Gujrat News: पैसों की चकाचौंध में बह गई भावना

Gujrat News: 30 जून, 2023 को गुजरात के जिला भरूच के थाना जंबुसर पुलिस को सूचना मिली कि पगरनाला में एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. लाश किसी पुरुष की थी, जिस की उम्र 36 साल के आसपास थी.

मरने वाले के शरीर पर कपड़े के नाम पर सिर्फ पैंट थी. पुलिस ने पैंट की तलाशी ली कि शायद उस की जेब से ऐसा कुछ मिल जाए, जिस से उस की पहचान हो जाए. पर उस की जेब से कुछ भी नहीं मिला. आसपास भी ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की पहचान हो पाती. तब पुलिस ने घटनास्थल की औपचारिक काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस के बाद थाने आ कर यह पता करने की कोशिश की जाने लगी कि जिले में कहीं कोई गुमशुदगी तो नहीं दर्ज है. पर जिले के किसी थाने में उस हुलिए के किसी व्यक्ति की कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं थी. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने लाश को बड़ौदा की मोर्चरी में रखवा दी. इस के बाद पुलिस यह पता करने की कोशिश करती रही कि मरने वाला कौन है?

10 दिन बाद हुई लाश की शिनाख्त

लाश मिलने के 10 दिनों बाद थाना जंबुसर से करीब 400 किलोमीटर दूर जिला बनासकांठा के थाना थराद के एसएचओ इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी ने फोन कर के जंबुसर पुलिस से पूछा, “पता चला है कि आप के थानांतर्गत एक पुरुष की लाश मिली है. मरने वाले की उम्र 36 साल के आसपास है.”

“जी, आज से 10 दिन पहले नाले में एक लाश मिली थी. मरने वाले की यही उम्र होगी, जितनी आप बता रहे हैं. मैं उस के फोटो भेज रहा हूं. लाश अभी मोर्चरी में रखी है.” थाना जंबुसर पुलिस ने कहा.

जंबुसर पुलिस ने लाश के फोटो भेजे तो पता चला कि वह लाश गुजरात के जिला बनासकांठा की तहसील थराद के गांव चोटपा के रहने वाले मारवाड़ी चौधरी पटेल शंकरभाई की थी. वह गांव में रह कर खेती करने के साथसाथ मकान बनाने के ठेके लेता था. उस के परिवार में पत्नी भावना पटेल के अलावा 3 बच्चे और बूढ़े मांबाप थे. पिता को लकवा मार दिया था, इसलिए वह चलफिर नहीं सकते थे.

29 जून, 2023 को साइट से आने के बाद शाम का खाना खा कर शंकर यह कह कर घर से निकला था कि वह पड़ोस में रहने वाले ऊदाजी के पास जा रहा है. वह घर से गया तो फिर लौट कर नहीं आया. घर वालों ने थोड़ी देर इंतजार किया. पर जब समय ज्यादा होने लगा तो उस के बारे में पता करने लगे. फोन किया गया तो पता चला फोन बंद है.

अगले दिन यानी 30 जून को थाना थराद पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन थाना थराद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय एकदो दिन और इंतजार करने के लिए कह कर सूचना देने गई शंकर की मां मीरादेवी को वापस भेज दिया था.

गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने की कार्यवाही

जब 2 जुलाई तक शंकर नहीं आया तो मीरादेवी दोबारा थाने जा पहुंची. इस बार इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी से उन की मुलाकात हो गई. उन्होंने तुरंत शंकर की गुमशुदगी दर्ज कराई और शंकर के बारे में पता कराने का आश्वासन दे कर मीरादेवी को घर भेज दिया.

इस के बाद एसएचओ ने शंकर की तलाश शुरू की. गांव वालों से पूछताछ में पता चला कि शंकर की पत्नी भावनाबेन का चरित्र ठीक नहीं है. इस के बाद उन्होंने भावना का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया. इस से उन्हें पता चला कि भावना लगातार पड़ोसी गांव कलश के रहने वाले शिवा पटेल के संपर्क में है.

जब उन्होंने शिवा पटेल के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह 29 जून को अंकलेश्वर से गांव आया तो था, पर अपने घर नहीं गया था. इस के अलावा 29 जून को उस ने शंकर को फोन भी किया था. 29 जून की शंकर और शिवा के फोन की लोकेशन निकलवाई गई तो पता चला कि दोनों के फोन की लोकेशन एक साथ थी.

इस से पुलिस को उस पर शक हुआ तो पुलिस ने उस की लोकेशन निकलवाई. उस की लोकेशन अंकलेश्वर की मिली. इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी की टीम अंकलेश्वर पहुंची और शिवा को गिरफ्तार कर के थाने ले आई.

थाने ला कर शिवा से पूछताछ शुरू हुई. शिवा पुलिस को गोलगोल घुमाता रहा. उस का कहना था कि वह 29 जून को गांव गया ही नहीं था. इधर शंकर से उस की मुलाकात ही नहीं हुई, लेकिन जब पुलिस ने उस के मोबाइल फोन की लोकेशन उस के सामने रखी तो उस ने शंकर के मर्डर में अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि भावना के साथ रहने के लिए उस ने शंकर की हत्या की है. इस के बाद उस ने भावना से प्यार होने से ले कर शंकर की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

मेले में मिल गए दोनों के दिल

शंकरभाई पटेल और भावनाबेन का विवाह करीब 14 साल पहले हुआ था. शंकर अपने परिवार के साथ चोटपा गांव में खेतों के बीच मकान बना कर रहता था. उस की दोस्ती कलश गांव के शिवाभाई पटेल से थी. वह भी मारवाड़ी चौधरी पटेल था. वह भी खेतों के बीच घर बना कर रहता था, शायद इसीलिए दोनों में कुछ ज्यादा पटती थी.

शिवा शंकर के घर भी खूब आताजाता था. शिवा अंकलेश्वर में मेटल का धंधा करता था. वह जब भी अंकलेश्वर से गांव आता, शंकर को अपनी क्रेटा गाड़ी में बैठा कर घुमाता था.

एक बार वह राजस्थान के बौर्डर पर लगने वाले लवाड़ा के मेले में घूमने जा रहा था तो शंकर के साथ उस की पत्नी भावना भी मेला देखने गई थी. उसी मेले में शिवा और भावना ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया था. बाद में दोनों के बीच फोन पर बातें होने लगीं. फोन पर बातें करतेकरते दोनों के बीच प्रेम संबंध बना तो फिर शारीरिक संबंध भी बन गए.

शिवा कुंवारा था, जवान था, अच्छा पैसा कमाता था, उसे एक महिला शरीर की जरूरत भी थी, जो भावना ने पूरी कर दी थी. शिवा के पास पैसों की कमी नहीं थी, वह दिल खोल कर भावना पर पैसे खर्च करता था तो भावना भी प्यार से उस की शारीरिक जरूरतें पूरी करती थी. यह अवैध संबंध इसी तरह चलते रहे.

यह लगाव जब गहराया तो भावना अकसर शिवा से शिकायत करने लगी, “मेरा पति शंकर मुझे बहुत परेशान करता है. जराजरा सी बात पर मुझे मारता है.”

शिवा के प्यार में डूब गई भावना

जब कभी भावना और शंकर में झगड़ा होता तो भावना शिवा को फोन कर के पति और अपना झगड़ा शिवा को सुनाती भी थी. शंकर भावना के साथ जो बरताव कर रहा था, वह शिवा को अच्छा नहीं लगता था. पर वह शंकर से कुछ कह भी नहीं सकता था.

शिवा भावना से बहुत प्यार करता था, इसलिए एक दिन उस ने कहा, “तुम शंकर को छोड़ कर मेरे साथ क्यों नहीं रहने आ जाती? मैं तुम्हें रानी की तरह रखूंगा.”

इस पर भावना ने कहा, “घर में बूढ़े मांबाप हैं, उन्हें छोड़ कर आऊंगी तो समाज मुझ पर थूकेगा. मेरी बहुत बदनामी होगी.”

“तब तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” शिवा ने कहा.

“कुछ तो करना ही होगा, मैं इस आदमी के साथ अब नहीं रह सकती.” भावना बोली.

28 जून, 2023 को किसी बात पर शंकर और भावना में झगड़ा हुआ. तब भावना ने शिवा को फोन कर के कहा, “शिवा, तुम किसी भी तरह मुझे इस आदमी से छुड़ाओ. अब मैं इस आदमी के साथ बिलकुल नहीं रह सकती.”

शिवा भावना से प्यार तो करता ही था. पर उस के लिए परेशानी यह थी कि उस की बिरादरी में पति या पत्नी को छोडऩा आसान नहीं है. इसलिए जब उस ने भावना से एक बार फिर शंकर को छोड़ कर आने को कहा तो भावना बोली, “अगर मैं शंकर को छोड़ कर आती हूं तो समाज में मेरी बहुत बदनामी होगी. इसलिए शंकर से छुटकारा पाने के लिए उस का कुछ करना होगा.”

“वही तो मैं पूछ रहा हूं कि शंकर का किया जाए?” शिवा ने पूछा.

“ऐसा है, अगर तुम मेरे साथ रहना चाहते हो तो उसे खत्म कर दो. वह नहीं रहेगा तो हम दोनों आराम से रह सकेंगे.” भावना ने कहा.

“ठीक है, जैसा तुम कह रही हो, वैसा ही करते हैं. आराम से बैठ कर योजना बनाते हैं, उस के बाद शंकर को खत्म कर देते हैं.” शिवा ने कहा.

शंकर की हत्या की हुई प्लानिंग

28 जून को यह बात हुई थी. इस के पहले भी दोनों में शंकर नाम के कांटे को निकालने की कई बार बात हो चुकी थी, लेकिन इस के पहले फाइनल योजना नहीं बनी थी. पर इस बार दोनों ने फोन पर ही शंकर को खत्म करने की फाइनल योजना बना डाली.

योजना बनाने के बाद किसी को शक न हो, इसलिए भावना 28 जून को ही मायके चली गई. 29 जून को शिवा ने एक दूसरे नंबर से अपने दोस्त शंकर को फोन कर के अच्छीअच्छी बातें करने के बाद विश्वास में ले कर कहा, “यार शंकर, तुम से एक जरूरी काम है. मैं गाड़ी ले कर आ रहा हूं. तुम ऐसा करो, सडक़ पर आ कर मुझ से मिलो.”

इस बीच भावना से भी शिवा की बातचीत होती रही. 2 महीने पहले भावना और शिवा के बीच शंकर को मारने की बात हुई थी, तब भावना ने कहा था कि शंकर को नींद की गोली खिला कर खत्म कर दो. इसलिए 2 महीने पहले ही उस ने भरूच सिटी से नींद की गोलियां खरीद कर रख ली थीं, जो उस की गाड़ी में ही रखी थीं. 2 महीने पहले हुई बातचीत के अनुसार शिवा अपनी योजना में आगे बढ़ रहा था.

कार में गला घोंट कर की थी हत्या

29 जून, 2023 की दोपहर को अपनी क्रेटा कार नंबर जीजे16डी के1389 ले कर शिवा अंकलेश्वर से निकला. उस ने अपने निकलने की बात शंकर को बता दी थी. चलने के पहले उस ने नींद की गोलियां पीस कर पानी की बोतल में मिला दी थीं.

रात करीब 9 बजे वह गांव चोटपा पहुंचा. उस ने शंकर से बता ही दिया था कि एक जरूरी काम से उसे साथ चलना है, इसलिए वह खाना खा कर तैयार था. गांव पहुंचते ही शिवा ने फोन किया तो शंकर आ कर उस की कार में बैठ गया. शिवा इधरउधर गाड़ी घुमाने लगा.

शिवा समय गुजार रहा था कि शंकर उस से पानी पीने के लिए मांगे. इसलिए वह शंकर को चोटपा से खोडा चरकपोस्ट, साचोर, ननेवा से घानेरा ले गया. जब वह काफी दूर निकल गया तो शंकर ने पानी पीने के लिए मांगा. शिवा ने तुरंत पानी की वही बोतल पकड़ा दी, जिस में उस ने नींद की गोलियां पीस कर मिलाई थीं.

वह पानी पीने के थोड़ी देर बाद शंकर को नींद आ गई. इस के बाद शिवा घानेरा से सीधे डीसा रोड पर गया. सडक़ पर सुनसान जगह देख कर शिवा ने कार रोकी और शंकर के मोबाइल को स्विच्ड औफ कर दिया कि किसी को पता न चल सके.

इस के बाद वह गाड़ी ले कर चल पड़ा. काफी दूर जाने के बाद सुनसान जगह देख कर उस ने सडक़ के किनारे गाड़ी रोक दी. शंकर गहरी नींद में था. शिवा ने कार में रखी रस्सी निकाली और शंकर के गले में लपेट कर कस दी. गला घोंटने से शंकर की सांस हमेशा हमेशा के लिए रुक गई.

बच्चों के अनाथ होने पर समाज ने की मदद

अब उसे शंकर की लाश को ठिकाने लगाना था. वह लाश को ऐसी जगह फेंकना चाहता था, जहां कोई उस की पहचान न कर सके. उस ने शंकर को आगे की सीट पर इस तरह बैठा दिया, जिस से लगे कि वह बैठेबैठे सो रहा हो.

शंकर की लाश को ले कर वह डीसा, पालनपुर, मेहसाणा, अहमदाबाद, बड़ौदा होते हुए वह जंबुसर गया. जंबुसर चौराहे से थोड़ी दूर आगे से सिंगल रोड गई थी. उसे वह रोड सुनसान दिखाई दी तो उस ने कार उसी रोड पर उतार दी. लगभग एक किलोमीटर जा कर शिवा को एक पगरनाला दिखाई दिया तो उस ने शंकर की लाश उसी पगरनाले में फेंक दी. उस समय सुबह के 6 बज रहे थे.

लाश को ठिकाने लगाने के बाद शिवा ने फोन कर के यह बात भावना को बताई और वहां से सीधे अंकलेश्वर चला गया. 2 दिन बाद भावना भी ससुराल आ गई, जिस से किसी को उस पर शक न हो.

हत्याकांड का खुलासा हो जाने के बाद थाना थराद पुलिस ने भावना को भी गिरफ्तार कर लिया. शिवा को थाने में देख कर उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. इस के बाद थाना थराद पुलिस ने शिवा और भावना को बनासकांठा की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों का 6 दिन का रिमांड लिया गया.

