Hindi love Story in Short : प्रेमिका को घर बुलाकर घोंटा गला फिर गड्ढा खोदकर शव दफनाया

Hindi love Story in Short : अपनेअपने जीवनसाथी को छोड़ चुके संतोष और छायाबाई के बीच काफी नजदीकी रिश्ता बन गया था. लेकिन दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ कि उन की यह नजदीकी एक दिन 2 गज जमीन के नीचे दफन हो गई?

साल 2020 समाप्त होने में गिनती के दिन बचे थे. नया साल शीत लहर की चौखट पर खड़ा था. ऐसे में खरगोन जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित भीकनगांव के टीआई जगदीश प्रसाद गोयल पुलिस टीम के साथ गांव में रहने वाली छायाबाई के पिता को ले कर मोहनखेड़ी पहुंचे. पुलिस को देख कर गांव वालों की भीड़ भी संतोष गोलकर के नए बने मकान के सामने जमा हो गई. दरअसल 2 दिन पहले गांव में अपने पिता के घर पर रहने वाली 25 वर्षीय छायाबाई अचानक लापता हो गई थी. जिस दिन छायाबाई लापता हुई, उसी रोज संतोष भी गांव से गायब था. दोनों का पे्रम प्रंसग पूरे गांव के लोगों की जुबान पर था, इसलिए गांव वालों का मानना था कि संतोष ही छायाबाई को ले कर भाग गया.

लेकिन छायाबाई के पिता को शक था कि उस की बेटी को संतोष ने अपने नए मकान में छिपा रखा है. इसी बात की जांच करने के लिए पुलिस मोहनखेड़ी आई थी. छायाबाई हुई लापता संतोष के मकान में ताला पड़ा था. गांव में रहने वाले उस के मातापिता भी गायब थे. इसलिए पुलिस ने ताला तोड़ कर पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन वहां केवल छिपकली और मकडि़यों के अलावा कोई तीसरा जीव दिखाई नहीं दिया. इसलिए पुलिस टीम वापस लौट आई. गांव वाले तो पहले ही मान चुके थे कि छायाबाई संतोष के साथ कहीं भाग गई है. अब पुलिस ने भी ऐसा ही मान लिया, लेकिन ऐसा मानने वालों के बीच केवल छायाबाई का परिवार ही ऐसा था, जो इस बात को मानने को राजी नहीं हो रहा था.

इसलिए  उन के बारबार कहने पर संतोष के मकान में एक कमरे के फर्श की खुदाई भी कर के देखी गई, लेकिन कुछ हाथ नहीं आया. धीरेधीरे गांव के लोग छायाबाई और संतोष को भूलने लगे और अपने कामों में जुट गए थे. लेकिन छायाबाई के पिता लगातार बेटी की खोज में लगे हुए थे. कोई महीने भर बाद संतोष के बंद पडे़ मकान से आने वाली अजीब सी बदबू से लोग परेशान होने लगे. पहले तो लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बदबू लगातार बढ़ने से पड़ोसियों का ध्यान संतोष के बंद मकान पर गया, जहां से यह बदबू आ रही थी. इस बात की खबर छायाबाई के पिता को लगी तो वह दौड़ेदौड़े अपने समाज के नेता के पास पहुंचे और उन्हेें सारी बात बताई.

वह नेता छायाबाई के पिता को खंडवा एसपी के पास ले गया और एसपी को सारी कहानी से अवगत कराया. संतोष छायाबाई के लापता होने के मामले में संदिग्ध तो था ही, इसलिए उस के मकान से आने वाली बदबू की जानकारी को खंडवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने गंभीरता से लिया. उन के निर्देश पर एएसपी (ग्रामीण) जितेंद्र पंवार ने अपने आदेश पर एसडीपीओ प्रवीण कुमार उइके के नेतृत्व में एक पुलिस टीम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ 27 जनवरी, 2021 को एक बार फिर मोहनखेड़ी पहुंची. संतोष गोलकर का मकान खोलते ही बदबू का तेज झोंका आने से पुलिस समझ गई की यह मांस सड़ने की बदबू है. इसलिए पूरे मकान की बारीकी से जांच की गई.

जिस से पता चला कि तीसरे कमरे के फर्श में ताजा सीमेंट लगाया गया है. इसलिए शक के आधार पर पुलिस ने उस जगह की खुदाई करवाई तो डेढ़ फुट नीचे एक कान की बाली और लगभग ढाई फुट नीचे एक लेडीज चप्पल मिली. जिन के बारे में बताया कि ये दोनों ही चीजें छायाबाई की हैं. सड़ागला मिला शव खुदाई की गहराई बढ़ने के साथ बदबू भी बढ़ती जा रही थी. वास्तव में पुलिस का शक उस समय सही साबित हुआ, जब कोई 4 फुट की गहराई पर छायाबाई का सड़ागला शव बरामद हो गया. इस के बाद जांच के लिए एफएसएल अधिकारी सुनील मकवाना भी पहुंच गए. जांच के बाद उन्होंने शव को लगभग एक महीने पुराना बताया.

जिस के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. लेकिन शव की हालत अत्यधिक खराब होने की वजह से उस का पोस्टमार्टम इंदौर के एमवाई अस्पताल में किया गया. जाहिर सी बात है कि अब तक पुलिस का मानना था कि संतोष छायाबाई को ले कर भाग गया है. लेकिन अब छायाबाई की लाश संतोष के मकान में दफन मिल चुकी थी. जबकि संतोष और उस का परिवार गायब था. इसलिए पुलिस का सीधा शक यही था की संतोष ने ही छायाबाई की हत्या की है. चूंकि उस के परिवार के सभी सदस्य गायब थे, इसलिए वे भी शक के घेरे में थे. एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित कर दी, जिस ने मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर 6 फरवरी, 2021 को संतोष की मां सकुबाई, भाई सुनील एवं बुआ के बेटे अनिल को गिरफ्तार कर लिया.

संतोष की तलाश पुलिस तत्परता से कर रही थी. जिस के चलते टीआई जगदीश प्रसाद गोयल की टीम में शामिल एएसआई लक्ष्मीनारायण पाल, प्रधान आरक्षक नंदकिशोर राय, आरक्षक अभिलाष डोंगरे, जितेंद्र एवं कमलेश की टीम ने सूचना मिलने पर उसे बैतूल से गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद यह कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

16 साल की उम्र में छायाबाई की शादी पास के ही गांव एकतासा में रहने वाले युवक  के साथ हुई थी. दोनों के 3 बच्चे भी हुए किंतु दोनों के बीच रिश्ता कुछ यूं बिगड़ा कि छायाबाई अपने पति का घर छोड़ कर मोहनखेड़ी में पिता के घर आ कर रहने लगी. मोहनखेड़ी में ही संतोष भी रहता था. संतोष छायाबाई की उम्र का था और छायाबाई की शादी से पहले वह उस की गली में चक्कर लगाया करता था. संतोष की दीवानगी की जानकारी छायाबाई को भी थी, लेकिन उन का इश्क परवान चढ़ पाता, उस से पहले ही छायाबाई की शादी हो गई थी. इस के बाद यह कहानी वहीं खत्म हो गई थी.

कुछ दिन बाद संतोष की भी शादी हो गई. लेकिन करीब 3 साल पहले ही उस की पत्नी भी उसे छोड़ कर अपने मायके में जा कर रहने लगी. संतोष ने कुछ दिनों तक तो ध्यान नहीं दिया, लेकिन पत्नी की गैरमौजूदगी में शारीरिक जरूरतें परेशान करने लगीं तो उसे छायाबाई का ध्यान आया जो खुद भी अपने पति को छोड़ कर बैठी थी. इसलिए उस ने अगले दिन ही छायाबाई की खातिर उस की गली में चक्कर लगाने शुरू कर दिए. छायाबाई भी कई साल से पति से अलग रह रही थी. जैसे ही उस ने संतोष को देखा तो उसे अपने किशोर उम्र की याद आ गई, जब संतोष उस के लिए गली में चक्कर लगाया करता था.

इसलिए एक दिन छायाबाई ने भी मौका देख कर उसे सकारात्मक संदेश दे दिया. जिस के 4 दिन बाद ही दोनों गांव के बाहर एकांत में मिले और अपनी हसरतें पूरी कर प्यार के बंधन में बंध गए छायाबाई मायके में रहते हुए अपने मातापिता के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहती थी. इसलिए वह गांव के कुछ घरों में झाड़ूपोंछा करने लगी थी. वह सुबह घर से निकल कर पहले अपना काम करती थी फिर सीधे संतोष के पास पहुंच जाती थी, जहां दोनों एकदूसरे के तन की प्यास पूरी करते थे. फिर छायाबाई वापस घर चली जाती थी. दोनों एकांत में रोज मिला करते थे, इसलिए इस बात की जानकारी गांव वालों को हो गई थी. छायाबाई के परिवार तक भी यह खबर पहुच चुंकी थी. पिता ने अपनी बेटी को समझाने की कोशिश की, लेकिन मामला हाथ से निकल चुका था.

छायाबाई ने तोड़ा विश्वास इधर छायाबाई के साथ घर बसाने की ठान चुके संतोष ने अपना खेत बेच कर छायाबाई के लिए सपनों का घर बनवा दिया था. कुछ दिनों में संतोष का मकान बन कर तैयार हो गया तो वह छायाबाई को इस मकान में ला कर अय्याशी करने लगा. बताया जाता है कि इसी दौरान छायाबाई की नजरें गांव के ही एक दूसरे युवक से लड़ गई थीं. वह संतोष की तुलना में रईस और जवान था. इसलिए छायाबाई संतोष से दूर जाने की कोशिश करने लगी. इस बात की जानकारी लगने पर संतोष काफी खफा था. बताया जाता है कि उस ने छायाबाई की हत्या की योजना पहले से ही बना रखी थी. इसलिए उस ने पानी का एक टैंक बनाने के नाम पर एक कमरे में गहरा गड्ढा खुदवा लिया था.

जिस के बाद उस ने 24 दिसंबर की रात को छायाबाई को अपने घर बुला कर पहले तो उस के साथ संबंध बनाए और फिर इसी दौरान मौका पा कर उस का गला दबा कर हत्या कर के शव को गड्ढे में डाल कर उस के ऊपर मिट्टी डाल दी और फरार हो गया. उस ने सोचा था कि घर के अंदर लाश की खबर पुलिस को कभी नहीं मिल पाएगी. लेकिन एक महीने के बाद मकान से आ रही बदबू के बाद शक होने पर पुलिस ने लाश बरामद कर हत्या में सहयोग करने वाली संतोष की मां, भाई और अन्य 2 को गिरफ्तार कर लिया. छायाबाई के लापता होने पर उस के पिता को उस की हत्या का शक हो गया था.

इसलिए पिता के कहने पर पुलिस ने पहले भी एक बार संतोष के घर नए पर बने फर्श की खुदाई लाश की तलाश करने के लिए की थी. लेकिन उस समय कुछ नहीं मिला था. लेकिन बदबू आने पर जब दूसरे कमरे में खुदाई की गई तो वहां से छायाबाई का शव बरामद हुआ. गिरफ्तार किए मुख्य आरोपी संतोष के भाई ने बताया कि छायाबाई की हत्या कर लाश को गड्ढे में दबाने वाली बात संतोष ने सुबह घर आ कर बताई थी. इस के बाद वह घर से भाग गया था. संतोष के भाग जाने के बाद घर वालों ने पुलिस से बचने के लिए खुदाई वाली जगह पर फर्श बनवा दिया और घर का ताला लगा कर फरार हो गए. Hindi love Story in Short

पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

UP Crime News : मामा के इश्क में भांजी ने कराई पति की हत्या

UP Crime News : पवन निशा और अजय के रास्ते की बाधा नहीं था. न ही उस ने कभी टोकाटाकी की थी. लेकिन मामाभांजी के रिश्ते से बेपरवाह वे दोनों खुल कर खेलना चाहते थे. इसी के चलते दोनों ने पवन को…

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे जनपद बाराबंकी के थाना सुबेहा क्षेत्र में एक गांव है ताला रुकनुद्दीनपुर. पवन सिंह इसी गांव में रहता था. 14 सितंबर, 2020 की शाम पवन सिंह अचानक गायब हो गया. उस के घर वाले परेशान होने लगे कि बिना बताए अचानक कहां चला गया. किसी अनहोनी की आशंका से उन के दिल धड़कने लगे. समय के साथ धड़कनें और बढ़ने लगीं. पवन का कोई पता नहीं चल पा रहा था. पवन की तलाश अगले दिन 15 सितंबर को भी की गई. लेकिन पूरा दिन निकल गया, पवन का कोई पता नहीं लगा. 16 सितंबर को पवन के भाई लवलेश बहादुर को उस के मोबाइल पर सोशल मीडिया के माध्यम से एक लाश की फोटो मिली.

फोटो लवलेश के एक परिचित युवक ने भेजी थी. लाश की फोटो देखी तो लवलेश फफक कर रो पड़ा. फोटो पवन की लाश की थी. दरअसल, पवन की लाश पीपा पुल के पास बेहटा घाट पर मिली थी. लवलेश के उस परिचित ने लाश देखी तो उस की फोटो खींच कर लवलेश को भेज दी. जानकारी होते ही लवलेश घर वालों और गांव के कुछ लोगों के साथ बेहटा घाट पहुंच गया. लाश पवन की ही थी. पीपा पुल गोमती नदी पर बना था. गोमती के एक किनारे पर गांव ताला रुकनुद्दीनपुर था तो दूसरे किनारे पर बेहटा घाट. लेकिन बेहटा घाट थाना सुबेहा में नहीं थाना असंद्रा में आता था. लवलेश ने 112 नंबर पर काल कर के घटना की सूचना पुलिस को दे दी. कुछ ही देर में एसपी यमुना प्रसाद और 3 थानों असंद्रा, हैदरगढ़ और सुबेहा की पुलिस टीमें मौके पर पहुंच गईं.

पवन के शरीर पर किसी प्रकार के निशान नहीं थे और लाश फूली हुई थी. एसपी यमुना प्रसाद ने लवलेश से आवश्यक पूछताछ की तो पता चला कि वह अपनी हीरो पैशन बाइक से घर से निकला था. बाइक पुल व आसपास कहीं नहीं मिली. पवन वहां खुद आता तो बाइक भी वहीं होती, इस का मतलब था कि वह खुद अपनी मरजी से नहीं आया था. जाहिर था कि उस की हत्या कर के लाश वहां फेंकी गई थी. पवन की बाइक की तलाश की गई तो बाइक कुछ दूरी पर टीकाराम बाबा घाट पर खड़ी मिली. यह क्षेत्र हैदरगढ़ थाना क्षेत्र में आता था. वारदात की पहल वहीं से हुई थी, इसलिए एसपी यमुना प्रसाद ने घटना की जांच का जिम्मा हैदरगढ़ पुलिस को दे दिया.

हैदरगढ़ थाने के इंसपेक्टर धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. फिर लवलेश को साथ ले कर थाने आ गए. इंसपेक्टर रघुवंशी ने लवलेश की लिखित तहरीर पर अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु की सही वजह पता नहीं चल पाई. इंसपेक्टर रघुवंशी के सामने एक बड़ी चुनौती थी. क्योंकि कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा था. उन्होंने पवन की पत्नी शिम्मी उर्फ निशा और भाई लवलेश से कई बार पूछताछ की, लेकिन कोई भी अहम जानकारी नहीं मिल पाई. पवन के विवाह के बाद ही उस की मां ने घर का बंटवारा कर दिया था. पवन अपनी पत्नी निशा के साथ अलग रहता था. इसलिए घर के अन्य लोगों को ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी.

स्वार्थ की शादी समय गुजरता जा रहा था, लेकिन केस का खुलासा नहीं हो पा रहा था. जब कहीं से कुछ हाथ नहीं लगा तो इंसपेक्टर रघुवंशी ने अपनी जांच पवन की पत्नी पर टिका दी. वह उस की गतिविधियों की निगरानी कराने लगे. घर आनेजाने वालों पर नजर रखी जाने लगी तो एक युवक उन की नजरों में चढ़ गया. वह पवन के गांव का ही अजय सिंह उर्फ बबलू था. अजय का पवन के घर काफी आनाजाना था. वह घर में काफी देर तक रुकता था. अजय के बारे में और पता किया गया तो पता चला कि अजय ने ही पवन से निशा की शादी कराई थी. निशा अजय की बहन की जेठानी की लड़की थी. यानी रिश्ते में वह अजय की भांजी लगती थी. पहले तो उन को यही लगा कि अजय अपना फर्ज निभा रहा है लेकिन जैसेजैसे जांच आगे बढ़ी तो उन्हें दोनों के संबंधों पर संदेह होने लगा.

इंसपेक्टर रघुवंशी ने उन दोनों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. पता चला, दोनों के बीच हर रोज काफी देर तक बातें होती थीं. दोनों के बीच जो रिश्ता था, उस में इतनी ज्यादा बात होना दाल में काला होना नहीं, पूरी दाल ही काली होना साबित हो रही थी. 7 फरवरी, 2021 को इंसपेक्टर धर्मेंद्र रघुवंशी ने अजय को टीकाराम मंदिर के पास से और निशा को गांव अलमापुर में उस की मौसी के घर से गिरफ्तार कर लिया. जिला बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र के गांव ताला रुकनुद्दीनपुर में अजय सिंह उर्फ बबलू रहता था. अजय के पिता का नाम मान सिंह था और वह पेशे से किसान थे. अजय 3 बहनों में सब से छोटा था. इंटर तक पढ़ाई करने के बाद अजय अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती करने लगा था.

निशा उर्फ शिम्मी अजय की बड़ी बहन अनीता (परिवर्तित नाम) की जेठानी की लड़की थी. शिम्मी के पिता चंद्रशेखर सिंह कोतवाली नगर क्षेत्र के भिखरा गांव में रहते थे, वह दिव्यांग थे, किसी तरह खेती कर के अपने परिवार का भरणपोषण करते थे. निशा की एक बड़ी बहन और 2 बड़े भाई बबलू और मोनू थे. बबलू पंजाब में फल की दुकान लगाता था. मोनू सऊदी अरब काम करने चला गया था. निशा अलमापुर में रहने वाली अपनी मौसी के यहां रहती थी. हमउम्र अजय और निशा रिश्ते में मामाभांजी लगते थे. जहां निशा हसीन थी, वहीं अजय भी खूबसूरत नौजवान था. निशा ने 11वीं तक तो अजय ने इंटर तक पढ़ाई की थी.

दोनों जब भी मिलते, एकदूसरे के मोहपाश में बंध जाते. दोनों मन ही मन एकदूसरे को चाहने लगे थे. लेकिन रिश्ता ऐसा था कि वे अपनी चाहत को जता भी नहीं सकते थे. लेकिन चाहत किसी भी उम्र और रिश्ते को कहां मानती है, वह तो सिर्फ अपना ही एक नया रिश्ता बनाती है, जिस में सिर्फ प्यार होता है. ऐसा प्यार जिस में वह कोई भी बंधन तोड़ सकती है. दोनों बैठ कर खूब बातें करते. बातें जुबां पर कुछ और होतीं लेकिन दिल में कुछ और. आंखों के जरिए दिल का हाल दोनों ही जान रहे थे लेकिन पहल दोनों में से कोई नहीं कर रहा था. दोनों की चाहत उन्हें बेचैन किए रहती थीं. दोनों एकदूसरे के इतना करीब आ गए थे कि एकदूसरे के बिना नहीं रह सकते थे. लेकिन प्यार के इजहार की नौबत अभी तक नहीं आई थी.

आखिरकार अजय ने सोच लिया कि वह अपने दिल की बात निशा से कर के रहेगा. संभव है, निशा किसी वजह से कह न पा रही हो. अगली मुलाकात में जब दोनों बैठे तो अजय निशा के काफी नजदीक बैठा. निशा के दाहिने हाथ को वह अपने दोनों हाथों के बीच रख कर बोला, ‘‘निशा, काफी दिनों की तड़प और बेचैनी का दर्द सहने के बाद आज मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’ कह कर अजय चुप हो गया. निशा अजय के अंदाज से ही जान गई कि वह आज तय कर के आया है कि अपने दिल की बात जुबां पर ला कर रहेगा. इसलिए निशा ने उस के सामने अंजान बनते हुए पूछ लिया, ‘‘ऐसी कौन सी बात है जो तुम बेचैन रहे और तड़पते रहे, मुझ से कहने में हिचकते रहे.’’

अजय ने एक गहरी सांस ली और हिम्मत कर के बोला, ‘‘मेरा दिल तुम्हारे प्यार का मारा है. तुम्हें बेहद चाहता है, दिनरात मुझे चैन नहीं लेने देता. इस के चक्कर में मेरी आंखें भी पथरा गई हैं, आंखों में नींद कभी अपना बसेरा नहीं बना पाती. अजीब सा हाल हो गया है मेरा. मेरी इस हालत को तुम ही ठीक कर सकती हो मेरा प्यार स्वीकार कर के… बोलो, करोगी मेरा प्यार स्वीकार?’’

‘‘मेरे दिल की जमीन पर तुम्हारे प्यार के फूल तो कब के खिल चुके थे, लेकिन रिश्ते की वजह से और नारी सुलभ लज्जा के कारण मैं तुम से कह नहीं पा रही थी. इसलिए सोच रही थी कि तुम ही प्यार का इजहार कर दो तो बात बन जाए. तुम भी शायद रिश्ते की वजह से हिचक रहे थे, तभी इजहार करने में इतना समय लगा दिया.’’

‘‘निशा, यह जान कर मुझे बेहद खुशी हुई कि तुम भी मुझे चाहती हो और तुम ने मेरा प्यार स्वीकार कर लिया. नाम का यह रिश्ता तो दुनिया का बनाया हुआ है, उसे हम ने तो नहीं बनाया. हमारी जिंदगी है और हम अपनी जिंदगी का फैसला खुद करेंगे न कि दूसरे लोग. रिश्ता हम दोनों के बीच वही रहेगा जो हम दोनों बना रहे हैं, प्यार का रिश्ता.’’

