Firozabad Crime : सिपाही पति ने पत्नी को पीटा फिर सीने में दागी चार गोलियां

Firozabad Crime : हत्या बड़ा अपराध है, इस के बावजूद ऐसे अपराध होते रहते हैं, लेकिन अगर कोई कानून का रक्षक हत्या जैसा अपराध करे तो बात गंभीर हो जाती है. यतेंद्र यादव ने पिस्तौल उठाई तो पत्नी को ही ठिकाने लगा दिया, आखिर क्यों…

सिपाही यतेंद्र कुमार यादव ने 26 अप्रैल, 2020 को रात 9 बजे अपने चचेरे साले सुरजीत के मोबाइल पर फोन किया. फोन सुरजीत के छोटे भाई योगेंद्र ने उठाया. यतेंद्र ने कहा, ‘‘सुनो, जैसे ही गेट में घुसोगे, घुसते ही नेमप्लेट लगी है. उस के ऊपर ग्रिल है, चाबी वहीं रखी है और अंदर पिंकी (पत्नी) आंगन में है. आप उन लोगों (ससुरालीजनों) को बता देना. मतलब हम ने पिंकी को गोली मार दी है. साफसीधी बात है.’’

योगेंद्र ने पूछा, ‘‘कब?’’

यतेंद्र ने बताया, ‘‘आज रात में.’’

‘‘बच्चियां कहां हैं?’’

इस पर यतेंद्र ने कहा, ‘‘बच्चियां भी गायब हैं. आप उन को (ससुरालीजनों को) बता देना, बहुत सोचसमझ कर ही कोई कदम उठाएं. हमें जो करना था कर दिया. आप समझदार हो, जो भी गलती हुई माफ करना. अभी चाहो अभी काल कर लो. रात की बात है. जो भी काररवाई करवानी है करवाओ.’’

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद के शिकोहाबाद थानांतर्गत हाइवे स्थित आवास विकास कालोनी 3/39 के सेक्टर-3 में 32 वर्षीय सरोज देवी उर्फ पिंकी अपनी 3 बेटियों 10 साल की आकांक्षा, 8 साल की आरती व सब से छोटी 4 साल की अन्या के साथ अपने निजी मकान में रहती थीं. सरोज का पति यतेंद्र कुमार यादव आगरा के थाना सैंया में डायल 112 पर सिपाही पद पर तैनात था. बीचबीच में यतेंद्र घर पर अपनी पत्नी व बेटियों के पास आताजाता रहता था. कहते हैं कभीकभी खून सिर चढ़ कर बोलता है. यही बात यतेंद्र के साथ भी हुई.

उस ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद अपने चचेरे साले को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और अपने ससुरालीजनों को सूचना देने व आगे की काररवाई करने को कहा. इस के साथ ही उस ने उन्हें धमकी भी दी कि वे जो भी काररवाई करें, खूब सोचसमझ कर करें. योगेंद्र ने पूरी बात रिकौर्ड कर ली थी. उसे जैसे ही बहनोई यतेंद्र से अपनी चचेरी बहन पिंकी की हत्या की जानकारी मिली उस के हाथपैर फूल गए. उस समय लौकडाउन चल रहा था. उसे इस बात की जानकारी थी कि पिंकी और यतेंद्र के बीच विवाद चल रहा है. लेकिन हालात हत्या तक पहुंच जाएगा, इस की उस ने कल्पना भी नहीं की थी.

योगेंद्र ने रात में ही पिंकी के मायके में फोन कर अपने चचेरे भाई हरिओम को घटना की जानकारी दी. हरिओम ने जैसे ही बहन पिंकी की हत्या की खबर बताई, घर में कोहराम मच गया. रोनापीटना शुरू हो गया. इस से पहले 26 अप्रैल की सुबह 9 बजे हरिओम के पास आवास विकास कालोनी में रहने वाले एक परिचित का फोन आया था. उस ने बताया कि वह उस की बहन सरोज उर्फ पिंकी के घर गया था. मकान का गेट अंदर से बंद था. कई आवाजें देने पर भी गेट नहीं खुला. इस पर हरिओम ने अपने बहनोई यतेंद्र व बहन सरोज उर्फ पिंकी के मोबाइलों पर फोन किया, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया. हरिओम ने अनुमान लगाया कि वे लोग कहीं गए होंगे, मोबाइल घर पर भूल गए होंगे.

रात को हरिओम के पास योगेंद्र का फोन आने पर बहनोई यतेंद्र द्वारा बहन सरोज उर्फ पिंकी की हत्या किए जाने की जानकारी हुई. हरिओम ने थाना शिकोहाबाद पुलिस को घटना की जानकारी दे दी. इस पर थाना पुलिस रात में ही आवास विकास कालोनी स्थित उस मकान पर पहुंची, लेकिन मकान का दरवाजा बंद देख कर लौट गई. पुलिस ने हरिओम से थाने आने को कहा. इन सब बातों के चलते काफी रात हो गई. इस के साथ ही लौकडाउन के चलते और गांव में एक गमी होने के कारण हरिओम व उस के घरवाले शिकोहाबाद नहीं आ पाए थे.

पुलिस ले कर पहुंचे मायके वाले दूसरे दिन 27 अप्रैल को सुबह होते ही हरिओम यादव अपने पिता रामप्रकाश व अन्य रिश्तेदारों के साथ शिकोहाबाद की आवास विकास कालोनी पहुंच गए और पुलिस को सूचना दी. घर वालों के आने की सूचना पर थानाप्रभारी अनिल कुमार पुलिस टीम के साथ आवास विकास कालोनी पहुंच गए. हरिओम ने पुलिस को बताया कि बहनोई यतेंद्र ने फोन पर ताऊ के लड़के योगेंद्र को मकान की चाबी ग्रिल के ऊपर रखी होने की जानकारी दी थी. इस पर चाबी को तलाशा गया. बताई गई जगह पर चाबी मिल गई. मकान का ताला खोल कर पुलिस अंदर गई.

आंगन में सरोज की खून से लथपथ लाश पड़ी हुई थी. तीनों बच्चियां भी गायब थीं. थानाप्रभारी अनिल कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. सूचना पर सीओ इंदुप्रभा सिंह व एसपी (ग्रामीण) राजेश कुमार फोरैंसिक टीम को ले कर मौकाएवारदात पर पहुंच गए. हत्या की जानकारी होते ही कालोनी के लोग भी एकत्र हो गए. सिपाही द्वारा पत्नी की हत्या किए जाने की खबर से सनसनी फैल गई. पुलिस अधिकारियों ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका के शरीर पर चोटों के साथ ही गोलियों के 4 निशान भी मिले. फोरैंसिक टीम ने भी जांच कर पूरे घर से साक्ष्य जुटाए. लाश के पास की दीवारों पर खून के छींटे मिलने के साथ ही टूटी हुई चूडियां भी मिलीं. इस से अनुमान लगाया कि मृतका ने अंतिम सांस तक पति के साथ संघर्ष किया था.

हरिओम ने हत्यारोपी सिपाही यतेंद्र द्वारा किए गए फोन की रिकौर्डिंग भी पुलिस अधिकारियों को सुनवाई. मकान से पुलिस को 2 मोबाइल फोन मिले. यह मृतका के बताए जा रहे थे. पुलिस ने फोनों के लौक खुलवा कर जांच कराने की बात कही. तीनों बेटियों के स्कूल आईडी कार्ड घर के बाहर पड़े मिले. 4 साल पहले यतेंद्र ने अपने परिचित के जरिए शिकोहाबाद की आवास विकास कालोनी में प्लौट खरीदा और रजिस्ट्री पत्नी सरोज के नाम कराई थी. इस के बाद मकान बनवाया था.

आवास विकास कालोनी का इलाका आबादी से दूर होने से सिपाही यतेंद्र ने सुरक्षा की दृष्टि से 5 सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे. शातिर सिपाही ने पत्नी की हत्या के बाद सारे सुबूत मिटाने की कोशिश की थी. वह घर के अंदर और बाहर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग डिलीट करने के बाद तीनों बेटियों को ले कर इस तरह घर निकला कि किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगी. पूछताछ में मृतका के भाई हरिओम यादव व पिता रामप्रकाश ने बताया कि यतेंद्र के मथुरा की एक युवती से अवैध संबंध थे. इस के चलते पतिपत्नी में विवाद होता रहता था. यतेंद्र मकान बेचने का दबाव बनाने के साथ ही दहेज की मांग को ले कर बहन पिंकी का उत्पीड़न करता था.

सरोज की शिकायत पर घर वालों ने यतेंद्र को कई बार समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा. यतेंद्र आए दिन पिंकी के साथ मारपीट करता था और इसी के चलते यतेंद्र ने उस की हत्या कर दी. घटना के बाद से तीनों बच्चियां भी गायब थीं. घर वालों को आशंका थी कि आरोपी ने बच्चियों के साथ कोई अनहोनी न कर दी हो. पड़ोसियों ने बताया कि रात में उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई नहीं दी. मृतका के भाई हरिओम यादव की तहरीर पर पुलिस ने सिपाही यतेंद्र कुमार यादव, उस के पिता रामदत्त व यतेंद्र के बहनोई हरेंद्र के खिलाफ सरोज की गोली मार कर हत्या करने का केस दर्ज कर लिया. पुलिस का अनुमान था कि कालोनी हाइवे के किनारे स्थित है, मकान दूरी पर बने हैं. रात का समय होने पर संभव है कि पड़ोसियों को गोली की आवाज सुनाई न दी हो. एक पड़ोसी ने इतना जरूर बताया कि शनिवार की शाम सरोज को घर के दरवाजे पर बैठा देखा था.

एसपी (ग्रामीण) ने बताया कि या तो कैमरे बंद किए गए थे या फिर रिकौर्डिंग डिलीट कर दी गई थी. आगरा से जानकारी करने पर पता चला कि यतेंद्र 26 अप्रैल को दोपहर 2 बजे से अनुपस्थित चल रहा था, उस के खिलाफ आगरा में रपट लिखी गई है. बेटियां लापता पुलिस का मानना था कि हो सकता है कि तीनों बेटियों को आरोपी यतेंद्र अपने साथ ले गया हो. बेटियों को ले कर वह कहां गया, इस का कोई पता नहीं चल रहा था. पुलिस व फोरैंसिक टीम ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय फिरोजाबाद भिजवा दिया. हत्यारोपी सिपाही की गिरफ्तारी के लिए लौकडाउन में पुलिस ने 3 टीमें गठित कीं. इन टीमों ने मैनपुरी और इटावा स्थित सिपाही के घर व रिश्तेदारियों के अलावा आगरा व मथुरा में भी दबिशें दीं.

मथुरा के थाना हाइवे क्षेत्र निवासी उस की प्रेमिका से भी पूछताछ की गई लेकिन हत्यारोपी सिपाही का कोई सुराग नहीं मिला. प्रेमिका ने पुलिस को बताया कि यतेंद्र से एक साल से बात नहीं हुई है. आरोपी का एक मामा भी कांस्टेबल था. मामा के मोबाइल की भी काल डिटेल्स खंगाली गई. जांच में पता चला कि मामा के मोबाइल पर एक भी फोन आरोपी का नहीं आया था. आरोपी की तलाश में पुलिस द्वारा लगातार दबिशें दिए जाने पर भी पुलिस के हाथ खाली थे. सरोज उर्फ पिंकी इटावा जनपद के थाना भरथना अंतर्गत गांव नगला नया कुर्रा निवासी रामप्रकाश यादव की बड़ी बेटी थी. स्वभाव से मिलनसार. पिंकी की शादी 2008 में मैनपुरी जनपद के कुर्रा थानांतर्गत गांव अंबरपुर सौंख निवासी रामदत्त यादव के बेटे यतेंद्र कुमार यादव के साथ हुई थी. यतेंद्र 2005 बैच का सिपाही है.

ससुरालीजनों ने बताया कि डेढ़ साल पहले यतेंद्र की तैनाती मथुरा जनपद के थाना हाइवे में हुई थी. ड्यूटी के दौरान यतेंद्र की मुलाकात उसी क्षेत्र की रहने वाली एक युवती से हुई. दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा तो वह यह भी भूल गया कि पहले से शादीशुदा है. सिपाही यतेंद्र अपनी प्रेमिका को ले कर फरार हो गया. जब ये बात प्रेमिका के घरवालों को पता चली तो उन्होंने थाना हाइवे में मुकदमा दर्ज करा दिया. इस संबंध में यतेंद्र कुमार सस्पेंड भी रहा था. 2 माह बाद युवती वापस आ गई और उस ने सिपाही यतेंद्र के पक्ष में बयान दिया था. बाद में यह मामला रफादफा हो गया था.

पति की इस करतूत से पिंकी को गहरी ठेस लगी. दोनों के बीच इस बात को ले कर तल्खी बढ़ गई. छोटीमोटी बातों को ले कर दोनों के बीच विवाद होने लगे. इस के चलते जीवन भर साथ निभाने वाली पत्नी पिंकी पति की नजरों में खटकने लगी थी. घटना के 3 दिन बाद मृतका पिंकी की तीनों बेटियां नाना के गांव नगला नया कुर्रा से 3-4 किलोमीटर दूर रौरा गांव की रोड पर मिलीं. उन्हें दिन के समय यतेंद्र छोड़ गया था. बच्चियों को देख कर गांववालों ने उन से पूछताछ की. इस पर सब से बड़ी लड़की आकांक्षा ने अपने नाना रामप्रकाश यादव के साथ ही गांव का नाम भी बता दिया.

पास का गांव होने के कारण गांव वाले उन के परिवार को जानते थे. गांव वालों ने तीनों बच्चियों को उन के गांव पहुंचा दिया. बच्चियों ने बताया कि पापा उन्हें कार से छोड़ कर चले गए थे. बच्चियों के मिलने की सूचना पुलिस को भी दे दी गई. आकांक्षा ने बताया कि उस ने पापा को मम्मी को गोली मारते देखा था. हम लोग डर गए थे. घटना के बाद आरोपी सिपाही की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता न मिलने पर एसएसपी सचिंद्र पटेल ने इसे गंभीरता से लिया और आरोपी पर 15 हजार का इनाम घोषित कर दिया. उन्होंने थानाप्रभारी अनिल कुमार को उस की गिरफतारी के भी निर्देश दिए.

पकड़ा गया आरोपी आखिर पुलिस की मेहनत रंग लाई. लौकडाउन में फरार चल रहे हत्यारोपी सिपाही यतेंद्र को पुलिस ने शिकोहाबाद के सुभाष तिराहे से लगभग एक माह बाद 24 मई की सुबह पौने 6 बजे तब गिरफ्तार कर लिया, जब वह कहीं जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहा था. सिपाही के कब्जे से 32 बोर की देशी पिस्टल भी बरामद हुई. इसी पिस्टल से उस ने अपनी पत्नी पिंकी की हत्या की थी. पुलिस ने सिपाही यतेंद्र के खिलाफ हत्या के साथ ही 25 आर्म्स एक्ट के अंतर्गत भी मुकदमा दर्ज किया. थाने में एसपी ग्रामीण राजेश कुमार ने प्रैसवार्ता में हत्यारोपी यतेंद्र कुमार यादव उर्फ सिंटू की गिरफ्तारी की जानकारी दी.

घटना के बाद वह बच्चियों को नाना के गांव के पास छोड़ गया था. पुलिस ने उस के घर से गिरफ्तारी से 15 दिन पूर्व कार बरामद कर ली थी. विवेचना में यह बात सामने आई कि सिपाही के एक युवती से प्रेम संबंधों को ले कर पिछले डेढ़ साल से पतिपत्नी के बीच कलह शुरू हो गई थी. यतेंद्र पत्नी पर मकान को बेचने का दबाव डालता था. 26 अप्रैल को यतेंद्र आगरा से शिकोहाबाद स्थित अपने घर आया हुआ था. पुरानी बातों को ले कर पतिपत्नी के बीच विवाद हो गया. मामला इतना बढ़ा कि यतेंद्र ने पत्नी सरोज उर्फ पिंकी के साथ मारपीट की. इस से भी जब उस का मन नहीं भरा तो उस ने साथ लाई देशी 32 बोर की पिस्टल से 4 गोलियां उस के सीने में उतार दीं.

घटना को अंजाम देने से पहले उस ने अपनी तीनों बेटियों को मकान के बाहर खड़ी कार में बैठा दिया था. बड़ी बेटी आकांक्षा अपने पिता की करतूत को पूरी तरह समझ गई थी, लेकिन पिता द्वारा धमकी देने से वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी थी. घटना को अंजाम देने के बाद सिपाही यतेंद्र तीनों बेटियों को ले कर फरार हो गया. गिरफ्तारी के बाद आरोपी सिपाही ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. सुंदर, सुशील पत्नी के होते हुए भी युवती से प्रेम संबंधों के चलते सिपाही यतेंद्र ने अपनी खुशहाल जिंदगी को ग्रहण लगा लिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Kanpur Crime : एकतरफा इश्क में आशिक ने प्रेमिका के पिता की ले ली जान

Kanpur Crime : मोहम्मद फहीम अपने पड़ोस की लड़की नाजनीन को बेइंतहा चाहता था. एक रात उस ने नाजनीन के पिता मोहम्मद अशरफ की हत्या कर दी. उस के बाद की जो हकीकत सामने आई, वह…

उस दिन जून 2020 की 9 तारीख थी. सुबह के यही कोई 8 बज रहे थे. थाना बाबूपुरवा के कार्यवाहक थानाप्रभारी सुरेश सिंह औफिस में आ कर बैठे ही थे कि उन्हें मोबाइल फोन पर सूचना मिली कि मुंशीपुरवा में एक अधेड़ व्यक्ति का कत्ल हो गया है. सुबहसुबह कत्ल की सूचना पा कर सुरेश सिंह का मन कसैला हो उठा. लेकिन मौकाएवारदात पर तो पहुंचना ही था. अत: उन्होंने कत्ल की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी और आवश्यक पुलिस बल साथ ले कर मुंशीपुरवा घटनास्थल पर पहुंच गए.  उस समय घटनास्थल पर मकान के बाहर भीड़ जुटी थी. भीड़ में से एक 20 वर्षीय युवक निकल कर सामने आया. उस ने थानाप्रभारी सुरेश सिंह को बताया कि उस का नाम इरफान है.

उस के अब्बू मोहम्मद अशरफ  का कत्ल हुआ है. उन की लाश छत पर पड़ी है. इस के बाद इरफान उन्हें छत पर ले कर गया. छत पर पहुंच कर सुरेश सिंह ने बारीकी से निरीक्षण शुरू किया. मृतक मोहम्मद अशरफ की लाश फोल्डिंग पलंग पर खून से तरबतर पड़ी थी. पलंग के नीचे भी फर्श पर खून फैला हुआ था. मोहम्मद अशरफ का कत्ल बड़ी बेरहमी से किसी तेज धार वाले हथियार से किया गया था. उस का गला आधे से ज्यादा कटा था. संभवत: ताबड़तोड़ कई वार गरदन पर किए गए थे, जिस से सांस नली कटने तथा अधिक खून बहने से उस की मौत हो गई थी.

मोहम्मद अशरफ की उम्र 50 साल के आसपास थी. कार्यवाहक थानाप्रभारी सुरेश सिंह अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसएसपी अनंत देव तिवारी, एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता तथा डीएसपी आलोक सिंह घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम तथा डौग स्क्वायड टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियोें के पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया. परिवार की महिलाएं दहाड़ मार कर चीखनेचिल्लाने लगीं. इस के बाद उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा मृतक के घर वालों से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की.

मृतक के बेटे इरफान ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि उस के पिता खरादी बुरादे का व्यापार करते थे. वह बीती शाम 7 बजे घर आए थे और खाना खाने के बाद रात 8 बजे सोने के लिए छत पर चले गए थे. पिता के साथ वह भी छत पर सोता था, लेकिन बीती रात वह टीवी देखतेदेखते कमरे में ही सो गया था. वह सुबह 6 बजे सो कर उठा और छत पर पहुंचा तो छत पर फोल्डिंग पलंग पर पिता का खून से लथपथ शव पड़ा देखा. शव देख कर उस के मुंह से चीख निकल गई. चीख सुन कर घर के अन्य लोग आ गए. इस के बाद तो घर में कोहराम मच गया.

घटनास्थल पर मृतक का भाई मोहम्मद नासिर भी मौजूद था. उस ने बताया कि वह सऊदी अरब में नौकरी करता है. उस के परिवार में पत्नी गुलशन बानो तथा 2 साल का बेटा है. 3 महीने पहले वह सऊदी अरब से परिवार सहित कानपुर आया था और भाईजान के घर परिवार के साथ रह रहा था. सुबह इरफान की चीख सुनाई दी तो वह दौड़ कर छत पर पहुंचा. वहां भाईजान पलंग पर मृत पड़े थे. किसी ने बड़ी बेरहमी से उन का कत्ल कर दिया था. मां रईसा को जानकारी हुई तो वह गश खा कर जमीन पर गिर पड़ीं. किसी तरह उन्हें होश में लाया गया. घटनास्थल पर फोरैंसिक टीम ने बड़ी ही बारीकी से जांच शुरू की. टीम ने खून का नमूना परीक्षण हेतु सुरक्षित किया फिर पलंग व आसपास से कई फिंगरप्रिंट लिए.

फोरैंसिक टीम ने जांच के बाद यह भी पाया कि हत्यारा छत पर या तो सीढ़ी लगा कर पहुंचा था या फिर छत से सटी दूसरे मकान की बाउंड्री फांद कर आया था. फिर उसी रास्ते वापस चला गया. डौग स्क्वायड की टीम खोजी कुत्ते को ले कर छत पर पहुंची. कुत्ते ने मृतक के शव को तथा छत के फर्श पर पड़े खून को सूंघा फिर वह पलंग के चारों ओर घूमता रहा. उस के बाद पड़ोसी की छत पर जाने के लिए उछलने लगा. लेकिन बाउंड्री वाल ऊंची थी, सो उछल कर दीवार फांद नहीं पा रहा था. यह देख कर टीम के सदस्यों ने लकड़ी की सीढ़ी मंगा कर छत पर लगाई. सीढ़ी के सहारे पड़ोसी की छत पर पहुंचे खोजी कुत्ते ने छत पर पड़े

खून के छींटों को सूंघना शुरू कर दिया. उस के बाद खोजी कुत्ता छत से नीचे उतरा और घटनास्थल से कुछ दूर स्थित मैदान में पहुंचा. वहां मैदान में खड़े एक युवक को सूंघ कर उस पर भौंकने लगा. तभी टीम ने उस युवक को पकड़ लिया और पुलिस अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया. पुलिस अधिकारियों ने जब उस से पूछताछ की तो उस ने अपना नाम मोहम्मद फहीम उर्फ नदीम बताया. जिस छत पर खोजी कुत्ता फांद कर गया था और खून की छींटे सूंघे थे, वह मकान मोहम्मद फहीम का ही था.

संदेह के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद फहीम को गिरफ्तार कर लिया. फोरैंसिक टीम व पुलिस ने मोहम्मद फहीम के घर की तलाशी ली तो वहां फहीम के ऐसे गीले कपड़े मिले, जो शायद सुबह ही धोए थे. उन कपड़ों पर बेंजामिन टेस्ट किया तो खून के धब्बे उभर आए. इस के अलावा उस के घर से एक चापड़ भी बरामद हुआ. मय चापड़ और कपड़ों सहित मोहम्मद फहीम को थाना बाबूपुरवा लाया गया तथा मृतक मोहम्मद अशरफ के शव को पोस्टमार्टम हाउस लाला लाजपत राय अस्पताल भेज दिया गया. एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता तथा सीओ आलोक सिंह ने जब थाने में मोेहम्मद फहीम से अशरफ की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया और पुलिस अधिकारियों को बरगलाने लगा.

लेकिन हत्या का सबूत मिल चुका था और उस के घर से खून सने कपड़े तथा आला कत्ल भी बरामद हो चुका था. अत: पुलिस ने उस पर सख्ती की तो वह टूट गया. इस के बाद उस ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह पड़ोसी मोहम्मद अशरफ की बेटी नाजनीन से मोहब्बत करता था. पर वह मुंबई चला गया और वहां नौकरी करने लगा. 3 साल बाद फरवरी 2020 में वह मुंबई से वापस कानपुर आया. अब तक नाजनीन जवान हो गई थी और खूबसूरत दिखने लगी थी. उसे देख कर उस की सोती हुई मोहब्बत फिर से जाग उठी और उसे एकतरफा प्यार करने लगा. उस ने सोच लिया था कि उस की मोहब्बत में जो भी बाधक बनेगा, उसे मिटा देगा. नाजनीन की मोहब्बत में उस का बाप मोहम्मद अशरफ बाधक बनने लगा तो बीती रात उसे चापड़ से काट कर हलाल कर दिया.

चूंकि मोहम्मद फहीम ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: बाबूपुरवा थाना प्रभारी (कार्यवाहक) सुरेश सिंह ने मृतक के बेटे इरफान को वादी बना कर भादंवि की धारा 302 के तहत मोहम्मद फहीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत बंदी बना लिया. पुलिस जांच में एक ऐसे सनकी प्रेमी की कहानी प्रकाश में आई, जिस ने एकतरफा प्यार में पागल हो कर प्रेमिका के बाप को मौत की नींद सुला दिया. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में बाबूपुरवा थाना अंतर्गत एक मुसलिम बाहुल्य आबादी वाला मोहल्ला मुंशीपुरवा पड़ता है. इसी मुंशीपुरवा में मसजिद के पास मोहम्मद अशरफ अपने परिवार के साथ रहता था.

उस के परिवार में पत्नी शबनम के अलावा एक बेटी नाजनीन तथा बेटा इरफान था. मोहम्मद अशरफ खरादी बुरादे का व्यापार करता था. इस व्यापार में मेहनतमशक्कत तो थी, पर कमाई भी अच्छी थी. इसी कमाई से वह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. मोहम्मद अशरफ के साथ उस की मां रईसा खान तथा भाई नासिर भी रहता था. नासिर की शादी गुलशन बानो के साथ हुई थी. शादी के बाद नासिर सऊदी अरब चला गया था. अब वह तभी आता था, जब उसे घरपरिवार की याद सताती थी. अशरफ मेहनत की रोटी खा कर परिवार के साथ खुश रहता था. परंतु उस की खुशियों में ग्रहण तब लगना शुरू हो गया जब उस की बेगम शबनम बीमार रहने लगी.

फिर बीमारी के दौरान ही सन 2010 में उस की मृत्यु हो गई. उस समय नाजनीन की उम्र 10 वर्ष तो इरफान की 9 साल थी. शबनम की मौत के बाद बच्चों के पालनपोषण की जिम्मेदारी अशरफ की मां रईसा खान पर आ गई. रईसा खान ने इस जिम्मेदारी को खूब निभाया और पालपोस कर बच्चों को बड़ा किया. रईसा खान अपने पोतेपोती को बहुत प्यार करती थी और उन की हर जायज ख्वाहिश पूरी करती थी. फहीम उर्फ नदीम नाजनीन का दीवाना था. वह उस के पड़ोस में ही रहता था. फहीम और नाजनीन हमउम्र थे. दोनों एक ही गली में खेलकूद कर बड़े हुए थे. दोनों एकदूसरे को जानतेपहचानते थे और अकसर उन का आमनासामना हो जाता था. फहीम मन ही मन नाजनीन को चाहने लगा था.

पर नाजनीन के मन में उस के प्रति कोई लगाव न था. वह तो पड़ोसी के नाते उस से भाईजान कह कर बात करती थी. फहीम के 2 अन्य भाई भी थे, जो उसी मकान में रहते थे. फहीम सिलाई कारीगर था. वह जो कमाता था, अपने ऊपर ही खर्च करता था, इसलिए बनसंवर कर खूब ठाटबाट से रहता था. फहीम अपने प्यार का इजहार नाजनीन से कर पाता, उस के पहले ही वह मुंबई कमाने चला गया. मुंबई जा कर भी वह नाजनीन को भुला न सका. उस के मनमस्तिष्क पर नाजनीन ही छाई रही. वह उसे अपने दिल की मल्लिका बनाने के सपने संजोता रहा. पर सपना तो सपना ही होता है. भला सपने से कभी किसी  के ख्वाब पूरे नहीं हुए.

देश में तालाबंदी घोषित होेने के एक माह पहले ही फहीम मुंबई से कानपुर अपने घर वापस आ गया. कमाई कर के वह जो पैसे लाया था, उसे अपने ऊपर और अपने दोस्तों पर खर्च करता. भाइयों ने उस की इस फिजूलखर्ची का विरोध किया तो वह उन पर हावी हो गया. अब वह दोस्तों के साथ मौजमस्ती तथा शराब पीने लगा. एक रोज नाजनीन किसी काम से घर से निकली तभी फहीम की नजर उस पर पड़ी. खूबसूरत नाजनीन को देख कर फहीम का मन मचल उठा. 3 साल पहले जब उस ने नाजनीन को देखा था तब वह 16 वर्ष की थी. किंतु अब वह 19 साल की उम्र पार कर चुकी थी. अब वह पहले से ज्यादा खूबसूरत दिखने लगी थी.

फहीम की आंखों में पहले से ही नाजनीन रचीबसी थी सो अब उसे देखते ही उस का मन बेकाबू होने लगा था. अब वह नाजनीन को फंसाने का तानाबाना बुनने लगा. मौका मिलने पर वह उस से बात करने का प्रयास करता था. लेकिन नाजनीन उसे झिड़क देती थी. तब फहीम खिसिया जाता. आखिर जब उस के सब्र का बांध टूट गया तो उस ने एक रोज मौका मिलने पर नाजनीन का हाथ पकड़ लिया और बोला, ‘‘नाजनीन, मैं तुम से बेइंतहा मोहब्बत करता हूं. तुम्हारी खूबसूरती ने मेरा चैन छीन लिया है. तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूं.’’

नाजनीन अपना हाथ छुड़ाते हुए गुस्से से बोली, ‘‘फहीम, तुम ये कैसी बहकी बातें कर रहे हो. मैं तुम्हारी जातिबिरादरी की हूं और इस नाते तुम मेरे भाईजान लगते हो. भाई को बहन से इस तरह की बातें करते शर्म आनी चाहिए.’’

‘‘प्यार अंधा होता है नाजनीन. प्यार जातिबिरादरी नहीं देखता.’’ वह बोला.

‘‘होगा, लेकिन मैं अंधी नही हूं. मैं ऐसा नहीं कर सकती. मैं तुम से नफरत करती हूं. और हां, आइंदा मेरा रास्ता रोकने या हाथ पकड़ने की कोशिश मत करना, वरना मुझ से बुरा कोई न होगा, समझे.’’ नाजनीन ने धमकाया. कुछ देर बाद नाजनीन घर वापस आई तो वह परेशान थी. वह समझ गई कि फहीम एकतरफा प्यार में पागल है. उस ने यह सोच कर फहीम की शिकायत घर वालों से नहीं की कि अब्बूजान बेमतलब परेशान होंगे. बात बढ़ेगी. बतंगड़ होगा. फिर लोग उस के चरित्र पर अंगुलियां उठाना शुरू कर देंगे.

इधर नाजनीन की फटकार से फहीम समझ गया कि नाजनीन अब ऐेसे नहीं मानेगी. उसे अपनी खूबसूरती और जवानी पर इतना घमंड है तो वह उस के घमंड को हर हाल में तोड़ कर रहेगा. वह उसे ऐसा दर्द देगा, जिसे वह ताजिंदगी नहीं भुला पाएगी. फहीम का एक दोेस्त सलीम था. दोनों ही हमउम्र थे, सो दोनों में खूब पटती थी. एक रोज दोनों शराब पी रहे थे. उसी समय फहीम बोला, ‘‘यार सलीम, मैं नाजनीन से मोहब्बत करता हूं लेकिन वह हाथ नहीं रखने दे रही.’’

‘‘देख फहीम, मैं एक बात बताता हूं कि नाजनीन ऐसीवैसी लड़की नहीं है. उस का पीछा छोड़ दे. कहीं ऐसा न हो कि उस का पंगा तुझे भारी पड़ जाए.’’ सलीम ने फहीम को समझाया.

‘‘अरे छोड़ इन बातों को, मैं भी जिद्दी हूं. नाजनीन अगर राजी से न मानी तो मुझे दूसरा रास्ता अपनाना पड़ेगा.’’ फहीम ने कहा.

इस के बाद फहीम फिर से नाजनीन को छेड़ने लगा. फहीम ने नाजनीन पर लाख डोरे डालने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे बेइज्जती का सामना करना पड़ा. फहीम की बढ़ती छेड़छाड़ से नाजनीन को अब डर सताने लगा था. अत: एक रोज उस ने फहीम की बदतमीजी तथा डोरे डालने की शिकायत दादी रईसा खान तथा अब्बू अशरफ से कर दी. नाजनीन की बात सुन कर जहां रईसा तिलमिला उठीं, वहीं अशरफ का भी गुस्सा फूट पड़ा. पहले रईसा ने फहीम को खूब खरीखोेटी सुनाई फिर अशरफ ने भी फहीम को जम कर लताड़ा तथा बेटी से दूर रहने की नसीहत दी. अशरफ ने फहीम की शिकायत उस के भाइयों से भी की तथा उसे समझाने को कहा. उस ने साफ  कहा कि वह इज्जतदार इंसान है. बेटी से छेड़छाड़ बरदाश्त न करेगा.

अशरफ ने उलाहना दिया तो दोनों भाइयों ने फहीम को खूब समझाया तथा नाजनीन से दूर रहने की नसीहत दी. लेकिन फहीम पर तो इश्क का भूत सवार था. वह तो एकतरफा प्यार में दीवाना था, सो उसे भाइयों की नसीहत पसंद नहीं आई. एक रोज फहीम ने गली के मोड़ पर नाजनीन को रोका और उस का हाथ पकड़ लिया. गुस्साई नाजनीन ने फहीम के हाथ पर दांत गड़ा कर अपना हाथ छुड़ा लिया और बोली, ‘‘बदतमीज, अपनी हरकतों से बाज आ, वरना अंजाम अच्छा नहीं होगा.’’

