बीवी का गुस्सा : पहले कनपटी पर मारी गोली फिर चाकू से कई बार गोदा

Crime News : सुरजीत कौर अपने पति जसवंत से इसलिए खुश नहीं थी क्योंकि शादी के कई साल बाद भी वह मां नहीं बन सकी थी. इस के बाद सुरजीत की जिंदगी में रणजीत आया. रणजीत ने सुरजीत को मां तो बना दिया लेकिन…

दीपावली का पूजन करने के बाद जसवंत ने अपने बच्चों के साथ आतिशबाजी का लुत्फ उठाया. फिर खाना खाने के बाद अपने बच्चों को ले कर घर के बरामदे में सो गया. उस की चारपाई के पास ही पत्नी सुरजीत कौर दूसरी चारपाई पर सोई हुई थी. दोनों ही चारपाइयों पर एक ही मच्छरदानी लगी हुई थी. सुबह करीब साढ़े 4 बजे सुरजीत कौर के पेट में दर्द की शिकायत हुई तो उस ने पति जसवंत को उठाने की कोशिश की. लेकिन वह नहीं उठा. उस के बाद सुरजीत कौर ने पति के मोबाइल फोन की टौर्च जलाई तो जसवंत का चेहरा रक्तरंजित दिखाई दिया.

पति के चेहरे को देखते ही सुरजीत कौर के मुंह से जोरों की चीख निकली. उस ने जसवंत को फिर से उठाने की कोशिश की, लेकिन उठना तो दूर वह हिलडुल तक नहीं सका. सुरजीत की चीखपुकार सुन कर मोहल्ले वाले इकट्ठा हो गए. लोगों ने देखा कि किसी ने उस की कनपटी पर सटा कर गोली चलाई थी. जिस के कारण उस की मौत हो गई थी. मृतक की पत्नी उसी की चारपाई के पास दूसरी चारपाई पर सोई हुई थी, लेकिन उसे गोली की भनक तक नहीं लगी, यह बात लोगों के लिए हैरत वाली थी.

परिवार वालों ने इसी बात को ले कर सुरजीत कौर से जवाब तलब किया तो उस ने बताया कि देर रात उस के चेहरे पर किसी का हाथ लगा. जिस के लगते ही उसे गहरी नींद आ गई. उस के बाद उसे बिलकुल होश नहीं रहा. शायद किसी ने उसे नशा सुंघा दिया था. वैसे भी चारों तरफ आतिशबाजी हो रही थी. आतिशबाजी के कारण उसे पता ही नहीं चला कि कौन कब आ कर उस के पति को मौत के घाट उतार कर चला गया. इस घटना की जानकारी केलाखेड़ा थाने में दी गई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी प्रभात कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे. घटनास्थल पर पहुंच कर प्रभात कुमार ने स्थिति का जायजा लिया और इस की सूचना उच्चाधिकारियों को दी.

सूचना पाते ही रुद्रपुर के एसएसपी डी.एस. कुंवर, एएसपी राजेश भट्ट, एसपी (क्राइम) प्रमोद कुमार और सीओ दीपशिखा अग्रवाल ने मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल की. मृतक के शरीर पर चाकुओं के निशान भी पाए गए. जिस से साफ था कि किसी ने उसे गोली मारने के बाद बुरी तरह से चाकुओं से गोदा था ताकि वह जिंदा न बच सके. उस के पास ही एक विशेष समुदाय की सफेद टोपी और एक धमकी भरा पत्र भी मिला मिला. मतलब किसी ने जसवंत से पुरानी दुश्मनी का बदला लेने के लिए उस की हत्या की थी. पुलिस ने मृतक जसवंत की पत्नी और उस के परिवार वालों से इस मामले में जानकारी ली. लेकिन सभी जैसे अंजान बने हुए थे. जसवंत के परिवार वालों ने बताया कि वह बहुत सीधे स्वभाव का व्यक्ति था.

उस की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. घटनास्थल से सभी तथ्य जुटाने के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. कनपटी पर मारी थी गोली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि जसवंत की मौत गोली लगने से हुई थी. इस मामले में पुलिस का सीधा शक उस की पत्नी सुरजीत कौर की ओर ही जा रहा था. लेकिन उस ने साफ कहा था कि आतिशबाजी की गड़गड़ाहट में वह समझ नही पाई कि गोली चली या फिर आतिशबाजी. उस की हत्या किस ने की, उसे भनक तक नहीं लगी. इस के बावजूद पुलिस ने सुरजीत कौर को अपने साथ लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई. थाने ला कर सुरजीत कौर से कड़ी पूछताछ की गई.

पहले तो उस ने हर एंगल से खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की,लेकिन पुलिस की सख्ती देख वह जल्दी टूट गई. उस ने स्वीकार किया कि उस ने पति की हत्या अपने प्रेमी रणजीत सिंह के साथ मिल कर की है. इस हत्याकांड का खुलासा होने के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह इस प्रकार थी. उत्तराखंड रुद्रपुर-काशीपुर हाइवे के किनारे बसा है एक कस्बा केलाखेड़ा. केलाखेड़ा से कोई 4 किलोमीटर दक्षिण की ओर पड़ता है रंपुरा काजी नाम का गांव. इसी गांव के पूर्वी छोर पर रहता था जसवंत सिंह का परिवार. परिवार के साथ उस का छोटा भाई मलकीत सिंह भी रहता था. लगभग 14 साल पहले जसवंत की शादी नानकमत्ता के गांव सरदारों की टुकड़ी निवासी दरबारा सिंह की बेटी सुरजीत कौर से हुई थी.

उस के कुछ दिनों बाद ही सुरजीत की बहन गुरमीत कौर की शादी जसवंत के छोटे भाई मलकीत से हुई. जसवंत सिंह और उस का छोटा भाई नौकरी कर के परिवार का पेट पालते थे. उन के पास न तो जुतासे की जमीन थी और न ही अन्य कोई कारोबार. 2 बेटियों की शादी के कुछ समय बाद सुरजीत कौर के पिता दरबारा सिंह की किसी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी. उन की मौत के बाद सुरजीत कौर की मां और छोटी बहन की जिम्मेदारी भी जसवंत को ही उठानी पड़ी, जिस से वह और अधिक परेशान रहने लगा था. कई साल बाद भी नहीं बनी मां जसवंत की शादी के कुछ सालों तक तो सब कुछ ठीकठाक चला. लेकिन शादी के 2 साल बाद भी सुरजीत कौर मां न बन सकी.

यह बात उस के मन को कचोटने लगी थी. सुरजीत कौर समझती थी कि उस का पति जसवंत कुछ ढीले किस्म का है, लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि वह औलाद पैदा करने में भी असमर्थ है. सुरजीत कौर ने कई बार उसे किसी डाक्टर को दिखा कर कर इलाज कराने की सलाह दी. लेकिन जसवंत किसी डाक्टर के पास जाने को तैयार नहीं था. वह हर साल नौकरी के लिए पंजाब जाता था. बीवी को घर पर अकेला छोड़ कर वह कईकई महीने वहीं पर रहता था. सुरजीत कौर घर पर अकेली रहती थी. घर पर कामकाज कोई था नहीं. वह भी अपना समय काटने के लिए अपने मायके चली जाती थी. मायके में रहते उस की मुलाकात रणजीत से हुई. रणजीत जसपुर भोगपुर डैम में रहता था.

उस की शादी भी सुरजीत कौर के मायके गांव सरदारों की टुकड़ी में हुई थी. इसलिए दोनों एकदूसरे को अच्छी तरह जानते थे. शादी के कुछ समय बाद रणजीत का  किसी वजह से अपनी पत्नी से तलाक हो गया था. बीवी से तलाक होने के कारण रणजीत का अपनी ससुराल जाना बंद हो गया था. तलाक के साल भर बाद जसपुर में एक शादी समारोह में संयोग से रणजीत की मुलाकात सुरजीत कौर से हुई. उसी दौरान दोनों ने एकदूसरे का हालचाल पूछा, तो रणजीत ने अपनी बीवी की कहानी उसे सुना कर अपना दुखड़ा रोया. पुरानी जानपहचान होने के नाते दोनों ही भावनाओं में बह गए. दोनों का दर्द एक ही था. एक अपने पति से परेशान थी तो दूसरे की बीवी ने उसे तंग कर दिया था.

सुरजीत कौर देखनेभालने में खूबसूरत थी. उस का दर्द सुन कर उस पर रणजीत का मन रीझ गया. उसी दौरान दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर भी ले लिया था. मुलाकात के दौरान बातचीत हुई तो दोनों दूर के रिश्तेदार भी निकल आए. एक बार जानपहचान बढ़ी तो रणजीत सुरजीत कौर के साथ उस के घर तक आ पहुंचा. हालांकि रणजीत शरीर से इतना हृष्टपुष्ट नहीं था. लेकिन बात करने में इतना तेज था कि किसी भी व्यक्ति से वह किसी भी तरह जानपहचान निकाल कर रिश्तेदारी तक बना लेता था. शादी के कई साल बाद तक बीवी को कोई बच्चा नहीं हुआ तो जसवंत ने अपनी बहन के बेटे प्रदीप को गोद ले लिया.

उस की बीवी उसे ही अपना बेटा मान कर उस की परवरिश करने लगी थी. उसी के सहारे उस का समय भी कटने लगा था. एक दिन रणजीत जसवंत के घर जा पहुंचा. रणजीत को घर आया देख कर सुरजीत का दिल बागबाग हो उठा. रणजीत ने भी बहुत दिनों बाद सुरजीत को नजदीक से देखा तो देखता ही रह गया. सुरजीत घर में बनठन कर रहती थी. देखनेभालने में तो वह ठीकठाक थी ही. रणजीत ने दिल में बना ली जगह सुरजीत कौर को देख कर रणजीत का मन मचल उठा. सुरजीत के दिल का भी कुछ यही हाल था. वह काफी समय से काम वासना से वंचित थी. उस रात सुरजीत कौर ने रणजीत को अपने घर पर ही रोक लिया.

सुरजीत ने रणजीत की काफी खातिरदारी की. उस ने उसे शराब पिलाई और उस के साथ ही 1-2 पैग खुद भी लगा लिए. जसवंत के घर में एक ही कमरा था. उस कमरे के आगे बरामदा था. खाना खाने के बाद सुरजीत ने कमरे में दूसरी चारपाई डाली और उस पर रणजीत को सुला दिया और स्वयं प्रदीप को ले कर दूसरी चारपाई पर लेट गई. प्रदीप थोड़ी देर में सो गया. सुरजीत और रणजीत देर रात तक बातें करते रहे. उस वक्त दोनों के दिलों का बुरा हाल था. लेकिन पहल कौन करे, दोनों की हिम्मत साथ नहीं दे रही थी. सुरजीत कौर को शराब का सुरूर चढ़ना शुरू हुआ तो उस ने रणजीत के सामने अपने पति की सारी पोल खोल दी.

सुरजीत ने शराब के नशे में कई बार कहा कि ऐसे मर्द से क्या फायदा जो बीवी को गर्म कर के ठंडा ही न कर पाए. सुरजीत कौर जब पूरी तरह से रणजीत के सामने खुल गई तो वह पीछे कहां हटने वाला था. उस के लिए यह अच्छा मौका था. सुरजीत की बात सुनतेसुनते जब उस का मनमस्तिष्क कामातुर हो गया तो वह देर लगाए बिना उस की चारपाई पर जा पहुंचा. उस रात दोनों के बीच जो हुआ उस से दोनों ही संतुष्ट थे. उस रात दोनों के बीच अवैध संबंध स्थापित हुए तो दोनों एकदूसरे के दीवाने हो गए. फिर यह सिलसिला अनवरत चलता रहा. जसवंत अपनी रोजीरोटी कमाने के चक्कर में लगा रहता, उस की बीवी उस की गैरमौजूदगी का लाभ उठा कर रणजीत के साथ मौजमस्ती करती. लेकिन इन दोनों की हरकतों की जसवंत को कानोंकान खबर तक नही हुई.

रणजीत और सुरजीत के बीच प्रेम परवान चढ़ता गया. जब भी जसवंत काम करने बाहर जाता तो सुरजीत फोन कर के रणजीत को अपने घर बुला लेती और फिर उस के साथ खुल कर अय्याशी करती. जसवंत चाहे कितना सीधा था लेकिन वह अपनी पत्नी के चरित्र को जान गया था. यह अलग बात है कि बीवी के सामने कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता था. वह स्वयं भी अपने आप पर शर्मिंदा होता रहता था. रणजीत के वक्तबेवक्त उस के घर आने से उस के परिवार वालों के साथ ही मोहल्ले वाले भी परेशान हो चुके थे. कई बार उस के भाई मलकीत ने ही जसवंत से शिकायत की कि वह भाभी को समझाए. इस तरह से गैरमर्द को घर में बुलाना अच्छा नहीं. लेकिन जसवंत में इतनी हिम्मत ही नहीं थी कि वह सुरजीत को कुछ कह पाता.

सुरजीत कौर बनी मां कुछ महीनों बाद सुरजीत ने जसवंत को खुशखबरी देते हुए बताया कि वह मां बनने वाली है. यह सुन कर जसवंत खुशी से पागल हो गया. उसे विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि शादी के इतने साल बाद वह अपने बच्चे का बाप बनेगा. जसवंत ने पहले ही अपनी बहन के बेटे को गोद ले रखा था. यह बात पूरे मोहल्ले में चर्चा का विषय बनी रही कि इतने सालों तक तो उस के कोई औलाद हुई नहीं, फिर सुरजीत कौर अचानक गर्भवती कैसे हो गई. यह बात उस के परिवार वालों के साथसाथ मोहल्ले वाले भी जानते थे कि उस के पेट में पल रहा बच्चा जसवंत का नहीं हो सकता. लेकिन जसवंत खुश था कि उस के घर उस की अपनी औलाद पैदा होने वाली थी.

समय पर सुरजीत ने एक बेटे को जन्म दिया. उस का नाम रखा गया सुखदेव. सुरजीत कौर जानती थी कि सुखदेव में जसवंत का खून नहीं है. वह पहले से ही उसे रणजीत का मान कर चल रही थी. लेकिन जसवंत घर में आई खुशियों से गदगद था. उसे अब समाज के सामने नीचा देखने की जरूरत नहीं थी. घर में नन्हा मेहमान आने से उस के घर के खर्चों में बढ़ोत्तरी हो गई थी. घर के खर्च पूरे करने के लिए जसवंत दिनरात एक कर के पैसा कमाने में जुट गया. सुरजीत कौर ने हकीकत रणजीत को बताते हुए खुशखबरी सुनाई कि सुखदेव जसवंत का नहीं, बल्कि तुम्हारा ही बेटा है. यह बात सुन कर रणजीत भी खुश हुआ.

उस ने अपने बेटे सुखदेव के ठीक प्रकार से लालनपालन करने के लिए सुरजीत कौर को खर्चा भी देना शुरू कर दिया था. अब सुरजीत रणजीत को और भी अधिक प्यार करने लगी थी. हालांकि जसवंत जो भी कमा कर लाता था वह सब सुरजीत के हाथ पर रख देता था. लेकिन सुरजीत को उस सब से खुशी कहां मिलने वाली थी. वह रणजीत को ही प्यार करती थी और उसे ही अपना पति मानने लगी थी. जसवंत के साथ तो उस के केवल अनचाहे रिश्ते रह गए थे, जिसे अब वह बरदाश्त भी नहीं कर पा रही थी.

रणजीत भी काफी समय से यही समझाता आ रहा था कि जब तेरा आदमी तेरे लायक ही नहीं है तो उस के घर में रह कर तू अपनी जिंदगी क्यों बरबाद कर रही है. रणजीत ने सुरजीत से कई बार घर से भाग चलने के लिए भी कहा, लेकिन सुरजीत गलत कदम उठाने को तैयार नहीं थी. उस ने रणजीत से कह दिया था कि जैसे चल रहा है, वैसे ही चलने दो. जसवंत की तरफ से चिंता मत करो, वह तुम्हें कुछ भी नहीं कहेगा इस के बावजूद रणजीत सुरजीत के प्यार में इस कदर पागल हो चुका था कि उसे एक पल के लिए भी अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देना चाहता था. वह आए दिन सुरजीत पर साथ चलने के लिए दबाव बनाने लगा था.

सुरजीत ने लिया खौफनाक फैसला सुरजीत रणजीत की जिद के आगे हार मान बैठी और उस ने फिर जिंदगी का आखिरी निर्णय लेते हुए अपनी मांग के सिंदूर को ही मिटाने की योजना बना डाली. सुरजीत ने जसवंत को कई बार मौत के घाट उतारने की योजना बनाई, लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा पाई. फिर उस ने रणजीत से साफ शब्दों में कह दिया कि अपने पति को मौत की नींद सुलाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगी. अब जो भी करना है आप ही करो. दीपावली का त्यौहार आने से कुछ दिन पहले रणजीत ने जसवंत को मौत की नींद सुलाने के लिए एक योजना बनाई. उसी योजना के तहत दोनों ने दीपावली का दिन चुना, ताकि दीपावली के शोरशराबे में वे अपनी योजना को आराम से अंजाम दे सकें. जिस वक्त दोनों ने जसवंत को मौत की नींद सुलाने की योजना बनाई उस वक्त वह पंजाब गया हुआ था.

दीपावली का त्यौहार नजदीक आया तो जसवंत 3 नवंबर, 2020 को अपने घर पहुंचा. घर पहुंच कर वह दीवाली की तैयारी में लग गया था. लेकिन सुरजीत के दिमाग में एक ही शैतान चढ़ा हुआ था कि कब दीपावली आएगी और कब उसे जसवंत से छुटकारा मिलेगा. 13 नवंबर, 2020 को रणजीत ने सुरजीत को अपनी पूर्वनियोजित योजना समझा दी. उसी दिन उस ने अपने 13 वर्षीय भतीजे से जसवंत के नाम एक धमकी भरा पत्र लिखवाया ताकि उस की हत्या के बाद पुलिस उस के हत्यारों के लिए इधरउधर भटकती रहे. पुलिस को गुमराह करने के लिए उस ने अन्य वर्ग की एक टोपी भी खरीद ली थी.

14 नवंबर, 2020 को सुबह से ही जसवंत त्यौहार की तैयारियों में जुटा था. शाम होने पर उस ने घर में पूजापाठ करने के बाद दीए जलाए और फिर बच्चों के साथ आतिशबाजी का मजा भी लिया. जसवंत को शराब पीने की लत थी. उस ने शराब का सेवन किया और फिर खाना खा कर परिवार के साथ सो गया. अपनी पूर्व योजना के अनुसार रणजीत देर रात जसवंत के घर पहुंचा. उस समय तक अधिकांश लोग सो चुके थे. लेकिन पटाखों की आवाज अभी भी गूंज रही थी. सुरजीत ने पहले ही घर की सारी लाइटें बंद कर दी थीं. लोगों की नजरों से छिपतेछिपाते रणजीत जैसेतैसे जसवंत के घर तक पहुंच गया.

खुद ही मिटाया सिंदूर रणजीत को आया देख सुरजीत ने उसे अंदर कमरे में बिठा दिया और फिर जसवंत को देखा. वह खर्राटे मार रहा था. फिर वह सीधे कमरे में गई और दोनों ने अपनी निर्धारित योजना को अंजाम देने के लिए आखिरी खाका तैयार किया. रणजीत पहले ही एक गोली से लोडेड चमंचा ले कर आया था. बाहर चारपाई पर सोते जसवंत को देख रणजीत के अंदर शैतान जाग उठा. जसवंत गहरी नींद में था. उसे सोता देख रणजीत ने उस की कनपटी पर चमंचा रख कर गोली चला दी. कनपटी पर गोली लगते ही उस के प्राणपखेरू उड़ गए. इस के बाद भी रणजीत की हैवानियत खत्म नहीं हुई. उस ने सोचा कि कहीं वह जिंदा न बच जाए, सो उस ने उस के शरीर पर चाकू से कई वार किए. कुछ ही पल में जसवंत का शरीर एक लाश बन कर रह गया.

पति की हत्या कराने के बाद सुरजीत कौर ने रणजीत को वहां से यह कह कर भगा दिया कि आगे का काम वह खुद संभाल लेगी. उस के बाद सुरजीत कौर अपने बच्चों को साथ ले कर दूसरी चारपाई पर लेट गई. सुबह होते ही उस ने नौटंकी करते हुए रोनाधोना शुरू किया, जिसे सुन कर गांव वाले उस के घर पर इकट्ठा हो गए थे. इस केस के खुलते ही पुलिस ने सुरजीत के प्रेमी रणजीत को उस के गांव भोगपुर डैम गुरुद्वारा तीरथनगर पतरामपुर (जसपुर) से गिरफ्तार कर लिया. रणजीत की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल तमंचा, एक खोखा और धमकी भरे पत्र का पन्ना बरामद कर लिया था. पुलिस ने जसवंत के छोटे भाई मलकीत की तहरीर पर भादंवि की धारा 320/120 बी व 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर रणजीत और उस की प्रेमिका सुरजीत कौर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया.

 

Agra News Crime : टॉयलेट के बहाने जंगल में ले जाकर प्रेमी से कराया पति का कत्ल

Agra News Crime : 2 शादियां करने के बावजूद भी पूनम अपने मायके के प्रेमी संदीप को नहीं भुला सकी थी. पति शिवकुमार से छुटकारा पाने और प्रेमी के साथ जिंदगी बिताने की पूनम ने ऐसी खूनी साजिश रची कि…

16 दिसंबर, 2020 की सुबह करीब 9 बजे का वक्त था. उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे से मथुरा के राया कस्बे में उतरने वाले रास्ते के किनारे लोगों ने झाडि़यों में खून से लथपथ एक युवक का शव पड़ा देखा. कुछ ही देर में वहां राहगीर भी जुटने लगे. उसी दौरान किसी व्यक्ति ने इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. चूंकि यह क्षेत्र थाना राया के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा वायरलैस मैसेज दे कर घटना से अवगत करा दिया. रातभर की ड्यूटी के बाद सुबह इतनी जल्दी उठना पुलिस के लिए थोड़ा मुश्किल जरूर होता है. लेकिन स्थानीय राया थाने के प्रभारी निरीक्षक सूरज प्रकाश शर्मा को जैसे ही उन के मुंशी ने आ कर हत्या के बारे में बताया तो उन का आलस्य काफूर हो गया.

थानाप्रभारी एस.पी. शर्मा तत्काल तैयार हुए. एसआई मोहनलाल यादव, राजकुमार, कांस्टेबल यशपाल, आशुतोष कुमार व प्रदीप कुमार को साथ ले कर वह उस स्थान पर पहुंच गए, जहां खून से लथपथ शव पड़े होने की सूचना मिली थी. लाश को देखते ही इंसपेक्टर शर्मा समझ गए कि यह दुर्घटना का नहीं बल्कि हत्या का मामला है. क्योंकि पास में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, जिस पर लगा खून इस बात की गवाही दे रहा था कि उसी पत्थर से मृतक के सिर पर प्रहार कर के उस की हत्या की गई थी. इसी के कारण मृतक का सिर व चेहरा खून से सराबोर हो चुके थे. चेहरे पर बहते ताजा खून को देख कर वे समझ गए कि हत्या हुए ज्यादा वक्त नहीं बीता है. मृतक के चेहरे पर घनी दाढ़ी थी जो खून से सराबोर थी.

थानाप्रभारी ने एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर तथा सीओ आरती सिंह को राया मोड़ पर मिले शव के बारे में सूचना दे दी. एसएसपी व सीओ सूचना मिलने के कुछ देर बाद ही घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक की टीम का दस्ता भी मौके पर पहुंच गया. घटनास्थल के मुआयने के बाद मृतक की कदकाठी व सूरत से अनुमान लगा कि उस की उम्र 26 साल के आसपास रही होगी. मृतक के शरीर पर जींस और जैकेट के साथ पैरों के जूतों से अनुमान लग रहा था कि वह कोई राहगीर था, जिस से या तो लूटपाट के लिए उस की हत्या की गई थी या किसी ने रंजिशन यहां ला कर मार दिया था.

मृतक के जेबों की तलाशी ली गई तो जेब से ऐसी कोई चीज बरामद नहीं हो सकी, जिस से उस की पहचान की जा सकती थी. इंसपेक्टर शर्मा शव का मुआयना कर रहे थे, तभी उन की नजर लाश से कुछ दूरी पर पड़े एक बैग पड़ी. लेकिन वह बैग पूरी तरह खाली था मगर तलाशी लेने पर उस में कागज का एक लिफाफा पड़ा मिला, जिस में एक फोटो थी. फोटो ताजमहल के सामने खिंचवाई गई थी. फोटो में मृतक के साथ एक महिला भी खड़ी थी. फोटो इस तरह खिंचवाई गई थी जिस तरह नवदंपति खिंचवाते हैं. इस फोटो से 2 बातें साफ हो रही थीं. एक तो यह कि जिस अंदाज में ये फोटो खिंचवाई गई थी आमतौर पर वैसे लोग अपनी पत्नी के साथ फोटो खिंचवाते हैं.

दूसरी ये बात भी साफ हो गई कि ये फोटो बहुत पुरानी नहीं थी, क्योंकि मृतक के शरीर पर जो कपड़े थे, फोटो में भी उस ने वही कपड़े पहने हुए थे. इस का मतलब साफ था कि मृतक ताजमहल घूम कर लौटा था. लेकिन सवाल यह था कि अगर फोटो में उस के साथ खड़ी महिला उस की पत्नी थी तो वह कहां है? अचानक इंसपेक्टर एस.पी. शर्मा के मन में सवाल कौंधा कि कहीं पत्नी ने ही तो उस का काम तमाम नहीं कर दिया. लेकिन ये तमाम सवाल तब तक कयास ही थे, जब तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो जाती. ताजमहल देख कर राया के इस रास्ते पर उतरने से इस बात की भी संभावना थी कि मृतक आसपास के ही किसी गांव का रहने वाला हो सकता है.

इसी उम्मीद में इंसपेक्टर सूरज प्रकाश शर्मा ने उस इलाके में 5 किलोमीटर तक पड़ने वाले सभी गांवों में अपनी पुलिस टीम से कह कर ऐसे जिम्मेदार लोगों को मौके पर बुलवाया, जो अपने गांव के अधिकांश लोगों को जानते थे. कई घंटे मशक्कत की गई, लेकिन काफी लोगों को दिखाने के बाद भी मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पुलिस अधिकारी घटनास्थल से थाने लौट आए. पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने जांच की जिम्मेदारी राया थाने के प्रभारी निरीक्षक सूरज प्रकाश शर्मा को ही सौंप दी. साथ ही उन्होंने सीओ आरती सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी.

टीम में थानाप्रभारी के अलावा एसआई मोहनलाल यादव, राजकुमार, कांस्टेबल यशपाल, आशुतोष कुमार, प्रदीप तथा इंसपेक्टर (सर्विलांस) जसवीर सिंह तथा उन की टीम के कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह, समुनेश, योगेश कुमार, गोपाल सिंह को भी शामिल किया गया. एसएसपी ने इस हत्याकांड का जल्द से जल्द खुलासा कर आरोपियों को पकड़ने के निर्देश टीम को दिए. पुलिस के पास मृतक की पहचान करने व वारदात का खुलासा करने के लिए केवल एक ही लीड थी और वह थी घटनास्थल से बरामद हुआ फोटो. थानाप्रभारी एस.पी. शर्मा खुद पुलिस टीम ले कर आगरा पहुंच गए. उन्होंने आगरा पहुंच कर वहां ताजमहल के आसपास फोटो खींचने वाले फोटोग्राफरों को मृतक के पास से मिले फोटो दिखा कर जानकारी हासिल करनी चाही. लेकिन इस प्रयास में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली.

क्योंकि वहां सैकड़ों फोटोग्राफर थे और सभी से संपर्क होना बेहद मुश्किल था. अचानक उन्होंने उस साइट का निरीक्षण किया, जहां खड़े हो कर मृतक ने फोटो खिंचवाई थी. इस से एक बात स्पष्ट हो गई कि मृतक ने ताजमहल के भीतर जा कर फोटो खिंचवाई थी. इंसपेक्टर शर्मा ने ताजमहल प्रशासन की मदद से ताजमहल के भीतर प्रवेश करने वाले गेट की पिछले 2 दिनों की सीसीटीवी फुटेज देखी तो 15 दिसंबर को मृतक एक महिला के साथ ताजमहल में प्रवेश करते हुए दिखाई पड़ गया. इस से एक बात तो साफ हो गई कि मृतक आगरा से घूम कर ही मथुरा गया था, जहां उस की हत्या हो गई.

आगे का काम पुलिस के लिए बेहद आसान हो गया. पुलिस ने ताजमहल प्रशासन की मदद से 15 दिसंबर को ताजमहल देखने वालों के टिकट की छानबीन शुरू कर दी. दरअसल ताजमहल देखने के लिए जाने वालों को अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर की जानकारी भरनी होती है. छानबीन करने के दौरान पुलिस टीम को आखिर एक ऐसा टिकट मिल गया, जो 2 लोगों के लिए बना था. उस में जो आईडी प्रूफ लगा था, वह हरियाणा के पलवल जिले के थाना होडल क्षेत्र के गांव सेवली में रहने वाले शिवकुमार का था. साथ में उस की पत्नी पूनम का नाम लिखा था.

पुलिस टीम ने ताजमहल प्रशासन की मदद से सीसीटीवी फुटेज और एंट्री टिकट का रिकौर्ड वहां से अपने कब्जे में ले लिया. इंसपेक्टर शर्मा अपनी टीम के साथ 16 दिसंबर की रात को ही मथुरा वापस लौट आए. इंसपेक्टर शर्मा ने एक सिपाही को पलवल के सेवली गांव भेजा. जहां से वह अगली सुबह शिवकुमार के चाचा लक्ष्मण सिंह व अन्य परिजनों को अपने साथ राया थाने लिवा लाया. सब से पहले लक्ष्मण व अन्य परिजनों को पोस्टमार्टम हाउस में प्रिजर्व कर के रखा गया शव दिखाया तो उन्होंने देखते ही उस की पहचान शिवकुमार के रूप में कर दी.

लक्ष्मण सिंह ने कपड़ों को देख कर भी साफ कर दिया कि उस ने जो कपड़े पहने थे, वह घर से पहन कर गया था. साथ ही उन्होंने मृतक शिवकुमार के शव के पास मिली फोटो को देख कर स्पष्ट कर दिया कि वह फोटो शिवकुमार तथ उस की पत्नी पूनम की है. पूछताछ करने पर लक्ष्मण ने बताया कि 14 दिसंबर को शिवकुमार अपनी पत्नी पूनम के साथ ताजमहल जाने की बात कह कर बस से गया था. दोपहर अपने मामा ओंकार सिंह से मुलाकात करने के लिए भरतपुर गेट मथुरा जाने की कह कर आया था. उन्होंने बताया कि शिवकुमार की शादी इसी साल 29 जून को अलीगढ़ जिले के गांव गोरोला निवासी पूनम से हुई थी. लक्ष्मण ने बताया कि उन के बेटे सूरज की शादी भी इसी गांव में हुई थी और उस के सुझाव पर उन के भाई भरत सिंह ने बेटे शिवकुमार का विवाह पूनम से किया था.

चूंकि शादी के बाद से कोरोना की महामारी के कारण शिवकुमार अपनी पत्नी को कहीं भी घूमने के लिए ले कर नहीं गया था, इसीलिए उस ने पहली बार पत्नी को घुमाने का प्लान बनाया था और ताजमहल घुमाने के लिए ले कर गया था. शिवकुमार की हत्या और उस की पत्नी पूनम के लापता होने की गुत्थी को लक्ष्मण सिंह भी नहीं समझ पा रहे थे. इंसपेक्टर शर्मा को लग रहा था कि हो न हो शिवकुमार की हत्या और उस की पत्नी के लापता होने में कोई राज जरूर है. शिवकुमार तथा उस की पत्नी पूनम के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. शिवकुमार की काल डिटेल्स से तो पुलिस को कुछ खास मदद नहीं मिली. लेकिन पूनम की काल डिटेल्स खंगाली गई तो पता चला कि पिछले कुछ महीनों से पूनम की एक खास नंबर पर लंबीलंबी बातें दिन में कई बार होती थीं.

