Love Story Hindi Kahani: प्रेमिका ही क्यों झेले शक के ताने

Love Story Hindi Kahani: 29 वर्षीय रितिका सेन को 2 बच्चों के बाप सचिन राजपूत से प्यार हो गया. सचिन भी रितिका को अपना दिल दे बैठा. सचिन उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगा. एकदूसरे को दिलोजान से चाहने वाले इस प्रेमी युगल के संबंधों में कड़वाहट भी पैदा हो गई. फिर एक दिन यही कलह उस मुकाम पर पहुंची कि…

27 जून, 2025 की रात को भी रितिका देर से घर लौटी तो उस के चरित्र को ले कर सचिन ने एक बार फिर से गंभीर टीकाटिप्पणी की तो रितिका की उस से तीखी नोकझोंक हो गई.

”मैं जानता हूं कि तू अपने बौस के साथ गुलछर्रे उड़ा कर आ रही है, इसी कारण घर आने में देर हुई.’’

”तुम्हें शर्म आनी चाहिए ऐसी बात कहते हुए.’’ रितिका कह देती, ”कोई एक बात तो बताओ जो मुझे चरित्रहीन साबित कर दे. कम से कम तोहमत लगाने से पहले मेरी नौकरी करने वाली कंपनी में जा कर लोगों से पूछ तो लेते मेरा चरित्र कैसा है. मैं नौकरी सिर्फ इसलिए करती हूं कि जब तक तुम बेरोजगार हो, तब तक घर अच्छे से चल सके.’’ रितिका ने समझाया.

”मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं है, मैं सब जानता हूं. तुझे घर चलाने की फिक्र नहीं, बौस से मिलने की फिक्र ज्यादा होती है.’’ सचिन ने ताना दिया.

उसी समय सचिन ने एक खतरनाक फैसला ले लिया था. सचिन देर रात तक जागता रहा. रात तकरीबन 12 बजे का समय था, समूचे गायत्री नगर में सन्नाटा पसरा हुआ था, तभी सचिन ने पूरी ताकत से रितिका का गला दबा दिया. उस की चीख भी नहीं निकल सकी. सचिन के शक्की मिजाज ने उसे हैवान बना दिया था. लगभग साढ़े 3 साल से सचिन राजपूत के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही रितिका को मौत के घाट उतारते वक्त उस के हाथ नहीं कांपे. हत्या करने के बाद उस की लाश चादर में लपेट कर बैड पर रख दिया और 2 दिनों तक लाश के बगल में शराब पी कर बिना किसी हिचकिचाहट के सोता रहा.

अपनी प्रेमिका की हत्या करने के बाद जैसे ही सचिन राजपूत नशे की हालत से बाहर आया तो उस ने मिसरोद में रहने वाले अपने दोस्त अनुज उपाध्याय को फोन कर अपनी प्रेमिका रितिका की हत्या की सूचना दे दी. रितिका की हत्या बात सुन कर पहले तो अनुज को सचिन की बात पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब सचिन ने जोर दे कर कहा तो अनुज उपाध्याय ने बिना देरी किए बजरिया थाने की एसएचओ शिल्पा कौरव को इस की सूचना दे दी. हत्या की सूचना पा कर एसएचओ शिल्पा कौरव तुरंत अपने सहायकों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गईं. रास्ते में ही उन्होंने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

कुछ देर में वह गायत्री नगर, भोपाल के फ्लैट नंबर 34 पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण किया. रितिका की लाश 48 घंटे से ज्यादा समय तक चादर में लिपटे पड़े रहने से डीकंपोज (खराब) होने लगी थी, अत: उन्होंने जरूरी काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और फ्लैट में ही मौजूद मृतका के हत्यारे लिवइन पार्टनर सचिन राजपूत को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी. पूछताछ में सचिन ने अपनी प्रेमिका रितिका सेन की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

उधर जिस फ्लैट में रितिका और सचिन पिछले 9 महीने से किराए पर रह रहे थे, उस के मालिक शैलेंद्र वर्मा ने पुलिस को बताया कि वह तो दोनों को पतिपत्नी ही समझते थे. फ्लैट किराए पर लेते वक्त सचिन ने रितिका को अपनी पत्नी बताया था. हालांकि रितिका की मांग में सिंदूर भरा न देख मेरी पत्नी ने रितिका को टोका भी था. तब रितिका ने कहा था कि आंटीजी, मैं प्राइवेट कंपनी में काम करती हूं, वहां कोई भी शादीशुदा महिला मांग भर कर नहीं आती, इसलिए मैं भी नहीं भरती. वैसे भी मैं नए खयालातों की हूं. गहनता से की गई पूछताछ में ऐसी कहानी निकल कर सामने आई कि पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो गई. चौंकाने वाली बात यह थी कि सचिन राजपूत ऐसा हैवान था, जिसे अपनी प्रेमिका की हत्या करने का तनिक भी मलाल नहीं था.

29 वर्षीय रितिका सेन और सचिन राजपूत के बीच शुरुआत में मोबाइल पर प्यार भरी बातों का सिलसिला शुरू हुआ, फिर छोटीछोटी मुलाकातें जब आगे बढ़ीं तो दोनों के दिलों में प्यार का अंकुर फूटने लगा. कुछ ही दिनों में उस ने वृक्ष का रूप अख्तियार कर लिया. कुछ समय तक पिकनिक स्पौट, कैफे और पार्क में मुलाकातें करने के बाद दोनों ने बिना किसी हिचकिचाहट के लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला कर लिया. यह बात जैसे ही दोनों के फेमिली वालों को मालूम हुई तो उन्होंने इस का विरोध किया. क्योंकि रितिका सेन समाज की थी, जबकि सचिन जाति से राजपूत था. इतना ही नहीं, वह 2 बच्चों का बाप था और रितिका के चक्कर में पत्नी से तलाक लेने की कोशिश कर रहा था. दोनों के फेमिली वाले उन की आशिकी को ले कर परेशान थे.

फेमिली वालों ने उन्हें हर तरह से समझाया. ऊंचनीच का वास्ता दिया, लेकिन फेमिली वालों के विरोध की परवाह किए बिना ही दोनों भोपाल के गायत्री नगर इलाके में किराए पर फ्लैट ले कर रहने लगे. शुरुआत के दिनों में दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहते हुए बेहद खुश थे. सचिन विदिशा जिले के सिरोंज का रहने वाला था, जबकि रितिका भोपाल की. वह अपने फेमिली वालों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी. इस का असर यह हुआ कि वे एकदूसरे की अच्छाइयों और कमजोरी को जान गए. समय अपनी गति से गुजरता रहा. इस बीच सचिन रितिका के मोबाइल फोन के हर वक्त बिजी रहने से काफी तनावग्रस्त रहने लगा था. क्योंकि वह जब भी उसे फोन करता, उस का मोबाइल व्यस्त ही आता था. सचिन समझ नहीं पा रहा था कि वह हर वक्त किस से बात करती है.

इसी हकीकत को जानने के लिए सचिन ने एक दिन उस का मोबाइल चैक किया तो पता चला कि वह घंटों अपने बौस से बातें करती है. सचिन समझ गया कि रितिका और उस के बौस के बीच अवश्य चक्कर है. चरित्र पर संदेह करने की वजह से दोनों में अकसर लड़ाई होने लगी थी. यह लड़ाई कभीकभी मारपीट तक पहुंच जाती थी. सचिन बेरोजगार था. रितिका के नौकरी करने से किसी तरह उस की गृहस्थी की गाड़ी चल रही थी. रितिका को प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने की वजह से घर आने में अकसर देर हो जाती थी. उधर अकसर उस का मोबाइल फोन भी व्यस्त रहता था.

यह बात सचिन को कतई पसंद नहीं थी. रितिका जिस दिन भी घर देर से आती, सचिन जरूर उस से झगड़ा करता. अनेक बार रितिका ने सचिन को समझाया भी कि देखो, तुम्हारा शक झूठा है. तुम्हें घर पर निठल्ले बैठेबैठे शक करने की बीमारी हो गई है. इस उम्र में मैं अपने बौस से इश्क लड़ा कर क्या अपना भविष्य चौपट करूंगी.

”मैं सब जानता हूं, तुम जैसी लड़कियां अपने प्रेमी को बहलाने के लिए इसी तरह की नौटंकियां किया करती हैं,’’ सचिन ने गहरी नजर से घूरते हुए कहा.

रितिका ने कहा, ”तुम्हें तो कोई चिंता है नहीं, तुम यूं ही शक करते रहे तो न जाने एक दिन क्या होगा.’’

सचिन अपने शक से बाहर निकलने को कतई तैयार नहीं था. रितिका सचिन को समझातेसमझाते थक चुकी थी, लेकिन उस पर कोई असर नहीं होता था.

27 जून, 2025 की रात रितिका ने सचिन से दोटूक शब्दों में कहा, ”आए दिन तुम मेरे चरित्र पर तोहमत लगाते रहते हो, यह अच्छी बात नहीं है.’’

रितिका की बात पर सचिन को ताव आ गया. बोला, ”तेरी जुबान आजकल कुछ ज्यादा ही चलने लगी है,’’ कहते हुए उस ने रितिका पर हाथ छोड़ दिया. कहते हैं कि शक इंसान को किसी भी हद तक सोचने पर मजबूर कर देता है, एक बार शक ने पैर जमाए तो वह दिमाग में घर कर के बैठ गया, लाख समझाने के बाद भी सचिन का शक बढ़ता गया तो वह खोयाखोया रहने लगा. शक पूरी तरह से उस की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. जिस दिन भी रितिका देर शाम अपनी नौकरी से घर वापस आती, सचिन ने घर में तूफान खड़ा कर देता.

बात 26 जून, 2025 की है. शाम के 6 बजे थे. उस दिन सचिन का मन रितिका से तकरार हो जाने की वजह से कुछ उखड़ा हुआ था, लेकिन इस के बावजूद भी वह अपने मित्र अनुज उपाध्याय को ले कर अपने फ्लैट पर आया था. फ्लैट के भीतर कदम रखते ही सचिन ने मित्र को बैठक में बिठा दिया और रितिका को आवाज लगाई. कई बार आवाज लगाने के बावजूद रितिका ने कोई जवाब नहीं दिया, इस पर सचिन बैडरूम का दरवाजा धकेल कर जैसे ही बैडरूम में घुसा, उस ने रितिका को गहरी नींद में सोता हुआ पाया. तब वह बोला, ”रितिका डार्लिंग, देखो मेरे साथ कौन आया है?’’

फिर भी रितिका ने कोई उत्तर नहीं दिया. तब सचिन अपने दोस्त की ओर मुंह कर धीरे से बोला, ”गहरी नींद में सो रही है.’’

जबकि असलियत यह थी कि उसे नींद से जगाने का साहस सचिन जुटा नहीं पा रहा था. इस की वजह थी, बीती रात रितिका के साथ हुई उस की तीखी नोकझोंक. रितिका के चरित्र को ले कर शुरू हुई नोकझोंक में जितना सचिन ने कहा, उस से कहीं ज्यादा जलीकटी बातें रितिका ने उसे सुना दी थीं. एक तरह से रितिका ने अपना सारा गुस्सा उस पर उतार दिया था. सुबह होने पर सचिन ने रितिका को गुस्से के मूड में ही पाया. वह अपनी नौकरी पर जाने से पहले गुमसुम रह कर किचन में अपने लिए लंच तैयार करने में जुटी हुई थी. इस दौरान न तो सचिन ने रितिका से एक भी शब्द बोला और न रितिका ने अपनी जुबान खोली. यहां तक कि उस ने बेमन से नाश्ता तैयार किया.

दरअसल, रितिका अपना काम मेहनत और लगन से करती थी, जिस से उस के बौस उस से काफी खुश थे. रितिका का अपने बौस से बेझिझक और खुल कर बातें करना सचिन के संदेह का कारण बन गया, जो वक्त के साथ गंभीर होता जा रहा था. सचिन इस के लिए रितिका को कई बार समझा भी चुका था, लेकिन रितिका ने उस पर ध्यान नहीं दिया था. उस का कहना था कि कंपनी में वह जिस माहौल में काम करती है, उस में बौस से ले कर अन्य कर्मचारियों से संपर्क में रहना ही पड़ता है. मगर सचिन यह मानने को तैयार नहीं था. रितिका के चरित्र को ले कर सचिन राजपूत का संदेह दिनप्रतिदिन गहरा होता जा रहा था.

सचिन बीती रात से ले कर सुबह होने तक की यादों से तब बाहर निकला, जब उस के दोस्त अनुज ने आवाज लगाई, ”सचिन, क्या हुआ, सब खैरियत तो है न? रितिका भाभी कहीं गई हैं क्या?’’

”अरे नहीं यार, अभी तक वह सो रही है. लगता है गहरी नींद में है, उसे गहरी नींद से जगाना उचित नहीं होगा.’’ सचिन वहीं से तेज आवाज में बोला.

”कोई बात नहीं, तुम यहां आ जाओ.’’ अनुज बोला और सचिन ने बैडरूम का दरवाजा खींच कर बंद कर दिया.

संयोग से दरवाजे के हैंडल पर उस का हाथ लग गया और दरवाजा खट से तेज आवाज के साथ बंद हो गया. इसी खटाक की आवाज से रितिका की नींद भी खुल गई. सचिन बैडरूम से निकल कर अपने दोस्त अनुज के पास आ कर बैठ गया. कुछ देर में रितिका भी आंखें मलती हुई बैडरूम से किचन में चली गई. किचन में जाते हुए उस की नजर बैठक में बैठे सचिन के दोस्त अनुज उपाध्याय पर पड़ गई थी. अनुज ने भी रितिका को देख लिया था और देखते ही तुरंत बोल पड़ा, ”भाभीजी नमस्ते, कैसी हैं आप?’’

थोड़ी देर में रितिका ने एक ट्रे में पानी से भरे 2 गिलास टेबल पर रख दिए. अनुज ने भी पानी पीने के बाद खाली गिलास ट्रे में रख दिया. रितिका अनुज से परिचित थी और यह भी जानती थी कि यह सचिन का करीबी दोस्त है. इस कारण उस के मानसम्मान में कभी कोई कमी नहीं रखती थी. अनुज से अनौपचारिक बातें करने के बाद दोबारा वह किचन में चली गई. कुछ मिनट में ही रितिका अनुज और सचिन के पास 3 कप चाय के ट्रे में ले कर उन के सामने ही सोफे पर बैठ गई थी. हकीकत में अनुज को सचिन के साथ आया देख कर रितिका कुछ सुकून महसूस कर रही थी. वह भी बीती रात से ले कर कुछ समय पहले तक के मानसिक तनाव से उबरना चाह रही थी.

रितिका ने चाय का कप उठा कर मुसकराते हुए अनुज की ओर बढ़ा दिया. अनुज हाथ में कप लेते हुए बोला, ”भाभीजी, आप ठीक तो हैं न? कैसी हालत बना रखी है आप ने? लगता है, सारी रात ठीक से सो नहीं पाई हो?’’

रितिका मौन बनी रही. उधर सचिन भी मौन रहा. कुछ पल बाद रितिका धीमे स्वर में बोली, ”यह अपने जिगरी दोस्त से पूछो, तुम्हारे सामने ही बैठा है.’’

”क्यों भाई सचिन, क्या बात है?’’

”अरे यह क्या बोलेगा, इस ने तो मेरी जिंदगी में तूफान ला दिया है. अब शेष बचा ही क्या है, अपने दोस्त को तुम ही समझाओ.’’ रितिका थोड़ा तल्ख आवाज में बोली.

”क्या बात हो गई? क्या तुम दोनों के बीच फिर से तूतूमैंमैं हुई है?’’ अनुज बोला.

”आप तूतूमैंमैं की बात करते हो,’’ कुछ देर मौन रह कर रितिका ने फिर बोलना शुरू किया, ”साढ़े 3 साल मेरे साथ गुजारने के बाद तुम्हारा मित्र कहता है कि मैं चरित्रहीन हूं, मेरा अपने बौस के साथ चक्कर चल रहा है. मुझे अब भलीभांति समझ में आ गया है कि तुम्हारे बेरोजगार दोस्त को सिर्फ मेरे कमसिन जिस्म और पैसों में दिलचस्पी थी. उसे न मेरी जिंदगी से कोई मतलब और न ही मेरी भावनाओं से, वह तो सिर्फ मेरे जिस्म से अपनी कामोत्तेजना शांत कर मेरे द्वारा नौकरी कर के मेहनत से लाए पैसों से मौज कर रहा है.

”साढ़े 3 साल तक मेरे साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद अब तुम्हारे दोस्त को मैं चरित्रहीन नजर आने लगी. इस के इश्क के चक्कर में मैं ने अपने घर वालों से नाता तोड़ लिया. और अब ये कह रहा है कि तू चरित्रहीन है, मैं अब तेरे साथ नहीं रह सकता, तू तो अपने बौस के साथ रह. अनुज, अब तुम ही बताओ कि मैं कहां जाऊं? क्या करूं? क्या जहर खा कर आत्महत्या कर लूं?’’

”भाभीजी, आप ऐसा कुछ भूल कर भी मत कर लेना वरना सचिन को जेल की हवा खानी पड़ेगी.’’ अनुज ने सचिन को समझाने का भरपूर प्रयास किया.

”यही तो मेरी जिंदगी बन गई है. कहां तो मुझ पर बड़ा प्यार उमड़ता था. कहता था जानेमन, तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता. कहां गईं वो प्यार की बातें? कहां गए वादे, जिस के भरोसे मैं ने अपने पेरेंट्स और भाई से नाता तोड़ दिया था.’’

रितिका भाभी ने जब अपने मन की भड़ास पूरी तरह से निकाल ली, तब अनुज सचिन से बोला, ”क्यों भाई सचिन, ये मैं क्या सुन रहा हूं? रितिका भाभी जो कुछ कह रही हैं, क्या वह सही है? यदि हां तो तुम्हें रितिका भाभी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए.’’

सचिन दोस्त अनुज की बातें चुपचाप सुनता रहा. उस की जुबान से एक शब्द नहीं निकला. सचिन की चुप्पी देख कर अनुज फिर बोलने लगा, ”तुम्हें रितिका भाभी के चरित्र पर संदेह करते हुए जरा भी शर्म नहीं आती?

”भाभी का अपने बौस के साथ चक्कर चलने का बेबुनियाद आरोप लगा कर तुम उन की चारित्रिक हत्या करने के साथ जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हो. देखो, तुम दोनों की भलाई इसी में है कि तुम जितनी जल्दी हो सके, रितिका भाभी से माफी मांगने के बाद विधिवत शादी कर लो और उन्हें समाज में सिर उठा कर पूरे मानसम्मान के साथ जीने का अधिकार दे दो.’’

मानसम्मान की बात सुनते ही सचिन बिफर पड़ा. तल्ख स्वर में बोला, ”अनुज, किस मानसम्मान की बात कर रहे हो, रितिका के चरित्र को ले कर इस के औफिस के लोगों से ले कर कालोनी के लोग क्या कुछ नहीं कहते हैं. ये भी रोज ताना मारती है कि मैं यदि नौकरी करने नहीं जा रही होती तो नानी याद आ जाती, कहां से देते फ्लैट का भाड़ा, लाइट का बिल, दूध और किराने वाले को पैसे. खुद बेरोजगार होते हुए भी काम की तलाश में नहीं जाते, सारा दिन मोबाइल फोन और टीवी सीरियल देखने में वक्त जाया करते रहते हो.’’

इतना सब सुनने के बाद अजीब दुविधा में फंसा अनुज समझ नहीं पा रहा था कि वह किस का पक्ष ले और किसे समझाए? फिर भी अनुज ने दोनों को बात का बतंगड़ न बनाने और प्रेम से मिल कर रहने की सलाह दे सचिन के घर से विदा ली. अनुज उपाध्याय के जाते ही दोनों आपस में फिर से उलझ गए. दोनों में तूतूमैंमैं होने लगी. दोनों तेज आवाज में एकदूसरे पर आरोपप्रत्यारोप लगाने लगे कि उन के आपसी विवाद में अनुज को क्यों लाया गया? इसी बात को ले कर रितिका और सचिन में नोकझोंक होती रही.

उन दोनों में नोकझोंक होने की आवाज पड़ोसियों को सुनाई दे रही थी, लेकिन उस के भाड़े के फ्लैट के आसपास कोई ऐसा पड़ोसी नहीं था, जो उन दोनों को झगडऩे से रोक सके, उन को शांत कर सके या फिर उन्हें समझा सके. पड़ोसियों के लिए तो उन के झगड़े आए दिन की बात हो चुकी थी. फिर रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर सचिन राजपूत ने रितिका सेन की हत्या कर दी. पूछताछ के बाद पुलिस ने सचिन राजपूत को अदालत में पेश किया, जहां से उसे हिरासत में जेल भेज दिया गया. सचिन ने यदि अपने शक्की मिजाज को काबू रख कर अपनी प्रेमिका की बात पर भरोसा कर के जिंदगी जी होती तो शायद जेल जाने की नौबत नहीं आती. Love Story Hindi Kahani

 

 

Love Story in Hindi: प्यार में न बनें बौयफ्रेंड का खिलौना

Love Story in Hindi: एक निजी अस्पताल में नर्स 24 वर्षीय समरीन की दिनचर्या भले ही व्यस्त थी, लेकिन उस के दिल का कोना खाली था. अपने सपनों के राजकुमार की उसे भी तलाश थी. इंस्टाग्राम के जरिए उस की जिंदगी में 25 वर्षीय गौसे आलम ने एंट्री तो की, लेकिन उस ने समरीन को एक ऐसा खिलौना समझा कि…

समरीन ने इंस्टाग्राम पर अपनी जो फोटो पोस्ट की थी, उस में उस का चेहरा आधा दिखता, आधा छिपा हुआ था. उस का हिजाब उस की पहचान बन चुका था. लोग यही समझते थे कि वह एक शरीफ मुसलिम लड़की है, परदे में रहती है. वह जनपद मुरादाबाद के गांव रुस्तम नगर सहसपुर में स्थित अपने घर से करीब 12 किलोमीटर दूर सेफनी कस्बे के एक अस्पताल में नर्स थी. समरीन अस्पताल की लंबी शिफ्ट से थक जाती थी, लेकिन मरीजों की देखभाल में अपना सारा दर्द भूल जाती थी, परंतु रात में अकेलापन उसे घेर लेता.

वह अस्पताल में हर दिन मौत और जिंदगी की जंग देखती थी. रोजाना घर से अस्पताल जाना और वापस घर आना सफर की थकान, साथ में अस्पताल के काम की थकान यह सब समरीन की जिंदगी का हिस्सा था. फिर भी उस के दिल में प्यार की गहराई, भावनाओं का सैलाब, दर्द, तड़प सब कुछ अनुभव करने की अपार क्षमता थी. अपने सपनों के राजकुमार की उसे भी तलाश थी. समरीन को इंस्टाग्राम पर नएनए लोगों से दोस्ती करना अच्छा लगता था. वह फोटोग्राफी और किताबों की तसवीरें डालती, छोटेछोटे कैप्शन में अपने दिल की बातें लिखती.

एक दिन उसे एक युवक का मैसेज मिला. उस की प्रोफाइल खंगाली तो वहां थोड़ेबहुत सुंदर फोटो थे, गौसे आलम नाम था उस का. नाम ऐसा था जो सुनने में सुकून दे रहा था. शुरुआत में तो बस सामान्य ‘हाय’ लिखा मैसेज देखा तो नसरीन ने भी उस का उत्तर ‘हाय’ में ही दे दिया. गौसे आलम एक 25 साल का ट्रक ड्राइवर था, जो लंबी दूरी की सड़कों पर जीवन बिताता था. अकेलापन, परिवार की जिम्मेदारी और जीवन की कठोर सच्चाइयां उस की साथी थीं. गौसे आलम की जिंदगी ट्रक की स्टीयरिंग और राजमार्गों पर लंबीलंबी दूरी तक माल ढोते हुए ही गुजर रही थी. कहीं वह रात में विश्राम करता तो वह रातों में खुद को अकेला महसूस करता. परिवार के लिए पैसा कमाता, लेकिन दिल खाली था. रात में मोबाइल की स्क्रीन पर दुनिया घूमना उस का शौक था.

वह जनपद मुरादाबाद के ही थाना कुंदरकी के चकफाजलपुर गांव का निवासी था. उस का इंस्टाग्राम अकाउंट जैसे उस की छोटी सी दुनिया था. तसवीरें, शायरी और कभीकभी दिल की बातें. हर रात वह अपनी किसी पोस्ट के नीचे लिखता, ‘कोई तो होगी, जो मेरे दिल की बात समझेगी’. वह चाहता था कोई ऐसी लड़की, जो उस की पोस्टों में छिपे जज्बात को महसूस कर सके, उस की अकेली जिंदगी में रंग भर सके. धीरेधीरे उसे समझ आया कि तमाम लड़के आजकल इंस्टाग्राम पर किस तरह की मोहब्बत ढूंढते हैं. कभी लाइक के जरिए, कभी कमेंट से बात शुरू कर के तो कभी किसी की स्टोरी पर रिप्लाई दे कर. गौसे आलम भी वही करने लगा. हर नई तसवीर पर मुसकराहट के साथ एक दिल भेज देता, कभी किसी शायरी पर ‘वाह!’ लिख देता.

एक रात ट्रक सड़क किनारे खड़ा कर के  उस ने इंस्टाग्राम ओपन किया. उस की निगाहें हिजाब पहने हुए एक फोटो पर टिक गईं. उस का नाम था समरीन. वह काफी देर चेहरे को देखता रहा. उस की एक पोस्ट ने गौसे आलम का ध्यान खींचा. अस्पताल की बालकनी से ली गई तसवीर, जहां वह मास्क लगाए एक बच्चे को गोद में ले कर मुसकरा रही थी. यह पोस्ट उस की भावनात्मक थकान दिखाती थी. नर्स की जिम्मेदारी में छिपा दर्द उस की आंखों से छलक रहा था. फिर उस ने समरीन की प्रोफाइल देखी. उस की प्रोफाइल की तसवीर में हल्की मुसकान थी और बायो में लिखा था, ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए.’

गौसे आलम ने हिम्मत की और उस की  शायरी पर कमेंट किया, ‘लफ्ज तो बहुत लोग लिखते हैं, पर एहसास सिर्फ तुम लाती हो.’ समरीन ने भी उसे ‘शुक्रिया’ लिखा, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. धीरेधीरे चैट शुरू हुई, फिर देर रात तक चलने लगी. दोनों अपनीअपनी जिंदगी की खाली जगहों को एकदूसरे के शब्दों से भरने लगे. गौसे आलम अब हर सुबह उस की ‘गुड मार्निंग’ का इंतजार करता. समरीन उसे अपने कालेज की बातें बताती और गौसे आलम अपने लंबे सफर की दास्तान सुनाता. अपनी दिन भर की थकान के बीच उस की हंसी में सुकून ढूंढता. उस दिन के बाद से इंस्टाग्राम अब सिर्फ एक ऐप नहीं रहा, वो उन की मोहब्बत की गवाही देने वाला आईना बन गया.

गौसे आलम अब रोज नई तसवीर नहीं डालता, बस एक ही कैप्शन लिखता है ‘मिल गई वो, जिस से जिंदगी रंगीन हो गई.’ इस तरह दोनों तरफ से मैसेज का सिलसिला शुरू हो गया. समरीन हर रोज सुबहशाम 1-2 लाइनें हंसीमजाक, मजहबी और कभी गहराई की बातें पोस्ट किया करती थी. जैसे कोई साथी मिल गया हो. गौसे आलम ने एक दिन दिल  की गहराई से एक पोस्ट लिखी, ‘तुम्हारी मुसकराहट तो मेरी रातों की थकान मिटा देती है. तुम्हारे जैसे लोगों को सलाम, जो दूसरों के लिए हर वक्त लगे रहते हैं. मैं एक ट्रक ड्राइवर हूं, इसलिए मेरी सड़कें भी बहुत तनहा होती हैं.’

गौसे आलम की यह पोस्ट समरीन के दिल में उतर गई. गौसे आलम एक आम युवक था. उम्र बस 25 की, पर सपने बहुत बड़े. समरीन और गौसे आलम एकदूसरे के मोबाइल फोन नंबर ले ही चुके थे. इसलिए दिल खोल कर प्यारमोहब्बत की बातें होने लगीं. जिंदगी भर साथ निभाने की कसमें भी खाई जाने लगीं. गौसे आलम का कहना था कि जल्दी एक मुलाकात हो जाए तो हमारा प्यार और भी परवान चढऩे लगेगा.

