Crime Stories : डेरा सच्चा सौदा के पाखंडी को मिली सजा

Crime Stories : डेरा सच्चा सौदा के संत राम रहीम ने अपनी व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा के लिए डेरे को अनैतिक कार्यों का केंद्र और अकूत संपत्ति हासिल करने का माध्यम बना लिया था. सब कुछ जानने के बाद उस के डर से डेरे में कोई मुंह तक नहीं खोल पाता था. लेकिन उस के काले कारनामों की जिस तरह कोर्ट द्वारा सजा सुनाई जा रही है, उस से तो यही लगता है कि…

18 अक्तूबर, 2021 को सुबह से ही पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. अदालत के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई थी. हत्या के जिस मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट के जज सुशील कुमार गर्ग सजा का ऐलान करने वाले थे, उस में 5 आरोपी उन के सामने कठघरे में खडे़ थे. जबकि एक आरोपी पिछले कई घंटों से रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए जुड़ा था. इसी शख्स के कारण सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए गए थे. क्योंकि प्रशासन को आशंका थी कि उस के खिलाफ सजा का ऐलान होने से कहीं उस के भक्त भड़क कर हिंसा पर उतारू न हो जाएं. यह शख्स कोई छोटामोटा व्यक्ति नहीं, बल्कि डेरा सच्चा सौदा का मुखिया संत गुरमीत राम रहीम था, जिस के देशविदेश में लाखों समर्थक थे.

सरकारी वकील और बचाव पक्ष के वकीलों की कई घंटे दलील चली. आखिरकार कई घंटों की बहस के बाद सीबीआई जज सुशील कुमार ने अपना फैसला देते हुए डेरे के सेवादार रणजीत कुमार की हत्या के आरोप में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम, अवतार सिंह, जसबीर सिंह, सर्बदिल सिंह और कृष्णलाल को धारा 120बी, 302 एवं 506 के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई. इस मामले में आरोपित इंद्रसेन की सुनवाई के दौरान 8 अक्तूबर, 2020 को मौत हो गई थी. जज ने गुरमीत राम रहीम को 32 लाख रुपए का जुरमाना अदा करने की सजा भी सुनाई. यह रकम पीडि़त परिवार को देने का आदेश दिया. सजा का ऐलान होते ही रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए कोर्ट के साथ जुड़े राम रहीम ने अपना सिर पकड़ लिया और वहीं जमीन पर बैठ गया.

ये वही गुरमीत राम रहीम था, जिस के आगेपीछे कुछ साल पहले तक लाखों अनुयायियों की भीड़ जुटी रहती थी. लेकिन अपने कर्मों के कारण आज वह सलाखों के पीछे एक नहीं बल्कि 3 आपराधिक मामलों में सजा भोग रहा है. रणजीत सिंह हत्याकांड की कहानी को समझने के लिए हमें पहले राम रहीम और उस के उस साम्राज्य की बात करनी होगी, जिस के गुमान में वह अपराध दर अपराध करते हुए आज सलाखों के पीछे है. गुरमीत सिंह के डेरा प्रमुख राम रहीम बनने की कहानी  गुरमीत सिंह अपने मातापिता की इकलौती संतान था. उस का जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जट सिख परिवार में हुआ था. उस के पिता का नाम मघर सिंह व मां का नाम नसीब कौर है. मातापिता हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी थे.

महज 7 साल की उम्र में मातापिता ने 31 मार्च, 1974 को अपने बेटे गुरमीत सिंह को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह के चरणों में समर्पित कर दिया था. जिस के बाद डेरे में ही उस की शिक्षादीक्षा शुरू हुई. 23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया. उसी समय उन्होंने गुरमीत सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. गुरमीत सिंह हरियाणा के सिरसा में स्थित आध्यात्मिक संस्था डेरा सच्चा सौदा के तीसरे प्रमुख बने. जिस की स्थापना 1969 में शाह सतनाम सिंह के गुरु शाह मस्तानाजी ने की थी.

डेरा प्रमुख बनने से पहले ही गुरमीत सिंह का गृहस्थ जीवन शुरू हो चुका था. गुरमीत सिंह की 2 बेटियां और एक बेटा है. बड़ी बेटी चरणप्रीत और छोटी का नाम अमरप्रीत है. उस ने इन 2 बेटियों के अलावा एक बेटी हनीप्रीत को गोद लिया हुआ था. इस की बड़ी बेटी चरणप्रीत कौर के पति का नाम डा. शान-ए-मीत इंसां जबकि छोटी बेटी अमरप्रीत के पति का नाम रूह-ए-मीत इंसां है. गुरमीत सिंह के बेटे जसमीत की शादी बठिंडा के पूर्व एमएलए हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी हुस्नमीत इंसां से हुई थी. डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य विदेशों तक फैला हुआ है. अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड से ले कर आस्ट्रेलिया और यूएई तक उन के आश्रम व अनुयायी हैं. डेरे की तरफ से दावा किया जाता है कि दुनिया भर में उन के करीब 5 करोड़ अनुयायी हैं, जिन में से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद हैं.

बहरहाल, गद्दी संभालने के बाद गुरमीत सिंह ने सर्वधर्म समभाव का संदेश देने के लिए अपने नाम में सभी धर्मों के नाम शामिल किए और अपना नाम गुरमीत सिंह से बदल कर गुरमीत राम रहीम सिंह रख लिया. जिस कारण चौतरफा उन की प्रशंसा हुई. उन्होंने जाति प्रथा की समाप्ति का आह्वान किया तथा अपने भक्तों से जातिवाचक नाम हटा कर ‘इंसां’ नाम लगाने को प्रेरित किया. गुरमीत राम रहीम ने कई वेश्याओं को अपनी पुत्री का दरजा दे कर अपनाया व अनुयायियों से आह्वान कर उन के घर बसाए. उन्होंने सफाई के कई अभियान चलाए. ऐसे कई काम थे, जिस कारण संत गुरमीत राम रहीम की शोहरत दुनिया भर में फैलने लगी और उन के भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी.

लेकिन इंसान चाहे साधारण हो या कोई संत, अगर अपनी इच्छाओं और कामनाओं पर अंकुश न रख सके तो शोहरत को कलंक लगने में देर नहीं लगती. गुरमीत राम रहीम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. गुरमीत राम रहीम सन 2002 में पहली बार सुर्खियों में तब आए, जब उन के ऊपर डेरे की साध्वियों के यौनशोषण के आरोप लगे. उसी साल उन के खिलाफ यौन शोषण की खबर छापने वाले सिरसा के एक स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या हो गई. इस के आरोप भी डेरामुखी पर ही लगे. अचानक शोहरत की बुलंदियां छूते राम रहीम अपने किसी न किसी कारनामे के कारण आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनने लगे. डेरामुखी राम रहीम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से निकलने के लिए एक के बाद ऐसी गलतियां कीं, जिस से वह अपराध की दलदल में गहरे तक फंसते चले गए.

जब हुआ बेनकाब डेरे में चल रही अय्याशगाह का खेल  28 अगस्त, 2017 को सीबीआई कोर्ट ने पहली बार गुरमीत राम रहीम को 4 साध्वियों के बलात्कार मामले में 20 साल की जेल व 30 लाख रुपए जुरमाने की सजा सुनाई थी. जिस मामले में उन्हें सजा सुनाई गई थी. डेरे में चल रहे साध्वियों के यौन उत्पीड़न के खुलासे की कहानी बेहद रोचक है. हुआ यूं कि साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक गुमनाम पत्र मिला. इस में एक गुमनाम साध्वी ने लिखा कि वह पंजाब की रहने वाली है और सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में 5 साल से रह रही है. डेरे में साध्वियों का यौन शोषण किया जा रहा है. लेटर में बठिंडा, कुरुक्षेत्र की कुछ साध्वियों के यौन शोषण किए जाने की बात भी लिखी थी.

साध्वी के पत्र में लिखी बातों का कुछ हिस्सा बेहद आपत्तिजनक था. इस गुमनाम पत्र के बाद से ही बवाल शुरू हो गया था.  2002 में गुमनाम साध्वी की लिखी चिट्ठी की गोपनीय जांच शुरू हो गई, लेकिन इसी बीच ये चिट्ठी मीडिया के जरिए सार्वजनिक हो गई, जिस पर संज्ञान लेते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच सौंप दी. सीबीआई ने डेरे के मैनेजर इंद्रसेन से 1999 से 2001 तक की साध्वियों की लिस्ट मांगी तो 2005 में सीबीआई को 3 लिस्ट मिलीं. पहली लिस्ट में 53, दूसरी में 80 और तीसरी लिस्ट में 24 साध्वियों के नाम थे.

राम रहीम के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए सीबीआई ने 1997 से 2002 के बीच डेरा छोड़ चुकी 24 साध्वियों पर फोकस किया. इन में से 18 को ही सीबीआई ट्रेस कर पूछताछ कर पाई. इन में भी सिर्फ 2 ही साध्वियां अदालत तक पहुंचीं और और अपने बयान दर्ज कराए. इन शादीशुदा साध्वियों के बच्चे भी हैं. जो साध्वी सीबीआई के सामने आईं, उस में से फतेहाबाद की एक पूर्व साध्वी ने 4 मई, 2006 को सीबीआई के सामने बयान दर्ज कराया. उस ने बताया कि 1998 में डेरा में बतौर साध्वी जौइन किया था. वह शाह सतनामजी स्कूल में पढ़ाती थी. 6 महीने बाद उस की बहन भी साध्वी बन गई. बाबा ने उस का नाम नाजम और बहन का तसलीम रखा.

बाबा गर्ल्स हौस्टल के पास बनी अपनी गुफा में रहता था और गुफा के बाहर साध्वियों को ही संतरी रखता था. जिन की ड्यूटी रात 8 बजे से 12 और 12 बजे से 4 बजे 2 शिफ्टों में होती थी. एक दिन उसे रात को 10 बजे गुफा में बुलाया गया, जहां बाबा ने उस के साथ जबरन रेप किया. वह रोती हुई गुफा से निकली और हौस्टल चली गई. वहां पर उस ने किसी को कुछ नहीं बताया. मगर उस दिन उस की बहन ने बताया कि बाबा उस के साथ भी रेप कर चुका है. रेप होने के एक साल बाद उसे डेरे के मैनेजर ने बुलाया और कहा कि बाबा ने उसे गुफा में बुलाया है. मगर पहले हुई घटना के कारण उस ने गुफा में जाने से मना कर दिया. इस के बाद मैनेजर ने उसे ऐसा करने पर भूखा रखने की धमकी दी. मजबूर हो कर उसे गुफा में दोबारा जाना पड़ा और बाबा ने उस के साथ फिर रेप किया.

दोनों बहनों ने हौस्टल की दूसरी साध्वियों को भी बाबा की गुफा से कई बार रोते हुए निकलते देखा था. एक बहन ने तो अपने साथ हुई घटना के तुरंत बाद डेरा छोड़ दिया. दूसरी साध्वी बहन भी डेरा छोड़ना चाहती थी, मगर उस के भाई की बेटियां डेरे में बीए की पढ़ाई कर रही थीं. इस कारण उसे वहां रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा. फिर अप्रैल, 2001 में उस ने अपने भाई और उस की दोनों बेटियों समेत डेरा छोड़ दिया. दोनों बहनों के डेरा छोड़ने के बाद ही प्रधानमंत्री कार्यालय को गुमनाम चिट्ठी मिली थी. बहरहाल, साध्वी के बयान कोर्ट में दर्ज कराने के बाद सीबीआई ने बाबा के साथ एक आरोपी अवतार सिंह, डेरा मैनेजर इंद्रसेन और मैनेजर कृष्णलाल को आरोपी बना कर उन का चंडीगढ़ और दिल्ली में लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया.

जहां झूठ पकड़ने वाली मशीन से खुलासा हुआ कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम साध्वियों का यौन शोषण करता था. दोनों साध्वियों ने सीबीआई और अदालत को अपनी जो आपबीती सुनाई, उस में कहा था कि बाबा हर रोज साध्वियों को गुफा में बुलाता था और रेप करता था. उस के शीश महल जिसे वह गुफा कहता था, वहां से साध्वियां हर रोज रोते हुए बाहर निकलती थीं. गुफा के आसपास बने हौस्टलों में 200 से ज्यादा सुंदर साध्वियों को रखा गया था.  बाबा की गुफा के आसपास रात के वक्त महिला साध्वियों को गार्ड के रूप में तैनात किया जाता था.  साध्वियों से दुष्कर्म का यही वो केस था, जिस के बाद गुरमीत राम रहीम नायक से खलनायक और संत से अपराधी बन गया था.

प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजे गए गुमनाम साध्वी के इस पत्र को पहले गृह मंत्रालय को सौंपा गया था. जहां से बाद में पत्र की जांच का जिम्मा सिरसा के सेशन जज को सौंपा गया. इसी दौरान हाईकोर्ट ने भी इस पर संज्ञान ले लिया था. दिसंबर 2002 में  राम रहीम के खिलाफ धारा 376, 506 और 509 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था. दिसंबर 2003 में  इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी दी गई. जांच अधिकारी सतीश डागर ने केस की जांच शुरू की और आखिर साल 2005-2006 में उस साध्वी को ढूंढ निकाला, जिस का यौन शोषण हुआ था.

जुलाई 2007 में  सीबीआई ने केस की जांच पूरी कर अंबाला सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी. अंबाला से केस की सुनवाई पंचकूला शिफ्ट कर दी गई. चार्जशीट के मुताबिक, डेरे में 1999 और 2001 में कुछ और साध्वियों का भी यौन शोषण हुआ, लेकिन वे मिल नहीं सकीं. अगस्त 2008 में साध्वियों से दुष्कर्म  केस का ट्रायल शुरू हुआ और डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए. साल 2011 से 2016 तक  केस का ट्रायल चला और डेरा प्रमुख राम रहीम की ओर से बड़ेबड़े वकील लगातार जिरह करते नजर आए. जुलाई 2016 तक चली केस की सुनवाई के दौरान कुल 52 गवाह पेश किए गए, इन में 15 प्रौसिक्यूशन और 37 डिफेंस के थे. और फिर वह दिन आ गया, जब राम रहीम की गरदन इस केस में पूरी तरह फंसी नजर आई और जून 2017 में कोर्ट ने डेरा प्रमुख के विदेश जाने पर रोक लगा दी.

17 अगस्त, 2017 को दोनों पक्षों की ओर से चल रही जिरह खत्म हो गई और फैसले के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की गई. 25 अगस्त, 2017 को पंचकूला सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने राम रहीम को उम्र कैद की सजा सुनाई. राम रहीम के खिलाफ सजा दिए जाने के आदेश के बाद डेरा सर्मथकों ने पंचकूला और सिरसा में जम कर उत्पात मचाया और हिंसा की, जिस में करीब 41 लोगों की मौत हुई. अदालत के फैसले के खिलाफ सिरसा व पंचकूला में हुई हिंसा के बाद गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा पर पुलिस के छापे पडे़ तो वहां से हथियारों का जखीरा बरामद हुआ.

हरियाणा पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप में राम रहीम की गोद ली बेटी और उस की कथित प्रेयसी कहीं जाने वाली हनीप्रीत को भी चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया. हनीप्रीत हिंसा होने के बाद से ही फरार थी. फ्रीज हुए डेरा के 90 बैंक एकाउंट साध्वियों से बलात्कार मामले में गुरमीत राम रहीम का सजा होने व गिरफ्तारी के बाद से ही डेरा सच्चा सौदा के रहस्य लोक की कहानियां सार्वजनिक होने लगीं. इधर, डेरा सर्मथकों की हिंसा के बाद डेरा के 90 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए. गुरमीत राम रहीम के खिलाफ एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने भी जांच शुरू कर दी. क्योंकि डेरा की 700 करोड़ की संपत्ति में मनी लांड्रिंग की आशंका नजर आ रही थी.

गुरमीत राम रहीम को रेप मामले में सजा होने के बाद पंचकूला और सिरसा के अलावा करीब 5 राज्यों में हिंसक प्रर्दशन हुए थे. इस मामले में दरजनों केस दर्ज हुए. चंडीगढ़ व पंचकूला में हिंसा फैलाने के मामले में डेरा प्रवक्ता दिलावर सिंह को भी देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया. दिलावर सिंह एमएसजी ग्लोरियस इंटरनैशनल स्कूल सिरसा का एडमिनिस्ट्रेटर था. उस ने डेरामुखी के गनमैन ओमप्रकाश सिंह, डेरा सर्मथक दान सिंह व चमकौर सिंह के साथ मिल कर पंचकूला में आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया था. करीब 177 से अधिक मामले दर्ज किए गए और 1137 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था.

बहरहाल, गुरमीत राम रहीम के पापों की कलई खुलनी शुरू हो चुकी थी और कानून ने सख्त रुख अपना लिया था. उस के खिलाफ मुंह न खोलने वाले लोग भी अब अदालत में सच बयां कर रहे थे. एक तरफ राम रहीम साध्वियों से बलात्कार के मामले में जेल से बाहर आने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा रहा था कि 17 जनवरी, 2019 को पंचकूला की विशेष सीबीआई के जज जगदीप सिंह  ने सिरसा के स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या के मामले में भी गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुना दी. इस मामले में डेरा प्रमुख के साथ 3 अन्य लोगों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को भी दोषी ठहराया गया था. इन्हें भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

दरअसल, सिरसा के स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति वकालत छोड़ कर ‘पूरा सच’ नाम से एक अखबार निकालते थे. रामचंद्र अपने अखबार के नाम की तरह ही पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे. निर्भीक छवि के रामचंद्र छत्रपति की हत्या का मामला कहीं न कहीं साध्वियों के दुष्कर्म से ही जुड़ा था.  2002 में रामचंद्र छत्रपति के हाथ वह चिट्ठी लग गई, जो गुमनाम साध्वी ने लिखी थी. रामचंद्र ने उस चिट्ठी को अपने अखबार में छाप दिया. इसी अखबार में छपी खबर के बाद लोगों को डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम द्वारा डेरे में साध्वियों के साथ दुष्कर्म करने की जानकारी मिली थी. इस खबर के छपने के बाद छत्रपति को जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं.

आखिरकार 19 अक्तूबर, 2002 की रात छत्रपति को घर के बाहर गोली मारी गई. इस के बाद 21 अक्तूबर को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उन की मौत हो गई. हालांकि इस दौरान छत्रपति होश में आए लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण छत्रपति का बयान तक दर्ज नहीं किया गया. दरअसल, छत्रपति अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा की अच्छी और बुरी खबरों को छापते थे, जिस कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलती रहती थीं. यह बात सिरसा के सभी पत्रकार जानते थे. मृतक पत्रकार के बेटे अंशुल ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका जनवरी, 2003 में मृतक के बेटे अंशुल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की. इस याचिका में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के भी इस में संलिप्त होने के आरोप लगाए.

सोशल मीडिया में रामचंद्र छत्रपति को इंसाफ दिए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी. इसी दौरान डेरामुखी पर डेरे के एक पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या के भी आरोप लगने लगे. इस मामले में भी पीडि़तों की तरफ से अदालत का दरवाजा खटखटाया गया. हाईकोर्ट ने पत्रकार छत्रपति और डेरा मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या के मामलों को जोड़ते हुए 10 नवंबर, 2003 को सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. सीबीआई ने दिसंबर, 2003 में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी. मामला दर्ज होते ही डेरा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर जांच पर रोक लगाने की अपील की गई, जिस के बाद उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और मामले की जांच पर उस वक्त रोक लगा दी गई.

लेकिन नवंबर, 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका को खारिज कर दिया और सीबीआई जांच को जारी रखने के आदेश दिए. सीबीआई ने दोबारा दोनों मामलों की जांच शुरू की और डेरा प्रमुख समेत कइयों को अभियुक्त बनाया. इसी मामले में सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. साध्वी रेप केस मामले और पत्रकार छत्रपति हत्याकांड की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के बाद से उस की खास राजदार हनीप्रीत सब से ज्यादा सुर्खियों में रही है. उस पर भी पंचकूला में दंगा भड़काने, राजद्रोह और राम रहीम को पुलिस कस्टडी से भगाने की साजिश रचने के आरोप लगे और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया.

हालांकि कुछ महीने बाद हनीप्रीत को अदालत से जमानत मिल गई और उस के बाद हनीप्रीत ने डेरा सच्चा सौदा की कमान अपने हाथों में ले ली. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर हनीप्रीत कौन है, जो गुरमीत राम रहीम के बाद डेरा सच्चा सौदा की सब से ताकतवर बनी है. आखिर इतना बड़ा परिवार होते हुए राम रहीम क्यों हर वक्त हनीप्रीत को याद करता रहा और हनीप्रीत से उस का क्या खास रिश्ता है. हनीप्रीत इंसां का जन्म 21 जुलाई, 1980 को हरियाणा के फतेहाबाद में हुआ था. उस का स्कूली नाम प्रियंका तनेजा है.  प्रियंका तनेजा का पूरा परिवार करीब ढाई दशक से डेरे का अनुयायी था. हनीप्रीत के दादा ने पाकिस्तान से आ कर हरियाणा के सिरसा में कपड़े की दुकान खोली थी. जहां गुरमीत राम रहीम के गुरु शाह मस्तानाजी आते रहते थे. तभी से उन की फैमिली डेरे की अनुयायी हो गई.

कुछ ही दिनों में हनीप्रीत के दादा डेरे के प्रशासक बन गए और वहां खजाने से संबंधित काम देखने लगे थे. 1996 में प्रियंका के दसवीं पास करते ही दादा ने उस का एडमिशन डेरे के ही स्कूल में करवा दिया. हनीप्रीत के पिता रामानंद तनेजा पहले पुरानी दिल्ली एमआरएफ टायर्स का ‘सर्च टायर्स’ नाम से शोरूम चलाते थे. लेकिन बाद में उन्होंने डेरे में ही एक बड़ा सीड प्लांट डाल लिया. बाद में गुरमीत राम रहीम ने उस के पिता रामानंद तनेजा को डेरा की पर्चेजिंग कमेटी का हेड बना दिया, जो डेरे के सारे सामान की खरीदफरोख्त का काम देखने लगे.

प्रियंका के भाई साहिल तनेजा को भी गुरमीत का आशीर्वाद मिल गया और वह भी डेरे में बड़े स्तर पर कारोबार करने लगा. बाद में प्रियंका की छोटी बहन नीशू तनेजा की गुरुग्राम में जो शादी हुई, उस में भी बाबा का खास योगदान रहा. हनीप्रीत के चाचा और मामा समेत दूसरे कई रिश्तेदार सिरसा के मुख्य मार्गों पर टायरों का कारोबार करते हैं. आज भी डेरे में कई बड़े प्रोजेक्ट हनीप्रीत के नाम से चल रहे हैं. बताते हैं कि गुरमीत राम रहीम 1996 में डेरे के स्कूल में जब छात्राओं को आशीर्वाद देने गया था तो वहां उस की नजर पहली बार प्रियंका तनेजा पर पड़ी थी. बस उसी के बाद बाबा ने कुछ ऐसा चक्कर चलाया कि वह प्रियंका को अपना खास आशीर्वाद देने के लिए डेरे में अपने निजी कक्ष में बुलाने लगा.

बाबा की खासमखास बन गई हनीप्रीत कुछ ही दिनों में प्रिंयका पूरी तरह बाबा के वश में हो गई. कुछ समय बाद बाबा ने उस का नया नामकरण किया और उस का नाम हनीप्रीत इंसां रख दिया. क्योंकि डेरे में सभी राजदारों व साधुसाध्वियों को ‘इंसां’ सरनेम दिया जाता है. उम्र का काफी फासला होने के बावजूद धीरेधीरे गुरमीत राम रहीम और हनीप्रीत इंसा के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. जल्द ही हनीप्रीत बाबा की खास बन गई और उस की पहुंच बेरोकटोक बाबा के बैडरूम तक होने लगी. हनीप्रीत ने 12वीं तक की पढ़ाई डेरे के स्कूल में ही की. बाबा ने उस का डेरे से बाहर आनाजाना बंद करा दिया. डेरे में उस के लिए एक खास आवास की व्यवस्था कर दी गई और वहीं पर उस के टीचर उसे पढ़ाने के लिए आते.

