Chhattisgarh Crime: प्रेमी को केवल – जिस्मानी प्यार तो नहीं

Chhattisgarh Crime: प्यार में अंधी हुई उर्मिला निषाद शादीशुदा विजय बांधे से प्यार कर बैठी. प्रेमी उस के जिस्म से खेलता रहा, लेकिन जैसे ही उर्मिला ने उस पर शादी का दबाव बनाने की भूल की तो विजय एक दिन इतना खूंखार बन गया कि…

अपनी प्रेमिका उर्मिला निषाद को ठिकाने लगाने के लिए विजय बांधे मौके की तलाश कर रहा था. योजना के मुताबिक उस ने पहले हार्डवेयर दुकान से सब्जी काटने वाला चाकू खरीदा और 7 दिसंबर 2025 रविवार की शाम उस ने उर्मिला को फोन लगाया तो उर्मिला ने उस से कहा, ”हां विजय, बोलो क्या बात है?’’

विजय एक कैटरर था, इसलिए उस ने उर्मिला को बताया, ”उर्मिला, बात दरअसल यह है कि आज रात एक प्रोग्राम में खाना बनाने के लिए और्डर बुक हुआ है, हमें वहां चलना पड़ेगा.’’ विजय ने बताया.

”लेकिन पहले तो तुम ने बताया नहीं कि आज का कोई कैटरिंग का और्डर है.’’ उर्मिला ने आशंका जताते हुए कहा.

”असल में क्या है उर्मिला, यह और्डर अर्जेंट में आज ही बुक हुआ है, इसलिए पहले से तुम्हें मैं कैसे बताता.’’ विजय ने सफाई देते हुए कहा.

”ठीक है, मैं तैयार होती हूं, मगर जाना कहां है, यह तो तुम ने बताया नहीं.’’ उर्मिला बोली.

”तुम्हें आम खाने हैं या पेड़ गिनने हैं, जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं.’’ उर्मिला पर अधिकार जमाते हुए विजय ने फोन काट दिया.

शाम का अंधेरा होते ही विजय ने अपनी बाइक निकाली और उर्मिला के घर की तरफ चल दिया. उर्मिला घर से निकलने को तैयार थी. जैसे ही विजय ने उस के घर के सामने बाइक रोक कर हार्न बजाया, उर्मिला अपने छोटे से बैग के साथ घर से बाहर निकल आई और झट से विजय की बाइक पर बैठ गई.

विजय ने रास्ते में एक रेस्टोरेंट के सामने बाइक रोकी तो उर्मिला ने सवाल किया, ”अब क्यों बाइक रोक दी?’’

इस पर विनोद बोला, ”खाना बनाते देर हो जाएगी, मोमोज और पकौड़ा पैक करवा लेता हूं, रास्ते में कहीं बैठ कर खा लेंगे.’’

मोमोज और पकौड़े पैक करवाने के बाद दोनों उतई गांव की तरफ निकल पड़े. रास्ते में नहर के पास खेल मैदान पर विनोद ने बाइक खड़ी करते हुए उर्मिला से कहा, ”शाम के समय यहां कोई नहीं है और लोगों का आनाजाना भी कम होता होगा, यहीं बैठ कर कुछ खा लेते हैं.’’

दोनों बीच मैदान खाने के लिए बैठ गए. पहले तो दोनों के बीच पहले से चल रहे विवादों पर बात शुरू हुई और थोड़ी ही देर में बहस गर्म हो गई. इसी बीच विजय ने बैग में रखे धारदार चाकू से अचानक उर्मिला पर वार कर दिए. पहले गले पर, फिर शरीर पर कई बार हमले किए. उर्मिला वहीं गिर गई. इस के बाद जिस साजिश की तैयारी विनोद ने पहले से की  थी, उसे अंजाम देने का वक्त आ गया था. विजय बोतल में अपने साथ पेट्रोल भी लाया था.

उस ने बाइक की डिक्की में रखी पेट्रोल की बोतल निकाली और उर्मिला के शरीर पर पेट्रोल उड़ेल दिया. इस के बाद उस ने जेब से माचिस निकाली और आग लगा दी. पास में रखी धान की पराली भी उस ने उसी आग में फेंक दी, ताकि शव पूरी तरह जल कर नष्ट हो जाए और कोई उसे पहचान न पाए. इस के बाद विजय सीधे अपने गांव करगाडीह लौट गया और ऐसे व्यवहार करने लगा, जैसे कुछ हुआ ही न हो. मगर पुलिस की नजरों से उस का कांड छिप नहीं सका और 24 घंटों के अंदर ही पुलिस ने अधजली लाश की गुत्थी सुलझाने में सफलता हासिल कर ली.

उतई पुलिस ने विजय बांधे को उर्मिला के कत्ल के जुर्म में उसे दुर्ग जिले की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में 8 दिसंबर की सुबह करगाडीह पऊवारा नहर किनारे बने खेल मैदान में गांव के कुछ लोग एक्सरसाइज करने पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर उन की आंखें खुली की खुली रह गईं. खेल मैदान के एक कोने में पड़े धान के पुआल के ढेर में एक महिला का अधजला शव पड़ा हुआ था. यह खबर पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई.

लोगों ने इस की सूचना सब से पहले गांव कोटवार को दी. गांव कोटवार केवल दास मानिकपुरी ने शव देख कर तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस टीम को जांच में शव के पास से आधा जला चप्पल और धारदार हथियार मिला, जिस से हत्या की आशंका गहरी हो गई. फोरैंसिक एक्सपर्ट को घटनास्थल पर मौजूद बड़े पत्थरों पर खून के निशान दिखे, जिस से यह संभावना और मजबूत होती गई कि हत्या के बाद शव को पत्थरों से भी कुचला गया है. शुरुआती जांच में यह अंदेशा व्यक्त किया गया है कि युवती की पहले धारदार हथियार से हत्या की गई, फिर सबूत मिटाने के लिए उस पर पराली या किसी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल कर शव को जला दिया गया हो.

फोरैंसिक टीम ने मिट्टी के नमूने, खून के धब्बे, जले हुए अवशेष और हथियार समेत कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्य वहां से जुटाए. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए, ताकि हत्या के समय क्षेत्र में आनेजाने वालों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके. उतई पुलिस ने आसपास के गांवों में ग्रामीणों से भी पूछताछ की, जिस से लाश की पहचान हो सके.

शुरुआती जांच में न तो मृतका की पहचान हो पाई, न ही कोई गवाह मिला. मौके पर पहुंची पुलिस टीम और फोरैंसिक एक्सपर्ट को पराली के बीच अधजला शव पड़ा मिला था, इसलिए यह साफ था कि हत्या कहीं और नहीं, इसी जगह की गई थी और पहचान छिपाने के इरादे से लाश जलाने की कोशिश भी की गई. एफएसएल टीम और डौग स्क्वायड मौके पर पहुंचे, लेकिन महिला की पहचान स्पष्ट नहीं थी, पुलिस ने इसे ‘ब्लाइंड मर्डर’ मानते हुए कई टीमें गठित कीं. एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर 6 विशेष टीमें रात भर जांच में लगी रहीं.

घटनास्थल से मिले मोमोज के टुकड़ों और मोजों के आधार पर पुलिस ने 5 किलोमीटर के दायरे में दुकानदारों से पूछताछ की और पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. 8 दिसंबर, 2025 की सुबह विजय बांधे सुपेला थाने पहुंचा. एसएचओ को अपना परिचय देते हुए उस ने कहा कि मेरे साथ काम करने वाली उर्मिला निषाद कल रात से घर नहीं पहुंची है.

”तुम उस से आखिरी बार कब मिले थे?’’ एसएचओ ने पूछा.

”सर, कल दिन में मेरी उस से फोन पर बात हुई थी, मगर रात से ही उस का फोन बंद आ रहा है. सुबह मैं ने उस के घर जा कर पता किया तो मालूम हुआ कि वह शाम को कहीं गई थी, मगर रात अपने घर नहीं लौटी.’’

बात महिला के लापता होने की थी, इसलिए उन्होंने उर्मिला निषाद की गुमशुदगी तुरंत दर्ज करा दी. एसएचओ ने इस की इत्तला एसएसपी विजय अग्रवाल को भी दे दी. एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने जिले के सभी थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की पड़ताल करनी शुरू कर दी. इस के अलावा गठित टीम ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले तो दूसरी टीम ने मोबाइल लोकेशन देखी. जांच की इसी कड़ी में एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में एक बाइक सवार युवक को पुलिस ने संदिग्ध मान कर जांच शुरू की.

दरअसल, उस युवक के पीछे बाइक पर एक महिला बैठी हुई थी और युवक ने बाइक में पेट्रोल डलवाने के बजाय बोतल में पेट्रोल लिया था. एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज में यही युवक मोमोज और चाइनीज पकौड़े पैक करवा रहा था. अंत में शक की सुई विजय बांधे नाम के उस व्यक्ति की ओर घूमी, जिस ने खुद को पीडि़त का परिचित बता कर सुपेला थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. पुलिस ने जब विजय बांधे को पूछताछ के लिए बुलाया तो उस की बातें शुरू से ही बेमेल लगीं. वह बारबार अपने बयान बदल रहा था और घटनाक्रम बताने में हिचक भी दिखाई दे रही थी.

तकनीकी टीम ने जब विजय का मोबाइल लोकेशन व मूवमेंट खंगाला तो पता चला कि घटना वाली शाम उस के मोबाइल की लोकेशन पुरई गांव की उसी नहर की थी, जहां पर अधजली लाश मिली थी. देर रात पूछताछ के दौरान जब विजय पर पुलिस के सवालों का दबाव और सख्ती बढ़ी तो आखिरकार वह टूट गया और उस ने पूरे मामले की कहानी पुलिस को साफसाफ बता दी. विजय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उस के घर और आसपास तलाशी ली. उस के कपड़ों पर खून के निशान मिले, जिन्हें उस ने छिपाने की कोशिश की थी. घटना में इस्तेमाल किया गया चापर भी बरामद हुआ. पेट्रोल डालने वाली बोतल और अन्य सामग्रियां भी पुलिस ने जब्त कीं.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले अवशेषों और आरोपी के कपड़ों का मिलान किया, जिस से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हो गई. पुलिस पूछताछ में विजय ने स्वीकार किया कि नहर के पास मिली अधजली लाश सुपेला की रहने वाली उर्मिला निषाद की थी, जिस का कई वर्षों से उस के साथ प्रेम प्रसंग था. उर्मिला उस के ऊपर शादी के लिए दबाव बना रही थी, जिस से परेशान हो कर उस ने हत्या की योजना बनाई.

24 साल का विजय बांधे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के करगाडीह गांव का रहने वाला था और कैटरिंग का काम करता था. 30 साल की उर्मिला निषाद भी पिछले कुछ सालों से उस के साथ काम कर रही थी. कैटरिंग के काम में अकसर रातरात भर दूसरे गांव कस्बों में जाना पड़ता था. साथ काम करतेकरते दोनों करीब आ गए और उन का रिश्ता भावनात्मक होतेहोते प्रेम संबंधों तक पहुंच गया. विजय शादीशुदा था और उस की पत्नी गर्भवती थी. इस के बावजूद उर्मिला उस पर विवाह का प्रेशर बना रही थी. इसी मुद्ïदे पर दोनों के बीच कई बार लड़ाईझगड़े हो चुके थे.

”विजय, आखिर तुम कब तक मेरी भावनाओं से खेलते रहोगे, मैं इस तरह अपनी जिंदगी बरबाद नहीं होने दूंगी.’’ एक दिन उर्मिला ने उलाहना देते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, तुम समझती क्यों नहीं. तुम्हें तो पहले ही मैं ने बता दिया था कि मैं शादीशुदा हूं, फिर भी तुम जिद कर रही हो.’’ विजय ने सफाई दी.

”तो क्या मैं जीवन भर तुम्हारी रखैल बन कर रहूंगी, तुम्हें मुझ से शादी करनी ही होगी.’’ उर्मिला गुस्से में तमतमा कर बोली.

”उर्मिला मैं ने तुम्हें धोखे में नहीं रखा, पत्नी के रहते तुम से मैं कैसे शादी कर सकता हूं. और मैं तुम्हारी जरूरतों का तो ध्यान रख रहा हूं.’’ विजय ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा.

”तुम्हें तो मेरे जिस्म से ही मतलब है, अगर तुम मुझे दिल से चाहते तो ऐसी बात कभी नहीं करते.’’ उर्मिला ने आंसू बहाते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, मेरी बीवी अभी प्रैग्नेंट है और मैं उसे किसी भी सूरत में छोड़ नहीं सकता. मुझे सोचने के लिए कुछ वक्त दो.’’ विजय ने मामले को शांत करने के लिहाज से कहा.

कैटरिंग के पैसों को ले कर भी विवाद खड़ा हो गया था. इसलिए धीरेधीरे उन के बीच का रिश्ता एकतरफा दबाव और आपसी मनमुटाव की भेंट चढऩे लगा था. कुछ समय से उर्मिला उसे सार्वजनिक रूप से लगातार अपमानित कर रही थी. इस बात को ले कर विजय के मन में इतना तनाव बढ़ गया था कि उस की स्थिति सांपछछूंदर जैसी हो गई थी. उर्मिला द्वारा की जा रही बारबार की बेइज्जती, गुस्से और शादी करने के दबाव से परेशान हो कर ही विजय के द्वारा उर्मिला को रास्ते से हटाने की साजिश रची जा रही थी. विजय को अपनी गलती का अहसास भी हो रहा था कि शादीशुदा होने के बावजूद उसे उर्मिला की बातों में नहीं आना था.

उर्मिला सुपेला गांव की रहने वाली थी. उस का विवाह करीब 10 साल पहले हो चुका था, पहले पति से उस का 8 साल का एक बेटा भी है. पति शराबी था, शराब पी कर उर्मिला के साथ मारपीट करता था. जब बेटा 3 साल का था, तभी उस ने पति को छोड़ दिया और अपनी सास और बेटे के साथ अलग रहने लगी. उर्मिला ने इस के बाद दूसरी शादी कर ली, लेकिन दूसरे पति के साथ भी वह ज्यादा दिनों तक रिश्ता नहीं निभा सकी. इस के बाद वह कैटरिंग का काम करने वाले विजय बांधे के संपर्क में आ गई.

उर्मिला ने शादी तो 2 बार कर ली, मगर उस के दिल पर राज करने वाला उसे कोई नहीं मिला. उस के दोनों पति न तो उस की जिस्मानी जरूरतों को पूरा कर सके और न ही उस के सपनों को साकार कर सके. यही वजह रही कि उर्मिला अपने से कम उम्र के विजय पर फिदा हो गई. विजय ने उर्मिला की कमजोरी का फायदा उठाते हुए उस से नजदीकियां बढ़ाईं और उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा. विजय उतई थान के अंतर्गत करगाडीह गांव का रहने वाला था. करगाडीह और सुपेला गांव के बीच की दूरी 15 किलोमीटर थी. कैटरिंग के काम के दौरान दोनों के बीच जिस ढंग से नजदीकियां बढ़ रही थीं, दोनों के बीच प्रेम की डोर मजबूत हो रही थी.

अकसर ही विजय उर्मिला को घुमाने ले जाता था और उस से कई बार शारीरिक संबंध भी बना चुका था. उर्मिला विजय पर दबाव बना रही थी कि वह भी सुपेला में उस के साथ रहे, मगर विजय शादीशुदा था और अपनी प्रैग्नेंट पत्नी की वजह से उर्मिला के साथ रहने को तैयार नहीं था. इसी बात पर दोनों के बीच मनमुटाव बढऩे लगा था और विवाद की स्थिति बनने लगी थी. उर्मिला निषाद की हत्या की घटना युवतियों को सचेत करती है कि प्रेम संबंध बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कोई पुरुष उन से केवल जिस्मानी संबंध बनाने के लिए तो प्रेम का नाटक नहीं कर रहा.

किसी शादीशुदा पुरुष से प्रेम करने की भूल से उन्हें जीवन भर का पछतावा ही मिल सकता है. यदि किसी मजबूरी के चलते ऐसे पुरुषों से प्रेम संबंध कायम भी हो जाएं तो इस बात का खयाल रखें कि उन पर शादी करने का दबाव कदापि न बनाएं, अन्यथा उन का हश्र भी उर्मिला निषाद की तरह होगा. Chhattisgarh Crime

 

 

UP News: इंटररिलीजन लव – ठेकेदार कौन

  • UP News: उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र में काजल के पड़ोस में मुसलिम युवक अरमान रहता था. दोनों एकदूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे. उन के बीच प्रेम तभी पनप गया था, जब वे किशोरावस्था की दहलीज पार कर चुके थे. पहले इस की भनक अरमान के फेमिली वालों को लगी. उन्होंने तुरंत समाज और परिवार की लोकलाज और मर्यादा को भांपते हुए अरमान को करिअर बनाने के लिए दुबई भेज दिया.

बीते दिनों सर्दियां शुरू होने से पहले अरमान करीब 4 साल बाद दुबई से अपने घर लौट आया था. उस के जेहन में काजल बसी हुई थी. उस का खूबसूरत मासूम चेहरा वह भुलाए नहीं भूल पाया था. उस ने किसी तरह से उस का नया मोबाइल नंबर पता कर लिया था.

रात का वक्त था. काजल की आंखों में नींद नहीं थी. मोबाइल फोन की स्क्रीन पर अंगुलियां सरका रही थी. कभी रील तो कभी ओटीटी और फिल्मों के शार्ट वीडियो देखने लगी थी. रात के 11 बज चुके थे. तभी स्क्रीन पर वाट्सऐप मैसेज चमकने लगा. लव के इमोजी के साथ लिखा था,’हाय! मुझे पहचाना?’

कुछ पल रुक कर उस ने जवाब टाइप कर दिया, ”नहीं! कौन हो?’’

अगला मैसेज था, ”अरे, मैं अरमान!’’

”कौन अरमान?’’

”वही तुम्हारा अरमान… अरमू.’’ इस मैसेज के पढऩे के बाद काजल की आंखों में अचानक चमक आ गई. उस ने तुरंत मैसेज आने वाले वाले नंबर पर वाट्सऐप कौल कर दिया.

उस के बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला जो शुरू हुआ, उन्हें पता ही नहीं चला कि कब रात के 12 बज गए.

दरअसल, दोनों पड़ोसी थे. वे सिर्फ पड़ोसी होने के नाते ही एकदूसरे को नहीं जानतेपहचानते थे, बल्कि उन के बीच प्रेम पनप चुका था. बीते 4 साल पहले अचानक अरमान दुबई चला गया था. उस के बाद काजल कालेज की पढ़ाई पूरी कर एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की जौब करने लगी थी.

सालों बाद अरमान की आवाज सुन कर काजल के दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं. मन में हलचल होने लगी थी. अगले रोज वे मिले, लेकिन फेमिली वालों से छिप कर.  उन्होंने तय किया कि उन्हें अपने फेमिली और मोहल्ले वालों की नजरों से बच कर रहना होगा. कारण वे अलगअलग धर्मों के थे. लोगों को बात का बतंगड़ बनाने में जरा भी वक्त नहीं लगेगा. वैसे भी समाज की नजरों में हिंदूमुसलिम के बीच भाईचारा बेकार की चीज बन गई है.

अरमान सालों बाद अपनी प्रेमिका काजल को पा कर खुश था. उसे इस बात की बेहद खुशी थी कि काजल उसे जरा भी नहीं भूल पाई थी. लंबे अरसे बाद भी उस का प्रेम जस का तस था. बल्कि उन के प्रेम में और भी गहराई आ गई थी. वे अब प्यारमोहब्बत की बातों के साथसाथ आगे की सुनहरी जिंदगी के सपने बुनने लगे थे. उन के बीच फोन पर बातें होने लगी थीं. बात 18-19 जनवरी, 2026 की रात की है. अरमान को काजल की याद सता रही थी. काजल का भी कुछ ऐसा ही हाल था, जबकि दोनों के बीच फोन पर काफी बातें हो चुकी थीं.

काजल रजाई में सोने की कोशिश कर रही थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी. इसी बीच कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दी. उस ने रजाई में लेटेलेटे झांक कर देखा. अंधेरे में कुछ नहीं दिखाई दिया. फिर उस ने मोबाइल की रोशनी में देखा तो सामने अरमान खड़ा था. वह चौंक गई. अभी वह कुछ और सोच पाती, उसे अपने भाई  सतीश की आवाज सुनाई दी. वह चिल्ला रहा था, ”कौन!…कौन है..!’’

उस की आवाज सुन कर काजल अलर्ट हो गई. वह समझ गई कि अरमान को यहां आते हुए सतीश ने शायद देख लिया है. उस ने तुरंत अरमान को अपनी रजाई में छिपा दिया और कमरे से बाहर निकल गई. तब तक सतीश उस के पास पहुंच चुका था. बोला, ”अभीअभी मैं ने किसी को तुम्हारे कमरे में जाते हुए देखा है.’’

”नहींनहीं, मैं ने तो नहीं देखा! तुम्हें कोई धोखा हुआ है…कौन आएगा इतनी रात को?’’ काजल बोली, लेकिन उस की आवाज में लडख़ड़ाहट थी.

उस की बात का जवाब दिए बगैर सतीश सीधा उस के कमरे में जा घुसा. बत्ती जला दी. रजाई पर नजर जाते ही बोला, ”यहां कौन है?’’

”कोई तो नहीं?’’ काजल बोली.

”कोई कैसे नहीं है… वह देखो, रजाई उठी हुई नहीं दिख रही है तुम्हें?’’ सतीश बोला और तुरंत रजाई को खींच लिया. उस में दुबका अरमान हड़बड़ा कर बिस्तर से नीचे उतरने लगा. सतीश ने तुरंत उसे दबोच लिया और आवाज दी, ”राजाराम… राजाराम! जल्दी आना काजल के कमरे में…देखो, यहां क्या हो रहा है?’’

सतीश का भाई राजाराम पास के कमरे में ही था. वह अधकचरी नींद में उठा और भाग कर सतीश के पास पहुंच गया. वहां सतीश बड़ी मुश्किल से अरमान को दबोचे हुए था. वह निकलने की कोशिश कर रहा था. राजाराम ने उस के हाथपैर बांध दिए. उन्हें पहले से काजल और अरमान के प्रेम संबंध के बारे में भनक थी. लोगों से उन के बारे में कई शिकायतें मिल चुकी थीं. किंतु इस का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि अरमान उस की बहन के कमरे में उस की रजाई में मिलेगा.

अरमान को वहां पा कर दोनों भाई जितने आक्रोशित थे, उतनी ही नाराजगी बहन काजल के प्रति भी थी. सतीश ने गुस्से में दोनों की पिटाई शुरू कर दी. राजाराम बोला, ”आज इन की खैर नहीं होने दूंगा. अभी रिंकू भैया को बुलाता हूं.’’

उन का बड़ा भाई रिंकू उस वक्त अपनी ससुराल अमरोहा देहात में था. वह अपने बच्चों और पत्नी के साथ वहीं रहता था. सतीश ने उसे फोन कर बुलाया. वह एक घंटे में ही कार से अपने घर पहुंच गया. उस समय रात का करीब एक बज चुका था. आते ही वह आगबबूला हो गया. गुस्से में चीखता हुआ बोला, ”खत्म कर दो साले को, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.’’

 

”भैया! ऐसा मत करना, मैं अरमान से प्यार करती हूं. उस के बिना जिंदा नहीं रह सकती.’’ हाथपैर बंधी काजल रोती हुई बोली.

”तू चुप रह कुतिया! सारी फसाद की जड़ तू ही है…तू जिंदा रहेगी, तब न उस से प्यार करेगी.’’ सतीश गुस्से में आंखें दिखाता हुआ बोला.

”मैं कई दिनों से इन पर नजर रखे हुए था. आज पकड़ में आया है…वह भी रंगेहाथों.’’

तीनों भाइयों की आंखों में अरमान और बहन काजल के प्रति अजीब तरह का गुस्सा था. रिंकू फावड़ा ले आया. तब तक सतीश और राजाराम मिल कर अरमान और काजल के हाथपांव को और मजबूती से बांध चुके थे, ताकि वे किसी भी तरह विरोध न कर सकें. तीनों ने मिल कर फावड़े से वार कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया. उसी रात तीनों भाइयों ने मिल कर दोनों की लाशों को ठिकाने भी लगा दिया.

रोंगटे खड़ी करने वाली यह वारदात मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव उमरी सब्जीपुर की थी, जहां सैनी परिवार के 3 भाइयों ने झूठी शान के नाम पर एक प्रेमी जोड़े की बेरहमी से हत्या इसलिए कर दी थी, क्योंकि प्रेमी मुसलिम समाज का था. अगले रोज 19 जनवरी, 2026 को उमरी सब्जीपुर के ही रहने वाले अरमान के पिता हनीफ को बेटे के घर नहीं होने की चिंता होने लगी. वह पाकबड़ा थाने में अरमान की गुमशुदगी की सूचना लिखवाने गए.

उन्होंंने एसएचओ योगेश कुमार को बताया कि उस का बेटा अरमान 18 जनवरी की शाम से ही घर पर नहीं है. रात को वह घर नहीं आया. उस का फोन भी बंद आ रहा है. जबकि अरमान के साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. इसी के साथ हनीफ ने पड़ोसी गनपत सैनी पर शक जाहिर करते हुए बताया कि उन का बेटा प्रेमप्रसंग के चलते लापता हो गया है. इस पर एसएचओ ने उलटे हनीफ से ही सवाल कर डाला कि कहीं उस का बेटा ही गनपत की बेटी को भगा कर तो नहीं ले गया? इस का पता लगाने के लिए गनपत की बेटी के बारे में पता करना होगा.

इसी के साथ एसएचओ कुमार ने हनीफ को जाने के लिए कहा और गनपत के बारे में पता लगाने के लिए एक सिपाही को गनपत सैनी के घर भेज दिया. उसी रोज पुलिस को पता चला कि गनपत सैनी की बेटी काजल सैनी भी 18 जनवरी की रात से ही लापता है. पाकबड़ा पुलिस हनीफ और गनपत की जानकारी के आधार पर मान चुकी थी कि अरमान और काजल आपसी प्रेम के चलते लापता हैं. यह कहना मुश्किल था कि काजल को अरमान भगा ले गया है या फिर दोनों अपनी मरजी से कहीं चले गए हैं.

हनीफ पुलिस के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं था, क्योंकि पुलिस उस की सुनने के बजाय उसे ही दोषी ठहरा रही थी. यहां तक कि गनपत की बेटी को भगा कर ले जाने का आरोप भी लगा रही थी. जबकि हनीफ अपने बेटे को जबरन लापता किए जाने की आशंका से घिरा हुआ था. उसे कुछ लोगों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों के पास जाने की सलाह दी. हनीफ ने ऐसा ही किया और 21 जनवरी, 2026 को मुरादाबाद जा कर एसएसपी सतपाल अंतिल से मिला. उन्हें भी पूरी बात बताई और बेटे की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराने का अनुरोध किया.

