MP News: मौडल खुशबू – मौत बनी पहेली

MP News: एक सामान्य दलित परिवार में पलीबढ़ी खुशबू अहिरवार ने सफल मौडल बनने का सपना देखा था. अपनी खूबसूरती और मोहक अदाओं के कारण उसे विज्ञापनों में काम मिलना भी शुरू हो गया था. अपने प्रेमी कासिम के साथ लिवइन में रहने वाली खुशबू उस के साथ उज्जैन गई थी, मगर अस्पताल में वह लाश के रूप में लौटी. आखिर खुशबू की मौत की वजह पुलिस और परिवार के लिए क्यों बनी हुई है एक पहेली?

इसी दीपावली पर जब खुशबू अहिरवार भोपाल से अपने घर पहुंची थी तो उस की बड़ी बहन ताराबाई भी वहां मौजूद थी. मम्मी ने बातचीत के दौरान तारा से खुशबू की शादी के संबंध में उस की राय लेने को कहा तो तारा ने खुशबू से कहा, ”खुशबू, अब तो तू अच्छी मौडल बन गई है, अब शादी के बारे में भी सोच. आखिर मम्मी को भी चिंता रहती है.’’

”दीदी, मैं ने मम्मी से बोला तो है, मुझे अभी और प्रोग्रेस करनी है. मंजिल बहुत दूर है,’’ खुशबू ने टालते हुए कहा.

”ऐसा तो नहीं है कि कि भोपाल में रह कर किसी को बौयफ्रेंड बना लिया हो, इसलिए टाल रही है?’’ आशंका व्यक्त करते हुए तारा बोली.

”दीदी, आप भी बड़ी वो हो…’’ खुशबू शरमाते हुए बोली.

”सच बता, कौन है वो? मोबाइल में फोटो है उस का? मुझे दिखा, मैं मम्मी से बोल कर तेरी शादी करा दूंगी.’’ तारा ने भरोसा दिलाते हुए कहा.

”दीदी, ये देखो…’’ मोबाइल स्क्रीन तारा को दिखाते हुए खुशबू बोली.

”लड़का तो हैंडसम है, क्या नाम है इस का.’’

”दीदी, कासिम नाम है इस का.’’

”तो क्या यह मुसलमान है? कहां मिला था तुझे पहली बार.’’

”हां दीदी, कासिम मुसलमान है. मुझे यह एक लाउंज में मिला था.’’

”तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या? और कोई नहीं मिला, जो मुसलमान के चक्कर में पड़ गई?’’ तारा ने डांटते हुए कहा.

”दीदी, कासिम दिल का अच्छा है. जब मैं उस से पहली बार मिली थी तो उस ने अपना नाम राहुल बताया था,’’ खुशबू ने कहा.

”और तूने उस पर भरोसा कर लिया, तुझे मालूम नहीं आजकल लव जिहाद चल रहा है. अपने एमपी में तो इस के लिए कानून भी बना है.’’

”दीदी, इसी लव जिहाद के डर से तो उस ने अपना नाम राहुल बताया था, मगर जब दोस्ती हुई तो पता चला कि वह मुझे दिल से चाहता है.’’ खुशबू बोली.

”मैं तो कहती हूं कि अभी भी समय है उस से दोस्ती खत्म कर ले, नहीं तो अंजाम भुगतने को तैयार रहना.’’ तारा ने चेतावनी देते हुए कहा.

”दीदी, आप फिक्र मत करो, सब ठीक हो जाएगा. मैं अब मौडलिंग के जरिए अच्छा कमाने लगी हूं. मैं उस पर डिपेंड नहीं हूं और अपना अच्छाबुरा खुद समझती हूं.’’  खुशबू ने तारा को विश्वास दिलाते हुए कहा.

इस के बाद खुशबू भोपाल चली गई और प्रेमी कासिम के साथ रहने लगी. खुशबू और कासिम एक साथ भोपाल के भानपुर इलाके में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में रह रहे थे. 27 साल की खुशबू सागर जिले के मंडी बमौरा की रहने वाली थी, जबकि प्रेमी कासिम उज्जैन का रहने वाला था. दिशा जिले के लटेरी कस्बे में कासिम शराब तसकरी के मामले में गिरफ्तार होने के बाद जेल चला गया था, जिस के बाद खुशबू कुछ समय यहां रही, बाद में वह मम्मी के घर मंडी बामोरा चली गई. एक महीने बाद कासिम के जेल से आते ही दोनों फिर एक साथ रहने लगे थे.

कासिम चाय का कैफे चलाता था. खुशबू और उस की मुलाकात करीब 3 साल पहले एक लाउंज में हुई थी, इस के बाद सोशल मीडिया पर बात होने लगी. डेढ़ साल पहले दोनों रिलेशन में आए थे और लिवइन रिलेशन में रह रहे थे. कासिम खुशबू से शादी करना चाहता था. फेमिली वालों की रजामंदी के लिए वह खुशबू को उन से मिलाना चाहता था. कासिम का पूरा परिवार उज्जैन में रहता था. इसी वजह से खुशबू और कासिम ने उज्जैन जाने का प्रोग्राम बनाया था.

खुशबू के कहने पर ही 8 नवंबर, 2025 को कासिम ने खुशबू की मम्मी लक्ष्मी अहिरवार को फोन किया था. जैसे ही काल रिसीव हुई तो कासिम बोला, ”आंटी, मैं कासिम बोल रहा हूं, आप से कुछ बात करना चाहता हूं.’’

”हां, बोलो क्या बात है, लेकिन मैं ने पहचाना नहीं तुम्हें.’’ लक्ष्मी ने कहा.

”आंटी, मैं आप की बेटी खुशबू का फ्रेंड हूं. खुशबू मेरे साथ है, आप उस की फिक्र मत करना. मैं उसे साथ ले कर उज्जैन जा रहा हूं.’’ कासिम ने कहा.

”लेकिन…’’

इस के पहले कि लक्ष्मी कुछ कह पाती, खुशबू ने कासिम से फोन लेते हुए कहा, ”मम्मी, आप फिक्र मत करना, कासिम अच्छा लड़का है और मैं उस के साथ हूं. हम लोग 1-2 दिन उज्जैन में घूमने के बाद वापस आ जाएंगे.’’

इस बातचीत के बाद ही लक्ष्मी को आभास हुआ कि बेटी खुशबू कासिम के साथ रिलेशन में है.

8 नवंबर, 2025 को कासिम खुशबू को अपनी मम्मी और बहन से मिलवाने उज्जैन गया था. एक दिन रुक कर 9 नवंबर को वापस लौटने वाले थे. सुबह खुशबू ने ही सभी के लिए चाय बनाई थी, हालांकि उस की तबीयत ठीक न होने पर वह सुबह से ही उल्टियां कर रही थी. भोपाल रवाना होने के लिए जब शाम को दोनों बस में बैठे तो उस की तबीयत ज्यादा खराब लग रही थी. बस में बैठते ही वह सो गई. भोपाल आने से पहले कासिम ने खुशबू को उठाने की कोशिश की तो उस ने रिस्पौंस नहीं किया.

इस के बाद कासिम ने बस को फंदा के पास नाके पर रुकवाया और वहां से वह खुशबू को औटो से भैंसाखेड़ी स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गया. अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डौक्टर इरा दुबे नाजुक हालत में भरती खुशबू की जांच करने इमरजेंसी वार्ड में पहुंची, तब तक खुशबू का शरीर पूरी तरह से ठंडा हो चुका था. ईसीजी जांच में उन्होंने पाया कि उस की पल्स भी नहीं चल रही थी, आंखें पथरा गई थीं और ब्लड प्रेशर तो बिलकुल ही नहीं था. जांच के आधार पर उन्होंने खुशबू को मृत घोषित कर दिया. अस्पताल प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दे दी गई.

सूचना पर पहुंची खजूरी सड़क पुलिस टीम ने पाया कि खुशबू के कपड़ों पर ऐसे दाग थे, जैसे उस ने खूब सारी उल्टियां की हों. उस के शरीर की जांच की तो पाया कि हाथ पर कट के निशान थे, जिसे हेजिटेशन कट कहते हैं. इन निशान को देख कर पुलिस को यह आशंका भी हुई, जैसे खुशबू ने इस के पहले खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की हो. कासिम ने अस्पताल में खुद को खुशबू का बौयफ्रेंड बताते हुए उसे भरती कराया था और  जब डौक्टरों ने खुशबू को मृत घोषित कर दिया तो खुशबू की मौत से आहत कासिम अस्पताल में खूब रोया. इस के बाद उस ने ही खुशबू के घर वालों को कौल कर अस्पताल बुला लिया. मगर लव जिहाद के डर से कासिम अस्पताल से चला गया.

अस्पताल प्रबंधन ने घटना की जानकारी खजूरी सड़क नगर थाना पुलिस को दी. मध्य प्रदेश में लव जिहाद के लिए कानून बनाया गया है और इस तरह की घटनाओं का हिंदूवादी संगठन विरोध करते हैं. इस के मद्ïदेनजर एसीपी आदित्यराज सिंह और खजूरी थाना इंचार्ज डीएसपी दिव्या झारिया ने तत्परता दिखाते हुए रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी. 10 नवंबर, 2025 को पुलिस ने को यह सूचना मिली थी. भोपाल के चिरायु अस्पताल से 27 वर्षीय मौडल खुशबू की मौत की सूचना के बाद पुलिस द्वारा शव को हमीदिया अस्पताल लाया गया, जहां मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में डौक्टरों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया.

मौके पर पहुंचे खुशबू के फेमिली वालों का कहना था कि खुशबू के शरीर पर चोटों के कई निशान मिले हैं. खुशबू के कंधे, चेहरा और प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें पाई गईं. उन्हें देख कर लगता है कि खुशबू को बेरहमी से पीटा गया और उस की हत्या की गई है. खुशबू के पोस्टमार्टम के बाद फेमिली वाले इस बात पर अड़ गए कि जब तक आरोपी कासिम गिरफ्तार नहीं होता, वे अपनी बेटी का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. बाद में पुलिस के समझाने के बाद खुशबू का अंतिम संस्कार किया गया.

खुशबू की बहन ताराबाई ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि उन की बहन भोपाल के एक कालेज में 3 साल से पढ़ाई कर रही थी. भानपुर मल्टी में रहने वाली खुशबू अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मौडलिंग भी करती थी. तारा ने कहा कि पिछले दिनों जब खुशबू दीवाली पर घर आई थी तो उस ने कासिम की ओर से मारपीट और परेशान किए जाने की बात उन्हें बताई थी.

तारा के मुताबिक खुशबू ने उन्हें बताया कि कासिम ने राहुल नाम बता कर उस से दोस्ती की. दोनों काफी करीब आ गए तो कासिम उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाने लगा, लेकिन बाद में उसे पता चला कि वह मुसलिम है. कासिम खुशबू पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था, जबकि वह इसलाम कुबूल नहीं करना चाहती थी और इस वजह से कासिम उस के साथ मारपीट करता था. खुशबू की बहन ताराबाई ने तो यहां तक कहा कि 8 नवंबर, 2025 को रात 11 बजे खुशबू का फोन आया था. खुशबू ने फोन पर कहा कि कासिम उसे जबरदस्ती उज्जैन अपनी मम्मी से मिलाने ले जा रहा है, मगर मैं नहीं जाना चाहती. इस के बाद फोन कट गया था.

अगले दिन 9 नवंबर को रात में करीब 10 बजे मेरे पास मेरी बहन प्रीति अहिरवार का फोन आया और उन्होंने मुझे बताया कि कासिम और खुशबू उज्जैन से वापस आ रहे थे तो बस में खुशबू की बौडी अकड़ गई है और खुशबू की मौत हो गई है. इस के बाद तारा अपने पति संजीव के साथ मम्मी को ले कर ट्रेन से भोपाल आ गए. पुलिस हिरासत में कासिम ने बारबार आरोपों को नकारा. लेकिन खुशबू के फेमिली वालों के दावों के आधार पर पुलिस ने धर्म परिवर्तन, पहचान छिपाने, मारपीट और जातिसूचक गालियां देने के आरोप में उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया की चमकदमक के पीछे छिपी असल ङ्क्षजदगी कितनी असुरक्षित हो सकती है. खुशबू अहिरवार, जो अपने सपनों की दुनिया में आगे बढऩा चाहती थी, अब सिर्फ एक जांच का विषय बन गई है और उस का परिवार न्याय की उम्मीद में पुलिस के जवाब का इंतजार कर रहा है. खुशबू 3 बहनों में सब से छोटी थी. उस से बड़ी 2 बहनों तारा और प्रीति की शादी हो चुकी है. 2022 में उन के भाई का निधन हो चुका है. खुशबू ही घर का खर्च चला रही थी. 2022 से ही वह भानपुर मल्टी में किराए पर रह रही थी.

पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की जो वजह सामने आई है, वह चौंकाने वाली है. रिपोर्ट में बताया गया है कि खुशबू प्रेगनेंट थी और उस की मौत फेलोपियन ट्यूब गर्भाशय की नली फटने से हुई है और उस के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं. डौक्टरों के मुताबिक खुशबू की राइट साइड की फेलोपियन ट्यूब में गर्भ विकसित होने से वह फट गई और इंटरनल ब्लीडिंग होने से खुशबू की मौत हो गई. उस का विसरा जांच के लिए फोरैंसिक लैब भेजा गया.

खजूरी सड़क पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और खुशबू की बहनों के बयान के आधार पर कासिम अहमद के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 115(2), 351(2), धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3(5) और एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर केस डायरी छोला मंदिर थाने भेज दी.

इस मामले में पुलिस ने मौडल खुशबू के बौयफ्रेंड कासिम को हिरासत में ले कर पूछताछ की. कासिम ने खुशबू के साथ डेढ़ साल से लिवइन रिलेशनशिप में रहना तो कुबूल किया है, परंतु कासिम ने पुलिस के सामने खुद को निर्दोष बताया. कासिम मूलरूप से उज्जैन का रहने वाला है. खुशबू को अपने फेमिली वालों से मिलाने उज्जैन ले गया था. वहां से लौटते समय बस में अचानक उस की तबीयत बिगड़ गई. अस्पताल के करीब बस रुकवा कर कासिम ही मौडल खुशबू को औटोरिक्शा से अस्पताल ले गया, जहां खुशबू की मौत होने की पुष्टि होने पर वह बुरी तरह घबरा गया और अस्पताल से भाग गया.

कासिम ने पुलिस को बताया कि खुशबू के गर्भ में मेरा ही बच्चा था. हम दोनों एकदूसरे को 2 सालों से जानते थे. 16 महीने पहले दोनों ने एकदूसरे से प्यार का इजहार किया और लिवइन में रहने लगे. वह जल्द ही दोनों शादी करने वाले थे. हाल ही में हम ने इस की जानकारी अपने फेमिली वालों को दी थी. कासिम ने पुलिस से कहा कि उस ने खुशबू के साथ मारपीट नहीं की और कभी उस के साथ किसी तरह का गलत बरताव भी नहीं किया.

खुशबू अहिरवार की संदेहास्पद स्थिति में हुई मौत पर भोपाल की फिजा में असंतोष की लहर दौड़ गई. 21 नवंबर, 2025 को भोपाल कलेक्ट्रेट के बाहर सकल हिंदू समाज ने धरना दिया. दिन भर चले इस प्रदर्शन में लोगों ने मौडल खुशबू अहिरवार को न्याय दिलाने की मांग करते हुए कहा कि खुशबू की मौत के मामले में उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और इस के साथ ही खुशबू के फेमिली वालों को सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए.

संत शिरोमणि गुरु रविदास विश्व महापीठ मध्य प्रदेश एवं सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में भारी संख्या में लोग भोपाल कलेक्ट्रेट के बाहर इकट्ठे हुए और नारेबाजी करते हुए धरनाप्रदर्शन किया. महापीठ के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) सूरज केरो के नेतृत्व में आयोजित इस धरना और प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. उपस्थित लोगों ने इसे लव जिहाद बताते हुए खुशबू अहिरवार की मौत के मामले में जांच कराने और दोषियों पर सख्त काररवाई की मांग की.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खुशबू को बेरहमी से अनैतिक कृत्य कर मौत के घाट उतारा गया है. ऐसे में दोषियों पर कठोर कानूनी काररवाई होनी चाहिए. धरने के बाद भोपाल के एडीएम अंकुर मेश्राम को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया. छोला मंदिर थाने के एसएचओ सरस्वती तिवारी ने कासिम अहमद से लगातार पूछताछ की और जब उस के फ्लैट की तलाशी ली तो जांच के दौरान खुशबू अहिरवार के बैग से एक हिजाब मिला. इस के साथ ही खुशबू का जो आधार कार्ड मिला, उस में उस की तसवीर में वह बुरका पहने नजर आ रही थी.

तलाशी में मिले सामान के आधार पर खुशबू के फेमिली वालों ने आधार कार्ड पर बुरके वाली तसवीर देख कर आशंका जताई कि कहीं खुशबू पर धर्म परिवर्तन का दबाव तो नहीं बनाया गया.

पुलिस अब इस केस के हर एंगल की गहराई से जांच कर रही है. कासिम कुछ दिन पहले ही दुबई से लौटा था, जहां वह कुछ समय के लिए काम के सिलसिले में गया था. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस विदेश यात्रा का कोई लिंक खुशबू की मौत से जुड़ा हुआ है. भोपाल की ग्लैमर दुनिया में खुशबू अहिरवार एक ऐसा नाम था, जिस ने बहुत कम समय में अपनी पहचान बना ली थी. इंस्टाग्राम पर @DiamondGirlx30 नाम से मशहूर खुशबू अपनी चमकदार मुसकान, ब्रांड शूट्स और फैशन वीडियोज के लिए जानी जाती थी.

सोशल मीडिया पर उस की तसवीरें और कैप्शन सपनों और उम्मीदों से भरे होते थे. एक बेहतर कल की चाह में जीने वाली खुशबू की मौत सदा के लिए कहानी बन गई. खुशबू अहिरवार की मौत ने न सिर्फ उस के परिवार को, बल्कि पूरे भोपाल के फैशन सर्कल को झकझोर दिया है. सवाल है कि आखिर खुशबू की मौत कैसे हुई? खुशबू सोशल मीडिया पर ऐक्टिव थी और इंस्टाग्राम पर उस के करीब 12 हजार फालोअर्स थे. वह करोंद भानपुर इलाके में बने पीएम आवास योजना में बने फ्लैट में किराए पर रह रही थी और कुछ लोकल प्रोडक्ट और ज्वैलरी शौप के लिए मौडलिंग का काम कर रही थी. उस ने साल 2025 के जनवरी महीने में एक फेमस रियलिटी शो के लिए औडिशन फार्म भी भरा था.

मंडी बामोरा जैसी छोटी जगह से निकल कर खुशबू ने राजधानी भोपाल में मौडलिंग के जरिए अपनी पहचान बनाई थी. उस का सपना एक कामयाब मौडल और एक्ट्रैस बनने का था. वह अपनी मम्मी से अकसर कहती थी कि एक दिन वह खूब शोहरत और दौलत कमाएगी. पुलिस को खुशबू के फ्लैट का ताला टूटा हुआ मिला. इस कारण जांच कुछ समय के लिए रोकी गई थी. एसीपी आदित्यराज ठाकुर के नेतृत्व में जांच शुरू कर फ्लैट से सबूत जुटा कर स्लाइड सैंपलिंग शुरू कर दी  गई है.

पुलिस  मामले की गहन जांच कर रही है. पुलिस को खुशबू की विसरा रिपोर्ट का इंतजार है, जिस में मौत की असली वजह पता चलेगी. उस का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है. वे कहते हैं कि उन की बेटी को न सिर्फ धोखा दिया गया, बल्कि उस की जान ले ली गई. इस मामले में अभी कई सवाल अनसुलझे हैं— क्या खुशबू की मौत नैचुरल थी या कोई साजिश? कासिम ने उस के साथ वाकई मारपीट की थी? हिजाब और बुरके वाला आधार कार्ड किस ने बनवाया? MP News

कथा लिखे जाने तक मौडल खुशबू की मौत पुलिस के लिए पहेली बनी हुई थी.

 

 

UP News: फर्स्ट लेडी ड्राइवर मर्डर – प्यार में छलावा

UP News: झांसी की 40 वर्षीय अनीता चौधरी ने जब औटोरिक्शा चलाना शुरू किया तो लोगों ने उस की हिम्मत की दाद देते हुए बहुत सम्मान दिया. जिले की इस पहली लेडी औटो ड्राइवर को सिर्फ सामाजिक संगठनों बल्कि पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने भी सम्मानित किया, लेकिन एक दिन उस की हत्या हो जाने पर पुलिस अधिकारी भी भौचक्के रह गए. कौन था अनीता चौधरी का हत्यारा और क्यों की गई उस की हत्या? पढ़ें, लव क्राइम की यह खास स्टोरी.

अनीता चौधरी की उपेक्षा से मुकेश झा बहुत परेशान रहने लगा था. वह समझ नहीं पा रही था कि जिस अनीता ने शादीशुदा होते हुए भी उस के साथ मंदिर में लव मैरिज की थी, उस ने अचानक उस से मुंह क्यों मोड़ लिया. मुकेश ने अनीता को लाख मनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह उस की बात सुनने को राजी ही नहीं थी. क्योंकि अनीता का झुकाव अरुण नाम के युवक की तरफ हो गया था. 4 जनवरी, 2026 का दिन मुकेश झा के लिए खास दिन था. खास इसलिए कि इसी दिन मुकेश ने अनीता के साथ मंदिर में लव मैरिज की थी. शादी की सालगिरह की खुशी में मुकेश बीते दिनों की कड़वाहट भुला कर अनीता से मिलने गया.

उस ने अनीता को शादी की सालगिरह की याद दिला कर साथ रहने को मनाने की कोशिश की, लेकिन अनीता राजी नहीं हुई. उस ने घूमनेफिरने को साथ चलने को कहा तो इस के लिए भी अनीता ने मना कर दिया. इतना ही नहीं, अनीता ने मुकेश को खरीखोटी सुना कर अपमानित भी किया.

अपमान और बेवफाई का घूंट पी कर मुकेश वापस घर आ गया. उसे अनीता की बेवफाई पसंद नहीं आई. वह सोचने लगा कि जिस के लिए उस ने तन मन धन सब न्योछावर कर दिया, अपनी पत्नी व बच्चों से छल किया, जिस को उस ने प्रेमिका की जगह पत्नी का दरजा दिया, उसी ने उस के साथ इतना बड़ा धोखा किया. ऐसी बेवफा को वह कभी माफ नहीं करेगा. उसे उस की बेवफाई की सजा जरूर देगा. वह उस की न हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.

इस के बाद मुकेश झा ने शादी की सालगिरह की रात ही अनीता व उस के प्रेमी अरुण की हत्या का प्लान बनाया. मुकेश अपनी सुरक्षा के लिए अपने साथ तमंचा रखता था. अपने प्लान के मुताबिक उस ने तमंचा लोड किया, फिर रात 9 बजे अपनी कार से अनीता की खोज में घर से निकल गया. अनीता झांसी जिले की पहली औटोरिक्शा महिला ड्राइवर थी. वह अकसर रात में ही औटो चलाती थी. एक दिन मुकेश ने मौका पा कर उस के औटोरिक्शा में ट्रैकर लगा दिया था. अपने फोन से ट्रैकर को कनेक्ट कर वह अनीता पर नजर रखता था.

अनीता 4 जनवरी, 2026 की रात लगभग साढ़े 9 बजे औटो ले कर घर से निकली और रेलवे स्टेशन पहुंची. वहां उस का प्रेमी अरुण मौजूद था. अनीता ने अरुण को औटो में बैठा लिया फिर दोनों बातचीत में लीन हो गए. इधर मुकेश झा तमंचा लोड कर अपनी कार से अनीता का पीछा करने निकला. ट्रैकर के सहारे वह पीछा करते हुए अनीता तक जा पहुंचा. औटो में अरुण भी था. उस समय रात का डेढ़ बज रहा था.

सुकुवां ढुकुवां कालोनी के पास मुकेश ने चलती कार से अनीता पर फायर कर दिया. गोली उस की कनपटी पर लगी. अनीता लहूलुहान हो कर सड़क पर जा गिरी. औटो कुछ दूरी पर जा कर पलट गया. औटो पलटने से मुकेश अनीता के दूसरे प्रेमी अरुण को नहीं मार सका. अरुण छिप कर वहां से भाग गया. मुकेश भी कार ले कर फरार हो गया. 4-5 जनवरी, 2026 की दरम्यानी रात डेढ़ बजे किसी युवक ने झांसी के थाना नवाबाद पुलिस को सूचना दी कि स्टेशन रोड पर सुकुवां ढुकुवां कालोनी के पास सड़क पर एक्सीडेंट हुआ है, औटो पलटा पड़ा है और एक महिला सड़क पर खून से लथपथ पड़ी है. वह जिंदा है या नहीं, यह बताना मुश्किल है.

पहली थी लेडी ड्राइवर

एक्सीडेंट की सूचना पर एसएचओ रवि श्रीवास्तव कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. सर्दी की रात थी, इसलिए वहां सन्नाटा पसरा था. एक महिला सड़क पर मरणासन्न पड़ी थी और चंद कदमों की दूरी पर एक औटो पलटा पड़ा था. एसएचओ रवि श्रीवास्तव ने जब घायल पड़ी महिला को गौर से देखा तो उन के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. उसे वह जानते थे. वह कोई और नहीं, बल्कि झांसी की पहली महिला औटो ड्राइवर अनीता चौधरी थी. वह झांसी की चर्चित महिला थी. उसे पूरा शहर जानता था.

इंसपेक्टर रवि श्रीवास्तव ने एक्सीडेंट की सूचना पुलिस अधिकारियों व अनीता के फेमिली वालों को दी और अनीता को इलाज के लिए मैडिकल कालेज अस्पताल भेजा. वहां डौक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. सुबह एसएसपी बी.बी.जी.टी. एस. मूर्ति, एसपी (सिटी) प्रीति सिंह तथा सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत गौतम घटनास्थल पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पहली नजर में अधिकारियों को लगा कि अनीता चौधरी की मौत एक्सीडेंट में हुई है.

सूचना पा कर मृतका की बहन विनीता चौधरी, पति द्वारका चौधरी व देवर दिलदार सिंह पहले घटनास्थल फिर मोर्चरी पहुंचे. वहां अनीता का शव देख कर सभी परिजन बिलख पड़े. मृतका का बेटा विक्की उस समय पुणे में था. उसे भी सूचना दे दी गई. पुलिस मान रही थी कि अनीता चौधरी की मौत दुर्घटना है, लेकिन अनीता के फेमिली वाले पुलिस की बात से सहमत नहीं थे. उन का कहना था कि अनीता की हत्या की गई है. दुर्घटना में मौत दर्शाने के लिए औटो को पलटा गया है. अनीता के शरीर से ज्वैलरी भी गायब थीं. वह मंगलसूत्र, झुमके, पायल आदि पहने थी. उस का मोबाइल फोन भी गायब था.

इधर सुबह होते ही फस्र्ट लेडी औटो ड्राइवर अनीता चौधरी की मौत की खबर झांसी शहर में जंगल की आग की तरह फैली. जिस ने भी सुना, वही दंग रह गया. अधिकारियों से जानकारी जुटाने मीडियाकर्मी भी उमड़ पड़े. अनीता के फेमिली वालों से भी उन्होंने बातचीत की. उन्होंने मीडियाकर्मियों से साफ कहा कि अनीता की हत्या हुई है. फेमिली वाले पुलिस अधिकारियों से भी मिले और हत्या की आशंका जताई.

अनीता चौधरी की हत्या हुई या फिर एक्सीडेंट में मौत हुई, इस के लिए पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम हेतु मैडिकल कालेज भेजा. 2 डाक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच अनीता चौधरी के शव का पोस्टमार्टम किया और रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. रिपोर्ट की एक प्रति एसपी कार्यालय भी भिजवा दी. एसएचओ रवि श्रीवास्तव ने जब अनीता चौधरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो वह चौंक पड़े. क्योंकि उस की मौत एक्सीडेंट में नहीं हुई थी, बल्कि उस की गोली मार कर हत्या की गई थी. उस की कनपटी (कान के नीचे) पर गोली मारी गई थी. गोली उस के गले में फंस गई थी. रवि श्रीवास्तव ने यह जानकारी आला अधिकारियों को दी तो वे भी सकते में आ गए.

अनीता की मौत के मामले में पुलिस से भारी चूक हुई थी, अत: पुलिस अधिकारियों ने मृतका अनीता चौधरी के फेमिली वालों को बुलवाया और उस की हत्या के संबंध में उन से पूछताछ की.

प्रेमी पर हुआ शक

मृतका की छोटी बहन विनीता चौधरी, पति द्वारका तथा देवर दिलदार ने बताया कि अनीता की हत्या मुकेश झा ने की है, जो प्रेमनगर थाने के ईसाई टोला मोहल्ले में रहता है. दोनों के बीच पैसों के लेनदेन का झगड़ा था. मुकेश अनीता के चरित्र पर भी शक करता था. अनीता की हत्या में उस का बेटा शिवम झा व उस का बहनोई मनोज झा भी शामिल हो सकता है. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों के आदेश पर इंसपेक्टर रवि श्रीवास्तव ने मृतका अनीता के पति द्वारका चौधरी की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मुकेश झा, उस के बेटे शिवम झा तथा बहनोई मनोज झा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. तुरंत काररवाई करते हुए पुलिस ने शिवम झा व मनोज झा को हिरासत में ले लिया, लेकिन मुकेश झा घर से फरार हो गया.

मुकेश झा की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने 3 टीमों का गठन एसपी (सिटी) प्रीति सिंह तथा सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत की अगुवाई में किया. ये टीमें मुहिम में जुट गईं. उस की तलाश में कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. तब एसएसपी ने उस की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया.

कार में मिला तमंचा

6 जनवरी, 2026 की देर रात एसएचओ रवि श्रीवास्तव को खबर मिली कि बरुआ सागर थाना क्षेत्र के बेतवा नदी के नोटघाट पुल पर एक लावारिस कार खड़ी है. खबर पाते ही वह अपनी टीम के साथ पहुंचे और कार की तलाशी ली. कार के अंदर से एक तमंचा तथा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ. मोबाइल फोन स्विच्ड औफ था. जांचपड़ताल से पता चला कि लावारिस खड़ी इग्निस कार हत्यारोपी मुकेश झा की है. एसएचओ ने मुकेश झा की कार बरामद होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. साथ ही आशंका जताई कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी मुकेश ने नदी में छलांग लगा दी है.

इस पर एसपी (सिटी) प्रीति सिंह व सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत गौतम नोटघाट पुल पहुंचे और नदी में जाल डलवा कर गोताखोरों की मदद से मुकेश की खोज कराई. लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी मुकेश का कुछ भी पता न चला. तब पुलिस अधिकारियों को शक हुआ कि शायद मुकेश पुलिस को गुमराह कर भाग गया होगा. अब पुलिस ने मुकेश की तलाश और तेज कर दी. जंगलों में भी उस की तलाश शुरू कर दी. इस के अलावा पुलिस अधिकारियों ने अपने खास खबरियों को भी लगा दिया. लेकिन इस के बावजूद मुकेश हाथ नहीं आया.

9 जनवरी, 2026 की रात 10 बजे एसएचओ रवि श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ भगवंतपुरा के पास चैकिंग कर रहे थे, तभी उन्हें खास मुखबिर से जानकारी मिली कि मुकेश झा को भगवंतपुरा से करगुआं वाले कच्चे रास्ते पर देखा गया है. इस पर नवाबाद थाने के एसएचओ रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने पुलिस टीम के साथ घेराबंदी की. पुलिस को देख कर मुकेश कच्चे रास्ते पर भागा. रोकने पर उस ने पुलिस टीम पर फायर किया. पुलिस की जवाबी फायरिंग में उस के दाएं पैर में गोली लगी. गोली लगते ही वह लडख़ड़ा कर गिर पड़ा. पुलिस ने उसे तब गिरफ्तार कर लिया. घायल मुकेश को इलाज हेतु अस्पताल में भरती कराया गया.

एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा एसपी (सिटी) प्रीति सिंह ने मुकेश झा से अनीता चौधरी की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया, ”मैं अनीता से बेहद प्यार करता था. हम दोनों पिछले 7 सालों से रिलेशनशिप में थे. मंदिर में शादी भी कर चुके थे, लेकिन अनीता अब दूसरे युवक को चाहने लगी थी. इसलिए उस ने 3 महीने पहले ब्रेकअप कर लिया था.’’