समरीन ने महसूस किया कि गौसे आलम उस के लिए बेहद समझदार है और सहानुभूति दिखाने लगा है. उस की बातों पर समरीन का दिल खोयाखोया सा रहने लगा. वह सोचती कि कोई तो है, जो उस की बात ध्यान से सुनता है, उस की परेशानी पर संवेदना दिखाता है और मुश्किल में साथ देने का वादा करता है. वह कहता कि समरीन मैं तुम से शादी करूंगा. तुम मेरी जिंदगी हो. समरीन भी उस की बातों पर गहरा विश्वास करने लगी थी. वह सोचती कि गौसे आलम दिल का सच्चा है. भले ही वह एक ट्रक ड्राइवर है, लेकिन दिल का अच्छा है.

 

इन दोनों की कहानी में पहला मोड़ तब आया, जब वह अकसर ‘सिर्फ तुम्हारे लिए’ जैसी बातें करता. वह कहता कि समरीन मेरा साथ कभी मत छोडऩा, मेरा इस दुनिया में तुम्हारे अलावा कोई नहीं है. मैं तुम्हें दिल से प्यार करता हूं. मुझे कभी किसी से कोई प्यार नहीं मिला. यदि तुम ने मेरा दिल तोड़ दिया तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा. इसलिए समरीन को यह अहसास होता कि उन दोनों का यह रिश्ता कुछ खास है. उस ने अपनी सब से करीबी सहेली को ये सारी बातें बताईं.

तब सहेली ने कहा, ”तेरी बातों से तो ऐसा लगता है कि वह तुझ से सच्चा प्यार करता है.’’

कुछ दिनों में उन का रिश्ता इंस्टाग्राम की स्क्रीन से निकल कर असल जिंदगी में उतरने लगा. उन का प्यार परवान चढऩे लगा.

पहली मुलाकात में जब गौसे आलम ने समरीन को देखा तो कहा, ”समरीन, तुम तो तसवीरों से ज्यादा हसीन हो और हकीकत में ज्यादा सच्ची भी.’’

समरीन भी मुसकराती हुई बोली, ”और तुम इंस्टाग्राम से ज्यादा शरमीले हो.’’

फिर दोनों हंस पड़े.

गौसे आलम को जब यकीन हो गया कि समरीन अब उस के फरेबी प्यार के जाल में फंस चुकी है तो  एक दिन वह अपने असली रूप में आ गया. उस ने ‘ओयो होटल’ में एक कमरा बुक किया. फोन कर के उस ने होटल में समरीन को भी बुला लिया.

जनपद मुरादाबाद में ‘ओयो’ जैसे और भी बहुत से केंद्र काफी चर्चित हो चुके हैं, जहां प्रेमी युगल दिन में 2-4 घंटे के लिए कमरा बुक करते हैं और मौजमस्ती कर के चले जाते हैं. होटल में पहुंच कर समरीन को जब गौसे आलम के इरादे का पता चले तो उस ने साफ इनकार किया. उस ने कहा कि शादी से पहले प्यार की अंतिम चरम सीमा पर नहीं पहुंचना चाहिए. तब गौसे आलम ने कहा, ”प्यार में सब जायज है. शादी तो होगी ही. जब हमें जिंदगी भर साथ ही रहना है तो फिर हम दोनों के बीच में किसी भी तरह की यह दूरी क्यों?’’

इस तरह हमबिस्तरी के पक्ष और विपक्ष में दोनों के बीच काफी चर्चा हुई और अंत में वह सब कुछ हो गया, जो सिर्फ सुहागरात को होना चाहिए था. समय बीतता रहा, समरीन ने महसूस किया कि गौसे आलम पहले की तरह प्यारमोहब्बत के लिए नहीं मिलता है. वह तो सिर्फ अंतिम प्यार का मौका देखता है. बस अपनी हवस मिटा लेता है. जब उसे शक हुआ तो समरीन ने उस से शादी के लिए कहा. शादी की बात सुनते ही गौसे आलम का तो नजरिया बदल गया. वैसे तो इन दोनों के प्यार के किस्से दोनों के फेमिली वालों और रिश्तेदारियों में आम हो चुके थे. समरीन ने उस के फेमिली वालों से भी कहा कि उस की शादी अब जल्द करा दी जाए. उन दोनों के प्यार को अब कई महीने बीत चुके हैं.

चारों तरफ से घिरता देख 25 वर्षीय गौसे आलम अब प्रेमिका समरीन से पीछा छुड़ाने के तरीके सोचने लगा. इस का एक कारण दोनों की जातियों का अलगअलग होना भी था. गौसे आलम की जाति के लोग इस क्षेत्र में अपने आप को उच्च जाति का समझते हैं. जबकि समरीन सलमानी यानी पिछड़ी जाति की थी.

 

‘एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद ओ अयाज, न कोई बंदा रहा, न कोई बंदा नवाज.’ यह कहावत यहां शादीविवाह में लागू नहीं होती. खासकर तो तुर्क बिरादरी के लोगों के लड़के तो अपनी बिरादरी में ही शादी करते हैं.

सलमानी बिरादरी के लोग भी जनपद में निवास करते हैं. ये लोग अभी तक अपने पारंपरिक कार्य को अंजाम दे रहे हैं. दूसरों के सिर के बाल, दाढ़ी और मूंछें संभालना इन का पेशा है. इन्हें अभी समानता का दरजा इस क्षेत्र में नहीं मिला है. जाति को ले कर भी गौसे आलम के फेमिली वाले समरीन से शादी करने के लिए राजी नहीं थे. समरीन को ले कर गौसे आलम की चिंता अब बढ़ती जा रही थी. इसलिए उसे लगा कि अब इसे ठिकाने लगा कर ही वह पीछा छुड़ा सकता है.

गौसे आलम को समरीन के व्यवहार से ऐसा लग रहा था कि वह शादी न करने पर उसे कानूनी पेंच में फंसा कर जेल भिजवा सकती है. समरीन पढ़ीलिखी थी. एक नर्स का काम करती है. समाज में अच्छेबुरे सभी तरह के लोगों से उस की डीलिंग अस्पताल में रहती है. इसलिए वह भी बड़ी दिलेरी से शादी  करने  के लिए अड़ी हुई थी. अधिकतर ड्राइवरों के चेहरे पर हमेशा एक मुसकान, लेकिन आंखों में हवस की चमक छिपी होती है. ऐसा ही गौसे आलम था. वह खुद को प्यार का पुजारी कहता, लेकिन सच तो यह थी कि वह हवस का गुलाम था.

छोटेछोटे गांवों और शहरों में उस की कई कहानियां बिखरी पड़ी थीं. लड़कियां जो उस के मीठे व झूठे वादों में फंसतीं और फिर छोड़ दी जातीं. लेकिन समरीन की कहानी अलग थी. यह कहानी प्यार की नहीं, बेवफाई की थी, जो दिल को छलनी कर देती है. इस से पहले कि समरीन नाम की फांस गौसे आलम के लिए नासूर बन जाए, उस ने एक दिन अपने इरादे को अंजाम दे दिया. यह काम गौसे आलम ने इतनी चालाकी और प्लानिंग के साथ किया कि पुलिस के हाथ उस की गरदन तक न पहुंचें. समय बलवान होता है. अपराधी कोई न कोई सबूत छोड़ जाता है. अब तो डिजिटल युग है. कोई न कोई सबूत कहीं न कहीं से मिल ही जाता है. आखिरकार वही हुआ यह सब उस ने कैसे किया? यह घटना बहुत ही दिल दहलाने वाली है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है तहसील बिलारी. इसी तहसील का एक गांव रुस्तम नगर सहसपुर है. यह बिलारी से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है. बिलारी और सहसपुर के बीच की इस दूरी में भी मकान बन रहे हैं. आबादी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि कुछ ही सालों में गांव सहसपुर भी बिलारी का एक मोहल्ला जैसा हो जाएगा. रुस्तम नगर सहसपुर तहसील क्षेत्र का सब से बड़ा गांव है. इस को नगर पंचायत बनाने की बात भी चल रही है. इस का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. इसी गांव के मोहल्ला साहूकारा में रियासत हुसैन का परिवार निवास करता है. नर्स समरीन इन्हीं की बेटी थी. अपने 4 भाईबहनों में वह सब से छोटी थी. इस की बड़ी बहन फरहा की शादी हो चुकी है. जबकि 2 बड़े भाई सुहेल और रिजवान दिल्ली में सैलून पर काम करते हैं. उस की अम्मी शाहिदा परवीन की 10 साल पहले मौत हो चुकी है.

रियासत हुसैन शादीविवाह में कौफी मशीन चलाते हैं. सर्दियों में अधिकांश समारोह में कौफी की व्यवस्था मेहमानों के लिए की जाती है. कौफी का स्टाल लगाने वाले अलग लोग होते हैं. इन का हलवाइयों के स्टाल से कोई मतलब नहीं होता है. एक तरह की मजदूरी का काम है. रियासत हुसैन ने भी एक कौफी मशीन ले रखी है. सर्दियों में अधिकांशत: रात में ही बुकिंग मिलती है. यह अपनी कौफी मशीन ले जा कर अपनी स्टाल सजा कर शादी समारोह में बैठ जाते हैं. दूध और काफी बाकी सामान की व्यवस्था समारोह के आयोजकों द्वारा की जाती है. इन की तो सिर्फ मशीन और खुद की मेहनत होती है.

रियासत हुसैन की बेटी समरीन रामपुर जिले के सेफनी कस्बे में स्थित इनाया हेल्थकेयर क्लीनिक में नर्स का काम करती थी. उस से परिवार को बहुत सारी उम्मीदें थीं. सेफनी जिला रामपुर की तहसील शाहबाद के अंतर्गत एक नगर पंचायत है, यानी सेफनी जिला मुरादाबाद की सीमा से एकदम सटा हुआ है. 22 वर्षीय समरीन 24 अगस्त, 2025 की सुबह 10 बजे रोजाना की तरह घर से नर्सिंग होम जाने की बात कह कर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वह वापस नहीं लौटी. रियासत हुसैन ने उस के क्लीनिक पर कौल की तो पता चला कि समरीन क्लीनिक पर आज नहीं पहुंची थी.

यह जानकारी मिलने पर फेमिली वालों के होश उड़ गए. इस के बाद परिजन उस की तलाश में जुट गए. अपने सभी रिश्तेदारों और परिचितों को मोबाइल फोन पर संपर्क कर के समरीन के बारे में पूछा गया, लेकिन कहीं से भी यह जवाब नहीं मिला कि समरीन को उन्होंने कहीं देखा है या उन के घर आई है. तब रियासत हुसैन ने दिल्ली में रह रहे अपने दोनों बेटों को फोन से सूचना दी कि समरीन आज सुबह से लापता है. दोनों बेटे भी रात में ही दिल्ली से घर के लिए रवाना हो गए. सुबह रियासत हुसैन और उन के बेटों ने अपने सभी रिश्तेदारों और परिचितों से राय ली. सब की सहमति के बाद उन्होंने 25 अगस्त, 2025 को बिलारी कोतवाली में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

समरीन के मोबाइल की पुलिस ने कौल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि वह बिलारी से 7 किलोमीटर दूर थाना कुंदरकी क्षेत्र के रहने वाले गौसे आलम नाम के युवक से बात करती थी. पुलिस गौसे आलम की तलाश में जुट गई. गौसे आलम ट्रक ले कर कहीं गया हुआ था. उस की लोकेशन पुलिस लगातार ट्रेस कर रही थी. पुलिस की कई टीमें इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए लगाई गईं. आखिरकार 30 अगस्त, 2025 दिन शनिवार को गौसे आलम पुलिस के हत्थे चढ़ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. चूंकि घटना थाना कुंदरकी क्षेत्र की थी, इसलिए गौसे आलम से कुंदरकी पुलिस ने पूछताछ शुरू की. पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा. यह साबित करने की कोशिश करता रहा कि उसे समरीन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वह ट्रक ले कर बाहर गया हुआ था, लेकिन पुलिस द्वारा थोड़ी सख्ती करने पर गौसे आलम टूट गया. उस ने समरीन की हत्या करना कुबूल कर लिया.

इस के बाद गौसे आलम की निशानदेही पर पुलिस ने 30-31 अगस्त की रात को थाना कुंदरकी क्षेत्र के चकफजालपुर गांव के गन्ने के खेत से समरीन का सड़ागला शव बरामद कर लिया. समरीन की लाश मिलने की सूचना पर उस के अब्बू, भाई और रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटना की सूचना जंगल की आग की तरह आसपास के गांवों में फैल गई. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए. थाना कुंदरकी के एसएचओ प्रदीप सहरावत मय फोर्स के घटना स्थल पर मौजूद थे. सूचना पर एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह भी घटनास्थल का मुआयना करने पहुंच गए. गौसे आलम को थाने भेज दिया गया. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. उस ने मौके पर जांच कर के साक्ष्य जुटाए.

मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय मुरादाबाद भेज दिया. थाना कुंदरकी के एसएचओ प्रदीप सहरावत की गहन पूछताछ के बाद हत्या का एक दिल दहलाने वाला खुलासा हुआ. समरीन का यह कोई पहला मौका नहीं था, जो उस ने किसी युवक पर भरोसा किया था. पहले भी एक युवक उस की जिंदगी में आया था. उस ने भी उस से कहा था, ”चेहरा क्या है, मैं तुम्हारे दिल से प्यार करता हूं.’’ जब शादी की बात आई तो वही आशिक उस के चेहरे व गले पर स्पष्ट दिखाई देने वाले जलने के निशान देख कर पीछे हट गया.

समरीन ने उस से लाख कहा कि इन दागों के नीचे भी मैं वही लड़की हूं. पर उस युवक और उस के फेमिली वालों ने उसे ‘अधूरी’ कह दिया. इसी तरह गौसे आलम ने उसे स्वीकार नहीं किया तो वह टूट गई. उस ने जिद की कि तुम शादी नहीं करोगे तो मैं खुद को खत्म कर दूंगी. इन बातों का समरीन के प्रेमी पर कोई असर नहीं हुआ. उस के फेमिली वालों ने भी समरीन की विनती को ठुकरा दिया. मामला पुलिस तक भी पहुंचा. मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला. मजबूरन समरीन और उस के परिवार को समझौता करना पड़ा.

दरअसल, कुछ साल पहले समरीन ने किसी कलह के चलते खुद को आग लगा दी थी. आग की चपेट में आ जाने से वह काफी झुलस गई थी. उस के चेहरे पर आग से जले हुए निशान अब भी स्पष्ट दिखाई देते थे. उस की गरदन पर भी जले हुए के निशान थे. शरीर के और भी हिस्सों पर निशान थे, जो कपड़ों से दब जाया करते थे. जबकि गरदन और चेहरे के निशान ढकने के लिए वह अकसर हिजाब पहना करती थी. समरीन की जले हुए की घटना की जिन्हें जानकारी नहीं थी, वो यही समझते थे कि बहुत ही मजहबी लड़की है. इसलाम और शरीयत की रोशनी में घर से हिजाब पहन कर ही निकलती है. बाहर के लोगों ने कभी उसे बिना हिजाब के नहीं देखा.

गौसे आलम ने जब पहली मर्तबा समरीन के चेहरे और गरदन के जले हुए निशान देखे थे, तब एकदम उस के चेहरे की रंगत बदल गई थी. वह उदास हो गया था. समरीन उस की हालत देख कर घबरा गई थी. वह रोने लगी थी. कहने लगी कि शायद मेरे चेहरे के निशान देख कर आप मायूस हो रहे हैं. निराश हो रहे हैं. आप मुझ से नहीं मेरे चेहरे से मोहब्बत करते हैं. गौसे आलम ने कहा कि ऐसी बात नहीं है. उस ने एकदम अपने चेहरे की रंगत बदली. चेहरे पर शगुफ्तगी लाने की कोशिश की और कहा कि मैं तुम्हें दिल से चाहता हूं. ऐसा कभी मत सोचना. मैं तुम्हारा जिंदगी भर साथ निभाऊंगा.

कस्बा बिलारी से करीब 7 किलोमीटर दूर बिलारी तहसील का ही एक कस्बा कुंदरकी है. गौसे आलम  कुंदरकी कस्बे से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित चकफाजलपुर गांव का निवासी है. यह 3 भाई और 2 बहनें हैं. गौसे आलम बीच का है. एक बहन की शादी हो चुकी है. एक बहन मानसिक रूप से विकलांग है. गौसे आलम के चेहरे पर मासूमियत और बातों में जादू होता था. गांव में उसे सब ‘आशिक आलम’ कह कर चिढ़ाते थे. असली दुनिया उस की इंस्टाग्राम थी. हर शाम हाथ में मोबाइल आता और फिर शुरू होती उस की औनलाइन मोहब्बत की दुनिया.

गौसे आलम का अंदाज ऐसा कि कोई भी लड़की उस की बातों में जल्दी बहक जाती. सिर्फ दोस्ती के नाम पर शुरू होने वाली बातें धीरेधीरे रोमांस में बदल जातीं. शेर ओ शायरी लिखता और हर चैट के अंत में दिल का इमोजी डाल देता. वह कई लड़कियों से चैट करता था. हर किसी से वही बातें ‘तुम बहुत अलग हो’, ‘काश तुम मेरे शहर में होतीं’, ‘तुम्हारी मुसकान दिल में उतर जाती है’.

उस के चेहरे पर एक ऐसी मासूमियत थी, जो किसी भी इंसान के दिल में भरोसा जगा दे. बड़ीबड़ी आंखों में अजीब सी शांति थी, जैसे उस में कभी तूफान उठा ही न हो. चेहरे की वो हलकी मुसकान, मानो किसी दर्द को छिपाने का हुनर हो. कोई पहली नजर में उसे देखे तो कहेगा ‘इतना सादा, इतना खूबसूरत चेहरा कैसे किसी का खून कर सकता है?’ लेकिन वही चेहरा था, जिस ने मोहब्बत की आड़ में मौत की कहानी लिखी थी.

एक दिन गलती से उस ने सना को वही मैसेज भेज दिया जो किसी और को भेजना था. ‘कह दो न, तुम भी मुझ से प्यार करती हो, शाइस्ता?’

मैसेज पड़ कर सना चौंक गई, ”शाइस्ता..? मैं तो सना हूं!’’

गौसे आलम की पोल खुल गई. उस दिन के बाद सना ने उसे ब्लौक कर दिया, उस के बाद से गौसे आलम ने बड़ी ऐहतियात बरतनी शुरू कर दी. इस तरह समरीन उस के प्यार के जाल में तो फंस गई, लेकिन बाद में गले की हड्ïडी भी बन गई. गौसे आलम ने यह एहसास समरीन को होने नहीं दिया. हमेशा की तरह उस ने समरीन को फोन कर के कहा कि बह बिलारी के महाराणा प्रताप चौक पर आ जाए. गौसे आलम बाइक ले कर वहीं खड़ा था. बिलारी का यह वही स्थान था, जहां से अकसर गौसे आलम अपनी बाइक पर बैठा कर समरीन को ले जाया करता था.

उस समय सुबह के लगभग 10 बजे थे. यही वह समय था, जब समरीन अपनी ड्यूटी करने जाया करती थी. अपने गांव रुस्तम नगर सहसपुर से समरीन बैटरी रिक्शा में बैठ कर आई थी. बैटरी रिक्शा से उतर कर समरीन गौसे आलम की बाइक पर बैठ गई और दोनों मौजमस्ती करने मुरादाबाद चले गए. गौसे आलम ने वादा किया था कि आज घर वालों से मिल कर शादी की बात करेंगे और जल्दी ही तारीख भी तय कर लेंगे. समरीन भी चाहती थी कि फेमिली वालों की मंजूरी व सामाजिक नियमकानून के अनुसार शादी होगी तो समाज में दोनों के फेमिली वालों की इज्जत बनी रहेगी.

गौसे आलम की योजना के अनुसार रास्ते में एक निश्चित स्थान पर उस का दोस्त मिल गया, जो जवानी की दहलीज पर कदम रखने  वाला था, लेकिन अभी नाबालिग था. गौसे आलम ने अपने मित्र से ऐसे अनजान बन कर बात की जैसे पहले से कोई प्लानिंग न हो. समरीन ने पूछा कौन है तो उस ने बताया कि यह मेरा कजिन है. उसे भी बाइक पर बैठा लिया. अपने गांव चकफाजलपुर और रूपपुर के बीच रेलवे ट्रैक के पास बाइक रोकी. उस की आंखों में वही मोहब्बत थी, वही भरोसा, जो समरीन को इस जंगल तक लाया था.

अभी तक समरीन को गौसे आलम पर किसी तरह का कोई शक नहीं था. वो नहीं जानती थी कि उसी के साथ में उस का कातिल भी है. गौसे आलम के मन में कुछ और ही तूफान उमड़ रहा था. विश्वास की नींव पर खड़ी उन की कहानी, अब धोखे की चट्टानों से टकराने वाली थी. समरीन बाइक से नीचे उतर गई. गौसे आलम ने मुसकरा कर उस की ओर देखा. वह उसे यहां लाया था, प्रेम की मिठास का वादा कर के.

नीचे उतर कर समरीन ने पूछा, ”क्या हुआ?’’

गौसे आलम ने कहा, ”कुछ नहीं, बस हलका होना है.’’

इस से पहले कि समरीन कुछ समझ पाती गौसे आलम ने उसे वहीं गिरा लिया. उस के साथी ने दबोच लिया. फिर उन्होंने उस की हत्या कर दी. उस की चीख सुनने वाला भी वहां कोई नहीं था. दोनों ने लाश को उठा कर गन्ने के खेत में डाल दिया. प्यार के वादों से शुरू हुई कहानी, उस शाम विश्वासघात की आग में जल कर राख हो गई. गौसे आलम की दास्तान सुन कर पुलिस भी दंग रह गई. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया. अदालत ने गौसे आलम को जेल भेज दिया और उस के नाबालिग दोस्त को बाल सुधार गृह के हवाले कर दिया.

पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद कर ली. समरीन के मोबाइल को गौसे आलम ने तोड़ कर फेंक दिया था, जो कहानी लिखने तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी. Love Story in Hindi

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UP News: मांगा सिंदूर मिली मौत

UP News: रचना की मांग में सिंदूर भले ही पति शिवराज के नाम का होता था, लेकिन वह प्रेमी संजय पटेल को ही पति मानती थी. वह प्रेमी के लिए तनमन से पूरी तरह समर्पित थी. पति शिवराज की मौत के बाद रचना ने संजय पर शादी का दबाव डाला तो ऐसी घटना घटी, जिस की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी…

संजय के लिए रचना से विवाह रचाना नामुमकिन था. वह गांव का पूर्वप्रधान था. गांव में उस की प्रतिष्ठा थी. रचना से विवाह कर वह अपनी मानमर्यादा को मिट्टी में नहीं मिलाना चाहता था, अत: उस ने रचना से पीछा छुड़ाने की सोची. मन में यह विचार आते ही संजय को रिश्ते के भतीजे संदीप पटेल व उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार की सुध आई. दोनों अपराधी प्रवृत्ति के थे. एक शाम संजय ने भतीजे संदीप और उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार से मुलाकात कर रचना से छुटकारा दिलाने में मदद की गुहार की.

रुपयों के लालच में वे दोनों राजी हो गए. इस के बाद संजय ने संदीप व प्रदीप की मदद से रचना की हत्या करने व उस की लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. संजय ने रचना की मौत का सौदा एक लाख रुपए में किया और प्रदीप को 15 हजार रुपए पेशगी दे दी. शेष रकम काम होने के बाद देने का वादा किया. 13 अगस्त, 2025 की दोपहर झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के किशोरपुरा गांव निवासी विनोद पटेल पशुओं का चारा काटने अपने महेबा रोड स्थित खेत पर पहुंचा. वहां खेत किनारे बने कुएं से तेज बदबू आ रही थी. उस ने कुएं में झांक कर देखा तो कुएं के पानी में 2 बोरियां तैर रही थीं.

विनोद ने अपने खेत के कुएं में पड़ी 2 बोरियों से तेज बदबू आने की सूचना थाना टोड़ी फतेहपुर पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही एसएचओ अतुल कुमार राजपूत पुलिस बल के साथ किशोरपुरा गांव के बाहर स्थित विनोद के कुएं पर जा पहुंचे. उस समय वहां ग्रामीणों की भीड़ जुटी थी. एसएचओ अतुल कुमार राजपूत ने पुलिसकर्मियों व ग्रामीणों की मदद से दोनों बोरियों को कुएं से बाहर निकलवाया. बोरियां खोली गईं तो सभी ने दांतों तले अंगुली दबा ली. प्लास्टिक की एक बोरी में महिला की लाश का गरदन से ले कर कमर तक का हिस्सा था, जबकि दूसरी बोरी में कमर से ले कर जांघ तक का हिस्सा था.

इस के बाद कुएं को खाली कराया गया तो उस में एक बोरी और मिली, जिस में कटा हुआ एक हाथ था. कलाई में लाल रंग का धागा बंधा हुआ था. महिला का सिर और पैर अब भी नहीं मिले थे. बिना सिर के लाश की शिनाख्त होनी मुश्किल थी. बोरियों में शव के टुकड़ों के साथ ईंटपत्थर भी भरे गए थे, ताकि बोरियां पानी में उतरा न सकें. इंसपेक्टर अतुल कुमार ने टुकड़ों में विभाजित महिला की लाश मिलने की सूचना पुलिस के आला अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद ही एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति, एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार तथा सीओ (सिटी) अनिल कुमार राय घटनास्थल आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने मृतका के अन्य अंगों की खोज में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन सफलता नहीं मिली तो बरामद अंगों को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल झांसी भेज दिया. 72 घंटे बाद भी शव की शिनाख्त न होने पर उन का पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने अज्ञात में दाह संस्कार कर दिया गया. एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने महिला के इस ब्लाइंड मर्डर को बड़ी गंभीरता से लिया और उस की शिनाख्त व हत्याकांड के खुलासे के लिए एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार व सीओ अनिल कुमार की देखरेख में 18 टीमें गठित कीं.

टीम में टोड़ी फतेहपुर थाने के एसएचओ अतुल राजपूत, स्वाट प्रभारी जितेंद्र तक्खर, सर्विलांस टीम से दुर्गेश कुमार, रजनीश तथा तेजतर्रार दरोगा रजत सिंह, शैलेंद्र, हर्षित आदि को शामिल किया गया. टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने आंगनबाड़ी गु्रप, ग्राम पंचायत गु्रप, आशा वर्कर तथा राशन कोटेदारों का भी सहयोग लिया. 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले. इतनी मशक्कत के बाद भी शव की पहचान नहीं हो पाई. अब तक यह मामला डीआईजी (झांसी रेंज) केशव चौधरी के संज्ञान में भी आ गया था. अत: उन्होंने इस ब्लाइंड मर्डर केस को जल्द से जल्द खोलने व हत्यारों को पकडऩे का आदेश एसपी व एसएसपी को दिया. इस आदेश के बाद पुलिस और भी सक्रिय हो गई.

इधर एसपी (ग्रामीण) की टीम भी जांच में जुटी थी. शव के टुकड़े जिन बोरियों में पाए गए थे, वे खाद की बोरियां थीं. उन पर कृभको लिखा था, लेकिन कोड नंबर साफ नजर नहीं आ रहा था. टीम यह जानना चाहती थी कि बोरी किस सहकारी समिति से खरीदी गईं और यह किस गांव के किसान ने खरीदी थीं. जांच के लिए टीम ने खाद की कई सहकारी समितियों से संपर्क किया, लेकिन कोड नंबर स्पष्ट न होने से कोई खास जानकारी हासिल न हो सकी. टीम ने बोरी से बरामद ईंट की मिट्टी का भी परीक्षण कराया तो जांच में टोड़ी फतेहपुर की मिट्टी पाई गई. जांच से यह बात स्पष्ट हो गई कि महिला टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र के ही किसी गांव की हो सकती है.

इसी बीच मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के थाना चंदेरा के मैलवारा गांव निवासी दीपक यादव को किसी महिला के कटे अंग मिलने की खबर लगी. उस की बहन रचना भी 8 दिनों से गायब थी. 19 अगस्त, 2025 की सुबह 10 बजे दीपक यादव गांव के सरपंच मोनू यादव के साथ थाना टोड़ी फतेहपुर पहुंचा. उस ने इंसपेक्टर अतुल राजपूत को बताया कि उस की बहन रचना यादव इसी थाना क्षेत्र के महेबा गांव निवासी शिवराज यादव को ब्याही थी. शिवराज की मौत हो चुकी है.

इन दिनों रचना महेबा गांव के ही पूर्वप्रधान संजय पटेल के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी. 8 अगस्त को उस ने रचना से बात करने की कोशिश की थी. वह किसी अस्पताल में भरती थी. बात करने के दौरान पूर्वप्रधान संजय पटेल ने रचना के हाथ से मोबाइल फोन छीन लिया और मुझे धमकाया कि फोन मत किया करो. 2 रोज बाद फोन किया तो संजय बोला कि मैं ने तेरी बहन को मार डाला है. यह सुन कर उसे लगा कि वह गुस्से व नशे में बात कर रहा है. लेकिन अब लग रहा है कि संजय पटेल ने उसे सचमुच मार डाला है. आप सच्चाई का पता लगाइए. दीपक यादव की बात सुन कर एसएचओ अतुल राजपूत ने रचना का फोन नंबर सर्विलांस पर लगाया. इस से पता चला कि रचना और पूर्वप्रधान संजय के बीच बातचीत होती रहती थी.

