Noida News: प्यार में ब्लैकमेलिंग कभी नहीं

Noida News: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बिना सिर और कटी हथेलियों वाली माहिला की नाले से बरामद लाश की गुत्थी सुलझाने में पुलिस के हाथपांव फूल गए थे. इस के लिए 5 हजार सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और 1,100 वाहनों की छानबीन की गई. इस तफ्तीश के हफ्ते भर बाद जब खुलासा हुआ, तब एक ऐसी प्रेम कहानी का राज खुला, जिस की बुनियाद प्यार के…

मोनू सिंह सोलंकी की बस में 5 नवंबर, 2025 की दोपहर को 30 वर्षीय प्रीति यादव सवार हो गई थी. यह पहला मौका नहीं था, जब वह डार्क शेड वाली एसी बस में अकेली मोनू के साथ थी. वह अकसर नोएडा में बरौला की जींस फैक्ट्री में छुट्टी मिलने पर उस की बस से ही अपने घर जाती थी. वह मोनू की प्रेमिका थी. मोनू भी उस से प्रेम करता था, लेकिन दोनों के बीच प्रेम संबंध कितना गहरा था, इस का पता उन के आपसी व्यवहार से चल जाता था. वे पहले से शादीशुदा और बालबच्चेदार थे. वे कहने को तो प्रेमी युगल थे, किंतु उन के प्रेम में कुंवारेपन की कसक और कशिश नहीं थी. उन के बीच ‘दिल’ और ‘देह’ दोनों के अनैतिक संबंध थे. वे करीब 2 साल पहले ही प्रेम में पड़े थे.

प्रीति अपने पति से अलग हो कर बरौला में ही अपने 2 बच्चों के साथ रह रही थी. वह मोनू पर अपनी पत्नी को छोड़ कर उस से शादी करने का दबाव बनाए हुए थी, जबकि मोनू की स्थिति उस से अलग दुविधा वाली थी. उस के लिए पत्नी और बच्चों को छोडऩा आसान नहीं था. इसे ले कर ही उन के बीच अकसर झगड़ा होता रहता था. प्रीति उस रोज मोनू को शादी के लिए राजी करने का मन बना कर आई थी. मोनू ने उसे रूखे मन से अपने बस में बिठा लिया था और सेक्टर 105 ले जा कर सीएनजी पंप के पास बस खड़ी कर दी थी. बड़े ही सहज भाव से चुप्पी तोड़ते हुए उस ने पूछा था, ”खाना खाओगी? बोलो तो बाहर से कुछ लाऊं?’’

”सिर्फ खाना खिला कर ही मुझ से आज पिंड छुड़ाना चाहते हो…पैसे के लिए बोली थी, उस का क्या हुआ?’’ ड्राइविंग सीट के पास बैठी प्रीति थोड़ी खिन्नता से बोली.

”ऐसे क्यों बोल रही हो. पैसे का इंतजाम कर रहा हूं. कुछ और समय लगेगा. वैसे, मैं तुम्हें काफी पैसे दे भी चुका हूं.’’ मोनू बोला.

”अच्छा, तो फिर ले आओ कुछ!’’ प्रीति सांस खींचती हुई बोली.

”मैं तो परांठा खाऊंगा, तुम बोलो.’’

”मेरे लिए मैगी बनवा लेना.’’

”चलो ठीक है. तुम यहीं बैठो, मैं अभी ले कर आता हूं.’’ मोनू बोला और बस से बाहर निकल गया.

पास के ढाबे से मोनू ने खुद के लिए 2 परांठे बनवा लिए और प्रीति के लिए मैगी  ली. बस में आ कर मोनू ने प्रीति को मैगी खाने के लिए दी और अपने लिए कागज की प्लेट में परांठा निकालते हुए बोला, ”अगर तुम चाहो तो परांठा टेस्ट कर सकती हो.’’

”नहींनहीं, परांठा तुम्हीं खाओ. बस, जितना जल्द हो सके, मेरा काम कर दो.’’ प्रीति बोली.

”तुम मेरी डगमगाई आर्थिक स्थिति को तो देख ही रही हो. फिर भी जिद करती हो तो अच्छा नहीं लगता है.’’ मोनू बोला.

प्रीति थोड़ी देर चुप रही. मैगी खाती रही. फिर धीरे से बोल पड़ी, ”कब कर रहे हो मुझ से शादी?’’

”शादी! यह अचानक शादी की बात कहां से आ गई?’’ मोनू आश्चर्य से पूछा.

”क्यों..? शादी कर लो फिर पैसे नहीं मांगूंगी.’’

”यह तो कोई बात नहीं हुई! शादी अपनी जगह है और पैसा अपनी जगह! तुम तो ब्लैकमेल कर रही हो.’’ मोनू  बोला.

” तुम जो समझो. अगर मुझे पैसे नहीं मिले, तब मैं कोई सख्त कदम उठाने पर मजबूर हो जाऊंगी, फिर मत कहना कि मैं ने गलत किया…’’ प्रीति धमकाते हुए बोली.

”क्या करोगी, जरा मैं भी तो जानूं.’’ मोनू बोला.

”थाने चली जाऊंगी.’’

”पैसा मांगने!’’

”नहीं, रेप की शिकायत करने…फिर जेल में सड़ते रहना!’’ प्रीति आंखें दिखाती हुई बोली.

”ऐंऽऽ तुम तो बहुत खतरनाक नागिन…’’

”मेरा काटा पानी भी नहीं मांग पाओगे.’’

”मैं उस से पहले तुम्हारा फन ही काट डालूं तो!’’

”है हिम्मत!’’

”देखना चाहती हो मेरी हिम्मत?’’ रेप का आरोप लगाने की बात पर मोनू गुस्से से भर चुका था. प्रीति मोनू को पहले भी धमकाती रही थी, लेकिन इस तरह की धमकी उस ने पहली बार दी थी. मोनू तिलमिला गया था. उस के दिल में पहले से जख्म बने हुए थे. इस धमकी से वे और हरे हो गए. परांठा खाना छोड़ कर खड़ा हो गया. हाथ में लिए हुए कौर को वहीं झटक दिया. उस के छींटे प्रीति के चेहरे पर भी पड़े.

वह कुछ समझ नहीं पाई कि मोनू को अचानक हो क्या गया! उस की बात इतनी बुरी लगी कि उस ने परांठा खाना छोड़ दिया. नजर उठा कर देखा. उस का रौद्र रूप देख कर सहम गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. उस की सिर्फ चीख ही निकल पाई. उस ने चापड़ से प्रेमिका का मर्डर कर दिया. कुछ सेकेंड बाद मोनू अपने चापड़ को निहार रहा था, जिस से खून टपक रहा था. खून के कई छींटे उस के कपड़ों पर भी पड़ गए थे. उस ने खून सने चापड़ को बस की सीट के नीचे सरका दिया और वहीं बैठ गया.

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के थानाक्षेत्र 39 के पौश सेक्टर 108 के नाले में 6 नवंबर को एक महिला का सिर और हाथ कटा शव मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया था. बिना सिर की लाश की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी. ब्लाइंड मर्डर का मामला था. उत्तर प्रदेश के नोएडा का यह इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला था. इस की जांच और तहकीकात के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गईं. सभी टीमें अपनेअपने स्तर से लाश की पहचान से ले कर उस की हत्या करने वाले की तलाश में जुट गई.

शव की हालत इतनी खराब थी कि महिला का सिर और दोनों हाथों के पंजे कटे हुए थे, जिस से उस की पहचान करना लगभग असंभव था. पुलिस ने तुरंत इस ब्लाइंड मर्डर को सुलझाने के लिए कई टीमें गठित कीं और जांच शुरू की.

डीसीपी यमुना प्रसाद के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने जांच को आगे बढ़ाया. सर्विलांस टीम ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए अभियान छेड़ दिया था. इस ब्लाइंड हत्याकांड का खुलासा करने के लिए पुलिस को लगभग 5,000 कैमरे और 60-70 हजार मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया और करीब 1,100 वाहनों को ट्रैक किया, जिस में से 44 संदिग्ध वाहनों को ‘जीरो इन’ किया गया. 40 लोगों की टीमें दिल्ली सहित बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मथुरा जनपदों में भेजी गईं.

शव पर केवल पैरों में बिछुए थे, जोकि मृतका की शादीशुदा होने की पहचान का एकमात्र सुराग था. पुलिस ने महिला की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उस के पैरों में पहने बिछुए की तसवीर के साथ एक पैंफ्लेट जारी किया. लोगों से अपील की कि यदि किसी को भी इस महिला के बारे में कोई जानकारी हो तो तुरंत थाना सेक्टर-39 पुलिस से संपर्क करें. मृतका के पास से कोई कपड़ा या अन्य पहचान का सामान नहीं मिला था. केवल उस के पैरों में बिछुए थे. महिला की लंबाई 5 फीट 1 इंच थी.

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो जनपद मे गुमशुदा महिलाओं के घरों पर कौल कर के उन की जानकारी जुटाने में जुट गई. पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो घटनास्थल से एक संदिग्ध बस को निकलते हुए देखा, जिस से जांच का रुख बस के ड्राइवर मोनू सिंह सोलंकी की ओर मुड़ गया. नोएडा पुलिस की 45 टीमों ने गाजियाबाद, दिल्ली, बुलंदशहर, अलीगढ़ और आगरा के लगभग 100 पुलिस थानों का दौरा किया. इन थानों में गुमशुदगी दर्ज महिलाओं की सूची से मृतका का मिलान करने का प्रयास किया गया.

सेक्टर 108 स्थित पुलिस चौकी कट एस2 के पास नाले में मिली सिरकटी महिला की लाश की शिनाख्त करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था. महिला की पहचान और हत्यारों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने दिनरात एक कर दिया था. जांच में पुलिस ने 50 से अधिक महिलाओं की हिस्ट्री खंगाली और 2 संदिग्ध वाहनों पर अपनी जांच केंद्रित कर दी. 120 महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाने के बाद एडीसीपी सुमित कुमार शुक्ला ने महिला की पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया.

हालांकि घटनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने के कारण जांच में बड़ी बाधा बन गई. घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्थित एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं, जिस में 3 दिनों के भीतर लगभग 600 वाहनों की जानकारी जुटाई गई. हालांकि, इन में कोई भी संदिग्ध नहीं मिला. किंतु इसी दौरान पुलिस का 2 गाडिय़ों पर शक गहराने के बाद उन की जानकारी जुटाई गई.

जांच के दौरान पुलिस को वह बस नंबर यूपी16के टी0037 मिल गई, जो मोनू सोलंकी चलाता था. जब मोनू के बारे में तहकीकात की गई, तब उस का नोएडा में पता बरौला का मिला, जहां वह किराए पर रहता था. इसी बीच, पुलिस को बरौला निवासी एक महिला के लापता होने की जानकारी मिली. पुलिस का शक मोनू पर गहरा गया. ब्लाइंड मर्डर केस में यहां तक पहुंचने में कई दिन लग गए. पुलिस को मुखबिर से भी मोनू के बारे में कई जानकारियां मिलीं. पता चला कि उस के लापता युवती के साथ प्रेम संबंध थे. शक के आधार पर 14 नवंबर, 2025 को बस चालक मोनू सोलंकी को गिरफ्तार कर लिया. वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के एटा के जैथरा नेहरू नगर का रहने वाला है.

पूछताछ में मोनू ने कुबूल किया कि प्रीति और उस की मम्मी एक जींस फैक्ट्री में काम करती थीं. इसी के चलते दोनों परिवारों का मेलजोल बढ़ गया था. बाद में उस के और प्रीति के बीच अवैध संबंध बन गए थे. मोनू ने बताया कि प्रीति उस से लगातार पैसे की मांग करती थी और उस पर कमाई का बड़ा हिस्सा देने का दबाव डालती थी. प्रीति शादी करने और 4-5 लाख रुपए देने के लिए मोनू को ब्लैकमेल कर रही थी. मोनू की 2 बेटियां और एक बेटा भी है.

विवाद के दौरान प्रीति ने मोनू को धमकी दी कि वह उस की बेटियों से अनैतिक कार्य कराएगी. वह उसे ब्लैकमेल भी करती थी और उस के बच्चों को गलत कामों में लगाने की धमकी देती थी. जब उस ने उसे रेप में फंसाने की धमकी दी, तब उस ने इस तनाव और बढ़ते दबाव के कारण प्रीति को रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान बना लिया था. इस से तंग आ कर ही उस ने यह कदम उठाया. मौका देख कर उस की चापड़ से हत्या कर दी और पहचान मिटाने के लिए शरीर के अंगों को काट दिया था.

5 नवंबर, 2025 को मोनू चुपके से एक चापड़ (धारदार हथियार) उठा लाया. इस के बाद वह प्रीति को अपनी बस में बैठा कर ले गया. रास्ते में खाना खाते वक्त उस से जम कर झगड़ा हो गया और मारपीट की नौबत आ गई. गुस्से में आ कर मोनू ने चापड़ से प्रीति की गरदन काट दी. पहचान मिटाने के लिए उस ने मृतका के दोनों हाथों के पंजे भी काट दिए. शव को उस ने सेक्टर 108 के नाले में फेंक दिया. इस से भी मन नहीं भरा तो सिर और कटे हुए हाथों के पंजों को गाजियाबाद ले जा कर अपनी बस से कुचल दिया और वहीं फेंक दिया.

अंगों के साथ बस की मैट, कपड़े आदि पटेल नगर थाना क्षेत्र में फेंक कर बरौला लौट आया. उस बस को 4 बार अच्छी तरह से धोई ताकि कोई सबूत न बचे. इस के बाद वह सामान्य जीवन जीने लगा. इस बयान के बाद मोनू की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया चापड़, मृतका प्रीति के देह के बाकी हिस्से, कपड़े और बस में बिछी खून लगी मैट को बरामद कर लिया है. फोरैंसिक टीम ने बरामद दागों के इंसानी रक्त होने की पुष्टि की है.

पुलिस को सिरकटी लाश की गुत्थी सुलझाने में सफलता मिलने के बाद मुख्य आरोपी मोनू सोलंकी को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया गया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में ले कर जेल भेज दिया गया. Noida News

 

 

Illicit Relationship: क्या करें जब पति बाहर मुंह मारे

Illicit Relationship: 33 साल की संगीता उर्फ पप्पी 35 वर्षीय महेंद्र गुर्जर की दूसरी पत्नी जरूर थी, लेकिन वह पूरी जिम्मेदारी के साथ घरगृहस्थी संभाले हुए थी. वह पति की इस आदत से परेशान रहती थी कि उस के दूसरी महिलाओं से भी अवैध संबंध थे. संगीता ने जब पति को समझाने की गुस्ताखी की तो…

रात के करीब 10 बजे महेंद्र गुर्जर जैसे ही अपने बैडरूम में दाखिल हुआ तो बिस्तर पर लेटी हुई पत्नी से बोला, ”पप्पी, मेरे पेट में बहुत दर्द हो रहा है.’’

”आप बिस्तर पर लेट जाइए, मैं तेल लगा कर मालिश कर देती हूं, इस से आराम मिल जाएगा,’’ कहते हुए संगीता उर्फ पप्पी अलमारी से तेल की शीशी निकालने चली गई.

”दर्द इतना तेज है कि मुझ से बरदाश्त नहीं हो रहा है, मालिश से कुछ नहीं होगा. जल्द ही मुझे डाक्टर को दिखाना होगा.’’ महेंद्र अपने पेट पर हाथ फेरते हुए बोला.

”रात के 10 बज रहे हैं, इतनी रात को शहर के हौस्पिटल कैसे जाओगे? हेमंत भैया को फोन लगा कर बुला लो, वह तुम्हें बाइक से डौक्टर के पास ले चलेंगे.’’ पत्नी ने सुझाव दिया.

”किसी को बुलाने की जरूरत नहीं है. तुम समझ नहीं रही हो पप्पी, यह दर्द साधारण पेट दर्द नहीं है, कोई गंभीर समस्या लग रही है. हो सकता है, डाक्टर मुझे एडमिट कर ले, इसलिए तुम मेरे साथ चलो.’’ महेंद्र ने कहा.

”लेकिन ऐसे में तुम बाइक चलाते हुए खंडवा तक कैसे चलोगे, रास्ते में तबियत और ज्यादा खराब हो गई तो क्या होगा?’’ पत्नी ने अंदेशा जताते हुए कहा.

”मैं बाइक चलाते हुए ले जाऊंगा, तुम तो कुछ पैसे रख कर जल्दी तैयार हो जाओ, तब तक मैं बाइक निकालता हूं.’’ महेंद्र पत्नी से बोला. संगीता उर्फ पप्पी ने जल्दी से अलमारी से कुछ पैसे निकाले और जरूरी सामान एक थैली में रख लिया. बगल के कमरे में पढ़ रहे बच्चों से पप्पी ने कहा, ”मैं पापा के साथ खंडवा इलाज के लिए जा रही हूं, तुम लोग अंदर से दरवाजा बंद कर ताला लगा कर सो जाना. हो सकता है, हम लोग सुबह लौटें.’’

इस के बाद वह तैयार हो कर घर से बाहर निकल आई. घर के बाहर महेंद्र बाइक ले कर खड़ा हुआ था. तब तक रात के करीब साढ़े 10 बज चुके थे. दोनों बाइक पर सवार हो कर खंडवा के लिए रवाना हो गए. यह 21 सितंबर, 2025 की बात है. महेंद्र ने रात करीब 11 बजे सब से पहले अपने साढ़ू विशाल को फोन कर के बताया, ”भैया, गांव के बाहर रास्ते में कुछ लोगों ने मुझे बंधक बना कर पप्पी को मार डाला है, आप तुरंत आ जाइए.’’

इतना सुनते ही विशाल के होश उड़ गए.  रात का वक्त होने से विशाल ने तुरंत गांव के कुछ लोगों को और फोन कर के बुला लिया और सभी मिल कर महेंद्र के बताई गई जगह पर पहुंच गए. घटनास्थल से ही विशाल ने 112 नंबर डायल कर के मर्डर होने की सूचना पुलिस को दी. इधर रात एक बजे खंडवा के पद्मनगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि डिगरीस और बावडिय़ाकाजी गांव के बीच एक महिला का कत्ल हो गया है. पद्मनगर थाने के टीआई प्रवीण आर्य ने तत्काल घटना की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी और पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

महेंद्र की बताई लोकेशन पर जब पुलिस टीम पहुंची तो महेंद्र बदहवास हालत में वहां मिला. सामने उस की पत्नी की लाश पड़ी हुई थी. महेंद्र ने पुलिस टीम को बताया कि वह बाइक से जिला अस्पताल जा रहा था. डिगरीस गांव के बाहर करीब 2 किलोमीटर निकले ही थे कि 3 बदमाश रास्ते में बाइक अड़ा कर शराब पी रहे थे. उस ने जैसे ही गाड़ी रोकी तो उन्हें देख कर पत्नी ने गुस्से में आ कर कहा, ”तुम लोगों को समझ नहीं आता कि रोड पर गाड़ी अड़ा कर बैठे हो.’’

इतना सुनते ही उन लोगों ने गालीगलौज शुरू कर दी. महेंद्र ने बताया कि रात के समय अंधेरे के कारण मैं उन लोगों को पहचान नहीं पाया और अनजान लोगों से मैं ने बहस करनी उचित नहीं समझी और पत्नी की तरफ से मैं ने उन से माफी मांगी, लेकिन वे लोग नहीं माने. वे लोग अलग ही भाषा बोल रहे थे, जो हमारी समझ से बाहर थी. इतने में 2 लोगों ने मुझे पकड़ा और एक व्यक्ति ने पत्नी को चाकू से गोदगोद कर मार डाला.

महेंद्र ने आगे बताया कि आंखों के सामने पत्नी का मर्डर होते देख मेरे हाथपांव फूल गए. मेरा मोबाइल भी कहीं गिर गया. इतना कहते ही महेंद्र फफकफफक कर रो पड़ा. सूचना मिलने पर एसपी मनोज कुमार राय समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस टीम ने घटनास्थल से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. मृतक महिला की पहचान 33 साल की संगीता उर्फ पप्पी  पति महेंद्र पटेल गुर्जर निवासी डिगरीस के रूप में हुई. पप्पी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उस के शरीर पर धारदार हथियार से करीब 40 बार वार किए गए थे.

