Family Crime: प्यार में छली गई कांस्टेबल

Family Crime: पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की एक्सीडेंट में मृत्यु के बाद ओडिशा के कांस्टेबल दीपक राउत (39 वर्ष) ने बीमा कंपनी से डेढ़ करोड़ रुपए का क्लेम लिया. इस के बाद उस ने कांस्टेबल शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को प्रेम जाल में फांस कर उस से कोर्टमैरिज कर ली. फिर एक दिन उस ने शुभमित्रा को भी ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने जब जांच कर गड़े मुर्दे खोदे तो ऐसी सच्चाई जगजाहिर हुई कि…

महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपने दोस्त कांस्टेबल दीपक राउत के साथ गुपचुप तरीके से की गई कोर्ट मैरिज को जल्द से जल्द सार्वजनिक करना चाहती थी, जबकि 39 वर्षीय दीपक राउत अब शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को अपनी जिंदगी से हमेशाहमेशा के लिए निकालने का प्लान बना चुका था.

अपने इसी प्लान को आखिरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उस ने 6 सितंबर, 2025 की तारीख को चुना. शुभमित्रा साहू की ड्यूटी डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय में थी. शाम 7 बजे उस की ड्यूटी खत्म हुई तो दीपक राउत ने फोन कर के उसे एक अनजान जगह मिलने के लिए बुलाया. जब शुभमित्रा 7 बज कर 10 मिनट पर उस की बताई गई जगह पर पहुंची तो दीपक राउत अपनी होंडा सिटी कार से उस का इंतजार कर रहा था.

दीपक उसे कार में बिठा कर भीड़भाड़ से दूर एक सुनसान जगह पर ले गया और फिर जंगल के सुनसान इलाके में उस ने कार रोक दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक से अपने उधार के 20 लाख रुपयों की मांग की, क्योंकि वह अपनी शादी को सार्वजनिक कर एक ग्रांड पार्टी देना चाहती थी. जबकि दीपक शुभमित्रा को एक पाई तक देने के मूड में नहीं था. वह तो केवल कोर्ट मैरिज की आड़ में उस के शरीर और भावनाओं से खेल रहा था.

पैसे मांगने पर दोनों के बीच विवाद हो गया. कांस्टेबल दीपक ने उसे गालियां देनी शुरू कर दीं तो शुभमित्रा भी जवाब में उसे गालियां देने लगी. इस पर दीपक ने उस के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक को जोर से एक लात मार दी. गुस्से में आ कर दीपक ने शुभमित्रा का गला पकड़ लिया और तब तक दबाता रहा, जब तक वह बेसुध हो कर नीचे नहीं गिर गई. कुछ ही पलों में शुभमित्रा की मौत हो गई.

शुभमित्रा की हत्या करने के बाद दीपक ने उस का शव अपनी कार की डिक्की में रखा. पूरे एक दिन तक वह शुभमित्रा का शव अपनी कार की डिक्की में रख कर सामान्य तरीके से ही घूमता रहा. यहां तक कि वह अपनी ड्यूटी करने थाने भी गया. इस के बाद उस ने अपने चचेरे भाई को पैसे देने का लालच दे कर उसे और उस के ड्राइवर को जेसीबी ले कर शव को 170 किलोमीटर दूर क्योंझर जिले के घाटगांव क्षेत्र के पास जंगल में भेज दिया. वहां उन्होंने सुनसान जगह पर जेसीबी से गहरा गड्ढा खोद कर शुभमित्रा साहू को दफना दिया.

25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उस समय कोरडा टाउन, पिचकुली, सूर्यनगर, भुवनेश्वर में किराए के मकान में रहती थी. उस के औफिस से उस के कमरे का रास्ता बमुश्किल आधे घंटे का था. शुभमित्रा की मम्मी सुकीर्ति साहू उस के साथ में रहती थीं. जब शाम को 8 बजे तक भी शुभमित्रा साहू अपने घर नहीं पहुंची तो उस की मम्मी एकदम से घबरा गईं. उन्होंने तुरंत अपने पति और बेटी को इस बारे में सूचना दी और अपने पड़ोस की एक महिला के साथ शुभमित्रा का पता लगाने उस के औफिस में चली गईं.

औफिस से पता चला कि शुभमित्रा साहू तो रोजाना की तरह आज शाम को 7 बजे अपनी ड्यूटी खत्म कर के अपने घर की ओर निकल गई थी. अब तक पुलिस महकमे में भी इस खबर को सुन कर हड़बड़ी मच गई थी. शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू ने तुरंत कैपिटल थाने में अपनी बेटी शुभमित्रा साहू के लापता होने की सूचना दर्ज करा दी.

पुलिस अब तुरंत हरकत में आ गई थी. दूसरे दिन लापता शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू और पापा धुरयदान साहू ने पुलिस कमिश्नर (भुवनेश्वर) सुरेश देव दत्ता सिंह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बेटी को तलाशने में त्वरित जांच की मांग की. पुलिस कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को लापता ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की खोज के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए.

पुलिस टीमें लगातार शुभमित्रा साहू की तलाश में जुटी हुई थीं. इस के लिए पुलिस ने अपनी कई टीमें बना रखी थीं, लेकिन हफ्ता गुजरने के बाद भी पुलिस के पास कोई भी सुराग हाथ नहीं आ पाया था. पुलिस टीम को शुभमित्रा के किराए के घर पर उस का खुद का मोबाइल भी सुरक्षित हालत में बरामद हुआ था.

अब पुलिस टीम को यह बात साफ नहीं हो पा रही थी कि लापता महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपना मोबाइल अपने ही घर में जल्दबाजी में भूल गई थी या जानबूझ कर छोड़ गई थी. एक महिला कांस्टेबल रहस्यमय तरीके से ड्यूटी के स्थान से ले कर अपने किराए के मकान के बीच भला कैसे गायब हो सकती थी. यह प्रश्न अब ओडिशा पुलिस के लिए खुद एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था.

अपनी इसी प्रतिष्ठा को बरकरार रखने के लिए आखिरकार डीसीपी भुवनेश्वर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर शुभमित्रा की फोटो और उस की पूरी डिटेल्स को शेयर करते हुए एक पोस्ट में लिखना पड़ा था कि क्या आप ने हमारी महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू, जिस की उम्र 25 वर्ष और लंबाई लगभग 5 फुट है, जिस ने ड्यूटी से अपने घर को निकलते समय बैंगनी रंग का टौप और सफेद सलवार पहनी हुई थी, उसे कहीं पर देखा है?

यदि किसी ने इन महिला कांस्टेबल को कहीं पर भी आतेजाते या टहलते हुए कहीं पर देखा है तो कृपया हमें हमारे मोबाइल नंबर 7008264419 और 8280338022 पर सूचित करें. सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी. इस के अतिरिक्त भुवनेश्वर पुलिस ने लापता शुभमित्रा की सूचना देने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी कर दी थी.

भुवनेश्वर पुलिस पूरे जोरशोर से शुभमित्रा की तलाश कर रही थी. इस के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरे और शुभमित्रा के घर से बरामद उस के मोबाइल फोन को भी अनलौक करने में जुटी जुटी हुई थी, लेकिन पुलिस को अभी तक कोई भी सूत्र हाथ नहीं लग पाया था. शुभमित्रा अपने औफिस से शाम को 7 बजे के बाद अपने घर आने के रास्ते में अचानक कहां लापता हो गई थी, यह प्रश्न बारबार पुलिस को परेशान कर रहा था.

जांच के दौरान पुलिस के सामने यह बात साफ हो चुकी थी कि शुभमित्रा के गायब होने में उस के किसी खास परिचित, प्रेमी आदि का हाथ हो सकता है, इसलिए अब पुलिस इस केस की जांच ‘लव एंगल’ से भी करने लगी. आखिरकार, भुवनेश्वर पुलिस के कैपिटल पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों को अपनी विस्तृत जांच करने के दौरान यह पता चला कि भुवनेश्वर में शुभमित्रा साहू के साथ आखिरी बार पुलिस कमिश्नरेट में तैनात पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को देखा गया था.

पुलिस टीम ने तत्काल दीपक राउत को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. इसी दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि पिछले साल दीपक और शुभमित्रा ने गुपचुप कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिस के बारे में दोनों के फेमिली वालों को पता तक नहीं था. अब पुलिस का शक दीपक पर पूरी तरह से बढ़ गया था. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर संदिग्ध दीपक राउत शुभमित्रा के गायब होने के बाद दुखी होने का दिखावा करता रहा. यहां तक कि वह शुरू में परिवार और पुलिस के साथ उसे ढूंढने में मदद करने का झूठा दिखावा करता रहा.

पुलिस पूछताछ में दीपक राउत ने सामान्य स्थिति का दिखावा करते हुए यह बात स्वीकार की कि उस के और शुभमित्रा के बीच में प्रेम प्रसंग था और उस ने शुभमित्रा के साथ 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज भी छिप कर कर ली थी. दीपक राउत ने पुलिस पूछताछ में आगे बताया कि वह 6 सितंबर, 2025 को जब शुभमित्रा एकाएक लापता हो गई थी तो वह अपने एक रिश्तेदार से मिलने क्योंझर गया था और उस ने अपनी प्रेयसी और पत्नी शुभमित्रा साहू की सकुशल व सुरक्षित वापसी के लिए वहां के तारिणी मंदिर में प्रार्थना भी की थी.

इस बात की पुष्टि करते हुए उस ने पुलिस टीम को अपने मोबाइल में खींची गई तसवीरें और पूजापाठ करते हुए ली गई सेल्फी भी दिखाई. इस के साथ ही उस ने सोशल मीडिया पर किया गया अपना पोस्ट भी दिखाया, जिस में उस ने शुभमित्रा के लापता होने की जानकारी पोस्ट की थी और लोगों से अपील भी की थी कि उस के बारे में किसी भी किस्म की जानकारी होने पर तुरंत पुलिस को दिए गए मोबाइल फोन पर सूचना दें.

शुभमित्रा साहू की जांच में एक अहम मोड़ तब आया, जब पुलिस ने लापता शुभमित्रा का फोन अनलौक करने के बाद उस के वाट्सऐप चैट्स को एक्सेस किया. इस में इस बात का पता चला कि शुभमित्रा ने 10 लाख रुपए कोर्ट मैरिज से पहले दीपक राउत को उधार दिए थे. उस के बाद शुभमित्रा दीपक से अपने 10 लाख रुपए लौटाने के साथसाथ 10 लाख रुपए अतिरिक्त देने की डिमांड कर रही थी, ताकि वह धूमधाम के साथ अपनी शादी की पार्टी अपने फेमिली वालों व परिचितों के बीच कर सके.

लेकिन दीपक इस विवाह को सार्वजनिक किए जाने के खिलाफ था. वह शुभमित्रा से बारबार यही कहता था कि वह अभी तक अपनी पहली पत्नी अपर्णा की मृत्यु से ठीक तरह से उबर नहीं पाया है. इस के अलावा दीपक बारबार इस बात का उलाहना भी शुभमित्रा को देता रहता था कि उस ने शुभमित्रा का एक करोड़ रुपए का बीमा करा रखा है, जिस की किश्त देना उसे भारी पड़ता जा रहा है, इसलिए दीपक उस के 10 लाख रुपए लौटाने के एकदम खिलाफ हो गया था.

इन सभी बातों से शुभमित्रा काफी तनाव में आ गई थी, जिस के कारण उस के वाट्सऐप मैसेज में पुरी, मथुरा और वाराणसी जाने की इच्छा जताई थी. शुरू में दीपक राउत ने पुलिस को यह कह कर गुमराह करने की कोशिश की थी कि शुभमित्रा की अपने मम्मीपापा के साथ अनबन रहती थी, जिस के कारण वह अपना घर छोड़ कर चली गई होगी. उस के बाद पुलिस टीम ने पुरी, वाराणसी और मथुरा में जा कर भी शुभमित्रा की तलाश की, लेकिन पुलिस टीम को शुभमित्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया था.

फिर पुलिस ने आरोपी दीपक राउत का पौलीग्राफ टेस्ट कराया. पौलीग्राफ टेस्ट के दौरान दीपक राउत के जवाब भ्रामक पाए गए. उस के बाद पुलिस ने जब उस के साथ सख्ती की तो फिर उस ने शुभमित्रा साहू की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. शुभमित्रा साहू और दीपक राउत की पहली मुलाकात किसी फिल्मी सीन की तरह घटित हुई थी. उस दिन शुभमित्रा को औफिस में ज्यादा काम हो गया था, जिस की वजह से वह शाम को 7 बजे अपने घर लौटने के बजाय रात लगभग 9 बजे अपने औफिस से स्कूटी से घर के लिए निकली थी.

जैसे ही शुभमित्रा एक अंधेरी सी सड़क से गुजरी तो उसे एक लड़की की चीख सुनाई पड़ी. चीख सुनते ही शुभमित्रा ने अपनी स्कूटी तत्काल उस तरफ मोड़ दी, जिधर से चीखने की आवाज आई थी. तभी उस की नजर एक अंधेरे कोने पर पड़ी तो उस ने देखा कि एक युवती को 4 युवकों ने चारों ओर से घेर रखा था और वे सब उस युवती को पकड़ कर उस के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे. शुभमित्रा खुद एक पुलिस वाली थी, इसलिए उस ने अपनी स्कूटी साइड में खड़ी की और तुरंत उस युवती को बचाने चली गई. पहले तो उन चारों युवकों ने शुभमित्रा को धमकाया, लेकिन जब शुभमित्रा ने उन में से 2 युवकों के चेहरों पर थप्पड़ जड़े तो उन के होश ठिकाने आ गए.

अब चारों युवक उस युवती को छोड़ कर शुभमित्रा से मारपीट करने लगे. पहले तो कुछ देर तक शुभमित्रा चारों से मुकाबला करती रही, लेकिन एक युवती अकेली उन चारों का मुकाबला भला कैसे कर सकती थी. इसलिए धीरेधीरे वे चारों युवक उस पर अब भारी पड़ते जा रहे थे. तभी उन में से एक युवक बोल पड़ा, ”इस के कारण हमारा शिकार देखो भाग गया. इतने दिन से हम उस के पीछे पड़े थे, उस की एकएक गतिविधि को देख रहे थे, आज हमें मौका मिला तो यह समाज सुधारक न जाने कहां से बीच में टपक पड़ी. चलो, कोई बात नहीं, अब इसी से मजे ले लेते हैं.’’

यह सुन कर सुमित्रा की रूह भी एकबारगी कांप सी उठी थी. वह अब सोचने लगी थी कि उस ने तो एक असहाय युवती को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन अब तो यहां पर दांव उलटा ही पड़ गया. वह अपनी ओर से उन चारों दरिंदों से फिर भी भिड़ रही थी और बीचबीच में वह मदद के लिए चीखपुकार भी रही थी. तभी उस सड़क से अपनी बाइक पर दीपक गुजर रहा था, उस ने जब अपने सामने एक युवती को अकेले 4 युवकों से मुकाबला करते देखा तो वह दंग रह गया. दीपक ने तुरंत अपनी बाइक रोकी और युवकों को ललकारने लगा. युवकों ने जब देखा कि अब मुकाबले में एक और आदमी शामिल हो गया है तो उन में से 2 युवकों ने चाकू निकाल लिए थे.

लेकिन जब दीपक कयामत बन कर उन सड़कछाप शोहदों पर एकाएक कर टूट पड़ा तो वे चारों शोहदे उस के ताइक्वांडो और जूडो कराटे का सामना चाह कर भी नहीं कर सके. दोनों चाकू वाले गुंडे तो दीपक के हाथों में पड़ गए, जिन की उस ने दिल से कुटाई की, लेकिन 2 शोहदे वहां से भागने में कामयाब हो गए. वहां पर ऐसा भी नहीं था कि अन्य लोग नहीं थे. दूर से तमाशा देखने वाले और उस घटना का वीडियो बनाने वाले भी उस भीड़ में शामिल थे, लेकिन उन लोगों ने न तो उस युवती की मदद की और न ही दीपक की सहायता करने के लिए आगे आए.

शुभमित्रा इस युवक के समय पर किए गए इस साहसिक कार्य को देख कर एकदम कायल हो गई थी. वह उस अनजान युवक को धन्यवाद देने के लिए जब उस के पास गई तो वह युवक किसी को फोन कर रहा था. उस के फोन कटते ही वहां पर पुलिस भी आ गई थी, जो उन दोनों शोहदों को पुलिस की गाड़ी में बिठा कर वहां से चली गई थी.

शुभमित्रा यह समझ चुकी थी कि यह युवक अवश्य कोई पुलिस वाला हो सकता है. जब उस ने अपनी नजरें उठा कर युवक की ओर देखा और दोनों की आंखें मिलीं तो पहला खयाल शुभमित्रा के दिल में यही आया था कि काश! ऐसा निडर पति मुझे भी मिल जाता तो पूरी जिंदगी कितनी आसानी से और बेफिक्री से गुजर जाती.

अपने मन की भावनाओं को किसी तरह शुभमित्रा ने काबू किया और उस अनजान व्यक्ति का धन्यवाद करते हुए बोली, ”सर, आज रात यदि आप यहां पर समय से नहीं आते तो ये चारों शोहदे मेरी जान अवश्य ले लेते. पता नहीं मेरी क्या हालत कर डालते. कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रह पाती मैं. आप का मैं किन शब्दों में धन्यवाद करूं, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है सर! क्या मैं जान सकती हूं कि आप किस विभाग में काम करते हैं?’’

”जी, इस में धन्यवाद वाली भला क्या बात है. एक पुलिसकर्मी होने के नाते तो यह मेरा फर्ज बनता भी है. वैसे मुझे यह लग रहा है कि मैं ने आप को कहीं देखा जरूर है. क्या मैं आप का परिचय जान सकता हूं.’’ उस युवक ने कहा.

”जी सर, मेरा नाम शुभमित्रा साहू है, मैं ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल हूं और डीसीपी (ट्रैफिक) में आजकल कंप्यूटर का काम देखती हूं. आप ने मुझे अवश्य देखा होगा, आप कहां पर हैं सर!’’ शुभमित्रा ने पूछा.