इतना ही नहीं, बाबा ने हनीप्रीत के लिए एक विशेष जिम बनवा दिया. हनीप्रीत के नाम पर डेरे के अंदर एक बुटीक भी खोल दिया गया. बताते हैं कि धीरेधीरे हनीप्रीत और राम रहीम की नजदीकियां कुछ इस तरह बढ़ गईं कि हनीप्रीत बाबा के हर राज की राजदार हो गई. हनीप्रीत अब गुरमीत की सब से करीबी बन गई थी. गुरमीत उस पर इतना मेहरबान था कि उस ने हनीप्रीत के नाम पर डेरे में कई बड़े कारोबार शुरू किए.  बताते हैं कि डेरे के अंदर बाबा और हनीप्रीत के रिश्ते को ले कर हमेशा लोगों के मन में सवाल रहते थे. लेकिन बाबा के डर से कोई अपनी जबान नहीं खोलता था, क्योंकि बाबा राम रहीम उसे लोगों के सामने अपनी बेटी, अपनी ‘परी’ कहता था. लेकिन हकीकत यह थी कि वो बाबा की ‘परी’ नहीं बल्कि बाबा की ‘हनी’ थी.

बताते हैं कि जब बाबा को लगा कि एक अविवाहित लड़की इस तरह उस की सेवा में रहेगी तो इस से उस की छवि और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े हो सकते हैं. इसलिए उस ने 14 फरवरी, 1999 वैलेनटाइंस डे के दिन हनीप्रीत की शादी विश्वास गुप्ता से करा दी. हनीप्रीत के परिवार की तरह करनाल के रहने वाले विश्वास गुप्ता का परिवार भी बाबा का अनुयायी था. बाबा ने ही शादी की सारी व्यवस्थाएं कराई थीं. राम रहीम ने हनीप्रीत की शादी तो गुप्ता से करा तो दी, लेकिन दोनों को आदेश दिया कि वे बच्चा पैदा न करें.

हनीप्रीत के पूर्व पति विश्वास गुप्ता ने बाबा की गिरफ्तारी के बाद मीडिया को बताया था कि शादी के 2 या 3 दिन बाद बाबा राम रहीम ने उसे हनीप्रीत के साथ डेरे में मुलाकात के लिए बुलाया था. तब बाबा ने कहा था कि तुम हमारे साथ बाहर यात्राओं पर जाती हो, अगर बच्चा हुआ तो उस के स्कूल जाने और लालनपालन के चलते हमारी सेवा नहीं कर पाओगी, इसलिए बच्चा पैदा न करो. बाबा ने कहा था कि हम तुम्हें बेटा मानते हैं, उसी तरह हनीप्रीत भी हमारी बेटी है. हम उसे भी उतना ही प्यार देंगे. विश्वास गुप्ता ने आरोप लगाया था कि बाबा हर सप्ताह हनीप्रीत और उसे डेरे में बुलाने लगा. वह गुफा के अंदर बने बैडरूम में हनीप्रीत को बुलाता था और उसे लिविंग रूम में ही बैठने को कहता था.

पूछने पर बाबा कहता था कि बेटी अकेले में ससुराल के हर सुखदुख बता सके, इसलिए उस से अकेले में हालचाल पूछता हूं. विश्वास गुप्ता ने आरोप लगाए थे कि राम रहीम और हनीप्रीत की सभी मुलाकातें हर बार एक से डेढ़ घंटे तक होती थीं. इस दौरान बाबा के चेले और दूसरे सेवादार विश्वास गुप्ता को बातों और कुछ कामों में उलझाए रखते थे. बाद में बाबा ने विश्वास गुप्ता को सप्ताह में 2 दिन पत्नी के साथ गुफा में रहने का आदेश दिया. बताते हैं कि उसी दौरान एक रात जब  विश्वास गुप्ता डेरे में बाबा की गुफा के लिविंग रूम में सो रहा था तो उस ने रात के वक्त बाबा के बैडरूम में अपनी पत्नी हनीप्रीत व बाबा को कामक्रीड़ा करते देखा. बस इसी के बाद से बाबा और हनीप्रीत से उस का मोहभंग हो गया.

बाद में हनीप्रीत और विश्वास गुप्ता के संबध बिगड़ने लगे तथा दोनों में अकसर तकरार होने लगी. विश्वास गुप्ता और हनीप्रीत का रिश्ता केवल 11 साल चला. बाबा राम रहीम ने साल 2009 में हनीप्रीत को बेटी के रूप में गोद ले लिया. जिस के बाद हनीप्रीत बाबा के साथ डेरे की गुफा में ही रहने लगी. हनीप्रीत को गोद लेने के बाद गुप्ता से हनी के मतभेद और गहरे हो गए. गुप्ता ने जब हनीप्रीत पर घर वापस चलने का दबाव डाला तो उस के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करवा दिया गया, जिस में उसे जेल की हवा खानी पड़ी. बाद में जेल से रिहा होने पर  साल 2011 में विश्वास गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर राम रहीम के कब्जे से अपनी पत्नी यानी हनीप्रीत को मुक्त कराने की मांग की थी. अदालत में दी गई याचिका में विश्वास गुप्ता ने राम रहीम पर हनीप्रीत के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया था.

डेरे के सारे फैसले लेने लगी हनीप्रीत बताते हैं कि बाद में डेरे के कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण विश्वास गुप्ता के परिवार वालों ने हनीप्रीत से उस का तलाक करवा दिया. लेकिन इस दौरान गुप्ता परिवार को बाबा के ऊंचे रसूख के कारण कई तरह की प्रताड़नाओं का शिकार होना पड़ा. विश्वास गुप्ता से तलाक के बाद हनीप्रीत पूरी तरह बाबा के लिए समर्पित हो गई. हनीप्रीत डेरा के हर महत्त्वपूर्ण फैसले लेने लगी. बाबा राम रहीम के साथ वह साए की तरह चौबीसों घंटे रहने लगी. बाबा हर फैसला हनीप्रीत से सलाह ले कर ही करता था.

इतना ही नहीं, बाबा ने हनीप्रीत की फिल्मों में काम करने की ख्वाहिश को देखते हुए ‘एमएसजी’ नाम से एक फिल्म कंपनी बनाई जिस के तहत बनी फिल्म ‘एमएसजी’, ‘जट्टू इंजीनियर’, ‘द वारियर लायन हार्ट’ समेत दूसरी और भी फिल्मों का निर्देशन हनीप्रीत ने ही किया. एमएसजी नाम की फिल्म में तो बाबा ने खुद हीरो के रूप में काम भी किया. बाबा की बेबी हनीप्रीत इतनी ताकतवर हो चुकी थी कि उसी के हाथ में डेरे की सभी चाबियां रहती थीं. पैसे से ले कर हर वो फैसला जो डेरे से संबंधित होता था, वह हनीप्रीत ही करती थी. हनीप्रीत भले ही दिखावे के लिए बाबा की बेबी रही हो, लेकिन लोग अब खुली जुबान से कहते हैं कि वह बाबा की हनी थी. शायद यही वजह थी कि गुरमीत राम रहीम की अपनी बीवी और बेटेबहू से दूरियां रहती थीं.

राम रहीम को अपने तौरतरीकों से चलाने वाली हनीप्रीत जेल जाने तक उस के साथ नजर आई थी और बाद में उसी ने डेरे का प्रबंध अपने हाथों में लिया. गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी के बाद 600 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाले उस के एमएसजी प्रोडक्ट्स की कमान भी बाद में हनीप्रीत के हाथों में आ गई. एमएसजी के सिरसा में 5 बड़े शोरूम थे, जिन में करीब 150 से ज्यादा प्रोडक्ट्स बेचे जाते थे. हालांकि बाबा की गिरफ्तारी के बाद एमएसजी का यह कारोबार आर्थिक संकट का शिकार हो कर बंद हो गया, जिस से इस में निवेश करने वाले लगभग 10 हजार लोगों की रकम भी डूब गई. साध्वियों के साथ रामचंद्र छत्रपति के परिवार को इंसाफ मिल चुका था, लेकिन राम रहीम के दामन पर लगे डेरा प्रेमी रणजीत सिंह की हत्या के दागों का इंसाफ होना अभी बाकी था.

18 अक्तूबर, 2021 को रणजीत सिंह हत्याकांड में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के जज सुशील कुमार ने राम रहीम समेत 5 लोगों को दोषी ठहरा कर उम्रकैद की सजा सुनाई. 19 साल तक अदालत में चले इस मामले की 250 पेशी हुई और 61 गवाही के बाद अदालत ने 5 आरोपियों को दोषी माना. रणजीत सिंह एक समय राम रहीम के डेरे का मैनेजर और उस का भक्त हुआ करता था, लेकिन 10 जुलाई, 2002 को अचानक रणजीत सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. हत्या का रहस्य बहुत गहरा था. हत्या के आरोप में राम रहीम के साथ उस का सहयोगी कृष्ण लाल भी फंसा था.

रणजीत सिंह हत्याकांड में 3 गवाह महत्त्वपूर्ण थे. इन में 2 चश्मदीद गवाह सुखदेव सिंह और जोगिंद्र सिंह थे. इन का कहना था कि उन्होंने आरोपियों को रंजीत सिंह पर गोली चलाते हुए देखा था. तीसरा गवाह गुरमीत का ड्राइवर खट्टा सिंह था, जिस के सामने रंजीत को मारने की साजिश रची गई थी. हालांकि बाद में खट्टा सिंह अदालत के सामने बयान से मुकर गया था. कई साल बाद खट्टा सिंह फिर से कोर्ट में पेश हो गया और गवाही दी. रणजीत का साला परमजीत सिंह भी इस मामले में गवाह था, जिस ने सीबीआई के स्पैशल मजिस्ट्रैट के सामने बयान दर्ज कराए थे. परमजीत ने अदालत को बताया था कि रणजीत की बहन भी जुलाई, 1999 में साध्वी बनी थी.

परमजीत ने कोर्ट के सामने डेरे से जुड़ी घटनाओं की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए बताया कि रणजीत सिंह की साध्वी बहन डेरा प्रमुख की गुफा के बाहर पहरेदारी का काम करती थी. उसी ने अपने भाई को डेरा प्रमुख की गुफा में साध्वियों के साथ होने वाले दुष्कर्म की बात बताई थी. जिस के बाद रणजीत सिंह ने डेरा छोड़ दिया और अपने गांव कुरुक्षेत्र चला गया. डेरा प्रमुख को शक था कि साध्वियों को डेरे से भगाने और उन के खिलाफ प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट में चिट्ठी लिखवा कर उसे बदनाम करने का काम रणजीत सिंह ने अपनी साध्वी बहन के जरिए किया है, इसीलिए रणजीत सिंह की हत्या करा दी गई.

चूंकि डेरे में 20 साल तक सेवादार रहे रणजीत सिंह की 2002 में गुमनाम साध्वी का पत्र सामने आने के बाद ही हत्या हुई थी. इसीलिए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कडि़यां जोड़ते हुए अदालत ने बाबा को उस की हत्या का दोषी माना. वैसे साध्वियों से दुष्कर्म, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरे के मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के अलावा भी डेरामुखी राम रहीम के खिलाफ कई संगीन आरोप हैं. 2010 में डेरा के ही एक पूर्व साधु रामकुमार बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर डेराप्रमुख पर डेरे के पूर्व मैनेजर फकीर चंद की हत्या कराने का आरोप लगाया था. 400 साधुओं को बनाया नपुंसक फकीरचंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग पर अदालत ने सीबीआई को जांच के आदेश तो दिए लेकिन जांच एजेंसी मामले में सबूत नहीं जुटा पाई और क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी. हालांकि बिश्नोई ने क्लोजर रिपोर्ट को उच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है.

इस के अलावा फतेहाबाद जिले के कस्बा टोहाना के रहने वाले डेरे के एक पूर्व साधु हंसराज चौहान ने जुलाई 2012 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राम रहीम पर डेरा के 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया था. अदालत के सामने उन्होंने 166 साधुओं का नाम सहित विवरण प्रस्तुत करते हुए गुरमीत राम रहीम की करतूतों की पोल खोली थी. अदालत ने इस शिकायत की जांच का काम भी सीबीआई को सौंपा, जिस के बाद ये मामला भी अब अदालत में विचाराधीन है. साधु हंसराज ने बताया कि उस के मातापिता डेरे के अनुयायी थे, इसलिए वह भी साल 1996 में 17 साल की उम्र में डेरे के अनुयायी बन गए थे. जहां डेरामुखी ने यह कहते हुए अनुयायियों को नपुंसक बनाया कि वे अगर खुद नपुंसक बनते हैं तो भगवान को पाने में सफल होंगे.

उन्हें साल 2002 में श्रीगंगानगर स्थित डेरे के अस्पताल में नपुंसक बनने के लिए मजबूर किया गया, जहां उन के अलावा कई अन्य साधु (डेरा अनुयायी) भी थे. डेरामुखी का मानना था कि नपुंसक बनने के बाद अनुयायी डेरा छोड़ कर नहीं जा सकेंगे. डेरामुखी ऐसे अनुयायियों से खाली कागज पर दस्तखत भी करवा लेता था. उस के बाद उन के नामों पर डेरामुखी को दान की गई जमीन ट्रांसफर करवाता और कुछ समय बाद उस जमीन को डेरा ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर करवा लिया जाता. दरअसल, गुरमीत राम रहीम के गलत कामों की कुंडलियां खुलने के बाद ही पता चला कि डेरे का आकार बढ़ाने के लिए उस ने डेरे के आसपास की जमीन हथियाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया हुआ था.

गुरमीत राम रहीम ने 1990 में गद्दीनशीं होने के बाद डेरे के चारों ओर की जमीन हासिल करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए. लोगों को डराधमका कर औनेपौने दामों पर 700 एकड़ जमीन हासिल की. इसी वजह से महज कुछ एकड़ में फैला डेरा आज बड़े शहर में तब्दील हो चुका है. गांव शाहपुर बेगू, नेजियाखेड़ा और फूलकां बाजेकां के जिन लोगों ने बाबा को जमीन देने का विरोध किया, उन्हें परेशान करने के लिए बाबा के गुंडों ने पहले उन्हें धमकाया फिर समझाया और जो इस के बाद भी नहीं माना, उस की जमीन को रातोंरात ओपन टौयलेट बना दिया जाता था.

डेरे पर आने वाले हजारों लोग ऐसे लोगों के खेतों और फसल की ऐसी दुर्दशा कर देते थे कि गंदगी की वजह से खेतों के आसपास जाना भी मुश्किल हो जाता था. परेशान हो कर लोग उस जमीन को जमीन बेचने में ही भलाई समझते थे. अदालत से जिन मामलों में गुरमीत राम रहीम को अपने कुकर्मों की सजा मिल चुकी है, वे तो महज उदाहरण हैं. लेकिन यौन उत्पीड़न से ले कर हत्या और लोगों की संपत्ति हड़पने के ऐसे सैकड़ों गुनाह हैं, जिन की पीडि़तों ने शिकायत ही नहीं की. लेकिन ऐसे तमाम लोग आज इस बात से खुश हैं कि सच्चे डेरे की आस्था को कलंकित करने वाला संत अब सलाखों के पीछे है. Crime Stories

 

Best Crime Story : स्मार्टवाच में छिपा हत्या का राज

Best Crime Story : हत्यारा अपने गुनाह के सबूत को मिटाने की चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, उस से कोई न कोई सुराग छूट ही जाता है. ब्रिटिश युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या का राज खोलने में बायोमैट्रिक घड़ी पुलिस के लिए ऐसी मददगार साबित हुई कि…

ग्रीस में 20 वर्षीया युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या हुई थी. उस के 33 वर्षीय पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस, जोकि हेलीकौप्टर पायलट था, ने 11 मई को पुलिस को फोन द्वारा सूचना दी थी कि उस की पत्नी की हत्या अज्ञात लुटेरों ने ग्लयका नेरा स्थित उस के ही घर के बैडरूम में कर दी है. सूचना पा कर ग्रीक पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने देखा कि घर में बाबिस की पत्नी कैरोलिन की लाश के अलावा एक कुत्ता भी मरा पड़ा था. घर का सामान भी बिखरा पड़ा था. पुलिस को मामला लूट का ही लग रहा था. बाबिस ने पुलिस को बताया कि उन्हें लुटेरों ने बांध दिया था. वे 3 थे. उन्होंने घर से पैसे लूटने के बाद उस की पत्नी का गला घोंट डाला था. उस ने लुटेरों से अपने परिवार को नुकसान नहीं पहुंचाने की गुहार भी लगाई थी.

पुलिस ने घटनास्थल से सारे सबूत इकट्ठे कर जांच शुरू कर दी. इतना ही नहीं, पुलिस ने इस हाईप्रोफाइल अपराध की जानकारी देने वाले को 2,57,000 पाउंड स्टर्लिंग (करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपए) ईनाम देने की भी घोषणा कर दी. इस ईनाम की घोषणा एथेंस की पुलिस औफिसर्स एसोसिएशन के डिप्टी चेयरमैन निकोस रिगास ने की थी. उन्होंने मीडिया को भी जांच में अपनाई जाने वाली तमाम लेटेस्ट सिस्टम इस्तेमाल करने की बात कहते हुए दावा किया कि बहुत जल्द ही वे इस मामले का पता लगा लेंगे. इस पर मीडिया ने उन्हें निशाने पर ले लिया था. कारण कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुए लौकडाउन के बाद से महिलाओं की हत्या और घरेलू अपराध की घटनाएं वहां काफी बढ़ गई थीं.

इसे देखते हुए रिगास ने घटनास्थल से मोबाइल उपकरणों, एक स्मार्टवाच और कैमरों की जांच करने के लिए एक समयरेखा भी निर्धारित कर दी. घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद एथेंस पुलिस  की क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम इस नतीजे पर पहुंची थी कि युवती की हत्या जिन 3 लुटेरों ने की, उन्हें दबोचा जाना बाकी है. क्योंकि पुलिस को वहां से काफी सबूत मिल चुके थे. इसी बीच पुलिस के अधिकारी ने अपने सहकर्मियों से सवाल किया, ‘‘तुम यह कैसे कह सकते हो कि हत्या प्रोफैशनल लुटेरों ने ही की है?’’

‘‘सर घटनास्थल पर मिले सारे प्रमाण तो यही बताते हैं. इस के अलावा, लुटेरों ने युवती के हाथपांव बांध दिए थे, और…’’ एक सहकर्मी पुलिस ने कहा.

‘‘… और उस ने पालतू कुत्ते को भी मार डाला था. तुम तो यही कहोगे न?’’ अधिकारी ने दूसरे सहकर्मी को देखते हुए सवाल किया.

‘‘ यस सर! ’’

‘‘वाट यस सर..? लुटेरों ने घर से जो रुपए लूटे, वे कहां रखे थे? तुम लोगों को तो केवल 13 हजार पाउंड अमाउंट के बारे पता चला है.’’

‘‘उस की डिटेल्स नहीं मिली सर. कोई निशान नहीं मिल पाया.’’ फोरैंसिक जांच वाले ने सफाई दी.

‘‘तुम्हें तो यह भी पता नहीं चला है कि लुटेरों के गिरोह ने युवती को कैसे बांधा, उस की मौत दम घुटने से हुई या फिर कोई और वजह थी.’’ अधिकारी ने सभी को जबरदस्त डांट पिलाई.

‘‘सर, सीसीटीवी कैमरे घटना के समय बंद थे,’’ तकनीकी जांच करने वाले ने बताया.

‘‘अब तुम लोग मुझे यह समझाओ कि मृत युवती की बगल में सिरहाने 11 माह की बच्ची चुपचाप कैसे लेटी थी?’’ जांच अधिकारी ने सख्ती के साथ पूछा. ग्रीक जांच अधिकारी की बात सुन कर सभी चुप हो गए थे. क्योंकि यह मामला साधारण नहीं था. मृतका के पति पायलट बाबिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पुलिस ने जांच शुरू की, जिस में कई विरोधाभास देखने को मिले. बाबिस ने मीडिया को बताया था कि वह घटना के समय लुटेरों से घिरा हुआ था. जबकि पुलिस जांच में पता चला कि उस दौरान वह घर के बाहर चारों ओर घूम रहा था. उस का आवागमन बेसमेंट से ले कर बालकनी तक हुआ था. इस विरोधाभास पर पुलिस को बाबिस पर ही शक हो गया.

डेटा एनालिस्ट की ली मदद इस आधार पर पुलिस औफिसर निकोस रिगास ने अपने सहकर्मियों को नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया. उन्होंने जांच टीम से कहा, ‘‘संदिग्ध युवती का पति भी हो सकता है. यह भी हो सकता है कि क्राइम सीन उस के द्वारा बनाया गया हो. वह खुद को बचाने की कोशिश में हो.’’

‘‘…लेकिन सर, इस पालतू कुत्ते को किस ने मारा होगा?और सर वह छोटी बच्ची..?’’ एक सहकर्मी ने जिज्ञासा जताई.

‘‘यही तो समझने की बात है, जिस ओर तुम लोगों का ध्यान ही नहीं गया?’’ निकोस रिगास बोले.

‘‘वह कैसे सर?’’ फोरैंसिक जांचकर्ता ने सवाल किया.

‘‘मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पालतू कुत्ते को संदिग्ध ने ही मारा होगा और हत्या को सही ठहराने के लिए बच्ची को उस की मां के मृत शरीर के बगल में रख दिया. हैरत की बात है कि उसे कोई चोट नहीं आई. यह भी हो सकता है उस वक्त बच्ची कहीं और सो रही हो.’’ रिगास ने समझाया.

‘‘तो सर, हमें अब क्या करना चाहिए?’’

‘‘आप लोग इस में अब कुछ अधिक नहीं कर पाएंगे. इस केस को डेटा एनलिस्ट की मदद से हैंडल किया जाएगा.’’

‘‘वह कैसे सर?’’ सभी चौंक पड़े.

‘‘बस आप सभी देखते जाइए और अपनीअपनी रिपोर्ट का डेटा सौफ्ट कौपी के साथ हार्ड कौपी में 12 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाइए.’’ रिगास ने आदेश दिया.

‘‘यस सर!’’ सभी सहकर्मियों ने एक साथ कहा.

‘‘और हां, आईटी के क्राइम सेल के साथ अभी घंटे भर के अंदर मीटिंग तय करवाइए.’’ यह आदेश उन्होंने अपने पीए को दिया.

इसी दौरान एक सहकर्मी ने उत्सुकता के साथ बताया, ‘‘सर, क्या मृतका के पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलास से पूछताछ की जाए?’’

‘‘अभी उस पर नजर रखिए. मुझे जानकारी मिली है कि वह इस समय ग्रीस में नहीं है, लेकिन इंस्टाग्राम पर सक्रिय है. उस ने पुर्तगाल यात्रा के दौरान अपनी पत्नी के साथ एक तसवीर पोस्ट की है.’’

‘‘जी सर, मैं ने वह तसवीर देखी है. उस में उस ने लिखा है— हमेशा एक साथ! विदाई, मेरे प्यार!’’ महिला सहकर्मी तपाक से बोल पड़ी.

‘‘तुम उस पर नजर रखो. उस के डेटा का कलेक्शन करो. हर तरह की डिटेल्स जुटाओ… जैसे उन के आपसी संबंध, शादीब्याह, अफेयर, डेटिंग, चैटिंग, डिनर, साथसाथ ट्रैवलिंग, फैमिली बैकग्राउंड, हौबी, उन के फ्रैंड सर्कल, प्रोफेशन इत्यादिइत्यादि. इंस्टाग्राम के अतिरिक्त दूसरे सोशल साइट्स और डेटिंग ऐप को भी खंगालो.’’

जांच दल की महिला सहकर्मी के द्वारा हेलीकौप्टर पायलट बाबिस और कैरोलिन के बारे में जुटाई गई जानकारी के बाद पता चला कि कैरोलिन क्राउच और बाबिस का प्रेम विवाह हुआ था. उन की शादी जुलाई, 2019 में अलगार्वे में हुई थी. सोशल साइट पर उस की शादी की कई यादगार तसवीरें देखने को मिलीं. उन में एक मार्मिक तसवीर उस की शादी के लिए तैयार होने की है, जिस में उस के बाल और मेकअप 2 स्थानीय स्टाइलिस्टों द्वारा किया गया था. इस तसवीर को उतारने वाले फोटोग्राफर को जब कैरोलिन की हत्या की जानकारी मिली तो वह स्तब्ध हो गया था, क्योंकि उसे मिला वह पहला असाइनमेंट था.