35 साल के महेंद्र पटेल के पिता सखाराम पटेल की मौत के बाद महेंद्र ने अपने घर के बाड़े में एक मकान बना लिया था, जिस में वह अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ रहता था. महेंद्र की मां पास ही के पुश्तैनी मकान में अकेली रहती थी. महेंद्र की खंडवा जिले के डिगरीस गांव में किराना दुकान थी. महेंद्र किराना सामान के साथ अवैध रूप से शराब बेचने का काम भी करता है. संगीता महेंद्र के किराना व्यापार में हाथ बंटाती थी. संगीता आदिवासी समाज से थी. महेंद्र ने पहली पत्नी को तलाक दे कर उस से शादी की थी. पहली पत्नी से एक बेटी है, जो महेंद्र के साथ ही रहती है. संगीता से भी उस का एक बेटा है, जिस की उम्र करीब 11 साल है.

दोनों की शादी 2012 में हुई थी. महेंद्र से बेटे के अलावा संगीता की पहले पति से 12 साल की बेटी भी है. बेटी गर्भ में थी, तभी संगीता ने पहले पति से तलाक ले लिया था. महेंद्र की तहरीर पर थाना पद्मनगर में धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत रिपोर्ट दर्ज हो गई. इस मामले की जांच के लिए खंडवा जिले के एसपी मनोज कुमार राय ने एडिशनल एसपी (सिटी) महेंद्र तारनेकर के निर्देशन में 2 पुलिस टीमों का गठन कर दिया. एक टीम में पद्मनगर थाने के टीआई प्रवीण आर्य के साथ एसआई हर्ष सोनगरे, एएसआई केमर रावत, कांस्टेबल अजय एवं दूसरी टीम इंसपेक्टर धीरेश धारवाल के नेतृत्व में गठित की गई.

 

दूसरी टीम ने इस दौरान मुखबिर तंत्र और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के आधार पर जांच की, जिस के बाद एक संदेही हेमंत उर्फ कान्हा से पूछताछ की गई. गांव में रहने वाले सेवकराम पंचाल के 21 साल के बेटे हेमंत पंचाल की मम्मी डिगरीस गांव की थी, इस वजह से वह महेंद्र को मामा कह कर बुलाता था. हेमंत एक प्राइवेट हौस्पिटल में कंपाउंडर का काम करता था. गांव डिगरीस के लोगों ने पुलिस को बताया कि हेमंत अकसर महेंद्र के साथ ही रहता था. ताज्जुब की बात यह थी कि महेंद्र ने पेट दर्द होने पर हेमंत को क्यों नहीं बुलाया?

 

शक होने पर पुलिस ने हेमंत से पूछताछ की. पहले तो उस ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने में अनभिज्ञता व्यक्त की, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया और उस ने हत्या की पूरी कहानी बता दी. हत्या के पीछे की वजह सुन कर हर कोई हैरान रह गया. हेमंत ने सच उगलते हुए पुलिस को बताया कि मृतका के पति ने ही 50 हजार रुपए में सुपारी दे कर अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारने की साजिश रची थी, जिस में गांव जामली कलां के रहने वाले आर्यन यादव और राजेंद्र यादव के साथ मिल कर हत्या की थी.

हेमंत आर्यन के साथ पढ़ा था और उस से दांत काटी दोस्ती थी. आर्यन का दोस्त राजेंद्र था. इस वजह से तीनों आपस में संपर्क में थे. आर्यन और राजेंद्र के पास कोई काम नहीं था. आवारागर्दी करने और नशे की गिरफ्त में रहने की वजह से पैसों की तंगी बनी रहती थी, इसलिए पैसों की खातिर कोई भी काम करने को तत्पर रहते थे. 22 साल का आर्यन यादव और 35 साल का राजेंद्र रेलवे गेट के पास गांव जामली कलां के रहने वाले थे. पुलिस ने दोनों को 24 सितंबर, 2025 को गिरफ्तार कर लिया. इन के पास से सुपारी के 10 हजार रुपए भी बरामद कर लिए.

शुरुआत में पुलिस को मामला लूट का लग रहा था, लेकिन पुलिस ने जब बारीकी से पड़ताल की तो कई बातें मेल नहीं खा रही थीं. पत्नी की हत्या अपनी आंखों के सामने होते देखने वाले महेंद्र के शरीर पर किसी तरह की खरोंच तक का निशान नहीं था. पुलिस को सब से बड़ा सुराग तब मिला, जब हौस्पिटल के डौक्टरों ने साफ कर दिया कि महेंद्र को कोई पेट दर्द नहीं था. इसी से पुलिस का शक और गहरा हुआ. आगे की जांच में जब महेंद्र और उस के दोस्तों से पूछताछ की गई तो पूरा सच सामने आ गया. हत्या के पीछे का कारण पतिपत्नी के बिगड़े रिश्ते बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, महेंद्र का यह दूसरा विवाह था. वह पत्नी से बेहद परेशान था.

पत्नी अकसर उस से और परिवार वालों से झगड़ा करती थी. गालीगलौज भी करती थी. महेंद्र इस तनाव से बाहर निकलना चाहता था और आखिरकार उस ने अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने का खौफनाक रास्ता चुन लिया. उस ने अपने दोस्तों की मदद ली और सब ने मिल कर इस रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश को अंजाम दिया. फिर पत्नी को तड़पातड़पा कर मार डाला. पुलिस पूछताछ में उस ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस का शक यकीन में बदल गया. हेमंत के बताए अनुसार, पप्पी के पति महेंद्र ने ही एक लाख रुपए की सुपारी हेमंत को दी थी. हेमंत अकेले इस काम को अंजाम नहीं दे पा रहा था, लिहाजा उस ने 20-20 हजार रुपए दे कर गांव जामली कलां के रहने वाले आर्यन और राजेंद्र को भी इस में शामिल कर लिया.

महेंद्र का अपने गांव और आसपास की कई महिलाओं से अफेयर चल रहा था. युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही उसे अय्याशी का शौक चढ़ गया था. उस के पास पुश्तैनी करीब 10 एकड़ जमीन थी, इसी अय्याशी के चक्कर में उस ने धीरेधीरे कर के 8 एकड़ जमीन बेच दी. पहली पत्नी सजातीय थी, उस से तलाक के पीछे भी यही कारण था. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू और सुपारी के तौर पर दी गई 10 हजार रुपए की धनराशि आरोपियों से बरामद की. इस दौरान महेंद्र ने अपना मोबाइल आरोपी हेमंत को दे कर उस में दूसरी सिम डलवा कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की थी, उसे भी जब्त कर लिया गया.

महेंद्र गुर्जर टीवी पर ‘क्राइम पेट्रोल’ देख कर प्रभावित हुआ था और पत्नी से परेशान हो कर उस ने पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया. योजना के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह से ले कर रात तक महेंद्र और हेमंत एक साथ थे. हेमंत ने फोन कर के शाम को उस के दोस्तों को बुला लिया था और महेंद्र की दुकान से ही शराब और सिगरेट के पैकेट ले कर उन पर खर्च करने लगा था. इस के बाद रात 10 बजे महेंद्र ने पत्नी के सामने अपने पेट में दर्द होने का नाटक किया.  पति की लाचारी देख कर पत्नी भी साथ चलने को राजी हो गई.

हेमंत और उस के साथी आर्यन व राजेंद्र गांव से करीब एक किलोमीटर बाहर मेन रोड पर बाइक अड़ा कर बैठे हुए थे. महेंद्र और उस की पत्नी के आते ही वे उस की बाइक के आगे खड़े हो गए. फिर तीनों ने मिल कर महेंद्र की पत्नी के साथ मारपीट की और बारीबारी से चाकुओं से तब तक गोदा, जब तक उस की सांसें नहीं थम गईं. मुख्य रास्ता होने की वजह से आरोपियों ने वारदात में देरी नहीं की और महज 5 मिनट में ही संगीता उर्फ पप्पी का काम तमाम कर दिया. उस के बाद महेंद्र गुर्जर ने नाटकीय रूप से गांव के लोगों को फोन किया और कहा कि उस के साथ मारपीट हुई है. गांव वालों के पहुंचने पर पुलिस को इत्तला दी गई.

पुलिस ने हत्या के आरोपी हेमंत गुर्जर, उस के दोस्त आर्यन यादव और राजेंद्र यादव से संगीता उर्फ पप्पी के हत्या के बारे में विस्तार से पूछताछ कर जेल भेज दिया. Illicit Relationship

 

 

 

Hindi Stories: एक औरत की खता

Hindi Stories: रिजवाना खूबसूरत महिला थी. उस की खूबसूरती के जाल में उलझ कर नूर हसन ने मर्यादाओं को तोड़ दिया. लेकिन तलाक के डर से उस ने प्रेमी नहीं पति का साथ दिया. घर तो बचा लिया, लेकिन जेल जाने से नहीं बच सकी. एक रात नूर हसन जब अचानक लापता हो गया तो उस के घर वालों की परेशानी बढ़ गई. वह घर वालों के साथ ही सोया था,

सुबह देखा तो वह बिस्तर से गायब था. वह कहां चला गया? कोई नहीं जानता था. घर वालों को भी उस ने कुछ नहीं बताया था. हैरानी की बात यह थी कि उस का मोबाइल भी स्विच औफ आ रहा था. घर वालों ने अपने हिसाब से उस की खूब खोजबीन की. लेकिन जब उस का कुछ पता नहीं चला तो उस के चाचा अब्दुल हमीद ने थाना डोईवाला में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

38 वर्षीय नूर हसन उत्तराखंड के डोईवाला कस्बे के गांव कुडकावाला निवासी दिवंगत सकी जान का बेटा था. वह घर के पास ही परचून की दुकान चलाता था. उस के परिवार में पत्नी शबनम के अलावा 2 बच्चे थे, जिन में एक 2 साल की बेटी और दूसरा 6 माह का दुधमुंहा बेटा था.

नूर हसन 6 अगस्त की देर रात लापता हुआ था. उस की गुमशुदगी दर्ज कर के थानाप्रभारी संदीप नेगी ने इस मामले की जांच में  एसएसआई प्रदीप चौहान व अन्य को लगा दिया था. पुलिस को लग रहा था कि नूर हसन शायद पत्नी से नाराज हो कर कहीं चला गया होगा, इसलिए पुलिस ने शबनम से पूछताछ की. पुलिस को उस ने बताया था कि वे दोनों हंसीखुशी से रहते थे. नाराजगी जैसी उन के बीच बिलकुल बात नहीं थी. वह लगभग 9 बजे बच्चों के साथ सो गई थी. सुबह नूर हसन गायब था और घर का दरवाजा खुला हुआ था. सुबह उस ने सोचा कि वह टहलने गए होंगे.

लेकिन जब 11 बजे तक वह नहीं आए, तो उस ने उन का मोबाइल नंबर मिलाया. मोबाइल स्विच औफ होने से उसे फिक्र हुई और उस ने अपने घर वालों को यह बात बताई. पूछताछ में एक बात बिलकुल साफ हो गई थी कि नूर हसन घर से अपनी मरजी से गया था. आखिर ऐसी क्या वजह थी, जो उस ने पत्नी को भी नहीं बताई. पुलिस ने जांच के लिए उस का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया. मोबाइल की काल डिटेल्स के लिए कंपनी को लिख दिया गया.

पुलिस नूर हसन का कुछ पता लगा पाती, उस से पहले ही 3 दिनों बाद यानी 11 अगस्त, 2015 को लोगों ने इस्तेमाल में न आने वाले कुएं में एक शव देखा. कुएं से बदबू फैलने के बाद लोगों ने उस में देखा था. इस की सूचना पुलिस को दी गई. सूचना पा कर थानाप्रभारी संदीप नेगी मय पुलिस बल के मौके पर पहुंच गए थे. कुआं गहरा था और उस में पानी के साथ गंदगी भी अटी पड़ी थी. ऐसे कुएं में जहरीली गैसें होती हैं, यह पुलिस जानती थी, इसलिए आक्सीजन सिलेंडर किट के जरिए अग्निशमन दल के कांस्टेबल दीपक थपलियाल को उस में उतारा गया.

अंतत: कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाल लिया गया. शव सड़ने लगा था. कुएं से शव मिलने की सूचना से गांव में सनसनी फैल गई थी. थोड़ी देर में वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई. कुएं से जो शव बरागद हुआ था, उस की शिनाख्त नूर हसन के रूप में हो गई. नूर हसन की कनपटी और सिर में पीछे की तरफ चोट के निशान थे. मामला सीधेसीधे हत्या का था. पुलिस का अनुमान था, किसी बहाने से उसे कुएं तक बुलाया गया था और वहीं उस की हत्या कर के शव कुएं में फेंक दिया गया था. सूचना पा कर एसपी (देहात) जी.सी. ध्यानी व पुलिस उपाधीक्षक अरुण पांडे ने भी मौका मुआयना किया था.

पुलिस ने लिखापढ़ी कर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के साथ ही अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर के इस की विवेचना एसएसआई प्रदीप चौहान को सौंप दी गई. एसएसपी पुष्पक ज्योति ने इस मामलें में अधीनस्थों को त्वरित काररवाई कर के केस का खुलासा करने के निर्देश दिए. नूरहसन की हत्या के खुलासे के लिए थानाप्रभारी संदीप नेगी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जिस में एसएसआई प्रदीप चौहान, एसआई संजीत कुमार, कांस्टेबल मनोज कुमार, विपिन सैनी, सुरेश रमोलसा , नवनीत, धन सिंह व महिला कांस्टेबल सुलेखा को शामिल किया गया.

इस बीच मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई, जिस में मृत्यु की वजह सिर में किसी भारी वस्तु से लगी चोट से हुआ ब्रेन हैमरेज व पानी में डूबना बताया गया था. एक दिन बाद मृतक की काल डिटेल्स भी पुलिस को मिल गई थी. पुलिस ने काल डिटेल्स की जांच की तो पाया कि लापता होने वाली रात नूर हसन की 1:33 और 1:38 बजे एक नंबर पर बात हुई थी. पुलिस समझ गई कि हत्या का राज उसी नंबर में छिपा है, जिस ने फोन किया था. पुलिस को लगा कि संदिग्ध नंबर के मालिक तक पहुंचते ही केस का खुलासा हो जाएगा.

पुलिस ने उस नंबर का कंपनी से पता हासिल किया तो वह चौंकी, क्योंकि वह नंबर भी नूर हसन के नाम पर ही था. उस नंबर से केवल नूर हसन से ही बात की जाती थी. लापता होने वाली रात से दोनों ही नंबर बंद थे. दूसरा नंबर या तो नूर हसन  के परिवार में होना चाहिए था या किसी ऐसे खास शख्स के पास, जो उस के बेहद नजदीक था. ऐसा भी संभव था कि उस ने दूसरा नंबर अपनी पत्नी को दिया हो. पुलिस ने उस की पत्नी से पूछताछ की तो उस ने उस नंबर के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया. उस ने यह भी बताया कि नंबर कौन इस्तेमाल कर रहा था, वह यह भी नहीं जानती. इस से हत्या की गुत्थी सुलझाने के बजाय और उलझ गई. देखतेदेखते कई दिन बीत गए.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जिस मोबाइल में वह संदिग्ध नंबर इस्तेमाल किया गया था, उस में 2 सिमकार्ड इस्तेमाल होते थे. पुलिस ने दूसरे सिमकार्ड का नंबर हासिल कर के उस के मालिक का पता लगाया तो वह कुडकावाला के ही फिरोज के नाम निकला. इस से हत्या का मामला सुलझता नजर आया. 19 अगस्त को पुलिस उस के पास पहुंची तो पता चला कि वह मोबाइल उस की पत्नी रिजवाना इस्तेमाल करती थी. रिजवाना खूबसूरत महिला थी. पुलिस को सामने देख पतिपत्नी, दोनों बुरी तरह घबरा गए. पुलिस दोनों को हिरासत में ले कर थाने आ गई. थाने में दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया कि पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई.

नूर हसन रिजवाना के हुस्न में उलझा हुआ था. यही हुस्न उसे बड़ी खामोशी और चालाकी से मौत की दहलीज तक ले गया. विस्तृत पूछताछ में चौंकाने वाली जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस प्रकार थी. रिजवाना देहरादून के महूवाला क्षेत्र की रहने वाली थी. करीब 10 साल पहले उस का निकाह फिरोज के साथ हुआ था. रिजवाना तेजतर्रार खूबसूरत युवती थी. उसे पा कर फिरोज खुशी से फूला नहीं समाया था. समय के साथ रिजवाना 2 बच्चों की मां बनी. फिरोज गांव में ही छोटा सा हेयरकटिंग सैलून चलाता था. उस का छोटा सा परिवार हर तरह की खुशिया समेटे हुए था. रिजवाना उन युवतियां में थी, जो अपनी खूबसूरती पर नाज करती हैं.

रिजवाना के पड़ोस में ही नूर हसन रहता था. वह पहले शहर में वेल्डिंग का काम करता था, लेकिन यह काम उसे रास नहीं आया तो एक साल पहले उस ने गांव आ कर परचून की दुकान खोल ली. एक दिन रिजवाना नूर हसन की दुकान पर आई तो वह उसे देखता रह गया. एक ही मोहल्ले का होने के कारण दोनों एकदूसरे को पहले से ही जानते थे, लेकिन उस दिन नूर हसन की नजरें उस पर अटक गई थीं. उस का मन किया कि रिजवाना के हुस्न की तारीफ करे, लेकिन वह यह सोच कर खामोश रहा कि कहीं वह बुरा न मान जाए. जिन हसरत भरी निगाहों से उस ने रिजवाना को देखा था, उस से रिजवाना को अपनी खूबसूरती पर और भी नाज हो गया था.

कहते हैं कि मर्द की नजरों को पहचानने में औरत का कोई सानी नहीं होता. दूसरे शब्दों में यह कुदरती हुनर होता है. अगले कुछ दिनों में रिजवाना की समझ में आ गया कि कुछ तो है, जो नूर हसन के दिल में चल रहा है. तभी वह उसे ऐसी नजरों से देखता है. यूं तो नूर हसन खुद भी 2 बच्चों का पिता था, परंतु रिजवाना की खूबसूरती उसे लुभा रही थी. उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह कभी मौका मिलने पर उस की खूबसूरती की तारीफ जरूर करेगा. एक दिन रिजवाना फिर उस की दुकान पर आई तो वह तारीफ करते हुए बोला,‘‘आप बुरा न माने तो एक बात कहूं भाभीजान?’’

‘‘हां कहो?’’ रिजवाना बोली.

‘‘पहले वादा कीजिए कि आप नाराज नहीं होंगी. इस से मुझे जो दर्द होगा, मैं खुद को कभी माफ नहीं कर सकूंगा.’’ यह बात उस ने इतने गंभीर लहजे में कही कि रिजवाना के मन में जिज्ञासा जाग गई और वह भी गंभीर हो गई, ‘‘ऐसी क्या बात है, जो तुम कहना चाहते हो?’’

‘‘बस यही कहना था कि आप बहुत खूबसूरत हैं. जो हुस्न आप ने पाया है, वह सब को नहीं मिलता. फिरोज खुशनसीब है, जो उसे आप जैसी शरीकेहयात मिली है.’’

तारीफ के अल्फाज हर किसी को खुश कर देते हैं. रिजवाना के साथ भी ऐसा ही हुआ. अपनी तारीफ सुन कर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई. वेसे भी नूर हसन की हसरतपूर्ण निगाहों ने उस के दिल में पहले ही जगह बना ली थी. इस के बाद जब दोनों मिलते, बातें कर लिया करते. एकाध बार ऐसा भी हुआ, जब नूर हसन फिरोज की अनुपस्थिति में किसी काम के बहाने उस के घर गया. रिजवाना कोई नादान नहीं थी. वह समझ गई कि नूर हसन उसे चाहता है. अब तक नूर हसन उसे भी अच्छा लगने लगा था. दोनों के दिलों में जो पनप रहा था, उसे एक दिन प्यार का नाम दे कर दोनों ने इजहार कर दिया.

इस के बाद दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया और अकसर बातें करने लगे. कुछ समय ऐसे ही चलता रहा. इस के बाद दोनों एकदूसरे से मिलने का बहाना तलाशने लगे. रिजवाना सामान लेने के बहाने उस की दुकान पर आती तो वह भी किसी न किसी बहाने उस के घर पहुंच जाता. जमाने से उन्होंने अपने दिलों में पनपते प्यार को छिपाया हुआ था. रिजवाना ऐसी गलती कर चुकी थी, जो उसे नहीं करनी चाहिए थी. रिजवाना के मोबाइल में अकसर बैलेंस कम होने लगा तो फिरोज उस से सवालजवाब करने लगा. इस से उसे शक हो सकता था.