”शुभमित्राजी, मैं कमिश्नर औफिस में लेखा विभाग में पोस्टेड हूं. देखिए, आप भी हमारे डिपार्टमेंट से ही हैं, इसलिए यदि आप मुझे सर कह कर न पुकारें तो मुझे अच्छा लगेगा. मेरा नाम दीपक राउत है, आप मुझे यदि दीपक नाम से संबोधित करेंगी तो मुझे अच्छा लगेगा,’’ दीपक ने मुसकराते हुए कहा.

”वैसे आप काफी बहादुर हैं. आप ने उन चारों को ऐसी मार लगाई, जिस से मेरा तो दिल खुश हो गया दीपकजी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक भी पहली नजर में शुभमित्रा का दीवाना सा हो गया था. उस का मन कर रहा था कि वह इस शुभमित्रा जैसी हसीन युवती को जी भर कर देखता रहे और उस के साथ ढेर सारी बातें करता रहे.

तभी शुभमित्रा ने कहा, ”दीपकजी, देखिए अब यहां पर भीड़ काफी अधिक हो चुकी है. लोग तो केवल तमाशबीन बन कर वीडियो बनाते फिरते हैं. किसी ने हम दोनों का ही वीडियो बना लिया तो हम दोनों के लिए यह ठीक नहीं हो सकता. ये तमाशबीन लोग अपने आप कुछ करते नहीं हैं, लेकिन बात का बतंगड़ बनाने में हमेशा आगे रहते हैं.’’

”आप वाकई बहुत समझदार हैं, लेकिन मैं तो आप की बहादुरी और खूबसूरती का पहली नजर में ही कायल हो गया हूं. आप से दोबारा कब मुलाकात होगी? क्या आप का मोबाइल नंबर ले सकता हूं?’’ दीपक ने सीधेसीधे कह दिया था.

”दीपकजी, आप से मिल कर मुझे आज सचमुच बहुत खुशी हो रही है, आप मेरा मोबाइल नंबर नोट कर लीजिए. आप कौल कीजिए, मैं भी आप का मोबाइल नंबर सेव कर लूंगी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक ने तुरंत ही उस मोबाइल नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ से शुभमित्रा के मोबाइल पर घंटी बजने लगी थी. शुभमित्रा ने भी दीपक का नंबर सेव कर लिया. 25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उड़ीसा के जगतपुर जिले के पारादीप की रहने वाली थी. उस के पापा का नाम धुरयदान साहू और मम्मी का नाम सुकीर्ति साहू था. शुभमित्रा अपने परिवार में सब से बड़ी थी. उस के 2 छोटे भाई और एक बहन थी. बचपन से ही शुभमित्रा का सपना पुलिस की नौकरी करने का था, इसलिए वह पढ़ाई के साथसाथ खेलकूद में भी स्कूल और कालेज में सब से आगे रहती थी.

उस के पापा एक किसान थे, इसलिए शुभमित्रा नौकरी कर अपने मम्मीपापा और दोनों छोटे भाइयों को एक सुखद भविष्य देना चाहती थी. सुभमित्रा की कोशिशें रंग लाईं और उस ने इधर बीए में प्रवेश प्रवेश लिया तो दूसरी तरफ उस की नियुक्ति ओडिशा पुलिस में हो गई. यह साल 2018 की बात है.

उस के बाद शुभमित्रा की पोस्टिंग जनवरी 2024 में भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल के रूप में हो गई. शुभमित्रा की उम्र भी तब 24 साल की हो गई थी, इसलिए उस के पेरेंट्स उस से शादी करने के लिए दबाव बनाते रहते थे, लेकिन शुभमित्रा का अपना यह मानना था कि अभी उस की शादी की उम्र भी नहीं है. दूसरा वह अपनी पसंद से ही शादी करना चाहती थी. शुभमित्रा साहू के दिल में दीपक राउत ने एक बौलीवुड हीरो की तरह एंट्री कर के ऐसी छाप छोड़ दी थी, जिसे वह भूल नहीं पा रही थी. एक ही दिन और एक ही पल में वह अपना दिल दीपक को न्यौछावर कर चुकी थी.

इस घटना को 2 दिन हो चुके थे, लेकिन शुभमित्रा सोच रही थी कि 2 दिन हो चुके हैं, दीपक ने अभी तक भी उसे फोन नहीं किया.

उस समय रात के लगभग 10 बजे थे. शुभमित्रा खाना खा कर अपने कमरे में बैठी एक किताब पढ़ रही थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने स्क्रीन देखी तो पता चला कि वह कौल दीपक की ही है. शुभमित्रा के चेहरे पर मुसकान तैर गई. दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई. उस के बाद दीपक ने उसे सीधासीधा कह दिया कि वह उस से दोस्ती कर उसे सदा के लिए अपनाना चाहता है.

शुभमित्रा भी यही चाहती थी. लिहाजा उस ने भी दीपक के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी. इस के बाद तो दोनों के बीच मुलाकातें भी होने लगी थीं. दीपक ने शुभमित्रा को यह भी बता दिया था कि 2018 में उस की शादी अपर्णा से हुई थी, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उस की जुलाई 2024 में मौत हो गई थी. दीपक की इस ईमानदारी पर शुभमित्रा बहुत प्रभावित हुई.

शुभमित्रा अब जल्द से जल्द धूमधाम से दीपक से शादी करना चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ दीपक ने उस से कहा कि अभी हम लोग कोर्ट मैरिज कर लेते हैं, क्योंकि अभी वह अपनी पहली पत्नी के दुख से पूरी तरह से उबर नहीं पाया है. कुछ समय बाद जब सब नारमल हो जाएगा तो धूमधाम से सब के सामने सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह कर लेंगे.

उस के बाद शुभमित्रा और दीपक राउत ने अपने फेमिली वालों, परिचितों से छिप कर 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज कर ली. कोर्ट मैरिज के बाद शुभमित्रा अपने पेरेंट्स के पास ही रह रही थी और दीपक भी अकेले अपने घर में रह रहा था. कभीकभार वह घूमने का प्लान बना कर दूसरे शहर में साथ रह लेते थे. एक कहावत भी है कि आज की मतलब की दुनिया में कौन किसी का होता है, आज तो धोखा वही देता है, जिस पर भरोसा होता है.

उन के आपसी संबंध अब भले ही चाहे दुनिया से दूर थे, पर अब बद से बदतर होते जा रहे थे. दीपक राउत के मन में लालच की बेल पूरी तरह फैल चुकी थी, इसलिए उस ने एक फुलप्रूफ प्लान बना कर शुभमित्रा साहू की हत्या कर उस का शव ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने दीपक से पूछताछ के बाद उस की निशानदेही पर 17 सितंबर, 2025 बुधवार को मजिस्ट्रैट की निगरानी में जेसीबी की मदद से उस जगह की खुदाई कराई, जहां पर शुभमित्रा साहू का शव सीमेंट के एक बैरल में बंद और लगभग 10 फीट नीचे जमीन में दबा हुआ था. जरूरी काररवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस के बाद पुलिस ने आरोपी दीपक राउत की होंडा सिटी कार नंबर ओडी02आर 8494 को भी जब्त कर लिया. दीपक राउत के कुबूलनामे और साक्ष्यों के आधार पर भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में उस के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. साथ ही पुलिस ने शव को छिपाने के लिए आरोपी दीपक रावत के चचेरे भाई विनोद बिहारी भुइयां (38 वर्ष) और जेसीबी चालक शंभूनाथ महंत (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया.

महिला पुलिस कांस्टेबल शुभमित्रा मर्डर केस जब ओडिशा के लोगों के सामने जगजाहिर हुआ तो आरोपी दीपक राउत की मुश्किलें अब और भी बढ़ गई हैं. दीपक की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी के पेरेंट्स ने भी अब पुलिस के समक्ष अपर्णा की हत्या किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है. मृतका अपर्णा प्रियदर्शिनी की छोटी बहन रोजलिन ने मीडिया को बताया है कि शुरुआत में हमें यह लगा था कि हमारी बहन की मौत महज एक दुर्घटना थी. अब दीपक राउत की दूसरी पत्नी शुभमित्रा साहू की हत्या के बाद हमें यह पूरा यकीन है कि दीपक ने मेरी बहन की भी हत्या की होगी और हत्या को दुर्घटना का रूप दे दिया. अपर्णा की मौत की दोबारा जांच की मांग को ले कर ढेंकनाल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.

रोजलिन ने यह आरोप भी लगाया है कि अपने पति दीपक के साथ अपर्णा का वैवाहिक जीवन शुरू से ही समस्याओं, परेशानियों और अथाह दुखों से भरा था. शादी के कुछ महीनों बाद ही दीपक ने अपर्णा को परेशान और प्रताडि़त करना शुरू कर दिया था. इस संबंध में अपर्णा ने पुलिस कमिश्नरेट में औनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने दीपक के खिलाफ कोई भी काररवाई नहीं की.

रोजलिन ने यह राज भी खोला कि दीपक ने उस की बहन का एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था, जोकि बहन की मृत्यु के बाद उसे मिल भी चुका है. अब हमें उस के ऊपर यह शक है कि दीपक ने इंश्योरेंस क्लेम पाने के लिए अपर्णा की हत्या की थी. शुभमित्रा साहू के हत्यारे कांस्टेबल दीपक राउत की पहली शादी अपर्णा प्रियदर्शिनी के साथ 25 अप्रैल, 2018 को हुई थी. दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) थी और ढेंकनाल जिले में तैनात थी.

19 मार्च, 2022 को दीपक राउत ने खुंटुनी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उस की पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी (31 वर्ष) की 2 दिन पहले ट्रक नंबर ओडी02 एस 3486 की चपेट में आने से मौत हो गई थी. कथित दुर्घटना एनएच-55 पर राधा किशोरपुर चौक के पास हुई थी. घटना के बारे में दीपक राउत ने तब पुलिस को बयान दिया था कि घटना के दिन अपर्णा उस (दीपक) के साथ अपनी गाड़ी से अपने गृहनगर लौट रही थी, तब एक जगह गाड़ी को रुकवा कर अपर्णा ने दीपक से कहा कि उसे टायलट जाना है.

जब वह सड़क पार टायलेट में जाने के लिए सड़क पार कर रही थी तो कथित तौर पर रात को 9 से साढ़े 9 बजे के बीच एक ट्रक ने अपर्णा को टक्कर मार दी, जिस से उस के सिर में गंभीर चोटें आ गई थीं. उस के बाद दीपक उसे ले कर अस्पताल गया, जहां पर इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. उस समय खुंटुनी पुलिस ने इस केस की जांच की थी. जांच के दौरान पुलिस ने उक्त पंजीकरण वाले ट्रक का पता लगा लिया और चालक को हिरासत में ले लिया था. लेकिन पुलिस जांच में यह पाया गया कि दुर्घटना वाले दिन वह ट्रक उस इलाके में नहीं था.

उस के बाद दीपक राउत ने दावा किया कि शायद अंधेरा होने के कारण उस ने ट्रक का गलत नंबर नोट कर लिया होगा. वह शायद कोई दूसरे नंबर का वाहन हो सकता है. रिपोर्ट लिखाने वाला एक पुलिसकर्मी था, इसलिए उस की बातों पर यकीन कर के जांच अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस दुर्घटना के लिए एक अज्ञात वाहन ही जिम्मेदार था. उस के बाद कोई अन्य सुराग न मिल पाने के कारण जांच अधिकारी द्वारा अदालत में एक अंतिम सत्य रिपोर्ट (एफटीआर) प्रस्तुत की गई, जिस में यह संकेत दिया गया कि यह घटना वास्तविक थी, लेकिन उस विशेष ट्रक को दोषी ठहराने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे.

अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या फिर शिकायतकर्ता पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत झूठ बोल रहे थे और क्या पुलिस को उस समय अपर्णा प्रियदर्शिनी की मौत में किसी गड़बड़ी का संदेह था. जांच अधिकारी ने तब अदालत में बताया था कि इन सभी सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल पाएंगे. इस मामले में मृतका अपर्णा की बहन रोजलिन ने मीडिया और पुलिस को दिए अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि अपर्णा के पति दीपक राउत ने उन्हें फोन पर बताया था कि खुंटुनी के राधा दामोदरपुर के पास अपर्णा का एक्सीडेंट हुआ था.

पहले तो दीपक राउत ने मृतका अपर्णा के परिजनों को यह बताया था कि अभी हम दोनों दुर्घटनास्थल पर ही हैं. उस के बाद में उन के द्वारा यह बताया गया था कि दीपक अपर्णा को एससीबी मैडिकल कालेज और अस्पताल ले कर गया है. बाद में हमें दीपक राउत का एक और कौल आया, जिस में बताया गया कि अपर्णा को वह कटक के एक निजी अस्पताल ले कर गया है. इस मामले में कटक (ग्रामीण) के एसपी विनीत अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि हम ने अपर्णा प्रियदर्शिनी की हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और इस की जांच के लिए एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को नियुक्त कर दिया है.

भुवनेश्वर पुलिस द्वारा 19 सितंबर, 2025 को बताया गया कि 25 वर्षीय महिला ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की हत्या को रैड फ्लैग घोषित कर दिया गया है. अब यह जांच क्राइम ब्रांच (सीबी) के डीजीपी की निगरानी में होगी. भुवनेश्वर के कमिश्नरेट पुलिस के समन्वित सहयोग के साथ, एजेंसी कैपिटल थाना पुलिस और खुंटुनी पुलिस द्वारा पहले एकत्र किए गए सभी साक्ष्यों और आंकड़ों की जांच करेगी. इस के साथ ही सीएडब्लू (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) और सीडब्लू (साइबर विंग) दोनों ही इकाइयां इस मामले की बारीकी से जांच और छानबीन करेंगी.

ओडिशा पुलिस ने वर्ष 2014 में जांच की रेड फ्लैग श्रेणी शुरू की थी, जिस के तहत मामलों की जांच सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाती है. इस रेड फ्लैग जांच में महिला कांस्टेबल शुभमित्रा की हत्या के साथसाथ 17 मार्च, 2022 को ओडिशा के कटक के आधागढ़ के पास एक सड़क दुर्घटना में आरोपी कांस्टेबल दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की मृत्यु के बीच संभावित संबंध का भी पता लगाया जाएगा, जिस के लिए दीपक राउत की जीवन बीमा पौलिसी से डेढ़ करोड़ रुपए का भुगतान मिला था.

18 सितंबर, 2025 को भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीणा ने आरोपी हत्यारे पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को उस की नौकरी से निलंबित कर दिया. उस के एक रिश्तेदार और एक अन्य सहयोगी को भी शुभमित्रा साहू के शव को ठिकाने लगाने में आरोपी दीपक राउत की मदद करने में गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी बीच मृतका शुभमित्रा के पोस्टमार्टम के नमूने भुवनेश्वर स्थित राज्य फोरैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं, क्योंकि क्योंझर जिला मुख्यालय अस्पताल में सड़ीगली लाशों की विस्तृत और सटीक रिपोर्ट देने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं.

मृतका कांस्टेबल शुभमित्रा साहू का पोस्टमार्टम उस के भाइयों का मौजूदगी में करा लिया गया है. पुलिस इस मामले की तफ्तीश गंभीरता से कर रही थी. Family Crime

 

Love Crime: छलिया आशिक से रहें अलर्ट

Love Crime: 22 वर्षीय तैयबा ने फैसल चौधरी से इसलिए कोर्ट मैरिज कर ली थी, क्योंकि उस ने खुद को कुंवारा बताया था, जबकि हकीकत में वह 2 बच्चों का बाप था. प्यार में छली गई तैयबा के सामने पछतावे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस के बावजूद तैयबा ने छलिया फैसल से जब उस के घर में जगह मांगी तो…

रात के 8 बज गए थे, लेकिन तैयबा अभी तक अपने काम से घर नहीं लौटी थी. उस की अम्मी के पेशानी पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं. वह अपने बड़े बेटे अदनान के कमरे में पहुंची और परेशान होते हुए बोली, ”अदनान, अभी तक तैयबा घर नहीं लौटी है.’’

”अरे!’’ अदनान हैरान होते हुए बोला, ”तैयबा तो 7-साढ़े 7 बजे तक घर आ जाती है, क्या तुम ने उसे फोन नहीं किया?’’

”किया था. मैं ने साढ़े 7 बजे उसे फोन किया था तो कह रही थी थोड़ा लेट हो जाऊंगी, मैं 9 बजे तक आ जाऊंगी, लेकिन अब तो साढ़े 9 बज गए.’’

अदनान ने तैयबा का नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ घंटी बजने के थोड़ी देर बाद ही तैयबा ने फोन उठा लिया. उस ने पूछा, ”कैसे फोन कर रहे हो भाई, सब ठीक तो है?’’

”सब ठीक है यहां. अम्मी तुम्हें ले कर परेशान हैं. तुम कहां पर हो?’’

”मैं अपने काम पर ही हूं भाईजान. मुझे यहां थोड़ा वक्त और लगेगा. आप लोग मेरी चिंता मत करो. खाना खा कर सो जाओ. मेरा खाना अम्मी ढक कर रख देगी. आऊंगी तो गरम कर के खा लूंगी.’’ तैयबा ने कहने के बाद कौल डिसकनेक्ट कर दी.

”तुम बेकार में परेशान हो रही हो अम्मी. तैयबा अपनी ड्यूटी पर ही है. उसे आने में देर हो जाएगी.’’ अदनान ने अम्मी को समझाया.

अदनान के अब्बू अहमद भी घर आ गए थे. तैयबा के अभी तक घर न आने पर उन्होंने लापरवाही से कहा, ”कंपनी में काम निकल आया होगा, तैयबा पहले भी कई बार देर से घर लौटी है. चिंता मत करो, आ जाएगी.’’

रात 11 बजे तक सभी खाना खा कर चारपाई पर आ गए और उन्हें नींद भी आ गई. केवल तैयबा की अम्मी की आंखों से नींद उड़ी हुई थी. तैयबा के लिए वह बेचैन थी. लेकिन नींद तो नींद होती है, रात को कब उसे भी नींद आ गई, मालूम ही नहीं चला, वह अधकच्ची नींद में सोती रही.