कैरोलिन जब 15 साल की थी, तभी उस की मुलाकात बाबिस से हुई थी. उन के बीच प्यार हो गया. उन की शादी एथेंस के उसी अपमार्केट इलाके में हुई थी, जहां कैरोलिन मृत पाई गई. शादी के समय वह 18 साल की थी. बाबिस के मातापिता एथेंस में रहते हैं, जबकि कैरोलिन के मातापिता एलोनिसोस द्वीप पर वहां से 6 घंटे की दूरी पर रहते हैं. हालांकि कैरोलिन का जन्म यूके में हुआ था, जिस से वह ब्रिटिश नागरिक बन गई थी. शादी के बाद वह अपने पति और बच्ची के साथ ग्लाइका नेरा में रह रही थी. इसी तरह से पुलिस ने उन के बारे में कई जानकारियां जुटाईं, जिन में कैरोलिन द्वारा लिखी गई डायरी भी थी. डायरी में उस ने अपने से करीब दोगुनी उम्र के पति के साथ संबंधों की अंतरंगता के बारे में लिखा था.

कैरोलिन की हत्या की जांच ग्रीक पुलिस ने नए सिरे से शुरू की. उन्होंने तमाम तकनीकी उपकरणों को अपने कब्जे में ले लिया और उन में दर्ज डेटा का विश्लेषण किया. इसी क्रम में पुलिस अधिकारी को वह सुराग मिल गया, जिस की उन्हें तलाश थी. वह सुराग कैरोलिन के स्मार्टवाच में छिपा था.  खास तरह की उस बायोमैट्रिक घड़ी में उन की मौत का दिन और उन की नाड़ी के जीवित रहने तक चलने की रीडिंग दर्ज थी. उस के साथ बाबिस के मोबाइल की काल डिटेल्स आदि का मिलान किया गया. इस काम के लिए पुलिस ने गूगल के सर्विलांस सिस्टम का उपयोग किया.

इस तरह से की गई तकनीकी जांच में संदिग्ध के तौर पर कैरोलिन के पति बाबिस के होने का शक पुख्ता हो गया. बाबिस ने भले ही कहा कि उसे लुटेरों ने बांध दिया था, लेकिन जांच में इस बात का पुष्टि हो गई कि उस दौरान उस का फोन इस्तेमाल में था. उस का डेटा उस की पत्नी के स्मार्टवाच के डेटा से मेल नहीं खा रहा था. कैरोलिन की स्मार्टवाच से पता चला कि कैरोलिन का दिल उस वक्त भी धड़क रहा था, जिस वक्त उस के पति द्वारा हत्या किए जाने का दावा किया गया था. उस के फोन पर गतिविधि ट्रैकर ने उसे घर के चारों ओर घूमते हुए दिखाया, जबकि उस ने कहा कि वह बंधा हुआ था. इस तरह से रिकौर्ड किए गए समय, जिस पर घर के सीसीटीवी कैमरे से डेटा कार्ड निकाल लिए गए थे, से घटना की अलग ही कहानी सामने आई.

बाबिस ने पुलिस को बताया था कि 11 मई, 2021 की सुबह 5 बजे के आसपास लुटेरों ने उस के घर में दरवाजा तोड़ कर प्रवेश किया और उस के साथ कैरोलिन को बांध दिया. घर में लूटपाट की और कैरोलिन की गला घोंट कर हत्या कर दी. सुबह 6 बजे पुलिस को बुलाने पर लुटेरे भाग गए. दिल की धड़कनें घड़ी में हुईं कैद इस के विपरीत जांच में पाया गया कि आधी रात को 12 बज कर 35 मिनट पर दंपति की ग्राउंड फ्लोर पर लगी सीसीटीवी कैमरे ने आखिरी तसवीर उतारी थी. उस में बाबिस सोफे पर बैठा दिखा था. उस की गोद में बेटी बैठी थी, उस के हाथ में फोन था. उस समय उस की कैरोलिन से बातचीत चल रही थी, जो किसी बात को ले कर कड़वी बहस में बदल गई थी.

रात 1.20 बजे कैमरे की डिवाइस में स्टोर डेटा के अनुसार उस में से मेमोरी कार्ड हटा दिया गया था. पुलिस का कहना है कि ऐसा कैरोलिन द्वारा स्टूपिड कहने के बाद किया गया. पुलिस ने पाया कि मेमोरी कार्ड को आधा काट कर शौचालय में बहा दिया गया था. इसे अधिकारी ने पूर्वनियोजित हत्या की योजना बताया. रात 12.35 बजे से सुबह 4 बजे तक बाबिस और कैरोलिन के बीच टेक्स्ट मैसेज के साथ बहस होती रही. उस दौरान कैरोलिन ने अपने एक दोस्त को भी मैसेज किया, जिस में उस ने लिखा कि वह अपने पति को छोड़ रही है और अभी रात में ही घर से किसी होटल में चली जाएगी. उसी बहस में बात इतनी बिगड़ गई कि कैरोलिन ने बाबिस से तलाक लेने तक के लिए कह दिया.

कैरोलिन की कलाई से जुड़े फिटनैस ट्रैकर से पुलिस को पता लग गया कि उस दिन सुबह 4 बजे कैरोलिन के दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं. अचानक दिल की बदली हुई गतिविधि से पता चला कि इस से दंपति के बीच लड़ाई बढ़ गई थी. बाबिस ने इस बारे में पूछने पर बताया कि कैरोलिन ने उसे मारा, जिस से उसे भी उस पर गुस्सा आ गया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया. उस के बाद उस ने तकिए से चेहरा दबा दिया. कैरोलिन के फिटनैस ट्रैकर से ही पता चला कि 4.11 बजे उस के दिल की धड़कनें रुक गईं. उस समय वह मर चुकी थी. पुलिस जांच में पता चला कि बाबिस ने उस के मुंह में रुई भर दी थी और फिर उस का गला घोंट दिया था.

इस के बाद बाबिस ने ठंडे दिमाग से हत्या को नाटकीय रूप देने की योजना बनाई. पुलिस जांच के अनुसार, उस ने खिड़की के नीचे की कुंडी तोड़ी और अलमारी में थोड़ी तोड़फोड़ की. घर में लूटपाट का सीन बनाया. इसी तरह से उस ने अपने पालतू कुत्ते को मार कर सीढ़ी के डब्बे में लटका दिया. उसे दिखा कर ही पुलिस को बताया लुटेरों ने उसे रास्ते में ही मार डाला होगा. फिर उस ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और खुद को बिस्तर से बांध लिया. उस के बाद पड़ोसी को फोन कर लुटेरों के बारे में बताया.  इस डेटा ट्रेल के आगे बाबिस की एक नहीं चली. हालांकि उसे दबोचने में भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. कारण जब तक पुलिस को उस के आरोपी होने का प्रमाण मिला था, तब तक वह दूसरे देश में जा छिपा था. इस तरह से स्मार्टवाच ने कैरोलिन के अंतिम क्षण की जानकारी दे कर इस केस को खोलने में मदद की.

बाद में पुलिस ने बाबिस को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. उसे ग्रीक की बड़ी जेल कोरयाडालोस में रखा गया. उस की गिरफ्तारी एक बहुचर्चित घटना थी. मीडिया जगत से ले कर सोशल एक्टिविस्टों में उन की घोर निंदा हुई. सामाजिक संस्थाओं ने उसे सख्त सजा देने की मांग के साथ प्रदर्शन किए. पुलिस के सामने बाबिस को जेल से कोर्ट तक ले जाने की समस्या थी. इस की वजह यह थी कि प्रदर्शनकारी बाबिस को अपने हाथों से सजा देने की मांग कर रहे थे. रास्ते में बाबिस की जान को खतरा भी था, इसलिए भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बाबिस को बुलेटपू्रफ जैकेट पहना कर जेल ले जाया गया और जज के सामने पेश किया.

वकीलों की शुरू हुई बहस में वह जल्द ही टूट गया और उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने 17 जून, 2021 को अपनी पत्नी को गला घोंट कर मारने की बात स्वीकार कर ली. साथ ही भावुकता के साथ कहा कि वह उस दौर के 6 मिनट का समय कभी नहीं भूल सकता है. क्योंकि पत्नी का गला घोंटते वक्त उस की बेटी लिडिया का चेहरा उस के सामने ही था. हालांकि उस ने हत्या का नाटक रचने के बारे में बताया कि ऐसा उस ने इसलिए किया, क्योंकि वह जेल नहीं जाना चाहता था और अपनी बेटी की परवरिश करना चाहता था. पूछताछ में बाबिस ने अपने पालतू कुत्ते का गला घोंटने की भी बात स्वीकार ली. उस ने कहा कि उस ने ऐसा बनावटी घटना को प्रभावशाली दिखाने के लिए किया.

हैलीकौप्टर पायलट बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस के अपना जुर्म स्वीकार करने के बाद अदालत ने 17 जून, 2021 को उसे कैरोलिन क्राउच और पालतू कुत्ते की हत्या का दोषी ठहराते हुए 15 साल जेल की सजा सुनाई. खूबसूरत पत्नी की हत्या के बाद बाबिस को अब पछतावा हो रहा है, जबकि उस की बेटी लिडिया के पालनपोषण की जिम्मेदारी कैरोलिन क्राउच के ब्रिटिश पिता ने उठा ली है. हालांकि बाबिस चाहता है कि सजा काटने के बाद वही अपनी बेटी की देखभाल करे, लेकिन लिडिया के नानानानी नहीं चाहते कि वह अपनी ही मां के हत्यारे पिता की बेटी कहलाए.

 

Family Story : पत्नी की मौत की सुपारी

Family Story : दंपति के बीच शक की फांस यदि समय रहते निकाली न जाए तो वह खतरनाक नासूर बन जाती है. श्यामशरण के साथ भी ऐसा ही हुआ. वह अपनी पत्नी आरती के ऊपर बने शक को अपराध में न बदलता तो शायद…

उस दिन मई 2021 की 18 तारीख थी. रात के 8 बज रहे थे. बिधनू थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह इलाके में गश्त पर निकलने वाले थे, तभी उन के मोबाइल फोन पर काल आई. उन्होंने काल रिसीव की तो फोनकर्ता ने चौंकाने वाली सूचना दी. उस ने बताया कि करसुई पुल के पास जो हनुमान मंदिर है, वहां एक महिला की लाश पड़ी है. उस की हत्या गोली मार कर की गई है. चूंकि मामला महिला की हत्या का था, अत: थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने गश्त पर जाने के बजाय उस जगह जाना जरूरी समझा जहां महिला की लाश पड़े होने की उन्हें सूचना मिली थी. इस से पहले उन्होंने घटना की खबर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी.

फिर पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो लिए. थाना बिधनू से करसुई नहर पुल की दूरी करीब 3 किलोमीटर थी. इसलिए पुलिस को वहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा. घटनास्थल पर उस समय कुछ लोग भी खड़े थे. उन्होंने महिला की लाश का मुआयना किया. मृतक महिला की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या गोली मार कर की गई थी. उस की पीठ पर 2 तथा सीने पर एक गोली दागी गई थी. महिला जींस व कमीज पहने थी. उस की मांग में सिंदूर तथा पैरों में बिछिया थे. स्पष्ट था कि महिला विवाहित थी. शव के पास ही सड़क किनारे उस की स्कूटी लुड़की पड़ी थी, जिस का नंबर यूपी78 जीएफ 3398 था. वहीं पर मृतका का पर्स व मोबाइल फोन पड़ा था, जिसे पुलिस ने सुरक्षित कर लिया.

थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रसाद सिंह तथा डीएसपी विकास पांडेय घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद कुछ लोगों से पूछताछ की. वहां मौजूद एक युवक ने पुलिस को बताया कि वह मंदिर में हनुमानजी के दर्शन करने आया था. तभी उसे फायर की आवाज सुनाई दी. वह वहां पहुंचा तो महिला मृत पड़ी थी. उस ने 2 हत्यारों को मोटरसाइकिल से भागते हुए देखा था. दोनों हेलमेट लगाए थे. उस ने ही पुलिस को सूचना दी थी.

अब तक महिला के शव को अनेक लोग देख चुके थे, लेकिन कोई उसे पहचान न सका था. तब पुलिस ने मौके काररवाई कर शव को पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया. महिला की स्कूटी को भी थाने भिजवा दी. घटनास्थल से मृत महिला का पर्स व मोबाइल फोन बरामद हुआ था. इस मोबाइल फोन को थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने खंगाला तो उस में उस के पिता का नंबर सेव था. थानाप्रभारी ने उस नंबर पर बात की तो पता चला कि वह नंबर बिरला नगर ग्वालियर के रहने वाले अनिल कुमार शर्मा का है. उन्होंने अनिल से पूछा कि जिस मोबाइल नंबर से वह बात कर रहे हैं, वह किस का है?

‘‘यह नंबर मेरी बेटी आरती शर्मा का है. लेकिन आप कौन है? मेरी बेटी का मोबाइल फोन आप के पास कैसे आया?’’ अनिल शर्मा ने घबराते हुए पूछा.

‘‘देखो शर्माजी, मैं कानपुर नगर के थाना बिधनू से इंसपेक्टर विनोद कुमार सिंह बोल रहा हूं. एक महिला के शव के पास से मुझे यह मोबाइल फोन मिला था. आप जल्दी से थाना बिधनू आ जाइए. शव की शिनाख्त भी हो सकेगी.’’

19 मई की सुबह 8 बजे अनिल कुमार शर्मा अपने साढू मनोज के साथ थाना विधनू पहुंच गए. इस के बाद थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह उन्हें पोस्टमार्टम हाउस ले कर आए. यहां महिला की लाश देख कर अनिल शर्मा फफक कर रो पड़े. उन्होंने बताया कि लाश उन की बेटी आरती की है. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने अनिल कुमार शर्मा को धैर्य बंधाया और फिर पूछताछ की. अनिल ने बताया कि उन्होंने कई साल पहले आरती की शादी हमीरपुर जिले के भरूवा सुमेरपुर कस्बा निवासी श्यामशरण शर्मा के साथ की थी. लेकिन दामाद और बेटी में पटरी नहीं खाती थी सो दोनों के बीच अकसर झगड़ा होता था. श्यामशरण को शक था कि आरती का किसी के साथ चक्कर चल रहा है. इसी बात को ले कर वह आरती को प्रताडि़त करता था.

अनबन होने पर आरती मायके में रहने लगी थी. दिसंबर 2020 में मैं ने दोनों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया था. लेकिन असफल रहा. समझौते के दौरान ही दोनों झगड़ा करने लगे थे. गुस्से में श्यामशरण ने आरती का सिर फोड़ दिया था. लोकलाज के कारण हम ने दामाद के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई थी. इस झगड़े के बाद आरती कानपुर के नौबस्ता थाना अंतर्गत सागरपुरी (गल्लामंडी) में किराए का मकान ले कर रहने लगी थी. जिस मकान में वह रहती थी, उसी में उस ने आइसक्रीम फैक्ट्री शुरू कर दी थी. शादी समारोह में आइसक्रीम की डिमांड खूब हो रही थी.

आरती पति से अलग जरूर रहती थी, लेकिन श्याम शरण उस पर निगरानी रखता था. फोन पर वह उसे धमकाता भी था. सर, मेरी बेटी आरती की हत्या उस के पति श्यामशरण तथा जेठ रामशरण ने की है. आप मेरी रिपोर्ट दर्ज कर उन दोनों को गिरफ्तार करें. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने अनिल कुमार शर्मा की तरफ से भादंवि धारा 302 आईपीसी के तहत श्यामशरण शर्मा व रामशरण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच में जुट गए. इधर महिला उद्यमी आरती हत्याकांड की खबर अखबारों में छपी तो आईजी (कानपुर जोन) मोहित अग्रवाल तथा एडीजी भानु भास्कर ने मामले को गंभीरता से लिया और घटनास्थल का निरीक्षण कर मृतका के पिता अनिल शर्मा से जानकारी हासिल की.

इस के बाद उन्होंने एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रसाद की देखरेख में पुलिस टीम गठित कर दी. खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपए का पुरस्कार भी घोषित कर दिया. गठित पुलिस टीम ने 3 बिंदुओं पर जांच शुरू की. पहली अवैध संबंधों की, दूसरी पति से अनबन तथा तीसरी व्यापारिक प्रतिस्पर्धा. टीम ने सब से पहले आरती शर्मा के पति श्यामशरण तथा जेठ रामशरण को भरुआ सुमेरपुर कस्बा में स्थित उन के घर से उठाया फिर दोनों को बिधनू थाने ला कर पूछताछ की. लेकिन दोनों ने जुबान नहीं खोली. पुलिस टीम ने आरती शर्मा के मोबाइल फोन को खंगाला तो उस में एक ऐसा वीडियो मिला, जिस में वह दोस्तों के साथ ड्रिंक कर रही थी और अश्लील हंसीमजाक कर रही थी.

टीम को समझते देर नहीं लगी कि आरती रंगीनमिजाज महिला थी. इसी मोबाइल में एक ऐसा नंबर भी था, जिस पर आरती की घटना से पहले बात हुई थी. इस नंबर को खंगाला गया तो पता चला कि यह नंबर प्रतापगढ़ के भौलपुर गांव निवासी जितेंद्र का है. पुलिस टीम ने जितेंद्र को उस के गांव से हिरासत में ले लिया और बिधनू थाने लाई. यहां उस से कड़ाई से पूछताछ हुई तो उस ने बताया कि उस का मोबाइल खो गया था. किसी ने गलत इस्तेमाल किया है. पुलिस को भी लगा कि जितेंद्र निर्दोष है, अत: उसे थाने से जाने दिया. पुलिस टीम को पक्का यकीन था कि आरती की हत्या का रहस्य उस के पति के पेट में ही छिपा है. अत: टीम ने श्यामशरण शर्मा से कड़ाई से पूछताछ की. पुलिस सख्ती से श्यामशरण टूट गया.

उस ने बताया कि आरती की हत्या उस ने शूटरों से कराई थी. मौत का सौदा उस ने 3 लाख 20 हजार रुपए में किया था, जिस में से 1 लाख 40 हजार शूटरों के खाते में ट्रांसफर कर दिया था.  श्यामशरण ने शूटरों के नाम शाहरुख खान निवासी इमलिया बाड़ा कस्बा भरुआ सुमेरपुर तथा नईम उर्फ भोलू निवासी ईदगाह कस्बा भरुआ सुमेरपुर जिला हमीरपुर बताया. 20 मई, 2021 को पुलिस टीम ने भरुआ सुमेरपुर थाना पुलिस की मदद से शाहरुख खान के घर पर छापा मारा. लेकिन वह घर से फरार था. दबाव बनाने के लिए पुलिस टीम ने उस की पत्नी रूबी, मां परवीन खातून तथा बहन रुखसार को हिरासत में ले लिया.

इस के बाद पुलिस ने ईदगाह निवासी नईम उर्फ भोलू के घर छापा मारा. वह भी घर से फरार था. पुलिस ने भोलू की मां शमीम, बहन रोजी तथा एक अन्य को हिरासत में ले लिया. सभी को थाना बिधनू लाया गया. दबाव बना कर पुलिस अधिकारियों के समक्ष उन से पूछताछ की गई और शाहरुख तथा नईम के ठिकानों की जानकारी जुटाई गई. पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. 23 मई को भरुआ सुमेरपुर थानाप्रभारी वी.पी. सिंह को एक खबरी के जरिए पता चला कि शाहरुख खान अपनी पत्नी रूबी से मिलने घर आया है. इस पर उन्होंने दबिश दे कर शाहरुख को उस के घर से दबोच लिया और थाने ले आए. इस के बाद उन्होंने उसे बिधनू पुलिस को सौंप दिया.

पुलिस टीम ने शाहरुख से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. शाहरुख ने बताया कि उसे 90 हजार रुपया मिला है. नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू की मार्फत वह वारदात में शामिल हुआ था. उस ने बताया कि आरती की हत्या में कबरई निवासी विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत भी शामिल हैं. ये दोनों प्रतापगढ़ के राजा शुक्ला गैंग के शूटर हैं. पुलिस ने शाहरुख खान की निशानदेही पर .315 बोर का तमंचा भी बरामद कर लिया, जिस से आरती पर फायर किया गया था. आरती हत्याकांड का खुलासा हो गया था. पुलिस ने अब इस मामले में श्यामशरण शर्मा, शाहरुख खान, नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू, विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत को नामजद कर लिया था.

श्यामशरण व शाहरुख खान तो पुलिस गिरफ्त में आ गए थे. लेकिन शेष आरोपी फरार थे. उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल फैलाया तो 25 मई को नईम उर्फ भोलू भी पकड़ में आ गया. नईम उर्फ भोलू ने भी अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसे 50 हजार रुपए मिले थे. विकास हजारिया और राहुल राजपूत को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी. रामशरण निर्दोष था. अत: उसे थाने से जाने दिया गया. पुलिस द्वारा की गई जांच, आरोपियों के बयानों तथा मृतका के पति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आरती हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस का विवरण इस प्रकार है.

मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है ग्वालियर. इसी ग्वालियर शहर के बिरला नगर मोहल्ले में अनिल कुमार शर्मा अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी आशा के अलावा 3 बेटियां आरती, अंजू, भारती तथा एक बेटा आदित्य था. अनिल कुमार शर्मा मेहनतकश इंसान थे. वह प्राइवेट नौकरी करते थे. नौकरी में मिलने वाले वेतन से वह परिवार का भरणपोषण करते थे. अनिल शर्मा की बेटी आरती अपनी बहनों में सब से बड़ी थी. वह अपनी अन्य बहनों से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी. उस ने वीरांगना लक्ष्मीबाई कालेज से पास कर ली थी और उसी कालेज से बीए की पढ़ाई कर रही थी. आरती स्वच्छंद थी. उस का स्वभाव भी चंचल था. इसलिए कालेज आतेजाते कई युवक उस के दोस्त बन गए थे. उन के साथ वह मौजमस्ती करती थी.

अनिल शर्मा को जब पता चला कि बेटी गलत राह पर जा रही है तो बदनामी से बचने के लिए उन्होंने उस का ब्याह जल्द करने का फैसला किया. उन्होंने आरती के योग्य वर की खोज की तो उन्हें श्यामशरण पसंद आ गया. श्यामशरण शर्मा, हमीरपुर जनपद के कस्बा भरुआ सुमेरपुर का रहने वाला था.  बड़े भाई रामशरण शर्मा का विवाह हो चुका था. दोनों भाई मिल कर व्यापार करते थे और साथ रहते थे. अनिल शर्मा ने जब श्यामशरण को देखा तो उन्होंने उसे अपनी बेटी आरती के लिए पसंद कर लिया. इस के बाद उन्होंने 20 फरवरी, 2004 को आरती का विवाह श्यामशरण के साथ कर दिया. शादी के बाद श्यामशरण और आरती ने हंसीखुशी से जीवन की शुरुआत की. देखतेदेखते 5 साल कब बीत गए, पता ही न चला. इन 5 सालों में आरती ने बेटी संस्कृति तथा बेटे सुमित को जन्म दिया.

आरती को अपनी खूबसूरती पर घमंड था, जिस से वह पूरे घर को अपनी अंगुलियों पर नचाती थी. कुछ समय तक तो आरती की ज्यादती उस के जेठजेठानी ने सहन की. उस के बाद विद्रोह के स्वर उभरने लगे. आरती को संयुक्त परिवार में रहना वैसे भी पसंद नहीं था. उस ने घर बंटवारे की मांग कर दी. कलह बढ़ी तो आरती की बात मान कर दोनों भाइयों के बीच घर, व्यापार का बंटवारा हो गया. हालांकि श्यामशरण बंटवारा नहीं चाहता था. आरती अलग रहने लगी, तो वह स्वच्छंद हो गई. उसे घर में कैद हो कर रहना पसंद नहीं था, सो वह बनसंवर कर घर से निकलती, फिर कस्बे के बाजारों में घूमती तथा होटल व रेस्टोरेंट में जाती.