रिजवाना सतर्क हो गई. उस ने यह बात नूर हसन को बताई तो उस ने अपने नामपते से एक नया सिम कार्ड खरीदा और उसे रिजवाना को दे दिया, साथ ही ताकीद भी कर दी कि इस नंबर से वह सिर्फ उस से ही बात करेगी. रिजवाना के पास ड्यूल सिमकार्ड वाला मोबाइल था. उस के बाद वह नूर हसन से सिर्फ उसी नंबर से बात करने लगी. वह भी उसी नंबर पर बात करता था. दूसरी ओर फिरोज को पता भी नहीं था कि उस की बीवी क्या गुल खिला रही है. खुफिया मुलाकातों के दौर में एक दिन रिजवाना व नूर हसन ने मर्यादाओं की दीवार को गिरा दिया. दोनों शादीशुदा थे, नैतिक व सामाजिक नजरिए से यह गलत था, लेकिन दिल के हाथों की मजबूरी बहाना बन गई.

पतन की दलदल ऐसी होती है, जो इस में एक बार गिरता है, वह गिरता ही जाता है. उन दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ. उन के रिश्ते अकसर बनने लगे. वह पकड़े जा सकते थे. इस का रास्ता भी दोनों ने खोज निकाला. रिजवाना को जिस रात नूर हसन के आगोश में समाना होता था, उस रात वह॒॒फिरोज को खाने में नींद की गोलियां दे दिया करती थी. जब वह गहरी नींद में हो जाता था तो वह नूर हसन को फोन कर के बुला लेती थी. दोनों के बीच यह आए दिन का सिलसिला बन गया था. ऐसे रिश्ते छिपाए नहीं छिपते. दोनों को ले कर लोगों में चर्चाएं होने लगीं. फिरोज को पता चल गया कि दिन में नूर हसन उस के घर जाता है. उस ने रिजवाना को डांटाफटकारा.

कुछ दिन तो रिजवाना सही रास्ते पर रही, लेकिन बहुत जल्द उस ने पुराना ढर्रा अपना लिया. फिरोज को किसी ने बताया था कि नूर हसन रात में भी उस की पत्नी से चोरीछिपे मिलता है. रिजवाना की गतिविधियों पर उसे शक तो हो ही गया था, इस तरह की बातों ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया. एक दिन उस ने नूर हसन को अपने घर से निकलते हुए देख लिया. वह घर के अंदर दाखिल हुआ तो रिजवाना चौंक गई. फिरोज उस की हालत देख कर समझ गया कि वह गलत डगर पर है. फिरोज गुस्से वाला युवक था. उस का खून खौल उठा. उस ने रिजवाना की जम कर पिटाई की और तलाक की धमकी दे डाली.

रिजवाना को अपना घर टूटता नजर आया तो वह त्रियाचरित्र पर उतर आई. उस ने रोरो कर बताया कि नूर हसन ने उसे अपने जाल में उलझा लिया था और उसे बदनाम करने की धमकी देता था, इसलिए वह खामोशी से अपने साथ होने वाले जुल्मों को सहती रही. फिरोज को उस के नाटक और आंसुओं पर भरोसा हो गया. उस ने रिजवाना को तो माफ कर दिया, लेकिन उसी दिन मन में ठान लिया कि वह नूर हसन को सबक सिखा कर रहेगा.

रिजवाना समझ गई थी कि घर टूटने से बेहतर अपने कदम संभालने में ही भलाई है. उस ने नूर हसन से बातें करनी बंद कर दीं. फिरोज अपमान की आग में झुलस रहा था. उस ने रिजवाना से कह दिया कि वह नूर हसन को जिंदा नहीं छोड़ेगा. वह जानता था कि रिजवाना के माध्यम से ही वह नूर हसन को उलझा सकता है. दोनों ने उसे मारने की योजना बना डाली.

योजना के अनुसार, 6 अगस्त की शाम रिजवाना ने उसे फोन कर के कहा, ‘‘मुझे तुम से कुछ बात करनी है.’’

‘‘कह दो इस में सोचने की क्या बात है?’’ नूर हसन ने कहा.

रिजवाना राजदराना अंदाज में बोली, ‘‘मैं फोन पर नहीं कह सकती.’’

‘‘तो आज रात आ जाता हूं.’’ नूर हसन ने कहा तो वह उसे समझाते हुए बोली, ‘‘नहीं, तुम्हारा घर आना ठीक नहीं है. एक गड़बड़ हो गई है. मैं रात को मौका देख कर फोन करूंगी. तुम कुएं पर आ जाना, हम वहीं मिल लेंगे.’’

‘‘ठीक है.’’ नूर हसन ने कहा.

कई दिनों से दोनों के बीच रिश्ते नहीं बने थे. नूर हसन के मन में मिलने की तड़प थी. वह उस पर पूरा भरोसा करता था. रात में वह उस के फोन का बेसब्री से इंतजार करने लगा. उस की पत्नी व बच्चे सो चुके थे. देर रात एक बजे के बाद रिजवाना का फोन आया और उस ने उसे कुएं पर आने के लिए कहा. नूर हसन को ख्वाब में भी उम्मीद नहीं थी कि रिजवाना आज उसे मौत का पैगाम दे रही है. वह चुपके से घर से निकल गया.

उधर नूर हसन को फोन कर के फिरोज व रिजवाना कुएं पर पहुंच गए. रात के गहरे सन्नाटे में वहां कोई नहीं था. फिरोज छिप कर खड़ा हो गया, जबकि रिजवाना उस का इंतजार करने लगी. कुछ ही मिनटों में नूर हसन वहां आ गया. रिजवाना को अकेली पा कर उसे सुकून मिला. रिजवाना ने उसे बातों में  उलझा लिया, तभी फिरोज ने एक पत्थर उठाया और तेजी से उस के सिर व कनपटी पर वार कर दिए. अचानक हुए वार को नूर हसन सह नहीं पाया. वह बेहोश हो कर नीचे गिर गया. फिरोज ने रिजवाना की मदद से उसे उठाया और कुएं में डाल कर घर चले आए. बाद में नूर हसन का शव मिलने पर फिरोज न सिर्फ कुएं पर गया, बल्कि उस के परिवार के गम में भी शरीक हुआ. उन्होंने सोचा भी नहीं था कि पुलिस कभी उन तक पहुंच पाएगी, लेकिन उन की यह सोच गलत साबित हुई और वह गिरफ्त में आ गए.

पूछताछ के बाद पुलिस ने अगले दिन दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी पुष्पक ज्योति ने ढाई हजार रुपए का इनाम देने की घोषण भी की.

नूर हसन ने दूसरे की बीवी से रिश्ते बना कर विश्वास न किया होता और रिजवाना ने गलती कर के त्रियाचरित्र न दिखाया होता तो ऐसी नौबत कभी नहीं आती. अब उन के बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है. कथा लिखे जाने दोनों हत्यारोपियों की जमानत नहीं हो सकी थी और पुलिस उन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही थी. Hindi Stories

Suspense Crime Story: परदेसी पति की बेवफा पत्नी

Suspense Crime Story: उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना कैंपियरगंज के थानाप्रभारी चौथीराम यादव रात की गश्त से लौट कर लेटे ही थे कि उन के फोन की घंटी बजी. बेमन से उन्होंने फोन उठा कर कहा, ‘‘हैलो, कौन?’’

‘‘सर मैं टैक्सी ड्राइवर किशोर बोल रहा हूं.’’ दूसरी ओर से कहा गया.

‘‘जो भी कहना है, सुबह थाने में आ कर कहना. अभी मैं सोने जा रहा हूं.’’

‘‘सर, जरूरी बात है… मोहम्मदपुर नवापार सीवान के पास सड़क के किनारे एक औरत की लाश पड़ी है. उस के सीने से एक छोटा बच्चा चिपका है. अभी बच्चा जीवित है.’’ किशोर ने कहा.

लाश की बात सुन कर थानाप्रभारी की नींद गायब हो गई. उन्होंने कहा, ‘‘ठीक है, मैं पहुंच रहा हूं. मेरे आने तक तुम वहीं रहना. बच्चे का खयाल रखना.’’

‘‘ठीक है सर, आप आइए. आप के आने तक मैं यहीं रहूंगा.’’

कह कर किशोर ने फोन काट दिया.

सूचना गंभीर थी, इसलिए थानाप्रभारी चौथीराम यादव ने तुरंत इस घटना की सूचना अधिकारियों को दी और खुद जल्दीजल्दी तैयार हो कर सबइंसपेक्टर विनोद कुमार सिंह, कांस्टेबल रामउजागर राय, अवधेश यादव और जगरनाथ यादव के साथ घटनास्थल की ओर चल पड़े. अब तक उजाला फैल चुका था. घटनास्थल पर काफी लोग जमा हो चुके थे. घटनास्थल पर पहुंचते ही थानाप्रभारी चौथीराम यादव ने सब से पहले उस बच्चे को उठाया, जो मरी हुई मां के सीने से चिपका सो रहा था. स्थिति यही बता रही थी कि वह मृतका का बेटा था. उठाते ही बच्चा जाग गया. वह बिलखबिलख कर रोने लगा. चौथीराम ने उसे एक सिपाही को पकड़ाया तो वह उसे चुप कराने की कोशिश करने लगा.

पहनावे से मृतका मध्यमवर्गीय परिवार की लग रही थी. उस की उम्र यही कोई 25 साल के आसपास थी. उस के मुंह और सीने में एकदम करीब से गोलियां मारी गई थीं. मुंह में गोली मारी जाने की वजह से चेहरा खून से सना था. घावों से निकल कर बहा खून सूख चुका था. मृतका की कदकाठी ठीकठाक थी. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे कम से कम 2 तो रहे ही होंगे. पुलिस ने घटनास्थल से 315 बोर के 2 खोखे बरामद किए थे. खोखे वही रहे होंगे, जो 2 गोलियां मृतका को मारी गई थीं. घटनास्थल पर मौजूद लोग लाश की शिनाख्त नहीं कर सके थे. इस का मतलब मृतका वहां की रहने वाली नहीं थी.

पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की काररवाई कर रही थी कि अचानक वहां एक युवक आया और लाश देख कर जोरजोर से रोने लगा. उस के रोने का मतलब था, वह मृतका का कोई अपना रहा होगा.

पुलिस ने उसे चुप करा कर पूछताछ की तो पता चला कि वह मृतका का भाई दीपचंद था. मृतका का नाम शीला था. कल सुबह वह ससुराल से अपने बेटे को ले कर मायके जाने के लिए निकली थी. शाम तक वह घर नहीं पहुंची तो उसे चिंता हुई. सुबह वह उसी की तलाश में निकला था. यहां भीड़ देख कर वह रुक गया. पूछने पर पता चला कि यहां एक महिला की लाश पड़ी है. वह लाश देखने आया तो पता चला वह लाश उस की बहन की है. उस के साथ उस का बेटा कृष्णा भी था.

पुलिस ने कृष्णा को उसे सौंप दिया. दीपचंद ने फोन द्वारा घटना की सूचना पिता वृजवंशी को दी तो घर में कोहराम मच गया. गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर वृजवंशी भी वहां पहुंच गया, जहां लाश पड़ी थी. बेटी की लाश और मासूम नाती कृष्णा को रोते देख वृजवंशी भी बिलखबिलख कर रोने लगा. उस से रहा नहीं गया और उस ने नाती को दीपचंद से ले कर सीने से चिपका लिया. घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर पुलिस दीपचंद के साथ थाने आ गई. थाने में उस की ओर से शीला की हत्या का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया गया. यह 23 जनवरी, 2014 की बात है.

मुकदमा दर्ज होने के बाद थानाप्रभारी चौथीराम यादव ने जांच शुरू की. हत्यारों ने सिर्फ शीला की हत्या की थी, उस के बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था. इस का मतलब उस का जो कुछ था, वह शीला से ही था. उसे सिर्फ उसी से परेशानी थी. ऐसे में उस का कोई प्रेमी भी हो सकता था, जो उस से पीछा छुड़ाना चाहता रहा हो.

शीला की ससुराल गोरखपुर के थाना गुलरिहा के गांव बनरहा सरहरी में थी. थानाप्रभारी चौथीराम दीपचंद को ले कर शीला की ससुराल जा पहुंचे. बनरहा पहुंचने में उन्हें करीब 2 घंटे का समय लगा. शीला की ससुराल में उस की सास और ससुर थे. पूछताछ में उन्होंने बताया कि 22 जनवरी, 2014 को शीला अपने मुंहबोले भाई पप्पू और उस के दोस्त के साथ मोटरसाइकिल से मायके के लिए निकली थी. कृष्णा को भी वह अपने साथ ले गई थी. इस के अलावा वे और कुछ नहीं बता सके थे. पूछताछ में सासससुर ने यह भी बताया था कि पप्पू अकसर उन के यहां आता रहता था. चौथीराम यादव ने दीपचंद से पप्पू के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि पप्पू उसी के गांव का रहने वाला था. वह आवारा किस्म का लड़का था.

थानाप्रभारी बनरहा से सीधे दीपचंद के गांव अहिरौली जा पहुंचे. पप्पू के बारे में पता किया गया तो घर वालों ने बताया कि वह 22 जनवरी, 2014 को नौतनवा जाने की बात कह कर घर से निकला था. तब से लौट कर नहीं आया है. दीपचंद की मदद से पप्पू और शीला का मोबाइल नंबर मिल गया था. पुलिस ने दोनों नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि 22 जनवरी की सुबह शीला ने पप्पू को फोन किया था. उस के बाद पप्पू का मोबाइल फोन बंद हो गया था. काल डिटेल्स से यह भी पता चला कि दोनों में रोजाना घंटों बातें होती थीं. इस से साफ हो गया कि दोनों में संबंध थे. पप्पू ने ही किसी बात से नाराज हो कर दोस्त की मदद से शीला की हत्या की थी.

जांच कहां तक पहुंची है, थानाप्रभारी चौथीराम इस की जानकारी क्षेत्राधिकारी अजय कुमार पांडेय और पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) डा. यस चेन्नपा को भी दे रहे थे. पप्पू के बारे में जब घर वालों से कोई जानकारी नहीं मिली तो थानाप्रभारी ने उस के बारे में पता करने के लिए उस के मोबाइल को सर्विलांस पर लगवा दिया. आखिर 2 फरवरी, 2014 को घटना के 10 दिनों बाद पुलिस ने मुखबिर के जरिए पप्पू और उस के दोस्त को मोटरसाइकिल सहित लोरपुरवा के पास से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब दोनों नेपाल की ओर जा रहे थे.

पुलिस पप्पू और उस के दोस्त अवधेश को थाने ले आई. तलाशी में पुलिस को अवधेश के पास से 315 बोर का देशी तमंचा और कारतूस भी मिले. पुलिस ने दोनों चीजों को अपने कब्जे में ले लिया. जबकि पप्पू उर्फ दुर्गेश के पास से सिर्फ 2 सिम वाला मोबाइल फोन मिला था. पुलिस दोनों से अलगअलग पूछताछ करने लगी. दोनों ने पहले तो शीला की हत्या से इनकार किया, लेकिन पुलिस के पास उन के खिलाफ इतने सुबूत थे कि ज्यादा देर तक वे अपनी बात पर टिके नहीं रह सके और सच्चाई कुबूल कर के शीला की हत्या की पूरी कहानी उगल दी. इस पूछताछ में पप्पू और अवधेश ने शीला की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस प्रकार थी.

जिला महाराजगंज के थाना पनियरा के गांव अहिरौली में रहता था वृजवंशी. उस के परिवार में पत्नी फूलवासी के अलावा कुल 7 बच्चे थे. शीला उन में पांचवें नंबर पर थी. वृजवंशी के पास इतनी खेती थी कि उसी से उन के इतने बड़े परिवार का गुजरबसर हो रहा था. लेकिन बेटे बड़े हुए, उन्होंने काफी जिम्मेदारियां अपने कंधों पर ले ली थीं. बेटों की शादियां हो गईं तो बेटों की मदद से वृजवंशी बेटियों की शादियां करने लगा. शीला जवान हुई तो वृजवंशी को उस की शादी की चिंता हुई. बाप और भाई उस के लिए लड़का ढूंढ पाते उस के पहले ही वह गांव में ही बचपन के साथी दुर्गेश उर्फ पप्पू से आंखें लड़ा बैठी. दोनों साथसाथ खेलेकूदे ही नहीं थे, बल्कि एक ही स्कूल में पढ़े भी थे.

दुर्गेश उर्फ पप्पू के पिता दूधनाथ भी खेती किसानी करते थे. उस के परिवार में पत्नी के अलावा एकलौता बेटा पप्पू और 3 बेटियां थीं. एकलौता होने की वजह से पप्पू को घर से कुछ ज्यादा ही लाडप्यार मिला, जिस की वजह से वह बिगड़ गया. जैसेतैसे उस ने इंटरमीडिएट कर के पढ़ाई छोड़ दी. इस के बाद गांव में घूमघूम कर आवारागर्दी करने लगा. शीला और पप्पू के संबंधों की जानकारी गांव वालों को हुई तो इस से वृजवंशी की बदनामी होने लगी. तब उसे चिंता हुई कि बात ज्यादा फैल गई  तो बेटी की शादी होना मुश्किल हो जाएगा. अब इस से बचने का एक ही उपाय था, शीला की शादी. वह उस के लिए लड़का ढूंढने लगा. क्योंकि अब देर करना ठीक नहीं था.

उस ने कोशिश की तो गोरखपुर के थाना गुलरिहा के गांव बनरहा का रहने वाला दिनेश उसे पसंद आ गया. उस ने जल्दी से शीला की शादी उस के साथ कर दी. शीला विदा हो कर ससुराल आ गई. दिनेश मुंबई में रहता था. कुछ दिन पत्नी के साथ रह कर वह मुंबई चला गया. शीला को उस ने बूढ़े मांबाप के पास उन की सेवा के लिए छोड़ दिया, ताकि किसी को कुछ कहने का मौका न मिले. क्योंकि उन्हें तो पूरी जिंदगी साथ रहना है.

शीला भले ही 2 बच्चों की मां बन गई थी, लेकिन पति के परदेस में रहने की वजह से वह अपने पहले प्यार दुर्गेश उर्फ पप्पू को कभी नहीं भूल पाई. शादी के बाद भी वह प्रेमी से मिलती रही. शीला का मुंहबोला भाई बन कर वह उस की ससुराल भी आता रहा. उस के सासससुर पप्पू को उस का भाई समझते थे, इसलिए उस के आनेजाने पर कभी रोक नहीं लगाई. जबकि भाईबहन के रिश्ते की आड़ में दोनों कुछ और ही गुल खिला रहे थे.

पप्पू ने बातचीत के लिए शीला को मोबाइल फोन खरीद कर दे दिया था. सासससुर रात में सो जाते तो शीला मिस्डकाल कर देती. इस के बाद पप्पू फोन करता तो दोनों के बीच घंटों बातें होतीं. शीला को कई बार पप्पू से गर्भ भी ठहरा, लेकिन पप्पू ने हर बार उस का गर्भपात करा दिया. बारबार गर्भपात कराने से तंग आ कर शीला उस के साथ रहने की जिद करने लगी. जबकि पप्पू को शीला से नहीं, सिर्फ उस की देह से प्रेम था. शीला जब भी उस से साथ रखने के लिए कहती, वह कोई न कोई बहाना बना देता. शीला जब उस पर जोर डालने लगी तो वह दूर भागने लगा. उस का कहना था कि घर वाले उसे रहने नहीं देंगे. अपना अलग घर है नहीं. तब शीला ने पप्पू को 1 लाख रुपए जमीन खरीद कर घर बनाने के लिए दिए. इस की जानकारी न तो शीला के पति को थी, न सासससुर को.

पप्पू ने पैसे तो लिए, लेकिन उस ने जमीन नहीं खरीदी. जब भी शीला जमीन और घर के बारे में पूछती, वह कोई न कोई बहाना बना देता. जब शीला को लगने लगा कि पप्पू उसे बेवकूफ बना रहा है तो वह बेचैन हो उठी. वह समझ गई कि उस से बहुत बड़ी भूल हो गई है. जिस के लिए उस ने घरपरिवार के साथ विश्वासघात किया, वह उस के साथ विश्वासघात कर रहा है. उस ने ठान लिया कि वह ऐसे आदमी को किसी कीमत पर नहीं बख्शेगी. वह पप्पू से अपने रुपए मांगने लगी.

शीला ने जब पैसे के लिए पप्पू पर दबाव बनाया तो वह विचलित हो उठा. उस की समझ में आ गया कि शीला उस की नीयत जान गई है. अब उस की दाल गलने वाली नहीं है. शीला के पैसे उस ने खर्च कर दिए थे.  लाख रुपए की व्यवस्था वह कर नहीं सकता था. इसलिए शीला से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने एक खतरनाक योजना बना डाली. शीला की हत्या करना उस के अकेले के वश का नहीं था, इसलिए उस ने एक पेशेवर बदमाश अवधेश से बात की.