उस ने आगे बताया, ”प्यार में धोखा मिला तो मुझे बरदाश्त नहीं हुआ. मैं ने मैरिज एनिवर्सरी की रात 4 जनवरी को कनपटी पर गोली मार कर उस की हत्या कर दी थी. फिर अपनी कार नोटघाट पुल पर खड़ी कर भाग गया था, ताकि पुलिस को लगे कि मैं ने बेतवा नदी में कूद कर जान दे दी है. मैं अनीता के प्रेमी अरुण को भी मारना चाहता था, लेकिन औटो पलटने से वह बच गया.’’

पुलिस अधिकारियों की पूछताछ के बाद उन के आदेश पर एसएचओ रवि प्रकाश ने मुकेश झा को अनीता चौधरी की हत्या के आरोप में विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. लेकिन हिरासत में लिए गए मुकेश के बेटे शिवम झा तथा बहनाई मनोज झा को साक्ष्य के अभाव में गिरफ्तार नहीं किया गया. दोनों ने खुद को अनीता की हत्या में निर्दोष बताया. अनीता चौधरी कौन थी? वह झांसी की प्रथम महिला औटो चालक कैसे बनी? मुकेश झा के संपर्क में कैसे आई? लिवइन रिलेशन में रहने के बावजूद उस का मुकेश से ब्रेकअप क्यों हुआ? मुकेश ने उस की हत्या क्यों की? यह सब जानने के लिए अनीता का अतीत झांकना होगा.

मैनेजर से हुआ प्यार

उत्तर प्रदेश का झांसी शहर वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है. इसी शहर के नवाबाद थाना अंतर्गत एक मोहल्ला है तालपुरा. इसी तालपुरा मोहल्ले की अंबेडकर नगर कालोनी में द्वारका चौधरी सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी अनीता के अलावा एक बेटा विक्की तथा 2 बेटियां थीं. द्वारका झांसी बस स्टौप के पास चाय का ठेला लगाता था. इसी की आमदनी से परिवार का भरणपोषण करता था.

अनीता पढ़ीलिखी खूबसूरत युवती थी, जबकि उस का पति द्वारका चौधरी साधारण रंगरूप का कम पढ़ालिखा इंसान था. अनीता की छोटी बहन विनीता भी द्वारका के छोटे भाई दिलदार के साथ ब्याही थी. वह भी झांसी में ही रहता था. अनीता 3 बच्चों की मां थी. वह चाहती थी कि उस के बच्चे पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़े हों, लेकिन पति द्वारका की कमाई इतनी नहीं थी कि वह बच्चों का पालनपोषण ठीक से कर सके, उन की पढ़ाई का बोझ उठा सके. उस के लिए तो परिवार की दोजून की रोटी जुटाना ही मुश्किल था. अनीता सदैव चिंता में डूबी रहती थी.

अनीता को जब बच्चों की देखभाल की चिंता ज्यादा सताने लगी तो उस ने घर की दहलीज लांघ कर नौकरी करने का मन बनाया. इस बाबत उस ने पति से बात की तो उस ने साफ मना कर दिया. द्वारका ने कहा, ”वह चौहान वंश का है. वह गरीब जरूर है, लेकिन उस के वंश की महिलाएं घर की देहरी नहीं लांघतीं.’’

लेकिन अनीता ने पति की बात अनसुनी कर दी और नौकरी के लिए प्रयास करने लगी. अनीता के मोहल्ले की कुछ महिलाएं ओरछा स्थित एक ग्लास फैक्ट्री में काम करती थीं. अनीता ने उन महिलाओं से बात की, फिर उन के सहयोग से अनीता को भी वहां नौकरी मिल गई. अनीता कांच फैक्ट्री में काम करने लगी तो उस की माली हालत सुधरने लगी. बच्चों का पालनपोषण व पढ़ाई ठीक से होने लगी.

वह जिस ग्लास फैक्ट्री में काम करती थी, उसी में मुकेश झा भी काम करता था. वह मैनेजर था. फैक्ट्री के कर्मचारियों पर निगाह रखना तथा उन का वेतन आदि वितरण करना उस का काम था. फैक्ट्री के अन्य काम भी वही देखता था. कर्मचारी को काम पर रखना या फिर निकालना उसी के हाथ में था. फैक्ट्री पर उस की मजबूत पकड़ थी. मुकेश झा प्रेमनगर थाने के ईसाई टोला मोहल्ले में परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी अंजना के अलावा बेटा शुभम व एक बेटी थी. मुकेश फैक्ट्री में मैनेजर तो था ही, इस के अलावा वह एक होटल का संचालन भी करता था. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. उस के पास एक कार तथा बाइक भी थी. वह ठाठबाट से रहता था. रंगीनमिजाज भी था.

एक रोज मुकेश झा की नजर फैक्ट्री में काम कर रही अनीता पर पड़ी. खूबसूरत अनीता को देख कर उस की धड़कनें बढ़ गईं. कुछ देर तक वह उसे अपलक निहारता रहा, फिर चला गया. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. अनीता को रिझाने के लिए वह उस से नजदीकियां बढ़ाने लगा. अनीता की पारखी नजरें भांप गईं कि मैनेजर बाबू की नजरें उस पर गड़ी हैं, इसलिए वह उस से नजरें चुराने लगी, लेकिन मुकेश झा कहां मानने वाला था. एक रोज मौका पा कर उस ने अनीता को रोक लिया और बोला, ”अनीता, तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हारी खूबसूरती पर मैं फिदा हूं. तुम से दोस्ती करना चाहता हूं.’’

अनीता झिझकते व शरमाते हुए बोली, ”मुकेश बाबू, आप यह क्या कह रहे हैं. मैं 3 बच्चों की मां हूं. भला मुझ से दोस्ती कर के आप को क्या हासिल होगा?’’

”अनीता तुम 3 बच्चों की मां जरूर हो, लेकिन खूबसूरती में किसी नवयौवना से कम नहीं हो. मेरे लिए तो तुम अप्सरा जैसी हो.’’

अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन कर अनीता मन ही मन खुश हुई, लेकिन दिखावे के तौर पर बोली, ”आप मेरी झूठी तारीफ कर रहे हो. भला मैं इतनी खूबसूरत कहां हूं.’’

इस के बाद मुकेश अनीता के पीछे पड़ गया. वह उसे हर तरह से रिझाने की कोशिश करने लगा. उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. धीरेधीरे अनीता भी उस की ओर आकर्षित होने लगी. यही आकर्षण कब प्यार में तब्दील हो गया, अनीता नहीं जान पाई. अनीता और मुकेश का प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच की दूरियां भी कम होने लगीं. अब दोनों साथसाथ घूमनेफिरने लगे. होटल रेस्त्रां में गुलछर्रे उड़ाने लगे. अनीता को अब मुकेश का साथ अच्छा लगने लगा था. मुकेश भी ज्यादा समय अनीता के साथ बिताने लगा. उसे अनीता हूर की परी लगने लगी थी.

मुकेश झा आर्थिक रूप से संपन्न था. शहर में उस का मकान तथा आवागमन के लिए घर में कार व बाइक थी. अनीता की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. उस का पति द्वारका चौधरी ठेले पर चाय बेचता था. वह बीमार भी रहता था. अनीता जितनी खूबसूरत थी, उस का पति साधारण शक्लसूरत का था. अत: अनीता को जब मुकेश का साथ मिला तो वह उस की तरफ खिंचती चली गई. मुकेश के सामने उसे अब अपना पति फीका लगने लगा था. यही हाल मुकेश का भी था. अनीता के मुकाबले अपनी पत्नी फीकी लगने लगी थी.

मंदिर में लव मैरिज

अनीता और मुकेश का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों एक रोज मंदिर में पहुंचे और मुकेश ने उस की मांग में सिंदूर भर कर उसे पत्नी का दरजा दे दिया. इस के बाद दोनों अलग मकान ले कर लिवइन रिलेशन में रहने लगे. मुकेश अनीता की हर सुखसुविधा का ध्यान रखता था. अनीता गहने, कपड़े, पैसों जिस किसी की भी डिमांड करती थी, मुकेश झा उसे पूरा करता था. अनीता की मांग में सिंदूर भले ही पति द्वारका का सजा था, लेकिन वह पतिधर्म प्रेमी मुकेश के साथ निभाती थी. हंसीखुशी से उन का समय बीत रहा था.

अनीता ने मुकेश को दिल मेें बसाया तो उसे अपना बीमार पति द्वारका फीका लगने लगा. वह उस की उपेक्षा करने लगी. उस ने उस की परवाह करना छोड़ दी. अनीता और मुकेश अब साथसाथ रहना चाहते थे. अत: 4 जनवरी, 2019 को मुकेश ने मंदिर में जा कर अनीता की मांग में सिंदूर भर कर उस के साथ लव मैरिज कर ली.

इस के बाद अनीता और मुकेश ने अपनेअपने घरों से दूरियां बना लीं और अलग मकान में लिवइन रिलेशन में रहने लगे. दोनों के फेमिली वालों को विवाह रचाने की जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध जताया, लेकिन विरोध का उन पर असर नहीं हुआ. 19 फरवरी, 2020 को अनीता और मुकेश के बीच फैक्ट्री में किसी बात को ले कर बहस हो गई. गुस्से में मुकेश ने अनीता से कह दिया कि कल से फैक्ट्री मत आना. मुकेश की यह बात अनीता के दिल में कांटे की तरह चुभ गई, अत: उस ने फैक्ट्री जाना बंद कर दिया.

हालांकि मुकेश ने अनीता को मनाने की कोशिश की, लेकिन बात दिल को चुभ गई थी, इसलिए अनीता फैक्ट्री नहीं गई. मार्च 2020 के पहले हफ्ते में अनीता नौकरी की तलाश में मुंबई चली गई. वहां गए उसे 10 दिन ही बीते थे कि कोरोना की वजह से लौकडाउन की चर्चा होने लगी. वहां उसे नौकरी भी नहीं मिली थी, इसलिए वह घर लौट आई. मुंबई से लौटने के बाद अनीता के घर की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई.

अनीता कर्मठ, लगनशील और खुद्ïदार महिला थी. काफी सोचविचार कर उस ने फाइनैंस पर औटो ले कर चलाने का प्लान बनाया, लेकिन उस के सामने पहला प्रश्न यह था कि पैसा कौन देगा? इस के लिए उस ने कई बैंकों से संपर्क साधा, लेकिन कोई बैंक बिना गारंटी उसे लोन देने को तैयार न था. काफी प्रयास के बाद एक निजी बैंक ने लोन देने की हामी भरी. जब बैंक अधिकारी जांचपड़ताल करने घर आए तो अनीता के पति द्वारका ने अपना आधार और बैंक पासबुक की कौपी देने से इंकार कर दिया. क्योंकि वह नहीं चाहता था कि अनीता महिला हो कर औटो चलाए.

वैसे भी झांसी में कोई महिला औटो चालक नहीं थी, लेकिन विरोध के बावजूद अनीता ने हिम्मत नहीं हारी. इस बुरे वक्त में अनीता ने मुकेश झा से मदद मांगी. मुकेश की मदद से उस ने बैंक के कागज पूरे किए और लोन ले लिया. 18 फरवरी, 2021 को अनीता ने फाइनैंस करा कर नई औटो खरीदी और झांसी की सड़कों पर उसे चलाने लगी. इस तरह अनीता चौधरी झांसी की फस्र्ट लेडी औटो ड्राइवर बन गई. उस के जज्बे की हर तरफ तारीफ होने लगी. वह अखबारों की सुर्खियों में भी छा गई. कई सामाजिक संगठनों ने उस के जज्बे को सलाम करते हुए उसे सम्मानित भी किया.

पुलिस विभाग में भी वह चर्चा का विषय बन गई. उस ने अपने औटो के आगेपीछे पोस्टर चस्पा किए थे, जिन पर लिखा था— जनपद झांसी पुलिस, झांसी की पहली महिला औटो ड्राइवर. पुरुष और महिला एक समान, जनजन का हो यही आह्वान. पुलिस अफसरों के फोन नंबर भी लिखे थे. अनीता का हौसला बढ़ाने के लिए तत्कालीन डीआईजी (झांसी रेंज) जोगेंद्र सिंह ने भी उस के औटो पर सफर किया था और 13 दिसंबर, 2021 को उस के कार्य की सराहना करते हुए उसे प्रशस्ति पत्र दिया था.

इस तरह समय बीतता रहा और अनीता औटो चला कर पैसे कमाती रही. साथ ही सुर्खियों में भी छाई रही. अनीता और मुकेश साथ रहते थे. मुकेश अनीता को प्यार करता था, इसलिए वह उस की हर डिमांड पूरी करता था. उस ने अनीता को गहनों से लाद दिया था. अनीता अकसर औटो ले कर झांसी रेलवे स्टेशन के पास खड़ी होती थी. यहां जुलाई 2025 में उस की दोस्ती अरुण नाम के युवक से हुई. अरुण स्टेशन के पास ही एक ट्रेवल एजेंसी में काम करता था. अनीता और अरुण एकदूसरे को पसंद करने लगे. दोनों घंटों मोबाइल पर रसभरी बातें करते और हंसीठिठोली करते.

प्यार में आया ट्विस्ट

अनीता की अरुण से नजदीकियां बढ़ीं तो वह मुकेश की उपेक्षा करने लगी. उस का फोन रिसीव करना भी बंद कर दिया. लेकिन इधर कुछ समय से अनीता के व्यवहार में रूखापन आ गया था. वह उस की उपेक्षा भी करने लगी थी. उस की जुबान में कड़वाहट भी आ गई थी. वह पहले जैसा न तो बरताव करती थी और न ही हंसतीबोलती थी. वह साथ घूमने को चलने के लिए कहता तो साफ मना कर देती. कोई उपहार लाता तो उसे लेने से इंकार कर देती. मुकेश की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अनीता के स्वभाव मेें यह परिवर्तन कैसे और क्यों आया.

अनीता के स्वभाव को ले कर मुकेश की उलझन बढ़ी तो उस ने अनीता की जासूसी की. तब उसे पता चला कि अनीता अब किसी अरुण नाम के युवक से प्यार करने लगी है. इसी कारण वह उस की उपेक्षा करती है.

एक रोज मुकेश ने अनीता के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ”अनीता, यह अरुण कौन है? इस से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’

अरुण का नाम सुनते ही अनीता घबरा गई. वह जान गई कि मुकेश को उस के और अरुण की दोस्ती का पता चल गया है. फिर भी वह संभलते हुए बोली, ”अरुण एक अच्छा इंसान है. हम दोनों के बीच दोस्ती है. कभीकभी उस से बतिया लेती हूं.’’

”तुम दोनों के बीच सिर्फ दोस्ती है या फिर नाजायज रिश्ता भी है?’’ मुकेश ने कटाक्ष किया.

मुकेश के इस कटाक्ष से अनीता भड़क गई और बोली, ”तुम मुझ पर लांछन लगा कर अपनी हदें पार कर रहे हो. मैं यह सब कतई बरदाश्त नहीं करूंगी.’’

उस रोज अरुण को ले कर अनीता और मुकेश के बीच खूब कहासुनी हुई. इस के बाद तो आए दिन विवाद होने लगा. उन दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस के सामने जा पहुंचा. अरुण को ले कर अकसर दोनों में झगड़ा होने लगा. अक्तूबर, 2025 में एक रोज मुकेश ने अनीता के साथ रेलवे स्टेशन के बाहर अभद्रता व मारपीट की तो औटो चालकों का गुस्सा फूट पड़ा. चालकों ने मुकेश की पिटाई कर दी. अनीता ने भी थाना नवाबाद में मुकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस के बाद मुकेश को थाने लाया गया. थाने में पंचायत शुरू हुई. दोनों के फेमिली वाले भी थाने पहुंचे.

थाने में मुकेश पुलिस व अपने फेमिली वालों के सामने बोला कि वह अनीता के साथ ही रहेगा, लेकिन जब अनीता से पूछा गया तो उस ने कहा कि वह मुकेश के साथ नहीं रहना चाहती. यह सुनते ही मुकेश बौखला गया और कहने लगा कि अब या तो तुम रहोगी या हम. धमकी देने पर पुलिस ने उसे काफी फटकार लगाई. इस घटना के बाद अनीता ने मुकेश से ब्रेकअप कर लिया और उसे छोड़ कर पति के साथ रहने लगी. अनीता अब दिन में घर संभालती और रात को औटो चलाती. रात में अकसर अरुण भी उस के साथ रहता. सुरक्षा की दृष्टि से वह अरुण को साथ रखती थी.

मुकेश किसी भी कीमत पर अनीता को खोना नहीं चाहता था, अत: अनीता चौधरी की जिंदगी में जब अरुण आया तो वह बौखला गया. वह दोनों पर नजर रखने लगा. मुकेश ने गुपचुप तरीके से अनीता के औटो में ट्रैकर लगा दिया. मोबाइल के जरिए वह निगाह रखता था. ट्रैकर औन होने पर उस से होने वाली बात सुनता था. अनीता व अरुण में क्या बातचीत होती, उसे सब पता चल जाता था. मुकेश अब जान गया था कि अनीता और अरुण के बीच गहरे प्रेम संबंध हैं.

4 जनवरी, 2026 की शाम मुकेश अनीता के पास गया. उस ने उसे शादी की सालगिरह की याद दिलाई और घर वापस चलने को कहा, लेकिन अनीता ने साफ मना करते हुए मुकेश की बेइज्जती की. तब उस ने उसी रात अनीता की गोली मार कर हत्या कर दी, लेकिन उस का दूसरा प्रेमी अरुण बच गया. आरोपी मुकेश झा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 10 जनवरी, 2026 को उसे झांसी की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया. UP News

 

 

Love Story: प्रेमी को समर्पण में जल्दबाजी नहीं

Love Story: पति मनमुताबिक न निकला तो 37 वर्षीय आंगनवाड़ी सुपरवाइजर मुकेश कुमारी जाट ने उसे तलाक दे दिया था. फिर वह पत्नी से परेशान रहने वाले 38 वर्षीय शादीशुदा सरकारी टीचर मानाराम के संपर्क में आई और दोनों के बीच नजदीकी संबंध बन गए. वह उस पर शादी का दबाव बनाने लगी, लेकिन मानाराम पत्नी से तलाक के बाद शादी करने को कहता. यह विवाद एक दिन इतना खतरनाक हो गया कि…

आंगनवाड़ी सुपरवाइजर प्रेमिका मुकेश कुमारी की लगातार शादी करने की जिद से सरकारी टीचर मानाराम परेशान हो गया. उस ने प्रेमिका को लाख समझाया कि वह पत्नी को तलाक देने के बाद उस से शादी अवश्य करेगा, लेकिन वह उस की बात किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं थी. उस की जिद से परेशान हो कर मानाराम प्रेमिका से छुटकारा पाने के उपाय खोजने लगा. उस रोज 10 सितंबर, 2025 का दिन था. टीचर मानाराम ड्यूटी से बाड़मेर स्थित शिवनगर अपने घर लौट आया था. वह आराम कर रहा था. तभी कालबेल बजी.

मानाराम ने सोचा कि कोई पड़ोसी होगा. उस ने मुख्य गेट खोला तो सामने मुकेश कुमारी को देख वह आश्चर्यचकित रह गया. उसे घूरते देख मुकेश कुमारी बोली, ”आठवां अजूबा तो हूं नहीं, जो मुझे घूरघूर कर देख रहे हो. अंदर आने को नहीं कहोगे.’’

तब मानाराम साइड में हो गया और बोला, ”बगैर कोई जानकारी दिए आ गई, मानना पड़ेगा. आओ, अंदर आओ.’’

दोनों घर में आ गए. मानाराम चाय बना कर ले आया. दोनों चाय पीते हुए बतियाने लगे. मुकेश कुमारी ताना मारते हुए बोली, ”मुझ से मन भर गया है क्या, जो मेरे नंबर भी ब्लौक कर रखे हैं. मगर मैं भी पीछा छोडऩे वाली नहीं हूं. मैं ने तुम पर विश्वास कर तनमन तुम्हें समर्पित किया. तुम ने शादी करने का वादा किया था, अब तुम मुकर रहे हो. बहाने कर रहे हो. मगर बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, जितनी जल्द हो मुझ से शादी करो.’’

”मैं ने शादी करने से मना थोड़ी किया है. मेरा तो यह कहना है कि मेरा अपनी पत्नी से तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है. उस से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. जब तक पत्नी से तलाक नहीं हो जाता, तब तक मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अपना पक्ष रखते हुए मानाराम ने कहा.

इस पर गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी तुनकते हुए बोली, ”तुम्हारा पत्नी से तलाक 10 साल तक नहीं होगा. कोर्ट में केस चलता रहेगा तो ऐसे में मैं इंतजार थोड़े करूंगी. तुम्हारी बातों में आ कर अपना तन भी तुम्हें सौंप चुकी. अब मैं किसी अन्य व्यक्ति से शादी भी तो नहीं कर सकती. तुम अपने फेमिली वालों से मिलाओ मुझे. मैं उन्हें सारी बात बता कर शादी के लिए राजी कर लूंगी.’’

”मैं शादी के लिए मना नहीं कर रहा, जो तुम्हें मेरे परिवार से मिलना पड़े. वकील ने कहा है कि थोड़े दिनों में तलाक हो जाएगा. तब तक तुम्हें सब्र रखना होगा. पत्नी से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. तुम पढ़ीलिखी समझदार हो, फिर भी बेवजह शादी के लिए बहस कर कर रही हो. ठंडे दिमाग से सोचो, तब समझ में आ जाएगा कि मैं सही कह रहा हूं.’’ मानाराम ने उसे समझाया.

मुकेश कुमारी भी जानती थी कि जब तक मानाराम का पत्नी के साथ तलाक नहीं होगा, तब तक उन की शादी मान्य नहीं होगी. फिर भी वह उस पर शादी का दबाव डाल रही थी, ताकि वह उसे भूले नहीं. मुकेश कुमारी जिला झुंझुनंू की सूरजगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर खड़ेला, जिला सीकर में कार्यरत थी. मुकेश कुमारी तलाकशुदा थी. उस ने 2019 में पति से तलाक ले लिया था. तलाक के बाद खड़ेला में रह कर अपनी नौकरी कर रही थी. मुकेश कुमारी की शादी उस की इच्छा से नहीं हुई थी. इस कारण वह पति को पसंद नहीं करती थी. बस, इसी कारण उस ने पति से तलाक ले लिया था.

मुकेश कुमारी 2019 से 2024 तक अकेली रही तो उसे जीवनसाथी की जरूरत महसूस हुई. तब उस ने अगस्त 2024 में अखबार में विज्ञापन दिया कि तलाकशुदा हूं और आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हूं. तलाकशुदा सरकारी नौकरी वाले से शादी करना चाहती हूं. वैवाहिक विज्ञापन में मुकेश कुमारी ने अपने मोबाइल नंबर दे रखे थे. बाड़मेर जिले के चवा गांव निवासी मानाराम जो पेशे से सरकारी टीचर है, उस ने अखबार में विज्ञापन देख कर मुकेश कुमारी से संपर्क साधा.

उस ने मुकेश कुमारी से अक्तूबर, 2024 में मुलाकात की. दोनों ने एकदूसरे से बात की. मानाराम भी पहले से शादीशुदा था, उस के 2 बेटियां थीं, मगर पत्नी टीपू देवी से बनती नहीं थी. पत्नी उसे छोड़ कर मायके शिवकर जा कर रह रही थी. ऐसे में मानाराम ने पत्नी से तलाक का कोर्ट में मामला दाखिल कर दिया था. दोनों ही तलाक लेना चाहते थे. मानाराम अपनी पत्नी से 2013 से ही अलग रह रहा था. वह भी चाहता था कि उस की किसी तलाकशुदा हमउम्र महिला से शादी हो जाए तो उस की दोबारा गृहस्थी बस जाए.

ऐसे में मुकेश कुमारी का वैवाहिक विज्ञापन अखबार में देखा तो वह अपने को रोक नहीं पाया और मुकेश कुमारी से संपर्क साध कर उस से जा मिला. मानाराम जहां 38 साल का था, वहीं मुकेश कुमारी उस से एक साल छोटी थी. दोनों सरकारी नौकरी में थे. वह देखने में खूबसूरत थी. मुकेश कुमारी को मानाराम पसंद आ गया. मानाराम ने उसी समय बता दिया था कि पत्नी से तलाक के बाद ही वह उस से शादी करेगा. उस की बात से वह भी सहमत थी. दोनों ने एकदूसरे के फोन नंबर लिए और बातचीत करने लगे. सोशल मीडिया पर चैट करने लगे. आंगनवाड़ी में छुट्टी होती, तब मुकेश कुमारी खड़ेला से बाड़मेर चली जाती थी. मानाराम के परिवार के लोग चवा गांव में रहते थे.

मानाराम बाड़मेर शहर स्थित शिवनगर कालोनी में अपने घर में अकेला रहता था. वह बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में टीचर था. वह बाड़मेर से जसाई गांव रोजाना आनाजाना किया करता था. मुकेश कुमारी जब भी बाड़मेर मानाराम से मिलने आती थी, वह शिवनगर स्थित उस के घर पर उस के साथ में ही रुकती थी. दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे और शादी करने वाले थे. ऐसे में उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे. कभी मानाराम बाड़मेर से 600 किलोमीटर दूर खड़ेला, सीकर प्रेमिका से मिलने चला जाता तो कभीकभार मुकेश कुमारी बाड़मेर चली जाती थी.

दोनों के बीच बिना शादी किए संबंध बन गए तो थोड़े वक्त बाद वे खुल कर मिलने लगे और मौजमस्ती करने लगे. उन के लव अफेयर को 6 माह ही बीते थे कि मानाराम को प्रेमिका बासी लगने लगी. उस का मन भर गया. इस के बावजूद भी वह ‘शादी करूंगा’, कह कर मुकेश कुमारी के जिस्म से खेलता रहा. करीब 4 महीने पहले मुकेश कुमारी ने जब मानाराम पर शादी का दबाव डाला तो उस ने वही राग अलापा कि पत्नी से तलाक के बाद ही शादी करेगा. ऐसे में मुकेश कुमारी उस पर बिफर गई. उस ने धमकी दी कि अगर उस ने उस से शादी नहीं की तो अंजाम ठीक नहीं होगा.

मानाराम जानता था कि अगर मुकेश कुमारी ने उस पर रेप या यौन शोषण का केस कर दिया तो उस की सामाजिक प्रतिष्ठा एवं नौकरी चली जाएगी. तब उस ने उस से किनारा करना शुरू कर दिया. मगर मुकेश कुमारी उस का पीछा छोडऩे वाली नहीं थी. मानाराम ने उस के फोन नंबर ब्लौक कर दिए तो वह दूसरे नंबर से फोन कर उसे धमकाती थी. उस का कहना था कि उस ने उस पर विश्वास कर के उसे जिस्म सौंपा था. मेरे तन को भोग कर तुम मुझे छोड़ दो, यह मैं होने नहीं दूंगी. लिहाजा दोनों के बीच दूरियां बढऩे लगी थीं.

इस के बावजूद मुकेश कुमारी उस के पीछे पड़ी थी. उस ने एक ही रट लगा रखी थी कि मुझ से शादी करो. मानाराम तलाक होने के बाद शादी करने की बात कहता था. मानाराम के रूखे व्यवहार से मुकेश कुमारी को लगने लगा था कि वह शादी को जानबूझ कर टाल रहा है. उसे लग रहा था कि वह उस से शादी नहीं करेगा. मगर मुकेश कुमारी ने भी ठान लिया था कि वह मानाराम से शादी कर के ही दम लेगी. मानाराम की मजबूरी यह थी कि वह पत्नी से तलाक लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता था.

मुकेश कुमारी की जिद से मानाराम परेशान हो गया था. बस, इसी कारण उस ने कन्नी काटनी शुरू की थी. यह मुकेश कुमारी को अखर रहा था. उस ने इस बार निश्चय किया कि वह मानाराम के फेमिली वालों से मिल कर अपने और मानाराम के संबंधों के बारे में बता कर शादी की बात पक्की कर के ही लौटेगी. 10 सितंबर को मुकेश कुमारी खंडेला, सीकर से बाड़मेर पहुंची और प्रेमी मानाराम से मिली. उस से शादी की बात की. वह 4 दिन बाड़मेर में प्रेमी के साथ रही. दोनों में संबंध भी बने.

14 सितंबर, 2025 की शाम को मुकेश कुमारी अपनी आल्टो कार ले कर बाड़मेर से मानाराम के गांव चवा पहुंच गई. उस ने मानाराम से कहा कि वह उसे अपने फेमिली वालों से मिलाए, उन से उसे शादी की बात पक्की करनी है. मानाराम ने फेमिली वालों से मिलाने से मना कर दिया तो मुकेश कुमारी गुस्से में लालपीली पुलिस चौकी चवा पहुंची. उस ने गांव चवा के रहने वाले प्रेमी टीचर मानाराम निवासी पर आरोप लगाया कि उस ने उसे शादी का झांसा दिया है. अब अपने परिवार से मुझे मिला नहीं रहा है. इस पर चौकी इंचार्ज ने फोन कर मानाराम को पुलिस चौकी बुलाया.

मानाराम पुलिस चौकी पहुंचा. उस ने पुलिस से कहा, ”मेरा तलाक का प्रोसेस चल रहा है. अभी परिवार से नहीं मिला सकता हूं. पत्नी से तलाक के बाद मैं मुकेश कुमारी से शादी कर लूंगा.’’

चौकी इंचार्ज एवं अन्य ने भी मानाराम की बात को सही ठहराया. ऐसे में मुकेश कुमारी बिना कोई परिवाद या शिकायत दर्ज करवाए पुलिस चौकी से मानाराम के साथ निकल गई. दोनों गांव चवा से शिवनगर, बाड़मेर मानाराम के घर पर आ गए. मुकेश कुमारी बिना बताए मानाराम के गांव चवा भी गई थी. वह पुलिस चौकी भी शादी का दबाव डलवाने पहुंच गई थी. इस बात से मानाराम खफा था. उस ने उसे घर पर ला कर समझाया, मगर मुकेश कुमारी इस बात से नाराज थी कि उस ने अपने फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलाया. उस की सोच थी कि मानाराम उस से शादी नहीं करना चाहता.

इस पर मानाराम ने कहा, ”तुम मुझे बिना बताए मेरे गांव चवा क्यों गई थी? मैं शादी से मना करता तो गांव जा कर फेमिली वालों से मिलती, मगर तुम पर तो जैसे भूत सवार है. पढ़ीलिखी हो कर भी मेरी मजबूरी नहीं समझ रही. कैसी महिला हो?’’

”मैं सब समझती हूं, मगर फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलने दिया. तुम्हारे दिल में जरूर कोई खोट है.’’ प्रेमिका ने जवाब में कहा.

तब मानाराम ने उसे समझाबुझा कर शांत किया. रात साथ में बिताई. अगले रोज 15 सितंबर, 2025 को अलसुबह मानाराम का मुकेश कुमारी से फिर शादी को ले कर झगड़ा हुआ. झगड़ा इतना बढ़ गया कि मानाराम ने घर में रखा लोहे का मोटा सरिया उठा कर मुकेश कुमारी के सिर पर दनादन कई वार कर दिए. मुकेश कुमारी के सिर से खून का फव्वारा बह निकला. थोड़ी देर तड़प कर वह मर गई. मुकेश कुमारी की लाश देख कर वह डर गया.

उसे जेल की सींखचे नजर आने लगीं. उस ने प्लान बनाया कि अब शव को ठिकाने लगा दूं, ताकि जेल जाने से बच जाए. उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी का शव उठा कर घर के बाहर खड़ी मृतका की आल्टो कार में ड्राइविंग सीट पर रखा और गाड़ी का दरवाजा बंद कर गाड़ी को धक्का मार कर सड़क से नीचे उतार दी. मानाराम को कार चलानी नहीं आती थी, इस कारण वह शव को दूर नहीं ले जा सका. गाड़ी को सड़क से उतार कर वह वापस घर पर आया. उस का शरीर डर के मारे थरथर कांप रहा था. उसे कुछ भी सूझ नहीं रहा था. तब उसे खयाल आया कि वकील से सलाह लूं.

सुबह पौने 7 बजे वकील को मानाराम ने कौल कर कहा, ”वकील साहब, मेरे हाथ एक महिला का मर्डर हो गया है. अब आप ही राय दें कि क्या करूं.’’

सुन कर वकील ने कहा, ”पुलिस के सामने सरेंडर कर दो. मैं पुलिस को घटना की खबर देता हूं.’’

कहने के साथ वकील ने सोमवार, 15 सितंबर की सुबह साढ़े 7 बजे फोन द्वारा थाना रीको बाड़मेर में अपने परिचय के साथ घटना की खबर देते हुए कहा, ”सर, शिवनगर कालोनी में मुकेश कुमारी नामक महिला का मर्डर हुआ है. मृतका का शव आल्टो कार में पड़ा है. यह हत्या सरकारी टीचर मानाराम जाट ने की है. आप जल्दी घटनास्थल पर पहुंच जाइए.’’

