दोनों से सख्ती के साथ पूछताछ से पहले पुलिस ने उन्हें बता दिया कि अनीता ने जुर्म मान लिया है और उस के बेटे ने सब कुछ बता दिया है, इसलिए उस के बचने की कोई गुंजाइश नहीं है. इतना सुनते ही काशीराम भी डर गया और घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बता दिया.

काशीराम प्रजापति पुलिस की सख्ती के आगे ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. उस ने बाकी 3 आरोपियों के नाम बताने के साथसाथ वीरू की हत्या करनी स्वीकार ली. उस ने सुपारी के लिए 2 लाख रुपए के बारे में भी बताया, जो अनीता ने देने का वादा किया था. एडवांस के रूप में उसे 40 हजार मिल गए थे. आरोपियों में बृजेश जाटव अलवर के कालवाड़ी का रहने वाला है. वह छोटामोटा कामधंधा करता है. पूछताछ के बाद अनीता, काशीराम प्रजापति और बृजेश को पुलिस ने अलवर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Rajasthan News

कथा संकलन तक पुलिस अन्य तीनों आरोपियों को सघनता से तलाश कर रही थी.

 

 

Love Crime: छलिया आशिक को कैसे पहचानें

Love Crime: 4 बच्चों की मां बनने के बावजूद 52 वर्षीय रानी सोमवंशी की हसरतें जवान थीं. वह बनसंवर कर रहती और इंस्टाग्राम पर अपने फोटो शेयर करती. यहीं पर 25 वर्षीय अरुण सिंह राजपूत उसे दिल दे बैठा. बाद में दोनों होटलों में भी मिलने लगे. शादीशुदा होते हुए भी रानी अरुण से शादी करने का ख्वाब संजोने लगी, लेकिन अरुण ऐसा छलिया आशिक निकला कि…

रानी सोमवंशी की धमकी से अरुण डर गया. उस की रातों की नींद व दिन का चैन छिन गया. आखिर उस ने रानी को खत्म करने का निश्चय कर लिया. उस ने रानी को विश्वास में ले कर उस की हत्या का तानाबाना बुन लिया. 8 अगस्त, 2025 को रानी सोमवंशी ने फोन पर अरुण से बात की और उसे धमकाया कि जल्द शादी करो या फिर पैसे वापस करो. इस पर अरुण ने उस से कहा कि वह उस से प्यार करता है और शादी को तैयार है. तुम 10 अगस्त को मैनपुरी आ जाओ और भांवत चौराहे पर मिलो. उस के बाद हम शादी करने का प्लान बनाएंगे.

रानी 9 अगस्त को अपनी ससुराल के गांव जिठौली से फर्रुखाबाद जिले के गांव खेड़ा में रहने वाली अपनी बहन के यहां आई थी. प्रेमी अरुण से बात होने के बाद वह 10 अगस्त को ही ससुराल जाने की बात कह कर वह मैनपुरी चली आई. प्रेमी की इस बात पर रानी खुश हो गई और 10 अगस्त, 2025 की दोपहर साढ़े 12 बजे वह मैनपुरी के भांवत चौराहे पहुंच गई. वहां अरुण पहले से ही रानी का इंतजार कर रहा था. रानी को देख कर वह मुसकरा उठा. रानी ने भी मुसकान बिखेरी. इस के बाद दोनों ने साथ बैठ कर एक रेस्टोरेंट में चायनाश्ता किया. फिर दोनों खरपरी बंबा के पास पहुंचे और सुनसान स्थान देख कर पेड़ के नीचे बैठ कर बतियाने लगे.

बातचीत के दौरान रानी ने शादी की जिद की और दिनतारीख बताने को कहा. यह सुनते ही अरुण को गुस्सा आ गया. उस ने रानी की चुन्नी को उसी के गले में लपेटा और गला कसने लगा. चुन्नी को वह तब तक कसता रहा, जब तक उस की मौत नहीं हो गई. रानी सोमवंशी की हत्या के बाद अरुण ने रानी के शव को झाडिय़ों में छिपा दिया. रानी के मोबाइल फोन का सिम निकाल क र तोड़ दिया और बंबा में फेंक दिया. मोबाइल कूच कर झाडिय़ों में छिपा दिया. चुनरी को पत्तों के नीचे छिपा दिया. उस के बाद वह फरार हो गया.

इधर रानी जब देर शाम तक घर नहीं पहुंची तो उस के पति राजपाल को चिंता हुई. उस ने रानी को कौल लगाई, लेकिन उस का फोन बंद था. वह रात भर चहलकदमी करता रहा. सुबह उस ने कुछ लोगों को रानी के लापता होने की जानकारी दी. उस के बाद वह कई दिनों तक पत्नी की खोज में भटकता रहा. जब कुछ पता नहीं चला, तब उस ने जिठौली थाने में पत्नी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. 11 अगस्त, 2025 की सुबह मैनपुरी कोतवाली के गांव खरपरी के कुछ किसान अपने खेतों की ओर गए तो उन्होंने बंबा के पास झाडिय़ों के बीच एक महिला की लाश देखी. लाश देख कर उन के होश उड़ गए. खबर गांव तक पहुंची तो वहां भीड़ जुट गई. इसी बीच किसी ग्रामीण ने इस लाश की सूचना थाना मैनपुरी कोतवाली को दे दी.

सूचना मिलते ही एसएसआई राजेंद्र सिंह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ खरपरी बंबा के पास पहुंच गए, जहां झाडिय़ों के बीच महिला की लाश पड़ी थी. उस समय वहां लोगों की भीड़ थी. चूंकि मामला एक महिला की हत्या का था, अत: एसएसआई राजेंद्र सिंह ने सूचना पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ देर बाद ही एसपी (सिटी) अरुण कुमार तथा डीएसपी संतोष कुमार सिंह घटनास्थल आ पहुंचे. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक व डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया. मृतक महिला की उम्र 50-52 वर्ष थी. वह लाल रंग का कुरता व पीले रंग की सलवार पहने थी. गले में पर्स लटका था. हाथ के पास रुमाल पड़ा था और हाथ में लाल रंग का धागा बंधा था.

मृतका के शरीर पर चोट आदि के निशान नहीं थे. देखने से ऐसा लग रहा था कि महिला की हत्या गला घोंट कर की गई थी. शरीर पर कोई आभूषण भी नहीं था. डौग स्क्वायड का खोजी कुत्ता महिला के शव को सूंघ कर झाडिय़ों के इर्दगिर्द घूमता रहा, फिर भौकता हुआ बंबा की पटरी पर आया. वह नगला गहियर जाने वाले मार्ग पर कुछ दूर तक गया, उस के बाद वापस आ गया. फोरैंसिक टीम ने भी जांच की, कुछ फोटो खींचे और सबूत जुटाए. अब तक महिला के शव को सैकड़ों लोग देख चुके थे, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं पाया था. इस से स्पष्ट था कि महिला पासपड़ोस के गांव की नहीं थी. दूरदराज से बुला कर उस की यहां हत्या की गई थी. हत्या किसी खास परिचित ने ही की थी.

जब शव की पहचान नहीं हो पाई, तब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल मैनपुरी भिजवा दिया. लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी जब शव की पहचान नहीं हुई, तब नियम के मुताबिक पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने अज्ञात में महिला के शव का दाह संस्कार कर दिया. एसपी अरुण कुमार ने इस ब्लाइंड मर्डर को बड़ी ही गंभीरता से लिया. उन्होंने महिला की शिनाख्त व हत्याकांड के खुलासे के लिए 2 टीमें गठित कीं. साथ ही हत्यारों की धरपकड़ के लिए एक पुलिस टीम डीएसपी संतोष कुमार सिंह की देखरेख में गठित की और दूसरी स्वाट प्रभारी जितेंद्र चंदेल के नेतृत्व में बनाई गई.

पुलिस टीमों ने महिला की खोज मैनपुरी के अलावा पड़ोसी जिला फर्रुखाबाद व इटावा में शुरू की. इन जिलों के थानों में महिला की हुलिया सहित फोटो चस्पा कराई गईं. गुमशुदा अधेड़ महिलाओं की सूचना भेजने को कहा गया. डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने सुरागसी के लिए अपनी विशेष टीम तथा मुखबिरों को भी लगा दिया. धीरेधीरे 10 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस की टीमें महिला के शव की पहचान न कर पाई. मुखबिरों ने भी पसीना बहाया, लेकिन वह भी नाकाम रहे. अखबारों में ब्लाइंड मर्डर की खबरें सुर्खियों में छप रही थीं, साथ ही पुलिस की नाकामी पर भी सवाल उठाए जा रहे थे. खबरों से पुलिस अधिकारी चिंतित थे.

23 अगस्त, 2025 को मैनपुरी कोतवाली के एसएसआई राजेंद्र सिंह को फर्रुखाबाद जिले के थाना राजेपुर से सूचना मिली कि उन के यहां रानी सोमवंशी नाम की महिला की गुमशुदगी दर्ज है. गुमशुदगी उस के पति राजपाल सिंह ने दर्ज कराई थी, जो जिठौली गांव का रहने वाला है. रानी 4 बच्चों की मां है. उस की उम्र 52 वर्ष है. इस सूचना पर पुलिस टीम गांव जिठौली पहुंची और राजपाल सिंह सोमवंशी को महिला की पहचान हेतु मैनपुरी कोतवाली ले आई. एसएसआई ने महिला के शव की फोटो राजपाल सिंह को दिखाई तो वह फफक पड़ा और बोला, ”साहबजी, यह फोटो उस की पत्नी रानी की है. वह 10 अगस्त की सुबह 9 बजे दवा लाने के लिए घर से निकली थी, उस के बाद घर वापस नहीं आई. तब से वह उस की खोज में जुटा था.’’

”क्या तुम बता सकते हो कि तुम्हारी पत्नी की हत्या किस ने की है?’’ एसएसआई राजेंद्र सिंह ने पूछा.

”नहीं साहब, मुझे पता नहीं कि रानी की हत्या किस ने और क्यों की है?’’ राजपाल ने जवाब दिया.

”गांव में तुम्हारी किसी से दुश्मनी या लेनदेन का झगड़ा तो नहीं था?’’

”साहब, मैं उम्रदराज सीधासादा किसान हूं. हमारा न तो किसी से झगड़ा है और न ही लेनदेन.’’

”कोई खास या बाहरी व्यक्ति घर में आता था, जिस से रानी का लगाव रहा हो.’’

”ऐसा कोई व्यक्ति घर में नहीं आता था, जिस से रानी का लगाव हो.’’

”रानी के पास मोबाइल फोन था?’’ राजेंद्र सिंह ने पूछा.

”हां साहब, था, लेकिन उस का फोन बंद है. मैं ने कई बार बात करने की कोशिश की थी.’’

राजपाल सोमवंशी से पूछताछ के बाद एसएसआई ने उस से मृतका रानी का मोबाइल फोन नंबर लिया और फिर उस नंबर की कौल डिटेल्स निकलवाई. कौल डिटेल्स से पता चला कि रानी एक खास नंबर पर अकसर बातें करती थी. आखिरी कौल उसी नंबर से उस के मोबाइल पर आई थी. रानी सोमवंशी के मोबाइल पर जो आखिरी कौल आई थी, पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया तो पता चला कि वह नंबर जनपद मैनपुरी के थाना एलाऊ के किशोरपुर गांव निवासी अरुण सिंह राजपूत के नाम दर्ज है.

यह पता चलते ही पुलिस टीम ने किशोरपुर गांव निवासी अरुण के घर छापा मारा, लेकिन वह घर पर नहीं था. अरुण के पापा मुन्ना राजपूत ने बताया कि अरुण गुरुग्राम (हरियाणा) में रहता है. वह टैंकर चलाता है. इस के बाद पुलिस टीम सर्विलांस की मदद से गुरुग्राम पहुंची और पहली सितंबर 2025 की रात अरुण को गिरफ्तार कर लिया. अरुण को थाना मैनपुरी कोतवाली लाया गया. थाने में अरुण राजपूत से रानी सोमवंशी की हत्या के बारे में पूछा गया तो वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करने लगा, लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया.

यही नहीं, पुलिस ने अरुण की निशानदेही पर मृतका रानी का टूटा हुआ मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया, जिस का सिम तोड़ कर अरुण ने बंबा में फेंक दिया था और टूटा हुआ मोबाइल झाडिय़ों में डाल दिया था. पुलिस ने वह चुनरी भी बरामद कर ली, जिस से अरुण ने रानी का गला घोंटा था. चुनरी उस ने पेड़ के पत्तों में छिपा कर ईंट से दबा दी थी. एसएसआई राजेंद्र सिंह ने ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने तथा कातिल को गिरफ्तार करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसपी (सिटी) अरुण कुमार व डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता कर रानी मर्डर केस का खुलासा कर दिया.