अवधेश महाराजगंज के थाना पनियरा के गांव खजुही का रहने वाला था. पप्पू से उस की दोस्ती भी थी. पनियरा थाने में उस के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, लूट और राहजनी के कई मुकदमे दर्ज थे. योजना के मुताबिक, अवधेश ने 315 बोर के देशी कट्टे का इंतजाम किया. इस के बाद दोनों को मौके की तलाश थी. 22 जनवरी, 2014 की सुबह 7 बजे शीला ने पप्पू को फोन कर के पूछा कि इस समय वह कहां है, तो उस ने कहा कि इस समय वह शहर में है. कुछ देर में उस के पास पहुंच जाएगा.

इस के बाद शीला ने फोन काट दिया. जबकि सही बात यह थी कि पप्पू उस समय नौतनवा में मौजूद था. उस ने शीला से झूठ बोला था. शीला से बात करने के बाद उस ने अपना मोबाइल बंद कर दिया. दुर्गेश उर्फ पप्पू को वह मौका मिल गया, जिस की तलाश में वह था. उस ने अवधेश को तैयार किया और मोटरसाइकिल से शीला की ससुराल बनरहा 11 बजे के आसपास पहुंच गया. शीला उसी का इंतजार कर रही थी. चायनाश्ता करा कर शीला मायके जाने की बात कह कर उन के साथ निकल पड़ी. उस ने सास से कहा था कि 2-1 दिन में वह लौट आएगी.

दिन में कुछ हो नहीं सकता था. इसलिए पप्पू को किसी तरह रात करनी थी. इस के लिए वह कुसुम्ही के जंगल स्थित बुढि़या माई के मंदिर दर्शन करने गया. वहां से निकल कर वह सब के साथ शहर में घूमता रहा. अचानक रात साढ़े 8 बजे पप्पू को कुछ याद आया तो उस ने मोबाइल औन कर के फोन किया. उस समय वह चिलुयाताल के मोहरीपुर में था. इस के बाद वे कैंपियरगंज पहुंचे.

रात साढ़े 10 बजे के करीब पप्पू सब के साथ मोहम्मदपुर नवापार पहुंचा तो ठंड का मौसम होने की वजह से चारों ओर सुनसान हो चुका था. पप्पू ने अचानक मोटरसाइकिल सड़क के किनारे रोक दी. शीला ने रुकने की वजह पूछी तो पप्पू ने कहा कि पेशाब करना है. पेशाब करने के बहाने वह थोड़ा आगे बढ़ गया तो अवधेश शीला के पास पहुंचा और कमर में खोंसा तमंचा निकाला और उस के सीने से सटा कर ट्रिगर दबा दिया.

गोली लगते ही शीला के मुंह से एक भयानक चीख निकली. तभी उस ने कट्टे की नाल उस के मुंह में घुसेड़ कर दूसरी गोली चला दी. इसी के साथ बच्चे को गोद में लिए हुए शीला जमीन पर गिरी और मौत के आगोश में समा गई. उस का मासूम बेटा सीने से चिपका सोता ही रहा. अपना काम कर के पप्पू और अवधेश चले गए. टैक्सी ड्राइवर किशोर सुबह उधर से गुजरा तो उस ने सड़क किनारे पड़ी शीला की लाश देख कर थानाप्रभारी चौथीराम यादव को सूचना दी.

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल, 315 बोर का तमंचा और मोबाइल फोन बरामद कर लिया था. थाने की सारी काररवाई निबटा कर थानाप्रभारी चौथीराम ने पप्पू और अवधेश को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Suspense Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

Suspense Story: प्यार की खातिर दोस्त को दगा

Suspense Story: सुबह के साढ़े 6 बजे थे. बिहार के मुंगेर शहर में रहने वाला प्रेमनारायण सिंह ड्यूटी पर जाने के लिए घर से बाहर निकलने लगा तो पास में खड़ी पत्नी शिवानी की तरफ देख कर मुसकराया. पत्नी भी पति की तरफ देख कर मंदमंद मुसकराई. उधर प्रेमनारायण सिंह की बाइक घर से मुश्किल से डेढ़ सौ मीटर आगे ब्रह्मï चौक पहुंची थी कि अचानक किसी ने पीछे से उस पर लगातार 2 फायर कर दिए. गोली लगते ही वह सडक़ पर गिर कर बुरी तरह तड़पनेे लगा.

सुबह की फिजा में गोली चलने की आवाज दूरदूर तक गूंज उठी. गोली की आवाज सुन आसपास के घरों से कुछ लोग निकल कर लहूलुहान प्रेमनारायण सिंह के समीप पहुंचे. किसी ने उस के घर जा कर प्रेमनारायण को गोली लगने की बात कही तो प्रेमनारायण की पत्नी शिवानी और अन्य लोग रोतेबिलखते घायल प्रेमनारायण सिंह के पास पहुंचे और उसे तुरंत एक निजी क्लिनिक ले गए, लेकिन वहां के डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

शिवानी ने फोन कर के मुंगेर के पूरब सराय पुलिस चौकी में अपने पति की हत्या की सूचना दी तो चौकी इंचार्ज राजीव कुमार कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर क्लिनिक पहुंच गए और प्रेमनारायण सिंह की लाश अपने कब्जे ले कर घटना की सूचना एसएचओ को दे दी. हत्या की खबरसुन कर एसएचओ भी क्लिनिक पहुंच गए. लाश का प्रारंभिक निरीक्षण करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई.

लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद पुलिस वारदात वाली जगह ब्रह्मï चौक के निकट पहुंची और वहां का बारीकी से मुआयना करने लगी. सडक़ पर जहां प्रेमनारायण गोली लगने के बाद गिरा था, वहां पर काफी खून था. उस की बाइक भी वहीं पड़ी थी. वहां उपस्थित लोगों से पूछताछ करने पर बस इतना पता चला कि कोई बाइक सवार प्रेमनारायण को गोली मार कर फरार हो गया था.

सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

कई लोगों से पूछताछ के बाद भी कोई भी बाइक का नंबर या उसेे चलाने वाले बदमाशों का हुलिया नहीं बता पाया. चौकी इंचार्ज राजीव कुमार ने प्रेमनारायण सिंह की पत्नी शिवानी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के पति की इलाके में किसी से दुश्मनी नहीं है. घर वालों से घटना के बारे में पूछताछ करने के बाद पुलिस वापस लौट आई. शिवानी की शिकायत पर प्रेमनारायण सिंह की हत्या का मुकदमा अज्ञात अपराधियों के खिलाफ दर्ज कर लिया गया.

एसएचओ ने इस घटना के बारे में मुंगेर के एसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी को विस्तार से जानकारी दी तो उन्होंने इस सनसनीखेज हत्याकांड के रहस्य से परदा हटाने के लिए एक एसआईटी का गठन किया. इस टीम में एसडीपीओ (सदर) राजीव कुमार, ओपी प्रभारी राजीव कुमार, कासिम बाजार एसएचओ मिंटू कुमार, जमालपुर एसएचओ सर्वजीत कुमार, पूरब सराय चौकी इंचार्ज राजीव कुमार तथा अन्य कई सिपाही शामिल थे.

टीम ने इस मर्डर केस को सुलझाने के लिए घटनास्थल और उस के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर बारीकी से उस की जांच शुरू की तो उन्होंने फुटेज में 2 बाइक सवारों के अलावा कुछ संदिग्ध चेहरों की पहचान की. इस के अलावा मृतक प्रेमनारायण की पत्नी शिवानी के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच में एक संदिग्ध नंबर मिला, जिस पर घटना के पहले और उस के बाद शिवानी धड़ल्ले से बातें कर रही थी. जब उस नंबर की काल डिटेल्स निकाली गई तो वह नंबर गौरव कुमार नाम के युवक का निकला.

हत्या के पीछे निकली लव क्राइम की कहानी

जब गौरव कुमार को थाने में बुला कर उस के और शिवानी के बीच मोबाइल पर चल रही लंबी बातचीत के बारे में पूछताछ की गई तो गौरव ने बताया कि वह प्रेमनारायण का दोस्त है, इसलिए उस का उन के घर आनाजाना है. इसी वजह से वह शिवानी से बातें करता है. लेकिन हैरत की बात थी कि जितनी वह शिवानी से बातें करता था, उतनी बातें शिवानी अपने पति से भी नहीं करती थी.

मामला संदेहास्पद लगा, इसलिए जब गौरव को थाने में बुला कर पूछताछ की गई तो थोड़ी देर के बाद उस ने प्रेमनारायण सिंह की हत्या में अपना जुर्म स्वीकार करते हुए पुलिस टीम को जो बातें बताईं, उस में पति पत्नी और वो के रिश्तों में उलझी लव क्राइम की एक दिलचस्प कहानी निकल कर सामने आई. उस ने प्रेमनारायण सिंह की हत्या में शामिल सभी लोगों के नामपते बताए, जिस में प्रेमनारायण की पत्नी शिवानी तथा शूटर अभिषेक कुमार, इंद्रजीत कुमार, मोहम्मद इरशाद, राजीव, दीपक कुमार उर्फ दीपू थे. गौरव कुमार को हिरासत में लेने के बाद पुलिस टीम मृतक प्रेमनारायण के घर पहुंची और पति की मौत का नाटक कर रही शिवानी को हिरासत में ले लिया गया.

10 और 11 अगस्त को 2 आरोपी और 12 अगस्त को 3 आरोपियों को उन के ठिकानों पर दबिश डाल कर गिरफ्तार कर लिया. सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद इस हत्याकांड के पीछे जो खौफनाक कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है. 32 वर्षीय प्रेमनारायण सिंह मुंगेर के वार्ड नंबर 14 में अपनी पत्नी शिवानी और 4 साल की बेटी के साथ रहता था. करीब 5 साल पहले दोनों की शादी हुई थी. प्रेमनारायण मुंगेर में ही स्थित आईटीसी कंपनी में नौकरी करता था.

नौकरीपेशा होने की वजह से प्रेमनारायण सिंह के जीवन में हर प्रकार का सुखवैभव मौजूद था, लेकिन इस घर में उन के बड़े भाई का परिवार भी रहता था. शिवानी को जौइंट फैमिली में रहना पसंद नहीं था. इस के अलावा शिवानी की सास भी रहती थी. शिवानी के ससुर की कुछ साल पहले मृत्यु हो चुकी थी. परिवार के अन्य सदस्यों के साथ होने से शिवानी घर में अपनी मनमरजी से नहीं रह पाती थी. जबकि वह बिना किसी रोकटोक के आजाद रहना पसंद करती थी. ऐसा तभी संभव था, जब वह बाकी लोगों से अलग हो कर कहीं दूसरा घर खरीद लेते या किराए के मकान में रहने चले जाते.

प्रेमनारायण इस घर को छोड़ कर कहीं भी जाना नहीं चाहता था. यहां से जाने पर एक तो उसे घर के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ते, दूसरे उसे अपनी मां और भाईभाभी से अलग होना पड़ जाता, जोकि वह चाहता नहीं था. रोजरोज की इस घरेलू कलह से बचने के लिए प्रेमनारायण ने अपने एक दोस्त गौरव कुमार की मदद ली.

दोस्ती की आड़ में प्रेम संबंध का खेल

गौरव कुमार मुंगेर के नजदीक नंदलालपुर का रहने वाला था और उसी के साथ सिगरेट फैक्ट्री में काम करता था. दोनों के बीच खूब जमती थी. वे रोज अपने घरों का हाल अकसर एकदूसरे को बताते रहते थे. कहते हैं कि अपनी परेशानी बांटने से मन का बोझ कुछ हल्का हो जाता है. इसी कारण प्रेमनारायण अपनी परेशानी गौरव के साथ शेयर कर लेता था. प्रेमनारायण के घर का हाल जानने के बाद गौरव भी उस के घर की समस्या हल करने में मदद करने की कोशिश करता.

2023 के जनवरी महीने में गौरव ने प्रेमनारायण के घर आनाजाना शुरू कर दिया. उस ने अपने दोस्त का पक्ष ले कर शिवानी को मनाने का प्रयास करना शुरू किया, लेकिन कुछ ही मुलाकातों के बाद शिवानी की बातों का गौरव के दिलोदिमाग पर कुछ ऐसा जादू हुआ कि वह जिस दिन शिवानी से नहीं मिलता, उस के दिल को सुकून नहीं मिलता था. शिवानी जानती थी कि गौरव कुंआरा है. वह गौरव को पसंद करने लगी. गौरव को जब भी वक्त मिलता, वह शिवानी को समझाने के बहाने उस से मिलने आ जाता. कुछ ही दिनों में उन के बीच जिस्मानी ताल्लुकात हो गए. उधर गौरव और शिवानी दोनों ने प्रेमनारायण को सदा अंधरे में रखा.

गौरव और शिवानी बड़ी खामोशी से प्यार की पींगें बढ़ाते रहे. प्रेमनाराण को कभी गौरव और शिवानी के अवैध संबंधों की भनक तक नहीं लगी. जब उन के अंतरंग संबंध प्रगाढ़ हो गए तो उन्होंने प्रेमनारायण को अपने रास्ते से सदा के लिए हटाने का फैसला कर लिया. गौरव ने शिवानी को समझाया कि प्रेमनारायण की हत्या के बाद उस की जगह पर तुम्हारी नौकरी लग जाएगी.

कुछ समय के बाद जब मामला ठंडा पड़ जाएगा, तब हम दोनों आपस में शादी कर लेंगे. इस बीच हम दुनिया वालों की आखों में धूल झोंक कर मिलते रहेंगे. शिवानी इस बात के लिए तैयार हो गई. तब गौरव कुमार अपने कुछ जानकारों की मदद से कुछ शातिर बदमाशों से मिला, जो सुपारी ले कर हत्या की वारदात को अंजाम देते थे. बदमाशों से प्रेमनारायण की हत्या की बात 7 लाख रुपए में तय हो गई. शिवानी ने बदमाशों को देने के लिए 7 लाख रुपए गौरव को सौंप दिए.

सुपारी दे कर शूटरों से कराई हत्या

4 अगस्त, 2023 को बेगूसराय का शूटर अभिषेक कुमार और समस्तीपुर का शूटर इंद्रजीत तथा मोहम्मद इरशाद मुंगेर स्थित गौरव कुमार के ठिकाने पर पहुंचे. गौरव कुमार मुंगेर के मंगल बाजार स्थित माधोपुर में किराए का कमरा ले कर रहता था. मुस्सफिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर से 2 बदमाश राजीव कुमार तथा दीपक कुमार उर्फ दीपू भी वहां पहुंचे. इन दोनों ने 5 अगस्त को प्रेमनारायण के घर के बाहर मौजूद रह कर उस की रेकी की. 6 अगस्त, 2023 की सुबह प्रेमनारायण सिंह जैसे ही अपनी बाइक से ड्यूटी जाने के लिए घर से निकला. पीछे से अभिषेक कुमार भी बाइक चलाते हुए उस के निकट पहुंचा और पीछे बैठे इंद्रजीत ने प्रेमनारायण की गोली मार कर हत्या कर दी.

घटना को अंजाम देने के बाद अभिषेक कुमार और शूटर इंद्रजीत मुख्य आरोपी गौरव कुमार के मंगल बाजार स्थित कमरे पर पहुंचे. वहां अपने हथियारों को छोड़ कर सभी मुंगेर से फरार हो गए. पुलिस एसआईटी की टीम ने गौरव के कमरे से 2 देशी पिस्तौल, 4 जिंदा कारतूस और 2 चले हुए कारतूस के खोखे बरामद कर लिए. कथा लिखे जाने तक मुंगेर पुलिस ने इस घटना में शामिल आरोपी गौरव समेत कुल 7 बदमाशों को गिरफ्तार कर मुंगेर की जिला अदालत में पेश कर दिया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था. Suspense Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story Hindi: नाबालिग मोहब्बत का तीखा जहर

Crime Story Hindi: रोमिला अपनी बेटी सलोनी के साथ लखनऊ के इंदिरा नगर मोहल्ले में रहती थी. उस का 3 मंजिल का मकान था. पहली दोनों मंजिलों पर रहने के लिए कमरे थे और तीसरी मंजिल पर गोदाम बना था, जहां कबाड़ और पुरानी चीजें रखी रहती थीं.

ईसाई समुदाय की रोमिला मूलत: सुल्तानपुर जिले की रहने वाली थी. उस ने जौन स्विंग से प्रेम विवाह किया था. सलोनी के जन्म के बाद रोमिला और जौन स्विंग के संबंध खराब हो गए. रोमिला ने घुटघुट कर जीने के बजाय अपने पति जौन स्विंग से तलाक ले लिया. इसी बीच रोमिला को लखनऊ के सरकारी अस्पताल में टैक्नीशियन की नौकरी मिल गई. वेतन ठीकठाक था. इसलिए वह अपनी आगे की जिंदगी अपने खुद के बूते पर गुजारना चाहती थी.

स्विंग से प्यार, शादी और फिर तलाक ने रोमिला की जिंदगी को बहुत बोझिल बना दिया था. कम उम्र की तलाकशुदा महिला का समाज में अकेले रहना सरल नहीं होता, इस बात को ध्यान में रखते हुए रोमिला ने अपने को धर्मकर्म की बंदिशों में उलझा लिया. समय गुजर रहा था, बेटी बड़ी हो रही थी. रोमिला अपनी बेटी को पढ़ालिखा कर बड़ा बनाना चाहती थी. क्योंकि अब उस का भविष्य वही थी. सलोनी कावेंट स्कूल में पढ़ती थी, पढ़ने में होशियार. रोमिला ने लाड़प्यार से उस की परवरिश लड़कों की तरह की थी.

सलोनी भी खुद को लड़कों की तरह समझने लगी थी. वह जिद्दी स्वभाव की तो थी ही गुस्सा भी खूब करती थी. जन्म के समय ही कुछ परेशानियों के कारण सलोनी के शरीर के दाएं हिस्से में पैरालिसिस का अटैक पड़ा था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उस का असर करीब करीब खत्म हो गया था. सलोनी बौबकट बाल रखती थी. उस की उम्र हालांकि 15 साल थी पर वह अपनी उम्र से बड़ी दिखाई देती थी. वह लड़कों की तरह टीशर्ट पैंट पहनती थी. सलोनी के साथ पढ़ने वाले लड़के लड़कियां स्मार्टफोन इस्तेमाल करते थे. सलोनी ने भी मां से जिद कर के स्मार्टफोन खरीदवा लिया.

रोमिला जानती थी कि आजकल के बच्चे मोबाइल पर इंटरनेट लगा कर फेसबुक और वाट्सएप जैसी साइटों का इस्तेमाल करते हैं जो सलोनी जैसी कम उम्र लड़की के लिए ठीक नहीं है. लेकिन एकलौती बेटी की जिद के सामने उसे झुकना पड़ा. रोमिला सुबह 8 बजे अस्पताल जाती थी और शाम को 4 बजे लौटती थी. सलोनी भी सुबह 8 बजे स्कूल चली जाती थी और 2 बजे वापस आती थी. कठिन जीवन जीने के लिए रोमिला ने बेड की जगह घर में सीमेंट के चबूतरे बनवा रखे थे. मांबेटी बिस्तर डाल कर इन्हीं चबूतरों पर सोती थीं.

रोमिला को अस्पताल से 45 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था. इस के बावजूद मांबेटी का खर्च बहुत कम था. रोमिला जो खाना बनाती थी वह कई दिन तक चलता था. मोबाइल फोन लेने के बाद सलोनी ने इंटरनेट के जरीए अपना फेसबुक पेज बना लिया था. वह अकसर अपने दोस्तों से चैटिंग करती रहती थी. इसी के चलते उस के कई नए दोस्त बन गए थे. उस के इन्हीं दोस्तों में से एक था पश्चिम बंगाल के मालदा का रहने वाला सुदीप दास. 19 साल का सुदीप एक प्राइवेट फैक्ट्री में काम करता था.

उस के घर की हालत ठीक नहीं थी. उस का पिता सुधीरदास मालदा में मिठाई की एक दुकान पर काम करता था. जबकि मां कावेरी घरेलू महिला थी. उस का छोटा भाई राजदीप कोई काम नहीं करता था. सुदीप और उस के पिता की कमाई से ही घर का खर्च चलता था. सुदीप और सलोनी के बीच चैटिंग के माध्यम से जो दोस्ती हुई धीरेधीरे प्यार तक जा पहुंची. नासमझी भरी कम उम्र का तकाजा था. चैटिंग करतेकरते सुदीप और सलोनी एकदूसरे के प्यार में पागल से हो गए. स्थिति यह आ गई कि सुदीप सलोनी से मिलने के लिए बेचैन रहने लगा.