उस ने किसी अनहोनी की आशंका जताई और कहा कि 18 जनवरी की रात को गनपत के घर से काफी चीखनेचिल्लाने की आवाजें आ रही थीं. उस वक्त इस पर उस ने ध्यान नहीं दिया था. हनीफ की शिकायत और अरमान के साथ काजल के लापता होने के मामले पर सतपाल अंतिल ने गहराई से विचार किया. वह इस निर्णय पर पहुंचे कि काजल के फादर या कोई परिजन पुलिस के पास अरमान के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने क्यों नहीं पहुंचे, जबकि वह भी उसी दिन से लापता थी.

उन्होंने इस मामले को देखने के लिए सीओ (हाईवे) राजेश कुमार को आवश्यक निर्देश दिए. सीओ राजेश कुमार ने अपनी जांच की शुरुआत गांव उमरी सब्जीपुर पहुंच कर शुरू की. सब से पहले वह गनपत सैनी से मिले और सवाल किया, ”तुम्हारी बेटी पिछले 2 दिनों से लापता है, फिर भी तुम ने उस बारे में पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की?’’ इस का सटीक जवाब उस के फेमिली वाले नहीं दे पाए.

सीओ साहब ने उन्हें अपने सभी बेटों के साथ थाने जा कर शिकायत दर्ज करवाने को कहा. पुलिस का दबाव मिलने पर गनपत अपने तीनों बेटों को ले कर थाने गया. वहां पुलिस उन सभी से सख्ती से पूछताछ करने लगी. इस पूछताछ में तीनों बेटे टूट गए और कुबूल कर लिया कि उन्होंने अरमान और काजल की हत्या कर दी है. दोनों को उन्होंने ही मारा है और दोनों की लाशें गांगन नदी के किनारे दफना दी हैं. भाइयों ने बताया कि दोनों लाशें वे बोरियों में भर कर गांव से 2 किलोमीटर दूर नीम करोली के मंदिर के पास ले कर चले गए. वहीं गांगन नदी के किनारे गड्ïढा खोद कर उन्हें दफना दिया.

यह जानकारी मिलने के बाद 21 जनवरी, 2026 की शाम को तीनों भाइयों की निशानदेही पर पुलिस टीम ने नीम करोली मंदिर के पीछे दफनाई गई अरमान और काजल की लाशें बरामद कर लीं. मुसलिम युवक और हिंदु युवती की लाश मिलने की सूचना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. सांप्रदायिक तनाव बढऩे और अप्रिय घटना की आशंका को भांपते हुए जिला प्रशासन ने गांव में भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात कर दी. खासकर उमरी सब्जीपुर गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था.

दोनों की लाशें देर रात तक बरामद कर ली गई थीं. युवक की पहचान 27 वर्षीय अरमान के रूप में और युवती की पहचान 18 वर्षीया काजल सैनी के रूप में हुई. उन की लाशों का पोस्टमार्टम अगले रोज 22 जनवरी को 3 डाक्टरों के पैनल द्वारा किया गया था. लाशों पर चोट और गहरे जख्म के निशान पाए गए. अरमान के शरीर पर 7 चोटों के निशान थे, जबकि काजल के शरीर पर 9 चोटों के निशान थे. गनपत सैनी की छोटी बेटी काजल की प्रेम कहानी तब शुरू हो गई थी, जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ती थी. उस के बाद उस ने गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली थी. काजल सुंदर थी.

एक दिन उस की मुलाकात पड़ोसी अरमान से हुई. तब वह उस की कदकाठी और स्टाइल पर फिदा हो गई. इस से पहले उस ने अरमान को कभी इस नजरिए से नहीं देखा था. जैसे ही काजल से अरमान की नजदीकियां बढ़ीं, अरमान भी उसे हसरत भरी नजरों से देखने लगा. जल्द उन के बीच अंकुरित हो रहे प्रेम की जानकारी दोनों के फेमिली वालों को भी हो गई. उन्हें जरा भी अच्छा नहीं लगा कि दोनों के बीच प्रेम संबंध कायम हो. इसे देखते हुए अरमान के अब्बू ने उसे दुबई भेज दिया. वहां अरमान टाइल्स लगाने का काम करने लगा, किंतु हर साल ईद के मौके पर घर आ जाता था. इस कारण उस का काजल से भी मिलनाजुलना होता रहा.

यह कहें कि उन के बीच प्रेम की ताजगी बनी रही. बीते साल 2025 में अरमान हमेशा के लिए दुबई से मुरादाबाद आ गया और यहीं टाइल्स का काम करने लगा. काजल का फोन नंबर चेंज हो चुका था. किसी तरह से उस ने काजल का नया फोन नंबर हासिल कर लिया. उस के बाद दोनों के बीच बातें होने लगीं. उस के बाद जो हुआ, वह उन के प्रेम संबंध के अंत की कहानी लिख गई.

इस मामले में बीएनएस की धारा 103 (1), 238 के तहत राजाराम, सतीश, रिंकू को आरोपी बनाया गया. उन से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर मुरादाबाद जेल भेज दिया गया. UP News

 

Love Story: इश्क की आग में जला निर्दोष हरजी

Love Story: पति के जुल्मोसितम से तंग आ चुकी एक बच्चे की मां गीता का झुकाव 25 वर्षीय भरत अहीर की तरफ हो गया. बाद में उस ने प्रेमी भरत के साथ रहने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने बौलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ देख कर ऐसी खौफनाक योजना बनाई कि…

गुजरात के जिला पाटन के थाना सांतलपुर के अंतर्गत आने वाले गांव जखोत्रा की रहने वाली गीता का विवाह बचपन में ही गांव के ही एक युवक से तय हो गया था. गीता जब सयानी हुई तो उसे वह युवक अच्छा नहीं लगता था. विवाह के बाद उस का पति अपने पेरेंट्स की बातों को ज्यादा मानता था, इसलिए छोटीछोटी बातों पर गीता से मारपीट करता था. इसी तरह के माहौल में वह एक बच्चे की मां बन गई, जो इस समय 3 साल का है.

इसी साल 4 महीने पहले गीता खेतों में जीरा की फसल काट रही थी, तभी उस की मुलाकात गांव के ही रहने वाले भरत अहीर से हुई. दोनों की आंखें मिलीं. भरत कुंवारा था. दोनों ने एकदूसरे का नंबर लिया और आपस में बातें करने लगे, जिस से दोनों को एकदूसरे से प्यार हो गया, जो समय के साथ गहरा होता गया. दोनों एक ही गांव के रहने वाले तो थे ही, पड़ोसी भी थे. भरत मुंबई में कोई प्राइवेट नौकरी करता था. समयसमय पर वह गांव आताजाता रहता था.

फोन पर बात करतेकरते ही उन के बीच प्यार इतना गहरा हो गया कि गीता को अब पति के साथ रहना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. इसलिए गीता ने भरत के साथ रहने की बात की तो वह उसे साथ रखने के लिए खुशीखुशी राजी हो गया, क्योंकि अब उसे भी गीता के बगैर रहना अच्छा नहीं लगता था.

गुजरात में अहीर समाज में बैशाख यानी मई में ही विवाह होते हैं. इसी बैशाख में गीता के चचेरे भाई का विवाह था. शादी में जाने के लिए उस ने पति से कहा, पर पति ने विवाह में जाने से मना कर दिया और गीता को भी नहीं जाने दिया. गीता को यह बात इतनी बुरी लगी कि उस ने भरत को फोन कर के स्पष्ट कह दिया कि अब वह पति के साथ बिलकुल नहीं रहेगी. भरत भी तो यही चाहता था. क्योंकि उस का भी मन अब गीता के बगैर नहीं लग रहा था. इस के बाद दोनों साथ रहने का उपाय खोजने लगे.

दोनों ने एक बार तो भाग जाने के बारे में सोचा. पर भाग जाने के बाद दोनों के घर वाले दोनों को खोज निकालते और फिर उन्हें अलग कर देते. क्योंकि इस के पहले परिवार में एक घटना ऐसी बन चुकी थी. कुछ दिनों पहले गीता की चचेरी बहन भाग चुकी थी. फेमिली वाले उसे ढूंढ कर ले आए थे. इस से गीता जानती थी कि अगर वह भरत के साथ भाग जाती है तो घर वाले कैसे भी उसे ढूंढ निकालेंगे. इसी दौरान लगभग महीने भर पहले गीता ने भाई के मोबाइल में ‘दृश्यम’ फिल्म देखी. फिल्म देखने के बाद उस ने एक खतरनाक योजना बना डाली. उस ने अपनी इस योजना के बारे भरत से बात की.

उस ने कहा, ”हमारे भागने के बाद अगर यह साबित हो जाए कि मैं मर गई हूं तो मुझे कोई नहीं ढूंढेगा. अगर हमें साथ रहना है तो किसी की लाश को मेरे कपड़े पहना कर लाश को जला कर हमें यह साबित करना होगा कि वह मैं हूं.’’

यह सुन कर भरत ने आनाकानी करते हुए कहा, ”ऐसा करने पर हम पकड़े गए तो सारी उम्र जेल में बीत जाएगी.’’

पर गीता ने तो ‘दृश्यम’ फिल्म देखी थी. इसलिए उस ने इतने तर्क दिए कि भरत को उस की बात माननी पड़ी. इस तरह गीता ने भरत को मना लिया. फिर दोनों ने वह स्थान भी तय कर लिया, जहां लाश को जलाना था. पूरी योजना बना कर भरत अहीर मुंबई चला गया, जिस से किसी को यह न लगे कि हत्या में वह भी शामिल था. वह वहां से योजना को पूरी करने के लिए इस तरह आएगा कि गांव के किसी व्यक्ति को पता नहीं चलेगा.

वह चुपके से आएगा और किसी की हत्या कर के गीता के कपड़े पहना कर जला देगा और यह साबित कर देगा कि लाश गीता की जली है. उस के बाद गीता को ले कर मुंबई चला जाएगा, जहां उस के साथ आराम से रहेगा. लगभग एक महीने तक दोनों अपनी इस योजना पर विचार करते रहे. 26 मई, 2025 को भरत मुंबई से आया, पर वह अपने गांव जखोत्रा जाने के बजाय अपने एक रिश्तेदार के यहां चला गया. वह जिस रिश्तेदार के यहां ठहरा था, उस की बाइक ले कर ऐसे व्यक्ति की तलाश में निकल पड़ा, जिस की हत्या कर के उस की लाश को गीता के कपड़े पहना कर जलाया जा सके.

गरमियों के दिन थे. आकाश से आग बरस रही थी. ऐसे में शिकार की तलाश में निकला भरत पूरे दिन भटकता रहा. पर उसे ऐसा कोई आदमी नहीं मिला, जिस से उस का मकसद पूरा हो पाता. शाम हो गई थी. लगभग साढ़े 7 बज रहे थे. भरत बुरी तरह थक गया था. उस समय वह वौवा गांव पहुंचा था. रवेची माता के मंदिर पर रुक कर वह पानी पी कर सोच रहा था कि अब क्या किया जाए, तभी उस की नजर सामने तालाब के पास से गुजर रहे एक अधेड़ पर पड़ी. उस का नाम हरजीभाई सोलंकी था.

भरत ने उसे रोक कर पूछा, ”काका, खेत जा रहे हो क्या?’’

”हां, खेत ही जा रहा हूं.’’ हरजी ने कहा.

भरत तो वैसे भी ऐसे ही मौके की तलाश में था. उस ने हरजी से कहा, ”आओ, मेरी बाइक पर बैठ जाओ. मैं तुम्हें खेत तक छोड़ देता हूं.’’

हरजीभाई को क्या पता था कि आगे मौत मुंह फाड़े खड़ी है. भरत के कहने पर वह उस की बाइक पर पीछे बैठ गया. भरत बाइक स्टार्ट कर के आगे बढ़ाते हुए हरजी से बातें करने लगा. क्योंकि वह हरजी से उस के बारे में अधिक से अधिक जानकारी ले लेना चाहता था. उस ने पूछा, ”काका, आप के घर में कौनकौन हैं?’’

”मेरी न पत्नी है और न ही कोई औलाद है. मैं बहुत दिनों से यहां रह कर खेतों में मजदूरी करता हूं.’’ हरजी ने कहा. हरजी की इस बात से भरत को लगा कि अगर इस की हत्या कर दी जाए तो इस की तलाश करने वाला कोई नहीं है. भरत ने हरजी को खेतों के पास उतार दिया. दूसरी ओर हरजी को लगा कि भरत अच्छा आदमी है. उसे अपनी बाइक पर बैठा कर खेतों तक ले आया है. इसलिए उस ने उसे पानी पी कर जाने के लिए कहा.

हरजी जैसे ही पानी लेने के लिए अपनी झोपड़ी की ओर बढ़ा, भरत ने उसे इतने जोर से धक्का मारा कि वह खुद को संभाल नहीं सका और जमीन पर गिर पड़ा. हरजी जैसे ही जमीन पर गिरा, भरत जल्दी से उस के ऊपर चढ़ गया और उस का गला पकड़ कर दबाने लगा. हरजी ने खुद को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, पर भरत जवान और तगड़ा था. इसलिए भरत के आगे उस की एक नहीं चली और गला दबाने से उस की सांसें हमेशा के लिए रुक गईं.

हरजी की मौत हो गई है, यह विश्वास होने के बाद भरत ने उस की लाश को उठा कर बाइक पर पीछे बैठा दिया और खुद आगे बैठ कर लाश को रस्सी से अपनी कमर में इस तरह बांध ली कि वह गिरे न. उस के हाथ भी उस ने रस्सी से बांध दिए, ताकि वे हिलें नहीं. इतना कर के वह जखोत्रा के लिए चल पड़ा. रास्ते में उसे 3 लोग मिले भी, पर अंधेरा होने की वजह से वे जान नहीं पाए कि भरत के पीछे बैठा आदमी जिंदा है या मुर्दा.

जखोत्रा पहुंच कर भरत गांव के सुतकणी नाम के स्थान पर हरजी की लाश को रख कर खड़ा हो गया. वहीं से उस ने गीता को फोन किया कि लाश मिल गई है. तब गीता ने कहा, ”रात एक बजे के आसपास मैं घर से इस तरह निकलूंगी कि किसी को पता नहीं चलेगा. मैं 4 लीटर पेट्रोल ले कर आऊंगी. उसी से लाश को जला दिया जाएगा.’’

गांव के आसपास कोई पेट्रोल पंप नहीं था, इसलिए गांव के दुकानदार पेट्रोल बेचते थे. गीता ने गांव की एक दुकान से पेट्रोल खरीद लिया. उस ने यहां चालाकी दिखाई. उस ने 4 लीटर पेट्रोल के बजाय डेढ़ लीटर पेट्रोल इसलिए खरीदा कि दुकानदार को शक न हो जाए और वह पूछने लगे कि इतने पेट्रोल का वह क्या करेगी. बाकी का पेट्रोल भरत को लाना था, पर उस के पास समय ही नहीं था. किसी ने उसे लाश के साथ देख लिया तो? इस डर से लाश को वहीं छोड़ कर वह एक मंदिर में चला गया. उसी मंदिर में बैठ कर एक बजे तक वह गीता का इंतजार करता रहा.

दूसरी ओर तय प्रोग्राम के अनुसार एक बजे गीता घर से निकल पड़ी. उस ने एक प्लास्टिक की थैली ले रखी थी, जिस में पेट्रोल भरी बोतल और उस की झांझर थी. उस ने लहंगा और चोली पहनी थी, जिस के नीचे लैगिंग और कुरता पहने थी. सुतकड़ी पहुंच कर गीता ने फोन कर के भरत को बुला लिया. थोड़ी ही देर में भरत आ गया तो दोनों ने मिल कर हरजी की लाश को लहंगाचोली और झांझर पहना दी, जिस से लोग यह समझें कि यह लाश गीता की है.

हरजी जो शर्ट पहने था, वह फटी थी, इसलिए उसे वैसे ही छोड़ दिया. फिर हरजी की लाश पर पेट्रोल डाला और आग लगा कर दोनों भाग गए. पेट्रोल कम होने की वजह से लाश ठीक से जल नहीं सकी. नवजीवन का सपना ले कर भरत और गीता जखोत्रा से करीब 165 किलोमीटर दूर जा कर कणोदर के एक होटल में ठहरे. होटल में दोनों ने रात भर मौजमस्ती की और फिर पालनपुर होते हुए राजस्थान के जोधपुर जाने का निश्चय किया. इस के पीछे कारण यह था कि जोधपुर में गुजराती कम रहते हैं, इसलिए वहां पहचाने जाने का डर कम था.

दूसरी ओर गीता के जाने के बाद उस का 3 साल का बेटा जाग कर रोने लगा. उतनी रात को अन्य कोई तो नहीं जागा, पर बच्चे की दादी जाग गई. बच्चे को गोद में ले कर उस ने चुप कराया और गीता को खोजने लगी. जब गीता नहीं मिली तो उस ने फेमिली के अन्य लोगों को जगा कर बताया कि गीता घर में नहीं है. उतनी रात को गीता घर से गायब है, यह जान कर सभी को हैरानी हुई. गीता का पति तो उस की खोज में निकल ही पड़ा, फेमिली वालों के अलावा अगलबगल वाले भी उस की मदद के लिए साथ आ गए थे. अंधेरा होने की वजह से टौर्च का सहारा लिया गया.

सभी लोग गीता की तलाश करतेकरते सुतकड़ी पहुंचे तो किसी को लगा कि थोड़ी दूर पर कोई सो रहा है. उस ने यह बात अन्य लोगों को बताई तो किसी ने कहा कि इतनी रात को यहां कौन सो रहा है? तभी किसी ने कहा कि चल कर देखते हैं. नजदीक पहुंच कर सभी ने जो देखा, उस से सभी के होश उड़ गए. वहां एक अधजली लाश पड़ी थी. कपड़ों से लगा कि यह तो गीता है. पैरों में झांझर भी गीता की थी.

सभी के मन में एक ही सवाल उठा कि गीता यहां कैसे पहुंची? उसे क्या हुआ होगा? गीता ने आत्मदाह किया है या फिर उसे किसी ने जलाया है? इन सभी सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे. पत्नी की लाश देख कर उस का पति जोरजोर से रोने लगा. साथ आए लोगों ने उसे सांत्वना दी और लाश उठा कर घर ले आए. घर आने के बाद एक ओर पुलिस को सूचना देने की बात चल रही थी तो दूसरी ओर उस का अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही थी. हैरानी के बीच सवेरा हुआ.

घर वालों ने सुबह अंतिम संस्कार के लिए गीता की लाश के कपड़े बदलने शुरू किए तो लाश देख कर सभी को हैरान रह गए. अंधेरे में जिसे वे गीता की लाश समझ कर घर ले आए थे, उसे दाढ़ी थी. जब उसे ठीक से देखा गया तो पता चला कि वह लाश गीता की नहीं, बल्कि किसी मर्द की थी. तब सभी हैरान रह गए थे कि अगर यह लाश गीता की नहीं है तो फिर किस की है. जबकि लाश पर कपड़े और झांझर गीता के ही थे. वे लाश के पास कैसे आए? इस से भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि गीता कहां है? धीरेधीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई. लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है?

इस के बाद पुलिस को सूचना दी गई. महिला के कपड़े पहने किसी पुरुष की अधजली लाश की सूचना मिलने के बाद थाना सांतलपुर पुलिस के अलावा एलसीबी (लोकल क्राइम ब्रांच) और एसपी वी.के. नायी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए. दुर्घटना की धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी. खोजी कुत्ता, एफएसएल की टीम और क्राइम इनवेस्टीगेशन टीम को भी सूचना दी गई तो ये लोग भी घटनास्थल पर आ पहुंचे. सभी साक्ष्य जुटाने में लग गए. लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया.

पुलिस ने गीता के घर वालों और गांव वालों से पूछताछ शुरू की. इस पूछताछ से एक बात तो साफ हो गई कि पुरुष की लाश पर जो लहंगाचोली थी, वह गीता की ही थी. इसी के साथ पुलिस को गांव वालों से यह भी पता चला कि गीता के साथ उस के पड़ोस में रहने वाला 25 साल का भरत अहीर भी गायब है. इतनी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने अपनी तरह से जांच शुरू की. अपने मुखबिरों को भी लगा दिया. इस के साथ टेक्नोलौजी की भी मदद ली. लाश की शिनाख्त के लिए उस के फोटो जिले के सभी थानों को भेजने के साथ सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर दिए गए.

जखोत्रा से लगभग 7 किलोमीटर दूर वौवा गांव के किसी आदमी ने सोशल मीडिया पर लाश का फोटो देखा तो उस ने पहचान लिया कि यह तो खेतों में मजदूरी करने वाला हरजी है. उस व्यक्ति ने यह बात गांव वालों को बताई. इस के बाद तो यह बात जखोत्रा से करीब 29 किलोमीटर दूर पीपराला गांव में रहने वाले हरजीभाई के फेमिली वालों तक पहुंच गई. हरजी का भाई अपने कुछ सगेसंबंधियों के साथ जखोत्रा पहुंचा.

पुलिस ने उस से पूछताछ की तो पता चला कि जिस की लाश मिली थी, उस का पूरा नाम हरजीभाई देवाभाई सोलंकी था. उस की उम्र 56 साल थी. उस की 3 बार शादी हुई थी. पर तीनों शादियां टिकी नहीं. इस के बाद हरजी इधरउधर भटकता रहता था. जहां कहीं खेतों में काम करने को मिलता था, वहीं मजदूरी कर लेता था. उस की किसी से दुश्मनी नहीं थी. अब सवाल यह था कि हरजीभाई को गीता के कपड़े पहना कर किस ने जलाया था. घटना को घटे अभी कुछ ही समय बीता था कि पुलिस ने अपना ध्यान गीता और भरत पर केंद्रित किया. पुलिस उन की तलाश कर रही थी, पर अभी यह तय नहीं था कि वही आरोपी हैं?

थाना सांतलपुर पुलिस के अलावा एलसीबी और लाश की शिनाख्त होने के बाद एससी/एसटी सेल के डिप्टी एसपी भी इस मामले की जांच में शामिल हो गए थे. लगभग 25 लोगों की टीम शक के आधार पर गीता और भरत को खोज रही थी. इसी दौरान पुलिस को मुखबिरों से एक सूचना मिली. उसी सूचना के आधार पर पुलिस पालनपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची, जहां गीता और भरत अहीर मिल गए. पुलिस दोनों को पकड़ कर थाना सांतलपुर ले आई. भरत ने राजस्थान के जोधपुर जाने के लिए 2 टिकट खरीदे थे.

पुलिस ने दोनों से पूछताछ शुरू की. इस पूछताछ में उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. इस के बाद पुलिस ने डमी के माध्यम से पूरी घटना को दोहराया. सारे साक्ष्य जुटा कर पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है. Love Story

 

 

Love Crime: प्रेम प्रसंग में टुकड़े – टुकड़े किया पति

Love Crime: चंदौसी शहर के जूता कारोबारी राहुल ने रूबी से लव मैरिज करने के बाद उसे हर तरह की सुखसुविधाएं दीं. लेकिन 2 बच्चों की मां बनने के बावजूद रूबी पति की आंखों में धूल झोंक कर 2-2 प्रेमियों के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी. प्यार में अंधी हो चुकी रूबी के इरादे एक दिन इतने खौफनाक हो गए कि….

रूबी की जिंदगी एक त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में फंस गई थी. वह प्रेमी अभिषेक व दूसरे प्रेमी गौरव और पति राहुल के बीच फंसी हुई थी. रूबी के लिए यह त्रिकोण नहीं, बल्कि 3 दिशाओं में बिखरा हुआ मन था. पति राहुल स्थिरता और परिवार में समन्वय  बनाए रखने के भ्रम के साथ परिवार को खुशहाल बनाए रखने की कोशिश में लगा हुआ था. इसी तरह उस की शादी के 15 साल बीत चुके थे. दूसरी तरफ अभिषेक, जो उस के पति और समाज में रूबी को बहन बता कर दिन में भैया रात में सैंया की कहावत को चरितार्थ कर रहा था. अपनी धनदौलत के सहारे रूबी की मस्त जवानी का इस्तेमाल कर रहा था. अभिषेक के साथ रूबी 15 साल पहले जैसे यौन आनंद लिए जाने में मस्त थी. अभिषेक बहुत समझदार था.

तीसरा आशिक गौरव ने कुछ महीने पहले इस कहानी में एंट्री की थी. वह जवानी के जुनून में इस तरह अंधा हो गया था, जैसे कि सांप केंचुली आने पर हो जाता है. रूबी से उस का संपर्क हुआ. इसी दौरान अभिषेक से भी मुलाकात हुई. दोनों में दोस्ती हो गई. अभिषेक की तरह गौरव भी रूबी को बहन कहने लगा था और उस के बच्चे भी अभिषेक की तरह गौरव को भी मामा कहते थे. यह मामला उत्तर प्रदेश के जिला संभल की सब से उन्नतशील तहसील चंदौसी का है. संभल के जिला बनने से पहले चंदौसी को ही जिला बनाने की मांग उठती रही थी. जिला होने के सभी मानक भी चंदौसी पूरे करती थी, लेकिन राजनीतिक खेल की वजह से संभल को जिला घोषित कर दिया गया था, लेकिन मुख्यालय काफी दूर बहजोई में बनाया गया.

चंदौसी की घनी आबादी के चुन्नी मोहल्ला में राहुल नाम का जूते का व्यापारी रहता था. वैसे यह इलाका जूतों के निर्माण के लिए काफी प्रसिद्ध है. इसी चुन्नी मोहल्ले में 40 वर्षीय राहुल कुमार अपनी पत्नी रूबी (39 साल) 12 साल की बेटी और 10 साल के बेटे के साथ रह रहा था. राहुल एक मेहनती जूता व्यापारी था, सुबह से शाम तक कारीगरों से जूते बनवाता था. जूतों को राहुल थोक दुकानदारों को सप्लाई करता था. भागतेदौड़ते हुए भी वह जब भी घर लौटता, रूबी और दोनों बच्चों का चेहरा देख कर सारे दिन की थकान भूल जाता था. उस के चेहरे पर हमेशा संतोष की मुसकान रहती. रूबी, उस की पत्नी, घर की सारी जिम्मेदारियां संभालती थी. कभीकभी वह राहुल के बिजनैस में भी मदद कर दिया करती थी.

प्रेमिका के साथ मिलकर उसके पति की जान लेने वाला आरोपी

रूबी की आंखों में एक खालीपन था, एक ऐसी तन्हाई जो शादी के बंधन में भी उसे घेर लेती थी. राहुल का प्यार सच्चा था, लेकिन उस का जीवन बिजनैस की भागदौड़ में इतना व्यस्त था कि रूबी की भावनाओं को छूने का समय ही नहीं मिलता.