सुबहसवेरे महिला की हत्या की खबर पा कर एसएचओ मनोज कुमार सामरिया पुलिस बल के साथ 15 मिनट में घटनास्थल पर जा पहुंचे. सड़क पर आल्टो कार में ड्राइवर की सीट पर एक महिला का खून सना शव पड़ा था. घटनास्थल पर मृतका का मोबाइल भी था. एसएचओ मनोज कुमार सामरिया ने घटना की खबर उच्चाधिकारियों को दी. खबर पा कर सीओ (सिटी) रमेश कुमार, एएसपी जसाराम बोस, एसपी नरेंद्र सिंह मीणा थोड़ी देर में घटनास्थल पर पहुंचे. एफएसएल एवं एमओबी टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं और सुबूत इकट्ठा किए. पुलिस ने घटनास्थल का मौकामुआयना किया.

शव देख कर लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के शव को ड्राइवर की सीट पर रखा गया था. पुलिस को गाड़ी के पास खून के धब्बे मिले. तब पुलिस पास में मानाराम के घर गई. घर में भी खून दिखाई दिया. पुलिस को समझते देर न लगी कि हत्या घर में की गई थी, बाद में शव को गाड़ी में ले जा कर रखा गया था. गाड़ी को सड़क से नीचे उतारा गया था, ताकि मामला एक्सीडेंट का लगे. पुलिस ने मौके की काररवाई निबटा कर शव बाड़मेर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया.

मृतका के बारे में सामने आया कि उस का नाम मुकेश कुमारी था. वह झुंझुनंू जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह तलाकशुदा थी और खड़ेला जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थी. वह अपने प्रेमी टीचर मानाराम से मिलने बाड़मेर 10 सितंबर को आल्टो कार ले कर आई थी. पता चला कि वह प्रेमी टीचर पर शादी का दबाव बना रही थी. पुलिस ने झुंझुनंू एसपी औफिस में संपर्क कर घटना की खबर मृतका के परिजनों को दी.

मुकेश कुमारी की हत्या की खबर मिलते ही काशनी गांव में मातम छा गया. मृतका के घर में रुदन शुरू हो गया. मृतका के भाई अन्य परिजनों के साथ बाड़मेर के लिए रवाना हो गए. 600 किलोमीटर दूर बाड़मेर था तो उन्हें आने में समय लगना था. रीको थाना पुलिस ने आरोपी टीचर मानाराम को 15 सितंबर, 2025 को डिटेन कर लिया था. उस ने पुलिस पूछताछ में गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी की हत्या करने का गुनाह कुबूल कर लिया था.

16 सितंबर, 2025 को मृतका के फेमिली वाले बाड़मेर पहुंचे और एसएचओ मनोज कुमार से मिले. एसएचओ उन्हें घटनास्थल पर ले गए और मौका दिखाया. मृतका का शव मोर्चरी में देख कर उस के भाई धर्मपाल एवं सुरेंद्र रो पड़े. 16 सितंबर, 2025 को धर्मपाल निवासी गांव काशनी, थाना सूरजगढ़, जिला झुंझुनू ने अपनी छोटी बहन मुकेश कुमारी जाट की हत्या की रिपोर्ट टीचर मानाराम जाट निवासी चवा के खिलाफ दर्ज कराई. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी मानाराम को गिरफ्तार कर लिया. मृतका के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया. पोस्टमार्टम के बाद शव उस के फेमिली वालों को सौंप दिया गया. वह उसे गांव काशनी ले गए और वहां अंतिम संस्कार कर दिया.

आरोपी टीचर मानाराम को 17 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश कर पुलिस रिमांड पर मांगा. मजिस्ट्रैट ने आरोपी को 2 दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया. रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने आरोपी से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

राजस्थान के बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर एक गांव चवा आता है. सदर थाना बाड़मेर के अंतर्गत आने वाले इस गांव में किरताराम जाट अपने परिवार के साथ रहते हैं. खेतीकिसानी कर के किरताराम ने अपने बेटे मानाराम को खूब पढ़ाया. इसी का परिणाम था कि पढ़लिख कर वह टीचर बन गया. सरकारी टीचर की नौकरी मिली तो शादी के लिए रिश्ते आने लगे. 2008 में मानाराम की शादी बाड़मेर जिले के शिवकर गांव की टीकू देवी के साथ कर दी गई. शादी के बाद सुहागरात पर मानाराम ने नई दुलहन टीकू को देखा तो उसे गहरा आघात लगा. जैसी सुंदर पत्नी उसे चाहिए थी, वैसी टीकू नहीं थी.

मानाराम मन मसोस कर रह गया. टीकू से वह शादी तो कर चुका था, ऐसे में उसे निभाना तो था ही. मानाराम को टीकू से 2 बेटियां हुईं, जो इस समय 16 साल एवं 14 साल की हैं. बेटियों के जन्म के बाद पतिपत्नी में मनमुटाव बढ़ गया. मानाराम अपनी पत्नी को ज्यादा महत्त्व नहीं देता था. वह बातबात पर उसे ताने मारता था. उस के रंगरूप को ले कर तंज कसता था. दोनों में मनमुटाव इतना बढ़ा कि 2013 में टीकू अपने मायके शिवकर गांव जा बैठी. मानाराम ने पत्नी की तरफ मुड़ कर नहीं देखा. टीकू भी पति को मन से निकाल चुकी थी. सामाजिक पंचायत भी हुई, मगर दोनों के दिल नहीं मिले. दोनों ने अलग रहना ठीक समझा.

टीकू मायके में रह रही थी. मानाराम की इच्छा थी कि वह दोबारा शादी कर ले. मगर पहली पत्नी टीकू से जब तक तलाक नहीं होता, तब तक शादी करना संभव नहीं था. मानाराम ने फेमिली कोर्ट में टीकू से तलाक का केस दायर कर दिया. तलाक का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. मानाराम की ड्यूटी बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में थी. वह बाड़मेर से जसाई आनाजाना करता था.

झुंझुनूं जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत एक गांव काशनी आता है. काशनी गांव में लिखमाराम जाट अपने परिवार के साथ रहता था. वह सेना से रिटायर थे, उन के 8 बच्चे थे. मुकेश कुमारी 8 भाईबहनों में सातवें नंबर की थी. सभी भाईबहनों मे मुकेश कुमारी होशियार थी. काशनी गांव से उस ने आठवीं तक पढ़ाई की. इस के बाद उसे पढऩे के लिए शहर भेज दिया. पढ़ाई के दौरान ही मुकेश कुमारी का चयन राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद पर हो गया. बेटी की नौकरी लगने से पेरेंट्स बहुत खुश थे. उन्होंने उस के योग्य घरवर की खोज शुरू की.

मुकेश कुमारी की 9 जुलाई, 2011 को पिलानी थाना क्षेत्र के लिखवा गांव निवासी विकास जाट से शादी कर दी गई. शादी के बाद मुकेश कुमारी ससुराल गई तो उसे ससुराल पसंद नहीं आई. उसे पति विकास भी पसंद नहीं आया. बेटी की शादी के 3 साल बाद 2014 में हार्ट अटैक से लिखमाराम की मौत हो गई. जैसा जीवनसाथी मुकेश को चाहिए था, वैसा विकास नहीं था. मुकेश कुमारी अपनी ड्यूटी पर रहती थी. वह ससुराल नहीं जाती थी. विकास शादी कर के भी कुंवारा था. वह पत्नी को घर ले जाना चाहता था, मगर वह राजी नहीं थी.

एक दिन मुकेश ने पति विकास से कहा, ”मैं ने परिवार वालों का मन रखने के लिए तुम से शादी की थी. मगर अब मैं तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहती.’’

विकास ने उसे समझाया. मगर वह नहीं मानी. मुकेश कुमारी का पुलिस की नौकरी से मन भर गया था. उस ने आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर पद के लिए आवेदन किया. वहां उस का चयन हो गया, तब उस ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और खड़ेला, जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगी. मुकेश कुमारी ने पति विकास से 2019 में तलाक ले लिया. अब वह खड़ेला में रहने लगी. पति से तलाक के बाद मुकेश कुमारी को एक अच्छे जीवनसाथी की जरूरत महसूस होने लगी थी. ऐसे में वर्ष 2024 के अगस्त महीने में उस ने अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया कि तलाकशुदा महिला को तलाकशुदा सरकारी नौकरी करने वाला हमउम्र जीवनसाथी चाहिए.

इस वैवाहिक विज्ञापन को टीचर मानाराम जाट ने देखा. उस ने दिए गए फोन नंबर पर मुकेश कुमारी से संपर्क किया. मुकेश कुमारी के पास कई लोगों के फोन आए थे, मगर उसे पसंद आया मानाराम. वह सरकारी टीचर था. दोनों की उम्र भी बराबर थी. इस तरह दोनों बेहद करीब आ गए. मानाराम ने गत 3-4 महीने से मुकेश कुमारी को साइड में करना शुरू कर दिया था. मगर मुकेश कुमारी उसे किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी. 15 सितंबर, 2025 की अलसुबह दोनों में शादी की बात पर फिर से झगड़ा हुआ. मानाराम को प्रेमिका पर इतना गुस्सा आया कि उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी पर मोटे सरिए से कई वार कर हत्या कर दी.

रिमांड अवधि पूरी होने पर 19 सितंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपी मानाराम को फिर से कोर्ट में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया और थाने ला कर पूछताछ की. आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का सरिया बरामद कर लिया. आरोपी की निशानदेही पर पर खून से सनी निवार एवं बिस्तर के जले टुकड़े भी बरामद किए. पुलिस ने 20 सितंबर, 2025 को उसे न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश किया, जहां से उसे बाड़मेर जेल भेजने का आदेश दिया गया. Love Story

 

 

Crime Story: लव सैक्स और मर्डर

Crime Story: फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई कर चुकी अमृता चौधरी यूपीएससी की पढ़ाई कर रहे रामकेश मीणा के प्यार में इतना डूब चुकी थी कि वह उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान रामकेश ने उस के आपत्तिजनक स्थिति के वीडियो बना लिए थे. इन दोनों के बीच वीडियो डिलीट करने का मुद्दा ऐसा बवाल बना कि…

सुबह का वक्त था. मुरादाबाद की एक गैस एजेंसी पर गैस सिलेंडर लेने वालों की अच्छीखासी भीड़ लगी हुई थी. सुमित कश्यप ग्राहकों की गैस कौपी में एंट्री कर के अपने नौकर को इशारे से कह रहा था, ”इन्हें गैस का सिलेंडर दे दो.’’ नौकर सिलेंडर देने का काम कर रहा था.

दिन के 11 बजे तक सुमित और उस के नौकर को सांस लेने की फुरसत नहीं मिली. साढ़े 11 बजे के करीब भीड़ खत्म हुई तो सुमित ने लंबी सास भर कर कहा, ”सर्दी में भी पसीना आ गया है बनवारी. जा, अब चाय बनवा कर ले आ. हां, चाय में अदरक अच्छे से डलवाना और देख बिसकुट भी लेते आना.’’

”ठीक है भैया.’’ सुमित से 50 रुपए का नोट लेते हुए बनवारी बोला और एजेंसी से बाहर निकल गया. जैसे बनवारी बाहर निकला था, वैसे ही उलटे पांव लौट आया. सुमित कुरसी पर कमर सीधी करने के लिए पीछे झुका ही था कि फिर सीधा हो गया.

”क्या हुआ? तू वापस क्यों आ गया? क्या चाय की दुकान बंद है?’’

”अभी मैं वहां पहुंचा ही कहां हूं भैया, वो बात यह है कि बाहर एक युवती आप को पूछ रही है.’’

”सिलेंडर लेने आई होगी, अंदर भेज दे उसे.’’ सुमित ने लापरवाही से कहा.

”सिलेंडर नहीं चाहिए उसे, वह तो आप को पूछ रही है कि क्या आप एजेंसी में आए हैं. आप की पहचान वाली लगती है.’’

”अंदर भेज दे, देखूं कौन है.’’ सुमित ने कहा और कुरसी पर ठीक से बैठ गया.

बनवारी बाहर निकल गया. थोड़ी देर में ही अंदर एक 20-21 साल की खूबसूरत युवती ने प्रवेश किया. सुमित उसे देखते ही हैरानी से कुरसी छोड़ कर खड़ा हो गया.

”त… तुम यहां!’’ सुमित के मुंह से हैरत भरा स्वर निकला, ”आज तुम इधर का रास्ता कैसे भूल गई?’’

”क्या मेरा आना तुम्हें अच्छा नहीं लगा है सुमित’’ लड़की ने गंभीर स्वर में पूछा.

”अच्छा क्यों नहीं लगा अमृता. हां, तुम्हें देख कर मुझे गहरा आश्चर्य हो रहा है. तुम ने मुझ से ब्रेकअप कर लिया था, फिर अचानक तुम्हें मैं कैसे याद आ गया?’’

”मैं बहुत परेशानी में हूं सुमित,’’ युवती जिस का नाम अमृता चौधरी था, बहुत गंभीर स्वर में बोली.

”ओह!’’ सुमित मुसकराया, ”तभी मैं तुम्हें याद आया हूं अमृता! चलो, अब आ गई हो तो बैठो और बताओ तुम्हें किस परेशानी ने आ घेरा है?’’

”बात थोड़ा राज वाली है. मैं एकांत में ही तुम्हें बताऊंगी.’’ अमृता ने धीरे से कहा, ”क्या हम कहीं बाहर नहीं चल सकते सुमित?’’

सुमित ने कुछ क्षण सोचा फिर बोला, ”लंबे ब्रेकअप के बाद तुम मेरे पास आई हो अमृता. मैं तुम्हारी परेशानी सुनूंगा और उसे हल भी करने की कोशिश करूंगा. पहले तुम बैठ जाओ. मेरे साथ चायनाश्ता करो, फिर हम बाहर चलेंगे.’’

”ठीक है.’’ अमृता ने कहा और कुरसी पर बैठ गई.

थोड़ी ही देर में बनवारी चायबिस्कुट ले कर आ गया. बह चाय ज्यादा ले कर आया था. उस ने 3 कपों में चाय डाली और सुमित तथा अमृता को दी. बिसकुट भी उस ने एक प्लेट मे खोल कर रख दिए.

”लो अमृता, चाय पिओ.’’ सुमित ने कप उठा कर अमृता की तरफ बढ़ाया. अमृता ने चाय ले ली और पीने लगी.

ऐसे बना खूनी प्लान

बनवारी दूर जा बैठा था. चाय पी लेने के बाद सुमित ने उठते हुए कहा, ”बनवारी, मैं बाहर जा रहा हूं. कोई ग्राहक आए तो संभाल लेना.’’

”ठीक है भैया,’’ बनवारी ने सिर हिलाया.

सुमित अमृता को ले कर गैस एजेंसी से बाहर आ गया. उस ने अपनी बाइक निकाली और अमृता को बिठा कर एक पार्क में आ गया.

यहां ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी. कुछ प्रेमी जोड़े पेड़ों के नीचे या बेंच पर बैठे नजर आ रहे थे. सुमित एक पेड़ के नीचे आ कर बैठ गया. यहां दूरदूर तक सन्नाटा था.

”बताओ अमृता, तुम्हें क्या परेशानी है?’’ सुमित ने अमृता के गंभीर चेहरे पर नजरें जमाते हुए पूछा

”सुमित, मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगी.’’ अमृता का स्वर गंभीर था.

”ये पुरानी बातें हैं अमृता. छोड़ो, वह बताओ जिस के लिए तुम्हें एकांत चाहिए था.’’

”वही बता रही हूं सुमित. मैं ने अपनी कालेज की पढ़ाई के कारण तुम से किनारा किया था, लेकिन तुम से जुदा हो कर मैं किसी दूसरे लड़के के प्रेमजाल में फंस गई. मैं जिस लड़के से प्यार करने लगी थी, उस के प्यार में मैं इतना पागल हो गई कि उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी.’’

कुछ क्षण चुप रहने के बाद अमृता ने गहरी सांस ली, ”सुमित, मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगी. उस लड़के के साथ मेरे संबंध भी बन गए और यही गलती मुझ से ऐसी हुई कि मैं आज परेशान खड़ी हूं.’’

”क्या तुम उस लड़के के बच्चे की मां बनने वाली हो अमृता?’’ सुमित ने अनुमान लगाते हुए पूछा.

”अरे नहीं. यह बात नहीं है सुमित, उस हरामजादे ने हमारे बीच बने अंतरंग क्षणों की वीडियो बना ली. वह वीडियो मेरे मांगने पर भी मुझे नहीं दे रहा है. जब भी मैं उस से वीडियो डिलीट करने या मुझे देने की बात करती हूं, वह टालमटोल करता है. मुझे अब उस से डर लगने लगा है. वह मेरी वीडियो द्वारा कहीं मुझे ब्लैकमेल न करने लगे.’’

”मामला गंभीर है अमृता,’’ सुमित लंबी सांस भर कर बोला, ”तुम्हारी बात से साफ दिखाई दे रहा है वह तुम्हें कभी न कभी अच्छी तरह बदनाम करेगा या तुम से रुपए ऐंठेगा.’’

”यही तो डर मेरी नींद उड़ाए हुए है सुमित, मैं तुम से इसीलिए मिलने आई हूं. तुम किसी भी तरह मुझे यह वीडियो दिलवा दो. मैं जिंदगी भर तुम्हारा अहसान मानूंगी.’’

”यह इतना सरल काम नहीं है अमृता, इस के लिए तुम्हारे उस पार्टनर के हाथपांव तोडऩे पड़ेंगे मुझे. जरूरत पड़ी तो उस की हत्या भी करनी पड़ सकती है.’’ सुमित कुछ सोचने के बाद गंभीर स्वर में बोला.

”खत्म कर दो उसे. मेरा अब उस से मोह भंग हो गया है सुमित. वह मरेगा, तभी अब मुझे सुकून मिलेगा. वह वीडियो जो उस ने अपने कंप्यूटर की हार्डडिस्क में डाल रखी है, मुझे वह हार्डडिस्क कुछ भी कर के मिलनी चाहिए.’’

”ठीक है, तुम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे जाओ. मैं कुछ करता हूं.’’

अमृता ने अपना मोबाइल नंबर सुमित को दे दिया.

इस के बाद उन दोनों के बीच आगे की प्लानिंग बनती रही, फिर अमृता को ले कर सुमित कश्यप मुरादाबाद बस अड्ïडा के लिए निकल गया. क्योंकि अमृता को वहां से बस पकड़ कर दिल्ली जाना था.

आग ऐसे बनी काल

5 अक्तूबर की आधी रात बीत गई थी. अब 6 अक्तूबर का दिन शुरू हो गया था, जो गांधी विहार वालों के लिए सनसनी ले कर आया.

रात करीब 3 बजे के आसपास ई ब्लौक 60 नंबर के फ्लैट के सामने रहने वाले एक सज्जन बाथरूम करने इसी समय उठे थे तो उन्होंने अपने वाशरूम की खिड़की से ई-60 नंबर वाले फ्लैट की चौथी मंजिल पर आग की ऊंचीऊंची लपटें उठती देखीं तो घबरा कर अपने घर से बाहर आ गए और जोरजोर से चिल्लाने लगे, ”आग लग गई है… आग लग गई है.’’

उन के चीखने पर कई घरों के खिड़की और दरवाजे खुल गए. लोग अपने घरों से बाहर आ गए. मोहल्ले में हल्ला मच गया. और भी घरों में जाग हो गई. आग लगी है का शोरगुल जोरजोर से उभरने लगा. ई-60 नंबर के फ्लैट के निचले तलों पर रहने वाले भी जाग गए और गली में आ कर ऊपरी मंजिल पर लगी भयानक आग को देख कर सहम गए.

किसी ने फायर बिग्रेड को फोन कर दिया था. करीब 15-20 मिनट में दमकल की गाडिय़ों की घंटियां वातावरण में सुनाई देने लगीं. दमकल की गाडिय़ां उस क्षेत्र के पास पहुंची ही थीं कि आग लगने वाली चौथी मंजिल के फ्लैट में जोरदार धमाका हुआ. इस के बाद आग और तेजी से भड़क उठी. आग की लपटें आसमान छूती नजर आने लगीं.

”लगता है, कमरे में सिलेंडर फट गया है.’’ भीड़ में कई स्वर उभरे, ”अरे इस में तो एक लड़का रहता है कोई रामकेश नाम का स्टूडेंट है, जो सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहा है. मेरी एकाध बार उस से बात हुई है.’’

एक व्यक्ति दुखी स्वर में बोला, ”बेचारा, पता नहीं कहीं गया हुआ है क्या. घर का सारा सामान जल गया है.’’

”गया है या घर में ही था,’’ दूसरा व्यक्ति बोला, ”उस के साथ तो एक लड़की भी रहती देखी है मैं ने. उस की रिश्तेदार होगी. एकदो दिन से तो मैं ने उसे नहीं देखा है.’’ एक अन्य युवक बोला.

तभी फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां वहां आ गई. दमकलकर्मी जल्दी से गाडिय़ों से बाहर कूदे और फिर अपने काम में लग गए. आग बुझाने के लिए पानी का प्रेशर पाइपों द्वारा फेंका जाने लगा. कुछ देर में वहां तिमारपुर थाने की पुलिस वैन भी आ गई. इस में थाने के एसएचओ प्रवीण कुमार, एसआई दीपक शर्मा, एसआई मोहित उज्जवला, हेडकांस्टेबल राहुल, टिंकू यादव, कांस्टेबल मनोज और महिला कांस्टेबल रजनी थे.

थोड़ी देर में उस फ्लैट की आग पर काबू पा लिया गया. दमकलकर्मी अपने इंचार्ज के साथ उस ऊपरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां का दृश्य बहुत भयावह और दिल को झकझोर देने वाला था. पूरे कमरे में एक युवक के शरीर के चीथड़े बिखरे हुए थे. सिलेंडर फटने से उस कमरे का सामान भी चारों तरफ बिखरा पड़ा था. मानव न मांस की सड़ांध वहां भयंकर रूप से फैली पड़ी थी.

कमरे में पानी काफी भर गया था, जो धीरेधीरे नाली के पाइप से निकल कर कम होने लगा था. वहां कुछ भी सामान सही स्थिति में नहीं था. पहली ही नजर में देखने से समझा जा सकता था कि कमरे में आग लगने के बाद तेजी से फैली थी, फिर सिलेंडर फटने से वहां पर फंसा युवक जो शायद नींद में रहा होगा और निकल पाने में सफल न हो सका हो, उस के चीथड़े उड़ गए थे.

यह बहुत भयानक मंजर था. दमकलकर्मी अपने इंचार्ज के साथ थोड़ी देर में ही वापस नीचे आ गए और नीचे मौजूद तिमारपुर थाना इंचार्ज से दमकल इंचार्ज ने बात की.

”यह एक हादसा है श्रीमान. आग रात को कब लगी, वहां मौजूद युवक को शायद मालूम नहीं हुआ, वह धुएं से बेहोश हो गया होगा, फिर सिलेंडर फटने से इस के चीथड़े उड़ गए. आप मालूम कीजिए, वह युवक कौन है, जो इस कमरे में रहता रहा है.’’

”हां, आगे की ड्यूटी अब हमारी है.’’ एसएचओ प्रवीण कुमार बोले और अपने साथ एसआई मोहित उज्जवल तथा दीपक शर्मा को ले कर चौथी मंजिल पर आ गए. वह भयानक मंजर देख कर उन के भी रोंगटे खड़े हो गए. मानव मांस की दुर्गंध से उबकाई आने लगी, फिर भी मुंह पर रुमाल बांध कर उन्होंने वहां का बारीकी से मुआयना क्रिया.

युवक की मौत आग लगने से हुई या आग लगने के बाद धुएं से दम घुटने से हुई, अब यह बताने वाला वहां कोई नहीं था. हां, मौत के बाद वहां रखा सिलेंडर फटने से उस के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे, यह समझा जा सकता था. वहां अधजला कंप्यूटर, किताबें कौपी और खानेपीने का सामान इधरउधर फैला पड़ा था. साथ में अटैच किचन भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया था.

यह पढऩे वाला स्टूडेंट था. एसएचओ प्रवीण कुमार बोले, ”इस के विषय में मकान मालिक से मालूम कर के परिजनों को सूचित करना होगा. दीपक शर्मा, आप यह काम निपटाइए. मैं फोरैंसिक टीम को बुलवा कर यहां की काररवाई पूरी करवाता हूं. उज्जवल, आप फोरैंसिक टीम को फोन कर दीजिए.’’

”ओके सर.’’ एसआई मोहित उज्जवल ने कहा और वह जेब से फोन निकाल कर फोरैंसिक स्क्वायड को फोन मिलाने लगे.

इंसपेक्टर प्रवीण कुमार वहां से बालकनी में आ गए और उन्होंने इस घटना की जानकारी नार्थ जिले के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी शशिकांत गौड़ को दे दी. उन दोनों ने लाश की शिनाख्त करने और उस के परिजन को सूचना देने की हिदायत के साथ लाश को पोस्टमार्टम के लिए हिंदू राव हौस्पिटल भेजने की सलाह दे दी.

फोरैंसिक टीम वहां आधा घंटे में पहुंच गई और अपने काम में जुट गई. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद लाश के सभी हिस्सों को, जो कमरे में बिखर गए थे, समेट कर पोस्टमोर्टम के लिए हिंदू राव अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया.

सुबह तक यह भी पता हो गया कि इस कमरे में रहने वाले युवक का नाम रामकेश मीणा था, वह यहां किराए पर रह कर यूपीएससी की पढ़ाई कर रहा था.

मृतक निकला स्टूडेंट

मकान मालिक और आसपड़ोस से पूछताछ में मालूम हुआ कि रामकेश मीणा के साथ कुछ महीनों से अमृता नाम की लड़की भी रह रही थी. दोनों में क्या संबंध थे, यह तो कोई नहीं बता सका. हां, यह जरूर मालूम हुआ कि वह फोरैंसिक साइंस की बीएससी की पढ़ाई कर चुकी थी. अब उस ने फोरैंसिक साइंस में कंप्यूटर का कोर्स करने के लिए दाखिला लिया हुआ था. 2-3 दिन से वह कमरे में नजर नहीं आई थी. शायद वह अपने घर गई हुई थी.

आजकल युवा लड़केलड़कियों का लिवइन रिलेशन में रहने का नया फैशन चला हुआ है. इसलिए इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने बहुत गंभीरता से इस विषय को नहीं लिया. रामकेश मीणा मूलरूप से राजस्थान का रहने वाला था. परिवार में उस के मम्मीपापा के अलावा एक भाई है. उन्हें इस दुर्घटना की खबर भेज दी गई. पूरी काररवाई निपटा कर सुबह तिमारपुर थाने की पुलिस टीम वापस लौट आई.

सुबह थाना तिमारपुर के एसएचओ धूप में बैठे अखबार पढ़ रहे थे. तब उन के फोन की घंटी बजने जगी. फोन उन के कक्ष में लैंडलाइन पर था. इंसपेक्टर प्रवीण कुमार उठ कर कमरे में आ गए. उन्होंने रिसीवर उठा कर कहा, ”हैलो, मैं एसएचओ प्रवीण कुमार बोल रहा हूं. आप?’’

”गुड मार्निंग सर!’’ दूसरी ओर से गंभीर स्वर उभरा, ”मैं फोरैंसिक टीम का इंचार्ज भट्ट बोल रहा हूं. सर, कल रात को हम ने तिमारपुर के गांधी विहार में फ्लैट नंबर ई-60 में घटनास्थल का निरीक्षण किया था. आप भी तब वहां थे.’’

”हां, मुझे याद है, अभी मुश्किल से इस बात को 5 घंटे का समय ही बीता है. बोलिए, आप क्या कहना चाहते हैं?’’

”सर, मेरा और मेरी पूरी टीम का कहना है कि वह महज एक दुर्घटना वाला मामला नहीं है. उस युवक रामकेश मीणा की पूरी प्लानिंग के साथ हत्या की गई है.’’

इंसपेक्टर प्रवीण कुमार हैरानी से बोले, ”आप की जांच से क्या ऐसा साबित हो रहा है मिस्टर भट्ट?’’

”जी हां. तभी तो मैं ने पूरे विश्वास के साथ आप को फोन मिलाया है.’’

”आप को इस मामले में कहां पर शक हो रहा है. वह तो सीधासीधा आग लगने और उस में सिलेंडर ब्लास्ट होने का मामला था. मैं ने स्वयं देखा है. सिलेंडर फटने से युवक के शरीर के चीथड़े उड़ थे.’’

”यह तो मैं भी मान रहा हूं सर, किंतु मुझे यह हत्या का ही मामला लग रहा है. क्योंकि जो सिलेंडर रसोई घर में गैस चूल्हे से लगा होना चाहिए था, वह किचन से अटैच्ड कमरे में मिला है. आप सोचिए सिलेंडर का कमरे में क्या काम?’’

”ओह!’’ इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने उतावलेपन से कहा, ”मान गया मैं आप को भट्ट साहब, आप ने कितनी बारीकी से इस बात को पकड़ा है. यह बात हमारे किसी के दिमाग में नहीं आई. आप ठीक कह रहे हैं, कमरे में सिलेंडर किस मकसद से लाया गया. यदि चाय या अन्य किसी चीज को बनाने के लिए सिलेंडर को किचन से कमरे में लाना आवश्यक था तो उस के साथ गैस चूल्हा भी होना जरूरी था. वह तो किचन में ही दिखाई दे रहा था.’’

”यहीं से मुझे इस मामले में संदिग्ध होने की बू आने लगी थी. मैं ने अपना विचार अपनी टीम के साथ शेयर किया तो सभी को कहना पड़ा, यह सोचीसमझी हत्या की साजिश बुनी गई है. युवक यदि बेहोश था तो उस के चीथड़े उड़ाने का मकसद यह हो सकता है कि पहले युवक की हत्या की गई, फिर सिलेंडर ब्लास्ट कर के इसे दुर्घटना बनाने की प्लानिंग रची गई.’’

”आप का सोचना ठीक है. मैं डीसीपी साहब से बात कर के उस स्थान की फिर से जांच करने की इजाजत ले लेता हूं. फिर देखता हूं कि मामला क्या है.’’

”जी ठीक है.’’ भट्ट ने कह कर संपर्क काट दिया.

इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने तुरंत डीसीपी राजा बांटिया को फोन लगा कर उन्हें फोरैंसिक इंचार्ज श्री भट्ट के संदेह का कारण बताते हुए इस मामले में फिर से जांच करने की इजाजत मांगी. श्री राजा बांटिया ने उन्हें इजाजत देते हुए इस मामले को गंभीरता से देखने के लिए उन के सुपरविजन में एक टीम का गठन कर दिया.

साजिश का मिला सुराग

तिमारपुर थाने के एसएचओ प्रवीण कुमार के साथ ला ऐंड और्डर इंसपेक्टर पंकज तोमर, एसआई दीपक शर्मा, एसआई मोहित उज्जवल, हैडकांस्टेबल राहुल, रामरूप, टिंकू यादव, मनोज और महिला कांस्टेबल रजनी को टीम में शामिल किया गया. यह टीम एसीपी शशिकांत गौड़ के दिशानिर्देश पर काम करने के लिए नियुक्त की गई. टीम ने घटनास्थल पर जा कर जब बारीकी से वहां का निरीक्षण किया तो उन्हें श्री भट्ट की बात में दम नजर आया.

सिलेंडर कमरे में ब्लास्ट हुआ था और उस के टुकड़े कमरे में फैले हुए थे. कमरे की दीवारों का सिलेंडर ब्लास्ट होने से काफी क्षति पहुंची थी. उस का प्लास्टर जगहजगह से उखड़ गया था. टीम ने किचन में जा कर देखा, वहां चूल्हा अव्यवस्थित पड़ा था. उस के पाइप से रबड़ का पाइप लगा था, लेकिन रेगुलेटर निकाला हुआ था. कमरे में रेगुलेटर सिलेंडर के मुंह पर लगा देख लिया गया था. ब्लास्ट से मुंह वाला हिस्सा एक कोने में पड़ा था.

कमरे में उन्हें केरोसिन, शराब की गंध भी महसूस हो रही थी. कोर्स की किताबें अधजली कुछ बैड पर पड़ी थीं. कुछ कमरे में फैली दिख रही थीं. इंसपेक्टर पंकज तोमर ने कमरे को देख लेने के बाद कहा, ”यहां पर क्राइम सीन हुआ है. युवक की पहले हत्या की गई, फिर आग लगा कर यहां सिलेंडर छोड़ दिया गया, ताकि गरम होने पर यहां ब्लास्ट हो और यह हादसा लगे.