दोनों के पास एकदूसरे के मोबाइल नंबर थे. सो दोनों खूब बातें करते थे. मोबाइल पर ही दोनों की मिलने की बात तय हुई. सितंबर 2013 में सुदीप सलोनी से मिलने लखनऊ आ गया. सलोनी ने सुदीप को अपनी मां से मिलवाया. रोमिला बेटी को इतना प्यार करती थी कि उस की हर बात मानने को तैयार रहती थी. 2 दिन लखनऊ में रोमिला के घर पर रह कर सुदीप वापस चला गया. अक्तूबर में सलोनी का बर्थडे था. उस के बर्थडे पर सुदीप फिर लखनऊ आया. अब तक सलोनी ने सुदीप से अपने प्यार की बात मां से छिपा कर रखी थी. लेकिन इस बार उस ने अपने और सुदीप के प्यार की बात रोमिला को बता दी.

सलोनी और सुदीप दोनों की ही उम्र ऐसी नहीं थी कि शादी जैसे फैसले कर सकें. इसलिए रोमिला ने दोनों को समझाने की कोशिश की. ऊंचनीच दुनियादारी के बारे में बताया. लेकिन सुदीप और सलोनी पर तो प्यार का भूत चढ़ा था. रोमिला को इनकार करते देख सुदीप बड़े आत्मविश्वास से बोला, ‘‘आंटी, आप चिंता न करें. मैं सलोनी का खयाल रख सकता हूं. मैं खुद भी नौकरी करता हूं और मेरे पिताजी भी. हमारे घर में भी कोई कुछ नहीं कहेगा.’’

बातचीत के दौरान रोमिला सुदीप के बारे में सब कुछ जान गई थी. इसलिए सोचविचार कर बोली, ‘‘देखो बेटा, तुम्हारी सारी बातें अपनी जगह सही हैं. मुझे इस रिश्ते से भी कोई ऐतराज नहीं है. पर मैं यह रिश्ता तभी स्वीकार करूंगी जब तुम कोई अच्छी नौकरी करने लगोगे. आजकल 10-5 हजार की नौकरी में घरपरिवार नहीं चलते. अभी तुम दोनों में बचपना है.’’

‘‘ठीक है आंटी, मैं आप की बात मान लेता हूं. लेकिन आप वादा करिए कि आप उसे मुझ से दूर नहीं करेंगी. जब मैं कुछ बन जाऊंगा तो सलोनी को अपनी बनाने आऊंगा.’’ सुदीप ने फिल्मी हीरो वाले अंदाज में रोमिला से अपनी बात कही.

इस बार सुदीप सलोनी के घर पर एक सप्ताह तक रहा. इसी बीच रोमिला ने सुदीप से स्टांप पेपर पर लिखवा लिया कि वह किसी लायक बन जाने के बाद ही सलोनी से शादी करेगा. इस के बाद सुदीप अपने घर मालदा चला गया. लेकिन लखनऊ से लौटने के बाद उस का मन नहीं लग रहा था. जवानी में, खास कर चढ़ती उम्र में महबूबा से बड़ा दूसरा कोई दिखाई नहीं देता. कामधाम, भूखप्यास, घरपरिवार सब बेकार लगने लगते हैं. सुदीप का भी कुछ ऐसा ही हाल था. उस की आंखों के सामने सलोनी का गोलगोल सुंदर चेहरा और बोलती हुई आंखें घूमती रहती थीं. वह किसी भी सूरत में उसे खोने के लिए तैयार नहीं था.

जब नहीं रहा गया तो 10 दिसंबर, 2013 को सुदीप वापस लखनऊ आया और रोमिला को बहका फुसला कर सलोनी को मालदा घुमाने के लिए साथ ले गया. हालांकि सलोनी की मां रोमिला इस के लिए कतई तैयार नहीं थी. लेकिन सलोनी ने उसे मजबूर कर दिया. दरअसल मां के प्यार ने उसे इतना जिद्दी बना दिया था कि वह कोई बात सुनने को तैयार नहीं होती थी. रोमिला के लिए बेटी ही जीने का सहारा थी. वह उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती थी. इस लिए वह सलोनी की जिद के आगे झुक गई. करीब ढाई माह तक सलोनी सुदीप के साथ मालदा में रही.

मार्च, 2014 में सलोनी वापस आ गई. सुदीप भी उस के साथ आया था. बेटी का बदला हुआ स्वभाव देख कर रोमिला को झटका लगा. सलोनी उस की कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी. पति से अलग होने के बाद रोमिला ने सोचा था कि वह बेटी के सहारे अपना पूरा जीवन काट लेगी. अब वह बेटी के दूर जाने की कल्पना मात्र से बुरी तरह घबरा गई थी.

लेकिन हकीकत वह नहीं थी जो रोमिला देख या समझ रही थी. सच यह था कि सलोनी का मन सुदीप से उचट गया था. उस का झुकाव यश नाम के एक अन्य लड़के की ओर होने लगा था. जबकि सुदीप हर हाल में सलोनी को पाना चाहता था. वह कई बार उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर चुका था. यह बात मांबेटी दोनों को नागवार गुजरने लगी थी. रोमिला ने अस्पताल से 1 मार्च, 2014 से 31 मार्च तक की छुट्टी ले रखी थी. उस ने अस्पताल में छुट्टी लेने की वजह बेटी की परीक्षाएं बताई थीं.

7 अप्रैल, 2014 की सुबह रोमिला के मकान के पड़ोस में रहने वाले रणजीत सिंह ने थाना गाजीपुर आ कर सूचना दी कि बगल के मकान में बहुत तेज बदबू आ रही है. उन्होंने यह भी बताया कि मकान मालकिन रोमिला काफी दिनों से घर पर नहीं है. सूचना पा कर एसओ गाजीपुर नोवेंद्र सिंह सिरोही, सीनियर इंसपेक्टर रामराज कुशवाहा और सिपाही अरूण कुमार सिंह रोमिला के मकान पर पहुंच गए.

देखने पर पता चला कि मकान के ऊपर के हिस्से में बदबू आ रही थी. पुलिस ने फोन कर के मकान मालकिन रोमिला को बुला लिया. वहां उस के सामने ही मकान खोल कर देखा गया तो पूरा मकान गंदा और रहस्यमय सा नजर आया. सिपाही अरूण कुमार और एसएसआई रामराज कुशवाहा तलाशी लेने ऊपर वाले कमरे में पहुंचे तो कबाड़ रखने वाले कमरे में एक युवक की सड़ीगली लाश मिली.

पुलिस ने रोमिला से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह लाश मालदा, पश्चिम बंगाल के रहने वाले सुदीप दास की है. वह उस की बेटी सलोनी का प्रेमी था और उस से शादी करना चाहता था. जब सलोनी ने इनकार कर दिया तो सुदीप ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. रोमिला ने आगे बताया कि इस घटना से वह बुरी तरह डर गई थी. उसे लग रहा था कि हत्या के इल्जाम में फंस जाएगी. इसलिए वह घर को बंद कर के फरार हो गई थी.

पुलिस ने रोमिला से नंबर ले कर फोन से सुदीप के घर संपर्क किया और इस मामले की पूरी जानकारी उस के पिता को दे दी. लेकिन उस के घर वाले लखनऊ आ कर मुकदमा कराने को तैयार नहीं थे. कारण यह कि वे लोग इतने गरीब थे कि उन के पास लखनऊ आने के लिए पैसा नहीं था. इस पर एसओ गाजीपुर ने अपनी ओर से मुकदमा दर्ज कर के इस मामले की जांच शुरू कर दी. प्राथमिक काररवाई के बाद सुदीप की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

8 अप्रैल 2014 को सुदीप की लाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जो सच सामने आया, वह चौंका देने वाला था. इस बीच सलोनी भी आ गई थी. रोमिला और उस की बेटी सलोनी ने अपने बयानों में कई बातें छिपाने की कोशिश की थी. लेकिन उन के अलगअलग बयानों ने उन की पोल खोल दी. एसपी ट्रांस गोमती हबीबुल हसन और सीओ गाजीपुर विशाल पांडेय पुलिस विवेचना पर नजर रख रहे थे जिस से इस पूरे मामले का बहुत जल्दी पर्दाफाश हो गया. मांबेटी से पूछताछ के बाद जो कहानी सामने आई वह कुछ इस तरह थी.

13 मार्च, 2014 की रात को सलोनी अपने कमरे में किसी से फोन पर बात कर रही थी. इसी बीच सुदीप उस से झगड़ने लगा. वह गुस्से में बोला, ‘‘मैं ने मांबेटी दोनों को कितनी बार समझाया है कि मुझे खीर में इलायची डाल कर खाना पसंद नहीं है. लेकिन तुम लोगों पर मेरी बात का कोई असर नहीं होता.’’

उस की इस बात पर सलोनी को गुस्सा आ गया. उस ने सुदीप को लताड़ा, ‘‘तुम मां से झगड़ने के बहाने तलाश करते रहते हो. बेहतर होगा, तुम यहां से चले जाओ. मैं तुम से किसी तरह की दोस्ती नहीं रखना चाहती.’’

‘‘ऐसे कैसे चला जाऊं? मैं ने स्टांपपेपर पर लिख कर दिया है, तुम्हें मेरे साथ ही शादी करनी होगी. बस तुम 18 साल की हो जाओ. तब तक मैं कोई अच्छी नौकरी कर लूंगा और फिर तुम से शादी कर के तुम्हें साथ ले जाऊंगा. अब तुम्हारी मां चाहे भी तो तुम्हारी शादी किसी और से नहीं करा सकती.’’ सुदीप ने भी गुस्से में जवाब दिया.

‘‘मेरी ही मति मारी गई थी जो तुम्हें इतना मुंह लगा लिया.’’ कह कर सलोनी ऊपर चली गई. वहां उस की मां पहले से दोनों का लड़ाईझगड़ा देख रही थी.

‘‘सुदीप, तुम मेरे घर से चले जाओ.’’ रोमिला ने बेटी का पक्ष लेते हुए चेतावनी भरे शब्दों में कहा तो सुदीप उस से भी लड़नेझगड़ने लगा. यह देख मांबेटी को गुस्सा आ गया. सुदीप भी गुस्से में था. उस ने मांबेटी के साथ मारपीट शुरू कर दी. जल्दी ही वह दोनों पर भरी पड़ने लगा. तभी रोमिला की निगाह वहां रखी हौकी स्टिक पर पड़ी.

रोमिला ने हौकी उठा कर पूरी ताकत से सुदीप के सिर पर वार किया. एक दो नहीं कई वार. एक साथ कई वार होने से सुदीप की वहीं गिर कर मौत हो गई. सुदीप की मृत्यु के बाद मांबेटी दोनों ने मिल कर उस की लाश को बोरे में भर कर कबाड़ वाले कमरे में बंद कर दिया. इस के बाद अगली सुबह दोनों घर पर ताला लगा कर गायब हो गईं. पुलिस को उलझाने के लिए रोमिला ने बताया कि वह यह सोच कर डर गई थी कि सुदीप का भूत उसे परेशान कर सकता है. इसलिए, वे दोनों हवन कराने के लिए हरिद्वार चली गई थीं.

सलोनी ने भी 14 मार्च को अपनी डायरी में लिखा था, ‘आत्माओं ने सुदीप को मार डाला. हम फेसबुक पर एकदूसरे से मिले थे. आत्माओं के पास लेजर जैसी किरणें हैं. वह हमें नष्ट कर देंगी. आत्माएं हमें फंसा देंगी.’ सलोनी ने इस तरह की और भी तमाम अनापशनाप बातें डायरी में लिखी थीं. रोमिला भी इसी तरह की बातें कर रही थी. पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि मांबेटी हरिद्वार वगैरह कहीं नहीं गई थी बल्कि दोनों लखनऊ में इधरउधर भटक कर अपना समय गुजारती रही थीं. वे समझ नहीं पा रही थीं कि इस मामले को कैसे सुलझाएं, क्योंकि सुदीप की लाश घर में पड़ी थी.

बहरहाल, उस की लाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस बात का खुलासा हो गया था कि मामला आत्महत्या का नहीं बल्कि हत्या का था. गाजीपुर पुलिस ने महिला दारोगा नीतू सिंह, सिपाही मंजू द्विवेदी और उषा वर्मा को इन मांबेटी से राज कबूलवाने पर लगाया. जब उन्हें बताया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुदीप की मौत का का कारण सिर पर लगी चोट को बताया गया है, तो वे टूट गईं. दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. रोमिला की निशानदेही पर हौकी स्टिक भी बरामद हो गई.

8 अप्रैल, 2014 को पुलिस ने मां रोमिला को जेल और उस की नाबालिग बेटी सलोनी को बालसुधार गृह भेज दिया. जो भी जैसे भी हुआ हो, लेकिन सच यह है कि फेसबुक की दोस्ती की वजह से सुदीप का परिवार बेसहारा हो गया है.

पुलिस उस के परिवार को बारबार फोन कर के लखनऊ आ कर बेटे का दाह संस्कार कराने के लिए कह रही थी. लेकिन वे लोग आने को तैयार नहीं थे. सुदीप की लाश लखनऊ मेडिकल कालेज के शवगृह में रखी थी. एसओ गाजीपुर नोवेंद्र सिंह सिरोही ने सुदीप के पिता सुधीर दास को समझाया और भरोसा दिलाया कि वह लखनऊ आएं, वे उन की पूरी मदद करेंगे. पुलिस का भरोसा पा कर सुदीप का पिता सुधीर दास लखनऊ आया. बेटे की असमय मौत ने उस का कलेजा चीर दिया था.

सुधीर दास पूरे परिवार के साथ लखनऊ आना चाहता था लेकिन उस के पास पैसा नहीं था. इसलिए परिवार का कोई सदस्य उस के साथ नहीं आ सका. वह खुद भी पैसा उधार ले कर आया था. सुधीर दास की हालत यह थी कि बेटे के दाह संस्कार के लिए भी उस के पास पैसा नहीं था. जवान बेटे की मौत से टूट चुका सुधीर दास पूरी तरह से बेबस और लाचार नजर आ रहा था. उन की हालत देख कर गाजीपुर पुलिस ने अपने स्तर पर पैसों का इंतजाम किया और सुदीप का क्रियाकर्म भैंसाकुंड के इलेक्ट्रिक शवदाह गृह पर किया. सुदीप की अभागी मां कावेरी और भाई राजदीप तो उसे अंतिम बार देख भी नहीं सके.

क्रियाकर्म के बाद पुलिस ने ही सुधीर के वापस मालदा जाने का इंतजाम कराया. गरीबी से लाचार यह पिता बेटे की हत्या करने वाली मांबेटी को सजा दिलाने के लिए मुकदमा भी नहीं लड़ना चाहता. अनजान से मोहब्बत और उस से शादी की जिद ने सुदीप की जान ले ली. सुदीप अपने परिवार का एकलौता कमाऊ बेटा था. उस के जाने से पूरा परिवार पूरी तरह से टूट गया है. सलोनी और सुदीप की एक गलती ने 2 परिवारों को तबाह कर दिया है. Crime Story Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है. कथा में आरोपी सलोनी का नाम परिवर्तित है.

Crime Kahaniyan: मामी की बेवफाई – लता बनी परिवार की बर्बादी का कारण

Crime Kahaniyan: 19वर्षीया काजल बेचैन हो कर अपने घर में टहल रही थी. वह बारबार रो रहे अपने छोटे भाई शिवम को चुप कराती थी, मगर शिवम मां को याद कर के बारबार रोने लगता था. हरिद्वार जिले के गांव हेतमपुर की रहने वाली काजल व शिवम की मां लता चौहान (38) गत शाम को पास के ही कस्बे बहादराबाद में सब्जी खरीदने के लिए घर से निकली थी, मगर आज तक वह वापस घर नहीं लौटी थी.

उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ आ रहा था. मां के वापस न लौटने व मोबाइल के स्विच्ड औफ होने से काजल व शिवम का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था. दोनों भाईबहन पिछली शाम से ही अपने सभी रिश्तेदारों को फोन कर कर के अपनी मां के बारे में जानकारी कर रहे थे, मगर उन की मां के बारे में सभी रिश्तेदारों ने मोबाइल पर अनभिज्ञता जताई. इस के बाद सूचना पा कर कुछ रिश्तेदारों व कुछ पड़ोसियों का भी उन के घर पर आना शुरू हो गया था. सभी भाईबहन को दिलासा दे कर चले जाते.

इसी प्रकार 3 दिन बीत गए थे, लेकिन काजल व शिवम को अपनी मां के बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिली. इस के बाद अब उन के रिश्तेदार काजल पर लता की गुमशुदगी थाने में दर्ज कराने पर जोर देने लगे. लेकिन थाने जाने के नाम से काजल को एक अंजाना सा डर लग रहा था. वह 14 जून, 2021 का दिन था. आखिर उस दिन काजल हरिद्वार के थाना सिडकुल पहुंच ही गई. वह थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला से मिली और उन्हें अपनी मां लता चौहान के गत 4 दिनों से लापता होने की जानकारी दी.

जब थानाप्रभारी बुटोला ने काजल से उस के पिता के बारे में पूछा तो काजल ने बताया, ‘‘सर पिछले 2-3 सालों से मेरे पिता चंदन सिंह नेगी व मां लता चौहान के बीच अनबन चल रही है. मेरे पिता फरीदाबाद (हरियाणा) में रह कर ड्राइवरी करते हैं. यहां पर 2 साल पहले मेरे फुफेरे भाई अंकित चौहान ने हमें एक मकान खरीद कर दिया था. इस मकान में हम तीनों रहते हैं. घर से चलते समय मेरी मां हरे रंग का सूट सलवार व पैरों में सैंडिल पहने थी.’’

इस के बाद काजल ने मां का मोबाइल नंबर भी थानाप्रभारी बुटोला को नोट करा दिया. फिर थानाप्रभारी के कहने पर काजल वापस घर आ गई. काजल की तहरीर पर थानाप्रभारी बुटोला ने लता की गुमशुदगी दर्ज कर ली और इस केस की जांच एसआई अमित भट्ट को सौंप दी. लता की गुमशुदगी का केस हाथ में आते ही अमित भट्ट सक्रिय हो गए. उन्होंने सब से पहले लता के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने के लिए साइबर थाने से संपर्क किया था और थाने के 2 सिपाहियों को लता चौहान की डिटेल्स का पता करने के लिए सादे कपड़ों में गांव हेतमपुर में तैनात कर दिया.

उसी दिन शाम को थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला ने लता की गुमशुदगी की सूचना एएसपी डा. विशाखा अशोक भडाने व एसपी (सिटी) कमलेश उपाध्याय को दी. 2 दिनों में पुलिस को लता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स मिल गई थी. काल डिटेल्स के अनुसार 10 जून, 2021 की शाम को लता चौहान व उस के भांजे अंकित चौहान की लोकेशन हेतमपुर से सलेमपुर की गंगनहर तक एक साथ थी. इस से पहले दोनों में बातें भी हुई थीं. इस के अलावा लता के मोबाइल पर अंतिम काल अंकित चौहान के ही मोबाइल से आई थी. इस के कुछ समय बाद लता चौहान व अंकित चौहान की लोकेशन भी अलगअलग हो गई थी. काल डिटेल्स की यह जानकारी तुरंत ही थानाप्रभारी ने एसपी (सिटी) कमलेश उपाध्याय को दी.

एसपी उपाध्याय ने थानाप्रभारी बुटोला व एसआई अमित भट्ट को अंकित चौहान से पूछताछ करने के निर्देश दिए. बुटोला व भट्ट ने जब अंकित चौहान से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला. पुलिस ने जब अंकित चौहान के बारे में जानकारी की तो पता चला कि वह लता का सगा भांजा था. अंकित मूलरूप से बिजनौर जिले के गांव मानपुर शिवपुरी का रहने वाला था. अंकित एमएससी करने के बाद किसी अच्छी नौकरी की तलाश में था.  3 साल पहले जब लता के अपने पति से संबंध बिगड़ गए थे, तब से अंकित की लता से नजदीकियां बढ़ गई थीं. इस दौरान अंकित लता व उस के दोनों बच्चों का पूरापूरा खयाल रखता था. लता के रहनेखाने से ले कर वह उन्हें हर चीज मुहैया कराता था.

यह जानकारी प्राप्त होने पर बुटोला व अमित भट्ट ने अंकित की तलाश में धामपुर व हेतमपुर में कुछ मुखबिर सतर्क कर दिए थे. विवेचक अमित भट्ट ने भी अंकित की तलाश में उस के धामपुर स्थित गांव मानपुर शिवपुरी में कई बार दबिश दी, मगर अंकित उन्हें न मिल पाया. इसी प्रकार 9 दिन बीत गए तथा पुलिस को अंकित चौहान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई. वह 27 जून, 2021 का दिन था. शाम के 7 बज रहे थे. तभी श्री बुटोला के मोबाइल पर उन के खास मुखबिर का फोन आया. मुखबिर ने उन्हें बताया कि सर, जिस अंकित को तलाश कर रहे हो, वह इस समय यहां हरिद्वार के रोशनाबाद चौक पर खड़ा है. यह सुनते ही बुटोला की बांछें खिल गईं.