नाजनीन की बात सुन कर फहीम भी गुस्से से बोला, ‘‘नाजनीन, यही बात मैं तुझे बता रहा हूं. मेरी मोहब्बत को स्वीकार कर ले और मुझे अपना बना ले. वरना कान खोल कर सुन ले, मेरी मोहब्बत में जो भी बाधा डालेगा, उसे मैं मिटा दूंगा. फिर वह तुम्हारा बाप, भाई या कोई और क्यों न हो.’’

जून, 2020 की 3 तारीख को फहीम ने पुन: नाजनीन से छेड़छाड़ की. इस की शिकायत उस ने पिता से की. शिकायत सुन कर अशरफ तिलमिला उठा. उस ने फहीम को खूब खरीखोटी सुनाई और कहा कि वह अंतिम बार उसे चेतावनी दे रहा है. इस के बाद उस ने हरकत की तो थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज करा देगा और जेल भिजवा देगा. फहीम पहले से ही उस पर खार खाए बैठा था. अत: अशरफ ने जब उसे जेल भिजवाने की धमकी दी तो उस की खोपड़ी घूम गई. उस ने अपने प्रेम में बाधक बने प्रेमिका के पिता अशरफ को मौत की नींद सुलाने का इरादा पक्का कर लिया. फिर वह अंजाम की तैयारी में जुट गया. उस ने तेजधार वाले चापड़ का इंतजाम किया फिर उसे घर में छिपा कर रख लिया.

8 जून, 2020 की रात फहीम ने अपनी छत की बाउंड्री से झांक कर देखा तो पता चला कि अशरफ आज रात अकेला ही छत पर सोया है. उचित मौका देख कर फहीम चापड़ ले आया फिर रात 2 बजे सीढ़ी लगा कर अशरफ की छत पर पहुंच गया. फहीम ने नफरत भरी एक नजर अशरफ पर डाली फिर चापड़ से खचाखच 4 वार अशरफ की गरदन पर किए. उस की गरदन आधी से ज्यादा कट गई और खून की धार बह निकली. अशरफ कुछ क्षण तड़पा फिर ठंडा हो गया.

हत्या करने के बाद सीढ़ी के रास्ते फहीम अपनी छत पर आ गया. यहां चापड़ पर लगे खून की कुछ बूंदे छत पर टपक गईं. नीचे जा कर उस ने कपड़े बदले और चापड़ में लगे  खून को साफ  किया. फिर कपड़ों और चापड़ को धो कर घर में छिपा दिए और कमरे में जा कर सो गया. मोहम्मद फहीम से पूछताछ के बाद पुलिस ने 10 जून, 2020 को उसे कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया.

कथा संकलन तक उस की जमानत स्वीकृत नहीं हुई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

नाजनीन परिवर्तित नाम है.

 

Etawah News : देवर के इश्क में सुहाग की बलि

Etawah News : 2 बच्चों की मां बनने के बावजूद मधु के अवैध संबंध फुफेरे देवर रोहित के साथ हो गए. अवैध संबंधों की राह पर वह ऐसी फिसली कि संभल नहीं पाई. साथ ही उस ने प्रेमी के साथ मिल कर ऐसे क्राइम को अंजाम दिया, जिस की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.

उस रोज मधु ने मस्टर्ड कलर की साड़ी और ब्लैक कलर का ब्लाउज पहन रखा था. इन कपड़ों में उस का गोरा रंग खूब खिल रहा था. रोहित कुछ देर उसे एकटक देखता रहा, फिर मुसकराते हुए बोला, ”भाभी, बुरा न मानो तो एक बात कहूं?’’

मधु के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. वह सवालिया नजरों से रोहित को देखने लगी. रोहित ने उस की झील सी आंखों में झांकते हुए कह दिया, ”तुम बहुत हसीन हो भाभी, हजारों में न सही, लेकिन सैकड़ों में एक जरूर हो.’’

अपनी तारीफ सुन कर मधु के गाल गुलाबी हो गए. बरबस उस के होंठों पर मुसकान तैर गई. वह मन की खुशी को छिपाते हुए बोली, ”चलो हटो, आजकल तुम बातें बनाना सीख गए हो.’’

”मैं सच कहता हूं भाभी, ”रोहित उत्साह में आ कर उस के सामने आ खड़ा हुुआ, ”कहो तो मैं सबूत भी दे सकता हूं कि आज तुम कितनी हसीन लग रही हो.’’

मधु ने गौर से रोहित को देखा फिर थोड़ी अदा से कहा, ”दो सबूत?’’

”मेरी आंखों में देखो, आईना तो झूठ बोल सकता है, पर मेरी आंखें झूठ नहीं बोलेंगी. आंखों में तुम्हारा अक्स जो कैद है, वह दुनिया की सब से हसीन औरत का है.’’ रोहित ने बड़े प्यार से मधु को देखा.

मधु के होंठों पर शरारत तैर गई. उस ने रोहित की आंखों में देखा, फिर निचला होंठ दबाते हुए बोली, ”चल झूठे, तेरी आंखों में तो मुझे कुछ और ही दिखाई दे रहा है.’’

”तुम्हारी तसवीर के सिवाय कुछ और हो ही नहीं सकता. बताओ, तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है?’’

”एक तमन्ना… एक प्यास,’’ मधु ने मादक स्वर में कहा.

”भाभी, जब तुम ने मेरी तमन्ना देख ही ली है तो उसे पूरी कर दो न.’’ रोहित ने हिम्मत जुटा कर मधु का हाथ पकड़ लिया.

”कर दूंगी, वक्त आने दो.’’ मधु ने रोहित के गाल पर प्यार की चपत लगाई.

”कब भाभी, आखिर कितना इंतजार कराओगी?’’

”ज्यादा नहीं, सिर्फ एक दिन का.’’ मधु नशीली नजरों से देवर को देख कर बोली, ”अब हाथ तो छोड़ दो.’’

”पहले वादा करो भाभी, तभी हाथ छोड़ूंगा.’’

”पक्का वादा.’’ मधु ने कहा तो रोहित ने उस का हाथ छोड़ दिया.

उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद का एक चर्चित कस्बा है लखुना. यह कस्बा सोनेचांदी के व्यवसाय के लिए दूरदूर तक मशहूर है. ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर लोग शादीविवाह में इसी कस्बे से आभूषण बनवाते हैं.

इसी लखुना कस्बे में रामबाबू अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रामबेटी के अलावा 2 बेटे अजय, अमर तथा 2 बेटियां राधा व मधु थीं. रामबाबू पढ़ालिखा तो न था, लेकिन आभूषण बनाने का उम्दा कारीगर था. वह ज्वैलरी की दुकान में काम करता था. उस के परिवार का भरणपोषण उस की सैलरी से होता था.

मधु भाईबहनों में सब से छोटी थी. वह अपने अन्य भाईबहनों से ज्यादा सुंदर थी. पढ़ाईलिखाई में भी तेज थी. हाईस्कूल पास कर के वह आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती थी, लेकिन मम्मीपापा उसे आगे पढ़ाने के पक्ष में नहीं थे. वह पढ़ाई छोड़ कर मम्मी के साथ घरेलू काम में हाथ बंटाने लगी. हालांकि वह मम्मीपापा के इस निर्णय से खुश नहीं थी.

मधु ने सोलहवां वसंत पार किया तो रामबाबू को उस के ब्याह की चिंता सताने लगी. एक कहावत है, ‘जब बेटी हुई सयानी, फिर पेटे नहीं समानी.’ इसी कहावत के चरितार्थ रामबाबू भी अपनी बेटी की शादी के लिए योग्य लड़का ढूंढने लगा. काफी दौड़धूप के बाद उस की नजर मनोज कुमार पर जा कर ठहर गई.

मनोज कुमार के पापा तहसीलदार, इटावा जिले के इकदिल कस्बा में रहते थे. परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी रागिनी तथा बेटा मनोज कुमार था. रागिनी की शादी वह आगरा के बाह कस्बा निवासी श्याम सिंह के साथ कर चुके थे. श्याम सिंह डाक्टर था.

मनोज अभी कुंवारा था. मनोज रंगरूप से तो सांवला था, लेकिन शरीर से मजबूत था. पढ़ालिखा भी था. सरकारी नौकरी की तलाश में उस ने जूते घिसे. लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो वह कस्बे में ही प्राइवेट नौकरी करने लगा. कुछ खेती की जमीन भी थी, उस की भी देखभाल मनोज ही करता था. रामबाबू ने मनोज को अपनी बेटी मधु के लिए पसंद कर लिया. रिश्ता तय होने के बाद फरवरी, 2010 में मधु का विवाह मनोज कुमार के साथ धूमधाम से हो गया.

सुहाग के जोड़े में सजीधजी मधु पहली बार ससुराल आई तो मुंह दिखाई रस्म में सभी ने उस के रूपरंग की तारीफ की. मनोज भी मधु जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर खुश था. वह अपने भाग्य पर इतरा उठा था. सब खुश थे, लेकिन मधु खुश नहीं थी. उस ने जिस तरह के पति की कल्पना की थी, मनोज वैसा नहीं था.

मधु ने सपना संजो रखा था कि उस का पति हैंडसम, तेजतर्रार और आधुनिक विचारों वाला होगा. जबकि मनोज उस की अपेक्षाओं से बिलकुल विपरीत था. सांवले रंग का मनोज देहाती भाषा बोलता था और रहनसहन भी साधारण था.

लेकिन अब जैसा भी था, मनोज उस का पति था. मन मसोस कर मधु ने जीवन की शुरुआत की. धीरेधीरे कई साल बीत गए. इस बीच मधु 2 बेटों अमित व सुमित की मां बनी. 2 बच्चों के जन्म से घर में खुशियां तो बढ़ गईं, लेकिन आर्थिक बोझ भी बढ़ गया. मनोज अधिक कमाई की सोचने लगा. लेकिन उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह कौन सा काम करे, जिस से उस की आमदनी में इजाफा हो.

काफी सोचविचार के बाद उस ने घरों में ब्रेड, चाय, बिसकुट सप्लाई का काम शुरू कर दिया. इस धंधे से उस की अतिरिक्त कमाई तो होने लगी, लेकिन इस काम से वह बहुत थम जाता था.

मधु की सास की मौत हो चुकी थी. अत: घर की चाबी उसी के हाथ में थी. मनोज नौकरी व व्यवसाय में जो भी कमाई करता था, वह सब मधु के हाथ पर ही रखता था. खेती से होने वाली आमदनी का हिसाब भी मधु ही रखती थी. मधु के ससुर तहसीलदार नाममात्र के घर के मालिक थे. वह तो केवल घर खेत की रखवाली करते थे. खेतों पर उन्होंने झोपड़ी बना रखी थी. उन का ज्यादा समय खेतों पर ही बीतता था. वह केवल खाना खाने घर आते थे.

मनोज कड़ी मेहनत करता था. वह सुबह उठ कर फेरी लगाता, फिर 10 बजे नौकरी पर चला जाता तो फिर रात गए ही लौटता था. थकान के बहाने वह शराब भी पीने लगा था. धीरेधीरे वह शराब का लती हो गया. मधु शराब पीने को मना करती तो वह उस पर नाराज हो जाता था.

मधु 2 बच्चों की मां जरूर बन गई थी, लेकिन उस के रूपरंग में अभी भी कोई कमी नहीं आई थी. वह बनसंवर कर रहती थी. दूसरी तरफ मनोज का मन सैक्स से हट गया था. 2 बच्चे पैदा करने के बाद उस ने पत्नी की भावनाओं को समझना बंद कर दिया था. मधु हर रात पति का साथ चाहती थी, लेकिन शराब का लती मनोज उस का साथ नहीं दे पाता था. नतीजा यह निकला कि मधु पति से किनारा कर के अपने लिए जिस्म का साथी तलाशने लगी.

इन्हीं दिनों मधु की निगाह रोहित पर पड़ी. रोहित थाना एकदिल के गांव बुसा का रहने वाला था. रिश्ते में मनोज रोहित का ममेरा भाई यानी मामा का बेटा था. इस नाते मनोज की पत्नी मधु और रोहित के बीच देवरभाभी का रिश्ता था.

25 वर्षीय रोहित गबरू जवान था. वह एलआईसी व पोस्ट औफिस का एजेंट था. बचत योजनाओं में लोगों का पैसा जमा कराता था और अच्छी कमाई करता था, जिस से वह ठाटबाट से रहता था. मधु भी पोस्ट औफिस में पैसा जमा करने जाती थी, अत: उस का मधु के घर आनाजाना लगा रहता था. रोहित रसभरी लच्छेदार बातें करता था, इसलिए मधु से उस की खूब पटती थी.

उम्र में रोहित मधु से 5 साल छोटा था. दोनों का देवरभाभी का रिश्ता था, सो उन के बीच खूब हंसीमजाक होती थी. मधु भी उस की बातों में खूब रस लेती थी. उस के मन के किसी कोने में जैसे साथी की तसवीर थी, वह रोहित जैसी ही थी.

यही वजह थी कि मधु रोहित को चाहने लगी थी. रोहित तो वैसे ही उस का दीवाना था. वह मधु भाभी से प्रीत जोड़ कर अपनी तन्हाइयों से निजात पाने के सपने देखा करता था.

उस रोज जब रोहित घर आया तो वह मधु के रूपरंग की तारीफ करने लगा और अपनी रसभरी बातों से मधु को रिझाने लगा. इस से मधु का दिल उमंगों से भर गया. उधर रोहित भी भाभी के लिए बेताब था. उस ने वह रात सपने संजोतेसंजोते गुजारी. अगले दिन उस की चाहत पूरी होने वाली थी.

रोहित सुबह देर से जागा. दोपहर हुई तो तैयार हो कर बाइक से मधु के घर की ओर रवाना हो लिया. लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय कर वह मधु के घर पहुंच गया. मधु उसी का इंतजार कर रही थी. उस दिन उस ने अपने आप को कुछ खास तरह से संवारा था. रोहित ने कमरे में पहुंचते ही मधु को अपनी बांहों में समेट लिया, ”भाभी, आज तो हूर की परी लग रही हो. जी चाहता है कि…’’

”थोड़ा सब्र से काम लो देवरजी,’’ मधु ने प्यार से उसे एक चपत लगाई, ”मैं दरवाजा तो बंद कर लूं.’’

 

रोहित ने मधु को बाहुपाश से मुक्त कर दिया. मधु दरवाजे तक गई, बाहर का जायजा लिया. बाहर दोपहर का सन्नाटा था. मधु ने दरवाजा बंद किया और मुसकान बिखेरती हुई रोहित के सामने आ खड़ी हुई. ख्वाबों की तसवीर अब उस के सामने थी. रोहित बावला सा हो गया. उस ने मधु को बाहुपाश में भरा और बिस्तर पर ले गया. इस के बाद तो कमरे में सीत्कार की आवाजें गूंजने लगीं. दोनों के जिस्म तभी जुदा हुए, जब उन्हें तृप्ति मिल गई.

उस दोपहर अनीति की आग में मर्यादा स्वाहा हुई तो फिर यह खेल अकसर खेला जाने लगा. मधु को रोहित पसंद था. उसे उस की बांहों में असीम सुख मिलता था. देवर से अवैध रिश्ता बना तो मधु पति को तनमन से भूल सी गई. उस ने उस की परवाह करनी भी बंद कर दी. यही नहीं, मधु रोहित के साथ बाइक पर बैठ कर बाजार में घूमने भी जाने लगी.

छिप न सके दोनों के अवैध संबंध

जब देवरभाभी की हर दोपहर रंगीन होने लगी तो बातें बाहर भी फैलने लगीं. इसी बीच एक रोज गांव का एक युवक खेतों पर पहुंचा और झोपड़ी में बैठे मनोज के पिता तहसीलदार से बोला, ”दद्ïदा, आप तो यहां खेतों पर पड़े रहते हो. घर में क्या अनर्थ हो रहा है, तुम्हें कुछ पता भी है?’’

”मेरे घर में और अनर्थ? यह तुम कैसी बातें कर रहे हो?’’ तहसीलदार ने प्रश्न किया.

”दद्ïदा, नहीं पता है तो सुनो. बुसा गांव का रिश्तेदार रोहित अकसर तुम्हारे घर दोपहर में आता है. उस के आते ही तुम्हारी बहू मधु दरवाजा बंद कर लेती है. आप तो बुजुर्ग हैं. बंद दरवाजे के भीतर बहू क्या गुल खिलाती होगी, आप को भी समझना चाहिए.’’

युवक तो अपनी बात कह कर बीड़ी फूंकता हुआ चला गया, लेकिन तहसीलदार के मन में शंकाओं के बादल उमडऩेघुमडऩे लगे. वह सोचने लगा, ‘रोहित खास रिश्तेदार है. क्या वह वास्तव में उस की पीठ में इज्जत का छुरा घोंप रहा है. जल्द ही असलियत का पता लगाना होगा. मनोज को भी अलर्ट करना होगा.’

असलियत जानने के लिए तहसीलदार ने घर की निगरानी शुरू कर दी. चंद दिनों में ही उसे पता चल गया कि बहू मधु बदचलन है. उस का रोहित से टांका भिड़ा है. दोनों बंद कमरे में मर्यादा को तारतार करते हैं. उन्होंने इस बाबत मनोज को अलर्ट किया कि वह अपनी पत्नी मधु व घर पर आने वाले रोहित पर नजर रखे. उन के बारे में पूरे मोहल्ले में खुसरफुसर हो रही है.

मनोज ने इस बाबत मधु से बात की तो वह उसे ही आंखें दिखाते हुए बोली, ”लोगों के बहकावे में आ कर मेरे कैरेक्टर पर शक करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आई. रोहित रिश्ते में मेरा देवर है. पोस्ट औफिस की किस्त लेने घर आता है. देवरभाभी के रिश्ते से हम दोनों हंसीमजाक कर लेते हैं. कमाल है, पासपड़ोस के लोग देवरभौजाई के रिश्ते को भी शक की नजर से देखते हैं.’’

आधी रात को चूडिय़ों की आवाज ने खोली पोल

मनोज के पास पत्नी की चरित्रहीनता का कोई सबूत तो था नहीं, सो वह चुप रह गया. उस ने सोचा कि जब तक सच अपनी आंखों से नहीं देखेगा, किसी की बात पर विश्वास नहीं करेगा. मनोज चुप हो गया तो मधु ने इसे अपनी जीत मान लिया. एक महीने तक वह रोहित से दूर रही. उस के बाद फिर अनीति की आग में बदन सिंकने लगे.

उस रोज भी मनोज रोजाना की तरह सुबह 10 बजे ड्यूटी गया था. उस के जाने के बाद ही रोहित उस के घर आ गया. उसी समय मनोज वापस आ गया. मधु और रोहित वासना के नशे में चूर थे. जल्दबाजी में दोनों अंदर से दरवाजा बंद करना भी भूल गए. उढ़का हुआ दरवाजा आहिस्ता से खोल कर मनोज सीधा कमरे में पहुंच गया. वहां का नजारा देख कर उस की आंखें गुस्से से लाल हो गईं.

मधु और रोहित रंगेहाथों पकड़े गए तो दोनों अपराधबोध से कांपने लगे. मनोज ने दोनों की खबर ली. मौके की नजाकत समझ कर मधु ने पति से अपनी गलती की माफी मांग ली. इस के साथ ही उस ने कसम खाई कि भविष्य में वह रोहित से किसी प्रकार का संबंध नहीं रखेगी. रोहित ने भी मनोज के पैर पकड़ते हुए कहा, ”बड़े भैया, मुझ से बड़ी भूल हो गई, इस बार माफ कर दो. आइंदा ऐसी भूल नहीं होगी.’’

मनोज ने देवरभाभी को इसलिए माफ कर दिया था ताकि मोहल्ले में घर की इज्जत नीलाम न हो. लेकिन इस के बाद वे दोनों पर कड़ी नजर रखने लगा. जिस दिन मनोज रोहित को घर में देख लेता तो उसे फटकार लगाता. मधु जवाबसवाल करती तो वह उस की पिटाई कर देता, परंतु पति की मार का मधु पर कोई असर नहीं पड़ता था. वह रोहित के प्यार में इस कदर पागल थी कि एक दिन भी उस से अलग नहीं रहना चाहती थी. रोहित को भी मधु के बिना चैन नहीं था.

रोहित अब अकसर संडे के दिन आता था. उस दिन मनोज की भी छुट्टी रहती थी, इसलिए वह घर पर ही मिलता था. ऐसा वह इसलिए करता था ताकि आने पर मनोज को शक न हो. उस रोज मधु स्वादिष्ट खाना बनाती थी. शाम को दोनों बैठ कर शराब पीते थे, फिर खाना खाते थे. मधु बड़ी चालाकी से मनोज की सब्जी में नींद की गोलियां पीस कर मिला देती थी. नतीजन खाने के बाद मनोज चारपाई पर लेटता तो कुछ देर बाद उसे नींद आ जाती थी. मनोज जब खर्राटे भरने लगता तो रोहित मधु के कमरे में पहुंच जाता. फिर दोनों रंगरलियां मनाते.

लेकिन मधु की यह चाल ज्यादा समय तक न चली और उस का यह भांडा भी फूट गया. दरअसल, उस रोज मनोज की तबियत कुछ नरम थी. इसलिए उस ने लती होने के बावजूद रोहित के साथ बैठ कर शराब नहीं पी. वह कमरे में जा कर लेट गया. उस ने खाना भी कमरे में ही मंगवा लिया. मधु ने खाने में नशीली गोलियां तो मिलाई थीं, लेकिन उस ने खाना आधाअधूरा ही खाया और थाली चारपाई के नीचे रख दी. कुछ देर बाद मधु उस के कमरे में पहुंची तो मनोज करवट लिए लेटा था. मधु ने समझा कि वह गहरी नींद में है. कुछ देर बाद वह रोहित के बिस्तर पर पहुंच गई.

आधी रात के बाद मनोज पेशाब करने के लिए उठा तो उस के बगल में सो रही मधु गायब थी. वह दबे पांव कमरे से निकल कर आंगन में आ गया. आंगन में आते ही मनोज के पांव ठिठक गए. आंगन से सटे कमरे में फुसफुसाहट और चूडिय़ों के खनकने की आवाजें आ रही थीं. मनोज सधे कदमों से कमरे के पास पहुंचा. दरवाजा उढ़का हुआ था, उस ने दरवाजा ढकेला तो खुल गया. कमरे के अंदर रोहित और मधु निर्वस्त्र हो कर एकदूसरे से गुंथे थे.

रिश्ते के भाई रोहित के साथ मधु को रंगरलियां मनाते देख कर मनोज की मर्दानगी जाग उठी. उस ने पहले दोनों को जलील किया और फिर जम कर मधु की पिटाई की. सुबह उस ने रोहित को भी फटकारा और घर आने को साफ मना कर दिया. अपराधबोध के चलते रोहित चला गया. उस ने मनोज के घर आना बंद कर दिया. रोहित का घर आना बंद हुआ तो मनोज ने राहत की सांस ली, लेकिन यह उस की भूल थी. मधु और रोहित कुछ महीनों तक एकदूसरे से दूर रहे और मोबाइल फोन के जरिए अपनी दिल की लगी बुझाते रहे. उस के बाद उन का फिर से मिलन होने लगा.

मधु रोहित की इस कदर दीवानी थी कि उसे उस के बिना कुछ भी नहीं सुहाता था. अब वह सागभाजी या घर का सामान लाने का बहाना बना कर घर से निकलती और पहुंच जाती रोहित के बताए स्थान पर. जिस्मानी मिलन के बाद मधु घर आ जाती थी. एक रोज मनोज दोपहर में घर आ गया. उस समय घर में ताला लगा था. उस ने पड़ोसियों से मधु के बारे में पूछा तो पता चला कि वह अकसर घर में ताला लगा कर कहीं चली जाती है. पड़ोसियों की बात सुन यह सोच कर मनोज का माथा ठनका कि कहीं वह रोहित से मिलने तो नहीं जाती. वह सोच ही रहा था कि हाथ में थैला लिए मधु आती दिखाई दी. पास आते ही वह बोली, ”आज इतनी जल्दी आ गए आप?’’

”हां, मैं तो आ गया. पहले तुम बताओ कहां गई थी?’’ मनोज ने मधु को शक की नजर से देखते हुए पूछा.

”और कहां जाऊंगी, सब्जी लेने गई थी.’’ मधु ने रूखी आवाज में जवाब दिया.

”सब्जी लेने क्या रोज जाती होï?’’ मनोज ने सवाल किया तो मधु बोली, ”नहीं, आज ही गई थी.’’

”पड़ोसी तो कहते हैं कि तुम आए दिन घर से निकल जाती हो?’’

”पड़ोसी जलते हैं. उन्हें हमारे घर में कलह कराने में मजा आता है, इसलिए तुम्हारे कान भरते हैं. तुम्हारा बूढ़ा बाप भी मुझे शक की नजर से देखता है और ताकझांक में लगा रहता है और तुम ऐसे शक्की इंसान हो कि भरोसा कर लेते हो.’’ मधु ने पति को बरगलाने की पूरी कोशिश की, लेकिन मनोज नहीं माना. उस ने लांछन लगाते हुए मधु को पीट दिया.

मधु भी ढीठ थी. उस ने तय कर रखा था कि पति कितना भी पूछे, लांछन लगाए पर वह रोहित का साथ नहीं छोड़ेगी. एक रोज मधु रोहित से मिलने पहुंची. वह उसे होटल में ले गया. वहां कमरे में रोहित के सामने उस के मन का दुख आंखों से छलक पड़ा. मधु रोआंसी आवाज में बोली, ”रोहित, मनोज ने मेरा जीना हराम कर दिया है. जब मन होता है, तुम्हारा नाम ले कर मुझे पीटने लगता है. अब मैं उस के साथ नहीं रह सकती. मुझे उस से निजात दिलाओ, नहीं तो मैं खुदकुशी कर लूंगी.’’

”ऐसा मत कहो भाभी,’’ रोहित ने उसे बांहों में भर लिया, ”तुम नहीं मरोगी, बल्कि वह मरेगा जो हमारी खुशियों का दुश्मन है.’’

”यह ठीक रहेगा. उस के जीते जी हम सुख से नहीं जी पाएंगे. तुम किसी सुपारी किलर के जरिए उसे ठिकाने लगवा दो. इस काम के लिए जो रुपया लगेगा, मैं खर्च कर दूंगी. कुछ रुपया पेशगी भी दे दूंगी.’’

पत्नी ने क्यों दी हत्या की सुपारी

भाभी के प्यार में आकंठ डूबे रोहित ने उसे पूरी तरह हासिल करने के लिए ममेरे भाई मनोज की हत्या का फैसला कर लिया. इस के बाद वह सुपारी किलर की तलाश में जुट गया. लेकिन वह सुपारी किलर हायर करने में सफल नहीं हुआ. रोहित शातिरदिमाग था. उस ने सोचा कि यदि वह स्वयं ही मनोज को ठिकाने लगा दे तो सुपारी किलर को दी जाने वाली रकम उसे ही मिल जाएगी. किसी को कानोकान खबर भी नहीं लगेगी. मन में लालच समाया तो उस ने सावधानी के साथ मधु से मुलाकात की. रोहित ने मधु से कहा कि सुपारी किलर का इंतजाम हो गया है. मोलभाव के बाद साढ़े 3 लाख रुपए में सौदा तय हुआ है. 20 हजार रुपए पेशगी देने होंगे.

रोहित की बात सुन कर मधु बोली, ”रोहित, तुम्हारे प्यार में मैं पागल हूं. तुम्हें पाने के लिए और पति से छुटकारा के लिए मुझे सौदा मंजूर है, लेकिन अभी मेरे पास 15 हजार रुपया है. कल एकदिल रेलवे स्टेशन पर मिलना, वहीं रुपए दे दूंगी. बाकी रकम काम होने के बाद ज्वैलरी बेच कर व एफडी तुड़वा कर दे दूंगी.’’ दूसरे रोज 15 हजार रुपए मिलने के बाद रोहित ने ममेरे भाई मनोज की हत्या का प्लान तैयार किया. इस प्लान में उस ने अपने छोटे भाई राहुल को भी शामिल कर लिया. राहुल बेरोजगार था और पैसेपैसे के लिए परेशान था, इसलिए पैसा मिलने के लालच में भाई का साथ देने को राजी हो गया.

दोनों भाइयों के बीच तय हुआ कि मनोज को इटावा की नुमाइश दिखाने के बहाने इटावा लाया जाए, फिर लौटते समय रास्ते में शराब पिला कर उसे ठिकाने लगा दिया जाए. लेकिन मनोज को नुमाइश दिखाने कैसे लाया जाए. क्योंकि उस के मन में तो रोहित के प्रति गुस्सा भरा था. रोहित ने इस के लिए कोशिश करनी शुरू कर दी. वह उस के घर तो नहीं जाता, लेकिन जब कभी एकदिल कस्बे में मुलाकात हो जाती तो रोहित झुक कर मनोज के पैर छूता, गलती के लिए माफी मांगता, फिर ठेके पर ले जा कर उसे शराब पिलाता. बारबार माफी मांगने और शराब पार्टी करने से कुछ दिनों बाद मनोज के मन में रोहित के प्रति भरा गुस्सा ठंडा पड़ गया.

प्रेमिका के पति की हत्या तो कर दी लेकिन…

3 जनवरी, 2025 की दोपहर रोहित अपनी बाइक से मनोज के एकदिल कस्बा के खेड़ापति मोहल्ला स्थित घर पहुंचा. उस समय मनोज घर पर ही था. रोहित ने उस के पैर छू कर कहा, ”मनोज भैया, इटावा नुमाइश देखने जा रहा हूं. आप भी साथ चलते तो मजा और ही होता. नुमाइश देख कर व खानेपीने के बाद वापस घर आ जाएंगे.’’ चूंकि मनोज शराब का लती था, इसलिए खानेपीने के लालच में रोहित के साथ चलने को राजी हो गया. वह यह भी जानता था कि सारा खर्चा रोहित ही करेगा, इसलिए वह फटाफट तैयार हुआ और रोहित के साथ नुमाइश देखने को बाइक से घर से निकल लिया. अपनी योजना के तहत रोहित ने अपने छोटे भाई राहुल को भी साथ ले लिया.

शाम 5 बजे तीनों इटावा नुमाइश पहुंचे. यहां रात 9 बजे तक वह सब नुमाइश देखते रहे. फिर रोहित मनोज के साथ शराब ठेके पर पहुंचा और दोनों ने शराब पी. राहुल ने शराब नहीं पी. अद्धा बोतल शराब रोहित ने खरीद कर सुरक्षित भी रख ली. इस के बाद तीनों ने एक होटल में खाना खाया. फिर खापी कर तीनों घर वापस जाने को निकल पड़े. योजना के तहत रोहित जब यमुना पुल के करीब सुनवारा बाईपास पर पहुंचा तो उस ने बाइक रोक दी. यहां रोहित ने मनोज को फिर शराब पिलाई. मनोज जब नशे में धुत हो गया, तब रोहित व राहुल ने उसे दबोच लिया और ईंट से सिर कूंच कर मनोज की हत्या कर दी.

हत्या करने के बाद दोनों मनोज के शव को यमुना नदी में फेंकने के इरादे से बाइक पर रखा और चल पड़े. लेकिन यमुना नदी तक पहुंचने के पहले ही उन की बाइक फिसल गई और शव सड़क किनारे गिर पड़ा. पकड़े जाने के डर से रोहित व राहुल शव को वहीं छोड़ कर भाग गए. इस बीच मोबाइल फोन के जरिए मधु रोहित के संपर्क में थी. उसे सारी जानकारी मिल रही थी. अब तक रात के 12 बज चुके थे. रोहित ने घर आ कर कार सवार बदमाशों द्वारा मनोज को मारनेपीटने व उस के किडनैप की झूठी खबर फेमिली वालों को दी. यह बात सुनते ही घर में कोहराम मच गया. बेटे के किडनैप की बात सुन कर तहसीलदार घबरा उठा. उस ने फोन के जरिए दामाद श्याम सिंह को खबर दी. मधु त्रियाचरित्र का नाटक कर रोनेपीटने लगी. उस की रोने की आवाज सुन कर पड़ोसी इकट्ठा होने लगे.

सुबह तहसीलदार अपने दामाद श्याम सिंह व अन्य फेमिली वालों के साथ सुनवारा बाईपास के पास पहुंचा और मनोज की खोज शुरू की. यमुना पुल से एक किलोमीटर पहले जब दोनों मानिकपुर जाने वाली रोड पर पहुंचे तो लोगों की भीड़ देखी. पता चला कि किसी युवक की लाश पड़ी है. उस लाश को तहसीलदार ने देखा तो फफक पड़ा, क्योंकि लाश मनोज की थी. लाश जिस जगह सड़क किनारे पड़ी थी, वह क्षेत्र इटावा के बड़पुरा थाने के तहत था, इसलिए पुलिस को सूचना दी गई. सूचना पाते ही बड़पुरा थाने के एसएचओ गणेश शंकर द्विवेदी पुलिस बल के साथ वहां आ गए.

उन की सूचना पर एसएसपी संजय कुमार वर्मा तथा सीओ (भरथना) नागेंद्र चौबे भी आ गए. पुलिस अधिकारियों को तहसीलदार ने बताया कि लाश उन के बेटे मनोज की है. कल दोपहर बाद वह रिश्ते के भाई रोहित के साथ नुमाइश देखने गया था. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतक मनोज की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी. उस का सिर जख्मी था. देखने से ऐसा लग रहा था कि उस की मौत किसी वाहन से टकराने से हुई थी. शव को पोस्टमार्टम के लिए इटावा के जिला अस्पताल भिजवा दिया गया.