16 दिसंबर की सुबह जब पुलिस ने शिवकुमार का शव बरामद किया था, उस दिन तथा उस से पहले 3-4 दिन में उसी नंबर पर पूनम की कई बार लंबी बातचीत हुई थी. पुलिस ने जब उस नंबर की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि वह पूनम के ही गांव गोरोला में रहने वाले किसी संदीप के नाम है. जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही थी, धीरेधीरे पूरा माजरा भी पुलिस की समझ में आ रहा था. क्योंकि जब पूनम व संदीप के फोन की लोकेशन ट्रेस की गई तो 15 दिसंबर की शाम से ले कर अभी तक दोनों के फोन की लोकेशन अलीगढ़ व मथुरा के बौर्डर एरिया में एक साथ मिल रही थी. साफ था कि पूनम व संदीप एक साथ हैं. पुलिस की एक टीम पूनम की तलाश में उस के मायके पहुंची, लेकिन वहां उस का कोई पता नहीं चल सका.

पुलिस ने लोकेशन के आधार पर कई टीमें बना कर अलीगढ़ में अलगअलग छापेमारी शुरू कर दी. आखिरकार पुलिस ने पूनम व संदीप को मथुरा व अलीगढ़ बौर्डर के गांव नगला गंजू से उस के एक दोस्त के घर से गिरफ्तार कर लिया. दोनों को राया थाने में ला कर पूछताछ शुरू की गई तो पुलिस को शिवकुमार की हत्या का राज खुलवाने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई. पूनम पति से बेवफाई और अपनी निजी जिंदगी का एकएक राज खोलती चली गई. 24 साल की पूनम ने जब से जवानी की दहलीज पर कदम रखा था, तब से संदीप को ही अपना सब कुछ माना था. दोनों एक ही बिरादरी के थे, इसलिए पूनम ने कभी सोचा ही नहीं था कि संदीप को पति के रूप में देखने का उस का सपना कभी पूरा नहीं होगा.

पलवल के सेवली गांव के रहने वाले चंद्रपाल सिंह के 4 बच्चों में पूनम सब से बड़ी थी. उस से छोटी एक बहन व 2 भाई थे. गांव में खेतीकिसानी करने वाले पिता को जब एक साल पहले पता चला कि बड़ी बेटी पूनम गांव में ही रहने वाले महावीर के छोटे बेटे संदीप से प्यार करती है तो उन का गुस्सा फूट पडा. दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज भी एक ही गांव में रहने वाले युवकयुवतियों को आपस में भाईबहन मानने की प्रथा है. इसलिए चंद्रपाल सिंह ने पूनम से साफ कह दिया कि वे मर जाएंगे, लेकिन संदीप से उस की शादी नहीं करेंगे. पूनम ने पिता से साफ कहा कि वह संदीप से 3 सालों से प्यार करती है और उस के बिना जीने की उस ने कभी कल्पना भी नहीं की है. अगर उन्होंने उस की शादी कहीं कर भी दी तो वह खुश नहीं रह पाएगी. क्योंकि वह तन मन से संदीप को ही अपना पति मान चुकी है.

चंद्रपाल सिंह ने बेटी को ऊंचनीच और समाज का वास्ता दे कर उस वक्त शांत तो कर दिया लेकिन उन्हें लगा कि अगर जल्द ही बेटी के हाथ पीले नहीं किए तो वह समाज में उसे रुसवा कर सकती है. गांव में बिरादरी के ही एक दोस्त की बेटी की शादी पलवल के सूरज से हुई थी. सूरज के परिवार और खानदान के बारे में उन्हें पता था कि निहायत शरीफ और अच्छे परिवार का लड़का है. चंद्रपाल ने दोस्त से कह कर पूनम के लिए अपने घरपरिवार में कोई लड़का देखने की बात कही तो सूरज ने उसे बताया कि उस के चाचा का लड़का शिवकुमार भी शादी के लायक है.

शिवकुमार भाइयों में सब से बड़ा था. हालांकि घर में थोड़ीबहुत जमीन थी, जिस पर परिवार के लोग खेती करते थे. लेकिन इस के अलावा भी शिवकुमार पलवल में एक कारखाने में नौकरी करता था. जब खेती का काम ज्यादा होता तो नौकरी छोड़ देता था. कुल मिला कर जिंदगी की गुजरबसर ठीक तरह से हो रही थी. सूरज ने जब अपने चाचा और पिता को अपनी ससुराल में रहने वाले चंद्रपाल की लड़की पूनम का जिक्र किया तो परिवार को लगा कि अच्छा ही देखाभाला परिवार है दोनों भाइयों की ससुराल एक ही गांव में होगी तो अच्छा रहेगा. एक दिन सूरज ने शिवकुमार को अपनी ससुराल में ले जा कर चोरी से उसे पूनम को दिखा भी दिया. शिवकुमार को पूनम पहली ही नजर में भा गई.

गांव की सीधीसादी और मासूम सी पूनम को देख कर शिवकुमार ने घर वालों से पूनम से शादी करने की हां भर दी. इस के बाद दोनों परिवारों में बात हुई और कोरोना के कारण दोनों परिवारों ने सादगी के साथ शादी संपन्न करा दी. शादी के बाद पूनम शिवकुमार की दुलहन बन कर उस के गांव सेवली आ गई. दोनों का वक्त धीरेधीरे प्यार के बीच गुजरने लगा. लेकिन शादी के बाद एक भी दिन पूनम अपने दिल से संदीप का प्यार व उस की यादों को निकाल नहीं सकी थी. वक्त जैसेजैसे गुजर रहा था, संदीप के लिए उस की तड़प और ज्यादा बढ़ती जा रही थी. वह जब भी मायके जाती तो चोरीछिपे संदीप से जरूर मिलती और किसी तरह शिवकुमार से छुटकारा दिला कर अपनी बनाने का दबाव उस पर डालती.

संदीप भी पूनम के बिना खुद को अधूरा समझता था. उस ने पूनम को भरोसा दिलाया कि जल्द ही वह उस के लिए कुछ करेगा. 9 दिसंबर को पूनम के भाई की शादी हुई थी. इस में शिवकुमार अपनी पत्नी के साथ गया था. 3 दिन तक वह वहीं रहा. उसी दौरान पूनम को संदीप के साथ कई बार मिलने का मौका मिला. संदीप ने उस से कहा कि शिवकुमार से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है कि उस की हत्या कर दी जाए. उस के बाद जब वह विधवा हो जाएगी तो परिवार वाले एक गांव का होने के बावजूद उन की शादी करने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

बात पूनम की समझ में आ गई. उस ने शिवकुमार की हत्या करने के लिए हामी भर दी. लेकिन शिवकुमार को कैसे मारा जाए कि उन पर कोई अंगुली भी न उठे. इस के लिए 2-3 मुलाकातों में ही पूनम ने संदीप से मिल कर हत्या की पूरी साजिश तैयार कर ली. शादी के बाद पूनम पति शिवकुमार के साथ वापस आ गई. पूनम व संदीप के पास मोबाइल फोन थे, जिस के माध्यम से वे शादी के बाद से एकदूसरे से बातचीत किया करते थे और वाट्सऐप कालिंग करते रहते थे. लेकिन भाई की शादी से लौटने के बाद पूनम का संदीप से फोन पर बातचीत करने का सिलसिला ज्यादा बढ़ गया. क्योंकि उन्हें अपनी उस योजना को अंजाम देना था, जिस के साथ शिवकुमार को रास्ते से हटाना था.

संदीप ने पूनम से कहा था कि अगले एकदो दिन में वह अपने पति को आगरा घूमने के लिए राजी कर ले और उसे अपने साथ आगरा ले आए. पूनम ने ऐसा ही किया. उस ने शिवकुमार से कहा कि शादी के बाद वह उसे कहीं घुमाने नहीं ले गया. कम से कम आगरा में प्यार की निशानी आगरा का ताजमहल तो दिखा दें. फरमाइश कोई ज्यादा बड़ी और नाजायज भी नहीं थी, लिहाजा शिवकुमार परिवार वालों से इजाजत ले कर 14 दिसंबर को पूनम को ताजमहल दिखाने के लिए बस से आगरा ले आया. 14 दिसंबर को पूनम और शिवकुमार आगरा ताजमहल घूमते रहे. रात को एक होटल में रुके. अगले दिन सुबह यानी 15 दिसंबर को उन्होंने ताजमहल देखा और शाम को वहीं रुके.

अगली सुबह 6 बजे आगरा से बस द्वारा घर के लिए निकल पड़े. हालांकि शिवकुमार का प्लान यह था कि पहले मथुरा जा कर कृष्ण जन्मभूमि व प्रेम मंदिर देखेंगे उस के बाद मथुरा में अपने मामा से मिलेगा और बाद में घर जाएगा. लेकिन बस में बैठते समय पूनम ने अनुरोध कर के उस का प्लान बदलवा दिया. दरअसल, पूनम ने कहा था कि राया के पास उस के रिश्ते के एक मौसा रहते हैं. उन्होंने कई बार उस से पति के साथ घर आने के लिए कहा है. थोड़ी देर के लिए उन से मिलने के बहाने वह शिवकुमार को ले कर राया के पास एक्सप्रेसवे के यमुना कट पर ही उतर गई. दरअसल, शिवकुमार पत्नी से इतना प्यार करता था और भले स्वभाव का था कि उसे पता ही नहीं था कि पूनम एक साजिश के तहत उसे राया लाई है. हकीकत यह थी कि वहां उस का कोई मौसा नहीं रहता था.

इस दौरान संदीप से लगातार उस की बात चल रही थी. उस वक्त सुबह के करीब 7 बजे थे. एक्सप्रेसवे पर बस से उतरने के बाद पूनम ने चाय पीने की इच्छा जताई तो उन्होंने एक स्टाल पर रुक कर चाय पी. इस के बाद पूनम ने साजिश के तहत शिवकुमार से टौयलेट जाने की बात कही तो वह असमंजस में पड़ गया. क्योंकि एक्सप्रेसवे पर सब जगह टायलेट तो होते नहीं हैं. लेकिन पत्नी को इमरजेंसी थी, लिहाजा सब से उचित जगह सड़क के नीचे दिख रहा जंगल ही था. लिहाजा शिवकुमार पूनम को ले कर नीचे जंगल की ओर उसे टौयलेट कराने के लिए ले गया. लेकिन उसे क्या पता था कि मौत पहले से वहां उस का इंतजार कर रही है. संदीप वहां पहले ही झाडि़यों में छिपा था.

जैसे ही शिवकुमार उस की तरफ पीठ कर के खड़ा हुआ, संदीप ने दबेपांव पीछे से जा कर शिवकुमार के सिर पर भारीभरकम पत्थर दे मारा. इस के बाद संदीप और पूनम ने शिवकुमार के सिर पर पत्थर से कई प्रहार किए. शिवकुमार वहीं निढाल हो कर गिर पड़ा. शिवकुमार के पास 2 बैग थे. एक बैग में पूनम के कपडे़ थे, दूसरे में शिवकुमार के कपड़े. शिवकुमार के बैग से पूनम ने सारा सामान निकाल कर अपने बैग में रख लिया ताकि बैग में ऐसी कोई चीज न मिले, जिस से शिवकुमार की पहचान हो सके. लेकिन गलती से शिवकुमार और पूनम का ताजमहल पर खिंचवाया गया फोटो वाला लिफाफा थैले में ही रह गया था. इसी आधार पर पुलिस ने मृतक की शिनाख्त की थी.

दरअसल, हत्या का ये पूरा प्लान संदीप ने ही तैयार किया था. शिवकुमार की हत्या करने के बाद वे दोनों वहां से टैंपो कर के मथुरा की ओर भाग आए थे. इस के बाद वे इधर से उधर भागते रहे. पूनम एक दिन बाद ससुराल जाने का मन बना रही थी. उस से पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पूनम की हालत ऐसी हो गई न तो सनम मिला ना ही विसाले सनम. एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम को 10 हजार रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की है. पुलिस ने पूनम व संदीप से पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस की जांच व आरोपियों तथा पीडि़त परिवार के बयान पर आधारित

 

Family Crime News : तानों से तंग आकर चाकू से काटी मां की गरदन

Family Crime News : फौजी राजेंद्र शाही के पास रुपएपैसों की कमी नहीं थी. इस के बावजूद भी उन के घर में क्लेश रहता था. इस की वजह थी उन की पत्नी हीरा देवी का व्यवहार. हीरा देवी के इसी व्यवहार ने एक दिन बेटे राहुल के हाथ खून से रंग दिए. और फिर…

20 दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर अपनी मां को खाने के लिए देती थी. उस ने सब से पहले वही बादाम छीले और अपनी मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन उस की मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह सीधे उन्हीं के कमरे में चली गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी. मां को सोता देख कर उसे हैरानी भी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि वह तो हर रोज घर में सब से पहले उठ जाती थीं.

अपनी मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश फाख्ता हो गए. मां को इस हालत में देख कर उस की जोरदार चीख निकली. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी. सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए थे. लेकिन हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल.

उस रात हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे. हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग ही था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा हुआ था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. इस बात से सभी परेशान थे. तुरंत ही इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की. पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की भांति सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो वह अपनी मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे. मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर पर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.

घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल करते हुए नमूने ले कर पैक कर लिए थे. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की. घटनास्थल से सब साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू सिंह की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा कोतवाली हल्द्वानी में दर्ज कर लिया. केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई करते हुए फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था. इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा ही तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही तो उस का सहारा थी. उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था.

घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया. पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे तो उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर एक पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की एक पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी. पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के तुरंत बाद ही उस ने अपनी मां की हत्या की बात कबूल ली. जिस मां ने अपने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक निकली.

उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव पड़ता है करायल जौलासाल. इसी गांव में रहता था राजेंद्र शाही का परिवार. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था. राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी बच्चों ने मन लगा कर पढ़ाई की, उस की परिणति सभी कामयाब भी हो गए थे.

राजेंद्र शाही ने बहुत पहले ही बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के पहले छोर पर ही काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने ही एक प्लौट और खरीद लिया था. जिस को उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था. ममता अपनी मां के साथ ही रहती थी. उस के बाद दूसरे नंबर की बेटी मंजू की भी शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था. रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में ही रहने लगी थी.

पांचवीं नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर हो गई. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था. इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद भी एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने जो प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना. हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी.

इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया. उसी मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे. सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी को घर खर्च देना भी बंद कर दिया था. उस के बाद हीरा देवी ने अदालत में अपने पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के बाद हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे. जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.

सन 2005 से ही राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. उस के बाद अपना घर होने के बावजूद भी राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद राजेंद्र सिंह ने रामनगर में भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ ही रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था. राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद भी उसे कहीं पर कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी भी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती चली गई.

उस की दिमागी हालत के खराब चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की अपनी मां से भी नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात में जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद भी राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रहती थी. गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.

दिल्ली में नौकरी करने के दौरान ही उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता रहता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर से अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों से लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी. उस के बाद उस की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस के कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उस के मन में नफरत पैदा हो गई थी.

अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन इस के बावजूद भी उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन खराब हो चला था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी. चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था. घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने भी सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली.

रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. रवींद्र सिंह अपने परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद भी परिवार में खुशियां बिलकुल भी नही थीं. 20 दिसंबर, 2020 को राहुल ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने को आदत जो पड़ गई है.’’

हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद भी राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे. क्या किया जाए इस बुढि़या का. इस ने तो मेरा जीना हराम कर रखा है. शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में ही सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद उस के कमरे में सुला दिया था.

हीरा देवी इस वक्त बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई थी. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत हुआ था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी. तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी चालें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, उस ने अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह उस वक्त गहरी नींद में सोई पड़ी थी. घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरे में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से एक चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. जिस के कारण दवाओं का नशा उस पर फौरन ही हावी हो जाता था.

अपनी मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन बैठा. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां हीरा देवी के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उस के प्राणपखेरू उड़ गए. मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर पर लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा. उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उस को बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे. वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुला दिया.

हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं. इस दर्दनाक घटना के बाद भी परिवार वाले एकदूसरे पर आरोप लगा कर लड़झगड़ रहे थे.

 

Extramarital Affair : प्रेमिका के लिए पति ने 10 लाख की सुपारी देकर कराई पत्नी की हत्या

Extramarital Affair : रोनी लिशी ने तेची मीना से प्रेम विवाह किया था, दोनों की एक बेटी भी हुई. जब मीना दूसरी बार गर्भवती हुई तो रोनी की जिंदगी में चुमी ताया आ गई. बड़े बाप के बेटे और बिजनैसमेन ने चुमी से गुपचुप शादी कर ली और पत्नी मीना को रास्ते से हटाने के लिए ऐसी साजिश रची कि…

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर 5 नवंबर के बाद से कई दिनों तक ‘हत्यारों को फांसी दो.. जस्टिस फौर मीना…’ के नारों से गूंजती रही. जिस के लिए जस्टिस मांगा जा रहा था, उस का नाम था तेची मीना लिशी, उम्र 28 वर्ष. तेची की हत्या हुई थी पर खुलासा कई दिन बाद हुआ. उस की हत्या का खुलासा होने के बाद से सामाजिक संगठनों में आक्रोश की आग सुलगने लगी थी. सामाजिक संगठन तेची मीना लिशी को न्याय दिलाने के लिए कभी कैंडिल मार्च तो कभी शांतिपूर्ण जुलूस निकाल कर इस हत्याकांड के आरोपियों को कठोर दंड देने की मांग कर रहे थे.

कोई मामूली शख्सियत नहीं थी. वह मिस अरुणाचल नाम की एक बड़ी संस्था में लेखा और वित्त विभाग की सचिव थी. वह प्रदेश के एक बड़े बिजनैसमैन रोनी लिशी की पत्नी थी. उस के ससुर लेगी लिशी कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों में रहे थे. वह ईटानगर से 3 बार विधायक व एक बार मंत्री रह चुके थे. अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर के उन राज्यों में से है, जहां अपराध की वारदातें बहुत कम होती हैं और साजिश कर के हत्या की वारदात को अंजाम देने के मामले तो अपवाद ही होते हैं. लेकिन नौर्थ ईस्ट के इस छोटे से खूबसूरत राज्य की राजधानी ईटानगर में 5 नवंबर को एक ऐसी वारदात हुई, जिस के बाद पूरे ईटानगर के शांत माहौल को गर्म कर दिया.

क्योंकि इस वारदात को इस तरह की साजिश के तहत अंजाम दिया गया था कि पिछले 2 दशकों में इस राज्य के लोगों ने इस तरह के अपराध की कोई वारदात न देखी थी न सुनी थी. राजधानी ईटानगर के विधायक रहे लेगी लिशी के रसूख और शहर के सब से पौश इलाके नाहारलागुन के सेक्टर-1 में बने उन के आवास लेगी कौंप्लेक्स को शहर का हर बांशिदा जानता था. 5 नवंबर की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे लेगी लिशी की बहू तेची मीना लिशी अपनी इनोवा एसयूवी कार में घर से निकली थी. मीना की गाड़ी को 2 दिन पहले ही नियुक्त हुआ ड्राइवर दाथांग सुयांग चला रहा था. गाड़ी ईटानगर से कारसिंगा की तरफ जा रही थी.

दरअसल, मीना को उस के पति रोनी लिशी ने सड़क बनाने के लिए अधिग्रहीत अपनी जमीन के मुआवजे के लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने हेतु संबंधित सरकारी विभाग में जानकारी लेने भेजा था. चूंकि मीना 7 महीने की गर्भवती थी, इसलिए रोनी ने 2 दिन पहले ही पत्नी की गाड़ी चलाने के लिए एक ड्राइवर रखा था. हालांकि मीना पहले अपनी सैंट्रो कार खुद चला कर अपने दफ्तर जाती थी. लेकिन 7 महीने की गर्भवती होने के कारण मीना के पति लिशी लेगी ने मीना के लिए अपनी बहन के घर पर खड़ी अपनी इनोवा कार मंगवा ली थी और उस के लिए 2 दिन पहले ही एक एक ड्राइवर दाथांग सुयांग को नियुक्त कर दिया था.

दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ड्राइवर दाथांग सुयांग इनोवा कार से मीना को ले कर कारसिंगा रोड पर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर ही चला था कि उस की कार जब कूड़ा डंपिंग जोन के पास बने मंदिर के पास पहुंची तो दुर्घटनाग्रस्त हो कर खाईं में लुढ़क गई. मीना की मौत किसी तरह दाथांग सुयांग तो बाहर निकल आया, लेकिन उस ने देखा कि बीच की सीट पर पड़ी मीना मृतप्राय थी. हैरानी यह थी कि ड्राइवर दाथांग किसी तरह दरवाजा खोल कर गाड़ी से बाहर निकल आया था और पूरी तरह से कुछ लोगों ने देखा कि गाड़ी के भीतर एक महिला खून से लथपथ घायल अवस्था में पड़ी है तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को दुर्घटना की सूचना दे दी. साथ ही मीना को पास के अस्पताल भिजवा दिया.

जिस स्थान पर ये दुर्घटना हुई थी, वह इलाका राजधानी ईटानगर के बांदरदेवा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता था. जब पता चला कि एक्सीडेंट हुई कार में पूर्व विधायक लेगी लिशी की पुत्रवधू मीना सवार थी तो खुद थानाप्रभारी गोशम ताशा पुलिस टीम को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. इंसपेक्टर गोशम यह देख कर हैरान थे कि गाड़ी का ड्राइवर दाथांग सुयांग एकदम सहीसलामत था. उसे खरोंच तक नहीं आई थी. सड़क से 3 मीटर नीचे खाई में लुढ़की गाड़ी भी एकदम सहीसलामत थी. उस के न तो शीशे टूटे थे, न ही गाड़ी कहीं से डैमेज हुई थी. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि गाड़ी की बीच वाली सीट पर बैठी मीना बुरी तरह खून से लथपथ थी और उस के सिर, कंधों व गरदन पर काफी चोटें आई थीं.

पुलिस के आने से पहले ही लोगों ने मीना को पास के एक अस्पताल भिजवा दिया था. इंसपेक्टर गोशाम ने दुघर्टना को पूर्व विधायक लेगी लिशी की पुत्रवधू से जुड़ा होने के कारण नाहारलागुन के सीओ रिक कामसी के अलावा ईटानगर कैपिटल रीजन के एसपी जिमी चिराम को भी दुर्घटना की जानकारी दे दी थी, जो सूचना मिलने के कुछ देर बाद घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने यह सूचना पूर्व विधायक लेगी लिशी और उन की पति रोनी लिशी को दे दी थी. उन्हीं की सूचना से यह जानकारी पा कर कारसिंगा में रहने वाले मीना के मातापिता, भाईबहन व अन्य रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. एसपी जिमी चिराम ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो पहली ही नजर में उन्हें दुर्घटना संदिग्ध लगी.

इसलिए फोरैंसिकटीम ने गाड़ी व घटनास्थल का निरीक्षण कर ऐसे साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए, जिस से पता चल सके कि दुर्घटना किन कारणों से हुई. ड्राइवर दाथांग सुयांग घटनास्थल पर ही मौजूद था, इसीलिए पूछताछ की शुरुआत उसी से हुई. दाथांग ने बताया कि गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए थे, जिस से गाड़ी संतुलन खो कर खाईं में लुढ़क गई और मालकिन मीना बुरी तरह जख्मी हो गईं. लेकिन पुलिस यह देख कर हैरान थी कि दाथांग एकदम सहीसलामत था, उसे खरोंच तक नहीं आई थी. मीना का बयान लेने के लिए पुलिस की एक टीम अस्पताल भेजी गई थी, लेकिन वहां पता चला कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उस की मौत हो गई थी. अस्पताल में मीना के परिजन, जिन में मायके व ससुराल के लोग भी शामिल थे, भी अस्पताल पहुंच चुके थे जिस से वहां का माहौल परिजनों के मार्मिक विलाप के कारण बेहद गमगीन हो गया था.

पुलिस टीम ने दुर्घटना में घायल हुई मीना के शरीर पर आई चोटों की फोटोग्राफी कराई. एसपी जिमी चिराम ने ये फोटो देखे तो पूरी तरह साफ हो गया कि दुर्घटना का यह मामला सिर्फ दिखाने के लिए था. मीना के मातापिता व रिश्तेदारों के साथ पूर्व विधायक लिशी लेगी भी अस्पताल से दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए थे. गाड़ी और उस का ड्राइवर जिस तरह सहीसलामत थे और मीना की दुर्घटना में जो हालत हुई थी, उसे देख कर उन्होंने भी यहीं आशंका जताई कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि मीना को दुर्घटना में इतनी गंभीर चोटें लगी हों. मीना के पिता तेची काक ने एसपी जिमी चिराम को एकांत में ले जा कर जो कुछ बताया, उस ने अचानक दुर्घटना के इस मामले को नया रंग दे दिया.

इस के बाद तो पुलिस की जांच करने का तरीका ही बदल गया. पुलिस ने उसी दिन मीना का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. ड्राइवर ने बताया ब्रेक फेल होना ड्राइवर दाथांग ने चूंकि बताया था कि गाड़ी के ब्रेक फेल होने के कारण वह असंतुलित हो कर खाई में गिरी थी. इसीलिए पुलिस ने पुलिस लाइन से मोटर इंजीनियर एक्सपर्ट को मौके पर बुलवा लिया. उन्होंने जांचपड़ताल की तो यह देख कर दंग रह गए कि गाड़ी के ब्रेक एकदम सहीसलामत थे. इस के बाद 2 दिन पहले ही मीना की गाड़ी पर ड्राइवर की नौकरी करने आए दाथांग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. साथ ही उस के मोबाइल को भी अपने कब्जे में ले लिया गया.

नाहरलगुन पुलिस स्टेशन में उसी दिन इंसपेक्टर गोशाम ने भादंसं की धारा 279/304 (ए) आईपीसी के तहत लापरवाही से गाड़ी चला कर दुर्घटना करने का मामला दर्ज करवा दिया और जांच का काम स्वयं शुरू किया. दाथांग सुयांग से कड़ी पूछताछ की जाने लगी. उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गईं. पूछताछ में पता चला कि नया मोबाइल व नंबर उस के मालिक लिशी रोनी ने ही उसे खरीद कर दिया था. 3 दिन पहले एक्टिव हुए इस नंबर की काल डिटेल्स खंगालते हुए पुलिस ने उन लोगों को चैक करना शुरू कर दिया, जिन्होंने इस नंबर पर काल की थी या इस नंबर से उन के नंबर पर काल किए गए थे.

अगली सुबह मीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उन के घरवालों को सौंप दिया गया. पूरे ईटानगर में मीना की संदिग्ध मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैल चुकी थी. मीना के ससुर लेगी लिशी एक बड़ी राजनीतिक हस्ती थे. खुद मीना भी सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी थी. इसलिए शवयात्रा में मीना के घर वालों के अलावा बड़ी संख्या में राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए. इधर पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि मीना की जांघ, हथेली, सिर और गरदन पर किसी भारी चीज से प्रहार हुआ था और वहां गहरे कट के निशान थे, बायां हाथ सूजा हुआ था. मैडिकल जांच करने वाले विशेषज्ञों और गाड़ी का मुआयना करने वाले एक्सपर्ट ने साफ कर दिया था कि दुर्घटना में इस तरह की चोट नहीं आ सकती.

दुर्घटना के बाद मीना के ससुर पूर्व विधायक लेगी लिशी ने भी दुर्घटना के संदिग्ध हालात के मामले की गहनता से सही जांच के लिए कहा था. पुलिस को इस मामले में शुरुआती जांच से ही जिस तरह से गहरी साजिश और इस में कई लोगों के शामिल होने के सबूत मिले थे. उसी के मद्देनजर आईजीपी (कानून एवं व्यवस्था) चुखू अपा ने ईटानगर कैपिटल रीजन के एसपी जिमी चिराम के नेतृत्व में इस मामले का खुलासा करने के लिए एक बड़ी टीम का गठन कर दिया. इस टीम में नाहारलागुन सर्किल के सीओ रिक कामसी व जांच अधिकारी इंसपेक्टर गोशाम के अलावा इंसपेक्टर मिनली गेई, खिकसी यांगफो व तिराप जिले के एसपी कारदक रिबा तथा खोंसा पुलिस थाने के इंसपेक्टर वांगोई कामुहा को शामिल किया गया. इस टीम को बंट कर काम करना था.

पुलिस की टीमों ने इस दौरान मीना के घर से ले कर घटनास्थल तक पहुंचने के तक जिन मार्गों से गाड़ी गुजरी थी, उन सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज चैक करने शुरू कर दिए. इस के अलावा पुलिस ने घटनास्थल के एक किलोमीटर के दायरे में सड़क किनारे बनी दुकानों व रेहड़ी वालों से पूछताछ करनी शुरू कर दी. पुलिस ने छानबीन शुरू की तो उसे जल्द ही चश्मदीद के रूप में कुछ राहगीर व रेहड़ी वाले मिल गए, जिन्होंने कार के ब्रेक फेल होने की ड्राइवर दाथांग सुयांग की कहानी को झूठा साबित कर दिया. एक चश्मदीद ने कार नीचे गिरने के बाद 50 मीटर की दूरी से देखा था कि उस का ड्राइवर गाड़ी से बाहर निकला था और पिछली सीट पर पड़ी महिला को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था.

जबकि कारसिंगा ब्लौक बिंदु पर सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले एक रेहड़ी वाले ने बताया कि उस के सामने से कार सामान्य गति से गुजरी थी, इस से यह कहना गलत था कि उस के ब्रेक फेल हुए होंगे. तब तक पुलिस को ड्राइवर दाथांग की संदिग्ध गतिविधियों के कुछ दूसरे साक्ष्य भी मिल गए थे. इसीलिए 6 नंवबर की सुबह उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर के कड़ी पूछताछ शुरू कर दी गई. मुंह खोलना पड़ा ड्राइवर दाथांग को ड्राइवर दाथांग ने शुरू में तो एक ही रट लगाए रखी कि गाड़ी के ब्रेक नहीं लगे थे. लेकिन जब पुलिस ने उस के खिलाफ एकत्र सारे सबूत एकएक कर के उस के सामने रखने शुरू किए तो वह जल्द ही टूट गया. उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. दाथांग के मुंह खोलते ही साजिश के तहत मीना की हत्या की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई.

पुलिस को एक बार अपराध का सिरा हाथ लग जाए तो उस के अंतिम छोर तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगती. पुलिस ने उसी दिन शाम तक ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए तिरप जिले से दाथांग सुयांग के साथ मीना की हत्या की साजिश में शामिल रहे 3 सहआरोपियों कपवांग लेटी लोवांग (40) के साथ ताने खोयांग (33) और दामित्र खोयांग (29) को गिरफ्तार कर लिया. कपवांग पूर्वोत्तर भारत के एक विद्रोही गुट एनएससीएन (यू) का सक्रिय कार्यकर्ता रह चुका था. उसी ने मीना की हत्या की सुपारी ली थी. हैरानी की बात यह थी कि मीना की हत्या की सुपारी उस के पति रोनी लिशी ने ही दी थी. कपवांग रोनी का पुराना जानकार था. उसी ने सुपारी लेने के बाद हत्यारों का इंतजाम किया था. बाद में पूरी योजना के तहत इस वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया ताकि यह हत्या एक दुर्घटना लगे.

पुलिस ने पूछताछ के लिए आरोपियों को अदालत से रिमांड पर ले लिया. उस के बाद उन के बयानों की तस्दीक की जाने लगी. क्योंकि हत्या का आरोप मृतका के पति और एक प्रभावशाली पूर्व विधायक के बेटे पर था. इसलिए पुलिस आरोपों को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य एकत्र कर लेना चाहती थी. इस दौरान जब यह बात सार्वजनिक हो गई कि मीना की हत्या उस के पति रोनी ने ही भाड़े के हत्यारों से करवाई है तो राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने धरने, प्रदर्शन व कैंडिल मार्च के जरिए पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. परिवार के लोग भी अब पूरी तरह रोनी के खिलाफ बोलने लगे. तब तक पुलिस ने कई साक्ष्य एकत्र कर लिए थे. जिस के बाद 10 नवंबर को रोनी लेशी को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन पुलिस को इस हत्याकांड की जो थ्योरी अब तक पता चली थी, उस के मुताबिक उसे मामले में 2 अन्य लोगों की तलाश थी. उस के लिए साक्ष्य एकत्र करने का काम शुरू कर दिया गया. आखिरकार 18 नवंबर को पुलिस ने रोनी की प्रेमिका व दूसरी पत्नी चुमी ताया (26) व उस की कंपनी में काम करने वाले मैनेजर विजय बिस्वास (30) को भी हत्याकांड की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इन सभी की गिरफ्तारी के बाद जांच अधिकारी ने दुर्घटना के इस मामले को हत्या व साजिश की धाराएं लगा कर हत्या में परिवर्तित कर दिया. इस के बाद मीना हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस ने पूर्वोत्तर के खूबसूरत राज्य अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर शहर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.