चूंकि अरुण कुमार राजपूत ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और हत्या में प्रयुक्त चुनरी भी बरामद करा दी थी, अत: बीएनएस की धारा 103(1), 228(4) के तहत अरुण राजपूत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में प्यार में छल की जो सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई, इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जिला कई मायनों में अपनी पहचान बनाए हुए है. यहां पर बीड़ी और तंबाकू का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है. आलू का उत्पादन भी भारी मात्रा में होता है. यहां की नमकीन पूरे उत्तर प्रदेश में मशहूर है. इसी फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर थाना अंतर्गत एक गांव है जिठौली. राजपाल सिंह सोमवंशी इसी गांव का निवासी था. उस की पत्नी का नाम रानी सोमवंशी था. उस के 4 बच्चों में 2 बेटे व 2 बेटियां थीं. राजपाल सिंह किसान था. उस के पास 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी, जिस में आलू, मूंगफली, मक्का और गेहंू की अच्छी उपज होती थी.

राजपाल व रानी अपने बच्चों से बेहद प्यार करते थे. बेटेबेटी में वह भेद भी नहीं करते थे. दोनों उन की हर जिद पूरी करते थे. पढ़ाईलिखाई का भी खूब खयाल रखते थे. उन के दोनों बेटे पढ़लिख कर टीचर बनना चाहते थे, जबकि बेटियां डाक्टर बनना चाहती थीं. राजपाल सीधासादा और कम पढ़ालिखा था. उस के रहनसहन और बोलचाल की भाषा भी साधारण थी. इस के विपरीत उस की पत्नी रानी पढ़ीलिखी थी. वह तेजतर्रार थी. सजसंवर कर रहती थी. जैसा उस का नाम था, वैसे ही वह रानी बन कर घर में रहती थी. राजपाल जो कमाता था, वह सब रानी के हाथ पर रख देता था. घर में उस की हैसियत कोल्हू के बैल की तरह थी. घर चलाने की जिम्मेदारी रानी की थी. बच्चों की पढ़ाई का खर्चा, खेत में बीजखाद का खर्चा, मजदूरों का खर्चा, सब रानी की जिम्मेदारी थी. राजपाल को तो बीड़ीतंबाकू का ही पैसा मिलता था.

राजपाल का पत्नी रानी पर कोई कंट्रोल नहीं था. वह उस की किसी बात का विरोध नहीं कर पाता था. रानी स्वच्छंद विचारों वाली थी. वह सामान खरीदने बाजारहाट भी जाती थी. घमंडी भी थी. इसी कारण अड़ोसपड़ोस के घरों से उस की दूरी बनी रहती थी. पड़ोस की महिलाएं उस से कम ही बातें करती थीं. समय बीतता रहा. समय के साथसाथ राजपाल उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच गया, जहां सारी इच्छाएं समाप्त हो जाती हैं. वह सारा दिन फसल की रखवाली में व्यतीत करता और रात को खाना खा कर चारपाई पर पसर जाता. दूसरी तरफ रानी सोमवंशी जो 4 बच्चों की मां थी, वह अब भी अपने को जवान समझती थी और खूब सजसंवर कर रहती थी. उसे घर में सब सुख था, लेकिन पति सुख से वंचित रहती थी.

उस के मन में प्रबल इच्छा होती कि कोई उस की जिंदगी में आए और उस के अरमानों की अलख जगाए. कभीकभी तो वह सोचती कि वह दूसरा विवाह कर ले. पर किस से? यह सोच कर दुखी हो जाती. रानी खाली समय मोबाइल फोन पर व्यतीत करती थी. उसे इंस्टाग्राम चलाने का शौक था. इंस्टाग्राम पर वह अपने एडिट किए हुए फोटो लगाती थी, ताकि वह कम उम्र की और खूबसूरत दिखे. वह चाहती थी कि कोई युवक उस की फोटो देख कर उसे पसंद करे और फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेजे. रानी को यकीन था कि एक न एक दिन उस की तमन्ना जरूर पूरी होगी. वह इंतजार में दिन गुजारती रही.

एक रोज अरुण राजपूत ने इंस्टाग्राम पर रानी सोमवंशी की फोटो देखी तो वह उसे पसंद आ गई. उसे लगा कि यही उस के सपनों की रानी है. अत: उस ने फालो कर उसे फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेज दी. रानी ने उस की रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली. इस के बाद दोनों की इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती हो गई और उन के बीच चैटिंग होने लगी. अरुण राजपूत उत्तर प्रदेश के ही मैनपुरी जिले के थाना एलाऊ के गांव किशोरपुर का रहने वाला था. उस के पिता मुन्ना राजपूत किसान थे. 3 भाईबहनों में अरुण सब से छोटा था. उस का मन न पढ़ाई में लगा और न किसानी में. अत: उस ने ड्राइवरी सीख ली और ड्राइवर बन गया. कुछ समय बाद वह गांव छोड़ कर गुडग़ांव (हरियाणा) चला गया और वहां टैंकर चलाने लगा.

अरुण राजपूत और रानी सोमवंशी की दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. दोनों एकदूसरे को मन ही मन चाहने लगे. इंस्टाग्राम पर दोनों हर रोज चैटिंग करते थे. रानी अपनी उम्र छिपाने के लिए फिल्टर ऐप का प्रयोग कर अरुण से बात करती थी. लगभग एक साल तक दोनों के बीच चैटिंग चलती रही. फिर चैटिंग के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल फोन नंबर शेयर कर लिए. अब इंस्टाग्राम पर चैटिंग के साथसाथ मोबाइल फोन पर भी उन की रसभरी बातें होने लगीं. रानी देर रात अरुण को कौल करती थी.

समय बीतते दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच एकदूसरे से रूबरू होने की तमन्ना जागी. एक रोज अरुण ने फोन पर बातचीत के दौरान रानी से कहा कि वह उस से मिलना चाहता है और आमनेसामने बैठ कर बात करना चाहता है. इस पर रानी ने जवाब दिया कि वह स्वयं भी उत्सुुक है. जब चाहो, तब आ जाओ. अरुण रानी से मिलने को उतावला था, अत: तीसरे रोज ही वह मैनपुरी से फर्रुखाबाद आ गया. उस के बाद उस ने रानी से फोन पर बात की और बताया कि वह फर्रुखाबाद आ गया है और यात्री होटल में ठहरा है. तुम कल मिलने आ जाना. मैं तुम्हारा बेसब्री से इंतजार करूंगा. जवाब में रानी ने कहा कि वह कल सुबह 10 बजे तक होटल पहुंच जाएगी. नाश्ता व लंच साथसाथ करेंगे.

वादे के तहत रानी सुबह 9 बजे ही फर्रुखाबाद स्थित यात्री होटल पहुंच गई. होटल रूम में जब पहली बार अरुण ने रानी को देखा तो वह ठगा सा रह गया. इंस्टाग्राम पर जिस रानी की फोटो को उस ने देखा था, सामने बैठी रानी वैसी नहीं थी. वह उस की उम्र से दोगुनी दिख रही थी. हालांकि रानी ने मेकअप कर उम्र छिपाने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन चेहरे की झुर्रियां उस की उम्र की चुगली कर रही थीं.

अरुण समझ गया कि रानी ने प्यार में उस के साथ छल किया है. इंस्टाग्राम पर एडिट फोटो लगा कर उस ने उसे छला है. उस के मन में रानी के प्रति नफरत भर गई, लेकिन उस ने अपनी नफरत को दबाए रखा और रानी से प्यार भरी बातें करता रहा. उस ने रानी को आभास नहीं होने दिया कि उस के मन में नफरत का कितना बड़ा तूफान उठ रहा है. अरुण जहां रानी को देख कर मायूस हुआ, वहीं रानी 25 वर्षीय युवक अरुण को देख कर गदगद हो उठी थी. वह सोचने लगी कि अरुण जैसे गबरू जवान से शादी कर वह अपने सारे अरमान पूरे कर लेगी. उस के नीरस जीवन में एक बार फिर बहार आ जाएगी.

उस रोज रानी ने अरुण से खूब बातें कीं, फिर उस के साथ शारीरिक भूख मिटाई. चंद घंटे होटल में रुकने के बाद रानी वापस घर आ गई. उस दिन वह बेहद खुश थी. रात में भी वह अरुण के बारे में सोचती रही और उस के साथ बिताए खुशी के पलों को याद करती रही. इधर अरुण घर आया तो उसे लगा कि जैसे उस का सब कुछ लुट गया है. रानी जैसी अधेड़ उम्र की महिला से वह शादी कभी नहीं कर सकता. रानी ने प्यार में उस के साथ छल किया था. अत: उस ने भी उस के साथ छल करने का निश्चय किया. प्यार के बदले वह उस से पैसा वसूल करेगा. इंकार किया तो दूरियां बना लेगा.

इस के बाद अरुण जब दोबारा होटल में रानी से मिला तो उस ने रानी से दिखावे के रूप में खूब प्यारभरी बातें कीं. शारीरिक संबंध भी बनाए, फिर जरूरत बता कर रानी से पैसे मांगे. शादी के लालच में रानी ने उसे पैसे दे दिए. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. जब भी अरुण आता, होटल रूम मेें रानी से संबंध बनाता और फिर पैसा मांगता. इस तरह रानी से वह लगभग 2 लाख रुपए ले चुका था. इधर कुछ दिनों से रानी अरुण पर शादी करने का दबाव बनाने लगी थी, लेकिन अरुण कोई न कोई बहाना बना कर टाल देता था.

रानी को उस पर शक हुआ तो उस ने अरुण को धमकाना शुरू कर दिया कि वह या तो उस से शादी करे या फिर पैसे वापस करे, अन्यथा वह पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा कर उसे परिवार सहित जेल भिजवा देगी. रानी सोमवंशी की धमकी से अरुण राजपूत डर गया और बोला, ”रानी, यह तुम क्या कह रही हो? तुम जैसा कहोगी, वैसा ही मैं करूंगा. थोड़ा समय दो. मैं तुम से शादी कर लूंगा.’’

”तब ठीक है, मुझे तुम से यही उम्मीद थी. वैसे भी मैं तुम से मजाक कर रही थी.’’ रानी बोली.

अरुण ने घबरा कर रानी से कह तो दिया कि वह उस से शादी रचा लेगा, लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकता था, क्योंकि रानी अधेड़ उम्र की थी. भला वह उस से शादी कैसे कर लेता. उस के पेरेंट्स भी रानी को बहू के रूप में स्वीकार नहीं करते. इज्जत उछलती सो अलग से.

इस तरह रानी की शादी की जिद, रुपया वापस करने की मांग तथा जेल भिजवाने की धमकी से अरुण बेचैन हो उठा. आखिर इस समस्या से निपटने के लिए अरुण ने रानी की हत्या की योजना बनाई. उस ने इस की भनक किसी के कानों में नहीं पडऩे दी. आरोपी अरुण सिंह राजपूत से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 3 सितंबर, 2025 को मैनपुरी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. Love Crime

 

 

Aligarh News: एक जुर्म दीवाने की खातिर

Aligarh News: पति यूसुफ के घर से निकलते ही तबस्सुम ने योजनानुसार प्रेमी दानिश को फोन कर दिया था. इस बात की जानकारी किसी को नहीं हो सकी. यूसुफ जब शाम को काम से वापस घर नहीं आया, तब फेमिली वालों को चिंता हुई. यूसुफ के साथ फिर क्या हुआ? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

दानिश और तबस्सुम का 4 सालों तक प्यार परवान चढ़ता रहा, लेकिन अब यूसुफ की दखलंदाजी से दोनों परेशान रहने लगे. फोन पर भी अब तबस्सुम दानिश से डरडर कर कम ही बात कर पाती थी. प्रेमी और प्रेमिका दोनों ही बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगे. जब दोनों को एकदूसरे की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो यूसुफ से छुटकारा पाने के लिए उस की हत्या करने का प्लान बनाया. 29 जुलाई, 2025 को यूसुफ घर से टिफिन ले कर मंडी जाने के लिए घर से निकला था, रास्ते में उसे दानिश ने रोक कर कहा, ”यूसुफ यहां पर सारे दिन काम करने पर भी मिलने वाले पैसों से तुम्हारा काम नहीं चलेगा. मेरे साथ चलो, कासगंज में मेरी जानपहचान है. वहां पर अच्छा काम दिलवा दूंगा.’’

अपने दोस्त दानिश की बातों में आ कर यूसुफ उस की स्कूटी पर बैठ गया. दानिश यूसुफ को अपनी स्कूटी पर बैठा कर कासगंज की ओर ले गया. रास्ते में टिफिन से खाना खाने के बहाने दानिश यूसुफ को विलराम क्षेत्र में स्थित बंद पड़े एक ईंट भट्ठे पर ले गया. दानिश ने अपने लिए खाना पहले ही एक होटल से ले लिया था. भट्ठे पर पहुंच कर दोनों ने वहां बैठ कर अपनाअपना खाना खाया. खाना खाने के बाद दोनों वहीं आराम करने लगे. खाना खाने के कुछ देर बाद ही यूसुफ बेहोश हो गया. तब दानिश ने उस के दोनों हाथ पीछे बांध दिए और अपने साथ लाए छुरे को स्कूटी से निकाल कर यूसुफ के पेट में वार कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद भी उसे तसल्ली नहीं हुई और अपने साथ लाए तेजाब से उस का चेहरा जला कर शव को वहां उगी झाडिय़ों में फेंक कर अपनी स्कूटी से भाग गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश ने काम होने की पूरी जानकारी मोबाइल से अपनी प्रेमिका तबस्सुम को दे दी. इस के बाद दानिश अपने घर आ गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश और तबस्सुम खुश थे. दोनों की फोन पर बातें होती रहती थीं. दोनों साथ रहने का प्लान बना रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

2 अगस्त, 2025 की शाम को कासगंज जिले की बिलराम पुलिस चौकी के गांव नगला छत्ता में बंद पड़े एक ईंट भट्ठे के पास झाड़ी में एक अज्ञात व्यक्ति का अधजला हुआ शव मिला. युवक का शव मिलने की जानकारी जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों की भीड़ एकत्र हो गई. कुछ लोग कह रहे थे कि यह आशिकी के चक्कर में मारा गया है, जबकि कुछ का कहना था कि पैसों के लेनदेन के पीछे हत्या हुई है. जितने मुंह उतनी बातें वहां होने लगी.

लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दी, पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. शव कई दिन पुराना होने के चलते उस में कीड़े पनप गए थे.  मृतक के दोनों हाथ पीछे रस्सी से बंधे हुए थे. शव को देखने से प्रतीत हो रहा था कि पेट में किसी धारदार हथियार से वार कर के मौत के घाट उतारा गया था. शव को पेट्रोल या तेजाब से जला दिया गया था, ताकि उस की शिनाख्त न हो सके. सूचना मिलने पर एसपी (देहात) अमृत जैन भी फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए. शव की पहचान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन शव की पहचान न होने पर पुलिस समझ गई कि युवक कहीं बाहर का है और उस की हत्या यहां ला कर की गई है.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को मोर्चरी भिजवा दिया. इस के बाद आसपास  के थानों व जिलों से लापता लोगों के बारे में जानकारी की गई. पुलिस को पता चला कि थाना छर्रा के धनसारी गांव का यूसुफ पिछले कई दिनों से लापता है. इस पर पुलिस ने बिना देर किए यूसुफ के फेमिली वालों से संपर्क किया. यूसुफ के फेमिली वाले जब थाने पहुंचे तो उन्होंने कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की शिनाख्त यूसुफ के रूप में की. 29 जुलाई, 2025 की शाम के 6 बज चुके थे और 27 वर्षीय यूसुफ अभी तक गल्ला मंडी से वापस नहीं लौटा था. यूसुफ गल्ला मंडी में काम करता था. दोनों बच्चे शाम होते ही बेसब्री से अपने पापा का इंतजार करने लगते थे, क्योंकि यूसुफ बच्चों के लिए खानेपीने और कभीकभी कोई खिलौना ले कर जरूर आता था.

सुबह से शाम हो गई और जब रात घिरने लगी तो बड़े बेटे असलान ने अपनी मम्मी तबस्सुम से पूछा, ”मम्मी, पापा अब तक क्यों नहीं आए हैं? वैसे तो वो शाम तक आ जाते थे.’’

”बेटा, पापा को आज ज्यादा काम मिल गया होगा, इसलिए उन्हें आने में देर हो गई है.’’ तबस्सुम ने कहा.

जब रात के 9 बज गए, तब यूसुफ के पिता भूरे खां ने बहू तबस्सुम से पूछा, ”बहू, यूसुफ सुबह जाते समय क्या कह गया था कि वह देर से घर आएगा?’’

इस पर तबस्सुम ने जबाव दिया, ”नहीं पापाजी, वह मुझ से तो कुछ कह नहीं गए थे. मैं ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. मुझे लगा कि कहीं काम में फंस गए होंगे. उन्होंने वापस कौल भी नहीं की.’’

यह सुन कर भूरे खां को चिंता हुई. यूसुफ सुबह गल्ला मंडी जा कर शाम को घर लौट आता था, लेकिन आज उस ने फोन कर के भी नहीं बताया कि वह देरी से आएगा. उन्होंने सोचा कि इस समय तो गल्ला मंडी भी बंद हो चुकी होगी. बेटे को तलाशें तो तलाशें कहां? फिर भी उन्होंने स्वजनों के साथ यूसुफ को ढंूढा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. अलीगढ़ के थाना छर्रा के गांव धनसारी निवासी भूरे खां व उन के फेमिली वालों ने यूसुफ के इंतजार में पूरी रात आंखों में काटी. सुबह होते ही भूरे खां ने फेमिली वालों के साथ गल्ला मंडी जा कर बेटे की तलाश की. साथ ही उस के साथ काम करने वाले अन्य लोगों से बेटे यूसुफ के बारे में जानकारी की. लोगों ने बताया कि यूसुफ कल तो मंडी आया ही नहीं था.

यह सुनते ही भूरे खां के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उन के मन में तरह तरह के विचार आने लगे कि कहीं बेटे के साथ कोई अनहोनी तो नहींं हो गई. कल से उस का कोई हालचाल नहीं मिला था. बेटे की तलाश में भूरे खां ने जहां भी संभव हो सकता था, वहां उस की तलाश की. दूसरे दिन यानी 30 जुलाई को भूरे खां ने थाना छर्रा में बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद  पुलिस और यूसुफ के फेमिली वाले उस की तलाश करते रहे, लेकिन 4 दिन तलाशने के बाद भी यूसुफ का कोई पता नहीं चला.

यूसुफ की नृशंस हत्या से घर में कोहराम मच गया. यूसुफ  के बच्चों के फूल से खिले चेहरे पिता की मौत से मुरझा से गए. पुलिस ने फेमिली वालों को ढांढस बंधाते हुए उन से हत्यारों की तलाश में मदद करने को कहा. कासगंज में यूसुफ के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव फेमिली वालों को सौंप दिया गया. 3 अगस्त को डैडबौडी शाम 5 बजे गांव पहुंची. परिजनों और ग्रामीणों ने घटना का खुलासा करने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छर्राकासगंज मार्ग पर जाम लगाने की कोशिश की. तब पुलिस ने उन्हें समझा कर सड़क से हटा दिया, इस के बाद गांव में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अपने पति की हत्या से यूसुफ की पत्नी तबस्सुम का रोरो कर बुरा हाल था. वह कभी अपने को संभालती तो कभी बच्चों को.  पुलिस ने मृतक यूसुफ की पत्नी के साथ ही घर के अन्य सदस्यों से गहनता से पूछताछ की. बच्चों से भी पुलिस ने जानकारी जुटाई. तबस्सुम ने बताया कि उस ने पति के वापस न आने पर उस ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच औफ आ रहा था. तब उस ने पति के दोस्त दानिश को फोन कर पति के बारे में पूछा था. दानिश ने पति यूसफ के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही थी. इस पर मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मृतक की पत्नी तबस्सुम के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच की. इस के अच्छे परिणाम शीघ्र ही सामने आ गए.

पुलिस ने गहनता से जांच कर इस हत्या की गुुत्थी सुलझा कर इस हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. जो सच्चाई सामने आई है, वो बेहद हैरान करने वाली थी. यूसुफ की दर्दनांक हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, उस ने सब को चौंका दिया. यूसुफ की पत्नी तबस्सुम ने अपने गांव में रहने वाले 28 वर्षीय प्रेमी दानिश के साथ मिल कर इस हत्या की साजिश रची थी. दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी होने पर जब यूसुफ ने इस का विरोध किया तो दोनों ने मिल कर अपने प्यार के रास्ते से हटाने की ठान ली.

पुलिस ने 3 अगस्त, 2025 को मृतक के पिता भूरे खां की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट  तबस्सुम, उस के प्रेमी दानिश व दानिश के  अज्ञात साथियों के खिलाफ दर्ज कर ली गई. कौल डिटेल्स में तबस्सुम और प्रेमी दानिश के बीच लंबेलंबे समय तक बातचीत के साक्ष्य मिले. इस के बाद तबस्सुम को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि यूसुफ को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. बेहोश होने के बाद पहले उस के हाथ पीछे बांधे गए. फिर धारदार हथियार से पेट पर वार किए गए. हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के शरीर पर तेजाब डाला गया.

जांच के बाद पुलिस ने 3 अगस्त को ही तबस्सुम को गिरफ्तार कर लिया. उस ने पूछताछ में सारा राज उगल दिया. प्रेम और वासना में अंधी हो कर तबस्सुम ने अपने पति से छुटकारा पाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की साजिश यूसुफ के दोस्त और अपने आशिक दानिश के साथ मिल कर रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस को 6 अगस्त, 2025 की शाम मुखबिर से सूचना मिली कि यूसूफ की हत्या का आरोपी दानिश जो कि यूसुफ का दोस्त भी है, रामपुर बंबा के निकट कहीं जाने की फिराक में है. सूचना मिलते ही पुलिस एलर्ट हो गई और बंबा के पास से दानिश को गिरफ्तार कर लिया.

दानिश को थाने ला कर उस से यूसुफ की हत्या के बारे में पूछताछ की गई. उस ने बताया कि गांव में उस का और यूसुफ का घर थोड़ी दूरी पर ही है. हम दोनों में दोस्ती थी. यूसुफ के घर आनाजाना रहता था. करीब 4 साल पहले एक दिन जब वह यूसुफ के घर गया था, उस की यूसुफ की पत्नी तबस्सुम से आंखें चार हो गईं. तबस्सुम बला की खूबसूरत थी. दानिश भी कसे शरीर का सुंदर युवक था. पहली ही मुलाकात में दोनों ने आंखों ही आखों में एकदूसरे के दिल पर मोहब्बत की दस्तक दे दी थी.

अब दानिश अकसर यूसुफ के घर आ जाता था. वह बच्चों के लिए कोई न कोई गिफ्ट या उन के पसंद की खानेपीने की चीजें ले कर आता. इस बीच दानिश ने यूसुफ की गैरमौजूदगी में तबस्सुम से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. यूसुफ के काम पर जाने के बाद दोनों प्रेमी प्रेमिका फोन पर घंटों बातें करते थे. पति यूसुफ के मंडी जाने के बाद वह बाजार जाने के बहाने घर से निकल जाती और अपने प्रेमी दानिश से मिलती. इस बीच दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते भी बन गए थे. जब भी तबस्सुम को मौका मिलता वह दानिश से मिल आती. तबस्सुम के खयालों में हरदम अपने प्रेमी दानिश की तसवीर रहती थी. वह चाहती थी कि उस का दीवाना हर पल उस की आंखों के सामने ही रहे.

पत्नी के बदलते व्यवहार पर यूसुफ को शक हुआ. फिर उसे दोस्त दानिश और पत्नी तबस्सुम के प्रेम प्रसंग की भनक लगी तो उस ने तबस्सुम का विरोध किया. दानिश को ले कर आए दिन उन के घर में कलह भी होने लगी. पूछताछ में पत्नी तबस्सुम ने पुलिस को बताया, वह अपने प्रेमी दानिश के साथ जाना चाहती थी. पति यूसुुफ इस का विरोध करता था. वह दानिश से बात करने और घर पर उस के सामने आने को मना करता था. पति यूसुफ मंडी के काम से इतना कमा नहीं पाता था, जिस से घर में तंगी बनी रहती थी. जबकि दानिश उस पर खूब खर्च करता था और उस की हर बात का खयाल रखता था.

योजना के अनुसार 29 जुलाई, 2025 को उस ने यूसुफ के खाने में नींद की गोलियां पीस कर मिला दी थीं. ये गोलियां दानिश ने ला कर दी थीं. इस के साथ ही पति के घर से गल्ला मंडी के लिए निकलते ही दानिश को फोन कर दिया था. बताते चलें कि भट्ठे पर जब यूसुफ ने टिफिन से खाना खाया तो नींद की गोलियों की मात्रा खाने में अधिक मिली होने से वह खाना खाने के कुछ समय बाद ही बेहोश हो गया. इस का फायदा उठाते हुए दानिश ने उस की नृशंस तरीके से हत्या कर दी. भूरे खां ने बताया कि बेटे यूसुफ की 7 साल पहले मडराक निवासी तबस्सुम से शादी हुई थी. यूसुफ के 6 साल और 4 साल के 2 बेटे हैं.

सब कुछ ठीक चल रहा था. 4 साल पहले जब से दानिश से यूसुफ की दोस्ती हुई तब से तबस्सुम फोन पर दानिश से बात किया करती थी. इस का यूसुफ विरोध किया करता था. इसी के चलते तबस्सुम ने दानिश के साथ मिल कर यूसुफ की बेहरमी से हत्या कर दी. उस ने अपने छोटे बेटों की भी चिंता नहीं की. थानाप्रभारी राजेश कुमार के अनुसार, जहां तबस्सुम और दानिश के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकाली गई, वहीं घटना में सीसीटीवी फुटेज की भी मदद ली गई.

घटना वाले दिन दानिश अपनी सफेद स्कूटी पर यूसुफ को बैठा कर अपने साथ ले जाता हुआ नजर आया. सभी सबूत एकत्रित कर घटना का परदाफाश किया गया है. आरोपी दानिश की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरा भी बरामद कर लिया गया है. सीओ (छर्रा) धनजंय सिंह के अनुसार, प्रेमिका ने ही प्रेमी के साथ मिल कर घटना का अंजाम दिया. दोनों जेल भेज दिए गए हैं. मृतक का चेहरा भी जलाया गया था. शिनाख्त कपड़ों व चप्पल से हुई. शव 4-5 दिन पुराना भी लग रहा था. अवैध संबंधों के चलते यूसुफ की हत्या की गई है.

