Web Series Search: द नैना मर्डर केस

Web Series Search: इस वेब सीरीज की शुरुआत एक हाई प्रोफाइल कालेज स्टूडेंट नैना मराठे के मर्डर से होती है. इस की लाश जंगल से बरामद होती है. इस केस की इन्वैस्टिीगैशन एसीपी संयुक्ता दास को मिलती है, लेकिन उस की ही टीम में विपरीत स्वभाव का पुलिस अधिकारी जय कंवल भी होता है, दोनों के मतभेद से जांच भी प्रभावित होती है. इस परिस्थिति में क्या ये इस केस को खोल पाते हैं?

निर्माता: अमृता सेन, निर्देशक: रोहन सिप्पी, लेखक: राधिका आनंद और श्रेया करुणाकरम, ओटीटी: जियो हौटस्टारा

कलाकार: कोंकणा सेन शर्मा, सूर्या शर्मा, शिव पंडित, श्रद्धा दास, ध्रुव सहगल, गोविंद नामदेव, चांदसी कटारिया, नावेद असलम, सागर देशमुख

डायरेक्टर रोहन सिप्पी जिन्होंने ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘मिथ्या’, ‘दुरंगा’,  जैसी वेब सीरीज बनाई हैं. जियो हौटस्टार पर अपनी नई क्राइम थ्रिलर सीरीज ‘सर्च: द नैना मर्डर केस’ ले कर आए हैं. यह वेब सीरीज साल 2007 में आए मशहूर डैनिश शो ‘द किलिंग’ का इंडियन रीमेक है. यह सीरीज एक लड़की नैना के रेप और मर्डर की गुत्थी सुलझाने पर आधारित है. वेब सीरीज की कहानी एक काबिल और कामयाब एसीपी संयुक्ता दास (कोंकणा सेन शर्मा) के इर्दगिर्द घूमती है. संयुक्ता अपनी फेमिली लाइफ को बचाने की खातिर अपने करिअर की कुरबानी देने के लिए तैयार है. वह अहमदाबाद शिफ्ट होने की तैयारी कर रही होती है, लेकिन तभी एक कालेज स्टूडेंट नैना मराठे की हत्या की हो जाती है.

नए एसीपी जय कंवल (सूर्या शर्मा) के आ जाने के बावजूद इस केस को लीड करने की जिम्मेदारी संयुक्ता को मिलती है. जाहिर तौर पर इस से नया एसीपी जय संयुक्ता से चिढ़ा रहता है और उसे जबतब नीचा दिखाने की कोशिश करता है. नैना मर्डर की खोजबीन शुरू होती है तो शक की सूई नैना के दोस्तों, एक्स बौयफ्रेंड, टीचर से ले कर महिला हितों की पैरवी करने वाले यूथ नेता तुषार सुर्वे (शिव पंडित) तक पहुंचती है. पूरी वेब सीरीज देख कर भी यह पता नहीं चलता कि आखिर नैना का कातिल कौन है. शायद निर्मातानिर्देशक द्वारा इस सस्पेंस को अगले सीजन के लिए बचा कर रखा गया है. यही वजह है कि आखिरी एपिसोड देखने के बाद दर्शकों में एक खीझ भी पैदा होती है.

रोहन सिप्पी निर्देशित इस सीरीज की एक खासियत यह है कि क्राइम की के अपने करिअर और परिवार के बीच तालमेल बिठाने की जद्दोजहद, औरत को कम आंकने की पुरुष सत्तात्मक सोच और उस के मातहत काम करने में आड़े आने वाली मेल ईगो जैसे सामाजिक मुद्दों को बिना किसी भाषणबाजी के सहजता से उठाया गया है. सीरीज की कमजोरी है इस की छानबीन वाला पहलू, जो काफी धीमी गति से आगे बढ़ता है और दर्शकों को निराश भी करता है. हत्या और रेप केस के इनवैस्टिगेशन के तरीके में थ्रिलर वाला रोमांच नहीं है. वहीं राजनीति और नैना की फेमिली वाले सब प्लौट्स में भी ट्विस्ट की कमी खलती है.

एपिसोड नंबर 1                 

42 मिनट के पहले एपिसोड की शुरुआत  एक ऐसे खौफनाक सीन से  होती है, जिस में रात के अंधेरे में सुनसान जगह एक कार एक लड़की का पीछा कर रही है और लड़की छिपने का प्रयास करती है, मगर अगले ही पल कार की हेडलाइट उस के चेहरे पर पड़ती है और फिर चाकू के वार से लड़की ढेर हो जाती है. अगले सीन में नवी मुंबई में अपनी मम्मी के घर रह रही एसीपी संयुक्ता दास (कोंकणा सेन शर्मा) को फोन पर एक डैडबौडी मिलने की खबर मिलती है तो वह घर से निकल जाती है. बताई गई लोकेशन पर जब वह पहुंचती है तो वहां क्राइम ब्रांच के स्टाफ के साथी मिलते हैं, जिन्होंने संयुक्ता को सरप्राइज दे कर बर्थडे पार्टी में बुलाया था.

अगले सीन में कालेज में एक पौलिटिकल पार्टी के फंक्शन की तैयारियां चल रही हैं, जिस में रक्षा (श्रद्धा दास) पहुंच कर तुषार सुर्वे (शिव पंडित) के बारे में पूछताछ करती है. अगले सीन में संयुक्ता की मुलाकात यूपीएससी में 32वीं रैंक लाने वाले एसीपी जय कंवल (सूर्या शर्मा) से होती है, तभी डीसीपी राठी आ कर बताते हैं कि संयुक्ता क्राइम ब्रांच छोड़ कर साइबर ब्रांच अहमदाबाद जा रही है और आज उन का आखिरी दिन है. वह जय के साथ संयुक्ता को भेज कर एक मर्डर केस के इनवैस्टीगेशन करने के लिए भेजते हैं.

अगले सीन में डीसीपी राठी (नावेद असलम) संयुक्ता को नए घर में शिफ्ट होने के लिए गिफ्ट दे कर क्राइम ब्रांच छोड़ कर साइबर ब्रांच में न जाने को कहते हैं, जिस पर संयुक्ता मुसकरा कर कहती हैं कि उसे अहमदाबाद जाना ही होगा. इस एपिसोड में इतने जल्दीजल्दी सीन बदलते हैं कि दर्शकों के दिमाग का दही जम जाता है. इस के आगे उद्धव (सागर देशमुख) और उस की पत्नी पायल के बीच का नोंकझोंक का मजेदार सीन है. पत्नी वाशिंग मशीन को सुधारने के लिए प्लंबर बुलाने को कहती, तभी उद्धव कहता है कि वह बड़ेबड़े ट्रक की रिपेयरिंग कर लेता है, मगर पानी का पाइप खुल जाता है. इसी सीन में पता चलता है कि उन की एक बेटी नैना है, जो उस की दोस्त लावण्या के घर पढऩे गई है.

जय और संयुक्ता कार से केस के इनवैस्टीगेशन के लिए जा रहे हैं और उन के बीच की बातचीत से लगता है कि जय अपने आप को ओवरस्मार्ट समझता है. नई सोच पार्टी के तुषार आता है तो रक्षा फारेस्ट डिपार्टमेंट से मिले ‘सेव मैंगो कैंपेन’ के कागजात पर दस्तखत कराती है. वहीं तुषार 4 हफ्ते बाद होने वाले इलेक्शन कैंपेन के लिए रणनीति बनाता है. घटनास्थल पर स्नीफर डौग स्क्वायड के साथ संयुक्ता और जय पहुंचते हैं तो टीम के सहयोगी उन्हें बताते हैं कि एक हुडी (पैंट) और सेलफोन मिला है.

अगले सीन से पता चलता है कि रक्षा और तुषार के बीच प्यार भी है. कालेज के फंक्शन में युवा नेता तुषार और सीनियर लीडर प्रदीप भोसले की मुलाकात होती है, तब प्रदीप तुषार से इस चुनाव में उसे जिताने की बात करता है और प्रौमिस करता है कि अगले चुनाव में उसे जिताएगा. कालेज के फंक्शन की शुरुआत के पहले संयुक्ता और जय वहां पहुंचते हैं तो पता चलता है नैना मराठे सहित कालेज के 4 स्टूडेंट एब्सेंट हैं. पूछताछ करने की वजह से संयुक्ता रिक्वेस्ट कर के फंक्शन को किसी और दिन कराने को कहती है, जिसे तुषार मान लेता है.

संयुक्ता और जय नैना के घर जाते हैं तो उस की मम्मी बताती है कि नैना कल शाम को लावण्या के घर पढऩे के लिए गई थी और वहां रुक कर कल कालेज जाने वाली थी. उधर सुनील बताता है कि लावण्या और सावंत तो घर पर ही हैं. इधर नैना की मां उद्धव को फोन कर के बताती है कि पुलिस घर पर नैना के संबंध में पूछताछ करने आई है तो उद्धव ओजस के घर जा कर पता करता है. ओजस बताता है कि वह रात में ही घर चली गई थी. अगले सीन में संयुक्ता को फोन कर खदान पहुंचने को कहा जाता है. खदान से एक क्रेन की मदद से निकली कार की डिक्की में नैना की डैडबौडी मिलती है.

नैना की मम्मी पायल के बताए अनुसार तभी उद्धव भी वहां पहुंच जाता है और अपनी बेटी की लाश देख कर फूटफूट कर रोने लगता है. एसीपी संयुक्ता को कार के अंदर तुषार सर्वे की पार्टी का स्टीकर मिलता है. शुरुआत की कहानी में लोचा है. क्राइम ब्रांच पहले ही नैना के घर तहकीकात करने पहुंच जाती है, जबकि उस की डैडबौडी मिलने का सीन बाद का है. यह सब दर्शकों को हजम नहीं होता.

एपिसोड नंबर 2

दूसरा एपीसोड भी 42 मिनट का है, जिस की शुरुआत में नैना की डैडबौडी का पोस्टमार्टम करने वाला डौक्टर संयुक्ता को बताता है कि आंखों में शीशे के टुकड़े मिले हैं और लंग्स में पानी भरने से मौत हुई है. नैना के मम्मीपापा वहां मौजूद हैं, जिन्हें जय भरोसा दिलाता है कि कातिल को छोड़ेंगे नहीं. अगले सीन में डीसीपी राठी संयुक्ता दास को अहमदाबाद जाने के बजाय 48 घंटे का वक्त इस केस के लिए देने को कहते हैं. इस के बाद तुषार सुर्वे को रक्षा बताती है कि उन का वीमेन सेफ्टी कैंपेन का डाटा लीक हो गया है और प्रदीप भोसले उसे आगे बढ़ा कर राजनैतिक फायदा उठाना चाहता है,

तभी संयुक्ता और जय वहां पहुंच कर उन को एक कार की फोटो दिखा कर कहते हैं कि इस कार में आप की पार्टी का स्टीकर लगा था. इस पर साहिल बताता है कि यह कार उन के इलेक्शन कैंपेन में इस्तेमाल हो रही थी. जय जब तल्ख लहजे में तुषार से पूछताछ करता है तो रक्षा उसे धमकाते हुए कहती है कि उस के एक फोन पर उसे हटाया जा सकता है. संयुक्ता उसे ट्रांसपोर्ट मैनेजर से बात करने के बहाने वहां से बाहर भेजती है और तुषार को जांच में सहयोग करने को कहती है. जय को ट्रांसपोर्ट मैनेजर उस कार के ड्राइवर मुकेश की फोटो और नंबर दे देता है.

ड्राइवर मुकेश की तलाश में संयुक्ता और जय उस के अड्ïडे पर बेलापुर जाते हैं. रात के वक्त एक पुरानी बिल्डिंग में जय नीचे और संयुक्ता ऊपरी मंजिल पर उस की तलाश करते हैं, तभी मुकेश कांच की टूटी हुई बोतल से संयुक्ता पर पीछे से हमले करने की कोशिश करता है, जिस में संयुक्ता बालबाल बच जाती है. दोनों में हाथापाई चलती है और उसी दौरान संयुक्ता के पूछने पर मुकेश बताता है कि उस रात वह गाड़ी और चाबी छोड़ कर हास्पिटल आ गया था. संयुक्ता मोबाइल में नैना की फोटो दिखा कर पूछती है कि इसे कालेज में देखा था तो वह बताता है कि उस के साथ खोपड़ी भी था. उसी समय जय आ कर मुकेश पर गोली चला देता है. वह उठ कर पीछे की तरफ कदम बढ़ाते हुए भागने की कोशिश में अगले ही पल छत से नीचे गिर जाता है.

इस के बाद दूसरे दिन सुबह घर पर संयुक्ता की मां उसे उलाहना देती है कि वह दफ्तर के काम में इतनी व्यस्त रहती है कि उसे पति भीष्म और बेटी माही का खयाल ही नहीं है. नैना के मर्डर की ब्रेकिंग न्यूज चलने के बाद तुषार सुर्वे और रक्षा संयुक्ता से मिल कर कहते हैं कि उन्हें भी मीडिया को स्टेटमेंट देना होगा, इस पर इनवैस्टीगेशन का हवाला दे कर संयुक्ता उन्हें रोकती है. जय नैना के सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ फोटो दिखाते हुए संयुक्ता से कहता है कि नैना ओजस अधिकारी से प्रेम करती थी, बाद में ब्रेकअप हो गया और नैना ने जब उसे इग्नोर किया तो जरूर उस दिलजले ने नैना का काम तमाम कर दिया होगा.

उधर से भीष्म फोन कर के नाराजगी दिखाते हुए कहता है कि ‘तुम्हारे अहमदाबाद न आने से माही के स्कूल का ओरिएंटेशन मिस हो गया, तुम न आ पा रही तो गृह प्रवेश का प्रोग्राम कैंसल कर दे रहा हूं.’

इस पर संयुक्ता कहती है कि उस ने आने के लिए परसों की फ्लाइट टिकट बुक कर ली है. तुषार और रक्षा जाह्नवी के घर जा कर उस की पार्टी से अलायंस का प्रपोजल रखते हैं. जाह्नवी अपने मैडिकल कालेज को लाइसेंस देने की शर्त पर अलायंस के लिए तैयार हो जाती है. जय कालेज के रंधीर से कालेज फेस्ट के फोटो ले कर संयुक्ता को दिखाता है. ओजस और लावण्या से भी पूछताछ होती है.

पूछताछ में पता चलता है कि ओजस कालेज में ड्रग्स सप्लाई करता था. उस दिन मजे लेने के लिए ड्राइवर मुकेश को ड्रग्स फूंकने को दिया और वह वोमेटिंग करने लगा और फिर वहां से गायब हो गया. पूछताछ के दौरान ओजस के पेरेंट्स आ कर आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि उन के लायर की उपस्थिति में ही पूछताछ होगी. इस पर संयुक्ता उन्हें क्राइम ब्रांच आने को कहती हैं, लेकिन जय ओजस का सेलफोन ले लेता है. जय को कालेज के वाशरूम में एक लड़का दिखता है, जिस के हाथ में खोपड़ी वाला टैटू बना हुआ है. ओजस के मोबाइल में मिले फोटो में भी वही लड़का दिखता है.

अगले सीन में रात के अंधेरे में जय और संयुक्ता कालेज में अलगअलग जगहों पर तलाशी करते हैं, जहां नैना का आईडी कार्ड मिलता है और एक गद्दे पर खून के निशान के साथ दीवारों पर लिखी इबारत मोबाइल में मिली फोटो से मेल खाती है. नैना के पेरेंट्स टीवी चैनल पर न्यूज में सुनते हैं कि तुषार सुर्वे की कार में नैना का मर्डर और रेप हुआ है. इलेक्शन कैंपेन, पार्टियों के साथ अलायंस जैसे सीन जिस तरह से फिल्माए गए हैं, वह कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं. वेब सीरीज में इनवैस्टीगेशन जिस तरह से दिखाई गई है, वह दर्शकों को उबाऊ लगता है.

एपिसोड नंबर 3

37 मिनट के तीसरे एपिसोड की शुरुआत होती है कालेज की उसी बेसमेंट में बने रेस्टरूम से जहां फोरैंसिक एक्सपर्ट गद्दों पर मिले खून के निशान के नमूने ले रहे हैं. जय संयुक्ता से कहता है कि उसे गार्ड ने बताया है कि यह स्थान कालेज के स्वीपरों के रुकने के लिए था, जिसे स्टूडेंट्स ने अपना पर्सनल रेस्टरूम बना लिया था. वह आगे कहता है कि आरव और ओजस उस रात कहां थे, वे नहीं बता पा रहे, इसलिए मेरी मानो तो कांड यहीं पर हुआ है. उद्धव के घर एक छोटा लड़का तनु के बर्थडे पर केक बना रहा है. उद्धव उसे गोद में ले कर बर्थडे सौंग गाने को कहता है, तभी पायल आ कर बच्चे को अंदर भेज  कर कहती है कि मुझे पुलिस की काररवाई पर भरोसा नहीं है.

अगले सीन में तुषार और साहिल न्यूज देखते हैं, जिस में प्रदीप भोसले मीडिया से कह रहा है कि तुषार जैसा अपराधी चुनाव में खड़ा भी नहीं होना चाहिए. तभी रक्षा आ कर बैड न्यूज सुनाती है कि जाह्नवी और प्रदीप भोसले की पार्टी का अलायंस हो गया है. कैंपेन मैनेजर साहिल तुषार से कहता है कि सोशल मीडिया पर इंटरव्यू कर के सच्चाई पब्लिक को बताएंगे, तभी तुषार सुर्वे मुर्दाबाद के नारे लगाती भीड़ उन के दफ्तर में घुस आती है और तुषार के चेहरे पर कालिख पोत देती है.

डीसीपी राठी न्यूज लीक होने पर संयुक्ता और जय को फटकार लगाते हुए कहता है कि मीडिया का टारगेट पुलिस न बने. रक्षा साहिल पर शक करती है, मगर तुषार कहता है साहिल उस के बचपन का दोस्त है और मुझे उस पर पूरा भरोसा है. उस के बाद तुषार धीरेन को फोन कर के कुछ पता लगाने की बात करता है. मीडिया के सवाल पूछने पर डीसीपी राठी बताते हैं कि अपराधी को जल्द पकड़ लिया जाएगा और केस सौल्व होने तक एसीपी क्राइम ब्रांच छोड़ कर नहीं जाएंगी. तीसरे दिन तुषार सोशल मीडिया पर लाइव आ कर नैना की हत्या को दुखद बताते हुए महिलाओं की सुरक्षा पर बात करता है और पब्लिक से कमेंट करने को कहता है.

उधर संयुक्ता को फोन पर भीष्म कहता है कि मुझे न्यूज से पता चला कि तुम नहीं आ रही. वह गुस्से में कहता है कि तुम्हें हसबैंड की बजाए एक कांस्टेबल की जरूरत है. क्राइम ब्रांच में संयुक्ता और जय नैना के पेरेंट्स से पूछताछ करते हैं, तब पता चलता है कि उस की मम्मी को नैना की लाइफ के बारे में कुछ भी पता नहीं है, मगर पिता उद्धव बताते हैं कि ओजस उस का बौयफ्रेंड था. तुषार एक व्यक्ति को पैसे दे कर यह जानकारी जुटा लेता है कि उस के औफिस से साहिल के अकाउंट से जानकारी भोसले को भेजी गई है. लावण्या और आरव से संयुक्ता और जय सघन पूछताछ करते हैं, जिस में उन के बयान संदेहास्पद लगते हैं.

दोनों यह स्वीकार करते हैं कि फेस्ट के दौरान कालेज में बेसमेंट में वे स्मोकिंग के लिए गए थे. संयुक्ता आरव को बताती है कि नैना की लास्ट फोटो बेसमेंट में उस के साथ मिली है. जय फिर से संयुक्ता को अपनी कहानी सुना कर कहता है कि ओजस और आरव ने ही नैना का रेप कर के मर्डर किया है और गाड़ी में लाश ले कर गाड़ी को पानी में फेंक दिया होगा. मगर संयुक्ता इसे नकार कर कहती है कि नैना फेस्ट में जिस कास्ट्यूम में थी, लाश अलग कास्ट्यूम में मिलती है और ओजस के साथ ब्रेकअप के बाद वह बेसमेंट में उस के साथ क्यों जाएगी. अगले सीन में प्रोफेसर रंधीर नैना के घर पहुंच कर बताते हैं कि नैना और मेरे बीच ऐसी पुस्तकों का आदानप्रदान होता था, जो अभी तक किसी ने पहले पढ़ी न हो. प्रोफेसर एक पुस्तक नैना की मां को देते हैं.

यह सीन भी यहां दर्शकों को बोर करता है. सीनियर अफसर संयुक्ता को नैना की रिपोर्ट दिखाते हैं, जिस में लिखा है कि उस ने किसी तरह का ड्रग्स या अल्कोहल नहीं लिया था. वह जय की थ्योरी पर नाराजगी जताते हुए संयुक्ता को बेस्ट औफीसर मानते हैं. इधर ओजस के लायर की उपस्थिति में जब जय सख्ती से पूछताछ करता है तो लायर आब्जेक्शन करता है. संयुक्ता को ओजस पूछताछ के दौरान बताता है कि नैना कई दिनों से अजीब बिहेव कर रही थी और फेस्ट की रात भी किसी से फोन पर बात कर रही थी, इस वजह से मेरा उस से झगड़ा हुआ था. ओजस के ज्यादा शराब पीने की वजह से उस की कार कालेज में रात भर खड़ी रहती है, मगर 3 बजे रात को आरव की गाड़ी ओजस के घर के सामने सीसीटीवी कैमरे में दिखती है. इस सवाल पर वह कुछ बताने की बजाय बुरी तरह रोने लगता है.

तभी उस का लायर उसे ले कर चला जाता है. इस के बाद इनवैस्टीगेशन के तौरतरीकों को ले कर संयुक्ता और जय में तीखी झड़प होती है. जय एक पार्टी में जाता है, वहां कालेज के 2 लड़कों से दोस्ती बढ़ा कर उन से नैना के बारे में तहकीकात करता है तो उसे नैना के साथ संबंध का एक वीडियो मिलता है. इधर रक्षा और तुषार साहिल पर प्रदीप भोसले के लिए काम करने का आरोप लगाते हैं. संयुक्ता अपनी बेटी माही के लैपटाप में उस की नंगी तसवीरें देख कर उसे डांटती है तो वह भी मम्मी को उस की केयर न करने की शिकायत करती है. दोनों के बीच कहासुनी चल रही होती है, उसी दौरान जय फोन कर के उसे औफिस बुला कर नैना का वह वीडियो दिखाता है. जय को पार्टी में अनजान लड़के जिस तरह नैना के सीक्रेट बता देते हैं, यह समझ से परे है.

एपिसोड नंबर 4

33 मिनट के चौथे एपिसोड की शुरुआत में बताया गया है कि रात के समय संयुक्ता जय के साथ औफिस में नैना के उस वीडियो को देखते हैं और कब चौथे दिन की सुबह हो जाती है, उन्हें पता भी नहीं चलता. इधर नैना की मम्मी पायल मीडिया के सामने इंसाफ की मांग करती है. रक्षा तुषार के साथ जाह्नवी से मिल कर उस के ब्रिटिश आइसलैंड में करोड़ों रुपए होने की जानकारी का हवाला दे कर अपनी पार्टी के साथ अलायंस करने पर मजबूर कर देती हैं. फोरैंसिक रिपोर्ट में पता चलता है कि स्टोर रूम में मिले ब्लड सैंपल का ग्रुप-ओ पौजिटिव है, जबकि नैना का ब्लड ग्रुप-बी पौजिटिव था. रिपोर्ट में यह भी पता चलता है कि नैना के बालों से मिले कांच के टुकड़े स्टोररूम में मिले कांच के टुकड़ों से मैच नहीं कर रहे.

इस से संयुक्ता समझ जाती है कि डीपफेक की मदद से नैना का चेहरा जोड़ कर वह वीडियो बनाया गया है. संयुक्ता अब ओ पौजिटिव ग्रुप वाली लावण्या से सख्ती से पूछताछ करती है तो वह बताती है कि उस रात ओजस और आरव के साथ बेसमेंट से नैना नाराज हो कर जाने लगी तो मैं ने उसे समझाया, मगर उस ने कहा कि ओजस अच्छा लड़का नहीं है. उस ने नैना के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी, इसलिए उस से ब्रेकअप हुआ था. लावण्या ओजस को चाहती थी. नैना के जाने के बाद ओजस उस के साथ स्टोररूम में इंटीमेट होना चाह रहा था, तभी लावण्या को दिखाई देता है कि  आरव रिकौर्डिंग कर रहा है.

वह कांच की बाटल फोड़ कर अपने हाथ में मार लेती है. तब आरव ने प्रौमिस किया था कि वीडियो डिलिट कर देगा, मगर फिर डीपफेक ऐप से एडिट कर के उसे वायरल कर दिया. लावण्या ने नैना के बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि वह कालेज भी कम आती थी और उस के घर भी लेट नाइट आती थी. उस के पास दूसरा सेलफोन भी था, जिस पर किसी के कौल आते थे. लावण्या एक जर्नी टिकट भी संयुक्ता को देती है, जो उस जगह का था, जहां अकसर नैना जाती थी. कहानी में नैना, लावण्या, ओजस, आरव जैसे किरदारों को रहस्यमयी तरीकों से दिखाया गया है, जिस में दर्शक उन के बारे में कोई राय कायम नहीं कर पाते.

उधर जय ओजस को कार में बिठा कर खदान के पास ले जा कर टौर्चर कर के उस से सच उगलवाना चाहता है, मगर सीनियर अफसर का फोन आ जाता है. दफ्तर में उसे डांटते हुए डीसीपी राठी कहता है कि ओजस का बाप सीएम का सर्जन है. वह चेतावनी देते हुए केयरफुल तरीके से केस सौल्व करने का निर्देश देता है. अगले सीन में जय और संयुक्ता की इस बात को ले कर झड़प होती है कि वे एकदूसरे को कुछ बताते नहीं है. संयुक्ता अपनी गलती मान लेती है और जय को कौफी दे कर बताती है कि उस रात क्या हुआ था. उस रात नैना अपने साथ कपड़े ले कर कहीं जाने वाली थी. उस का फोन 8 बजे डिस्चार्ज हुआ, लेकिन उस ने चार्ज नहीं किया, क्योंकि उस के पास दूसरा फोन था.

साथ ही वह किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने जा रही थी जो कालेज फ्रेंड से अलग कोई उम्रदराज या शादीशुदा व्यक्ति था. उसी समय जय एक बैग निकाल कर देते हुए बताता है कि यह बैग शिंदे को नैना के कबर्ड से मिला है. यह बैग जरूर उस आदमी ने दिया होगा, जिस से मिलने नैना जाती थी. नैना के पेरेंट्स को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. बातचीत के दौरान जय कहता है कि जिन के मांबाप स्ट्रिक्ट रहते हैं, उन के बच्चे झूठे होते हैं. इस पर संयुक्ता अपनी बेटी को याद कर जय से बोल कर कुछ समय के लिए घर चली जाती है. इधर पायल के पिता उद्धव को भलाबुरा कह कर इस का जिम्मेदार उसे ही ठहराते हैं. उधर संयुक्ता का बेटी से झगड़ा होता है तो बेटी उस पर तुषार सुर्वे को प्रोटेक्ट करने का आरोप लगाती है.

इसी दौरान वह बेटी का मोबाइल ले कर तसवीरों के बारे में पूछती है तो बेटी दरवाजा बंद कर लेती है. संयुक्ता उस का डाटा चैक करना चाहती है, मगर पासवर्ड बदल जाने से नहीं देख पाती. वह स्टाफ के केतन को बिना पासवर्ड बताए स्क्रीन अनलौक करने के बारे में पूछती है. इधर नैना के घर से उस की अर्थी उठ रही है. अगले सीन में जय संयुक्ता को ले कर जाता है, वहां किसी ऐप के बारे में बताता है कि कालेज स्टूडेंट इस ऐप के एडिक्ट हैं और नैना के मोबाइल में भी यह ऐप थी, जिस में कालेज प्रोफेसर रंधीर से नैना की प्राइवेट चैट मिली है. जय बताता है कि प्रोफेसर रंधीर रंगीनमिजाज आदमी है, पहले भी एक कालेज में इस का स्टूडेंट के साथ अफेयर रहा था. जब दोनों रंधीर के घर जाते हैं तो उस की वाइफ सुप्रिया से पूछताछ करते हैं.

संयुक्ता वाशरूम जाने के बहाने अंदर तहकीकात करती है, जहां उसे प्लास्टिक का एक ऐसा बैंड मिलता है, जो नैना की बौडी में बंधा हुआ था. यहीं पता चलता है कि रंधीर का तुषार सुर्वे से भी संबंध है. इधर उद्धव को जब रंधीर के नैना से कनेक्शन का पता चलता है तो वह भी कुछ करने की योजना बनाता है.