ससुर ने बहू पर क्यों जताया शक

घटनास्थल पर पिता तहसीलदार मौजूद था. पुलिस अधिकारियों ने जब उस से पूछताछ की तो उस ने बेटे मनोज की हत्या का शक जाहिर किया. उस ने बताया कि बुसा गांव निवासी रोहित का उस के घर आनाजाना था. रिश्ते में वह मनोज का भाई है. रोहित और उस की बहू मधु के बीच नाजायज रिश्ता बन गया था, जिस का वह और मनोज विरोध करते थे. रोहित ही उसे कल घर से ले गया था. अब मनोज की हत्या की गई या दुर्घटना से मौत हुई, इस का राज तो रोहित और उस की बहू के पेट में ही छिपा है. सुबह बहू भी रोहित के साथ ही चली गई है.

शक के आधार पर एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने मनोज की मौत के खुलासे के लिए सीओ नागेंद्र चौबे की देखरेख में एक पुलिस टीम गठित कर दी. इस टीम ने रोहित व मधु की टोह में इकदिल, भरथना, लखुना आदि स्थानों पर छापा मारा, लेकिन उन का पता नहीं चला. पुलिस टीम ने रोहित के बुसा गांव स्थित घर पर भी छापा मारा तो पता चला कि रोहित के साथ उस का भाई राहुल भी घर से गायब है. 5 जनवरी, 2025 की दोपहर एसएचओ गणेश शंकर द्विवेदी जमुना पुल के करीब वाहन चेकिंग कर रहे थे. तभी एक बाइक पर 3 सवारी दिखीं. उन्होंने बाइक रोकने का प्रयास किया तो वे भागने लगे. तब पीछा कर पुलिस ने उन्हें दबोच लिया. इन तीनों में एक महिला थी. तीनों को थाना बड़पुरा लाया गया.

थाने में जब उन से पूछताछ की गई तो पता चला कि महिला का नाम मधु है और वह मृतक मनोज कुमार की पत्नी है. उस के साथ जो अन्य 2 युवक थे, उन में से एक रोहित और दूसरा रोहित का भाई राहुल था.

उन तीनों से जब मनोज की मौत के बारे मे पूछा गया तो उन्होंने मनोज की हत्या ईंट से सिर कूंचकर करने का जुर्म कुबूला. रोहित ने बताया कि मनोज उस का ममेरा भाई था. घर आनेजाने के दौरान मनोज की पत्नी मधु से उस के संबंध बन गए थे. इस रिश्ते का मनोज विरोध करता था. इसलिए उस ने मधु के साथ मिल कर हत्या की योजना बनाई.

फिर उसे नुमाइश दिखाने के बहाने भाई राहुल के साथ इटावा ले गए. वापसी में राहुल के साथ मिल कर ईंट से सिर कूंच कर मनोज की हत्या कर दी और शव छोड़ कर भाग गए. रोहित ने जुर्म कुबूलने के बाद हत्या में प्रयुक्त ईंट भी बरामद करा दी, जो उस ने झाडिय़ों में फेंक दी थी. एसएचओ गणेश शंकर द्विवेदी ने मनोज की हत्या का खुलासा करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसएसपी संजय वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रैसवार्ता की और मीडिया के सामने मनोज की हत्या का खुलासा किया. उन्होंने 24 घंटे के अंदर खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए पुरस्कार देने की भी घोषणा की.

चूंकि हत्यारोपियों ने जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल खून से सनी ईंटभी बरामद करा दी थी, इसलिए बड़पुरा थाने के एसएचओ गणेश शंकर द्विवेदी ने मृतक के पिता तहसीलदार को वादी बना कर बीएनएस की धारा 103(1), 238/61(2) तथा 3(5) के तहत मधु, रोहित व राहुल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया तथा उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

6 जनवरी, 2025 को पुलिस ने मधु, रोहित राहुल को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उन तीनों को जिला जेल भेज दिया गया.

 

 

Uttar Pradesh Crime : कातिल बनी देवरानी की दीवानगी

Uttar Pradesh Crime : सुधा अपनी ससुराल आ जरूर गई थी, लेकिन दिल मायके में प्रेमी नीटू उर्फ लिटिल के पास ही बसा हुआ था. नीटू भी उस के बगैर बेचैन रहने लगा था. वह भी किसी न किसी बहाने उस से मिलने आने लगा. किंतु एक दिन वह प्रेमी संग जेठानी सीमा द्वारा रंगेहाथों पकड़ी गई. फिर क्या हुआ? पढ़ें, इस सनसनीखेज कहानी में दीवानी हुई देवरानी की दास्तान…

उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद के गांव दरियापुर में 10 अक्तूबर, 2024 की  शुरुआत भी एक सामान्य दिन की तरह हुई थी. गांव के हरपाल सिंह अपनी दिनचर्या में जुट गए थे. वह अपने बच्चों राहुल कुमार, सौरभ और गौरव के साथ सुबह के 9 बजे पशुओं का चारा लाने के लिए खेतों की ओर निकल गए थे. राहुल की पत्नी सीमा (38 वर्ष) ने सुबह का घरेलू काम निपटाने के बाद 7 वर्षीय बड़ी बेटी रीतिका को स्कूल भेज दिया था. सास धरमी देवी अपनी बेटी के घर बिजनौर गई हुई थी. सीमा ने अपने 9 महीने के बेटे गीत को दूध पिला कर पालने में सुलाने के बाद देवरानी सुधा (31 वर्ष) को आवाज लगाई, ”सुधा…अरी ओ सुधा, जल्दी बाथरूम से निकलो, खेत पर जाने का टाइम हो गया है…’’

”अभी आई दीदी,’’ सुधा ने बाथरूम से ही आवाज दी.

”सुनो, गीत दूध पी कर पालने में सो रहा है. उस का खयाल रखना. …और हां, चकोर बाहर खेल रही है, उसे बुला कर नाश्ता करवा देना.’’ चकोर सीमा की छोटी बेटी थी. वह देवरानी सुधा को घर का कुछ और काम समझा कर चली गई.

सुधा सौरभ की पत्नी और घर की नईनवेली दुलहन थी. ससुराल आए उसे कुछ महीने ही हुए थे. खूबसूरत और मिलनसार स्वभाव की होने के कारण वह बहुत जल्द ही परिवार के सभी सदस्यों की चहेती बन गई थी. घर के बहुत सारे कामकाज निपटाने की जिम्मेदारी उसी पर थी. वह सभी के साथ बहुत ही प्यार से पेश आती थी. सभी उस के व्यवहार से खुश थे. सीमा के जाने के कुछ समय बाद ही सुधा बाथरूम से निकल आई थी. जैसेतैसे पहने कपड़े सही करने के लिए अपने कमरे में चली गई थी. कमरे से ही एक नजर बाहर बरामदे में भी डाली. पालने में सो रहे गीत को देखा. इसी बीच उस की निगाहें बाहर के खुले दरवाजे की ओर गईं.

वहां से बच्चों संग खेलती हुई सीमा की छोटी बेटी चकोर की आवाज भी सुनाई दी. वह निश्चिंत हो गई कि घर में सब कुछ ठीक है. कमरे से कुछ मिनटों में वह बाहर निकली. तभी उसे जानीपहचानी आवाज सुनाई दी, ”ससुराल में तुम तो गजब ढा रही हो… तुम्हारी सुंदरता का तो जवाब नहीं.’’

”अरे नीटू तुम? कब आए? अचानक…’’ सुधा एकदम से चौंकती हुई बोली.

”अरे हां, दिल नहीं माना सो चला आया अचानक. तुम्हें देख कर मूड फ्रैश हो गया. तुम तो गजब की मौडल लग रही हो. क्या बात है?’’ नीटू बोला. वह उस के पीहर के गांव का रहने वाला था. उस के अचानक आने से सुधा चौंक गई थी. वह बोली,”तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए था?’’

”क्यों?’’

”यह मेरी ससुराल है…लोग पूछेंगे तब तुम्हारे बारे में क्या बताऊंगी?’’ सुधा बोली.

”कुछ भी बता देना.’’

”कुछ भी क्या…इधर आ कमरे में…तुम्हें छिपाना होगा!’’

”इतना भी डरना क्या?’’ नीटू समझाते हुए बोला.

”तुम नहीं समझते हो…तुम्हें कोई देख लेगा तब बात का बतंगड़ बन जाएगा. मैं जैसा कह रही हूं वैसा कर…तुम्हारे लिए पानी ले कर आती हूं.’’ सुधा ने कहा.

”चाय भी लाना…और हां कुछ खाने के लिए भी…’’ नीटू बोला.

”सब लाती हूं. तुम कमरे से बाहर मत निकलना.’’

”जैसा हुक्म!’’ नीटू बोलता हुआ सीधा सुधा के कमरे में चला गया.

दरअसल, नीटू सुधा के गांव का रहने वाला उस का प्रेमी था. दूसरी जाति का होने के कारण सुधा उस से शादी नहीं कर पाई थी. बुझे मन से सुधा अपनी ससुराल आ कर रहने लगी थी, लेकिन वह नीटू को भूल नहीं पाई थी. उन की फोन पर बातें हो जाती थीं. महीनों बाद उसे पास पा कर मन ही मन सुधा खुश हो गई थी. नीटू का भी यही हाल था. वह सुधा से मिलने के लिए बेचैन हो गया था. कुछ समय में ही सुधा कमरे में चाय और सुबह बना नाश्ता ले कर आ गई. नीटू इधरउधर नजरें घुमाता हुआ बोला, ”घर में कोई नजर नहीं आ रहा है?’’

”हां, सभी खेत पर गए हैं. मैं अकेली हूं…’’ सुधा बोली.

”अरे वाह! बड़े अच्छे मौके पर आया हूं… आज तुम्हारे साथ समय बिताने का अच्छा मौका मिल गया. बहुत बातें करेंगे और कुछ रोमांस भी…’’ नीटू खुश हो कर बोला.

”ज्यादा चहकनेबहकने की जरूरत नहीं है. यह मेरी ससुराल है!’’ सुधा ने मजाकिया अंदाज में समझाने की कोशिश की.

”वहां भी अपने बापभाई से डरी रहती थी…और यहां भी!’’ नीटू भी उसी अंदाज में बोला.

सुधा बोली, ”डरने की बात नहीं है, बात बच कर रहने की है. मेरी जेठानी को शक है…फोन पर बात करते कई बार सुन चुकी है. मैं तुम्हें गांव का मुंहबोला भाई बता चुकी हूं.’’

”लेकिन मैं तुम्हारा प्रेमी हूं…अब और सहन नहीं होता!’’ नीटू बोला और एक झटके में सुधा को बांहों में भर लिया.

”छोड़ो, कोई आ जाएगा…’’ सुधा ने छुड़ाने की कोशिश की, मगर नाकाम रही. नीटू की पकड़ मजबूत थी. सुधा भी कब उस की वासना की रौ में बह गई, पता ही नहीं चला. नीटू ने बड़ी होशियारी से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था. सुधा की तंद्रा तब भंग हुई, जब उस ने सीमा की आवाज सुनी.

वह कमरे का दरवाजा पीटती हुई बड़बड़ाए जा रही थी, ”बाहर का दरवाजा खुला है. बच्चा पालने में अकेला सो रहा है और महारानी कमरे में बंद है. पता नहीं क्या कर रही है दिन में?’’

हड़बड़ाते हुए सुधा ने कमरे की कुंडी खोली. उसे अस्तव्यस्त कपड़े में देख सीमा चौंक गई. बोल पड़ी, ”देवरजी तो अभी खेत पर ही दिखे थे, तुम कमरे में किस के साथ हो?’’

सुधा जवाब में कुछ नहीं बोली. इसी बीच उस ने कमरे में एक मर्द को देख लिया. पूछ बैठी, ”कौन है भीतर?’’

”कोई तो नहीं है…आइए न, मैं सब बताती हूं आप को.’’ सुधा अपनी जेठानी का हाथ पकड़ कर खींचती हुई दूसरे कमरे में ले जाने लगी. तभी पीछे से नीटू आ गया और सीमा की आंखें और मुंह पास पड़े गमछे से बांध दिया. दोनों ने मिल कर सीमा को एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया. फिर सुधा ने इशारे से धीमी आवाज में नीटू से पूछा, ”अब क्या करें?’’

”यह हमारा भेद खोल देगी. इस का एक ही उपाय है…’’ कहते हुए नीटू ने उस की हत्या करने का इशारा किया.

”नहींनहीं, यह गलत होगा.’’ सुधा घबराई.

”तो फिर तुम ससुराल से बेदखल होने के लिए तैयार हो जाओ.’’

”लेकिन कैसे होगा वह सब…हम पकड़े जाएंगे. पुलिस केस तो हम पर ही बनेगा.’’ सुधा बोली.

”कुछ नहीं होगा. मैं सब संभाल लूंगा…जो कहता हूं, तुम वैसा करती जाओ.

दिन चढ़ चुका था. करीब 12 बजने वाले थे. हरपाल सिंह अपने तीनों बेटे राहुल, सौरभ और गौरव के साथ खेतों से घर लौट आए थे. घर में पसरा सन्नाटा देख कर वे चौंक गए. बरामदे में पालने पर खुद से खेलते बच्चे के सिवाय कोई नजर नहीं आ रहा था. जब उन्होंने पास के कमरे की ओर नजर दौड़ाई, तब वे चौंक पड़े. वहां फर्श पर बड़ी बहू सीमा की रक्तरंजित लाश पड़ी थी. राहुल उस के पास गया. उस की नाक के पास अपना हाथ ले जा कर पता किया. उस की सांस बंद थी. फर्श पर काफी खून फैल चुका था.

सौरभ ने सुधा को आवाज लगाई. साथ के कमरे से सुधा की अस्पष्ट आवाज सुनाई दी. वह उस ओर भागा. वहां सुधा भी फर्श पर पड़ी थी. उस के हाथपैर बंधे थे. मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था. अपनी पत्नी की यह हालत देख कर सौरभ बौखला गया. उस ने उस के मुंह से कपड़ा निकाला. गहरी सांस लेती हुई सुधा से हालचाल पूछा. उस की इस हालत के बारे में एक साथ कई सवाल कर दिए. घबराई सुधा ने हाथ के इशारे से पीने का पानी मांगा. देवर गौरव पानी लेने गया, तब तक सौरभ सुधा को सहारा दे कर कमरे से बाहर निकाल लाया. पूरा एक गिलास पानी पी कर वह कुछ सेकेंड चुप बनी रही. उस के बाद उस ने जो कुछ बताया, वह बेहद चौंकाने वाला था, लेकिन अर्धबेहोशी के कारण उस के द्वारा दी गई जानकारी आधीअधूरी ही थी. उस ने बताया कि घर में लूटपाट हुई है.

कोई अचानक घर में घुस आया था. उसी ने सीमा की हत्या कर दी. उस ने उस के हाथपैर बांध कर यहां कमरे में डाल दिया था. उस के इंजेक्शन लगा दिया था. वह बेहोश हो गई थी. पता ही नहीं चला कि घर में क्या हुआ और क्या नहीं… इतना बताते हुए सुधा फिर बेहोश हो गई. उसे तुरंत पास के नर्सिंग होम ले जाया गया. घर में हत्या हुई थी. कुछ समय में ही कोहराम मच गया. पासपड़ोस के कुछ लोग भी आ गए थे. हरपाल सिंह ने तुरंत पुलिस को इस की सूचना दी. पुलिस दलबल के साथ कांठ थाने से घंटेभर में पहुंच गई. एसएचओ विजेंद्र सिंह ने घटनास्थल का मुआयना करने से पहले मामले की गंभीरता को देखते हुए अपने उच्च अधिकारियों को इस हत्याकांड की जानकारी दे दी.

एसएचओ की सूचना पा कर मुरादाबाद जिले के एसएसपी सतपाल अंतिल, एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह और सीओ (कांठ) अपेक्षा निंबाडिय़ा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. वहां की फोटोग्राफी करवाई गई, वीडियो बनाई गई. घटना की तहकीकात के लिए पासपड़ोस के लोगों से बात की जाने लगी. इस दौरान गांव के एक व्यक्ति ने एसएसपी सतपाल अंतिल को बताया कि सुबह 10-11 बजे के बीच उस ने मृतक सीमा के घर से एक अनजान व्यक्ति को निकलते देखा था. वह बहुत जल्दी में था. वह उसे नहीं पहचानता था. गांव का नहीं था.

यह जानकारी सतपाल अंतिल के लिए महत्त्वपूर्ण थी. पुलिस ने घर के सभी सदस्यों से पूछताछ की. सीमा के पति राहुल ने पुलिस का बताया कि सीमा का किसी से भी कभी लड़ाईझगड़ा नहीं हुआ था. उस ने बताया कि वह जब अपने भाइयों और पिता के साथ घर आया, तब सुधा बेहोशी की हालत में थी. उस के हाथपैर बंधे थे. कुछ देर के लिए वह होश में आई थी. वह सिर्फ इतना ही बता पाई कि घर में 4 लोग घुस आए थे. उन्होंने उस के साथ मारपीट की और इंजेक्शन लगा दिया. सतपाल अंतिल यह सुन कर चौंक गए. पड़ोसी से मिली जानकारी के अनुसार घर से केवल एक ही व्यक्ति निकला था, जबकि सुधा के अनुसार 4 लोग घर में घुसे थे. उन का इरादा लूटपाट का था, लेकिन घर की हालत को देख कर नहीं लगता कि वहां कोई लूटपाट हुई हो.

पुलिस ने खोजी कुत्ते को भी बुला लिया था. वह घर में ही घूमघूम कर सभी संदिग्ध चीजों को सूंघने लगा. पुलिस को स्योहारा नर्सिंग होम में भरती सुधा के होश में आने का इंतजार था. इस बीच पुलिस ने परिवार के बाकी लोगों से जानकारी जुटा ली थी. इस के मुताबिक सुधा की शादी 10 जुलाई, 2024 को हरपाल सिंह के दूसरे बेटे सौरभ के साथ हुई थी. वह बिजनौर जिले के गांव भगवतपुर रैनी की निवासी थी. शादी के बाद से ही वह अकसर अपने मायके में ही रह रही थी, जिस कारण सौरभ के साथ मधुर संबंध नहीं बन पाए थे.

बताते हैं कि उन के बीच आए दिन नोकझोंक हो जाती थी. उस के देवर और पति के बड़े भाई ने बताया कि सुधा अपने पति सौरभ को ज्यादा तरजीह नहीं देती थी. इसे ले कर सुधा के मायके वाले भी उसे आ कर समझा गए थे. उन्होंने एक तरह से नई जिंदगी में रहने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि कि तुम्हारी शादी हो चुकी है. तुम्हें पूरा जीवन अपने पति सौरभ के साथ ही गुजारना है. ससुराल को ही अपना घर समझना है. तुम्हारी ससुराल ही अब सब कुछ है. अपनी जेठानी से मिलजुल कर रहना है. सास और ससुर की सेवा करनी है. उन के साथ ठीक वैसे ही इज्जत के साथ पेश आना है, जैसा वह अपने मायके में मम्मीपापा और भाइयों के साथ करती आई है. इस तरह सुधा अपने ससुराल में रहने के तैयार हो गई थी.

अब पुलिस को सुधा के होश में आने का इंतजार था. इसी बीच सीमा के शव का पंचनामा भर कर उसे मुरादाबाद के पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया गया. पहली जांच में पाया गया कि सीमा की हत्या बेरहमी से गला रेत कर की गई थी, जिस से काफी मात्रा में खून बहने से उस की मौत हो गई थी. एसएसपी सतपाल अंतिल ने इस हत्याकांड का खुलासा करने के लिए पुलिस की कुछ टीमें बना दीं. इस के लिए एसओजी प्रभारी अमित कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई. थाना कांठ क्षेत्र की सीओ अपेक्षा निंबोडिया को नर्सिंग होम में भरती सुधा के होश आने पर पूछताछ की जिम्मेदारी दी गई.

निर्देश मिलते ही अपेक्षा निंबाडिया नर्सिंग होम जा पहुंचीं. उन्होंने वहां के डाक्टर से सुधा की हालत के बारे में जानकारी ली. डाक्टर ने बताया कि वह ठीक है. बातचीत करने की हालत में है, लेकिन बेहोशी का नाटक कर रही है. अपेक्षा ने इस बारे में एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह से बात की. यह सुन कर कुंवर आकाश सिंह नर्सिंग होम जा पहुंचे. उन्होंने पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन सुधा गुमसुम ऐसे लेटी रही, मानो कुछ सुन नहीं पाई हो. सिंह तेज आवाज में डाक्टर से बोले, ”आप के नर्सिंग होम में इस की बेहोशी नहीं टूट रही है तो रिलीज कर दो, हम इसे बड़े अस्पताल में भरती करवाएंगे.’’

डिस्चार्ज होने के बाद नर्सिंग होम के स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से सीओ अपेक्षा ने सुधा को पुलिस गाड़ी में बिठाया और उसे अस्पताल ले जाने के बजाए थाना कांठ ले आए. उसे सहारे से कुरसी पर बैठाया गया. चेहरे पर पानी की तेज बौछार की गई. वह कुरसी से गिरने को हुई. अचानक सुधा ने आंखें खोल दीं. सख्ती के साथ अपेक्षा बोलीं, ”अब बता, तू इस वक्त कहां है?’’

सुधा हकलाती हुई कुछ बोलना चाही कि दूसरे पुलिस अधिकारी बोल पड़े, ”ज्यादा नाटक करने की जरूरत नहीं है. आज दिन में घर में क्याक्या हुआ? कितने लोग आए थे? सीमा को किस ने मारा? पूरी बात सचसच बता…’’

”…तू अभी थाने में है…सच बोलेगी तो यहीं से छूट जाएगी, वरना मजिस्ट्रैट तो जेल भेज ही देगा.’’ सीओ ने धमकाते हुए कहा.

पुलिस की तीखी हिदायत सुनते ही सुधा ने हाथ के इशारे से पीने के लिए पानी मांगा. एक महिला कांस्टेबल ने टेबल पर रखा पानी का गिलास उठा कर उसे पकड़ा दिया. पानी पी कर ही वह बुदबुदाने लगी. उस ने धीमे स्वर में बताना शुरू किया, ”मैं और मेरी जेठानी सीमा घर में अकेले थे. अचानक 4 लोग घर में घुस आए थे. वे जेठानी सीमा के साथ मारपीट करने लगे और मेरे हाथपैर बांध दिए. मुझे कूल्हे में इंजेक्शन लगा दिया और मैं बेहोश हो गई. उस के बाद मुझे खुद नहीं पता क्या हुआ.’’

इतना सुनते ही आकाश सिंह डपटते हुए बोले, ”घटना को अंजाम देने के लिए 4 नहीं एक व्यक्ति आया था. तुम झूठ बोल रही हो.’’

इसी के साथ अपेक्षा उसे अलग पूछताछ करने ले गईं. अपेक्षा सुधा से बोलीं, ”देखो, साहब को सब पता चल गया है. खैर इसी में है कि तुम सचसच बता दो. मैं तुम्हें बचाने में मदद करूंगी, अन्यथा तुम पूरी जिंदगी जेल में चक्की पीसोगी.’’

सीओ अपेक्षा की सख्ती के आगे सुधा टूट गई. उस ने एक झटके में कहा, ”वह कांड मैं ने अपने प्रेमी नीटू उर्फ लिटिल के साथ मिल कर किया है.’’ यह कहती हुई सुधा सुबकने लगी. सुधा ने आगे बताया कि घटना के एक सप्ताह पहले भी जेठानी सीमा ने सुधा को घर में नीटू के साथ उसे देख लिया था. उस रोज किसी तरह से बात यह कह कर संभाल लिया कि वह उस के मायके का मुंहबोला भाई है. हालसमाचार लेने आया है. घटना के रोज दोबारा नीटू घर में तब आ गया था, जब सभी लोग खेतों पर गए हुए थे. उस रोज जेठानी ने दोनों को बहुत डांटा. बोली, ”अपने मुंहबोले भाई के साथ मुंह काला कर रही है, इस बात का पता फेमिली वालों को चल गया तो क्या अंजाम होगा, इस का जरा भी अंदाजा है तुम्हें.’’

सीमा ने सुधा को समझाया कि देख अब तेरी शादी सौरभ से हो गई है. वही तेरा सब कुछ है, तुम मेरी अच्छी देवरानी हो, यह सब शादी से पहले का दीवानापन छोड़ दो. सीमा  ने देवरानी को यह आश्वासन भी दिया कि वह इस बात को किसी से नहीं बताएगी. इसलिए अपने पूर्व प्रेमी से संबंध खत्म कर लो. यह सारी बातें कमरे में दुबका नीटू भी सुन रहा था, जो उस के गले नहीं उतरी थी. फिर उस ने आननफानन में एक खतरनाक फैसला ले लिया था. दरअसल, नीटू बारबार सुधा से प्रेम संबंध बनाए रखने पर जोर डालता रहता था. सुधा भी कई दफा उस से कह चुकी थी कि वह उस के बिना नहीं रह सकती. यानी कि आग दोनों तरफ से जल रही थी.

किसी तरह से मायके के लोगों की बातें मानती हुई वह ससुराल चली आई थी, लेकिन दिल मायके में नीटू के पास ही लगा हुआ था. सुधा ने पूछताछ में यह भी कुबूल कर लिया कि उस ने 14 अक्तूबर, 2024 को योजना के मुताबिक अपने प्रेमी नीटू उर्फ लिटिल को फोन कर ससुराल बुला लिया था. हत्या को अंजाम देने के लिए सुधा और नीटू सीमा को खींच कर उस कमरे में ले गए, जिस में भूसा भरा था. पास ही गेहूं काटने की दरांती पड़ी थी, जिस का बेंता टूटा था. सुधा ने जेठानी के सीने पर बैठ कर अपनी चुनरी से उस का मुंह दबा दिया था. सीमा ने अपने बचाव के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन उस की चीख भी मुंह में दब कर रह गई. उसी समय नीटू ने दरांती से सीमा का गला रेत दिया. दरांती का बेंता टूटा होने के कारण गरदन पर भरपूर वार नहीं हो पा रहा था. तब नीटू ने जेब से चाकू निकाल कर गला रेत दिया था.

सीमा की सांस की नली कट गई थी. जब सीमा मर गई, तब नीटू ने योजना के तहत सीमा के हाथपैर बांध कमरे में डाल दिया. हाथमुंह पर कपड़ा बांध दिया था. कमरे की किवाड़ भेड़ दी. इस से पहले दोनों ने अपने खून से सने हाथपैर भी धोए. दोपहर में फेमिली के लोग घर आए, तब इस हत्याकांड का पता चला. उन्होंने पुलिस को सूचना दी और सीमा के पति राहुल ने थाने में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई. हत्याकांड को अंजाम दे कर नीटू अपने गांव चला गया. पुलिस 16 अक्तूबर, 2024 को सुधा के बयान के आधार पर नीटू उर्फ लिटिल को  गिरफ्तार करने में सफल हो गई.  उसी रोज दोनों को मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर दिया गया. वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

 

Uttar Pradesh news : जेंडर चेंज कर सहेली को बनाया दुलहन

Uttar Pradesh news : एक बड़े ज्वैलर इंद्रकुमार गुप्ता की लाडली बेटी शिवांगी को अपनी सहेली ज्योति से ऐसा प्यार हुआ कि वह उस से शादी करने को अड़ गई. इंद्रकुमार गुप्ता ने भी अपनी लाडली का लिंग चेंज करा कर धूमधाम से उस की शादी ज्योति से कराई. इन दोनों की प्रेम कहानी इतनी दिलचस्प है कि…

शिवांगी और ज्योति पक्की सहेलियां थीं. दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी. रविवार को वे घर के पास ही संजीवनी पार्क पहुंच जातीं फिर घंटा, आधा घंटा किसी सूने कोने में बैठ कर अंतरंग बातें करती थीं, उस के बाद दोनों अपनेअपने घर चली जातीं. यह उन का हर रविवार का नियम था. हर बार की तरह उस रोज भी रविवार था. शिवांगी व ज्योति आईं और झाडिय़ों के पीछे एकांत में बैठ गईं. यूं भी दोपहर का समय था और उस समय पार्क अकसर सुनसान रहते हैं. संजीवनी पार्क में भी इक्कादुक्का लोग ही दिखाई दे रहे थे. कुछ देर दोनों गपशप करती रहीं, फिर सहसा शिवांगी गंभीर हो कर ज्योति को अपलक निहारने लगी. 

कुछ देर ज्योति सहेली को देखते हुए मुसकराती रही, फिर असहज हो कर बोली, ”शिवांगी, तुम इस तरह मुझे क्यों देख रही हो?’’

यह पूछो कि क्या देख रही हूं.’’

मुसकराते हुए ज्योति ने प्रतिप्रश्न किया, ”तुम ही बता दो कि बिना पलकें झपकाए तुम मुझ में क्या देख रही हो?’’

ज्योति, तुम बहुत खूबसूरत हो,’’ शिवांगी अपना मुंह ज्योति की आंखों के पास ले गई, स्वाभाविक तौर पर उस की पलकें बंद हो गईं. शिवांगी ने बारीबारी उस की पलकें चूमी, फिर अपना मुंह दूर हटा लिया, ”तुम्हारी आंखें किसी उस्ताद शायर का हसीन ख्वाब हैं,’’ इस के बाद उस ने ज्योति के होठों पर तर्जनी फिराई, ”और तुम्हारे ये होंठ मानो शराब के पैमाने हैं.’’

पलकों पर होंठों का स्पर्श, चेहरे से टकराती शिवांगी की हसरत भरी सांसें और होंठों पर अब भी घूम रही तर्जनी के स्पर्श से ज्योति एक अजब रोमांच से भर गई. सहेली का यह व्यवहार भी उसे अजीब लग रहा था, इसलिए चेहरे पर मुसकान सजा कर उस ने पूछा, ”शिवांगी, आज तुुम यह कैसी बहकीबहकी सी बातें कर रही हो?’’

बहकीबहकी नहीं, महकीमहकी बातें कर रही हूं,’’ शब्द मानो शिवांगी की आत्मा से निकल रहे थे, ”सच कह रही हूं ज्योति, तुम्हारे होंठों को मुंह लगा कर जो यह शराब पी ले, कसम से जिंदगी भर उस का नशा न उतरे.’’

ज्योति को उलझन सी महसूस हुई, ”शिवांगी, आज तुम्हें यह क्या हो गया है?’’

प्यार हो गया है,’’ ज्योति की तरह उस का भी लहजा संजीदा था, ”तुम्हारे लिए अपने दिल में प्यार तो तभी से महसूस कर रही हूं, जब से पहली बार तुम्हें देखा था, आज जाहिर कर देती हूंआई लव यू ज्योति.’’

ज्योति खिलखिला कर हंसी, ”यह बात किसी लड़के से बोलो तो तुम्हें कुछ हासिल भी हो, मुझ से क्या पाओगी. जो तुम में है, वही मुुझ में है. लड़कियों की खुशियों का बंद ताला खोलने की चाबी लड़कों के पास होती है. मुझे बख्शो और अपनी मनपसंद के किसी लड़के से बोलो आई लव यू.’’

जरूरी नहीं कि लड़की को लड़के से ही प्यार हो,’’ शिवांगी ने अपना दर्शन बघारा, ”लड़की को लड़की से भी प्यार हो सकता है. वैसे ही जैसे मुझे तुम से हो गया है.’’

बहुत चुहल हो गई, अब चलो.’’ ज्योति भौहें उचका कर बोली.

चलते हैं यार,’’ शिवांगी ने ज्योति की कमर जकड़ कर जहां का तहां बैठा लिया, ”पहले अपने होठों की शराब तो चखा दो. आज मैं ऐसा नशा कर लेना चाहती हूं, जो जीवन भर न उतरे.’’

शिवांगी क्या फिजूल की बात कर रही हो, यार. लड़कीलड़की में ऐसे थोड़े ही होता है.’’

होता है यार, आज से नहीं सदियों से होता आ रहा है और होता रहेगा.’’

नहीं यार, ये गलत है.’’ ज्योति ने विरोध किया.

ज्योति मना करती रही, लेकिन शिवांगी कहां मानने वाली थी. उस ने ज्योति का मुंह अपनी तरफ घुमाया, दोनों हथेलियों में उस का चेहरा फंसाया और उस का निचला होंठ अपने होंठों से चूमने लगी. ज्योति का तनमन रोमांच से भर गया. ज्योंज्यों चुंबन के चटखारे तेज हुए, ज्योति का विरोध कमजोर पड़ता गया. आनंद और उत्तेजना के कारण उस की आंखें खुदबखुद बंद हो गईं. लड़की भी लड़की को असीम आनंद दे सकती है, यह उस ने पहली बार जाना. उत्तर प्रदेश का एक चर्चित शहर है कन्नौज. यह शहर सुगंध की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. यहां का इत्र व्यवसाय पूरे विश्व में मशहूर है.

कन्नौज का ऐतिहासिक महत्त्व भी है. राजा जयचंद ने इसे अपनी राजधानी बनाया था. उस के द्वारा बनाए गए किलों के अवशेष आज भी मौजूद हैं. बीड़ी उद्योग के लिए भी कन्नौज मशहूर है. कन्नौज शहर का ही एक बड़ा क्षेत्र है सरायमीरा. इसी सरायमीरा के देविनटोला मोहल्ले में इंद्रकुमार गुप्ता सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी लक्ष्मी के अलावा 3 बेटियां व एक बेटा था. इंद्रकुमार गुप्ता सर्राफा व्यापारी थे. सरायमीरा में उन की ज्वैलरी शौप थी. सर्राफा व्यापार में उन का नाम था.

किसे ढूंढ रही थीं शिवांगी की प्यासी निगाहें

इंद्रकुमार गुप्ता ने 2 बेटियों के विवाह कर दिए थे. बेटे की भी शादी कर दी थी. अब बची थी सब से छोटी बेटी शिवांगी उर्फ रानू. शिवांगी खूबसूरत व तेजतर्रार थी. पढ़ाई में भी वह तेज थी और खेलकूद में भी निपुण थी. उस ने महिला महाविद्यालय से बीए किया था. इस के बाद पापा की ज्वैलरी शौप पर उन का सहयोग करने लगी थी. इतनी सारी खूबियां होने के बावजूद शिवांगी के वजूद में एक खामी थी. किशोरवय तक तो सब ठीक था, मगर उस के बाद उस में विचित्र बदलाव आने लगे. वह महसूस करने लगी थी कि उस की देह अवश्य नारी की है, मगर उस में जो आत्मा है, वह पुरुष की है. 