पुलिस को इस मामले का परदाफाश करने में ज्यादा टाइम नहीं लगा. पत्नी को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. लेकिन उस की बात पूरी तरह पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. तब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स जांची तो पड़ोस में रहने वाला दानिश पुलिस के रडार पर आया. लव अफेयर के चलते पत्नी ने प्रेमी के साथ साजिश रच कर अपने ही जीवनसाथी को मार डाला. अब पत्नी तबस्सुम और प्रेमी दानिश अपने किए का फल भोगेंगे. Aligarh News

 

 

Hindi Crime Story: ऐसी बहन किसी की न हो

Hindi Crime Story: कोई बहन गलतियों का पिटारा बनने के बावजूद इतनी खुदगर्ज हो सकती है कि लालच में अपने ही एकलौते भाई की जान ले ले, सोचा भी नहीं जा सकता. लेकिन रचना तो ऐसी ही निकली. उसे क्या सजा मिलेगी, यह अलग बात है, लेकिन उस ने अपनी मां का आंचल तो सूना कर ही दिया. काले रंग की वह लेंसर कार बड़ी तेजी से लुधियानाअमृतसर मार्ग पर जालंधर बाईपास की ओर भागी चली जा रही थी. कार में करीब 60 साल की एक औरत और 26-27 साल का एक लड़का सवार थे. दोनों बहुत घबराए हुए लग रहे थे. लड़का कार चलाते हुए बारबार पीछे मुड़ कर देख रहा था. इस की वजह यह थी 3 मोटर साइकिलों पर सवार लोग कार का पीछा कर रहे थे और उसे लगातार ललकारते हुए रुकने को कह रहे थे.

जिस तरह कार भाग रही थी, उस से यही लग रहा था कि कार चलाने वाला लड़का काफी होशियार है, लेकिन जीटी रोड पर वाहनों की आवाजाही काफी थी, जिस की वजह से उसे कार भगाने में परेशानी हो रही थी. कई बार उस की कार दुर्घटनाग्रस्त होतेहोते बची थी. लेकिन उस कार चालक लड़के को संभवत: दुर्घटना की उतनी चिंता नहीं थी, जितनी पीछा करने वालों की थी. शायद इसीलिए वह किसी भी तरह उन की पकड़ से दूर निकल जाना चाहता था.

बगल वाली सीट पर बैठी औरत लड़के के कंधे पर अपना हाथ रख कर बारबार उसे सांत्वना दे रही थी. तभी कार अचानक झटका खा कर हिचकौले लेने लगी. इस से लड़के के चेहरे पर घबराहट झलकने लगी. उस ने फ्यूल गेज पर नजर डाली. सुई एकदम नीचे बैठ चुकी थी. उस ने बगल में बैठी औरत से कहा, ‘‘अब क्या होगा? कार का पैट्रोल खत्म हो गया है?’’

यह सुन कर महिला घबरा गई. अचानक चालक लड़के के दिमाग में न जाने क्या आया कि उस ने बड़ा खतरा उठाते हुए बगल में चल रहे ट्रक को एकदम से ओवरटेक किया और कार बाईं ओर वाले पेट्रौल पंप में घुसा दी. इस तरह वह मोटरसाइकिल सवारों को चकमा देने में सफल हो गया, क्योंकि ट्रक की वजह से मोटरसाइकिल सवार यह नहीं देख पाए कि कार किधर गई.

कारचालक लड़के ने जल्दीबाजी में पेट्रौल भरवाया. लेकिन जैसे ही वह पेट्रौल पंप से बाहर निकल कर कुछ दूर आगे सब्जी मंडी के पास पहुंचा, मोटरसाइकिल सवारों ने रास्ता रोक कर कार रुकवा ली. कार रुक गई तो मोटरसाइकिलों से आए लोग उसे घेर कर दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगे. लेकिन लौक होने की वजह से दरवाजे नहीं खुले. तब उन्होंने बाहर से ही कार पर धावा बोल दिया. वे लोग इतने उत्तेजित थे कि राहगीरों की परवाह किए बगैर कार पर अंधाधुंध ईंटपत्थर बरसाने लगे. लड़के और महिला ने मदद के लिए शोर भी मचाया, लेकिन हमलावर जिस तरह उत्तेजित और गुस्से में थे, उसे देख कर किसी की भी बचाव के लिए आगे आने की हिम्मत नहीं हुई.

कार के शीशे टूट गए तो हमलावरों द्वारा फेंके जाने वाली ईंटें चालक और महिला को लगने लगीं. हमलावरों में एक औरत भी थी, जो सब से ज्यादा पत्थर फेंक रही थी. उसे उस तरह पत्थर फेंकते देख कार में बैठी औरत हाथ जोड़ कर चीखचीख कर कहने लगी, ‘‘यह क्या कर रही है बेटी, यह तेरा भाई है.’’

लेकिन इस बात का न तो उस औरत पर कोई असर हुआ, न ही उस के साथी हमलावरों पर. तभी उस औरत द्वारा फेंकी एक ईंट ड्राइविंग सीट पर बैठे लड़के के माथे पर आ लगी. ईंट लगते ही खून का फव्वारा फूट पड़ा. चालक लड़का कार की सीट पर बैठेबैठे ही छटपटाने लगा. इस के बावजूद ईंटपत्थर फेंकने वालों के हाथ नहीं रुके. उन के हाथ तभी रुके, जब उस लड़के की गरदन सीट पर ही एक ओर लुढ़क गई. इस के बाद वे सब मोटरसाइकिलों पर बैठ कर भाग निकले.

इस बीच किसी ने फोन कर के इस घटना की सूचना थाना सलेम टाबरी को दे दी थी. खबर मिलते ही थानाप्रभारी इंसपेक्टर मनिंदर सिंह बेदी, सबइंसपेक्टर दलबीर सिंह, एएसआई सुखपाल सिंह, कमलजीत सिंह, परमजीत सिंह, हेडकांस्टेबल अमरीक सिंह, बलविंदर राम और गुरजीत सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए थे. हमलावर चूंकि भाग चुके थे, इसलिए उन के बारे में बाद में भी पता किया जा सकता था. पहले घायलों का इलाज कराना जरूरी था. इसलिए मनिंदर सिंह औरत और लड़के को अविलंब अस्पताल ले गए.

डाक्टरों ने लड़के को तो देखते ही मृत घोषित कर दिया, जबकि महिला को इलाज के लिए भरती कर लिया. यह घटना 9 मई, 2015 दोपहर 2 बजे की थी. मनिंदर सिंह बेदी के आदेश पर सबइंसपेक्टर दलबीर सिंह ने इलाज के दौरान औरत का बयान लिया तो पता चला कि उस का नाम रेनू अरोड़ा है और मृतक उस का एकलौता बेटा हरीश अरोड़ा था. हमलावरों में जो औरत शामिल थी, वह उस की बेटी रचना थी. उसी ने अपने प्रेमी मनोज कुमार और उस के घर वालों के साथ मिल कर मां और भाई पर हमला किया था.

रेनू अरोड़ा ने पुलिस को बताया कि वह विधवा है और अपने बेटे हरीश के साथ लुधियाना  के दुगेड़ी में धांधरा रोड पर मानकपाल गेट के पास जीएसवी में रहती है. उस के 3 बच्चों में 2 बेटियां थीं रचना और ज्योति तथा एक बेटा था हरीश. दोनों बेटियों की शादियां हो चुकी थीं. रेनू की बड़ी बेटी रचना प्रौपर्टी में हिस्सा मांग रही थी. इस के लिए रेनू ने कुछ शर्तें रख दी थीं, जिस की वजह से विवाद हो गया था. उस के बाद रचना ने अपने प्रेमी मनोज कुमार, उस की मां बलराज कौर, ह्यूमन राइट्स संस्था के प्रधान नवनीत सिंह, प्रवीन कुमार, दीपू, राकेश, करन और शमी के साथ उन पर हमल कर दिया था.

रेनू अरोड़ा के इस बयान के आधार पर सबइंसपेक्टर दलबीर सिंह ने उसी दिन यानी 9 मई, 2015 को भादंसं की धारा 302/323, 342, 327, 149, 120बी के तहत 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर के उसी दिन ह्यूमन राइट्स के प्रधान नवनीत सिंह, करन और शमी को गिरफ्तार कर लिया. प्राथमिक उपचार के बाद रेनू अरोड़ा को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी. हरीश की लाश का पोस्टमार्टम हो गया तो उसे रिश्तेदारों को सौंप दिया गया. इंसपेक्टर मनिंदर सिंह बेदी ने एसआई दलबीर सिंह, एएसआई सुखपाल सिंह, परमजीत सिंह और कमलजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीमें बना कर नामजद लोगों की तलाश में लगा दिया था.

दिनदहाड़े शहर के बीचोबीच मुख्यमार्ग पर घटी इस घटना से स्थानीय लोगों में दहशत भी थी और पुलिस के प्रति आक्रोश भी. कोई अनहोनी न हो, इस के लिए पुलिस टीमें अभियुक्तों की तलाश में दिनरात एक किए हुए थीं. आखिर उन की मेहनत रंग लाई और 12 मई, 2015 को एसआई दलबीर सिंह ने 3 अभियुक्तों दीपू, राकेश कुमार उर्फ गोगी को गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद 24 मई को रचना और मनोज कुमार को भी बड़े नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया गया. इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाने वाली मनोज कुमार की मां बलराज कौर को एसआई दलबीर सिंह ने बड़ी मुश्किल से काफी दिनों बाद 23 जुलाई को गिरफ्तार किया.

लगभग 2, ढाई महीने चली भागदौड़ और गिरफ्तारियों के बाद अभियुक्तों से सिलसिले वार की गई पूछताछ में जो कानी प्रकाश में आई, वह एक ऐसी खुदगर्ज औरत की कहानी थी, जिस ने अपनी मौजमस्ती के लिए अपने ही सगे भाई को मौत के घाट उतार दिया था. लुधियाना के दुगड़ी में रहते थे अशोक कुमार अरोड़ा. उन के परिवार में पत्नी रेनू अरोड़ा के अलावा 2 बेटियां रचना, ज्योति और एकलौता बेटा हरीश था. अशोक अरोड़ा टैक्सियां चलवाते थे. वह कोई बड़े आदमी तो नहीं थे, लेकिन घर में किसी चीज की कमी नहीं थी.

अशोक कुमार ने अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई थी. बड़ी बेटी रचना पढ़लिख तो जरूर गई थी, लेकिन उस में वे संस्कार नहीं आ पाए थे, जिन से घरपरिवार की मानमर्यादा बनती है. वह बचपन से ही हठी और महत्त्वकांक्षी प्रवृत्ति की थी. उम्र के साथसाथ उस का हठ और महत्त्वाकांक्षा बढ़ती गई. समय रहते ही अशोक कुमार ने रचना की शादी हैबोवाल निवासी विनय कुमार से कर दी. शादी के बाद जल्दी ही वह एक बेटी की मां भी बन गई. इसी बीच अशोक कुमार की मौत हो गई. उन की मौत के बाद घरपरिवार की पूरी जिम्मेदारी रेनू और हरीश पर आ गई. पिता की मौत के बाद टैक्सियां चलवाने का काम हरीश करने लगा. उस ने छोटी बहन ज्योति की भी शादी कर दी. अब घर में सिर्फ मांबेटे रह गए. सब ठीकठाक चल रहा था.

हरीश ने ड्राइवर तो रख ही रखे थे, खुद भी टैक्सी चलाता था. उस का एक ड्राइवर था मनोज, जिस से उस की कुछ ज्यादा ही पटती थी. इसी वजह से वह उस के घर भी आताजाता था. हरीश की बड़ी बहन रचना की ससुराल ठीकठाक थी. वहां उसे किसी चीज की कमी नहीं थी. पति भी प्यार करने वाला था. इस के बावजूद उस का मन ससुराल में नहीं लगता था. वह अकसर मायके आ जाया करती थी. वह जब भी मायके आती, महीनों रहती.

मायके में रहते हुए ही उस की मुलाकात ड्राइवर मनोज कुमार से हुई. उस ने उस में न जाने ऐसा क्या देखा कि वह उस पर मर मिटी. एक तरह से वह मनोज की दीवानी सी हो गई. मनोज भी उसे अपनी ओर आकर्षित होते देख उस के गदराए शरीर पर फिदा हो गया. हालांकि वह शादीशुदा और एक बेटी का बाप था. उस की शादी सन 2012 में चंडीगढ़ के रहने वाले रामदेव की बेटी मोनिका से हुई थी. लेकिन वह उतनी सुंदर नहीं थी, जितनी सुंदर रचना थी.

इस बीच रचना की शादी को 12 साल हो गए थे और उस की बेटी भी 11 साल की हो गई थी. इतनी बड़ी बेटी की मां होने के बावजूद उस ने मनोज से नाजायज संबंध बना लिए. कुछ दिनों तक तो यह सब चोरीछिपे चला, लेकिन रचना को चोरीछिपे मिलना अच्छा नहीं लगा तो वह मां और पति का घर छोड़ कर मनोज के साथ रहने लगी. रेनू अरोड़ा को इस बात की भी जानकारी कई दिनों बाद मिली.