रिमांड के दौरान बनासकांठा के एसपी अक्षयराज मकवाना ने प्रैस कौन्फ्रैंस की. पत्रकारों के सामने भी प्रेमिका प्रेमी भावना और शिवा ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद सारे सबूत जुटा कर पुलिस ने दोनों को दोबारा अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

शंकर, जिस की हत्या हुई है, उस के पिता लकवाग्रस्त हैं, मां बूढ़ी है. 3 बच्चे हैं, जिस में सब से बड़ी बेटी 7 साल, उस से छोटा बेटा 4 साल और सब से छोटा बेटा 2 साल का है. पिता की हत्या हो गई है. पिता की हत्या के आरोप में मां जेल में है. बच्चों की हालत पर दया खा कर आजणा चौधरी समाज के बुजुर्गों ने बच्चों की मदद के लिए 15 लाख रुपए इकट्ठा कर के दिए हैं. Gujrat News

Love Crime: खूनी बन गई झूठी मोहब्बत

Love Crime: 19 मार्च, 2018 की सुबह कमलप्रीत कौर अपने पति हरजिंदर सिंह से यह कहते हुए घर से निकली थी कि उस के मायके में किसी की तबीयत खराब है, इसलिए वह राहुल को ले कर वहां जा रही है. पत्नी की यह बात सुन र हरजिंदर ने कहा, ‘‘ठीक है, हो आओ. ज्यादा परेशानी वाली बात हो तो तुम मुझे फोन कर देना. मैं भी पहुंच जाऊंगा.’’

‘‘हां, तुम्हारी जरूरत हुई तो फोन कर दूंगी और कोई ज्यादा चिंता वाली बात नहीं हुई तो 2 दिन में वापस लौट आऊंगी.’’ कमलप्रीत बोली.

मूलरूप से पंजाब के जिला पटियाला के गांव बल्लोपुर की रहने वाली थी कमलप्रीत. करीब 12 साल पहले जब वह 19 बरस की थी, तब उस की शादी हरियाणा के गांव गणौली के रहने वाले हरजिंदर सिंह से हुई थी. यह गांव जिला अंबाला की तहसील नारायणगढ़ के तहत आता है.शादी के ठीक एक साल बाद कमलप्रीत ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम राहुल रखा गया. इन दिनों वह गांव के सरकारी स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ रहा था.

हरजिंदर का अपना खेतीबाड़ी का काम था, जिस में वह काफी व्यस्त रहता था. कमलप्रीत घर पर रहते हुए चौकेचूल्हे से ले कर सब कम संभाले हुए थी. जो भी था, सब बड़े अच्छे से चल रहा था. पतिपत्नी में खूब प्यार था. दोनों में अच्छी अंडरस्टैंडिंग भी थी. दोनों अपने बच्चों का भी सलीके से ध्यान रखे हुए थे.

काफी दिनों से राहुल पिता से कहीं घुमा लाने की जिद कर रहा था तो पिता ने उस से पक्का वादा किया था कि वह उस के इम्तिहान खत्म होने के बाद उसे 2 दिन के लिए घुमाने शिमला ले चलेगा. मगर पेपर खत्म होने के अगले रोज ही उसे अपनी मां के साथ नानी के यहां जाना पड़ गया. पत्नी के मायके जाने वाली बात पर हरजिंदर को कोई परेशानी वाली बात नहीं थी. पति की निगाह में कमलप्रीत एक सुलझी हुई मेहनती औरत थी, जो ससुराल के साथसाथ अपने मायके वालों का भी पूरा ध्यान रखती थी.

सुखदुख में वह अपने अन्य रिश्तेदारों के यहां भी अकेली आयाजाया करती थी. कुल मिला कर बात यह थी कि हरजिंदर को पत्नी की तरफ से कोई चिंता नहीं थी. इसलिए जब वह 19 मार्च को बेटे के साथ मायके के लिए घर से अकेली निकली तो हरजिंदर ने कोई चिंता नहीं की.

उसी रोज शाम के समय हरजिंदर ने पत्नी को यूं ही रूटीन में फोन कर के पूछा, ‘‘हां कमल, पहुंचने में कोई परेशानी तो नहीं हुई? बल्लोपुर पहुंच कर तुम ने फोन भी नहीं किया?’’

‘‘हांहां…वो ऐसा है कि अभी मैं बल्लोपुर नहीं पहुंच पाई.’’ कमलप्रीत बोली तो उस की आवाज में हकलाहट थी.

society

पत्नी की ऐसी आवाज सुन कर हरजिंदर को थोड़ी घबराहट होने लगी. उस ने पूछा, ‘‘बल्लोपुर नहीं पहुंची तो फिर कहां हो?’’

‘‘अभी मैं शहजादपुर में हूं. किसी जरूरी काम से मुझे यहां रुकना पड़ गया.’’ कमलप्रीत ने पहले वाले लहजे में ही जवाब दिया.

‘‘शहजादपुर में ऐसा क्या काम पड़ गया तुम्हें? वहां तुम किस के यहां रुकी हो? सब ठीक तो है न? बताओ, कोई परेशानी हो तो मैं भी आ जाऊं क्या?’’

‘‘सब ठीक है, घबराने वाली कोई बात नहीं है. अच्छा, मैं फ्री हो कर अभी कुछ देर बाद फोन करती हूं. तब सब कुछ विस्तार से भी बता दूंगी.’’ कहने के साथ ही कमलप्रीत की ओर काल डिसकनेक्ट कर दी गई.

लेकिन हरजिंदर की घबराहट बढ़ गई थी. उस ने कमलप्रीत का नंबर फिर से मिला दिया. पर अब उस का फोन स्विच्ड औफ हो चुका था.

अचानक यह सब होने पर हरजिंदर का फिक्रमंद हो जाना लाजिमी था. कुछ नहीं सूझा तो उस ने उसी समय अपनी ससुराल के लैंडलाइन नंबर पर फोन किया. यहां से उसे जो जानकारी मिली, उस से उस के पैरों तले की जमीन सरक गई. ससुराल से उसे बताया गया कि यहां तो घर में कोई बीमार नहीं है और न ही कमलप्रीत के वहां आने की किसी को कोई जानकारी थी.

अब हरजिंदर के लिए एक मिनट भी रुके रहना संभव नहीं था. उस ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और शहजादपुर की ओर रवाना हो गया. रास्ते भर वह कमलप्रीत को फोन भी मिलाता रहा था, पर हर बार उसे फोन के स्विच्ड औफ होने की ही जानकारी मिलती रही.

आखिर वह शहजादपुर जा पहुंचा. पत्नी और बच्चे की तलाश में उस ने उस गांव का चप्पाचप्पा छान मारा मगर पत्नी और बेटे राहुल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. वहां से वह मोटरसाइकिल से ही अपनी ससुराल बल्लोपुर चला गया. कमलप्रीत को ले कर वहां भी सब परेशान हो रहे थे.

इस के बाद तो हरजिंदर सिंह और उस की ससुराल वालों ने कमलप्रीत व राहुल की जैसे युद्धस्तर पर तलाश शुरू कर दी. मगर कहीं भी दोनों मांबेटे के बारे में जानकारी हाथ नहीं लगी.

19 मार्च, 2018 का दिन तो गुजर ही गया था, पूरी रात भी निकल गई. 20 मार्च को भी दोपहर तक तलाश करते रहने के बाद सभी निराश हो गए तो हरजिंदर शहजादपुर थाने पहुंच गया. थानाप्रभारी शैलेंद्र सिंह को उस ने पत्नी और बेटे के रहस्यमय तरीके से गायब होने की जानकारी दे दी. थानाप्रभारी ने कमलप्रीत और उस के बेटे राहुल की गुमशुदगी दर्ज कर ली. पुलिस ने अपने स्तर से दोनों मांबेटे को ढूंढने की काररवाई शुरू कर दी.

देखतेदेखते इस बात को एक सप्ताह गुजर गया, मगर पुलिस भी इस मामले में कुछ कर पाने में असफल रही.

बात 26 मार्च, 2018 की थी. थानाप्रभारी शैलेंद्र सिंह उस वक्त अपने औफिस में थे. तभी एक अधेड़ उम्र के शख्स ने उन के सामने आ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए दयनीय भाव से कहा, ‘‘सर, मेरा नाम ओमप्रकाश है और मैं यमुनानगर में रहता हूं.’’

‘‘जी हां, कहिए.’’ शैलेंद्र सिंह बोले.

‘‘अब क्या कहूं सर, एक भारी मुसीबत आन पड़ी है हमारे परिवार पर.’’

‘‘हांहां बताइए, क्या परेशानी है?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

society

‘‘सर, मेरा एक भांजा है नीटू. उम्र उस की करीब 21 साल है. किसी बात पर उस का एक औरत से झगड़ा हुआ और हाथापाई में वह औरत मर गई. उस ने उस की लाश को कहीं ले जा कर दफन कर दिया. जब इस की जानकारी मुझे हुई तो हम ने उसे समझाया कि गलती हो जाने पर कानून से आंखमिचौली खेलने के बजाय पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना ही बेहतर होगा.’’ ओमप्रकाश ने बताया.

इस पर एकबारगी तो शैलेंद्र सिंह चौंके. फिर खुद को संभालने का प्रयास करते हुए बोले, ‘‘मतलब यह कि आप के भांजे ने किसी की जान ली, फिर उस की लाश भी ठिकाने लगा दी. अब सरेंडर का प्रस्ताव लेकर आए हो. तो यह भी बता दो कि किन शर्तों पर सरेंडर करवाओगे?’’

‘‘कोई शर्त नहीं सर. लड़का आप के सामने तो अपना अपराध कबूलेगा ही, अदालत में भी ठीक ऐसा ही बयान देगा. भले उसे कितनी भी सजा क्यों न हो जाए. बस आप से हमें सिर्फ इतना सहयोग चाहिए कि थाने में उस पर ज्यादा सख्ती न हो.’’ ओमप्रकाश ने कहा.

‘‘देखो, अगर वह हमें सहयोग करते हुए सच्चाई बयान करता रहेगा तो हमें क्या जरूरत पड़ी है उस से सख्ती से पेश आने की. जाओ, लड़के को ला कर पेश कर दो. यदि वह सच्चा है तो यहां उस के साथ किसी तरह की ज्यादती नहीं होगी.’’

‘‘ठीक है सर, मैं समझ गया. लड़का थाने के बाहर ही खड़ा है. मैं अभी उसे ला कर आप के सामने पेश करता हूं.’’ कहने के साथ ही ओमप्रकाश बाहर गया और थोड़ी ही देर में एक लड़के को ले कर थाने में आ गया.

‘‘यही है मेरा भांजा नीटू, सर.’’ उस ने बताया.

जिस वक्त ओमप्रकाश नीटू को ले कर थानाप्रभारी के औफिस में पहुंचा था, पुलिस वाले बगल वाले कमरे में एक अभियुक्त से गहन पूछताछ कर रहे थे. जरा सी देर में वहां से चीखचिल्लाहट की भयावह आवाजें आने लगी थीं.

ये आवाजें सुन कर नीटू थरथर कांपने लगा. फिर वह दबी सी आवाज में ओमप्रकाश से बोला, ‘‘मामा, ये लोग मेरा भी क्या ऐसा ही हाल करेंगे?’’

‘‘नहीं करेंगे बेटा, मैं ने एसएचओ साहब से सारी बात कर ली है. फिर जब तुम एकदम सच्चाई बयान कर ही रहे हो तो फिर डर कैसा?’’ ओमप्रकाश ने समझाया.

‘‘यही तो डर है मामा, मैं ने आप को भी पूरी सच्चाई नहीं बताई. दरअसल, मैं ने औरत के साथसाथ उस के बेटे का भी मर्डर कर दिया है और दोनों की लाशें एक साथ दफनाई हैं.’’

नीटू की यह बात थानाप्रभारी के कानों तक भी पहुंच गई थी. उन्होंने नीटू को खा जाने वाली नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘मुझे पहले ही से शक था कि तुम्हारे अपराध का संबंध गणौली की कमलप्रीत और उस के बच्चे की गुमशुदगी से है.

अब तुम्हारे लिए बेहतर यही है कि तुम अपने घिनौने अपराध की सच्ची दास्तान अपने मामा को बता दो, वरना दूसरे तरीके से सच्चाई उगलवानी भी आती है.’’

थानाप्रभारी के इतना कहते ही ओमप्रकाश नीटू को ले कर एक दूसरे कमरे में ले गया. इस के बाद नीटू ने अपने अपराध की पूरी कहानी मामा को बता दी. नीटू के बताने के बाद ओमप्रकाश ने सारी कहानी थानाप्रभारी को बता दी.

थानाप्रभारी ने ओमप्रकाश के बयान दर्ज करने के बाद उसे घर भेज दिया फिर नीटू को गिरफ्तार कर उसे अदालत में पेश कर 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उस से व्यापक पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने जो कुछ पुलिस को बताया, उस से अपराध की एक सनसनीखेज कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

करीब एक साल पहले की बात है. अपनी रिश्तेदारी के एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए कमलप्रीत अकेली नारायणगढ़ के बड़ागांव गई थी. वहां जब वह नाचने लगी तो एक लड़के ने भी उस का खूब साथ दिया. उस ने बहुत अच्छा डांस किया था.

इस डांस के बाद भी दोनों एक साथ बैठ कर बतियाते रहे. लड़के ने अपना नाम सुमित उर्फ नीटू कहते हुए बताया कि यों तो वह शहजादपुर का रहने वाला है, मगर बड़ागांव में किराए का कमरा ले कर एक कंप्टीशन की तैयारी कर रहा है.

society

कमलप्रीत उस की बातों से तो प्रभावित हो ही रही थी, उस का सेवाभाव भी उसे खूब पसंद आया. कमलप्रीत तो थकहार कर एक जगह बैठ गई थी, पार्टी में खाने की जिस चीज का भी उस ने जिक्र किया, वह ला कर उसे वहीं बैठी को खिलाता रहा.

इसी तरह काफी रात गुजर जाने पर कमलप्रीत को नींद सताने लगी. नीटू ने सुझाव दिया कि वह उसे अपने कमरे पर छोड़ आता है, जहां वह बिना किसी शोरशराबे के आराम से सो सकती है. थोड़ी झिझक के बाद वह मान गई.

अब तक नीटू को भी नींद आने लगी थी. अत: कमरे में चारपाई पर कमलप्रीत को सुलाने के बाद वह खुद भी जमीन पर दरी बिछा कर सो गया.

आगे का सिलसिला शायद इन के वश में नहीं था. रात के जाने किस पहर में दोनों की एक साथ आंखें खुलीं और बिना आगेपीछे की सोचे, दोनों एकदूसरे में समा गए. कमलप्रीत से नीटू 10 साल छोटा था, अत: उस मिलन के बाद कमलप्रीत उस की दीवानी हो गई. इस के बाद यही सिलसिला चल निकला. दोनों किसी न किसी तरीके से, कहीं न कहीं मौजमस्ती करने का तरीका निकाल लेते.