श्यामशरण को पत्नी का इस तरह फिजूल में घूमनाफिरना अच्छा नहीं लगा था. उस ने आरती को फटकारा और बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने को कहा. लेकिन आरती ने पति की बात पर ध्यान नहीं दिया. वह पति पर तरहतरह की फरमाइशें पूरी करने का दबाव बनाती और लड़तीझगड़ती. श्यामशरण पत्नी के ऊलजुलूल खर्चों से परेशान था. उसे घर का खर्च चलाने और आरती की फरमाइशें पूरी करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही थी. 3 बच्चे पैदा करने के बाद श्यामशरण पत्नी की शारीरिक जरूरतों को भी अनदेखा करने लगा. जबकि आरती का यौवन खिल उठा था और वह हर रात पति का साथ चाहती थी. श्यामशरण कमाई के चक्कर में इस कदर व्यस्त हो गया था कि उसे न अपना होश रहा और न आरती का.

आजाद पंछी की तरह खुले आकाश में विचरण करने वाली आरती को अब पति का घर जेल जैसा लगने लगा था. पति की उदासीनता की वजह से चांदनी रातें भी उसे अमावस की काली रातों जैसी लगने लगीं. धीरेधीरे उन दोनों के बीच की दूरियां बढ़ती गईं. तब वह शारीरिक जरूरतों के लिए इधरउधर नजरें दौड़ाने लगी. परिणामस्वरूप जल्द ही उस की कस्बे के कई युवकों से यारी हो गई. उन के साथ वह गुलछर्रे उड़ाने लगी. श्यामशरण शर्मा को आरती की इस करतूत का पता चला तो उस ने शराब पी कर आरती से मारपीट तो की ही, उसे रंडी और वेश्या तक कह डाला. लेकिन इतनी मार खाने के बाद भी आरती कहती रही कि यह सब झूठ है. उसे गलतफहमी हुई है. जबकि श्यामशरण ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया.

अब आए दिन उन दोनों का झगड़ा मोहल्ले वालों के लिए मुफ्त का तमाशा बन गया था. रोजरोज की पिटाई से आहत हो कर आरती एक दिन अपने दोनों बच्चों को ले कर मायके ग्वालियर आ गई. कुछ माह बाद श्यामशरण आरती को लेने ग्वालियर आया. लेकिन आरती ने उस के साथ जाने को साफ मना कर दिया. धीरेधीरे कई साल बीत गए. लेकिन आरती पति के घर नहीं लौटी. श्यामशरण को बच्चों से मोह था. कभीकभी वह बच्चों से मिलने जाता, लेकिन आरती बच्चों से नहीं मिलने देती. अनिल शर्मा चाहते थे कि दोनों में सुलह हो जाए और आरती अपने बच्चों के साथ ससुराल चली जाए. वह सोचते थे कि आखिर जवान बेटी कब तक पिता की छाती पर मूंग दलेगी.

अनिल कुमार शर्मा ने इस दिशा में प्रयास शुरू किया तो दिसंबर 2020 में आरती और श्यामशरण आपसी सुलह को राजी हो गए. आरती अपने पिता के साथ ससुराल पहुंची. वहां दोनों के बीच बात शुरू हुई. आरोपप्रत्यारोप के बीच दोनों की भौंहें टेढ़ी हो गईं. गुस्से में श्यामशरण ने बट्टे से आरती के सिर पर प्रहार कर दिया, जिस से उस का सिर फट गया और खून बहने लगा. आरती अपने हाथ में खून ले कर गुस्से से बोली, ‘‘मिस्टर शर्मा, तुम्हें इस खून की कीमत चुकानी पड़ेगी. खून का बदला खून से न लिया तो आरती मेरा नाम नहीं.’’

इस के बाद वह पिता के साथ घर चली गई. उस के फटे सिर में 10 टांके लगाने पड़े थे. लेकिन उस के पिता ने दामाद के खिलाफ रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई थी. आरती अब सोचने लगी थी कि उसे बच्चों के भविष्य के लिए अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा. इसी उद्देश्य से वह कानपुर शहर आ गई. फिर एक रिश्तेदार के माध्यम से नौबस्ता थाने के सागरपुरी (गल्लामंडी) में एक मकान किराए पर लिया और रहने लगी. इस के बाद उस ने इसी मकान में आइसक्रीम फैक्ट्री शुरू कर दी. उस की मेहनत और लगन रंग लाई और उस का धंधा अच्छा चलने लगा. उस की आइसक्रीम की बुकिंग शादीविवाह व छोटेमोटे अन्य समारोह के लिए होने लगी. जल्दी ही आरती की पहचान उद्यमी महिला के रूप में हो गई.

आरती हंसमुख थी. सामने वाले को प्रभावित करने में वह माहिर थी. सजधज कर भी वह रहती थी. होंठों पर लिपस्टिक और आंखों का कजरा, उस की खूबसूरती में चारचांद लगाते थे. वह रंगीनमिजाज भी थी, जिस से कई रंगीनमिजाज युवक उस के दोस्त बन गए थे. उन के साथ वह होटल, क्लब जाती, शराब पीती और मौजमस्ती करती. अब उसे रोकनेटोकने वाला कोई न था. इधर श्यामशरण को जब से आरती ने बदला लेने की धमकी दी थी, तब से उस की रातों की नींद हराम हो गई थी. उसे लगने लगा था कि यदि आरती जीवित रही तो वह उस की हत्या करा देगी. लिहाजा श्यामशरण पत्नी आरती की हत्या कराने का फैसला ले लिया. इस के लिए उस ने भरुआ सुमेरपुर कस्बा के ईदगाह कालोनी निवासी कुख्यात अपराधी नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू से संपर्क साधा और 3 लाख 20 हजार रुपए में आरती की हत्या की सुपारी दी.

नईम ने अपने साथी शाहरुख तथा प्रतापगढ़ के राजा शुक्ला गैंग के शूटर विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत को शामिल किया. विकास कबरई (बांदा) का रहने वाला था, जबकि राहुल राजपूत प्रतापगढ़ का. 14 मई, 2021 को ईद वाले दिन नईम उर्फ रिंकू के घर सभी बदमाश इकट्ठे हुए और श्यामशरण शर्मा की मौजूदगी में आरती की हत्या की योजना बनी. श्यामशरण ने शूटरों को आरती का फोटो तथा मोबाइल नंबर दिया. इस के बाद शाहरुख ने फरजी आईडी पर एक सिम ऐक्टीवेट कराया और उस ने आरती से बात की. उस ने आइसक्रीम की क्वालिटी तथा रेट पूछे. उस ने कहा कि 20 मई को उस के यहां शादी है, उस के लिए 2-3 तरह की आइसक्रीम चाहिए. इस पर आरती ने जवाब दिया कि सभी क्वालिटी की आइसक्रीम आप को उचित रेट पर मिल जाएगी.

18 मई, 2021 की शाम 7 बजे नौबस्ता समाधि पुलिया के पास चारों शूटर इकट्ठे हुए. शूटर विकास हजारिया और राहुल राजपूत कार से आए थे. जबकि शाहरुख और नईम मोटरसाइकिल से. चारों ने मिल कर एक बार फिर से विचारविमर्श किया. फिर शाहरुख और नईम करसुई पुल की ओर रवाना हो लिए. विकास हजारिया ने लगभग साढ़े 7 बजे उसी फरजी सिम से आरती से बात की और करसुई पुल के पास आइसक्रीम का और्डर और एडवांस देने को बुलाया. आरती ने सोचा कि कोई बड़ी पार्टी है. अत: वह अपनी स्कूटी पर सवार हो कर करसुई पुल के पास पहुंच गई.

अब तक वहां चारों शूटर पहुंच चुके थे. नईम उर्फ भोलू आरती से बातचीत करने लगा. तभी पीछे से शूटर विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत ने आरती पर फायर झोंक दिए. दोनों गोलियां पीठ में लगीं. तीसरा फायर शाहरुख ने सामने से किया. गोली आरती के सीने में लगी. आरती वहीं गिर पड़ी और दम तोड़ दिया. हत्या करने के बाद चारों शूटर फरार हो गए. कुछ देर बाद एक युवक ने थाना बिधनू पुलिस को सूचना दी तो थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह मौके पर आ गए. 26 मई, 2021 को थाना बिधनू पुलिस ने आरोपी श्यामशरण शर्मा, शाहरुख तथा नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक 2 अन्य आरोपी विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत फरार थे. पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी. Family Story

—कथा पुलिस सूत्रोंं पर आधारित

 

Crime Story in Hindi : ऊधम सिंह नगर में धंधा पुराना लेकिन तरीके नए

Crime Story in Hindi : देशदुनिया की शायद ही कोई औरत हो, जो अपनी इच्छा से देहव्यापार को पेशा बनाना चाहती है. किसी भी स्त्री की देह वह बेशकीमती दौलत है, जिस का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, फिर भी इस की बोली लगाने वाले बाजारों की कमी नहीं है. ऐसा ही उत्तराखंड के काशीपुर में एक बाजार है, जो राजारजवाड़ों के जमाने से काफी विख्यात रहा है.

सदियों पहले उस दौर की बात है, जब देश में राजेरजवाड़ों का अपना साम्राज्य हुआ करता था. समूचे इलाके में उन की तूती बोलती थी. उन के मनोरंजन के 2 ही मुख्य साधन हुआ करते थे. एक, जंगली जानवरों का शिकार करना और दूसरा, सुंदर स्त्री की लुभावनी अदाओं के नाचगाने का आनंद उठाने के अलावा यौनाचार में लिप्त हो जाना. ऐसा ही कुछ आज के उत्तराखंड स्थित ऊधमसिंह नगर के काशीपुर में था. तब काशीपुर के कई मोहल्ले तो इस के लिए दूरदूर तक विख्यात थे. उस मोहल्ले की मुख्य सड़क के दोनों ओर वेश्याएं रहती थीं.

देह व्यापार में लिप्त ऐसी औरतें अब वैश्या कहलाना पसंद नहीं करतीं, उन्हें सैक्स वर्कर कहा जाता है. यहां पर कई छोटेबड़े नगरों के लोग अपनी कामपिपासा शांत करने आते थे. बाद में ऐसी औरतों की संख्या बढ़ने पर उन के धंधे को जबरन बंद करवाना पड़ा. सामाजिक दबाव और प्रशासन की सख्ती के आगे इन वेश्याओं को नगर छोड़ कर जाने पर मजबूर होना पड़ा था. उस के बाद उन्होंने मेरठ शहर के लिए पलायन कर लिया था. उन्हीं में कुछ वेश्याएं ऐसी भी थीं, जिन्होंने नगर के आसपास रह कर गुप्तरूप से चोरीछिपे धंधे में लिप्त रहीं. वही सिलसिला बदस्तूर आज भी जारी है.

पुलिस समयसमय पर उन के ठिकानों पर छापामारी करती रहती है. उन्हें हिरासत में ले कर नारी सुधार गृह या जेल भेज दिया जाता है. बात 30 जुलाई की है. पुलिस को जानकारी मिली थी कि काशीपुर के ढकिया गुलाबो मोहल्ले का एक दोमंजिला मकान काफी समय से देह व्यापार का ठिकाना बना हुआ है. इस जानकारी को ध्यान में रखते हुए सीओ अक्षय प्रह्लाद कोंडे के निर्देश पर एक पुलिस टीम गठित की गई. टीम में महिला इंसपेक्टर धना देवी, कोतवाली एसएसआई देवेंद्र गौरव, टांडा चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल भूपेंद्र जीना, देवानंद, कांस्टेबल गिरीश कांडपाल, दीपक, मुकेश कुमार शामिल थे.

पुलिस टीम ने काफी सावधानी से छापेमारी को अंजाम दिया. सभी पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे. छापेमारी में उन्हें बताए गए ठिकाने से 4 महिलाएं और 2 पुरुषों को धर दबोचने में सफलता मिली. वे मकान के अलगअलग कमरों में आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए थे. देह व्यापार मामले में आरोपी को रंगेहाथों पकड़ना जरूरी होता है. वरना वे संदेह के आधार पर आसानी से छूट जाते हैं. इस छापेमारी में देहव्यापार की सरगना फरार हो गई. पकड़े गए आरोपियों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया. वैसे काशीपुर में इस तरह की छापेमारी पहली बार नहीं हुई थी. पहले भी कई बार इलाके में देह व्यापार के ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी थी. देह के गंदे धंधे में लगे लोग हमेशा अड्डा बदलते रहते हैं.

देह व्यापार के धंधे में आधुनिकता और बदलाव कई रूपों में सामने आया है, जिस का एक मामला हल्द्वानी पुलिस के सामने 3 अगस्त को आया. पुलिस को सूचना मिली कि हाइडिल गेट स्थित स्पा सेंटर में काफी समय से देह व्यापार का खुला खेल चल रहा है. इस सूचना के आधार पर हल्द्वानी सीओ शांतनु पराशर ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम को साथ ले कर स्पा सेंटर पर छापा मारा. छापेमारी के दौरान एक युवक को युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया. स्पा सेंटर में पुलिस की रेड पड़ते ही हलचल मच गई. सेंटर की संचालिका दिल्ली निवासी सुमन और स्वाति वर्मा फरार हो गईं. जबकि सेंटर के मैनेजर पश्चिम बंगाल के वरुणपारा वारूईपुरा, निवासी नादिया पकड़े गए.

छापेमारी के दौरान स्पा सेंटर से देह व्यापार से संबंधित कई आपत्तिजनक वस्तुएं भी बरामद हुईं. यहां तक कि उस के बेसमेंट से 9 लड़कियां निकाली गईं. उन में 2 उत्तर प्रदेश, एक मध्य प्रदेश, एक मणिपुर, 2 पश्चिम बंगाल और 3 हरियाणा की थीं. पकड़ा गया युवक आशीष उनियाल काठगोदाम का रहने वाला निकला. वह एक निजी कंपनी में काम करता था. स्पा सेंटर में सुनियोजित तरीके से देह व्यापार का धंधा चलाया जा रहा था. धंधेबाजों ने बड़े पैमाने पर मसाज की आड़ में यौनाचार के सारे इंतजाम कर रखे थे. वहां से पकड़ी गई सभी युवतियों के रहने की व्यवस्था सेंटर के बेसमेंट में की गई थी. उन के खानेपीने की पूरी सुविधाएं वहीं की गई थीं.

ग्राहक को स्पा सेंटर आने से पहले ही वाट्सऐप पर युवती की फोटो दिखा कर उस का सौदा कर लिया जाता था. ग्राहक को युवतियों के टाइम के हिसाब से अपौइंटमेंट तय किया जाता था. स्पा सेंटर आते ही ग्राहक को रिसैप्शन पर बाकायदा बिल चुकाना होता था, जो स्पा से संबंधित होते थे. उस के बाद उसे कमरे में बने केबिन में जाने की इजाजत मिलती थी. अपने फिक्स टाइम पर ग्राहक स्पा सेंटर पहुंच जाता था. उन्हें स्पीकर पर आवाज लगाई जाती थी. उस के साथ फिक्स युवती को इस की सूचना पहले होती थी और कुछ समय में ही अपने ग्राहक के पास चली जाती थी. एक युवती को एक दिन में 3 सर्विस देनी होती थी.

सेंटर में आने वाले ग्राहकों का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं था. जबकि उन की बिलिंग होती थी. उसे किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जाता था. फिर भी पुलिस ने जांच में पता लगाया कि सेंटर को प्रतिदिन 50 हजार की कमाई होती थी. स्पा सेंटर से बरामद सभी युवतियों ने स्वीकार किया कि वे किसी न किसी मजबूरी की वजह से मसाज की आड़ में देह बेचने का काम करती हैं. इसी के साथ उन्होंने सेंटर के मालिक पर आरोप भी लगाया कि उन्हें बहुत कम पैसा मिलने के कारण मजबूरी के चलते बेसमेंट में रहना होता है, जहां काफी मुश्किल होती है. पुलिस पूछताछ के बाद सीओ के निर्देश पर सभी युवतियों को मुखानी स्थित वन स्टौप सेंटर में भेज दिया गया. उसी दौरान 7 अगस्त, 2021 को पुलिस को पता चला कि स्पा सेंटर की आड़ में कई जगहों पर देह व्यापार चल रहा है.

इस सूचना के आधार पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट प्रभारी ने सीओ अमित कुमार के साथ मीटिंग कर इस अपराध को जड़ से मिटाने का निर्णय लिया. इस की जानकारी एसएसपी दलीप सिंह को दे कर अनुमति मांगी गई. अनुमति मिलते ही अमित कुमार ने ठोस कदम उठाए. उस योजना को अंजाम देने के लिए पुलिस ने नगर में चल रहे स्पा सेंटरों पर मुखबिरों का जाल बिछा दिया. पुलिस को जहां से भी जानकारी मिलती, वहां तुरंत छापेमारी की जाने लगी. इस सिलसिले में मैट्रोपोलिस सिटी बिग बाजार स्थित सेवेन स्काई स्पा सेंटर में कुछ संदिग्ध युवकयुवतियां दबोचे गए. एक कमरे के केबिन से 2 युवकों को 3 युवतियों के साथ, जबकि दूसरे कमरे में बने केबिनों में 2-2 युवकयुवतियां मसाज में तल्लीन पकड़े जाने पर दबोचा गया. सभी अर्धनग्नावस्था में थे.

सेंटर की गहन छानबीन में प्रयोग किए गए और नए महंगे कंडोम बरामद हुए. रिसैप्शन काउंटर से भी कंडोम बरामद किए गए. कस्टमर एंट्री रजिस्टर से पुलिस को ग्राहकों के एंट्री की तारीख और समय का पता चला. सेंटर की संचालिका सोनू थी. उस ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि स्पा सेंटर का मालिक हरमिंदर सिंह हैं, उन के निर्देश पर ही सेंटर में सब कुछ होता रहा है. सेंटर से बरामद 5 युवतियों ने स्वीकार किया कि उन्हें एक ग्राहक के साथ हमबिस्तर होने पर 500 रुपए मिलते थे. इस मामले को पंतनगर थाने में दर्ज किया गया. गिरफ्तार युवकयुवतियों और सेंटर के मालिक हरमिंदर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट लिख ली गई. बिलासपुर जिला रामपुर निवासी हरमिंदर सिंह फरार था.

पुलिस उस की तलाश में लगा दी गई थी. इसी तरह ऊधमसिंह नगर में चल रहे स्पा सेंटर पर भी 13 अगस्त को छापेमारी की गई. उस के बाद वहां बसंती आर्या ने सभी स्पा सेंटरों व होटल मालिकों को आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए. उन से कहा गया कि सभी ठहरने वाले ग्राहकों के आईडी की फोटो कौपी रखें और उन के नाम व पते रिसैप्शन सेंटर पर जरूर दर्ज करें. साथ ही होटल में सभी जगह पर सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में रखने अनिवार्य कर दिए गए. कहते हैं, जहां चाह वहां राह, तो इस धंधे को स्मार्टफोन से नई राह मिल गई है. देह व्यापार में लिप्त काशीपुर की सैक्स वर्करों ने स्मार्टफोन को ग्राहक तलाशने का जरिया बना लिया है. पुरुष भी धंधेबाज औरतों की तलाश आसानी से करने लगे हैं.

देह व्यापार में लिप्त महिलाएं मोबाइल पर चंद अश्लील बातें कर अपने ग्राहकों को फंसा लेती हैं. पैसे का लेनदेन भी उसी के जरिए हो जाता है. वाट्सऐप और वीडियो कालिंग तो इस धंधे के लिए वरदान साबित हो रहा है. इस पर वे अपनी अश्लील फोटो या वीडियो भेज कर उन को लुभा लेती हैं. फिर वह ग्राहक की सुविधानुसार कुछ समय के लिए किराए पर ले रखे कमरे पर ही उसे बुला लेती हैं या उस के बताए ठिकाने पर पहुंच जाती हैं. जो महिलाएं कल तक मंडी से जुड़ी हुई थीं, वे अब इसी तरीके से अपना धंधा चला रही हैं, यही उन की रोजीरोटी का साधन बन चुका है.

जांच में यह भी पता चला कि काशीपुर में कुछ ऐसी बस्तियां हैं, जहां पर कई औरतें अपना धंधा चला कर मोटी कमाई कर रही हैं. उन में कुछ औरतें अधेड़ उम्र की हैं, वे  नई लड़कियों के लिए ग्राहक ढूंढने के साथसाथ उन की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाती हैं. ऐसी औरतें ही किराए का मकान या कमरा ले कर रखती हैं. उन में वह खुद रहती हैं. किसी ग्राहक की मांग आते ही वह उन से सौदा तय कर आगे के काम में लग जाती हैं. उन्हें थोड़े समय के लिए अपना घर उपलब्ध करवा देती हैं. ग्राहक को 15 मिनट से ले कर आधे घंटे तक का समय मिलता है. इसी समय के लिए 300 से 500 रुपए वसूले जाते हैं.  इस आय में आधा हिस्सा लड़की को मिलता है. कभीकभी लड़की को ज्यादा भी मिलता है.

यह ग्राहक की संतुष्टि और उस से मिलने वाले अतिरिक्त बख्शीश पर निर्भर करता है. इस गिरोह में घरेलू किस्म की औरतें, स्टूडेंट या पति से प्रताडि़त या उपेक्षित सफेदपोश संभ्रांत किस्म की महिलाएं शामिल होती हैं, जिन के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता कि उस पर भी गंदे धंधे के दाग लगे हुए हैं. उन की पब्लिसिटी पोर्न वेबसाइटों के जरिए भी होती रहती है. इस तरह के देह व्यापार का धंधा काशीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में अपने पैर पसारता जा रहा है. बताते हैं कि यहां लड़कियां तस्करी के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती हैं, जिन में अधिकतर मजबूर महिलाएं और युवतियां ही होती हैं.

इसी साल जुलाई माह की भी ऐसी एक घटना 21 तारीख को रुद्रपुर में सामने आई. एंटी ह्यूमन टै्रफिकिंग यूनिट के प्रभारी को ट्रांजिट कैंप गंगापुर रोड के पास मोदी मैदान में खड़ी एक संदिग्ध कार के बारे में सूचना मिली. मुखबिर ने एक कार यूके06एए3844 में कुछ पुरुष और महिलाओं के द्वारा अश्लील हरकतें करने की जानकारी दी. इस सूचना पर काररवाई करते हुए इंसपेक्टर बसंती आर्या अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. अपनी टीम के साथ चारों तरफ से कार को घेरते हुए उस कार से 3 लोगों को पकड़ा गया. उन में एक आदमी और 2 औरतें थीं. जब वे पकड़े गए, तब उन की हरकतें बेहद आपत्तिजनक थीं. तीनों को अपनी कस्टडी में ले कर पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

आदमी की पहचान उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के बहेड़ी थाना के रहने वाले 29 वर्षीय भगवान दास उर्फ अर्जुन के रूप में हुई. महिला की पहचान 32 वर्षीया भारती के रूप में हुई. उस ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश में रामपुर जिले के अंतर्गत दिनकरी की रहने वाली है, लेकिन अब वह ऊधमसिंह नगर जिला में  सिडकुल ढाल ट्रांजिट कैंप में रहती है. इसी तरह से दूसरी 21 वर्षीया युवती ने अपना नाम पूजा यादव बताया. उस ने कहा कि उस का पति उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के गांव सनसडा में रहता है. तीनों से गहन पूछताछ के बाद उन की तलाशी ली गई. तलाशी में उन के पास से 2 स्मार्टफोन बरामद हुए. मोबाइलों में तमाम अश्लील फोटो, वीडियो के साथ ही अनेक अश्लील मैसेज भी भरे हुए थे.

उन्हीं मैसेज से मालूम हुआ कि ये दोनों महिलाएं एक रात के 1000 से 1500 रुपए लेकर ग्राहकों की रातें रंगीन करती थीं. उन के साथ पकड़ा गया भगवान दास का काम ग्राहक तलाशना होता था. वह उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था. बदले में 500 रुपए वसूलता था. दास ने बताया कि वह ग्राहक की जानकारी होटलों में ठहरने वालों से जुटाता था. इस के लिए अपने संपर्क में आई युवतियों को किसी एकांत जगह पर कार में बैठा कर रखता था और फिर वहीं से ग्राहकों के फोन का इंतजार करता था. जैसे ही किसी ग्राहक का फोन आता वह 10 से 15 मिनट में उस के बताए स्थान पर लड़की को पहुंचा देता था.