लोग सोच रहे थे कि एक इंसान केवल दूसरी लड़की से शादी करने के लिए अपनी पहली पत्नी की बेरहमी से हत्या करा सकता है, जिस से न सिर्फ उस ने प्रेम विवाह किया था बल्कि जिस के पेट में उस का बच्चा भी पल रहा था. रोनी लिशी एक संपन्न परिवार का युवक था. परिवार में 2 छोटे भाई व एक बहन थी. पिता लेगी लिशी प्रतिष्ठित राजनीतिक व्यक्ति होने के साथ अथाह संपत्ति के मालिक थे. उन्होंने सभी बच्चों के नाम पर संपत्तियां खरीदी हुई थीं. रोनी कोई अशिक्षित भी नहीं था. उस ने इंजीनियरिंग की थी. कालेज में पढ़ते हुए हुआ प्यार पिता लेगी लिशी ने रोनी को 2 कंपनियां खुलवा कर दी थीं. ईटानगर में उन की पहली कंपनी लिशी वन होम मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड थी, जिस की स्थापना उन्होंने 2012 में की थी.

जबकि 3 साल पहले रोनी ने अपनी बेटी के नाम पर यामिको ग्लोबल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दूसरी कंपनी शुरू की थी. उस की प्रेमिका व दूसरी पत्नी चुमी ताया इसी कंपनी में काम करती थी. रोनी व मीना की दोस्ती 2008 में कालेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी, जो बाद में प्यार में बदल गई. मीना कारसिंगा में रहने वाले एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेहद खूबसूरत व घरेलू लड़की थी. मीना की इसी खूबसूरती पर रोनी मर मिटा था और उस से प्यार करने लगा था. बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था. मीना चूंकि मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी, इसलिए पहले उस के घर वाले संकोच करते रहे कि रोनी एक संपन्न व बड़े परिवार का लड़का है. कहीं ऐसा न हो कि उस के परिवार वाले शादी के लिए राजी न हों.

क्योंकि उन की हैसियत रोनी के परिवार के सामने कुछ भी नहीं थी. ऐसा न हो कि दोनों की शादी बेमेल संबंध बन जाए और मीना को बाद में परेशानी उठानी पड़े. लेकिन मीना व रोनी के कई बार समझाने के बाद परिवार की झिझक दूर हुई और दोनों के मिलन का रास्ता साफ हो गया. लिहाजा सन 2012 में दोनों परिवारों की सहमति से रोनी और मीना ने शादी कर ली. शादी के 2 साल बाद 2014 में दोनों के प्यार की निशानी के रूप में एक बेटी हुई, जिस का नाम लेसी यामिको रखा गया. साल 2017 में अचानक मीना के परिजनों को पता चला कि रोनी ने मीना को तलाक देने के लिए अदालत में अरजी दी है. यह पता चला तो परिवार के लोग बेचैन हो गए.

क्योंकि जिस लड़की से विवाह करने के लिए रोनी उन के सामने मिन्नतें कर रहा था, वह उसी को तलाक क्यों देना चाह रहा था, यह उन की समझ से परे था. पूरा मामला जानने के लिए मीना के घर वाले रोनी के पास पहुंचे. मीना से पता चला कि रोनी कुछ दिनों से चुमी ताया नाम की एक लड़की के प्यार में पागल है. जब से वह रोनी की जिंदगी में आई है, तब से उन दोनों के प्यार में न सिर्फ दरार आ गई थी बल्कि रोनी अब छोटीछोटी बातों पर उस के साथ मारपीट भी करने लगा था और परेशान भी. परेशानी भी कोई बड़ी नहीं होती थी. कभी वह खाने में खराबी बता कर उस से मारपीट करता तो कभी घर में सफाई न होने को ले कर झगड़ा करता था.

मीना के घर वालों को जब यह बात पता चली तो उन्होंने रोनी के मातापिता व भाईबहनों के साथ मिलबैठ कर इस मसले को सुलझाना चाहा. रोनी के मातापिता को जब इस बात का पता चला कि उस की जिंदगी में किसी दूसरी महिला ने जगह बना ली है तो उन्होंने भी रोनी को बहुत समझाया. उन्होंने उसी साल 2017 में रोनी की मांग पर उसे एक नया घर ले कर दे दिया और उस से वायदा लिया कि वह मीना के साथ उस घर में प्यार से रहेगा. दोनों परिवारों को उम्मीद थी कि अलग रहने के बाद दोनों के बीच खोया हुआ प्यार शायद फिर से पनप जाए. लेकिन कुछ दिन सामान्य रहने के बाद रोनी फिर से अपनी नई गर्लफ्रैंड की बांहों में खो गया. वह कईकई दिनों तक घर से गायब रहता. मीना ऐतराज करती तो वह उस के साथ मारपीट करता और कहता कि अगर मेरे साथ नहीं रहना चाहती तो मुझे तलाक दे दो.

एक तरह से रोनी ने मन बना लिया था कि किसी भी तरह मीना उस की जिंदगी से चली जाए. सन 2018 में एक बार फिर बात मीना के घर वालों तक पहुंच गई. मीना के घर वाले उस के नए घर पहुंचे, जहां एक बार फिर से दोनों परिवारों के सभी लोगों की पंचायत हुई. मीना ने परिवार वालों को रोनी की जिन हरकतों के बारे में बताया था, उस के बाद परिवार वालों को भी लगा कि अगर रोनी के दिल से मीना के लिए प्यार ही खत्म हो गया है तो ऐसे में यातना सहने के लिए बेटी को उस घर में छोड़ने से क्या फायदा. इसीलिए उन्होंने मीना को अपने साथ ले जाने के लिए कहा. लेकिन रोनी के पिता ने मीना को भेजने से मना कर दिया और रोनी को पूरे परिवार के सामने बहुत डांटाफटकारा.

नतीजा यह निकला कि रोनी को अपनी हरकतों पर पछतावा हुआ और उस ने दोनों परिवारों के सामने अपने किए पर शर्मिंदगी जताते हुए स्वीकार किया कि मीना ही उस की असली और इकलौती मोहब्बत है तथा उस की बेटी की मां भी है. उस दिन रोनी ने दोनों परिवारों के बीच वादा किया कि भविष्य में मीना को उस की तरफ से किसी तरह की शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा. अगर पतिपत्नी के बीच कोई छोटीमोटी प्रौब्लम होगी भी तो वे उसे खुद बैठ कर सुलझाएंगे, परिवार के दूसरे लोगों को शिकायतें सुनने का मौका नहीं मिलेगा. दोनों के बदले हुए व्यवहार से दोनों परिवारों ने सोचा कि शायद सुबह का भूला शाम को घर आ गया है. बेटी का टूटता घर बचने की आस में मीना के घर वाले वापस लौट गए.

लगा सब ठीक हो गया इस के बाद वक्त तेजी से बीतने लगा. मीना के घर वाले उस की गृहस्थी के बारे में फोन कर के पूछते रहते थे. लेकिन मीना ने परिवार वालों से कभी भी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी, जिस से उन्हें पता चलता कि रोनी उसे फिर से परेशान कर रहा है. वक्त बीता और साल 2020 शुरू हो गया. इसी बीच फरवरी में मीना के घर वाले यह जान कर खुशी से फूले नहीं समाए कि मीना फिर से गर्भवती है और रोनी के दूसरे बच्चे की मां बनने वाली है. इस के बाद उन्हें यकीन हो गया कि रोनी और मीना के बीच का प्यार मजबूत हो चुका है.

लेकिन 5 नंवबर को अचानक परिवार के लोगों को सूचना मिली कि मीना कारसिंगा में एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल हुई है और उसे अस्पताल में भरती कराया गया है. जब तक परिवार वहां पहुंचा, तब तक उस की मौत हो चुकी थी. इधर चुमी ताया (26) मूलरूप से कामले जिले की रहने वाली खूबसूरत और महत्त्वाकांक्षी युवती थी. वह पिछले 3 साल से रोनी की कंपनी में काम करती थी. यहीं पर रोनी उस की तरफ आकर्षित हुआ. दोनों के बीच प्यार हुआ और बाद में दोनों लिवइन में रहने लगे. चुमी को पता था कि कि रोनी शादीशुदा है और एक बच्ची का पिता भी. इस के बावजूद कुछ समय पहले रोनी के साथ उस ने गुपचुप तरीके से शादी भी कर ली. चुमी ताया धीरेधीरे रोनी पर दबाव बनाने लगी कि वह मीना को तलाक दे कर उसे सामाजिक रूप से अपनी पत्नी घोषित करे.

हालांकि रोनी जब से चुमी ताया के प्यार में डूबा था तभी से मीना के साथ उस के रिश्तों में कड़वाहट भर गई थी. लेकिन चुमी से शादी के बाद यह कड़वाहट एक जहरीले रिश्ते के रूप में बदल गई. रोनी लगातार मीना पर दबाव बनाने लगा कि वह एक मकान और कुछ पैसा ले ले लेकिन उसे तलाक दे दे. लेकिन मीना इस के लिए तैयार नहीं थी. इसीलिए रोनी ने मीना को अपनी जिंदगी से हटाने के लिए भाड़े के हत्यारों का सहारा ले कर उस की हत्या कराने की साजिश तैयार की. कारसिंगा में ही रोनी का एक फार्महाउस था, जहां वह अकसर अपनी दूसरी पत्नी चुमी ताया के साथ रहता था. रोनी ने हत्याकांड को इस तरह से अंजाम दिलाने की साजिश रची थी कि लोग इसे दुर्घटना समझ लें. मीना की हत्या के लिए उस ने अपने एक पुराने दोस्त कपवांग लेटी से संपर्क किया.

क्योंकि उसे पता था कि कपवांग विद्रोही संगठन एनएससीएन (यू) का पुराना कार्यकर्ता है और उस के पास पैसा ले कर किसी की हत्या करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं होगी. रोनी ने जब उस से कौन्ट्रैक्ट किलर की व्यवस्था करने के लिए कहा तो कापवांग ने कहा कि वह काम तो करा देगा, लेकिन इस के लिए 10 लाख रुपए लगेंगे. रोनी तैयार हो गया, लेकिन उस ने शर्त रख दी कि काम इस तरह होना चाहिए कि किसी को मीना की हत्या का पता न लगे बल्कि लोग इसे दुर्घटना समझें. कपवांग ने आश्वासन दिया कि ऐसा ही होगा. इस के बाद साजिश तैयार होने लगी. 27 अक्तूबर की शाम कपवांग लेटी लोवांग अपने साथ दाथांग सुयांग और ताने खोयांग को ले कर खोंसा जिले से राजधानी ईटागनर पहुंचा और वे तीनों होटल सू पिंसा में रुके.

28 अक्तूबर को रोनी उन से मिलने होटल पहुंचा और अपनी पत्नी को कपवांग के साथ मारने की योजना को अंतिम रूप दिया. बनाई गई योजना के अनुसार दाथांग सुयांग को इस हत्या को अंजाम दे कर दुर्घटना का रूप देना था. रोनी ने तय किया था कि इस काम के लिए वह 5 लाख रुपए एडवांस देगा. लिहाजा उसी दिन रोनी ने 5 लाख रुपए का नकद भुगतान कर दिया. बाकी की रकम काम होने पर 15 दिनों में 3 लाख और 2 लाख रुपए की 2 किस्तों में देना तय हुआ था. कपवांग और ताने खोयांग 30 अक्तूबर को खोंसा वापस चला गए. जबकि दाथांग अगले ही दिन वापस आ गया. रोनी ने जो साजिश तैयार की थी, उस के मुताबिक दाथांग को वारदात को अंजाम देने के लिए रोनी की पत्नी मीना का ड्राइवर बन कर रहना था.

साजिश का पहला कदम एक दिन मीना के ड्राइवर के रूप में काम करने के बाद उसे लगा कि काम को वह जितना आसान समझ रहा था उतना आसान नहीं है. इसीलिए 2 नवंबर को दाथांग ने रोनी से एक साथी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया. क्योंकि उसे लगा कि वह खुद मीना की हत्या करने में समर्थ नहीं होगा. रोनी ने फिर से कापवांग से फोन पर संपर्क कर के दाथांग की तरफ से एक और साथी उपलब्ध कराने की बात बताई तो विचारविमर्श के बाद कपवांग ने अपने दूसरे सहयोगी दामित्र खोयांग को इस साजिश को अंजाम देने के लिए ईटानगर के लिए रवाना कर दिया.

दामित्र खोयांग उस वक्त दोइमुख में किसी के यहां ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था. आदेश मिलते ही वह राजधानी ईटानगर पहुंच गया और रोनी से मिला. खोयांग के आ जाने पर 4 नवंबर की सुबह रोनी और दाथांग ने एक बार फिर उस रूट का जायजा लिया, जो कारसिंगा में ब्लौक पौइंट के पास था. यहीं पर उस ने मीना की हत्या कराने की योजना को अंजाम देने का प्लान तैयार किया था. उसी दिन रोनी ने एक बार फिर से पूरी योजना को अंजाम देने वाली हर बात को अंतिम रूप दिया और तय हुआ कि अगले दिन यानी 5 नवंबर, 2020 को मीना को ठिकाने लगाने की योजना को अंजाम दिया जाएगा.

जैसी योजना बनी थी, उसी के मुताबिक काम शुरू कर दिया गया. 5 नवंबर की सुबह रोनी जब अपने फार्महाउस में था, उस ने वहीं से मीना को फोन कर के कहा कि कारसिंगा में जो भूमि सरकार ने अधिग्रहित की है, उस के मुआवजे के मामले पर सरकारी विभाग में मीटिंग है. इसलिए वह ड्राइवर को साथ ले कर उस के पास आ जाए, जिस के बाद दोनों साथ चलेंगे. सुबह करीब 12 बजे बेटी को नौकरानी के पास छोड़ कर मीना इनोवा कार में ड्राइवर दाथांग के साथ कारसिंगा के लिए निकल पड़ी. जैसी कि योजना बनाई गई थी रास्ते में दाथांग ने बांगे तीनाली में पहले से इंतजार कर रहे अपने साथी दामित्र को साथ ले लिया. मीना के पूछने पर दाथांग ने बताया कि वह उस का दोस्त है और उसे भी कारसिंगा तहसील दफ्तर जाना है.

मीना दाथांग के साथ ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर बैठी थी जबकि दामित्र सब से पीछे की सीट पर बैठ गया था. जैसे ही उन की गाड़ी ने मंदिर (कूड़ा डंपिंग जोन) पार किया, दामित्र ने अपने साथ छिपा कर लाए हथौड़े से मीना पर पीछे से पहले सिर पर वार किया, उस के बाद ताबड़तोड़ उस के कंधों, कनपटी और गरदन के पीछे वार किए. इस काम में मुश्किल से 3 से 4 मिनट का समय लगा. लहूलुहान और अपने ही खून से कार की सीट पर सराबोर हुई मीना ने अगले चंद मिनटों में ही दम तोड़़ दिया. दामित्र को जब यकीन हो गया कि मीना मर चुकी है तो उस ने दाथांग से कह कर ब्लौक पौइंट के पास गाड़ी रुकवाई और जैसे गाड़ी में सवार हुआ था, वैसे ही चुपचाप उतर गया.

दाथांग ने गाड़ी को थोड़ा आगे बढ़ाया और उसे मोड़ के पास सड़क के बाएं किनारे तिरछा खड़ा कर के चाभी लगी छोड़ नीचे उतर गया. इस के बाद उस ने न्यूट्रल में खड़ी गाड़ी को जोर लगा कर धक्का दे दिया. गाड़ी खाई में लगभग 2 से 3 मीटर नीचे चली गई. लेकिन 3 मीटर नीचे जा कर टायर के नीचे एक बड़ा पत्थर आने से गाड़ी ज्यादा आगे नहीं जा सकी. इसलिए दुर्घटना साबित करने की थ्योरी कमजोर पड़ गई. पुलिस ने जब जांच की तो पाया कि न तो कार के कहीं से शीशे टूटे थे और न ही कहीं से गाड़ी में टूटफूट हुई थी. फिर भी गाड़ी में बीच की सीट पर बैठी मीना की मौत हो गई थी. निरीक्षण के दौरान पता चला कि कार में कहीं भी कोई अंदरूनी क्षति नहीं पहुंची थी.

पुलिस ने ड्राइवर दाथांग से जब पूछताछ की तो उस ने बताया था कि ब्रेक फेल होने के कारण गाड़ी खाई में लुढ़की थी. लेकिन पुलिस ने अपने मोटर एक्सपर्ट को बुला कर गाड़ी की जांच करवाई तो गाडी के ब्रेक सही पाए गए. पत्नी के चक्कर में बच्चा भी गया इसी के बाद पुलिस को दाथांग पर शक होने लगा और उसे हिरासत में ले लिया गया. बाद में दाथांग के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गई तो उस में कपवांग से ले कर दामित्र तक से बातचीत के रिकौर्ड मिले. हैरानी की बात यह थी कि दाथांग ने पुलिस पूछताछ में यह बात छिपा ली थी कि उन के साथ दामित्र भी था. पुलिस को दामित्र के मोबाइल फोन की जांच में मौके पर उस की मौजूदगी का सबूत मिल गया था. दोनों के फोन की काल डिटेल्स से पुलिस को कपवांग लेटी लोवांग और ताने खोयांग के इस साजिश से जुड़े होने के सबूत मिल गए.

मोबाइल फोन के जरिए इन सभी की कडि़यां जब रोनी लिशी से जुड़ी पाई गईं तो एकएक कर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती गई. जांच आगे बढ़ी तो पाया गया कि विजय बिस्वास जो मूलरूप से असम के नागांव का रहने वाला था, रोनी की इंफ्रा कंपनी में काम करता था. उसे इस हत्याकांड की साजिश की पूरी जानकारी थी. मीना की हत्या को जिस अनोखी साजिश से अंजाम दिया गया था, उस का खुलासा शायद ही होता, अगर मीना के परिजनों के खुल कर सामने आने और ईटानगर में लोगों ने ‘जस्टिस फौर मीना’ की मुहिम शुरू न की होती. इसीलिए पुलिस ने दबाव में आ कर गहन छानबीन करनी शुरू की. कडि़यों से कडि़यां जोड़ते हुए पुलिस इस साजिश के सूत्रधार और मीना के पति रोनी तक पहुंच गई और उसे गिरफ्तार कर लिया.

बाद में पुलिस ने चुमी ताया को भी गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि जांच में पाया गया कि उसे पूरी वारदात की जानकारी थी, भले ही वह इस वारदात में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थी. लेकिन उसी के उकसावे के कारण रोनी ने हत्या का कठोर फैसला लिया था. चुमी ताया के अलावा पुलिस ने इस हत्याकांड में विजय बिस्वास नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया. विजय रोनी की कंपनी में काम करते हुए रोनी का सब से वफादार और भरोसेमंद आदमी बन गया था. वह उस के निजी कामों को संभालता था. रोनी के कहने पर विजय ने ही 3 मोबाइल खरीद कर वारदात में शामिल दोनों हत्यारों दाथांग सुयांग, दामित्री खोयांग और हत्याकांड की सुपारी लेने वाले कपवांग लेटी लोवांग तक पहुंचाए थे.

पुलिस ने इन तीनों मोबाइल फोनों के साथ एक नहर में फेंके गए उस हथौडे़ को भी बरामद कर लिया, जिस से मीना की हत्या की गई थी. रोनी ने साजिश तो रची थी दूसरी पत्नी के लिए पहली पत्नी को रास्ते से हटाने की, लेकिन एक कत्ल के चक्कर में वह दूसरी हत्या के रूप में अपने अजन्मे बच्चे की हत्या का पाप भी करा बैठा.

—कहानी पुलिस की जांच व परिजनों के कथन पर आधारित

 

Love Crime : प्रेमिका का गला तब तक दबाया जब तक उसकी सासें थम नहीं जाएं

Love Crime : घरपरिवार से अलग स्वच्छंद जीवन जीने की इच्छुक लड़कियों का कमोबेश रश्मि जैसा ही हाल होता है. चिराग पटेल ने भले ही हत्या का अपराध किया, लेकिन उस की हत्या की भूमिका तभी बननी शुरू हो गई थी जब रश्मि ने जानबूझ कर शादीशुदा चिराग के साथ रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था. काश! रश्मि ने अपने पिता परिवार…

60 वर्षीय जयंतीभाई वनमाली कटारिया अपनी दोनों बेटियों तनु और रश्मि के साथ गुजरात के सूरत जिले के बारदोली कस्बे के रोहितफालिया इलाके में रहते थे. वह गांव के प्रतिष्ठित काश्तकार थे. परिवार संपन्न और इज्जतदार था. किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. उन की ख्वाहिश थी कि वह अपनी दोनों बेटियों को उच्चशिक्षा दिलाएं ताकि वे पढ़लिख कर समाज और बिरादरी में अपना एक अलग स्थान बनाएं. अपनी दोनों बेटियों के साथ वह बेटों जैसा व्यवहार करते थे. उन्होंने उन्हें अपनी तरफ से पूरी आजादी दे रखी थी. लेकिन जयंती भाई को यह पता नहीं था कि उन की आजादी एक दिन उन्हें बहुत भारी पड़ेगी. उन की बड़ी बेटी तो सरल स्वभाव की थी, लेकिन छोटी बेटी रश्मि काफी तेज और चंचल थी.

23 वर्षीय रश्मि कटारिया आधुनिक और ब्रौड माइंडेड युवती थी. वह जितनी शोख चंचल थी, उतनी ही सुंदर और स्मार्ट भी थी. फैशनपरस्त होने के साथसाथ वह पुराने दकियानूसी रस्मोरिवाजों को नहीं मानती थी. उस का कहना था कि जब तक खूबसूरती और जवानी है, एंजौय करो. शादीविवाह तो बंधन है, जिस की समय के साथ जरूरत पड़ती है. इसी वजह से रश्मि चिराग पटेल नाम के युवक के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी. 15 नवंबर, 2020 दीपावली का दूसरा दिन था. लोग खुशियां मना रहे थे. अपने जानपहचान वालों, नातेरिश्तेदारों को दीपावली की बधाइयों केसाथ गिफ्ट दे रहे थे. कटारिया परिवार भी इस सब में पीछे नहीं था.

उन्होंने भी अपनी बेटी रश्मि को गिफ्ट देने के लिए फोन कर के घर बुलाया. फोन रश्मि के साथ लिवइन में रहने वाले चिराग पटेल ने रिसीव किया और कहा, ‘‘अंकल रश्मि तो नहाने के लिए बाथरूम गई है.’’

‘‘ठीक है बेटा, नहाने के बाद तुम लोग घर आ जाना.’’ रश्मि के पिता जयंतीभाई कटारिया ने अनुरोध किया. दूसरी तरफ से संतोषजनक जवाब पाने के बाद जयंतीभाई कटारिया ने फोन रख दिया और उन के आने का इंतजार करने लगे. लेकिन पूरा दिन निकल जाने के बाद भी न तो बेटी रश्मि आई और न ही उस का कोई फोन आया. इस से उन्हें रश्मि की चिंता हुई. उन्होंने रश्मि और चिराग को कई बार फोन लगाया लेकिन कोई रिस्पौंस नहीं मिला. हर बार दोनों का फोन स्विच्ड औफ मिला. फिर आउट औफ कवरेज एरिया बताने लगा. बेटी की चिंता में जयंतीभाई कटारिया की रात जैसेतैसे बीत गई. पर सुबह होते ही उन्होंने रश्मि और चिराग के फोन फिर ट्राई किए. लेकिन नतीजा वैसा ही रहा. ऐसे

में कटारिया और उन के परिवार का धैर्य टूट गया. ऐसा कभी नहीं हुआ था कि रश्मि के मांबाप, बहन फोन करें और उस का उन्हें जवाब न मिले. दिन में एक 2 बार तो रश्मि का उन के साथ संपर्क हो ही जाता था. लंबी बातें भी हुआ करती थीं. भले ही उन की बेटी लंबे समय से एक गैरजाति वाले चिराग के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी, लेकिन परिवार के लोगों को उस के प्रति किसी प्रकार की नाराजगी नहीं थी. 17 नवंबर, 2020 को जब रश्मि की चिंता हद से गुजर गई तो जयंतीभाई कटारिया अपने भतीजे हीरेन कटारिया के साथ सुबहसुबह रश्मि के फ्लैट पर पहुंच गए. वहां उन्हें न तो रश्मि मिली और न ही चिराग पटेल मिला.

वहां सिर्फ उस की नौकरानी और रश्मि का 3 साल का बेटा मिला. पूछताछ में नौकरानी ने उन्हें बताया कि रश्मि और चिरागभाई कहीं बाहर घूमने गए हैं. नौकरानी से बातचीत करने केबाद जयंतीभाई कटारिया अपने नाती को साथ ले कर घर आ गए. नौकरानी और  पड़ोसियों ने जो बताया उसे ले कर उन का मन अशांत था. कुछ सवाल थे जो बारबार खटक रहे थे. उन का मानना था कि अगर रश्मि और चिराग बाहर घूमने गए थे तो बेटे को क्यों नहीं ले गए. इतने छोटे बच्चे को छोड़ कर मां कभी बाहर नहीं जाती. दूसरी बात यह थी कि उन दोनों के मोबाइल क्यों बंद थे. यह सब सोच कर उन का माथा ठनका तो उन्होंने अपनी जानपहचान और नातेरिश्तेदारों के यहां उन की तलाश शुरू कर दी.

जल्दी ही इस का नतीजा भी सामने आ गया. चिराग कहीं नहीं गया था, वह अपने रिश्तेदारों के यहां था. अगर कोई गया था तो वह थी रश्मि, उन की बेटी. उन्होंने इस बारे में जब चिराग से पूछा तो उस का कहना था कि रश्मि कहां गई, उसे नहीं पता. संदेह का सूत्र इस पर जयंतीभाई कटारिया परिवार का संदेह बढ़ गया. उन्होंने बिना किसी विलंब के 20 नवंबर को थाना बारदोली के थानाप्रभारी से मिल कर बेटी रश्मि की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाते हुए डीवाईएसपी रूपल सोलंकी को सारी बात बताई. साथ ही बेटी की तलाश करने का अनुरोध किया. जयंतीभाई कटारिया के अनुरोध पर डीवाईएसपी रूपल सोलंकी ने मामले को गंभीरता से लिया और बारदोली थानाप्रभारी को जांच के निर्देश दे दिए.

मामला एक बड़े किसान परिवार से जुड़ा और काफी जटिल था, जिसे सुलझाने के लिए सावधानी की जरूरत थी. इस के लिए थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ विचारविमर्श कर संदिग्ध चिराग को थाने बुला कर फौरी तौर पर पूछताछ की. चिराग ने जिस तरह रश्मि की गुमशुदगी में अनभिज्ञता जाहिर की, वह थानाप्रभारी और उन के सहायकों के गले नहीं उतरी. उन्हें दाल में कुछ काला नजर आ रहा था. इस के लिए थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ चिराग के जानपहचान और उस के परिवार की कुंडली खंगाली तो चिराग रडार पर आ गया. पुलिस ने चिराग को जब दूसरी बार पूछताछ के लिए थाने बुलाया तो वह घबरा गया और सच बोलने के सिवा उस के पास और कोई चारा नहीं बचा. उसे रश्मि की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठाना ही पड़ा.

चिराग के बयान और पुलिस जांच के अनुसार रश्मि की गुमशुदगी और लिवइन रिलेशनशिप की जो कहानी सामने आई, उस की पृष्ठभूमि काफी सनसनीखेज थी, जिसे जान कर लोगों का कलेजा मुंह को आ गया. 32 वर्षीय चिराग पटेल उसी तालुका बारदोली का रहने वाला था, जहां की रश्मि रहने वाली थी. उस के पिता का नाम सुरेशभाई पटेल था. सुरेशभाई की गिनती वहां के धनी और संपन्न किसानों में की जाती थी. उन की अच्छी उपजाऊ जमीन थी, जिस पर वह आधुनिक तरीके से खेती करवाते थे. तैयार होने पर उन की फसल सीधे शहर की बड़ी मंडियों में जाती थी.

स्वस्थ, सुंदर और महत्त्वाकांक्षी चिराग पटेल उन का एकलौता बेटा था, जिसे परिवार से खूब लाड़प्यार मिला था. पिता की तरह उसे भी खेतीबाड़ी से प्यार था. इसी के चलते उस ने अपनी पढ़ाई कृषि विज्ञान से पूरी की और घर आ कर पूरी तरह काश्तकारी संभाल ली. चिराग को अपने पैरों पर खड़ा देख परिवार वालों को उस की शादी की चिंता हुई तो उन्होंने उस के लिए लड़की की तलाश शुरू कर दी. उन्होंने अपनी जानपहचान और नातेरिश्तेदारों में उस की शादी की बात चलाई. फलस्वरूप उन्हें अपने ही रिश्तेदारी के बालोद गांव की रहने वाली सुंदर, सुशिक्षित, सुशील लड़की पसंद आ गई. उसी के साथ उन्होंने चिराग पटेल की शादी पूरे रस्मोरिवाज के साथ धूमधाम से कर दी.

चिराग अपनी शादी से बहुत खुश था. जल्दी ही वह एक बच्चे का पिता भी बन गया. पिता बन गया चिराग समय अपनी गति से चल रहा था. चिराग अपने परिवार में खुश था कि अचानक उस की जिंदगी में उस की पुरानी क्लासमेट रश्मि कटारिया दाखिल हो गई. खेती के कामों से शहर आतेजाते जब चिराग की नजर रश्मि से टकराई तो आधुनिक पोशाक में स्मार्ट और मौडर्न रश्मि को देख कर उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. यही हाल रश्मि का भी था. वह भी स्मार्ट और सुंदर चिराग को अचानक देख कर स्तब्ध रह गई. थोड़ी सी औपचारिकता के बाद दोनों खुल गए. उन्होंने अपने जीवन और दिल की बातें शेयर की और एकदूसरे के सामने जिंदगी की पूरी किताब खोल कर रख दी.

अपनी शादी और जीवनसाथी के बारे में रश्मि ने बताया कि उस ने अभी इस बारे में सोचा ही नहीं है. वैसे भी यह एक बेकार का काम है, क्योंकि उस के नजरिए से जीवन मौजमजे का नाम है. रश्मि की बेबाक बातें सुन कर चिराग उस की तरफ आकर्षित हो गया. उसे एक ऐसी ही सुंदर पार्टनर की जरूरत थी, जिस के साथ वह मौजमजा कर सके. यह सोच कर चिराग ने जब रश्मि की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो रश्मि ने भी देरी नहीं की. पहले दोनों में दोस्ती हुई और फिर उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब चिराग जबजब शहर जाता, अपने साथ रश्मि को भी ले कर जाता. दोनों शहर के होटलों में मौजमस्ती करते. मौलों में शौपिंग करते, घूमतेफिरते.

यह बात जानते हुए भी कि चिराग शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है, रश्मि कटारिया चिराग के प्यार में आकंठ डूब गई. वह उस के साथ आजादी से घूमतीफिरती. चिराग का रहनसहन और वैभव देख कर उसे अहसास हो रहा था कि उस के साथ उस का भविष्य और सपने दोनों सुरक्षित रहेंगे. इसी वजह से परिवार वालों के रोकने और समझाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ. रिलेशनशिप की शुरुआत चिराग के परिवार वालों को उस का रश्मि के साथ मिलनाजुलना पसंद नहीं था. इस के पहले कि वे चिराग को समझा कर रश्मि से अलग कर पाते, रश्मि लिवइन रिलेशन में रहने के लिए उन के बंगले पर आ गई और घरपरिवार वालों से कहा कि चिराग को वह अपना पति मानती है, उस से शादी करेगी.