देखतेदेखते एक बरस गुजर गया. अब कमलप्रीत ने नीटू से यह कहना शुरू कर दिया था कि वह अपने पति को तलाक दे कर उस से शादी कर लेगी. मौजमस्ती तक तो ठीक था, कमलप्रीत की इस बात ने नीटू को परेशान कर डाला.

नीटू ने इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए आखिर मन ही मन यह निर्णय लिया कि वह कमलप्रीत को अच्छी तरह से समझाएगा. फिर भी न मानी तो वह उस का खून कर देगा. इस के लिए उस ने एक चाकू भी खरीद कर रख लिया था.

19 मार्च, 2018 की सुबह कमलप्रीत उस के यहां आ धमकी. उस के साथ एक लड़का था, जिसे उस ने अपना बेटा बताया. आते ही उस ने कहा कि वह अपने पति को हमेशा के लिए छोड़ आई है. आगे वह उस से शादी कर के अपने लड़के सहित उसी के साथ रहेगी.

नीटू ने उसे समझाने की कोशिश की. लगातार समझाते समझाते पूरा दिन और सारी रात भी निकल गई. मगर वह अपनी जिद पर अड़ी रही तो 20 मार्च को नीटू ने चाकू से कमलप्रीत की हत्या कर दी.

यह देख कर उस का लड़का राहुल सहम गया. मगर वह इस मर्डर का चश्मदीद गवाह बन सकता था. इसलिए नीटू ने चाकू से उस का भी गला रेत दिया. दोनों लाशों को कमरे में छिपा कर नीटू अमृतसर चला गया.

वहां गोल्डन टेंपल में उस ने वाहेगुरु से अपने इस गुनाह की माफी मांगी. रात में वापस आ कर बड़ागांव के पास से गुजर रही बेगना नदी की तलहटी में दोनों लाशों को दफन कर आया. इस के बाद वह अपने मामा के पास यमुनानगर चला गया, जिन्होंने उसे पुलिस के सामने सरेंडर करने का सुझाव दिया था.

पुलिस ने उस की निशानदेही पर न केवल चाकू बरामद किया बल्कि दोनों लाशें भी खोज लीं, जो जरूरी काररवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दीं. कस्टडी रिमांड की समाप्ति पर नीटू को फिर से अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में अंबाला की केंद्रीय जेल भेज दिया गया था. Love Crime

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Social Media Crime: सोशल मीडिया से मोहब्बत, फिर मर्डर

Social Media Crime: सोशल मीडिया की साइट फेसबुक द्वारा हुई दोस्ती में सच्चाई कम झूठ ज्यादा होता है. फिर भी यह लोगों को इतना आकर्षित करती है कि वे अपनी दोस्ती को रिश्ते में बदलने को तैयार हो जाते हैं. ऐसे में जब सच्चाई सामने आती है तो निश्चित है अपराध होगा ही.

बंगलुरु के काडुगोडी पौश एरिया स्थित महावीर किंग्ज अपार्टमेंट के गेट पर जिस समय सुखवीर पहुंचा, दोपहर के सवा 12 बज रहे थे. सिक्योरिटी वालों ने जब उस से पूछा कि वह किस से मिलने आया है तो उस ने कहा, ‘‘मैं अपार्टमैंट में चौथी मंजिल पर रहने वाली कुसुम सिंगला से मिलने आया हूं. मैं उन का नजदीकी रिश्तेदार हूं और हरियाणा से आया हूं.’’

सिक्योरिटी गार्डों ने यह सूचना इंटरकौम द्वारा चौथी मंजिल पर स्थित फ्लैट में रहने वाली कुसुम सिंगला को दी तो उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बिठाओ, मैं खुद उन्हें लेने नीचे आ रही हूं.’’

कुछ देर बाद आकर्षक व्यक्तित्व वाली कुसुम अपौर्टमैंट के गेट पर बने सिक्योरिटी कक्ष में पहुंची तो उस के हावभाव से ही लगा कि उस से मिलने आने वाले इस आदमी से वह पहली बार मिल रही हैं, क्योंकि उस ने उसे पहचानने की कोशिश करते हुए पूछा था, ‘‘मिस्टर सुखवीर सिंह?’’

आगंतुक, जिसे कुसुम ने सुखवीर कहा था, उठ कर अपना हाथ उस की ओर बढ़ाते हुए कहा था, ‘‘जी आप मिस कुसुम सिंगला?’’

कुसुम सिंगला ने उस का हाथ अपने हाथ में ले कर जिस तरह गर्मजोशी से दबाया था, उसे देख कर सिक्योरिटी वालों को लगा था कि आगंतुक मैडम का कोई खास ही है. इस के बाद उन्होंने सुखवीर से उस के बारे में पूछ कर सिक्योरिटी कक्ष में रखे विजिटर रजिस्टर में लिखा और अपने चौथी मंजिल स्थित फ्लैट में जाने के लिए उस के साथ लिफ्ट की ओर बढ़ गई. दरअसल, पंजाब की रहने वाली कुसुम सिंगला को फेसबुक द्वारा दोस्त बनाने का शौक था. इस की वजह यह थी कि वह अकेली थीं. इन्हीं दोस्तों से चैटिंग कर के वह अपना खाली समय बिताती थीं. यही वजह थी कि जिस किसी ने भी उन्हें फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी, उन्होंने बेझिझक स्वीकार कर ली.

शायद यही कारण था कि जब 31 दिसंबर, 2015 की रात उन्होंने अपना फेसबुक चैक किया तो उस में हरियाणा के सुखवीर सिंह की ओर से भेजी फ्रैंड रिक्वैस्ट देखी तो स्वीकार कर ली थी. उस ने सिर्फ फ्रैंड रिक्वैस्ट ही नहीं भेजी थी, नए साल का शुभकामना संदेश भी भेजा था. अपने स्टेटस में 30 वर्षीय सुखवीर ने खुद को याहू इंडिया कंपनी का अधिकारी और अविवाहित लिखा था. कुसुम ने सुखवीर की फ्रैंड रिक्वैस्ट तो स्वीकार कर ही ली थी, शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद देते हुए अपनी ओर से भी उसे नववर्ष की मुबारकबाद दी थी.

इस के बाद दोनों की फेसबुक पर चैटिंग होने लगी. 9 जनवरी, 2016 को दोनों अपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दिए तो फेसबुक पर चैटिंग बंद कर के मोबाइल पर इन की घंटों बातें होने लगीं. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों एकदूसरे से प्यार ही नहीं करने लगे, बल्कि आपस में शादी करने के बारे में सोचने लगे. बातचीत में सुखवीर ने खुद को अमीर घर का होने के साथसाथ यह भी बताया था कि वह याहू इंडिया कंपनी में अधिकारी है. दूसरी ओर से कुसुम भी अपने बारे में तमाम बातें करते हुए सुखवीर को अक्सर यह अहसास दिलाती रहती थी कि वह उस का पहला प्यार है. इतनी उम्र होने के बावजूद उसे किसी का प्यार नसीब नहीं हुआ.

दोनों के ही फोटो फेसबुक पर थे. सुखवीर के मुकाबले कुसुम कहीं ज्यादा खूबसूरत और प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालकिन थी. उस की नौकरी भी अच्छी थी, जहां से उसे बढि़या तनख्वाह मिल रही थी. सुखवीर ने उस से मिलने की इच्छा जाहिर की तो कुसुम ने उसे अपने घर का पता दे कर बंगलुरु आने का निमंत्रण दे दिया. इस तरह 19 जनवरी, 2016 को सुखवीर हवाई जहाज से बंगलुरु पहुंच गया और हवाई अड्डे से सीधे दोपहर को कुसुम सिंगला के फ्लैट पर जा पहुंचा. कुसुम उसे सम्मान और अपनत्व के साथ अकेली होने के बावजूद हर तरह से विश्वास कर के उसे अपने साथ फ्लैट में ले गई थी.

कुसुम उस फ्लैट में अकेली नहीं, निधि शर्मा के साथ रहती थी. वह डैल कंपनी में नौकरी करती थी और शाम 8 बजे तक अपनी नौकरी से वापस आती थी. 19 जनवरी की शाम वह अपनी नौकरी से ठीक 8 बजे फ्लैट पर पहुंची. कुसुम रोजाना उस से पहले आ जाती थी. लेकिन उस दिन अपने किसी रिश्तेदार के आने की वजह से उस ने छुट्टी ले रखी थी. निधि को उस ने यह बात सुबह ही बता दी थी. इसलिए निधि रात 8 बजे फ्लैट पर पहुंची तो कुसुम फ्लैट पर ही होगी, यह सोच कर उस ने फ्लैट की डोरबैल बजाई. एक बार बजाने पर जब उसे लगा कि अंदर किसी तरह की हलचल नहीं हुई है तो उस ने दोबारा बजाई. इस बार भी अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो तीसरी बार, चौथी, फिर कई बार बजाई.

दरवाजे पर लैचलौक होने की वजह से उसे भीतरबाहर दोनों ओर से खोला और बंद किया जा सकता था. दरवाजे की एक चाबी कुसुम के पास होती थी और एक निधि के पास.  लगातार कई बार बैल बजाने पर भी जब अंदर कोई रिस्पौंस नहीं मिला तो निधि को लगा शायद कुसुम अपने रिश्तेदार के साथ कहीं घूमने चली गई है. उस ने पर्स से चाबी निकाली और दरवाजा खोल कर भीतर आ गई. अंदर अंधेरा था, स्विचबोर्ड का अनुमान उसे था ही, इसलिए हाथ बढ़ा कर लाइट औन कर दी. लाइट जलते ही निधि ने जो देखा, उस की आंखें खुली की खुली रह गईं. उस का शरीर कांपने लगा, आवाज मुंह में जैसे घुट कर रह गई. हाथ में पकड़ा मोबाइल छूट कर फर्श पर गिर गया.

थोड़ी देर बाद जब उस की चेतना लौटी तो हिम्मत कर के उस ने फ्लैट का दरवाजा खोला और बाहर आ कर ‘खून…खून…’ चिल्लाने लगी. उस की चीख सुन कर पल भर में तमाम पड़ोसी इकट्ठा हो गए. सिक्योरिटी वाले भी भाग कर ऊपर आ गए. घबराई निधि निढाल हो कर दीवार के सहारे जमीन पर बैठ गई थी. उस से कोई कुछ पूछता था तो जवाब देने के बजाय वह फ्लैट के अंदर की ओर अंगुली से इशारा कर दे रही थी.

फ्लैट का औटोमैटिक दरवाजा फिर से बंद हो गया था, लेकिन चाबी की होल में ही लटक रही थी. आने वालों ने दरवाजा खोल कर अंदर जा कर देखा तो आगे वाले कमरे में कुसुम सिंगला की लाश पड़ी थी. उस की आंखें खुली थीं, गरदन पर लैपटौप के चार्जर का तार लिपटा था. बाईं आंख की भौंहों के पास गहरा जख्म था, जिस से बहा खून फर्श तक आ गया था. पहली ही नजर में लग रहा था कि वह मर चुकी है. लाश के आसपास तमाम कागज बिखरे पड़े थे.

इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई. थाना काडुगोडी पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और घटनास्थल की जांच कर के जरूरी काररवाई निपटाई, उस के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. निधि शर्मा से तहरीर ले कर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और फिर अपार्टमैंट में रहने वालों तथा सिक्योरिटी वालों से पूछताछ शुरू हुई. इस पूछताछ में सिक्योरिटी गार्ड ने बताया था कि कुसुम सिंगला का एक रिश्तेदार सुखवीर सिंह आया था. लेकिन वह 3 बजे के करीब लिफ्ट से नीचे उतरा और अपार्टमैंट के मुख्य गेट से जाने के बजाय छोटे गेट से बाहर निकल गया था. उस ने कुसुम मैडम का लैपटौप वाला बैग अपने कंधे से लटका रखा था.

पुलिस ने जब सिक्योरिटी गार्ड से कहा कि तुम ने उसे रोका क्यों नहीं तो उस ने कहा, ‘‘हम रोकते कैसे, हमें उस पर किसी तरह का शक ही नहीं हुआ. चूंकि कुसुम मैडम जिस तरह से हाथ मिला कर उसे अपने साथ ले गईं थीं और विजिटर रजिस्टर में उस के बजाय खुद अपने हाथों से इंट्री भरी थी, उसे देख कर यही लगा था कि वह उन का कोई बहुत खास है. इसी वजह से वह बाहर जाने लगा तो हम ने रोका नहीं था. लेकिन अब लगता है कि हम से बहुत बड़ी गलती हुई है. अगर उसे रोक कर कुसुम मैडम को फोन कर लिया होता तो वह उसी समय पकड़ा जाता.’’

पुलिस वालों के कहने पर सिक्योरिटी गार्ड ने विजिटर रजिस्टर का वह पेज दिखाया, जहां कुसुम की हैंडराइटिंग में उस के कथित रिश्तेदार का विवरण लिखा था. वह विवरण कुछ इस तरह था : सुखबीर सिंह, निवासी हथीन, पलवल, हरियाणा. इसी के साथ उस का मोबाइल नंबर लिखा था. पुलिस ने उस नंबर पर फोन किया तो वह बंद था. विजिटर रजिस्टर ले कर पुलिस थाने लौट आई. मामला गंभीर था. संदिग्ध अपराधी के हुलिए की जानकारी देते हुए सभी थाना पुलिस को सूचना दे दी गई थी.

बंगलुरु पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसीपी (ईस्ट) पी. हरिशेखरन के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन कर इस केस को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपते हुए अभियुक्त की तलाश में लगा दिया. हरिशेखरन ने अपनी जांच तेजी से शुरू कर दी. अब तक कुसुम के साथ रहने वाली निधि भी काफी हद तक संभल गई थी. पुलिस की मौजूदगी में उस ने कुसुम का सामान चैक कर के बताया कि लैपटौप के अलावा उस के मोबाइल फोन, कै्रडिट और डेबिट कार्ड, बैंक के खाते की चैकबुक के साथ एक ट्राउजर गायब है. इस के अलावा अन्य सामान भी गायब हो सकता है, क्योंकि उस की अलमारी में पड़े तमाम कागजात और दस्तावेज वगैरह बिखरे पड़े थे.

हरिशेखरन ने निधि शर्मा से पूरी जानकारी ले कर कुसुम का मोबाइल नंबर भी ले लिया था. उन्होंने कुसुम के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाने के साथ उस की उस समय की लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया. काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उन्होंने कई बार फोन किए थे. यही नहीं, उस नंबर से भी कुसुम के नंबर पर कई बार फोन आए थे. वह वही नंबर था, जो पुलिस को अपौर्टमैंट के विजिटर रजिस्टर से मिला था. इस का मतलब वह संदिग्ध सुखवीर सिंह का नंबर था.