तीनों 21 जुलाई को ग्राहक का फोन आने का ही इंतजार कर रहे थे. उन की कोई सूचना नहीं मिल पाने के कारण वे आपस में ही हंसीमजाक करते हुए टाइमपास कर रहे थे. ऐसा करते हुए वे बीचबीच में अश्लील हरकतें भी करने लगे थे. उस दिन भगवान दास ने दोनों को 1500-1500 रुपयों में तय किया था. लेकिन जब काफी समय गुजर जाने के बाद भी उसे कोई ग्राहक नहीं आया था. पुलिस मुखबिर की निगाह उन पर गई और उन्होंने पुलिस को इस की सूचना दे दी. पूछताछ में भगवान दास ने कई मोबाइल नंबर दिए, जो देहव्यापार करने वाली महिलाओं के थे.

वे अपनी बुकिंग एक दिन पहले करवा लेती थीं. बुकिंग के आधार पर ही उन्हें होटल या किसी निजी घर पर ले जाया जाता था. उन्हें ले जाने वाला ही उन का सौदा पक्का कर देता था. औनलाइन पेमेंट आने के बाद ही बताए जगह पर पहुंचती थीं. इस मामले को थाना ट्रांजिट कैंप में दर्ज किया गया. पकड़े गए व्यक्तियों पर  सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकतें कर अनैतिक देह व्यापार करने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज की गई. उन पर आईपीसी की धारा 294/34 लगाई गईं. इसी के साथ उन्हें अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 5/7/8 के तहत काररवाई की गई. Crime Story in Hindi

love story : मीठे जहर वाली प्रेमिका को फांसी

love story : डिजिटल जमाने में कालेज के प्रेमीप्रेमिकाओं के लिए ब्रेकअप अब कोई बड़ी बात नहीं रही. इधर कालेज कैंपस छूटा, उधर सारे कसमेवादे खत्म. किंतु केरल की ग्रीष्मा और शेरोन के साथ ऐसा नहीं हो पाया. उन्होंने आपस में जो फैसला लिया, उस से एक को मौत मिली, जबकि दूसरे को फांसी की सजा. कैसे हुआ यह सब? पढ़ें बेवफाई, ब्लैकमेल और बदले की भावना से सराबोर रोंगटे खड़े कर देने वाली मर्डर मिस्ट्री में 24 वर्षीय प्रेमिका का किलर प्लान…

नए साल 2025 का तीसरा शुक्रवार था. उस रोज की तारीख 17 जनवरी शेरोन राज और ग्रीष्मा के फेमिली वालों के लिए खास थी. तिरुवनंतपुरम जिले के नय्याट्टिनकारा के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में बहुचर्चित शेरोन हत्याकांड का मुकदमा अंतिम चरण में पहुंच चुका था. इस मामले में महज 24 साल की युवती ग्रीष्मा और उस के चाचा निर्मल कुमारन पर गंभीर आरोप लगे हुए थे. कोर्टरूम सुनवाई शुरू होने से पहले ही खचाखच भर चुका था. दोनों पक्षों के वकील, परिवार, रिश्तेदार, गवाह, दोस्तों के अलावा मीडियाकर्मी और दूसरे लोग भी मौजूद थे.

लोगों के आपस में बातें करने का शोरगुल अचानक तब बंद हो गया, जब पेशकार ने मलयालम भाषा में घोषणा शुरू की, ”अदालत का कार्य शुरू होने वाला है. आप सभी शांत हो जाएं. अपनेअपने मोबाइल फोन स्विच औफ कर दें. किसी भी तरह का इलैक्ट्रानिक डिवाइस कैमरा, रिकौर्डर, हेडफोन, इयरबोट बड या इयरफोन आदि अपने पास नहीं रखें. अपनी सीट पर बैठ जाएं… कुछ समय में ही न्यायाधीश महोदय पधारने वाले हैं. अदालत के अनुशासन और नियमों का पालन करें.’’

इसी घोषणा को अदालत में मौजूद एक क्लर्क ने अंगरेजी में दोहराते हुए हाथ के इशारे से सभी को बैठने का इशारा किया. साथ ही उस ने मौजूद पुलिसकर्मी से भीड़ संभालने का आग्रह किया.

शेरोन के वकील अदालत में पहले हुई सुनवाई के दौरान उस की प्रेमिका ग्रीष्मा पर हत्या का मामला सबित करने के कई सबूत पेश कर चुके थे. इस कारण उस रोज की सुनवाई काफी अहम थी. उस दिन फैसला आने की उम्मीद थी. कुछ सेकेंड में ही सेशन कोर्ट के न्यायाधीश ए.एम. बशीर का आगमन हो गया. कोर्टरूम में बैठे सभी लोग खड़े हो गए. कुरसी पर बैठने के साथ ही उन्होंने हाथ से सभी को बैठने का इशारा किया. पेशकार ने एक बार फिर कहा, ”न्यायाधीश महोदय के आदेशानुसार आज के मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाती है, जो मृतक शेरोन राज के परिजन बनाम ग्रीष्मा की है. शेरोन की मृत्यु के आरोपी ग्रीष्मा, उस के चाचा और मम्मी हैं. उन के वकील अपनी दलील पेश करने को तैयार हो जाएं.’’

”आज के मामले के मुख्य आरोपी ग्रीष्मा को कठघरे में बुलाया जाए!’’ जज साहब फाइलें पलटते हुए बोले.

वकीलों ने दिए अपनेअपने तर्क

24 वर्षीय ग्रीष्मा के वकील शालीनता के साथ अपनी सीट से उठे. न्यायाधीश महोदय को अदब के साथ थोड़ा झुक कर अभिवादन किया, फिर अपने मुवक्किल का सधे हुए शब्दों में संक्षिप्त परिचय दिया, ”जनाब, मेरी मुवक्किल ग्रीष्मा एक शिक्षित युवती है. उन्होंने अंगरेजी लिटरेचर से पढ़ाई की है. काफी समझदार हैं. दुनियादारी की समझ है. उन का किसी भी तरह का पुराना आपराधिक रिकौर्ड नहीं रहा है.

”वह अपने मम्मीपापा की इकलौती संतान हैं. उन पर लगाई गई आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 364 (हत्या करने के इरादे से अपहरण), 328 (जान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से जहर देना) और 203 (गलत जानकारी दे कर न्याय में बाधा डालना) के तहत दर्ज किए गए मामले बेबुनियाद हैं. इसलिए जनाब, आप से विनती है कि एक बार फिर से उस पर गौर किया जाए.’’

वकील की इस भावनात्मक अपील के बाद ग्रीष्मा को कठघरे में बुलाने की आवाज लगाई गई, ”मुलजिम ग्रीष्मा कठघरे में हाजिर हो!’’

ग्रीष्मा धीमे कदमों से चल कर कठघरे में आई. उसे गीता पर हाथ रख कर सच बोलने की औपचारिक कसम खिलाई गई. जज साहब सरकारी वकील की ओर मुखातिब हो कर बोले, ”आप को मुलजिम ग्रीष्मा के खिलाफ दिए गए सबूतों की पुष्टि के लिए कुछ पूछना है तो उन से सवाल पूछ सकते हैं.’’

”जी जनाब!’’ यह कह कर मृतक शेरोन राज के फेमिली वालों को मुहैय्या करवाए गए सरकारी वकील वी.एस. विनीत कुमार अपनी सीट से उठ खड़े हुए. मुलजिम से सवाल पूछने से पहले उन्होंने भी मामले पर रोशनी डालते हुए अदालत के सामने कुछ नई अहम जानकारी के साथ आरोपों की बौछार कर दी.

”जनाब! मैं मुलजिम से कुछ सवाल पूछने से पहले इस मामले के बारे कुछ नई बातें भी बताना चाहता हूं, जिस पर अभी तक परदा पड़ा हुआ था. सब से पहली बात तो यह है जनाब कि मुलजिमा जितनी मासूम दिख रही है, उतनी है नहीं. इन के शांत चेहरे के पीछे एक क्रूर और शातिर चेहरा भी छिपा हुआ है. मुलजिम ने अपने प्रेमी शेरोन राज के खिलाफ जो कुछ भी किया पूरी तरह से होशोहवास में सुनियोजित तरीके से किया. उसे अपने हुस्न के जाल में फंसाया, यौन संतुष्टि के लिए अपने घर बुलाया. सैक्स की आड़ ले कर जूस में दर्द की गोलियां काफी मात्रा में घोल कर पिलाने की कोशिश की…’’

”औब्जेशन मी लौर्ड! हमारे मुवक्किल का चरित्र हनन किया जा रहा है. बेबुनियाद बातें की जा रही हैं. उन की निजी जिंदगी पर कीचड़ उछाली जा रही है.’’ ग्रीष्मा के वकील ने बीच में जज महोदय के सामने अपनी शिकायत दर्ज की, लेकिन सरकारी वकील ने यह कह कर अपनी बात जारी रखी कि उन के द्वारा दी जा रही जानकारी का मामले से बहुत ही गहरा ताल्लुक है. इस पर जज महोदय ने उन से अपनी बात जारी रखने को कहा.

जूस में क्यों मिलाईं पेनकिलर की गोलियां

”शुक्रिया जनाब! अब सीधेसीधे मुलजिमा और मृतक शेरोन राज के प्रेम संबंध पर आता हूं. वह तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के एक निजी कालेज में लिटरेचर की पढ़ाई कर चुकी है. वह केरल और तमिलनाडु के बौर्डर पर तिरुवनंतपुरम जिलांतर्गत पारसाला के रहने वाले शेरोन राज से 2021 में तब मिली थी, जब वह उसी कालेज में बीएससी रेडियोलौजी के फाइनल ईयर में थे.

”उन की मुलाकात कालेज आनेजाने के दौरान रास्ते में हुई थी. दोनों के बीच एक साल से ज्यादा समय तक प्रेम संबंध कायम रहे, लेकिन मार्च 2022 में ग्रीष्मा के परिवार ने एक सैन्य अधिकारी से उस की शादी तय कर दी. उस ने इस रिश्ते के लिए हामी भर दी.

”जनाब! वे प्रेमी युगल जरूर थे, लेकिन अलगअलग जातियों के थे. ग्रीष्मा हिंदू में उच्च जाति की नायर परिवार से थी, जबकि शेरोन पिछड़ी जाति के नडार का क्रिश्चियन समुदाय का था. ग्रीष्मा जानती थी कि उन की शादी के लिए उस के परिवार वाले कतई राजी नहीं होंगे.

”शेरोन बेरोजगार भी था. यही कारण था कि ग्रीष्मा शादी तय होते ही प्रेमी शेरोन से दूरी बनाने के साथसाथ उसे मारने की प्लानिंग भी करने लगी थी. फिर एक दिन मुलजिमा ग्रीष्मा ने शेरोन की जहर दे कर हत्या कर दी.’’

इसी के साथ पूरे मामले के घटनाक्रम को सरकारी वकील ने विस्तार से अदालत के सामने प्रस्तुत किया. वह इस प्रकार सामने आया—

ग्रीष्मा और शेरोन के प्रेम संबंध में खलल आने के पीछे न केवल ग्रीष्मा की फेमिली द्वारा तय की गई शादी के लिए भारतीय सेना में नौकरी करने वाले लड़के से उस की सगाई का कारण था, बल्कि एक ज्योतिषी द्वारा की गई उस की शादी को ले कर भविष्यवाणी भी थी. ग्रीष्मा को एक ज्योतिषी ने बताया था कि उस की शादी होने के साथ ही उस के पति की मृत्यु हो जाएगी. इसी भविष्यवाणी से ग्रीष्मा घबरा कर अंधविश्वास से घिर गई थी. उस ने इस बारे में अपनी मम्मी से जिक्र किया. यह जान कर मम्मी भी परेशान हो गई. इस से बचाव के उपाय के लिए मम्मी ने अनुष्ठान आदि का सहारा लिया, जबकि ग्रीष्मा ने ही एक योजना बनाई.

उस ने जो योजना बनाई थी, उस के बेहद खतरनाक नतीजे आने की आशंका थी. फिर भी उसे ज्योतिषी की भविष्यवाणी की यही काट सही लगी और उस प्लान को कार्यरूप देने के लिए अपने फेमिली वालों की भी सहमति ले ली. जैसे ही ग्रीष्मा ने अपनी शादी तय होने की बात प्रेमी शेरोन से की, वह बिफर गया. तुनकते हुए उस ने कहा, ”ऐसा कैसे? यह नहीं हो सकता! मैं तुम से प्यार करता हूं. मैं तुम से शादी करूंगा. बस, मेरी पढ़ाई पूरी जाए.’’

”लेकिन मेरे फेमिली वालों को नौकरी वाला दामाद चाहिए!’’ ग्रीष्मा बोली.

”तुम्हें क्या लगता है कि मुझे नौकरी नहीं मिल सकती? अरे, मेरी पढ़ाई किसी प्रोफेशनल कोर्स से कम है? रेडियोलौजिस्ट की नौकरी तो मिल ही जाएगी!’’ शेरोन बोला.

”मेरी बात समझने की कोशिश करो. मैं अपने मम्मीपापा की इकलौती संतान हूं. उन के भी कुछ अपने अरमान हैं.’’ ग्रीष्मा ने समझाने की कोशिश की.

”…और मेरे अरमानों का क्या होगा? मेरे सपनों का क्या होगा, जो हम ने मिल कर देखे थे. नहींनहीं, मैं ने कोई फिल्मी लव नहीं किया है, जो ब्रेकअप के जश्न के साथ दफन कर दिया जाए.’’ शेरोन भावुक हो गया था.

”चलो ठीक है, ठीक है! मैं तुम्हारी भावना को समझ सकती हूं…मैं एक बार फिर अपनी मां से बात कर के देखती हूं. तुम अपनी जन्मकुंडली देना, अपनी कुंडली से मिलवाऊंगी. देखती हूं हमारेतुम्हारे कितने गुण मेल खाते हैं?’’

”मैं कुंडली मिलान को अंधविश्वास समझता हूं. क्या हम ने प्रेम कुंडली मिला कर किया था?’’ शेरोन ने तर्क दिया.

दरअसल, ग्रीष्मा अपने फेमिली वालों द्वारा तय की गई शादी की वजह से शेरोन से संबंध तोडऩा चाहती थी, जिस के लिए प्रेमी कतई तैयार नहीं था. उस ने बातों ही बातों में कह दिया था कि उस की कुछ तसवीरें हैं, जिस से उस की तय हुई शादी टूट सकती है या भविष्य में शादीशुदा जिंदगी खराब हो सकती है. ग्रीष्मा ने महसूस किया कि शेरोन उसे ब्लैकमेल करना चाहता है. इस से बचाव के लिए उस ने कुंडली मिलान की बात की थी, लेकिन पहले ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाई. उस की भविष्यवाणी का ग्रीष्मा पर गहरा असर हुआ और उस के दिमाग में योजना कौंध गई थी.

दूसरी तरफ उस ने पाया कि शेरोन उस से बेइंतहा मोहब्बत करता है. इन दोनों बातों को ले कर ग्रीष्मा के दिमाग में खलबली मची हुई थी.

उस ने शेरोन को वाट्सऐप मैसेज भेज दिया, ”कल दिन में मिलो!’’

जवाब आया, ”कहां?’’

”मंदिर में…बढिय़ा सी माला और मिठाई ले कर आना. नए कपड़ों में आना.’’

”क्यों?’’

”शादी करनी है.’’

”मम्मीपापा मान गए?’’

”उन की छोड़ो, मैं जो कह रही हूं वह सुनो. उन को बाद में मैं मना लूंगी.’’

ग्रीष्मा और शेरोन के बीच इस तरह के वाट्सऐप संदेशों का आदानप्रदान अक्टूबर 2024 को हुआ था. ज्योतिषी की बातों ने क्यों घुमा दिया प्रेमिका का दिमाग ग्रीष्मा अपने ज्योतिषीय भविष्यवाणी के बारे में शेरोन को भी बता चुकी थी. शेरोन ने उसे अंधविश्वास बताते हुए चुनौती के तौर पर लिया और गलत साबित करने के लिए ग्रीष्मा की योजना के अनुसार प्रतीकात्मक शादी करने के लिए तैयार हो गया. उन्होंने निर्धारित तारीख को वेट्टुकाडु चर्च में शादी कर ली. ग्रीष्मा ने शेरोन के नाम का सिंदूर भी लगाया. शेरोन खुश हो गया था कि ग्रीष्मा ने प्रतीकात्मक ही सही, शादी तो कर ली. इसे आधार बना कर आने वाले दिनों में उस के मम्मीपापा को सार्वजनिक शादी के लिए राजी कर लेगा.

दोनों ने साथ में सेल्फी ली. मोबाइल में सेल्फी देखते हुए शेरोन ने मजाक किया, ”शादी तो हो गई, हनीमून कब मनाया जाए?’’

उस के मजाक का जवाब ग्रीष्मा ने मजाक में ही दिया, ”जब तुम चाहो, लेकिन..?’’

”लेकिन क्या?’’ शेरोन ने सवाल किया.

”कुछ दिन ठहरो, अगले हफ्ते मम्मीपापा बाहर जाने वाले हैं. फिर हम लोग वहीं मिलेंगे.’’

”यह भी ठीक है. चलो, इसी खुशी में कुछ खातेपीते हैं.’’

”तुम यहीं ठहरो, मैं कुछ खाने के लिए ले कर आती हूं.’’ कहती हुई ग्रीष्मा पास के मार्केट में चली गई. लौटी तो उस के हाथ में 2 बड़ी बोतलों में जूस था.

”2 बोतल जूस!… और खाने के लिए…’’ शेरोन चौंकता हुआ बोला.

”आज इसी से पेट भरना है. समझो, यह हमारी शादी की खुशी की शैंपेन है!’’ ग्रीष्मा बोली.

”वाह! क्या कहने हैं तुम्हारी सोच और खुशियां बांटने के तरीके का…लाजवाब!’’ ग्रीष्मा की तारीफ करते हुए शेरोन ने जूस की बोतल लेने के लिए हाथ बढ़ाया.

”मेरी एक शर्त है.’’ ग्रीष्मा एक बोतल का ढक्कन खोल कर उसे देती हुई बोली.

”कौन सी शर्त?’’

”हमें एक साथ जूस पीना होगा. देखती हूं कि कौन पहले बोतल खत्म करता है.’’ ग्रीष्मा बोली और अपनी बोतल का ढक्कन खोलने लगी.

”ओके माई डार्लिंग!’’ कहते हुए शेरोन ने तुरंत बोतल को मुंह में लगा लिया.

किंतु यह क्या, कुछ घूंट मुंह में लेते ही ‘थू…थू…’ करने लगा. कुछ सेकेंड रुक कर बोला, ”कहां से इसे खरीदा, एकदम कड़वा है. नकली लगता है या फिर इस की डेट एक्सपायर हो चुकी है.’’

”नहींनहीं, ऐसा नहीं हो सकता, मैं ने तो एक्पायरी डेट देख कर लिया. नकली हो सकता है. लाओ, इसे वापस लौटा कर दूसरा लाती हूं.’’ ग्रीष्मा बोली.

शेरोन काफी समय तक थूथू करता रहा. बोला, ”मुंह का स्वाद ही बिगड़ गया. कुछ भी खानेपीने का मन नहीं कर रहा है.’’

”चलो, कहीं कौफी पीने चलते हैं.’’ ग्रीष्मा बोली.

”नहीं रहने दो, मन नहीं कर रहा. कमरे पर चलता हूं. थोड़ा आराम करूंगा.’’

दोनों उस रोज जल्द मिलने का वादा कर अपनीअपनी राह चल दिए. जातेजाते ग्रीष्मा बोली, ”हम लोग आगे वाट्सऐप पर चैटिंग करेंगे. कभी भी काल मत करना.’’

”ओके!’’ कहते हुए शेरोन ने विदा ली. किंतु 2 दिनों तक ग्रीष्मा का कोई मैसेज नहीं आया, तब शेरोन ने ही ‘हाय, कैसी हो?’ करता हुआ छोटा सा मैसेज भेज दिया.

तुरंत उस का जवाब आ गया, ”अच्छी हूं. अभी थोड़ी बिजी हूं. आगे की योजना बताती हूं. अपना खयाल रखना.’’

ग्रीष्मा के इस मैसेज से शेरोन के दिल को तसल्ली मिली. जल्द ही एक और मैसेज आ गया. उस ने 14 अक्तूबर को अपने घर पर बुलाया था. साथसाथ चलते रहे साजिश और प्यार शेरोन ग्रीष्मा के घर दिन में पहुंच गया. उसे ऐसा महसूस हुआ, जैसे ग्रीष्मा उस के आने का इंतजार कर रही हो. गले मिली. बैठने के लिए अपने कमरे में ले जाने लगी. घर में सन्नाटा था. पूछा, ”यहां और कोई नहीं है?’’

”अभी नहीं, कल ही लोग एक रिश्तेदारी में गए हैं. वहां एक फंक्शन है… मेरे लिए क्या लाए हो?’’ ग्रीष्मा चहकती हुई बोली.

”लाया हूं न, रवा लड्डू! तुम्हारी पसंद की स्वीट!’’ शेरोन बोला और अपना बैग खोलने लगा.

”नय्यप्पम नहीं लाए..!’’

”वह भी लाया हूं.’’

”अच्छा, तुम मेरा कितना खयाल रखते हो.’’ ग्रीष्मा तारीफ करते हुए बोली.

”तुम ने सिंदूर नहीं लगाया?’’ शेरोन अचानक उस की सूनी मांग देख कर बोला.

”यहां घर में कैसे लगा सकती हूं. हम ने छिप कर शादी की है. किसी को हमारे रिश्ते के बारे नहीं मालूम है.’’ ग्रीष्मा ने कहा.

”लेकिन मैं तो तुम्हारी मम्मीपापा को यही बताने आया था.’’ शेरोन बोला.

”पागल हो क्या? अभी उन्हें कुछ नहीं बताना है. घर में हंगामा हो जाएगा. मैं धीरेधीरे उन्हें मनाने की कोशिश कर रही हूं. तुम सिर्फ कहीं जौब पाने की कोशिश करो. फिलहाल तो अपनी शादी टालना चाहती हूं.’’

”उस से क्या होगा? एक न एक दिन तो हमारे रिश्ते के बारे में खुल कर बताना होगा.’’ शेरोन बोला.

”तुम मुझे समझने की कोशिश करो. हम दोनों की जाति अलगअलग है. परिवार तो क्या पूरा समाज हमारा दुश्मन बन सकता है. तुम्हें या मुझे कोई जौब मिल गई, तब हम लोग अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं…और हां, तुम ने मोबाइल से सारे फोटो डिलीट किए या नहीं?’’

”हांहां कर दिए.’’ शेरोन बोला.

”कहां किए, दिखाओ अपना मोबाइल.’’ ग्रीष्मा बोली. शेरोन ने अपना मोबाइल उस की ओर बढ़ा दिया.

”इस का पासवर्ड बताओ. गैलरी खोलो.’’ ग्रीष्मा बोली.

”तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है…यह देखो.’’ शेरोन ने अपने मोबाइल की फोटो गैलरी खोल कर खाली जगह दिखा दी.

”अरे बात वह नहीं है, मेरी तुम्हारे साथ की एक भी फोटो कहीं लीक हुई, तब समझो मुझ पर शामत आ जाएगी.’’

”ग्रीष्मा की अंगुलियां शेरोन के मोबाइल पर सरकने लगीं. उस की फोटो गैलरी से ले कर मैसेजिंग ऐप की गैलरी तक को सर्च कर लिया, जब वहां उस की एक भी फोटो और वीडियो नहीं मिली, तब आश्वस्त हो गई. किचन में चली गई. कुछ समय में ही एक गिलास में कुछ पीने के लिए ले कर आई.

”ये लो आरेंज जूस! मैं ने तुम्हारे लिए ताजा तैयार किया है. मीठा है, उस रोज की तरह कड़वा नहीं है.’’ ग्रीष्मा प्यार से बोली.

”इतने प्यार से दे रही हो तब क्या कड़वा और क्या मीठा!…तुम भी मेरे हाथों से ट्रेडिशनल नेय्यप्पम खाओ… चावल का आटा, गुड़ और नारियल में बहुत टेस्टी है. मेरी मां ने घी में बनाया है.’’ शेरोन बोला.

”हांहां खिलाओ!’’ कह कर ग्रीष्मा ने अपना मुंह शेरोन के सामने खोल दिया. वह पूरा नेय्यप्पम ग्रीष्मा के मुंह में डालने लगा.