बुटोला ने इस मामले में विलंब करना उचित नहीं समझा. उन्होंने तुरंत अपने साथ विवेचक अमित भट्ट व फोर्स को साथ लिया और 5 मिनट में ही रोशनाबाद चौक पर पहुंच गए. मुखबिर के इशारे पर उन्होंने वहां से अंकित को हिरासत में ले लिया. वह उसे थाने ले आए. यहां पर जब बुटोला व भट्ट ने उस से लता के लापता होने के बारे में पूछताछ की, तो पहले तो वह पुलिस को गच्चा देने की कोशिश करता रहा. वह पुलिस को बताता रहा कि लता उस की मामी अवश्य थी, मगर अब वह कहां है, उस की उसे कोई जानकारी नहीं है. लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और बोला, ‘‘साहब, अब लता इस दुनिया में नहीं है. 10 जून, 2021 की रात को मैं ने अपने दोस्त अमन निवासी कस्बा शेरकोट जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश के साथ मिल कर उस की

गला घोंट कर हत्या कर दी थी तथा उस की लाश हम ने गांव सलेमपुर स्थित गंगनहर में फेंक दी थी. लता को मैं घुमाने की बात कह कर सलेमपुर गंगनहर तक लाया था.’’

अंकित के मुंह से लता की हत्या की बात सुन कर थानाप्रभारी बुटोला तथा वहां मौजूद अन्य पुलिस वाले सन्न रह गए. पूछताछ में उस ने लता की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

अंकित गांव मानपुर में अपने पिता हरगोविंद, मां सरोज तथा छोटे भाई अनुज के साथ रहता था. उस ने बताया कि 3 साल पहले जब लता का अपने पति के साथ विवाद हुआ था तो उस दौरान उस ने ही लता की काफी मदद की थी. उसी दौरान लता उस की ओर आकर्षित हो गई थी. लता और अंकित के बीच अवैध संबंध बन गए थे. फिर अंकित ने लता को हेतमपुर में एक मकान खरीद कर दे दिया था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि करीब 2 महीने पहले अंकित ने लता को उस के पड़ोसी के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया था. यह देख कर अंकित को गुस्सा आ गया था. गुस्से में उस ने लता को उसे खरीद कर दिया हुआ मकान अपने नाम वापस करने का कहा तो वह टालने लगी और 2 लाख रुपए की मांग करने लगी.

लता की इस हरकत से अंकित परेशान हो गया था और अंत में वह उस की हत्या की योजना बनाने लगा. यह बात उस ने अपने दोस्त अमन को बताई तो वह भी अंकित का साथ देने को राजी हो गया. दोनों ने इस की योजना बनाई. योजना के अनुसार 10 जून, 2021 को अंकित अमन के साथ रात 8 बजे लता के घर पहुंचा था. इस के बाद उसे घुमाने की बात कह कर वह लता को ले कर गंगनहर किनारे गांव सलेमपुर पहुंचा था. उस समय वहां रात का अंधेरा छाया था.

मौका मिलने पर अमन ने तुरंत ही लता को पकड़ कर उस का गला घोंट दिया था. लता के मरने के बाद दोनों ने उस की लाश गंगनहर में फेंक दी थी. उस समय रात के 11 बज चुके थे. इस के बाद अमन वापस अपने घर चला गया था. लता का मोबाइल उस समय अंकित के पास ही था. जब उस ने 12 जून, 2021 को मोबाइल औन किया तो उस में फोन आने शुरू हो गए थे. तब अंकित ने उस में से सिमकार्ड निकाल कर मोबाइल व सिम को सिंचाई विभाग की गंगनहर में फेंक दिया था. इस के बाद पुलिस ने अंकित के बयान दर्ज कर लिए और लता की गुमशुदगी के मुकदमे को हत्या में तरमीम कर दिया.

पुलिस ने इस केस में आईपीसी की धाराएं 302 व 120बी और बढ़ा दी थीं. 2 जुलाई, 2021 को पुलिस ने अंकित को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक आरोपी अंकित जेल में ही बंद था. थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला द्वारा गंगनहर में लता के शव को तलाश किया जा रहा था. दूसरी ओर पुलिस दूसरे आरोपी अमन की तलाश में जुटी थी.

छाया : सोहेब मलिक

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Illicit Relationship: दिलबर ने ली जान

Illicit Relationship: कमलेश और जीरा के बीच भले ही शादी से पहले के संबंध रहे थे, लेकिन जीरा की शादी के बाद दोनों को यह गलती दोहरानी नहीं चाहिए थी. उन दोनों की इस गलती ने जब विकराल रूप ले लिया तो फिर खून की नदी तो बहनी ही थी, भले ही उस में लाश जीरा की बहती या कमलेश की.

खिदिरपुर गांव से सटा हुआ गांव है ताजपुर माझा. 23 जुलाई, 2015 की सुबह का उजाला फैला तो ताजपुर माझा के लोगों ने खेतों का रुख किया. एक ग्रामीण ने सिट्टू राय के खेत के पास की झाड़ी में एक जवान युवक को रक्तरंजित पड़ा देखा तो उस की घिग्गी बंध गई. उस ने हिम्मत कर के उस युवक के जिस्म पर नजर डाली तो उसे समझते देर नहीं लगी कि वह जीवित नहीं है. वह ग्रामीण चिल्लाता हुआ वहां से भागा, ‘‘झाडि़यों में लाश है, झाडि़यों में लाश है.’’

उस की आवाज सुन कर लोग खेतों के पास खड़ी झाडि़यों की तरफ दौड़ पड़े. देखते ही देखते लाश के पास काफी लोग जमा हो गए. मृतक जवान युवक था. उस के शरीर पर नई पैंट शर्ट और जूते थे, ऐसा लगता था जैसे वह किसी रिश्तेदारी में आया था. क्योंकि गांव के ज्यादातर लोग कहीं बाहर या रिश्तेदारी में आनेजाने पर ही नए कपड़े पहनते हैं. मृतक का सिर फटा हुआ था, जिस से बहा खून उस के चेहरे और शर्ट के काफी हिस्से पर फैल गया था.

खून चूंकि जम कर काला पड़ गया था, इस से लग रहा था कि उसे मरे हुए काफी समय हो गया है. आसपास एकत्र भीड़ में तरहतरह की चर्चाएं हो रही थीं, उसे पहचानने की कोशिश भी की गई, लेकिन कोई भी उसे पहचान नहीं पाया. इसी बीच किसी ने थाना जमानियां की पुलिस को फोन कर के युवक की लाश मिलने की सूचना दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी जमानियां अवधेश नारायण सिंह पुलिस टीम के साथ मौकाएवारदात पर पहुंच गए. उन्हें देख कर भीड़ लाश के पास से हट गई. अवधेश नारायण सिंह ने युवक की लाश का निरीक्षण किया. उस के फटे सिर को देख कर ही उन्हें अनुमान हो गया कि उस की मौत ज्यादा खून बह जाने की वजह से हुई है.

मृतक के शरीर पर चोट के भी निशान नजर आ रहे थे. मरने से पहले शायद उसे काफी पीटा गया था. अवधेश नारायण सिंह को उस की जेबों की तलाशी में जो पर्स मिला, उस में केवल कुछ रुपए थे. इस के अलावा उस के पास से ऐसा कोई सामान नहीं मिला, जिस से उस की शिनाख्त हो सकती. लाश की पहचान के लिए उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा तो सभी ने उसे पहचानने से मना कर दिया. लोगों ने यही शंका जाहिर की कि हो सकता है यह आसपास के किसी गांव का रहने वाला हो. इस पर अवधेश नारायण सिंह ने एक सिपाही को भेज कर पड़ोसी गांव खिदिरपुर से वहां के चौकीदार राममिलन को बुलवा लिया.

राममिलन ने युवक की लाश को देखते ही बता दिया कि मृतक राधोपुर गांव का कमलेश यादव है. राममिलन ने यह भी बताया कि कमलेश यादव का खिदिरपुर में जीरा देवी के पास काफी आनाजाना था. दोनों के अवैधसंबंधों के बारे में पूरा खिदिरपुर जानता है. इस महत्वपूर्ण जानकारी को सुन कर अवधेश नारायण सिंह को पक्का यकीन हो गया कि कमलेश यादव की हत्या अवैधसंबंधों के कारण ही हुई है और इस के सूत्र खिदिरपुर में जीरा देवी के घर से ही मिलेंगे. उन्होंने लिखापढ़ी कर के कमलेश की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया, साथ ही अपने मातहतों को निर्देश दिया कि वे कमलेश यादव के गांव राधोपुर खबर भेज कर उस के घर वालों को थाने बुला लें.

तत्पश्चात अवधेश नारायण सिंह 2 सिपाहियों और चौकीदार के साथ गांव खिदिरपुर की ओर रवाना हो गए. खिदिरपुर वहां से ज्यादा दूर नहीं था. जब वह जीरा देवी के दरवाजे पहुंचे तो अंदर तेजी से हलचल हुई, लगा कोई भागा है. दरवाजा खुला था. अवधेश नारायण सिंह धड़धड़ाते हुए अंदर चले गए. घर के आंगन में एक युवती घबराई हुई खड़ी थी. वही जीरा देवी थी. घर में पुलिस को देख कर उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

अवधेश नारायण सिंह की पैनी नजरों ने घर के आंगन में पड़े खून के उन धब्बों को देख लिया, जिन्हें साफ करने की कोशिश की तो गई थी, पर वे पूरी तरह से साफ नहीं हो पाए थे. श्री सिंह ने जीरा देवी को घूरते हुए पूछा, ‘‘अंदर कौन भागा है?’’

‘‘ज…जी… मेरी सास अंदर गई है.’’ जीरा देवी ने घबराई हुई आवाज में कहा और अंदर की तरफ जाने लगी. अवधेश सिंह ने उसे रोका नहीं, बल्कि उस के पीछे हो लिए. जीरा देवी जिस कमरे में गई, उस में कमलेश यादव की हत्या के पुख्ता सबूत मौजूद थे. कमरे में जीरा देवी की सास संधारी देवी खड़ी मिली, उस के हाथ में लोहे की खून सनी रौड थी, जिसे वह एक गीले कपड़े से साफ करने की कोशिश कर रही थी.

अब कुछ भी पूछने की आवश्यकता नहीं थी, उन्होंने वहां मौजूद सबूतों को अपने कब्जे में ले लिया और जीरा देवी व संधारी देवी को साथ ले कर थाने लौट आए. एक आदमी की हत्या और कुछ लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण भी आ गए थे. उन की और मीडिया की उपस्थिति में दोनों से सख्ती से पूछताछ हुई. आखिरकार जीरा देवी पुलिस की सख्ती के आगे टूट गई. उस ने अपना जुर्म कबूल करते हुए जो कुछ बताया, उस से कमलेश की हत्या की पूरी कहानी साफ हो गई. जीरा देवी ने बताया, ‘‘कमलेश अकसर मेरे साथ अनैतिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता था. इस से मेरी ससुराल वालों की बहुत बदनामी हो रही थी.

अपने पड़ोसी प्यारेलाल के कहने पर कल रात मैं ने उसे घर पर बुलाया. कमलेश मुझ से मिलने के लिए घर आया तो मैं ने और मेरी सास ने लोहे की रौड और लाठी से उस पर वार कर के उसे मौत के घाट उतार दिया. इस के बाद हम ने उस की लाश पास के गांव ताजपुर के एक खेत के पास खड़ी झाड़ी में फेंक दी. इस में मेरे पति का कोई हाथ नहीं है.’’

अवधेश सिंह जानते थे कि कमलेश की लाश को 2 औरतें पास के गांव के खेतों में ले जा कर नहीं फेंक सकतीं, इस में अवश्य ही किसी पुरुष का भी हाथ रहा होगा. उन्होंने अपनी पुलिस टीम को जीरा के पति करिमन यादव उर्फ करिया और उस के पड़ोसी प्यारेलाल को पकड़ कर लाने के आदेश दिए. गाजीपुर जिले के जमानियां थाना क्षेत्र का एक गांव है राधोपुर. इस गांव के एक छोटे से किसान रामअधार यादव की बेटी थी जीरा. रामअधार के पास खेती लायक इतनी जमीन थी कि वह अपने परिवार का भरणपोषण अच्छे से कर लेता था. जीरा बचपन से ही नटखट और चंचल स्वभाव की थी. पढ़ाईलिखाई के साथ खेतखलिहान और गांव की गलियों में खेलतेकूदते जीरा कब जवान हो गई, उसे पता ही नहीं चला.

उसे अपनी जवानी का अहसास तब हुआ, जब उस के जीवन में प्यार का एक मदहोश कर देने वाला झोंका आया. वह मदमस्त कर देने वाला आवारा झोंका था कमलेश. वह भी इसी गांव में जवान हुआ था. उस के पिता रामविलास यादव भी किसान थे. कमलेश की पढ़ने में ज्यादा रुचि नहीं थी. सारा दिन अपने दोस्तों के साथ गांव की गलियों में घूमना, फिल्मी गाने गुनगुना कर खुद को हीरो साबित करने की कोशिश करना उस का काम था. एक दिन वह अपनी साइकिल से कस्बे की ओर जा रहा था, तभी उस की नजरें सामने से आती हुई जीरा पर पड़ गईं.

19 वर्षीया कमसिन, अल्हड़, खूबसूरत जीरा की बड़ीबड़ी कजरारी आंखें, कमर तक लहराते काले बाल, पतली छरहरी कंचन सी काया किसी भी युवा दिल को आकर्षित करने के लिए काफी थी. उस के चेहरे पर ऐसा चुंबकीय आकर्षण था कि कमलेश अपनी आंखें तक झपकाना भूल गया. उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उस का दिल सीने से निकल कर बाहर आ गया हो.

‘‘हाय, इतनी दिलकश हसीना मेरे गांव में रहती है और मुझे पता ही नहीं चला.’’ कमलेश ने सर्द आह भर कर कहा तो जीरा ने आंखें तरेरते हुए जवाब दिया, ‘‘अच्छा, अगर पहले पता चल जाता तो क्या कर लेते?’’

‘‘कसम पैदा करने वाले की, मैं तुम्हारा हाथ मांगने खुद ही तुम्हारे दरवाजे पर आ जाता.’’

जीरा थोड़ी शरमाई, फिर झेंप कर बोली, ‘‘क्यों घर में मांबाप नहीं हैं क्या तुम्हारे?’’

‘‘हैं, कहो तो भेज दूं अपने बाप को?’’ कमलेश ने शरारत से पूछा.

‘‘धत!’’ जीरा लाज से दोहरी हो कर तेजी से कमलेश की बगल से निकल गई.

‘‘उफ, यह शरमाना…’’ कमलेश ने फिर ठंडी सांस भरी और बोला, ‘‘अरे नाम तो बताती जाओ.’’

‘‘जीरा नाम है मेरा.’’ जीरा ने पलट कर बड़ी अदा से बताया और फिर लहराती हुई चली गई. कमलेश तब तक वहां खड़ा रहा, जब तक जीरा उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई. उसे लगा जैसे आज उस का दिल उस के पास नहीं है, उसे जीरा चुरा कर ले गई है. वह उस दिन बेमन से कस्बे के बाजार गया.

इत्तफाक से दूसरे दिन जीरा उसे खेत में मिल गई. उस दिन सांझ ढल रही थी. जीरा ने जानवरों के लिए घास का गट्ठर तैयार कर लिया था और उसे उठाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी. गट्ठर भारी था और आसपास कोई दिखाई नहीं दे रहा था. तभी कमलेश वहां पहुंच गया. उस ने जीरा को देखा तो उस के पास चला आया.

‘‘क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर दूं?’’ कमलेश ने प्यार से पूछा.

‘‘ना बाबा?’’ जीरा ने अपनी मुसकराहट छिपा कर घबराने का अभिनय किया, ‘‘तुम से उठवाऊंगी तो दंड भोगना पड़ेगा.’’

‘‘दंड.’’ कमलेश चौंका, ‘‘कैसा दंड?’’

‘‘मैं जानती हूं, फोकट में मुझ पर एहसान नहीं करोगे. बोझ उठवा दिया तो कहोगे, मुझ पर उपकार किया है, अब बापू को भेजूं तो ‘हां’ बोल देना.’’

कमलेश हंस पड़ा, ‘‘वह तो तुम्हें वैसे भी बोलना पड़ेगा जीरा. जानती हो तुम्हें जब से देखा है न दिन को चैन है, न रात को ठीक से सो पाया हूं. पता नहीं कैसा जादू कर दिया है तुम ने मुझ पर.’’

‘‘जादू तो तुम ने भी चला दिया मुझ पर.’’ जीरा सिर झुका कर लजाते हुए बोली, ‘‘लड़की हूं न, अपने दिल की बात होंठों पर लाते हुए झिझक होती है.’’

कमलेश ने प्यार से उस की कलाई थाम ली, ‘‘तुम्हारी हां की गवाही तुम्हारी शरम से झुकी आंखें भी दे रही है जीरा. मेरा यकीन करो, मैं ने तुम्हें अपना बनाया तो है रानी बना कर रखूंगा… तुम राज करोगी मेरे दिल पर.’’

जीरा ने आंखें तरेरी, ‘‘तुम्हारी रानी तो मैं तब बनूंगी, जब मुझे ब्याह लोगे. अगर मेरा ब्याह किसी और से हो गया तो मैं तुम्हारी रानी…’’

कमलेश ने जल्दी से उस की बात काट दी, ‘‘गलती से कह दिया पगली, तुम तो हर तरह से मेरी रानी रहोगी, शादी मुझ से हुई तब भी और नहीं हुई तब भी.’’

‘‘शादी तो तुम से ही होगी मेरी.’’ जीरा हंस कर बोली, ‘‘कोई और मुझे ब्याह कर ले जाए, मैं ऐसा होने नहीं दूंगी.’’

‘‘इतना चाहती हो मुझे?’’ कमलेश ने भावविभोर हो कर जीरा को अपने सीने से लगा लिया. क्षणभर के लिए तो जीरा भी कमलेश के सीने से लग कर अपनी सुधबुध भूल गई, लेकिन जल्दी ही वह संभल कर उस से अलग हटते हुए इधरउधर देखने लगी.

‘‘कोई नहीं है जीरा, बस यहां मैं हूं और तुम हो.’’ कमलेश ने अपनी उखड़ी सांसों को व्यवस्थित करते हुए कहा.

‘‘तुम पुरुष हो कमलेश, मैं स्त्री हूं और स्त्री को अपनी सीमा में रहने का पाठ पढ़ाया जाता है. अभी कोई देख लेता तो मेरी बदनामी हो जाती.’’

‘‘आगे से ध्यान रखूंगा जीरा.’’ कमलेश सिर झुका कर धीरे से बोला, ‘‘लेकिन तुम्हें इस बेचैन दिल को सुकून देने का वादा करना पड़ेगा.’’

‘‘स्त्री मन से कुछ छिपा नहीं रहता, वह पुरुष की नजरों को पल भर में पढ़ लेती है. मैं जान चुकी हूं कि तुम मुझे बेइंतहा प्यार करते हो और मुझे धोखा नहीं दोगे. औरत को अगर इतना विश्वास हो जाए तो वह पुरुष को बेझिझक अपना तनमन समर्पित कर देती है. मैं भी तुम्हारी बांहों में समा कर अपना सबकुछ तुम्हें सौंपने को आतुर हूं, लेकिन इस के लिए सही वक्त का इंतजार करना होगा.’’

‘‘ठीक है.’’ कमलेश ने ठंडी आह भर कर कहा, ‘‘मैं उस समय की प्रतीक्षा करूंगा.’’ इस के बाद कमलेश ने जीरा का घास का गट्ठर उठवा दिया. फिर दोनों अपनेअपने रास्ते घर चले गए.

जीरा कमलेश के मन में इस कदर समा गई थी कि वह जब तक दिन में एक बार उस का दीदार नहीं कर लेता था, उसे चैन नहीं पड़ता था. उसे देखे बिना जीरा का खाना भी गले से नीचे नहीं उतरता था. एक ही गांव के होने के कारण, कभी गली, कभी तालाब तो कभी खेत में उन्हें एकदूसरे का दीदार करने का अवसर मिल ही जाता था. वह एकदूसरे को देख कर आंखों की प्यास बुझा लेते थे, लेकिन उन के तन की प्यास उन्हें बेचैन कर रही थी.