सुखवीर और कुसुम के फोन की मौजूदा लोकेशन बंगलुरु से बाहर की साथसाथ होने की आ रही थी. बंगलुरु पुलिस हरियाणा पुलिस को सुखवीर सिंह का पता दे कर उस के बारे में पता लगाने में सहयोग करने का अनुरोध कर चुकी थी. लेकिन हरियाणा पुलिस ने कहा था कि दिया गया पता अधूरा है, फिर भी उस के बारे में पता करने की कोशिश की जा रही है.

हरिशेखरन की टीम ने अब तक कुसुम के बारे में जो जानकारी जुटाई थी, उस के अनुसार वह मूलरूप से पंजाब की रहने वाली थी. पेशे से वह सौफ्टवेयर इंजीनियर थी और इस से पहले आईबीएम कंपनी की नोएडा शाखा में काम करती थी. यहीं काम करते हुए उस की शादी हुई थी, लेकिन जल्दी ही उस का तलाक हो गया था. करीब 6 महीने पहले उस का तबादला बंगलुरु के लिए हो गया था. कुसुम काफी खूबसूरत ही नहीं, समझदार और व्यवहारकुशल भी थी. बढि़या नौकरी कर रही थी. इस तरह की सर्वगुणसंपन्न लड़की का तलाक क्यों हुआ, यह किसी भी समझ में नहीं आ रहा था.

कुसुम दूसरी शादी के लिए काफी गंभीर थी, लेकिन सचेत भी बहुत थी. एक बार धोखा खाने के बाद इस बारे में वह अगला कदम बहुत फूंकफूंक कर रख रही थी. उस ने तय कर लिया था कि दूसरी शादी करने से पहले वह लड़के के बारे में अच्छी तरह जांचपरख कर ही शादी का निर्णय करेगी. पूछताछ में निधि शर्मा ने पुलिस को बताया था कि कुसुम अपनी शादी के बारे में तो उस से बातें करती थी, लेकिन इस संबंध में उस की किसी से बात चल रही है, यह कभी नहीं बताया था.

उस दिन उस ने निधि को सिर्फ यही बताया था कि उस का कोई रिश्तेदार उस से मिलने आ रहा है. वह रिश्तेदार कौन है, कहां से और क्यों आ रहा है? यह सब उस ने कुछ नहीं बताया था. जो भी था, अब कुसुम का वही कथित रिश्तेदार उस के कत्ल के संदेह के दायरे में आ रहा था. अपार्टमैंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस ने देखी थी. उन में कुसुम के साथ एक लड़का उस के फ्लैट की ओर जाता दिखाई दिया था. सिक्योरिटी वालों ने उसे पहचान कर कन्फर्म कर दिया था कि वही वह सुखवीर सिंह है, जिस के बारे में विजिटर रजिस्टर में एंट्री कर के कुसुम अपने साथ ले गई थी.

सुखवीर सिंह तक पहुंचने का अब पुलिस के पास एक ही रास्ता रह गया था कि उस के मोबाइल की औनरशिप के बारे में पता किया जाए. पुलिस ने ऐसा ही किया. इसे बंगलुरु पुलिस का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि वह फोन नंबर सुखवीर सिंह पुत्र राजपाल सिंह के नाम ही था, जिस में उस का पूरा पता लिखा॒था॒: गांव रीबड़, थाना हथीन, पलवल, हरियाणा. बंगलुरु पुलिस ने तुरंत उक्त पता हरियाणा पुलिस को दे कर सुखवीर सिंह को गिरफ्तार करने का आग्रह किया.

थाना हथीन पुलिस ने बंगलुरु पुलिस द्वारा दिए पते पर छापा मारा तो सुखवीर सिंह वहीं का रहने वाला था. लेकिन वह घर पर नहीं था. जब घर वालों से उस के बारे में पूछा गया तो पता चला कि वह उस समय गुड़गांव में था. गुड़गांव में वह कहां है, घर वालों से पता चल गया था. इस के बाद गुड़गांव पुलिस की मदद से उसे थोड़ी ही देर में पकड़ लिया गया था. सुखवीर सिंह के पकड़े जाने की सूचना पा कर बंगलुरु पुलिस गुड़गांव पहुंची और विधिवत उसे हिरासत में ले कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 5 दिनों के ट्रांजिट रिमांड पर ले कर बंगलुरु आ गई.

बंगलुरु पुलिस ने सुखवीर सिंह को पूछताछ सैल में ले जा कर व्यापक पूछताछ की तो उस ने पुलिस को जो कुछ बताया, उस से कुसुम सिंगला की हत्या की जो वजह सामने आई, वह इस तरह थी : सुखवीर सिंह गांव में पैदा हुआ था, इसलिए ग्रामीण परिवेश में ही पलाबढ़ा. लेकिन वह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार था, इसलिए पढ़लिख कर इंजीनियर बन गया. इस के बाद उसे याहू इंडिया कंपनी की नोएडा शाखा में नौकरी मिल गई. कुछ दिनों बाद बंगलुरु की किसी फर्म में उसे यहां से ज्यादा वेतन की नौकरी मिल गई. यह सन 2011 की बात है.

वहां उस ने कुछ महीने ही नौकरी की थी कि याहू इंडिया कंपनी ने उसे और ज्यादा पैसे दे कर अपने यहां बुला लिया. इस के बाद उसे एक्सेंचर कंपनी में नौकरी मिल गई तो उस ने याहू कंपनी छोड़ कर वहां की नौकरी जौइन कर ली. लेकिन सन 2013 में उस की यह नौकरी छूट गई तो उसे अभी तक कहीं नौकरी नहीं मिली थी. नौकरी छूटने के बाद उस के पास 2 ही काम रह गए थे, एक नौकरी की तलाश करना, दूसरा सोशल मीडिया से जुड़ कर टाइम पास करना. लाखों युवाओं की तरह वह भी फेसबुक द्वारा अनेक लोगों से चैटिंग किया करता था. फेसबुक में वह अपने बारे में खूब बढ़चढ़ कर बताता था.

इसी तरह कुसुम सिंगला से जब उस की फेसबुक द्वारा फ्रैंडशिप हुई तो उस ने उन्हें भी अपने बारे में खूब बढ़चढ़ कर बताया. बाद में जब दोनों ने अपनेअपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए तो उन की फोन पर लंबीलंबी बातें होने लगीं. एक तो उस के पास बात करने का प्रभावशाली अंदाज था, दूसरे उस ने अपने झूठ के सहारे बहुत जल्दी कुसुम को शीशे में उतार लिया था.

दरअसल, कुसुम की नौकरी और वेतन के बारे में जब सुखवीर को पता चला तो उसे लगा कि अगर कुसुम से उस की शादी हो जाती है तो उस के सारे कष्ट तुरंत कट जाएंगे. कुछ दिनों बाद वह उसे अपने बेरोजगार होने की बात बता देगा. शादी होने के बाद कुसुम कुछ कर तो सकेगी नहीं, फिर खुद ही नौकरी दिलवाने में उस की मदद करेगी. अपनी इस गलत सोच के साथ तिकड़म भिड़ा कर फोन पर बात करते हुए वह कुसुम के इतने नजदीक आ गया कि उस के एक बार कहने पर कुसुम ने उसे मिलने के लिए बंगलुरु बुला लिया.

अपनी धाक जमाने के लिए सुखवीर हवाई जहाज से वहां गया. जिस समय वह सिक्योरिटी कक्ष में बैठा कुसुम का इंतजार कर रहा था, वहां बैठे लोगों की बातचीत से उसे पता चला कि कुसुम कुंवारी नहीं, बल्कि तलाकशुदा है. इस बात से उसे एकबारगी धक्का लगा, क्योंकि कुसुम ने उस से कहा था कि वह उस का पहला प्यार है. लेकिन उस ने भी तो कुसुम से तमाम झूठ बोले थे, इसलिए खुद को सहज बनाए रखा.

कुसुम आ कर उसे अपने फ्लैट में ले गई और उस की खूब आवभगत की. दोनों बैठ कर इधरउधर की बातें करने लगे तो सुखवीर ने कुसुम से तलाकशुदा होने और उस से इस बात को छिपाने की शिकायत की. इस के जवाब में कुसुम ने कहा कि वह विवाह नहीं, एक धोखा था. उसे उस के उस कथित पति से कभी प्यार नहीं मिला, इसलिए उस ने उसे प्यार या शादी माना ही नहीं. सुखबीर ने उसे उस की इस गलती पर इस तरह माफ करने वाली बात कही, जैसे ऐसा कर के वह उस पर बहुत बड़ा एहसान कर रहा हो.

कुसुम को शायद उस का माफ करने वाला यह अंदाज पसंद नहीं आया, इसलिए उस ने थोड़ा गंभीर लहजे में कहा, ‘‘मेरी जिंदगी में सिर्फ यही एक झूठ था, जिसे माफ कर के तुम ने मुझे अपराधबोध से बचा लिया. अगर तुम्हारी जिंदगी में भी कोई झूठ हो तो अभी बता दो. मैं भी तुम्हें इसी तरह माफ कर के अपना मन साफ कर लूंगी.’’

उस समय वहां ऐसा माहौल बन गया था कि सुखबीर को लगा कि उसे भी अपने बारे में सचसच बता देना चाहिए. उस ने निश्चिंत हो कर अपने बेरोजगार होने की बात कुसुम को बता कर अनुरोध किया कि हो सके तो वह उस की नौकरी लगवाने में मदद करे. सुखवीर का झूठ बेवकूफ बनाने वाला था, इसलिए उस के झूठ को सुन कर कुसुम को इतना गुस्सा आया कि उस ने उसे डांटते हुए तुरंत वहां से चले जाने को कहा.

‘‘ठीक है, मैं अभी चला जाता हूं, लेकिन तुम मुझे मेरे आनेजाने का खर्च 50 हजार रुपए दे दो.’’ सुखबीर ने कहा.

कुसुम ने उसे एक भी पैसा देने से साफ मना कर दिया. उस का कहना था कि उसे देने के लिए उस के पास एक भी पैसा नहीं है. मना करने की एक वजह यह भी थी कि इस के पहले वह इसी तरह धोखे में 5 लाख रुपए गंवा चुकी थी. इसलिए अब वह किसी के धोखे में नहीं आना चाहती थी.

‘‘ठीक है, तुम 50 हजार नहीं देना चाहती तो मुझे वापस जाने के लिए 5 हजार रुपए ही दे दो. इस के बाद मैं तुम से कभी किसी तरह का संपर्क नहीं रखूंगा.’’ सुखबीर ने अनुनय करते हुए कहा.

कुसुम ने 5 हजार रुपए देने से भी मना कर दिया. इस पर सुखवीर को गुस्सा आ गया और वहां पड़ा पैन उठा कर उस के चेहरे पर वार कर दिया. कुसुम जख्मी हो गई. कुसुम अपने बचाव के लिए शोर मचा पाती, सुखबीर ने फुर्ती से लैपटौप के चार्जर का तार उस के गले में लपेट कर कस दिया. पल भर में कुसुम की सांसों ने उस का साथ छोड़ दिया. सुखवीर निश्चिंत हो गया कि कुसुम मर गई है तो उस का लैपटौप बैग मे डाल कर उस के कमरे की तलाशी लेने लगा. तलाशी में उसे कुसुम का क्रैडिट कार्ड, डैबिट कार्ड और बैंक की चैकबुक मिली तो उसे भी बैग में डाल लिया. उस का सैलफोन भी उस ने जेब में डाल लिया.

सुखवीर ने जब पैन से कुसुम पर वार किया था तो उस के चेहरे से निकला खून उस की पैंट पर लग गया था. पकड़े जाने के डर से उस ने अपना पैंट उतार कर बैग में डाल लिया और कुसुम का ट्राउजर निकाल कर पहन लिया. वहां से वह इस तरह इत्मीनान से निकला, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था. थोड़ी दूर जा कर उस ने कुसुम के फोन से संबंधित बैंक के कस्टमर केयर पर रिक्वैस्ट भेजी कि वह पिन भूल गया है, इसलिए उसे नया पिन दिया जाए. इस से सुखबीर को नया पिन मिल गया.

नया पिन मिलने के बाद सुखबीर ने एटीएम से 10 हजार रुपए निकाले. दिल्ली पहुंच कर उस ने 30 हजार रुपए और निकाले. इस के बाद वह गुड़गांव के एक होटल में कमरा ले कर आराम करने की गरज से ठहर गया. लेकिन वह आराम कर पाता, उस के पहले ही पुलिस द्वारा पकड़ लिया गया. दरअसल, उस ने होटल में पहुंचते ही इस की सूचना होटल के फोन से अपने घर वालों को दे दी थी. इस तरह कुसुम की हत्या कर के भागने के 24 घंटे के अंदर ही सुखवीर पकड़ लिया गया.

पुलिस ने उस के पास से कुसुम के दोनों मोबाइल फोन, उस की बैंक की चैकबुक, क्रैडिट और डैबिट कार्ड, लैपटौप बरामद करने के साथ उस की निशानदेही पर बंगलुरु में फेंकी गई उस की वह पैंट भी बरामद कर ली थी, जिस पर कुसुम का खून लगा था. रिमांड अवधि समाप्त होने पर सुखबीर को एक बार फिर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में ही था. Social Media Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime: शादी के बाद प्रेमी पर कितना हक

UP Crime: शिवानी निषाद की शादी देवरिया के युवक से हो जरूर गई थी, लेकिन वह किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी विनय उर्फ दीपक निषाद को छोडऩा नहीं चाहती थी. विनय ने उसे लाख समझाया, लेकिन वह प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी थी. एक दिन प्रेमी पर हक जमाना शिवानी को इतना भारी पड़ा कि…

अपनी प्रेमिका शिवानी की जिद से विनय उर्फ दीपक निषाद डर चुका था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे शिवानी से कैसे निबटा जाए? जिस तरह से वह अपनी जिद पर अड़ी हुई थी, सचमुच उस के गले की हड्डी बन गई थी, जो न तो निगली जा रही थी और न ही उगली ही जा रही थी. इसी उहापोह में उस ने शिवानी से निबटने के लिए एक खतरनाक रास्ता अख्तियार करने के लिए अपना मन मजबूत कर लिया था.

शिवानी उसे पहले ही बता चुकी थी कि वह 23 नवंबर, 2025 को अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने के लिए ससुराल से आ रही है. वह हमेशाहमेशा के लिए ससुराल छोड़ कर मायके रहने के लिए आ रही है. विनय के दिमाग में तभी एक खतरनाक प्लान ने जन्म ले लिया. काफी सोचविचार कर उस ने इसी मौके पर प्रेमिका शिवानी को मौत के घाट उतारने का प्लान बनाया. खतरनाक प्लान बना कर वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.