इस बात को चिराग ने भी स्वीकार किया. उस का भी यही कहना था कि वह रश्मि को बहुत प्यार करता है, उस के बिना नहीं रह सकता. परिवार वालों को चिराग और रश्मि से यह उम्मीद नहीं थी. इस बात का परिवार और गांव वालों ने कड़ा विरोध किया. उन्होंने चिराग और रश्मि को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर उन दोनों ने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा तो उन्हें गांव में नहीं रहने दिया जाएगा. वह किसी दूसरे गांव में जा कर रहें. आखिरकार पत्नी, मां और गांव परिवार के विरोध के चलते चिराग और रश्मि को गांव छोड़ना पड़ा और वे वागेन तालुका सूरत आ कर वहां के एक लग्जरी अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट लेकर रहने लगे. लिवइन रिलेशनशिप के इस सफर को 5 साल कैसे बीत गए उन्हें पता ही नहीं चला.

इस बीच रश्मि एक स्वस्थ सुंदर बच्चे की मां बन चुकी थी. बीतते वक्त के साथ धीरेधीरे दोनों का पारिस्पारिक आकर्षण खत्म होने लगा. 5 सालों में चिराग के इश्क का भूत उतर चुका था. अब रश्मि उसे बोझ लगने लगी थी. वह उस से छुटकारा पाना चाहता था. ऐसे में रश्मि जब दोबारा गर्भवती हुई तो वह चिड़चिड़ा हो गया. जब यह बात चिराग की पत्नी और मां तक पहुंची तो वे आगबबूला हो गईं. दोनों ने रश्मि के फ्लैट पर पहुंच कर उन्हें आड़े हाथों लिया. खरीखोटी सुनाते हुए रश्मि के साथ मारपीट की, जिस से वह बुरी तरह डर गई थी. इस घटना से रश्मि को अपने और अपने बच्चे के भविष्य की चिंता सताने लगी.

उस का और बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो, इस के लिए रश्मि चिराग पर शादी का दबाव बनाने लगी, जो उसे मान्य नहीं था. दूसरी ओर रश्मि शादी को ले कर अड़ गई थी.  इस से दोनों के बीच कहासुनी होने लगी. कभीकभी स्थिति मारपीट तक भी पहुंच जाती थी. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद जब रश्मि ने शादी की बात उठाई तो दोनों के बीच तकरार बढ़ गई और चिराग आपा खो बैठा. गुस्से में वह रश्मि का गला पकड़ कर तब तक दबाता रहा जब कि उस के प्राण नहीं निकल गए. इस तरह उसे रश्मि से छुटकारा तो मिल गया, लेकिन अब वह उस के शव का क्या करे, यह उस की समझ में नहीं आ रहा था.

मिल ही गई कब्र की जगह काफी सोचविचार के बाद चिराग को अपनी ससुराल के गांव बालोद की याद आई, जहां सरकारी पाइप डालने का काम चल रहा था और गहरे गड्ढे खोदे गए थे. वहां पाइपलाइन किसानों के खेतों से जा रही थी. यह खयाल आते ही चिराग ने रश्मि का शव बैडशीट में लपेट कर अपनी कार  में डाला और बालोद गांव पहुंच गया. वहां उस ने एक जेसीबी मशीन के ड्राइवर से बात कर के रश्मि के शव को दफन करवा दिया और अपने रिश्तेदारों के यहां चला गया. चिराग से पूछताछ के बाद बारदोली पुलिस ने मामले की जानकारी बालोद पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को दी. घटनास्थल पर पहुंच कर अधिकारियों ने एफएसएल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन की सहायता से रश्मि कटारिया का शव बाहर निकलवाया.

शव को बाहर निकलवा कर उस का बारीकी से निरीक्षण किया और पोस्टमार्टम के लिए स्थानीय अस्पताल भेज कर चिराग पटेल और जेसीबी के ड्राइवर को हिरासत में ले कर जेल भेज दिया. पोसटमार्टम रिपोर्ट में रश्मि 4 महीने की गर्भवती पाई गई. पुलिस के अनुसार भले ही चिराग ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, लेकिन पुलिस उस के बयानों से संतुष्ट नहीं थी. उन का मानना था कि इस हत्याकांड में वह अकेला नहीं रहा होगा. परदे के पीछे और लोग भी हो सकते हैं. वे लोग कौन हैं, यह जांच का विषय है. चूंकि रश्मि कटारिया अनुसूचित जाति की थी, इसलिए आगे की जांच अनुसूचित जाति/जनजाति सेल के डीवाईएसपी भार्गव पंडया को सौंप दी गई.

Hindi Story : पत्नी ने साजिश रचकर पति को पहाड़ी से धक्का दिया

Hindi Story : एक मामूली परिवार की होते हुए भी अनल ने शीतल से न केवल शादी की, बल्कि उसे अपने करोड़ों का व्यवसाय संभालने के काबिल भी बना दिया. लेकिन शीतल ने अनल के साथ जो खतरनाक खेल खेला, उस से उस का सब कुछ छिन गया. लेकिन उस ने भी शीतल से…

‘‘मे रे दिल ने जो मांगा मिल गया, जो कुछ भी चाहा मिला.’’ शीतल उस हिल स्टेशन के होटल के कमरे में खुदबखुद गुनगुना रही थी.

‘‘क्या बात है शीतू, बहुत खुश नजर आ रही हो.’’ अनल उस के पास आ कर कंधे पर हाथ रखता हुआ बोला.

‘‘हां अनल, मैं आज बहुत खुश हूं. तुम मुझे मेरे मनपसंद के हिल स्टेशन पर जो ले आए हो. मेरे लिए तो यह सब एक सपने के जैसा था.

‘‘पिताजी एक फैक्ट्री में छोटामोटा काम करते थे. ऊपर से हम 6 भाईबहन. ना खाने का अतापता होता था ना पहनने के लिए ढंग के कपड़े थे. किसी तरह सरकारी स्कूल में इंटर तक पढ़ पाई. हम लोगों को स्कूल में वजीफे के पैसे मिल जाते थे, उन्हीं पैसों से कपड़े वगैरह खरीद लेते थे.

‘‘एक बार पिताजी कोई सामान लाए थे, जिस कागज में सामान था, उसी में इस पर्वतीय स्थल के बारे में लिखा था. तभी से यहां आने की दिली इच्छा थी मेरी. और आज यहां पर आ गई.’’ शीतल होटल के कमरे की बड़ी सी खिड़की के कांच से बाहर बनते बादलों को देखते हुए बोली.

‘‘क्यों पिछली बातों को याद कर के अपने दिल को छोटा करती हो शीतू. जो बीत गया वह भूत था. आज के बारे में सोचो और भविष्य की योजना बनाओ. वर्तमान में जियो.’’ अनल शीतल के गालों को थपथपाते हुए बोला.

‘‘बिलकुल ठीक है अनल. हमारी शादी को 9 महीने हो गए हैं. और इन 9 महीनों में तुम ने अपने बिजनैस के बारे में इतना सिखापढ़ा दिया है कि मैं तुम्हारे मैनेजर्स से सारी रिपोर्ट्स भी लेती हूं और उन्हें इंसट्रक्शंस भी देती हूं. हिसाबकिताब भी देख लेती हूं.’’ शीतल बोली.

‘‘हां शीतू यह सब तो तुम्हें संभालना ही था. 5 साल पहले मां की मौत के बाद पिताजी इतने टूट गए कि उन्हें पैरालिसिस हो गया. कंपनी से जुड़े सौ परिवारों को सहारा देने वाले खुद दूसरे के सहारे के मोहताज हो गए.

‘‘नौकरों के भरोसे पिताजी की सेहत गिरती ही जा रही थी. तुम नई थीं, इसीलिए पिताजी का बोझ तुम पर न डाल कर तुम्हें बिजनैस में ट्रेंड करना ज्यादा उचित समझा. पिताजी के साथ मेरे लगातार रहने के कारण उन की सेहत भी काफी अच्छी हो गई है. हालांकि बोल अब भी नहीं पाते हैं.

‘‘मैं चाहता हूं कि इस हिल स्टेशन से हम एक निशानी ले कर जाएं जो हमारे अपने लिए और उस के दादाजी के लिए जीने का सहारा बने.’’ अनल शीतल के पीछे खड़ा था. वह दोनों हाथों का हार बना कर गले में डालते हुए बोला.

‘‘वह सब बातें बाद में करेंगे. अभी तो सफर में बहुत थक गए हैं. खाना और्डर करो, खा कर आराम से सो जाएंगे. अभी तो 7 दिन हैं, खूब मौके मिलेंगे.’’ शीतल बोली.

‘‘वाह क्या नजारा है इस हिल स्टेशन का. कितना सुंदर लग रहा है उगता हुआ सुरज  होटल की इस 5वीं मंजिल से.’’ सुबह उठ कर उसी खिड़की के पास खड़ी हो कर शीतल बोली.

‘‘रात तो तुम बहुत जल्दी बहुत गहरी नींद सो गई थीं. मैं तुम्हें जगाने की कोशिशें ही करता रह गया.’’ अनल शीतल के साथ खड़े होते हुए बोला.

‘‘मैं बहुत थक गई थी. बिस्तर पर गिरते ही गहरी नींद आ गई.’’

‘‘चलो कोई बात नहीं, आज पूरा मजा उठा लेंगे. देखो, आज 5 विजिटिंग पौइंट्स पर चलना है. 9 बजे टैक्सी आ जाएगी. हम यहां से नाश्ता कर के निकलते हैं. लंच किसी सूटेबल पौइंट पर ले लेंगे.’’ अनल बोला.

‘‘हां, मैं तैयार होती हूं.’’ शीतल बोली.

‘‘सर, आप की टैक्सी आ गई है.’’ नाश्ते के बाद होटल के रिसैप्शन से फोन आया.

‘‘ठीक है हम नीचे पहुंचते हैं.’’ अनल बोला.

‘‘क्यों भैया, 7 दिन आप हमारे साथ रह सकोगे? हम चाहते हैं, पूरा हिल स्टेशन हमें आप ही घुमाओ.’’ शीतल टैक्सी में बैठते हुए बोली.

‘‘जी मैडम, मैं आप को सारी जगह दिखाऊंगा.’’ ड्राइवर बड़े अदब से बोला.

‘‘देखो भैया, सब जगह आराम से और अच्छे से घुमाना. आप की मनमाफिक बख्शीश दे कर जाऊंगी.’’ शीतल चहकते हुए बोली.

‘‘जी मैडम, टूरिस्ट की खुशी ही हमारे लिए सब से बड़ा ईनाम है.’’

‘‘आज तो तुम ने खूब अच्छा घुमाया.’’ शाम को टैक्सी से उतरते हुए अनल बोला.

‘‘घुमाया तो खूब, पर पैदल कितना चला दिया. पर्वतों पर हर स्पौट पर आधा किलोमीटर चढ़ना और उतरना अपने आप में बेहद थकाऊ काम है.’’ शीतल अनल के कंधे का सहारा ले कर टैक्सी से निकलते हुए बोली.

‘‘वैसे चलने का अपना ही मजा है.’’ अनल ने कहा.

‘‘जी साहब. मैं चलता हूं. सुबह जल्दी आ जाऊंगा, आप तैयार रहें.’’ कहते हुए ड्राइवर चला गया.

‘‘अनल, जब हम घूम कर लौट रहे थे तब उस संकरे रास्ते पर क्या एक्सीडेंट हो गया था? सारा ट्रैफिक जाम था. तुम देखने भी तो उतरे थे.’’ होटल के कमरे में घुसते हुए शीतल ने पूछा.

‘‘एक टैक्सी वाले से एक बुजुर्ग को हलकी सी टक्कर लग गई. बस उसी का झगड़ा चल रहा था. बुजुर्ग इलाज के लिए पैसे मांग रहा था. इसीलिए पूरा रास्ता जाम था.’’ अनल ने बताया. ‘‘ऐसा ही एक एक्सीडेंट हमारी जिंदगी में भी हुआ था, जिस से हमारी जिंदगी ही बदल गई.’’ अनल ने आगे जोड़ा.

‘‘हां मुझे याद है. उस दिन पापा मेरे रिश्ते की बात करने कहीं जा रहे थे. तभी सड़क पार करते समय तुम्हारे खास दोस्त वीर की स्पीड से आती हुई कार ने उन्हें टक्कर मार दी. जिस से उन के पैर की हड्डी टूट गई और वह चलने से लाचार हो गए.’’ शीतल बोली.

‘‘हां, और तुम्हारे पिताजी ने हरजाने के तौर पर तुम्हारी शादी वीर से करने की मांग रखी. इस से कम पर वह और कोई समझौता नहीं चाहते थे.’’

‘‘मेरा रिश्ते टूटने की सारी जवाबदारी वीर की ही थी. इसलिए हरजाना तो उसी को देना था ना.’’ शीतल अपने पिता की मांग को जायज ठहराते हुए बोली.

‘‘वीर तो बेचारा पहले से ही शादीशुदा था, वह कैसे शादी कर सकता था? मेरी मम्मी की मौत के बाद वीर की मां ने मुझे बहुत संभाला और पिताजी को पैरालिसिस होने के बाद तो वह मेरे लिए मां से भी बढ़ कर हो गईं.

‘‘कई मौकों पर उन्होंने मुझे वीर से भी ज्यादा प्राथमिकता दी. उस परिवार को मुसीबत से बचाने के लिए ही मैं ने तुम से शादी की. क्योंकि एक बिजनैसमैन के लिए बिना वजह कोर्टकचहरी के चक्कर लगाना संभव नहीं था.

‘‘मेरे बिजनैस की पोजीशन को देखते हुए कोई भी पैसे वाली लड़की मुझे मिल जाती. मगर मेरे मन में यह संदेह हमेशा से था कि शायद वह पिताजी की देखभाल उस तरह से न कर पाए जैसा मैं चाहता हूं. मैं खुद किसी गरीब घर की लड़की से शादी करने के पक्ष में था.

‘‘वीर के परिवार का एहसान तो मैं ताजिंदगी नहीं उतार सकता था. मगर तुम से शादी कर के उस का बोझ कुछ कम जरूर कर सकता था.’’ अनल बोला.

‘‘मतलब तुम्हें एक नौकरानी चाहिए थी जो बीवी की तरह रह सके.‘‘शीतल के स्वर में कुछ कड़वापन था.

‘‘बड़े सयानों के मुंह से सुना था जोडि़यां स्वर्ग में बनती हैं. मगर हमारी जोड़ी सड़क पर बनी. यू आर जस्ट ऐन एक्सीडेंटल वाइफ. लेकिन मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं हैं. मैं ने पिछले 9 महीनों में एक नई शीतल गढ़ दी है, जो मेरा बिजनैस हैंडल कर सकती है. बस एक ही ख्वाहिश और है जिसे तुम पूरा कर सकती हो.’’ अनल हसरतभरी निगाहों से शीतल की तरफ देखते हुए बोला.

‘‘अनल, पहाड़ों पर चढ़नेउतरने के कारण बदन दर्द से टूट रहा है. कोई पेनकिलर ले कर आराम से सोते हैं. वैसे भी सुबह 4 बजे उठना पड़ेगा सनराइज पौइंट जाने के लिए. यहां सूर्योदय साढ़े 5 बजे तक हो ही जाता है.’’ शीतल सपाट मगर चुभने वाले लहजे में बोली.

अनल अपना सा मुंह ले कर बिस्तर में दुबक गया.

‘‘वाह क्या सुंदर सीन है सनराइज का, मजा आ गया.’’ अनल सनराइज देख कर चहकता हुआ बोला. दरअसल वह माहौल को हलका करना चाहता था.

‘‘हां सचमुच ऐसा लगता है, जैसे कुदरत ने सिंदूरी रंग की कलाकारी कर शानदार पेंटिंग बनाई है.’’ ऐसा लगा शीतल भी रात की बातों को भुला कर आगे की यात्रा सुखद बनाना  चाहती थी.

‘‘वाह, ड्राइवर भैया धन्यवाद. इस सनराइज ने तो जिंदगी को अवस्मरणीय दृश्य दे दिया.’’ शीतल अपनी ही रौ में बोलती चली गई. आज ऐसी जगह ले चलो जो एकदम से अलग सा एहसास देती हो.’’

‘‘जी मैडम, यहां से 20 किलोमीटर दूर है. इस टूरिस्ट प्लेस की सब से ऊंची जगह. वहां से आप सारा शहर देख सकती हैं, करीब एक हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है.

‘‘वहां पर आप टेंट लगा कर कैंपिंग भी कर सकते है. यहां टेंट में रात को रुकने का अपना ही रोमांच है. वहां आप को डिस्टर्ब करने के लिए कोई नहीं होगा.’’ ड्राइवर ने उस जगह के बारे में बताया.

‘‘चलो ना अनल वहां पर. कितना मजा आएगा पहाड़ की सब से ऊंची चोटी पर हम अकेले एक टेंट में. कभी न भूल पाने वाला अनुभव होगा यह.’’ शीतल जिद करते हुए बोली.

‘‘और लोग भी तो होते होंगे वहां पर?’’ अनल ने पूछा.

‘‘सामान्यत: भीड़ वाले समय में 2 टेंटों के बीच लगभग सौ मीटर की दूरी रखी जाती है. लेकिन इस समय भीड़ कम है. चढ़ाई करते समय आप बोल देंगे तो वहां के लोग आप की इच्छानुसार आप का टेंट नो डिस्टर्ब वाले जोन में लगा देंगे. आप उन वादियों का अकेले में लुत्फ उठा पाएंगे.’’ ड्राइवर ने बताया.

‘‘चलो ना अनल. ऐसी जगह पर तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी.’’ शीतल जोर देते हुए बोली.

‘‘चलो भैया आज उसी टेंट में रुकते हैं.’’ अनल खुश होते हुए बोला.

लगभग एक घंटे के बाद वह लोग उस जगह पर पहुंच गए.

‘‘साहब, यहां से लगभग एक किलोमीटर आप को संकरे रास्ते से चढ़ाई करनी है.’’ ड्राइवर गाड़ी पार्किंग में लगाते हुए बोला.

‘‘अच्छा होता तुम भी हमारे साथ ऊपर चलते. एक टेंट तुम्हारे लिए भी लगवा देते.’’ अनल गाड़ी से उतरते हुए बोला.

‘‘नहीं साहब, मैं नहीं चल सकता. मैं आज अपने परिवार के साथ रहूंगा. यहां आप को टेंट 24 घंटे के लिए दिया जाएगा. उस में सभी सुविधाएं होती हैं. आप खाना बनाना चाहें तो सामान की पूरी व्यवस्था कर दी जाती है और मंगवाना चाहें तो ये लोग बताए समय पर खाना डिलीवर भी कर देते हैं. यहां कैंप फायर का अपना ही  मजा है. आप रात में कैंप फायर अवश्य जलाएं, इस से जंगली जानवरों का खतरा भी कम रहता है.’’ ड्राइवर ने बताया.

‘‘चलो शीतू ऊपर चढ़ते हैं.’’ अनल बोला.

‘‘कितना सुंदर लग रहा है. ऊपर की तो बात ही कुछ और होगी. यहां से जो निशानी ले कर जाएंगे, वह बेमिसाल होगी.’’ शीतल कनखियों से अनल की तरफ देखते हुए शरारत से बोली. जाते समय दोनों ने टेंट वाले को नो डिस्टर्ब जोन में टेंट लगाने के निर्देश दे दिए. दोपहर और रात के खाने के और्डर भी दे दिए. लगभग एक घंटे की चढ़ाई के बाद दोनों पहाड़ी की सब से ऊंची चोटी पर थे.

‘‘हाय कितना सुंदर लग रहा है. यहां से घर, पेड़, लोग कितने छोटेछोटे दिखाई पड़ रहे हैं. ऐसा लगता है जैसे नीचे बौनों की बस्ती हो. मन नाचने को कर रहा है,’’ शीतल खुश हो कर बोली, ‘‘दूर तक कोई नहीं है यहां पर.’’

‘‘अरे शीतू, संभालो अपने आप को ज्यादा आगे मत बढ़ो. टेंट वाले ने बताया है ना नीचे बहुत गहरी खाई है.’’ अनल ने चेतावनी दी.

‘‘यहां आओ अनल, एक सेल्फी इस पौइंट पर हो जाए.’’ शीतल बोली.

‘‘लो आ गया, ले लो सेल्फी.’’ अनल शीतल के नजदीक आता हुआ बोला.

‘‘वाह क्या शानदार फोटो आए हैं.’’ शीतल मोबाइल में फोटो देखते हुए बोली.

‘‘चलो तुम्हारी कुछ स्टाइलिश फोटो लेते हैं. फिर तुम मेरी लेना.’’

‘‘अरे कुछ देर टेंट में आराम कर लो. चढ़ कर आई हो, थक गई होगी.’’ अनल बोला.

‘‘नहीं, पहले फोटो.’’ शीतल ने जिद की, ‘‘तुम यह गौगल लगाओ. दोनों हथेलियों को सिर के पीछे रखो. हां और एक कोहनी को आसमान और दूसरी कोहनी को जमीन की तरफ रखो. वाह क्या शानदार पोज बनाया है.’’ शीतल ने अनल के कई कई एंगल्स से फोटो लिए.

‘‘अरे भाई अब तो बस करो कुछ शाम के लिए भी तो छोड़ दो.’’ अनल ने शीतल से अनुरोध किया.

‘‘बस, एक और शानदार मर्दाना फोटो हो जाए. अब तुम उस आखिरी सिरे पर रखे उस बड़े से पत्थर पर अपना पैर रखो. और मुसकराओ. वाह मजा आ गया एकदम से मौडल जैसे दिख रहे हो.

‘‘अब उसी चट्टान पर जूते के तस्मे बांधते हुए एक फोटो लेते हैं. अरे ऐसे नहीं. मुंह थोड़ा नीचे रखो. फोटो में फीचर्स अच्छे आने चाहिए. ओफ्फो…ऐसे नहीं बाबा. मैं आ कर बताती हूं. थोड़ा झुको और नीचे देखो.’’ शीतल ने निर्देश दिए. तस्मे बांधने के चक्कर में अनल कब अनबैलेंस हो गया पता ही नहीं चला. अनल का पैर चट्टान से फिसला और वह पलक झपकते ही नीचे गहरी खाई में गिर गया. एक अनहोनी जो नहीं होनी थी हो गई.

‘‘अनल…अनल…अनल…’’ शीतल जोरजोर से चीखने लगी. दूसरा टेंट लगभग 5 सौ मीटर दूर लगा था. वह सहायता के लिए उधर भागी. मगर उस टेंट वाले शायद पहले ही छोड़ कर जा चुके थे. टेंट वाले का नंबर उस के पास नहीं था. मगर उस के पास ड्राइवर का नंबर जरूर था. उस ने ड्राइवर को फोन लगाया.

‘‘भैया, अनल पैर फिसलने के कारण खाई में गिर गए हैं. कुछ मदद करो.’’ शीतल जोर से रोते हुए बोली.

‘‘क्या..?’’ ड्राइवर आश्चर्य से बोला, ‘‘यह तो पुलिस केस है. मैं पुलिस को ले कर आता हूं.’’

‘‘आप वहीं रुकिए, मैं नीचे आती हूं फिर पुलिस के पास चलते हैं.’’ शीतल बोली.

‘‘नहीं मैडम, इस में काफी टाइम लग जाएगा. आप वहीं रुकिए, मैं पुलिस को ले कर वहीं आता हूं इस से जल्दी मदद मिल जाएगी.’’ ड्राइवर बोला. लगभग 2 घंटे बाद ड्राइवर पुलिस को ले कर वहां पहुंच गया.

‘‘ओह तो यहां से पैर फिसला है उन का.’’ इंसपेक्टर ने जगह देखते हुए शीतल से पूछा.

‘‘जी.’’ शीतल ने जवाब दिया.

‘‘आप दोनों ही आए थे, इस टूर पर या साथ में और भी कोई है?’’ इंसपेक्टर ने प्रश्न किया.

‘‘जी, हम दोनों ही थे. वास्तव में यह हमारा डिलेड हनीमून शेड्यूल था.’’ शीतल ने बताया.

‘‘देखिए मैडम, यह खाई बहुत गहरी है. इस में गिरने के बाद किसी के भी बचने की संभावनाएं शून्य रहती हैं. हमें आज तक किसी के भी जिंदा रहने की सूचना नहीं मिली है. सुना है, इस खाई के बाद एक बस्ती है, जिस में जंगली आदिवासी रहते हैं, जो लोगों को देखते ही उन पर आक्रमण कर उन्हें मार डालते हैं.

‘‘इस खाई के अंतिम छोर तक तो किसी भी आदमी का पहुंचना नामुमकिन है. फिर भी हम जिस ऊंचाई तक आदमी के जीवित होने की संभावना होती है उतनी ऊंचाई तक रस्सों की मदद से अपनी सहायता टीम को पहुंचाते हैं.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

‘‘जल्दी कीजिए सर, यहां पर सूर्यास्त भी जल्दी होता है.’’ लगातार रोती हुई शीतल ने अनुरोध किया.

‘‘आप के घर में और कौनकौन हैं?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

‘‘अनल के पिताजी हैं सिर्फ. जोकि पैरालिसिस से पीडि़त हैं और बोलने में असमर्थ.’’ शीतल ने बताया, ‘‘इन का कोई भी भाई या बहन नहीं हैं. 5 साल पहले माताजी का स्वर्गवास हो गया था.’’

‘‘तब आप के पिताजी या भाई को यहां आना पड़ेगा.’’ इंसपेक्टर बोला

‘‘मेरे परिवार से कोई भी इस स्थिति में नहीं है कि इतनी दूर आ सके.’’ शीतल बोली.

‘‘आप के हसबैंड का कोई दोस्त भी है या नहीं.’’ इंसपेक्टर ने झुंझला कर पूछा.

‘‘हां, अनल का एक खास दोस्त है वीर है. उन्हीं ने हमारी शादी करवाई थी.’’ शीतल ने जवाब दिया.

‘‘मुझे उन का नंबर दीजिए, मैं उन से बात करता हूं.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

शीतल ने मोबाइल स्क्रीन पर नंबर डिसप्ले कर के इंसपेक्टर को दे दिया.

‘‘हैलो, मिस्टर वीर,’’ कहते हुए इंसपेक्टर दूर निकल गया.

‘‘सर लगभग 60 मीटर तक सर्च कर लिया मगर कोई दिखाई नहीं पड़ा. अब अंधेरा हो चला है, सर्चिंग बंद करनी पड़ेगी.’’ सर्च टीम के सदस्यों ने ऊपर आ कर बताया.

‘‘ठीक है मैडम, आप थाने चलिए और रिपोर्ट लिखवाइए. कल सुबह सर्च टीम एक बार फिर भेजेंगे.’’ इंसपेक्टर ने कहा, ‘‘वैसे कल शाम तक मिस्टर वीर भी आ जाएंगे.’’

दूसरे दिन शाम के लगभग 4 बजे वीर पहुंच गया. बोला, ‘‘सर मेरा नाम वीर है. मुझे आप का फोन मिला था, अनल के एक्सीडेंट के बारे में.’’ वीर ने इंसपेक्टर साहब को अपना परिचय दिया.

‘‘जी मिस्टर वीर, मैं ने ही आप को फोन किया था. हमारे थाने में आप के दोस्त अनल की पहाड़ी से गिरने की रिपोर्ट दर्ज हुई है. फ्रैंकली स्पीकिंग इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद जिंदा रहने की संभावना कम है. अगर कोई चमत्कार हो जाए तो अलग बात है.

‘‘हम ने 2 बार एप्रोचेबल फाल तक सर्च टीमें भेजी हैं, मगर अब तक कुछ पता नहीं चला.’’ इंसपेक्टर ने बता कर पूछा, ‘‘वैसे आप के दोस्त के और उन की पत्नी के आपसी संबंध कैसे हैं?’’

‘‘अनल और शीतल की शादी को 9 महीने हो चुके हैं और अनल ने मुझ से आज तक ऐसी कोई बात नहीं कही, जिस से लगे कि दोनों के बीच कुछ एब्नार्मल है.’’ वीर ने इंसपेक्टर को बताया.

‘‘मतलब उन के बीच सब कुछ सामान्य था और अनल कम से कम आत्महत्या नहीं कर सकता था.’’ इंसपेक्टर ने निष्कर्ष निकाला.

‘‘जी, अनल किसी भी कीमत पर आत्महत्या नहीं कर सकता था. उस का बिजनैस 2 साल के बाद एक बार फिर काफी अच्छा चलने लगा था. सब से बड़ी बात वह इस का श्रेय अपने लेडी लक मतलब शीतल को दिया करता था.’’ वीर ने बताया.

‘‘और आप की भाभीजी मतलब शीतलजी के बारे में क्या खयाल है आपका?’’ इंसपेक्टर ने अगला प्रश्न किया.

‘‘जी, वो एक गरीब घर से जरूर हैं मगर उन की बुद्धि काफी तीक्ष्ण है. अनल की इच्छानुसार शादी के मात्र 9 महीने के अंदर ही उन्होंने बिजनैस की बारीकियों पर अच्छी पकड़ बना ली है. उन की त्वरित निर्णय क्षमता के तो सब मुरीद हैं. अनल भी अपने आप को चिंतामुक्त एवं हलका महसूस करता था.’’ वीर ने बताया.

‘‘आप के कहने का आशय यह है कि हत्या या आत्महत्या का कोई कारण नहीं बनता. यह एक महज दुर्घटना ही है.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

‘‘जी मेरे खयाल से ऐसा ही है.’’ वीर ने अपने विचार व्यक्त किए.

‘‘देखिए, आप के बयानों के आधार पर हम इस केस को दुर्घटना मान कर समाप्त कर रहे हैं. यदि भविष्य में कभी लाश से संबंधित कोई सामान मिलता है तो शिनाख्त के लिए आप को बुलाया जा सकता है. उम्मीद है, आप सहयोग करेंगे.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

‘‘जी बिलकुल.’’

‘‘वीर भैया, अनल की आत्मा की शांति के लिए सभी पूजापाठ पूरे विधिविधान से करवाइए. मैं नहीं चाहती अनल की आत्मा को किसी तरह का कष्ट पहुंचे.’’ शहर पहुंचने पर भीगी आंखों के साथ शीतल ने हाथ जोड़ कर कहा.

‘‘जी भाभीजी आप निश्चिंत रहिए, उत्तर कार्य के सभी काम वैसे ही होंगे जैसा कि आप चाहती हैं.’’ वीर शोक सभा में उपस्थित लोगों के सामने बोला, ‘‘अनल न सिर्फ मेरा दोस्त था बल्कि मेरे भाई से भी बढ़ कर था. मुझे बचाने के लिए उस ने जो बलिदान दिया, उसे मैं भूला नहीं हूं.’’

‘‘आज अनल के उत्तर कार्य भी पूरे हो गए भाभीजी. मैं आप को एक बात बताना चाहता था. दरअसल, करीब 6 महीने पहले अनल ने एक बीमा पौलिसी ली थी. उस पौलिसी की शर्तों के अनुसार अनल की प्राकृतिक मौत होने पर 5 करोड़ और दुर्घटना में मृत्यु होने पर 10 करोड़ रुपए मिलने वाले हैं. यदि आप कहें तो इस संदर्भ में काररवाई करें.’’ वीर विवरण देते हुए बोला.

‘‘वीर भाई साहब, अनल इतना अच्छा और चलता हुआ बिजनैस छोड़ गए हैं. उसी से काफी अच्छी आय हो जाती है. और आप जिस बीमे के बारे में बात कर रहे हैं, उस के विषय में मैं पहले से जानती हूं और अपने वकीलों से इस बारे में बातें भी कर रही हूं.’’ शीतल ने रहस्योद्घाटन किया.

‘‘जी बहुत अच्छा. फिर भी कोई जरूरत पड़े तो मुझे बोलिएगा.’’ वीर चलतेचलते बोला. शीतल ने बताया कि पिताजी की देखभाल करने वाला नौकर अपने काम पर ठीक से ध्यान नहीं दे रहा है. पिताजी को न समय पर खाना देता है न दवाइयां. उन की हालत गिरती जा रही है. ऐसे में वह महीने 2 महीने से ज्यादा जीवित रह पाएंगे. इसलिए वह चाहती है कि अंतिम समय में पिताजी की देखभाल खुद करे. शीतल ने यह बात कार्यक्रम के लगभग 10 दिन बाद वीर से कही जो पिताजी की कुशलक्षेम पूछने आया था.