यही कारण था कि लड़कियों को सहेली बनाने के बजाय लड़कों को दोस्त बनाना शिवांगी को सुहाता था. उस की चालढाल, आचारविचार सब लड़कों जैसे हो गए. कपड़े भी उस ने मरदाना पहनने शुरू कर दिए. लंबे बाल कटवा कर हेयर स्टाइल भी लड़कों जैसा करा लिया. कह सकते हैं कि शिवांगी अपने मन की मालिक थी. जो उसे अच्छा लगता, वही करती. मातापिता का उस पर अंकुश था नहीं. इसलिए भी वह अपने मन की करती थी.

किशोरावस्था पार कर के शिवांगी ने युवावस्था में प्रवेश किया तो उस का मन किसी से प्रीत जोडऩे के लिए ललकने लगा. शिवांगी लड़की थी, मगर स्वयं को लड़की मानती नहीं थी और लड़कों में उसे दिलचस्पी नहीं थी. इसलिए उस की आंखों ने किसी ऐसी नवयौवना की तलाश शुरू कर दी, जिसे वह अपनी प्रेमिका बना कर प्यार कर सके. शिवांगी के मन को कुछ लड़कियां भायीं भी, मगर हर किसी में कोई न कोई कमी भी नजर आई. लिहाजा उन से प्रेम करने का इरादा त्याग दिया. दरअसल, शिवांगी को ऐसी संगिनी की तमन्ना थी, जो लाखों में एक न सही, सैकड़ों में एक जरूर हो. 

लड़कियों की भीड़ में वह सब से अलग नजर आए. ऐसी लड़की जो उस के मन, आत्मा और भावनाओं को समझे. समलिंगी से वह वे सारी अपेक्षाएं करे, जो आम लड़कियां विपरीत लिंगी से किया करती हैं. यही नहीं, उस की क्रियाओं से वह शांति एवं संपूर्ण तृप्ति की भी अनुभूति करे. किसी का प्यार पाने तथा किसी को प्यार देने के लिए शिवांगी का मन बेचैन था, मगर उस के मनमुताबिक संगिनी मिल नहीं रही थी. शिवांगी को हर किसी से निराशा मिल रही थी. इस के बावजूद उस ने सब्र का दामन नहीं छोड़ा. वह उस पल का इंतजार करती रही, जब नियति को उस के जोड़ीदार से मिलाना था. आखिर वह दिन आ ही गया. 

पार्क में फलनेफूलने लगा लेस्बियन प्यार

साल 2020 की बात है. दिसंबर का महीना था. हर रोज की तरह उस रोज भी शिवांगी पापा की ज्वैलरी शौप के काउंटर पर बैठी थी. लगभग 12 बजे एक लड़की आई और शिवांगी के काउंटर के सामने आ कर बैठ गई. शिवांगी की नजरें उसी से चिपक गई, ‘वाव! क्या हुस्न, शबाब और ताजाताजा खिली जवानी है. महबूबा बनाने लायक तो यह लड़की है.’ 

शिवांगी ने मुसकराहट के फूल खिलाए, ”हाय!’’

लड़की भी मुसकराई, ”हाय.’’

मेरा नाम शिवांगी गुप्ता है.’’

मैं ज्योति, देविन टोला में रहती हूं.’’

अरे, वहीं तो मेरा भी मकान है. लेकिन कभी मुलाकात नहीं हुई.’’

मैं पहले दूसरे मोहल्ले में रहती थी. अभी कुछ महीने से देविन टोला मोहल्ले में रह रही हूं. परिवार में मम्मीपापा के अलावा एक बहन है, जिस की शादी हो चुकी है. मैं ने इंटर पास करने के बाद ब्यूटीशियन का कोर्स किया है.’’

परिचय होते ही दोस्ती हो गई. शिवांगी ने खूबसूरत ताजा गुलाब जैसी ज्योति को भरपूर नजरों से देखा फिर पूछा, ”बताओ, कौन सी ज्वैलरी दिखाऊं?’’

मुझे आधुनिक डिजाइन की पायल चाहिए.’’ ज्योति ने कहा. 

शिवांगी ने कई पायल दिखाईं, लेकिन ज्योति को पसंद नहीं आईं. फिर वह दूसरे काउंटर पर जा कर पायल लाई और बोली, ”ज्योति, तुम्हारे दूधिया पैरों में यह पायल खूब फबेगी.’’ 

सचमुच वह पायल ज्योति को पसंद आ गई. उस ने पायल की कीमत चुकाई और चली गई. इस के बाद उसे जब भी कोई ज्वैलरी खरीदनी होती, वह शिवांगी की शौप पर पहुंच जाती. 

इस तरह शौप पर आतेजाते उन की दोस्ती गहराने लगी. शिवांगी ज्योति को अपने घर ले गई तो ज्योति के घर जा कर उस की मम्मी सुषमा से भी मिल आई. बात लड़की से लड़की की दोस्ती की थी, इसलिए किसी को क्या आपत्ति होती. इंद्रकुमार गुप्ता के लिए ज्योति और सुषमा के लिए शिवांगी बेटी जैसी थी. दोस्ती पक्की हो गई. ज्योति के साथ शिवांगी अधिक से अधिक समय गुजारने के प्रयास में रहने लगी. रविवार को शिवांगी की शौप बंद रहती थी, इसलिए वह ज्योति को पास के संजीवनी पार्क में ले जाती. इस के बाद शाम व रात को भी वह ज्योति से फोन पर बातें करती. 

शिवांगी यह सब ज्योति का मन टटोलने के लिए कर रही थी. उस के मन में कसक भी थी, यदि उस का प्रेम निवेदन ज्योति ने ठुकरा दिया तो दिल टूट जाएगा. देर रात को जब सारे लोग गहरी नींद सो रहे होते, शिवांगी जागते हुए सोच रही होती कि जरूरी नहीं कि ज्योति भी ऐसी हो. हर युवती अपने नारी अंगों का महत्त्व देती है एवं उन का उपयोग जानती है. उसे यह भी पता होता है कि उस के अंगों का विपरीतलिंगी ही सही उपयोग कर सकता है और यही प्रकृतिसम्मत है. ज्योति हो अथवा दूसरी युवती, उसे अपनी कामुक चेष्टाओं से चरम का स्पर्श तो करा सकती हूं, मगर कहलाएगा तो अप्राकृतिक ही.

सोचों के इन गहन क्षणों में शिवांगी सोचती, ‘मुझे फिफ्टीफिफ्टी क्यों बनाया. देह नारी की दी तो आत्मा पुरुष की क्यों डाली? मुझे ज्योति से प्यार है. यदि उस ने मेरी नारी देह के साथ प्रेम स्वीकार नहीं किया, तब तो मैं न घर की रहूंगी, न घाट की.

शिवांगी जल्दी हार मानने वाली युवती नहीं थी. धीरेधीरे किंतु बहुत चतुराई से वह ज्योति की भावनाओं से अपने जज्बात जोड़ती रही. इस के साथ ही उस ने ज्योति की कामनाओं में आग लगाना भी शुरू कर दी. संजीवनी पार्क की झाडिय़ों में ले जा कर शिवांगी ने पहले तो अपनी बातों से ज्योति की कामनाएं भड़काई, फिर उस दिन उस के साथ शोख शारीरिक छेड़छाड़ भी कर दी. शिवांगी ने ज्योति की पलकें चूमी, प्यार का इजहार किया और फिर उस के होंठों का शराब चूसने लगी. ज्योति आनंद, उत्तेजना और सरसराहट से भर गई. रोमांच की लहरें उसे दूर बहा ले जाने लगीं. 

सहसा ज्योति का मस्तिष्क जागा. उस ने अपना मुंह शिवांगी के मुंह से हटा लिया, ”बहुत हो गया, अब यह सब मत करो.’’

ज्योति को दिलफेंक आशिक की तरह चाहने लगी शिवांगी

शिवांगी भी एकदम से सब कुछ नहीं करना चाहती थी. उस की इच्छा चरणदरचरण ज्योति को काम के शिखर पर ले जाने की थी. इसलिए वह संगिनी को देखते हुए मुसकराई, फिर भीगे होंठों पर जीभ फिरा कर उन्हें और भिगो लिया, ”ज्योति, वाकई तुम गजब की मादक लड़की हो. जी चाहता है कि तुम्हारे होंठों को चूसचूस कर इस कदर लाल कर दूं कि तुम्हें कभी लिपस्टिक लगाने की जरूरत न रहे.’’

बहुत हो गया, अब चलो.’’ फिर संजीवनी पार्क से निकल कर दोनों अपनेअपने घर चली गईं. 

उस पूरी रात शिवांगी की हर बात और हरकत ज्योति को उत्तेजक अनुभूति से भरती रही. शिवांगी उसे पसंद थी. वह सोचने लगी कि काश! शिवांगी लड़का होती. 

अगले रविवार को भी शिवांगी ने पार्क के सूने कोने की ऐसी जगह चुनी, जहां उन पर किसी की नजर न पड़े. दोनों बैठ गईं तो शिवांगी ने अपनी बांहें ज्योति के गले में डाल दी, ”आई लव यू.’’

ज्योति ने गले से शिवांगी की बांहें निकाली नहीं, बल्कि उस की आंखों में देखते हुए मुसकराने लगी, ”तुम फिर शुरू हो गई.’’

क्या करूं यार, तुम्हें करीब पाते ही मन बहकने लगता है.’’

शिवांगी, बीते रविवार को तुम ने मेरे साथ जो हरकत की, उस के बारे में सोचसोच कर मैं अजीब सा महसूस करती रही.’’

रात को सपना भी देखा था क्या कि तुम मेरी बांहों में हो और मैं तुम्हें प्यार कर रही हूं.’’

यह सुन कर ज्योति के गालों पर हया की सुर्खी फैल गई. वह धीमे से मुसकराई और नजर झुका कर बोली, ”हां, देखा था.’’

इस से यह साबित होता है कि तुम्हें भी मुझ से प्यार हो गया है.’’ शिवांगी के लहजे में शोखी भर गई, ”मैं कह चुकी हूंआई लव यू’, तुम भी कह दो यारआई लव यू टू शिवांगी.’’

धत्त..’’ कह कर ज्योति ने लजा कर अपना चेहरा दुपट्टे से ढक लिया. 

अच्छा, मैं फिर से तुम्हारे होंठ चूसती हूं, उस से तुम्हारी झिझक खत्म हो जाएगी, फिर खुल कर कहोगी आई लव यू टू.’’ कहने के साथ ही बीते दिन की तरह शिवांगी ने ज्योति का निचला होंठ दबाया और पूरी शिद्ïदत से उसे पीने लगी. 

ज्योति की देह उत्तेजना से भरने लगी तो उस ने शिवांगी को स्वयं से दूर हटा दिया, ”लिमिट में रहो यार.’’

अभी मैं ने कहा न, अकेले में तुम्हें पा कर कंट्रोल नहीं होता.’’ शिवांगी ने उस के भीगे होंठों पर अंगुली फेरी, ”अब तो कह दो, आई लव यू शिवांगी.’’

कह दूंगी तो क्या होगा?’’ ज्योति ने पूछा.

प्यार की नेमत मिल जाएगी.’’ शिवांगी किसी दिलफेंक आशिक की तरह बोली, ”मुझे सुकून मिलेगा कि मेरी मोहब्बत एकतरफा नहीं है. ज्योति भी मुझे चाहती है.’’

शिवांगी की बातों और कामुक छेड़छाड़ से ज्योति के जिस्म में आग सी लगी हुई थी. मन में प्यार भी अंगड़ाई ले रहा था. अत: उस ने भी निश्चय कर लिया फिर शिवांगी की आंखों में देखते हुए वह मुसकराई और फिर धीमे से कह दिया, ”आई लव यू टू.’’

शिवांगी की इच्छा पूरी हुई. मुसकरा कर उस ने अपने होंठों के प्याले ज्योति की ओर बढ़ाए और नशीले अंदाज में बोली, ”ऐसे नहीं, पहले मेरे होंठों को चूमो, फिर कहो, आई लव यू शिवांगी.’’

ज्योति ने शिवांगी की तर्ज पर उस का निचला होंठ अपने होंठों से दबाया, चूसा, फिर मुंह हटा कर बोली, ”आई लव यू शिवांगी.’’

उस दिन से शिवांगी और ज्योति की लव स्टोरी शुरू हो गई. पार्क में जा कर कामुक छेड़छाड़ करती और रात को फोन पर वैसी ही बातें करतीं, जैसे प्रेमीप्रेमिका किया करते हैं. शिवांगी प्रेमी होती और ज्योति प्रेमिका. एक रोज ज्योति ने शिवांगी से कहा कि उस ने ब्यूटीशियन कोर्स किया है. ब्यूटीपार्लर खोलने के लिए उसे जगह की तलाश है. शिवांगी कुछ देर सोचती रही फिर बोली, ”हमारे मकान के ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरा खाली है. चाहो तो तुम उस कमरे में ब्यूटीपार्लर चला सकती हो. मगर इस के लिए तुम्हें मेरे मम्मीपापा से बात करनी होगी. आज रविवार है. हमारी शौप बंद है. पापा घर पर ही हैं. तुम मेरे साथ घर चलो और उन से बात कर लो.’’

शिवांगी की सलाह ज्योति को अच्छी लगी. वह उस के साथ घर गई और शिवांगी के पापा इंद्रकुमार गुप्ता से ब्यूटीपार्लर खोलने के लिए रूम देने का अनुरोध किया. चूंकि ज्योति उन की बेटी शिवांगी की सहेली थी, इसलिए वह ज्योति की रिक्वेस्ट को ठुकरा न सके. उन की पत्नी लक्ष्मी भी मान गई. उस के बाद ज्योति ने रूम सजाया और ज्योति ब्यूटीपार्लरके नाम से दुकान के बाहर बोर्ड लगा दिया. पार्लर खोलने में शिवांगी ने उस की भरपूर मदद की. 

ब्यूटीपार्लर बन गया प्यार करने का अड्डा

पहले दोनों का मिलन पार्क में होता था. अब हर रोज सुबह व शाम उन का मिलन ब्यूटीपार्लर वाले रूम में होने लगा. यहां उन्हें किसी प्रकार का डर भी नहीं था. कभीकभी रात को बहाने से शिवांगी ज्योति को रोक भी लेती. फिर तो उस रात दोनों खूब मौजमस्ती करतीं. शिवांगी प्रेमी का रोल अदा करती और ज्योति प्रेमिका का. दोनों पूरी रात आपस में लिपटी रहतीं और देह सुख पातीं. लेकिन एक रात उन का भांडा फूट गया. उस रात शिवांगी ने ज्योति को रोक लिया था. खाना खाने के बाद दोनों कमरे में पहुंचीं और शिवांगी ने कमरा अंदर से बंद कर लिया. आधी रात के बाद शिवांगी की मम्मी लक्ष्मी बाथरूम जाने के लिए वह बेटी के कमरे के सामने से गुजरी तो उसे फुसफुसाहट के साथ अजीब सी आवाजें सुनाई दीं. लक्ष्मी का माथा ठनका और पांव जहां के तहां ठिठक गए. 

लक्ष्मी ने खिड़की से झांक कर देखा तो भीतर का नजारा देख कर उस के होश उड़ गए. दोनों सहेलियां बेलिबास थीं और कामुक क्रीड़ाओं में तल्लीन थी. लक्ष्मी सन्न रह गई तो यह है ज्योति व शिवांगी की दोस्ती का राज’. 

उसे गुस्सा तो बहुत आया कि उसी समय ज्योति को कमरे से खींच कर घर से बाहर निकाल दे. मगर ऐसा करने से बदनामी हो सकती थी. इसलिए वह चुप रही और अपने बैड पर जा कर लेट गई. यह अलग बात थी कि वह पूरी रात सो नहीं सकी. सुबह होते ही ज्योति अपने घर चली गई. इस के बाद लक्ष्मी ने शिवांगी की खबर ली, ”रानू, तुम दोनों जो करती हो, वह मैं ने देख लिया है. आज से तुम उस से नहीं मिलोगी.’’ 

लक्ष्मी ने बेटी की करतूत पति को भी बता दी. इंद्रकुमार गुप्ता शर्म से पानीपानी हो गए. उन्होंने शिवांगी को जम कर फटकार लगाई. पेरेंट्स की फटकार सुन कर शिवांगी न शरमाई न लजाई, न डरी न सहमी. सीधे बोली, ”पापा, मैं ज्योति से प्यार करती हूं. ज्योति भी मुझ से प्यार करती है. हम दोनों एकदूजे के लिए ही बने हैं. इसलिए मैं ज्योति से शादी करना चाहती हूं. इस के लिए ज्योति भी तैयार है.’’

बेटी की बात सुन कर इंद्रकुमार गुप्ता हैरान रह गए, ”शिवांगी, तुम्हारा दिमाग फिर गया है क्या. भला लड़की की शादी लड़की से कैसे हो सकती है. घरसमाज वाले क्या कहेंगे. समाज में मेरी इज्जत है, मानमर्यादा है. सब कुछ खत्म हो जाएगा. मेरी बात मानो और उस लड़की से नाता तोड़ लो.’’

यह संभव नहीं है पापा. न मैं उस के बिना रह सकती हूं और न ज्योति मेरे बिना रह सकती है.’’

जिद छोड़ दो बेटी. मैं ने तो सोचा था कि तुम्हारी बड़ी बहनों की तरह तुम्हारी भी शादी किसी अच्छे परिवार में धूमधाम से करूंगा, लेकिन तुम ने तो मेरे अरमानों का गला घोंट दिया. तुम्हारे इस कदम से समाज में मेरी जगहंसाई होगी और लोग हमें अजीब नजरों से देखेंगे.’’

पापा, आप मेरी भावनाओं को समझें. मेरी परिस्थिति को जानें. मैं न नर हूं, न नारी. मेरी काया जरूर नारी की है, लेकिन आत्मा पुरुष की है. मेरी शादी जबरदस्ती कर दी तो क्या रिश्ता कायम रहेगा? कभी नहीं. तब आप की बदनामी नहीं होगी? सिर नीचा नहीं होगा?’’

तो तुम्हीं बताओ, चाहती क्या हो तुम?’’

पापा, मैं चाहती हूं कि आप जितना पैसा मेरी धूमधाम वाली शादी में खर्च करना चाहते हैं. उतना पैसा मेरी जिंदगी संवारने में खर्च कर दीजिए. आप मेरा जेंडर बदलवाने में खर्च कर दें ताकि मैं संपूर्ण पुरुष बन जाऊं. उस के बाद हम ज्योति से शादी कर लेंगे.’’

शिवांगी के फैसले से फेमिली वाले क्यों हुए परेशान

इंद्रकुमार गुप्ता को शिवांगी की बातें अटपटी लगीं. वह हर हाल में दोनों सहेलियों को अलग करना चाहते थे. शिवांगी नहीं मानी तो इंद्रकुमार गुप्ता उलाहना ले कर ज्योति के घर जा पहुंचे. उन्होंने सुषमा से कहा, ”तुम्हारी बेटी गलत शौक रखती है. बेहतर होगा, जल्द ही उस के हाथ पीले कर दीजिए. ज्योति को यह भी समझा दीजिएगा कि वह मेरी बेटी शिवांगी का पीछा छोड़ दे. और हां, ज्योति से कहना, मेरा कमरा खाली कर दे, जिस में उस ने ब्यूटीपार्लर खोल रखा है.’’

इंद्रकुमार गुप्ता की बात सुन कर सुषमा चौंक गई. उसे दोनों की दोस्ती पर शक तो था, लेकिन बात इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी, इस का अंदाजा उसे नहीं था. इंद्रकुमार के जाते ही सुषमा ने ज्योति की खबर ली, ”ज्योति, तुम दोनों जो करती हो, उस की खबर हमें मिल गई है. आज से तुम्हारा उस के घर जाना बंद. ब्यूटीपार्लर भी बंद कर दो. देहरी से पांव निकाला तो टांगे तोड़ दूंगी.’’ सुषमा ने ज्योति पर पाबंदियां ही नहीं लगाईं, उस का मोबाइल फोन भी छीन लिया. 

अपनी सफाई में ज्योति क्या कहती. कहने को उस के पास कुछ था ही नहीं. सिर झुकाए वह मम्मी की बात सुनती रही. शिवांगी लड़का होती, तब जरूर कह देती, ‘हम दोनों प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं. लड़की से लड़की के प्यार का न कोई औचित्य है, न सामाजिक मान्यता.

बेटी की आई शिकायत से सुषमा ने पति राधेश्याम को अवगत कराया तो वह चौंक पड़े कि यह क्या सुनने को मिल रहा है. फिर बोले, ”तुम ज्योति पर कड़ी नजर रखो. जल्द से जल्द हम उस के हाथ पीले कर देंगे, ताकि हमारी इज्जत बची रहे.’’

ज्योति ने पापा की बात सुनी तो मानो उस के दिल पर छुरियां चल गईं, लेकिन वह कर ही क्या सकती थी. एक बार फिर उसे शिवांगी के लड़की होने पर अफसोस हुआ, ‘काश! शिवांगी लड़का होती’.

शिवांगी और ज्योति के फेमिली वाले अवश्य उन के विरोधी हो गए थे, लेकिन वे एकदूसरे की मोहब्बत को तोड़ नहीं सके. वे दोनों किसी न किसी तरह अपनी तड़प मिटा ही लेते थे. वे हमेशा इस चिंता में रहती थीं कि कैसे मिलें, कहां मिलें.

एक रोज ज्योति बाजार से निकली तो उसे सड़क पर स्कूटी से जाते हुए शिवांगी दिखी. उस ने हाथ लहरा कर रुकने का इशारा किया. स्कूटी रोक कर दोनों एकदूसरे से जा मिलीं. दोनों ने अपनीअपनी तड़प बयां की. शिवांगी ने उस का हाथ अपने हाथों में ले कर तसल्ली दी, ”ज्योति, हम एकदूसरे के लिए ही बने हैं, इसलिए कोई भी हमें जुदा नहीं कर सकता.’’

ज्योति ने मायूस निगाहों से उसे देखा, ”जीवन भर हम साथ रहें भी तो कैसे?’’

शादी कर के.’’ शिवांगी के मुंह से निकला.

क्या यह मुमकिन है?’’ ज्योति ने अचकचा कर पूछा. 

बेशक मुमकिन है. मैं अपना जेंडर चेंज करा कर पूर्णरूप से लड़का बनूंगी. उस के बाद तुम से शादी करूंगी. मैं ने अपने पापा को अपनी मंशा से अवगत करा दिया है. 

अब देखना है कि वह अमल कब करते हैं. ज्योति, तुम्हें वादा करना होगा कि जब तक मैं लड़का न बन जाऊं, तब तक तुम्हें इंतजार करना होगा.’’

शिवांगी, मुझे फेमिली वालों की कितनी ही जिल्लत झेलनी पड़े, कितनी भी प्रताडऩा सहनी पड़े. लेकिन वादा निभाऊंगी. तुम्हारा इंतजार करूंगी.’’

लिंग चेंज करा कर शिवांगी को मिल ही गया प्यार

इधर शिवांगी को ले कर इंद्रकुमार गुप्ता बेहद परेशान रहने लगे थे. इसी परेशानी के चलते एक रोज उन्होंने अपने फैमिली डाक्टर से शिवांगी को ले कर चिंता जताई. इस पर डाक्टर ने कहा कि शिवांगी की काया नारी की है, लेकिन उस की चालढाल, पहनावा, बोलीभाषा सब लड़कों जैसी है. ऐसे में यदि वह अपना जेंडर चेंज कराने की इच्छुक है तो इस में हर्ज ही क्या है. इसी के साथ उन्होंने दिल्ली, लखनऊ के कुछ डाक्टरों के नाम भी सुझाए. 

इस बाबत इंद्रकुमार गुप्ता ने पत्नी लक्ष्मी से गहन विचारविमर्श किया फिर पत्नी के राजी होने पर उन्होंने शिवांगी का जेंडर चेंज कराने का फैसला किया. वह शिवांगी को दिल्ली ले गए और जेंडर चेंज करने वाले एक चर्चित डाक्टर को दिखाया. डाक्टर ने सब से पहले शिवांगी की काउंसलिंग की, फिर बताया कि शिवांगी का जेंडर चेंज हो सकता है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा. 4 औपरेशन करने होंगे और लगभग 8 लाख रुपए का खर्च आएगा. हर औपरेशन की फीस एडवांस जमा करनी होगी. 

इंद्रकुमार गुप्ता राजी हो गए. इस के बाद शिवांगी के जेंडर चेंज की प्रक्रिया शुरू हो गई. लगभग 2 साल में शिवांगी के 3 औपरेशन पूरे हो गए थे. शिवांगी लड़की से लड़का बन चुकी थी. यद्यपि एक साधारण सा औपरेशन अब भी बाकी था. अब वह शिवांगी से शिव बन गई थी. शिवांगी लड़की से लड़का बनी तो उस ने ज्योति से शादी की इच्छा जताई. उस ने पहले अपने पेरेंट्स को राजी किया, फिर ज्योति के मम्मीपापा को भी राजी कर लिया. इस के बाद शादी की तैयारियां शुरू हो गईं. शादी के कार्ड छपवाए गए और नातेदारों, इष्ट मित्रों व परिवार वालों को बंाटे गए. कार्ड पर वर का नाम शिव गुप्ता व वधू का नाम ज्योति लिखा था. 

कार्ड बंटने के बाद यह शादी कौतूहल का विषय बन गई. क्योंकि रिश्तेदारपरिवार व मोहल्ले के लोग जानते थे कि इंद्रकुमार के 4 बच्चों में 3 की शादी हो चुकी थी और चौथी बेटी शिवांगी थी. जबकि कार्ड पर वर का नाम शिव छपा था. अत: इस शादी में सम्मलित होने को लोग उत्साहित थे. 25 नवंबर, 2024 को कन्नौज के एक अच्छे गेस्टहाउस में शिवांगी उर्फ शिव का विवाह ज्योति के साथ धूमधाम से हो गया. इंद्रकुमार गुप्ता ने पत्नी लक्ष्मी के साथ वरवधू को आशीर्वाद दिया. 

ज्योति के मम्मीपापा भी शादी में शामिल हुए और दोनों को आशीर्वाद दिया. 2 सहेलियों की इस अजबगजब प्रेम कहानी की चर्चा आजकल पूरे क्षेत्र में हो रही है. कथा संकलन तक ज्योति दुलहन बन कर पति शिवांगी उर्फ शिव के साथ उस के घर में रह रही थी. 

अपनेअपने पति को छोड़ 2 महिलाओं ने की शादी

देवरिया जिले से 25 किलोमीटर दूर एक कस्बा है रुद्रपुर. जो छोटा काशी के नाम से जाना जाता है. 23 जनवरी, 2025 को यहां स्थित दुग्धेश्वर मंदिर परिसर में एक कौतूहल भरी घटना घटित हुई. सुबह के समय मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा था. तभी 2 महिलाएं मंदिर में आईं. पुजारी उमाशंकर पांडेय उस समय मंदिर में ही थे. दोनों महिलाओं ने पुजारी को हाथ जोड़ कर अभिवादन किया फिर बोली, ”पुजारीजी, हम दोनों गोरखपुर से आई हैं. मेरा नाम गुंजा है और यह कविता है. हम दोनों एकदूसरे से बहुत प्यार करती हैं, एकदूसरे के बिना नहीं रह सकतीं, इसलिए आपस में शादी करना चाहती हैं.’’

उन की बात सुन कर पुजारी उमाशंकर पांडेय चौंक पड़े. फिर सोचने लगे कि महिला की शादी महिला से… यह कैसी शादी? यह तो अमर्यादित है. उन्होंने दोनों को गौर से देखा, फिर पूछा, ”तुम्हारी उम्र तो परिपक्व है. क्या तुम दोनों की अभी तक किसी पुरुष के साथ शादी नही हुई?’’

पुजारीजी, हम दोनों विवाहित हैं, लेकिन हम ने अपनेअपने पतियों को छोड़ दिया है. क्योंकि वे शराबी थे और मारपीट करते थे. बाद में हम दोनों की मुलाकात हुई. बातचीत शुरू हुई, बातचीत प्यार में बदली और अब जीवन भर साथ रहना चाहती हैं. आप को हमारी शादी से कोई ऐतराज तो नही?’’

पुजारी ने कहा, ”बेटा, इस मंदिर में जो भी सच्चे मन से आता है, नाथ बाबा उन की मनोकामना पूरी करते हैं. हम तो सिर्फ उन के सेवक हैं. हमें कोई ऐतराज नहीं.’’

पुजारी की सहमति मिली तो गुंजा और कविता मंदिर के पास फूल बेचने वाले की दुकान पर पहुंचीं. वहां से उन्होंने फूलों की 2 मालाएं लीं और बगल की दुकान से सिंदूर की डिब्बी ली. फिर वे वापस मंदिर में आ गईं. इस के बाद गुंजा दूल्हा बनी और कविता दुलहन. दोनों नाथ बाबा के समक्ष पहुंचीं और उन को साक्षी मान कर एकदूसरे के गले में माला पहनाई. गुंजा ने कविता की मांग में सिंदूर भर कर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार किया और जीवन भर साथ निभाने का वादा किया. फिर दोनों ने पुजारी उमाशंकर पांडेय से आशिर्वाद लिया.

2 समलैंगिक महिलाओं की शादी की खबर रुद्रपुर कस्बे में फैली तो कौतूहलवश उन्हें देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी. सब को इस बात की उत्सुकता थी कि उन्होंने आपस में क्यों और कैसे शादी रचाई? मीडियाकर्मियों को भी यह जानकारी हुई तो उन का भी जमावड़ा लग गया. दोनों महिलाओं ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया और आपस में शादी करने के बाबत बताया. दूल्हे की भूमिका निभाने वाली गुंजा रांची (बिहार) की रहने वाली थी. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ी है. वह जवान हुई तो मम्मीपापा ने उस की शादी राधे नामक युवक से कर दी. राधे प्राइवेट नौकरी करता था. गुंजा की शादी के कुछ साल तो ठीक से गुजरे, उस के बाद घर में कलह होने लगी. 

कलह का पहला कारण यह था कि शादी के कई साल बीत जाने के बाद भी गुंजा मां नहीं बन सकी थी. सब लोग उसे बांझ कहते थे और ताने मारते थे. उस का पति राधे भी उसी को दोषी ठहराता था. दूसरा कारण यह था कि राधे शराब का लती था. गुंजा शराब पीने का विरोध करती थी तो वह उसे मारतापीटता था. सासससुर के तानों और पति की प्रताडऩा से गुंजा आजिज आ गई तो उस ने ससुराल से किनारा कर लिया और मायके में आ कर रहने लगी. पेरेंट्स ने उस की दूसरी शादी का प्रयास किया, लेकिन उस ने इनकार कर दिया, क्योंकि उसे तो अब मर्द जाति से ही नफरत हो गई थी. 

दुलहन बनी कविता, गोरखपुर के झंगहा थाने के बांसगांव की रहने वाली थी. उस का विवाह कम उम्र में मंगई उर्फ मंगूलाल के साथ हुआ था. मंगई किसान था. उस की आर्थिक स्थिति खराब थी. शादी के बाद कविता एक के बाद एक 4 बच्चों की मां बनी. मंगई खेतों पर मेहनत तो करता था, लेकिन शराबी था. वह कविता पर शक करता था. लांछन लगा कर वह उस की खूब पिटाई करता था. कविता उसे शराब पीने को मना करती तो वह इंसान से हैवान बन जाता और उसे जानवरों की तरह पीटता था. कविता कब तक मार सहती, वह शराबी पति से नफरत करने लगी. वह बच्चों और पति को छोड़ मायके में आ कर रहने लगी. 

गुजा को मोबाइल फोन चलाने का शौक था. वह फोन पर इंस्टाग्राम व फेसबुक देखती थी. करीब 6 साल पहले उस का सोशल मीडिया के जरिए कविता से संपर्क हुआ. दोनों ने अपने दुख को एक दूसरे से साझा किया. सोशल मीडिया के जरिए उन की अकसर बातचीत होने लगी. धीरेधीरे बातचीत प्यार में बदल गई. उन दोनों की प्यार भरी बातें इंस्टाग्राम व फेसबुक के जरिए होने लगीं. समय बीतता रहा और उन का प्यार पनपता रहा. आखिर वह समय भी आ गया, जब दोनों महसूस करने लगीं कि अब वे एकदूसरे के बिना नहीं रह सकतीं. अत: दोनों ने आपस में शादी रचाने और जीवन भर साथ रहने का निश्चय किया.

एक रोज गुंजा ने कविता से बात की और उसे अपनी दुलहन बनाने को राजी कर लिया. गुंजा ने उसे गोरखपुर बुलाया. 15 जनवरी, 2025 को गुंजा और कविता अपनेअपने घरों से निकलीं और गोरखपुर आ कर दोनों का मिलन हुआ. दोनों गोरखपुर के बेतिया हाता स्थित सरकारी अस्पताल में आ कर रुकीं. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह कहां शादी रचाएं. इसी बीच उन्हें देवरिया के रुद्रपुर कस्बा स्थित दुग्धेश्वर मंदिर के बारे में पता चला.

लगभग एक सप्ताह तक इधरउधर भटकने के बाद दोनों 23 जनवरी को दुग्धेश्वर मंदिर पहुंचीं और आपस में एकदूसरे के गले में वरमाला डाल कर शादी रचा ली. शादी करने के बाद दोनों ने शादी रचाने के फोटो भी सोशल मीडया पर शेयर किए. गुंजा और कविता ने अब जीवन भर साथ रहने और एकदूसरे के सुखदुख में साथ देने की कसम खाई है. उन का कहना है कि वे गोरखपुर में कमरा ले कर साथ रहेंगी और रोजीरोटी का साधन खुद ही जुटाएंगी. समलैंगिक महिला जोड़ी की यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.