शादी से 3 दिन पहले यानी 21 नवंबर, 2025 को देवरिया में स्थित अपनी ससुराल से शिवानी चचेरी बहन की शादी में शरीक होने के लिए रसूलपुर अपने मायके पति के साथ आई. ससुराल के बाकी सदस्य शादी वाले दिन आने वाले थे. वह बहुत खुश थी. उस के खुश होने का सब से बड़ा कारण शादी में शरीक होना नहीं था, बल्कि वह इसलिए खुश हो रही थी कि उस का मिलन उस के प्रेमी विनय से होने वाला था, क्योंकि प्रेमी ने उसे वचन दिया था कि वह उसे हमेशा के लिए अपना लेगा. यही सोचसोच कर वह खुश हो रही थी.

23 नवंबर, 2025 की रात 8 बजे रसूलपुर गांव से 500 मीटर दूर शादी का कार्यक्रम था. कार्यक्रमस्थल पर सुबह से ही फेमिली वालों के आनेजाने का सिलसिला जारी था. घर वाले बेहद खुश थे. नियत समय पर रात में बारात दरवाजे पर लग गई थी. रात 10 बजे जयमाल का कार्यक्रम शुरू हो गया था. घर के सदस्य और नातेरिश्तेदार कार्यक्रम का लुत्फ उठा रहे थे. शिवानी भी वहां मौजूद थी और बेहद खुश नजर आ रही थी.

शिवानी निषादः विवाह हो जाने के बाद भी विनय के साथ रहने की जिद कर रही थी

उसी समय उस की नजर बाहर दरवाजे की ओर पड़ी तो उस की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. बाहर दरवाजे पर प्रेमी विनय खड़ा उसे ही देख रहा था और इशारा कर उसे अपने पास बुला रहा था. उसे देख कर ही इशारे से शिवानी ने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओ, जयमाला देख लूं, फिर आ रही हूं. विनय ने आंखें तरेर कर उसे तुरंत अपने पास आने का इशारा किया तो शिवानी न चाहते हुए भी उस से मिलने उस की ओर हो ली. विनय नजरें बचाते हुए वहां से शिवानी को ले कर उस के ही घर की ओर बढा. इतनी सफाई से दोनों वहां से घर की ओर निकले थे कि वहां से जाते हुए उन्हें किसी ने भी नहीं देखा.

विनय यही चाहता भी था कि उसे वहां से जाते हुए कोई न देख पाए और उस ने प्रेमिका शिवानी को मारने का जो फुलप्रूफ प्लान बनाया है, वह शतप्रतिशत कामयाब हो जाए. सब कुछ उस के प्लान के अनुसार चल रहा था. शिवानी नहीं जानती थी कि जिसे वह सच्चे दिल से प्यार करती है, वही फरेबी आशिक उस के जीवन का दीया बुझाने जा रहा है. उस के खतरनाक इरादों की उसे तनिक भी भनक होती तो वह उस के साथ कतई नहीं जाती. लेकिन वह तो ये सोच कर खुश हो रही थी कि जैसेतैसे कर के प्रेमी को अपने प्यार के तराजू पर तौल कर साथ रखने को मना ही लेगी, उसे पीछे हटने नहीं देगी.

रात लगभग साढ़े 10 बजे विनय शिवानी को ले कर उस के घर के वाशरूम में पहुंचा, क्योंकि घर के बाकी सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था, इसलिए उन्हें वाशरूम का चुनाव करना पड़ा था. खैर, कुछ देर वहां गहरी खामोश छाई रही, फिर शिवानी ने ही खामोशी तोड़ी, ”बताओ, तुम मुझे यहां क्यों ले कर आए हो?’’

”मैं तुम से खुल कर बात नहीं कर पा रहा था, जब से ससुराल से लौट कर आई हो.’’

”अच्छा, इतना मिस कर रहे थे मुझे. तो फिर फोन पर तो न जाने कैसीकैसी बातें कर रहे थे. लगता है मुझे खोने का एहसास हो गया है जनाब को.’’

”कुछ ऐसा ही सोच लो. मेरे दिल में तुम्हारे लिए जो प्यार है, इस जनम में तो क्या, जनमजनम तक कभी कम नहीं होगा. मैं भी तुम्हारे लिए उतना ही तड़पा हूं, जितना तुम मेरे लिए विरह की आग में जली हो.’’ शातिर विनय ने भावनाओं के तरकश से तीर निशाने पर लगाया. उस का निशाना ठीक जगह पर लगा था. वह आगे बोला, ”रियली मुझे अब अपने किए का बहुत पछतावा हो रहा है. सच कहूं तो मैं सचमुच कायर था, बुजदिल था, डरपोक था, जो तुम जैसी महबूबा के सच्चे प्यार को नहीं समझ सका. तुम्हारी सच्ची भावनाओं की कद्र नहीं कर सका. हो सके तो मुझे माफ कर देना शिवानी. आज के बाद तुम्हें कभी दुख नहीं होने दूंगा, तुम्हें इतना प्यार दूंगा कि बीते दिनों के जख्मों को भुला दोगी.’’

”सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते. आप को अपनी शिवानी की याद आई, उस का प्यार याद आया तो समझो कि मेरे सारे गिलेशिकवे मिट गए. अब दोनों मिल कर साथ रहेंगे और साथ जीएंगे भी, जमाना चाहे जो भी सोचे. हम दो जिस्म, एक जान थे, जान हैं और जान रहेंगे. हमें कोई अलग नहीं कर सकता.’’ शिवानी बोली.

शिवानी की बात सुन कर विनय के जिस्म में आग लग गई. वह उस से छुटकारा पाने के लिए पापड़ बेल रहा था और शिवानी थी कि उसे ले कर भविष्य की योजनाएं बना रही थी. तभी विनय ने अपने तरकश से भावनाओं का एक तीर निकाला और चलाते हुए बोला, ”आई लव यू मेरी जान. सच कहा तुम ने, हमें एकदूसरे से कोई जुदा नहीं कर सकता. हम 2 जिस्म एक जान हैं.’’ कह कर विनय ने शिवानी का  माथा चूमा और उसे सीने से आलिंगनबद्ध किया तो वह भी अपना प्यार लुटाने के लिए उस में समा गई और उसे प्यार करने लगी.

विनय इसी समय का इंतजार कर रहा था. शातिर विनय ने उसी समय अपनी कमर में खोंस रखा धारदार हंसिया निकाला और शिवानी की गरदन पर चला दिया. अचानक हुए हमले से शिवानी घबरा गई और उस की मजबूत पकड़ से दूर हो कर जान बचाने के लिए पीछे की तरफ भागी. आशिक से शैतान बना विनय उस पर शेर के मानिंद टूट पड़ा. दोनों के बीच में गुत्थमगुत्थी हो गई.

शिवानी विनय के चंगुल से खुद को आजाद कराने के लिए संघर्ष करती रही, लेकिन उस के वार से बच नहीं पाई और अपने ही खून से सनी शिवानी धीरेधीरे ठंडी पड़ती गई. जब उस ने उसे हिलाडुला कर देखा तो उस के शरीर में कोई हरकत होती नहीं दिखी तो वह समझ गया कि ये मर चुकी है. फिर उस ने वाशरूम में पड़े कपड़ों से खून से सना हंसिया साफ किया और बाल्टी में भरे पानी से अपना हाथमुंह धो कर अपने घर लौट गया और इत्मीनान से सो गया. घटनास्थल से 200 मीटर दूर उस का घर था. हंसिया उस ने बीच रास्ते की झाडिय़ों में छिपा दिया था.

शिवानी को शादी मंडप से निकले घंटों बीत चुके थे, उस की मम्मी नोहरी देवी बेटी को काफी देर से ढूढ रही थी. वह स्टेज से उतरने के बाद से दिखाई नहीं दे रही थी तो नोहरी देवी घर के सभी सदस्यों से उस के बारे में पूछ चुकी थी. किसी ने भी उस के बारे में ठीक से जवाब नहीं दिया, सभी यही कहते रहे कि काफी देर से वह यहां दिखाई नहीं दे रही है. शादी स्थल पर बेटी को न पा कर नोहरी देवी बुरी तरह परेशान हो गई थीं. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी रात में वह कहां जा सकती है?

पता नहीं क्यों नोहरी देवी का मन बेटी को ले कर बुरी तरह घबरा रहा था. अचानक मन में खयाल आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आराम करने के लिए घर चली गई हो. घर पर भी जा कर देख लेते हैं. यह सोच वह घर के लिए चल दीं. घर पर सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था. यह देख कर उस का मन किसी अनहोनी से भर गया और वह बुरी तरह परेशान हो गई. फिर बेटी को तलाशते हुए नोहरी देवी गुसलखाने में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर वह बुरी तरह चीख पड़ीं. शिवानी खून में सनी मरी पड़ी थी. उलटे पांव दौड़ती हुई नोहरा देवी शादी के मंडप में पहुंची, जहां शादी हो रही थी. सभी को उस ने शिवानी की हत्या की खबर दी.

फिर क्या था? पलभर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और शादी का कार्यक्रम बीच में छोड़ कर सभी लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. शादी के घर में खुशियों की जगह मातम छा गया था. घर में रोनापीटना शुरू हो गया. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह काम किस ने और क्यों किया? उसी रात घटना की सूचना ग्राम प्रधान शिवकरन ने थाना झंगहा को दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल की तरफ रवाना हो गई थी. उस समय रात के करीब 4 बज रहे थे. पुलिस टीम के पहुंचने के बाद मौके पर डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई थी.

पत्नी शिवानी की दुखद मृत्यु से आक्रोशित भीम निषाद

पुलिस घटना की जांच कर रही थी. घटनास्थल को देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतका अपनी जान बचाने के लिए कातिल से भिड़ गई होगी, क्योंकि मौके पर संघर्ष के संकेत मिले. खोजी कुत्ते को घटनास्थल सुंघा कर छोड़ दिया तो वह सूंघ कर घर के पीछे 200 मीटर दूर स्थित विनय के घर पहुंचा और वहां रुक कर भौंकने लगा. यह क्रिया 3 बार की गई. डौग ने तीनों बार यही क्रिया दोहराई. पुलिस को समझने में देर नहीं लगी कि इस घर के किसी सदस्य का घटना में हाथ हो सकता है. इस बारे में पुलिस ने मृतका के घर वालों से जानकारी ली तो पता चला कि गांव के विनय उर्फ दीपक निषाद और शिवानी के बीच में कई सालों से प्रेम संबंध चल रहा था.

शिवानी के मायके का वाशरूम जिस में उस के प्रेमी ने उस की जान ले ली

इस की जानकारी जब लड़की के घर वालों को हुई, तब दोनों के परिवार वाले खिलाफ हो गए थे. इसे ले कर दोनों परिवारों के बीच काफी झगड़ा भी हुआ था. बाद में शिवानी की शादी उस के पेरेंट्स ने देवरिया में कर दी थी. शादी के बाद भी विनय शिवानी से फोन पर बात करता था और उसे परेशान करता था. पुलिस के लिए इस क्लू ने अंधेरे में रोशनी की तरह काम कर गया. उस के बाद पुलिस ने शिवानी के फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई और उस का अध्ययन किया तो घटना वाली रात शिवानी के फोन पर विनय के नंबर से कौल आई थी.

इस के अलावा शादी की हो रही वीडियो रिकौर्डिंग की जांच की गई तो जयमाला के समय जब सारे लोग कार्यक्रम देखने में बिजी थे, तब शिवानी स्टेज से उतर कर विनय के साथ जाती हुई कैमरे में रिकौर्ड हो गई थी. फिर क्या था? पुलिस के लिए यह फुटेज कातिल तक पहुंचने में मददगार साबित हुई. इसी साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने 25 नवंबर, 2025 की रात विनय को उस के घर से दबोच लिया. उस से गहन पूछताछ की गई तो वह पुलिस के सामने टूट गया और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

विनय ने पूरी घटना पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर बिछिया मंडलीय जेल भेज दिया. इस के पहले मृतका की मम्मी नोहरी देवी की तहरीर पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत विनय उर्फ दीपक निषाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था. आरोपी विनय से पूछताछ के बाद शिवानी के मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है थाना झंगहा. इसी थानाक्षेत्र के जंगल रसूलपुर नंबर-2 स्थित लक्ष्मीपुर गांव पड़ता है. इसी गांव में नोहरी देवी अपने 4 सदस्यों वाले परिवार के साथ रहती थी. पति की सालों पहले स्वाभाविक मौत हो चुकी थी. पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी नोहरी देवी के कंधों पर आ गई थी. अपनी दिनरात की मेहनत से बच्चों की परवरिश में उस ने कोई कमी आने नहीं दी थी.

नोहरी की 2 बेटियां थीं सुमन और शिवानी. इन में शिवानी छोटी थी. वह सुंदर, चंचल और हंसमुख थी. हर किसी की बातों का मुसकरा कर जबाव देती थी. उस के इसी अंदाज के सभी कायल थे. जैसेजैसे वह सयानी होती गई, आवारा भौंरे उस की ओर आकर्षित होने लगे. उन्हीं भौरों में विनय उर्फ दीपक निषाद का था, जो उस के पड़ोस में रहता था. सुदर शिवानी नैनों के रास्ते उस के दिल में उतर गई थी. उस ने उसे अपने दिल की कोठरी में कैद कर लिया था. आलम यह था कि उसे बिना देखे रह नहीं पाता था. दिन का चैन और रातों की नींद गंवा चुका था वह. उठते, बैठते, सोते और जागते हर घड़ी उसे अपनी आंखों के सामने देखना चाहता था.

मोहब्बत की यह आग विनय के सीने में ही नहीं लगी थी. यह आग तो शिवानी के अंदर भी धधक रही थी. ऐसा नहीं था कि वह विनय की आशिकी से अंजान और बेपरवाह थी, बल्कि उस की हर हरकत पर अपनी नजरें गड़ाए हुई थी. वह भी चाहती थी कि वह पलभर के लिए भी उस की निगाहों से दूर न जाए. विनय से कहीं ज्यादा तड़पन शिवानी के दिल में थी. अपने कोरे दिल पर मोहब्बत की स्याही से उस ने विनय का नाम लिख लिया था.

दोनों दिलों में मोहब्बत की आग बराबर लगी हुई थी. समय देख कर विनय और शिवानी ने एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार कर दिया था. प्यार का इजहार करने के बाद दोनों मिल कर भविष्य के सपनों में खो गए थे. यह करीब 2 साल पहले की बात थी. धीरेधीरे 2 साल बीत गए थे. अपने प्यार को दोनों छिपा कर रखे थे. उन का प्यार अब परदों के पीछे और छिपा नहीं रह सकता था, क्योंकि फिजा में तैरती हुई यह खबर शिवानी के फेमिली वालों तक पहुंची तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई.

नोहरी देवी ने आव देखा न ताव शिवानी पर टूट पड़ी, ”करमजली, इसी दिन के लिए तुझे पालपोस कर बड़ा किया था कि परिवार का नाम मिट्टी में मिला दो.’’