रूबी से हुआ प्यार

राहुल मूलरूप से संभल जिले के ही रजपुरा थाना क्षेत्र के गंवा कस्बे के रहने वाले जसवंत का इकलौता बेटा था. जसवंत के 4 बच्चे हुए, जिस में एक बेटा राहुल और 3 बेटियां हैं. राहुल के चाचा, ताऊ और बाकी रिश्तेदार वहीं रहते हैं. गवां कस्बे में रहने वाले राहुल के चाचा नेकराम बताते हैं कि राहुल जब केवल 15 साल का था, तभी उस के मम्मीपापा का बीमारी के चलते कुछ ही अंतराल में निधन हो गया.

घर संभालने के लिए राहुल ने राजमिस्त्री का काम शुरू कर दिया. पहले राजमिस्त्री के साथ मजदूरी करता था. फिर धीरेधीरे काम सीख कर राजमस्त्री बन गया. बाद में इस ने टाइल्स लगाने का भी काम सीखा. राहुल ने मेहनत कर के परिवार को आगे बढ़ाया. बहनों की शादी की. काम के चलते इसे अलगअलग जगहों पर जाना पड़ता था. उसी बीच इस की मुलाकात चुन्नी मोहल्ले की रहने वाली रूबी से हुई.

चंदौसी के चुन्नी मोहल्ले में उस सुबह धूप कुछ ज्यादा ही सुनहरी थी. गली के कोने पर बन रहे नए मकान में राजमिस्त्री राहुल अपने औजार संभालते हुए काम पर लग चुका था. सिर पर गमछा बंधा था. हाथों में सीमेंट की महक आ रही थी. आंखों में अपने भविष्य के छोटेछोटे सपने थे. राहुल रोज की तरह ईमानदारी से काम कर रहा था. एक दिन मकान के आंगन से अचानक चूडिय़ों की हलकी सी खनक सुनाई दी. राहुल ने नजर उठाई. सामने खड़ी थी मकान मालिक की बेटी. सादे सूट में, खुले बालों और शांत आंखों वाली रूबी किसी सुबह की तरह ताजा लग रही थी. वह पानी का गिलास ले कर आई थी और संकोच से बोली, ”मिस्त्री साहब, पानी पी लीजिए.’’

राहुल ने पहली बार उसे देखा. जवान रूबी की सुंदरता ऐसी थी, जैसे किसी हलकी सुबह की पहली किरण जो धीरेधीरे पूरे आकाश को रंग दे देती हो. उस का चमकदार लाल कुरता, भरे गांव की पृष्ठभूमि में खिला कोई ताजा फूल सा सुंदर लग रहा था. गले के पास की खूबसूरत कढ़ाई उस के व्यक्तित्त्व की कोमलता को और उभार दे रही थी.

उस के कंधों तक बिखरे हलके घुंघराले बाल हवा के हर झोंके के साथ नाच उठते, जैसे बचपन की शरारतें अब भी उस के साथ खेल रही हों. उस की चाल में न तो शहर की बनावट थी, न ही किसी संकोच की दीवार. बस, आत्मविश्वास और सहजता की हलकी सी मुसकान थी, जो अनजाने में देखने वालों के मन में जगह बना लेती.

देखने में वह किसी फिल्मी दृश्य की हीरोइन लग रही थी. जवान रूबी के सपने उस की आंखों से झलक रहे थे, जैसे हर कदम के साथ वह भविष्य की नई कहानी बुन रही हो. रूबी ने फिर कहा, ”लो मिस्त्री साहब, पानी पी लो.’’

उस पल सब कुछ ठहर सा गया. उस ने मुसकरा कर पानी लिया. बस उसी एक पल में दोनों के दिल में जैसे कोई हलकी सी 2 दिलों को जोडऩे वाली प्रेम रेखा खिंच गई. दिन बीतते गए. राहुल ईंटों की दीवारें खड़ी करता और रूबी  कभीकभी उसे काम करते देखती. कभी चाय ले कर आ जाती, कभी घर के किसी काम का बहाना बन जाता. बातों का सिलसिला छोटा होता, पर आंखों में कहानियां लंबी होने लगीं.

धीरेधीरे रोज की मुलाकात छोटी बातों में बदलने लगी. पानी देना, चाय लाना या बस मुसकराना. राहुल को महसूस हुआ कि उस के भीतर का दिल रूबी पर आ गया है. राहुल को अपनी हैसियत का पूरा एहसास था. वह एक राजमिस्त्री था, रोज की मजदूरी पर जीने वाला. वहीं रूबी एक अच्छे घर की पढ़ीलिखी लड़की थी. फिर भी दिल ने बारबार दिमाग को चुप करा दिया. रूबी को राहुल की सादगी, उस का सम्मानपूर्ण व्यवहार और मेहनत भरी ईमानदारी अच्छी लगने लगी. उसे लगा कि यह आदमी दीवारें ही नहीं, भरोसा भी मजबूती से खड़ा करता है.

एक शाम जब काम खत्म हो चुका था और आसमान हलका गुलाबी हो चला था, रूबी ने हिम्मत कर के कहा, ”राहुल, आप बहुत अच्छे इंसान हैं.’’

राहुल कुछ पल चुप रहा. फिर बोला, ”रूबी, मैं बहुत साधारण हूं, पर दिल सच्चा है.’’

बस वही सच था, जिस ने दोनों को और करीब ला दिया.

यह प्यार चुपचाप पनपा. बिना शोर, बिना दिखावे के ईंट, सीमेंट और धूल के बीच 2 दिलों ने एकदूसरे के लिए जगह बना ली. मकान बन कर तैयार हो गया, लेकिन राहुल और रूबी के दिलों में जो निर्माण हुआ था, वह कहीं ज्यादा मजबूत था. चुन्नी मोहल्ले की उस गली में आज भी लोग उस मकान को देखते हैं, पर बहुत कम लोग जानते हैं कि उस की नींव में कहीं न कहीं रूबी की प्रेम कहानी भी गड़ी हुई है. दोनों का इश्क परवान चढ़ा. 2025 के हिसाब से देखें तो 15 साल पहले यानी कि 2010 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया.

इस चुन्नी मोहल्ले में रूबी का जहां मायका है, इसी गली में थोड़ा आगे कुछ घर छोड़ कर रूबी के राहुल ने भी यहां एक प्लौट खरीद कर मकान बना लिया. राहुल के घर और रूबी के मायके के बीच की गली मात्र 4 फीट चौड़ी है. गांव छोड़ कर कुछ सालों बाद ये लोग इस संकरी गली में बने मकान में रहने लगे.

दिल में बसा गौरव

एक दिन बारिश की झमाझम में रूबी बाजार से सब्जियां ले कर लौट रही थी. उस की साड़ी हलकी सी भीग चुकी थी और वह जल्दीजल्दी घर की ओर बढ़ रही थी, तभी मोहल्ले का युवक गौरव उसे देख कर रुक गया. उस ने अपनी छतरी रूबी की ओर बढ़ाई और मुसकराते हुए कहा, ”भाभीजी, भीग जाएंगी. लीजिए, मेरी छतरी ले लीजिए. मैं तो घर के पास ही हूं.’’

रूबी ने हिचकिचाते हुए छतरी ली, लेकिन उस की आंखों में गौरव की उस छोटी सी मदद ने एक अनजानी चिंगारी जला दी. अगले दिन रूबी ने छतरी लौटाने के बहाने गौरव के घर पर जाना तय किया. छतरी ले कर जा ही रही थी कि रास्ते में उसे गौरव मिल गया. वह बोला, ”अरे भाभीजी, आप ने क्यों कष्ट किया. छतरी लेने मैं ही घर आ जाता. इस बहाने से एक कप चाय भी मिल जाती.’’

रूबी ने कहा, ”अब तो यह अपनी छतरी संभालो. चाय के लिए फिर किसी दिन आ जाना, मेरा दरवाजा आप के लिए हमेशा खुला मिलेगा.’’

यह बस 2-3 मिनट की औपचारिक बातचीत थी, मगर रूबी को चलतेचलते लगा जैसे किसी ने लंबे सूखे दिन के बाद जरा सा पानी छिड़क दिया हो. एक दिन गौरव उस के घर पहुंच गया. रूबी घर में बिलकुल अकेली थी, उसी समय अचानक अभिषेक भी वहां आ गया. दोनों उस समय चाय पी रहे थे. रूबी ने गौरव से परिचय कराते हुए कहा कि यह मेरा मुंह बोला भाई अभिषेक है. फिर गौरव की तरफ इशारा करते हुए रूबी ने कहा कि यह गौरव है. ये मोहल्ले में ही रहता है. मुझे बहन मानता है.

दोनों की यह पहली मुलाकात थी. उस के बाद अकसर रूबी के घर या बाहर भी कभीकभी कहींकहीं दोनों मिल जाया करते थे. औपचारिक बातचीत के साथसाथ उन दोनों में दोस्ती भी हो गई. रूबी की कोशिश रहती कि एक बार में उस के घर एक ही व्यक्ति से मुलाकात हो. दोनों एकदूसरे पर भरोसा भी करते थे. दिलचस्प बात यह कि इन दोनों के मन में कहीं न कहीं शक भी पनप रहा था कि भाई है या मेरी तरह आशिक. कुछ ही मुलाकातों में गौरव और रूबी एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे.

राहुल को गौरव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. एक दिन राहुल बाजार से घर पर आया. उस समय रूबी के साथ गौरव बैठा चाय पी रहा था. स्थिति बहुत आपत्तिजनक  तो नहीं थी, लेकिन शक पनप जाने के लायक काफी थी.

यह नजारा देख कर राहुल का पारा चौथे आसमान पर पहुंच गया. इस से पहले कि वह कोई सवाल करता, गौरव ही बोल पड़ा, ”दीदी, चाय में तो मजा आ गया.’’

यह सुन कर राहुल सामान्य हो गया. 2-4 बातें गौरव से भी हुईं. फिर गौरव रुबी दीदी राहुल जीजा को नमस्ते कर के चला गया. चाय की इस मुलाकात के बाद अगली मुलाकात में रूबी ने गौरव से कहा कि उस दिन तुम्हारा स्टेप शानदार रहा, जिस से राहुल का गुस्सा शांत हो गया. नहीं तो यह हमारे बीच का प्यार परवान नहीं चढ़ पाता.

धीरेधीरे गौरव उस की दिनचर्या का हिस्सा बनने लगा, वह पूछता, ”भैया की दुकानदारी कैसी चल रही है? सीजन में तो जूते की अच्छी मांग होगी?’’

रूबी को यह अच्छा लगता कि कोई तो है जो उस के पति के बिजनैस के बारे में इतनी तल्लीनता से पूछ रहा है. बस धीरेधीरे दोनों की बातें, दोनों की आदतें और दोनों की बेचैनियां एकदूसरे में घुलने लगीं. राहुल मेहनती था, पर बिजनैस की चिंता, कर्ज की किस्तें और बढ़ता हुआ खर्च उस के स्वभाव को चिड़चिड़ा बना रहे थे. घर पर उस की बातचीत ज्यादातर पैसों, बिलों और थके हुए तानों के बीच उलझ जातीं. रूबी के दिल में कहीं यह बात बैठ गई कि उस की मुसकराहट अब पति के लिए जरूरी नहीं रही.

रूबी और गौरव दोनों को समझ में आ गया कि जो रिश्ता उन के बीच बन चुका है, वह नाम के बंधन से परे, दिल की गहराई में जड़ें जमा चुका है. एक दिन मौका पाते ही 2 जिस्म एक जान हो गए. फिर तो यह सिलसिला चलता ही रहा.

दोनों पकड़े गए रंगेहाथ

जब कभी राहुल बिजनैस के काम से बाजार चला जाता, गौरव घर आ जाता. बच्चे स्कूल में होते. दोनों मौजमस्ती करते. अभिषेक से भी ज्यादा आनंद वह गौरव के साथ महसूस कर रही थी. शाम का वक्त था. राहुल ने अपना ब्रीफकेस उठा कर जल्दबाजी में कहा, ‘मैं बाजार जा रहा हूं, कल शाम तक लौटूंगा’, इतना कह कर वह निकल गया. बच्चे सो चुके थे. घर में अब सिर्फ रूबी थी. उस ने तुरंत फोन कर के गौरव से घर आने को कहा.

मौके का फायदा उठाने के लिए गौरव रूबी के घर पहुंच गया.

”कितनी देर लगाई आज?’’ रूबी ने हलके से ठहाका लगाते हुए कहा.

पति की हत्यारोपी रूबी को पुलिस में ले जाते हुए 

”बाजार गया था, वहां ट्रैफिक में फंस गया था,’’ गौरव ने आतेआते अपनी शर्ट का एक बटन खोल दिया और उस के पास पहुंच कर उस की कमर में हाथ डाल दिया.

”अब सजा सुनाओ, कितना इंतजार करवाया?’’ रूबी ने भी उस के गले में बांहें डाल दीं.

”सजा तो बहुत कुछ बाकी है. पहले तो यह सजा पूरी करो.’’ गौरव ने उसे दीवार से सटा दिया.

रूबी की सांसें तेज हो गईं. उस ने गौरव के होंठों को अपने होंठों से ढंक लिया. एक ऐसी भूख के साथ, जो सालों से दबी हुई थी. 15 साल पहले राहुल के साथ भी ऐसे ही पल आते थे, पर वो जल्दी खत्म हो जाते. अब कमरे में सिर्फ सांसों की आवाज थी. दोनों एकदूसरे में खोए हुए थे. ऐसे जैसे दुनिया में सिर्फ यही 2 लोग बचे हों. जल्दबाजी में वे दरवाजा बंद करना भी भूल गए थे. तभी अचानक राहुल आ गया.

राहुल हुआ लापता

दरअसल, राहुल को पूरा शक हो गया था कि उस की पत्नी गौरव के साथ रंगरलियां मनाती है, इसलिए वह जाने का बहाना कर के घर में ही अपने गोदाम में छिप गया था. यही घटना राहुल की हत्या का सबब बन गई. रूबी ने अपने प्रेमी गौरव के साथ मिल कर अपने पति राहुल की हत्या की ऐसी योजना बनाई कि एक महीने तक पता ही नहीं चल सका कि राहुल कहां चला गया. उसे जमीन खा गई या आसमान निगल गया.

शायद कभी पता चलता भी नहीं, लेकिन कहते हैं कि अपराधी कितना भी चालाक हो, कोई न कोई ऐसा क्लू पुलिस के हाथ लग ही जाता है. फिर जमीन की तह से भी पुलिस अपराधी को खोज लेती है. राहुल ने राजमिस्त्री के काम से हट कर जूतों के कारोबार में कदम रखा था. घर से ही यह काम शुरू किया. वह अलगअलग जगहों पर जूते सप्लाई करता था. उस ने देहरादून में भी एक किराए की जगह ले रखी है. वहां भी बिजनैस को बढ़ा रहा था. देहरादून एक पर्यटक स्थल है.

कभीकभी वहां सैलानी बहुत बड़ी संख्या में आ जाते हैं, जिस के कारण होटल में ठहरने को जगह भी नहीं मिल पाती थी. इसलिए राहुल ने किराए पर एक कमरा ले लिया था. बिजनैस के सिलसिले में उस का हमेशा घर से बाहर आनाजाना लगा रहता. अभी कुछ दिन पहले राहुल की बुआ की बेटी की शादी थी. राहुल को शादी की तैयारी के लिए जाना था. इस के अलावा उसे कुछ खरीदारी भी करनी थी. 18 नवंबर, 2025 को उस ने अपनी पत्नी रूबी से कहा, ”मैं किसी काम से बाहर जा रहा हूं, कल तक लौट आऊंगा.’’

18 नवंबर का पूरा दिन बीत गया. 19 नवंबर आया, पर राहुल घर नहीं लौटा. पत्नी और बच्चे इंतजार कर रहे थे. हालांकि वो काम की वजह से कईकई दिनों तक घर नहीं आता था. यह नौरमल बात थी, इसलिए बच्चों को उतनी चिंता नहीं थी. 20 नवंबर आया. बेटा और बेटी भी मम्मी से पापा के बारे में पूछ रहे थे. बेटी के अनुसार पापाजी का मोबाइल फोन कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रहा था. कभी औन रहता तो कभी स्विच्ड औफ हो जाता.

शायद बैटरी खराब हो गई होगी. बच्चों के जिद करने पर रूबी ने जब पति को कौल किया तो उस का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. कुछकुछ देर बाद और ट्राई किया, लेकिन हर बार मोबाइल स्विच्ड औफ ही मिला. बेटी ने बताया कि पापा अपने फूफा के घर भी जाने वाले थे. हो सकता है कि काम पूरा करने के बाद वहीं चले गए हों. शादी के सामान की खरीदारी करवानी थी.

अब फूफा को कौल किया गया. उन्होंने कहा कि राहुल तो यहां पर आया ही नहीं. बारीबारी से पत्नी कभी बच्चे बाकी रिश्तेदारियों में कौल करते रहे, लेकिन राहुल का कहीं कुछ पता नहीं चला. इसी तरह एक दिन और बीत जाता है. अब रूबी ने फैसला किया कि राहुल जहां भी काम के सिलसिले में जाते थे, वहां जा कर पता करेगी. इस के बाद रूबी बच्चों के खुद पति की खोज में निकल गई. 22 नवंबर, 2025 को यह देहरादून के उस किराए वाले मकान में भी पहुंच गई, जहां राहुल का अकसर आनाजाना होता था.

रूबी ने मकान मालिक से बात की. अभी तक 4 दिन बीत चुके थे. मकान मालिक ने कहा कि राहुल तो यहां पर कई दिनों से नहीं आए. समझ नहीं आ रहा था कि राहुल कहां चला गया. अंत में थकहार कर रूबी ने 24 नवंबर, 2025 को कोतवाली चंदौसी में पति के लापता होने की सूचना दर्ज कराई. पुलिस ने उस की हर एक डिटेल ली. राहुल की गुमशुदगी दर्ज कर ली. इस की जानकारी आसपास के दूसरे थानों में भी भिजवा दी.

ऐसे ही इस का भाई जुगनू है. उस के खिलाफ चंदौसी कोतवाली में कई मामले दर्ज हैं. जो चोरीचकारी, लूटपाट और छिनैती के मामले बताए गए हैं. वह वर्तमान में मुरादाबाद जेल में बंद है. भाई के कारनामों में बहन रूबी का भी दखल रहता था. बताते हैं कि जब पुलिस जुगनू को पकडऩे के लिए जाती तो रूबी पुलिस से उलझ जाती थी. आसपास के लोग भी रूबी से दूरी बना कर रखते, इस डर से कि कब किस पर झूठा केस कर दे. रूबी कोई आम सुंदरी नहीं थी.

रूबी एक हेकड़ और दबंग महिला थी. बताते हैं कि साल 2016 में राहुल का अपने गांव में जमीन को ले कर विवाद हो गया था. उस समय रूबी अपने पति के साथ गांव के ही मकान में रहती थी. तब रूबी ने मोर्चा संभाला और विरोधियों को धूल चटाई थी. रूबी ने गांव के 3 लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए रजपुरा थाने में केस दर्ज करवाया था. इस में एक पिता, बेटा और भतीजे को नामजद कराया गया था. वह झगड़ा तो शांत हुआ. गांव के लोगों ने फैसला करा दिया था. नामजद लोगों को इस के लिए भरी पंचायत में माफी मांगनी पड़ी थी. ऊपर से रूबी ने उन तीनों से केस वापस लेने के लिए भारीभरकम रकम भी वसूल की थी.

घटना से करीब डेढ़ महीने पहले चंदौसी के सैनिक चौराहे के पास एक जमीन खाली कराने के लिए रूबी अपने प्रेमी अभिषेक के लिए मैदानेजंग में उतर आई थी. रूबी की हिम्मत, हौसला और तेवर देख कर विरोधी घबरा गए और उन्हें जमीन छोड़ कर भागना पड़ा था. रूबी के कारण ही प्रेमी अभिषेक को मोटी रकम का फायदा हुआ था.

बदले में रूबी को खुश करने के लिए अभिषेक ने भी अच्छीखासी रकम रूबी को दी थी. ऐसे ही विवाद का एक और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस में रूबी ने अभिषेक और गौरव के साथ मिल कर हंगामा किया था. उस समय उस का पति राहुल भी साथ था. इस की एक तसवीर भी वायरल हो रही है, जिस में रूबी को अपने दोनों प्रेमी और  पति के साथ कहीं पर हंगामा करते हुए देखा जा सकता है.

इसी तरह के कई अन्य विवादों में रूबी चंदौसी, रजपुरा, बनियाठेर थानों में लगभग 6-7 केस दर्ज करवा चुकी है. कुछ महीने पहले अभिषेक, रूबी और गौरव नैनीताल घूमने गए थे. वहां एक होटल में इन्होंने रात्रि विश्राम किया था. दोनों का टारगेट यह था कि इन में से कोई एक भी किसी काम से बाहर चला जाए तो दूसरा रूबी के साथ अपने प्रेम का टारगेट पूरा कर ले. शक तो दोनों को एकदूसरे पर हो ही गया था. यह सब आजमाने के लिए अभिषेक होटल से कोई बहाना कर के बाहर गया.

गौरव समझा 1-2 घंटे में तो घूम कर वापस आएगा, लेकिन अभिषेक कुछ ही मिनट बाद जैसे ही होटल के कमरे में घुसा, उस ने रूबी और गौरव को आपत्तिजनक हालत में देख लिया. उस समय उस ने गौरव से तो कुछ नहीं कहा, ऐसा बन गया जैसे उस ने कुछ देखा ही न हो. उस दिन के बाद से वह धीरेधीरे उन दोनों से किनारा करने लगा.

लाश के मिले टुकड़े

रूबी अब गौरव पर पूरी तरह से फिदा थी. इसलिए अभिषेक रूबी की प्रेम कहानी से बाहर हो गया और उस का संपर्क रूबी और गौरव दोनों से ही टूट गया. धीरेधीरे समय बीत रहा था. लेकिन राहुल का कुछ अतापता नहीं था. सभी लोग काफी चिंतित थे. अब दिन हफ्तों में बदलने लगे. 3 हफ्ते गुजर गए. सब की उम्मीद भी अब दम तोड़ चुकी थी. 27 दिन बाद यानी 15 दिसंबर, 2025 को राहुल के घर से करीब 800 मीटर दूर पतरौआ रोड है. यहीं पर एक ईदगाह स्थित है. इसी के पास रोड के साइड से एक नाला गुजरता है.

यह इलाका काफी सुनसान रहता है. आसपास खेतखलिहान है. कोई सीसीटीवी कैमरा भी दूरदूर तक नहीं है. सुबह के करीब 9 बजे के आसपास कुछ लोग इसी रास्ते से गुजर रहे थे. उन्होंने देखा कि नाले के पास काफी सारे कुत्ते इकट्ठे हैं और आपस में लड़ रहे हैं. एकदूसरे पर भौंक रहे हैं और किसी चीज को ले कर छीनाझपटी भी कर रहे हैं. उन के पास एक बड़ा सा पौलीथिन बैग पड़ा था, जिस में कुछ भारीभरकम चीज रखी हो.

उस में से काफी तेज गंध भी आ रही थी. मामला संदिग्ध लगा तो एक व्यक्ति ने पुलिस कंट्रोल रूम का 112 नंबर डायल कर दिया. पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना चंदौसी कोतवाली में दे दी गई. सूचना मिलते ही कोतवाल अनुज तोमर पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. यह 15 दिसंबर, 2025 की बात है. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां 2 टूरिस्ट बैग नाले में पड़े थे. एक को कुत्तों ने फाड़ दिया था, जिस में से मानव बौडी के टुकड़े दिखाई दे रहे थे. जब खोला गया तो उस में से किसी आदमी का धड़ वाला भाग निकला. इस का हाथ, पैर, सिर सब कुछ गायब था.

पुलिस को दूसरे बैग के अंदर कुछ और भी सामान और एक पौलीथिन मिली. सामानों में ब्लैक और ग्रीन कलर की एक टीशर्ट थी. इस पर खून के धब्बे भी थे. एक अंडरवियर भी मिला और पौलीथिन में बायां हाथ अच्छे से सील पैक था, जिस वजह से नाले में पड़े रहने के बावजूद भी उस में पानी प्रवेश नहीं कर सका. शायद इस की बदबू बाहर न आ जाए, इस वजह से पैक किया हो. दिखने में लाश के ये अंग कई हफ्ते पुराने लग रहे थे. फोरैंसिक टीम को सूचित कर दिया गया.

फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य इकट्ठा करने शुरू कर दिए. इतनी देर में आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग भी जुटने लगे. पुलिस ने यहीं आसपास और भी छानबीन की. शायद और भी शरीर का हिस्सा भी मिल जाए. काफी तलाश के बाद भी सिर और शरीर के बाकी अंग कहीं नहीं मिले. घटनास्थल के फोटोग्राफ लिए गए और वीडियो भी बनाई गई. पुलिस द्वारा बरामद शरीर और बरामद कपड़ों को दिखा कर पहचान कराने की कोशिश की गई.

कटर से काटी लाश

फोरैंसिक जांच के दौरान पुलिस को बहुत सारी चीजें पता चलीं. ऐसा लगा जैसे आराम से घटना अंजाम दी गई है. पूरी सफाई के साथ शरीर के टुकड़े किए गए. शरीर को काटने में तेजधार हथियार नहीं, बल्कि किसी मशीन का इस्तेमाल किया गया. 16 और 17 दिसंबर, 2025 तक यानी 2 दिन लगातार पुलिस की टीमें बौडी के विभिन्न अंगों को तलाश करती रहीं. पुलिस की कोशिश थी कि किसी तरह से सिर बरामद हो जाए तो मृतक की पहचान हो सके.

कोतवाल अनुज कुमार तोमर लगातार केस की जांच कर रहे थे. घटनास्थल पर बैग में जो हाथ मिला था, पुलिस द्वारा उस का ध्यान से निरीक्षण किया तो उस पर एक टैटू नजर आया. हाथ के बीच में ‘राहुल’ नाम लिखा हुआ था. अब राहुल कौन हो सकता है? राहुल या तो इस का ही नाम होगा या फिर इस के किसी करीबी का. उधर पुलिस की टीमें थाने में ऐसी पुरानी फाइल्स खंगाल रही थीं, जिन की गुमशुदगी लिखाई गई हो. चंदौसी थाने में ही एक केस फाइल मिला जूता कारोबारी राहुल कुमार का. 18 नवंबर, 2025 से गायब था. उस की गुमशुदगी उस की पत्नी रूबी द्वारा लिखाई गई थी.

पुलिस ने रूबी को बुला कर बरामद कपड़े व लाश के टुकड़े दिखाए. रूबी ने सब कुछ देख कर अपने पति के अवशेष होना स्वीकार नहीं किया. साफ इनकार कर दिया. थकहार कर पुलिस ने 18 दिसंबर, 2025 को लाश के टुकड़ों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस का सब से पहला काम था मृतक की पहचान पता करना. पुलिस के पास तो कोई ऐसी निशानी भी नहीं थी. अब पुलिस को शक हो चला था कि यह लाश राहुल की ही हो सकती है. क्योंकि एक तरफ तो राहुल गुमशुदा था और दूसरी तरफ लाश की बांह पर भी ‘राहुल’ के नाम का टैटू बना हुआ था.

जनपद संभल के थाना चंदौसी क्षेत्र में 24 नवंबर, 2025 को रूबी नाम की एक महिला ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी. गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद रूबी ने कभी पुलिस से कोई कौंटेक्ट नहीं किया, न ही उच्च अधिकारियों से शिकायत की कि पुलिस उस के पति को ढूंढने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है, इसलिए पुलिस का शक अब यकीन में बदलता जा रहा था, लेकिन कोई सबूत हाथ में आने से पहले वह रूबी पर हाथ डालना नहीं चाहती थी.

पुलिस ने लापता राहुल के मोबाइल नंबर की कौल डिटेल्स और लोकेशन निकलवाई. पता चला कि राहुल का मोबाइल फोन घर पर ही 18 नवंबर, 2025 से ही स्विच औफ दिख रहा था. 19 दिसंबर, 2025 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ चुकी थी. पुलिस को राहुल की पत्नी रूबी पर शक हो रहा था. 20 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने रूबी से फिर पूछताछ की. उस के बात करने का तरीका अजीब था. जैसे कि वह जानबूझ कर दुखी होने का नाटक कर रही हो. जांच के दौरान पुलिस ने रूबी से उस का मोबाइल फोन मांगा, लेकिन वह मोबाइल  देने से इंकार कर रही थी.

पुलिस को मना करने की वजह भी नहीं बता रही थी. डांटडपट कर पुलिस ने मोबाइल लिया और इस की जांच की. सारे फोटोज, कौल डिटेल्स, चैटिंग सब कुछ चैक किया गया. इसी में ही रूबी के पति राहुल के साथ अलगअलग समय में लिए गए अनेक फोटो मिले. उसी दौरान पुलिस को 2 फोटो ऐसे मिले, जिन्होंने इस केस की परतें प्याज के छिलकों की तरह खोल कर रख दी. एक फोटो में राहुल वही टीशर्ट पहने दिखा, जो नाले के पास बैग में मिली थी.

जब पुलिस ने बरामद टीशर्ट रूबी को दिखाई थी तो उस ने उसे पहचानने से क्यों इंकार किया? मान लें कि वह कोई दूसरा टीशर्ट हो, किसी और का हो, फिर भी यह बोल सकती थी कि राहुल के पास ऐसा ही टीशर्ट है. पर उस ने बिलकुल ही पहचानने से मना कर दिया था.

पत्नी निकली कातिल

पुलिस ने थोड़ा ध्यान से देखा तो फोटो में राहुल के हाथ पर उस के नाम का टैटू गुदा था. इस से पुलिस को विश्वास कि नाले से बरामद लाश के टुकड़े राहुल के ही थे. इस से साफ हो गया कि रूबी अपने पति राहुल की गुमशुदगी और मौत को ले कर झूठ बोल रही है. अब पुलिस ने रूबी से अपने अंदाज में पूछताछ शुरू कर दी. इस पूछताछ में रूबी सच बोलने के लिए मजबूर हो गई. उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपने पति राहुल की हत्या कराई थी. उस ने इस हत्याकांड की एक हृदयविदारक स्टोरी सुनाई.

18 नवंबर की रात को जब राहुल घर पर नहीं था. रूबी ने गौरव को अपने घर बुला लिया. रूबी को पता नहीं था कि वह कहीं गया नहीं है, घर में ही छिपा है. राहुल को मौके का इंतजार था. प्यार के नाम पर वासना का खेल शुरू होते ही राहुल अंदर आया. दरवाजा खुला था. क्योंकि दोनों इतने खोए हुए थे कि चिटकनी लगाना भी भूल गए थे. राहुल को देखते ही कमरे में सन्नाटा छा गया.

एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई

उस की आंखें पहले रूबी पर टिकीं, जो अब तक चादर से जिस्म ढकने की कोशिश में सीने से लगाए बैठी थी. बाल बिखरे, होंठ कांपते हुए. फिर गौरव पर, जो बिस्तर के किनारे खड़ा था, हाथ में चादर का कोना पकड़े, लेकिन शरीर अभी भी नंगा था. राहुल का चेहरा पहले सफेद पड़ गया, फिर लाल. उस की आंखों में कुछ ऐसा था नफरत, सदमा, धोखा और शायद एक पल के लिए दया भी. वह कुछ बोलना चाहता था, लेकिन गला सूख गया था.

सन्नाटा तोड़ते हुए आवाज आई, ”राहुल…’’ यह कांपती आवाज रूबी की थी, ”तुम… तुम इतनी जल्दी?’’

राहुल ने जवाब नहीं दिया. उस ने बस एक बार फिर दोनों को देखा, जैसे कोई तसवीर देख रहा हो, जो कभी भूलना नहीं चाहता. फिर बिना एक शब्द बोले, वह मुड़ा. उस के कदम भारी थे. दरवाजे तक पहुंच कर वह रुका. पीठ फेर कर बोला, कपड़े पहन ले. वह आक्रोश से बुरी तरह तमतमा रहा था. फिर उस ने रूबी को बुरी तरह पीटा और सरेबाजार उस का जुलूस निकालने की धमकी दी.

कोतवाल अनुज तोमर

बस इसी से पगलाई रूबी ने गौरव को इशारा किया. गौरव ने लोहे की रौड उठा कर राहुल के सिर में मार दिया. वह वहीं गिर गया. उस के सिर से खून का फव्वारा फूट पड़ा. रूबी भी पति पर हमला करने की पोजीशन ले चुकी थी. उस ने हथौड़ा ले कर उस के सिर पर मारमार कर सिर कुचल दिया. इस तरह दोनों ने मिल कर राहुल का  कत्ल कर दिया और अगले दिन बाजार से इलैक्ट्रिक कटर मशीन ला कर घर में ही अपने पति की लाश के टुकड़ेटुकड़े कर डाले.

पुलिस ने रूबी और गौरव की निशानदेही पर कत्ल और सबूत मिटाने में इस्तेमाल किए गए कटर मशीन, हथौड़ा, मोबाइल फोन और लोहे की रौड जैसी चीजों को भी अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने धड़ का हिस्सा और एक बांह तो बरामद कर ली थी, लेकिन राहुल का सिर और उस के बाकी के हाथपांव बरामद नहीं हुए. रूबी और गौरव ने उस की लाश के अन्य हिस्सों को एक कार में ले कर बहजोई बबराला होते हुए राजघाट पहुंचे. वहां से गुजर रही गंगा नदी में राहुल के शरीर के बाकी टुकड़ों को फेंक दिया, जो अब बह कर दूर जा चुके हैं. शायद नष्ट भी हो चुके हों.

इस पूरे हत्याकांड की भनक उन्होंने बच्चों तक को नहीं लगने दी. राहुल की बेटी पापा के मर्डर में मम्मी और गौरव के अलावा अभिषेक को भी आरोपी मान रही है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि अभिषेक के रूबी से संबंध विच्छेद हो चुके थे. वह इस कहानी से अलग था. इस का इस घटना में कोई रोल नहीं है. चंदौसी शहर के लिए इतनी निर्मम हत्या का यह पहला मामला बताया जा रहा है.

गौरव ने जिस दुकान से बैग खरीदे थे, उस दुकानदार का नाम विनोद अरोड़ा है. उसे भी यह जान कर बहुत दुख हुआ कि उस के बैग का इस्तेमाल एक निर्मम हत्या के बाद लाश के टुकड़े कर के फेंकने के लिए किया गया. गौरव को कटर देने वाला व्यक्ति जितेंद्र उर्फ जीतू तो उस समय बिलखबिलख कर रोने लगा, जब पत्रकारों ने उस से कहा कि तुम ने कटर गौरव को क्यों दिया था. उसे इस बात का बहुत दुख हुआ कि लोहे का सरिया काटने वाला कटर मानव शरीर को काटने में इस्तेमाल किया गया.

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने 22 दिसंबर, 2025 को एक प्रैस कौन्फ्रैंस में घटनाक्रम का खुलासा किया. पुलिस ने दोनों आरोपियों गौरव व रूबी को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Love Crime

 

 

UP News: फर्स्ट लेडी ड्राइवर मर्डर – प्यार में छलावा

UP News: झांसी की 40 वर्षीय अनीता चौधरी ने जब औटोरिक्शा चलाना शुरू किया तो लोगों ने उस की हिम्मत की दाद देते हुए बहुत सम्मान दिया. जिले की इस पहली लेडी औटो ड्राइवर को सिर्फ सामाजिक संगठनों बल्कि पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने भी सम्मानित किया, लेकिन एक दिन उस की हत्या हो जाने पर पुलिस अधिकारी भी भौचक्के रह गए. कौन था अनीता चौधरी का हत्यारा और क्यों की गई उस की हत्या? पढ़ें, लव क्राइम की यह खास स्टोरी.

अनीता चौधरी की उपेक्षा से मुकेश झा बहुत परेशान रहने लगा था. वह समझ नहीं पा रही था कि जिस अनीता ने शादीशुदा होते हुए भी उस के साथ मंदिर में लव मैरिज की थी, उस ने अचानक उस से मुंह क्यों मोड़ लिया. मुकेश ने अनीता को लाख मनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह उस की बात सुनने को राजी ही नहीं थी. क्योंकि अनीता का झुकाव अरुण नाम के युवक की तरफ हो गया था. 4 जनवरी, 2026 का दिन मुकेश झा के लिए खास दिन था. खास इसलिए कि इसी दिन मुकेश ने अनीता के साथ मंदिर में लव मैरिज की थी. शादी की सालगिरह की खुशी में मुकेश बीते दिनों की कड़वाहट भुला कर अनीता से मिलने गया.

उस ने अनीता को शादी की सालगिरह की याद दिला कर साथ रहने को मनाने की कोशिश की, लेकिन अनीता राजी नहीं हुई. उस ने घूमनेफिरने को साथ चलने को कहा तो इस के लिए भी अनीता ने मना कर दिया. इतना ही नहीं, अनीता ने मुकेश को खरीखोटी सुना कर अपमानित भी किया.

अपमान और बेवफाई का घूंट पी कर मुकेश वापस घर आ गया. उसे अनीता की बेवफाई पसंद नहीं आई. वह सोचने लगा कि जिस के लिए उस ने तन मन धन सब न्योछावर कर दिया, अपनी पत्नी व बच्चों से छल किया, जिस को उस ने प्रेमिका की जगह पत्नी का दरजा दिया, उसी ने उस के साथ इतना बड़ा धोखा किया. ऐसी बेवफा को वह कभी माफ नहीं करेगा. उसे उस की बेवफाई की सजा जरूर देगा. वह उस की न हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.

इस के बाद मुकेश झा ने शादी की सालगिरह की रात ही अनीता व उस के प्रेमी अरुण की हत्या का प्लान बनाया. मुकेश अपनी सुरक्षा के लिए अपने साथ तमंचा रखता था. अपने प्लान के मुताबिक उस ने तमंचा लोड किया, फिर रात 9 बजे अपनी कार से अनीता की खोज में घर से निकल गया. अनीता झांसी जिले की पहली औटोरिक्शा महिला ड्राइवर थी. वह अकसर रात में ही औटो चलाती थी. एक दिन मुकेश ने मौका पा कर उस के औटोरिक्शा में ट्रैकर लगा दिया था. अपने फोन से ट्रैकर को कनेक्ट कर वह अनीता पर नजर रखता था.

अनीता 4 जनवरी, 2026 की रात लगभग साढ़े 9 बजे औटो ले कर घर से निकली और रेलवे स्टेशन पहुंची. वहां उस का प्रेमी अरुण मौजूद था. अनीता ने अरुण को औटो में बैठा लिया फिर दोनों बातचीत में लीन हो गए. इधर मुकेश झा तमंचा लोड कर अपनी कार से अनीता का पीछा करने निकला. ट्रैकर के सहारे वह पीछा करते हुए अनीता तक जा पहुंचा. औटो में अरुण भी था. उस समय रात का डेढ़ बज रहा था.

सुकुवां ढुकुवां कालोनी के पास मुकेश ने चलती कार से अनीता पर फायर कर दिया. गोली उस की कनपटी पर लगी. अनीता लहूलुहान हो कर सड़क पर जा गिरी. औटो कुछ दूरी पर जा कर पलट गया. औटो पलटने से मुकेश अनीता के दूसरे प्रेमी अरुण को नहीं मार सका. अरुण छिप कर वहां से भाग गया. मुकेश भी कार ले कर फरार हो गया. 4-5 जनवरी, 2026 की दरम्यानी रात डेढ़ बजे किसी युवक ने झांसी के थाना नवाबाद पुलिस को सूचना दी कि स्टेशन रोड पर सुकुवां ढुकुवां कालोनी के पास सड़क पर एक्सीडेंट हुआ है, औटो पलटा पड़ा है और एक महिला सड़क पर खून से लथपथ पड़ी है. वह जिंदा है या नहीं, यह बताना मुश्किल है.

पहली थी लेडी ड्राइवर

एक्सीडेंट की सूचना पर एसएचओ रवि श्रीवास्तव कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. सर्दी की रात थी, इसलिए वहां सन्नाटा पसरा था. एक महिला सड़क पर मरणासन्न पड़ी थी और चंद कदमों की दूरी पर एक औटो पलटा पड़ा था. एसएचओ रवि श्रीवास्तव ने जब घायल पड़ी महिला को गौर से देखा तो उन के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. उसे वह जानते थे. वह कोई और नहीं, बल्कि झांसी की पहली महिला औटो ड्राइवर अनीता चौधरी थी. वह झांसी की चर्चित महिला थी. उसे पूरा शहर जानता था.

इंसपेक्टर रवि श्रीवास्तव ने एक्सीडेंट की सूचना पुलिस अधिकारियों व अनीता के फेमिली वालों को दी और अनीता को इलाज के लिए मैडिकल कालेज अस्पताल भेजा. वहां डौक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. सुबह एसएसपी बी.बी.जी.टी. एस. मूर्ति, एसपी (सिटी) प्रीति सिंह तथा सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत गौतम घटनास्थल पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पहली नजर में अधिकारियों को लगा कि अनीता चौधरी की मौत एक्सीडेंट में हुई है.

सूचना पा कर मृतका की बहन विनीता चौधरी, पति द्वारका चौधरी व देवर दिलदार सिंह पहले घटनास्थल फिर मोर्चरी पहुंचे. वहां अनीता का शव देख कर सभी परिजन बिलख पड़े. मृतका का बेटा विक्की उस समय पुणे में था. उसे भी सूचना दे दी गई. पुलिस मान रही थी कि अनीता चौधरी की मौत दुर्घटना है, लेकिन अनीता के फेमिली वाले पुलिस की बात से सहमत नहीं थे. उन का कहना था कि अनीता की हत्या की गई है. दुर्घटना में मौत दर्शाने के लिए औटो को पलटा गया है. अनीता के शरीर से ज्वैलरी भी गायब थीं. वह मंगलसूत्र, झुमके, पायल आदि पहने थी. उस का मोबाइल फोन भी गायब था.

इधर सुबह होते ही फस्र्ट लेडी औटो ड्राइवर अनीता चौधरी की मौत की खबर झांसी शहर में जंगल की आग की तरह फैली. जिस ने भी सुना, वही दंग रह गया. अधिकारियों से जानकारी जुटाने मीडियाकर्मी भी उमड़ पड़े. अनीता के फेमिली वालों से भी उन्होंने बातचीत की. उन्होंने मीडियाकर्मियों से साफ कहा कि अनीता की हत्या हुई है. फेमिली वाले पुलिस अधिकारियों से भी मिले और हत्या की आशंका जताई.

अनीता चौधरी की हत्या हुई या फिर एक्सीडेंट में मौत हुई, इस के लिए पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम हेतु मैडिकल कालेज भेजा. 2 डाक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच अनीता चौधरी के शव का पोस्टमार्टम किया और रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. रिपोर्ट की एक प्रति एसपी कार्यालय भी भिजवा दी. एसएचओ रवि श्रीवास्तव ने जब अनीता चौधरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो वह चौंक पड़े. क्योंकि उस की मौत एक्सीडेंट में नहीं हुई थी, बल्कि उस की गोली मार कर हत्या की गई थी. उस की कनपटी (कान के नीचे) पर गोली मारी गई थी. गोली उस के गले में फंस गई थी. रवि श्रीवास्तव ने यह जानकारी आला अधिकारियों को दी तो वे भी सकते में आ गए.

अनीता की मौत के मामले में पुलिस से भारी चूक हुई थी, अत: पुलिस अधिकारियों ने मृतका अनीता चौधरी के फेमिली वालों को बुलवाया और उस की हत्या के संबंध में उन से पूछताछ की.

प्रेमी पर हुआ शक

मृतका की छोटी बहन विनीता चौधरी, पति द्वारका तथा देवर दिलदार ने बताया कि अनीता की हत्या मुकेश झा ने की है, जो प्रेमनगर थाने के ईसाई टोला मोहल्ले में रहता है. दोनों के बीच पैसों के लेनदेन का झगड़ा था. मुकेश अनीता के चरित्र पर भी शक करता था. अनीता की हत्या में उस का बेटा शिवम झा व उस का बहनोई मनोज झा भी शामिल हो सकता है. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों के आदेश पर इंसपेक्टर रवि श्रीवास्तव ने मृतका अनीता के पति द्वारका चौधरी की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मुकेश झा, उस के बेटे शिवम झा तथा बहनोई मनोज झा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. तुरंत काररवाई करते हुए पुलिस ने शिवम झा व मनोज झा को हिरासत में ले लिया, लेकिन मुकेश झा घर से फरार हो गया.

मुकेश झा की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने 3 टीमों का गठन एसपी (सिटी) प्रीति सिंह तथा सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत की अगुवाई में किया. ये टीमें मुहिम में जुट गईं. उस की तलाश में कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. तब एसएसपी ने उस की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया.

कार में मिला तमंचा

6 जनवरी, 2026 की देर रात एसएचओ रवि श्रीवास्तव को खबर मिली कि बरुआ सागर थाना क्षेत्र के बेतवा नदी के नोटघाट पुल पर एक लावारिस कार खड़ी है. खबर पाते ही वह अपनी टीम के साथ पहुंचे और कार की तलाशी ली. कार के अंदर से एक तमंचा तथा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ. मोबाइल फोन स्विच्ड औफ था. जांचपड़ताल से पता चला कि लावारिस खड़ी इग्निस कार हत्यारोपी मुकेश झा की है. एसएचओ ने मुकेश झा की कार बरामद होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. साथ ही आशंका जताई कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी मुकेश ने नदी में छलांग लगा दी है.

इस पर एसपी (सिटी) प्रीति सिंह व सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत गौतम नोटघाट पुल पहुंचे और नदी में जाल डलवा कर गोताखोरों की मदद से मुकेश की खोज कराई. लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी मुकेश का कुछ भी पता न चला. तब पुलिस अधिकारियों को शक हुआ कि शायद मुकेश पुलिस को गुमराह कर भाग गया होगा. अब पुलिस ने मुकेश की तलाश और तेज कर दी. जंगलों में भी उस की तलाश शुरू कर दी. इस के अलावा पुलिस अधिकारियों ने अपने खास खबरियों को भी लगा दिया. लेकिन इस के बावजूद मुकेश हाथ नहीं आया.

9 जनवरी, 2026 की रात 10 बजे एसएचओ रवि श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ भगवंतपुरा के पास चैकिंग कर रहे थे, तभी उन्हें खास मुखबिर से जानकारी मिली कि मुकेश झा को भगवंतपुरा से करगुआं वाले कच्चे रास्ते पर देखा गया है. इस पर नवाबाद थाने के एसएचओ रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने पुलिस टीम के साथ घेराबंदी की. पुलिस को देख कर मुकेश कच्चे रास्ते पर भागा. रोकने पर उस ने पुलिस टीम पर फायर किया. पुलिस की जवाबी फायरिंग में उस के दाएं पैर में गोली लगी. गोली लगते ही वह लडख़ड़ा कर गिर पड़ा. पुलिस ने उसे तब गिरफ्तार कर लिया. घायल मुकेश को इलाज हेतु अस्पताल में भरती कराया गया.

एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा एसपी (सिटी) प्रीति सिंह ने मुकेश झा से अनीता चौधरी की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया, ”मैं अनीता से बेहद प्यार करता था. हम दोनों पिछले 7 सालों से रिलेशनशिप में थे. मंदिर में शादी भी कर चुके थे, लेकिन अनीता अब दूसरे युवक को चाहने लगी थी. इसलिए उस ने 3 महीने पहले ब्रेकअप कर लिया था.’’

उस ने आगे बताया, ”प्यार में धोखा मिला तो मुझे बरदाश्त नहीं हुआ. मैं ने मैरिज एनिवर्सरी की रात 4 जनवरी को कनपटी पर गोली मार कर उस की हत्या कर दी थी. फिर अपनी कार नोटघाट पुल पर खड़ी कर भाग गया था, ताकि पुलिस को लगे कि मैं ने बेतवा नदी में कूद कर जान दे दी है. मैं अनीता के प्रेमी अरुण को भी मारना चाहता था, लेकिन औटो पलटने से वह बच गया.’’

पुलिस अधिकारियों की पूछताछ के बाद उन के आदेश पर एसएचओ रवि प्रकाश ने मुकेश झा को अनीता चौधरी की हत्या के आरोप में विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. लेकिन हिरासत में लिए गए मुकेश के बेटे शिवम झा तथा बहनाई मनोज झा को साक्ष्य के अभाव में गिरफ्तार नहीं किया गया. दोनों ने खुद को अनीता की हत्या में निर्दोष बताया. अनीता चौधरी कौन थी? वह झांसी की प्रथम महिला औटो चालक कैसे बनी? मुकेश झा के संपर्क में कैसे आई? लिवइन रिलेशन में रहने के बावजूद उस का मुकेश से ब्रेकअप क्यों हुआ? मुकेश ने उस की हत्या क्यों की? यह सब जानने के लिए अनीता का अतीत झांकना होगा.

मैनेजर से हुआ प्यार

उत्तर प्रदेश का झांसी शहर वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है. इसी शहर के नवाबाद थाना अंतर्गत एक मोहल्ला है तालपुरा. इसी तालपुरा मोहल्ले की अंबेडकर नगर कालोनी में द्वारका चौधरी सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी अनीता के अलावा एक बेटा विक्की तथा 2 बेटियां थीं. द्वारका झांसी बस स्टौप के पास चाय का ठेला लगाता था. इसी की आमदनी से परिवार का भरणपोषण करता था.

अनीता पढ़ीलिखी खूबसूरत युवती थी, जबकि उस का पति द्वारका चौधरी साधारण रंगरूप का कम पढ़ालिखा इंसान था. अनीता की छोटी बहन विनीता भी द्वारका के छोटे भाई दिलदार के साथ ब्याही थी. वह भी झांसी में ही रहता था. अनीता 3 बच्चों की मां थी. वह चाहती थी कि उस के बच्चे पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़े हों, लेकिन पति द्वारका की कमाई इतनी नहीं थी कि वह बच्चों का पालनपोषण ठीक से कर सके, उन की पढ़ाई का बोझ उठा सके. उस के लिए तो परिवार की दोजून की रोटी जुटाना ही मुश्किल था. अनीता सदैव चिंता में डूबी रहती थी.

अनीता को जब बच्चों की देखभाल की चिंता ज्यादा सताने लगी तो उस ने घर की दहलीज लांघ कर नौकरी करने का मन बनाया. इस बाबत उस ने पति से बात की तो उस ने साफ मना कर दिया. द्वारका ने कहा, ”वह चौहान वंश का है. वह गरीब जरूर है, लेकिन उस के वंश की महिलाएं घर की देहरी नहीं लांघतीं.’’

लेकिन अनीता ने पति की बात अनसुनी कर दी और नौकरी के लिए प्रयास करने लगी. अनीता के मोहल्ले की कुछ महिलाएं ओरछा स्थित एक ग्लास फैक्ट्री में काम करती थीं. अनीता ने उन महिलाओं से बात की, फिर उन के सहयोग से अनीता को भी वहां नौकरी मिल गई. अनीता कांच फैक्ट्री में काम करने लगी तो उस की माली हालत सुधरने लगी. बच्चों का पालनपोषण व पढ़ाई ठीक से होने लगी.

वह जिस ग्लास फैक्ट्री में काम करती थी, उसी में मुकेश झा भी काम करता था. वह मैनेजर था. फैक्ट्री के कर्मचारियों पर निगाह रखना तथा उन का वेतन आदि वितरण करना उस का काम था. फैक्ट्री के अन्य काम भी वही देखता था. कर्मचारी को काम पर रखना या फिर निकालना उसी के हाथ में था. फैक्ट्री पर उस की मजबूत पकड़ थी. मुकेश झा प्रेमनगर थाने के ईसाई टोला मोहल्ले में परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी अंजना के अलावा बेटा शुभम व एक बेटी थी. मुकेश फैक्ट्री में मैनेजर तो था ही, इस के अलावा वह एक होटल का संचालन भी करता था. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. उस के पास एक कार तथा बाइक भी थी. वह ठाठबाट से रहता था. रंगीनमिजाज भी था.

एक रोज मुकेश झा की नजर फैक्ट्री में काम कर रही अनीता पर पड़ी. खूबसूरत अनीता को देख कर उस की धड़कनें बढ़ गईं. कुछ देर तक वह उसे अपलक निहारता रहा, फिर चला गया. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. अनीता को रिझाने के लिए वह उस से नजदीकियां बढ़ाने लगा. अनीता की पारखी नजरें भांप गईं कि मैनेजर बाबू की नजरें उस पर गड़ी हैं, इसलिए वह उस से नजरें चुराने लगी, लेकिन मुकेश झा कहां मानने वाला था. एक रोज मौका पा कर उस ने अनीता को रोक लिया और बोला, ”अनीता, तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हारी खूबसूरती पर मैं फिदा हूं. तुम से दोस्ती करना चाहता हूं.’’

अनीता झिझकते व शरमाते हुए बोली, ”मुकेश बाबू, आप यह क्या कह रहे हैं. मैं 3 बच्चों की मां हूं. भला मुझ से दोस्ती कर के आप को क्या हासिल होगा?’’

”अनीता तुम 3 बच्चों की मां जरूर हो, लेकिन खूबसूरती में किसी नवयौवना से कम नहीं हो. मेरे लिए तो तुम अप्सरा जैसी हो.’’

अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन कर अनीता मन ही मन खुश हुई, लेकिन दिखावे के तौर पर बोली, ”आप मेरी झूठी तारीफ कर रहे हो. भला मैं इतनी खूबसूरत कहां हूं.’’

इस के बाद मुकेश अनीता के पीछे पड़ गया. वह उसे हर तरह से रिझाने की कोशिश करने लगा. उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. धीरेधीरे अनीता भी उस की ओर आकर्षित होने लगी. यही आकर्षण कब प्यार में तब्दील हो गया, अनीता नहीं जान पाई. अनीता और मुकेश का प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच की दूरियां भी कम होने लगीं. अब दोनों साथसाथ घूमनेफिरने लगे. होटल रेस्त्रां में गुलछर्रे उड़ाने लगे. अनीता को अब मुकेश का साथ अच्छा लगने लगा था. मुकेश भी ज्यादा समय अनीता के साथ बिताने लगा. उसे अनीता हूर की परी लगने लगी थी.

मुकेश झा आर्थिक रूप से संपन्न था. शहर में उस का मकान तथा आवागमन के लिए घर में कार व बाइक थी. अनीता की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. उस का पति द्वारका चौधरी ठेले पर चाय बेचता था. वह बीमार भी रहता था. अनीता जितनी खूबसूरत थी, उस का पति साधारण शक्लसूरत का था. अत: अनीता को जब मुकेश का साथ मिला तो वह उस की तरफ खिंचती चली गई. मुकेश के सामने उसे अब अपना पति फीका लगने लगा था. यही हाल मुकेश का भी था. अनीता के मुकाबले अपनी पत्नी फीकी लगने लगी थी.

मंदिर में लव मैरिज

अनीता और मुकेश का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों एक रोज मंदिर में पहुंचे और मुकेश ने उस की मांग में सिंदूर भर कर उसे पत्नी का दरजा दे दिया. इस के बाद दोनों अलग मकान ले कर लिवइन रिलेशन में रहने लगे. मुकेश अनीता की हर सुखसुविधा का ध्यान रखता था. अनीता गहने, कपड़े, पैसों जिस किसी की भी डिमांड करती थी, मुकेश झा उसे पूरा करता था. अनीता की मांग में सिंदूर भले ही पति द्वारका का सजा था, लेकिन वह पतिधर्म प्रेमी मुकेश के साथ निभाती थी. हंसीखुशी से उन का समय बीत रहा था.

अनीता ने मुकेश को दिल मेें बसाया तो उसे अपना बीमार पति द्वारका फीका लगने लगा. वह उस की उपेक्षा करने लगी. उस ने उस की परवाह करना छोड़ दी. अनीता और मुकेश अब साथसाथ रहना चाहते थे. अत: 4 जनवरी, 2019 को मुकेश ने मंदिर में जा कर अनीता की मांग में सिंदूर भर कर उस के साथ लव मैरिज कर ली.

इस के बाद अनीता और मुकेश ने अपनेअपने घरों से दूरियां बना लीं और अलग मकान में लिवइन रिलेशन में रहने लगे. दोनों के फेमिली वालों को विवाह रचाने की जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध जताया, लेकिन विरोध का उन पर असर नहीं हुआ. 19 फरवरी, 2020 को अनीता और मुकेश के बीच फैक्ट्री में किसी बात को ले कर बहस हो गई. गुस्से में मुकेश ने अनीता से कह दिया कि कल से फैक्ट्री मत आना. मुकेश की यह बात अनीता के दिल में कांटे की तरह चुभ गई, अत: उस ने फैक्ट्री जाना बंद कर दिया.

हालांकि मुकेश ने अनीता को मनाने की कोशिश की, लेकिन बात दिल को चुभ गई थी, इसलिए अनीता फैक्ट्री नहीं गई. मार्च 2020 के पहले हफ्ते में अनीता नौकरी की तलाश में मुंबई चली गई. वहां गए उसे 10 दिन ही बीते थे कि कोरोना की वजह से लौकडाउन की चर्चा होने लगी. वहां उसे नौकरी भी नहीं मिली थी, इसलिए वह घर लौट आई. मुंबई से लौटने के बाद अनीता के घर की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई.

अनीता कर्मठ, लगनशील और खुद्ïदार महिला थी. काफी सोचविचार कर उस ने फाइनैंस पर औटो ले कर चलाने का प्लान बनाया, लेकिन उस के सामने पहला प्रश्न यह था कि पैसा कौन देगा? इस के लिए उस ने कई बैंकों से संपर्क साधा, लेकिन कोई बैंक बिना गारंटी उसे लोन देने को तैयार न था. काफी प्रयास के बाद एक निजी बैंक ने लोन देने की हामी भरी. जब बैंक अधिकारी जांचपड़ताल करने घर आए तो अनीता के पति द्वारका ने अपना आधार और बैंक पासबुक की कौपी देने से इंकार कर दिया. क्योंकि वह नहीं चाहता था कि अनीता महिला हो कर औटो चलाए.

वैसे भी झांसी में कोई महिला औटो चालक नहीं थी, लेकिन विरोध के बावजूद अनीता ने हिम्मत नहीं हारी. इस बुरे वक्त में अनीता ने मुकेश झा से मदद मांगी. मुकेश की मदद से उस ने बैंक के कागज पूरे किए और लोन ले लिया. 18 फरवरी, 2021 को अनीता ने फाइनैंस करा कर नई औटो खरीदी और झांसी की सड़कों पर उसे चलाने लगी. इस तरह अनीता चौधरी झांसी की फस्र्ट लेडी औटो ड्राइवर बन गई. उस के जज्बे की हर तरफ तारीफ होने लगी. वह अखबारों की सुर्खियों में भी छा गई. कई सामाजिक संगठनों ने उस के जज्बे को सलाम करते हुए उसे सम्मानित भी किया.

पुलिस विभाग में भी वह चर्चा का विषय बन गई. उस ने अपने औटो के आगेपीछे पोस्टर चस्पा किए थे, जिन पर लिखा था— जनपद झांसी पुलिस, झांसी की पहली महिला औटो ड्राइवर. पुरुष और महिला एक समान, जनजन का हो यही आह्वान. पुलिस अफसरों के फोन नंबर भी लिखे थे. अनीता का हौसला बढ़ाने के लिए तत्कालीन डीआईजी (झांसी रेंज) जोगेंद्र सिंह ने भी उस के औटो पर सफर किया था और 13 दिसंबर, 2021 को उस के कार्य की सराहना करते हुए उसे प्रशस्ति पत्र दिया था.

इस तरह समय बीतता रहा और अनीता औटो चला कर पैसे कमाती रही. साथ ही सुर्खियों में भी छाई रही. अनीता और मुकेश साथ रहते थे. मुकेश अनीता को प्यार करता था, इसलिए वह उस की हर डिमांड पूरी करता था. उस ने अनीता को गहनों से लाद दिया था. अनीता अकसर औटो ले कर झांसी रेलवे स्टेशन के पास खड़ी होती थी. यहां जुलाई 2025 में उस की दोस्ती अरुण नाम के युवक से हुई. अरुण स्टेशन के पास ही एक ट्रेवल एजेंसी में काम करता था. अनीता और अरुण एकदूसरे को पसंद करने लगे. दोनों घंटों मोबाइल पर रसभरी बातें करते और हंसीठिठोली करते.

प्यार में आया ट्विस्ट

अनीता की अरुण से नजदीकियां बढ़ीं तो वह मुकेश की उपेक्षा करने लगी. उस का फोन रिसीव करना भी बंद कर दिया. लेकिन इधर कुछ समय से अनीता के व्यवहार में रूखापन आ गया था. वह उस की उपेक्षा भी करने लगी थी. उस की जुबान में कड़वाहट भी आ गई थी. वह पहले जैसा न तो बरताव करती थी और न ही हंसतीबोलती थी. वह साथ घूमने को चलने के लिए कहता तो साफ मना कर देती. कोई उपहार लाता तो उसे लेने से इंकार कर देती. मुकेश की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अनीता के स्वभाव मेें यह परिवर्तन कैसे और क्यों आया.

अनीता के स्वभाव को ले कर मुकेश की उलझन बढ़ी तो उस ने अनीता की जासूसी की. तब उसे पता चला कि अनीता अब किसी अरुण नाम के युवक से प्यार करने लगी है. इसी कारण वह उस की उपेक्षा करती है.

एक रोज मुकेश ने अनीता के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ”अनीता, यह अरुण कौन है? इस से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’

अरुण का नाम सुनते ही अनीता घबरा गई. वह जान गई कि मुकेश को उस के और अरुण की दोस्ती का पता चल गया है. फिर भी वह संभलते हुए बोली, ”अरुण एक अच्छा इंसान है. हम दोनों के बीच दोस्ती है. कभीकभी उस से बतिया लेती हूं.’’

”तुम दोनों के बीच सिर्फ दोस्ती है या फिर नाजायज रिश्ता भी है?’’ मुकेश ने कटाक्ष किया.

मुकेश के इस कटाक्ष से अनीता भड़क गई और बोली, ”तुम मुझ पर लांछन लगा कर अपनी हदें पार कर रहे हो. मैं यह सब कतई बरदाश्त नहीं करूंगी.’’

उस रोज अरुण को ले कर अनीता और मुकेश के बीच खूब कहासुनी हुई. इस के बाद तो आए दिन विवाद होने लगा. उन दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस के सामने जा पहुंचा. अरुण को ले कर अकसर दोनों में झगड़ा होने लगा. अक्तूबर, 2025 में एक रोज मुकेश ने अनीता के साथ रेलवे स्टेशन के बाहर अभद्रता व मारपीट की तो औटो चालकों का गुस्सा फूट पड़ा. चालकों ने मुकेश की पिटाई कर दी. अनीता ने भी थाना नवाबाद में मुकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस के बाद मुकेश को थाने लाया गया. थाने में पंचायत शुरू हुई. दोनों के फेमिली वाले भी थाने पहुंचे.

थाने में मुकेश पुलिस व अपने फेमिली वालों के सामने बोला कि वह अनीता के साथ ही रहेगा, लेकिन जब अनीता से पूछा गया तो उस ने कहा कि वह मुकेश के साथ नहीं रहना चाहती. यह सुनते ही मुकेश बौखला गया और कहने लगा कि अब या तो तुम रहोगी या हम. धमकी देने पर पुलिस ने उसे काफी फटकार लगाई. इस घटना के बाद अनीता ने मुकेश से ब्रेकअप कर लिया और उसे छोड़ कर पति के साथ रहने लगी. अनीता अब दिन में घर संभालती और रात को औटो चलाती. रात में अकसर अरुण भी उस के साथ रहता. सुरक्षा की दृष्टि से वह अरुण को साथ रखती थी.

मुकेश किसी भी कीमत पर अनीता को खोना नहीं चाहता था, अत: अनीता चौधरी की जिंदगी में जब अरुण आया तो वह बौखला गया. वह दोनों पर नजर रखने लगा. मुकेश ने गुपचुप तरीके से अनीता के औटो में ट्रैकर लगा दिया. मोबाइल के जरिए वह निगाह रखता था. ट्रैकर औन होने पर उस से होने वाली बात सुनता था. अनीता व अरुण में क्या बातचीत होती, उसे सब पता चल जाता था. मुकेश अब जान गया था कि अनीता और अरुण के बीच गहरे प्रेम संबंध हैं.

4 जनवरी, 2026 की शाम मुकेश अनीता के पास गया. उस ने उसे शादी की सालगिरह की याद दिलाई और घर वापस चलने को कहा, लेकिन अनीता ने साफ मना करते हुए मुकेश की बेइज्जती की. तब उस ने उसी रात अनीता की गोली मार कर हत्या कर दी, लेकिन उस का दूसरा प्रेमी अरुण बच गया. आरोपी मुकेश झा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 10 जनवरी, 2026 को उसे झांसी की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया. UP News

 

 

Love Story: ये आदत आप के प्रेमी की तो नहीं

Love Story: 20 वर्षीय आकांक्षा उर्फ माही 25 वर्षीय प्रेमी सूरज उत्तम को अपना सब कुछ मान बैठी थी. तभी तो वह उस के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी, लेकिन सूरज कई अन्य लड़कियों के साथ गुलछर्रे उड़ा रहा था. प्रेमी की यह आदत प्रेमिका पर इतनी भारी पड़ी कि…

आकांक्षा उर्फ माही की रोजरोज की किचकिच से सूरज उत्तम परेशान था. वह उस पर शादी करने का दबाव डाल रही थी. शादी न करने पर माही ने उसे रेप के मामले में फंसाने की धमकी भी दे दी थी. सूरज की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस प्रौब्लम से बाहर कैसे निकले?

21 जुलाई, 2025 की सुबह 8 बजे 20 वर्षीय आकांक्षा कान्हा रेस्टोरेंट जाने को घर से निकली तो सूरज फोन पर बात कर रहा था. आकांक्षा को शक हुआ कि वह अपनी किसी गर्लफ्रेंड से बतिया रहा है. उस ने उस समय तो कुछ नहीं कहा, लेकिन दोपहर को फोन कर सूरज को कान्हा रेस्टोरेंट बुला लिया.

सूरज ने अपना मोबाइल फोन टेबल पर रखा. फिर आमनेसामने बैठ कर दोनों बातें करने लगे. इसी समय सूरज की खास गर्लफ्रेंड का वीडियो कौल आया. इस कौल को आकांक्षा उर्फ माही ने देखा तो वह सूरज से झगडऩे लगी. माही को शक हुआ कि सुबह भी सूरज इसी से बात कर रहा था. वीडियो कौल को ले कर दोनों कुछ देर झगड़ते रहे, फिर सूरज वहां से चला गया.

रात 10 बजे सूरज कमरे पर आया तो गर्लफ्रेंड को ले कर दोनों के बीच फिर झगड़ा शुरू हो गया. आकांक्षा धमकी भरे लहजे में बोली, ”सूरज, एक बात कान खोल कर सुन लो. यदि तुम ने मुझे धोखा दिया और शादी नहीं की तो मैं रेप का केस दर्ज करा कर तुम्हें जेल भिजवा दूंगी. फिर ताउम्र जेल में ही रहोगे.’’

आकांक्षा का गुस्सा शांत करने के लिहाज से सूरज बोला, ”माही, मैं तुम्हारे सिवाय किसी और से प्यार नहीं करता. तुम बिना वजह मुझ पर शक कर रही हो.’’

”झूठ, सफेद झूठ. सच्चाई यह है कि तुम खेलते मेरे शरीर से हो और प्यार कहीं और लुटाते हो.’’ माही का गुस्सा और बढ़ गया.

”ऐसा नहीं है माही, मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूं.’’ कहते हुए सूरज माही से प्यार जताने आगे बढ़ा.

तभी माही ने एक जोरदार तमाचा सूरज के गाल पर जड़ दिया और बोली, ”खबरदार! जो मेरे शरीर को छूने की जुर्रत की.’’

गाल पर तमाचा लगते ही सूरज तिलमिला उठा. उस का गुस्सा सातवें आसमान जा पहुंचा. वह आपा खो बैठा और आकांक्षा पर लातघूंसे चलाने लगा. माही चीखी तो सूरज के हाथ उस की गरदन पर पहुंच गए. वह उस का गला कसने लगा. चंद मिनट बाद ही आकांक्षा उर्फ माही की सांसें थम गईं. प्रेमिका माही की हत्या के बाद सूरज घबरा गया. उस ने कानपुर के नौबस्ता में रह रहे अपने दोस्त आशीष को फोन कर सारी बात बताई और मदद मांगी. रात 11 बजे आशीष बाइक से सूरज के कमरे में आ गया.

दोनों ने आकांक्षा उर्फ माही का शव उस के काले रंग के ट्रौली बैग में पैक किया. इस के बाद बंद ट्रौली बैग को बाइक पर रखा और दोनों निकल पड़े. सूरज बाइक चला रहा था, जबकि आशीष पीछे की सीट पर ट्रौली बैग पकड़ कर बैठा. सूरज और आशीष रात के अंधेरे में कानपुर से बिंदकी, फतेहपुर होते हुए लगभग 132 किलोमीटर की दूरी तय कर रात 3 बजे बांदा के चिल्ला घाट यमुना पुल पर पहुंचे. फिर ट्रौली बैग को जिस में माही का शव था, उफनती यमुना नदी में फेंक दिया. उस के बाद दोनों वापस कानपुर आ गए.

आकांक्षा उर्फ माही का मोबाइल फोन सूरज के पास ही था. हत्या के बाद भी उस ने उस का मोबाइल फोन बंद नहीं किया था. विजयश्री अपनी बेटी माही के लिए बेहद परेशान थी. वह उसे बारबार कौल कर रही थी, लेकिन माही उस का कौल रिसीव ही नहीं कर रही थी. जैसेजैसे समय बीतता जा रहा था, वैसेवैसे उस की चिंता भी बढ़ती जा रही थी.

22 जुलाई, 2025 की शाम विजयश्री की बात बड़ी बेटी प्रतीक्षा से तो हो गई थी, लेकिन छोटी बेटी आकांक्षा उर्फ माही से नहीं हो पा रही थी. उस के मोबाइल फोन की रिंग तो जा रही थी, लेकिन वह जवाब नहीं दे रही थी. देर रात विजयश्री ने अपनी चिंता से प्रतीक्षा को अवगत कराया तो उस ने बताया कि माही के फोन पर रिंग जा रही है, लेकिन वह फोन उठा नहीं रही है. यह पहला अवसर था, जब माही मांबहन में से किसी का फोन रिसीव नहीं कर रही थी, अत: विजयश्री घबरा उठी. किसी अनहोनी की आशंका से उस का दिल कांप उठा. जैसेतैसे करवट बदल कर उस ने वह रात बिताई, फिर सवेरा होते ही उस ने ट्रेन पकड़ी और कानपुर पहुंच गई.

प्रतीक्षा कानपुर के बर्रा क्षेत्र में किराए पर रहती थी. विजयश्री उस के रूम पर पहुंची. प्रतीक्षा ने मम्मी के सामने ही माही को कौल लगाई, लेकिन कौल रिसीव नहीं हुई.

तब प्रतीक्षा ने माही के फोन पर मैसेज भेजा, ‘माही, मम्मी रो रही हैं. तुम उन से बात क्यों नहीं कर रही हो.’

कुछ देर बाद माही के फोन से मैसेज आया, ‘बाद में बात करूंगी, अभी मैं ड्यूटी पर हूं.’

प्रतीक्षा ने फिर से मैसेज किया, ‘मम्मी ने पुलिस में शिकायत कर दी है. सूरज का नाम लिखा दिया है.’

इस का माही के फोन से तुरंत मैसेज आया, ‘सूरज का नाम क्यों लिखा दिया. मैं अपनी मरजी से अलग हुई हूं.’

आकांक्षा उर्फ माही नौबस्ता गल्ला मंडी स्थित ‘कान्हा रेस्टोरेंट’ में काम करती थी, अत: विजयश्री प्रतीक्षा के साथ माही का पता लगाने कान्हा रेस्टोरेंट पहुंची. रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि आकांक्षा से उस की फोन पर तो बात नहीं हुई, लेकिन उस ने मैसेज भेजा है कि उसे लखनऊ में जौब मिल गई है, इसलिए अब रेस्टोरेंट में काम नहीं कर पाएगी. मैसेज पढ़ कर मैं ने उसे कोई जवाब नहीं दिया.

आकांक्षा उर्फ माही की एक खास दोस्त मंजू हंसपुरम में रहती थी. विजयश्री उस के घर पहुंची. मंजू ने बताया कि आकांक्षा ने उसे मैसेज भेजा था कि सूरज से ब्रेकअप कर वह लखनऊ आ गई है. मंजू ने कहा कि मैसेज पढऩे के बाद उस ने आकांक्षा से फोन पर बात करने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई. पता नहीं वह किन हालात से गुजर रही होगी. थकहार कर मांबेटी वापस आ गईं. देर रात विजयश्री ने अपने मोबाइल फोन से बेटी को मैसेज किया, ‘माही मुझ से बात करो. बहुत घबराहट हो रही है.’

इस का जवाबी मैसेज आया, ‘भैया, मैं बाद में बात करूंगी.’

इस मैसेज को पढ़ कर विजयश्री का माथा ठनका. वह जान गईं कि माही का फोन कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा है. माही खतरे में है. दरअसल, विजयश्री जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थी, उसे उस के बड़े बेटे ने खरीद कर दिया था.

माही ने मम्मी के मोबाइल फोन नंबर को अपने मोबाइल फोन में ‘भैया’ के नाम से सेव कर रखा था. माही अगर मैसेज भेजती तो भैया की जगह मम्मी के नाम मैसेज आता. इसी से उसे संदेह हो गया.

आकांक्षा उर्फ माही का प्रेमी था सूरज उत्तम. वह उसी के साथ लिवइन रिलेशन में रहती थी. प्रतीक्षा व उस की मम्मी ने सूरज उत्तम से फोन पर बात की और माही के बारे में पूछा. इस पर उस ने माही के बारे में कोई जानकारी होने से इंकार किया. उस के बाद सूरज उत्तम भी विजयश्री के साथ हो लिया और माही की तलाश में जुटा रहा. प्रतीक्षा और उस की मम्मी माही की तलाश करतेकरते थक गईं तो गुमशुदगी दर्ज कराने थाना नौबस्ता पहुंचीं, लेकिन वहां उन्हें यह कह कर टरका दिया गया कि उन की बेटी जिस कान्हा रेस्टोरेंट में काम करती थी, वह थाना हनुमंत विहार के अंतर्गत आता है.

यह जानकारी पा कर विजयश्री थाना हनुमंत विहार पहुंची. वहां उस ने एसएचओ राजीव सिंह को सारी बात बताई और बेटी की गुमशुदगी दर्ज करने की गुहार लगाई. इस पर उन्होंने कहा कि लड़की कुंवारी है. इज्जत का सवाल है. कुछ रोज और इंतजार कर लो. शायद वापस आ जाए. निराश हो कर तब विजयश्री वापस आ गई. धीरेधीरे एक सप्ताह बीत गया, लेकिन न तो माही का कुछ पता चला और न ही गुमशुदगी दर्ज हो पाई. इस के बाद विजयश्री पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से मिली और गुमशुदा बेटी माही का पता लगाने की गुहार लगाई.

सीपी अखिल कुमार ने विजयश्री को आश्वासन दिया कि रिपोर्ट दर्ज कर उन की बेटी की खोज की जाएगी, लेकिन आश्वासन के बाद भी काररवाई नहीं हुई. इस के बाद विजयश्री ने महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 पर कौल लगाई और मदद मांगी. इस पर विजयश्री फिर से थाना हनुमंत विहार पहुंची और एसएचओ राजीव सिंह से मिली. अब तक थाने पर फरमान आ चुका था, अत: बिना किसी हीलाहवाली के माही की गुमशुदगी की सूचना 8 अगस्त, 2025 को दर्ज कर ली गई. मामले की जांच एसआई सुशील कुमार को सौंपी गई.

लेकिन एसआई सुशील कुमार ने माही को खोजने का कोई प्रयास नहीं किया. विजयश्री जब भी दारोगा सुशील कुमार से माही के बारे में पूछती तो वह झल्ला कर कहता, ”तुम्हारी बेटी अपने किसी प्रेमी के साथ घूमने गई होगी. जल्द ही वापस आ जाएगी.’’

दारोगा का जवाब विजयश्री के मन में कांटे की तरह चुभता. परंतु वह मन मसोस कर लौट आती. पुलिस भले ही सुस्त थी, लेकिन विजयश्री बेटी की खोज में जुटी रही. वह जानकारी जुटाने उस मकान पर पहुंची, जहां उस की बेटी अपने प्रेमी सूरज के साथ रहती थी. मकान में कई किराएदार थे. विजयश्री ने किराएदारों से बेटी माही के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि माही को 21 जुलाई के बाद उन्होंने नहीं देखा. उस के साथ रहने वाला सूरज भी कमरा खाली कर माही का सारा सामान ले गया.

विजयश्री ने पूछा, ”क्या सूरज सामान ट्रौली बैग में भर कर ले गया?’’

इस पर किराएदारों ने बताया कि आकांक्षा जब आई थी, तब ट्रौली बैग था, लेकिन जब सूरज ने कमरा खाली किया, तब ट्रौली बैग नहीं था. सूरज द्वारा कमरा खाली करना और ट्रौली बैग न होने से विजयश्री का माथा ठनका. वह कमरे में पहुंची तो वहां अलमारी पर एक दीपक जल रहा था. दीपक जलता देख विजयश्री को शक हो गया कि उन की बेटी माही के साथ सूरज ने कोई अनहोनी कर दी है. वह जान गई कि माही के गायब होने का राज सूरज के पेट में ही छिपा है.

पुलिस की निष्क्रियता से परेशान विजयश्री ने तब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई. वहां से सख्ती बरती गई तब थाना हनुमंत विहार पुलिस सक्रिय हुई. यह मामला डीसीपी (साउथ) दीपेंद्र नाथ चौधरी के संज्ञान में आया तो उन्होंने एसएचओ राजीव सिंह को फटकार लगाई और जल्द से जल्द माही प्रकरण को सुलझाने का आदेश दिया. आदेश पाते ही राजीव सिंह जांच में जुट गए. उन्होंने कौल कर विजयश्री को थाने बुलाया और उन का बयान दर्ज किया. विजयश्री ने बयान में कहा कि सूरज के साथ उन की बेटी माही लिवइन रिलेशन में रह रही थी.

उस की गुमशुदगी का राज उस के दिल में ही छिपा है. यदि उस से सख्ती से पूछताछ की जाए तो माही का पता चल सकता है. विजयश्री ने सूरज का मोबाइल फोन नंबर भी पुलिस को मुहैया करा दिया. इंसपेक्टर राजीव सिंह ने सूरज के फोन नंबर की कौल डिटेल्स तथा लोकेशन निकलवाई तो चौंकाने वाली जानकारी निकली. पता चला कि सूरज और माही के बीच हर रोज बात होती थी. 21 जुलाई, 2025 की दोपहर माही ने आखिरी बार सूरज से बात की थी.

सूरज की लोकेशन 21 जुलाई की रात को कानपुर से बिंदकी होते हुए बांदा की तरफ जाते दिखाई दे रही थी. सब से चौंकाने वाली बात यह थी कि माही के मोबाइल फोन की लोकेशन भी इस दरम्यान बांदा तक गई थी. 3 दिनों बाद उस का फोन बंद हो गया था. 15 सितंबर, 2025 की सुबह 10 बजे एसएचओ राजीव सिंह ने शक के आधार पर सूरज को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से 4 घंटे तक आकांक्षा उर्फ माही के बारे में पूछताछ की गई.

लेकिन सूरज लगातार यही बताता रहा कि किसी दूसरी गर्लफ्रेंड से बात करने को ले कर उस का माही से मामूली विवाद हुआ था. फिर वह घर से चली गई. उस के बाद उस की बात नहीं हुई. वह कहां है? किस के साथ है? उसे कुछ भी पता नहीं है. सूरज ने मुंह नहीं खोला तो एसएचओ राजीव सिंह उसे डीसीपी (साउथ) के औफिस ले गए. यहां डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने उस से पूछताछ की. तब उस ने साफ कह दिया कि उसे माही की कोई जानकारी नही है.

लेकिन जब उन्होंने सूरज के सामने उस के फोन की डिटेल्स रखते हुए सख्ती से पूछा तो वह घबरा गया और बोला, ”साहब, आकांक्षा उर्फ माही अब इस दुनिया में नहीं है. मैं ने उसे मार डाला है.’’

”क्याऽऽ तूने उसे मार डाला?’’ डीसीपी चौंक पड़े. फिर पूछा, ”लाश कहां है?’’