कहानी लेखक द्वारा एकत्र की गई जानकारी पर आधारित

 

Uttar Pradesh Crime : महिलाओं को टारगेट बनाने वाला साइको किलर

Uttar Pradesh Crime : 19 वर्षीय अजय निषाद और शिवानी एकदूसरे को जीजान से प्यार करते थे. फिर इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि अजय महिलाओं से ही नफरत करने लगा. एक के बाद एक जानलेवा वारदातों को अंजाम दे कर उस ने लोगों के मन में साइको किलर का ऐसा डर भर दिया कि…

13 नंवबर, 2024 की उस रात गोरखपुर के झंगहा थानाक्षेत्र के रसूलपुर गांव के टोला कटहरिया की रहने वाली 24 वर्षीय कविता गहरी नींद में सो रही थी. घर के अन्य सदस्य अपनेअपने कमरों में सो रहे थे. रात गहरी थी और चारों ओर घनघोर अंधेरा था. कुत्तों के भौंकने की आवाज अंधेरे के सीने को चीर रही थी. उसी समय अचानक कविता के कमरे से उस के जोर से चीखने की आवाज उस के पापा छोटेलाल भारती के कानों से टकराई. 

गहरी नींद में सोए होने के बावजूद छोटेलाल भारती झट से उठ बैठे और कविता के कमरे की ओर दौड़े. पति को अचानक बेटी के कमरे की ओर जाते देख पत्नी सुमन भी उन के पीछे हो ली. वह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा क्या हुआ, जो इतनी तेजी से बेटी के कमरे की ओर जा रहे हैं. पलभर में वह कविता के कमरे में पहुंचे और बिजली का स्विच औन किया तो कविता बिस्तर पर पड़ी दर्द से छटपटा रही थी. उस के सिर से खून बह रहा था. 

छोटेलाल ने बेटी से इस हालात के बारे में पूछा तो उस ने कराहते हुए बताया कि काली शर्ट में एक नकाबपोश ने किसी भारी चीज से सिर पर जोरदार वार किया और सामने के दरवाजे से तेजी से भाग गया. छोटेलाल को समझते देर न लगी कि यह नकाबपोश वही रहस्यमयी व्यक्ति है, जो पिछले 6 महीने से रहस्य बना हुआ है और चुनचुन कर औरतों को अपना शिकार बना रहा है. छोटेलाल दौड़ते हुए उस ओर गया, जिस ओर भागने की बात कविता ने उसे बताई थी. 

घर से कुछ दूर आगे तक छोटेलाल गया, मगर उसे दूरदूर तक कोई नजर नहीं आया, सिवाय चारों ओर फैले सन्नाटे के. लौट कर वह घर पहुंचा. उस ने मोबाइल फोन पर टाइम देखा तो उस समय रात के साढ़े 3 बज रहे थे.  दर्द से बिलबिला रही कविता की आवाज सुन कर फेमिली वाले परेशान थे. छोटेलाल ने उसी समय शोर मचा कर पड़ोसियों को जगाया और नकाबपोश के गांव में होने और बेटी पर हमला करने की बात बता कर उसे पकडऩे में मदद की गुहार लगाई. इस नकाबपोश के आतंक से सिर्फ उस गांव वाले ही नहीं, पासपड़ोस के कई गांव वाले दहशत में जी रहे थे. 

आलम यह हो चला था कि शाम होते ही महिलाएं अपने घरों में दुबक जाती थीं. नकाबपोश की दहशत से कोई भी औरत अकेली रात में कहीं भी नहीं जाती थी. गांव वाले भी चाहते थे कि नकाबपोश जल्द से जल्द पकड़ा जाए. पुलिस भी उसे पकडऩे में लगी हुई थी, लेकिन अभी तक वह भी खाली हाथ थी. इसलिए लोगों ने उसे आज पकडऩे की ठान ली. खैर, गांव वालों ने एकजुट हो कर लाठी और डंडे लिए गांव को चारों ओर से घेर लिया, ताकि जो भी हो वह यहां से बच कर जाने न पाए. दहशत के मारे 6 महीने से गांव वालों की आंखों से नींद गायब हो गई थी. गांव वालों ने गांव का चप्पाचप्पा छान मारा, एकएक गली छान ली, लेकिन उस रहस्यमयी व्यक्ति का कहीं पता नहीं चला. शायद अंधेरे का लाभ उठा कर वह कहीं गुम हो गया था.

बहरहाल, पौ फटते ही छोटेलाल भारती गांव वालों के साथ घायल बेटी को ले कर झंगहा थाने पहुंचे. सुबहसुबह दीवान दयाराम थाने में भारी संख्या में गांव वालों को देख कर चौंक गया. औफिस से निकल कर वह बाहर आया और इतनी सुबह आने का कारण पूछा तो छोटेलाल ने नकाबपोश के द्वारा बीती रात बेटी पर जानलेवा हमला करने की जानकारी दे कर आवश्यक काररवाई करने की गुहार लगाई. थानाक्षेत्र की यह पांचवीं घटना थी और उस हमलावर को पकड़े जाने की बात तो दूर, पुलिस उस की परछाई तक छू नहीं सकी थी. हैडकांस्टेबल दयाराम ने छोटेलाल और उस के साथ आए गांव वालों को भरोसा दिलाया कि बड़े साहब के आते ही उस के खिलाफ जरूरी काररवाई जरूर की जाएगी. पहले अस्पताल जा कर बेटी का इलाज कराएं.

दयाराम ने जो बात कही थी, सच ही कही थी. दर्द से कराह रही कविता को इस समय इलाज की बहुत जरूरत थी.  दीवान की बात मान कर छोटेलाल बेटी को ले कर नजदीक के अस्पताल पहुंचे. चूंकि चोट काफी गहरी थी और हालत गंभीर बनी हुई थी, इसलिए डाक्टर ने उसे भरती कर इलाज करना शुरू किया. 

लगातार घटनाओं से पुलिस भी हुई परेशान

इधर दीवानजी के जरिए तत्कालीन इंसपेक्टर सूरज सिंह को घटना की सूचना मिल चुकी थी. वह तुरंत अस्पताल पहुंचे और घायल कविता के बयान दर्ज कर थाने लौट आए. फिर छोटेलाल की तहरीर पर अज्ञात हमलावर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. इंसपेक्टर सूरज सिंह ने घटना की सूचना सीओ (चौरीचौरा) अनुराग सिंह, एसपी (ग्रामीण) जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव और एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर को दे दी. मामला गंभीर हो चला था. नकाबपोश की इस पांचवीं घटना ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था. 

अफसोस की बात तो यह थी कि अभी तक पुलिस यह तक पता लगाने में असफल थी कि आखिर वो है कौन? क्यों वह औरतों को ही अपना निशाना बना रहा है? जानलेवा हमला कर के वह आखिर अंधेरे में गुम कहां हो जाता है? इन तमाम सवालों के जबाव उस नकाबपोश के पकड़े जाने पर ही मिल सकते थे.  14 नंवबर, 2024 की दोपहर में एसएसपी गौरव ने अपने औफिस में इसी घटना को ले कर जरूरी मीटिंग बुलाई थी. उस मीटिंग में एसपी (ग्रामीण) जितेंद्र कुमार, सीओ (चौरीचौरा) अनुराग सिंह, एसएचओ (झंगहा) और एसओजी प्रभारी शामिल थे. पहली घटना से ले कर पांचवीं घटना की चर्चा उस मीटिंग में की गई. 

चर्चा के दौरान एक बात कौमन निकल कर बाहर आई, वह यह थी कि सभी घटनाओं में औरतों पर हमला एक जैसे ही किया गया था, जिस में हमलावर ने किसी वजनी चीज से सिर पर ही वार कर के उन्हें मारना चाहा था.  इस घटना में 11 अगस्त, 2024 को हमलावर का दूसरा शिकार बनी थी ममता देवी (32 साल). 15 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझती हुई वह जिंदगी से हार गई थी. हमलावर की शिकार बनी औरतों के लिए गए बयान में यह सामने आया था कि देखने में हमलावर दुबलापतला दिखता है, काली शर्ट पहने होता है, चेहरा किसी कपड़े से ढका रखता है और नंगेपांव रहता है.

एसएसपी गौरव ने एक टीम गठित की, जिस की जिम्मेदारी एसपी (ग्रामीण) जितेंद्र को सौंपी. उन्होंने अपने नेतृत्व में पुलिस की कई टीमें गठित कीं. उन टीमों का नेतृत्व उन्होंने सीओ (चौरीचौरा) अनुराग सिंह को सौंपा. एसएसपी के दिशानिर्देशन में अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए सीओ अनुराग सिंह रहस्यमयी हमलावर की खोज में जुट गए. 30 जुलाई, 2024 से 13 नवंबर, 2024 के बीच हुई घटनाओं की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने 20 गांव खंगाले. 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखने के साथ ही करीब डेढ़ लाख मोबाइल फोन का डेटा खंगाला. इस के बावजूद उस का कोई सुराग हाथ नहीं लगा.

सफलता नहीं मिलने पर ऐसे व्यक्ति की तलाश शुरू हुई, जो महिला अपराध के मामले में जेल गया हो और घटनास्थल के आसपास उस की लोकेशन रही हो. मगर पुलिस यहां भी खाली हाथ रही. पुलिस टीम ने गांवगांव जा कर लोगों से संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी लेने के बाद उन का थाने का रिकौर्ड चैक किया. संदेह के आधार पर कई लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ भी की गई. काफी मशक्कत के बाद पुलिस के हाथों आखिरकार रहस्यमयी हमलावर की पहचान हो ही गई. दरअसल, 4 घटनास्थलों से जुटाए गए फुटेज में एक ऐसा व्यक्ति देखा गया, जो घटना के बाद तेजी से भागता नजर आ रहा था. 

फुटेज को गहराई से देखा गया तो इकहरे बदन वाला वह व्यक्ति काली शर्ट पहने था और नंगे पांव था. उस का हुलिया ठीक वैसा ही मेल खा रहा था, जैसा पीडि़त महिलाओं ने बताया था. उस रहस्यमयी व्यक्ति की पहचान अजय कुमार निषाद पुत्र स्वामीनाथ निषाद निवासी मंगलपुर गांव के रूप में की गई थी. 

पुलिस क्यों रख रही थी फूंकफूंक कर कदम

पहचान पुख्ता होते ही सीओ अनुराग सिंह की टीम चौकन्नी हो गई थी. वह टीम के साथ इतने सतर्क थे कि किसी भी कीमत पर उस रहस्यमयी हमलावर तक उस की पहचान हो जाने की खबर तक न लगने पाए. वरना वह मौके से फरार हो सकता था और कई दिनों की कड़ी मेहनत पर पानी फिर सकता था. इसलिए वे बहुत फूंकफूंक कर कदम उठा रहे थे. आननफानन में उन्होंने एक योजना बनाई. उस योजना के अनुसार, उसी रात यानी 17 नवंबर की रात में सादे वेश में पुलिस टीम के साथ रात करीब साढ़े 12 बजे मंगलपुर गांव को चारों ओर से घेर लिया. यही नहीं ऐहतियात के तौर पर एसओजी टीम को मौके पर बुला लिया गया था. दोनों टीमें इस औपरेशन को मिल कर अंजाम दे रही थीं, ताकि हमलावर गांव से भाग न सके.

पुलिस मुखबिर के जरिए पहले ही उस की शिनाख्त कर चुकी थी. पुलिस हमलावर अजय के घर की ओर बढ़ रही थी. पुलिस की टीम ने अजय के घर को चारों ओर से घेर लिया था. झंगहा थाने के एसएचओ सूरज सिंह ने दरवाजा थपथपाया. थाप की आवाज सुन कर अधेड़ उम्र के एक शख्स ने दरवाजा खोला. सामने कई लोगों को एक साथ देख कर उस की नींद गायब हो गई. अभी वह कुछ समझ पाता, तभी इंसपेक्टर सूरज सिंह ने अपना परिचय देते हुए कहा, ”मैं झंगहा थाने का इंसपेक्टर सूरज सिंह हूं. तुम्हारे दरवाजे पर पुलिस फोर्स खड़ी है. जो पूछूंगा, उस का सहीसही जवाब देना. क्या अजय यहीं रहता है?’’

हां साहब, अजय यहीं रहता है, लेकिन बात क्या है, सर?’’ अचकचा कर शख्स ने सवाल किया, ”मैं अजय का पिता स्वामीनाथ हूं. इतनी रात गए आप सब यहां. सब ठीक तो है न. मेरे बेटे ने क्या किया है?’’

हां, सब ठीक है. एक नारमल पूछताछ के लिए उसे थाने ले जाना है.’’ इंसपेक्टर सूरज सिंह ने बड़े साधारण तरीके से अपनी बात को आगे रखा, ”पूछताछ के बाद उसे घर तक छोड़ दिया जाएगा.’’

लेकिन बात क्या है साहब?’’

कहा न, एक नारमल पूछताछ है. पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा.’’ 

बाहर बातचीत की आवाज सुन कर स्वामीनाथ की पत्नी भी उठ कर पति के पास जा पहुंची थी. दरवाजे पर कई लोगों को देख कर उन की भी आंखें फटी रह गई थीं. पति और सामने खड़े इंसपेक्टर के बीच तीखी बहस हो रही थी. 

देखो, मैं जो पूछ रहा हूं, सीधी तरह से बता दो कि अजय कहां है, वरना मुझे दूसरे तरीके भी आते हैं.’’ इंसपेक्टर सूरज सिंह ने कड़क स्वर में कहा, ”तुम सीधे तरीके से बताते हो या फिर मैं पुलिसिया…’’ 

बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि स्वामीनाथ गिड़गिड़ाया, ”साहब, मेरे बेटे के साथ कुछ मत कीजिएगा. मैं उसे ले कर आता हूं. वो घर में सो रहा है.’’

ठीक है, उसे ले कर आओ, पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाएगा.’’ इंसपेक्टर सिंह ने उसे भरोसा दिलाया, तब कहीं जा कर वह अजय को बुलाने कमरे की ओर बढ़ा. इधर सामने खड़ी अजय की मां समझ नहीं पा रही थी कि पुलिस वाले बेटे को क्यों लेने आए हैं?

कुछ देर के बाद स्वामीनाथ अजय को साथ ले कर बाहर आया और उसे पुलिस को सौंप दिया. यह देख कर उस की मां ने हंगामा किया तो पुलिस के कड़े तेवर देख कर वह चुप हो गई. इंसपेक्टर सूरज सिंह अजय को सीधे थाने ले गए. थोड़ी में सीओ अनुराग सिंह और एसओजी टीम भी थाने पहुंच गई थी. पुलिस के तमाम सवालों का अजय ने एक ही जवाब दिया कि उसे इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उस ने ऐसा कोई काम किया है.

रात भर पुलिस परेशान रही. अगली सुबह उन चारों महिलाओं को थाने बुलाया गया और उन्हें छिपा कर अजय की शिनाख्त कराई तो चारों पीडि़ताओं ने उसे पहचान लिया. उसी ने उन पर हमला किया था. फिर क्या था, पुलिस ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि वह औरतों से सख्त नफरत करता है. उन का चीखना, तड़पना और उन के जिस्म से बहता खून देख कर उसे बहुत सुकून मिलता था. 

यह सुन कर पुलिस वाले आश्चर्यचकित हो गए कि यह तो किसी मनोरोगी से कम नहीं है. क्योंकि दूसरों को दर्द दे कर, उस की तकलीफ देख कर उसे खुशी मिलती थी. सीओ सिंह ने जब इस का कारण पूछा तो उस का जवाब सुन कर वह भी हैरान रह गए थे. फिर उस ने आगे जो बयान दिया, वह किसी सस्पेंस वाली फिल्मी कहानी से कम नहीं निकला. घटना का खुलासा होने के बाद उसी दिन शाम साढ़े 3 बजे एसएसपी गौरव ग्रोवर ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता बुला कर करीब 6 महीने से सिरदर्द बनी सीरियल किलर की कहानी का खुलासा किया. 

पत्रकारों ने उक्त घटना के बारे में आरोपी से पूछताछ की तो अजय के चेहरे पर पछतावे का कोई निशान नहीं था. खैर, पुलिस ने अजय कुमार निषाद को नामजद करते हुए बीएनएस की अलगअलग धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के अदालत के सामने पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों के रिमांड पर जेल भेज दिया गया. अदालती आदेश के बाद अजय को कड़ी सुरक्षा में बिछिया स्थित गोरखपुर मंडलीय कारागार भेज दिया गया.  बहरहाल, पुलिस द्वारा अजय से की गई पूछताछ के बाद हैरान कर देने वाली जो कहानी सामने आई है, वो इस तरह है

अजय को शिवानी से हुआ प्यार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के दक्षिण में झंगहा थाना के अंतर्गत राजधानी गांव में मंगलपुर नाम का एक टोला पड़ता है. निषाद बाहुल्य गांव में किसान स्वामीनाथ निषाद अपनी पत्नी और 6 बेटे, 4 बेटियों के साथ रहता था. 10 बच्चों में अजय सब से छोटा था. चारों बेटियों और 3 बेटों की शादी वह कर चुका था. अजय भाईबहनों में सब से शातिर और बेहद चालाक किस्म का था. घर की माली हालत से वह अच्छी तरह वाकिफ था. मेहनत कर के कैसे इतने बड़ा परिवार उस के पिता चलाते थे, इस का दर्द सालों से उसे सालता था. 

वह सोचता था कि काश! कहीं से काफी सारा पैसा मिल जाए तो परिवार की माली हालत दुरुस्त कर देता और मजे की जिंदगी जीता. उसे पता था कि सोशल मीडिया पर ऐसी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं, जिस के जरिए लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं. इसी सोच के चलते बेहद कम उम्र में ही उस ने सोशल मीडिया को खंगालना शुरू किया. अजय स्कूल से छुट्टी के बाद मोबाइल फोन में जमा रहता था. घर वाले उसे समझाते कि पढ़लिख कर कुछ काबिल बन जा, मोबाइल तो जीवन भर चलाना है. जब समय हाथ से निकल जाएगा तो पछताने से कोई फायदा नहीं होगा. पेरेंट्स के समझाने का उस पर कोई असर नहीं होता था, वह अपनी ही धुन में रमा रहता था.

रमेश निषाद अजय के पड़ोसी थे. उन की सब से छोटी बेटी थी शिवानी, जो 15 साल की थी. शिवानी खूबसूरत थी. वह 8वीं कक्षा में पढ़ती थी. लेकिन इसी उम्र में वह पूरी तरह सयानी हो चुकी थी. उस का अंगअंग विकसित हो चुका था. अजय था तो साधारण शक्लसूरत और इकहरे बदन का. उस में कोई खास आकर्षण नहीं था, लेकिन गोरी और सुंदर शिवानी पर उस की जिस दिन से नजर पड़ी थी, वह उस का दीवाना हो चुका था. पड़ोसी होने के नाते अजय और उस के घरपरिवार की रमेश के घर के अंदर तक आनाजाना था. रमेश के फेमिली वाले भी स्वामीनाथ के घर आतेजाते थे. 

खैर, शिवानी आंखों के रास्ते अजय के दिल में उतर आई थी. जिस दिन से उस के दिल में उतरी थी, उस दिन से उस पर शिवानी के प्यार का ऐसा नशा छाया कि दिनरात, सोतेजागते, उठतेबैठते शिवानी ही शिवानी नजर आती थी. शिवानी जान चुकी थी कि अजय उसे चाहता है, उस से प्यार करता है. धीरेधीरे वह भी अजय के प्यार में गिरफ्तार हो गई. लेकिन दोनों ही कच्ची उम्र के प्रेमी थे. अकसर देखा गया है कि इस उम्र के प्यार में प्यार कम और शारीरिक भूख मिटाने की ललक ज्यादा होती है. यहां भी कुछ ऐसा ही आलम था. अजय शिवानी की गदराए देह को पाने के लिए लालायित था. लेकिन उसे ऐसा मौका मिल नहीं पा रहा था, जहां जिस्मानी संबंध बना सके.

वह जिस मौके की तलाश में था, एक दिन वह मौका आखिरकार उसे मिल ही गया. एक दिन की बात है शिवानी के फेमिली वाले किसी जरूरी काम से घर से बाहर गए थे. घर पर शिवानी ही अकेली थी, अजय को यह बात पता थी. दोपहर के समय अजय प्रेमिका के घर पहुंचा. कमरे में शिवानी अकेली थी. और घर के कामों व्यस्त थी. अचानक से सामने अजय को देख कर वह सकपका गई.

तुम यहां..?’’ चौंक कर शिवानी ने पूछा.

हां, मैं.’’ अजय ने जवाब दिया, ”मुझे देख कर तुम्हें खुशी नहीं हुई?’’

खुशी तो हुई पर…’’ बाहर मेनगेट की ओर झांकते हुई शिवानी बोली, ”ऐसे घर में घुसते तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं?’’

अगर कोई देख भी लेता तो क्या होता. हम सच्चे प्रेमी हैं. किसी के सामने झुकने वाले नहीं. हम मर मिटने वालों में से हैं.’’

देखो, डायलौगबाजी छोड़ो, यह बताओ किसलिए यहां आए हो. मम्मीपापा कभी भी आ सकते हैं. जल्दी बताओ.’’

शिवानी, तुम तो ऐसे घबरा रही हो जैसे मुझे जानती नहीं हो, किसी अजनबी से मिल रही हो. तुम से प्यार करने के लिए आया हूं.’’ कहते हुए अजय शिवानी के करीब जा पहुंचा. 

प्रेमिका ने क्यों नहीं किया तन समर्पित

अजय को अपने बेहद करीब देख कर शिवानी के दिल की धड़कनें तेज हो गईं. सांसें तेजतेज चलने लगी थीं. प्यार का तपन महसूस कर शिवानी का बदन भी गरम होने लगा था. यह देख अजय खुद को रोक नहीं सका और शिवानी को खींच कर अपनी बाहों में भर लिया. पहली बार किसी पुरुष ने शिवानी को स्पर्श किया था. उसे बहुत अच्छा लग रहा था. उस ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया. दोनों की सांसें और तेज हो गई थीं और बदन जलने लगा था, ”हमें डूब जाने दो शिवानी. 2 जिस्म एक जान हो जाने दो.’’अजय बोला.

मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं, मैं भी तुम्हारे प्यार के समंदर में डूब जाना चाहती हूं. लेकिन अभी नहीं.’’ शिवानी खुद पर काबू करते हुए बोली, ”यही तो वो दौलत है, जो पत्नी अपने पति को बचा कर उसे सौंपती हैं. हमें अभी सामाजिक मर्यादा नहीं लांघनी है. तुम्हें अभी और इंतजार करना होगा.’’

इंतजार ही तो नहीं हो पा रहा है मुझ से. खो जाने दो मुझे तुम में.’’

नहीं…नहीं…अभी नहीं…’’ कहती हुई शिवानी अजय को धक्का देते हुए उस से दूर हो गई. अजय गिरतेगिरते बचा. 

शिवानी के अचानक बदले मिजाज से वह हैरान रह गया. वह समझ नहीं पाया कि अचानक उस ने उसे धक्का दे कर खुद से दूर क्यों किया.

क्या हुआ शिवानी?’’ आश्चर्य से अजय ने सवाल किया, ”तुम ने मुझे धक्का क्यों दिया?’’

मैं कहती हूं कि तुम यहां से अभी चले जाओ.’’ शिवानी तल्खी से बोली, ”इस से पहले कि कोई हमें इस बंद कमरे में एक साथ देख ले, तुम अभी यहां से चले जाओ.’’ शिवानी दोनों हाथ जोड़ कर उस के सामने गिड़गिड़ाने लगी थी. 

गुस्से में पैर पटकता हुआ अजय तेज कदमों से वहां से चला गया. जिस चाहत को ले कर वह शिवानी से मिलने उस के घर आया था, उस की मंशा पूरी नहीं हो पाई थी. शिवानी ने जोश में भी होश से काम लिया था. इस के बाद भी अजय ने शिवानी से जिस्मानी संबंध बनाने के लिए कई बार रिक्वेस्ट की. लेकिन हर बार उस ने उस की रिक्वेस्ट यह कह कर ठुकरा दी कि जो भी करना होगा, शादी के बाद. शिवानी के बारबार प्रणय निवेदन को ठुकराने से अजय नाराज हो गया और उस के दिमाग में उसे बदनाम करने की खतरनाक साजिश ने जन्म ले लिया. 

उस ने सोचा कि जब हम उस पर दबाव बनाएंगे तो अपनी इज्जत बचाने के लिए वह खुद ही मेरी बाहों में गिर जाएगी. अजय के मोबाइल फोन में शिवानी की कई तसवीरें थीं. गुस्से में उस ने उस के कुछ फोटो को एडिट कर के फेसबुक पर डाल दिया. शिवानी को इस का पता चल गया. उस ने फेसबुक पर अपनी अश्लील फोटो देखी तो आगबबूला हो गई. यह बात शिवानी ने अपने फेमिली वालों को बता दिया. शिवानी के बताने पर घर वालों ने भी फोटो को देखा तो शरम के मारे जमीन में गड़ गए. अजय ने शिवानी को बदनाम करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी. 

शिवानी के फेमिली वालों ने झंगहा थाने में उस के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने पोक्सो ऐक्ट में मुकदमा दर्ज कर के अजय को गिरफ्तार कर के बाल कारागार भेज दिया. तब अजय 17 साल का था और यह बात साल 2022 की थी. इस घटना ने अजय को भीतर तक झकझोर कर रख दिया था. वह इस बात से काफी परेशान था कि जो गुनाह उस ने किया ही नहीं, नाहक उस झूठे गुनाह में फंसा कर उसे सजा दिलाई गई है.

अजय ऐसे बना महिलाओं का दुश्मन

6 महीने बाद अजय जमानत पर जेल से छूट कर घर आया. जेल से बाहर आने के बाद अजय के तेवर पूरी तरह बदले हुए थे. औरतों को देखते ही नफरत से दूसरी ओर मुंह फेर लेता था. औरतों से उसे अब घृणा हो गई थी. घर आने के बाद वह शिवानी के घर वालों को झूठा मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाने लगा था. उस ने धमकी दी कि ऐसा नहीं किया तो सभी को जान से मार दूंगा. अजय की रोजरोज की धमकियों से शिवानी और उस के घर वाले बुरी तरह परेशान हो गए थे. वे नहीं चाहते थे कि उस का जीवन खराब हो. इसलिए इस बारे में शिवानी के पेरेंट्स ने स्वामीनाथ से शिकायत भी की कि अपने बेटे को संभाल लें, उसे ओछी हरकतें करने से रोक लें वरना उस का जीवन बरबाद हो जाएगा. फिर उन्हें दोषी मत ठहराना. लेकिन उस के फेमिली वालों ने इसे अनसुना कर दिया था. इधर अजय बुरी तरह बागी बन गया था और उसे किसी की भावनाओं से कोई लेनादेना नहीं था.

बुरी तरह परेशान रमेश ने एक बार फिर अजय कश्यप के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस उसे फिर से गिरफ्तार कर के ले गई और इस बार उसे 6 महीने जेल में रहना पड़ा. फिर उस के फेमिली वालों ने जमानत करा कर उसे जेल से बाहर निकाला. बाल कारागार से बाहर आने के बाद उस के फेमिली वालों ने उसे सूरत भेज दिया. एक साल तक अजय सूरत में रह कर पेंट, पालिश का काम करता रहा. लेकिन उस के दिल से सजा काटने वाली बात नहीं निकली थी. रहरह कर उसे टीस मारती थी. जब उसे बीती बातें याद आतीं तो एक साइको की तरह हरकतें करने लगता था. 

डेढ़ साल बाद जब अजय सूरत से घर लौटा तो एकदम से शांत रहने लगा था. पड़ोसियों से कम बातचीत करता था. ऐसा करना उस की योजना की एक चालाकी भरी कड़ी थी. जो सिर्फ उस के अलावा किसी को पता नहीं था. अजय अपने जीवन में थोड़ा बदलाव ले आया. वह शनिदेव का भक्त बन गया. शनिवार के दिन वह काले कपड़े पहनता और विधिपूर्वक शनिदेव का पूजन करता था. उस दिन नंगे पांव रहता था. वह शिवानी को भूल नहीं पाया था. इतना सब होने के बावजूद भी उसे टूट कर प्यार करता था. उसे जब देखता था तो न जाने उसे क्या हो जाता था. उस दिन पूरा दिन वह बेचैन और परेशान रहता था. 

इस के बाद उस ने तय किया कि शिवानी को जिंदा रख कर उसे ऐसी सजा देना है, जिस का दर्द जीवन भर उसे सालता रहे. योजना के अनुसार, उस ने उन महिलाओं को अपना टारगेट बनाने का फैसला किया, जिन का इस घटना से दूरदूर तक कोई लेनादेना नहीं था. अपनी खतरनाक योजना को पहली बार 29 जुलाई, 2024 को उस ने अंजाम दिया. झंगहा थानाक्षेत्र के सिंहपुर के सहरसा की 50 वर्षीया माया देवी को उस ने अपना टारगेट बनाया था. माया का घर गांव के आखिर में बना था. गरमी के दिन थे. माया का पति बमनलाल कमरे में सो रहा था. उस की पत्नी बरामदे में गहरी नींद में सोई थी. रात के करीब 2 बजे का समय था. अजय काली शर्ट पहने, काले कपड़े से मुंह ढके और नंगे पांव घर में घुस गया. 

माया को देखते ही उस ने हाथ में ली हुई लोहे की रौड से उस के सिर पर जोरदार प्रहार किया. जोरदार वार से गहरी नींद में सोई माया दर्द से तड़पने लगी. उस के सिर से बहता खून और उसे तड़पता देख कर अजय के दिल को ठंडक पहुंची. फिर घटना को चोरी का रूप देने के लिए घर से लोहे का संदूक ले कर भागा और उसे गांव के बाहर छोड़ दिया. ताकि लोग यही समझें कि चोरी के विरोध में चोर ने घटना को अंजाम दिया था. 

महिलाओं की तड़प और खून देख कर होता था खुश

ठीक अजय की सोच के हिसाब से बमनलाल भी सोचने लगा था कि शायद चोर आया होगा. दोनों के बीच हाथापाई हुई होगी. उसी हाथापाई में चोर ने पत्नी पर हमला कर उसे घायल कर दिया होगा. अगली सुबह बमनलाल ने अज्ञात चोर के खिलाफ चोरी का मुकदमा झंगहा थाने में दर्ज करा दिया. शातिर अजय घटना को अंजाम दे क र शांत बैठ गया. किसी को उस पर तनिक भी शक नहीं हुआ था. इस के ठीक 12वें दिन यानी 11 अगस्त, 2024 को अजय ने इसी तर्ज पर उपधवलिया की रहने वाली 32 वर्षीया ममता देवी पर रात के 3 बजे कातिलाना हमला किया और सामान उठा कर भाग गया. फिर अंधेरे में कहीं गायब हो गया. 

ममता पर हमला इतना जोरदार किया था कि वह कई दिनों तक अस्पताल में भरती रही और अंत में इलाज के दौरान उस ने दम तोड़ दिया. बेटी की मौत का सदमा सेवा प्रसाद बरदाश्त नहीं कर पाया और हमेशा के लिए परिवार सहित घर छोड़ कर अपनी नौकरी पर लौट गया और वहीं रहने लग. इस घटना को अंजाम देने के बाद अजय सूरत भाग गया. 14 दिनों बाद सूरत से घर लौटा और फिर तीसरी घटना 25 अगस्त को इसी तर्ज पर इसी थानाक्षेत्र के हाथावाल की रहने वाली 55 वर्षीया रंभा देवी के साथ किया और रात के अंधेरे में गुम हो गया.

इन तीनों घटनाओं के बाद झंगहा क्षेत्र में दहशत फैल गई थी, क्योंकि इन घटनाओं में काफी समानता दिख रही थी. वह थी रात के समय हमले का होना. इस के बाद घर के लोग सतर्क रहने लगे और शाम के बाद महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी. यह देख कर अजय को खूब मजा आता था और अकेले में ठहाका मार कर हंसता था. इन घटनाओं के बाद पुलिस हरकत में आई और यह पता लगाने में जुट गई कि आखिर वह कौन है, जो इस तरह रात के अंधेरे में महिलाओं को अपना शिकार बना कर और उसी अंधेरे में गुम हो जाता है.

3 महीने शांत रहने के बाद अजय ने चौथी घटना 9 नवंबर, 2024 को मंगलपुर की रहने वाली 32 वर्षीया शांति सिंह पत्नी सोनू सिंह के साथ की. उसे भी रात के समय डंडे से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया और रात के अंधेरे में कहीं गुम हो गया. इस घटना ने पुलिस की आंखों से नींद छीन ली थी. एसएसपी गौरव ग्रोवर भी यह सोचने पर मजबूर हो गए कि घटना चोरी के लिए नहीं, बल्कि जानबूझ कर की जा रही है. 

एक ही तरीके से घटना को अंजाम देने से एक बात पक्की हो गई थी कि रहस्यमय हमलावर जो भी होगा, उस के दिल में महिलाओं के प्रति नफरत भरी होगी. पुलिस अभी इसी सोचविचार में उलझी हुई थी कि पांचवीं घटना 4 दिनों बाद यानी 13 नवंबर, 2024 को इसी थानाक्षेत्र के जंगल रसूलपुर के टोला कटहरिया की रहने वाली 24 वर्षीया कविता पुत्री छोटेलाल भारती के साथ घटी. इस घटना के बाद पुलिस रहस्यमयी हमलावर के पीछे पड़ गई और 5 दिनों की अथक कोशिशों के बाद वैज्ञानिक विधि और मुखबिरों के सहयोग से अजय निषाद को गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई. 