एपिसोड नंबर 5

33 मिनट के पांचवें एपिसोड की शुरुआत होती है प्रोफेसर रंधीर झा की गिरफ्तारी से. उन्हें नैना के मर्डर के आरोप में क्राइम ब्रांच लाया जाता है, जहां पर उन से पूछताछ होती है. उस के पहले उन की पत्नी सुप्रिया, गार्ड, मेड और पड़ोसियों के बयान के आधार पर संयुक्ता और जय का शक रंधीर पर गहरा जाता है. रंधीर बताता है कि उस रात नैना उस के घर आई तो थी, मगर घर के बाहर से ही मुझे बुक दे कर और बाहर पार्किंग में साइकिल छोड़ कर निकल गई थी. रंधीर भरोसे के साथ कहता है कि उस ने नैना को न कोई फोन दिया है और न ही उस के साथ कोई ऐसा रिश्ता है. तभी संयुक्ता की मां फोन पर माही के घर पर न होने की जानकारी देती है.

संयुक्ता माही के बौयफ्रेंड के आईपी एड्रेस को ट्रेस कर माही तक पहुंच जाती है. रास्ते में कार में दोनों की बहस होती है, जिस में माही उसे सेल्फिश कहती है. रास्ते में झड़प के दौरान माही भरोसे से कहती है कि मैं गलत नहीं हूं. उस के बाद घर में जब माही सो रही होती है, तब संयुक्ता ‘आई ट्रस्ट यू ऐंड आई लव यू’ लिखी एक परची लगा कर मोबाइल उस की टेबल पर रख कर वापस कर देती है. इधर संयुक्ता के साथ पूरी टीम रंधीर के घर की तलाशी ले कर सबूत इकट्ठा करने में लगी है.

इसी दौरान फर्श पर खून के निशान मिलते हैं, उसी समय डीसीपी राठी उन्हें औफिस बुला लेता है. पार्टी अलायंस की मीटिंग में रंधीर झा को ले कर जाह्नïवी द्वारा आपत्ति की जाती है और टीवी चैनल की डिबेट में भी प्रदीप भोसले तुषार पर वीमेन सेफ्टी का दिखावा करने का आरोप लगा कर उसे भी दोषी मानता है. क्राइम ब्रांच के दफ्तर में संयुक्ता की आंखों के सामने रंधीर को छोड़ दिया जाता है. डीसीपी उसे बगल के कमरे की तरफ (जहां जय एक लड़का और लड़की से पूछताछ कर रहा है) इशारा करते हुए कहते हैं कि रंधीर के घर मिला खून किसी और का है.

संयुक्ता उन के पास जाती है तो साक्षी और अमृत नाम के कपल उस रात की कहानी बताने लगते हैं. अमृत और साक्षी एकदूसरे को प्रेम करते थे, मगर अलगअलग जातियों के होने के बावजूद उन के घर वाले राजी नहीं थे. शादी करने के बाद साक्षी को उस की बहन ने बताया कि उस के बाबा उसे खोज रहे हैं और उसे वे बहुत मारेंगे. इस वजह से दोनों हेल्प के लिए रंधीर सर के पास पहुंचते हैं, मगर डर के मारे साक्षी अपना हाथ काट लेती है. खून बहता देख रंधीर उन्हें हौस्पिटल ले जाता है. यह सीन बनावटी सा ज्यादा लगता है. कहानी के हिसाब से कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाया है.

डीसीपी राठी इनवैस्टीगेशन की इस तरह के तरीके पर सवाल उठाते हुए संयुक्ता को इस केस को छोड़ कर अहमदाबाद जाने को कहते हैं. जाह्नवी तुषार को कहती है कि रंधीर झा की वजह से उस की पार्टी के 17 एमएलए पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टी बना रहे हैं. इस से तुम्हारे करिअर पर गलत प्रभाव पड़ेगा, तभी साहिल आ कर बताता है कि रंधीर को क्राइम ब्रांच ने क्लीन चिट दे दी है. संयुक्ता केस छोड़ कर जाने को होती है, तभी जय उसे हाफ डे का बोल कर फिर से जांच शुरू करने को कहता है. जय और संयुक्ता अब दूसरे एंगल से फिर एक पेट्रोल पंप के फुटेज देखते हैं, तभी संयुक्ता फोन आने की वजह से घर आ जाती है.

घर पर भीष्म मुंबई आ जाता है और संयुक्ता को कल की फ्लाइट से अहमदाबाद चलने को कहता है तो संयुक्ता भी राजी हो जाती है. इधर जय पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज से मिले इनपुट को संयुक्ता को भेजता है, जिस में पता चलता है कि उस कैंपेन वाली कार को ले कर उद्धव का पार्टनर विनायक ले कर आया था.

एपिसोड नंबर 6

30 मिनट के आखिरी एपिसोड की शुरुआत में जय और संयुक्ता विनायक मोरे के घर तलाशी के लिए पहुंचते हैं, जहां उन्हें नैना के फोटोग्राफ और लव लेटर मिलता है. संयुक्ता को नैना की मां बताती है कि उद्धव विनायक को भाई की तरह समझता था. विनायक मूवर्स ऐंड पैकर्स के इस काम को और आगे बढ़ाने में नंबर 2 का पैसा लगाना चाहता था, वह उद्धव को मंजूर नहीं था. जय संयुक्ता को विनायक की बैकग्राउंड हिस्ट्री बताता है कि उद्धव और विनायक गुंडागर्दी करते थे. संयुक्ता की मम्मी फोन कर के उस से भीष्म के साथ अहमदाबाद जाने के लिए कहती है. संयुक्ता केतन से विनायक की चैट हिस्ट्री चैक करने को कहती है, तभी भीष्म फोन कर के संयुक्ता को 9 बजे एयरपोर्ट के लिए निकलने को कहता है.

संयुक्ता काम का हवाला दे कर उस से कहती है कि वह सीधे एयरपोर्ट पहुंच जाएगी. रात को औफिस के बाहर तुषार संयुक्ता से मिल कर आश्वस्त होना चाहता कि अब तो कोई दिक्कत उस की पार्टी को नहीं आएगी. जय फिर संयुक्ता को एक कहानी गढ़ कर सुनाता है कि नैना का मर्डर विनायक ने ही किया, मगर संयुक्ता बिना प्रूफ के इसे मानने को तैयार नहीं होती. संयुक्ता जय के पूछने पर बताती है कि उस की एक गलती की वजह से 3 साल पहले एक निरपराध की जान चली गई थी, इस वजह से वह बिना गोली के गन रख कर काम करती है. वह समाज के उस कल्चर को भी दोषी मानती है कि समाज लड़कियों को सुरक्षित रहने को कहता है, मगर लड़कों से कुछ नहीं कहता.

संयुक्ता को नैना के मोबाइल में एक ऐप के जरिए की गई काल हिस्ट्री मिलती है, जिस में देर रात उस को एक आईडी से काल किए जाते थे. छठवें दिन की सुबह रक्षा ग्राउंड में एक्सरसाइज कर रही है और साहिल वहां पहुंच कर रक्षा को मनाने की कोशिश करता है. संयुक्ता से केतन आईपी एड्रेस न मिलने की बात कहता है तो संयुक्ता उसे कालेज के सीसीटीवी फुटेज फिर से चैक करने को कहती है, तभी डीसीपी उस के पास आ कर कहते हैं कि तुम्हारी फ्लाइट तो मिस नहीं हो जाएगी? इस पर संयुक्ता कहती है कि प्रूफ ढूंढने की कोशिश कर रही हूं. इधर उद्धव गोडाउन में विनायक को बांध कर उसे मारने दौड़ता है, मगर विनायक उसे लात मार कर गिरा देता और भागने की कोशिश करता है.

जैसे ही वह अपना मोबाइल औन करता है, जय उस की लोकेशन ट्रेस कर उस के पीछे जाता है. डीसीपी संयुक्ता को अहमदाबाद जाने को कहते हैं. इधर भीष्म और माही एयरपोर्ट पर बैठे हैं, तभी संयुक्ता भी आ जाती है. फ्लाइट की अनाउंसमेंट होते ही वे उठ कर जाने लगते हैं, तभी केतन फोन कर के बताता है कि विनायक की काल डिटेल्स में विनायक पेट्रोल पंप पर तो गया था, मगर कालेज और खदान पर नहीं गया था. वह जय को फोन करने को बोलती है. जय विनायक की लोकेशन पर पहुंचता है.  वहां उद्धव और विनायक में हाथापाई होती है. विनायक उद्धव को मारने से पहले बताता है कि वह नैना को चाहता था, मगर नैना ने मना किया तो वह पीछे हट गया था.

जैसे ही विनायक उद्धव को मारने को होता है, तभी जय उस पर गोली चला देता है. मरने से पहले विनायक कहता है कि उस ने नैना का खून नहीं किया है. इधर भीष्म और माही के साथ संयुक्ता फ्लाइट में चढऩे जाने ही वाली थी कि रक्षा फोन कर के बताती है कि उस ने झूठ बोला था, वह मर्डर वाली रात तुषार के साथ नहीं थी. उस रात नैना हमारी पार्टी के डिनर पर आई थी और तुषार से मिली थी. रक्षा यह भी बताती है कि क्राइम सेल का कोई आदमी तुषार की मदद कर रहा है. संयुक्ता के प्रूफ मांगने पर रक्षा उसे कुछ भेज कर मोबाइल चैक करने को कहती है. फ्लाइट की फाइनल कौल होते ही भीष्म संयुक्ता को बुलाता है, मगर वह बस देखती रह जाती है और विमान उड़ जाता है. यहां भी कुछ अधूरापन सा लगता है कि कैसे भीष्म और माही फ्लाइट में चले जाते हैं और संयुक्ता रह जाती है.

संयुक्ता दोबारा फिर से क्राइम ब्रांच औफिस आ जाती है और एक बार फिर से नैना के मर्डर की तहकीकात में जुट जाती है. रक्षा द्वारा भेजे गए वीडियो में नैना तुषार से मिलते हुए दिखाई देती है. उद्धव पुलिस हिरासत में संयुक्ता के सामने एक बार फिर इस मर्डर केस के किरदार एकएक कर के सामने आने लगते हैं. आखिरी एपिसोड की एंडिंग दर्शकों को निराश करती है. 6 एपिसोड के साढ़े 3 घंटे सिर खपाने के बाद दर्शकों को कुछ खास हासिल नहीं होता. इतनी मशक्कत के बाद भी कातिल का पता न लगना यह साबित करता है कि लेखकों ने यह सस्पेंस अगले सीजन के लिए बचा कर रखा है.

कोंकणा सेन शर्मा

बंगाली परिवार में 3 दिसंबर, 1979 को जन्म लेने वाली कोंकणा विज्ञान लेखक और पत्रकार मुकुल शर्मा, अभिनेत्री और फिल्म निर्देशक अपर्णा सेन की बेटी है. कोंकणा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई मौडर्न हाईस्कूल फौर गल्र्स, कलकत्ता में की है. कोंकणा ने अपनी स्नातक की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेन कालेज से पूरी की है. कोंकणा की शादी रणवीर शौरी से हुई है, उस के एक बेटा भी है जिस का नाम हारुन सेन शौरी है.

कोंकणा ने अपने करिअर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म ‘इंदिरा’ से की थी. साल 2000 में उस ने फिल्म अभिनेत्री के रूप में बंगाली फिल्म ‘एक जे आछे कन्या’ से शुरुआत की, जिस में उस ने एक नकारात्मक चरित्र निभाया था. इस के बाद वह रितुपर्णो घोष की बहुप्रशंसित फिल्म तितली में मिथुन चक्रवर्ती और अपनी मम्मी अपर्णा सेन के अपोजिट नजर आई थी. कोंकणा को इंडस्ट्री में पहचान फिल्म ‘मिस्टर ऐंड मिसेज अय्यर’ में मीनाक्षी अय्यर के रूप में मिली, उसे इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया. इस फिल्म का निर्देशन उन की मम्मी अपर्णा सेन के द्वारा किया गया था. इस फिल्म के बाद कोंकणा फिल्म जगत की जानीमानी अभिनेत्री बन गई थी.

इस के बाद वह मधुर भंडारकर की फिल्म ‘पेज 3’ में एक पत्रकार के किरदार में नजर आई. इस फिल्म में उस की बेहतरीन अदाकारी को देख आलोचक भी उस से बिना प्रभावित हुए बिना रह नहीं सके. यह फिल्म उसे दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने में कामयाब रही. साल 2006 में फिल्म ‘ओमकारा’ में एक गरीब अधेड़ महिला का किरदार निभा कर कोंकणा ने एक बार फिर अपने प्रशंसकों को काफी प्रभावित किया था. उसे इस फिल्म के फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था. इस के बाद कोंकणा ने रितुपर्णो घोष के बंगाली कला फिल्म ‘दोसर’ में अभिनय किया, जिस का पहला प्रदर्शन कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में किया गया.

इस फिल्म के लिए उसे महिंद्रा इंडो-अमेरिकन आर्ट काउंसिल (रूढ्ढ्र्रष्ट) फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस के बाद वह फिर मधुर भंडारकर की एक फिल्म ‘ट्रैफिक सिगनल’ में दिखाई दी. इस फिल्म में वह एक वेश्या के किरदार में नजर आई थी. 2007 में आई उन की दूसरी फिल्म अनुराग बासु की ‘लाइफ इन ए… मेट्रो’ थी, यह फिल्म बौक्स औफिस पर अच्छीखासी कमाई करने में कामयाब रही थी.  इस फिल्म में मुंबई के अलगअलग लोगों के जीवन का चित्रण किया था और कोंकणा की भूमिका एक जवान और असुरक्षित महिला की थी, जिस के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

2007 के आखिर में कोंकणा ने यशराज फिल्म्स बैनर के अंतर्गत 2 फिल्मों में अभिनय किया. पहली फिल्म प्रदीप सरकार निर्देशित ‘लागा चुनरी में दाग’ थी. यह फिल्म बनारस की पृष्ठभूमि पर आधारित थी. दूसरी फिल्म थी माधुरी की कमबैक फिल्म ‘आ जा नच ले’. इस फिल्म में कोंकणा बतौर सपोर्टिंग एक्ट्रेस नजर आई थी. 2008 में कोंकणा ने ‘दिल कबड्डी’ में अभिनय किया. उस ने एक लघु फिल्म ‘हाउ कैन इट बी?’ में भी काम किया, जिस का निर्देशन मीरा नायर ने किया था और इसे रिलीज करने से पहले 2008 के कई फिल्म समारोहों में दिखाया गया था. 2009 में वह एक कम बजट की अंगरेजी फिल्म ‘द प्रेसिडेंट इज कमिंग’ में दिखाई पड़ी, जिस का निर्देशन कुणाल राय कपूर ने किया था.

इस के बाद कोंकणा जोया अख्तर की फिल्म ‘लक बाइ चांस’ में फरहान अख्तर के अपोजिट नजर आई, लेकिन बौक्स औफिस पर फिल्म को प्रत्याशित सफलता नहीं मिली. इस के बाद सेन 2009 में अयान मुखर्जी की रोमानी हास्य फिल्म ‘वेकअप सिड’ में रणबीर कपूर के संग रोमांस करती हुई नजर आई. 2010 में कोंकणा ने अश्विनी धीर की फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ में अजय देवगन और परेश रावल के साथ काम किया. यह एक कौमेडी ड्रामा फिल्म थी. 2013 में वह एकता कपूर की फिल्म ‘एक थी डायन’ में नजर आई. कोंकणा सेन की आने वाली फिल्मों में ‘गौर हरि दास्तां- द फ्रीडम फाइल’, ‘लिपस्टिक अंडर माई बुरका’, ‘तलवार’ और ‘कादंबरी’ शामिल हैं.

सूर्या शर्मा

सूर्या शर्मा का जन्म 27 फरवरी, 1990 को हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में हुआ था. हिमाचल प्रदेश के रहने वाले ऐक्टर सूर्य शर्मा बौलीवुड में लंबी दूरी तय कर अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है. सूर्या शर्मा ने रिया कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ और सुधीर मिश्रा की वेब सीरीज ‘होस्टेज’ में अपने अभिनय का परचम लहराया. उस के अभिनय की तारीफ निर्देशक अनुराग कश्यप और ऐक्टर सुधीर मिश्रा भी कर चुके हैं. 2025 में रिलीज ‘सलाकार’ वेब सीरीज में सूर्या शर्मा ने कर्नल अशफाक उल्लाह का किरदार निभा कर अपनी ऐक्टिंग का लोहा मनवाया था. उस की अदायगी आप को यकीनन उस से नफरत करने पर मजबूर कर देती है.

इस नेगेटिव किरदार को सूर्या शर्मा ने बड़ी शिद्दत से निभाया है. जियो हौटस्टार पर अक्तूबर में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘सर्च’ में एसीपी जय कंवल के रूप में भी उस की ऐक्टिंग काबिलेतारीफ है. सूर्या की ऐक्टिंग की शुरुआत 2015 में जी टीवी के रोमांटिक शो ‘काला टीका’ से हुई, जिस में उस ने आर्यन नाम का किरदार निभाया था. इस पहले टीवी ब्रेक मिलने से पहले उसे लगभग 800 से 900 औडिशंस देने पड़े और उस 2 मिनट के छोटे रोल के लिए 1,500 रुपए मिले थे. 2019 में उस ने वेब सीरीज ‘होस्टेजेस’ में प्रिंस का किरदार निभा कर दर्शकों का ध्यान खींचा. 2020 में सीरीज ‘अनदेखी’ में वह रिंकू बना नजर आया. यह किरदार उस के लिए एक मील का पत्थर बन गया और उसे बेस्ट नेगेटिव रोल का खिताब भी मिला.

सूर्या मानता है कि अभिनय में कोई रोल छोटा या बड़ा नहीं होता. सिर्फ एक सही रोल ही आप के लिए गेमचेंजर बन सकता है. उस के पेरेंट्स ने हर कदम पर उस का समर्थन किया. खासकर उस के पिता कहा करते थे कि ‘घिसोगे नहीं तो चमकोगे कैसे’. उनकी इन पंक्तियों ने उसे हर वक्त इंस्पायर किया. 9 दिसंबर, 2023 को सूर्या ने पूर्व मिस इंडिया मानसी मोघे से शादी की. दोनों को 11 मार्च, 2025 को एक बेटा भी हुआ. सूर्या ट्रैवलिंग, पेंटिंग और फिटनैस का शौकीन है. वह सादा खाना पसंद करता है और फिट रहने के लिए रनिंग करना पसंद करता है. Web Series Search

 

Actress Murder Case: टुकड़ों में मिली अभिनेत्री की लाश

Actress Murder Case: राइमा इसलाम शिमू बांग्लादेश की एक जानीमानी अभिनेत्री थीं. उन्होंने न सिर्फ 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, बल्कि 2 दरजन से अधिक नाटकों में भी काम कर दर्शकों के दिलों में जगह बनाई. यह महज इत्तफाक की बात है कि जिन दिनों देश भर में अपने दौर की खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री परवीन बाबी की जिंदगी पर बनी वेब सीरीज ‘रंजिश ही सही’ की चर्चा हो रही थी, उन्हीं दिनों बांग्लादेश की परवीन जितनी ही सैक्सी, लोकप्रिय और सुंदर एक्ट्रेस राइमा इसलाम शिमू की दुखद हत्या की चर्चा भी उतनी ही शिद्दत से हो रही थी.

फर्क सिर्फ इतना था कि परवीन बाबी की लाश उन के घर में मिली थी, जबकि राइमा की एक सड़क पर मिली थी. यह सड़क बांग्लादेश की राजधानी ढाका के केरानीगंज अलियापुर इलाके में हजरतपुर ब्रिज के नजदीक है, जो कालाबागान थाने के अंतर्गत आता है. 17 जनवरी, 2022 को राइमा की लाश मिली तो बांग्लादेश में सनाका खिंच गया क्योंकि वह कोई मामूली हस्ती नहीं थीं बल्कि घरघर में उन की पहुंच थी. अपनी अभिनय प्रतिभा के दम पर उन्होंने अपना एक बड़ा दर्शक और प्रशंसक वर्ग तैयार कर लिया था.

जिस हाल में राइमा की लाश मिली थी, उस से साफ जाहिर हो रहा था कि उन की बेरहमी से हत्या की गई है. इस हादसे ने एक बार फिर साफ कर दिया कि रील और रियल लाइफ में जमीनआसमान का फर्क होता है और आमतौर पर फिल्म स्टार्स, फिर वे किसी भी देश के हों, की जिंदगी उतनी हसीन और खुशनुमा होती नहीं जितनी कि उन के जिए किरदारों में दिखती है. यही राइमा के साथ हुआ कि हत्यारा कोई और नहीं बल्कि उन का बेहद करीबी शख्स था और हत्या की वजह कोई अफेयर, पैसों का लेनदेन, कोई विवाद या नशे की लत या फिर कोई दिमागी बीमारी भी नहीं थी.

45 वर्षीय राइमा साल 1977 में ढाका के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी थीं, जिन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था. ढाका से स्कूल और कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक्टिंग का कोर्स भी किया था. 19 साल की उम्र में ही उन्हें ‘बर्तमान’ फिल्म में काम करने का मौका मिल गया था. निर्माता काजी हयात की इस कामयाब फिल्म से वह फिल्म इंडस्ट्री में पहचानी जाने लगीं. फिल्म समीक्षकों ने तो उन की एक्टिंग को अव्वल नंबर दिए ही थे, दर्शकों ने भी उन्हें सराहा था. इस की वजह उन का ताजगी से भरा चेहरा और बेहतर एक्टिंग के अलावा उन की कमसिन अल्हड़पन और खूबसूरती भी थी.

पहली फिल्म कामयाब होने के बाद राइमा ने फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. देखते ही देखते उन्होंने बांग्लादेश के तमाम दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया. इन में इनायत करीम, शरीफुद्दीन खान, दीपू, देलवर जहां झंतु और चाशी नजरूल इसलाम प्रमुख हैं. सभी छोटेबड़े निर्देशकों के साथ राइमा ने 50 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और टीवी पर भी अपना जलवा बिखेरा.

लोगों के दिलों में बसी थीं राइमा

छोटे परदे पर आना उन की व्यावसायिक मजबूरी भी हो गई थी, क्योंकि बांग्लादेश के लोग भी टीवी धारावाहिकों को ज्यादा तरजीह देने लगे हैं. राइमा ने कोई 25 धारावाहिकों में एक्टिंग की, जिस से घरघर उन की पहुंच और स्वीकार्यता बढ़ती गई. बांग्लादेश फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी बड़े नायकों के साथ उन्होंने काम किया. खासतौर से अमित हसन, बप्पाराज रियाज, शाकिब खान, जाहिद हसन और मुशर्रफ करीम के साथ उन की जोड़ी खूब जमती थी.

राइमा आला कारोबारी दिमाग की मालकिन थीं, इसलिए उन्होंने खुद का प्रोडक्शन हाउस भी खोल लिया था. जिस के तहत कई टीवी सीरियल बने थे. अलावा इस के वह फिल्म पत्रकारिता भी ‘अर्थ कोथा द नैशनल बिजनैस मैगजीन’ के लिए करती थीं. बहुमुखी प्रतिभा की धनी इस एक्ट्रेस को टीवी न्यूज चैनल एटीएन बांग्ला में सेल्स एंड मार्केटिंग में वाईस प्रेसिडेंट भी नियुक्त किया गया था. जल्द ही एक नामी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी टीएन इवेंट्स लिमिटेड के सीईओ की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी.

इतना ही नहीं, उन्होंने बांग्लादेश में ही अपना ब्यूटी सैलून भी शुरू कर दिया था, जिस का नाम रोज ब्यूटी सैलून है. ढाका का ग्रीन रोड इलाका राइमा के घर की वजह से भी पहचाना जाने लगा, जो दर्शकों और प्रशंसकों की नजर में किसी मन्नत या जन्नत से कम नहीं था. लेकिन कोई सोच भी नहीं सकता था कि लाखों लोगों का मनोरंजन करने वाली और दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली इस एक्ट्रेस की निजी जिंदगी किसी नर्क से कम बदतर नहीं थी और इस की वजह था उन का पति शखावत अली नोबेल, जो कभी उन पर जान छिड़का करता था. इन दोनों ने 16 साल पहले लव मैरिज की थी.

शौहर ही निकला कातिल

आम दर्शक इस से ज्यादा कुछ नहीं सोच पाता कि उस की चहेती एक्ट्रेस अपने महल जैसे घर के अंदर सदस्यों के साथ हंसखेल रही होगी, रोमांस कर रही होगी या फिर डायनिंग टेबल पर बैठी लंच या डिनर कर रही होगी. और कुछ नहीं तो पति और बच्चों के साथ आंचल हवा में लहराते लौन के झूले पर झूलती गाना गा रही होगी. उस के इर्दगिर्द रंगबिरंगे फूल और चहचहाते पक्षी होंगे. सर के ऊपर नीला खुला आसमान होगा. लेकिन ऐसा कुछ भी कम से कम राइमा की जिंदगी में तो नहीं था.

पिछले कुछ दिनों से वह बेहद घुटन भरी जिंदगी जी रही थीं. आलीशान घर के अंदर कलह स्थायी रूप से पसर चुकी थी जिस से उन के दोनों बच्चे सहमेसहमे से रहते थे. राइमा और शखावत कहने और देखने को ही साथ रहते थे और मियांबीवी कहलाना भी उन की सामाजिक मजबूरी हो चली थी. लेकिन रोजरोज की मारकुटाई और कलह आम बात हो चुकी थी. यह सब कितने खतरनाक मुकाम तक पहुंच चुका था, इस का खुलासा 17 जनवरी, 2022 को राइमा की लाश मिलने के बाद हुआ. अंदर से टूटी और थकी हुई यह एक्ट्रेस 16 जनवरी को मावा एक शूटिंग के लिए गई थी. लेकिन देर रात तक वापस घर नहीं लौटी तो घर वालों को चिंता हुई क्योंकि राइमा का फोन भी बंद जा रहा था.

कालाबागान थाने में उन की गुमशुदगी की सूचना दर्ज हुई. एक रिपोर्ट राइमा की बहन फातिमा निशा ने भी लिखाई थी. पुलिस ने राइमा की ढुंढाई शुरू की, लेकिन देर रात तक कोई कामयाबी नहीं मिली तो मामला सुबह तक के लिए टल गया. इस दौरान उन का भाई शाहिदुल इसलाम खोकान लगातार पुलिस वालों से बहन को ढूंढने की गुजारिश करते खुद भी राइमा की तलाश में इस उम्मीद के साथ लगा रहा कि कहीं से कोई सुराग मिल जाए. लेकिन उस के हाथ भी मायूसी ही लगी. 17 जनवरी की सुबह कुछ राहगीरों ने हजरतपुर ब्रिज के पास एक लावारिस संदिग्ध बोरे को देख इस की खबर पुलिस को दी. पुलिस ने आ कर जैसे ही बोरे को खोला तो उस में से बरामद हुई राइमा की लाश, जो 2 टुकड़े कर बोरे में ठूंसी गई थी.

गले पर चोट के निशान भी साफसाफ दिख रहे थे, जिस से स्पष्ट हो गया कि राइमा की हत्या हुई है और लाश को यहां फेंक दिया गया है. लेकिन हत्यारा कौन हो सकता है, यह सवाल पुलिस को मथे जा रहा था. राइमा की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह फैली और फैंस जहांतहां इकट्ठा होने लगे. शव को पोस्टमार्टम के लिए सर सलीमुल्लाह मैडिकल कालेज भेज दिया गया.

पुलिस को शखावत पर शक तो था ही, लेकिन जैसे ही राइमा के भाई शाहिदुल इसलाम खोकान ने यह कहा कि शखावत एक ड्रग एडिक्ट है. वह अकसर मेरी बहन से कलह करता था. मैं ने उस की कार में खून देखा है. वह सुबह 8 से ले कर 10 बजे तक घर पर नहीं था. मुझे लगता है कि उसी दौरान उस ने राइमा की लाश फेंक दी.

फिल्मों जैसा कत्ल

शाहिदुल की शिकायत पर पुलिस ने शखावत को घेरा तो बिना किसी ज्यादा मशक्कत के उस ने सच उगल दिया. अब तक राइमा के फैंस जगहजगह मोमबत्तियां ले कर उन की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने लगे थे. सोशल मीडिया पर भी राइमा छाई हुई थीं. लोग श्रद्धांजलि देते राइमा के हत्यारे को गिरफ्तार करने की मांग और प्रदर्शन कर रहे थे. हिरासत में लिए गए शखावत ने बगैर किसी खास चूंचपड़ के अपना गुनाह कुबूल लिया. उस के बयान की बिनाह पर 6 लोग और गिरफ्तार किए गए, जिन में उन का ड्राइवर और एक नजदीकी दोस्त अब्दुल्ला फरहाद भी था. फरहाद को शखावत ने फोन कर बुलाया था.