अचानक पौने 3 बजे उस की नींद खुल गई. वह घबरा कर बिस्तर पर उठ बैठी. तैयबा अभी भी घर नहीं आई थी. सिरहाने रखा मोबाइल उठा कर तैयबा की अम्मी ने उसे फोन लगाया. घंटी बजी और फोन को तैयबा ने उठा कर कहा, ”हैलो अम्मी! आप अभी तक सोई नहीं हैं क्या?’’

”तू कहां पर है तैयबा?’’ अम्मी ने पूछा.

”मैं यहां एक दोस्त के साथ होटल में चाय पीने आई हूं अम्मी, यह मेरा दोस्त मेरे साथ ही काम करता है. चाय पी कर मैं बस घर के लिए ही निकलूंगी. आप सो जाइए.’’ तैयबा ने बताने के बाद फोन काट दिया. अम्मी को तसल्ली हुई कि बेटी ठीकठाक है और अब जल्दी घर भी आ जाएगी. फोन सिरहाने रख कर उन्होंने आंखें बंद कर लीं तो फिर नींद ने उन्हें अपने आगोश में समेट लिया.

सुबह का उजाला फैला, तब तैयबा की अम्मी की आंखें खुलीं. तैयबा आ गई होगी. यह सोच कर उन्होंने तैयबा के बिस्तर पर नजर दौड़ाई. वह खाली था. अम्मी ने तैयबा को फिर फोन मिलाया, लेकिन तैयबा के फोन के स्विच औफ होने की रिकौर्डिंग सुनाई देने लगी. अम्मी ने कई बार ट्राई किया, किंतु तैयबा का फोन नहीं लगा. घबरा कर अम्मी ने अदनान और पति को जगा दिया. अदनान के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वह बोला, ”अब्बा! मुझे अब तैयबा के लिए ज्यादा चिंता हो रही है. पूरी रात वह घर नहीं आई. आखिर वह कहां रुक गई है. मालूम करना पड़ेगा.’’

अदनान ने दूसरे कपड़े पहने और बोला, ”मैं उस की कंपनी में जा कर पता करता हूं.’’

अदनान स्कूटी ले कर बहन तैयबा का पता लगाने दिलशाद गार्डन चला गया. तैयबा दिलशाद गार्डन में स्थित एक कंपनी में काम करती थी. अदनान ने तैयबा की कंपनी में जा कर मालूम किया तो उसे बताया गया कि तैयबा शाम को ही कंपनी से छुट्टी कर के चली गई थी. अदनान की चिंता बढ़ गई. इस का मतलब तैयबा झूठ बोल रही थी कि कंपनी में ओवरटाइम है, जबकि वह 5 बजे ही कंपनी से छुट्टी कर के निकल गई थी. आखिर वह कहां गई?

अदनान ने तैयबा की कुछ परिचित सहेलियों के यहां जा कर मालूम किया. तैयबा उन से नहीं मिली थी. हर संभावित जगहों पर तलाश करने पर भी जब वह नहीं मिली तो अदनान घर लौट आया और अब्बू को साथ ले कर उत्तरपूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाने में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने चला गया. तैयबा 22 साल की जवान युवती थी. थाना दयालपुर में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली गई. यह सूचना 28 नवंबर को तैयबा के अब्बा अहमद की तरफ से लिखवाई गई थी. उन्हें तैयबा के अपहरण होने का शक था.

दयालपुर थाने के एसएचओ परमवीर दहिया ने तैयबा के लापता होने की घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने यह जानकारी उत्तरपूर्वी डीसीपी आशीष मिश्रा को भी दे दी. इंसपेक्टर परमवीर दहिया डीसीपी के निर्देश पर तैयबा की कंपनी में पहुंच गए और वहां तैयबा के बारे में कंपनी के मालिक से पूछताछ न कर, वहां तैयबा के साथ काम करने वाली एक अन्य युवती को अपने पास बुला कर बड़े प्यार से पूछा, ”तुम तैयबा के साथ काम करती हो, तुम्हारा नाम क्या है?’’

”जी, मेरा नाम रुखसाना है.’’ युवती ने बताया फिर पूछा, ”तैयबा के विषय में क्यों छानबीन कर रहे हैं साहब?’’

”तैयबा कल से घर नहीं लौटी है रुखसाना. उस के अब्बू ने उस की गुमशुदगी थाने में लिखवाई है. क्या तुम्हें लगता है तैयबा का कोई अपहरण कर सकता है?’’

”नहीं साहब,’’ रुखसाना बोली, ”भला उस का अपहरण कोई क्यों करेगा. तैयबा खुद उस के साथ चली गई होगी.’’

”किस के साथ?’’ इंसपेक्टर दहिया ने चौंकते हुए पूछा.

”जिसे वह प्यार करती है. क्या आप ने उस की इंस्टाग्राम पर होटल वाली रील नहीं देखी साहब?’’ कहने के बाद रुखसाना ने अपने मोबाइल में इंस्टाग्राम खोल कर एक रील इंसपेक्टर दहिया के सामने कर दी.

इस रील में तैयबा किसी होटल में एक युवक के साथ बैठी चाय पीती नजर आ रही थी. तैयबा अपने मोबाइल से उस युवक के साथ विभिन्न पोज में रील बना रही थी. युवक का चेहरा इस रील में काफी स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

”इस का नाम तुम्हें मालूम है रुखसाना?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

”फैसल चौधरी है इस का नाम, मुस्तफाबाद में कहीं रहता है. मुझे तैयबा ने यह बात बताई थी.’’

इंसपेक्टर दहिया ने डीसीपी आशीष मिश्रा को यह जानकारी थाने लौट कर दे दी. उन्होंने अपनी देखरेख में थाने के तेजतर्रार इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद की एक टीम बना कर इंसपेक्टर परमवीर दहिया को फैसल चौधरी को ढूंढ निकालने का आदेश दे दिया.

इंसपेक्टर परमवीर दहिया ने इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद को साथ ले कर पहले तैयबा के परिजनों से फैसल चौधरी के विषय में पूछताछ की. उन्होंने तैयबा द्वारा होटल में चाय पीने की वह इंस्टाग्राम वाली रील तैयबा के परिजनों को दिखा कर पूछा, ”क्या इस युवक को आप जानते हैं?’’

”यह तो फैसल चौधरी है.’’ अदनान ने तुरंत कहा, ”मैं ने इसे पहले भी देखा है. यह मुस्तफाबाद में रहता है. इस के पिता आलम चौधरी प्रौपर्टी का काम करते हैं. मैं एक परिचित के साथ इन के औफिस में गया था, परिचित को एक मकान खरीदना था, लेकिन यह फैसल मेरी बहन तैयबा के साथ कैसे?’’

”यह रील देख कर अदनान तुम्हें समझ लेना चाहिए कि तैयबा इस के संपर्क में थी और इस से उस का प्रेम संबंध भी था. यह रील खुद तैयबा ने अपने मोबाइल से बनाई है.’’ इंसपेक्टर दहिया ने गंभीर स्वर में कहा तो अदनान ने सिर झुका लिया और धीरे से बोला, ”मैं इस विषय में नहीं जानता.’’

पुलिस टीम अदनान को साथ ले कर मुस्तफाबाद आलम चौधरी के प्रौपर्टी डीलर वाले औफिस में पहुंच गई. आलम चौधरी अपने औफिस में ही मिल गए. पुलिस को अपने औफिस में देख कर वह चौंकते हुए कुरसी से खड़े हो गए.

”आप फैसल को जानते हैं?’’ इंसपेक्टर राजेश ने पूछा.

”फैसल मेरा बेटा है तो मैं क्या अपने बेटे को नहीं जानंूगा साहब.’’ आलम मुसकराने का प्रयास करते हुए बोले, ”आप उस के विषय में क्यों पूछताछ कर रहे हैं.’’

”वह एक लड़की तैयबा को ले कर आया है. हमें फैसल से मिलवाइए.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कड़क स्वर में कहा.

आलम चौधरी चौंक कर बोले, ”मेरा बेटा फैसल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है जनाब. वह किसी लड़की को क्यों ले कर आएगा? आप लोगों को अवश्य गलतफहमी हुई है.’’

”हमें फैसल से मिलवाओ. उसी के मुंह से हम उस की करतूत आप को सुनवाएंगे. बुलाइए उसे.’’ इंसपेक्टर दहिया शुष्क स्वर में बोले.

आलम चौधरी का घर पास में ही था. वह घर गए और कुछ ही देर में वापस आ गए.

”सर, अभी फैसल घर पर नहीं है…’’

”क्या सुबह वह घर पर था?’’ इंसपेक्टर दहिया ने पूछा.

”मुझे मालूम नहीं. मैं सुबह ही फ्रेश हो कर औफिस में आ जाता हूं. जब मैं घर से निकला था, शायद फैसल सो रहा होगा.’’

”क्या मैं उस की बीवी से पूछताछ कर सकता हूं?’’ इंसपेक्टर दहिया ने आलम चौधरी से पूछा.

”बेशक, आप आइए मेरे साथ.’’ आलम ने कहा.

इंसपेक्टर दहिया अकेले आलम चौधरी के साथ उस के घर की तरफ चले आए. बाकी दोनों इंसपेक्टर और पुलिस कांस्टेबल वहीं औफिस में बैठ गए.

आलम चौधरी ने घर आ कर इंसपेक्टर दहिया के सामने अपनी बहू को हाजिर कर दिया.

इंसपेक्टर दहिया ने सीधा सवाल किया, ”तुम्हारा पति फैसल कहां पर है?’’

”ज…जी, वह कल से ही घर नहीं आए हैं. शाम को कह कर गए थे कि किसी जरूरी काम से जा रहा हूं. क्या काम है और कहां पर जा रहे हैं, यह मैं कभी नहीं पूछती हूं उन से.’’ फैसल की बीवी ने जवाब में कहा. फिर पूछा, ”आप उन के बारे में क्यों पूछताछ कर रहे हैं?’’

”फैसल एक लड़की को ले कर गायब हुआ है. लड़की का नाम तैयबा है. यदि फैसल घर आए तो तुम हमें फोन करोगी. मैं तुम्हें फोन नंबर दे कर जा रहा हूं.’’

इंसपेक्टर दहिया ने अपना मोबाइल नंबर एक कागज पर लिख पर फैसल की बीवी को थमाया तो उन्होंने महसूस किया कि फैसल की बीवी धीरेधीरे सिसक रही थी. शायद पति की करतूत सुनने के बाद वह नर्वस हो गई थी. इंसपेक्टर दहिया आलम चौधरी के साथ औफिस में लौट आए. आलम चौधरी से फैसल के दोस्तों और रिश्तेदारों के पते नोट कर के पुलिस टीम ने उसी वक्त से इन पतों पर दबिश देनी शुरू कर दी. फैसल चौधरी इन पतों पर नहीं था.

पुलिस टीम ने फैसल के संभावित उठनेबैठने की जगहों पर भी छापेमारी की, लेकिन फैसल कहीं भी नहीं मिला. निराश हो कर पुलिस टीम वापस हो गई. पुलिस की छापेमारी जारी थी, तभी उन्हें कड़कडड़ूमा कोर्ट से मैसेज मिला कि फैसल चौधरी ने 25 नवंबर, 2025 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. पुलिस टीम ने कोर्ट में जा कर फैसल चौधरी को अपनी कस्टडी में ले लिया. उस का 2 दिन का रिमांड पुलिस ने कोर्ट से प्राप्त कर लिया. फैसल चौधरी को अपने साथ ले कर पुलिस दयालपुर थाने में आ गई.

इंसपेक्टर दहिया, इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद ने डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में फैसल चौधरी से तैयबा के संबंध में पूछताछ शुरू की तो फैसल ने चौंकाने और होश उड़ाने वाला राज खोलते हुए कहा, ”तैयबा की मैं ने गोली मार कर हत्या कर दी है साहब. वह अब इस दुनिया में नहीं है.’’

फैसल चौधरी के मुंह से यह सच्चाई सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. इंसपेक्टर दहिया ने फैसल को घूरते हुए पूछा, ”तुम ने यदि तैयबा की गोली मार कर हत्या कर दी है तो उस की लाश कहां पर है?’’

”तैयबा की लाश बागपत के पास सरूरपुर कलां के जंगल में मैं ने फेंक दी थी साहब.’’

”चलो, हमें तैयबा की लाश बरामद करवाओ.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कहा.

”ठीक है साहब,’’ फैसल चौधरी ने कहा.

पुलिस टीम फैसल चौधरी को वैन में बिठा कर बागपत पहुंची. सरूरपुर कलां के जंगल में तैयबा की लाश फैसल चौधरी ने जहां फेंकी थी, वह अभी भी वहीं पड़ी हुई थी, लेकिन लाश 3 दिन में काफी खराब हालत में हो गई थी. तैयबा की कनपटी पर गोली का सुराख था, जहां से खून बह कर काला पड़ चुका था. इंसपेक्टर दहिया ने बागपत पुलिस थाने से संपर्क कर के वहां से पुलिस और फोरैंसिक टीम बुलवा कर तैयबा की लाश की जांच करवाई. फिर कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को बागपत पुलिस से अपने अंडर में ले लिया.

तैयबा की लाश ले कर दयालपुर थाने की पुलिस टीम थाने में लौट आई. तैयबा की फैसल चौधरी ने हत्या कर दी है, यह जानकारी तैयबा के फेमिली वालों को दे दी गई. थोड़ी ही देर में तैयबा के फेमिली वाले थाना दयालपुर आ गए. तैयबा की अम्मी, अब्बू अहमद और भाई अदनान का रोरो कर बुरा हाल था. उन के सामान्य होने पर डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में एक बार फिर फैसल चौधरी से पूछताछ की गई. उस की तैयबा से क्या दुश्मनी थी और उस ने तैयबा की हत्या क्यों की? यह पूछे जाने पर फैसल ने बताया, ”साहब, तैयबा मेरी दूसरी पत्नी थी.’’

इस जानकारी पर तैयबा के फेमिली हैरान रह गए. उन्हें यह विश्वास ही नहीं हुआ कि 2 बच्चों के बाप फैसल से तैयबा ने शादी कर ली थी.

”यह झूठ बोल रहा है साहब. मेरी बहन तैयबा इतनी नादान नहीं थी कि वह 2 बच्चों के पिता को अपना शौहर बनाएगी.’’ अदनान ने गुस्से में कहा.

”मेरे पास कोर्ट का सार्टिफिकेट है साहब.’’

उस ने पुलिस के सामने अपने अब्बा को फोन कर कहा कि उस ने तैयबा नाम की लड़की से दूसरी शादी कर ली थी और कोर्ट द्वारा जारी मैरिज सर्टिफिकेट अलमारी के लौकर में रखा है. वह आप थाना दयालपुर में ले कर आ जाएं. यह सुन कर आलम चौधरी सकते में आ गए. फैसल की पहली बीवी ने सिर पीट लिया.

आलम चौधरी आधे घंटे में साकेत कोर्ट द्वारा तैयबा और फैसल की कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट ले कर थाने में आ गए. डीसीपी मिश्रा ने सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच करने के बाद फैसल से पूछा, ”यदि तुम ने तैयबा से छिप कर शादी कर ली थी तो तुम ने उस की हत्या क्यों कर दी?’’

”साहब, मेरी मुलाकात तैयबा से क्लब में हुई थी. तैयबा पहले वहीं काम करती थी. तैयबा खूबसूरत नवयौवना थी. मैं उस की खूबसूरती पर मर मिटा. मैं ने रोज क्लब में जाना शुरू किया और तैयबा से जानपहचान बनाने की कोशिश करने लगा.

”तैयबा थोड़े ही दिनों में मेरी तरफ आकर्षित हो गई. मेरी उस की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. तैयबा को मैं ने बताया था कि मैं कुंवारा हूं. मैं तैयबा पर खूब पैसा खर्च करने लगा. तैयबा मुझे दिल से चाहने लगी. उस ने मेरे साथ शादी का प्रस्ताव रखा तो मैं ने उस के साथ अप्रैल, 2025 में साकेत कोर्ट में शादी कर ली. मैं ने तैयबा से कहा कि यह शादी मेरे परिवार से छिपा कर की गई है, इसलिए मैं उसे तुरंत घर नहीं ले जा सकता. घर वालों को धीरेधीरे मैं समझा लूंगा तो तुम्हें वहां बहू का दरजा दिलवा दूंगा.

”मैं तैयबा से बाहर होटलों में मिलता रहा. हम अपनी हसरतें इन होटलों में पूरी करते रहे. धीरेधीरे समय गुजरने लगा तो तैयबा मुझ पर घर ले चलने का दबाब बनाने लगी. मैं उसे बहाने बना कर टालता रहा. तैयबा को घर ले जाना नहीं चाहता था मैं, क्योंकि घर में मेरी बीवी और 2 बच्चे थे.’’

फैसल कुछ देर के लिए रुका फिर बताने लगा, ”तैयबा 10-12 दिन से ज्यादा जिद करने लगी थी कि मैं उसे घर ले चलूं. मैं परेशान हो गया तो मैं ने तैयबा से पीछा छुड़ाने का उपाय तलाशना शुरू कर दिया. बहुत सोचने के बाद मैं ने निर्णय लिया कि मैं तैयबा की हत्या कर के उस से पिंड छुड़ा लूं.

”मैं ने योजना बना कर एक देशी रिवौल्वर खरीदा, फिर 22 नवंबर को मैं ने अपने एक दोस्त से आई20 कार मांग ली और शाम से पहले तैयबा की कंपनी के सामने दिलशाद गार्डन पहुंच गया. तैयबा को मैं ने फोन कर के बता दिया कि मैं कार लाया हूं, आज हम सैरसपाटा करेंगे. तुम घर में कोई बहाना बना डालो.

”तैयबा शाम को कंपनी से निकल कर मुझ से मिली. उस ने घर में कह दिया था कि आज कंपनी में काम ज्यादा है, देर से घर आएगी. मैं तैयबा को ले कर फिल्म देखने एक थिएटर में गया. मैं ने उस के साथ रात का शो देखा. फिर इधरउधर घूमने के बाद मैं तैयबा को एक होटल में ले गया. वहां हम ने चाय पी. तैयबा बहुत खुश थी. उस की अम्मी का होटल में फोन आया तो तैयबा ने कह दिया वह होटल में चाय पी रही है, जल्दी घर लौटेगी.