निशा अजय के सीने से लग गई, अजय ने भी उसे अपनी बांहों के घेरे में ले लिया. दोनों ने एकदूसरे का साथ पा लिया था, इसलिए उन के चेहरे खिले हुए थे. कुछ ही दिनों में दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया. समय के साथ दोनों का रिश्ता और प्रगाढ़ होता चला गया. दोनों जानते थे कि वे विवाह के बंधन में नहीं बंध पाएंगे, फिर भी अपने रिश्ते को बनाए रखे थे. निशा का विवाह उस के घर वाले कहीं और करें और निशा उस से दूर हो जाए, उस से पहले अजय ने निशा का विवाह अपने ही गांव में किसी युवक से कराने की ठान ली. जिस से निशा हमेशा उस के पास रह सके.

पवन सिंह अजय के गांव ताला रुकनुद्दीनपुर में ही रहता था. पवन के पिता दानवीर सिंह चौहान की 2008 में मत्यु हो चुकी थी. परिवार में मां शांति देवी उर्फ कमला और 3 बड़ी बहनें और 3 बड़े भाई थे. मनमर्जी की शादी अजय ने निशा का विवाह पवन से कराने का निश्चय कर लिया. अजय ने इस के लिए अपनी ओर से कोशिशें करनी शुरू कर दीं. इस में उसे सफलता भी मिल गई. 2012 में दोनों परिवारों की आपसी सहमति के बाद निशा का विवाह पवन से हो गया. निशा मौसी के घर से अपने पति पवन के घर आ गई. विवाह के बाद पवन की मां ने बंटवारा कर दिया. पवन निशा के साथ अलग रहने लगा. इस के बाद पवन की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. पवन पिकअप चलाने लगा.

लेकिन अधिक आमदनी हो नहीं पाती थी. जो होती थी, वह उसे दारू की भेंट चढ़ा देता था. कालांतर में निशा ने एक बेटी शिवांशी (7 वर्ष) और एक बेटे अंश (5 वर्ष) को जन्म दिया. अजय ने भी निशा के विवाह के एक साल बाद फैजाबाद की एक युवती जया से विवाह कर लिया था. जया से उसे एक बेटा था. लेकिन निशा और अजय के संबंध बदस्तूर जारी थे. पवन शराब का इतना लती था कि उस के लिए कुछ भी कर सकता था. एक बार शराब पीने के लिए पैसे नहीं थे तो पवन निशा के जेवरात गिरवी रख आया. मिले पैसों से वह शराब पी गया. वह जेवरात निशा को अजय ने दिए थे.

पवन की हरकतों से निशा और अजय बहुत परेशान थे. अपनी परेशानी दूर करने का तरीका भी उन्होंने खोज लिया. दोनों ने पवन को दुबई भेजने की योजना बना ली. इस से पवन से आसानी से छुटकारा मिल जाता. उस के चले जाने से उस की हरकतों से तो छुटकारा मिलता ही, साथ ही दोनों बेरोकटोक आसानी से मिलते भी रहते. निशा और अजय ने मिल कर अयोध्या जिले के भेलसर निवासी कलीम को 70 हजार रुपए दे कर पवन को दुबई भेजने की तैयारी की. लेकिन दोनों की किस्मत दगा दे गई. लौकडाउन लगने के कारण पवन का पासपोर्ट और वीजा नहीं बन पाया. पवन को दुबई भेजने में असफल रहने पर उस से छुटकारा पाने का दोनों ने दूसरा तरीका जो निकाला, वह था पवन की मौत. अजय ने निशा के साथ मिल कर पवन की हत्या की योजना बनाई.

13 सितंबर को अजय ने पवन से कहा कि वह बहुत अच्छी शराब लाया है, उसे कल पिलाएगा. अच्छी शराब मिलने के नाम से पवन की लार टपकने लगी. अगले दिन 14 सितंबर की रात 9 बजे पवन अपनी बाइक से अजय के घर पहुंच गया. वहां से अजय उसे टीकाराम बाबा के पास वाले तिराहे पर ले गया. अजय ने वहां उसे 2 बोतल देशी शराब पिलाई. पिलाने के बाद वह उसे पीपा पुल पर ले गया. वहां पहुंचतेपहुंचते पवन बिलकुल अचेत हो गया. अजय ने उसे उठा कर गोमती नदी में फेंक दिया. उस के बाद वह घर लौट गया. लेकिन अजय और निशा की होशियारी धरी की धरी रह गई और दोनों पकड़े गए. आवश्यक कागजी खानापूर्ति करने के बाद इंसपेक्टर धर्मेंद्र रघुवंशी ने दोनों को न्यायालय में पेश कर दिया, वहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधार

Short love Story in Hindi : प्रेमी के साथ मिलकर पति का चाकू से काटा गला फिर लाश नहर में फेंकी

Short love Story in Hindi : कुछ महिलाएं अपने स्वार्थ में इस कदर अंधी हो जाती हैं कि वह कपड़ों की तरह अपने जीवनसाथी को बदलती हैं. कंचन भी उन्हीं में से एक थी. उस ने अपने स्वार्थ के लिए जो किया, वह…

रामकुमार की जानकारी में अपनी पत्नी कंचन की कुछ ऐसी बातें आई थीं, जिस के बाद कंचन उस के लिए अविश्वसनीय हो गई थी. बताने वाले ने रामकुमार को यह तक कह दिया, ‘‘कैसे पति हो तुम, घर वाली पर तुम्हारा जरा भी अकुंश नहीं. इधर तुम काम पर निकले, उधर कंचन सजधज कर घर से निकल जाती है. दिन भर अपने यार के साथ ऐश करती है और शाम को तुम्हारे आने से पहले घर पहुंच जाती है.’’

रामकुमार कंचन पर अगाध भरोसा करता था. पति अगर पत्नी पर भरोसा न करे तो किस पर करे. यही कारण था कि रामकुमार को उस व्यक्ति की बात पर विश्वास नहीं हुआ. वह बोला, ‘‘हमारी तुम्हारी कोई बुराई या आपसी रंजिश नहीं है, मैं ने कभी तुम्हारा बुरा नहीं किया. इस के बावजूद तुम मेरी पत्नी को किसलिए बदनाम कर रहे हो, मैं नहीं जानता. इतना जरूर जानता हूं कि कंचन मेकअपबाज नहीं है. शाम को जब मैं घर पहुंचता हूं तो वह सजीधजी कतई नहीं मिलती.’’

‘‘कंचन जैसी औरतें पति की आंखों में धूल झोंकने का हुनर बहुत अच्छी तरह जानती हैं.’’ उस व्यक्ति ने बताया, ‘‘तुम्हें शक न हो, इसलिए वह मेकअप धो कर घर के कपड़े पहन लेती होगी.’’

रामकुमार को तब भी उस व्यक्ति की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. वह उस का करीबी था, इसलिए वह उसे डांट भी नहीं सका. रामकुमार ने उस शख्स को डांट जरूर दिया था, लेकिन उस के मन में यह भी खयाल आया कि कोई इतनी बड़ी बात कह रहा है तो वह हवा में तो कह नहीं रहा होगा. उस ने खुद देखा होगा या उस के पास कोई ठोस सबूत या गवाह होगा. वैसे भी धुंआ वहीं उठता है, जहां आग लगी होती है. लिहाजा वह बेचैन हो गया. उस ने सोचा कि अपनी तसल्ली के लिए वह इस बारे में कंचन से बात जरूर करेगा. घर पहुंचतेपहुंचते रामकुमार ने कंचन से उक्त संदर्भ में बात करने का इरादा बदल दिया. इस के पीछे कारण यह था कि कोई भी औरत अपनी बदचलनी स्वीकार नहीं करती तो कंचन कैसे कर लेगी.

इसीलिए उस ने स्वयं मामले की असलियत का पता लगाने का फैसला कर लिया. पत्नी के चरित्र को ले कर रामकुमार तनाव में था. उस का वह तनाव चेहरे और आंखों से साफ झलक रहा था. एक दिन कंचन ने उस से पूछा भी, लेकिन रामकुमार ने टाल दिया, बोला, ‘‘मन ठीक नहीं है.’’

‘‘तुम्हारी दवा घर में रखी तो है, पी लो. जी भी ठीक हो जाएगा और चैन की नींद भी सो जाओगे.’’ वह बोली.

तनाव की अधिकता से रामकुमार का सिर फट रहा था. सिर हलका करने और चैन से सोने के लिए उसे स्वयं भी शराब की तलब महसूस हो रही थी. इसलिए वह कंचन से बोला, ‘‘ले आओ.’’

कंचन ने शराब की बोतल, पानी, नमकीन और एक गिलास ला कर पति के सामने रख दिया. रामकुमार ने एक बड़ा पैग बना कर हलक में उड़ेला और सोचने लगा कि कल उसे क्या करना चाहिए.  उत्तर प्रदेश के जनपद जौनपुर के गांव गोहानी में रहता था शंभू सिंह. शंभू सिंह के परिवार में पत्नी पार्वती के अलावा एक बेटा कुलदीप और एक बेटी कंचन थी. कुलदीप पंजाब में रह कर काम करता था. उस की पत्नी गांव में रहती थी. शंभू सिंह खेतिहर मजदूर था. कमाई कम थी, इसलिए घरपरिवार में किसी न किसी चीज का सदैव अभाव बना रहता था. सुंदर व चुलबुली कंचन मामूली चीजों तक को तरसती रहती थी.

पिता की कमाई कम थी और खर्च अधिक, इसलिए निजी जरूरतें और शौक पूरा करने के लिए कंचन को घर से वांछित रुपए मिल नहीं  सकते थे. इसीलिए वह कभी कोई चीज खाने को तरसती, कभी किसी को अच्छे कपड़े पहने देख ललचाती तो कभी सोचती कि सजनेसंवरने का सामान कैसे खरीदे. किशोर उम्र की लड़कियों की मानसिकता समझने और उन से लाभ उठाने वालों की दुनिया में कोई कमी नहीं है. गोहानी गांव में भी कुछ ऐसे ठरकी थे. उन्होंने कंचन का लालच समझा तो वह उसे रिझाने लगे. खिलानेपिलाने या कुछ सामान दिलाने के नाम पर कंचन के साथ अश्लील हरकत करते.

कुछ समय में ही कंचन समझ गई कि कोई यूं मेहरबान नहीं होता. जो पैसा खर्च करता है, उस के एवज में कुछ चाहता भी है. वह अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लोगों की इच्छाएं पूरी करने लगी. परिणाम यह हुआ कि कंचन कुछ ही दिनों में पूरे गांव में बदनाम हो गई. बात पिता शंभू सिंह और मां पार्वती तक पहुंची तो उन्होंने अपना सिर पीट लिया कि बेटी है या आफत की परकाला. छोटी सी उम्र में इतने बड़े गुल खिला रही है. दोनों ने कंचन को खूब मारापीटा, मगर कंचन ने अपनी राह नहीं बदली. शंभू सिंह और पार्वती जब सारी कोशिश कर के हार गए तब उन्होंने सोचा कि कंचन की जल्द शादी कर के उसे ससुराल भेज दिया जाए, तभी थोड़ीबहुत इज्जत बची रह सकती है.

इस फैसले के बाद शंभू सिंह ने कंचन के लिए वर की तलाश शुरू कर दी. जल्द ही एक अच्छा रिश्ता मिल गया. प्रतापगढ़ जनपद के गांव धर्मपुर निवासी राजेश पटेल से कंचन का रिश्ता तय हो गया. 12 वर्ष पूर्व कंचन का विवाह राजेश पटेल से हो गया.  कंचन को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अब किसी और की जरूरत नहीं थी. पति राजेश उस की हर जरूरत पूरी करता था. कालांतर में कंचन ने 2 बेटियों को जन्म दिया. धीरेधीरे कंचन और राजेश में मतभेद रहने लगे, जिस वजह से उन के बीच वादविवाद होता था. यह वादविवाद कभीकभी विकराल रूप धारण कर लेता था. कंचन को अब अपनी ससुराल काटने को दौड़ती थी. उस का वहां मन नहीं लगता था.

इसी बीच कंचन की मुलाकात रामकुमार दुबे से हो गई. रामकुमार दुबे कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला था. 10 सालों से वह हरदोई जिले में रहने वाली अपनी बहन मिथलेश की ससुराल में रहता था. काम की तलाश में वह प्रतापगढ़ आ गया. यहीं पर उसे कंचन मिल गई. पहली मुलाकात हुई तो उन के बीच बातें हुईं. दोनों की यह मुलाकात काफी अच्छी रही. दोनों ने एकदूसरे को अपना नंबर दे दिया. इस के बाद तो उन की मुलाकातों का सिलसिला चल निकला. फोन पर भी बातें होने लगीं. कुछ ही दिनों में दोनों इतने करीब आ गए कि शादी कर के साथ रहने की सोचने लगे.

दोनों ने साथ रहने का फैसला लिया तो कंचन अपनी ससुराल छोड़ कर उस के पास आ गई. रामकुमार ने साथ रहने के लिए कंचन के कहने पर पहले ही जौनपुर के भुईधरा गांव में जमीन ले कर 2 कमरों का मकान बनवा लिया था. दोनों शादी कर के यहीं रहने लगे. यह 8 साल पहले की बात है. 4 साल पहले कंचन ने एक बेटे को जन्म दिया. लेकिन अभावों ने कंचन का यहां भी पीछा न छोड़ा. रामकुमार की भी कमाई अधिक नहीं थी. घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता था. कंचन की मुश्किलें बढ़ने लगीं तो उस ने इधरउधर देखना शुरू कर दिया. उसे ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो उस की जरूरतों पर पैसा खर्च कर सके. इस खेल की तो वह पुरानी खिलाड़ी थी.

उस की तलाश रामाश्रय पटेल पर जा कर खत्म हुई. रामाश्रय जौनपुर के मुगरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के बेरमाव गांव का निवासी था. बेरमाव पंवारा थाना क्षेत्र की सीमा से सटा गांव था. रामाश्रय दिल्ली में रह कर किसी फैक्ट्री में काम करता था. कुछ दिनों बाद वह घर आता रहता था. रामाश्रय विवाहित था और उस के 3 बच्चे भी थे. लेकिन उस की अपनी पत्नी से नहीं बनती थी. रामाश्रय भुईधरा गांव आता रहता था. इसी आनेजाने में उस की मुलाकात कंचन से हो गई थी. कंचन जान गई थी कि रामाश्रय आर्थिक रूप से काफी मजबूत है. कंचन और रामाश्रय की मुलाकातें होने लगीं. इन मुलाकातों में कंचन ने रामाश्रय के बारे में काफी कुछ जान लिया.

वह यह भी जान गई कि रामाश्रय की अपनी पत्नी से नहीं बनती. यह जान कर वह काफी खुश हुई, उस का काम आसान जो हो गया था. पत्नी से परेशान मर्द को बहला कर अपने पहलू में लाना आसान होता है, यह कंचन बखूबी जानती थी. कंचन ने अब रामाश्रय को अपने लटकेझटके दिखाने शुरू कर दिए. रामाश्रय भी कंचन के नजदीक आ कर उसे पाने की चाहत रखता था. कंचन के लटकेझटके देख कर वह भी समझ गया कि मछली खुद शिकार होने को आतुर है. वह भी कंचन पर अपना प्रभाव जमाने के लिए खुल कर उस पर अपना पैसा लुटाने लगा.

कंचन की रामाश्रय से नजदीकी क्या हुई, कंचन के अंदर की अभिलाषा जाग गई. कंचन ने अपनी कामकलाओं का ऐसा जादू बिखेरा कि रामाश्रय सौसौ जान से उस पर न्यौछावर हो गया. रामकुमार के काम पर जाते ही कंचन सजधज कर घर से निकल जाती और रामाश्रय के साथ घूमती और मटरगश्ती करती. रामाश्रय पर कंचन के रूप का जबरदस्त नशा चढ़ा हुआ था. रामकुमार के घर आने से पहले कंचन घर आ जाती थी. घर आने के बाद अपना मेकअप धो कर साफ कर लेती. घर के कपड़े पहन कर घर का काम करने लगती. कंचन समझती थी कि किसी को उस की रंगरलियों की खबर नहीं है. जबकि वास्तविकता सब जान रहे थे.

एक दिन किसी शुभचिंतक ने रामकुमार को उस की पत्नी की रंगरलियों की दास्तान बयान कर दी. रामकुमार ने इस बाबत कंचन से कोई सवाल नहीं किया. बल्कि अपना पैग पीतेपीते सोच लिया कि हकीकत का पता करने के लिए उसे क्या करना है. दूसरे दिन रामकुमार काम पर जाने के लिए घर से तो निकला, पर गया नहीं. कुछ दूरी पर एक जगह छिप कर बैठ गया. उस की नजर घर की ओर से आने वाले रास्ते पर जमी थी. मुश्किल से आधा घंटा बीता होगा कि कंचन आती दिखाई दी. अच्छे कपड़े, आंखों में काजल, होठों पर लिपस्टिक, कलाइयों में खनकती चूडि़यां उस की खूबसूरती बढ़ा रही थी.

कंचन जैसे ही नजदीक आई. रामकुमार एकदम से छिपे हुए स्थान से निकल कर उस के सामने आ खड़ा हुआ. पति को अचानक सामने देख कर कंचन भौचक्की रह गई. वह रामकुमार से पूछना चाहती थी कि वह यहां कैसे, काम पर गए नहीं या लौट आए. मगर मानो वह गूंगी हो गई. चाह कर भी आवाज उस के गले से नहीं निकली. रामकुमार ने कंचन की आंखों में देख कर भौंहें उचकाईं, ‘‘छमिया बन कर कहां चलीं… यार से मिलने? अपना मुंह काला करने और मेरी इज्जत की धज्जियां उड़ाने.’’

कंचन घबराई, लेकिन जल्दी ही खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘नहाधो कर घर से निकलना भी अब जुल्म हो गया. दुखी हो गई हूं मैं तुम से.’’

‘‘घर चल, तब मैं बताता हूं कि कौन किस से दुखी है.’’

दोनों घर आए तो दोनों ने बीच जम कर झगड़ा हुआ. कंचन अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि वह रामाश्रय से मिलने नहीं, अपनी सहेली से मिलने जा रही थी. रामकुमार ने कंचन पर अंकुश लगाने का हरसंभव प्रयास किया, मगर नाकाम रहा. 14 मई को गांव रामपुर हरगिर के पास शारदा नहर के किनारे लोगों ने एक लाश देखी. देखते ही देखते वहां काफी संख्या में लोग जमा हो गए. लाश को ले कर लोग तरहतरह की चर्चाएं करने लगे. इसी बीच रामपुर हरगिर गांव के अजय कुमार नाम के व्यक्ति ने संबंधित थाना पंवारा को लाश मिलने की सूचना दे दी.

सूचना पा कर थानाप्रभारी सेतांशु शेखर पंकज अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वहां पहुंच कर उन्होंने लाश का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र लगभग 35-36 वर्ष रही होगी. मृतक के शरीर की खाल पानी में रहने से गल गई थी. लाश देखने में 2-3 दिन पुरानी लग रही थी. मृतक के दाएं हाथ पर रामकुमार पटेल और कंचन गुदा हुआ था. थानाप्रभारी सेतांशु शेखर ने लाश के कई कोणों से फोटो खींचने के साथ नाम का जो टैटू था, उस की भी फोटो कर ली. घटनास्थल का निरीक्षण किया गया तो पास से चाकू, रस्सी और कपड़े बरामद हुए. वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन वहां मौजूद कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर सका.

थानाप्रभारी सेतांशु शेखर ने लाश पोस्टमार्टम हेतु भेज दी. फिर अजय कुमार को साथ ले कर थाने आ गए. अजय कुमार की लिखित तहरीर पर थानाप्रभारी ने अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. थाने के सिपाहियों को लाश पर मिले टैटू की फोटो दे कर अपने थाना क्षेत्र और आसपास के थाना क्षेत्र में भेजा, जिस से मृतक के बारे में कोई जानकारी मिल सके. उन का यह प्रयास सफल भी हुआ. गोहानी गांव में टैटू देख कर लोगों ने पहचाना कि कंचन तो उसी गांव की बेटी है, रामकुमार उस का पति है. वह टैटू देख कर यह लगा कि वह लाश रामकुमार की थी.

जानकारी मिली तो थानाप्रभारी सेतांशु शेखर गोहानी गांव पहुंच गए. रामकुमार की ससुराल गोहानी में थी. वहां रामकुमार की पत्नी कंचन मौजूद थी. उस के साथ में रामाश्रय था. रामाश्रय का पता पूछा तो उस का गांव बेरमाव था जोकि घटनास्थल से काफी करीब था. रामकुमार की हत्या होना, उस समय उस की पत्नी कंचन का मायके में होना और उस के साथ जो व्यक्ति रामाश्रय मिला उस के गांव के नजदीक रामकुमार की लाश मिलना, यह सब इत्तिफाक नहीं था. सुनियोजित साजिश के तहत घटना को अंजाम देने की ओर इशारा कर रहा था. इस बात को थानाप्रभारी बखूबी समझ गए थे.

इसलिए उन्होंने शक के आधार पर पूछताछ हेतु दोनों को हिरासत में ले लिया और थाने वापस आ गए. थाने में ला कर उन से पहले अलगअलग फिर आमनेसामने बैठा कर कड़ाई से पूछताछ की गई तो वे दोनों टूट गए और हत्या के पीछे की वजह बयान कर दी. दोनों के संबंधों को ले कर हर रोज घर में रामकुमार झगड़ा करने लगा. उन के मिलने में अड़चनें पैदा करने लगा तो कंचन ने रामाश्रय से रामकुमार को हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटाने के लिए कह दिया. यह घटना से करीब एक हफ्ते पहले की बात है. दोनों ने पूरी योजना बना ली. कंचन अपने मायके गोहानी चली गई. 11/12 मई की रात रामाश्रय रामकुमार के पास गया. उस से कंचन से संबंध खत्म करने की बात कही.