पूछताछ में पता चला कि शखावत और फरहाद ने राइमा की हत्या 16 जनवरी को ही कर दी थी. वक्त था सुबह 7 बजे का. इन दोनों ने राइमा की लाश बोरे में भर दी और उसे प्लास्टिक की डोरी से सिल दिया. यह काम इत्मीनान से बिना किसी अड़ंगे के हो सके, इस के लिए उन्होंने घर पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड को नाश्ता लेने भेज दिया था. घटनास्थल से बरामद डोरी शखावत के गले का फंदा बनेगी, यह भी तय दिख रहा है क्योंकि जब पुलिस टीम घर पहुंची थी तो इस डोरी का पूरा बंडल वहां से बरामद हुआ था. जिस से शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी.

ये दोनों लाश को ठिकाने लगाने के पहले उसे मीरपुर ले गए थे, लेकिन वहां कोई उपयुक्त सुनसान जगह नहीं मिली तो वापस घर आ गए थे. राइमा की लाश उन लोगों के लिए बोझ बनती जा रही थी. मीरपुर से वापसी के बाद दोनों रात साढ़े 9 बजे के करीब हजरतपुर ब्रिज पहुंचे और लाश वाले बोरे को वहीं फेंक दिया, लेकिन हड़बड़ाहट और जल्दबाजी में गलती से डोरी वहीं छोड़ दी, जो उन के खिलाफ एक पुख्ता सबूत बन गई. लाश फेंकने के बाद घर आ कर दोनों ने सबूत मिटाने की गरज से कार को धोया और बदबू दूर करने के लिए उस में ब्लीचिंग पाउडर भी छिड़का. लेकिन इस के बाद भी खून के धब्बे पूरी तरह नहीं मिट पाए थे.

यानी राइमा शूटिंग पर गई है, यह झूठ जानबूझ कर फैलाया गया था, जिस से कत्ल को किसी हादसे में तब्दील किया जा सके या उस का ठीकरा किसी और के सिर फूटे, नहीं तो उसे तो ये लोग 16 जनवरी, 2022 को ही ऊपर पहुंचा चुके थे. गलत नहीं कहा जाता कि मुलजिम कितना भी चालाक हो, कोई न कोई सबूत छोड़ ही देता है फिर शखावत और फरहाद तो नौसिखिए थे, जो यह मान कर चल रहे थे कि उन्होंने बड़ी चालाकी से अपने गुनाह को अंजाम दिया है, इसलिए पकडे़ जाने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होगा. कुछ दिन हल्ला मचेगा और फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा.

पुलिस के सामने शखावत ने शरीफ बच्चों की तरह मान लिया कि राइमा से कलह के चलते उस ने उस का कत्ल किया, लेकिन हकीकत में वह अव्वल दरजे का शराबी और ड्रग एडिक्ट था, जो पत्नी को मार कर उस की सारी दौलत हड़प कर लेना चाहता था, जिस से ताउम्र मौज और अय्याशी की जिंदगी जी सके. पर अब उसे जिंदगी भर जेल की चक्की पीसना तय दिख रहा है. हो सकता है अदालत कोई रहम न दिखाते हुए शखावत को फांसी की सजा ही दे दे, जिस का कि वह हकदार भी है. Actress Murder Case

Crime Story: दिखावटी रईस – निकला बड़ा ठग

Crime Story: कहते हैं कि इंसान बड़ा तिकड़मी होता है. कोई अपने तिकड़म अच्छे कामों के लिए लगाता है तो कोई अपने तिकड़म से दुनिया को झुकाने की फितरत रखता है. केरल के एक आदमी ने आसानी से पैसा कमाने के लिए जोरदार तिकड़म लगाया. 10 करोड़ की ठगी के मामले में 25 सितंबर, 2021 की रात को केरल की क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तारी के बाद जब उस के कारनामों का खुलासा हुआ तो लोग उस की चर्चा करते नहीं थक रहे हैं. क्योंकि अपने तिकड़म से उस ने देश के जानेमाने ठग नटवरलाल को भी पीछे छोड़ने की कोशिश की है. 51 साल के उस आदमी का नाम है मोनसन मावुंकल. वह केरल के जिला अलप्पुझा के चेरथला का रहने वाला है. इस ठग ने स्वयंप्रसिद्धि द्वारा अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी.

अपनी वेबसाइट पर उस ने जरा भी कंजूसी किए बगैर बड़ी ही उदारता के साथ अपनी पहचान इस तरह दी थी— डा. मोनसन मावुंकल, प्राचीन और दुर्लभ वस्तुओं का अंतरराष्ट्रीय सौदागर. विश्व शांति के प्रणेता और वर्ल्ड पीस काउंसिल का मेंबर. प्रवासी मलयाली फैडरेशन पेट्रन, पुरातत्त्वविज्ञान के मास्टर, डाक्टरेट इन कौस्मेटोलौजी और उस में पोस्टडाक्टरल, शिक्षाशास्त्री, प्राचीन ज्वैलरी के निर्यातक, मोटिवेशनल स्पीकर और प्रख्यात यूट्यूबर.

यह आदमी काम क्या करता था? कोच्चि में एक आलीशान कोठी किराए पर ले कर उस में उस ने प्राचीन और दुर्लभ वस्तुओं का म्यूजियम बना रखा था. इस के अलावा कोठी के एक फ्लोर पर वह सौंदर्य चिकित्सा करता था. वहां एक स्पा भी था. कोठी के विशाल कंपाउंड में उस की लगभग 30 कारें खड़ी थीं. उस की कारों के इस काफिले में पोर्शे बाक्सटर, रोल्स रायस, रेंजरोवर, लैंडक्रूजर, डौज, मर्सिडीज एस क्लास और लेक्सस जैसी महंगीं कारें थीं.

उस के म्यूजियम में जो दुर्लभ चीजें थीं, वह सोनेचांदी की प्राचीन ज्वैलरी के अलावा देशी और विदेशी प्रवासियों को अमूल्य और दुर्लभ नमूने भी बेचता था. उस की सूची में ईसा मसीह जो कपड़े पहनते थे, उस का एक टुकड़ा, जीसस को धोखा देने के लिए घूल जुडासन ने जो 30 चांदी के सिक्के दिए थे, वे सिक्के. मोहम्मद पैगंबर जिस कटोरे में खाते थे, वह कटोरा. टीपू सुलतान का सिंहासन, लियोनार्डो दा विंची और राजा रवि वर्मा के बनाए असली चित्र, छत्रपति शिवाजी महाराज हमेशा अपने साथ जो भगवद्गीता रखते थे, वह भगवद् गीता, मोजिस का अधिकार दंड, नारायण गुरु की लाठी, त्रावणकोर के महाराजा का सिंहासन, विश्वप्रसिद्ध पैलेस का ओरिजिनल टाइटल डीड.

दुनिया की पहली ग्रामोफोन मशीन, बाइबल की सर्वप्रथम छपी पहली कौपी, सद्दाम हुसैन अपने साथ जो कुरान शरीफ रखता था, वह पवित्र कुरान शरीफ, केरल का प्रसिद्ध शबरीमाला मंदिर जब बना था, तब की उस की धार्मिक विधियों के लिए दस्तावेज के रूप में जो ताम्रपत्र बनाया गया था, वह दुर्लभ ताम्रपत्र, इस तरह की अनेक दुर्लभ प्राचीन चीजें मोनसन मावुंकल के खजाने में थीं. छोटे ग्राहकों के लिए हाथीदांत की कलाकृतियां और व्हेल मछली की हड्डियों से बने खिलौने भी उस के म्यूजियम में थे. फिल्मी हीरो जैसे लगने वाले और अपनी बोलने की कला से सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित करने की उस में गजब की शक्ति थी.

इस के अलावा उस के इस म्यूजियम और वैभवशाली 30 कारों के काफिले के कारण किसी को भी प्रभावित करने में उसे जरा भी दिक्कत नहीं होती थी. 2-3 सशस्त्र बौडीगार्ड हमेशा उस के साथ रहते थे. प्रसिद्धि का भूखा मोनसन डौन की स्टाइल में अपने फोटो वेबसाइट और सोशल मीडिया पर अकसर डालता रहता था. सामान्य आदमी तो ठीक, केरल के फिल्मी कलाकार, राजनेता और बड़ेबड़े पुलिस अधिकारी भी उस का म्यूजियम देखने आते थे.

उस से मिलने वालों में राज्य के डीजीपी लोकनाथ बेहरा, असिस्टेंट आईजीपी मनोज अब्राहम, सुपरस्टार मोहनलाल, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुधाकरन, वर्तमान सरकार के मंत्री रोशी आंगस्टाइन, अहमद देवरकोविल, आईजी लक्ष्मण गुगुलोथ, पूर्व डीआईजी सुरेंद्रन, आईपीएस श्रीलेखा, सांसद हीबी एडन, पूर्व मंत्री मोना जोसेफ जैसे अनेक महारथियों के फोटोग्राफ्स उस के म्यूजियम में थे. इस तरह के वीआईपी मेहमानों के भव्य स्वागत में मोनसन मावुंकल कोई कसर नहीं छोड़ता था. इन लोगों के साथ के फोटो वह तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल कर देता था. वह पुलिस अधिकारियों को छोटामोटा सामान उपहार में दे कर खुश रखता था.

पुलिस विभाग में चलने वाली चर्चाओं के अनुसार, मोनसन ने एक बड़े पुलिस अधिकारी को 55 लाख की कोरल एडमिरल कलाई घड़ी उपहार में दी थी. पुलिस विभाग से मधुर संबंध होने की वजह से उस की कोठी और अलप्पुझा जिले में स्थित उस के घर, दोनों जगहों पर पुलिस बीट बौक्स की व्यवस्था हो गई थी. आखिर यह ठग पकड़ा कैसे गया? जून, 2017 से नवंबर, 2020 के बीच मोनसन मावुंकल ने अलग अलग 6 लोगों से कुल 24 करोड़ रुपए उधार लिए थे. अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापारी और एंटीक बिजनैस डीलर के रूप में उस ने इन लोगों से अपना परिचय कराया था.

बाद में जब इन लोगों ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया तो मोनसन मावुंकल इन से कहने लगा कि फारेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के अधिकारियों ने उस का पैसा रोक रखा है. उसे पाने के लिए केंद्र सरकार से उस की कानूनी लड़ाई चल रही है. उन लोगों को मोनसन की बात पर विश्वास नहीं था, इसलिए वे लोग उस के घर आए. आलीशान कोठी, लग्जरी कारों का काफिला, उस की आलीशान जीवनशैली और माननीय लोगों के साथ उस की फोटो देख कर उन्हें मोनसन की बात पर विश्वास हो गया. इस के अलावा विश्वास जमाने के लिए मोनसन मावुंकल ने उन लोगों को एचएसबीसी बैंक का स्टेटमेंट भी दिखाया.

मोनसन मावुंकल का पार्टनर कोई वी.आई. पटेल (यह वी.आई. पटेल कौन हैं, इस के बारे में केरल पुलिस आज तक पता नहीं कर सकी है) के साथ के उस के एकाउंट में छोटीमोटी नहीं, 2.62 लाख करोड़ की रकम जमा थी. मोनसन मावुंकल ने उन से यह भी कहा था कि 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर उस ने अपना पैसा पाने की बात भी की है. प्रवासी मलयाली फेडरेशन की वैश्विक महिला कोआर्डिनेटर रह चुकी अनीता पुल्लाइल इस समय इटली में रहती हैं. मोनसन मावुंकल के किसी लेनदार ने जब उन से व्यक्तिगत रूप से इस बारे में बात की तो उन्होंने सलाह दी कि उस चीटर के खिलाफ तुरंत पुलिस में शिकायत कर दीजिए. अगर आप को जरूरत महसूस हो तो मेरे नाम का भी उपयोग कर सकते हो.

अनीता ने यह भी कहा था कि पता चला है कि उस नालायक ने उस की कोठी में काम करने वाली नौकरानी की 17 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया है. यह पता चलते ही उन्होंने उस शैतान से सारे संबंध तोड़ लिए हैं. इस के बाद उन लेनदारों ने मोनसन मावुंकल के खिलाफ शिकायत करने के साथसाथ उस शिकायत पर काररवाई के लिए राज्य के मुख्यमंत्री पी. विजयन के यहां शिकायत की. उन्हीं की शिकायत के आधार पर लोकल पुलिस को अंधेरे में रख कर राज्य की क्राइम ब्रांच ने इस मामले को अपने हाथ में लिया.

25 सितंबर, 2021 को मोनसन मावुंकल की बेटी की सगाई की आलीशान पार्टी थी. उसी रात क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. जिस समय उसे गिरफ्तार किया गया, उस की जेब में 3 महंगे आईफोन, दाहिने हाथ में एप्पल की घड़ी, बाएं हाथ में सोने का वजनदार लकी ब्रेसलेट और गले में मोटी सी सोने की चेन थी. अपनी स्वयंप्रसिद्धि के कारण मोनसन मावुंकल ने केरल में ‘हू इज हू’ की सूची में स्थान प्राप्त कर लिया था. गिरफ्तारी के बाद मोनसन मावुंकल मीडिया में छा गया.

अखबारों और टीवी चैनलों में उस के नेताओं के साथ के संबंध और पुलिस अधिकारियों से सांठगांठ की चर्चा लगातार चलने लगी. उस के बाद बहुत बड़ा घोटाला सामने आया. इस के अलावा भी अनेक रहस्य बाहर आएंगे, ऐसा सभी को लग रहा है. फोटोग्राफ्स में जो महानुभाव थे, वे सब ढीले पड़ गए और अपनीअपनी सफाई देने लगे कि यह आदमी इतना बड़ा ठग है, उन्हें पता नहीं था. राज्य के डीजीपी लोकनाथ बेहरा ने तो मोनसन मावुंकल के म्यूजियम में महाराजा के स्टाइल में हाथ में तलवार के साथ पोज दिया था.

लोकनाथ इसी साल रिटायर हुए हैं. उन के रिटायर होने के बाद सरकार ने उन्हें तुरंत कोच्चि मेट्रो का मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया था. मोनसन मावुंकल के गिरफ्तार होते ही वह पत्नी की बीमारी का कारण बता कर अपने घर ओडिशा चले गए हैं. जैसेजैसे सच्चाई बाहर आने लगी, झूठ और मात्र झूठ के आधार पर खड़ा किया गया मोनसन मावुंकल का साम्राज्य भरभरा कर गिरने लगा. हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मोनसन मावुंकल ने किसी कालेज का मुंह नहीं देखा था. फिर भी उस के नाम के साथ डाक्टरेट की डिग्री लगी है. उस के म्यूजियम के खजाने में जो पौराणिक वस्तुएं थीं, वे ज्यादातर नकली थीं.

हाथीदांत और व्हेल की हड्डियों से बनी जो चीजें थीं, वे तिरुवनंतपुरम के एक कारीगर से ऊंट की हड्डियों से बनवाई गई थीं. उस कारीगर का भी इस पर पैसा बाकी है, इसलिए उस ने भी मुकदमा कर रखा है. उस की 30 कारों में से एक भी कार के पूरे कागज नहीं मिले. महंगी पोर्शे कार 2007 में करीना कपूर के नाम रजिस्टर्ड हुई थी. उस में पिता का नाम रणधीर कपूर और पता भी उन्हीं के घर का है. मोनसन मावुंकल की पत्नी शिक्षिका थी. 1981-82 में वे दोनों इडुक्की जिले के एक गांव में रहते थे. उस समय के उस के पड़ोसियों का कहना है कि मोनसन मावुंकल तो उन के गांव में इलैक्ट्रिशियन वायरमैन का काम करता था. 1998 में उस ने कोच्चि में पुरानी कारों के खरीदनेबेचने का धंधा शुरू किया. तभी चोरी की कार बेचने के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था.

छोटीमोटी धोखाधड़ी करते हुए उस ने एक पूरा आभासी साम्राज्य खड़ा कर लिया. अपने लेनदारों को मोनसन मावुंकल बड़े शान से 2.62 लाख करोड़ की जमा रकम वाला एचएसबीसी बैंक का स्टेटमेंट दिखाता था. पुलिस जांच में सामने आया है कि इस आदमी का तो बैंक में कोई एकाउंट ही नहीं है. कोफिन में अंतिम कील जैसी घटना उस की गिरफ्तारी के बाद बाहर आई. उस की कोठी में काम करने वाली नौकरानी की बेटी 17 साल की थी, तब मोनसन मावुंकल ने उस के साथ उच्च शिक्षा के लिए दाखिला दिलाने के नाम पर दुष्कर्म किया था. पुलिस से मोनसन मावुंकल के संबंधों के कारण वह गरीब पुलिस से शिकायत करने से डरती रही.

मोनसन मावुंकल पकड़ा गया तो उस ने एर्नाकुलम थाने में शिकायत की है कि अब तक उस के साथ दुष्कर्म का सिलसिला चलता रहा था. गिरफ्तारी के 2 दिन पहले भी उस नराधम ने उस लड़की के साथ दुष्कर्म किया था. क्राइम ब्रांच ने मोनसन मावुंकल के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 450, 506, 420, 421 के तहत कुल 14 एफआईआर दर्ज की हैं. इस में 19 अक्तूबर, 2021 को पोक्सो एक्ट के अंतर्गत भी मामला दर्ज किया गया था. डौन की तरह बौडीगार्ड के साथ मोनसन मावुंकल के फोटो खूब वायरल हुए थे. पुलिस जांच में पता चला कि सभी अंगरक्षकों के हाथों में जो हथियार दिख रहे थे, वे चाइनीज खिलौना राइफलें थीं. इस घटना का राजकीय प्रत्याघात भी जोरदार सामने आया है.

6 अक्तूबर, 2021 को केरल की विधानसभा में प्रश्नोत्तर के दौरान मोनसन मावुंकल एक बार फिर चर्चा में आया. राज्य के डीजीपी और अन्य उच्च अधिकारी मोनसन के म्यूजियम में क्या करने जाते थे, इस का जवाब देना मेरे लिए मुश्किल है. मुख्यमंत्री विजयन ने कहा. उन्होंने विश्वास दिलाया कि उस के दोनों घरों पर पुलिस बीट बौक्स की व्यवस्था किस ने कराई है, इस की जांच होगी.

विपक्षी नेता वी.डी. सतीश ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि 2019 में पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने मोनसन मावुंकल को चीटर घोषित करते हुए जनवरी, 2020 में पूरी रिपोर्ट दी थी, फिर भी पुलिस ने उस के खिलाफ कुछ नहीं किया था. उसे राज्य के पुलिस अधिकारियों और सरकार की मदद मिलती रही थी. यह कह कर विपक्ष ने वाकआउट कर दिया था. लोगों को ठग कर इकट्ठा किया गया पैसा आखिर गया कहां? पुलिस अब इस दिशा में जांच कर रही है. पिछले 5 सालों में कोच्चि के पौश इलाके की प्रौपर्टी में जो बेनामी इनवैस्ट हुआ है, उस में सभी डीलरों का कहना है कि किसी ‘डाक्टर’ नाम के आदमी ने खासा बेनामी इनवैस्ट किया है.

पुलिस का मानना है कि वह डाक्टर कोई और नहीं, मोनसन मावुंकल ही होगा. इटली में रह रही अनीता पुल्लाइल भी पुलिस के शक के दायरे में है. वह बारबार केरल आ कर मोनसन मावुंकल से मिलती रहती थी. इस से पुलिस को आशंका है कि उस के माध्यम से मोनसन ने पैसा विदेश पहुंचाया है. पुलिस इस की भी जांच कर रही है. पुलिस का मानना है कि उन लेनदारों से अनीता ने जो शिकायत करने के लिए कहा था, उस समय मोनसन की पुलिस अधिकारियों से अच्छी सांठगांठ थी. इसलिए उन लोगों की शिकायत पर कुछ होगा नहीं, यह सोच कर उस ने यह सलाह दी थी.

दुनिया झुकती है, झुकाने वाला चाहिए, यह उक्ति मोनसन मावुंकल पर सच्ची ठहरती है. सारा नकली कारोबार कर के लोगों को ठगने और उन पर धाक जमाने के लिए नेताओं, अभिनेताओं और पुलिस अधिकारियों की तसवीरों का उपयोग किया, परंतु अंत में अपराध का घड़ा फूटा और अब वह नमूना जेल की सलाखें गिन रहा है.

Short love Story in Hindi : प्यार का ऐसा अंजाम तो सपने में भी नहीं सोचा

Short love Story in Hindi : सोशल मीडिया पर जहां मी टू जैसे कैंपेन चल रहे हैं, वहीं एक मौडल को इस की कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी. वजह, फेसबुक फ्रैंड ने ही मौडल बनने आई कुलीग के साथ ऐसी हरकत कर डाली कि उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. मलाड (पश्चिम) में माइंडस्पेस के पास झाड़ियों के बीच ट्रैवल बैग में 20 साल की मौडल की लाश मिलने से हड़कंप मच गया. बैग के अंदर एक महिला की लाश थी जिस के सिर पर चोट थी. उस के शव को कुशन और बेडशीट से कवर किया हुआ था.

हालांकि सीसीटीवी फुटेज में एक कार दिखी है जिस के अंदर बैठे एक शख्स ने सड़क किनारे सूटकेस फेंका था. इसी के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसे उस की बिल्डिंग से पकड़ लिया गया. आरोपी की पहचान 20 साला मुजम्मिल सईद के रूप में हुई. आरोपी सेकंड ईयर का छात्र है. वह मिल्लत नगर अंधेरी (पश्चिम) में रहता था. वहीं मृतका का नाम मानसी दीक्षित है जो राजस्थान से मुंबई मौडल बनने का सपना ले कर आई थी.

पुलिस के मुताबिक, मानसी राजस्थान के कोटा शहर की रहने वाली थी, आरोपी मुजम्मिल सईद हैदराबाद का रहने वाला है. मानसी आरोपी से इंटरनेट के जरीए मिली थी. दोनों ने अंधेरी स्थित आरोपी के फ्लैट में मुलाकात की थी. दोपहर में दोनों के बीच किसी बात पर बहस हो गई, जिस के बाद मुजम्मिल सईद ने गुस्से में मानसी को किसी चीज से सिर पर मारा जिस से उस की मौत हो गई.

घटना को अंजाम देने के बाद सईद ने मानसी के शव को बैग में भरा और अंधेरी से मलाड तक एक प्राइवेट कैब बुक की. इस के बाद उस ने मलाड के माइंडस्पेस के पास झाड़ियों में बैग को फेंक दिया और वहां से फरार हो गया. पुलिस को इस घटना की जानकारी कैब ड्राइवर ने दी. कैब ड्राइवर ने सईद को झाड़ियों में बैग फेंक कर आटोरिक्शा में फरार होते देखा था. पुलिस ने तुंरत मौके पर पहुंच कर मामले की जांच शुरू की और मानसी का शव बरामद कर लिया.

मुजम्मिल ने बताया कि हादसे के दौरान मानसी उस के फ्लैट में थी. उस ने गुस्से में मानसी के सिर पर स्टूल मार दिया जिस से अनजाने में मानसी की मौत हो गई. आरोपी ने हत्या की बात कबूल कर ली है.

Crime News : डाक्टर ने की हैवानियत की हद पार

Crime News : गोरखपुर पुलिस लाइंस स्थित मनोरंजन कक्ष खबर नवीसों से खचाखच भरा हुआ था. सामने कुरसी पर स्पैशल  टास्क फोर्स (एसटीएफ) के आईजी अमिताभ यश और एसएसपी डा. सुनील गुप्ता बैठे हुए थे. चूंकि पत्रकार वार्ता का आयोजन आईजी यश ने किया था, इसलिए ये वार्ता और भी खास लग रही थी. पत्रकारों के मन में एक अजीब सा कौतूहल था. ऐसा लग रहा था जैसे एसटीएफ के हाथ कोई बड़ा मामला लगा है और उसी के खुलासे के लिए लखनऊ से आए अमिताभ यश ने प्रैस वार्ता आयोजित की हो.

थोड़ी देर बाद पत्रकारों के मन से कौतूहल के बादल छंट गए, जब उन के सामने 3 आरोपियों को कतारबद्ध खड़ा किया गया. उन में से एक आरोपी गोरखपुर शहर का जाना माना डाक्टर और आर्यन हौस्पिटल का संचालक डा. डी.पी. सिंह उर्फ धीरेंद्र प्रताप सिंह था.

वार्ता शुरू करते हुए एसटीएफ आईजी अमिताभ यश ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा, ‘‘यह पत्रकारवार्ता 6 महीने पहले 2 जून, 2018 को नेपाल के पोखरा से रहस्यमय तरीके से गायब हुई गोरखपुर की सरस्वतीपुरम कालोनी निवासी राजेश्वरी उर्फ राखी श्रीवास्तव केस से जुड़ी हुई है, जिस की लाश 4 जून, 2018 को पोखरा की एक गहरी खाई से बरामद की गई थी.’’

नेपाल पुलिस ने मृतका का पोस्टमार्टम करवाया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस का पेट फटने के कारण मौत की पुष्टि हुई थी. इधर 4 जून, 2018 को राखी के भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने बिहार के गया निवासी अपने बहनोई मनीष सिन्हा पर गोरखपुर के शाहपुर थाने में राखी के अपहरण और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करवाया था. मनीष सिन्हा ने खुद को बेगुनाह बताते हुए मामले की जांच एसटीएफ से कराए जाने की मांग की थी.

मुकदमे से संबंधित विवेचना की फाइल एसटीएफ के पास आई तो जांच शुरू की गई. नेपाल पुलिस ने भारतीय पुलिस से मृतका के फोटो साझा करते हुए केस का खुलासा करने में मदद मांगी थी. फोटो को एसटीएफ के तेजतर्रार सिपाही शुक्ला ने पहचान लिया. वह राखी श्रीवास्तव की तसवीर थी.

जांचपड़ताल में पता चला कि राखी श्रीवास्तव आर्यन हौस्पिटल के संचालक डा. डी.पी. सिंह की दूसरी पत्नी थी. 7 साल पहले दोनों ने आर्यसमाज मंदिर में शादी की थी. शादी के बारे में डाक्टर की पहली पत्नी ऊषा सिंह को जानकारी नहीं थी. जब जानकारी हुई तो परिवार में हड़कंप मच गया.

आगे चल कर डा. डी.पी. सिंह और राखी के बीच संबंधों को ले कर टकराव पैदा हो गया. राखी की उम्मीदें और डिमांड लगातार बढ़ती जा रही थीं. इस सब के चलते डाक्टर राखी से पीछा छुड़ाना चाह रहा था.

आईजी ने आगे बताया, ‘‘राखी ने शहर के कैंट थाने में डी.पी. सिंह के खिलाफ रेप और धमकी देने का मुकदमा भी दर्ज कराया था. हालांकि बाद में दोनों ने सुलह कर लिया था. फरवरी 2018 में राखी ने मनीष सिन्हा से दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन इस के बावजूद डा. डी.पी. सिंह और राखी श्रीवास्तव के बीच रिश्ता बना रहा. इस के बावजूद राखी की डिमांड बढ़ती जा रही थी.

‘‘राखी की डिमांड से तंग आ कर डा. डी.पी. सिंह ने राखी की हत्या की साजिश रच डाली. बीते 4 जून, 2018 को राखी नेपाल के पोखरा घूमने गई थी. इस की जानकारी मिलने पर डा. डी.पी. सिंह अपने 2 कर्मचारियों देशदीपक निषाद और प्रमोद सिंह के साथ किराए की स्कौर्पियो से नेपाल गया. जहां उस ने राखी से मुलाकात कर उसे अपने झांसे में ले लिया.

‘‘डा. डी.पी. सिंह ने राखी को शराब पिलाई और नशे की गोली दे कर बेहोश कर दिया. बेहोशी की हालत में डी.पी. सिंह ने राखी को अपने दोनों कर्मचारियों के साथ पहाड़ी से नीचे खाई में फेंक दिया, जहां सिर और पेट में चोट आने से उस की मौत हो गई. बाद में डी.पी. सिंह अपने दोनों साथियों के साथ फरार हो गया. इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच में स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ भी लगी थी. ऐसे में गहराई से मामले की जांच किए जाने पर डा. डी.पी. सिंह और राखी के पहले के संबंधों की तह तक जाने पर हत्याकांड का खुलासा हो पाया.’’

पत्रकारों के पूछे जाने पर डा. डी.पी. सिंह और दोनों कर्मचारियों देशदीपक निषाद तथा प्रमोद सिंह ने अपना अपना जुर्म कबूल करते हुए राखी श्रीवास्तव हत्या में संलिप्तता स्वीकार ली. पत्रकारवार्ता के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया. अदालत ने तीनों आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया. तब पुलिस ने तीनों को गोरखपुर जिला जेल भेज दिया. यह 21 दिसंबर, 2018 की बात है.