”चाय पी लेने के बाद मैं तैयबा को कार में बिठा कर बागपत की तरफ ले गया. रात काफी निकल चुकी थी. सरूरपुर कलां के पास सन्नाटा मिला तो मैं ने पास में बैठी तैयबा के सिर में गोली मार दी. वह मर गई तो मैं ने उस की लाश जंगल में फेंक दी और घर लौट आया. मुझे तैयबा की हत्या करने का बहुत अफसोस है साहब.’’

पुलिस ने फैसल चौधरी से रिवौल्वर और आई20 कार बरामद कर ली. कार की सीट धो कर खून साफ कर दिया गया था, किंतु फोरैंसिक टीम ने कार से तैयबा के खून के नमूने उठा लिए. पुलिस ने फैसल चौधरी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) 3, 5 लगाई गई और उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

तैयबा की लाश का पोस्टमार्टम करवा कर लाश उस के फेमिली वालों को सौंप दी गई. उस के परिजन चाहते थे उन की बेटी को धोखे में रख कर उस से शादी करने और उस की हत्या करने वाले फैसल चौधरी को फांसी की सजा मिले. Love Crime

 

 

Bihar News: मोहब्बत में जाति बंधन क्यों

लेखक – शंभु शरण सत्यार्थी

Bihar News: बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई करते समय अलगअलग जाति के राहुल मंडल और तनुप्रिया झा न सिर्फ एकदूसरे को दिल दे चुके थे, बल्कि कोर्ट मैरिज भी कर ली. तनुप्रिया के फेमिली वालों को यह बात इतनी नागवार लगी कि…

बिहार के सुपौल जिले का तुलापट्टी गांव, जहां खेतों की हरियाली और कोसी नदी की शांति जीवन को एक सादगी भरा रंग देती है, एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना, जिस ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि भारतीय समाज में गहरे जड़ जमाए जातिगत भेदभाव की क्रूर सच्चाई को भी उजागर किया.

यह कहानी राहुल कुमार मंडल और तनु प्रिया की प्रेम कहानी है. एक ऐसी कहानी, जो प्रेम की पवित्रता और समाज की रूढिय़ों के बीच टकराव की मार्मिक गाथा है. यह न केवल एक हत्याकांड की सच्चाई को बयान करती है, बल्कि उन सामाजिक पूर्वाग्रहों पर भी सवाल उठाती है, जो आज भी प्रेम और इंसानियत को कुचल देते हैं. इस कहानी को जातिगत भेदभाव के व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक समाज की इस बीमारी को गहराई से समझ सकें.

तुलापट्टी गांव की संकरी गलियों में गणेश मंडल का घर मेहनत और सादगी की मिसाल था. गणेश एक छोटेमोटे किसान, अपनी छोटी सी जमीन पर खेती कर के परिवार का गुजारा करते थे. उन की पत्नी सुशीला घर की धुरी थीं, जिन का एकमात्र सपना अपने इकलौते बेटे राहुल कुमार मंडल को पढ़ालिखा कर बड़ा आदमी बनाना था. राहुल, जो अतिपिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से था, बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल था. गांव के स्कूल में उस की मेहनत की चर्चा हर जुबान पर थी. शिक्षक अकसर कहते कि राहुल इस गांव का गौरव बनेगा.

राहुल ने अपनी मेहनत से दरभंगा मैडिकल कालेज  में बीएससी नर्सिंग में दाखिला लिया. सेकेंड सेमेस्टर में पढ़ते हुए उस का सपना था कि वह अपने गांव में एक छोटा सा अस्पताल खोले, जहां गरीबों का मुफ्त इलाज हो. कालेज में उस की मुलाकात तनु प्रिया से हुई. तनु प्रिया सहरसा के एक रूढि़वादी ब्राह्मïण परिवार से थी और बीएससी नर्सिंग के फस्र्ट सेमेस्टर की छात्रा थी. उस की मुसकान और सादगी ने राहुल का दिल जीत लिया. तनु का परिवार सामाजिक रुतबे और जातिगत श्रेष्ठता में विश्वास रखता था, लेकिन तनु ने अपनी पढ़ाई और सपनों के लिए घर की रूढिय़ों को चुनौती दी थी.

पहली मुलाकात कालेज की लाइब्रेरी में हुई. राहुल किताबों में खोया हुआ था, जब तनु ने उस से एक किताब मांगी.

”यह फार्माकोलौजी की किताब आप के पास है?’’ तनु की आवाज में मासूमियत थी. राहुल ने मुसकराते हुए किताब दी और यहीं से उन की दोस्ती की शुरुआत हुई. कालेज की कैंटीन में चाय की चुस्कियां, लाइब्रेरी में किताबों के बीच बातें और कालेज के मैदान में सैर, इन सब ने उन की दोस्ती को प्यार में बदल दिया. राहुल की सादगी और तनु की हंसी ने उन के रिश्ते को एक अनमोल बंधन में बांध दिया.

राहुल और तनु को पता था कि उन का प्यार समाज की जातिगत दीवारों को तोडऩे की चुनौती है. भारत में जाति व्यवस्था सदियों से सामाजिक संरचना को नियंत्रित करती आई है, जो आर्थिक, सामाजिक, और राजनीतिक अवसरों को प्रभावित करती है. तनु का परिवार ब्राह्मण था और उस के पापा प्रेमशंकर झा, सहरसा में एक रसूखदार व्यक्ति थे. उन के लिए बेटी की शादी अपनी ही जाति के अच्छे परिवार के लड़के से करना सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल था. दूसरी ओर, राहुल का परिवार साधारण और पिछड़ी जाति का था.

तनु ने हिम्मत जुटा कर अपने फेमिली वालों को राहुल के बारे में बताया. उस ने कहा, ”पापा, राहुल मेहनती और अच्छा इंसान है. हम एकदूसरे से प्यार भी करते हैं.’’

लेकिन प्रेम शंकर ने गुस्से में जवाब दिया, ”तूने हमारी इज्जत मिट्टी में मिला दी. उस नीची जाति के लड़के से शादी का खयाल तू मन से निकाल दे!’’

कमरे में ही मौजूद तनु की मम्मी गुंजन कुमारी ने भी उसे डराया, ”तू हमारे खानदान की इज्जत का कुछ तो खयाल कर.’’

इतना ही नहीं, तनु के भाई अवनीश वत्स और बहन प्रीति कुमारी ने भी उस का साथ नहीं दिया, लेकिन तनु अपने प्यार पर अडिग थी. उस ने राहुल से कहा, ”मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती राहुल, चाहे दुनिया मेरे खिलाफ हो जाए.’’

राहुल ने अपने परिवार को इस रिश्ते के बारे में बताया. गणेश मंडल ने बेटे की खुशी को देखते हुए उस का समर्थन किया. उस की मम्मी सुशीला ने तनु से फोन पर बात की और कहा, ”बेटी, तुम मेरे बेटे की पसंद हो तो मेरी भी बेटी हो.’’

दोनों ने गुपचुप तरीके से कोर्ट मैरिज करने का फैसला किया. 5 जुलाई, 2025 को दरभंगा के एक मंदिर में राहुल और तनु प्रिया ने सात फेरे लिए और कोर्ट में शादी रजिस्टर कराई. शादी के बाद दोनों कालेज के हौस्टल में रहने लगे. राहुल ने तनु को अपने गांव तुलापट्टी ले जाने का वादा किया. तनु के परिवार में उस के द्वारा राहुल से शादी करने की खबर आग की तरह फैल गई. पापा प्रेमशंकर झा के लिए यह शादी उन की इज्जत पर धब्बा थी. प्रेमशंकर ने अपने बेटे अवनीश, पत्नी गुंजन, बेटी प्रीति और मां अरुण देवी के साथ मिल कर राहुल को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली.

तनु को कई बार धमकी भरे फोन आए. अवनीश ने उसे फोन पर कहा, ”घर वापस आ जा, नहीं तो उस लड़के की लाश तेरे सामने होगी.’’

तनु ने डरते हुए पति राहुल को बताया, ”राहुल, मुझे लगता है कि मेरे फेमिली वाले कुछ गलत करने की सोच रहे हैं.’’

इस के बाद तनु ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिस में उस ने अपने फेमिली वालों की धमकियों का जिक्र किया. लेकिन पुलिस ने इसे पारिवारिक मामला कह कर टाल दिया. तनु और राहुल ने हिम्मत नहीं हारी. राहुल ने तनु से कहा, ”हमारा प्यार इन दीवारों को तोड़ देगा.’’

5 अगस्त, 2025 की रात दरभंगा मैडिकल कालेज के हौस्टल गेट पर सन्नाटा था. रात के 9 बजे राहुल अपनी बाइक लेने गया था. तनु अपने कमरे में थी और राहुल से फोन पर बात कर रही थी. दोनों अगले दिन तुलापट्टी जाने की योजना बना रहे थे. राहुल ने हंसते हुए कहा, ”तनु तुम्हें मालूम है कि मम्मी तुम्हारे स्वागत का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं, वह तुम्हारे लिए खीर बनाएंगी.’’

तनु ने जवाब दिया, ”बस तुम सुरक्षित आ जाओ, बाकी बातें हम बाद में करेंगे.’’

उसी समय अचानक एक नकाबपोश शख्स, जिस ने मास्क, रेनकोट, और दस्ताने पहने थे, राहुल के पास पहुंचा. उस ने पूछा, ”यह बाइक किस की है?’’

राहुल ने जवाब दिया, ”मेरी है.’’

इस से पहले कि राहुल कुछ समझ पाता, नकाबपोश ने देसी कट्टे से उस के सीने में गोली मार दी. गोली की आवाज सुन कर तनु का दिल धक से रह गया. वह दौड़ती हुई गेट की ओर भागी. वहां उस ने देखा कि राहुल खून से लथपथ जमीन पर गिरा है. तनु ने उसे गोद में लिया और चीखी, ”राहुल, जागो!’’ लेकिन राहुल की सांसें थम चुकी थीं. तनु ने देखा कि नकाबपोश कोई और नहीं, उस के पापा प्रेमशंकर झा थे. वह चिल्लाई, ”पापा, आप ने यह क्या किया?’’ प्रेमशंकर भागने की कोशिश में था, लेकिन छात्रों और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया और पिटाई कर दी.

इसी दौरान किसी ने पुलिस को फोन द्वारा सूचना दे दी. पुलिस ने प्रेम शंकर को हिरासत में लिया. तनु ने बताया कि उस के पापा, भाई, मम्मी, बहन, और दादी इस साजिश में शामिल थे. उस ने कहा, ”मेरे परिवार को मेरी अंतरजातीय शादी मंजूर नहीं थी. मैं ने पहले थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की.’’ सीसीटीवी फुटेज और फोरैंसिक साक्ष्यों ने प्रेम शंकर की संलिप्तता की पुष्टि की. राहुल और तनु की कहानी इस बात का सबूत है कि जातिगत मानसिकता आज भी समाज को बांट रही है.

राहुल का शव उस के गांव तुलापट्टी पहुंचा तो गांव मातम में डूब गया. सुशीला बारबार बेहोश हो रही थीं. गणेश ने कहा, ”मेरा बेटा बस अपने सपनों को जीना चाहता था.’’

तनु ने माफी मांगी, लेकिन सुशीला ने उसे गले लगा कर कहा, ”गलती तुम्हारी नहीं बेटा, समाज की है.’’ सोशल मीडिया पर JusticeForRahul ट्रेंड करने लगा. लोग पुलिस की लापरवाही और जातिगत हिंसा पर सवाल उठा रहे थे. तनु की गवाही ने सभी को झकझोर दिया. उस ने कहा, ”मेरे परिवार ने मेरे प्यार को अपराध माना.’’ भारत का संविधान जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को प्रतिबंधित करता है, लेकिन सामाजिक स्तर पर यह प्रथा आज भी जारी है. तनु ने फैसला किया कि वह राहुल के सपने को पूरा करेगी और तुलापट्टी में ‘राहुल स्मृति अस्पताल’ खोलेगी.

राहुल और तनु की कहानी जातिगत भेदभाव की क्रूरता को उजागर करती है. यह समाज से सवाल पूछती है कि क्या प्रेम अपराध है? क्या इज्जत के नाम पर हिंसा जायज है ? हमें शिक्षा, जागरूकता और सख्त कानूनी काररवाई के जरिए जातिगत भेदभाव को खत्म करना होगा, ताकि कोई और राहुल व तनु इस दर्द से न गुजरें. Bihar News

 

 

Love Story Short Hindi : कोर्ट मैरिज से नाराज पिता ने बेटी और दामाद को मारी गोली

Love Story Short Hindi : सोनाली सिंह और अजय यादव एकदूसरे से न केवल प्यार करते थे, बल्कि कोर्ट मैरिज भी कर चुके थे. लेकिन सोनाली के पिता राजेश सिंह और घर वाले नहीं चाहते थे कि ठाकुर खानदान की बेटी यादव परिवार की बहू बने. इसलिए उन्होंने सोनाली और अजय को अलग करने के लिए…

22 फरवरी की सुबह 6 बजे रामपुर गांव के कुछ लोग मार्निंग वाक पर निकले तो उन्होंने पानी की टंकी के पास लिंक मार्ग से 50 मीटर दूर खेत में एक युवक को बुरी तरह से जख्मी हालत में पड़े देखा. युवक की जान बचाने के लिए उन में से किसी ने थाना खानपुर पुलिस को सूचना दे दी. सूचना प्राप्त होते ही खानपुर थानाप्रभारी विश्वनाथ यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी सूचित कर दिया था. विश्वनाथ यादव जिस समय वहां पहुंचे, उस समय ग्रामीणों की भीड़ जुटी थी. भीड़ को परे हटाते हुए वह खेत में पहुंचे, जहां युवक जख्मी हालत में पड़ा था.

युवक की उम्र 24 साल के आसपास थी. उस के सिर में गोली मारी गई थी, जो आरपार हो गई थी. उस के एक हाथ में पिस्टल थी तथा दूसरी पिस्टल उस के पैर के पास पड़ी थी. जामातलाशी में उस के पास से 2 मोबाइल फोन, आधार कार्ड तथा पुलिस विभाग का परिचय पत्र मिला, जिस में उस का नामपता दर्ज था. परिचय पत्र तथा आधार कार्ड से पता चला कि युवक का नाम अजय कुमार यादव है तथा वह बभरौली गांव का रहने वाला है. तुरंत उस के घर वालों को सूचना दे दी गई. इंसपेक्टर विश्वनाथ यादव अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि एसपी डा. ओमप्रकाश सिंह, एएसपी गोपीनाथ सोनी तथा डीएसपी राजीव द्विवेदी आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा युवक के पास से बरामद सामान का अवलोकन किया. देखने से ऐसा लग रहा था कि युवक ने आत्महत्या का प्रयास किया था. अब तक अजय के पिता रामऔतार यादव भी घटनास्थल आ गए थे. वह आत्महत्या की बात से सहमत नहीं थे. चूंकि अजय यादव मरणासन्न स्थिति में था, अत: पुलिस अधिकारियों ने उसे इलाज हेतु तत्काल सीएचसी (सैदपुर) भिजवाया लेकिन वहां के डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर रैफर कर दिया. इलाज के दौरान अजय यादव की मौत हो गई.

चूंकि अजय यादव सिपाही था, अत: उस की मौत को एसपी डा. ओमप्रकाश सिंह ने गंभीरता से लिया. उन्होंने जांच के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया, जिस में क्राइम ब्रांच, सर्विलांस टीम तथा स्वाट टीम को शामिल किया गया. इस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर बरामद सामान को कब्जे में लिया. सर्विलांस सेल प्रभारी दिनेश यादव ने अजय के पास से बरामद दोनों फोन की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि 22 फरवरी की रात 3 बजे एक फोन से अजय के फोन पर एक वाट्सऐप मैसेज भेजा गया था, जिस में लिखा था, ‘तत्काल मिलने आओ, नहीं तो हम मर जाएंगे.’

जिस मोबाइल फोन से मैसेज भेजा गया था, उस फोन की जानकारी की गई तो पता चला कि वह मोबाइल फोन इचवल गांव निवासी राजेश सिंह की बेटी सोनाली सिंह के नाम दर्ज था. जबकि फोन मृतक अजय की जेब से बरामद हुआ था. अजय और सोनाली का क्या रिश्ता है? उस ने 3 बजे रात को अजय को मैसेज क्यों भेजा? जानने के लिए पुलिस टीम सोनाली सिंह के गांव इचवल पहुंची और उस के पिता राजेश सिंह से पूछताछ की. राजेश सिंह ने बताया कि उस की बेटी सानिया उर्फ सोनाली सिंह आज सुबह से गायब है. हम ने सैदपुर कैफे से उस की औनलाइन एफआईआर भी कराई है. राजेश सिंह ने एफआईआर की कौपी भी दिखाई.

राजेश सिंह की बात सुन कर पुलिस टीम का माथा ठनका. राजेश सिंह को गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करानी थी, तो थाना खानपुर में करानी चाहिए थी. आनलाइन रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई? दाल में जरूर कुछ काला था. यह औनर किलिंग का मामला हो सकता था. संभव था अजय और सोनाली सिंह प्रेमीप्रेमिका हों और इज्जत बचाने के लिए राजेश सिंह ने अपनी बेटी की हत्या कर दी हो. ऐसे तमाम प्रश्न टीम के सदस्यों के दिमाग में आए तो उन्होंने शक के आधार पर राजेश सिंह के घर पर पुलिस तैनात कर दी. साथ ही पुलिस सानिया उर्फ सोनाली सिंह की भी खोज में जुट गई. अजय का मोबाइल फोन खंगालने पर उस का और सोनाली सिंह का विवाह प्रमाण पत्र मिला, जिस में दोनों की फोटो लगी थी.