एक दिन कमलेश को अपने खेत से लौटते वक्त देर हो गई. सांझ ढल गई थी और हलका अंधेरा जमीन पर उतर आया था. तभी एकाएक आसमान में काले बादलों के साए मंडराए और देखते ही देखते तेज बारिश होने लगी. कमलेश तेजी से दौड़ पड़ा. अभी वह कुछ ही दूर पहुंचा था कि उसे बरगद के पेड़ के नीचे जीरा नजर आई. वह पेड़ के नीचे खड़ी बारिश से बचने का प्रयास कर रही थी. वहां दूरदूर तक कोई नहीं था. कमलेश दौड़ता हुआ जीरा के पास पहुंच गया.

‘‘आज तुम्हें देर हो गई जीरा?’’ कमलेश ने सिर का पानी पोंछते हुए जीरा के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा तो जीरा उस के करीब सरक आई. ‘‘आज तुम्हारे लिए मैं ने देर कर दी है. मुझे मालूम था तुम अभी खेत में ही हो.’’

‘‘तुम्हारा इरादा नेक नहीं है?’’ कमलेश उस के और करीब आ कर फुसफुसाया.

‘‘तुम्हारा कौन सा नेक है.’’ जीरा को अपनी आवाज हलक में फंसती महसूस हुई. दोनों अब इतना करीब थे कि उन्हें एकदूसरे के दिलों की धड़कनें स्पष्ट सुनाई देने लगीं. कमलेश ने अपनी बांहों को आगे बढ़ाया तो जीरा उन में सिमट गई. तूफानी बारिश में दोनों के जिस्म सुलगने लगे. कमलेश ने जीरा का चेहरा दोनों हथेलियों में समेट कर उस के गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

जीरा की पूरी काया कसमसा उठी, वह कमलेश से कस कर लिपट गई. कमलेश ने उसे जकड़ लिया और अपने में समेटने लगा. जीरा ने अपना तन ढीला कर के मौन स्वीकृति दी तो कमलेश उसे ले कर जमीन पर झुकता चला गया. उस बारिश में दो तन एक हुए तो दोनों की आंखों में अजीब चमक और चेहरे पर तृप्ति के भाव थे. उस दिन के बाद जीरा अकसर खेतों से घर लौटने में देर करने लगी. कमलेश के साथ प्यार का अनैतिक खेल खेलने के लिए जीरा ने उपयुक्त स्थान और समय खोज निकाला था. सांझ के धुंधलके में जब खेतों में सन्नाटा व्याप्त हो जाता था, दोनों प्रेमी अपने तनमन की प्यास बुझाते थे.

जैसेजैसे यह खेल आगे बढ़ रहा था, उन के प्यार का बंधन भी मजबूत होता जा रहा था. लेकिन ऐसी बातें छिपती कहां है? एक दिन कमलेश और जीरा को एक आदमी ने बरगद के पेड़ के नीचे आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया तो बात जीरा के बाप को पता लगने में देर नहीं लगी. जीरा की पिटाई तो हुई ही, उस के घर से बाहर जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई. जीरा के बाप ने आननफानन में उस के लिए वर की तलाश की और उसे शादी के बंधन में बांध कर राधोपुर से खिदिरपुर भेज दिया. जीरा चाह कर भी विरोध नहीं कर पाई. सब कुछ इतनी जल्दी से हुआ कि कमलेश भी मूकदर्शक बना रह गया.

2 प्यार करने वालों के दरमियान समाज ने एक ऐसी रेखा खींच दी, जिसे लांघना जीरा और कमलेश के लिए नामुमकिन तो नहीं था, लेकिन मुश्किल जरूर था. उधर जीरा लोकलाज के डर से ससुराल में अपने मन पर पत्थर रख कर बैठ गई. प्रेमिका की जगहंसाई न हो, इसलिए कमलेश भी खामोश हो कर रह गया. लेकिन अधिक समय तक ऐसा नहीं हो सका. 2 दिलों में धधक रही प्रीत और कामना की ज्वाला ने सारे बंधन तोड़ डाले. एक दिन जीरा ने ही कमलेश को अपनी ससुराल आने का न्योता दे दिया. कमलेश को उस ने ससुराल वालों के सामने मुंहबोले भाई के रूप में पेश कर दिया. परिणामस्वरूप जीरा की ससुराल में कमलेश की खूब आवभगत हुई. इसी की आड़ में कमलेश और जीरा की देह का मिलन भी हुआ.

दोनों तृप्त हुए तो इस रिश्ते की आड़ में कमलेश बारबार खिदिरपुर आने लगा. धीरेधीरे पहले गांव में, फिर जीरा की ससुराल वालों में भी इस रिश्ते को ले कर चर्चाएं होने लगीं. इन चर्चाओं में विश्वास कम, शक अधिक था. जीरा और कमलेश को इस की भनक लगी तो दोनों घर से भाग गए. कमलेश अपनी प्रेमिका जीरा को ले कर दिल्ली आ गया. यहां उस ने एक वर्ष तक जीरा को पत्नी के रूप में रखा. उस ने किराए का कमरा ले लिया था और एक कंपनी में काम करने लगा था. यह बात 2013 की है.

इधर जीरा के ससुराल वाले खुद और पुलिस की मदद से उन दोनों की तलाश करते रहे और अंत में दोनों को दिल्ली से ढूंढ़ निकाला. पुलिस उन्हें पकड़ कर खिदिरपुर ले आई. जीरा ने कोतवाली जमानियां में बयान दे कर कहा कि वह खुद कमलेश को ले कर दिल्ली गई थी. इस तरह उस ने कमलेश को सजा से तो बचा लिया, लेकिन पुलिस के और ससुराल वालों के समझाने पर उस ने कसम खाई कि अब वह पति की वफादार बन कर रहेगी. उस ने कमलेश को स्पष्ट रूप से कह दिया कि अब वह उस की वैवाहिक जिंदगी में दखल देने की कोशिश न करें, वह उसे भूल कर अपना विवाह कर ले और पत्नी के साथ राधोपुर में रहे.

कमलेश ने इसे प्यार भरी झिड़की समझ कर एक कान से सुना, दूसरे से निकाल दिया. वह थोड़े दिनों तक तो शांत रहा, लेकिन फिर जीरा की याद आई तो शराब पी कर उस की ससुराल खिदिरपुर पहुंच गया. जीरा घर में अकेली मिली, उस ने कमलेश को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन कमलेश अपनी मनमानी कर के ही वहां से गया. ऐसा बारबार होने लगा. यह बात जीरा की ससुराल वालों को मालूम हुई तो वह कमलेश को सबक सिखाने की योजना बनाने लगे. जीरा भी चाहती थी कि कमलेश को अब उस की वैवाहिक जिंदगी से दूर कर दिया जाए. इस परिवार के पड़ोस में प्यारेलाल रहता था, वह भी उन का साथ देने को तैयार हो गया. उसी ने अपने फोन से जीरा की बात कमलेश से करवाई.

योजना के अनुसार जीरा ने उस दिन एक प्रेमिका का सच्चा अभिनय किया. उस ने मोबाइल पर कमलेश का नंबर मिला कर सुरीली आवाज में कहा, ‘‘कमलेश मैं तुम्हारी जीरा बोल रही हूं, कैसे हो तुम?’’

‘‘तुम पूछ रही हो जीरा,’’ कमलेश गहरी सांस भर कर बोला, ‘‘मैं तो तुम्हारे प्रेम के सहारे जिंदा रहना चाहता था, लेकिन तुम ही बेवफाई पर उतर आई हो. तुम्हारे पास आता हूं तो तुम बेरुखी से मुंह मोड़ लेती हो. अब तुम मेरी वाली जीरा नहीं रह गई.’’

‘‘नहीं कमलेश, जीरा तुम्हारी थी, तुम्हारी ही रहेगी.’’ जीरा गंभीर हो कर बोली, ‘‘मुझे अपनी ससुराल वालों के दबाव में तुम से बेरुखी करनी पड़ी थी. लेकिन वह सब नाटक था, हकीकत नहीं. मैं तुम्हें आज भी बहुत चाहती हूं.’’

‘‘सच,’’ कमलेश खुश हो कर बोला, ‘‘कहो कैसे फोन किया?’’

‘‘आज घर के सब लोग एक शादी में जा रहे हैं, तुम रात को खिदिरपुर आ जाओ, खूब मौजमस्ती करेंगे.’’

‘‘मैं आऊंगा जीरा, तुम दरवाजा खुला रखना.’’ कमलेश खुशी से चहका और फोन बंद कर के खिदिरपुर जाने की तैयारी करने लगा. उस दिन 22 जुलाई, 2015 का दिन था.

रात गहराने पर कमलेश ने जीरा के दरवाजे पर पहुंच कर हलकी सी दस्तक दी और हौले से दरवाजा धकेला. दरवाजा खुद ही अंदर की तरफ खुल गया. कमलेश के दिल की धड़कनें बेकाबू होने लगीं. वह उस पल की कल्पना कर के ही रोमांचित होने लगा, जब जीरा उस की बांहों के समाने वाली थी. अब वह पल बहुत करीब था. कमलेश ने उन्माद में अपने कदम आगे बढ़ा दिए. छोटी सी गली पार कर के जैसे ही उस ने आंगन में कदम रखा, उस के सिर पर एक भरपूर प्रहार हुआ. उस के मुंह से दर्दभरी हलकी चीख निकली और वह लहराता हुआ नीचे झुकता चला गया. बस इस के बाद उस पर रौड और डंडों से वार पर वार होने लगे. अचेत अवस्था में ही इस जानलेवा हमले में कब उस के प्राण निकल गए, पता ही नहीं चला. कुछ देर बाद हमलावरों का जुनून शांत हुआ तो जीरा की सास संधारी ने कमलेश की सांसे टटोलीं.

‘‘मर गया कमीना.’’ वह नफरत से थूकती हुई बोली.

‘‘हमारे रास्ते का कांटा निकल गया, चलो अब इसे ठिकाने लगा देते हैं.’’ जीरा के पति करिमन उर्फ करिया यादव ने अपने पास खड़ी अपनी पत्नी जीरा और मां संधारी की तरफ देख कर कहा.

इस के बाद 22 जुलाई की रात में ही उन लोगों ने कमलेश की लाश को पास के गांव ताजपुर माझा में सिट्टू राय के खेत की झाड़ी में ले जा कर छिपा दिया. उन्हें लगा था, दूसरे गांव में इस की पहचान नहीं हो पाएगी तो मामला रफादफा हो जाएगा. लेकिन कोतवाली जमानियां के प्रभारी अवधेश नारायण सिंह ने पहली इन्वैस्टीगेशन में ही कातिलों के गिरेबान पर हाथ डाल दिया. बेशक करिमन यादव भाग निकला, लेकिन थानाप्रभारी को विश्वास था कि वह जल्द ही पकड़ में आ जाएगा. प्यारेलाल को भी पकड़ लिया गया था.

कमलेश की हत्या का जुर्म जीरा और संधारी देवी कबूल कर चुकी थीं. थानाप्रभारी सिंह ने कमलेश के पिता रामविलास यादव को वादी बना कर हत्यारों के नाम एक तहरीर लिखवा ली और उन के विरुद्ध अपराध भा.दं.वि. की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर के तीनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कमलेश की हत्या में शामिल प्यारेलाल पकड़ में आ गया था, जबकि करिमन की तलाश जारी थी. Illicit Relationship

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Aligarh News: एक जुर्म दीवाने की खातिर

Aligarh News: पति यूसुफ के घर से निकलते ही तबस्सुम ने योजनानुसार प्रेमी दानिश को फोन कर दिया था. इस बात की जानकारी किसी को नहीं हो सकी. यूसुफ जब शाम को काम से वापस घर नहीं आया, तब फेमिली वालों को चिंता हुई. यूसुफ के साथ फिर क्या हुआ? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

दानिश और तबस्सुम का 4 सालों तक प्यार परवान चढ़ता रहा, लेकिन अब यूसुफ की दखलंदाजी से दोनों परेशान रहने लगे. फोन पर भी अब तबस्सुम दानिश से डरडर कर कम ही बात कर पाती थी. प्रेमी और प्रेमिका दोनों ही बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगे. जब दोनों को एकदूसरे की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो यूसुफ से छुटकारा पाने के लिए उस की हत्या करने का प्लान बनाया. 29 जुलाई, 2025 को यूसुफ घर से टिफिन ले कर मंडी जाने के लिए घर से निकला था, रास्ते में उसे दानिश ने रोक कर कहा, ”यूसुफ यहां पर सारे दिन काम करने पर भी मिलने वाले पैसों से तुम्हारा काम नहीं चलेगा. मेरे साथ चलो, कासगंज में मेरी जानपहचान है. वहां पर अच्छा काम दिलवा दूंगा.’’

अपने दोस्त दानिश की बातों में आ कर यूसुफ उस की स्कूटी पर बैठ गया. दानिश यूसुफ को अपनी स्कूटी पर बैठा कर कासगंज की ओर ले गया. रास्ते में टिफिन से खाना खाने के बहाने दानिश यूसुफ को विलराम क्षेत्र में स्थित बंद पड़े एक ईंट भट्ठे पर ले गया. दानिश ने अपने लिए खाना पहले ही एक होटल से ले लिया था. भट्ठे पर पहुंच कर दोनों ने वहां बैठ कर अपनाअपना खाना खाया. खाना खाने के बाद दोनों वहीं आराम करने लगे. खाना खाने के कुछ देर बाद ही यूसुफ बेहोश हो गया. तब दानिश ने उस के दोनों हाथ पीछे बांध दिए और अपने साथ लाए छुरे को स्कूटी से निकाल कर यूसुफ के पेट में वार कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद भी उसे तसल्ली नहीं हुई और अपने साथ लाए तेजाब से उस का चेहरा जला कर शव को वहां उगी झाडिय़ों में फेंक कर अपनी स्कूटी से भाग गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश ने काम होने की पूरी जानकारी मोबाइल से अपनी प्रेमिका तबस्सुम को दे दी. इस के बाद दानिश अपने घर आ गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश और तबस्सुम खुश थे. दोनों की फोन पर बातें होती रहती थीं. दोनों साथ रहने का प्लान बना रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

2 अगस्त, 2025 की शाम को कासगंज जिले की बिलराम पुलिस चौकी के गांव नगला छत्ता में बंद पड़े एक ईंट भट्ठे के पास झाड़ी में एक अज्ञात व्यक्ति का अधजला हुआ शव मिला. युवक का शव मिलने की जानकारी जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों की भीड़ एकत्र हो गई. कुछ लोग कह रहे थे कि यह आशिकी के चक्कर में मारा गया है, जबकि कुछ का कहना था कि पैसों के लेनदेन के पीछे हत्या हुई है. जितने मुंह उतनी बातें वहां होने लगी.

लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दी, पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. शव कई दिन पुराना होने के चलते उस में कीड़े पनप गए थे.  मृतक के दोनों हाथ पीछे रस्सी से बंधे हुए थे. शव को देखने से प्रतीत हो रहा था कि पेट में किसी धारदार हथियार से वार कर के मौत के घाट उतारा गया था. शव को पेट्रोल या तेजाब से जला दिया गया था, ताकि उस की शिनाख्त न हो सके. सूचना मिलने पर एसपी (देहात) अमृत जैन भी फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए. शव की पहचान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन शव की पहचान न होने पर पुलिस समझ गई कि युवक कहीं बाहर का है और उस की हत्या यहां ला कर की गई है.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को मोर्चरी भिजवा दिया. इस के बाद आसपास  के थानों व जिलों से लापता लोगों के बारे में जानकारी की गई. पुलिस को पता चला कि थाना छर्रा के धनसारी गांव का यूसुफ पिछले कई दिनों से लापता है. इस पर पुलिस ने बिना देर किए यूसुफ के फेमिली वालों से संपर्क किया. यूसुफ के फेमिली वाले जब थाने पहुंचे तो उन्होंने कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की शिनाख्त यूसुफ के रूप में की. 29 जुलाई, 2025 की शाम के 6 बज चुके थे और 27 वर्षीय यूसुफ अभी तक गल्ला मंडी से वापस नहीं लौटा था. यूसुफ गल्ला मंडी में काम करता था. दोनों बच्चे शाम होते ही बेसब्री से अपने पापा का इंतजार करने लगते थे, क्योंकि यूसुफ बच्चों के लिए खानेपीने और कभीकभी कोई खिलौना ले कर जरूर आता था.

सुबह से शाम हो गई और जब रात घिरने लगी तो बड़े बेटे असलान ने अपनी मम्मी तबस्सुम से पूछा, ”मम्मी, पापा अब तक क्यों नहीं आए हैं? वैसे तो वो शाम तक आ जाते थे.’’

”बेटा, पापा को आज ज्यादा काम मिल गया होगा, इसलिए उन्हें आने में देर हो गई है.’’ तबस्सुम ने कहा.

जब रात के 9 बज गए, तब यूसुफ के पिता भूरे खां ने बहू तबस्सुम से पूछा, ”बहू, यूसुफ सुबह जाते समय क्या कह गया था कि वह देर से घर आएगा?’’

इस पर तबस्सुम ने जबाव दिया, ”नहीं पापाजी, वह मुझ से तो कुछ कह नहीं गए थे. मैं ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. मुझे लगा कि कहीं काम में फंस गए होंगे. उन्होंने वापस कौल भी नहीं की.’’

यह सुन कर भूरे खां को चिंता हुई. यूसुफ सुबह गल्ला मंडी जा कर शाम को घर लौट आता था, लेकिन आज उस ने फोन कर के भी नहीं बताया कि वह देरी से आएगा. उन्होंने सोचा कि इस समय तो गल्ला मंडी भी बंद हो चुकी होगी. बेटे को तलाशें तो तलाशें कहां? फिर भी उन्होंने स्वजनों के साथ यूसुफ को ढंूढा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. अलीगढ़ के थाना छर्रा के गांव धनसारी निवासी भूरे खां व उन के फेमिली वालों ने यूसुफ के इंतजार में पूरी रात आंखों में काटी. सुबह होते ही भूरे खां ने फेमिली वालों के साथ गल्ला मंडी जा कर बेटे की तलाश की. साथ ही उस के साथ काम करने वाले अन्य लोगों से बेटे यूसुफ के बारे में जानकारी की. लोगों ने बताया कि यूसुफ कल तो मंडी आया ही नहीं था.

यह सुनते ही भूरे खां के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उन के मन में तरह तरह के विचार आने लगे कि कहीं बेटे के साथ कोई अनहोनी तो नहींं हो गई. कल से उस का कोई हालचाल नहीं मिला था. बेटे की तलाश में भूरे खां ने जहां भी संभव हो सकता था, वहां उस की तलाश की. दूसरे दिन यानी 30 जुलाई को भूरे खां ने थाना छर्रा में बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद  पुलिस और यूसुफ के फेमिली वाले उस की तलाश करते रहे, लेकिन 4 दिन तलाशने के बाद भी यूसुफ का कोई पता नहीं चला.

यूसुफ की नृशंस हत्या से घर में कोहराम मच गया. यूसुफ  के बच्चों के फूल से खिले चेहरे पिता की मौत से मुरझा से गए. पुलिस ने फेमिली वालों को ढांढस बंधाते हुए उन से हत्यारों की तलाश में मदद करने को कहा. कासगंज में यूसुफ के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव फेमिली वालों को सौंप दिया गया. 3 अगस्त को डैडबौडी शाम 5 बजे गांव पहुंची. परिजनों और ग्रामीणों ने घटना का खुलासा करने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छर्राकासगंज मार्ग पर जाम लगाने की कोशिश की. तब पुलिस ने उन्हें समझा कर सड़क से हटा दिया, इस के बाद गांव में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अपने पति की हत्या से यूसुफ की पत्नी तबस्सुम का रोरो कर बुरा हाल था. वह कभी अपने को संभालती तो कभी बच्चों को.  पुलिस ने मृतक यूसुफ की पत्नी के साथ ही घर के अन्य सदस्यों से गहनता से पूछताछ की. बच्चों से भी पुलिस ने जानकारी जुटाई. तबस्सुम ने बताया कि उस ने पति के वापस न आने पर उस ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच औफ आ रहा था. तब उस ने पति के दोस्त दानिश को फोन कर पति के बारे में पूछा था. दानिश ने पति यूसफ के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही थी. इस पर मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मृतक की पत्नी तबस्सुम के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच की. इस के अच्छे परिणाम शीघ्र ही सामने आ गए.

पुलिस ने गहनता से जांच कर इस हत्या की गुुत्थी सुलझा कर इस हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. जो सच्चाई सामने आई है, वो बेहद हैरान करने वाली थी. यूसुफ की दर्दनांक हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, उस ने सब को चौंका दिया. यूसुफ की पत्नी तबस्सुम ने अपने गांव में रहने वाले 28 वर्षीय प्रेमी दानिश के साथ मिल कर इस हत्या की साजिश रची थी. दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी होने पर जब यूसुफ ने इस का विरोध किया तो दोनों ने मिल कर अपने प्यार के रास्ते से हटाने की ठान ली.