दरअसल, उस समय रचना मायके में थी. उस ने मां और भाई से कहा कि वह ससुराल जा रही है लेकिन वह ससुराल जाने के बजाय मनोज के घर चली गई. कई दिनों बाद जब विनय ने आ कर बताया कि रचना उस के घर पहुंची ही नहीं है तो उस की तलाश शुरू हुई. उस समय तो उस का पता नहीं चला, लेकिन इस बात की जानकारी जरूर हो गई है कि जाते समय रचना अपने साथ मां के करीब डेढ़ लाख रुपए, 5 तोला सोने के गहने और कुछ अन्य कीमती सामान ले गई है. यह जानकारी होने पर रेनू अरोड़ा ने थाना दुगड़ी में रचना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी.

इस के पहले भी हरीश और मनोज के बीच रचना को ले कर झगड़ा हुआ था. हरीश ने इस झगड़े की रिपोर्ट थाना डिवीजन नंबर 4 में दर्ज कराई थी. रचना मनोज के साथ छावनी क्षेत्र में किराए का मकान ले कर रह रही थी. इस बात का पता चलने पर हरीश और रेनू ने वहां जा कर उसे समझाया कि जो हुआ, वह उसे भूल जाए और अपनी ससुराल में जा कर शांति से रहे. लेकिन रचना ने उन की सलाह मानने से साफ मना करते हुए कहा कि अब वह मनोज को छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी. तब रेनू और हरीश ने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया.

इस बीच हरीश ने टैक्सियां चलवाने का काम बंद कर के जालंधर बाईपास पर मोटर गैराज खोल लिया. इस के बाद रेनू ने हरीश की सगाई कर दी थी और उस के विवाह की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं. जब इस बात की जानकारी रचना को हुई तो वह तिलमिला उठी. वह मायके पहुंची और मां तथा भाई से अपना हिस्सा मांगने लगी. वैसे तो उस स्थिति में उस का कोई हिस्सा नहीं बनता था, इस के बावजूद रेनू और हरीश उसे हिस्सा देने को तैयार हो गए. लेकिन उन्होंने शर्त रख दी कि वे उसे हिस्सा तभी देंगे, जब वह मनोज को छोड़ कर ससुराल चली जाएगी.

रचना मनोज को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी. इस बात को ले कर उस का मां और भाई से आए दिन झगड़ा होने लगा. मनोज और उस के घर वाले भी रचना का साथ दे रहे थे. एक तरह से उस ने मां और भाई का जीना हराम कर दिया था. 8 मई को 2 लोग रेनू के घर आए और उन्होंने कहा कि रचना और मनोज से उन का जो विवाद चल रहा है, अगर वह उन के औफिस आ जाएं तो वे इस विवाद को खत्म करा देंगे. आने वालों ने अपना नाम करन और शमी बताया था. वे छावनी मोहल्ला स्थिति डेमोके्रटिव ह्यूमन राइट्स औफिस से आए थे.

अगले दिन यानी 9 मई की दोपहर को समझौते की गरज से रेनू बेटे हरीश को ले कर छावनी स्थित डेमोके्रटिव ह्यूमन राइट्स के औफिस पहुंची तो वहां करन और शमी के अलावा उन की मुलाकात डेमोके्रटिव ह्यूमन राइट्स के प्रधान नवनीत सिंह से हुई, उन्होंने जिन शर्तों के तहत रचना और मनोज से उन का समझौता कराना चाहा, वे रेनू और हरीश को मंजूर नहीं थीं. रेनू और हरीश ने समझौता करने से मना किया तो वे बहस कर के दबाव में समझौता कराने की कोशिश करने लगे. जब रेनू और हरीश ने समझौता करने से मना कर दिया तो वे लड़ाईझगड़े और मारपीट पर उतारू हो गए. किसी तरह वे दोनों बाहर आए तो वहां रचना अपने प्रेमी मनोज कुमार, मनोज की मां बलराज कौर के साथ खड़ी थी.

उन दोनों के साथ और भी कई लोग थे. सभी ने उन्हें घेर लिया और मारपीट करने लगे. रेनू और हरीश किसी तरह अपनी कार तक पहुंचे और जान बचाने के लिए कार में बैठ कर वहां से भाग निकले. बाद में रचना और उस के साथियों ने मोटरसाइकिलों से पीछा कर के उन्हें पकड़ लिया और ईंटपत्थरों से उन पर हमला कर दिया. इस हमले में रेनू जहां घायल हो गई, वहीं उस के बेटे हरीश की मौत हो गई. पुलिस ने जैसेजैसे जिस को पकड़ा था, पूछताछ कर के अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. कथा लिखे जाने तक किसी भी अभियुक्त की जमानत नहीं हुई थी. Hindi Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime News: उम्र के भंवरजाल में फंसी औरत

Crime News: 2 बच्चों की मां नीरू जब जवान हुई तो उस का पति बूढ़ा हो गया. इस स्थिति में उस के कदम बहक गए. इस का दुखद अंत यह हुआ कि बीवी के कत्ल में आज पति जेल में है.

रात के 12 बज रहे थे. अभी तक नीरू उर्फ नीलम घर नहीं लौटी थी. बीते 3 दिनों से यही क्रम चल रहा था. महावीर अग्रवाल ने पत्नी की गैरहाजिरी में खाना बना कर बेटी कोमल और बेटे हर्षित को खिला कर सुला दिया था. खुद खा कर पत्नी नीरू का खाना फ्रिज में रख दिया था. 4 लोगों के इस परिवार में बीते कई सालों से यही सिलसिला चला आ रहा था. महावीर के चेहरे पर कभी शिकन तक नहीं आई थी.

घर और कपड़ों की साफसफाई से ले कर चौकाचूल्हा तक के काम में वह पत्नी की मदद करता था. नीरू की गैरहाजिरी में वह अपने दोनों बच्चों को पिता के साथसाथ मां के स्नेह से भी सराबोर कर रहा था. दोनों बच्चों के चेहरे देख कर और उन्हें लाड़प्यार कर के वह दिन भर की दौड़धूप और घर के कामकाज की थकावट को भूल जाता था. राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के मोहल्ला प्रेमनगर के बने एक साधारण से घर में टीवी के सामने बैठा महावीर अग्रवाल पत्नी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. रात एक बजे के करीब नीरू घर में दाखिल हुई.

अस्तव्यस्त कपड़े, बिखरे बाल और पस्त बदन देख कर महावीर का माथा ठनका. वह कुछ कहता, उस से पहले ही नीरू बोल पड़ी, ‘‘क्या करूं यार, आज 3 जगहों के और्डर थे और एक दुलहन तो पौर्लर पर ही आ गई थी. अब 4-4 दुलहनों को सजाने में देर तो हो ही जाएगी.’’

नीरू ने देर होने की वजह बता दी. महावीर ने उस की इस सफाई पर ध्यान दिए बगैर कहा, ‘‘सुबह बात करेंगे. खाना फ्रिज में रखा है, मन हो तो खा लेना.’’

इतना कह कर महावीर अपने बिस्तर पर जा कर लेट तो गया, लेकिन उस की नींद आंखों से कोसों दूर थी. दोनों बच्चों के भविष्य, खस्ताहाल दुकानदारी और नीरू के संदिग्ध चालचलन को ले कर उस के दिमाग में तूफान चल रहा था. नीरू कपड़े बदल कर दूसरे कमरे में जा कर अपने बिस्तर पर लेट गई. उस ने खाना नहीं खाया था. महावीर को लगा, संभवत: वह किसी के यहां से मनपसंद खाना खा कर आई होगी. सुबह महावीर की आंख लगी तो वह देर से सो कर उठा. कोमल और हर्षित स्कूल जा चुके थे. नाश्ता कोमल ने बनाया था.

धूप चढ़े नीरू उठी तो महावीर ने 2 कप चाय बनाई. बिस्तर पर बैठी नीरू को चाय का कप पकड़ा कर महावीर उस के सामने पड़ी कुरसी पर बैठते हुए बोला, ‘‘देखो नीरू, तुम्हारा रवैया दिनबदिन असहनीय होता जा रहा है. तुम मेरी उपेक्षा कर रही हो, इस की मुझे रत्ती भर चिंता नहीं है. लेकिन बच्चों के लिए तो सोचो.’’

‘‘मैं ने क्या कर दिया भई. ब्यूटीपौर्लर चलता हूं. इन दिनों लगनें चल रही हैं. मैं ने तो आप को रात में ही बता दिया था कि 4 दुलहनों को तैयार करना है, घर आने में देर हो जाएगी.’’ नीरू ने कहा.

महावीर को पता था कि उस दिन शादियां नहीं थीं, नीरू रटारटाया बहाना बना कर झूठ बोल रही है. वह नहीं चाहता था कि नीरू बात का बतंगड़ बना कर झगड़ा करने लगे, इसलिए उस ने बड़े धैर्य से उसे समझाने की कोशिश की. महावीर ने कहा, ‘‘देखो नीरू, मुझे पता है कि दुकानदारी से जो कमाई हो रही है, उस से घर के खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं. दोनों बच्चों को अच्छा खिलाड़ी बनाने के लिए कोचिंग करानी है. ठीक से आमदनी न होने की वजह से मैं काफी परेशान रहता हूं. मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं. तुम मेरी सहनशीलता की परीक्षा लेना बंद कर दो. किसी भी समय मेरे सब्र का बांध टूट सकता है. जिस दिन ऐसा हुआ, अनर्थ हो जाएगा.’’

महावीर ने ये बातें जिस तरह गिड़गिड़ाते हुए कही थीं, कोई भी समझदार औरत होती तो सिर ऊपर न उठाती. लेकिन नीरू उस की बात समझने के बजाय गुस्से में बोली, ‘‘यह गीदड़ भभकी किसी और  को देना. तुम्हारा और तुम्हारे बच्चों का खर्च पूरा करने के लिए ही तो मैं रातदिन खटती हूं. इस बात का एहसान मानने के बजाय तुम मुझे धमकी दे रहे हो. अपने मांबाप की तरह तुम भी मुझ पर शक करते हो. तुम जैसे निखट्टू के पल्ले बंध कर मेरा तो जीवन नरक हो गया है.’’

नीरू की इन जहरबुझी बातों से महावीर को भी गुस्सा आ गया. अपने 16 साल के वैवाहिक जीवन में महावीर पहली बार आपा खो बैठा. उस ने चाय का कप लिए नीरू के गालों पर तड़ातड़ 2 थप्पड़ रसीद कर दिए. नीरू तिलमिला उठी. भद्दी सी गाली देते हुए उस ने कहा, ‘‘तुम ने मेरे ऊपर हाथ उठाया है. अब देखो, मैं तुम्हें कैसा मजा चखाती हूं. मैं अभी मम्मी को फोन कर के बुलाती हूं. तुम्हारे शरीर में भूसा न भरवा दिया तो मेरा भी नाम नीरू नहीं.’’

नीरू इसी तरह बड़बड़ाती रही और महावीर घर से निकल गया. मोहल्ले के पार्क में पेड़ के नीचे लेटा महावीर भविष्य के तानेबाने बुनता रहा. उस के मोबाइल पर कई बार उस की सास चंपा देवी का फोन आया, लेकिन उस ने फोन रिसीव नहीं किया. उस की नजर में यह पतिपत्नी के बीच घटी एक मामूली घटना थी. नीरू ने नमकमिर्च लगा कर मां से शिकायत कर दी होगी. इसलिए वह उसे खरीखोटी सुनाने के लिए फोन कर रही होगी.

महावीर की सास चंपा देवी नीरू से भी ज्यादा तीखी थी. नीरू ने उन से कहा था कि उस से ब्याह कर के उस का जीवन नरक हो गया है, जबकि यह सरासर झूठ था. सही बात तो यह थी कि नीरू मजे लूट रही थी और उस की वजह से उसी की नहीं, पूरे परिवार का जीवन नरक हो चुका था. अंधेरा घिरने तक महावीर पार्क में ही पड़ा रहा. अब तक उस की सास ने न जाने कितनी बार फोन कर दिया था, पर उस ने फोन रिसीव नहीं किया था. रात 10 बजे वह घर पहुंचे तो दोनों बच्चे खापी कर सो चुके थे. किचन में मिला खाना खा कर महावीर लेट गया. नीरू अभी पौर्लर से नहीं लौटी थी.

अगले दिन सुबह महावीर थोड़ी देर से उठा. दोनों बच्चे स्कूल चले गए थे. नीरू अपने कमरे में घोड़े बेच कर सो रही थी. घर के थोड़ेबहुत काम निपटा कर महावीर पार्क में जा पहुंचा. नीरू परिवार की ही नहीं, अपने दोनों मासूम बच्चों की भी अनदेखी कर रही थी. उसे उन की जरा भी चिंता नहीं थी. यही सब सोचसोच कर उसे नीरू से नफरत सी होती जा रही थी. उस की सहनशीलता अंतिम पड़ाव पर जा पहुंची थी. तभी उस की सास चंपा देवी का फोन आ गया. महावीर ने जैसे ही फोन रिसीव किया, दूसरी ओर से चंपा देवी उसे डांटने लगी. अंत में उस ने उसे जेल भिजवाने तक की धमकी दे डाली. महावीर जवाब में तो कुछ नहीं बोला, लेकिन जेल भिजवाने की धमकी उस के दिमाग में बैठ गई.