युवक के चीथड़े होने से उस के शव की जांच भी नहीं की जा सकती है. सब सोचीसमझी प्लानिंग के तहत हुआ है. हमें अब यह देखना है कि इस कमरे में घटना से पहले कौन आया था. यहां आसपास सीसीटीवी कैमरे होंगे तो यह मालूम हो जाएगा.

”चलिए सीसीटीवी कैमरों की तलाश करते हैं.’’ श्री प्रवीण कुमार ने कहा.

वह सब बाहर आ कर सीसीटीवी तलाश करने लगे. उन्हें गली में बिजली के पोल पर सीसीटीवी कैमरा लगा दिखाई दे गया. उस की फुटेज चैक की गई तो उन को ई-60 के फ्लैट के चौथी मंजिल की वीडियो मिल गई. रात 5 अक्तूबर को चौथी मंजिल पर रात लगभग साढ़े 8 बजे 2 व्यक्ति अंदर जाते नजर आए. इस के 39 मिनट बाद यानी 9 बज कर 9 मिनट पर एक युवक मुंह ढंक कर कमरे से बाहर निकलते दिखा.

फिर 6 अक्तूबर लगने पर 2.57 बजे 2 युवक कमरे से बाहर आते दिखे. इन्होंने मुंह ढंक रखे थे. इन में एक युवक लड़की की तरह दिखाई दिया. उस की चाल और शरीर की बनावट से ही ऐसा संदेह हुआ. इस के बाद कमरे में से आग की लपटें निकलती दिखाई देने लगीं. पुलिस टीम के सामने यह स्पष्ट हो गया कि 5 अक्तूबर की रात ही ई-60 की मंजिल 6 पर 3 लोग घुसे. एक जल्दी बाहर आ गया, 2 आग लगने से कुछ ही मिनट पहले मुंह ढक कर कमरे से निकले. कल रात यहां प्लानिंग रच कर युवक रामकेश मीणा की हत्या की गई.

यह मालूम हो चुका था कि रामकेश के साथ 3-4 महीने से अमृता चौहान नाम की युवती भी रह रही थी. वह इस घटना से 3 दिन पहले ही यहां से गायब हो गई थी और लौटी नहीं थी. पुलिस का शक उसी पर गहराया. उस का मोबाइल नंबर मकान मालिक से मिल गया. यह भी मालूम हो गया कि अमृता मुरादाबाद में पीतल नगरी की रहने वाली है और उस के पिता का नाम राजवीर सिंह है. पुलिस टीम ने अमृता का मोबाइल नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ आ रहा था. उस की 5 अक्तूबर की लोकेशन ट्रेस की गई तो वह रात को ई-60 की ही मिली. इस से अमृता संदेह के घेरे में आ गई.

श्री पंकज तोमर को वादी बना कर यह केस धारा 287/106 (1) बीएनएस के तहत दर्ज कर लिया गया. दोपहर को रामकेश के मम्मीपापा भी रोते हुए राजस्थान से दिल्ली आ गए. उन का भी यही कहना था कि उन का बेटा साहसी और निडर था, वह आत्महत्या नहीं कर सकता. उन के बेटे को मारा गया है. यह उसी लड़की का काम हो सकता है, जो उन के बेटे के साथ रहती थी.

बौयफ्रेंड का किया मर्डर

पुलिस ने अब सारा ध्यान अमृता पर केंद्रित कर दिया. उस को हिरासत में लेने के लिए पुलिस टीम मुरादाबाद भेजी गई. पुलिस ने उस के घर और रिश्तेदारियों में छापे मारे, लेकिन अमृता वहां नहीं थी. उस के दिल्ली के छतरपुर में छिपे होने की जानकारी मिलने पर छतरपुर में छापा डाला गया, लेकिन वह वहां से निकल कर कुछ समय पहले ही कहीं चली गई थी.

पुलिस उस की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाथपांव मारती रही, लेकिन उस ने अपना मोबाइल फोन औन नहीं किया. आखिर 18 अक्तूबर को उसे मुरादाबाद से गिरफ्तार करने में पुलिस कामयाब रही. उसे दिल्ली लाया गया और सख्ती से पूछताछ की गई. उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उस ने रामकेश मीणा की हत्या करने के लिए अपने पूर्वप्रेमी सुमित कश्यप, निवासी मोहल्ला वाल्मीकि बस्ती, बंगला गांव, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) की मदद ली थी.

”लेकिन हम ने ई-60 की चौथी मंजिल से 3 युवकों को कमरे से मुंह ढक कर निकलते देखा था. वह तीसरा कौन था और उन 3 में तुम कहां थी?’’ इंसपेक्टर प्रवीण कुमार में पूछा.

”तीसरा युवक संदीप कुमार था सर. इसे सुमित ने मुरादाबाद से ही बुलाया था. वह रामकेश की हत्या होते ही मुंह ढक कर निकल गया था. मैं और सुमित रात 2 बज कर 57 मिनट पर कमरे में आग लगाने के बाद निकले थे. मैं ने तब खुद को छिपाने के लिए रामकेश की पहन रखी थी.’’

इंसपेक्टर पंकज तोमर ने अमृता से पूछा, ”तुम्हें रामकेश की हत्या क्यों करनी पड़ी, तुम तो 4-5 महीने से उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही थी?’’

”सर, मैं ने फोरैंसिक साइंस में बीएससी की थी. मई में मैं रामकेश के संपर्क में आई तो वह मिलनसार और अच्छा लगा. हम में प्यार हो गया तो मैं रामकेश के कमरे में साथ आ कर रहने लगी. रामकेश ने द्वारका के एक कालेज से बीटेक किया था. इन दिनों वह यूपीएससी की तैयारी कर रहा था. वह आईएएस बनना चाहता था. मैं ने फोरैंसिक साइंस में कंप्यूटर कोर्स ले लिया था.

”एक साथ रहते हुए मेरे रामकेश से संबंध बन गए. उस ने न जाने कैसे अंतरंग क्षणों के वीडियो बना लिए थे. मुझे जब पता चला तो मैं ने उस से वे तमाम वीडियो डिलीट करने के लिए कहा, लेकिन उस ने नहीं की.

”बारबार कहने पर भी वह मुझे न तो हार्डडिस्क दे रहा था न वीडियो डिलीट कर रहा था. तब मैं गुस्से में अपने मुरादाबाद के पूर्वप्रेमी सुमित कश्यप से मिली. वह मुरादाबाद में गैस एजेंसी चलाता है. उस ने कहा कि वह रामकेश से किसी भी तरह हार्डडिस्क दिलवा देगा.

”मुझे अपने वीडियो चाहिए थे. बेशक इस के लिए रामकेश की हत्या भी करनी पड़े तो मैं करने को तैयार थी. मैं फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई कर रही हूं. मुझे हत्या को हादसा कैसे दिखाया जाना है, मालूम था. मैं ने रामकेश की हत्या को खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई क्राइम वेब सीरीज देखीं और पूरी प्लानिंग के साथ 5 अक्तूबर को सुमित कश्यप के साथ रामकेश के कमरे में गई. तब संदीप भी हमारे साथ था.

”सुमित और संदीप ने रामकेश को डरायाधमकाया, मारापीटा, लेकिन वह हार्डडिस्क देने को तैयार नहीं हुआ तो सुमित ने उस का गला घोंट दिया. संदीप यह देख कर भाग गया. सुमित और मैं ने रामकेश की लाश पलंग पर लिटा कर उस पर तेल, केरोसिन, घी, शराब और रामकेश के कोर्स की किताबें भी डाल दीं.

”सुमित किचन से सिलेंडर निकाल लाया. उस के रेगुलेटर को थोड़ा सा खोल कर गैस को रिसने के लिए छोड़ कर हम बाहर निकले. दरवाजे पर जाली लगी थी, उसे काट कर अंदर हाथ डाला गया और कुंडी अंदर से लगाई गई ताकि पुलिस सोचे रामकेश ने खुद को खत्म किया है. बाहर से ही कमरे में माचिस की तीली जला कर फेंकने के बाद मुंह ढक कर हम निकल भागे.’’

”वह हार्डडिस्क तुम्हें मिल गई, जिस के लिए तुम ने यह जुर्म किया है.’’ डीसीपी राजा बांटिया ने प्रश्न किया. वह बहुत देर से अमृता का बयान सुन रहे थे.

”हां सर, मैं ने कंप्यूटर से हार्डडिस्क निकाल ली थी. वहां से मैं ने रामकेश के ट्रौली बैग में रामकेश के 2 मोबाइल भी उठा कर रख लिए थे. मैं समझ रही थी कि पुलिस इसे हादसा ही मानेगी, किंतु मैं फंस गई. इतनी चालाकी के बाद भी.’’ अमृता ने गहरी निराशा के साथ कहा.

श्री प्रवीण कुमार ने चुटकी ली, ”अभी तुम्हारी फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई अधूरी जो है अमृता, तुम ने अपना करिअर तो खराब किया ही, सुमित और संदीप जो मेहनत से एसएससी की तैयारी कर रहे थे और ग्रैजुएशन कर चुके हैं, उन की भी जिंदगी पर कालिख पोत दी है.

अमृता के बताए पते पर पुलिस ने छापे मार कर 21 अक्तूबर को मुरादाबाद से सुमित कश्यप (27 साल) और 23 अक्तूबर को 23 वर्षीय संदीप को गिरफ्तार कर लिया. अमृता से ट्रौली बैग, रामकेश की शर्ट और दोनों मोबाइल फोन पुलिस ने कब्जे में ले लिए. तीनों को सक्षम न्यायालय में पेश कर के 2 दिन की पुलिस रिमांड पर ले कर पूछताछ पूरी की गई, फिर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

अपने होनहार बेटे को खोने का गम लिए उस के पेरेंट्स बेटे का अंतिम संस्कार करने के बाद भारी मन से अपने घर राजस्थान लौट गए. Crime Story

 

 

Love Crime: प्रेमिका का सिर कलम

Love Crime: पति जौनी को छोडऩे के बाद 30 वर्षीय उमा को 25 वर्षीय बिलाल से मोहब्बत हो गई थी. उस के बाद वह लिवइन रिलेशन में रहने लगी. फिर एक दिन जंगल में उमा की सिरविहीन और निर्वस्त्र लाश मिली. उमा की जब किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी तो आखिर किस ने और क्यों किया उस का मर्डर? पढ़ें, लव क्राइम की यह हैरतंगेज कहानी.

उमा को खत्म करने की बिलाल की योजना किसी कागज पर नहीं थी, वह उस के दिमाग में बनी एक अंधेरी भूलभुलैया थी. उस ने सोचा कि पहले उमा को भरोसे में लिया जाए, फिर उसे सुनसान जगह ले जा कर उसे खत्म किया जाए. फिर उस की लाश के टुकड़े कर अलगअलग फेंक दिया जाए. इस से उस की शिनाख्त भी नहीं हो पाएगी और यह राज भी राज ही बन कर रह जाएगा. प्रेमिका को ठिकाने लगाने का बिलाल ने यही प्लान बना लिया.

14 दिसंबर, 2025 को बिलाल की शादी होने जा रही थी. बारात उतराखंड के रुड़की जानी थी. लेकिन इस निकाह में बिलाल की हिंदू प्रेमिका बाधा बन सकती थी और ऐसे में उस ने प्रेमिका उमा को रास्ते से हटाने का प्लान तैयार कर लिया था.

बिलाल ने अपनी शादी से ठीक 8 दिन पहले यानी 6 दिसंबर को उस ने उमा से कहा, ”चलो, कहीं घुमा कर लाता हूं.’’

उस के खौफनाक इरादों से अनजान उमा राजी हो गई. शाम का वक्त था, अंधेरा हो चला था. उमा रोमांच महसूस कर रही थी, जबकि उस के मन में कुछ और ही चल रहा था. 6 दिसंबर, 2025 को शाम करीब 6 बजे स्विफ्ट कार ले कर वह उमा के कमरे पर गया था. बोला, ”सरप्राइज है, चलो तुम्हें बाहर घुमा कर लाता हूं.’’

हथिनीकुंड बैराज में यूपी और हरियाणा को जोडऩे वाला पुल है. वह उसी रास्ते से कार लाया. पहले हिमाचल की तरफ कार घुमाई, फिर उस ने पहले हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब की तरफ कार मोड़ ली. उमा लगातार उस से बातें किए जा रही थी. वह उसे प्यारभरे अंदाज में उस की बातों का जवाब दे रहा था. दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था.

रात के करीब 8 बज गए थे. रात का स्याह अंधेरा छा गया था. कलेसर नैशनल पार्क से गुजर रहे थे. नैशनल हाइवे से गाडिय़ां आजा रही थीं. उस दिन शनिवार था. वीकेंड पर अकसर पर्यटक इस इलाके में ज्यादा घूमने जाते हैं. उस ने कहा कि कोई होटल देखते हैं, वहां शाम बिताएंगे. पांवटा में रूम तलाशने की कोशिश की, लेकिन पर्यटक काफी थे. कहीं कोई कमरा किराए पर नहीं मिला. उसे डर लगा कि कहीं पकड़ा न जाए. अचानक प्लान बदल दिया.

इस के बाद उस ने हरियाणा की सीमा की तरफ कार मोड़ ली. बोला कि चलो, जंगल की तरफ चलते हैं, उधर भी अच्छे होटल हैं. उमा तो उस पर आंखें मूंद कर भरोसा करती थी, इसलिए राजी हो गई. कलेसर जंगल के एरिया से निकलते ही आबादी शुरू हो जाती है. यहां प्रतापनगर के गांव बहादुरपुर की सीमा से पहले ही उस ने कार रोक ली. उमा ने पूछा कि कार क्यों रोक दी?

उस ने कहा कि आबादी आने वाली है. सीट बेल्ट लगाना जरूरी है. यह बहाना बना कर वह पिछली सीट पर चला गया. उस वक्त उमा अगली सीट पर बैठी अपनी धुन में मस्त थी. तभी अचानक (25 वर्षीय) बिलाल ने 30 वर्षीय प्रेमिका उमा के गले में सीट बेल्ट डाल दी और गला घोंटने लगा. उमा के पास बचने या चिल्लाने का ज्यादा मौका नहीं था. उमा का शरीर बेजान हो गया. उसे मरा मान बिलाल तुरंत अगली सीट पर आया. उस ने कार आगे बढ़ा दी. करीब आधा किलोमीटर दूर गया तो सामने गांव बहादुरपुर की लाइटें नजर आने लगीं.

बिलाल को अब शव ठिकाने लगाने की जल्दी थी. उस के मन में पकड़े जाने का भी डर था, इसलिए उस ने गरदन से सिर काटने की सोची. साथ में वह मीट काटने वाला छुरा ले कर आया था. लाश को सड़क किनारे खेतों में बनी पौपुलर की नर्सरी में ले गया. वहां सिर धड़ से अलग किया और लाश के कपड़े उतार लिए, ताकि उस की पहचान न हो. कटे सिर और उतारे गए कपड़ों को पौलीथिन के थैले में डाल कर अगली सीट पर रख लिया. सिर कटी लाश उस ने वहीं छोड़ दी थी.

उस वक्त रात के करीब 11-साढ़े 11 बजे होंगे. अब उसे ऐसी जगह की तलाश थी, जहां सिर व कपड़े फेंक सके ताकि शिनाख्त की संभावना न बचे. बिलाल ने सिर फेंकने के लिए इसी जगह को चुना. यहां सिर फेंकने के बाद बिलाल ने कार घुमाई और हथिनीकुंड बैराज के पुल से होते हुए अपने घर चला गया.

बिलाल ने मर्डर के बाद घर पहुंच कर सब से पहले अपना मोबाइल फारमेट कर दिया, जिस से कि उस के मोबाइल में उमा की फोटो और कौन्टैक्ट नंबर सब डिलीट हो गए. आधी रात के बाद बिलाल सो गया और सुबह फेमिली वालों से कहा कि अब निकाह की तैयारियों में रहूंगा. अब कहीं नहीं जाऊंगा.’’ योजना पर अमल कर के उस ने उमा की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म कर दी. यह मामला हरियाणा के यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जुड़ा एक सनसनीखेज हत्याकांड है, जिस में प्रेम प्रसंग, लिवइन रिलेशनशिप और शादी के दबाव के चलते बेरहमी से हत्या की गई है.

सहारनपुर के हलालपुर गांव में एक परिवार रहता है. उस परिवार की उमा 18 साल की हो चुकी थी. उस की जवानी अब फूल की तरह पूरी तरह खिल चुकी थी. उमा के घर से सिर्फ 2-4 घर छोड़ कर  एक 19 साल का युवक जौनी रहता था. पेशे से मजदूर था और रंगाईपुताई का काम किया करता था. जौनी मामूली सा विकलांग था. उस की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि कोई उस की कमजोरी पर ध्यान ही नहीं देता. जौनी मेहनती और हंसमुख था.

उमा के घर में रंगाईपुताई का काम चल रहा था. उमा के पापा ने जौनी को बुलाया था, क्योंकि वह पड़ोस में ही रहता था. पहली बार जब जौनी उमा के घर आया तो वह सीढ़ी पर चढ़ कर दीवारों को रंग रहा था. विकलांग होने के बावजूद वह बड़े सलीके से काम कर रहा था, जैसे कोई कलाकार अपनी पेंटिंग बना रहा हो. उमा उस वक्त घर में थी. बचपन से ही वो जौनी को ‘जानी वाकर’ कह कर चिढ़ाती थी और जौनी मुसकरा कर उस की कलाई पकड़ लेता. दोनों साथ खेलते हुए बड़े हुए.

परंपरा, मानवता और पड़ोसी होने के नाते वह चाय ले कर किचन से बाहर आई और जौनी को देखा. उस के माथे पर पसीने की बूंदें, हाथों में ब्रश और चेहरे पर एक हलकी मुसकान.

”ओए जौनी, ले चाय पी ले,’’ उमा ने शरमाते हुए कहा.

जौनी ने मुड़ कर देखा और उस की आंखें उमा की मासूमियत पर ठहर गईं.

”धन्यवाद, उमा. लेकिन मैं तो मजदूर हूं.’’ उस ने हंसते हुए कहा.

”मजदूर को भी हमारी परंपरा के अनुसार दिन में 2 बार चाय पिलाते हैं.’’

उमा की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि वह छोटीछोटी बातों से प्रभावित हो जाती थी. जौनी की सादगी और मेहनत ने उसे छू लिया. उस दिन से दोनों की बातचीत शुरू हुई. बचपन की पुरानी यादें, यही सब बातों के विषय होते. धीरेधीरे ये मुलाकातें रोमांटिक रंग लेने लगीं. इस के बाद उन की मुलाकातें भी होने लगीं. जौनी उमा को अपनी जिंदगी की कहानियां सुनाता, कैसे वह विकलांग होने के बावजूद कभी हारा नहीं, कैसे वह सपने देखता है एक बेहतर जिंदगी के. उमा उस की ताकत से प्रभावित होती और उसे चूमती, पहले गाल पर, फिर होंठों पर.

उन के चुंबन में एक जुनून था, जैसे दोनों की आत्माएं मिल रही हों. जौनी की मजबूत बांहें उमा को घेर लेतीं और उमा की नरम अंगुलियां उस के बालों में घूमतीं. वे घंटों बातें करते, हंसते और कभीकभी चुपके से एकदूसरे को छूते, एक स्पर्श जो बिजली सी दौड़ाता.

जौनी ने उमा का हाथ पकड़ा और बोला, ”उमा, तुम मेरी जिंदगी हो. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

उमा ने उस के सीने पर सिर रखा और कहा, ”जौनी, तुम्हारी कमजोरी मेरी ताकत है. हम साथ हैं, हमेशा.’’

उन का रोमांस अब गहरा हो गया था. उमा और जौनी के बीच का प्यार एक खामोश नदी की तरह बहता था. गहरा, शांत और हर किसी की नजरों से छिपा हुआ.

शादी के दिन हुई फरार

रातें उन की थीं. जब मोहल्ला सो जाता, उमा अपनी छत पर आती. जौनी दीवार फांद कर उस के पास पहुंच जाता. ऐसे ही 5 साल गुजर गए. 5 साल की अनगिनत रातें, अनकही बातें, चुराए गए चुंबन और वो सांसें जो सिर्फ एकदूसरे के लिए रुकी थीं. उमा के फेमिली वाले उमा की शादी के लिए बहुत चिंतित थे. आखिरकार एक लड़का उमा के लिए फेमिली वालों ने पसंद कर के शादी तय कर दी. यह बात सन 2010 की है. सभी धार्मिक औपचारिकताओं के बाद बारात आने की तारीख तय हो गई. अभी तक उमा की तरफ से किसी तरह का कोई विरोध फेमिली वालों के सामने नहीं आया.

सूरज की पहली किरणों ने अभीअभी गांव की सड़कों को छुआ था, जब उमा के घर में हलचल मच गई. आज वह दिन था, जिस का इंतजार पूरे परिवार को था. उमा की शादी. लेकिन कमरे में सन्नाटा था. जब मां ने दरवाजा खटखटाया और भीतर झांका तो पल भर में सब कुछ समझ में आ गया. अलमारी खुली थी, कुछ कपड़े गायब थे, उमा भी गायब थी. दुलहन का लहंगा बिस्तर पर बिखरा पड़ा था. मेज पर रखा वह छोटा सा कागज, ‘मम्मी, हम मजबूर थे. माफ करना.’

जौनी और उमा, 2 प्रेमी दिल, रात की आड़ में घर से निकल चुके थे. उन के पैरों की धूल अब दूर किसी अनजान रास्ते पर उड़ रही थी, जहां प्यार की उड़ान ने परिवार की इज्जत को पीछे छोड़ दिया था. पापा की आंखें फैल गईं, भाई दौड़ कर बाहर निकले. ”कहां गई वो? जौनी भी गायब है!’’ चाचा की आवाज कांप रही थी.

पूरे गांव में तलाश शुरू हो गई. कुएं के पास, मंदिर में, बस स्टैंड पर. सभी रिश्तेदार मिल कर तलाश कर रहे थे. पड़ोसी जुट गए, फोन घूमने लगे. उन के मुंह से एक ही बात निकली, ‘भाग गए दोनों…’

ये शब्द हवा में जहर की तरह फैल गए, उमा के पापा का चेहरा पीला पड़ गया, मम्मी रोरो कर बेहाल हो रही थी.

‘उमा और जौनी की प्यार की आग में सब जल गया. अब इज्जत का क्या होगा?’ सोच कर पापा ने सिर थाम लिया.

तभी मामामामी आगे आए. उन की आवाज कांपी, पर नीयत मजबूत थी. दोनों ने उमा की मम्मी और पापा को समझाया. कहा, ”हम हैं आप के साथ. चिंता की कोई बात नहीं है. मेरी बेटी है. अगर आप कहें तो आज हम उमा की जगह अपनी बेटी को विदा कर देंगे. पूरे समाज में आप की इज्जत का सवाल है. यह त्याग हम कर सकते हैं.’’

दोनों में से किसी ने आंखें उठा कर नहीं देखा. अब हर तरफ फुसफुसाहटें थीं. उमा की मम्मी आंसू पोंछते हुए बोली, ”भाभी, क्या करूं? मेरी बेटी ने तो हमें डुबो दिया. बारात लौट गई तो गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’

आंसू बिना आवाज के गिरते रहे. मां ने एक पल को भाई की ओर देखा और फिर धीरे से सिर हिला दिया. समय बीतता गया, सूरज चढ़ता गया. बारात की धुन दूर से सुनाई देने लगी. ढोल की थाप, शहनाई की मधुर स्वरलहरियां. दूल्हा, घोड़ी पर सजाधजा, मुसकराता हुआ आ रहा था अनजान इस तूफान से. घर के दरवाजे पर बारात रुकी. बारात आई. ढोलनगाड़ों की आवाज ने उस खालीपन को ढक लिया, जो आंगन में पसरा था. स्वागत हुआ, आवभगत निभाई गई. सभी के चेहरे पर नकली मुसकानें थीं, पर आंखों में प्रश्न.

परंपराएं चलीं, फेरों का समय आया. मामा की बेटी लाल जोड़े में आई. कांपती नहीं, बल्कि विश्वास से भरी थी. फेमिली वालों के चेहरे पर मुसकान चिपकी हुई थी, लेकिन आंखें बता रही थीं कि दिल टूटा हुआ है.

पापा ने आगे बढ़ कर दूल्हे का स्वागत किया, ”आओ जी, स्वागत है!’’

बाहर बारात नाच रही थी, अंदर फैसला हो चुका था. मामामामी की बेटी को बुलाया गया. वह हैरान थी, लेकिन परिवार की इज्जत के लिए तैयार हो गई.

”अगर इस से सब की लाज बचती है तो मैं कर लूंगी,’’ उस ने धीरे से कहा.

मेकअप किया गया. उमा का ही लहंगा पहनाया गया. अब  मंडप सजा, पंडितजी मंत्र पढऩे लगे. दूल्हे को बताया गया कि ‘परिवार की रस्म है, दुलहन का नाम बदल गया.’ वह मुसकराया. शायद अनजान, शायद समझदार. फेरों के समय उमा की मम्मी की आंखों से आंसू बह रहे थे, खुशी के नहीं, दर्द के. पापा ने दुलहन का हाथ दूल्हे को सौंपा, मन में उमा की याद थी, ‘बेटी, तू जहां भी है, खुश रह,’ उन्होंने मन ही मन कहा.

इस तरह अपनी इज्जत की आरती को बचा कर इस घर से उमा की जगह उस की ममेरी बहन को विदा कर दिया गया. शादी संपन्न हुई. बारात विदा हुई. लेकिन घर में सन्नाटा था. रात को जब सब सो गए तब उमा की मम्मी ने पति से कहा, ”क्या हम ने सही किया?’’

उन्होंने सिर हिलाया, ”हां, इज्जत बचाई. लेकिन दिल टूटा है. जौनी और उमा, काश वे समझते.’’

इस अप्रत्याशित मोड़ ने एक नई कहानी शुरू की, दर्द की, बलिदान की और उम्मीद की.

निर्वस्त्र मिली लाश

हरियाणा के यमुनानगर के प्रताप नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव पड़ता है बहादुरपुर. 7 दिसंबर, 2025 की सुबह के करीब  9 बजे के आसपास इसी बहादुरपुर गांव के एक व्यक्ति ने प्रताप नगर थाने में फोन कर कहा, ”साहब, मेरे गांव के बाहर पौपुलर की एक नर्सरी है. एक महिला की डैडबौडी पड़ी है, जिस का न तो वहां पर सिर मौजूद है और न ही उस के शरीर पर कोई कपड़ा मौजूद है.’’

एसएचओ नरसिंह गुर्जर को जैसे ही सूचना मिली, वह फौरन अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां पर पहले से ही काफी तादाद में लोग मौजूद थे. पुलिस भीड़ को हटा कर डैडबौडी के पास पहुंची. डैडबौडी को देखने के बाद खुद पुलिस भी एकदम से चौंक गई. पुलिस ने घटनास्थल का बड़ी बारीकी से मुआयना किया, लेकिन महिला का सिर बरामद नहीं हुआ.

पर सवाल यह था कि आखिरकार वह मरने वाली महिला कौन थी? घटनास्थल पर काफी सारे लोग मौजूद थे. उन सभी से पूछताछ की, पर कोई भी व्यक्ति उस डैडबौडी की शिनाख्त नहीं कर सका. घटनास्थल पर कोई ऐसा डौक्यूमेंट्स और न ही कोई ऐसा पहचानपत्र मिला, जिस से उस मरने वाली महिला के बारे में कुछ पता चल सके. उस के शरीर पर भी कहीं कोई टैटू, नाम या अन्य कोई चिह्नï या गुदा नहीं था.

पुलिस ने डैडबौडी को अपने कब्जे में लेने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसएचओ नरसिंह गुर्जर ने तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी. यमुनानगर के एसपी कुलदीप गोयल घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी बुला लिया गया. पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के बाद केस की जांचपड़ताल शुरू कर दी. 72 घंटे का समय बीत जाने के बावजूद मृतका की शिनाख्त नहीं हुई तो इस सिरविहीन धड़ का अंतिम संस्कार सेवा समिति के माध्यम से करा दिया गया.

एसपी कुलदीप गोयल ने केस का खुलासा करने के लिए एसआईटी का गठन कर दिया. साथ ही सर्विलांस टीम, फोरैंसिक टीम, डौग स्क्वायड सभी अपनीअपनी तरह से प्रयास करने में जुट गए, ताकि इस हत्याकांड का खुलासा हो सके. यह एक तरह से ब्लाइंड मर्डर था और इस का पता चल पाना मुश्किल हो रहा था. एसपी कुलदीप गोयल ने एसआईटी के हैड डीएसपी रजत गुलिया को नियुक्त किया था. रजत गुलिया के नेतृत्व में पुलिस ने प्रयास करने शुरू कर दिए. 500 से ज्यादा  सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. पुलिस द्वारा उन्हें बारबार देखा जा रहा था.

इस केस की जांचपड़ताल करते हुए 3 दिन का समय गुजर गया, लेकिन पुलिस के हाथ कोई सबूत नहीं मिला. 3 दिनों के बाद पुलिस फिर से उस घटनास्थल पर गई. जब आसपास के लोगों से पूछताछ की तो बहादुरपुर गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस से कहा कि साहब मैं दावे के साथ तो नहीं कह सकता, लेकिन ठीक एक दिन पहले 6 दिसंबर, 2025 को रात के करीब 11-साढ़े 11 बजे इस रोड पर मैं ने एक कार को देखा था. मुझे उस कार का नंबर तो याद नहीं है, लेकिन उस कार के नंबर प्लेट पर यूपी का नंबर लिखा हुआ था.

निकाह से पहले अरेस्ट

पुलिस ने इसी को आधार बना कर जब इस केस की जांचपड़ताल करते हुए आगे जा कर जब रोड पर लगे हुए सीसीटीवी की फुटेज को चैक किया तो आखिरकार एक सीसीटीवी में वह कार जाते हुए दिखाई दी. उस का नंबर भी साफसाफ दिखाई दे गया. पुलिस गाड़ी के उस नंबर के माध्यम से उस के मालिक तक पहुंच गई. कार के मालिक से पता चला कि उस गाड़ी के ड्राइवर का नाम बिलाल है, जो मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नकुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत टिडोली गांव का रहने वाला है.

13 दिसंबर, 2025 को शाम के करीब 7 बजे के आसपास हरियाणा की पुलिस अपनी टीम के साथ बिलाल के घर पहुंच गई. उस दिन बिलाल की छोटी बहन की बारात आई हुई थी. कुछ बाराती चले गए थे. कुछ बाराती वहां मौजूद थे. उस वक्त बिलाल की बहन की विदाई का कार्यक्रम चल रहा था. बड़ी संख्या में पुलिस बल देख कर घर में अफरातफरी मच गई. पुलिस ने बिलाल के अब्बा फुरकान से संपर्क किया. उन से पूछा कि आज तुम्हारे यहां क्या फंक्शन है? उन्होंने बता दिया कि आज उन की बेटी की विदाई हो रही है.

पुलिस के कहने पर फुरकान ने अपने बेटे बिलाल को पुलिस के सामने पेश कर दिया.  पुलिस वालों ने जब उस से सवाल करने शुरू किए तो बिलाल सवालों के जवाब नहीं दे पा रहा था. सर्दी में भी उसे पसीना आने लगा. फुरकान समझ गया कि कुछ न कुछ उस के बेटे ने गड़बड़ की है. तभी बिलाल ने वहां से भागने की कोशिश की. उसे पता नहीं था कि चारों तरफ से वह पुलिस से घिरा हुआ है.

पुलिस ने बिलाल को गिरफ्तार कर लिया. तभी काफी संख्या में मौजूद रिश्तेदार पुलिस का विरोध करने लगे. सभी रिश्तेदार जानना चाहते थे कि बिलाल को पुलिस क्यों गिरफ्तार करने आई है. तब पुलिस ने उन्हें बता दिया कि इस ने एक महिला की हत्या की है. पुलिस उसे गिरफ्तार कर लौट आई. थाने में जब उस महिला की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने उमा नाम की महिला की हत्या कर उस की सिरविहीन लाश हरियाणा के यमुना नगर क्षेत्र में डाल दी थी और उस का सिर हरियाणा हिमाचल प्रदेश के बौर्डर पर कलेसर जंगल में एक खाई में डाल दिया था.