फिर एक नई शुरुआत करने के बहाने उसे अपने साथ ले गया. रामकुमार को उस ने जम कर शराब पिलाई.  देर रात एक बजे रामाश्रय रामकुमार को रामपुर हरगिर गांव के पास ले गया. उस समय रामकुमार नशे में धुत्त था. रामाश्रय ने साथ लाए चाकू से गला काट कर रामकुमार की हत्या कर दी. उस के बाद उस के हाथपैर को रस्सी और कपड़े से बांध कर लाश नहर में डाल दी लेकिन लाश नदी के दोनों किनारों को जोड़ने के लिए डाले गए बिजली के आरसीसी के बने खंभों में फंस कर रह गई. नदी के बहाव में वह नहीं बह सकी. रामाश्रय यह नहीं देख पाया. वह चाकू वहीं फेंक कर घर चला गया. अगले दिन वह कंचन के पास उस के मायके पहुंच गया. वहां वह कंचन के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

मुकदमे में भादंवि की धारा 201/120बी/34 और जोड़ दी गईं. कानूनी लिखापढ़ी करने के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Short love Story in Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Murder Mystery Story : रस्सी से पति का गला घोंटा फिर लाश को जला डाला

Murder Mystery Story : किसी भी इंसान के लिए परिवार सब से ज्यादा मायने रखता है. लेकिन संजीव को सिर्फ अपनी नाजायज खुशी ही प्यारी थी. उस की गलत हरकतों से उस की बीवी से उस के दोस्त के करीबी संबंध हो गए. उसे रोकने की बजाय संजीव उस की गलत हरकतों में खुद की खुशी ढूंढने लगा. इस के बाद जो हुआ…

देस दिन मई 2021 की 11 तारीख थी. तीर्थनगरी हरिद्वार के पथरी थाने के थानाप्रभारी अमर चंद्र शर्मा अपने औफिस में बैठे कुछ आवश्यक काम निपटा रहे थे, तभी उन के पास एक महिला आई और बोली, ‘‘साहब, मेरी मदद कीजिए.’’

वह महिला बड़े ही दुखी लहजे में बोली, ‘‘मेरा नाम अंजना है और मैं रानी माजरा गांव में रहती हूं. साहब, परसों 9 मई को मेरा पति संजीव सुबह फैक्ट्री गया था, लेकिन शाम को वापस नहीं लौटा. उस के न लौटने पर उस की फैक्ट्री व परिचितों के घर जा कर पता किया लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. उस के बारे में कुछ पता न चलने पर मैं आप के पास मदद मांगने आई हूं. अब आप ही मेरे पति को तलाश सकते हैं.’’

‘‘ठीक है, हम तुम्हारे पति को खोज निकालेंगे. तुम लिखित तहरीर दे दो और साथ में अपने पति की एक फोटो दे दो.’’

‘‘ठीक है साहब. मुझे शक है कि मेरे गांव के ही प्रधान ने मेरे पति को गायब कराया है. कहीं उस ने मेरे पति के साथ कुछ गलत न कर दिया हो. इस बात से मेरा दिल बैठा जा रहा है.’’ वह बोली.

‘‘ठीक है, जांच में सब पता लगा लेंगे. अगर प्रधान का इस सब में हाथ हुआ तो उसे सजा जरूर दिलाएंगे.’’ इंसपेक्टर शर्मा ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा.

‘‘ठीक है साहब,’’ कह कर वह महिला अंजना वहां से चली गई. कुछ ही देर में वह वापस लौटी और एक तहरीर और फोटो थानाप्रभारी शर्मा को दे गई तो उन्होंने संजीव की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. थानाप्रभारी शर्मा अभी कुछ प्रयास करते, उस से पहले ही अगले दिन फिर अंजना उन से मिलने आ गई. उस ने गांव के प्रधान द्वारा अपने पति को मार देने का आरोप लगाते हुए लाश जंगल में पड़ी होने की आशंका जाहिर की. उस ने यह बात उस की इस हरकत से इंसपेक्टर शर्मा को उस पर शक हो गया. ऐसी हरकत तो इंसान तभी करता है, जब वह खुद उस मामले में संलिप्त हो और दूसरे को फंसाने की कोशिश करता है.

अंजना भी जिस तरह से गांव के प्रधान को बारबार इंगित कर रही थी, उस से यही लग रहा था कि अंजना का अपने पति संजीव को गायब कराने में हाथ है और इस में वह गांव के प्रधान को फंसाना चाहती है. संजीव ने गांव के कई विकास कार्यों के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग रखी थी. इस से प्रधान और संजीव के बीच विवाद चल रहा था. इसी का फायदा शायद अंजना उठाना चाहती थी. अंजना पर शक हुआ तो इंसपेक्टर शर्मा ने अंजना के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. उस में एक नंबर पर अंजना की काफी बातें होने की बात पता चली. 9 मई को भी कई बार बातें हुई थीं. दोनों की लोकेशन भी कुछ देर के लिए साथ में मिली.

अंजना पर जब शक पुख्ता हो गया तो 16 मई, 2021 को थानाप्रभारी शर्मा ने अंजना को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. फिर महिला कांस्टेबलों बबीता और नेहा की मौजूदगी में अंजना से काफी सवाल किए, जिन का सही से अंजना जवाब नहीं दे पाई. जब सख्ती की गई तो अंजना ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. अंजना ने ही अपने पति संजीव की हत्या की थी. हत्या में उस का साथ उस के प्रेमी शिवकुमार उर्फ शिब्बू ने दिया था, जोकि धनपुरा गांव में रहता था. उसी ने हत्या के बाद संजीव की लाश पैट्रोल डाल कर जलाई थी. पुलिस ने शिवकुमार को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया.

दोनों की निशानदेही पर पीपली गांव के जंगल के काफी अंदर जा कर संजीव की अधजली लाश पुलिस ने बरामद कर ली. मौके से ही हत्या में प्रयुक्त रस्सी और प्लास्टिक बोरी भी बरामद हो गई. लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया. दोनों हत्याभियुक्तों से पूछताछ के बाद जो कहानी निकल कर सामने आई, वह काफी हैरतअंगेज थी. उत्तराखंड के शहर हरिद्वार के पथरी थाना क्षेत्र के गांव रानी माजरा में रहता था संजीव. संजीव पदार्था स्थित पतंजलि फूड पार्क कंपनी की फैक्ट्री में काम करता था. परिवार के नाम पर उस की पत्नी और 12 साल का बेटा सनी था.

जब परिवार का मुखिया सही न चले तो परिवार का बिगड़ना तय होता है. संजीव में कई गलत आदतें थीं, जिस से अंजना काफी परेशान रहती थी. संजीव को अप्राकृतिक यौन संबंध बनवाने का शौक था, जिस के चलते वह शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार भी रहता था. कभीकभी उस की मानसिक स्थिति काफी बदतर हो जाती थी. घर के सामने से कोई कुत्ता गुजर जाता तो वह कुत्ते को जम कर मारतापीटता था. कई बार उस ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर के पुलिसकर्मियों को गालियां दी. पुलिसकर्मियों ने शिकायत की तो उस की हालत देख कर थाना स्तर से कोई काररवाई नहीं की जाती. उस के दिमाग में कब क्या फितूर बस जाए कोई नहीं जान सकता था.

धनपुरा गांव में रहता था 45 वर्षीय शिवकुमार उर्फ शिब्बू. शिवकुमार के परिवार में पत्नी और एक बेटी और एक बेटा था. शिवकुमार दूध बेचने का काम करता था. संजीव के घर पिछले 10 सालों से शिवकुमार दूध देने आता था. संजीव से उस की दोस्ती थी. संजीव ने शिवकुमार को अपनी पत्नी अंजना से मिलाया. दोनों मे दोस्ती कराई. दोस्ती होने पर शिवकुमार दूध देने घर के अंदर तक आने लगा. अंजना से वह घंटों बैठ कर बातें करने लगा. कुछ ही दिनों में वे दोनों काफी घुलमिल गए. उन के बीच हंसीमजाक भी होने लगा. एक दिन दूध देने के बाद शिवकुमार अंजना के पास बैठ गया. उसे देखते हुए बोला, ‘‘भाभी, लगता है अपना खयाल नहीं रखती हो?’’

अंजना को उस की बात सुन कर हैरत हुई, बोली, ‘‘अरे, भलीचंगी तो हूं …और कैसे खयाल रखूं?’’

‘‘सेहत पर तो आप ध्यान दे रही हो, जिस से स्वस्थ हो लेकिन अपने हुस्न को निखारनेसंवारने में बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रही हो.’’

‘‘ओह! तो यह बात है. मैं भी सोचूं कि मैं तो अच्छीखासी हूं.’’ फिर दुखी स्वर में बोली, ‘‘अपने हुस्न को संवार कर करूं भी तो क्या.  जिस के साथ बंधन में बंधी हूं, वह तो ध्यान ही नहीं देता. उस का शौक भी दूसरी लाइन का है. मुझे खुश करने के बजाय खुद को खुश करने के लिए लोगों को ढूंढता फिरता है.’’

‘‘क्या मतलब…?’’

शिवकुमार कुछकुछ समझ तो गया था लेकिन अंजना से खुल कर पूछने के लिए उस से सवाल किया.

‘‘यही कि वह आदमी है और आदमी से ही प्यार करता है, उसे औरत में कोई लगाव नहीं है. जैसेतैसे उस ने कुछ दिन मुझे बेमन से खुशी दी, जिस की वजह से एक बेटा हो गया. उस के बाद उस ने मेरी तरफ देखना ही बंद कर दिया. उस के शौक ही निराले हैं.’’

इस पर शिवकुमार उस से सुहानुभूति दर्शाते हुए बोला, ‘‘यह तो आप के साथ अत्याचार हो रहा है, शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से. आप कैसे सह लेती हो इतना सब?’’

‘‘क्या करूं…जब नसीब में ही सब लिखा है तो भुगतना तो पडे़गा ही.’’ दुख भरे लहजे में अंजना ने कहा.

‘‘जैसे वह आप का खयाल नहीं रखता, वैसे आप भी उस का खयाल मत रखो. आप का भी अपना वजूद है, आप को भी अपनी खुशी का खयाल रखने का हक है.’’

‘‘खुद को खुश रखने की कोशिश भी करूं तो कैसे, संजीव मेरी खुशियों में आग लगाने में पीछे नहीं हटता. अब उस से बंध गई हूं तो उस के साथ ही निभाना पड़ेगा.’’

‘‘आप अपनी खुशी के लिए कोई भी कदम उठा सकती हैं. इस के लिए आप पर कोई बंधन नहीं है. जरूरत है तो आप के एक कदम बढ़ाने की.’’

‘‘कदम तो तभी बढ़ेंगे, जब कोई मंजिल दिखे. बिना मंजिल के कदम बढ़ाने से कोई फायदा नहीं, उलटा कष्ट ही होगा.’’

‘‘मंजिल तो आप के सामने ही है लेकिन आप ने देखने की कोशिश ही नहीं की.’’ शिवकुमार ने अंजना की आंखों में देखते हुए कहा.

शिवकुमार की बात सुन कर अंजना ने भी उस की आंखों में देखा तो वहां उसे अपने लिए उमड़ता प्यार दिखा. अंजना के दिल को सुकून मिला कि उसे भी कोई दिल से चाहता है और उस का होना चाहता है.

‘‘लेकिन शिव, हम दोनों का ही अपना बसाबसाया परिवार है. ऐसे में एकदूसरे की तरफ कदम बढ़ाना सही होगा.’’

‘‘मेरी छोड़ो, अपनी बात करो. कौन सा परिवार… परिवार के नाम पर पति और एक बेटा. पति ऐसा कि जो अपने लिए ही मस्ती खोजता रहता है, जिसे अपनी पत्नी की जरूरतों का कोई खयाल नहीं और न ही उस की भावनाओं की कद्र करता है. ऐसे इंसान से दूर हो जाना बेहतर है.’’

‘‘कह तो तुम ठीक रहे हो शिव. जब उसे मेरा खयाल नहीं तो मैं क्यों उस की चिंता करूं.’’

‘‘हां भाभी, मैं आप को वह सब खुशियां दूंगा, जिस की आप हकदार हैं. बस आप एक बार हां तो कहो.’’

अंजना ने उस की बात सुन कर मूक सहमति दी तो शिवकुमार ने उसे बांहों में भर कर कर सीने से लगा लिया. उस के बाद शिवकुमार ने अंजना को वह खुशी दी, जो अंजना पति से पाने को तरसती थी. उस दिन शिवकुमार ने अंजना की सूखी जमीन को फिर से हराभरा कर दिया. फिर तो उन के बीच नाजायज संबंध का यह रिश्ता लगभग हर रोज निभाया जाने लगा. अंजना का चेहरा अब खिलाखिला सा रहने लगा. वह अब अपने को सजानेसंवारने लगी थी. शिवकुमार के बताए जाने पर वह शिवकुमार के दिए जाने वाले कच्चे दूध से चेहरे की सफाई करती. दूध उबालने के बाद पड़ने वाली मोटी मलाई को अपने चेहरे पर लगाती, जिस से उस के चेहरे की चमक बनी रहे.

समय का पहिया निरंतर आगे बढ़ता गया. संजीव से उन दोनों के संबंध छिपे नहीं रहे. उसे पता चला तो उसे बिलकुल भी गुस्सा नहीं आया. अमूमन कोई भी पति अपनी पत्नी के अवैध रिश्ते के बारे में जानता तो गुस्सा करता. पत्नी के साथ मारपीट लड़ाईझगड़ा करता, लेकिन संजीव के मामले में ऐसा कुछ नहीं था. उस के दिमाग में तो और ही कुछ चल रहा था. जो उस के दिमाग में चल रहा था उसे वह सोच कर मंदमंद मुसकरा रहा था. अब संजीव दोनों पर नजर रखने लगा. एक दिन उस ने दोनों को शारीरिक रिश्ता बनाते रंगेहाथ पकड़ लिया. उसे आया देख कर शिवकुमार और अंजना सहम गए.

संजीव ने दोनों को एक बार खा जाने वाली नजरों से देखा, फिर उन के सामने कुरसी डाल कर आराम से बैठ गया और बोला, ‘‘तुम दोनों अपना कार्यक्रम जारी रखो.’’

उस के बोल सुन कर शिवकुमार और अंजना हैरत से एकदूसरे को देखने लगे. उन के आश्चर्य की सीमा नहीं थी. संजीव ने जो कहा था उन की उम्मीद के बिलकुल विपरीत था. संजीव के दिमाग में क्या चल रहा है, दोनों यह जानने के लिए उत्सुक थे. उन दोनों को हैरत में पड़ा देख कर संजीव मुसकरा कर बोला, ‘‘चिंता न करो, मुझे तुम दोनों के संबंधों से कोई एतराज नहीं है. मैं तो खुद तुम दोनों को संबंध बनाते देखने को आतुर हूं.’’

संजीव के बोल सुन कर अंजना के अंदर की औरत जागी, ‘‘कैसे मर्द हो जो अपनी ही बीवी को पराए मर्द के साथ बिस्तर पर देखना चाहते हो. तुम इतने गिरे हुए इंसान हो, मैं तो सपने में भी नहीं सोच सकती थी.’’

‘‘तुम्हारे प्रवचन खत्म हो गए हों तो आगे का कार्यक्रम शुरू करो.’’ बड़ी ही बेशरमी से संजीव बोला.

‘‘क्यों कोई जबरदस्ती है, हम दोनों ऐसा कुछ नहीं करेंगे.’’ अंजना ने सपाट लहजे में बोल दिया.

संजीव ठहाके लगा कर हंसा, फिर बोला, ‘‘मुझे न बोलने की स्थिति में नहीं हो तुम दोनों. मैं ने बाहर वालों को तुम दोनों के नाजायज संबंधों के बारे में बता दिया तो समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे.’’

बदनामी का भय इंसान को अंदर तक हिला कर रख देता है. अंजना और शिवकुमार भी बदनाम नहीं होना चाहते थे. वैसे भी जिस से उन को डरना चाहिए था, वह खुद उन को संबंध बनाने की छूट दे रहा था. ऐसे में दोनों ने संबंध बनाए रखने के लिए संजीव की बात मान ली. अंजना और शिवकुमार शारीरिक संबंध बनाने लगे. संजीव उन के पास ही बैठ कर अपनी आंखों से उन को ऐसा करते देखता रहा और आनंदित होता रहा. किसी पोर्न मूवी में फिल्माए जाने वाले दृश्य की तरह ही सब कुछ वहां चल रहा था.

अंजना के साथ संबंध बनाए जाने के बाद संजीव ने शिवकुमार से अपने साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने को कहा. शिवकुमार ने न चाहते हुए उस की बात मान ली. संजीव को उस की खुशी दे दी. अब तीनों के बीच बेधड़क संबंधों का यह नाजायज खेल बराबर खेला जाने लगा. अंजना और शिवकुमार को संजीव ब्लैकमेल कर रहा था. दोनों को अपने प्यार में बाधा पहुंचाने वाला और बदनाम करने की धमकी देने वाला संजीव अब अखरने लगा था. उस से छुटकारा पाने का एक ही तरीका था, वह था उसे मौत की नींद सुला देने का. दोनों ने संजीव को ठिकाने लगाने का फैसला किया तो उस पर योजना भी बना ली.

शिवकुमार का फेरूपुर गांव में खेत था, उसी में उस ने अपना एक अलग मकान बनवा रखा था. 9 मई को अंजना संजीव को यह कह कर वहां ले गई कि वहीं तीनों शारीरिक संबंध बनाएंगे. संजीव अंजना के जाल में फंस गया. उस के साथ शिवकुमार के मकान पर पहुंच गया. शिवकुमार वहां पहले से मौजूद था. शिवकुमार के पहुंचते ही शिवकुमार ने अंजना को इशारा किया. अंजना ने तुरंत पीछे से संजीव को दबोच लिया. दुबलापतला संजीव अंजना के चंगुल से तमाम कोशिश के बाद भी छूट न सका. शिवकुमार ने संजीव के गले में रस्सी का फंदा डाल कर कस दिया, जिस से दम घुटने से संजीव की मौत हो गई.

शिवकुमार ने उस की लाश को प्लास्टिक बोरी में डाल कर बोरी को बंद कर दी और बाइक पर बोरी रख कर वह पीपली गांव के जंगल में ले गया और जंगल में काफी अंदर जा कर संजीव की लाश फेंक दी. लाश ठिकाने लगा कर वह वापस आ गया. योजना के तहत 11 मई, 2021 को अंजना ने पथरी थाने में पति की गुमशुदगी दर्ज करा दी. अंजना ने ग्राम प्रधान पर हत्या का शक जाहिर किया, जिस से हत्या में ग्रामप्रधान फंस जाए. इधर अंजना को भय सताने लगा कि वे दोनों किसी बड़ी मुसीबत में फंसने वाले हैं. इस भय के कारण 14 मई को ईद के दिन अंजना ने शिवकुमार से संपर्क किया और शिवकुमार से कहा कि लाश को पैट्रोल डाल कर जला दो.

शिवकुमार ने फिर से जंगल जा कर संजीव की लाश पर पैट्रोल डाल कर जला दी. लेकिन दोनों की ज्यादा होशियारी काम न आई, दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए. चूंकि अंजना ही वादी थी, ऐसे में पीडि़त को गुनहगार साबित करना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है. लेकिन थानाप्रभारी अमर चंद्र शर्मा ने बड़ी सूझबूझ से पहले पुख्ता सुबूत जुटाए, फिर अंजना को उस के प्रेमी शिवकुमार के साथ गिरफ्तार किया. थानाप्रभारी शर्मा ने दोनों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201/120बी के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. Murder Mystery Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधार

Crime ki Kahani : पत्नी ने पति की प्रेमिका और उसके बेटे को जिंदा डालाया

Crime ki Kahani : डा. सुदीप गुप्ता के अपने ही अस्पताल की रिसैप्शनिस्ट दीपा गुर्जर के साथ अवैध संबंध हो गए थे. तब सुदीप गुप्ता की पत्नी डा. सीमा गुप्ता ने अपनी सास सुरेखा के साथ मिल कर दीपा गुर्जर और उस के बेटे को जिंदा जला दिया था. यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था. कोर्ट का फैसला आने से पहले ही दीपा के भाई अनुज ने डाक्टर दंपति को ऐसी सजा दी कि…

बात 28 मई की है. शाम के करीब पौने 5 बजे का वक्त रहा होगा. राजस्थान के भरतपुर शहर में डा. सुदीप गुप्ता अपनी पत्नी डा. सीमा गुप्ता के साथ कार से कुम्हेर गेट पर जाहरवीर मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे. रोजाना शाम को मंदिर में जा कर दर्शन करना उन की दिनचर्या में शुमार था. गुप्ता दंपति का शहर में काली की बगीची पर श्रीराम गुप्ता मेमोरियल हौस्पिटल है. इसी हौस्पिटल के ऊपरी हिस्से में वह अपने परिवार के साथ रहते थे. परिवार में डा. सुदीप की मां सुरेखा, पत्नी डा. सीमा और 18 साल का बेटा संयम तथा 15 साल की बेटी साक्षी थे.

डाक्टर दंपति 5 मिनट पहले ही अपने हौस्पिटल से मंदिर के लिए रवाना हुए थे. कार डा. सुदीप चला रहे थे. डा. सीमा उन के साथ आगे की सीट पर बैठी हुई थी. वह घर से करीब 750 मीटर दूर ही पहुंचे थे कि सरकुलर रोड पर नीम दा गेट के पास पीछे से आए एक मोटरसाइकिल पर सवार 2 युवकों ने साइड से ओवरटेक कर अपनी बाइक उन की कार के आगे लगा दी. सड़क के बीच बाइक रुकने से डा. सुदीप ने फुरती से कार के ब्रेक लगाए. सुदीप कुछ समझ पाते, इस से पहले ही बाइक से उतर कर दोनों युवक कार की ड्राइविंग साइड में डा. सुदीप की तरफ आए.

इन में एक युवक ने लाल कपड़े से अपना मुंह ढक रखा था और दूसरे युवक ने न तो मास्क लगाया हुआ था और न ही हेलमेट पहना हुआ था. इन दोनों युवकों को डा. सुदीप पहचान नहीं सके. कार के सामने बाइक लगाने की वजह जानने के लिए डा. सुदीप ने अपनी कार के गेट का शीशा नीचे किया. डा. सुदीप उन युवकों से सवाल पूछते, इस से पहले ही मुंह पर कपड़ा बांधे युवक ने अपनी पैंट में छिपी पिस्तौल निकाली. उस ने बिना कुछ कहेसुने डा. सुदीप की कनपटी के पास 2-3 गोलियां मार दीं. डा. सुदीप के पास आगे की सीट पर ही बैठी डा. सीमा कुछ समझती, इस से पहले ही उस युवक ने उन को भी गोलियों से भून दिया.