महावीर के दिमाग में आया, वह तो वैसे भी जेल से बदतर जीवन जी रहा है. वही क्यों, उस के दोनों बच्चे, बूढ़े मांबाप भी एक तरह से जेल से भी गयागुजरा जीवन जीने को मजबूर हैं. उस समय महावीर जिन स्थितियों से गुजर रहा था, उस में सकारात्मक सोच मिलने पर वह संत बन सकता था और नकारात्मक सोच में शैतान. महावीर और उस के परिवार का दुर्भाग्य था कि उस समय उस के दिमग पर नकारात्मक सोच भारी हो गई. अपने बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए उस ने एक भयानक निर्णय ले लिया. उस का सोचना था कि अब उसे जेल जाना ही है, सास भिजवाए या वह स्वयं चला जाए. अंत में उस ने खुद जेल जाने का निर्णय कर लिया.

खतरनाक निर्णय लेने के बाद महावीर ने खुद को काफी हलका महसूस किया. शायद उस का दिलोदिमाग विवेकहीन हो गया था. वह पार्क से उठा और सीधा घर पहुंचा. नहाधो कर 3 दिनों से बंद पड़ी अपनी स्पेयर पार्ट्स की दुकान पर पहुंचा. उसे अब दुकानदारी में कोई दिलचस्पी नहीं थी. शाम होने से पहले ही वह घर लौट आया. दोनों बच्चे घर पर ही थे. बच्चों की मनपसंद का खाना बना कर उन्हें प्यार से खिलाया और सुला दिया. इस के बाद खुद टीवी देखते हुए नीरू का इंतजार करने लगा.

देर रात नीरू घर लौटी तो महावीर ने उसे मुख्य द्वार पर ही रोक लिया. बरामदे में 2 कुरसी उस ने पहले से रख दी थी. उस ने नीरू का हाथ पकड़ कर एक कुरसी पर बिठा दिया और खुद सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया. इस के बाद उस के गाल पर हाथ फेरते हुए बोला, ‘‘नीरू जो हो गया, अब उसे भूल जाओ. मैं अपनी गलती के लिए माफी मांगता हूं. अब इस परिवार को बचाना तुम्हारे हाथ में है. मैं तुम्हारा हर आदेश मानने को तैयार हूं. तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूंगा. बस तुम गलत आदतें छोड़ दो.’’

महावीर की इन बातों पर गंभीर होने के बजाय नीरू खिलखिला कर हंस पड़ी. इस के बाद व्यंग्य से बोली, ‘‘इस तरह की फालतू बातें मैं सुनने की आदी नहीं.’’

नीरू इतना ही कह पाई थी कि महावीर के सब्र का बांध टूट गया. वह उस पर एकदम से पिल पड़ा. उस ने नीरू के गले में पड़े दुपट्टे को लपेट कर कसना शुरू किया तो फिर तभी छोड़ा, जब वह मर कर कुर्सी से लुढ़क गई. पत्नी को मार कर महावीर ने उस की लाश को उठा कर बरामदे के कोने में बने स्टोर रूम में ले जा कर रख दिया और अपने बिस्तर पर जा कर सो गया. अगले दिन सुबह महावीर बच्चों से पहले उठ गया. बच्चों ने मम्मी के बारे में पूछा तो कहा कि वह ब्यूटीपौर्लर का सामान लेने बाहर गई है. उसी समय सास चंपा देवी का फोन आया तो उन से भी कह दिया कि वह बाहर गई है. बच्चे स्कूल चले गए तो महावीर बाजार गया और लोहा काटने की एक आरी खरीद लाया. मुख्य दरवाजा बंद कर के वह स्टोर रूम में घुस गया.

महावरी ने उस के दोनों पैर आरी से काट कर धड़ से अलग कर दिए. इस के बाद दोनों हाथों के पंजे काटे. दब्बू पति से जल्लाद बना महावीर अब तक थक गया था. उस के दिल में नीरू के प्रति पैदा नफरत बढ़ती जा रही थी. अब वह उस की लाश से बदला ले रहा था. इस के बाद उस ने कमरे में ताला बंद कर दिया और अगले दिन तक बच्चों के साथ सामान्य ढंग से रहता रहा. दोनों बच्चे रोज की तरह स्कूल चले गए. बच्चों के जाने के बाद महावीर कमरे में घुसा तो दोनों हाथ काट कर धड़ से अलग किए. इस के बाद उस ने सिर काट कर अलग किया. इस तरह नीरू की लाश 8 टुकड़ों में बंट गई. जबकि महावीर के चेहरे पर किसी तरह की शिकन या प्रायश्चित नहीं था.

इस बीच चंपा देवी ने महावीर को कई बार फोन कर के नीरू या बच्चों से बात करवाने के लिए कह चुकी थी. लेकिन हर बार उस ने नीरू के न लौटने और बच्चों के बाहर होने की बात कह कर सास को टरका दिया था. अब तक चंपा देवी को किसी अनहोनी की आशंका हो गई थी. इसलिए उस ने श्रीगंगानगर में ही रह रहे अपने दूसरे दामाद धर्मेंद्र अग्रवाल को फोन कर के नीरू के बारे में पता लगाने को कहा. महावीर ने उसे भी टरका दिया था. थकहार कर चंपा देवी ने फाजिल्का में रह रहे अपने भाई अमित को नीरू के बारे में पता लगाने के लिए श्रीगंगानगर भेजा, इसी के साथ वह खुद भी श्रीगंगानगर के लिए रवाना हो गई.

अमित अग्रवाल श्रीगंगानगर पहुंचे तो महावीर ने उन्हें भी गोलमोल जवाब दिया. हर्षित और कोमल घर में ताला बंद होने की वजह से पड़ोसी के यहां बैठे थे. अमित तुरंत सेतिया कालोनी स्थित पुलिस चौकी पहुंचे और अपनी भांजी नीरू के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने की सूचना दी, लेकिन पुलिस ने उन की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया. तब अमित ने अपने कुछ रिश्तेदारों और परिचितों को इस मामले के बारे में बता कर मदद मांगी. जब सभी लोग महावीर के घर पहुंचे तो वहां से आने वाली असहनीय दुर्गंध से उन्हें आशंका हुई. अमित के साथ आए लोगों ने तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी विष्णु खत्री दलबल के साथ महावीर के घर पहुंच गए.

उन्होंने इस बात की सूचना अधिकारियों को दी तो उन की सूचना पर एएसपी (शहर) शशि डोगरा, प्रशिक्षु आईपीएस चूनाराम भी घटनास्थल पहुंच गए. महावीर के पहुंचने पर कमरा खुलवाया गया तो पुलिस अधिकारी भी नफरत की वजह से मानवीय संवेदनाओं का वहशीपन भरा हश्र देख कर भौचक्के रह गए. पुलिस अधिकारियों ने नीरू की 8 टुकड़ों में बंटी लाश को कब्जे में ले लिया. महावीर ने अपना जुर्म कबूल लिया था, इसलिए पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. इस के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. पुलिस घटनास्थल की काररवाई निपटा रही थी, तभी नीरू की मां चंपा देवी भी वहां पहुंच गई थीं.

कोतवाली पुलिस ने चंपा देवी की ओर से नीरू की हत्या का मुकदमा महावीर अग्रवाल के खिलाफ दर्ज कर लिया. यह 6 अप्रैल, 2015 की बात थी. चंपा देवी के बताए अनुसार, नीरू की हत्या 2 अप्रैल की रात 2 बजे के करीब की गई थी. उस ने तो हत्या के इस मामले में महावीर के पूरे परिवार को नामजद करा दिया था, लेकिन जांच में पता चला कि परिवार के बाकी लोगों से इन लोगों का बहुत पहले ही संबंध खत्म हो चुका था, इसलिए पुलिस ने बाकी लोगों को निर्दोष मान लिया. पुलिस पूछताछ में नीरू की हत्या की जो कहानी सामने आई थी, वह इस प्रकार थी—

पंजाब प्रदेश का एक जिला है फतेहगढ़ साहिब. इसी जिले की एक प्रमुख व्यावसायिक मंडी है गोविंदगढ़. यहीं आयरन मंडी में रहते थे शिवदयाल अग्रवाल. उन की बेटी नीलम उर्फ नीरू विवाह लायक हुई तो रिश्तेदारों के बताने पर उन्होंने अबोहर निवासी खुशीराम के बेटे महावीर से नीरू का विवाह कर दिया था. खुशीराम काफी संपन्न आदमी थे. महावीर भी खूब मेहनती और मिट्टी में सोना निकालने वाला था. लेकिन नीरू और महावीर की उम्र के बीच का फासला काफी लंबा था. नीरू 18 साल की थी, जबकि महावीर 35 साल का. लेकिन धनदौलत और वैभवशाली परिवार की चकाचौंध में दोगुनी उम्र का अंतर गौण हो गया था.

महावीर और नीरू के शुरुआती दिन बड़े अच्छे गुजरे. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उन के दांपत्य में खटास आने लगी. उसी बीच खुशीराम को व्यापार में घाटा हुआ तो वह परिवार के साथ अबोहर से श्रीगंगानगर आ गए. शादी के 2 सालों बाद नीरू ने बेटी कोमल और उस के बाद बेटे हर्षित को जन्म दिया. महत्वाकांक्षी और स्वछंद विचारों वाली नीरू को संयुक्त परिवार में घुटन सी होती थी. इसलिए अलग रहने के लिए उस ने क्लेश शुरू कर दिया. महावीर ने किराए पर अलग मकान ले लिया और कमाई के लिए स्पेयर पार्ट्स का खुदरा व्यवसाय शुरू कर दिया. संजनेसंवरने का शौक रखने वाली नीरू ने अपने इस शौक को व्यावसायिक उपयोग करने की गरज से ब्यूटीपौर्लर खोल लिया.

नीरू का ब्यूटीपौर्लर चल निकला. पतिपत्नी, दोनों के कमाने से परिवार में बरकत होने लगी. नीरू और महावीर की उम्र में अंतर तो था ही, अब उन के विचारों में भी जमीनआसमान का अंतर आ गया था. स्वच्छंद जीवन जीने वाली नीरू को रोकटोक बहुत कस्टदायक लगता था. जबकि महावीर को इस तरह की आजादी बिलकुल पसंद नहीं थी. इस तरह विचारों के टकराव की वजह से पतिपत्नी में कलह रहने लगी. कहा जाता है कि श्रीगंगानगर में आने के बाद खुशीराम और उन की पत्नी मनोरीदेवी ने नीरू की आजादी से नाराज हो कर उस से पूरी तरह रिश्ता खत्म कर लिया था.

खुदगर्जी का जीवन जीने वाली नीरू अपने पति और बच्चों से अलगअलग होती गई. मांबाप के बीच होने वाली कलह और खींचतान से बच्चे भी परेशान रहते थे. उन्होंने अपने ढंग से दोनों को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन नीरू और महावीर के अपनेअपने जो अहम थे, उस की वजह से बात बन नहीं पाई और बात हत्या तक पहुंच गई. हत्या के इस मामले की जांच कोतवाली प्रभारी विष्णु खत्री ने स्वयं संभाली. पूछताछ में महावीर ने बताया कि नीरू की बदचलनी की वजह से वह परेशान हो चुका था. उस की सास चंपा देवी उसे जेल भिजवाने की धमकी देती रहती थी.

अगले दिन पुलिस ने महावीर को न्यायालय में पेश कर के पूछताछ एवं सबूत जुटाने के लिए 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने वह आरी बरामद कर ली, जिस से नीरू की लाश के टुकड़े किए गए थे. इस के बाद अन्य औपचारिकताएं पूरी कर के महावरी को पुन: न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. लोगों का कहना है कि इस हत्या की मुख्य वजह मियांबीवी के बीच की उम्र का अंतर था. शादी के समय नीरू 18 साल की थी, जबकि महावीर 35 साल का. नीरू जब पूरी तरह जवान हुई तो महावीर को बुढ़ापा आ गया, जिस की वजह से नीरूके कदम बहके तो बहकते ही चले गए. परिणामस्वरूप उसे असमय ही मरना पड़ा.

महावीर की बेटी कोमल और बेटा हर्षित पढ़ने में तो अच्छे हैं ही, बैडमिंटन और टेबल टेनिस के अच्छे खिलाड़ी भी हैं. अब मां का कत्ल हो गया और पापा मां के कत्ल के आरोप में जेल चले गए. दोनों बच्चों के लिए दुख की बात यह है कि उन्होंने दादादादी को मां की मौत और पिता के जेल जाने के बाद पहली बार देखा था. वहीं ननिहाल पक्ष वालों ने उन्हें अपने साथ ले जाने से साफ मना कर दिया था. ऐसे में इन होनहार बच्चों का क्या होगा?