”मम्मी, मुझे बताओ तो सही मैं ने क्या किया है? क्यों मुझ पर गुस्सा कर रही हो?’’ शिवानी ने सवाल किया.

”पूछती है मैं ने किया क्या है? तू तो ऐसे बन रही है जैसे तुझे अपनी करतूतों का ज्ञान ही नहीं है?’’

”सच मम्मी, मुझे नहीं पता कि आप मेरे से क्यों गुस्सा हो? आखिर मैं ने किया क्या है?’’

”तुझे सच में पता नहीं है, तूने क्या किया है? उस विनय के साथ तेरा क्या रिश्ता है? कब से तेरा उस के साथ चक्कर चल रहा है? देख, तू सचसच बता दे कि तूने कोई ऐसीवैसी हरकत तो नहीं की है जिस से हमें समाज में मुंह छिपाना पड़े?’’

”नहीं…नहीं मम्मी, तुम्हारी कसम, मैं ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया है, जिस से घर की बदनामी हो. मैं सच कहती हूं, पापा की कसम.’’ शिवानी ने कसम खाई.

”देख शिवानी, तू झूठ बोल रही है या नहीं, ये तो तू ही जानती है, लेकिन यदि मुझे पता चला कि तूने उस करमजले के साथ कुछ ऐसीवैसी नीच हरकत की है तो जान ले, तुझे जान से मार दूंगी.’’ नोहरी देवी ने शिवानी को धमकाया.

घटनास्थल की जांच करता डौग स्क्वायड

”नहीं मम्मी, मैं ने कोई नीच हरकत नहीं की है. मैं जानती हूं एक बार इज्जत चली जाने पर फिर दोबारा वापस नहीं लौटती है, फिर मैं ऐसी नीच हरकत क्यों करूंगी.’’ शिवानी ने मम्मी को सफाई दी.

”आज से तेरा घर से बाहर निकलना बंद. घर में पड़ी रह चुपचाप. देखती हूं कैसे इश्क लडाती है अपने यार से. उस की भी खबर लेती हूं मैं.’’

नोहरी देवी का गुस्से से चेहरा ऐसा तमतमाया हुआ था, जैसे बेटी को जिंदा खा जाएगी. उसी हाल में वह विनय के घर जा पहुंची और उस के फेमिली वालों से खूब झगड़ी. उन्हें धमकाते हुए कहा, ”अपने बेटे को समझा दो, मेरी बेटी से दूर रहे. इज्जत से न खेेले, वरना इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है. यह मत समझना कि मेरा आदमी (पति) नहीं है तो जो चाहे हमारी इज्जत से खेल लेगा, बोटीबोटी काट डालूंगी, समझे. फिर से कहती हूं अपने बेटे को समझा  देना, जाती हूं.’’

नोहरी देवी का रौद्र रूप देख कर विनय के फेमिली वालों का पसीना छूट गया था. बेटे की हरकतों से वे बुरी तरह शर्मिंदा थे. चूंकि खोट उन के बेटे में थी, इसलिए वे चुपचाप नोहरी देवी की जलीकटी सुनते रहे, एक बोल उन के मुंह से नहीं फूटा था और सारा गुस्सा विनय पर उतार दिया था. विनय के फेमिली वालों ने उसे समझाया, ”देख बेटा, तुम जिस काम में लगे हो उसे मन लगा कर पूरा करो. अच्छी नौकरी होते ही दरवाजे पर लड़कियों की लाइन लग जाएगी या तुम जिस लड़की से शादी करने को कहोगे, उसी से तुम्हारा ब्याह करा दूंगा, लेकिन तुम अपने भविष्य पर ध्यान दो.’’

फेमिली वालों की बात सुन कर वह एकदम चुप रहा, कुछ नहीं बोला. उस वक्त वह यही सोच रहा था कि आखिर शिवानी की मम्मी को हमारे प्यार के बारे में कैसे पता चला? हम शिवानी के बिना जिंदा नहीं रह पाएंगे. उस के बिना मर जाएंगे. इधर यही हाल शिवानी का था. वह विनय के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. जबकि उस की मम्मी तेजी से उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगी थी और जल्द ही लड़का भी मिल गया.

8 मई, 2025 को देवरिया के रहने वाले भीम निषाद के साथ बेटी के हाथ पीले कर  दिए. शिवानी ने अपनी हर ख्वाहिशों को अपने सीने में दफन कर के भीम के साथ शादी तो कर ली, लेकिन उसे दिल से पति नहीं माना. जिंदा लाश के समान वह खुद को तो पति के सामने बिस्तर पर बिछ जाती थी, लेकिन उस का सुख उसे पता नहीं चलता था. सिसकसिसक कर उस के दिन  कटते रहे और वह ससुराल वालों से चोरीछिपे दिन में एक बार फोन पर विनय से बात जरूर कर लेती थी तो उस का मन थोड़ा हलका हो जाता था.

शिवानी का ब्याह हो जाने से विनय उस से काफी नाराज हो गया था और उसे अब दूसरे की जूठन समझने लगा था. वह उस से धीरेधीरे दूरियां बढ़ाने लगा था. यह बात शिवानी जान चुकी थी कि विनय अब उस से दूर भाग रहा है, लेकिन वह उसे इतनी आसानी से छोडऩे वाली नहीं थी. बारबार वह फोन कर के उसे अपना कसम और वायदे याद दिलाती थी. गोरखपुर जिले के रसूलपुर गांव के रहने वाले रामवचन निषाद के तीनों बेटों में 25 वर्षीय विनय उर्फ दीपक निषाद काफी होशियार था.

जब किसी पुलिसकर्मी को वरदी में देखता तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह भी पुलिस विभाग में नौकरी करना चाहता था, इसीलिए वह अपने ऊपर यानी अपने शरीर पर खास ध्यान रखता था. वह जिम में खूब वर्जिश करता था. यह सब तो अलग था. लेकिन वह पिछले 6 महीने से काफी परेशान रह रहा था. उस की परेशानी का नाम था शिवानी निषाद, जो उस की प्रेमिका थी और पड़ोसन भी थी. दोनों के बीच करीब साढ़े 3 साल से प्रेम संबंध कायम था. हालांकि शिवानी के घर वालों ने उस की शादी देवरिया में कर दी थी, लेकिन इस के बावजूद दोनों के प्रेम संबंध चल रहे थे.

शिवानी विनय से बेइंतहा मोहब्बत करती थी. उस ने कसम भी खाई थी कि विनय के अलावा कोई और पुरुष उस के जीवन का हिस्सा नहीं बन सकता, अगर फेमिली वालों के दबाव में वह पति बन भी गया तो उसे वह अधिकार नहीं देगी जो उसे मिलना चाहिए. विनय ही उस का सब कुछ था, है और सब कुछ रहेगा. इसलिए वह उसे अकसर फोन करती थी. यही नहीं, उस पर शादी करने और साथ रहने के लिए दबाव भी बनाते हुए कहा, ”विनय, तुम यूं मुझ से आसानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते. मेरे जीते जी तो कतई नहीं. प्यार किया है मैं ने तुम से… फिर मुझ से अपना पीछा क्यों छुड़ा रहे हो.’’

”यार शिवानी, एक बात कहना चाहता हूं मैं तुम से…’’ विनय ने भी समझाते हुए आगे कहा, ”तुम्हारी शादी हो चुकी है, मुझ से ज्यादा प्यार करने वाला तुम्हारा पति है, सासससुर हैं, घरपरिवार है, सब कुछ तो है तुम्हारे पास, फिर मुझ बेचारे को क्यों परेशान किए जा रही हो. मेरी बात मानो, अपनी गृहस्थी पर ध्यान दो, परिवार पर ध्यान दो. मेरी दुआएं तुम्हारे साथ हमेशा हैं.

”रही बात प्यार करने की तो मैं तुम्हें बता दूं कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं, यह मैं तुम से बता नहीं सकता. जीते जी तो मैं तुम्हें अपने दिल से जुदा नहीं कर सकता. बस यही कहना चाहता हूं तुम से.’’

”कितनी आसानी से यह बात कह दी कि मैं तुम्हें परेशान करती हूं. मेरे पास पति है, घर परिवार है. है तो, लेकिन तुम नहीं हो न मेरे पास. मैं ने अपनी मरजी से यह शादी थोड़े ही न की थी. घर वालों ने जोरजबरदस्ती से मेरी शादी कराई थी. इस में मेरी क्या गलती है, तुम ही बताओ कि कहां गलत हूं मैं?’’

मृतका शिवानी निषाद की मम्मी नोहरी देवी

”दोष तो मैं तुम्हें दे ही नहीं रहा. बस यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि तुम्हारी शादी हो चुकी है. अच्छा घरपरिवार भी मिला हैं. क्यों अपनी बसीबसाई गृहस्थी में अपने ही हाथों से आग लगा रही हो. क्यों नहीं ख्वाब समझ कर पिछली बातों को भूल जाती हो?’’

”भूल तुम सकते हो, मैं नहीं.’’ शिवानी गुस्सा हो गई, ”मेरा प्यार कोई गुड्ïडेगुडिय़ा का खेल नहीं था, जिसे जब चाहा प्यार किया, जब चाहा भुला दिया. मेरा प्यार कोई मजाक भी नहीं था कि जब चाहा दिल लगाया, जब  चाहा रेत के घरौंदे की तरह तोडफ़ोड़ डाला.

”कहे देती हूं जो तुम मुझ से पीछा छुड़ा कर भागने की कोशिश कर रहे हो न, मैं तुम्हारी मंशा को समझ चुकी हूं. और ऐसा होने नहीं दूंगी मैं. किसी कीमत पर नहीं होने दूंगी. इसे अपने दिलोदिमाग में गांठ बांध लीजिएगा.’’

”क्यों खामख्वाह लालपीली हो रही हो यार. तुम से कहां भाग रहा हूं मैं और भाग कर जाऊंगा कहां? रहूंगा इसी धरती पर. बिलावजह उलझ रही हो मुझ से.’’

पुलिस हिरासत में आरोपी विवेक निषाद

”तुम भी इतना समझ लो कि अपने प्यार को पाने के लिए शिद्ïदत तक लड़ूंगी? लेकिन मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगी. इतने बुजदिल और कायर निकलोगे तुम, अगर पहले जानती तो तुम से कभी दिल न लगाती.’’

जोर से फोन पर विनय चिल्लाया, ”मैं कायर नहीं हूं शिवानी. मैं न तो कायर हूं, न डरपोक हूं और न ही बुजदिल. तुम मेरी परेशानियों को समझ नहीं रही हो. यार, क्यों अपना घर उजाडऩे पर तुली हुई हो? मेरे समझाने का कोई फायदा नहीं है क्या?’’

”नहीं, मुझे कुछ समझना नहीं है, मैं ने तय किया है मुझे तो बस तुम्हारे साथ रहना है. इसे मेरी जिद कह लो या जोरजबरदस्ती. इस के अलावा मैं कुछ नहीं जानती. इसी नवंबर में मेरी चचेरी बहन की शादी है, मैं उस में आ रही हूं. फिर लौट कर ससुराल नहीं जाऊंगी. तुम्हारे ही साथ रहूंगी, यह मैं ने फैसला कर लिया है.’’

इतना सुनते ही विनय ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. प्रेमिका शिवानी निषाद की बातों को ले कर विनय काफी परेशान रह रहा था. उस की बातें सोचसोच कर उस के दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. वह सोच रहा था कि कहीं सचमुच ही शिवानी अपनी ससुराल छोड़ कर साथ रहने आ गई तो उस की इज्जत मटियामेट हो जाएगी. गांवसमाज को वह क्या मुंह दिखाएगा. फेमिली वालों को क्या जबाव देगा. उस के करिअर का क्या होगा?

इस से पहले कि वह कोई ऐसावैसा कदम उठाए, उस का काम तमाम करना होगा. उस से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने मन बना लिया था. इस के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो गया था. आखिर में वही हुआ, जो विनय ने तय किया था. शिवानी से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उसे मौत के घाट उतार दिया और जेल के सलाखों के पीछे जा पहुंचा. विनय उर्फ दीपक निषाद जेल में बंद था. उस की निशानदेही पर पुलिस ने झाड़ी में छिपा कर रखा गया हंसिया बरामद कर लिया था. UP Crime

 

 

Love Story: जब कोई करे एकतरफा प्यार

Love Story: एकतरफा प्यार आमतौर पर सफल नहीं होता, क्योंकि रिश्ते के लिए दोनों तरफ से प्रयास और भावनाएं जरूरी होती हैं, लेकिन सलीम इस बात को नहीं समझता था. वह क्षमा शर्मा को एकतरफा प्यार करता था. एक दिन इसी एकतरफा प्यार में वह अपना आपा खो गया और फिर ऐसा कदम उठा बैठा कि…

उस दिन सलीम बहुत खुश था, इसलिए उस ने अपनी बहन रुखसाना और उस के पति सलीम को भी घर पर दावत के लिए बुलाया हुआ था. बुलंदशहर में स्थित सलीम पीरवाली गली में रहता था. उस की फेमिली में अब्बूअम्मी के अलावा 2 भाई सुभान और समीर व एक बहन रुखसाना थे.

रुखसाना की शादी हापुड़ निवासी सलीम से हो चुकी थी. सलीम अपने बहनोई, जिस का खुद का नाम भी सलीम ही था, के साथ बड़े दोस्ताना ढंग से रहता था. सलीम कबाड़ी का काम करता था, इस के लिए वह कबाड़ का सामान लेने पास के कस्बों में और गावों में जाया करता था, जिस से उसे काफी अच्छी आमदनी हो जाया करती थी. रात में जब जीजासाला साथ में बैठे और पार्टी शबाब पर चढऩे लगी तो जीजा सलीम ने अपने साले सलीम से पूछा, ”साले साहब, आज बहुत शानदार पार्टी रखी है’ इस की कोई खास वजह या फिर कोई बड़ा खजाना हाथ तो नहीं लग गया?’’

”यस जीजा साहब, दिल किया तो पार्टी रख ली. कभीकभी पार्टी भी करनी चाहिए, जिस से आपस में बातें भी हो जाती हैं.’’ साले ने बात का रुख पलटते हुए कहा.

उधर जीजा यह समझ चुका था कि आज कुछ न कुछ बात अवश्य है, मगर साले साहब के दिल की बात उस की जुबान से उगलनी भी तो चाहिए, इसलिए वह बोला, ”देखिए साले साहब, आप ने अपने दिल में काफी गहरी बात छिपा कर रखी हुई है. घर वाले तुम्हारे दिल की बात भले ही न समझ पाएं, मगर मैं तुम्हारा चेहरा देख कर तुम्हारे दिल की बात जान ही लेता हूं.’’ जीजा ने साले का नया पैग बनाते हुए कहा.