‘‘मैं चाहती हूं कि पिताजी के अंतिम समय में मैं ही उन की देखभाल करूं.’’ शीतल ने आंखों में आंसू लिए भावनात्मक संवाद जोड़ा.

‘‘मगर भाभीजी नौकर पिछले 5 सालों से अंकलजी की बहुत अच्छे से सेवा कर रहा है.’’ वीर ने आश्चर्य से कहा.

‘‘हां, पर परिवार वाले होते हुए एक नौकर सेवा करे, यह तो उचित नहीं होगा ना.’’ शीतल ने तर्क दिया.

‘‘ठीक है भाभीजी, जैसा आप उचित समझें.’’

‘‘और भाईसाहब, आप अनल की बीमा पौलिसी के बारे में बता रहे थे, उस के क्लेम के लिए क्या कंडीशन रहेगी?’’ शीतल ने पूछा.

‘‘भाभीजी, चूंकि अभी तक अनल की बौडी नहीं मिली है, अत: कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हमें कुछ समय इंतजार करना होगा. शायद कम से कम 2 साल. उस के बाद उस पर्वतीय क्षेत्र के थाने से केस समाप्त होने के प्रमाणपत्र के बाद ही हम क्लेम कर पाएंगे.’’ वीर ने अपनी जानकारी के हिसाब से बताया.

‘‘ओह किसी गरीब के साथ ऐसी दुर्घटना घट जाए तो बेचारा बिना सहायता के ही मर जाए. आप बीमा कंपनी में जा कर कुछ लेदे कर क्लेम सेटल करवाइए न.’’ शीतल ने वीर से अनुरोध किया.

‘‘जी ठीक है, मैं कोशिश करता हूं.’’ वीर ने जवाब दिया.

‘‘और आप उस नौकर को समझा कर हटा दीजिए.’’ शीतल जोर देते हुए बोली.

‘‘ठीक है, आप उसे मेरे घर पर भेज दीजिए. मैं वहीं उस का हिसाब कर दूंगा.’’ वीर ने जवाब दिया.

अनल का स्वर्गवास हुए 45 दिन बीत चुके थे. अब तक शीतल की जिंदगी सामान्य हो गई थी. धीरेधीरे उस ने घर के सभी पुराने नौकरों को निकाल कर नए नौकर रख लिए थे. हटाने के पीछे तर्क यह था कि वे लोग उस से अनल की तरह नरम व पारिवारिक व्यवहार की अपेक्षा करते थे. जबकि शीतल का व्यवहार सभी के प्रति नौकरों जैसा व कड़ा था. नए सभी नौकर शीतल के पूर्व परिचित थे. इस बीच शीतल लगातार वीर के संपर्क में थी तथा बीमे की पौलिसी को जल्द से जल्द इनकैश करवाने के लिए जोर दे रही थी. शीतल की जिंदगी में बदलाव अब स्पष्ट दिखाई देने लगा था. अनल के साथ हफ्ते दस दिन में मनोरंजन क्लब जाने वाली शीतल अब समय काटने के लिए नियमित क्लब जाने लगी थी. उस ने कई किटी क्लब भी इसी उद्देश्य के साथ जौइन कर लिए थे.

ऐसे ही एक दिन क्लब से वह रात 12 बजे लौटी. कार से उतरते हुए उसे घर की दूसरी मंजिल पर किसी के खड़े होने का अहसास हुआ. उस ने ध्यान से देखने की कोशिश की मगर धुंधले चेहरे के कारण कुछ समझ में नहीं आ रहा था. आश्चर्य की बात यह थी कि जिस गैलरी में वह शख्स खड़ा था, वह उस के ही बैडरूम की गैलरी थी. और वह ऊपर खड़ा हो कर बाहें फैलाए शीतल को अपनी तरफ आने का इशारा कर रहा था. शीतल अपने बैडरूम की तरफ भागी, मगर वह बाहर से उसी प्रकार बंद था जैसे वह कर के गई थी. दरवाजा बाहर से बंद होने के बावजूद कोई अंदर कैसे जा सकता है, यह सोच कर वह गैलरी की तरफ गई. गैलरी की तरफ जाने वाला दरवाजा भी अंदर से लौक था.

शीतल ने सोचा शायद कोई चोर होगा, अत: वह सुरक्षा के नजरिए से अपने साथ बैडरूम में रखी अनल की रिवौल्वर ले कर गैलरी में गई. मगर वहां कोई नहीं था. शीतल को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था. उस ने खुद अपनी आंखों से उस व्यक्ति को देखा था, जो बाहें फैलाए उसे अपनी तरफ बुला रहा था. इतनी जल्दी कोई कैसे गायब हो सकता है. उसे ऊपर आते समय रास्ते में कोई मिला भी नहीं, क्योंकि आनेजाने के लिए सिर्फ एक ही सीढियां थीं. इस के साथ ही बैडरूम उसी तरह से लौक था जैसे वह छोड़ गई थी. फिर कैसे कोई गैलरी तक आ सकता है? उस ने चौकीदार को आवाज दी.

‘‘ऊपर कौन आया था?’’ चौकीदार से पूछा.

‘‘नहीं मैडम, ऊपर तो क्या आप के जाने के बाद बंगले में कोई नहीं आया.’’ चौकीदार ने जवाब दिया. सुबह जैसे ही शीतल की नींद खुली, उसे रात की घटना याद आ गई. वह तुरंत उठ कर गैलरी में गई. उस ने अनुमान लगाया गैलरी में 2 संभावित रास्तों से आया जा सकता है. एक या तो नीचे से कोई अतिरिक्त सीढ़ी लगाए या छत पर से रस्सा डाल कर कोई नीचे आए. अगर कोई सीढि़यां लगा कर ऊपर आया, तो गैलरी के नीचे की कच्ची जमीन पर उस के निशान जरूर आए होंगे. और अगर छत के द्वारा नीचे आया है तब भी रस्से के कुछ सबूत मौजूद होंगे. शीतल उठ कर दोनों प्रमाण ढूंढने गई. मगर उसे निराशा ही हाथ लगी.

उस ने क्लब में उतनी ही ड्रिंक ली थी जितना वह रोज लेती थी. हो सकता है ड्रिंक की स्ट्रौंगनैस कुछ ज्यादा रही हो और इसी वजह से उसे कुछ अतिरिक्त खुमार हो गया हो और उसी कारण यह गलतफहमी हुई हो. इस तरह की बातें सोच कर वह अपने रोज के कामों में लग गई और मैनेजर्स से रिपोर्ट लेने लगी. शाम को शीतल पूरी तरह चौकन्नी थी. वह कल जैसी गलती दोहराना नहीं चाहती थी. बंगले से निकलते समय उस ने खुद अपने बैडरूम को लौक किया और चौकीदार को लगातार राउंड लेने की हिदायत दी. लौटने में उसे कल जितना ही समय हो गया. हालांकि वह जल्दी लौटना चाहती थी, लेकिन फ्रैंड्स के अनुरोध के कारण उसे देरी हो गई. उस ने ड्रिंक भी आज रोजाना की अपेक्षा कम ही ली.

आज क्लब से निकलते समय उसे न जाने क्यों अंदर ही अंदर एक अनजाना सा डर लग रहा था. उस का दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था. मगर ऊपर से वह कुछ भी जाहिर न होने देने का प्रयास कर रही थी. कार से उतरते ही उस ने नजरें उठा कर अपने बैडरूम की गैलरी में देखा. पर आज वहां कोई नहीं था. ओह तो कल सचमुच वह मेरा वहम था. सोच कर वह मन ही मन मुसकराते हुए बंगले के अंदर घुसी. वह आगे कदम बढ़ा ही रही थी कि उस के मोबाइल की घंटी बज उठी.

‘‘हैलो..’’

‘‘मेरे दिल ने जो मांगा मिल गया, मैं ने जो भी चाहा मिल गया…’’ दूसरी तरफ से किसी पुरुष के गुनगुनाने की आवाज आ रही थी.

‘‘कौन है?’’ शीतल ने तिलमिला कर पूछा.

जवाब में वह व्यक्ति वही गीत गुनगुनाता रहा. शीतल ने झुंझला कर फोन काट दिया और आए हुए नंबर की जांच करने लगी. मगर स्क्रीन पर नंबर डिसप्ले नहीं हो रहा था. उसे याद आया यह तो वही पंक्तियां थीं, जो वह उस हिल स्टेशन पर होटल में अनल के सामने बुदबुदा रही थी. कौन हो सकता है यह व्यक्ति? मतलब होटल के कमरे में कहीं गुप्त कैमरा लगा था जो उस होटल में रुकने वाले जोड़ों की अंतरंग तसवीरें कैद कर उन्हें ब्लैकमेल करने के काम में लिया जाता होगा. लेकिन जब उन्हें उस की और अनल की ऐसी कोई तसवीर नहीं मिली तो इन पंक्तियों के माध्यम से उस का भावनात्मक शोषण कर ब्लैकमेल कर रुपए ऐंठना चाहते होंगे.

शीतल बैडरूम में जाने के लिए सीढि़यां चढ़ ही रही थी कि एक बार फिर से मोबाइल की घंटी बज उठी. इस बार उस ने रिकौर्ड करने की दृष्टि से फोन उठा लिया. फिर वही आवाज और फिर वही पंक्तियां. उस ने फोन काट दिया. मगर फोन काटते ही फिर घंटी बजने लगती. बैडरूम का लौक खोलने तक 4-5 बार ऐसा हुआ. झुंझला कर शीतल ने मोबाइल ही स्विच्ड औफ कर दिया. उसे डर था कि यह फोन उसे रात भर परेशान करेगा और वह चैन से सोना चाहती थी. शीतल कपड़े चेंज कर के आई और लाइट्स औफ कर के लेटी ही थी कि उस के बैडरूम में लगे लैंडलाइन फोन पर आई घंटी से वह चौंक गई. यह तो प्राइवेट नंबर है और बहुत ही चुनिंदा और नजदीकी लोगों के पास थी. क्या किसी परिचित के यहां कुछ अनहोनी हो गई. यही सोचते हुए उस ने फोन उठा लिया.

फोन उठाने पर फिर वही पंक्तियां कानों में पड़ने लगीं. शीतल बुरी तरह से घबरा गई. एसी के चलते रहने के बावजूद उस के माथे पर पसीना उभर आया. नहीं यह होटल वाले की नहीं, बल्कि निकाले गए किसी नौकर की शरारत है. उस ने निश्चय किया कि वह सुबह उठ कर पुलिस में शिकायत करेगी. मगर प्रश्न यह है कि होटल में अनल के सामने बोली गईं पंक्तियां किसी नौकर को कैसे पता चलीं. फोन रख कर वह सोच ही रही थी की एक बार फिर लैंडलाइन की कर्कश घंटी बजी. उसी का फोन होगा और यह रात भर इसी तरह परेशान करेगा, सोच कर उस ने लैंडलाइन फोन का भी प्लग निकाल कर डिसकनेक्ट कर दिया. फोन डिसकनेक्ट कर के वह मुड़ी ही थी कि उस की नजर बैडरूम की खिड़की पर लगे शीशे की तरफ गई.

शीशे पर किसी पुरुष की परछाई दिख रही थी, जो कल की ही तरह बाहें फैलाए उसे अपनी तरफ बुला रहा था. वह जोरों से चीखी और बैडरूम से निकल कर नीचे की तरफ भागी. चेहरे पर पानी के छीटें पड़ने से शीतल की आंखें खुलीं.

‘‘क्या हुआ?’’ उस ने हलके से बुदबुदाते हुए पूछा.

घर के सारे नौकर और चौकीदार शीतल को घेर कर खड़े थे और उस का सिर एक महिला की गोद में था.

‘‘शायद आप ने कोई डरावना सपना देखा और चीखते हुए नीचे आ गईं और यहां गिर कर बेहोश हो गईं.’’ चौकीदार ने बताया.

‘‘सपना…? हां शायद,’’ कुछ सोचते हुए शीतल बोली, ‘‘ऐसा करो, वह नीचे वाला गेस्टरूम खोल दो, मैं वहीं आराम करूंगी.’’

दरअसल, शीतल इतना डर चुकी थी कि वह वापस अपने बैडरूम में जाना नहीं चाहती थी.

सुबह उठ कर शीतल पुलिस में शिकायत करने के बारे में सोच ही रही थी कि एक नौकर ने आ कर सूचना दी.

‘‘मैडम, वीर सर आप से मिलाना चाहते हैं.’’

‘‘वीर? अचानक? इस समय?’’ शीतल मन ही मन बुदबुदाते हुई बोली.

‘‘अरे भैया, अचानक बिना सूचना के इस समय…’’ ड्राइंगरूम में प्रवेश करते हुए शीतल बोली.

‘‘नमस्ते भाभीजी. क्या बात है आप की तबीयत ठीक नहीं है क्या? मैं आप को फोन लगा रहा था, मगर आप का फोन बंद आ रहा था. आप का हाल जानने चला आया.’’ वीर बिना किसी औपचारिकता के बोला.

‘‘ओह शायद रात में उस की बैटरी खत्म हो गई हो.’’ शीतल बैठते हुए बोली.

उसे याद आया कि मोबाइल तो उस ने स्वयं ही बंद किया हुआ है. मगर वह असली बात वीर को बताना नहीं चाहती थी.

‘‘भाभीजी जैसा कि आप ने कहा था मैं ने इंश्योरेंस कंपनी के औफिसर्स से बात की है. चूंकि यह केस कुछ पेचीदा है फिर भी वह कुछ लेदे कर केस निपटा सकते हैं.’’ वीर ने कहा.

‘‘कितना क्या और कैसे देना पड़ेगा? हमारी तरफ से कौनकौन से पेपर्स लगेंगे?’’ शीतल ने शांत भाव से पूछा.

‘‘हमें उस हिल स्टेशन वाले थाने से पिछले तीन केस की ऐसी रिपोर्ट निकलवानी होगी, जिस में लिखा होगा उस खाई में गिरने के बाद उन लोगों की लाशें नहीं मिलीं. यही हमारे केस सेटलमेंट का सब से बड़ा आधार होगा, जो यह सिद्ध करेगा कि बौडी मिलने की संभावनाएं नहीं है.

‘‘इस काम के लिए अधिकारियों को मिलने वाली राशि का 25 परसेंट मतलब ढाई करोड़ रुपए देना होगा. यह रुपए उन्हें नगद देने होंगे. कुछ पैसा अभी पेशगी देना होगा बाकी क्लेम सेटल होने के बाद. चूंकि बात मेरे माध्यम से चल रही है अत: पेमेंट भी मेरे द्वारा ही होगा.’’ वीर ने बताया.

‘‘ढाई करोड़ऽऽ..’’ शीतल की आंखें चौड़ी हो गईं, ‘‘यह कुछ ज्यादा नहीं हो जाएगा?’’ वह बोली.

‘‘देखिए भाभीजी, अगर हम वास्तविक क्लेम पर जाएंगे तो सालों का इंतजार करना होगा. शायद कम से कम 7 साल. फिर उस के बाद कोर्ट का अप्रूवल. फिर भी कह नहीं सकते उस समय इस कंपनी के अधिकारियों की पोजीशन क्या रहे. सब कुछ खोने से बेहतर है, थोड़ा कुछ दे कर ज्यादा पा लिया जाए.’’ वीर ने अपना मत रखा.

‘‘आप क्या चाहते हैं, इस डील को स्वीकार कर लिया जाए?’’ शीतल ने पूछा.

‘‘जी मेरे विचार से बुद्धिमानी इसी में है.’’ वीर बोला, ‘‘अभी हमें सिर्फ 25 लाख रुपए देने हैं. ये 25 लाख लेने के बाद इंश्योरेंस औफिस एक लेटर जारी करेगा, जिस के आधार पर हम उस हिल स्टेशन वाले थाने से पिछले 3 केस की केस हिस्ट्री देंगे.

‘‘इस हिस्ट्री के आधार पर कंपनी हमारे क्लेम को सेटल करेगी और 10 करोड़ का चैक जारी करेगी. उस चैक की फोटोकौपी देख कर हम अधिकारियों को बाकी अमाउंट का बेयरर चैक जारी करेंगे और हमारे अकाउंट में इंश्योरेंस कंपनी का चैक डिपोजिट होने के बाद हम उन्हें नगद पैसा दे कर अपना चैक वापस ले लेंगे.’’ वीर ने पूरी योजना विस्तार से समझाई.

‘‘ठीक है 1-2 दिन में सोच कर बताती हूं. 25 लाख का इंतजाम करना भी आसान नहीं होगा.’’ शीतल बोली.

‘‘अच्छा भाभीजी, मैं चलता हूं.’’ वीर उठते हुए नमस्कार की मुद्रा बना कर बोला. शीतल की तीक्ष्ण बुद्धि यह समझ गई की वीर दोस्ती के नाम पर धोखा दे रहा है. और हो न हो, यह वही शख्स है जो उसे रातों में डरा रहा है. यह मुझे डरा कर सारा पैसा हड़पना चाहता है. मैं ऐसा नहीं होने दूंगी और इसे रंगेहाथों पुलिस को पकड़वाऊंगी. बहुत ही कमीना है. शीतल मन ही मन बुदबुदाते हुए बोली. उस ने तत्काल पुलिस से शिकायत करने का इरादा त्याग दिया. रोजाना की तरह आज भी लगभग 8 बजे शाम को वह क्लब जाने के लिए निकली. आज शीतल बेफिक्र थी, क्योंकि उसे पता चल चुका था कि पिछले दिनों हो रही घटनाओं के पीछे किस का हाथ है. अब उस का डर निकल चुका था. उस ने वीर को सबक सिखाने की योजना पर भी काम चालू कर दिया था.

बंगले की गली से निकल कर जैसे ही वह मुख्य सड़क पर आने को हुई तो कार की हैडलाइट सामने खड़े बाइक सवार पर पड़ी. उस बाइक सवार की शक्ल हूबहू अनल के जैसी थी. अनल…अनल कैसे हो सकता है. ओहो तो वीर ने उसे डराने के लिए यहां तक रच डाला कि अनल का हमशक्ल रास्ते में खड़ा कर दिया. अपने आप से बात करते हुए शीतल बोली,  ‘‘हद है कमीनेपन की.’’

‘‘जी मैडम, कुछ बोला आप ने?’’ ड्राइवर ने पूछा.

‘‘नहीं कुछ नहीं. चलते रहो.’’ शीतल बोली.

‘‘मैडम, मैं कल की छुट्टी लूंगा.’’ ड्राइवर बोला.

‘‘क्यों?’’ शीतल ने पूछा.

‘‘मेरी पत्नी को झाड़फूंक करवाने ले जाना है.’’ ड्राइवर बोला, ‘‘उस पर ऊपर की हवा का असर है.’’

‘‘अरे भूतप्रेत, चुड़ैल वगैरह कुछ नहीं होता. फालतू पैसा मत बरबाद करो.’’ शीतल ने सीख दी.

‘‘नहीं मैडम, अगर मरने वाले की कोई इच्छा अधूरी रह जाए तो वह इच्छापूर्ति के लिए भटकती रहती है. और भटकने वाली आत्मा भी किसी अपने की ही रहती है. जितनी परेशानी हमें होती है, उतनी ही परेशानी उन्हें भी होती है. अत: उन को भी मुक्त करा दिया जाना चाहिए.’’ ड्राइवर बोला.

‘‘अधूरी इच्छा?’’ बोलने के साथ ही शीतल को याद आया कि अनल की मौत भी तो एक अधूरी इच्छा के साथ हुई है. तो अभी जो दिखाई पड़ा, वह अनल ही था? अनल ही साए के माध्यम से उसे अपने पास बुला रहा था? उस के प्राइवेट नंबर पर काल कर रहा था? पिछले 12 घंटों से जीने की हिम्मत बटोरने वाली शीतल पर एक बार फिर डर का साया छाने लगा था. क्लब की किसी भी एक्टिविटी में उस का दिल नहीं लगा. आज वह इस डर से क्लब से जल्दी निकल गई कि दिखाई देने वाला व्यक्ति कहीं सचमुच अनल तो नहीं. अभी कार क्लब के गेट के बाहर निकली ही थी कि शीतल की नजर एक बार फिर बाइक पर बैठे अनल पर पड़ी, जो उसे बायबाय करते हुए जा रहा था. लेकिन इस बार उस ने रंगीन नहीं एकदम सफेद कपड़े पहने थे.

‘‘ड्राइवर उस बाइक का पीछा करो.’’ पसीने में नहाई शीतल बोली. उस की आवाज अटक रही थी घबराहट के मारे.

‘‘बाइक? कौन सी बाइक मैडम?’’ ड्राइवर ने पूछा.

‘‘अरे, वही बाइक जो वह सफेद कपड़े पहने आदमी चला रहा है.’’ शीतल कुछ साहस बटोर कर बोली.

‘‘मैडम मुझे न तो कोई बाइक दिखाई पड़ रही है, न कोई इस तरह का आदमी. और जिस तरफ आप जाने का बोल रही हैं, वह रास्ता तो श्मशान की तरफ जाता है. आप तो जानती ही हैं, मैं अपने घर में इस तरह की एक परेशानी से जूझ रहा हूं. इसीलिए इस वक्त इतनी रात को मैं उधर जाने की हिम्मत नहीं कर सकता.’’ ड्राइवर ने जवाब दिया.

‘‘क्या सचमुच तुम को कोई आदमी, कोई बाइक दिखाई नहीं दी.’’ शीतल ने पूछा.

‘‘जी मैडम, मैं सच कह रहा हूं.’’ ड्राइवर ने जवाब दिया.

अब शीतल का डर और भी अधिक बढ़ गया. वह समझ चुकी थी, उसे जो दिखाई दे रहा है वह अनल का साया ही है. अब उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह पंक्तियों की आवाज भी अनल की ही थी. क्या चाहता है अनल का साया उस से? क्या वह उस के माध्यम से अपनी अपूरित इच्छा पूरी करना चाहता है? या यह काम वीर ही उस की दौलत हथियाने के लिए कर रहा है. लेकिन वीर को उस होटल वाली पंक्तियों के बारे में कैसे पता चला? शीतल अभी यह सब सोच ही रही थी कि कार बंगले के उस मोड़ पर आ गई, जहां उस ने जाते समय अनल को बाइक पर देखा था. उस ने गौर से देखा उस मोड़ पर अभी भी एक बाइक पर कोई खड़ा है. अबकी बार कार की हैडलाइट सीधे खड़े हुए आदमी के चेहरे पर पड़ी.

उसे देख कर शीतल का चेहरा पीला पड़ गया. उसे लगा जैसे उस का खून पानी हो गया है, शरीर ठंडा पड़ गया है. वह अनल ही था. वही सफेद कपड़े पहने हुए था.

‘‘देखो भैया, उस मोड़ पर बाइक पर एक आदमी खड़ा है सफेद कपड़े पहन कर.’’ डर से कांपती हुई शीतल बोली.

‘‘नहीं मैडम, जिसे आप सफेद कपड़ों में आदमी बता रहीं हैं वो वास्तव में एक बाइक वाली कंपनी के विज्ञापन का साइन बोर्ड है जो आज ही लगा है.’’ ड्राइवर ने कहा और गाड़ी बंगले की तरफ मोड़ दी. ड्राइवर की बात सुन कर फुल स्पीड में चल रहे एयर कंडीशन के बावजूद शीतल को इतना पसीना आया कि उस के पैरों में कस कर बंधी सैंडल में से उस के पंजे फिसलने लगे, कदम लड़खड़ाने लगे. वह लड़खड़ाते कदमों से ड्राइवर के सहारे बंगले में दाखिल हुई. और ड्राइंगरूम के सोफे  पर बैठ गई. वह सोच ही रही थी कि अपने बैडरूम में जाए या नहीं. तभी शीतल अचानक बजी डोरबेल की आवाज से डर गई.

रात के समय चौकीदार मेन गेट का ताला अंदर से लगा देता है. ऐसे में यदि किसी को बंगले में प्रवेश करना हो तो उसे डोरबेल बजा कर गेट खुलवाना पड़ता था. शीतल के तो बंगले का माहौल तो वैसे ही डरावना था, उस का डरना और चौंकना स्वाभाविक था. कुछ सामान्य हुआ दिल फिर से जोरों से धड़कने लगा. बदन में सनसनी की एक लहर दौड़ गई. वह किसी अनहोनी की आशंका से पसीनेपसीने होने लगी. शीतल उठ कर बाहर जाना नहीं चाहती थी. वैसे भी अनहोनी की आशंका से उस की हिम्मत भी जवाब दे चुकी थी. वह ड्राइंगरूम की खिड़की से देखने लगी.

चौकीदार ने मेन गेट पर बने स्लाइडिंग विंडो से देखने की कोशिश की, मगर उसे कोई दिखाई नहीं दिया. अत: वह छोटा गेट खोल कर बाहर देखने लगा. ज्यों ही उस ने गेट खोला शीतल को सामने के लैंपपोस्ट के नीचे खड़ा अनल दिखाई दिया. इस बार उस ने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे और वह दोनों बाहें फैलाए हुए था. चौकीदार उसे देखे बिना ही सड़क पर अपनी लाठी फटकारने लगा और जोरों से विसलिंग करने लगा. इस का मतलब था कि चौकीदार को अनल दिखाई नहीं पड़ा. इसीलिए वह उस से बात न कर के जमीन पर लाठी फटकार कर अपनी ड्यूटी की खानापूर्ति कर रहा था. ड्राइवर अनल के दिखाई न देने की बात का झूठ बोल सकता है, मगर चौकीदार तो इस घटना के बारे में कुछ जानता ही नहीं था. उसे भी अनल दिखाई नहीं पड़ा. मतलब अनल सचमुच भूत…ओह नो.

शीतल सोचने लगी उस दिन अगर उस की इच्छापूर्ति कर देती तो शायद अनल इस रूप में नहीं आता और उसे इस तरह डर कर नहीं रहना पड़ता. कल ड्राइवर के साथ वह भी उस झाड़फूंक करने वाले ओझा के पास जाएगी. पुलिस से शिकायत करने से कुछ नहीं होगा. क्योंकि पुलिस तो जिंदा लोगों को पकड़ सकती है. भूतप्रेत और आत्माओं को नहीं. शीतल अभी पूरी तरह से निर्णय ले भी नहीं पाई थी कि मोबाइल पर आई इनकमिंग काल की रिंग से डर कर वह दोहरी हो गई. उस के हाथपैर कांपने लगे. बदन एक बार फिर पसीने से नहा गया. वह जानती थी की इस समय फोन करने वाला कौन होगा.

उस ने हिम्मत कर के मोबाइल की स्क्रीन पर देखा. इस बार किसी का नंबर डिसप्ले हो रहा था. नंबर अनजाना जरूर था, मगर यह नंबर उस के लिए एक प्रमाण बन सकता है. यही सोच कर उस ने फोन उठा लिया. उसे विश्वास था कि उसे फिर वही पंक्तियां सुनने को मिलेंगी. लेकिन उस का अनुमान गलत निकला.

‘‘हैलो शीतू?’’ उधर से आवाज आई.

‘‘क..क..कौन हो तुम?’’ शीतल बहुत हिम्मत कर के अपनी घबराहट पर नियंत्रण रखते हुए बोली.

‘‘तुम्हें शीतू कौन बुला सकता है. कमाल हो गया, तुम अपने पति की आवाज तक नहीं पहचान पा रही हो. अरे भई, मैं तुम्हारा पति अनल बोल रहा हूं.’’ उधर से आवाज आई.

‘‘तु..तु…तुम तो मर गए थे न?’’ शीतल ने हकलाते हुए पूछा.

‘‘हां, मगर मेरी वह अधूरी मौत थी, इट वाज जस्ट ऐन इनकंपलीट डेथ. क्योंकि मैं अपनी एक अधूरी इच्छा के साथ मर गया था. इस कारण मुझे तुम से मिलने वापस आना पड़ा.’’ अनल बोला.

‘‘तुम अपनी इच्छापूर्ति के लिए सीधे घर पर भी आ सकते थे. मुझे इस तरह परेशान करने की क्या जरूरत है?’’ शीतल सहमे हुए स्वर में बोली.

‘‘देखो शीतू, मैं अब आत्मा बन चुका हूं और आत्मा कभी भी उस जगह पर नहीं जाती, जहां पर भगवान रहते हैं. पिताजी ने बंगला बनवाते समय हर कमरे में भगवान की एकएक मूर्ति लगाई थी. यही मूर्तियां मुझे तुम से मिलने से रोकती हैं. लेकिन मैं तुम से आखिरी बार मिल कर जाना चाहता हूं. बस मेरी आखिरी इच्छा पूरी कर दो.’’ उधर से अनल अनुरोध करता हुआ बोला.

‘‘मगर एक आत्मा और शरीर का मिलन कैसे होगा?’’ शीतल ने पूछा.

‘‘मैं एक शरीर धारण करूंगा, जो सिर्फ तुम को दिखाई देगा और किसी को नहीं. जैसे आज ड्राइवर व चौकीदार को दिखाई नहीं दिया.’’ अनल ने जवाब दिया.

‘‘इस बात की क्या गारंटी है कि तुम अपनी इच्छा पूरी होने के बाद चले जाओगे, मुझे कोई नुकसान नहीं पहुंचाओगे.’’ शीतल ने अपनी बात रखी.

‘‘मैं वादा करता हूं शीतू…कि मुझे जो चाहिए वह मिल जाएगा तो तुम्हारी जिंदगी से सदासदा के लिए चला जाऊंगा.’’ अनल ने शीतल को आश्वस्त किया.

‘‘ठीक है, बताओ कहां मिलना है?’’ शीतल ने पूछा, ‘‘मैं भी इस डरडर के जीने वाली जिंदगी से परेशान हो गई हूं.’’ शीतल ने कहा.

‘‘शहर के बाहर सुनसान पहाड़ी पर जो टीला है, उसी पर मिलते हैं, आखिरी बार.’’ अनल बोला,  ‘‘दोपहर 12 बजे.’’

‘‘ठीक है मैं आती हूं.’’ शीतल बोली, ‘‘लेकिन वादा करो आज की रात मुझे चैन से सोने दोगे.’’

‘‘मैं वादा करता हूं.’’ उधर से आवाज आई. शीतल अब निश्चिंत हो गई. वह सोचने लगी, इस स्थिति से कैसे निपटा जाए. अगर वह सचमुच एक आत्मा हुई तो..? अरे उस ने खुद ने ही तो बता दिया है कि जहां भगवान होते हैं, वहां वह ठहर ही नहीं सकता. मतलब भगवान को साथ ले जाना होगा. और अगर वह खुद कोई फ्रौड हुआ, ब्लैकमेलर हुआ तो? तभी उसे याद आया अनल के पास एक लाइसेंसी रिवौल्वर है. अनल ने उसे चलाने का तरीका भी बताया था. उसी रिवौल्वर को मैं अपनी आत्मरक्षा के लिए साथ ले जाऊंगी. शीतल ने निर्णय लिया. आज शीतल भरपूर गहरी नींद सोई.

सुबह उठ कर उस ने अपने दोनों हाथों की कलाइयों, बाजुओं, गले यहां तक कि कमर में भी भगवान के फोटो वाली लौकेट पहन लिए, ताकि वह आत्मा उसे छूने से पहले ही समाप्त हो जाए. साथ ही उस ने अपनी भौतिक सुरक्षा के लिए रिवौल्वर भी अपने पर्स में रख ली. ड्राइवर आज छुट्टी पर था. उस ने खुद गाड़ी चलाने का निर्णय लिया. वह निर्धारित समय से 15 मिनट पहले ही सुनसान पहाड़ी पर पहुंच गई. नाम के अनुरूप जगह वाकई सुनसान थी. लेकिन अनल उस से भी पहले से वहां पहुंचा हुआ था.

‘‘ऐसा लगता है, तुम सुबह से ही यहां आ गए हो.’’ शीतल अनल की तरफ देखते हुए बोली.

‘‘शीतू, मैं तो रात से ही तुम्हारे इंतजार में बैठा हूं.’’ अनल बोला, ‘‘आखिर हूं तो आत्मा ही न?’’

अनल के इस जवाब से शीतल के शरीर में सिहरन सी दौड़ गई.

‘‘कौन सी इच्छा पूरी करना चाहते हो अनल?’’ शीतल अपने आप को संभालती हुई बोली.