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Bihar News: ट्यूटर के प्यार में लिपटी अस्मिता

Bihar News: समस्तीपुर (बिहार) की रहने वाली अस्मिता शराबी पति सोनू झा के जुल्मोसितम से ऊब चुकी थी. इसी बीच बेटे के ट्यूशन टीचर हरिओम को वह दिल दे बैठी. इन दोनों के प्यार ने एक ऐसे अपराध को जन्म दिया कि…

अपनी प्रेमिका अस्मिता झा को उस के पति सोनू झा द्वारा प्रताडि़त करने की बात सुन कर हरिओम का गुस्से में खून खौल गया. वह प्रेमिका को भरोसा देते हुए बोला, ”ठीक है भाभीजी, अब आप परेशान मत हो. मैं जल्दी ही इस का कुछ हल सोचता हूं. अगर तुम्हारे दिमाग में कोई आइडिया हो तो बताओ.’’

”अभी तो कोई आइडिया नहीं आ रहा, लेकिन तुम इस जालिम पति से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाओ, तभी हम आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं.’’ अस्मिता बोली.

”भाभीजी, आप चिंता न करो. अब यह काम मेरा है, बहुत जल्दी आप को उस से छुटकारा मिल जाएगा.’’ यह तसल्ली देने के बाद हरिओम अगले दिन आने को कह कर चला गया. लेकिन उस दिन अस्मिता के दिल में कुछ आस जरूर जागी थी. 25 जुलाई, 2025 की शाम को अस्मिता ने हरिओम को फोन पर बताया कि सोनू आज अभी थोड़ी देर पहले ही आटो ले कर घर से निकला है. वह रात देर से ही घर पहुंचेगा. वह तुरंत आ कर उस से मिले. इस जानकारी के मिलते ही हरिओम पागलों की तरह बिना देर लगाए अस्मिता के घर पर जा पहुंचा. उस वक्त अस्मिता का बेटा सो चुका था.

सोनू के घर के दरवाजे के पास ही एक छोटा सा कमरा बना हुआ था, जिस में उस के पापा टुनटुन झा अकेले ही सोते थे. उसी कमरे के पास एक ग्रिल लगा हुआ था, जिस पर रात में ताला लगाया जाता था. उस ताले की एक चाबी सोनू और दूसरी अस्मिता के पास होती थी. सोनू जब कभी भी आता तो वह उस ताले को खोल कर घर में चला जाता था. 25 जुलाई, 2025 को जब सोनू देर से निकला तो अस्मिता को उम्मीद थी कि वह सुबह तक ही घर वापस आ पाएगा, इसी कारण उस ने उस दिन उस ग्रिल में ताला ही नहीं लगाया. ताकि हरिओम बिना किसी आहट के घर में आ सके.

सोनू के घर से निकलते ही अस्मिता ने प्रेमी हरिओम को फोन कर सारी जानकारी दे दी, जिस के तुरंत बाद ही हरिओम दबेपांव उस के घर में प्रवेश कर गया. घर में अस्मिता को अकेला पा कर हरिओम जवानी के जोश में अपने होश खो बैठा था. अस्मिता को घर में अकेला पाते ही वह उस के साथ संबंध बनाने के लिए आतुर हो उठा, लेकिन इत्तफाक रहा कि सोनू को किसी काम से रास्ते से ही घर आना पड़ा. लेकिन घर में आते ही उस ने जो देखा, वह उस की कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था.

उस वक्त उस की पत्नी अस्मिता हरिओम के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी. पत्नी और हरिओम को ऐसी हालत में देखते ही सोनू अपना आपा खो बैठा. अस्मिता के पास पहुंचते ही सोनू ने उस के बाल पकड़ते हुए कहा, ”रंडी, मुझे तुझ से ऐसी उम्मीद नहीं थी. कुतिया अपने मर्द को तो पूरी तरह से संतुष्ट कर नहीं पाती, दूसरों के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है.’’

इतना कहते ही सोनू ने अस्मिता को बुरी तरह से पीटना शुरू कर दिया था. सोनू को घर आया देखकर पहले तो हरिओम ने घर से भागने की कोशिश की, लेकिन फिर उस ने अस्मिता को सोनू से बचाने की हिम्मत जुटाई. हरिओम को अस्मिता के बचाव में आते देख सोनू ने उस के साथ भी मारपीट शुरू कर दी थी.

प्रेमी के सामने बनाने लगा संबंध

सोनू को गुस्से में देखते ही हरिओम ने उस कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया, ताकि घर में हो रहे शोरशराबे की बाहर तक आवाज तक न जा सके. तभी गुस्से से तिलमिलाए सोनू ने अस्मिता की चोटी पकड़ कर उसे फर्श पर दे पटका. वह उस के प्रेमी के सामने ही उस से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा. अस्मिता उस का विरोध कर रही थी. फिर वह हैवान बन कर पत्नी के कपड़ों को फाडऩे लगा. देखते ही देखते वह पत्नी के सीने पर चढ़ बैठा. अचानक अस्मिता की चीखपुकार निकली. उस ने प्रेमी हरिओम को ललकारते हुए कहा, ”हरिओम, देख क्या रहे हो, कर दो इस का काम तमाम. इस से अच्छा मौका और कब मिलेगा.’’

अस्मिता को खतरे में देख कर हरिओम को पारा हाई हो गया. उस ने इधरउधर नजर दौड़ाई तो सामने एक केतली रखी नजर आई. उस ने केतली उठाई और फिर उसी केतली से सोनू के सिर पर लगातार कई वार कर डाले. पीछे से सिर पर केतली के बार होते ही सोनू अपना सिर पकड़े नीचे गिर गया. तभी फर्श पर पड़ी अस्मिता भी उठ गई. वह फुरती से घर में रखी लाठी और डंडा ले आई. उस के बाद दोनों ने लाठी और डंडों से पीटपीट कर सोनू को बुरी तरह से अधमरा कर दिया. जब सोनू बेहोशी की हालत में पहुंच गया तो हरिओम ने घर में रखे बिजली के तार से सोनू का गला भी घोंट दिया. बाद में उस की मौत को कंफर्म करने के लिए हरिओम ने सोनू के शरीर पर बिजली का करेंट भी लगाया, ताकि उस की मौत को बिजली का करंट लगने से मौत दिखाया जा सके.

सोनू की हत्या करने के बाद अस्मिता ने अपने कपड़े चेंज किए और फिर हरिओम की जिद के आगे उस के साथ संबंध भी बनाए. इस के बाद हरिओम वहां से चला गया.सोनू को मौत की नींद सुलाने के बाद अस्मिता और हरिओम पूरी तरह से बेफिक्र हो गए थे. उस की हत्या का शक किसी भी तरह से उन के ऊपर नही आने वाला. अगले दिल जैसे ही भोर हुआ, अस्मिता ने रोनाचिल्लाना शुरू कर दिया. उस ने रोते हुए ही लोगों को बताया कि सोनू को बिजली का करंट लग गया, जिस के कारण उस की मौत हो गई. सोनू की मौत की खबर पाकर उस के पापा टुनटुन झा मौके पर पहुंचे.

उन्होंने कमरे के अंदर जा कर देखा तो उन्हें तो मामला कुछ और ही नजर आया. सोनू का बिस्तर भी खून से सना था, साथ ही उस के बिस्तर के पास दीवार पर खून के छींटे भी लगे हुए थे. उस कमरे के फर्श पर भी खून लगा हुआ था. उस की आंखें भी सूजी हुई थीं. यह सब देख कर टुनटुन झा का माथा ठनक गया. उन्हें लगा कि उस की मौत बिजली के करंट से नहीं, बल्कि बुरी तरह से मारपीट कर उस की हत्या की गई है. देखते ही देखते यह चर्चा मोहल्ले में फैल गई. लोग तरहतरह की बातें बनाने लगे थे. तभी गांव वालों ने सोनू की हत्या की सूचना मुफ्फसिल थाने में दी.

इस घटना की जानकारी मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची. घटना स्थल पर पहुंचते ही एसएचओ अजीत प्रसाद सिंह ने मामले की जांचपड़ताल की तो पता चला कि मृतक सोनू झा की मौत बिजली के करंट से नहीं, बल्कि उस को बुरी तरह से पीटपीट कर मारा गया था. घटनास्थल से पुलिस ने एक 10 मीटर लंबा बिजली का तार भी बरामद किया था, जिस से बिजली का करंट लगाने की आशंका थी. मृतक के सिर पर गहरे चोट के निशान थे.

ससुर ने बताई बहू की सच्चाई

इस जानकारी के बाद एएसपी संजय कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. जिन्होंने घटनास्थल पर पहुंचते ही मृतक के फेमिली वालों से पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में मृतक के पापा टुनटुन झा ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि सोनू देर रात घर पहुंचा था. लेकिन अगली सुबह वह मृत हालत में घर में पाया गया. टुनटुन झा ने बताया कि सोनू के घर पर हरिओम का आना जाना था. कोई लगभग 6 महीने पहले सोनू ने हरिओम को अपनी पत्नी अस्मिता के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया था. तब से सोनू और उस की पत्नी के बीच मनमुटाव रहने लगा था, लेकिन हरिओम अभी भी उस के बेटे को ट्यूशन पढ़ाने आता था. हरिओम और अस्मिता के बीच लव अफेयर के कारण ही उस की हत्या की गई थी.

इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर सोनू की लाश को पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेज दिया. इस मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया था.   हालांकि अस्मिता और हरिओम ने इस घटना को दुर्घटना का रूप देने की काफी कोशिश की थी, लेकिन पुलिस के सामने उन की एक भी चाल सफल न हो सकी. सोनू के फेमिली वालों द्वारा दोनों पर शक जाहिर होते ही पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स भी निकलवाई, जिस से जानकारी मिली कि हर रोज अस्मिता और हरिओम के बीच काफी लंबी बातचीत होती थी. फिर सोनू के कमरे से मिले हत्या के साक्ष्य उस की हत्या करने की पूरी गबाही दे रहे थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी साफ हो गया था कि अस्मिता और हरिओम ने हत्या करने से पहले उसे बुरी तरह से मारापीटा था. उस के शरीर पर चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. उस की एक आंख के पास चोट का गहरा निशान और उस का एक हाथ भी टूटा हुआ पाया गया था. उस का दम घोंटते समय उस के मुंह और नाक से भी काफी खून निकला था.   अस्मिता को गिरफ्तार कर पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था. पुलिस पूछताछ में अस्मिता ने पति की हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

ट्यूटर से ऐसे मिले नैना

 

बिहार के समस्तीपुर जिले के थाना मुफ्फसिल के अंतर्गत एक गांव है लगुनियां रघुकंठ. इसी गांव में रहता था, टुनटुन झा का परिवार. टूनटून झा के 4 बेटे थे. साल 2017 में सोनू की शादी अस्मिता के साथ हुई थी. सोनू की शादी के बाद से दोनों भाई अलगअलग रहने लगे थे. सोनू झा ने अपना एक आटोरिक्शा ले रखा था, जिसे चला कर वह अपने परिवार की गुजरबसर करता था. सोनू में शराब पीने की लत थी, जिस के कारण आए दिन अस्मिता और उस के बीच लड़ाईझगड़ा होता रहता था.

शादी के बाद अस्मिता 2 बच्चों की मां बनी, जिस में उस की बेटी बड़ी और बेटा छोटा था. दोनों ही बच्चे स्कूल जाते थे. बच्चे होने के बाद अस्मिता को उम्मीद थी कि सोनू शराब पीना छोड़ देगा, लेकिन उस ने शराब पीनी नहीं छोड़ी, जिस के कारण पति और पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया. उसी विवाद के चलते अस्मिता कई बार सोनू से रूठ कर अपने मायके चली जाती थी. इन दोनों के रिश्तों को बनाए रखने के लिए कई बार सोनू की ससुराल में पंचायत भी हुई. कई बार पंचायत के फैसले पर अस्मिता अपनी ससुराल भी आई, लेकिन उस के बाद भी दोनों के बीच लड़ाईझगड़ा शांत नहीं हुआ.

उसी दौरान अस्मिता की मुलाकात कुंवारे हरिओम से हुई. हरिओम उस के दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर पर ही आता था. जिस वक्त हरिओम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था, उस वक्त घर पर उस की फेमिली का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं होता था. मौके का फायदा उठाते हुए अस्मिता ने हरिओम के साथ दोस्ती कर ली. दोस्ती के बाद दोनों के बीच मधुर संबंध बनते ही अबैध संबंध भी स्थापित हो गए थे. हरिओम और अस्मिता के बीच प्यार पनपा तो वह पति को कम चाहने लगी थी. अस्मिता झा को लगने लगा था कि हरिओम भी उसे बहुत ही चाहता है. अस्मिता ने उसी दिन फैसला लिया कि वह किसी भी तरह से हरिओम से अपने संबंध मजबूत करेगी.

हरिओम और अस्मिता को मिलनेजुलने में न तो कोई पाबंदी थी और न ही कोई रोकटोक. हरिओम के फेमिली वालों के साथसाथ गांव वाले भी जानते थे कि वह हर रोज सोनू के लड़के को ट्यूशन पढ़ाने के लिए उस के घर जाता है. इसी कारण कोई भी उन दोनों पर कोई शक नहीं करता था. दोनों के बीच प्यार की शुरुआत होते ही उन के बीच की दूरियां सिमटने लगी थीं. सोनू झा सुबह होते ही अपना आटोरिक्शा ले कर घर से निकल जाता. लेकिन घर आने का उस का कोई टाइम फिक्स नहीं था, जिस का लाभ उठाते ही अस्मिता हरिओम को फोन कर कभी भी बुला लेती थी.