प्रमाण पत्र के अनुसार दोनों 5 नवंबर, 2018 को कोर्टमैरिज कर चुके थे. इस प्रमाण पत्र को देखने के बाद पुलिस टीम का शक और भी गहरा गया. पुलिस टीम ने सोनाली सिंह के पिता राजेश सिंह व परिवार के 4 अन्य सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. 23 फरवरी, 2021 की सुबह पुलिस टीम को इचवल गांव में राजेश सिंह के खेत में एक युवती की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. पुलिस टीम तथा अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और लाश का निरीक्षण किया. मृतका राजेश सिंह की 25 वर्षीय बेटी सानिया उर्फ सोनाली सिंह थी. उस के सिर में गोली मारी गई थी. चेहरे को भी कुचला गया था. निरीक्षण के बाद पुलिस ने सोनाली सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल गाजीपुर भेज दिया.

शव के पास से पिस्टल या तमंचा बरामद नहीं हुआ, लेकिन एक जोड़ी मर्दाना चप्पल तथा टूटी हुई चूडि़यां जरूर मिलीं. चप्पलों की पहचान मृतक सिपाही अजय के घर वालों ने की. उन्होंने पुलिस को बताया कि चप्पलें अजय की थीं. पुलिस टीम ने हिरासत में लिए गए राजेश सिंह से बेटी सोनाली सिंह की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब उस से कड़ाई से पूछताछ की गई तो वह टूट गया और उस ने सोनाली सिंह तथा उस के प्रेमी अजय यादव की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. यही नहीं, उस ने हत्या में इस्तेमाल अजय यादव की बाइक यूपी81 एसी 5834 भी बरामद करा दी.

राजेश सिंह ने बताया कि उस की बेटी सानिया सिपाही अजय यादव से प्यार करती थी और दोनों ने कोर्ट में शादी भी कर ली थी. तब अपनी इज्जत बचाने के लिए उस ने दोनों को मौत की नींद सुलाने की योजना बनाई. इस योजना में उस ने अपने पिता अवधराज सिंह, बेटे दीपक सिंह, भतीजे अंकित सिंह तथा पत्नी नीलम सिंह को शामिल किया. इस के बाद पहले सानिया की हत्या की फिर अजय की. उस के बाद दोनों के शव अलगअलग जगहों पर डाल दिए. पुलिस अजय की हत्या को आत्महत्या समझे, इसलिए उस के एक हाथ में पिस्टल थमा दी तथा बेटी का मोबाइल फोन अजय की जेब में डाल दिया, ताकि लगे कि अजय ने पहले सोनाली सिंह की गोली मार कर हत्या की फिर स्वयं गोली मार कर आत्महत्या कर ली.

बेटी के शव के पास अजय की चप्पलें छोड़ना, सोचीसमझी साजिश का ही हिस्सा था. राजेश के बाद अन्य आरोपियों ने भी जुर्म कबूल कर लिया. थानाप्रभारी विश्वनाथ यादव ने डबल मर्डर का परदाफाश करने तथा आरोपियों को गिरफ्तार करने की जानकारी एसपी डा. ओमप्रकाश सिंह को दी तो उन्होंने पुलिस लाइन स्थिति सभागार में प्रैसवार्ता की और आरोपियों को मीडिया के समक्ष पेश कर डबल मर्डर का खुलासा कर दिया. चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थानाप्रभारी विश्वनाथ यादव ने मृतक के पिता रामऔतार यादव की तहरीर पर धारा 302 आईपीसी के तहत राजेश सिंह, अवधराज सिंह, दीपक सिंह, अंकित सिंह तथा नीलम सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा सभी को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई, उस में दोनों की हत्याओं की वजह मोहब्बत थी.

गाजीपुर जिले के खानपुर थाना अंतर्गत एक गांव है इचवल कलां. इसी गांव में ठाकुर राजेश सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी नीलम सिंह के अलावा बेटा दीपक सिंह तथा बेटी सानिया उर्फ सोनाली सिंह थी. राजेश सिंह के पिता अवधराज सिंह भी उन के साथ रहते थे. पितापुत्र दबंग थे. गांव में उन की तूती बोलती थी. उन के पास उपजाऊ जमीन थी, जिस में अच्छी पैदावार होती थी. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. राजेश सिंह की बेटी सोनाली उर्फ सानिया सुंदर, हंसमुख व मिलनसार थी. पढ़ाई में भी तेज थी. वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय डिग्री कालेज सैदपुर से बीए की डिग्री हासिल कर चुकी थी और बीएड की तैयारी कर रही थी.

दरअसल, सानिया टीचर बन कर अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी. इसलिए वह कड़ी मेहनत कर रही थी. सानिया उर्फ सोनाली के आकर्षण में गांव के कई युवक बंधे थे. लेकिन अजय कुमार यादव कुछ ज्यादा ही आकर्षित था. सानिया भी उसे भाव देती थी. सानिया और अजय की पहली मुलाकात परिवार के एक शादी समारोह में हुई थी. पहली ही मुलाकात में दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए थे. इस के बाद जैसेजैसे उन की मुलाकातें बढ़ती गईं, वैसेवैसे उन का प्यार बढ़ता गया. अजय कुमार यादव के पिता रामऔतार यादव सानिया के पड़ोस के गांव बभनौली में रहते थे. वह सीआरपीएफ में कार्यरत थे. लेकिन अब रिटायर हो गए थे और गांव में रहते थे. उन की 5 संतानों में 4 बेटियां व एक बेटा था अजय कुमार.

बेटियों की वह शादी कर चुके थे और बेटा अजय अभी कुंवारा था. रामऔतार यादव, अजय को पुलिस में भरती कराना चाहते थे, सो वह उस की सेहत का खास खयाल रखते थे. अजय बीए पास कर चुका था और पुलिस भरती की तैयारी कर रहा था. उस ने पुलिस की परीक्षा भी दी. एक दिन अजय ने सानिया के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो वह गहरी सोच में डूब गई. कुछ देर बाद वह बोली, ‘‘अजय, मुझे तुम्हारा शादी का प्रस्ताव तो मंजूर है, लेकिन मुझे डर है कि हमारे घर वाले शादी को कभी राजी नही होंगे.’’

‘‘क्यों राजी नही होंगे?’’ अजय ने पूछा.

‘‘क्योंकि मैं ठाकुर हूं और तुम यादव. मेरे पिता कभी नहीं चाहेंगे कि ठाकुर की बेटी यादव परिवार में दुलहन बन कर जाए. मूंछ की लड़ाई में वह कुछ भी अनर्थ कर सकते हैं.’’

‘‘घर वाले राजी नहीं होंगे, फिर तो एक ही उपाय है कि हम दोनों कोर्ट में शादी कर लें.’’

‘‘हां, यह हो सकता है.’’ सानिया ने सहमति जताई.

इस के बाद 5 नवंबर, 2018 को सानिया उर्फ सोनाली और अजय कुमार ने गाजीपुर कोर्ट में कोर्टमैरिज कर के विवाह प्रमाण पत्र हासिल कर लिया. कोर्ट मैरिज करने की जानकारी सानिया के घर वालों को नहीं हुई, लेकिन अजय के घर वालों को पता था. उन्होंने सानिया को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया. दिसंबर, 2018 में अजय का चयन सिपाही के पद पर पुलिस विभाग में हो गया. ट्रेनिंग के बाद उस की पोस्टिंग अमेठी जिले के गौरीगंज थाने में हुई. अजय और सानिया की मुलाकातें चोरीछिपे होती रहती थीं. मोबाइल फोन पर भी उन की बातें होती रहती थीं. कोर्ट मैरिज के बाद उन का शारीरिक मिलन भी होने लगा था. इस तरह समय बीतता रहा.

जनवरी, 2021 के पहले हफ्ते में राजेश सिंह को अपनी पत्नी नीलम सिंह व बेटे दीपक सिंह से पता चला कि सानिया पड़ोस के गांव बभनौली के रहने वाले युवक अजय यादव से प्रेम करती है और दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली है. दरअसल, नीलम सिंह ने बेटी को देर रात अजय से मोबाइल फोन पर बतियाते पकड़ लिया था. फिर डराधमका कर सारी सच्चाई उगलवा ली थी. यह जानकारी नीलम ने पति व बेटे को दे दी थी. राजेश सिंह ठाकुर था. उसे यह गवारा न था कि उस की बेटी यादव से ब्याही जाए, अत: उस ने सानिया की जम कर पिटाई की और घर से बाहर निकलने पर सख्त पहरा लगा दिया. नीलम हर रोज डांटडपट कर तथा प्यार से बेटी को समझाती लेकिन सानिया, अजय का साथ छोड़ने को राजी नहीं थी.

21 फरवरी को अजय की चचेरी बहन की सगाई थी. वह 15 दिन की छुट्टी ले कर अपने गांव बभनौली आ गया. सिपाही अजय के आने की जानकारी राजेश सिंह को हुई तो उस ने अपने पिता अवधराज सिंह, बेटे दीपक सिंह, भतीजे अंकित सिंह तथा पत्नी नीलम के साथ गहन विचारविमर्श किया. जिस में तय हुआ कि पहले अजय व सानिया को समझाया जाए, न मानने पर दोनों को मौत के घाट उतार दिया जाए. अवैध असलहा घर में पहले से मौजूद था. योजना के तहत 22 फरवरी की रात 3 बजे राजेश सिंह व नीलम सिंह ने सानिया को धमका कर सिपाही अजय यादव के मोेबाइल फोन पर एक वाट्सऐप मैसेज भिजवाया, जिस में लिखा, ‘तत्काल मिलने आओ, नहीं तो हम मर जाएंगे.’

अजय ने मैसेज पढ़ा, तो उसे लगा कि सानिया मुसीबत में है. अत: वह अपनी मोटरसाइकिल से सानिया के गांव इचबल की ओर निकल पड़ा. इधर मैसेज भिजवाने के बाद राजेश सिंह, नीलम सिंह, दीपक सिंह, अवधराज सिंह व अंकित सिंह ने सानिया उर्फ सोनाली को अजय का साथ छोड़ने के लिए हर तरह से समझाया. लेकिन जब वह नहीं मानी तो राजेश सिंह ने उसे गोली मार दी. फिर लाश को घर में छिपा दिया. कुछ देर बाद अजय आया, तो उसे भी समझाया गया. लेकिन वह ऊंचे स्वर में बात करने लगा. इस पर वे सब अजय को बात करने के बहाने गांव के बाहर अंबिका स्कूल के पास ले गए.

वहां अजय सानिया को अपनी पत्नी बताने लगा तो उन सब ने उसे दबोच लिया और पिस्टल से उस के सिर में गोली मार दी और मरा समझ कर रामपुर गांव के पास सड़क किनारे खेत में फेंक दिया. एक पिस्टल उस के हाथ में पकड़ा दी तथा दूसरी उस के पैर के पास डाल दी. सानिया का मोबाइल फोन भी अजय की पाकेट में डाल दिया. इस के बाद वे सब वापस घर आए और सानिया का शव घर के पीछे गेहूं के खेत में फेंक दिया. अजय की चप्पलें भी शव के पास छोड़ दीं. सुबह राजेश व नीलम ने पड़ोसियों को बताया कि उन की बेटी सानिया बिना कुछ बताए घर से गायब है.

फिर सैदपुर कस्बा जा कर कैफे से औनलाइन एफआईआर दर्ज करा दी. उधर रामपुर गांव के कुछ लोगों ने युवक को मरणासन्न हालत में देखा तो पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने काररवाई शुरू की तो डबल मर्डर की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई. 24 फरवरी, 2021 को थाना खानपुर पुलिस ने अभियुक्त राजेश सिंह, दीपक सिंह, अंकित सिंह, अवधराज सिंह तथा नीलम सिंह को गाजीपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. love story short hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Haryana News : भाई ने बहन की कोर्ट मैरिज से नाराज होकर जीजा को चाकुओं से गोद डाला

Haryana News : नीरज को पड़ोस में रहने वाले गहरे दोस्त विजय की बहन कोमल से प्यार हो गया तो दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली. इस से कोमल के भाई विजय के दिल में इंतकाम की ऐसी आग भड़की कि…

उस दिन पहली जनवरी, 2021 की तारीख थी. नए साल का पहला दिन होने की वजह से लोग अपनेअपने अंदाज में सेलीब्रेशन करने में जुटे थे. पानीपत के बधावा राम कालोनी की रहने वाली कोमल वर्मा भी अपने तरीके से नए साल के सेलीब्रेशन की तैयारी में जुटी थी. कोमल के सासससुर और जेठजेठानी भी उस का हाथ बंटाने में जुटे थे. काम करतेकरते कोमल की नजर बारबार मुख्यद्वार की ओर चली जाती थी. झील सी गहरी आंखें पति नीरज के आने की बाट जोह रही थीं. कोमल मन ही मन सोच रही थी, ‘अपनीअपनी ड्यूटी से जेठजी और ससुर घर आ गए, ये (नीरज) ही घर नहीं लौटे.

आखिर कहां रह गए? आज जल्दी घर आने के लिए कह गए थे. कितने लापरवाह हो गए हैं, न ही काल कर के बताया कि कहां हैं.’

कोमल ने कई बार नीरज का फोन नंबर डायल किया, लेकिन फोन हर बार स्विच्ड औफ ही मिला. उस समय रात के करीब साढ़े 9 बज रहे थे. नीरज घर लौटने में कभी इतनी देर नहीं करता था. यह देख कर कोमल परेशान हो गई. परेशान कोमल कमरे से निकली और ससुर के कमरे में जा कर उन्हें पूरी बात बताई तो वह भी परेशान हो गए. उन्होंने भी अपने फोन से नीरज के मोबाइल पर काल की तो उस का फोन बंद ही आ रहा था. पिता विकासचंद ने बड़े बेटे जगदीश को उस का पता लगाने के लिए भेजा. जगदीश बाइक ले कर अकेला ही भाई को ढूंढने निकल गया. उस समय रात के करीब 10 बज रहे थे.

वह घर से 500 मीटर दूर गया होगा, तभी भावना चौक मोड़ पर सड़क के बीच खून में डूबे एक युवक को देख जगदीश रुक गया. वह युवक उस का छोटा भाई नीरज था और उस की मौत हो चुकी थी. पल भर के लिए जगदीश के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. बाइक से नीचे उतर कर वह भाई की लाश से लिपट गया और जोरजोर से चीखनेचिल्लाने लगा. जब थोड़ी देर बाद वह सामान्य हुआ तो फोन कर के पापा को पूरी बात बता दी. जगदीश के मुंह से नीरज की मौत की बात सुन कर पिता के हाथ से मोबाइल फोन नीचे गिरतेगिरते बचा. बदहवास विकासचंद के मुंह से एक ही शब्द निकला,  ‘हाय! इतना बड़ा अनर्थ मेरे साथ क्यों हो गया?’ वह सिर पर हाथ रख फफकफफक कर रोने लगे.

अचानक विकासचंद को रोता देख घर वाले घबरा गए. आखिर ऐसा क्या हुआ जो वह दहाड़ें मार कर रोने लगे. जरूर कोई बड़ी बात रही होगी. कोमल ने फोन उठा कर देखा तो पता चला काल उस के जेठ जगदीश ने की थी. उस के बाद कोमल ने जेठ को फोन मिला कर पूछा कि आप ने पापाजी से ऐसा क्या कह दिया जो वह नर्वस हो गए. जगदीश ने कोमल को भी वही सब बता दिया. जेठ की बात सुन कर कोमल जैसे काठ हो गई. उस के हाथ से फोन छूट कर नीचे फर्श पर जा गिरा और वह बदहवास हो कर धम्म से गिर पड़ी और बेहोश हो गई. थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो दहाड़ मारमार कर रोने लगी.

जवान बेटे की मौत की खबर सुन कर विकासचंद इतना साहस नहीं जुटा पाए कि बेटे की लाश तक जा सकें. घर में कोहराम मच गया था. अचानक रोनेचिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी जुट गए कि वर्माजी के घर में क्या हो गया, जो सब के सब रोए जा रहे हैं. सच जानने के लिए पड़ोसी उन के घर पहुंचे. जब उन्होंने नीरज की हत्या की बात सुनी तो वे भी दंग रह गए. पड़ोसी घटनास्थल पर पहुंच गए, जहां जगदीश भाई की लाश के पास बैठा रो रहा था. उसी रात पड़ोसियों ने घटना की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी. घटना बधावा राम कालोनी के पास घटी थी. यह इलाका सिटी थाने में आता था. इसलिए कंट्रोलरूम ने घटना की सूचना वायरलैस के जरिए सिटी थाने को दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी योगेश कटारिया अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. रात होने के बावजूद वहां काफी लोग जुट गए थे. थानाप्रभारी कटारिया ने लाश का गहन निरीक्षण किया. हत्यारों ने नीरज के सीने और पेट में ताबड़तोड़ चाकू घोंप कर बड़ी बेरहमी से कत्ल किया था. जब थानाप्रभारी ने जगदीश से नीरज की किसी से दुश्मनी की बात पूछी तो वह चीखता हुआ बोला, ‘‘मेरे भाई को उन के सालों ने ही मार डाला. हमें जिस बात का डर था आखिरकार वहीं हुआ. भाई की सुरक्षा के लिए थाने में कई बार एप्लीकेशन भी दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. अगर काररवाई हुई होती तो आज मेरा भाई जिंदा होता.’’ कह कर जगदीश रोने लगा.

बहरहाल, थानाप्रभारी योगेश कटारिया ने जगदीश की पूरी बात सुनी. उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त काररवाई का आश्वासन दिया और इस की सूचना डीएसपी वीरेंद्र सैनी, एसपी और एसएसपी को दे दी.

सूचना मिलने के बाद आला अफसर मौके पर पहुंच गए. इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी कटारिया ने फटाफट लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी. उस के बाद जगदीश की तहरीर पर पुलिस ने मृतक के साले विजय उर्फ छोटा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी. पुलिस की काररवाई करतेकरते रात के 2 बज गए थे. खुशियों में लगा ग्रहण नए साल के पहले दिन ने ही विकासचंद वर्मा की खुशियों में ग्रहण लगा दिया था. कुछ क्षण पहले तक जहां घर वालों की खिलखिलाहट से घर का कोनाकोना गुलजार था, वहां पल भर में ही मातम छा गया था.