‘‘बस एक ही इच्छा है, जो मैं मर कर भी नहीं जान पाया…’’ अनल थोड़ा रुकता हुआ बड़ी संजीदगी से बोला, ‘‘…कि तुम ने मुझे उस ऊंची पहाड़ी से धक्का क्यों दिया? इस का जवाब दो, इस के बाद मैं सदासदा के लिए तुम्हारी जिंदगी से दूर चला जाऊंगा.’’

‘‘हां, तुम्हें यह जवाब जानने का पूरा हक है. और यह सुनसान जगह उस के लिए उपयुक्त भी है. अनल तुम तो मेरी पारिवारिक स्थिति अच्छी तरह से जानते ही हो. मैं बचपन से बहनों के उतारे हुए पुराने कपड़े और बचीखुची रोटियों के दम पर ही जीवित रही हूं. लेकिन किस्मत ने मुझे उस मोड़ पर ला कर खड़ा कर दिया, जहां मेरे चारों और खानेपीने और पहनने ओढ़ने की बेशुमार चीजें बिखरी पड़ी थीं.

‘‘यह सब वे खुशियां थीं जिस का इंतजार मैं पिछले 23 साल से कर रही थी. एक तुम थे कि मुझे मां बनाने पर तुले थे. और मैं जानती थी, एक बार मां बनाने के बाद मेरी सारी इच्छाएं बच्चे के नाम पर कुरबान हो जातीं. और यह भी संभव था कि एक बच्चे के 3-4 साल का होने के बाद मुझ से दूसरे बच्चे की मांग की जाती.

‘‘अब तुम ही बताओ मेरी अपनी सारी इच्छाओं का क्या होता? क्या बच्चे और परिवार के नाम पर मेरी ख्वाहिशें अधूरी नहीं रह जातीं?

‘‘मैं अपनी इच्छाओं को किसी के साथ भी बांटना नहीं चाहती थी. न तुम्हारे साथ न बच्चों के साथ. मैं भरपूर जिंदगी जीना चाहती हूं सिर्फ अपने और अपने लिए.

‘‘उस पहाड़ी को देखते ही मैं ने मन ही मन योजना बना ली थी. इसी कारण स्टाइलिश फोटो के नाम पर ऐसा पोज बनवाया, जिस से मुझे धक्का देने में आसानी हो.’’

शीतल ने अपनी योजना का खुलासा किया, ‘‘मैं अब तक इस बात को भी अच्छी तरह से समझ चुकी हूं कि तुम कोई आत्मा नहीं हो. लेकिन मैं तुम्हें इसी पल आत्मा में तब्दील कर दूंगी.’’ कहते हुए शीतल ने अपने पर्स में से रिवौल्वर निकाल ली. और हां तुम्हारी लाश पुलिस को मिल जाएगी, तो मुझे बीमे का क्लेम भी आसानी से मिल जाएगा.’’ शीतल ने आगे जोड़ा.

‘‘देखो शीतल, दोबारा ऐसी गलती मत करो. तुम्हारे पीछे पुलिस यहां पर पहुंच ही चुकी है.’’ अनल शीतल को चेताते हुए बोला.

‘‘मूर्ख, मुझे छोटा बच्चा समझ रखा है क्या? तुम कहोगे पीछे देखो और मैं पीछे देखूंगी तो मेरी पिस्तौल छीन लोगे.’’ शीतल कातिल हंसी हंसते हुए बोली. शीतल गोली चलाती, इस से पहले ही उस के पैर के निचले हिस्से पर किसी भारी चीज से प्रहार हुआ.

‘‘आ आ आ मर गई… ’’ कहते हुए शीतल जमीन पर गिर गई और हाथों से रिवौल्वर छूट गई. उस ने पीछे पलट कर देखा तो सचमुच में पुलिस खड़ी थी और साथ में वीर भी था.

‘‘आप का कंफेशन लेने के लिए ही यह ड्रामा रचा गया था मैडम. इस सारे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कर ली गई है. अनल ने कपड़ों में 3-4 स्पाइ कैमरे लगा रखे थे.’’ इंसपेक्टर बोला, ‘‘आप को कुछ जानना है?’’

‘‘हां इंसपेक्टर, मैं यह जानना चाहती हूं कि अनल का भूत कैसे पैदा किया गया? वह मेरी गैलरी में कैसे चढ़ा और उतरा? वह मेरे अलावा किसी और को दिखाई क्यों नहीं दिया?’’ शीतल ने अपनी जिज्ञासा रखी.

‘‘यह वास्तव में ठीक उसी तरह का शो था जैसा कि कई शहरों में होता है. लाइट एंड साउंड शो के जैसा लेजर लाइट से चलने वाला. इस की वीडियो अनल व वीर ने ही बनाई थी और इस का संचालन आप के बंगले के सामने बन रही एक निर्माणाधीन बिल्डिंग से किया जाता था.’’ इंसपेक्टर ने बताया, ‘‘और आप के ड्राइवर और चौकीदार तो बेचारे इस योजना में शामिल हो कर आप के साथ नमकहरामी नहीं करना चाहते थे. लेकिन जब उन्हें पुलिस थाने बुलाया और पूरा मामला समझाया गया तो वह साथ देने को तैयार हो गए. ड्राइवर की आज की छुट्टी भी इसी पटकथा का एक हिस्सा है.’’

‘‘पहाड़ी पर इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी अनल बच कैसे गया?’’ शीतल ने हैरानी से पूछा.

‘‘यह सारी कहानी तो मिस्टर अनल ही बेहतर बता सकेंगे.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

‘‘शीतल, तुम ने अपनी योजना को बखूबी अंजाम दिया, मगर तुम से एक गलती हो गई. तेजी से नीचे गिरने के लिए जितने प्रेशर की जरूरत पड़ती है, लड़की होने के कारण तुम उतना प्रेशर लगा नहीं पाई. इस का परिणाम यह निकला कि मुझे जिस तेजी से नीचे गिरना चाहिए था, मैं गिरा नहीं.

‘‘बस ढलान होने के कारण लेटी कंडीशन में लुढ़कता रहा. और लगभग 50 मीटर लुढ़कने के बाद खाई में उगे एक पेड़ पर अटक गया. इतना लुढ़कने और कई छोटेबड़े पत्थरों से टकराने के कारण मैं बेहोश हो गया .

‘‘दूसरी चालाकी या मूर्खता तुम ने यह की कि तुम ने मुझे जिस स्थान से धक्का दिया था, उस से लगभग 100 मीटर दूर तुम ने पुलिस को घटनास्थल बताया. तुम चाहती थी कि मेरी लाश किसी भी स्थिति में न मिले.

‘‘पहले दिन पुलिस तुम्हारे बताए स्थान पर ढूंढती रही, मगर अंधेरा होने के कारण चली गई. लेकिन दूसरे दिन पुलिस ने उस पूरे इलाके में सर्चिंग के लिए 6 सर्चिंग पार्टियां लगा दीं. उन्हें मैं एक पेड़ पर अटका हुआ बेहोश हालत में दिखाई दिया. चूंकि यह स्थान तुम्हारे बताए गए स्थान से काफी दूर और अलग था, अत: पुलिस को तुम पर शक पहले दिन से ही हो गया था. और वह मेरे बयान लेना चाहती थी. पुलिस ने तुम्हें बताए बिना मुझे अस्पताल में भरती करवा दिया. कुछ समय बेहोश रहने के बाद मैं कोमा में चला गया.

‘‘वीर के बयानों के आधार पर और पिताजी की जवाबदारी देखते हुए तुम्हें वहां से जाने दिया गया. लगभग एक महीने के बाद मुझे होश आया और मैं ने अपना बयान दिया. तुम से गुनाह कबूल करवाना मुश्किल था, इसीलिए पुलिस से मिल कर यह नाटक करना पड़ा.’’ अनल ने बताया.

‘‘चलो, अब समझ में आ गया भूत जैसी कोई चीज नहीं होती. मुझे इस बात की तो खुशी होगी कि मैं जेल में कम से कम उन  अभावों में तो नहीं रहूंगी, जिन अभावों से मैं बचपन से गुजरी हूं.’’ शीतल बोली.

‘‘मैं ने तुम से वायदा किया था कि आज के बाद हम कभी नहीं मिलेंगे तो यह हमारी आखिरी मुलाकात होगी. मेरी अनुपस्थिति में  पिताजी का खयाल रखने के लिए बहुतबहुत धन्यवाद.’’ अनल हाथ जोड़ते हुए बोला.

 

UP News : परेशान प्रेमिका ने प्रेमी के सिर पर सिलेंडर मारकर की हत्या

UP News : सीमा की शादी हो जाने के बाद नीरज को उस से दूरी बना लेनी चाहिए थी. लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया बल्कि वह उस की ससुराल तक जाने लगा. एक दिन उस ने सीमा के साथ जोरजबरदस्ती करने की कोशिश की तो सीमा भी विकराल हो गई. इस के बाद…

नीरज बनसंवर कर घर से जाने लगा, तो उस के भाई धीरज ने उसे टोका, ‘‘नीरज इतनी रात को तुम कहां जा रहे हो? क्या कोई जरूरी काम है या फिर किसी की शादी में जा रहे हो?’’

‘‘भैया, मेरे दोस्त के घर भगवती जागरण है. मैं वहीं जा रहा हूं.’’ नीरज बोला.

फिर नीरज ने कलाई पर बंधी घड़ी पर नजर डाली और बोला, ‘‘भैया, अभी रात के साढ़े 9 बजे हैं. मैं 12 बजे तक लौट आऊंगा.’’ कहते हुए नीरज घर से बाहर चला गया. नीरज उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर शहर की सुरेखापुरम कालोनी में रहता था. धीरज और उस की पत्नी नीरज के इंतजार में रात 12 बजे तक जागते रहे. जब वह घर नहीं आया तो उन्हें चिंता हुई. वे दोनों घर के अंदरबाहर कुछ देर चहलकदमी करते रहे, फिर धीरज ने अपने मोबाइल फोन से नीरज को फोन किया. पर उस का फोन बंद था. धीरज ने कई बार फोन मिलाया, लेकिन हर बार फोन बंद ही मिला. रात 2 बजे तक वह नीरज के इंतजार में जागता रहा. उस के बाद उस की आंख लग गई.

अभी सुबह का उजाला ठीक से फैला भी नहीं था कि धीरज का दरवाजा किसी ने जोरजोर से पीटना शुरू किया. अलसाई आंखों से धीरज ने दरवाजा खोला तो सामने एक अनजान व्यक्ति खड़ा था. धीरज ने उस से पूछा, ‘‘आप कौन हैं और दरवाजा क्यों पीट रहे हैं?’’

उस अनजान व्यक्ति ने अपना परिचय तो नहीं दिया. लेकिन यह जरूर बताया कि उस का भाई नीरज डंगहर मोहल्ले में मीना किन्नर के घर के पास गंभीर हालत में पड़ा है. उस ने घर का पता बताया था और खबर देने का अनुरोध किया था, सो वह चला आया. भाई के घायल होने की जानकारी पा कर धीरज घबरा गया. उस ने अड़ोसपड़ोस के लोगों को जानकारी दी और फिर उन को साथ ले कर डंगहर मोहल्ले में मीना किन्नर के घर के पास पहुंच गया. उस समय वहां भीड़ जुटी थी. धीरज ने अपने भाई नीरज को मरणासन्न स्थिति में देखा तो वह घबरा गया. उस का सिर फटा हुआ था, जिस से वह लहूलुहान था. लग रहा था जैसे उस के सिर पर किसी ने भारी चीज से हमला किया था.

उस ने थाना कटरा पुलिस को इस की जानकारी दी फिर सहयोगियों के साथ नीरज को इलाज के लिए निजी डाक्टर के पास ले गया. लेकिन डाक्टर ने हाथ खड़े कर लिए और पुलिस केस बता कर सदर अस्पताल ले जाने की सलाह दी. यह बात 28 नवंबर, 2020 की सुबह 8 बजे की है. जीवित होने की आस में धीरज अपने भाई नीरज को सदर अस्पताल मिर्जापुर ले गया. डाक्टरों ने नीरज को देखते ही मृत घोषित कर दिया. भाई की मृत्यु की बात सुन कर धीरज फफक कर रोने लगा. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने सूचना थाना कटरा पुलिस को दी. सूचना पाते ही प्रभारी निरीक्षक रमेश यादव पुलिस बल के साथ सदर अस्पताल आ गए. उन्होंने धीरज को धैर्य बंधाया और घटना के संबंध में पूछताछ की.

धीरज ने बताया कि वह सुरेखापुरम कालोनी में रहता है. उस का भाई नीरज बीती रात साढ़े 9 बजे यह कह कर घर से निकला था कि वह दोस्त के घर जागरण में जा रहा है. लेकिन सुबह उसे उस के घायल होने की जानकारी मिली. तब उस ने उसे सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

‘‘क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे भाई पर कातिलाना हमला किस ने किया है?’’ श्री यादव ने पूछा.

‘‘सर, मुझे कुछ भी पता नहीं है.’’ धीरज ने जवाब दिया.

पूछताछ के बाद श्री यादव ने नीरज के शव का बारीकी से निरीक्षण किया. नीरज की उम्र 32 वर्ष के आसपास थी. उस के सिर पर किसी ठोस वस्तु से प्रहार किया गया था, जिस से उस का सिर फट गया था. संभवत: सिर में गहरी चोट लगने के कारण ही उस की मौत हो गई थी. शरीर के अन्य भागों पर भी चोट के निशान थे. निरीक्षण के बाद उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इधर नीरज की हत्या की खबर सुरेखापुरम कालोनी पहुंची तो कालोनी में सनसनी फैल गई. धीरज के घर लोगों की भीड़ जमा हो गई. लोगों में जवान नीरज की हत्या को ले कर गुस्सा था. गुस्साई भीड़ ने मिर्जापुर नगर के बथुआ के पास मिर्जापुर-रीवा मार्ग जाम कर दिया तथा पुलिस विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए.

सड़क जाम की सूचना कटरा कोतवाल रमेश यादव को हुई तो वह पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे. उन्होंने भीड़ को समझाने का प्रयास किया तो भीड़ और उत्तेजित हो गई. लोगों की शर्त थी कि जब तक पुलिस अधिकारी नहीं आएंगे, तब तक वह सड़क पर बैठे रहेंगे. इस पर श्री यादव ने जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. उन्होंने अधिकारियों को यह भी बताया कि भीड़ बढ़ती जा रही है तथा स्थिति बिगड़ती जा रही है. हत्या के विरोध में सड़क जाम की सूचना पा कर एसपी अजय कुमार सिंह, एडीशनल एसपी (सिटी) संजय कुमार तथा सीओ अजय राय मौके पर पहुंचे. उन्होंने मृतक के घर वालों एवं उत्तेजित लोगों को समझाया तथा आश्वासन दिया कि नीरज के कातिलों को जल्द ही पकड़ा जाएगा. पुलिस अधिकारियों के इस आश्वासन पर भीड़ ने सड़क खाली कर दी.

एसपी अजय कुमार सिंह ने नीरज की हत्या को चुनौती के रूप में लिया. अत: हत्या का खुलासा करने के लिए उन्होंने एक विशेष टीम का गठन एएसपी (सिटी) संजय कुमार व सीओ अजय राय की देख रेख में गठित कर दी. इस टीम में प्रभारी निरीक्षक रमेश चंद्र यादव, चौकी इंचार्ज अजय कुमार श्रीवास्तव, हैडकांस्टेबल भोलानाथ, दारा सिंह, अरविंद सिंह, महिला कांस्टेबल रिचा तथा पूजा मौर्या को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. उस के बाद मृतक नीरज के भाई धीरज का बयान दर्ज किया. पुलिस टीम ने अपनी जांच किन्नर मीना के घर के आसपास से शुरू की और दरजनों लोगों से पूछताछ की.

इस का परिणाम भी सार्थक निकला. पूछताछ से पता चला कि मृतक का आनाजाना डंगहर मोहल्ला निवासी विशाल यादव के घर था. विशाल की पत्नी सीमा (परिवर्तित नाम) और मृतक नीरज के बीच दोस्ती थी. लेकिन विशाल को नीरज का घर आना पसंद नहीं था. पुलिस टीम ने अपनी जांच आगे बढ़ाई और विशाल यादव के पड़ोसियों से पूछताछ की तो पता चला कि बीती रात 12 बजे के आसपास विशाल यादव के घर झगड़ा हो रहा था. मारपीट और चीखनेचिल्लाने की आवाजें आ रही थीं. फिर कुछ देर बाद खामोशी छा गई थी. पर झगड़ा किस से और क्यों हो रहा था, यह बात पता नहीं है.

विशाल यादव और उस की पत्नी सीमा पुलिस टीम की रडार पर आए तो टीम ने दोनों को हिरासत में ले कर पूछताछ करने की योजना बनाई. योजना के तहत पुलिस टीम रात 10 बजे विशाल यादव के घर पहुंची और विशाल को हिरासत में ले लिया. महिला कांस्टेबल रिचा और पूजा मौर्या ने विशाल की पत्नी सीमा को अपनी कस्टडी में ले लिया. दोनों को थाना कटरा लाया गया. थाने पर जब उन से नीरज की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो विशाल व उस की पत्नी सीमा ने सहज ही अपना जुर्म कबूल कर लिया. विशाल यादव ने बताया कि वह मंजू रिटेलर टायर बरौंधा में काम करता है. उस की ड्यूटी रात में लगती है. बीती रात साढ़े 11 बजे नीरज उस के घर में घुस आया था और उस की पत्नी सीमा के साथ शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा था. उस ने जब सीमा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की तो उस ने इस का विरोध किया.

इसी बात को ले कर सीमा और नीरज में विवाद होने लगा. उस की पत्नी सीमा ने अपने बचाव में घर में रखे एक छोटे सिलेंडर से नीरज के सिर पर प्रहार कर दिया. जिस से उस के सिर में गंभीर चोट आ गई. इसी बीच विशाल भी घर आ गया, सच्चाई पता चली तो उसे भी गुस्सा आ गया, उस ने भी नीरज को मारापीटा और घर से भगा दिया. शायद गंभीर चोट लगने से उस की मौत हो गई. जुर्म कबूलने के बाद विशाल यादव ने आलाकत्ल छोटा सिलेंडर तथा ईंट अपने घर से पुलिस टीम को बरामद करा दी. पुलिस टीम ने नीरज हत्याकांड का परदाफाश करने तथा आलाकत्ल सहित उस के कातिलों को पकड़ने की जानकारी एसपी अजय कुमार सिंह को दी तो उन्होंने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता की और आरोपियों को मीडिया के समक्ष पेश कर नीरज हत्याकांड का खुलासा किया.

यही नहीं उन्होंने हत्याकांड का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए पुरस्कार देने की भी घोषणा की. चूंकि हत्यारोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: थानाप्रभारी रमेश यादव ने मृतक के भाई धीरज की तरफ से धारा 304 आईपीसी के तहत विशाल यादव व उस की पत्नी सीमा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में एक औरत और उस के जुर्म की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर शहर के सुरेखापुरम कालोनी में 2 भाई धीरज व नीरज श्रीवास्तव रहते थे. यह कालोनी थाना कटरा के अंतर्गत आती है. धीरज की शादी हो चुकी थी जबकि नीरज अविवाहित था.

उन के पिता रमेशचंद्र श्रीवास्तव की मौत हो चुकी थी. धीरज की बथुआ में मोबाइल फोन और एसेसरीज की दुकान थी, जबकि उस का छोटा भाई नीरज मोबाइल पार्ट्स की सप्लाई करता था. दोनों भाई खूब कमाते थे और मिलजुल कर रहते थे. एक रोज नीरज सुरेखापुरम कालोनी स्थित एक मोबाइल की दुकान पर कुछ मोबाइल पार्ट्स देने पहुंचा तो वहां उस की मुलाकात एक खूबसूरत युवती से हुई. उस समय वह वहां अपना मोबाइल फोन ठीक कराने आई थी. युवती और नीरज की आंखें एकदूसरे से मिलीं तो पहली ही नजर में दोनों एकदूसरे को भा गए. दोनों में बातचीत शुरू हुई तो युवती ने अपना नाम सीमा बताया. वह भी सुरेखापुरम कालोनी में ही रहती थी. बातचीत के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया. फिर दोनों में अकसर मोबाइल फोन पर बातें होने लगीं. बातों का दायरा बढ़ता गया. फिर वे प्यारमोहब्बत की बातें करने लगे.

दरअसल सीमा विवाहित थी. उस के पिता ने उस की शादी एक सजातीय युवक के साथ की थी. सीमा दुलहन बन कर ससुराल तो गई लेकिन उसे वहां का वातावरण बिलकुल रास नहीं आया. ऊंचे ख्वाब सजाने वाली स्वच्छंद युवती को ससुराल की मानमर्यादा की सीमाओं में बंध कर रहना भला कैसे भाता. सुहागरात में तो उस के सारे अरमान धूल धूसरित हो कर रह गए. उस का पति उस की इच्छापूर्ति की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया. सीमा को ससुराल बंद पिंजरे की तरह लगने लगी थी, जहां वह किसी परिंदे की तरह फड़फड़ाने लगी थी. स्वच्छंदता पर सामाजिक मानमर्यादा की बंदिशें लग चुकी थीं. मन की तरंगे घूंघट के भीतर कैद हो कर रह गई थीं. ससुराल में उस का एकएक दिन मुश्किल में बीतने लगा.

सीमा ने एक दिन निश्चय कर लिया कि एक बार यहां से निकलने के बाद वह कभी अपनी ससुराल नहीं आएगी. आखिर एक दिन उस के घर वाले उसे बुलाने आ गए तो वह अपनी ससुराल को हमेशा के लिए अलविदा कह कर अपने मायके आ गई. मायके आ कर सीमा सजसंवर कर स्वच्छंद हो कर घूमने लगी. एक रोज उस का फोन खराब हो गया तो वह उसे ठीक कराने के लिए पास के ही एक मोबाइल शौप पर गई तो वहां उस की मुलाकात एक सजीले युवक नीरज से हुई. उस के बाद दोनों अकसर मिलने लगे. बाद में सीमा नीरज के साथ घूमने भी जाने लगी. कुछ ही दिनों में दोनों इतने नजदीक आ गए कि उन के बीच अंतरंग संबंध बन गए. अवैध रिश्तों का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो फिर रुकने का नाम नहीं लिया. जब भी दोनों को मौका मिलता, एकदूसरे की बांहों में समा जाते.

लेकिन ऐसी बातें समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक छिपती कहां हैं. धीरेधीरे पूरे मोहल्ले में नीरज और सीमा के नाजायज रिश्ते की चर्चा होने लगी. जवान बेटी ससुराल छोड़ कर बाप की छाती पर मूंग दले, इस से बड़ा कष्ट बाप के लिए और क्या हो सकता है. ऊपर से जब उस के नाजायज रिश्तों की बात पता चले तो उस के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात होती है. सीमा के बाप का धैर्य टूटा तो उस ने उस पर लगाम कसनी शुरू की और उस के योग्य कोई लड़का खोजना शुरू कर दिया. इस बीच प्रतिबंध लग जाने से सीमा और नीरज का मिलना कुछ कम हो गया. काफी दौड़धूप के बाद घर वालों ने सीमा का दूसरा विवाह विशाल यादव के साथ वर्ष 2019 में कर दिया. विशाल यादव के पिता कल्लू यादव की मृत्यु हो चुकी थी. विशाल मिर्जापुर शहर के कटरा थाना अंतर्गत डंगहर मोहल्ले में रहता था और मंजू रिटेलर टायर बरौंधा कचार में काम करता था.

विशाल यादव से विवाह करने के बाद सीमा हंसीखुशी से ससुराल में रहने लगी. यहां उसे कोई बंधन न था. न घर में सास थी न ससुर. पति भी सीधासादा था. वह पति से जिस भी चीज की मांग करती, वह उसे पूरा कर देता था. क्योंकि पत्नी की खुशी में ही अपनी खुशी समझता था. उस की मांग पर उस ने उसे नया मोबाइल फोन भी ला कर दे दिया था. होना यह चाहिए था कि जब सीमा ने दूसरी शादी कर ली तो नीरज को उस की ससुराल नहीं जाना चाहिए था. लेकिन नीरज नहीं माना. वह शारीरिक सुख पाने के लिए सीमा के घर जाने लगा. सीमा कभी तो उसे लिफ्ट दे देती, तो कभी उसे दुत्कार भी देती. सीमा नाराज हो जाती तो नीरज उसे उपहार दे कर या फिर आर्थिक मदद कर उस की नाराजगी दूर करता.

सीमा के पति विशाल की ड्यूटी रात में रहती थी. उस के जाने के बाद ही नीरज सीमा से मिलने आता था. फिर घंटा, 2 घंटा उस के साथ बिताने के बाद वापस चला जाता था. पड़ोसियों ने पहले तो गौर नहीं किया, लेकिन जब नीरज अकसर वहां आने लगा तो उन के कान खड़े हो गए. उन्होंने विशाल को हकीकत बताई तो उस के मन में शंका का बीज उपज आया. विशाल ने इस बाबत सीमा से जवाब तलब किया तो वह उसे बरगलाने की कोशिश करने लगी. विशाल ने सख्ती की तो सीमा ने सच्चाई बयां कर दी और यह कहते हुए माफी मांग ली कि आज के बाद वह नीरज से कोई वास्ता नहीं रखेगी.

विशाल ने घर टूटने के खौफ से सीमा को माफ कर दिया. इस के बाद सीमा ने सख्त रुख अख्तियार करना शुरू कर दिया. अब नीरज जब भी उस के घर आता, सीमा उसे दुत्कार कर भगा देती, लेकिन नीरज दुत्कारने के बावजूद सीमा से मिलने पहुंच जाता. वह सीमा को मनाने की भी कोशिश करता. 27 नवंबर, 2020 की रात साढ़े 9 बजे नीरज बनसंवर कर घर से निकला. उस ने अपने भाई धीरज से झूठ बोला कि वह दोस्त के घर जागरण में जा रहा है. घर से निकल कर वह कुछ देर इधरउधर घूमता रहा फिर रात साढ़े 11 बजे वह डंगहर स्थित सीमा के घर जा पहुंचा. सीमा ने उसे दुत्कारा और घर से निकल जाने को कहा.

लेकिन नीरज नहीं माना. उस ने सीमा को धकेल कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और सीमा से जोरजबरदस्ती करने लगा. सीमा ने विरोध किया तो वह जबरदस्ती उसे अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश करने लगा. सीमा बचाव में हाथपैर चलाने लगी. इसी बीच उस की निगाह छोटे गैस सिलेंडर पर पड़ी. उस ने लपक कर सिलेंडर उठाया और नीरज के सिर पर दे मारा. नीरज का सिर फट गया और वह जमीन पर गिर पड़ा. इसी समय किसी ने दरवाजा खटखटाया. सीमा ने दरवाजा खोला तो सामने उस का पति विशाल था. वह पति के सीने से लिपट गई और बोली, ‘‘नीरज जबरदस्ती घर में घुस आया था और उसे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता था.’’

सीमा की बात सुन कर विशाल का गुस्सा बढ़ गया. उस ने ईंट से उसे पीटना शुरू कर दिया. नीरज तब चीखनेचिल्लाने लगा और माफी भी मांगने लगा. बुरी तरह पीटने के बाद विशाल ने नीरज को घर के बाहर धकेल दिया. नीरज घायल अवस्था में कुछ दूर तक गया फिर मीना किन्नर के घर के सामने गिर पड़ा. रात भर ठंड में वह वहीं पड़ा रहा. सुबह कुछ लोग घर से टहलने निकले तो उन्होंने नीरज को गंभीर हालत में देखा. उधर से गुजरने वाले एक व्यक्ति को अपने घर का पता देते हुए खबर देने का अनुरोध किया. जब उस व्यक्ति ने नीरज के घर खबर की तो उस का भाई धीरज आया. धीरज ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

विशाल यादव और सीमा से पूछताछ के बाद पुलिस ने 29 नवंबर, 2020 को दोनों अभियुक्तों को मिर्जापुर की जिला अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में सीमा नाम परिवर्तित है.

 

Love Affair : इश्क में पति की आहुति

Love Affair : मीना के संजय कुशवाहा से अवैध संबंध बने तो उसे अपना पति कांटे की तरह चुभने लगा. संजय के हाथों पति की हत्या कराने के बाद मीना और उस के प्रेमी ने यही सोचा था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे, लेकिन पुलिस ने ऐसी युक्ति अपनाई कि वह हत्यारों तक पहुंच गई…

मीना ने अपने प्रेमी संजय कुशवाहा के साथ पति चरण सिंह को मौत के घाट उतारने की योजना बना ली थी. इस के बाद चरण सिंह की हत्या करने का दिन और स्थान भी तय कर लिया गया, लेकिन चरण सिंह इस बात से पूरी तरह बेखबर था. वह तो अपनी पत्नी का मोबाइल तोड़ कर निश्चिंत था कि मीना अब अपने प्रेमी संजय कुशवाहा से बात नहीं कर पाएगी, लेकिन चरण सिंह नहीं जानता था कि घायल शेरनी कितनी खूंखार और खतरनाक होती है.

 

प्लान के अनुसार, मीना अपने व्यवहार में बदलाव ला कर पति का भरोसा जीतने का प्रयास कर रही थी. इस से चरण सिंह को लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है. जबकि हकीकत में मामला और बिगड़ गया था. मीना अपने पति को प्रेमी संजय के हाथों मरवाने के बाद निश्चिंत हो कर उसी के साथ मौजमस्ती करना चाहती थी. 20 दिसंबर, 2024 को चरण सिंह के इकलौते बेटे का जन्मदिन था. अत: वह अपने गांव जारह से 19 दिसंबर की सुबह जन्मदिन के लिए जरूरी सामान लेने मुरैना आया था. योजनाबद्ध ढंग से मुरैना में बस स्टैंड पर उसे संजय खड़ा मिल गया.

संजय ने उस से कहा, ”चरण सिंह, तुम बेटे के जन्मदिन का सामान बाद में खरीद लेना, आज मौसम बहुत ही बेहतरीन है. चलो, पहले बाइक से पगारा डैम पर चलते हैं. वहीं बैठ कर तसल्ली के साथ 2-2 पैग लगा लेते हैं.’’

आने वाली आफत से बेखबर चरण सिंह संजय के कहने पर बसस्टैंड से संजय की बाइक पर बैठ कर पगारा डैम चला आया. पगारा डैम पर दोनों ने बैठ कर शराब पी. इस दौरान संजय ने चरण सिंह से उधार लिए डेढ़ लाख रुपए लौटाने को कहा. पैसे मांगने की बात पर उन के बीच झगड़ा हो गया. दोनों में जम कर मारपीट हुई. चरण सिंह समझ गया कि उस के साथ धोखा हुआ है. उस ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन नशा चढऩे के कारण वह भाग नहीं सका, वहीं मारपीट में सिर में चोट लगाने से चरण सिंह बेहोश हो गया तो संजय ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए उसे उठा कर पगारा डैम में फेंक दिया और अपने घर लौट आया.

चरण सिंह की मौत के बाद संजय और मीना ने राहत की सांस ली, लेकिन जेल जाने और सजा पाने का डर दोनों की आंखों में साफ नजर आ रहा था. उन के इश्क की दीवानगी का सुरूर उतर चुका था. इधर 4 दिन गुजर जाने के बावजूद भी जब चरण सिंह मुरैना से लौट कर घर नहीं आया तो फेमिली वाले चिंतित हो गए. उस का मोबाइल फोन भी स्विच औफ आ रहा था. यह देख कर कर फेमिली वालों का माथा ठनका तो चरण सिंह का छोटा भाई रामचंद्र थाना सराय छौला में उस की गुमशुदगी की सूचना लिखाने चला गया. रामचंद्र ने अपने भाई की गुमशुदगी की सूचना लिखाते हुए शक अपनी भाभी मीना और उस के प्रेमी संजय कुशवाहा पर जताया.

एसएचओ के.के. सिंह ने रामचंद्र को भरोसा दिया कि वह जल्दी ही चरण सिंह का पता लगाने का प्रयास करेंगे. इस के बाद रामचंद्र ने अपनी रिश्तेदारियों में भी फोन किए, लेकिन चरण सिंह का कुछ पता नहीं चला. 26 दिसंबर, 2024 को जिला मुरैना के गांव लख्खा का पुरा निवासी श्याम सुंदर ने जौरा थाने के एसएचओ उदयभान सिंह यादव को फोन कर के सूचना दी कि गुमशुदा चरण सिंह की लाश पगारा डैम में पड़ी हुई है. यह सूचना मिलते ही उदयभान सिंह यादव तुरंत मौके पर पहुंच गए. उन्होंने ग्रामीणों की मदद से पगारा डैम से चरण सिंह की लाश को डैम से निकलवाने के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली.