आरोपियों के इकबालिया बयान और पुलिस जांचपड़ताल के बाद इस केस की हाईप्रोफाइल प्रेम कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र की पौश कालोनी बिलंदपुर में विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर हरेराम श्रीवास्तव अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में कुल जमा 6 सदस्य थे, जिन में 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. उन के चारों बच्चों में राजेश्वरी सब से छोटी थी. सब उसे प्यार से राखी कहते थे.

चारों भाईबहनों में राखी सब से अलग थी. उस के काम करने का तरीका, उठनेबैठने और पढ़नेलिखने का सलीका, बातचीत करने का अंदाज सब कुछ अलग था. परिवार में सब से छोटी होने की वजह से घर वाले उसे प्यार भी बहुत करते थे.

राखी मांबाप की दुलारी तो थी ही, बड़ा भाई अमर प्रकाश भी उसे बहुत चाहता था. बहन में जान बसती थी बड़े भाई अमर की. जिद्दी स्वभाव की राखी लाड़प्यार में भाई से जो मांगती थी, अमर कभी इनकार नहीं करता था.

राखी पर मोहित हो गया था डा. डी.पी. सिंह

सन 2006 की बात है. राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव बीमार थे. उन्हें इलाज के लिए आर्यन हौस्पिटल में इलाज के लिए भरती कराया गया था. यह हौस्पिटल घर के पास तो था ही, पूर्वांचल का जानामाना भी था. बेहतर इलाज और नजदीक समझते हुए अमर प्रकाश ने पिता को डा. डी.पी. सिंह के हौस्पिटल में भरती करा दिया. पिता की तीमारदारी के लिए घर वाले अस्पताल आतेजाते रहते थे. राखी भी आतीजाती थी.

करीब साढ़े 5 फीट लंबी राखी छरहरी तो थी ही ऊपर से गठीला बदन, गोरा रंग, गोलमटोल चेहरा, नागिन सी लहराती चोटी, झील सी गहरी आंखों से वह बला की खूबसूरत दिखती थी. डा. डी.पी. सिंह उर्फ डा. धीरेंद्र प्रताप सिंह की नजर जब राखी पर पड़ी तो उस का मन राखी में ही उलझ कर रह गया. एक तरह से वह उस के दिल में समा गई.

राखी प्राय: रोज ही पिता को देखने जाती थी. जब भी वह अस्पताल में होती तो डा. डी.पी. सिंह ज्यादा से ज्यादा समय उस के पिता के बैड के आसपास चक्कर लगाता रहता. राखी को यह देख कर खुशी होती कि डाक्टर उस के पिता के इलाज को ले कर गंभीर हैं. वह उन का कितना ध्यान रख रहा है.

2-3 दिन में ही राखी समझ गई कि डा. डी.पी. सिंह जब भी चैकअप के लिए पिता के बैड के आता है तो उस की नजरें पिता पर कम, उस पर ज्यादा टिकती हैं. उस की नजरों में आशिकी झलकती थी. डी.पी. सिंह भी गबरू जवान था. साथ ही स्मार्ट भी. पिता की तीमारदारी में डी.पी. सिंह की सहानुभूति देख कर राखी भी उस के आकर्षक व्यक्तित्व पर फिदा हो गई. वह भी डी.पी. सिंह को कनखियों से देखा करती थी. जब दोनों की नजरें आपस में टकरातीं तो दोनों ही मुसकरा देते.

राखी ने भी खोल दिया दिल का दरवाजा

कह सकते हैं कि राखी और डी.पी. सिंह दोनों के दिल एकदूसरे की चाहत में धड़कने लगे. अंतत: मौका देख कर एक दिन दोनों ने अपने अपने प्यार का इजहार कर दिया. बाली उमर की कमसिन राखी डी.पी. सिंह को दिल से मोहब्बत करने लगी जबकि डी.पी. सिंह राखी को दिल से नहीं, बल्कि उस की खूबसूरती से प्यार करता था.

कई दिनों के इलाज से हरेराम श्रीवास्तव स्वस्थ हो कर अपने घर लौट गए. पिता के हौस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद राखी किसी न किसी बहाने हौस्पिटल आ कर डी.पी. सिंह से मिलने लगी. सालों तक दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले प्यार के झूले पर पेंग बढ़ाते रहे. आलम यह हो गया कि एकदूसरे को देखे बिना दोनों को चैन नहीं मिलता था.

डा. डी.पी. सिंह के दिल के पिंजरे में कैद हुई राखी ने उस के अतीत में झांका तो उसे ऐसा लगा जैसे उस के पैरों तले जमीन खिसक गई हो. राखी के सपनों का महल रेत की दीवार की तरह भरभरा कर ढह गया. क्योंकि डी.पी. सिंह पहले से शादीशुदा था. उस ने यह बात छिपा कर रखी थी. राखी को जब यह सच्चाई दूसरों से पता चली तो उसे गहरा धक्का लगा. वह डाक्टर से नाराज हो कर गोंडा चली गई. वहां वह बीएड की पढ़ाई करने लगी.

डा. डी.पी. सिंह राखी के अचानक मुंह मोड़ लेने से तड़प कर रह गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि अचानक राखी उस से रूठ क्यों गई. डी.पी. सिंह से जब राखी की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने राखी से बात की, ‘‘क्या बात है राखी, तुम अचानक रूठ कर क्यों गईं? जाने अनजाने में मुझ से कोई भूल हो गई हो तो मुझे माफ कर दो.’’

‘‘मैं माफी देने वाली कौन होती हूं,’’ राखी तुनक कर बोली.

‘‘अरे बाप रे बाप, इतना गुस्सा!’’ मुसकराते हुए डी.पी. सिंह ने कहा.

‘‘ये गुस्सा नहीं दिल की टीस है, जो आप ने दी है डाक्टर साहब.’’ राखी के चेहरे पर दिल का दर्द छलक आया.

आश्चर्य से डा. डी.पी. सिंह ने कहा, ‘‘मैं ने तुम्हारे दिल को ऐसी कौन सी टीस दे दी कि तुम मुझ से रूठ गईं और शहर छोड़ कर चली गईं. तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं.’’

‘‘डाक्टर साहब, आप इतनी बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो. ये बताओ, आप ने अपनी जिंदगी की इतनी बड़ी सच्चाई मुझ से क्यों छिपाई? आप ने मुझे यह क्यों नहीं बताया कि आप शादीशुदा हो.’’

‘‘हां, यह सच है कि मैं शादीशुदा हूं. यह भी सच है कि मुझे तुम्हें यह सच्चाई पहले बता देनी चाहिए थी लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’ बीच में बात काटते हुए राखी बोली.

‘‘बताने का मौका ही नहीं मिला,’’ डा. सिंह ने सफाई दी, ‘‘मैं तुम्हें अपने जीवन की यह सच्चाई बताने वाला था, लेकिन बताने का मौका नहीं मिला. इस बात का मुझे दुख है.’’

‘‘तो फिर अब यहां क्या लेने आए हैं?’’

‘‘अपने प्यार की भीख. मैं तुम से अपने प्यार की भीख मांगता हूं राखी. तुम मेरा प्यार मुझे लौटा दो. मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. फिर मैं यहां से चला जाऊंगा.’’

‘‘ठीक है, लेकिन मेरी भी एक शर्त है.’’ राखी बोली.

‘‘क्या शर्त है तुम्हारी?’’

‘‘यही कि आप को मुझ से शादी करनी होगी. मेरी यह शर्त मंजूर है तो बताओ?’’

‘‘मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है. मैं तुम से शादी करने के लिए तैयार हूं. शादी के बाद तुम्हें पत्नी की नजरों से बचा कर ऐसी जगह रखूंगा, जहां तुम पर किसी की नजर न पड़ सके.’’

राखी ने सभी गिलेशिकवे भुला दिए.

राखी बन गई डाक्टर की दूसरी पत्नी

सन 2011 के फरवरी में राखी और डा. डी.पी. सिंह ने परिवार वालों से छिप कर गोंडा जिले के आर्यसमाज मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया. प्रेमी प्रेमिका दोनों पतिपत्नी बन गए. लेकिन यह बात राखी के परिवार वालों से ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही.

राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव को बेटी द्वारा एक शादीशुदा आदमी से शादी करने की बात पता चली तो उन्हें गहरा सदमा पहुंचा. वह इस सदमे को सहन नहीं कर सके और उन की मौत हो गई. उस के बाद राखी के परिवार वालों ने उस से हमेशा हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया.

शादी के बाद डी.पी. सिंह ने दूसरी पत्नी राखी के रहने के लिए गोरखपुर के शाहपुर क्षेत्र की पौश कालोनी सरस्वतीपुरम में एक आलीशान मकान खरीद दिया. राखी इसी मकान में रहती थी. हौस्पिटल से खाली होने के बाद डी.पी. सिंह राखी से मिलने उस के पास आता था. घंटों साथ बिता कर वह पहली पत्नी ऊषा सिंह के पास चला जाता था. उस के साथ कुछ समय बिता कर रात में राखी के पास आ जाता.

पहली पत्नी को पता चल गई डाक्टर की हकीकत 

डी.पी. सिंह की पहली पत्नी ऊषा सिंह देख समझ रही थी कि उस के पति के स्वभाव और रहनसहन में काफी तब्दीलियां आ गई हैं. वह उस में पहले की अपेक्षा कम दिलचस्पी ले रहा था. रात रात भर घर से गायब रहता था. वह रात में कहां जाता था, उसे कुछ भी नहीं बताता था. वह बताता भी तो क्या.

हालांकि वह जानता था कि जिस दिन यह सच पहली पत्नी ऊषा को पता चलेगा तो उस की खैर नहीं. आखिरकार डी.पी. सिंह का अंदेशा सच साबित हुआ. ऊषा को पति पर शक हो गया और उस ने पति की दिनचर्या की खोजबीन शुरू कर दी.

ऊषा से पति की सच्चाई ज्यादा दिनों नहीं छिप पाई. आखिर पूरा सच उस के सामने खुल कर आ गया. उस ने भी तय कर लिया कि अपने जीते जी वह अपने सिंदूर का बंटवारा हरगिज नहीं करेगी. या तो सौतन को मार देगी या खुद मर जाएगी.

इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच विवाद खड़ा हो गया. दूसरी औरत राखी को  ले कर ऊषा ने पति को आड़े हाथों लिया तो डी.पी. सिंह की बोलती बंद हो गई. वह हैरान था कि उस की सच्चाई पत्नी तक कैसे पहुंची, जबकि उस ने इस राज को काफी गहराई तक छिपा रखा था.

पत्नी के सामने सच्चाई आने के बाद डी.पी. सिंह की स्थिति बड़ी विचित्र हो गई. वह न तो पत्नी को छोड़ सकता था और न प्रेमिका से पत्नी बनी राखी के बिना रह सकता था. उस की हालत 2 नावों के सवार जैसी थी. इस के बावजूद वह दोनों नावों को डूबने नहीं देना चाहता था. डी.पी. सिंह किसी निष्कर्ष पर पहुंचता, इस से पहले ही पहली पत्नी ऊषा ने डी.पी. सिंह के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया.

भले ही ऊषा ने उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था, डी.पी. सिंह ने इस की कोई परवाह नहीं की. वजह यह थी कि राखी मां बनने वाली थी. राखी और डी.पी. सिंह दोनों इसे ले कर काफी खुश थे. आने वाले बच्चे के भविष्य को ले कर संजीदा थे. समय आने पर राखी ने हौस्पिटल में बेटी को जन्म दिया. लेकिन वह मां की गोद तक जाने से पहले ही दुनिया छोड़ गई. बेटी की मौत ने राखी को झकझोर कर रख दिया. नवजात शिशु की मौत का असर डी.पी. सिंह पर भी पड़ा.

डाक्टर को होने लगा गलती का पछतावा

डी.पी. सिंह को अपने किए का पश्चाताप होने लगा था. वक्त के साथ स्थितियां बदल गईं. उसे लगने लगा कि राखी की खूबसूरती महज एक छलावा था. असल जीवनसाथी तो ऊषा है. अब डा. डी.पी. सिंह अपनी भूल सुधारने के लिए पत्नी की ओर आकर्षित होने लगा. उस ने अपनी भूल सुधारने के लिए ऊषा से एक मौका मांगा, साथ ही वादा किया कि अब ऐसा कभी नहीं होगा.

पति के वादे पर ऊषा को भरोसा नहीं था. सालों तक वह उस की पीठ पीछे रंगरलियां मनाता रहा था. यहां तक कि उसे भनक तक नहीं लगने दी थी. यही सब सोच कर ऊषा ने उसे माफ नहीं किया बल्कि फैसला पति पर छोड़ दिया.

दूसरी ओर डी.पी. सिंह ने राखी से बिलकुल ही मुंह मोड़ लिया. डी.पी. सिंह में पहले से काफी बदलाव आ गया था. लेकिन राखी को यह मंजूर नहीं था कि उस का पति उसे छोड़ कर पहली पत्नी के पास जाए.

राखी ने डी.पी. सिंह को चेतावनी दे दी कि अगर वह उसे छोड़ कर पहली पत्नी के पास गया तो इस का परिणाम भुगतने को तैयार रहे. जब उस ने प्यार के लिए अपना घरबार सब छोड़ दिया तो वह रिश्ता तोड़ने से पहले अच्छी तरह सोच ले.

राखी की चेतावनी ने डा. डी.पी. सिंह के संपूर्ण अस्तित्व को हिला कर रख दिया. वह जानता था कि राखी जिद्दी स्वभाव की है, जो ठान लेती है, कर के रहती है. घरगृहस्थी को बचाने के लिए डी.पी. सिंह धीरेधीरे राखी से किनारा करने लगा.

राखी समझ गई थी कि डी.पी. सिंह उस से बचने के लिए किनारा कर रहा है. डी.पी. सिंह ने भले ही राखी से दूरी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन उस के खर्चे में कमी नहीं की थी. उसे वह उस की मुंहमांगी रकम देता था.

राखी मांगने लगी अपना हक

यह अलग बात है कि राखी रुपए नहीं, अपना पूरा हक चाहती थी. उसे दूसरी औरत बन कर रहना मंजूर नहीं था. वह पत्नी का पूरा अधिकार चाहती थी. जबकि डी.पी. सिंह पहली पत्नी ऊषा को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. राखी उस पर दबाव बनाने लगी थी कि वह ऊषा को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ कर उस के पास आ जाए. लेकिन डी.पी. सिंह ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था.

राखी ने सोच लिया था कि वह तो बरबाद हो गई है, पर उसे भी इतनी आसानी से मुक्ति नहीं देगी. डाक्टर को सबक सिखाने के लिए साल 2017 के शुरुआती महीने में राखी ने राजधानी लखनऊ के चिनहट थाने में डा. डी.पी. सिंह के खिलाफ अपहरण और गैंगरेप का मुकदमा दर्ज करा दिया.

यही नहीं उस ने गोरखपुर के महिला थाने में भी डा. सिंह के खिलाफ महिला उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया. एक साथ 2-2 मुकदमे दर्ज होते ही डा. सिंह के होश उड़ गए. गैंगरेप का मुकदमा दर्ज होते ही डी.पी. सिंह की शहर ही नहीं, पूर्वांचल भर में थूथू होने लगी. इस के चलते हौस्पिटल बुरी तरह प्रभावित हो गया. मरीज उस के क्लीनिक पर आने से कतराने लगे.

गैंगरेप केस ने डी.पी. सिंह की इज्जत पर बदनुमा दाग लगा दिया था. लोग उसे हिकारत भरी नजरों से देखने लगे और उस पर अंगुलियां उठने लगीं. इस से उस की सामाजिक प्रतिष्ठा की खूब छिछालेदर हुई. अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए डी.पी. सिंह ने राखी से केस वापस लेने को कहा और उसे मुंहमांगी रकम देने का औफर दिया.

राखी ने उस के सामने सरस्वतीपुरम कालोनी की उस आलीशान कोठी की रजिस्ट्री अपने नाम कराने की शर्त रखी, जिस में वह रह रही थी. वह कोठी करोड़ों की थी. इस के लिए डी.पी. सिंह तैयार नहीं हुआ. उस ने बात टाल दी.

धी रेधीरे डा. डी.पी. सिंह का राखी से मोह खत्म हो गया. दोनों के बीच का प्यार टकराव में बदल गया. कल तक जिस राखी की गंध डी.पी. सिंह की रगों में खून के साथ बहती थी, अब वह दुर्गंध बन गई थी. टकराव की स्थिति में डी.पी. सिंह का जीना मुश्किल हो गया था. उस की पलपल की खुशियां छिन गई थीं. राखी द्वारा पैदा की गई दुश्वारियों से डी.पी. सिंह बौखला गया और उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा.

राखी को हो गया फौजी मनीष से प्यार

इस बीच राखी के जीवन में एक नई कहानी की कड़ी जुड़ गई थी. सरस्वतीपुरम कालोनी में जहां राखी रहती थी, उसी के पड़ोस में मनीष कुमार श्रीवास्तव नाम का एक खूबसूरत और स्मार्ट युवक रहता था. वह आर्मी का जवान था और अपने एक रिश्तेदार के घर अकसर जाताआता था. वह मूलरूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला था.

डी.पी. सिंह से रिश्ते खराब होने के बाद राखी अकेलापन दूर करने के लिए मनीष से नजदीकियां बढ़ाने लगी. मनीष भी राखी की खूबसूरती पर फिदा हो गया. थोड़ी मुलाकातों के बाद दोनों एकदूसरे के करीब आ गए. अंतत: फरवरी 2018 में राखी और मनीष ने कोर्टमैरिज कर ली.

शादी के बाद राखी मनीष के साथ गया चली गई. उस ने मनीष से अपने अतीत की सारी बातें बता दीं. मनीष समझदार और सुलझा हुआ इंसान था. वह राखी को समझाता रहता था. मनीष को पत्नी की अतीत की कहानी सुन कर उस के साथ सहानुभूति हो गई. उस ने राखी को समझाया कि जो बीत गया, उसे याद करने से कोई फायदा नहीं है. उसे बुरा सपना समझ कर भुला दो.

राखी ने भले ही मनीष से शादी कर ली थी, लेकिन अपने पहले प्यार डी.पी. सिंह को अपने दिल से निकाल नहीं पाई थी. डा. डी.पी. सिंह जान चुका था कि राखी ने दूसरी शादी कर ली है. डी.पी. सिंह ही नहीं वरन राखी का बड़ा भाई अमर प्रकाश भी इस बात को जान चुका था कि राखी ने दूसरी शादी कर ली है. राखी के इस कृत्य पर उस ने बहन को काफी डांटाफटकारा भी था और समझाया भी था.

दरअसल परिवार वालों ने राखी से संबंध तोड़ लिए थे. एक अमर ही था जिसे राखी की परवाह थी. वह उसे अकसर फोन कर के उस का हालचाल पूछ लेता था. राखी के इस बार के कृत्य से वह दुखी था और उस ने राखी से बात करनी बंद कर दी थी.

इधर राखी डी.पी. सिंह को बारबार फोन कर के मकान की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव बना रही थी. राखी के दबाव बनाने से डी.पी. सिंह परेशान हो गया था. उस का दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. इस मुसीबत से निजात पाने के लिए वह राखी को रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा.

इस के लिए उस ने 5 बार योजना बनाई, लेकिन पांचों बार अपने मकसद में असफल रहा. अब आगे वह अपने मकसद में असफल नहीं होना चाहता था, इसलिए इस बार उस ने अपने हौस्पिटल के 2 कर्मचारियों देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह को पैसों का लालच दे कर साथ मिला लिया.

सब कुछ डा. डी.पी. सिंह की योजना के अनुसार चल रहा था. डी.पी. सिंह ने भले ही राखी से कन्नी काट ली थी, लेकिन राखी से फोन पर बात करनी बंद नहीं की थी. ऐसा वह राखी को विश्वास में लेने के लिए कर रहा था. राखी समझ रही थी कि डी.पी. सिंह अभी भी उस से प्यार करता है. राखी डी.पी. सिंह की इस योजना को समझ नहीं पाई. वह उस पर पहले जैसा ही यकीन करती रही.

31 मई, 2018 की बात है. राखी पति मनीष के साथ नेपाल के भैरहवा घूमने गई थी. 2 जून की सुबह पति से नजरें बचा कर उस ने डी.पी. सिंह को फोन कर के बता दिया कि वह भैरहवा घूमने आई है.

यह जान कर डी.पी. सिंह को लगा जैसे खुदबखुद उस की मुराद पूरी हो गई हो. वह जो चाह रहा था, वैसी स्थिति खुदबखुद बन गई. उस ने राखी से कहा कि वह भैरहवा में रुकी रहे. वह भी उस से मिलने आ रहा है. दूसरी ओर भैरहवा घूमने के बाद मनीष ने राखी से घर वापस चलने को कहा तो उस ने कुछ जरूरी काम होने की बात कह कर मनीष को अकेले ही घर वापस भेज दिया. मनीष अकेला ही गोरखपुर वापस लौट आया. वह कुछ दिनों की छुट्टी पर आया हुआ था.

डाक्टर ने रच ली थी खूनी साजिश

2 जून, 2018 को डा. डी.पी. सिंह, देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह के साथ स्कौर्पियो से नेपाल गया. नेपाल जाते हुए प्रमोद कुमार गाड़ी चला रहा था, जबकि देशदीपक निषाद ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठा था और डा. सिंह पिछली सीट पर.

दोपहर के समय ये लोग सोनौली (भारत-नेपाल सीमा) होते हुए नेपाल पहुंचे. प्रमोद कुमार ने सोनौली बौर्डर पार करते हुए भंसार बनवाया था. भंसार बनवाने के लिए प्रमोद के ड्राइविंग लाइसेंस की कौपी लगाई गई थी. भंसार नेपाल द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स होता है जो भारत से नेपाल सीमा में आने वाले वाहनों पर लगता है.

नेपाल के भैरहवा में राखी सड़क पर बैग लिए खड़ी इंतजार करती मिली. राखी से डी.पी. सिंह की बात नेपाल के नंबर से हुई थी. डी.पी. सिंह ने अपना मोबाइल जानबूझ कर घर पर छोड़ दिया था, ताकि जांचपड़ताल के दौरान पुलिस उस पर शक न कर सके.

राखी ने बताया कि वह भैरहवा में सड़क किनारे अकेली खड़ी है. राखी डी.पी. सिंह के पास गाड़ी में बैठ गई. वहां से चारों लोग पोखरा के लिए निकले. इन लोगों ने बुटवल से थोड़ा आगे और पालपा से पहले नाश्ता किया.

सभी लोग बुटवल से लगभग 100 किलोमीटर आगे मुलंग में एक छोटे होटल में रुके. इन लोगों ने होटल में 2 रूम बुक किए थे. डी.पी. सिंह और राखी एक कमरे में ठहरे थे. इस के बाद सुबह लगभग 11 बजे ये लोग खाना खा कर पोखरा के लिए निकले.

शाम को लगभग 4-5 बजे सभी पोखरा पहुंचे और डेविस फाल घूमे. इस के बाद राखी ने शौपिंग की, फिर सभी ने पोखरा में ही नाश्ता किया. इस के बाद ये लोग पहाड़ के ऊपर सारंगकोट नामक जगह पर होटल में रुके. इस होटल में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे. डा. डी.पी. सिंह ने खुद इस होटल का चुनाव किया था. होटल में इन लोगों ने पहले चाय पी और बाद में शराब. राखी की चाय में डी.पी. सिंह ने एल्प्रैक्स का पाउडर मिला दिया था.

रात के लगभग 11 बजे दवा ने अपना असर दिखाया तो राखी की तबीयत खराब होने लगी. यह देख डा. डी.पी. सिंह ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं. उस ने राखी को लातघूंसों से जम कर मारापीटा. मारपिटाई में एक लात राखी के पेट में ऐसी लगी कि वह अर्द्धचेतना में चली गई. थोड़ी देर में उस की सांसें भी बंद हो गईं.

उस की मौत के बाद तीनों राखी की लाश को ले कर उसी रात पोखरा के लिए निकल गए. लाश की शिनाख्त न हो सके, तीनों शातिरों ने राखी का मतदाता पहचानपत्र, मोबाइल फोन, नेपाल रिचार्ज कार्ड कीमत 100 रुपए, सहित कई सामान अपने पास रख लिए थे.

इस के बाद इन लोगों ने राखी को गाड़ी से निकाला और पहाड़ से नीचे धक्का दे दिया और फिर नेपाल से वापस घर लौट आए.

3 जून, 2018 को झाड़ी से नेपाल पुलिस ने राखी की लाश बरामद की. लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हुई. नेपाल पुलिस ने लाश का पोस्टमार्टम कराया तो राखी की मौत का कारण पेट फटना सामने आया. पोखरा पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी.

इधर मनीष पत्नी को ले कर परेशान था कि उस ने काम निपटा कर शाम तक घर वापस लौटने को कहा था, लेकिन न तो वह घर आई और न ही उस का फोन काम कर रहा था.

मनीष पर ही किया गया शक

मनीष फिर नेपाल के भैरहवा पहुंचा, जहां वह पत्नी के साथ रुका था. वहां जाने पर उसे पता चला कि राखी 2 जून को यहां से चली गई थी. इस के बाद वह कहां गई, किसी को पता नहीं था. 2 दिनों तक मनीष राखी को भैरहवा में खोजता रहा. जब वह नहीं मिली तो 4 जून को मनीष ने फोन कर के इस की सूचना राखी के बड़े भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव को दे दी.

अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने राखी के पति मनीष कुमार श्रीवास्तव पर शक जताते हुए गोरखपुर के शाहपुर थाने में मनीष के खिलाफ बहन के अपहरण और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने काररवाई करते हुए मनीष को गिरफ्तार कर लिया.

जांचपड़ताल में वह कहीं भी दोषी नहीं पाया गया. अंतत: पुलिस ने उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया. उधर नेपाल पुलिस ने लाश की शिनाख्त के लिए लाश की कुछ तसवीरें गोरखपुर आईजी जोन जयप्रकाश सिंह के कार्यालय भिजवा दीं. आईजी जोन ने इस की जिम्मेदारी आईजी एसटीएफ अमिताभ यश को सौंप दी. अमिताभ यश ने एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह को जांच सौंप दी.

मनीष ने खुद किया जांच में सहयोग

इस बीच मनीष ने आईजी से मिल कर राखी के लापता होने की जांच की मांग की और खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे से बरी करने की गुहार लगाई. मनीष के आवेदन पर एसटीएफ ने अपने विभाग के तेजतर्रार सिपाहियों यशवंत सिंह, अनूप राय, धनंजय सिंह, संतोष सिंह, महेंद्र सिंह आदि को लगाया.

एसटीएफ की जांचपड़ताल में राखी के मोबाइल की लोकेशन गुवाहाटी में मिली. फिर एक दिन अचानक राखी की डेडबौडी की फोटो सिपाही राजीव शुक्ला के सामने आई तो वह पहचान गया. इस क्लू ने डा. डी.पी. सिंह की साजिश का परदाफाश कर दिया. पुलिस ने जब डा. डी.पी. सिंह को गिरफ्तार कर के पूछताछ की तो सारी सच्चाई सामने आ गई.

डी.पी. सिंह के बयान के बाद उस के दोनों कर्मचारी देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों ने राखी की हत्या करने और डी.पी. सिंह का साथ देने का अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस को गुमराह करने के लिए डी.पी. सिंह ने राखी के मोबाइल को गुवाहाटी भिजवा दिया था, ताकि पुलिस को लगे कि राखी जिंदा है और वह गुवाहाटी में है. लेकिन पुलिस ने उस के गुनाहों को बेपरदा कर दिया.

घटना के बाद डी.पी. सिंह ने राखी के दूसरे प्रेमी को फंसाने की योजना बनाई थी. लेकिन उस की यह योजना धरी का धरी रह गई. एसटीएफ ने डी.पी. सिंह और उस के साथियों के पास से राखी का मतदाता पहचान पत्र, मोबाइल फोन, 100 रुपए का नेपाल रिचार्ज कार्ड व अन्य सामान बरामद कर लिया. नेपाल पुलिस ने अपने यहां हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था. डी.पी. सिंह और उस के दोनों साथियों पर दोनों देशों में एक साथ मुकदमा चलाया जाएगा. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Story : घर में घुसकर कैंची से काटा प्रेमिका का गला

Love Story  विभा और रोहित ने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में साथसाथ स्ट्रगल किया था. वहीं दोनों में दोस्ती और तथाकथित प्यार हुआ. जब थकहार कर विभा अपने घर लौट आई तो रोहित ने उसे उसी के घर में बंधक बना कर 12 घंटे तक ऐसा हाईवोल्टेज ड्रामा किया कि…

जिस ने भी सुना, उस ने मिसरोद का रास्ता पकड़ लिया. कोई सिटी बस से गया तो कोई औटो से. किसी ने टैक्सी ली तो कुछ लोग अपने वाहन से मिसरोज जा पहुंचे. बीती 13 जुलाई की अलसुबह मिसरोद में कोई ऐसी डिस्काउंट सेल नहीं लगी थी, जिस में किसी जहाज के डूब जाने से कपड़ा व्यवसायी या निर्माता को घाटे में आ कर मुफ्त के भाव कपड़े बेचने पड़ रहे हों, बल्कि जो हो रहा था, वह निहायत ही दिलचस्प और अनूठा ड्रामा था, जिसे भोपाल के लोग रूबरू देखने का मौका नहीं चूकना चाहते थे. भोपाल होशंगाबाद रोड पर पड़ने वाला मिसरोद कस्बा अब भोपाल का ही हिस्सा बन गया है. इस इलाके में तेजी से जो रिहायशी कालोनियां विकसित हुई हैं, उन में से एक है फौर्च्यून डिवाइन सिटी.

इस कालोनी में खासे खातेपीते लोग रहते हैं. इन्हीं में से एक हैं बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) से रिटायर हुए एम.पी. श्रीवास्तव. एजीएम जैसे अहम पद से रिटायर्ड एम.पी. श्रीवास्तव ने वक्त रहते फौर्च्यून डिवाइन सिटी में फ्लैट ले लिया था. एम.पी. श्रीवास्तव नौकरी से तो रिटायर हो गए थे, लेकिन जवान हो गई दोनों बेटियां विभा और आभा की शादी की चिंता से मुक्त नहीं हो पाए थे. रिटायरमेंट के बाद उन का अधिकांश समय बेटियों के लिए योग्य वर ढूंढने में गुजर रहा था. साधनसंपन्न घर में सब कुछ था. साथ ही खुशहाल परिवार में 2 होनहार बेटियां और कुशल गृहिणी साबित हुई उन की पत्नी चंद्रा, जिन्हें पति से ज्यादा बेटियों के हाथ पीले होने की चिंता सताती थी.

13 जुलाई को श्रीवास्तवजी के फ्लैट नंबर 503 में जो चहलपहल हुई, उस की उम्मीद श्रीवास्तव दंपति ने सपने में भी नहीं की थी. ऐसी शोहरत जिस से हर शरीफ शहरी बचना चाहता है, कैसी और क्यों थी, पहले उस की वजह जान लेना जरूरी है. इस संभ्रांत संस्कारी कायस्थ परिवार की बड़ी बेटी का नाम विभा है, जिस की उम्र 31 साल है. विभा पढ़ाईलिखाई में तो होशियार है ही, साथ ही उस की पहचान उस के सांवले सौंदर्य की वजह से भी है. एमटेक करने के बाद महत्त्वाकांक्षी विभा ने बजाय नौकरी करने के मुंबई का रास्ता पकड़ लिया था. चाहत थी मौडल बनने की.

विभा महत्त्वाकांक्षी ही नहीं, बल्कि प्रतिभावान भी थी. इसी के चलते करीब 3 साल पहले एक समारोह में कायस्थ समाज ने उसे सम्मानित भी किया था. उसी साल विभा ने एक ब्यूटी कौंटेस्ट में भी हिस्सा लिया था, जिस में वह विजेता रही थी. इस सब से उत्साहित विभा को भी लगने लगा था कि अगर कोशिश की जाए तो उस के लिए सेलिब्रिटी बनना कोई मुश्किल काम नहीं है. उस ने अपनी यह इच्छा मांबाप को बताई तो उन्होंने उसे निराश नहीं किया. उन लोगों ने उसे मुंबई जाने की इजाजत दे दी.

मौडलिंग और फिल्मों में काम करने की सोच लेना तो आसान काम है, लेकिन ग्लैमर की इस दुनिया में अपना मुकाम बनाना हंसीखेल नहीं है. यह बात विभा को मुंबई जा कर समझ आई. लेकिन विभा हिम्मत हारने वालों में से नहीं थी. वह  काम हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष करती रही. बोलचाल की भाषा में कहें तो वह स्ट्रगलर थी.  मुंबई में रोजाना हजारों स्ट्रगलर हाथ में एलबम लिए निर्मातानिर्देशकों और नामी कलाकारों के यहां धक्के खाते हैं. सचमुच दाद देनी होगी ऐसे नवोदित कलाकारों को, जो सुबह उठ कर देर रात तक चलते दौड़ते नहीं थकते. उस वक्त उन के जेहन में उन नामी कलाकारों के संघर्ष की छवि बसी होती है जो कभी उन्हीं की तरह स्ट्रगलर थे.

मीडिया भी ऐसे किस्से खूब बढ़ाचढ़ा कर पेश करता है. मसलन देखो कल का चाय या फल बेचने वाला या फिर पेशे से कंडक्टर कैसे शोहरत के शिखर पर पहुंच गया और अब अरबों की दौलत का मालिक है. कामयाब होना है तो धक्के तो खाने ही पड़ेंगे, यह बात मुंबई पहुंचने वाला हर स्ट्रगलर जानता है. विभा भी जानती थी. स्ट्रगल के दौरान विभा की मुलाकात रोहित नाम के युवक से हुई जो खुद भी स्ट्रगलर था. मूलत: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला रोहित भी छोटामोटा कलाकार था और किसी बड़े मौके की तलाश में था. विभा और रोहित की जानपहचान पहले दोस्ती में और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई, इस का अहसास दोनों को उस वक्त हुआ, जब रोहित ने विभा पर बेजा हक जमाना शुरू कर दिया.

छोटे शहरों की बनिस्बत मुंबई की दोस्ती और (Love Story) प्यार में फर्क कर पाना बेहद मुश्किल काम है. वजह यह कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई वर्जना नहीं होती. वहां कलाकार की पहचान उस की कामयाबी के पैमाने से होती है, जबकि विभा और रोहित अभी कामयाबी के सब से निचले पायदान पर खड़े थे. कामयाबी की सोचना तो दूर की बात है, अभी उन के कदम जरा भी आगे नहीं बढ़ पाए थे. जमीन पर खड़ेखड़े ही विभा को अहसास हो गया था कि जितना उसे मिलना था, उतना मिल चुका. लिहाजा अब वापस भोपाल लौट जाए और मम्मीपापा जहां कहें, वहां शादी कर ले. वजह यह कि रोहित उस पर शादी के बाबत दबाव बनाने लगा था जो उस से बरदाश्त नहीं हो पा रहा था.

पर वापसी के पहले विभा ने एक आखिरी कोशिश इस सोच के साथ शौर्ट मूवी बना कर की थी कि अगर मूवी चल निकली तो आगे के रास्ते और किस्मत के दरवाजे खुदबखुद खुलते चले जाएंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उलटे जो हुआ वह उस की बनाई रील का रीयल लाइफ में उतर आना था. अपनी बनाई मूवी में विभा ने अपनी पूरी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और प्रतिभा झोंक दी थी. इस मूवी की प्रोड्यूसर उस की छोटी बहन आभा थी. मूवी के कथानक के आधार पर उस ने उस का नाम फ्रायडे नाइट रखा था. फ्रायडे नाइट की कहानी मसालों से भरपूर थी, जिस की शूटिंग विभा ने अपने ही फ्लैट पर की थी. इस कहानी की मुख्य पात्र भी वही थी, जो एक लड़के से प्यार करने लगती है. लड़का विभा को धोखा दे देता है तो वह तिलमिला उठती है.

इस के पहले वह अपने प्रेमी के सामने रोतीगिड़गिड़ाती है, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता. एक वक्त ऐसा भी आता है, जब विभा की हालत पागलों जैसी हो जाती है और इसी गुस्से में वह एक सख्त फैसला ले लेती है. यह सख्त फैसला होता है अपने बेवफा प्रेमी का कत्ल कर देने का, जिसे वह एक शुक्रवार की रात को अंजाम देती है. विभा को लगा था कि उस की फिल्म बाजार में आते ही हाहाकार मचा देगी और बौलीवुड उसे हाथोंहाथ ले लेगा. अपनी फिल्म को ले कर विभा ने कई चैनलों के चक्कर लगाए, लेकिन उसे किसी ने भाव नहीं दिया. अंतत: उस ने 2 साल पहले इस फिल्म को यूट्यूब पर अपलोड कर दिया. यूट्यूब पर भी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले. फ्रायडे नाइट को देखने वालों की संख्या मुश्किल से 5 अंकों में पहुंच पाई.

13 जुलाई को हजारों लोग विभा के पांचवीं मंजिल स्थित उस फ्लैट की तरफ उत्सुकता से देख रहे थे, जहां कभी फ्रायडे नाइट की शूटिंग हुई थी. इन में कितने ही लोग उस वीडियो को भी देख रहे थे जिसे रोहित ने वायरल किया था. इस वीडियो में रोहित लाल बनियान में नजर आ रहा था और विभा पलंग पर बेहोश पड़ी थी. वीडियो में रोहित गुहार लगाता नजर आ रहा था कि देखो पुलिस और विभा के घर वाले हम बच्चों पर कितना जुल्म ढा रहे हैं. रोहित के मुताबिक वह और विभा दोनों एकदूसरे से प्यार (Love Story) करते थे और शादी करना चाहते थे. लेकिन विभा के घर वाले इस के लिए तैयार नहीं थे. आज जब वह विभा से मिलने आया तो उन्होंने पुलिस बुला ली. पुलिस वालों ने दोनों की इतनी पिटाई की कि शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा है. उस ने बहता हुआ खून भी दिखाया.

वीडियो वायरल होने की देर थी कि लोग मुफ्त का तमाशा देखने मिसरोद की तरफ दौड़ पड़े. रोहित का यह कहना गलत नहीं था कि विभा के घर वालों ने पुलिस बुला ली है. पुलिस घटनास्थल पर मौजूद तो थी लेकिन यह सोच कर सकपकाई हुई थी कि इस सिचुएशन से कैसे निपटा जाए. मतलब यह कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. यानी विभा की जान भी बच जाए और रोहित को गिरफ्तार भी कर लिया जाए.  दरअसल उस दिन सुबह करीब 7 बजे मिसरोद थाना इंचार्ज एस.के. चौकसे को एम.पी. श्रीवास्तव के फोन पर इत्तला दी थी कि रोहित नाम के एक युवक ने उन के फ्लैट में जबरन घुस कर उन की बड़ी बेटी विभा को फ्लैट के आखिरी कमरे में बंधक बना रखा है. उन्हें यह बात तब पता चली जब वह दूध लेने फ्लैट से बाहर निकले थे.

मामला गंभीर था और संभ्रांत कालोनी से ताल्लुक रखता था, इसलिए 3 सदस्यीय पुलिस टीम जल्द ही फार्च्यून डिवाइन सिटी पहुंच गई. पुलिस दल का नेतृत्व एसआई एस.एस. राजपूत कर रहे थे. उन्होंने सारा मामला समझ कर रोहित को बहलाफुसला कर काबू में करने की कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हुए. सुबहसुबह पुलिस को आया देख कालोनी के लोग विभा के घर के नीचे इकट्ठा हो कर माजरा समझने की कोशिश करने लगे थे. उन्हें इतना ही पता चल पाया कि श्रीवास्तवजी के घर कोई सिरफिरा घुस आया है, जिस ने उन की बड़ी बेटी को बंधक बना लिया है और तरहतरह की धमकियां दे रहा है.

रोहित को इस बात की आशंका थी कि विभा के मातापिता पुलिस को बुलाएंगे इसलिए वह सतर्क था. एम.पी. श्रीवास्तव उन की पत्नी चंद्रा और छोटी बेटी आभा हलकान थीं कि अंदर कमरे में विभा पर रोहित जाने क्याक्या जुल्म ढा रहा होगा. इस डर की वजह रोहित के हाथ में देसी कट्टे का होना था. एसआई राजपूत ने रोहित से बात करने की कोशिश की तो उस ने मोबाइल चार्जर की मांग की. राजपूत से चार्जर लेने के लिए रोहित ने दरवाजा थोड़ा खोला तो उन्होंने हाथ अड़ा कर पूरा दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन रोहित इस स्थिति के लिए तैयार था. उस ने कैंची से राजपूत के हाथ पर हमला कर दिया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी. चोट से तिलमिलाए एसआई राजपूत ने हाथ वापस खींच लिया तो रोहित ने चार्जर ले कर कमरा फिर से बंद कर लिया.

पुलिस को आया देख विभा की हिम्मत बढ़ी और उस ने रोहित का विरोध किया. इस पर झल्लाए रोहित ने विभा के हाथ और गले पर कैंची से वार कर के उसे घायल कर दिया. खून बहने से विभा बेहोश हो गई तो उस ने उसे बिस्तर पर पटक दिया और इसी हालत में वीडियो शूट कर वाट्सऐप पर डाल दिया. इस वीडियो के वायरल होते ही भोपाल में हड़कंप मच गया. थोड़ी देर में पुलिस के आला अफसर भी मौके पर पहुंच गए. एसपी (साउथ) राहुल लोढा ने भी रोहित से बातचीत कर के उस की मंशा जाननी चाही. शुरू में तो वह बात करने से कतराता रहा लेकिन खामोश रहने से बात नहीं बन रही थी, इसलिए उस ने जल्द ही अपने दिल की बात जाहिर कर दी कि वह विभा से प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है.

इस दौरान पुलिस ने रोहित के पिता को भी खबर कर दी थी, इसलिए वह अलीगढ़ से भोपाल के लिए निकल गए थे. दरअसल, रोहित की एक शर्त यह भी थी कि वह अपने पिता के आने के बाद ही दरवाजा खोलेगा. यह पुलिस और प्रशासन का इम्तिहान था. वजह अपनी पर उतारू हो आया रोहित विभा को जान से भी मार सकता था. ऐसे में पुलिस वालों ने उस की हर बात मानने में ही भलाई समझी और लगातार उस से बात कर के उसे उलझाए रखा.

रोहित ने दूध मांगा तो वह भी उसे दिया गया, लेकिन वह दरवाजा खोलने को तैयार नहीं था, इसलिए दूध की बोतल छत से रस्सी से लटका कर दी गई. रोहित ने बोतल का दूध लेने से मना कर दिया क्योंकि उसे डर था कि कहीं उस में कोई नशीला या बेहोश कर देने वाला पदार्थ न हो. इस के बाद उस ने हर चीज पैक्ड मांगी जो उसे मुहैया कराई गई. उधर रोहित द्वारा जारी वीडियो में विभा लहूलुहान और बेहोश दिखाई दे रही थी, जिसे देख कर उस के मांबाप और बहन की चिंता बढ़ती जा रही थी. वीडियो में रोहित एसआई एस.एस. राजपूत को भी कोसता नजर आया. दोपहर होतेहोते स्थिति और विकट हो चली थी. रोहित कुछ समझने को तैयार नहीं था और बारबार विभा से शादी करने की रट लगाए जा रहा था. खाना और पानी भी उसे बालकनी से दिया गया था, जो उस की मांग के मुताबिक पैक्ड था.

जब खूब हल्ला मच गया तो शाम के करीब 5 बजे आला पुलिस अधिकारी हाइड्रोलिक मशीन के जरिए 5वीं मंजिल तक पहुंचे और रोहित से बातचीत की. हाइड्रोलिक मशीन पर राहुल लोढ़ा के साथ एसडीएम दिशा नागवंशी और एएसपी रामवीर यादव थे. इन लोगों ने खिड़की से रोहित से बात की और उसे भरोसा दिलाया कि उस की शादी विभा से करवा दी जाएगी, इस में कोई अड़चन इसलिए नहीं है क्योंकि दोनों बालिग हैं और शादी के लिए राजी हैं. राहुल लोढ़ा ने समझदारी से काम लेते हुए रोहित को आश्वस्त किया कि शादी रजिस्टर्ड होगी, क्योंकि एसडीएम भी उन के साथ हैं. चूंकि बंद कमरे में शादी नहीं करवाई जा सकती थी, इसलिए उन्होंने रोहित से बाहर आने के लिए कहा.

रोहित समझ तो रहा था कि यह पुलिस की चाल भी हो सकती है, लेकिन अब तक 12 घंटे गुजर चुके थे और वह थकने लगा था. वह बारबार विभा को धमका रहा था. होश में आ चुकी विभा की समझ में भी आ गया था कि इस सिरफिरे से छुटकारा पाने का एक ही तरीका है कि उस की बात मान ली जाए. मेरी नहीं हुई तो मैं तुम्हें किसी और की भी नहीं होने दूंगा. अगर किसी और से शादी की तो मार डालूंगा, जैसे फिल्मी डायलौग बोलने वाले राहुल को थोड़ी तसल्ली तब हुई, जब विभा ने स्टांप पेपर पर शादी की सहमति दे दी. इधर पुलिस वाले भी कुछ इस तरह से पेश आ रहे थे, मानो बाहर आते ही दोनों की शादी करा देंगे. रोहित को लग रहा था कि वह प्यार की जंग जीत गया है, जमाना उस के सामने झुक गया है.

वह पूरी ठसक से बाहर निकल आया. इस के पहले उस ने कुछ मीडियाकर्मियों से वीडियो कालिंग के जरिए बात की और जीत का निशान अंगरेजी का ‘वी’ अक्षर बनाते हुए खुशी जाहिर की थी.  बाहर आते ही पुलिस ने सिरफिरे आशिक रोहित को गिरफ्तार कर लिया और विभा सहित उसे इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया, क्योंकि दोनों के शरीर से काफी खून बह चुका था. वहां गुस्से में मौजूद महिलाओं ने रोहित की जूतेचप्पलों और लातघूसों से खूब धुनाई की. इलाज के बाद रोहित को हिरासत में ले लिया गया और विभा को घर जाने दिया गया. अस्पताल में विभा ने बताया कि वह रोहित से प्यार नहीं करती, उस ने तो खुद के बचाव के लिए शादी के हलफनामे पर दस्तखत कर दिए थे.

विभा की मां चंद्रा ने खुलासा किया कि एक साल से रोहित विभा के पीछे पड़ा था और उसे तरहतरह से तंग कर रहा था. इसी साल होली के मौके पर 28 मार्च को भी वह उन के घर में घुस आया था, तब भी उस के हाथ में कट्टा था. इस की शिकायत थाने में लिखाई गई थी और पुलिस ने रोहित को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई थी. इधर मथुरा तक आ गए रोहित के पिता रेशमपाल को जैसे ही ड्रामे के खात्मे की जानकारी मिली, वह वहीं से वापस लौट गए. उन्होंने यह जरूर बताया कि वह रोहित की बेजा हरकतों से आजिज आ चुके हैं. इसीलिए कुछ दिन पहले उन्होंने उसे अपनी जायदाद से बेदखल कर दिया था. गांव में प्रधानी के चुनाव के दौरान रोहित द्वारा शराब चुराए जाने की बात भी उन्होंने बताई.

रेशमपाल ने ईमानदारी से यह भी बताया कि रोहित ने कई दफा इस लड़की (विभा) से फोन पर उन की बात कराई थी. यानी लोगों का यह अनुमान गलत नहीं था कि मामला उतना एकतरफा नहीं था, जितना विभा बता रही थी. उस ने भले ही रोहित से प्यार की बात नहीं स्वीकारी, पर यह जरूर कह रही थी कि रोहित का असली चेहरा सामने आने के बाद उस ने उस से दूरियां बनानी शुरू कर दी थीं. जाहिर है माशूका की इसी बेरुखी से रोहित झल्लाया हुआ था. उसे विभा बेवफा नजर आने लगी थी, लेकिन वह उसे दिलोदिमाग से निकाल नहीं पा रहा था. गिरफ्तारी के दूसरे दिन रोहित पुलिस वालों से यह कहता रहा कि उन एसपी साहब को लाओ, जिन्होंने शादी करवाने का वादा किया था.

उस के मुंह से यह सुन कर सभी को उस पर हंसी भी आई और तरस भी. पुलिस वाले इस ड्रामे को थर्सडे नाइट कहते नजर आए, क्योंकि इस की शुरुआत गुरुवार 12 जुलाई से हुई थी.  श्रीवास्तव परिवार अभी सदमे से उबरा नहीं है और न ही लंबे समय तक उबर पाएगा. रोहित ने 12 घंटे जो ड्रामा किया, उस की दहशत उन के सिर चढ़ कर बोल रही है. खुद विभा आशंका जता रही है कि अगर रोहित को जमानत मिली तो वह फिर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा. रोहित के पिता रेशमपाल का भी यही कहना है कि रोहित को जमानत नहीं मिलनी चाहिए. कथा लिखने तक रोहित को जमानत नहीं मिली थी, पर भोपाल के सीनियर वकीलों का कहना है कि कुछ देर से ही सही, उसे जमानत मिल ही जाएगी. इसलिए बदनामी झेल चुके श्रीवास्तव परिवार को संभल कर रहना चाहिए.

 

Extramarital Affair : भाभी को लेकर भागा देवर

Extramarital Affair  30 वर्षीय पूनम ने 40 साल के दिनेश अवस्थी से प्रेम विवाह कर जरूर लिया था, लेकिन वह उस से खुश नहीं थी. फिर पूनम ने हमउम्र देवर मनोज अवस्थी को प्यार के जाल में फांस लिया. यह बात जब दिनेश को पता चली तो उस ने क्या किया? क्या पति के सामने पूनम देवर के साथ रहती रहीï? जानने के लिए पढ़ें यह दिलचस्प कहानी.

एक रोज दिनेश ने पत्नी पूनम को अपने छोटे भाई मनोज की बांहों में समाए हुए देख लिया. तब उस ने दोनों को खूब फटकार लगाई. उस समय उन दोनों ने दिनेश से माफी मांग ली. कुछ दिनों बाद पूनम और मनोज दोबारा पकड़े गए, तब दिनेश ने दोनों की जम कर पिटाई की. इस के बाद पूनम और मनोज ने बाधक बन रहे भाई दिनेश को ठिकाने लगाने का निश्चय किया.

भाई का काम तमाम करने के लिए मनोज बिधनू बाजार गया और वहां से डेढ़ सौ रुपए में तेज धार वाला चाकू खरीदा और उसे कमरे में ला कर छिपा दिया. पूनम ने पत्थर पर रगड़ कर उस चाकू की धार तेज कर दी. 23 अप्रैल, 2024 की रात 8 बजे दिनेश घर आया. वह नशे में था और आते ही चारपाई पर लुढ़क गया. दिनेश गहरी नींद सो गया तो उस की पत्नी पूनम देवर मनोज के कमरे में पहुंच गई. उस के बाद वे दोनों मस्ती में डूब गए. आधी रात को मनोज के कमरे का दरवाजा भड़ाक से खुला तो दिनेश सामने खड़ा था.

शायद उस की नींद खुल गई थी और वह पूनम को ढूंढते हुए कमरे में आ पहुंचा था. पत्नी को छोटे भाई मनोज के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख कर उस का खून खौल उठा था. उस ने गुस्से में पत्नी पूनम पर हाथ उठाया तो मनोज से रहा नहीं गया और उस ने बड़े भाई दिनेश का हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया. इसी समय पूनम बोली, ”मनोज, देख क्या रहे हो. आज इस बाधा को दूर कर दो. हम दोनों का जीना हराम कर दिया है इस ने.’’

इस के बाद मनोज और पूनम ने मिल कर दिनेश को दबोच लिया और फिर चाकू से गोद कर उस का काम तमाम कर दिया. हत्या करने के बाद उस के हाथपैर रस्सी से बांधे, फिर शव को बोरी में भर कर साइकिल पर लाद कर गांव के बाहर तालाब में फेंक दिया. सुबह उन दोनों ने मिल कर खून के धब्बे साफ किए और खून लगी काटन और कपड़े चारपाई के नीचे छिपा दिए. चाकू उस ने टांड पर छिपा दिया.

26 अप्रैल की सुबह वह तालाब पर गया तो दिनेश की लाश तालाब में उतरा रही थी. उस ने लाश को डंडे से दबाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहा. उसी समय उसे गांव के कुछ लोग तालाब की तरफ आते दिखाई दिए तो वह डर गया और फिर डर की वजह से घर में ताला लगाया और पूनम को साथ ले कर फरार हो गया.

2 दिन दोनों बुआ के घर लखीमपुर रहे. फिर वहां से चित्रकूट पहुंचे, चित्रकूट में कुछ दिन रहे. उस के बाद बागेश्वर धाम आश्रम आ गए. पकड़े जाने के डर से उन दोनों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए थे. बागेश्वर धाम आश्रम उन्हे छिपने के लिए उचित लगा, इसलिए वे वहीं रहने लगे. जीवन चलाने के लिए उन दोनों ने आश्रम के बाहर एक चाय स्टाल पर नौकरी खोज ली. दिन भर दोनों चाय स्टाल पर रहते और रात में आश्रम आ कर सो जाते.

दिनेश की क्यों नहीं हो रही थी शादी

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर बिधनू थाना अंतर्गत एक गांव है- खेरसा. बिधनू कस्बा से सटे इस गांव के लोग या तो खेती करते हैं या फिर व्यापार. पढ़ेलिखे लोग सरकारी/प्राइवेट नौकरी भी करते हैं. इस गांव में बिजली पानी जैसी सभी भौतिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. गांव के आसपास कई ईंट भट्ठे हैं, जहां सैकड़ों मजदूर काम करते हैं. अन्य प्रदेशों के मजदूर भी यहां काम की तलाश में आते हैं.

इसी खेरसा गांव में स्थित अपनी ननिहाल में दिनेश अवस्थी रहता था. दिनेश अवस्थी के पिता राजकुमार अवस्थी, लखीमपुर जनपद के मूलगांव कुडऱीरूप सेनारूप के मूल निवासी थे. उन के परिवार में पत्नी सावित्री के अलावा 3 बेटे दिनेश, मनोज व मयानंद उर्फ अशनी थे. बड़ा बेटा दिनेश अपने भाई मनोज के साथ ननिहाल (खेरसा गांव) में रहने लगा था, जबकि सब से छोटा मयानंद पिता के साथ गांव में रहता था.

दिनेश अवस्थी ट्रक चलाता था, जबकि मनोज बिधनू के ईंट भट्ठे पर काम करता था. दोनों भाइयों की अभी तक शादी नहीं हुई थी. दिनेश का कहीं रिश्ता तय नहीं हो पा रहा था. उस की शादी के लिए उस के मातापिता भी चिंतित थे. क्योंकि वह 40 वर्ष की उम्र पार कर चुका था. इन्हीं दिनों एक रोज दिनेश की मुलाकात पूनम उर्फ गुडिय़ा से हुई. पूनम के पिता रघुवर सीतापुर जनपद के गांव लहरापुर के रहने वाले थे. पूनम उन की बिगड़ैल बेटी थी. आवारा युवकों के साथ घूमना, उन के साथ मौजमस्ती करना उस का शौक था. इसी बदनामी के कारण उस का रिश्ता नहीं हो पा रहा था. रघुवर बेटी के चालचलन से बहुत दुखी थे.

दिनेश की रिश्तेदारी लहरापुर गांव में थी. रिश्तेदार के घर आतेजाते ही दिनेश की मुलाकात पूनम से हुई थी. 30 वर्षीय पूनम दिनेश को ऐसी भाई कि वह उस के पीछे ही पड़ गया. पूनम भी घर बसाना चाहती थी, इसलिए वह भी दिनेश को लिफ्ट देने लगी. दोनों के बीच मुलाकातें बढ़ीं और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो नजदीकियां भी बढऩे लगीं.

वर्ष 2023 की जनवरी माह में दिनेश ने पूनम उर्फ गुडिय़ा से बारादेवी मंदिर में जयमाला पहना कर प्रेम विवाह कर लिया. इस विवाह की जानकारी न तो दिनेश के घरवालों को हुई और न ही पूनम के घर वालों को. हालांकि बाद में दोनों परिवारों को उन के विवाह की भनक लग गई थी. लेकिन विरोध किसी की तरफ से नहीं किया गया. शादी के वक्त पूनम की उम्र 30 वर्ष थी, जबकि दिनेश अवस्थी 40 वर्ष पार कर चुका था. शादी के बाद दिनेश खेरसा गांव में पूनम के साथ रहने लगा. चूंकि अधेड़ उम्र में दिनेश ने प्रेम विवाह किया था, अत: वह पत्नी पूनम को बेहद प्यार करता था और उस की हर डिमांड पूरी करता था.