नीरज के जाने के गम में सब का बुरा हाल था. कोमल की आंखें रोरो कर सूज गई थीं. उस का तो संसार ही उजड़ गया था. दोनों ने डेढ़ साल पहले ही लव मैरिज की थी. जिस दिन कोमल के साथ नीरज की शादी हुई थी, उसी दिन उस के भाई विजय ने शहर छोड़ देने की धमकी दी थी. ऐसा न करने पर उस ने बहनोई नीरज को बुरा अंजाम भुगतने की भी चेतावनी दी थी. खैर, मुकदमा दर्ज कर के पुलिस नीरज के कातिलों की सुरागरसी में जुट गई. घटनास्थल से थोड़ी दूर एक गली में एक घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा था. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगाला. फुटेज में मुंह ढंके 2 युवक तेजी से घटनास्थल से गली की ओर भागते साफ दिख रहे थे.

उस फुटेज में भाग रहे युवकों की जब पुलिस ने जगदीश से शिनाख्त कराई तो वह पहचान गया. उन दोनों युवकों में से एक विजय उर्फ छोटा था, जबकि दूसरा उस का ममेरा भाई पवन था. दोनों ही विजय नगर के रहने वाले थे. 3 जनवरी, 2021 की सुबहसुबह सीआईए-2 सतीश कुमार वत्स के नेतृत्व में सिटी थाने की पुलिस ने विजय नगर में पवन और विजय के घर पर दबिश दे कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें थाने ले आई. थाने ला कर पुलिस ने दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की तो विजय ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया, ‘‘वह और नीरज पड़ोसी थे. दोनों ही पचरंगा बाजार में हैंडलूम पर काम करते थे. नीरज ने विश्वासघात कर मेरी बहन कोमल से प्रेम विवाह कर लिया था.

‘‘कहता था उस का जीजा लगता है. यह बात कांटे की तरह मेरे सीने में चुभती थी. मैं ने उसे शहर छोड़ने के लिए कहा था लेकिन दोनों ने शहर नहीं छोड़ा. इस से समाज और दोस्तों में हमारी बदनामी हो रही थी, इसलिए मैं ने यह कदम उठाया और उसे मार डाला. मुझे इस का कोई मलाल नहीं है.’’

विस्तार से पूछने के बाद इस हत्याकांड की पूरी कहानी इस तरह सामने आई—

23 वर्षीय नीरज वर्मा मूलरूप से पानीपत के सिटी थाने के बधावा राम नगर मोहल्ले में परिवार के साथ रहता था. नीरज विकासचंद का दूसरे नंबर का बेटा था. नीरज से बड़ा जगदीश और उस से छोटी एक बेटी थी.  दोनों बेटे अपनी काबिलियत के बल पर अपने पैरों पर खड़े थे. विकासचंद को अपने दोनों बेटों पर बहुत नाज था. उन की एक आवाज पर दोनों बेटे हमेशा तत्पर खड़े रहते थे. शिवाकांत विकासचंद के पड़ोसी थे. दोनों पड़ोसियों में गहरी छनती थी. दोनों परिवारों का एकदूसरे के घरों में आनाजाना था. दोनों ही परिवार एकदूसरे के सुखदुख में एकदूसरे की मदद के लिए खड़े रहते थे. लगता ही नहीं था कि 2 अलगअलग परिवार हैं.

शिवाकांत एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे. उन के परिवार में कुल 5 सदस्य थे. पतिपत्नी और 3 बच्चे. 2 बेटे और एक बेटी. बेटों में सब से बड़ा विजय था. फिर बेटी कोमल, उस से छोटा एक और बेटा. यही शिवाकांत का परिवार था. शिवाकांत का बड़ा बेटा विजय और विकासचंद का मझला बेटा नीरज दोनों ही हमउम्र थे. एकदूसरे के घर आतेजाते दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी. उठनाबैठना, खेलनाकूदना और पढ़नालिखना सब साथसाथ होता था. दोनों परिवार एकदूसरे के बच्चों पर, उन की दोस्ती पर फख्र करते थे. आहिस्ताआहिस्ता कोमल बचपन की गलियों को पीछे छोड़ जवानी की दहलीज पर आ खड़ी हुई थी. चंचल, चपल कोमल के दमकते चेहरे और महकते बदन की खुशबू से नीरज पिघल गया था.

रेशमी जुल्फों वाली खूबसूरत कोमल को जब से उस ने देखा था, उस की मोहिनी सूरत की छवि उस के दिल में घर कर गई थी. कोमल भी छिपछिप कर नीरज को प्रेमिल नजरों से देखती थी.कोमल नीरज को दिल की गहराइयों से भी ज्यादा प्यार करने लगी थी. प्यार की आग दोनों दिलों में सुलग रही थी. बस, थोड़ी सी हवा मिलने की जरूरत थी ताकि अपने प्यार का इजहार कर सकें. एक दिन मौका देख कर दोनों ने अपने दिलों का हाल एकदूसरे के सामने बयान कर दिया. उस दिन के बाद से दोनों की दुनिया ही बदल गई. आलम यह हो गया था कि एकदूसरे को देखे बिना पल भर जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे. किसी न किसी बहाने दोनों मिल ही लेते थे.

जवां हो गई मोहब्बत नीरज और कोमल दोनों की मोहब्बत जवां हो रही थी. प्रेम के रथ पर सवार दोनों भविष्य की कल्पनाओं में रमे हुए थे. एक दिन दोपहर का वक्त था. नीरज कोमल के भाई विजय से मिलने उस के घर आया. इत्तफाक से उस समय घर पर न तो विजय था और न ही उस के पापा. घर पर कोमल की मां और कोमल थी. नीरज को देख कर कोमल का चेहरा खिल उठा तो नीरज के होंठों पर भी मुसकान उतर आई. नीरज ने कोमल से विजय के बारे में पूछा तो उस ने जवाब दिया ‘नहीं हैं’. यह सुन कर नीरज को बड़ी तसल्ली हुई कि आज वह दिल खोल कर कोमल से प्यारभरी बातें करेगा. कोमल की मां ने बेटी और नीरज को बात करते देखा तो वहां से उठ कर घर के कामों में जुट गई.

वह जानती थी कि दोनों भले ही जवान हो गए हैं लेकिन उन के बीच के रिश्ते एकदम पाकसाफ हैं. उन्हें क्या पता था कि उन की बेटी उन की पीठ पीछे नीरज संग इश्क लड़ा रही है. कोमल ने कमरे का दरवाजा भिड़ा दिया. कमरे में उन दोनों के अलावा कोई नहीं था. कोमल की गोरी कलाइयों को नीरज अपने हाथों में लिए उस की आंखों में आंखें डाले उसे एकटक देख रहा था. तभी कोमल बोली, ‘‘ऐसे क्या देख रहे हो?’’

‘‘एकदम चुप रहो, कुछ मत कहो, इन झील सी आंखों में आज उतर जाने दो मुझे.’’ नीरज ने जवाब दिया.

‘‘ऐसे ही देखना है तो मुझ से शादी क्यों नहीं कर लेते?’’ वह बोली.

‘‘वह भी कर लूंगा जान. थोड़ा और सब्र कर लो.’’ नीरज ने कहा.

‘‘सब्र ही तो नहीं होता मुझ से अब. तुम्हारी दूरियां मुझ से बरदाश्त नहीं होतीं. रात को बिस्तर पर जाती हूं तो तुम्हारी यादें मुझे सोने नहीं देतीं, नश्तर बन कर दिल में चुभती हैं.’’

‘‘कुछ ऐसा ही मेरा भी हाल है लेकिन मैं चाहता हूं तुम्हें तुम्हारे घर से विदा करा कर ले जाऊं.’’

‘‘तब तो तुम्हारे सपने धरे के धरे रह जाएंगे.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘तुम तो जानते हो हमारे घर वाले इस रिश्ते के लिए कभी भी राजी नहीं होंगे.’’ कोमल बोली.

‘‘क्यों राजी नहीं होंगे? आखिर क्या कमी है मुझ में?’’ नीरज की बात सुन कर कोमल उदास हो गई.

‘‘ऐसे भी नादान नहीं हो तुम. क्या तुम नहीं जानते कि हमारे घर वाले जातपात को ले कर कितने संजीदा हैं. फिर हम दोनों की जाति भी अलग हैं. पापा और भैया इस रिश्ते के लिए कभी तैयार नहीं होंगे.’’

‘‘मैं तुम से वादा करता हूं कोमल कि मैं तुम्हें अपना जीवनसाथी बना कर रहूंगा. हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता. यह मेरा तुम से वादा है.’’

इस के बाद दोनों घंटों प्यारभरी बातें करते रहे. फिर नीरज कोमल से साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा कर अपने घर वापस लौट आया, कोमल भी अपनी मां के पास दूसरे कमरे में चली आई और उन से लिपट गई. उस समय वह बहुत खुश थी. चर्चे हो गए आम धीरेधीरे नीरज और कोमल के प्यार के चर्चे पूरे कालोनी में फैल गए. यह बात कोमल के भाई विजय तक पहुंची तो वह नीरज पर भड़क उठा. उसे नीरज से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी कि वह दोस्ती की आड़ में विश्वासघात करेगा. उस दिन से विजय ने नीरज पर नजरें गड़ा दीं कि वह कब उस के घर आता है, कब बहन से मिलता है. वह उसे रंगेहाथ पकड़ना चाहता था.

विजय के रवैए से नीरज को लगा कि विजय को उस पर शक हो गया है. विजय उस के प्यार के बारे में जान चुका है. यह बात नीरज ने कोमल को बताई और उसे सावधान भी कर दिया. उस दिन के बाद से कोमल और नीरज दोनों सब की नजरों से बच कर मिलने लगे. विजय के साथसाथ उस के मांबाप को भी दोनों पर शक हो गया था. शिवाकांत ने सोचा कि इस से पहले कोई ऊंचनीच हो जाए, उन्हें ठोस कदम उठाना होगा.  चूंकि विजय और नीरज दोनों के परिवार पड़ोसी थे और उन में संबंध भी गहरे थे. लेकिन नीरज के कारण उन के रिश्तों में खटास आ गई थी. नीरज के पिता विकासचंद बेटे की करतूत से शर्मसार थे. नीरज और कोमल के प्यार के रिश्ते ने दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी की दीवार खड़ी कर दी थी.

विजय के पिता शिवाकांत सुलझे हुए सिद्धांतवादी इंसान थे. समझदारी का परिचय देते हुए उन्होंने वहां से हटना ही मुनासिब समझा. उन्होंने वहां का मकान छोड़ दिया और परिवार सहित विजय नगर में आ कर रहने लगे. विजय भी यही चाहता था कि नीरज की परछाईं कोमल पर न पड़े. पिता के फैसले से विजय बहुत खुश था. खुश इसलिए कि वह नीरज से अब खुल कर इंतकाम ले सकता था. क्योंकि नीरज की वजह से उस के परिवार की मोहल्ले में बदनामी हुई थी. बात घटना से 3 महीने पहले की है. कोमल घर से अचानक गायब हो गई. विजय को पूरा शक था कि कोमल को नीरज ही भगा ले गया है.

विजय नीरज की तलाश में जुटा तो नीरज अपने घर पर ही मिल गया लेकिन कोमल वहां नहीं मिली. इस पर उस ने नीरज से पूछा कि उस की बहन को कहां छिपा कर रखा है, बता दे नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा होगा. नीरज ने उस से साफ शब्दों में कह दिया कि न तो वह कोमल के बारे में जानता है और न ही उसे कहीं छिपाया है. उस से जो बन पड़े, कर ले. वह गीदड़भभकियों से डरने वाला नहीं है. उस के बाद विजय वहां से वापस घर लौट आया. नीरज ने विजय से झूठ बोला था. जबकि उस ने कोमल को अपने घर में ही छिपा कर रखा था. उस के घर वालों को पता था कि कोमल और नीरज एकदूसरे से प्रेम करते हैं. उन्होंने नीरज को समझाया भी था कि वह जिद छोड़ दे.

लेकिन नीरज ने मांबाप की बातों को दरकिनार करते हुए कह दिया कि वह कोमल से प्यार करता है और शादी भी उसी से करेगा. आखिरकार मांबाप को बेटे के सामने झुकना ही पड़ा. घर वाले जानते थे कि कोमल को ज्यादा दिनों तक छिपा कर नहीं रख सकते. एक न एक दिन भेद खुल ही जाएगा. तब मामला बिगड़ सकता है. कोमल की सुरक्षा को देखते हुए विकासचंद ने उसे हिसार में अपने एक परिचित के घर भेज दिया. इधर विजय कोमल को ढूंढता रहा, लेकिन कोमल का कहीं पता नहीं चला. इसी तरह डेढ़ महीना बीत गया. समाज में बदमानी के डर से उस ने जानबूझ कर कोमल के गायब होने का मुकदमा दर्ज नहीं कराया था.

वह जान रहा था कि अगर मामला पुलिस में चला गया तो इज्जत की धज्जियां उड़ जाएंगी. इसलिए उस के घर वाले अपने हिसाब से उस की तलाश करते रहे. कर ली कोर्ट मैरिज आखिरकार नीरज ने कोमल से कोर्टमैरिज कर ली. डेढ़ महीने बाद नवंबर, 2020 के आखिरी हफ्ते में विजय को कहीं से भनक लगी कि कोमल नीरज के साथ उस के घर में ही रह रही है. दोनों ने चंद दिनों पहले कोर्टमैरिज भी कर ली है. खबर सौ फीसदी सच थी. नीरज और कोमल कोर्टमैरिज कर चुके थे और पतिपत्नी के रूप में रह रहे थे. विजय को यह बात बरदाश्त नहीं हुई. उस ने नीरज और कोमल दोनों को रास्ते से हटाने की योजना बना ली.

अपनी योजना में विजय उर्फ छोटा ने अपने ममेरे भाई पवन को भी शामिल कर लिया. पवन अपने परिवार के साथ जावा कालोनी में रहता था. पवन अपराधी प्रवृत्ति का था. उस के खिलाफ पानीपत के कई थानों में गंभीर अपराध के मुकदमे दर्ज थे. पुलिस के लिए वह वांछित था. बेटी के घर छोड़ कर जाने से मांबाप दुखी थे. उन्होंने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. उन का तर्क था कि जब बेटी ने ही उन की पगड़ी की लाज नहीं रखी तो वह उस के लिए चिंता क्यों करें. लेकिन विजय अपनी जिद पर अड़ा था कि कोमल और नीरज ने जो भी किया है वह माफ करने लायक नहीं है.

पहले वह नीरज को रास्ते से हटाएगा फिर कोमल को उस के किए का सजा देगा. योजना बनाने के बाद विजय ने नौकरी छोड़ दी और नीरज की निगरानी में दोनों जुट गया कि वह घर से कब निकलता है, कहांकहां जाता है, रात में नौकरी से घर कब लौटता है. डेढ़ महीने तक विजय और पवन ने नीरज की रेकी की. वारदात को दिया अंजाम जब वे पूरी तरह आश्वस्त हो गए तो नए साल के पहले दिन नीरज की हत्या की योजना बनाई ताकि विकासचंद के घर की खुशियां मातम में बदल जाएं. पहली जनवरी, 2021 की रात विजय और पवन बधावा राम कालोनी की उस गली में घात लगा कर बैठ गए, जिस से नीरज अपनी बाइक से आताजाता था.

नीरज जैसे ही कालोनी के मोड़ पर पहुंचा विजय और पवन उस की बाइक के सामने आ खड़े हुए. अचानक दोनों ने धक्का दिया तो नीरज बाइक सहित नीचे गिर गया. दोनों उस पर टूट पड़े और चाकुओं से ताबड़तोड़ प्रहार कर उस की हत्या कर दी. फिर भावना चौक गली के रास्ते भाग निकले. ज्यादा खून बहने से कुछ ही पलों में नीरज की मौत हो गई. विजय और पवन दोनों भाग कर राजाखेड़ी गांव की तरफ एक खेत में जा कर छिप गए. फिर दोनों ने शराब पी और नीरज की मौत का जश्न मनाया. नीरज की वजह से उन की बदनामी हो रही थी. बदनामी का एक विकेट गिर गया था. अब कोमल को मौत के घाट उतारने की बारी थी, जिस के चलते परिवार ने खून के आंसू रोए थे.

इस से पहले कि दोनों अपने इस खतरनाक मकसद में कामयाब हो पाते, थानाप्रभारी योगेश कटियार ने 3 जनवरी, 2021 को सेक्टर-24 के एमजेआर स्कूल के पास से दोनों को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल लिया और हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद करा दिया. विजय को नीरज की मौत का कोई अफसोस नहीं था. अफसोस इस बात का था कि कोमल जिंदा बच गई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Love Crime News : पहले कोर्ट मैरिज की फिर सोते हुए बॉयफ्रेंड ने गला दबा दिया

Love Crime News : प्यार शब्द में भले ही दुनिया जहान की खुशियां सिमटी हों, लेकिन जब प्रेमीप्रेमिका का प्यार हकीकत के धरातल से टकराता है तो उस का अस्तित्व डगमगाने लगता है. कभीकभी तो शहद सा मीठा यही प्यार जहर बन जाता है. यही सिमरन और आमिर के साथ भी हुआ. सिमरन ने जिस आमिर को अपना…

सिमरन की प्रेम कहानी की शुरुआत ढाई साल पहले हुई थी. दिल्ली के शाहदरा जिले में मंडोली रोड पर हर्ष विहार थाना क्षेत्र में एक कालोनी है बुध विहार. इसी कालोनी की गली नंबर 12 के मकान नंबर 438 में रहता है मोहम्मद शरीफ और शाबरी बेगम का परिवार. शरीफ का कबाड़ खरीदनेबेचने का काम है. काम कबाड़ी का जरूर था, लेकिन आमदनी अच्छी थी. घर में कोई कमी नहीं थी, परिवार दिल खोल कर पैसा खर्च करता था. शरीफ व शाबरी की 5 औलादें थीं, 2 बेटे व 3 बेटियां. तीनों बेटियां बड़ी थीं उन से छोटे 2 बेटे थे. 2 बड़ी बेटियों की दिल्ली में ही अच्छे परिवारों में शादी हो चुकी थी. सिमरन बेटियों में सब से छोटी थी. उस से छोटे 2 भाई थे बड़ा फिरोज, उस से छोटा अजहर.

