Crime Story : भांजे ने मामी को कुल्हाड़ी से काट डाला

Crime Story : मुकेश ने अपने भांजे धर्मेंद्र के लिए जितना कुछ किया, वह उस की मजबूरी इसलिए थी क्योंकि उस की पत्नी रीना उसे किनारे कर के धर्मेंद्र से प्यार करने लगी थी. यहां तक कि वह तब भी शांत रहा जब धर्मेंद्र ने रीना से कोर्टमैरिज कर ली. लेकिन उसी आशिक भांजे ने रीना को…

उत्तर प्रदेश के जिला औरैया का एक कस्बा है अजीतमल. यहीं का रहने वाला धर्मेंद्र वन विभाग में चौकीदार की नौकरी करता था. उस की शादी मैनपुरी की रहने वाली सुनीता से हुई थी. दोनों ही खुश थे. उन की घरगृहस्थी बड़े आराम से चल रही थी. इसी दौरान सुनीता 2 बच्चों की मां बन गई. इस के बाद तो घर की खुशियों में और इजाफा हो गया. लेकिन ये खुशियां ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकीं. सुनीता बीमार हो गई और बीमारी के चलते एक दिन उस की मौत हो गई. पत्नी की मौत के बाद धर्मेंद्र जब नौकरी पर जाता, घर पर बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहता था. इस परेशानी को देखते हुए कुछ समय बाद वह अपने दोनों बच्चों को उन की ननिहाल में छोड़ आया और खुद रहने के लिए अपने मामा मुकेश के यहां चला गया.

मुकेश जिला मैनपुरी के गांव फैजपुर गढि़या में रहता था. वह एक फैक्ट्री में काम करता था. उस की शादी रीना से हुई थी, जिस से एक बेटा भी था. चूंकि धर्मेंद्र मुकेश का सगा भांजा था, इसलिए मुकेश ने उसे अपने घर के सदस्य की तरह रखा. पत्नी की मौत के बाद धर्मेंद्र एकदम खोयाखोया सा रहता था. मामा के यहां रह कर वह एकाकी जीवन काट रहा था. धीरेधीरे माया ने उस की पीड़ा को समझा और वह उस का मन लगाने की कोशिश करने लगा. धीरेधीरे वह घुलमिल कर रहने लगा तो उस की बोरियत दूर हो गई. साथ ही वह पत्नी की मौत का गम भी भूल गया. मामाभांजे दोनों अपनेअपने काम से लौट कर आते तो साथ मिल कर इधरउधर की खूब बातें करते थे.

दोनों की आपस में खूब बनती थी. धर्मेंद्र अपनी तनख्वाह से घर खर्च के कुछ पैसे अपनी मामी को दे देता था, जिस से घर का खर्च ठीक से चलने लगा. इसी बीच रीना एक और बेटे की मां बन गई, जिस का नाम प्रियांशु रखा गया. 28 साल की मामी रीना से धर्मेंद्र की खूब पटती थी. मामीभांजे के बीच हंसीठिठोली भी होती थी. धर्मेंद्र को मामी की सुंदरता और अल्हड़पन बहुत भाता था. कभीकभी वह उसे एकटक प्यारभरी नजरों से देखा करता था. अपनी ओर टकटकी लगाए देखते समय जब कभी रीना की नजरें उस से टकरा जातीं तो दोनों मुसकरा देते थे. धर्मेंद्र रीना के पति मुकेश से ज्यादा सुंदर और अच्छी कदकाठी का था. इस से रीना का झुकाव धर्मेंद्र के प्रति बढ़ता गया.

धर्मेंद्र रीना को दिल ही दिल चाहने लगा.  चूंकि वे मामीभांजा थे, इसलिए दोनों के साथसाथ रहने पर मुकेश को कोई शक नहीं होता था. मुकेश सीधेसरल स्वभाव का था, पत्नी और भांजे के बीच क्या खिचड़ी पक रही है, इस की मुकेश को कोई जानकारी नहीं थी. समय का चक्र घूमता रहा, धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के करीब आते गए. एक दिन धर्मेंद्र ने जब मजाकमजाक में मामी को बांहों में भर लिया तो रीना ने विरोध नहीं किया, बल्कि उस ने दोनों हाथों से धर्मेंद्र को जकड़ लिया. धर्मेंद्र ने इस मूक आमंत्रण का फायदा उठाते हुए उस पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. इस के बाद अपनी मर्यादाओं को लांघते हुए दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं.

धर्मेंद्र चूंकि वहीं रहता था, इसलिए कुछ दिनों तक तो दोनों का खेल इसी तरह से चलता रहा. मुकेश को पता तक नहीं चला कि उस के पीछे घर में क्या हो रहा है. एक दिन मुकेश अचानक घर आया तो उस ने दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया. लेकिन मौके की नजाकत को भांपते हुए रीना और धर्मेंद्र ने उस से माफी मांग ली. मुकेश ने रहम करते हुए दोनों से कुछ नहीं कहा और उन्हें माफ कर दिया. इस के कुछ दिनों तक तो रीना और धर्मेंद्र ठीक रहे, लेकिन मौका मिलने पर वे अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे. मामा के सीधेपन की वजह से धर्मेंद्र की हिम्मत बढ़ गई थी. अब धर्मेंद्र अपनी मामी रीना से शादी करने के ख्वाब देखने लगा.

एक दिन उस ने अपने मन की बात रीना से कही. चूंकि रीना भी उसे प्यार करती थी, इसलिए 2 बच्चों की मां होने के बावजूद वह भांजे से शादी करने के लिए तैयार हो गई. किसी तरह शादी वाली बात मुकेश को पता चली तो वह परेशान हो गया. उस ने इस का विरोध किया. लेकिन जब रीना नहीं मानी तो उस ने रीना की पिटाई कर दी. रीना के सिर पर तो इश्क का जुनून सवार था, ऐसे में वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी. लेकिन मुकेश के लिए यह बड़ी बदनामी वाली बात थी. थकहार कर मुकेश ने गांव में पंचायत बैठाई. रीना ने पंचायत में भी स्पष्ट रूप से कह दिया कि वह पति मुकेश को छोड़ सकती है लेकिन धर्मेंद्र को नहीं छोड़ेगी. वह उस से शादी जरूर करेगी. रीना की जिद के आगे मुकेश व उस के घर वालों को झुकना पड़ा.

घर वालों की इस रजामंदी के बाद पंचायत में तय हुआ कि रीना मुकेश और धर्मेंद्र दोनों की पत्नी के रूप में रहेगी. इस के बाद रीना और धर्मेंद्र ने कोर्टमैरिज कर ली. शादी करने के बाद भी रीना मुकेश के घर में ही रहती रही. यह बात लगभग 7 साल पहले की है. इस के बाद रीना अपने पहले पति मुकेश और भांजे से दूसरा पति बने धर्मेंद्र के साथ दोनों की पत्नी बन कर रहने लगी. समय धीरेधीरे बीतने लगा. रीना दोनों पतियों के दिलों पर राज करती थी. वह चाहती थी कि उन दोनों से वह ज्यादा कमाई कराए. क्योंकि नौकरी से तो बस बंधीबधाई तनख्वाह मिलती थी, जिस से रीना संतुष्ट नहीं थी.

एक दिन धर्मेंद्र, मुकेश व रीना ने बैठ कर तय किया कि क्यों न यहां के बजाय शिकोहाबाद जा कर कोई दूसरा धंधा शुरू किया जाए. शिकोहाबाद में कबाड़ का व्यवसाय काफी बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए उन्होंने वहां जा कर कबाड़ का काम करने का फैसला लिया. करीब ढाई साल पहले मुकेश और धर्मेंद्र गांव से जिला फिरोजाबाद के शहर शिकोहाबाद चले गए. उन्होंने लक्ष्मीनगर मोहल्ले में प्रमोद कुमार का मकान किराए पर ले लिया. फिर वे पत्नी रीना व बच्चों को भी शिकोहाबाद ले आए. यहां रह कर मुकेश और धर्मेंद्र मिल कर कबाड़ का कारोबार करने लगे. इसी दौरान रीना एक और बेटे की मां बन गई. धर्मेंद्र भले ही रीना का पति बन गया था, लेकिन वह अपने बच्चों से उसे भैया ही कहलवाती थी.

रीना दोनों पतियों के साथ सामंजस्य बना कर रह रही थी. दोनों ही उस से खुश थे. कहते हैं, समय बहुत बलवान होता है, उस के आगे किसी की नहीं चलती. इस परिवार में भी यही हुआ. जब दोनों का काम अच्छा चलने लगा, आमदनी बढ़ी तो धर्मेंद्र शराब पीने लगा. रीना इस का विरोध करती तो धर्मेंद्र उसे डांट देता. कभीकभी वह उस पर हाथ भी उठा देता था. रीना अब उस से डरीडरी सी रहने लगी. शराब की लत जब बढ़ गई तो धर्मेंद्र ने काम पर जाना भी बंद कर दिया. वह दिन भर घर पर रह कर शराब पीता रहता. लड़झगड़ कर वह रीना से पैसे ले लेता था. जब रीना पैसे नहीं देती तो वह घर में रखे पैसे चुरा लेता था. एक दिन तो वह रीना की सोने की झुमकी और चांदी की पायल तक चुरा कर ले गया. इस पर रीना और मुकेश ने उसे घर से निकाल दिया.

2 महीने धर्मेंद्र इधरउधर भटकता रहा. बाद में वह रीना के पास ही लौट आया. उस ने मुकेश और रीना से शराब न पीने तथा ढंग से चलने का वादा किया. इस पर रीना ने उस पर दया दिखाते हुए उसे फिर से घर में रख लिया. मकान मालिक प्रमोद कुमार और वहां रहने वाले अन्य किराएदारों ने रीना से धर्मेंद्र को फिर से साथ रखने को मना किया, क्योंकि वह आए दिन घर में झगड़ता रहता था. इस पर रीना ने कहा कि वह अकेला कहां धक्के खाएगा. थोड़े दिन सब कुछ ठीक रहा, लेकिन धर्मेंद्र को शराब की जो लत लग गई थी, उस के चलते वह फिर से शराब पीने लगा. रीना ने धर्मेंद्र को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उस ने अपनी आदतों में कोई सुधार नहीं किया. इस से घर में आए दिन लड़ाई होने लगी.

10 अगस्त, 2018 की रात करीब साढ़े 8 बजे की बात है. मुकेश के कमरे से अचानक शोरशराबे की आवाज आने लगी. बच्चे चिल्ला रहे थे, ‘मम्मी मर गईं, मम्मी मर गईं.’

शोर सुन कर प्रमोद के मकान के नीचे के हिस्से में रह रहे मकान मालिक प्रमोद कुमार व उन के परिवार के लोगों को लगा कि शायद खाना बनाते समय कमरे में आग वगैरह लग गई है. इसलिए वे पानी की बाल्टी ले कर ऊपर पहुंचे. ऊपर पहुंच कर उन्होंने जो नजारा देखा, उसे देख कर आंखें फटी की फटी रह गईं. रीना कमरे की देहरी पर मरी पड़ी थी, उस के सिर व चेहरे से खून बह कर कमरे में फैल गया. पता चला कि रीना के दूसरे पति धर्मेंद्र ने ही रीना की हत्या की थी. हत्या करने के बाद जब धर्मेंद्र भागने को था, तभी अन्य किराएदारों ने उसे पकड़ लिया था. वह उसे वहीं दबोचे खड़े रहे. प्रमोद ने इस की सूचना पुलिस को दे दी.

थानाप्रभारी विजय कुमार गौतम, सीओ संजय रेड्डी मय पुलिस टीम के कुछ ही देर में वहां पहुंच गए. लोगों ने पकड़े गए हत्यारोपी धर्मेंद्र को पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. मृतका के बड़े बेटे सनी ने बताया कि हम लोग अंदर टीवी देख रहे थे. मम्मी ने पापा से खाना खाने के लिए कहा. इतने में भैया (धर्मेंद्र) ने अंदर ले जा कर कुल्हाड़ी से मम्मी को मार डाला. उस ने बताया कि दोपहरी में भैया ने कहा था कि लाओ कुल्हाड़ी पर धार लगा लें. लकडि़यां काट कर लाएंगे. पुलिस ने जब धर्मेंद्र से पूछताछ की तो पता चला कि घटना के समय रीना कमरे के बाहर चूल्हे पर रोटी बना रही थी और उस के तीनों बच्चे खाना खा कर कमरे में टीवी देख रहे थे. कमरे में ही मुकेश चारपाई पर लेटा हुआ था.

रात को अचानक धर्मेंद्र नशे में सीढि़यां चढ़ कर ऊपर आया. रीना धर्मेंद्र से कुछ नहीं बोली, उस ने अपने बेटे सनी को आवाज देते हुए कहा, ‘‘पापा से कह दे, खाना खा लें.’’

रीना द्वारा धर्मेंद्र से खाना खाने के लिए न कहने से धर्मेंद्र बौखला गया. उस के तनबदन में आग लग गई. उस ने रीना के साथ गालीगलौज करते हुए कहा कि हम से खाना खाने के लिए नहीं पूछा. अभी खबर लेता हूं तेरी. कह कर वह गुस्से में कमरे में घुसा जहां बच्चों के साथ मुकेश मौजूद था. उस ने कमरे में रखी कुल्हाड़ी उठाई और चूल्हे पर रोटी बना रही रीना के बाल पकड़ कर उसे कमरे की देहरी पर ले जा कर लिटा दिया. फिर उस के सिर व चेहरे पर कई प्रहार कर उस की नृशंस हत्या कर दी. कमरे में चारों ओर खून फैल गया. अपनी आंखों के सामने मां को मारते देख बच्चे चिल्लाए, ‘‘मम्मी मर गई, मम्मी मर गई.’’

शोर सुन कर अन्य किराएदार वहां आ गए. धर्मेंद्र के हाथ में खून सनी कुल्हाड़ी देख कर वे सारा माजरा समझ गए. किसी तरह किराएदारों ने धर्मेंद्र को दबोच लिया, जिसे बाद में उन्होंने पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने मुकेश की तहरीर पर धर्मेंद्र के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर के अगले दिन उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. अपनी भावनाओं पर अंकुश न लगा पाने वाली रीना रिश्तों की मर्यादा को लांघ गई थी. वह धर्मेंद्र के प्यार में इस कदर डूबी कि उसे अपने पति, बच्चों व समाज तक की परवाह नहीं रही. उस ने अपने भांजे से अवैध संबंध बनाने के बाद उस से कोर्टमैरिज तक कर ली. इस की कीमत उसे अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी.

—कथा पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित

 

Crime stories : मास काटने वाली छुरी से दोस्त के कर डाले 25 टुकड़े

Crime stories : ‘‘है  लो, आप गुड़गांव पुलिस कंट्रोल रूम से बोल रहे हैं?’’ एक आदमी ने घबराई हुई आवाज में फोन पर पूछा.

‘‘हां, यह पुलिस कंट्रोल रूम ही है. आप बताएं, क्या कहना चाहते हैं.’’ ड्यूटी औफिसर ने कहा.

‘‘साहब, आप गुड़गांव से ही बोल रहे हैं ?’’ फोन करने वाले ने संतुष्टि के लिए पूछा.

‘‘हां, हम गुड़गांव से ही बोल रहे हैं.’’ ड्यूटी औफिसर ने संजीदगी से जवाब दिया.

‘‘साहब, मैं पंजाब के लुधियाना से रूपेंदर सिंह बोल रहा हूं.’’ फोन करने वाले ने कहा, ‘‘साहबजी, बात यह है कि मेरे रिश्तेदार हरनेक सिंह ढिल्लन ने अपनी बीवी को मार डाला है और खुद भी सुसाइड करने जा रहा है.’’ एक ही बार में उस ने अपनी बात कह डाली. फिर बोला, ‘‘साहब जी, हरनेक को बचा लीजिए.’’

‘‘रूपेंदर सिंह जी, पहले यह बताएं कि आप के रिश्तेदार रहते कहां हैं?’’ ड्यूटी औफिसर ने सवाल किया.

‘‘साहब, वह गुड़गांव के डीएलएफ फेज-2 में जे ब्लौक में रहता है.’’

‘‘ठीक है, हम पुलिस भेजते हैं.’’ ड्यूटी औफिसर ने रूपेंदर सिंह को भरोसा दिया. यह 20 अक्तूबर की बात है. समय रहा होगा सुबह के करीब 10 बजे का. फोन पर रूपेंदर सिंह से मिली सूचना के आधार पर पुलिस कंट्रोल रूम ने डीएलएफ थाने को सूचना दीसूचना मिलने के कुछ ही देर बाद डीएलएफ थानाप्रभारी विष्णु प्रसाद कुछ पुलिस जवानों के साथ फेज-2 के जे ब्लौक के लिए रवाना हो गए. पुलिस 10 मिनट में मौके पर पहुंच गई. जे ब्लौक में पहुंच कर पुलिस ने हरनेक सिंह ढिल्लन के मकान के बारे में पूछताछ की. 2-4 लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस को हरनेक सिंह के मकान का पता चल गया.

वह 3 मंजिला कोठी थी. कोठी के बाहर पुलिस को ऐसा कुछ नजर नहीं आया जिस से यह लगता कि अंदर किसी ने हत्या कर के खुद सुसाइड कर लिया हो. पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला हरनेक सिंह दूसरी मंजिल पर रहता है. पुलिस दूसरी मंजिल पर पहुंची तो उसे हरनेक सिंह के घर के अंदर एक भयावह दृश्य से रूबरू होना पड़ा. बैड पर एक बुजुर्ग महिला की लाश पड़ी थी. उस का गला रेता गया था. गला रेतने के कारण खून पूरे बिस्तर पर फैला हुआ था. इसी कमरे में एक बुजुर्ग पड़ा हुआ था. उस की कलाई की नसें कटी हुई थीं और खून रिस कर बह रहा था.थानाप्रभारी ने बैड पर पड़ी बुजुर्ग महिला की नब्ज टटोल कर देखी. उस में जीवन के कोई लक्षण नहीं थे. इस के बाद बुजुर्ग की नब्ज देखी तो चलती मिली थी, वह अर्धमूर्छित था

पुलिस ने बुजुर्ग से उस का नाम पूछा तो उस ने हरनेक सिंह ढिल्लन बताया. पुलिस उस से कुछ और पूछताछ करती, इस से पहले ही हरनेक सिंह फिर से अचेत हो गया. पुलिस के लिए किसी भी तरह हरनेक सिंह की जान बचाना जरूरी था. हाथ की नसें काट लिए जाने से उस का काफी खून बह चुका था. थानाप्रभारी ने 2 सिपाहियों को हरनेक सिंह के मकान पर छोड़ा और खुद उन्हें अस्पताल ले गए. अस्पताल के डाक्टरों ने अविलंब हरनेक का उपचार शुरू कर दिया. समय पर इलाज मिल जाने और डाक्टरों के प्रयास से उस की जान बच गई.

रहस्यमय मामला जब यह सुनिश्चित हो गया कि हरनेक सिंह की जान बच जाएगी तो थानाप्रभारी विष्णु प्रसाद ने उस की कोठी पर जांचपड़ताल शुरू की. आसपड़ोस के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि मरने वाली बुजुर्ग महिला का नाम गुरमेल कौर था. अभी प्राथमिक जांच चल ही रही थी कि डीएलएफ के सहायक पुलिस आयुक्त करण गोयल भी वहां पहुंच गए. एसीपी गोयल ने घटनास्थल की स्थिति देखनेसमझने के बाद थानाप्रभारी को वहां एकत्र लोगों की मौजूदगी में घर की तलाशी लेने और गुरमेल की हत्या हरनेक सिंह के सुसाइड का प्रयास करने के कारणों का पता लगाने के दिशानिर्देश दिए. मौके की आवश्यक काररवाई के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया.

गुड़गांव पुलिस को गुरमेल कौर की हत्या और हरनेक सिंह के सुसाइड करने की सूचना लुधियाना के रूपेंदर सिंह ने दी थी. इसलिए पुलिस ने रूपेंदर सिंह से फोन पर बात की तो उस ने बताया कि वह हरनेक सिंह का रिश्तेदार है. सुबह करीब 9 बज कर 40 मिनट पर हरनेक सिंह ने फोन कर के उस से कहा था कि मैं ने गुरमेल को मार डाला है और खुद सुसाइड  करने जा रहा हूं. रूपेंदर सिंह ने पुलिस को बताया कि हरनेक सिंह की बात सुन कर वह काफी घबरा गया था. वह गुड़गांव से दूर लुधियाना में था और किसी भी तरह हरनेक सिंह की जान नहीं बचा सकता था. इसलिए उस ने गुड़गांव पुलिस को फोन कर के मामले की जानकारी दे दी थी.

पुलिस ने जांचपड़ताल की तो हरनेक सिंह के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला. यह सुसाइड नोट वसीयत के रूप में लिखा गया था. इस में हरनेक सिंह ने अपनी कोठी, बैंक बैलेंस समेत तथा अन्य संपत्तियों का बंटवारा बेटे और बेटी के अलावा एक रिश्तेदार के बीच करने की बात लिखी थी. सुसाइड नोट में हरनेक सिंह ने यह भी लिखा था कि मृत्यु के बाद उस की आंखें, किडनी, फेफड़े और हार्ट दान कर दिया जाए. पुलिस ने हरनेक सिंह के बेटेबेटी के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि बेटा मनजीत सिंह आस्ट्रेलिया के शहर सिडनी में रहता है. वहां वह किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में अधिकारी है. हरनेक सिंह की बेटी कनाडा में अपने परिवार के साथ रहती थी. पुलिस ने हरनेक सिंह के बेटे और बेटी को फोन कर के इस घटना की सूचना दे दी

हरनेक सिंह के बच्चे विदेश में रहते थे, उन का कोई ऐसा करीबी रिश्तेदार भी नहीं था, जो गुड़गांव में रहता हो. इसलिए पुलिस ने हरनेक की पत्नी गुरमेल का शव अस्पताल के फ्रिजर में रखवा दिया ताकि बेटे के आने पर पोस्टमार्टम कराया जा सके. हरनेक सिंह के बेटे मनजीत सिंह ने पुलिस से कहा कि वह अर्जेंट में कोई फ्लाइट पकड़ कर जल्द से जल्द भारत पहुंच जाएगा. पुलिस ने हरनेक सिंह के बारे में उस के घर के आसपास रहने वालों से पूछताछ की तो पता चला कि वह मूलरूप से लुधियाना का रहने वाला था और वहां की एक आटोमोबाइल कंपनी में अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए थे. बाद में वह पत्नी गुरमेल कौर के साथ डीएलएफ फेज-2 के जे ब्लौक की इस कोठी में रहने लगा था, जो उन की अपनी थी. यह कोठी उस ने 10-11 साल पहले खरीदी थी.

आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि हरनेक सिंह किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था. लेकिन उस की पत्नी गुरमेल कौर पड़ोसियों से बोलतीचालती भी थीं और घुलीमिली भी थीं. पतिपत्नी रोजाना सुबह मौर्निंग वौक पर पार्क जाते थे. वहां गुरमेल कौर अन्य महिलाओं के साथ योगा करती थीं. बाद में पतिपत्नी आपस में बातें करते हुए पार्क से घर लौट आते थे. पड़ोसियों से पूछताछ में पुलिस के सामने यह बात जरूर आई कि हरनेक सिंह और उस की पत्नी गुरमेल 4-5 दिनों से परेशान नजर रहे थे. बीच में एकदो दिन के लिए वह बाहर भी चले गए थे, जिस की वजह से मौर्निंग वौक पर नहीं जा पाए थे.

उधर, अस्पताल में भरती हरनेक सिंह की हालत खतरे से बाहर तो हो गई थी, लेकिन वह पुलिस को बयान देने की स्थिति में नहीं था. फलस्वरूप इस बात का खुलासा नहीं हो सका कि हरनेक सिंह ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया था. ऐशोआराम की जिंदगी में ऐसा कदम क्यों?

 हरनेक सिंह के पास पैसे की कोई  कमी नहीं थी. उस की काफी अच्छी कोठी थी. बेटी कनाडा में अच्छे से सैटल थी और बेटा आस्ट्रेलिया की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अधिकारी था. सुसाइड नोट में परेशानी की कोई वजह भी नहीं लिखी थी. ऐसी स्थिति में कोई ठोस वजह सामने नहीं आने पर पुलिस ने यही माना कि हरनेक सिंह ने अकेलेपन से परेशान हो कर पत्नी को मौत की नींद सुलाने के बाद खुद भी जान देने का फैसला किया होगा. दूसरे दिन पंजाब से रूपेंदर सिंह और कुछ अन्य रिश्तेदार गुड़गांव गए. रूपेंदर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने 21 अक्तूबर को हरनेक सिंह के खिलाफ पत्नी की हत्या और सुसाइड नोट के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया. साथ ही पुलिस इस मामले से जुड़े कारणों की तलाश में जुटी रही

पुलिस को इस बारे में या तो हरनेक सिंह से जानकारी मिल सकती थी या फिर उस के बेटे मनजीत सिंह से. लेकिन परेशानी यह थी कि दूसरे दिन भी शाम तक हरनेक सिंह पुलिस को बयान दर्ज कराने की स्थिति में नहीं आया. वहीं, हरनेक का बेटा मनजीत भी आस्ट्रेलिया से शाम तक गुड़गांव नहीं पहुंचा था. मनजीत सिंह से पुलिस की बात हुई तो उस ने देर रात तक गुड़गांव पहुंचने की बात कही थी. इस बीच, पुलिस को पता चला कि हरनेक सिंह के संबंध जसकरण सिंह से रहे हैं. जसकरण उस का अच्छा परिचित था. जसकरण गुड़गांव के सेक्टर-29 इलाके के सरस्वती विहार में रहता था. वह 14 अक्तूबर से लापता था. जसकरण की पत्नी मनजीत कौर ने इस संबंध में 16 अक्तूबर को सेक्टर 29 पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी

इस रिपोर्ट में उस ने बताया था कि जसकरण 14 अक्तूबर को हरनेक सिंह से मिलने जाने के लिए घर से स्कूटी ले कर गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा था. जसकरण के लापता होने में उस के परिवार वालों ने हरनेक सिंह का हाथ होने की आशंका जताई थी. जसकरण के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होने पर सेक्टर-29 पुलिस ने एक दिन हरनेक सिंह के घर जा कर उस से पूछताछ की थी, लेकिन हरनेक सिंह ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि जसकरण के लापता होने से उस का कोई ताल्लुक है. हरनेक सिंह ने सेक्टर-29 थाना पुलिस के सामने यह बात जरूर कबूल की थी कि जसकरण 14 अक्तूबर को उस से मिलने आया था.

जसकरण का मामला सामने आने पर डीएलएफ थाना पुलिस कई एंगलों से इस मामले की जांचपड़ताल करने में जुट गई. पुलिस ने हरनेक सिंह के मकान के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो पता चला कि जसकरण सिंह 14 अक्तूबर को हरनेक सिंह के घर आया जरूर था, लेकिन वहां से वापस नहीं लौटा था. कहां गया जसकरण इस पर गुड़गांव पुलिस के आला अफसरों ने एक बार फिर हरनेक सिंह के मकान का जायजा लिया और पड़ोसियों से पूछताछ की. हरनेक सिंह के मकान से पुलिस को जसकरण की स्कूटी मिल गई. पुलिस ने वह स्कूटी अपने कब्जे में ले ली. अब पुलिस इस बात की जांच में जुट गई कि जसकरण का इस घटना से क्या संबंध था.

जांचपड़ताल चल ही रही थी कि मनजीत सिंह अपनी पत्नी किरणवीर कौर के साथ आस्ट्रेलिया से गुड़गांव गया. वह 22 अक्तूबर को पुलिस के साथ अपने पिता के मकान पर गया. कुछ देर वहां रुकने के बाद वह अपने दोस्त के घर चला गया. पुलिस की पूछताछ में मनजीत सिंह ने बताया कि पिता से उस की करीब 2 साल से बोलचाल नहीं थी. हां, वह अपनी मां गुरमेल से फोन पर रोजाना बात करता था. मनजीत ने पुलिस को बताया कि उस के पिता के पास डीएलएफ फेज-2 के जे ब्लौक की कोठी के अलावा अन्य कोई प्रौपर्टी नहीं है. इस कोठी में भी केवल दूसरी मंजिल का फ्लैट ही उन का अपना है, बाकी दोनों तल दूसरों के हैं. मनजीत ने पिता के लुधियाना स्थित पैतृक गांव में भी कोई संपत्ति नहीं होने की बात बताई

मनजीत ने पिता के लिखे सुसाइड नोट पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उन के पास कोई संपत्ति थी ही नहीं तो बंटवारा किस बात का होता. मनजीत ने सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग को ठीक से पहचानने से मना कर दिया. मनजीत से पिता द्वारा की गई उस की मां की हत्या के कारणों के बारे में पूछा तो वह कोई कारण नहीं बता सका. मनजीत ने इतना जरूर बताया कि उस के पिता अच्छे आदमी नहीं थे, लेकिन वह बुरे  आदमी कैसे थे, इस बारे में वह कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे सका. कुल मिला कर पुलिस को हरनेक के बेटे मनजीत से गुरमेल कौर की हत्या और पिता के खुदकुशी के प्रयास तथा उन की परेशानी के कारणों के बारे में कोई महत्त्वपूर्ण सुराग नहीं मिल सका.