इस के बाद पुलिस टीम महेबा गांव पहुंची. वहां ग्रामीणों से पता चला कि रचना और पूर्व ग्राम प्रधान संजय के बीच अफेयर है. अब रचना लापता है. पुलिस टीम ने 20 अगस्त की रात नाटकीय ढंग से संजय पटेल व उस के भतीजे संदीप को टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र के लखेरी बांध के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ करने पर उन्होंने रचना की हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. संजय की निशानदेही पर पुलिस टीम ने हत्या में प्रयुक्त कार व मृतका रचना का मोबाइल फोन भी संजय के घर से बरामद कर लिया. संजय पटेल व संदीप को थाने लाया गया. थाने में जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस ने अपने भतीजे संदीप व उस के दोस्त प्रदीप के साथ मिल कर रचना की हत्या की थी. फिर उस ने शव के 7 टुकड़े कर 4 बोरियों में भरे थे. 3 बोरियां कुएं में फेंक दी थी तथा चौथी बोरी लखेरी नदी में डाल दी थी.

संजय व संदीप की निशानदेही पर पुलिस ने लखेरी नदी में नाव से सर्च औपरेशन चलाया और रचना का सिर, पैर व एक हाथ भी बरामद कर लिया. ये अंग भी बोरी में भरे गए थे. बरामद अंगों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए झांसी के जिला अस्पताल भेज दिया. अभी तक पुलिस टीम ने 2 आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन तीसरा आरोपी प्रदीप अहिरवार फरार था. 21 अगस्त, 2025 की रात 10 बजे पुलिस टीम ने एक मुठभेड़ के बाद प्रदीप अहिरवार को भी गिरफ्तार कर लिया. मुठभेड़ के दौरान उस के पैर में गोली लगी थी. कातिलों के पकड़े जाने के बाद डीआईजी केशव कुमार चौधरी, एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने झांसी पुलिस सभागार में एक संयुक्त प्रैस कौन्फ्रैंस कर रचना यादव हत्याकांड का खुलासा किया.

कातिलों को पकडऩे वाली पुलिस टीम पर आला कमान अधिकारियों ने इनामों की खूब बौछार की. डीआईजी केशव चौधरी ने टीम को 50 हजार रुपए नकद इनाम देने की घोषणा की. एसएसपी ने 20 हजार रुपए नकद पुलिस टीम को दिया. वहीं एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने भी 20 हजार रुपए नकद पुलिस टीम को पुरस्कार के रूप में दिए. चूकि कातिलों ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: एसएचओ अतुल राजपूत ने मृतका रचना के भाई दीपक यादव की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) तथा 201(3)(5) के तहत संजय पटेल, संदीप पटेल तथा प्रदीप अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

रचना कौन थी? वह संजय पटेल के संपर्क में कैसे आई? संजय ने उस की हत्या क्यों और कैसे कराई? यह सब जानने के लिए रचना के अतीत की ओर झांकना होगा. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना अंतर्गत एक गांव है मैलवारा. इसी गांव में फूलसिंह यादव सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी लौंगश्री के अलावा एक बेटा दीपक तथा बेटी रचना थी. फूलसिंह प्राइवेट नौकरी करता था. फूलसिंह की बेटी रचना खूबसूरत थी. 16 बसंत पार करने के बाद जब उस ने जवानी की डगर पर पैर रखा तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया. जो भी उसे देखता, मंत्रमुग्ध हो जाता. रचना खूबसूरत तो थी, लेकिन पढ़ाई में उस का मन नहीं था. जैसेतैसे कर के उस ने दसवीं की परीक्षा पास की फिर घर के काम में मम्मी का हाथ बंटाने लगी.

फूल सिंह ने रचना की शादी टीकमगढ़ शहर के मोहल्ला सलियाना में रहने वाले जयकरन यादव से कर दी. वह तहसील में काम करता था. उस के 2 अन्य भाई थे, जो पन्ना शहर में नौकरी करते थे. शादी के बाद ससुराल में रचना के हंसीखुशी से 5 साल बीत गए. इस बीच वह 2 बेटियों की मां बन गई. बेटियों के जन्म के बाद जब खर्च बढ़ा तो घर में आर्थिक परेशानी रहने लगी. घर खर्च को ले कर रचना व जयकरन के बीच झगड़ा होने लगा. धीरेधीरे पतिपत्नी के बीच इतना मनमुटाव बढ़ गया कि रचना अपनी दोनों मासूम बेटियों को पति के हवाले कर मायके में आ कर रहने लगी.

मायके में कुछ समय तो उस का ठीक से बीता, उस के बाद घरपरिवार के लोगों के ताने मिलने लगे. भाई दीपक को भी रचना का ससुराल छोड़ कर मायके में रहना नागवार लगता था. गांव में उस की बदनामी होने लगी थी. घरपरिवार के तानों से परेशान रचना ने जैसेतैसे 2 साल मायके में बिताए. उस के बाद एक रिश्तेदार के माध्यम से रचना ने शिवराज यादव से विवाह कर लिया. शिवराज यादव झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के गांव महेबा का रहने वाला था. वह किसान था. उस के पास 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी. वह अपने बड़े भाई रघुराज के साथ रहता था.

शादी रचाने के बाद रचना अपने दूसरे पति शिवराज के साथ महेबा गांव में रहने लगी. रचना स्वच्छंद स्वभाव की थी. उसे घूंघट में रहना पसंद न था, अत: वह न जेठ से परदा करती थी और न ही बड़ीबुजुर्ग महिलाओं से. उस की अपनी जेठानी से भी नहीं पटती थी. घरेलू कामकाज को ले कर दोनों में अकसर तूतूमैंमैं होती रहती थी. रचना को संयुक्त परिवार में रहना पसंद न था, अत: वह पति पर अलग रहने का दबाव बनाने लगी. घर और जमीन के बंटवारे को ले कर रचना और शिवराज के बीच मनमुटाव शुरू हो गया. दोनों के बीच झगड़ा व मारपीट होने लगी. बंटवारे को ले कर रचना की कहासुनी जेठजेठानी से भी होने लगी.

अत: उस ने जेठ रघुराज पर इलजाम लगाना शुरू कर दिया कि वह उस पर बुरी नजर रखता है. 25 मई, 2023 की शाम रेप हत्या के इलजाम को ले कर रचना का जेठजेठानी व पति से झगड़ा हुआ. तीनों ने मिल कर रचना की जम कर पिटाई की. इस पिटाई ने आग में घी डालने जैसा काम किया. सुबह होते ही रचना थाना टोड़ी फतेहपुर में जेठ व पति के खिलाफ रेप व हत्या की कोशिश करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने रचना के जेठ रघुराज व पति शिवराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस घटना के बाद रचना का ससुराल में रहना संभव न था, अत: वह एक बार फिर मायके आ गई. उस ने अपने भाई दीपक के सामने आंसू बहाए तो उस ने बहन को घर में शरण दे दी.

रचना के रेप व हत्या के प्रयास का मामला झांसी के गरौठा कोर्ट में शुरू हो चुका था. केस की पैरवी हेतु रचना को कोर्ट आना पड़ता था. गरौठा कोर्ट आतेजाते ही एक रोज रचना की मुलाकात संजय पटेल से हुई. दोनों एकदूसरे को पहले से ही जानते थे. जिस महेबा गांव में रचना की ससुराल थी, संजय पटेल भी उसी गांव का रहने वाला था. वह गांव का प्रधान भी रह चुका था. रचना और संजय की दोस्ती हो गई. दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. संजय अब रचना के केस की पैरवी करने लगा और उस की आर्थिक मदद भी करने लगा.

संजय नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका रचना उस से दूर मायके में रहे, अत: उस ने झांसी के गुरदासपुर में एक मकान किराए पर लिया और रचना को इस मकान में शिफ्ट कर दिया. संजय ने मकान में सारी सुविधाएं भी मुहैया करा दीं. इस के बाद रचना और संजय इस किराए के मकान में लिवइन रिलेशन में रहने लगे. रचना जो भी डिमांड करती, संजय उस डिमांड को पूरी करता. उस ने गहनोंकपड़ों से रचना को लाद दिया था. लाखों रुपए नकद भी दे चुका था. संजय पटेल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था. बड़ा बेटा 20 वर्ष की उम्र पार कर चुका था, लेकिन रचना से नाजायज रिश्ता जोडऩे के बाद उसे अपनी पत्नी ममता फीकी लगने लगी थी.

ममता को जब पता चला कि पति संजय व गांव के शिवराज की पत्नी रचना के बीच नाजायज रिश्ता है तो उसे अपना व बच्चों का भविष्य अंधकारमय लगने लगा. उस ने दोनों के नाजायज संबंधों का जम कर विरोध किया. घर में कलह मचाई, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई. संजय और रचना के संबंध आम हो गए थे. शिवराज यादव को जब पत्नी रचना के नाजायज संबंधों की जानकारी हुई तो उस ने माथा पीट लिया. वह पहले भी उस के परिवार को बदनाम कर चुकी थी, लेकिन अब तो उस ने हद ही कर दी थी. पत्नी के कृत्य से वह इतना टूट गया कि बीमार पड़ गया. जून, 2025 की 10 तारीख को उस की बीमारी के चलते मौत हो गई.

पति की मौत के बाद रचना विधवा हो गई, लेकिन रचना को विधवा कहलाना तथा विधवा का जीवन बिताना मंजूर नहीं था. एक शाम संजय पटेल अपनी प्रेमिका रचना से मिलने आया तो वह उदास बैठी थी. संजय ने उदासी का कारण पूछा तो वह बोली, ”संजय, तुम्हें तो पता ही है कि मैं विधवा हो गई हूं. लोग मुझे विधवा की नजर से देखें, यह मुझे पसंद नहीं है.’’

”तो तुम चाहती क्या हो?’’ संजय ने रचना से पूछा.

रचना बोली, ”संजय, तुम मेरी मांग में सिंदूर भर कर मुझे अपनी पत्नी बना लो. शेष जीवन मैं तुम्हारी पत्नी बन कर तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं.’’

रचना की बात सुन कर संजय को लगा कि जैसे उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. वह असमंजस की स्थिति में बोला, ”रचना, मैं कपड़ा, गहना, रुपयापैसा जैसी तुम्हारी हर डिमांड को पूरा कर रहा हूं. फिर यह सिंदूर जैसी अटपटी डिमांड क्यों?’’

रचना तुनक कर बोली, ”तुम्हें मेरी डिमांड अटपटी लग रही है. औरत का सब से कीमती गहना उस का सिंदूर होता है. वही मैं तुम से मांग रही हूं. सिंदूर के आगे बाकी सारी सुविधाएं फीकी हैं.’’

”रचना, मैं शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप हूं. तुम्हारी मांग में सिंदूर भर कर मैं अपनी पत्नी से विश्वासघात नहीं कर सकता.’’ संजय ने समझाया.

”जब मेरे साथ रात बिताते हो, मेरे शरीर को रौंदते हो, तब तुम पत्नी के साथ विश्वासघात नहीं करते. सिंदूर की मांग की तो मुझे विश्वासघात का पाठ पढ़ा रहे हो. मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनूंगी. तुम्हें मेरी मांग में सिंदूर भर कर पत्नी का दरजा देना ही होगा.’’

इस के बाद तो आए दिन सिंदूर की बात को ले कर रचना और संजय में तकरार होने लगी. संजय जब भी रचना से मिलने जाता, वह मांग में सिंदूर भरने और पत्नी का दरजा देने का दबाव बनाती. रचना अब उसे ब्लैकमेल करने पर उतर आई थी. रचना ने शादी की जिद पकड़ी तो संजय घबरा उठा. उस ने रचना को बहुत समझाया, लेकिन जब वह नहीं मानी तो उस ने रचना को खत्म करने का निश्चय किया. इस के लिए उस ने भतीजे संदीप व उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार को चुना. दोनों अपराधी प्रवृत्ति के थे.

संदीप झांसी के बिजौली कस्बे में रहता था और एक फैक्ट्री में काम करता था. साल 2022 में उस ने एक महिला की हत्या की थी. हत्या के मामले में वह जेल गया था, जेल में ही संदीप की दोस्ती प्रदीप से हुई थी. प्रदीप अहिरवार मूलरूप से झांसी के थाना गरौंठा के गांव पसौरा का रहने वाला था, लेकिन मऊरानीपुर में किराए पर रहता था. वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहता था. संजय पटेल ने संदीप व प्रदीप अहिरवार से संपर्क कर रचना की मौत का सौदा किया. फिर हत्या करने व लाश को ठिकाने लगाने तथा किसी भी सूरत में पकड़े न जाने का प्लान बनाया.

संजय व उस के साथी रचना की हत्या करते, उस के पहले ही रचना 6 अगस्त, 2025 को बीमार पड़ गई. संजय ने उसे झांसी के प्राइवेट अस्पताल रामराजा में भरती कराया. रचना को ब्लीडिंग हो रही थी. 2 दिन में रचना ठीक हो गई. 8 अगस्त को संजय उसे डिस्चार्ज करा कर घर लाने पहुंचा तो वह बोली, ”यहीं से कोर्ट चलो. शादी करने के बाद ही घर में जाएंगे.’’ संजय ने उसे समझाया, लेकिन वह मान नहीं रही थी. संजय ने तब रचना को ठिकाने लगाने की ठान ली. उस ने संदीप से बात की और उसे अस्पताल बुला लिया. संदीप ने तब दोस्त प्रदीप से बात की और उसे तैयार रहने को कहा. उस ने तेजधार वाली कुल्हाड़ी का इंतजाम करने की भी बात प्रदीप से कही.

सब कुछ तय होने के बाद संजय ने रचना को 9 अगस्त, 2025 की शाम 5 बजे अस्पताल से डिस्चार्ज कराया. हालांकि वह डिस्चार्ज होने से मना कर रही थी, लेकिन जब संजय ने दूसरे रोज 10 अगस्त को शादी करने का वचन दिया तो वह मान गई. संजय की कार अस्पताल के बाहर ही खड़ी थी. वह कार की पीछे की सीट पर बैठ गई. उस के बगल में संजय भी बैठ गया. संदीप कार ले कर हाइवे पर आया तो संजय बोला, ”रचना, तुम इतने दिन अस्पताल में रही, तुम्हारा मन खराब हो गया होगा. थोड़ा घूम कर आते हैं.’’

लगभग एक घंटा सफर के बाद संजय मऊरानीपुर हाइवे पहुंचा. यहां प्रदीप अहिरवार उस का पहले से इंतजार कर रहा था. उस ने प्लास्टिक बोरी में लिपटी कुल्हाड़ी कार की डिक्की में रखी. फिर आगे की सीट पर संदीप के बगल में आ कर बैठ गया. इस के बाद यह लोग घूमते रहे. एक जगह रुक कर संजय ने शराब खरीदी और तीनों ने मिल कर कार के अंदर ही शराब पी. घूमते हुए सभी लहचूरा बांध पर कार ले कर पहुंचे. अब तक अंधेरा हो गया था. वहां सन्नाटा छाया था. प्रदीप कार में बैठी रचना से बोला, ”भाभी, तुम कितनी भी जिद कर लो, लेकिन संजय भैया तुम से शादी नहीं करेंगे.’’

इतना सुनते ही रचना भड़क गई और प्रदीप से बोली, ”तुम कौन होते हो यह सब कहने वाले?’’

रचना ने संजय से पूछा तो उस ने भी कह दिया कि प्रदीप ठीक बोल रहा है. वह उस से शादी नहीं कर सकता. तब रचना गुस्से से बोली, ”मैं क्या सिर्फ मजे लेने के लिए हूं. शहर वापस चलो. तुम सब को देख लूंगी. सब के दिमाग ठिकाने लग जाएंगे.’’

रचना की धमकी सुनते ही संदीप व प्रदीप ने उसे दबोच लिया और संजय ने कार में ही गला घोंट कर रचना को मार डाला. शव में पत्थर बांध कर लहचूरा डैम में फेंकने गए तो वहां पुलिस की गाड़ी खड़ी थी. कार में लाश थी, इसलिए तीनों वहां से भाग निकले. फिर वह लाश फेंकने खजूरी नदी पहुंचे, लेकिन वहां गार्ड था, इसलिए शव को नहीं फेंक सके. आधी रात को संजय साथियों के साथ किशोरपुरा गांव पहुंचा. गांव के बाहर सड़क किनारे उस ने कार रोकी. यहां खेत के पास कुआं था. तीनों ने मिल कर रचना के शव को कार से निकाला और कुएं में फेंकने को ले आए. लेकिन यहां से संजय का गांव महेबा मात्र 5 किलोमीटर दूर था, जिस से शव की पहचान हो सकती थी. अत: उन्होंने समूचा शव कुएं में नहीं फेंका.

शातिर अपराधी प्रदीप कार से कुल्हाड़ी ले आया, फिर रचना के शव के 7 टुकड़े किए. शव के अंगों को 4 बोरियों में भरा गया. बोरियां पानी में न उतराएं, इस के लिए बोरियों में ईंटपत्थर भी भर दिए. फिर बोरियों का मुंह बांध कर 3 बोरियां कुएं में फेंक दीं और चौथी बोरी जिस में सिर व पैर थे, कार में रख कर वहां से 7 किलोमीटर दूर रेवन गांव के पास लखेरी नदी के पुल पर आए. इस के बाद पुल के नीचे नदी में बोरी फेंक दी. शव को ठिकाने लगाने के बाद संजय ने कार से प्रदीप को मऊरानीपुर तथा संदीप को विजौली पहुंचाया, फिर खुद कार ले कर अपने गांव महेबा आ गया.

संजय को विश्वास था कि उस का अपराध उजागर नहीं होगा, लेकिन यह उस की भूल थी. भीषण बरसात के कारण कुएं का जलस्तर बढ़ा तो बोरियां उतराने लगीं. 13 अगस्त, 2025 की दोपहर किशोरपुरा गांव का विनोद पटेल चारा काटने खेत पर गया तो कुएं में बोरियां उतराती दिखीं और उन से दुर्गंध भी आ रही थी. उस ने सूचना पुलिस को दी. पूछताछ करने के बाद 23 अगस्त, 2025 को पुलिस ने आरोपी संजय पटेल, संदीप पटेल तथा प्रदीप अहिरवार को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. UP New

 

Love story in Hindi: कालेज स्टूडेंट का खूनी प्रेमी

Love story in Hindi : कालेज में पढ़ाई के दौरान 19 साल की वर्षिता चेतन नाम के युवक को दिल दे बैठी थी. बाद में पता चला कि चेतन स्टेज थ्री का कैंसर पेशेंट है. इस के बावजूद हालात ऐसे बन गए कि वर्षिता के पेरेंट्स को कैंसर पीडि़त चेतन के साथ सगाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन शादी होने से पहले चेतन ने एक दिन न सिर्फ वर्षिता की हत्या कर दी, बल्कि उस की लाश पेट्रोल से जला दी. आखिर मंगेतर क्यों बना खूनी?

कर्नाटक के जिला चित्रदुर्ग के रहने वाले चेतन को पता चला कि उसे तीसरी स्टेज का कैंसर है. यह जानकारी होने के बाद 19 वर्षीय प्रेमिका वर्षिता उस से कटीकटी रहने लगी थी. इस बीच उस ने किसी अन्य युवक से संबंध बना लिए थे. बस, इसी बात से चेतन नाराज हो गया था और वर्षिता को सबक सिखाने के बारे में सोचने लगा था. उसी बीच जब वर्षिता के गर्भवती होने का पता चलने के बाद उस की चाची ने चेतन से वर्षिता से विवाह की बात की तो उस की नाराजगी और बढ़ गई. वह धोखेबाज और स्वार्थी वर्षिता से विवाह बिलकुल नहीं करना चाहता था.

जबकि वर्षिता के फेमिली वाले उस पर विवाह के लिए दबाव डाल रहे थे. इसलिए चेतन वर्षिता से बचने के उपाय सोचने लगा. वर्षिता से बचने का जब कोई उपाय चेतन को नहीं सूझा तो उस ने उस की हत्या की योजना बना डाली. उसी योजना के तहत उस ने 14 अगस्त, 2025 को वर्षिता को फोन कर के कहीं घूमने चलने के लिए कहा. वर्षिता को पता था कि उस के पेरेंट्स उस के विवाह की बात चेतन से कर रहे हैं, इसलिए वह खुशीखुशी उस के साथ जाने के लिए राजी हो गई.

शाम को अपनी बाइक ले कर चेतन वर्षिता के हौस्टल पहुंचा तो वर्षिता ने वार्डन से घर जाने के बहाने छुट्टी ली और चेतन के साथ घूमने के लिए निकल पड़ी. चेतन अपनी योजना के अनुसार, पूरी तैयारी कर के आया था. शाम के धुंधलके में गोनूर के पास सुनसान स्थान देख कर एक ब्रिज के पास उस ने बाइक रोक दी. चेतन के मन में क्या है, यह तो वर्षिता को पता नहीं था. इसलिए जब चेतन ने बाइक रोकी तो उस ने हंसते हुए कहा, ”जंगल में मंगल मनाने का मन है क्या?’’

”वह तो बाद की बात है. मैं यह जानना चाहता हूं कि तुम्हारे पेट में जो बच्चा है, वह किस का है? क्योंकि जब तुम्हें पता चला कि मुझे कैंसर है, तब तुम ने किसी दूसरे युवक से संबंध बना लिए थे.’’ चेतन ने कहा.

”तुम से किस ने कहा कि मैं ने दूसरे से संबंध बना लिए थे?’’ वर्षिता ने पूछा.

”हर चीज कहने से ही पता नहीं चलती. कुछ बातें हवा में फैल जाती हैं, जो अपने आप कानों तक पहुंच जाती हैं.’’ चेतन ने तल्खी से कहा, ”अब जब उस का पाप तुम्हारे पेट में पलने लगा है तो तुम्हारे फेमिली वाले तुम्हें मेरे गले में बांधना चाहते हैं. लेकिन अब मैं तुम से विवाह नहीं करने वाला.’’

”क्यों नहीं करोगे मुझ से विवाह? विवाह तो तुम्हें मुझ से हर हालत में करना होगा.’’ वर्षिता गुस्से में बोली.

”मैं और तुम से विवाह, कतई नहीं. मैं तुम से बिलकुल विवाह नहीं करूंगा. तुम्हें जो करना हो, कर लेना.’’ चेतन ने कहा.

”मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस में शिकायत करूंगी. तुम्हें जेल भिजवा दूंगी.’’ वर्षिता चिल्लाई.

तभी चेतन ने उसे धक्का देते हुए कहा, ”तू मेरे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा कर मुझे जेल भिजवाएगी? मैं तुझे उस लायक ही नहीं छोड़ूंगा. मैं अभी तुझे खत्म कर दूंगा.’’

इतना कह कर चेतन लातघूंसों से वर्षिता की पिटाई करने लगा. जब वर्षिता की पिटाई करतेकरते उस का मन भर गया और वर्षिता अधमरी हो गई तो गला दबा कर उस की हत्या कर चेतन ने साथ लाए पेट्रोल को उस के ऊपर डाल कर आग लगा दी. इस के बाद अपनी बाइक ले कर वह चित्रदुर्ग अपने घर वापस आ गया. नैशनल हाइवे नंबर-48 पर गोनूर ब्रिज के नीचे विश्राम के लिए रुके 2 लोगों ने सड़क किनारे एक अधजली लाश देखी. इस बात की सूचना चित्रदुर्ग थाना पुलिस को दी गई. पुलिस ने लाश की पहचान की कोशिश की, लेकिन तत्काल उस की शिनाख्त नहीं हो सकी.

लेकिन जब पुलिस को पता चला कि सरकारी डिग्री कालेज में पढऩे वाली एक लड़की वर्षिता की गुमशुदगी हिरियूर थाने में दर्ज कराई गई है. तब चित्रदुर्ग पुलिस ने तुरंत वर्षिता के पेरेंट्स को बुला लिया. पेरेंट्स ने अस्पताल पहुंच कर वर्षिता के शरीर के टैटू से लाश की शिनाख्त की. वर्षिता की लाश मिलने के बाद दलित संगठनों ने हत्यारे को गिरफ्तार करने के लिए आंदोलन भी किया था. उन की मांग थी कि जब तक हत्यारे को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे. मृतका की मम्मी ज्योति थिप्पेस्वामी ने हत्यारे को जल्द गिरफ्तार कर फांसी की सजा दिए जाने की मांग की.

पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी चेतन को गिरफ्तार कर उसे अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर मामले की जांच शुरू की. सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, दोस्तों व रिश्तेदारों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि वर्षिता और चेतन के बीच पिछले लगभग 10 महीने से प्रेम संबंध था. लोगों ने यह भी बताया कि चेतन ने उसे नौकरी का लालच दिया था. परेशानी की बात यह थी कि कोई चश्मदीद नहीं था, जो घटना की सटीक जानकारी देता. पर वर्षिता के हौस्टल से निकलने के बाद सीसीटीवी फुटेज में दोनों साथ जाते नजर आए थे. आगे चेतन चल रहा था और उस के पीछे वर्षिता चल रही थी.

हौस्टल से निकलने के बाद दोनों बाइक से जाते समय पेट्रोल पंप पर पहुंचे और वहां बाइक में पेट्रोल भराया था. वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में भी दोनों साथ नजर आए थे. इस के अलावा दोनों के मोबाइल की लोकेशन भी एक साथ मिली थी. यही नहीं, वर्षिता के हौस्टल से निकलने से पहले चेतन ने उस से फोन पर बात भी की थी. इस के बाद पुलिस ने वर्षिता के प्रेमी चेतन को गिरफ्तार कर लिया. उस ने चित्रदुर्ग के एसपी रंजीत कुमार बंडारू की मौजूदगी में वर्षिता की हत्याकांड की चौंकाने वाली कहानी बताई.

कर्नाटक के जिला चित्रदुर्ग के थाना हिरियूर के गांव कोवरहट्टी की रहने वाली 19 साल की वर्षिता चित्रदुर्ग के सरकारी डिग्री कालेज में सेकेंड ईयर की छात्रा थी और वहीं एससीएसटी हौस्टल में रहती थी. मम्मीपापा गांव में रह कर मेहनतमजदूरी करते थे. एकलौती संतान होने की वजह से वर्षिता ही अपने मम्मीपापा के जीवन का आधार थी. गरीब होने की वजह से वे यही सोचते थे कि बेटी पढ़लिख कर कुछ बन जाएगी तो कम से कम उन का बुढ़ापा तो सुख से कट जाएगा. इसीलिए गरीब होने के बावजूद वे उसे एक बेटे की तरह पढ़ालिखा रहे थे.

दूसरी ओर वर्षिता सरकार से मिलने वाली सहायता यानी स्कौलरशिप से अपनी पढ़ाई कर रही थी. मम्मीपापा तो किसी तरह अपना ही खर्च चला रहे थे, इसलिए उन से उसे कोई ज्यादा उम्मीद नहीं रहती थी. फिर भी वे मिलने वाली मजदूरी से कुछ न कुछ रुपए बचा कर वर्षिता को देते ही रहते थे, जबकि वह वर्षिता के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान था. गरीबी में जीने वाली वर्षिता हमेशा मुसकराती रहती थी. लडख़ड़ाते सपनों और किताबों में उलझी होने के बावजूद उसे उम्मीद थी कि एक दिन वह अपने सपने पूरे करने में सफल जरूर होगी. पर उस के भीतर कुछ और भी था. मजबूर होने के

बाद भी वह किसी की चाह में डूब चुकी थी. इंस्टाग्राम पर मैसेज करतेकरते उस की धीरेधीरे चेतन नाम के युवक से दोस्ती हो गई थी. दोस्ती ने भरोसा दिया. फिर भरोसे ने उम्मीद जगाई और उसी उम्मीद में वह उस के प्यार के रंग में रंग गई. चेतन देखने में साधारण, पर सोच से बेहद चालाक और स्वार्थी था. वह एक मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी करता था. वह उस कंपनी में भरती का काम देखता था. वह बातचीत में थोड़ा झिझकता था, क्योंकि उस पर जिम्मेदारियों का बोझ था. दोनों की जानपहचान इंस्टाग्राम से हुई थी. चेतन से जब वर्षिता ने अपनी परेशानी बता कर उस से नौकरी दिलाने को कहा तो उस ने कहा था कि वह उस के लिए जरूर कुछ करेगा. वह उसे कहीं न कहीं नौकरी जरूर दिला देगा.