खैर, जो भी हो अजय के गिरफ्तार होने से क्षेत्र में डर तो कम हुआ, लेकिन रहस्यमयी हमलावर का दहशत अभी भी बरकरार है. जिनजिन महिलाओं पर उस ने कातिलाना हमला किया है वो महिलाए अभी भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हैं. आरोपी 19 वर्षीय अजय निषाद से विस्तार से पूछताछ कर उस की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त डंडा, लोहे की रौड आदि बरामद करने के बाद उसे बिछिया स्थित गोरखपुर मंडलीय कारागार भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक अजय निषाद सलाखों के पीछे था. घर वाले उस की जमानत की कोशिश में जुटे थे, लेकिन उस की जमानत हो नहीं पाई थी.

कथा में शिवानी परिवर्तित नाम है. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

Uttar Pradesh Crime : रहस्य में उलझी प्रेमी युगल की मौत

Uttar Pradesh Crime : प्यार की खातिर पेरेंट्स को खाने में नींद की गोलियां दे कर रजनी प्रेमी सनी पाल के साथ चली गई. 3 दिन बाद प्रेमी युगल के शव एक निर्माणाधीन मकान में मिले. उन्होंने आत्महत्या की या उन की हत्या की गई? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

रजनी ने अपने मम्मीपापा के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के बाद जैसे ही दोनों गहरी नींद में सोए, इस के बाद उस ने घर से कपड़े, रुपए व जेवरात एक बैग में रखे और अपने प्रेमी सनी पाल के साथ बाइक पर बैठ कर रफूचक्कर हो गई. 22 नवंबर, 2024 की सुबह जब मम्मीपापा सो कर उठे, तब उन्हें बेटी रजनी (परिवर्तित नाम) के घर से भाग जाने और अपने साथ नकदी व जेवरात ले जाने की बात मालूम हुई. उन्हें इस बात का भी एहसास हो गया कि उन की बेटी ने उन्हें खाने में नींद की गोलियां मिला दी थीं, जिस के चलते उन्हें पता ही नहीं चला कि वह कब घर से चली गई. बेटी की काफी देर तक गांव में तलाश करने के बाद उन्होंने थाना मऊ दरवाजा में तहरीर दी.

उत्तर प्रदेश का एक जिला है फर्रुखाबाद. इसी जिले के थाने मऊदरवाजा क्षेत्र के नगला खैरबंद गांव के रहने वाले थे प्रेमी युगल 22 वर्षीय सनी पाल और 15 वर्षीय रजनी. ये दोनों 21 नवबंर, 2024 की रात को अचानक अपनेअपने घरों से गायब हो गए. 24 नवंबर रविवार की सुबह कुइयांबूट गांव के एक युवक ने एक निर्माणाधीन मकान के सामने झाड़ी में एक बाइक खड़ी देखी. उस ने देखा कि काफी देर तक वहां कोई नहीं आया. लावारिस हालत में बाइक को वहां खड़ा देख कर उसे आश्चर्य हुआ. युवक उस मकान के अंदर गया तो वहां युवक व लड़की अद्र्धनग्न अवस्था में मृत पड़े थे. शवों को देख कर युवक डर गया और वहां से सिर पर पैर रख कर गांव की ओर भागा.

रास्ते में खेतों की ओर जा रहे लोगों को उस ने आंखों देखा हाल बता दिया. यह सुनते ही लोग उस निर्माणीधीन मकान पर पहुंचे. वहां का नजारा देख कर उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. युवक का शव मकान में बने कमरे के बाहर हैंडपंप के पास तथा लड़की का शव कमरे के अंदर पड़ा था. शव के पास कुछ सामान भी पड़ा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने मऊ दरवाजा थाने में फोन कर के यह सूचना दे दी. सूचना मिलते ही एसएचओ बलराज भाटी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. दोनों के शव अद्र्धनग्न अवस्था में थे. उन्होंने कपड़ा मंगा कर लड़की के शव को ढका. इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया.

मौके पर एसपी (फर्रुखाबाद) आलोक प्रियदर्शी, एएसपी डा. संजय कुमार, सीओ (सिटी) ऐश्वर्या उपाध्याय भी मौके पर पहुंच गईं. उसी दौरान सीओ की नजर झाड़ी में पड़े गुलाब के फूल पर पड़ी. इस पर सिपाही से फूल उठवाया, उसे देखा और फिर झाड़ी में फेंक दिया. समझा जाता है कि प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए गुलाब का फूल ले कर गया था.

आत्महत्या से पहले रजनी क्यों बनी दुलहन

घटना की जानकारी होते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई. आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ मृतकों को देखने के लिए इकट्ठी हो गई. लोगों ने मृतकों की शिनाख्त 22 वर्षीय सनी पाल व 15 वर्षीय रजनी के रूप में की. दोनों एक ही गांव नगला खैरबंद के रहने वाले थे. बढ़ती भीड़ के कारण पुलिस ने शवों को देखने के लिए आने वाले लोगों को काफी दूर ही रोक दिया. घटनास्थल को सुरक्षित करने के बाद फोरैंसिक टीम को जानकारी दी गई. फोरैंसिक टीम ने घटना की जांचपड़ताल कर मौके से सबूत जुटाए.

रजनी की डैडबौडी के पास दोनों के बैग रखे थे और चप्पलें पड़ी थीं. वहीं पर सिंदूर की डब्बी, कंगन, नमकीन और 2 खाली पैकेट सल्फास के पड़े थे. वहीं पर 2 मोबाइल फोन, पानी की खाली बोतल और प्लास्टिक के 2 गिलास पुलिस को मिले थे. रजनी के हाथों में लगी मेहंदी उस के अटूट प्यार की कहानी बयां कर रही थी. उस ने मरने से पहले लिपस्टिक लगा कर मांग में सिंदूर भरा और पैरों में बिछिया पहन कर गले में मंगल सूत्र डाला. लोगों का कहना था कि आत्महत्या करने से पहले दोनों ने शादी रचाई और सुहागरात मनाई. क्योंकि दोनों ही अद्र्धनग्न अवस्था में थे.

जांच के दौरान पता चला कि सल्फास की करीब 30 गोलियों को प्लास्टिक के गिलास में घोल कर पिया था. घातक जहर के तेज असर से लड़की ने तुरंत ही दम तोड़ दिया. जहर खाने के बाद जब प्रेमी सनी का गला सूखने लगा, तब वह हैंडपंप से पानी पीने के लिए कमरे से बाहर निकला होगा और हैंडपंप के पास ही उस की मौत हो गई. प्रेमी युगल अलगअलग जाति के थे. दोनों मऊ दरवाजा थाना क्षेत्र के गांव नगला खैरबंद के निवासी थे. रजनी और सनी की मौत की खबर से दोनों घरों में कोहराम मच गया. दोनों के फेमिली वाले घटनास्थल पर पहुंच गए. रजनी के पापा ने सनी, उस के पिता प्रमोद व भाई बौबी पर अपनी बेटी का अपहरण कर उस की हत्या करने का आरोप लगाया.

घटनास्थल पर पहुंची, रजनी की चाची रेखा सब से अधिक आरोपप्रत्यारोप लगा रही थी. उस ने आरोप लगाया कि रजनी के लापता होने की शिकायत लिखित में की थी. वहां मौजूद एक दरोगा ने उस से अभद्रता की और उस की रिपोर्ट दर्ज नहीं की. पुलिस ने शिकायत पर कोई काररवाई नहीं की. बताया जाता है कि चाची का पति घटना के बाद से नहींं दिख रहा है. सनी के फैमिली वालों को कई दिन से सब से अधिक वही धमका रहा था. पुलिस भी इस मामले में गंभीरता से जांच में जुट गई. एसपी अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि सनी व रजनी ने जहर खा कर जान दी है. दोनों का विसरा सुरक्षित कर स्लाइड बनाई गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

रजनी के फैमिली वालों द्वारा पुलिस पर लगाए आरोपों की जांच कराई जाएगी. घटना के संबंध में लड़की के फैमिली वालों की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है. इस मामले में आगे की कानूनी काररवाई की जाएगी. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया.

दोनों के पेरेंट्स ने क्यों लगाए आरोप

रजनी की हत्या के संबंध में थाने में उस के फादर द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सनी ने अपने पिता व भाई के सहयोग से साजिश के तहत 21 नवबंर, 2024 की रात 11 बजे उसे व उस की पत्नी को नींद की गोलियां खाने में खिला दीं, जिस से वे बेहोश हो गए. इस के बाद वे सभी रजनी को बहलाफुसला कर अपने साथ ले गए. वे लोग घर में रखे 48 हजार रुपए व 2 लाख रुपए की ज्वेलरी भी अपने साथ ले गए. घटना के बारे में उन्हें 22 नवंबर की सुबह जानकारी हुई. इस घटना की सूचना सुबह होने पर पुलिस चौकी बघार पर दी थी, लेकिन कोई काररवाई नहीं हुई. पिछले 2 दिनों से सनी के फेमिली वाले भी फरार हो गए थे.

सनी के पिता प्रमोद ने भी रजनी के घर वालों पर बेटे ही हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी, जिस में कहा गया है कि 20 दिन पहले लड़की के पापा फेमिली के कुछ लोगों के साथ उस के घर आए थे. उन्होंने गालीगलौज कर सनी की हत्या करने की धमकी दी थी. यही नहीं, करीब 10 दिन पहले उन्होंने फोन किया. धमकी दी कि सनी के हाथपैर तोड़ कर उसे अपाहिज कर देंगे. उन्होंने पुलिस को बताया कि धमकी देने की उन के पास रिकौर्डिंग भी है.

एसएचओ बलराज भाटी ने बताया कि 24 नवंबर की शाम को ही लड़की का शव उस के फैमिली वाले ले कर चले गए. मगर युवक सनी के फैमिली वालों के न पहुंचने पर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था. हुआ यह कि सनी के पापा अपने व बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने से गिरफ्तारी के डर से मोर्चरी नहीं जा रहे थे. बाद में थाने से आश्वासन मिलने के बाद 25 नवबंर को सनी के पापा प्रमोद अन्य फैमिली वालों और रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने साथ ले गए. एसएचओ का कहना था कि शुरुआती जांच से लग रहा है कि दोनों ने आत्महत्या की है. हत्या का आरोप निराधार है.

पहले प्रेमिका बाद में प्रेमी की मौत हुई

24 नवबंर को शाम करीब 4 बजे पोस्टमार्टम की काररवाई शुरू हुई. दोनों ही शवों का पोस्टमार्टम डा. नीरज कुमार ने किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि प्रेमिका की मौत पहले हुई और उस के प्रेमी सनी पाल की मौत प्रेमिका की मौत के 2 घंटे बाद हुई थी. दोनों के पेट में कोई ठोस खाद्य पदार्थ नहीं मिला है. केवल तरल पदार्थ ही पाया गया है. इस से यह स्पष्ट है कि जहरीला पदार्थ खाने के बाद पानी पिया गया है. पोस्टमार्टम के दौरान मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण दोनों का विसरा सुरक्षित किया गया. रजनी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, फिर भी स्लाइड बना कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, झांसी भेजी गई है.

सपने क्यों न हुए हकीकत

मृतक सनी पाल पीओपी (प्लास्टर औफ पेरिस) का कारीगर था. घटनास्थल से बरामद बाइक गांव देवरामपुर निवासी पीओपी ठेकेदार सनी बाथम की थी. मृतक 21 नवंबर को अपने ठेकेदार की बाइक मांग कर ले आया था. पुलिस ने बाइक अपने कब्जे में ले ली. इस संबंध में पुलिस ने ठेकेदार बाथम से भी पूछताछ की. पुलिस द्वारा इस सनसनीखेज कांड की जांच के दौरान घटना की जो कहानी सामने आई, उसे जान कर हर कोई सन्न रह गया. सनी और रजनी एक ही गांव के रहने वाले थे. गांव में दोनों के घर कुछ दूरी पर थे. रजनी दसवीं में पढ़ती थी. जब स्कूल जाती, रास्ते में उसे गांव का युवक सनी पाल मिल जाया करता था.

रजनी और सनी की नजरें अकसर मिल जातीं. उस समय रजनी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था. उसे मालूम था कि सनी उस की जाति का नहीं है, लेकिन वह उसे भा गया था. उस का सनी के प्रति आकर्षण बढऩे लगा. यही हाल सनी का भी था. उसे रजनी अच्छी लगती थी. अकसर दोनों स्कूल के रास्ते में मिल जाया करते थे. दोनों ही एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार करने में सकुचा रहे थे, क्योंकि दोनों का ही यह पहलापहला प्यार था. आखिर एक दिन सनी ने हिम्मत कर रजनी से पूछ ही लिया, ”रजनी, तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?’’

रजनी को तो जैसे इसी पल का ही इंतजार था. उस ने मुसकराते हुए कहा, ”मेरी पढ़ाई तो ठीक चल रही है, पर तुम कैसे हो?’’

”मैं अच्छा हूं.’’

इस मुलाकात के बाद दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए.

अब जब भी रजनी स्कूल जाती, सनी उसे रास्ते में इंतजार करता मिल जाता. फिर दोनों साथ चलतेचलते प्यार की बातें करते. कभीकभी रजनी पड़ोस में जाने की बात कह कर घर से निकल जाती और सनी से चोरीछिपे मिल आती थी. कुछ दिनों में ही दोनों का हाल ऐसा हो गया था कि जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, दोनों को चैन नहीं मिलता था. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. अब दोनों चोरीछिपे मिल लेते थे. जब भी रजनी और सनी मिलते, भविष्य के सपने संजोते. रजनी शाक्य समाज की थी जबकि सनी पाल समाज से था. रजनी कहती, ”सनी, समाज से डर कर तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे? मैं जातपात में विश्वास नहीं करती हूं और शादी करूंगी तो तुम्हीं से, अन्यथा अपनी जान दे दूंगी.’’

इस पर सनी ने उस के होठों पर हाथ रख उसे चुप कराते हुए कहा था, ”2 सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. समय आने पर मैं तुम्हारे साथ ही शादी रचाऊंगा.’’

प्रेमी युगल अपने भविष्य के सुखद सपने संजोते हैं, दिल कुछ चाहता है और हो कुछ और जाता है. रजनी और सनी भी सपने संजो रहे थे. गांव के लोगों ने दोनों को एक साथ देख लिया. धीरेधीरे दोनों परिवारों को रजनी और सनी के लव अफेयर के बारे में पता चल गया.

दोनों की मौत औनर किलिंग तो नहीं

सनी व रजनी के शव मिलने की सनसनीखेज घटना के बाद नई बात निकल कर सामने आई. गांव वालों के अनुसार, प्रेम प्रसंग की जानकारी होने के बाद रजनी के फैमिली वालों ने उसे काफी समझायाबुझाया. वहीं सनी पर रजनी से दूर रहने का दबाव बनाया, लेकिन जब इस का कोई असर दोनों पर नहीं हुआ तो आननफानन में फेमिली वालों ने रजनी की शादी कन्नौज में तय कर दी थी. 19 नवबंर को ही रजनी की गोदभराई हुई थी. विवाह मैच्योर होने के इंतजार में रुका था. मृतका रजनी के एक भाई और एक बहन हैं.

रजनी के फैमिली वालों ने आरोप लगाया था कि रजनी घर से जाते समय जेवर व नकदी अपने साथ ले गई थी. जबकि गांव के बाहर निर्माणाधीन मकान में मिले दोनों की डैडबौडी के पास ऐसा कोई भी सामान नहीं मिला. तब क्या रजनी के फेमिली वाले सनी के घर वालों को झूठा फंसा रहे हैं?

दोनों एकदूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे. दोनों ने एक साथ जीने और मरने की कसमें खाई थीं. प्रेमी जोड़े का हंसनामुसकराना समाज को मंजूर नहीं हुआ. लड़की के फैमिली वाले इस प्रेम कहानी के आड़े आ गए और आखिर में प्रेमी युगल को एक ऐसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा, जिस से हर कोई हैरान रह गया. दोनों एकदूसरे को पाने के लिए तिलतिल तड़प रहे थे. शादी कर एकदूसरे के बनना चाहते थे, लेकिन उन की मोहब्बत के बीच जाति और समाज की कुरीतियां आड़े आ गईं.  रजनी सनी के प्यार में इतनी पागल हो चुकी थी कि उस ने गले में मंगलसूत्र पहन कर मांग भी भर ली थी.

इस से साफ दिखाई दे रहा था कि वह सनी से शादी की रस्म भी पूरी कर चुकी थी. रजनी के फैमिली वाले खासे प्रभावशाली बताए जाते हैं. सनी के घर वाले दबी जुबान से इसे औनर किलिंग भी मान रहे हैं. पुलिस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए थी. प्रेमी युगल चांदनी रात में मोहब्बत के अफसाने बुनते थे. पानी की लहरों पर प्रेम का गीत लिखते थे. दोनों ही एकदूसरे पर जान छिड़कते थे. जहां इस लव स्टोरी का अंत रामलीला और इश्कजादे मूवी की तर्ज पर दोनों ने अपनी कुरबानी दे कर किया, वहीं मौत को गले लगाने से पहले दोनों ने अपनी शादी का जश्न भी मनाया.

बेदर्द दुनिया से हार कर दोनों ने मौत का दामन थाम लिया. ये प्रेमी युगल जीते जी अपने प्यार को पा न सके. मौत भी ऐसी चुनी कि अपनी मौत की कहानी अमर कर गए. हर जुबां पर गांव के प्रेमी युगल की मोहब्बत की दास्तां थी.

वैसे आत्महत्या जैसा निर्णय प्रेमी युगल तनाव के चलते लेते हैं. जब उन्हें आगे कोई रास्ता दिखाई नहीं देता, तब ऐसा कदम उठाने को वे मजबूर हो जाते हैं. पेरेंट्स को अपने बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए, ताकि उन के मन की बात जान कर ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

Love Crime Stories : साली की वजह से दोस्त का कत्ल

Love Crime Stories : लालची स्वभाव की काजल ने अपने जीजा आशुतोष राजपूत उर्फ प्रिंस के दोस्त आयुष गुप्ता से दोस्ती कर नजदीकियां तो बढ़ा लीं, लेकिन उसे इस के अंजाम की तनिक भी आशंका नहीं थी. फिर एक दिन इस का ऐसा खौफनाक नतीजा सामने आया कि…

सर्दी बहुत ज्यादा थी. हो भी क्यों न, जनवरी का सर्द महीना जो था. इस मौसम में धूप बहुत अच्छी लगती है, लेकिन सूरज के भी खुल कर दीदार नहीं हो पा रहे थे. गलियां ऐसे मौसम में बेरौनक हो जाती हैं क्योंकि ज्यादातर लोग घरों के दरवाजे बंद कर के रोजमर्रा का काम करते हैं. शाहजहांपुर के गदियाना मोहल्ले में रहने वाले आशुतोष राजपूत उर्फ प्रिंस उर्फ बबुआ की साली काजल इस सर्द मौसम में उस के यहां आई हुई थी, किंतु ठंड ने उसे रजाई में दुबका कर बिठा दिया था. दिन के 11 बज रहे थे. काजल नित्य कर्म से फारिग होने के बाद रजाई में आ कर बैठ गई थी. वह मोबाइल में यूट्यूब देखने में खोई हुई थी.

 

कमरे में उस की बहन पलक चाय की ट्रे ले कर आई तो काजल को रजाई में दुबकी देख कर मुसकरा पड़ी, ”तुम तो घूमने के इरादे से आई थी काजल .’’

”सर्दी बहुत है दीदी, बिस्तर से पांव नीचे रखने की हिम्मत नहीं हो रही है, तुम घूमने की बात कह रही हो.’’ काजल ठिठुरन भरे लहजे में बोली.

”चाय लो, शरीर में स्फूर्ति और गरमी आ जाएगी.’’ चाय का प्याला काजल की ओर बढ़ाते हुए पलक बोली.

”चाय भी कुछ ही देर के लिए गरमी देती है दीदी.’’

”तो किसी पुरुष से दिल लगाओ न, शरीर से ठंडी उडऩछू हो जाएगी.’’ काजल की बात काट कर पलक ने हंसते हुए कहा.

काजल और पलक दोनों बहनें जरूर थीं, लेकिन एक साथ रहते हुए दोनों हर तरह की बातें दिल खोल कर करती थीं.

”ओह!’’ काजल ने पलकें झपकाईं, ”यह मंत्र तुम ने शादी के बाद सीखा है क्या दीदी?’’

”अरी नहीं.’’ पलक झेंप गई, ”मैं ने सुना है. वैसे इस दिल लगाने का मेरी नजर में यह मतलब निकलता है कि दिल लगाने से नारी का मन पुरुष के खयालों में ही उलझा रहता है. उस से कहां मिलना है, कब मिलना है, इसी में उलझी नारी अपने अंदर ठंड का अहसास नहीं करती या यूं समझ लो ठंड उस के पास नहीं फटकती.’’

”यह तो मैं मान सकती हूं दीदी, ठंड को महसूस किया जाए या याद किया जाएगा तो वह हमें आ कर चिपकेगी. मन इधरउधर लगा रहेगा तो ठंड का अहसास ही नहीं होगा. किंतु ठंड का अहसास न हो इस के लिए पुरुष से ही दिल क्यों लगाया जाए, कुछ और भी तो किया जा सकता है.’’

”पुरुष की कंपनी मिलेगी तो हम लंबे समय के लिए बिजी हो सकते हैं. दूसरा काम तो शुरू किया और घंटे 2 घंटे में खत्म.’’

”यह बात तो है दीदी.’’

”तो फिर निकलो रजाई से और किसी सुंदर, सजीले पुरुष की तलाश करो, जिस से तुम दिल लगा सको.’’

”तुम मुझे यह सलाह दे रही हो दीदी?’’ काजल से पलकें झपकाईं.

”क्या हुआ, आज का मौडर्न जमाना है, तुम अपने लिए बौयफ्रैंड चुन लोगी तो मम्मीपापा और हमारी टेंशन भी दूर हो जाएगी. हम तुम्हारी उस लड़के से शादी कर देंगे.’’

”शादी न कर के मैं उस के साथ फुर्र हो गई तो..?’’ काजल ने आंखें नचा कर कहा.

”तो और भी अच्छा होगा. हमारा शादी का खर्चा बच जाएगा.’’ पलक ने कहा और हंस पड़ी, ”मैं जानती हूं तुझे, तू ऐसा कदम नहीं उठाएगी.’’

”क्यों नहीं उठाऊंगी?’’

”क्योंकि तू हम लोगों से प्यार करती है.’’ पलक ने मुसकरा कर कहा.

काजल थोड़ी देर खामोश रही फिर बोली, ”दीदी, तुम सचमुच कह रही हो न कि मुझे कोई बौयफ्रैंड ढूंढना चाहिए?’’

”हां.’’ पलक ने सिर हिलाया, ”इस में गलत क्या है, तू जवान हो गई है, तुझे अपने लिए हैंडसम लड़का ढूंढ लेना चाहिए. हां, यह याद रखना, लड़का हैंडसम ही न हो, उस की जेब मे माल भी होना चाहिए. यानी दौलतमंद लड़का हो.’’ काजल ने होंठों को गोल दायरे में सिकोड़ कर सीटी बजाई.

”ऐसा एक लड़का मैं ने यहीं गौटिया मंदिर में कल ही देखा था. शाम को जब मैं माथा टेकने मंदिर गई थी तो वह वहां मुझे नजर आया था.’’

”तूने कैसे भांप लिया वह दौलतमंद है?’’

”उस के पास बढिय़ा बाइक थी. उस ने मंदिर के बाहर बैठे गरीबों को 50-50 रुपए का दान भी दिया.’’

”शक्लसूरत से कैसा है तेरा वह दौलतमंद?’’ पलक ने मुसकरा कर पूछा.

”दुबलापतला है, खूबसूरत भी है. कहो तो मैं उस का आज नामपता मालूम कर आऊं!’’

”कर ले.’’ पलक ने हरी झंडी दे दी, ”लड़का अच्छा हुआ तो तेरे लिए हम रिश्ते की बात कर लेंगे.’’

”ठीक है, मैं आज शाम को मंदिर हो कर आऊंगी. अब तुम मुझे बढिय़ा खाना बना कर खिलाओ दीदी. पेट में चूहे दौडऩे लगे हैं.’’

”बनाती हूं, सब्जी पक रही है. बस वह तैयार होते ही रोटियां बना कर परोस दूंगी.’’ पलक ने कहा और कप ट्रे में रख कर वह कमरे से बाहर निकल गई.

आयुष गुप्ता को फांसने के लिए काजल ने चुना अनोखा तरीका

काजल ने जिस लड़के को गौटिया मंदिर में देखा था, उस का नाम आयुष गुप्ता था. उस के पापा दिलीप कुमार गुप्ता काफी पैसे वाले थे. उन का टेंट का बड़ा कारोबार था, जिस की देखभाल की जिम्मेदारी उन्होंने बेटे आयुष के कंधे पर डाल दी थी. अब आयुष ही टेंट के कारोबार को देखता था. आयुष बहुत सीधा और धार्मिक प्रवृत्ति वाला इंसान था. वह रोज मंदिर जाता था और गरीबों को खाना खिलाने के लिए रुपयों का दान करता था. काजल ने अपनी बहन पलक के कहने पर उसी शाम मंदिर में जा कर आयुष के बारे में वहां के गरीब लोगों से मालूम कर लिया था. गरीब लोग आयुष को काफी समय से पहचानते थे. उन्होंने ही बताया था कि आयुष गुप्ता बगैर नागा किए इस मंदिर में शाम को जरूर आता है.

काजल ने दूसरी शाम आयुष की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने के लिए बहुत खूबसूरत नाटक किया था. वह शाम को शाल ओढ़ कर उन गरीब लोगों की पंगत में जा कर बैठ गई थी, जो आयुष से कुछ पाने की आस में रोज कतार लगा कर मंदिर की सीढिय़ों पर बैठ जाते थे. आयुष अपने समय पर मंदिर में आया तो उस के हाथ में पूजा की टोकरी थी, जिस में फूल और पूजा करने के लिए धूपबत्ती, माचिस, चंदन आदि था. आयुष ने मंदिर में जा कर पहले पूजा की, फिर खाली टोकरी ले कर वह बाहर सीढिय़ों की ओर आ गया.

सीढिय़ों पर गरीब लोग कतार में उसी का इंतजार करते बैठे रहते थे. आयुष ने जेब से रुपए निकाल कर सभी को 50-50 रुपए देने शुरू किए और कतार की अंतिम छोर तक आ गया. यहां बैठी काजल ने हथेली ऊपर उठा कर आयुष की तरफ देखा. आयुष उस की खूबसूरती देख कर क्षण भर को चौंका, फिर सिर झटक कर उस ने 50 रुपए का नोट काजल की तरफ बढ़ाया, ”लो, इस से अपने लिए खाना खरीद लेना.’’

”मुझे यह रुपए नहीं चाहिए,’’ काजल ने गंभीर स्वर में कहा.

”तो क्या चाहिए?’’ आयुष ने हैरानी से पूछा.

”मुझे आप चाहिए. संपूर्ण रूप से.’’ बेझिझक काजल ने कह दिया.

”क्या कह रही हैं आप?’’ आयुष चौंकता हुआ बोला.

”जो आप ने सुना है. मैं चाहती हूं आप मुझे 50 रुपए का दान न दें, बल्कि पूर्णरूप से मुझे मिल जाएं.’’

”आप को मालूम है आप क्या मांग रही है?’’

”हां. यही पाने के लिए तो मैं भी आप की तरह रोज इस मंदिर में आ कर माथा टेकती हूं. मैं आप को पाना चाहती हूं, आयुष बाबू.’’

”खड़ी हो जाइए,’’ आयुष ने गंभीर हो कर कहा.

काजल खड़ी हो गई. आयुष ने उस की सुंदरता को ऊपर से नीचे तक निहारा, फिर बोला, ”आप को विश्वास है, आप जो मांग रही हैं, वह आप को मिल जाएगा?’’

”मैं दान पाने वालों की लाइन में बैठी हूं. यह दान देने वाले की इच्छा पर डिपेंड करता है कि वह मुझे दान दे सकेगा या नहीं.’’

”आप बहुत होशियार हैं, आप की मंशा पूरी कर के कोई भी धन्य हो जाएगा. मैं तो बहुत तुच्छ हूं.’’

”आप समर्थ हैं आयुषजी.’’ काजल गंभीर हो गई, ”आप मेरी मनोकामना पूरी कर सकते हैं.’’

”लेकिन मैं आप के बारे में कुछ नहीं जानता हूं.’’ आयुष गंभीर स्वर में बोला, ”आइए, वहां सामने चाय का स्टाल है, वहीं बैठ कर एकदूसरे को करीब से जान लेते हैं.’’

आयुष से दोस्ती कर गदगद क्यों हुई काजल

काजल आयुष के साथ चाय के स्टाल पर आ गई. दोनों वहां कोने की मेज के सामने की कुरसियों पर आ कर बैठे. आयुष ने चाय बिसकुट का और्डर दिया.

”क्या नाम है आप का?’’ आयुष ने पूछा.

”मेरा नाम काजल है.’’

”कहां रहती हो?’’

”मैं यहां अपने जीजा के पास रहती हूं. वह मोहल्ला गदियाना, सदर बाजार थाना क्षेत्र में रहते हैं.’’

”गदियाना में..?’’ आयुष चौंका, ”क्या नाम है आप के जीजा का?’’

”आशुतोष राजपूत उर्फ प्रिंस उर्फ बबुआ.’’

”क्याऽऽ’’ आयुष हैरानी से बोला, ”आप प्रिंस की साली हैं? अरे! वह तो मेरा फ्रेंड है. वाह! क्या अजीब संयोग है, प्रिंस से दोस्ती थी, अब उस की साली साहिबा मेरी जिंदगी में एंट्री कर रही हैं.’’

”ओह! आप मेरे जीजा के फ्रेंड हैं. यह तो और अच्छी बात हो गई.’’ काजल हंस पड़ी, ”अब तो आप मुझे अपना बनाने का मेरा प्रस्ताव मंजूर कर लेंगे न?’’

”बेशक!’’ आयुष हंस कर बोला, ”आप सुंदर हैं, हसीन हैं, आप का प्रस्ताव मैं कैसे ठुकरा दूं.’’ आयुष ने हाथ आगे बढ़ाया. काजल ने मुसकरा कर अपना हाथ आयुष के हाथ में दे दिया.

आयुष से दोस्ती हो जाने के बाद काजल बहुत खुश हुई.

यह बात जब उस ने अपनी बहन पलक को बताई तो उस ने भी काजल की पसंद की सराहना की क्योंकि आयुष एक अमीर बिजनैसमैन का बेटा था.

धीरेधीरे काजल और आयुष के बीच दोस्ती का दायरा बढ़ता गया. हालांकि आयुष शादीशुदा था, इस के बावजूद उस का काजल के साथ चक्कर चल गया. वह उसे अपनी गाड़ी से इधरउधर घुमाता और शौपिंग कराता था. काजल और पलक दोनों बहनें लालची स्वभाव की थीं, इसलिए कभीकभी काजल Love Crime Stories अपनी बहन पलक को भी आयुष के साथ घूमने के लिए बुला कर ले जाती थी. आयुष दोनों बहनों को शौपिंग कराता और महंगे रेस्टोरेंट में खाना खिलाता था.

दिनदहाड़े आयुष को किस ने मारी गोली

उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर के थाना सदर बाजार में 2 दिसंबर, 2024 की दोपहर बाद कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि ओसीएफ रामलीला मैदान में 2 गुटों में जम कर मारपिटाई हुई है, जिस में एक पक्ष के युवक को गोली मार दी है. मौका मुआयना किया जाए. एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह ने इस सूचना को रोजनामचे में दर्ज कर के अपनी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर कूच कर दिया. पुलिस जब ओसीएफ रामलीला मैदान पहुंची तो वहां कुछ लोगों की भीड़ नजर आ रही थी. इन्हीं में उस युवक के घर वाले भी थे, जिस को गोली मार देने की सूचना कंट्रोल रूम से दी गई थी.

एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह ने पास जा कर देखा तो जमीन पर एक 24-25 साल का युवक खून से लथपथ औंधा पड़ा हुआ था. उस की खोपड़ी के पीछे वाले भाग पर एक छोटा सा सुराख नजर आ रहा था, जिस में से गाढ़ा खून बह कर उस के कपड़ों को रंग रहा था. चूंकि खून गाढ़ा हो चुका था, इस से अनुमान लगाया गया कि युवक के सिर में जो गोली मारी गई है, उसे बहुत ज्यादा वक्त नहीं हुआ है. युवक के शरीर में प्राण नहीं रह गए थे. वह इस दुनिया को छोड़ चुका था. युवक के पास 2-3 युवक, एक बुजुर्ग दंपति और कुछ महिलाएं थीं. बुजुर्ग और एक महिला दहाड़ें मार कर रो रहे थे. शायद ये दोनों इस मृत युवक के मम्मीपापा हो सकते थे.

”आप लोग इस के पास से हट जाइए. हमें अपनी काररवाई करने दीजिए.’’ एसएचओ ने गंभीर स्वर में कहा.

यह सुनने के बाद फैमिली वाले उठ कर युवक के शव के पास से दूर खड़े हो गए. एसएचओ सुरेंद्र पाल अपनी जांच में जुट गए. उन्होंने युवक की नब्ज टटोली तो वह थम चुकी थी. युवक के शरीर पर चोट के भी निशान नजर आ रहे थे, लग रहा था उसे पहले जम कर पीटा गया है. मृतक का अच्छी तरह मुआयना कर लेने के बाद एसएचओ ने सब से पहले एसपी राजेश एस. को इस घटना की सूचना दे दी.

इस के बाद एसएचओ मृतक के फैमिली वालों के पास आए. वह अभी भी जारजार रो रहे थे.

”यह युवक आप का क्या लगता था?’’ एसएचओ ने सहानुभूति से पूछा.

”यह मेरा बेटा है साहब.’’ बुर्जुग व्यक्ति रोते हुए बोला, ”इस का मैं अभागा बाप हूं. मेरा नाम दिलीप कुमार गुप्ता है और यह मेरी पत्नी रानी गुप्ता है. आयुष मेरा एकलौता बेटा था, जिसे उन लोगों ने मार डाला.’’

”आप बताएंगे, आप के बेटे का किन लोगों से झगड़ा हुआ था और इस झगड़े का कारण क्या रहा था.’’

”साहब, मेरा बेटा बहुत सीधासादा था. उस की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. इस को जिस व्यक्ति ने मारा है, उस का नाम प्रिंस है. नामालूम उस ने मेरे बेटे की जान क्यों ली है.’’

”यह हम मालूम कर लेंगे, आप यहां की काररवाई पूरी हो जाने के बाद रिपोर्ट दर्ज करवा देना. हम आरोपियों के खिलाफ सख्त ऐक्शन लेंगे.’’

”जी साहब, मैं चाहता हूं कि मेरे बेटे के कातिल को फांसी की सजा मिले.’’ दिलीप कुमार रोते हुए बोला.

”ऐसा ही होगा.’’ एसएचओ गंभीर हो गए.

चूंकि एसपी राजेश एस फिंगरप्रिंट्स एक्सपर्ट और फोटोग्राफर्स की टीम के साथ वहां आ गए थे, इसलिए एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह मृतक के फैमिली वालों के पास से हट गए और एसपी साहब के पास आ गए. उन्होंने एसपी साहब को सैल्यूट किया और युवक के शव को दिखा कर बोले, ”सर, इस युवक के सिर में गोली मारी गई है. इस के फादर दिलीप कुमार गुप्ता का कहना है कि इसे प्रिंस नाम के व्यक्ति ने गोली मारी है.’’

एसपी साहब युवक के शव के पास आए और उस का मुआयना करने लगे. थोड़ी देर बाद उन्होंने फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और फोटोग्राफर्स को अपनी काररवाई करने का इशारा कर दिया.

”इस युवक के सिर में गोली मारी गई है सिंह साहब, आप मालूम कीजिए ये कौन हैं और उन्होंने यह कदम क्यों उठाया है. मुझे आप जांच कर कल तक रिपोर्ट देंगे.’’ एसपी साहब बोले.

”ठीक है सर.’’ एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह ने सिर हिला कर कहा.

सीसीटीवी में कैद हुए हत्यारे

एसपी राजेश एस. एसएचओ को कुछ हिदायतें दे कर घटनास्थल से चले गए. उन्होंने वहां मौजूद कुछ चश्मदीदों से घटना के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि यहां 2 गुटों का आपस में झगड़ा हुआ था. एक पक्ष के लोग कुछ ज्यादा थे. सभी लाठीडंडों से लैस थे. वही इस युवक के गुट पर भारी पड़ गए थे. उन्होंने भगदड़ मचने पर इस युवक को पीछे से गोली मारी. गोली लगते ही यह नीचे गिर कर तड़पने लगा तो सब भाग गए. उन सभी के नाम वह नहीं बता पाए. जब युवक के पास से सबूत एकत्र करने का काम पूरा कर लिया गया तो शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया.

वहां पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई ताकि सबूत नष्ट करने की कोई कोशिश न हो. एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह वापस थाने लौट आए. उन के साथ युवक के पापा दिलीप कुमार गुप्ता भी थे. मृतक आयुष के पापा दिलीप कुमार गुप्ता शाहजहांपुर के ही रहने वाले आशुतोष राजपूत उर्फ प्रिंस उर्फ बबुआ, उस की पत्नी पलक, साली काजल के अलावा स्वप्निल शर्मा, निशांत मिश्रा, अरविंद वर्मा, अनमोल सक्सेना, शेखर मौर्य, अनुज सिंह, आर्यन सिंह, पीयूष राठौर, कमल, मोहम्मद आदिल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने इन के खिलाफ बीएनएस की धारा 191 (2), 191 (3), 190/61 (2), 103 (1) के तहत मामला दर्ज कर लिया.

मुख्य अभियुक्त आशुतोष राजपूत को बनाया गया था, जो सत्यपाल का बेटा था. यह मोहल्ला गदियाना में रहता था. शेष अभियुक्तों के बारे में विवेचना कर के ही मालूम किया जाना था. एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह ने एसपी राजेश एस को दूसरे ही दिन यह जानकारी दे दी. उन्होंने एएसपी (सिटी) के निर्देशन में एक पुलिस टीम गठित कर दी, जिस में सीओ (सिटी) पंकज पंत, एसएचओ सुरेंद्र पाल सिंह, एसआई दिलशाद खां, प्रदीप शर्मा, अहसान अली, दिनेश कुमार, जगेंद्र प्रताप सिंह, कांस्टेबल मोनू चौधरी, आकिब सैफी, अंकित धाना और विनीत कुमार को शामिल किया गया.

इस टीम को सब से पहले प्रिंस के खिलाफ ठोस सबूत एकत्र करने थे. 2 दिसंबर, 2024 को दिनदहाड़े ओसीएफ रामलीला मैदान में यह घटना घटी थी. इस घटना में कौनकौन लोग शामिल थे, यह जांच कर के ही मालूम किया जाना था. पुलिस टीम ने इस की जांच रामलीला Love Crime Stories ग्राउंड से ही शुरू की. रामलीला ग्राउंड में कई सीसीटीवी लगे हुए थे. जाहिर था यह घटना उन सीसीटीवी में रिकौर्ड हुई होगी. यही बात ध्यान में रख कर पुलिस टीम रामलीला ग्राउंड में पहुंच गई.

वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक करने का काम शुरू हुआ तो बहुत कुछ स्पष्ट होता गया. सीसीटीवी कैमरों ने यह रिकौर्ड कर लिया था कि 2 दिसंबर की दोपहरी में वहां क्या कुछ घटित हुआ था. उन फुटेज में 2 गुट वहां दिखाई दिए थे. पहले से एक गुट के लोग वहां मोर्चा संभाले नजर आ रहे थे. मृतक युवक आयुष गुप्ता बाद में अपने साथ 5-7 युवकों के साथ पार्क में पहुंचता दिखाई दिया. पहले से वहां मौजूद युवकों के पास लाठीडंडे थे.

आयुष जब वहां पहुंचा तो एक 25-26 साल का युवक उस के पास आया था. उस के साथ 3-4 अन्य युवक थे. पास आ कर उस ने आयुष से कुछ कहा था. फिर आयुष के साथ धक्कामुक्की शुरू कर दी थी. वह युवक बहुत गुस्से में था. आयुष के साथ आए युवकों ने बीचबचाव करना चाहा था, तब उन में मारपिटाई शुरू हो गई थी. लाठीडंडे चलते दिखाई दे रहे थे. सभी एकदूसरे से गुत्थमगुत्था हो रहे थे. फिर आयुष का दल भागता दिखाई दिया. आयुष एक बाइक पर बैठने की कोशिश में उस के पीछे दौड़ रहा था, तभी उसे किसी व्यक्ति ने गोली मार दी थी. आयुष को वहां बुलाने वाला दूसरे दल का लीडर कौन था, यह अनुमान लगाया जा रहा था. उस की पहचान के लिए दिलीप कुमार गुप्ता को वहां पर बुलवाया गया.

उन्हें जब सीसीटीवी की फुटेज दिखाई गई तो उन्होंने पहचान कर बताया, ”साहब, यह पतला सा युवक प्रिंस राजपूत है. दूसरा युवक अरविंद वर्मा, तीसरा पीयूष राठौर है. यह मोहल्ला जलाल नगर बजरिया, थाना सदर बाजार में रहता है. मैं अन्य को नहीं पहचानता.’’

”हमारे हाथ प्रिंस आ गया तो सभी के नाम सामने आते जाएंगे.’’ सीओ (सिटी) पंकज पंत बोले, ”फिलहाल हमें अपना ध्यान प्रिंस के ऊपर केंद्रित करना है. उसे गिरफ्तार करना जरूरी है.’’

सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई. प्रिंस को गिरफ्तार करने के लिए उस के घर दबिश दी गई तो वह घर से फरार मिला. पुलिस ने उस के घर पर गुप्तरूप से निगरानी के लिए एक पुलिसकर्मी को लगा दिया.

डैडबौडी रख कर ढाई घंटे तक क्यों किया हाइवे जाम

4 दिसंबर, 2024 को फैमिली वालों को जिला अस्पताल से आयुष गुप्ता का शव पोस्टमार्टम के बाद मिल गया. चूंकि अभी तक पुलिस उस की हत्या में शामिल नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी, इसलिए आयुष के फैमिली वालों में काफी गुस्सा था. उन्होंने आयुष की डैडबौडी शाहजहांपुर-पीलीभीत हाइवे पर रख कर जाम लगा दिया. पुलिस ने उन्हें समझाया और सड़क को सुचारू रूप चलने देने के लिए शव हटा कर उस का अंतिम संस्कार करने को कहा तो वे लोग नहीं माने. उन की एक ही मांग थी कि पुलिस पहले हत्यारों को गिरफ्तार करे, तभी आयुष का अंतिम संस्कार होगा.

मौके पर डीएम प्रवेंद्र सिंह और सीओ (सिटी) पंकज पंत भी वहां आ गए, लेकिन आयुष के फैमिली वाले नहीं माने. जाम बढऩे लगा, तब पुलिस ने आलाधिकारियों को फोन किया तो एसपी राजेश एस स्वयं घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने फैमिली वालों को आश्वासन दिया कि 24 घंटे में वह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल पहुंचा देंगे. उन के समझाने पर ढाई घंटे बाद वह आयुष की डैडबौडी को राजमार्ग से हटाने पर राजी हुए. फिर आयुष के शव का विधिविधान से अंतिम संस्कार कर दिया गया.

उसी शाम को आशुतोष राजपूत उर्फ प्रिंस उर्फ बबुआ, आर्यन उर्फ शुभांकर व काजल को गिरफ्तार कर लिया गया. इन से पूछताछ करने पर 11 अन्य लोगों के नाम सामने आए. पुलिस ने प्रिंस से वह तमंचा और 2 कारतूस भी हासिल कर लिया, जिस से आयुष की खोपड़ी में गोली मारी गई थी. आयुष को उस की प्रेमिका काजल, जो प्रिंस की साली लगती थी, उस के द्वारा झूठ बोल कर ओसीएफ रामलीला ग्राउंड में बुलवाया गया था. काजल ने आयुष से कहा था कि वह वहां पर उस का इंतजार कर रही है. लेकिन आयुष को दाल में कुछ काला लगा था, क्योंकि एक दिन पहले ही उस की प्रिंस से झड़प हो गई थी.

दरअसल, प्रिंस और आयुष गुप्ता दोस्त थे, लेकिन प्रिंस ने उसे पहली दिसंबर, 2024 को अपनी पत्नी पलक और साली काजल के साथ आयुष को नैशनल हाइवे पर एक ढाबे से एक साथ बाहर निकलते देख लिया था. यह देख कर वह आयुष पर आगबबूला हो कर बोला था, ”तेरी हिम्मत कैसे हो गई मेरी पत्नी और साली को इस ढाबे में लाने की. मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा. तू कल ओसीएफ ग्राउंड में आना, वहां देखूंगा तुझे.’’

इसी धमकी की वजह से 5-7 लड़के ले कर दोपहरी में ओसीएफ रामलीला ग्राउंड में आयुष गया था, लेकिन वहां प्रिंस ने पहले से 12-13 लड़के इकट्टे कर रखे थे, जिन्होंने आयुष को घेर कर मारना शुरू कर दिया था. आयुष घबरा कर अपने साथियों के साथ भागने लगा था, तब पीछे से उस की खोपड़ी में गोली मार दी गई थी. जिस से आयुष की मौके पर ही मौत हो गई थी. पुलिस टीम के सामने 14 लोगों के नाम सामने आए तो एसपी राजेश एस. ने 4 पुलिस टीमें बना कर शेष अभियुक्तों को पकडऩे का आदेश दे दिया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस ने मोहित, अमन खां, पीयूष राठौर को पकड़ कर जेल भेज दिया था.

अन्य फरार अभियुक्तों में हिंदू युवा वाहिनी का पूर्व जिलाध्यक्ष स्वप्निल शर्मा, शेखर मौर्या, अनमोल सक्सेना और अनुज भी हैं. पुलिस टीमें इन्हें पकडऩे के लिए पूरा जोर लगाए हुए थीं. इन की गिरफ्तारी पर एसपी ने 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया. उम्मीद है कि ये लोग भी शीघ्र पुलिस के हत्थे चढ़ जाएंगे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

चौहरा हत्याकांड : हनीमून के बाद दबेपांव आई मौत

पत्नी व 3 बच्चों के होते हुए भी सर्राफा कारोबारी मुकेश वर्मा ने रिश्ते की साली स्वाति सोनी के साथ मंदिर में शादी कर ली थी. उस के साथ गोवा में हनीमून के बाद वह घर लौटा तो दबेपांव मौत ने भी घर में दस्तक दे दी. नतीजतन घर के 4 लोग मौत के मुंह में समा गए. आखिर कैसे हुआ यह सब? पढ़ें, यह दिलचस्प कहानी.

प्लान के मुताबिक 10 नवंबर, 2024 की सुबह 10 बजे मुकेश अपनी स्कूटी से घर से निकला. इस के बाद वह अपनी जानपहचान वाले 3 मैडिकल स्टोर्स पर गया और वहां से नींद वाली 15 गोलियां खरीदीं. इन गोलियों को पीस कर उस ने 4 पुडिय़ा बना ली और अपने घर वापस लौट आया. इस के बाद शाम तक वह बीवीबच्चों से खूब हंसता, बोलता, बतियाता रहा. उन्हें मुकेश के प्लान की भनक तक नहीं लगी.

रात 10 बजे मुकेश ने और्डर कर 4 पिज्जा मंगवा लिए. बड़ी चालाकी से उस ने पिज्जा में पिसी हुई नींद की गोलियों का पाउडर मिला दिया. पत्नी व बच्चे उस समय टीवी पर कोई मूवी देख रहे थे. रात 12 बजे के आसपास मूवी खत्म हुई तो सभी ने पिज्जा खाया. बच्चों को पिज्जा का स्वाद कुछ अजीब लगा तो उन्होंने आधाअधूरा पिज्जा ही खाया और बचा हुआ फ्रिज में रख दिया. पिज्जा खाने के बाद पत्नी रेखा, बेटी भव्या और बेटा अभीष्ट ग्राउंड फ्लोर वाले कमरे मेें पड़े पलंग पर जा कर लेट गए, जबकि दूसरी बेटी काव्या फस्र्ट फ्लोर वाले कमरे में जा कर पलंग पर लेट गई. नींद की गोलियों ने कुछ देर बाद ही असर दिखाना शुरू कर दिया. फिर एक के बाद एक सभी गहरी नींद के आगोश में समा गए.

लेकिन मुकेश की आंखों से नींद कोसों दूर थी. रात 2 बजे मुकेश ने अपनी माशूका स्वाति से मोबाइल फोन पर बात की और सारी बात बताई. उस ने स्वाति से फोन पर संपर्क बनाए रखने को भी कहा. स्वाति सुबह तक उस के संपर्क में रही. इधर पत्नी व बच्चे जब गहरी नींद में सो गए तो सुबह लगभग 4 बजे मुकेश ग्राउंड फ्लोर वाले कमरे में पहुंचा. उस ने पलंग पर सो रही पत्नी रेखा, बेटी भव्या व बेटे अभीष्ट पर एक नजर डाली. फिर रस्सी का टुकड़ा, जिसे उस ने पहले से ही कमरे में सुरक्षित कर लिया था, पत्नी रेेखा (44 वर्ष) की गरदन में लपेटा और कसने लगा. नींद की आगोश में समाई रेखा चीख भी नहीं पाई और उस ने दम तोड़ दिया.

रेखा के बाद उस ने बेटी भव्या (19 वर्ष) और बेटा अभीष्ट (13 वर्ष) को भी रस्सी से गला कस कर मार डाला. इस के बाद वह फस्र्ट फ्लोर पर कमरे में सो रही छोटी बेटी काव्या (17 वर्ष) के पास पहुंचा और उस का भी रस्सी से गला कस दिया. पत्नी व बेटियों का गला कसने के बाद मुकेश ने बेटे अभीष्ट को भी नहीं बख्शा और उसे भी मौत की नींद सुला दिया. पत्नी व बच्चों की हत्या करने के बाद मुकेश ने प्रेमिका स्वाति से फोन पर बात की और उसे बताया कि उस ने पत्नी व बच्चों की हत्या कर दी है. वह सुबह इटावा रेलवे स्टेशन पर आ कर मिले और फोन पर संपर्क में रहे.

4 हत्याएं करने के बाद नारमल क्यों रहा मुकेश

मुकेश 3 घंटे तक लाशों के बीच बैठा रहा. इस बीच उस ने बच्चों के गले में पड़ी  सोने की चेन, पत्नी के गले में पड़ा मंगलसूत्र, चेन व दोनों हाथों से सोने कीे अंगूठियां निकाल कर सुरक्षित कर लीं. तिजोरी का लौकर खोल कर उस में रखी ज्वैलरी भी सुरक्षित कर ली. सुबह 8 बजे मुकेश ने दोनों कमरों का ताला बंद किया और कीमती सामान का थैला ले कर प्लान के मुताबिक रेलवे स्टेशन पहुंच गया. अपने किए गए प्रौमिस के मुताबिक स्वाति रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद थी. चंद मिनट पहले ही वह कानपुर से इटावा ट्रेन द्वारा आई थी.

मुकेश ने कुछ मिनट स्वाति से बात की, फिर कीमती सामान वाला थैला उसे थमा दिया. इस के बाद दोनों बस स्टाप आए. मुकेश ने स्वाति को कानपुर जाने वाली बस में बैठा दिया. बस में बैठते ही स्वाति ने अपना मोबाइल फोन स्विच औफ कर लिया. पुश्तैनी मकान में रहने वाले मुकेश के भाइयों ने सुबह मुकेश के दोनों कमरों में ताला लगा देखा तो था, लेकिन उन्होंने ज्यादा गौर नहीं किया. उन्होंने सोचा कि मुकेश परिवार के साथ कहीं घूमनेफिरने गया होगा, एकदो दिन में वापस आ जाएगा.

मुकेश ने पुलिस से बचने का प्लान पहले से ही बना लिया था. उसी प्लान के तहत वह सिविल लाइंस कोतवाली पहुंचा. वहां टंगे बोर्ड से उस ने सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह का फोन नंबर नोट किया. फिर दोपहर में गल्ला मंडी स्थित एक होटल पर भरपेट खाना खाया. यहीं पर उस ने एक सुसाइड नोट तैयार किया. इस सुसाइड नोट में उस ने अपने भाई अखिलेश वर्मा व सीलमपुर दिल्ली निवासी फुफेरे भाई मनोज कुमार वर्मा पर लाखों रुपया हड़पने और मांगने पर ताने मार कर जलील करने का आरोप लगाया. तथा हत्या/आत्महत्या करने को उकसाने का आरोप लगाया.

इस नोट को लिखने के बाद गल्ला मंडी में ही एक ज्वैलर्स की दुकान पर उस ने अपनी सोने की अंगूठी बेची. अंगूठी बेचने से उसे जो पैसे मिले, उन में से 700 रुपया सैलून वाले को तथा डेढ़ हजार रुपया सोनू नाम के व्यक्ति को उधारी के दिए. सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देने के बावजूद मुकेश विचलित नहीं हुआ. वह बेखौफ इटावा शहर की गलियों में घूमता रहा. शाम 6 बजे के बाद उस ने अपने साढ़ू भोपाल निवासी आशीष वर्मा तथा भिंड निवासी साले रविंद्र व सत्येंद्र से फोन पर बात की और हालचाल पूछा.

उस ने अपने भाइयों से भी फोन पर बात की, लेकिन किसी को महसूस नहीं होने दिया कि उस ने 4 लोगों का मर्डर किया है. रात करीब सवा 8 बजे मुकेश ने सुसाइड नोट का फोटो खींच कर सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह को वाट्सऐप कर दिया तथा डायल 112 पर सूचना दी कि उस की पत्नी व बच्चों ने सुसाइड कर लिया है. वह भी सुसाइड करने रेलवे स्टेशन जा रहा है. इस के बाद उस ने बेटी काव्या व पत्नी रेखा के मोबाइल फोन के वाट्सऐप स्टेटस पर मृतकों की फोटो लगा कर कैप्शन लिखा, ‘ये सब लोग खत्म.Ó फिर उस ने अपना मोबाइल फोन स्विच्ड औफ कर लिया.

इस स्टेटस को देख कर सगेसंबंधी सन्न रह गए. पड़ोसी भी सकते में आ गए. पड़ोसी मुकेश के घर पहुंचे तो ताला बंद था. उन्होंने मुकेश के बड़े भाई रत्नेश वर्मा व अवधेश वर्मा को सूचना दी. थोड़ी देर बाद दोनों भाई घर आ गए. उन्होंने पड़ोसियों के सहयोग से कमरों का ताला तोड़ा. अंदर का दृश्य देख कर सभी का कलेजा कांप उठा. रत्नेश वर्मा ने सूचना थाना सिविल लाइंस पुलिस को दी तो हड़कंप मच गया. सूचना पाते ही एसएचओ विक्रम सिंह चौहान पुलिस दल के साथ लालपुरा स्थित मुकेश वर्मा के घर आ गए.

मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने सूचना पुलिस अफसरों को दी तो थोड़ी देर में मौके पर एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एएसपी अभय नाथ त्रिपाठी तथा सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह भी आ गए. पुलिस अफसरों ने घटनास्थल को देखा तो सहम गए. 2 कमरों में 4 लाशें पड़ी थीं. दोनों कमरों में खून की एक बूंद भी नहीं थी. अब तक फोरैंसिक टीम भी आ गई थी और वह जांच में जुट गई थी. घर का मुखिया मुकेश वर्मा घर से नदारद था. पुलिस को पता चल गया था कि उस ने डायल 112 पर पत्नी व बच्चों के सुसाइड करने की जानकारी दी. लेकिन वह स्वयं कहां है, जीवित भी है या नहीं, इस की जानकारी न दे कर उस ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था.

अब तक मीडिया को भी घटना की जानकारी मिल गई थी, इसलिए मीडियाकर्मियों की भी भीड़ जुट गई थी. पुलिस औफिसर इस स्थिति में नहीं थे कि वे बता सकें कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का. अत: उन के सवालों से बचने के लिए चारों शवों को इटावा के सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मुकेश की खोज में पुलिस ने उस के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लिया तो रात 8:20 पर उस की लोकेशन इटावा रेलवे स्टेशन के पास मिली. उस के बाद उस का फोन बंद हो गया था. पुलिस की टीम इटावा रेलवे स्टेशन पहुंची. वहां पता चला कि मुकेश रेल से कट कर आत्महत्या करना चाहता था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ. वह जीआरपी पुलिस की हिरासत में है. पुलिस टीम तब मुकेश को अपनी कस्टडी में ले कर थाना सिविल लाइंस आ गई.

थाने में पुलिस अफसरों ने जब मुकेश से पूछताछ की तो उस ने पहले से प्लानिंग कर बनाई गई कहानी पुलिस को बताई. उस ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि पिछले कई सालों से वह परेशान था. रिश्तेदारों को उस ने 15 लाख रुपए उधार दिए थे, जो वापस नहीं कर रहे थे. पैसा मांगने पर वे उसे जलील करते थे और ताने मारते थे. इस कारण उसे व्यापार करने में दिक्कत आ रही थी. धीरेधीरे घर खर्च का ज्यादा और आमदनी कम होती गई. इस से वह काफी समय से तनाव में था. टेंशन के चलते सिर्फ वह आत्महत्या करना चाहता था. उस ने यह बात पत्नी रेखा को बताई तो वह बोली कि आत्महत्या के बाद उस का और बच्चों का क्या होगा.

फिर पत्नी की सहमति के बाद उस ने सभी को मारने के बाद आत्महत्या करने की योजना बनाई. वह करवाचौथ वाले दिन सभी को मारना चाहता था, लेकिन पत्नी ने उस दिन ऐसा करने से मना कर दिया, जिस से मौत टल गई. इस के बाद दीपावली के बाद का प्लान बनाया. 11 नवंबर, 2024 को बड़ी बेटी भव्या पढ़ाई के लिए वापस दिल्ली जाने वाली थी, इसलिए उस ने एक दिन पहले ही सब को मारने का प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक वह मैडिकल स्टोर से नींद की 15 गोलियां खरीद कर लाया. 5 गोलियां पीस कर पत्नी रेखा को पिज्जा के साथ मिला कर खिला दी, बाकी गोलियां बच्चों को पीस कर पिज्जा के साथ खिला दीं.

उस ने बताया कि गला घोंटते समय बच्चे बेहोशी की अवस्था में बोले थे, ”पापा, ये क्या कर रहे हो?

तब मैं ने उन से कहा था कि मेरे मरने के बाद तुम लोग रह नहीं पाओगे. इसलिए मरना ही बेहतर है और फिर गला घोंट कर सभी को मार डाला. मुकेश ने आगे बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद वह दिन भर शहर की गलियों में भटकता रहा. रात साढ़े 8 बजे वह इटावा रेलवे स्टेशन पहुंचा और सुसाइड के लिए पूर्वी छोर पर पटरियों के बीच लेट गया. मरुधर एक्सप्रैस उस के ऊपर से गुजर गई, लेकिन वह बच गया. जीआरपी ने उसे पकड़ा. जामातलाशी में पुलिस को मुकेश से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए. उन्हें पुलिस ने सुरक्षित कर लिया. मुकेश की निशानदेही पर पुलिस ने उस के घर से रस्सी का वह टुकड़ा बरामद कर लिया, जिस से उस ने पत्नी व बच्चों का गला घोंटा था.

पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ के बाद उस की बात को सच मान कर उस का बयान दर्ज किया. लेकिन अधिकारियों के मन में एक फांस चुभ रही थी कि मुकेश को यदि आत्महत्या करनी ही थी तो उस ने घर में क्यों नहीं की? घटना को अंजाम देने के 16 घंटे बाद वह आत्महत्या करने इटावा रेलवे स्टेशन क्यों गया? वह भी बच गया. उस के शरीर पर खरोंच तक नहीं आई. उन्हें लगा कि दाल में कुछ काला जरूर है. 12 नवंबर, 2024 को इस हत्या/आत्महत्या प्रकरण की खबर प्रमुख अखबारों में छपी, जिसे पढ़ कर लोग सन्न रह गए. शहरवासियों तथा सगेसंबधियों की भीड़ मुकेश के घर पर जुट गई. सहमति से आत्महत्या की बात न शहरवासियों के गले उतर रही थी और न ही परिवार तथा सगेसंबधियों की समझ में आ रही थी.

सगेसंबंधी भी नहीं समझ पाए वारदात की वजह

पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए मुकेश के बड़े भाई एडवोकेट रत्नेश वर्मा, अवधेश वर्मा तथा मां चंद्रकला से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि रिश्तेदारों व पड़ोसियों के फोन आने के बाद वह मुकेश के घर गए तो देखा कि लाशें पड़ी थीं. रत्नेश ने बताया कि मुकेश के घर में तनाव जैसी कोई बात नहीं थी. तनाव की बात उस ने कभी उन्हें नहीं बताई. आर्थिक स्थिति भी कमजोर नहीं थी. वह सोनेचांदी के व्यापार में अच्छा पैसा कमाता था. पता नहीं मुकेश ने यह कदम क्यों उठाया.

अब तक मृतका रेखा का भाई भिंड निवासी सत्येंद्र सोनी भी बहन के घर आ गया था. उस ने पुलिस औफिसरों को बताया कि उस ने भांजी काव्या का स्टेट्स देखा था, जिस में लिखा था-ये सब खत्म. बहन और बच्चों की फोटो लगी थी. इस के बाद उस ने सब को फोन लगाया, लेकिन किसी का फोन नहीं लगा. यहां आ कर पता चला कि बहन व बच्चों की हत्या हो गई है.

सत्येंद्र ने आरोप लगाया कि बहनोई मुकेश शराब पीता था. औरत उस की कमजोरी थी. बहनोई मुकेश ने ही प्लान के तहत उस की बहन रेखा व उस के बच्चों की हत्या की है. सहमति से हत्या/आत्महत्या की बात गलत है. सत्येंद्र ने यह भी बताया कि दीपावली के 2 दिन पहले उस की बहन रेखा व बच्चे भिंड आए थे. तब रेखा ने न तनाव वाली बात बताई थी और न ही आर्थिक परेशानी की. वह हंसीखुशी से बच्चों के लिए पटाखे खरीद कर चली गई थी.

पूछताछ के बाद एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने दोपहर बाद 2 बजे पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता की और मुकेश वर्मा को मीडिया के समक्ष पेश किया. पत्रकारों से रूबरू होते वक्त मुकेश को न कोई पछतावा था और न ही माथे पर कोई शिकन. साले सत्येंद्र ने भी मुकेश पर हत्या का आरोप लगाया था. अत: सिविल लाइंस थाने के एससएचओ विक्रम सिंह ने सत्येंद्र सोनी की तहरीर पर मुकेश वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) तथा 61 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. शाम 4 बजे उसे इटावा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

जेल भेजने के बाद अधर में क्यों अटका मामला

पुलिस ने मुकेश को जेल जरूर भेज दिया था, लेकिन सामूहिक हत्या आत्महत्या का मामला अब भी अधर में ही लटका हुआ था. पुलिस टीम ने जांच आगे बढ़ाई तो मुकेश के एक और झूठ का खुलासा हो गया. पता चला कि मुकेश ने आत्महत्या करने का नाटक किया था. मरुधर एक्सप्रैस ट्रेन उस के ऊपर से गुजरी ही नहीं थी. वह प्लेटफार्म नंबर 4 पर खड़ी मरुधर एक्सप्रैस ट्रेन के इंजन के आगे लेट गया था. गाड़ी चलने के पहले ही चालक की नजर उस पर पड़ गई थी. चालक ने तब उसे जीआरपी के हवाले कर दिया था.

पुलिस की इस गुत्थी को सुलझाया मृतका रेखा की बहन राखी तथा उस के पति आशीष वर्मा ने, जो भोपाल से इटावा आए थे. आशीष वर्मा व राखी ने पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी दी. राखी ने बताया कि उस के बहनोई मुकेश वर्मा का कानपुर (बर्रा) की रहने वाली तलाकशुदा महिला स्वाति सोनी से नाजायज रिश्ता है. वह महिला मुकेश की पहली पत्नी नीतू की रिश्तेदार है. रिश्ते में वह मुकेश की साली लगती है.

इन नाजायज संबंधों की जानकारी रेखा को भी हो गई थी. वह इस का विरोध करती थी, जिस से घर में कलह होती थी. बहन ने उसे कई बार फोन पर यह जानकारी दी थी. करवाचौथ पर रेखा ने मुकेश के मोबाइल फोन में स्वाति की तसवीर देखी थी, तब खूब झगड़ा हुआ था. उस ने बताया कि अवैध संबंधों के चलते ही बहनोई मुकेश ने प्रीप्लान कर उस की बहन रेखा व उस के बच्चों की हत्या की है. हत्या के इस प्लान में स्वाति भी शामिल है. उस ने मुकेश को अपने प्रेमजाल में फंसा रखा है.

अवैध रिश्तों में हुई सामूहिक हत्या का पता चलते ही पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गए. उन्होंने जांच तेज कर दी. पुलिस को मुकेश के पास से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए थे. पुलिस ने उन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि घटना वाली रात 2 बजे से 5 बजे के बीच एक फोन नंबर सक्रिय था, जिस पर मुकेश ने कई बार बात की थी. इस नंबर पर पहले भी उस की बातें होती थीं. पुलिस ने उस मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह नंबर स्वाति सोनी निवासी विश्व बैंक कालोनी बर्रा (कानपुर) के नाम दर्ज है.

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने स्वाति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम भेजी. लेकिन उस के घर पर ताला लगा था. पुलिस टीम तब खाली हाथ लौट आई. पुलिस ने उस की टोह में खबरियों को लगा दिया. इधर सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह मुकेश के उस हस्तलिखित सुसाइड नोट की जांच कर रहे थे, जिसे मुकेश ने उन के वाट्सऐप पर भेजा था. जांच में यह बात सच निकली कि मुकेश के फुफेरे भाई मनोज वर्मा ने उस का लाखों रुपया हड़प लिया था. मांगने पर जलील करता था. झूठे मामले में फंसाने की धमकी देता था. इस के अलावा भाई अखिलेश ने भी उस के रुपए हड़प रखे थे. जांच पूरी होने के बाद सीओ (सिटी) ने उन की गिरफ्तारी का जाल बिछाया.

15 नवंबर, 2024 को सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह की टीम ने अखिलेश व मनोज वर्मा को बस स्टैंड इटावा से दबोच लिया. पूछताछ में दोनों ने गलत फंसाने का आरोप लगाया. लेकिन पुलिस ने उन की एक न सुनी और दोनों को आत्महत्या करने को मजबूर करने के जुर्म में जेल भेज दिया. 20 नवंबर, 2024 की दोपहर 12 बजे एसएचओ विक्रम सिंह चौहान को मुखबिर के जरिए जानकारी मिली कि मुकेश की प्रेमिका स्वाति इस समय अंबेडकर चौराहे के पास निर्माणाधीन रामनगर ओवरब्रिज के नीचे मौजूद है. वह कोर्ट में सरेंडर करने के लिए किसी वकील का वेट कर रही है.

चूंकि मुखबिर की इनफार्मेशन खास थी, इसलिए पुलिस टीम रामनगर ओवरब्रिज के नीचे पहुंची और घेराबंदी कर स्वाति को गिरफ्तार कर लिया. उसे थाना सिविल लाइंस लाया गया. उस की गिरफ्तारी की सूचना पर पुलिस अफसर भी थाने आ गए. पुलिस औफसरों ने स्वाति से पूछताछ की तो उस ने बताया कि मुकेश वर्मा से उस का नाजायज रिश्ता था. पूछताछ के बाद इंसपेक्टर विक्रम सिंह चौहान ने स्वाति सोनी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103 (1) तथा 61 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच, मुकेश व स्वाति के बयानों तथा अन्य सूत्रों के आधार पर इस सामूहिक हत्याकांड की सनसनीखेज कहानी सामने में आई.

बीवीबच्चों वाला मुकेश क्यों फंसा स्वाति के चक्कर में

उत्तर प्रदेश के इटावा शहर के सिविल लाइंस थाने के अंतर्गत एक मोहल्ला है— लालपुरा. इसी मोहल्ले में खुशीराम वर्मा सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी चंद्रकला के अलावा 6 बेटे रत्नेश, राकेश, अवधेश, मुकेश, अखिलेश व रघुवेश थे. खुशीराम वर्मा सर्राफा व्यापारी थे. इस व्यवसाय में उन का बड़ा नाम था. उन्होंने अपना हुनर बेटों को ही नहीं, रिश्तेदारों को भी सिखाया था. वे सभी इसी व्यापार से अपनी जीविका चलाते थे. खुशीराम वर्मा के बच्चे पढ़लिख कर जवान हुए तो सभी किसी न किसी व्यापार में रम गए. बेटे कमाने लगे तो उन्होंने एक के बाद एक सभी बेटों का विवाह कर दिया. 3 मंजिला घर में उन के 4 बेटे अवधेश, मुकेश, अखिलेश व रघुवेश वर्मा अपनेअपने परिवारों के साथ रहने लगे.

जबकि सब से बड़ा बेटा रत्नेश वर्मा, जोकि नोटरी वकील था, वह एआरटीओ औफिस के सामने नवविकसित कालोनी में परिवार सहित रहता था. उस से छोटा राकेश वर्मा सपरिवार गाड़ीपुरा मोहल्ले में रहता था. उस की वहीं स्थित चारा मार्केट में सर्राफा की दुकान तथा पालिका बाजार में कपड़े की दुकान थी.

खुशीराम वर्मा के चौथे नंबर का बेटा था— मुकेश. उस की शादी नीतू से हुई थी. शादी के एक साल बाद नीतू ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने भव्या रखा. भव्या 2 साल की थी, तभी उस की मम्मी नीतू का निधन हो गया. वह कैंसर से पीडि़त थी.

पत्नी की मौत के बाद मुकेश को बेटी के पालनपोषण की समस्या हुई तो उस ने सन 2006 में रेखा से दूसरी शादी कर ली. रेखा भिंड शहर कोतवाली के मोहल्ला झांसी की रहने वाली थी. उस के 2 भाई सत्येंद्र, रविंद्र तथा एक बहन राखी थी. दूसरी शादी के बाद मुकेश खुश था. रेखा ने एक बेटी काव्या व बेटे अभीष्ट को जन्म दिया. रेखा अब दोनों बेटियों व बेटे का पालनपोषण करने लगी. बच्चे कुछ बड़े हुए तो तीनों बच्चे ज्ञानस्थली स्कूल में पढऩे लगे. मुकेश वर्मा सर्राफा व्यापार का मंझा हुआ खिलाड़ी था. सर्राफा की दुकान पर उस का छोटा भाई रघुवेश बैठता था. मुकेश दिल्ली से सोनाचांदी के आभूषण लाता था और इटावा, औरैया, मैनपुरी के व्यापारियों को सप्लाई करता था. उस का बिजनैस कानपुर तक फैला था. इस व्यवसाय से उसे लाखों रुपए की कमाई होती थी.

वर्ष 2019 में मुकेश अपनी पत्नी रेखा के साथ मथुरा-वृंदावन घूमने गया. वहां एक होटल में उस की मुलाकात स्वाति सोनी से हुई. वह भी अपने पति अर्पण के साथ घूमने आई थी. वह भी उसी होटल में रुकी थी, जिस में मुकेश ठहरा था. दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई तो रिश्तेदारी खुल गई. स्वाति मुकेश की पहली पत्नी नीतू की मौसी की बेटी निकली. इस नाते मुकेश और स्वाति के बीच जीजासाली का रिश्ता बन गया.

गुपचुप शादी कर गोवा में मनाया हनीमून

स्वाति मुकेश के रहनसहन से प्रभावित हुई. लौटते समय दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर भी दे दिए. स्वाति सोनी, बर्रा (कानपुर) की रहने वाली थी. उस की शादी 2007 में जालौन के उरई कस्बा निवासी अर्पण से हुई थी. अर्पण प्राइवेट नौकरी करता था. उस की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. वह शराब का लती भी था. स्वाति उस से खुश नहीं थी. खर्चे पूरे न होने के कारण स्वाति और अर्पण के बीच अकसर झगड़ा होता रहता था.

स्वाति पहली ही नजर में मुकेश के दिलोदिमाग पर छा गई थी, इसलिए वह उस की ससुराल जाने लगा. मोबाइल फोन पर भी दोनों की रसभरी बातें होने लगीं. जल्दी ही दोनों के बीच दूरियां कम हो गईं और उन के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. मुकेश ने स्वाति के पति अर्पण से भी दोस्ती कर ली और उस के साथ शराब की पार्टी करने लगा. लेकिन एक रोज भांडा फूट गया, जब अर्पण ने दोनों को रंगेहाथ पकड़ लिया. अर्पण ने स्वाति को जम कर पीटा. तब स्वाति रूठ कर मायके बर्रा कानपुर आ गई. साथ में बेटे को भी ले आई. बाद में पति अर्पण से उस का तलाक हो गया.

स्वाति मायके में आ कर रहने लगी तो मुकेश का वहां भी आनाजाना शुरू हो गया. मुकेश जब भी बिजनैस के सिलसिले में आता, स्वाति के घर पर ही रुकता. रात में उस के साथ रंगरलियां मनाता. मुकेश ने बर्रा में ही उसे ब्यूटीपार्लर खुलवाया ताकि वह कुछ पैसा कमा सके, लेकिन स्वाति ब्यूटीपार्लर चला नहीं पाई. कुछ समय बाद स्वाति के कहने पर मुकेश ने बर्रा की विश्व बैंक कालोनी में एक मकान खरीद लिया. इस मकान में स्वाति मालकिन बन कर रहने लगी. यही नहीं मुकेश ने खाड़ेपुर में स्वाति को सर्राफा की दुकान भी खुलवा दी. इस दुकान पर मुकेश भी बैठता था. पूछने वालों को स्वाति मुकेश को अपना पति बताती थी. मुकेश अब कईकई दिनों तक बर्रा में ही रुकने लगा था.

स्वाति बहुत चालाक थी. उस की नजर मुकेश की धनदौलत पर टिकी थी. इसलिए वह मुकेश को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी. स्वाति मुकेश के प्यार में इतनी अंधी हो गई थी कि वह उस के साथ शादी रचा कर जिंदगी भर तक साथ रहने का सपना देखने लगी थी. अपना सपना पूरा करने के लिए स्वाति ने मुकेश के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो वह राजी हो गया. मुकेश यह तक भूल गया कि वह शादीशुदा और 4 बच्चों का बाप है. मुकेश के राजी होने के बाद स्वाति ने उस के साथ मंदिर में विवाह कर लिया. फिर वह हनीमून के लिए मुकेश के साथ गोवा चली गई. वहां से सप्ताह भर बाद मौजमस्ती करने के बाद दोनों लौटे.

एक रोज रेखा ने पति के मोबाइल फोन में स्वाति की फोटो देखी तो उस का माथा ठनका. उस ने गुप्तरूप से जानकारी जुटाई तो पता चला कि दोनों के बीच नाजायज रिश्ता है.

और अवैध संबंधों में स्वाहा हो गया परिवार

अपना घर उजड़ता देख कर रेखा ने विरोध शुरू किया, जिस से दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. लेकिन विरोध के बावजूद मुकेश नहीं माना. धीरेधीरे दोनों के बीच नफरत बढ़ती गई.

वर्ष 2021 में मुकेश के छोटे भाई रघुवेश की बीमारी के चलते मौत हो गई. उस के बाद मुकेश ने गल्ला मंडी वाली दुकान 16 लाख रुपए में बेच दी. दुकान बेचने का रेखा ने भरपूर विरोध किया था, लेकिन मुकेश नहीं माना. दुकान बेचने से मिले 16 लाख रुपयों में से 3 लाख रुपया स्वाति ने लटकेझटके दिखा कर ले लिए तथा 10 लाख रुपए उस ने सीलमपुर दिल्ली निवासी फुफेरे भाई मनोज कुमार वर्मा को दे दिया. उस ने चांदी रिफाइनरी का काम शुरू किया था और आधा लाभ देने का वादा किया था. बाद में वह अपने प्रौमिस से मुकर गया.

अब तक मुकेश के बच्चे भी बड़े हो गए थे. बड़ी बेटी भव्या 18 साल की उम्र पार कर चुकी थी. उस ने स्थानीय ज्ञानस्थली स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर दिल्ली यूनिवर्सिटी के रानी लक्ष्मीबाई कालेज में बीकौम (प्रथम वर्ष) में प्रवेश ले लिया था. 17 वर्षीय काव्या 11वीं कक्षा में तथा 13 वर्षीय अभीष्ट 9वीं कक्षा में पढ़ रहा था. तीनों बच्चे होनहार थे. मन लगा कर पढ़ाई कर रहे थे.

रेखा की छोटी बहन राखी भोपाल निवासी आशीष वर्मा को ब्याही थी. रेखा जब परेशान होती थी, तब वह राखी से मोबाइल फोन पर बात करती थी और अपना दर्द बयां करती थी. उस ने राखी को बताया था कि उस के बहनोई के कानपुर की एक तलाकशुदा महिला से नाजायज संबंध है. उस के कारण घर में कलह होती है. दुकान बेचने की जानकारी भी उस ने राखी को दी थी.

ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा था, त्योंत्यों मुकेश वर्मा की उलझन भी बढ़ती जा रही थी, जिस के कारण उस का व्यापार में भी मन नहीं लगता था. उस का दिन का चैन छिन गया था और रात की नींद हराम हो गई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे, क्या न करे. इसी उलझन मेें उस ने 7 नवंबर को स्वाति के घर का रुख किया. मुकेश और स्वाति ने कान से कान जोड़ कर पूरा प्लान बना लिया. मुकेश ने पत्नी और बच्चों को मारने का प्लान बना लिया. यही नहीं, पुलिस से बचने के लिए मुकेश ने पूरी योजना भी बना ली.

फिर प्लान के तहत ही मुकेश ने 10 नवंबर की रात पत्नी व बच्चों की हत्या कर दी और स्वयं आत्महत्या करने का नाटक रचा. 21 नवंबर, 2024 को पुलिस ने आरोपी स्वाति सोनी को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. मुकेश को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी थी.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

22 साल से लापता बेटा जब संन्यासी बन कर लौटा

किसी चमत्कार के इंतजार में सालों से दिन गुजार रहे रतिपाल और घर वालों को 22 साल बाद साधु वेश में अपना खोया बेटा पिंकू मिला तो सब की आंखें छलक उठीं थीं. बेटा मिलने की खुशी में रतिपाल ने दिल्ली से अपनी पत्नी माया देवी को भी बुला लिया. खोए बेटे पिंकू को साधु वेश में देखते ही मां भावुक हो गई. उस के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

दरअसल, संन्यासी की पारंपरिक पोशाक में आए एक युवक ने सारंगी बजा कर भिक्षा देने की गुहार लगा कर जैसे ही एक रुदन गीत गाना शुरू किया तो उसे सुन कर बड़ी संख्या में गांववाले एकत्र हो गए. जोगी ने अपने आप को गांव के ही रहने वाले रतिपाल सिंह का गायब हुआ बेटा बताया. रुदन गीत सुन कर गांव की महिलाओं और पुरुषों के साथ ही रतिपाल के घर वालों की आंखों से आंसू झरने लगे.

दरअसल, 22 साल से लापता अरुण उर्फ पिंकू के लौटने की खुशी में पूरा गांव रो पड़ा. घर वालों के आंसू तो थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे. यह दृश्य उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के थाना जायज के गांव खरौली का था. तारीख थी 28 जनवरी, 2024.

Jogi or Sathi ke Ane Par Ekatra Ganv Wale

बताते चलें कि साधु के वेश में अपने एक साथी के साथ आया वह युवक गांव के ही रतिपाल सिंह का बेटा अरुण उर्फ पिंकू था, जो 22 साल से अधिक समय तक लापता रहने के बाद अब संन्यासी के वेश में उन के सामने था. जब पिंकू लापता हुआ, उस समय वह 11 साल का था. अब पिंकू जोगी बन कर अपने गांव में मां से भिक्षा लेने पहुंचा था. इतने लंबे समय बाद अपने खोए बेटे को संन्यासी के रूप में सामने देख पिता व अन्य परिजन भावुक हो गए.

मां माया देवी, पिता रतिपाल के अलावा पिंकू की बुआओं उर्मिला व नीलम ने भी साधु वेश में आए पिंकू से गृहस्थ जीवन में लौटने की मिन्नतें कीं. लेकिन युवक की जुबान पर एक ही रट थी, ‘आप से भिक्षा लिए बिना मेरी दीक्षा पूरी नहीं होगी. गुरु का आदेश है कि मां के हाथ से भिक्षा पाने के बाद ही योग सफल होगा.’ उस ने कहा, ‘मां, यदि आप भिक्षा नहीं दोगी तो मैं दरवाजे की मिट्टी को ही भिक्षा के रूप में स्वीकार कर चला जाऊंगा.’

अब बेटा नहीं संन्यासी हूं मैं

साधु ने कहा, ”माई, मैं अब आप का बेटा पिंकू नहीं, बल्कि संन्यासी हूं. मैं भिक्षा ले कर वापस झारखंड स्थित पारसनाथ मठ में दीक्षा पूरी करने के लिए चला जाऊंगा.’’

साधु की बातें सुन कर रतिपाल और उन की पत्नी का कलेजा बैठ गया. उन्होंने उसे मनाने के साथ ही कहीं भी जाने से मना किया.

साधु खरौली गांव में 22 जनवरी, 2024 से ही आनेजाने लगा था. वह साथी के साथ आधे गांव में चक्कर लगा कर सारंगी व ढपली पर भजन गाता था. इस के बाद शाम होते ही वापस चला जाता.

रतिपाल मूलरूप से गांव खरौली के रहने वाले हैं. गांव में उन का छोटा भाई जसकरन सिंह, भतीजे व अन्य लोग रहते हैं. गांव में उन की खेती की जमीन भी है. 11वीं पास करने के बाद उन की शादी हो गई थी. साल 1986 में वह दिल्ली आ गए. यहां उन के एक बेटा हुआ, जिस का नाम उन्होंने अरुण रखा. घर में सभी प्यार से उसे पिंकू के नाम से पुकारते थे.

Arun Pankoo Birthday Par Kek Khata Huaa

                                      पिंकू के बचपन की तस्वीर

जब पिंकू 5-6 साल का था, उस की मां भानुमति बीमार हो गई. 3 साल तक उन का दिल्ली में इलाज चलता रहा, लेकिन उन की मृत्यु हो गई. रतिपाल ने बच्चे की परवरिश व अपनी आगे की जिंदगी के लिए वर्ष 1998 में माया देवी से दूसरी शादी कर ली. सब कुछ ठीक चल रहा था.

डांटने से गुस्से में घर से चला गया था पिंकू

कंचे खेलने पर मां की डांट से गुस्से में आ कर साल 2002 में 11 साल की उम्र में पिंकू अपने घर से कहीं चला गया. उस समय वह दिल्ली के शहादतपुर स्थित स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ता था. घर वालों ने पिंकू को काफी तलाश किया, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिलने पर पिता रतिपाल ने दिल्ली के थाना खजूरी खास में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई.

समय गुजरता गया लेकिन लापता बेटा नहीं मिला. रतिपाल हफ्ते दस दिन में थाने जा कर पुलिस से अपने खोए बेटे के बारे में जानकारी लेते, लेकिन उन्हें हर बार एक ही जबाव मिलता कि तलाशने पर भी आप का बच्चा नहीं मिल रहा है.

रतिपाल ने अपने स्तर से भी बच्चे को तलाश किया, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला. अपने इकलौते बेटे के इस तरह घर से चले जाने पर मातापिता ने कलेजे पर पत्थर रख कर सब्र कर लिया.

27 जनवरी, 2024 को खरौली में रह रहे भतीजे दीपक ने दिल्ली रतिपाल के पास फोन किया, ”चाचा, साधु भेष में एक युवक 22 जनवरी से गांव में आया हुआ है, जो अपने को आप का खोया हुआ बेटा अरुण उर्फ पिंकू बता रहा है. जब उस से पिंकू की कोई पहचान बताने को कहा तो उस ने कहा कि पिता जब खुद देख कर बताएंगे, तभी पहचान सभी गांव वालों को दिखाऊंगा. चाचा, आप गांव आ कर देख लो. साधु कल आने की बात कह कर रायबरेली से लगभग 30 किलोमीटर दूर बछगांव स्टेशन जाने की बात कह कर चला गया है.’’

बेटे से मिलने की चाहत और मन में ढेरों सवाल लिए रतिपाल अपनी बहन नीलम के साथ दिल्ली से गांव खरौली 28 जनवरी को ही पहुंच गए. दूसरे दिन वह साधु अपने एक साथी के साथ सुबह 11 बजे गांव आया. आधे गांव का चक्कर लगाता और सारंगी पर भजन गाते हुए साधु रतिपाल के घर पर पहुंचा.

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पिंकू निकला नफीस

साधु ने देखते ही पापा व बुआओं को पहचान लिया. साधु ने उन्हें बताया कि वह वास्तव में उन का बेटा पिंकू है. वह संन्यासी हो गया है, भिक्षा मांगने आया हुआ है. रतिपाल ने उस के पेट पर बचपन की चोट के निशान को देखने के बाद अपने खोए बेटे अरुण उर्फ पिंकू के रूप में उस की पहचान की.

बेटे की खातिर रतिपाल सब कुछ न्यौछावर करने को हो गया तैयार

बचपन में खोए बेटे को 22 साल बाद दरवाजे पर देख पिता व परिजनों की उम्मीद लौट आई थी. आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ी. स्नेह ऐसा जागा कि भींच कर उसे सीने से लगा लिया. बेटे को घर लाने के लिए पिता सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार था.

खोए बेटे के मिलने पर रतिपाल ने घर पर साधु व उस के साथी के साथ भोजन भी किया. अब साधु रतिपाल को पापा तथा रतिपाल उसे पिंकू कह कर पुकारने लगे थे. रतिपाल ने खोए बेटे के मिलने की खुशखबरी अपनी रिश्तेदारी में भी दे दी थी. इस पर कई रिश्तेदार गांव आ गए थे.

एक सप्ताह तक वह जोगी अपने साथी के साथ रोजाना गांव आता और शाम होते ही वापस चला जाता. इस दौरान उस की रतिपाल और परिजनों से बातें भी होतीं. भोजन भी पापा के साथ करता. अपने पापामम्मी व अन्य घर वालों के प्यार को देख कर पिंकू का झुकाव भी उन की ओर होने लगा.

वहीं रतिपाल की बूढ़ी आंखों ने अपने खोए बेटे को 22 साल बाद देखा तो प्यार फफक पड़ा. खोए बेटे को किसी भी तरह वापस पाने के लिए परिवार तड़प उठा. सभी के प्रयास विफल होने पर रतिपाल ने जोगी से किसी भी तरह घर लौटने की गुजारिश की.

इस पर उस ने कहा, ”पापा, आप मेरे गुरु महाराज से बात कर मुझे आश्रम से छुड़ा लो.’’

”पापा, आश्रम से गुरुजी ने मुझे दीक्षा के दौरान लंगोटी, कमंडल व अंगवस्त्र दिए हैं. मठ की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. मठ का सामान वापस करना होगा.’’

तब रतिपाल ने कहा, ”बेटा, तुम गुरुजी से बात कर प्रक्रिया के बारे में बताना. मैं तुम्हें घर लाने के लिए प्रक्रिया पूरी कर दूंगा.’’

अनाज व नकदी दे कर किया विदा

दिल पर पत्थर रख कर घर वालों व गांव वालों ने भिक्षा के रूप में उसे 13 क्ंिवटल अनाज और रतिपाल ने जोगी बने बेटे पिंकू को संपर्क में बने रहने के लिए एक नया मोबाइल फोन व नकदी दे कर पहली फरवरी को विदा किया. रतिपाल की बाराबंकी में रहने वाली बहन निर्मला ने पिंकू द्वारा बताए खाते में 11 हजार रुपए की रकम ट्रांसफर कर दी.

पिंकू ने कहा कि वह यहां से सभी सामान ले कर अयोध्या जाएगा, जहांं साधुओं को भंडारा कराएगा. सामान पहुंचाने के लिए रतिपाल ने एक वाहन का इंतजाम कर दिया. पहली फरवरी, 2024 को जोगी अपने साथी के साथ सामान ले कर चला गया. रतिराम, पत्नी माया देवी परिजनों के साथ ही गांव वालों ने भारी मन से जोगी को विदा किया.

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घर से भिक्षा ले कर जाने के बाद संन्यासी बेटे पिंकू का मन पसीज गया. दूसरे दिन उस ने फोन कर पिता से घर लौटने की इच्छा जताई. बेटे के गृहस्थ जीवन में लौटने की बात सुन कर रतिराम की खुशी का पारावार नहीं रहा. उस ने बताया कि गुरु महाराज का कहना है कि गृहस्थ आश्रम में लौटने के लिए दीक्षा के रूप में 10.80 लाख रुपए चुकाने पड़ेंगे.

रतिपाल ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई. इतना ही नहीं, पिंकू ने पिता की मठ के गुरु महाराज से फोन पर बात भी कराई. लेकिन इतनी बड़ी रकम देने की उन की हैसियत नहीं थी. तब 4.80 लाख देने की बात कही गई.

गुरुओं की दीक्षा चुकाने की शर्त पर पिता ने आखिरकार बेटे को पाने के लिए 3 लाख 60 हजार रुपए में हां कर दी.

मठ का खाता न बताने पर हुआ शक

बेटे को वापस पाने के लिए मजबूर पिता ने 14 बिस्वा जमीन का सौदा गांव के ही अनिल कुमार वर्मा से 11 लाख 20 हजार रुपए में तय कर लिया. 3-4 दिन रतिपाल को पैसों का इंतजाम करने में लग गए.

इस के बाद साधु पिंकू की ओर से बताए गए आईसीआईसीआई बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करने भाई जसकरन व भतीजे धर्मेश के साथ पहुंचे. रतिपाल ने बताया, बैंक मैनेजर ने उन से कहा कि एक दिन में 25 हजार से ज्यादा रुपए ट्रांसफर नहीं हो सकते. पिंकू ने यूपीआई से भुगतान करने को कहा.

रतिपाल ने पिंकू से कहा कि अपने मठ के ट्रस्ट का बैंक खाते का नंबर दे दो, उस पर भुगतान कर देंगे. इस के बाद वहां आ कर तुम्हें अपने साथ घर ले आएंगे तो साधु ने मना कर दिया. यहीं से रतिपाल को कुछ शक होने लगा. तब प्रशासन से उन्होंने मदद मांगी.

रतिपाल सिंह समझ गए कि बेटे पिंकू के रूप में आया जोगी कोई ठग है. उस ने उन की भावनाओं का सौदा किया है. रतिपाल ने 10 फरवरी, 2024 को थाना जायस में 2 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 419 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई.

एसएचओ देवेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद इस केस की जांच बहादुरपुर चौकी प्रभारी राजकुमार सिंह को सौंपी. आरोपी का मोबाइल बंद आने पर उसे सर्विलांस पर लगा दिया गया.

इस के बाद रतिपाल को जब शंका हुई तो उन्होंने अपने स्तर से जांचपड़ताल करनी शुरू कर दी. उन के हाथ उसी साधु बने युवक के कई फोटो और वीडियो लग गए हैं. रतिपाल ने बताया कि उन्होंने झारखंड के एसपी से फोन पर बात की. पूरा प्रकरण बताया. एसपी को जोगी का मोबाइल नंबर भी दिया.

उन्होंने अपने स्तर से जांच कराई फिर फोन कर बताया कि यह नंबर झारखंड में नहीं, बल्कि गोंडा में चल रहा है. इस के साथ ही झारखंड में पारसनाथ नाम का कोई मठ है ही नहीं. उन्होंने कहा कि उसे पकड़ा जाए और यदि वह गलत है तो सजा मिले.

जोगी की सच्चाई पता करने के लिए रतिपाल ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. जिस गुरु का नाम बताया, वह भी गलत निकला. दीक्षा में मिले 13 क्विंटल अनाज व अन्य सामान को पिकअप में ले कर साधु अयोध्या जाने की कह कर गया था. पिकअप चालक  के साथ रतिपाल अयोध्या पहुंचे तो वहां कोई नहीं मिला. पिकअप चालक ने बताया कि अरुण अयोध्या न जा कर उसे गोंडा ले गया था, वहीं सारा सामान उतरवाया था.

गोंडा की जिस आईसीआईसीआई बैंक के खाते का नंबर साधु ने रतिपाल को दिया था वह खाता आशीष कुमार गुप्ता, आशीष जनरल स्टोर मुंबई का निकला. बाराबंकी में रहने वाली रतिपाल की बहन निर्मला ने उसी खाते में 11 हजार रुपए की धनराशि ट्रांसफर की थी.

रतिपाल ने बताया कि उन्होंने पुलिस को बैंक स्टेटमेंट सौंप दिया है. उन्होंने बताया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला है कि साधु के भेष में आया युवक जो अपने को उन का खोया बेटा पिंकू बताता था, उस युवक का नाम नफीस है.

ठगी के लिए साधु का वेश धारण किया

सीओ (तिलोई) अजय सिंह ने बताया कि मामला ठगी से जुड़ा हुआ है. पूरे मामले पर मुकदमा पंजीकृत कर मामले की छानबीन की जा रही है. जल्द से जल्द इस पूरे मामले में कड़ी से कड़ी काररवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि 10 फरवरी को जायस थाना क्षेत्र के खरौली गांव निवासी रतिपाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल ने बताया, ”टिकरिया गांव में रहने वाले कई लोगों द्वारा जोगी बन कर जालसाजी करने की शिकायत मिली है. 2 आरोपियों द्वारा अमेठी जिले में भी साधु वेश बना किसी को झांसा देने का मामला प्रकाश में आया है. पुलिस को तलाश के निर्देश दिए गए हैं.’’

रिपोर्ट दर्ज होने और उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद जायस थाने की पुलिस सक्रिय हो गई. रतिपाल ने बताया कि 16 फरवरी, 2024 को एक प्राइवेट वाहन से जायस पुलिस के साथ गोंडा कोतवाली देहात की सालपुर पुलिस चौकी पहुंचे. वहां के चौकी इंचार्ज पवन कुमार सिंह से मिले, उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही. इस चौकी से कुछ दूरी पर ही टिकरिया गांव है.

उन्होंने कहा कि गोंडा की सालपुर चौकी पर उन्हें 5 घंटे तक बैठाया गया. कहा कि आप यहीं बैठो, पुलिस दबिश देने जा रही है. नफीस के घर पहुंची पुलिस टीम सब से पहले नफीस के परिवार से मिली. उस समय घर पर बुजुर्ग महिलाएं ही थीं. उन्होंने बताया कि 25 वर्षीय नफीस करीब एक महीने से घर से बाहर है.

पुलिस को आया देख कर आरोपी गन्ने के खेत में भाग गया था. पुलिस ने उसे पकडऩे का प्रयास किया, लेकिन वह हाथ नहीं आया. पुलिस ने बताया, पिंकू बन कर घर पहुंचा ठग टिकरिया निवासी सिजाम का बेटा नफीस है, जो ठगी के मामले में पहले भी जेल जा चुका है.

जबकि उस का भाई राशिद 29 जुलाई, 2021 को जोगी बन कर मिर्जापुर के गांव सहसपुरा परसोधा निवासी बुधिराम विश्वकर्मा के यहां उन का 14 साल पहले लापता हुआ बेटा रवि उर्फ अन्नू बन कर पहुंचा था. मां से भिक्षा मांगी ताकि उस का जोग सफल हो जाए. परिजनों ने बेटा मान कर उसे घर में रख लिया. कुछ दिन बाद वह लाखों रुपए ले कर फरार हो गया था. बाद में पकड़ा गया और जेल गया.

पुलिस की दस्तक के चलते नफीस, उस के दोनों भाई दिलावर और राशिद समेत अधिकांश तथाकथित साधु अंडरग्राउंड हो गए. उस का एक रिश्तेदार असलम भी ऐसे मामले में वांछित चल रहा है. नफीस का मोबाइल बंद है.

पड़ताल में सामने आया कि नफीस के ससुर का भाई असलम उर्फ लंबू घोड़ा भी वाराणसी में जेल जा चुुका है. तब पुलिस ने शिकायत के आधार पर एक परिवार को इसी तरह जोगी का झांसा दे कर ठगने के बाद उसे दबोच लिया था.

पेट के टांकों को देख कर की पहचान

रतिपाल ने बताया कि 22 साल पहले उस का 11 वर्षीय बेटा अरुण उर्फ पिंकू घर से कहीं चला गया था. एक बार वह सीढ़ी से गिर गया था, जिस से उस के पेट में अंदरूनी चोट आई थी. इस बात का 6 माह तक पता नहीं चला. पिंकू की आंत सड़ गई थी, जिस के चलते उस का औपरेशन दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित होली चाइल्ड अस्पताल में हुआ था. उस के 14 टांके आए थे.

साधु के भेष में आए व्यक्ति ने उन्हें टांकों के निशान दिखाए थे. लेकिन वे असली थे या बनाए हुए थे, ये नहीं पता. रतिपाल सिंह पहले अपनी बहन नीलम के साथ खरौली गांव पहुंचे थे. खबर दिए जाने पर बहन उर्मिला भी आ गई थी. उन्होंने अपनी पत्नी माया देवी को घर पर ही बच्चों की देखभाल के लिए छोड़ दिया था. खोए पिंकू की पहचान हो जाने के बाद उन्होंने पत्नी को भी गांव बुला लिया था.

रतिपाल की दूसरी शादी के बाद 4 बच्चे हुए. 2 बेटी व 2 बेटे हैं. बड़ी बेटी 24 वर्ष की है. दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है. एक बेटा 12वीं तथा सब से छोटा 9वीं में पढ़़ रहा है. वे घर पर ही बर्थडे में बच्चों के लगाए जाने वाली कैप बनाने का कार्य पत्नी के सहयोग से कर गुजरबसर करते हैं.

पूरा परिवार जिस युवक को अपना खोया बेटा पिंकू मान कर प्यार लुटा रहा था. असल में वह जालसाज गोंडा जिले के टिकरिया गांव  का नफीस निकला. टिकरिया के 20-25 लोगों का गैंग कई राज्यों में सक्रिय है. वह खोए बच्चों के बारे में जानकारी करने के बाद परिजनों की भावनाओं से खिलवाड़ कर ठगी करने का काम करते हैं.

साइबर सेल प्रभारी बृजेश सिंह का कहना है कि किसी गांव में बच्चों के खोने या लापता होने पर परिजन खुद उस का प्रचार प्रसार करते हैं. इस प्रचार से उन्हें आस होती है कि शायद कोई व्यक्ति उन की खोई संतान को वापस मिला देगा. पैंफ्लेट व अखबारों से भी पहचान के लिए चोट के निशानों का उल्लेख किया जाता है. ठगों का यह गैंग स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्र कर इसी का फायदा उठा कर ठगी करता है.

मातापिता की भावनाओं से खेल कर संपत्ति व धन हड़पने का नफीस का षडयंत्र विफल हो गया. 22 साल पहले लापता बेटा पिंकू बन कर गांव जायसी पहुंचा साधु वेशधारी पुलिस जांच में गोंडा के गांव टिकरिया निवासी नफीस और उस का साथी पट्टर  निकला. गांव वालों ने वायरल वीडियो में भी दोनों की तस्दीक की. पुलिस की सक्रियता से ठगी की मंशा का खुलासा हुआ तो ठग और उस का साथी दोनों फरार हो गए.

गोंडा में पड़ताल करने पर पता चला कि टिकरिया गांव के कुछ परिवार इस तरह की ठगी करते हैं. उन का एक गैंग ठगी का काम करता है. ठगी जेल तक जा चुकी है. उन्हीं में से एक नफीस का भी परिवार है.

नफीस मुकेश (मुसलिम) का दामाद है. उस की पत्नी का नाम पूनम है. उस का एक बेटा अयान है. ठग साधु कहता था कि उस ने झारखंड के पारसनाथ मठ में दीक्षा ली है. मठ के गुरु का आदेश था कि अयोध्या में दर्शन के बाद गांव जा कर अपनी मां से भिक्षा मांगना, तभी दीक्षा पूरी होगी. सच यह है कि झारखंड में पारसनाथ नाम का कोई मठ है ही नहीं. बेटा बन कर अब तक नफीस कई लोगों को चूना लगा चुका है.

रतिपाल का कहना है कि दोनों ठगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है. दोनों ठग अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. जिस बैंक खाते में 11 हजार रुपए बहन निर्मला ने जमा कराए थे, उस खाते वाले को पकड़ा जाए, जिस से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और इन ठगों का गैंग पकडऩे में मदद मिलेगी.

पुलिस फरार चल रहे दोनों साधु वेशधारी ठगों की सरगरमी से तलाश में जुटी है. पुलिस का कहना है कि समय रहते इन ठगों का भेद खुल जाने से रतिपाल व उन का परिवार बहुत बड़ी ठगी व मुसीबत से बच गए.

पिता रतिपाल को पुत्र वियोग और मिलन के बाद उसे दोबारा पाने की चाह है, लेकिन किसी षडयंत्र की आशंका भी है. उन का कहना है कि खोया हुआ बेटा इस समय 33 वर्ष का होता.

—कथा पुलिस व परिजनों से की गई बातचीत पर आधारित