बच्चों को बनाना चाहता था काबिल

गांव हो या शहर, यह प्यार करने की बीमारी सभी जगह पनप रही है. लेकिन उसे समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक छिपाया नहीं जा सकता. यही हरिओम और अस्मिता की लव स्टोरी में भी हुआ. हरिओम कुंवारा था, जबकि उस की पे्रमिका शादीशुदा. देखते ही देखते दोनों ही लोगों की नजरों में आ चुके थे. फिर जल्दी ही दोनों की प्रेम कहानी सोनू झा के पास भी जा पहुंची थी.

सोनू झा एक शराबी किस्म का युवक था. जैसे ही यह बात उसे पता लगी, उस का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उस ने घर पहुंचते ही अस्मिता को खरीखोटी सुनाते हुए उस के साथ मारपीट भी की. अगले दिन हरिओम बेटे को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर पहुंचा तो उसे भी काफी भलाबुरा कहा. साथ ही उस ने बेटे का ट्यूशन भी बंद कर दिया था. उस के बाद हरिओम का अस्मिता से मिलनाजुलना पूरी तरह से बंद हो गया था, जिस के बाद हरिओम और अस्मिता एक दूसरे के वियोग में तड़पने लगे.

ऐसे आगे बढ़ी लव स्टोरी

अस्मिता सोनू के व्यवहार से भलीभांति परिचित थी. शराब के नशे वह भले ही हैवान बन बैठता था. लेकिन जैसे ही उस का नशा उतरता, वह फिर से उसे प्यार जताने लगता था. सोनू ने हरिओम के अपने घर आने पर पावंदी लगा दी थी, लेकिन हरिओम अभी भी सोनू के बड़े भाई के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था. तब सोनू को लगा कि उस के बेटे की पढ़ाई खराब हो रही है. यही बात सोच कर एक दिन अस्मिता ने सोनू को समझाने की कोशिश की, ”देखो जी, गांव वाले हमारी खुशी देख कर जलने लगे हैं, इसीलिए वह मुझ पर मास्टर साहब को ले कर कीचड़ उछालने लगे हैं. जबकि यह तो मैं ही जानती हूं कि हरिओम और मेरे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है.

अगर हम ने बेटे का ट्यूशन हटाया तो वह पढ़ाई में बहुत कमजोर हो जाएगा. फिर हम तो कहीं के भी नही रहेंगे. मेरा तो आप को समझाने का काम था, बाकी आप की मरजी.’’

अस्मिता की बात सोनू के दिल में उतर गई. वह तो गांव वालों से पहले ही परेशान था, लेकिन उस ने बेटे के जन्म के बाद ही तय कर लिया था कि वह अपने बेटे को अपनी छाया से बहुत ही दूर रखेगा. वह दिनरात मेहनत कर के उसे उच्च शिक्षा दिलाने के बाद बड़ा आदमी बनाएगा. यही सोच कर उस ने फिर से हरिओम को राहुल को ट्यूशन पढ़ाने की इजाजत दे दी थी, जिस के बाद फिर से हरिओम और अस्मिता की लव स्टोरी चोरीछिपे आगे बढऩे लगी थी. हरिओम पहले की तरह फिर से सोनू के बेटे को उस के घर ट्यूशन पढ़ाने जाने लगा था, जिस के बाद फिर से अस्मिता और हरिओम के बीच अवैध संबधों का सिलसिला चालू हो गया.

हालांकि दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि दोनों के बीच यह पक रही खिचड़ी ज्यादा दिनों तक नहीं पक सकती. क्योंकि सोनू हर रोज देर रात शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर लौटता तो किसी भी बात पर अस्मिता से लडऩेझगडऩे लगता था. इस घटना से लगभग 6 महीने पहले एक दिन सोनू ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया, जिस के बाद सोनू ने अस्मिता को काफी मारापीटा भी. उस के बाद से सोनू ने अपने बेटे का ट्यूशन भी बंद कर दिया था, लेकिन घर की इज्जत की खातिर सोनू ने इस की कंपलेन थाने में नहीं की थी. इस छोटी सी भूल ने अस्मिता के हौसले बुलंद कर दिए थे. अस्मिता को लगा कि सोनू हरिओम से डरता है. इसी कारण उसने पुलिस से उन की शिकायत नहीं की.

यही कारण रहा कि हरिओम और अस्मिता के बीच फिर से मौजमस्ती का सिलसिला चालू हो गया, लेकिन यह बात जल्दी ही किसी तरह से सोनू के पास पहुंच गई. इस जानकारी के मिलते ही उसने फिर से पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी. सोनू के जुल्मों से तंग आ कर कर अस्मिता एक दिन अपने दोनों बच्चों को ले कर अपने मायके घटहो चली गई. फिर वह दोनों बच्चों को मायके में ही छोड़कर सोनू के साथ ससुराल आ गई.

घर पर बच्चों के न होने के कारण अस्मिता बिलकुल ही फ्री हो गई थी. वह हर रोज मौका पाते ही अपने प्रेमी हरिओम को अपने घर बुलाती और सारी रात उस के साथ मौजमस्ती करती थी. लेकिन सोनू झा के दिमाग में यह बात बैठ गई थी कि अस्मिता का हरिओम के साथ अभी भी चक्कर चल रहा है, इसलिए वह छोटीछोटी बातों को ले कर पत्नी से झगड़ता और बात बढऩे पर उस की पिटाई तक कर देता था.

एक गुनाह प्रेमिका की खातिर

एक दिन अस्मिता शायद घर के कामकाज में बिजी थी. उस का बेटा घर के आंगन में अकेला ही खेल रहा था. हालांकि अस्मिता ने हरिओम को घर में प्रवेश करते वक्त देख लिया था, लेकिन उस दिन पहली बार ऐसा हुआ कि अस्मिता हरिओम को देखते ही कमरे के अंदर चली गई थी. कमरे के अंदर से ही उस ने बेटे को आवाज लगाई थी, ”बेटा, मास्टर साहब आ गए. कमरे में जाकर ट्यूशन पढ़ लो.’’

थोड़ी देर में ही बेटा अपना बस्ता थामे बैठक में चला गया था. जहां पर बैठा हरिओम उस का इंतजार कर रहा था. बेटे के आते ही हरिओम ने उस की स्कूल की कौपी निकाल कर चैक की. उस दिन बेटे को काफी होमवर्क मिला था. हरिहोम ने सब से पहले उस का होमवर्क कराया, लेकिन उस वक्त भी उस का दिमाग अस्मिता में ही लगा हुआ था. डस दिन हरिओम को अस्मिता का व्यवहार कुछ बदला नजर आया तो उस के मन में उथलपुथल मचने लगी. एक रात ही राम में अस्मिता को क्या हो गया था, जो उस के घर आते ही कई बार बैठक में चक्कर लगाती थी, लेकिन आज वह एक बार भी उस के पास नहीं आई.

हरिओम अभी उस के बारे में सोच ही रहा था. तभी अस्मिता चाय ले कर बैठक में पहुंच गई. उस के आते ही सब से पहले हरिओम की नजर उस के चेहरे पर पड़ी. उस के चेहरे का एक हिस्सा सूझा हुआ दिख रहा था, जिस को अस्मिता बारबार ढंकने की कोशिश कर रही थी.

आंसुओं ने बयां की दास्तां

अस्मिता के चेहरे को देखते ही हरिओम को समझने में तनिक भी देर नही लगी कि जरूर अस्मिता के साथ कोई अनहोनी घट चुकी है, जिस के कारण वह अपने चेहरे को बारबार छिपाने की कोशिश कर रही है. इस से पहले कि अस्मिता वहां से जा पाती, हरिओम ने उस से पूछ ही लिया.’’ भाभीजी, यह आप के चेहरे पर क्या हुआ? कल तक तो आप ठीकठाक थीं. फिर यह अचानक क्या हुआ?’’

हरिओम के इस प्रश्न ने जैसे अस्मिता के जख्म को और भी कुरेद डाला था. देखते ही देखते अस्मिता की आंखें आंसुओं से सराबोर हो चुकी थीं. फिर भी उस ने जैसेतैसे कर अपने को संभाला और अपनी चुन्नी के पल्लू से अपने आंसुओं को पोंछने की कोशिश करते हुए बोली, ”नहींनहीं, कुछ भी तो नहीं. रात अचानक मेरा पैर फिसल गया और मेरे चेहरे पर चोट लग गई.’’

अस्मिता ने हरिओम के सामने अपने दर्द को छिपाने की कोशिश की, लेकिन हरिओम का दिल उस की इस बात को मानने को तनिक भी तैयार न था. उस के बाद हरिओम उस की सच्चाई जानने के लिए उस के पीछे ही पड़ गया, ”भाभीजी, अगर आप चलतेचलते ही गिरी हैं तो आप को कोई और भी चोट लगी होगी. भाभीजी, आप जरूर सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही हैं.’’

जब हरिओम अस्मिता की सच्चाई जानने के लिए हाथ धो कर उस के पीछे पड़ गया तो उस ने अपनी चुप्पी तोड़ दी. उस ने कहा, ”क्या बताऊं हरिओम,मेरी तो किस्मत ही फूट गई. मेरा इस शराबी इंसान ने जीना हराम कर रखा है. हर रोज शाम को शराब पी कर आता है, फिर रात में वह मेरे साथ गालीगलौज करते हुए मारपीट भी करता है. मैं उसे कहां तक झेलूं.

”हर रोज की तरह कल शाम भी मेरा पति सोनू दारू पी कर आया था. उस के बाद उस ने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी थी, जिस के कारण मेरे चेहरे पर भी चोट लग गई थी.’’ अपना दर्द सुनातेसुनाते अस्मिता फफकफफक कर रोने लगी थी. हरिओम अस्मिता को दिल से प्यार करने लगा था. जब अस्मिता ने उसे अपनी दुख भरी कहानी सुनाई तो उस के तनबदन में आग लग गई, लेकिन यह मामला मियांबीवी का था. इस में हरिओम कर भी क्या सकता था. उस के बाद भी उस ने किसी तरह से अस्मिता को समझा बुझा कर शांत कर दिया था, लेकिन उस दिन के बाद से उस के दिल में सोनू के प्रति नफरत पैदा हो गई थी.

उसी दौरान हर दिन की तरह हरिओम ट्यूशन पढ़ाने सोनू के घर पहुंचा. उस दिन सोनू के बेटे की तबियत कुछ ठीक नहीं थी. अस्मिता झा ने हरिओम के आने से पहले ही उसे दवा दे कर सुला दिया था. जैसे ही हरिओम ट्यूशन पढ़ाने के लिए अस्मिता के घर पहुंचा, वह उसे देखते ही फूटफूट कर रोने लगी, ”हरिओम, अब पानी सिर के उपर से गुजरने लगा है. सोनू ने रात भी बिना वजह मेरे साथ मारपीट की. अगर तुम मुझे सच्चा प्यार करते हो तो तुम ही मुझे किसी तरह से इस जंजाल से निकालो. कुछ ऐसा करो कि मैं उस की रोजरोज की मार से निजात पा सकूं. वरना मुझे एक दिन जहर खा कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने पर मजबूर होना पड़ेगा.’’

”नहींनहीं, भाभी यह आप क्या कह रही हो. ऐसा आप कभी सपने में भी नहीं सोचना. आप ने ऐसा कर लिया तो फिर मेरा क्या होगा. मैं आप के बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता. आप तो मुझे केवल आदेश करो. यह बंदा आप के लिए क्या कर सकता है. आप के लिए मेरी जान भी हाजिर है.’’ कहतेकहते हरिओम ने अस्मिता को अपने गले लगा लिया.

”हरिओम, तुम सही कह रहे हो. तुम्हारे बिना मैं भी एक पल के लिए जिंदा नहीं रह सकती. तुम्हारे साथ मुझे जो जिंदगी का सच्चा सुख प्राप्त होता है, वह सोनू न तो आज तक दे पाया और न ही दे सकता है. अब तो यह दिल भी केवल तुम्हारे लिए ही धड़कता है.’’ कहते हुए अस्मिता की आंखें आंसुओं से सराबोर हो गईं.

इस के बाद दोनों ने तय कर लिया कि सोनू को ठिकाने लगाए बगैर अब सुकून से नहीं जिया जा सकता. जल्द ही अब कुछ करना पड़ेगा. इस से पहले कि वह योजना बना कर उसे ठिकाने लगाते 25 जुलाई, 2025 को ऐसे हालात बन गए और मौका भी मिल गया, जिस से उन्होंने सोनू की हत्या कर दी. फिर उसे बिजली के करंट से दुर्घटना दिखाने की कोशिश की, लेकिन कमरे में मिले सबूतों और सोनू झा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन्हें कानून के शिकंजे में फांस लिया.

इस घटना में उस के प्रेमी हरिओम को भी काफी चोटें आई थीं. बाद में उस ने किसी अस्पताल में जा कर अपना इलाज कराया था. पुलिस ने अस्मिता झा और हरिओम की निशानदेही पर सोनू झा की हत्या में प्रयुक्त केतली और लाठीडंडे भी बरामद कर लिए थे. केस के खुलते ही पुलिस ने अस्मिता झा और हरिओम दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. Bihar News