12वीं तक पढ़ी सिमरन की ढाई साल पहले कालोनी में हो रहे एक निकाह के वलीमा में जब आमिर से पहली बार आंख लड़ी थी तो वह उम्र का 20वां बसंत पार कर चुकी थी. वैसे तो उम्र की ये ऐसी दहलीज होती है जिसे लांघ कर लड़की यौवनांगी बनती है,  इस पड़ाव पर पहुंचते ही उसे दुनिया की हर चीज खूबसूरत नजर आने लगती है. देखने का नजरिया बदल जाता है. निहायत खूबसूरती का खजाना लिए सिमरन की जवानी एक नई अंगडाई ले रही थी. वैसे तो कुदरत ने उसे खूबसूरती की नियामत दिल खोल कर बख्शी थी लेकिन जब वह सजसंवर कर निकलती थी तो उस के तीखे नाकनक्श उस की बेइंतहा खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा देते थे.

उस दिन भी सिमरन की खूबसूरती कुछ ऐसी ही बिजलियां गिरा रही थी. वलीमा की उस पार्टी में सिमरन की निगाहें डीजे के फ्लोर पर बेहद आकर्षक ढंग से डांस कर रहे उस युवक पर अटकी थी जो मानों उसी के लिए डांस कर रहा हो. पहले प्यार की पहली खुशबू हालांकि सिमरन ने इस से पहले किस्से कहानियों में ही देखा सुना था कि मोहब्बत नाम की कोई चीज होती है. आखिर मोहब्बत है ही ऐसी चीज, जिसे सभी करना चाहते हैं. सिमरन को उस दिन पहली बार मुहब्बत का अहसास आमिर से बात कर के हुआ था. उस वलीमा फंक्शन में मौका मिलते ही आमिर ने उसे एक कोने में रोक कर पूछा, ‘हैलो जी, कैसा लगा हमारा डांस?’

एक अंजान युवक से इस तरह बात करते हुए सिमरन का दिल पहली बार इतनी तेजी से धड़का. उस की अटकी हुई सांसों को आमिर ने एक ही नजर में पढ़ लिया.

‘‘आप ने बताया नहीं.’’ आमिर ने फिर से वही सवाल किया ‘‘जी बहुत अच्छा… एकदम रितिक रोशन की तरह डांस करते हो आप.’’

सिमरन ने किसी तरह जवाब दिया.

‘‘आप का नाम जान सकता हूं.’’ आमिर ने पूछा.

‘‘सिमरन…’’ ना जाने कैसे और क्यूं  सिमरन के मुंह से अपने आप निकल गया. अगले ही पल उसे अपनी भूल का अहसास हुआ.

‘‘मुझे आमिर कहते हैं, यहीं गली नंबर 9 में रहता हूं मदीना मस्जिद के पास.’’ आमिर जो सिमरन से बातचीत करने के लिए बेताब था ने सिमरन की घबराहट व हिचकिचाहट को देख कर खुद ही बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया. ‘‘आप को पहले इस इलाके में नहीं देखा, आप शायद अपनी रिश्तेदारी में आई हैं.’’

‘‘नहीं…नहीं मैं भी यहीं की रहने वाली हूं 12 नंबर गली में घर है हमारा, जिन के यहां ये वलीमा है, अब्बू के दोस्त हैं.’’

सिमरन को मानों अपने उपर नियंत्रण ही नहीं था. आमिर जो भी सवाल कर रहा था, उस के मुंह से जवाब खुद निकल रहे थे. थोड़ीबहुत बातचीत और हुई. अचानक आमिर नाम के उस युवक ने सिमरन के हाथ से उस का मोबाइल ले लिया और उस पर अपना नंबर लगा कर घंटी मार दी. आमिर के मोबाइल पर सिमरन के नंबर की काल आ चुकी थी. ‘‘थैंक यू सिमरन… तुम से मिल कर बहुत अच्छा लगा… पहली बार कोई इतनी प्यारी लड़की मिली है जिस से दोस्ती करने का मन हो रहा है हम लोग फोन पर बात करते रहेंगे.’’

आमिर हवा के तेज झोंके की तरह आया और अपनी बात कह कर सिमरन को हक्काबक्का छोड़ कर चला गया तो सिमरन मानो सोते से जागी. सिमरन को उस दिन पहली बार लगा कि कहीं ये मुहब्बत तो नहीं है. क्योंकि उस ने सुना था कि मुहब्बत एक भावना है, जिस का एहसास धीरेधीरे होता है, कभी कभी यह मोहब्बत किसी से पहली नजर में भी हो जाती है. सिमरन को उस दिन लगा कि ये शायद मुहब्बत का तीर था, जो उस के जिगर के पार हो गया था, इसीलिए वह आमिर की किसी बात का विरोध नहीं कर सकी थी. उस दिन रात को सिमरन ठीक से सो नहीं सकी. आंखे बंद करती तो बार बार आमिर का चेहरा उस की आंखों के आगे तैरने लगता.

उस के डांस का अंदाजे बयां याद कर के वह खुद ही मुसकराने लगती. उसे लगा कि वह प्यार की अंजानी सी डगर पर चल पड़ी है. लेकिन अभी तक वो ये नहीं जानती थी कि आमिर है कौन, क्या करता है, उस की हैसियत क्या है? अगले दिन ही आमिर ने वाटसएप पर सिमरन से बातचीत शुरू कर दी. प्रेम दीवानी सिमरन, प्यासा आमिर युवाओं के बीच प्यार की शुरूआत में जिस तरह की बातें होती हैं. उस दिन से दोनों के बीच वैसी बातचीत भी शुरू हो गई. दोनों ने एक दूसरे को अपने फोटो भेजने शुरू कर दिए. चंद रोज बाद दोनों के बीच घर से बाहर कहीं मिलने की बात भी तय हो गई. एक बार मिलना हुआ तो फिर दोनों को मिलनाजुलना आम बात हो गई.

कभी इलाके में गली के किसी नुक्कड़ पर तो कभी नजदीक के किसी पार्क में, कभी किसी चाईनीज फूड सेंटर पर तो कभी पिक्चर देखने के लिए दोनों साथ आने जाने लगे. जैसेजैसे समय बीत रहा था दोनों की मुहब्बत परवान चढ़ती जा रही थी. कभीकभी मौका मिलता तो आमिर सिमरन के अधरों पर अपने प्यार की मुहर भी लगा देता, जिस से सिमरन की तड़प ओर बढ़ जाती थी. एक तरह से सिमरन आमिर के प्यार में पूरी तरह दीवानी हो चुकी थी. करीब 6 महीने तक दोनों का प्यार इसी तरह चोरीछिपे परवान चढ़ता रहा. प्यार की हर कहानी एकदम सीधी नहीं होती. उस में कई बाधाएं होती हैं और सिमरन का प्यार तो वैसे भी पहली नजर का अंधा प्यार था, जिस में न तो भविष्य की भलाई देखी गई थी न ही भावी जिदंगी की कड़वी सच्चाई को परखा गया था.

सिमरन बहनों में सब से छोटी थी और मां बाप की लाड़ली भी. मां बाप चाहते थे कि जवानी की दहलीज पर खड़ी सिमरन की शादी भी किसी अच्छे परिवार में कर दी जाए. इसीलिए वे उस के लिए अच्छा वर तलाश रहे थे. सिमरन के प्यार से अंजान मां ने जब एक दिन सिमरन को रिश्ते के लिए एक लड़के की फोटो दिखाई तो सिमरन को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसे हसीन सपना देखते हुए जगा दिया हो.

‘‘अम्मी अभी शादी की क्या जल्दी है.. मुझे घर से निकालना चाहती हो क्या?’’ सिमरन ने बेमन से लड़के की फोटो देखने के बाद कहा.

‘‘नहीं बेटा, लड़की मांबाप के लिए एक जिम्मेदारी होती है जितनी जल्दी ये जिम्मेदारी पूरी हो जाए मांबाप का मन हल्का हो जाता है. और तेरा निकाह हो जाएगा तो उस के बाद फिरोज के लिए भी तो दुल्हन लानी है घर में.’’

शाबरी बेगम ने सिमरन के शादी के ऐतराज को स्वभाविक रूप से लिया. लेकिन वे इस बात से कतई अंजान थी कि बेटी के मन में क्या चल रहा है. सिमरन जानती थी कि अगर उस ने अपनी अम्मी को अपनी पंसद के बारे में बताया तो वे आमिर से उस की शादी के लिए कतई तैयार नहीं होगी. क्योंकि आमिर का परिवार उस की दूसरी बहनों की ससुराल की तरह समृद्ध नहीं था. आमिर के पिता शाहिद मूलरूप से मेरठ के रहने वाले हैं. वे जवानी के दिनों में ही दिल्ली आ गए थे. आजादपुर मंडी में आढ़तियों को लेबर सप्लाई करने वाले शाहिद के परिवार में उन की बीवी आबिदा के अलावा 10 बच्चे थे, 3 बेटियां व 7 बेटे.

परिवार लंबाचौड़ा था और खर्चे अधिक. मंदे समय में उन्होेंने किसी तरह अपने परिवार के लिए मंडोली की गली नंबर 9 में मकान तो बना लिया था, लेकिन 3 बेटियों की शादी करने और 7 बेटों को पालपोस कर जवान करतेकरते वे उम्र से पहले ही बूढे हो कर बीमार रहने लगे थे. उन का कोई भी बच्चा 5वीं जमात से ज्यादा नहीं पढ़ सका था. मेरठ के सरूरपुर, जैनपुर में पनीर बनाने के कई प्लांट हैं. शाहिद के लगभग सभी बेटे इन्हीं फैक्ट्रियों में काम करते हैं. 2 बड़े बेटे अपने परिवार के साथ जैनपुर में ही किराए का मकान ले कर रहते थे. आमिर से छोटे भाई की भी शादी हो चुकी थी, लेकिन उस की पत्नी दिल्ली में शाहिद व उन की पत्नी आबिदा के पास ही रहती थी. 3 बेटों की अभी शादी नहीं हुई थी.

ढाई साल पहले जिन दिनों सिमरन और आमिर का प्यार परवान चढ़ रहा था उन दिनों आमिर पनीर बनाने का काम सीख रहा था. उस ने अभी नौकरी शुरू नहीं की थी. अलबत्ता 10 हजार रूपए में उस की नौकरी एक प्लांट में पक्की हो गई थी. इधर जब सिमरन ने आमिर को बताया कि उस के अम्मी अब्बू उस का जल्द से जल्द कहीं दूसरी जगह निकाह कराने की तैयारी कर रहे है तो आमिर सकते में आ गया. क्योंकि वो चाहता था कि सिमरन के साथ अभी एक साल उस के प्रेम संबध यूं ही चलते रहें. उस ने सोचा था कि नौकरी कर के पहले पैसा कमाएगा फिर सिमरन से शादी करेगा. लेकिन जब अचानक सिमरन ने बताया कि परिवार वाले उस का निकाह कराने की तैयारी कर रहे हैं तो उस के हाथपांव फूल गए.

उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करें. सिमरन ने उसे ये भी बता दिया था कि उस के परिवार की हैसियत देख कर उस के परिवार वाले कभी दोनों की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. सिमरन दिल्ली में रहने वाली और 12वीं क्लास तक पढ़ी लड़की थी. उसे पता था कि अगर परिवार शादी की इजाजत ना दे तो बालिग प्रेमियों को शादी के लिए क्या करना चाहिए. सिमरन मिली भावी ससुराल वालों से इसलिए सिमरन ने आमिर से पूछा कि क्या उस के परिवार वाले उसे अपनाने के लिए तैयार हैं. सिमरन अच्छे संपन्न परिवार की पढ़ीलिखी सुंदर लड़की थी. जब आमिर ने उसे अपने परिवार वालों से मिलाया तो सब ने शादी के लिए हां कर दी.

अब सवाल यह था कि सिमरन के परिवार वाले दोनों का निकाह कराने के लिए तैयार नहीं होंगे. तय हुआ कि सिमरन व आमिर कोर्ट मैरिज कर लें. बाद में सिमरन का परिवार अपने आप मान जाएगा. सिमरन व आमिर ने शाहदरा मैरिज कोर्ट में शादी के लिए आवेदन कर दिया. चूंकि दोनों ही बालिग थे और परिवार के तौर पर दोनों की तरफ से आमिर के दोस्त गवाह थे, लिहाजा दोनों की कोर्ट मैरिज होने में कोई अड़चन नहीं आई. लेकिन जब कोई लड़की निकाह करती है तो भले ही परिवार से कुछ ना बताए लेकिन उस के रहनसहन और पहनावे में इतना परिवर्तन तो आ ही जाता है कि सवालों का पहाड़ अपने आप ही खड़ा हो जाए.

कोर्ट मैरिज के बाद सिमरन जब चूड़ा पहन कर अपने घर गई तो उस की अम्मी को शक हुआ, तो उन्होंने सवालों की बौछार कर दी. सिमरन जानती थी कि एक ना एक दिन सब को सच बताना ही पडे़गा. लिहाजा उस ने अपनी मां को बता दिया कि वह आमिर नाम के एक लड़के से प्यार करती है और उस ने कोर्ट मैरिज कर ली है. बेटी के लिए अच्छे घर का सपना देखने वाले मातापिता के लिए बेटी के प्रेम विवाह की खबर किसी वज्रपात से कम नहीं होती. उन्होंने जब लड़के व उस के परिवार के बारे में पूछा तो सिमरन ने सब कुछ सचसच बता दिया. जैसा कि सिमरन को आशंका थी वैसा ही हुआ. मां ने सिमरन को लानतमलानत दी और उस की पिटाई कर दी. अब्बू के घर आने के बाद तो जम कर हंगामा हुआ. पिता ने उसी दिन आमिर को अपने घर बुलाया और उसे धमकी देते हुए अपनी बेटी को भूल जाने के लिए कहा.

आमिर ने सिमरन से सच्ची मोहब्बत की थी. भूल जाने का तो सवाल ही नहीं उठता था. लिहाजा उस ने साफ कह दिया कि वह दुनिया में सब को छोड़ सकता है लेकिन सिमरन को छोड़ना उस के लिए मुमकिन नहीं. मोहम्मद शरीफ ने जब उसे अपनी हैसियत देखने के लिए कहा तो आमिर ने साफ कह दिया कि उस ने सिमरन की हैसियत से नहीं, बल्कि दिल से प्यार किया है. शरीफ ने आमिर को मारपीट कर घर से भगा दिया और उसे चेतावनी दे दी कि भूल कर भी सिमरन से मिलने का प्रयास न करें. आमिर जानता था कि अगर उस ने जरा सी भी देर कर दी तो सिमरन के घर वाले जल्दी ही कहीं उस का निकाह कर देंगे. लिहाजा उस ने अपनी जान पहचान के कुछ लोगों से बात की और हर्ष विहार थाने पहुंच गया.

आमिर ने पुलिस को बताया कि उस ने सिमरन से कोर्ट मैरिज की है लेकिन उस के ससुराल वाले इस शादी को नहीं मान रहे हैं. उन्होंने उस की बीवी को अपने घर में बंधक बना कर रखा हुआ है और उस के साथ नहीं भेज रहे. आमिर ने कोर्ट मैरिज का जो प्रमाण पत्र दिया था, उस की जांच की गई तो उस से आमिर का आरोप सच पाया गया. लिहाजा आमिर की शिकायत पर पुलिस मोहम्मद शरीफ, उन की बेगम व बेटी को थाने ले आई. थाने ला कर दोनों पक्षों में बहस हुई. मातापिता के बेटी के पक्ष में अपने तर्क थे, तो आमिर व सिमरन के अपनी मोहब्बत के तर्क. लेकिन पुलिस को तो कानून देखना था. पुलिस की नजर में आमिर व सिमरन दोनों बालिग थे, दोनों का धर्म भी एक था और कानूनन उन की शादी हुई थी.

लिहाजा पुलिस ने मोहम्मद शरीफ को चेतावनी दी कि वे आमिर व सिमरन के बीच में बाधा न डालें और उसे अपने पति के पास जाने दें. ऐसा ही हुआ भी शरीफ ने टूटे मन से बेटी को आमिर के हाथों में सौंप दिया. लेकिन उन का दिल बुरी तरह टूट गया था. उन्होंने बेटी को न जाने क्यों बद्दुआ दे दी कि मातापिता का दिल दुखा कर वो कभी खुश नहीं रह सकती. उन्होंने थाने से ही सिमरन को आमिर के साथ भेज दिया. लेकिन साथ ही कहा भी कि आमिर के साथ उन की बिना मरजी के उस ने जो शादी की है, उस के बाद उस का उन के साथ कोई रिश्ता नहीं रहा. मांबाप का दिल तोड़ कर खुश थी सिमरन माता पिता का दिल टूटने के दुख से ज्यादा सिमरन को इस बात की ज्यादा खुशी थी कि जिस के साथ उस ने जीवन जीने के सपने देखे थे, वह उस का हो गया.

सिमरन की शादी भले ही कोर्ट मैरिज के रूप में हुई थी लेकिन ससुराल में आने के बाद आमिर ने घर में एक बड़ी दावत रखी. शुरुआत के कुछ दिन आमिर के प्यार में कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला. लेकिन एक दो महीने बाद ही सिमरन का सामना जिंदगी की हकीकत से शुरू होने लगा. पिता के घर में लाड़प्यार से पली सिमरन को कभी किसी जरूरत के लिए किसी का मोहताज नहीं होना पड़ा था. उस ने हमेशा खुले मन से पैसा खर्च किया था. चूंकि आमिर ने तब तक नौकरी शुरू नहीं की थी, सो वह खुद ही मांबाप व भाइयों के खर्चे पर पल रहा था. इसलिए शादी के 2 महीने बीतने के बाद सिमरन को छोटेछोटे खर्चो के लिए दूसरों का मोहताज होना पड़ा.

वह जब भी आमिर से खर्चे के लिए पैसे मांगती तो वह टका सा जवाब दे देता कि जब तक वह कमाएगा नहीं, तब तक वह उसे कुछ नहीं दे सकता. अगर वह चाहती है कि उस के पास पैसा हो और उस की जिंदगी किसी पर निर्भर ना रहे तो उस के साथ मेरठ चले. जहां वह नौकरी कर के उस की हर खुशी पूरी करेगा. सिमरन के लिए गुरबत में जीने से अच्छा यही था कि वह उस के साथ मेरठ चली जाए. लिहाजा शादी के 2 महीने बाद ही सिमरन आमिर के साथ सरूरपुर चली गई. वहां आमिर ने हर्रा कस्बे में एक सस्ता सा किराए का मकान ले लिया. पास के जैनपुर गांव में अपने भाइयों की तरह उस ने भी एक पनीर बनाने वाले प्लांट में 10 हजार रुपए की पगार पर नौकरी शुरू कर दी.