”देखिए जीजा साहब, मैं आप से अपने दिल को कोई बात छिपाता भी तो नहीं हूं, इसलिए आप को अंदाजा लगाना आसान हो जाता है. अच्छा तो जीजा साहब, बताइए कि आज मेरे दिल में ऐसी कौन सी बात है, जो मैं ने अभी तक छिपा रखी है.’’ सलीम ने गिलास से एक लंबा घूंट लगाते हुए कहा.

मृतका क्षमा शर्मा का भाई रामबाबू शर्माः देर रात तक बहन घर नहीं लौटी तो थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी

”बात और दूसरी क्या हो सकती है. तुम्हारी महबूबा है न, क्षमा नाम ही है न उस का, उस से प्रेम की शुरुआत हो चुकी होगी अब तुम्हारी. देखो, उस का नाम तुम्हीं ने मुझे उस दिन बताया भी था. अब बताओ, शादी कब करने वाले हो तुम अपनी प्रेमिका से?’’ जीजा ने एक बड़ा सिप गले के अंदर लेते हुए कहा.

सलीम ने एक और गहरा राज अपने मन में छिपाते हुए कहा, ”जीजा साहब, आप फिर भी सही बात तक नहीं पहुंच पाए हो. असल बात क्षमा से ही संबंधित तो है पर कुछ और है, इसलिए अब मैं ने अपना एक अंतिम फैसला भी कर लिया है. आप असल में मेरे जीजा साहब हो, पर मैं आप को अपने दोस्त से भी बढ़ कर मानता हूं.’’

”अब तो पानी सिर के ऊपर ही आ गया है,’’ सलीम ने कहा तो उस के जीजा की जिज्ञासा और बढ़ गई. वह बोला, ”देखिए साले साहब, अब बात को ज्यादा घुमाइएगा मत, क्या उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं रहा? मैं तुम्हारे लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं. तुम्हारी खुशी ही मेरे लिए सब कुछ है. इसलिए अब सीधेसीधे बताइए, तुम्हारे दिल में ऐसी क्या बात है जो तुम ने मुझ से भी छिपा कर रखी हुई है.’’

”जीजा साहब, मुझे सचमुच आप से यही उम्मीद भी थी कि आप मेरा साथ जरूर देंगे. आप को मैं ने पहले बताया था कि मैं क्षमा से बेइंतहा प्यार करता हूं. मुझे पहलेपहले ऐसा लगा भी था, लेकिन अब वह न तो मुझे देखती है, न मेरे मैसेज का उत्तर देती है और न ही मुझ से बात करती है.

मुझे ऐसा लग रहा है कि उस की जिंदगी में शायद कोई और युवक आ गया है, जिस के लिए वह अब मुझ से किनारा करने लग गई है.

”अब आप ही बताएं जीजा साहब कि भला मैं यह सब कैसे बरदाश्त कर सकता हूं.’’ सलीम अब यह सब कहतेकहते रुक गया था, क्योंकि उस की आंखों में आंसू आ गए थे.

”साले साहब, अब तुम मुझे बताओ कि तुम्हारा इरादा क्या है? क्या करना चाहते हो?’’ जीजा ने नशे की खुमार में कहा.

”जीजा साहब, क्षमा से मैं अब आखिरी बार मिल कर अपने दिल की बात कह कर उसे अपना बना लेना चाहता हूं.’’ सलीम कबाड़ी ने कहा.

”देखो सलीम, प्यार तो दोनों तरफ से होता है. वैसे भी हमारा और उस का धर्म एकदम विपरीत है. यदि वह तुम्हारा प्यार अपनाने से इंकार कर देती है तो बेहतर यही होगा कि तुम उस का खयाल ही अपने दिल से निकाल दो. हमारे समाज में भी तो तुम्हें कई अच्छे रिश्ते मिल सकते हैं,’’ जीजा ने साले सलीम को समझाते हुए कहा.

”जीजा साहब, मैं ने क्षमा से दिल से मोहब्बत की है. मैं उस का इंकार सहन नहीं कर सकता, अगर कुछ हो गया तो आप मेरी मदद करोगे न!’’ साले ने अपने जीजा को हाथ से पकड़ते हुए विनती करते हुए कहा.

”अब तुम मेरे साले भी हो और मेरे दोस्त भी. मैं हर परिस्थिति में तुम्हारे साथ रहूंगा,’’ जीजा ने अपने साले की हथेलियों को मसलते हुए कहा.

दूसरे दिन 27 नवंबर, 2025 की तारीख थी. अपनी योजना के अनुसार, सलीम कबाड़ी ने शाम को 6 बजे क्षमा को फोन किया और आखिरी बार मिलने के लिए बुलाया. क्षमा ने सोचा कि वह सलीम को किसी तरह समझा भी देगी कि वह उस का खयाल अपने दिल से निकाल दे. क्षमा पढ़ीलिखी समझदार थी, उस ने सोचा कि समझाने से तो बुरे से बुरा इंसान भी समझ जाता है. क्षमा ने भी यही सोचा कि घर में अगर कुछ बताऊंगी तो घर वाले सभी सलीम की जान के दुश्मन बन जाएंगे. यदि बात समझाबुझा कर हल कर ली जाए तो अच्छा रहेगा.

इसीलिए क्षमा सलीम के बताई जगह पर उस से मिलने अकेले चली गई. सलीम क्षमा को ले कर उस के गांव नैथला हसनपुर से 3 किलोमीटर दूर वलीपुर नहर के पुल पर जा पहुंचा.

”बोलो सलीम, मुझे यहां पर अकेले क्यों बुलाया है?’’ क्षमा ने पूछा.

”क्षमा, मैं तुम से बेइंतहा मोहब्बत करता हूं. पिछले कुछ दिनों से तुम न मेरे मैसेज का जवाब देती हो, न मुझ से मिलती हो, न मुझ से बात करती हो. यह बात बिलकुल भी ठीक नहीं है.’’ संलीम ने कहा.

”देखो सलीम, तुम हमारे घर कबाड़ खरीदने आते थे. तुम ने एक दिन मुझ से मेरा मोबाइल नंबर मांगा, मैं ने दे दिया. उस के बाद तुम सुबहशाम उलटेसीधे मैसेज भेजने लगे. यदि मेरे घर वाले देख लेते तो मैं कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहती.

”जहां तक प्यार का संबंध है, तुम मुझ से प्यार करते हो, लेकिन मैं तुम से प्यार नहीं करती, न ही कभी कर सकती हूं. बेहतर होगा कि आज के बाद तुम मेरा पीछा करना छोड़ दो. इसी में तुम्हारी भलाई है,’’ क्षमा ने उसे समझाते हुए कहा.

”क्षमा, मैं तुम्हें बेवकूफ नहीं बना रहा हूं. जब मैं ने तुम को देखा, तुम से मिला, तुम से मेरी बातचीत हुई, तब मेरे दिल के अंदर तक जो हलचल हुई थी, उस से मुझे यह महसूस हुआ कि मोहब्बत क्या होती है. इसीलिए मैं तुम से अपने से ज्यादा प्यार करने लगा हूं. मैं अब तुम से शादी करना चाहता हूं. मैं तुम्हारे प्यार के लिए अपने को एकदम बदल लूंगा. बस, तुम हां कर दो.’’ कहते हुए सलीम ने क्षमा का हाथ पकड़ लिया.

यह सुन कर क्षमा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था. वह उस का हाथ झटक कर गुस्से से बोली, ”सलीम, तू अपनी औकात में रह. अभी तक तो मैं तेरे साथ इज्जत से पेश आ रही थी, लेकिन तुम तो अब न जाने क्याक्या बकने लगे हो. आज के बाद यदि तुम कभी भी मेरे रास्ते में आए तो इस का परिणाम बहुत बुरा होगा.’’ यह कह कर क्षमा जैसे ही घर जाने के लिए पलटी तो उसी क्षण सलीम ने अपनी कमर में पहले से ही खोंसा हुआ चाकू निकाला और एक ही वार में उस ने क्षमा की गरदन को रेत कर वहां से फरार हो गया.

रोतेबिलखते मृतका क्षमा शर्मा के घर वाले तथा नीचे बाएं -चचेरा भाई अमित शर्मा

27 नवंबर, 2025 की रात तक भी जब क्षमा शर्मा घर नहीं लौटी तो उस के बड़े भाई रामबाबू शर्मा ने बुलंदशहर के चोला थाने में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. इधर पुलिस क्षमा को ढूढ रही थी तो दूसरी तरफ उस के फेमिली वाले उसे गांव से ले कर नातेरिश्तेदारों और सहेलियों के घर ढूंढने में दिनरात जुटे थे. किसी की समझ में यह नहीं आ पा रहा था कि रातोंरात क्षमा अचानक कहां गायब हो गई.

उस के फेमिली वाले किसी अनहोनी की आशंका से भी काफी डरे हुए थे. वह बारबार क्षमा को फोन कर रहे थे, लेकिन क्षमा का फोन बंद जा रहा था. उन्होंने क्षमा को हरसंभावित जगह, दोस्तों और रिश्तेदारियों में जा कर तलाश किया, परंतु क्षमा का कोई सुराग नहीं मिला. उधर बुलंदशहर कोतवाली नगर में धर्मेंद्र सिंह राठौर पहली दिसंबर, 2025 को अपने औफिस में बैठे ही थे कि तभी उन के मोबाइल पर किसी का फोन आ गया.

”कोतवाल साहब, मैं सुबहसुबह मौर्निंग वाक पर निकला था तो मुझे वलीपुरा नहर में एक शव तैरता हुआ दिखाई दे रहा है. कृपया आप यहां पर जल्दी आ कर मामले की जांच करें. मैं आप लोगों के आने तक यहीं पर खड़ा हूं.’’

यह सूचना मिलते ही कोतवाल धर्मेंद्र सिंह राठौर कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने शव को नहर से बाहर निकाला. वह किसी युवती का था, जिस की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष थी. वह बैंगनी रंग की हुडïडी, फिरोजी रंग का कुरता, फिरोजी रंग की सलवार, हलके बैंगनी रंग के जूते पहने हुए थी. उस के बाएं हाथ में कलावा और दाहिने हाथ में सफेद रंग की चूडिय़ां थीं. वहां मौजूद लोगों से पुलिस ने शव की शिनाख्त करने की कोशिश की, लेकिन वहां पर कोई भी शव की शिनाख्त नहीं कर सका.

इस के बाद कोतवाल धर्मेंद्र सिंह राठौर ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल बुलंदशहर भेज दिया और इस की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को भेज दी. इस के बाद कोतवाली पुलिस ने अज्ञात शव मिलने की जानकारी अपने आसपास के पुलिस स्टेशनों को देने के साथसाथ शव के हुलिया सहित इस की सूचना अपने प्रदेश और अन्य नजदीकी प्रदेशों को भी सूचित कर दिया.

इधर जब अज्ञात युवती का शव मिलने की सूचना चोला पुलिस को फोटो सहित मिली तो इंसपेक्टर बलराम सिंह सेंगर ने क्षमा शर्मा के फेमिली वालों को थाने पर बुला लिया. फेमिली वालों ने जब शव के फोटो और कपड़े देखे तो उन्होंने उस की शिनाख्त क्षमा शर्मा के रूप में कर दी. 2 दिसंबर, 2025 मंगलवार के दिन जब थाना चोला पुलिस क्षमा के शव को ले कर उन के गांव नैया हसनपुर पहुंची तो फेमिली वालों और ग्रामीणों ने शव को लेने से इंकार कर दिया. वे सब लोग पहले आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त काररवाई की मांग को ले कर अड़े रहे.

सभी लोग पुलिस प्रशासन और आरोपियों के खिलाफ नारे लगाने लगे थे. हंगामे और तनाव की सूचना मिलने पर सीओ (सिकंदराबाद) भास्कर कुमार मिश्रा मौके पर पहुंच गए. सीओ भास्कर कुमार मिश्रा ने ग्रामीणों और मृतका क्षमा शर्मा के फेमिली वालों को उचित काररवाई करने का पूरापूरा आश्वासन दिया, जिस के बाद उन्होंने क्षमा का शव ले कर उस का अंतिम संस्कार किया. यह मामला काफी संवेदनशील व 2 समुदायों से जुड़ा था, जिस की वजह से पूरे गांव नैथला हसनपुर व आसपास के इलाकों में काफी तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया था.

इसलिए बुलंदशहर पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना या अनहोनी से निपटने के लिए गांव नैथला हसनपुर में अतिरिक्त पुलिस बल बुला लिया. पुलिस अधिकारी वहां पर बारबार सभी ग्रामीणों और मृतका के परिजनों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहे थे. उसी दिन 2 दिसंबर, 2025 को मृतका क्षमा शर्मा के बड़े भाई रामबाबू शर्मा ने एक लिखित तहरीर जनपद बुलंदशहर के थाना चोला में दी, जिस में उन्होंने आरोप लगाया कि बुलंदशहर की ही पीरवाली गली निवासी सलीम कबाड़ खरीदने उन के घर पर अकसर आया करता था. सलीम कबाड़ी ने अपने अब्बू, भाइयों, बहन व बहनोई के साथ उस की बहन क्षमा शर्मा की सुनियोजित ढंग से हत्या कर दी थी.

रामबाबू शर्मा की लिखित तहरीर पर सलीम कबाड़ी और उस के परिजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. परिजनों की तहरीर के आधार पर थाना पुलिस अब अभियुक्त सलीम के पीछे पड़ गई थी. मुखबिर की निशानदेही पर मुख्य अभियुक्त सलीम को 3 दिसंबर, 2025 की देर रात पुलिस ने चोला चौराहे से गिरफ्तार कर लिया. अभियुक्त सलीम से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार एक स्थान पर छिपा कर रखा हुआ है.

पुलिस टीम जब आरोपी सलीम को ले कर उस स्थान पर पहुंची तो उस ने हथियार निकालने के बहाने उस स्थान से एक तमंचा निकाल लिया और पुलिस पर अंधाधुंध फायर करने लगा और वहां से भागने का प्रयास करने लगा. सलीम के तमंचे की फायरिंग के कारण वहां पर मौजूद पुलिस कांस्टेबल अंकुर के दाहिने हाथ में गोली लग जाने के कारण वह बुरी तरह से घायल हो गया. पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक गोली सीधे सलीम के पैर पर लग गई, जिस के कारण वह बुरी तरह से घायल हो गया.