इस के बाद जौरा थाने के एसएचओ उदयभान सिंह यादव द्वारा वायरलैस से चरण सिंह की लाश पगारा डैम में पड़ी मिलने की सूचना प्रसारित करवाई. इस सूचना को सुन कर सराय छौला के एसएचओ के.के. सिंह ने चरण सिंह के भाई रामचंद्र को थाने बुलाया, क्योंकि रामचंद्र ने सराय छौला थाने में चरण सिंह की गुमशुदगी दर्ज करा रखी थी. इस के बाद वह रामचंद्र को ले कर जौरा के पगारा डैम पहुंच गए. रामचंद्र ने जैसे ही वह लाश देखी तो वह दहाड़ें मार कर रोने लगा. रामचंद्र ने पगारा डैम से बरामद हुई लाश की शिनाख्त अपने बड़े भाई चरण सिंह के रूप में की. इस के बाद एसएचओ ने लाश को अपने कब्जे में ले कर धारा 103 (1) बीएनएस के तहत रिपोर्ट तरमीम कर दी.

जैसे ही पगारा डैम से चरण सिंह की लाश मिलने की खबर इलाके के लोगों को हुई तो वे हैरान रह गए. सराय छौला पुलिस को अब कातिलों की तलाश थी. चरण सिंह के भाई ने अपनी भाभी  मीना और उस के प्रेमी संजय पर अपना शक जताया था, लिहाजा पुलिस उन दोनों के पीछे लग गई. काफी कोशिश के बाद पुलिस के लंबे हाथ आखिर संजय कुशवाहा तक पहुंच गए. 27 दिसंबर, 2024 को मुखबिर की सूचना पर संजय कुशवाहा को जौरा में नए अस्पताल के पास से पुलिस ने दबोच लिया. पुलिस उसे थाने ले आई. सख्ती से पूछताछ करने पर संजय ने स्वीकार कर लिया कि चरण सिंह की हत्या उस ने ही की थी. हत्या की साजिश में मृतक की पत्नी और उस की प्रेमिका मीना भी शामिल थी.

संजय से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने मृतक चरण सिंह की पत्नी मीना को गांव जारह से गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. दोनों से पूछताछ के बाद चरण सिंह की हत्या की चौंकाने वाली कहानी सामने आई—

मध्य प्रदेश के जिला मुरैना के थाना सराय छौला के अंतर्गत आने वाले गांव जारह का रहने वाला चरण सिंह जब मेहनतमजदूरी कर के ठीकठाक पैसे कमाने लगा तो उस के विवाह के लिए समाज के लोग आने लगे. तमाम लड़कियां देखने के बाद फेमिली वालों ने उस के लिए जौरा के नयापुरा इलाके की रहने वाली मीना नाम की युवती को पसंद किया. फिर उस के साथ चरण सिंह की शादी कर दी. शादी के बाद मीना ससुराल आई तो जल्द ही उस ने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल ली. जिस से घरपरिवार में उस की गिनती अच्छी बहू के रूप में होने लगी. धीरेधीरे चरण सिंह का परिवार बढऩे लगा. चरण सिंह और मीना 3 बच्चों के मातापिता बन गए, जिन में 2 बेटियां और एक बेटा था. सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन वक्त कब बदल जाए, कहा नहीं जा सकता.

एक सप्ताह पहले चरण सिंह ने एक प्लौट का बयाना दे कर सौदा कर लिया था. शेष डेढ़ लाख रुपए उसे एक पखवाड़े के भीतर चुकाने थे, लेकिन काफी भागदौड़ के बाद जब चरण सिंह पैसों का इंतजाम करने में नाकाम रहा तो उस की पत्नी मीना ने अपने पुराने परिचित संजय कुशवाहा को फोन कर कहा कि मेरे पति ने एक प्लौट का सौदा कर लिया है, अत: उन्हें डेढ़ लाख रुपए की जरूरत है. यदि तुम कुछ समय के लिए डेढ़ लाख रुपए उधार दे दोगे तो मेहरबानी होगी. संजय कुशवाहा ने कुछ सोचविचार कर कहा, ”देखो मीना, इस तरह की बातें मोबाइल फोन पर नहीं हो सकतीं, ऐसा करता हूं कि मैं तुम्हारे घर पर आ जाता हूं. वहीं बैठ कर आराम से इस बारे में बात करेंगे.’’

मीना को लगा कि संजय उस के पति को पैसे उधार देना चाहता है, इसीलिए वह घर पर आना चाहता है. अगले दिन संजय चरण सिंह के घर पहुंच गया. इत्तफाक से जिस वक्त संजय आया, चरण सिंह घर पर नहीं था. मीना ने संजय से पूछा, ”तुम ने कुछ सोचा?’’

”किस बारे में?’’ संजय बोला.

”अरे, पैसे उधार देने के बारे में. मैं ने तुम से डेढ़ लाख रुपए उधार देने के लिए कहा था न…’’

”अच्छा, वह तो मैं तुम्हारे पति को दे दूंगा, लेकिन जो पैसे मैं उधार दूंगा, वह जल्द से जल्द लौटाने की कोशिश करना.’’ संजय कुशवाहा ने कहा.

”संजय, इस बात से तुम बेफिक्र रहो, मैं पूरापूरा प्रयास करूंगी कि जितनी जल्दी हो सके, तुम्हारा पैसा अदा करवा दूं.’’

अगले दिन संजय ने लिखापढ़ी करके चरण सिंह को डेढ़ लाख रुपए दे दिए. चरण सिंह को संजय से डेढ़ लाख रुपए उधार मिल गए तो वह खुश हो गया और खुशीखुशी प्लौट वाले को वायदे के मुताबिक डेढ़ लाख रुपए दे दिए. चरण सिंह को रुपए उधार देने के कारण संजय कुशवाहा का चरण सिंह के यहां आनाजाना शुरू हो गया. चरण सिंह तो सुबह होते ही नाश्तापानी करने के बाद टिफिन ले कर मजदूरी करने निकल पड़ता था और अकसर देर रात को ही घर लौटता था. इस बीच घरगृहस्थी के काम मीना को देखने पड़ते थे, लेकिन जब से संजय उस के घर आनेजाने लगा था, जरूरत पडऩे पर वह मीना की मदद कर देता था. इस के बदले में मीना उसे चायनाश्ता करा देती थी. यदि खाने का समय होता तो खाना भी खिला देती.

ऐसे में ही एक दिन संजय ने कहा, ”मीना, तुम सारे दिन कितना काम करती हो. इस के बाबजूद चरण सिंह तुम्हारी जरा भी फिक्र नहीं करता.’’

मीना ने उसे तिरछी नजरों से देखते हुए कहा, ”यह तुम कैसे कह सकते हो कि वह हमारी फिक्र नहीं करते. मेरे और बच्चों के लिए सुबह से शाम तक मेहनतमजदूरी करते हैं. जब तुम्हारी शादी हो जाएगी

तो तुम्हें भी अपने बालबच्चों के लालनपालन के लिए इसी तरह भागदौड़ करनी पड़ेगी.’’

दरअसल, चरण सिंह के घर आतेजाते संजय कुशवाहा का दिल मीना पर आ गया था, इसलिए वह उसे अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए चारा डालने लगा था. मीना की इस बात से वह निराश तो हुआ, लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी. संयोग से एक दिन मीना को घर की जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार जाना था. वह तैयारी कर ही रही थी कि तभी संजय आ गया. मीना को तैयार होते देख उस ने पूछा, ”कहीं जा रही हो मीना?’’

”गृहस्थी का सामान खरीदना है, इसलिए बाजार जा रही हूं. उन के पास तो इस काम के लिए वक्त है नहीं, इसलिए मुझे ही जाना पड़ रहा है.’’ मीना ने कहा.

” तुम अकेली मत जाओ, मैं तुम्हारे साथ चलता हूं.’’ संजय बोला.

मीना को भला क्यों ऐतराज होता. वह संजय के साथ बाइक से बाजार पहुंच गई. सामान खरीदने के बाद थैला संजय ने उठाया तो मीना हंसते हुए बोली, ”मेरी शादी को 10 साल हो गए, लेकिन वो कभी मेरे साथ बाजार तक नहीं आए.’’ मीना बोली.

”मीना, एक बात बताऊं, यदि तुम्हारे साथ चरण सिंह की शादी नहीं हुई होती तो उसे घर में रोटी भी नसीब नहीं होती. तुम ही हो जो पूरा घर चला रही हो.’’

इस पर मीना कुछ नहीं बोली, लेकिन मुसकरा पड़ी. संजय मीना को ले कर घर पहुंचा तो मीना ने कहा, ”मैं खाना बना रही हूं, अब तुम खाना खा कर जाना.’’

संजय कुशवाहा दालान में पड़े तख्त पर जा कर लेट गया. मीना ने उसे पहले चाय बना कर पिलाई. उस के बाद खाना बना कर खिलाया. संजय मन ही मन सोचने लगा कि मीना के दिल में जरूर ही उस के लिए कोई नरम कोना है, तभी तो वह उस का इतना खयाल रखती है. अब सवाल यह था कि वह उस के दिल की बात जाने कैसे?

उसी दौरान संजय हरियाणा के सूरजकुंड में लगे हस्तशिल्प मेले में गया. वहां हाथ से बनी चीजों की प्रदर्शनी लगी थी. वह प्रदर्शनी देखने गया तो वहां उसे एक दुकान पर एक जोड़ी झुमके पसंद आ गए तो संजय ने वह खरीद लिए. अगले दिन दोपहर को वह चरण सिंह के घर पहुंचा तो मीना घर पर अकेली मिल गई. मीना ने संजय को बैठाया, चायनाश्ता कराया. इस के बाद उस ने झुमके की डब्बी मीना के हाथ में थमा दी. मीना ने डब्बी खोली तो झुमके देख कर बोली, ”झुमके तो बहुत ही शानदार हैं. किस के लिए लाए हो?’’

”मीना, तुम भी कमाल करती हो. जब तुम्हारे हाथ में दिए हैं तो तुम्हारे लिए ही होंगे. कौन मेरी घरवाली बैठी है, जिस के लिए लाऊंगा.’’

”संजय, मेरे लिए तुम इतने महंगे झुमके क्यों खरीद कर लाए हो?’’ मीना ने कहा.

”मुझे अच्छे लगे, इसलिए खरीद लाया. अब जरा पहन कर तो दिखाओ.’’

मीना मुसकराते हुए भीतर कमरे में गई और थोड़ी देर में झुमके पहन कर बाहर दालान में आई तो संजय बोला, ”अरे मीना, झुमके पहन कर तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो.’’

”क्यों झूठी तारीफ करते हो.’’ शरमाते हुए मीना ने कहा.

”तुम्हारी कसम मीना, सच कह रहा हूं, रात को घर लौटने पर जब चरण सिंह देखेगा तो वह भी यही बात कहेगा.’’

मीना ने आह भरते हुए कहा, ”उन के पास इतना टाइम कहां है कि वह मुझे झुमके पहने हुए देख कर मेरी तारीफ करें. काम से लौट कर उन्हें तो दारू पीने से फुरसत ही कहां मिलती है.’’

संजय मुसकराया, क्योंकि मीना की कमजोर नस अब उस के हाथ में आ गई थी. उस की समझ में आ गया कि पतिपत्नी के बीच पतली सी दरार है, जिसे वह प्रयास कर चौड़ी कर सकता है. इस के बाद संजय कुशवाहा मीना के करीब आने की कोशिश करने लगा. मीना को भी उस का आनाजाना और उस से बातचीत करना अच्छा लगने लगा था, लेकिन संजय को अपनी मंजिल नहीं मिल रही थी. उसी बीच संजय ने चरण सिंह से अपने डेढ़ लाख रुपए वापस लौटाने को कहा. चरण सिंह इस बात से काफी परेशान हो गया, क्योंकि उस के पास लौटाने के लिए रुपए नहीं थे.

कड़वा सच तो यह था कि अब उस की नीयत खराब हो गई थी. वह संजय से उधार लिया रुपया लौटाना नहीं चाहता था. एक दिन दोपहर को संजय चरण सिंह के घर पहुंचा तो मीना ने कहा, ”क्या इधरउधर मारेमारे फिरते हो, शादी क्यों नहीं कर लेते?’’

”शादी..? अभी कुछ महीने पहले ही तो मैं ने तुम्हारे कहने पर चरण सिंह को डेढ़ लाख रुपए बैंक से निकाल कर बिना ब्याज के उधार दिया था, लेकिन कई बार तकादा करने के बावजूद भी तुम्हारा पति मेरे पैसे लौटा नहीं रहा है. वह मेरा रुपया लौटाए, तब मैं शादी करने के बारे में सोचूं. क्योंकि वह मेरी अब तक की कुल कमाई का हिस्सा है.

”मेरे कहने पर जो डेढ़ लाख रुपए तुम ने मेरे पति को उधार दिया है, उस की बिलकुल भी चिंता मत करो.’’ मीना ने तिरछी नजरों से संजय को देखते हुए कहा, ”संजय, तुम मुझे बहुत डरपोक लगते हो. जो तुम्हारे मन में है, वह भी नहीं कह पा रहे.’’

”मीना, मैं ने तुम्हारी बात का मतलब नहीं समझा.’’ संजय अनभिज्ञ बनते हुए बोला.

”तुम ऐसा करो कि आज रात को आना, चरण सिंह आज रिश्तेदारी में शादी में जाएगा. मैं घर पर अकेली ही रहूंगी, तब अच्छे से समझा दूंगी.’’ मीना ने मुसकराते हुए कहा.

इतना सुनते ही संजय कुशवाहा का दिल एकदम से धड़क उठा. वह भाग कर घर गया और नहाधो कर रात होने का इंतजार करने लगा, लेकिन सूरज था कि अस्त होने का नाम ही नहीं ले रहा था. किसी तरह शाम हुई तो वह अपने गांव नयापुरा से जारह के लिए चल दिया. जारह पहुंचतेपहुंचते अधेरा हो चुका था. चरण सिंह के घर पहुंच कर संजय ने धीरे से दरवाजा खटखटाया. मीना ने जैसे ही दरवाजा खोला, वह फुरती से घर के भीतर घुस गया कि कोई उसे देख न ले.

घर में सन्नाटा पसरा हुआ था. बच्चे सो चुके थे. मीना संजय का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गई. वासना से वशीभूत मीना भूल गई कि वह अपने पति से बेवफाई करने जा रही है. संजय को अंदाजा लग गया था कि मीना ने अपने पति की गैरमौजूदगी में उसे क्यों बुलाया है. वह बिना किसी हिचकिचाहट के पलंग पर बैठ गया तो उस से सट कर बैठते हुए मीना ने कहा, ”संजय, मुझे तुम से इश्क हो गया है संजय.’’

”यदि तुम्हारे पति को यह सब पता चल गया तो…?’’

”किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. तुम भी तो मुझ से इश्क फरमाना चाहते हो, बोलो?’’

संजय ने कुछ कहने के बजाय मीना को अपनी बाहों में समेट लिया तो वह उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. उन्होंने वह गुनाह कर डाला, जिस का अंजाम आगे चल कर बुरा ही होता है. रात दोनों की अपनी थी. क्योंकि मीना का पति घर पर नहीं था, इसलिए दोनों को किसी तरह का कोई डर नहीं था. लेकिन वे जिस दलदल में उतर गए थे, उस से वे चाह कर भी बाहर नहीं आ सकते थे. भोर होने से पहले ही संजय अपने गांव लौट गया. दोपहर को जब चरण सिंह घर लौट कर आया, मीना बिस्तर पर औंधे मुंह लेटी हुई थी. उसे समझते देर नहीं लगी कि पत्नी की तबियत ठीक नहीं है. उसे क्या पता था कि वह रात की थकावट उतार रही है.

हौलेहौले मीना और संजय का प्यार परवान चढऩे लगा. अवसरों की कोई कमी नहीं थी. चरण सिंह मजदूरी करने गांव से बाहर निकल जाता था. उसी बीच मीना संजय को अपने घर पर बुला कर रंगरलियां मना लिया करती थी. चरण सिंह को भले ही उन दोनों की कारगुजारियों की भनक अभी तक नहीं लग सकी थी, लेकिन पड़ोसी तो देख ही रहे थे. पड़ोसियों को समझते देर नहीं लगी कि चरण सिंह की गैरमौजूदगी में संजय के आने का मतलब क्या हो सकता है. आखिर एक दिन एक बुजुर्ग ने चरण सिंह को रोक कर कह ही दिया, ”चरण सिंह, मेहनतमजदूरी में इतना ज्यादा व्यस्त रहते हो, अपनी घरवाली का भी खयाल रखा करो.’’

”दादाजी मैं समझा नहीं, आप कहना क्या चाहते हैं?’’ चरण सिंह ने पूछा.

”मेरा मतलब संजय से है, आजकल वह तुम्हारी गैरमौजूदगी में तुम्हारे घर कुछ ज्यादा ही आ रहा है.’’

पड़ोसी बुजुर्ग की बात सुन कर चरण सिंह सन्न रह गया. वह सब काम छोड़ कर अपने घर पहुंचा और अपनी पत्नी से पूछा, ”मेरी गैरमौजूदगी में संजय यहां क्यों आता है?’’

”नहीं तो, किस ने कहा?’’ मीना ने लापरवाही से कहा.

”आगे से अब मेरी गैरमौजूदगी में संजय यहां आए तो उसे साफ मना कर देना, क्योंकि आसपड़ोस में उसे ले कर तरहतरह की चर्चा हो रही है. मैं नहीं चाहता कि बिना मतलब के हमारी बदनामी हो.’’

मीना ने कोई उत्तर नहीं दिया. चरण सिंह इस बात को ले कर काफी परेशान था. वह खुद भी महसूस कर रहा था कि पिछले कुछ दिनों से मीना का व्यवहार उस के प्रति लापरवाह सा रहने लगा है. कहीं वह गुमराह तो नहीं हो गई, लेकिन उस ने अपनी आंखों से अभी तक दोनों को कोई गलत हरकत करते हुए नहीं देखा था, इसलिए कोई निर्णय कैसे ले सकता था. उधर मीना ने भी फोन कर के संजय कुशवाहा को सचेत कर दिया कि वह कुछ दिनों तक उस के पति की गैरमौजूदगी में मिलने न आए, क्योंकि चरण सिंह और पड़ोसियों  को शक हो गया है. इस के बाद 2 हफ्ते तक संजय ने चरण सिंह के घर की तरफ रुख नहीं किया.

जब मीना ने देखा कि इस मामले में उस का पति लापरवाह हो गया है तो उस ने एक दिन संजय को फोन कर के घर पर बुला लिया, क्योंकि उस दिन चरण सिंह मथुरा जाने को कह कर गया हुआ था. लेकिन जैसे ही वह टिकट लेने के लिए कतार में खड़ा हुआ, तभी उस के पड़ोसी का उस के मोबाइल पर फोन आ गया. वह बोला, ”तुम कहां पर हो? तुम्हारी पत्नी तुम्हारी गैरमौजूदगी में संजय के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है. संजय घर पर आया हुआ है.’’

पत्नी को रंगेहाथों पकडऩे के लिए चरण सिंह मथुरा जाने का इरादा त्याग कर घर लौट आया और पड़ोस की छत से घर के भीतर पहुंचा तो मीना को संजय की बाहों में पाया. चरण सिंह ने संजय को पकडऩा चाहा, लेकिन वह उसे धक्का दे कर भाग गया. इस के बाद चरण सिंह ने मीना की जम कर ठुकाई कर दी. जब कुछ गुस्सा शांत हुआ तो वह इस सोच में लग गया कि वह इस चरित्रहीन पत्नी का क्या करे. यदि वह उसे तलाक दे देता है तो उस के तीनों बच्चों का क्या होगा, अपनी मेहनतमजदूरी छोड़ कर वह उन की देखभाल भी नहीं कर सकता था.

मीना ने स्वयं को संभाला और सोचने लगी कि उसे क्या करना चाहिए? पति के द्वारा आपत्तिजनक हालत में रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद वह संजय को किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी और चरण सिंह का घर भी नहीं छोडऩा चाहती थी. क्योंकि जो सुखसुविधा चरण सिंह के घर में थी, वह संजय नहीं दे सकता था. फिर कुछ सोच कर उस ने पति के पैरों में सिर रख कर माफी मांगते हुए कहा, ”मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई, अब मैं कसम खाती हूं कि आगे से ऐसी गलती कभी नहीं होगी.’’

चरण सिंह के पास पत्नी को माफ करने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं था, इसलिए उस ने पत्नी को माफ कर दिया. दूसरी ओर संजय की अब मीना से मिलने के लिए उस के पास जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, लेकिन मीना ने उस से कहा कि वह उस के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. उस के बिना उस का जीवन नीरस हो जाएगा. दोनों ने अब घर के बाहर मेलमिलाप का कार्यक्रम तय किया. बहाना बना कर मीना अपने मायके नयापुरा चली जाती थी, जहां उस से मिलने के लिए संजय आ जाता था.

लेकिन वहां भी वे कई लोगों की निगाहों में आ गए. जिस से चरण सिंह को इस मेलमिलाप के बारे में पता चल गया. उस का भरोसा अपनी पत्नी से उठ गया था, वह शराब पी कर उस के साथ आए दिन मारपीट करने लगा. चरण सिंह से एक दिन बाजार में अचानक मुलाकात होने पर संजय ने उस से अपने डेढ़ लाख रुपए लौटाने को कहा. जबकि चरण सिंह अब उस के रुपए लौटाने के मूड में नहीं था. एक दिन मीना और संजय मिले तो मीना ने कहा, ”संजय, चलो हम कहीं दूर जा कर अपनी दुनिया बसा लेते हैं.’’

”देखो, हम अपनी दुनिया तो बसा लेंगे, लेकिन खाएंगेपहनेंगे क्या? मीना, इस के लिए हमें कुछ और सोचना होगा.’’ संजय बोला.

चरण सिंह की गृहस्थी में ग्रहण लग चुका था. आसपड़ोस के लोग उस की पत्नी की चुगली करते रहते थे, लेकिन चरण सिंह की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी बेहया पत्नी का क्या करे. उसे अपने बच्चों का भविष्य बरबाद होता दिखाई दे रहा था. पतिपत्नी के बीच आए दिन होने वाले झगड़ों का असर बच्चों पर भी पड़ रहा था. जबकि मीना पति से छुटकारा पाना चाहती थी. उसी बीच एक रात चरण सिंह ने मीना को मोबाइल फोन पर बातें करते हुए देखा तो उस के हाथ से मोबाइल फोन छीन कर नंबर चैक किया तो वह नंबर संजय का निकला. चरण सिंह ने कहा, ”इतना सब होने के बावजूद तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही हो?’’

 

जब मीना ने कोई उत्तर नहीं दिया तो चरण सिंह को गुस्सा आ गया. उस ने मीना के गाल पर थप्पड़ जड़ते हुए कहा, ”चरित्रहीन औरत, अब तू बिलकुल भी भरोसे लायक नहीं रही.’’

इस के बाद उस ने मोबाइल छीन कर तोड़ दिया.

इस पर मीना ने कहा, ”यह तुम ने अच्छा नहीं किया.’’ पति के द्वारा मोबाइल फोन तोड़ देने से तिलमिलाई मीना ने तय कर लिया कि अब वह अपने पति को जिंदा नहीं छोड़ेगी. अगले दिन उस ने अपनी सहेली के मोबाइल से संजय को फोन किया और पूछा, ”अब तुम्हारा क्या इरादा है, मुझे आज साफसाफ बताओ?’’

”मेरी माली स्थिति के बारे में तुम सब कुछ जानती हो. अब मीना तुम्हीं बताओ कि मैं क्या करूं? मैं तुम्हारे पति को उधार दिए डेढ़ लाख रुपए लौटाने के लिए अनेक बार कह चुका, लेकिन वह देने का नाम नहीं ले रहा है. मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं?’’

”देखो संजय, मैं तुम्हारी वजह से रोजरोज तो पिट नहीं सकती, इसलिए अब फैसला लेने का वक्त आ गया है. या तो तुम मुझे छोड़ दो या फिर कुछ ऐसा करो कि हम दोनों सुकून से जी सकें.’’

”अब तुम ही बताओ मीना कि मुझे क्या करना चाहिए?’’

”तुम कुछ ऐसा करो कि मुझे हमेशाहमेशा के लिए चरण सिंह से छुटकारा मिल जाए. उस के बाद हम दोनों सुकून की जिंदगी गुजार सकेंगे.’’

”लेकिन यह सब कैसे होगा?’’

”सब आराम से हो जाएगा, क्योंकि यह हमारे बीच दीवार की तरह है. यह अब मुझे सहन नहीं हो रहा है.’’

”चरण सिंह को ठिकाने लगाने के लिए पैसों की जरूरत होगी, जो मेरे पास हैं नहीं.’’

”पैसे में दे दूंगी. पति का डेढ़ लाख रुपया मेरे पास सुरक्षित रखा हुआ है.’’

सौदा कहीं से भी घाटे का नहीं था. संजय मन ही मन खुश हो गया. उधार दिए डेढ़ लाख रुपए भी वापस मिल जाएंगे और प्रेमिका मीना के साथ उस की संपत्ति भी मिल जाएगी. वह मौज करेगा. लेकिन ऐसा नहीं जो सका. उन का गुनाह छिप न सका और दोनों ही पुलिस की पकड़ में आ गए. हत्या के बाद हर कातिल कानून से बचना चाहता है. इश्क में अंधी मीना पति की हत्या के बाद अधूरी खुशियों को पूरा करना चाहती थी, लेकिन उस के यह अरमान धरे के धरे रह गए. उसे क्या पता था कि वह मौज करने के बजाय प्रेमी संजय कुशवाहाा के साथ जेल चली जाएगी. पुलिस ने दोनों आरोपियों को चरण सिंह की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

 

 

Mumbai Crime News : बेटी ने की मां की हत्या

Mumbai Crime News : करीब 65 वर्षीया सबीरा बानो अपना प्यार और ममता दोनों विवाहित बेटियों रेशमा और जैनबी पर बराबर लुटाती थी. किंतु छोटी बेटी रेशमा को लगता था कि अम्मी उस की बड़ी बहन को अधिक प्यार करती है और उसे दुत्कारती है, उस से द्वेष रखती है. इसे जांचनेपरखने से पहले ही रेशमा ने ऐसा कदम उठाया कि वह जेल की सलाखों के पीछे जा पहुंची. आखिर क्या हुआ? पढ़ें, इस हत्या कथा में…

नए साल 2025 की पहली जुमेरात यानी 2 जनवरी की तारीख थी. शाम होने को आया था. 65 वर्षीया सबीरा बानो छोटी बेटी रेशमा मुजफ्फर काजी के घर गई थी. उस ने दरवाजे पर दस्तक दी और अधखुली किवाड़ को धकेलती हुई घर के भीतर घुस गई. आवाज दी, ”अरे, कहां हो रेशमा… कहां गए सब… कोई दिख नहीं रहा है?’’

”आ रही हूं अम्मीजान, यहीं तो हूं. अब मिली यहां आने की फुरसत!’’ रेशमा रूखेपन से बोली.

”अरे कहां फुरसत है…जैनबी के यहां जाना था, सोचा पहले तुम से मिल लेती हूं.’’ सबीरा बानो शांत भाव से बोली.

”अरे, उसी करमजली के यहां जाती, यहां क्यों आई हो. वही तो तुम्हारी दुलारी बेटी है, मैं कौन हूं…फेंकी हुई!’’ रेशमा शिकायती लहजे में बोलती जा रही थी.

उस की एकएक बात दिल में चुभने वाली थी. बड़ी बहन के खिलाफ नाराजगी साफ झलक रही थी और अपनी अम्मी से रूखे लहजे में बोल रही थी.

”तुम बात समझो, ऐसा कुछ भी नहीं जैसा तुम समझती हो. जैनबी तुम्हारी बड़ी बहन है. जो मन में आता है बोल देती हो. बड़ी बहन को गाली देना ठीक नहीं है.’’ सबीरा ने रेशमा को समझाने की कोशिश की, लेकिन इस का उस पर उल्टा असर हुआ. वह और भी तिलमिला गई. पैर पटकती हुई दूसरे कमरे में चली गई. पीछे से सबीरा भी गई. उसे समझाने की कोशिश करने लगी, ”तुम भी तो मेरी बेटी हो, वह भी है, तुम दोनों हमारे लिए एक जैसी हो. तुम बेकार में अपनी बहन जैनबी के प्रति गिलाशिकवा रखती हो, इस का कोई कारण नहीं है मेरी बच्ची!’’

यह कहती हुई अम्मी सबीरा बानो ने रेशमा को गले लगाने की कोशिश की, लेकिन रेशमा का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था. उस ने उस के बढ़े हुए हाथ झटक दिए. एकदम से लडऩे के मूड में आ गई. तीखी आवाज में बोली, ”क्यों? अब तुम कहोगी कि जैनबी बहुत अच्छी है, समझदार है, मेरी देखभाल करती है, दवादारू करवाती है, यही न!’’

”हां, तो क्यों न कहूं कि तुम से अच्छी तरह वही मेरी देखभाल करती है. 3 महीने पहले मेरी आंखों का इलाज करवाने में उसी ने मदद की, तुम ने कुछ किया क्या?’’ सबीरा अपनी बड़ी बेटी की और तारीफ करने लगी. जबकि रेशमा कुछ ज्यादा ही आक्रोशित होने लगी थी.

फिर उसे न जाने अचानक क्या हुआ, गुस्से में ही किचन में चली गई. गैस चूल्हे के पास रखा बड़ा चाकू हाथ में ले लिया. पीछे से सबीरा भी वहां आ गई. रेशमा ने उसे धकेलते हुए किचन से बाहर कर दिया. सबीरा कुछ समझ नहीं पा रही थी कि रेशमा को अचानक क्या हो गया है. वह एकदम से बौखलाई हुई पागलों जैसी हरकतें कर रही थी. सबीरा बेटी रेशमा को शांत रहने की गुजारिश करती हुई बोली, ”आखिर, तुम क्या चाहती हो? मुझे बताओ, ताकि मैं तुम्हें समझा सकूं.’’ इतना कहना था कि रेशमा का गुस्सा और बढ़ गया.

वह बोली, ”मुझे शांत रहने को कहती हो, मैं आज तुझे ही शांत कर देती हूं.’’

गुस्से में रेशमा ने अपनी अम्मी पर चाकू से हमला कर दिया. चाकू सीधे सबीरा की गरदन में घुसेड़ दिया. वह वहीं गिर गई. घायल अम्मी पर उसे जरा भी रहम नहीं आया. वह और भी आक्रामक हो गई. उस ने लगातार कई वार कर दिए. देखते ही देखते सबीरा खून से लथपथ हो गई. रेशमा ने उस की नाक के आगे अपनी अंगुली लगा कर चैक किया. सांसें भी बंद हो चुकी थीं. उस वक्त शाम के साढ़े 7 बज चुके थे. घर पर कोई और सदस्य नहीं था.

उस की नजरों के सामने ही सबीरा बानो ने दम तोड़ दिया था. जैसे ही उस के जेहन में ध्यान आया कि उस ने अम्मी का कत्ल कर दिया है. अब इस दुनिया में नहीं रही. वह डर गई. उसे एहसास हुआ कि उस ने बहुत बड़ी गलती कर दी है. घबराहट में उस ने अपने पति और भतीजे को फोन किया. खुद मुंबई के चूनाभट्ठी पुलिस थाना जा पहुंची. वहां जा कर पुलिस के सामने धम्म से जा बैठी. हांफते हुए टूटे शब्दों में बोली, ”साहब, मैं ने अपनी अम्मी का कत्ल कर दिया है…ये देखो मेरे हाथ…’’

एक सिपाही उस की फैली हथेली पर लगे खून को देख कर समझ गया. महिला पुलिस की मदद से वह उसे एसएचओ के पास ले गए. रेशमा मुजफ्फर काजी ने वारदात की पूरी कहानी सिलसिलेवार तरीके से एसएचओ के सामने बयां कर दी. एक तरह से उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था. जैनबी को जब अपने भाई से घटना की जानकारी मिली तो वह भागीभागी रेशमा के घर गई. वहां उस ने अपनी अम्मी को खून से लथपथ देखा. वह फूटफूट कर रोने लगी. कुछ समय में ही चूनाभट्ठी पुलिस भी रेशमा के घर पर पहुंच गई. खून से लथपथ पड़ी सबीरा बानो को सायन अस्पताल ले गई, लेकिन डाक्टरों ने जांच के तुरंत बाद ही उसे मृत घोषित कर दिया.