”अरे, यह तो बहुत बड़ा है, पूरा मुंह में नहीं आएगा. एक बाइट लूंगी.’’ ग्रीष्मा बोली और नेय्यप्पम पाइसम के एक टुकड़े को अपनी दांतों से काट लिया. बचे नेय्यप्पम को उस ने शेरोन के मुंह में ठूंस दिया. शेरोन उसे तुरंत मुंह में ले कर चबाने लगा. भरे मुंह में ही गिलास के जूस की एक घूंट पी लिया.

”कैसा है जूस?’’ ग्रीष्मा ने पूछा.

”अभी तो नेय्यप्पम के स्वाद में मिल गया है, पता नहीं चला.’’

”सादा पानी दूं क्या?’’ ग्रीष्मा बोली.

”नहींनहीं, प्यास नहीं है. इसे ही पीता हूं.’’ शेरोन एक झटके में कई घूंट जूस पी गया. स्वाद कुछ अजीब सा लगा. उसे कुछ समझ में नहीं आया. बोला, ”इस की मिठास अलग तरह की क्यों है?’’

”शायद नेय्यप्पम के साथ आरेंज का बीज दांतों के बीच आ गया हो.’’ ग्रीष्मा बोली.

”हो सकता है.’’ कहते हुए शेरोन गिलास का पूरा जूस पी गया.

”तुम्हें हमेशा पीठ दर्द की शिकायत रहती है, इसलिए मैं ने तुम्हारे लिए खास तरह का जूस बनाया है. इसे तुम हर्बल काढ़ा भी कह सकते हो, जिस से तुम्हें पीठ दर्द में राहत मिलेगी. थोड़ा कसैला जरूर लगेगा, लेकिन फायदेमंद है.’’ ग्रीष्मा बोली.

”मुझे लगता है थोड़ा आराम करना चाहिए.’’ शेरोन बोला.

”ठीक है, लेकिन ध्यान रखना नींद नहीं आने पाए.’’ ग्रीष्मा बोली और खाली गिलास ले कर किचन में चली गई और खाना पकाने का इंतजाम करने लगी.

कुछ समय में ही शेरोन भी वहां आ गया. उस की चाल थोड़ी लडख़ड़ाई हुई थी. बोला, ”डार्लिंग, मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है. मैं अपने घर जाना चाहता हूं.’’

”क्यों क्या हुआ? कैसा फील हो रहा है? दर्द है क्या?’’

”अरे, कोई खास नहीं, बस मैं सोना चाहता हूं.’’ शेरोन बोला.

”अकेले चले जाओगे? कहो तो तुम्हें घर छोड़ दूं.’’

”चला जाऊंगा. सिर्फ आटो बुलवा दो.’’

”ठीक है, मुझे लगता है कि तुम थके हुए हो. कुछ परेशानी हो तो मैसेज कर देना.’’

उस के बाद शेरोन वहां से अपने घर की ओर निकल पड़ा. उस रोज 14 अक्तूबर 2022 की तारीख थी. किसी तरह शेरोन अपने घर तो पहुंच गया, लेकिन उसे कई उल्टियां हुईं. इस बारे में उस ने ग्रीष्मा को मैसेज लिखा. तबीयत बिगडऩे पर उसी रोज उस का भाई शिमोन राज उसे परसाला सरकारी अस्पताल ले गया. वह एक आयुर्वेदिक डाक्टर था.शेरोन के डाक्टर भाई को क्यों हुआ शक शेरोन की हालत देख कर पहले तो उस ने अपच आदि की समस्या समझा, किंतु उल्टियों की दुर्गंध से कुछ गलत पदार्थ खानेपीने का संदेह हुआ. शेरोन की हालत बिगड़ती जा रही थी.

सरकारी अस्पताल से उसे तिरुवनंतपुरम मैडिकल कालेज रेफर कर दिया गया. हालांकि उस के खून जांच आदि के नमूने ले कर उसे घर भेज दिया गया. अगले रोज 15 अक्तूबर, 2022 को शेरोन की तबीयत और बिगड़ गई और उसे तिरुवनंतपुरम मैडिकल कालेज अस्पताल में फिर से भरती होने से पहले कई अस्पतालों में ले जाया गया. आखिरकार, उसे आईसीयू में भरती कराया गया.

तब तक हुई कई जांचों की रिपोर्ट भी आ चुकी थीं. उस की तबीयत दिनप्रतिदिन बिगड़ती ही चली गई. इस दौरान उस ने एक बूंद पानी तक नहीं पीया. 25 अक्तूबर को कार्डियक अरेस्ट का झटका आया और उस की मौत हो गई. इलाज करने वाले डाक्टरों ने इस का कारण अंगों का फेल होना बताया.
उस की मौत होने पर शेरोन के फेमिली वाले विचलित हो गए. उन्होंने इस का सीधा आरोप ग्रीष्मा पर लगाया. उस के भाई ने कहा कि शेरोन बीमार होने से पहले ग्रीष्मा के पास गया था. उन्होंने कहा कि उस के भाई की एक सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है.

शेरोन के पेरेंट्स जयराम और प्रिया ने इस की परसाल के थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. 30 अक्तूबर को जांच क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम को सौंप दी गई. पुलिस ने जांच के सिलसिले में ग्रीष्मा को 31 अक्तूबर, 2022 को गिरफ्तार कर लिया. उस के बाद उस की मम्मी और चाचा को भी गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर हत्या की साजिश रचने में शामिल होने का आरोप लगाया गया. तीनों से गहन पूछताछ हुई और ग्रीष्मा करीब एक साल तक जेल में रही. केरल हाईकोर्ट ने 25 सितंबर, 2023 को उसे जमानत दे दी. मरने से पहले शेरोन ने पुलिस को बयान दिया था कि ग्रीष्मा ने उसे हर्बल काढ़ा दिया था. उसे पीने के कुछ समय बाद ही कई उल्टियां हुईं.

बाद में जांच में सामने आया कि ग्रीष्मा ने अपने प्रेमी को धीमा जहर दे कर मारा था. ग्रीष्मा ने ऐसा करने से पहले गूगल पर सर्च किया था और पूरी रिसर्च की थी. शेरोन को कैसे मारा जाए, इस का उस ने पूरा प्लान बनाया था. ये सब पुलिस की जांच में सामने आया है. ग्रीष्मा ने अपने प्रेमी शेरोन राज को मारने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया था. उस ने गूगल पर ढूंढा कि पैरासिटामोल और खरपतवारनाशक यानी हर्बिसाइड पैराक्वाट को किस तरह से इस्तेमाल किया जाए कि वह मानव शरीर पर एक धीमे जहर की तरह असर करे. उस वक्त ग्रीष्मा ने यह नहीं सोचा था कि ये सब डाटा गूगल पर रिकौर्ड हो रहा है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शेरोन की मौत का कारण सामने आया. इस रिपोर्ट के मुताबिक शेरोन की मौत उस के दोनों फेफड़ों के फेल होने के कारण हुई थी. फोरैंसिक एक्सपर्ट ने बताया कि खरपतवारनाशक जहर मानव शरीर पर इस तरह ही असर करता है. जहर के कारण शेरोन के पीनस से रक्त रिसाव हो रहा था और शेरोन के पूरे शरीर में भयंकर दर्द हो रहा था. सरकारी वकील द्वारा शेरोन मर्डर केस की विस्तृत जानकारी सुनने के बाद न्यायाधीश ए.एम. बशीर ने पूरी रिपोर्ट पर गहन अध्ययन के बाद ग्रीष्मा को दोषी करार दिया. मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी, 2025 को हुई.

सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि गूगल क्लाउड ने घटना से जुड़ा डाटा जमा कर लिया था. कोई भी व्यक्ति बिना सबूत छोड़े घटनास्थल से नहीं जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी. आरोपी ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए एक प्लान तैयार किया था. इस के लिए उस ने कई दिनों तक पूरी बारीकी से काम किया. उस ने इंटरनेट पर अलगअलग तरह के जहर के बारे में रिसर्च किया. साथ ही यह भी ध्यान में रखा कि कौन सा जहर मानव शरीर पर किस तरह से असर करता है.

कोर्ट के डाक्यूमेंट के अनुसार, ग्रीष्मा ने जहर के बारे में गूगल पर रिसर्च की थी. उस के खेती करने वाले अंकल ने घर पर कपिक खरपतवारनाशक रखा था. जिसे ग्रीष्मा ने एक आयुर्वेदिक काढ़े ‘कषायम’ में मिला कर शेरोन को पिला दिया था. कोर्ट ने देखा कि ग्रीष्मा ने शेरोन को मारने की तैयारी करते हुए भी, उसे प्रेम भरे मैसेज करना नहीं छोड़ा. शेरोन को जहरीला काढ़ा पीने के बाद लोकल अस्पताल ले जाया गया. वहां से उसे गवर्नमेंट मैडिकल कालेज, तिरुवनंतपुरम शिफ्ट कर दिया गया था. वहां के डाक्टर शेरोन की बीमारी का कारण पता नहीं लगा पा रहे थे.

उन्होंने देखा कि शेरोन की दोनों किडनियां फेल हो गई थीं. खरपतवारनाशक ने शेरोन के शरीर में कोई अवशेष नहीं छोड़े थे. इस कारण डाक्टर को शेरोन के खून में जहर के निशान भी नहीं मिले. मामले की काररवाई में यह पाया गया कि ग्रीष्मा ने अपने बौयफ्रेंड शेरोन राज को आयुर्वेदिक काढ़े में खरपतवारनाशक मिला कर पिलाया था. इस खरपतवारनाशक ने धीमे जहर की तरह शेरोन की सेहत पर असर करना शुरू किया. जिस के कारण काढ़ा पीने के ठीक 11 दिन बाद शेरोन की अस्पताल में मौत हो गई थी.

यही नहीं शेरोन के मम्मीपापा बारबार ग्रीष्मा से पूछते रहे कि उस ने उसे क्या पिलाया था, लेकिन उस ने कुछ भी बताने से इनकार करती रही. शेरोन को मारने के लिए ग्रीष्मा पहले भी कोशिश कर चुकी थी. तब वह नाकामयाब रही. उस ने जूस के एक गिलास में 50 पेनकिलर की गोलियां मिलाई थीं और शेरोन को वह जूस पीने की चुनौती दी थी. हालांकि जूस के कड़वा होने के कारण शेरोन ने उसे पीने से मना कर दिया था. इस कारण वह उस वक्त मरने से बच गया.

वैज्ञानिक सबूतों ने दी केस को मजबूती

रिपोर्ट के मुताबिक, मामले के बारे में काढ़े में जहर मिलने की शंका सब से पहले शेरोन के आयुर्वेदिक डाक्टर भाई शिमोन राज को हुई. जब उन्हें पता चला कि शेरोन ने ग्रीष्मा के घर कषायम पीया था, तब उन्होंने ग्रीष्मा से काढ़े में डाली गई सामग्री के बारे में पूछा, किंतु ग्रीष्मा ने उन्हें दवाई का नाम नहीं बताया था. उस ने कहा कि वो ये दवाई कमरदर्द होने पर लेती है. यह डाक्टर की बताई हुई दवाई है. हालांकि, शिमोन ने बताया कि ग्रीष्मा की यह सभी बातें झूठी निकलीं.

पुलिस की जांच रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीष्मा शेरोन को 2021 में मिली. वे दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे. इस बारे में उन दोनों के फेमिली वालों को खबर नहीं थी. फेमिली वालों ने 2022 में ग्रीष्मा की एक फौजी से सगाई कर दी थी. फिर भी ग्रीष्मा शेरोन से मिलती रही. कुछ वक्त बाद ग्रीष्मा को फौजी के साथ रहने के फायदे दिखने लगे और यहीं से उस ने शेरोन को छोडऩे का मन बना लिया.

मजिस्ट्रैट के सामने अपने बयान में शेरोन ने ग्रीष्मा का नाम लेते हुए बताया था कि उस ने ग्रीष्मा द्वारा दी गई हर्बल दवा पी थी. चूंकि उसे ग्रीष्मा की हरकत पर संदेह था, इसलिए उस ने पीने से पहले उस का वीडियो भी रिकौर्ड किया था. बाद में फोरैंसिक विश्लेषण ने काढ़े में कीटनाशक की मौजूदगी की पुष्टि की, आगे की जांच के दौरान ग्रीष्मा की भूमिका के सबूत मिले. वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन किया. पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने पर ग्रीष्मा ने अपराध कुबूल कर लिया था. उस की मम्मी सिंधु और उस के चाचा निर्मलकुमारन नायर सबूत नष्ट करने के आरोपी पाए गए. ग्रीष्मा ने पुलिस हिरासत में आत्महत्या का प्रयास भी किया था, जिसे अदालत ने जवाबदेही से बचने का एक नाटकीय प्रयास बताया.

केरल से बाहर मुकदमा चलाने की आरोपी की याचिका को हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद पुलिस ने 25 जनवरी, 2023 को मामले में चार्जशीट दाखिल की. मुकदमा 15 अक्तूबर, 2024 को शुरू हुआ और 3 जनवरी, 2025 को समाप्त हुआ. विशेष सरकारी अभियोजक वी.एस. विनीत कुमार ने इस मामले में ग्रीष्मा के चाचा निर्मलकुमारन नायर और उस की मां पर लगे आरोप साबित कर दिए. इस तरह से बनी कुल 586 पन्नों की रिपोर्ट में ग्रीष्मा पर आईपीसी के तहत कई आरोप लगाए गए, जिन में धारा 302 (हत्या), धारा 364 (हत्या करने के इरादे से अपहरण), धारा 328 (जान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से जहर देना), धारा 203 (गलत जानकारी दे कर न्याय में बाधा डालना था).

न्यायाधीश ने कहा कि ग्रीष्मा ने ऐसा समय चुना, जब उस का परिवार बाहर था और उस ने जहर इस तरह से दिया कि उस का पता लगाना मुश्किल हो गया. उस ने हत्या का प्लान सावधानीपूर्वक बनाया था. शेरोन को धोखा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर अवसर का लाभ उठाया कि उस की हरकतें छिपी रहें. यह जहर दे कर हत्या करने का मामला है, इसलिए ग्रीष्मा ने इसे बहुत ही गोपनीयता से अंजाम दिया. शेरोन ने जांच अधिकारियों को बताया था कि ग्रीष्मा ने उसे सैक्स के लिए वहां बुलाया था. उस ने कल रात लंबी काल कर के अपनी मुलाकात के बारे में उसे आश्वस्त किया था. उस ने गुप्त उद्ïदेश्य से उसे विश्वास में लिया. अपराध करने की उस की तैयारी गुप्त और धोखे भरी थी.

अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट औफ द रेयर केस’ कहते हुए दोषी ग्रीष्मा को फांसी की सजा सुना दी. अदालत ने इस हत्या को ‘बेहद क्रूर, अमानवीय और घिनौना’ बताते हुए कहा कि इस ने समाज के सामूहिक विवेक को झकझोर दिया है. दोषी ग्रीष्मा पर साढ़े 3 लाख रुपए का जुरमाना भी लगाया. ग्रीष्मा ने सजा में नरमी के लिए अपनी एजुकेशन की उपलब्धियों, पूर्व में आपराधिक रिकौर्ड न होने और मम्मीपापा की इकलौती संतान होने का हवाला दिया, किंतु फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी की सामाजिक पृष्ठभूमि, पारिवारिक परिस्थितियों, उम्र, आपराधिक रिकौर्ड न होने और उस के अच्छे आचरण को ‘दुर्लभतम मामलों’ की श्रेणी से बाहर करने के लिए सहायक नहीं माना जा सकता.

हालांकि, सजा को ले कर ग्रीष्मा हाईकोर्ट में इस फैसले को चैलेंज कर सकती है. ग्रीष्मा केरल में मृत्युदंड पाने वाली दूसरी और सब से कम उम्र की महिला है और राज्य में मौत की सजा पाने वाली 40वीं दोषी है. निर्मलाकुमारन नायर (ग्रीष्मा के चाचा) को भी 3 साल कैद की सजा सुनाई गई. हालांकि अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय ने ग्रीष्मा की मम्मी को इस मामले में बरी कर दिया.

कब किसे मिली मौत की सजा

ग्रीष्मा केरल की अगर सब से कम उम्र की मौत की सजा पाने वाली युवती है तो उस से पहले भारत में 2 महिलाओं को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. उन में एक रतनबाई है, जिसे साल 1955 में फांसी दी गई थी. उसे यह सजा 3 लड़कियों की हत्या के आरोप में दी गई थी. दरअसल, रतनबाई ने पति के साथ अवैध संबंधों के शक में तीनों लड़कियों की हत्या की थी. जिस के बाद कोर्ट के फैसले पर उसे जनवरी 1955 में उसे फांसी की सजा दी गई थी. इस के अलावा 2008 में मुरादाबाद की शबनम वो दूसरी युवती थी, जिसे मौत की सजा दी गई थी. शबनम को 2008 में अपने परिवार के 7 सदस्यों की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था.

जानकारी के मुताबिक शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर इस हत्या को अंजाम दिया था. उस वक्त राष्ट्रपति ने भी उस की दया याचिका को खारिज कर दिया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

 

Social Crime Stories : 20 लाख के लिए साले ने किया जीजा के भाई का कत्ल

Social Crime Stories : आगरा के संजय पैलेस स्थित आईसीआईसीआई बैंक के कैशियर के सामने जैसे ही एक करोड़ रुपए का चैक आया, उस ने नजरें उठा कर चैक रखने वाले को देखा तो एकदम से उस के मुंह से निकल गया, ‘‘नमस्कार इमरान भाई, कहो कैसे हो?’’

‘‘ठीक हूं भाईजान, आप कैसे हैं?’’ जवाब में इमरान ने कहा.

‘‘मैं भी ठीक हूं्.’’ कैशियर ने कहा.

‘‘भाईजान थोड़ा जल्दी कर देंगे, बड़े भाईजान का फोन आ चुका है. वह मेरा ही इंतजार कर रहे हैं.’’ इमरान ने कहा.

कैशियर अपनी सीट से उठा और मैनेजर के कक्ष में गया. थोड़ी देर बाद लौट कर उस ने कहा, ‘‘इमरानभाई, आज तो बैंक में इतनी रकम नहीं है. जो है वह ले लीजिए, बाकी का भुगतान कल कर दूं तो..?’’

‘‘कोई बात नहीं. आज कितना कर सकते हैं?’’ इमरान ने पूछा.

‘‘20-25 लाख होंगे. ऐसा है, आप को आज 20 लाख दे देता हूं. बाकी कल ले लीजिएगा.’’ कैशियर ने कहा तो इमरान ने एक करोड़ वाला चैक वापस ले कर 20 लाख का दूसरा चैक दे दिया. कैशियर ने उसे 20 लाख रुपए दिए तो उन्हें बैग में डाल कर वह बाहर खड़ी अपनी मारुति 800 से शहर से 15 किलोमीटर दूर कुबेरनगर स्थित अपने ताऊ के बेटे पूर्व विधायक जुल्फिकार अहमद भुट्टो के स्लाटर हाउस (कट्टीखाने) की ओर चल पड़ा.

यह शाम के सवा 4 बजे की बात थी. साढे़ 4 बजे के आसपास इमरान पैसे ले कर वाटर वर्क्स चौराहे पर पहुंचा था कि उस के बड़े भाई इरफान का फोन आ गया. फोन रिसीव कर के उस ने कहा, ‘‘भाईजान, बैंक से 20 लाख रुपए ही मिल सके हैं. मैं उन्हें ले कर 10-15 मिनट में पहुंच रहा हूं.’’

इमरान ने 10-15 मिनट में पहुंचने को कहा था. लेकिन एक घंटे से भी ज्यादा समय हो गया और वह स्लाटर हाउस नहीं पहुंचा तो उस के बड़े भाई इरफान को चिंता हुई. उस ने इमरान को फोन किया तो पता चला कि उस के दोनों फोन बंद हैं. इरफान परेशान हो उठा.  वह बारबार नंबर मिला कर इमरान से संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन फोन बंद होने की वजह से संपर्क नहीं हो पाया. अब तक शाम के 7 बज गए थे. इरफान को हैरानी के साथसाथ चिंता भी होने लगी.

इमरान और इरफान आगरा छावनी से बसपा के विधायक रह चुके जुल्फिकार अहमद भुट्टो के चचेरे भाई थे. दोनों भाई आगरा शहर से यही कोई 15 किलोमीटर दूर कुबेरपुर स्थित जुल्फिकार अहमद भुट्टो के स्लाटर हाउस (कट्टीखाने) का कामकाज देखते थे. इरफान फैक्ट्री का एकाउंट संभालता था तो उस से छोटा इमरान फील्ड का काम देखता था. बैंक में रुपए जमा कराने, निकाल कर लाने आदि का काम वही करता था.

चूंकि उन के चचेरे भाई बसपा के विधायक रह चुके थे, इसलिए यह काम इमरान अकेला ही करता था. अपने साथ वह कोई हथियार भी नहीं रखता था. इस की वजह यह थी कि वह खुद तो साहसी था ही, फिर सिर पर बड़े भाई का हाथ भी था. लेकिन जब से उस के बड़े भाई इरफान का साला भोलू स्लाटर हाउस से जुड़ा था, वह इमरान के साथ रहने लगा था. बड़े भाई का साला होने की वजह से भोलू भरोसे का आदमी था. इसीलिए बैंक आनेजाने में इमरान उसे साथ रखने लगा था.

लेकिन 3 दिसंबर को भोलू ने फोन कर के कहा था कि वह जानवरों की खरीदारी के लिए शमसाबाद जा रहा है, इसलिए आज नहीं आ पाएगा. भोलू ने यह बात इमरान और इरफान दोनों भाइयों को बता दी थी, जिस से वे उस का इंतजार न करें. भोलू नहीं आया तो इमरान अकेला ही बैंक चला गया था. वह चला तो गया था, लेकिन लौट कर नहीं आया था.

7 बजे के आसपास पैसे ले कर इमरान के वापस न आने की बात इरफान ने बड़े भाई जुल्फिकार अहमद भुट्टो को बताई तो वह भी परेशान हो उठे. उन्हें पैसों की उतनी चिंता नहीं थी, जितनी भाई की थी. वह इमरान को बहुत पसंद करते थे. इसीलिए उन्होंने उसे अपने यहां रखा था. उन के यहां काम करते उसे लगभग ढाई साल हो गए थे. इस बीच उस ने एक पैसे की भी हेराफेरी नहीं की थी.

जुल्फिकार अहमद भुट्टो ने भी इमरान के दोनों नंबरों पर फोन किया. जब दोनों नंबर बंद मिले तो वह इरफान के अलावा फैक्ट्री के 20-25 लोगों को 6-7 गाडि़यों से ले कर वाटर वर्क्स चौराहे पर जा पहुंचे, क्योंकि इमरान ने वहीं से बड़े भाई इरफान को आखिरी फोन किया था. इधरउधर तलाश करने के बाद वहां के दुकानदारों से ही नहीं, बीट पर मौजूद सिपाहियों से भी पूछा गया कि यहां कोई हादसा तो नहीं हुआ था.

वाटर वर्क्स चौराहे पर इमरान के बारे में कुछ पता नहीं चला तो वाटर वर्क्स चौराहे से फैक्ट्री तक ही नहीं, पूरे शहर में उस की तलाश की गई. लेकिन उस के बारे में कहीं कुछ पता नहीं चला. सब हैरानपरेशान थे. लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इमरान कहां चला गया. ऐसे में जब कुछ लोगों ने आशंका व्यक्त की कि कहीं पैसे ले कर इमरान भाग तो नहीं गया, तब पूर्व विधायक जुल्फिकार अहमद ने चीख कर कहा था, ‘भूल कर भी ऐसी बात मत करना. वह मेरा भाई है, ऐसा हरगिज नहीं कर सकता.’

सुबह होते ही फिर इमरान की खोज शुरू हो गई थी. उस के इस तरह गायब होने से उस के घर में कोहराम मचा हुआ था. घर के किसी भी सदस्य के आंसू थम नहीं रहे थे. सब को इस बात की आशंका सता रही थी कि कहीं इमरान के साथ कोई अनहोनी तो नहीं घट गई. बैंक जा कर भी इमरान के बारे में पूछा गया. बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी देखी गई. पता चला, वह बैंक में अकेला ही आया था और अकेला ही गया था.

अब इमरान के घर वालों के पास इमरान की गुमशुदगी दर्ज कराने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं बचा था. जुल्फिकार अहमद भुट्टो पुलिस अधीक्षक (नगर) पवन कुमार से मिले और उन्हें सारी बात बताई. उन्होंने तुरंत थाना हरिपर्वत के थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार और क्षेत्राधिकारी समीर सौरभ को इस मामले को प्राथमिकता से देखने का आदेश दिया. थाना हरि पर्वत पुलिस ने इमरान की गुमशुदगी दर्ज कर इमरान के दोनों नंबर सर्विलांस सेल को दे कर उन की काल डिटेल्स और आखिरी लोकेशन बताने का आग्रह किया.

पुलिस अधीक्षक (नगर) पवन कुमार ने इस मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शलभ माथुर को भी दे दी थी. पुलिस इस मामले में तत्परता से लग गई. इमरान के मोबाइल जब बंद हुए थे, तब वे वाटर वर्क्स और रामबाग चौराहे के टावरों की सीमा में थे. काल डिटेल्स में ऐसा कोई भी नंबर नहीं था, जिस पर संदेह किया जाता. जो भी फोन आए थे या किए गए थे, वे अपनों को ही किए गए थे या आए थे. जैसे कि इरफान, पूर्व विधायक के घर के नंबरों व भोलू के नंबरों के थे. एक दिन पहले भी इरफान या भोलू के फोन आए थे या इन्हें ही किए गए थे. चूंकि पुलिस को इन फोनों में कुछ नया या संदेहास्पद नजर नहीं आया, इसलिए पुलिस अन्य बातों पर विचार करने लगी.

इस काल डिटेल्स और लोकेशन की एकएक कौपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शलभ माथुर, पुलिस अधीक्षक पवन कुमार और क्षेत्राधिकारी समीर सौरभ को भी दी गई थी. इन अधिकारियों ने जब काल डिटेल्स और लोकेशन का अध्ययन किया तो उन्हें एक नंबर पर संदेह हुआ. पुलिस ने उस नंबर की लोकेशन निकलवाई तो यह संदेह और बढ़ गया. यह आदमी कोई और नहीं, इरफान का साला भोलू था, जो इमरान के साथ बैंक आता जाता था.

पुलिस ने भोलू को थाने बुलाया तो उस के साथ पूरा परिवार ही चला आया. सभी पुलिस से उस पर शक की वजह पूछने लगे तो क्षेत्राधिकारी समीर सौरभ ने कहा, ‘‘पुलिस शक के आधार पर ही अभियुक्तों तक पहुंचती है. हम किसी पर भी शक कर सकते हैं. वह सगा हो या पराया. आप लोग निश्चिंत रहें, हम किसी निर्दोष व्यक्ति को कतई नहीं फंसाएंगे.’’

क्षेत्राधिकारी के इस आश्वासन पर सभी को विश्वास हो गया कि भोलू को सिर्फ पूछताछ के लिए बुलाया गया है. क्योंकि वही उस के साथ बैंक आताजाता था. पुलिस भोलू से पूछताछ करती रही, जबकि वह स्वयं को निर्दोष बताते हुए पुलिस की इस काररवाई को अपने साथ अन्याय कहता रहा था. इस तरह 4 दिसंबर का दिन भी बीत गया. कोई जानकारी न मिलने से इमरान के घर वालों की चिंता बढ़ती ही जा रही थी. 5 दिसंबर की सुबह आगरा से यही कोई 20 किलोमीटर दूर यमुना एक्सप्रेसवे से सटे गांव चौगान के पंचमुखी महादेव मंदिर के पुजारी ने एक्सप्रेसवे से सटे एक गड्ढे में एक Social Crime Stories युवक की लाश देखी. चूंकि लाश खून से लथपथ थी, इसलिए उसे समझते देर नहीं लगी कि किसी ने इस अभागे को मार कर यहां फेंक दिया है.

पुजारी ने इस घटना की सूचना ग्रामप्रधान को दी तो उस ने इस बात की जानकारी थाना एत्मादपुर पुलिस को दे दी. थाना एत्मादपुर पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की. लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो उन्होंने इस बात की सूचना जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी. साथ ही उन्होंने मृतक का हुलिया भी बता दिया था. थाना एत्मादपुर पुलिस ने मृतक का जो हुलिया बताया था, वह 3 दिसंबर की शाम से लापता इमरान से हुबहू मिल रहा था. इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शलभ माथुर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण-पश्चिम) बबीता साहू, क्षेत्राधिकारी अवनीश कुमार, समीर सौरभ के अलावा कई थानों का पुलिस बल एवं इमरान के घर वालों को साथ ले कर गांव चौगान पहुंच गए.

शव इमरान का ही था. हत्यारों ने उसे बड़ी बेरहमी से मारा था. उसे गोली तो मारी ही थी, उस का गला भी काट दिया था. पुलिस ने जहां लाश पड़ी थी, वहीं से थोड़ी दूरी पर पड़े चाकू और पिस्टल को भी बरामद कर लिया था. साफ था, इन्हीं से इमरान की हत्या की गई थी. हत्या करने वाले दोनों चीजें वहीं फेंक गए थे. घटनास्थल की काररवाई निपटा कर पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए आगरा मैडिकल कालेज भिजवा दिया. लाश बरामद होने से साफ हो गया कि इमरान की हत्या हो चुकी है. लाश के पास उस की कार और पैसे नहीं मिले थे, इस का मतलब यह हत्या उन्हीं पैसों के लिए की गई थी, जो वह बैंक से ले कर चला था. लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने भोलू से सख्ती से पूछताछ शुरू की. इस की वजह यह थी कि पुलिस के पास उस के खिलाफ अब तक पुख्ता सुबूत मिल चुके थे.

पुलिस ने उस के मोबाइल फोन की 3 दिसंबर की लोकेशन निकलवाई तो चौगान की मिली थी. पुलिस ने इसी लोकेशन को आधार बना कर भोलू के साथ सख्ती की तो उसे इमरान की हत्या की बात स्वीकार करनी ही पड़ी. इस के बाद उस ने अपने उस साथी का भी नाम बता दिया, जिस के साथ मिल कर उस ने इस घटना को अंजाम दिया था. इमरान की हत्या का राज खुला तो इमरान के घर वाले ही नहीं, रिश्तेदार और दोस्त यार भी हैरान रह गए. हैरान होने वाली बात ही थी. इमरान की हत्या करने वाला भोलू इमरान के बड़े भाई का साला तो था ही, इमरान का पक्का दोस्त भी था. इस के बावजूद उस ने हत्या कर दी थी. आइए, अब यह जानते हैं कि आखिर भोलू ने ऐसा क्यों किया था?

हाजी सलीमुद्दीन और हाजी मोहम्मद आशिक, दोनों सगे भाई आगरा के ताजगंज के कटरा उमर खां में रहते हैं. हाजी मोहम्मद आशिक के बड़े बेटे मोहम्मद जुल्फिकार अहमद भुट्टो उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के विधायक भी रह चुके हैं. मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं तो भुट्टो की प्रदेश में खासी इज्जत थी. इस की वजह यह थी कि वह मायावती के खासमखास नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खासमखास थे. भुट्टो के विधायक रहते हुए आगरा के कुबेरपुर स्थित उन के स्लाटर हाउस ने खासी तरक्की की. इस की खपत एकाएक बढ़ गई. काम बढ़ा तो वर्कर भी बढ़ गए. तभी उन्होंने अपने चाचा सलीमुद्दीन के बड़े बेटे इरफान को अपने स्लाटर हाउस का हिसाबकिताब देखने के लिए रख लिया. इरफान को यह काम पसंद आ गया तो 2 साल पहले उस ने अपने छोटे भाई इमरान को भी अपनी मदद के लिए स्लाटर हाउस में रख लिया.

20 वर्षीय इमरान मेहनती युवक था. स्लाटर हाउस में नौकरी करने से पहले वह ताजमहल में गाइड का काम करता था. वहां वह ठीकठाक कमाई कर रहा था, लेकिन जब भुट्टो ने उस से इरफान की मदद के लिए स्लाटर हाउस में काम करने को कहा तो उस ने गाइड का काम छोड़ दिया और भाई के स्लाटर हाउस का काम देखने लगा. 5 भाइयों में सब से छोटे Social Crime Stories इमरान ने स्लाटर हाउस में आते ही रुपयों के लेनदेन से ले कर बाहर के सारे काम संभाल लिए. इस तरह इमरान ने आते ही इरफान का बोझ आधा कर दिया.

इरफान की शादी हो चुकी थी. उस का विवाह आगरा शहर के ही वजीरपुरा के रहने वाले अहसान की बेटी सीमा के साथ हुआ था. उस के ससुर दरी के अच्छे कारीगर थे, इसलिए उन का दरियों का कारोबार था. उन के इंतकाल के बाद इस पुश्तैनी काम में ज्यादा मुनाफा नहीं दिखाई दिया तो उन के सब से छोटे बेटे भोलू ने जूतों के डिब्बे बनाने का काम शुरू कर दिया. जबकि उस के 3 अन्य भाई और चाचा दरी का पुश्तैनी कारोबार ही करते रहे. भोलू का जूतों के डिब्बे बनाने का काम बढि़या चल निकला. उसी की कमाई से जल्दी ही उस ने मारुति स्विफ्ट कार खरीद ली. भोलू अपनी बहन सीमा के यहां आताजाता ही रहता था. इसी आनेजाने में उस ने महसूस किया कि स्लाटर हाउस में जो लोग जानवर सप्लाई करते हैं, उन की अच्छीखासी कमाई होती है. उस के पास पैसे तो थे ही, उस ने अपने बहनोई इरफान से इस संबंध में बात की तो उस ने भुट्टो से बात कर के भोलू को जानवर खरीद कर लाने के लिए कह दिया.

इस के बाद भोलू आगरा के जानवरों के बाजारों, किरावली, शमसाबाद, बटेश्वर आदि से सस्ते दामों में जानवर खरीद कर बहनोई की मार्फत स्लाटर हाउस में बेचने लगा. इस काम में उसे अच्छीखासी कमाई होने लगी. जूतों के डिब्बों का उस का काम चल ही रहा था. इस तरह महीने में वह एक लाख रुपए से अधिक की कमाई करने लगा. किरावली बाजार में जानवरों की खरीदारी के दौरान भोलू की मुलाकात सलमान से हुई तो उसे यह आदमी भा गया. सलमान भी जानवरों की खरीदफरोख्त करता था. इस की वजह यह थी कि एक तो भोलू को कई काम देखने पड़ते थे, दूसरे सलमान इस काम में काफी तेज था. इसीलिए पहली मुलाकात में ही भोलू ने सलमान को बिजनैस पार्टनर बना लिया था. इस के बाद दोनों मिल कर जानवर खरीदने और बेचने लगे.

भोलू ने सलमान को बिजनैस पार्टनर तो बना लिया, लेकिन उस के बारे में उसे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उस के बारे में उसे सिर्फ इतना पता था कि वह किरावली का रहने वाला है और उस का मोबाइल नंबर यह है. भोलू के साथ रहने में सलमान को फायदा दिखाई दिया, इसलिए वह उस के साथ रहने लगा. बड़े भाई का साला होने की वजह से इमरान की भोलू से खूब पटती थी. जिस दिन भोलू पशु मेले या बाजार नहीं गया होता था, सारा दिन इमरान उसे अपने साथ रखता था. उसी के सामने वह बैंक से पैसे भी निकालता था और जमा भी कराता था. 50 लाख से ले कर करोड़ रुपए निकालना उस के लिए आम बात थी.

भोलू ने कभी कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं की थी, इसलिए इमरान उस पर पूरा विश्वास करने लगा था. भोलू का काम दोनों ओर से ठीकठाक चल रहा था. उस की कमाई महीने में लाख रुपए से ऊपर थी. लेकिन कमाई बढ़ी तो उस की पैसों की भूख भी बढ़ गई थी. अब वह करोड़पति बनने के सपने देखने लगा.

एक दिन शाम को वह सलमान के साथ बैठा था तो उस के मुंह से निकला, ‘‘यार सलमान, मेरे पास एक ऐसी योजना है, जिस के तहत हमें एक करोड़ रुपए आसानी से मिल सकते हैं.’’

‘‘कैसे?’’ सलमान ने पूछा.

इस के बाद भोलू ने उसे जो योजना बताई, सुन कर सलमान की रूह कांप उठी. लेकिन जब भोलू ने उसे पूरी योजना समझा कर मिलने वाली रकम का लालच दिया तो वह उस की योजना में शामिल हो गया.  3 दिसंबर को उन्होंने अपनी इस योजना को अंजाम देने की तैयारी भी कर ली. 2 दिसंबर यानी सोमवार को भोलू इमरान के साथ ही रहा. उस दिन बैंक का कोई काम नहीं था, इसलिए बैंक जाना नहीं हुआ. लेकिन उस दिन भोलू को पता चल गया कि अगले दिन इमरान को बैंक जाना है और लगभग एक करोड़े रुपए निकाल कर लाना है. शाम को घर जाते समय इमरान ने भोलू को वाटर वर्क्स चौराहे पर छोड़ दिया तो वहां से वह वजीरपुरा स्थित अपने घर चला गया.

इमरान की गाड़ी से उतरते ही भोलू ने सलमान को फोन कर के अगले दिन चाकू और पिस्तौल ले कर तैयार रहने के लिए कह दिया था. अगले दिन यानी 3 दिसंबर, 2013 दिन मंगलवार को योजनानुसार 10 बजे के आसपास भोलू ने अपने बहनोई इरफान को फोन कर के बताया कि आज वह सलमान के साथ जानवरों की खरीदारी करने शमसाबाद जा रहा है. इसलिए वह देर शाम तक ही स्लाटर हाउस आ पाएगा. तब इरफान ने उस से कहा था, ‘‘आज इमरान को बैंक से बड़ी रकम निकाल कर लाना है, हो सके तो तुम यह काम करा कर जाओ.’’

इस पर भोलू ने कहा, ‘‘दरअसल वहां कुछ व्यापारी सस्ते जानवर ले कर आने वाले हैं, अगर उन से सौदा पट गया तो काफी मोटा मुनाफा हो सकता है. इसलिए वहां जाना जरूरी है.’’

इस के बाद भोलू ने इमरान को भी फोन कर के कहा था, ‘‘इमरानभाई, मैं सलमान के साथ शमसाबाद जानवर खरीदने जा रहा हूं. इसलिए तुम अकेले ही बैंक चले जाना. क्योंकि मैं देर शाम तक ही वापस आ पाऊंगा.’’

योजनानुसार न तो भोलू शमसाबाद गया न सलमान. दोनों साए की तरह इमरान के पीछे इस तह लगे रहे कि वह उन्हें देख न पाए. इस बीच इमरान को फोन कर के वह पूछता रहा कि वह क्या कर रहा है? लेकिन उस ने यह नहीं पूछा था कि आज वह कितने रुपए निकाल रहा है?

इमरान जैसे ही रुपए ले कर बैंक से निकला, भोलू और सलमान टूसीटर से उस से पहले वाटर वर्क्स चौराहे पर पहुंच गए और वहीं खड़े हो कर इमरान पर नजर रखने लगे. जब उन्हें लगा कि इमरान वाटर वर्क्स चौराहे पर पहुंच गया होगा तो भोलू ने उसे फोन किया, ‘‘इमरानभाई, मैं शमसाबाद से लौट आया हूं और वाटर वर्क्स चौराहे पर खड़ा हूं. इस समय तुम कहां हो?’’

‘‘मैं यहीं वाटर वर्क्स चौराहे पर जाम में फंसा हूं. जहां से जवाहर पुल शुरू होता है, तुम वहीं पहुंचो. मैं वहीं से तुम्हें ले लूंगा.’’

भोलू सलमान के साथ जवाहर पुल के पास जा कर खड़ा हो गया. 5-7 मिनट बाद इमरान वहां पहुंचा तो भोलू इमरान की बगल वाली सीट पर बैठ गया तो सलमान पीछे वाली सीट पर. गाड़ी आगे बढ़ गई. इमरान को बातों में उलझा कर भोलू ने डैशबोर्ड पर रखे उस के दोनों मोबाइल फोन के स्विच औफ कर दिए. कार जैसे ही कुबेरपुर के पास पहुंची, भोलू ने कहा, ‘‘इमरानभाई, मेरे 2 दोस्त चौगान गांव के पास एक्सप्रेसवे के नीचे मेरा इंतजार कर रहे हैं. अगर तुम मुझे वहां तक छोड़ देते तो अच्छा रहता.’’

इमरान ने नानुकुर की, लेकिन चौगान गांव वहां से कोई बहुत ज्यादा दूर नहीं था. फिर भोलू पर उसे पूरा विश्वास था, इसलिए साथ में इतने रुपए होने के बावजूद इमरान ने कार चौगान गांव की ओर मोड़ दी. चौगान से कोई आधा किलोमीटर पहले ही सुनसान जंगली रास्ते पर लघुशंका के बहाने भोलू ने इमरान से कार रुकवा ली. भोलू नीचे उतरा और इधरउधर देख कर अंदर बैठे सलमान को इशारा किया. जैसे ही सलमान नीचे उतरा, भोलू ने तमंचा निकाल कर ड्राइविंग सीट पर बैठे इमरान के सीने पर गोली मार दी. उस ने दूसरी गोली मारनी चाही, लेकिन तमंचा धोखा दे गया. गोली लगते ही इमरान के मुंह से हलकी सी चीख निकली और वह छटपटाने लगा. भोलू ने सलमान से छुरा ले कर इमरान पर कई वार करने के साथ गला भी काट दिया कि कहीं यह बच न जाए. चाकू चलाने के दौरान भोलू के दोनों हाथ जख्मी हो गए, जिस में उस ने रूमाल बांध ली.

इस के बाद इमरान की लाश घसीट कर दोनों ने हाईवे से सटे एक गड्ढे में फेंक दी. वहीं पास ही उन्होंने चाकू और तमंचा भी फेंक दिया. इस के बाद कार ले कर भाग निकले. रास्ते में एक हैंडपंप पर कार रोक कर थोड़ीबहुत धुलाई की. वहां से थोड़ा आगे आ कर एक्सप्रेसवे पर उन्होंने रकम गिनी तो पता चला कि ये तो सिर्फ 20 लाख रुपए ही हैं. जबकि उन्हें एक करोड़ रुपए होने की उम्मीद थी. दोनों ने ही अपना अपना सिर पीट लिया. बहरहाल अब तो जो होना था, वह हो गया था. दोनों ने आधीआधी रकम ले ली. भोलू ने  सलमान को कार ठिकाने लगाने के लिए दे कर एक जगह रकम छिपाई और खुद स्लाटर हाउस पहुंच गया.

स्लाटर हाउस में इमरान के न आने की वजह से इरफान परेशान था. बहनोई से हालचाल पूछ कर वह इमरान की तलाश करने के बहाने बाहर आ गया. इरफान ने उस के हाथों पर रूमाल बंधी देखी तो उस के बारे में पूछा था. तब उस ने बहाना बना दिया था. स्लाटर हाउस से निकल कर भोलू ने छिपा कर रखे रुपए अपने एक परिचित के पास रखे और वापस जा कर इरफान के साथ इमरान की तलाश करने लगा.

दूसरी ओर इमरान की कार ले कर गया सलमान वहां से 5 किलोमीटर दूर एक ढाबे पर पहुंचा और एक दुर्घटनाग्रस्त ट्रेलर के पीछे कार खड़ी कर के ढाबे के एक कर्मचारी को 5 सौ रुपए का नोट दे कर कहा कि वह दिल्ली जा रहा है, इसलिए एक दिन के लिए अपनी इस कार को यहीं खड़ी कर रहा है. ढाबे के उस कर्मचारी को क्या ऐतराज होता, उस ने कह दिया कि खड़ी कर दो. सलमान ने वहीं अपने फोन का स्विच औफ किया और रुपए ले कर फरार हो गया.

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पुलिस ने मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर इमरान की हत्या में भोलू को गिरफ्तार किया था. इस की वजह यह थी कि उस ने सब से कहा था कि वह शमसाबाद जा रहा है, जबकि उस के मोबाइल फोन की लोकेशन आईसीआईसीआई बैंक से ले कर जहां से इमरान की लाश बरामद हुई थी, वहां तक मिली थी. मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इमरान की कार तो उस ढाबे से बरामद कर ली थी, लेकिन सलमान का मोबाइल बंद होने की वजह से उसे नहीं पकड़ पाई. पूछताछ के बाद पुलिस ने भोलू को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था.

सलमान की तलाश में आगरा के कई थानों की पुलिस तो लगी ही है, मृतक इमरान के घर वाले भी उस की खोज में लगे हैं. उन्हें 10 लाख रुपयों से ज्यादा इमरान के हत्यारे को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने की चिंता है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

वो कैसे बना 40 बच्चों का रेपिस्ट व सीरियल किलर?

वो कैसे बना 40 बच्चों का रेपिस्ट व सीरियल किलर? – भाग 4

बेटे के जाते ही मंजू और सन्नी अपनी हसरतें पूरी करने लगे, लेकिन मैकेनिक की दुकान बंद होने की वजह से रविंद्र जल्द ही वापस लौट आया. घर का दरवाजा बंद था. उस ने दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा नहीं खुला, फिर वह गली में जा कर खड़ा हो गया.

रविंद्र के दोस्त सन्नी से थे मां के संबंध

उधर दरवाजा खटखटाने पर मंजू और सन्नी की कामलीला में व्यवधान पड़ गया. फटाफट दोनों ने कपड़े पहने और सन्नी दरवाजा खोल कर चला गया. सन्नी रविंद्र को नहीं देख सका. अपने घर से सन्नी को निकलता देख रविंद्र का माथा घूम गया. वह समझ गया कि उस की मां के साथ सन्नी का जरूर कोई चक्कर चल रहा है.

उस ने उसी समय तय कर लिया कि वह सन्नी को सबक सिखा कर रहेगा. उस ने यह बात अपने भाई सुनील को बताई तो सुनील का भी सन्नी के प्रति खून खौल उठा. दोनों भाइयों ने सन्नी के खिलाफ योजना बना ली. इस योजना में रविंद्र ने अपने दोस्त हिमांशु को भी शामिल कर लिया. उसी दिन शाम को रविंद्र ने सन्नी से फोन पर बात की तो उस ने बताया कि वह इस समय मुंडका में है.

योजना को अंजाम देने के लिए रविंद्र, हिमांशु और सुनील को ले कर मुंडका पहुंच गया. सन्नी उन्हें वहीं मिल गया. सन्नी के साथ उन्होंने एक जगह बैठ कर शराब पी. सन्नी पर जब थोड़ा नशा चढ़ गया तो उसी दौरान तीनों ने सन्नी की जम कर पिटाई की और रविंद्र ने उस की जेब से उस का मोबाइल फोन और ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य कागजात निकाल लिए.

रविंद्र ने सन्नी को जिन्दा जलाने के लिए उसी की मोटरसाइकिल से पैट्रोल निकाल कर उसी के ऊपर छिडक़ दिया. लेकिन सुनील ने उसे आग लगाने से रोक दिया. सुनील ने यह कहते हुए भाई को समझा दिया कि अभी इस के लिए इतनी ही सजा काफी है. अगर यह अब भी नहीं मानेगा तो इसे दुनिया से ही मिटा देंगे. उसी वक्त मौका मिलते ही सन्नी वहां से खेतों की तरफ भाग गया. सन्नी की बाइक ले कर रविंद्र, सुनील और हिमांशु अपने घर चले गए.

सन्नी रात भर खेतों में ही रहा. डर की वजह से वह घर तक नहीं गया. सुबह होने पर वह अपने घर गया और पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के अपने साथ घटी घटना की जानकारी दी. तब पुलिस ने सन्नी को रोहिणी के डा. अंबेडकर अस्पताल में भरती कराया और रविंद्र, सुनील व हिमांशु के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

सन्नी को फंसाने की रची थी साजिश

14 जुलाई 2015 को सुबह 6 बजे के करीब रविंद्र नित्य क्रिया के लिए घर से निकला, तभी उस ने रास्ते में संतोष की 6 साल की बेटी निशा को अकेली जाते हुए देखा. वह भी नित्य क्रिया के लिए जा रही थी. उसे अकेली देख कर उस का शैतानी दिमाग जाग उठा. उस ने उस बच्ची को 10 रुपए दिए और किसी बहाने से उसे वहां से 50 मीटर की दूरी पर स्थित निर्माणाधीन इमारत में ले गया.