पुलिस ने रविवार 14 दिसंबर, 2025 को बिलाल की निशानदेही पर हरियाणा हिमाचल के बौर्डर पर कलेसर जंगल में स्थित लालढांग की खाई से उमा का सिर बरामद किया गया. हालांकि वहां छुरा बरामद नहीं हुआ. पुलिस ने अदालत में पेश कर के बिलाल को 4 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया था. रिमांड अवधि पर उस ने पुलिस को उमा की हत्या करने की जो कहानी बताई, वह हैरान करने वाली निकली—

हमदर्दी ने प्यार जगाया

बिलाल 4 भाईबहन हैं. वह पहले ट्रक और डंपर चलाता था. इन दिनों कार की ड्राइविंग कर रहा था. पेशेवर तरीके से कार की बुकिंग कर के यात्रियों को उन की बताई हुई मंजिल तक पहुंचाता था. रोज की तरह उस दिन भी वह एक फैक्ट्री में किसी सवारी को छोडऩे आया था. फैक्ट्री के गेट के बाहर एक महिला बेंच पर बैठी हुई थी. करीब 30 साल की, उस का चेहरा पीला था. आंखों में थकान और बेचैनी साफ झलक रही थी.

बिलाल का ध्यान उस पर चला गया. वह आदतन संवेदनशील था. उस ने पास जा कर उस से धीरे से पूछा, ”आप ठीक तो हैं? कुछ परेशान लग रही हैं.’’

महिला ने कमजोर सी मुसकान के साथ कहा, ”बुखार आ रहा है, सिर घूम रहा है. इसी फैक्ट्री में काम करती हूं. छुट्टी ले कर घर जा रही थी. चला नहीं गया, इसलिए अकेली बैठी हूं. अगर हो सके तो मुझे गंगोत्री कालोनी में घर तक छोड़ दीजिए.’’

घर पहुंचने पर बिलाल ने मैडिकल स्टोर से ला कर बुखार की दवा भी खिला दी. 2 घंटे में बुखार उतर गया तो बिलाल अपने घर चला गया. अगले कुछ दिनों में बिलाल हालचाल पूछने आने लगा. कभी दवा लाता, कभी फल. बातचीत का सिलसिला बढ़ा तो अहसासों की गरमाहट भी. दोनों ने अपनेअपने संघर्ष, अकेलापन और सपने साझा किए. उमा को बिलाल की सादगी और ईमानदारी भा गई और बिलाल को उमा की समझदारी और आत्मसम्मान.

एक दिन उमा ने बिलाल को अपनी जिंदगी की दुखभरी कहानी सुनाई. 13 साल पहले की बात है. मैं ने अपने पड़ोस के एक युवक जौनी के साथ भाग कर शादी की थी. मेरे एक बेटा भी है, जो अपने पापा के साथ रहता है. घर से बाहर 10 साल हम ने इधरउधर बिताए. उस के बाद हम लौट कर सहारनपुर आ गए. मेरे फेमिली वालों ने मुझ से संबंध खत्म कर दिए थे.

सहारनपुर आने पर मैं अपने पति के साथ  रमजानपुर में रहती थी. मैं काफी गुरबत में समय बिता रही थी. मोहल्ले के ही एक युवक से मेरा संपर्क हुआ. उस ने मुझे सहारनपुर में एक फैक्ट्री में नौकरी दिला दी. एक मोहल्ले के ही होने के कारण कभीकभी मैं उस के साथ चली जाती और कभीकभी वापसी में भी हम साथसाथ ही आ जाते. इस से पति मेरे ऊपर शक करने लगा. मैं ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पति जौनी के दिमाग से शक दूर नहीं हुआ.

इस बात को ले कर हम दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. दिलों में खटास पैदा हो गई. मैं ने गंगोत्री में किराए पर मकान लिया और पति से अलग इस किराए के मकान में अकेली रहने लगी. बात तलाक तक पहुंच गई. इस तरह हम दोनों के बीच संबंध विच्छेद हो गया. कुछ दिनों बाद युवक ने फैक्ट्री से काम छोड़ दिया. मेरा संपर्क उस से टूट गया. पति ने मेरी कभी कोई खबर नहीं ली. इस तरह मैं अकेली पड़ गई.

मैं एक दिन अपने पति के कमरे पर अपने बेटे से मिलने के इरादे से गई. पता चला कि वह मकान खाली कर के अपने गांव वापस चला गया है. उमा की आंखों में आंसू आ गए. दोनों एकदूसरे के करीब आए. उन के दिलों में एक नई गरमाहट जाग रही थी. धीरेधीरे मामला प्यार में बदल गया.

सहारनपुर की गलियों में एक नई कहानी शुरू हो चुकी थी 2 अकेले दिलों के मिलन की. बिलाल और उमा अब साथ थे. वे लिवइन में रहने लगे. बिलाल अपने घर कोई न कोई बहाना बना कर उमा के साथ रातें बिताया करता था. घर का सारा खर्च बिलाल ही उठाता था.

परिजनों ने तोड़ा संबंध

बिलाल को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने सब से पहले उस से सवाल किया कि यह महिला कौन है और इस की हत्या क्यों की? बिलाल ने पुलिस को अपनी मोहब्बत की शुरुआत की सारी कहानी बता दी. सिर को भी पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. शेष धड़ का तो पहले ही पोस्टमार्टम हो चुका था. सिरविहीन धड़ लावारिस घोषित हो जाने के कारण सेवा समिति ने बगैर सिर के अज्ञात मान कर पश्चिम यमुना नहर के पास श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया था.

क्योंकि अब उमा की शिनाख्त हो गई थी. उस के परिवार का पता लग गया था, इसलिए पुलिस पोस्टमार्टम के बाद सिर को ले कर उमा के गांव हलालपुर पहुंची तो उस का भाई टिंकू मिला. टिंकू ने बताया कि साहब करीब 15 साल पहले उमा की शादी हो रही थी. हम लोगों को पता ही नहीं चला, जिस दिन उस की बारात आने वाली थी, उसी दिन मौका पाते ही वो जौनी के साथ घर से भाग गई थी. उसी रात हम ने फैसला ले लिया था कि हम अब उमा को कभी याद नहीं करेंगे. उमा से हमारा कोई वास्ता नहीं है. उमा से हमारा कोई रिश्तानाता नहीं है.

पुलिस वाले जब उस का सिर ले कर पहुंचे तो इंसानियत के नाते टिंकू ने पुलिस वालों और रिश्तेदारों के कहने पर सिर का अंतिम संस्कार कर दिया. गांव के लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि आखिरकार यह सब कैसे हो गया. फिर पुलिस उस के पति जौनी के पास गई. जौनी बोला कि मुझे पता चला है कि वह किसी बिलाल नाम के युवक के साथ रह रही थी. उस ने ही उस का कत्ल कर दिया है. जौनी ने कहा कि मुझे उस के मर्डर का दुख तो है, लेकिन मेरा उस से कोई वास्ता या सरोकार नहीं रहा. कानूनन मेरा उमा से तलाक हो चुका था.

बिलाल इस समय जेल में है. पुलिस का दावा है कि उस ने सारे सबूत एकत्र कर लिए हैं. आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी. Love Crime

 

 

Love Story Hindi Kahani: प्रेमिका ही क्यों झेले शक के ताने

Love Story Hindi Kahani: 29 वर्षीय रितिका सेन को 2 बच्चों के बाप सचिन राजपूत से प्यार हो गया. सचिन भी रितिका को अपना दिल दे बैठा. सचिन उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगा. एकदूसरे को दिलोजान से चाहने वाले इस प्रेमी युगल के संबंधों में कड़वाहट भी पैदा हो गई. फिर एक दिन यही कलह उस मुकाम पर पहुंची कि…

27 जून, 2025 की रात को भी रितिका देर से घर लौटी तो उस के चरित्र को ले कर सचिन ने एक बार फिर से गंभीर टीकाटिप्पणी की तो रितिका की उस से तीखी नोकझोंक हो गई.

”मैं जानता हूं कि तू अपने बौस के साथ गुलछर्रे उड़ा कर आ रही है, इसी कारण घर आने में देर हुई.’’

”तुम्हें शर्म आनी चाहिए ऐसी बात कहते हुए.’’ रितिका कह देती, ”कोई एक बात तो बताओ जो मुझे चरित्रहीन साबित कर दे. कम से कम तोहमत लगाने से पहले मेरी नौकरी करने वाली कंपनी में जा कर लोगों से पूछ तो लेते मेरा चरित्र कैसा है. मैं नौकरी सिर्फ इसलिए करती हूं कि जब तक तुम बेरोजगार हो, तब तक घर अच्छे से चल सके.’’ रितिका ने समझाया.

”मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं है, मैं सब जानता हूं. तुझे घर चलाने की फिक्र नहीं, बौस से मिलने की फिक्र ज्यादा होती है.’’ सचिन ने ताना दिया.

उसी समय सचिन ने एक खतरनाक फैसला ले लिया था. सचिन देर रात तक जागता रहा. रात तकरीबन 12 बजे का समय था, समूचे गायत्री नगर में सन्नाटा पसरा हुआ था, तभी सचिन ने पूरी ताकत से रितिका का गला दबा दिया. उस की चीख भी नहीं निकल सकी. सचिन के शक्की मिजाज ने उसे हैवान बना दिया था. लगभग साढ़े 3 साल से सचिन राजपूत के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही रितिका को मौत के घाट उतारते वक्त उस के हाथ नहीं कांपे. हत्या करने के बाद उस की लाश चादर में लपेट कर बैड पर रख दिया और 2 दिनों तक लाश के बगल में शराब पी कर बिना किसी हिचकिचाहट के सोता रहा.

अपनी प्रेमिका की हत्या करने के बाद जैसे ही सचिन राजपूत नशे की हालत से बाहर आया तो उस ने मिसरोद में रहने वाले अपने दोस्त अनुज उपाध्याय को फोन कर अपनी प्रेमिका रितिका की हत्या की सूचना दे दी. रितिका की हत्या बात सुन कर पहले तो अनुज को सचिन की बात पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब सचिन ने जोर दे कर कहा तो अनुज उपाध्याय ने बिना देरी किए बजरिया थाने की एसएचओ शिल्पा कौरव को इस की सूचना दे दी. हत्या की सूचना पा कर एसएचओ शिल्पा कौरव तुरंत अपने सहायकों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गईं. रास्ते में ही उन्होंने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

कुछ देर में वह गायत्री नगर, भोपाल के फ्लैट नंबर 34 पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण किया. रितिका की लाश 48 घंटे से ज्यादा समय तक चादर में लिपटे पड़े रहने से डीकंपोज (खराब) होने लगी थी, अत: उन्होंने जरूरी काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और फ्लैट में ही मौजूद मृतका के हत्यारे लिवइन पार्टनर सचिन राजपूत को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी. पूछताछ में सचिन ने अपनी प्रेमिका रितिका सेन की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

उधर जिस फ्लैट में रितिका और सचिन पिछले 9 महीने से किराए पर रह रहे थे, उस के मालिक शैलेंद्र वर्मा ने पुलिस को बताया कि वह तो दोनों को पतिपत्नी ही समझते थे. फ्लैट किराए पर लेते वक्त सचिन ने रितिका को अपनी पत्नी बताया था. हालांकि रितिका की मांग में सिंदूर भरा न देख मेरी पत्नी ने रितिका को टोका भी था. तब रितिका ने कहा था कि आंटीजी, मैं प्राइवेट कंपनी में काम करती हूं, वहां कोई भी शादीशुदा महिला मांग भर कर नहीं आती, इसलिए मैं भी नहीं भरती. वैसे भी मैं नए खयालातों की हूं. गहनता से की गई पूछताछ में ऐसी कहानी निकल कर सामने आई कि पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो गई. चौंकाने वाली बात यह थी कि सचिन राजपूत ऐसा हैवान था, जिसे अपनी प्रेमिका की हत्या करने का तनिक भी मलाल नहीं था.

29 वर्षीय रितिका सेन और सचिन राजपूत के बीच शुरुआत में मोबाइल पर प्यार भरी बातों का सिलसिला शुरू हुआ, फिर छोटीछोटी मुलाकातें जब आगे बढ़ीं तो दोनों के दिलों में प्यार का अंकुर फूटने लगा. कुछ ही दिनों में उस ने वृक्ष का रूप अख्तियार कर लिया. कुछ समय तक पिकनिक स्पौट, कैफे और पार्क में मुलाकातें करने के बाद दोनों ने बिना किसी हिचकिचाहट के लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला कर लिया. यह बात जैसे ही दोनों के फेमिली वालों को मालूम हुई तो उन्होंने इस का विरोध किया. क्योंकि रितिका सेन समाज की थी, जबकि सचिन जाति से राजपूत था. इतना ही नहीं, वह 2 बच्चों का बाप था और रितिका के चक्कर में पत्नी से तलाक लेने की कोशिश कर रहा था. दोनों के फेमिली वाले उन की आशिकी को ले कर परेशान थे.

फेमिली वालों ने उन्हें हर तरह से समझाया. ऊंचनीच का वास्ता दिया, लेकिन फेमिली वालों के विरोध की परवाह किए बिना ही दोनों भोपाल के गायत्री नगर इलाके में किराए पर फ्लैट ले कर रहने लगे. शुरुआत के दिनों में दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहते हुए बेहद खुश थे. सचिन विदिशा जिले के सिरोंज का रहने वाला था, जबकि रितिका भोपाल की. वह अपने फेमिली वालों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी. इस का असर यह हुआ कि वे एकदूसरे की अच्छाइयों और कमजोरी को जान गए. समय अपनी गति से गुजरता रहा. इस बीच सचिन रितिका के मोबाइल फोन के हर वक्त बिजी रहने से काफी तनावग्रस्त रहने लगा था. क्योंकि वह जब भी उसे फोन करता, उस का मोबाइल व्यस्त ही आता था. सचिन समझ नहीं पा रहा था कि वह हर वक्त किस से बात करती है.

इसी हकीकत को जानने के लिए सचिन ने एक दिन उस का मोबाइल चैक किया तो पता चला कि वह घंटों अपने बौस से बातें करती है. सचिन समझ गया कि रितिका और उस के बौस के बीच अवश्य चक्कर है. चरित्र पर संदेह करने की वजह से दोनों में अकसर लड़ाई होने लगी थी. यह लड़ाई कभीकभी मारपीट तक पहुंच जाती थी. सचिन बेरोजगार था. रितिका के नौकरी करने से किसी तरह उस की गृहस्थी की गाड़ी चल रही थी. रितिका को प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने की वजह से घर आने में अकसर देर हो जाती थी. उधर अकसर उस का मोबाइल फोन भी व्यस्त रहता था.

यह बात सचिन को कतई पसंद नहीं थी. रितिका जिस दिन भी घर देर से आती, सचिन जरूर उस से झगड़ा करता. अनेक बार रितिका ने सचिन को समझाया भी कि देखो, तुम्हारा शक झूठा है. तुम्हें घर पर निठल्ले बैठेबैठे शक करने की बीमारी हो गई है. इस उम्र में मैं अपने बौस से इश्क लड़ा कर क्या अपना भविष्य चौपट करूंगी.

”मैं सब जानता हूं, तुम जैसी लड़कियां अपने प्रेमी को बहलाने के लिए इसी तरह की नौटंकियां किया करती हैं,’’ सचिन ने गहरी नजर से घूरते हुए कहा.

रितिका ने कहा, ”तुम्हें तो कोई चिंता है नहीं, तुम यूं ही शक करते रहे तो न जाने एक दिन क्या होगा.’’

सचिन अपने शक से बाहर निकलने को कतई तैयार नहीं था. रितिका सचिन को समझातेसमझाते थक चुकी थी, लेकिन उस पर कोई असर नहीं होता था.

27 जून, 2025 की रात रितिका ने सचिन से दोटूक शब्दों में कहा, ”आए दिन तुम मेरे चरित्र पर तोहमत लगाते रहते हो, यह अच्छी बात नहीं है.’’

रितिका की बात पर सचिन को ताव आ गया. बोला, ”तेरी जुबान आजकल कुछ ज्यादा ही चलने लगी है,’’ कहते हुए उस ने रितिका पर हाथ छोड़ दिया. कहते हैं कि शक इंसान को किसी भी हद तक सोचने पर मजबूर कर देता है, एक बार शक ने पैर जमाए तो वह दिमाग में घर कर के बैठ गया, लाख समझाने के बाद भी सचिन का शक बढ़ता गया तो वह खोयाखोया रहने लगा. शक पूरी तरह से उस की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. जिस दिन भी रितिका देर शाम अपनी नौकरी से घर वापस आती, सचिन ने घर में तूफान खड़ा कर देता.

बात 26 जून, 2025 की है. शाम के 6 बजे थे. उस दिन सचिन का मन रितिका से तकरार हो जाने की वजह से कुछ उखड़ा हुआ था, लेकिन इस के बावजूद भी वह अपने मित्र अनुज उपाध्याय को ले कर अपने फ्लैट पर आया था. फ्लैट के भीतर कदम रखते ही सचिन ने मित्र को बैठक में बिठा दिया और रितिका को आवाज लगाई. कई बार आवाज लगाने के बावजूद रितिका ने कोई जवाब नहीं दिया, इस पर सचिन बैडरूम का दरवाजा धकेल कर जैसे ही बैडरूम में घुसा, उस ने रितिका को गहरी नींद में सोता हुआ पाया. तब वह बोला, ”रितिका डार्लिंग, देखो मेरे साथ कौन आया है?’’

फिर भी रितिका ने कोई उत्तर नहीं दिया. तब सचिन अपने दोस्त की ओर मुंह कर धीरे से बोला, ”गहरी नींद में सो रही है.’’

जबकि असलियत यह थी कि उसे नींद से जगाने का साहस सचिन जुटा नहीं पा रहा था. इस की वजह थी, बीती रात रितिका के साथ हुई उस की तीखी नोकझोंक. रितिका के चरित्र को ले कर शुरू हुई नोकझोंक में जितना सचिन ने कहा, उस से कहीं ज्यादा जलीकटी बातें रितिका ने उसे सुना दी थीं. एक तरह से रितिका ने अपना सारा गुस्सा उस पर उतार दिया था. सुबह होने पर सचिन ने रितिका को गुस्से के मूड में ही पाया. वह अपनी नौकरी पर जाने से पहले गुमसुम रह कर किचन में अपने लिए लंच तैयार करने में जुटी हुई थी. इस दौरान न तो सचिन ने रितिका से एक भी शब्द बोला और न रितिका ने अपनी जुबान खोली. यहां तक कि उस ने बेमन से नाश्ता तैयार किया.

दरअसल, रितिका अपना काम मेहनत और लगन से करती थी, जिस से उस के बौस उस से काफी खुश थे. रितिका का अपने बौस से बेझिझक और खुल कर बातें करना सचिन के संदेह का कारण बन गया, जो वक्त के साथ गंभीर होता जा रहा था. सचिन इस के लिए रितिका को कई बार समझा भी चुका था, लेकिन रितिका ने उस पर ध्यान नहीं दिया था. उस का कहना था कि कंपनी में वह जिस माहौल में काम करती है, उस में बौस से ले कर अन्य कर्मचारियों से संपर्क में रहना ही पड़ता है. मगर सचिन यह मानने को तैयार नहीं था. रितिका के चरित्र को ले कर सचिन राजपूत का संदेह दिनप्रतिदिन गहरा होता जा रहा था.

सचिन बीती रात से ले कर सुबह होने तक की यादों से तब बाहर निकला, जब उस के दोस्त अनुज ने आवाज लगाई, ”सचिन, क्या हुआ, सब खैरियत तो है न? रितिका भाभी कहीं गई हैं क्या?’’

”अरे नहीं यार, अभी तक वह सो रही है. लगता है गहरी नींद में है, उसे गहरी नींद से जगाना उचित नहीं होगा.’’ सचिन वहीं से तेज आवाज में बोला.

”कोई बात नहीं, तुम यहां आ जाओ.’’ अनुज बोला और सचिन ने बैडरूम का दरवाजा खींच कर बंद कर दिया.

संयोग से दरवाजे के हैंडल पर उस का हाथ लग गया और दरवाजा खट से तेज आवाज के साथ बंद हो गया. इसी खटाक की आवाज से रितिका की नींद भी खुल गई. सचिन बैडरूम से निकल कर अपने दोस्त अनुज के पास आ कर बैठ गया. कुछ देर में रितिका भी आंखें मलती हुई बैडरूम से किचन में चली गई. किचन में जाते हुए उस की नजर बैठक में बैठे सचिन के दोस्त अनुज उपाध्याय पर पड़ गई थी. अनुज ने भी रितिका को देख लिया था और देखते ही तुरंत बोल पड़ा, ”भाभीजी नमस्ते, कैसी हैं आप?’’

थोड़ी देर में रितिका ने एक ट्रे में पानी से भरे 2 गिलास टेबल पर रख दिए. अनुज ने भी पानी पीने के बाद खाली गिलास ट्रे में रख दिया. रितिका अनुज से परिचित थी और यह भी जानती थी कि यह सचिन का करीबी दोस्त है. इस कारण उस के मानसम्मान में कभी कोई कमी नहीं रखती थी. अनुज से अनौपचारिक बातें करने के बाद दोबारा वह किचन में चली गई. कुछ मिनट में ही रितिका अनुज और सचिन के पास 3 कप चाय के ट्रे में ले कर उन के सामने ही सोफे पर बैठ गई थी. हकीकत में अनुज को सचिन के साथ आया देख कर रितिका कुछ सुकून महसूस कर रही थी. वह भी बीती रात से ले कर कुछ समय पहले तक के मानसिक तनाव से उबरना चाह रही थी.

रितिका ने चाय का कप उठा कर मुसकराते हुए अनुज की ओर बढ़ा दिया. अनुज हाथ में कप लेते हुए बोला, ”भाभीजी, आप ठीक तो हैं न? कैसी हालत बना रखी है आप ने? लगता है, सारी रात ठीक से सो नहीं पाई हो?’’

रितिका मौन बनी रही. उधर सचिन भी मौन रहा. कुछ पल बाद रितिका धीमे स्वर में बोली, ”यह अपने जिगरी दोस्त से पूछो, तुम्हारे सामने ही बैठा है.’’

”क्यों भाई सचिन, क्या बात है?’’

”अरे यह क्या बोलेगा, इस ने तो मेरी जिंदगी में तूफान ला दिया है. अब शेष बचा ही क्या है, अपने दोस्त को तुम ही समझाओ.’’ रितिका थोड़ा तल्ख आवाज में बोली.

”क्या बात हो गई? क्या तुम दोनों के बीच फिर से तूतूमैंमैं हुई है?’’ अनुज बोला.

”आप तूतूमैंमैं की बात करते हो,’’ कुछ देर मौन रह कर रितिका ने फिर बोलना शुरू किया, ”साढ़े 3 साल मेरे साथ गुजारने के बाद तुम्हारा मित्र कहता है कि मैं चरित्रहीन हूं, मेरा अपने बौस के साथ चक्कर चल रहा है. मुझे अब भलीभांति समझ में आ गया है कि तुम्हारे बेरोजगार दोस्त को सिर्फ मेरे कमसिन जिस्म और पैसों में दिलचस्पी थी. उसे न मेरी जिंदगी से कोई मतलब और न ही मेरी भावनाओं से, वह तो सिर्फ मेरे जिस्म से अपनी कामोत्तेजना शांत कर मेरे द्वारा नौकरी कर के मेहनत से लाए पैसों से मौज कर रहा है.

”साढ़े 3 साल तक मेरे साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद अब तुम्हारे दोस्त को मैं चरित्रहीन नजर आने लगी. इस के इश्क के चक्कर में मैं ने अपने घर वालों से नाता तोड़ लिया. और अब ये कह रहा है कि तू चरित्रहीन है, मैं अब तेरे साथ नहीं रह सकता, तू तो अपने बौस के साथ रह. अनुज, अब तुम ही बताओ कि मैं कहां जाऊं? क्या करूं? क्या जहर खा कर आत्महत्या कर लूं?’’

”भाभीजी, आप ऐसा कुछ भूल कर भी मत कर लेना वरना सचिन को जेल की हवा खानी पड़ेगी.’’ अनुज ने सचिन को समझाने का भरपूर प्रयास किया.

”यही तो मेरी जिंदगी बन गई है. कहां तो मुझ पर बड़ा प्यार उमड़ता था. कहता था जानेमन, तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता. कहां गईं वो प्यार की बातें? कहां गए वादे, जिस के भरोसे मैं ने अपने पेरेंट्स और भाई से नाता तोड़ दिया था.’’

रितिका भाभी ने जब अपने मन की भड़ास पूरी तरह से निकाल ली, तब अनुज सचिन से बोला, ”क्यों भाई सचिन, ये मैं क्या सुन रहा हूं? रितिका भाभी जो कुछ कह रही हैं, क्या वह सही है? यदि हां तो तुम्हें रितिका भाभी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए.’’

सचिन दोस्त अनुज की बातें चुपचाप सुनता रहा. उस की जुबान से एक शब्द नहीं निकला. सचिन की चुप्पी देख कर अनुज फिर बोलने लगा, ”तुम्हें रितिका भाभी के चरित्र पर संदेह करते हुए जरा भी शर्म नहीं आती?

”भाभी का अपने बौस के साथ चक्कर चलने का बेबुनियाद आरोप लगा कर तुम उन की चारित्रिक हत्या करने के साथ जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हो. देखो, तुम दोनों की भलाई इसी में है कि तुम जितनी जल्दी हो सके, रितिका भाभी से माफी मांगने के बाद विधिवत शादी कर लो और उन्हें समाज में सिर उठा कर पूरे मानसम्मान के साथ जीने का अधिकार दे दो.’’

मानसम्मान की बात सुनते ही सचिन बिफर पड़ा. तल्ख स्वर में बोला, ”अनुज, किस मानसम्मान की बात कर रहे हो, रितिका के चरित्र को ले कर इस के औफिस के लोगों से ले कर कालोनी के लोग क्या कुछ नहीं कहते हैं. ये भी रोज ताना मारती है कि मैं यदि नौकरी करने नहीं जा रही होती तो नानी याद आ जाती, कहां से देते फ्लैट का भाड़ा, लाइट का बिल, दूध और किराने वाले को पैसे. खुद बेरोजगार होते हुए भी काम की तलाश में नहीं जाते, सारा दिन मोबाइल फोन और टीवी सीरियल देखने में वक्त जाया करते रहते हो.’’

इतना सब सुनने के बाद अजीब दुविधा में फंसा अनुज समझ नहीं पा रहा था कि वह किस का पक्ष ले और किसे समझाए? फिर भी अनुज ने दोनों को बात का बतंगड़ न बनाने और प्रेम से मिल कर रहने की सलाह दे सचिन के घर से विदा ली. अनुज उपाध्याय के जाते ही दोनों आपस में फिर से उलझ गए. दोनों में तूतूमैंमैं होने लगी. दोनों तेज आवाज में एकदूसरे पर आरोपप्रत्यारोप लगाने लगे कि उन के आपसी विवाद में अनुज को क्यों लाया गया? इसी बात को ले कर रितिका और सचिन में नोकझोंक होती रही.

उन दोनों में नोकझोंक होने की आवाज पड़ोसियों को सुनाई दे रही थी, लेकिन उस के भाड़े के फ्लैट के आसपास कोई ऐसा पड़ोसी नहीं था, जो उन दोनों को झगडऩे से रोक सके, उन को शांत कर सके या फिर उन्हें समझा सके. पड़ोसियों के लिए तो उन के झगड़े आए दिन की बात हो चुकी थी. फिर रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर सचिन राजपूत ने रितिका सेन की हत्या कर दी. पूछताछ के बाद पुलिस ने सचिन राजपूत को अदालत में पेश किया, जहां से उसे हिरासत में जेल भेज दिया गया. सचिन ने यदि अपने शक्की मिजाज को काबू रख कर अपनी प्रेमिका की बात पर भरोसा कर के जिंदगी जी होती तो शायद जेल जाने की नौबत नहीं आती. Love Story Hindi Kahani

 

 

UP News: मांगा सिंदूर मिली मौत

UP News: रचना की मांग में सिंदूर भले ही पति शिवराज के नाम का होता था, लेकिन वह प्रेमी संजय पटेल को ही पति मानती थी. वह प्रेमी के लिए तनमन से पूरी तरह समर्पित थी. पति शिवराज की मौत के बाद रचना ने संजय पर शादी का दबाव डाला तो ऐसी घटना घटी, जिस की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी…

संजय के लिए रचना से विवाह रचाना नामुमकिन था. वह गांव का पूर्वप्रधान था. गांव में उस की प्रतिष्ठा थी. रचना से विवाह कर वह अपनी मानमर्यादा को मिट्टी में नहीं मिलाना चाहता था, अत: उस ने रचना से पीछा छुड़ाने की सोची. मन में यह विचार आते ही संजय को रिश्ते के भतीजे संदीप पटेल व उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार की सुध आई. दोनों अपराधी प्रवृत्ति के थे. एक शाम संजय ने भतीजे संदीप और उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार से मुलाकात कर रचना से छुटकारा दिलाने में मदद की गुहार की.

रुपयों के लालच में वे दोनों राजी हो गए. इस के बाद संजय ने संदीप व प्रदीप की मदद से रचना की हत्या करने व उस की लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. संजय ने रचना की मौत का सौदा एक लाख रुपए में किया और प्रदीप को 15 हजार रुपए पेशगी दे दी. शेष रकम काम होने के बाद देने का वादा किया. 13 अगस्त, 2025 की दोपहर झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के किशोरपुरा गांव निवासी विनोद पटेल पशुओं का चारा काटने अपने महेबा रोड स्थित खेत पर पहुंचा. वहां खेत किनारे बने कुएं से तेज बदबू आ रही थी. उस ने कुएं में झांक कर देखा तो कुएं के पानी में 2 बोरियां तैर रही थीं.

विनोद ने अपने खेत के कुएं में पड़ी 2 बोरियों से तेज बदबू आने की सूचना थाना टोड़ी फतेहपुर पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही एसएचओ अतुल कुमार राजपूत पुलिस बल के साथ किशोरपुरा गांव के बाहर स्थित विनोद के कुएं पर जा पहुंचे. उस समय वहां ग्रामीणों की भीड़ जुटी थी. एसएचओ अतुल कुमार राजपूत ने पुलिसकर्मियों व ग्रामीणों की मदद से दोनों बोरियों को कुएं से बाहर निकलवाया. बोरियां खोली गईं तो सभी ने दांतों तले अंगुली दबा ली. प्लास्टिक की एक बोरी में महिला की लाश का गरदन से ले कर कमर तक का हिस्सा था, जबकि दूसरी बोरी में कमर से ले कर जांघ तक का हिस्सा था.

इस के बाद कुएं को खाली कराया गया तो उस में एक बोरी और मिली, जिस में कटा हुआ एक हाथ था. कलाई में लाल रंग का धागा बंधा हुआ था. महिला का सिर और पैर अब भी नहीं मिले थे. बिना सिर के लाश की शिनाख्त होनी मुश्किल थी. बोरियों में शव के टुकड़ों के साथ ईंटपत्थर भी भरे गए थे, ताकि बोरियां पानी में उतरा न सकें. इंसपेक्टर अतुल कुमार ने टुकड़ों में विभाजित महिला की लाश मिलने की सूचना पुलिस के आला अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद ही एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति, एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार तथा सीओ (सिटी) अनिल कुमार राय घटनास्थल आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने मृतका के अन्य अंगों की खोज में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन सफलता नहीं मिली तो बरामद अंगों को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल झांसी भेज दिया. 72 घंटे बाद भी शव की शिनाख्त न होने पर उन का पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने अज्ञात में दाह संस्कार कर दिया गया. एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने महिला के इस ब्लाइंड मर्डर को बड़ी गंभीरता से लिया और उस की शिनाख्त व हत्याकांड के खुलासे के लिए एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार व सीओ अनिल कुमार की देखरेख में 18 टीमें गठित कीं.

टीम में टोड़ी फतेहपुर थाने के एसएचओ अतुल राजपूत, स्वाट प्रभारी जितेंद्र तक्खर, सर्विलांस टीम से दुर्गेश कुमार, रजनीश तथा तेजतर्रार दरोगा रजत सिंह, शैलेंद्र, हर्षित आदि को शामिल किया गया. टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने आंगनबाड़ी गु्रप, ग्राम पंचायत गु्रप, आशा वर्कर तथा राशन कोटेदारों का भी सहयोग लिया. 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले. इतनी मशक्कत के बाद भी शव की पहचान नहीं हो पाई. अब तक यह मामला डीआईजी (झांसी रेंज) केशव चौधरी के संज्ञान में भी आ गया था. अत: उन्होंने इस ब्लाइंड मर्डर केस को जल्द से जल्द खोलने व हत्यारों को पकडऩे का आदेश एसपी व एसएसपी को दिया. इस आदेश के बाद पुलिस और भी सक्रिय हो गई.