पुलिस ने 3 अगस्त, 2025 को मृतक के पिता भूरे खां की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट  तबस्सुम, उस के प्रेमी दानिश व दानिश के  अज्ञात साथियों के खिलाफ दर्ज कर ली गई. कौल डिटेल्स में तबस्सुम और प्रेमी दानिश के बीच लंबेलंबे समय तक बातचीत के साक्ष्य मिले. इस के बाद तबस्सुम को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि यूसुफ को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. बेहोश होने के बाद पहले उस के हाथ पीछे बांधे गए. फिर धारदार हथियार से पेट पर वार किए गए. हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के शरीर पर तेजाब डाला गया.

जांच के बाद पुलिस ने 3 अगस्त को ही तबस्सुम को गिरफ्तार कर लिया. उस ने पूछताछ में सारा राज उगल दिया. प्रेम और वासना में अंधी हो कर तबस्सुम ने अपने पति से छुटकारा पाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की साजिश यूसुफ के दोस्त और अपने आशिक दानिश के साथ मिल कर रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस को 6 अगस्त, 2025 की शाम मुखबिर से सूचना मिली कि यूसूफ की हत्या का आरोपी दानिश जो कि यूसुफ का दोस्त भी है, रामपुर बंबा के निकट कहीं जाने की फिराक में है. सूचना मिलते ही पुलिस एलर्ट हो गई और बंबा के पास से दानिश को गिरफ्तार कर लिया.

दानिश को थाने ला कर उस से यूसुफ की हत्या के बारे में पूछताछ की गई. उस ने बताया कि गांव में उस का और यूसुफ का घर थोड़ी दूरी पर ही है. हम दोनों में दोस्ती थी. यूसुफ के घर आनाजाना रहता था. करीब 4 साल पहले एक दिन जब वह यूसुफ के घर गया था, उस की यूसुफ की पत्नी तबस्सुम से आंखें चार हो गईं. तबस्सुम बला की खूबसूरत थी. दानिश भी कसे शरीर का सुंदर युवक था. पहली ही मुलाकात में दोनों ने आंखों ही आखों में एकदूसरे के दिल पर मोहब्बत की दस्तक दे दी थी.

अब दानिश अकसर यूसुफ के घर आ जाता था. वह बच्चों के लिए कोई न कोई गिफ्ट या उन के पसंद की खानेपीने की चीजें ले कर आता. इस बीच दानिश ने यूसुफ की गैरमौजूदगी में तबस्सुम से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. यूसुफ के काम पर जाने के बाद दोनों प्रेमी प्रेमिका फोन पर घंटों बातें करते थे. पति यूसुफ के मंडी जाने के बाद वह बाजार जाने के बहाने घर से निकल जाती और अपने प्रेमी दानिश से मिलती. इस बीच दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते भी बन गए थे. जब भी तबस्सुम को मौका मिलता वह दानिश से मिल आती. तबस्सुम के खयालों में हरदम अपने प्रेमी दानिश की तसवीर रहती थी. वह चाहती थी कि उस का दीवाना हर पल उस की आंखों के सामने ही रहे.

पत्नी के बदलते व्यवहार पर यूसुफ को शक हुआ. फिर उसे दोस्त दानिश और पत्नी तबस्सुम के प्रेम प्रसंग की भनक लगी तो उस ने तबस्सुम का विरोध किया. दानिश को ले कर आए दिन उन के घर में कलह भी होने लगी. पूछताछ में पत्नी तबस्सुम ने पुलिस को बताया, वह अपने प्रेमी दानिश के साथ जाना चाहती थी. पति यूसुुफ इस का विरोध करता था. वह दानिश से बात करने और घर पर उस के सामने आने को मना करता था. पति यूसुफ मंडी के काम से इतना कमा नहीं पाता था, जिस से घर में तंगी बनी रहती थी. जबकि दानिश उस पर खूब खर्च करता था और उस की हर बात का खयाल रखता था.

योजना के अनुसार 29 जुलाई, 2025 को उस ने यूसुफ के खाने में नींद की गोलियां पीस कर मिला दी थीं. ये गोलियां दानिश ने ला कर दी थीं. इस के साथ ही पति के घर से गल्ला मंडी के लिए निकलते ही दानिश को फोन कर दिया था. बताते चलें कि भट्ठे पर जब यूसुफ ने टिफिन से खाना खाया तो नींद की गोलियों की मात्रा खाने में अधिक मिली होने से वह खाना खाने के कुछ समय बाद ही बेहोश हो गया. इस का फायदा उठाते हुए दानिश ने उस की नृशंस तरीके से हत्या कर दी. भूरे खां ने बताया कि बेटे यूसुफ की 7 साल पहले मडराक निवासी तबस्सुम से शादी हुई थी. यूसुफ के 6 साल और 4 साल के 2 बेटे हैं.

सब कुछ ठीक चल रहा था. 4 साल पहले जब से दानिश से यूसुफ की दोस्ती हुई तब से तबस्सुम फोन पर दानिश से बात किया करती थी. इस का यूसुफ विरोध किया करता था. इसी के चलते तबस्सुम ने दानिश के साथ मिल कर यूसुफ की बेहरमी से हत्या कर दी. उस ने अपने छोटे बेटों की भी चिंता नहीं की. थानाप्रभारी राजेश कुमार के अनुसार, जहां तबस्सुम और दानिश के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकाली गई, वहीं घटना में सीसीटीवी फुटेज की भी मदद ली गई.

घटना वाले दिन दानिश अपनी सफेद स्कूटी पर यूसुफ को बैठा कर अपने साथ ले जाता हुआ नजर आया. सभी सबूत एकत्रित कर घटना का परदाफाश किया गया है. आरोपी दानिश की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरा भी बरामद कर लिया गया है. सीओ (छर्रा) धनजंय सिंह के अनुसार, प्रेमिका ने ही प्रेमी के साथ मिल कर घटना का अंजाम दिया. दोनों जेल भेज दिए गए हैं. मृतक का चेहरा भी जलाया गया था. शिनाख्त कपड़ों व चप्पल से हुई. शव 4-5 दिन पुराना भी लग रहा था. अवैध संबंधों के चलते यूसुफ की हत्या की गई है.

पुलिस को इस मामले का परदाफाश करने में ज्यादा टाइम नहीं लगा. पत्नी को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. लेकिन उस की बात पूरी तरह पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. तब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स जांची तो पड़ोस में रहने वाला दानिश पुलिस के रडार पर आया. लव अफेयर के चलते पत्नी ने प्रेमी के साथ साजिश रच कर अपने ही जीवनसाथी को मार डाला. अब पत्नी तबस्सुम और प्रेमी दानिश अपने किए का फल भोगेंगे. Aligarh News

 

 

Crime Story: जब बोझिल लगने लगा सुहाग

Crime Story: 2 बच्चों की मां बनने के बाद दिव्या की सोच में बदलाव आया और वह पति की जगह चचेरे देवर को पसंद करने लगी. दोनों के बीच अनैतिक संबंध भी बन गए. जब यह बात उस के पति राजेश को पता चली तो घर में कलह रहने लगी. किसे पता था कि यह कलह एक मौत की आहट है.

सुबहसुबह बहू के रोने की आवाज सुन कर अजय वर्मा का माथा ठनका. वह मन ही मन सोचने लगे कि ऐसी कौन सी आफत आ गई कि बहू छाती पीटपीट कर रो रही है. वजह जानने के लिए वह तेज कदमों से उस के कमरे की तरफ बढ़े. कमरे का दरवाजा भिड़ा हुआ था, जो दस्तक देने पर खुल गया. ससुर को सामने देख कर दिव्या और जोरों से चीखने लगी, ‘‘मैं तो लुट गई, बरबाद हो गई. अब मैं कहां जाऊंगी, मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा?’’

‘‘बहू आखिर हुआ क्या, यह तो बताओ?’’ अजय वर्मा ने दिव्या से पूछा.

‘‘पिताजी, ये मेरा साथ छोड़ गए.’’ वह रोते हुए बोली.

बेटे के मरने की बात सुनते ही अजय वर्मा को धक्का सा लगा, वह बोले, ‘‘यह तू क्या कह रही है, ऐसा कैसे हो गया? कल रात भलाचंगा था, उसे कोई बीमारी भी नहीं थी.’’

‘‘पता नहीं, यह सब कैसे हुआ? रात में इन्होंने शराब पी, फिर खाना खा कर सो गए. सुबह देखा तो यह इस हालत में मिले. मुझे तो लग रहा है, ज्यादा शराब पीने से इन की मौत हो गई.’’ बहू रोते हुए बोली.

जवान बेटे की लाश देख कर अजय वर्मा भी रोने लगे. लेकिन उन की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह सब कैसे हो गया. जरा सी देर में पूरे मोहल्ले में राजेश की मौत की खबर फैल गई. तमाम लोग अजय वर्मा के घर पहुंच गए. वहां पर जितने मुंह, उतनी तरह की बातें हो रही थीं. इसी बीच किसी ने थाना उमरदा में फोन कर के खबर दे दी कि उमरदा में ही राजेश की रहस्यमय परिस्थिति में मौत हो गई है. यह बात 13 अगस्त, 2015 की थी. सुबह 8 बजे के करीब जब उमरदा थाने के थानाप्रभारी श्रीप्रकाश यादव को यह खबर मिली, तब रिमझिम बारिश हो रही थी. फिर भी जल्दी से वह अपने अधीनस्थों के साथ राजेश के घर की तरफ रवाना हो गए.

जब वह उस के घर पहुंचे तो उस की पत्नी दिव्या पति की लाश से लिपट कर विलाप कर रही थी. पुलिस को देख कर वह और ज्यादा जोर से रोने लगी. थानाप्रभारी की आंखें ताड़ गईं कि यह जानबूझ कर लोगों को दिखाने के लिए जरूरत से ज्यादा रोनेधोने का नाटक कर रही है. थानाप्रभारी ने कमरे में तख्त पर पड़ी राजेश की लाश का मुआयना किया तो उस के शरीर पर कोई जख्म नहीं था. हां, गले को ध्यान से देखने पर गरदन के चारों तरफ रगड़ के निशान जरूर नजर आए. ऐसा लग रहा था, जैसे उस की हत्या गला घोंट कर की गई थी. मुंह से झाग भी निकला हुआ था. जिस से जहर देने की आशंका हो रही थी.

कमरे में शराब की 2 खाली बोतलें पड़ी थीं. थानाप्रभारी ने राजेश के पिता अजय वर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि कल रात राजेश ठीकठाक था, पता नहीं रात को उस के साथ यह क्या हो गया? इस के बाद उन्होंने दिव्या से बात की तो उस ने भी यही बात बताई. उस समय मामला गमगीन था, इसलिए उन्होंने उन लोगों से बहुत ज्यादा बात नहीं की और घटनास्थल की औपचारिकताएं पूरी कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. मृतक के पिता अजय वर्मा ने श्रीप्रकाश यादव को बताया कि अजय की मौत शराब पीने से नहीं हुई, बल्कि उस की किसी ने हत्या की है. मृतक के पिता अजय वर्मा की तहरीर पर उन्होंने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस मामले की जांच श्रीप्रकाश यादव ने खुद अपने हाथों में ली. उन्हें लगा कि जब हत्या उसी के कमरे में हुई है तो यह काम कोई बाहर वाला तब तक नहीं कर सकता, जब तक घर का कोई व्यक्ति इस में शामिल न रहा हो. राजेश और उस के घर वालों के बारे में और ज्यादा जानकारी लेने के लिए वह उस के पड़ोसियों से मिले. उन से उन्हें महत्त्वपूर्ण जानकारी यह मिली कि राजेश की पत्नी दिव्या के अवैधसंबंध उस के घर के सामने रहने वाले चचेरे देवर रवि वर्मा के साथ थे.

यह जानकारी मिलने के बाद श्रीप्रकाश अजय वर्मा के घर पहुंचे. वहां दिव्या का रोनाधोना अभी भी जारी था. पुलिस को देख कर उस ने और जोरजोर से रोना शुरू कर दिया. उन्होंने उसे सांत्वना दे कर चुप कराया. उस के शांत होने के बाद उन्होंने उस से पूछा, ‘‘अब बताओ कि रात में क्या हुआ था, क्या तुम अपने पति के हत्यारे के बारे में कुछ जानती हो?’’

‘‘साहब, रात को वह 10 बजे घर आए थे. उस समय नशे में चूर होने के बाद भी उन्होंने घर में बैठ कर शराब पी, फिर खाना खाया. उन्हें खाना खिलाने के बाद मैं दूसरे कमरे में जा कर बच्चों के साथ सो गई. सुबह जब मैं उन के कमरे में गई तो वह तख्त पर मृत पड़े थे. उन की मौत कैसे हुई, मैं नहीं जानती.’’

श्रीप्रकाश को दिव्या की बात पर जरा भी विश्वास नहीं हुआ. उन्हें लगा कि वह आसानी से सही बात नहीं बताएगी. इसलिए वह दिव्या को थाने ले आए. अब तक पुलिस के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई थी. रिपोर्ट में बताया गया था कि राजेश की मौत गला कसने से हुई थी. जहर की आशंका को देखते हुए उस का बिसरा सुरक्षित कर लिया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के बाद श्रीप्रकाश यादव ने दिव्या से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई. उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस ने पति की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली.

उत्तर प्रदेश के जनपद कन्नौज के इंदरगढ़ थाने के अंतर्गत एक गांव पड़ता है असैनी. रामस्वरूप वर्मा इसी गांव में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रजनी के अलावा 3 बेटे व 2 बेटियां थीं. दिव्या उसी की छोटी बेटी थी. रामस्वरूप वर्मा अपनी बड़ी बेटी का विवाह करने के बाद दिव्या के लिए भी लड़का देखने लगे. इसी भागदौड़ में एक रिश्तेदार ने उन्हें राजेश वर्मा के बारे में बताया. राजेश कन्नौज जनपद मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित उमरदा कस्बे के अजय वर्मा का बेटा था.

अजय वर्मा के 2 ही बच्चे थे. एक बेटी और एक बेटा. बेटी का वह विवाह कर चुके थे. राजेश टैंपो चलाता था. वह उस की शादी कर के निश्चित होना चाहते थे. इसलिए जब दिव्या का रिश्ता राजेश के लिए आया तो अजय वर्मा ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया. जल्दी ही दोनों की शादी हो गई. दिव्या से शादी कर के राजेश खुश था, पर दिव्या राजेश से खुश नहीं थी. चूंकि वह दिव्या की कल्पना के अनुरूप नहीं था, इसलिए उस के अरमान चकनाचूर हो गए थे. पर अब वह कर भी क्या सकती थी. आखिरकार वह इसे ही अपना नसीब समझ कर गृहस्थी में रम गई. विवाह के लगभग 2 सालों बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम पंकज रखा गया.

पंकज के जन्म के बाद दिव्या के यौवन का निखार और बढ़ गया. स्वभाव से चंचल दिव्या का मन अब गृहस्थी से उचटने लगा था. इस की वजह यह थी कि राजेश ने शराब पीनी शुरू कर दी थी. एक तरफ वह उदास रहती थी तो दूसरी तरफ उस का मन भटकता रहता था. इसी बीच दिव्या ने एक बच्ची को जन्म दिया. राजेश के घर के सामने उस का चचेरा भाई रवि वर्मा रहता था. रवि की परचून की दुकान थी. राजेश अपने घर का सामान रवि की दुकान से ही खरीदता था. कभीकभी रवि खुद सामान पहुंचाने उस के घर चला जाता तो उस की मुलाकात दिव्या से हो जाती. दिव्या मन ही मन रवि को चाहती थी. लेकिन वह पहल नहीं कर पा रही थी.

राजेश को शराब पीने की लत थी. रवि भी शराब पीता था, इसलिए वह राजेश के साथ शराब पीने के लिए अकसर उस के यहां आने लगा. रवि और दिव्या के बीच देवर भाभी का रिश्ता था. उस रिश्ते का फायदा उठाते हुए दिव्या उस के साथ हंसीमजाक करती. रवि भी जवान था. इसलिए भाभी के मजाक का वह उसी के अंदाज में जवाब देता. इस से दोनों का हौसला बढ़ता गया. इस का नतीजा यह हुआ कि एक दिन मौका मिलने पर दोनों ने हदें लांघ कर अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

इस के बाद रवि मौका ढूंढ़ कर जबतब दिव्या के यहां जाने लगा. रवि का सान्निध्य पा कर दिव्या भी खुश रहने लगी. अब वह खिलीखिली सी रहती थी. उस ने पति की परवाह करनी छोड़ दी थी. उसे वह बातबात पर झिड़क देती थी. एक घर में रहने के बावजूद दोनों नदी के दो किनारों की तरह थे. राजेश पत्नी में आए इस बदलाव को महसूस तो कर रहा था, लेकिन समझ नहीं पा रहा था कि वह उस की इतनी उपेक्षा क्यों करने लगी है. माजरा उसे उस दिन समझ में आया, जब उस ने उसे अपने चचेरे भाई रवि के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. फिर तो घर में कोहराम मच गया. उस रोज राजेश ने दिव्या की जम कर पिटाई की. ससुर अजय वर्मा ने भी दिव्या को खूब खरीखोटी सुनाई.

रंगेहाथों पकड़े जाने के बाद दिव्या सतर्क हो गई. अब चूंकि पति और ससुर उस की निगरानी करने लगे थे, इसलिए उस का रवि से मिलना मुश्किल हो गया. लेकिन सख्त पाबंदी के बावजूद दोनों किसी न किसी तरह मिल ही लेते थे. धीरेधीरे देवरभाभी के नाजायज संबंधों की बात पूरे मोहल्ले में फैल गई थी. महिलाएं जहां भी बैठतीं, चटकारे ले कर उन के संबंधों की चर्चा करतीं. ज्योंज्यों समय बीतता गया, घर में कलह बढ़ती गई. दिव्या रवि के बिना रह नहीं पा रही थी. इसलिए शराब पीने के बाद राजेश उस की पिटाई करता था. दिव्या भले ही राजेश के 2 बच्चों की मां बन गई थी, लेकिन उसे पसंद नहीं करती थी. आखिर आजिज आ कर उस ने एक भयानक योजना बना डाली.

इस फैसले से उस ने अपने प्रेमी रवि को भी अवगत करा दिया. रवि उस का साथ देने को तैयार हो गया. इस के बाद दोनों ने राजेश को रास्ते से हटाने की उस योजना पर काम शुरू कर दिया. योजना के अनुसार रवि ने बाजार से एक कीटनाशक दवा ला कर दिव्या को दे दी. 12 अगस्त, 2015 को रात 10 बजे राजेश घर लौटा और रोज की तरह शराब की बोतल ले कर बैठ गया. शराब पीने के दौरान जब वह उठ कर लघुशंका के लिए गया तो दिव्या ने मौका देख कर कीटनाशक दवा जल्दी से उस के शराब के गिलास में मिला दी.

लौट कर राजेश ने दवा मिली शराब का गिलास एक ही बार में अपने गले से नीचे उतार लिया. दवा मिली शराब ने राजेश के ऊपर जल्दी ही असर करना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में वह तख्त पर बेहोश हो कर लुढ़क गया. इसी बीच घर में रवि आ गया. दिव्या ने अपना दुपट्टा राजेश के गले में लपेटा. दुपट्टे का एक छोर खुद पकड़ा और दूसरा रवि ने. वे दुपट्टे को तब तक खींचते रहे, जब तक राजेश का दम नहीं घुट गया. पति की हत्या के बाद दिव्या ने शराब की बोतल तख्त के नीचे लुढ़का दी और गिलास साफ कर के रसोई में रख दिया. कीटनाशक दवा की शीशी उस ने कूड़ेदान में फेंक दी और दुपट्टा घर में छिपा दिया. राजेश की मौत के बाद रवि अपने घर चला गया.

खुद को बचाने के लिए दिव्या ने सुबह होते ही छाती पीटपीट कर रोना शुरू कर दिया. उस के रोने की आवाज सुन कर अजय वर्मा आ गए. उस के बाद घर में कोहराम मच गया. राजेश की हत्या में दिव्या का प्रेमी रवि वर्मा भी शामिल था. इसलिए पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए उस के घर दविश दी, लेकिन वह घर से फरार हो चुका था पुलिस ने उस के मिलने के संभावित ठिकानों पर छापे मारे. तब वह तिर्वा में अपनी बहन की ससुराल में मिल गया. उसे गिरफ्तार कर के पुलिस थाने ले आई. उस ने भी पूछताछ में राजेश वर्मा की हत्या करने की बात कबूल कर ली.

14 अगस्त, 2015 को पुलिस ने अभियुक्त रवि वर्मा और दिव्या वर्मा को कन्नौज कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक दोनों जेल में बंद थे. Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित