UP News : छलिया प्रेमी को पहचानना जरूरी

UP News : ज्यादातर महिलाएं प्यार की कद्रदान होती हैं. जब वह एक बार किसी पुरुष को अपने दिल में बसा लेती हैं तो उस का साथ ताउम्र चाहने की लालसा रखती हैं, लेकिन पुरुष उस के साथ दगा करने से नहीं चूकता. जब कभी उस महिला का दिल टूटता है तो वह कुछ भी करने से नहीं झिझकती. पढ़ें, हवस में अंधे पुरुषों से धोखा खाई महिलाओं की यह दिलचस्प कहानी…

उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना गुरबख्शगंज के एसएचओ प्रवीण गौतम ने गीता को समझाते हुए कहा, ”अगर तुम्हारे साथ कुछ गलत हुआ है तो मुझे बताओ. मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि मुझ से जितना हो सकेगा, मैं तुम्हारी मदद करूंगा.’’

एसएचओ का इतना कहना था कि गीता फफकफफक कर रोने लगी. रोते हुए ही उस ने कहा, ”क्या करती साहब, जवान बेटी की इज्जत का सवाल था. अगर मैं उसे मार न डालती तो वह मेरी बेटी की जिंदगी को नरक बना देता. मजबूर हो कर मुझे उस की हत्या करनी पड़ी.’’

एसएचओ ने गिलास का पानी गीता की ओर बढ़ाते हुए कहा, ”यह लो पहले पानी पियो. मन को थोड़ा शांत करो, उस के बाद बताओ कि मेड़ीलाल ने तुम्हारे साथ या तुम्हारी बेटी के साथ ऐसा क्या किया कि तुम्हें उस की हत्या करनी पड़ी?’’

एसएचओ के हाथ से पानी का गिलास ले कर गीता ने थोड़ा पानी पिया. खाली गिलास सिपाही को पकड़ा कर साड़ी के पल्लू से मुंह और आंखें पोंछ कर सिसकते हुए गीता अपनी दुखभरी कहानी सुनाने लगी. गीता ने एसएचओ को अपनी जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी. हरियाणा की रहने वाली गीता की शादी दयाशंकर से हुई थी. दयाशंकर ठीक आदमी नहीं था. इसलिए गीता पति से परेशान रहती थी, लेकिन कोई ढंग का सहारा न मिलने की वजह से वह किसी तरह उस से निभा रही थी. दूसरों के घर काम कर के वह किसी तरह जीवन काट रही थी. उसी बीच उसे एक बेटी हो गई, जिस का नाम उस ने रोशनी रखा.

उसे लगा कि रोशनी के आने के बाद शायद उस के जीवन में रोशनी आ जाए, पर उस के जीवन में वैसा ही अंधेरा बना रहा. धीरेधीरे रोशनी बड़ी होने लगी, पर गीता के जीवन में वैसा ही अंधेरा बना रहा. अचानक एक दिन उस के जीवन में उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना गुरबख्शगंज के गांव दाउदपुर रामनगर का रहने वाला मेड़ीलाल आया. रोजीरोटी की तलाश में मेड़ीलाल हरियाणा गया था. जबकि उस का परिवार गांव में ही रहता था. गीता ने जब अपनी दुखभरी कहानी मेड़ीलाल को सुनाई तो उसे गीता से सहानुभूति हो गई और वह गीता की हर तरह से मदद करने लगा.

मेड़ीलाल पत्नी और बच्चों से दूर अकेला रहता था. गीता से मुलाकात होने के बाद मेड़ीलाल जब काम से घर आता तो गीता उसे एक गिलास पानी ही नहीं चाय भी बना कर देने लगी. मेड़ीलाल भी हर तरह से गीता का खयाल रखने लगा था. गीता जहां पति के प्यार से वंचित थी, वहीं मेड़ीलाल भी पत्नी से दूर था. दोनों को प्यार की नहीं, शरीर की भूख सताती थी. इसलिए उन्हें नजदीक आने में देर नहीं लगी. नजदीकी बढ़ी तो दोनों एक साथ रहने लगे, जिसे आज लिवइन कहा जाता है. मेड़ीलाल गीता की बेटी का भी खयाल रखता था. उस की पढ़ाई का खर्च उठाने के साथसाथ उस की हर जरूरत पूरी करता था. गीता की बेटी तब यही कोई 14 साल की थी.

सब कुछ बढिय़ा चल रहा था. गीता का साथ पाने के बाद मेड़ीलाल घर और परिवार को लगभग भूल सा गया था. शायद वह गांव लौट कर आता भी न. पर जब देश में कोरोना फैला तो बहुत लोगों के रोजगार चले गए. उन्हीं में एक मेड़ीलाल भी था. कोरोना की वजह से काम बंद हुआ तो मेड़ीलाल ने गांव लौटने का विचार किया. जब वह गांव जाने के लिए तैयार हुआ तो गीता ने कहा, ”तुम गांव चले जाओगे तो मेरा क्या होगा? मैं अकेली पड़ जाऊंगी. इतने दिन साथ रहने के बाद अब में तुम्हारे बिना रह नहीं पाऊंगी.’’

मेड़ीलाल जहां 55 साल का था, वहीं गीता 35 साल की थी. उस की पत्नी भी बूढ़ी हो चुकी थी. इस के अलावा गीता उस की पत्नी से सुंदर भी थी. यही सब सोच कर उस ने गीता से कहा, ”तुम ने ऐसा कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हें छोड़ कर अकेला गांव जाऊंगा. अब तो जहां मैं रहूंगा, वहीं तुम्हें भी रखूंगा.’’

इस के बाद परिणाम की चिंता किए बगैर मेड़ीलाल गीता और उस की बेटी रोशनी को साथ ले कर गांव आ गया. मेड़ीलाल गीता के साथ घर पहुंचा तो घर में बवाल हो गया. फेमिली वालों ने गीता और रोशनी को घर में रखने से साफ मना कर दिया. मेड़ीलाल का गांव के बाहर थोड़ा खेत था, उसी में उस ने गीता के लिए झोपड़ी डाल दी. गीता के रहने की व्यवस्था हो गई. खर्च भी मेड़ीलाल ही उठाता था. वह कभी घर में रहता तो कभी गीता के साथ. इसी तरह समय बीतता रहा.

रोशनी का दाखिला यहां भी गीता ने एक स्कूल में करा दिया था. गीता अब तक 12वीं पास कर चुकी थी. उस की उम्र भी 19 साल हो गई थी. देखा जाए तो अब वह जवान हो गई थी. ऐसे में ही किसी दिन मेड़ीलाल की नजर उस पर पड़ी तो उस की नीयत बदल गई. फिर क्या था, वह बेटी की तो क्या पोती की उम्र की रोशनी के पीछे हाथ धो कर पड़ गया. मेड़ीलाल को लगता था कि वही उसे खिलातापिलाता है तो वह जो चाहेगा, उस के साथ कर लेगा. लेकिन रोशनी ने उसे छूने नहीं दिया. एक दिन तो उस ने हद ही कर दी. उस दिन उस ने उस के नाजुक अंगों पर हाथ लगा दिया.

मेड़ीलाल की इस हरकत पर रोशनी को गुस्सा आ गया. उस ने कह भी दिया, ”आज के बाद इस तरह की हरकत की तो ठीक नहीं होगा.’’

मेड़ीलाल को इस के बाद पीछे हट जाना चाहिए था. पर उस की मम्मी गीता को उस ने रखैल बना रखा था, इसलिए उसे लगता था कि बेटी भी वैसी ही होगी. आज नखरे कर रही है, पर कभी न कभी समर्पित ही हो जाएगी. पर ऐसा हुआ नहीं. उस ने उसी दिन मेड़ीलाल की शिकायत मम्मी से कर दी. प्रेमी की इस हरकत पर गीता सोच में पड़ गई. बेटी की जिंदगी का सवाल था. उसी का प्रेमी उस की बेटी की जिंदगी नरक बनाने पर तुला था. गीता जानती थी कि मेड़ीलाल समझाने से नहीं मानेगा. क्योंकि अब तक वह उस के स्वभाव से अच्छी तरह परिचित हो चुकी थी. इसलिए उस ने बेटी से सलाह कर के उसे खत्म करने का निर्णय ले लिया.

यह निर्णय लेने के बाद गीता मेड़ीलाल से मिली और उसे लालच दिया कि शाम को वह उस के घर आ जाए. रात में पार्टी करेंगे. उस के बाद रोशनी को समझाबुझा कर वह उस के पास भेज देगी. मेड़ीलाल तो यही चाहता था. रात होते ही वह शराब की बोतल ले कर गीता के घर पहुंच गया. गीता और रोशनी ने मेड़ीलाल को जम कर शराब पिलाई. जब वह विरोध करने की स्थिति में नहीं रहा तो गीता और रोशनी ने पहले तो लाठीडंडे से मेड़ीलाल की खूब पिटाई की. ज्यादा डंडे उस के सीने पर ही मारे, जिस से उस की पसलियां टूट गईं. उस के गुप्तांग पर भी डंडों से मारा. मार खातेखाते जब मेड़ीलाल बेहोश हो गया तो गीता और रोशनी ने चुन्नी से उस का गला घोंट दिया.

मेड़ीलाल का खेल खत्म कर गीता और रोशनी ने उस की लाश एक चादर में लपेटी और अपने घर से करीब 100 मीटर दूर ले जा कर झाडिय़ों में फेंक दी. इस के बाद अपने घर आ कर मांबेटी सो गईं. सवेरा होने पर देर तक मेड़ीलाल घर नहीं आया तो उस की खोज शुरू हुई. गांव में इधरउधर तलाशा गया, गीता के घर भी जा पर पूछा गया, लेकिन मेड़ीलाल का कुछ पता नहीं चला. दोपहर के करीब किसी व्यक्ति ने झाडिय़ों के बीच लाश देखी तो उस ने शोर मचाया तो गांव वालों ने उस लाश की शिनाख्त मेड़ीलाल के रूप में की. मेड़ीलाल के बेटे सुशील कुमार ने थाना गुरबख्शगंज जा कर पिता की हत्या की सूचना पुलिस को दी.

सूचना मिलते ही एसएचओ प्रवीण गौतम, सीओ (लालगंज) पुलिस बल एवं फोरैंसिक टीम के साथ गांव दाउदपुर रामनगर पहुंच गए. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया. उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर परिवार के लोगों तथा गांव वालों से पूछताछ शुरू की. जब उस के चरित्र के बारे में पूछा तो गीता का नाम पुलिस के सामने आया. तब पुलिस गीता से पूछताछ करने लगी. पहले तो गीता पुलिस को इधरउधर की कहानियां सुनाती रही, पर उस की बौडी लैंग्वेज और बारबार झूठ बोलने पर पुलिस को शक हुआ तो पुलिस ने उसे विश्वास में लेने की कोशिश की. उस से कहा गया कि अगर वह सब कुछ सचसच बता देगी तो जितना हो सकेगा, पुलिस उस की मदद करेगी. इस के बाद गीता ने रोते हुए मेड़ीलाल की हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए उस की हत्या की सारी कहानी सुना दी.

मेड़ीलाल की हत्या की सच्चाई जान कर पुलिस का मन भी द्रवित हो उठा, लेकिन अपराध तो अपराध है. गीता ने अपराध किया था, इसीलिए पुलिस ने उस के साथ उस की 19 साल की बेटी रोशनी को भी गिरफ्तार कर लिया. इसी के साथ वह चुन्नी भी बरामद कर ली, जिस से मेड़ीलाल का गला घोंटा गया था. उन डंडों को पुलिस ने बरामद कर लिया, जिन से मेड़ीलाल की पिटाई की गई थी. सारे सबूत जुटाने के बाद एसपी आलोक प्रियदर्शी ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर के पत्रकारों को मेड़ीलाल की हत्या का खुलासा करते हुए आरोपियों के गिरफ्तार करने की सूचना दी. अगले दिन मांबेटी को रायबरेली की अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

यह ऐसी सत्य घटना थी, जिस में एक मां गीता ने अपनी बेटी की इज्जत बचाने के लिए अपने प्रेमी और पालनहार की जान ले ली. लेकिन दूसरी जो घटना गोरखपुर की है, उस में अपनी हवस मिटाने के लिए एक सुनीता ने बेटी को फंदे से लटकाने वाले प्रेमी को बचाने की कोशिश की. गोरखपुर का एक थाना है कैंपियरगंज. इसी थाने के अंतर्गत एक परिवार रहता था, जिस के मुखिया मुंबई में रहते थे. पत्नी सुनीता और 15 साल की बेटी रजनी गांव में ही रहती थी. बेटी 9वीं क्लास में पढ़ती थी. पति के बाहर होने की वजह से घर और बाहर के सारे काम सुनीता ही देखती थी. इन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिस का दूध बेच कर कुछ पैसे कमा लेती थीं. इस के अलावा पति कुछ पैसे भेज देता था, जिस से मांबेटी का गुजारा आराम से हो जाता था.

गाय के लिए भूसे की जरूरत पड़ती थी. भूसा थाना पीपीगंज के अंतर्गत आने वाले गांव जंगल अगही के रहने वाले सुनील गौड़ से खरीदती थीं. जब भी इन्हें भूसे की जरूरत पड़ती, वह सुनील गौड़ को फोन कर देतीं, सुनील भूसा पहुंचा देता था. अगर पैसे होते तो उसी समय दे देतीं, न होते सुनील को बाद में ले जाने के लिए कह दिया जाता. सुनील को भी ऐतराज नहीं होता, क्योंकि वह हमेशा उसी से भूसा लेती थीं. सुनीता अभी जवान थी. पति परदेश में रहता था. साल, डेढ़ साल में महीने, 2 महीने के लिए आता था और फिर वापस चला जाता था. इतने दिनों में उस की पति के साथ रहने की हसरतें अधूरी ही रह जाती थीं. जबकि सुनीता चाहती थी कि उस का पति हमेशा उस के साथ रहे.

प्यार की भूखी सुनीता के घर जब सुनील का आनाजाना बढ़ा तो वह उस में पति वाला प्यार ढूंढने लगी. सुनील जवान और कुंवारा था, इसलिए वह किसी भी औरत के प्यार की तलाश में रहता था. सुनील को सुनीता की आंखों में अपने लिए प्यार दिखाई दिया तो उसे उस के करीब आते देर नहीं लगी. क्योंकि आग दोनों ओर लगी थी. सुनीता और सुनील के बीच संबंध बने तो जब देखो, तब सुनील सुनीता के घर आनेजाने लगा. घर में कोई मर्द तो था नहीं कि रोकटोक होती, इसलिए सुनील कभीकभी रात को भी सुनीता के घर रुक जाता.

सुनीता की बेटी रजनी नाबालिग जरूर थी, पर इतनी भी छोटी नहीं थी कि उसे यह न पता चलता कि उस की मम्मी और सुनील के बीच क्या चल रहा है. कुछ दिनों तो वह चुप रही, लेकिन जब बात हद से ज्यादा बढ़ी तो वह मम्मी के इस संबंध का विरोध करने लगी. वह सुनील को अपने घर आने से रोकने लगी. इस से सुनील को भी परेशानी होने लगी और सुनीता को भी. क्योंकि न तो सुनीता सुनील को छोडऩा चाहती थी और न ही सुनील सुनीता को. जब इस मामले पर सुनीता और सुनील ने सलाह की तो उन्होंने इस का एक ही हल निकाला कि रजनी को भी इस की लत लगा दी जाए. उस के बाद न तो वह किसी से इस बात की शिकायत कर सकेगी और न ही विरोध कर सकेगी.

फिर क्या था, सुनील तो चाहता ही यही था. रजनी अभी कुंवारी थी. हर मर्द ऐसी लड़कियों को पाना चाहता है. सुनील गौड़ प्रेमिका सुनीता की बेटी रजनी पर भी डोरे डालने लगा. सुनीता की ओर से उसे पूरी छूट थी, इसलिए वह उस से शारीरिक छेड़छाड़ भी करने लगा. इस तरह जल्दी ही रजनी सुनील के जाल में फंस गई और अपना सब कुछ सुनील को दे बैठी. फिर तो सुनील की चांदी हो गई. वह मांबेटी से संबंध बनाता. यह सब इसी तरह चलता रहा. सुनीता के सुनील से संबंध केवल शारीरिक भूख मिटाने के लिए थे. पर रजनी को तो सुनील से प्यार हो गया था. जबकि उसे पता था कि सुनील के उस की मम्मी से भी संबंध हैं.

इस के बावजूद वह सुनील को इस कदर चाहने लगी कि उसे लगने लगा कि वह सुनील के बगैर नहीं रह सकती. इसलिए वह सुनील पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. जबकि सुनील ने केवल मौजमजे के लिए मांबेटी से संबंध बनाए थे. रजनी पहले तो सुनील से ऐसे ही विवाह के लिए कहती रही. पर जब देखा कि सुनील गंभीर नहीं है तो वह उस के पीछे पड़ गई. जब सुनील के लिए रजनी गले की हड्डी बनने लगी तो वह परेशान रहने लगा. उस ने यह बात अपने ही टोले के रहने वाले अपने दोस्त दुर्गेश यादव को बताई तो उस ने साफ कहा, ”अगर प्रेमिका गले की हड्डी बन रही है तो निकाल फेंको, वरना तुम्हारी ही जान ले लेगी.’’

इस के बाद सुनील रजनी को रास्ते से हटाने के बारे में सोचने लगा. आखिर एक दिन उसे मौका मिल गया. सुनीता के किसी रिश्तेदार की मौत हो गई थी. पति बाहर था, इसलिए संवेदना व्यक्त करने उसे ही जाना पड़ा. बेटी को घर में अकेली छोड़ कर वह रिश्तेदार के यहां संवेदना व्यक्त करने चली गई. शाम को सुनीता लौट कर आई तो उसे बेटी रजनी की साड़ी से लटकी लाश मिली. रोते हुए उस ने यह बात पड़ोसियों को बताई तो मोहल्ले की तमाम महिलाएं व पुरुष संवेदना व्यक्त करने पहुंच गए. उसी दौरान किसी पड़ोसी ने यह जानकारी थाना कैंपियरगंज पुलिस को दे दी.

पहली नजर में पुलिस को लगा कि यह सुसाइड का मामला है, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि यह सुसाइड का मामला नहीं, बल्कि रजनी की गला दबा कर हत्या की गई थी. यही नहीं, हत्या से पहले उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाया गया था. पुलिस चौंकी, क्योंकि रजनी अभी नाबालिग थी. पुलिस को शुरुआती जांच में घर में जोरजबरदस्ती के कोई निशान नहीं मिले थे. मां सुनीता से भी पूछताछ की गई कि लड़की का किसी से प्रेमसंबंध तो नहीं था?

सुनीता ने भी मना कर दिया. तब पुलिस ने घर के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस काल डिटेल्स से पता चला कि इस नंबर से एक नंबर पर रोजाना लंबीलंबी बातें होती थीं. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर थाना पीपीगंज के गांव जंगल अगही के टोला भरवल के रहने वाले सुनील गौड़ का निकला. पुलिस ने सुनील को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू की तो हर अपराधी की तरह उस ने भी पहले इधरउधर की कहानियां सुनाईं. लेकिन जब पुलिस अपनी पर आई तो उस ने सारी सच्चाई उगल दी. उस ने रजनी की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया और रजनी से शारीरिक संबंध बनाने से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी सुना दी.

रजनी सुनील पर विवाह के लिए दबाव डाल रही थी, इसलिए सुनील अब उस से पीछा छुड़ाना चाहता था. 26 सितंबर को जब सुनील को पता चला कि रजनी घर में अकेली है तो वह अपने दोस्त दुर्गेश यादव के साथ उस के घर पहुंच गया. पहले तो उस ने रजनी के साथ शारीरिक संबंध बनाए. इस के बाद जब रजनी ने विवाह की बात की तो उस ने विवाह करने से साफ मना कर दिया. फिर तो रजनी बिफर उठी और सुनील से उलझ गई. पीछा छुड़ाने के लिए सुनील ने रजनी की गला दबा कर हत्या कर दी.

इस बीच दुर्गेश घर के बाहर बैठा निगरानी करता रहा. हत्या करने के बाद सुनील ने दुर्गेश को अंदर बुलाया और उस की मदद से आंगन में फैली सुनीता की साड़ी में फंदा बना कर रजनी की लाश को लटका दिया, ताकि लगे कि रजनी ने आत्महत्या की है. अपना काम कर के दोनों अपनेअपने घर चले गए. रजनी की मम्मी सुनीता को पता था कि यह काम कौन कर सकता है, पर अपना पाप छिपाने के चक्कर में उस ने यह बात पुलिस को नहीं बताई थी.

सुनील गौड़ के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने दुर्गेश यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद एसएसपी गोरखपुर डा. गौरव ग्रोवर ने पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता कर के इस बात की जानकारी दी और थाना कैंपियरगंज में आरोपियों के खिलाफ हत्या और पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर के अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. यह तीसरी घटना है गुजरात के जिला भुज की. भुज का एक थाना है मुंद्रा मरीन. इसी थाने के अंतर्गत आने वाले गांव हमीरमोरा के रहने वालों ने समुद्र के किनारे एक लाश पड़ी देखी. यह जानकारी उन्होंने थाना मुंद्रा मरीन पुलिस को दी तो थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई.

लाश की स्थिति काफी खराब थी. इस से साफ लग रहा था कि हत्या कई दिनों पहले की गई थी. पुलिस ने लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, पर पता चला कि यह महिला वहां की रहने वाली नहीं है. पुलिस ने लाश के फोटो करवा कर वह पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी और थाने आ कर उस की शिनाख्त की कोशिश करने लगी. काफी कोशिश के बाद भी जब लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने फोटो से महिला का स्केच बनवा कर उस के पैंफ्लेट छपवा कर सार्वजनिक स्थानों पर लगवाए, लेकिन इस का भी कोई फायदा नहीं हुआ.

पुलिस ने उस स्थान का मोबाइल का डंप डाटा निकलवाया, जहां वह लाश मिली थी. जब इस डंप डाटा की स्क्रीनिंग की गई तो उस में 2 नंबर ऐसे मिले, जो वहां के रहने वालों के नहीं थे. जब इस बारे में पुलिस ने गांव वालों से पूछताछ की तो गांव के एक आदमी ने बताया, ”जी साहब, कुछ दिनों पहले 3 लोग यहां दिखाई दिए थे, जो यहां के रहने वाले नहीं थे. उन लोगों ने यहां पार्टी वगैरह की थी. उस के बाद चले गए थे.’’

पुलिस को डंप डाटा से बाहर के 2 नंबर मिले थे. इस से पुलिस को लगा कि वे दोनों नंबर उन्हीं लोगों के हो सकते हैं, जो बाहर से आए थे.

इस के बाद पुलिस ने उन लोगों के बारे में पता कराया तो जानकारी मिली कि ये नंबर नवावास के रहने वाले योगेश और नारण के थे. इस के बाद पुलिस ने घटना के लगभग एक महीने बाद लोकेशन के आधार पर योगेश और नारण को उठा लिया. थाने में योगेश और नारण से पूछताछ की तो पहले तो दोनों पुलिस को घुमाने की कोशिश करते रहे. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उन्होंने लक्ष्मी की हत्या की बात स्वीकारते हुए असली कहानी सुनानी शुरू कर दी. पुलिस ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया. फिर जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस तरह थी.

इस कहानी को जानने के लिए 9 साल पीछे जाना होगा. मूलरूप से जूनागढ़ के रहने वाले जितेंद्र भट्ट को 9 साल पहले लक्ष्मी बेकरिया से प्यार हो गया. लक्ष्मी शादीशुदा ही नहीं, 3 बच्चों की मां थी, लेकिन पति से न पटने के कारण उस का झुकाव जितेंद्र की ओर हो गया तो वह पति को छोड़ कर जितेंद्र के साथ रहने लगी थी. उस ने एक बेटे को तो पति के पास छोड़ दिया था, जबकि एक बेटी और एक बेटे चेतन को साथ रख लिया था. बाद में उस ने पति से तलाक ले कर जितेंद्र से विवाह भी कर लिया था.

जब तक बच्चे छोटे थे, तब तक तो जितेंद्र की कमाई से घर का खर्च चलता रहा, लेकिन जब बच्चे बड़े हो गए तो घर का खर्च भी बढ़ गया. अब तक लक्ष्मी भी बच्चों की देखभाल से फुरसत पा गई थी. इस के बाद आमदनी बढ़ाने के लिए वह भी काम की तलाश में बाहर निकली. उसे कोई और काम नहीं मिला तो वह रंगरोगन का काम करने लगी. क्योंकि यह काम उसे आता था. इसी रंगरोगन का काम करने के दौरान उस की मुलाकात योगेश जोतियाना से हुई तो वह उसे दिल दे बैठी. इस के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. फिर तो योगेश लक्ष्मी के घर भी आनेजाने लगा.

जितेंद्र को पता चल गया कि उस की पत्नी का संबंध योगेश से हो गया है, लेकिन योगेश थोड़ा अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए जितेंद्र उस से कुछ कहने या उसे रोकने से घबराता था. दूसरी ओर लक्ष्मी भी पति का कहना नहीं मानती थी. ऐसे में योगेश का जब मन होता, लक्ष्मी के घर आ धमकता. लक्ष्मी के घर आनेजाने में योगेश की नजर लक्ष्मी की नाबालिग बेटी पर पड़ी तो वह अधेड़ लक्ष्मी के सहारे उसे पाने के रास्ता खोजने लगा. वह लक्ष्मी की बेटी पर भी डोरे डालने लगा. जिस घर में अनैतिक काम हो रहा हो, उस घर के बच्चों को बहकते देर नहीं लगती. लक्ष्मी की बेटी भी जल्दी ही योगेश के झांसे में आ गई और उसे अपना सब कुछ सौंप बैठी.

जल्दी ही बेटी और योगेश के संबंधों की जानकारी लक्ष्मी को तो हो ही गई, जितेंद्र को भी हो गई. तब जितेंद्र ने पत्नी को ताना मारा, ”देख लिया न अपनी अय्याशी का नतीजा. तुम्हारी ही वजह से आज नाबालिग बेटी की जिंदगी बरबाद हो रही है.’’

बेटी भले ही लक्ष्मी के पहले पति की थी, लेकिन जितेंद्र का अपना कोई बच्चा न होने की वजह से वह लक्ष्मी के पहले पति के बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानता था. इसलिए बेटी के गलत रास्ते पर जाने की वजह से वह परेशान तो था ही, इस की वजह भी पत्नी लक्ष्मी को मानता था. योगेश और बेटी के संबंधों के बारे में जान कर लक्ष्मी भी परेशान थी. उस ने बेटी को समझाया. पर बेटी नहीं मानी तो उस ने योगेश को घर आने से रोक दिया, लेकिन अब तक बेटी शारीरिक संबंधों की आदी हो चुकी थी और योगेश का भी वही हाल था. अब दोनों के बीच में लक्ष्मी कांटा बन रही थी, इसलिए दोनों ने सलाह की कि लक्ष्मी नाम के इस कांटे को ही निकाल फेंका जाए.

योगेश ने अपने एक दोस्त नारण से बात की तो वह योगेश का साथ देने को तैयार हो गया. 10 जुलाई, 2023 को योगेश ने लक्ष्मी को फोन कर के कहा, ”चलो, कहीं घूम कर आते हैं.’’

पहले तो लक्ष्मी ने मना किया, पर जब योगेश ने मिन्नतें की तो लक्ष्मी साथ चलने को तैयार हो गई. नारण के पास अपनी कार थी. योगेश नारण की कार में लक्ष्मी को बैठा कर थाना मुंद्रा मरीन के अंतर्गत आने वाले गांव हमीरमोरा पहुंचा. पहले तो तीनों ने शराब पी. उस के बाद योगेश ने लक्ष्मी के साथ संबंध बनाए और फिर गला दबा कर उस की हत्या कर दी. लक्ष्मी की हत्या कर उस की लाश को वहीं समुद्र किनारे बालू में दबा कर योगेश और नारण नवावास लौट आए.

समुद्र की लहरों की वजह से लाश के ऊपर की बालू हट गई तो गांव वालों की नजर उस पर पड़ गई और बात पुलिस तक जा पहुंची. इस के बाद काफी प्रयास कर महीनों बाद पुलिस ने लाश की शिनाख्त कर आरोपियों को पकड़ा. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मां की हत्या में नाबालिग बेटी का कितना हाथ है. पुलिस ने जब लक्ष्मी के पति जितेंद्र से पूछा कि उस ने पत्नी की गुमशुदगी क्यों नहीं दर्ज कराई तो जितेंद्र ने कहा, ”साहब, जब मैं ने पहले इसे योगेश से मिलनेजुलने से रोका था, तब इस ने मुझ से कहा था कि उसे मेरे साथ रहना हो तो रहे, वरना चला जाए. उस का जहां मन होगा जाएगी. साहब, इसीलिए मुझे लगा कि वह योगेश के साथ कहीं गई होगी. जब उस का मन भर जाएगा तो वापस आ जाएगी.’’

जितेंद्र के इस बयान में जो दर्द था, उसे सुनने वाले हर व्यक्ति ने महसूस किया. पुलिस ने पूछताछ के बाद योगेश और नारण को जेल भिजवा दिया है. UP News

—कथा में कुछ पात्रों के नाम परिवर्तित हैं

 

 

MP Crime News : बेदर्दी न समझा कोमल दिल की बात

MP Crime News : सैक्स की चाहत के लिए किया गया प्रेम न केवल अनैतिक और विरोध का तानाबाना बुन लेता है, बल्कि प्रेमी युगल को नाजायज और नापाक राह पर ले जाता है. ऐसा ही कुछ 21 वर्षीय रानू मेहर और रामनिवास सोलंकी के साथ हुआ, जिस के बाद…

रामनिवास सोलंकी अपने घर की छत पर अकेला बैठा था. शाम का अंधेरा घिरने में अभी वक्त था. एकदम तन्हाई में डूबा हुआ था. सामने दूर तक गांव का नजारा वहां से दिख रहा था. उस की पतली पगडंडियों पर गाहेबगाहे उस की नजर ठहर जाती थी. वहां इक्कादुक्का लोगों का आनाजाना हो रहा था. उन में अधिकतर गांव की ओर आने वाले ही थे.

अचानक उस की निगाह कंधे से बैग लटकाए एक युवती पर ठहर गई. वह उस की जानीपहचानी थी और गांव से बाहर जाती दिख रही थी. वह उस के बारे में सोचने लगा, ‘रानू मायके कब आई थी? अब कहां जा रही है?…शायद ससुराल?…आई थी तब उस ने मुझे कौल क्यों नहीं की?…पता लगाना होगा कि क्या बात है?’

रामनिवास चाहता तो वहीं से उसे आवाज दे सकता था, लेकिन उस ने अपने मोबाइल से उसे कौल कर दिया. कुछ सेकेंड तक रिंग जाने के बाद कौल डिसकनेक्ट हो गई. उस ने सोचा कि शायद उस का मोबाइल बैग में होगा. उस का अनुमान सही था. देखा युवती कुछ सेकेंड में ही अपने बैग से मोबाइल निकाल चुकी थी.

अगले पल रामनिवास के फोन पर रिंग बजने लगी थी. उस ने तुरंत कौल रिसीव कर ली.

”हां जानू! तुम कब आई…बताया नहीं… मिले बगैर जा रही हो!’’

”आज ही दिन में आई थी…जल्दी लौटना है…फिर आऊंगी.’’ जवाब देने वाली युवती रानू मेहर रामनिवास के गांव की ही थी. तालाब के दूसरी छोर पर उस का मायका था. उन की पुरानी और गहरी जानपहचान थी. उन के बीच सालों से प्रेम संबंध में ताजगी बनी हुई थी, जबकि युवती पास के ही गांव में ब्याही थी. शादीशुदा हो कर भी उस का दिल और दिमाग रामनिवास के दिल में ही अटका हुआ था.

”तो फिर मिली क्यों नहीं?’’ रामनिवास ने मायूसी से शिकायत की.

”क्या करती मिल कर, तुम मेरी बात मानते ही नहीं.’’

”कैसे मान लूं, तुम अब दूसरे की हो!’’

”चलो, अब फोन काटो,’’ बोलते हुए रानू ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

रानू का अचानक फोन कट जाने पर रामनिवास दुखी महसूस करने लगा. सोचने लगा कि आखिर वह उस से चाहती क्या है? मई की तपिश का महीना था. उस की इच्छा हुई कि तालाब के ठंडे पानी में नहा लिया जाए. इसी के साथ उस के मन में कई तरह के खयाल आते रहे. उन में बारबार रानू का चेहरा भी घूमता रहा. उस के साथ गुजारे गए हसीन लम्हों को याद करने लगा. तालाब में तैरते वक्त उसे याद आया कि कैसे उस ने इसी तालाब में रानू को तैरना सिखाने की पहल की थी.

बात 4 साल पहले की है. बरसात का मौसम था. रामनिवास सोलंकी गांव के तालाब में तैराकी कर रहा था. कुछ देर बाद जब वह तालाब से बाहर निकला, तब उस ने देखा कि उसे गांव की ही लड़की रानू मेहर निहार रही है. वह झेंप गया, लेकिन लड़की बोल पड़ी, ”तुम तो बहुत अच्छा तैरना जानते हो… मुझे भी तैरने का बहुत शौक है.’’

”तो सीख लो, किस ने रोका है.’’

”कैसे सीखूं…कोई लड़की तुम्हारी तरह अच्छी तैराक नहीं है.’’

”मैं सिखा दूं?’’

”हां, तुम सिखा दोगे मुझे तैरना!’’ रानू बोली.

”फीस लगेगी.’’ रामनिवास गमछे से अपना अधनंगा बदन पोंछता हुआ बोला.

”क्या फीस लोगे?’’

”तैराकी सिखाने के बाद बताऊंगा.’’

”बाद में मेरी जान मांग ली तो!’’

”तुम जैसी सुंदर लड़की की भला जान कौन मांगेगा?’’

”तो क्या मांगोगे?’’

”दिल?’’

”चल हट… बड़ा आया दिल लेने वाला!’’ रानू बोलती हुई शरमा गई थी.

”तैरना सीखना है तो बोलो, अभी से ही ट्रेनिंग शुरू कर देता हूं.’’

”हांहां सीखना है न, लेकिन डर लगता है…बाबू को मालूम हो गया तो वह मेरा गला घोंट देगा!’’ रानू आशंका जताती हुई बोली.

”बाबू को मालूम होगा तब न! दोपहर में सिखाऊंगा जब बाबू खेतों पर गए होंगे. चलो आ जाओ… पानी में उतरो.’’

”दूसरे कपड़े ले कर आती हूं.’’ रानू बोल कर अपने घर की ओर दौड़ पड़ी.

कुछ मिनटों में ही रानू पौलीथिन बैग में कपड़े ले कर तालाब के किनारे लौट आई थी. चंचल रानू को संभालता हुआ रामनिवास कमर तक पानी में उतर गया था. उस ने उस के दोनों हाथों को पकड़ कर एक झटके में डुबकी लगाई, जिस के लिए रानू शायद पहले से तैयार नहीं थी. जिस से उस के नाकमुंह में पानी घुस गया था. अपना हाथ छुड़ाती हुई दोनों हथेलियों से नाकमुंह में घुस आए पानी को साफ किया. चेहरा पोंछती हुई बोली, ”ऐसे तो तुम मुझे मार ही डालोगे…सांस नहीं ले पा रही थी.’’

”इतने में घबरा गई…यह तुम्हारा पहला सबक था. उस में पास हो गई…अब अगले स्टेप के लिए तैयार हो जाओ!’’ रामनिवास प्यार से बोला.

”लेकिन अचानक से पानी में डुबो दिया था!’’ रानू बोली. उस का कोई जवाब दिए बगैर रामनिवास ने उस की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी दोनों हथेलियों पर उठा लिया. अब उस का चेहरा आसमान की ओर था.

”अपना सिर पानी में डूबने से बचाना है और दोनों पैरों को पानी पर पटकना है…’’

रानू इस निर्देश का पालन करने लगी. कुछ देर बाद रामनिवास ने उसे अचानक छोड़ दिया. तब तक वह और गहरे पानी तक चली गई थी. सीने तक पानी में गिर पड़ी. किसी तरह उस ने खुद को संभाला और रामनिवास से लिपट गई. उसे अजीब सी अनुभूति हुई. किसी मर्द की बाहों में आना 17 साल की रानू का पहला अनुभव था. रामनिवास के लिए भी गीले बदन में रानू को पकड़े रहने का पहला अनुभव था. दोनों कुछ कम पानी में आ गए थे. रामनिवास उस की कमर और पीठ को सहला रहा था, किंतु जल्द ही रानू उस से अलग हो कर पानी से बाहर आ गई. अपने कपड़ों की थैली उठाई और पास की झाड़ी के पीछे चली गई. ओट में जा कर अपने कपड़े बदले और जाने लगी.

कपड़े बदल कर जब वह निकली तो रामनिवास बोला, ”अब और नहीं सीखना है?’’

”आज नहीं.’’ कहती हुई रानू चली गई. उस के जाने के काफी देर बाद तक रानू के शरीर स्पर्श को वह याद करता रहा.

इसी के साथ एक सच यह भी था कि रानू और रामनिवास के दिलों की धड़कनें एकदूसरे के लिए धड़कने लगी थीं.

उस के बाद दोनों का दोपहर में घंटे दो घंटे तक तालाब के पानी में तैरना सीखनेसिखाने का सिलसिला चल पड़ा. वह समय उन के लिए एकदूसरे के साथ पानी में रोमांस करने का भी था. रानू कुछ हफ्ते में ही तैरना सीख चुकी थी. वह रामनिवास की ऐहसानमंद थी कि बगैर कोई फीस दिए उस ने उस से तैरना सीख लिया है. उस के प्रति प्रेम की कोमलता के एहसास से भर गई थी. रामनिवास का भी कमोबेश यही हाल था, लेकिन उस के दिल में प्यार का मतलब रानू की कमसिन देह भर से था. वह उस मौके की ताक में रहने लगा था कि कब रानू उसे अपना सर्वस्व समर्पित कर दे.

जल्द ही उसे वह मौका भी मिल गया. एक दफा जब दोनों एकांत में एकदूसरे की तारीफ करते हुए रोमांस की बातों में मशगूल थे, तब रामनिवास ने अपनी वासना की प्यास बुझाने के लिए रानू को राजी कर लिया था. उस रोज दोनों ने साथ जिएंगे साथ मरेंगे की कसमें भी खाईं. रामनिवास ने रानू के सिर पर हाथ रख कर परिवार और गांव के समाज के विरोध का सामना कर शादी रचाने की सौंगंध ली. उन के बीच महीने 2 महीने नहीं, बल्कि 4 साल तक प्रेम संबंध कायम रहे. हालांकि उन के बारे में गांव में चर्चा भी होने लगी थी, लेकिन कोई खुल कर उन का विरोध नहीं जताता था.

इस दौरान जब भी रानू रामनिवास से मिलती, तब छूटते ही शादी की बात छेड़ देती थी…और फिर उन के बीच एक खटास की भावना भर जाती थी. हालांकि रामनिवास प्रेमिका रानू को शादी का आश्वासन दे कर नई उम्मीद से भर देता था.

इसी बीच दोनों के प्रेम संबंध की सूचना रानू के परिवार तक जा पहुंची. उस के मम्मीपापा रानू के इस व्यवहार से खफा हो गए और वे जल्द से जल्द उस की शादी रचाने की कोशिश में लग गए. पापा ने उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी. उन का प्रयास सफल हुआ और रानू की शादी पास के गांव गरोठ में रहने वाले एक युवक से कर दी गई. शादी के बाद भी विवाहिता रानू मेहर का दिल रामनिवास सोलंकी में लगा रहा.  वह चाहती थी कि वही उस का जीवनसाथी बने. जबकि रामनिवास गांव और परिवार में अपनी इज्जत बनाए रखना चाहता था. वह नहीं चाहता था कि उस के प्यारमोहब्बत के चलते 2 परिवारों के बीच तनाव का महौल कायम हो जाए.

रानू मेहर के मायके में सभी इस बात से निश्चिंत हो गए थे कि रानू का घर बस गया है. उस ने कुंवारेपन में जो गलतियां कीं, अब उस के गांव के रामनिवास से मिलने में किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. वह बेरोकटोक रामनिवास के घर चली जाती, उस की फेमिली वालों के साथ हंसीमजाक करती. इसी तरह रामनिवास भी रानू के मायके आने के बाद उस के घर जा कर एक बार जरूर मिल आता या फिर वे अपने पुराने प्रेम को ताजा करने के लिए तालाब के किनारे घंटों समय गुजार लते थे.

दूसरी तरफ रानू मेहर इसी उम्मीद में रहती थी कि एक न एक दिन रामनिवास सोलंकी जरूर उस के साथ शादी रचाएगा. इस उम्मीद के साथ वह अपने गांव आती रहती थी और रामनिवास से शादी करने का दबाव बनाती थी. जबकि वह कई बार उस से कन्नी काट चुका था. उस के रानू से बचने का कारण भी था. बातोंबातों में वह कई बार धमकी भी दे चुकी थी. वह बोल चुकी थी कि अगर उस ने शादी नहीं की, तब पुलिस के पास चली जाएगी. रेप का मुकदमा कर देगी. हालांकि उस ने बात को संभाल लिया और बोली कि वह मजाक कर रही है. ऐसा वह उस के साथ हरगिज नहीं करेगी.

उस रोज तो बात आईगई हो गई थी, लेकिन रामनिवास के दिमाग में रेप में फंसाए जाने की आशंका के कीड़े ने काटना शुरू कर दिया था. यही कारण था कि वह उस से दूरी बनाए रखना चाहता था. वह रानू को भूलने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन जब वह मायके आती थी, तब उस के उस साथ गुजारे हसीन रोमांस की यादें ताजा हो जाती थीं. उस रोज भी वैसा ही कुछ हुआ था, जब रामनिवास छत पर तन्हा बैठा था और उस से मिले बगैर रानू चली गई थी. वह मन मसोस कर रह गया था. उस के ठीक एक हफ्ते बाद ही 25 मई को रानू फिर मायके आई थी. आते ही सीधे रामनिवास को फोन किया. उसे तुरंत मिलने के लिए बुलाया.

उस वक्त रामनिवास गांव से बाहर गया हुआ था. उस ने 2 घंटे बाद आने को कहा, लेकिन रानू ने मिलने की बेसब्री दिखाई और कहा कि घर से बाहर किसी एकांत जगत पर मिलना चाहती है. इस पर रामनिवास ने तालाब के किनारे रात होने पर मिलने को कहा. उस ने समय तय कर लिया और छिप कर आने को कहा.

रानू ने ऐसा ही किया. वह गांव वालों की नजरों से बचती हुई 25 मई, 2025 की रात करीब 10 बजे तालाब के किनारे ओट ले कर बैठ गई. जल्द ही रामनिवास भी वहां पहुंच गया. आते ही मजाक किया, ”जानू! तैरने चलें!’’

”मजाक मत करो, आज में बहुत सीरियस मूड में हूं.’’

”क्यों, क्या बात हुई, पति से झगड़ कर आई हो?’’ रामनिवास बोला.

पति से तो नहीं, लेकिन तुम से जरूर झगडऩे आई हूं.’’ रानू बोली.

उस के बोलने के अंदाज से रामनिवास को लगा कि उस की मजाक का उस ने गंभीरता से जवाब दिया है. वह कुछ पल के सन्न सा रह गया.

”क्यों तुम से नहीं झगड़ सकती? मैं तुम से बहुत नाराज हूं. तुम से बहुत शिकायत है…’’ रानू बिफरती हुई बोली.

”शिकायत? किस बात की?…मेरी बीवी हो जो तुम्हारी शिकायतों को दूर करूं?’’ रामनिवास भी उसी के लहजे में बोला.

”तुम्हारी यही बात मुझे पसंद नहीं आती…मैं तुम्हारी प्रेमिका हूं…पहली प्रेमिका…मैं ने तुम्हें अपना सब कुछ सुपुर्द कर दिया…और तुम कहते हो मैं क्यों तुम्हारी शिकायत सुनूं?’’ रानू बोली.

”यही कहने के लिए बुलाया था?’’

”किस से कहूं अपने दिल की बात?’’

”पति से?’’

”उसे पसंद नहीं करती! तुम को मेरा पति बनना होगा, वरना मैं तूफान मचा दूंगी….अब और बहाना नहीं चलेगा? बहुत हो गया तुम्हारा आश्वासन!’’ रानू मेहर बोले जा रही थी.

”इस तरह से बात करने की जरूरत नहीं है. मेरी भी मजबूरी है. अभी तुम से शादी नहीं कर सकता. मेरा कोई ठोस काम नहीं है. मुझे गांव में ही रहना है. खेती से आमदनी करनी है. अगर कहीं दूसरे शहर में कामधंधा मिल जाए, तब शादी की बात सोची जा सकती है.’’

”आज तुम अपने वादे से भी मुकर गए.’’

”ऐसा ही समझो…इसी में हम दोनों की भलाई है. हम लोग एक ही गांव के हैं. हम लोगों का घर 10-12 घरों  के अंतर पर है. शादी कर हम लोग इसी गांव में कैसे रह पाएंगे? तुम अब शादीशुदा हो. मैं किसी ब्याहता को कैसे अपनी पत्नी बना सकता हूं. तुम्हारे मायके और ससुराल वाले हम पर मुकदमा ठोक देंगे, तब क्या होगा… कोर्टकचहरी के चक्कर में नहीं पडऩा चाहता.’’ रामनिवास ने अपने मन की बात कह दी. उस ने एक तरह से अपना फैसला ही सुना दिया कि वह अब उस के साथ शादी नहीं कर सकता.

”कोर्टकचहरी के चक्कर में तो ऐसे भी आ जाओगे…उस रोज मजाक में बोली थी, आज वैसा नहीं है…तुम पर रेप का मुकदमा कर दूंगी. सीधे जेल जाओगे.’’ रानू गुस्से में आ गई थी और वहां से जाने के लिए उठ खड़ी हुई थी.

उस की तल्ख बातें सुन कर रामनिवास का दिमाग भन्ना गया था. दिलोदिमाग में तेजाबी तूफान उमडऩे लगा था. उस ने महसूस किया कि उस के हाथपैर बेकाबू हो गए हैं. अगले ही पल रामनिवास के दोनों हाथ रानू मेहर की गरदन को दबोच चुके थे. अचानक इस हमले के लिए रानू तैयार नहीं थी. अपने दोनों हाथों से रामनिवास की पकड़ से मुक्त होने की कोशिश करने लगी, लेकिन उस की बलिष्ठ भुजाओं की मजबूती के आगे असफल रही.

कुछ सेकेंड में ही उस की गरदन झूल गई. उस की मिमियाती आवाज भी बंद हो गई. रामनिवास के हाथों की पकड़ ढीली हुई, तब रानू जमीन पर धड़ाम से गिर पड़ी. सामने गिरी रानू की लाश को रामनिवास ने 2 बार ठोकरें मारी और भुनभुनाया, ”बड़ा आई थी मुझे जेल भेजने…’’

अगले रोज रानू के अचानक लापता हो जाने पर उस के मायके वाले परेशान हो गए. उस के बारे में पता लगाना शुरू किया. उन्हें आश्चर्य हुआ कि वह कभी भी इस तरह घर से बिना कहे कहीं नहीं जाती थी. गांव वालों से पूछताछ की गई. किसी ने उस के बारे में कुछ नहीं बताया. उस के पापा को बहुत चिंता हुई. उन्होंने रानू की ससुराल वालों से उस की तहकीकात की. उन्होंने उस के ससुराल में नहीं होने की पुष्टि की. उस के पति ने गरोठ थाने पर रानू मेहर की गुमशुदगी की सूचना लिखवा दी. जिस के बाद फेमिली वाले और पुलिस उस की तलाश में जुट गए. रानू के घर से लापता होने के 4 दिन बाद भी कहीं पता नहीं चला.

अचानक 29 मई, 2025 को गांधी सागर जलाशय के बैकवाटर से एक अज्ञात महिला की लाश मिली. पुलिस को शक हुआ कि लाश मृतका रानू मेहर की हो सकती है. लाश की पहचान के लिए पुलिस ने मृतका के घर वालों को बुलाया, लेकिन शव की स्थिति इतनी खराब थी कि वे उसे नहीं पहचान पा रहे थे. इसलिए पुलिस ने फेमिली वालों के डीएनए से मृतका के डीएनए की जांच करवाई. रिपोर्ट आने के बाद मृतका की पहचान हो पाई. पहचान होते ही मृतका के पापा ने गांव के ही रामनिवास सोलंकी पर हत्या की आशंका जताई, क्योंकि रानू के गायब होने के बाद से वह भी गांव से गायब था. पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर उस से सख्ती से पूछताछ की, जिस पर आरोपी ने मृतका की हत्या करना कबूल किया.

आरोपी रामनिवास सोलंकी ने बताया कि रानू मेहर शादीशुदा होते हुए भी उस से शादी कर साथ रहने को कहती थी. जबकि वह अविवाहित था, लेकिन सामाजिक बंधन के चलते उस का रानू से शादी करना संभव नहीं था. इसलिए रानू की जिद से परेशान हो कर उस ने उस की हत्या कर दी. इस के बाद शव को पानी में फेंक दिया था. पुलिस ने आरोपी रामविलास सोलंकी पर हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस मामले की जांच गरोठ थाने के एसएचओ हरीश मालवीय कर रहे थे. MP Crime News

 

 

Bihar Crime News : स्कूली प्रेमी कातिल बना

Bihar Crime News : 19 वर्षीय पूजा कुमारी और 21 वर्षीय अमित कुमार की दोस्ती उस समय से थी, जब वे स्कूल में साथसाथ पढ़ते थे. बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई, दोनों शादी करना चाहते थे. न चाहते हुए भी पूजा के पेरेंट्स बेटी की शादी अमित से कराने को राजी हो गए. इसी बीच एक दिन पूजा की रक्तरंजिश लाश मिली. कौन था पूजा का हत्यारा? उस की हत्या क्यों की गई? पढ़ें, लव क्राइम की यह स्टोरी.

25 वर्षीय अमित कुमार बिहार में नालंदा जिले के नगर थानाक्षेत्र स्थित कागजी मोहल्ले के विजय कुशवाहा के मकान में किराए पर अकेला ही रहता था. यहां रह कर वह एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता था. वह कई दिनों से बुरी तरह से परेशान दिख रहा था, इस की वजह से नौकरी पर जा नहीं रहा था और वह इस से हमेशाहमेशा के लिए निजात पाना चाहता था, इसीलिए उस ने अपने दोस्त विशाल को कमरे पर बुलाया था. यह 10 जून, 2025 की बात है.

जैसे ही विशाल कमरे पर पहुंचा तो अमित बोला, ”यार, तू मेरा कैसा दोस्त है, जो मुसीबत में मेरा साथ नहीं दे सकता? यदि तेरी जगह मैं ने किसी और से मदद की गुहार लगाई होती तो वो अपना कलेजा निकाल कर अब तक मेरी हथेलियों पर रख दिया होता. और एक तू है कि मेरी मदद करने की बजाए मेरी खिल्ली उड़ा रहा है.’’

”नहीं यार, मैं खिल्ली नहीं उड़ा रहा हूं, बल्कि यह सोच रहा हूं कि मैं तेरी मदद कैसे करूं…’’ विशाल ने सोचने वाली मुद्रा में जवाब दिया.

”मैं कुछ नहीं जानता, बस तू इस मुसीबत की घड़ी में मेरा साथ देगा या नहीं?’’

”मैं साथ देने के लिए तैयार हूं, तू बता मुझे करना क्या होगा?’’

”देख भाई, तू जानता है कि पूजा से मैं कितना प्यार करता हूं, उस के बिना जी नहीं सकता.’’

”हुआ क्या यह तो बता..?’’ विशाल ने हैरानी से पूछा.

”उसे मेरे दूसरे प्यार वाली बात पता चल गई है. जब से उसे ये पता चला है कि मेरा अफेयर कंचन से भी था और मैं ने उसे यूज कर के छोड़ दिया, तब से वह विद्रोह पर उतर आई है. अगर उस ने कुछ ऐसावैसा कर दिया तो मैं अपने फेमिली वालों और कालेज में क्या मुंह दिखाऊंगा. जिस कालेज में मैं ने प्रोफेसरों के सामने अच्छी रेपुटेशन बनाई है, सब खत्म हो जाएगी. यही सोच कर मैं बहुत परेशान हूं. तभी मैं ने तुझ से हेल्प मांगी है.’’

”हंू तो यह बात है.’’ विशाल ने सिर हिलाते हुए कहा.

”हां, यह मुसीबत मेरे गले की हड्डी बनती जा रही है. इसे रास्ते से हटाया नहीं तो मैं बरबाद हो जाऊंगा. इसलिए अपनी सेफ्टी के लिए उसे मारना होगा. इस के अलावा और कोई दूसरा रास्ता बचा नहीं है.’’ अमित ने विशाल से मदद करने की रिक्वेस्ट की.

”जो करना है तुझे करना है, मैं तो तेरे साथ परछाई बन कर खड़ा रहूंगा. अब तू ही बता, उसे कैसे रास्ते से हटाएगा.’’ विशाल ने अमित के सवाल का जवाब सवाल में दिया.

”देख भाई, इस में कोई शक नहीं, आज भी पूजा मुझ से उतना ही प्यार करती है जितना कल करती थी. लेकिन यह सच है कि उस के यकीन का बांध थोड़ा डगमगा सा गया है, पर कोई बात नहीं. मैं उसे विश्वास में ले कर मजबूती से अपने प्यार के धागे से बांधने की कोशिश करूंगा. जब उसे मुझ पर पक्का यकीन हो जाएगा कि अमित मिस्टर फ्लर्ट नहीं रहा, वह सचमुच बदल गया है, तब मैं अपनी चाल चल दूंगा यानी उसे खलास कर दूंगा.’’ उत्साहित हो कर विशाल ने अपना प्लान समझाया.

”कह तो ठीक ही रहा है, लेकिन पूजा तेरी बातों पर यकीन करेगी, इस की गारंटी क्या है?’’

”वह तू मुझ पर छोड़ दो, मैं जानता हूं उसे कैसे यकीन दिलाना है. अब आगे सुन.’’

”बोल, सुन रहा हूं मैं.’’

”मेरा प्लान यह है कि उसे मौत के घाट उतारने के बाद लाश बोरे में भर सूटकेस में डाल कर किसी ऐसी जगह फेंक देंगे, जहां उस के फरिश्ते भी नहीं पहुंच पाएंगे.’’

20 वर्षीया पूजा कुमारी अमित के बगल वाले कमरे में किराए पर रहती थी. यहीं रह कर वह नर्सिंग की पढ़ाई करती थी. ये दोनों कालेज के दिनों से एकदूसरे को जानते थे. पहले दोनों के बीच में दोस्ती थी. दोस्ती ने कब उन के बीच प्यार का रूप ले लिया था, उन्हें पता नहीं चला.

धीरेधीरे 4 साल हो गए थे उन के प्यार को. पूजा के फेमिली वालों को बेटी के प्यार वाली बात पता चल चुकी थी. वे उसे अमित से मिलने से मना करते थे, लेकिन अमित के प्यार में अंधी और बहरी पूजा के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती थी.

पेरेंट्स की बातों का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था. यहां तक कि उस ने अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला कर लिया था. बेटी जब फेमिली वालों की बातें सुनने के लिए तैयार नहीं हुई तो उन्होंने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. पूजा यह नहीं जानती थी कि जिस प्यार के लिए वह अपनी फेमिली से बगावत पर उतर चुकी थी, जिस प्यार के लिए जेठ के महीने की तपती धूप में सावन की हरियाली देख रही थी, वह उस का आशिक नहीं, रसिकलाल है.

पूजा की हत्या करने के परफैक्ट प्लान को अमित ने पहले ही अंतिम रूप दे दिया था. बाजार से एक धारदार चापड़, जूट वाली 2 बड़ी बोरियां और लाश को ठिकाने लगाने के लिए एक बड़े साइज का नया मैरून कलर का सूटकेस खरीद कर कमरे में ला कर उसे तख्त के नीचे छिपा दिया, ताकि किसी को उस पर कोई संदेह न हो. उस ने जब पूरी तैयारी कर ली तो पूजा को उस के मोबाइल फोन पर काल की और घडिय़ाली आंसू बहाते हुए माफी मांगने का नाटक किया, ताकि उस का खतरनाक मकसद पूरा हो जाए, ”हैलो पूजा, मेरी पूरी बात सुने बगैर फोन मत काटना, प्लीज.’’

फोन पर अमित गिड़गिड़ाया. वह आगे कुछ और कहता, उस की बात सुने बगैर पूजा ने काल डिसकनेक्ट कर दी और अपने कामों में लगी रही. उस समय सुबह के साढ़े 10 बज रहे थे. पूजा अमित की बेवफाई और धोखेबाजी को भुला नहीं पाई थी. कैसे उस ने धोखा दिया था. वह कभी उस की बातों पर शायद यकीन नहीं करेगी, यही अमित सोच रहा था, लेकिन अमित अपनी योजना पर यूं ही पानी फिरने नहीं देना चाहता था. किसी भी हद तक जा कर पूजा को मनाने की अपनी जिद पर अड़ा रहा और 10-10 मिनट के अंतराल पर करीब 8 बार उसे फोन किया.

बारबार काल आने से पूजा परेशान हो गई थी. वह उस से बात करना नहीं चाहती थी. परेशान हो कर उसने काल रिसीव किया आर उसे झाड़ते हुए कहा, ”बारबार क्यों काल कर के मुझे परेशान कर रहे हो? जबकि मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी है.’’

”मैं जानता हूं कि तुम मुझ से बहुत नाराज हो, ऐसा काम ही मैं ने किया है, लेकिन मैं उस के लिए तुम से सौरी बोलता हूं. बस, एक बार मेरी पूरी बात सुन लो, फिर तुम्हें जो सही लगे वो करना. तब मैं तुम्हें कभी न ही रोकूंगा और न ही टोकूंगा, बस एक बार मेरी बात सुन लो, प्लीज.’’

अमित ने मीठी और चिकनीचुपड़ी बातों का ऐसा तीर फेंका, जो सीधा उस के दिल के पार हो गया और एक पल के लिए पूजा विचलित हो गई थी.

न चाहते हुए भी उस ने उस की बातों को दिल पर लेते हुए कहा, ”यह मत समझना कि मैं ने तुम्हें माफ कर दिया.’’ एक लंबीगहरी सांस लेती हुई फिर आगे बोली, ”बताओ, क्या कहना चाहते हो?’’

”बात कुछ ऐसी है, जो मैं फोन पर नहीं कह सकता, एक बार आ कर मिल लो तो सारी बातें क्लीयर हो जाएंगी.’’ अमित अपने होंठों पर जहरीली मुसकान लिए बोला.

”ठीक है, तुम इतना जिद कर ही रहे हो तो तुम से मिलना ही पड़ेगा.’’ पूजा ने जवाब दिया तो अमित की आंखों में शैतानी चमक जाग उठी. मतलब उस ने अंधेरे में जो तीर चलाया था, वह ठीक निशाने पर जा कर लगा था.

पूजा के मुंह से हां सुन कर अमित की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. दूसरी तरफ किसी अनहोनी से बेखबर पूजा अमित के किए को भुला कर उस से मिलने के लिए तैयार हो गई थी. उसी ने फोन पर 3 दिनों बाद यानी 17 जून, 2025 को मिलने के लिए कही. पूजा ने प्रेमी अमित से मिलने का वायदा कर दिया था. फेमिली वालों ने उस के घर से बाहर जाने पर सख्त पाबंदी लगा दी थी. यह कदम उन्होंने तब उठाया था, जब अमित के साथ उन्हें बेटी के अफेयर की जानकारी हुई थी.

बात 17 जून की है. पूजा जानती थी फेमिली वाले उसे आसानी से घर से बाहर अकेले निकलने नहीं देंगे. तब उस ने इस का एक आसान सा रास्ता निकाला. फेमिली वालों से उस ने झूठ बोला कि कल यानी 18 जून को उस की नर्सिंग की परीक्षा है, उस की ड्रेस कमरे पर है, बगैर ड्रेस के कालेज में एंट्री नहीं मिलेगी. उसे लेने कमरे पर जा रही है. फेमिली वालों ने पूजा की बातों पर यकीन कर लिया और उसे घर से अकेले जाने की परमिशन दे दी. जातेजाते उसे सख्त हिदायत भी दी कि ड्रेस ले कर जल्द से जल्द घर वापस लौट आना, वरना कभी घर से बाहर निकलने नहीं देंगे.

उस समय सुबह के करीब साढ़े 10 बज रहे थे. पूजा अपना मोबाइल साथ में ले कर निकली और फेमिली वालों को यकीन दिलाया था कि वह जल्दी घर वापस लौट आएगी. दोपहर करीब डेढ़ बजे पूजा अपने कमरे पर पहुंची, जहां अमित उस के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. उस ने पूजा को आते हुए जैसे देखा तो उस के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान थिरक उठी. उस वक्त कमरे में पूजा और अमित के सिवाय कोई और नहीं था. मकान मालिक विजय कुशवाहा भी ड्यूटी जा चुका था.

धूप की तपन से जली और थकी हुई पूजा कमरे में पहुंची तो उस के आवभगत में अमित जुट गया था. चाय और नाश्ता कर के जब दोनों फारिग हुए तो अमित पूजा की ओर मुखातिब हुआ और अपनी बातों में उलझा कर बड़ी चालाकी से उस का मोबाइल फोन स्विच औफ कर दिया. इस के बाद उस ने कहा, ”मुझे माफ कर दो पूजा. मैं तुम्हारा गुनहगार हूं. मैं ने तुम्हें धोखा दिया, फिर भी तुम मेरी बात सुन कर मुझ से मिलने आ गई. मैं कैसे बताऊं कि मैं कितना खुश हूं. हनुमान होता तो सीना चीर कर दिखा देता कि किस कदर तुम्हारी तसवीर अपने दिल में बसा रखी है.’’

”ठीक है अमित. बीती बातों को कुरेद कर जख्मों को हरा मत करो तो ही अच्छा होगा.’’ पूजा तड़प कर बोली, ”बड़ी मुश्किल से मैं उन बातों भुला पाई हूं और घर वालों से झूठ बोल कर यहां तक आई हूं. मुझे घर जल्दी पहुंचना भी है. जो बात हो फटाफट बताओ.’’

”इतनी जल्दी भी क्या है. अभी तो आई हो, अभी जाने की बात कर रही हो, इस का मतलब तुम ने मुझे माफ नहीं किया है.’’

”नहीं…नहीं…ऐसी बात नहीं है. मैं ने तुम्हें माफ नहीं किया होता तो यहां आती नहीं. बस मम्मीपापा तुम्हारे खिलाफ हैं. उन्हें पता न चले इसीलिए जल्द घर पहुंचना है, वरना वो मुझे कभी घर से बाहर निकलने नहीं देंगे.’’

”ठीक है, जब तुम इतनी जिद कर रही हो तो थोड़ी देर बाद चली जाना, रोकूंगा नहीं मैं. बस, तुम ने मेरी बात का मान रख लिया और मुझे माफ कर दिया तो समझो मेरे सीने से एक बड़ा बोझ उतर गया.’’

जिस पल का अमित को बेसब्री से इंतजार था, वह समय आ गया था. अमित ने अपनी भावनाओं के भंवर में पूजा को पूरी तरह से उतार लिया था. पूजा से बात करतेकरते वह तख्त के नीचे झुका और चुपके से धारदार चापड़ निकाला. उस के हाथ में चापड़ देख कर पूजा डर गई तो अमित के चेहरे पर शैतानियत साफ झलकने लगी थी. गुस्से से उस की आंखें लाल हो गईं और जबड़ा भिंच गया था. पूरी तरह दैत्य दिख रहा था वह. पूजा समझ गई थी कि अमित ने उसे धोखा दिया है.

पूजा कुछ कर पाती, इस से पहले ही अमित ने चापड़ से उस की गरदन पर जोरदार प्रहार किया. एक ही प्रहार से पूजा की गरदन धड़ से कट कर लटक गई और वह फर्श पर गिर कर अपने ही खून में लथपथ हो कर छटपटाने लगी. उसे छटपटाता देख अमित ने नफरत भरी हुंकार ली और होंठों पर बुदबुदाया, ”चली थी हरामजादी मेरा करिअर बरबाद करने, मुझे नंगा करने. अब ऊपर जा कर मेरे नाम की माला जपना. हुंह..’’

पूजा की हत्या करने के बाद अमित जब होश में आया तो उस की आखों के सामने जेल की सलाखें नजर आने लगी थीं. फटाफट उस ने लाश को बोरी में भरी और पूजा के मोबाइल को उसी बोरी में डाल दिया, ताकि कोई सबूत न बचे और पुलिस किसी कीमत पर उस तक न पहुंच सके. लाश बोरी में भरने के बाद उस ने लाल सूटकेस में बोरी को डाल कर अच्छी तरह बंद कर दिया. फिर फर्श पर फैले खून को साफ कर दिया. इस के बाद उस ने वाशरूम में जा कर अपने शरीर और कपड़ों को अच्छी तरह साफ किया. यह सब करतेकरते शाम के 5 बज गए थे.

सारी तैयारी करने के बाद उस ने विशाल को फोन कर के उस की कार मांगी. विशाल के पास उस के पापा की कार थी. उस ने कह भी रखा था कि जब भी कहीं घूमने जाना हो तो वह उस की कार बेझिझक ले जा सकता है. लेकिन विशाल के फेमिली वालों ने उसे कार देने से साफतौर पर मना कर दिया. इस से उस की योजना पर पानी फिर गया. समझ नहीं पा रहा था कि अब वह लाश का क्या करे. वह डरने लगा कि लाश ठिकाने नहीं लगाई तो वह बुरी तरह फंस सकता था. जब कुछ समझ नहीं आया तो शहर के बाहर स्थित नाला याद आया. उसी नाले में लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई.

जब उस बिल्डिंग के सभी लोग सो गए तो अमित दबे पांव अपने कमरे से बाहर निकला. घर का मुख्य दरवाजा आहिस्ता से खोला और चुपके से बाहर निकल गया. उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे. फिर वह भाड़े पर एक टोटो (टैंपो) ले आया और सूटकेस को उस में रख दिया. टोटो चालक से शहर से बाहर की ओर चलने को कहा. वह जब बड़े नाले के पास पहुंचा तो उस ने टोटो वहीं रोकवा दिया और सूटकेस ले कर उतर गया. टोटो वाले को तय भाड़े से कुछ ज्यादा पैसे दे कर उसे छोड़ दिया. ज्यादा पैसे पा कर टोटो चालक बहुत खुश हुआ और दूसरी ओर चला गया.

चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था. अमित ने इधरउधर चारों ओर देखा. वहां कोई आजा नहीं रहा था. जल्दीजल्दी उस ने सूटकेस खोला और बोरे में भरी लाश बाहर निकाली और बोरी कंधे पर उठा कर नाले में फेंक दी. सूटकेस वहीं सड़क पर ही छोड़ दिया था. फिर वहां से कमरे में आ कर सो गया, ताकि किसी को उस पर कोई शक न हो. इधर पूजा के फेमिली वाले उस के देर शाम तक घर वापस न लौटने पर परेशान हो गए थे. उस ने घर से निकलते वक्त उन से दोपहर तक वापस लौट आने को कहा था, लेकिन शाम के 6 बजे तक जब वह घर नहीं लौटी तो फेमिली वाले जवान बेटी को ले कर काफी परेशान थे.

उन के माथे पर चिंता की लकीरें तब और उभरी थीं, जब उस का मोबाइल लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था. अपनी तरफ से उन्होंने हर जानपहचान वालों के पास फोन कर के पूछा, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला. सभी ने एक ही जवाब दिया था कि वह हमारे यहां नहीं आई थी. रात जैसेतैसे फेमिली वालों की आंखों में कटी. सुबह होते ही वे गांव के कुछ लोगों को ले कर अस्थावा थाने पहुंच गए. उस समय थाने के औफिस में हैडकांस्टेबल दयाराम मौजूद थे. पूजा के पापा संजय कुमार ने बताया कि उन की बेटी कल सुबह शहर गई थी, लेकिन अभी तक वह घर नहीं लौटी है. उस का मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है.

हैडकांस्टेबल दयाराम ने यह बात एसएचओ सुशील कुमार को दी. इस के बाद संजय कुमार ने एसएचओ को बेटी पूजा के घर न लौटने की पूरी बात बता दी. तब एसएचओ ने पूजा की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसएचओ सुशील ने संजय कुमार से किसी पर शक होने की बात पूछी तो उन्होंने बेटी के प्रेमी अमित पर शक जताया और पूरी बात विस्तार से बताई. पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर ले कर जांच की तो संजय की बात सच निकली.

जांच में पता चला कि 17 जून, 2025 को सुबह के समय पूजा से अमित की आखिरी बार बात हुई थी और दोपहर बाद पूजा का फोन स्विच्ड औफ हो गया था. इस के बाद एक पुलिस टीम अमित की तलाश में भेज दी. वह कागजी मोहल्ले में स्थित अपने कमरे पर मिल गया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई. उस से सख्ती से पूछताछ शुरू की तो जल्द ही पुलिस के सामने उस ने घुटने टेक दिए और पूजा की हत्या का जुर्म आसानी से स्वीकार कर लिया.

एसएचओ ने यह जानकारी डीएसपी नुरुलहक को दी तो वह भी थाने में आ गए. डीएसपी ने भी पूजा की हत्या के बारे में कई सवाल किए. तब अमित ने घटना के बारे में तफसील से सारी जानकारी दे दी और जिस नाले में पूजा की लाश फेंकी थी, वहां ले कर गया. उस की निशानदेही पर पुलिस ने नाले में से मृतका की लाश बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. आरोपी अमित की निशानदेही पर उस के कमरे से हत्या में प्रयुक्त धारदार चापड़ और खून सने कपड़े बरामद कर लिए. जिस सूटकेस में लाश भर कर ले गया था, वह वहां नहीं मिला. उस टोटो (टैंपो) वाले की तलाश में जुटी थी, जिस में लाश ले कर वह गया था. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पूजा कुमारी के मर्डर के पीछे की जो सस्पेंस स्टोरी सामने आई, इस प्रकार निकली—

बिहार के नालंदा जिले के ओडा गांव के मूल निवासी संजय कुमार सरकारी प्राइमरी स्कूल के टीचर हैं. कुल 5 सदस्यों वाला उन का भरापूरा परिवार था, जिन में पतिपत्नी के अलावा 3 बेटियां थीं. 19 वर्षीय पूजा सब से बड़ी और समझदार थी. देखने में वह साधारण शक्लसूरत की थी, लेकिन उस की बोली में जैसे मिश्री घुली हुई थी. अपनी बातों से वह अपरिचितों को भी अपनी ओर खींच लेती थी. वह पढऩे में भी अव्वल थी. पढ़लिख कर वह डाक्टर बनना चाहती थी. जब वह डाक्टरों को सफेद पोशाक में देखती थी तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह यही सोचती थी कि एक दिन उस के भी बदन पर यह पोशाक झलकेगी.

बात साल 2022 के आसपास की है. हंसमुख और चंचल स्वभाव वाली पूजा जिस स्कूल में पढ़ती थी, उसी स्कूल में अमित भी पढ़ता था. पूजा 10वीं कक्षा की छात्रा थी. तब उस की उम्र 16 साल के आसपास रही होगी. उस समय 18 वर्षीय अमित भी इंटरमीडिएट में पढ़ रहा था. दोनों किशोरावस्था से जवानी की दहलीज की ओर कदम बढ़ा रहे थे. दोनों ही पैदल एक ही रास्ते से हो कर स्कूल जातेआते थे. अमित इसी नालंदा जिले के शेखपुरा गांव का रहने वाला था. 4 भाईबहनों में वह दूसरे नंबर पर था. उस के पापा रामबरन कुमार एक किसान थे.

खैर, उम्र के जिस पड़ाव पर पूजा और अमित खड़े थे, उस दौरान कइयों के कदम बहकने लगते थे. ऐसे में पूजा और अमित कहां अछूते रहने वाले थे यानी उन के भी कदम बहकने लगे थे. स्कूल से घर आतेजाते दोनों एकदूसरे को दिल दे बैठे. धीरेधीरे उन का प्यार समय के रथ पर सवार हो कर आगे बढ़ता रहा. बड़़े जतन से दोनों 3 सालों तक अपने प्यार को परदे के पीछे छिपाने में कामयाब रहे. आखिरकार बेटी पूजा की करतूतों की सच्चाई उस के पापा संजय कुमार के कानों तक पहुंची तो उन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह आगबबूला हो उठे. उन्होंने बेटी को खूब खरीखोटी सुनाई और पत्नी को भी आड़ेहाथों लिया. उन्होंने पूजा का घर से निकलना बंद कर दिया.

पूजा ने थोड़ी चालाकी और समझदारी से काम लिया. उस ने फेमिली वालों के सामने पैंतरा खेला और झूठ बोलते हुए मम्मी से कहा, ”मम्मी, मुझ से गलती हो गई थी. इस गलती के लिए सब से माफी मांग रही हूं. मुझे माफ कर दो. अमित से अब मैं कभी नहीं मिलूंगी और न बात करूंगी.’’

बेटी की बातों पर फेमिली वालों को विश्वास हो गया और उन्होंने उसे माफ कर दिया. फिर अपना ध्यान उस की ओर से हटा लिया. पूजा यही चाहती थी. फेमिली वालों की तरफ से पूजा एक तरह से आजाद हो गई थी. अब कोई रोकटोक करने वाला नहीं था. इंटरमीडियट पास करने के बाद उस ने मैडिकल कालेज में दाखिला लिया और एएनएम की पढ़ाई शुरू की. वहीं दूसरी ओर अमित प्राइवेट जौब करते हुए बीएड की पढ़ाई कर रहा था. उस ने कागजी कालोनी में विजय कुशवाहा के मकान में एक किराए का कमरा ले लिया था. चूंकि पूजा को गांव से शहर आ कर क्लास लेने आने में बहुत दिक्कत उठानी पड़ती थी तो पापा से परमिशन ले कर अमित के बगल में किराए का एक कमरा ले कर रहने लगी.

पेरेंट्स की नजरों में पूजा ने यह साबित कर दिया था कि अब अमित से उस का कोई संबंध नहीं है और न ही उस से कभी मिलती है. जबकि हकीकत में मामला इस के विपरीत था. अब दोनों खुल्लमखुल्ला आपस में मिलते थे और टूट कर एकदूसरे से प्यार करते थे. धीरेधीरे यह बात फिर से संजय कुमार को पता चल गई तो उन के दिल को बहुत ठेस पहुंचा और बेटी को वापस घर बुलाया और समाज के ऊंचनीच रीतिरिवाजों को समझाया. संजय कुमार एक सुलझे हुए इंसान थे. उन्होंने बेटी को अपने पास बैठा कर समझाया कि वह अपने करिअर पर ध्यान दे, समय आने पर अच्छा घरवर देख कर धूमधाम से उस की शादी कर देंगे.

इस पर पूजा ने खुले शब्दों में जबाव दिया कि वह अमित से प्यार करती है उसी से शादी करेगी. चाहे जो हो जाए, वह अपने फैसले पर अडिग है और कोई भी कुरबानी देने के लिए तैयार है. फेमिली वालों ने पूजा को बहुत समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ तो वो चुप हो गए, मगर विचलित नहीं हुए. आखिरकार संजय कुमार को भी बेटी की जिद के सामने झुकना पड़ा, लेकिन कोई फैसला लेने से पहले वह अमित के बारे में खूब जांचपरख लेना चाहते थे. आखिर बेटी के जीवन का सवाल था. इस बात को उन्होंने सिर्फ अपने तक ही सीमित रखा था.

संजय ने अमित के बारे में पड़ताल शुरू की तो वह हैरान रह गए. जानकारी मिली कि कई लड़कियों के साथ अमित के संबंध हैं. उस आवारा ने कंचन नाम की एक लड़की का जीवन बरबाद कर दिया था. यह बात महीनों तक सुर्खियों में छाई रही. अमित की यह सच्चाई सामने आने के बाद संजय ने बेटी का रिश्ता अमित से जोडऩे का अपना इरादा बदल दिया. और फिर बेटी के सामने उस के प्रेमी की कलई खोल दी. पापा के मुुंह से अमित की सच्चाई सुन कर पूजा को धक्का लगा था.

पूजा ने सपने में भी कभी नहीं सोचा होगा कि जिस अमित से वह अंधा प्यार करती थी, जिस के लिए अपनी फेमिली से बगावत पर उतर आई थी, वह इतना बड़ा दगाबाज निकलेगा. उस के सारे सपने चूर हो गए थे. उस दिन के बाद से पूजा ने अमित से बात करनी बंद कर दी थी. उसे देखते ही अपना रास्ता बदल लेती थी. उसे उस से नफरत हो गई थी. पूजा अमित से इतनी नफरत करने लगी थी कि उस की शक्ल तक नहीं देखना चाहती थी. उस ने अमित को किसी माध्यम से संदेश भिजवाया था कि जैसे उस ने उस की जिंदगी के साथ खेला है, उसे धोखा दे कर खून के आंसू रुलाया है, वह भी उसी तरह उस की जिंदगी तबाह और बरबाद कर के दम लेगी. किसी कीमत पर उसे नहीं छोड़ेगी.

आखिर अमित को पता चल ही गया था कि पूजा को उस के और लड़कियों के साथ चक्कर वाली बात पता चल गई थी, इसलिए उस ने उस से दूरी बना ली. वह यह भी जानता था कि पूजा बहुत जिद्दी किस्म की है, एक बार जो ठान लेती है, उसे पूरा कर के ही दम लेती है. अमित को लगने लगा कि पूजा उस के भविष्य के लिए खतरा बन सकती है. इस से पहले कि वह उस के लिए खतरा बने, इस खतरे को मिटा देगा. उसे जान से मार देगा. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. इस के बाद अमित पूजा को मनाने में लग गया. आखिरकार अमित ने अपनी खतरनाक साजिश में फांसने के बाद 17 जून, 2025 को पूजा की हत्या कर दी.

पूजा की हत्या करने के बाद वह भी कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सका और अपने असल ठिकाने तक पहुंच गया. पुलिस आरोपी अमित कुमार को गिरफ्तार कर उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त धारदार चापड़, फर्श पर फैले खून को साफ करने वाला कपड़ा बरामद कर उसे साक्ष्य के तौर पर अपने पास सुरक्षित कर लिया. मौके से गायब सूटकेस 2 दिन बाद उसी जगह से बरामद हो गया था, जहां से गायब हुआ था. जिस टोटो (टैंपो) से लाश ले जाई गई थी, 10 दिनों बाद उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया. Bihar Crime News

 

 

Crime News in Hindi : सोनल की जान ली लिवइन पार्टनर ने

Crime News in Hindi : बर्थडे पार्टी में सोनल और निखिल कुमार की नजरें ऐसी मिलीं कि दोनों एकदूसरे के दिल में उतर गए. फेमिली वालों से विद्रोह कर सोनल निखिल के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान एक दिन निखिल ने न सिर्फ सोनल बल्कि उस की सहेली की 6 महीने की बेटी की गला रेत कर हत्या कर दी. आखिर निखिल ने जान से ज्यादा प्यार करने वाली प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों कियाï?

वह पार्टी में सब से अलग नजर आ रही थी. निखिल की नजरें उस खूबसूरत हसीन युवती से हट ही नहीं रही थी, वह अपलक उसे ही देखे जा रहा था. पतलीदुबली छरहरी काया, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, कसा हुआ बदन और गोरा रंग. सब कुछ उस युवती की सब से अलग पहचान बना रहा था. निखिल अपने दोस्त के बेटे की बर्थडे पार्टी में शामिल होने आया था. पहली ही नजर में वह युवती उस के दिल में उतर गई थी और निखिल उसे पागलों की तरह घूरे जा रहा था.

केक काटने की घोषणा होने का उसे पता ही नहीं चला. वह तब चौंका, जब उस के दोस्त अभय ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया, ”खाना शुरू हो गया है निखिल, तुम कहां खो गए हो?’’

”अं…’’ वह चौंक कर बोला, ”कहीं भी तो नहीं अभय. अरे हां, क्या तुम्हारे बेटे का केक कट गया?’’

अभय मुसकराया, ”लगता है, तुम किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गए हो, केक कटे तो आधा घंटा हो गया है.’’

”ओह,’’ निखिल झेंप गया, ”भाभीजी कहां हैं, मैं बेटे यश के लिए एक गिफ्ट लाया हूं.’’

”हेमा वहां स्टेज पर है,’’ अभय हंस कर बोला.

निखिल तेजी से स्टेज की तरफ बढ़ गया. उस ने अपने हाथ का गिफ्ट हेमा के पास बैठे यश को थमा कर हेमा को हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा और फिर अभय के पास लौट आया.

अभय किसी अन्य मित्र से बतिया रहा था. निखिल उसे इशारे से बुला कर एक तरफ ले गया. अभय को आश्चर्य हुआ, वह हैरानी से बोला, ”क्या हुआ, तुम मुझे महफिल से अलग क्यों ले कर आए हो निखिल?’’

”अभय, यार तुम्हारी इस महफिल में एक खूबसूरत फूल मुझे पसंद आ गया है. तुम बताओगे, वह गुलाबी सूट वाली युवती कौन है?’’

”अरे वह!’’ अभय ने उस युवती की तरफ देख कर मुसकराते हुए कहा, ”वह मेरी मेहमान है. मेरी पत्नी हेमा की फ्रेंड है, नैनीताल से यहां हल्द्वानी आई है.’’

”नाम क्या है इस का?’’

”सोनल.’’ अभय ने बताया, ”वैसे इसे पटाना तेरे वश की बात नहीं है. वह बहुत नकचढ़ी है.’’

”देखता हूं.’’ निखिल मुसकराया और उस ओर बढ़ गया, जिधर वह युवती खाना खा रही थी.

निखिल ने अपने लिए खाने की प्लेट ली और उसे ले कर सोनल की तरफ आ गया. वह सोनल के पास खड़ा हो कर खाना खाने लगा. कनखियों से वह अभी भी सोनल को देख रहा था.

अचानक वह घबरा गया. सोनल उस के करीब आ रही थी. वह बगलें झांकने लगा तो सोनल की मीठी हंसी उस के कान में पड़ी, ”बस, हो गए अरमान ठंडे. मैं बहुत देर से देख रही हूं, तुम मुझे घूर रहे हो.’’

”नहीं तो.’’ निखिल जल्दी से बोला, ”मैं क्यों तुम्हें घूरूंगा मिस सोनल.’’

सोनल को हैरानी हुई, ”वाह! तुम ने तो मेरा नाम भी मालूम कर लिया. क्या इरादे हैं जनाब के?’’

निखिल ने हिम्मत जुटाई, ”तुम खूबसूरत हो सोनल. इस पार्टी में तुम ही तुम नजर आ रही हो, मेरा दिल तुम पर आ गया है.’’

सोनल के गालों पर लालिमा दौड़ गई. वह नीचे देखते हुए बोली, ”तुम भी हैंडसम हो, क्या नाम है तुम्हारा?’’

”निखिल कुमार. मैं यहीं हल्द्वानी में रहता हूं.’’ अपनी बात खत्म कर के उस ने पूछा, ”नैनीताल में तुम कहां रहती हो सोनल?’’

सोनल को गहरा आश्चर्य हुआ, ”मान गई तुम्हें. तुम ने तो यह भी जान लिया कि मैं नैनीताल में रहती हूं.’’

”क्या करता, तुम अच्छी लगी तो तुम्हारे बारे में जानना जरूरी हो गया. अब बताओ, नैनीताल में कहां रहती हो, घर में कौनकौन हैं?’’

सोनल कुछ कहती, तभी हेमा को अपनी तरफ आता देख कर वह जल्दी से बोली, ”खाना खा लो, मैं 2 दिन यहीं हूं. जाओगे तो मेरा मोबाइल नंबर लेते जाना.’’

”ठीक है.’’ निखिल ने कहा और खाना खाने लगा. सोनल अपनी प्लेट थामे दूसरी तरफ चली गई.

पार्टी खत्म कर के जब निखिल निकला तो उस की जेब में सोनल का मोबाइल नंबर था, जो सोनल ने चुपचाप एक कागज पर लिख कर उसे थमा दिया था.

8 जुलाई, 2025 को दिन के डेढ़ बजे थाना सिविल लाइंस में आए एक फोन ने खलबली मचा दी. फोन एक महिला की ओर से किया गया था, ”साहब, मैं मजनू का टीला से रश्मि बोल रही हूं. यहां मेरी सहेली और मेरी 6 महीने की बेटी की किसी से हत्या कर दी है, आप जल्दी से यहां आ जाइए.’’ महिला का स्वर भर्राया हुआ था. फोन थाने में मौजूद एसआई नितिन शर्मा ने अटेंड किया था. 2 कत्ल की वारदात से वह थोड़ा विचलित हो गए. उन्होंने गंभीर स्वर में पूछा, ”तुम मजनू का टीला में कहां से बोल रही हो रश्मि?’’

”मैं एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर रहती हूं. वारदात मेरे इसी घर में हुई है साहब.’’ रश्मि इस बार बताते हुए रोने लगी थी.

”हम आ रहेहैं. तुम वहां किसी भी सामान को नहीं छुओगी. जिस कमरे में ये कत्ल हुए हैं, उस से बाहर ही रहना है.’’ एसआई नितिन शर्मा ने रश्मि को हिदायत दी और फोन रख कर उन्होंने अपने कक्ष में मौजूद एसएचओ हनुमंत सिंह को जा कर इस दोहरे हत्याकांड की सूचना दी. एसएचओ हनुमंत सिंह अपने साथ एसआई रंजीत कुमार, नितिन शर्मा, हैडकांस्टेबल रनवीर, विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम को ले कर तुरंत घटनास्थाल के लिए निकल पड़े. रास्ते से उन्होंने फोरैंसिक टीम को भी वारदात वाले स्थान पर पहुंचने के लिए कह दिया.

घटनास्थल थाने से ज्यादा दूर नहीं था. पुलिस जब एफ-54 के पते पर पहुंची तो वहां आसपास के लोगों की अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई थी. हैडकांस्टेबल विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम ने भीड़ को वहां से हटाया. एसएसओ हनुमंत सिंह और एसआई नितिन कुमार वैन से उतर कर आगे बढ़े तो एक व्यक्ति उन के पास आ गया. वह रो रहा था, ”साहब, मेरी बेटी की हत्या हुई है, उस के साथ सोनल भी मृत पड़ी है.’’

”चलो, हम देखते हैं.’’ एसएचओ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले. वह उस व्यक्ति के साथ एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर आ गए. सामने ही वह कमरा था, जिस में एक युवती और 6 महीने की बच्ची की रक्तरंजित लाश पड़ी हुई थी.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने देखा. युवती और उस मासूम बच्ची का बड़ी बेरहमी से गला रेता गया था. बच्ची की लाश पलंग पर थी, जबकि युवती की लाश फर्श पर पड़ी हुई थी. पूरे कमरे में नजर दौड़ाने पर यह स्पष्ट हो गया कि युवती और हत्यारे में पहले जम कर संघर्ष हुआ है. इस के बाद हत्यारा उस का गला काटने में सफल हुआ. हत्यारे ने इस 6 माह की बच्ची की हत्या क्यों की, यह बात एसएचओ हनुमंत सिंह की समझ में नहीं आई.

उन्होंने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. चूंकि फोरैंसिक टीम वहां आ गई थी. उन्होंने टीम को बारीक से बारीक सबूत उठाने के लिए कहा और कमरे से बाहर आ गए. इस दोहरे हत्याकांड की सूचना उन्होंने उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी को दे दी. फिर वह मृत बच्ची के पिता के पास बाहर आ गए.

”रश्मि कहां है, जिस ने हमें फोन किया था?’’ उन्होंने प्रश्न किया.

उस व्यक्ति ने औरतों से घिरी अपनी पत्नी रश्मि को इशारे से पास बुला लिया. रश्मि का रोरो कर बुरा हाल था.

”यहां एक जवान युवती की लाश भी है, वह कौन है?’’ एसएचओ ने रश्मि से सवाल किया.

”साहब, इस युवती का नाम सोनल है. यह ए ब्लौक में रहती है, लेकिन कुछ दिनों से इस का अपने लिवइन पार्टनर से झगड़ा चल रहा था. चूंकि मेरी इस के साथ गहरी जानपहचान बन गई थी, मैं इसे अपनी सहेली मानने लगी थी. पार्टनर से झगड़े के चलते सोनल 4-5 दिन से हमारे घर में आ कर रह रही थी. यह लाश सोनल की है.’’

”इस की हत्या कैसे हुई, मेरे कहने का मतलब है कि जब यह वारदात हुई, तुम और तुम्हारे पति क्या घर पर ही थे?’’

”नहीं साहब, मेरे पति दुर्गेश अपनी दुकान चले गए थे सुबह. उन की मजनू का टीला में ही मोबाइल रिपेयरिंग की शौप है. मेरी 2 बेटियां हैं, बड़ी बेटी का नाम दीया है, वह स्कूल जाती है. छोटी अभी 6 माह की ही थी. हम ने प्यार से इस का नाम यशिका रखा था. आज मैं दीया को लाने के लिए दोपहर में स्कूल गई तो सोनल को उस की देखभाल का जिम्मा सौंप गई थी. मैं जब दीया को स्कूल से ले कर घर आई तो घर का दरवाजा बंद था. मैं ने धक्का दिया तो वह खुल गया.

”कमरे में खून से सनी मुझे सोनल की लाश दिखी तो मेरे मुंह से चीख निकल गई. मैं घबरा कर उसे देखने अंदर घुसी तो मुझे पलंग पर यशिका भी खून से तर हालत में पड़ी मिली. यशिका और सोनल का गला किसी ने काट डाला था. मैं बदहवास हालत में बाहर भागी और चिल्ला कर मैं ने पड़ोसियों को इकट्ठा किया, फिर किसी के कहने पर थाने में फोन कर दिया. मैं ने फोन कर के पति दुर्गेश को भी घर बुला लिया.’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने पूछा, ”यह माना जा सकता है कि सोनल की किसी के साथ रंजिश रही होगी, वह मौका देख कर यहां आया और उस ने सोनल का गला काट दिया. लेकिन तुम्हारी बेटी तो अभी 6 महीने की ही थी, उस की हत्या भला कोई क्यों करेगा.’’

”मैं क्या कहूं साहब,’’ रश्मि रोते हुए बोली, ”इस छोटी सी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था, वह इतनी समझदार भी नहीं थी कि हत्यारे द्वारा सोनल की हत्या करने की बात किसी को बता देती.’’

”यही तो मैं भी सोच रहा हूं.’’ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले, ”अगर हत्यारे को यह डर हो कि उसे हत्या करते हुए जिस ने देखा है, वह यह भेद किसी को बता देगा, हत्यारा ऐसी सूरत में उस प्रत्यक्षदर्शी की हत्या करता है. यहां ऐसी बात नहीं है, फिर यशिका की हत्या क्यों की गई?’’

”दुर्गेश, क्या तुम्हारी किसी से दुश्मनी वगैरह तो नहीं थी? संभव है तुम्हारा कोई दुश्मन तुम से बदला लेने घर में घुसा, तुम नहीं मिले तो उस ने तुम्हारी बेटी का कत्ल कर दिया. सोनल की हत्या इसलिए हो गई कि वह तुम्हारी बेटी के हत्यारे से भिड़ गई…’’

”नहीं साहब. मैं ने जिंदगी में दोस्त बनाए हैं, दुश्मन नहीं. मैं सीधासादा जीवन जीने वाला व्यक्ति हूं साहब.’’ दुर्गेश रुंधे स्वर में बोला, ”मेरी फूल सी बेटी का कातिल बचना नहीं चाहिए साहब, उसे गिरफ्तार कर के आप फांसी पर चढ़ा दीजिए.’’

”कातिल कोई भी हो दुर्गेश, उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’’ हनुमंत सिंह ने कहा.

डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी वहां आ पहुंचे थे. उन्हें हनुमंत सिंह ने दोनों लाशें दिखाईं. डीसीपी श्री बांटिया ने वहां निरीक्षण करने के बाद एसएचओ हनुमंत सिंह से पूछा, ”आप ने कुछ मालूम किया, ये दोनों लाशें किस की हैं?’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने दोनों अधिकारियों को सारी जानकारी संक्षिप्त में दे दी.

एसीपी विनीता त्यागी पूरी बात सुनने के बाद बोलीं, ”मुझे ऐसा लगता है, यह हत्या सोनल के बौयफ्रेंड ने की है. चूंकि सोनल उस से नाराज हो कर अपनी सहेली रश्मि के घर आ कर रह रही थी, यह बात उसे अच्छी नहीं लगी. वह गुस्से में रश्मि की गैरमौजूदगी में यहां आया. सोनल और उस में झगड़ा हुआ. इसी झगड़े में उस ने सोनल की जान ले ली.’’

”लेकिन मैडम, इस 6 माह की बच्ची को उस ने क्यों मारा?’’ हनुमंत सिंह ने प्रश्न कर दिया.

”कातिल को पकडि़ए, इस का जवाब आप को उस से मिल जाएगा. आप यहां के सीसीटीवी फुटेज चैक करिए. सोनल के लिवइन पार्टनर को चैक कीजिए. इन दोनों हत्याओं का रहस्य इन्हीं में छिपा मिलेगा.’’ एसीपी विनीता त्यागी ने गंभीर स्वर में निर्देश दिया.

”ठीक है मैडम!’’ एसएचओ हनुमंत सिंह सिर हिला कर बोले.

फोरैंसिक टीम वहां के साक्ष्य जुटा कर अपना काम खत्म कर चुकी थी. पुलिस टीम ने वहां की जरूरी कागजी काररवाई पूरी कर के दोनों लाशें पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दीं, फिर रश्मि और उस के पति से सोनल के लिवइन पार्टनर का पूरा एड्रैस ले कर उन्होंने एसआई नितिन शर्मा को सोनल के बौयफ्रैंड की जांच का कार्य सौंप कर वह थाने लौट गए. एसीपी विनीता त्यागी का अनुमान गलत नहीं था. उन्हें सोनल के लिवइन पार्टनर पर शक हुआ था. एसआई नितिन शर्मा ने जब ए ब्लौक में जा कर वह कमरा देखा, जिस में सोनल कई महीनों से अपने लिवइन पार्टनर के साथ रह रही थी तो वहां दरवाजे पर ताला लटका मिला.

उन्होंने फोन से यह जानकारी सिविल लाइंस थाने में दी तो थाने से उन की मदद के लिए एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार को मजनू का टीला भेज दिया गया. दोनों ने वहीं के पड़ोसियों से उस लिवइन पार्टनर का नाम और उस के व्यवहार के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली. उस का नाम निखिल कुमार था. वह कुछ महीनों से यहां कमरा ले कर सोनल के साथ रह रहा था.  पड़ोसियों के अनुसार निखिल शराबी था और वह वक्तबेवक्त सोनल से लड़ताझगड़ता भी रहता था. उन में मारपीट भी होती रहती थी.

एक खास बात यह भी मालूम हुई कि सोनल हालफिलहाल गर्भवती थी. निखिल बच्चा चाहता था, किंतु सोनल ने उस की मरजी के खिलाफ वह बच्चा गिरा दिया था. निखिल इस बात से बहुत नाराज था. 4 दिन पहले उन में जबरदस्त झगड़ा हुआ था, तब सोनल अपना बैग ले कर अपनी सहेली रश्मि के यहां रहने चली गई थी. निखिल के पिता, 2 भाई और बहन भी मजनू का टीला में ही रहते थे. दोनों पुलिस अधिकारी उन का पता ले कर उन तक पहुंच गए. निखिल के विषय में पूछने पर उस की बहन मीनाक्षी (12 वर्ष) ने उपेक्षित स्वर में कहा, ”सर, हम उस के रवैए से उस के साथ कोई वास्ता नहीं रखते. वह हमारे लिए मर गया है.’’

”वह घर से लापता है, हमें केवल यह बताओ कि इस समय वह कहां छिपा हो सकता है?’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार बोले.

”क्या उस ने कोई गुनाह किया है साहब?’’ निखिल के पिता मोहन राम ने पूछा.

”वह जिस लड़की के साथ लिवइन पार्टनर के रूप में रह रहा था, उस लड़की का आज दोपहर में कत्ल हो गया है. निखिल पर हमें शक है, इसलिए उस के बारे में हमें जानकारी चाहिए.’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार ने कहा.

इस बार निखिल के बड़े भाई करण (25 वर्ष) ने कहा, ”सर, हमारा पैतृक घर उत्तराखंड के हल्द्वानी में है. वह वहां जा सकता है.’’ करण ने हल्द्वानी का पता लिखवा दिया.

”देखो, यदि निखिल आप लोगों से फोन से बात करे तो तुरंत हमें आप लोग वह फोन नंबर और वह कहां से बात कर रहा है, बताएंगे.’’ एसआई नितिन शर्मा ने कहने के बाद अपना मोबाइल नंबर उन्हें नोट करवा दिया.

इधर एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि-दुर्गेश के घर के आसपास के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए थे. उन्हें एक सीसीटीवी की फुटेज में निखिल रश्मि के घर चोरों की तरह जाता हुआ दिखाई दे गया. यह इस बात का पुख्ता सबूत था कि निखिल ही आज दोपहर में रश्मि के घर में आया था.

एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार और एसआई नितिन शर्मा ने थाने पहुंच कर निखिल के लापता होने की और उस के हल्द्वानी भाग जाने की जानकारी दी तो डीसीपी राजा बांटिया के कहने पर पुलिस की 2 टीमें उत्तराखंड के हल्द्वानी और टनकपुर के बनबसा बौर्डर के लिए भेज दी गईं. पुलिस अधिकारियों को संदेह था कि निखिल नेपाल भाग कर खुद को सुरक्षित महसूस कर सकता है. इसलिए बनबसा बौर्डर के लिए एक टीम भेजी गई थी. पुलिस की तत्परता की वजह से लव क्राइम के आरोपी निखिल को 24 घंटे में ही हल्द्वानी से गिरफ्तार कर लिया गया. निखिल ने गलती यह कर दी थी. उस ने 8 जुलाई की रात को अपनी बहन मीनाक्षी को फोन कर के बता था कि वह हल्द्वानी में है और पैसा इकट्ठा कर के नेपाल भागने की तैयारी कर रहा है.

मीनाक्षी ने उस का यह फोन नंबर पुलिस को भेज दिया था. उसे ट्रैस कर के ही पुलिस ने निखिल को हल्द्वानी दबोच लिया था. उसे 9 जुलाई, 2025 को दिल्ली लाया गया.

सिविल लाइंस थाने में डीसीपी राजा बांटिया, एसीपी विनीता त्यागी और थाने की पुलिस टीम द्वारा निखिल से पूछताछ की गई तो उस ने कुबूल कर लिया कि सोनल और रश्मि की बेटी की हत्या उस ने की थी.

”तुम ने अपनी प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों किया? इस क्राइम स्टोरी की सच्चाई क्या है?’’ एसएचओ हनुमंत सिंह ने निखिल से प्रश्न किया.

”साहब, वह मुझ से लड़ कर रश्मि के घर रहने चली गई थी. मैं उसे बहुत प्यार करता था, उस के बगैर रह नहीं सकता था. मैं दोपहर रश्मि के घर उस वक्त गया, जब वह अपनी बेटी दीया को लाने स्कूल गई थी. मैं ने सोनल से कहा कि वह घर चले. सोनल ने मना कर दिया कि अब वह मुझ से कोई वास्ता नहीं रखेगी, वह घर नहीं आएगी, यहीं रहेगी तो मैं ने बहुत समझाया, लेकिन वह मुझ से झगडऩे लगी. मुझे गुस्सा आ गया तो मैं ने चाकू से सोनल का गला काट डाला.’’

”तुम ने रश्मि की बेटी की हत्या किस वजह से की? उस से तो तुम्हारा कोई झगड़ा नहीं था.’’ हनुमंत सिंह ने पूछा.

”साहब, मुझे शक था कि सोनल का रश्मि के पति दुर्गेश से नाजायज रिश्ता है. कुछ महीने पहले ही सोनल गर्भवती हुई थी, इस की सब से ज्यादा खुशी मुझे हुई थी. मैं सोनल से कहता था कि हम इस बच्चे को दुनिया में लाएंगे. हम शादी कर के घर बसा लें, लेकिन सोनल ने वह बच्चा गिरवा दिया.

”मुझे संदेह था यह बच्चा दुर्गेश का था और दुर्गेश बच्चा नहीं चाहता था, इसलिए उस के कहने पर सोनल ने एबौर्शन करवाया था. मुझे दुर्गेश दुश्मन नजर आता था. सोनल उसी के चक्कर मे फंसी थी, तभी मुझ से झगड़ कर के वह बारबार उस के घर चली जाती थी. सोनल की हत्या के बाद मुझे पलंग पर दुर्गेश की बेटी सोती दिखाई दी. दुर्गेश से बदला लेने के लिए मैं ने उस का भी गला काट डाला और घर भाग आया.

”मैं सोनल को मार कर पछता रहा था, मैं खुद मरना चाहता था, लेकिन फिर मैं ने विचार बदल दिया और घर पर ताला लगा कर बैग ले कर हल्द्वानी चला गया, वहां से मैं नेपाल भाग जाना चाहता था. इस के लिए मुझे पैसे चाहिए थे.

”मैं रिश्तेदारों, दोस्तों से फोन कर के पैसे इकट्ठे कर रहा था, मैं ने इसीलिए अपनी बहन मीनाक्षी को भी फोन किया था और पैसे मांगे थे. मीनाक्षी ने मना कर दिया. मैं कहीं और से पैसों का इंतजाम कर के नेपाल भाग पाता, उस से पहले ही पुलिस ने मुझे पकड़ लिया और दिल्ली ले आई. सोनल और रश्मि की बेटी यशिका की हत्या मेरे हाथ से हो गई. इस का मुझे दुख है. मैं सोनल से बहुत प्यार करता था साहब.’’

”सोनल से तुम्हारी मुलाकात कैसे हुई थी, तुम तो शराबी आवारा और निकम्मे व्यक्ति हो.’’

”साहब, मैं शराब पीता हूं, निकम्मा नहीं हूं. मैं हल्द्वानी में था, तब भी काम करता था. यहां भी मैं तिमारपुर के एक होटल में काम करता हूं. सोनल मुझे 4 साल पहले मेरे हल्द्वानी वाले दोस्त अभय के बेटे की जन्मदिन पार्टी में मिली थी. अभय की पत्नी उस की सहेली थी. वह उसी के कहने पर नैनीताल से हल्द्वानी आई थी. नैनीताल में उस के परिजन रहते हैं. मैं ने सोनल को पार्टी में देखा तो उसे दिल दे बैठा. सोनल ने भी मेरा प्यार स्वीकार कर लिया.

”वह हल्द्वानी में 2-3 दिन के लिए आई थी, लेकिन मुझ से मुलाकात होने पर वह वापस नैनीताल नहीं गई. मैं ने हल्द्वानी में सोनल को खूब सैरसपाटा करवाया. वह वहां मेरे साथ रहने लगी. हमारे अनैतिक संबंध इस बीच बन गए थे, जिस से सोनल गर्भवती हो गई.

”हम एबौर्शन करवाना चाहते थे, किंतु समय अधिक हो जाने से सोनल का एबार्शन नहीं हो सका. समय पर सोनल को एक बेटा हुआ. चूंकि हम अविवाहित थे, इसलिए हम ने अल्मोड़ा में वह बच्चा 2 लाख रुपए में एक जरूरतमंद दंपति को बेच दिया. हम 2 लाख रुपया ले कर दिल्ली आ गए.

”पहले हम वजीरपुर गांव में एक किराए का कमरा ले कर रहते रहे. फिर वहां से हम मजनू का टीला में रहने आ गए. तब से हम यहां ही रह रहे थे. मैं चाहता था कि मैं सोनल से शादी कर के घर बसा लूं, लेकिन सोनल पता नहीं क्यों मुझ से शादी नहीं करना चाहती थी.

”अब उस की मौत के बाद मैं सोचता हूं, सोनल ठीक ही सोचती थी. मैं तिमारपुर में वेटर का काम करने लगा था तो मुझे शराब की गंदी आदत पड़ गई थी. मैं बातबात पर सोनल से लड़ता भी था, इसलिए वह मेरे साथ गृहस्थी नहीं बसाना चाहती थी. आज मेरे हाथों ही वह मारी गई है साहब. मैं अच्छा प्रेमी साबित नहीं हो सका.’’ एकाएक निखिल फफकफफक कर रोने लगा.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि और दुर्गेश को थाने बुलाया और रश्मि को वादी बना कर निखिल के खिलाफ सोनल और यशिका की हत्या का केस बीएनएस की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज कर लिया. दूसरे दिन निखिल को कोर्ट मे पेश कर के 5 दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू और सोनल का मोबाइल नंबर पुलिस ने जब्त कर लिया.

सोनल के घर नैनीताल में उस की हत्या की सूचना भेज दी गई थी. उस के पापा गिरीश चंद आर्या अपनी बेटी से मुंह मोड़ चुके थे, लेकिन जब उन्हें सिविल लाइंस थाना, दिल्ली से सोनल की हत्या की सूचना दी गई तो परिवार सहित वह दिल्ली आ गए. पुलिस ने सोनल की लाश पोस्टमार्टम के बाद उन के हवाले कर दी. रश्मि और दुर्गेश की बेटी की डैडबौडी पुलिस ने उन्हें सौंपी तो वह फूटफूट कर रोने लगे. उन के रुदन ने पुलिस वालों की भी आंखें नम कर दीं. एक अधूरे प्रेम कहानी का यह बहुत दुखद अंत था. Crime News in Hindi

 

 

Love Crime Story : जोरजबरदस्ती से नहीं दिल से होती है मोहब्बत

Love Crime Story : 27 वर्षीय संजना कुमारी और उस का भाई सौरभ कुमार पटना में रह कर सरकारी जौब की तैयारी कर रहे थे. कुछ दिनों बाद सौरभ का बिहार पुलिस में सबइंसपेक्टर पद पर सेलेक्शन हो गया तो वह ट्रेनिंग पर चला गया. फिर संजना ने एसएससी की सीजीएल परीक्षा पास कर ली. उसे 5 जून को सचिवालय में नौकरी जौइन करनी थी, लेकिन इस से पहले ही किसी ने उस की हत्या कर दी. उस की झुलसी हुई डैडबौडी कमरे में मिली. कौन था संजना का हत्यारा और क्यों की गई उस की हत्या?

जिस तरह से कौपी पर स्याही से लिखे शब्दों को पूरी तरह से मिटाया नहीं जा सकता, उसी तरह से जिंदगी का पहला प्यार दिल का ऐसा अहसास होता है, जिसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता. ठीक ऐसा ही प्यार का रिश्ता था संजना और सूरज के बीच. संजना और सूरज आसपास के गांव के निवासी थे. गांव में एक ही साथ खेले और पढ़े भी थे. कक्षा 7 से ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई दोनों ने एक साथ ही की थी. फिर दोनों के बीच प्यार होना तो स्वाभाविक ही था.

जैसे ही संजना और सूरज ने जवानी की दहलीज पर पांव रखा, दोनों एकदूसरे के आकर्षण में बंधे. फिर दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ और उन के बीच प्यार का बीज अंकुरित हो गया. हालांकि दोनों शुरू से ही क्लासफेलो रहे थे, लेकिन दोनों के फेमिली वालों में काफी अंतर था. जातिबिरादरी और हैसियत में भी. लेकिन प्यारमोहब्बत में ये चीजें कोई मायने नहीं रखतीं.

संजना कुमारी एक अच्छे परिवार से थी. उस की जिंदगी का मकसद भी सूरज से कुछ अलग ही था. वह पढ़लिख कर कुछ बनना चाहती थी ताकि अपने परिवार का नाम ऊंचा कर सके. यही कारण रहा कि उस ने ग्रैजुएशन करने के बाद अपना अगला रास्ता चुना और फिर वह गांव छोड़ कर पढ़ाई करने पटना जा पहुंची थी. संजना ने पटना हौस्टल में रह कर 3 साल तक पढ़ाई की. उस के बाद वह पटना के थाना श्रीकृष्णापुरी के आनंदपुरी मोहल्ले में रह रहे अपने भाई सौरभ कुमार के पास चली गई. संजना का भाई सौरभ कुमार पटना में रह कर अपनी जौब की तैयारी कर रहा था. दोनों भाईबहन पर सरकारी नौकरी पाने का जुनून सवार था. दोनों ही पढऩे में होशियार थे.

कुछ दिन पहले ही सौरभ का पुलिस में एसआई की नौकरी में चयन हो गया. फिर वह कमरा छोड़ कर अपनी ट्रेनिंग पर निकल गया था. सौरभ के जाते ही संजना उस कमरे में अकेली ही रह गई थी. सूरज कुमार एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखता था. यही कारण रहा कि वह ग्रैजुएशन करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं कर सका. उस के बाद उस ने आर्थिक स्थिति के चलते पटना में ही पेटकेयर क्लीनिक पर नौकरी कर ली थी.

सूरज के पास संजना का पहले ही मोबाइल नंबर था, जिस के सहारे वह टाइम मिलते ही उस से बात कर लिया करता था, लेकिन उसे पता था कि उस का भाई सौरभ कुमार उस के साथ ही रहता था. इसी कारण वह उस के पास जा कर मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था. जब उसे जानकारी हुई कि उस के भाई की नौकरी पुलिस में लग गई है और वह अपनी ट्रेनिंग पर भी चला गया है. इस जानकारी के मिलते ही वह संजना के पास जा कर उस से मुलाकात करने लगा था. उस के साथ ही दोनों के बीच फिर से पुराना सोया प्यार जाग उठा. हालांकि संजना भी उसे दिलोजान से प्यार करती थी. लेकिन उस का लक्ष्य सरकारी नौकरी पाना था. जबकि सूरज उसे पाने के लिए व्याकुल रहता था. उस की यह हरकत संजना को भी पसंद नहीं थी, लेकिन वह अपने प्यार के आगे मजबूर थी.

पिछले साल सूरज के फेमिली वालों ने उस पर शादी करने का दबाव बनाना शुरू किया, लेकिन सूरज किसी भी कीमत पर किसी और लड़की से शादी करने को तैयार नहीं था. संजना और सूरज के बीच में क्या खिचड़ी पक रही है, इस बात की जानकारी न तो संजना के फेमिली वालों को थी और न ही सूरज के फेमिली वालों को. सूरज जानता था कि उस के फेमिली वाले संजना की शादी के लिए आसानी से मानने वाले नहीं, लेकिन फिर भी वह संजना के पीछे पड़ा था. वह उस के बिना किसी अन्य लड़की के साथ शादी करने को तैयार नहीं था, लेकिन फेमिली वालों की जिद के आगे उस की एक न चली.

उसी दौरान सूरज ने अपने फेमिली वालों के दबाव में आ कर 25 मार्च, 2025 को किसी अन्य युवती के साथ शादी कर ली. लेकिन सूरज ने यह बात प्रेमिका संजना को नहीं बताई थी. शादी के एक महीने तक सूरज ने संजना को फोन नहीं किया. वह वैसे भी अपनी शादी वाली बात संजना से छिपा कर रखना चाहता था. लेकिन किसी तरह से यह बात संजना के कानों तक पहुंच गई.

जैसे ही संजना को सूरज की शादी वाली बात पता चली तो उस पर उसे गुस्सा भी आया. इस बारे में उस ने सूरज से कोई बात करना उचित नहीं समझा था. उस के बावजूद भी उस ने अपना गुस्सा उस के सामने जाहिर नहीं होने दिया. न ही संजना ने सूरज को यह अहसास होने दिया था कि उस की शादी होने वाली बात उसे पता चल गई है. शादी होने के बाद पहली बार सूरज संजना से मिलने पहुंचा तो संजना ने उस से सीधे मुंह बात नहीं की. सूरज के पहुंचते ही उस ने प्रश्न किया, ”तुम्हारी बीवी कैसी है?’’

”ठीक है, लेकिन यह बात तुम्हें किस ने बताई?’’ संजना का प्रश्न सुन सूरज को जैसे सांप सूंघ गया था.

”क्या तुम्हें लगता है कि तुम जो बात मुझ से छिपाओगे, उस का मुझे पता नहीं चलेगा.’’

”नहींनहीं संजना, मैं तो आज तुम्हें बताने ही वाला था. वो मेरे फेमिली वालों ने जबरदस्ती मेरी शादी कर दी. मैं उन के सामने कोई बहाना भी नहीं बना सका.’’ संजना की बात सुनते ही सूरज सटपटा गया.

”देखो सूरज, तुम अब शादीशुदा हो. अब से पहले हमारे और तुम्हारे बीच में जो भी चल रहा था, उसे पूरी तरह से भूल जाओ. आज तो तुम मेरे पास चले आए हो, लेकिन आगे मुझ से मिलने की कोशिश भी मत करना.’’

”नहीं संजना, यह शादी मैं ने अपनी खुशी से नहीं की. मेरे फेमिली वालों ने मेरी मरजी के बिना जबरदस्ती उस युवती के साथ शादी करा दी. लेकिन मेरी शादी हो जाने से तुम्हें कोई फर्क नहीं पडऩे वाला. संजना, मैं पहले भी तुम्हें जान से ज्यादा प्यार करता था और आगे भी करता रहंूगा.’’

”बस, बहुत हो चुका तुम्हारे प्यार का नाटक. अब मैं तुम्हारे साथ कोई भी रिश्ता रखना नहीं चाहती, अगर तुम ने आगे मुझ से मिलने की कोशिश भी की तो उस का अंजाम ठीक नहीं होगा.’’

उस दिन दोनों के बीच काफी नोकझोंक हुई. उस के बाद सूरज अपना सा मुंह ले कर अपने घर चला आया था.

संजना के पास से आने के बाद भी सूरज ने कई बार उस के फोन पर काल लगाने की कोशिश की. लेकिन हर बार उस का फोन इंगेज ही आता रहा. उस के बाद संजना ने सूरज के मोबाइल नंबर को ब्लौक कर दिया. सूरज को इस तरह से दुत्कारने के बाद संजना को भी बुरा लगा था. सूरज उस की जिंदगी का पहला प्यार था. संजना उसे बहुत प्यार करती थी, लेकिन उसे उस से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह चोरीछिपे इस तरह से किसी अन्य युवती के साथ शादी भी कर लेगा. उस ने बाद में मन को समझा लिया. सूरज उस से नहीं, बल्कि उस के जिस्म से प्यार करता था.

संजना काफी समझदार थी. उस के बाद उस ने सूरज को भुलाने की कोशिश करते हुए अपना ध्यान पूरी तरह से पढ़ाई पर लगा दिया था. कुछ ही दिनों में उस की मेहनत ऐसी रंग लाई कि उस ने एसएससी सीजीएल का एग्जाम पास कर लिया. उसे अगले महीने 5 जून को ही सचिवालय में नौकरी जौइन करनी थी. संजना की नौकरी लगने वाली बात किसी तरह से सूरज को भी पता चल गई थी. संजना की नौकरी लगने की बात सुनते ही सूरज को बहुत अफसोस हुआ. उसे लगा कि उस ने अपने फेमिली वालों के बहकावे में आ कर अपनी जिंदगी तबाह कर ली. उस के बाद उस ने फिर से संजना को फोन करना शुरू कर दिया.

संजना हर रोज उस की मिसकाल देख कर इग्नोर कर देती थी, लेकिन जब वह उस की मिसकाल से परेशान हो गई तो उस ने उस से लास्ट बार फोन पर बात करने का मन बनाया. फिर उस ने सूरज का फोन मिला दिया.

”सूरज, जब मैं ने तुम से एक बार कह दिया कि मुझे फोन मत करना. फिर बारबार मुझे फोन क्यों कर रहे हो?’’ संजना ने प्रश्न किया.

”संजना प्लीज, मुझे मेरी गलती की इतनी बड़ी सजा मत दो. मैं तुम्हारा गुनहगार हूं, लेकिन मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता. प्लीज संजना, मैं तुम से केवल एक बार मिलना चाहता हूं.’’ सूरज फोन पर गिड़गिड़ाया.

तब संजना ने सूरज को बताया कि मेरी नौकरी भी पक्की हो गई और अगले साल मेरी शादी भी होने वाली है. इसलिए तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम पूरी तरह से मेरा पीछा करना छोड़ दो. तुम्हारी शादी हो चुकी है, अपनी बीवी के साथ अपनी गृहस्थी संभालो. लेकिन उस के काफी समझाने के बाद भी जब सूरज उस से आखिरी बार मिलने की जिद पर अड़ा रहा तो संजना ने हामी भर ली. संजना ने उस दिन उस से साफसाफ शब्दों में कह दिया था कि यह उस का उस के साथ आखिरी मिलना होगा. उस के बाद कभी भी न तो मुझे फोन करना और न ही मिलने की कोशिश करना.

संजना को सूरज पर अभी भी थोड़ा विश्वास था. लेकिन सूरज के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. जब से संजना ने उस से मिलने से मना किया था, सूरज हर रात क्राइम की वेब सीरीज देखने लगा था. उन में फिल्माए गए हर क्राइम सीन को बहुत ही ध्यान से देखता था. वेब सीरीज देखते हुए उस ने मर्डर करने के कई तरीके भी सीख लिए थे. ताकि अगर उसे संजना का खून भी करना पड़े तो वह उसे किस तरह से अंजाम दे सकता है.

संजना से फोन पर बात होते ही सूरज का मन थोड़ा हलका हुआ. उसे उम्मीद थी कि संजना उस के प्यार को भूल नहीं पाएगी. उसी आशा के साथ वह उस से मिलने की जुगत में लग गया. लेकिन तब भी उस के मन में संजना को ले कर तरहतरह के सवाल उठ रहे थे. जब उसे यह पता चला कि उस की शादी फिक्स हो गई है, तो वह बहुत परेशान रहने लगा. उसे पता था कि उस की शादी के बाद वह उस से मिल नहीं पाएगा, लेकिन सूरज किसी भी तरह से संजना को छोडऩे को तैयार नहीं था.

यही सोच कर कई दिन से उस के दिमाग में कई सवाल उठ रहे थे ‘वह पहले उसे प्यार से समझाने की काशिश करेगा. अगर वह मान गई तो ठीक, नहीं तो वह उसे किसी भी तरह से मौत के घाट उतार देगा.’ यही सोच कर उस ने संजना से मिलने की पूरी तैयारी कर ली थी. पूर्वनियोजित प्लान के अनुसार ही उस ने एक टीशर्ट और ट्राउजर अपने बैग में रख लिया था.

संजना से मिलने की पूरी योजना तैयार करने के बाद वह 15 मई, 2025 को बाइक से घर से निकला और ठीक 11 बजे तक पटना पहुंच गया था. पटना पहुंचते ही उस ने अपनी बाइक बेली रोड में खड़ी की और फिर आटो से बोरिंग रोड तक पहुंचा. बोरिंग रोड से सूरज पैदल ही संजना के रूम तक पहुंचा. सूरज को संजना के मकान की सारी जानकारी थी. उसे पता था कि शहर के अधिकांश लोग गरमी के कारण 11 बजे के बाद अपनेअपने कमरों में कैद हो कर रह जाते हैं.

संजना जिस मकान में रूम ले कर रह रही थी, उस मकान पर हर वक्त अंदर से ताला लगा रहता था. मकान मालिक राजेश्वर प्रसाद ने अपने सभी किराएदारों को एकएक चाबी दे रखी थी, ताकि किराएदार किसी भी समय आएंजाएं. उस के रूम के बाहर पहुंचते ही सूरज ने उसे फोन मिला कर आने की सूचना दी. उस का फोन आते ही संजना उसे लेने मकान के मेन गेट पर आई. फिर वह चुपके से उसे दरवाजे से अपने रूम तक ले गई.

सूरज के रूम के अंदर दाखिल होते ही संजना ने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया था, ताकि उस के आने का किसी को आभास भी न हो सके. तभी संजना ने सूरज से प्रश्न किया, ”बोलो, तुम मुझ से क्या कहना चाहते हो? इस वक्त तुम शादीशुदा हो. तुम्हारी शादी हो जाने के बाद तुम्हारे और मेरे बीच में कोई रिश्ता बाकी नहीं रह गया. तुम ने जिस के साथ शादी की है, उसी के साथ ही मौजमस्ती करो. अब मेरे पीछे क्यों पड़े हो? एक बात कान खोल कर सुन लो. मैं बारबार तुम्हें समझासमझा कर हार चुकी हूं. तुम मेरा पीछा करना छोड़ दो. नहीं तो मुझे गुस्सा आ गया तो कहीं के भी नहीं रहोगे.’’

संजना के धमकी भरे शब्द सुन सूरज ने अपना रोनाधोना शुरू किया, ”संजना, मैं कई दिनों से ठीक से सो नहीं पाया हूं. यह शादी मैं ने अपनी मरजी से नहीं की, बल्कि फेमिली वालों ने जबरदस्ती करा दी. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए अपनी पत्नी को भी छोडऩे को तैयार हूं, लेकिन तुम मेरे साथ इतना अत्याचार मत करो. मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता.’’ यह कहतेकहते सूरज संजना की तरफ बढऩे लगा. अपनी तरफ सूरज को बढ़ते देख संजना ने उसे फिर से समझाने की पूरी कोशिश की, ”सूरज, मेरी तरफ मत बढऩा, अगर तुम ने मेरे साथ कोई जोरजबरदस्ती की तो मैं शोर मचा कर सब को इकट्ठा कर लूंगी. फिर तुम अपना अंजाम समझ लो. यहां से भाग भी नहीं पाओगे.’’

उस के बाद भी सूरज अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. उस ने 27 वर्षीय संजना के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. संजना चीख न पाए, इस के लिए उस ने पहले ही उस का मुंह दबा दिया था. इस के बावजूद संजना उस से भिड़ गई. फिर उस ने अपना बचाव करते हुए सूरज का डट कर मुकाबला किया. जब सूरज को लगने लगा कि संजना इतनी जल्दी हार मानने वाली नहीं, तभी उस का ध्यान कमरे में ही रखी कैंची पर गया. उस ने संजना के मुंह को बंद किएकिए ही वह कैंची उठाई और उस की गरदन पर कई वार कर डाले. गरदन पर कैंची का वार होते ही संजना निढाल हो कर नीचे गिर गई. अधिक खून बहने से संजना की मौके पर ही मौत हो गई. यह बात 15 मई, 2025 की है.

संजना के मरने के बाद भी सूरज की हैवानियत खत्म नहीं हुई. उसे मारने के बाद वह सारे सबूत खत्म करना चाहता था, ताकि पुलिस के आने के बाद वह इस मर्डर केस में फंस न जाए. उस ने कई वेब सीरीज देख रखी थी. इन सभी सबूतों को मिटाने के लिए वह किचन में गया. वहां से सिलेंडर लाया और उस का पाइप काट कर मृत पड़ी संजना के मुंह में डाल दिया. फिर उस ने उस में आग लगा दी.

इस घटना को अंजाम देने के दौरान उस के कपड़ों पर खून के छींटे आ गए थे, जिन को पहन कर वह अपने घर नहीं जा सकता था. इसलिए अपने साथ लाई टीशर्ट और लोअर पहन लिया. उस के बाद सूरज ने संजना के रूम में कपड़े इधरउधर बिखेर दिए. उस का मोबाइल, लैपटाप, उस के गले की सोने की चेन व 25 हजार रुपए नकद अपने बैग में रख लिए, ताकि उस के रूम से जाने के बाद पुलिस उस घटना को लूटपाट की घटना समझे.

घटनास्थल से सारे सबूत मिटाने के बाद सूरज ने संजना का रूम बाहर से बंद कर दिया और उस के बाद वह दबेपांव नीचे मेन गेट से फरार हो गया. सूरज ने बड़ी ही चालाकी से संजना को मौत की नींद सुला दिया था. जिस की मकान मालिक या उस में रह रहे अन्य किराएदारों को भनक तक नहीं लगी थी. इस घटना को अंजाम देने के बाद सूरज अपनी बाइक से वैशाली की ओर भाग गया. वैशाली के रास्ते में ही उस ने संजना का मोबाइल, लैपटाप, गंगा नदी में फेंक दिया, जिस से उस के पास उस का कोई भी सबूत न रहे.

शाम को लगभग 4 बजे के आसपास उस मकान में काम करने वाली मेड आई. उस ने घर का दरवाजा खुला हुआ देखा तो उस ने उस की जानकारी मकान मालिक को दी. तभी मेड की नजर संजना के रूम की ओर गई. उस ने देखा कि उस का कमरा पूरी तरह से अस्तव्यस्त था. उस के कमरे से कुछ अजीब सी स्मैल भी आ रही थी. उस ने जैसे ही उस के कमरे में अंदर झांक कर देखा तो संजना कुमारी को जली अवस्था में पड़ी देख उस की जोर से चीख निकल गई.

उस के बाद वह फौरन ही नीचे वाले हिस्से में आ गई थी. इस बात की जानकारी मिलते ही मकान मालिक राजेश्वर प्रसाद अपने किराएदारों के साथ उस कमरे में पहुंचे, जहां पर संजना का आग से झुलसा हुआ शव पड़ा हुआ था. राजेश्वर प्रसाद ने इस घटना की जानकारी मृतका संजना के भाई और श्रीकृष्णापुरी थाना पुलिस को दी. सूचना पाते ही थाने के एसएचओ प्रभात कुमार पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. घटनास्थल पर पहुंचते ही प्रभात कुमार ने जांचपड़ताल की.

शुरुआती जांच में पुलिस को लगा कि सिलेंडर में आग लगने के कारण संजना के साथ यह हादसा हुआ होगा. इस मामले में पुलिस ने मकान मालिक और वहां रह रहे अन्य किराएदारों से भी पूछताछ की. पुलिस को पता चला कि उस के साथ यह हादसा कैसे, कब हुआ, किसी को आभास तक नहीं हुआ था. न ही उस के चीखनेचिल्लाने की आवाज किसी ने सुनी थी.

लेकिन मकान मालिक राजेश्वर प्रसाद ने पुलिस को जानकारी दी कि उन के मकान का मेन गेट हमेशा बंद रहता था, लेकिन घटना के बाद वह खुला हुआ पाया गया था. जिस से लगता है कि उस दौरान उस के मकान में कोई बाहरी व्यक्ति अवश्य आया था, जो घटना को अंजाम दे कर चुपचाप फरार हो गया. संजना के साथ जो घटना घट चुकी थी, उस की जानकारी पाते ही उस के फेमिली वाले भी मुजफ्फरपुर से पटना पहुंच गए थे.

इस घटना की जानकारी पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी दी गई. जानकारी मिलते ही सचिवालय एडीपीओ-2 साकेत कुमार व एसपी (सिटी) स्वीटी सेहरावत भी घटनास्थल पर पहुंचीं. मृतका के फेमिली वालों के पहुंचते ही पुलिस ने विस्तार से जानकारी जुटाई. बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के गांव सबहा निवासी मिथलेश सिंह की संजना कुमारी इकलौती बेटी थी. मिथलेश सिंह का पढ़ालिखा और सभ्य परिवार था. इस से पहले दोनों भाईबहन पटना में रह कर सरकारी जौब की तैयारी कर रहे थे.

संजना कुमारी के भाई राजेश कुमार का कुछ समय पहले एसआई की पोस्ट पर चयन हो जाने के बाद संजना ने भी सीजीएल की परीक्षा पास कर ली थी. उसे 5 जून, 2025 को सचिवालय में नौकरी जौइन करनी थी. उस के साथ ही उस की शादी भी तय हो गई थी. अगले साल उस की शादी की डेट भी फिक्स हो गई थी. घटना से 2 दिन पहले तक संजना की मम्मी भी उसी के साथ थी. उसी दिन उस का भाई अपनी मम्मी को मुजफ्फरपुर छोड़ आया था. मम्मी ने संजना से घर चलने वाली बात कही थी, लेकिन संजना ने कह दिया कि 5 जून को उस की जौइनिंग हो जाएगी, उस के बाद ही वह घर आएगी, लेकिन उस के आने से पहले ही फेमिली वालों को उस के खत्म होने की सूचना मिली.

संजना के भाई सौरभ कुमार ने पुलिस को बताया कि 15 मई की शाम को 7 बजे उस के मकान मालिक ने बताया कि गैस सिलेंडर से झुलस कर संजना की मौत हो गई है. घटना की जानकारी पाते ही वह पटना पहुंचा. घटना के हालात देख कर ही उसे लगा कि उस की हत्या की गई है. सौरभ कुमार ने पुलिस को बताया कि संजना पूरी तरह से सरकारी जौब की तैयारी में लगी हुई थी. लेकिन वह किसी लड़के के संपर्क में थी या नहीं, उस के परिवार वालों के पास ऐसी कोई जानकारी भी नहीं थी. यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई को पूरा करते हुए संजना के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. उस के मकान मालिक और भाई के द्वारा उस की हत्या का शक जाहिर करने पर पुलिस ने उस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई.

सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध युवक आतेजाते दिखा, लेकिन मृतका के फेमिली वाले उस युवक से पूरी तरह से अंजान थे. उस फुटेज को देखते ही उस मकान में काम करनी वाली महिला ने पुलिस को बताया कि उस ने उस युवक को कई बार संजना के पास आतेजाते देखा था. वह युवक कौन और कहां का रहने वाला था, वह इस बारे में कुछ नहीं जानती. इस जानकारी के बाद पुलिस को पूरा यकीन हो गया था कि घटना से पहले संजना से मिलने जरूर कोई युवक आया था. उसी ने उस की हत्या की और वह फिर फरार हो गया.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने संजना का मोबाइल तलाशा तो वहां से उस के मोबाइल के साथसाथ उस का लैपटाप भी गायब मिला. उस के बाद पुलिस ने सच्चाई जानने के लिए संजना के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो सूरज नामक व्यक्ति का नंबर सामने आया. जिस पर संजना की हत्या होने से पहले बात हुई थी. सूरज के नंबर के सामने आते ही पुलिस ने उस के नंबर पर काल करने की कोशिश की तो वह बंद आ रहा था, लेकिन उस नंबर से सूरज की सारी जानकारी सामने आ गई थी.

सूरज कुमार सकरा थाने के ही बाजी बुजुर्ग गांव का रहने वाला था, जो शुरू से ही संजना का क्लासफेलो रहा था. उस मकान की मेड पहले ही बता चुकी थी कि कई बार एक युवक संजना ने मिलने आता रहता था. इस जानकारी से यह तो पूरी तरह से साफ हो गया कि संजना का हत्यारा सूरज ही था. इस हत्याकांड और पुलिस की काररवाई की पलपल की जानकारी सूरज किसी तरह से ले रहा था. उसी दौरान उस के दिमाग में एक सवाल पैदा हुआ. उस ने सोचा कि पुलिस उस की उस काल डिटेल्स से भी उस पर शक कर सकती है. इस से बचने के लिए उस ने अपने मोबाइल के खोने की रिपोर्ट लिखाने का प्लान बना लिया.

यह विचार मन में आते ही उस ने अपने दोस्त के माध्यम से अपने मोबाइल के खोने की रिपोर्ट दर्ज कराने का प्लान बनाया. फिर वह अपने दोस्त को साथ ले कर सकरा थाने की ओर रवाना हो गया. लेकिन सकरा थाने पहुंचने से पहले ही थाना एस.के. पुरी ने उसे धर दबोचा. पुलिस ने आरोपी सूरज को वैशाली जिले के हाजीपुर से गिरफ्तार किया था.

सूरज को गिरफ्तार कर के पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की. पुलिस पूछताछ के दौरान सूरज ने बताया कि वह संजना के साथ 7वीं कक्षा से पढ़ा था. आगे चल कर संजना और उस के बीच दोस्ती हुई और फिर प्यार भी हो गया था. उस ने कई बार संजना से शादी करने की बात भी कही थी, लेकिन वह उस के साथ शादी करने के लिए तैयार न थी. सूरज ने अपने फेमिली वालों के दबाव में आ कर किसी और लड़की के साथ शादी कर ली थी. लेकिन वह उस लड़की के साथ शादी कर के खुश नहीं था.

उस ने अपनी शादी वाली बात पूरी तरह से संजना से छिपा कर रखी थी, ताकि उस के साथ उस का प्यार पहले की तरह ही चलता रहे. लेकिन किसी तरह से उस की शादी की बात संजना को पता चल गई. जिस के बाद उस ने उस से मोबाइल पर बात करनी बंद कर दी थी. उसी दौरान सूरज को पता चला कि उस की नौकरी लगने के साथ ही उस की शादी की बात भी फिक्स हो गई है. सूरज चाहता था कि वह किसी दूसरे के साथ शादी न करे और दोनों के बीच पहले जैसा ही प्यार चलता रहे, लेकिन संजना इस के लिए तैयार नहीं थी. फिर 15 जून को उस ने संजना कुमारी की उसी के कमरे में जा कर हत्या कर दी.

 

स्ंाजना के खत्म होने के बाद जैसे ही उस ने वहां से जाने का प्लान बनाया, तभी उस के दिमाग में आया कि संजना ने उस के बाल खींचे थे. कहीं उस के बाल वहां पर न गिर गए हों. सूरज ने कई वेब सीरीजों में देखा था कि घटनास्थल से अगर पुलिस को हत्यारे का एक बाल भी मिल जाता है तो पुलिस उसी का डीएनए करा कर आरोपी तक पहुंच जाती है. यही सोच कर घटनास्थल से सारे सबूत मिटाने के लिए सूरज रसोई से गैस सिलेंडर लाया और उस का पाइप काटने के बाद संजना के मुंह में डाल दिया और वह उस का सारा सामान ले कर फरार हो गया था. इस हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपी सूरज को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. Love Crime Story

 

 

UP Crime News : पूजा ने प्रौपर्टी के लिए सास को मरवाया

UP Crime News : पति को छोडऩे के बाद 28 वर्षीय पूजा को कल्याण राजपूत से प्यार हो गया. उस के साथ वह लिवइन रिलेशन में रहने लगी. एक्सीडेंट में कल्याण की मृत्यु हो जाने के बाद पूजा ने जेठ संतोष राजपूत को फांस लिया. खूबसूरत पूजा से शादी करने के बाद संतोष की पहली पत्नी रागिनी उपेक्षा के चलते मायके चली गई. इसी बीच पूजा की 55 वर्षीय सास सुशीला की हत्या हो गई. किस ने की यह हत्या और इस की क्या वजह रही?

पूजा अपनी मासूम बेटी रूबी के साथ बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी के घर ग्वालियर पहुंची तो कमला ने उसे हाथोंहाथ लिया और खूब खातिरदारी की. पूजा को बहन के घर रहते कई दिन बीत चुके थे, लेकिन वह खुश नहीं थी. वह हमेशा चिंता में डूबी रहती. न ढंग से खाना खाती और न ही चेहरे पर मुसकान होती.

कमला उर्फ कामिनी ने छोटी बहन को इस हाल में देखा तो एक रोज शाम को चाय पीने के दौरान उस ने पूछा, ”पूजा, तुम दिनरात किस चिंता में डूबी रहती हो. न ढंग से बात करती हो और न ही हंसतीमुसकराती हो. क्या पति से झगड़ कर आई हो या फिर ससुर ने कुछ कहा है. जो भी बात हो मुझे खुल कर बताओ.’’

”दीदी, ऐसी कोई बात नहीं है. न मैं पति से झगड़ कर आई हूं और न ही ससुर ने कुछ कहा है. वे दोनों तो मुझे खूब प्यार करते हैं और हर बात मानते हैं. उन से हमें कोई शिकवाशिकायत नहीं है.’’ पूजा बोली.

”फिर इतनी परेशान क्यों है?’’ कमला ने पूजा को बीच में ही टोका.

”दीदी, मेरी परेशानी की वजह मेरी सास सुशीला देवी है.’’

”वह कैसे?’’ कमला ने पूजा के चेहरे पर नजरें गड़ा दीं.

”दीदी, मैं अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेच कर ग्वालियर शहर में बसना चाहती हूं. मेरी बेटी अब सयानी हो रही है. उसे शहर में पढ़ालिखा कर उस का जीवन संवारना चाहती हूं. मेरे पति व ससुर तो जमीन बेचने को राजी हैं, लेकिन सास सुशीला देवी अड़चन बनी है.’’

कमला और पूजा अभी आपस में बातें कर ही रही थीं कि तभी कमला का प्रेमी अनिल वर्मा वहां आ गया. वह भी उन की बातों में शामिल हो गया. पूजा की समस्या को समझने के बाद अनिल वर्मा बोला, ”पूजा, यदि सासरूपी तुम्हारी बाधा को मैं दूर कर दूं तो मुझे और कमला को क्या हासिल होगा?’’

पूजा को बाधा यानी यह समस्या दूर होने की उम्मीद जागी तो वह बोली, ”जमीन बिकने पर जो पैसा मिलेगा, उस में से तुम दोनों को भी हिस्सा दूंगी. बस किसी तरह इस प्रौब्लम दूर कर दो.’’

पैसा मिलने के लालच में अनिल वर्मा व उस की प्रेमिका कमला उर्फ कामिनी, पूजा की सास सुशीला देवी की हत्या करने को राजी हो गए. इस के बाद पूजा, कमला व अनिल वर्मा ने कान से कान जोड़ कर सुशीला देवी की हत्या की योजना बनाई. साथ ही प्लान ए और बी भी बनाया. प्लान ए के तहत हत्या के आरोप में पूजा के ससुर को जेल भिजवाना तथा प्लान बी के तहत पुलिस से बचाव करना.

22 मई 2025 को पूजा की बेटी रूबी का जन्मदिन था. पूजा ने योजना के तहत अपने पति संतोष राजपूत व ससुर अजय प्रताप राजपूत से फोन पर बात की और उन्हें बेटी के जन्मदिन पर आने का न्योता दिया और ग्वालियर आने को कहा. उस ने ऐसा इसलिए किया ताकि घर में सास सुशीला अकेली पड़ जाए और उस की हत्या आसानी से की जा सके.

पूजा के बुलाने पर संतोष और उस के पापा अजय प्रताप राजपूत ग्वालियर आ गए. रूबी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया. जश्न में कमला का प्रेमी अनिल वर्मा भी शामिल हुआ. दूसरे रोज पूजा ने पति संतोष को यह कह कर रोक लिया कि वह पेट से है, लेकिन दूसरा बच्चा अभी नहीं चाहती. अत: अस्पताल चल कर गर्भपात कराना है. ससुर अजय प्रताप को भी पूजा ने बहाने से रोक लिया. ससुर ने उसे 5 हजार रुपए भी खर्च के लिए दिए. अजय प्रताप को क्या पता था कि उस की शातिर बहू उसी के साथ छल कर रही है और उस की पत्नी का काल बनने जा रही है.

पूजा का पति व ससुर ग्वालियर में थे और पूजा की सास सुशीला देवी गांव में अकेली थी, अत: उचित मौका देख कर योजना के तहत कमला और अनिल वर्मा 24 जून, 2025 की सुबह 5 बजे बाइक से कुम्हरिया गांव स्थित सुशीला देवी के घर पहुंचे. सुशीला घर पर ही थी. पूजा की बहन कमला को सुशीला जानती थी. अत: उस ने उसे घर के अंदर आदर भाव से बिठाया और चायनाश्ता कराया. दोनों ने आधेआधे कप चाय पी. फिर अनिल और कमला ने सुशीला को अचानक दबोच लिया और बैड पर गिरा कर रस्सी से उस के हाथपैर बांध कर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया.

सुशीला चीख न सके, इस के लिए उन दोनों ने उस के मुंह में कपड़ा ठूूंस दिया, फिर उसी की चुनरी से उसे गला घोंट कर मार डाला. हत्या करने के बाद कमला व अनिल ने घर में लूटपाट की और नकदी तथा सोनेचांदी के गहने ले कर फरार हो गए. 24 जून, 2025 को दोपहर बाद अजय प्रताप राजपूत ग्वालियर से कुम्हरिया गांव स्थित अपने घर पहुंचे तो घर के मुख्य दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद थी. वह कुंडी खोल कर घर के अंदर कमरे में पहुंचे तो कमरे का नजारा देख कर चौंक गए. बैड पर उन की पत्नी सुशीला देवी की लाश पड़ी थी. वह चीखते हुए बाहर आए.

चाचा की चीख सुन कर सौरभ राजपूत आ गया. उस ने चाची की हत्या की बात सुनी तो वह भी दंग रह गया. इस के बाद तो पूरे गांव में कोहराम मच गया और लोगों की भीड़ अजय प्रताप के घर जुटने लगी. इसी बीच सौरभ ने चाची सुशीला की हत्या की सूचना थाना टहरौली पुलिस तथा डायल 112 पर दे दी. हत्या की सूचना पाते ही एसएचओ सुरेश कुमार पुलिस टीम के साथ कुम्हरिया गांव पहुंच गए. उन की सूचना पर एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति, सीओ अरुण कुमार राय तथा एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया.

मृतका सुशीला का शव बैड पर पड़ा था. बैड के एक सिरे से उस के हाथ तथा दूसरे सिरे से रस्सी से उस के पैर बंधे थे. मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था. मृतका की उम्र 55 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या बेहोश कर गला घोंट कर की गई थी. बेहोशी का इंजेक्शन बेड के नीचे पड़ा था. साक्ष्य के तौर पर पुलिस ने उस खाली पड़े इंजेक्शन को सुरक्षित कर लिया. एक कमरे का ताला टूटा पड़ा था और बक्से का ताला भी टूटा पड़ा था. उस में रखा सामान कमरे में फैला था. जिस कमरे में बैड पर लाश पड़ी थी, उसी कमरे में छोटी सी मेज पर चाय के 2 कप तथा नमकीन, बिसकुट की प्लेटें रखी थीं. आधाआधा कप ही चाय पी गई थी.

निरीक्षण के बाद एसएसपी ने शव को झांसी के जिला अस्पताल पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दिया और एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह को हत्या के खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने तब एक स्पैशल टीम बनाई, जिस में एसएचओ के अलावा सर्विलांस तथा एसओजी के तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. साथ ही खास खबरियों को भी लगा दिया. पुलिस की इस स्पैशल टीम ने सब से पहले घर के मुखिया अजय प्रताप से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि हत्यारे एक लाख नकद तथा 8 लाख के जेवर भी लूट ले गए थे.

”तुम्हें किसी पर शक है?’’ एसपी ज्ञानेंद्र सिंह ने अजय राजपूत से पूछा.

”हां सर, मुझे बड़ी बहू रागिनी और उस के भाई आकाश पर शक है. रागिनी सुशीला से खुन्नस रखती थी. इसी खुन्नस में दोनों ने मिल कर मेरी पत्नी की हत्या की होगी.’’

अजय राजपूत के अलावा पुलिस टीम ने उस के बेटे संतोष व भतीजे सौरभ राजपूत से भी पूछताछ की.

ससुर को क्यों फंसाना चाहती थी पूजा

अजय के भतीजे सौरभ राजपूत ने बताया कि चाचा की चीख सुन कर वह घर आया तो चाची बैड पर मृत पड़ी थीं. उस ने ही पुलिस को सूचना दी थी. उस ने बताया कि सुबह 5 बजे एक युवक व एक युवती चाची के घर बाइक से आए थे. वे दोनों मुंह पर कपड़ा बांधे थे. उन्होंने घर से करीब 100 मीटर दूर अपनी बाइक खड़ी की थी. लगभग डेढ़ घंटा बाद वे चले गए थे. उस समय भी दोनों के मुंह पर कपड़ा बंधा था, इसलिए वह उन दोनों को पहचान नहीं पाया था. बाइक दूर खड़ी थी, इसलिए नंबर भी नोट नहीं कर पाया.

सौरभ ने यह भी बताया कि 3:10 बजे उस की पत्नी के मोबाइल फोन पर एक काल आई थी. यह काल पूजा ने अपने नंबर से न कर के दूसरे के मोबाइल नंबर से की थी और चाची का हालचाल पूछा था. सौरभ ने वह नंबर पुलिस को दे दिया. इधर संदेह के आधार पर पुलिस ने अजय प्रताप की तहरीर पर दतिया निवासी आकाश व उस की बहन रागिनी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच में जुट गई. पुलिस टीम दूसरे रोज रागिनी व आकाश की तलाश में दतिया को निकलने ही वाली थी कि आकाश और रागिनी स्वयं ही थाना टहरौली आ गए. उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि सुशीला देवी की हत्या हो गई है और रिपोर्ट उन के खिलाफ दर्ज की गई है तो वे घबरा गए और थाने आ गए.

रागिनी ने पुलिस के सामने कहा कि यह बात सही है कि वह पूरे परिवार से नफरत करती है, क्योंकि पति संतोष राजपूत ने विधवा देवरानी पूजा से शादी रचा कर उस के साथ छल किया तो दूसरी ओर सासससुर ने पूजा को जरूरत से ज्यादा प्यारदुलार दे कर उस के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई. वह सौतन को कब तक बरदाश्त करती. इसलिए ससुराल छोड़ कर मायके में आ कर रहने लगी. रागिनी ने कहा कि उस ने सास की हत्या नहीं की. उसे और उस के भाई को हत्या के मामले में झूठा फंसाया जा रहा है. सास की हत्या का राज ससुर अजय व उस की बहू पूजा के पेट में ही छिपा है.

रागिनी ने जिस बेबाकी से अपनी बात पुलिस को बताई, उस से पुलिस को लगा कि रागिनी व उस का भाई आकाश निर्दोष हैं. उन्हें थाने से जाने दिया. हां, इतना जरूर कहा कि सहयोग के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाए, वे थाने पर जरूर आएं. रागिनी के बयान के आधार पर अजय प्रताप की बहू पूजा शक के दायरे में आ गई थी. शक का दूसरा कारण यह भी था कि सास सुशीला की हत्या को 3 दिन बीत गए थे, लेकिन पूजा ग्वालियर से ससुराल नहीं आई थी. मोबाइल फोन के जरिए ही वह पति व ससुर के संपर्क में थी और पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी ले रही थी. जबकि सास की मौत की खबर पाते ही उसे ससुराल आ जाना चाहिए था.

27 जून, 2025 को पुलिस टीम ने शक के आधार पर पूजा को उस के पति संतोष के सहयोग से ग्वालियर स्थित घर से हिरासत में ले लिया और थाना टहरौली ले आई. थाने में उस से सास सुशीला की हत्या के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गई. बोली, ”साहब, मैं तो ग्वालियर में थी. पति व ससुर भी मेरे साथ थे. मुझे क्या पता कि सास को किस ने मारा?’’

”तुम ने सुशाीला की हत्या नहीं की तो फिर किस ने की?’’ टीम के एक दरोगा ने उस से पूछा.

”साहब, मुझे तो अपने ससुर अजय प्रताप राजपूत पर ही शक है. वह सास से खुन्नस रखते थे. सास को शक था कि ससुर मुझे चाहते हैं और संबंध बनाना चाहते हैं.’’

पूजा के बयान के आधार पर पुलिस टीम कुम्हरिया गांव पहुंची और अजय प्रताप राजपूत को पकड़ कर थाने ले आई. रात भर उन से सख्ती से पूछताछ की गई, लेकिन वह अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करते रहे.

सुबह पुलिस टीम ने पूजा व अजय प्रताप राजपूत को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की. पूजा ने अपनी बात दोहराई और ससुर अजय प्रताप से कहा कि वह सास की हत्या का जुर्म कुबूल कर लें. वह उन्हें जल्द ही जमानत पर छुड़ा लेगी.

पूजा की बात सुन कर अजय प्रताप सन्न रह गए. वह सोचने लगे जिस बहू को उन्होंने ससम्मान घर में रखा, लाड़प्यार दिया, वही बहू उसे हत्या जैसे मामले में फंसाना चाहती है. उन के दिमाग में विचार कौंधा कि कहीं पूजा ने ही तो सुशीला की हत्या नहीं कराई. क्योंकि पूजा जमीन बेचना चाहती थी और सुशीला विरोध करती थी.

अजय ने तब सारी बात पुलिस को बताई और अब हत्या का शक पूजा पर जताया. पूजा अब पूरी तरह से शक के घेरे में आ गई थी. अत: पुलिस टीम ने पूजा से सख्ती से पूछताछ की. पूजा ने तब सास की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. पूजा ने बताया कि मैं अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेच कर ग्वालियर में बसना चाहती थी. लेकिन सास सुशीला बाधक बन गई थी. इसी जमीन के लिए मैं ने सास की हत्या करवाई. हत्या के लिए मैं ने रुपयों का लालच दे कर बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी व उस के प्रेमी अनिल वर्मा को तैयार किया. ससुर को फंसाना भी साजिश का हिस्सा था. ससुर जेल चले जाते तो जमीन बिकने में कोई अड़चन नहीं आती. कमला व उस के प्रेमी अनिल वर्मा ने ही प्लान के तहत सास की हत्या की और घर में लूटपाट भी की.

पूजा ने गुनाह कुबूल किया तो पूजा की मदद से पुलिस टीम ने पूजा की बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी को भी ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया. लेकिन अनिल वर्मा पुलिस को चकमा दे गया. कमला उर्फ कामिनी को थाना टहरौली लाया गया. एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह व सीओ (टहरौली) अरुण कुमार राय ने जब कमला से सुशीला की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने सहज ही हत्या व लूटपाट का जुर्म कुबूल कर लिया, लेकिन उस के पास से लूटपाट की ज्वैलरी बरामद नहीं हुई. जेवर के बारे में पूछने पर कमला ने बताया कि लूटपाट के जेवर उस के प्रेमी अनिल वर्मा के पास हैं. वह जेवर को बेचने की फिराक में किसी ज्वैलर के संपर्क में है.

चूंकि पूजा और उस की बहन कमला उर्फ कामिनी ने सुशीला देवी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: पुलिस ने मृतका के पति अजय प्रताप की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) व (61) के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. दूसरे रोज (29 जून) को उन्हें झांसी की कोर्ट में पेश कर जिला जेल भेज दिया गया. चूंकि लूट का माल कमला के प्रेमी अनिल वर्मा के पास था. उस की खोज में पुलिस टीम जुट गई. पुलिस ने उस की टोह में खास खबरियों को भी लगा दिया.

30 जून, 2025 की रात 9 बजे एक खास मुखबिर से थाना टहरौली के एसएचओ सुरेश कुमार को सूचना मिली कि वांछित अपराधी अनिल वर्मा किसी रिश्तेदार के यहां लूटी गई ज्वैलरी पहुंचाने के इरादे से बघौरा के घुरैया तिराहे से निकलने वाला है. इस सूचना पर सीओ (टहरौली) अरुण कुमार राय, इंसपेक्टर सुरेश कुमार तथा उल्दन थाने के एसएचओ दिनेश कुमार पुलिस टीम के साथ घुरैया तिराहे पहुंचे और चैकिंग शुरू कर दी.

रात 10 बजे के लगभग पुलिस को एक संदिग्ध बाइक सवार आता दिखा. पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन उस ने बाइक दौड़ा दी और पुलिस पर फायर झोंक दिया. जवाबी काररवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई. गोली अनिल वर्मा के पैर में लगी और वह घायल हो गया. पुलिस ने तब अनिल वर्मा को दबोच लिया. पुलिस को उस के पास से 8 लाख रुपए कीमत के आभूषण बरामद हो गए, जो उस ने सुशीला देवी हत्या के बाद लूटे थे. पुलिस ने हत्या में प्रयोग उस की बाइक तथा तमंचा भी अपने कब्जे में ले लिया. उस ने हत्या में प्रयुक्त सीरिंज भी बरामद करा दी, जो उस ने बाइक की डिक्की में छिपा दी थी.

पुलिस जांच, आरोपियों के बयानों एवं मृतका के फेमिली वालों द्वारा दी गई जानकारी के तहत झांसी की कातिल हसीना की दिल को झकझोर देने वाली कहानी प्रकाश में आई. उत्तर प्रदेश के झांसी शहर के थाना प्रेमनगर अंतर्गत एक मोहल्ला है— नगरा महावीरन. इसी मोहल्ले में बोधराम जाटव परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी सरला के अलावा 2 बेटे निरपत, गणपत तथा 2 बेटियां कमला तथा पूजा थीं. बोधराम रेलवे में लोको पायलट थे. बड़ी बेटी कमला उर्फ कामिनी सयानी हुई तो उन्होंने उस का विवाह हजीरा (ग्वालियर) निवासी सूरज जाटव से कर दिया.

बोधराम की बेटी पूजा अपने भाईबहनों में सब से छोटी थी. जब वह 7 साल की थी, तभी उस की मम्मी सरला की मौत हो गई थी. पूजा की भाभी लीलावती ने उसे पालपोस कर बड़ा किया था. यौवन की दहलीज पर आते ही उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया था. जो भी उसे देखता, मंत्रमुग्ध सा हो जाता. घर के सभी लोग उसे बेहद प्यार करते थे. इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद पूजा की पढ़ाई पर विराम लग गया था. पूजा सयानी हुई तो बोधराम को उस के विवाह की चिंता सताने लगी. उस ने बेटी के लिए योग्य वर की खोज शुरू की तो उसे रमेश जाटव पसंद आ गया. रमेश जाटव रेलवे में नौकरी करता था और संयुक्त परिवार के साथ ओरछा में रहता था. रमेश पसंद आया तो बोधराम ने 4 मई, 2014 को पूजा का विवाह रमेश के साथ धूमधाम से कर दिया.

शादी के बाद कुछ माह तक दोनों का जीवन हंसीखुशी से बीता. उस के बाद दोनों के बीच कलह होने लगी. कलह का पहला कारण था संयुक्त परिवार में रहना. पूजा अपने सासससुर के साथ रहने के बजाय अलग रहना चाहती थी. लेकिन रमेश को अलग रहना पसंद न था. दूसरा कारण था पूजा की फैशनपरस्ती. वर्ष 2016 के जुलाई माह में रमेश पर किसी ने जानलेवा हमला किया. उस पर गोली चला दी, लेकिन उस की जान बच गई. उस रोज वह पूजा को मायके से ले कर अपने घर ओरछा जा रहा था. रमेश को शक हुआ कि गोली पूजा ने चलवाई थी, अत: उस ने थाना प्रेमनगर में पूजा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी.

पुलिस ने पूजा को आम्र्स एक्ट की धारा 25/4 व आईपीसी की धारा 506 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस के बाद पूजा व रमेश के बीच अलगाव हो गया. पूजा लगभग 6 माह तक जेल में रही. उस के बाद बोधराम ने पूजा की जमानत करा ली और वह मायके में रहने लगी. मुकदमे की पैरवी के लिए पूजा झांसी कोर्ट जाती थी. कोर्ट में ही एक रोज पूजा की मुलाकात कल्याण उर्फ लाखन राजपूत से हुई. कल्याण पर भी चोरी, लूट व मारपीट के लगभग आधा दरजन मुकदमे दर्ज थे. इन्हीं की पैरवी के लिए वह भी कोर्ट आता था.

कोर्ट की हुई मुलाकात ऐसे बदली प्यार में

कल्याण उर्फ लाखन के पापा अजय प्रताप राजपूत झांसी जिले के कुम्हरिया गांव के रहने वाले थे. परिवार में पत्नी सुशीला देवी के अलावा 2 बेटे संतोष व कल्याण थे. उन के पास खेती की 16 बीघा भूमि थी. बड़े बेटे संतोष की शादी हो चुकी थी. उस की पत्नी रागिनी सुंदर व सुशील थी. घरगृहस्थी वही संभालती थी. उन का छोटा बेटा कल्याण उर्फ लाखन अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए उस का विवाह नहीं हुआ था.  पूजा और कल्याण राजपूत पहली ही मुलाकात में एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए थे. उन के बीच दोस्ती हो गई और खुल कर बातचीत होने लगी. मोबाइल फोन पर भी वे घंटों बतियाने लगे. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई.

प्यार परवान चढ़ा तो पूजा झांसी के गुमनावारा में किराए के मकान में कल्याण के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. पूजा के भाई निरपत को कल्याण के साथ रहना अच्छा न लगा, इसलिए उस ने पूजा से रिश्ता खत्म कर लिया. बोधराम भी चिंता में लकवाग्रस्त हो गए. उन्होंने भी पूजा से नाता तोड़ दिया. 25 मई, 2019 को कोंछा झाबर के पास सड़क दुर्घटना में कल्याण की मौत हो गई. पूजा विधवा हो गई और उस पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा. बेटे की मौत का अजय व उन की पत्नी सुशीला को भी गहरा सदमा लगा.

कल्याण की तेरहवीं वाले दिन पूजा कुम्हरिया गांव ससुराल आ गई. वह सुशीला देवी की गोद में सिर रख कर रोने लगी और बोली, ”मम्मी, अब मैं कहां जाऊं. मेरा कोई नहीं है. बचपन में मम्मी मर गई और भाई व पापा ने भी नाता तोड़ लिया. अब मैं एक तरह से अनाथ हूं.’’

पूजा के आंसुओं ने सुशीला देवी का दिल पिघला दिया. उस ने पूजा को गले लगा कर उसे बहू के रूप में स्वीकार कर लिया. हालांकि फेमिली के लोगों ने विरोध किया और कहा कि वह छोटी जाति की है. लेकिन सुशीला के आगे किसी की नहीं चली.

पूजा अब ससुराल में खुशीखुशी रहने लगी. रागिनी ने भी पूजा को अपनी देवरानी के रूप में स्वीकार कर लिया. देवरानीजेठानी घर का काम मिलजुल कर करतीं और हंसीखुशी से रहतीं. पूजा ने अपनी सेवा से सासससुर का भी दिल जीत लिया था. पूजा खूबसूरत व जवान थी. उस ने जेठ संतोष पर नजरें गड़ानी शुरू कर दीं. संतोष भी पूजा की खूबसूरती का कायल था और मन ही मन उसे चाहता था. संतोष रंगीनमिजाज था. रिश्तेनाते उस के लिए कोई मायने नहीं रखते थे. बहू और जेठ का रिश्ता होने के बावजूद वह पूजा के जिस्म को पाने के लिए लालायित रहने लगा. पूजा को रिझाने के लिए उस ने तरहतरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए.

मर्द जिस नजर से औरत को देखता है, उस से वह उस के मन का भाव समझ जाती है. संतोष जिस तरह से ललचाई नजरों से उस के शबाब को निहारता था, उस से पूजा समझ गई कि जेठ की नीयत ठीक नहीं है. पूजा भी जेठ को अपना बनाना चाहती थी, इसलिए उस ने कभी टोकाटाकी नहीं की.

जेठ को फांस कर जेठानी को किया दूर

संतोष अब पूजा से बतियाने भी लगा था. बातचीत में वह पूजा के रूप की प्रशंसा तो करता ही, उस के व्यवहार की भी खूब तारीफ करता. पूजा भी उस की बातों में रस लेने लगी थी. धीरेधीरे दोनों के बीच का परदा हटता गया और फिर एक दिन उन के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. रागिनी मायके से वापस आई तो उसे पूजा की चालढाल पर शक हुआ. उस ने निगरानी शुरू की तो एक रात उस ने पति को पूजा की बांहों में झूलते देख लिया. वह समझ गई कि पूजा उस की सौतन बन गई है.

उस ने इस नाजायज रिश्ते का विरोध किया तो संतोष और पूजा उसी पर हावी हो गए. सास और ससुर ने भी चुप्पी साध ली. उन दोनों ने रागिनी को समझाया कि घर की बात है, घर में ही रहने दो. मजबूरन रागिनी ने पूजा को सौतन के रूप में स्वीकार कर लिया. कुछ दिनों बाद मामला ठंडा पड़ा तो संतोष ने पूजा के साथ शादी रचा ली और उसे पत्नी का दरजा दे दिया. शादी के एक साल बाद पूजा ने एक बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म से घर में खुशियां छा गईं. सभी उसे बेहद चाहते थे.

पूजा से शादी करने के बाद संतोष ज्यादा समय उसी के साथ बिताता था. वह पूजा की हर बात मानता था और उसे भरपूर प्यार देता था. जबकि रागिनी पति के प्यार के लिए तरसती रहती थी. संतोष उस की कोई बात नहीं मानता था और अकसर उसे अपमानित करता रहता था. वक्त के साथ पूजा की बेटी 3 साल की हो गई थी. पूजा को गांव में अच्छा नहीं लगता था. वह ग्वालियर शहर में बसना चाहती थी. एक रोज उस ने पति व ससुर के सामने इच्छा जताई कि वह अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेचना चाहती है. इस पर थोड़ा नानुकुर के बाद संतोष व अजय प्रताप राजी हो गए, लेकिन जब सास सुशीला को जमीन बेचने की बात पता चली तो उस ने पूजा को आड़े हाथों लिया और जमीन बेचने का विरोध किया.

इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. पूजा जब भी जमीन बेचने की बात करती, सास सुशीला विरोध करती. इस विरोध के कारण पूजा मन ही मन सास से नफरत करने लगी थी. हालांकि पूजा अपने लाड़प्यार तथा सेवा भाव से सास को पटाने की पूरी कोशिश करती थी. इधर घर में रागिनी की हैसियत एक दासी जैसी थी. उसे न कोई प्यार देता था न सम्मान. सास ने मंगलसूत्र भी उस से छीन लिया था. हताश रागिनी का ससुराल में जीना दूभर हो गया तो पिछले साल से वह अपने मायके दतिया में आ कर रहने लगी.

मई, 2025 के पहले सप्ताह में पूजा ने फिर से जमीन बेचने की बात चलाई तो सास सुशीला बाधा बन गई. उस ने पूजा को डांटफटकार भी लगाई. पूजा तब सास से लड़झगड़ कर 16 मई, 2025 को अपनी बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी के घर हजीरा (ग्वालियर) आ गई. बहन के घर रह कर पूजा ने सास सुशीला की हत्या की योजना बनाई.

3 जुलाई, 2025 को पुलिस ने आरोपी अनिल वर्मा को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. पूजा व कमला पहले ही जेल जा चुकी थीं.पूजा के जेल जाने के बाद उस की बेटी संतोष के घर पलबढ़ रही थी. UP Crime News

 

 

Hindi love Story in Short : अपने अस्पताल की मैनेजर से चक्कर डाक्टर पत्नी खल्ल्लास

Hindi love Story in Short : मैडिकल की पढ़ाई करने के दौरान ही राकेश रोशन और सुरभि राज को प्यार हो गया. फेमिली वालों की मरजी के बिना दोनों ने शादी भी कर ली थी. आगे चल कर दोनों ने एक आधुनिक अस्पताल बनवाया. अस्पताल में तैनात एचआर मैनेजर अलका से डा. राकेश की आंखें 4 हो गईं. इन दोनों की जुनूनी मोहब्बत में 35 वर्षीया डा. सुरभि राज ऐसी पिसी कि…

”यार अलका, आजकल मैं बहुत टेंशन में रहता हूं,’’ डा. राकेश रोशन ने अपनी प्रेमिका अलका से आगे कहा, ”लगता है सुरभि को हमारे संबंधों पर शक हो गया है. तभी तो वह आजकल मुझ से उखड़ीउखड़ी सी रहती है और हम दोनों पर नजर भी गड़ाए हुए है कि मैं कहां जा रहा हूं? तुम से कब मिल रहा हूं? हमारे बीच बात क्या हो रही है…’’

”हां, मुझे भी ऐसा लगता है कि सुरभि मैम को हमारे अफेयर के बारे में पक्की जानकारी हो चुकी है. तभी तो वह मुझे भी शक की नजरों से घूरघूर कर देखती हैं.’’ जवाब देते वक्त अलका के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं.

”अलका, बात यह है कि मैं तुम्हें दूर कर भी नहीं सकता और न ही तुम्हारे बिना जीने की कल्पना ही कर सकता हूं. मुझे तो यही लगता है कि अब सुरभि को रास्ते से हटाना ही होगा.’’

”मगर कैसे?’’ अलका ने सवाल दागा, ”तुम्हारे लिए उसे रास्ते से हटाना इतना आसान नहीं होगा राकेश, जितना आसान तुम समझ रहे हो. वो तुम्हारी पत्नी है.’’

”जानता हूं मैं. मगर उसे रास्ते से हटाने के लिए चक्रव्यूह की रचना करनी होगी. ऐसी रचना, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. फिलहाल, ससुराल वालों को हमारे खटास होते रिश्तों के बारे में भनक लग चुकी है. ऐसे में अगर मैं ने कोई कदम उठाया और उसे कुछ हुआ तो सीधा शक हम पर ही आ जाएगा, इसलिए मैं चाहता हूं कि हम उसे ऐसे ठिकाने लगाएं कि न तो किसी को हम पर शक हो और न ही कोई सबूत मिले. इस के लिए हमें जबरदस्त प्लान करना होगा.’’ कहते हुए राकेश के चेहरे पर अजीब सी शैतानी चमक थिरक उठी थी.

”हूं. तो कैसा प्लान किया जाए, जिस से सुरभि की मौत के बाद किसी को हम पर शक न हो?’’ अलका ने फिर से सवाल दागा.

प्रेमिका का सवाल सुन कर राकेश ने कुछ पल के लिए चुप्पी साध ली. फिर कुछ देर सोचने के बाद बोला, ”यही कि अपने इस खतरनाक प्लान में कुछ और भरोसेमंद लोगों को शामिल करूंगा, जो हमारे लिए हर वक्त खड़े रहते हैं.’’

”किस की बात कर रहे हो तुम? कौन है जो हमारे भरोसे पर खरा उतर सकता है? हमें कदम बहुत फूंकफंूक कर उठाने होंगे.’’

पटना के अगमकुआं का रहने वाला डा. राकेश रोशन उर्फ चंदन सिंह और अलका यह सोच कर काफी परेशान थे कि अच्छाभला उन का प्यार चल रहा था, बीच में अचानक सुरभि कहां से आ टपकी कि सारा मजा ही किरकिरा हो गया. ऊपर से पैसों का हिसाब लेने लगी, सो अलग. मेरी बिल्ली मुझ से म्याऊं कर रही है. उस की ये बातें अब बरदाश्त के बाहर हो गई थीं, इसलिए इस का कुछ इंतजाम करना ही होगा.

”तो बताया नहीं तुम ने? हमारी प्लानिंग में किसे शामिल करना चाहतेे हो, जो हमारे राज को राज बनाए रखने में हमारा साथ देगा?’’ अलका ने एक बार फिर पूछा.

”मैं ने इस योजना में अपने छोटे भाई रमेश और अस्पताल के कर्मचारी अनिल और मसूद आलम को शामिल करने का फैसला किया है मेरी जान. ये तीनों मेरे सब से खास और हमराज हैं. तीनों इतने वफादार हैं कि अपनी जान तो दे सकते हैं, लेकिन जीते जी अपना मुंह नहीं खोलेंगे.’’ राकेश ने कहा. राकेश का जबाव सुन कर अलका खुशी से झूम उठी और राकेश को खींच कर अपनी बांहों में भर लिया. यह बात घटना से करीब 3 महीने पहले यानी जनवरी, 2025 की है. प्रेमिका अलका के साथ योजना बनाने के बाद राकेश ने अगले दिन हौस्पिटल के अपने औफिस में एक मीटिंग बुलाई.

उस मीटिंग में राकेश ने अपने छोटे भाई रमेश, हौस्पिटल के दोनों कर्मचारी अनिल और मसूद आलम को बुलाया था. इस मीटिंग में उस ने अलका को भी शामिल किया था. राकेश ने गार्ड को सख्त हिदायत दे रखी थी कि केबिन में सीक्रेट मीटिंग चल रही है. किसी को भी उस के केबिन की ओर मत आने देना.

”जानते हो, आप सभी को यहां क्यों बुलाया गया है?’’ राकेश ने सभी से सवाल किया था

”नहीं, सर.’’ राकेश के छोटे भाई रमेश ने सवाल का जबाव देते हुए आगे कहा, ”हमें नहीं पता, हमें यहां क्यों बुलाया गया है.’’

”एक सीक्रेट काम के लिए हम ने यहां आप सभी को जिस काम के लिए बुलाया है, वह आप सभी के बिना संभव नहीं हो सकता.’’

”कैसा काम, सर?’’ रमेश ने फिर सवाल किया था.

”बताता हूं…बताता हूं…पहले आप सभी वादा करो कि इस मीटिंग की भनक बाहर नहीं जानी चाहिए.’’

राकेश की बात सुन क र सभी एकदूसरे का मुंह ताकने लगे और एक सुर में कहा कि इस की भनक बाहर तक नहीं जाएगी. एक पल के लिए हम सांस लेना तो भूल सकते हैं, किंतु मालिक के साथ गद्दारी कभी नहीं कर सकते. हम सभी की ओर से आप निश्चिंत रहें.

”दैट्स वैरी गुड. हमें सभी से यही उम्मीद थी.’’ राकेश ने अपनी बात आगे जारी रखी, ”दरअसल, मैं पत्नी सुरभि राज को अपने रास्ते से हमेशाहमेशा के लिए हटाना चाहता हूं. इस काम में आप सभी की हेल्प चाहिए. बताओ, आप सभी मेरा साथ दोगे?’’

राकेश की बात सुन कर सभी सन्न रह गए. पलभर केबिन में गहरी खामोशी छाई रही. फिर रमेश ने ही खामोशी तोड़ी, ”हां, साथ देने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें करना क्या होगा?’’

”इस योजना को इस तरीके से अंजाम देना होगा कि हम पुलिस के शक के चक्रव्यूह में कभी भी न फंसें और न ही पुलिस को कभी यह शक हो कि घटना को हम ने अंजाम दिया है.’’

”फिर तो हर कदम फूंकफूंक कर रखना होगा.’’ इस बार अनिल बोला था.

”कैसे करना होगा, इसे आप सभी तय करोगे. रही बात पैसों की तो पैसों की चिंता मत करो, पैसों का इंतजाम हो जाएगा. बस काम बिलकुल परफेक्ट होना चाहिए.’’

”सर, मेरे जानने वालों में कई हार्डकोर क्रिमिनल हैं, जो काम को बड़े सफाई से अंजाम दे सकते हैं. उन से बात करनी होगी. वे कई मर्डर कर चुके हैं.’’ मसूद आलम बोला.

”फिर देर किस बात की.’’ राकेश उतावला हो कर आगे बोला, ”अभी कांटैक्ट कर के उसे सुपारी दे दो, मसूद.’’

”थोड़ी मोहलत दे दो सर, मैं उन से बात कर के आप को बता दूंगा.’’

”तो फिर ठीक है, आज की मीटिंग यहीं खत्म करता हूं. 2 दिनों बाद फिर यहीं मिलते हैं और उस दिन फाइनल रूपरेखा तैयार होनी चाहिए, क्योंकि हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं बचा है.’’

इस के बाद सभी केबिन से बाहर निकले और अपनेअपने कामों में जुट गए. 2 दिनों बाद फिर राकेश, रमेश, अनिल, मसूद और अलका उसी केबिन में मिले, जहां पहले मीटिंग हुई थी.

”मुझे लगता है कि सभी ने अपनीअपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा दिया होगा?’’ राकेश ने रमेश की ओर देखते हुए सवाल किया.

”यस सर, प्लान तैयार हो चुका है, बस शिकार को घेरना बाकी है. जैसे ही शिकार उस जाल में आया, समझिए कि उस का काम तमाम हो जाएगा. लेकिन इस से पहले हमें यहां (हौस्पिटल) के सभी सीसीटीवी कैमरे बंद करने होंगे, ताकि हमारे क्रियाकलाप उस में कैद न हो सकें, वरना पुलिस से हमें कोई बचा नहीं सकता.’’

”रमेश सर बिलकुल ठीक कह रहे हैं, सर.’’ अलका ने रमेश का समर्थन किया, ”सीसीटीवी कैमरे बंद नहीं हुए तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा और हम सभी पकड़े जाएंगे.’’

”मैं कोई भी रिस्क नहीं ले सकता. ऐसा ही होगा. यहां के सभी सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाएं. कोई पूछेगा तो कह देंगे कि खराब हो गए थे.’’

डा. सुरभि राज की हत्या की पूरी फुलप्रूफ योजना बन गई थी. सुरभि का देवर रमेश और मसूद आलम ने सुपारी किलर को मोटी रकम दे कर हायर कर लिया था. यह बात घटना से करीब डेढ़ महीने पहले की है. पति, देवर और पति की प्रेमिका अलका ने मिल कर इतनी बड़ी और खतरनाक साजिश रच डाली, जिस की भनक सुरभि को कानोकान तक नहीं लगी.

हां, यह सच था कि पति की इश्कबाजी और प्रेमिका के ऊपर पानी की तरह पैसे बहाने से डा. सुरभि पति डा. राकेश से परेशान भी थी और नाराज भी.

खैर, इधर सुपारी किलर सुरभि की हत्या का कौन्ट्रैक्ट लेने के बाद उस की रेकी करता रहा. वह कब घर से निकलती है? किस के साथ और किस रास्ते से हो कर जातीआती है? उस ने तकरीबन 15 दिनों तक रेकी की, लेकिन इस दौरान उसे इतना मौका नहीं मिला कि सुरभि की हत्या को अंजाम दे सके.

इधर राकेश यह सोचसोच कर परेशान हो रहा था क्योंकि टास्क अभी तक पूरा नहीं हुआ था. तब उस ने सुरभि को आतेजाते रास्ते में मारने का प्लान कैंसिल करवा दिया. फिर उस ने उसे हौस्पिटल में ही मारने का प्लान बनाया. योजना के अनुसार, घटना से करीब 20 दिन पहले राकेश ने रमेश से कह कर हौस्पिटल के सारे सीसीटीवी कैमरे खराब करवा दिए, जिस से उस में घटना की कोई रिकौर्डिंग न हो सके. उस ने खुद भी हौस्पिटल आनाजाना कम कर दिया. ताकि इस बीच कोई घटना घटे तो उस पर कोई शक न कर सके. इस दौरान डा. सुरभि रोजाना हौस्पिटल आतीजाती रही.

बात 22 मार्च, 2025 की है. रोजाना की तरह डा. सुरभि घर के कामकाज निबटा कर करीब साढ़े 11 बजे हौस्पिटल गई थी और दूसरी मंजिल पर बने अपने केबिन में बैठी जरूरी फाइलों को निबटाने में बिजी थी. हौस्पिटल मरीजों से भरा हुआ था. डा. राकेश बीमारी का बहाना बना कर घर पर आराम कर रहा था. दोपहर 2 बजे के करीब 2 युवक सुरभि के केबिन में चुपके से घुस गए. दोनों सुपारी किलर थे, जो उस की हत्या करने के पैसे ले चुके थे. अचानक अपने केबिन में 2 अनजान युवकों को देख कर सुरभि घबरा गई, ”कौन हो तुम लोग? बिना नौक किए मेरे केबिन में कैसे घुस आए? सिक्योरिटी…सिक्योरिटी…’’

गोलियों से भून डाला डा. सुरभि को जैसे ही उस ने आवाज लगाने की कोशिश की एक झन्नाटेदार चांटा उस के गाल पर पड़ा.

”चुप हरामजादी, एकदम चुप.’’ एक युवक ने अपनी कमर में खोंस कर रखा साइलेंसरयुक्त पिस्टल निकाल कर सुरभि की कनपटी पर तान दिया, ”जरा भी चूंचपड़ की या शोर मचाया तो सारी गोलियां भेजे में उतार दूंगा.’’

”मुझे मार क्यों रहे हो? मैं ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है.’’ सुरभि हाथ जोड़ते हुए दोनों युवकों के सामने गिड़गिड़ाई, ”छोड़ दो मुझे…’’ वो आगे कुछ और कहती, इस से पहले युवक ने ताबड़तोड़ गोलियों से उसे छलनी कर दिया.

सुरभि अपने ही खून में सनी रिवौल्विंग चेयर पर एक ओर लुढ़क गई. वह मर चुकी थी. फर्श पर खून फैल गया था. डा. सुरभि राज मर गई है, यह इत्मीनान हो जाने के बाद दोनों युवकों ने पिस्टल से साइलेंसर निकाल कर पिस्टल अपनी कमर में खोंस लिया और फिर उसी रास्ते बाहर निकल गए, जिस रास्ते से वे हौस्पिटल में दाखिल हुए थे. लेकिन जातेजाते हत्यारे ने रमेश को फोन कर के ‘टारगेट पूरा हो गया’ की सूचना भी दे दी थी. सूचना पा कर रमेश खुशी से झूम उठा और यह बात बड़े भाई डा. राकेश को बता दी. यह खबर सुन कर राकेश भी मन ही मन खुश हो गया. फिर उस ने रमेश को अच्छी तरह समझाया कि वहां हत्या का कोई सबूत नहीं रहना चाहिए.

केबिन के फर्श पर फैले खून को इस तरह साफ कराना कि देखने से लगे कि यहां कुछ भी नहीं हुआ था. रमेश ने भाई को भरोसा दिलाया कि वैसा ही होगा, जैसा वह चाहते हैं. वगैर वक्त गंवाए रमेश ने हौस्पिटल में झाड़ूपोंछा लगाने वाली बाई बीना को फोन कर के वापस हौस्पिटल झूठ बोल कहते हुए बुलाया कि सुरभि मैडम को खून की उल्टियां हो रही हैं, आ कर उन का केबिन साफ कर दो फिर चली जाना. मालिक का आदेश मिलते ही बीना हौस्पिटल आ गई थी, जो एक घंटे पहले ही वहां से काम निबटा कर अपने घर गई थी.

ऐसे नष्ट किए मौके के सबूत

खैर, बीना हौस्पिटल पहुंची और उन के केबिन में दाखिल हुई. डा. सुरभि राज अपनी चेयर पर एक ओर लुढ़की हुई थीं. बीना को इस की भनक तक नहीं थी कि उस की मालकिन की हत्या की जा चुकी है. उस ने तो सिर्फ वही किया, जो उसे करने के लिए कहा गया था. उस ने फर्श पर फैले खून को बड़ी सफाई से साफ कर दिया. फर्श की सफाई करते हुए गोलियों के पीतल के 7 खाली खोल मिले. उन्हें नीचे फर्श से उठा कर उस ने मेज पर रख दिए और फिर दरवाजा बंद कर वापस घर लौट गई थी. उसे समझ में नहीं आया था कि वह क्या चीज थी और फर्श पर क्यों पड़े हैं.

हौस्पिटल का वार्डबौय दीपक, जो डा. सुरभि राज का सब से खासमखास और वफादार था. पता नहीं क्यों उसे सुरभि मैडम को ले कर कुछ बेचैनी सी हो रही थी. शाम के साढ़े 4 बज गए थे. उन की केबिन से कोई हरकत नजर नहीं आ रही थी तो उस ने केबिन का दरवाजा खोल कर भीतर झांका. डा. सुरभि को चेयर पर औंधे मुंह पड़ा देख कर उस के मुंह से चीख निकल पड़ी और वह उलटे पांव दूसरी मंजिल से दौड़ता नीचे हाल में आया. हाल में चीखचीख कर डा. सुरभि की हालत के बारे में सब को बता दिया.

दीपक की बात सुन कर अस्पताल के सभी स्टाफ दौड़ेभागे उन की केबिन में पहुंचे तो देखा वह अचेत पड़ी हुई थीं और शरीर खून से भीगा था. आननफानन में उन्हें एंबुलेंस से पटना एम्स ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. इधर डा. राकेश कुमार ने झूठ बोलते हुए शाम साढ़े 4 बजे अपने ससुर राजेश सिन्हा को फोन किया कि सुरभि अचानक बीमार हो गई है. उसे पटना एम्स में भरती किया गया है, आ कर उसे देख लें. बेटी के अचानक बीमार होने की खबर मिली तो वह घबरा गए. क्योंकि दिन में ही तो उन्होंने उस से बात की थी, तब उस ने किसी बीमारी के बारे में कोई जिक्र नहीं किया था. अचानक क्या हो गया उसे? वह समझ नहीं पा रहे थे.

आननफानन में वह घर से सीधा पटना एम्स पहुंचे, जहां सुरभि के भरती होने की सूचना मिली थी. जब वह हौस्पिटल पहुंचे तो पता चला कि बेटी की गोली मार कर हत्या कर दी गई है. इतना सुनते ही वह पछाड़ खा कर फर्श पर गिरे और यह सोच कर और भी परेशान हो गए कि आखिर दामाद ने उन से झूठ क्यों बोला कि बेटी बीमार है. फिर उन्होंने अगमकुआं थाने को फोन कर के बेटी सुरभि की हत्या की सूचना दी.

एशिया हौस्पिटल की डायरेक्टर डा. सुरभि राज की हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस के हाथपांव फूल गए थे. एसएचओ रामायण राम ने घटना की सूचना एएसपी अतुलेश कुमार झा, एसपी अखिलेश झा और एसएसपी अवकाश कुमार को दे कर खुद एम्स हौस्पिटल पहुंचे. थोड़ी देर बाद सभी पुलिस अधिकारी भी हौस्पिटल पहुंच गए, जहां मृतका के पिता राजेश सिन्हा दहाड़ मार कर रो रहे थे. शहर की कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने डा. सुरभि राज की डैडबौडी अपने कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी थी. सुरभि के पापा राजेश सिन्हा ने दामाद डा. राकेश कुमार, उस के छोटे भाई रमेश और अस्पताल की एचआर मैनेजर अलका को नामजद करते हुए पुलिस को तहरीर सौंपी.

पुलिस ने तहरीर के आधार पर तीनों के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसपी अखिलेश झा के नेतृत्व में पुलिस फोर्स धुनकी मोड़ स्थित एशिया हौस्पिटल पहुंची और जांच की काररवाई आगे बढ़ाई तो जो पहली जानकारी मिली, उसी से पुलिस का शक भी मजबूत होने लगा. पता चला कि सुरभि की हत्या दोपहर तकरीबन 2 बजे के आसपास हुई थी और पुलिस को सूचना शाम साढ़े 4 बजे के करीब दी गई. यही नहीं, जिस केबिन में डा. सुरभि की हत्या की गई थी, फर्श पर खून का एक कतरा तक मौजूद नहीं था. बड़ी सफाई के साथ फर्श से खून को साफ कर सबूत को मिटा दिया गया था. पुलिस की निगाह सीसीटीवी कैमरे पर गई.

जब वह डिजिटल वीडियो रिकौर्डिंग सिस्टम (डीवीआर) तक पहुंची तो और भी चकरा गई. डीवीआर गायब था. इस बारे पुलिस ने जब हौस्पिटल के मालिक डा. राकेश से पूछा तो उस ने बताया पिछले 20 दिनों से डीवीआर खराब पड़ी है, उसे मरम्मत के लिए दुकान पर दिया गया है. राकेश का जबाव सुन कर पुलिस आश्चर्यचकित रह गई. पुलिस को लगा कि कुल मिला कर एक बड़ी साजिश के तहत डा. सुरभि राज की हत्या की गई थी और बड़ी सफाई से एकएक सबूत को गायब कर दिया गया.

अस्पताल के कर्मचारियों, मृतका के फेमिली वालों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस को पूरी तरह से नामजद आरोपियों पर शक मजबूत होने लगा. पुलिस डा. राकेश, रमेश और अलका को हिरासत में ले कर अगमकुआं थाने लौट आई. वहां सीओ अतुलेश झा और एसपी अखिलेश झा ने तीनों से सख्ती से अलगअलग पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. राकेश के बयान के आधार पर पुलिस ने हौस्पिटल से गायब डीवीआर मसूद आलम के घर से बरामद कर लिया. अब इस केस में अनिल का नाम भी जुड़ गया था. पुलिस ने मसूद आलम और अनिल को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो सुरभि का गायब मोबाइल फोन राकेश के पास से बरामद कर लिया, जिस पर गोली के निशान मौजूद थे.

यही नहीं, पांचों आरोपियों की निशानदेही पर एप्पल कंपनी का एक सिल्वर रंग का मैकबुक, एक एचपी कंपनी का प्रो बुक, 2 पैन ड्राइव, विभिन्न कंपनियों के 15 सिमकार्ड, एक ग्रे कलर की टोपी और 7 मोबाइल फोन बरामद किए. पूछताछ में पांचों आरोपियों ने डा. सुरभि राज की साजिशन हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. पूछताछ में हत्या की जो कहानी सामने आई, वह अवैध संबंधों की बुनियाद पर रचीबसी निकली. 35 वर्षीय सुरभि राज मूलरूप से पटना के रहने वाले राजेश सिन्हा की बेटी थी. राजेश सिन्हा की 5 बेटियां थीं, बेटा एक भी नहीं था. उन्होंने बेटियों को बेटे की तरह परवरिश कर पढ़ायालिखाया, ताकि वे खुद के पैरों पर खड़े हो कर अपनी घरगृहस्थी की जिम्मेदारियां संभाल सकें.

पांचों बेटियों में सुरभि सब से बड़ी थी. वह निहायत समझदार और पढ़ाई में अव्वल भी थी. उस का सपना था भविष्य में एक ऐसा बिजनैस खड़ा करना, जिस में पैसे तो आएं, साथ ही समाजसेवा भी होती रहे.

मैडिकल की पढ़ाई में परवान चढ़ा प्यार

बात 2015 की है. कालेज का दौर था. जिस मैडिकल कालेज में वह पढ़ती थी, उसी में राकेश रोशन उर्फ चंदन सिंह भी पढ़ता था. नोट्स लेतेदेते दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी. इस दोस्ती ने कब प्यार का रूप ले लिया, उन्हें पता ही नहीं चला. उन्हें पता तो तब चला जब दोनों एकदूसरे के बिना रह नहीं पाते थे. कालेज कैंपस से अलग होते ही दोनों तड़पने लगते थे. 3 साल तक दोनों का प्यार यूं ही चलता रहा और साल 2018 में प्रेमीप्रेमिका से पतिपत्नी बन गए थे. हालांकि सुरभि के फेमिली वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था, लेकिन औलाद की खुशी के आगे दिल पर पत्थर रख कर उन्हें झुकना पड़ा था.

 

शादी के बाद डा. राकेश पटना के एक निजी अस्पताल में नौकरी करने लगा था. डा. सुरभि राज भी उसी निजी हौस्पिटल में पति के साथ नौकरी करने लगी थी. दोनों साथसाथ नौकरी करते थे. उसी अस्पताल में अलका नाम की युवती भी नौकरी करती थी. वह खूबसूरत थी. तब उस की उम्र 25 साल के करीब रही होगी, जब पहली बार राकेश की नजर उस पर पड़ी तो वह उस की खूबसूरती को एकटक निहारता ही रह गया था. इस दरमियान सुरभि भी 2 बच्चों की मां बन चुकी थी.

जब से राकेश और सुरभि ने हौस्पिटल में नौकरी शुरू की थी, हौस्पिटल की बेशुमार आमदनी देख कर उन की आंखें फटी रह गईं. दोनों ने मिल कर एक अपना भी नर्सिंग होम बनाने के ठान ली. साल 2020 में दोनों ने अपने सपनों को पंख देना शुरू किया और अगमकुंआ थाना क्षेत्र के धुनकी मोड़ पर एक प्लौट खरीद कर एक बड़ा अस्पताल बनवाया, जिस नाम ‘एशिया हौस्पिटल’ रखा. अस्पताल को चलाने के लिए डा. राकेश रोशन और डा. सुरभि राज ने दिनरात जीतोड़ मेहनत की और कौन्ट्रैक्ट पर शहर के मानेजाने डाक्टरों को अपने अस्पताल में पैनल पर रख लिया. अस्पताल चल निकला और रुपयों की बरसात होने लगी.

राकेश और सुरभि ने अपने सपने जी लिए जो उन्होंने ठाना था, उसे पूरा कर लिया था. डा. सुरभि ने अस्पताल का पूरा दायित्व पति के कंधों पर छोड़ दिया और खुद वहां जानाआना कम कर दिया. राकेश का दिल अभी भी अलका के लिए धड़क रहा था. फोन पर अभी भी दोनों के बीच बातचीत होती रहती थी. अलका चाहती थी, वह भी उसी के साथ उसी के अस्पताल में काम करे. उस ने अपनी दिली इच्छा राकेश के सामने रख दी.

राकेश के दिल में अलका के लिए पहले से ही सौफ्ट कार्नर था, जैसे ही उस का प्रस्ताव आया तो वह न नहीं कर सका और उसे अपने वहां बुला लिया. यही नहीं उसे एचआर मैनेजर बना दिया. राकेश की इस दयालुता पर वह नतमस्तक हो गई थी. राकेश के दिल में पहले से जन्मे प्यार ने अंकुरित हो कर पौधे का रूप ले लिया था. अलका भी उसे पंसद करने लगी थी. यह जानते हुए भी कि डा. राकेश शादीशुदा है और उस के 2 बच्चे हैं. फिर भी अलका राकेश को अपना दिल दे बैठी और उस के दिल पर अपनी हुकूमत चलाने लगी.

4 साल तक उन का प्यार परदे के पीछे छिपा रहा. आखिरकार डा. सुरभि को कहीं से भनक लग ही गई कि उस के पति का एचआर मैनेजर अलका के बीच काफी दिनों से अफेयर चल रहा है और उस के पति अलका पर पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं. सुरभि यह यह कतई बरदाश्त नहीं कर सकती थी कि उस का सिंदूर बंट जाए. उस ने इस पर पति से सवाल किया और अलका को नौकरी से हटाने का दबाव बनाया, लेकिन पति डा. राकेश ने उस की दोनों बातें मानने से इंकार कर दिया. पति की यह बात डा. सुरभि को काफी नागवार लगी और उस ने फैसला कर लिया किवह अलका को अपने यहां से हटा कर ही दम लेगी.

सुरभि के जिद्दी स्वभाव से राकेश अच्छी तरह परिचित था. किसी कीमत पर वह अलका को अपने से दूर होने देना नहीं चाहता था. इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच मनमुटाव तक हो गया और झगड़े भी होने लगे. सुरभि घर की सारी बातें मायके खासकर अपनी मम्मी और पापा को बताया करती थी. प्रेम विवाह करने पर अब उसे पछतावा हो रहा था. सुरभि किसी कीमत पर पति को मनमानी नहीं करने देना चाहती थी. इस के लिए वह घर में बैठने की बजाए नर्सिंगहोम में बैठना शुरू कर दिया. यह बात घटना से करीब डेढ़ महीने पहले की है.

सुरभि के हौस्पिटल आने से डा. राकेश की परेशानियां बढ़ गई थीं. अब न तो वह खुल कर प्रेमिका अलका से रंगीन बातें कर सकता था और न ही पैसों की मनमानी ही कर सकता था. दिन पर दिन सुरभि पति के प्रति सख्त होती जा रही थी. पत्नी का यह रूप देख कर राकेश परेशान हो गया. इसी परेशानी को दूर करने के लिए उस ने सुरभि को रास्ते से हटाने की खतरनाक योजना बना ली थी. उसी योजना के तहत राकेश ने हौस्पिटल के अपने खासमखास सिपहसालारों भाई रमेश कुमार, अनिल, मसूद आलम और प्रेमिका अलका के साथ मिल कर सुरभि को मौत के घाट उतार दिया था.

सुरभि की हत्या करवा कर डा. राकेश रोशन ने अपने रास्ते के कांटे को हमेशाहमेशा के लिए उखाड़ फेंका था. साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने सुरभि हत्याकांड की गुत्थी तो फिलहाल सुलझा ली थी. जांच में यह बात भी साबित हो गई थी कि डा. राकेश रोशन, रमेश, अलका, अनिल और मसूद आलम ने मिल कर ही डा. सुरभि राज की हत्या करवाई थी, लेकिन करीब 3 माह बीत जाने के बाद भी उस पिस्टल को पुलिस ढूढ नहीं पाई, जिस से उस की हत्या की गई. और न ही वो हत्यारे ट्रेस हो सके थे, जिन्होंने उस की हत्या की थी.

 

 

 

Crime Story in Hindi : डैड किल्स डौटर टेनिस प्लेयर राधिका यादव

Crime Story in Hindi : राधिका यादव एक उभरती हुई टेनिस प्लेयर थी. वह गुरुग्राम में एक टेनिस एकेडमी चलाने के साथ म्यूजिक अलबम में भी काम कर चुकी थी. दिनोंदिन उस की पहचान बढ़ती जा रही थी. इसी बीच ऐसा क्या हुआ कि उस के पिता ने खुद उसे गोलियों से भून डाला?

राजधानी दिल्ली के एनसीआर गुरुग्राम सेक्टर 57 में स्थित सुशांत लोक एक पौश कालोनी है. इस के एक 3 मंजिला मकान को हर कोई जानता था. उस मकान में दीपक यादव अपने परिवार के साथ रहते थे. दीपक और मकान को लोग उन की 25 वर्षीया बेटी राधिका यादव की वजह से जानतेपहचानते थे. इस मकान में दीपक अपनी पत्नी, बेटे और बेटी राधिका के साथ रहते थे. साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर उन के छोटे भाई कुलदीप यादव अपने परिवार समेत रहते थे.

राधिका हरियाणा की राज्य स्तरीय टेनिस खिलाड़ी रह चुकी है. उस ने कई टूर्नामेंट जीते थे. इस के अलावा वह पिछले एक साल से गुरुग्राम के ही सेक्टर 56 में एक टेनिस एकेडमी चला रही रही थी. इलाके के बच्चे वहां उस से टेनिस सीखने आते थे, किंतु 10 जुलाई, 2025 की सुबह बच्चे एकेडमी में नहीं आए. उन्हें राधिका ने सुबह में ही आने से मना कर दिया था. कारण, उसे ग्राउंड कोऔर्डिनेटर ने मैसेज कर बता दिया था कि बारिश की वजह से सुबह ग्राउंड खेलने के लिए नहीं मिल पाएगा.

उस ने बड़ी मुश्किल से बच्चों को समझाया था कि वे आज एकेडमी नहीं आएं. इस पर कुछ अभिभावकों ने राधिका से शिकायत भी की थी कि ऐसे तो बच्चों की प्रैक्टिस छूट जाएगी. उन से राधिका ने सौरी बोल कर पीछा तो छुड़ा लिया था, लेकिन उस के बाद से ही उस का मन और ज्यादा खिन्न हो गया था. सुबह के करीब 10 बज चुके थे. राधिका किचन में अपने लिए एनर्जी ड्रिंक बना रही थी. उस की मम्मी मीनू यादव दूसरे कमरे में लेटी थीं. उन्हें बीती रात से ही हलकाहलका बुखार था. उस रोज उन का जन्मदिन भी था. राधिका मम्मी के लिए उन की पसंद का कुछ स्पैशल खाना बनाना चाहती थी. मम्मी की सेहत को ध्यान में रख कर उस ने स्पैशल आइटम बनाने की तैयारी भी करनी थी.

उस के पापा दीपक यादव ड्राइंग रूम में बैठेबैठे बड़बड़ा रहे थे. वह थोड़ी देर पहले मार्निंग वाक कर लौटे थे. काफी तनाव में थे. सोफे पर कभी पैर पसार कर बैठते तो कभी उठ कर हाल में ही चहलकदमी करने लगते. वह जो कुछ बोल रहे थे, हाल से लगी रसोई में राधिका को भी सुनाई दे रहा था. अधिकतर बातें उस के बारे में ही कह रहे थे. वो भी सभी जलीभुनी, दिल को छेद करने वाली, मन को कचोटती हुई थीं. उन्होंने शिकायतें और घरपरिवार की मानमर्यादा, समाजसंस्कार की बातों का मानो पुलिंदा ही खोल दिया था.

जब ये बातें राधिका के कानों में पड़ीं तो वह तिलमिला उठी. उस के हाथ से चम्मच छूट कर फर्श पर जा गिरी. उसे उठाने लगी तो दूसरा बरतन गिर पड़ा…

”पापा! अब चुप भी हो जाओ. बंद करो अपनी बकवास!’’ राधिका तीखे लहजे में बोली और मिक्सी का बटन दबा दिया. घर्र… कर मिक्सी चल पड़ी.

”मैं बकवास कर रहा हूं…मुझे तो रोक लोगी, लेकिन उन को कैसे रोकोगी, जो मैं सुन कर आया हूं.’’

”तुम सब की बातों पर ध्यान ही क्यों देते हो?’’ वह बोली.

”क्यों न ध्यान दूं. तू कौन मेरी बात पर ध्यान दे रही है…कब से कह रहा हूं एकेडमी बंद कर दे, लोग मुझे ताने मारते हैं. कहते हैं कि बेटी की कमाई खा रहा है…’’ दीपक बोलते चले जा रहे थे. बीचबीच में राधिका बोलने लगी थी.

”तो क्या करूं? म्यूजिक एलबम बनाऊं…उस पर भी आपत्ति है. शक करते हो. रील बनाने की सोचती हूं, वह भी पसंद नहीं. …और अब कह रहे हो एकेडमी बंद कर दूं…’’

”मैं सही कह रहा हूं. जो लोग कह रहे हैं, मुझे ताने दे रहे हैं, वही कह रहा हूं. तुम्हारे म्यूजिक वीडियो को ले कर मुझे काफी सुनने को मिल रहा है.’’ दीपक ने कहा.

”मैं किसी की परवाह नहीं करती. दुनिया कुछ भी कहे…मैं अपने मन की ही करूंगी.’’

”मैं अब और नहीं झेल सकता लोगों की तीखी बातें.’’

”नहीं झेल सकते तो चुप हो जाओ. मुझे काम करने दो.’’ राधिका ने एक तरह से अपने पापा को डपट दिया था और बंद मिक्सी को फिर से चला दिया. अचानक गूंज उठी मिक्सी की आवाज और राधिका की बहस से दीपक तिलमिला गए थे. उन्होंने महसूस कि राधिका पर उन की बातों का कोई असर नहीं हुआ. गुस्से से पैर कांपने लगे थे. वह तेजी से अपने कमरे में गए. अगले पल ड्राइंगरूम में पहुंचे और तब उन के हाथ में लाइसेंसी रिवौल्वर थी. गुस्से से कांपते हुए हाथों से दीपक ने गोली दागनी शुरू कर दी. निशाने पर राधिका थी. एक गोली चूक गई. दीपक ने दनादन 4 गोलियां चला दीं.  गोलियां लगते ही वह फर्श पर गिर गई. लगातार गोलियां चलने की आवाज पूरे मकान और आसपास गूंज गई.

नीचे ग्राउंड फ्लोर पर उन के छोटे भाई कुलदीप यादव ने भी गोलियां चलने की आवाज सुनी. वह दौड़ेदौड़े दीपक के घर के मेन गेट पर आए. संयोग से दरवाजा खुला था. उन के साथ उन का बेटा भी आया था. उन्होंने देखा, ड्राइंग रूम में दीपक सोफे पर पसर कर बैठे थे, रिवौल्वर बगल में रखा था. सामने किचन में राधिका खून से लथपथ फर्श पर गिरी पड़ी थी. कुलदीप तुरंत बेटे के साथ जख्मी राधिका को कार से सेक्टर 56 स्थित एशिया मारिंगो अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इस वारदात की सूचना गुरुग्राम थाने की पुलिस को हो गई. एसएचओ विनोद कुमार मौके पर पहुंच गए. शुरुआती जांच में मृतका राधिका की पहचान 25 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव के रूप में हुई. वह राज्य स्तरीय कई टूर्नामेंट में मेडल जीत कर राष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी बन चुकी थी.  यह वारदात गुरुग्राम की पौश सोसायटी सुशांत लोक फेस-2 के फ्लैट नंबर ई-157 में हुई थी. पुलिस जांच में पाया गया कि उसे गोली उस के पापा दीपक यादव ने ही मारी है. घटनास्थल पर दीपक यादव मौजूद थे. पुलिस ने उन की 0.32 बोर की रिवौल्वर को तुरंत जब्त कर दीपक को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में पता चला कि हत्या परिवार में महीनों से चल रहे तनाव के बाद हुई. इस के कारणों में उन की आर्थिक आजादी, इंस्टाग्राम रील्स, कारवां नाम का एक म्यूजिक वीडियो और टेनिस एकेडमी की भूमिका सामने आई. 49 वर्षीय दीपक यादव बैंक में क्लर्क की नौकरी करते थे. नौकरी से वीआरएस ले कर वजीराबाद गांव में अपनी जमीनजायदाद की देखभाल के काम में लग गए थे. उन की आमदनी किराए के रूप में होती थी. उन की आमदनी के बारे में बताते हैं कि वह महीने की 15 लाख रुपए से अधिक की थी.

वह अपनी बेटी के बढ़ते कद और आजादी को ले कर पिछले 2 हफ्तों से नाराज चल रहे थे. खासकर सेक्टर 57 में अपनी टेनिस एकेडमी खोलने के बाद वह बेटी के व्यवहार मे आए बदलाव पर अकसर आक्रामक हो जाते थे. पुलिस को शुरुआती पूछताछ में ही हत्या की बात कुबूलते हुए दीपक ने बताया कि उन्हें गांव वाले बारबार अपनी बेटी की कमाई पर निर्भर रहने के लिए ताना मारते थे. उन्होंने कई बार राधिका से अपनी टेनिस एकेडमी बंद करने का आग्रह किया था. इस कारण बापबेटी के बीच अकसर टकराव हो जाता था. वे इस पर घंटों बहस करते रहते थे. बड़ी मुश्किल से राधिका की मम्मी बीचबचाव कर बहस को बंद करवाती थी. राधिका के एक म्यूजिक वीडियो के चर्चा में आने पर घर में तनाव और बढ़ गया था.

इस वीडियो में मुंबई के कलाकार इनाम का ‘कारवां’ नामक एक गाना है, जिसे जीशान अहमद ने प्रोड्यूस किया है. इसे एक साल पहले एलएलएफ रिकौड्र्स लेवल के तहत रिलीज किया गया था. हालांकि इस का ठीक से प्रमोशन नहीं हो पाया था. वीडियो में कई दृश्यों में राधिका इनाम के साथ नजर आती है. पिछले दिनों राधिका ने इसे अपने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया था. यह भी कहा जाता है कि दीपक ने वीडियो पर आपत्ति जताई थी और उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इसे हटाने के लिए कहा था.

पुलिस का कहना है कि दीपक ने अपने गांव में अपनी बेटी की कमाई पर निर्भर रहने के बारे में टिप्पणी मिलने के बाद और भी आक्रामक तरीके से विरोध करना शुरू कर दिया था. उन्होंने पुलिस को बताया कि वह शर्मिंदा महसूस करता था और उस की बातों से ऐसा लगता था कि वह अपनी बेटी की कामयाबी पर जीता है. जब वह वजीराबाद गांव में दूध लेने जाते थे तो लोग उन्हें ताना मारते थे और कहते थे कि यह अपनी बेटी की कमाई पर जीता है.

इस तरह लोगों के तानों से उन्हें बहुत परेशानी होती थी और वह मानसिक तनाव में आ जाते थे. कुछ लोगों ने उन की बेटी के चरित्र पर भी सवाल उठाए थे. उन का यहां तक कहना था कि वह गैर जाति और गैरधर्म के लड़के के साथ फरार हो सकती है. इसी पर उन्होंने राधिका से कहा था कि वह अपनी टेनिस एकेडमी बंद कर दे, लेकिन उस ने साफसाफ मना कर दिया था. राधिका को पिछले दिनों एक मैच के दौरान कंधे में चोट लग गई थी, जिस के कारण उसे अपना खेल रोकना पड़ा था. हालांकि वह टेनिस से पूरी तरह दूर नहीं होना चाहती थी. इस कारण उस ने बच्चों को कोचिंग देने का काम चुना था.

दीपक ने यह भी कुबूल कर लिया कि 10 जुलाई, 2025 की सुबह उन्होंने अपनी लाइसेंसी 0.32 बोर की रिवौल्वर निकाली और बेटी राधिका को नाश्ता बनाते समय पीछे से गोली मार दी. 4 राउंड फायर किए गए, जिन में से 3 गोलियां उसे लगीं. इस मामले की रिपोर्ट राधिका के छोटे भाई और राधिका के चाचा कुलदीप यादव ने दर्ज कराई. कुलदीप ने रिपोर्ट में लिखवाया कि राधिका एक प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी थी. उस ने कई ट्राफी जीती थीं. उस की मौत से सभी स्तब्ध हैं. उन्होंने बताया कि जब मैं पहली मंजिल पर गया तो वहां सिर्फ मेरा भाई दीपक, भाभी मंजू यादव और राधिका ही मौजूद थे.

कुलदीप की तहरीर पर पुलिस ने दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 (1) और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया. गुरुग्राम पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने यह भी बताया कि हत्या में इस्तेमाल हथियार को जब्त कर लिया गया है और फोरैंसिक और बैलिस्टिक विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है. दीपक यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया था. उन की पत्नी मंजू यादव गोलीबारी के समय घर में मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने लिखित बयान देने से इनकार कर दिया. उन का कहना था कि उन्हें बुखार था और वह कमरे में थीं. उन का बेटा धीरज घटना के समय घर पर नहीं था.

जब यह घटना हुई, तब वह अपने कमरे में आराम कर रही थीं और कहा कि उन्हें ‘प्रेशर कुकर फटने’ जैसी आवाज सुनाई दी थी, तब वह कमरे से बाहर निकली थीं. उन्होंने यह भी कहा कि राधिका का चरित्र अच्छा था और उस ने कभी परिवार को बदनाम नहीं किया. राधिका यादव एक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी थी, जिस ने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई थी. इंटरनैशनल टेनिस फेडरेशन और वीमेंस टेनिस एसोसिएशन के कई टूर्नामेंट्स में उस ने भाग लिया था. जून 2024 में ट्यूनीशिया में आयोजित डब्लू 15 टूर्नामेंट में भी उतरी थी.

इस के अलावा उस का मुकाबला ताइवान, श्रीलंका और यूक्रेन की खिलाडिय़ों से भी हो चुका है. उस की आईटीएफ रैंकिंग 1600 के करीब रही थी, जो किसी भी उभरती भारतीय खिलाड़ी के लिए उपलब्धि मानी जाती है. राधिका केवल खिलाड़ी ही नहीं, एक कोच भी थी. उस ने गुरुग्राम में एक निजी टेनिस एकेडमी शुरू की थी, जहां वह दरजनों बच्चों को प्रशिक्षित कर रही थी. पुलिस ने राधिका की हत्या के आरोपी उस के पिता से पूछताछ करने के बाद उसे कोर्ट में पेश के जेल भेज दिया.

कथा लिखने तक पुलिस मामले की जांच कर रही थी. पुलिस राधिका के आईफोन को भी खंगाल रही है. शायद उस में कोई राज छिपा मिले. Crime Story in Hindi

 

UP Crime News : प्रेमी कर देते हैं प्रेमिका के जिस्म का सौदा

UP Crime News : संगीता 3 बच्चों की मां थी, लेकिन पति के दोस्त रोहित से प्रेम कर बैठी. ये प्रेम इतना गलत नहीं था, जितना रोहित का संगीता को अपने 2 दोस्तों को उपहार में देने की कोशिश करना. इस के बाद संगीता के साथ जो हुआ, वो हर औरत को याद रखना चाहिए.

20 मार्च, 2025 की रात 8 बजे रोहित वाल्मीकि 2 साथियों के साथ झांसी के लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला में रहने वाली अपनी प्रेमिका संगीता के घर पहुंचा. रोहित ने दरवाजा थपथपाया तो कुछ पल बाद संगीता ने दरवाजा खोला. सामने रोहित को देख कर संगीता का चेहरा खिल उठा. वह बड़ी अदा से बोली, ”बड़ी देर कर दी रोहित. कब से मैं तुम्हरा इंतजार कर रही थी. खैर, कोई बात नहीं, अंदर आओ.’’

रोहित व उस के दोनों साथी घर के अंदर पहुंचे और आंगन में बिछी चटाई पर जा कर बैठ गए. रोहित ने दाएंबाएं नजर दौड़ाई फिर पूछा, ”संगीता, रविंद्र भाई नजर नहीं आ रहे. क्या वह गला तर करने ठेके पर गए है?’’

”जेब गरम होती तो शायद चले भी जाते, लेकिन जेब खाली है तो कमरे में पड़े हैं. कई बार वह भी पूछ चुके हैं कि रोहित नहीं आया?’’

इस के बाद संगीता ने आवाज लगाई तो उस का पति रविंद्र कमरे से बाहर आ गया और रोहित को देख कर बोला, ”आ गए भाई. बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था. दारू के बिना गला सूख रहा था.’’

”रविंद्र भाई, अब इंतजार की घड़ी खत्म. छक कर दारू पियो और सब कुछ भुला दो. आज मैं एक नहीं, 4 बोतलें ले कर आया हूं.’’ कहते हुए रोहित ने शराब की 4 बोतलें व नमकीन झोले से निकाल कर सामने रख दी. शराब देख कर रविंद्र व संगीता की जीभ लपलपाने लगी.

इसी समय सामने बैठे 2 युवकों को देख कर संगीता ने पूछा, ”रोहित, ये दोनों कौन हैं? इस के पहले मैं ने इन को तुम्हारे साथ कभी नहीं देखा?’’

”संगीता, तुम इन्हें नहीं जानती हो. ये दोनों मेरे दोस्त हैं. जैसे तुम्हारे घर में महफिल जमती है, उसी तरह इन के साथ ठेके पर कभीकभी महफिल जमती है.’’ रोहित ने इशारे से बताया, ”यह पवन खटीक है और यह कल्लू है. आज की पार्टी इन्हीं की तरफ से है.’’

”किस खुशी में पार्टी कर रहे हैं?’’ संगीता ने दोनों पर निगाह जमाते हुए पूछा.

”इस बात की जानकारी हम बाद में देंगे. अभी तुम महफिल सजाओ.’’ रोहित बोला.

संगीता ने अपने बच्चों को मकान की दूसरी मंजिल पर रहने वाली किराएदार शकुंतला के कमरे में भेज दिया. इस के बाद संगीता ने गिलास व पानी का इंतजाम किया फिर उस ने अपने हाथों से 5 पैग बनाए और पति, प्रेमी व प्रेमी के साथ आए पवन व कल्लू को एकएक गिलास थमाया और स्वयं भी गिलास थाम कर उन के साथ शराब पीने लगी. इसी बीच रोहित रविंद्र को कमरे में ले गया और बोला, ”रविंद्र भाई, आज रात मेरे अलावा मेरे दोस्त पवन व कल्लू भी संगीता के साथ मौजमस्ती करेंगे. उन्होंने पार्टी का इंतजाम तो किया ही है. साथ में नजराना भी दिया है.’’ कहते हुए रोहित ने जेब से कुछ रुपए निकाले और रविंद्र के हाथ पर रख दिए.

रुपया जेब में रखते हुए रविंद्र बोला, ”रोहित, संगीता हम दोनों का साझा प्यार है. जब तुम्हें कोई ऐतराज नहीं तो मुझे भी कोई ऐतराज नहीं.’’

दारू पीने के बाद पवन व कल्लू घर से चले गए. जाते समय रोहित ने उन दोनों से कहा कि संगीता का पति मान गया है. कुछ देर में वह संगीता को भी राजी कर लेगा. तुम दोनों उस के फोन का इंतजार करना. उस के बाद आ जाना और रात भर मौजमस्ती करना.

पवन व कल्लू के जाने के बाद रोहित संगीता को कमरे में ले गया. यहां संगीता, रोहित व रविंद्र ने खूब जाम से जाम टकराए. शराब पीने के दौरान ही रोहित बोला, ”संगीता, तुम पूछ रही थी कि मेरे दोस्तों ने किस खुशी में पार्टी दी है? तो सुनो मैं ने उन से एक वादा किया है.’’

”कैसा वादा?’’ संगीता ने रोहित को घूरते हुए पूछा.

”यही कि वे रात भर तुम्हारे साथ मौजमस्ती करेंगे.’’

”क्या!’’ संगीता चौंकी. फिर नाराज हो कर बोली, ”देखो रोहित, मैं तुम से प्यार करती हूं, इसलिए तुम्हें जिस्म से खेलने देती हूं. मैं कोई वेश्या नहीं कि हर किसी को जिस्म सौंप दूं. मैं एक बार पति से विश्वासघात कर चुकी हूं. दोबारा नहीं करूंगी.’’

”मैं ने रविंद्र भाई से बात कर ली है. उन्हें कोई ऐतराज नहीं है.’’ रोहित बोला.

यह सुन कर संगीता पति पर बिफर पड़ी, ”कैसा मर्द है तू. अपनी पत्नी के तन का ही सौदा कर दिया. सौदा करते समय तुझे जरा भी शर्म नहीं आई. चुल्लू भर पानी में डूब मर.’’

रविंद्र दांत निपोरते हुए बोला, ”ज्यादा सतीसावित्री मत बन. जैसे रोहित को खुश करती है, वैसे ही उस के दोस्तों को भी खुश कर दे. इस में हर्ज ही क्या है?’’

रोहित और रविंद्र दोनों ने संगीता को जिस्म सौैंपने के लिए मनाने की कोशिश की. लेकिन जब वह राजी नहीं हुई तो दोनों ने मिल कर संगीता की जम कर पिटाई की. रोहित संगीता का सिर दीवार पर पटकने लगा. पति व प्रेमी की पिटाई से संगीता चीखने लगी, ”बेटी पिंकी, तुम कहां हो. मुझे बचा लो. ये राक्षस मुझे पीटपीट कर मार डालेंगे.’’

मम्मी की ‘बचाओ…बचाओ’ की चीखें सुन कर 12 वर्षीया पिंकी नीचे आई और कमरे का दरवाजा पीटना शुरू किया. कुछ देर बाद रोहित ने आधा दरवाजा खोला. पिंकी कमरे में घुसने को बढ़ी तो रोहित ने उसे बाहर ढकेल दिया और बोला, ”यह लो 100 का नोट और खानेपीने की चीज ले कर छत पर चली जाना.’’ लेकिन पिंकी ने पैसे नहीं लिए. उस के बाद रोहित ने कमरा अंदर से बंद कर लिया. कमरे में संगीता पलंग पर बैठी थी. रोहित ने उसे दबोच लिया और उस के साथ मनमानी की. रोहित ने एक बार फिर संगीता को मनाने की कोशिश की. इस पर वह बोली कि वह किसी कीमत पर अपने जिस्म का सौदा नहीं करेगी.

उस ने रोहित से यह भी कहा कि उसे दोस्तों को खुश करना है तो अपनी मांबहन का सौदा क्यों नहीं कर देता.

यह सुनते ही रोहित के तनबदन में आग लग गई. उस ने संगीता को फिर पीटा और तकिया से मुंह दबा कर उस की आवाज सदा के लिए बंद कर दी. उस के बाद बाकी बची शराब रोहित ने रविंद्र के साथ पी. फिर रविंद्र बेसुध हो कर सोफे पर लुढ़क गया और रोहित संगीता के पलंग पर पसर गया. इधर संगीता की बेटी पिंकी किराएदार शकुंतला के कमरे में पहुंची. वह बेहद डरी हुई थी. उस ने शकुंतला आंटी को बताया कि रोहित अंकल मम्मी को पीट रहे हैं. मम्मी बचाने की गुहार लगा रही हैं. उन्हें बचा लो.

मासूम पिंकी की बात सुन कर शकुंतला उसे साथ ले कर नीचे आई. लेकिन अब तक कमरे में चीखें बंद हो गई थीं. शकुंतला ने दरवाजा खटखटाया, आवाज भी लगाई. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. शकुंतला ने तब अड़ोसपड़ोस के लोगों को बुला लिया और डायल 112 नंबर पर फोन कर के पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पर पुलिस आ गई. एसआई ए.के. सिंह ने दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे. मामला संगीन समझ कर उन्होंने सूचना झांसी थाना कोतवाल को दी. यह मामला लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला का था.

खबर मिलते ही थाना कोतवाली के एसएचओ राजेश पाल पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंच गए. उस समय मकान के बाहर भीड़ जुटी थी. किराएदार शकुंतला ने इंसपेक्टर राजेश पाल को बताया कि घर के अंदर आंगन से सटे कमरे में रविंद्र उस की पत्नी संगीता तथा दोस्त रोहित मौजूद हैं. कमरा अंदर से बंद है. कुछ देर पहले संगीता की चीखें सुनी गई थीं. अब सब कुछ शांत है.

इंसपेक्टर राजेश पाल ने कमरे का दरवाजा खुलवाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन जब असफल रहे, तब सहयोगी पुलिसकर्मियों की मदद से दरवाजा तोड़ दिया और कमरे में प्रवेश किया. कमरे का दृश्य दिल कंपा देने वाला था. कमरे में पलंग पर संगीता मृत पड़ी थी. उसी के बगल में उस का प्रेमी रोहित नशे में धुत पड़ा था. सोफे पर संगीता का पति रविंद्र नशे की हालत में पसरा पड़ा था. नशे में धुत होने की वजह से दोनों को होश नहीं था. संगीता का शव अर्धनग्न अवस्था में था. देखने से ऐसा लग रहा था कि उस के साथ जोरजबरदस्ती की गई थी. संगीता की आंख, कान, सिर व गरदन पर चोटों के निशान थे. कमरे में शराब की दुर्गंध फैली हुई थी. सामान भी अस्तव्यस्त था.

ऐसा लग रहा था कि संगीता ने मृत्यु पूर्व संघर्ष किया था. कमरे में शराब की खाली बोतलें, डिसपोजल गिलास तथा प्लेट में कुछ नमकीन पड़ी थी. आंगन में चटाई बिछी थी और वहां भी शराब की एक खाली बोतल व गिलास पड़े थे. मामले की गंभीरता को समझते हुए एसएचओ राजेश पाल ने संगीता की हत्या की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद ही झांसी की एसएसपी सुधा सिंह, एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह तथा सीओ (सिटी) स्नेहा तिवारी घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फील्ड यूनिट को भी बुला लिया.

अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका का पति रविंद्र और प्रेमी रोहित इस हालत में नहीं थे कि वे कुछ भी बता सकें. अत: उन्हें थाना कोतवाली में भिजवा दिया. फील्ड यूनिट ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए. फील्ड यूनिट ने पलंग, दीवार आदि से फिंगरप्रिंट लिए तथा कमरे से शराब की 3 बोतलें तथा आंगन से एक बोतल तथा खाली गिलास सुरक्षित किए. यूनिट ने वह तकिया भी सुरक्षित किया, जिस पर खून लगा था. जांचपड़ताल के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए झांसी जिला अस्पताल भिजवा दिया.

घटनास्थल पर मृतका संगीता की बड़ी बेटी पिंकी मौजूद थी. उस ने सीओ (सिटी) स्नेहा तिवारी को बताया कि रात 8 बजे रोहित अंकल अपने साथी कल्लू व पवन के साथ घर आए थे. उन सब ने मम्मीपापा के साथ बैठ कर शराब पी. कुछ देर बाद कल्लू व पवन चले गए. रोहित अंकल मम्मी को साथ ले कर कमरे में चले गए. पापा भी कमरे में ही थे. कुछ देर बाद कमरे से मम्मी की चीखें सुनाई दीं तो वह उन्हें बचानेे पहुंची, लेकिन रोहित अंकल ने कमरे में अंदर नहीं जाने दिया. रोहित अंकल ने ही मम्मी की हत्या की है.

किराएदार शकुंतला ने बताया कि वह 15 दिन पहले ही यहां आई थी. यहां का माहौल ठीक नहीं था. संगीता पति व प्रेमी के साथ बैठ कर शराब पीती थी. आज रात भी पार्टी की गई थी. कुछ देर बाद संगीता की बेटी आई और बताया कि रोहित उस की मम्मी को पीट रहा है. मां चीख रही है. उस की गुहार पर वह नीचे गई. दरवाजा थपथपाया, नहीं खुला तो पुलिस को सूचना दी. इधर रोहित और रविंद्र रात भर हवालात में बंद रहे. सुबह जब नशा उतरा तो खुद को हवालात में पाया. दोनों समझ गए कि उन्हें क्यों हवालात में डाला गया है. हत्या का रहस्य जानने के लिए एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह कोतवाली पहुंचे.

संगीता

इंसपेक्टर राजेश पाल ने दोनों को हवालात से बाहर निकलवाया और एसपी साहब के समक्ष पेश किया. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने उन दोनों से पूछताछ की तो रोहित ने आसानी से संगीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. रविंद्र कुछ भी नहीं बोला. उस की आंखों सें आंसू टपकते रहे. अब तक बहू की हत्या व बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी पा कर मृतका की सास गिरजा देवी व ससुर तुलसीदास अहिरवार भी कोतवाली आ गए थे. एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पहले वे बेटेबहू के साथ ही रहते थे. लेकिन जब रविंद्र और संगीता शराब पीने लगे और संगीता अपने आशिक रोहित के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी, तब वे छोटे बेटे के साथ गांव में रहने लगे.

प्रेमी

तुलसीदास ने यह भी बताया कि उन के बड़े भाई रतनलाल अहिरवार बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे. पहले उन का घर आनाजाना बना रहता था, लेकिन जब बहू संगीता शराब पीने लगी और मर्यादाओं की सीमा लांघने लगी, तब मंत्रीजी ने नाता तोड़ दिया और दूरियां बना लीं. चूंकि रोहित व रविंद्र ने संगीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था. अत: इंसपेक्टर राजेश पाल ने संगीता के देवर अरविंद को वादी बना कर बीएनएस की धारा 103 के तहत रोहित वाल्मीकि व रविंद्र अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पति

पुलिस जांच तथा आरोपियों से की गई पूछताछ से संगीता हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है. उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है झांसी. इसी झांसी शहर के थाना कोतवाली अंतर्गत आता है लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला. तुलसीदास अहिरवार सपरिवार इसी मोहल्ला में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी गिरजा देवी के अलावा 2 बेटे थे रविंद्र व अरविंद. तुलसीदास अहिरवार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे. विश्वविद्यालय से मिलने वाले वेतन से वह परिवार का भरणपोषण करते थे. बड़े भाई रतनलाल अहिरवार बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे, इसलिए बिरादरी में मानसम्मान था.

तुलसीदास का बड़ा बेटा रविंद्र ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था. वह डेकोरेशन का काम करता था. वह शराब का लती था. वह अपनी कमाई का सारा पैसा शराब पीनेपिलाने में ही खर्च कर देता था. उस के मम्मीपापा ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उस की शराब की लत नहीं छूटी. तुलसीदास और उन की पत्नी गिरजा देवी का मानना था कि यदि रविंद्र के पैरों में शादी रूपी बेडिय़ां डाल दी जाए तो शायद वह सुधर सकता है. इसी उद्ïदेश्य से वह रविंद्र की शादी के लिए लड़की की तलाश में जुट गए. लेकिन सवाल था कि शराबीकबाबी को लड़की कौन दे? वह जहां भी जाते, मुंह की खाते, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आखिर उन्होंने रविंद्र का रिश्ता संगीता के साथ पक्का कर दिया.

संगीता के पापा कांशीराम अहिरवार कालपी कस्बा के रहने वाले थे. 3 बच्चों में संगीता सब से बड़ी थी. संगीता बेहद खूबसूरत, फैशनपरस्त व चंचल स्वभाव की थी. कांशीराम प्राइवेट नौकरी करते थे, इसलिए उन्होंने रविंद्र के संबंध में बिना कुछ जानेसमझे बेटी का रिश्ता मंजूर कर लिया. इस के बाद 5 फरवरी, 2011 को संगीता का विवाह रविंद्र के साथ हो गया. शादी के बाद संगीता रविंद्र की दुलहन बन कर ससुराल पहुंची तो सभी खुश थे, लेकिन संगीता खुश नहीं थी. संगीता ने किसी मजदूर को पति के रूप में पाने की कल्पना नहीं की थी. उस ने तो फिल्मी हीरो जैसे युवक की छवि मन में बसा रखी थी.

संगीता के दिल को दूसरी ठेस तब लगी, जब रविंद्र उस के थोड़ा और करीब आया. उस की सांसों से शराब की महक आ रही थी. संगीता ने मुंह दूसरी ओर घुमा लिया, ”तुम शराब पीए हो.’’

”आज खुशी का दिन है न, इसलिए दोस्तों के साथ हलक तर कर लिया.’’ रविंद्र बेहयाई से हंसने लगा, ”वैसे भी शराब के बिना शबाब का मजा थोड़े ही आता है.’’

संगीता कुढ़ गई और उस का मन पति से खट्टा हो गया. इस के बावजूद उसे पत्नी का धर्म निभाना पड़ा. संगीता को अपने सपने जैसा पति नहीं मिला था, इस के बावजूद उस ने नियति का लिखा मान कर संतोष कर लिया था. पति की नशे की लत छुड़ाने के लिए उस ने भरसक प्रयास किया, मगर रविंद्र ने शराब से तौबा नहीं की. शादी के एक साल बाद संगीता ने बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम पिंकी रखा. इस के बाद 4 सालों में वह एक बेटी व एक बेटे की मां और बनी. वर्तमान में पिंकी की आयु 12 वर्ष है. समय के साथ संगीता व रविंद्र की उम्र भी बढ़ती गई.

एक ओर जहां शराब की लत ने रविंद्र को खोखला कर दिया, वहीं संगीता की हसरतें अब भी जवान थीं. पहले वह खुशी का बहाना बना कर शराब पीता था, अब एक्स्ट्रा पावर अर्जित करने के लिए शराब को गले लगाने लगा. लेकिन हुआ इस के विपरीत. ज्यादा नशा करने से उस की सैक्स की उमंग जागनी लगभग बंद हो गई. इन्हीं दिनों रविंद्र की दोस्ती रोहित वाल्मीकि से हो गई. वह ओरछा गेट का रहने वाला था. वह भी डेकोरेशन का काम करता था. एक शादी समारोह में सजावट करने के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी. चूंकि रोहित भी शराब का आदी था. अत: दोनों में जल्दी ही यारी हो गई. पहले दोनों साथ में ठेके पर पीते थे, फिर उन की महफिल रविंद्र के घर भी जमने लगी.

रोहित वाल्मीकि मजबूत शरीर वाला बांका जवान था. संगीता से उस की उम्र भी कम थी. संगीता ने जब रोहित को पहली बार देखा, तभी मन में दबी हुई तमन्ना जोर मारने लगी, ‘मेरी शादी इस से हुई होती तो जिंदगी बहारों से भरी होती.’ यही कारण था कि रोहित का आना, उस को देखना, उस से बातें करना संगीता को अच्छा लगता था. वह उसे रिझाने का भी प्रयत्न करने लगी थी. रोहित का रविंद्र के घर आनाजाना शुरू हुआ तो संगीता से भी नजदीकियां बढऩे लगीं. संगीता से रिश्ता भी भाभी का था. 3 बच्चों की मां बन जाने के बाद भी संगीता का यौवन अभी ढला नहीं था. संगीता की आंखों में जब रोहित को एक मूक आमंत्रण दिखने लगा तो कामना की प्यास बढ़ गई.

रविंद्र की कमजोरी शराब थी. उसे अंगूर की बेटी सुहाती थी. अत: आए दिन शराब की महफिल रविंद्र के घर सजने लगी. रोहित उसे मुफ्त में शराब पिलाता और उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. रोहित का घर आनाजाना बढ़ा तो संगीता समझ गई कि रोहित पर उस के हुस्न का जादू चल गया है. दोनों ही समझ गए थे कि एक को हुस्न की तलब है तो दूसरे को इश्क की. बेताबी दोनों ओर बढ़ती गई. एक रोज रोहित ने संगीता को पाने का मन बनाया और वह काम पर न जा कर दोपहर को रविंद्र के घर पहुंच गया. संगीता उस वक्त घर मेें अकेली थी. बच्चे स्कूल गए थे और रविंद्र काम पर.

सासससुर गांव में थे. मौका अच्छा था. रोहित को देख कर संगीता के होंठों पर मानीखेज मुसकान बिखरी और उस ने पूछा, ”तुम तो शाम को अंगूर की बेटी को होंठों पर लगाने यहां आते थे, आज दिन में रास्ता कैसे भूल गए?’’

”संगीता भाभी, अंगूर की बेटी से होंठों की प्यास बुझती कहां है, उल्टा और भड़क जाती है. सोचा, आज शराब से भी ज्यादा नशीली, उस से ज्यादा मादक अपनी भाभी का नशा कर लूं.’’ रोहित ने उस के कंधों पर हाथ रख दिए. संगीता तो कामातुर थी ही. अत: वह भी रोहित की छाती सहलाने लगी. रोहित का हौसला बढ़ा तो उस ने संगीता को बांहों में भर लिया और उस के नाजुक अंगों को सहलाने लगा. इस छेड़छाड़ को संगीता ज्यादा देर तक सहन न कर सकी. वह भी उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. कुछ देर बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव थे.

उस रोज के बाद रोहित व संगीता मौका मिलते ही अपनी हसरतें पूरी कर लेते. पति व प्रेमी की शराब पार्टी में अब संगीता भी शामिल होने लगी. शाम को रोहित के आते ही संगीता महफिल सजाती फिर अपने हाथों से 3 पैग बनाती, एक पैग पति को दूसरा पैग प्रेमी को और तीसरा पैग स्वयं हाथों में थामती. फिर जाम से जाम टकरा कर तीनों शराब पीते. शुरू में संगीता कम पीती थी, लेकिन बाद में जम कर पीने लगी. रोहित की जिद पर संगीता शराब पीने लगी थी.

एक रोज गिरजा देवी ने बहू संगीता को बेटे व उस के दोस्त के साथ शराब पीते देखा तो उस के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. वह जान गई कि बेटाबहू बिगड़ गए हैं. उसे यह भी पता चल गया कि बहू मर्यादा की देहरी लांघ कर गैरमर्द के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी है. गिरजा देवी ने बेटेबहू को फटकार लगाई तो दोनों उसी पर हावी हो गए. उन दोनों ने साफ कह दिया कि वे रोज शराब पीएंगे. देख सको तो साथ रहो, वरना गांव चले जाओ. बेटेबहू के कारण जब बिरादरी में थूथू होने लगी, तब गिरजा देवी अपने पति तुलसीदास व छोटे बेटे अरविंद के साथ गांव दोन में रहने लगी. यहां पैतृक मकान व कुछ जमीन थी.

तुलसीदास अब तक रिटायर हो चुके थे. उन्हें 20 हजार रुपया पेंशन मिलती थी. संगीता ने सासससुर का पीछा यहां भी नहीं छोड़ा. वह हर महीने गांव आती और सासससुर से लड़झगड़ कर पेंशन के पैसे से 5 हजार रुपया ले जाती थी. सासससुर गांव में रहने लगे तो संगीता पूरी तरह से स्वच्छंद हो गई. शाम को रोहित आता फिर तीनों की महफिल जमती. संगीता और रोहित जानबूझ कर रविंद्र को ज्यादा शराब पिला देते. जब वह टुन्न हो कर सोफे पर लुढ़क जाता तो रोहित संगीता को ले कर कमरे में पहुंच जाता और दोनों मौजमस्ती करते.

रविंद्र ने अपनी अधखुली आंखों से कई बार रोहित और संगीता को रंगरलियां मनाते देखा था, लेकिन कभी टोकाटाकी नहीं की. कारण, रोहित मुफ्त में उसे शराब पिलाता था और उस की आर्थिक मदद भी करता था. विरोध करने पर यह सब बंद हो जाता और संगीता भी धोखा दे सकती थी. अत: मुंह बंद रखने में ही उस ने अपनी भलाई समझी. रोहित और संगीता इतने निर्लज्ज हो गए थे कि शराब पीने के बाद रविंद्र के सामने ही कमरे में पलंग पर लुढ़क जाते थे. रविंद्र तब आंगन में पड़े तख्त पर पसर जाता. रोहित वाल्मीकि, संगीता को पत्नी से कम नही समझता था. वह अपनी कमाई भी संगीता को देता था. संगीता भी उस की दीवानी थी, सो हर बात उस की मानती थी.

रोहित वाल्मीकि के 2 अन्य दोस्त पवन खटीक व कल्लू थे. ये दोनों उस के साथ ही काम करते थे. पीनेखाने के दौरान रोहित अपने व संगीता के अंतरंग क्षणों के बारे में दोस्तों को बताता था, जिस से वे दोनों भी संगीता के जिस्म को पाने के लिए लालायित रहते थे. एक रोज पवन खटीक ने रोहित से कहा कि उन दोनो की दोस्ती भी संगीता से करा दे. रोहित ने पहले तो साफ मना कर दिया, लेकिन बाद में शराब पार्टी व 5 हजार रुपया नकद देने पर रोहित ने संगीता के जिस्म का सौदा कर दिया.

रोहित को पक्का यकीन था कि संगीता उस की बात मान लेगी और उस के पति को भी रुपयों का लालच दे कर राजी कर लेगा. 20 मार्च, 2025 को रोहित ने पवन खटीक व कल्लू को साथ लिया और रात 8 बजे शराब की पार्टी के लिए प्रेमिका संगीता के घर पहुंच गया. वहां रविंद्र, संगीता, रोहित व उस के दोनों दोस्तों ने शराब पी. शराब पीने के बाद कल्लू व पवन, रोहित के इस आश्वासन पर वहां से चले गए कि संगीता को राजी करने के बाद वह फोन कर दोनों को बुला लेगा. रोहित ने दोस्तों के जाने के बाद संगीता से बात की. लेकिन संगीता दोस्तों का बिछौना बनने को राजी नहीं हुई. इसी बात को ले कर रविंद्र और रोहित ने संगीता की जम कर पिटाई की, फिर तकिए से मुंह दबा कर मार डाला.

22 मार्च, 2025 को पुलिस ने आरोपी रविंद्र अहिरवार तथा रोहित वाल्मीकि को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. मृतका संगीता के तीनों बच्चे अपनी दादी व बाबा के संरक्षण में रह रहे थे. UP Crime News

—कथा में पिंकी परिवर्तित नाम है.

 

 

Hindi Short Stories : सिरफिरे आशिकों से बचना जरूरी मोहब्बत हुई खूनी

Hindi Short Stories : 18 वर्षीय महक जैन दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए (आनर्स) इंगलिश की पढ़ाई कर रही थी. पहली जून 2025 को वह कालेज जाने के लिए घर से निकली थी, उसी दिन 22 वर्षीय अर्शकृत सिंह ने संजय वन में चाकू से गोद कर उस की हत्या कर दी. कौन है अर्शकृत सिंह और उस ने महक की हत्या क्यों की? पढ़ें, लव क्राइम की यह कहानी.

प्रीति जैन दोपहर से ही बहुत परेशान थी. उस की छोटी 18 वर्षीय बहन महक जैन सुबह अपने कालेज के लिए गई थी. उस ने 10 बजे प्रीति को फोन किया था कि वह जल्दी घर लौट आएगी. हमेशा महक एकडेढ़ बजे घर वापस आ जाती थी, लेकिन अब दोपहर बाद के 3 बजने को आ गए थे, महक का कोई अतापता नहीं था. उस का फोन भी बंद आ रहा था. प्रीति के लिए यही चिंता की बात थी. उसे मालूम था कि महक कभी भी अपना फोन स्विच्ड औफ नहीं करती थी, उस के फोन की बैटरी भी फुल रहती थी, इसलिए महक का फोन बंद होने की वजह वह नहीं समझ पा रही थी.

घड़ी की सूइयां जैसेजैसे आगे सरक रही थीं, प्रीति के दिल की धड़कनें वैसेवैसे बढ़ती जा रही थीं. कुछ सोच कर उस ने अर्शकृत सिंह को फोन लगाया. घंटी बजने के साथ ही अर्शकृत ने फोन उठा लिया, ”हैलो प्रीति. कैसी हो?’’ अर्शकृत के स्वर में अपनापन था.

”मैं ठीक हूं अर्श, मुझे महक के लिए बात करनी है, वह कहां पर है?’’ प्रीति ने गंभीर स्वर में पूछा.

”मुझे क्या मालूम प्रीति, मैं तो उस से 2 दिन से नहीं मिला हूं.’’ अर्शकृत ने बताया.

”बनो मत अर्श, परसों तुम ने महक का पीछा किया था.’’ प्रीति गुस्सा हो कर बोली, ”महक ने यह बात मुझे खुद बताई थी.’’

”ओह!’’ अर्श ने बड़े इत्मीनान से कहा, ”मैं क्यों महक का पीछा करूंगा प्रीति. हो सकता है जिस रास्ते से मैं जा रहा था, महक उसी रास्ते पर मुझ से आगे रही हो और उसे लगा कि मैं उस का पीछा कर रहा हूं तो यह उस की गलतफहमी रही है.’’

”चलो छोड़ो, अब ठीकठीक बता दो महक कहां है. प्लीज बता दो, मुझे और मम्मी को बहुत टेंशन हो रही है.’’

”मैं ने कहा न प्रीति, मैं महक के विषय में कुछ नहीं जानता, तुम उस की किसी सहेली से मालूम करो.’’ अर्श ने कहने के बाद अपनी तरफ से फोन काट दिया.

प्रीति ने गहरी सांस ली. उसे पूरा विश्वास था कि अर्शकृत महक के बारे में जरूर जानता होगा, लेकिन अर्श की ओर से इंकार कर देने के बाद प्रीति की चिंता और ज्यादा बढ़ गई.

वह अंदर मम्मी मधु जैन के कमरे में आ गई. उस वक्त मधु जैन फोन पर अपने पति राकेश जैन से बात कर रही थी. प्रीति को आया देख कर उस ने पूछा, ”कुछ पता लगा महक का?’’

”नहीं मम्मी. मैं ने अर्श से भी पूछा है, वह कह रहा है कि उस ने महक को नहीं देखा है.’’ प्रीति ने बताया.

”हे मालिक!’’ मधु परेशान स्वर में बोली, ”कहां रह गई यह लड़की आज. रोज तो दोपहर में ही घर आ जाती थी, कभी रुकना होता था तो फोन कर के बता भी देती थी. आज तो उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ आ रहा है. तेरे पापा को बताया तो वह भी परेशान हो गए हैं, वह घर लौट रहे हैं.’’

प्रीति कुछ नहीं बोली. वह सोफे पर सिर झुका कर बैठ गई. मधु उस के पास आ गई. उस के कंधे पर हाथ रख कर बोली, ”तूने उस की सहेलियों से मालूम किया है?’’

”मेरे पास महक की 3 सहेलियों के नंबर हैं, मैं तीनों से मालूम कर चुकी हूं. उन्होंने आज महक को कालेज के अंदर भी नहीं देखा है मम्मी.’’

”अगर महक कालेज ही नहीं गई तो फिर सुबहसुबह कहां चली गई?’’ मधु का स्वर भीगने लगा. उन की आंखें गीली हो गईं. प्रीति की भी आंखें भर आईं.

करीब आधे घंटे बाद राकेश जैन घर आ गए. पत्नी और बेटी को रोता देख कर वह विचलित हो गए. दोनों को ढांढस बंधाते हए वह बोले, ”रोओ मत. मैं कालेज जा कर देखता हूं.’’

”कालेज तो वह पहुंची ही नहीं है पापा.’’ प्रीति ने रोते हुए बताया, ”उस की एक सहेली ने यह बात बताई है.’’

”ओह!’’ राकेश जैन घबरा गए, ”फिर तो शायद रास्ते में ही महक के साथ कोई अनहोनी हुई होगी. मैं देखता हूं जा कर.’’ राकेश जैन ने कहा और जैसे ही उन्होंने बाहर जाने के लिए कदम बढ़ाया, उन का फोन बजने लगा.

”शायद महक का फोन है.’’ आशा भरे स्वर राकेश जैन के मुंह से निकले. उन्होंने मोबाइल निकाला तो उस पर एक नया नंबर देख कर चौंके.

मोबाइल की घंटी बज रही थी. उन्होंने उस नंबर की काल को रिसीव कर लिया, ”हैलो! मैं राकेश जैन बोल रहा हूं.. आप?’’

”मैं सुरजीत सिंह बोल रहा हूं.’’ दूसरी ओर से बोलने वाला बहुत घबराया हुआ लगा, ”आप की बेटी महक ने मेरे बेटे अर्शकृत पर अपने दोस्तों से हमला करवाया है.’’

”क्या बकवास कर रहे हैं आप?’’ राकेश जैन क्रोध से चीख पड़े, ”मेरी बेटी ऐसा क्यों करेगी?’’

”यह तो अपनी बेटी से पूछना तुम. मेरा बेटा अर्शकृत पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में घायल पड़ा है. यदि मेरे बेटे को कुछ हुआ तो मैं महक को जेल की चक्की पिसवा दूंगा राकेश जैन.’’ सुरजीत भी गुस्से में चीख पड़ा और उस ने फोन काट दिया.

”क्या हुआ जी?’’ मधु घबरा कर बोली, ”क्या किया महक ने?’’

”उस आवारा लड़के अर्श के बाप का फोन था. कह रहा था कि महक ने उस के बेटे अर्श पर अपने दोस्तों के द्वारा हमला करवाया है, उस का बेटा अर्श अस्पताल में है.’’

”बकवास कर रहे हैं अर्श के डैडी. महक इतनी शांत स्वभाव की है. वह भला अर्श पर क्यों हमला करवाएगी.’’ प्रीति सोफे से उठते हुए बोली.

”वह कहां है यह तो पूछते आप अर्श के डैडी से.’’ मधु जैन परेशान हो कर बोली, ”उन्हें फिर फोन लगाओ.’’

राकेश जैन ने कुछ देर पहले उन के मोबाइल पर आए नंबर को रिडायल किया. दूसरी तरफ से फोन सुरजीत सिंह ने ही अटेंड किया, ”हां बोलो.’’

”महक कहां है?’’

”मुझे नहीं मालूम.’’ सुरजीत सिंह ऐंठ कर बोला.

”आप के बेटे पर महक ने कहां हमला करवाया है, वह जगह तो आप बता ही सकते हैं?’’

”महरौली में संजय वन के पास महक ने अपने दोस्तों के साथ मेरे बेटे को घेर कर चाकू मारे हैं. मैं छोड़ूंगा नहीं महक को,’’ सुरजीत ने कहने के बाद काल डिसकनेक्ट कर दी.

”महरौली के संजय वन में अर्श पर हमला हुआ है. सुरजीत का कहना है कि महक ने अपने दोस्तों के साथ वहां अर्श को घेरा था.’’ राकेश जैन ने बताया फिर प्रीति से बोले, ”तुम साथ चलो बेटी. हम संजय वन जा कर हकीकत मालूम करते हैं. वहां ऐसा कुछ हुआ होगा तो वहां के आसपास पटरी पर खोमचा लगाने वाले बता ही देंगे. महक का भी पता चल जाएगा.’’

”ठीक है पापा,’’ प्रीति ने कहा और तुरंत तैयार हो कर वह अपने पापा के साथ घर से निकल गई.

राकेश जैन ने बेटी प्रीति के साथ महरौली पहुंच कर संजय वन के आसपास पटरी लगाने वालों से वहां आज हुई किसी वारदात के विषय में पूछताछ की. किसी ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की कि आज वहां किसी प्रकार की मारपीट या चाकूबाजी की घटना घटी है. सुबह से ही वहां का वातावरण और दिनों की तरह ही था.

”पापा. मुझे तो लगता है अर्श झूठ बोल रहा है. वह महक को फंसाना चाहता है.’’ प्रीति ने अपनी आशंका जाहिर की.

”इस के लिए महक का मिलना भी तो जरूरी है बेटी. वही बताएगी कि सच्चाई क्या है.’’

”मुझे तो अर्शकृत पर शक है. वह जानता है कि महक कहां है, लेकिन बता नहीं रहा है.’’

”हमें अर्शकृत से मिलना चाहिए बेटी.’’ राकेश जैन ने कहा.

”चलिए, हम पीतमपुरा चलते हैं. वह यदि किसी अस्पताल में होगा तो मालूम हो जाएगा, महक कहां है और उस ने कैसे हमला करवाया.’’ प्रीति बोली.

दोनों महरौली से पीतमपुरा के लिए निकले. रास्ते में ही राकेश जैन ने सुरजीत को फोन कर के मालूम कर लिया कि अर्शकृत किस अस्पताल में एडमिट है.

अस्पताल में राकेश जैन अपनी बेटी के साथ पहुंचे तो उन्हें अर्शकृत एक बैड पर पड़ा मिल गया. वह वहां अकेला था.

राजेश जैन ने देखा, उस के हाथों पर 1-2 जगह पट्टियां बंधी थीं. वह आराम से बैड पर लेटा हुआ था. उसे देख कर नहीं लग रहा था कि उस पर चाकुओं से जानलेवा हमला हुआ है. प्रीति को अपने पापा राकेश जैन के साथ देख कर उस ने जख्मी हाथ ऊपर उठा कर कहा, ”देख लो अपनी बेटी की करतूत. उस ने मुझ पर अपने दोस्तों से हमला करवाया है.’’

”महक कहां पर है?’’ राकेश जैन ने पूछा.

”मुझ पर हमला करवा कर भाग गई. कहां गई, मैं नहीं जानता.’’ अर्शकृत ने कहने के बाद चेहरा घुमा लिया.

कुछ सोच कर राकेश जैन बेटी प्रीति को साथ ले कर घर लौट आए. पत्नी से सलाह करने के बाद वह उसे साथ ले कर जहांगीरपुरी थाने पहुंच गए.

वहां उन्होंने एसएचओ सतविंदर सिंह को अपना परिचय दिया और बताया, ”सर, मैं जहांगीरपुरी के के-ब्लौक में अपनी पत्नी मधु और 2 बेटियों के साथ रहता हूं. मेरी छोटी बेटी दिल्ली यूनिवर्सिटी से ओपन लर्निंग कोर्स द्वारा इंगलिश आनर्स की पढ़ाई कर रही है. साथ ही वह मूलचंद में एक इंस्टीट्यूट से कोरियन लैंग्वेज भी सीख रही है.

”वह आज सुबह 8 बजे घर से यह कह कर निकली थी कि वह कालेज जा रही है. वह कालेज से एकडेढ़ बजे तक घर लौट आती थी. आज वह 3 बजे तक नहीं लौटी तो मधु और प्रीति ने उस के विषय में हर संभव जगह पर फोन कर के मालूम किया. चूंकि महक का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था, उस की सहेलियों से और अर्शकृत से भी मालूम किया.

”महक की सहेली का कहना था कि महक आज कालेज नहीं आई. जबकि अर्श पहले कहता रहा कि वह महक से 2 दिन से नहीं मिला है, लेकिन सर वह सुबह से महक के विषय में जानता रहा है. क्योंकि…’’

”यह अर्शकृत कौन है?’’ एसएचओ ने पूछा.

”यह महक को एकतरफा प्यार करने वाला सिरफिरा आशिक है. हम ने उसे कितनी ही बार महक से न मिलने और महक को तंग न करने की हिदायत दी थी, लेकिन वह बाज नहीं आया. वह महक के पीछे घर तक भी पहुंचने लगा था सर.’’

”आप कह रहे हैं अर्श आज सुबह महक के साथ था, आप यह बात किस अनुमान से कह रहे हैं?’’

”सर, आज जब हम महक की खोजखबर में परेशान थे, मुझे अर्श के पिता का फोन आया कि अर्श पर महक ने अपने दोस्तों के साथ जानलेवा हमला करवाया है. जगह के बारे में पूछने पर हमें बताया गया कि महरौली के संजय वन के पास यह घटना घटी है. मैं अपनी बेटी के साथ संजय वन गया. वहां पूछताछ की तो मालूम हुआ वहां ऐसी कोई वारदात नहीं हुई.’’

”इस का मतलब अर्श झूठ बोल रहा है.’’

”कह नहीं सकते सर, मैं ने बेटी के साथ पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में जा कर अर्श से मुलाकात की. उस के हाथ पर मामूली जख्म है, जिस की पट्टी करवा कर वह अस्पताल के बैड पर आराम से पड़ा हुआ है. वह महक के विषय में कुछ भी नहीं बता रहा है.’’

”ठीक है, मैं अर्शकृत से मिलता हूं. असलियत क्या है वही बताएगा.’’ एसएचओ ने कहने के बाद मधु जैन के द्वारा महक के लापता होने का मामला दर्ज कर लिया और उन का फोन नंबर नोट कर के उन्हें थाने से वापस घर भेज दिया.

जहांगीरपुरी पुलिस ने उसी शाम अर्शकृत से पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में जा कर पूछताछ की. अर्शकृत ने पुलिस को यही बताया कि महक ने अपने 2 दोस्तों द्वारा उस पर चाकुओं से हमला करवाया है.

”यह घटना कहां पर घटी है, बताओगे मुझे?’’ एसएचओ सतविंदर सिंह ने उस के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

”महरौली के संजय वन में सर.’’

”महक वहां कैसे पहंची, क्या उसे तुम ने बताया था कि तुम महरौली में खड़े हो?’’

इस प्रश्न पर अर्शकृत अचकचा गया. उस ने चेहरा झुका कर धीरे से कहा, ”यह तो महक ही जाने सर.. मैं आज सुबह महरौली गया था.’’

”तुम पर जिन 2 युवकों ने हमला किया, उन्हें पहचानते हो? उन के नामपते नोट करवाओ मुझे.’’

”म… मैं उन्हें नहीं जानता. यह महक जानती होगी, वही उन्हें वहां पर लाई थी.’’

”क्या महक उस वक्त उन युवकों के साथ थी, जिन्होंने तुम पर चाकुओं से हमला किया?’’

”जी हां सर. तभी तो मैं कह रहा हूं, यह महक की ओर से मुझ पर कातिलाना हमला था.’’

”महक ने ऐसा क्यों किया, क्या तुम से उस की दुश्मनी रही है?’’

”कह नहीं सकता सर.’’

”मुझे तो बताया गया है तुम महक से प्यार करते थे, यदि ऐसा था तो कोई लड़की अपने प्रेमी पर हमला क्यों करवाएगी?’’ एसएचओ ने पूछा.

”यह तो सर, महक ही जाने.’’

”मैं बताता हूं.’’ एसएचओ सतविंदर सिंह ने अर्शकृत को जलती आंखों से घूरते हुए कहा, ”तुम महक के पीछे पड़े हुए थे. वह तुम्हें नहीं चाहती थी, लेकिन तुम उसे हर रोज तंग करते थे. इसी से नाराज हो कर उस ने तुम पर हमला करवाया है.’’

”जी, वह भी मुझे प्यार करती थी,’’ अर्शकृत जल्दी से बोला, ”वह मेरी किस बात पर नाराज हो गई, मैं नहीं जानता.’’

”तुम पर जानलेवा हमला हुआ. वे 2 युवक थे, फिर भी तुम्हारे एक ही हाथ पर मामूली सा जख्म हुआ. कहीं किसी पर चाकू चलाने में तो यह हाथ घायल नहीं हुआ है? महक भी सुबह से लापता है, सच्चाई क्या है, बताओगे मुझे?’’

अर्शकृत का चेहरा सफेद पड़ गया. वह अपने को संभाल कर तुरंत बोला, ”आप मुझ पर ही संदेह कर रहे हैं सर, मुझ पर जानलेवा हमला हुआ है, मैं जख्मी हूं… आप जाइए और संजय वन में घटनास्थल देखिए. मैं आराम करना चाहता हूं.’’

एसएचओ मुसकराते हुए खड़े हो गए और मन ही मन बड़बड़ाए, ”बेटा, मैं ने कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं. तुम पर जानलेवा हमला नहीं हुआ है, तुम ने महक पर जानलेवा हमला किया है. हम संजय वन चेक कर लें, फिर तुम्हें हथकडिय़ां पहनाऊंगा.’’

एसएचओ सतविंदर सिंह उठ कर अपनी टीम के साथ अस्पताल से बाहर आ गए. अभी अंधेरा नहीं हुआ था. उन्होंने संजय वन जा कर देख लेना उचित समझा तो टीम के साथ महरौली निकल पड़े. महरौली में संजय वन पहुंच कर उन्होंने महक को तलाश किया. उन्हें संदेह था कि यदि अर्शकृत ने महक पर जानलेवा हमला किया होगा तो वह जीवित या मृत अंदर संजय वन में ही पड़ी मिलेगी. 2 घंटे तक अपनी टीम के साथ उन्होंने संजय वन में तलाशा, लेकिन महक उन्हें नहीं मिली.

अंधकार जमीन पर उतर आया था, इसलिए वह टीम के साथ थाने में लौट आए. एसएचओ सतविंदर सिंह ने यह जानकारी एसीपी प्रवीण कुमार को दी तो उन्होंने उन्हें यह केस महरौली थाने को देने के लिए कह दिया. यह दक्षिणी दिल्ली के थाना महरौली की घटना थी. इसलिए यहां की जांच का थाना महरौली ही पड़ता था. एसएचओ सतविंदर सिंह (जहागीरपुरी) ने सारी घटना की जानकारी महरौली थाने को दे कर महक की गुमशुदगी वाला केस उन को हैंडओवर कर दिया.

महरौली थाने में यह मामला बीएनएस की धारा 103 के तहत दर्ज कर के यहां के एसएचओ संजय कमार सिंह ने डीसीपी अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह को पूरी घटना की जानकारी दे दी. उन्होंने एसएचओ संजय कुमार सिंह को यह मामला हल करने का दायित्व सौंप दिया. दूसरी सुबह वह पीतमपुरा के अस्पताल में 22 वर्षीय अर्शकृत से मिलने पहुंचे तो वह वहां से डिसचार्ज हो चुका था.

अस्पताल से उन्हें उस के घर का पता मिल गया. अर्शकृत के पिता सुरजीत सिंह, डब्ल्यूजेड-1552, रानी बाग, दिल्ली में रहते थे. पुलिस टीम वहां पहुंच गई. अर्शकृत को उम्मीद नहीं थी कि पुलिस घर के दरवाजे तक पहुंच जाएगी. पुलिस का सामना उस के पिता सुरजीत सिंह ने किया.

”आप मेरे दरवाजे किसलिए आए हैं?’’ सुरजीत सिंह ने रौब से पूछा.

”आप कौन हैं, हमें अर्शकृत से मिलना है.’’ एसआई विनोद भाटी ने कहा.

”मैं अर्शकृत का फादर हूं. आप अर्शकृत से क्यों मिलना चाहते हैं?’’

”महक के विषय में उस से कुछ पूछताछ करनी है, बुलाइए उसे बाहर.’’

”महक ने तो मेरे बेटे पर जानलेवा हमला करवाया है. आप महक से मिलिए…’’

”आप उसे बुलाते हैं या मैं पुलिस को अंदर भेजूं.’’ विनोद भाटी इस बार कड़क लहजे में बोले तो सुरजीत सिंह की ऐंठन कम हो गई. उस ने अर्शकृत को बाहर बुला लिया.

एसआई भाटी ने उस का हाथ पकड़ लिया और पुलिस वैन में ले आए. पुलिस टीम उसे ले कर महरौली थाने में आ गई.

”अर्शकृत, तुम ने बहुत नाटक कर लिया. अब यदि तुम ने सीधी तरह सच्चाई नहीं उगली तो मुझे सख्ती से पूछताछ करनी पड़ेगी.’’ एसएचओ संजय कुमार सिंह ने रौबदार आवाज में कहा, ”बताओ, महक कहां है?’’

”मैं ने उसे मार डाला है.’’ अर्शकृत सिर झुका कर बोला.

उस की बात पर पुलिस चौंक पड़ी. एसएचओ संजय कुमार सिंह ने गहरी सांस ली, ”महक की लाश कहां है?’’

”संजय वन में मैं ने छिपा दी है सर.’’ अर्शकृत ने बताया.

”चलो, हमें महक की लाश बरामद करवाओ.’’ एसएचओ सिंह ने कहा.

अर्शकृत को संजय वन ले जाने से पहले श्री सिंह ने महक के पिता राकेश जैन को महक की हत्या अर्शकृत द्वारा किए जाने की जानकारी दे दी.

अर्शकृत को पुलिस टीम अपने साथ ले कर संजय वन आ गई. इस समय एसएचओ संजय कुमार सिंह के साथ इंसपेक्टर (कानून एवं व्यवस्था) अनुराग सिंह और एसआई विनोद भाटी भी थे.

अर्शकृत पुलिस को संजय वन के उस कोने में ले गया, जहां ज्यादा पेड़पौधे और जंगली घास थी. महक की लाश अर्शकृत ने जंगली घास में छिपा रखी थी. उस की लाश खून से पूरी तरह सनी हुई थी, खून सूख चुका था. महक का चेहरा और शरीर का कुछ हिस्सा जला हुआ था. महक के शरीर पर कई जगह चाकू के गहरे घाव देखे जा सकते थे. उस की आंखें फटी पड़ी थीं. उस का गला भी घोंटा गया था.

संजय सिंह ने फोन कर के महक की लाश संजय वन में मिलने की जानकारी डीसीपी (दक्षिणी दिल्ली) अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह को दे दी. उन्होंने घटनास्थल पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. आधे घंटे में उच्चाधिकारी और फोरैंसिक टीम संजय वन में आ पहुंचे. फोरैंसिक टीम अपने काम में लग गई. डीसीपी अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह ने महक की लाश का निरीक्षण किया, फिर वह इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह को कुछ निर्देश दे कर वहां से चले गए.

लाश की काररवाई पूरी कर के इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह निपटे ही थे कि महक के मम्मीपापा और बड़ी बहन प्रीति वहां आ गए. अपनी फूल जैसी बेटी का चाकू से गोदा गया जिस्म और जला हुआ चेहरा देख कर मधु जैन और प्रीति दहाड़े मार कर रोने लगीं. राकेश जैन भी फफक कर रोने लगे. उन्हें सांत्वना देते हुए एसएचओ संजय कुमार सिंह ने कहा, ”महक की हत्या हो जाने का मुझे भी दुख है. महक का हत्यारा हमारी पकड़ में है. मैं कोशिश करूंगा, इसे फांसी का फंदा मिले.’’

”मैं भी चाहता हूं सर,’’ राकेश जैन भर्राए स्वर में बोले, ”इसे फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए.’’

कागजी काररवाई करने के बाद महक का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया. उस के परिजन भी मोर्चरी के लिए चले गए. अर्शकृत को ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई.

पुलिस टीम ने संजय वन और बाहर लगे सभी सीसीटीवी चैक किए तो उन्हें अर्शकृत और महक संजय वन में जाते नजर आ गए. अर्शकृत के हाथ में बोतल भी दिखाई दे रही थी. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया गया था. यह अर्शकृत के खिलाफ पुख्ता सबूत थे कि उस ने महक का कत्ल किया है.

थाना महरौली में डीसीपी अंकित चौहान की उपस्थिति में अर्शकृत से महक की हत्या करने का कारण पूछा गया तो उस ने बताया, ”मेरी पहचान महक से कालेज में हुई थी. महक ओपन लर्निंग द्वारा इंगलिश आनर्स की पढ़ाई कर रही थी. मैं बीकाम फस्र्ट ईयर का स्टूडेंट था. महक और मैं पहले हायहैलो करते रहे, फिर धीरेधीरे हम प्यार करने लगे. महक मेरे बुलाने पर कहीं भी आ जाती थी. वह मुझे बहुत प्यार करती थी, लेकिन उस के पेरेंट्स मुझे पसंद नहीं करते थे. उन्होंने कई बार मुझे धमकाया कि मैं महक से न मिलूं. उन्होंने महक को भी मुझ से दूर करने की कोशिश की और वे कामयाब हो गए.’’

अर्शकृत ने रुक कर लंबी सांस ली, फिर बोला, ”सर, मैं महक को बहुत प्यार करता था. वह मुझ से कटने लगी तो मुझे बहुत बुरा लगता था. मैं जानता था महक मेरी है, मेरे लिए ही उस ने धरती पर जन्म लिया है. मैं तब बहुत तड़पा, जब महक ने मुझ से बोलना छोड़ दिया. मैं ने महक से कई बार मिलने की कोशिश की तो वह नहीं मिली. उस के घर गया तो घर वालों ने मेरी बेइज्जती कर के मुझे महक से मिलने नहीं दिया. इस से मेरे अंदर महक के प्रति गुस्सा भरता चला गया.

”मैं ने 2 दिन पहले इरादा बनाया कि महक मेरी नहीं होगी तो किसी दूसरे की नहीं होगी. मैं ने कल पहली जून को पेट्रोल खरीद कर बोतल में भर लिया. चाकू मैं ने पहले ही खरीद लिया था. मैं ने सुबह महक को फोन कर के कहा कि वह एक बार मुझ से मिल ले, फिर बेशक मुझ से किनारा कर लेना.

”महक मान गई. मैं ने महक को महरौली संजय वन में बुलाया. मैं सुबह सवा 8 बजे संजय वन पहुंच गया. महक 10 बजे के बाद आई. मैं ने महक को फिर से दोस्ती करने के लिए कहा, लेकिन उस ने मना कर दिया. हमारी इसी बात पर लड़ाई हो गई. मैं महक को घसीट कर संजय वन के कोने में ले आया.

”मैं गुस्से में था. मैं ने महक पर चाकू से हमला किया, मैं ने कितने चाकू मारे मुझे नहीं मालूम. महक मर गई तो मैं ने उस का गला घोंटा, फिर पेट्रोल डाल कर उस का चेहरा जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. मैं उस की लाश छिपा कर घर आ गया और फिर प्लान बना कर अस्पताल में एडमिट हो गया. मैं ने अपने पापा से कहा कि महक ने मुझ पर जानलेवा हमला किया है. मैं ने महक का कत्ल किया है. मैं कुबूल करता हूं.’’

अर्शकृत के कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसे उसी दिन कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक पुलिस उस के खिलाफ ठोस सबूत जुटा रही थी. Hindi Short Stories