इधर एसपी (ग्रामीण) की टीम भी जांच में जुटी थी. शव के टुकड़े जिन बोरियों में पाए गए थे, वे खाद की बोरियां थीं. उन पर कृभको लिखा था, लेकिन कोड नंबर साफ नजर नहीं आ रहा था. टीम यह जानना चाहती थी कि बोरी किस सहकारी समिति से खरीदी गईं और यह किस गांव के किसान ने खरीदी थीं. जांच के लिए टीम ने खाद की कई सहकारी समितियों से संपर्क किया, लेकिन कोड नंबर स्पष्ट न होने से कोई खास जानकारी हासिल न हो सकी. टीम ने बोरी से बरामद ईंट की मिट्टी का भी परीक्षण कराया तो जांच में टोड़ी फतेहपुर की मिट्टी पाई गई. जांच से यह बात स्पष्ट हो गई कि महिला टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र के ही किसी गांव की हो सकती है.

इसी बीच मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के थाना चंदेरा के मैलवारा गांव निवासी दीपक यादव को किसी महिला के कटे अंग मिलने की खबर लगी. उस की बहन रचना भी 8 दिनों से गायब थी. 19 अगस्त, 2025 की सुबह 10 बजे दीपक यादव गांव के सरपंच मोनू यादव के साथ थाना टोड़ी फतेहपुर पहुंचा. उस ने इंसपेक्टर अतुल राजपूत को बताया कि उस की बहन रचना यादव इसी थाना क्षेत्र के महेबा गांव निवासी शिवराज यादव को ब्याही थी. शिवराज की मौत हो चुकी है.

इन दिनों रचना महेबा गांव के ही पूर्वप्रधान संजय पटेल के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी. 8 अगस्त को उस ने रचना से बात करने की कोशिश की थी. वह किसी अस्पताल में भरती थी. बात करने के दौरान पूर्वप्रधान संजय पटेल ने रचना के हाथ से मोबाइल फोन छीन लिया और मुझे धमकाया कि फोन मत किया करो. 2 रोज बाद फोन किया तो संजय बोला कि मैं ने तेरी बहन को मार डाला है. यह सुन कर उसे लगा कि वह गुस्से व नशे में बात कर रहा है. लेकिन अब लग रहा है कि संजय पटेल ने उसे सचमुच मार डाला है. आप सच्चाई का पता लगाइए. दीपक यादव की बात सुन कर एसएचओ अतुल राजपूत ने रचना का फोन नंबर सर्विलांस पर लगाया. इस से पता चला कि रचना और पूर्वप्रधान संजय के बीच बातचीत होती रहती थी.

इस के बाद पुलिस टीम महेबा गांव पहुंची. वहां ग्रामीणों से पता चला कि रचना और पूर्व ग्राम प्रधान संजय के बीच अफेयर है. अब रचना लापता है. पुलिस टीम ने 20 अगस्त की रात नाटकीय ढंग से संजय पटेल व उस के भतीजे संदीप को टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र के लखेरी बांध के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ करने पर उन्होंने रचना की हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. संजय की निशानदेही पर पुलिस टीम ने हत्या में प्रयुक्त कार व मृतका रचना का मोबाइल फोन भी संजय के घर से बरामद कर लिया. संजय पटेल व संदीप को थाने लाया गया. थाने में जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस ने अपने भतीजे संदीप व उस के दोस्त प्रदीप के साथ मिल कर रचना की हत्या की थी. फिर उस ने शव के 7 टुकड़े कर 4 बोरियों में भरे थे. 3 बोरियां कुएं में फेंक दी थी तथा चौथी बोरी लखेरी नदी में डाल दी थी.

संजय व संदीप की निशानदेही पर पुलिस ने लखेरी नदी में नाव से सर्च औपरेशन चलाया और रचना का सिर, पैर व एक हाथ भी बरामद कर लिया. ये अंग भी बोरी में भरे गए थे. बरामद अंगों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए झांसी के जिला अस्पताल भेज दिया. अभी तक पुलिस टीम ने 2 आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन तीसरा आरोपी प्रदीप अहिरवार फरार था. 21 अगस्त, 2025 की रात 10 बजे पुलिस टीम ने एक मुठभेड़ के बाद प्रदीप अहिरवार को भी गिरफ्तार कर लिया. मुठभेड़ के दौरान उस के पैर में गोली लगी थी. कातिलों के पकड़े जाने के बाद डीआईजी केशव कुमार चौधरी, एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने झांसी पुलिस सभागार में एक संयुक्त प्रैस कौन्फ्रैंस कर रचना यादव हत्याकांड का खुलासा किया.

कातिलों को पकडऩे वाली पुलिस टीम पर आला कमान अधिकारियों ने इनामों की खूब बौछार की. डीआईजी केशव चौधरी ने टीम को 50 हजार रुपए नकद इनाम देने की घोषणा की. एसएसपी ने 20 हजार रुपए नकद पुलिस टीम को दिया. वहीं एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने भी 20 हजार रुपए नकद पुलिस टीम को पुरस्कार के रूप में दिए. चूकि कातिलों ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: एसएचओ अतुल राजपूत ने मृतका रचना के भाई दीपक यादव की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) तथा 201(3)(5) के तहत संजय पटेल, संदीप पटेल तथा प्रदीप अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

रचना कौन थी? वह संजय पटेल के संपर्क में कैसे आई? संजय ने उस की हत्या क्यों और कैसे कराई? यह सब जानने के लिए रचना के अतीत की ओर झांकना होगा. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना अंतर्गत एक गांव है मैलवारा. इसी गांव में फूलसिंह यादव सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी लौंगश्री के अलावा एक बेटा दीपक तथा बेटी रचना थी. फूलसिंह प्राइवेट नौकरी करता था. फूलसिंह की बेटी रचना खूबसूरत थी. 16 बसंत पार करने के बाद जब उस ने जवानी की डगर पर पैर रखा तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया. जो भी उसे देखता, मंत्रमुग्ध हो जाता. रचना खूबसूरत तो थी, लेकिन पढ़ाई में उस का मन नहीं था. जैसेतैसे कर के उस ने दसवीं की परीक्षा पास की फिर घर के काम में मम्मी का हाथ बंटाने लगी.

फूल सिंह ने रचना की शादी टीकमगढ़ शहर के मोहल्ला सलियाना में रहने वाले जयकरन यादव से कर दी. वह तहसील में काम करता था. उस के 2 अन्य भाई थे, जो पन्ना शहर में नौकरी करते थे. शादी के बाद ससुराल में रचना के हंसीखुशी से 5 साल बीत गए. इस बीच वह 2 बेटियों की मां बन गई. बेटियों के जन्म के बाद जब खर्च बढ़ा तो घर में आर्थिक परेशानी रहने लगी. घर खर्च को ले कर रचना व जयकरन के बीच झगड़ा होने लगा. धीरेधीरे पतिपत्नी के बीच इतना मनमुटाव बढ़ गया कि रचना अपनी दोनों मासूम बेटियों को पति के हवाले कर मायके में आ कर रहने लगी.

मायके में कुछ समय तो उस का ठीक से बीता, उस के बाद घरपरिवार के लोगों के ताने मिलने लगे. भाई दीपक को भी रचना का ससुराल छोड़ कर मायके में रहना नागवार लगता था. गांव में उस की बदनामी होने लगी थी. घरपरिवार के तानों से परेशान रचना ने जैसेतैसे 2 साल मायके में बिताए. उस के बाद एक रिश्तेदार के माध्यम से रचना ने शिवराज यादव से विवाह कर लिया. शिवराज यादव झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के गांव महेबा का रहने वाला था. वह किसान था. उस के पास 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी. वह अपने बड़े भाई रघुराज के साथ रहता था.

शादी रचाने के बाद रचना अपने दूसरे पति शिवराज के साथ महेबा गांव में रहने लगी. रचना स्वच्छंद स्वभाव की थी. उसे घूंघट में रहना पसंद न था, अत: वह न जेठ से परदा करती थी और न ही बड़ीबुजुर्ग महिलाओं से. उस की अपनी जेठानी से भी नहीं पटती थी. घरेलू कामकाज को ले कर दोनों में अकसर तूतूमैंमैं होती रहती थी. रचना को संयुक्त परिवार में रहना पसंद न था, अत: वह पति पर अलग रहने का दबाव बनाने लगी. घर और जमीन के बंटवारे को ले कर रचना और शिवराज के बीच मनमुटाव शुरू हो गया. दोनों के बीच झगड़ा व मारपीट होने लगी. बंटवारे को ले कर रचना की कहासुनी जेठजेठानी से भी होने लगी.

अत: उस ने जेठ रघुराज पर इलजाम लगाना शुरू कर दिया कि वह उस पर बुरी नजर रखता है. 25 मई, 2023 की शाम रेप हत्या के इलजाम को ले कर रचना का जेठजेठानी व पति से झगड़ा हुआ. तीनों ने मिल कर रचना की जम कर पिटाई की. इस पिटाई ने आग में घी डालने जैसा काम किया. सुबह होते ही रचना थाना टोड़ी फतेहपुर में जेठ व पति के खिलाफ रेप व हत्या की कोशिश करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने रचना के जेठ रघुराज व पति शिवराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस घटना के बाद रचना का ससुराल में रहना संभव न था, अत: वह एक बार फिर मायके आ गई. उस ने अपने भाई दीपक के सामने आंसू बहाए तो उस ने बहन को घर में शरण दे दी.

रचना के रेप व हत्या के प्रयास का मामला झांसी के गरौठा कोर्ट में शुरू हो चुका था. केस की पैरवी हेतु रचना को कोर्ट आना पड़ता था. गरौठा कोर्ट आतेजाते ही एक रोज रचना की मुलाकात संजय पटेल से हुई. दोनों एकदूसरे को पहले से ही जानते थे. जिस महेबा गांव में रचना की ससुराल थी, संजय पटेल भी उसी गांव का रहने वाला था. वह गांव का प्रधान भी रह चुका था. रचना और संजय की दोस्ती हो गई. दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. संजय अब रचना के केस की पैरवी करने लगा और उस की आर्थिक मदद भी करने लगा.

संजय नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका रचना उस से दूर मायके में रहे, अत: उस ने झांसी के गुरदासपुर में एक मकान किराए पर लिया और रचना को इस मकान में शिफ्ट कर दिया. संजय ने मकान में सारी सुविधाएं भी मुहैया करा दीं. इस के बाद रचना और संजय इस किराए के मकान में लिवइन रिलेशन में रहने लगे. रचना जो भी डिमांड करती, संजय उस डिमांड को पूरी करता. उस ने गहनोंकपड़ों से रचना को लाद दिया था. लाखों रुपए नकद भी दे चुका था. संजय पटेल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था. बड़ा बेटा 20 वर्ष की उम्र पार कर चुका था, लेकिन रचना से नाजायज रिश्ता जोडऩे के बाद उसे अपनी पत्नी ममता फीकी लगने लगी थी.

ममता को जब पता चला कि पति संजय व गांव के शिवराज की पत्नी रचना के बीच नाजायज रिश्ता है तो उसे अपना व बच्चों का भविष्य अंधकारमय लगने लगा. उस ने दोनों के नाजायज संबंधों का जम कर विरोध किया. घर में कलह मचाई, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई. संजय और रचना के संबंध आम हो गए थे. शिवराज यादव को जब पत्नी रचना के नाजायज संबंधों की जानकारी हुई तो उस ने माथा पीट लिया. वह पहले भी उस के परिवार को बदनाम कर चुकी थी, लेकिन अब तो उस ने हद ही कर दी थी. पत्नी के कृत्य से वह इतना टूट गया कि बीमार पड़ गया. जून, 2025 की 10 तारीख को उस की बीमारी के चलते मौत हो गई.

पति की मौत के बाद रचना विधवा हो गई, लेकिन रचना को विधवा कहलाना तथा विधवा का जीवन बिताना मंजूर नहीं था. एक शाम संजय पटेल अपनी प्रेमिका रचना से मिलने आया तो वह उदास बैठी थी. संजय ने उदासी का कारण पूछा तो वह बोली, ”संजय, तुम्हें तो पता ही है कि मैं विधवा हो गई हूं. लोग मुझे विधवा की नजर से देखें, यह मुझे पसंद नहीं है.’’

”तो तुम चाहती क्या हो?’’ संजय ने रचना से पूछा.

रचना बोली, ”संजय, तुम मेरी मांग में सिंदूर भर कर मुझे अपनी पत्नी बना लो. शेष जीवन मैं तुम्हारी पत्नी बन कर तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं.’’

रचना की बात सुन कर संजय को लगा कि जैसे उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. वह असमंजस की स्थिति में बोला, ”रचना, मैं कपड़ा, गहना, रुपयापैसा जैसी तुम्हारी हर डिमांड को पूरा कर रहा हूं. फिर यह सिंदूर जैसी अटपटी डिमांड क्यों?’’

रचना तुनक कर बोली, ”तुम्हें मेरी डिमांड अटपटी लग रही है. औरत का सब से कीमती गहना उस का सिंदूर होता है. वही मैं तुम से मांग रही हूं. सिंदूर के आगे बाकी सारी सुविधाएं फीकी हैं.’’

”रचना, मैं शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप हूं. तुम्हारी मांग में सिंदूर भर कर मैं अपनी पत्नी से विश्वासघात नहीं कर सकता.’’ संजय ने समझाया.

”जब मेरे साथ रात बिताते हो, मेरे शरीर को रौंदते हो, तब तुम पत्नी के साथ विश्वासघात नहीं करते. सिंदूर की मांग की तो मुझे विश्वासघात का पाठ पढ़ा रहे हो. मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनूंगी. तुम्हें मेरी मांग में सिंदूर भर कर पत्नी का दरजा देना ही होगा.’’

इस के बाद तो आए दिन सिंदूर की बात को ले कर रचना और संजय में तकरार होने लगी. संजय जब भी रचना से मिलने जाता, वह मांग में सिंदूर भरने और पत्नी का दरजा देने का दबाव बनाती. रचना अब उसे ब्लैकमेल करने पर उतर आई थी. रचना ने शादी की जिद पकड़ी तो संजय घबरा उठा. उस ने रचना को बहुत समझाया, लेकिन जब वह नहीं मानी तो उस ने रचना को खत्म करने का निश्चय किया. इस के लिए उस ने भतीजे संदीप व उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार को चुना. दोनों अपराधी प्रवृत्ति के थे.

संदीप झांसी के बिजौली कस्बे में रहता था और एक फैक्ट्री में काम करता था. साल 2022 में उस ने एक महिला की हत्या की थी. हत्या के मामले में वह जेल गया था, जेल में ही संदीप की दोस्ती प्रदीप से हुई थी. प्रदीप अहिरवार मूलरूप से झांसी के थाना गरौंठा के गांव पसौरा का रहने वाला था, लेकिन मऊरानीपुर में किराए पर रहता था. वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहता था. संजय पटेल ने संदीप व प्रदीप अहिरवार से संपर्क कर रचना की मौत का सौदा किया. फिर हत्या करने व लाश को ठिकाने लगाने तथा किसी भी सूरत में पकड़े न जाने का प्लान बनाया.

संजय व उस के साथी रचना की हत्या करते, उस के पहले ही रचना 6 अगस्त, 2025 को बीमार पड़ गई. संजय ने उसे झांसी के प्राइवेट अस्पताल रामराजा में भरती कराया. रचना को ब्लीडिंग हो रही थी. 2 दिन में रचना ठीक हो गई. 8 अगस्त को संजय उसे डिस्चार्ज करा कर घर लाने पहुंचा तो वह बोली, ”यहीं से कोर्ट चलो. शादी करने के बाद ही घर में जाएंगे.’’ संजय ने उसे समझाया, लेकिन वह मान नहीं रही थी. संजय ने तब रचना को ठिकाने लगाने की ठान ली. उस ने संदीप से बात की और उसे अस्पताल बुला लिया. संदीप ने तब दोस्त प्रदीप से बात की और उसे तैयार रहने को कहा. उस ने तेजधार वाली कुल्हाड़ी का इंतजाम करने की भी बात प्रदीप से कही.

सब कुछ तय होने के बाद संजय ने रचना को 9 अगस्त, 2025 की शाम 5 बजे अस्पताल से डिस्चार्ज कराया. हालांकि वह डिस्चार्ज होने से मना कर रही थी, लेकिन जब संजय ने दूसरे रोज 10 अगस्त को शादी करने का वचन दिया तो वह मान गई. संजय की कार अस्पताल के बाहर ही खड़ी थी. वह कार की पीछे की सीट पर बैठ गई. उस के बगल में संजय भी बैठ गया. संदीप कार ले कर हाइवे पर आया तो संजय बोला, ”रचना, तुम इतने दिन अस्पताल में रही, तुम्हारा मन खराब हो गया होगा. थोड़ा घूम कर आते हैं.’’

लगभग एक घंटा सफर के बाद संजय मऊरानीपुर हाइवे पहुंचा. यहां प्रदीप अहिरवार उस का पहले से इंतजार कर रहा था. उस ने प्लास्टिक बोरी में लिपटी कुल्हाड़ी कार की डिक्की में रखी. फिर आगे की सीट पर संदीप के बगल में आ कर बैठ गया. इस के बाद यह लोग घूमते रहे. एक जगह रुक कर संजय ने शराब खरीदी और तीनों ने मिल कर कार के अंदर ही शराब पी. घूमते हुए सभी लहचूरा बांध पर कार ले कर पहुंचे. अब तक अंधेरा हो गया था. वहां सन्नाटा छाया था. प्रदीप कार में बैठी रचना से बोला, ”भाभी, तुम कितनी भी जिद कर लो, लेकिन संजय भैया तुम से शादी नहीं करेंगे.’’

इतना सुनते ही रचना भड़क गई और प्रदीप से बोली, ”तुम कौन होते हो यह सब कहने वाले?’’

रचना ने संजय से पूछा तो उस ने भी कह दिया कि प्रदीप ठीक बोल रहा है. वह उस से शादी नहीं कर सकता. तब रचना गुस्से से बोली, ”मैं क्या सिर्फ मजे लेने के लिए हूं. शहर वापस चलो. तुम सब को देख लूंगी. सब के दिमाग ठिकाने लग जाएंगे.’’

रचना की धमकी सुनते ही संदीप व प्रदीप ने उसे दबोच लिया और संजय ने कार में ही गला घोंट कर रचना को मार डाला. शव में पत्थर बांध कर लहचूरा डैम में फेंकने गए तो वहां पुलिस की गाड़ी खड़ी थी. कार में लाश थी, इसलिए तीनों वहां से भाग निकले. फिर वह लाश फेंकने खजूरी नदी पहुंचे, लेकिन वहां गार्ड था, इसलिए शव को नहीं फेंक सके. आधी रात को संजय साथियों के साथ किशोरपुरा गांव पहुंचा. गांव के बाहर सड़क किनारे उस ने कार रोकी. यहां खेत के पास कुआं था. तीनों ने मिल कर रचना के शव को कार से निकाला और कुएं में फेंकने को ले आए. लेकिन यहां से संजय का गांव महेबा मात्र 5 किलोमीटर दूर था, जिस से शव की पहचान हो सकती थी. अत: उन्होंने समूचा शव कुएं में नहीं फेंका.

शातिर अपराधी प्रदीप कार से कुल्हाड़ी ले आया, फिर रचना के शव के 7 टुकड़े किए. शव के अंगों को 4 बोरियों में भरा गया. बोरियां पानी में न उतराएं, इस के लिए बोरियों में ईंटपत्थर भी भर दिए. फिर बोरियों का मुंह बांध कर 3 बोरियां कुएं में फेंक दीं और चौथी बोरी जिस में सिर व पैर थे, कार में रख कर वहां से 7 किलोमीटर दूर रेवन गांव के पास लखेरी नदी के पुल पर आए. इस के बाद पुल के नीचे नदी में बोरी फेंक दी. शव को ठिकाने लगाने के बाद संजय ने कार से प्रदीप को मऊरानीपुर तथा संदीप को विजौली पहुंचाया, फिर खुद कार ले कर अपने गांव महेबा आ गया.

संजय को विश्वास था कि उस का अपराध उजागर नहीं होगा, लेकिन यह उस की भूल थी. भीषण बरसात के कारण कुएं का जलस्तर बढ़ा तो बोरियां उतराने लगीं. 13 अगस्त, 2025 की दोपहर किशोरपुरा गांव का विनोद पटेल चारा काटने खेत पर गया तो कुएं में बोरियां उतराती दिखीं और उन से दुर्गंध भी आ रही थी. उस ने सूचना पुलिस को दी. पूछताछ करने के बाद 23 अगस्त, 2025 को पुलिस ने आरोपी संजय पटेल, संदीप पटेल तथा प्रदीप अहिरवार को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. UP New

 

Mumbai Crime : इंफ्लुएंसर बीवी के किए 17 टुकड़े

Mumbai Crime : 25 वर्षीय मोहम्मद ताहा अंसारी ने रील बनाने वाली 22 साल की परवीन उर्फ मुसकान से मोहब्बत की थी. फेमिली वालों के विरोध के बावजूद निकाह कर दोनों ने अपनी अलग दुनिया बसा ली थी. 2 साल बाद फिर अचानक उन की मोहब्बत को शक के कीड़े ने काट लिया. उस के बाद जो कुछ हुआ, उसे सुन कर किसी का भी दिल दहल जाएगा. ताहा के दिमाग की नसों को कुतरने वाला शक का कीड़ा तो नहीं मरा, लेकिन मुसकान जरूर 17 टुकड़ों में काट दी गई. पढ़ें, इस दर्दनाक कहानी में कैसे हुआ यह सब?

भिवंडी (ठाणे) के ईदगाह इलाके में रहने वाला मोहम्मद ताहा अंसारी 29 अगस्त, 2025 की शाम को जब कमरे पर आया, तब वहां ताला लगा पाया. उसे बहुत कोफ्त हुई. कारण उस वक्त वह बेहद थका हुआ था. कई दिनों बाद ट्रक चला कर कमरे पर लौटा था. खाड़ी से महज 20 मीटर की दूरी पर उस का कमरा था. समुद्र की उठतीगिरती लहरों के बढ़ते शोर से वह और भी परेशान हो रहा था. जबकि उसे कमरे के एकांत की जरूरत थी. वह कुछ खापी कर सोना चाहता था.

कमरे पर ताला लगा देख कर वह भुनभुनाया, ”दिन में ही उसे फोन किया था और शाम तक आने के बारे में बता दिया था…फिर भी न जाने कहां चली गई?’’

इसी के साथ उस ने पत्नी परवीन उर्फ मुसकान को फोन मिलाया, लेकिन उस का फोन नौट रीचेबल था. मोहम्मद ताहा परेशान हो गया. मुसकान को कई बार फोन मिलाया. कौल नहीं लगी. कुछ मिनटों में ही उस का फोन भी बैटरी खत्म होने के कारण बंद हो गया. वह दरवाजे के छोटे से चबूतरे पर बैठ गया. करीब आधे घंटे बाद मुसकान गोद में एक साल के बच्चे को लिए हुए आई. दूसरे हाथ में मोबाइल फोन और स्टैंड थामे हुए थी. उसे देख कर समझने में देर नहीं लगी कि मुसकान वीडियो बनाने के लिए गई हुई थी. वह बिफरता हुआ बोला, ”तुम्हें मैं ने दिन में कौल कर दिया था, फिर भी तुम लापरवाह की तरह आ रही हो.’’

”रील बनाने चली गई थी. सवारी नहीं मिल रही थी, इसलिए देरी हो गई.’’ मुसकान ने सफाई दी और ताला खोल कर कमरे में ऐसे चली गई, जैसे उसे शौहर की कोई परवाह ही नहीं हो.

जबकि ताहा बड़बड़ाता हुआ कमरे में दाखिल हुआ…

”तुम्हारे रील बनाने से मैं परेशान हो गया हूं. मेरा जरा भी खयाल नहीं रहता है.’’

”मेरा यही तो शौक है…तुम्हारी तरह मैं दारूबाज नहीं हूं.’’ मुसकान तीखे लहजे में बोली.

उस अंदाज में ताहा भी बोला, ”अरे तुम तो उस से भी अधिक गिरी हुई हो. रील बनाने के बहाने इधरउधर मुंह मारती फिरती हो. न जाने तुम्हारे कितने यार बन चुके हैं?’’

यह बात मुसकान को बहुत बुरी लगी. वह उस पर बिफरती हुई बोली, ”मेरे कैरेक्टर पर शक करते हो, तुम कौन से पाकसाफ हो. बच्चे की कसम खा कर बोलो कि तुम कभी मेरे अलावा किसी दूसरी औरत के साथ नहीं सोए हो!’’

”मेरे कैरेक्टर पर अंगुली उठाने वाली तुम कौन होती हो? मैं शराब पीता हूं, लेकिन यह बात मैं सच कहता हूं कि तुम्हारे अलावा मेरी जिंदगी में कोई गैर औरत नहीं है. मैं तो फेसबुक पर मर्दों के साथ बर्थडे मनाते तुम्हारी फोटो देख चुका हूं.’’ ताहा गुस्से में बोल पड़ा था.

दोनों के बीच बातों का घमासान होने लगा. ताहा की नजर जैसे ही पास बैठे बेटे पर गई. उसे देखते ही बातोंबातों में बोल पड़ा, ”पता नहीं बेटा भी मेरा है या किसी और का?’’

मुसकान आगबबूला हो गई. गुस्से में उस ने पति पर हाथ उठा दिया. अगले पल वहीं रखे मोबाइल स्टैंड से पति पर हमला बोल दिया. ताहा बचता हुआ एक कोने में चला गया. वहीं उस की नजर मांस काटने वाले बड़े चाकू पर पड़ी. उस के दिमाग में क्या खुराफात हुई कि उस ने बगैर कुछ सोचेविचारे चाकू उठा लिया. एक झटके में उस ने पत्नी को दबोच लिया और उस की गरदन रेत डाली. चंद मिनटों में मुसकान खून से सराबोर हो गई. वह जमीन पर गिर पड़ी थी. उस की गरदन कट गई थी.

ताहा जब ठंडा हुआ, तब उस ने अपने दोनों हाथों से माथा पकड़ लिया, ”यह मैं ने क्या कर दिया!’’

वह वहीं बैठ गया. कभी अपने खून सने हाथ को तो कभी खून लगे चाकू को देखने लगा. उस के सामने पत्नी मुसकान की लाश पड़ी थी. वह दुखी हो रहा था. उस के बारे में सोचने लगा था. अचानक 2 साल पहले का वह वाकया उस के दिमाग में घूम गया, जब मुसकान से वह पहली बार मिला था.

रील बनाते समय हो गया था प्यार

दोपहर का वक्त था. मुंबईठाणे हाइवे पर किनारे ट्रक खड़ा कर के एक पेड़ की छांव में मोहम्मद ताहा कड़ाही में कुछ पका रहा था. पास में उस का हेल्पर आटा गूंथ रहा था,  तभी उस की नजर एक लड़की पर गई. ग्रामीण वेशभूषा के साथ मेकअप में थी. उस के एक हाथ में मोबाइल था. दूसरे हाथ में मोबाइल लगाने का एक स्टैंड पकड़े थी. वह उस की तरफ ही चली आ रही थी. अपनी ओर उसे आता देख मोहम्मद ताहा चौंक गया था. उस की चालढाल जानीपहचानी सी लग रही थी. उस के बारे में सोच ही रहा था कि वह उस के करीब आ चुकी थी. वह कुछ बोल पाता, इस से पहले ही लड़की हिंदी में बोल पड़ी, ”आप ट्रक ड्राइवर हो? क्या पका रहे हो? कहां से आ रहे हो?’’

”मैं आप को पहचानता हूं?’’ बीच में ही ताहा का हेल्पर बोल पड़ा.

”कैसे पहचानता है तू? अभी जुम्माजुम्मा 4 दिन का ही है और…बेकार की बातें करता है?’’ ताहा झिड़कते हुए बोला.

”हांहां, मैं ने इन को आज ही मोबाइल में देखा है…इसी ड्रेस में!’’ हेल्पर फिर बोला.

”अरे हां! याद आया तूने मुझे भी तो दिखाया था इंस्टाग्राम में…एक चलती ट्रक पर रस्सा पकड़ कर चढ़ रही थी…’’ ताहा बोला.

”हांहां, तुम लोगों ने सही तरीके से मुझे पहचान लिया…मैं वही ट्रक पर चढऩे वाली लड़की हूं… कैसा लगा था वीडियो?’’

”मैं तो देख कर हैरान हो गया था…मैं ने बोला था कि यह तो कोई फिल्मी सीन की तरह है.’’ ताहा बोला.

”तो लाइक क्यों नहीं किया? चलो, कोई बात नहीं, अब सब्सक्राइब कर दो…यह लो मेरे वीडियो का ब्लौग. अपने मोबाइल में इसे खोल कर इस लाल वाले बटन को टच कर दो!’’ लड़की बोली.

”यहां भी वीडियो बनाने आई हो?’’ हेल्पर बोला.

”तुम लोग मेरी मदद करोगे?’’

”चलती ट्रक पर चढऩे वाला कैसे बनाया था?’’ हेल्पर को उस के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई.

”उस में एक बाइक वाले से मदद ली थी. उसी ने वीडियो बना दी थी.’’

”बहुत रिस्की था. डर नहीं लगा?’’ ताहा बोला.’’

”रिस्क कहां नहीं है? इंसान बैठाबैठा, चलताफिरता लुढ़क जाता है…या सड़क के किनारे कोई तेज गाड़ी से टक्कर मार कर फरार हो जाता है…’’ लड़की बोली.

”वह तो है, फिर भी जानबूझ कर रिस्क लेना…’’ ताहा बोला.

”अरे कुछ नहीं होता…जिंदगी में मजे होने चाहिए. मुझे रील बनाने में मजा आता है.’’ लड़की बोली.

”यहां क्या बनाओगी? यहां तो कुछ भी वैसा रिस्क जैसा नहीं है?’’

”यहां मुझे एक ट्रक ड्राइवर की पत्नी के रोल का वीडियो बनाना है.’’

”ऐंऽऽ ऐसा क्या?’’ हेल्पर चौंकता हुआ बोला, ”बिना शादी किए भाईजान शौहर बन जाएंगे.’’

”अरे, उसे शौहर का नाटक करना है.’’ लड़की बोली.

”तुम ने नाम तो बताया नहीं.’’

”मुसकान. रील भी इसी नाम से है.’’

”बड़ा अच्छा नाम है. मेरा नाम मोहम्मद ताहा है…अजब इत्तेफाक है कि मैं भी मुसलिम और तुम भी! साथ तो देना ही पड़ेगा.’’

”…तो फिर रील बनाना शुरू करें.’’ लड़की बोली.

थोड़ी देर में ताहा और मुसकान ने सड़क के किनारे रोटी बेलने, बरतन साफ करने, भोजन परोसने और साथसाथ खाने का वीडियो शूट किया. इस में हेल्पर ने मदद की. वीडियो बनाया. मुसकान जाने से पहले अपना पर्सनल मोबाइल नंबर ताहा को देती गई.

लव मैरिज के बाद मतभेदों ने लिया जन्म

उस के बाद 25 साल के ताहा और 22 साल की मुसकान की पहली मुलाकात दोस्ती में बदल गई. ताहा को जब भी ट्रक की ड्राइविंग से फुरसत मिलती, वह मुसकान को कौल कर देता. उस से घंटों बातें करता. उस की वीडियो की तारीफ करने लगता. एक दिन उस ने मुसकान के मन को टटोलते हुए उस से विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया. मुसकान ने भी उस के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया. किंतु एक समस्या मुसकान के सामने परिवार के लोगों को राजी करने की थी.

किसी तरह मुसकान ने अपने फेमिली वालों को ताहा से प्रेम विवाह करने के लिए मना लिया. उस के बाद मोहम्मद ताहा अंसारी और मुसकान भिवंडी की एक बस्ती में अलग एक कमरा ले कर रहने लगे. सालडेढ़ साल तक तो उन के संबंध मधुर बने रहे, किंतु जैसे ही उन की जिंदगी में बच्चा आया, उन की मधुरता में कमी आने लगी. बातबात पर ताहा मुसकान पर अपनी मरजी थोपने लगा. यहां तक कि उसे परदे में रहने और रील बनाना बंद करने का फरमान जारी कर दिया. इस पर मुसकान तिलमिला गई. उस ने दोटूक कह दिया, ”मैं रील बनाना किसी भी सूरत में बंद नहीं करूंगी.’’

पाबंदी और नसीहत को मानने से इनकार करने पर ताहा बौखला गया. उस के आत्मसम्मान को ठेस लगी कि बीवी को उस की भावना की कद्र नहीं है. इसे ले कर दोनों के बीच हमेशा तकरार होने लगी. ताहा जब काम के सिलसिले में बाहर रहता, तब मुसकान भी रील के लिए वीडियो बनाने निकल पड़ती थी. साथ में बच्चे को भी संभालती थी.

वे झगड़ते हुए एकदूसरे के चरित्र पर भी कीचड़ उछालने लगे थे. मुसकान के अंदाज और मर्दों के बीच जल्द घुलमिल जाने और उस के साथ हंसहंस कर बातें करने की आदत से ताहा के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा था. कई बार शक उस के मनमिजाज पर हावी हो जाता था. वह सोच में पड़ जाता था कि बच्चा किसी और का तो नहीं! किंतु सच तो यही था कि मुसकान और ताहा एक साल के बच्चे के मातापिता थे.

शक के कीड़े ने कुतर दी गृहस्थी

ताहा के दिमाग की नसों को कुतरता शक का कीड़ा एक दिन काल बन गया. उस का 28 अगस्त को मुसकान के साथ खूब झगड़ा हुआ था और गुस्से में काम पर चला गया था. मुसकान भी उस रोज काफी गुस्से में थी और घर से कहीं और भाग जाने की धमकी दे दी थी. किंतु अगले रोज ताहा ने दिन में मुसकान से फोन पर आत्मीयता के साथ बात की. उस ने पति से माफी मांगते हुए शाम तक लौट आने को कहा था. उस के कमरे पर नहीं होने से फिर से मानसिक तनाव में आ गया था. इसी तनाव में मुसकान के कमरे पर आते ही उस से बीते दिनों की तरह झगड़ पड़ा था, फिर उस की हत्या कर दी.

 

ताहा ने बीवी मुसकान की लाश को ठिकाने लगाने के लिए हत्या से भी अधिक अमानवीय तरीका अपनाया. ताहा ने सब से पहले उस का सिर धड़ से अलग कर दिया और फिर शव के 17 टुकड़े कर डाले. तब तक रात घिर आई थी और खाड़ी में समुद्री लहरें और तेजी से उठनेगिरने लगी थीं. समुद्र का पानी तट के काफी करीब आने लगा था. ताहा ने इस का फायदा उठाया और शव के टुकड़ों को पास के बूचडख़ाने से ले कर समंदर तक इधरउधर फेंक दिया. उस का अंदाजा था कि समुद्र की लहरों के साथ शव के टुकड़े उस में समा जाएंगे.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पुलिस को ईदगाह रोड के पास स्थित बूचडख़ाने के इलाके से एक महिला का कटा हुआ सिर बरामद हुआ, जो कीचड़ से सना हुआ था. उस की पहचान और हत्या के बारे में जांच शुरू की गई. मामला भिवंडी के भोईवाड़ा पुलिस थाने में दर्ज किया गया. वहां के सीनियर इंसपेक्टर अशोक रतनपारखी हत्या का कारण पता लगाने के साथसाथ स्थान और सिर काटे जाने वाले हथियार की तलाशी में जुट गए थे. जांच में तेजी लाने के लिए डीसीपी और एसीपी की देखरेख में 2 स्पैशल इनवैस्टीगेशन टीमें बनाई गई थीं.

भोईवाड़ा पुलिस के सामने महिला की पहचान और फिर हत्या के आरोपियों को पकडऩे की बड़ी चुनौती थी. अशोक रतनपारखी के मार्गदर्शन में पुलिस इंसपेक्टर प्रमोद कुंभार और उन की टीम ने ईदगाह बस्ती में जानकारी जुटानी शुरू की. पता चला कि वहां से एक महिला लापता है. इसी के आधार पर पुलिस ने जांच की दिशा तय की और जांच शुरू की. यह स्पष्ट हो गया कि शव परवीन उर्फ मुसकान नाम की महिला का था.  तहकीकात के क्रम में पुलिस को उस के पति मोहम्मद ताहा अंसारी के बारे में मालूम हुआ. पुलिस उस के कमरे पर गई. वहां से वह फरार था. पुलिस ने उसे ढूंढ कर पहली सितंबर की शाम को हिरासत में लिया और गहन जांच शुरू की.

पूछताछ में वह बयान बदलता रहा. पुलिस द्वारा सख्ती किए जाने के बाद ताहा ने अपनी पत्नी मुसकान की हत्या करना कुबूल कर लिया. पुलिस उसे घटनास्थल पर ले गई और नाव की मदद से खाड़ी में तलाशी की ताकि पता लगाया जा सके कि उस की पत्नी का शव कहां है.  ताहा ने जुर्म कुबूल करते हुए बताया कि उस ने पहले अपनी पत्नी का सिर धड़ से अलग कर दिया था. इस के बाद उस ने शव के 17 टुकड़े कर दिए और जब समुद्री लहरें तेज थीं, तब उन्हें खाड़ी में फेंक दिया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें.

इस बयान के आधार पर 2 सितंबर, 2025 को स्थानीय पुलिस, फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को घटनास्थल पर ले जाया गया और शव की तलाश शुरू की गई, लेकिन शव के नहीं मिलने पर खाड़ी के पास के पुलिस स्टेशन को पत्र लिख कर इस की सूचना दे दी गई. आरोपी ताहा को भिवंडी कोर्ट में पेश कर दिया और उसे 11 सितंबर तक पुलिस रिमांड में भेज दिया गया. इस बीच आरोपी ने हत्या में इस्तेमाल हथियार के बारे में बताया कि उसे वह खाड़ी में फेंक चुका है. पुलिस उस की तलाश में जुट गई थी.

इस के अलावा डीसीपी शशिकांत बोराटे के अनुसार ड्रोन कैमरों और नावों की मदद से शव की तलाश का काम शुरू करने की योजना बनाई गई थी. लिखे जाने तक आरोपी मोहम्मद ताहा अंसारी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. Mumbai Crime

 

 

Crime News in Hindi : सोनल की जान ली लिवइन पार्टनर ने

Crime News in Hindi : बर्थडे पार्टी में सोनल और निखिल कुमार की नजरें ऐसी मिलीं कि दोनों एकदूसरे के दिल में उतर गए. फेमिली वालों से विद्रोह कर सोनल निखिल के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान एक दिन निखिल ने न सिर्फ सोनल बल्कि उस की सहेली की 6 महीने की बेटी की गला रेत कर हत्या कर दी. आखिर निखिल ने जान से ज्यादा प्यार करने वाली प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों कियाï?

वह पार्टी में सब से अलग नजर आ रही थी. निखिल की नजरें उस खूबसूरत हसीन युवती से हट ही नहीं रही थी, वह अपलक उसे ही देखे जा रहा था. पतलीदुबली छरहरी काया, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, कसा हुआ बदन और गोरा रंग. सब कुछ उस युवती की सब से अलग पहचान बना रहा था. निखिल अपने दोस्त के बेटे की बर्थडे पार्टी में शामिल होने आया था. पहली ही नजर में वह युवती उस के दिल में उतर गई थी और निखिल उसे पागलों की तरह घूरे जा रहा था.

केक काटने की घोषणा होने का उसे पता ही नहीं चला. वह तब चौंका, जब उस के दोस्त अभय ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया, ”खाना शुरू हो गया है निखिल, तुम कहां खो गए हो?’’

”अं…’’ वह चौंक कर बोला, ”कहीं भी तो नहीं अभय. अरे हां, क्या तुम्हारे बेटे का केक कट गया?’’

अभय मुसकराया, ”लगता है, तुम किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गए हो, केक कटे तो आधा घंटा हो गया है.’’

”ओह,’’ निखिल झेंप गया, ”भाभीजी कहां हैं, मैं बेटे यश के लिए एक गिफ्ट लाया हूं.’’

”हेमा वहां स्टेज पर है,’’ अभय हंस कर बोला.

निखिल तेजी से स्टेज की तरफ बढ़ गया. उस ने अपने हाथ का गिफ्ट हेमा के पास बैठे यश को थमा कर हेमा को हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा और फिर अभय के पास लौट आया.

अभय किसी अन्य मित्र से बतिया रहा था. निखिल उसे इशारे से बुला कर एक तरफ ले गया. अभय को आश्चर्य हुआ, वह हैरानी से बोला, ”क्या हुआ, तुम मुझे महफिल से अलग क्यों ले कर आए हो निखिल?’’

”अभय, यार तुम्हारी इस महफिल में एक खूबसूरत फूल मुझे पसंद आ गया है. तुम बताओगे, वह गुलाबी सूट वाली युवती कौन है?’’

”अरे वह!’’ अभय ने उस युवती की तरफ देख कर मुसकराते हुए कहा, ”वह मेरी मेहमान है. मेरी पत्नी हेमा की फ्रेंड है, नैनीताल से यहां हल्द्वानी आई है.’’

”नाम क्या है इस का?’’

”सोनल.’’ अभय ने बताया, ”वैसे इसे पटाना तेरे वश की बात नहीं है. वह बहुत नकचढ़ी है.’’

”देखता हूं.’’ निखिल मुसकराया और उस ओर बढ़ गया, जिधर वह युवती खाना खा रही थी.

निखिल ने अपने लिए खाने की प्लेट ली और उसे ले कर सोनल की तरफ आ गया. वह सोनल के पास खड़ा हो कर खाना खाने लगा. कनखियों से वह अभी भी सोनल को देख रहा था.

अचानक वह घबरा गया. सोनल उस के करीब आ रही थी. वह बगलें झांकने लगा तो सोनल की मीठी हंसी उस के कान में पड़ी, ”बस, हो गए अरमान ठंडे. मैं बहुत देर से देख रही हूं, तुम मुझे घूर रहे हो.’’

”नहीं तो.’’ निखिल जल्दी से बोला, ”मैं क्यों तुम्हें घूरूंगा मिस सोनल.’’

सोनल को हैरानी हुई, ”वाह! तुम ने तो मेरा नाम भी मालूम कर लिया. क्या इरादे हैं जनाब के?’’

निखिल ने हिम्मत जुटाई, ”तुम खूबसूरत हो सोनल. इस पार्टी में तुम ही तुम नजर आ रही हो, मेरा दिल तुम पर आ गया है.’’

सोनल के गालों पर लालिमा दौड़ गई. वह नीचे देखते हुए बोली, ”तुम भी हैंडसम हो, क्या नाम है तुम्हारा?’’

”निखिल कुमार. मैं यहीं हल्द्वानी में रहता हूं.’’ अपनी बात खत्म कर के उस ने पूछा, ”नैनीताल में तुम कहां रहती हो सोनल?’’

सोनल को गहरा आश्चर्य हुआ, ”मान गई तुम्हें. तुम ने तो यह भी जान लिया कि मैं नैनीताल में रहती हूं.’’

”क्या करता, तुम अच्छी लगी तो तुम्हारे बारे में जानना जरूरी हो गया. अब बताओ, नैनीताल में कहां रहती हो, घर में कौनकौन हैं?’’

सोनल कुछ कहती, तभी हेमा को अपनी तरफ आता देख कर वह जल्दी से बोली, ”खाना खा लो, मैं 2 दिन यहीं हूं. जाओगे तो मेरा मोबाइल नंबर लेते जाना.’’

”ठीक है.’’ निखिल ने कहा और खाना खाने लगा. सोनल अपनी प्लेट थामे दूसरी तरफ चली गई.

पार्टी खत्म कर के जब निखिल निकला तो उस की जेब में सोनल का मोबाइल नंबर था, जो सोनल ने चुपचाप एक कागज पर लिख कर उसे थमा दिया था.

8 जुलाई, 2025 को दिन के डेढ़ बजे थाना सिविल लाइंस में आए एक फोन ने खलबली मचा दी. फोन एक महिला की ओर से किया गया था, ”साहब, मैं मजनू का टीला से रश्मि बोल रही हूं. यहां मेरी सहेली और मेरी 6 महीने की बेटी की किसी से हत्या कर दी है, आप जल्दी से यहां आ जाइए.’’ महिला का स्वर भर्राया हुआ था. फोन थाने में मौजूद एसआई नितिन शर्मा ने अटेंड किया था. 2 कत्ल की वारदात से वह थोड़ा विचलित हो गए. उन्होंने गंभीर स्वर में पूछा, ”तुम मजनू का टीला में कहां से बोल रही हो रश्मि?’’

”मैं एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर रहती हूं. वारदात मेरे इसी घर में हुई है साहब.’’ रश्मि इस बार बताते हुए रोने लगी थी.

”हम आ रहेहैं. तुम वहां किसी भी सामान को नहीं छुओगी. जिस कमरे में ये कत्ल हुए हैं, उस से बाहर ही रहना है.’’ एसआई नितिन शर्मा ने रश्मि को हिदायत दी और फोन रख कर उन्होंने अपने कक्ष में मौजूद एसएचओ हनुमंत सिंह को जा कर इस दोहरे हत्याकांड की सूचना दी. एसएचओ हनुमंत सिंह अपने साथ एसआई रंजीत कुमार, नितिन शर्मा, हैडकांस्टेबल रनवीर, विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम को ले कर तुरंत घटनास्थाल के लिए निकल पड़े. रास्ते से उन्होंने फोरैंसिक टीम को भी वारदात वाले स्थान पर पहुंचने के लिए कह दिया.

घटनास्थल थाने से ज्यादा दूर नहीं था. पुलिस जब एफ-54 के पते पर पहुंची तो वहां आसपास के लोगों की अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई थी. हैडकांस्टेबल विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम ने भीड़ को वहां से हटाया. एसएसओ हनुमंत सिंह और एसआई नितिन कुमार वैन से उतर कर आगे बढ़े तो एक व्यक्ति उन के पास आ गया. वह रो रहा था, ”साहब, मेरी बेटी की हत्या हुई है, उस के साथ सोनल भी मृत पड़ी है.’’

”चलो, हम देखते हैं.’’ एसएचओ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले. वह उस व्यक्ति के साथ एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर आ गए. सामने ही वह कमरा था, जिस में एक युवती और 6 महीने की बच्ची की रक्तरंजित लाश पड़ी हुई थी.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने देखा. युवती और उस मासूम बच्ची का बड़ी बेरहमी से गला रेता गया था. बच्ची की लाश पलंग पर थी, जबकि युवती की लाश फर्श पर पड़ी हुई थी. पूरे कमरे में नजर दौड़ाने पर यह स्पष्ट हो गया कि युवती और हत्यारे में पहले जम कर संघर्ष हुआ है. इस के बाद हत्यारा उस का गला काटने में सफल हुआ. हत्यारे ने इस 6 माह की बच्ची की हत्या क्यों की, यह बात एसएचओ हनुमंत सिंह की समझ में नहीं आई.

उन्होंने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. चूंकि फोरैंसिक टीम वहां आ गई थी. उन्होंने टीम को बारीक से बारीक सबूत उठाने के लिए कहा और कमरे से बाहर आ गए. इस दोहरे हत्याकांड की सूचना उन्होंने उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी को दे दी. फिर वह मृत बच्ची के पिता के पास बाहर आ गए.

”रश्मि कहां है, जिस ने हमें फोन किया था?’’ उन्होंने प्रश्न किया.

उस व्यक्ति ने औरतों से घिरी अपनी पत्नी रश्मि को इशारे से पास बुला लिया. रश्मि का रोरो कर बुरा हाल था.

”यहां एक जवान युवती की लाश भी है, वह कौन है?’’ एसएचओ ने रश्मि से सवाल किया.

”साहब, इस युवती का नाम सोनल है. यह ए ब्लौक में रहती है, लेकिन कुछ दिनों से इस का अपने लिवइन पार्टनर से झगड़ा चल रहा था. चूंकि मेरी इस के साथ गहरी जानपहचान बन गई थी, मैं इसे अपनी सहेली मानने लगी थी. पार्टनर से झगड़े के चलते सोनल 4-5 दिन से हमारे घर में आ कर रह रही थी. यह लाश सोनल की है.’’

”इस की हत्या कैसे हुई, मेरे कहने का मतलब है कि जब यह वारदात हुई, तुम और तुम्हारे पति क्या घर पर ही थे?’’

”नहीं साहब, मेरे पति दुर्गेश अपनी दुकान चले गए थे सुबह. उन की मजनू का टीला में ही मोबाइल रिपेयरिंग की शौप है. मेरी 2 बेटियां हैं, बड़ी बेटी का नाम दीया है, वह स्कूल जाती है. छोटी अभी 6 माह की ही थी. हम ने प्यार से इस का नाम यशिका रखा था. आज मैं दीया को लाने के लिए दोपहर में स्कूल गई तो सोनल को उस की देखभाल का जिम्मा सौंप गई थी. मैं जब दीया को स्कूल से ले कर घर आई तो घर का दरवाजा बंद था. मैं ने धक्का दिया तो वह खुल गया.

”कमरे में खून से सनी मुझे सोनल की लाश दिखी तो मेरे मुंह से चीख निकल गई. मैं घबरा कर उसे देखने अंदर घुसी तो मुझे पलंग पर यशिका भी खून से तर हालत में पड़ी मिली. यशिका और सोनल का गला किसी ने काट डाला था. मैं बदहवास हालत में बाहर भागी और चिल्ला कर मैं ने पड़ोसियों को इकट्ठा किया, फिर किसी के कहने पर थाने में फोन कर दिया. मैं ने फोन कर के पति दुर्गेश को भी घर बुला लिया.’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने पूछा, ”यह माना जा सकता है कि सोनल की किसी के साथ रंजिश रही होगी, वह मौका देख कर यहां आया और उस ने सोनल का गला काट दिया. लेकिन तुम्हारी बेटी तो अभी 6 महीने की ही थी, उस की हत्या भला कोई क्यों करेगा.’’

”मैं क्या कहूं साहब,’’ रश्मि रोते हुए बोली, ”इस छोटी सी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था, वह इतनी समझदार भी नहीं थी कि हत्यारे द्वारा सोनल की हत्या करने की बात किसी को बता देती.’’

”यही तो मैं भी सोच रहा हूं.’’ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले, ”अगर हत्यारे को यह डर हो कि उसे हत्या करते हुए जिस ने देखा है, वह यह भेद किसी को बता देगा, हत्यारा ऐसी सूरत में उस प्रत्यक्षदर्शी की हत्या करता है. यहां ऐसी बात नहीं है, फिर यशिका की हत्या क्यों की गई?’’

”दुर्गेश, क्या तुम्हारी किसी से दुश्मनी वगैरह तो नहीं थी? संभव है तुम्हारा कोई दुश्मन तुम से बदला लेने घर में घुसा, तुम नहीं मिले तो उस ने तुम्हारी बेटी का कत्ल कर दिया. सोनल की हत्या इसलिए हो गई कि वह तुम्हारी बेटी के हत्यारे से भिड़ गई…’’

”नहीं साहब. मैं ने जिंदगी में दोस्त बनाए हैं, दुश्मन नहीं. मैं सीधासादा जीवन जीने वाला व्यक्ति हूं साहब.’’ दुर्गेश रुंधे स्वर में बोला, ”मेरी फूल सी बेटी का कातिल बचना नहीं चाहिए साहब, उसे गिरफ्तार कर के आप फांसी पर चढ़ा दीजिए.’’

”कातिल कोई भी हो दुर्गेश, उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’’ हनुमंत सिंह ने कहा.

डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी वहां आ पहुंचे थे. उन्हें हनुमंत सिंह ने दोनों लाशें दिखाईं. डीसीपी श्री बांटिया ने वहां निरीक्षण करने के बाद एसएचओ हनुमंत सिंह से पूछा, ”आप ने कुछ मालूम किया, ये दोनों लाशें किस की हैं?’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने दोनों अधिकारियों को सारी जानकारी संक्षिप्त में दे दी.

एसीपी विनीता त्यागी पूरी बात सुनने के बाद बोलीं, ”मुझे ऐसा लगता है, यह हत्या सोनल के बौयफ्रेंड ने की है. चूंकि सोनल उस से नाराज हो कर अपनी सहेली रश्मि के घर आ कर रह रही थी, यह बात उसे अच्छी नहीं लगी. वह गुस्से में रश्मि की गैरमौजूदगी में यहां आया. सोनल और उस में झगड़ा हुआ. इसी झगड़े में उस ने सोनल की जान ले ली.’’

”लेकिन मैडम, इस 6 माह की बच्ची को उस ने क्यों मारा?’’ हनुमंत सिंह ने प्रश्न कर दिया.

”कातिल को पकडि़ए, इस का जवाब आप को उस से मिल जाएगा. आप यहां के सीसीटीवी फुटेज चैक करिए. सोनल के लिवइन पार्टनर को चैक कीजिए. इन दोनों हत्याओं का रहस्य इन्हीं में छिपा मिलेगा.’’ एसीपी विनीता त्यागी ने गंभीर स्वर में निर्देश दिया.

”ठीक है मैडम!’’ एसएचओ हनुमंत सिंह सिर हिला कर बोले.

फोरैंसिक टीम वहां के साक्ष्य जुटा कर अपना काम खत्म कर चुकी थी. पुलिस टीम ने वहां की जरूरी कागजी काररवाई पूरी कर के दोनों लाशें पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दीं, फिर रश्मि और उस के पति से सोनल के लिवइन पार्टनर का पूरा एड्रैस ले कर उन्होंने एसआई नितिन शर्मा को सोनल के बौयफ्रैंड की जांच का कार्य सौंप कर वह थाने लौट गए. एसीपी विनीता त्यागी का अनुमान गलत नहीं था. उन्हें सोनल के लिवइन पार्टनर पर शक हुआ था. एसआई नितिन शर्मा ने जब ए ब्लौक में जा कर वह कमरा देखा, जिस में सोनल कई महीनों से अपने लिवइन पार्टनर के साथ रह रही थी तो वहां दरवाजे पर ताला लटका मिला.

उन्होंने फोन से यह जानकारी सिविल लाइंस थाने में दी तो थाने से उन की मदद के लिए एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार को मजनू का टीला भेज दिया गया. दोनों ने वहीं के पड़ोसियों से उस लिवइन पार्टनर का नाम और उस के व्यवहार के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली. उस का नाम निखिल कुमार था. वह कुछ महीनों से यहां कमरा ले कर सोनल के साथ रह रहा था.  पड़ोसियों के अनुसार निखिल शराबी था और वह वक्तबेवक्त सोनल से लड़ताझगड़ता भी रहता था. उन में मारपीट भी होती रहती थी.

एक खास बात यह भी मालूम हुई कि सोनल हालफिलहाल गर्भवती थी. निखिल बच्चा चाहता था, किंतु सोनल ने उस की मरजी के खिलाफ वह बच्चा गिरा दिया था. निखिल इस बात से बहुत नाराज था. 4 दिन पहले उन में जबरदस्त झगड़ा हुआ था, तब सोनल अपना बैग ले कर अपनी सहेली रश्मि के यहां रहने चली गई थी. निखिल के पिता, 2 भाई और बहन भी मजनू का टीला में ही रहते थे. दोनों पुलिस अधिकारी उन का पता ले कर उन तक पहुंच गए. निखिल के विषय में पूछने पर उस की बहन मीनाक्षी (12 वर्ष) ने उपेक्षित स्वर में कहा, ”सर, हम उस के रवैए से उस के साथ कोई वास्ता नहीं रखते. वह हमारे लिए मर गया है.’’

”वह घर से लापता है, हमें केवल यह बताओ कि इस समय वह कहां छिपा हो सकता है?’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार बोले.

”क्या उस ने कोई गुनाह किया है साहब?’’ निखिल के पिता मोहन राम ने पूछा.

”वह जिस लड़की के साथ लिवइन पार्टनर के रूप में रह रहा था, उस लड़की का आज दोपहर में कत्ल हो गया है. निखिल पर हमें शक है, इसलिए उस के बारे में हमें जानकारी चाहिए.’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार ने कहा.

इस बार निखिल के बड़े भाई करण (25 वर्ष) ने कहा, ”सर, हमारा पैतृक घर उत्तराखंड के हल्द्वानी में है. वह वहां जा सकता है.’’ करण ने हल्द्वानी का पता लिखवा दिया.

”देखो, यदि निखिल आप लोगों से फोन से बात करे तो तुरंत हमें आप लोग वह फोन नंबर और वह कहां से बात कर रहा है, बताएंगे.’’ एसआई नितिन शर्मा ने कहने के बाद अपना मोबाइल नंबर उन्हें नोट करवा दिया.

इधर एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि-दुर्गेश के घर के आसपास के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए थे. उन्हें एक सीसीटीवी की फुटेज में निखिल रश्मि के घर चोरों की तरह जाता हुआ दिखाई दे गया. यह इस बात का पुख्ता सबूत था कि निखिल ही आज दोपहर में रश्मि के घर में आया था.

एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार और एसआई नितिन शर्मा ने थाने पहुंच कर निखिल के लापता होने की और उस के हल्द्वानी भाग जाने की जानकारी दी तो डीसीपी राजा बांटिया के कहने पर पुलिस की 2 टीमें उत्तराखंड के हल्द्वानी और टनकपुर के बनबसा बौर्डर के लिए भेज दी गईं. पुलिस अधिकारियों को संदेह था कि निखिल नेपाल भाग कर खुद को सुरक्षित महसूस कर सकता है. इसलिए बनबसा बौर्डर के लिए एक टीम भेजी गई थी. पुलिस की तत्परता की वजह से लव क्राइम के आरोपी निखिल को 24 घंटे में ही हल्द्वानी से गिरफ्तार कर लिया गया. निखिल ने गलती यह कर दी थी. उस ने 8 जुलाई की रात को अपनी बहन मीनाक्षी को फोन कर के बता था कि वह हल्द्वानी में है और पैसा इकट्ठा कर के नेपाल भागने की तैयारी कर रहा है.

मीनाक्षी ने उस का यह फोन नंबर पुलिस को भेज दिया था. उसे ट्रैस कर के ही पुलिस ने निखिल को हल्द्वानी दबोच लिया था. उसे 9 जुलाई, 2025 को दिल्ली लाया गया.

सिविल लाइंस थाने में डीसीपी राजा बांटिया, एसीपी विनीता त्यागी और थाने की पुलिस टीम द्वारा निखिल से पूछताछ की गई तो उस ने कुबूल कर लिया कि सोनल और रश्मि की बेटी की हत्या उस ने की थी.

”तुम ने अपनी प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों किया? इस क्राइम स्टोरी की सच्चाई क्या है?’’ एसएचओ हनुमंत सिंह ने निखिल से प्रश्न किया.

”साहब, वह मुझ से लड़ कर रश्मि के घर रहने चली गई थी. मैं उसे बहुत प्यार करता था, उस के बगैर रह नहीं सकता था. मैं दोपहर रश्मि के घर उस वक्त गया, जब वह अपनी बेटी दीया को लाने स्कूल गई थी. मैं ने सोनल से कहा कि वह घर चले. सोनल ने मना कर दिया कि अब वह मुझ से कोई वास्ता नहीं रखेगी, वह घर नहीं आएगी, यहीं रहेगी तो मैं ने बहुत समझाया, लेकिन वह मुझ से झगडऩे लगी. मुझे गुस्सा आ गया तो मैं ने चाकू से सोनल का गला काट डाला.’’

”तुम ने रश्मि की बेटी की हत्या किस वजह से की? उस से तो तुम्हारा कोई झगड़ा नहीं था.’’ हनुमंत सिंह ने पूछा.

”साहब, मुझे शक था कि सोनल का रश्मि के पति दुर्गेश से नाजायज रिश्ता है. कुछ महीने पहले ही सोनल गर्भवती हुई थी, इस की सब से ज्यादा खुशी मुझे हुई थी. मैं सोनल से कहता था कि हम इस बच्चे को दुनिया में लाएंगे. हम शादी कर के घर बसा लें, लेकिन सोनल ने वह बच्चा गिरवा दिया.

”मुझे संदेह था यह बच्चा दुर्गेश का था और दुर्गेश बच्चा नहीं चाहता था, इसलिए उस के कहने पर सोनल ने एबौर्शन करवाया था. मुझे दुर्गेश दुश्मन नजर आता था. सोनल उसी के चक्कर मे फंसी थी, तभी मुझ से झगड़ कर के वह बारबार उस के घर चली जाती थी. सोनल की हत्या के बाद मुझे पलंग पर दुर्गेश की बेटी सोती दिखाई दी. दुर्गेश से बदला लेने के लिए मैं ने उस का भी गला काट डाला और घर भाग आया.

”मैं सोनल को मार कर पछता रहा था, मैं खुद मरना चाहता था, लेकिन फिर मैं ने विचार बदल दिया और घर पर ताला लगा कर बैग ले कर हल्द्वानी चला गया, वहां से मैं नेपाल भाग जाना चाहता था. इस के लिए मुझे पैसे चाहिए थे.

”मैं रिश्तेदारों, दोस्तों से फोन कर के पैसे इकट्ठे कर रहा था, मैं ने इसीलिए अपनी बहन मीनाक्षी को भी फोन किया था और पैसे मांगे थे. मीनाक्षी ने मना कर दिया. मैं कहीं और से पैसों का इंतजाम कर के नेपाल भाग पाता, उस से पहले ही पुलिस ने मुझे पकड़ लिया और दिल्ली ले आई. सोनल और रश्मि की बेटी यशिका की हत्या मेरे हाथ से हो गई. इस का मुझे दुख है. मैं सोनल से बहुत प्यार करता था साहब.’’

”सोनल से तुम्हारी मुलाकात कैसे हुई थी, तुम तो शराबी आवारा और निकम्मे व्यक्ति हो.’’

”साहब, मैं शराब पीता हूं, निकम्मा नहीं हूं. मैं हल्द्वानी में था, तब भी काम करता था. यहां भी मैं तिमारपुर के एक होटल में काम करता हूं. सोनल मुझे 4 साल पहले मेरे हल्द्वानी वाले दोस्त अभय के बेटे की जन्मदिन पार्टी में मिली थी. अभय की पत्नी उस की सहेली थी. वह उसी के कहने पर नैनीताल से हल्द्वानी आई थी. नैनीताल में उस के परिजन रहते हैं. मैं ने सोनल को पार्टी में देखा तो उसे दिल दे बैठा. सोनल ने भी मेरा प्यार स्वीकार कर लिया.

”वह हल्द्वानी में 2-3 दिन के लिए आई थी, लेकिन मुझ से मुलाकात होने पर वह वापस नैनीताल नहीं गई. मैं ने हल्द्वानी में सोनल को खूब सैरसपाटा करवाया. वह वहां मेरे साथ रहने लगी. हमारे अनैतिक संबंध इस बीच बन गए थे, जिस से सोनल गर्भवती हो गई.

”हम एबौर्शन करवाना चाहते थे, किंतु समय अधिक हो जाने से सोनल का एबार्शन नहीं हो सका. समय पर सोनल को एक बेटा हुआ. चूंकि हम अविवाहित थे, इसलिए हम ने अल्मोड़ा में वह बच्चा 2 लाख रुपए में एक जरूरतमंद दंपति को बेच दिया. हम 2 लाख रुपया ले कर दिल्ली आ गए.

”पहले हम वजीरपुर गांव में एक किराए का कमरा ले कर रहते रहे. फिर वहां से हम मजनू का टीला में रहने आ गए. तब से हम यहां ही रह रहे थे. मैं चाहता था कि मैं सोनल से शादी कर के घर बसा लूं, लेकिन सोनल पता नहीं क्यों मुझ से शादी नहीं करना चाहती थी.

”अब उस की मौत के बाद मैं सोचता हूं, सोनल ठीक ही सोचती थी. मैं तिमारपुर में वेटर का काम करने लगा था तो मुझे शराब की गंदी आदत पड़ गई थी. मैं बातबात पर सोनल से लड़ता भी था, इसलिए वह मेरे साथ गृहस्थी नहीं बसाना चाहती थी. आज मेरे हाथों ही वह मारी गई है साहब. मैं अच्छा प्रेमी साबित नहीं हो सका.’’ एकाएक निखिल फफकफफक कर रोने लगा.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि और दुर्गेश को थाने बुलाया और रश्मि को वादी बना कर निखिल के खिलाफ सोनल और यशिका की हत्या का केस बीएनएस की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज कर लिया. दूसरे दिन निखिल को कोर्ट मे पेश कर के 5 दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू और सोनल का मोबाइल नंबर पुलिस ने जब्त कर लिया.

सोनल के घर नैनीताल में उस की हत्या की सूचना भेज दी गई थी. उस के पापा गिरीश चंद आर्या अपनी बेटी से मुंह मोड़ चुके थे, लेकिन जब उन्हें सिविल लाइंस थाना, दिल्ली से सोनल की हत्या की सूचना दी गई तो परिवार सहित वह दिल्ली आ गए. पुलिस ने सोनल की लाश पोस्टमार्टम के बाद उन के हवाले कर दी. रश्मि और दुर्गेश की बेटी की डैडबौडी पुलिस ने उन्हें सौंपी तो वह फूटफूट कर रोने लगे. उन के रुदन ने पुलिस वालों की भी आंखें नम कर दीं. एक अधूरे प्रेम कहानी का यह बहुत दुखद अंत था. Crime News in Hindi

 

 

Love Story : गलत प्रेमी जान के लाले

Love Story : मुश्ताक अहमद ने ङ्क्षहदू नाम अजीत बता कर पूजा बिस्वास को पहले अपने प्रेमजाल में फांसा, फिर उस से शादी भी कर ली. इस के बाद एक दिन उस ने पूजा के सिर को धड़ से अलग कर दिया. हत्या के समय पूजा हाथ जोड़ कर उस से रहम की भीख मांग रही थी, लेकिन उस का दिल न पसीजा. मुश्ताक ने आखिर ऐसा क्यों किया?