घटनास्थल पर जांच के दौरान पुलिस को रेशमा द्वारा इस्तेमाल किया गया चाकू, खून से सने कपड़े और खून के नमूने बरामद हुए. साथ ही वारदात के वक्त रेशमा द्वारा पहने गए कपड़ों को भी सबूत के तौर पर जब्त कर लिया गया. रेशमा का मोबाइल फोन पुलिस ने चैक किया. पाया कि रेशमा अपने रिश्तेदारों को फोन कर कर अपना जुर्म कुबूल कर चुकी थी. रेशमा मुजफ्फर काजी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उस पर अपनी ही अम्मी की हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया. इस वारदात की पूरी जांच मुंबई परिमंडल 6, चुन्नाभट्ठी के डीसीपी नवनाथ धवले के मार्गदर्शन में की गई.

चूनाभट्ठी पुलिस थाने की महिला सीनियर इंसपेक्टर निशा जाधव, महिला एसआई अंकिता पवार, एसआई बद्रीनाथ कुंडकर आदि ने इस मामले में अपनीअपनी भागीदारी निभाई. रेशमा पर अपराध बीएनएस की धारा 103 (1), 37(1)  के साथ 135 मपोका के तहत अपराध के साथ दर्ज कर लिया गया. बेटी द्वारा अपनी अम्मी की हत्या करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद घटना थी. ऐसी घटना पारिवारिक रिश्तों, सामुदायिक मानसिकता और मानवता पर भारी पड़ती है. समाज के लिए ऐसी घटनाओं के पीछे के कारणों को समझना और ऐसी हिंसक प्रवृत्ति को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना जरूरी है, लेकिन यह शर्मनाक घटना मुंबई में घटी है. यह नौबत क्यों आई, इसे समझने के लिए उस की बड़ी बहनों, उस के भाई और सबीरा बानो के संघर्ष की कहानी को जानना जरूरी है.

जैनबी नौशाद कुरैशी (41 साल) मुंबई के कुरैशी नगर, कुर्ला (पूर्व) में प्रसिद्ध गुलजार होटल के सामने बसे अनहारुल हक चाल के कमरा नंबर 2 में रहती थी. उन की चाल बहुत ही साधारण थी. किसी तरह वह वहां अपने परिवार के साथ समय गुजार रही थी. पति की मृत्यु के बाद जैनबी मुंबई के भायकला में पुश्तैनी पेशे प्याजआलू का व्यवसाय कर परिवार को चला रही थी. उन के जीवन का एकमात्र सहारा 65 साल की मां सबीरा बानो थी. हालांकि वह अपने बेटे असगर शेख के साथ ठाणे जिले के कलवा में रहती थीं. सबीरा बानो के 4 बच्चों में 3 बेटियां और एक बेटा था. सब से बड़ी बेटी फातिमा पुणे में रहती थी. दूसरे नंबर की रेशमा मुजफ्फर काजी मुंबई के कुर्ला, कुरैशी नगर में रह रही थी. वहीं कुछ दूरी पर तीसरी बेटी जैनबी कुरैशी भी रहती थी.

सबीरा बानो अपनी दोनों बेटियों जैनबी और रेशमा के लिए सहारा थी. उन की यादें उन के परिवार के संघर्षों को दर्शाती हैं. सबीरा ने अपनी बेटियों के लिए कितना त्याग किया था, यह उस की बेटियां अच्छी तरह समझती थीं. यह उस की कड़ी मेहनत का ही नतीजा था कि उन की तीनों बेटियां अपने पैरों पर खड़ी थीं. उस ने अपनी बेटियों के लिए कड़ी मेहनत की और उन को प्यार दिया. उन्हें परिवार के संस्कार दिए और उन की मार्गदर्शक बनी रही. जबकि उस की बेटियां अपनी अम्मी में ही मीनमेख निकालने लगीं. उन्होंने यह नहीं समझा कि उन की अम्मी बुढ़ापे की उम्र की ढलान पर है. उस की कुछ गलतियां स्वाभाविक हैं. इस कारण वे कई बार अम्मी को गलत समझ लेती थीं. ऐसे विचार रेशमा के मन में कुछ ज्यादा ही आते थे.

सबीरा यह उम्मीद करती थी कि भले ही उन की बेटियां अपनी ससुराल जा चुकी हैं, फिर भी वह उन से जुड़ी रहें. उन के अनुभवों से कुछ अच्छा सीखें. कहने को तो जैनबी और रेशमा बहनें थीं, लेकिन जैनबी का अपनी अम्मी से गहरा रिश्ता था. वह अम्मी की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझती थी. लेकिन अम्मी के प्रति उस का अत्यधिक सम्मान कभीकभी उस की छोटी बहन रेशमा को नाराज कर देता था, जिस से उन के बीच बहस छिड़ जाती थी.रेशमा अधिक स्वतंत्र, विद्रोही और आधुनिक विचारों वाली थी. उसे लगता था कि अम्मी को उस के फैसलों में कम दखल देना चाहिए. इस के चलते उस की उन के साथ अकसर बहस होती रहती थी.

वैसे विवादों की शुरुआत आमतौर पर तब होती थी, जब अम्मी किसी एक की तारीफ करने लगती थी और किसी के फैसले की आलोचना कर देती थी. इस के पीछे अम्मी का इरादा बेटियों को उचित मार्गदर्शन देना होता था, लेकिन कभीकभी उन की बातें बेटियों को कड़वी लगने लगती थीं. खासकर छोटी बेटी रेशमा बड़ी बहन की तारीफ सुन कर परेशान हो जाती थी. इस से दोनों बहनों के रिश्ते पर बुरा असर पड़ गया था. बड़ी बेटी जैनबी अम्मी से बहुत प्यार करती थी. जब कभी समीरा उस के घर जाती तो वह प्यार से उन की देखभाल करती. उन्हें खर्च के लिए पैसे देते हुए और जरूरत के मुताबिक दवा पानी भी मुहैया कराती थी.

इसलिए सबीरा बानो बेटी जैनबी के घर रेशमा की तुलना में अधिक जाती थीं. उन की प्रेमपूर्ण सेवा के लिए उन्हें भरपूर आशीर्वाद देती थी. सबीरा सिर्फ जैनबी के घर ही नहीं जाती थी, बल्कि रेशमा के घर भी जाती रहती थीं. सबीरा बानो जब रेशमा के सामने जैनबी की प्रशंसा करती हुई कहती थी, ”मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे जैनबी जैसी बेटी मिली.’’ तब वह जलभुन जाती थी. नतीजतन  रेशमा के मन में अम्मी के प्रति नफरत का बीजारोपण हो गया था. जिस कारण वह अपनी अम्मी को ताने देती थी. बातबात पर झगड़ जाती थी. जैनबी और रेशमा के स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर था. जैनबी ने अपने जीवन में कष्टों का सामना करते हुए आत्मनिर्भरता हासिल की थी. दूसरी ओर रेशमा को हमेशा लगता था कि उस की अम्मी उसे कम प्यार करती है.

रेशमा का यह गुस्सा धीरेधीरे बढ़ता गया. अम्मी के जरिए जैनबी का खासा खयाल रखने से पर रेशमा काफी गलतफहमियों की कुंठा से भर गई. इसी गुस्से के चलते रेशमा और जैनबी कुरैशी के बीच विवाद हो गया. रेशमा ने 2021 में मुंबई के चूनाभट्ठी पुलिस स्टेशन में जैनबी कुरैशी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी थी. वैसे तो सबीरा बानो अपने बेटे के साथ कलवा में रहती थी, लेकिन वह समयसमय पर कुर्ला में रहने वाली अपनी बेटी जैनबी और रेशमा के पास भी आतीजाती रहती थी. पिछले 3 महीने से उन की दाहिनी आंख का इलाज मुंबई के सायन हौस्पिटल में चल रहा था, इसलिए वह समयसमय पर जैनबी के पास रहने चली जाती थी.

लेकिन जब वह रेशमा के घर जाती थी तो जैनबी का कुछ ज्यादा ही गुणगान करने लगती थी. साथ ही सबीरा ने लंबे समय तक अपनी बेटी जैनबी के साथ रहने की योजना बना ली थी. जिस पर रेशमा अपनी अम्मी को ताने देती थी. इस की उस ने जैनबी से कई बार शिकायत भी की थी. उस ने बताया था कि रेशमा उस के साथ हाथापाई पर उतर आती है. सबीरा आंख का इलाज कराने के बाद 4 दिन पहले ठाणे जिला के कलवा में अपने बेटे अख्तर शेख के साथ रहने चली गई थी.

उन्हीं दिनों सबीरा ने रेशमा मुजफ्फर काजी के घर जाने का मन बनाया था और वह 2 जनवरी, 2025 को उस के घर गई थी. किंतु वहां रेशमा ने उस का शिकायती लहजे में स्वागत किया और तुरंत ही झगड़ पड़ी. उन का झगड़ा इतना बढ़ जाएगा, इस का अंदाज दोनों में से किसी को नहीं था. लेकिन कहते हैं सबीरा को मौत का काल अपनी ओर खींच ले गया तो रेशमा बदहवासी की हालत में जुर्म करने से खुद को नहीं रोक पाई.

कथा लिखे जाने तक रेशमा से पूछताछ करने के बाद उसे जेल भेजा चुका था.

 

 

पत्नी ने रचाई साजिश : 5 लाख की सुपारी देकर कराया पति का खौफनाक कत्ल

Crime News : मौडर्न और महत्त्वाकांक्षी विनीता ने प्रवक्ता पति के होते 2-2 प्रेमी बना लिए थे. जब वह चेन मार्केटिंग कंपनी ‘वेस्टीज’ से जुड़ने के बाद तो वह अवधेश को 2 कौड़ी का समझने लगी थी. आखिर उस ने अपने मन की करने के लिए…

42 वर्षीय अवधेश सिंह जादौन फिरोजाबाद जिले के भीतरी गांव के निवासी थे. वह बरेली जिले के सहोड़ा में स्थित कुंवर ढाकनलाल इंटर कालेज में हिंदी लेक्चरर के पद पर तैनात थे. नौकरी के चलते ढाई वर्ष पहले उन्होंने बरेली के कर्मचारीनगर की निर्मल रेजीडेंसी में अपना निजी मकान ले लिया था, जिस में वह अपनी पत्नी विनीता और 6 वर्षीय बेटे अंश के साथ रहते थे. 12 अक्तूबर, 2020 को अवधेश से फोन पर गांव में रह रही उन की मां अन्नपूर्णा देवी ने बात की थी. अवधेश उस समय काफी परेशान थे. मां ने उन्हें दिलासा दी कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा. इस के बाद उन्होंने अवधेश से बात करनी चाही, लेकिन बात न हो सकी. उन का मोबाइल बराबर स्विच्ड औफ आ रहा था. अन्नपूर्णा को चिंता हुई तो वह 16 अक्तूबर को बरेली पहुंच गईं. जब वह बेटे के मकान पर पहुंची, तो वहां मेनगेट पर ताला लगा मिला.

पड़ोसियों से पूछताछ की तो पता चला कि 12 अक्तूबर, 2020 को कुछ लोग कार से अवधेश के मकान में आए थे. तब से उन्हें नहीं देखा. अन्नपूर्णा का दिल किसी अनहोनी की आशंका से धड़कने लगा. वह वहां से स्थानीय थाना इज्जतनगर पहुंच गईं और थाने के इंसपेक्टर के.के. वर्मा को पूरी बात बताई. यह भी बताया कि अवधेश को अपने ससुरालीजनों से खतरा था. यह बात अवधेश ने 12 अक्तूबर को फोन पर बात करते समय मां को बताई थी. उस की पत्नी विनीता भी अपने बच्चे के साथ गायब थी. इस पर अन्नपूर्णा से लिखित तहरीर ले कर इंसपेक्टर वर्मा ने थाने में अवधेश सिंह जादौन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी.  फिरोजाबाद के फरिहा में 4/5 दिसंबर, 2019 की रात एक ज्वैलर्स की दुकान में हुई चोरी के मामले में पुलिस के एसओजी प्रभारी कुलदीप सिंह ने नारखी थाना क्षेत्र के धौकल गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह उर्फ चीकू को पकड़ा.

25 अक्तूबर, 2020 की शाम शेर सिंह को उठा कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने बरेली के हिंदी प्रवक्ता अवधेश सिंह की हत्या करना स्वीकार किया. अवधेश की पत्नी विनीता ने अवधेश की हत्या के लिए उसे 5 लाख की सुपारी दी थी. इस में विनीता के पिता थाना नारखी के खेरिया खुर्द गांव निवासी रिटायर्ड फौजी अनिल जादौन, भाई प्रदीप जादौन, बहन ज्योति, विनीता का आगरा निवासी प्रेमी अंकित और शेर सिंह के 2 साथी भोला और एटा निवासी पप्पू जाटव शामिल थे. हत्या में कुल 8 लोग इस शामिल थे. शेर सिंह ने बताया कि बरेली में हत्या करने के बाद लाश को सभी लोग फिरोजाबाद ले कर आए और यहां नारखी में रामदास नाम के व्यक्ति के खेत में गड्ढा खोद कर दफना दिया था.

अवधेश मिला पर जीवित नहीं इस खुलासे के बाद फिरोजाबाद पुलिस ने बरेली की इज्जतनगर पुलिस को सूचना दी. अवधेश की मां अन्नपूर्णा को बुला कर 26 अक्तूबर, 2020 को फिरोजाबाद पुलिस ने तहसीलदार की उपस्थिति में उस खेत में बताई गई जगह पर खुदाई करवाई तो वहां से अवधेश की लाश मिल गई. चेहरा बुरी तरह जला हुआ था. शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. अवधेश की लाश मिलने के बाद उसी दिन इज्जतनगर थाने में विनीता, ज्योति, अनिल जादौन, प्रदीप जादौन, अंकित, शेर सिंह उर्फ चीकू, भोला सिंह और पप्पू जाटव के विरुद्ध भादंवि की धारा 147/302/201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस के बाद हत्याभियुक्तों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी गई, लेकिन सभी अपने घरों से लापता थे.

उन सब के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए गए. सभी के मोबाइल बंद थे. बीच में किसी से बात करने के लिए कुछ देर के लिए खुलते तो फिर बंद हो जाते. उन की लोकेशन जिस शहर की पता चलती, वहां पुलिस टीम भेज दी जाती. लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही हत्यारे वहां से निकल जाते थे. 31 अक्तूबर, 2020 को एक हत्यारोपी पप्पू जाटव उर्फ अखंड प्रताप को इंसपेक्टर के.के. वर्मा ने गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी बयान में वहीं कहा, जो शेर सिंह ने कहा था. इस बीच 5 नवंबर को इज्जतनगर पुलिस ने सभी आरोपियों के गैरजमानती वारंट हासिल कर लिए. अगले ही दिन इस से डर कर अवधेश की पत्नी विनीता ने अपने वकील के माध्यम से थाने में आत्मसमर्पण कर दिया.

पूछताछ में वह अपने मृतक पति अवधेश को ही गलत साबित करने पर तुल गई. जबकि उस की सारी हकीकत सब के सामने आ गई. जब उस से क्रौस क्वेशचनिंग की गई. कई सवालों पर वह चुप्पी साध गई. अनिल जादौन परिवार के साथ फिरोजाबाद के गांव खेरिया खुर्द में रहते थे. वह सेना से रिटायर थे. परिवार में पत्नी रेखा और 3 बेटियां विनीता, नीतू और ज्योति व एक बेटा प्रदीप था. अनिल के पास पर्याप्त कृषियोग्य भूमि थी. तीनों बेटियां काफी खूबसूरत थीं और सभी ने स्नातक तक पढ़ाई पूरी कर ली थी. 2010 में नीतू का अफेयर गांव के ही पूर्व प्रधान के बेटे के साथ हो गया. जिस पर काफी बवाल हुआ. इस पर अनिल ने जल्द से जल्द अपनी बेटियों का विवाह करने का फैसला कर लिया. नारखी थाना क्षेत्र के ही गांव भीतरी में बाबू सिंह का परिवार रहता था.

परिवार में पत्नी अन्नपूर्णा और 2 बेटे रमेश और अवधेश थे. रमेश का विवाह हो चुका था और वह परिवार के साथ जयपुर में रह कर नौकरी कर रहा था. अविवाहित अवधेश हिंदी प्रवक्ता के पद पर नौकरी कर रहा था. नौकरी के चक्कर में उस की उम्र अधिक हो गई थी. अवधेश विनीता से 12 साल बड़ा था. फिर भी अनिल विनीता की शादी उस से करने को तैयार हो गए. अनिल ने विनीता से बात की तो वह मना करने लगी कि 12 साल बड़े लड़के से शादी नहीं करेगी. अनिल ने जब समझाया कि वह सरकारी नौकरी में है, उस के पास पैसों की कमी नहीं है तो वह शादी के लिए तैयार हो गई. 2011 में अवधेश का विनीता से विवाह हो गया. उसी दिन ज्योति का भी विवाह हुआ. विनीता मायके से ससुराल आ गई. विनीता पढ़ीलिखी आजाद खयालों वाली युवती थी. जबकि अवधेश सीधेसादे सरल स्वभाव का था. दोनों एक बंधन में तो बंध गए थे लेकिन उन के विचार, उन की सोच बिलकुल एकदूसरे से अलग थी.

पति सीधा था पत्नी मौडर्न विनीता को ठाठबाट से रहना पसंद था. जबकि अवधेश को साधारण तरीके से जीवन जीना अच्छा लगता था. दोनों की सोच और खयाल एक नहीं थे तो उन में आए दिन मनमुटाव और विवाद होने लगा. विनीता की अपनी सास अन्नपूर्णा से भी नहीं बनती थी. अवधेश अपनी मां की बात मानता था. विनीता इस बात को ले कर भी चिढ़ती थी. दोनों के बीच विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहे थे. 6 साल पहले विनीता ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम उन्होंने अंश रखा. ढाई वर्ष पहले बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र के कर्मचारी नगर की निर्मल रेजीडेंसी में अवधेश ने अपना निजी मकान ले लिया. पहले वह मकान विनीता के नाम लेना चाहता था.

लेकिन उस की बातें और हरकतों से उस का मन बदल गया. वह विनीता व बेटे के साथ अपने नए मकान में आ कर रहने लगा. बढ़ते आपसी विवादों में विनीता अवधेश से नफरत करने लगी थी. उस ने शादी से पहले सोचा था कि अवधेश उस के कहे में चलेगा, उस की अंगुलियों के इशारे पर नाचेगा, लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ. पैसों के लिए उसे अवधेश का मुंह देखना पड़ता था. अवधेश अपनी सैलरी से विनीता को उस के खर्च के लिए 3 हजार रुपए महीने देता था. उस में विनीता का गुजारा नहीं होता था. अपने खर्चे को देखते हुए विनीता ने घर में ही ‘रिलैक्स जोन’ नाम से एक ब्यूटीपार्लर खोल लिया. विनीता अपनी छोटी बहन ज्योति की ससुराल जाती थी. वहीं पर उस की मुलाकात सिपाही अंकित यादव से हो गई.

अंकित यादव बिजनौर का रहने वाला था. उस समय उस की पोस्टिंग मैनपुरी में थी. अंकित अविवाहित था और काफी स्मार्ट था. विनीता से उस की बात हुई तो वह उस के रूपजाल में उलझ कर रह गया. फिर दोनों मोबाइल पर बातें करने लगे. एक दिन अंकित विनीता से मिलने बरेली आया. दोनों एक होटल में मिले. उस दिन से दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए. विनीता से मिलने वह अकसर बरेली आने लगा. विनीता का भाई प्रदीप एक मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी में नौकरी करता था. उस ने विनीता से कहा कि वह मल्टीलेवल मार्केटिंग से जुड़ी कंपनी ‘वेस्टीज’ से जुड़ जाए. इस में कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का मौका मिलता है. चेन मार्केटिंग कंपनियां कंपनी से जुड़ने वाले लोगों को बड़ेबडे़ सपने दिखाती हैं.

विनीता ने भी कंपनी से जुड़ने का फैसला कर लिया. वह कई मीटिंग में गई और मीटिंग में जाने के बाद उस पर चेन मार्केटिंग के जरिए जल्द से जल्द पैसा कमा कर रईस बनने का नशा सवार हो गया. इस के लिए उस ने इसी साल की शुरुआत में कंपनी जौइन कर ली. इस के लिए विनीता ने किसी बड़ी महिला अधिकारी की तरह अपनी वेशभूषा बनाई. शानदार सूटबूट में चश्मा लगा कर जब वह इंग्लिश में बड़े विश्वास के साथ अपनी बात किसी भी व्यक्ति के सामने रखती तो वह उस का मुरीद हो जाता और उस के कहने पर कंपनी जौइन कर लेता. भाई प्रदीप की लाल टीयूवी कार विनीता अपने पास रखने लगी. वह इसी कार से लोगों से मिलने जाती थी.

लग्जरी कार से सूटेडबूटेड महिला को उतरता देख कर लोगों पर इस का काफी गहरा प्रभाव पड़ता. घर की चारदीवारी से विनीता बाहर निकली तो उस ने अपने लिए पैसों का इंतजाम करना शुरू कर दिया. अब लोग विनीता से मिलने घर पर भी आने लगे. विनीता की चल पड़ी दुकान अवधेश तो दिन में कालेज में होता था और शाम को ही लौटता था. उसे पड़ोसियों से पता चलता तो अवधेश और विनीता में विवाद होता. विनीता पहले जब अवधेश से नहीं डरीदबी तो अब तो वह खुद का काम कर रही थी. ऐसे में अवधेश को ही शांत होना पड़ता था. दोनों  के बीच की दूरियां गहरी खाई में तब्दील होती जा रही थीं. दूसरी ओर विनीता की बहन ज्योति का अपनी ससुरालवालों से मनमुटाव हो गया था. वह काफी समय से मायके में रह रही थी. विनीता ने उसे अपने पास रहने के लिए बुला लिया. इस से भी अवधेश खफा था.

लौकडाउन के दौरान फेसबुक पर विनीता की दोस्ती अमित सिसोदिया उर्फ अंकित से हुई. अमित आगरा का रहने वाला था और वेस्टीज कंपनी से ही जुड़ा था, जिस से विनीता जुड़ी थी. अमित विवाहित था और एक बेटे का पिता भी था. दोनों की फेसबुक पर बातें हुईं तो पता चला कि अमित विनीता के भाई प्रदीप का दोस्त है. इस के बाद दोनों खुल कर बातें करने लगे और मिलने भी लगे. दोनों अलगअलग शहरों में होने वाले कंपनी के सेमिनार में भी साथ जाने लगे. अमित और विनीता की सोच और विचार काफी मिलते थे. एक साथ रहने के दौरान विनीता को यह बात महसूस हो गई थी. दोनों ही जिंदगी में खूब पैसा कमाना चाहते थे. दोनों साथ बैठते तो कल्पनाओं की ऊंची उड़ान भरते. एक दिन अमित ने विनीता का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘विनीता, हम दोनों बिलकुल एक जैसे है.

एक जैसा सोचते हैं, एक जैसा काम करते है और एक ही उद्देश्य है, एकदूसरे का साथ भी हमें भाता है. क्यों न हम हमेशा के लिए एक हो जाएं.’’

विनीता पहले हलके से मुसकराई, फिर गंभीर मुद्रा में बोली, ‘‘हां अमित, मैं भी ऐसा ही सोच रही थी. यह भी सोच रही थी कि तुम मेरी जिंदगी में पहले क्यों नहीं आए, आ जाते तो मुझे कष्टों से न गुजरना पड़ता.’’ कुछ पलों के लिए रुकी, फिर बोली, ‘‘खैर अब भी हम एक हो सकते हैं ठान लें तो.’’

विनीता की स्वीकृति मिलते ही अमित खुश हो गया, ‘‘तुम ने कह दिया तो अब हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता.’’ कह कर अमित ने विनीता को बांहों में भर लिया. विनीता भी उस से लिपट गई. अमित को पा कर जैसे विनीता ने राहत की सांस ली. उसे ऐसे ही युवक की तलाश थी जो उस के जैसा हो, उसे समझता हो और उस के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाए. दूसरी ओर वह अंकित यादव से भी संबंध बनाए हुए थी. विनीता दिनरात एक कर के अपने मार्केटिंग के बिजनैस में सफल होना चाहती थी. इसलिए वह इस में लगी रही. कुछ महीनों में ही उस ने अपने अंडर में एक हजार लोगों की टीम खड़ी कर दी. कंपनी ने उसे कंपनी का ‘सिलवर डायरेक्टर’ घोषित कर दिया.

विनीता खुशी से फूली नहीं समाई. कंपनी ने उसे एक स्कूटी भी इनाम में दी. विनीता अपनी कंपनी के कार्यक्रमों और उस के रिकौर्डेड संदेशों को अपने फेसबुक अकाउंट पर डालती रहती थी. कंपनी से जुड़ने के लिए लोगों से अपील भी करती थी कि उस के पास बिजनैस करने का एक अनोखा आइडिया है, जिस में महीने में 5 से 50 हजार तक कमा सकते हैं. जो कमाना चाहते हैं, उस से मिलें. विनीता की जिंदगी में सब कुछ अब अच्छा ही अच्छा हो रहा था. बस खटकता था तो अवधेश. उस के साथ होने वाली कलह. अब विनीता अवधेश से छुटकारा पाने की सोचने लगी थी. उस की जिंदगी में अमित आ चुका था, वह उस के साथ जिंदगी बिताने का सपना देखने लगी थी. अमित भी उस से कई बार कह चुका था कि वह कहे तो अवधेश को ठिकाने लगा दिया जाए. वह ही मना कर देती थी.

अवधेश के मरने से उसे हमेशा के लिए छुटकारा तो मिलता ही साथ ही अवधेश का मकान और सरकारी नौकरी भी मिल जाती. यही सोच कर उस ने आगे की योजना बनानी शुरू कर दी. इस में उस ने अपने पिता व भाई से साफ कह दिया कि वह अवधेश के साथ नहीं रहना चाहती. उसे मारने से उसे मकान और उस की सरकारी नौकरी भी मिलेगी. विनीता के पिता अनिल ने एक बार कहा भी कि वह अपना बसा हुआ घर न उजाड़े, लेकिन विनीता नहीं मानी. विनीता की जिद और लालच के लिए वे सभी उस का साथ देने को तैयार हो गए. विनीता का एक मुंहबोला चाचा था शेर सिंह उर्फ चीकू. वह उस के पिता अनिल का खास दोस्त था. शेर सिंह नारखी थाने का हिस्ट्रीशीटर था, उस पर वर्तमान में 16 मुकदमे दर्ज थे.

विनीता ने शेर सिंह से कहा कि उसे उस के पति अवधेश की हत्या करनी है. शेर सिंह ने उस से 5 लाख रुपए का इंतजाम करने को कहा तो विनीता ने हामी भर दी. अवधेश ने कार खरीदने के लिए घर में रुपए ला कर रखे थे. सोचा था कि नवरात्र में बुकिंग करा देगा और धनतेरस पर गाड़ी खरीद लेगा. उन पैसों पर विनीता की नजर पड़ गई. उन रुपयों में से 70 हजार रुपए निकाल कर विनीता ने शेर सिंह को दे दिए, बाकी पैसा बाद में देने को कहा. इस के बाद शेर सिंह ने अपने गांव के ही भोला सिंह और एटा के पप्पू जाटव को हत्या में साथ देने के लिए तैयार कर लिया. शेर सिंह ने विनीता, विनीता के पिता अनिल, भाई प्रदीप और प्रेमी अमित सिसोदिया के साथ मिल कर अवधेश की हत्या की योजना बनाई. विनीता ने बाद में ज्योति को इस बारे में बता कर उसे भी अपने साथ शामिल कर लिया.

12 अक्तूबर, 2020 की रात अवधेश रोज की तरह टहलने के लिए निकले. उस के जाने के बाद विनीता ने हत्या के उद्देश्य से पहुंचे शेर सिंह, भोला, पप्पू जाटव, अनिल, प्रदीप और अमित को घर के अंदर बुला लिया. सभी घर में छिप कर बैठ गए. कुछ देर बाद जब अवधेश लौटे तो घर में घुसते ही सब ने मिल कर उसे दबोच लिया. विनीता अपने बेटे अंश को ले कर ऊपरी मंजिल पर चली गई. नीचे सभी ने अवधेश को पकड़ कर उस का गला घोंट दिया. अवधेश के मरने के बाद विनीता नीचे उतर कर आई. अवधेश की लाश को बड़ी नफरत से देख कर गाली देते हुए उस में कस के पैर की ठोकर मार दी. देर रात अमित ने लाश को सभी के सहयोग से अपनी आल्टो कार में डाल लिया. इस के बाद प्रदीप की टीयूवी कार जो विनीता के पास रहती थी, सब उस में सवार हो गए.

प्रदीप कार चला रहा था. उस के पीछे थोड़ी दूरी पर अंकित चल रहा था. लगभग साढ़े 3 घंटे का सफर तय कर के अवधेश की लाश को ले कर वे फिरोजाबाद में नारखी पहुंचे. लेकिन तब तक उजाला हो चुका था. इसलिए लाश को कहीं दफना नहीं सकते थे. इन लोगों ने पूरा दिन ऐसे ही निकाला. इस बीच लाश को जलाने के लिए बाजार से तेजाब खरीद कर लाया गया. अंधेरा होने पर नारखी में रामदास के खेत में गड्ढा खोद कर अवधेश की लाश को उस में डाल दिया गया. फिर लाश पर तेजाब डाल दिया गया, जिस से लाश का चेहरा व कई हिस्से जल गए. लाश को दफनाने के बाद सभी वहां से लौट आए. विनीता बराबर वीडियो काल के जरिए उन लोगों के संपर्क में थी. 14 अक्तूबर, 2020 को वह भी बेटे अंश को ले कर घर से भाग गई.

शेर सिंह पकड़ा गया तो घटना का खुलासा हुआ. उस ने विनीता के प्रेमी अंकित का नाम लिया. घटना की खबर अखबारों की सुर्खियां बनीं तो विनीता के प्रेमी सिपाही अंकित यादव ने देखा. अंकित ने अपना नाम समझा. उसे लगा कि पुलिस को विनीता की काल डिटेल्स से उस के बारे में पता लग गया है. अब वह भी इस हत्याकांड की जांच में फंस जाएगा. दूसरी ओर अंकित नाम आने पर विनीता के शातिर दिमाग ने खेल खेला. अपने प्रेमी अमित सिसोदिया को बचाने के लिए वह अंकित को ही फंसाने में लग गई. 26 अक्तूबर, 2020 को वह अंकित यादव से मिलने संभल गई. 2 महीने से अंकित संभल की हयातनगर चौकी पर तैनात था. वहां वह उस से मिली. कुछ सिपाहियों ने उसे उस के साथ देखा भी. विनीता उस से मिल कर चली गई. अंकित भयंकर तनाव में आ गया.

27 अक्तूबर, 2020 को उस ने अपने साथी सिपाही की राइफल ले कर उस से खुद को गोली मार ली. अंकित के आत्महत्या कर लेने की बात विनीता को पता चल गई थी. इसलिए जब उस ने आत्मसमर्पण किया तो वह सारा दोष अंकित यादव पर डालती रही. वह अपने प्रेमी अमित सिसोदिया उर्फ अंकित को बचाना चाहती थी. समर्पण से पहले विनीता ने अपना मोबाइल भी तोड़ दिया था, ताकि पुलिस उस मोबाइल से कोई सुराग हासिल न कर सके. गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद से सभी आरोपियों में इस बात का खौफ है कि पुलिस उन की संपत्तियों को तोड़फोड़ सकती है, कुर्क कर सकती है. इसलिए बारीबारी से सभी आत्मसमर्पण करने की तैयारी में लग गए.

फिलहाल कथा लिखे जाने तक पुलिस शेष आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी. शेर सिंह की रिमांड 20 नवंबर को मिलनी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों व मीडिया में छपी रिपोर्टों के आधा