”साहब, माही की लाश को उसी के ट्रौलीबैग में भर कर कानपुर से 132 किलोमीटर दूर बांदा के चिल्लाघाट पुल से यमुना नदी में फेंक दी थी. लाश ठिकाने लगाने में मेरे दोस्त आशीष ने भी मदद की थी.’’

”तुम ने अपनी गर्लफ्रेंड माही की हत्या क्यों की?’’ डीसीपी चौधरी ने पूछा.

इस के बाद सूरज ने अपनी लिवइन पार्टनर की हत्या से ले कर उस की लाश ठिकाने लगाने तक की पूरी कहानी पुलिस को बता दी.

इस के बाद पुलिस ने सूरज की निशानदेही पर दबिश दे कर आशीष को भी उस के नौबस्ता स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने सहज ही जुर्म कुबूल कर लिया, लेकिन शव को ठिकाने लगाने में प्रयुक्त आशीष की बाइक को पुलिस बरामद नहीं कर पाई. दूसरे रोज पुलिस सूरज व आशीष को साथ ले कर बांदा के चिल्ला घाट यमुना पुल पर पहुंची. फिर 2 दिन तक माही के शव को बरामद करने के लिए सर्च औपरेशन चलाया, लेकिन यमुना उफान पर थी इसलिए शव बरामद नहीं हो पाया.

20 सितंबर, 2025 को डीसीपी (साउथ) दीपेंद्र नाथ चौधरी ने प्रैसवार्ता की और मीडिया के सामने आकांक्षा उर्फ माही की लव क्राइम स्टोरी का खुलासा किया. इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करने में पुलिस को लगभग 2 महीने का समय लग गया. चूंकि दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: एसएचओ राजीव सिंह ने मृतका की मम्मी विजयश्री की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) के तहत सूरज तथा आशीष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा दोनों को बाकायदा गिरफ्तार कर लिया.

आकांक्षा उर्फ माही कौन थी? वह सूरज के संपर्क में कैसे आई? सूरज ने उस की हत्या क्यों की? यह सब जानने के लिए माही के अतीत की ओर चलते हैं. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक चर्चित कस्बा है-रूरा. व्यापारिक कस्बा होने से यहां हर रोज चहलपहल रहती है. रूरा उत्तर रेलवे का बड़ा स्टेशन भी है. इसी रूरा कस्बे से 5 किलोमीटर दूर डेरापुर रोड पर एक गांव है-सुजनीपुर. इसी गांव में सुरेश उर्फ बच्चन लाल वर्मा रहता था. उस के परिवार में पत्नी विजयश्री के अलावा 2 बेटे सूरज व आदर्श तथा 2 बेटियां प्रतीक्षा व आकांक्षा थी.

सुरेश वर्मा के पास थोड़ी सी खेती की जमीन थी. वह मेहनतमजदूरी कर परिवार का भरणपोषण करता था. आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण विजयश्री अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा न दिला सकी. बड़ा बेटा सूरज इंटरमीडिएट पास करने के बाद रूरा कस्बे में एक कपड़े की दुकान पर काम करने लगा. बात फरवरी 2022 की है. मियादी बुखार व पीलिया से सुरेश उर्फ बच्चन लाल की मौत हो गई. पति की मौत के बाद परिवार में आर्थिक प्रौब्लम आ गई. विजयश्री की बेटियां जवानी की दहलीज पर थीं. उसे उन के ब्याह की भी चिंता सताने लगी थी, लेकिन घर की माली हालत ऐसी थी कि वह उन के ब्याह के बारे में सोच भी नहीं सकती थी.

 

मम्मी की व्यथा को बड़ा बेटा सूरज भलीभांति समझता था. अत: वह दिल्ली चला गया. वहां वह किसी फैक्ट्री में काम करने लगा. कमाई का पैसा सूरज घर भेजने लगा तो विजयश्री को कुछ राहत मिलने लगी. कर्ज का पैसा भी चुकता करने लगी. एक परिचित के माध्यम से विजयश्री की दोनों बेटियों प्रतीक्षा व आकांक्षा की 20 जून, 2024 को कानपुर में बर्रा बाईपास पर स्थित ‘गुड फूड रेस्टोरेंट’ में नौकरी लग गई.

नौकरी लगने के बाद प्रतीक्षा ने बर्रा में राजेश गुप्ता के मकान में एक कमरा किराए पर ले लिया. इस कमरे में प्रतीक्षा छोटी बहन आकांक्षा उर्फ माही के साथ रहने लगी. दोनों बहनें साथ जातीं और साथ आतीं. मेहनत और लगन से काम करने से दोनों ने रेस्टोरेंट में पैठ बना ली.

प्रतीक्षा व आकांक्षा को सैलरी मिली तो दोनों ने मोबाइल फोन किस्तों में खरीद लिया. उधर सूरज जब दिल्ली से घर आया तो उस ने मम्मी को वह फोन दे दिया, ताकि वह सब से बात कर सके. सूरज ने दूसरा फोन खरीद लिया. आकांक्षा ने मम्मी के फोन नंबर को अपने फोन में भैया के नाम से सेव कर लिया. विजयश्री अब अकसर देर शाम बेटियों से बात करती और फिर निश्चिंत हो कर सो जाती.

इसी दौरान इंस्टाग्राम के माध्यम से आकांक्षा की दोस्ती सूरज उत्तम से हुई. दोस्ती प्यार में बदली और फिर उन के बीच चैटिंग होने लगी. चैटिंग के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर शेयर किए, फिर उन के बीच मोबाइल फोन के जरिए भी खूब बातें होने लगीं. एक रोज आकांक्षा ने फोन कर सूरज को अपने गुड फूड रेस्टोरेंट बुलाया. सूरज कुछ देर बाद ही रेस्टोरेंट पहुंच गया. वहां पहली बार दोनों ने एकदूसरे को देखा.

20 वर्षीया खूबसूरत आकांक्षा उर्फ माही को देख कर सूरज उस का दीवाना बन गया. वहीं 25 वर्षीय सूरज को देख कर आकांक्षा को लगा कि यही उस के सपनों का राजकुमार है. वह भी उस की दीवानी बन गई. इस के बाद दोनों का प्रेम प्रसंग परवान चढऩे लगा. दोनों के बीच की दूरियां सिमटने लगीं. फिर एक रोज दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. आकांक्षा उर्फ माही सूरज के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी. सूरज उस पर पैसा खर्च करने लगा.

एक रोज बातचीत के दौरान माही ने सूरज से उस के घरद्वार के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वह फतेहपुर जिले के गांव हरीखेड़ा का रहने वाला है. पापा महानंद उत्तम किसान हैं. उस के 2 अन्य भाई कल्लू व अमन हैं, जो कैटरिंग का काम करते हैं. वह इलैक्ट्रिशियन है और हंसपुरम में रहता है. सूरज के बारे में जानने के बाद माही ने अपने बारे में सूरज को बताया. कुछ समय बाद सूरज आकांक्षा से मिलने उस के किराए वाले रूम पर आने लगा.

एक दिन प्रतीक्षा ने दोनों को मिलन करते देख लिया तो उस ने माही को फटकार लगाई. तब माही ने बताया कि वह और सूरज एकदूसरे से प्रेम करते हैं. उन की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी. वह सूरज से शादी कर उसे अपना जीवनसाथी बनाना चाहती है. माही के लव अफेयर की बात सुन कर प्रतीक्षा के होश उड़ गए. उस ने माही की प्रेम कहानी मम्मी विजयश्री को बताई तो वह परेशान हो गई. विजयश्री ने बेटी को बहुत समझाया, ऊंचनीच का पाठ पढ़ाया, लेकिन माही टस से मस नहीं हुई. उस ने दोटूक शब्दो में मम्मी से कह दिया कि वह सूरज से प्रेम करती है और उसी से ब्याह रचाएगी.

इधर सूरज उत्तम का माही के रूम में आनाजाना बढ़ा तो अन्य किराएदारों की शिकायत पर मकान मालिक राजेश गुप्ता ने सूरज के आने का विरोध किया. आकांक्षा ने सारी बात प्रेमी सूरज को बताई तो उस ने नौबस्ता की धोबिन पुलिया के पास प्रमोद तिवारी के मकान में कमरा किराए पर ले लिया. 11 जुलाई, 2025 को माही ने अपना सारा सामान ट्रौली बैग में भरा और सूरज द्वारा लिए गए किराए के कमरे में आ कर रहने लगी. सूरज भी उस के साथ रहने लगा. इस तरह दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे.

यही नहीं, सूरज उत्तम ने माही की नौकरी भी छुड़वा दी और नौबस्ता गल्ला मंडी स्थित कान्हा रेस्टोरेंट में नौकरी दिलवा दी. इस रेस्टोरेंट में सूरज इलैक्ट्रिशियन था. उस की मालिक से खूब पटती थी. साथ रहते आकांक्षा को चंद दिन ही बीते थे कि उसे पता चला कि सूरज के कई अन्य लड़कियों से भी प्रेम संबंध हैं. उन से वह छिप कर बातें करता है. उस ने ऐतराज जताया तो दोनों में कहासुनी होने लगी. माही सूरज पर जल्द शादी करने का दबाव भी बनाने लगी.

एक रोज आकांक्षा ने रोते हुए बड़ी बहन प्रतीक्षा को सूरज की अन्य लड़कियों से दोस्ती के बारे में बताया. तब प्रतीक्षा ने सूरज को फटकार लगाई. इस पर सूरज ने माफी मांग ली. लेकिन माफी मांगने के बावजूद उस ने अन्य लड़कियों से बतियाना बंद नहीं किया. 21 जुलाई, 2025 को भी माही और सूरज के बीच इसी बात को ले कर झगड़ा इतना बढ़ गया कि सूरज ने गला घोंट कर आकांक्षा उर्फ माही की हत्या कर दोस्त आशीष के सहयोग से उस की लाश ठिकाने लगा दी.

दूसरे दिन जब माही के मोबाइल फोन पर कौल आने लगी तो उस ने कौल रिसीव नहीं की. मैसेज आने पर मैसेज करता रहा, ताकि उस के जानने वालों को लगे कि वह जिंदा है. इस तरह 3 दिन तक वह माही के जानने वालों को गुमराह करता रहा. 25 जुलाई को वह कानपुर सेेंट्रल स्टेशन पहुंचा और मुंबई जाने वाली ट्रेन में आकांक्षा का फोन बंद कर रख दिया. ऐसा उस ने पुलिस को गुमराह करने के लिए किया.

21 सितंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपी सूरज उत्तम और आशीष को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक पुलिस की 5 टीमें आकांक्षा उर्फ माही का शव बरामद करने के लिए सर्च औपरेशन में जुटी थीं, लेकिन शव बरामद नहीं हुआ था. Love Story

 

 

True Crime Story: जिम ट्रेनर की हत्या – प्यार में चली गोली

True Crime Story: लव, सैक्स और गोली के इस केस में खुशबू, राजीव समेत सभी आरोपी पुलिस के फंदे में फंस चुके हैं. राजीव फिजियो थैरेपिस्ट है और जनता दल (यू) के मैडिकल सैल का उपाध्यक्ष है. इस केस में नाम आने के बाद पार्टी ने उसे पद से हटा दिया है.

पिछले 18 सितंबर की सुबह 6 बजे विक्रम लोहानीपुर महल्ले के अपने घर से जिम जाने के लिए स्कूटी से निकला, तो रास्ते में कदमकुआं इलाके के बुद्ध मूर्ति के पास शूटरों ने उस पर गोलियां चला दीं. विक्रम लहूलुहान हो कर स्कूटी से गिर पड़ा और आसपास खड़े लोगों से अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाने लगा. किसी ने दर्द से छटपटाते विक्रम की बात नहीं सुनी. आखिरकार खून से लथपथ विक्रम खुद ही उठा और स्कूटी चला कर पास के प्राइवेट अस्पताल पहुंचा. प्राइवेट अस्पताल ने उसे भरती करने से इनकार कर दिया, तो वह पटना मैडिकल कालेज पहुंचा. वहां तुरंत आपरेशन किया गया और उस के जिस्म से 5 गोलियां निकाली गईं.

आशिकी के चक्कर में खुशबू ने विक्रम पर सुपारी किलर से गोलियां चलवाई थीं. इस के लिए पुराने दोस्त मिहिर सिंह के जरीए सुपारी किलर को ढाई लाख रुपए दिए गए थे. पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए कहा कि राजीव, खुशबू, मिहिर और 3 सुपारी किलरों को गिरफ्तार किया गया है. सुपारी किलर अमन कुमार, शमशाद और आर्यन उर्फ रोहित से पुलिस पूछताछ कर चुकी है और सभी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.

18 सितंबर को सुपारी किलरों ने विक्रम के जिस्म में 5 गोलियां दागी थीं. अपराधियों ने कबूल किया कि उन्हीं लोगों ने विक्रम पर गोलियां चलाई थीं और इस काम के लिए मिहिर ने उन्हें रुपए दिए थे.

अमन एमबीए का स्टूडैंट है और डिलीवरी बौय का काम करता है. शमशाद गोवा में राजमिस्त्री का काम करता था और लौकडाउन की वजह से वह पटना आया हुआ था. अमन और शमशाद भागवतनगर में किराए के मकान में साथ रहते हैं. मकान का किराया 14,000 रुपए है. मिहिर के चचेरे भाई सूरज ने मिहिर की मुलाकात अमन से कराई थी.

जिम ट्रेनर को जान से मारने की धमकी देने का आडियो भी पुलिस को मिला. ट्रेनर की बीवी और परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि आडियो में धमकी देने वाली महिला खुशबू की आवाज है, जो फिजियो थैरेपिस्ट राजीव कुमार सिंह की बीवी है.

ट्रेनर की बीवी वर्षा का आरोप है कि फिजियो थैरेपिस्ट की बीवी ने उस के पति को फोन पर गंदीगंदी गालियां भी दी थीं. उस ने बताया कि खुशबू अकसर पटना मार्केट के ‘द जिम सिटी’ पहुंच जाती थी. पहले तो फिजियो थैरेपिस्ट राजीव ने पुलिस को बताया कि जिम ट्रेनर विक्रम पर हुए हमले में उस का और उस की बीवी का कोई हाथ नहीं है.

अलबम बनाने के नाम पर विक्रम ने 60,000 रुपए लिए थे. अलबम नहीं बनाने पर राजीव और विक्रम से तीखी नोकझोंक हुई थी और रुपया लौटाने की बात हुई थी. बाद में विक्रम ने राजीव के अकाउंट में 40,000 रुपए और खुशबू के अकाउंट में 20,000 रुपए डाल दिए थे. मई महीने के बाद से राजीव और विक्रम से कोई बातचीत नहीं हुई थी. एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने बताया कि खुशबू का कहना है कि विक्रम उस का पीछा नहीं छोड़ रहा था और वह उस से पीछा छुड़ाना चाह रही थी. खुशबू का कहना है कि 60,000 रुपए के लेनदेन को ले कर विवाद पैदा हुआ था.

पुलिस को दिए गए बयान में विक्रम ने कहा है कि खुशबू उसे पिछले एक साल से परेशान कर रही थी. एक साल तक वह राजीव को उन के पाटलीपुत्र कालोनी वाले घर में ऐक्सरसाइज कराने जाता था. पैसे को ले कर हिसाबकिताब ठीक नहीं रहने पर उस ने वहां जाना बंद कर दिया. उस के बाद खुशबू ने उसे सोशल मीडिया के जरीए तंग करना चालू कर दिया. एक बार खुशबू ने गुस्से में उस के सीने पर ब्लेड से हमला किया था.

पुलिस ने खुशबू और राजीव के मोबाइल फोन को खंगाला तो खुलासा हुआ कि जनवरी में खुशबू और विक्रम के बीच 1100 बार बातचीत हुई. राजीव से आखिरी बार 18 अप्रैल को बातहुई थी. उन के बीच ह्वाट्सएप और वीडियो काल के जरीए बातचीत होती थी.

सितंबर, 2020 से मई, 2021 के बीच खुशबू ने विक्रम को 1875 काल की थी. दोनों के बीच साढ़े 5 लाख सैकंड बातचीत हुई थी. इतने ही समय के दौरान खुशबू ने अपने पति राजीव को महज 13 बार फोन किया. खुशबू और विक्रम के बीच अकसर घंटों बातें होती थीं.

मिहिर ने पुलिस को बताया कि वह 5-6 सालों से खुशबू को जानता था. खुशबू ने ही उस से कहा था कि विक्रम उसे परेशान करता है, इस वजह से वह उस की हत्या करवाना चाहती है. सुपारी किलर को जुलाई में ही एक लाख, 85 हजार रुपए दिए थे. एसएसपी ने बताया कि कुछ साल पहले मिहिर और खुशबू की पहचान भी फेसबुक के जरीए ही हुई थी.

पुलिस की छानबीन से यह बात भी सामने आई कि 5-6 साल पहले खुशबू और मिहिर के बीच भी गहरा रिश्ता रहा था. मिहिर भी खुशबू का प्रेमी रह चुका है. जब विक्रम ने खुशबू से कन्नी काटना शुरू किया, तो खुशबू को पुराने आशिक मिहिर की याद आई. उस ने मिहिर से कहा कि विक्रम उसे बहुत परेशान कर रहा है और फिर दोनों ने मिल कर विक्रम को रास्ते से हटाने की साजिश रची.

खुशबू ने मिहिर से यह भी कहा कि विक्रम को ठिकाने लगाने के लिए वह रुपयों की चिंता न करे. विक्रम को मारने के लिए मिहिर ने खुशबू से 3 लाख रुपए मांगे. खुशबू ने 3 किस्तों में एक लाख, 85 हजार रुपए मिहिर को दिए. मिहिर ने अपने चचेरे भाई सूरज के साथ मिल कर पूरी साजिश रची. उस के बाद शार्प शूटर अमन, आर्यन और शमशाद को विक्रम को मारने की सुपारी दी गई.

शूटरों के साथ यह डील अगस्त महीने की शुरुआत में ही हुई थी. अगस्त महीना खत्म हो गया और उस के बाद सितंबर भी आधा खत्म हो गया और विक्रम को ठिकाने नहीं लगाया जा सका तो खुशबू परेशान हो गई. उस ने मिहिर पर दबाव बनाना शुरू किया. विक्रम राजीव को जिम ट्रेनिंग देने के लिए उस के घर पर जाता था. वहीं खुशबू से जानपहचान हुई और बातचीत शुरू हुई. विक्रम के गठीले बदन को देख खुशबू उस पर फिदा हो गई. वह धीरेधीरे विक्रम के करीब आती गई. वह पटना मार्केट के पास विक्रम के जिम में पहुंचने लगी और वहीं कईकई घंटों तक बैठी रहती थी.

विक्रम ने पुलिस को बताया कि वह उस के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाना चाहती थी. ऐसा नहीं करने पर वह उसे फंसाने और ब्लैकमेल करने की धमकी देने लगी. जब विक्रम उस से दूर रहने की कोशिश करने लगा तो एक रात को विक्रम के घर पहुंच गई और हंगामा मचाने लगी. खुशबू की हरकतों से आजिज आ कर विक्रम ने डाक्टर राजीव को फोन कर सारे मामले की जानकारी भी दी. विक्रम ने उस से कहा कि खुशबू उसे पिछले कई दिनों से परेशान कर रही है. डाक्टर राजीव ने विक्रम की बातों पर यकीन नहीं किया और उस से कहा कि सुबूत ले कर आओ, उस के बाद देखा जाएगा.

विक्रम के बयान पर कदमकुआं थाने में केस दर्ज किया गया. केस नंबर है-477/2021. आरोपियों पर आईपीसी की धारा-307, 120बी, 34 और 27 के तहत केस दर्ज किया गया है. True Crime Story

Love Story: प्रेमी को समर्पण में जल्दबाजी नहीं

Love Story: पति मनमुताबिक न निकला तो 37 वर्षीय आंगनवाड़ी सुपरवाइजर मुकेश कुमारी जाट ने उसे तलाक दे दिया था. फिर वह पत्नी से परेशान रहने वाले 38 वर्षीय शादीशुदा सरकारी टीचर मानाराम के संपर्क में आई और दोनों के बीच नजदीकी संबंध बन गए. वह उस पर शादी का दबाव बनाने लगी, लेकिन मानाराम पत्नी से तलाक के बाद शादी करने को कहता. यह विवाद एक दिन इतना खतरनाक हो गया कि…

आंगनवाड़ी सुपरवाइजर प्रेमिका मुकेश कुमारी की लगातार शादी करने की जिद से सरकारी टीचर मानाराम परेशान हो गया. उस ने प्रेमिका को लाख समझाया कि वह पत्नी को तलाक देने के बाद उस से शादी अवश्य करेगा, लेकिन वह उस की बात किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं थी. उस की जिद से परेशान हो कर मानाराम प्रेमिका से छुटकारा पाने के उपाय खोजने लगा. उस रोज 10 सितंबर, 2025 का दिन था. टीचर मानाराम ड्यूटी से बाड़मेर स्थित शिवनगर अपने घर लौट आया था. वह आराम कर रहा था. तभी कालबेल बजी.

मानाराम ने सोचा कि कोई पड़ोसी होगा. उस ने मुख्य गेट खोला तो सामने मुकेश कुमारी को देख वह आश्चर्यचकित रह गया. उसे घूरते देख मुकेश कुमारी बोली, ”आठवां अजूबा तो हूं नहीं, जो मुझे घूरघूर कर देख रहे हो. अंदर आने को नहीं कहोगे.’’

तब मानाराम साइड में हो गया और बोला, ”बगैर कोई जानकारी दिए आ गई, मानना पड़ेगा. आओ, अंदर आओ.’’

दोनों घर में आ गए. मानाराम चाय बना कर ले आया. दोनों चाय पीते हुए बतियाने लगे. मुकेश कुमारी ताना मारते हुए बोली, ”मुझ से मन भर गया है क्या, जो मेरे नंबर भी ब्लौक कर रखे हैं. मगर मैं भी पीछा छोडऩे वाली नहीं हूं. मैं ने तुम पर विश्वास कर तनमन तुम्हें समर्पित किया. तुम ने शादी करने का वादा किया था, अब तुम मुकर रहे हो. बहाने कर रहे हो. मगर बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, जितनी जल्द हो मुझ से शादी करो.’’

”मैं ने शादी करने से मना थोड़ी किया है. मेरा तो यह कहना है कि मेरा अपनी पत्नी से तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है. उस से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. जब तक पत्नी से तलाक नहीं हो जाता, तब तक मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अपना पक्ष रखते हुए मानाराम ने कहा.

इस पर गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी तुनकते हुए बोली, ”तुम्हारा पत्नी से तलाक 10 साल तक नहीं होगा. कोर्ट में केस चलता रहेगा तो ऐसे में मैं इंतजार थोड़े करूंगी. तुम्हारी बातों में आ कर अपना तन भी तुम्हें सौंप चुकी. अब मैं किसी अन्य व्यक्ति से शादी भी तो नहीं कर सकती. तुम अपने फेमिली वालों से मिलाओ मुझे. मैं उन्हें सारी बात बता कर शादी के लिए राजी कर लूंगी.’’

”मैं शादी के लिए मना नहीं कर रहा, जो तुम्हें मेरे परिवार से मिलना पड़े. वकील ने कहा है कि थोड़े दिनों में तलाक हो जाएगा. तब तक तुम्हें सब्र रखना होगा. पत्नी से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. तुम पढ़ीलिखी समझदार हो, फिर भी बेवजह शादी के लिए बहस कर कर रही हो. ठंडे दिमाग से सोचो, तब समझ में आ जाएगा कि मैं सही कह रहा हूं.’’ मानाराम ने उसे समझाया.

मुकेश कुमारी भी जानती थी कि जब तक मानाराम का पत्नी के साथ तलाक नहीं होगा, तब तक उन की शादी मान्य नहीं होगी. फिर भी वह उस पर शादी का दबाव डाल रही थी, ताकि वह उसे भूले नहीं. मुकेश कुमारी जिला झुंझुनंू की सूरजगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर खड़ेला, जिला सीकर में कार्यरत थी. मुकेश कुमारी तलाकशुदा थी. उस ने 2019 में पति से तलाक ले लिया था. तलाक के बाद खड़ेला में रह कर अपनी नौकरी कर रही थी. मुकेश कुमारी की शादी उस की इच्छा से नहीं हुई थी. इस कारण वह पति को पसंद नहीं करती थी. बस, इसी कारण उस ने पति से तलाक ले लिया था.

मुकेश कुमारी 2019 से 2024 तक अकेली रही तो उसे जीवनसाथी की जरूरत महसूस हुई. तब उस ने अगस्त 2024 में अखबार में विज्ञापन दिया कि तलाकशुदा हूं और आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हूं. तलाकशुदा सरकारी नौकरी वाले से शादी करना चाहती हूं. वैवाहिक विज्ञापन में मुकेश कुमारी ने अपने मोबाइल नंबर दे रखे थे. बाड़मेर जिले के चवा गांव निवासी मानाराम जो पेशे से सरकारी टीचर है, उस ने अखबार में विज्ञापन देख कर मुकेश कुमारी से संपर्क साधा.

उस ने मुकेश कुमारी से अक्तूबर, 2024 में मुलाकात की. दोनों ने एकदूसरे से बात की. मानाराम भी पहले से शादीशुदा था, उस के 2 बेटियां थीं, मगर पत्नी टीपू देवी से बनती नहीं थी. पत्नी उसे छोड़ कर मायके शिवकर जा कर रह रही थी. ऐसे में मानाराम ने पत्नी से तलाक का कोर्ट में मामला दाखिल कर दिया था. दोनों ही तलाक लेना चाहते थे. मानाराम अपनी पत्नी से 2013 से ही अलग रह रहा था. वह भी चाहता था कि उस की किसी तलाकशुदा हमउम्र महिला से शादी हो जाए तो उस की दोबारा गृहस्थी बस जाए.

ऐसे में मुकेश कुमारी का वैवाहिक विज्ञापन अखबार में देखा तो वह अपने को रोक नहीं पाया और मुकेश कुमारी से संपर्क साध कर उस से जा मिला. मानाराम जहां 38 साल का था, वहीं मुकेश कुमारी उस से एक साल छोटी थी. दोनों सरकारी नौकरी में थे. वह देखने में खूबसूरत थी. मुकेश कुमारी को मानाराम पसंद आ गया. मानाराम ने उसी समय बता दिया था कि पत्नी से तलाक के बाद ही वह उस से शादी करेगा. उस की बात से वह भी सहमत थी. दोनों ने एकदूसरे के फोन नंबर लिए और बातचीत करने लगे. सोशल मीडिया पर चैट करने लगे. आंगनवाड़ी में छुट्टी होती, तब मुकेश कुमारी खड़ेला से बाड़मेर चली जाती थी. मानाराम के परिवार के लोग चवा गांव में रहते थे.