आमिर चूंकि गाड़ी चलाने से ले कर पनीर की मार्केटिंग और प्लांट के दूसरे काम भी देखता था. लिहाजा इन कामों से भी उसे 4-5 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई हो जाती थी. किसी तरह सिमरन के साथ धीरेधीरे घरगृहस्थी  चलने लगी. जिस तेजी के साथ समय गुजरने लगा, उसी तेजी के साथ सिमरन के उपर चढ़ा आमिर के प्यार का नशा भी उतरने लगा. क्योंकि शुरुआत में तो सिमरन ने सोचा था कि चलो जिदंगी का सफर शुरू करने के लिए तंगी में भी गुजर बसर की जा सकती है. लेकिन एक सवा साल बीतने के बाद उसे लगा कि गुरबत में जिंदगी गुजारना मानों उस की नियति बन गई है. क्योंकि ना तो आमिर उसे अच्छे कपडे़ दिलाता था और ना ही उस की कोई ऐसी फरमाइश पूरी करता था जिस से उसे खुशी मिलती.

आमिर अब ये और ताने देने लगा था कि उस की जिंदगी ऐसी ही थी और आगे भी ऐसी ही रहेगी. मैं ने तेरे बाप से कोई दहेज नहीं लिया कि तेरी फरमाइशें पूरी करने के लिए चोरीडकैती करूं. जब कभी आमिर इस तरह के ताने देता तो सिमरन का मातापिता की लड़के की हैसियत को ले कर कही जाने वाली बातें याद आने लगती थीं. अब उसे समझ आने लगा था कि मातापिता बेटी के सुखद भविष्य के लिए लड़के की हैसियत और उस के काम को तवज्जो क्यों देते हैं. लेकिन सिमरन प्यार में अंधी हो कर आमिर से शादी का जो कदम उठा चुकी थी उस का पश्चाताप तो यही था कि हर हाल में भी उसे आमिर के साथ खुश रहना था. लेकिन इस दौरान एक अच्छी बात ये हुई कि कोर्ट मैरिज के कारण शुरू हुई मातापिता की नाराजगी खत्म हो गई. मातापिता और भाई व बहनें अब उस से अक्सर मोबाइल फोन पर बातें करने लगे थे.

कुछ दिन सिमरन को लगा कि परिवार ने संबधों को सुधारने के लिए जो पहल की है उसे उस पहल को आगे बढ़ाना चाहिए. लिहाजा वह भी एक दिन आमिर को साथ ले कर अपने मायके चली गई. लंबे समय बाद मांबाप से मिलन हुआ. कुछ शिकवेशिकायतें हुईं और फिर मांबाप भी बेटी को अपने शौहर के साथ खुश देख कर सारे गिलेशिकवे भूल गए. इस तरह सिमरन का अपने मातापिता के घर आनाजाना शुरू हो गया. इधर, आमिर इस बात से खुश था कि चलो अब सिमरन के अपने मायके वालों के साथ संबध सुधर गए है तो उसे भी उन की बड़ी हैसियत का फायदा मिलेगा. बेटी को खुश रखने के लिए आखिर वे कुछ ना कुछ आर्थिक मदद तो करेंगे ही. लेकिन एकदो बार मायके जाने के बाद भी जब सिमरन खाली हाथ लौटी तो आमिर के ससुराल वालों से मदद मिलने के सपने चकनाचूर हो गए.

इधर मायके से संबध जरूर सुधर गए थे, लेकिन सिमरन कभी उन से अपनी गुरबत भरी जिंदगी का जिक्र नहीं करती थी. क्योंकि उस का मानना था कि उस ने अपनी इच्छा से आमिर से शादी की थी. इसीलिए वो जिस हाल में भी उसे रखेगा वह रहेगी लेकिन परिवार को अपने दुखों के बारे में नहीं बताएगी. आमिर की भी उम्मीदें अधूरी, सिमरन की भी इधर जब सिमरन अपनी जरूरतों के लिए आमिर से पैसा मांगती तो वह उसे टका सा जवाब दे देता कि मेरे साथ तो तुम को रूखी रोटी ही नसीब होगी. अगर ऐशोआराम के लिए पैसा चाहिए तो अपने बाप से मंगा लो. जब भी आमिर इस तरह का ताना देता तो सिमरन का उस से झगड़ा हो जाता और वह उसे सुना देती कि उस ने अपने मातापिता की इच्छा के खिलाफ लड़झगड़ कर उस से शादी की है इसलिए उस की हर इच्छा और जरूरतों को पूरा करना भी उसी का फर्ज है.

ऐसे ही रोजमर्रा के झगड़ों में समय तेजी से बीतने लगा. लेकिन कोरोना और बीच में कुछ समय तक रहे लौकडाउन के कारण आमिर की कमाई में कमी आ गई थी. घर की आम जरूरतें भी ठीक से पूरी नहीं हो पाती थीं. उस पर जब सिमरन उस से कोई फरमाइश कर देती तो इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हो जाता था. आमिर को भी अब लगने लगा था कि एक बड़े घर की लड़की से शादी कर के उस ने बड़ी गलती कर दी है. उस ने तो सोचा था कि बडे़ घर में शादी कर के उसे ससुराल वालों का सहारा मिलेगा, लेकिन जब ऐसा कुछ नहीं हुआ तो उस की खींझ बढ़ने लगी. इस दौरान आमिर व सिमरन के बीच आर्थिंक तंगियों के कारण झगड़े ज्यादा होने लगे थे.

जब भी ऐसा होता तो आमिर नाराज हो कर जैनपुर में अपने सब से बडे़ भाई के पास चला जाता. पूरे परिवार को इस दौरान आर्थिक तंगी के कारण पतिपत्नी के बीच होने वाले झगड़ों की बात पता चल चुकी थी. आमिर अपने परिवार वालों के सामने सिमरन की गलत आदतों और ऊंची फरमाइशों की बात बता कर हमेशा उसे ही गलत ठहराता था. सब को यही लगता कि सिमरन बड़े घर की लड़की है, अपनी ऐश भरी फरमाइशें पूरी न होने के कारण आमिर से झगड़ा करती होगी. 29 नवंबर, 2020 को शाबरी बेगम अपने पति मोहम्मनद शरीफ व बेटे फिरोज को ले कर अचानक सरूरपुर थाने पहुंची. थानाप्रभारी अरविंद कुमार उस समय थाने पर ही अपने स्टाफ के साथ मीटिंग कर रहे थे.

शाबरी बेगम ने बताया कि उस की बेटी हर्रा कस्बे में अपने पति आमिर के साथ रहती है. लेकिन 26 नवंबर की सुबह से बेटी का फोन लगातार स्विच्ड औफ आ रहा है. वे लोग उस की खैरियत को ले कर परेशान हैं. इसलिए हकीकत जानने के लिए जब पति व बेटे के साथ उस के घर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला. ना ही बेटी का फोन मिल रहा है, ना ही उस की कोई खबर मिल रही है. ‘हो सकता है अपने हसबैंड के साथ ही गई हो या फोन में कोई परेशानी आ गई हो.’

इंसपेक्टर अरविंद कुमार ने सारी बात जानने के लिए दूसरे पहलू को सोचते हुए अपनी राय दी तो शाबरी बेगम ने कहा सर मेरी चिंता इस बात को ले कर है कि मेरी बेटी को उस का पति पिछले कुछ महीनों से लगातार परेशान कर रहा था. दोनों ने कोर्ट मैरिज की थी. वो बेटी को इस बात के लिए परेशान कर रहा था कि उसे कोई दहेज नहीं मिला था. इस के अलावा पिछले कुछ दिनों से वो हमारी बेटी से छुटकारा पा कर दूसरी शादी करने की बात भी करता था. जब मेरी बेटी से आखिरी बात हुई थी, उस दिन भी दोनों में झगड़ा हुआ था और आमिर ने सिमरन की पिटाई कर दी थी.

चूंकि शाबरी बेगम ने आमिर के खिलाफ अपनी बेटी को दहेज के लिए प्रताडि़त करने व हत्या की नियत से उस के अपहरण की आशंका जाहिर की थी, लिहाजा एसएचओ अरविंद कुमार ने सारी बात एसएसपी मेरठ अजय साहनी को बताई. उन्होंने एसपी देहात अवीनाश पांडे व सीओ सरधना आरपी शाही को थाने पहुंचने के लिए कहा. दरअसल दहेज उत्पीड़न के साथ अपहरण जैसे गंभीर मामलों में उच्चाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना कोई कार्रवाई करने से मामला बिगड़ सकता था. एसपी देहात व सीओ सरधना थाने पहुंचे तो उन से भी शाबरी बेगम ने बेटी सिमरन के प्रेम विवाह से ले कर पति की प्रताड़ना तक की पूरी कहानी सुना दी.

बात पहुंची पुलिस तक जिस तरह की शिकायत थी उस पर तत्काल काररवाई जरूरी थी. इसलिए  एसपी देहात के आदेश पर  इंसपेक्टपर अरविंद कुमार ने उसी दिन थाने पर धारा 498ए 364 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. चूंकि मामला दहेज उत्पीड़न का था लिहाजा जांच की जिम्मेदारी सीओ आरपी शाही को सौंपी गई. उन्होंने आगे की काररवाई के लिए इंसपेक्टर अरविंद कुमार के नेतृत्व में एसएसआई योगेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल सुरेश कुमार, कांस्टेबल आशु मलिक, सचिन सिरोही, महिला कांस्टेबल अनु और बबली की एक टीम गठित कर दी. पुलिस टीम ने जांच का काम हाथ में लेते ही सब से पहले आमिर के परिवार और मिलनेजुलने वाले लोगों की सूची तैयार कर उन से आमिर के बारे में पूछा.

लेकिन किसी को उस के बारे में कुछ पता नहीं था. वह 26 नवंबर से काम पर भी नहीं गया था. पुलिस ने आमिर के घर के पास लगे एक सीसीटीवी को चैक किया तो पता चला कि 25 व 26 नवंबर की रात में आमिर व 3 अन्य लोग काले रंग की एक बोलेरो गाड़ी में सिमरन को लाद कर कहीं ले गए थे. साफ था कि सिमरन के साथ कुछ गलत हो चुका था. सिमरन को क्या हुआ था इस की जानकारी आमिर के पकड़े जाने पर ही मिल सकती थी. लिहाजा पुलिस ने आमिर के फोन की सीडीआर निकलवाई, जिस से पता चला  कि वारदात के अगले दिन 27 नंवबर को उस की लोकेशन दिल्ली में थी. उस के बाद से उस की लोकेशन लगातार लखनऊ की आ रही थी. एसएसपी के आदेश पर उसी समय एक टीम को लखनऊ रवाना किया गया.

जहां से सर्विलांस टीम तथा स्थानीय पुलिस की मदद से पुलिस ने आमिर को 1 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम उसे सरूरपुर ले आई और पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ. पता चला कि उस ने सिमरन की हत्या कर दी थी. आमिर ने बताया कि उस की आय उतनी नहीं थी लेकिन सिमरन एक अच्छी जिंदगी जीने वाली लडकी थी और अपनी जरूरतों के लिए उस से कोई फरमाइश करती थी तो उसे गुस्सा आ जाता था. आमिर ने कई बार सिमरन से कहा था कि वह अपने परिवार से 2-4 लाख रुपए ले ले, जिस से कोई काम कर के उन की जिंदगी बदल सकती है.

लेकिन सिमरन ने साफ कह दिया था कि उस ने अपने परिवार से बागी हो कर शादी की थी. ऐसे में उसे कोई हक नहीं बनता कि वह अपने परिवार से पैसा मांग कर उन की नजर में अपने फैसले को गलत साबित करे. सिमरन खुद्दार लड़की थी लेकिन आमिर को इस से कोई मतलब नहीं था. जब सिमरन ने उस की बात नहीं मानी और उसकी फरमाइशें पूरी करने के चक्कर में आए दिन झगड़ा होने लगा तो आमिर का अपने बड़े भाई आदिल के घर आना जाना बढ़ गया. वहां भाई की जवान साली से उसका दिल लग गया. आदिल की साली सिमरन जैसी बहुत खूबसूरत तो नहीं थी लेकिन गरीब परिवार की होने के कारण खुद को हर तरह के हालात में ढाल सकती थी.

जैसेजैसे आमिर का आकर्षण भाई की साली की तरफ बढ़ता गया वैसेवैसे सिमरन से उस के झगडे़ बढ़ते चले गए. वैसे भी अब उसे अपनी ससुराल से किसी तरह की मदद की उम्मीद नहीं रह गई थी. इसलिए आमिर ने सोचा कि क्यों न जिंदगी भर होने वाली सिमरन की चिकचिक से छुटकारा पा कर भाई की साली से निकाह कर लिया जाए. इसीलिए जब भी लड़ाई होती तो आमिर सिमरन से कहता कि अगर उस के साथ नहीं रहना चाहती तो उस का पीछा छोड़ दे और अपने घर चली जाए, कम से कम वह दूसरा निकाह तो कर लेगा. 25 नंवबर को भी ऐसी ही बात पर झगड़ा हुआ था. दोनों के बीच मारपीट भी हुई थी. यह बात सिमरन ने फोन पर अपनी मां को भी बता दी थी.

उसी दिन आमिर ने मन बना लिया कि बस अब बहुत हुआ रोजरोज के झगड़ों से अच्छा है कि आज सिमरन को खत्म कर दिया जाए. उस रात जब वो शाम को घर पहुंचा तो पहले उस ने सुबह के झगड़े के लिए सिमरन से माफी मांगी, फिर दोनों ने साथ खाना खाया. बिस्तर पर पहुंचते ही आमिर ने सिमरन को इस तरह प्यार किया मानों आज के बाद वे फिर कभी दोबारा नहीं मिलेंगे. ऐसा ही हुआ भी. आधी रात को जब सिमरन गहरी नींद सो गई तो उस ने सोते समय सिमरन का गला दबा दिया. सिमरन एक क्षण को छटपटाई लेकिन आमिर की मजबूत पकड़ से निकल नहीं सकी और उस ने दम तोड़ दिया.

प्रेमी पति ने सिमरन को लगाया ठिकाने हत्या करने के बाद आमिर अपने पनीर के जैनपुर स्थित प्लांट पर पहुंचा. वहां से वह फैक्टरी की बोलेरो गाड़ी में प्लांट पर काम करने वाले तीन मजदूरों को यह कहकर अपने हर्रा स्थित घर बुला लाया कि उस की पत्नी की तबीयत खराब है उसे अस्पताल ले जाना है. वह उसे गाड़ी में डालने में मदद कर दें. जब मजदूर घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि आमिर की पत्नी तो मृत पड़ी है. मजदूरों ने ऐतराज किया तो आमिर ने उन्हें  नौकरी से निकलवाने की धमकी दी जिस से वे चुप हो गए, उन्होंने सोचा कि चलो बौडी को गाड़ी में ही तो रखवाना है. इस के बाद उस ने उन की मदद से सिमरन के शव को गाड़ी में डाला और वापस जैनपुर स्थित प्लांट के पास पीछे ले जा कर तिरपाल डाल कर गाडी खड़ी कर दी.

रात में करीब ढाई बजे आमिर ने प्लांट के पास एक खेत में गड्ढा खोदा और एक मजदूर की मदद से सिमरन के शव को गड्ढे में दबा दिया. राज खुलने के डर से आमिर ने अगली सुबह अपना मोबाइल स्विच औफ कर दिया और दिल्ली पहुंच गया. लेकिन वहां उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा तो सीधा लखनऊ निकल गया. इस दौरान आमिर ने परिवार में या किसी को सिमरन की हत्या की भनक नहीं लगने दी. पुलिस ने पूछताछ के बाद आमिर की निशानदेही पर जैनपुर के एक खेत में दबे सिमरन के शव को बरामद कर लिया. साथ में मौजूद सिमरन के परिजनों ने उस की शिनाख्त भी कर दी. जिस के बाद पुलिस ने सिमरन का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

आमिर से पूछताछ के बाद पुलिस ने सिमरन का शव ठिकाने लगाने में उस की मदद करने वाले उस की फैक्टरी के मजूदरों के नाम पते भी मिल गए, जिन की पहचान आरिफ निवासी नूरपुर, जिला अलीगढ़, नसीम निवासी शिकरावा जिला नूह मेवात हरियाणा तथा बबलू निवासी विनोली जिला बागपत के रूप में हुई. पुलिस ने उन्हें भी मुकदमे में आरोपी बना कर मामलें में हत्या की धारा 302 व सबूत खत्म करने की धारा 201 जोड़ दी. आमिर को सक्षम न्याधयालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया. पुलिस बाकी आरोपियों को गिरफ्तारी की कोशिश में लग गई.

कितनी हैरानी की बात है कि जिस युवक के लिए सिमरन ने अपने परिवार से बगावत की थी, उस का वहीं हम सफर जिंदगी भर साथ निभाना तो दूर उस की जिम्मेदारियां तक नहीं उठा सका और एक दूसरी औरत के आगोश में जाने के लिए उसे ही अपने रास्ते से हटा दिया. यह कहानी सिर्फ एक सिमरन की नहीं है. आज की पीढ़ी के नौजवान लड़केलड़कियां प्यार में अंधे हो कर साथ जीने मरने की कसमें खा कर परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी तो कर लेते हैं. लेकिन तजुर्बे की कमी के कारण ये भूल जाते है कि जिंदगी की कठिन राह में जिम्मेदारियों के बहुत से कांटे भी होते हैं, जो कदमकदम पर चुभते हैं.

इसीलिए मातापिता बेटियों की शादी से पहले दामाद का परिवार, उस की हैसियत और उस के नौकरी या कारोबार को परखते हैं. क्योंकि इन्हीं छोटी बातों को अनदेखा करने से एक दिन जिंदगी का बड़ा फसाना बन जाने की संभावना बनी रहती है.