डाक्टर दंपति पर गोलियां चलाने के बाद उस युवक ने कुछ पल रुक कर यह तसल्ली की कि दोनों की मौत हुई या नहीं. इस के बाद डा. सुदीप को एक गोली और मारी. फिर सड़क के दोनों ओर से गुजर रहे लोगों को डराने के लिए पिस्तौल से हवा में गोली चलाई. दोनों युवक बाइक पर सवार हो कर भागने लगे, लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुई. इस पर गोलियां चलाने वाले युवक ने धक्का दिया. गाड़ी स्टार्ट होने पर दोनों उस पर सवार हो कर यूटर्न ले कर भाग गए. भागते हुए भी उन्होंने पिस्तौल से हवा में गोलियां चलाईं. गोलियां लगने से डा. सुदीप और सीमा अपनी कार में ही लुढ़क गए.

शहर के सब से प्रमुख रोड पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात के समय सड़क के दोनों ओर वाहन लगातार आजा रहे थे, लेकिन किसी ने भी न तो बदमाशों को रोकने की हिम्मत की और न ही उन का पीछा किया. इसीलिए दोनों युवक जिस तरफ से आए थे, बाइक से उसी तरफ भाग गए. यह वारदात वहां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद जरूर हो गई. खास बात यह हुई कि डाक्टर दंपति को सरेआम गोलियां मारने की वारदात लौकडाउन के दौरान हुई. कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए पूरे राजस्थान में अप्रैल महीने के तीसरे सप्ताह से ही लौकडाउन लगा हुआ था. लौकडाउन में हालांकि आम लोगों के घर से निकलने पर रोक लगी हुई थी, लेकिन फिर भी लोग किसी न किसी बहाने घर से बाहर निकलते ही थे.

हरेक चौराहों के अलावा जगहजगह पुलिस तैनात रहती थी. इतनी सख्ती होने के बावजूद दोनों युवक पिस्तौल से गोलियां चलाते हुए भाग गए और पुलिस को पता भी नहीं चला. दोनों युवकों के भागने के बाद आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए. उन्होंने कार में लुढ़के पड़े डा. सुदीप और उस की पत्नी सीमा को पहचान लिया और पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में पुलिस पहुंच गई. मौके पर एकत्र लोगों ने बताया कि ये डा. सुदीप और उस की पत्नी है. पुलिस ने लोगों की मदद से दोनों को कार से निकाला और तुरंत अस्पताल ले गए. अस्पताल में डाक्टर दंपति को मृत घोषित कर दिया.

दिनदहाड़े डाक्टर दंपति की हत्या की घटना से शहर में दहशत फैल गई. पुलिस के अफसर मौके पर पहुंच गए. शुरुआती जांचपड़ताल में ही साफ हो गया कि डाक्टर दंपति की हत्या बदला लेने के लिए की गई थी. डाक्टर दंपति के खौफनाक अंत के पीछे की कहानी इस से भी ज्यादा खौफनाक है. उस कहानी तक ले चलने से पहले आप को बता दें कि डा. सुदीप की एक प्रेमिका थी. उस का नाम था दीपा गुर्जर. दीपा के 6 साल का बेटा शौर्य था. दीपा और शौर्य की भरतपुर की सूर्या सिटी में 7 नवंबर, 2019 को मकान में स्प्रिट से आग लगा कर हत्या कर दी गई थी. दीपा और शौर्य की हत्या का आरोप डा. सुदीप, उस की पत्नी डा. सीमा और मां सुरेखा गुप्ता पर है. इस मामले में उस समय तीनों की ही गिरफ्तारी हुई थी.

बाद में पिछले साल यानी 2020 में मई से अगस्त महीने के बीच अलगअलग समय पर जमानत होने पर ये तीनों जेल से बाहर आए थे. बदला लेने की भावना से डाक्टर दंपति की हत्या किए जाने की आशंका का पता चलने पर पुलिस ने दीपा के भाईबहनों की तलाश शुरू की. इस बीच, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज हासिल कर लिए. इन फुटेज से पता चला कि डाक्टर दंपति को गोलियां मारने वाला युवक अनुज था. अनुज दीपा का भाई था. अनुज और उस के साथ बाइक पर आए दूसरे युवक का पता लगाने के लिए पुलिस ने दीपा की बहन राधा को हिरासत में ले कर पूछताछ की. राधा ने ही डेढ़ साल पहले बहन दीपा और भांजे शौर्य की हत्या का मुकदमा पुलिस में दर्ज कराया था.

राधा को फुटेज दिखाने पर पता चला कि दूसरा युवक उन का रिश्तेदार महेश है. महेश धौलपुर जिले का रहने वाला था. दोनों हत्यारों की पहचान हो जाने पर पुलिस ने उन की तलाश शुरू कर दी. उन के भरतपुर या धौलपुर जिले के डांग इलाके में भाग जाने की संभावना थी. दोनों की तलाश में सर्च अभियान चला कर पुलिस की कई टीमें विभिन्न इलाकों में छापे मारने में जुट गईं. भरतपुर रेंज के आईजी ने भरतपुर व धौलपुर सहित आसपास के जिलों में दोनों आरोपियों की फोटो भेज कर उन की तलाश करने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए. साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया. भरतपुर शहर में विभिन्न मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मौनिटरिंग वाले अभय कमांड सेंटर से तमाम कैमरों की फुटेज देखी गई, ताकि हत्यारों के भागने की सही दिशा का पता चल सके.

लेकिन पुलिस को इस में कामयाबी नहीं मिली. दीपा के भाई अनुज का नाम सामने पर पुलिस ने उस की कुंडली खंगाली. पता चला कि वह भरतपुर जिले के रुदावल कस्बे में इसी साल 16 मार्च को हुई फायरिंग की घटना में भी शामिल था. इस वारदात में बदमाशों ने 15-20 राउंड गोलियां चला कर रुदावल कस्बे मे दहशत फैलाई थी. पुलिस ने इस मामले में कुछ बदमाशों को बाद में पकड़ा था, लेकिन अनुज नहीं पकड़ा गया था. पता चला कि वह राजेश उर्फ लल्लू शूटर की गैंग का बदमाश था. राजेश का गैंग लूट और रंगदारी वसूलने के अपराध करती है. अनुज के धौलपुर के कुछ डकैतों से भी संबंध होने का पता चला.

डाक्टर दंपति की हत्या हो गई थी और उन के निजी अस्पताल में उस समय कई मरीज भरती थे. इस बात का पता चलने पर अधिकारियों ने अस्पताल के कर्मचारियों की मदद से उन सभी मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कराया. डा. सुदीप के बाहर रहने वाले एकदो नजदीकी रिश्तेदारों को फोन से सूचना दी गई. लौकडाउन के दौरान सरेआम दिनदहाड़े डाक्टर दंपति की हत्या होने से पुलिस और सरकार पर सवाल उठने लगे. सवाल उठने का दूसरा कारण यह भी था कि डाक्टर दंपति की हत्या से करीब 17 घंटे पहले ही भरतपुर सांसद रंजीता कोली की गाड़ी पर आधी रात के समय भरतपुर जिले के हलैना इलाके में हमला किया गया था.

सरकार की किरकरी होने पर दूसरे दिन 29 मई को जयपुर से चिकित्सा राज्यमंत्री डा. सुभाष गर्ग और एडीजी (कानून व्यवस्था) सुनील दत्त भरतपुर पहुंच गए. उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली. हालात की समीक्षा कर कानूनव्यवस्था की जानकारी ली. बाद में एसपी देवेंद्र विश्नोई ने डाक्टर दंपति की हत्या के मामले में लापरवाही मानते हुए बीट कांस्टेबल और बीट प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया. वहीं, चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग ने सुदीप और सीमा की हत्या को ले कर विवादित बात कही कि हर गलती सजा मांगती है. डाक्टर दंपति ने जो किया, उन्हें उस की सजा मिली. अब इन आरोपियों को भी मिलेगी.

दोपहर बाद पुलिस ने डा. सुदीप और डा. सीमा के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद वह घर वालों को सौंप दिए. डा. सुदीप के दोनों बच्चे नाबालिग होने और मां कैंसर रोगी होने के कारण बाहर से आई सुदीप की बहन को शव सुपुर्द किए गए. बाद में पुलिस की मौजूदगी में दोनों शवों का एक ही चिता पर सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया. डाक्टर दंपति के परिवार पर मंडराते खतरे को देखते हुए पुलिस ने उन के मकान और कुछ रिश्तेदारों के आवास पर पहरा लगा दिया. इस बीच, लगातार छापे मारने के बावजूद पुलिस को दूसरे दिन भी दोनों हत्यारों का सुराग नहीं मिला. पुलिस इन के रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ करती रही और उन के मोबाइल ट्रेस करती रही.

तीसरे दिन 30 मई, 2021 को पुलिस ने इस मामले में भरतपुर के रहने वाले दौलत और धौलपुर जिले के रहने वाले निर्भान सिंह को गिरफ्तार कर लिया. इन में दौलत महेश का जीजा है. उसी ने महेश को वह बाइक दी थी, जिस से डाक्टर दंपति की हत्या की वारदात की गई. दौलत पहलवानी करता है और जमीनजायदाद या जेवर गिरवी रख कर ब्याज पर रुपए देने का काम करता है. उस के दोनों कान टूटे हुए हैं. दूसरा आरोपी निर्भान सिंह दौलत का दोस्त था. इन से पूछताछ में पता चला कि डाक्टर दंपति की हत्या की साजिश दौलत के घर पर ही रची गई थी. इस के लिए दौलत ने महेश को कुछ दिन पहले एक बाइक दे दी थी.

महेश ने यह बाइक अनुज को दे दी थी. वारदात के वक्त महेश ही बाइक चला रहा था और अनुज पीछे बैठा था. पुलिस के लिए अनुज और महेश की गिरफ्तारी ज्यादा बड़ी बात नहीं थी. हालांकि वे दोनों बदमाश थे और अपराधियों के सारे दांवपेच के साथ पुलिस से बचने के रास्ते भी जानते थे. मुख्य बात डाक्टर दंपति की हत्या के कारण का पता लगाना था. यह बात तो सामने आ गई थी कि डा. सुदीप और डा. सीमा की हत्या बदला लेने के लिए की गई थी, लेकिन इस में तात्कालिक कारण क्या रहे?

जांचपड़ताल में डाक्टर दंपति की हत्या का कारण जनचर्चाओं के अनुसार यह उभर कर सामने आया कि डा. सुदीप की प्रेमिका दीपा और उस के बेटे शौर्य की हत्या के केस में गवाही नहीं देने या बयान से मुकरने की बात चल रही थी. दीपा के परिवार वाले डाक्टर से एक करोड़ रुपए मांग रहे थे और डाक्टर करीब 50 लाख रुपए देने को तैयार था. इसी बात पर दोनों पक्षों में बात नहीं बन रही थी. दीपा और उस के बेटे शौर्य की हत्या के मामले में डा. सुदीप गुप्ता की जमानत 8 मई, 2020 को और डा. सीमा गुप्ता की 5 अगस्त, 2020 को हो गई थी. डाक्टर की मां सुरेखा भी जून 2020 में जमानत होने के बाद जेल से बाहर आ गई थी. तीनों के जमानत पर छूटने के बाद इस मामले में राजीनामे की बात चल रही थी.

इस मामले में अदालत में ट्रायल चल रहा था. मृतका दीपा की मां ओमवती, बहन राधा उर्फ राधिका और एक कांस्टेबल की गवाही के लिए सब से पहले 8 दिसंबर, 2020 की तारीख तय थी. इस के बाद इस साल जनवरी, फिर फरवरी, मार्च और 12 मई की तारीख की तय हुई थी, लेकिन इन में से किसी भी तारीख पेशी पर तीनों में से किसी की गवाही नहीं हो सकी. दीपा के परिवार की ओर से लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा था. डाक्टर दंपति भी इस केस से किसी तरह अपना पीछा छुड़ाना चाहता था. राजीनामे की बात इस पर अटकी हुई थी कि दीपा का भाई एकमुश्त रकम मांग रहा था और डा. सुदीप हर गवाही पर रकम देना चाहता था, ताकि कोई गड़बड़ न हो.

राजीनामे में आ रही अड़चनों के बीच कुछ समय पहले अनुज ने डा. सुदीप को धमकी भी दी थी. इस पर डाक्टर ने अपने परिचित कुछ अधिकारियों और कानूनविदों से सलाहमशविरा भी किया था. इस में डाक्टर ने खुद पर और परिवार पर खतरे की आशंका जताई थी. चूंकि यह कानूनी मामला था, इसलिए सभी ने उन्हें विवाद नहीं बढ़ाने और समझाइश से मामला शांत करने को कहा था. शायद इसीलिए डा. सुदीप ने अनुज के धमकी देने की लिखित शिकायत पुलिस में नहीं की थी. लगातार दबाव बनाने के बावजूद डाक्टर से पैसा नहीं मिलने के कारण वह अपनी बहन और भांजे के जलने के दृश्य याद कर बौखला जाता था. इसी बौखलाहट में उस ने बदला लेने के लिए डा. सुदीप और उस की पत्नी डा. सीमा की हत्या कर दी.

अब आप को डेढ़ साल पहले की उस खौफनाक मंजर की कहानी बताते हैं, जिस में दीपा और उस के 6 साल के बेटे शौर्य की मौत हो गई थी. वह 7 नवंबर, 2019 का दिन था. भरतपुर शहर में जयपुर-आगरा हाईवे पर पौश कालोनी सूर्या सिटी में उस दिन शाम करीब 4 बजे डा. सीमा गुप्ता अपनी सास सुलेखा के साथ अपने पति डा. सुदीप की प्रेमिका दीपा के मकान पर पहुंची. घर में दीपा और उस का बेटा शौर्य था. उन की दीपा से कहासुनी हुई. इस दौरान अचानक आवेश में आई डा. सीमा ने स्प्रिट की बोतल फरनीचर पर उड़ेल कर आग लगा दी. इस के बाद घर के बाहर की कुंडी लगा कर वह चली गई.

स्प्रिट ने तुरंत भयावह रूप दिखाया. पूरा मकान आग की लपटों से घिर गया. चारों तरफ आग से घिरी दीपा ने अपना और मासूम बेटे का जीवन बचाने के लिए पहले डा. सुदीप का फोन किया. सुदीप ने तुरंत पहुंचने की बात कही. इस बीच, दीपा ने अपने छोटे भाई अनुज से भी जान बचाने की गुहार की. अनुज भरतपुर शहर में ही नीम दा गेट इलाके में रहता था. दीपा की गुहार सुन कर अनुज बाइक ले कर तुरंत उस के मकान पर पहुंचा. वह बिना आवताव देखे मकान के बाहर लगी कुंडी खोल कर तेज लपटों के बीच अंदर घुस गया. इतनी हिम्मत करने के बावजूद वह जान बचाने के लिए चीखतेचिल्लाते इधरउधर छिपते फिर रही बहन और भांजे को नहीं बचा सका. उस ने दोनों को जिंदा जलता देखा.

चारों तरफ आग की लपटों से घिरने के कारण अनुज भी गंभीर रूप से झुलस गया था. बड़ी मुश्किल से वह बाहर निकल सका. बाद में उसे जयपुर ले जा कर अस्पताल में भरती कराया गया. कुछ दिनों बाद वह ठीक हो गया. यह बताना भी जरूरी है कि डा. सीमा ने दीपा और उस के बेटे को क्यों जलाया? यह कहानी सन 2017 में शुरू हुई थी. दीपा गुर्जर ने भरतपुर में श्रीराम गुप्ता मेमोरियल अस्पताल में बतौर रिसैप्शनिस्ट नौकरी शुरू की थी. यह अस्पताल प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. सीमा गुप्ता का था. डा. सीमा के पति डा. सुदीप भरतपुर के सरकारी अस्पताल आरबीएम में फिजिशियन थे. सरकारी ड्यूटी के बाद डा. सुदीप भी पत्नी के अस्पताल में कुछ समय बैठ जाते थे. वैसे भी उन्होंने अस्पताल के ऊपरी हिस्से में ही आवास बना रखा था.

दीपा का विवाह उत्तर प्रदेश के जगनेर गांव में हुआ था, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण उस का वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रहा. उस के एक बेटा हुआ, जिस का नाम शौर्य रखा गया. बाद में वह ससुराल से अलग हो कर भरतपुर में अपने पीहर आ कर रहने लगी. बेटा शौर्य उसी के साथ रहता था. पति से उस का तलाक का केस चल रहा था. अस्पताल में नौकरी करने के दौरान दीपा का डा. सीमा के पति डा. सुदीप से प्रेम प्रसंग शुरू हो गया. दीपा अकेली थी. डा. सुदीप का प्यार मिला, तो वह उन की बांहों में चली गई. पुरानी कहावत है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. डा. सुदीप और दीपा के मामले में भी यही हुआ.

अस्पताल में दोनों के प्यार के चर्चे होने लगे. डा. सीमा को भी पता चल गया. वह बहुत गुस्सा हुई. उस ने दीपा को नौकरी से निकाल दिया और हिदायत दी कि फिर कभी उन के पति डा. सुदीप से नहीं मिलना. दीपा क्या करती, उसे नदी का किनारा मिल रहा था, वह भी छूट गया था. वह अपने पीहर में रह कर नए सिरे से जीवन शुरू करने की सोचने लगी. उधर, दीपा को नौकरी से निकाले जाने से डा. सुदीप बेचैन हो गया. आग दोनों तरफ लगी हुई थी. आग के शोले भड़कने लगे, तो दोनों चोरीछिपे मिलने लगे. दोनों इस बात की सावधानी रखते थे कि डा. सीमा को इस बात का पता न चले. यह सिलसिला कई महीने तक चलता रहा.

इस बीच, डा. सुदीप ने सूर्या सिटी का अपना मकान दीपा को रहने के लिए दे दिया. दीपा इस मकान में अपने बेटे शौर्य के साथ रहने लगी. यह मकान डा. सुदीप और उस की पत्नी डा. सीमा ने कुछ साल पहले खरीदा था. मकान खाली पड़ा था. डा. सीमा को अपने कामकाज से इतनी फुरसत नहीं थी कि वह कभी जा कर अपने मकान को देखे. इसी का फायदा उठा कर डा. सुदीप ने पत्नी डा. सीमा से कह दिया कि उस ने यह मकान किराए पर दे दिया है. इस मकान में दीपा और डा. सुदीप मिलनेजुलने लगे. डा. सुदीप ही उस का सारा खर्च उठाता था. दीपा के बेटे शौर्य की पढ़ाई का खर्च भी उठाता था. शौर्य भरतपुर के नामी और महंगे स्कूल में पढ़ता था.

दीपा और डा. सुदीप के फिर से पनपे प्रेम संबंधों की जानकारी डा. सीमा को उस समय हुई, जब शहर में आयशा सैलून एंड स्पा सेंटर खुलने के निमंत्रण पत्र बंटे. इस निमंत्रण पत्र में डा. सुदीप का नाम भी था. सूर्या सिटी में डा. सुदीप के मकान में दीपा ने पहली नवंबर 2019 को यह स्पा सेंटर खोला. डा. सीमा को जब यह बात पता चली, तो उसे अपना वैवाहिक जीवन हिचकोले खाता नजर आया. उसे यह भी पता चला कि दीपा डा. सुदीप पर सूर्या विला वाला बंगला अपने नाम कराने और सुदीप से औपचारिक रूप से शादी करने का दबाव डाल रही है. कहीं डा. सुदीप दीपा की यह बात भी न मान लेकिन, इसलिए डा. सीमा ने अपनी सास सुरेखा को यह बात बताई. सुरेखा ने बेटे डा. सुदीप से बात की.

सुदीप ने अपनी चिकनीचुपड़ी बातों से मां को यह कह कर संतुष्ट कर दिया कि मां ऐसी कोई बात नहीं है. सुरेखा ने बेटे से हुई बातें बहू डा. सीमा को बताईं तो उस ने दीपा के स्पा सेंटर का निमंत्रण पत्र उन के सामने रख दिया. सुरेखा क्या कर सकती थी, उसे अपने 42-45 साल के बेटे की करतूतों पर गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन बुढ़ापे और असाध्य बीमारी के कारण वह मजबूर थी. वह अपने बेटेबहू का गृहस्थ जीवन बचाए रखना चाहती थी. डा. सीमा ने अपने तरीके से पता कराया, तो मालूम हुआ कि दीपा ने स्पा सेंटर की साजसज्जा और उपकरणों पर लाखों रुपए खर्च किए थे. यह तय था कि यह सारा पैसा डा. सुदीप की जेब से ही निकला था.

अपनी अय्याशी पर एक पराई औरत पर लाखों रुपए इस तरह उड़ाने पर सीमा को बहुत गुस्सा आया. उसे यह उम्मीद नहीं थी कि उस के पति डा. सुदीप आसानी से मान जाएंगे और दीपा का पीछा छोड़ देंगे. इसलिए उस ने दीपा को ही सबक सिखाने का फैसला किया. इसी योजना के तहत 7 नवंबर, 2019 को डा. सीमा अपनी सास सुरेखा के साथ दोपहर में दीपा के मकान पर पहुंची. उस समय दीपा का मकान बंद था. वे दोनों आसपास छिप कर इंतजार करती रही. इस बीच डा. सुदीप भी दीपा के मकान पर आए, लेकिन ताला बंद देख कर वापस चला गया. इस दौरान डा. सुदीप ने अपनी पत्नी और मां को नहीं देखा. इस से डा. सीमा को अपने पति की करतूतों पर पूरा यकीन हो गया.