इसी उम्मीद में वर्षिता ने उस का हाथ थाम लिया था. उन की बातचीत शाम की गपशप तक ही सीमित नहीं रही थी, दोनों ही एकदूसरे का भरोसा बनते गए और रिश्ते के तार गुंथते गए थे. वे एकदूसरे का इस तरह भरोसा बन गए थे कि उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे.फिर जो सच सामने आया, वह बहुत ही दुखद था. पता चला कि चेतन को कैंसर हो गया है. डौक्टरों के अनुसार उसे तीसरी स्टेज का कैंसर था. चेतन की जिंदगी अब सवालों में घिर गई थी. उस का जीवन भरोसे का नहीं रह गया था. इसलिए उस पर भरोसा करना वर्षिता के लिए मुश्किल हो गया था. इलाज, खर्च, भविष्य के फैसले, ये सब चीजें अचानक रिश्ते के बीच आ गई थीं.

वर्षिता ने चेतन से दूरी बढ़ानी शुरू कर दी, जिस से चेतन को झटका सा लगा. दोनों ने शादी के बारे में सोच लिया था. ऐसे में चेतन को वर्षिता से प्यार और सहारे की उम्मीद थी. जबकि वह उस से दूर जाने लगी थी. दोनों की दुनिया में दरारें पडऩे लगी थीं.फिर वह खबर आई, जिस ने वर्षिता के परिवार को हिला कर रख दिया. पता चला कि वर्षिता गर्भवती थी. जब घर वालों को इस बात का पता चला तो सभी घबरा गए. बात इज्जत की थी, इसलिए घर वाले इज्जत बचाने के लिए वर्षिता और चेतन की शादी के बारे में सोचने ही नहीं लगे, बल्कि वर्षिता की चाची ने चेतन से वर्षिता से विवाह करने की बात की. उन्होंने कहा कि वर्षिता जिस स्थिति में है, उस में अब उसे उस से विवाह कर लेना चाहिए, वरना वे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.

चेतन ने वर्षिता से विवाह के लिए मना करते हुए कहा कि वर्षिता का अब किसी अन्य युवक से संबंध है. इसलिए हो सकता है, यह बच्चा उसी का हो. इस के बाद चेतन वर्षिता से छुटकारा पाने के बारे में सोचने लगा था. क्योंकि अब वह वर्षिता को धोखेबाज और स्वार्थी मानने लगा था और ऐसी लड़की से वह विवाह नहीं करना चाहता था. 14 अगस्त, 2025 को वर्षिता ने घर जाने के लिए हौस्टल से छुट्टी ली. पर वह गांव गई नहीं.  मम्मीपापा तो यही सोच रहे थे कि बेटी हौस्टल में होगी, लेकिन जब अगले दिन वर्षिता से फेमिली वालों की बात नहीं हुई तो फेमिली वालों को चिंता हुई. पापा ने हौस्टल में पता किया तो मालूम हुआ कि वह तो एक दिन पहले ही घर के लिए हौस्टल से छुट्टी ले कर निकल चुकी है.

यह सुन कर फेमिली वाले घबरा गए और वर्षिता के पापा थिप्पेस्वामी ने तुरंत हिरियूर थाने में बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. बाद में उन्हें बेटी की हत्या की सूचना मिली. पुलिस ने आरोपी चेतन से पूछताछ के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Love story in Hindi

 

 

Rajasthan News : नीले ड्रम की मर्डर मिस्ट्री

Rajasthan News : शादी हो जाने के बाद हर पत्नी चाहती है कि वह अपने घर को अच्छे से संभाले और अपने पति व बालबच्चों की ठीक से देखभाल करे. 3 बच्चों की मां सुनीता भी ये सारी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही थी. फिर एक दिन ऐसा क्या हुआ कि सुनीता ने अपने पति हंसराम उर्फ सूरज की न सिर्फ हत्या कर दी, बल्कि उस की लाश को नीले ड्रम में डाल कर ऊपर से नमक भी डाल दी. आखिर सुनीता ने क्यों की पति की हत्या?

बरसात आते ही ईंटभट्ठे के मुनीम जितेंद्र शर्मा के कहने पर हंसराम उर्फ सूरज 3 महीने के लिए शाहजहांपुर में स्थित अपने घर लौटने के बजाए बीवीबच्चों के साथ उसी के साथ राजस्थान के अलवर जिले के किशनगढ़ वास कस्बा चला आया. उसे भट्ठे पर लोग सूरज के नाम से जानते थे. वह अपनी पत्नी सुनीता और 3 बच्चों के साथ वहां की आदर्श नगर कालोनी में जितेंद्र शर्मा की मां मिथिलेश शर्मा के मकान में किराए पर रहने लगा.

जितेंद्र ने सूरज को एक दुकान पर काम भी दिलवा दिया. इस तरह से सूरज की आमदनी का जरिया बन गया और उस की दिनचर्या शुरू हो गई. वह सुबह काम पर जाता और शाम तक घर वापस लौटता था. घर में उस के पीछे पत्नी सुनीता और 3 बच्चे होते थे. बड़ा बेटा 8 साल का, जबकि 2 अन्य बच्चे 4 साल और डेढ़ साल के थे.

सूरज और सुनीता एक तरह से जितेंद्र के एहसान तले आ गए थे. जितेंद्र जबतब छत पर बने घर में सुनीता के पास आनेजाने लगा था. वह सूरज के नहीं रहने पर भी सुनीता के पास चला जाता था. बच्चों से प्यारदुलार करता था. जल्द ही सुनीता जितेंद्र से भावनात्मक लगाव महसूस करने लगी थी. यह लगाव कब सैक्स अपील की भावना में बदल गया, उन्हें पता ही नहीं चला. यानी उन के बीच अवैध संबंध बन गए. दोनों को जब एकांत की चाहत होती, तब जितेंद्र बच्चों को गेम खेलने के लिए अपना मोबाइल फोन दे कर कमरे से बाहर भेज दिया करता था.

सुनीता और जितेंद्र के बीच एक अनैतिक रिश्ता कायम हो चुका था. जबकि सूरज इस से बेखबर था.  सुनीता शुरू से ही अपने पति से संतुष्ट नहीं थी. वह भले ही 3 बच्चों का बाप बन गया था, लेकिन सुनीता की शारीरिक भूख को नहीं मिटा पाता था.

सूरज उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का रहने वाला था, लेकिन रोजीरोटी की तलाश में राजस्थान के खैरथल तिजारा जिलांतर्गत सूर्या ईंटभट्ठे पर काम करने आ गया था. वहीं उस की भट्ठे के मुनीम जितेंद्र से अच्छी जानपहचान हो गई थी. उन्हीं दिनों रंगीनमिजाज जितेंद्र की निगाह सुनीता पर पड़ी थी. उस के खिलते यौवन और सौंदर्य को देख कर मन ही मन उसे पाने की लालसा से भर गया था.

शायद यही कारण था कि जितेंद्र ने सूरज को परिवार समेत अपने गांव वापसी से रोक दिया था. यही नहीं, उस ने सूरज को शराब की ऐसी लत लगा दी कि वह जितेंद्र का पक्का यार बन गया. यह सब जितेंद्र ने सुनीता को हासिल करने के लिए किया था.

जितेंद्र एक तरह से अपनी योजना में सफल हो गया था और उस ने सुनीता के साथ जैसा रिश्ता कायम करना चाहता था, उस में उसे सफलता मिल गई थी. उस की जब इच्छा होती तो मौका निकाल कर सुनीता को अपनी बाहों में दबोच लेता था.

हालांकि जितेंद्र भी शादीशुदा था. वह एक 8 साल के बेटे आदित्य का पिता भी था. उस की पत्नी की करीब 12 साल पहले करंट लगने से मौत हो गई थी. बेटे की देखभाल उस की मां करती थी और जितेंद्र विधुर की जिंदगी गुजार रहा था.

यही कारण था कि वह स्त्रीसुख की आग में बेचैन रहता था. जब से उस ने सुनीता को देखा था, तभी से उसे पाने के लिए तड़प उठा था. इस के प्रयास में लग गया था और उस ने सुनीता को भट्ठे पर कम काम करवाने और शराबी सूरज को मुफ्त शराब पिला कर संतुष्ट कर दिया था.

वैसे जितेंद्र और सुनीता के बीच अवैध संबंध किशनगढ़ आने के पहले से बने हुए थे. जुलाई में बारिश के दिनों में जब सूरज ने सुनीता से वापस गांव चलने की बात कही, तब उस ने जितेंद्र के प्रस्ताव के साथ हां में हां मिला कर सूरज को राजी कर लिया था.

जितेंद्र ने जानबूझ कर सूरज को अपने घर के छत पर बना कमरा मां से कह कर किराए पर दिलवा दिया था. वहां उस की मां कभीकभार जाती थी. वह जगह सुनीता और जितेंद्र दोनों के लिए महफूज थी. सूरज और सुनीता के वहां रहने पर एक तरह से जितेंद्र की मौज आ गई थी.

बदले में वह उस की मदद करने लगा. एक बार जितेंद्र ने किराया ही अपनी जेब से दे दिया था. जब इस की जानकारी सूरज को हुई, तब वह पत्नी से झगड़ पड़ा. उसे पहले से ही पत्नी के चालचलन और जितेंद्र से अधिक घुलनेमिलने से उस पर संदेह होने लगा था. किराए की बात पर उस का संदेह और गहरा हो गया. शराब के नशे में वह सुनीता पर सच उगलवाने का दबाव बनाने लगा था.

तब उलटे सुनीता पति सूरज से ही उलझ गई, गुस्से में बोली, ”तुम्हारे पास किराए का पैसा नहीं था और जब उस ने किराया चुका दिया है, तब उस का एहसान मानने के बजाए उसी पर लांछन लगा रहे हो.’’

”किराए में दोचार रोज देरी हो जाती तो इस से क्या हो जाता,’’ सूरज बोला.

”तुम्हें नहीं मालूम जितेंद्र की मां किराए के मामले में बहुत कड़क बुढिय़ा है. किराया नहीं मिलने पर तुरंत कमरा खाली करवा देती.’’ सुनीता बोली.

पत्नी के इस तर्क पर सूरज चुप लगा गया, किंतु कुछ दिनों बाद ही बेटे के एडमिशन को ले कर सुनीता पति से झगड़ पड़ी. दरअसल, उस के एडमिशन के लिए जितेंद्र ने पहल की थी. जब इस की जानकारी सूरज को हुई, तब वह गुस्से में आ गया और बोला, ”जितेंद्र कौन होता है मेरे बेटे का एडमिशन करवाने वाला?’’

इस पर फिर सुनीता पहले की तरह पति को ताना देती हुई बोली, ”अगर कोई तुम्हें मदद कर रहा है तो इस में बुराई क्या है?’’

”बुराई उस की मदद में नहीं, उस की नीयत में है. उस ने तुम्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया है…तुम मेरे कहने का मतलब अच्छी तरह से समझती हो,’’ सूरज नाराजगी के साथ बोला.

तभी जितेंद्र वहां आ गया. उस ने जब सुनीता और सूरज को तूतूमैंमैं करते देखा, तब माहौल को हलका बनाते हुए बोल पड़ा, ”तुम दोनों फिजूल में लड़ते रहते हो. इतना अच्छा मौसम है. चलो बाजार, आज दारू की बोतल और मछली लाते हैं. यहीं दारू पार्टी करेंगे. सुनीता मछली पकाएगी.’’

दारू और मछली का नाम सुनते ही सूरज के मुंह से लार टपकने लगी. वह तुरंत तैयार हो गया और उस के साथ दारू लाने के लिए बाजार चला गया. थोड़ी देर में जितेंद्र और सूरज दारू और मछली ले कर आ गए. दोनों वहीं दारू पार्टी करने लगे. मछली पका कर सुनीता लाई, तब जितेंद्र ने उसे भी एक पैग पीने को दे दिया. उस ने भी खुश हो कर 2-3 पैग दारू का आनंद लिया. शराब के नशे में जितेंद्र ने कहा कि उसे उस की माली हालत पर पर दया आती है, इसलिए वह उस की मदद करता है. अपनी बातों से उस ने सूरज को आश्वस्त किया कि सुनीता और उस के संबंधों को ले कर बेकार में संदेह करता है.

हालांकि यह कहना उस का एक झूठ ही था. हकीकत तो यह थी कि जितेंद्र अकसर सूरज को शराब पिलाता था. उस में सुनीता भी साथ देती थी और जब सूरज नशे में धुत हो जाता था, तब जितेंद्र उस की बीवी के साथ मौजमस्ती करता था. यह सब चलता रहा. सुनीता अपने अनैतिक संबंधों के बचाव में लोगों से पति को शराब की लत लग जाने का दुखड़ा सुनाने लगी थी. जब भी जितेंद्र की मां से मिलती, एक दुखड़ा सुनाती कि वह अपने शराबी पति से परेशान हो गई है. जितेंद्र की मां उसे नसीहत देती. समझाती थी कि वह पति से झगड़ा नहीं करे, बल्कि प्रेम से उसे समझाएबुझाए.

बात 15 अगस्त, 2025 की है. सूरज दुकान से घर लौट आया था. वह गुस्से से भरा हुआ कमरे में बैठा था. जैसे ही पत्नी आई, उस से झगड़ पड़ा. तभी मकान के नीचे बैठा जितेंद्र उस के कमरे में आ गया. वह बोला, ”क्यों झगड़ रहे हो?’’

”क्या करूं? मेरी जिंदगी नरक बन गई है. दारू पिलाओगे, तब बोलूंगा?’’ सूरज निराश भाव से बोला.

”हां, क्यों नहीं, लो अभी गया और ले कर आया.’’ जितेंद्र बोला.

”कहां से लाओगे, आज तो ड्राई डे है.’’

”तो क्या हुआ, मैं ने इंतजाम कर रखा है.’’ जितेंद्र बोला और वहां से चला गया. थोड़ी देर में लौटा, तब उस के हाथ में एक शराब की बोतल थी.

सूरज और जितेंद्र वहीं दारू पीने लगे. सुनीता गुमसुम उन्हें देखती रही. जितेंद्र ने इशारा किया, तब वह भी अपने लिए एक गिलास ले आई. सूरज उस रोज गुस्से में लगातार पैग पर पैग पिए जा रहा था. हर पैग के साथ सुनीता को गालियां बके जा रहा था. उस पर बदलचलनी का आरोप लगाए जा रहा था. हद तो तब हो गई, जब सूरज उस पर गिलास फेंक कर मार दिया. इस पर जितेंद्र बोला, ”क्यों उसे मारते हो? गलत बात है.’’

नशे में सूरज बोला, ”मैं उसे मारूं या प्यार करूं, तुम कौन होते हो इसे बचाने वाले?’’

”तुम्हें जो कुछ करना है वह मेरे सामने मत करो,’’ जितेंद्र डांटता हुआ बोला.

”मैं मारूंगा इसे, आज इस की सारी हेकड़ी निकाल दूंगा.’’ बोलते हुए उस ने सुनीता की गरदन पकड़ ली थी. सुनीता चीख पड़ी थी. चीख सुन कर जब उस का बेटा उसे बचाने आया था, तब सूरज ने बेटे की भी पिटाई शुरू कर दी. वह गुस्से में बावला हो गया था. बचाव करते हुए जितेंद्र बोल पड़ा, ”अरे बच्चे को मार डालेगा क्या? इतना क्यों पीट रहा है उसे?’’

तभी सूरज की नजर लोहे के एक औजार पर गई. उस ने झट से उसे उठा लिया. तब तक सुनीता और उस का बेटा बचाव में भागने लगे. वे सूरज के आक्रामक तेवर को देख कर समझ गए थे कि वह काफी गुस्से में है. कुछ भी कर सकता है. ऐसा ही जितेंद्र ने भी महसूस किया तो वह भी वहां से जाने को उठा. तब सूरज ने तीनों पर लोहे का औजार फेंक मारा.

उस ने अनापशनाप बकना शुरू कर दिया था. उस रोज नशे में उस ने यहां तक कह दिया कि उन के बीच नाजायज संबंध है. उसे अब खत्म कर के ही चैन लेगा. वह शराब के नशे में बकता हुआ इधरउधर चक्कर लगा रहा था. इसी बीच सुनीता ने जितेंद्र को इशारा किया. हाथों के इशारे से धीमी आवाज में बोली, ”अब क्या किया जाए? इस पर तो भूत सवार है.’’

”जो तुम को सही लगे.’’

फिर क्या था. जितेंद्र ने चक्कर काटते सूरज को दबोच लिया. सुनीता ने उस के पैर पकड़ लिए. सूरज के गरदन पर जितेंद्र की पकड़ मजबूत होती चली गई. सुनीता ने उस को छटपटाने का मौका तक नहीं दिया. जितेंद्र ने एक हाथ से गरदन और दूसरे हाथ से सूरज का मुंह नाक ऐसे दबाई कि वह कुछ मिनट में ही बेजान हो गया. उस वक्त रात हो चुकी थी. सुनीता और जितेंद्र आपस में विचार करने लगे कि अब आगे क्या किया जाए? शव को कैसे ठिकाने लगाया जाए?

तभी जितेंद्र को कमरे के बाहर छत पर रखे नीले ड्रम को देख कर एक आइडिया आया. क्यों न शव को ड्रम में डाल कर उस पर नमक डाल दिया जाए, ताकि शव जल्दी सडग़ल जाए. उसे यह आइडिया अचानक कुछ महीने पहले मेरठ के सौरभ हत्याकांड से आया. उस ने वही किया. फर्क इतना था कि सीमेंट का गाढ़ा घोल डालने के बजाय सूरज के शव को ड्रम में डाल कर उस में नमक का घोल डाल दिया. उस के मुंह को चादर से ढंक दिया.

संयोग से जब यह सब किया जा रहा था, तब सूरज का बेटा पेशाब के लिए उठा था. वह अर्धनिद्रा में था, उसे कुछ समझ में नहीं आया कि उस की मम्मी और जितेंद्र अंकल ड्रम के साथ क्या कर रहे हैं? जब उस ने पूछा कि वे क्या कर रहे हैं? तब अचानक जितेंद्र बोल पड़ा, ”तुम्हारे पापा को ठिकाने लगा रहे हैं. वह तुम्हें और मम्मी को मार रहा था न!’’

17 अगस्त, 2025 को जितेंद्र की मां मिथिलेश ने महसूस किया कि छत पर रहने वाले किराएदार सूरज के यहां सन्नाटा है, वहां से किसी की आवाज नहीं आ रही है. जबकि सुबह होते ही सुनीता और सूरज के बीच होने वाली बहस की आवाजें आने लगती थीं. कई बार बच्चों के रोने की भी आवाज सुनाई देती थी.

वह छत पर चली गई. कमरे में कोई नजर नहीं आ रहा था. वहां न तो सुनीता थी और न ही सूरज और उस के बच्चे. उस ने महसूस किया कि जितेंद्र भी बीती रात से अपने कमरे में नजर नहीं आया था. तभी वहां उसे अजीब सी दुर्गंध महसूस हुई. जो पास रखे नीले ड्रम से आ रही थी. उस ने तुरंत अपने पति राजेश शर्मा को यह बात बताई. पति ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर छत पर रखे ड्रम से दुर्गंध आने की सूचना पुलिस को दी.

पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना पा कर किशनगढ़ वास के एसएचओ जितेंद्र सिंह शेखावत, एसआई दिनेश कुमार मीणा, एएसआई ज्ञानचंद पुलिस दलबल के साथ आदर्शनगर कालोनी स्थित राजेश शर्मा के घर पहुंच गए. पुलिस टीम छत पर रखे नीले ड्रम के पास गई, जहां से दुर्गंध आ रही थी. एक पुलिसकर्मी ने उस का ढक्कन हटाया तो दुर्गंध और तेज हो गई. उस के भीतर चादर ठूंसी हुई थी. जब चादर बाहर निकली, तब दुर्गंध का तेज भभका निकला और अंदर लाश नजर आई.

लाश की पहचान सूरज के रूप में हुई, जो वहीं किराए पर रहता था. एसएचओ ने इस की सूचना किशनगढ़ वास के डीएसपी राजेंद्र सिंह निर्वाण को दे दी. वह थोड़ी देर में ही मौके पर पहुंच गए. उन्होंने उस के कमरे की तलाशी ली. वहां उन्हें सूरज का आधार कार्ड मिला, जिस पर उस का नाम हंसराज दर्ज था. उस पर उस के पिता का नाम खेमकरण और पता नवादिन नवाजपुर, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश लिखा था. मकान मालकिन को भी यह जान कर हैरानी हुई कि मृतक ने अपना असली नाम उसे नहीं बताया था.

उस वक्त सडऩे की स्थिति में आ चुके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस के सामने सवाल यह था कि मृतक की पत्नी सुनीता और बच्चे कहां गए? जांच और पूछताछ में यह भी मालूम हुआ कि मकान मालकिन का विधुर बेटा जितेंद्र शर्मा भी 16 सितंबर, 2025 से ही लापता है. उन का पता लगाने के लिए जांच टीमें गठित कर दी गईं. उन्हें पकडऩे के लिए टीमें पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश भेजी गईं. साथ ही सीसीटीवी के फुटेज निकलवाए गए.

दूसरी तरफ फरार जितेंद्र शर्मा 18 अगस्त को सुनीता और उस के तीनों बच्चों को ले कर अलवर जिले के रामगढ़ इलाके के आलावड़ा गांव जा पहुंचा. वहां लोगों ने एक ईंट भट्ठे पर काम मांगा. भट्ठे के मालिक को उन पर संदेह हो गया था. कारण उसे बीते दिनों किशनगढ़ वास में हत्या संबंधी जानकारी न्यूजपेपर और सोशल मीडिया के जरिए मिल चुकी थी, जिस में फरार लोगों के बारे में भी जिक्र किया गया था.

इस संदेह के आधार पर उस ने तुरंत स्थानीय पुलिस थाने को इस की सूचना दे दी. पुलिस वहां पहुंच गई और उन्हें वही हिरासत में ले लिया. इस के बाद उन्हें किशनगढ़ वास लाया गया. थाने में पहले से ही सूरज के परिजन मौजूद थे. उन्होंने सूरज की लाश की पहचान कर ली थी. सूरज के पेरैंट्स और भाईबहनों का रोरो कर बुरा हाल था. थाना किशनगढ़ वास की पुलिस ने हंसराज उर्फ सूरज की हत्या का मामला उस के परिजनों की शिकायत पर दर्ज कर लिया गया. हत्याकांड में जितेंद्र शर्मा और सुनीता मुख्य आरोपी बनाए गए.

दोनों ने गहन पूछताछ में हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उन्होंने हत्या किस तरह से की, पुलिस इस की जांच के लिए उन्हें घटनास्थल पर ले गई. वहां आरोपियों द्वारा क्राइम सीन क्रिएट किया गया. उन के बयान लिए गए. अपने बयान में जितेंद्र ने बताया कि सूरज की पत्नी सुनीता के प्रेम में वह अंधा हो गया था. सुनीता भी उसे पसंद करने लगी थी. सूरज उन के प्रेम संबंधों में बाधक था, इसलिए उस की हत्या कर दी थी.

पुलिस ने जितेंद्र शर्मा और सुनीता से गहन पूछताछ के बाद उन्हें मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर दिया. वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Rajasthan News

 

 

Love Story in Hindi : इश्क पर पहरा बरदाश्त नहीं

Love Story in Hindi : मनोज और स्वाति एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, लेकिन उन के फेमिली वालों को यह बात बरदाश्त नहीं हुई. उन्होंने न सिर्फ स्वाति पर पहरा लगा दिया, बल्कि उस के प्रेमी मनोज को भी बुरी तरह हड़काया. अंकुश लगाया गया यह प्यार एक दिन ऐसा शोला बन गया कि…

बात 17 सितंबर, 2025 की रात लगभग साढ़े 11 बजे की है. उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद के पुलिस कंट्रोल रूम को एक सूचना मिली. कौल करने वाले ने बताया, ”साहब, मैं गुरैठा गांव का योगेश हूं. गांव के ही शोभाराम और उस के 2 बेटे गौरव व कपिल मेरे साथ मारपीट कर रहे हैं. मैं बुरी तरह से घायल हूं. उन के चंगुल से किसी तरह छूट कर मैं अंधेरे में छिप गया हूं. वे लोग मुझे जान से मार देंगे. मैं इस समय मोढ़ा तैया गांव के कब्रिस्तान से आप को सूचना दे रहा हूं. साहब, मुझे आ कर बचा लो.’’

यह कौल सुन कर पुलिस तुरंत हरकत में आ गई. पुलिस कंट्रोल रूम (यूपी 112) की गाड़ी तुरंत सूचना में बताए गए पते पर रवाना कर दी गई.यह कब्रिस्तान जिला मुरादाबाद में अगवानपुर से पाकबड़ा की तरफ जाने वाले बाईपास के किनारे मोढ़ा तैया गांव के पास स्थित है. पुलिस जब वहां पहुंची तो वह वह अंधेरे में हाथपैर मार कर वापस आ गई थी. जिस फोन नंबर से पुलिस को सूचना मिली थी, उस नंबर पर कौलबैक की तो उस मोबाइल की घंटी तो बज रही थी, लेकिन उसे कोई उठा नहीं रहा था.

पुलिस ने समझा कि किसी ने शायद फेक कौल कर दी होगी या कोई शरारती तत्त्व नशा कर के पुलिस को गुमराह कर रहा है. यानी उस समय पुलिस ने मामले को हलके में लिया था. अगले दिन 18 सितंबर, 2025 की सुबह 8 बजे किसी व्यक्ति ने फोन द्वारा थाना पाकबड़ा पुलिस को सूचना दी कि मोढ़ा तैया कब्रिस्तान के पास एक रक्तरंजित शव पड़ा हुआ है. सूचना मिलते ही थाना पाकबड़ा के एसएचओ योगेश कुमार पुलिस टीम के घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. वहां पर लाश के आसपास लोगों का हुजूम लगा हुआ था, पुलिस को देख कर लोग दाएंबाएं हो गए.

एसएचओ योगेश कुमार ने लाश का मुआयना करने के बाद लोगों से शव की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन लोगों ने शव पहचानने से इंकार कर दिया. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतक कहीं दूसरी जगह का हो सकता है. इस की हत्या कहीं और कर के शव यहां पर ला कर डाल दिया गया है. पुलिस को शव के पास से एक मोबाइल फोन भी मिला. मृतक का मुंह किसी भारी चीज से बुरी तरह कुचला गया था. एसएचओ योगेश कुमार ने शव मिलने की सूचना अपने उच्च अधिकारियों को दी.

सूचना मिलते ही मुरादाबाद के एसपी (सिटी) कुमार रणविजय सिंह व सीओ राजेश कुमार मौके पर पहुंच गए थे उन्होंने फोरैंसिक टीम भी बुला ली थी. जांचपड़ताल के बाद शव का पंचनामा भर कर उस मोर्चरी भिजवा दिया गया. इस के बाद जब हत्या की खबर सोशल मीडिया द्वारा फैली तो शव की भी शिनाख्त हो गई. पता चला कि मृतक घटनास्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित गांव गुरैठा का रहने वाला 20 वर्षीय योगेश कुमार था.

उधर शाम तक योगेश की लाश का पोस्टमार्टम भी हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि पहले उस का गला घोंटा गया था, बाद में किसी भारी वस्तु से उस का सिर कुचला गया था. योगेश के फेमिली वालों का रोरो कर बुरा हाल था. मृतक के भाई उमेश ने गांव गुरैठा निवासी शोभाराम व उस के 2 बेटों गौरव व कपिल के खिलाफ अपने भाई योगेश की हत्या का थाना पाकबड़ा में मुकदमा दर्ज करवाया. पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा बीएनएस की धारा 103 (1) व 3 (2)(v) एससी/एसटी ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस के बाद पुलिस ने गांव गुरैठा निवासी नामजद शोभाराम और उस के दोनों बेटों गौरव व कपिल को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. आरोपियों के हिरासत में लेने की सूचना पर मुरादाबाद के एसएसपी सतपाल अंतिल भी थाना पाकबड़ा पहुंच गए. पुलिस ने तीनों आरोपियों शोभाराम, गौरव व कपिल से गहनता से पूछताछ की. तीनों ही अपने को निर्दोष बताते रहे, ”सर, हमारा मृतक योगेश से कोई झगड़ा नहीं था और न उन के यहां पर हमारा कोई आनाजाना था. आप पूरे गांव से पता कर लें, घटना वाली रात हम अपने घर पर ही थे. खाना खाया, घूमे, फिर सो गए.

”सर, हम इस बात से परेशान हैं कि हमें कौन से लोगों ने फंसवा दिया. हम ने तो आज तक मक्खी तक नहीं मारी, हत्या करना तो दूर की बात है. सर, आप जांच करवा लें इस मामले में हमें किसी बड़े षडयंत्र के तहत फंसाया गया है. आप मृतक योगेश के परिवार से भी मालूम करो, हमारा उस परिवार से आज तक कोई लड़ाईझगड़ा तक नहीं हुआ है. हमारे पास तो खाने के भी लाले हैं, हम मुकदमा कैसे लड़ेंगे. न कोई मुकदमा लडऩे वाला. सर, हम तो बरबाद हो गए.’’