वह इमारत खाली पड़ी थी. नादान बच्ची उस के इरादों को नहीं समझ पाई. उस ने अन्य बच्चों की तरह निशा के साथ भी कुकर्म कर के उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. शातिर दिमाग रविंद्र ने इस बच्ची के मामले में सन्नी को फंसाने के लिए सन्नी का ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य कागजात उसी इमारत की दूसरी मंजिल पर डाल दिए, ताकि पुलिस सन्नी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दे.

रविंद्र ने सन्नी को फंसाने का जाल तो अच्छी तरह बिछाया था, पर अपने जाल में वह खुद फंस जाएगा, ऐसा उस ने नहीं सोचा था. आखिर वह पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया. रविंद्र से पूछताछ के बाद डीसीपी भी हैरान रह गए कि यह एक के बाद एक 40 वारदातें करता गया और पुलिस को पता तक नहीं चला. अगर यह क्रूर हत्यारा अब भी नहीं पकड़ा जाता तो न मालूम कितने और बच्चों को अपना निशाना बनाता.

बहरहाल, पुलिस ने 17 जुलाई को रविंद्र को रोहिणी जिला न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के समक्ष पेश किया. रविंद्र ने पुलिस को बताया था कि वह लगभग 40 बच्चों को अपना शिकार बना कर उन की हत्या कर चुका है. ये सारी वारदातें उस ने दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों में भी की थीं.

घटनास्थल का सत्यापन और केस से संबंधित सबूत जुटाने के लिए उस से और ज्यादा पूछताछ करनी जरूरी थी. इसलिए पुलिस ने कोर्ट से उस का 7 दिनों का रिमांड मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

रिमांड मिलने के बाद पुलिस रविंद्र को उन जगहों पर ले गई, जहांजहां उस ने वारदातों को अंजाम दिया था. रविंद्र ने पुलिस को अलगअलग जगहों पर ले जा कर 27 केसों की पुष्टि करा दी. बाकी केसों के बारे में उसे खुद को ध्यान नहीं रहा कि उस ने कहां वारदात की थी.

तमाम लाशें हो चुकी थीं डैमेज

जिन जगहों पर वारदात कराने की उस ने पुष्टि कराई थी, पुलिस ने उस क्षेत्र के थाने में संपर्क किया तो पता चला कि उन में से केवल 15 केसों की ही अलगअलग थानों में रिपोर्ट दर्ज हुई थी. पुलिस किसी और बच्चे की लाश बरामद नहीं कर पाई. इस की वजह यह थी कि उसे वारदात को अंजाम दिए काफी दिन बीत चुके थे, जिस से अनुमान यही लगाया गया कि बच्चों की लाशें जंगली जानवरों द्वारा या अन्य वजह से नष्ट हो गईं.

जैसेजैसे सीरियल किलर रविंद्र की क्रूरता के खुलासे लोगों को पता लगते गए, उन का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था. दिल्ली और आसपास के क्षेत्र के जिन गायब हुए बच्चों का कोई सुराग नहीं लग रहा था, उन के मांबाप भी यही सोचने लगे कि कहीं उन का बच्चा भी रविंद्र का शिकार तो नहीं हो गया. वे भी थाना बेगमपुर पहुंचने लगे.

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रिमांड अवधि खत्म होने से पहले पुलिस ने 23 जुलाई, 2015 को जब रविंद्र को फिर से न्यायालय में पेश किया तो उसे देखने के लिए कोर्ट में और कोर्ट से बाहर तमाम लोग जमा हो गए. वे सभी गुस्से से भरे थे. वे उसे जनता के सुपुर्द करने की मांग करने लगे, ताकि उस क्रूर हत्यारे को अपने हाथों से सजा दे सकें. भारी पुलिस सुरक्षा के बीच उसे कोर्ट में पेश किया गया.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने रविंद्र को जेल भेजने के आदेश दिए. पुलिस जब उसे कोर्ट से बाहर ले जा रही थी, तभी वकीलों ने रविंद्र पर हमला कर उस की पिटाई शुरू कर दी. बड़ी मशक्कत से पुलिस ने उसे बचाया.

बहरहाल रविंद्र को जानने वाले सभी लोग उस के कारनामे से आश्चर्यचकित थे. सीधासादा दिखने वाला रविंद्र इतना बड़ा सीरियल किलर निकलेगा, ऐसी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी.

केस में 24 गवाह हुए पेश

जांच अधिकारी इंसपेक्टर जगमंदर दहिया उस के केसों से संबंधित ज्यादा से ज्यादा सबूत जुटा कर इस केस की चार्जशीट रोहिणी न्यायालय में पेश की. कोर्ट में यह केस 8 साल तक चला. दोनों पक्षों ने अपने गवाह प्रस्तुत किए. कुल 24 गवाह पेश हुए. इन में मुख्य गवाह बने टेलीफोन औपरेटर मुकुल कुमार. यह सीपीसीआर (पुलिस मुख्यालय) में तैनात थे.

रोहिणी न्यायालय के एडिशनल सेशन जज सुनील कुमार की अदालत में इस केस की अंतिम बहस हुई. अभियोजन पक्ष की ओर से राज्य के विशेष पीपीएलडी विनीत दहिया, काजल सिंघल (डीसीडब्ल्यू में सलाहकार) तथा बचाव पक्ष की तरफ से वकील अभिषेक श्रीवास्तव नियुक्त हुए.

अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील में कहा, “मी लार्ड, दोषी ने पीडि़ता के साथ जघन्य अपराध किया जो किसी अमानवीय और शैतानी से कम नहीं. निशा 6 साल की अबोध बालिका थी. ऐसी बच्ची से कोई इंसान इतना घिनौना कृत्य करे, यह उम्मीद नहीं की जा सकती. बलात्कार फिर गला घोंट कर हत्या.

“मी लार्ड, आरोपी 8 साल से जेल में है यह सुधर गया होगा, यह कहना सोचना गलत होगा. इसे अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है. इस ने लगभग 40 मासूम बच्चों और बच्चियों की जान ली है. उन का यौन शोषण भी किया. इसे मृत्युदंड से कम सजा नहीं दी जानी चाहिए. इस ने निशा के साथ वासनापूर्ति की, फिर उसे बेरहमी से मार डाला, यह दया का पात्र हरगिज नहीं हो सकता.”

बचाव पक्ष ने अपील की, “मी लार्ड, इस की गरीबी ने इसे उद्दंड बनाया. यह 8 साल से जेल में है, इस के आचरण पर किसी ने अंगुली नहीं उठाई. जेल अधिकारी से रिकौर्ड मांगा गया, यह सुधर गया है. अब यह समाज के लिए खतरा नहीं है. इसे कम सजा दे कर समाज में सुधरने का अवसर दिया जाना चाहिए. यह अभी 30 साल का है. इस को अपने मांबाप की देखभाल भी करनी है.”

मरते दम तक जेल में रहने की मिली सजा

दोनों पक्षों की दलीलें सुन लेने के बाद 6 मई, 2023 को माननीय न्यायाधीश सुनील कुमार ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा—

“रविंद्र कुमार पुत्र ब्रह्मानंद को बच्चों के यौन शोषण में पोक्सो ऐक्ट 6 की धारा में दोषी पाया गया. यह व्यक्ति रेप, हत्या, बच्चों को अगवा करने, सबूत नष्ट करने में दोषी ठहराया जाता है. चूंकि यह साइको क्रिमिनल है, इसलिए इसे मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता. भादंवि की धारा 302 के तहत यह मृत्यु तक जेल में रहेगा, इसे दंड के रूप में 10 हजार रुपए का जुरमाना देना होगा. जुरमाना न देने पर 3 माह का दंड और भुगतना होगा.

“दफा 363 आईपीसी में इसे 7 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार का जुरमाना लगाया जाता है. जुरमाना न देने पर 3 माह का कठोर दंड भुगतना होगा. दफा 366 आईपीसी में 10 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार का जुरमाना लगाया जाता है. जुरमाना अदा न करने पर 3 महीने का अतिरिक्त दंड भुगतना होगा. धारा 201 आईपीसी में इसे 7 साल की सजा और 10 हजार रुपए का जुरमाना अदा करना होगा. जुरमाना न देने पर 3 माह की सजा काटनी होगी.

“चूंकि यह आर्थिक रूप से कमजोर है, इस के पास चलअचल संपत्ति भी नहीं है, यह गरीब है और किसी भी तरह से जुरमाने की रकम नहीं दे सकेगा, यह मान कर यह कोर्ट उपधारा (4) राज्य के तरह आवेदन करती है कि निशा के मांबाप को जिला विशेष सेवा प्राधिकरण उचित जांच के बाद मुआवजे की राशि 15 लाख रुपए 2 माह के भीतर अदा करे, जिस से बेटी को खो देने की क्षतिपूर्ति हो सके.”

न्यायाधीश सुनील कुमार द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद पुलिस ने कटघरे से बाहर निकले मुजरिम रविंद्र कुमार को तुरंत कस्टडी में ले लिया और उसे रोहिणी जेल पहुंचा दिया.

न्यायाधीश सुनील कुमार द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद निशा के मातापिता फैसले से संतुष्ट दिखे. उन्होंने ऐतिहासिक फैसले की भूरिभूरि प्रशंसा की.

वो कैसे बना 40 बच्चों का रेपिस्ट व सीरियल किलर? – भाग 3

रविंद्र ने 6 साल की बच्ची को बनाया था पहला शिकार

सन 2008 की बात है. उस समय रविंद्र करीब 17 साल का था. एक बार वह आधी रात को दोस्तों से फारिग हो कर अपने घर लौट रहा था. उस ने कराला में एक झुग्गी के बाहर मांबाप के साथ सो रही बच्ची को देखा. उस बच्ची की उम्र कोई 6 साल थी.

उस बच्ची को देख कर रविंद्र की कामवासना जाग उठी. वह चुपके से गहरी नींद में सो रही उस बच्ची को उठा ले गया. बच्ची के मांबाप को पता ही नहीं चला कि उन की बेटी उन के पास से गायब हो चुकी है. रविंद्र उस बच्ची को सूखी नहर की तरफ ले गया. जैसे ही उस ने उस बच्ची को जमीन पर लिटाया वह जाग गई.

खुद को सुनसान और अंधेरे में देख कर वह डर गई. वहां उस के मांबाप की जगह एक अनजान आदमी था. वह रोने लगी तो रविंद्र ने डराधमका कर उसे चुप करा दिया. उस के बाद उस ने उस के साथ कुकर्म किया. बच्ची दर्द से चिल्लाने लगी तो उस ने उस का मुंह दबा दिया. कुछ ही देर में वह बेहोश हो गई. भेद खुलने के डर से उस ने बच्ची की गला दबा कर हत्या कर दी और अपने घर चला गया.

अगली सुबह झुग्गी के बाहर सो रहे दंपति को जब अपनी बेटी गायब मिली तो वह उसे खोजने लगे. उसी दौरान उन्हें सूखी नहर में बेटी की लाश पड़ी होने की जानकारी मिली तो वे वहां पहुंचे. इस मामले की थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस केस को नहीं खोल सकी.

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केस न खुलने से रविंद्र की हिम्मत बढ़ गई. इस के बाद सन 2009 में बाहरी दिल्ली के ही विजय विहार, रोहिणी इलाके से 6- 7 साल के एक लडक़े को बहलाफुसला कर वह सुनसान जगह पर ले गया और कुकर्म करने के बाद उस की हत्या कर दी. इस मामले को भी पुलिस नहीं खोल सकी.

रविंद्र को अपनी कामवासना शांत करने का यह तरीका अच्छा लगा. क्योंकि वह 2 हत्याएं कर चुका था और दोनों ही मामलों में वह सुरक्षित रहा, इस से उस के मन का डर निकल गया. इस के बाद वह कंझावला इलाके में एक बच्ची को बहलाफुसला कर सुनसान जगह पर ले गया और उस के साथ कुकर्म कर के उस की हत्या कर दी.

बच्चियों को देख कर जाग जाती थी कामकुंठा

वह कोई एक काम जम कर नहीं करता था. कभी गाड़ी पर हेल्परी का काम करता तो कभी बेलदारी करने लगता. नोएडा के सेक्टर-72 में वह एक बिल्डिंग में काम कर रहा था. वहां भी उस ने अपने साथ काम करने वाली महिला बेलदारों की 2 बच्चियों को अलगअलग समय पर अपनी हवस का शिकार बनाया. वह उन बच्चियों को चौकलेट दिलाने के लालच में गेहूं के खेत में ले गया था. वहीं पर उस ने उन की गला दबा कर हत्या कर दी थी.

उस के पिता ब्रह्मानंद का दिल्ली आने के बाद अपने गांव जाना नहीं हो पाता था, लेकिन रविंद्र कभीकभी अपने गांव जाता रहता था. खानदान के और लोग भी दिल्ली और नोएडा चले आए थे. रविंद्र जब भी गांव जाता, गंज डुंडवारा के पास गांव नूरपुर में अपनी मौसी मुन्नी देवी के यहां ठहरता था. वहीं पास के ही बिरारपुर गांव में उस की बुआ कृपा देवी का घर था. कभीकभी वह उन के यहां भी चला जाता था.

उस की हैवानियत वहां भी जाग उठी तो उस ने वहां भी अलगअलग समय पर 2 बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया. अब तक रविंद्र सैक्स एडिक्ट हो चुका था. उस की मानसिकता ऐसी हो गई थी कि वह अपने शिकार को तलाशता रहता. बच्चे उस का शिकार आसानी से बन जाते थे, इसलिए वे उस का सौफ्ट टारगेट बन जाते थे. ज्यादातर वह झुग्गीझोपडिय़ों या गरीब परिवारों के बच्चों को ही निशाना बनाता था, ताकि वे लोग ज्यादा कानूनी काररवाई न कर सकें.

इस तरह उस ने दिल्ली के निहाल विहार, मुंडका, कंझावला, बादली, शालीमार बाग, नरेला, विजय विहार, अलीपुर के अलावा हरियाणा के बहादुरगढ़, फरीदाबाद, उत्तर प्रदेश के सिकंदराऊ, अलीगढ़ आदि जगहों पर 6 से 9 साल के करीब 40 लडक़ेलड़कियों को अपना निशाना बनाया. उस की मानसिकता ऐसी हो गई थी कि वह कुकर्म के बाद हर बच्चे की हत्या कर देता था. ज्यादातर के साथ उस ने मारने के बाद कुकर्म किया था.

पहली बार दोस्त के साथ हुआ गिरफ्तार

उस ने कई बच्चों की लाशें ऐसी जगहों पर डाली थीं कि पुलिस भी उन्हें बरामद नहीं कर सकी. 4 जून  को उस ने अपने दोस्त राहुल के साथ अपनी ही बस्ती जैन नगर के कृष्ण कुमार के 6 साल के बेटे शिबू को सोते हुए उठा लिया. दोनों उसे आधा किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर ले गए और उस के साथ कुकर्म किया.

राहुल नाई था. वह अपने साथ उस्तरा भी ले गया था. बाद में उस ने उसी उस्तरे से उस का गला काट कर लाश सूखे गटर में डाल दी थी. बच्चे को गटर में डालते हुए उन्हें किसी ने देख लिया था. उन दोनों ने तो यही समझा था कि शिबू मर चुका है, लेकिन वह जीवित था. अगले दिन जब खोजबीन हुई तो वह सूखे गटर में पड़ा मिला.

जिस शख्स ने रविंद्र और राहुल को देखा था, उसी ने अगले दिन पुलिस को सब बता दिया. नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने रविंद्र और राहुल को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया.

रविंद्र जिस सन्नी के साथ ट्रेलर पर हैल्परी करता था, उसी सन्नी के रविंद्र की मां मंजू से अवैध संबंध थे. रविंद्र के जेल जाने के बाद मंजू परेशान हो गई. वह बेटे की जमानत की कोशिश में लग गई. कहसुन कर उस ने सन्नी के पिता सुरेंद्र से बेटे की जमानत करवा ली. लिहाजा 20 मई, 2015 को रविंद्र जेल से बाहर आ गया.

बात 13 जुलाई की है. मंजू अपने घर में अकेली थी. उस ने फोन कर के अपने प्रेमी सन्नी को घर पर बुला लिया. दोनों अपनी हसरतें पूरी करते, अचानक रविंद्र घर आ गया था. सन्नी उस समय मंजू से बातें कर रहा था. इसलिए रविंद्र को उस पर कोई शक वगैरह नहीं हुआ. रविंद्र के आने के बाद मंजू और सन्नी की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही थी.

बेटे को बाहर भेजने के लिए मंजू ने घर में पड़ा टेप रिकौर्डर रविंद्र को देते हुए कहा कि वह उसे ठीक करा लाए. मां के कहने पर रविंद्र टेप रिकौर्डर ठीक कराने चला गया.

वो कैसे बना 40 बच्चों का रेपिस्ट व सीरियल किलर? – भाग 2

जांच ने लिया नया मोड़

इस मामले को सुलझाने के लिए डीसीपी विक्रमजीत ने एसीपी ऋषिदेव के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में इंसपेक्टर जगमंदर दहिया, एएसआई सुरेंद्रपाल, हैडकांस्टेबल नरेंद्र कुमार, कांस्टेबल टी.आर. मीणा आदि को शामिल किया गया.

जिस बिल्डिंग में निशा की लाश मिली थी, उसी बिल्डिंग में पुलिस को जो ड्राइविंग लाइसेंस और कागजात मिले थे, उन की जांच शुरू की गई. ड्राइविंग लाइसेंस पर सन्नी पुत्र सुरेंद्र कुमार नाम लिखा था. उस पर जो पता लिखा था, वह कराला के जैन नगर का ही था. यानी यह पता वही था, जहां मरने वाली बच्ची रहती थी.

खैर, पुलिस सन्नी के घर पहुंच गई. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. पता चला कि वह डा. अंबेडकर अस्पताल में भरती है. जब पुलिस अस्पताल पहुंची तो जानकारी मिली कि सन्नी को कुछ देर पहले ही डिस्चार्ज कर दिया गया था. लिहाजा उलटे पांव पुलिस जैन नगर लौट आई. सन्नी घर पर ही मिल गया. उस के हाथपैर और शरीर के अन्य भागों पर चोट लगी हुई थी.

पुलिस ने 14 जुलाई को ही सन्नी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि कल रात पड़ोस के ही रविंद्र कुमार, उस के भाई सुनील और उस के दोस्त हिमांशु ने उस की खूब पिटाई की थी. पिटाई करने के बाद रविंद्र उस की जेब से मोबाइल, ड्राइविंग लाइसेंस, पैसे आदि निकाल कर ले गया था. मुझे उम्मीद है कि उसी ने यह सब किया होगा.

आरोपी रविंद्र तक ऐसे पहुंची पुलिस

रविंद्र का घर सन्नी के घर के पास ही था. पुलिस उस के घर गई तो वह और उस के भाई में से कोई नहीं मिला. घर पर मौजूद उस के पिता ने पुलिस को बताया कि दोनों भाई अपने किसी दोस्त के यहां गए हुए हैं. पुलिस उस के पिता को हिदायत दे कर चली आई.

पुलिस ने रविंद्र के बारे में छानबीन की तो जानकारी मिली कि पिछले साल उस ने बेगमपुर थानाक्षेत्र में ही एक बच्चे के साथ कुकर्म कर के उस की गला काट कर हत्या कर दी थी. इस की रिपोर्ट थाना बेगमपुर में ही भादंवि की धारा 363/307/377 के तहत लिखी गई थी. इस मामले में वह गिरफ्तार हुआ था. गिरफ्तारी के 6 महीने बाद सन्नी के पिता सुरेंद्र सिंह ने उस की जमानत कराई थी. तब वह जेल से बाहर आया था.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस को रविंद्र पर शक हुआ. उस का जो मोबाइल नंबर पुलिस को मिला था, वह स्विच्ड औफ था. पुलिस टीम रविंद्र को सरगर्मी से तलाशने लगी. 2 दिन बाद एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने 16 जुलाई  को उसे थाना क्षेत्र के ही सुखवीर नगर बस स्टौप से गिरफ्तार कर लिया.

थाने ला कर जब रविंद्र से पूछताछ की गई तो उस ने निशा की हत्या का जुर्म तो स्वीकार कर ही लिया, इस के अलावा उस ने ऐसा खुलासा किया कि पुलिस हैरान रह गई. उस ने बताया कि वह निशा की तरह तकरीबन 40 बच्चों की हत्या कर चुका है. पुलिस तो केवल मर्डर के एक केस को खोलने के लिए रविंद्र को तलाश रही थी, लेकिन वह इतना बड़ा सीरियल किलर निकलेगा, पता नहीं था.

इंसपेक्टर जगमंदर दहिया के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी. उन्होंने उसी समय डीसीपी विक्रमजीत को यह जानकारी दी तो आधे घंटे के अंदर वह भी बेगमपुर थाने पहुंच गए. एक लाश और ड्राइविंग लाइसेंस ने ऐसे गुनाह से परदा उठा दिया था, जिसे सुन कर इंसानियत भी शर्मशार हो जाए. उस ने डीसीपी के सामने रोंगटे खड़ी कर देने वाली बच्चों की हत्या की जो कहानी बताई, वह नोएडा के निठारी कांड से कम नहीं थी.

रविंद्र ने बताया कि वह बच्चों की हत्या करने के बाद ही उन से कुकर्म करता था. उस के खुलासे पर डीसीपी भी चौंके. 24 साल के रविंद्र कुमार ने एक के बाद एक कर के करीब 40 बच्चों की हत्या करने और सैक्स एडिक्ट बनने की जो कहानी बताई, वह दिल को झकझोरने वाली थी.

गांव छोड़ कर दिल्ली आया था परिवार

रविंद्र मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज के कस्बा गंज डुंडवारा के रहने वाले ब्रह्मानंद का बेटा था. रविंद्र के अलावा उस के 3 और बेटे थे. ब्रह्मानंद प्लंबर का काम करता था, इसलिए उस की हैसियत ऐसी नहीं थी कि वह बच्चों को पढ़ा सकता था.

लिहाजा जब उस के 2 बेटे बड़े हुए तो वह उन से भी मजदूरी कराने लगा. बेटे कमाने लगे तो उस के घर की माली हालत सुधरने लगी. उसी दौरान सन 1990 में गंज डुंडवारा में दंगा भडक़ गया तो ब्रह्मानंद अपनी पत्नी मंजू और बच्चों को ले कर दिल्ली आ गया.

बाहरी दिल्ली के कराला गांव में उस की जानपहचान के तमाम लोग रहते थे. लिहाजा वह भी उन के साथ कराला में रहने लगा. उस समय मंजू गर्भवती थी. कुछ दिनों बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम रविंद्र कुमार रखा. घर में सब से छोटा होने की वजह से वह सब का प्यारा था.

ब्रह्मानंद्र अपने बाकी बच्चों को तो पढ़ा नहीं सका था, लेकिन वह रविंद्र को पढ़ाना चाहता था. जब वह स्कूल जाने लायक हुआ तो उस ने उस का दाखिला सरकारी स्कूल में करा दिया, लेकिन मोहल्ले के बच्चों की संगत में पड़ कर वह पांचवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ सका.

वह नशा करने वाले बच्चों की संगत में पड़ गया, जिस से वह भी चरस, गांजा आदि पीने लगा. घर वालों को जब पता चला तो उन्होंने उसे डांटा भी, लेकिन वह नहीं माना. रविंद्र नहीं पढ़ा तो ब्रह्मानंद उसे अपने साथ काम पर ले जाने लगा, लेकिन उस की आदत तो दोस्तों के साथ घूमने की थी.

पिता के साथ मेहनत का काम भला वह क्यों करता. इसलिए वह पिता के साथ भी ज्यादा दिन नहीं टिक सका. उसे जब खर्च के लिए पैसों की जरूरत होती, वह अपनी जानपहचान वाले ड्राइवर सन्नी के साथ हेल्परी करने चला जाता. सन्नी उसी के पड़ोस में रहता था और वह ट्रेलर चलाता था. उस का ट्रेलर मुंडका मैट्रो स्टेशन के निर्माण के कार्य में लगा हुआ था. रविंद्र वहां से जो भी कमाता, अपने नशा के शौक पर उड़ा देता था.