बाद में दीपा का बेटा शौर्य भी स्कूल से आया. घर बंद मिलने पर वह पड़ोस में खेलने चला गया. शाम करीब 4 बजे दीपा मकान पर पहुंची. कुछ देर बाद शौर्य भी आ गया. इस के बाद डा. सीमा और सुरेखा उस मकान में गईं. वहां उन की दीपा से काफी गरमागरमी हुई. इसी गरमागरमी के बीच डा. सीमा ने गुस्से में अपने पर्स में से स्प्रिट की बोतल निकाली और फरनीचर पर छिड़क कर आग लगा दी. इस के बाद यह कहते हुए बाहर निकल कर कुंडी लगा दी कि अब देखती हूं कि तुझे कौन बचाता है. स्प्रिट के कारण तुरंत आग फैल गई. चारों तरफ आग की लपटों से घिरी दीपा ने डा. सुदीप और अपने भाई अनुज को बारीबारी से फोन कर बचाने की गुहार की.

अनुज पहले पहुंच कर जलती लपटों के बीच मकान में घुस गया. बाद में डा. सुदीप भी पहुंच गए थे, लेकिन वह अंदर नहीं घुसा. बदले की इस आग में दीपा और उस का 6 साल का बेटा शौर्य जिंदा जल गए थे. दीपा की बहन राधा उर्फ राधिका ने इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. बाद में पुलिस ने डा. सीमा, डा. सुदीप और उस की मां सुरेखा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में तीनों के खिलाफ आरोपपत्र पेश कर दिया. अभी यह मामला अदालत में विचाराधीन है. इसी मामले में राजीनामे की बात चल रही थी. बात सिरे नहीं चढ़ी तो बदले की आग में जल रहे अनुज ने इंसाफ मिलने से पहले ही इस मामले का फैसला करने का निश्चय किया. उस ने खुद ही डा. सुदीप और डा. सीमा की खौफनाक मौत की साजिश रच डाली.

अनुज ने इस काम में अपने दोस्त धौलपुर के महेश को साथ लिया. दौलत के मकान पर साजिश रची. इस के बाद दौलत की बाइक ले कर महेश और अनुज भरतपुर आ गए. अनुज तो भरतपुर में ही रहता था. उसे डाक्टर दंपति की हर गतिविधि की एकएक बात पता थी. फिर भी उस ने अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए 2-4 दिन रैकी की. जब उसे यकीन हो गया कि डाक्टर दंपति रोजाना शाम साढ़े 4-पौने 5 बजे के आसपास मंदिर के लिए जाते हैं तो उस ने 28 मई को अपने दोस्त महेश के साथ बाइक पर जा कर उन की कार रोक ली और पिस्तौल से दोनों को गोलियों से ठंडा कर अपनी बहन व भांजे की हत्या का बदला ले लिया. उस ने खून का बदला खून कर ले लिया. कथा लिखे जाने तक अनुज और महेश पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए थे.

बहरहाल, भरतपुर उस दिन गोलियों की आवाज से बदलापुर बन गया. बदले की आग ने 2 परिवारों को खत्म कर दिया. दीपा के हंसतेखेलते जीवन को डा. सीमा ने खत्म कर दिया. डेढ़ साल बाद अनुज ने डाक्टर दंपति का परिवार उजाड़ दिया. अब डाक्टर दंपति के 18 साल के बेटे संयम और 15 साल की बेटी साक्षी के सिर से मांबाप का साया उठ गया. डा. सुदीप की मां सुरेखा बुढ़ापे की दोनों लाठियां टूट गईं. डाक्टर दंपति का अस्पताल चलाने वाला भी अभी फिलहाल कोई नहीं है. उन के बेटे और बेटी पर भी खतरा मंडरा रहा है. दीपा और उस के बेटे की मौत का जिम्मेदार कौन था, यह फैसला अदालत को करना था. इस से पहले ही अनुज ने खुद फैसला कर दिया.

कानूनविदों का कहना है कि डा. सुदीप और डा. सीमा की मौत होने के कारण उन के खिलाफ अदालत में केस बंद हो जाएगा. सुरेखा के खिलाफ मुकदमा चलता रहेगा. दूसरी ओर, डाक्टर दंपति की हत्या करने और सहयोग करने वालों पर पुलिस की जांच पूरी होने और अदालत में चालान पेश किए जाने के बाद नया मुकदमा चलेगा. Crime ki Kahani

 

Love Crime Story In Hindi : प्रेमी की शादी कही और तय हुई तो प्रेमिका ने तेजाब डाल कर मार डाला

Love Crime Story In Hindi : मोहब्बत के एक रिश्ते पर सदियों से इतरा रहे ताजमहल के शहर आगरा को भी उस वक्त शर्मसार होना पड़ा, जब यहां अपनी मोहब्बत की खातिर सोनम पांडेय ने प्रेमी देवेंद्र की ही जान ले ली.

पहली मंजिल पर रह रहे किराएदार के कमरे से सुबहसुबह तेज चीखने की आवाज भूतल पर रह रहे मकान मालिक सुरेशचंद्र की पत्नी ने सुनी. आवाज सुन कर एक बार तो वह सोच में पड़ गईं. लेकिन दूसरे ही पल लगातार आ रही चीखों को सुन कर वह एक ही सांस में सीढि़यां चढ़ कर किराएदार नर्स सोनम पांडेय के कमरे में पहुंच गईं. क्योंकि चीख उसी के कमरे से आ रही थी. वहां का दृश्य देख कर उन की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं. पीछेपीछे मकान मालिक सुरेशचंद्र भी वहां पहुंच गए. कमरे के फर्श पर सोनम और देवेंद्र झुलसे हुए पड़े थे. वहीं पर एक स्टील का डब्बा पड़ा था. कमरे में तेजाब की तेज दुर्गंध आ रही थी.

दोनों ही तेजाब की जलन और दर्द से तड़प रहे थे. उस समय सुबह के यही कोई 7 बज रहे थे. इसी बीच झुलसी हालत में ही देवेंद्र ने अपने दोस्त शिवम को फोन किया. कुछ ही देर में शिवम आटो ले कर वहां पहुंच गया. वह आननफानन में घायल देवेंद्र को आटो में ले कर अस्पताल जाने लगा. इस पर मकान मालिक सुरेशचंद्र ने उस से कहा कि वह घायल सोनम को भी साथ ले जाए. क्योंकि इलाज की उसे भी जरूरत है. तब शिवम ने कहा, ‘‘मैं पहले देवेंद्र को अस्पताल में भरती करा दूं वह ज्यादा झुलस गया है. इस के बाद सोनम को ले जाऊंगा.’’ इस तरह वह देवेंद्र को वहां से ले कर चला गया.

जब शिवम सोनम को काफी देर तक लेने नहीं आया तो सुरेशचंद्र ने इस की सूचना थाना हरीपर्वत के थानाप्रभारी अरविंद कुमार को दे दी. थानाप्रभारी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए. उन्होंने तेजाब से झुलसी सोनम को एक निजी अस्पताल में भरती कराया. वहीं अस्पताल में भरती 80 फीसदी झुलसे देवेंद्र की उपचार के दौरान दोपहर करीब ढाई बजे मौत हो गई. पुलिस ने मरने से पहले देवेंद्र के मजिस्ट्रैट के सामने बयान दर्ज करा लिए थे. उस ने अपने बयान में सोनम पांडेय को एसिड अटैक के लिए जिम्मेदार बताया था. देवेंद्र के घर वालों को जब यह जानकारी उस के दोस्त शिवम ने दी तो उस के घर में रोना शुरू हो गया. वह 5 बहनों के बीच अकेला भाई था, रोतेरोते मां और बहनों की हालत बिगड़ गई.

दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के थाना हरीपर्वत क्षेत्र स्थित शास्त्रीनगर का है. देवेंद्र ने अपने बयान में बताया था कि 25 मार्च, 2021 की सुबह सोनम ने उसे अपने कमरे में लगे पंखे को ठीक करने के लिए बुलाया था. जैसे ही देवेंद्र कमरे में आया तो सोनम ने स्टील के डब्बे में रखा तेजाब उस के ऊपर उड़ेल दिया. अचानक हुए इस हमले से वह खुद को बचा नहीं सका. एसिड अटैक के दौरान नर्स सोनम पर भी तेजाब गिर गया था, जिस से वह भी झुलस गई थी. अब प्रश्न यह था कि सोनम ने देवेंद्र के ऊपर एसिड अटैक क्यों किया?

देवेंद्र को बताती थी पति पुलिस ने मकान मालिक सुरेशचंद्र से बात की तो उन्होंने पुलिस को बताया कि सोनम पहले शास्त्रीनगर में ही स्थित किसी दूसरे मकान में रहती थी. 5 महीने से वह उन के मकान में किराए पर रह रही थी. देवेंद्र को वह अपना पति बताती थी. वह कमरे पर उस के पास 10-12 दिनों में आता और 1-2  दिन रुक कर चला जाता था. उस का कहना था कि पति बाहर काम करते हैं. वहीं सूचना पा कर अस्पताल पहुंचे देवेंद्र के घर वालों ने इन सब बातों से अनभिज्ञता जताई. उन का कहना था कि सोनम के देवेंद्र से संबंध होने की उन्हें जानकारी नहीं थी.

उन्होंने बताया कि देवेंद्र अविवाहित था और उस की 28 अप्रैल को शादी होने वाली थी. देवेंद्र की मां कुसुमा ने सोनम पांडेय पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया. सोनम के कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस ने स्टील का एक डब्बा बरामद किया. संभवत: इस एक लीटर वाले डब्बे में दूध लाया जाता होगा. इस में ही तेजाब रखा हुआ था. इस डब्बे की तली में तेजाब भी मिला. वहीं कमरे से देवेंद्र के जले हुए कपड़े व जूते भी मिले. पुलिस ने इन साक्ष्यों को जब्त कर जरूरी काररवाई के बाद फोरैंसिक लैब भेज दिया.  घटना की जानकारी मिलने पर एसपी (सिटी) रोहन प्रमोद बोत्रे ने घटनास्थल का निरीक्षण किया व अस्पताल भी गए. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सोनम और देवेंद्र के बीच प्रेम संबंध थे.

आरोपी युवती को गिरफ्तार कर लिया गया है. चूंकि वह भी एसिड की चपेट में आ कर झुलसी है, इसलिए इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती कराया गया है. पुलिस ने जरूरी काररवाई करने के बाद देवेंद्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया. पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की. जांच में पता चला कि सोनम पांडेय मूलरूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के भागूपुर की रहने वाली शादीशुदा युवती है. सोनम की शादी करीब 10 साल पहले गुजरात में हुई थी. शादी के कुछ दिनों बाद ही पतिपत्नी के बीच लड़ाईझगड़ा रहने लगा. इस दौरान वह एक बेटे की मां भी बन गई. शादी के 2 साल बाद ही वह अपने बेटे को ले कर अपने मायके आ गई.

कुछ समय बाद वह आगरा आ कर नर्स की नौकरी करने लगी थी. वह सिकंदरा बाईपास स्थित एक अस्पताल में नर्स थी. बेटा ननिहाल में ही रह रहा था. सोनम ने अब तक अपने पति से तलाक नहीं लिया था. उस ने अपने साथी कर्मचारियों को भी अपने शादीशुदा होने के बारे में नहीं बताया था. 28 वर्षीय देवेंद्र राजपूत मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के सहावर क्षेत्र के गांव बाहपुर का रहने वाला था. देवेंद्र चिकित्सा क्षेत्र में बचपन से ही रुचि रखता था. इसलिए उस ने लैब टैक्नीशियन का कोर्स किया था. लिवइन रिलेशन में रहते थे दोनों सुनहरे भविष्य की तलाश में वह आगरा आ गया था और पिछले 8 साल से लाल पैथ लैब में सहायक के पद पर काम कर रहा था. वह आगरा के ही खंदारी इलाके में किराए पर रहता था.

चूंकि सोनम और देवेंद्र एक ही फील्ड से जुड़े थे, एक दिन काम के दौरान दोनों की जानपहचान हो गई. साथसाथ काम करते पहले दोनों में दोस्ती हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई. पिछले 3 सालों से दोनों लिवइन रिलेशन में रह रहे थे. सोनम ने अपने मकान मालिक को बता रखा था कि देवेंद्र उस का पति है. इस तरह देवेंद्र का जब मन होता, वह सोनम से मिलने उस के कमरे पर चला जाता था. इसी बीच सोनम को पता चला कि देवेंद्र की शादी कहीं और तय हो गई है. इस जानकारी से सोनम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. क्योंकि वह देवेंद्र पर शादी करने का दबाव बना रही थी. सोनम ने घटना से कुछ दिन पहले देवेंद्र से कहा, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करती हूं और तुम से शादी करना चाहती हूं.’’

मेरा नहीं तो किसी और का भी नहीं देवेंद्र को सोनम के बारे में पता चल चुका था कि वह शादीशुदा है और उस के एक बच्चा भी है. देवेंद्र तो सोनम के साथ पिछले 3 साल से केवल टाइम पास कर रहा था. देवेंद्र ने उसे समझाते हुए कहा,‘‘सोनम तुम शादीशुदा हो. तुम्हारे एक बेटा भी है. और तुम ने अब तक अपने पति से तलाक भी नहीं लिया है. ऐसे में हम शादी कैसे कर सकते हैं? ऐसी स्थिति में मेरे घर वाले भी शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. फिर मेरी भी शादी तय हो चुकी है.’’

देवेंद्र की इन बातों ने आग में घी डालने का काम किया. सोनम अपना आपा खो बैठी. उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अपने प्रेमी को किसी और का हरगिज नहीं होने देगी. अपने खतरनाक मंसूबे की भनक उस ने देवेंद्र को नहीं लगने दी. इस बीच देवेंद्र ने सोनम के कमरे और उस से मिलनाजुलना भी बंद कर दिया. अपनी योजना को अंजाम देने के लिए सोनम ने 25 मार्च, 2021 की सुबह देवेंद्र को फोन कर कमरे का पंखा ठीक करने के बहाने अपने पास बुलाया था. देवेंद्र सोनम के कमरे पर पहुंचा तो उन दोनों के बीच शादी की बात को ले कर गरमागरमी हुई. इस के बाद सोनम ने स्टील के डब्बे में पहले से लाए तेजाब से देवेंद्र पर अटैक कर दिया, जिस से वह गंभीर रूप से सिर से पैर तक झुलस गया.

जानकारी मिलने पर घटना के दूसरे दिन सोनम के पिता आगरा आ गए. उन्होंने घायल बेटी को एस.एन. मैडिकल कालेज में भरती कराया. वहां उपचार होने से उस की हालत में सुधार हुआ. हालांकि उस समय तक उस के बयान दर्ज नहीं हो सके थे. प्रेमिका के तेजाबी हमले ने एक साथ 3 परिवारों के अरमानों को झुलसा दिया. 5 बहनों में इकलौता भाई और एक मां से उस का घर का चिराग छीन लिया. मां और बहनें देवेंद्र के सिर पर सेहरा बांधने की तैयारी में जुटी थीं. शादी के कार्ड भी छप गए थे. शादी में बुलाने वालों को कार्ड भेजने की तैयारी चल रही थी. वहीं कासगंज की रहने वाली जिस युवती से देवेंद्र का रिश्ता तय हो गया था और एक महीने बाद दोनों को फेरे लेने थे, उस के अरमानों को भी तेजाब से हमेशा के लिए झुलसा दिया.

पोस्टमार्टम के बाद देवेंद्र का शव रात 9 बजे जब घर पहुंचा तो बेटे का शव देख कर मां बेहोश हो गईं. वहीं पांचों बहनें अपने छोटे भाई के शव से लिपट कर रोने लगीं. पूरे गांव में शोक का माहौल था. उधर जिस घर में देवेंद्र की बारात जानी थी वहां उस की मौत की खबर पहुंचने से कोहराम मच गया. दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह देवेंद्र का शोकपूर्ण माहौल में अंतिम संस्कार किया गया. सभी का कहना था कि देवेंद्र की हत्यारोपी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. कहानी लिखे जाने तक प्रेमिका का इलाज चल रहा था. ठीक होने पर उसे जेल जाना पड़ेगा. देश भर में हर साल एसिड अटैक की तमाम घटनाएं होती हैं, वह भी तेजाब पर बैन लगाए जाने के बाद.

एसिड अटैक एक खतरनाक अपराध है, जो महिला हो या पुरुष सभी की जिंदगी तबाह कर देता है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी देश में गैरकानूनी रूप से होने वाली एसिड की बिक्री पर रोक नहीं लगाई जा सकी है. एसिड बिक्री को ले कर जो कानून हैं, उन्हें सख्ती के साथ जमीन पर उतारा जाना बेहद जरूरी है. एसिड अटैक से पीडि़त व्यक्ति के निजी, सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है. Love Crime Story In Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

True Crime Stories : मोबाइल पर आशिक से बात करती पत्नी को देख गुस्साए पति ने कर दी हत्या

True Crime Stories : पत्नी मधु के कहने पर सतीश कुमार श्रीवास्तव ने अपनी तरह उसे भी मैडिकल रिप्रजेंटेटिव बनवा दिया था. उसी दौरान मधु के कदम बहक गए. इस का परिणाम इतना घातक निकला कि…

पतिपत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास पर टिका होता है. कोई आदमी किसी पर सब से अधिक विश्वास करता है तो अपनी पत्नी पर. पत्नी ही तो उस की सब से अच्छी दोस्त और जीवनसाथी होती है. ऐसे में पति उस पर अगाध विश्वास न करे तो भला किस पर करे. सतीश को भी अपनी पत्नी मधु पर अंधविश्वास की सीमा तक विश्वास था. उस का यह यकीन तब दरका, जब एक दिन अचानक तबीयत खराब होने से शाम को वह जल्दी घर लौट आया. दरअसल सतीश मैडिकल रिप्रजेंटेटिव था. वह सुबह 10 बजे घर से निकलता था, फिर रात 9 बजे के आसपास ही उस की वापसी होती थी. लेकिन उस दिन वह जल्दी घर आ गया था.

सतीश कुमार श्रीवास्तव जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचा, अंदर से मधु की खिलखिलाहट सुनाई दी. सतीश के पांव जहां के तहां ठहर गए. सोचने लगा, ‘जब मैं घर में रहता हूं, तब मधु की त्यौरियां चढ़ी होती हैं. कुछ कहता हूं तो चिढ़ जाती है, बोलो मत, मूड खराब है. लेकिन अब वह किस के साथ खिलखिला रही है.’ सतीश ने दिमाग पर जोर दिया, पर उसे याद नहीं आया कि मधु कब उस के सामने इस तरह दिल से खिलखिलाई थी. सतीश के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा, ‘आखिर इस समय घर के अंदर कौन है जिस के साथ वह इस तरह खिलखिला कर बातें कर रही है.’

सतीश ने कदम आगे बढ़ाया, लेकिन फिर खींच लिया. मधु कह रही थी, ‘‘तुम्हारे जोश की तो मैं दीवानी हूं. अरे छोड़ो यार, तुम किस माटी के माधव की बात कर रहे हो. अगर वही रसीला होता तो भला मैं तुम से क्यों दिल लगाती. मैं तो तुम्हारे जोश और तुम्हारी रसीली बातों की दीवानी हूं.’’

एकतरफा संवादों से सतीश ने अनुमान लगा लिया कि कमरे में मधु के अलावा कोई नहीं है. वह फोन पर किसी से रसीली बातें कर रही है. मधु जोश में थी. इसलिए उस की आवाज बुलंद थी. कमरे में की जाने वाली बातें बाहर तक साफ सुनाई दे रही थीं. बातें सुन कर सतीश की खोपड़ी घूम गई, ‘मधु बीवी मेरी और जोश का गुणगान कर रही है किसी दूसरे का.’

सतीश ने गुस्से में दरवाजे पर लात मारी. भीतर से बंद न होने के कारण वह फटाक से खुल गया. सामने ही मधु मोबाइल फोन कान से लगाए टहलटहल कर बातें कर रही थी. पति को देखते ही उस ने हड़बड़ा कर फोन पर चल रही बात डिसकनेक्ट कर दी. इस के बाद वह चेहरे पर मुसकान सजाने की जबरन कोशिश करते हुए बोली, ‘‘अरे तुम, आज इतनी जल्दी घर कैसे आ गए?’’

सतीश ने मधु को खा जाने वाली नजरों से देखा फिर बोला, ‘‘तू किस के जोश की दीवानी है?’’ गुस्से में की पत्नी की पिटाई सतीश ने लपक कर मधु का हाथ पकड़ लिया और उस का मोबाइल छीनने लगा. लपटा झपटी के बीच मधु ने उस नंबर को डिलीट कर दिया, जिस नंबर पर वह रसीली बातें कर रही थी. सतीश का दिमाग पहले से गरम था, नंबर डिलीट करने से और गरम हो गया. उस ने मधु को लातघूंसों और थप्पड़ों पर रख लिया. हर प्रहार के साथ उस का प्रश्न होता था, ‘‘बता, तू किस के जोश की दीवानी है और यह सब कब से चल रहा है?’’

लेकिन पिटाई के बावजूद मधु ने जुबान बंद रखी. मधु को पीटतेपीटते जब सतीश पस्त पड़ गया तो घर के बाहर चला गया. मधु कमरे में सिसकती रही और अपने भाग्य को कोसती रही. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में बर्रा थाना अंतर्गत एक मोहल्ला जरौली पड़ता है. इसी मोहल्ले के फेस-2 में सतीश कुमार श्रीवास्तव अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी मधु के अलावा 2 बेटे आयुष व पीयूष थे. वह मूलरूप से औरैया जिले के दिबियापुर कस्बे का रहने वाला था. सालों पहले वह रोजीरोटी की तलाश में कानपुर शहर आया था. वह पढ़ालिखा था. हिंदी और अंगरेजी भाषा पर उस की पकड़ थी. अत: उसे बिरहाना रोड स्थित एक आयुर्वेदिक दवा कंपनी में नौकरी मिल गई थी.

बाद में वह मैडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) बन गया और उसी कंपनी की दवा आयुर्वेदिक डाक्टरों के यहां सप्लाई करने लगा था. मधु सतीश की दूसरी पत्नी थी. उस की पहली पत्नी श्वेता की मौत हो गई थी. उस की एक बेटी शिवांगी थी, जो अपनी ननिहाल में पलबढ़ रही थी. पहली पत्नी की मौत के बाद सतीश ने मधु से शादी कर ली थी. मधु पढ़ीलिखी व तेजतर्रार थी. सुंदर भी थी, अत: सतीश उसे बहुत चाहता था और उस पर भरोसा करता था. वह उस की हर खुशी का खयाल रखता था. समय बीतता रहा. समय के साथ मधु के बच्चे आयुष व पीयूष बड़े हुए तो उस का खर्च बढ़ गया.

इस खर्चे को पूरा करने के लिए उस ने पति के साथ काम करने का निश्चय किया. मधु ने इस बाबत सतीश से बात की. पहले तो सतीश ने साफ मना कर दिया. लेकिन पत्नी के समझाने पर बाद में मान गया. सतीश अब विजिट के लिए घर से निकलता तो मधु को भी साथ ले जाता. उस ने कानपुर शहर तथा आसपास के कस्बे के दरजनों वैद्यों व डाक्टरों से मधु का परिचय कराया और दवा बेचने के सारे गुर बताए. उस के बाद मधु सतीश के दवा कारोबार में हाथ बटाने लगी. पत्नी के सहयोग से सतीश अच्छी कमाई करने लगा. मधु का बड़ा बेटा आयुष पढ़ने में कमजोर था. उस का मन पढ़ाई में नहीं लगा तो मधु ने उसे गोविंदनगर स्थित फार्मा मैडिकल स्टोर में काम पर लगा दिया.

लेकिन छोटा बेटा पीयूष तेज दिमाग का था. मधु उसे पढ़ालिखा कर डाक्टर बनाना चाहती थी. अत: वह उस की पढ़ाई पर पूरा ध्यान देती थी. पढ़ाई के साथ वह कोचिंग भी जाता था. मधु ने कुछ समय तक ही पति के साथ काम किया. उस के बाद वह डाक्टरों के यहां अलग विजिट पर जाने लगी. मधु का मानना था कि अलगअलग जाने से दवा का और्डर ज्यादा मिलता है. यद्यपि मधु का अलग जाना सतीश को पसंद न था. लेकिन मधु के आगे उस की एक न चली. 2 डाक्टरों को फंसा लिया मधु 2 बेटों की मां जरूर थी. लेकिन उस के बनावशृंगार से कोई भांप नहीं पाता था कि वह 2 जवान बेटों की मां है. सतीश का मन भोगविलास से उचट चुका था.

वह दिन भर की भाग दौड़ से इतना थक जाता था कि खाना खाने के बाद चादर तान कर सो जाता था. इस के विपरीत मधु हर रात पति का साथ चाहती थी. लेकिन वह वंचित रहती थी. मधु को जब पति का साथ नहीं मिला तो उस ने घर के बाहर ताकझांक शुरू की. उस के संपर्क में कई डाक्टर ऐसे थे, जो मनचले थे और जिन्हें औरत सुख की चाहत थी. मधु ने ऐसे ही शहर के 2 डाक्टरों को अपने हुस्न के जाल में फंसाया और उन के साथ मौजमस्ती करने लगी. ये दोनों डाक्टर निजी प्रैक्टिस करते थे. मधु को जब भी मौका मिलता था, वह उन से खूब रसीली बातें करती थी. सतीश पत्नी पर भरोसा करता था. उस ने कभी किसी तरह का उस पर शक नहीं किया. लेकिन उस दिन तबीयत खराब होने पर जब वह समय से पहले घर आया और मधु को मोबाइल फोन पर अश्लील और रसीली बातें करते पाया तो उस का विश्वास डगमगा गया.

शक होने पर उस ने मधु की जम कर धुनाई भी की लेकिन उस ने आशिक का नाम नहीं बताया. बल्कि आशिक का मोबाइल नंबर भी डिलीट कर दिया. शक का बीज बहुत जल्दी पनपता है. सतीश के मन में भी शक था. अत: वह पत्नी पर नजर रखता था. जिस दिन वह मधु को एकांत में बात करते देख लेता, उस दिन पहले तो तूतू मैंमैं होती फिर नौबत मारपीट तक आ जाती. अब एक छत के नीचे रहते हुए भी दोनों को एकदूसरे से ज्यादा मतलब नहीं रहता था. बड़ा बेटा आयुष पिता के पक्ष में रहता था, जबकि छोटा बेटा पीयूष मां के पक्ष में बोलता था. युवक से अश्लील बातें करते देखा 19 मार्च, 2021 को आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनी की दिल्ली में मीटिंग थी, जिस में कानपुर शहर के डीलर व एमआर को मीटिंग में शामिल होने के लिए बुलाया गया था.

सतीश कुमार श्रीवास्तव भी अपनी पत्नी मधु श्रीवास्तव के साथ शामिल होने दिल्ली गया था. मीटिंग समाप्त होने के बाद मधु ने कुछ खरीदारी की फिर शताब्दी बस से दोनों कानपुर को रवाना हो लिए. 21 मार्च, 2021 की सुबह 8 बजे मधु और सतीश अपने जरौली स्थित घर पहुंचे. उस समय घर पर कोई अन्य न था. दोनों बेटे आयुष और पीयूष गीता मौसी के घर पर थे, जो जरौली में ही रहती थी. सतीश को किसी जरूरी काम से अपने पिता के घर दिबियापुर जाना था. उस ने मधु से जल्दी खाना बनाने को कहा. लेकिन मधु ने उस की बात को अनसुना कर दिया और मोबाइल फोन पर वीडियो काल कर बतियाने लगी. वह किसी युवक से अश्लील बातें कर रही थी.

सतीश ने उसे बातें करने से मना किया तो मधु झगड़ने लगी और उसे गाली बकने लगी. इस पर सतीश को गुस्सा आ गया. उस ने फोन छीन कर फेंक दिया और उसे धक्का दे दिया. धक्का लगने से उस का सिर दीवार से टकरा गया. जिस से सिर फट गया और खून बहने लगा. अपने हाथों से घोंटा गला खून देख कर मधु को गुस्सा आ गया और उस ने सतीश के मुंह पर जूता फेंक कर मारा. मुंह पर जूता लगा तो सतीश आपा खो बैठा. उस ने मधु को फर्श पर पटक दिया और बोला, ‘‘हरामजादी, बदचलन, आज तुझे किसी कीमत पर नहीं छोड़ूंगा. तुझे तेरे पापों की सजा दे कर ही दम लूंगा.’’ कहते हुए सतीश ने मधु की साड़ी से उस का गला घोंट दिया.

मधु की हत्या करने के बाद उस ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. दिन का वक्त था. सो वह लाश को बाहर कैसे ले जाता. उस ने बड़े बक्से को खाली किया और मधु के शव को बक्से में बंद कर दिया. मोबाइल फोन को भी उस ने बंद कर दिया. शाम को दोनों बेटे घर आए तो सतीश ने बताया कि मधु किसी का फोन आने पर घर से निकली थी. तब से नहीं आई. इस के बाद वह आयुष और पीयूष के साथ मधु की खोज करता रहा. अगली सुबह सतीश ने बड़े बेटे आयुष को गुमशुदगी दर्ज कराने थाना बर्रा भेजा. वहां पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर मधु की तलाश शुरू कर दी. पुलिस को गुमराह करने के लिए सतीश ने मधु का मोबाइल चालू कर सड़क से गुजर रहे एक लोडर में फेंक दिया.

रात में सतीश ने शव को बक्से से निकाला. लेकिन गरमी की वजह से शव फूल चुका था और उस से दुर्गंध आने लगी थी. पीयूष ने बदबू की बात की तो भेद खुलने के भय से सतीश ने उसे गीता मौसी के घर भेज दिया. आधी रात के बाद सतीश ने एक बार फिर शव को ठिकाने लगाने की सोची. वह शव कमरे से घसीट कर गेट तक लाया. लेकिन उस की हिम्मत दगा दे गई. शव उठाते समय बाल व खाल उस के हाथ में आ गए. शव सड़ने लगा था. सवेरा होने से पहले सतीश ने गेट पर ताला लगाया और फरार हो गया. पड़ोसियों ने की पुलिस से शिकायत  23 मार्च, 2021 की सुबह सतीश के पड़ोसियों ने सतीश के घर से भीषण दुर्गंध महसूस की तो उन्होंने थाना बर्रा पुलिस को सूचना दे दी.

सूचना पाते ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह टीम के साथ सतीश के घर पहुंचे. ताला तोड़ कर वह घर के अंदर घुसे तो गेट के पास ही उन्हें सड़ीगली महिला की लाश मिली. पड़ोसियों ने तुरंत लाश को पहचाना, उन्होंने बताया कि लाश सतीश की पत्नी मधु श्रीवास्तव की है. थानाप्रभारी की सूचना पर एसपी (साउथ) दीपक भूकर तथा डीएसपी विकास पांडेय भी आ गए. उन्होंने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतका की उम्र 40 वर्ष के आसपास थी. संभवत: उस की हत्या गला दबा कर की गई थी. फोरैंसिक टीम ने भी जांच कर साक्ष्य जुटाए. इस के बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया.

इसी बीच पता चला कि सतीश अपने दोनों बेटों और स्थानीय नेताओं के साथ थाना बर्रा पहुंचा है और पुलिस की नाकामी को ले कर हंगामा कर रहा है. यह सूचना प्राप्त होते ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह थाने पहुंचे और सतीश को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने सख्ती से उस से पूछताछ की तो उस ने पत्नी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उस ने बताया कि मधु बदचलन थी. वह आशिक से मोबाइल पर बात कर रही थी. मना किया तो जूता फेंक कर मुंह पर मारा. गुस्से में मैं ने उस का गला घोंट दिया. उस के बेटे निर्दोष हैं. उन्हें हत्या की जानकारी नहीं थी. चूंकि सतीश ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थानाप्रभारी हरमीत सिंह ने भादंवि की धारा 302/201 के तहत सतीश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे न्यायसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

24 मार्च, 2021 को बर्रा पुलिस ने अभियुक्त सतीश कुमार श्रीवास्तव को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Real Crime Story : प्रेमी संग साजिश रच कर पत्नी ने रस्सी से गला घोंटकर पति को मार डाला

Real Crime Story : 3 बच्चों की मां बनने के बाद भी प्रियंका की हसरतें उफान पर थीं. उसी दौरान उस के संपर्क में महावीर मीणा नाम का युवक आया. इस के संपर्क में आते ही प्रियंका की गृहस्थी में ऐसा जहर घुला कि…

तकरीबन 26-27 साल की उस युवती ने अपना नाम प्रियंका बताया था. हलका सा घूंघट होने के बावजूद उस का आंसुओं से भीगा चेहरा साफ नजर आ रहा था. उस का रंग गेहुंआ था. बड़ीबड़ी आंखें और सुतवां नाक घूंघट की ओट से साफ नजर आ रही थी. थानाप्रभारी बदन सिंह के सामने आते ही वह फफक पड़ी, ‘‘साब मेरा तो सुहाग ही उजड़ गया. बच्चों को भी अनाथ कर गया.’’

फिर चेहरा हाथों में छिपा कर रोने लगी, ‘‘साहब, एक तो मेरा मरद खुदकुशी कर मुझे बेसहारा छोड़ गया. अब घरपरिवार वाले कह रहे हैं कि उस की हत्या हो गई. कोई क्यों करेगा उन की हत्या? हमारा तो किसी से बैर भी नहीं था.’’

इतना कहतेकहते उस ने हिचकियां लेनी शुरू कर दीं. थानाप्रभारी बदन सिंह  ने उसे शांत रहने का संकेत करते हुए कहा, ‘‘आप रोएं नहीं. हम हकीकत का खुलासा कर के रहेंगे. आप पूरी बात को सिलसिलेवार बताइए ताकि हमें अपराधी को गिरफ्तार करने में मदद मिल सके.’’

कुछ पलों के लिए गला भर आने के कारण प्रियंका चुप हो गई. फिर उस ने कहना शुरू किया, ‘‘सच्ची बात तो यह है साब कि हमारा मर्द कुछ दिनों से पैसों की देनदारी और तगादों से परेशान था. उधारी चुकाने की कोई सूरत कहीं से नजर नहीं आ रही थी. दिनरात शराब में डूबा रहता था. कल तो सुबह से ही शराब पी रहा था. शायद दारू के नशे की झोंक में ही जान दे बैठा…’’ प्रियंका की रुलाई फिर फूट पड़ी, ‘‘तगादों से परेशान हो कर जान देने की क्या जरूरत थी?’’

थानाप्रभारी बदन सिंह ने उसे ढाढस बंधाते हुए कहा, ‘‘आप को किसी पर शक है? मेरा मतलब है जिस के तगादे से परेशान हो कर आप के पति ने आत्महत्या की या उस की हत्या हो गई?’’

‘‘हत्या की बात कौन कह रहा है साब!’’ प्रियंका ने प्रतिवाद करते हुए कहा.

तभी वहां खड़े कुछ लोगों में से एक युवक बोल पड़ा, ‘‘हम कहते हैं साब.’’

इस के साथ ही वह शख्स बुरी तरह उबल पड़ा, ‘‘हमें तो इस कुलच्छिनी पर ही शक है. साहब, इस ने ही मरवाया है अपने पति को… यह आत्महत्या का नहीं बल्कि हत्या का मामला है.’’

इस से पहले कि थानाप्रभारी बदन सिंह उस युवक को तवज्जो देते, प्रियंका चिल्ला पड़ी, ‘‘नहीं… यह झूठ है, हम से दुश्मनी निकालने के लिए यह झूठे इल्जाम लगा रहा है.’’

थानाप्रभारी बदन सिंह ने युवक की तरफ देखा, ‘‘कौन हो तुम? तुम कैसे कह सकते हो कि इस की हत्या हुई है और इस के पीछे प्रियंका का हाथ है?’’

‘‘मेरा नाम रामदीन है साहब, रिश्ते में मृतक बुद्धि प्रकाश मेरा चचेरा भाई था.’’ उस के चेहरे की तमतमाहट कम नहीं हुई थी. वह बुरी तरह फट पड़ा, ‘‘साहब बुद्धि प्रकाश का किसी से कोई लेनदेन था ही नहीं. फिर तगादे की बात कहां से आ गई? मेरा भाई मजबूत दिल गुर्दे वाला आदमी था, कायर नहीं था कि आत्महत्या कर लेता. जरूर उस की हत्या हुई है.’’

‘‘तो इस में प्रियंका कहां से आ गई?’’ थानाप्रभारी बदन सिंह ने सवाल दागा.

‘‘आप पूरी जांच कर लो साहब. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.’’ वहीं मौजूद परिजनों और बस्ती के लोगों ने एक स्वर में कहा, ‘‘साहब, घर में प्रियंका के अलावा और कौन रहता है? बुद्धि प्रकाश ने जिंदगी में कभी शराब नहीं पी, लेकिन पिछले 2 सालों से तो जैसे दारू में डुबकी मार रहा था. अगर उस ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया है तो हमारी समझ से बाहर है.’’

इस बीच पड़ोस के कुछ लोग भी बोल पड़े, ‘‘पतिपत्नी के संबंध भी अच्छे नहीं थे. दिनरात झगड़े की आवाज सुनाई देती थी. पड़ोस के नाते हम ने प्रियंका से पूछा भी, लेकिन इस ने मुंह बिचका दिया. कहती थी, नशेड़ी को न घर की चिंता होती है और न ही घरवाली की. दारू पी कर खेतखलिहान में पड़ा रहेगा तो घर में झगड़े ही होंगे.’’

थानाप्रभारी बदन सिंह ने गहरी नजरों से मृतक के परिजनों और पड़ोसियों की तरफ देखा फिर कहा, ‘‘दिनरात दारू में डुबकी मारने की नौबत तो तब आती है जब कोई गहरे तनाव में हो? पतिपत्नी के बीच रोज की खटपट भी इस की वजह हो सकती है? लेकिन आत्महत्या तो बहुत बड़ा कदम होता है.’’

लेकिन इस सवाल पर परिजनों की खामोशी ने रहस्य का कुहासा और गहरा कर दिया. थानाप्रभारी बदन सिंह के दिमाग में एक सवाल हथौड़े की तरह टकरा रहा था, आखिर मृतक की पत्नी प्रियंका क्यों इस बात पर अड़ी हुई है कि यह आत्महत्या का मामला है.

उन्होंने थोड़े सख्त स्वर मे प्रियंका से पूछा, ‘‘तुम्हें कब और कैसे पता चला कि तुम्हारे पति ने आत्महत्या कर ली है?’’

प्रियंका की रुलाई फिर फूट पड़ी, ‘‘साहब हम तो रोज की तरह तड़के दिशामैदान के लिए चले गए थे. तब भी हमारा मरद ऐसे ही सो रहा था. लौट कर आए तब भी ऐसे ही सोता मिला. हमें बड़ा अटपटा लगा. ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ. हम ने हिलायाडुलाया, कोई हरकत नहीं हुई. दिल की धड़कन भी गायब थी. हमारा दिल धक से रह गया. लगा जरूर कुछ गड़बड़ है… हम ने फौरन पड़ोसियों को पुकार लगाई.’’

बुद्धि प्रकाश घर के बाहर बरामदे में तख्त पर मृत पड़ा था. थानाप्रभारी बदन सिंह शव का निरीक्षण करने लगे. वह कुछ अनुमान लगा पाते तब तक सीओ विजय शंकर शर्मा वहां पहुंच गए. उन्होंने शव का निरीक्षण किया तो उन के चेहरे पर हैरानी के भाव आए बिना नहीं रहे. गले पर पड़े निशानों ने कौतूहल जगा दिया था. सीओ शर्मा ने झुक कर गौर किया तो वह चौंक पड़े. चेहरे पर ऐंठन और गले के निशान बहुत कुछ कह रहे थे. चेहरे पर ऐसी ऐंठन तो बेरहमी से गला दबाए जाने पर ही होती है.  स्वाभाविक प्रश्न था कि क्या किसी ने बुद्धि प्रकाश का गला दबाने की कोशिश की थी?

मामला पूरी तरह संदिग्ध लग रहा था. काले निशान भी रस्सी से गला दबाए जाने पर होते हैं. उन्होंने आसपास नजर दौड़ाई. ऐसी कोई रस्सी नजर नहीं आई. फोरैंसिक टीम को बुलाना अब जरूरी हो गया था. छानबीन और मौके से सबूत जुटाने के लिए क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम के साथ फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई थी. फोरैंसिक टीम की जांच में चौंकाने वाले रहस्य उजागर हुए. बुद्धि प्रकाश के गले के दोनों ओर तथा पीछे की तरफ काले निशान बने हुए थे. लगता था कि रस्सी से गले को पूरी ताकत से कसा गया था. इस के अलावा चोट का कोई और निशान शरीर पर कहीं नहीं पाया गया.

लेकिन स्थितियां पूरी तरह संदेहास्पद थीं. घटनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होने के कारण किसी के वहां आनेजाने का साक्ष्य मिलना भी संभव नहीं था. सीओ विजय शंकर शर्मा ने घटनास्थल का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने प्रियंका से दरजनों सवाल किए. लेकिन अपने मतलब की कोई बात नहीं उगलवा सके. बिना किसी सबूत के प्रियंका पर हाथ डालने का कोई मतलब भी नहीं था. हालांकि पूछताछ के दौरान प्रियंका पूरी तरह सामान्य लग रही थी. उस के चेहरे पर भय या घबराहट की कोई रेखा तक नहीं थी. लेकिन उस के जवाब अटपटे थे.

मृतक करवट की स्थिति में था, जबकि प्रियंका का कहना था कि उस ने दिशामैदान से लौट कर उसे हिलायाडुलाया था. दिल की धड़कन टटोलने के लिए शरीर को पीठ के बल कर दिया था. लेकिन प्रियंका और पड़ोसियों के बयानों में कोई तालमेल नहीं था. उन का कहना था हम ने बुद्धिप्रकाश को करवट स्थिति में देखा था. पुलिस के सामने अच्छेअच्छे के हौंसले पस्त पड़ जाते हैं. लेकिन प्रियंका चाहे अटकअटक कर ही सही, पूरे हौसले से हर सवाल का जवाब दे रही थी. बेशक बुद्धि प्रकाश शराब में धुत रहा होगा. लेकिन आखिर था तो हट्टाकट्टा मर्द. उसे अकेली प्रियंका के द्वारा काबू करना आसान नहीं था.

सीओ हत्या के हर संभावित कोण को समझ रहे थे. इसलिए एक बात पर तो उन्हें यकीन हो चला था कि अगर हत्या में प्रियंका शामिल थी तो उस का कोई मजबूत साथी जरूर रहा होगा. हत्या सुनियोजित ढंग से की गई थी. लेकिन सवाल यह था कि योजना किस ने बनाई और उसे कैसे अंजाम दिया? पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया. पोस्टमार्टम में प्रथमदृष्टया मौत का कारण दम घुटना माना गया. थाने लौट कर थानाप्रभारी बदन सिंह ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

एसपी शरद चौधरी ने इस मामले का खुलासा करने के लिए एडिशनल एसपी पारस जैन की निगरानी में सीओ विजय शंकर शर्मा, थानाप्रभारी बदन सिंह, हैडकांस्टेबल भरत, कांस्टेबल सतपाल, रामराज और महिला कांस्टेबल भारती बाना को शामिल किया. प्रियंका के थाने आने से पहले की गई पूछताछ में पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई थी. लेकिन थाने लाए जाने के बाद हुई पूछताछ में महावीर मीणा का जिक्र आने के साथ ही घटना की गिरह खुलने लगी. पुलिस का हवा में पूछा गया सवाल ही घटना का तानाबाना खोलता चला गया कि बुद्धि प्रकाश की शराबनोशी में उस का साथी कौन था? प्रियंका जिस भेद को छिपाए थी, वह खुल गया. प्रियंका को बताना पड़ा कि बुद्धि प्रकाश शनिवार 13 मार्च को दिन भर पड़ोसी महावीर मीणा के साथ शराब पी रहा था.

लेकिन पुलिस के इस सवाल पर प्रियंका बिफर पड़ी कि महावीर मीणा के साथ उस के अवैध रिश्ते हैं. उस का कहना था, ‘‘आप सुनीसुनाई बातों को ले कर मेरे चरित्र पर लांछन लगा रहे हैं.’’

लेकिन प्रियंका की काल डिटेल्स खंगाल चुके पुलिस अधिकारी पूरी तरह आश्वस्त थे. उन का एक ही सवाल प्रियंका के होश फाख्ता कर गया, ‘‘क्या तुम्हारे और महावीर के बीच देर रात को 2-2 घंटे तक बातें नहीं होती थीं?’’

प्रियंका के पास अब कोई जवाब नहीं बचा था. उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस का कहना था कि बुद्धि प्रकाश उस के चालचलन पर शक करता था और रोज उस के साथ मारपीट करता था. इसलिए उस ने पति की हत्या कर दी. यह आधा सच था. प्रियंका अपने आप को एक बेबस औरत के रूप में पेश कर रही थी. लेकिन पुलिस को उस की पूरी दास्तान सुनने का इंतजार था कि कैसे उस ने प्रेमी के साथ मिल कर पति को मौत के घाट उतारा? राजस्थान के कोटा जिले में इटावा कस्बे के बूढादीत गांव में रहने वाले बुद्धि प्रकाश मीणा का कोई 12 साल पहले वहीं के निवासी सीताराम की बेटी प्रियंका से विवाह हुआ था. बुद्धि प्रकाश खेतिहर किसान था. प्रियंका का दांपत्य जीवन 10 साल ही ठीकठाक रह पाया. इस के बाद दोनों में खटपट रहने लगी.

इस बीच प्रियंका ने एकएक कर के एक बेटा और 2 बेटियों समेत 3 बच्चों को जन्म दिया. दांपत्य जीवन के 12 साल गुजर जाने और 3 बच्चों की पैदाइश के बाद बुद्धि प्रकाश और प्रियंका के बीच खटास कैसे पैदा हुई? उस की वजह था पड़ोस में आ कर बसने वाला युवक महावीर मीणा. दरअसल कदकाठी की दृष्टि से आकर्षक लगने वाला महावीर मीणा प्रियंका की नजरों में चढ़ गया था. प्रियंका की हर बात महावीर पर जा कर खत्म होती थी कि क्यों तुम अपने आप को महावीर की तरह नहीं ढाल लेते? जबकि बुद्धि प्रकाश का जवाब मुसकराहट में डूबा होता था कि महावीर की अभी शादी नहीं हुई है. इसलिए उसे अभी किसी की फिक्र नहीं है.

प्रियंका जवान थी, खूबसूरत भी. बेशक वह 3 बच्चों की मां बन गई थी, लेकिन उस की देह के कसाव में कोई कमी नहीं आई थी. उस की अपनी भावनाएं थीं. इसलिए मन करता था कि बुद्धि प्रकाश भी सजीले नौजवान की तरह बनठन कर रहे. फिल्मी हीरो की तरह उस से प्यार करे. लेकिन बुद्धि प्रकाश 35 की उम्र पार कर चुका था. मेहनतकश खेतीकिसानी में खटने के कारण उस पर उम्र हावी हो चली थी. इसलिए पत्नी की इच्छाओं की गहराई भांपने का उसे कभी खयाल तक नहीं आया. प्रियंका को अपने मेहनतकश पति के पसीने की गंध सड़ांध मारती लगती थी.

चढ़ती उम्र और बढ़ती आकांक्षाओं के साथ प्रियंका में पति के प्रति नफरत में इजाफा होता चला गया. संयोग ही रहा कि उस के बाजू वाले मकान में रहने के लिए महावीर बैरवा आ गया. महावीर छैलछबीला था और प्रियंका के सपनों के मर्द की तासीर पर खरा उतरता था. प्रियंका अकसर अपने पति बुद्धि प्रकाश को उस का उदाहरण देते हुए कहती थी, तुम भी ऐसे सजधज कर क्यों नहीं रहते. बुद्धि प्रकाश सीधासादा गृहस्थ इंसान था, इसलिए पत्नी की उड़ान को पहचानने की बजाय बात को टालते हुए कह देता, ‘‘अभी महावीर पर गृहस्थी की जिम्मेदारी नहीं पड़ी. जब पड़ेगी तो वह भी सजनासंवरना भूल जाएगा.’’

पड़ोसी के नाते महावीर भी बुद्धि प्रकाश से मेलमुलाकात बढ़ी तो गाहेबगाहे महावीर के यहां उस का आनाजाना भी बढ़ गया. अकसर प्रियंका के आग्रह पर वह वहीं खाना भी खा लेता था. असल में महावीर की नजरें प्रियंका पर थी. उस की पारखी नजरों से यह बात छिपी नहीं रही कि असल में प्रियंका को क्या चाहिए? लेकिन सवाल यह था कि पहल कौन करे. महावीर दोपहर में अकसर वक्त गुजारने के लिए अपने दोस्त की फलसब्जी की दुकान पर बैठ जाता था. दोस्त को सहूलियत थी कि अपने जरूरी काम निपटाने के लिए महावीर के भरोसे दुकान छोड़ जाता था. एक दिन दुकान पर अकेला बैठा था तो प्रियंका सब्जी खरीदने पहुंची. लेकिन महावीर ने फलसब्जी के पैसे नहीं लिए.

प्रियंका ने पैसे देने चाहे तो महावीर मुसकरा कर बोला, ‘‘तुम्हारी मुसकराहट में दाम वसूल हो गए. सारी दुकान ही अपनी समझो…’’

प्रियंका को शायद ऐसे ही मौके की तलाश थी. मुसकरा कर कहा, ‘‘ऐसी दोपहरी में दुकान पर बैठने की बजाय घर आओ.’’ प्रियंका ने मुसकरा कर निमंत्रण दिया तो महावीर बोला, ‘‘खातिरदारी का वादा करो तो आऊं.’’

‘‘मेरी तरफ से मेहमाननवाजी में कोई कमी नहीं रहेगी, तुम अकेले में आ कर देखो तो…’’ प्रियंका ने हंस कर कहा.

इस के बाद एक दिन महावीर प्रियंका के घर दोपहर के समय चला गया. प्रियंका तो जैसे उस का इंतजार कर रही थी. मौके का फायदा उठाते हुए उस दिन दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. इस के बाद तो प्रियंका महावीर की मुरीद हो गई. मौका मिलने पर दोपहर के समय वह प्रियंका के घर चला जाता. इस तरह कुछ दिनों तक उन का यह खेल बिना किसी रुकावट के चलता रहा. कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते.  एक दिन बुद्धि प्रकाश खेत से जल्दी ही लौट आया और उस ने प्रियंका को महावीर के साथ रंगरलियां मनाते देख लिया. फिर तो बुद्धि प्रकाश का खून खौल उठा.

महावीर तो भाग गया, लेकिन उस ने प्रियंका की जम कर धुनाई शुरू कर दी. प्रियंका ने गलती मानी तो बुद्धि प्रकाश ने यह चेतावनी देते हुए उसे छोड़ दिया कि अगली बार ऐसा हुआ तो तुम दोनों जिंदगी से हाथ धो बैठोगे. जिसे पराया घी चाटने की आदत पड़ जाए वह कहां बाज आता है. एक बार कीबात है. पति के सो जाने के बाद प्रियंका अपने प्रेमी से फोन पर बातें कर रही थी. उसी दौरान बुद्धि प्रकाश की नींद खुल गई. उस ने पत्नी की बातें सुनली थीं. फिर क्या था, उसी समय बुद्धि प्रकाश ने प्रियंका पर जम कर लातघूंसों की बरसात कर दी.

प्रियंका किसी भी हालत में महावीर का साथ नहीं छोड़ना चाहती थी. इस की वजह से अकसर ही उसे पति से पिटाई खानी पड़ती थी. रोजरोज की कलह और पिटाई से अधमरी होती जा रही प्रियंका का पोरपोर दुखने लगा था. प्रियंका का सब से ज्यादा आक्रोश तो इस बात को ले कर था कि बुद्धि प्रकाश जम कर शराब पीने लगा था और नशे में धुत हो कर उसे गंदीगंदी गालियों से जलील करता था. प्रियंका ने महावीर पर औरत का आखिरी अस्त्र चला दिया कि तुम्हारे कारण मैं हर रोज रूई की तरह धुनी जाती हूं और तुम कुछ भी नहीं करते. प्रियंका ने महावीर के सामने शर्त रख दी, ‘‘फूल चाहिए तो कांटे को जड़ से खत्म करना पड़ेगा.’’

प्रियंका की खातिर महावीर बुद्धि प्रकाश का कत्ल करने को तैयार हो गया. फिर योजना के तहत अगले दिन महावीर यह कहते हुए बुद्धि प्रकाश के पावोंं में गिर पड़ा, ‘‘दादा, मैं कल गांव छोड़ कर जा रहा हूं ताकि तुम्हारा कलह खत्म हो सके.’’

बुद्धि प्रकाश ने भी महावीर पर यह सोच कर भरोसा जताया कि संकट अपने आप ही जा रहा है. महावीर ने बुद्धि प्रकाश को यह कहते हुए शराब की दावत दे डाली कि भैया आखिरी मुलाकात का जश्न हो जाए. बुद्धि प्रकाश के मन में तो कोई खोट नहीं थी. उस ने सहज भाव से कह दिया, ‘‘ठीक है भैया, अंत भला सो सब भला.’’

महावीर ने तो थोड़ी ही शराब पी, लेकिन बुद्धि प्रकाश को जम कर पिलाई. नशे में बेहोश हो चुके बुद्धि प्रकाश को महावीर ने घर के बरामदे में रखे तख्त पर ला कर पटक दिया. फिर प्रियंका की मदद से रस्सी से उस का गला घोंट दिया. पुलिस द्वारा निकाली गई काल डिटेल्स के मुताबिक महावीर ने रात करीब 12 बजे बुद्धि प्रकाश की हत्या करने के बाद प्रियंका से 20 से 25 मिनट बात की. इस के बाद प्रियंका सो गई थी. प्रियंका से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के प्रेमी महावीर मीणा को भी गिरफ्तार कर लिया. फिर दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Real Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

 

 

 

 

 

UP Crime News : प्रेमी संग साजिश रच कर पत्नी ने हथौड़े से करवाया पति का कत्ल

UP Crime News : 2 बच्चों की मां मधु ससुराल के लोगों से अलग पति धनपाल के साथ गुड़गांव में रह रही थी. मौजमजे के लिए उस ने विवाहित मुकेश से संबंध बना लिए. उस के प्यार में वह इतनी अंधी हो गई कि…

उस दिन अप्रैल 2021 की 3 तारीख थी. पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर के कस्बा थाना तिलहर अंतर्गत गांव राजनपुर के मोड़ पर सड़क किनारे सैंट्रो कार के नीचे एक अज्ञात युवक की लाश दबी पड़ी थी. रात 10 बजे के करीब किसी ने तिलहर थाना पुलिस को घटना की सूचना दे दी. सूचना पा कर इंसपेक्टर हरपाल सिंह बालियान अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. प्रथमदृष्टया मामला ऐक्सीडेंट का लगा. लाश दाईं ओर दोनों पहियों के बीच में पड़ी थी. सिर में काफी चोट थी. कार की तलाशी ली गई तो कार से गिलास, खानेपीने का सामान, 3 मोबाइल फोन और गाड़ी के कागजात बरामद हुए.

इसी बीच रजाकपुर गांव के कुछ लोग वहां पहुंच गए. परमजीत नाम के युवक ने लाश की शिनाख्त अपने बड़े भाई 38 वर्षीय धनपाल गंगवार के रूप में की. पूछताछ में परमजीत ने बताया कि धनपाल पत्नी मधु और 2 बेटों के साथ गुड़गांव में रहता था, होली पर 3 साल बाद अपने घर आया था. वह शाम को पत्नी व बच्चों को तिलहर के बाजार में खरीदारी कराने के लिए ले कर आया था. साढ़े 5 बजे धनपाल ने पत्नी मधु और बच्चों को भाई प्रेमपाल के साथ वापस घर भेज दिया था और खुद तिलहर में रुक गया था. जब काफी रात हो गई, धनपाल नहीं लौटा तो उस की तलाश शुरू की.

इसी बीच कार से मिले मोबाइल पर किसी की काल आ गई. इंसपेक्टर बालियान ने काल रिसीव की. काल कनेक्ट होते ही दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘कहां है तू, तेरा पता ही नहीं रहता.’’

काल करने वाली कोई महिला थी. इंसपेक्टर बालियान ने उन्हें पूरी बात बताई. उस महिला ने कहा कि सैंट्रो कार उस के पति की है, जिसे उस का भाई मुकेश यादव वृंदावन जाने की बात कह कर ले गया था. इस का मतलब यह था कि कार में मुकेश यादव था, जोकि घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था. मामला साधारण सड़क दुर्घटना का न हो कर हत्या का लग रहा था, जिसे साजिश के तहत सड़क दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई थी. फिलहाल इंसपेक्टर बालियान ने जरूरी काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी और कार को थाने में खड़ा करा दी.

अगले दिन सुबह मृतक धनपाल के छोटे भाई परमजीत गंगवार ने तिलहर थाने पहुंच कर इंसपेक्टर बालियान को तहरीर दी, जिस में उस ने मुकेश यादव पर अपने भाई की हत्या का आरोप लगाया था. उस की तहरीर के आधार पर इंसपेक्टर बालियान ने मुकेश यादव के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. परमजीत ने इंसपेक्टर बालियान से अपनी भाभी मधु पर भी भाई की हत्या में हाथ होने का शक जताया था, लेकिन तहरीर में उस का जिक्र नहीं किया था. पति की मृत्यु के बाद भी मधु के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, जबकि जिस का पति मार दिया जाए, वह महिला रोरो कर आसमान सिर पर उठा लेती है.

इंसपेक्टर बालियान ने परमजीत से मधु का नंबर मांगा तो परमजीत ने अपनी भाभी मधु से उस का नंबर मांगा तो मधु ने साफ कह दिया कि उस के पास कोई नंबर नहीं है. जो मोबाइल उस के पास है, वह उस ने केवल गाना सुनने के लिए ले रखा है. परमजीत को मधु पर विश्वास नहीं हुआ. किसी तरह उस के करीबियों से बात कर के उस का नंबर निकलवाया. मधु पर हुआ शक इंसपेक्टर बालियान ने मधु के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. डिटेल्स से मधु और मुकेश के नंबरों पर हर रोज काफी बार बात करने की पुष्टि हुई. घटना की रात भी दोनों के बीच बात हुई थी.

6 अप्रैल को इंसपेक्टर बालियान ने मधु को उस की ससुराल से गिरफ्तार कर लिया. मधु से पूछताछ के बाद उन्होंने मुकेश यादव को मधु के मायके शाहजहांपुर के कटरा थाना क्षेत्र के कसरक गांव से गिरफ्तार कर लिया. उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर के तिलहर थाना क्षेत्र के गांव रजाकपुर में रहता था धनपाल गंगवार. धनपाल के पिता का नाम खलासीराम और माता का नाम शांति देवी था. खलासीराम सेना में कार्यरत थे. रिटायर होने के बाद 1989 में उन की मृत्यु हो गई. उस समय धनपाल बहुत छोटा था. धनपाल कुल 6 भाई थे. 2 बड़े भाई हरपाल और जसपाल व 3 छोटे भाई धर्मपाल, प्रेमपाल और परमजीत थे. हरपाल विवाह के बाद पंजाब चला गया. जसपाल विवाह के बाद गांव में ही रह कर खेती करने लगा.

11 साल पहले धनपाल का रिश्ता शाहजहांपुर के मीरनपुर कटरा थाना क्षेत्र के कसरक गांव निवासी मधु से हुआ था. मधु के पिता रामपाल पेशे से किसान थे. मधु की एक बड़ी बहन और 3 भाई थे. काम के लिए वह गुड़गांव चला गया. वहां उस ने ओरियंट कंपनी में नौकरी कर ली, साथ ही हरीनगर में अनाज मंडी के पास में 4500 रुपए में किराए पर कमरा ले लिया. फिर एक दिन वापस आ कर अपने साथ पत्नी मधु को भी गुड़गांव ले गया. समय बीतता गया. समय के साथ मधु ने 2 बच्चों कृष्णा (9 वर्ष) और क्रश (4 वर्ष) को जन्म दिया. पत्नी से होने लगी खटपट धनपाल सुबह साढ़े 7 बजे घर से कंपनी जाता था और शाम 8 बजे घर में घुसता था.

लगभग 12 घंटे की ड्यूटी करने के बाद वह थकाहारा घर आता था. धनपाल था तो मजबूत कदकाठी का, लेकिन रोज की यह ड्यूटी उस के बदन को तोड़ कर रख देती थी. ऐसे में जो धनपाल अभी तक शराब को हाथ तक नहीं लगाता था, वह शराब पीने भी लगा. शराब पी कर घर जाता तो मधु से उस का झगड़ा होता. झगड़े में वह मधु को पीट भी देता था. वैसे भी मधु धनपाल पर हावी रहने की कोशिश करती थी, लेकिन धनपाल को यह मंजूर नहीं था. शराब पीने के बाद तो इंसान वैसे भी निडर हो जाता है. किसी तरह से दोनों के  झगड़ों के बीच उन की जिंदगी कटती रही. मधु को अब धनपाल भाता नहीं था. उस के साथ रहना मधु की मजबूरी थी. वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी.

एक साल पहले धनपाल ने गुड़गांव में ही घर के पास रहने वाले मुकेश यादव को घर पर डीटीएच कनेक्शन के लिए बुलवाया. धनपाल मुकेश को आतेजाते दुकान पर बैठे देखता था. मुकेश डीटीएच का काम करने के साथ ही दूध, दही, मट्ठा और लस्सी का भी काम करता था. मुकेश गुड़गांव के थाना फरूखनगर में खेंटावास में रहता था. वह विवाहित था. उस के एक बेटा भी था. मुकेश काफी स्मार्ट था. अपने व्यवहार से वह किसी को अपना मुरीद बना लेता था. मुकेश डीटीएच का कनेक्शन करने आया तो घर पर केवल मधु थी. उस ने मधु से बात करनी शुरू की तो मधु को ऐसा लगा जैसे वह उस से पहली बार न मिल कर कई बार मिल चुकी हो. मधु को उस की बातों में रस आया तो वह भी उस से बतियाने लगी.

मुकेश से जुड़ा कनेक्शन उस दिन कहने को पहली मुलाकात थी दोनों की, लेकिन उन के बीच काफी बातें हुईं जोकि पहली मुलाकात में नहीं हुआ करतीं. मुकेश डीटीएच का कनेक्शन कर के चला गया, लेकिन मधु की आंखों के सामने अब भी मुकेश का चेहरा घूम रहा था. मुकेश आया तो था डीटीएच का कनेक्शन लगाने, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से वह मधु के दिल से अपने दिल का कनेक्शन कर गया था. इस के बाद तो मुकेश जबतब मधु से मिलने आने लगा. घर पर कोई रोकनेटोकने वाला नहीं था. मुकेश जब भी आता तो साथ में दूध, दही, लस्सी में से कुछ न कुछ ले आता और मधु को दे देता. मधु उस के तरीके को भलीभांति समझ रही थी कि वह कैसे उस के दिल तक पहुंचना चाहता है. मधु इस बात से नाराज नहीं हुई, बल्कि खुश होने लगी. उसे नए ठौर की जरूरत थी, वह खुद चल कर उस के पास आ गया था.

मुकेश की अपनी पत्नी से नहीं बनती थी. उस की पत्नी अकसर मायके में ही रहती थी. यही वजह थी कि मुकेश मधु की तरफ आकर्षित हो गया था. उस के साथ अपनी जिंदगी बिताने का सपना देख रहा था. मधु और मुकेश दोनों ही अपने जीवनसाथी से खुश नहीं थे, इसलिए एकदूसरे के करीब आने में उन्हें देर नहीं लगी. एक दिन मुलाकात के दौरान मुकेश ने मधु से कहा, ‘‘भाभी, लगता है आप अपना ध्यान नहीं रखतीं?’’

‘‘क्यों…अच्छीखासी तो हूं.’’ मधु ने कहा.

‘‘नहीं, तुम्हारा चेहरा मुरझाया सा रहता है, चेहरे पर जो चमक होनी चाहिए, वह गायब रहती है. शरीर भी पहले से काफी कमजोर हो गया है. आप को क्या चिंता है जो अपना यह हाल कर लिया है?’’

इस पर मधु कुछ देर शांत रही, फिर अपना दर्द बयां करते हुए बोली, ‘‘अब तुम ने पूछा है तो बता देती हूं. इस परदेश में दूसरा कोई है नहीं, जिस को अपना दर्द बता सकूं.’’

‘‘क्यों, धनपाल तो है.’’ मुकेश ने पूछा.

‘‘दर्द देने वाला दर्द ही देगा, दवा नहीं. इसलिए…’’

‘‘ओह.. तो यह बात है. वैसे आप से अलग मेरा मामला भी नहीं है. मैं भी अपनी पत्नी से परेशान हूं.’’ दुखी लहजे में मुकेश ने कहा. दोनों ने किया प्यार का इजहार फिर कुछ देर शांत रहने के बाद मुकेश बोला, ‘‘तो क्यों न भाभी, हम एकदूसरे के दर्द की दवा बन जाएं.’’ उपाय सुझाते हुए मुकेश ने अपने दिल की बात मधु तक पहुंचाने की कोशिश की.

‘‘क्या मतलब..?’’ जान के भी अंजान बनती हुई मधु पूछ बैठी.

‘‘यही कि हम दोनों एकदूसरे का हाथ थाम लें और हमेशा के लिए एक हो जाएं. मैं तो तुम्हें बेइंतहा चाहता हूं, बस तुम एक बार हां कह दो तो मैं सारी खुशियां तुम्हारे कदमों में डाल दूंगा.’’

‘‘तुम ने तो अपने दिल के साथसाथ मेरे दिल की भी बात कह दी. मैं भी तुम्हें चाहती हूं और तुम्हारे साथ जिंदगी बिताना चाहती हूं. अगर तुम तैयार हो तो…’’

‘‘मैं तो कब से इस पल के इंतजार में था. मैं हर पल तैयार हूं. आई लव यू मधु.’’ उस ने कह दिया.

यह पहला मौका था, जब मुकेश ने उसे भाभी नहीं मधु कह कर पुकारा था. मधु के दिल के तार झनझना उठे. एक नए एहसास से उस का दिल पुलकित हो उठा. वह भी बेसाख्ता बोल उठी, ‘‘आई लव यू टू मुकेश.’’