मानाराम बाड़मेर शहर स्थित शिवनगर कालोनी में अपने घर में अकेला रहता था. वह बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में टीचर था. वह बाड़मेर से जसाई गांव रोजाना आनाजाना किया करता था. मुकेश कुमारी जब भी बाड़मेर मानाराम से मिलने आती थी, वह शिवनगर स्थित उस के घर पर उस के साथ में ही रुकती थी. दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे और शादी करने वाले थे. ऐसे में उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे. कभी मानाराम बाड़मेर से 600 किलोमीटर दूर खड़ेला, सीकर प्रेमिका से मिलने चला जाता तो कभीकभार मुकेश कुमारी बाड़मेर चली जाती थी.

दोनों के बीच बिना शादी किए संबंध बन गए तो थोड़े वक्त बाद वे खुल कर मिलने लगे और मौजमस्ती करने लगे. उन के लव अफेयर को 6 माह ही बीते थे कि मानाराम को प्रेमिका बासी लगने लगी. उस का मन भर गया. इस के बावजूद भी वह ‘शादी करूंगा’, कह कर मुकेश कुमारी के जिस्म से खेलता रहा. करीब 4 महीने पहले मुकेश कुमारी ने जब मानाराम पर शादी का दबाव डाला तो उस ने वही राग अलापा कि पत्नी से तलाक के बाद ही शादी करेगा. ऐसे में मुकेश कुमारी उस पर बिफर गई. उस ने धमकी दी कि अगर उस ने उस से शादी नहीं की तो अंजाम ठीक नहीं होगा.

मानाराम जानता था कि अगर मुकेश कुमारी ने उस पर रेप या यौन शोषण का केस कर दिया तो उस की सामाजिक प्रतिष्ठा एवं नौकरी चली जाएगी. तब उस ने उस से किनारा करना शुरू कर दिया. मगर मुकेश कुमारी उस का पीछा छोडऩे वाली नहीं थी. मानाराम ने उस के फोन नंबर ब्लौक कर दिए तो वह दूसरे नंबर से फोन कर उसे धमकाती थी. उस का कहना था कि उस ने उस पर विश्वास कर के उसे जिस्म सौंपा था. मेरे तन को भोग कर तुम मुझे छोड़ दो, यह मैं होने नहीं दूंगी. लिहाजा दोनों के बीच दूरियां बढऩे लगी थीं.

इस के बावजूद मुकेश कुमारी उस के पीछे पड़ी थी. उस ने एक ही रट लगा रखी थी कि मुझ से शादी करो. मानाराम तलाक होने के बाद शादी करने की बात कहता था. मानाराम के रूखे व्यवहार से मुकेश कुमारी को लगने लगा था कि वह शादी को जानबूझ कर टाल रहा है. उसे लग रहा था कि वह उस से शादी नहीं करेगा. मगर मुकेश कुमारी ने भी ठान लिया था कि वह मानाराम से शादी कर के ही दम लेगी. मानाराम की मजबूरी यह थी कि वह पत्नी से तलाक लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता था.

मुकेश कुमारी की जिद से मानाराम परेशान हो गया था. बस, इसी कारण उस ने कन्नी काटनी शुरू की थी. यह मुकेश कुमारी को अखर रहा था. उस ने इस बार निश्चय किया कि वह मानाराम के फेमिली वालों से मिल कर अपने और मानाराम के संबंधों के बारे में बता कर शादी की बात पक्की कर के ही लौटेगी. 10 सितंबर को मुकेश कुमारी खंडेला, सीकर से बाड़मेर पहुंची और प्रेमी मानाराम से मिली. उस से शादी की बात की. वह 4 दिन बाड़मेर में प्रेमी के साथ रही. दोनों में संबंध भी बने.

14 सितंबर, 2025 की शाम को मुकेश कुमारी अपनी आल्टो कार ले कर बाड़मेर से मानाराम के गांव चवा पहुंच गई. उस ने मानाराम से कहा कि वह उसे अपने फेमिली वालों से मिलाए, उन से उसे शादी की बात पक्की करनी है. मानाराम ने फेमिली वालों से मिलाने से मना कर दिया तो मुकेश कुमारी गुस्से में लालपीली पुलिस चौकी चवा पहुंची. उस ने गांव चवा के रहने वाले प्रेमी टीचर मानाराम निवासी पर आरोप लगाया कि उस ने उसे शादी का झांसा दिया है. अब अपने परिवार से मुझे मिला नहीं रहा है. इस पर चौकी इंचार्ज ने फोन कर मानाराम को पुलिस चौकी बुलाया.

मानाराम पुलिस चौकी पहुंचा. उस ने पुलिस से कहा, ”मेरा तलाक का प्रोसेस चल रहा है. अभी परिवार से नहीं मिला सकता हूं. पत्नी से तलाक के बाद मैं मुकेश कुमारी से शादी कर लूंगा.’’

चौकी इंचार्ज एवं अन्य ने भी मानाराम की बात को सही ठहराया. ऐसे में मुकेश कुमारी बिना कोई परिवाद या शिकायत दर्ज करवाए पुलिस चौकी से मानाराम के साथ निकल गई. दोनों गांव चवा से शिवनगर, बाड़मेर मानाराम के घर पर आ गए. मुकेश कुमारी बिना बताए मानाराम के गांव चवा भी गई थी. वह पुलिस चौकी भी शादी का दबाव डलवाने पहुंच गई थी. इस बात से मानाराम खफा था. उस ने उसे घर पर ला कर समझाया, मगर मुकेश कुमारी इस बात से नाराज थी कि उस ने अपने फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलाया. उस की सोच थी कि मानाराम उस से शादी नहीं करना चाहता.

इस पर मानाराम ने कहा, ”तुम मुझे बिना बताए मेरे गांव चवा क्यों गई थी? मैं शादी से मना करता तो गांव जा कर फेमिली वालों से मिलती, मगर तुम पर तो जैसे भूत सवार है. पढ़ीलिखी हो कर भी मेरी मजबूरी नहीं समझ रही. कैसी महिला हो?’’

”मैं सब समझती हूं, मगर फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलने दिया. तुम्हारे दिल में जरूर कोई खोट है.’’ प्रेमिका ने जवाब में कहा.

तब मानाराम ने उसे समझाबुझा कर शांत किया. रात साथ में बिताई. अगले रोज 15 सितंबर, 2025 को अलसुबह मानाराम का मुकेश कुमारी से फिर शादी को ले कर झगड़ा हुआ. झगड़ा इतना बढ़ गया कि मानाराम ने घर में रखा लोहे का मोटा सरिया उठा कर मुकेश कुमारी के सिर पर दनादन कई वार कर दिए. मुकेश कुमारी के सिर से खून का फव्वारा बह निकला. थोड़ी देर तड़प कर वह मर गई. मुकेश कुमारी की लाश देख कर वह डर गया.

उसे जेल की सींखचे नजर आने लगीं. उस ने प्लान बनाया कि अब शव को ठिकाने लगा दूं, ताकि जेल जाने से बच जाए. उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी का शव उठा कर घर के बाहर खड़ी मृतका की आल्टो कार में ड्राइविंग सीट पर रखा और गाड़ी का दरवाजा बंद कर गाड़ी को धक्का मार कर सड़क से नीचे उतार दी. मानाराम को कार चलानी नहीं आती थी, इस कारण वह शव को दूर नहीं ले जा सका. गाड़ी को सड़क से उतार कर वह वापस घर पर आया. उस का शरीर डर के मारे थरथर कांप रहा था. उसे कुछ भी सूझ नहीं रहा था. तब उसे खयाल आया कि वकील से सलाह लूं.

सुबह पौने 7 बजे वकील को मानाराम ने कौल कर कहा, ”वकील साहब, मेरे हाथ एक महिला का मर्डर हो गया है. अब आप ही राय दें कि क्या करूं.’’

सुन कर वकील ने कहा, ”पुलिस के सामने सरेंडर कर दो. मैं पुलिस को घटना की खबर देता हूं.’’

कहने के साथ वकील ने सोमवार, 15 सितंबर की सुबह साढ़े 7 बजे फोन द्वारा थाना रीको बाड़मेर में अपने परिचय के साथ घटना की खबर देते हुए कहा, ”सर, शिवनगर कालोनी में मुकेश कुमारी नामक महिला का मर्डर हुआ है. मृतका का शव आल्टो कार में पड़ा है. यह हत्या सरकारी टीचर मानाराम जाट ने की है. आप जल्दी घटनास्थल पर पहुंच जाइए.’’

सुबहसवेरे महिला की हत्या की खबर पा कर एसएचओ मनोज कुमार सामरिया पुलिस बल के साथ 15 मिनट में घटनास्थल पर जा पहुंचे. सड़क पर आल्टो कार में ड्राइवर की सीट पर एक महिला का खून सना शव पड़ा था. घटनास्थल पर मृतका का मोबाइल भी था. एसएचओ मनोज कुमार सामरिया ने घटना की खबर उच्चाधिकारियों को दी. खबर पा कर सीओ (सिटी) रमेश कुमार, एएसपी जसाराम बोस, एसपी नरेंद्र सिंह मीणा थोड़ी देर में घटनास्थल पर पहुंचे. एफएसएल एवं एमओबी टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं और सुबूत इकट्ठा किए. पुलिस ने घटनास्थल का मौकामुआयना किया.

शव देख कर लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के शव को ड्राइवर की सीट पर रखा गया था. पुलिस को गाड़ी के पास खून के धब्बे मिले. तब पुलिस पास में मानाराम के घर गई. घर में भी खून दिखाई दिया. पुलिस को समझते देर न लगी कि हत्या घर में की गई थी, बाद में शव को गाड़ी में ले जा कर रखा गया था. गाड़ी को सड़क से नीचे उतारा गया था, ताकि मामला एक्सीडेंट का लगे. पुलिस ने मौके की काररवाई निबटा कर शव बाड़मेर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया.

मृतका के बारे में सामने आया कि उस का नाम मुकेश कुमारी था. वह झुंझुनंू जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह तलाकशुदा थी और खड़ेला जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थी. वह अपने प्रेमी टीचर मानाराम से मिलने बाड़मेर 10 सितंबर को आल्टो कार ले कर आई थी. पता चला कि वह प्रेमी टीचर पर शादी का दबाव बना रही थी. पुलिस ने झुंझुनंू एसपी औफिस में संपर्क कर घटना की खबर मृतका के परिजनों को दी.

मुकेश कुमारी की हत्या की खबर मिलते ही काशनी गांव में मातम छा गया. मृतका के घर में रुदन शुरू हो गया. मृतका के भाई अन्य परिजनों के साथ बाड़मेर के लिए रवाना हो गए. 600 किलोमीटर दूर बाड़मेर था तो उन्हें आने में समय लगना था. रीको थाना पुलिस ने आरोपी टीचर मानाराम को 15 सितंबर, 2025 को डिटेन कर लिया था. उस ने पुलिस पूछताछ में गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी की हत्या करने का गुनाह कुबूल कर लिया था.

16 सितंबर, 2025 को मृतका के फेमिली वाले बाड़मेर पहुंचे और एसएचओ मनोज कुमार से मिले. एसएचओ उन्हें घटनास्थल पर ले गए और मौका दिखाया. मृतका का शव मोर्चरी में देख कर उस के भाई धर्मपाल एवं सुरेंद्र रो पड़े. 16 सितंबर, 2025 को धर्मपाल निवासी गांव काशनी, थाना सूरजगढ़, जिला झुंझुनू ने अपनी छोटी बहन मुकेश कुमारी जाट की हत्या की रिपोर्ट टीचर मानाराम जाट निवासी चवा के खिलाफ दर्ज कराई. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी मानाराम को गिरफ्तार कर लिया. मृतका के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया. पोस्टमार्टम के बाद शव उस के फेमिली वालों को सौंप दिया गया. वह उसे गांव काशनी ले गए और वहां अंतिम संस्कार कर दिया.

आरोपी टीचर मानाराम को 17 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश कर पुलिस रिमांड पर मांगा. मजिस्ट्रैट ने आरोपी को 2 दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया. रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने आरोपी से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

राजस्थान के बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर एक गांव चवा आता है. सदर थाना बाड़मेर के अंतर्गत आने वाले इस गांव में किरताराम जाट अपने परिवार के साथ रहते हैं. खेतीकिसानी कर के किरताराम ने अपने बेटे मानाराम को खूब पढ़ाया. इसी का परिणाम था कि पढ़लिख कर वह टीचर बन गया. सरकारी टीचर की नौकरी मिली तो शादी के लिए रिश्ते आने लगे. 2008 में मानाराम की शादी बाड़मेर जिले के शिवकर गांव की टीकू देवी के साथ कर दी गई. शादी के बाद सुहागरात पर मानाराम ने नई दुलहन टीकू को देखा तो उसे गहरा आघात लगा. जैसी सुंदर पत्नी उसे चाहिए थी, वैसी टीकू नहीं थी.

मानाराम मन मसोस कर रह गया. टीकू से वह शादी तो कर चुका था, ऐसे में उसे निभाना तो था ही. मानाराम को टीकू से 2 बेटियां हुईं, जो इस समय 16 साल एवं 14 साल की हैं. बेटियों के जन्म के बाद पतिपत्नी में मनमुटाव बढ़ गया. मानाराम अपनी पत्नी को ज्यादा महत्त्व नहीं देता था. वह बातबात पर उसे ताने मारता था. उस के रंगरूप को ले कर तंज कसता था. दोनों में मनमुटाव इतना बढ़ा कि 2013 में टीकू अपने मायके शिवकर गांव जा बैठी. मानाराम ने पत्नी की तरफ मुड़ कर नहीं देखा. टीकू भी पति को मन से निकाल चुकी थी. सामाजिक पंचायत भी हुई, मगर दोनों के दिल नहीं मिले. दोनों ने अलग रहना ठीक समझा.

टीकू मायके में रह रही थी. मानाराम की इच्छा थी कि वह दोबारा शादी कर ले. मगर पहली पत्नी टीकू से जब तक तलाक नहीं होता, तब तक शादी करना संभव नहीं था. मानाराम ने फेमिली कोर्ट में टीकू से तलाक का केस दायर कर दिया. तलाक का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. मानाराम की ड्यूटी बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में थी. वह बाड़मेर से जसाई आनाजाना करता था.

झुंझुनूं जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत एक गांव काशनी आता है. काशनी गांव में लिखमाराम जाट अपने परिवार के साथ रहता था. वह सेना से रिटायर थे, उन के 8 बच्चे थे. मुकेश कुमारी 8 भाईबहनों में सातवें नंबर की थी. सभी भाईबहनों मे मुकेश कुमारी होशियार थी. काशनी गांव से उस ने आठवीं तक पढ़ाई की. इस के बाद उसे पढऩे के लिए शहर भेज दिया. पढ़ाई के दौरान ही मुकेश कुमारी का चयन राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद पर हो गया. बेटी की नौकरी लगने से पेरेंट्स बहुत खुश थे. उन्होंने उस के योग्य घरवर की खोज शुरू की.

मुकेश कुमारी की 9 जुलाई, 2011 को पिलानी थाना क्षेत्र के लिखवा गांव निवासी विकास जाट से शादी कर दी गई. शादी के बाद मुकेश कुमारी ससुराल गई तो उसे ससुराल पसंद नहीं आई. उसे पति विकास भी पसंद नहीं आया. बेटी की शादी के 3 साल बाद 2014 में हार्ट अटैक से लिखमाराम की मौत हो गई. जैसा जीवनसाथी मुकेश को चाहिए था, वैसा विकास नहीं था. मुकेश कुमारी अपनी ड्यूटी पर रहती थी. वह ससुराल नहीं जाती थी. विकास शादी कर के भी कुंवारा था. वह पत्नी को घर ले जाना चाहता था, मगर वह राजी नहीं थी.

एक दिन मुकेश ने पति विकास से कहा, ”मैं ने परिवार वालों का मन रखने के लिए तुम से शादी की थी. मगर अब मैं तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहती.’’

विकास ने उसे समझाया. मगर वह नहीं मानी. मुकेश कुमारी का पुलिस की नौकरी से मन भर गया था. उस ने आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर पद के लिए आवेदन किया. वहां उस का चयन हो गया, तब उस ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और खड़ेला, जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगी. मुकेश कुमारी ने पति विकास से 2019 में तलाक ले लिया. अब वह खड़ेला में रहने लगी. पति से तलाक के बाद मुकेश कुमारी को एक अच्छे जीवनसाथी की जरूरत महसूस होने लगी थी. ऐसे में वर्ष 2024 के अगस्त महीने में उस ने अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया कि तलाकशुदा महिला को तलाकशुदा सरकारी नौकरी करने वाला हमउम्र जीवनसाथी चाहिए.

इस वैवाहिक विज्ञापन को टीचर मानाराम जाट ने देखा. उस ने दिए गए फोन नंबर पर मुकेश कुमारी से संपर्क किया. मुकेश कुमारी के पास कई लोगों के फोन आए थे, मगर उसे पसंद आया मानाराम. वह सरकारी टीचर था. दोनों की उम्र भी बराबर थी. इस तरह दोनों बेहद करीब आ गए. मानाराम ने गत 3-4 महीने से मुकेश कुमारी को साइड में करना शुरू कर दिया था. मगर मुकेश कुमारी उसे किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी. 15 सितंबर, 2025 की अलसुबह दोनों में शादी की बात पर फिर से झगड़ा हुआ. मानाराम को प्रेमिका पर इतना गुस्सा आया कि उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी पर मोटे सरिए से कई वार कर हत्या कर दी.

रिमांड अवधि पूरी होने पर 19 सितंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपी मानाराम को फिर से कोर्ट में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया और थाने ला कर पूछताछ की. आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का सरिया बरामद कर लिया. आरोपी की निशानदेही पर पर खून से सनी निवार एवं बिस्तर के जले टुकड़े भी बरामद किए. पुलिस ने 20 सितंबर, 2025 को उसे न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश किया, जहां से उसे बाड़मेर जेल भेजने का आदेश दिया गया. Love Story

 

 

Noida News: प्यार में ब्लैकमेलिंग कभी नहीं

Noida News: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बिना सिर और कटी हथेलियों वाली माहिला की नाले से बरामद लाश की गुत्थी सुलझाने में पुलिस के हाथपांव फूल गए थे. इस के लिए 5 हजार सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और 1,100 वाहनों की छानबीन की गई. इस तफ्तीश के हफ्ते भर बाद जब खुलासा हुआ, तब एक ऐसी प्रेम कहानी का राज खुला, जिस की बुनियाद प्यार के…

मोनू सिंह सोलंकी की बस में 5 नवंबर, 2025 की दोपहर को 30 वर्षीय प्रीति यादव सवार हो गई थी. यह पहला मौका नहीं था, जब वह डार्क शेड वाली एसी बस में अकेली मोनू के साथ थी. वह अकसर नोएडा में बरौला की जींस फैक्ट्री में छुट्टी मिलने पर उस की बस से ही अपने घर जाती थी. वह मोनू की प्रेमिका थी. मोनू भी उस से प्रेम करता था, लेकिन दोनों के बीच प्रेम संबंध कितना गहरा था, इस का पता उन के आपसी व्यवहार से चल जाता था. वे पहले से शादीशुदा और बालबच्चेदार थे. वे कहने को तो प्रेमी युगल थे, किंतु उन के प्रेम में कुंवारेपन की कसक और कशिश नहीं थी. उन के बीच ‘दिल’ और ‘देह’ दोनों के अनैतिक संबंध थे. वे करीब 2 साल पहले ही प्रेम में पड़े थे.

प्रीति अपने पति से अलग हो कर बरौला में ही अपने 2 बच्चों के साथ रह रही थी. वह मोनू पर अपनी पत्नी को छोड़ कर उस से शादी करने का दबाव बनाए हुए थी, जबकि मोनू की स्थिति उस से अलग दुविधा वाली थी. उस के लिए पत्नी और बच्चों को छोडऩा आसान नहीं था. इसे ले कर ही उन के बीच अकसर झगड़ा होता रहता था. प्रीति उस रोज मोनू को शादी के लिए राजी करने का मन बना कर आई थी. मोनू ने उसे रूखे मन से अपने बस में बिठा लिया था और सेक्टर 105 ले जा कर सीएनजी पंप के पास बस खड़ी कर दी थी. बड़े ही सहज भाव से चुप्पी तोड़ते हुए उस ने पूछा था, ”खाना खाओगी? बोलो तो बाहर से कुछ लाऊं?’’

”सिर्फ खाना खिला कर ही मुझ से आज पिंड छुड़ाना चाहते हो…पैसे के लिए बोली थी, उस का क्या हुआ?’’ ड्राइविंग सीट के पास बैठी प्रीति थोड़ी खिन्नता से बोली.

”ऐसे क्यों बोल रही हो. पैसे का इंतजाम कर रहा हूं. कुछ और समय लगेगा. वैसे, मैं तुम्हें काफी पैसे दे भी चुका हूं.’’ मोनू बोला.

”अच्छा, तो फिर ले आओ कुछ!’’ प्रीति सांस खींचती हुई बोली.

”मैं तो परांठा खाऊंगा, तुम बोलो.’’

”मेरे लिए मैगी बनवा लेना.’’

”चलो ठीक है. तुम यहीं बैठो, मैं अभी ले कर आता हूं.’’ मोनू बोला और बस से बाहर निकल गया.

पास के ढाबे से मोनू ने खुद के लिए 2 परांठे बनवा लिए और प्रीति के लिए मैगी  ली. बस में आ कर मोनू ने प्रीति को मैगी खाने के लिए दी और अपने लिए कागज की प्लेट में परांठा निकालते हुए बोला, ”अगर तुम चाहो तो परांठा टेस्ट कर सकती हो.’’

”नहींनहीं, परांठा तुम्हीं खाओ. बस, जितना जल्द हो सके, मेरा काम कर दो.’’ प्रीति बोली.

”तुम मेरी डगमगाई आर्थिक स्थिति को तो देख ही रही हो. फिर भी जिद करती हो तो अच्छा नहीं लगता है.’’ मोनू बोला.

प्रीति थोड़ी देर चुप रही. मैगी खाती रही. फिर धीरे से बोल पड़ी, ”कब कर रहे हो मुझ से शादी?’’

”शादी! यह अचानक शादी की बात कहां से आ गई?’’ मोनू आश्चर्य से पूछा.

”क्यों..? शादी कर लो फिर पैसे नहीं मांगूंगी.’’

”यह तो कोई बात नहीं हुई! शादी अपनी जगह है और पैसा अपनी जगह! तुम तो ब्लैकमेल कर रही हो.’’ मोनू  बोला.

” तुम जो समझो. अगर मुझे पैसे नहीं मिले, तब मैं कोई सख्त कदम उठाने पर मजबूर हो जाऊंगी, फिर मत कहना कि मैं ने गलत किया…’’ प्रीति धमकाते हुए बोली.

”क्या करोगी, जरा मैं भी तो जानूं.’’ मोनू बोला.

”थाने चली जाऊंगी.’’

”पैसा मांगने!’’

”नहीं, रेप की शिकायत करने…फिर जेल में सड़ते रहना!’’ प्रीति आंखें दिखाती हुई बोली.

”ऐंऽऽ तुम तो बहुत खतरनाक नागिन…’’

”मेरा काटा पानी भी नहीं मांग पाओगे.’’

”मैं उस से पहले तुम्हारा फन ही काट डालूं तो!’’

”है हिम्मत!’’

”देखना चाहती हो मेरी हिम्मत?’’ रेप का आरोप लगाने की बात पर मोनू गुस्से से भर चुका था. प्रीति मोनू को पहले भी धमकाती रही थी, लेकिन इस तरह की धमकी उस ने पहली बार दी थी. मोनू तिलमिला गया था. उस के दिल में पहले से जख्म बने हुए थे. इस धमकी से वे और हरे हो गए. परांठा खाना छोड़ कर खड़ा हो गया. हाथ में लिए हुए कौर को वहीं झटक दिया. उस के छींटे प्रीति के चेहरे पर भी पड़े.

वह कुछ समझ नहीं पाई कि मोनू को अचानक हो क्या गया! उस की बात इतनी बुरी लगी कि उस ने परांठा खाना छोड़ दिया. नजर उठा कर देखा. उस का रौद्र रूप देख कर सहम गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. उस की सिर्फ चीख ही निकल पाई. उस ने चापड़ से प्रेमिका का मर्डर कर दिया. कुछ सेकेंड बाद मोनू अपने चापड़ को निहार रहा था, जिस से खून टपक रहा था. खून के कई छींटे उस के कपड़ों पर भी पड़ गए थे. उस ने खून सने चापड़ को बस की सीट के नीचे सरका दिया और वहीं बैठ गया.

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के थानाक्षेत्र 39 के पौश सेक्टर 108 के नाले में 6 नवंबर को एक महिला का सिर और हाथ कटा शव मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया था. बिना सिर की लाश की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी. ब्लाइंड मर्डर का मामला था. उत्तर प्रदेश के नोएडा का यह इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला था. इस की जांच और तहकीकात के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गईं. सभी टीमें अपनेअपने स्तर से लाश की पहचान से ले कर उस की हत्या करने वाले की तलाश में जुट गई.

शव की हालत इतनी खराब थी कि महिला का सिर और दोनों हाथों के पंजे कटे हुए थे, जिस से उस की पहचान करना लगभग असंभव था. पुलिस ने तुरंत इस ब्लाइंड मर्डर को सुलझाने के लिए कई टीमें गठित कीं और जांच शुरू की.

डीसीपी यमुना प्रसाद के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने जांच को आगे बढ़ाया. सर्विलांस टीम ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए अभियान छेड़ दिया था. इस ब्लाइंड हत्याकांड का खुलासा करने के लिए पुलिस को लगभग 5,000 कैमरे और 60-70 हजार मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया और करीब 1,100 वाहनों को ट्रैक किया, जिस में से 44 संदिग्ध वाहनों को ‘जीरो इन’ किया गया. 40 लोगों की टीमें दिल्ली सहित बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मथुरा जनपदों में भेजी गईं.

शव पर केवल पैरों में बिछुए थे, जोकि मृतका की शादीशुदा होने की पहचान का एकमात्र सुराग था. पुलिस ने महिला की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उस के पैरों में पहने बिछुए की तसवीर के साथ एक पैंफ्लेट जारी किया. लोगों से अपील की कि यदि किसी को भी इस महिला के बारे में कोई जानकारी हो तो तुरंत थाना सेक्टर-39 पुलिस से संपर्क करें. मृतका के पास से कोई कपड़ा या अन्य पहचान का सामान नहीं मिला था. केवल उस के पैरों में बिछुए थे. महिला की लंबाई 5 फीट 1 इंच थी.

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो जनपद मे गुमशुदा महिलाओं के घरों पर कौल कर के उन की जानकारी जुटाने में जुट गई. पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो घटनास्थल से एक संदिग्ध बस को निकलते हुए देखा, जिस से जांच का रुख बस के ड्राइवर मोनू सिंह सोलंकी की ओर मुड़ गया. नोएडा पुलिस की 45 टीमों ने गाजियाबाद, दिल्ली, बुलंदशहर, अलीगढ़ और आगरा के लगभग 100 पुलिस थानों का दौरा किया. इन थानों में गुमशुदगी दर्ज महिलाओं की सूची से मृतका का मिलान करने का प्रयास किया गया.

सेक्टर 108 स्थित पुलिस चौकी कट एस2 के पास नाले में मिली सिरकटी महिला की लाश की शिनाख्त करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था. महिला की पहचान और हत्यारों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने दिनरात एक कर दिया था. जांच में पुलिस ने 50 से अधिक महिलाओं की हिस्ट्री खंगाली और 2 संदिग्ध वाहनों पर अपनी जांच केंद्रित कर दी. 120 महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाने के बाद एडीसीपी सुमित कुमार शुक्ला ने महिला की पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया.

हालांकि घटनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने के कारण जांच में बड़ी बाधा बन गई. घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्थित एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं, जिस में 3 दिनों के भीतर लगभग 600 वाहनों की जानकारी जुटाई गई. हालांकि, इन में कोई भी संदिग्ध नहीं मिला. किंतु इसी दौरान पुलिस का 2 गाडिय़ों पर शक गहराने के बाद उन की जानकारी जुटाई गई.

जांच के दौरान पुलिस को वह बस नंबर यूपी16के टी0037 मिल गई, जो मोनू सोलंकी चलाता था. जब मोनू के बारे में तहकीकात की गई, तब उस का नोएडा में पता बरौला का मिला, जहां वह किराए पर रहता था. इसी बीच, पुलिस को बरौला निवासी एक महिला के लापता होने की जानकारी मिली. पुलिस का शक मोनू पर गहरा गया. ब्लाइंड मर्डर केस में यहां तक पहुंचने में कई दिन लग गए. पुलिस को मुखबिर से भी मोनू के बारे में कई जानकारियां मिलीं. पता चला कि उस के लापता युवती के साथ प्रेम संबंध थे. शक के आधार पर 14 नवंबर, 2025 को बस चालक मोनू सोलंकी को गिरफ्तार कर लिया. वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के एटा के जैथरा नेहरू नगर का रहने वाला है.

पूछताछ में मोनू ने कुबूल किया कि प्रीति और उस की मम्मी एक जींस फैक्ट्री में काम करती थीं. इसी के चलते दोनों परिवारों का मेलजोल बढ़ गया था. बाद में उस के और प्रीति के बीच अवैध संबंध बन गए थे. मोनू ने बताया कि प्रीति उस से लगातार पैसे की मांग करती थी और उस पर कमाई का बड़ा हिस्सा देने का दबाव डालती थी. प्रीति शादी करने और 4-5 लाख रुपए देने के लिए मोनू को ब्लैकमेल कर रही थी. मोनू की 2 बेटियां और एक बेटा भी है.

विवाद के दौरान प्रीति ने मोनू को धमकी दी कि वह उस की बेटियों से अनैतिक कार्य कराएगी. वह उसे ब्लैकमेल भी करती थी और उस के बच्चों को गलत कामों में लगाने की धमकी देती थी. जब उस ने उसे रेप में फंसाने की धमकी दी, तब उस ने इस तनाव और बढ़ते दबाव के कारण प्रीति को रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान बना लिया था. इस से तंग आ कर ही उस ने यह कदम उठाया. मौका देख कर उस की चापड़ से हत्या कर दी और पहचान मिटाने के लिए शरीर के अंगों को काट दिया था.

5 नवंबर, 2025 को मोनू चुपके से एक चापड़ (धारदार हथियार) उठा लाया. इस के बाद वह प्रीति को अपनी बस में बैठा कर ले गया. रास्ते में खाना खाते वक्त उस से जम कर झगड़ा हो गया और मारपीट की नौबत आ गई. गुस्से में आ कर मोनू ने चापड़ से प्रीति की गरदन काट दी. पहचान मिटाने के लिए उस ने मृतका के दोनों हाथों के पंजे भी काट दिए. शव को उस ने सेक्टर 108 के नाले में फेंक दिया. इस से भी मन नहीं भरा तो सिर और कटे हुए हाथों के पंजों को गाजियाबाद ले जा कर अपनी बस से कुचल दिया और वहीं फेंक दिया.

अंगों के साथ बस की मैट, कपड़े आदि पटेल नगर थाना क्षेत्र में फेंक कर बरौला लौट आया. उस बस को 4 बार अच्छी तरह से धोई ताकि कोई सबूत न बचे. इस के बाद वह सामान्य जीवन जीने लगा. इस बयान के बाद मोनू की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया चापड़, मृतका प्रीति के देह के बाकी हिस्से, कपड़े और बस में बिछी खून लगी मैट को बरामद कर लिया है. फोरैंसिक टीम ने बरामद दागों के इंसानी रक्त होने की पुष्टि की है.

पुलिस को सिरकटी लाश की गुत्थी सुलझाने में सफलता मिलने के बाद मुख्य आरोपी मोनू सोलंकी को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया गया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में ले कर जेल भेज दिया गया. Noida News

 

 

Love Crime: छलिया आशिक से रहें अलर्ट

Love Crime: 22 वर्षीय तैयबा ने फैसल चौधरी से इसलिए कोर्ट मैरिज कर ली थी, क्योंकि उस ने खुद को कुंवारा बताया था, जबकि हकीकत में वह 2 बच्चों का बाप था. प्यार में छली गई तैयबा के सामने पछतावे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस के बावजूद तैयबा ने छलिया फैसल से जब उस के घर में जगह मांगी तो…

रात के 8 बज गए थे, लेकिन तैयबा अभी तक अपने काम से घर नहीं लौटी थी. उस की अम्मी के पेशानी पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं. वह अपने बड़े बेटे अदनान के कमरे में पहुंची और परेशान होते हुए बोली, ”अदनान, अभी तक तैयबा घर नहीं लौटी है.’’

”अरे!’’ अदनान हैरान होते हुए बोला, ”तैयबा तो 7-साढ़े 7 बजे तक घर आ जाती है, क्या तुम ने उसे फोन नहीं किया?’’

”किया था. मैं ने साढ़े 7 बजे उसे फोन किया था तो कह रही थी थोड़ा लेट हो जाऊंगी, मैं 9 बजे तक आ जाऊंगी, लेकिन अब तो साढ़े 9 बज गए.’’

अदनान ने तैयबा का नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ घंटी बजने के थोड़ी देर बाद ही तैयबा ने फोन उठा लिया. उस ने पूछा, ”कैसे फोन कर रहे हो भाई, सब ठीक तो है?’’

”सब ठीक है यहां. अम्मी तुम्हें ले कर परेशान हैं. तुम कहां पर हो?’’

”मैं अपने काम पर ही हूं भाईजान. मुझे यहां थोड़ा वक्त और लगेगा. आप लोग मेरी चिंता मत करो. खाना खा कर सो जाओ. मेरा खाना अम्मी ढक कर रख देगी. आऊंगी तो गरम कर के खा लूंगी.’’ तैयबा ने कहने के बाद कौल डिसकनेक्ट कर दी.

”तुम बेकार में परेशान हो रही हो अम्मी. तैयबा अपनी ड्यूटी पर ही है. उसे आने में देर हो जाएगी.’’ अदनान ने अम्मी को समझाया.

अदनान के अब्बू अहमद भी घर आ गए थे. तैयबा के अभी तक घर न आने पर उन्होंने लापरवाही से कहा, ”कंपनी में काम निकल आया होगा, तैयबा पहले भी कई बार देर से घर लौटी है. चिंता मत करो, आ जाएगी.’’

रात 11 बजे तक सभी खाना खा कर चारपाई पर आ गए और उन्हें नींद भी आ गई. केवल तैयबा की अम्मी की आंखों से नींद उड़ी हुई थी. तैयबा के लिए वह बेचैन थी. लेकिन नींद तो नींद होती है, रात को कब उसे भी नींद आ गई, मालूम ही नहीं चला, वह अधकच्ची नींद में सोती रही.

अचानक पौने 3 बजे उस की नींद खुल गई. वह घबरा कर बिस्तर पर उठ बैठी. तैयबा अभी भी घर नहीं आई थी. सिरहाने रखा मोबाइल उठा कर तैयबा की अम्मी ने उसे फोन लगाया. घंटी बजी और फोन को तैयबा ने उठा कर कहा, ”हैलो अम्मी! आप अभी तक सोई नहीं हैं क्या?’’

”तू कहां पर है तैयबा?’’ अम्मी ने पूछा.

”मैं यहां एक दोस्त के साथ होटल में चाय पीने आई हूं अम्मी, यह मेरा दोस्त मेरे साथ ही काम करता है. चाय पी कर मैं बस घर के लिए ही निकलूंगी. आप सो जाइए.’’ तैयबा ने बताने के बाद फोन काट दिया. अम्मी को तसल्ली हुई कि बेटी ठीकठाक है और अब जल्दी घर भी आ जाएगी. फोन सिरहाने रख कर उन्होंने आंखें बंद कर लीं तो फिर नींद ने उन्हें अपने आगोश में समेट लिया.

सुबह का उजाला फैला, तब तैयबा की अम्मी की आंखें खुलीं. तैयबा आ गई होगी. यह सोच कर उन्होंने तैयबा के बिस्तर पर नजर दौड़ाई. वह खाली था. अम्मी ने तैयबा को फिर फोन मिलाया, लेकिन तैयबा के फोन के स्विच औफ होने की रिकौर्डिंग सुनाई देने लगी. अम्मी ने कई बार ट्राई किया, किंतु तैयबा का फोन नहीं लगा. घबरा कर अम्मी ने अदनान और पति को जगा दिया. अदनान के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वह बोला, ”अब्बा! मुझे अब तैयबा के लिए ज्यादा चिंता हो रही है. पूरी रात वह घर नहीं आई. आखिर वह कहां रुक गई है. मालूम करना पड़ेगा.’’

अदनान ने दूसरे कपड़े पहने और बोला, ”मैं उस की कंपनी में जा कर पता करता हूं.’’

अदनान स्कूटी ले कर बहन तैयबा का पता लगाने दिलशाद गार्डन चला गया. तैयबा दिलशाद गार्डन में स्थित एक कंपनी में काम करती थी. अदनान ने तैयबा की कंपनी में जा कर मालूम किया तो उसे बताया गया कि तैयबा शाम को ही कंपनी से छुट्टी कर के चली गई थी. अदनान की चिंता बढ़ गई. इस का मतलब तैयबा झूठ बोल रही थी कि कंपनी में ओवरटाइम है, जबकि वह 5 बजे ही कंपनी से छुट्टी कर के निकल गई थी. आखिर वह कहां गई?

अदनान ने तैयबा की कुछ परिचित सहेलियों के यहां जा कर मालूम किया. तैयबा उन से नहीं मिली थी. हर संभावित जगहों पर तलाश करने पर भी जब वह नहीं मिली तो अदनान घर लौट आया और अब्बू को साथ ले कर उत्तरपूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाने में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने चला गया. तैयबा 22 साल की जवान युवती थी. थाना दयालपुर में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली गई. यह सूचना 28 नवंबर को तैयबा के अब्बा अहमद की तरफ से लिखवाई गई थी. उन्हें तैयबा के अपहरण होने का शक था.

दयालपुर थाने के एसएचओ परमवीर दहिया ने तैयबा के लापता होने की घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने यह जानकारी उत्तरपूर्वी डीसीपी आशीष मिश्रा को भी दे दी. इंसपेक्टर परमवीर दहिया डीसीपी के निर्देश पर तैयबा की कंपनी में पहुंच गए और वहां तैयबा के बारे में कंपनी के मालिक से पूछताछ न कर, वहां तैयबा के साथ काम करने वाली एक अन्य युवती को अपने पास बुला कर बड़े प्यार से पूछा, ”तुम तैयबा के साथ काम करती हो, तुम्हारा नाम क्या है?’’

”जी, मेरा नाम रुखसाना है.’’ युवती ने बताया फिर पूछा, ”तैयबा के विषय में क्यों छानबीन कर रहे हैं साहब?’’

”तैयबा कल से घर नहीं लौटी है रुखसाना. उस के अब्बू ने उस की गुमशुदगी थाने में लिखवाई है. क्या तुम्हें लगता है तैयबा का कोई अपहरण कर सकता है?’’

”नहीं साहब,’’ रुखसाना बोली, ”भला उस का अपहरण कोई क्यों करेगा. तैयबा खुद उस के साथ चली गई होगी.’’

”किस के साथ?’’ इंसपेक्टर दहिया ने चौंकते हुए पूछा.

”जिसे वह प्यार करती है. क्या आप ने उस की इंस्टाग्राम पर होटल वाली रील नहीं देखी साहब?’’ कहने के बाद रुखसाना ने अपने मोबाइल में इंस्टाग्राम खोल कर एक रील इंसपेक्टर दहिया के सामने कर दी.

इस रील में तैयबा किसी होटल में एक युवक के साथ बैठी चाय पीती नजर आ रही थी. तैयबा अपने मोबाइल से उस युवक के साथ विभिन्न पोज में रील बना रही थी. युवक का चेहरा इस रील में काफी स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

”इस का नाम तुम्हें मालूम है रुखसाना?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

”फैसल चौधरी है इस का नाम, मुस्तफाबाद में कहीं रहता है. मुझे तैयबा ने यह बात बताई थी.’’

इंसपेक्टर दहिया ने डीसीपी आशीष मिश्रा को यह जानकारी थाने लौट कर दे दी. उन्होंने अपनी देखरेख में थाने के तेजतर्रार इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद की एक टीम बना कर इंसपेक्टर परमवीर दहिया को फैसल चौधरी को ढूंढ निकालने का आदेश दे दिया.

इंसपेक्टर परमवीर दहिया ने इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद को साथ ले कर पहले तैयबा के परिजनों से फैसल चौधरी के विषय में पूछताछ की. उन्होंने तैयबा द्वारा होटल में चाय पीने की वह इंस्टाग्राम वाली रील तैयबा के परिजनों को दिखा कर पूछा, ”क्या इस युवक को आप जानते हैं?’’

”यह तो फैसल चौधरी है.’’ अदनान ने तुरंत कहा, ”मैं ने इसे पहले भी देखा है. यह मुस्तफाबाद में रहता है. इस के पिता आलम चौधरी प्रौपर्टी का काम करते हैं. मैं एक परिचित के साथ इन के औफिस में गया था, परिचित को एक मकान खरीदना था, लेकिन यह फैसल मेरी बहन तैयबा के साथ कैसे?’’

”यह रील देख कर अदनान तुम्हें समझ लेना चाहिए कि तैयबा इस के संपर्क में थी और इस से उस का प्रेम संबंध भी था. यह रील खुद तैयबा ने अपने मोबाइल से बनाई है.’’ इंसपेक्टर दहिया ने गंभीर स्वर में कहा तो अदनान ने सिर झुका लिया और धीरे से बोला, ”मैं इस विषय में नहीं जानता.’’

पुलिस टीम अदनान को साथ ले कर मुस्तफाबाद आलम चौधरी के प्रौपर्टी डीलर वाले औफिस में पहुंच गई. आलम चौधरी अपने औफिस में ही मिल गए. पुलिस को अपने औफिस में देख कर वह चौंकते हुए कुरसी से खड़े हो गए.

”आप फैसल को जानते हैं?’’ इंसपेक्टर राजेश ने पूछा.

”फैसल मेरा बेटा है तो मैं क्या अपने बेटे को नहीं जानंूगा साहब.’’ आलम मुसकराने का प्रयास करते हुए बोले, ”आप उस के विषय में क्यों पूछताछ कर रहे हैं.’’

”वह एक लड़की तैयबा को ले कर आया है. हमें फैसल से मिलवाइए.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कड़क स्वर में कहा.

आलम चौधरी चौंक कर बोले, ”मेरा बेटा फैसल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है जनाब. वह किसी लड़की को क्यों ले कर आएगा? आप लोगों को अवश्य गलतफहमी हुई है.’’

”हमें फैसल से मिलवाओ. उसी के मुंह से हम उस की करतूत आप को सुनवाएंगे. बुलाइए उसे.’’ इंसपेक्टर दहिया शुष्क स्वर में बोले.

आलम चौधरी का घर पास में ही था. वह घर गए और कुछ ही देर में वापस आ गए.

”सर, अभी फैसल घर पर नहीं है…’’

”क्या सुबह वह घर पर था?’’ इंसपेक्टर दहिया ने पूछा.

”मुझे मालूम नहीं. मैं सुबह ही फ्रेश हो कर औफिस में आ जाता हूं. जब मैं घर से निकला था, शायद फैसल सो रहा होगा.’’

”क्या मैं उस की बीवी से पूछताछ कर सकता हूं?’’ इंसपेक्टर दहिया ने आलम चौधरी से पूछा.

”बेशक, आप आइए मेरे साथ.’’ आलम ने कहा.

इंसपेक्टर दहिया अकेले आलम चौधरी के साथ उस के घर की तरफ चले आए. बाकी दोनों इंसपेक्टर और पुलिस कांस्टेबल वहीं औफिस में बैठ गए.

आलम चौधरी ने घर आ कर इंसपेक्टर दहिया के सामने अपनी बहू को हाजिर कर दिया.

इंसपेक्टर दहिया ने सीधा सवाल किया, ”तुम्हारा पति फैसल कहां पर है?’’

”ज…जी, वह कल से ही घर नहीं आए हैं. शाम को कह कर गए थे कि किसी जरूरी काम से जा रहा हूं. क्या काम है और कहां पर जा रहे हैं, यह मैं कभी नहीं पूछती हूं उन से.’’ फैसल की बीवी ने जवाब में कहा. फिर पूछा, ”आप उन के बारे में क्यों पूछताछ कर रहे हैं?’’

”फैसल एक लड़की को ले कर गायब हुआ है. लड़की का नाम तैयबा है. यदि फैसल घर आए तो तुम हमें फोन करोगी. मैं तुम्हें फोन नंबर दे कर जा रहा हूं.’’

इंसपेक्टर दहिया ने अपना मोबाइल नंबर एक कागज पर लिख पर फैसल की बीवी को थमाया तो उन्होंने महसूस किया कि फैसल की बीवी धीरेधीरे सिसक रही थी. शायद पति की करतूत सुनने के बाद वह नर्वस हो गई थी. इंसपेक्टर दहिया आलम चौधरी के साथ औफिस में लौट आए. आलम चौधरी से फैसल के दोस्तों और रिश्तेदारों के पते नोट कर के पुलिस टीम ने उसी वक्त से इन पतों पर दबिश देनी शुरू कर दी. फैसल चौधरी इन पतों पर नहीं था.

पुलिस टीम ने फैसल के संभावित उठनेबैठने की जगहों पर भी छापेमारी की, लेकिन फैसल कहीं भी नहीं मिला. निराश हो कर पुलिस टीम वापस हो गई. पुलिस की छापेमारी जारी थी, तभी उन्हें कड़कडड़ूमा कोर्ट से मैसेज मिला कि फैसल चौधरी ने 25 नवंबर, 2025 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. पुलिस टीम ने कोर्ट में जा कर फैसल चौधरी को अपनी कस्टडी में ले लिया. उस का 2 दिन का रिमांड पुलिस ने कोर्ट से प्राप्त कर लिया. फैसल चौधरी को अपने साथ ले कर पुलिस दयालपुर थाने में आ गई.

इंसपेक्टर दहिया, इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद ने डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में फैसल चौधरी से तैयबा के संबंध में पूछताछ शुरू की तो फैसल ने चौंकाने और होश उड़ाने वाला राज खोलते हुए कहा, ”तैयबा की मैं ने गोली मार कर हत्या कर दी है साहब. वह अब इस दुनिया में नहीं है.’’

फैसल चौधरी के मुंह से यह सच्चाई सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. इंसपेक्टर दहिया ने फैसल को घूरते हुए पूछा, ”तुम ने यदि तैयबा की गोली मार कर हत्या कर दी है तो उस की लाश कहां पर है?’’

”तैयबा की लाश बागपत के पास सरूरपुर कलां के जंगल में मैं ने फेंक दी थी साहब.’’

”चलो, हमें तैयबा की लाश बरामद करवाओ.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कहा.

”ठीक है साहब,’’ फैसल चौधरी ने कहा.

पुलिस टीम फैसल चौधरी को वैन में बिठा कर बागपत पहुंची. सरूरपुर कलां के जंगल में तैयबा की लाश फैसल चौधरी ने जहां फेंकी थी, वह अभी भी वहीं पड़ी हुई थी, लेकिन लाश 3 दिन में काफी खराब हालत में हो गई थी. तैयबा की कनपटी पर गोली का सुराख था, जहां से खून बह कर काला पड़ चुका था. इंसपेक्टर दहिया ने बागपत पुलिस थाने से संपर्क कर के वहां से पुलिस और फोरैंसिक टीम बुलवा कर तैयबा की लाश की जांच करवाई. फिर कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को बागपत पुलिस से अपने अंडर में ले लिया.

तैयबा की लाश ले कर दयालपुर थाने की पुलिस टीम थाने में लौट आई. तैयबा की फैसल चौधरी ने हत्या कर दी है, यह जानकारी तैयबा के फेमिली वालों को दे दी गई. थोड़ी ही देर में तैयबा के फेमिली वाले थाना दयालपुर आ गए. तैयबा की अम्मी, अब्बू अहमद और भाई अदनान का रोरो कर बुरा हाल था. उन के सामान्य होने पर डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में एक बार फिर फैसल चौधरी से पूछताछ की गई. उस की तैयबा से क्या दुश्मनी थी और उस ने तैयबा की हत्या क्यों की? यह पूछे जाने पर फैसल ने बताया, ”साहब, तैयबा मेरी दूसरी पत्नी थी.’’

इस जानकारी पर तैयबा के फेमिली हैरान रह गए. उन्हें यह विश्वास ही नहीं हुआ कि 2 बच्चों के बाप फैसल से तैयबा ने शादी कर ली थी.

”यह झूठ बोल रहा है साहब. मेरी बहन तैयबा इतनी नादान नहीं थी कि वह 2 बच्चों के पिता को अपना शौहर बनाएगी.’’ अदनान ने गुस्से में कहा.

”मेरे पास कोर्ट का सार्टिफिकेट है साहब.’’

उस ने पुलिस के सामने अपने अब्बा को फोन कर कहा कि उस ने तैयबा नाम की लड़की से दूसरी शादी कर ली थी और कोर्ट द्वारा जारी मैरिज सर्टिफिकेट अलमारी के लौकर में रखा है. वह आप थाना दयालपुर में ले कर आ जाएं. यह सुन कर आलम चौधरी सकते में आ गए. फैसल की पहली बीवी ने सिर पीट लिया.

आलम चौधरी आधे घंटे में साकेत कोर्ट द्वारा तैयबा और फैसल की कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट ले कर थाने में आ गए. डीसीपी मिश्रा ने सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच करने के बाद फैसल से पूछा, ”यदि तुम ने तैयबा से छिप कर शादी कर ली थी तो तुम ने उस की हत्या क्यों कर दी?’’

”साहब, मेरी मुलाकात तैयबा से क्लब में हुई थी. तैयबा पहले वहीं काम करती थी. तैयबा खूबसूरत नवयौवना थी. मैं उस की खूबसूरती पर मर मिटा. मैं ने रोज क्लब में जाना शुरू किया और तैयबा से जानपहचान बनाने की कोशिश करने लगा.

”तैयबा थोड़े ही दिनों में मेरी तरफ आकर्षित हो गई. मेरी उस की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. तैयबा को मैं ने बताया था कि मैं कुंवारा हूं. मैं तैयबा पर खूब पैसा खर्च करने लगा. तैयबा मुझे दिल से चाहने लगी. उस ने मेरे साथ शादी का प्रस्ताव रखा तो मैं ने उस के साथ अप्रैल, 2025 में साकेत कोर्ट में शादी कर ली. मैं ने तैयबा से कहा कि यह शादी मेरे परिवार से छिपा कर की गई है, इसलिए मैं उसे तुरंत घर नहीं ले जा सकता. घर वालों को धीरेधीरे मैं समझा लूंगा तो तुम्हें वहां बहू का दरजा दिलवा दूंगा.

”मैं तैयबा से बाहर होटलों में मिलता रहा. हम अपनी हसरतें इन होटलों में पूरी करते रहे. धीरेधीरे समय गुजरने लगा तो तैयबा मुझ पर घर ले चलने का दबाब बनाने लगी. मैं उसे बहाने बना कर टालता रहा. तैयबा को घर ले जाना नहीं चाहता था मैं, क्योंकि घर में मेरी बीवी और 2 बच्चे थे.’’

फैसल कुछ देर के लिए रुका फिर बताने लगा, ”तैयबा 10-12 दिन से ज्यादा जिद करने लगी थी कि मैं उसे घर ले चलूं. मैं परेशान हो गया तो मैं ने तैयबा से पीछा छुड़ाने का उपाय तलाशना शुरू कर दिया. बहुत सोचने के बाद मैं ने निर्णय लिया कि मैं तैयबा की हत्या कर के उस से पिंड छुड़ा लूं.

”मैं ने योजना बना कर एक देशी रिवौल्वर खरीदा, फिर 22 नवंबर को मैं ने अपने एक दोस्त से आई20 कार मांग ली और शाम से पहले तैयबा की कंपनी के सामने दिलशाद गार्डन पहुंच गया. तैयबा को मैं ने फोन कर के बता दिया कि मैं कार लाया हूं, आज हम सैरसपाटा करेंगे. तुम घर में कोई बहाना बना डालो.

”तैयबा शाम को कंपनी से निकल कर मुझ से मिली. उस ने घर में कह दिया था कि आज कंपनी में काम ज्यादा है, देर से घर आएगी. मैं तैयबा को ले कर फिल्म देखने एक थिएटर में गया. मैं ने उस के साथ रात का शो देखा. फिर इधरउधर घूमने के बाद मैं तैयबा को एक होटल में ले गया. वहां हम ने चाय पी. तैयबा बहुत खुश थी. उस की अम्मी का होटल में फोन आया तो तैयबा ने कह दिया वह होटल में चाय पी रही है, जल्दी घर लौटेगी.

”चाय पी लेने के बाद मैं तैयबा को कार में बिठा कर बागपत की तरफ ले गया. रात काफी निकल चुकी थी. सरूरपुर कलां के पास सन्नाटा मिला तो मैं ने पास में बैठी तैयबा के सिर में गोली मार दी. वह मर गई तो मैं ने उस की लाश जंगल में फेंक दी और घर लौट आया. मुझे तैयबा की हत्या करने का बहुत अफसोस है साहब.’’

पुलिस ने फैसल चौधरी से रिवौल्वर और आई20 कार बरामद कर ली. कार की सीट धो कर खून साफ कर दिया गया था, किंतु फोरैंसिक टीम ने कार से तैयबा के खून के नमूने उठा लिए. पुलिस ने फैसल चौधरी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) 3, 5 लगाई गई और उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

तैयबा की लाश का पोस्टमार्टम करवा कर लाश उस के फेमिली वालों को सौंप दी गई. उस के परिजन चाहते थे उन की बेटी को धोखे में रख कर उस से शादी करने और उस की हत्या करने वाले फैसल चौधरी को फांसी की सजा मिले. Love Crime