जरूरी पूछताछ के बाद पुलिस ने मनजीत सिंह से अस्पताल जा कर अपने पिता को देख आने को कहा, लेकिन मनजीत ने साफ मना कर दिया. एकदो रिश्तेदारों ने भी मनजीत से पिता को देख आने की बात कही, लेकिन उस ने किसी की बात नहीं मानी. बाद में पुलिस ने मनजीत की मौजूदगी में घटना के तीसरे दिन 22 अक्तूबर को गुरमेल कौर के शव का पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम के बाद गुरमेल का शव मनजीत को सौंप दिया गया. मनजीत अंतिम संस्कार के लिए अपनी मां का शव लुधियाना ले गया. बड़ा खिलाड़ी निकला 77 साल का हरनेक

अस्पताल के डाक्टरों से इजाजत मिलने पर पुलिस ने हरनेक सिंह से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि लापता होने से पहले जसकरण आखिरी बार उस के घर आया था, इसलिए उस के परिवार वाले उस पर संदेह कर रहे हैं. पुलिस ने भी इस मामले में उस से पूछताछ की थी. जसकरण के घर वालों ने भी उस के घर कर हंगामा किया थाहरनेक ने पुलिस को बताया कि जसकरण ने उस से 40 लाख रुपए उधार ले रखे थे. उस के लापता होने से वह खुद परेशान था. जसकरण को गायब करने के आरोपों और उधार दी गई रकम की वापसी होने की आशंका से वह परेशानी और तनाव में था

इसी के चलते उस ने पहले 72 साल की अपनी पत्नी गुरमेल की हत्या की, और बाद में खुद अपनी जान देने का प्रयास किया. पुलिस ने हरनेक सिंह के बयान के आधार पर आईपीसी की धारा 302 और 309 के तहत 77 साल के हरनेक सिंह को 24 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया. अगले दिन 25 अक्तूबर को पुलिस ने हरनेक सिंह को अदालत में पेश कर के 2 दिन के रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने हरनेक से कड़ाई से पूछताछ की तो एक ऐसे राज का पता चला, जिस से पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए. हरनेक सिंह से पूछताछ में जो कहानी सामने आई वह इस तरह थी

हरनेक सिंह ने अपने दोस्त जसकरण सिंह से सोने के व्यापार के सिलसिले में करीब 50 लाख रुपए उधार लिए थे. तय समय गुजर जाने के बाद भी हरनेक ने जब उधार की रकम वापस नहीं की तो जसकरण उस से अपनी रकम का तकाजा करने लगा. इस बीच हरनेक के मन में खोट गया था. वह जसकरण से उधार ली गई रकम वापस नहीं लौटाना चाहता था. इस के लिए हरनेक ने जसकरण की हत्या करने का फैसला कर लिया. साथ ही उस ने जसकरण के शव को ठिकाने लगाने की योजना भी बना ली. इस काम में हरनेक ने अपने एक पुराने नौकर जगदीश कुमार को सहयोग देने के लिए राजी किया. उत्तराखंड के चमोली का रहने वाला जगदीश पैसों के लालच में जसकरण की हत्या में सहयोग करने को तैयार हो गया.

करीब 38 वर्षीय जगदीश को हरनेक सिंह 2004 से जानता था. दरअसल, हरनेक सिंह पहले गुड़गांव के फेज-2 और सुशांत लोक-1 में 3 पेइंग गेस्ट हौस्टल संचालित करता था. इन पीजी हौस्टल के लिए हरनेक ने जगदीश को कुक के रूप में नौकरी पर रख रखा थाबाद में हरनेक ने पेइंग गेस्ट हौस्टल का अपना काम बंद कर दिया. इस से जगदीश बेरोजगार हो गया तो हरनेक ने उसे एक एजेंट के माध्यम से दिल्ली में नौकरी पर रखवा दिया. दिल्ली में नई नौकरी पर जगदीश का मन नहीं लगा तो वह वापस हरनेक के पास आया. हरनेक ने उसे पैसों का लालच दे कर जसकरण की हत्या के लिए तैयार कर लिया. पूरी साजिश रच कर हरनेक सिंह ने 14 अक्तूबर को अपने दोस्त जसकरण को उधार के पैसे देने के लिए घर बुलाया. जसकरण जब डीएलएफ फेज-2 में हरनेक सिंह के घर पहुंचा. उस समय जगदीश भी वहां था. हरनेक की पत्नी गुरमेल उस समय किसी काम से बाजार गई थी.

दोस्त को लगाया ठिकाने हरनेक सिंह पहले तो जसकरण से कुछ देर तक घरगृहस्थी और पैसों की बातें करता रहा. इस दौरान जसकरण और हरनेक सिंह में झगड़ा भी हुआ. झगड़े की आवाजें पड़ोसियों ने भी सुनी थीं. झगड़े के दौरान मौका मिलने पर हरनेक ने जगदीश के सहयोग से जसकरण की गला घोंट कर हत्या कर दी. इस के बाद हरनेक सिंह बाजार गया और मांस काटने वाली छुरी खरीद कर लाया. हरनेक सिंह ने घर कर जगदीश की मदद से जसकरण के शव के करीब 20-25 टुकड़े किए. इन टुकड़ों को दोनों ने प्लास्टिक की 2 बड़ी थैलियों में भर दिया. बाद में जगदीश वहां से चला गया. गुरमेल घर लौटी, तो हरनेक ने उसे जसकरण की हत्या करने की बात बता दी. जसकरण की हत्या कर दिए जाने की बात जान कर गुरमेल बुरी तरह डर गईं. लेकिन वह क्या कर सकती थीं. गुरमेल ने इस बात के लिए हरनेक सिंह से झगड़ा भी किया.

उसी दिन शाम को हरनेक सिंह पत्नी गुरमेल के साथ पंजाब जाने के लिए अपनी सैंट्रो कार ले कर घर से निकल पड़ा. कार में उस ने जसकरण के शव के टुकड़ों की दोनों थैलियां भी रख ली थीं. गुड़गांव से पंजाब के रास्ते में हरनेक को जहां भी मौका मिला, जसकरण के शव के टुकड़े फेंक दिए. बाद में 16 अक्तूबर की सुबह हरनेक और उस की पत्नी गुड़गांव अपने घर लौट आए. घर कर हरनेक ने अच्छी तरह से धुलाई कराई ताकि जसकरण की हत्या का कोई निशान बाकी रह पाए. हरनेक ने भले ही जसकरण की हत्या कर उस के शव को टुकड़ों में बांट कर ठिकाने लगा दिया था, लेकिन उसे खुद के पकड़े जाने का डर सताने लगा था. इस का कारण यह था कि जसकरण के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने उस से पूछताछ की थी. पुलिस उस से फिर से पूछताछ कर के घर की तलाशी ले सकती थी

हरनेक को डर था कि जसकरण की हत्या का राज खुलने पर पुलिस उसे पकड़ कर ले जाएगी. इस पर उस ने पत्नी गुरमेल के साथ मिल कर सामूहिक आत्महत्या करने की योजना बनाई, लेकिन गुरमेल ने आत्महत्या करने से साफ इनकार कर दिया. इस से हरनेक सिंह को यह शक हो गया कि कहीं पत्नी ही उस का राज किसी के सामने उगल दे. हरनेक की खतरनाक साजिश इस पर हरनेक सिंह ने एक और खतरनाक साजिश रची. उस ने 20 अक्तूबर की सुबह जब गुरमेल बैड पर सो रही थीं, गला काट कर उन की हत्या कर दी. इस के बाद हरनेक ने मामले को दूसरा रूप देने के लिए एक सुसाइड नोट लिखा. इस में अपनी संपत्ति के बंटवारे और जसकरण को मोटी रकम उधार देने की बात भी लिखी थी

सुसाइड नोट लिख कर हरनेक ने लुधियाना में रहने वाले अपने रिश्तेदार रूपेंदर सिंह को फोन किया और उसे पत्नी की हत्या करने तथा खुद के सुसाइड करने की बात बताई. इस के बाद हरनेक ने अपने हाथ की नसें काट लीं. रूपेंदर सिंह की सूचना पर गुड़गांव पुलिस समय पर उस के घर पहुंच गई और हरनेक की जान बचा ली. बाद में पुलिस ने हरनेक सिंह को फिर से रिमांड पर लिया और उस की निशानदेही पर पंजाब के लुधियाना की दोराहा नहर और कुछ अन्य जगहों से धड़ बाजू सहित जसकरण के शव के टुकड़े बरामद किए. हरनेक ने जसकरण का सिर और एक बाजू भाखड़ा बांध में फेंक दी थी, उन का पता नहीं चल सका

फरीदाबाद पुलिस ने दिल्ली के अलीपुर बौर्डर से जसकरण की एक टांग कपड़े बरामद किए. तीसरी बार रिमांड पर ले कर की गई पूछताछ के बाद पुलिस ने जसकरण की हत्या में हरनेक का सहयोग करने के आरोप में एक नवंबर को जगदीश को भी गिरफ्तार कर लिया. उसे उत्तराखंड के चमोली में उस के घर से पकड़ा गयाजगदीश ने जसकरण की हत्या के लिए हरनेक से 2 लाख रुपए लिए थे. 2 नवंबर को पुलिस ने हरनेक सिंह को अदालत पर पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इसे विडंबना कहेंगे कि 77 साल की उम्र में हरनेक सिंह ने करीब 50 लाख रुपए की रकम हड़पने के लिए पहले तो अपने ही दोस्त की हत्या कर दी और फिर पूरी कू्रूरता से उस के शव के टुकड़ेटुकड़े कर के यहांवहां फेंक दिए. अपने इस अपराध को छिपाने के लिए हरनेक ने अपनी ही पत्नी को भी मार डाला और खुद भी आत्महत्या का प्रयास किया

जसकरण की जान केवल इसलिए चली गई कि वह विदेश में सोने का व्यापार करना चाहता था. इस के लिए हरनेक के कहने पर उस ने उसे करीब 30 लाख रुपए उधार दे दिए थे. हरनेक ने कनाडा में रहने वाली अपनी बेटी के जरिए उसे विदेश में सोने का व्यापार चमकाने का लालच दिया था. इस के लिए जसकरण ने अपना फ्लैट भी बेच दिया था.

Murder Stories : सल्फास की गोली खिलाकर विवाहिता ने प्रेमी को मार डाला

Murder Stories : सोशल मीडिया ने दूर के लोगों को भी पास ला दिया है. जब चाहे एक मिनट में संदेश भेजो या औनलाइन बात करो. इस सब के लिए फेसबुक और वाट्सऐप सब से सशक्त माध्यम हैं. लेकिन इन्हीं माध्यमों का दुरुपयोग कर के लोगों को प्रताडि़त भी किया जाता है और ठगी भी खूब होती है…  

40 वर्षीय प्रशांत कुमार सोशल मीडिया में कुछ इस तरह खो गए थे कि उन का ज्यादातर समय मोबाइल पर ही बीतने लगा था. वह वाट्सऐप, फेसबुक मैसेंजर, ट्विटर पर फोटो, कविताएं, शायरी और तरहतरह के विचार डालते रहते थे. लोग लाइक या प्रशंसा में कमेंट करते तो वह और उत्साहित होते. वैसे उन्हें लिखनेपढ़ने का कोई शौक नहीं था. एक दिन उन्होंने फेसबुक खोला तो एक फ्रैंड रिक्वेस्ट आई हुई थी. उन्होंने प्रोफाइल खोल कर देखी, वह किसी लड़की की फ्रैंड रिक्वेस्ट थी. प्रोफाइल में लड़की का सुंदर सा फोटो लगा था. उन की फ्रैंड लिस्ट में तमाम लड़कियां और महिलाएं थीं, लेकिन ये सब वह थीं, जिन्हें प्रशांत ने अपनी ओर से फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी. उन्हें किसी लड़की ने पहली बार फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी.

लड़की की फ्रैंड रिक्वेस्ट कन्फर्म कर के वह फेसबुक सर्च कर रहे थे कि मैसेंजर पर एक मैसेज आया. उन्होेंने तुरंत मैसेंजर खोल कर देखा. उसी लड़की का मैसेज था, जिसे उन्होंने थोड़ी देर पहले कन्फर्म किया था. मैसेज में लिखा था, ‘हैलो’.

इस के बाद दोनों के बीच मैसेजबाजी शुरू हो गई. लड़की ने पूछा, ‘‘आप क्या करते हैं?’’

‘‘नौकरी करता हूं. क्यों?’’ प्रशांत ने मैसेज का जवाब मैसेज से दिया.

‘‘कितना वेतन मिलता है आप को?’’ लड़की ने पूछा.

लड़की के इस सवाल पर प्रशांत को गुस्सा गया. उन्होंने मैसेज भेजा, ‘‘मुझ से शादी करनी है क्या, जो मेरे वेतन के बारे में पूछ रही हो?’’

‘‘आप मेरे सवाल से नाराज हो गए?’’ लड़की ने मैसेज भेजा, ‘‘मैं ने तो यूं ही पूछ लिया था. वैसे आप बहुत अच्छे आदमी हैं.’’

‘‘आप को कैसे पता?’’ प्रशांत ने पूछा.

‘‘आप की पोस्ट से पता चला. आप अपनी वाल पर बड़ी अच्छी पोस्ट डालते हैं.’’ लड़की ने मैसेज भेजा.

यह मैसेज पढ़ कर प्रशांत की नाराजगी तुरंत दूर हो गई. उन्होंने भीधन्यवादलिख कर भेज दिया. साथ ही उन्होंने यह भी लिखा, ‘‘आप भी तो बहुत सुंदर हैं. मेरी फ्रैंड लिस्ट में जितनी भी लड़कियां हैं, उन सब से ज्यादा सुंदर.’’

प्रशांत ने यह संदेश लड़की को खुश करने के लिए भेजा था. उन्होंने जानबूझ कर उस की सुंदरता की तारीफ की थी. लड़की नेथैंक्यूके साथ मैसेज में यह भी लिखा, ‘‘आप भी तो बहुत अच्छे हैं और स्मार्ट भी.’’

लड़की की इस तारीफ पर प्रशांत खुश हो गए. मैसेज के माध्यम से दोनों के बीच बातों का दायरा बढ़ा तो बढ़ता ही गया. बातोंबातों में प्रशांत ने कह दिया कि कोई काम हो तो बताना.

 इस पर लड़की ने मैसेज भेजा, ‘‘जो काम बताऊंगी, आप कर देंगे?’’

‘‘मेरे करने लायक हुआ तो जरूर करूंगा.’’ 

प्रशांत के मैसेज भेजते ही लड़की का लंबा सा मैसेज आया, ‘‘मैं हौस्टल में रहती हूं. घर वालों ने जो पैसे दिए थे, खर्च हो गए. आप मेरा फोन रिचार्ज करा दीजिए, प्लीज.’’

‘‘इस से मुझे क्या फायदा होगा?’’ प्रशांत ने पूछा तो उस ने मैसेज भेजा, ‘‘आप से बातें करूंगी. जैसी आप चाहेंगे. वीडियो कालिंग भी.’’

बिना सोचेसमझे मैसेज भेजना भी खतरनाक मैसेजबाजी में बात यहां तक पहुंची कि लड़की कपड़े उतार कर वीडियो कालिंग करने को तैयार हो गई. प्रशांत के साथ ऐसा पहली बार हुआ था. कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने चाहते हुए भी एक मैसेज भेज दिया, ‘‘मैं कैसे मानूं कि आप लड़की ही हैं. फेसबुक पर तो…’’

‘‘आप मुझ पर विश्वास कीजिए, मैं लड़की ही हूं.’’ मैसेज के साथ लड़की का फोटो भी गया. डीपी में भी वही फोटो लगा हुआ था. फोटो देख कर प्रशांत को समझते देर नहीं लगी कि वह फोटो फेसबुक से ही डाउनलोड की गई है. उन्होंने संदेश भेजा, ‘‘ठीक है, आप नंबर दो.’’

‘‘प्लीज, रिचार्ज करा दोगे ?’’ दूसरी ओर से संदेश आया.

‘‘इसीलिए तो नंबर मांग रहा हूं.’’ प्रशांत ने मैसेज भेजा. एक बार प्रशांत ने सोचा भी कि हो हो लड़की परेशानी में हो, इसलिए 3 महीने का नहीं तो एक महीने का पैक डलवा देते हैं.

लेकिन तुरंत उन के दिमाग में आया कि उन के रिचार्ज कराते ही उस ने उन्हें ब्लौक कर दिया तो. उन्होंने यह आशंका मैसेज द्वारा प्रकट की तो लड़की का संदेश आया, ‘‘मां कसम मैं ऐसा नहीं करूंगी. आप जिस तरह चाहेंगे, आप से उस तरह बातें करूंगी.’’

प्रशांत का दिमाग बड़ी तेजी से चल रहा था. वह समझ गए कि यह कोई फ्रौड है, वरना 400 रुपए के लिए कोई लड़की कपड़े उतार कर वीडियो काल क्यों करेगी? उन्होंने यह देखने के लिए उस से उस का नंबर मांग लिया कि वह नंबर देती है या नहीं. प्रशांत के मांगते ही उस ने नंबर के साथ शहर और कंपनी का नाम भी भेज दिया. थोड़ी देर बाद उन्होंने उस नंबर पर फोन किया. फोन उठा तो लड़के की आवाज आई. उन्होंने उसे धमका कर फोन काट दिया. इस के बाद उन्होंने इस बात की चर्चा अपने कुछ साथियों से की तो सब ने कहा कि वे बच गए. इस तरह के मैसेज अकसर आते रहते हैं और यह सब लड़के करते हैं.

इस से प्रशांत को पता चल गया कि फेसबुक मात्र दोस्तों को मिलाने, अपने विचार रखने और दूसरों के विचार जानने का ही मंच नहीं है. इस के माध्यम से बहुत कुछ होता हैनीरज की अलग कहानी प्रशांत की ही तरह नीरज भी फेसबुक पर काफी समय बिताते थे. उन की उम्र प्रशांत से कुछ ज्यादा थी. वह नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके थे, इसलिए अपना ज्यादातर समय मोबाइल पर ही बिताते थे. इस की एक खास वजह यह थी कि उन की फ्रैंड लिस्ट में कुछ ऐसे लड़के और कथित लड़कियां (जिन के नाम तो लड़कियों के थे, असल में वे लड़के थे) थीं. जिन से वह अश्लील चैट करते थे.

नीरज की फ्रैंडलिस्ट में एक लड़का था, जिस का नाम पीयूष मिश्रा था. उसी ने नीरज को फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी. प्रोफाइल के हिसाब से लड़का ठीकठाक लगा था. इसलिए उन्होंने उस की रिक्वेस्ट कन्फर्म कर दी थी. एक सुबह वह फेसबुक सर्च कर रहे थे, फेसबुक से जुड़े मैसेंजर पर मैसेज आया. खोलने पर पता चला कि पीयूष मिश्रा ने गुडमार्निंग का संदेश भेजा था. उन्होंने भी जवाब में गुडमार्निंग लिख दिया. इस के बाद दोनों के बीच मैसेजबाजी का सिलसिला जुड़ा तो बात अश्लील मैसेजों पर जा कर रुकी. इस के बाद पीयूष ने अश्लील मैसेज भेजने शुरू कर दिए. नीरज ने सोचा था, सच्चाई जान कर उसे ब्लौक कर देंगे. पर जब संदेशों का आदानप्रदान होने लगा तो उन्हें भी मजा आने लगा. उन के लिए यह टाइम पास करने का साधन बन गया था

जैसेजैसे बात बढ़ती गई दोनों एकदूसरे से खुलते गए. नीरज ने पीयूष से ही बात करने के लिए मैसेंजर डाउनलोड कर लिया. जिस से मैसेज करने में ही नहीं, फोटो और वीडियो भेजने में आसानी रहे. जल्दी ही उन की हालत यह हो गई कि दोनों एकदूसरे को दिगंबर अवस्था में अपनेअपने फोटो भेजने लगे. फेसबुक की हकीकत जान कर नीरज फेसबुक पर ढूंढ कर स्मार्ट लड़कों को फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजने लगे. रिक्वेस्ट कन्फर्म होने पर वह मैसेज भेज कर इसी तरह की बातें करने को उकसाते. ज्यादातर लड़के इस तरह की बातें करने से मना कर देते. जो तैयार हो जाते, उन से अश्लील चैट कर के वह अपना समय पास करते हैं.

नीरज इस तरह की चैटिंग में ऐसे रम गए कि उन्हें लगा कि फेसबुक सिर्फ इसी के लिए है. जो उन के मानमाफिक बातें करने से मना कर देता, तो उसे वह तुरंत ब्लौक कर देते. क्योंकि उन के लिए वह फालतू का आदमी होता था. इस तरह की अश्लील चैटिंग मात्र लड़के या बड़ी उम्र के पुरुष ही नहीं करते, कुछ महिलाएं और लड़कियां भी करती हैं, जो ऐसी चैटिंग कर के मजे लेती हैं. फेसबुक यानी सोशल मीडिया पर यह सब क्यों, कैसे और क्याक्या होता है, यह जानने से पहले आइए थोड़ा सोशल मीडिया के बारे में जान लेते हैं. क्योंकि लगभग सभी के मन में यह उत्सुकता होती है कि आखिर यह सोशल मीडिया है क्या?

सोशल मीडिया का अस्तित्व कहना गलत नहीं होगा कि सोशल मीडिया का अस्तित्व इंटरनेट की वजह से है. क्योंकि इंटरनेट से ही सोशल मीडिया चलता है. इंटरनेट पर विश्व की कुछ ऐसी जानीमानी वेबसाइटें हैं, जिन्होंने हमें सोशल मीडिया से अवगत कराया. इन में फेसबुक, ट्विटर, वाट्सऐप, यूट््यूब, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट जैसी कई वेबसाइटें हैं. ये सभी वेबसाइटें मिल कर इंटरनेट के जमाने में सोशल मीडिया बनाती हैं. आज सोशल मीडिया एक ऐसा साधन बन गया है, जब आम आदमी भी अपने दिल की बात दुनिया के सामने रख सकता है और इस के लिए उसे किसी तरह की मेहनत भी करने की जरूरत नहीं है. इतना ही नहीं, इस सोशल मीडिया ने बहुत लोगों को रातोंरात स्टार बना दिया है. क्योंकि सोशल मीडिया पर किसी की फोटो या वीडियो वायरल होने में समय नहीं लगता.

यही नहीं, सोशल मीडिया ऐसे तमाम लोगों को भी सामने लाया है, जिन की प्रतिभा कोई नहीं जानता था. यूट्यूब एक ऐसी वेबसाइट है, जिस के माध्यम से लोग करोड़ों की कमाई कर रहे हैं, जबकि यह वेबसाइट औनलाइन डेटिंग के लिए बनाया गया था. लेकिन इसे गूगल ने खरीद लिया, जिस के बाद यह लोगों की कमाई का जरिया बन गया. अब आते हैं सोशल वेबसाइट फेसबुक पर. इस वेबसाइट के जरिए घर बैठे हजारों दोस्त बनाए जा सकते हैं. इस समय सोशल मीडिया में फेसबुक नंबर एक पर है. क्योंकि इस के यूजर्स सब से ज्यादा हैं. लेकिन सेलिब्रिटी और बड़ी हस्तियों की बात की जाए तो उन की पहली पसंद ट्विटर है. ट्विटर के जरिए ही वे अपनी बात आम लोगों और दुनिया के सामने रखते हैं. सोशल मीडिया द्वारा हम जो दोस्त बनाते हैं. उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

आमतौर पर फेसबुक पुराने मित्रों को खोजने, उन से जुड़ने और परिचितों के साथ संदेश और चर्चा करने के लिए उत्तम माध्यम है. इस माध्यम से लोग अपने फोटो, वीडियो और पसंद की अन्य चीजें, समाचार, जानकारियां और रचनाएं अपने मित्रों के साथ शेयर कर सकते हैं. मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक पुराने दोस्तों को खोजने, संपर्क करने, नए दोस्त बनाने और अपने विचार आसानी से दुनिया के सामने रखने और बिजनैस प्रमोशन के लिए किया था. यह अलग बात है कि हमारे यहां लोग इस का उपयोग दूसरे तरीके से करने लगे हैं. इसीलिए फेसबुक आज युवाओं की पहली पसंद बन चुका है. वे रात ढाईतीन बजे तक सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं. इस में लड़केलड़कियां ही नहीं, बड़ी उम्र के पुरुष और गृहिणियां भी शामिल हैं.

जो लड़केलड़कियां घर से बाहर रहते हैं, उन्हें तो किसी का कोई डर नहीं है. इसलिए वे इस में खासा समय गंवाते हैं. ऐसा ही हाल उन पुरुषों का है जो परिवार से दूर अकेले रहते हैं. इसी तरह वे गृहिणियां भी इस का खूब आनंद लेती हैं, जिन के पति बाहर रहते हैं. इस की मुख्य वजह है चैटिंग, औडियो वीडियो कालिंग, अश्लील चैटिंग. इस के बारे में हर किसी को पता नहीं. लेकिन जिन्हें पता है, वे इस तरह के साथी खोज निकालते हैं, जो उन की पसंद की बातें करते हैं. विकास को भी पहले इस बारे में कुछ पता नहीं था. उस ने तो अपने दोस्तों से जुड़ने के लिए फेसबुक डाउनलोड किया था. दोस्तों से चैट के लिए वह मैसेंजर का उपयोग करता था.

दो दोस्तों की कहानी एक दिन वह अपने दोस्त रवि से चैटिंग कर रहा था, उसी दौरान उस ने विकास को कुछ फोटो भेजे. वे फोटो देख कर विकास यह सोच कर हैरान रह गया कि ये फोटो रवि के पास कहां से आए. फोटो एक 30-32 साल की महिला के थे, जिस के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. गले में मंगलसूत्र जरूर लटक रहा था, जिस से साफ पता लगता था कि वह शादीशुदा थी. हां, उस ने इतना जरूर किया था कि गरदन के ऊपर का हिस्सा काट दिया, जिस से उसे कोई पहचान सके.

फोटो देख कर विकास ने रवि से पूछा, ‘‘ये किस के फोटो हैं, तुझे कहां से मिले?’’

‘‘एक फेसबुक फ्रैंड ने भेजी हैं,’’ रवि ने कहा तो विकास ने मैसेज द्वारा हैरानी व्यक्त की, ‘‘फेसबुक फ्रैंड इस तरह के भी फोटो भेजती हैं?’’

‘‘वह मुझ से अश्लील चैटिंग करती थी. ऐसे में मैं ने उस से फोटो भेजने को कहा तो उस ने ये फोटो भेज दिए.’’ रवि ने बताया.

‘‘तू ने भी इसी तरह के अपने फोटो भेजे होंगे?’’ विकास ने पूछा.

  ‘‘नहीं, उस ने मांगे ही नहीं, इसलिए मैं ने नहीं भेजे.’’

  ‘‘अगर मांगे तो…?’’

‘‘पहले तो टालूंगा, नहीं मानी तो भेजना ही पड़ेगा. ऐसे दोस्त को छोड़ा तो नहीं जा सकता.’’ रवि ने मैसेज से जवाब दिया.

रवि से यह बात होने के बाद विकास की भी इस तरह की लड़कियों और औरतों से चैटिंग करने की इच्छा हुई. वह खोज में जुट गयाआखिर उस की मेहनत रंग लाई और अब उस की ऐसी कई महिला मित्र हैं, जो उस से अश्लील चैटिंग करती हैं. अब विकास दिन में तो इन से चैटिंग करता ही है, रात को भी देर तक मोबाइल पर लगा रहता है. मित्र बनाने के लिए उस ने वही तरीका अपनाया था, जैसा उस के दोस्त ने बताया था. मित्र यानी रवि द्वारा दी गई सलाह के अनुसार विकास ढूंढढूंढ कर फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजता. कन्फर्म होने पर पहले वह उन के मैसेज बौक्स में हायहैलो और गुड मार्निंग के मैसेज भेजता. जवाब जाता तो वह पूछता, ‘‘कहां से हो, कैसी हो, क्या करती हो?’’

इन के भी जवाब जाते तो विकास समझ जाता कि महिला बात करने में उत्सुकता दिखा रही है. आगे पूछता, ‘‘आप के शौक यानी आप को क्या पसंद है?’’

इन सवालों के जवाब मिल जाते तो विकास को सारा रहस्य समझ में जाता और फिर शुरू हो जाती चैटिंग. चैटिंग होतेहोते ही फोटो के आदानप्रदान होने लगते हैं. कुछ दिनों बाद बिना कपड़ों के फोटो भेजे जाते हैं. यह सब अच्छा तो बहुत लगता है, लेकिन इस में खतरा भी बहुत है. लोग मजे लेने के लिए उत्तेजना में ऐसे फोटो भेज देते हैं, लेकिन कभीकभी इस तरह के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं या फिर लोग ब्लैकमेल होने लगते हैं. जिस से बदनामी तो होती ही है, घर तक छूट जाते हैं.

सुमन का भी कुछ ऐसा ही मामला है. घर में अकेली होने की वजह से उसे चैटिंग का चस्का लग गया था. पति सुबह निकल जाते तो रात साढ़े 10-11 बजे घर लौटते थे. घर में काम करने के लिए कामवाली आती थी. पति का दोनों टाइम का खाना लगभग बाहर ही यानी आफिस कैंटीन में होता था. सुमन का कोई बच्चा भी नहीं था, जो उसी के साथ समय कट जाता. पति के जाने के बाद रात साढ़े 10-11 बजे तक सुमन घर में अकेली रहती थी. कोई कामधाम भी नहीं रहता था. दोपहर का खाना वह कामवाली से बनवा लेती थी. टीवी भी कितना देखती. टीवी से ऊब जाती तो फोन में लग जाती.

फेसबुक, वाट्सऐप पर समय बिताती, पति से उस की चैटिंग होती ही रहती थी. इस के बावजूद कुछ सहेलियां थीं, जिन से वह चैटिंग करती थी. उस के मैसेंजर पर अन्य लोगों के भी मैसेज आते रहते थे. जिन्हें वह बिना देखे ही डिलीट कर दिया करती थी. एक दिन वह बोर हो रही थी तो इनबौक्स में पडे़ पेंडिंग मैसेज खोल कर पढ़ने लगी. इसी बीच एक और मैसेज आया तो टाइम पास के लिए उस ने उस का जवाब दे दिया. इस के बाद एकदूसरे का हालचाल पूछा गया. सुमन ने उस आदमी की प्रोफाइल खोल कर देखी तो प्रोफाइल के हिसाब से वह ठीकठाक लगा. फिर तो सुमन की उस आदमी से चैटिंग होने लगी. शुरूशुरू में यह चैटिंग समान्य रही, लेकिन कुछ ही दिनों में यह बैडरूम तक पहुंच गई यानी अश्लील चैटिंग होने लगी.

सुमन को भी इस में मजा रहा था, क्योंकि उस का समय आसानी से कट जाता था. पुरुष तो वैसे भी चालाक होता है. उस की नजर हमेशा स्त्री देह पर होती है. उस आदमी ने भी सुमन को बरगला कर उस के निर्वस्त्र फोटो प्राप्त कर लिए. पुरुषों में सब से गंदी आदत यह होती है कि इस तरह की बातें वे छिपा कर यानी अपने दिल तक नहीं रख पाते. दोस्तों पर रौब जमाने के लिए वे इस तरह की बातों को बढ़ाचढ़ा कर बताते हैं. इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. विकास के मामले की तरह सुमन से चैटिंग करने वाले उस आदमी ने सुमन के फोटो दोस्तों में बांट दिए.

चैटिंग में पुरुष भी बन जाते हैं महिलाएं नतीजतन सुमन के फोटो एकदूसरे से होते हुए आगे बढ़ते गए और वायरल हो कर वे उस के पति के परिचित तक पहुंच गए. इस से सुमन की बड़ी बदनामी हुई. अच्छा यह था कि पति समझदार था, जिस से घर टूटने से बच गया. इस तरह सोशल मीडिया का चस्का और मजा सुमन के लिए सजा बन गया. सुमन के तो फोटो ही वायरल हुए पर राजेश के साथ जो हुआ, वह किसी से कह भी नहीं सकता. उसे तो इस तरह ब्लैकमेल किया गया कि पैसे भी दिए और इज्जत भी गंवाई. राजेश युवा था, इसलिए वह लड़कियों को ही फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजता था और फिर उन्हें मैसेज भेज कर बातें करने की कोशिश करता था. ऐसे ही उस की सुनीता नाम की एक लड़की से चैटिंग होने लगी

इस तरह के मामले में अकसर लोग लड़कियों के फोटो मांगते हैं, पर यहां उल्टा हुआ. सुनीता ने राजेश से उस के इस तरह के फोटो मंगवा लिए, जिन्हें देख कर कोई भी शरमा जाए. राजेश सुनीता के प्यार में इस कदर पागल था कि उस ने अपना पूरा फोटो उसे भेज दिया यानी चेहरे सहित. इस का नतीजा यह निकला कि सुनीता उसे ब्लैकमेल कर के पैसे ऐंठने लगी. यह बात यहीं तक सीमित नहीं रही. राजेश पढ़ाई कर रहा था, इसलिए वह ज्यादा पैसे कहां से देता. उस ने हाथ जोड़ लिए. तब सुनीता ने मिलने के लिए संदेश भेजा, ‘‘तुम ने मुझे बहुत पैसे दिए हैं. इसलिए मैं चाहती हूं कि तुम मुझ से कम से कम एक बार तो मिल लो. तुम्हें भी तो पैसे के बदले कुछ मिल जाए.’’

राजेश ने सोचा, चलो कुछ तो सुनीता ने उस पर दया की. वह सुनीता से मिलने उस के घर पहुंचा तो पता चला, वह लड़की नहीं 40 साल का आदमी था. कुछ मिलने की उम्मीद में गए राजेश को काफी कुछ गंवाना पड़ा. उस आदमी ने राजेश के साथ कुकर्म भी किया. वह आगे भी राजेश को परेशान करना चाहता था. लेकिन अब तक परेशान हो चुके राजेश ने उसे धमकी दे दी कि कुछ भी हो, अगर उस ने पैसे मांगे या किसी भी तरह परेशान किया तो वह उस की शिकायत पुलिस में कर देगा. राजेश की यह धमकी कारगर साबित हुई और उस आदमी ने राजेश के फोटो डिलीट कर दिए.

राजेश तो मात्र एक उदाहरण है. उस की तरह जाने कितनी लड़कियां और महिलाएं थोड़ा मजा लेने के चक्कर में ब्लैकमेल तो हो ही रही हैं, दुष्कर्म का शिकार होती हैं. अपनी जरा सी गलती की वजह से वे मुंह भी नहीं खोल पातीं. कई बार लड़कियों को मांबाप की कमाई भी चोरी कर के देनी पड़ती है. इस तरह की खबरें तो आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिल रही हैं कि फेसबुक पर हुई दोस्ती के बाद लड़की को बुला कर नशीला पदार्थ दे कर दुष्कर्म कियामजे की बात तो यह है कि फेसबुक पर फ्रैंड लिस्ट में पता ही नहीं चलता कि फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजने वाली लड़की है या लड़का या जिसे फ्रैंड रिक्वेस्ट भेज रहे हैं, वह कौन है.

इस बारे में कई लड़कियों से पूछने पर पता चला, उन के पास दिन में 50 से 60 फ्रैंड रिक्वेस्ट जाना आम बात है. कहने को तो ये सभी रिक्वेस्ट लड़कियों की होती हैं, जबकि असलियत यह होती है कि उन में एक भी लड़की नहीं होती. आज ज्यादातर लड़के या अश्लील चैटिंग करने वाले लड़की के नाम से फेसबुक आईडी बना कर प्रोफाइल में सुंदर लड़की की फोटो लगा देते हैं, जिस से कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि वह लड़की है या लड़का. इस का पता चैटिंग करने पर चलता है. क्योंकि लड़का जल्दी ही अश्लील चैटिंग करने लगता है

चैटिंग शुरू होते ही हायहैलो के बाद पहला सवाल यही होता है लड़का या लड़की. कुछ तो तुरंत बता देते हैं. लेकिन धूर्त टाइप के लड़के नहीं बताते. वे भी यही सवाल करते हैं. फिर जैसा जवाब मिलेगा. वैसा जवाब दे कर थोड़ी देर चैटिंग करेंगे. उस के बाद कहेंगे, ‘‘दीदी, आप से मेरा भाई या ब्वायफ्रैंड बात करना चाहता है.’’ इस के बाद अपना फोटो भेज कर पूछेंगे, ‘‘कैसा लगता है?’’

एक सर्वे के अनुसार सुंदर फोटो लगे जितने भी फेसबुक पेज हैं, उन में 99 प्रतिशत लड़कों के हैं. कोई भी लड़की या महिला किसी अजनबी लड़की या महिला को जल्दी फ्रैंड रिक्वेस्ट नहीं भेजती. इसलिए फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजने या स्वीकारने के पहले यह जरूर सोच लें कि जो शुरुआत ही गलत काम से हो रहा हो, उस के इरादे नेक नहीं हो सकते. यमुना ने लिखी बरबादी की स्क्रिप्ट इस तरह छोटामोटा मजा कभीकभी ऐसी सजा बन जाता है कि किसी की जान जाती है तो कइयों की जिंदगी बरबाद होने के साथ घरपरिवार तबाह हो जाता है. हरियाणा के रोहतक में अभी कुछ दिनों पहले ऐसा ही हुआ. रोहतक के सूर्यनगर की रहने वाली यमुना की समालखा के इनेलो नेता के मौल में सिक्योरिटी सुपरवाइजर की नौकरी करने वाले दीपक से फेसबुक पर दोस्ती हो गई

यमुना के पति सुरेश कुमार सीआरपीएफ में डीएसपी थे. वह जम्मू में तैनात थे. पति के बाहर रहने की वजह से यमुना सोशल मीडिया पर खासा समय बिताती थी. ऐसे में ही दीपक से उस की दोस्ती हो गई. पहले दोनों की मैसेंजर चैटिंग होती थी. साथ ही वाट्सऐप पर चैटिंग भी. कभीकभी दोनों की फोन पर बातें हो जाती थीं.  इस सब के चलते मिलने की बातें करने लगे. अंतत: यमुना दीपक से मिलने को राजी हो गई. दीपक तो उस से मिलने के लिए बेचैन था ही. दोनों की यह बात चल ही रही थी कि यमुना के पति सुरेश ने फोन कर के बताया कि वह एक महीने की छुट्टी ले कर घर रहे हैं. लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया था कि वह किस तारीख को आएंगे. पति के आने से यमुना और दीपक के मिलने का प्रोग्राम एक महीने टल सकता था, इसलिए यमुना ने सोचा, वह पति के आने से पहले ही अपने इस नए प्रेमी से मिल ले.

यमुना ने 29 सितंबर की रात दीपक को बुला लिया. दीपक अपने एक दोस्त काली के साथ रहता था. काली से मौल जाने की बात कह कर दीपक अपनी मोटरसाइकिल से यमुना से मिलने निकल गया. रोहतक पहुंच कर उस ने मोटरसाइकिल बस अड्डे पर खड़ी कर दी. क्योंकि यमुना ने मना किया था कि वह किसी वाहन से नहीं आएगा, क्योंकि वाहन देख कर लोगों को शक हो सकता है. इस के बाद वह यमुना के घर पहुंच गया.दीपक ने रात यमुना के साथ उस के घर में बिताई. सुबह वह यमुना के घर से निकल पाता, उस के पहले ही उस का पति सुरेश कुमार घर गया. पत्नी के साथ किसी अजनबी को देख कर सुरेश कुमार ने दोनों को घर के अंदर बंद कर दिया और ससुराल वालों को इस बात की सूचना दे दी. यमुना ने गलती तो की ही थी. इस गलती को छिपाने के लिए उस ने एक और भयंकर गलती कर डाली.

इज्जत बचाने के लिए उस ने दीपक को जबरदस्ती सल्फास की गोली खिला दी, जिस से उस की मौत हो गई. कहते हैं दीपक जान बचाने के लिए गुहार लगा रहा था, लेकिन सुरेश घर के बाहर ही बैठा था. इसलिए मदद के लिए कोई नहीं सका. साले के आने पर सुरेश कुमार ने दरवाजा खोला तो दीपक को मरा हुआ पाया. निर्दोष फौजी पति भी फंस गया बीवी की वजह से इज्जत बचाने के लिए सुरेश कुमार ने साले की मदद से लाश को स्कूटी से ले जा कर ठिकाने लगा दिया. इन लोगों का सोचना था कि पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाएगी. लेकिन लाश मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो काल डिटेल्स और फोन की लोकेशन से यमुना तक पहुंच गई. सख्ती से की गई पूछताछ में सारा रहस्य खुल गया.

इस तरह सोशल मीडिया पर मजा लेने के चक्कर में उस ने जो गलती की, उस के लिए वह खुद तो जेल गई ही, अच्छीभली नौकरी वाले पति तथा भाई को भी जेल भेज दिया. देखा जाए तो यमुना के लिए सोशल मीडिया का मजा सजा बन गया. अच्छाखासा घर बरबाद कर दिया. दूसरी ओर दीपक को भी जान से हाथ धोना पड़ा. इस सब के अलावा एक चीज अकसर देखने को मिलती है. फेसबुक पर किसी सुंदर लड़की के फोटो के साथ एक मोबाइल नंबर दिया रहता है, जिस के साथ लिखा रहता है कि जिसे मुझ से दोस्ती करनी हो इस नंबर पर वाट्सऐप करे. उस नंबर पर मैसेज करते ही तुरंत जवाब आएगा, ‘अगर आप को मुझ से बातें करनी है तो आप 2000 रुपए पेटीएम करें.’ मांगने पर लड़की, अपने उत्तेजक फोटो भी भेज देगी. पर पैसे मिलने पर गालियां दे कर ब्लौक कर देगी.

इसी तरह यह भी लिखा मिल जाएगा कि मेरा मोबाइल नंबर 7599760333 है. मैं 200 रुपए ले कर वीडियो सैक्स करती हूं. जिस के पास पेटीएम हो, वह मुझे वाट्सऐप करे. लोग बिना मतलब परेशान करते हैं. इसलिए पैसे मिलने के बाद ही मैं फोटो भेजूंगी. अगर पैसे भेजने से पहले मैसेज किया तो ब्लौक कर दूंगी. यह सब तो लड़कियों की बातें हैं. इसी तरह की सूचनाएं लड़के भी अश्लील फोटो के साथ अपनी प्रोफाइल पर फोन नंबर के साथ देते हैं. इस में जिगोलो यानी कालबौय भी होते हैं और गंदी चैट करने वाले भी होते हैं.  सोशल मीडिया का सशक्त माध्यम कहे जाने वाले फेसबुक के माध्यम से ठगी भी होती है. किसी को सस्ता सामान या मकान दिलाने के बहाने ठगा जाता है तो किसी को शादी के नाम पर तो किसी को प्यार के नाम पर. सारा कुछ देखते हुए यही कहा जा सकता है कि बडे़ धोखे हैं इस राह में

   

Uttar Pradesh Crime : रहस्य में उलझी प्रेमी युगल की मौत

Uttar Pradesh Crime : प्यार की खातिर पेरेंट्स को खाने में नींद की गोलियां दे कर रजनी प्रेमी सनी पाल के साथ चली गई. 3 दिन बाद प्रेमी युगल के शव एक निर्माणाधीन मकान में मिले. उन्होंने आत्महत्या की या उन की हत्या की गई? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

रजनी ने अपने मम्मीपापा के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के बाद जैसे ही दोनों गहरी नींद में सोए, इस के बाद उस ने घर से कपड़े, रुपए व जेवरात एक बैग में रखे और अपने प्रेमी सनी पाल के साथ बाइक पर बैठ कर रफूचक्कर हो गई. 22 नवंबर, 2024 की सुबह जब मम्मीपापा सो कर उठे, तब उन्हें बेटी रजनी (परिवर्तित नाम) के घर से भाग जाने और अपने साथ नकदी व जेवरात ले जाने की बात मालूम हुई. उन्हें इस बात का भी एहसास हो गया कि उन की बेटी ने उन्हें खाने में नींद की गोलियां मिला दी थीं, जिस के चलते उन्हें पता ही नहीं चला कि वह कब घर से चली गई. बेटी की काफी देर तक गांव में तलाश करने के बाद उन्होंने थाना मऊ दरवाजा में तहरीर दी.

उत्तर प्रदेश का एक जिला है फर्रुखाबाद. इसी जिले के थाने मऊदरवाजा क्षेत्र के नगला खैरबंद गांव के रहने वाले थे प्रेमी युगल 22 वर्षीय सनी पाल और 15 वर्षीय रजनी. ये दोनों 21 नवबंर, 2024 की रात को अचानक अपनेअपने घरों से गायब हो गए. 24 नवंबर रविवार की सुबह कुइयांबूट गांव के एक युवक ने एक निर्माणाधीन मकान के सामने झाड़ी में एक बाइक खड़ी देखी. उस ने देखा कि काफी देर तक वहां कोई नहीं आया. लावारिस हालत में बाइक को वहां खड़ा देख कर उसे आश्चर्य हुआ. युवक उस मकान के अंदर गया तो वहां युवक व लड़की अद्र्धनग्न अवस्था में मृत पड़े थे. शवों को देख कर युवक डर गया और वहां से सिर पर पैर रख कर गांव की ओर भागा.

रास्ते में खेतों की ओर जा रहे लोगों को उस ने आंखों देखा हाल बता दिया. यह सुनते ही लोग उस निर्माणीधीन मकान पर पहुंचे. वहां का नजारा देख कर उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. युवक का शव मकान में बने कमरे के बाहर हैंडपंप के पास तथा लड़की का शव कमरे के अंदर पड़ा था. शव के पास कुछ सामान भी पड़ा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने मऊ दरवाजा थाने में फोन कर के यह सूचना दे दी. सूचना मिलते ही एसएचओ बलराज भाटी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. दोनों के शव अद्र्धनग्न अवस्था में थे. उन्होंने कपड़ा मंगा कर लड़की के शव को ढका. इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया.

मौके पर एसपी (फर्रुखाबाद) आलोक प्रियदर्शी, एएसपी डा. संजय कुमार, सीओ (सिटी) ऐश्वर्या उपाध्याय भी मौके पर पहुंच गईं. उसी दौरान सीओ की नजर झाड़ी में पड़े गुलाब के फूल पर पड़ी. इस पर सिपाही से फूल उठवाया, उसे देखा और फिर झाड़ी में फेंक दिया. समझा जाता है कि प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए गुलाब का फूल ले कर गया था.

आत्महत्या से पहले रजनी क्यों बनी दुलहन

घटना की जानकारी होते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई. आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ मृतकों को देखने के लिए इकट्ठी हो गई. लोगों ने मृतकों की शिनाख्त 22 वर्षीय सनी पाल व 15 वर्षीय रजनी के रूप में की. दोनों एक ही गांव नगला खैरबंद के रहने वाले थे. बढ़ती भीड़ के कारण पुलिस ने शवों को देखने के लिए आने वाले लोगों को काफी दूर ही रोक दिया. घटनास्थल को सुरक्षित करने के बाद फोरैंसिक टीम को जानकारी दी गई. फोरैंसिक टीम ने घटना की जांचपड़ताल कर मौके से सबूत जुटाए.

रजनी की डैडबौडी के पास दोनों के बैग रखे थे और चप्पलें पड़ी थीं. वहीं पर सिंदूर की डब्बी, कंगन, नमकीन और 2 खाली पैकेट सल्फास के पड़े थे. वहीं पर 2 मोबाइल फोन, पानी की खाली बोतल और प्लास्टिक के 2 गिलास पुलिस को मिले थे. रजनी के हाथों में लगी मेहंदी उस के अटूट प्यार की कहानी बयां कर रही थी. उस ने मरने से पहले लिपस्टिक लगा कर मांग में सिंदूर भरा और पैरों में बिछिया पहन कर गले में मंगल सूत्र डाला. लोगों का कहना था कि आत्महत्या करने से पहले दोनों ने शादी रचाई और सुहागरात मनाई. क्योंकि दोनों ही अद्र्धनग्न अवस्था में थे.

जांच के दौरान पता चला कि सल्फास की करीब 30 गोलियों को प्लास्टिक के गिलास में घोल कर पिया था. घातक जहर के तेज असर से लड़की ने तुरंत ही दम तोड़ दिया. जहर खाने के बाद जब प्रेमी सनी का गला सूखने लगा, तब वह हैंडपंप से पानी पीने के लिए कमरे से बाहर निकला होगा और हैंडपंप के पास ही उस की मौत हो गई. प्रेमी युगल अलगअलग जाति के थे. दोनों मऊ दरवाजा थाना क्षेत्र के गांव नगला खैरबंद के निवासी थे. रजनी और सनी की मौत की खबर से दोनों घरों में कोहराम मच गया. दोनों के फेमिली वाले घटनास्थल पर पहुंच गए. रजनी के पापा ने सनी, उस के पिता प्रमोद व भाई बौबी पर अपनी बेटी का अपहरण कर उस की हत्या करने का आरोप लगाया.

घटनास्थल पर पहुंची, रजनी की चाची रेखा सब से अधिक आरोपप्रत्यारोप लगा रही थी. उस ने आरोप लगाया कि रजनी के लापता होने की शिकायत लिखित में की थी. वहां मौजूद एक दरोगा ने उस से अभद्रता की और उस की रिपोर्ट दर्ज नहीं की. पुलिस ने शिकायत पर कोई काररवाई नहीं की. बताया जाता है कि चाची का पति घटना के बाद से नहींं दिख रहा है. सनी के फैमिली वालों को कई दिन से सब से अधिक वही धमका रहा था. पुलिस भी इस मामले में गंभीरता से जांच में जुट गई. एसपी अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि सनी व रजनी ने जहर खा कर जान दी है. दोनों का विसरा सुरक्षित कर स्लाइड बनाई गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

रजनी के फैमिली वालों द्वारा पुलिस पर लगाए आरोपों की जांच कराई जाएगी. घटना के संबंध में लड़की के फैमिली वालों की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है. इस मामले में आगे की कानूनी काररवाई की जाएगी. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया.

दोनों के पेरेंट्स ने क्यों लगाए आरोप

रजनी की हत्या के संबंध में थाने में उस के फादर द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सनी ने अपने पिता व भाई के सहयोग से साजिश के तहत 21 नवबंर, 2024 की रात 11 बजे उसे व उस की पत्नी को नींद की गोलियां खाने में खिला दीं, जिस से वे बेहोश हो गए. इस के बाद वे सभी रजनी को बहलाफुसला कर अपने साथ ले गए. वे लोग घर में रखे 48 हजार रुपए व 2 लाख रुपए की ज्वेलरी भी अपने साथ ले गए. घटना के बारे में उन्हें 22 नवंबर की सुबह जानकारी हुई. इस घटना की सूचना सुबह होने पर पुलिस चौकी बघार पर दी थी, लेकिन कोई काररवाई नहीं हुई. पिछले 2 दिनों से सनी के फेमिली वाले भी फरार हो गए थे.

सनी के पिता प्रमोद ने भी रजनी के घर वालों पर बेटे ही हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी, जिस में कहा गया है कि 20 दिन पहले लड़की के पापा फेमिली के कुछ लोगों के साथ उस के घर आए थे. उन्होंने गालीगलौज कर सनी की हत्या करने की धमकी दी थी. यही नहीं, करीब 10 दिन पहले उन्होंने फोन किया. धमकी दी कि सनी के हाथपैर तोड़ कर उसे अपाहिज कर देंगे. उन्होंने पुलिस को बताया कि धमकी देने की उन के पास रिकौर्डिंग भी है.

एसएचओ बलराज भाटी ने बताया कि 24 नवंबर की शाम को ही लड़की का शव उस के फैमिली वाले ले कर चले गए. मगर युवक सनी के फैमिली वालों के न पहुंचने पर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था. हुआ यह कि सनी के पापा अपने व बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने से गिरफ्तारी के डर से मोर्चरी नहीं जा रहे थे. बाद में थाने से आश्वासन मिलने के बाद 25 नवबंर को सनी के पापा प्रमोद अन्य फैमिली वालों और रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने साथ ले गए. एसएचओ का कहना था कि शुरुआती जांच से लग रहा है कि दोनों ने आत्महत्या की है. हत्या का आरोप निराधार है.

पहले प्रेमिका बाद में प्रेमी की मौत हुई

24 नवबंर को शाम करीब 4 बजे पोस्टमार्टम की काररवाई शुरू हुई. दोनों ही शवों का पोस्टमार्टम डा. नीरज कुमार ने किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि प्रेमिका की मौत पहले हुई और उस के प्रेमी सनी पाल की मौत प्रेमिका की मौत के 2 घंटे बाद हुई थी. दोनों के पेट में कोई ठोस खाद्य पदार्थ नहीं मिला है. केवल तरल पदार्थ ही पाया गया है. इस से यह स्पष्ट है कि जहरीला पदार्थ खाने के बाद पानी पिया गया है. पोस्टमार्टम के दौरान मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण दोनों का विसरा सुरक्षित किया गया. रजनी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, फिर भी स्लाइड बना कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, झांसी भेजी गई है.

सपने क्यों न हुए हकीकत

मृतक सनी पाल पीओपी (प्लास्टर औफ पेरिस) का कारीगर था. घटनास्थल से बरामद बाइक गांव देवरामपुर निवासी पीओपी ठेकेदार सनी बाथम की थी. मृतक 21 नवंबर को अपने ठेकेदार की बाइक मांग कर ले आया था. पुलिस ने बाइक अपने कब्जे में ले ली. इस संबंध में पुलिस ने ठेकेदार बाथम से भी पूछताछ की. पुलिस द्वारा इस सनसनीखेज कांड की जांच के दौरान घटना की जो कहानी सामने आई, उसे जान कर हर कोई सन्न रह गया. सनी और रजनी एक ही गांव के रहने वाले थे. गांव में दोनों के घर कुछ दूरी पर थे. रजनी दसवीं में पढ़ती थी. जब स्कूल जाती, रास्ते में उसे गांव का युवक सनी पाल मिल जाया करता था.

रजनी और सनी की नजरें अकसर मिल जातीं. उस समय रजनी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था. उसे मालूम था कि सनी उस की जाति का नहीं है, लेकिन वह उसे भा गया था. उस का सनी के प्रति आकर्षण बढऩे लगा. यही हाल सनी का भी था. उसे रजनी अच्छी लगती थी. अकसर दोनों स्कूल के रास्ते में मिल जाया करते थे. दोनों ही एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार करने में सकुचा रहे थे, क्योंकि दोनों का ही यह पहलापहला प्यार था. आखिर एक दिन सनी ने हिम्मत कर रजनी से पूछ ही लिया, ”रजनी, तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?’’

रजनी को तो जैसे इसी पल का ही इंतजार था. उस ने मुसकराते हुए कहा, ”मेरी पढ़ाई तो ठीक चल रही है, पर तुम कैसे हो?’’

”मैं अच्छा हूं.’’

इस मुलाकात के बाद दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए.

अब जब भी रजनी स्कूल जाती, सनी उसे रास्ते में इंतजार करता मिल जाता. फिर दोनों साथ चलतेचलते प्यार की बातें करते. कभीकभी रजनी पड़ोस में जाने की बात कह कर घर से निकल जाती और सनी से चोरीछिपे मिल आती थी. कुछ दिनों में ही दोनों का हाल ऐसा हो गया था कि जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, दोनों को चैन नहीं मिलता था. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. अब दोनों चोरीछिपे मिल लेते थे. जब भी रजनी और सनी मिलते, भविष्य के सपने संजोते. रजनी शाक्य समाज की थी जबकि सनी पाल समाज से था. रजनी कहती, ”सनी, समाज से डर कर तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे? मैं जातपात में विश्वास नहीं करती हूं और शादी करूंगी तो तुम्हीं से, अन्यथा अपनी जान दे दूंगी.’’

इस पर सनी ने उस के होठों पर हाथ रख उसे चुप कराते हुए कहा था, ”2 सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. समय आने पर मैं तुम्हारे साथ ही शादी रचाऊंगा.’’

प्रेमी युगल अपने भविष्य के सुखद सपने संजोते हैं, दिल कुछ चाहता है और हो कुछ और जाता है. रजनी और सनी भी सपने संजो रहे थे. गांव के लोगों ने दोनों को एक साथ देख लिया. धीरेधीरे दोनों परिवारों को रजनी और सनी के लव अफेयर के बारे में पता चल गया.

दोनों की मौत औनर किलिंग तो नहीं

सनी व रजनी के शव मिलने की सनसनीखेज घटना के बाद नई बात निकल कर सामने आई. गांव वालों के अनुसार, प्रेम प्रसंग की जानकारी होने के बाद रजनी के फैमिली वालों ने उसे काफी समझायाबुझाया. वहीं सनी पर रजनी से दूर रहने का दबाव बनाया, लेकिन जब इस का कोई असर दोनों पर नहीं हुआ तो आननफानन में फेमिली वालों ने रजनी की शादी कन्नौज में तय कर दी थी. 19 नवबंर को ही रजनी की गोदभराई हुई थी. विवाह मैच्योर होने के इंतजार में रुका था. मृतका रजनी के एक भाई और एक बहन हैं.

रजनी के फैमिली वालों ने आरोप लगाया था कि रजनी घर से जाते समय जेवर व नकदी अपने साथ ले गई थी. जबकि गांव के बाहर निर्माणाधीन मकान में मिले दोनों की डैडबौडी के पास ऐसा कोई भी सामान नहीं मिला. तब क्या रजनी के फेमिली वाले सनी के घर वालों को झूठा फंसा रहे हैं?

दोनों एकदूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे. दोनों ने एक साथ जीने और मरने की कसमें खाई थीं. प्रेमी जोड़े का हंसनामुसकराना समाज को मंजूर नहीं हुआ. लड़की के फैमिली वाले इस प्रेम कहानी के आड़े आ गए और आखिर में प्रेमी युगल को एक ऐसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा, जिस से हर कोई हैरान रह गया. दोनों एकदूसरे को पाने के लिए तिलतिल तड़प रहे थे. शादी कर एकदूसरे के बनना चाहते थे, लेकिन उन की मोहब्बत के बीच जाति और समाज की कुरीतियां आड़े आ गईं.  रजनी सनी के प्यार में इतनी पागल हो चुकी थी कि उस ने गले में मंगलसूत्र पहन कर मांग भी भर ली थी.

इस से साफ दिखाई दे रहा था कि वह सनी से शादी की रस्म भी पूरी कर चुकी थी. रजनी के फैमिली वाले खासे प्रभावशाली बताए जाते हैं. सनी के घर वाले दबी जुबान से इसे औनर किलिंग भी मान रहे हैं. पुलिस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए थी. प्रेमी युगल चांदनी रात में मोहब्बत के अफसाने बुनते थे. पानी की लहरों पर प्रेम का गीत लिखते थे. दोनों ही एकदूसरे पर जान छिड़कते थे. जहां इस लव स्टोरी का अंत रामलीला और इश्कजादे मूवी की तर्ज पर दोनों ने अपनी कुरबानी दे कर किया, वहीं मौत को गले लगाने से पहले दोनों ने अपनी शादी का जश्न भी मनाया.

बेदर्द दुनिया से हार कर दोनों ने मौत का दामन थाम लिया. ये प्रेमी युगल जीते जी अपने प्यार को पा न सके. मौत भी ऐसी चुनी कि अपनी मौत की कहानी अमर कर गए. हर जुबां पर गांव के प्रेमी युगल की मोहब्बत की दास्तां थी.

वैसे आत्महत्या जैसा निर्णय प्रेमी युगल तनाव के चलते लेते हैं. जब उन्हें आगे कोई रास्ता दिखाई नहीं देता, तब ऐसा कदम उठाने को वे मजबूर हो जाते हैं. पेरेंट्स को अपने बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए, ताकि उन के मन की बात जान कर ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

चौहरा हत्याकांड : हनीमून के बाद दबेपांव आई मौत

पत्नी व 3 बच्चों के होते हुए भी सर्राफा कारोबारी मुकेश वर्मा ने रिश्ते की साली स्वाति सोनी के साथ मंदिर में शादी कर ली थी. उस के साथ गोवा में हनीमून के बाद वह घर लौटा तो दबेपांव मौत ने भी घर में दस्तक दे दी. नतीजतन घर के 4 लोग मौत के मुंह में समा गए. आखिर कैसे हुआ यह सब? पढ़ें, यह दिलचस्प कहानी.

प्लान के मुताबिक 10 नवंबर, 2024 की सुबह 10 बजे मुकेश अपनी स्कूटी से घर से निकला. इस के बाद वह अपनी जानपहचान वाले 3 मैडिकल स्टोर्स पर गया और वहां से नींद वाली 15 गोलियां खरीदीं. इन गोलियों को पीस कर उस ने 4 पुडिय़ा बना ली और अपने घर वापस लौट आया. इस के बाद शाम तक वह बीवीबच्चों से खूब हंसता, बोलता, बतियाता रहा. उन्हें मुकेश के प्लान की भनक तक नहीं लगी.

रात 10 बजे मुकेश ने और्डर कर 4 पिज्जा मंगवा लिए. बड़ी चालाकी से उस ने पिज्जा में पिसी हुई नींद की गोलियों का पाउडर मिला दिया. पत्नी व बच्चे उस समय टीवी पर कोई मूवी देख रहे थे. रात 12 बजे के आसपास मूवी खत्म हुई तो सभी ने पिज्जा खाया. बच्चों को पिज्जा का स्वाद कुछ अजीब लगा तो उन्होंने आधाअधूरा पिज्जा ही खाया और बचा हुआ फ्रिज में रख दिया. पिज्जा खाने के बाद पत्नी रेखा, बेटी भव्या और बेटा अभीष्ट ग्राउंड फ्लोर वाले कमरे मेें पड़े पलंग पर जा कर लेट गए, जबकि दूसरी बेटी काव्या फस्र्ट फ्लोर वाले कमरे में जा कर पलंग पर लेट गई. नींद की गोलियों ने कुछ देर बाद ही असर दिखाना शुरू कर दिया. फिर एक के बाद एक सभी गहरी नींद के आगोश में समा गए.

लेकिन मुकेश की आंखों से नींद कोसों दूर थी. रात 2 बजे मुकेश ने अपनी माशूका स्वाति से मोबाइल फोन पर बात की और सारी बात बताई. उस ने स्वाति से फोन पर संपर्क बनाए रखने को भी कहा. स्वाति सुबह तक उस के संपर्क में रही. इधर पत्नी व बच्चे जब गहरी नींद में सो गए तो सुबह लगभग 4 बजे मुकेश ग्राउंड फ्लोर वाले कमरे में पहुंचा. उस ने पलंग पर सो रही पत्नी रेखा, बेटी भव्या व बेटे अभीष्ट पर एक नजर डाली. फिर रस्सी का टुकड़ा, जिसे उस ने पहले से ही कमरे में सुरक्षित कर लिया था, पत्नी रेेखा (44 वर्ष) की गरदन में लपेटा और कसने लगा. नींद की आगोश में समाई रेखा चीख भी नहीं पाई और उस ने दम तोड़ दिया.

रेखा के बाद उस ने बेटी भव्या (19 वर्ष) और बेटा अभीष्ट (13 वर्ष) को भी रस्सी से गला कस कर मार डाला. इस के बाद वह फस्र्ट फ्लोर पर कमरे में सो रही छोटी बेटी काव्या (17 वर्ष) के पास पहुंचा और उस का भी रस्सी से गला कस दिया. पत्नी व बेटियों का गला कसने के बाद मुकेश ने बेटे अभीष्ट को भी नहीं बख्शा और उसे भी मौत की नींद सुला दिया. पत्नी व बच्चों की हत्या करने के बाद मुकेश ने प्रेमिका स्वाति से फोन पर बात की और उसे बताया कि उस ने पत्नी व बच्चों की हत्या कर दी है. वह सुबह इटावा रेलवे स्टेशन पर आ कर मिले और फोन पर संपर्क में रहे.

4 हत्याएं करने के बाद नारमल क्यों रहा मुकेश

मुकेश 3 घंटे तक लाशों के बीच बैठा रहा. इस बीच उस ने बच्चों के गले में पड़ी  सोने की चेन, पत्नी के गले में पड़ा मंगलसूत्र, चेन व दोनों हाथों से सोने कीे अंगूठियां निकाल कर सुरक्षित कर लीं. तिजोरी का लौकर खोल कर उस में रखी ज्वैलरी भी सुरक्षित कर ली. सुबह 8 बजे मुकेश ने दोनों कमरों का ताला बंद किया और कीमती सामान का थैला ले कर प्लान के मुताबिक रेलवे स्टेशन पहुंच गया. अपने किए गए प्रौमिस के मुताबिक स्वाति रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद थी. चंद मिनट पहले ही वह कानपुर से इटावा ट्रेन द्वारा आई थी.

मुकेश ने कुछ मिनट स्वाति से बात की, फिर कीमती सामान वाला थैला उसे थमा दिया. इस के बाद दोनों बस स्टाप आए. मुकेश ने स्वाति को कानपुर जाने वाली बस में बैठा दिया. बस में बैठते ही स्वाति ने अपना मोबाइल फोन स्विच औफ कर लिया. पुश्तैनी मकान में रहने वाले मुकेश के भाइयों ने सुबह मुकेश के दोनों कमरों में ताला लगा देखा तो था, लेकिन उन्होंने ज्यादा गौर नहीं किया. उन्होंने सोचा कि मुकेश परिवार के साथ कहीं घूमनेफिरने गया होगा, एकदो दिन में वापस आ जाएगा.

मुकेश ने पुलिस से बचने का प्लान पहले से ही बना लिया था. उसी प्लान के तहत वह सिविल लाइंस कोतवाली पहुंचा. वहां टंगे बोर्ड से उस ने सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह का फोन नंबर नोट किया. फिर दोपहर में गल्ला मंडी स्थित एक होटल पर भरपेट खाना खाया. यहीं पर उस ने एक सुसाइड नोट तैयार किया. इस सुसाइड नोट में उस ने अपने भाई अखिलेश वर्मा व सीलमपुर दिल्ली निवासी फुफेरे भाई मनोज कुमार वर्मा पर लाखों रुपया हड़पने और मांगने पर ताने मार कर जलील करने का आरोप लगाया. तथा हत्या/आत्महत्या करने को उकसाने का आरोप लगाया.

इस नोट को लिखने के बाद गल्ला मंडी में ही एक ज्वैलर्स की दुकान पर उस ने अपनी सोने की अंगूठी बेची. अंगूठी बेचने से उसे जो पैसे मिले, उन में से 700 रुपया सैलून वाले को तथा डेढ़ हजार रुपया सोनू नाम के व्यक्ति को उधारी के दिए. सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देने के बावजूद मुकेश विचलित नहीं हुआ. वह बेखौफ इटावा शहर की गलियों में घूमता रहा. शाम 6 बजे के बाद उस ने अपने साढ़ू भोपाल निवासी आशीष वर्मा तथा भिंड निवासी साले रविंद्र व सत्येंद्र से फोन पर बात की और हालचाल पूछा.

उस ने अपने भाइयों से भी फोन पर बात की, लेकिन किसी को महसूस नहीं होने दिया कि उस ने 4 लोगों का मर्डर किया है. रात करीब सवा 8 बजे मुकेश ने सुसाइड नोट का फोटो खींच कर सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह को वाट्सऐप कर दिया तथा डायल 112 पर सूचना दी कि उस की पत्नी व बच्चों ने सुसाइड कर लिया है. वह भी सुसाइड करने रेलवे स्टेशन जा रहा है. इस के बाद उस ने बेटी काव्या व पत्नी रेखा के मोबाइल फोन के वाट्सऐप स्टेटस पर मृतकों की फोटो लगा कर कैप्शन लिखा, ‘ये सब लोग खत्म.Ó फिर उस ने अपना मोबाइल फोन स्विच्ड औफ कर लिया.

इस स्टेटस को देख कर सगेसंबंधी सन्न रह गए. पड़ोसी भी सकते में आ गए. पड़ोसी मुकेश के घर पहुंचे तो ताला बंद था. उन्होंने मुकेश के बड़े भाई रत्नेश वर्मा व अवधेश वर्मा को सूचना दी. थोड़ी देर बाद दोनों भाई घर आ गए. उन्होंने पड़ोसियों के सहयोग से कमरों का ताला तोड़ा. अंदर का दृश्य देख कर सभी का कलेजा कांप उठा. रत्नेश वर्मा ने सूचना थाना सिविल लाइंस पुलिस को दी तो हड़कंप मच गया. सूचना पाते ही एसएचओ विक्रम सिंह चौहान पुलिस दल के साथ लालपुरा स्थित मुकेश वर्मा के घर आ गए.

मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने सूचना पुलिस अफसरों को दी तो थोड़ी देर में मौके पर एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एएसपी अभय नाथ त्रिपाठी तथा सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह भी आ गए. पुलिस अफसरों ने घटनास्थल को देखा तो सहम गए. 2 कमरों में 4 लाशें पड़ी थीं. दोनों कमरों में खून की एक बूंद भी नहीं थी. अब तक फोरैंसिक टीम भी आ गई थी और वह जांच में जुट गई थी. घर का मुखिया मुकेश वर्मा घर से नदारद था. पुलिस को पता चल गया था कि उस ने डायल 112 पर पत्नी व बच्चों के सुसाइड करने की जानकारी दी. लेकिन वह स्वयं कहां है, जीवित भी है या नहीं, इस की जानकारी न दे कर उस ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था.

अब तक मीडिया को भी घटना की जानकारी मिल गई थी, इसलिए मीडियाकर्मियों की भी भीड़ जुट गई थी. पुलिस औफिसर इस स्थिति में नहीं थे कि वे बता सकें कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का. अत: उन के सवालों से बचने के लिए चारों शवों को इटावा के सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मुकेश की खोज में पुलिस ने उस के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लिया तो रात 8:20 पर उस की लोकेशन इटावा रेलवे स्टेशन के पास मिली. उस के बाद उस का फोन बंद हो गया था. पुलिस की टीम इटावा रेलवे स्टेशन पहुंची. वहां पता चला कि मुकेश रेल से कट कर आत्महत्या करना चाहता था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ. वह जीआरपी पुलिस की हिरासत में है. पुलिस टीम तब मुकेश को अपनी कस्टडी में ले कर थाना सिविल लाइंस आ गई.

थाने में पुलिस अफसरों ने जब मुकेश से पूछताछ की तो उस ने पहले से प्लानिंग कर बनाई गई कहानी पुलिस को बताई. उस ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि पिछले कई सालों से वह परेशान था. रिश्तेदारों को उस ने 15 लाख रुपए उधार दिए थे, जो वापस नहीं कर रहे थे. पैसा मांगने पर वे उसे जलील करते थे और ताने मारते थे. इस कारण उसे व्यापार करने में दिक्कत आ रही थी. धीरेधीरे घर खर्च का ज्यादा और आमदनी कम होती गई. इस से वह काफी समय से तनाव में था. टेंशन के चलते सिर्फ वह आत्महत्या करना चाहता था. उस ने यह बात पत्नी रेखा को बताई तो वह बोली कि आत्महत्या के बाद उस का और बच्चों का क्या होगा.

फिर पत्नी की सहमति के बाद उस ने सभी को मारने के बाद आत्महत्या करने की योजना बनाई. वह करवाचौथ वाले दिन सभी को मारना चाहता था, लेकिन पत्नी ने उस दिन ऐसा करने से मना कर दिया, जिस से मौत टल गई. इस के बाद दीपावली के बाद का प्लान बनाया. 11 नवंबर, 2024 को बड़ी बेटी भव्या पढ़ाई के लिए वापस दिल्ली जाने वाली थी, इसलिए उस ने एक दिन पहले ही सब को मारने का प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक वह मैडिकल स्टोर से नींद की 15 गोलियां खरीद कर लाया. 5 गोलियां पीस कर पत्नी रेखा को पिज्जा के साथ मिला कर खिला दी, बाकी गोलियां बच्चों को पीस कर पिज्जा के साथ खिला दीं.

उस ने बताया कि गला घोंटते समय बच्चे बेहोशी की अवस्था में बोले थे, ”पापा, ये क्या कर रहे हो?

तब मैं ने उन से कहा था कि मेरे मरने के बाद तुम लोग रह नहीं पाओगे. इसलिए मरना ही बेहतर है और फिर गला घोंट कर सभी को मार डाला. मुकेश ने आगे बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद वह दिन भर शहर की गलियों में भटकता रहा. रात साढ़े 8 बजे वह इटावा रेलवे स्टेशन पहुंचा और सुसाइड के लिए पूर्वी छोर पर पटरियों के बीच लेट गया. मरुधर एक्सप्रैस उस के ऊपर से गुजर गई, लेकिन वह बच गया. जीआरपी ने उसे पकड़ा. जामातलाशी में पुलिस को मुकेश से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए. उन्हें पुलिस ने सुरक्षित कर लिया. मुकेश की निशानदेही पर पुलिस ने उस के घर से रस्सी का वह टुकड़ा बरामद कर लिया, जिस से उस ने पत्नी व बच्चों का गला घोंटा था.

पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ के बाद उस की बात को सच मान कर उस का बयान दर्ज किया. लेकिन अधिकारियों के मन में एक फांस चुभ रही थी कि मुकेश को यदि आत्महत्या करनी ही थी तो उस ने घर में क्यों नहीं की? घटना को अंजाम देने के 16 घंटे बाद वह आत्महत्या करने इटावा रेलवे स्टेशन क्यों गया? वह भी बच गया. उस के शरीर पर खरोंच तक नहीं आई. उन्हें लगा कि दाल में कुछ काला जरूर है. 12 नवंबर, 2024 को इस हत्या/आत्महत्या प्रकरण की खबर प्रमुख अखबारों में छपी, जिसे पढ़ कर लोग सन्न रह गए. शहरवासियों तथा सगेसंबधियों की भीड़ मुकेश के घर पर जुट गई. सहमति से आत्महत्या की बात न शहरवासियों के गले उतर रही थी और न ही परिवार तथा सगेसंबधियों की समझ में आ रही थी.

सगेसंबंधी भी नहीं समझ पाए वारदात की वजह

पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए मुकेश के बड़े भाई एडवोकेट रत्नेश वर्मा, अवधेश वर्मा तथा मां चंद्रकला से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि रिश्तेदारों व पड़ोसियों के फोन आने के बाद वह मुकेश के घर गए तो देखा कि लाशें पड़ी थीं. रत्नेश ने बताया कि मुकेश के घर में तनाव जैसी कोई बात नहीं थी. तनाव की बात उस ने कभी उन्हें नहीं बताई. आर्थिक स्थिति भी कमजोर नहीं थी. वह सोनेचांदी के व्यापार में अच्छा पैसा कमाता था. पता नहीं मुकेश ने यह कदम क्यों उठाया.

अब तक मृतका रेखा का भाई भिंड निवासी सत्येंद्र सोनी भी बहन के घर आ गया था. उस ने पुलिस औफिसरों को बताया कि उस ने भांजी काव्या का स्टेट्स देखा था, जिस में लिखा था-ये सब खत्म. बहन और बच्चों की फोटो लगी थी. इस के बाद उस ने सब को फोन लगाया, लेकिन किसी का फोन नहीं लगा. यहां आ कर पता चला कि बहन व बच्चों की हत्या हो गई है.

सत्येंद्र ने आरोप लगाया कि बहनोई मुकेश शराब पीता था. औरत उस की कमजोरी थी. बहनोई मुकेश ने ही प्लान के तहत उस की बहन रेखा व उस के बच्चों की हत्या की है. सहमति से हत्या/आत्महत्या की बात गलत है. सत्येंद्र ने यह भी बताया कि दीपावली के 2 दिन पहले उस की बहन रेखा व बच्चे भिंड आए थे. तब रेखा ने न तनाव वाली बात बताई थी और न ही आर्थिक परेशानी की. वह हंसीखुशी से बच्चों के लिए पटाखे खरीद कर चली गई थी.

पूछताछ के बाद एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने दोपहर बाद 2 बजे पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता की और मुकेश वर्मा को मीडिया के समक्ष पेश किया. पत्रकारों से रूबरू होते वक्त मुकेश को न कोई पछतावा था और न ही माथे पर कोई शिकन. साले सत्येंद्र ने भी मुकेश पर हत्या का आरोप लगाया था. अत: सिविल लाइंस थाने के एससएचओ विक्रम सिंह ने सत्येंद्र सोनी की तहरीर पर मुकेश वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) तथा 61 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. शाम 4 बजे उसे इटावा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

जेल भेजने के बाद अधर में क्यों अटका मामला

पुलिस ने मुकेश को जेल जरूर भेज दिया था, लेकिन सामूहिक हत्या आत्महत्या का मामला अब भी अधर में ही लटका हुआ था. पुलिस टीम ने जांच आगे बढ़ाई तो मुकेश के एक और झूठ का खुलासा हो गया. पता चला कि मुकेश ने आत्महत्या करने का नाटक किया था. मरुधर एक्सप्रैस ट्रेन उस के ऊपर से गुजरी ही नहीं थी. वह प्लेटफार्म नंबर 4 पर खड़ी मरुधर एक्सप्रैस ट्रेन के इंजन के आगे लेट गया था. गाड़ी चलने के पहले ही चालक की नजर उस पर पड़ गई थी. चालक ने तब उसे जीआरपी के हवाले कर दिया था.

पुलिस की इस गुत्थी को सुलझाया मृतका रेखा की बहन राखी तथा उस के पति आशीष वर्मा ने, जो भोपाल से इटावा आए थे. आशीष वर्मा व राखी ने पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी दी. राखी ने बताया कि उस के बहनोई मुकेश वर्मा का कानपुर (बर्रा) की रहने वाली तलाकशुदा महिला स्वाति सोनी से नाजायज रिश्ता है. वह महिला मुकेश की पहली पत्नी नीतू की रिश्तेदार है. रिश्ते में वह मुकेश की साली लगती है.

इन नाजायज संबंधों की जानकारी रेखा को भी हो गई थी. वह इस का विरोध करती थी, जिस से घर में कलह होती थी. बहन ने उसे कई बार फोन पर यह जानकारी दी थी. करवाचौथ पर रेखा ने मुकेश के मोबाइल फोन में स्वाति की तसवीर देखी थी, तब खूब झगड़ा हुआ था. उस ने बताया कि अवैध संबंधों के चलते ही बहनोई मुकेश ने प्रीप्लान कर उस की बहन रेखा व उस के बच्चों की हत्या की है. हत्या के इस प्लान में स्वाति भी शामिल है. उस ने मुकेश को अपने प्रेमजाल में फंसा रखा है.

अवैध रिश्तों में हुई सामूहिक हत्या का पता चलते ही पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गए. उन्होंने जांच तेज कर दी. पुलिस को मुकेश के पास से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए थे. पुलिस ने उन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि घटना वाली रात 2 बजे से 5 बजे के बीच एक फोन नंबर सक्रिय था, जिस पर मुकेश ने कई बार बात की थी. इस नंबर पर पहले भी उस की बातें होती थीं. पुलिस ने उस मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह नंबर स्वाति सोनी निवासी विश्व बैंक कालोनी बर्रा (कानपुर) के नाम दर्ज है.

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने स्वाति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम भेजी. लेकिन उस के घर पर ताला लगा था. पुलिस टीम तब खाली हाथ लौट आई. पुलिस ने उस की टोह में खबरियों को लगा दिया. इधर सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह मुकेश के उस हस्तलिखित सुसाइड नोट की जांच कर रहे थे, जिसे मुकेश ने उन के वाट्सऐप पर भेजा था. जांच में यह बात सच निकली कि मुकेश के फुफेरे भाई मनोज वर्मा ने उस का लाखों रुपया हड़प लिया था. मांगने पर जलील करता था. झूठे मामले में फंसाने की धमकी देता था. इस के अलावा भाई अखिलेश ने भी उस के रुपए हड़प रखे थे. जांच पूरी होने के बाद सीओ (सिटी) ने उन की गिरफ्तारी का जाल बिछाया.

15 नवंबर, 2024 को सीओ (सिटी) अमित कुमार सिंह की टीम ने अखिलेश व मनोज वर्मा को बस स्टैंड इटावा से दबोच लिया. पूछताछ में दोनों ने गलत फंसाने का आरोप लगाया. लेकिन पुलिस ने उन की एक न सुनी और दोनों को आत्महत्या करने को मजबूर करने के जुर्म में जेल भेज दिया. 20 नवंबर, 2024 की दोपहर 12 बजे एसएचओ विक्रम सिंह चौहान को मुखबिर के जरिए जानकारी मिली कि मुकेश की प्रेमिका स्वाति इस समय अंबेडकर चौराहे के पास निर्माणाधीन रामनगर ओवरब्रिज के नीचे मौजूद है. वह कोर्ट में सरेंडर करने के लिए किसी वकील का वेट कर रही है.

चूंकि मुखबिर की इनफार्मेशन खास थी, इसलिए पुलिस टीम रामनगर ओवरब्रिज के नीचे पहुंची और घेराबंदी कर स्वाति को गिरफ्तार कर लिया. उसे थाना सिविल लाइंस लाया गया. उस की गिरफ्तारी की सूचना पर पुलिस अफसर भी थाने आ गए. पुलिस औफसरों ने स्वाति से पूछताछ की तो उस ने बताया कि मुकेश वर्मा से उस का नाजायज रिश्ता था. पूछताछ के बाद इंसपेक्टर विक्रम सिंह चौहान ने स्वाति सोनी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103 (1) तथा 61 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच, मुकेश व स्वाति के बयानों तथा अन्य सूत्रों के आधार पर इस सामूहिक हत्याकांड की सनसनीखेज कहानी सामने में आई.

बीवीबच्चों वाला मुकेश क्यों फंसा स्वाति के चक्कर में

उत्तर प्रदेश के इटावा शहर के सिविल लाइंस थाने के अंतर्गत एक मोहल्ला है— लालपुरा. इसी मोहल्ले में खुशीराम वर्मा सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी चंद्रकला के अलावा 6 बेटे रत्नेश, राकेश, अवधेश, मुकेश, अखिलेश व रघुवेश थे. खुशीराम वर्मा सर्राफा व्यापारी थे. इस व्यवसाय में उन का बड़ा नाम था. उन्होंने अपना हुनर बेटों को ही नहीं, रिश्तेदारों को भी सिखाया था. वे सभी इसी व्यापार से अपनी जीविका चलाते थे. खुशीराम वर्मा के बच्चे पढ़लिख कर जवान हुए तो सभी किसी न किसी व्यापार में रम गए. बेटे कमाने लगे तो उन्होंने एक के बाद एक सभी बेटों का विवाह कर दिया. 3 मंजिला घर में उन के 4 बेटे अवधेश, मुकेश, अखिलेश व रघुवेश वर्मा अपनेअपने परिवारों के साथ रहने लगे.

जबकि सब से बड़ा बेटा रत्नेश वर्मा, जोकि नोटरी वकील था, वह एआरटीओ औफिस के सामने नवविकसित कालोनी में परिवार सहित रहता था. उस से छोटा राकेश वर्मा सपरिवार गाड़ीपुरा मोहल्ले में रहता था. उस की वहीं स्थित चारा मार्केट में सर्राफा की दुकान तथा पालिका बाजार में कपड़े की दुकान थी.

खुशीराम वर्मा के चौथे नंबर का बेटा था— मुकेश. उस की शादी नीतू से हुई थी. शादी के एक साल बाद नीतू ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने भव्या रखा. भव्या 2 साल की थी, तभी उस की मम्मी नीतू का निधन हो गया. वह कैंसर से पीडि़त थी.

पत्नी की मौत के बाद मुकेश को बेटी के पालनपोषण की समस्या हुई तो उस ने सन 2006 में रेखा से दूसरी शादी कर ली. रेखा भिंड शहर कोतवाली के मोहल्ला झांसी की रहने वाली थी. उस के 2 भाई सत्येंद्र, रविंद्र तथा एक बहन राखी थी. दूसरी शादी के बाद मुकेश खुश था. रेखा ने एक बेटी काव्या व बेटे अभीष्ट को जन्म दिया. रेखा अब दोनों बेटियों व बेटे का पालनपोषण करने लगी. बच्चे कुछ बड़े हुए तो तीनों बच्चे ज्ञानस्थली स्कूल में पढऩे लगे. मुकेश वर्मा सर्राफा व्यापार का मंझा हुआ खिलाड़ी था. सर्राफा की दुकान पर उस का छोटा भाई रघुवेश बैठता था. मुकेश दिल्ली से सोनाचांदी के आभूषण लाता था और इटावा, औरैया, मैनपुरी के व्यापारियों को सप्लाई करता था. उस का बिजनैस कानपुर तक फैला था. इस व्यवसाय से उसे लाखों रुपए की कमाई होती थी.

वर्ष 2019 में मुकेश अपनी पत्नी रेखा के साथ मथुरा-वृंदावन घूमने गया. वहां एक होटल में उस की मुलाकात स्वाति सोनी से हुई. वह भी अपने पति अर्पण के साथ घूमने आई थी. वह भी उसी होटल में रुकी थी, जिस में मुकेश ठहरा था. दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई तो रिश्तेदारी खुल गई. स्वाति मुकेश की पहली पत्नी नीतू की मौसी की बेटी निकली. इस नाते मुकेश और स्वाति के बीच जीजासाली का रिश्ता बन गया.

गुपचुप शादी कर गोवा में मनाया हनीमून

स्वाति मुकेश के रहनसहन से प्रभावित हुई. लौटते समय दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर भी दे दिए. स्वाति सोनी, बर्रा (कानपुर) की रहने वाली थी. उस की शादी 2007 में जालौन के उरई कस्बा निवासी अर्पण से हुई थी. अर्पण प्राइवेट नौकरी करता था. उस की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. वह शराब का लती भी था. स्वाति उस से खुश नहीं थी. खर्चे पूरे न होने के कारण स्वाति और अर्पण के बीच अकसर झगड़ा होता रहता था.

स्वाति पहली ही नजर में मुकेश के दिलोदिमाग पर छा गई थी, इसलिए वह उस की ससुराल जाने लगा. मोबाइल फोन पर भी दोनों की रसभरी बातें होने लगीं. जल्दी ही दोनों के बीच दूरियां कम हो गईं और उन के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. मुकेश ने स्वाति के पति अर्पण से भी दोस्ती कर ली और उस के साथ शराब की पार्टी करने लगा. लेकिन एक रोज भांडा फूट गया, जब अर्पण ने दोनों को रंगेहाथ पकड़ लिया. अर्पण ने स्वाति को जम कर पीटा. तब स्वाति रूठ कर मायके बर्रा कानपुर आ गई. साथ में बेटे को भी ले आई. बाद में पति अर्पण से उस का तलाक हो गया.

स्वाति मायके में आ कर रहने लगी तो मुकेश का वहां भी आनाजाना शुरू हो गया. मुकेश जब भी बिजनैस के सिलसिले में आता, स्वाति के घर पर ही रुकता. रात में उस के साथ रंगरलियां मनाता. मुकेश ने बर्रा में ही उसे ब्यूटीपार्लर खुलवाया ताकि वह कुछ पैसा कमा सके, लेकिन स्वाति ब्यूटीपार्लर चला नहीं पाई. कुछ समय बाद स्वाति के कहने पर मुकेश ने बर्रा की विश्व बैंक कालोनी में एक मकान खरीद लिया. इस मकान में स्वाति मालकिन बन कर रहने लगी. यही नहीं मुकेश ने खाड़ेपुर में स्वाति को सर्राफा की दुकान भी खुलवा दी. इस दुकान पर मुकेश भी बैठता था. पूछने वालों को स्वाति मुकेश को अपना पति बताती थी. मुकेश अब कईकई दिनों तक बर्रा में ही रुकने लगा था.

स्वाति बहुत चालाक थी. उस की नजर मुकेश की धनदौलत पर टिकी थी. इसलिए वह मुकेश को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी. स्वाति मुकेश के प्यार में इतनी अंधी हो गई थी कि वह उस के साथ शादी रचा कर जिंदगी भर तक साथ रहने का सपना देखने लगी थी. अपना सपना पूरा करने के लिए स्वाति ने मुकेश के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो वह राजी हो गया. मुकेश यह तक भूल गया कि वह शादीशुदा और 4 बच्चों का बाप है. मुकेश के राजी होने के बाद स्वाति ने उस के साथ मंदिर में विवाह कर लिया. फिर वह हनीमून के लिए मुकेश के साथ गोवा चली गई. वहां से सप्ताह भर बाद मौजमस्ती करने के बाद दोनों लौटे.

एक रोज रेखा ने पति के मोबाइल फोन में स्वाति की फोटो देखी तो उस का माथा ठनका. उस ने गुप्तरूप से जानकारी जुटाई तो पता चला कि दोनों के बीच नाजायज रिश्ता है.

और अवैध संबंधों में स्वाहा हो गया परिवार

अपना घर उजड़ता देख कर रेखा ने विरोध शुरू किया, जिस से दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. लेकिन विरोध के बावजूद मुकेश नहीं माना. धीरेधीरे दोनों के बीच नफरत बढ़ती गई.

वर्ष 2021 में मुकेश के छोटे भाई रघुवेश की बीमारी के चलते मौत हो गई. उस के बाद मुकेश ने गल्ला मंडी वाली दुकान 16 लाख रुपए में बेच दी. दुकान बेचने का रेखा ने भरपूर विरोध किया था, लेकिन मुकेश नहीं माना. दुकान बेचने से मिले 16 लाख रुपयों में से 3 लाख रुपया स्वाति ने लटकेझटके दिखा कर ले लिए तथा 10 लाख रुपए उस ने सीलमपुर दिल्ली निवासी फुफेरे भाई मनोज कुमार वर्मा को दे दिया. उस ने चांदी रिफाइनरी का काम शुरू किया था और आधा लाभ देने का वादा किया था. बाद में वह अपने प्रौमिस से मुकर गया.

अब तक मुकेश के बच्चे भी बड़े हो गए थे. बड़ी बेटी भव्या 18 साल की उम्र पार कर चुकी थी. उस ने स्थानीय ज्ञानस्थली स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर दिल्ली यूनिवर्सिटी के रानी लक्ष्मीबाई कालेज में बीकौम (प्रथम वर्ष) में प्रवेश ले लिया था. 17 वर्षीय काव्या 11वीं कक्षा में तथा 13 वर्षीय अभीष्ट 9वीं कक्षा में पढ़ रहा था. तीनों बच्चे होनहार थे. मन लगा कर पढ़ाई कर रहे थे.

रेखा की छोटी बहन राखी भोपाल निवासी आशीष वर्मा को ब्याही थी. रेखा जब परेशान होती थी, तब वह राखी से मोबाइल फोन पर बात करती थी और अपना दर्द बयां करती थी. उस ने राखी को बताया था कि उस के बहनोई के कानपुर की एक तलाकशुदा महिला से नाजायज संबंध है. उस के कारण घर में कलह होती है. दुकान बेचने की जानकारी भी उस ने राखी को दी थी.

ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा था, त्योंत्यों मुकेश वर्मा की उलझन भी बढ़ती जा रही थी, जिस के कारण उस का व्यापार में भी मन नहीं लगता था. उस का दिन का चैन छिन गया था और रात की नींद हराम हो गई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे, क्या न करे. इसी उलझन मेें उस ने 7 नवंबर को स्वाति के घर का रुख किया. मुकेश और स्वाति ने कान से कान जोड़ कर पूरा प्लान बना लिया. मुकेश ने पत्नी और बच्चों को मारने का प्लान बना लिया. यही नहीं, पुलिस से बचने के लिए मुकेश ने पूरी योजना भी बना ली.

फिर प्लान के तहत ही मुकेश ने 10 नवंबर की रात पत्नी व बच्चों की हत्या कर दी और स्वयं आत्महत्या करने का नाटक रचा. 21 नवंबर, 2024 को पुलिस ने आरोपी स्वाति सोनी को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. मुकेश को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी थी.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

Love Story : घर में घुसकर कैंची से काटा प्रेमिका का गला

Love Story  विभा और रोहित ने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में साथसाथ स्ट्रगल किया था. वहीं दोनों में दोस्ती और तथाकथित प्यार हुआ. जब थकहार कर विभा अपने घर लौट आई तो रोहित ने उसे उसी के घर में बंधक बना कर 12 घंटे तक ऐसा हाईवोल्टेज ड्रामा किया कि…

जिस ने भी सुना, उस ने मिसरोद का रास्ता पकड़ लिया. कोई सिटी बस से गया तो कोई औटो से. किसी ने टैक्सी ली तो कुछ लोग अपने वाहन से मिसरोज जा पहुंचे. बीती 13 जुलाई की अलसुबह मिसरोद में कोई ऐसी डिस्काउंट सेल नहीं लगी थी, जिस में किसी जहाज के डूब जाने से कपड़ा व्यवसायी या निर्माता को घाटे में आ कर मुफ्त के भाव कपड़े बेचने पड़ रहे हों, बल्कि जो हो रहा था, वह निहायत ही दिलचस्प और अनूठा ड्रामा था, जिसे भोपाल के लोग रूबरू देखने का मौका नहीं चूकना चाहते थे. भोपाल होशंगाबाद रोड पर पड़ने वाला मिसरोद कस्बा अब भोपाल का ही हिस्सा बन गया है. इस इलाके में तेजी से जो रिहायशी कालोनियां विकसित हुई हैं, उन में से एक है फौर्च्यून डिवाइन सिटी.

इस कालोनी में खासे खातेपीते लोग रहते हैं. इन्हीं में से एक हैं बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) से रिटायर हुए एम.पी. श्रीवास्तव. एजीएम जैसे अहम पद से रिटायर्ड एम.पी. श्रीवास्तव ने वक्त रहते फौर्च्यून डिवाइन सिटी में फ्लैट ले लिया था. एम.पी. श्रीवास्तव नौकरी से तो रिटायर हो गए थे, लेकिन जवान हो गई दोनों बेटियां विभा और आभा की शादी की चिंता से मुक्त नहीं हो पाए थे. रिटायरमेंट के बाद उन का अधिकांश समय बेटियों के लिए योग्य वर ढूंढने में गुजर रहा था. साधनसंपन्न घर में सब कुछ था. साथ ही खुशहाल परिवार में 2 होनहार बेटियां और कुशल गृहिणी साबित हुई उन की पत्नी चंद्रा, जिन्हें पति से ज्यादा बेटियों के हाथ पीले होने की चिंता सताती थी.

13 जुलाई को श्रीवास्तवजी के फ्लैट नंबर 503 में जो चहलपहल हुई, उस की उम्मीद श्रीवास्तव दंपति ने सपने में भी नहीं की थी. ऐसी शोहरत जिस से हर शरीफ शहरी बचना चाहता है, कैसी और क्यों थी, पहले उस की वजह जान लेना जरूरी है. इस संभ्रांत संस्कारी कायस्थ परिवार की बड़ी बेटी का नाम विभा है, जिस की उम्र 31 साल है. विभा पढ़ाईलिखाई में तो होशियार है ही, साथ ही उस की पहचान उस के सांवले सौंदर्य की वजह से भी है. एमटेक करने के बाद महत्त्वाकांक्षी विभा ने बजाय नौकरी करने के मुंबई का रास्ता पकड़ लिया था. चाहत थी मौडल बनने की.

विभा महत्त्वाकांक्षी ही नहीं, बल्कि प्रतिभावान भी थी. इसी के चलते करीब 3 साल पहले एक समारोह में कायस्थ समाज ने उसे सम्मानित भी किया था. उसी साल विभा ने एक ब्यूटी कौंटेस्ट में भी हिस्सा लिया था, जिस में वह विजेता रही थी. इस सब से उत्साहित विभा को भी लगने लगा था कि अगर कोशिश की जाए तो उस के लिए सेलिब्रिटी बनना कोई मुश्किल काम नहीं है. उस ने अपनी यह इच्छा मांबाप को बताई तो उन्होंने उसे निराश नहीं किया. उन लोगों ने उसे मुंबई जाने की इजाजत दे दी.

मौडलिंग और फिल्मों में काम करने की सोच लेना तो आसान काम है, लेकिन ग्लैमर की इस दुनिया में अपना मुकाम बनाना हंसीखेल नहीं है. यह बात विभा को मुंबई जा कर समझ आई. लेकिन विभा हिम्मत हारने वालों में से नहीं थी. वह  काम हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष करती रही. बोलचाल की भाषा में कहें तो वह स्ट्रगलर थी.  मुंबई में रोजाना हजारों स्ट्रगलर हाथ में एलबम लिए निर्मातानिर्देशकों और नामी कलाकारों के यहां धक्के खाते हैं. सचमुच दाद देनी होगी ऐसे नवोदित कलाकारों को, जो सुबह उठ कर देर रात तक चलते दौड़ते नहीं थकते. उस वक्त उन के जेहन में उन नामी कलाकारों के संघर्ष की छवि बसी होती है जो कभी उन्हीं की तरह स्ट्रगलर थे.

मीडिया भी ऐसे किस्से खूब बढ़ाचढ़ा कर पेश करता है. मसलन देखो कल का चाय या फल बेचने वाला या फिर पेशे से कंडक्टर कैसे शोहरत के शिखर पर पहुंच गया और अब अरबों की दौलत का मालिक है. कामयाब होना है तो धक्के तो खाने ही पड़ेंगे, यह बात मुंबई पहुंचने वाला हर स्ट्रगलर जानता है. विभा भी जानती थी. स्ट्रगल के दौरान विभा की मुलाकात रोहित नाम के युवक से हुई जो खुद भी स्ट्रगलर था. मूलत: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला रोहित भी छोटामोटा कलाकार था और किसी बड़े मौके की तलाश में था. विभा और रोहित की जानपहचान पहले दोस्ती में और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई, इस का अहसास दोनों को उस वक्त हुआ, जब रोहित ने विभा पर बेजा हक जमाना शुरू कर दिया.

छोटे शहरों की बनिस्बत मुंबई की दोस्ती और (Love Story) प्यार में फर्क कर पाना बेहद मुश्किल काम है. वजह यह कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई वर्जना नहीं होती. वहां कलाकार की पहचान उस की कामयाबी के पैमाने से होती है, जबकि विभा और रोहित अभी कामयाबी के सब से निचले पायदान पर खड़े थे. कामयाबी की सोचना तो दूर की बात है, अभी उन के कदम जरा भी आगे नहीं बढ़ पाए थे. जमीन पर खड़ेखड़े ही विभा को अहसास हो गया था कि जितना उसे मिलना था, उतना मिल चुका. लिहाजा अब वापस भोपाल लौट जाए और मम्मीपापा जहां कहें, वहां शादी कर ले. वजह यह कि रोहित उस पर शादी के बाबत दबाव बनाने लगा था जो उस से बरदाश्त नहीं हो पा रहा था.

पर वापसी के पहले विभा ने एक आखिरी कोशिश इस सोच के साथ शौर्ट मूवी बना कर की थी कि अगर मूवी चल निकली तो आगे के रास्ते और किस्मत के दरवाजे खुदबखुद खुलते चले जाएंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उलटे जो हुआ वह उस की बनाई रील का रीयल लाइफ में उतर आना था. अपनी बनाई मूवी में विभा ने अपनी पूरी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और प्रतिभा झोंक दी थी. इस मूवी की प्रोड्यूसर उस की छोटी बहन आभा थी. मूवी के कथानक के आधार पर उस ने उस का नाम फ्रायडे नाइट रखा था. फ्रायडे नाइट की कहानी मसालों से भरपूर थी, जिस की शूटिंग विभा ने अपने ही फ्लैट पर की थी. इस कहानी की मुख्य पात्र भी वही थी, जो एक लड़के से प्यार करने लगती है. लड़का विभा को धोखा दे देता है तो वह तिलमिला उठती है.

इस के पहले वह अपने प्रेमी के सामने रोतीगिड़गिड़ाती है, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता. एक वक्त ऐसा भी आता है, जब विभा की हालत पागलों जैसी हो जाती है और इसी गुस्से में वह एक सख्त फैसला ले लेती है. यह सख्त फैसला होता है अपने बेवफा प्रेमी का कत्ल कर देने का, जिसे वह एक शुक्रवार की रात को अंजाम देती है. विभा को लगा था कि उस की फिल्म बाजार में आते ही हाहाकार मचा देगी और बौलीवुड उसे हाथोंहाथ ले लेगा. अपनी फिल्म को ले कर विभा ने कई चैनलों के चक्कर लगाए, लेकिन उसे किसी ने भाव नहीं दिया. अंतत: उस ने 2 साल पहले इस फिल्म को यूट्यूब पर अपलोड कर दिया. यूट्यूब पर भी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले. फ्रायडे नाइट को देखने वालों की संख्या मुश्किल से 5 अंकों में पहुंच पाई.

13 जुलाई को हजारों लोग विभा के पांचवीं मंजिल स्थित उस फ्लैट की तरफ उत्सुकता से देख रहे थे, जहां कभी फ्रायडे नाइट की शूटिंग हुई थी. इन में कितने ही लोग उस वीडियो को भी देख रहे थे जिसे रोहित ने वायरल किया था. इस वीडियो में रोहित लाल बनियान में नजर आ रहा था और विभा पलंग पर बेहोश पड़ी थी. वीडियो में रोहित गुहार लगाता नजर आ रहा था कि देखो पुलिस और विभा के घर वाले हम बच्चों पर कितना जुल्म ढा रहे हैं. रोहित के मुताबिक वह और विभा दोनों एकदूसरे से प्यार (Love Story) करते थे और शादी करना चाहते थे. लेकिन विभा के घर वाले इस के लिए तैयार नहीं थे. आज जब वह विभा से मिलने आया तो उन्होंने पुलिस बुला ली. पुलिस वालों ने दोनों की इतनी पिटाई की कि शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा है. उस ने बहता हुआ खून भी दिखाया.

वीडियो वायरल होने की देर थी कि लोग मुफ्त का तमाशा देखने मिसरोद की तरफ दौड़ पड़े. रोहित का यह कहना गलत नहीं था कि विभा के घर वालों ने पुलिस बुला ली है. पुलिस घटनास्थल पर मौजूद तो थी लेकिन यह सोच कर सकपकाई हुई थी कि इस सिचुएशन से कैसे निपटा जाए. मतलब यह कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. यानी विभा की जान भी बच जाए और रोहित को गिरफ्तार भी कर लिया जाए.  दरअसल उस दिन सुबह करीब 7 बजे मिसरोद थाना इंचार्ज एस.के. चौकसे को एम.पी. श्रीवास्तव के फोन पर इत्तला दी थी कि रोहित नाम के एक युवक ने उन के फ्लैट में जबरन घुस कर उन की बड़ी बेटी विभा को फ्लैट के आखिरी कमरे में बंधक बना रखा है. उन्हें यह बात तब पता चली जब वह दूध लेने फ्लैट से बाहर निकले थे.

मामला गंभीर था और संभ्रांत कालोनी से ताल्लुक रखता था, इसलिए 3 सदस्यीय पुलिस टीम जल्द ही फार्च्यून डिवाइन सिटी पहुंच गई. पुलिस दल का नेतृत्व एसआई एस.एस. राजपूत कर रहे थे. उन्होंने सारा मामला समझ कर रोहित को बहलाफुसला कर काबू में करने की कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हुए. सुबहसुबह पुलिस को आया देख कालोनी के लोग विभा के घर के नीचे इकट्ठा हो कर माजरा समझने की कोशिश करने लगे थे. उन्हें इतना ही पता चल पाया कि श्रीवास्तवजी के घर कोई सिरफिरा घुस आया है, जिस ने उन की बड़ी बेटी को बंधक बना लिया है और तरहतरह की धमकियां दे रहा है.

रोहित को इस बात की आशंका थी कि विभा के मातापिता पुलिस को बुलाएंगे इसलिए वह सतर्क था. एम.पी. श्रीवास्तव उन की पत्नी चंद्रा और छोटी बेटी आभा हलकान थीं कि अंदर कमरे में विभा पर रोहित जाने क्याक्या जुल्म ढा रहा होगा. इस डर की वजह रोहित के हाथ में देसी कट्टे का होना था. एसआई राजपूत ने रोहित से बात करने की कोशिश की तो उस ने मोबाइल चार्जर की मांग की. राजपूत से चार्जर लेने के लिए रोहित ने दरवाजा थोड़ा खोला तो उन्होंने हाथ अड़ा कर पूरा दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन रोहित इस स्थिति के लिए तैयार था. उस ने कैंची से राजपूत के हाथ पर हमला कर दिया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी. चोट से तिलमिलाए एसआई राजपूत ने हाथ वापस खींच लिया तो रोहित ने चार्जर ले कर कमरा फिर से बंद कर लिया.

पुलिस को आया देख विभा की हिम्मत बढ़ी और उस ने रोहित का विरोध किया. इस पर झल्लाए रोहित ने विभा के हाथ और गले पर कैंची से वार कर के उसे घायल कर दिया. खून बहने से विभा बेहोश हो गई तो उस ने उसे बिस्तर पर पटक दिया और इसी हालत में वीडियो शूट कर वाट्सऐप पर डाल दिया. इस वीडियो के वायरल होते ही भोपाल में हड़कंप मच गया. थोड़ी देर में पुलिस के आला अफसर भी मौके पर पहुंच गए. एसपी (साउथ) राहुल लोढा ने भी रोहित से बातचीत कर के उस की मंशा जाननी चाही. शुरू में तो वह बात करने से कतराता रहा लेकिन खामोश रहने से बात नहीं बन रही थी, इसलिए उस ने जल्द ही अपने दिल की बात जाहिर कर दी कि वह विभा से प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है.

इस दौरान पुलिस ने रोहित के पिता को भी खबर कर दी थी, इसलिए वह अलीगढ़ से भोपाल के लिए निकल गए थे. दरअसल, रोहित की एक शर्त यह भी थी कि वह अपने पिता के आने के बाद ही दरवाजा खोलेगा. यह पुलिस और प्रशासन का इम्तिहान था. वजह अपनी पर उतारू हो आया रोहित विभा को जान से भी मार सकता था. ऐसे में पुलिस वालों ने उस की हर बात मानने में ही भलाई समझी और लगातार उस से बात कर के उसे उलझाए रखा.

रोहित ने दूध मांगा तो वह भी उसे दिया गया, लेकिन वह दरवाजा खोलने को तैयार नहीं था, इसलिए दूध की बोतल छत से रस्सी से लटका कर दी गई. रोहित ने बोतल का दूध लेने से मना कर दिया क्योंकि उसे डर था कि कहीं उस में कोई नशीला या बेहोश कर देने वाला पदार्थ न हो. इस के बाद उस ने हर चीज पैक्ड मांगी जो उसे मुहैया कराई गई. उधर रोहित द्वारा जारी वीडियो में विभा लहूलुहान और बेहोश दिखाई दे रही थी, जिसे देख कर उस के मांबाप और बहन की चिंता बढ़ती जा रही थी. वीडियो में रोहित एसआई एस.एस. राजपूत को भी कोसता नजर आया. दोपहर होतेहोते स्थिति और विकट हो चली थी. रोहित कुछ समझने को तैयार नहीं था और बारबार विभा से शादी करने की रट लगाए जा रहा था. खाना और पानी भी उसे बालकनी से दिया गया था, जो उस की मांग के मुताबिक पैक्ड था.

जब खूब हल्ला मच गया तो शाम के करीब 5 बजे आला पुलिस अधिकारी हाइड्रोलिक मशीन के जरिए 5वीं मंजिल तक पहुंचे और रोहित से बातचीत की. हाइड्रोलिक मशीन पर राहुल लोढ़ा के साथ एसडीएम दिशा नागवंशी और एएसपी रामवीर यादव थे. इन लोगों ने खिड़की से रोहित से बात की और उसे भरोसा दिलाया कि उस की शादी विभा से करवा दी जाएगी, इस में कोई अड़चन इसलिए नहीं है क्योंकि दोनों बालिग हैं और शादी के लिए राजी हैं. राहुल लोढ़ा ने समझदारी से काम लेते हुए रोहित को आश्वस्त किया कि शादी रजिस्टर्ड होगी, क्योंकि एसडीएम भी उन के साथ हैं. चूंकि बंद कमरे में शादी नहीं करवाई जा सकती थी, इसलिए उन्होंने रोहित से बाहर आने के लिए कहा.

रोहित समझ तो रहा था कि यह पुलिस की चाल भी हो सकती है, लेकिन अब तक 12 घंटे गुजर चुके थे और वह थकने लगा था. वह बारबार विभा को धमका रहा था. होश में आ चुकी विभा की समझ में भी आ गया था कि इस सिरफिरे से छुटकारा पाने का एक ही तरीका है कि उस की बात मान ली जाए. मेरी नहीं हुई तो मैं तुम्हें किसी और की भी नहीं होने दूंगा. अगर किसी और से शादी की तो मार डालूंगा, जैसे फिल्मी डायलौग बोलने वाले राहुल को थोड़ी तसल्ली तब हुई, जब विभा ने स्टांप पेपर पर शादी की सहमति दे दी. इधर पुलिस वाले भी कुछ इस तरह से पेश आ रहे थे, मानो बाहर आते ही दोनों की शादी करा देंगे. रोहित को लग रहा था कि वह प्यार की जंग जीत गया है, जमाना उस के सामने झुक गया है.

वह पूरी ठसक से बाहर निकल आया. इस के पहले उस ने कुछ मीडियाकर्मियों से वीडियो कालिंग के जरिए बात की और जीत का निशान अंगरेजी का ‘वी’ अक्षर बनाते हुए खुशी जाहिर की थी.  बाहर आते ही पुलिस ने सिरफिरे आशिक रोहित को गिरफ्तार कर लिया और विभा सहित उसे इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया, क्योंकि दोनों के शरीर से काफी खून बह चुका था. वहां गुस्से में मौजूद महिलाओं ने रोहित की जूतेचप्पलों और लातघूसों से खूब धुनाई की. इलाज के बाद रोहित को हिरासत में ले लिया गया और विभा को घर जाने दिया गया. अस्पताल में विभा ने बताया कि वह रोहित से प्यार नहीं करती, उस ने तो खुद के बचाव के लिए शादी के हलफनामे पर दस्तखत कर दिए थे.

विभा की मां चंद्रा ने खुलासा किया कि एक साल से रोहित विभा के पीछे पड़ा था और उसे तरहतरह से तंग कर रहा था. इसी साल होली के मौके पर 28 मार्च को भी वह उन के घर में घुस आया था, तब भी उस के हाथ में कट्टा था. इस की शिकायत थाने में लिखाई गई थी और पुलिस ने रोहित को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई थी. इधर मथुरा तक आ गए रोहित के पिता रेशमपाल को जैसे ही ड्रामे के खात्मे की जानकारी मिली, वह वहीं से वापस लौट गए. उन्होंने यह जरूर बताया कि वह रोहित की बेजा हरकतों से आजिज आ चुके हैं. इसीलिए कुछ दिन पहले उन्होंने उसे अपनी जायदाद से बेदखल कर दिया था. गांव में प्रधानी के चुनाव के दौरान रोहित द्वारा शराब चुराए जाने की बात भी उन्होंने बताई.

रेशमपाल ने ईमानदारी से यह भी बताया कि रोहित ने कई दफा इस लड़की (विभा) से फोन पर उन की बात कराई थी. यानी लोगों का यह अनुमान गलत नहीं था कि मामला उतना एकतरफा नहीं था, जितना विभा बता रही थी. उस ने भले ही रोहित से प्यार की बात नहीं स्वीकारी, पर यह जरूर कह रही थी कि रोहित का असली चेहरा सामने आने के बाद उस ने उस से दूरियां बनानी शुरू कर दी थीं. जाहिर है माशूका की इसी बेरुखी से रोहित झल्लाया हुआ था. उसे विभा बेवफा नजर आने लगी थी, लेकिन वह उसे दिलोदिमाग से निकाल नहीं पा रहा था. गिरफ्तारी के दूसरे दिन रोहित पुलिस वालों से यह कहता रहा कि उन एसपी साहब को लाओ, जिन्होंने शादी करवाने का वादा किया था.

उस के मुंह से यह सुन कर सभी को उस पर हंसी भी आई और तरस भी. पुलिस वाले इस ड्रामे को थर्सडे नाइट कहते नजर आए, क्योंकि इस की शुरुआत गुरुवार 12 जुलाई से हुई थी.  श्रीवास्तव परिवार अभी सदमे से उबरा नहीं है और न ही लंबे समय तक उबर पाएगा. रोहित ने 12 घंटे जो ड्रामा किया, उस की दहशत उन के सिर चढ़ कर बोल रही है. खुद विभा आशंका जता रही है कि अगर रोहित को जमानत मिली तो वह फिर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा. रोहित के पिता रेशमपाल का भी यही कहना है कि रोहित को जमानत नहीं मिलनी चाहिए. कथा लिखने तक रोहित को जमानत नहीं मिली थी, पर भोपाल के सीनियर वकीलों का कहना है कि कुछ देर से ही सही, उसे जमानत मिल ही जाएगी. इसलिए बदनामी झेल चुके श्रीवास्तव परिवार को संभल कर रहना चाहिए.

 

Murder Story : शादी का दबाव डालने लगी तो प्रेमी ने पैर से पिंकी का गला दबा दिया

पिंकी जैसी लड़कियां भले ही खुद पर कितना भी कौन्फीडेंस रखती हों, लेकिन सच्चाई यह है कि अपने कौन्फीडेंस की वजह से वे किसी न किसी के जाल में फंस ही जाती हैं. पिंकी सोचती थी कि वह जब चाहे रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर की हकीकत सामने ले आएगी. लेकिन उसे नहीं मालूम था कि वह मगरमच्छ है. आखिर वही हुआ जो…

मंजू गुप्ता अपने पति किशन गुप्ता के साथ समाधान दिवस पर कानपुर के थाना चकेरी पहुंची. उस समय एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा, एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास, सीओ अजीत प्रताप सिंह और थानाप्रभारी अजय सेठ थाने में ही मौजूद थे. थाना परिसर में फरियादियों की भीड़ लगी थी और अधिकारी बारीबारी से उन की समस्याएं सुन कर निदान करने की कोशिश कर रहे थे. फरियादियों में नेताजी नगर निवासी मंजू गुप्ता भी थी. बारी आने पर जब वह एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के सामने पहुंची तो अपनी लिखित फरियाद देते हुए फफक कर रो पड़ी. रोतेरोते उस ने कहा, ‘‘साहब, हमारी बेटी पिंकी उर्फ आंचल को घर से गायब हुए डेढ़ साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन अभी तक उस का कुछ पता नहीं चला. पता नहीं वह जिंदा है भी या नहीं. उस की गुमशुदगी और अपहरण की रिपोर्ट थाने में दर्ज है.’’

एसएसपी मीणा ने मंजू गुप्ता को भरोसा दिया कि वह उस की बेटी पिंकी की खोज कराएंगे और वह जहां भी होगी, बरामद की जाएगी. आश्वासन पा कर मंजू गुप्ता पति के साथ घर वापस आ गई. हालांकि एसएसपी के आश्वासन पर उन्हें यकीन नहीं था, क्योंकि अब तक वे लोग आईजी, डीआईजी से ले कर डीएम व कमिश्नर तक की चौखट पर दस्तक दे चुके थे, पर किसी ने भी उन की मदद नहीं की थी. फिर भी एसएसपी के आश्वासन पर उन के मन में आशा की एक नई किरण तो जागी ही थी. यह बात 21 जुलाई, 2018 की है.

एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा ने पिंकी गुप्ता अपहरण मामले को गंभीरता से लिया. उन्हें इस बात का अफसोस था कि डेढ़ साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद पुलिस पिंकी को बरामद नहीं कर सकी थी. उन्होंने इस मामले को हैंडल करने की जिम्मेदारी एसपी सुरेंद्र कुमार दास को सौंपी. दास हाल ही में अंबेडकर नगर से पदोन्नत हो कर आए थे और एसपी (पूर्वी) बनाए गए थे. एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने पिंकी अपहरण मामले को चुनौती के रूप में लिया. उन्होंने सीओ अजीत प्रताप सिंह, थानाप्रभारी अजय सेठ तथा चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह को अपने औफिस बुला लिया. साथ बैठ कर सभी ने इस मामले पर गंभीरता से विचारविमर्श किया. इसी मीटिंग में तय हुआ कि पिंकी अपहरण मामले की जांच चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह करेंगे. यह भी तय हुआ कि हर रोज की जांच से वह अधिकारियों को अवगत कराते रहेंगे.

24 जुलाई, 2018 को जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद जगदीश सिंह ने उसी दिन इस मामले की फाइल के पन्ने पलटते हुए अब तक हुई जांच के बारे में जानने की कोशिश की. पता चला कि पिंकी की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद तत्कालीन दरोगा संजय यादव को जांच सौंपी गई थी. बाद में संजय यादव ने पिंकी की गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया था. इस के बाद दरोगा राघवेंद्र सिंह, सुजीत कुमार मिश्रा तथा मुरलीधर पांडेय ने जांच की. इस दरमयान 55 पर्चे काटे गए थे. लेकिन पिंकी का कहीं पता नहीं चला था. इस के बाद इस मामले की जांच जगदीश सिंह को सौंपी गई थी.

दरोगा जगदीश सिंह ने फाइल खंगाली तो कई बातों ने उन्हें चौंकाया पिंकी अपहरण केस की पूरी फाइल का अध्ययन करने के बाद जगदीश सिंह ने पिंकी की मां मंजू गुप्ता को चौकी बुलाया और उस से पूछताछ कर के उस का बयान दर्ज किया. मंजू ने बताया कि पिंकी उर्फ आंचल 27 सितंबर, 2016 को यह कह कर घर से निकली थी कि वह मैडिकल परीक्षण कराने उर्सला अस्पताल जाएगी. उसे थाना बाबूपुरवा की पुलिस ने बुलाया है. उस के बाद वह घर वापस नहीं लौटी थी. पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगी.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ जगदीश ने पूछा.

‘‘हां साहब, है.’’ मंजू ने जवाब दिया.

‘‘किस पर?’’

‘‘रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा उस के दोस्त अनुज सिंह पर.’’

‘‘उन के खिलाफ तुम्हारे पास कोई सबूत है क्या?’’ जगदीश सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, सबूत तो कोई नहीं है. पर शक जरूर है. दिखावे के लिए तो बउआ ठाकुर ने मेरी मदद की है लेकिन पिंकी के अपहरण का षडयंत्र उसी ने रचा है. उसी ने अपने दोस्तों की मदद से पिंकी का अपहरण किया है.’’

विवेचक जगदीश सिंह ने रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि बउआ ठाकुर शिवकटरा का रहने वाला है और क्षेत्र का दबंग आदमी है. वह डीएवी कालेज का छात्र नेता रहा था और उस ने छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ा था. यह अलग बात है कि वह हार गया था. बउआ प्रौपर्टी डीलिंग का काम करता था, साथ ही वह वकील भी था. उस की गिनती दबंग वकीलों में होती थी. बउआ ठाकुर के दोस्त अनुज सिंह के बारे में सिंह ने जानकारी जुटाई तो पताचला कि वह केडीए कालोनी श्यामनगर का रहने वाला है और ट्रैवल एजेंसी चलाता है. उस का भी अपने क्षेत्र में दबदबा है. साथ ही उस की राजनीतिक गलियारों में पैठ भी है. बउआ ठाकुर से उस की गहरी दोस्ती है. दोनों साथ उठतेबैठते हैं और शराब की महफिल जमाते हैं.

बउआ ठाकुर और अनुज सिंह शक के घेरे में आए तो जगदीश सिंह ने पिंकी गुप्ता उर्फ आंचल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर देखी. जिस दिन पिंकी गायब हुई थी, उस दिन उस की जिनजिन नंबरों पर बात हुई थी, उन नंबरों को जगदीश सिंह ने अलग पेपर पर लिख लिया. इस के बाद उन्होंने उन नंबरों पर काल कर के एकएक शख्स को थाने बुलाया और उन से पूछताछ की. बउआ ठाकुर आया संदेह के दायरे में इसी दौरान एक युवक जगदीश सिंह के हाथ लगा, जिस ने बताया कि 27 सितंबर, 2016 को उस ने पिंकी गुप्ता को छात्र नेता व अधिवक्ता बउआ ठाकुर और उस के दोस्त अनुज सिंह के साथ श्यामनगर में हाइवे पुल के नीचे कार में देखा था.

जगदीश सिंह ने इसी क्लू को आधार बनाया. उन्होंने सीधे अधिवक्ता बउआ ठाकुर पर हाथ डालना उचित नहीं समझा. सोचविचार कर उन्होंने पहले अनुज को उठाने का तानाबाना बुना. इस के लिए उन्होंने एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास से संपर्क किया और सारी जानकारी देते हुए अनुज व बउआ को अलगअलग गिरफ्तार करने की अनुमति मांगी. एसपी ने जगदीश सिंह की जांच प्रगति के आधार पर दोनों की गिरफ्तारी की अनुमति दे दी, साथ ही सहयोग के लिए स्पैशल फोर्स भी मुहैया करा दी. इसी बीच विवेचक जगदीश सिंह को काल डिटेल्स से एक और चौंकाने वाली बात पता चली कि जिस दिन पिंकी बउआ व अनुज के साथ कार में देखी गई थी, उसी रात से तीनों के मोबाइल फोन स्विच्ड औफ हो गए थे. इस का मतलब उस रात कोई न कोई ऐसी अनहोनी जरूर हुई थी, जिस की वजह से तीनों को मोबाइल स्विच्ड करने पड़े थे. इस क्लू के आधार पर बउआ ठाकुर व अनुज सिंह पुलिस के रडार पर आ गए.

25 अगस्त, 2018 की रात दरोगा जगदीश सिंह ने एसपी (पूर्वी) द्वारा उपलब्ध कराई गई स्पैशल फोर्स की मदद से अनुज सिंह के केडीए कालोनी, श्यामनगर आवास पर छापा मारा. पुलिस छापे से घर में हड़कंप मच गया. घर वालों व पड़ोसियों ने अनुज की गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने किसी की एक नहीं सुनी और अनुज सिंह को गिरफ्तार कर थाना चकेरी ले आई. थाना चकेरी पर अनुज सिंह से पिंकी गुप्ता के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकरते हुए बोला, ‘‘मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता.’’

थानाप्रभारी अजय सेठ व सीओ अजीत प्रताप सिंह ने भी अनुज से हर तरह से पूछताछ की, लेकिन उस ने जुबान नहीं खोली. इस पर विवचेक जगदीश सिंह ने क्लू देने वाले आदमी से अनुज का सामना कराया. उसे देखते ही अनुज सिंह को पसीना आ गया. आखिर उसे जुबान खोलनी पड़ी. अनुज सिंह ने पुलिस को बताया कि पिंकी गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं है. उस ने और बउआ ठाकुर ने पिंकी का अपहरण कर उसी दिन मार डाला था और उस का शव हमीरपुर ले जा कर यमुना नदी में फेंक दिया था. यह पूछे जाने पर कि पिंकी को क्यों मारा, अनुज बोला, ‘‘यह सब बउआ से पूछो. मैं ने तो दोस्ती के नाते उस का साथ दिया था.’’

आखिर खुल ही गया पिंकी की गुमशुदगी का भेद अनुज सिंह ने पिंकी की हत्या का खुलासा किया तो पुलिस सकते में आ गई. आननफानन में इंसपेक्टर अजय सेठ ने पिंकी की हत्या किए जाने की जानकारी एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास व सीओ कैंट अजीत प्रताप सिंह को दे दी. अधिकारियों के निर्देश पर दबंग छात्र नेता, अधिवक्ता रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर के शिवकटरा, गांधीनगर स्थित घर पर भारी पुलिस बल के साथ छापा मारा गया. पुलिस उसे बंदी बना कर थाना चकेरी ले आई. बउआ ठाकुर की गिरफ्तारी की खबर छात्र नेताओं और वकीलों को लगी तो वे थाना चकेरी आ पहुंचे और हंगामा करने लगे. हंगामे की खबर पा कर एसपी सुरेंद्र कुमार दास व सीओ कैंट अजीत प्रताप सिंह भी आ गए. उन्होंने छात्र नेताओं और वकीलों से अपील की कि वे हंगामा न करें. अगर बउआ ठाकुर निर्दोष है तो उसे बाइज्जत छोड़ दिया जाएगा.

एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने जब बउआ से पिंकी के संबंध में पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब उस का सामना अनुज सिंह से करा कर बताया गया कि उस ने पिंकी की हत्या का राज उगल दिया है तो बउआ ने भी सिर झुका लिया. इस के बाद उस ने पिंकी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. यही नहीं, दोनों ने हत्या में प्रयुक्त अर्टिगा कार भी बरामद करा दी. मंजू गुप्ता को जब पिंकी की हत्या हो जाने की खबर मिली तो वह थाना चकेरी पहुंच गई. उस ने हवालात में बंद बउआ से पूछा कि तुम तो पिंकी को बहुत चाहते थे, फिर उसे क्यों मार डाला? इस पर बउआ बोला, ‘‘तुम्हारी बेटी मुझे ब्लैकमेल कर के शादी का दबाव डालने लगी थी. आखिर क्या करता मैं?’’

चूंकि बउआ ठाकुर और अनुज सिंह ने पिंकी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, इसलिए विवेचक जगदीश सिंह ने दोनों को अपरहण की धारा 364, हत्या की धारा 302 और लाश गायब करने के लिए धारा 201 में नामजद कर विधिसम्मत बंदी बना लिया. पुलिस बउआ व अनुज को ले कर हमीरपुर गई, जहां दोनों ने पिंकी के शव को यमुना पुल के नीचे फेंका था. लेकिन पुलिस शव बरामद नहीं कर पाई. पुलिस यमुना किनारे स्थित थानों से अज्ञात शव के बारे में जानकारी जुटा कर पिंकी के शव की शिनाख्त कराने का प्रयास कराने लगी.

पिंकी कौन थी, वह बउआ ठाकुर के संपर्क में कैसे आई, बउआ ने उसे अपने प्यार के जाल में कैसे फंसाया और फिर उस की हत्या क्यों और कैसे की, यह सब जानने के लिए हमें पिंकी के अतीत को टटोलना पड़ेगा. आम लड़की से खास बनी पिंकी कानपुर महानगर के चकेरी थाना के अंतर्गत एक मोहल्ला है नेताजी नगर. इसी मोहल्ले में किशन गुप्ता अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी मंजू के अलावा केवल एक ही बेटी थी पिंकी उर्फ आंचल. किशन गुप्ता जीटी रोड पर अंडे का ठेला लगाता था. उस की पत्नी मंजू भी उस के काम में हाथ बंटाती थी. किशन जो कमाता था, उसी से परिवार का भरणपोषण होता था. मंजू गुप्ता की बेटी पिंकी उर्फ आंचल देखनेभालने में काफी सुंदर थी. उस ने जब जवानी की ओर कदम बढ़ाया तो उस का अंगअंग दमकने लगा. गोरी रंगत और खूबसूरत आंखों वाली पिंकी को जो भी देखता, आकर्षित हो जाता.

पिंकी गुप्ता का चचेरा भाई दिलीप गुप्ता भी नेताजी नगर में पिंकी के घर के पास रहता था. उस की अपने चाचा किशन व चाची मंजू से पटरी नहीं बैठती थी. दोनों के बीच अकसर छोटीमोटी बातों को ले कर झगड़ा होता रहता था. पिंकी इस झगड़े से बहुत परेशान रहती थी. मां का पक्ष ले कर कभीकभी वह दिलीप से भी भिड़ जाती थी, जिस से दिलीप उस से नाराज रहने लगा था. एक रोज पिंकी चचेरे भाई दिलीप की शिकायत ले कर एसएसपी औफिस जा रही थी, तभी रामादेवी चौराहे पर उस की मुलाकात अधिवक्ता रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर से हो गई. उस रोज टैंपो औटो की हड़ताल थी, जिस से पिंकी को सवारी नहीं मिल रही थी.

अधिवक्ता बउआ ठाकुर कचहरी जा रहा था, पुलिस कार्यालय भी कचहरी के पास ही था. बउआ ठाकुर ने पिंकी से कहा कि उस की कार में बैठ जाए, वह उसे पुलिस औफिस के सामने उतार देगा. पिंकी की मजबूरी थी, सो वह गाड़ी में बैठ गई. पिंकी खूबसूरत होने के साथसाथ बातूनी भी थी. रामादेवी चौराहे से पुलिस औफिस तक वह उस से बातें करती रही. एक मिनट के लिए भी उस का मुंह बंद नहीं हुआ. जिस तरह वह मुसकरामुसकरा कर बातें कर रही थी, उस से रीतेंद्र सिंह बहुत प्रभावित हुआ. पहली ही नजर में पिंकी उस के दिल में उतर गई. वह बैक मिरर में उस का चेहरा देखते हुए उस की बातों का जवाब देता रहा. बातोंबातों में उस ने पिंकी का मोबाइल नंबर भी ले लिया.

बउआ ने धीरेधीरे पांव आगे बढ़ा कर थाम लिया पिंकी का हाथ  पिंकी उर्फ आंचल से हुई पहली मुलाकात में ही बउआ जैसे उस का दीवाना हो गया. उस का फोन नंबर तो उस के पास था ही, इसलिए जब भी उस का मन करता, उस से फोन पर बात कर लेता. रीतेंद्र उर्फ बउआ ठाकुर शरीर से हृष्टपुष्ट व स्मार्ट था, सो पिंकी को भी उस से बातें करना अच्छा लगता था. धीरेधीरे उन दोनों के बीच दोस्ती हो गई. यही दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे. एक दिन पिंकी के चचेरे भाई दिलीप के घर चोरी हो गई. दिलीप ने अपनी चाची मंजू व चचेरी बहन पिंकी के विरुद्ध थाना चकेरी में रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने मंजू के घर तलाशी ली तो चोरी का कुछ सामान बरामद हो गया.

पुलिस ने मांबेटी को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि मंजू चिल्लाती रही कि उस ने चोरी नहीं की है, बल्कि उसे साजिशन फंसाया गया है. लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी और मंजू और उस की बेटी पिंकी को जेल भेज दिया.  प्रेमिका पिंकी के जेल जाने की बात अधिवक्ता बउआ ठाकुर को पता चली तो वह तिलमिला उठा. उस ने दौड़धूप कर के पिंकी व उस की मां मंजू की जमानत करा दी. इस दरम्यान दोनों को 14 दिन जेल में रहना पड़ा. चूंकि वकील बउआ ठाकुर ने मंजू की जमानत कराई थी, इसलिए वह उस के अहसान तले दब गई और उसे अपन हितैषी मानने लगी.

पिंकी का भी प्यार उमड़ पड़ा और वह बउआ को अपना सच्चा प्रेमी समझ बैठी. इस के बाद बउआ और पिंकी का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों साथसाथ घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने लगे. दोनों का शारीरिक मिलन भी होने लगा. रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर चकेरी थाना के शिवकटरा, गांधीग्राम में रहता था. वहां उस का अपना मकान था. वह छात्र जीवन से ही दबंग था. डीएवी कालेज में पढ़ाई के दौरान उस ने छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह हार गया था. बउआ प्रौपर्टी डीलिंग के साथसाथ वकालत भी करता था. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी और वह क्षेत्र का दबंग व्यक्ति था.

मांबाप ने भी नहीं समझाया पिंकी को पिंकी, बउआ के प्यार में ऐसी दीवानी हुई कि वह उस के साथ शादी रचाने का ख्वाब देखने लगी. ख्वाब ही नहीं देखने लगी बल्कि उस पर शादी के लिए दबाव भी डालने लगी. जबकि बउआ शादीशुदा था. भला वह शादी के लिए कैसे राजी होता. पिंकी जब भी शादी का प्रस्ताव रखती, बउआ यह कह कर टाल देता कि अभी तो मौजमस्ती के दिन हैं. शादी की जल्दी क्या है.

अब तक पिंकी के मांबाप भी जान गए थे कि पिंकी और बउआ ठाकुर एकदूसरे को चाहते हैं. लेकिन उन्होंने कभी विरोध नहीं किया. इस का कारण यह था कि बउआ ठाकुर मंजू और किशन की हरसंभव मदद करता था.  मांबाप यह भी जानते थे कि अगर वे पिंकी को मना भी करेंगे तो भी वह बउआ का साथ नहीं छोड़ेगी. इसलिए उन्होंने पिंकी को बउआ ठाकुर के साथ आनेजाने की छूट दे दी थी. पिंकी का जब भी जी चाहता, बउआ के साथ चली जाती थी. इधर पिंकी के चचेरे भाई दिलीप को जब पता चला कि दबंग बउआ ठाकुर पिंकी के घर वालों की मदद कर रहा है तो उस ने भी बउआ से दोस्ती कर ली. जल्द ही दिलीप भी बउआ ठाकुर का खास बन गया. दिलीप की शराब पार्टी भी बउआ ठाकुर व उस के दोस्तों के साथ जमने लगी. पार्टी का खर्च दिलीप ही उठाता था.

जब पिंकी को बउआ ठाकुर और दिलीप की दोस्ती की जानकारी हुई तो वह बउआ से नाराज रहने लगी. उस ने बउआ के साथ आनाजाना भी कम कर दिया. अब वह बहुत अनुरोध करने पर ही उस के साथ जाती थी. दरअसल पिंकी को यह गवारा नहीं था कि उस का प्रेमी उस के पारिवारिक दुश्मन दिलीप से दोस्ती रखे. इसलिए वह बउआ से दूरी बनाने लगी थी. 19 जून, 2016 को पिंकी बाबूपुरवा कालोनी में रहने वाले किसी रिश्तेदार के घर जा रही थी, तभी ट्रांसपोर्ट चौराहे पर उसे बउआ ठाकुर मिल गया. उस ने पिंकी को साथ चलने को कहा. लेकिन उस ने साफ इनकार कर दिया. बउआ पिंकी को जबरदस्ती खींच कर कार में बिठाने लगा. इस पर पिंकी ने हंगामा खड़ा कर दिया, जिस से भीड़ जुट गई. भीड़ जुटते देख बउआ वहां से रफूचक्कर हो गया.

पिंकी ने बउआ ठाकुर के खिलाफ दर्ज कराया केस  इस के बाद पिंकी बदहवास हालत में थाना बाबूपुरवा पहुंची और उस ने रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा अपने चचेरे भाई दिलीप के विरुद्ध छेड़छाड़, मारपीट, गालीगलौज, धमकी देने और पोक्सो ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. पिंकी ने चचेरे भाई दिलीप को सबक सिखाने के लिए रिपोर्ट में उस का नाम भी दर्ज कराया. बउआ ठाकुर को जब पिंकी द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने की जानकारी मिली तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उस ने पिंकी पर दबाव डाला कि वह इस मामले को रफादफा कर दे. लेकिन पिंकी राजी नहीं हुई. वह सीधेसीधे ब्लैकमेलिंग पर उतर आई. उस ने बउआ ठाकुर से कहा कि वह समझौता तभी करेगी, जब वह उस से शादी कर लेगा. उस ने यह भी धमकी दी कि अगर उस ने शादी नहीं की तो वह उस की जिंदगी में भी जहर घोल देगी. इस के लिए वह उस की पत्नी को अपने और उस के अवैध संबंधों की जानकारी दे देगी.

पिंकी की धमकी से बउआ ठाकुर घबरा गया. वह जानता था कि पिंकी जिद्दी लड़की है, वह किसी भी हद तक जा सकती है. अत: गले की इस फांस को निकालने के लिए बउआ ने एक भयानक निर्णय ले लिया और समय का इंतजार करने लगा. इस बीच बउआ ठाकुर ने अपने अजीज दोस्त अनुज सिंह से भी मुलाकात की जो ट्रैवल एजेंसी चलाता था. वह केडीए कालोनी, श्यामनगर में रहता था. बउआ ने उसे अपनी परेशानी बताते हुए मदद मांगी तो अनुज राजी हो गया. बउआ ठाकुर वकील था. उस ने मामले को रफादफा करने के लिए एक शपथपत्र तैयार कर रखा था. वह इस शपथपत्र पर पिंकी से दस्तखत कराना चाहता था. लेकिन पिंकी इस के लिए राजी नहीं थी. उस ने पिंकी को समझौते के लिए मोटी रकम देने का भी लालच दिया, लेकिन वह टालमटोल करती रही.

पिंकी ने मौत की ओर खुद बढ़ाए कदम पिंकी ने बउआ के खिलाफ पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले में उम्र का पता लगाने के लिए पिंकी का मैडिकल होना था. बाबूपुरवा पुलिस ने 27 सितंबर, 2016 को उसे थाने बुलाया और मैडिकल कराने उर्सला अस्पताल ले गई. पिंकी के मैडिकल की जानकारी बउआ ठाकुर को हुई तो वह अपने दोस्त अनुज सिंह के साथ अर्टिगा कार ले कर कचहरी पहुंच गया. अर्टिगा कार अनुज के दोस्त गोलू की थी. यहीं से बउआ ठाकुर ने फोन कर के पिंकी को समझौते के लिए बुलाया. मैडिकल करा कर पिंकी कचहरी गेट पहुंची तो बउआ ने उसे काली स्क्रीन चढ़ी अर्टिगा कार में बैठा लिया. वहां से ये लोग छप्पनभोग चौराहा आए, जहां बउआ, पिंकी और अनुज ने नाश्ता किया. वहां से निकल कर उन की कार श्यामनगर हाइवे हो कर हमीरपुर रोड की ओर दौड़ने लगी.

कार अनुज चला रहा था, जबकि पीछे वाली सीट पर बउआ ठाकुर और पिंकी बैठे थे. रात करीब 8 बजे चलती कार में पिंकी और बउआ के बीच समझौते के लिए झगड़ा होने लगा. शातिरदिमाग बउआ ठाकुर ने समझौते के शपथ पत्र पर जबरदस्ती पिंकी के दस्तखत करा लिए और समझौते के लिए रुपए देते हुए वीडियो भी बना लिया.  इस के बाद बउआ ठाकुर ने पिंकी को बेरहमी से पीटा और कार में अपने पैरों के नीचे गिरा दिया. बाद में उस ने पैर से ही पिंकी का गला दबा कर उसे बेरहमी से मार डाला. पिंकी की सांसें थमने के बाद बउआ और अनुज हमीरपुर स्थित यमुना पुल पहुंचे. वहां बउआ ने अनुज की मदद से पिंकी की लाश उफनती यमुना में फेंक दी. फिर दोनों वापस घर लौट आए. बउआ ने पिंकी का मोबाइल तोड़ कर फेंक दिया था और दोनों ने अपने मोबाइल स्विच्ड औफ कर दिए थे.

इधर 27 सितंबर, 2016 की रात तक जब पिंकी वापस नहीं लौटी तो उस की मां मंजू को चिंता हुई. वह रात भर पिंकी के इंतजार में जागती रही. दूसरे दिन वह पिंकी की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना बाबूपुरवा जा ही रही थी कि बउआ ठाकुर आ गया. उस ने मंजू से कहा कि उस का पिंकी से समझौता हो गया है. समझौते के तौर पर 10 हजार रुपए ले कर वह वैष्णोदेवी के दर्शन करने गई है. हफ्ते भर में आ जाएगी. सबूत के तौर पर उस ने मंजू को शपथ पत्र तथा वीडियो दिखाया, जिस से मंजू को विश्वास हो गया. पिंकी जब हफ्ते भर बाद भी वापस नहीं लौटी और उस से फोन पर भी संपर्क नहीं हुआ तो मंजू ने बउआ से मदद मांगी. तब बउआ ने हमदर्द बन कर मंजू की तरफ से 12 नवंबर, 2016 को चकेरी थाने में पिंकी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद दरोगा संजय यादव ने जांच की.

जांच के बाद उन्होंने गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया. बाद में एक के बाद एक कई अफसरों ने इस मामले की जांच की. लेकिन डेढ़ साल बाद भी पिंकी का कुछ पता नहीं चला. इस बीच बउआ ठाकुर मंजू का हमदर्द बन कर मंजू को पुलिस अधिकारियों की चौखट पर ले जाता रहा.  जिस से पुलिस को भी उस पर शक नहीं हुआ. मंजू की हमदर्दी का फायदा उठा कर बउआ ठाकुर ने समझौते का शपथ पत्र तथा पिंकी के अपहरण की रिपोर्ट कोर्ट में लगा कर अपने मारपीट, छेड़छाड़, धमकी व पोक्सो ऐक्ट के मामले को खत्म करा दिया. बउआ ठाकुर व अनुज सिंह निश्चिंत थे कि वे पुलिस की पकड़ में नहीं आएंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन के पाप का घड़ा फूट ही गया और पिंकी की हत्या का राज खुल गया.

दरअसल, 21 जुलाई 2018 को मंजू गुप्ता समाधान दिवस पर अपनी फरियाद ले कर थाना चकेरी पहुंच गई और एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के समक्ष पिंकी को बरामद करने की गुहार लगाई. एसएसपी के निर्देश और एसपी सुरेंद्र कुमार दास की मौनिटरिंग में जब दरोगा जगदीश सिंह ने जांच शुरू की तो एक महीने में ही पिंकी के अपहरण व हत्या का परदाफाश हो गया.

27 अगस्त, 2018 को थाना चकेरी पुलिस ने अभियुक्त रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा अनुज सिंह को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्रेमिका के चक्कर में मारा गया भोगनाथ

कड़ाके की सर्दी हो और ऊपर से बरसात हो जाए तो सर्दी के तेवर और भी भयावह हो जाते हैं. रोज की तरह दोपहर को भोगनाथ बिट्टू के घर पहुंचा तो वह रजाई में लिपटी बैठी थी. दोनों एकदूसरे को देख कर मुसकराए, फिर हथेलियां रगड़ते हुए भोगनाथ बोला, ‘‘आज तो गजब की सर्दी है.’’

‘‘इसीलिए तो रजाई में दुबकी बैठी हूं,’’ बिट्टू बोली, ‘‘रजाई छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा, लेकिन तुम इतनी ठंड में कहां घूम रहे हो?’’

‘‘घूम नहीं रहा, सुबह से तुम्हें देखा नहीं था, इसलिए रोज की तरह तुम से मिलने चला आया,’’ भोलानाथ ने जवाब दिया, ‘‘सोचा था, तुम आग ताप रही होगी तो मैं भी हाथ सेंक लूंगा, लेकिन यहां तो हालात दूसरे ही है. लगता है मुझ से ज्यादा तुम्हें गर्मी की जरूरत है. दूसरे तरीके से हाथ सेंक कर मुझे तुम्हारी ठंड दूर करनी होगी.’’  कहने के बाद भोगनाथ ने बिट्टू का चेहरा अपने हाथों में ले लिया.

बिट्टू ने एक झटके से अपना चेहरा अलग कर लिया और ठंडे हो गए गालों पर हथेलियां मलते हुए बोली, ‘‘हटो भी, कितने ठंडे हैं तुम्हारे हाथ, एकदम बर्फ जैसे.’’

‘‘बिट्टू, कुछ चीजें ठंडी जरूर लगती हैं, लेकिन उन की तासीर बड़ी गर्म होती है,’’ भोगनाथ ने चुहल की, ‘‘मेरी बात पर विश्वास न हो तो आजमा कर देख लो. 2 मिनट में मेरे हाथ तुम्हें गर्म तो लगने ही लगेंगे, खुद भी इतनी गर्म हो जाओगी कि रजाई शरीर से उतार फेंकोगी.’’

भोगनाथ के कथन का आशय समझ कर बिट्टू के गाल सुर्ख हो गए. वह उसे मीठी फटकार लगाते हुए बोली, ‘‘मैं तुम से कई बार कह चुकी हूं कि इस तरह की बातें मत किया करो. लेकिन तुम हो कि मानते ही नहीं.’’

भोगनाथ ने थोड़ा आगे की ओर झुक कर बिट्टू की आंखों में झांका, ‘‘तो फिर कैसी बातें किया करूं?’’

‘‘वैसी ही अच्छीअच्छी बातें, जैसे दूसरे प्रेमी करते हैं.’’

‘‘प्रेमियों की बात कहीं से भी शुरू हो, जिस्म पर ही पहुंच कर खत्म होती है.’’

‘‘भोग, अभी हमारी शादी नहीं हुई है.’’

‘‘शादी भी जल्दी हो जाएगी.’’

‘‘तब जो मन में आए, बातें कर लेना.’’

‘‘बातें तो अभी भी कर रहा हूं. शादी के बाद तो कुछ और करूंगा.’’

बिट्टू को उस की बातों में रस आने लगा. मुसकरा कर उस ने पूछा, ‘‘शादी के बाद क्या करोगे?’’

‘‘कह कर बताऊं या कर के?’’

‘‘फिर शुरू हो गए.’’

‘‘उकसा तो तुम ही रही हो,’’ भोगनाथ मुसकराया, ‘‘लगता है तुम्हारा मन डोल रहा है.’’

जवाब में मुंह खोलने के लिए बिट्टू ने मुंह खोला ही था कि तभी हवा का तेज झोंका बरसात की ठंडी फुहारों को खुले दरवाजे के भीतर तक ले आया. ठंड से बिट्टू और भोगनाथ दोनों के बदन सिहर उठे. बिट्टू ने रजाई को और मजबूती से लपेट लिया, ‘‘उफ! यह बारिश और यह ठंड आज किसी की जान ले कर ही मानेगी.’’

‘‘किसी की क्या, फिलहाल तो मेरी जान पर ही बनी हुई है.’’

‘‘वो कैसे?’’

‘‘तुम ने तो सर्दी से अपना बचाव कर रखा है, मैं खुले दरवाजे के सामने खड़ा ठंड से कांप रह हूं.’’

‘‘तो दरवाजा भेड़ कर तुम भी रजाई ओढ़ लो.’’ बिट्टू के मुंह से अनायास निकल गया. यह बात उस ने कैसे कह दी. वह खुद ही नहीं समझ पाई.

भोगनाथ को शायद इसी पल की प्रतीक्षा थी. बिट्टू ने उस से दरवाजा भेड़ने को कहा था, पर उस ने दरवाजा बंद कर के सिटकनी लगा दी. उस के पास आ कर बिटटू की रजाई में घुसने लगा, ‘‘बिट्टू, तुम कितनी गर्म हो. अपने जैसा मुझे भी गर्म कर दो न?’’

‘‘मेरी रजाई में तुम कहां घुसे आ रहे हो,’’ बिट्टू ने हड़बड़ा कर कहा, ‘‘कोई आ जाए तो मैं मुफ्त में बदनाम हो जाऊंगी.’’

‘‘इश्क की दुनिया में उन का ही नाम होता है, जो बदनाम होते हैं.’’

‘‘समझने की कोशिश करो भोग,’’ बिट्टू ने प्रतिरोध किया, ‘‘तुम लड़के हो, तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी.’’

‘‘मैं चाहता भी नहीं हूं कि कोई तुम्हारा मुंह देखे. तुम्हारा मुंह देखने के लिए मैं हूं न.’’ भोगनाथ ने रजाई के साथसाथ बिट्टू को भी जकड़ लिया. बिट्टू के बदन में ठंड की सिहरन दौड़ी तो पुरुष स्पर्श की मादक अनुभूति भी हुई.

गर्म रजाई और बिट्टू के तन की गरमी से भोगनाथ का शरीर सुलगने लगा. रजाई के भीतर से ही उस ने बिट्टू की कमर में हाथ डाल दिया. बिट्टू के तनमन में चिंगारियां सी चटखने लगीं. आनंद की उठती लहरों से उस की पलकें मुंदने लगीं और सांसों की रफ्तार तेज हो गई. दोनों चुप थे, लेकिन उन की शारीरिक गतिविधियां एकदूसरे से बहुत कुछ कह रही थीं. मस्ती में भर कर वह भोगनाथ को अपने ऊपर खींचने लगी. बिट्टू की देह को मस्त और बहकते देख कर भोगनाथ ने उसे निर्वस्त्र किया, फिर स्वयं भी निर्वस्त्र हो गया. इस के बाद दोनों एकदूसरे में समा गए.

कुछ देर में जब दोनों के तन की आग ठंडी हुई तो दोनों एकदूसरे की बांहों से आजाद हुए. उस के बाद ही बिट्टू को पता चला कि पुरुष संसर्ग कितना आनंददायक होता है.

उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के पिसावां थाना क्षेत्र के गांव सरवाडीह में भगौती रहता था. उस के परिवार में उस की पत्नी रामश्री और 2 बेटियां बिट्टू, सीमा और एक बेटा शोभित था. भगौती पिसावां कस्बे में एक दुकान पर लोहे की ग्रिल बनाने का काम करता था. भगौती को मिलने वाली मजदूरी से घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता था. घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी.

घर में बिट्टू भाईबहनों में सब से बड़ी थी. बात उस समय की है, जब बिट्टू की उम्र 16 साल थी. यौवन की दहलीज पर बिट्टू की खूबसूरती निखर गई थी.

भगौती के मकान से कुछ दूरी पर केदार रहता था. उस के परिवार में पत्नी जयरानी और 3 बेटों भोगनाथ, पिंटू और शिवा के अलावा 1 बेटी सविता थी. केदार मेहनतमजदूरी कर के  परिवार का भरणपोषण करता था. दोनों के घरों में काफी मेलजोल था और एकदूसरे के घर भी आनाजाना था.

आनेजाने के दौरान जवान होती बिट्टू पर भोगनाथ की नजर पड़ी तो उस की मदमस्त काया देख कर उस की नजरें उस पर जम गईं. जैसी लड़की की चाहत उस के दिल में थी, बिट्टू ठीक वैसी थी. बिट्टू का हसीन चेहरा उस की आंखों के रास्ते उस के दिल में उतरता चला गया.

घर के रास्ते पहले से खुले हुए थे. भोगनाथ की बिट्टू से खूब पटती थी. उस का कारण भी था, बिट्टू भी दिल ही दिल में भोगनाथ को पसंद करने लगी थी. धीरेधीरे वह भी उस की तरफ खिंचती चली गई. दोनों एकदूसरे से दिल ही दिल में प्यार करते थे. अपने प्यार का इजहार करने के लिए उन के पास पर्याप्त अवसर थे. इसलिए उन्हें न मोहब्बत के इजहार में वक्त लगा न इश्क के इकरार में.

गांव में मकान एक लाइन से बने थे. उन की छतें भी आपस में मिली हुई थीं. भोगनाथ अपने मकान से कई मकानों की छत फांद कर बिट्टू के पास पहुंच जाता था और छत पर बने कमरे में उस के साथ घंटों प्यार की मीठीमीठी बातें करता था.

प्रेम के हिंडोले में झूमती हुई बिट्टू कहती, ‘‘भोग, दिल तो मैं ने तुम्हें दे दिया है, पर तुम भी उस की लाज रखना. देखना कभी भूले से मेरा दिल न टूटे.’’

‘‘कैसी बात करती हो बिट्टू, तुम्हारा दिल अब मेरी जान है और कोई अपनी जान को यूं ही जाने देता है क्या?’’

‘‘इसी भरोसे पर तो मैं ने तुम से प्यार किया है. मनआत्मा से तुम्हें वरण कर के मैं 7 जन्मों के लिए तुम्हारी हो चुकी. देखना है कि तुम किस हद तक प्यार निभाओगे.’’

‘‘प्यार निभाने की मेरी कोई हद नहीं है. प्यार निभाने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं.’’

बिट्टू ने इत्मीनान से सांस ली, ‘‘पता नहीं, वह दिन कब आएगा, जब मैं तुम्हारी पत्नी बनूंगी.’’

‘‘विश्वास रखो बिट्टू, हमारे प्यार को मंजिल मिलेगी.’’ बिट्टू का हाथ अपने हाथों में ले कर भोगनाथ बोला, ‘‘वैसे भी हमारी शादी में कोई अड़चन तो है नहीं, हमारा धर्म और जाति एक है. हमारा सामाजिकआर्थिक स्तर एक जैसा है. सब से बड़ी बात यह कि हम दोनों प्यार करते हैं.’’

भोगनाथ की बात तो बिट्टू को यकीन दिलाती ही थी, उसे खुद भी पूरा भरोसा था कि दोनों की शादी कोई अड़चन नहीं आएगी. इसलिए उसे अपने प्रेम व भविष्य के प्रति कभी नकारात्मक विचार नहीं आते थे. उसे पलपल भोगनाथ का इंतजार रहता था. भोगनाथ के आते ही वह खुली आंखों से भविष्य के सुनहरे सपने देखने लगती थी.

तन्हाई, दो जवां जिस्म और किसी के आने का कोई डर नहीं. यही भावनाओं के बहकने का पूरा वातावरण होता था. कभीकभी बिट्टू और भोगनाथ के दिल बहकने लगते थे, लेकिन बिट्टू जल्द ही संभल जाती और भोगनाथ को भी बहकने से रोक लेती थी. लेकिन एक वर्ष पूर्व कड़कड़ाती ठंड में वह सब तनहाई में हो गया, जो बिट्टू नहीं चाहती थी.

उस दिन दोपहर को बने शारीरिक संबंध में बिट्टू को ऐसा आनंद आया कि वह बारबार उस आनंद को पाने के लिए उतावली रहने लगी. भोगनाथ भी कम मतवाला नहीं था.

इसी दौरान एक दिन इत्तफाक से बिट्टू की अनस नाम के एक युवक से बात हुई. उस के बाद इन दोनों की प्रेम कहानी में एक नया मोड़ आ गया. सीतापुर की सीमा से सटे हरदोई जनपद के टडि़यावां थाना क्षेत्र के कस्बा गोपामऊ में नवी हसन रहते थे. नवी हसन के परिवार में पत्नी नाजिमा के अलावा 3 बेटे थे- साबिर, अनस और असलम.

नबी हसन की कस्बे में ही खाद की दुकान थी, जिस पर उस के साथ उस के बेटे अनस और असलम बैठते थे. साबिर किसी फैक्ट्री में काम करता था. अनस काफी खूबसूरत नौजवान था, साथ ही अविवाहित भी. उसे दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने में काफी मजा आता था.

एक दिन सुहानी सुबह अनस उठ कर छत पर चला आया. छत की मुंडेर पर बैठ कर वह आसमान की तरफ निहार रहा था कि अचानक उस का मोबाइल बज उठा इतनी सुबह फोन करने वाला कोई दोस्त ही होगा, सोच कर अनस मोबाइल स्क्रीन पर बिना नंबर देखे ही बोला, ‘‘हां बोल?’’

‘‘जी, आप कौन बोल रहे हैं?’’ दूसरी ओर से किसी युवती की आवाज सुनाई दी तो अनस चौंक पड़ा. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उस ने तुरंत ‘सौरी’ कहते हुए कहा, ‘‘माफ करना, दरअसल मैं समझा इतनी सुबह कोई दोस्त ही फोन कर सकता है, इसलिए… वैसे आप को किस से बात करनी है, आप कौन बोल रही हैं?’’

‘‘मैं बिट्टू बोल रही हूं. मुझे भी अपनी दोस्त से बात करनी थी, लेकिन गलत नंबर डायल हो गया.’’

‘‘कोई बात नहीं, आप को अपनी दोस्त का नंबर सेव कर के रखना चाहिए. ऐसा करने से दोबारा गलती नहीं होगी.’’

‘‘आप पुलिस में हैं क्या?’’

‘‘नहीं तो, क्यों?’’

‘‘पूछताछ तो पुलिस वालों की तरह कर रहे हैं. 25 सवाल और सलाह भी.’’ कह कर बिट्टू जोर से हंसी.

‘‘अरे नहीं, मैं ने तो वैसे ही बोल दिया. दोस्त आप की, फोन भी आप का. आप चाहें नंबर सेव करें या न करें.’’

‘‘तो आप दार्शनिक भी हैं?’’ बिट्टू ने फिर छेड़ा.

‘‘नहीं नहीं, आम आदमी हूं.’’

‘‘किसी के लिए तो खास होंगे?’’

‘‘आप बहुत बातें करती हैं.’’

‘‘अच्छी या बुरी?’’

‘‘अच्छी.’’

‘‘क्या अच्छा है मेरी बातों में?’’

अब हंसने की बारी अनस की थी. वह जोर से हंसा, फिर बोला, ‘‘माफ करना, मैं आप से नहीं जीत सकता.’’

‘‘और मैं माफ न करूं तो?’’

‘‘तो आप ही बताएं, मैं क्या करूं?’’ अनस ने हथियार डाल दिए.

‘‘अच्छा जाओ, माफ किया.’’

दरअसल बिट्टू ने अपनी सहेली से बात करने के लिए नंबर मिलाया था, लेकिन गलत नंबर डायल होने से अनस का नंबर मिल गया था. लेकिन अनस की आवाज उसे भा गई थी. इस के बाद उस के दिल में फिर से अनस से बात करने की इच्छा हुई, लेकिन संकोचवश वह अपने आप को रोक लेती थी.

फिर एक दिन उस से रहा नहीं गया तो उस ने अनस का नंबर फिर मिला दिया. इस बार अनस भी जैसे उस के फोन का इंतजार कर रहा था. उसे इस बात का एहसास था कि बिट्टू उसे फिर से फोन जरूर करेगी. इस बार जब दोनों की बात हुई तो काफी देर तक चली. बिट्टू ने अपने बारे में बताया तो अनस ने भी अपने बारे में सब कुछ बता दिया. दोनों के बीच कुछ ऐसी बातें हुईं कि दोनों एकदूसरे के प्रति अपनापन सा महसूस करने लगे. यह दिसंबर 2017 की बात है. फिर उन के बीच बराबर बातें होने लगीं. एक दिन दोनों ने रूबरू मिलने का फैसला कर लिया. दोनों मिले तो एकदूसरे को सामने पा कर काफी खुश हुए. बिट्टू काफी खुश थी.

उस ने भोगनाथ और अनस की तुलना की तो पाया कि भोगनाथ और अनस का कोई मुकाबला नहीं है. अनस भोगनाथ से ज्यादा खूबसूरत था और उस की आर्थिक स्थिति भी भोगनाथ से लाख गुना अच्छी थी. इसलिए वह भोगनाथ से दूरी बना कर अनस से नजदीकियां बढ़ाने लगी. अनस अपने आप चल कर आए मौके को भला कैसे गंवा देता. उसे भी बैठेबिठाए एक खूबसूरत युवती का साथ मिला तो वह भी बिट्टू का हो गया. समय के साथ दोनों की नजदीकियां इतनी बढ़ीं कि तन की दूरियां भी खत्म हो गईं. एक दिन दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया.

13 मई की शाम साढ़े 7 बजे भोगनाथ घर में बैठा खाना खा रहा था कि तभी उस के मोबाइल पर किसी की काल आई. वह पूरा खाना खाए बिना घर से चला गया. काफी रात होने पर भी वह नहीं लौटा तो घर वाले चिंता में पड़ गए. सुबह होने पर उस की काफी तलाश की गई लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. 16 मई की सुबह किसी राहगीर ने पिसावां थाने में डीह कबीरा बाबा के जंगल में किसी अज्ञात युवक की लाश पड़ी होने की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

मृतक की उम्र 24-25 वर्ष रही होगी. उस के मुंह व गले पर कस कर अंगौछा बांधा गया था, जिस से दम घुटने से उस की मृत्यु हो गई थी. घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उस की शिनाख्त कराई तो पता चला वह गांव सरवाडीह का भोगनाथ है. घटनास्थल सरवाडीह गांव के बाहर ही था. इसलिए गांव के लोग भी वहां पहुंच गए थे. उन्होंने ही लाश की शिनाख्त की थी. पता चलते ही भोगनाथ का पिता केदार भी घर के अन्य सदस्यों के साथ वहां आ गया. भोगनाथ की लाश देख कर सब रोनेबिलखने लगे.

थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने केदार से कुछ आवश्यक पूछताछ की और फिर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दी. केदार को साथ ले कर वह थाने आ गए. केदार की लिखित तहरीर पर उन्होंने अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. भोगनाथ के पास मोबाइल था, जो उस के पास से नहीं मिला था. केदार से भोगनाथ का मोबाइल नंबर ले कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उसे सर्विलांस पर लगा दिया. इस के अलावा भोगनाथ के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स भी निकलवाई.

भोगनाथ को बुलाने के लिए जिस नंबर से काल की गई थी, उस नंबर की जब विस्तृत जानकारी जुटाई गई तो वह नंबर सरवाडीह निवासी बिट्टू का निकला. इस के बाद थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने बिट्टू को हिरासत में ले कर महिला सिपाही की उपस्थिति में उस से सख्ती से पूछताछ की. उस ने भोगनाथ की हत्या का जुर्म स्वीकार करते हुए अपने 3 साथियों के नाम भी बता दिए.

इस के बाद बिट्टू के प्रेमी अनस को गिरफ्तार कर लिया गया. अनस के 2 दोस्त गोपामऊ निवासी विपिन और मोनू भी इस अपराध में शामिल थे. इस के बाद एसपी महेंद्र चौहान ने प्रैसवार्ता कर बिट्टू और अनस को मीडिया के सामने पेश किया. जब भोगनाथ ने बिट्टू को अपने से दूरी बनाते देखा तो उस ने पता किया. जल्द ही उसे पता चल गया कि बिट्टू उस से किए गए सारे वादे, रिश्तेनाते तोड़ कर उस से दूर होना चाहती है तो वह तिलमिला गया. ऐसे मौके के लिए ही उस ने अपने मोबाइल से बिट्टू के साथ अंतरंग पलों के फोटो खींच रखे थे.

भोगनाथ ने बिट्टू से मिल कर उसे धमकाया कि वह उस से दूर हुई तो उस के अश्लील फोटो सब को भेज देगा. फोटो के बल पर भोगनाथ उसे ब्लैकमेल कर के उस के साथ संबंध बनाने लगा. बिट्टू उस के हाथ का खिलौना बनने के लिए मजबूर थी. इसी बीच उस के घर वालों ने हरदोई जनपद के पिहानी थाना क्षेत्र के एक युवक से उस की शादी तय कर दी. शादी 29 जून को होनी थी. भोगनाथ की हरकतों से आजिज आ कर बिट्टू ने अनस से बात की. उस से कहा कि उस की जिंदगी में आने से पहले उस का एक दोस्त भोगनाथ था. भोगनाथ के पास उस के कुछ अश्लील फोटो हैं, जिन के सहारे वह उसे ब्लैकमेल करता है.

वैसे भी उस की शादी तय हो गई है. वह उस की शादी में अड़चन डाल सकता है. बिट्टू ने अनस से कहा कि भोगनाथ को ठिकाने लगाना पड़ेगा. इस के लिए मैं तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं. बिट्टू ने अनस से यह भी कहा कि भले ही उस की शादी हो रही हो, लेकिन उस के साथ संबंध हमेशा बने रहेंगे. अनस ने बिट्टू की परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया. उस ने अपने जिगरी दोस्तों विपिन और मोनू से मदद मांगी तो दोस्ती की खातिर दोनों अनस का साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद भोगनाथ को मारने की योजना बनाई गई.

योजनानुसार 13 मई को अनस ने एक मारुति वैगनआर कार बुक की. कार मालिक को उस ने बताया कि उसे दोस्तों के साथ एक तिलक समारोह में जाना है. कार में बैठ कर अनस अपने दोस्तों के साथ चल दिया. दूसरी ओर बिट्टू ने शाम साढ़े 7 बजे के करीब भोगनाथ को मिलने के लिए डीह कबीरा बाबा के जंगल में बुलाया. भोगनाथ उस समय खाना खा रहा था, लेकिन अपनी प्रेमिका के बुलाने पर वह खाना बीच में छोड़ कर तुरंत वहां पहुंच गया. वहां उसे बिट्टू मिली. योजना के अनुसार बिट्टू उसे अपनी प्यार भरी बातों में उलझाए रही.

दूसरी ओर अनस ने चुनी गई जगह से कुछ पहले हडियापुर गांव के पास ड्राइवर से यह कह कर कार रुकवा दी कि आगे का रास्ता खराब है. वह वहीं खड़ा हो कर उन के आने का इंतजार करे. इस के बाद अनस और उस के दोस्त पैदल ही कबीरा बाबा के जंगल पहुंचे. वहां पहुंच कर उन्होंने बिट्टू के साथ मौजूद भोगनाथ को दबोच लिया. फिर उस के गले में पड़े अंगौछे को रस्सी की तरह बना कर उस के मुंह में दबाते हुए उस के गले में फंदा बना कर कस दिया, इस से भोगनाथ चिल्ला न सका और गले पर कसाव बढ़ते ही उस का दम घुटने लगा. वह कुछ देर छटपटाया, फिर उस का शरीर शिथिल पड़ गया.

भोगनाथ को मौत के घाट उतारने के बाद बिट्टू छिपतेछिपाते हुए घर चली गई. अनस भी दोनों दोस्तों के साथ भागते हुए कार तक पहुंचा और ड्राइवर से बोला कि वह तेजी से कार चलाए जहां वह लोग गए थे, वहां उन का झगड़ा हो गया है. ड्राइवर ने यह सुन कर कार की गति बढ़ा दी. गोपामऊ पहुंच कर सब लोग अपने घर चले गए.

लेकिन अपने आप को ये लोग कानून की गिरफ्त में आने से नहीं बचा सके. उन के पास से भोगनाथ का मोबाइल और हत्या की साजिश में प्रयुक्त 2 मोबाइल फोन पुलिस ने उन से बरामद कर लिए.

29 मई, 2018 को पुलिस ने विपिन और मोनू को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

साथ में मोहित शुक्ला

दुलहन पर लगा दांव : क्या माया और रवि की साजिश पूरी हो पाई

सुर्ख जोड़े में सजी नईनवेली दुलहन सुलेखा दोस्त जैसे पति रवि राउत को पा कर बहुत खुश थी. यौवन की दहलीज पर उस ने खुली आंखों से जो सपने देखे थे, वे साकार हो गए थे. सुलेखा 15 जुलाई, 2018 को ब्याह कर खुशीखुशी ससुराल आई थी. शादी के 6 दिन बीत जाने के बावजूद उस के हाथों पर पति के नाम की मेहंदी का रंग अभी भी ताजा था.

रवि राउत बिहार के जिला गया के थाना मुफस्सिल क्षेत्र में आने वाले शहीद ईश्वर चौधरी हाल्ट स्थित मोहल्ला कुर्मी टोला के रहने वाला था. उस के पिता श्यामसुंदर कपड़े के व्यापारी थे. गया में उन का कपड़े का काफी बड़ा कारोबार था, जो अच्छा चल रहा था. इस से अच्छी कमाई होती थी. श्यामसुंदर राउत के 3 बेटे थे, रवि, विक्की और शुक्कर. विक्की और शुक्कर पिता के व्यापार में सहयोग करते थे.

सुबह दोनों नाश्ता कर के पिता के साथ दुकान पर चले जाते थे और रात में दुकान बढ़ा कर उन्हीं के साथ घर लौटते थे. जबकि यारदोस्तों की संगत में रह कर रवि की आदतें बिगड़ गई थीं. उस की आदतें सुधारने के लिए श्यामसुंदर ने उस की शादी कर दी थी ताकि बहू के आने पर अपनी जिम्मेदारियों को समझ सके. बात 21 जुलाई, 2018 की रात की है. पढ़ीलिखी, समझदार सुलेखा ससुराल वालों को रात का भोजन करा कर पति के साथ फर्स्ट फ्लोर पर सोने चली गई. दिन भर की थकीहारी सुलेखा को बिस्तर पर लेटते ही नींद आ गई. रवि भी सो गया.

रवि तब अचानक नींद से उठ बैठा, जब उस के कानों में सुलेखा की दर्दनाक चीख पड़ी. नींद से जाग कर रवि ने पत्नी की ओर देखा तो सन्न रह गया. सुलेखा के गले से तेजी से खून बह रहा था. लगा जैसे किसी ने तेजधार हथियार से गला रेत कर उस की हत्या की कोशिश की हो. खून देख कर रवि बुरी तरह घबरा गया. जब उस की समझ में कुछ नहीं आया तो उस ने चादर से सुलेखा का गला लपेट दिया, ताकि खून बहना बंद हो जाए. तभी अचानक रवि की नजर एक महिला पर पड़ी. वह अपना चेहरा कपड़े से ढंके हुए थी और उसी कमरे से निकल कर बाहर की ओर भाग रही थी. उस महिला से थोड़ी दूर आगे 2 और महिलाएं तेजी से भागी जा रही थीं.

इस से पहले कि नकाबपोश महिला भागने में सफल हो पाती, सुलेखा की चीख सुन कर उस के देवर विक्की और शुक्कर कमरे में आ गए थे. रवि और उस के दोनों भाइयों ने दौड़ कर नकाबपोश महिला को पकड़ लिया और लातघूसों से उस की जम कर पिटाई की. नकाबपोश महिला जब बेसुध हो गई तो विक्की ने उस के चेहरे से नकाब उतार दिया. नकाब हटते ही रवि, विक्की और शुक्कर तीनों दंग रह गए. वह महिला रवि के जानने वालों में थी, जिस का नाम माया था. वह सूढ़ीटोला में रहती थी.

उधर ज्यादा खून बहने से सुलेखा की हालत बिगड़ती जा रही थी. इस बीच रवि के भाई विक्की ने 100 नंबर पर फोन कर के इस घटना की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी थी. कंट्रोलरूम से सूचना मिलते ही थाना मुफस्सिल के थानेदार कमलेश शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने हत्या की कोशिश करने वाली माया को आलाकत्ल ब्लेड के साथ गिरफ्तार कर लिया. सुलेखा की हालत बिगड़ती जा रही थी. रवि उसे इलाज के लिए मगध मैडिकल अस्पताल ले गया और इमरजेंसी वार्ड में भरती करा दिया. डाक्टरों ने उस का इलाज शुरू कर दिया. समय पर इलाज मिल जाने से सुलेखा बच गई. यह 15/16 जुलाई, 2018 की रात ढाई बजे की बात थी.

अगले दिन रवि राउत की नामजद लिखित तहरीर पर मुफस्सिल थाने में माया के खिलाफ 307 आईपीसी के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया गया. मुकदमा दर्ज होने के बाद थानेदार कमलेश शर्मा सुलेखा का बयान लेने मगध मैडिकल अस्पताल पहुंचे. सुलेखा ने कमलेश शर्मा को बताया कि रात एकडेढ़ बजे के करीब उस का पति रवि दरवाजा खोल कर बाहर चला गया था, तभी एक नकाबपोश औरत ने कमरे में घुस कर मुझ पर हमला बोल दिया. एक औरत कमरे के अंदर थी, जबकि दूसरी कमरे के दरवाजे के पास खड़ी थी.

वह वहीं से पूछ रही थी कि सुलेखा मरी या नहीं. मुझ पर नकाबपोश औरत ने न केवल हमला किया बल्कि मुझे तेजाब पिलाने की भी कोशिश की. लेकिन मेरी चीख सुन कर ऊपर आए मेरे देवरों ने मुझे बचा लिया. पकड़ी गई औरत ने अपना नाम माया बताया. जांच अधिकारी ने जब उस से हमले की वजह पूछी तो वह वजह बताने में असमर्थ रही. वह खुद हैरान थी कि माया ने उस की हत्या करने का प्रयास क्यों किया, जबकि वह उसे जानती तक नहीं थी. सुलेखा की बात सुन कर एसओ कमलेश शर्मा हैरान रह गए.

कमलेश शर्मा को सुलेखा के बयान ने परेशानी में डाल दिया था. इस का जवाब सिर्फ माया ही दे सकती थी या फिर सुलेखा का पति रवि राउत. माया महिला थाने के हवालात में बंद थी. कमलेश शर्मा ने थाने लौट कर आरोपी माया को महिला थाने से बुलवाया, फिर उस से पूछताछ की. माया का बयान सुन कर विवेचक शर्मा अवाक रह गए. माया ने पुलिस को बताया कि रवि और उस के बीच करीब 3 साल से प्रेम संबंध थे. दोनों एकदूसरे को प्यार करते थे, रवि उस से शादी करना चाहता था. लेकिन अपने घर वालों की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाया. अपने बयान में माया एकएक राज से परदा उठाती गई

माया के बयान से इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ आ गया. उस के बयान पर विश्वास कर के पुलिस जब रवि से पूछताछ करने मगध मैडिकल अस्पताल पहुंची तो रवि वहां नहीं था. उस की जगह सुलेखा के पास उस का छोटा भाई विक्की बैठा था. पुलिस ने जब विक्की से रवि के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि रवि घर पर होगा. एसओ कमलेश शर्मा ने रवि को अस्पताल बुलाने के लिए एक सिपाही उस के घर भेजा. सिपाही रवि के घर पहुंचा तो वह वहां भी नहीं था.

पूछने पर घर वालों ने बताया कि वह रात से अस्पताल से घर नहीं लौटा है. सिपाही ने लौट कर यह बात एसओ को बता दी. कमलेश शर्मा सोच में पड़ गए कि जब रवि न अस्पताल में है और न ही घर पर, तो वह कहां गया? इस का मतलब वह फरार हो चुका था. निस्संदेह पत्नी की हत्या के प्रयास के पीछे उस का भी हाथ था. उस के फरार होने से यह बात साफ हो गई कि माया ने जो बयान दिया था, वह सच था. अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए रवि की गिरफ्तारी जरूरी थी. हकीकत जानने के लिए पुलिस ने रवि के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स से पता चला कि रवि और माया के बीच बातें होती रहती थीं. घटना वाले दिन भी रवि और माया के बीच काफी देर तक बात हुई थी. इस डिटेल्स से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि रवि ने अपनी प्रेमिका माया के साथ मिल कर पत्नी की हत्या का षडयंत्र रचा था. लेकिन वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया था. बहरहाल, सुलेखा ठीक हो कर अस्पताल से घर आ गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी रवि पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा. इस बीच पुलिस ने माया को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. आखिरकार घटना के एक महीने बाद रवि उस वक्त पुलिस के हत्थे चढ़ गया, जब वह गया रेलवे स्टेशन से कहीं भागने के लिए ट्रेन के इंतजार में वेटिंग रूम में बैठा था.

पुलिस रवि को गिरफ्तार कर के थाने ले आई और सुलेखा की हत्या की योजना जानने के लिए उस से पूछताछ की. चाह कर भी रवि हकीकत को छिपा नहीं सका. उस ने पुलिस के सामने सच उगल दिया. पूछताछ में रवि ने अपनी और माया की प्रेम कहानी सिलसिलेवार बतानी शुरू की. माया मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सूढ़ीटोला की रहने वाली थी. वह शादीशुदा और 3 बच्चों की मां थी. उस का पति मनोहर बाहर रह कर नौकरी करता था. वह 6 महीने या साल भर में एकाध बार ही घर आ कर कुछ दिन बिता पाता था.

माया भले ही 3 बच्चों की मां थी, लेकिन उस का शारीरिक आकर्षण खत्म नहीं हुआ था. उस का कसा हुआ शरीर और गोरा रंग पुरुषों को आकर्षित करने के लिए काफी था. सजसंवर कर माया जब घर से बाहर निकलती थी तो अनचाहे में लोगों की नजरें उस की ओर उठ ही जाती थीं. कभीकभी रवि माया के घर के सामने से हो कर घाटबाजार स्थित अपनी दुकान पर जाया करता था. एकदो बार का आमनासामना हुआ तो दोनों की नजरें टकरा गईं. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित होने लगे. जल्दी ही वह समय भी आ गया, जब दोनों ने आकर्षण को प्यार का नाम दे दिया. इस प्यार को शारीरिक संबंधों में बदलते देर नहीं लगी. इस की एक वजह यह भी थी कि माया का पति परदेस में था और वह शारीरिक रूप से प्यार की प्यासी थी.

धीरेधीरे रवि और माया के प्यार के चर्चे पूरे सूढ़ीटोला में होने लगे. रवि घर से दुकान पर जाने की कह कर निकलता और पहुंच जाता माया के पास. जब तक वह दुकान पर पहुंचता, तब तक उस के दोनों भाई विक्की और शुक्कर दुकान पर पहुंच कर पिता के साथ काम में लग जाते. रवि देर से पहुंचता तो पिता श्यामसुंदर राउत उस से देर से आने की वजह पूछते, लेकिन वह चुप्पी साध लेता था. इस से श्यामसुंदर और भी परेशान हो जाते थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि रवि को आखिर हो क्या गया. उन्होंने उस के देर से आने का रहस्य पता लगाने का फैसला किया.

आखिरकार श्यामसुंदर ने जल्द ही सच का पता लगा लिया. पता चला उन का बड़ा बेटा रवि एक शादीशुदा और 3 बच्चों की मां माया के प्रेमजाल में फंसा है. बेटे की सच्चाई जान कर वह परेशान हो गए. उन्होंने रवि को माया से दूर रखने के बारे में सोचना शुरू किया. सोचविचार कर वह इस नतीजे पर पहुंचे कि रवि की शादी कर दी जाए तो वह माया को भूल जाएगा. उन्होंने रवि की शादी की बात चलाई तो बात बन गई. फलस्वरूप सुलेखा से रवि का रिश्ता तय हो गया.

रिश्ता तय हो जाने के बाद रवि जब कभी माया के घर के सामने से गुजरता तो उस से नजरें मिलाने के बजाय चुपचाप निकल जाता. रवि में अचानक आए बदलाव से माया परेशान हो गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक रवि को क्या हो गया, जो उस ने मुंह फेर लिया.

माया से रवि की जुदाई बरदाश्त नहीं हो पा रही थी. एक दिन वह रवि का रास्ता रोक कर उसे अपने घर ले आई. फिर उस ने रवि से पूछा, ‘‘तुम्हें अचानक ऐसा क्या हो गया जो मुझ से मुंह फेर लिया.’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है माया.’’ रवि ने सहज भाव से कहा.

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है तो अचानक मुझ से मुंह क्यों मोड़ लिया?’’

‘‘माया, अब हमारा मिलना संभव नहीं है.’’ रवि ने नजरें झुका कर कहा.

‘‘क्यों, संभव नहीं है हमारा मिलना? मैं तुम से कितना प्यार करती हूं, जानते तो हो. फिर हमारा मिलना क्यों नहीं संभव है?’’

“‘क्योंकि मेरे घर वालों ने मेरी शादी करने का फैसला कर लिया है.’’

रवि का जवाब सुन कर माया के होश उड़ गए. माथे पर हाथ रख कर वह बिस्तर पर जा बैठी. कुछ देर दोनों के बीच खामोशी छाई रही.

उस खामोशी को माया ने ही तोड़ा, ‘‘आखिर क्या समझ रखा है तुम ने मुझे? मैं कोई खिलौना नहीं हूं कि जब चाहा, खेला और जब चाहा छोड़ दिया. मेरी जिंदगी बरबाद कर के तुम किसी और के साथ शादी रचाओगे? तुम ने यह कैसे सोच लिया कि मैं ऐसा होने दूंगी? मेरे जीते जी ऐसा हरगिज नहीं हो सकता.’’

‘‘मेरी बात समझने की कोशिश करो, माया.’’ माया के सामने रवि हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगा, ‘‘मैं घर वालों के सामने बेबस हूं. मुझे उन के सामने झुकना ही पड़ा.’’ रवि ने माया को समझाने की कोशिश की, ‘‘तुम तो जानती हो, मैं भी तुम से कितना प्यार करता हूं. तुम्हारे बिना जीने की कल्पना तक नहीं कर सकता.’’

‘‘मैं कुछ नहीं सुनना चाहती. तुम्हें जो भी करना हो करो, लेकिन मैं तुम्हारी शादी नहीं होने दूंगी.’’ माया ने रवि को धमकाया. रवि माया को काफी देर तक समझाता रहा. लेकिन माया ने रवि की शादी की बात स्वीकार नहीं की. उस ने खुल कर धमकी दी कि अगर उस ने किसी और से शादी की तो इस का अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा. उस दिन के बाद से रवि ने न तो माया से बात की और न ही मिला. माया ने सपने में भी नहीं सोचा था कि रवि उसे धोखा देगा और किसी दूसरी लड़की से शादी रचा लेगा. उस की बेवफाई से माया घायल नागिन सी बन गई. उस के सीने में बदले की आग धधकने लगी. यह मई 2018 की बात थी.

माया रवि से बदला लेने के लिए भले ही घायल नागिन बन गई थी, लेकिन उस की जुदाई में उस से कहीं ज्यादा तड़प रही थी. रवि भी माया से मिलने के लिए विरह की आग में जल रहा था. अंतत: उस से रहा नहीं गया और एक महीने बाद वह माया के पास लौट आया. सारे गिलेशिकवे भुला कर माया ने उसे प्यार के आंचल में छिपा लिया ताकि उन के प्यार को जमाने की नजर न लग जाए.

रवि ने माया से कहा कि मांबाप की खुशी के लिए वह सुलेखा से शादी तो जरूर करेगा, लेकिन उसे कभी पत्नी का दर्जा नहीं देगा और मौका मिलते ही उसे सदा के लिए अपने रास्ते से हटा देगा. रवि की बात पर माया ने सहमति जता दी. रवि की शादी के बाद सुलेखा को रास्ते से हटाने के लिए माया शादी से पहले ही योजना बनाने में जुट गई. बहरहाल, वह दिन भी आ गया जिस का रवि और माया को इंतजार था. 15 जुलाई, 2018 को रवि की शादी सुलेखा के साथ हो गई. सुलेखा मायके से विदा हो कर ससुराल आ गई.

दूसरी ओर माया का आनाजाना बंद हो जाने से ईर्ष्या की आग में जल रही थी. रवि भले ही माया के पास नहीं जा रहा था, लेकिन फोन से दोनों की अकसर बातें हो जाती थीं. माया उसे बारबार उस का वादा याद दिलाती रहती थी. रवि उस से कह देता था कि जल्द ही अपना वादा पूरा करेगा. शादी के 4-5 दिन बाद रवि के घर से सब मेहमान चले गए. घर पूरी तरह खाली हो गया. 21 जुलाई, 2018 की दोपहर रवि चुपके से माया से मिलने उस के घर जा पहुंचा. उस वक्त घर में माया के अलावा कोई नहीं था. उस के तीनों बच्चे स्कूल गए हुए थे.

पहले तो दोनों ने मौके का भरपूर फायदा उठाया. फिर रवि और माया अपनी पहले से तैयार योजना पर बात की. रवि ने माया से कहा कि आज रात सुलेखा को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया जाएगा. मेरे फोन का इंतजार करना. जैसे ही मैं फोन करूं, धारदार हथियार ले कर मेरे घर आ जाना. घर का दरवाजा खुला रहेगा. रात 10 बजे के करीब सुलेखा पति, सास, ससुर और देवरों को खाना खिला कर पति के साथ पहली मंजिल पर सोने चली गई. उसे क्या पता था कि आज की रात उस पर भारी पड़ने वाली है. खैर, पतिपत्नी बातें करतेकरते कब सो गए, पता ही नहीं चला.

रात 1 बजे के करीब रवि की आंखें खुल गईं. उस ने देखा, सुलेखा गहरी नींद में सो रही थी. रवि मोबाइल लेकर आहिस्ता से बिस्तर से नीचे उतरा और दरवाजा खोल कर बाहर चला गया. तभी सुलेखा की आंखें खुल गईं. उस ने पति से इतनी रात गए बाहर जाने के बारे में पूछा तो रवि ने कहा कि बाथरूम जाना है, अभी आता हूं. रवि घर से बाहर निकल आया और फोन कर के माया को बता दिया कि रास्ता साफ है, आ जाओ. थोड़ी देर बाद रवि बाहर से लौट आया और फिर सोने का नाटक करने लगा. करीब 30 मिनट बाद माया 2 महिलाओं के साथ रवि के घर पहुंच गई.

माया इन महिलाओं को सुरक्षा के लिए लाई थी. उन्हें उस ने बाहर ही रोक दिया था. माया स्वयं चुपके से सीढि़यों के सहारे रवि के कमरे में दाखिल हो गई. उसे रवि के घर का कोनाकोना पता था. सुलेखा रवि के बगल में सोई हुई थी. माया ने साथ लाए धारदार ब्लेड से सुलेखा के गले, चेहरे और आंख पर वार किए. साथ ही उस का गला दबाने का भी प्रयास किया. अचानक हुए हमले से सुलेखा के मुंह से दर्दनाक चीख निकल गई.

पत्नी की चीख सुन कर सोने का बहाना कर रहा रवि उठ बैठा. तब तक नीचे से रवि के दोनों भाई विक्की और शुक्कर ऊपर कमरे में पहुंच गए. विक्की और शुक्कर को देख माया डर गई, क्योंकि रवि का पूरा गेम ही उलटा पड़ गया था. जैसे ही माया वहां से भागी, विक्की और शुक्कर ने उसे दौड़ा कर पकड़ लिया और उसे मारनेपीटने लगे. किसी को शक न हो, सोच कर रवि भी भाइयों के साथ जा मिला और मौका देख कर माया को लातथप्पड़ मारने लगा.

माया के गिरफ्तार हो जाने के बाद उस से महिला थाने में एसओ विमला ने पूछताछ की. माया ने सुलेखा की हत्या की योजना का खुलासा कर दिया कि कैसे उस ने अपने प्रेमी रवि के साथ मिल कर सुलेखा की हत्या की योजना बनाई थी. उस के बयान पर पुलिस ने उस के प्रेमी और सुलेखा के पति रवि को पत्नी की हत्या की कोशिश करने का मुकदमा दर्ज कर के गिरफ्तार कर लिया.

कथा लिखे जाने तक दोनों प्रेमीप्रेमिका रवि राउत और माया जेल में बंद थे. बेटे की करतूत पर मांबाप को काफी दुख पहुंचा. स्वस्थ हो चुकी सुलेखा ससुराल से मायके लौट गई. उस रात माया के साथ आई 2 महिलाओं का पता नहीं चल सका.  ?

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Murder Story : हाथपांव बांधकर काटा प्रेमिका का गला

इलाहाबाद (प्रयागराज) के वेणीमाधव मंदिर के आसपास का इलाका धनाढ्य लोगों का है. इसी इलाके की वेणीमाधव मंदिर वाली गली में उमा शुक्ला का परिवार रहता था. उन के 3 बच्चे थे, एक बेटा भोला और 2 बेटियां निशा और रचना. पति की मृत्यु के बाद परिवार को संभालने की जिम्मेदारी उमा ने ही उठाई. जब बेटा भोला बड़ा हो गया तो उमा शुक्ला को थोड़ी राहत मिली.

रचना उमा शुक्ला की छोटी बेटी थी, थोड़े जिद्दी स्वभाव की. उस दिन साल 2016 के अप्रैल की 16 तारीख थी. समय सुबह के 10 बजे. रचना जींस और टौप पहन कर कहीं जाने की तैयारी कर रही थी. मां ने पूछा तो बोली, ‘‘थोड़ी देर के लिए जाना है, जल्दी लौट आऊंगी.’’

उमा शुक्ला कुछ पूछना चाहती थीं, लेकिन रचना बिना मौका दिए अपनी स्कूटी ले कर बाहर निकल गई. बड़ी बेटी निशा पहले ही कालेज जा चुकी थी. थोड़ी देर में लौटने को कह कर रचना जब 2 घंटे तक नहीं लौटी तो उमा शुक्ला को चिंता हुई. उन्होंने फोन लगाया तो वह स्विच्ड औफ मिला. इस के बाद तो उमा का फोन बारबार रिडायल होने लगा. उन्होंने रचना के कालेज फ्रैंड्स को भी फोन किए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. शाम होतेहोते जब बेटा भोला शुक्ला और बेटी निशा लौट आए तो उन्होंने सुबह गई रचना के अभी तक नहीं लौटने की बात बताई. निशा और भोला ने भी रचना का फोन ट्राई किया, उस के दोस्तों से भी पता किया लेकिन रचना का पता नहीं चला.

रचना को इस तरह लापता देख भोला ने थाना दारागंज में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी. मां, बेटा और बहन निशा रात भर इस उम्मीद में जागते रहे कि क्या पता रचना आ जाए. अगले दिन 17 अप्रैल को अखबारों में एक खबर प्रमुखता से छपी कि प्रतापगढ़-वाराणसी मार्ग पर हथीगहां के पास एक लड़की की अधजली लाश मिली है. लाश का जो हुलिया बताया गया था, वह काफी हद तक रचना से मिलता था. यह खबर पढ़सुन कर उमा शुक्ला का कलेजा दहल गया. फिर भी मन में कहीं थोड़ी सी उम्मीद  थी कि संभव है, लाश किसी और की हो. कई बार निगाहें धोखा खा जाती हैं.

इसी के मद्देनजर भोला अलगअलग 4-5 अखबार खरीद लाया था ताकि खबरों और फोटो को ठीक से जांचापरखा जा सके. अखबारों में छपी खबर और फोटो में कोई फर्क नहीं था. इस से उमा शुक्ला और भोला इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि लाश रचना की है. इस पर मांबेटे सारे अखबार ले कर थाना दारागंज जा पहुंचे और तत्कालीन थानेदार विक्रम सिंह से मिले. उमा शुक्ला ने जोर दे कर विक्रम सिंह को बताया कि लाश उन की बेटी रचना की है और उस का हत्यारा है सलमान. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सलमान को पकड़ कर ठीक से पूछताछ की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी. लेकिन विक्रम सिंह हत्या के मामले में पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे, वह यह मान कर चल रहे थे कि रचना जिंदा भी तो हो सकती है. उन्होंने उन दोनों को समझा दिया कि हथिगहां में मिली लाश रचना की नहीं है. वह जिंदा होगी और लौट आएगी.

विक्रम सिंह ने उमा शुक्ला से एक लिखित शिकायत ले ली और मांबेटी को समझा कर घर भेज दिया. लेकिन आरोपी का नाम बताने के बावजूद पुलिस ने अगले 2-3 दिन तक रचना के मामले में कोई रुचि नहीं ली. इस पर उमा शुक्ला और भोला एसपी (सिटी) बृजेश श्रीवास्तव से मिले. दोनों ने उन्हें पूरी बात बताई तो बृजेश श्रीवास्तव ने थानाप्रभारी विक्रम सिंह को इस मामले में तुरंत काररवाई करने को कहा. इस का लाभ यह हुआ कि पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट को अपहरण की धाराओं 363, 366 में तरमीम कर के सलमान व अन्य को आरोपी बना दिया.

पुलिस का ढुलमुल रवैया

मुकदमा तो दर्ज हो गया, लेकिन पुलिस ने किया कुछ नहीं. आरोपी सलमान की गिरफ्तारी तो दूर पुलिस ने उस से पूछताछ तक नहीं की. इस की वजह भी थी. सलमान इलाहाबाद के रईस व्यवसायी साजिद अली उर्फ लल्लन का एकलौता बेटा था. पुलिस और नेताओं तक पहुंच रखने वाले लल्लन मियां अपने परिवार के साथ थाना दारागंज क्षेत्र के मोहल्ला बक्शी खुर्द में रहते हैं. उन के पास पैसा भी था और ऊपर तक पहुंच भी. बात 2015 की है. जब भी रचना किसी काम से घर से बाहर निकलती थी, तो इत्तफाकन कहिए या जानबूझ कर सलमान उस के सामने पड़ जाता था. जब भी वह खूबसूरत रचना को देखता तो उस पर फब्तियां कसता, छेड़छाड़ करता. उस समय उस के साथ कई दोस्त होते थे. यह सब देखसुन कर रचना चुपचाप निकल जाती थी.

सलमान के खास दोस्तों में मीरा गली का रहने वाला लकी पांडेय और सलमान का ममेरा भाई अंजफ थे. अंजफ पहले सलमान के पड़ोस में रहता था. बाद में उस का परिवार कर्नलगंज थाना क्षेत्र के बेलीरोड, जगराम चौराहा के पास रहने लगा था. तीनों हमप्याला, हमनिवाला थे. तीनों साथसाथ घूमते थे. लकी पांडेय और अंजफ सलमान के पैसों पर ऐश करते थे. रचना सलमान की आए दिन छेड़छाड़ से तंग आ गई थी. एक दिन उस ने मां को सलमान द्वारा छेड़ने की बात बता दी. किसी तरह यह बात भोला के कानों तक पहुंच गई. यह सुन कर उस के तनबदन में आग लग गई. उस ने बहन को परेशान करने वाले सलमान को सबक सिखाने की ठान ली.

एक दिन भोला ने सलमान को रास्ते में रोक कर उग्रता से समझाया, ‘‘जिस लड़की को तुम जातेआते छेड़ते हो, वो मेरी छोटी बहन है. अपनी आदत सुधार लो सलमान, तुम्हारी सेहत के लिए अच्छा रहेगा. मैं तुम्हें पहली और आखिरी बार समझा रहा हूं.’’

सलमान को किसी ने पहली बार उसी के इलाके में धमकाया था. वह ऐसी धमकियों की चिंता नहीं करता था. भोला के चेताने पर भी सलमान पर कोई असर नहीं हुआ. अब राह में जातीआती रचना को वह पहले से ज्यादा तंग करने लगा. जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा तो रचना से सहन नहीं हुआ. उस ने सलमान के खिलाफ थाना दारागंज में छेड़खानी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. लेकिन सलमान के पिता साजिद अली की पहुंच की वजह से पुलिस उस पर हाथ डालने से कतराती रही. भोला के कहनेसुनने पर पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया.

समझौते के बाद भोला और उस की मां उमा शुक्ला ने बेटी की इज्जत की खातिर पिछली बातों को भुला दिया. लेकिन घमंडी सलमान इसे आसानी से भूलने वाला नहीं था. उस के मन में अपमान की चिंगारी सुलग रही थी. बहरहाल, मार्च 2017 में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो उमा शुक्ला को उम्मीद की किरण दिखाई दी. उम्मीद की इसी किरण के सहारे उमा शुक्ला ने योगी आदित्यनाथ को एक शिकायती पत्र भेजा. योगीजी ने उस पत्र का संज्ञान लिया और रचना शुक्ला अपहरण कांड की जांच स्पैशल टास्क फोर्स से कराने के आदेश दे दिए. थाना पुलिस ने रचना शुक्ला कांड की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी थी.

एसटीएफ ने रचना शुक्ला अपहरण कांड की जांच शुरू तो की, लेकिन बहुत धीमी गति से. फलस्वरूप नतीजा वही रहा ढाक के तीन पात. एसटीएफ भी यह पता नहीं लगा सकी कि रचना जिंदा है या मर चुकी. अगर जिंदा है तो 3 साल से कहां है या आरोपी ने उसे कहां छिपा रखा है. एसटीएफ की जांच की गति देख कर उमा शुक्ला का इस जांच से भी भरोसा उठ गया. अब उन के लिए न्यायालय ही एक आखिरी आस बची थी. उमा शुक्ला ने दिसंबर, 2019 के दूसरे सप्ताह में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की. याचिका में उन्होंने लिखा कि उन की बेटी का अपहरण हुए 4 साल होने वाले हैं. पुलिस अब तक बेटी के बारे में पता नहीं लगा सकी. आरोपी समाज में छुट्टे घूम रहे हैं.

हाईकोर्ट पहुंची उमा शुक्ला

हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लिया और 6 जनवरी, 2020 को एसएसपी एसटीएफ राजीव नारायण मिश्र और वर्तमान थानाप्रभारी दारागंज आशुतोष तिवारी को फटकार लगाई. साथ ही 15 दिनों के अंदर रचना शुक्ला के बारे में कारगर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया. हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसएसपी राजीव नारायण मिश्र ने एएसपी नीरज पांडेय को आड़े हाथों लिया और काररवाई कर के जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का सख्त आदेश दिया. कप्तान के सख्त रवैए से पुलिस ने रचना शुक्ला कांड से संबंधित पत्रावलियों का एक बार फिर से अध्ययन किया.

जांचपड़ताल में उन्होंने सलमान और उस के दोस्त लकी पांडेय को संदिग्ध पाया. अंतत: पुलिस ने 19 जनवरी, 2020 की सुबह सलमान और लकी पांडेय को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. दोनों को गुप्त स्थान ले जा कर पूछताछ की गई. शुरू में सलमान एएसपी नीरज पांडेय पर अपनी ऊंची पहुंच का रौब झाड़ने लगा, लेकिन उन के एक थप्पड़ में उसे दिन में तारे नजर आने लगे. सलमान उन के पैरों में गिर गया. उस ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा, ‘‘सर, हमें माफ कर दीजिए. हम से बड़ी भूल हो गई. करीब 4 साल पहले मैं ने, लकी और अपने ममेरे भाई अंजफ के साथ मिल कर रचना की गला रेत कर हत्या कर दी थी. 4 साल पहले हथिगहां में मिली लाश रचना की ही थी.’’

इस के बाद सलमान परतदरपरत हत्या के राज से परदा उठाता चला गया. करीब 4 सालों से राज बनी रचना शुक्ला की हत्या हो चुकी थी. पता चला सलमान और रचना एकदूसरे को प्यार करते थे. सलमान ने अपनी इस तथाकथित प्रेमिका को मौत के घाट उतार दिया था. रचना शुक्ला के अपहरण और हत्या से परदा उठते ही एसएसपी एसटीएफ राजीव नारायण मिश्र ने अगले दिन यानी 20 जनवरी को पुलिस लाइंस में पत्रकारवार्ता आयोजित की. प्रैस वार्ता में उन्होंने पत्रकारों के सामने रचना शुक्ला के अपहरण और हत्या के आरोपियों सलमान और उस के दोस्त लकी पांडे को पेश किया.

पत्रकारों के सामने सलमान और लकी पांडेय ने अपना जुर्म कबूल किया. साथ ही पूरी घटना भी बताई और वजह भी. रचना की हत्या क्यों और कैसे की गई थी, उस ने इस का भी खुलासा किया. रचना की हत्या की यह कहानी कुछ यूं सामने आई. 19 वर्षीय रचना शुक्ला भाईबहनों में सब से छोटी थी. रचना खूबसूरत युवती थी. जितनी देर तक वह घर में रहती, उस का ज्यादातर समय आइना देखने में बीतता था. बक्शी खुर्द मोहल्ले के रहने वाले सलमान ने जब दूधिया रंगत वाली खूबसूरत रचना को जातेआते देखा तो वह उस पर मर मिटा. यह बात सन 2014 की है, तब रचना इंटरमीडिएट की छात्रा थी और उम्र थी 19 साल.

रचना उम्र के जिस पड़ाव को पार कर रही थी, वह ऐसी उम्र होती है, जब सहीगलत या अच्छेबुरे की जानकारी नहीं होती. रचना के लिए सलमान का प्यार शारीरिक आकर्षण से ज्यादा कुछ नहीं था. सलमान एक अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद था. उस के लिए पैसा कोई मायने नहीं रखता था. जब भी वह घर से बाहर निकलता, राह में कई चाटुकार दोस्त मिल जाते. उन की संगत में वह पैसे खर्च करता तो वे उसी का गुणगान करते. रसिक सलमान की दिली डायरी में कई ऐसी लड़कियों के नाम थे, जिन के साथ वह मौजमस्ती करता था. इस के बावजूद वह मुकम्मल प्यार की तलाश में था, जहां उस की जिंदगी स्थिर हो जाए. एक ठहराव हो. रचना को देखने के बाद सलमान को अपना सपना पूरा होता लगा. उसे जिस प्यार की तलाश थी, वह रचना पर आ कर खत्म हो गई.

सलमान का प्यार एकतरफा था, क्योंकि इस के लिए रचना ने अपनी ओर से हरी झंडी नहीं दी थी. बाद में जब उस ने सलमान की आंखों में अपने लिए प्यार देखा तो उस का दिल पसीज गया. सलमान घंटों उस के घर के पास खड़ा उस के दीदार के लिए बेताब रहता. रचना चुपकेचुपके सब देखती थी, आखिरकार उस का दिल भी सलमान पर आ गया और उस ने सलमान से इस बात का इजहार भी कर लिया.

पंछी की तरह फंस गई जाल में

फलस्वरूप दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों ने प्यार में जीनेमरने की कसमें खाईं. सलमान तो निश्चिंत था, लेकिन रचना को यह चिंता सता रही थी कि घर वाले उन दोनों के प्यार को स्वीकार करेंगे या नहीं, क्योंकि दोनों की जाति ही नहीं धर्म भी अलगअलग थे. रचना की मां उमा शुक्ला कट्टर हिंदू थीं. वह बेटी के इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करतीं. रचना ने सलमान को अपने मन की आशंका बता दी थी. वैसे भी बहुत कम लोग ऐसे हैं जो बेटे या बेटी की शादी दूसरे मजहब के लड़के या लड़की से करना चाहें. खैर, सलमान ने रचना को समझाया और सब कुछ वक्त पर छोड़ देने को कहा. साथ ही कहा कि हम जिएंगे भी एक साथ और मरेंगे भी एक साथ. सलमान की भावनात्मक बातें सुन कर रचना मन ही मन खुश हुई. इतनी खुश कि उस ने सलमान का गाल चूम लिया. सलमान कैसे पीछे रहता, उस ने रचना को बांहों में भर लिया.

सलमान से रचना सच्चे दिल से प्यार करती थी, लेकिन सलमान के मन में तो कुछ और ही चल रहा था. जिस दिन से उस ने रचना को अपनी बांहों में भरा था, उसी दिन से उस के मन में प्यार नहीं बल्कि वासना की आग धधकने लगी थी. रचना ने सलमान की आंखों में दहकती वासना को महसूस कर लिया था. उस ने उस से कह भी दिया था कि जो तुम मुझ से चाहते हो, वह शादी के पहले संभव नहीं है. मुझे ऐसी लड़की मत समझना, जो दौलत के लिए सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार हो जाती हैं. जब से यह बात हुई थी, तब से रचना सलमान से थोड़ा बच कर रहने लगी थी. उस ने मिलना भी कम कर दिया था. सलमान यह सब सह नहीं पा रहा था. इस पर सलमान ने एक दांव खेला. उस ने अपने नाम पर एक स्कूटी खरीदी और रचना को गिफ्ट कर दी. यह देख रचना बहुत खुश हुई.

रचना स्कूटी ले कर घर पहुंची तो घर वाले यह सोच कर हैरान हुए कि उस के पास स्कूटी कहां से आई. घर वालों ने रचना से स्कूटी के बारे में पूछा तो उस ने झूठ बोल दिया कि एक दोस्त की है. कुछ दिनों के लिए वह शहर से बाहर गई है. उस ने स्कूटी मुझे चलाने के लिए दी है. जब वापस लौट आएगी, मैं उसे लौटा दूंगी. बात वहीं की वहीं रह गई. सलमान ने जो सोच कर रचना को स्कूटी दी थी, वह संभव नहीं हो पाया. स्कूटी हड्डी बन कर उस के गले में अटकी रह गई. महीनों बाद रचना ने प्यार का दम भरने वाले सलमान के सामने एक प्रस्ताव रखा. उस ने स्कूटी को अपने नाम पर स्थानांतरित कराने के लिए कहा तो सलमान उसे घुमाते हुए बोला, ‘‘जब हम दोनों एक होने वाले हैं तो स्कूटी चाहे तुम्हारे नाम हो या मेरे, क्या फर्क पड़ता है. वक्त आने दो स्कूटी तुम्हारे नाम करा दूंगा. चिंता क्यों करती हो.’’

सलमान की यह बात रचना की समझ में नहीं आई. वह अपनी मांग पर अड़ी रही. सलमान इस के लिए तैयार नहीं हुआ. साथ जीनेमरने की कसमें खाने वाले सलमान का नकली चेहरा सामने आ गया था. जिस वासना की चाहत में उस ने रचना को स्कूटी दी थी, उस रचना ने उस की आंखों में वासना की आग देख ठेंगा दिखा दिया. इस बात को ले कर दोनों के बीच विवाद भी हुआ. सलमान ने रचना को भलाबुरा कहा तो रचना भी पीछे नहीं रही. उस ने सलमान को उस के दोस्तों के सामने ही जलील किया. रचना यहीं चुप नहीं बैठी, उस ने सलमान के खिलाफ दारागंज थाने में छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करा दिया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद रचना और सलमान के बीच दूरियां बढ़ गईं. दोनों ने एकदूसरे से मिलना बात करना बंद कर दिया. रचना ने अपने घर वालों को बता दिया कि सलमान नाम का लड़का उसे छेड़ता है. बहन की बात सुन कर भाई भोला का खून खौल उठा. उस ने सलमान को धमका कर बहन की तरफ न देखने और उस से दूर रहने की हिदायत दे दी.

इंतकाम की आग

रचना ने सलमान के साथ जो किया, वह उसे काफी नागवार लगा. वह अपमान की आग में झुलस रहा था. उस ने यह कभी नहीं सोचा था, रचना उस के साथ ऐसी घिनौनी हरकत भी कर सकती है. तभी उस ने दृढ़ निश्चय कर लिया कि जब तक वह रचना से अपने अपमान का बदला नहीं ले लेगा, तब तक उस के इंतकाम की आग ठंडी नहीं होगी. लेकिन सवाल यह था कि वह रचना से दोबारा कैसे मिले ताकि फिर से दोस्ती हो जाए और वह उसे विश्वास में ले कर अपना इंतकाम ले सके.

जैसेतैसे सलमान ने रचना तक अपना संदेश भिजवाया कि वह एक बार आ कर मिल ले. वह उस से मिल कर माफी मांगना चाहता है. रचना सलमान की बात मान गई और उसे माफ कर दिया. यही नहीं दोनों फिर से पहले की तरह मिलने लगे. सलमान यही चाहता भी था. उस ने रचना को अपने खतरनाक इरादों की भनक तक नहीं लगने दी. इस बीच 3-4 महीने बीत गए. रचना पर फिर से सलमान के इश्क का जादू चल गया. सलमान को इसी का इंतजार था. सलमान ने अपने दोस्तों लकी पांडेय और ममेरे भाई अंजफ से बात कर के रचना को रास्ते से हटाने की बात की. लकी और अंजफ उस का साथ देने को तैयार हो गए.

तीनों ने मिल कर योजना बनाई कि रचना को किसी तरह सलमान के घर बुलाया जाए और उस का काम तमाम कर के लाश नदी में फेंक दी जाए. इस से किसी को पता भी नहीं चलेगा और वे लोग पुलिस से भी बचे रहेंगे. योजना बन जाने के बाद सलमान ने 16 अप्रैल, 2016 की अलसुबह रचना को फोन कर के सुबह 10 बजे रेलवे स्टेशन पर मिलने के लिए कहा. अपनी स्कूटी ले कर रचना ठीक 10 बजे सलमान से मिलने स्टेशन पहुंच गई. सलमान वहां मौजूद मिला. उस ने रचना की स्कूटी प्रयागराज स्टेशन के स्टैंड पर खड़ी कर दी और उसे अपनी बाइक पर बैठा कर बक्शी खुर्द स्थित अपने घर ले गया. उस के घर में बेसमेंट था.

सलमान रचना को बेसमेंट में ले गया. वहां लकी और अंजफ पहले से मौजूद थे. उन्हें देख रचना खतरे को भांप गई. उस ने वहां से भागने की कोशिश की लेकिन उन तीनों ने उसे दौड़ कर पकड़ लिया और उस के हाथपांव रस्सी से बांध दिए. फिर सलमान ने चाकू से उस का गला रेत कर हत्या कर दी. लाश ठिकाने लगाने के लिए सलमान ने अपने मामा शरीफ को फोन किया. शरीफ फौर्च्युनर ले आया. चारों ने मिल कर लाश जूट के बोरे में भर दी. इस के बाद कपड़े से कमरे में फैला खून साफ कर दिया. रचना की लाश जूट की बोरी में भर कर फौर्च्युनर में लाद दी गई. सलमान और उस के मामा शरीफ सहित चारों लोग पहले नैनी की तरफ गए. इरादा था लाश को यमुना में फेंकने का, लेकिन 5 घंटे तक भटकने के बाद भी उन्हें मौका नहीं मिला.

इस के बाद ये लोग नवाबगंज की तरफ निकल गए. लेकिन वहां भी लाश को गंगा में फेंकने का मौका नहीं मिला. इन लोगों ने प्रयागराज की सीमा के पास प्रतापगढ़, वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर रचना की लाश हथिगहां के पास सड़क किनारे फेंक दी और सब लौट आए. इस के बाद सलमान बाइक से फिर वहां गया. उस के पास एक बोतल पैट्रोल था. उस ने रचना की लाश पर पैट्रोल डाला और आग लगा दी, ताकि लाश पहचानी न जा सके, लौट कर उस ने रचना की स्कूटी सोरांव के एक परिचित के गैराज में खड़ी कर दी. बाद में जो हुआ, जगजाहिर है. सलमान और उस के पिता ने पैसों के बल पर पुलिस को अपने पक्ष में कर लिया.

रचना के केस की पैरवी कर रहे उस के भाई भोला को साल 2018 में सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में फंसा कर जेल भिजवा दिया गया था. इस पर भी रचना के घर वालों ने हार नहीं मानी. रचना की छोटी बहन निशा शुक्ला ने पैरवी करनी शुरू की. आखिरकार हाईकोर्ट की चाबुक से पुलिस की नींद टूटी और आरोपियों को जेल जाना पड़ा. सलमान और लकी के गिरफ्तार होने के 3 दिनों बाद थाना दारागंज के थानेदार आशुतोष तिवारी ने अंजफ को और 20 दिनों बाद मामा शरीफ को दारागंज से गिरफ्तार कर लिया. करीब 4 सालों से जिस रचना शुक्ला की हत्या रहस्य बनी थी, आरोपियों की गिरफ्तारी से सामने आ गई.

अगर पुलिस पीडि़ता उमा शुक्ला की बातों पर विश्वास कर लेती तो घटना के दूसरे दिन ही चारों आरोपी गिरफ्तार हो जाते और इस समय अपने गुनाह की सजा काट रहे होते. बहरहाल, देर से ही सही आरोपी जेल की सलाखों के पीछे चले गए.