पूजा बिस्वास को इस बात की जानकारी हो गई थी कि प्रेमी से पति बने मुश्ताक अहमद ने दूसरी शादी अपनी बिरादरी की लड़की से कर ली है, यह बात पूजा से बिलकुल भी बरदाश्त नहीं हुई और वह बिफर कर मुश्ताक से बोली कि तुम तो बहुत धोखेबाज इंसान हो. पहले तो तुम ने धर्म छिपा कर धोखे से मुझ से शादी की और फिर अब अपनी ही बिरादरी में दूसरी शादी भी कर ली. इस बात को ले कर दोनों में कहासुनी हो गई.

इस के बाद तो इस बात को ले कर पूजा ने घर में रोज हंगामा करना शुरू कर दिया था. इतना ही नहीं, सितारगंज में मुश्ताक के घर जा कर वहां भी काफी हंगामा किया. मुश्ताक के फेमिली वालों से भी उस ने लड़ाईझगड़ा किया. यहां तक कि सितारगंज पुलिस को लिखित शिकायत भी दी. मुश्ताक के घर गांव गौरीखेड़ा (सितारगंज) उत्तराखंड में जब रोज हंगामा होने लगा तो उस के फेमिली वालों ने मुश्ताक और पूजा को घर से निकाल दिया. तब मुश्ताक पूजा को अपने साथ ले कर गुरुग्राम वापस आ गया.

गुरुग्राम आ कर अब पूजा रोज मुश्ताक से झगडऩे लगी. रोजरोज की कलह से पेशान हो कर मुश्ताक ने निर्णय ले लिया कि अब वह पूजा को हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटा कर ही रहेगा. उस ने अपने दिमाग में हत्या की पूरी योजना का खाका तैयार कर लिया. अपने खूनी प्लान के मुताबिक उस ने पूजा से कहा कि पूजा, मैं अपनी जिंदगी में केवल तुम्हें ही अपनी पत्नी बना कर रखूंगा और अपनी दूसरी पत्नी को तलाक दे दूंगा. चलो, इसी खुशी में हम लोग उत्तराखंड घूमने चलते हैं, वहां पर कुछ दिन घूमने के बाद अपनी बीवी को तलाक दे कर हम वापस गुरुग्राम आ जाएंगे.

15 नवंबर, 2024 को अपने प्लान के मुताबिक मुश्ताक पूजा को अपनी बहन के घर टैक्सी से खटीमा ले कर पहुंचा. रात को वे दोनों वहीं पर रुके. 16 नवंबर, 2024 की सुबह खूनी साजिश के तहत मुश्ताक अपनी टैक्सी से पूजा को घुमाने के बहाने नदन्ना नहर जिला ऊधमसिंह नगर ले गया. नदन्ना नहर के पास एक काली पुलिया है, जो अकसर सुनसान रहती है. मुश्ताक ने चारों ओर देखा तो दूरदूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था. उस ने काली पुलिया के पास अपनी टैक्सी रोक दी और दोनों टैक्सी से उतर कर पुलिया के ऊपर बैठ गए.

अपने प्लान के मुताबिक मुश्ताक ने थोड़ी देर तक पूजा से प्रेमपूर्वक बातचीत की. पूजा को समझाया कि वह जल्दी ही अपनी दूसरी बीवी को तलाक देने वाला है. तभी मुश्ताक पेशाब करने का बहाना बना कर पुलिया से उठ गया, जबकि पूजा सामने नहर का दृश्य देखने में मशगूल हो गई थी. मुश्ताक ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया. उस ने फुरती से पैंट की जेब में छिपाया हुआ चाकू निकाला और पीछे से पूजा की गरदन पर घातक वार कर दिया. उधर पूजा को इस बात का आभास तक न था. चाकू के वार से उस की गरदन से खून का फव्वारा फूट पड़ा था.

मुश्ताक ने पत्नी का धड़ से अलग किया सिर

पूजा पीड़ा से जोरजोर से ‘बचाओ… बचाओ’ चिल्लाने लगी थी, लेकिन उस समय वहां पर दूरदूर तक कोई भी इंसान नहीं था, जो पूजा की करुण पुकार को सुन पाता. पूजा ने मुश्ताक से अपनी जान की भीख भी मांगी, परंतु निर्दयी हत्यारा मुश्ताक पूजा की गरदन पर तब तक चाकू से वार करता रहा, जब तक कि गरदन उस के धड़ से पूरी तरह अलग नहीं हो गई. गरदन धड़ से अलग होने पर पूजा ने तड़पते और छटपटाते हुए दम तोड़ दिया. इस के बाद की प्लानिंग भी मुश्ताक ने अपने दिमाग में पहले से ही बना कर रखी थी, इसलिए वह अपनी टैक्सी में तेज धारदार चाकू, चादर और अन्य सामान बैग में छिपा कर लाया था.

मुश्ताक ने सब से पहले धड़ को चादर में पूरी तरह से लपेट कर एक गठरी बनाई. उसे अच्छी तरह से बांधा और नाले मे फेंक दिया. इस के बाद उस ने पूजा के सिर को एक पौलीथिन की थैली में बांधा और सिर को दूसरी जगह ले जा कर पानी में बहा दिया. मुश्ताक इस बात से अब तक निश्चिंत हो चुका था कि पुलिस अब उस का कुछ भी बिगाड़ नहीं पाएगी, क्योंकि अगर पुलिस को किसी तरह पूजा का धड़ मिल भी गया तो वह पूजा के सिर को कभी भी नहीं ढूंढ सकती है.

पूजा गुडग़ांव के एक स्पा सेंटर में काम करती थी. वह भले ही अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त रहती थी और उस के दोनों बेटे नानकमत्ता में उस की मम्मी के पास रह कर पढ़ाई करते थे, लेकिन पूजा रोज अपनी मम्मी और छोटी बहन प्रमिला से एक बार सुबह और एक बार रात को अवश्य फोन कर बातचीत कर लिया करती थी. प्रमिला भी गुरुग्राम में रह कर जौब करती थी. पूजा के विवाह के बाद प्रमिला अब अकेले रहने लगी थी. 15 नवंबर, 2024 की रात को पूजा की मम्मी का प्रमिला को फोन आया कि आज पूजा ने फोन पर बात नहीं की. उस के बाद प्रमिला ने पूजा का फोन लगातार ट्राइ करना शुरू कर दिया, लेकिन पूजा का फोन लगातार बंद आता रहा.

उस के बाद प्रमिला ने स्पा सेंटर में पता किया तो वहां पर पता चला कि पूजा 15 नवंबर से स्पा सेंटर में अपने जौब पर नहीं आ रही थी. इस के बाद प्रमिला और उस के फेमिली वाले लगातार पूजा की खोज में लगे रहे. प्रमिला ने नानकमत्ता और सितारगंज में भी अपने फेमिली वालों के साथ पूजा की तलाश जारी रखी, परंतु पूजा का कहीं कोई पता नहीं चल सका. 19 दिसंबर, 2024 को प्रमिला ने गुरुग्राम के सेक्टर-5 थाना पुलिस में पूजा के लापता होने की शिकायत दर्ज करा दी. प्रमिला ने पूजा के बारे में पुलिस को यह जानकारी भी दी कि पूजा का विवाह गांव गौरीखेड़ा जिला ऊधमसिंह नगर के अजीत के साथ हुआ था.

प्रमिला ने पुलिस को यह भी बताया कि अजीत का असली नाम मुश्ताक अहमद था, उस ने अपना धर्म व नाम अजीत बता कर धोखे से उस की बहन के साथ विवाह किया था. प्रमिला की ओर से शिकायत मिलने पर गुरुग्राम सेक्टर-5 थाने के एसएचओ सुखबीर ने अपने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया. पुलिस टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी और सब से पहले लापता पूजा की काल डिटेल्स खंगालनी शुरू की. इस में लोकेशन सहित कई अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगीं.

इन्हीं में पुलिस को मुश्ताक का नंबर भी मिला. मुश्ताक उत्तराखंड का रहने वाला था, इसलिए पुलिस टीम ने सितारगंज जा कर अहम जानकारियां एकत्रित कीं. वहां पर गुरुग्राम पुलिस को पूजा और मुश्ताक के लिवइन रिलेशन व प्रेम विवाह की जानकारी भी मिली. पुलिस टीम ने मुश्ताक के फेमिली वालों से पूछताछ की तो यह पता चला कि मुश्ताक के घर वालों ने पूजा और मुश्ताक को अक्तूबर, 2024 में ही अपने घर से निकाल दिया था. सितारगंज से पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि कुछ साल पहले मुश्ताक कुटरी गांव में गाड़ी के पंक्चर लगाने की दुकान चलाता था. वह सितारगंज और खटीमा दोनों जगहों पर रह कर काम करता था. उस के बाद उस ने टैक्सी चलाने का काम करना शुरू कर दिया था. पुलिस ने मुश्ताक की हर जगह तलाश की, लेकिन पुलिस मुश्ताक को ढूंढने में नाकाम रही.

गुरुग्राम पुलिस को इस बीच मुश्ताक के अन्य ठिकानों के बारे में भी पता चला, लेकिन मुश्ताक अब तक वहां से भी निकल चुका था. इस के बाद गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम में मुश्ताक के बारे में पता किया कि वह किस की टैक्सी चलाता था, कहां पर रहता था, किसकिस से मिलता था, किनकिन से बातचीत करता था, लेकिन पुलिस के हाथ फिर भी खाली रहे. आखिरकार इस ब्लांइड केस में गुरुग्राम पुलिस ने अब उत्तराखंड पुलिस की मदद ली. उत्तराखंड पुलिस ने इस केस में अपने खास मुखबिर लगा दिए और खुद भी इस केस से जुड़ गई. उत्तराखंड पुलिस और गुरुग्राम पुलिस की संयुक्त कोशिश आखिरकार रंग लाई.

साढ़े 5 महीना चकमा देने के बाद आया पुलिस गिरफ्त में

गुरुग्राम पुलिस को यह जानकारी मिली कि फरार टैक्सी ड्राइवर मुश्ताक सितारगंज के गौरीखेड़ा में एक स्थान पर छिप कर रह रहा है. इस सूचना के मिलते ही गुरुग्राम पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस की सहायता से मुश्ताक को गिरफ्तार कर लिया. मुश्ताक को गिरफ्तार कर गुरुग्राम पुलिस ने जब मुश्ताक से पुलिसिया अंदाज में कड़ी पूछताछ की तो वह जल्दी ही टूट गया और उस ने पुलिस को बताया कि उस ने 16 नवंबर, 2024 को ही पूजा की हत्या कर दी थी. मुश्ताक अहमद ने पूजा बिस्वास की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

पुलिस पूछताछ में आरोपी मुश्ताक ने बताया कि पूजा को यह बात पता चल चुकी थी कि उस ने नाम और धर्म छिपा कर पूजा के साथ धोखे से विवाह किया था, इस के कारण वह उस से काफी नाराज रहने लगी थी. उस के बाद मुश्ताक के फेमिली वालों ने उस का विवाह उन की बिरादरी की एक युवती के साथ कर दिया. अब मुश्ताक गुरुग्राम में पूजा से दूरियां बनाने लगा था. उस दिन तारीख थी 10 मार्च 2022. पूजा बिस्वास सुबह से ही अपनी तैयारियों में व्यस्त थी. आज उसे अपनी ड्यूटी पर गुरुग्राम जाना था. उत्तराखंड के नानकमत्ता की रहने वाली पूजा उस दिन अपने घर से रुद्रपुर जा रही थी, जहां से उस ने गुरुग्राम के लिए अपनी अगली बस पकडऩी थी.

रुद्रपुर पहुंचने से 5 किलोमीटर पहले ही उस बस का इंजन एकाएक चलना बंद हो गया, जिस के कारण ड्राइवर को मजबूरन बस रोकनी पड़ी. सभी सवारियां उतर कर टेंपो और रिक्शा ले कर अपने गंतव्य स्थानों पर जा रही थीं. पूजा को रुद्रपुर के रोडवेज स्टेशन जाना था, मगर उसे कोई आटो मिल ही नहीं रहा था. जिस के कारण वह अपना सामान सड़क के किनारे रख कर इंतजार कर रही थी. तभी दूसरी ओर से मुश्ताक नाम का व्यक्ति अपनी किराए की टैक्सी ले कर उधर से गुजरा तो उस की निगाह सड़क के किनारे खड़ी युवती पर पड़ गई.

काले घने लंबे बाल, तीखे नैननक्श, गोराचिट्ठा रंग और इकहरा बदन की पूजा पर मुश्ताक की जैसे ही नजर पड़ी तो वह एक पल के लिए ठगा सा रह गया था. अगले ही पल मुश्ताक ने सड़क के किनारे अपनी टैक्सी रोक दी और टैक्सी से उतर कर युवती के पास चला गया.

”जी, आप को कहीं जाना है क्या? क्या मैं आप की मदद कर सकता हूं?’’ मुश्ताक ने कहा.

”अरे भाईसाहब, आप के पास तो टैक्सी है. इस का भाड़ा भी काफी ज्यादा होगा. मैं तो किसी शेयर आटोरिक्शा का इंतजार कर रही थी.’’ पूजा ने हिचकते हुए कहा.

तभी मुश्ताक ने पूछा, ”जी, मैं आप को जानता नहीं हूं, आप को मैं ने पहली बार ही देखा. मैं ने आप को पसीने से लथपथ, हैरान और परेशान देखा तो मुझ से रहा नहीं गया. आप इस गाड़ी को अपनी ही समझें. वैसे आप को जाना कहां है?’’

”जी, मुझे रुद्रपुर रोडवेज बस अड्डा जाना है, वहां से मुझे गुरुग्राम के लिए बस लेनी है,’’ पूजा ने कहा.

”जी, आप मेरी टैक्सी में बैठेंगी तो मुझे बहुत खुशी होगी.’’ कहते हुए मुश्ताक ने पूजा का सामान टैक्सी में रख दिया था. हालांकि सफर काफी छोटा था. मुश्ताक भी जानबूझ कर टैक्सी काफी आराम से चला रहा था.

तभी मुश्ताक न पीछे की सीट पर बैठी पूजा को सामने के मिरर से देखा और पूछ लिया, ”जी, आप अपना समझ कर मेरी टैक्सी में बेहिचक बैठ गईं, इस के लिए आप का बहुतबहुत धन्यवाद. क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं?’’

”जी, मेरा नाम पूजा बिस्वास है. मैं नानकमत्ता की बंगाली कालोनी में रहती हूं. गुरुग्राम में एक स्पा सेंटर में काम करती हूं. आप का नाम क्या है?’’ पूजा बोली.

”जैसे आप इतनी खूबसूरत हैं वैसे ही आप का नाम भी है. मेरी खुशकिस्मत है कि आज अनजाने में ही सही, आप से मेरी मुलाकात हो गई. पूजाजी, मेरा नाम अजीत है. मैं गौरीखेड़ा गांव तहसील सितारगंज में रहता हूं. मेरा टैक्सी का काम है.’’ मुश्ताक ने अपना नाम छिपाते हुए कहा.

मुश्ताक ने पूजा को बसा लिया था दिल में

टैक्सी को मुश्ताक धीरेधीरे चला रहा था. बीचबीच में वह पूजा को देख भी लेता था. पूजा यह समझ गई थी कि अजीत भी उसे देख रहा है, इसलिए वह भी उसे देखने लगी. कुछ समय के लिए दोनों की नजरें टकरातीं, फिर वे दोनों इधरउधर देखने लगते थे. तभी मुश्ताक ने ट्रैक्सी में ब्रेक लगा दिया. अब मुश्ताक पूजा का सामान टैक्सी से निकालने में भी उस की मदद करने लगा था, क्योंकि रुद्रपुर का रोडवेज स्टेशन आ चुका था. मुश्ताक ने बस में सामान चढ़ाने में भी पूजा की पूरी मदद की. काफी देर तक दोनों बातचीत करते रहे.

बस जब रुद्रपुर से गुरुग्राम की तरफ चलने की तैयारी करने लगी तो पूजा मुश्ताक की ओर निहारते हुए बोली, ”अजीतजी, आप बहुत ही सुलझे हुए और परिपक्व इंसान हैं. आप का दिल बहुत अच्छा है. आप का बहुतबहुत धन्यवाद. वैसे किराए के कितने पैसे हुए?’’

”पूजाजी, एक तरफ तो आप मुझे अपना कहती हैं और दूसरी तरफ किराए की बात करने लगीं. अच्छा, अब दोस्ती आगे भी ऐसे ही चलती रहे, उस के लिए कम से कम अपना मोबाइल नंबर तो दे दीजिए.’’

पूजा ने अपना मोबाइल नंबर बताया तो मुश्ताक ने पूजा के मोबाइल पर फोन कर दिया. घंटी बजने लगी. पूजा ने मुसकराते हुए कहा, ”अजीतजी, आप का नंबर मेरे पास आ चुका है, मैं इसे सेव कर लूंगी.’’ उस के बाद बस चल पड़ी थी. उस दिन के बाद से दोनों की अकसर फोन पर बातचीत होने लगी. दोनों को अब एकदूसरे से बात कर के काफी रस आने लगा था. एक दिन में कईकई बार वे दोनों अब आपस में बात करने लगे थे. इस बीच मुश्ताक भी गुरुग्राम आ कर प्राइवेट टैक्सी चलाने लगा था. एक दिन पूजा सुबह से काफी परेशान थी कारण कि नानकमत्ता मम्मी की तबीयत काफी खराब थी, तभी मुश्ताक का फोन आ गया.

”पूजाजी, कई दिनों से आप ने कोई फोन नहीं किया, इसलिए मैं ने आप को फोन कर दिया. कैसी हो आप?’’ मुश्ताक ने पूछा.

”अजीत, घर पर मेरी मम्मी की तबीयत काफी खराब है, उन्हें यहां पर लाना है, इसीलिए काफी परेशान हूं.’’ पूजा ने कहा.

”आप इतनी ज्यादा दुखी और परेशान क्यों हो रही हैं. मेरी गाड़ी में चल कर माताजी को ले कर आ जाते हैं.’’ मुश्ताक ने कहा. यह 2022 की बात थी.

अपनी मम्मी को गुरुग्राम लाने और वापस नानकमत्ता ले जाने और इस बीच अपनी मम्मी की खोजखबर लेने के लिए पूजा ने मुश्ताक की मदद ली. इस के कारण उन दोनों में दोस्ती और आत्मीयता अब अपने चरम पर पहुंचने लगी थी.

ऐसे ही एक दिन जब पूजा अपनी मम्मी को देखने मुश्ताक की टैक्सी ले कर वापस गुरुग्राम लौट रही थी तो मुश्ताक उस से बातें करने लगा था, जबकि पूजा अपने घरपरिवार की समस्याओं के बारे में सोचने में मग्न थी. तभी मुश्ताक ने उस से कहा, ”पूजाजी, पता है आज कौन सी तारीख है?’’

”आज 14 फरवरी का दिन है.’’ पूजा ने उत्तर दिया.

”आज का दिन कितना खास होता है, लगता है आप को पता ही नहीं है.’’ मुश्ताक ने रहस्यमयी ढंग से कहा.

”मुझे तो पता नहीं, आज का दिन इतना खास क्यों होता है, आप ही बता दो.’’ पूजा ने कहा.

”आप भी बुद्धू निकलीं. अरे आज पूरी दुनिया में वेलेंटाइन डे मनाया जाता है, जिसे हिंदी में प्रेम दिवस कहते हैं. आज आप से कुछ दिल की बात कहना चाहता हूं.’’ मुश्ताक ने कहा.

”अरे मैं तो भूल हो गई, आज वेलेंटाइन डे भी है. आप अपने दिल की क्या बात कहना चाहते हो अजीत?’’ पूजा ने पूछा.

मुश्ताक ने टैक्सी सड़क के किनारे खड़ी कर दी, उस के बाद उस ने पूजा का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, ”पूजा, मैं तुम से बहुत प्यार करने लगा हूं, अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता. लव यू पूजा.’’ मुश्ताक उर्फ अजीत की आवाज लडख़ड़ाने लगी थी.

यह देख पूजा बिस्वास ने एक उचटती हुई निगाह मुश्ताक की ओर डाली और अपना हाथ झटके से खींच लिया. यह देख कर मुश्ताक मन ही मन घबराने लगा और सोचने लगा कि ऐसा लगता है पूजा मेरी बात से कहीं नाराज तो नहीं हो गई. मुझे ऐसे प्रपोज नहीं करना चाहिए था.

”देखो अजीत, ये प्यार कोई हंसीखेल का तमाशा नहीं है. सब से पहले तुम्हें मेरे अतीत को जानना चाहिए.’’ पूजा ने गंभीर हो कर कहा.

”देखिए पूजाजी, मेरे दिल में आप के लिए अब वह स्थान बन चुका है, जिसे मैं किसी भी हालत में खोना नहीं चाहता. आप का अतीत चाहे जैसा भी रहा हो, मैं तुम्हें हर हाल में अपनाना चाहता हूं.’’ मुश्ताक ने भावुक स्वर में कहा.

लिवइन में रहने लगे दोनों

उस के बाद पूजा ने मुश्ताक को बताया, ”मेरा विवाह 18 साल पहले शक्ति फार्म में रतन (परिवर्तित नाम) के साथ हुआ था, मेरा पति रतन मकान में शटरिंग का काम करता था. रतन बहुत शक्की स्वभाव का था, वह मेरे चरित्र पर हमेशा शक करता रहता था. वह शराब पीने का भी आदती थी. बाद में हमारे 2 बेटे भी हो गए. मैं ने सोचा कि बच्चों की जिम्मेदारी सिर पर आने के बाद रतन में सुधार आ जाएगा, लेकिन रतन तो न जाने किस मिट्टी का बना हुआ था. शराब पी कर वह कईकई दिन घर पर ही पड़ा रहता था.

”जब मैं उसे समझाने का प्रयास करती तो वह मुझे बुरी तरह से गालियां देने लगता था. मारपीट करने लगता था. वह केवल मेरे साथ ही नहीं, बल्कि अब बच्चों को भी बुरी तरह से पीटने लगा था. मैं ने जब यह बात अपने मम्मीपापा और भाईबहनों को बताई तो वे मुझे अपने साथ ले गए और फिर 2019 में मैं ने रतन से तलाक भी ले लिया. 2008 में मेरी शादी हुई और 11 साल के बाद मेरा तलाक भी हो गया.’’

”पूजा, आप के घर में कौनकौन है?’’ मुश्ताक ने पूछा.

”अजीतजी, मेरे घर में मेरे मम्मीपापा के अलावा हम 4 बहनें और एक भाई है. बहनों के नाम शिवली, रमा और प्रमिला हैं जबकि मेरे भाई का नाम आशीष है. और भी कुछ पूछना बाकी रह गया हो तो बताइए.’’ पूजा ने कहा.

”पूजाजी, मुझे अब आगे कुछ नहीं पूछना है, बस आप का प्यार पाना चाहता हूं. आप की जिंदगी के सारे दुख बांटना चाहता हूं.’’ मुश्ताक ने कहा.

”ये जानते हुए भी कि मेरा एक बेटा 13 साल का है और दूसरा 11 साल का हो चुका है.’’ पूजा ने कहा.

”पूजा, मैं तुम्हें अपने दिल से भी ज्यादा प्यार करता हूं. मैं जीवन भर तुम्हारा और तुम्हारे बेटों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार हूं. तुम एक बार मेरा विश्वास कर के तो देखो!’’ मुश्ताक ने पूजा का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा.

मोहब्बत एक ऐसा रोग है, जो दबाने पर और भी अधिक भड़कने लगता है. लिहाजा पूजा भी मुश्ताक के बहकावे में आ गई और मोहब्बत के जोश में पूजा ने भी आखिर कह ही दिया, ”अजीत, मैं भी तुम से अब दिलोजान से प्यार करने लगी हूं. तुम ही अब मेरा प्यार, मेरी चाहत, मेरी दीवानगी हो, मैं अब तुम्हारी हूं और मरते दम तक तुम्हारी ही रहूंगी.’’

इस के बाद पूजा और मुश्ताक गुरुग्राम में लिवइन में रहने लगे. इस से पूजा के फेमिली वालों व बहनों को ऐतराज हुआ. उन्होंने पूजा को समझाया कि बिना विवाह किए किसी युवक के साथ रहना हमारे समाज में वर्जित है. पूजा और अजीत उर्फ मुश्ताक ने फिर 10 सितंबर, 2024 में एक मंदिर में जा कर शादी कर ली और फिर बेरोकटोक साथ रहने लगे.

पूजा अब मुश्ताक के साथ अलग फ्लैट में रहने लगी थी. इसी बीच पूजा को पता चल गया कि अजीत ङ्क्षहदू नहीं मुसलिम है और उस का असली नाम मुश्ताक है. धोखा कर के शादी करने पर पूजा और मुश्ताक के बीच कहासुनी भी हुई. जो होना था हो चुका था, इसलिए पूजा चुप हो गई. उस ने यह जानकारी अपनी बहन और मम्मी को भी बता दी थी. इस के बाद पूजा की मुश्ताक के साथ आए दिन कलह होने लगी. यह झगड़ा तब और बढ़ गया, जब मुश्ताक के फेमिली वालों ने मुश्ताक का निकाह अपने ही समाज में कर दिया था. फिर मुश्ताक ने योजना बना कर पूजा बिस्वास का मर्डर कर उस की लाश ठिकाने लगा दी.

गुरुग्राम पुलिस ने उत्तराखंड की खटीमा पुलिस के सहयोग से अभियुक्त मुश्ताक अहमद को गिरफ्तार करने के बाद उस की निशानदेही पर 30 अप्रैल, 2025 को खटीमा काली पुलिया अंडरपास से शव बरामद कर लिया. शव में सिर नहीं था. शव की शिनाख्त करने के लिए पूजा के भाई को वहां पर बुलाया गया तो शव देख कर आशीष फूटफूट कर रोने लगा था. उस ने रोते हुए पुलिस को बताया कि शव के पास जो दुपट्टा पड़ा है, वह दुपट्टा रक्षाबंधन के दिन आशीष ने ही पूजा को शगुन के तौर पर दिया था. पूजा का शव यानी धड़ काफी समय से पानी में पड़े रहने के कारण काफी सडग़ल चुका था. हालांकि शव की पहचान मृतका के भाई ने कपड़ों के आधार पर कर ली थी.

मृतका पूजा के परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस पर लगाए आरोप, फांसी की मांग की

2 साल तक अपनी आर्थिक और दैहिक जरूरतों को पूरा करने के बाद प्रेमी मुश्ताक ने अपनी प्रेमिका पूजा की नृशंस हत्या कर दी. गुरुग्राम में काम करते समय पूजा ने जो भी पैसेरुपए कमाए, उस से उस ने अपने प्रेमी मुश्ताक के लिए सितारगंज के गौरीखेड़ा में एक प्लौट खरीदा, जहां आज मुश्ताक का मकान है. इतना ही नहीं पूजा ने मुश्ताक को सोने के जेवर और एक बाइक भी खरीदी.

मृतका पूजा के भाई आशीष और छोटी बहन प्रमिला ने उत्तराखंड पुलिस पर काफी संगीन आरोप लगाए हैं. उन का कहना है कि नवंबर 2024 में जब उन की बहन का कहीं पता नहीं चल रहा था तो वे सितारगंज कोतवाली अपनी बहन पूजा की मिसिंग रिपोर्ट लिखाने गए थे, लेकिन सितारगंज पुलिस ने उन से कोई सहयोग नहीं किया और पूजा के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया. उधर गुरुग्राम पुलिस भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही थी. बाद में काफी दबाब बनाने के बाद गुरुग्राम के सेक्टर-5 थाना पुलिस में उन की रिपोर्ट दर्ज की गई.

लव जिहाद की शिकार बनी नानकमत्ता निवासी पूजा ने हत्या से कुछ दिन पहले एसएसपी को पत्र लिख कर मुश्ताक की शिकायत की थी. परिजनों के अनुसार पूजा ने मुश्ताक पर धर्म छिपाने और बाद में जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाया था. इस मामले में एसएसपी ऊधमसिंह नगर मणिकांत मिश्रा ने कोतवाल सितारगंज को निर्देशित भी किया था. इस बारे ने एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया है कि पूजा और मुश्ताक के बीच पहले भी कई विवाद हो चुके थे, जिस संबंध में मेरे कार्यालय में स्टाफ को शिकायती पत्र दिया गया था.

युवक युवती को अपने साथ रखना चाहता था, जबकि युवती उस के साथ नहीं रहना चाहती थी, जिस पर दोनों पक्षों में वार्ता भी कराई गई थी. इस के बावजूद उन के बीच विवाद होते रहे, लेकिन गुमशुदगी के संबंध में मुझे कोई शिकायत पत्र नहीं मिला. युवती के लापता होने के बाद काल डिटेल्स के आधार पर घटना की सच्चाई का पता लगाया गया.

पूजा की हत्या के आरोपी मुश्ताक के घर पर चला बुलडोजर

नानकमत्ता के बंगाली कालोनी निवासी पूजा बिस्वास की नृशंस हत्या के आरोपी मुश्ताक अहमद का सितारगंज के गौरीखेड़ा में बने घर को प्रशासन ने भारी पुलिस की मौजूदगी में 5 मई, 2025 को बुलडोजर लगा कर ध्वस्त कर दिया. 4 मई, 2025 को गुरुग्राम पुलिस गौरीखेड़ा स्थित मुश्ताक के घर पर पहुंची थी, लेकिन उस के घर पर ताला लगा था.

5 मई, 2025 की सुबह उत्तराखंड की पूरी जिले की पुलिस (ऊधमसिंह नगर), पीएसी व प्रशासनिक अधिकारी गौरीखेड़ा पहुंच गए. यहां पर गांव के आवागमन के रास्तों में बैरिकेडिंग लगा कर व भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर आवागमन बंद कर दिया गया. इसी दौरान जेसीबी मशीन से टिन शेड के बने मुश्ताक के मकान को जमींदोज कर दिया गया. भारी पुलिसप्रशासन तैनाती देख कर ग्रामीण अपने घरों में ही बैठे रहे. इस से पूर्व ऊधमसिंह नगर प्रशासन को थारू गौरीखेड़ा निवासी नारायण सिंह ने शिकायत दी थी कि मुश्ताक के पिता अली अहमद ने उस की जमीन पर कब्जा कर मकान बना दिया है और वह मेरी जमीन खाली नहीं कर रहा है.

जांच में पाया गया कि यह भूमि अनुसूचित जनजाति समुदाय के मथुरा प्रसाद की है और मकान अवैध ढंग से बनाया गया था. इस के बाद जिला प्रशासन की ओर से आरोपी को भूमि को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, जिस के बाद आरोपी अपने घर पर ताला लगा कर वहां से फरार हो गए गए थे. जिस के बाद 5 मई, 2025 को पुलिस और प्रशासन की टीम ने बुलडोजर काररवाई करते हुए अवैध मकान को ढहा दिया.

गुरुग्राम पुलिस ने आरोपी मुश्ताक की निशानदेही पर घटनास्थल के पास से मृतका पूजा का टूटा हुआ मोबाइल फोन बरामद कर लिया है. इस के अलावा जिस चाकू से पूजा का गला काटा गया, उसे भी पुलिस ने मुश्ताक की बहन फूलबानो के घर से बरामद कर लिया गया. पुलिस को रेड के दौरान उस की बहन व अन्य सदस्य घर पर नहीं मिले. इस मामले में गुरुग्राम पुलिस आरोपी मुश्ताक अहमद के अन्य संभावित सहयोगियों की भी तलाश कर रही थी. कथा लिखने तक मृतका पूजा के सिर को तलाशने के लिए गुरुग्राम पुलिस उत्तराखंड पुलिस के साथ लगातार सर्च अभियान चला रही थी.

पुलिस गोताखोरों की मदद ले रही थी. सिर तलाशना पुलिस के लिए काफी अहम कड़ी भी है, क्योंकि उस से मृतका महिला के शव की पहचान पुख्ता हो जाएगी, जो कोर्ट में आरोपी हत्यारे मुश्ताक को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने में एक अहम सबूत हो सकता है. Love Story