मधु के इजहार करते ही मुकेश ने उसे बांहों के घेरे में ले लिया. उस के बाद उन के बीच कोई शारीरिक दूरी न रही. वे एकदूसरे में इस कदर समाए कि अपनी इच्छापूर्ति के बाद ही अलग हुए. इस के बाद तो उन के बीच का यह रिश्ता दिनोंदिन परवान चढ़ने लगा. मगर गलत काम कभी छिपा है जो उन का छिप जाता. धनपाल को दोनों के संबंधों की बात पता चल गई. धनपाल ने मुकेश के घर आने पर रोक लगा दी. लेकिन मुकेश और मधु का चोरीछिपे मिलना जारी रहा. इसे ले कर धनपाल और मधु में रोज झगड़े होने लगे. मुकेश और मधु ने अपने संबंधों के बीच धनपाल को दीवार बनते देखा तो धनपाल नाम की इस दीवार को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. दोनों ने इस के लिए साथ बैठ कर योजना भी बना ली.

धनपाल विवाह के बाद साल-डेढ़ साल में शाहजहांपुर स्थित अपने घर के चक्कर लगा लेता था. लेकिन जब से बेटा स्कूल जाने लगा था, तब से वह 2-3 साल में ही घर का चक्कर लगा पाता था. 3 साल बाद इस बार धनपाल ने होली पर घर आने का फैसला लिया. इस में मधु ने खुद सहमति दी थी. इस से पहले वह ससुराल के नाम से ही बिदक जाती थी. रच ली पूरी साजिश गुड़गांव में पूरी योजना पर कार्य करने के बाद 14 मार्च, 2021 को मधु शाहजहांपुर के मीरनपुर कटरा थाना क्षेत्र के कसरक गांव स्थित अपने मायके आ गई. 27 मार्च को धनपाल रजाकपुर स्थित अपने घर आ गया. 2 अप्रैल को मधु मायके से अपनी ससुराल आ गई.

3 अप्रैल को धनपाल मधु और बच्चों के साथ तिलहर में ईरिक्शा से बाजार गया. ईरिक्शा धनपाल के छोटे भाई प्रेमपाल का था और उसे वही चला कर ले गया. बाजार घूमने के बाद धनपाल ने मधु और बच्चों को प्रेमपाल के साथ वापस घर भेज दिया, वह खुद तिलहर में रुक गया. दरअसल मुकेश ने धनपाल को फोन किया था कि वह उस से मिलने आ रहा है, मिल कर दारू पार्टी करने की बात कही थी. धनपाल ने एक बार भी नहीं सोचा और उसे आने की सहमति दे दी. मुकेश अपने बहनोई की सैंट्रो कार से तिलहर पहुंचा. मुकेश को कार में बैठाने के बाद वह एक सुनसान स्थान पर ले गया. कार में पहले से ही मुकेश ने खानेपीने की चीजें और शराब खरीद कर रख ली थी.

मुकेश ने धनपाल को खूब शराब पिलाई. धनपाल की आंख बचा कर उस की शराब में नींद की गोलियां भी मुकेश ने मिला दीं. जब धनपाल बेहोश हो गया, तब मुकेश उसे कार से राजनपुर गांव के मोड़ पर ले गया. उस समय रात के 9 बज रहे थे. मुकेश ने धनपाल को कार से नीचे उतारा और साथ लाए हथौड़े से उस के सिर पर कई वार कर के उसे मौत के घाट उतार दिया. मामले को ऐक्सीडेंट का रूप देने के लिए धनपाल की लाश को कार से कुचलने की कोशिश की. इस कोशिश में उस की कार कच्ची मिट्टी में फंस गई. मुकेश घबरा गया. कोई वहां आ न जाए उसे इस बात का डर भी सता रहा था.

जब कार किसी तरह से नहीं निकल सकी तो कार को वहीं छोड़ कर वह फरार हो गया. मुकेश ने मधु को फोन कर के धनपाल का काम तमाम कर देने की सूचना भी दे दी. जिस के बाद मधु ने अपना दूसरा मोबाइल गुप्त स्थान पर छिपा दिया. देर रात तक धनपाल नहीं लौटा तो घर वालों को चिंता हुई. परमजीत ने सोचा कि शराब पी कर धनपाल कहीं बेसुध तो नहीं पड़ा. उस ने तिलहर थाने के एक परिचित सिपाही को फोन कर के पूछा कि कहीं कोई बंदा शराब पीए हुए तो नहीं मिला. इस पर सिपाही ने उसे राजनपुर मोड़ पर हादसा होने की जानकारी दी. जो हुलिया बताया, वह धनपाल से मिलता था. इस के बाद परमजीत, उस की मां वहां पहुंच गए. मधु भी वहां पहुंच गई.

मुकेश और मधु का गुनाह छिप न सका और दोनों पुलिस की गिरफ्त में आ गए. मधु को मुकदमे में आईपीसी की धारा 120बी का अभियुक्त बनाया गया. इंसपेक्टर हरपाल सिंह बालियान ने अभियुक्त मुकेश की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथौड़ा भी बरामद कर लिया. बाकी कार और मोबाइल तो पहले ही बरामद हो गए थे. मधु का मोबाइल नहीं बरामद हो सका. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों व परमजीत से पूछताछ पर आधारि

Rajasthan Crime News : पत्नी ने नौकर संग मिलकर रची साजिश फिर कर दिया पति का कत्ल

Rajasthan Crime News : रुक्मिणी पढ़ीलिखी ही नहीं बल्कि एक सरकारी टीचर प्रेमनारायण मीणा की पत्नी थी. वह एक बेटी की शादी भी कर चुकी थी. 40 साल की उम्र में उस ने घरेलू नौकर जितेंद्र से नजदीकी संबंध बना लिए. यह संबंध उस के लिए इतने घातक सिद्ध हुए कि…

बात 26 मार्च, 2021 की सुबह 7 बजे की है. राजस्थान के बारां जिले के गांव आखाखेड़ी के रहने वाले मास्टर प्रेमनारायण मीणा के यहां उन का भतीजा राजू दूध लेने पहुंचा तो उन के घर का मुख्य गेट भिड़ा हुआ था. दरवाजा धक्का देने पर खुला तो भतीजा घर में चला गया. उस की नजर जैसे ही आंगन में चारपाई पर पड़ी तो वहां का मंजर देख कर वह कांप गया. बिस्तर पर चाचा प्रेमनारायण की खून सनी लाश पड़ी थी. यह देख कर भतीजा चीखनेचिल्लाने लगा. आवाज सुन कर प्रेमनारायण की पत्नी रुक्मिणी (40 वर्ष) अपने कमरे से बाहर आई. बाहर आते समय वह बोली, ‘‘क्यों रो रहे हो राजू, क्या हुआ?’’

मगर जैसे ही रुक्मिणी की नजर चारपाई पर खून से लथपथ पड़े पति पर पड़ी तो वह जोरजोर से रोनेचिल्लाने लगी. रोने की आवाज मृतक के बच्चों वैभव मीणा और ऋचा मीणा ने भी कमरे में सुनी. वह दरवाजा पीटने लगे कि क्या हुआ. क्यों रो रही हो. दरवाजा खोलो. उन भाईबहनों के दरवाजे के बाहर कुंडी लगी थी. कुंडी खोली तो भाईबहन बाहर आ कर पिता की लाश देख कर रोने लगे. मास्टर प्रेमनारायण के घर से सुबहसवेरे रोने की आवाज सुन कर आसपास के लोग भी वहां आ गए. थोड़ी देर में पूरे आखाखेड़ी गांव में मास्टर की हत्या की खबर फैल गई. थाना छीपा बड़ौद में किसी ने हत्या के इस मामले की खबर दे दी.

थानाप्रभारी रामस्वरूप मीणा खबर मिलते ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे. थानाप्रभारी मीणा ने घटनास्थल का मुआयना किया. रात में अज्ञात लोगों ने घर में सो रहे सरकारी टीचर प्रेमनारायण की धारदार हथियार से गला, मुंह और सिर पर वार कर के हत्या कर दी थी, जिस से काफी मात्रा में खून निकल चुका था. पूछताछ में मृतक की पत्नी रुक्मिणी ने बताया कि वह कमरे में सो रही थी. उस के दोनों बच्चे वैभव और ऋचा अलग कमरे में सो रहे थे. बड़ी बेटी ससुराल में थी. वह (प्रेमनारायण) आंगन में अकेले सो रहे थे, तभी नामालूम किस ने उन्हें मार डाला.

थानाप्रभारी रामस्वरूप मीणा ने घटना की खबर उच्चाधिकारियों को दे दी. एसपी (बारां) विनीत कुमार बंसल ने सीओ (छबड़ा) ओमेंद्र सिंह शेखावत व जयप्रकाश अटल आरपीएस (प्रोबेशनरी) को निर्देश दिए कि वे घटनास्थल पर जा कर मौकामुआयना कर जल्द से हत्याकांड का खुलासा करें. एसपी के निर्देश पर दोनों सीओ ओमेंद्र सिंह और जयप्रकाश अटल घटनास्थल पर पहुंचे और घटना से संबंधित जानकारी ली. पुलिस अधिकारियों ने एफएसएल एवं डौग स्क्वायड टीम को भी बुला कर साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए. पुलिस अधिकारियों को पता चला कि मृतक प्रेमनारायण मीणा सरकारी स्कूल में टीचर थे.

उन की पोस्टिंग इस समय मध्य प्रदेश के गुना जिले के फतेहगढ़ के सरकारी स्कूल में थी. वह छुट्टी पर घर आए हुए थे. वह 15-20 दिन बाद छुट्टी पर गांव आते थे. पुलिस को पता चला कि मृतक प्रेमनारायण घर के आंगन में सोए थे. उन की बीवी कमरे में अलग सोई थी. उन के 3 बच्चे हैं, जिन में से बड़ी बेटी की शादी हो चुकी थी. वह अपनी ससुराल में थी. जबकि छोटे दोनों बच्चे वैभव व ऋचा अलग कमरे में सो रहे थे. घर के आंगन में हत्यारों ने आ कर हत्या की थी, मगर बीवी व बच्चों ने कुछ नहीं सुना था. बीवी सुबह 7 बजे तब जागी, जब भतीजा राजू दूध लेने आया.

यह बात पुलिस को पच नहीं रही थी. मृतक के मुंह, सिर और गरदन पर लगे गहरे घावों से रिसा खून सूख चुका था. इस का मतलब था कि मृतक की हत्या हुए 6-7 घंटे का समय हो चुका था. एफएसएल टीम ने साक्ष्य एकत्रित किए. तब पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया. पुलिस अधिकारियों ने अपने मुखबिरों को सुरागसी के लिए लगा दिया. वहीं मृतक के बच्चों वैभव व ऋचा से एकांत में पूछताछ की. बच्चों ने बताया कि कल रात मम्मी ने हमें धमका कर अलग कमरे में सुला दिया था. मम्मी ने हमें कमरे में बंद कर के बाहर से कुंडी लगा दी थी. मम्मी अलग कमरे में सोई थी. बच्चों ने यह भी बताया कि वह हमेशा मम्मी के कमरे में सोते थे, लेकिन उन्होंने कल हमें दूसरे कमरे में सुला दिया था.

वैभव को पुचकार कर पुलिस अधिकारियों ने कुछ और जानकारी पूछी तो उस ने एक पत्र ला कर पुलिस अधिकारियों को दिया. वैभव ने कहा, ‘‘यह चिट्ठी मेरी बड़ी बहन, जो शादीशुदा है, ने पापा को लिखी थी. यह पत्र हम भाईबहनों को मिला तो हम ने छिपा दिया था.’’

उस पत्र में मृतक की बड़ी बेटी ने पापा प्रेमनारायण को लिखा था कि वह मम्मी को बदनाम नहीं करना चाहती है. नौकर जितेंद्र को अब अपने यहां नहीं रखना चाहिए. पुलिस ने चिट्ठी के आधार पर तथा वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं पर जांच करते हुए जांच आगे बढ़ाई. पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट सत्येंद्र सिंह की भी मदद ली. बच्चों ने पुलिस अधिकारियों से यहां तक कहा कि पापा की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि मम्मी ने ही नौकर जितेंद्र उर्फ जीतू बैरवा (मेघवाल) के साथ मिल कर रात में की है. रात में वैभव कमरे से बाहर आना चाहता था मगर कमरा बाहर से लौक था. इस कारण वह वापस जा कर सो गया था.

इसी दौरान मुखबिरों ने भी पुलिस को जानकारी दी. इन सब तथ्यों पर गौर किया गया तो मृतक की पत्नी का किरदार संदिग्ध नजर आया. पुलिस अधिकारियों ने तब उसे पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. पुलिस ने रुक्मिणी से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में वह टूट गई. उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस ने अपने प्रेमी व नौकर जितेंद्र उर्फ जीतू बैरवा और एक अन्य हंसराज भील के साथ मिल कर पति की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया. बस, फिर क्या था, पुलिस ने उसी दिन जितेंद्र और हंसराज भील को भी दबोच लिया. थाने ला कर उन से पूछताछ की.

पूछताछ में उन्होंने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया.  जितेंद्र ने बताया कि वह पिछले 2 साल से टीचर प्रेमनारायण के घर नौकर था. वह खेतों की रखवाली और खेतीबाड़ी करता था. जितेंद्र को 65 हजार रुपए सालाना तनख्वाह पर रखा हुआ था. प्रेमनारायण ज्यादातर समय अपनी ड्यूटी पर फतेहगढ़, मध्य प्रदेश में रहते थे. वह 15-20 दिन बाद ही अपने गांव आखाखेड़ी आते थे. प्रेमनारायण की अपनी बीवी से नहीं बनती थी. दोनों में मनमुटाव रहता था. इस कारण रुक्मिणी ने पति की गैरमौजूदगी में अपने नौकर से अवैध संबंध बना लिए थे. प्रेमनारायण की बड़ी बेटी ने एक दिन अपनी मम्मी और नौकर जितेंद्र को रंगरलियां मनाते देख लिया था.

इस कारण वह चिट्ठी लिख कर पापा को अपनी मम्मी की करतूत बताना चाहती थी. मगर यह चिट्ठी उस के छोटे भाईबहनों के हाथ लग गई थी. तब उन्होंने चिट्ठी पढ़ कर छिपा ली. 26 मार्च, 2021 को यह चिट्ठी बच्चों ने पुलिस अधिकारियों को सौंपी. तब जा कर इस घटना की परतें खुलनी शुरू हुईं. प्रेमनारायण को किसी तरह बीवी और नौकर के अवैध संबंधों की खबर लग गई थी. इस कारण वह इन दोनों के बीच राह का रोड़ा बन चुके थे. इस रोड़े को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने के लिए रुक्मिणी ने एक योजना बना ली. फिर जितेंद्र ने 31 वर्षीय हंसराज भील को 20 हजार रुपए दे कर योजना में शामिल कर लिया. हंसराज जितेंद्र का दोस्त था. पुलिस ने मात्र 3 घंटे में ही मास्टर प्रेमनारायण मीणा की हत्या का राजफाश कर दिया.

मृतक के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया. परिजनों ने उसी रोज दोपहर बाद अंतिम संस्कार क र दिया. आखाखेड़ी में मास्टर की मौत से सनसनी फैल गई थी. जिस ने भी बीवी और उस के प्रेमी नौकर की करतूत के बारे में सुना, सन्न रह गया. आरोपी पुलिस हिरासत में थे, जिन से पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की. पूछताछ में जो घटना प्रकाश में आई, वह इस प्रकार थी. प्रेमनारायण मीणा अपनी पत्नी रुक्मिणी और 3 बच्चों के साथ जिला बारां के गांव आखाखेड़ी में रहते थे. वह सरकारी अध्यापक थे. प्रेमनारायण की ड्यूटी इन दिनों मध्य प्रदेश के जिला गुना के फतेहगढ़ में थी. वह महीने में एकाध बार अपने गांव बीवीबच्चों से मिलने आते रहते थे.

प्रेमनारायण जहां शांत स्वभाव के थे तो वहीं उन की बीवी कर्कश स्वभाव की थी. उन की शादी को 20 साल से ज्यादा हो गए थे मगर इतना समय साथ गुजारने के बाद भी मियांबीवी में अकसर झड़प हो जाया करती थी. उन के बच्चे बड़े हो गए थे. मगर दोनों का मनमुटाव कम नहीं हुआ. रुक्मिणी दिनरात काम कर के थक जाने का रोना रोती रहती थी. तब प्रेमनारायण ने वार्षिक तनख्वाह पर जितेंद्र उर्फ जीतू बैरवा  को 2 साल पहले घर का नौकर रख लिया. जितेंद्र जहां खेतों पर काम करता, वहीं घर पर भी काम करता था. रुक्मिणी और जितेंद्र का रिश्ता मालकिन और नौकर का था. मगर पति के दूर रहने और मनमुटाव के चलते रुक्मिणी शारीरिक सुख से वंचित थी.

जब उसे जितेंद्र नौकर के रूप में मिला तो वह उसे बिस्तर तक ले आई. रुक्मिणी की उम्र 40 साल थी. इस के बावजूद वह अपने से 8 साल छोटे नौकर के साथ सेज सजाने लगी. उस ने नौकर को प्रेमी बना लिया और उस की बांहों में झूला झूलने लगी. रुक्मिणी की बड़ी बेटी शादी लायक हो गई थी. इस के बावजूद अधेड़ उम्र में उस पर वासना का ऐसा भूत सवार हुआ कि वह जबतब मौका पा कर नौकर जितेंद्र बैरवा के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगी. एक रोज बेटी ने अपनी मां को नौकर के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. अपनी मां का यह रूप देख कर बेटी को उस से नफरत सी हो गई. मां का यह रूप देख कर उसे कई दिन तक कुछ भी अच्छा नहीं लगा.

वह सोचने लगी कि क्या किया जाए. इसी बीच एक दिन फिर उस ने अपनी मां को नौकर जितेंद्र के साथ देख लिया. तब उस ने अपने पापा को लिखे एक पत्र में मम्मी की करतूत और नौकर को हटाने के बारे में लिखा. पत्र पापा के पास पहुंचने से पहले ही वह छोटे भाई वैभव व बहन ऋचा के हाथ लग गया. दोनों बहनभाइयों ने वह पत्र छिपा दिया. उन्हें पता था कि पापा ने यह पत्र देख लिया तो मम्मी की खैर नहीं होगी. बस, उन मासूमों को क्या पता था कि मम्मी को बचाने के चक्कर में वह पापा को एक दिन खो देंगे. पत्र गायब हुआ तो बड़ी बेटी भी चुप्पी लगा गई. एक साल पहले प्रेमनारायण ने बेटी की शादी कर दी. वह अपनी ससुराल चली गई.

कोरोना काल में प्रेमनारायण काफी समय तक घर पर रहे. तब रुक्मिणी को अपने प्रेमी से एकांत में मिलने का मौका नहीं मिला. जब स्कूल खुल गए तब प्रेमनारायण फतेहगढ़ चले गए. पति के जाने के बाद रुक्मिणी और जितेंद्र का खेल फिर से शुरू हो गया. लेकिन छुट्टी पर प्रेमनारायण गांव आते तो बीवी को वह फूटी आंख नहीं सुहाते थे. वह उन से बिना किसी बात के लड़तीझगड़ती रहती. तब वह ड्यूटी पर चले जाते. रुक्मिणी यही तो चाहती थी. इस के बाद वह नौकर के साथ रंगरलियां मनाती. प्रेमनारायण को अपनी बीवी और नौकर जितेंद्र के व्यवहार से ऐसा लगा कि कुछ गड़बड़ है. एकदो बार प्रेमनारायण ने बीवी से इस बारे में पूछा तो वह उलटा उस पर चढ़ दौड़ी.

रुक्मिणी को अंदेशा हो गया कि उस के पति को नौकर के साथ संबंधों का शक हो गया है. तब उस ने नौकर जितेंद्र के साथ साजिश रची कि अब वह प्रेमनारायण को रास्ते से हटा कर अपने हिसाब से जीवन जिएंगे. रुक्मिणी के कहने पर जितेंद्र यह काम करने को राजी हो गया. घटना से 10 दिन पहले प्रेमनारायण छुट्टी पर घर आए थे. होली के बाद उन्हें वापस फतेहगढ़ जाना था. इन 10 दिनों में रुक्मिणी और जितेंद्र को एकांत में मिलने का मौका नहीं मिला. ऐसे में रुक्मिणी और उस के प्रेमी ने तय कर लिया कि अब जल्द ही योजना को अंजाम दिया जाएगा, तभी वह चैन की जिंदगी जी सकेंगे. जितेंद्र ने अपने दोस्त हंसराज को 20 हजार का लालच दे कर योजना में शामिल कर लिया.

25 मार्च, 2021 की आधी रात को योजना के तहत जितेंद्र और हंसराज तलवार और कुल्हाड़ी ले कर रुक्मिणी के घर के पीछे पहुंचे. रुक्मिणी ने पहली मंजिल पर जा कर मकान के पीछे वाली खिड़की से रस्सा नीचे फेंका. रस्से के सहारे जितेंद्र और हंसराज मकान की पहली मंजिल पर खिड़की से आ गए. इस के बाद घर के आंगन में बरामदे में सो रहे मास्टर प्रेमनारायण पर नींद में ही तलवार और कुल्हाड़ी से हमला कर मार डाला. इस के बाद जिस रास्ते से आए थे, उसी रास्ते से अपने हथियार ले कर चले गए. रुक्मिणी निश्चिंत हो कर कमरे में जा कर सो गई. सुबह जब मृतक का भतीजा राजू दूध लेने आया तो उस की चीखपुकार सुन कर रुक्मिणी आंखें मलती हुई कमरे से बाहर आई. वह नाटक कर के रोनेपीटने लगी. मगर उस की करतूत बच्चों ने चिट्ठी से खोल दी.

पुलिस ने पूछताछ पूरी होने पर तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से रुक्मिणी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. जितेंद्र व हंसराज को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया. रिमांड के दौरान आरोपियों से तलवार, कुल्हाड़ी, खून सने कपड़े और मोबाइल बरामद किए गए. रिमांड अवधि खत्म होने पर 30 मार्च, 2021 को फिर से जितेंद्र और हंसराज भील को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Rajasthan Crime News