उसी समय अभियुक्त शोभाराम का बड़ा बेटा गौरव बोला, ”सर, घटना वाली रात मेरे मोबाइल पर एक कौल आई थी. जैसे ही मैं ने कौल रिसीव की, तभी उधर से कौल डिसकनेक्ट कर दी गई. आप इस कौल को भी चैक करवा लो. सर, हमारे साथ बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है.’’ इतना सुनते ही एसएसपी सतपाल अंतिल का माथा ठनका. उन्होंने कौल की जांच करवाई तो वह नंबर मृतक योगेश का ही निकला. इस का मतलब यह हुआ कि  हत्यारों ने मृतक योगेश के फोन से ही कौल की थी.

मामला बड़ा गंभीर था. उन्होंने तुरंत ही थाने में एक इमरजेंसी मीटिंग बुलवाई. मीटिंग में एसपी (सिटी) कुमार रणविजय सिंह, सीओ (हाइवे) राजेश कुमार, एसएचओ (पाकबड़ा) योगेश कुमार, एसओजी प्रभारी अमित कुमार, थाने के एसएसआई आदि की टीम बनाई गई. उन्हें समझाया गया मामला बहुत गंभीर है, इसलिए इस का जल्द से जल्द खुलासा किया जाए.

कप्तान साहब का आदेश मिलते ही टीम हरकत में आ गई. थाने के तमाम मुखबिर सक्रिय हो गए थे. जल्द ही पुलिस ने तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी. इस जांच से यह पता चला कि घटनास्थल से पहले 3 लोग एक बाइक नंबर यूपी-21बीजेड 5949 से जाते दिखे. पुलिस टीम ने इस नंबर के आधार पर बाइक के मालिक से बात की तो उस ने बताया कि उक्त बाइक मैं ने हाल ही में पाकबड़ा कस्बे के मोहल्ला सैनियों वाला मंदिर के पास रहने वाले मनोज को बेची थी और मनोज राजेश दिवाकर के मकान में किराए पर रहता है. पुलिस ने मनोज के मकान पर दबिश दी तो पता चला कि वह ताला लगा कर वहां से फरार था.

एसपी (सिटी) कुमार रणविजय सिंह व सीओ राजेश कुमार ने वहां पर मनोज के बारे में जानकारी की तो पता चला कि कुछ माह पहले उस की पास के गांव गुरैठा में नाई की दुकान की थी. मनोज आपराधिक प्रवृत्ति का था. गुरैठा गांव के लोगों से अकसर उस का झगड़ा होता रहता था, जिस कारण उस ने अपनी नाई की दुकान बंद कर के मकानों की रंगाईपुताई के ठेके लेना शुरू कर दिया है. पुलिस को यह बात भी पता चली कि मृतक योगेश मनोज द्वारा लिए गए ठेकों में मजदूरी करता था. पुलिस को क्लू मिल चुका था, इसलिए पुलिस ने मनोज के तमाम ठिकानों पर दबिश दी तो वह पुलिस के पहुंचने से पहले गायब हो जाता था.

21 सितंबर रविवार की शाम को पुलिस हुड्डा तिराहे पर नाका लगा कर वाहनों की चैकिंग कर रही थी. तभी 2 व्यक्ति एक बाइक से आते दिखे. पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया तो उन्होंने बाइक की गति बढ़ा दी. जिस कारण बाइक फिसल कर गिर गई, लेकिन बाइक गिरने से पहले ही दोनों व्यक्ति कूद गए थे. जब पुलिस उन के पास पहुंचने वाली थी तो उन में से एक ने पुलिस पर फायर झोंक दिया. पुलिस ने अपने बचाव में फायर किए. गोली फायर करने वाले की टांग में लगी थी. वह कराह उठा.

फायर की आवाज सुनते ही चैकिंग कर रहे अन्य पुलिसकर्मी भी वहां पहुंच गए थे. पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया. पुलिस ने जब उन से उन के नाम व पते पूछे तो एक ने अपना नाम मनोज निवासी मोहल्ला सैनियों वाला मंदिर थाना पाकबड़ा और दूसरे ने अपना नाम मंजीत हाल निवासी एकता कालोनी थाना मझोला (मुरादाबाद) बताया.

पाकबड़ा पुलिस को जिस मनोज की तलाश थी, वही योगेश हत्याकांड का आरोपी था. अभियुक्त मंजीत को पुलिस थाना पाकबड़ा ले आई थी. मनोज पुलिस की गोली से घायल था, इसलिए उसे जिला अस्पताल में भरती करवा दिया. एसएसपी सतपाल अंतिल ने मनोज व मंजीत से योगेश की हत्या के विषय में पूछताछ की तो मनोज ने अपनी प्रेमिका स्वाति को पाने के लिए एक ऐसी साजिश रची, जिसे सुन कर पुलिस अफसरों के भी होश उड़ गए.

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसएसपी ने 22 सितंबर, 2025 को आरोपी मंजीत और स्वाति को पुलिस लाइंस के सभागार में प्रैस कौन्फ्रेंस कर घटना का खुलासा किया. इस खुलासे में योगेश कुमार की हत्या के पीछे प्रेम संबंधों से लबालब एक दिलचस्प कहानी सामने आई. उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले हाइवे पर करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है कस्बा पाकबड़ा. इसी थानाक्षेत्र के गांव गुरैठा में रहता था मनोज. वैसे मनोज मूलरूप से जिला बदायूं के गांव खेड़ादास का रहने वाला है. वह शुरू से ही आपराधिक प्रवृत्ति का है. थाना फैजगंज बेहटा, बदायूं में उस पर लूट, हत्या के करीब आधा दरजन मामले दर्ज हैं.

आए दिन पुलिस उसे परेशान करती थी, इसलिए वह अपने गांव से कुछ साल पहले पाकबड़ा कस्बे में राजेश दिवाकर के मकान में किराए पर रहने लगा. मनोज बाल काटने का काम जानता था. थाना पाकबड़ा के अंतर्गत गांव गुरैठा में मनोज ने बाल काटने का सैलून खोल लिया था. बराबर के ही गांव के निवासी शोभाराम की परचून की दुकान थी. शोभाराम के 2 बेटे गौरव व कपिल और एक बेटी स्वाति थी. अकसर शोभाराम की बेटी स्वाति भी परचून की दुकान पर अपने पापा का हाथ बंटाती थी. शातिर मनोज जब स्वाति को दुकान पर बैठे देखता तो वह अकसर सामान खरीदने के बहाने उस की दुकान पर आ धमकता था.

मनोज ने अपनी लच्छेदार बातों से स्वाति से नजदीकियां बढ़ा ली थीं. ज्यादातर समय अब स्वाति परचून की दुकान पर ही बिताती थी. मनोज व स्वाति में नैनमटक्का का खेल शुरू हो गया था. यानी दोनों एकदूसरे को दिल दे चुके थे. फिर एक दिन मौका पा कर उन्होंने अपनी हसरतें भी पूरी कर लीं. स्वाति तो मनोज के प्यार में ऐसी दीवानी हो गई थी कि वह अकसर रात के खाने में अपने फेमिली वालों को नींद की गोलियां डाल कर खिला देती थी. जब सब गहरी नींद में सो जाते तो वह अपने प्रेमी को घर बुला कर पूरी रात मौजमस्ती करती. सुबह होने के पहले ही मनोज स्वाति के घर से निकल कर अपनी दुकान में चला जाता था.

कहते हैं कि इश्क और मुश्क कभी छिपाए नहीं छिपते. यह बात इन के साथ भी चरितार्थ हुई. किसी तरह स्वाति के फेमिली वालों को जब सच्चाई पता लगी तो स्वाति के भाई गौरव ने स्वाति की पिटाई कर दी. इतना ही नहीं, उस के बाहर आनेजाने पर भी रोक लगा दी. उधर घटना से एक महीने पहले स्वाति के भाई गौरव ने मनोज की भी पिटाई कर दी थी. गौरव व गांव वालों ने मनोज को यह हिदायत दी थी कि तू बाहर का रहने वाला है, हमारी बहनबेटियों के साथ गंदी हरकत करता है. उन्होंने उस से साफ शब्दों में कहा कि दुकान बंद कर के यहां से चला जाए, वरना खैर नहीं.

इस धमकी के बाद मनोज ने  दुकान बंद कर दी थी. वह कहीं और किसी दूसरे गांव में सैलून खोलने की सोच रहा था. मनोज बेरोजगार हो गया था. वह रंगाईपुताई का काम भी जानता था. पाकबड़ा दिल्लीमुरादाबाद हाइवे के किनारे पर स्थित है. यहां बड़ीबड़ी एक्सपोर्ट फर्म हैं, बड़ीबड़ी शिक्षण संस्थाए भी हैं. मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की कई कालोनियां भी हैं. बहुत बड़ा इलाका आबादी में तब्दील हो चुका है. इसलिए यहां काम की कोई कमी नहीं है.

हाईस्कूल तक पढ़ा मनोज अब मकानों की पुताईरंगाई के ठेके लेने लगा और खुद भी रंगाईपुताई का कारीगर था. गांव गुरैठा निवासी योगेश भी इस के साथ काम करता था. अकसर स्वाति से मिलने के बहाने वह योगेश के घर आताजाता था. फेमिली वालों ने स्वाति पर घर से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी थी. स्वाति व मनोज को एकदूसरे से संपर्क करने का एकमात्र साधन मोबाइल ही था. अकसर स्वाति व मनोज फोन पर घंटों बातें करते थे. यह बात स्वाति के फेमिली वालों को पता नहीं थी. वे तो यही समझ रहे थे कि अब स्वाति मनोज को भूल चुकी है. उन्होंने उस पर ज्यादा ध्यान देना बंद कर दिया था.

स्वाति पर गांव के बाहर आनेजाने पर पाबंदी जरूर थी, लेकिन वह अपने प्रेमी के लगातार संपर्क में थी. मनोज व स्वाति प्यार के लिए तरस रहे थे. आपस में मिलन की सारी योजना जब विफल हो गई तो स्वाति ने एक खतरनाक योजना बना डाली. वह अपने प्रेमी मनोज से बोली, ”क्यों न तुम मेरे पापा और भाइयों को हमेशा के लिए खत्म कर दो.’’

मनोज उस की इस सलाह को टाल गया था. उस ने स्वाति को भरोसा दिया कि वह एक ऐसा प्लान बनाएगा कि इतना खूनखराबा नहीं करना पड़ेगा. शातिर मनोज ने क्राइम सीरियल देख कर एक अलग योजना बनाई. फिर उस ने स्वाति से कहा, ”हम ने एक योजना बनाई कि हम गांव के किसी भी व्यक्ति की हत्या कर देंगे. उस हत्या का इलजाम तुम्हारे पापा शोभाराम, भाई गौरव व कपिल पर लग जाएगा. ऐसा में खुद करूंगा. इन तीनों को जेल जाने से कोई नहीं बचा सकता. इन के जेल जाने के बाद हमारे प्यार में कोई रुकावट नहीं रहेगी.’’

स्वाति व मनोज ने इस प्लान को अंजाम देने की ठान ली थी. मनोज ने अपनी इस योजना में अपने ममेरे भाई मंजीत को भी शामिल कर लिया था. वह थाना मझोला के मोहल्ला एकता कालोनी में रहता था. गुरैठा गांव निवासी योगेश सीधासादा व एक गरीब परिवार का था. मनोज व योगेश अकसर रंगाईपुताई का काम साथसाथ करते थे. उन का उठनाबैठना और खानपान भी साथसाथ चलता था. मनोज ने अपने ममेरे भाई मंजीत से कहा कि योगेश जब मुरादाबाद से काम के बाद शाम को अपने घर गुरैठा गांव लौटता है तो वह अकसर ड्रिंक किए होता है. उस के आनेजाने का समय भी मनोज को पता था. योगेश अकसर गांगन नदी वाले रास्ते से अपने गांव गुरैठा लौटता था.

योजना के मुताबिक 17 सितंबर, 2025 की शाम को मनोज व ममेरा भाई मंजीत दोनों ने योगेश को काम पर जाते देख लिया. वे शाम को गांगन नदी किनारे सड़क पर योगेश के आने का कई घंटे से इंतजार कर रहे थे. शाम करीब 7 बजे योगेश साइकिल से आता दिखाई दिया. मनोज व मंजीत ने योगेश को रोक लिया. मनोज बोला एक पार्टी से पेमेंट ले कर आ रहे हैं. मनोज ने योगेश से कहा कि इसी खुशी में आज की पार्टी मेरी तरफ से. तभी योगेश ने कहा, ”यार, मैं तो आधा क्वार्टर लिए हुए हूं.’’

”आधे से क्या होता है,’’ मनोज बोला.

”थोड़ीथोड़ी और ले लेते हैं. तीनों पी लेंगे.’’

योगेश उन की बातों में आ गया. तीनों वहां से दिल्ली हाइवे पर आ गए. मंगूपुरा के पेट्रोल पंप पर मनोज ने योगेश की साइकिल खड़ी करवा दी. पेट्रोल पंप के सामने ही देशी शराब का ठेका था. मनोज ने मंजीत को पैसे दे कर मंजीत से शराब मंगा ली. उस के बाद योगेश ने अपनी साइकिल उठाई, जबकि मनोज व मंजीत बाइक पर थे. तीनों धीरेधीरे एमडीए कालोनी होते हुए महा कालेश्वर मंदिर के पास से हर्बल पार्क जाने वाले रास्ते पर खड़े हो गए. मनोज ने योगेश को और पैसे दे कर नमकीन का पाउच लाने भेज दिया.

मंजीत ने अपने साथ लाए 3 डिस्पोजल गिलासों में पैग बना दिए. एक गिलास में मनोज ने अपने साथ लाई नींद की गोली के पत्ते से नींद की 7 गोलियां योगेश के क्वार्टर में डाल दीं. फिर उसे अंगुली से घोल दीं. इतनी देर में योगेश नमकीन ले कर लौटा तो मनोज बोला, ”सड़क पर आवाजाही हो रही है. हम तो पी चुके, तू भी पी ले.’’

इतना सुनते ही योगेश ने गिलास को एक सांस में खाली कर दिया. इस के बाद मनोज ने उसे एक और हैवी पैग पिला दिया. इस के बाद योगेश को नशा कुछ ज्यादा ही हो गया था. मनोज ने योगेश को अपनी बाइक पर बैठाया. मंजीत योगेश की साइकिल से चलने लगा. एक किलोमीटर जाने के बाद अंधेरे में योगेश को नीचे लिटा दिया. दोनों ने योगेश की साइकिल नीचे ढलान पर ले जा कर गांगन नदी में फेंक दी. फिर दोनों वहां पर वापस आ गए, जहां पर योगेश बेहोशी की हालत में था.

बाइक मनोज चला रहा था. बीच में योगेश को बैठा कर पीछे योगेश को पकड़ कर मंजीत बैठ गया. तीनों जीरो पौइंट पुल के नीचे से बागड़ पर होते हुए मोढ़ा तैया गांव से एक किलोमीटर दूर कब्रिस्तान के बराबर में पहुंचे. योगेश को नशे की हालत में नीचे उतार लिया. मनोज योगेश के ऊपर बैठ गया, उस ने योगेश के हाथ दबा लिए. वह ममेरे भाई मंजीत से बोला कि पास पड़ी ईंट से इस का सिर कुचल दो. मंजीत ने जब पहला बार योगेश के सिर पर किया तो योगेश चीखा कि मुझे क्यों मार रहे हो? वह नशे में था.

जब मनोज ने देखा कि यह तो बोल रहा है तो मनोज ने योगेश का गला दबा दिया, जिस कारण उस की मौत हो गई. उस के बाद मनोज ने स्वाति को फोन किया, ”अपने भाई गौरव का मोबाइल नंबर दो.’’

तो स्वाति ने गौरव का मोबाइल नंबर मनोज को दे दिया. उस के बाद मनोज ने योगेश के मोबाइल से गौरव को फोन किया. गौरव ने वह कौल उठा ली. दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई तो गौरव ने कौलबैक की तो उधर से कोई उत्तर नहीं मिला. उस के बाद मनोज ने योगेश के फोन से पुलिस कंट्रोल रूम को कौल कर कहा, ”मेरा नाम योगेश है. गांव के निवासी शोभाराम, उस के 2 बेटे गौरव व कपिल मेरे साथ मारपीट कर रहे हैं. मैं घायल होने के बाद भी उन के चंगुल से छूट कर आप को बता रहा हूं. वे मुझे अंधेरे में खोज रहे हैं. पता है मोढ़ा तैया गांव के पास कब्रिस्तान.’’

सूचना मिलते ही पीआरवी वैन वहां पर गई जरूर, लेकिन वहां पर पुलिस को कोई नहीं मिला तो पुलिस वापस लौट आई थी. घटना को अंजाम देने के बाद मनोज व मंजीत वापस पाकबड़ा मनोज के घर आ गए थे. मनोज घटना को अंजाम देने के बाद घबरा रहा था. बोला, ”यार, यहां पर रहना खतरे से खाली नहीं है, चल तेरे कमरे पर चलते हैं.’’

फिर मनोज मंजीत के कमरे एकता विहार वाले कमरे पर आ कर सो गए थे. सुबह उठ कर मंजीत अपने काम पर चला गया था. वह पाकबड़ा में नसीम ज्वैलर्स के यहां काम करता था. मनोज अपने मूल घर गांव खेड़ादास थाना फैजगंज बेहटा जिला बदायूं चला गया था. पुलिस को पीआरवी वैन पर योगेश के फोन से गलत सूचना दी थी. थाना पुलिस ने उस आवाज की रिकौर्डिंग लखनऊ से मंगाई थी. पीआरवी वैन का संबंध लखनऊ से जुड़ा होता है. उक्त काल की रिकौर्डिंग मृतक योगेश के घर वालों को सुनाई तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि यह आवाज योगेश की नहीं है.

पुलिस ने हत्या की साजिश में शामिल मनोज की प्रेमिका स्वाति को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. इस के बाद पुलिस ने आरोपी मनोज, मंजीत व स्वाति को 22 सितंबर, 2025 सोमवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Love Story in Hindi

 

UP Crime : पति और प्रेमी नहीं समझे बीनू का दर्द

UP Crime : बीनू शर्मा को अपने घर और बच्चों की चिंता थी, तभी तो वह पति संजय शर्मा से शराब पीने को मना करती थी, लेकिन समझाने पर उसे मिला शारीरिक और मानसिक उत्पीडऩ. फिर बड़ी उम्मीद के साथ उस ने देहरी लांघ कर अनुज दुबे की तरफ कदम बढ़ाए. प्यार करते हुए उस को अपना सब कुछ समर्पित कर दिया. इस के बावजूद प्रेमी अनुज ने उस के साथ ऐसा छल किया कि…

अनुज दुबे बहुत बेचैन था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह बेवफा प्रेमिका बीनू शर्मा का क्या करे. क्योंकि वह उस से दूरी बना कर अशोक नाम के युवक के संपर्क में आ गई थी. इस बात को ले कर अनुज परेशान था. 11 मई, 2025 की रात 9 बजे अनुज ने बीनू को कौल लगाई और उसे बताया कि वह उस से मिलने आ रहा है. उसे कुछ जरूरी बात करनी है. बीनू इस का कुछ जवाब दे पाती, उस से पहले ही अनुज ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

लगभग एक घंटा बाद रात 10 बजे अनुज बीनू के घर आ गया. उस समय बीनू के बच्चे कमरे के बाहर बरामदे में तख्त पर सो रहे थे और पति संजय शर्मा काम पर गया था. संजय शर्मा एक होटल में काम करता था और रात 12 बजे के बाद ही घर लौटता था. अनुज ने कमरे में घुसते ही बीनू से कहा कि छत पर चलो, वहां एकांत में कुछ जरूरी बातें करनी है. इस पर बीनू ने पूछा कि छत पर ही क्यों? कमरे में बैठ कर भी तो बात कर सकते हैं. तब अनुज ने कहा कि यहां बच्चों के जाग जाने का खतरा है. वह उन की बातों में खलल डाल सकते हैं.

बीनू ने बुझे मन से अनुज की बात मान ली. फिर दोनों सीढिय़ों से छत पर पहुंचे. वहां दोनों बैठ कर बातें करने लगे. बातों ही बातों में अनुज ने बीनू के नए आशिक अशोक की चर्चा छेड़ दी. अशोक के नाम से बीनू भड़क गई और दोनो में गरमागरम बहस होने लगी. इसी बहस में अनुज को गुस्सा आ गया और उस ने बीनू को दबोच लिया. फिर चाकू से उस के गले व सिर पर कई प्रहार किए, जिस से उस का गला कट गया और खून बहने लगा. सिर से भी खून की धार बह निकली. कुछ देर तड़पने के बाद बीनू ने दम तोड़ दिया.

प्रेमिका बीनू की हत्या करने के बाद अनुज ने उस के शव को छत से नीचे खंडहर में फेंक दिया. इस के बाद अनुज ने बीनू का मोबाइल फोन अपने कब्जे में किया और चाकू को साथ ले कर फरार हो गया. इधर रात 12 बजे के बाद संजय शर्मा होटल से घर आया. उस समय वह नशे में था. उस ने एक नजर तख्त पर सो रहे बच्चों पर तो डाली, लेकिन पत्नी बीनू की तरफ उस का ध्यान ही नहीं गया. फिर वह चारपाई पर पसर गया.

सुबह 7 बजे बीनू की 10 वर्षीया बेटी जागी तो उस ने देखा कि पापा तो चारपाई पर सो रहे हैं, लेकिन मम्मी कमरे में नहीं है. उस ने तब अपने छोटे भाई शुभ को जगाया और मम्मी की तलाश में जुट गई. दोनों ने घर का कोनाकोना छान मारा, लेकिन मम्मी कहीं नहीं दिखी. बेटी ने सोचा कि मम्मी गरमी के कारण कहीं छत पर तो सोने नहीं चली गई. अत: भाई को साथ ले कर वह छत पर पहुंची. छत पर खून फैला देख कर दोनों घबरा गए. बेटी ने छत के नीचे झांक कर देखा तो मकान के पिछवाड़े खंडहर में उसे एक लाश दिखी.

बेटी को समझते देर नहीं लगी कि लाश उस की मम्मी की है. अत: दोनों भाईबहन रोने लगे. रोते हुए दोनों ज्योति शुक्ला के कमरे में पहुंचे. ज्योति भी इसी मकान में किराएदार थी और भूतल पर अपने पति सौरभ शुक्ला के साथ रहती थी. बीनू के बच्चे ज्योति को मौसी कह कर बुलाते थे. सुबहसुबह किराएदार के बच्चों को रोते देख कर मकान मालिक ज्योति ने पूछा, ”क्या बात है बच्चो, तुम दोनों रो क्यों रहे हो? क्या पापा ने मम्मी को मारापीटा है?’’

बेटी बोली, ”नहीं मौसी, पापा तो सो रहे हैं, लेकिन मम्मी घर में नहीं है. छत पर खून फैला है और मकान के पीछे खंडहर में एक लाश पड़ी है. लगता है किसी ने छत पर मम्मी की हत्या कर दी और लाश को छत से नीचे फेंक दिया है.’’

बच्ची की बात सुन कर ज्योति शुक्ला घबरा गई. उस ने दोनों बच्चों को पुचकारा, फिर बच्ची के पापा संजय शर्मा को झकझोर कर जगाया. इस के बाद ज्योति शुक्ला अपने पति सौरभ व बीनू के पति संजय के साथ मकान के पिछवाड़े पहुंची, जहां लाश पड़ी थी. लाश देखते ही सभी के मुंह से चीख निकल पड़ी. क्योंकि वह लाश संजय शर्मा की पत्नी बीनू शर्मा की ही थी. ज्योति शुक्ला ने सूचना थाना चौबेपुर पुलिस को दी.

सूचना के मुताबिक हत्या की यह घटना कानपुर जिले के चौबेपुर कस्बा के ब्रह्मïनगर मोहल्ले में घटित हुई थी. अत: थाना चौबेपुर के एसएचओ राजेंद्र कांत शुक्ला सूचना मिलते ही सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन की सूचना पर डीसीपी (वेस्ट) दिनेशचंद्र त्रिपाठी तथा एसीपी अमरनाथ यादव भी मौकाएवारदात पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया.

पुलिस अधिकारियों ने जांच शुरू की तो पता चला कि मृतका का नाम बीनू शर्मा है, जो इस मकान में अपने पति संजय शर्मा व 3 बच्चों के साथ रहती थी. बीनू की हत्या किसी नुकीली चीज से गोद कर बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस के गले व सिर पर गहरे घाव थे. हत्या छत पर की गई थी, फिर शव को छत से नीचे फेंका गया था. मृतका की उम्र 32 वर्ष के आसपास थी. मृतका का मोबाइल फोन भी गायब था. फोरैंसिक टीम ने भी छत से ले कर खंडहर तक बारीकी से जांच की और सबूत जुटाए.

घटनास्थल पर मृतका की मां लक्ष्मी देवी भी मौजूद थी. वह बेटी के शव के पास सुबक रही थी. डीसीपी दिनेशचंद्र त्रिपाठी ने जब उन से पूछताछ की तो वह फफक पड़ी, ”साहब, हमारी बेटी की हत्या हमारे दामाद संजय शर्मा ने की है. वह आदमी नहीं दानव है. वह शराब का लती है. मेरी बेटी को मारतापीटता था. उस की प्रताडऩा से वह मायके आ जाती थी. लेकिन माफी मांग कर बेटी को साथ ले जाता था. बीती रात वह नशे में आया होगा. बेटी के टोकने पर मारापीटा होगा और हत्या कर दी होगी. हुजूर, उसे गिरफ्तार कर लो. उसे फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए.’’

चूंकि लक्ष्मी के आरोप गंभीर थे, अत: डीसीपी दिनेशचंद्र त्रिपाठी के आदेश पर मृतका बीनू के पति संजय शर्मा को इंसपेक्टर राजेंद्र कांत शुक्ला ने हिरासत में ले लिया. फोरैंसिक टीम ने संजय शर्मा के कपड़ों व हाथों का बेंजाडीन टेस्ट किया तो खून के धब्बे पाए गए. सबूत मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

एसीपी अमरनाथ यादव ने मृतका की बेटी तथा किराएदार ज्योति शुक्ला से भी पूछताछ की. बेटी ने बताया कि बीती रात 8 बजे मम्मी ने खाना बनाया था. फिर हम सब ने खाना खाया. उस के बाद हम तीनों भाईबहन तख्त पर सो गए. सुबह आंखें खुलीं तो मम्मी घर में नहीं थी. हम उन्हें खोजते छत पर गए. वहां खून फैला था. छत से नीचे झांका तो खंडहर में मम्मी की लाश पड़ी थी. हम ने ज्योति मौसी को बताया. मौसी ने पापा को जगाया और पुलिस को सूचना दी. मम्मी की हत्या किस ने की, उसे इस बारे में कुछ भी नहीं पता.

किराएदार ज्योति शुक्ला ने बताया कि संजय अपनी पत्नी बीनू को प्रताडि़त करता था. कभीकभी उस की चीखें कानों में पड़ती थीं तो वह उसे बचाने उस के कमरे में जाती थी और संजय को डांटती थी. लेकिन संजय बीनू की हत्या कर देगा, ऐसा उस ने कभी नहीं सोचा था. आज सुबह बच्चे रोते हुए आए थे और मम्मी की हत्या की बात बताई थी. उस के बाद वह उन के साथ गई थी. फिर पुलिस को सूचित किया था. घटनास्थल का निरीक्षण और पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका के शव को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल माती भिजवा दिया. संजय शर्मा को थाना चौबेपुर लाया गया.

थाने में जब पुलिस अधिकारियों ने संजय शर्मा से बीनू की हत्या के बारे में पूछताछ शुरू की तो संजय ने यह बात स्वीकार की कि वह बीनू को प्रताडि़त करता था, लेकिन इस बात से साफ इंकार कर दिया कि उस ने बीनू की हत्या की है. पुलिस ने कई राउंड में संजय से पूछताछ की और हर हथकंडा अपनाया, लेकिन संजय ने बीनू की हत्या का जुर्म स्वीकार नहीं किया. हर राउंड की पूछताछ में संजय एक ही बात कहता कि उस ने हत्या नहीं की.

संजय शर्मा के खिलाफ हत्या के पर्याप्त सबूत थे. बेंजाडीन टेस्ट में भी हाथों व कपड़ों पर खून के सबूत मिले थे. लेकिन वह हत्या से इंकार कर रहा था. हालांकि अभी तक पुलिस आलाकत्ल भी बरामद नहीं कर पाई थी. इसलिए पुलिस के मन में भी संदेह पैदा होने लगा था कि कहीं हत्यारा कोई और तो नहीं. इस संदेह को दूर करने के लिए डीसीपी दिनेशचंद्र त्रिपाठी ने एक बार फिर संजय से पूछताछ की, ”संजय, यदि तुम ने बीनू की हत्या नहीं की तो तुम्हारे हाथों व कपड़ों पर खून के धब्बे कैसे पड़े?’’

”सर, सुबह मैं बीनू के शव के पास गया था. यह जानने के लिए कि कहीं उस की सांसें चल तो नहीं रही हैं. इसी आस में हम ने उस के शव को हिलायाडुलाया था, तभी हाथ व कपड़ों पर खून लग गया होगा. यही बेंजाडीन टेस्ट में आ गया. मैं निर्दोष हूं.’’

”तुम निर्दोष हो तो तुम्हारी पत्नी बीनू का हत्यारा कौन है?’’ डीसीपी ने संजय से पूछा.

”सर, मैं यकीन के साथ तो नहीं कह सकता, लेकिन मुझे शक है कि बीनू की हत्या में अनुज दुबे का हाथ हो सकता है.’’

”यह अनुज दुबे कौन है?’’ डीसीपी दिनेशचंद्र त्रिपाठी ने पूछा.

”सर, अनुज दुबे रौतेपुर गांव का रहने वाला है. किराएदार ज्योति शुक्ला का पति सौरभ शुक्ला भी रौतेपुर गांव का निवासी है. सौरभ और अनुज गहरे दोस्त हैं. अनुज का सौरभ के घर आनाजाना था. सौरभ के घर आतेजाते अनुज की बुरी नजर मेरी पत्नी पर पड़ी. उस ने उसे प्रेमजाल में फंसा लिया. दोनों के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. हम ने बीनू को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी.

”इधर बीते कुछ दिनों से दोनों के बीच किसी बात को ले कर मनमुटाव हो गया था, जिस से अनुज का आनाजाना कम हो गया था. सर, मुझे शक है कि बीती रात अनुज घर आया होगा. गरमी के कारण दोनों छत पर बतियाने गए होंगे. फिर वहीं अनुज ने बीनू की हत्या कर दी होगी.’’

अनुज दुबे संदेह के घेरे में आया तो पुलिस ने उस के खिलाफ साक्ष्य जुटाने के लिए बीनू और अनुज दुबे के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस से पता चला कि बीनू के मोबाइल फोन पर अनुज की ही आखिरी कौल रात 9 बजे आई थी. रात 11 बजे तक बीनू और अनुज के फोन की लोकेशन बीनू के घर की थी. उस के बाद 11:52 पर बीनू का फोन बंद हुआ था. उस समय उस के फोन की लोकेशन रौतेपुर गांव के पास थी. इस से साफ हो गया कि अनुज फोन कर बीनू के घर रात 10 बजे के आसपास आया, फिर बीनू की हत्या कर उस का फोन साथ ले कर गांव गया और फिर दोनों फोन बंद कर लिए.

पुलिस अधिकारियों के आदेश पर एसएचओ राजेंद्र कांत शुक्ला ने 13 मई की सुबह अपनी टीम के साथ रौतेपुर गांव में अनुज के घर छापा मारा और अनुज को दबोच लिया. उसे थाना चौबेपुर लाया गया. पुलिस अधिकारियों ने अनुज से बीनू की हत्या के बारे में पूछा तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब सख्ती की गई तो वह टूट गया और उस ने बीनू की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. यही नहीं, अनुज ने हत्या में प्रयुक्त चाकू व खून से सने कपड़े भी बरामद करा दिए, जो उस ने अपने गांव के बाहर झाडिय़ों में छिपा दिए थे.

मृतका बीनू का मोबाइल फोन जिसे अनुज ने तोड़ कर एक गड्ढे में फेंक दिया था. पुलिस ने उस फोन को भी बरामद कर लिया. साक्ष्य के तौर पर पुलिस ने बरामद सामान को सुरक्षित कर लिया. अनुज ने पुलिस को बताया कि वह बीनू से बहुत प्यार करता था. उस के प्यार में इतना डूब गया था कि उसे अपनी पत्नी मान बैठा था. उस के प्यार में उस ने शादी भी नहीं की. उस के सारे खर्च भी वही उठाता था, लेकिन प्यार में उसे धोखा मिला. बीनू उस का प्यार ठुकरा कर किसी और से प्यार करने लगी. प्रेमिका की बेवफाई उसे बरदाश्त नहीं हुई और उसे मार डाला. उसे बीनू की हत्या का कोई अफसोस नहीं है.

चूंकि अनुज ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल चाकू भी बरामद करा दिया था, अत: पुलिस ने मृतका के पति संजय शर्मा को निर्दोष मानते हुए थाने से जाने दिया. साथ ही मृतका की मां लक्ष्मी देवी की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत अनुज दुबे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में पति व प्रेमी से प्रताडि़त महिला की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर एक बड़ा व्यापारिक कस्बा है- चौबेपुर. यह कानपुर (देहात) जिले के अंतर्गत आता है. इसी कस्बे से 2 किलोमीटर दूर बसा है एक गांव गबड़हा. रामकिशन शर्मा का परिवार इसी गांव में रहता था. परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे संजय व अजय थे. रामकिशन की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. मेहनतमजदूरी कर किसी तरह वह परिवार का पालनपोषण करता था. समय बीतने के साथ दोनों बेटे बड़े हुए तो वे भी परिवार की सहायता करने लगे.

संजय जब शादी के लायक हो गया तो रामकिशन ने उस का ब्याह बीनू के साथ कर दिया. आकर्षक कदकाठी की छरहरी तथा गौरवर्ण वाली बीनू पचौर गांव के रमेश शर्मा की बेटी थी. 3 भाईबहनों में वह सब से छोटी थी. संजय बीनू को पा कर बेहद खुश था, क्योंकि उस ने जैसी पत्नी की कल्पना की थी, उसे बिलकुल वैसी ही पत्नी मिली थी. बीनू की मोहक मुसकान, कजरारी आंखें एवं छरहरी काया का वह दीवाना हो गया था. समय हंसीखुशी से बीतता रहा. इस दौरान बीनू 3 बच्चों की मां बन गई. उस का घरआंगन किलकारियों से गूंजने लगा.

बच्चों के जन्म के बाद संजय की जिम्मेदारियां बढ़ गईं तो उस ने शहर कस्बा जा कर पैसा कमाने का फैसला किया. इस बारे में उस ने परिवार वालों से बात की तो वे भी राजी हो गए. अगले ही दिन उस ने अपना सामान समेटा और चौबेपुर कस्बा आ गया. यहां उस ने काम की तलाश शुरू की तो उसे कस्बे के जीटी रोड स्थित राही होटल में वेटर का काम मिल गया. वह अन्य कर्मचारियों के साथ होटल में ही रहने लगा. वेटरों के बीच अकसर शराब पीनेपिलाने का दौर भी चलता था. संजय भी उन के साथ पीता था. धीरेधीरे वह शराब का लती बन गया.

संजय जब कमाने लगा तो उस ने चौबेपुर कस्बे के ब्रह्मïनगर मोहल्ले में एक कमरा किराए पर ले लिया. उस के बाद पत्नी व बच्चों को भी ले आया. किराए के इस मकान में बीनू के 2 साल हंसीखुशी से बीते. उस के बाद दोनों के बीच तकरार होने लगी. तकरार का पहला कारण था- संजय का शराब पी कर घर आना. बीनू शराब पी कर घर आने को मना करती तो वह गालीगलौज करता और बीनू की पिटाई करता. तकरार का दूसरा कारण था- आर्थिक अभाव. बीनू बच्चों व घर खर्च के लिए पैसे मांगती तो वह मना कर देता. जोर देने पर बीनू की धुनाई कर देता.

पति की प्रताडऩा से बीनू परेशान रहने लगी थी. उसे जब अधिक पीड़ा महसूस होती तो वह मायके चली जाती, लेकिन संजय वहां भी पहुंच जाता और हाथपैर जोड़ तथा माफी मांग कर बीनू को ले आता. एकदो माह उस का रवैया ठीक रहता, उस के बाद वह बीनू को फिर प्रताडि़त करने लगता. बीनू यह सोच कर प्रताडऩा सहती कि पति आज नहीं तो कल वह सुधर जाएगा. फिर उस का भी जीवन सुधर जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. दिनप्रतिदिन संजय की प्रताडऩा बढ़ती ही गई.

बीनू जिस मकान में किराएदार थी, उसी में ज्योति शुक्ला भी किराएदार थी. ज्योति अपने पति सौरभ शुक्ला के साथ भूतल पर रहती थी, जबकि बीनू पहली मंजिल पर रहती थी. बीनू बच्चों का मुंह देख कर दिन बिता रही थी और पति की प्रताडऩा सह रही थी. समय बिताने के लिए कभीकभार बीनू ज्योति के कमरे में चली जाती थी. वहीं एक रोज उस की मुलाकात हुई अनुज दुबे से. अनुज दुबे रौतेपुर गांव का रहने वाला था. ज्योति शुक्ला का पति सौरभ शुक्ला भी रौतेपुर गांव का था. अनुज और सौरभ बचपन के दोस्त थे. दोस्ती के नाते अनुज सौरभ के घर जबतब आता रहता था. अनुज के पिता की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. अनुज भी नौकरी करता था और खूब कमाता था.

ज्योति शुक्ला के घर अनुज व बीनू का आमनासामना हुआ तो दोनों एकदूसरे को देख कर पलक झपकाना भूल गए. जहां बीनू की आकर्षक देहयष्टि देख अनुज की आंखों में लालच के डोरे उतर आए, वहीं अनुज का खूबसूरत चेहरामोहरा एवं गठीले बदन से बीनू मंत्रमुग्ध सी हो गई थी. ज्योति ने दोनों का एकदूसरे से परिचय कराया तो अनुज ने जल्दी ही अपनी वाकपटुता से बीनू का दिल जीत लिया. बातचीत के दौरान अनुज की नजरें बीनू के जिस्म को तौलती रहीं. वह बारबार कनखियों से उस की तरफ देखता. बीनू की नजरें जब उस की नजरों से टकरातीं तो वह कामुक अंदाज से मुसकरा देता. उस की मुसकराहट से बीनू के दिलोदिमाग में हलचल मचनी शुरू हो गई थी.

दरअसल, बीनू पति की प्रताडऩा से ऊब चुकी थी. अत: जब अनुज की हमदर्दी उसे मिली तो वह उस की ओर आकर्षित हो गई. चूंकि चाहत दोनों तरफ से थी, इसलिए जल्द ही उन के बीच प्यार पनपने लगा. प्यार पनपा तो शारीरिक मिलन शुरू हो गया. बातचीत के लिए अनुज ने उसे एक फोन भी खरीद कर दे दिया. बीनू से अवैध रिश्ता बना तो अनुज उस की आर्थिक मदद करने लगा. उस के बच्चों का भी खयाल रखने लगा. बीनू उस की बाइक पर बैठ कर सैरसपाटे पर भी जाने लगी. बीनू का पति संजय शर्मा होटल में काम करता था. वह दोपहर 11 बजे घर से निकलता और फिर रात 12 बजे के बाद ही घर लौटता था.

पति संजय के होटल जाने के बाद अनुज बीनू के पास आ जाता. दोनों खूब हंसतेबोलते, बतियाते और फिर रंगरलियां मनाते. बीनू अब खुश रहने लगी थी. उस की पेट की और शारीरिक भूख पूरी होने लगी थी. अनुज इतना दीवाना बन गया था कि वह बीनू को अपनी जागीर समझने लगा था. लेकिन एक रोज उन के नाजायज रिश्तों का भांडा फूट गया. उस रोज संजय होटल गया तो था, लेकिन होटल किसी कारण बंद था, इसलिए वापस घर आ गया था. घर आ कर उस ने जो अनर्थ देखा, उस से उस का पारा चढ़ गया. कमरे में बीनू और अनुज हमबिस्तर थे. संजय ने उन्हें धिक्कारा तो कपड़े दुरुस्त कर अनुज तो भाग गया, लेकिन बीनू कहां जाती. उस ने बीनू की जम कर पिटाई की.

अभी तक घर में कलह मारपीट, शराब व आर्थिक परेशानी को ले कर होती थी. अब अनुज को ले कर बीनू का उत्पीडऩ शुरू हो गया था. एक रात पिटाई के दौरान बीनू का धैर्य टूट गया. वह पति से बोली, ”मारपीट कर तुम मुझे चोट पहुंचा सकते हो, लेकिन उस के प्यार को कम नहीं कर सकते. तुम ने कभी सोचा कि बच्चों का पेट भरा है या वह खाली पेट सो रहे हैं. उन के बदन पर कपड़ा है या नहीं. अनुज ने साथ न दिया होता तो मैं कब की बच्चों सहित सुसाइड कर लेती. इसलिए कान खोल कर सुन लो, मैं तुम्हारा साथ छोड़ सकती हूं, लेकिन अनुज का नहीं.’’

बीनू की धमकी से संजय डर गया. इस के बाद उस ने बीनू से टोकाटाकी बंद कर दी. हालांकि उस का उत्पीडऩ जारी रहा. बीनू अब स्वच्छंद रूप से अनुज के साथ घूमने लगी. दोनों के बीच रिश्ता भी कायम रहा. बीनू अनुज के साथ रंगरलियां जरूर मनाती थी, लेकिन कभीकभी उसे ग्लानि भी होती. वह सोचती कि अनुज से दिल लगा कर उस ने अच्छा नहीं किया. पति के साथ धोखा तो किया ही, बच्चों के भविष्य के बारे में भी नहीं सोचा. कल को उस की बेटी सयानी होगी और अनुज उस पर डोरे डालने लगा तो कैसे उसे रोक पाएगी. धीरेधीरे बीनू का प्यार फीका पडऩे लगा और वह अनुज से दूरियां बनाने लगी.

बीनू को मोबाइल फोन चलाने का शौक था. वह फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाती थी. इंस्टाग्राम के माध्यम से उस की दोस्ती अशोक नाम के युवक से हुई. दोस्ती प्यार में बदली और दोनों के बीच चैटिंग शुरू हो गई. अशोक से प्यार हुआ तो बीनू अनुज की उपेक्षा करने लगी. अनुज पिछले कई महीने से महसूस कर रहा था कि जब भी वह अपनी प्रेमिका बीनू के घर उस से मिलने जाता है तो वह उस की उपेक्षा करती है. पहले जब वह बीनू के घर जाता था तो वह उस से खूब हंसती, बोलती और बतियाती थी. आवभगत करती थी. लेकिन अब आते ही उस का चेहरा लटक जाता है. न हंसती और न बतियाती है.

बीनू की जुबान में अब कड़वाहट भी आ गई थी. आवभगत करना तो जैसे वह भूल ही गई थी. अनुज की समझ में नहीं आ रहा था कि बीनू के स्वभाव में यह परिवर्तन क्यों और कैसे आया? आखिर एक रोज इस राज का परदाफाश हो ही गया. उस रोज अनुज बीनू से मिलने आया तो वह बाथरूम में नहा रही थी. अनुज कमरे में जा कर पलंग पर बैठ गया. उसी समय उस की नजर बीनू के मोबाइल फोन पर पड़ी, जो पलंग पर तकिए के पास रखा था. अनुज ने उत्सुकतावश बीनू का फोन उठा लिया और चैक करने लगा. अनुज जैसेजैसे मोबाइल फोन चैक करता गया, वैसेवैसे उस के माथे पर बल पड़ते गए.

बीनू का मोबाइल फोन खंगालने के बाद अनुज के आश्चर्य का ठिकाना न रहा, क्योंकि बीनू ने इंस्टाग्राम के जरिए किसी अशोक नाम के युवक से दोस्ती गांठ ली थी. दोनों के बीच चैटिंग होती थी. बीनू का इंस्टाग्राम पर अकाउंट था. उस ने एक जगह लिखा था, ‘तुम ने तो 2 बूंद ही मांगी थी, हम ने तो समंदर ही लुटा दिया.’ इस का मतलब था कि दोनों के बीच नाजायज रिश्ता बन चुका था. फोन में दोनों के अश्लील फोटो भी मौजूद थे. अनुज अब समझ गया था कि बीनू ने उसे दिल से क्यों निकाल फेंका है. क्योंकि उस ने नए आशिक अशोक को दिल में बसा लिया है. इसी कारण उस के स्वभाव में परिवर्तन आ गया है.

कुछ देर बाद बीनू बाथरूम से निकली तो कमरे में बैठे अनुज को देख कर सकपका गई. फिर गुस्से से बोली, ”अनुज, तुम्हें फोन कर के आना चाहिए था. इस तरह किसी के घर आना अच्छी बात नहीं. आइंदा इस बात का खयाल रखना.’’

”मैं कोई पहली बार तो तुम्हारे घर आया नहीं. इस के पहले भी बेधड़क आताजाता रहा हूं. तब तो तुम ने कभी टोकाटाकी नहीं की.’’ अनुज ने बीनू की बात का जवाब दिया. कुछ देर कमरे में सन्नाटा पसरा रहा. फिर अनुज ने बीनू के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ”बीनू, यह अशोक कौन है? इस से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’

अशोक का नाम सुनते ही बीनू अंदर ही अंदर घबरा गई. वह जान गई कि अनुज ने उस का मोबाइल फोन खंगाला है. फिर भी वह संभलते हुए बोली, ”अशोक मेरा दूर का रिश्तेदार है. हम दोनों की इंस्टाग्राम के जरिए से दोस्ती हुई थी.’’

”सिर्फ दोस्ती या फिर नाजायज रिश्ता भी है.’’ अनुज ने कटाक्ष किया.

”तुम मुझ पर लांछन लगा कर अपनी हद पार कर रहे हो अनुज,’’ बीनू भी भड़क उठी.

”मैं अपनी हद पार नहीं कर रहा हूं, बल्कि सच्चाई बयां कर रहा हूं. मोबाइल फोन में मौजूद अश्लील फोटो और चैटिंग इस बात का सबूत है कि तुम दोनों के बीच नाजायज रिश्ता है. इसी कारण तुम मेरी उपेक्षा करती हो.’’

पोल खुल जाने से बीनू डर गई थी. वह बात बढ़ाना नहीं चाहती थी, अत: धीमी आवाज में बोली, ”अनुज, तुम्हें जो समझना है, समझो. मैं तुम्हारा शक तो दूर नहीं कर सकती.’’

उस दिन बहस के बाद अनुज घर चला तो गया, लेकिन उस के बाद उस का दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गई. उसे प्रेमिका बीनू की बेवफाई रास नहीं आई. वह सोचता कि जिस के लिए उस ने अपना तन, मन, धन सब न्यौछावर कर दिया, वही बेवफा बन गई, जिस को वह प्रेमिका की जगह पत्नी मानने लगा, जिसे वह अपनी जागीर समझने लगा, जिस के लिए उस ने शादी भी नहीं की. उसी ने उस के साथ इतना बड़ा धोखा किया. ऐसी बेवफा प्रेमिका को वह कभी माफ नहीं करेगा. उसे उस की बेवफाई की सजा जरूर मिलेगी. वह उस की न हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.

इस के बाद अनुज ने अपनी प्रेमिका बीनू की हत्या का प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक वह चौबेपुर बाजार गया और एक तेज धार वाला चाकू खरीदा और उसे अपने पास सुरक्षित रख लिया. फिर योजनानुसार उस की हत्या कर दी. अनुज से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 14 मई, 2025 को अनुज को कानपुर (देहात) की माती कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. मृतका के बच्चे नानी लक्ष्मी के साथ रह रहे थे.

 

 

Family Dispute : नफरत का खौफनाक अंजाम

Family Dispute : पति नीरज से अनबन हो जाने के बाद आयशा अपने 12 वर्षीय बेटे सक्षम के साथ मायके में रहने लगी थी. पत्नी के प्रति नीरज के मन में उपजी इस नफरत का ऐसा खौफनाक अंजाम निकला कि…

21 अक्तूबर, 2021 की रात के करीब साढ़े 11 बजे फरीदाबाद के गोठड़ा मोहब्ताबाद का रहने वाला गगन (26 वर्ष) अपने परिवार के साथ खाटू श्याम के दर्शन कर के घर लौटा था. गगन हर साल इसी समय के आसपास अपने पूरे परिवार के साथ खाटू श्याम मंदिर में दर्शन के लिए जाया करता था. उस मंदिर के प्रति उस की आस्था बहुत थी. वह इस साल अपनी माता सुमन (50 वर्ष), अपनी बहन आयशा (30 वर्ष), अपने छोटे भांजे सक्षम (12 वर्ष) और अपने दोस्त राजन शर्मा के साथ मंदिर में दर्शन कर के लौटा था.

गगन राजन के साथ ही फरीदाबाद सेक्टर 55-56 में प्रौपर्टी डीलिंग और पुरानी गाडि़यों की खरीदफरोख्त का काम करता था. इस से पहले गगन अपने परिवार के साथ फरीदाबाद सेक्टर 55 में किराए पर ही रहता था. लेकिन इसी साल सितंबर में उस ने गोठड़ा मोहब्ताबाद में किराए के एक मकान में, जो कि एक पूर्व सरपंच का मकान है, वहां रहने लगा था. उस के पुराने घर से इस नए मकान के बीच करीब 30 मिनट पैदल की दूरी थी. 21 अक्तूबर को मंदिर से दर्शन कर देर रात घर लौटने की वजह से गगन ने राजन को अपने घर पर ही रुकने का आग्रह किया था, क्योंकि रात बहुत हो चुकी थी और वह अपने इलाके में देर रात होने वाली घटनाओं और वारदातों के बारे में अच्छे से जानता था.

राजन ने भी गगन की बात मान ली और वह उस रात उसी के घर पर ही रुक गया. देर रात को लंबा सफर कर के लौटे सभी लोग पहले फ्रैश हुए और हलकाफुलका खाना खा कर वे सब सोने के लिए अपनेअपने कमरे में चले गए. आयशा व उस की मां सुमन मकान में नीचे के कमरे में सोने चली गईं और गगन, राजन वह सक्षम पहली मंजिल पर सोने चले गए. सब थकेहारे थे तो हर किसी को जल्दी नींद भी आ गई थी और सभी गहरी नींद में सो भी गए थे. बस सक्षम ही रात को जागा हुआ था.

नींद तो सक्षम को भी तेज आ रही थी, लेकिन वह किसी का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहा था. वह रात को जगे हुए अपने मम्मी के फोन में गेम खेल रहा था. रात के करीब ढाई बजे के आसपास उस का फोन बजा. इस से पहले कि फोन की घंटी हर किसी को नींद से जगा देती कि उस से पहले ही सक्षम ने तुरंत फोन उठा लिया. यह उस के पिता नीरज चावला (35 वर्ष) का फोन था. सक्षम ने फोन उठा कर फुसफुसाते हुए कहा, ‘‘हैलो पापा.’’

नीरज अपने बेटे को पुचकारते हुए बोला, ‘‘अरे मेरा बेटा कैसा है? खाटू श्याम घूम कर आ गए सब? कैसा लगा वहां घूम कर? मजा आया?’’

सक्षम ने फिर से फुसफुसाते हुए अपने पिता के सवालों का जवाब दिया, ‘‘जी पापा. वहां तो खूब मजा आया पापा. काश! आप भी साथ होते और मजा आता. हमें तो काफी रात हो गई थी वहां से वापस आते हुए.’’

ये सुन कर नीरज ने कहा, ‘‘कोई बात नहीं बेटे. सुनो, जो हमारी बीच बात हुई थी तुम्हें याद है न?’’

सक्षम ने उत्सुकता के साथ कहा, ‘‘जी पापा, मुझे याद है. आप क्या लाए हो मेरे लिए?’’

नीरज ने जवाब दिया, ‘‘वो तो सरप्राइज है मेरे बच्चे. मैं अभी तुम्हारे घर के बाहर ही तो खड़ा हूं. नीचे आ कर दरवाजा खोलो और अपना गिफ्ट ले जाओ. और हां, किसी को इस बारे में बताने की जरूरत नहीं है. ये गिफ्ट स्पैशल तुम्हारे लिए मंगवाया है बाहर से. अब जल्दी से नीचे आ कर अपना गिफ्ट ले लो. इसी बहाने मैं अपने बेटे से भी मिलूंगा.’’

अपने पिता के द्वारा लाए हुए गिफ्ट की बात सुन कर सक्षम के मन में खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. वह तुरंत अपने बिस्तर से इस तरह से उठा कि किसी और को उस के उठने की भनक तक नहीं लगी और वह जल्द ही नीचे दरवाजे की ओर भागा. आहिस्ता से सक्षम ने अंदर से लगी दरवाजे की कुंडी खोली और धीरे से दरवाजा खोला. उस ने देखा उस के पिता दरवाजे के ठीक सामने अपने हाथों में एक थैली लिए खड़े थे. सक्षम न समझ सका पिता के इरादे सक्षम के दरवाजा खोलने पर नीरज ने झुक कर उसे पहले अपने गले लगा लिया और फुसफुसाते हुए उस से पूछा, ‘‘कोई जागा तो नहीं बेटा?’’

सक्षम ने भी उसी तरह से नीरज को जवाब दिया, ‘‘नहीं पापा, कोई नहीं जागा.’’

यह सुन कर नीरज ने सक्षम के कंधे पर हाथ रखा और घर के अंदर आ गया. सक्षम को यह देख कर थोड़ा अजीब लगा. उस ने अपने पिता को रोकना चाहा, लेकिन वह कहां रुकने वाला था. उन दोनों के अंदर घुसते ही बाहर से एक और आदमी मकान में आ घुसा. यह शख्स नीरज का दोस्त लेखराज था. लेखराज के अंदर आते ही उस ने भीतर से मुख्य दरवाजे की कुंडी बंद कर दी और भाग कर पहली मंजिल पर जा पहुंचा. लेखराज को देखते ही इस से पहले कि सक्षम कुछ कहता, नीरज ने उस के मुंह पर हाथ रख दिया और उसे अपनी गोद में उठा कर उस कमरे की ओर चल पड़ा, जहां पर उस की पत्नी आयशा और उस की सास सुमन सोए हुए थी.

एक तरफ नीचे ग्राउंड फ्लोर पर नीरज अपने बेटे के साथ था तो दूसरी ओर लेखराज पहली मंजिल पर गगन और राजन के कमरे में था. लेखराज ने अपनी कमर से एक देसी तमंचा निकाल कर सोते हुए राजन पर गोली चला दी. गोली चलने की आवाज सुन कर गगन नींद से जाग गया और उस की नजर लेखराज और उस के हाथ में तमंचे पर पड़ी. गगन के अवचेतन दिमाग ने खुद को बचाने के लिए अपने बिस्तर किनारे रखे फोन को लेखराज की ओर जोर से फेंका.

वह फोन लेखराज के चेहरे पर जा कर लगा और कुछ पलों के लिए उस का ध्यान गगन से हट गया. इतने में गगन भाग कर दरवाजे की ओर से निकलने ही वाला था कि लेखराज ने गगन पर पीछे से गोली चला दी, जोकि उस की कमर पर लगी. गोली लगते ही वह गिर पड़ा. गगन के शरीर से निकला खून पूरे फर्श पर फैल चुका था, जिसे देख लेखराज को लगा कि वह मर गया है, क्योंकि गगन के शरीर से किसी तरह की कोई हरकत नहीं हो रही थी. पहली मंजिल पर गोली चलने की आवाज सुन कर 12 साल का छोटा बच्चा इस से पहले कि कुछ समझ पाता, नीरज ने उसे नीचे उतार दिया. फिर उस ने अपने थैले में से तमंचा बाहर निकाल कर अपनी सास सुमन पर निशाना साधते हुए 2 गोलियां चला दीं.

नीरज की पत्नी आयशा जो गहरी नींद में सो रही थी, बाहर होने वाले शोर से वह भी जाग गई. इस से पहले कि वह कुछ समझ पाती, नीरज ने मौका देख कर एक गोली अपनी पत्नी की छाती पर दाग दी. गोली मारने के बाद नीरज ने इधरउधर देखा तो सक्षम वहां मौजूद नहीं था. नीरज ने जब उसे अपनी गोद से उसे नीचे उतारा था, तब वह भाग कर बाथरूम में चला गया था. उस ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया. सक्षम इतनी दहशत में था कि उस ने बाथरूम में किसी तरह की कोई हरकत करने की हिम्मत नहीं दिखाई.

इतने में लेखराज अपना काम पूरा कर के नीचे आया और उस ने नीरज से पूछा, ‘‘काम हो गया, अब आगे क्या करना है?’’

नीरज ने अपने थैले में से 2 धारदार चाकू निकाले और एक उस के हाथ में थमाते हुए बोला, ‘‘ये दोनों किसी भी कीमत पर जिंदा नहीं रहने चाहिए. इन्होंने मेरा जीना हराम कर दिया है, इसलिए इन्हें पूरी तरह से खत्म कर दो.’’

गोली मारने के बाद चाकुओं से गोदा दोनों को कहते हुए लेखराज और नीरज दोनों सुमन और आयशा की लाश की ओर बढ़े और दोनों उन के शरीर पर चढ़ कर उन के शरीर पर लगातार चाकू से वार करने लगे. उन्होंने उन का शरीर गोदने के बाद महसूस किया कि मकान में उन का नौकर भी रहता है, उस नौकर को भी उन्होंने ठिकाने लगाना जरूरी समझा. उसी समय उन्होंने महसूस किया कि कोई मकान का मेन दरवाजा खोल रहा है. यह उस मकान में काम करने वाला नौकर शिवा ही था. उसे देख कर नीरज उस की ओर अपना तमंचा ले कर दौड़ा. शिवा अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागा और दीवार फांदते हुए वह मकान के इर्दगिर्द खाली पड़े प्लौट को पार करते हुए भाग निकला.

इस बीच नीरज ने उस की ओर निशाना साध कर गोली भी चलाई थी, लेकिन गोली के तमंचे में फंस जाने की वजह से शिवा अपनी जान बचाने में कामयाब रहा. नीरज और लेखराज सक्षम को छोड़ घर में सभी को गोली मारने के बाद तुरंत वहां से नौ दो ग्यारह हो गए. हत्यारों की गोली से बच गया गगन नीरज और लेखराज ने सभी को गोली तो मार दी थी, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि गगन को गोली लगने के बाद भी वह बच जाएगा. गगन को उस की कमर पर गोली लगी थी, उस का खून भी काफी बह चुका था लेकिन वह जिंदगी और मौत के बीच लटक गया था.

नीरज और लेखराज के हत्या कर के वहां से निकल जाने के बाद सक्षम रोताबिलखता एकएक कर अपने परिवार के पास जा कर उन्हें देख रहा था, तभी उस ने देखा कि उस के मामा के शरीर में हरकत हो रही थी. यह देख कर फोन ले कर वह भागते हुए अपने मामा गगन के पास पहुंचा. गगन ने 100 नंबर डायल कर पुलिस को फोन लगाया और पुलिस को कराहती आवाज में जल्द ही अपने घर पर आने के लिए कहा. सुबह के करीब साढ़े 3 बज रहे थे, जब इस घटना की सूचना फरीदाबाद में धौज थाना क्षेत्र को मिली. धौज थाना परिसर गगन के नए घर से मात्र 5 मिनट की दूरी पर ही था.

मामले की सूचना मिलते ही धौज थानाप्रभारी दयानंद अपनी टीम के साथ कुछ ही देर में गगन के घर जा पहुंचे और उन्होंने सब से पहले मकान में गगन को ढूंढ निकाला और उसे पास के अस्पताल ले गए. उसी दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले की सूचना दी. सूचना मिलने पर थोड़ी देर में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. फोरैंसिक टीम द्वारा अपना काम निपटाने के बाद पुलिस ने दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए भेज दीं. इस के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर थानाप्रभारी ने जांच शुरू कर दी. पुलिस ने सक्षम से उस के पिता का मोबाइल नंबर ले कर टेक्निकल टीम को दे दिया. टीम ने ट्रेसिंग कर के नीरज की लोकेशन का पता लगा लिया.

घटना के 9 घंटे बाद डीएलएफ और धौज की क्राइम ब्रांच की टीमों ने 22 अक्तूबर को एनआईटी फरीदाबाद से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पत्नी के बर्ताव से उपजी कलह इस हत्या के दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उन से पूछताछ के दौरान इस पूरे हत्याकांड की वजह सामने आई. दरअसल, नीरज और उस की पत्नी आयशा के जीवन में सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन नीरज के मन में आयशा को ले कर उसे शक होता था. आयशा अकसर अपने बचपन के दोस्तों के साथ फोन पर बातचीत किया करती थी. कई बार वह बातों में इतनी मशगूल हो जाती थी कि आयशा का ध्यान नीरज पर होता ही नहीं था.

इस के अलावा आयशा खुले दिमाग वाली युवती थी. दोस्तों के संग बातचीत, हंसीमजाक करना उसे बेहद पसंद था. लेकिन कहीं न कहीं आयशा का इस तरह का बर्ताव करना नीरज को पसंद नहीं आता था. इसी को ले कर अकसर नीरज और आयशा के बीच झगड़े होते रहते थे. दोनों के बीच झगड़े इतने बढ़ जाते थे कि उन के बीच सुलह के लिए आयशा के मायके वालों को आना पड़ता था. इसी बीच पिछले साल, नीरज ने आयशा के भाई यानी अपने साले गगन से 10 लाख रुपए उधार भी मांगे थे. एनआईटी फरीदाबाद का रहने वाला नीरज अपने इलाके में एक टेलर मैटेरियल की दुकान खोलना चाहता था, जिस के लिए उसे पैसों की जरूरत थी.

उस ने गगन से पैसे ले कर साल भर में वापस करने की बात भी कही थी. लेकिन जब एक साल से ज्यादा का समय हो गया तो गगन नीरज को पैसे लौटाने के लिए कहने लगा. कोरोना की वजह से धंधा नहीं चलने के कारण नीरज के पास गगन को लौटाने के लिए पैसा इकट्ठे नहीं हो सके. वह गगन को आज कल कह कर हर दिन पैसे लौटाने की बात किया करता, लेकिन वह पैसों का जुगाड़ नहीं कर पा रहा था. ये बात कहीं न कहीं गगन को भी समझ आ गई थी कि उस के जीजा के पास पैसे नहीं है. सास भी मारती थी ताने जब यह बात उस ने अपने घर वालों को बताई तो आएशा की मां सुमन ने नीरज को ताना मारना शुरू कर दिया. सुमन और गगन के साथसाथ आएशा को जब कभी मौका मिलता, वे सब उसे पैसे लौटाने के लिए कहते, नहीं तो उसे किसी न किसी बहाने ताने मारते थे.

यही नहीं, पिछले एक साल से आयशा अपने बेटे सक्षम के साथ अपने मायके में ही थी. दोनों के बीच झगड़े के बाद आयशा अपने बेटे को ले कर अपने मायके रहने के लिए आ गई थी. और यह बात नीरज को काफी खटकने लगी थी. ये सब देखते हुए और इन सभी चीजों से परेशान हो कर उस ने इस हत्याकांड की प्लानिंग अपने दिमाग में ही रच ली थी. पूरी प्लानिंग के चलते नीरज ने बीते कुछ दिनों से ससुराल के लोगों को राजीनामे के बहाने अपनी बातों में फंसाना शुरू कर दिया, ताकि उस पर कोई शक न कर सके.

इसी के चलते 15-16 दिन पहले नीरज ससुराल के लोगों से राजीनामा करने के बहाने मोहब्ताबाद गया और पूरी कोठी को अपनी नजरों में उतार लिया था. उस ने इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पैसों का लालच दे कर अपने करीबी दोस्त लेखराज को भी इस में शामिल कर लिया था. इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए नीरज ने एक महीने पहले हापुड़ से 35 हजार रुपए में 2 देसी तमंचे, 2 चाकू और कुछ कारतूस खरीद लिए थे.

नीरज ने कभी न तो हथियार रखे और न ही चलाए थे, लेकिन पत्नी के चरित्र और पैसे के लेनदेन के चलते तीनों की हत्या करने के लिए उस ने तमंचा चलाना भी सीख लिया था. फिर उस ने 21 अक्तूबर, 2021 की रात को घटना को अंजाम दे दिया. कोई भी जीवित न बचे, इसलिए नीरज और लेखराज ने गोली चलाने के साथसाथ चाकुओं से भी वार किए सास सुमन को एक गोली लगी और चाकू के कई वार किए गए. आयशा को 2 गोली लगी थीं. राजन शर्मा को एक गोली सीने में लगी, जबकि गगन के कमर में गोली लगी थी.

नीरज को अनुमान था कि इस गोली से गगन की मौत हो जाएगी. लेकिन वह जीवित बच गया. दोनों आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. Family Dispute

 

Hindi Story : नौकरी के चक्कर में बीवी को न भूलें

Hindi Story : मुजफ्फरपुर की सबा फिरदौस अपने जीजा के भाई मुमताज अहमद को 16 साल की उम्र में दिल दे बैठी थी. न चाहते हुए भी फेमिली वालों को दोनों की शादी करने के लिए मजबूर होना पड़ा. शादी के कई साल बाद फिरदौस ने गूगल सर्च कर पंचायत औफीसर पति मुमताज की हत्या की फुलप्रूफ प्लानिंग कर मौत के घाट उतार दिया. जिस मुमताज से शादी करने के लिए सबा फिरदौस ने फेमिली वालों से बगावत की, आखिर उसे चाकू से क्यों गोद डाला?

घटना 7 जुलाई, 2025 की है. वक्त था सुबह के कोई 4 बजे का. बिजली गुल हो जाने के बाद बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के गांव माड़ीपुर की रहने वाली सबा फिरदौस की आंखें खुलीं तो उस ने अपने पति के कमरे में जा कर देखा. पति को देखते ही उस की जोरदार चीख निकल गई. उस का पति मुमताज अहमद औंधे मुंह फर्श पर पड़ा हुआ था. उस के आसपास का फर्श खून से लाल था. उस का सारा कमरा अस्तव्यस्त था. कहीं पर कपड़े पड़े हुए थे तो कहीं पर कुछ और सामान.

कमरे का हाल देख कर वह बदहवास सी हो कर जोरजोर से चीखने लगी. ‘बचाओ …बचाओ’ किसी ने मेरे पति का खून कर दिया. सुबहसुबह सबा फिरदौस के रोनेचीखने की आवाज सुन कर पड़ोसी भी इकट्ठा हो गए थे. घर में शोरशराबे की आवाज सुन कर उस के तीनों बच्चे भी उठ कर अपने अब्बू को देख कर रोने लगे थे. पति के कमरे की हालत देखते ही सबा ने रोते हुए ही पति के बड़े भाई मुश्ताक अहमद को फोन कर सूचना दी. सूचना पाते ही मुश्ताक मुमताज के घर पहुंचा. उस के बाद मुश्ताक ने अपने अन्य फेमिली वालों को इस की जानकारी देने के बाद पुलिस को भी सूचना दे दी.

सुबहसुबह हत्या की सूचना पाते ही काजी मोहम्मदपुर थाने के एसएचओ जयप्रकाश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. मुमताज अपने कमरे में पेट के बल पड़ा हुआ था. उस का शरीर पूरी तरह से लहूलुहान था. इस घटना की जानकारी जुटाने के बाद एसएचओ ने इस मामले की सूचना मुजफ्फरपुर जिले के एसपी (सिटी) कोटा किरण कुमार, डीएसपी (टाउन) सीमा देवी को भी दे दी थी. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

जांचपड़ताल के दौरान पता चला कि हत्यारे पड़ोसी की छत के सहारे मकान के फस्र्ट फ्लोर के दरवाजे की जाली और ताला काट कर कमरे में अंदर घुसे और फिर लूटमार करने के बाद मुमताज की हत्या कर फरार हो गए थे. मौके पर पहुंची एसपी (सिटी) कोटा किरण ने तुरंत ही एफएसएल की टीम को जांच के लिए बुला लिया था. एफएसएल की टीम के 5 वैज्ञानिकों ने करीब 2 घंटे तक कमरे व फस्र्ट फ्लोर पर कटी जाली और ताले से साक्ष्य जुटाए. साथ ही टीम ने मृतक के बैड पर पड़े चाकू पर लगे ब्लड के सैंपल और फिंगरप्रिंट भी लिए.

घटनास्थल पर डौग स्क्वायड को भी बुला लिया. इस दौरान खोजी कुत्ता कई बार मृतक के पास से होता हुआ उस की पत्नी के पास भी जा कर रुका, लेकिन पुलिस का मुमताज की पत्नी पर हत्या का शक करने का सवाल ही नहीं उठता था. क्योंकि सब से पहले उस की हत्या के बाद सबा फिरदौस ही उस के पास पहुंची थी. फिर वैसे भी वह उस की पत्नी थी. उस के बाद खोजी कुत्ता मृतक के कमरे से नीचे उतर कर बगल की गली से होता हुआ झाड़ी के रास्ते से रेलवे ट्रैक तक पहुंचा और वहीं पर रुक गया.

मामला गंभीर था, इसीलिए पुलिस प्रशासन ने घटनास्थल से सभी साक्ष्य जुटाने के बाद जांच की काररवाई पूरी कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. उसी दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक के पास 2 मोबाइल फोन थे, दोनों ही गायब थे. उस के घर ज्वैलरी और नकदी भी गायब थी. मृतक मुमताज के घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे, लेकिन उन की रिकौर्डिंग (डीवीआर) भी गायब थी. शायद अपराधी राज खुलने के डर से अपने साथ ही ले गए थे.

इस दौरान मृतक की बीवी सबा फिरदौस का रोरो कर बुरा हाल था. इस दौरान वह कई बार बेहोश भी हो गई, जिसे बड़ी मुश्किल से संभाला गया था. सबा फिरदौस ने रोतेरोते बताया कि पति कई महीनों से नौकरी को ले कर परेशान थे. वह अकसर यही कहा करते थे कि उन की नौकरी खतरे में है. नौकरी कभी भी उन के हाथों से जा सकती है. उस के अलावा मुमताज ने आसपास के कई लोगों को पैसा दे रखा था, जो मिल नहीं पा रहा था. पता नहीं कौन लोग उस के दुश्मन बन कर आए और उन की हत्या कर गए.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि मुमताज का किसी धारदार हथियार से 3 बार गला काटा गया था. उसी हथियार से उस की दोनों आंखों में भी वार किए गए थे. साथ ही उस के शरीर पर अलगअलग 5-6 गहरे घाव पाए गए थे. इस मामले में तुरंत ऐक्शन लेते हुए पुलिस ने उस के घर के आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. जिस रास्ते से खोजी कुत्ता बारबार जा रहा था, पुलिस ने उसी रास्ते पर मुमताज के घर के पीेछे लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज निकाली तो पता चला कि रात के 3 बजे उस रास्ते से एक काली रंग की नए मौडल की स्कौर्पियो आतीजाती दिखाई दी, जिस से पुलिस को पूरा शक हो गया कि अपराधी इसी स्कौर्पियो से घटना को अंजाम देने के लिए आए होंगे.

इसी आशंका के चलते पुलिस ने रामराज की ओर जाने वाले रास्ते पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटा ली. उस के साथ ही पुलिस ने डीआईयू व सर्विलांस टीम को मृतक के दोनों मोबाइल नंबर दे दिए, जो सर्विलांस पर लगा दिए गए, लेकिन अफसोस, कहीं से भी पुलिस को इस घटना से संबधित कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई. जब पुलिस को इस हत्याकांड के सिलसिले में कहीं से भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला तो पुलिस ने फिर से उस के फेमिली वालों के साथसाथ पड़ोसियों से पूछताछ की, जिस के दौरान पुलिस को एक अहम जानकारी मिली.

पड़ोसियों ने बताया कि मुमताज की गैरमौजूदगी में उस के घर पर कभीकभी एक युवक आता था. वह युवक कौन था, उस की उन्हें कोई जानकारी नहीं. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने फिर से मृतक मुमताज अहमद की पत्नी फिरदौस से पूछताछ की, लेकिन फिरदौस अपने पहले बयान से कुछ हटती नजर आई. इस बार उस ने पुलिस को बताया कि जिस वक्त वह पति के कमरे की तरफ गई तो वहां पर कुछ लोग उन्हें बुरी तरह से मारपीट रहे थे. उस ने उन का विरोध किया तो उन्होंने उसे चाकू दिखा कर अपने कब्जे में ले लिया.

बाद में उस के सामने ही उन लोगों ने पति की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी. उस के बाद उन लोगों ने उस से ही अलमारी खुलवा कर उस में रखा हुआ सारा सामान लूट लिया और फरार हो गए. हालांकि उस ने अपने किसी खास व्यक्ति को बचाने के लिए यह बयान बदला था, लेकिन पुलिस की नजरों में वह बुरी तरह से फंस चुकी थी. उस के इस बयान से पुलिस पूरी तरह से समझ चुकी थी कि उस के पति की हत्या में उसी का हाथ था. इस के बाद भी पुलिस ने जल्दबाजी करना उचित नहीं समझा.

उस के बाद डीएसपी ने स्वयं सबा फिरदौस को बुला कर उस से पूछताछ की. लेकिन वह बारबार बदमाशों द्वारा उस के पति की हत्या करने वाली बात दोहराती रही. लेकिन पुलिस को उस के फेमिली वालों ने एक और जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मुमताज के साथ उस का छोटा भाई भी रहता था, जिस को सबा फिरदौस ने एक दिन पहले ही अपनी रिश्तेदारी में भेज दिया था. उस के बाद उस ने अपने देवर से कहा था कि वह रात में वहीं पर रुके. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने इस बारे में उस के देवर से पूछा तो उस ने पुलिस को बताया कि भाभी ने ही उसे यह कह कर भेजा था कि आज रात तुम वहीं पर रुक जाना. लेकिन पुलिस के लिए यह जानकारी भी अधूरी ही थी. फिर भी पुलिस का उस पर शक पूरी तरह से गहरा गया था.

उस के बाद पुलिस ने उस के मोबाइल को जब्त कर लिया. सबा फिरदौस का मोबाइल अपने कब्जे में लेते ही पुलिस ने सब से पहले उस के गूगल सर्च पर क्लिक किया. क्लिक करते ही उस की सारी जानकारी सामने आ गई. कुछ दिन पहले ही सबा फिरदौस ने गूगल पर सर्च किया था कि ‘हत्या कैसे करनी चाहिए.’ उस से सब कुछ साफ हो गया था कि सबा फिरदौस ने अपने पति को मौत की नींद सुलाने का तरीका गूगल पर ही सर्च किया था. जब पुलिस ने सबा फिरदौस के खिलाफ कई सबूत जुटा लिए तो उस से सख्ती से पूछताछ की. पुलिस की सख्ती के आगे सबा फिरदौस ज्यादा वक्त तक टिक न सकी. फिर उस ने पुलिस को सब कुछ साफसाफ बता दिया था.

पुलिस पूछताछ में सबा फिरदौस ने बताया कि उस ने पढ़लिख कर जीवन में अफसर बनने का सपना देखा था. उस ने मुमताज अहमद से इसीलिए निकाह किया था कि उस के साथ शादी करने के बाद उस के सारे सपने पूरे हो जाएंगे, लेकिन शादी के बाद पता चला कि मुमताज का किसी दूसरी महिला के साथ अफेयर चल रहा है. मुमताज शादी के बाद उस से पहले जैसा प्यार भी नहीं करता था. उसे डर था कि कहीं मुमताज उस महिला के चक्कर में आ कर उस की हत्या न कर डाले. इसी डर की वजह से उस ने उस की हत्या करने का प्लान बनाया.

उस के लिए उस ने गूगल और यूट्यूब पर हत्या करने के नएनए तरीके सीखे. फिर एक दिन योजना के तहत उस की हत्या कर दी. हालांकि पुलिस पूछताछ के दौरान सबा फिरदौस ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए पति की हत्या करने वाली बात स्वीकार कर ली थी. लेकिन पुलिस क्या, कोई भी इंसान उस की बात से सहमत नहीं हो पा रहा था. उस का कारण था कि मुमताज अहमद एक हट्ïटाकट्टा युवक था, वह अकेली उस की हत्या कैसे कर सकती है?

जबकि सबा फिरदौस ने पुलिस को बताया कि उस ने पति के गहरी नींद में सोते ही तकिए से उस का मुंह दबा कर हत्या कर दी. दूसरे मुमताज के मकान के ऊपर लगे दरवाजे पर जाली और उस का ताला कटा हुआ मिला था. सबा फिरदौस का मोबाइल तो पुलिस को मिल गया था. लेकिन मुमताज के 2 मोबाइल फोन कहां गायब हो गए थे. मुमताज की गैरमौजूदगी में उस के घर जो शख्स आताजाता था, वह कौन था और उस से सबा फिरदौस का क्या रिश्ता था? यह सब जानकारी पुलिस के गले की हड्डी बनी हुई थी.

पुलिस पूछताछ और मुमताज के फेमिली वालों की जानकारी के अनुसार इस हत्याकांड का जो खुलासा हुआ, वह इस प्रकार था. बिहार के जिला वैशाली के पातेपुर थाने के डढुआ गांव में रहता था मुमताज अहमद का परिवार. सबा फिरदौस मुमताज की रिश्ते में साली लगती थी. सबा फिरदौस की बहन की शादी उस के बड़े भाई मुश्ताक अहमद के साथ हुई थी. उसी कारण उस का अपनी बहन के पास आनाजाना लगा रहता था. उसी आनेजाने के दौरान दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया. उन के बीच चक्कर चला तो जल्दी ही दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए थे. उस वक्त सबा फिरदौस केवल 16 साल की ही थी.

धीरेधीरे दोनों के लव अफेयर की जानकारी सबा फिरदौस के फेमिली वालों को भी हो गई थी. बाद में उस के फेमिली वालों ने सबा फिरदौस की बड़ी बहन की ससुराल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन मुमताज अहमद अपने भाई की ससुराल जाने से बाज नहीं आ रहा था, जहां पर वह सबा फिरदौस के साथ आंखमिचौली खेलते हुए प्यार का खेल खेलने लगा था. उस के बाद वह अपने फेमिली वालों से भी सबा फिरदौस के साथ शादी करने की जिद करने लगा था, लेकिन मुमताज अहमद के घर वाले किसी भी सूरत में उस के साथ उस की शादी करने को तैयार नहीं थे. इस के बाद भी मुमताज अपनी जिद पर अड़ा रहा. जबकि फिरदौस के फेमिली वाले उस की कम उम्र होने के कारण उस की शादी करने को राजी नहीं थे.

लेकिन सबा फिरदौस और मुमताज अहमद एक साथ जीनेमरने की कसम खा चुके थे. फेमिली वाले उन की शादी के बीच आड़े आए तो एक दिन सबा फिरदौस प्रेमी मुमताज अहमद के साथ घर से भाग गई. घर से भागते ही दोनों के घर वालों को समाज के सामने नीचा देखना पड़ा. दोनों एक ही बिरादरी और खास रिश्तेदारी से बंधे हुए थे. इसी कारण दोनों परिवारों ने एक साथ बैठ कर बातचीत की. रिश्तेदारी का कनेक्शन होने के कारण दोनों परिवारों में जल्दी ही सहमति बनी और फिर सन 2012 में उन की शादी कर दी. उस वक्त तक मुमताज अहमद बेरोजगार था, लेकिन उस ने सरकारी नौकरी के लिए कई जगह अप्लाई कर रखा था.

सबा फिरदौस भी पढ़ाई में तेज थी. मुमताज के साथ शादी करने के बाद भी उस ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. उसी दौरान 2014 में मुमताज अहमद की नौकरी पंचायत रोजगार सेवक के पद पर लग गई. मुमताज की पहली पोस्टिंग वैशाली के ही भगवानपुर प्रखंड में हुई थी. नौकरी लगने के बाद मुमताज ने अपना गांव छोड़ दिया. उस के बाद वह अपनी पत्नी सबा फिरदौस को साथ ले कर जिला मुजफ्फरपुर के गांव माड़ीपुर स्थित रामराजी रोड पर मसजिद के नजदीक अपना मकान बना कर रहने लगा था. मुमताज की नौकरी लगने के बाद सबा फिरदौस भी सरकारी नौकरी के लिए हाथपांव मारने लगी थी. दिल में एक बड़ा अफसर बनने की चाहत लिए उस ने शादी के बाद भी कड़ी मेहनत की.

उस दौरान उस ने एक बार बीपीएससी और 2 बार यूपीएससी का एग्जाम भी दिया था. समय के साथसाथ सबा फिरदौस ने 2 बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया. हालांकि उस की गृहस्थी ठीकठाक चल रही थी, लेकिन उस के अंदर एक अफसर बनने का जज्बा अभी भी हार मानने को तैयार न था. शादी के कई साल बाद तक दोनों के बीच सब कुछ ठीक प्रकार चलता रहा. लेकिन 2022 आतेआते उन के संबंधों में खटास पैदा होने लगी थी. उस का मुख्य कारण था मुमताज की व्यस्तता. मुमताज अहमद करीब ढाई साल से वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड में पंचायत रोजगार सेवक के पद पर कार्यरत था.

उस के बाद मुमताज को रतनपुरा और असोई पंचायत में पंचायत रोजगार का सेवक बनाया गया था, जिस के कारण उस का घर से ही पंचायत और प्रखंड में आनाजाना लगा रहता था. काम अधिक होने के कारण वह अपनी बीवी और बच्चों को भी ठीक से टाइम नहीं दे पाता था. यही कारण रहा कि सबा फिरदौस को मुमताज पर किसी अन्य महिला के साथ संबंध होने का शक पैदा हो गया था. उसी शक के चलते दोनों के बीच मनमुटाव पैदा हो गया. दोनों के बीच शक ही दरार ने उन के रिश्तों में कड़वाहट घोल दी थी. सबा फिरदौस को पूरा विश्वास था कि पति का वैशाली के भगवानपुर प्रखंड में काम करने वाली एक महिला के साथ अवैध संबंध हैं.

मुमताज अपने लौकर की चाबी हमेशा अपने पास ही रखता था. कई बार सबा फिरदौस ने उस से चाबी मांगी, लेकिन उस ने चाबी देने से मना कर दिया था, जिस के कारण सबा फिरदौस को पति पर शक हो गया था कि उस ने उस के जेवर उस महिला को दे दिए हैं, जिस से वह प्यार करता था. सबा फिरदौस पढ़ीलिखी थी. उस ने कई बार पति मुमताज को चोरीछिपे मोबाइल पर बात करते देखा था. उसे पूरा शक था कि पति जरूर किसी अन्य महिला के प्यार के चक्कर में पड़ गया है. उस की सच्चाई जानने के लिए उस के दिमाग में एक आइडिया आया.

उस ने अपने मोबाइल में मोबाइल ट्रैकर ऐप इंस्टाल कर लिया, ताकि वह घर बैठे ही पति की दिनचर्या पर पूरा ध्यान रख सके. मुमताज अहमद का काम ही कुछ ऐसा था, जहां पर रहते उसे दिन में तरहतरह के लोगों से मिलना होता था. उस में स्त्रीपुरुष दोनों ही होते थे. उस के बाद भी सबा फिरदौस पति के घर आते ही उस से तरहतरह के सवाल करने लगी थी. उस की उसी बात से मुमताज को उस पर झुंझलाहट पैदा होने लगी थी, जिस के कारण दोनों के बीच मतभेद और बढ़ गए. इस के बाद सबा फिरदौस अपने एक रिश्तेदार के संपर्क में आ गई, जिस से वह अपना मन बहलाने के लिए मोबाइल पर बात करने लगी थी.

फिर वह धीरेधीरे पति की गैरमौजूदगी में उस के घर भी आने लगा था. रिश्तेदार के साथ अफेयर चालू होते ही उस का पति के प्रति व्यवहार भी बदल गया था. वह हर वक्त उस से खफाखफा सी रहती थी, जिस के कारण मुमताज अहमद को भी उस पर शक होने लगा था. इस दौरान मुमताज ने कई बार उस से उस का मोबाइल मांगा, लेकिन फिरदौस ने उसे अपना मोबाइल दिखाने से साफ मना कर दिया था. वह अपने मोबाइल में लौक लगा कर रखती थी. इसी कारण मुमताज को पत्नी पर शक हो गया कि वह उस की गैरमौजूदगी में जरूर किसी से मिलती है.

इस बात की पुख्ता जानकारी के लिए मुमताज अहमद ने अपने बच्चों को माध्यम बनाया. उस ने अपने बच्चों से पूछा तो बच्चों ने साफसाफ बता दिया कि आप के पीछे हमारे घर एक अंकल आते हैं. इस जानकारी के मिलते ही मुमताज का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, लेकिन उस ने उस वक्त पत्नी से इस बारे में कोई बात नहीं की. वह किसी भी तरह से गुप्तरूप से उस की हकीकत जानना चाहता था. वह कौन है और कहां रहता है? उस सच्चाई को जानने के लिए मुमताज ने अपने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए, ताकि वह पत्नी की हर दिन की दिनचर्या देख सके. घर में सीसीटीवी लगते ही सबा फिरदौस भी सचेत हो गई थी. उस ने फोन कर अपने रिश्तेदार को उस सब की जानकारी दे दी, जिस के बाद वह उस के घर नहीं आया था.

लेकिन मुमताज फिर भी मानने को तैयार न था. उस के बाद भी उस ने कई बार उस से जानने की कोशिश की कि उस के पीछे घर पर कौन आता है. सबा फिरदौस अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं थी. इसी बात को ले कर दोनों के बीच में इतना मनमुटाव हो गया कि मुमताज ने कई बार उस की पिटाई तक कर दी. मुमताज अपनी प्रेम कहानी उस से छिपाए हुए था, लेकिन बारबार सबा फिरदौस पर शक करते हुए उस की सच्चाई जानने के लिए व्याकुल था. उस की इस बात से सबा फिरदौस पूरी तरह से पति से नफरत करने लगी थी. उस ने तभी सोच लिया था कि किसी भी तरह से पति से पीछा छुड़ाना होगा.

उसे अपने पर विश्वास था कि एक न एक दिन उस की सरकारी नौकरी लग ही जानी है. उस के खत्म होने के बाद वह अपने बच्चों को खुद ही पाल लेगी. उसी दौरान उस ने एक दिन एक चार्ट पर स्लोगन लिखा, ‘हारना मंजूर है मुझे, पर खेल तो बड़ा ही खेलूंगी.’’

मुमताज अहमद ने वह स्लोगन कई बार पढ़ा भी, लेकिन उस ने सोचा कि बच्चों के लिए लिखा होगा. उस ने उस बारे में कभी भी गहराई से नहीं सोचा था. उस के साथ ही फिरदौस ने पति की हत्या की प्लानिंग करनी शुरू कर दी. फिर वह क्राइम पेट्रोल, सस्पेंस व थ्रिलर वाली फिल्में देखने लगी, ताकि वह बिना किसी रिस्क के पति की हत्या कर सके. इस के साथ ही वह अपने मोबाइल से गूगल व यूट्यूब पर हत्या करने के तरीके भी खोजने लगी थी. उस दौरान उस ने गूगल और यूट्यूब से कई तरह के तरीके नोट भी कर लिए थे, जिस से वह जल्दी से पति से आजाद हो सके.

मुमताज अहमद सारे दिन भागदौड़ की ड्यूटी निभाने के बाद शाम को जब घर पहुंचता तो उस की बीवी उस से सीधे मुंह बात नहीं करती थी. पत्नी के बदले व्यवहार से तंग आ कर उस ने शराब पीनी भी शुरू कर दी थी. वह अपनी ड्यूटी से घर वापस आता और फिर खाना खा कर सो जाता था. उस दौरान तक वह पति की हत्या करने का पूरा प्लान बना चुकी थी. मुमताज हमेशा ही घर देर से पहुंचता था. सबा फिरदौस एक थ्रिलर फिल्म की भांति उस की हत्या की स्क्रिप्ट लिख चुकी थी. उस ने पति की हत्या से पहले ही ताले की चाबी खो जाने वाली बात कहते हुए किसी से कटर द्वारा उसे कटवा लिया था, ताकि वह मुमताज की हत्या के बाद अपनी योजनानुसार उस को बदमाशों द्वारा काटना दिखा सके.

पति की हत्या की पूरी स्क्रिप्ट तैयार करने के बाद फिरदौस ने 7 जुलाई, 2025 को उस की हत्या का दिन फिक्स कर दिया था. 7 जुलाई की रात को देर रात मुमताज अहमद अपने घर पहुंचा. आते ही उस ने सब से पहले शराब का पैग लिया. उसी दौरान किसी का फोन आया तो वह अपने फोन पर बात करतेकरते ऊपर की मंजिल पर चला गया. वह काफी देर तक फोन पर बात करता रहा. जब वह नीचे आया तो सबा फिरदौस ने उस से पूछा, ”किस का फोन था, जिस से इतनी देर से बात कर रहे थे?’’

”तुम अपने काम से काम रखो, तुम्हें यह जानने की कोई जरूरत नहीं कि मैं किस से क्या बात कर रहा हूं.’’ मुमताज बोला. उस के बाद सबा फिरदौस उस का मोबाइल देखने की जिद करने लगी, लेकिन मुमताज ने उसे अपना मोबाइल देखने के लिए नहीं दिया. उसी बात को ले कर उस की सबा फिरदौस से झड़प हो गई. उसी झड़प के दौरान सबा फिरदौस की जिद के आगे मुमताज ने उसे लौकर की चाबी दे दी. लौकर की चाबी मिलते ही उस ने लौकर खोल कर देखा तो उस में से उस के सारे जेवर गायब थे. जेवरों को गायब देखते ही सबा फिरदौस का माथा ठनक गया. उस ने पति से जेवरों के बारे में पूछा तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि उसे उस के जेवरों से क्या लेनादेना, अपने जेवर अपने आप देखो, तुम ने कहां रखे हैं.

सबा फिरदौस को पूरा शक हो गया था कि उस ने उस के जेवर जरूर उसी महिला को दे दिए होंगे, जिस से चक्कर चल रहा है. इस बात का शक पैदा होते ही सबा फिरदौस ने उसी समय मुमताज की हत्या करने का पूरा मन बना लिया था. उस के बाद भी दोनों ने बच्चों के साथ खाना खाया और फिर मुमताज अहमद अपने कमरे में सोने चला गया. सबा फिरदौस भी बच्चों को साथ ले कर दूसरे कमरे में चली गई. कुछ देर बाद ही उस के तीनों बच्चे तो सो गए, लेकिन उस रात सबा फिरदौस की आंखों से नींद कहीं दूर जा चुकी थी. वह बारबार कमरे से उठती और पति के कमरे की तरफ ही ताड़ती रही. उस रात उस का टाइम काटे कट नहीं रहा था. वह बारबार घड़ी की तरफ देखती रही.

जब काफी रात गुजर गई और चारों ओर सन्नाटा छा गया तो वह अपने कमरे से दबेपांव निकली. उस वक्त तक सारे दिन की भागदौड़ और शराब के नशे में मुमताज बेसुध हो कर सो चुका था. रात के 1 बज कर 20 मिनट पर मौका पाते ही सबा फिरदौस ने सीसीटीवी कैमरों का रिकौर्डिंग बौक्स निकाल दिया. उस के बाद वह फिर से अपने बच्चों के पास आ कर बैठ गई. फिर वह लाइट गुल होने का इंतजार करने लगी. रात के कोई ढाई बजे लाइट गुल हो गई. इस के बाद वह अपने कमरे में रखा हथौड़ा और चाकू ले कर पति के कमरे में पहुंची. उस वक्त भी मुमताज अहमद गहरी नींद में सोया हुआ था. उसे गहरी नींद में सोते देख उस के मन का शैतान जाग उठा.

मौका देखते ही उस ने अपने एक हाथ से तकिए द्वारा उस का मुंह दबाया और दूसरे हाथ से हथौड़े से उस के सिर पर लगातार कई वार कर डाले, जिस के बाद मुमताज अहमद की चीख तकिए से दब कर रह गई. मुमताज अहमद शरीर से तगड़ा था. उस के बाद भी वह जैसेतैसे कर बैड से उठा, फिर वह सबा फिरदौस की ओर बढऩे लगा. जब सबा फिरदौस को पति से खतरा नजर आने लगा तो उस ने अपने हाथ में चाकू उठाया और पति मुमताज अहमद पर ताबड़तोड़ वार कर डाले. उस के बाद जिंदगी मौत से जूझता मुमताज अहमद फर्श पर गिर गया. उस के नीचे गिरते ही सबा फिरदौस ने चाकू से उस का गला काट दिया. उस के साथ ही उस ने पति की आंखों पर चाकू के कई वार कर डाले. कुछ देर तड़पने के बाद मुमताज ने दम तोड़ दिया.

पति को मौत की नींद सुलाने के बाद फिरदौस ने अपने बच्चों को जा कर देखा तो तीनों गहरी नींद में सोए पड़े थे. उस के बाद उस ने पति के दोनों फोन और डीवीआर उठाया और मकान की छत पर पहुंची. उस ने रात का फायदा उठाते हुए पड़ोसियों की छत पर जा कर मुमताज के मोबाइल और डीवीआर को जंगल में फेंक दिया. फिर उस ने अपने मकान की मुमटी पर लगे लोहे के दरवाजे की चाकू से जाली काटी और उस में पहले से कटा हुआ ताला लगा दिया, ताकि वह इस हत्याकांड को लूटमार की शक्ल देने में कामयाब हो जाए.

इस पूरी घटना को अंजाम देने के बाद सबा फिरदौस ने अपने पहने कपड़े चेंज किए, अलमारी का सामान उस ने कमरे में इधरउधर बिखेर दिया. उस के बाद वह अपने बच्चों के पास जा कर सो गई. जब उसे लगने लगा कि सुबह होने वाली है, तब उस ने अपने बच्चों को उठाया और फिर उस ने पड़ोसियों के साथ ही अपने फेमिली वालों को घर में लूटपाट और पति की हत्या होने की जानकारी दे दी. हत्या की सूचना पाते ही सब से पहले उस के परिवार वाले उस के पास पहुंचे और फिर पुलिस भी पहुंच गई थी. पुलिस और परिवार वालों के मकान पर पहुंचते ही सबा फिरदौस ने अपने रोनेधोने का नाटक शुरू कर दिया था.

इस हत्याकांड के खुलते ही पुलिस ने आरोपी पत्नी सबा फिरदौस की निशानदेही पर मोबाइल और डीवीआर भी बरामद कर ली थी. इस घटना के बाद मृतक मुमताज अहमद के बड़े भाई मुश्ताक अहमद ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिस में कहा गया था कि डकैत उस के भाई मुमताज की हत्या करने के बाद सबा फिरदौस से चाकू की नोंक पर 9 लाख रुपयों की ज्वैलरी व 2 लाख रुपए कैश लूट कर फरार हो गए थे. सबा फिरदौस ने पति की हत्या करने से पहले ही चाकू पर अपने पति का ही रूमाल लपेट दिया था, ताकि पुलिस काररवाई के दौरान उस के अंगुलियों के निशान उस चाकू पर न आने पाएं.

सबा फिरदौस ने पति की हत्या स्वयं ही करना स्वीकार की थी, लेकिन यह बात किसी के भी गले नहीं उतर पा रही थी. सभी का मानना था कि इस हत्याकांड में उस की सहायता करने वाला जरूर कोई रहा होगा. सबा मुमताज के घर पति की अनुपस्थिति में उस से कौन मिलने आता था? वह भी रहस्यमय बना हुआ था, जिस का राज सबा फिरदौस ने अपने दिल में छिपाए रखा था. जिस को वह पूरी तरह से बचाना चाहती थी. इस केस के खुलते ही पुलिस ने आरोपी सबा फिरदौस को कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया, लेकिन उस ने पति पर शक कर और अपनी प्रेम कहानी के चलते अपने साथ ही बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय बना डाला. Hindi Story

 

 

Rajasthan Crime News : दगाबाज प्रेमी और 2 हत्याएं

Rajasthan Crime News : शादीशुदा मोनू का अपनी जवानी पर कंट्रोल नहीं था. फैक्ट्री में साथ काम करने वाली विवाहिता आशा पर वह इस कदर लट्टू हो गया था कि उसे हासिल करने के लिए उस ने परिवार, समाज और देश के कायदेकानून तक ताक पर रख दिए. फिर जो हुआ, वह किसी अनहोनी से कम नहीं था…

जयपुर के सांगानेर सदर इलाके में स्थित कई फैक्ट्रियों में कुरती बनाने की भी एक फैक्ट्री थी. वहीं मोनू पंडित और आशा मीणा काम करते थे. उस का पति राजाराम मीणा भी उसी फैक्ट्री में काम करता था. मोनू और आशा हमउम्र थे. विवाहित थे. जब कभी फुरसत में होते, तब इधरउधर की बातें करते थे. उन के बीच होने वाली कुछ मिनटों की बातों में उन्हें अच्छा सुकून मिलता था. कई बार घरेलू समस्याओं से बेखबर एकदूसरे की तारीफ भी कर दिया करते थे.

आशा की तारीफ करते हुए जब मोनू कह देता कि तुम आज बहुत सुंदर दिख रही हो, तब वह शरमा जाती थी. मुसकराती हुई उस के कसरती बदन को बनाए रखने के लिए खानेपीने पर ध्यान देने की सलाह दे डालती थी. एक दिन जब आशा ने बातोंबातों में अपने 4 साल के बच्चे के बारे में जिक्र किया, तब मोनू चौंंक गया. उस ने तुरंत टिप्पणी कर दी, ”तुम्हें देख कर कोई नहीं कहेगा कि तुम 4 साल के बच्चे की मां हो! आखिर तुम्हारी इस खूबसूरती का राज क्या है…जरा मुझे भी बताओ!’’

इस तरह की मीठीमीठी बातों का असर आशा के मन में गहराई से होने लगा था, जबकि मोनू उस के रूपरंग और अदाओं पर मर मिटा था. वह उस की खूबसूरती, चालढाल और बोलचाल की शैली को ले कर जबतब छेडऩे भी लगा था. सच तो यह था कि मोनू का उस के साथ खुल कर बात करना आशा को भी अच्छा लगने लगा था. वे फैक्ट्री में लंच साथसाथ करने लगे थे, जबकि अधिकतर लड़कियां अपने साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ ही लंच करती थीं. मोनू उसे अपनी तरफ से कुछ बाहरी खानेपीने की चीजें, आइसक्रीम, चौकलेट, बिसकुट, चाय वगैरह भी देने लगा था.

आशा और मोनू के बीच नजदीकियां बढ़ चुकी थीं. मोनू की मीठी बातें और उस का खयाल रखने को ले कर आशा को बहुत कुछ समझने में देर नहीं लगी कि वह उस का दीवाना बन चुका है… और उस की चाहत क्या है? कई बार उस ने उस की निगाहों को उस की देह पर टिके होने का भी एहसास किया. एक दिन मोनू ने जब अपने प्यार का इजहार किया, तब वह झेंप गई. उस ने कहा कि वह एक बेटे की मां है. तब मोनू भी बोला, ”तो क्या हुआ? मैं भी एक बेटे का पिता हूं. हमारा दिल तुम पर आ गया है…तो इस में बुराई क्या है?’’

इस के बाद धीरेधीरे आशा और मोनू एकदूसरे के करीब आते चले गए. मोनू ने उसे एक नया एंड्रायड फोन गिफ्ट दिया तो आशा बहुत खुश हुई. आशा अपने कुंवारेपन को याद करती हुई मोनू की ओर एक कदम आगे बढ़ाती तो मोनू उस की ओर 2 कदम आगे बढ़ा देता था. कई महीने तक उन के बीच यह सब चलता रहा. एक रोज इस की भनक आशा के पति राजाराम मीणा को हो गई. पत्नी के प्रेम संबंधों और उसे प्रेमी द्वारा फोन गिफ्ट में देने की जानकारी एक परिचित ने उसे दी. जबकि आशा ने पति को बताया था कि उस के साथ काम करने वाली एक लड़की ने किस्त पर मोबाइल दिलवाया है.

आशा ने अपने फोन में मोनू का नंबर पंडित के नाम से सेव कर रखा था. मोनू का पूरा नाम मोनू उपाध्याय उर्फ मोनू पंडित था. उस नंबर पर आशा के दिन में कई बार कौल करने के रिकौर्ड दर्ज थे. इस पर राजाराम चुप नहीं बैठा. उस ने फोन में सबूत दिखाते हुए नाराजगी दिखाई. साफ लहजे में समझाया कि उस का किसी गैरमर्द के साथ प्रेम संबंध रखना इज्जत नीलाम करने जैसा है. इस का असर उस के बच्चों और परिवार पर होगा. इसलिए यह सब छोड़ कर अपनी नौकरी और परिवार पर ध्यान दे. इस का असर आशा पर हुआ. उस ने पति से माफी मांगी. गलती सुधारने का मौका मांगा. कसम खाई कि वह अब मोनू से बात तक नहीं करेगी.

राजाराम ने अगला कदम उठाते हुए आशा की फैक्ट्री से नौकरी छुड़वा दी. उन दिनों वह भी उसी फैक्ट्री में काम करता था. उस ने भी वहां से नौकरी छोड़ कर आदित्य सोलर कंपनी में नौकरी जौइन कर ली. आशा का मोबाइल भी उस ने अपने कब्जे में ले लिया. इस की जानकारी जब मोनू को हुई, तब वह आगबबूला हो गया. वह आशा से बात करने के लिए तड़पने लगा. उस ने राजाराम को आशा के प्यार का रोड़ा मान लिया. उसे राजाराम पर बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन वह उस के खिलाफ कुछ करने में विवश था.

अचानक उसे आशाराम मीणा उर्फ गोलू का खयाल आया. वह आशा का देवर था. गोलू को अपनी भाभी आशा और मोनू के बीच प्रेम संबंध के बारे में जानकारी हो चुकी थी. यही कारण था कि मोनू ने जब आशा से बात करवाने को कहा, तब उस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. गुस्से में मोनू ने गोलू को धमकी दी. कहा कि इस का अंजाम पूरे परिवार को भुगतना होगा, किंतु मोनू का यह प्रयास भी विफल हो गया. फिर तो वह और भी तड़प उठा. उस के बाद वह 26 वर्षीय राजाराम मीणा को ही रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा. दूसरी तरफ जब से मोनू ने गोलू को धमकी दी थी, तब से आशाराम और राजाराम दोनों भाई सतर्क हो गए थे. खासकर आशा के घर से निकलने पर परिवार का कोई न कोई सदस्य उस के साथ हमेशा रहने लगा था.

24 वर्षीय आशा मीणा अपने पति, 4 साल के बेटे, भाई आशाराम मीणा और बहन मीनाक्षी के साथ जोतवाड़ा के शांति विहार में रहती थी. वैसे वे मूलरूप से जयपुर जिले के चाकसू तहसील में कोटखावदा के रहने वाले थे. आशा राजाराम और गोलू जिस कुरती फैक्ट्री में काम करते थे, वहीं यूपी के आगरा जिले के बंडपुरा गांव का रहने वाला मोनू उपाध्याय उर्फ मोनू पंडित भी काम करता था. सांगानेर में मोनू और आशा के घर के बीच की दूरी करीब आधे किलोमीटर की थी. मोनू किराए के मकान में अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ रहता था. वह कई साल पहले आगरा से आ कर जयपुर काम करने लगा था.

मोनू के दिलोदिमाग पर आशा छाई हुई थी. वह रातदिन उस की याद में तड़पता रहता था. किंतु जनवरी, 2025 के पहले सप्ताह में जब से आशा का मोबाइल फोन पति ने अपने कब्जे में लिया था, तब से मोनू उस से बात करने तक को तरस गया था. आशा की जुदाई और ऊपर से उस पर लगी पहरेदारी से उस की स्थिति पागलों जैसी हो गई थी. उस की रातों की नींद गायब हो चुकी थी. दिन में बावलों की तरह घूमता रहता था. आशा पर भले ही कई पाबंदियां लगी थीं, लेकिन कई बार उसे अकेले में घर से निकलना ही होता था. इसी सिलसिले में 22 जनवरी, 2025 को वह अपने बेटे को स्कूल से लेने के लिए घर से अकेली निकली जरूर थी, लेकिन गोलू काफी पीछे से उस पर नजर रखे हुए था. अचानक मोनू की नजर आशा पर पड़ी. आशा से बात करने की चाहत में वह उस के पीछेपीछे हो लिया.

किंतु जैसे ही उस की निगाह गोलू पर पड़ी वह सहम गया, तुरंत खुद को संभालते हुए गोलू को धमका कर अपनी राह चल दिया. इस घटना की आशा को भनक तक नहीं लगी, लेकिन जब वह बच्चे को ले कर घर आई, तब गोलू ने उसे और पति को मिली धमकी के बारे में बताते हुए और अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी. मोनू अब इस उधेड़बुन में रहने लगा था कि राजाराम को रास्ते से कैसे हटाया जाए, ताकि वह आशा को हासिल कर सके. अंतिम निर्णय लिया, क्यों न उसे गोली मार दी जाए? इसी के साथ अगला सवाल उठा कि गोली दागने का इंतजाम कैसे होगा? उस ने इस का भी हल निकाल लिया.

दिमाग में विचार आया, ‘क्यों न पिस्तौल ही खरीद ली जाए…देसी कट्टा ही सही!’ फिर क्या था, इस बारे में प्रयास तेज कर दिया. पता चला कि धौलपुर में उसे पिस्तौल मिल सकती है. अगले दिन 23 जनवरी, 2025 को ही मोनू धौलपुर के बसेड़ी गांव गया और 50 हजार रुपए में एक देसी पिस्तौल और कारतूस खरीद लाया. तब तक शाम हो चुकी थी. उस ने फैक्ट्री में साथ काम करने वाले अपने दोस्त प्रदीप को वीडियो कौल के जरिए पिस्तौल दिखाई. उस से कहा, ”आशा मुझ से बात नहीं करेगी, तब मैं उस के पति राजाराम मीणा को इसी पिस्तौल से मार दूंगा.’’

प्रदीप को वीडियो कौल से पिस्तौल दिखाने का मकसद उस की धमकी को राजाराम तक पहुंचाने का था. हालांकि प्रदीप ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था. 24 जनवरी, 2025 की सुबहसुबह मोनू ने राजाराम के मोबाइल पर कई कौल कीं, लेकिन उस का मोबाइल साइलेंट मोड पर होने के कारण कौल का पता नहीं चला. उस के बाद मोनू ने गोलू को कौल कर उसे राजाराम को कई कौल करने की बात बताई. उस ने मोनू को कौलबैक की और बताया कि वह घर पर है. थोड़ी देर बाद उस का भाई गोलू ड्यूटी पर चला गया.

उसी रोज 24 जनवरी, 2025 को मोनू पिस्तौल ले कर दोपहर करीब साढ़े 12 बजे राजाराम के घर के बाहर जा पहुंचा. काफी समय तक घर के बाहर मंडराता रहा. कभी कमर मेें खोंस कर रखे पिस्तौल को टटोलने लगता तो कभी मोबाइल पर नंबर सरकाने लगता. उस की स्थिति एक विक्षिप्त जैसी थी. उस ने राजाराम मीणा को कौल की. उस की कौल का जवाब राजाराम ने चिढ़ते हुए दिया, ”बोलो, क्या बात है? क्यों सुबह से मुझे कौल कर के तंग कर रहे हो?’’

जवाब में मोनू बोला, ”घर आओ, तुम से जरूरी बात करनी है. मैं तुम्हारे साथ दुश्मनी रख कर एक ही मोहल्ले में भला कैसे रह पाऊंगा?’’

राजाराम को भी न जाने क्या सूझी, वह मोनू के कहने पर घर आ गया. पीछे से ताक लगाए मोनू भी राजाराम के घर में घुस आया. उस वक्त घर पर आशा और उस की विवाहित बहन मीनाक्षी मौजूद थी. वह अपने मायके आई हुई थी. मोनू ने उस से कहा कि बाहर उस की सहेली बुला रही है. उस के कहे पर मीनाक्षी बाहर चली गई, किंतु वहां सहेली को नहीं पा कर सामने उस के घर ही चली गई. राजाराम मोनू को ले कर घर के पिछले हिस्से में बने कमरे में ले कर चला गया. वहीं आशा भी आ गई. राजाराम के कुछ भी बोलने से पहले मोनू ही कड़े तेवर के साथ बोला, ”राजाराम, तूने आशा को मुझ से बात करने से क्यों मना किया?’’

उस के कड़े रुख को देखते हुए राजाराम नरमी के साथ बोला, ”देख मोनू, तू बालबच्चे वाला है, मैं भी बालबच्चेदार हूं…ऐसे में तू जो चाहता है वह कैसे हो सकता है? समाजपरिवार भी कुछ होता है या नहीं?’’

”मुझे अच्छेबुरे की तुझ से ज्यादा समझ है… प्यारमोहब्बत भी तो कुछ होता है कि नहीं…इस पर दुनियाजहान टिकी हुई है.’’ मोनू ने तर्क दिया.

”लेकिन तुम जो चाहते हो, वह सरासर गलत है…और जब आशा ही तुम से बात नहीं करना चाहती, तब तुम क्यों उस के पीछे पड़े हो?’’ अब राजाराम भी उस की तरह गर्म लहजे में बोला.

आशा ने बीचबचाव करने की कोशिश की, लेकिन कुछ सेकेंड में ही बात बिगड़ती चली गई. उन तीनों के बीच गरमागरम बहस छिड़ गई. यहां तक कि मोनू और राजाराम एकदूसरे को धमकाने लगे…और उन के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई. आशा बीचबचाव करने लगी. मोनू उसे परे धकेलता हुआ बोला, ”तुम हट जाओ…आज में इसे हमेशा के लिए हटा कर रहूंगा.’’

आशा को जोर का धक्का लगा था, जिस से वह थोड़ी दूर जा कर गिर पड़ी. इस बीच मोनू ने कमर में खोंस कर रखी पिस्तौल राजाराम मीणा की कनपटी पर सटा दी. आशा चीखी, बचाने की गुहार लगाई…किंतु तब तक तो मोनू के सिर पर आक्रामकता का भूत सवार हो चुका था. सेकेंड भर में ही उस ने गोली दाग दी, राजाराम मीणा धड़ाम से वहीं गिर गया. आशा अवाक रह गई!

किंतु जल्द ही वह चीखती हुई मोनू को मारने के लिए उस की तरफ दौड़ पड़ी. मोनू आशा के विरोधी तेवर को देख कर डर गया. उस ने महसूस किया कि आशा को पति की मौत का जबरदस्त सदमा लगा है, इसलिए उस की विरोधी बन चुकी है. उसे पुलिस में पकड़वा सकती है. आशा जैसे ही पास आई, उस ने तुरंत उस की कनपटी पर भी पिस्तौल रख कर गोली दाग दी. आशा भी राजाराम की तरह जमीन पर गिर पड़ी. उस के बाद मोनू फरार हो गया.

इस तरह एक घर में डबल मर्डर की घटना हो गई थी. दोनों रक्तरंजित लाशें जमीन पर पड़ी थीं. जब मीनाक्षी घर आई, तब वह भाई और भाभी की लाश देख कर घबरा गई. उस वक्त राजाराम का बेटा स्कूल में था. मीनाक्षी ने सब से पहले अपने भाई गोलू को इस की सूचना दी. वह भागाभागा घर आया. इस घटना की खबर आग की तरह पूरे मोहल्ले में फैल गई. गोलू पड़ोसियों की मदद से राजाराम और आशा को नारायण अस्पताल ले गया. वहां डौक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया.

दोपहर ढाई बजे सदर थाना सांगाने को इस वारदात की सूचना मिल गई. इंसपेक्टर  नंदलाल चौधरी दलबल के साथ अस्पताल पहुंचे. घटना की तहकीकात डौक्टरी जांच के आधार पर की, उस के बाद पुलिस घटनास्थल पर गई. इस बीच दोहरे हत्याकांड में मोनू पंडित का हाथ होने की जानकारी मिली. उस के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया. इस घटना की जानकारी एसएचओ नंदलाल चौधरी ने अपने आला अधिकारियों को भी दी. मौके पर डीसीपी (साउथ) दिगंत आनंद अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.

एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया. जांच टीम ने वहां से साक्ष्य एकत्रित किए. कमरे में बिखरे खून के नमूने लिए. वहीं से खाली कारतूस भी मिले. घटना के बारे में मृतकों के परिजनों में आशाराम मीणा उर्फ गोलू और मीनाक्षी से तमाम तरह की जानकारियां जुटाई गईं. गोलू ने साफतौर पर कहा कि मोनू ने उसे राजाराम को मारने की धमकी दी थी. वह आशा से प्रेम करता था, जिस का राजाराम ने विरोध जताया था.

इस दोहरे हत्याकांड में मुख्य आरोपी मोनू उपाध्याय उर्फ मोनू पंडित फरार हो गया था. उस के घर में तलाशी ली गई, लेकिन वह दूसरे शहर के लिए निकल चुका था. उस के फेमिली वालों को न तो किसी तरह के प्रेमप्रसंग की जानकारी थी और न ही इस तरह की घटना को ले कर कभी संदेह हुआ था. एडिशनल डीसीपी ललित शर्मा के नेतृत्व में पुलिस की टीमें हत्यारे का पता लगाने में जुट गई थीं. घटनाक्रम से पहले वही व्यक्ति था, जो आशा और राजाराम से घर पर बातचीत के लिए आया था.

तीनों के बीच क्या बातें हुईं और पूर्व में किस तरह का कैसा विवाद था? इस बारे में मृतक के परिजनों और फैक्ट्री में काम करने वाले कारीगरों से पूछताछ की गई. उस के पकड़े जाने पर ही वारदात का पूरी तरह से खुलासा हो पाएगा. मोनू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने पहले उस के मोबाइल नंबर से लोकेशन का पता लगाई. इसी के साथ पूरे इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. एक फुटेज में मोनू आगरा जाने वाली बस में सवार होता हुआ दिख गया. उस आधार पर पुलिस टीम ने दौसा आगरा की तरफ रुख किया. उस का मोबाइल फोन भी सर्विलांस पर था.

उस ने जैसे ही फोन को औन किया, उस की लोकेशन दौसा की मिल गई. उस आधार पर 25 जनवरी, 2025 की रात को उसे दौसा से महुवा जाने के क्रम में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. अगले दिन 26 जनवरी को उसे सांगनेर सदर थाने लाया गया. उस से सख्ती से पूछताछ की गई. उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस से पुलिस ने दोनों हत्याओं में प्रयुक्त हुई देसी पिस्तौल भी बरामद कर ली. मोनू को उसी रोज कोर्ट में पेश किया गया, वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Rajasthan Crime News