विवाह के बाद के दिन मौजमस्ती में बीतते हैं. पूनम दिनेश से मिलने वाले सुख से इस कदर आनंदित होती रही कि किसी दूसरी ओर उस का ध्यान ही नहीं गया. लेकिन एक महीने बाद जब दिनेश काम पर जाने लगा और देर रात घर वापस आने लगा तो पूनम के दिमाग में फितूर समाना शुरू हो गया. वह सोचने लगी कि दिनेश न उसे कहीं सैरसपाटा कराने ले जाता है और न शौपिंग कराने. न कभी कोई उपहार ला कर दिया है. पत्नी को खुश रखने का न तो उसे हुनर आता है, न तमीज है. दिनेश से शादी होते ही उस के अरमानों को घुन लग गया और किस्मत का बेड़ा गर्क हो गया.

बीतते दिनों के साथ पति से पूनम का मन खट्टा होने लगा. उस ने पति की परवाह करनी छोड़ दी. न वह उस की जरूरतों का ध्यान रखती, न उस की कोई बात सुनती. दिनेश अपनी कोई जरूरत बताता तो वह एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल देती. इस के बावजूद दिनेश उस पर प्यार उड़ेलता. दिनेश ट्रक चलाता था. शराब का भी लती था. अत: वह जब घर लौटता तो नशे में झूमता आता. कभीकभी शराब की बोतल साथ भी ले आता, फिर घर में बैठ कर पीता. शराब पीने को ले कर दोनों के बीच बहस होती, फिर झगड़ा होता.

दिनेश और पूनम में झगड़ा होने लगा तो पूनम सोचने लगी कि उस ने अधेड़ उम्र के शराबी से प्रेम विवाह रचा कर बड़ी भूल की है. वह उसे देह सुख प्रदान नहीं कर सकता. पूनम अपनी हसरतों का गला नही घोंटना चाहती थी. उस ने अपने सुख के साधन की तलाश शुरू की तो नजरें मनोज पर ठहर गईं. मनोज पूनम के पति दिनेश का छोटा भाई था. रिश्ते में वह उस का सगा देवर. दोनों भाई साथ ही रहते थे. मनोज पूनम का हमउम्र था. आखों, चेहरे, Extramarital Affair  जिस्म व बातों से उस का कुंवारापन साफ झलकता था. पूनम जब भी मनोज को देखती, उस की लार टपकने लगती.

वह सोचती, मनोज से उस की शादी हुई होती तो हर दिन होली होती और हर रात दिवाली होती. दिन को चाहत के रंग बिखरते, कहकहों का गुलाल उड़ता और रात को हसरतों की फुलझडिय़ां. पूनम ने जो करना था, तय कर लिया. पूनम के दिल में देवर आया तो मनोज को रिझाने के लिए पूनम ने उसी तरह डोरे डालने शुरू कर दिए, जिस तरह देह सुख की प्यासी औरत डाला करती है. कभी वह वक्षों से आंचल गिरा देती, कभी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही मनोज के सामने आ जाती. कभी सजधज कर उसे रिझाने की कोशिश करती.

पूनम के खुलेपन और छेड़छाड़ से मनोज का मन गुदगुदाता था. वह यह भी समझ गया था कि भाभी उस से क्या चाहती है? मनोज भी यही चाहने लगा था. मगर उसे बड़े भाई दिनेश का डर सता रहा था. इसलिए पहल करने से डरता था. धीरेधीरे दोनों की नजदीकियां बढऩे लगीं. पूनम देवर मनोज के साथ बिधनू कस्बे के बाजारहाट भी जाने लगी. मनोज अपनी कमाई के कुछ पैसे भाभी के हाथ पर भी रखने लगा. इस से पूनम का लगाव और भी बढऩे लगा. मनोज की अब भाभी से खूब पटती थी. देवरभाभी के बीच हंसीमजाक व ठिठोली भी होती थी. मनोज को भाभी की सुंदरता और अल्हड़पन खूब भाता था. कभीकभी वह उसे एकटक प्यार भरी नजरों से देखा करता था.

अपनी ओर टकटकी लगाए देखते समय जब कभी पूनम की नजर उस से टकरा जाती तो दोनों मुसकरा देते थे. मनोज दिनेश से ज्यादा सुंदर और अच्छी कदकाठी का था, इसलिए पूनम उस पर पूरी तरह से फिदा हो गई थी.

पूनम के देवर की तरफ क्यों बढ़े कदम

मनोज भी पूनम को चाहने लगा था. चूंकि वे देवरभाभी थे, इसलिए दोनों के साथ रहने पर दिनेश को कोई शक नहीं होता था. दिनेश सरल स्वभाव का था. पत्नी पर विश्वास भी करता था. पत्नी और भाई के बीच क्या खिचड़ी पक रही है, इस की दिनेश को कोई जानकारी नहीं थी. वह अपने में ही मस्त रहता था. देह सुख पाने की लालसा दोनों में दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी. आखिर जब मनोज से नहीं रहा गया तो उस ने एक रोज मजाकमजाक में भाभी पूनम को बाहों में भर लिया और शारीरिक छेड़छाड़ शुरू कर दी. इस छेड़छाड़ का पूनम Extramarital Affair ने विरोध नहीं किया. उस ने भी दोनों हाथों से मनोज को जकड़ लिया.

मनोज ने इस मूक आमंत्रण का फायदा उठाते हुए उस पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. इस के बाद अपनी मर्यादाओं को लांघते हुए दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. चूंकि मनोज घर में ही रहता था. इसलिए कुछ दिनों तक दोनों का खेल पूरी तरह से चलता रहा. दिनेश को पता तक नहीं चला कि उस के पीछे घर में क्या हो रहा है. आसपड़ोस के लोग भी यही समझते रहे कि दोनों देवरभाभी हैं. इसलिए उन पर शक नहीं हुआ.

पूनम अब देवर मनोज के साथ खुल कर खेलने लगी थी और देह सुख का भरपूर आनंद उठाने लगी थी. उसे दिन दोपहर शाम जब भी इच्छा होती, वह देवर के कमरे में पहुंच जाती और उस के साथ बिस्तर पर बिछ जाती. कभीकभी तो वह रात में भी पति को बिस्तर पर नशे में धुत सोता छोड़ कर देवर के पास पहुंच जाती और देह की प्यास बुझा कर वापस पति के बिस्तर पर आ जाती.

पूनम देवर के प्यार में इतनी अंधी बन गई थी कि उसे पति नकारा और देवर प्यारा लगने लगा था. वह पति की हर तरह से उपेक्षा भी करने लगी थी. न उस का खानेपीने का ध्यान रखती थी और न ही उस से हमदर्दी जताती थी. जब कभी दिनेश कामसुख की कामना करता तो वह कोई न कोई बहाना बना देती. दिनेश की समझ में नहीं आ रहा था कि पूनम ऐसा बरताव क्यों कर रही है. गलत काम कैसा भी हो, उस की उम्र लंबी नहीं होती. पूनम और मनोज के साथ भी ऐसा ही हुुआ. एक दोपहर पड़ोस में रहने वाली ठकुराइन ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया.

ठकुराइन ने इस पाप की जानकारी आसपड़ोस की महिलाओं को दी. उस के बाद पहले पड़ोस में चर्चाएं शुरू हुईं, फिर उन के संबंधों की चर्चा पूरे गांव में खुल कर होने लगी. ये चर्चाएं दिनेश के कानों तक पहुंचीं तो उस ने पूनम से जवाब मांगा.

पोल खुली तो पूनम ने बहाए घडिय़ाली आंसू

ऐसे मामलों में जैसा कि होता है, कोई महिला आसानी से अपनी चरित्रहीनता स्वीकार नहीं करती. पूनम भी साफ मुकर गई, ”लोगों ने कह दिया और तुम ने मान लिया. मुझ पर लांछन लगाते हुए तुम्हें जरा भी शरम नहीं आई.’’

”किसी एक ने कहा होता तो मैं उस का मुंह तोड़ देता, लेकिन पूरा गांव कह रहा है कि तूने मेरे भाई को यार बना लिया है.’’ दिनेश ने डंडा उठा लिया, ”सच बोल, वरना तेरी हड्डियां तोड़ दूंगा.’’

पूनम सच बोलती तो शामत, सच न बोलती तो भी शामत. अत: उस ने सच ही बोलने का निश्चय कर लिया. उस ने घडिय़ाली आंसू बहाते हुए दिनेश के पांव पकड़ लिए, ”मुझ से गलती हो गई. माफ कर दो. वायदा करती हूं कि आइंदा मनोज से संबंध नहीं रखूंगी.’’

पहली गलती समझ कर तथा बदनामी के डर से दिनेश ने पत्नी को माफ कर दिया. डर कर पूनम ने पति से वादा तो कर लिया, पर वह उस पर अमल करने को मानसिक रूप से राजी नहीं थी. दरअसल, पूनम के दिल में पति की जगह देवर बस गया था, इसलिए वह उस से नाता तोडऩा नहीं चाहती थी. इधर भेद खुला तो मनोज डर की वजह से गांव चला गया. दिनेश ने फोन पर बात की, तभी वह वापस आया. आते ही उस ने भी दिनेश के पैर पकड़ लिए, ”भैया, मुझे माफ कर दो. बड़ी भूल हो गई. आइंदा ऐसी भूल नहीं होगी.’’

दिनेश ने रहम करते हुए भाई मनोज को माफ कर दिया. इस के कुछ दिनों तक तो पूनम और मनोज ठीक रहे, लेकिन मौका मिलने पर वे अपनीअपनी हसरतें पूरी कर लेते थे.

भाई के सीधेपन की वजह से मनोज की हिम्मत बढ़ गई थी. अब मनोज अपनी भाभी से शादी रचाने के ख्वाब देखने लगा था. उस ने अपने मन की बात भाभी Extramarital Affair से कही तो वह भी देवर से शादी रचाने को राजी हो गई. इधर दिनेश को विश्वास हो गया था कि पूनम को अपने किए का पछतावा है. इसी कारण उस ने मनोज से यारी तोड़ दी है. एक रोज दोपहर को वह बेवक्त घर लौटा तो फिर से एक बार उस की आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया.

उस ने देखा कि पूनम मनोज की बांहों में पड़ी है. यह देख कर उस ने मनोज और पूनम की जम कर पिटाई कर डाली. पिटने के बाद मनोज तो भाग निकला, लेकिन पूनम कहां जाती. वह रात भर अपनी चोटों को सहलाती रही और नफरत की आग में जलती रही. दिनेश का विश्वास चकनाचूर हुआ तो वह पूनम पर निगरानी रखने लगा. दिनेश अब हमेशा उसे नजरों के पहरे में रखता था. इस कारण वह देवर से मिल नहीं पाती थी. इस का उपाय उस ने यह निकाला कि जिस रोज दिनेश ज्यादा शराब पी लेता और धुत हो कर सो जाता, वह मनोज के कमरे में पहुंच जाती. फिर सारी रात दोनों जिस्म की आग में तपते रहते.

एक रात मनोज की बांहों में लेटी पूनम ने मन की बात कह डाली, ”मनोज, हम इस तरह कब तक आंखमिचौली खेलते रहेंगे. कोई ऐसा रास्ता नहीं है, जिस से दिनेश हम दोनों के बीच से हमेशा के लिए हट जाए.’’

मनोज को तो जैसे इसी बात का इंतजार था. उस ने पूनम के गालों को सहलाते हुए कहा, ”चिंता मत करो भाभी, तुम्हारी यह इच्छा जरूर पूरी होगी.’’

दरअसल, मनोज पूनम को अपनी जागीर समझने लगा था. वह उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था. लेकिन भाई दिनेश बाधक था. भाई की पिटाई से भी वह आहत था. जब पूनम को अपने मन की बात उसे बताई तो उस ने भाई का काम तमाम करने का मन बना लिया. पूनम भी उस का साथ देने को तैयार थी.

26 अप्रैल, 2024 को खेरसा गांव के लोगों ने गांव के बाहर तालाब में उतराती एक लाश देखी. ग्राम प्रधान राजेश कुमार ने फोन के जरिए सूचना थाना बिधनू पुलिस को दी. सूचना पाते ही एसएचओ जितेंद्र प्रताप सिंह सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने गांव के 2 युवकों तथा पुलिसकर्मियों के सहयोग से तालाब में उतराती लाश को बाहर निकलवाया, साथ ही सूचना पुलिस अधिकारियों को दी.

बंद कमरे में मिले खून के निशान

लाश को देखते ही गांव वालों ने उस की पहचान कर ली. ग्राम प्रधान राजेश कुमार ने बताया कि लाश दिनेश अवस्थी की है. वह पत्नी पूनम Extramarital Affair व भाई मनोज के साथ ननिहाल में रहता था. वह मूल निवासी लखीमपुर के मूलगांव कुडऱीरूप सेनारूप का है. मनोज अपनी भाभी पूनम के साथ फरार है. घर में ताला पड़ा है. जबकि उसे सुबह तालाब के पास देखा गया था. पड़ोसी युवक राजू दूबे के पास दिनेश के छोटे भाई मयानंद उर्फ अशनी का मोबाइल नंबर था. पहले वह भी ननिहाल मे ही रहता था. तभी राजू की दोस्ती उस से हो गई थी. लेकिन 2 साल पहले वह गांव चला गया था. राजू की बात उस से फोन पर होती रहती थी.

एसएचओ जितेंद्र प्रताप सिंह ने राजू से मोबाइल नंबर ले कर मयानंद उर्फ अशनी को उस के बड़े भाई दिनेश की हत्या की सूचना दी और तत्काल ननिहाल आने को कहा. इस के बाद जितेंद्र प्रताप सिंह ने शव का बारीकी से निरीक्षण किया. दिनेश की हत्या किसी नुकीले हथियार से की गई थी. उस के गले, सीने व चेहरे पर कई घाव थे. हत्या कर हाथपैर रस्सी से बांध कर शव को बोरी में भर कर तालाब में फेंका गया था. मृतक की उम्र 43 वर्ष के आसपास थी.

एसएचओ जितेंद्र प्रताप सिंह अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर डीसीपी (साउथ) अंकिता शर्मा, एडीसीपी विजेंद्र द्विवेदी तथा एसीपी (घाटमपुर) रंजीत कुमार सिंह घटनास्थल आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा घटना के संबंध में इंसपेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह तथा गांव वालों से जानकारी जुटाई. गांव वालों से जो जानकारी मिली थी, उस से स्पष्ट था कि दिनेश की हत्या उस की पत्नी पूनम व भाई मनोज ने ही की है. वे फरार भी थे. साक्ष्य की तलाश में पुलिस अधिकारी मृतक दिनेश के घर पहुंचे. घर पर ताला लगा था.

ताला तोड़ कर पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई. वहां कमरे में खून से सनी काटन तथा कुछ कपड़े बरामद हुए. बिस्तर व फर्श पर खून के धब्बे मिले. फर्श को साफ किया गया था. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर काटन, कपड़े सुरक्षित कर लिए. स्पष्ट था कि हत्या कमरे के अंदर ही की गई थी. जांचपड़ताल के बाद पुलिस ने दिनेश के शव का पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपत राय अस्पताल, कानपुर भिजवा दिया.

शाम 5 बजे तक मृतक दिनेश का छोटा भाई मयानंद उर्फ अशनी ननिहाल आ गया. वहां से वह थाना बिधनू पहुंचा. उस ने पुलिस के साथ जा कर मोर्चरी में रखे शव को देखा तो फफक पड़ा. उस ने बताया शव उस के भाई दिनेश का है. उस ने एसएचओ जितेंद्र प्रताप सिंह को बताया कि दिनेश की हत्या उस के भाई मनोज व भाभी पूनम ने की है.

मयानंद उर्फ अशनी की तहरीर पर इंसपेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने मृतक की पत्नी पूनम व भाई मनोज के खिलाफ हत्या कर लाश छिपाने की दर्ज कर ली तथा उन की गिरफ्तारी के लिए जुट गए.

जितेंद्र प्रताप सिंह ने आरोपियों को पकडऩे के लिए ताबड़तोड़ छापे मारे. लेकिन वे पकड़ में नहीं आए. उन्होंने नातेदारों के घर सीतापुर, विसवां लखीमपुर तथा चित्रकूट में भी छापा मारा, लेकिन उन का पता नहीं चला. पुलिस ने उन की लोकेशन जानने के लिए उन के मोबाइल फोन नंबर सर्विलांस पर लिए. लेकिन उन के मोबाइल फोन बंद थे.

आरोपियों पर घोषित हुआ ईनाम

हत्यारोपियों की तलाश में धीरेधीरे 3 महीने बीत गए. लेकिन उन का कुछ भी पता नहीं चला. पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उन पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया. पुलिस ने उन की फिर तलाश तेज की साथ ही मुखबिरों का भी सहारा लिया. लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. दरअसल, मनोज व पूनम ने अपनेअपने मोबाइल फोन बंद कर लिए थे. इसलिए उन की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी. करीब 6 महीने बाद नवंबर, 2024 की 5 तारीख को मनोज का मोबाइल फोन चालू हुआ तो पुलिस को उस की लोकेशन मध्य प्रदेश के छतरपुर (गढ़ा) स्थित बागेश्वर धाम आश्रम की मिली.

इंसपेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह तत्काल अपनी टीम के साथ बागेश्वर धाम आश्रम के लिए रवाना हो गए. पुलिस टीम यहां 3 दिन तक डेरा जमाए रही. उस के बाद टीम को सफलता मिल गई. टीम ने आश्रम के बाहर एक चाय के स्टाल से दोनों को गिरफ्तार कर लिया. मनोज व पूनम को थाना बिधनू लाया गया. इंसपेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने मनोज और पूनम से दिनेश की हत्या के बारे में पूछताछ की तो वे साफ मुकर गए. लेकिन सख्ती करने पर टूट गए और हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. यही नहीं, मनोज ने आलाकत्ल चाकू भी बरामद करा दिया, जिसे उस ने घर में ही छिपा दिया था. जानकारी होने पर पुलिस अधिकारियों ने भी उन से विस्तार से पूछताछ की.

दिनेश की हत्या किए हुए 6 महीने बीत गए. अब पूनम और मनोज को लगने लगा था कि शायद मामला ठंडा पड़ गया है. अत: मनोज ने अपना मोबाइल फोन चालू किया और किसी से बात की. उस का फोन पुलिस ने सर्विलांय पर लगा रखा था, इसलिए फोन चालू होते ही उस की लोकेशन बागेश्वर धाम की मिल गई और पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने उन दोनों के बयान दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. 10 नवंबर, 2024 को पुलिस ने आरोपी मनोज व पूनम को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हे जिला जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Murder Story : शादी का दबाव डालने लगी तो प्रेमी ने पैर से पिंकी का गला दबा दिया

पिंकी जैसी लड़कियां भले ही खुद पर कितना भी कौन्फीडेंस रखती हों, लेकिन सच्चाई यह है कि अपने कौन्फीडेंस की वजह से वे किसी न किसी के जाल में फंस ही जाती हैं. पिंकी सोचती थी कि वह जब चाहे रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर की हकीकत सामने ले आएगी. लेकिन उसे नहीं मालूम था कि वह मगरमच्छ है. आखिर वही हुआ जो…

मंजू गुप्ता अपने पति किशन गुप्ता के साथ समाधान दिवस पर कानपुर के थाना चकेरी पहुंची. उस समय एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा, एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास, सीओ अजीत प्रताप सिंह और थानाप्रभारी अजय सेठ थाने में ही मौजूद थे. थाना परिसर में फरियादियों की भीड़ लगी थी और अधिकारी बारीबारी से उन की समस्याएं सुन कर निदान करने की कोशिश कर रहे थे. फरियादियों में नेताजी नगर निवासी मंजू गुप्ता भी थी. बारी आने पर जब वह एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के सामने पहुंची तो अपनी लिखित फरियाद देते हुए फफक कर रो पड़ी. रोतेरोते उस ने कहा, ‘‘साहब, हमारी बेटी पिंकी उर्फ आंचल को घर से गायब हुए डेढ़ साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन अभी तक उस का कुछ पता नहीं चला. पता नहीं वह जिंदा है भी या नहीं. उस की गुमशुदगी और अपहरण की रिपोर्ट थाने में दर्ज है.’’

एसएसपी मीणा ने मंजू गुप्ता को भरोसा दिया कि वह उस की बेटी पिंकी की खोज कराएंगे और वह जहां भी होगी, बरामद की जाएगी. आश्वासन पा कर मंजू गुप्ता पति के साथ घर वापस आ गई. हालांकि एसएसपी के आश्वासन पर उन्हें यकीन नहीं था, क्योंकि अब तक वे लोग आईजी, डीआईजी से ले कर डीएम व कमिश्नर तक की चौखट पर दस्तक दे चुके थे, पर किसी ने भी उन की मदद नहीं की थी. फिर भी एसएसपी के आश्वासन पर उन के मन में आशा की एक नई किरण तो जागी ही थी. यह बात 21 जुलाई, 2018 की है.

एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा ने पिंकी गुप्ता अपहरण मामले को गंभीरता से लिया. उन्हें इस बात का अफसोस था कि डेढ़ साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद पुलिस पिंकी को बरामद नहीं कर सकी थी. उन्होंने इस मामले को हैंडल करने की जिम्मेदारी एसपी सुरेंद्र कुमार दास को सौंपी. दास हाल ही में अंबेडकर नगर से पदोन्नत हो कर आए थे और एसपी (पूर्वी) बनाए गए थे. एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने पिंकी अपहरण मामले को चुनौती के रूप में लिया. उन्होंने सीओ अजीत प्रताप सिंह, थानाप्रभारी अजय सेठ तथा चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह को अपने औफिस बुला लिया. साथ बैठ कर सभी ने इस मामले पर गंभीरता से विचारविमर्श किया. इसी मीटिंग में तय हुआ कि पिंकी अपहरण मामले की जांच चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह करेंगे. यह भी तय हुआ कि हर रोज की जांच से वह अधिकारियों को अवगत कराते रहेंगे.

24 जुलाई, 2018 को जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद जगदीश सिंह ने उसी दिन इस मामले की फाइल के पन्ने पलटते हुए अब तक हुई जांच के बारे में जानने की कोशिश की. पता चला कि पिंकी की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद तत्कालीन दरोगा संजय यादव को जांच सौंपी गई थी. बाद में संजय यादव ने पिंकी की गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया था. इस के बाद दरोगा राघवेंद्र सिंह, सुजीत कुमार मिश्रा तथा मुरलीधर पांडेय ने जांच की. इस दरमयान 55 पर्चे काटे गए थे. लेकिन पिंकी का कहीं पता नहीं चला था. इस के बाद इस मामले की जांच जगदीश सिंह को सौंपी गई थी.

दरोगा जगदीश सिंह ने फाइल खंगाली तो कई बातों ने उन्हें चौंकाया पिंकी अपहरण केस की पूरी फाइल का अध्ययन करने के बाद जगदीश सिंह ने पिंकी की मां मंजू गुप्ता को चौकी बुलाया और उस से पूछताछ कर के उस का बयान दर्ज किया. मंजू ने बताया कि पिंकी उर्फ आंचल 27 सितंबर, 2016 को यह कह कर घर से निकली थी कि वह मैडिकल परीक्षण कराने उर्सला अस्पताल जाएगी. उसे थाना बाबूपुरवा की पुलिस ने बुलाया है. उस के बाद वह घर वापस नहीं लौटी थी. पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगी.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ जगदीश ने पूछा.

‘‘हां साहब, है.’’ मंजू ने जवाब दिया.

‘‘किस पर?’’

‘‘रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा उस के दोस्त अनुज सिंह पर.’’

‘‘उन के खिलाफ तुम्हारे पास कोई सबूत है क्या?’’ जगदीश सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, सबूत तो कोई नहीं है. पर शक जरूर है. दिखावे के लिए तो बउआ ठाकुर ने मेरी मदद की है लेकिन पिंकी के अपहरण का षडयंत्र उसी ने रचा है. उसी ने अपने दोस्तों की मदद से पिंकी का अपहरण किया है.’’

विवेचक जगदीश सिंह ने रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि बउआ ठाकुर शिवकटरा का रहने वाला है और क्षेत्र का दबंग आदमी है. वह डीएवी कालेज का छात्र नेता रहा था और उस ने छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ा था. यह अलग बात है कि वह हार गया था. बउआ प्रौपर्टी डीलिंग का काम करता था, साथ ही वह वकील भी था. उस की गिनती दबंग वकीलों में होती थी. बउआ ठाकुर के दोस्त अनुज सिंह के बारे में सिंह ने जानकारी जुटाई तो पताचला कि वह केडीए कालोनी श्यामनगर का रहने वाला है और ट्रैवल एजेंसी चलाता है. उस का भी अपने क्षेत्र में दबदबा है. साथ ही उस की राजनीतिक गलियारों में पैठ भी है. बउआ ठाकुर से उस की गहरी दोस्ती है. दोनों साथ उठतेबैठते हैं और शराब की महफिल जमाते हैं.

बउआ ठाकुर और अनुज सिंह शक के घेरे में आए तो जगदीश सिंह ने पिंकी गुप्ता उर्फ आंचल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर देखी. जिस दिन पिंकी गायब हुई थी, उस दिन उस की जिनजिन नंबरों पर बात हुई थी, उन नंबरों को जगदीश सिंह ने अलग पेपर पर लिख लिया. इस के बाद उन्होंने उन नंबरों पर काल कर के एकएक शख्स को थाने बुलाया और उन से पूछताछ की. बउआ ठाकुर आया संदेह के दायरे में इसी दौरान एक युवक जगदीश सिंह के हाथ लगा, जिस ने बताया कि 27 सितंबर, 2016 को उस ने पिंकी गुप्ता को छात्र नेता व अधिवक्ता बउआ ठाकुर और उस के दोस्त अनुज सिंह के साथ श्यामनगर में हाइवे पुल के नीचे कार में देखा था.

जगदीश सिंह ने इसी क्लू को आधार बनाया. उन्होंने सीधे अधिवक्ता बउआ ठाकुर पर हाथ डालना उचित नहीं समझा. सोचविचार कर उन्होंने पहले अनुज को उठाने का तानाबाना बुना. इस के लिए उन्होंने एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास से संपर्क किया और सारी जानकारी देते हुए अनुज व बउआ को अलगअलग गिरफ्तार करने की अनुमति मांगी. एसपी ने जगदीश सिंह की जांच प्रगति के आधार पर दोनों की गिरफ्तारी की अनुमति दे दी, साथ ही सहयोग के लिए स्पैशल फोर्स भी मुहैया करा दी. इसी बीच विवेचक जगदीश सिंह को काल डिटेल्स से एक और चौंकाने वाली बात पता चली कि जिस दिन पिंकी बउआ व अनुज के साथ कार में देखी गई थी, उसी रात से तीनों के मोबाइल फोन स्विच्ड औफ हो गए थे. इस का मतलब उस रात कोई न कोई ऐसी अनहोनी जरूर हुई थी, जिस की वजह से तीनों को मोबाइल स्विच्ड करने पड़े थे. इस क्लू के आधार पर बउआ ठाकुर व अनुज सिंह पुलिस के रडार पर आ गए.

25 अगस्त, 2018 की रात दरोगा जगदीश सिंह ने एसपी (पूर्वी) द्वारा उपलब्ध कराई गई स्पैशल फोर्स की मदद से अनुज सिंह के केडीए कालोनी, श्यामनगर आवास पर छापा मारा. पुलिस छापे से घर में हड़कंप मच गया. घर वालों व पड़ोसियों ने अनुज की गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने किसी की एक नहीं सुनी और अनुज सिंह को गिरफ्तार कर थाना चकेरी ले आई. थाना चकेरी पर अनुज सिंह से पिंकी गुप्ता के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकरते हुए बोला, ‘‘मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता.’’

थानाप्रभारी अजय सेठ व सीओ अजीत प्रताप सिंह ने भी अनुज से हर तरह से पूछताछ की, लेकिन उस ने जुबान नहीं खोली. इस पर विवचेक जगदीश सिंह ने क्लू देने वाले आदमी से अनुज का सामना कराया. उसे देखते ही अनुज सिंह को पसीना आ गया. आखिर उसे जुबान खोलनी पड़ी. अनुज सिंह ने पुलिस को बताया कि पिंकी गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं है. उस ने और बउआ ठाकुर ने पिंकी का अपहरण कर उसी दिन मार डाला था और उस का शव हमीरपुर ले जा कर यमुना नदी में फेंक दिया था. यह पूछे जाने पर कि पिंकी को क्यों मारा, अनुज बोला, ‘‘यह सब बउआ से पूछो. मैं ने तो दोस्ती के नाते उस का साथ दिया था.’’

आखिर खुल ही गया पिंकी की गुमशुदगी का भेद अनुज सिंह ने पिंकी की हत्या का खुलासा किया तो पुलिस सकते में आ गई. आननफानन में इंसपेक्टर अजय सेठ ने पिंकी की हत्या किए जाने की जानकारी एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास व सीओ कैंट अजीत प्रताप सिंह को दे दी. अधिकारियों के निर्देश पर दबंग छात्र नेता, अधिवक्ता रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर के शिवकटरा, गांधीनगर स्थित घर पर भारी पुलिस बल के साथ छापा मारा गया. पुलिस उसे बंदी बना कर थाना चकेरी ले आई. बउआ ठाकुर की गिरफ्तारी की खबर छात्र नेताओं और वकीलों को लगी तो वे थाना चकेरी आ पहुंचे और हंगामा करने लगे. हंगामे की खबर पा कर एसपी सुरेंद्र कुमार दास व सीओ कैंट अजीत प्रताप सिंह भी आ गए. उन्होंने छात्र नेताओं और वकीलों से अपील की कि वे हंगामा न करें. अगर बउआ ठाकुर निर्दोष है तो उसे बाइज्जत छोड़ दिया जाएगा.

एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने जब बउआ से पिंकी के संबंध में पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब उस का सामना अनुज सिंह से करा कर बताया गया कि उस ने पिंकी की हत्या का राज उगल दिया है तो बउआ ने भी सिर झुका लिया. इस के बाद उस ने पिंकी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. यही नहीं, दोनों ने हत्या में प्रयुक्त अर्टिगा कार भी बरामद करा दी. मंजू गुप्ता को जब पिंकी की हत्या हो जाने की खबर मिली तो वह थाना चकेरी पहुंच गई. उस ने हवालात में बंद बउआ से पूछा कि तुम तो पिंकी को बहुत चाहते थे, फिर उसे क्यों मार डाला? इस पर बउआ बोला, ‘‘तुम्हारी बेटी मुझे ब्लैकमेल कर के शादी का दबाव डालने लगी थी. आखिर क्या करता मैं?’’

चूंकि बउआ ठाकुर और अनुज सिंह ने पिंकी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, इसलिए विवेचक जगदीश सिंह ने दोनों को अपरहण की धारा 364, हत्या की धारा 302 और लाश गायब करने के लिए धारा 201 में नामजद कर विधिसम्मत बंदी बना लिया. पुलिस बउआ व अनुज को ले कर हमीरपुर गई, जहां दोनों ने पिंकी के शव को यमुना पुल के नीचे फेंका था. लेकिन पुलिस शव बरामद नहीं कर पाई. पुलिस यमुना किनारे स्थित थानों से अज्ञात शव के बारे में जानकारी जुटा कर पिंकी के शव की शिनाख्त कराने का प्रयास कराने लगी.

पिंकी कौन थी, वह बउआ ठाकुर के संपर्क में कैसे आई, बउआ ने उसे अपने प्यार के जाल में कैसे फंसाया और फिर उस की हत्या क्यों और कैसे की, यह सब जानने के लिए हमें पिंकी के अतीत को टटोलना पड़ेगा. आम लड़की से खास बनी पिंकी कानपुर महानगर के चकेरी थाना के अंतर्गत एक मोहल्ला है नेताजी नगर. इसी मोहल्ले में किशन गुप्ता अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी मंजू के अलावा केवल एक ही बेटी थी पिंकी उर्फ आंचल. किशन गुप्ता जीटी रोड पर अंडे का ठेला लगाता था. उस की पत्नी मंजू भी उस के काम में हाथ बंटाती थी. किशन जो कमाता था, उसी से परिवार का भरणपोषण होता था. मंजू गुप्ता की बेटी पिंकी उर्फ आंचल देखनेभालने में काफी सुंदर थी. उस ने जब जवानी की ओर कदम बढ़ाया तो उस का अंगअंग दमकने लगा. गोरी रंगत और खूबसूरत आंखों वाली पिंकी को जो भी देखता, आकर्षित हो जाता.

पिंकी गुप्ता का चचेरा भाई दिलीप गुप्ता भी नेताजी नगर में पिंकी के घर के पास रहता था. उस की अपने चाचा किशन व चाची मंजू से पटरी नहीं बैठती थी. दोनों के बीच अकसर छोटीमोटी बातों को ले कर झगड़ा होता रहता था. पिंकी इस झगड़े से बहुत परेशान रहती थी. मां का पक्ष ले कर कभीकभी वह दिलीप से भी भिड़ जाती थी, जिस से दिलीप उस से नाराज रहने लगा था. एक रोज पिंकी चचेरे भाई दिलीप की शिकायत ले कर एसएसपी औफिस जा रही थी, तभी रामादेवी चौराहे पर उस की मुलाकात अधिवक्ता रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर से हो गई. उस रोज टैंपो औटो की हड़ताल थी, जिस से पिंकी को सवारी नहीं मिल रही थी.

अधिवक्ता बउआ ठाकुर कचहरी जा रहा था, पुलिस कार्यालय भी कचहरी के पास ही था. बउआ ठाकुर ने पिंकी से कहा कि उस की कार में बैठ जाए, वह उसे पुलिस औफिस के सामने उतार देगा. पिंकी की मजबूरी थी, सो वह गाड़ी में बैठ गई. पिंकी खूबसूरत होने के साथसाथ बातूनी भी थी. रामादेवी चौराहे से पुलिस औफिस तक वह उस से बातें करती रही. एक मिनट के लिए भी उस का मुंह बंद नहीं हुआ. जिस तरह वह मुसकरामुसकरा कर बातें कर रही थी, उस से रीतेंद्र सिंह बहुत प्रभावित हुआ. पहली ही नजर में पिंकी उस के दिल में उतर गई. वह बैक मिरर में उस का चेहरा देखते हुए उस की बातों का जवाब देता रहा. बातोंबातों में उस ने पिंकी का मोबाइल नंबर भी ले लिया.

बउआ ने धीरेधीरे पांव आगे बढ़ा कर थाम लिया पिंकी का हाथ  पिंकी उर्फ आंचल से हुई पहली मुलाकात में ही बउआ जैसे उस का दीवाना हो गया. उस का फोन नंबर तो उस के पास था ही, इसलिए जब भी उस का मन करता, उस से फोन पर बात कर लेता. रीतेंद्र उर्फ बउआ ठाकुर शरीर से हृष्टपुष्ट व स्मार्ट था, सो पिंकी को भी उस से बातें करना अच्छा लगता था. धीरेधीरे उन दोनों के बीच दोस्ती हो गई. यही दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे. एक दिन पिंकी के चचेरे भाई दिलीप के घर चोरी हो गई. दिलीप ने अपनी चाची मंजू व चचेरी बहन पिंकी के विरुद्ध थाना चकेरी में रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने मंजू के घर तलाशी ली तो चोरी का कुछ सामान बरामद हो गया.

पुलिस ने मांबेटी को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि मंजू चिल्लाती रही कि उस ने चोरी नहीं की है, बल्कि उसे साजिशन फंसाया गया है. लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी और मंजू और उस की बेटी पिंकी को जेल भेज दिया.  प्रेमिका पिंकी के जेल जाने की बात अधिवक्ता बउआ ठाकुर को पता चली तो वह तिलमिला उठा. उस ने दौड़धूप कर के पिंकी व उस की मां मंजू की जमानत करा दी. इस दरम्यान दोनों को 14 दिन जेल में रहना पड़ा. चूंकि वकील बउआ ठाकुर ने मंजू की जमानत कराई थी, इसलिए वह उस के अहसान तले दब गई और उसे अपन हितैषी मानने लगी.

पिंकी का भी प्यार उमड़ पड़ा और वह बउआ को अपना सच्चा प्रेमी समझ बैठी. इस के बाद बउआ और पिंकी का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों साथसाथ घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने लगे. दोनों का शारीरिक मिलन भी होने लगा. रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर चकेरी थाना के शिवकटरा, गांधीग्राम में रहता था. वहां उस का अपना मकान था. वह छात्र जीवन से ही दबंग था. डीएवी कालेज में पढ़ाई के दौरान उस ने छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह हार गया था. बउआ प्रौपर्टी डीलिंग के साथसाथ वकालत भी करता था. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी और वह क्षेत्र का दबंग व्यक्ति था.

मांबाप ने भी नहीं समझाया पिंकी को पिंकी, बउआ के प्यार में ऐसी दीवानी हुई कि वह उस के साथ शादी रचाने का ख्वाब देखने लगी. ख्वाब ही नहीं देखने लगी बल्कि उस पर शादी के लिए दबाव भी डालने लगी. जबकि बउआ शादीशुदा था. भला वह शादी के लिए कैसे राजी होता. पिंकी जब भी शादी का प्रस्ताव रखती, बउआ यह कह कर टाल देता कि अभी तो मौजमस्ती के दिन हैं. शादी की जल्दी क्या है.

अब तक पिंकी के मांबाप भी जान गए थे कि पिंकी और बउआ ठाकुर एकदूसरे को चाहते हैं. लेकिन उन्होंने कभी विरोध नहीं किया. इस का कारण यह था कि बउआ ठाकुर मंजू और किशन की हरसंभव मदद करता था.  मांबाप यह भी जानते थे कि अगर वे पिंकी को मना भी करेंगे तो भी वह बउआ का साथ नहीं छोड़ेगी. इसलिए उन्होंने पिंकी को बउआ ठाकुर के साथ आनेजाने की छूट दे दी थी. पिंकी का जब भी जी चाहता, बउआ के साथ चली जाती थी. इधर पिंकी के चचेरे भाई दिलीप को जब पता चला कि दबंग बउआ ठाकुर पिंकी के घर वालों की मदद कर रहा है तो उस ने भी बउआ से दोस्ती कर ली. जल्द ही दिलीप भी बउआ ठाकुर का खास बन गया. दिलीप की शराब पार्टी भी बउआ ठाकुर व उस के दोस्तों के साथ जमने लगी. पार्टी का खर्च दिलीप ही उठाता था.

जब पिंकी को बउआ ठाकुर और दिलीप की दोस्ती की जानकारी हुई तो वह बउआ से नाराज रहने लगी. उस ने बउआ के साथ आनाजाना भी कम कर दिया. अब वह बहुत अनुरोध करने पर ही उस के साथ जाती थी. दरअसल पिंकी को यह गवारा नहीं था कि उस का प्रेमी उस के पारिवारिक दुश्मन दिलीप से दोस्ती रखे. इसलिए वह बउआ से दूरी बनाने लगी थी. 19 जून, 2016 को पिंकी बाबूपुरवा कालोनी में रहने वाले किसी रिश्तेदार के घर जा रही थी, तभी ट्रांसपोर्ट चौराहे पर उसे बउआ ठाकुर मिल गया. उस ने पिंकी को साथ चलने को कहा. लेकिन उस ने साफ इनकार कर दिया. बउआ पिंकी को जबरदस्ती खींच कर कार में बिठाने लगा. इस पर पिंकी ने हंगामा खड़ा कर दिया, जिस से भीड़ जुट गई. भीड़ जुटते देख बउआ वहां से रफूचक्कर हो गया.

पिंकी ने बउआ ठाकुर के खिलाफ दर्ज कराया केस  इस के बाद पिंकी बदहवास हालत में थाना बाबूपुरवा पहुंची और उस ने रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा अपने चचेरे भाई दिलीप के विरुद्ध छेड़छाड़, मारपीट, गालीगलौज, धमकी देने और पोक्सो ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. पिंकी ने चचेरे भाई दिलीप को सबक सिखाने के लिए रिपोर्ट में उस का नाम भी दर्ज कराया. बउआ ठाकुर को जब पिंकी द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने की जानकारी मिली तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उस ने पिंकी पर दबाव डाला कि वह इस मामले को रफादफा कर दे. लेकिन पिंकी राजी नहीं हुई. वह सीधेसीधे ब्लैकमेलिंग पर उतर आई. उस ने बउआ ठाकुर से कहा कि वह समझौता तभी करेगी, जब वह उस से शादी कर लेगा. उस ने यह भी धमकी दी कि अगर उस ने शादी नहीं की तो वह उस की जिंदगी में भी जहर घोल देगी. इस के लिए वह उस की पत्नी को अपने और उस के अवैध संबंधों की जानकारी दे देगी.

पिंकी की धमकी से बउआ ठाकुर घबरा गया. वह जानता था कि पिंकी जिद्दी लड़की है, वह किसी भी हद तक जा सकती है. अत: गले की इस फांस को निकालने के लिए बउआ ने एक भयानक निर्णय ले लिया और समय का इंतजार करने लगा. इस बीच बउआ ठाकुर ने अपने अजीज दोस्त अनुज सिंह से भी मुलाकात की जो ट्रैवल एजेंसी चलाता था. वह केडीए कालोनी, श्यामनगर में रहता था. बउआ ने उसे अपनी परेशानी बताते हुए मदद मांगी तो अनुज राजी हो गया. बउआ ठाकुर वकील था. उस ने मामले को रफादफा करने के लिए एक शपथपत्र तैयार कर रखा था. वह इस शपथपत्र पर पिंकी से दस्तखत कराना चाहता था. लेकिन पिंकी इस के लिए राजी नहीं थी. उस ने पिंकी को समझौते के लिए मोटी रकम देने का भी लालच दिया, लेकिन वह टालमटोल करती रही.

पिंकी ने मौत की ओर खुद बढ़ाए कदम पिंकी ने बउआ के खिलाफ पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले में उम्र का पता लगाने के लिए पिंकी का मैडिकल होना था. बाबूपुरवा पुलिस ने 27 सितंबर, 2016 को उसे थाने बुलाया और मैडिकल कराने उर्सला अस्पताल ले गई. पिंकी के मैडिकल की जानकारी बउआ ठाकुर को हुई तो वह अपने दोस्त अनुज सिंह के साथ अर्टिगा कार ले कर कचहरी पहुंच गया. अर्टिगा कार अनुज के दोस्त गोलू की थी. यहीं से बउआ ठाकुर ने फोन कर के पिंकी को समझौते के लिए बुलाया. मैडिकल करा कर पिंकी कचहरी गेट पहुंची तो बउआ ने उसे काली स्क्रीन चढ़ी अर्टिगा कार में बैठा लिया. वहां से ये लोग छप्पनभोग चौराहा आए, जहां बउआ, पिंकी और अनुज ने नाश्ता किया. वहां से निकल कर उन की कार श्यामनगर हाइवे हो कर हमीरपुर रोड की ओर दौड़ने लगी.

कार अनुज चला रहा था, जबकि पीछे वाली सीट पर बउआ ठाकुर और पिंकी बैठे थे. रात करीब 8 बजे चलती कार में पिंकी और बउआ के बीच समझौते के लिए झगड़ा होने लगा. शातिरदिमाग बउआ ठाकुर ने समझौते के शपथ पत्र पर जबरदस्ती पिंकी के दस्तखत करा लिए और समझौते के लिए रुपए देते हुए वीडियो भी बना लिया.  इस के बाद बउआ ठाकुर ने पिंकी को बेरहमी से पीटा और कार में अपने पैरों के नीचे गिरा दिया. बाद में उस ने पैर से ही पिंकी का गला दबा कर उसे बेरहमी से मार डाला. पिंकी की सांसें थमने के बाद बउआ और अनुज हमीरपुर स्थित यमुना पुल पहुंचे. वहां बउआ ने अनुज की मदद से पिंकी की लाश उफनती यमुना में फेंक दी. फिर दोनों वापस घर लौट आए. बउआ ने पिंकी का मोबाइल तोड़ कर फेंक दिया था और दोनों ने अपने मोबाइल स्विच्ड औफ कर दिए थे.

इधर 27 सितंबर, 2016 की रात तक जब पिंकी वापस नहीं लौटी तो उस की मां मंजू को चिंता हुई. वह रात भर पिंकी के इंतजार में जागती रही. दूसरे दिन वह पिंकी की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना बाबूपुरवा जा ही रही थी कि बउआ ठाकुर आ गया. उस ने मंजू से कहा कि उस का पिंकी से समझौता हो गया है. समझौते के तौर पर 10 हजार रुपए ले कर वह वैष्णोदेवी के दर्शन करने गई है. हफ्ते भर में आ जाएगी. सबूत के तौर पर उस ने मंजू को शपथ पत्र तथा वीडियो दिखाया, जिस से मंजू को विश्वास हो गया. पिंकी जब हफ्ते भर बाद भी वापस नहीं लौटी और उस से फोन पर भी संपर्क नहीं हुआ तो मंजू ने बउआ से मदद मांगी. तब बउआ ने हमदर्द बन कर मंजू की तरफ से 12 नवंबर, 2016 को चकेरी थाने में पिंकी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद दरोगा संजय यादव ने जांच की.

जांच के बाद उन्होंने गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया. बाद में एक के बाद एक कई अफसरों ने इस मामले की जांच की. लेकिन डेढ़ साल बाद भी पिंकी का कुछ पता नहीं चला. इस बीच बउआ ठाकुर मंजू का हमदर्द बन कर मंजू को पुलिस अधिकारियों की चौखट पर ले जाता रहा.  जिस से पुलिस को भी उस पर शक नहीं हुआ. मंजू की हमदर्दी का फायदा उठा कर बउआ ठाकुर ने समझौते का शपथ पत्र तथा पिंकी के अपहरण की रिपोर्ट कोर्ट में लगा कर अपने मारपीट, छेड़छाड़, धमकी व पोक्सो ऐक्ट के मामले को खत्म करा दिया. बउआ ठाकुर व अनुज सिंह निश्चिंत थे कि वे पुलिस की पकड़ में नहीं आएंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन के पाप का घड़ा फूट ही गया और पिंकी की हत्या का राज खुल गया.

दरअसल, 21 जुलाई 2018 को मंजू गुप्ता समाधान दिवस पर अपनी फरियाद ले कर थाना चकेरी पहुंच गई और एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के समक्ष पिंकी को बरामद करने की गुहार लगाई. एसएसपी के निर्देश और एसपी सुरेंद्र कुमार दास की मौनिटरिंग में जब दरोगा जगदीश सिंह ने जांच शुरू की तो एक महीने में ही पिंकी के अपहरण व हत्या का परदाफाश हो गया.

27 अगस्त, 2018 को थाना चकेरी पुलिस ने अभियुक्त रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा अनुज सिंह को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

Murder Story : जेठानी ने कर डाला देवर के बेटे का कत्ल

विधवा मंजीत कौर ने अपने विवाहित देवर को न सिर्फ अपने जाल में फांसा बल्कि उस की गृहस्थी उजाड़ कर शादी भी कर ली. इस के बाद उस का ऐसा कौन सा स्वार्थ रह गया जिस के चलते उस ने अपने सौतेले बेटे को भी ठिकाने लगा दिया

‘‘दखो सरदारजी, एक बात सचसच बताना, झूठ मत बोलना. मैं पिछले कई दिनों से देख रही हूं कि आजकल तुम अपनी भरजाई पर कुछ ज्यादा ही प्यार लुटा रहे हो. क्या मैं इस की वजह जान सकती हूं?’’ राजबीर कौर ने यह बात अपने पति हरदीप सिंह से जब पूछी तो वह उस से आंखें चुराने लगा. पत्नी की बात का हरदीप को जवाब भी देना था, इसलिए अपने होंठों पर हलकी मुसकान बिखेरते हुए उस ने राजबीर कौर से कहा, ‘‘तुम भी कमाल करती हो राजी. तुम तो जानती ही हो कि बड़े भाई काबल की मौत हुए अभी कुछ ही समय हुआ है. भाईसाहब की मौत से भाभीजी को कितना सदमा पहुंचा है. यह बात तुम भी समझ सकती हो. मैं बस उन्हें उस सदमे से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा हूं. और फिर भाईसाहब के दोनों बच्चे मनप्रीत सिंह और गुरप्रीत सिंह भी अभी काफी छोटे हैं.’’

हरदीप अपनी पत्नी को प्यार से राजी कह कर बुलाता था.

‘‘हां, यह बात तो मैं अच्छी तरह समझ सकती हूं पर कोई ऐसे तो नहीं करता, जैसे तुम कर रहे हो. तुम्हें यह भी याद रखना चाहिए कि अपना भी एक बेटा किरनजोत है. तुम अपनी बीवीबच्चे छोड़ कर हर समय अपनी विधवा भाभी और उन के बच्चों का ही खयाल रखोगे तो अपना घर कैसे चलेगा.’’ राजबीर कौर बोली.

‘‘मैं समझ सकता हूं और यह बात भी अच्छी तरह से जानता हूं कि मेरी लापरवाही में तुम घर को अच्छी तरह संभाल सकती हो. फिर अब कुछ ही दिनों की तो बात है, सब ठीक हो जाएगा.’’ पति ने समझाया. कहने को तो यह बात यहीं खत्म हो गई थी पर राजबीर कौर अच्छी तरह जानती थी कि अब आगे कुछ ठीक होने वाला नहीं है. इसलिए उस ने मन ही मन फैसला कर लिया कि जहां तक संभव होगा, वह अपने घर को बचाने की पूरी कोशिश करेगी. पंजाब के अमृतसर देहात क्षेत्र के थाना रमदास के गांव कोटरजदा के मूल निवासी थे बलदेव सिंह. पत्नी के अलावा उन के 3 बेटे थे परगट सिंह, काबल सिंह और हरदीप सिंह. बलदेव सिंह ने समय रहते सभी बेटों की शादियां कर दी थीं और तीनों भाइयों में जमीन का बंटवारा भी कर के अपने फर्ज से मुक्ति पा ली थी.

अपने हिस्से की जमीन ले कर परगट सिंह ने अपना अलग मकान बना लिया था. काबल और हरदीप अपने पुश्तैनी घर में मातापिता के साथ रहते थे. काबल सिंह की शादी मनजीत कौर के साथ हुई थी. उस के 2 बच्चे थे 13 वर्षीय मनप्रीत सिंह और 12 वर्षीय गुरप्रीत सिंह.  सन 2003 में हरदीप सिंह की शादी खतराये निवासी राजबीर कौर के साथ हुई थी. शादी के बाद उन के घर किरनजोत सिंह ने जन्म लिया था. बच्चे के जन्म से दोनों पतिपत्नी बड़े खुश थे. तीनों भाइयों की अपनी अलगअलग जमीनें थीं. सब अपनेअपने कामों और परिवारों में मस्त थे. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि 24 जून, 2008 को काबल सिंह की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई. इस के बाद तो उस घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. उस की खेती आदि के काम कोई करने वाला नहीं था क्योंकि उस समय बच्चे भी छोटे थे. तब भाई के खेतों के काम से ले कर उस के दोनों बच्चों की देखभाल का जिम्मा हरदीप सिंह ने संभाल लिया था.

अपनी विधवा भाभी मनजीत कौर से सहानुभूति रखने और उस की मदद करतेकरते हरदीप सिंह का झुकाव धीरेधीरे अपनी विधवा भाभी की ओर होने लगा. हरदीप की पत्नी राजबीर कौर इन सब बातों से बेखबर नहीं थी.  वह समयसमय पर पति हरदीप सिंह को उस की अपनी घरेलू जिम्मेदारियों का अहसास दिलाती रहती थी. पर उस ने इन बातों को ले कर कभी पति से क्लेश या लड़ाईझगड़ा नहीं किया था. वह हर मसले को प्यार और समझदारी से निपटाने के पक्ष में थी और यही बात उस के हक में नहीं रही. उसे जब इन सब बातों की समझ आई तब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका था. उस का पति हरदीप अब उस का नहीं रहा. वह कभी का अपनी विधवा भाभी मंजीत कौर की आगोश में जा चुका था. राजबीर कौर ने जब अपना घर उजड़ता देखा तब उस की नींद टूटी और उस ने इस रिश्ते का जम कर विरोध किया था.

बाद में उस ने इस मसले पर रिश्तेदारों से शिकायत भी की पर कोई नतीजा नहीं निकला. इस पूरे मामले में राजबीर कौर की यह गलती रही कि उस ने अपने पति पर विश्वास करते हुए समय रहते इन सब बातों का विरोध नहीं किया था. शायद उसे पति की वफादारी और अपनी समझ पर भरोसा था. बहरहाल उस का बसाबसाया घर टूट गया था. हरदीप सिंह और राजबीर कौर के बीच तलाक हो गया था. यह सन 2013 की बात है. राजबीर कौर का हरदीप सिंह से तलाक भले ही हो गया था, पर वह वहीं रहती रही. हरदीप सिंह अपने 9 वर्षीय बेटे किरनजोत सिंह और अपने दोनों भतीजों मनप्रीत सिंह और गुरप्रीत सिंह के साथ मंजीत कौर के साथ रहने लगा था. भाभी के साथ रहने पर लोगों ने कुछ दिनों तक चर्चा जरूर की पर बाद में सब शांत हो गए.

समय का पहिया अपनी गति से घूमता रहा. सब अपनेअपने कामों में व्यस्त हो गए थे. हरदीप तीनों बच्चों और दूसरी पत्नी मंजीत कौर के साथ खुशी से रह रहा था.  बात 28 जून, 2018 की है. तीनों बच्चों सहित हरदीप और मंजीत कौर रात का खाना खा कर सो गए थे. हरदीप और मंजीत कौर कमरे के अंदर और तीनों बच्चे बाहर बरामदे में सो रहे थे. बिस्तर पर लेटते ही हरदीप को तो नींद आ गई थी पर मंजीत कौर अपने बिस्तर पर लेटेलेटे ही टीवी पर कोई कार्यक्रम देख रही थी. कमरे की लाइट बंद थी पर टीवी चलने के कारण उस कमरे में पर्याप्त रोशनी थी. रात के करीब 12 बजे का समय होगा कि मंजीत कौर ने अपने कमरे में एक साया देखा. साया कमरे से बाहर की ओर निकल गया था. फिर अचानक मंजीत कौर की नजर कमरे में रखी हुई अलमारी पर पड़ी. अलमारी खुली हुई थी और पास ही सामान बिखरा पड़ा था. यह देख कर वह चौंक गई. घबरा कर उस ने पास में सोए पति हरदीप को जगाया और अलमारी की ओर इशारा किया.

कमरे में चल रहे टीवी की रोशनी में उसे भी खुली अलमारी के आसपास कपड़े आदि बिखरे दिखे. इस के बाद हरदीप ने तुरंत उठ कर घर की लाइट जला दी. वह समझ गया कि घर में चोरी हो गई है. कमरे से निकल कर जब वह बरामदे में पहुंचा तो उस की नजर बरामदे में सोए बच्चों पर गई. वहां मनप्रीत और गुरप्रीत तो सो रहे थे, लेकिन उस का अपना 9 वर्षीय बेटा किरनजोत सिंह गायब था. यह सब देख कर हरदीप ने चोरचोर का शोर मचाना शुरू कर दिया था. रात के सन्नाटे में उस की आवाज सुन कर पड़ोसी उस के घर आ गए और जब सब को पता चला कि 9 वर्षीय किरनजोत को भी चोर अपने साथ उठा कर ले गए हैं तो सब हैरान रह गए. किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. ऐसे में किरनजोत को कहां और कैसे ढूंढा जाए. फिर भी समय व्यर्थ न करते हुए सभी लोग रात में ही किरनजोत की तलाश में अलगअलग दिशाओं में निकल पड़े.

पूरी रात किरनजोत की तलाश होती रही. लोगों ने गांव से ले कर मुख्य मार्ग तक भी छान मारा पर वह नहीं मिला. पूरी रात बीत गई थी पर किरनजोत का कुछ पता नहीं चला था. हरदीप सिंह की पहली बीवी यानी किरनजोत को जन्म देने वाली मां राजबीर कौर को जब अपने बेटे के चोरी होने का पता चला तो रोरो कर उस ने अपना बुरा हाल कर लिया था. किरनजोत को तलाश करतेकरते दिन निकल आया था. बच्चे के न मिलने पर सभी लोग निराश थे. कुछ देर बाद गांव के एक आदमी ने हरदीप सिंह को आ कर यह खबर दी कि किरनजोत की लाश नहर किनारे पड़ी है.  यह सुनते ही हरदीप व अन्य लोग नहर किनारे पहुंचे तो वास्तव में वहां किरनजोत की लाश मिली. कुछ ही देर में गांव के तमाम लोग नहर किनारे जमा हो गए. किसी ने पुलिस को भी खबर कर दी.

सूचना मिलते ही थाना रमदास के थानाप्रभारी मनतेज सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने बच्चे की लाश को अपने कब्जे में ले कर जरूरी काररवाई कर के पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दी और भादंवि की धारा 302 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. मुकदमा दर्ज होने के बाद मनतेज सिंह ने हरदीप सिंह के घर का मुआयना किया. हरदीप सिंह से बात करने के बाद पता चला कि उस के घर का कोई सामान चोरी नहीं हुआ था. इस से यही पता लगा कि वारदात को चोरी का रूप देने की कोशिश की गई है. पुलिस को यह भी पता चला कि कमरे में कोई साया होने की बात सब से पहले हरदीप सिंह की पत्नी मंजीत कौर ने बताई थी, इसलिए थानाप्रभारी ने मंजीत कौर के ही बयान लिए.

थानाप्रभारी मनतेज सिंह को मंजीत के बयानों में काफी झोल दिखाई दे रहे थे. यह बात भी उन्हें हजम नहीं हो रही थी कि कमरे में जागते और टीवी देखते हुए कैसे चोर की हिम्मत हो गई कि वह चोरी करने के साथसाथ बच्चे को भी उठा कर अपने साथ ले गया. भला उस बच्चे से उसे क्या मतलब था और किस मकसद से उस ने बच्चे को अगवा किया था. लाख सोचने पर भी मनतेज सिंह को यह बात समझ नहीं आ रही थी. तब थानाप्रभारी ने अपने कुछ विश्वासपात्र लोगों को सच्चाई का पता करने पर लगाया. इस बीच अस्पताल में किरनजोत के पोस्टमार्टम के समय उस की मां राजबीर कौर ने खूब हंगामा खड़ा किया. उस ने अपनी जेठानी मंजीत कौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि किरनजोत की हत्या के पीछे मंजीत कौर का ही हाथ है क्योंकि वह उसे अपना सौतेला बेटा मानती थी.

राजबीर कौर के आरोप को मद्देनजर रखते हुए पुलिस ने अपने मुखबिरों को सच्चाई का पता लगाने के लिए लगाया. इस के बाद थानाप्रभारी को मंजीत कौर के बारे में जो खबर मिली, वह चौंकाने वाली थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किरनजोत की मौत के बारे में बताया कि उस की मौत गला घोंटने से हुई थी. सोचने वाली बात यह थी कि मारने वाले ने बच्चे को घर से उठाया और हत्या के बाद वह उसे नहर के किनारे फेंक आया. इस में इकट्ठे सो रहे तीनों बच्चों में से उस ने किरनजोत सिंह को ही क्यों उठाया. थानाप्रभारी मनतेज सिंह ने मृतक किरनजोत की मां राजबीर कौर से भी पूछताछ की. राजबीर कौर ने बताया कि 10 साल पहले उस का विवाह हरदीप सिंह के साथ हुआ था. उस के जेठ काबल सिंह की मौत हो जाने के बाद उस के पति हरदीप सिंह के उस की जेठानी मंजीत कौर से अवैध संबंध हो गए थे. इस कारण उस ने अपने पति को तलाक दे दिया और दूसरा विवाह कर लिया.

उस के पति हरदीप सिंह ने भी उस की जेठानी के साथ शादी कर ली थी. शादी के बाद न तो उस की जेठानी उसे उस के बेटे किरनजोत से मिलने देती थी और न ही वह उसे पसंद करती थी. उसे पूरा यकीन है कि उस के बेटे की हत्या मंजीत कौर ने ही करवाई है. थानाप्रभारी ने महिला हवलदार सुरजीत कौर को भेज कर मंजीत कौर को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. शुरुआती दौर में वह अपने आप को निर्दोष बताते हुए चोरी की कहानी पर डटी रही पर जब उस से पूछा गया कि क्याक्या सामान चोरी हुआ है तो यह सुन कर वह बगलें झांकने लगी.  थोड़ी सख्ती करने पर उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि उसी ने किरनजोत की गला घोंट कर हत्या की थी और लाश को गोद में उठा कर नहर किनारे फेंक आई. फिर आधी रात को अपने पति हरदीप को जगा कर चोरी वाली कहानी सुनाई थी.

इस की वजह यह थी कि मंजीत कौर को हरदीप और किरनजोत के बीच का प्यार खलता था. वह नहीं चाहती थी कि उस के दोनों बेटों के अलावा उस का पति हरदीप अपनी पहली बीवी से हुए बेटे किरनजोत के साथ कोई भी रिश्ता रखे. पिता का यही प्यार बेटे की मौत का कारण बन गया. दरअसल हरदीप सिंह तीनों बच्चों से तो प्यार करता था पर वह सब से अधिक अपने किरनजोत को चाहता था. पति के इस प्यार की वजह से मंजीत कौर को यह भ्रम हो गया था कि हरदीप सिंह किरनजोत के बड़े होने पर अपनी सारी जायदाद उसी के नाम कर देगा.

ऐसे में उस के पैदा किए बच्चे दानेदाने को मोहताज हो जाएंगे, जबकि ऐसी कोई बात नहीं थी. हरदीप ने सपने में भी कभी यह नहीं सोचा था कि मंजीत कौर ऐसा भी कुछ सोच सकती है. मंजीत कौर के बयान दर्ज करने के बाद किरनजोत सिंह की हत्या के आरोप में उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया. अदालत के आदेश पर उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारिते

प्रेमिका के चक्कर में मारा गया भोगनाथ

कड़ाके की सर्दी हो और ऊपर से बरसात हो जाए तो सर्दी के तेवर और भी भयावह हो जाते हैं. रोज की तरह दोपहर को भोगनाथ बिट्टू के घर पहुंचा तो वह रजाई में लिपटी बैठी थी. दोनों एकदूसरे को देख कर मुसकराए, फिर हथेलियां रगड़ते हुए भोगनाथ बोला, ‘‘आज तो गजब की सर्दी है.’’

‘‘इसीलिए तो रजाई में दुबकी बैठी हूं,’’ बिट्टू बोली, ‘‘रजाई छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा, लेकिन तुम इतनी ठंड में कहां घूम रहे हो?’’

‘‘घूम नहीं रहा, सुबह से तुम्हें देखा नहीं था, इसलिए रोज की तरह तुम से मिलने चला आया,’’ भोलानाथ ने जवाब दिया, ‘‘सोचा था, तुम आग ताप रही होगी तो मैं भी हाथ सेंक लूंगा, लेकिन यहां तो हालात दूसरे ही है. लगता है मुझ से ज्यादा तुम्हें गर्मी की जरूरत है. दूसरे तरीके से हाथ सेंक कर मुझे तुम्हारी ठंड दूर करनी होगी.’’  कहने के बाद भोगनाथ ने बिट्टू का चेहरा अपने हाथों में ले लिया.

बिट्टू ने एक झटके से अपना चेहरा अलग कर लिया और ठंडे हो गए गालों पर हथेलियां मलते हुए बोली, ‘‘हटो भी, कितने ठंडे हैं तुम्हारे हाथ, एकदम बर्फ जैसे.’’

‘‘बिट्टू, कुछ चीजें ठंडी जरूर लगती हैं, लेकिन उन की तासीर बड़ी गर्म होती है,’’ भोगनाथ ने चुहल की, ‘‘मेरी बात पर विश्वास न हो तो आजमा कर देख लो. 2 मिनट में मेरे हाथ तुम्हें गर्म तो लगने ही लगेंगे, खुद भी इतनी गर्म हो जाओगी कि रजाई शरीर से उतार फेंकोगी.’’

भोगनाथ के कथन का आशय समझ कर बिट्टू के गाल सुर्ख हो गए. वह उसे मीठी फटकार लगाते हुए बोली, ‘‘मैं तुम से कई बार कह चुकी हूं कि इस तरह की बातें मत किया करो. लेकिन तुम हो कि मानते ही नहीं.’’

भोगनाथ ने थोड़ा आगे की ओर झुक कर बिट्टू की आंखों में झांका, ‘‘तो फिर कैसी बातें किया करूं?’’

‘‘वैसी ही अच्छीअच्छी बातें, जैसे दूसरे प्रेमी करते हैं.’’

‘‘प्रेमियों की बात कहीं से भी शुरू हो, जिस्म पर ही पहुंच कर खत्म होती है.’’

‘‘भोग, अभी हमारी शादी नहीं हुई है.’’

‘‘शादी भी जल्दी हो जाएगी.’’

‘‘तब जो मन में आए, बातें कर लेना.’’

‘‘बातें तो अभी भी कर रहा हूं. शादी के बाद तो कुछ और करूंगा.’’

बिट्टू को उस की बातों में रस आने लगा. मुसकरा कर उस ने पूछा, ‘‘शादी के बाद क्या करोगे?’’

‘‘कह कर बताऊं या कर के?’’

‘‘फिर शुरू हो गए.’’

‘‘उकसा तो तुम ही रही हो,’’ भोगनाथ मुसकराया, ‘‘लगता है तुम्हारा मन डोल रहा है.’’

जवाब में मुंह खोलने के लिए बिट्टू ने मुंह खोला ही था कि तभी हवा का तेज झोंका बरसात की ठंडी फुहारों को खुले दरवाजे के भीतर तक ले आया. ठंड से बिट्टू और भोगनाथ दोनों के बदन सिहर उठे. बिट्टू ने रजाई को और मजबूती से लपेट लिया, ‘‘उफ! यह बारिश और यह ठंड आज किसी की जान ले कर ही मानेगी.’’

‘‘किसी की क्या, फिलहाल तो मेरी जान पर ही बनी हुई है.’’

‘‘वो कैसे?’’

‘‘तुम ने तो सर्दी से अपना बचाव कर रखा है, मैं खुले दरवाजे के सामने खड़ा ठंड से कांप रह हूं.’’

‘‘तो दरवाजा भेड़ कर तुम भी रजाई ओढ़ लो.’’ बिट्टू के मुंह से अनायास निकल गया. यह बात उस ने कैसे कह दी. वह खुद ही नहीं समझ पाई.

भोगनाथ को शायद इसी पल की प्रतीक्षा थी. बिट्टू ने उस से दरवाजा भेड़ने को कहा था, पर उस ने दरवाजा बंद कर के सिटकनी लगा दी. उस के पास आ कर बिटटू की रजाई में घुसने लगा, ‘‘बिट्टू, तुम कितनी गर्म हो. अपने जैसा मुझे भी गर्म कर दो न?’’

‘‘मेरी रजाई में तुम कहां घुसे आ रहे हो,’’ बिट्टू ने हड़बड़ा कर कहा, ‘‘कोई आ जाए तो मैं मुफ्त में बदनाम हो जाऊंगी.’’

‘‘इश्क की दुनिया में उन का ही नाम होता है, जो बदनाम होते हैं.’’

‘‘समझने की कोशिश करो भोग,’’ बिट्टू ने प्रतिरोध किया, ‘‘तुम लड़के हो, तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी.’’

‘‘मैं चाहता भी नहीं हूं कि कोई तुम्हारा मुंह देखे. तुम्हारा मुंह देखने के लिए मैं हूं न.’’ भोगनाथ ने रजाई के साथसाथ बिट्टू को भी जकड़ लिया. बिट्टू के बदन में ठंड की सिहरन दौड़ी तो पुरुष स्पर्श की मादक अनुभूति भी हुई.

गर्म रजाई और बिट्टू के तन की गरमी से भोगनाथ का शरीर सुलगने लगा. रजाई के भीतर से ही उस ने बिट्टू की कमर में हाथ डाल दिया. बिट्टू के तनमन में चिंगारियां सी चटखने लगीं. आनंद की उठती लहरों से उस की पलकें मुंदने लगीं और सांसों की रफ्तार तेज हो गई. दोनों चुप थे, लेकिन उन की शारीरिक गतिविधियां एकदूसरे से बहुत कुछ कह रही थीं. मस्ती में भर कर वह भोगनाथ को अपने ऊपर खींचने लगी. बिट्टू की देह को मस्त और बहकते देख कर भोगनाथ ने उसे निर्वस्त्र किया, फिर स्वयं भी निर्वस्त्र हो गया. इस के बाद दोनों एकदूसरे में समा गए.

कुछ देर में जब दोनों के तन की आग ठंडी हुई तो दोनों एकदूसरे की बांहों से आजाद हुए. उस के बाद ही बिट्टू को पता चला कि पुरुष संसर्ग कितना आनंददायक होता है.

उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के पिसावां थाना क्षेत्र के गांव सरवाडीह में भगौती रहता था. उस के परिवार में उस की पत्नी रामश्री और 2 बेटियां बिट्टू, सीमा और एक बेटा शोभित था. भगौती पिसावां कस्बे में एक दुकान पर लोहे की ग्रिल बनाने का काम करता था. भगौती को मिलने वाली मजदूरी से घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता था. घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी.

घर में बिट्टू भाईबहनों में सब से बड़ी थी. बात उस समय की है, जब बिट्टू की उम्र 16 साल थी. यौवन की दहलीज पर बिट्टू की खूबसूरती निखर गई थी.

भगौती के मकान से कुछ दूरी पर केदार रहता था. उस के परिवार में पत्नी जयरानी और 3 बेटों भोगनाथ, पिंटू और शिवा के अलावा 1 बेटी सविता थी. केदार मेहनतमजदूरी कर के  परिवार का भरणपोषण करता था. दोनों के घरों में काफी मेलजोल था और एकदूसरे के घर भी आनाजाना था.

आनेजाने के दौरान जवान होती बिट्टू पर भोगनाथ की नजर पड़ी तो उस की मदमस्त काया देख कर उस की नजरें उस पर जम गईं. जैसी लड़की की चाहत उस के दिल में थी, बिट्टू ठीक वैसी थी. बिट्टू का हसीन चेहरा उस की आंखों के रास्ते उस के दिल में उतरता चला गया.

घर के रास्ते पहले से खुले हुए थे. भोगनाथ की बिट्टू से खूब पटती थी. उस का कारण भी था, बिट्टू भी दिल ही दिल में भोगनाथ को पसंद करने लगी थी. धीरेधीरे वह भी उस की तरफ खिंचती चली गई. दोनों एकदूसरे से दिल ही दिल में प्यार करते थे. अपने प्यार का इजहार करने के लिए उन के पास पर्याप्त अवसर थे. इसलिए उन्हें न मोहब्बत के इजहार में वक्त लगा न इश्क के इकरार में.

गांव में मकान एक लाइन से बने थे. उन की छतें भी आपस में मिली हुई थीं. भोगनाथ अपने मकान से कई मकानों की छत फांद कर बिट्टू के पास पहुंच जाता था और छत पर बने कमरे में उस के साथ घंटों प्यार की मीठीमीठी बातें करता था.

प्रेम के हिंडोले में झूमती हुई बिट्टू कहती, ‘‘भोग, दिल तो मैं ने तुम्हें दे दिया है, पर तुम भी उस की लाज रखना. देखना कभी भूले से मेरा दिल न टूटे.’’

‘‘कैसी बात करती हो बिट्टू, तुम्हारा दिल अब मेरी जान है और कोई अपनी जान को यूं ही जाने देता है क्या?’’

‘‘इसी भरोसे पर तो मैं ने तुम से प्यार किया है. मनआत्मा से तुम्हें वरण कर के मैं 7 जन्मों के लिए तुम्हारी हो चुकी. देखना है कि तुम किस हद तक प्यार निभाओगे.’’

‘‘प्यार निभाने की मेरी कोई हद नहीं है. प्यार निभाने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं.’’

बिट्टू ने इत्मीनान से सांस ली, ‘‘पता नहीं, वह दिन कब आएगा, जब मैं तुम्हारी पत्नी बनूंगी.’’

‘‘विश्वास रखो बिट्टू, हमारे प्यार को मंजिल मिलेगी.’’ बिट्टू का हाथ अपने हाथों में ले कर भोगनाथ बोला, ‘‘वैसे भी हमारी शादी में कोई अड़चन तो है नहीं, हमारा धर्म और जाति एक है. हमारा सामाजिकआर्थिक स्तर एक जैसा है. सब से बड़ी बात यह कि हम दोनों प्यार करते हैं.’’

भोगनाथ की बात तो बिट्टू को यकीन दिलाती ही थी, उसे खुद भी पूरा भरोसा था कि दोनों की शादी कोई अड़चन नहीं आएगी. इसलिए उसे अपने प्रेम व भविष्य के प्रति कभी नकारात्मक विचार नहीं आते थे. उसे पलपल भोगनाथ का इंतजार रहता था. भोगनाथ के आते ही वह खुली आंखों से भविष्य के सुनहरे सपने देखने लगती थी.

तन्हाई, दो जवां जिस्म और किसी के आने का कोई डर नहीं. यही भावनाओं के बहकने का पूरा वातावरण होता था. कभीकभी बिट्टू और भोगनाथ के दिल बहकने लगते थे, लेकिन बिट्टू जल्द ही संभल जाती और भोगनाथ को भी बहकने से रोक लेती थी. लेकिन एक वर्ष पूर्व कड़कड़ाती ठंड में वह सब तनहाई में हो गया, जो बिट्टू नहीं चाहती थी.

उस दिन दोपहर को बने शारीरिक संबंध में बिट्टू को ऐसा आनंद आया कि वह बारबार उस आनंद को पाने के लिए उतावली रहने लगी. भोगनाथ भी कम मतवाला नहीं था.

इसी दौरान एक दिन इत्तफाक से बिट्टू की अनस नाम के एक युवक से बात हुई. उस के बाद इन दोनों की प्रेम कहानी में एक नया मोड़ आ गया. सीतापुर की सीमा से सटे हरदोई जनपद के टडि़यावां थाना क्षेत्र के कस्बा गोपामऊ में नवी हसन रहते थे. नवी हसन के परिवार में पत्नी नाजिमा के अलावा 3 बेटे थे- साबिर, अनस और असलम.

नबी हसन की कस्बे में ही खाद की दुकान थी, जिस पर उस के साथ उस के बेटे अनस और असलम बैठते थे. साबिर किसी फैक्ट्री में काम करता था. अनस काफी खूबसूरत नौजवान था, साथ ही अविवाहित भी. उसे दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने में काफी मजा आता था.

एक दिन सुहानी सुबह अनस उठ कर छत पर चला आया. छत की मुंडेर पर बैठ कर वह आसमान की तरफ निहार रहा था कि अचानक उस का मोबाइल बज उठा इतनी सुबह फोन करने वाला कोई दोस्त ही होगा, सोच कर अनस मोबाइल स्क्रीन पर बिना नंबर देखे ही बोला, ‘‘हां बोल?’’

‘‘जी, आप कौन बोल रहे हैं?’’ दूसरी ओर से किसी युवती की आवाज सुनाई दी तो अनस चौंक पड़ा. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उस ने तुरंत ‘सौरी’ कहते हुए कहा, ‘‘माफ करना, दरअसल मैं समझा इतनी सुबह कोई दोस्त ही फोन कर सकता है, इसलिए… वैसे आप को किस से बात करनी है, आप कौन बोल रही हैं?’’

‘‘मैं बिट्टू बोल रही हूं. मुझे भी अपनी दोस्त से बात करनी थी, लेकिन गलत नंबर डायल हो गया.’’

‘‘कोई बात नहीं, आप को अपनी दोस्त का नंबर सेव कर के रखना चाहिए. ऐसा करने से दोबारा गलती नहीं होगी.’’

‘‘आप पुलिस में हैं क्या?’’

‘‘नहीं तो, क्यों?’’

‘‘पूछताछ तो पुलिस वालों की तरह कर रहे हैं. 25 सवाल और सलाह भी.’’ कह कर बिट्टू जोर से हंसी.

‘‘अरे नहीं, मैं ने तो वैसे ही बोल दिया. दोस्त आप की, फोन भी आप का. आप चाहें नंबर सेव करें या न करें.’’

‘‘तो आप दार्शनिक भी हैं?’’ बिट्टू ने फिर छेड़ा.

‘‘नहीं नहीं, आम आदमी हूं.’’

‘‘किसी के लिए तो खास होंगे?’’

‘‘आप बहुत बातें करती हैं.’’

‘‘अच्छी या बुरी?’’

‘‘अच्छी.’’

‘‘क्या अच्छा है मेरी बातों में?’’

अब हंसने की बारी अनस की थी. वह जोर से हंसा, फिर बोला, ‘‘माफ करना, मैं आप से नहीं जीत सकता.’’

‘‘और मैं माफ न करूं तो?’’

‘‘तो आप ही बताएं, मैं क्या करूं?’’ अनस ने हथियार डाल दिए.

‘‘अच्छा जाओ, माफ किया.’’

दरअसल बिट्टू ने अपनी सहेली से बात करने के लिए नंबर मिलाया था, लेकिन गलत नंबर डायल होने से अनस का नंबर मिल गया था. लेकिन अनस की आवाज उसे भा गई थी. इस के बाद उस के दिल में फिर से अनस से बात करने की इच्छा हुई, लेकिन संकोचवश वह अपने आप को रोक लेती थी.

फिर एक दिन उस से रहा नहीं गया तो उस ने अनस का नंबर फिर मिला दिया. इस बार अनस भी जैसे उस के फोन का इंतजार कर रहा था. उसे इस बात का एहसास था कि बिट्टू उसे फिर से फोन जरूर करेगी. इस बार जब दोनों की बात हुई तो काफी देर तक चली. बिट्टू ने अपने बारे में बताया तो अनस ने भी अपने बारे में सब कुछ बता दिया. दोनों के बीच कुछ ऐसी बातें हुईं कि दोनों एकदूसरे के प्रति अपनापन सा महसूस करने लगे. यह दिसंबर 2017 की बात है. फिर उन के बीच बराबर बातें होने लगीं. एक दिन दोनों ने रूबरू मिलने का फैसला कर लिया. दोनों मिले तो एकदूसरे को सामने पा कर काफी खुश हुए. बिट्टू काफी खुश थी.

उस ने भोगनाथ और अनस की तुलना की तो पाया कि भोगनाथ और अनस का कोई मुकाबला नहीं है. अनस भोगनाथ से ज्यादा खूबसूरत था और उस की आर्थिक स्थिति भी भोगनाथ से लाख गुना अच्छी थी. इसलिए वह भोगनाथ से दूरी बना कर अनस से नजदीकियां बढ़ाने लगी. अनस अपने आप चल कर आए मौके को भला कैसे गंवा देता. उसे भी बैठेबिठाए एक खूबसूरत युवती का साथ मिला तो वह भी बिट्टू का हो गया. समय के साथ दोनों की नजदीकियां इतनी बढ़ीं कि तन की दूरियां भी खत्म हो गईं. एक दिन दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया.

13 मई की शाम साढ़े 7 बजे भोगनाथ घर में बैठा खाना खा रहा था कि तभी उस के मोबाइल पर किसी की काल आई. वह पूरा खाना खाए बिना घर से चला गया. काफी रात होने पर भी वह नहीं लौटा तो घर वाले चिंता में पड़ गए. सुबह होने पर उस की काफी तलाश की गई लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. 16 मई की सुबह किसी राहगीर ने पिसावां थाने में डीह कबीरा बाबा के जंगल में किसी अज्ञात युवक की लाश पड़ी होने की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

मृतक की उम्र 24-25 वर्ष रही होगी. उस के मुंह व गले पर कस कर अंगौछा बांधा गया था, जिस से दम घुटने से उस की मृत्यु हो गई थी. घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उस की शिनाख्त कराई तो पता चला वह गांव सरवाडीह का भोगनाथ है. घटनास्थल सरवाडीह गांव के बाहर ही था. इसलिए गांव के लोग भी वहां पहुंच गए थे. उन्होंने ही लाश की शिनाख्त की थी. पता चलते ही भोगनाथ का पिता केदार भी घर के अन्य सदस्यों के साथ वहां आ गया. भोगनाथ की लाश देख कर सब रोनेबिलखने लगे.

थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने केदार से कुछ आवश्यक पूछताछ की और फिर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दी. केदार को साथ ले कर वह थाने आ गए. केदार की लिखित तहरीर पर उन्होंने अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. भोगनाथ के पास मोबाइल था, जो उस के पास से नहीं मिला था. केदार से भोगनाथ का मोबाइल नंबर ले कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उसे सर्विलांस पर लगा दिया. इस के अलावा भोगनाथ के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स भी निकलवाई.

भोगनाथ को बुलाने के लिए जिस नंबर से काल की गई थी, उस नंबर की जब विस्तृत जानकारी जुटाई गई तो वह नंबर सरवाडीह निवासी बिट्टू का निकला. इस के बाद थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने बिट्टू को हिरासत में ले कर महिला सिपाही की उपस्थिति में उस से सख्ती से पूछताछ की. उस ने भोगनाथ की हत्या का जुर्म स्वीकार करते हुए अपने 3 साथियों के नाम भी बता दिए.

इस के बाद बिट्टू के प्रेमी अनस को गिरफ्तार कर लिया गया. अनस के 2 दोस्त गोपामऊ निवासी विपिन और मोनू भी इस अपराध में शामिल थे. इस के बाद एसपी महेंद्र चौहान ने प्रैसवार्ता कर बिट्टू और अनस को मीडिया के सामने पेश किया. जब भोगनाथ ने बिट्टू को अपने से दूरी बनाते देखा तो उस ने पता किया. जल्द ही उसे पता चल गया कि बिट्टू उस से किए गए सारे वादे, रिश्तेनाते तोड़ कर उस से दूर होना चाहती है तो वह तिलमिला गया. ऐसे मौके के लिए ही उस ने अपने मोबाइल से बिट्टू के साथ अंतरंग पलों के फोटो खींच रखे थे.

भोगनाथ ने बिट्टू से मिल कर उसे धमकाया कि वह उस से दूर हुई तो उस के अश्लील फोटो सब को भेज देगा. फोटो के बल पर भोगनाथ उसे ब्लैकमेल कर के उस के साथ संबंध बनाने लगा. बिट्टू उस के हाथ का खिलौना बनने के लिए मजबूर थी. इसी बीच उस के घर वालों ने हरदोई जनपद के पिहानी थाना क्षेत्र के एक युवक से उस की शादी तय कर दी. शादी 29 जून को होनी थी. भोगनाथ की हरकतों से आजिज आ कर बिट्टू ने अनस से बात की. उस से कहा कि उस की जिंदगी में आने से पहले उस का एक दोस्त भोगनाथ था. भोगनाथ के पास उस के कुछ अश्लील फोटो हैं, जिन के सहारे वह उसे ब्लैकमेल करता है.

वैसे भी उस की शादी तय हो गई है. वह उस की शादी में अड़चन डाल सकता है. बिट्टू ने अनस से कहा कि भोगनाथ को ठिकाने लगाना पड़ेगा. इस के लिए मैं तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं. बिट्टू ने अनस से यह भी कहा कि भले ही उस की शादी हो रही हो, लेकिन उस के साथ संबंध हमेशा बने रहेंगे. अनस ने बिट्टू की परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया. उस ने अपने जिगरी दोस्तों विपिन और मोनू से मदद मांगी तो दोस्ती की खातिर दोनों अनस का साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद भोगनाथ को मारने की योजना बनाई गई.

योजनानुसार 13 मई को अनस ने एक मारुति वैगनआर कार बुक की. कार मालिक को उस ने बताया कि उसे दोस्तों के साथ एक तिलक समारोह में जाना है. कार में बैठ कर अनस अपने दोस्तों के साथ चल दिया. दूसरी ओर बिट्टू ने शाम साढ़े 7 बजे के करीब भोगनाथ को मिलने के लिए डीह कबीरा बाबा के जंगल में बुलाया. भोगनाथ उस समय खाना खा रहा था, लेकिन अपनी प्रेमिका के बुलाने पर वह खाना बीच में छोड़ कर तुरंत वहां पहुंच गया. वहां उसे बिट्टू मिली. योजना के अनुसार बिट्टू उसे अपनी प्यार भरी बातों में उलझाए रही.

दूसरी ओर अनस ने चुनी गई जगह से कुछ पहले हडियापुर गांव के पास ड्राइवर से यह कह कर कार रुकवा दी कि आगे का रास्ता खराब है. वह वहीं खड़ा हो कर उन के आने का इंतजार करे. इस के बाद अनस और उस के दोस्त पैदल ही कबीरा बाबा के जंगल पहुंचे. वहां पहुंच कर उन्होंने बिट्टू के साथ मौजूद भोगनाथ को दबोच लिया. फिर उस के गले में पड़े अंगौछे को रस्सी की तरह बना कर उस के मुंह में दबाते हुए उस के गले में फंदा बना कर कस दिया, इस से भोगनाथ चिल्ला न सका और गले पर कसाव बढ़ते ही उस का दम घुटने लगा. वह कुछ देर छटपटाया, फिर उस का शरीर शिथिल पड़ गया.

भोगनाथ को मौत के घाट उतारने के बाद बिट्टू छिपतेछिपाते हुए घर चली गई. अनस भी दोनों दोस्तों के साथ भागते हुए कार तक पहुंचा और ड्राइवर से बोला कि वह तेजी से कार चलाए जहां वह लोग गए थे, वहां उन का झगड़ा हो गया है. ड्राइवर ने यह सुन कर कार की गति बढ़ा दी. गोपामऊ पहुंच कर सब लोग अपने घर चले गए.

लेकिन अपने आप को ये लोग कानून की गिरफ्त में आने से नहीं बचा सके. उन के पास से भोगनाथ का मोबाइल और हत्या की साजिश में प्रयुक्त 2 मोबाइल फोन पुलिस ने उन से बरामद कर लिए.

29 मई, 2018 को पुलिस ने विपिन और मोनू को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

साथ में मोहित शुक्ला