पुलिस मुठभेड़ में घायल कबाड़ी सलीम को सहारा देकर ले जाते पुलिसकर्मी

पुलिस टीम तत्काल सलीम को गिरफ्तार कर उसे प्राथमिक उपचार के लिए बुलंदशहर के जिला अस्पताल में ले कर आ गई. पुलिस ने आरोपी सलीम कबाड़ी से अवैध हथियार और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया. इस के साथ ही घटना में प्रयुक्त कपड़े भी बरामद कर लिए. पुलिस पूछताछ में सलीम ने बताया कि वह और क्षमा एकदूसरे से परिचित थे. सलीम उसे पाना चाहता था, क्षमा से प्यार और शादी करना चाहता था, लेकिन क्षमा के इंकार करने पर उसे गुस्सा आ गया, जिस से क्षुब्ध हो कर 27 नवंबर, 2025 की शाम उस ने क्षमा की गला रेत कर हत्या कर दी और शव को वहां पर फेंक कर वहां से भाग गया.

अभियुक्त सलीम कबाड़ी से विस्तृत पूछताछ करने के बाद पुलिस जांच में यह सामने आया कि आरोपी सलीम कबाड़ी का पूरा परिवार इस मामले में शामिल रहा था. पुलिस के पास पुख्ता जानकारी थी कि इस प्रकरण में मुख्य अभियुक्त सलीम कबाड़ी के साथ उस की बहन रुखसाना, रुखसाना का पति सलीम और सलीम कबाड़ी के दोनों भाई सुभान और समीर भी शामिल थे.

5 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने सलीम की बहन रुखसाना को गिरफ्तार किया और आवश्यक पूछताछ करने के बाद जेल भेज दिया. उस के बाद 6 दिसंबर, 2025 एक सूचना के आधार पर वांछित अभियुक्तगण सुभान और समीर को वलीपुरा नहर से गंगेरुआ को जाने वाले रास्ते से गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के बाद दोनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

मृतका क्षमा शर्मा के बड़े भाई रामबाबू शर्मा की तहरीर के आधार पर थाना चोला में सलीम कबाड़ी व अन्य 4 अभियुक्तों के खिलाफ बीएनएस की धारा 87/103(3)/238/61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. जिन में से एक आरोपी जो सलीम कबाड़ी का बहनोई सलीम शहर व थाना हापुड़ फरार चल रहा था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए अपनी कई टीमें भी लगा रखी थीं. 10 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने उसे बुलंदशहर कलेक्ट्रेट गेट के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ करने के बाद उसे भी जेल भेज दिया गया. एकतरफा प्यार के कई बार बेहद घातक परिणाम देखने को मिलते हैं. यह प्यार सिर्फ एक तरफ से होता है.

एकतरफा प्यार आप की मेंटल हेल्थ को प्रभावित भी कर सकता है, क्योंकि यह प्यार आप को कभी खुशी नहीं देता है, बल्कि आप केवल इस के कारण दुखी ही होते हैं. जिस के कारण उस व्यक्ति की मेंटल हेल्थ, फिजिकल हेल्थ प्रभावित हो जाती है. ऐसे व्यक्ति खुद पर ध्यान देना एकदम से छोड़ देते हैं. मृतका क्षमा शर्मा के भाई रामबाबू शर्मा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन का कहना है कि चोला थाने के एसआई मोहम्मद असलम ने मामूली पूछताछ के बाद सलीम को निर्दोष कह कर छोड़ दिया था. यदि उसी दिन सलीम से कड़ी पूछताछ की जाती तो शायद आज हमारी बहन जिंदा होती.

वहीं एसपी ने लापरवाही बरतने के आरोप में एसआई मोहम्मद असलम को निलंबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि जो भी इस मामले में दोषी पाए जाएंगे, उन के खिलाफ काररवाई की जाएगी. Love Story

 

 

UP Crime: दामाद बना हैवान – साससाले को चाकुओं से गोदा

UP Crime: एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया, जो आप को भी चौंका देगा. जहां एक दामाद ने अपनी सास और साले की चाकू से गोदकर   हत्या कर डाली. चलिए जानते हैं,  फेमिली से जुड़ी इस पूरी पूरी क्राइम स्टोरी को विस्तार से, जो आप को होने वाली ऐसी घटनाओं से सतर्क भी करेगी.

यह दर्दनाक घटना बरेली से सामने आई है. जहां अफसर खान ने अपनी सास आसमा और साले आदिल पर चाकुओं से कई वार किए जिस से उन की मौके पर मौत हो गई.

आप को बता दें कि यह मामला पंचायत के दौरान हुआ था, जिस वक्त अफसर खान और पत्नी के बीच विवाद सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई थी. इसी पंचायत में अफसर ने अपने ससुरालवालों पर चाकू से हमला कर दिया था. इसी हमले में उस की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई. वहीं साले और सास भी बुरी तरह घायल थे. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया था.

इस वारदात की सूचना मिलते ही एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी (सिटी) मानुष पारीक, सीओ (तृतीय) पंकज श्रीवास्तव, इज्जतनगर इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह फोर्स और फील्ड यूनिट के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.

पुलिस हमलावर की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है. साइमा की बहन साहिबा ने बताया जीजा एंबुलेंस चलाते हैं. वो पहले भी कई बार मारपीट कर चुके हैं. 9 साल पहले मेरी बहन साइमा की उन से शादी हुई थी. रविवार को भी उन्होंने मारपीट की थी. तब पुलिस कंट्रोल रूम के 112 नंबर पर फोन करके पुलिस बुलाई गई थी. इस पर वह घर से भाग गए थे. आज पंचायत के लिए बुलाया गया, तभी उन्होंने हमला कर दिया. भाई और मां की मौत हो गई है. दीदी की हालत नाजुक है. पुलिस पूरे मामले की विस्तार से जांच कर रही है. UP Crime

Love Crime: सलहज को प्यार – साले को मौत का उपहार

Love Crime: रामवीर की नजर अपनी सलहज कुसुमा पर पहले से ही जमी थी. पत्नी की मौत के बाद तो वह उस के पीछे ही पड़ गया. उस ने उसे पा तो लिया, लेकिन इस का परिणाम सुखद नहीं रहा.

उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा के थाना यमुनापार के गांव ढहरुआ में रहता था भागचंद. उस की गिनती गांव के खुशहाल लोगों में होती थी. उस के 7 बेटे और 3 बेटियां थीं. उस ने सभी बच्चों को खूब पढ़ाना चाहा था, लेकिन उस का कोई भी बेटा ज्यादा नहीं पढ़ सका, तब उस ने सभी को उन की मरजी के मुताबिक काम सिखवा दिए. उस के 3 बेटे शटर बनाने का काम करने लगे. बच्चे कमाने लगे तो भागचंद की मौज हो गई. बच्चे जो भी कमाते थे, वह उसी को देते थे. जैसेजैसे बच्चे जवान होते गए, वह उन की शादियां करता गया.

भागचंद ने अपने बेटे भूरा की शादी मथुरा से और उस से छोटे खन्ना की शादी जिला आगरा के गांव मितावली इंकारपुर की कुसुमा से की थी. कुसुमा के पिता की मौत हो चुकी थी. इस के बाद घर में मां मनिया के अलावा 3 बहनें और एक भाई था. खन्ना अपनी कमाई से जो पैसे पिता को देता था, शादी के बाद देने बंद कर दिए थे. उन पैसों से अब वह अपनी गृहस्थी चलाने लगा था. कुसुमा खन्ना के साथ बहुत खुश थी. उन्हीं दिनों भागचंद ने अपनी बेटी पिंकी की शादी राजस्थान के कस्बा कुम्हेरपुर के रामवीर के साथ कर दी. रामवीर भी खातेपीते परिवार का था. पिंकी को ससुराल में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी.

रामवीर का छोटा भाई श्यामवीर भी शादी लायक था. भागचंद को श्यामवीर छोटी बेटी किन्ना के लिए ठीक लगा तो उस के पिता देवी सिंह से बात की. देवी सिंह का परिवार पिंकी से काफी खुश था, इसलिए उन्हें इस रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं था. इस के बाद किन्ना की शादी श्यामवीर के साथ हो गई. इस तरह भागचंद की दोनों बेटियों की शादी एक ही घर में हो गई. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. समय के साथ कुसुमा 2 बच्चों की मां बन गई. खन्ना का शटर बनाने का काम बढि़या चल रहा था. पिंकी अपने पति रामवीर के साथ जल्दीजल्दी मायके आती रहती थी. रामवीर मजाकिया स्वभाव का था, इसलिए अपनी सलहज कुसुमा से वह खूब मजाक करता था.

यह बात उस के साले खन्ना को अच्छी नहीं लगती थी. कभीकभी खन्ना अपने बहनोई रामवीर के मजाक करने पर ऐतराज कर दिया करता था. तब रामवीर कहता, ‘‘साले साहब, सलहज से हमारा मजाक करने का हक है, इस में आप को क्यों बुरा लगता है. भाभी को तो कोई ऐतराज नहीं है.’’

खन्ना कहता, ‘‘मजाक का भी कोई समय होता है. हर समय हंसीमजाक अच्छा नहीं लगता. उस की भी एक सीमा होती है, लेकिन आप हैं कि मानते ही नहीं.’’

मगर खन्ना की बातों का रामवीर पर कोई असर नहीं पड़ा. वह जब तक ससुराल में रहता, खन्ना परेशान रहता. खन्ना ने कई बार अपने पिता से भी कहा, ‘‘आप जीजाजी को समझाते क्यों नहीं, वह इतने फूहड़ मजाक करते हैं.’’

भागचंद दामाद के बजाय उसे ही समझाता, ‘‘बेटा, दामाद से इस तरह की बात करना ठीक नहीं है. फिर वह मजाक ही तो करता है. वह यहां महीनों तो रहता नहीं, एकदो दिन रह कर चला जाता है. इस बात को ले कर उसे नाराज नहीं करना चाहिए, हम ने उसे बेटी दी है, बेटी की वजह से हमें चुप रहना चाहिए.’’

रामवीर को किसी की कोई परवाह नहीं थी. वह जब भी ससुराल आता, कुसुमा के आगेपीछे मंडराता रहता और हंसीमजाक करता रहता. जब वह चला जाता तो खन्ना इस बात को ले कर कुसुमा से खूब झगड़ता. एक दिन भागचंद को खबर मिली कि उस की बेटी बीमार है. यह खबर सुन कर वह परेशान हो उठा. उसे देखने के लिए वह बेटे खन्ना के साथ उस की ससुराल कुम्हेरपुर पहुंचा. वहां जा कर पता चला कि पिंकी की हालत बहुत नाजुक है. बेहतर इलाज के लिए वह बेटी को एक बड़े अस्पताल ले गया, लेकिन वहां भी उस की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. लाख कोशिशों के बाद भी डाक्टर पिंकी को नहीं बचा पाए.

पिंकी की मौत उस के मायके वालों के लिए एक बड़ा सदमा थी. उस के बच्चों को पालने की जिम्मेदारी पिंकी की छोटी बहन किन्ना ने ले ली. पत्नी की मौत के बाद भी रामवीर जबतब अपनी ससुराल आता रहता था. ससुराल में अब भी उस की पहले की ही तरह इज्जत होती थी. कुसुमा उस की पहले की ही तरह खातिरदारी करती थी. खन्ना को अब रामवीर का आना बिलकुल भी नहीं अच्छा लगता था. उसी की वजह से अब उस के और कुसुमा के बीच तनाव रहने लगा था. खन्ना की बात पर घर में कोई ध्यान नहीं देता था और न ही कोई उस के मानसिक तनाव को समझने की कोशिश करता था.

जबकि सच्चाई यह थी कि कुसुमा रामवीर की तरफ आकर्षित होती जा रही थी, जिस की वजह से उस के दांपत्य में दरार पड़ने लगी थी. रामवीर और कुसुमा के बीच वे बातें भी होने लगीं, जो दोनों को एकदूसरे के करीब लाने वाली थीं. एक दिन रामवीर ने कुसुमा को मथुरा में मिलने को कहा, लेकिन कुसुमा ने कहा कि घर के सभी लोग शादी में जा रहे हैं, इसलिए घर में अकेली होने की वजह से वह वहां नहीं आ सकती. उस ने रामवीर को अपने यहां आने को कहा. तब रामवीर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि ऐसे में वह उस के घर आ सकता था.

मौके का फायदा उठाने के लिए रामवीर अपनी ससुराल पहुंच गया और एकांत का फायदा उठा कर दोनों ने उस दिन मर्यादाएं लांघ कर इच्छा पूरी कर ली. रामवीर ने साले के दांपत्य में सेंध लगा दी. खन्ना को बीवी की बेवफाई का पता नहीं चला. कुसुमा को भी अपनी बेवफाई पर कोई ग्लानि नहीं हुई. उस दिन के बाद से कुसुमा का पति के प्रति व्यवहार बदलने लगा. खन्ना जब कभी उस से झगड़ता, वह मायके जाने की धमकी देने लगती. खन्ना समझ नहीं पा रहा था कि कुसुमा अब इस तरह की बातें क्यों करती है. वह अंदर ही अंदर तनाव में घुटने लगा. दूसरी ओर कुसुमा को किसी बात की परवाह नहीं थी.

उसी बीच मथुरा में रामवीर और कुसुमा की मुलाकात हुई तो कुसुमा ने उस से कहा कि खन्ना को अब उस पर शक हो गया है. वह छोटीछोटी बात पर उस की पिटाई करने लगा है. तब रामवीर ने कहा, ‘‘मैं खन्ना से बात करूंगा.’’

‘‘नहीं, तुम उस से कुछ मत कहना. अब मेरे घर भी मत आना. जब कभी मिलना होगा, हम बाहर ही मिल लिया करेंगे. लेकिन इस समस्या का कोई हल तो ढूंढ़ना ही होगा. आखिर मैं कब तक उस से पिटती रहूंगी.’’ कुसुमा ने कहा.

कुसुमा की बात पर रामवीर गंभीर हो गया. उसे लगा कि कुछ तो करना ही होगा. कुसुमा ने कहा, ‘‘चलो, हम कहीं भाग चलते हैं.’’

‘‘नहीं, इस से बड़ी गड़बड़ हो जाएगी. तुम्हें यह तो पता ही है कि मेरा छोटा भाई श्यामवीर भी उस घर का दामाद है. जब मैं घर में नहीं रहूंगा तो खन्ना को पूरा विश्वास हो जाएगा कि मैं ही तुम्हें भगा कर ले गया हूं. तब ससुराल वालों से श्यामवीर के संबंध खराब हो जाएंगे. मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से श्यामवीर की गृहस्थी बिगड़े.’’

रामवीर ने कुसुमा को भरोसा दिया कि वह इस बारे में कुछ न कुछ जरूर करेगा. अगर जरूरत पड़ी तो खन्ना को रास्ते से हटा कर हमेशा की टेंशन खत्म कर देगा. होली पर रामवीर बिना बुलाए मेहमान की तरह भागचंद के घर पहुंच गया. खन्ना को उस का आना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. लेकिन वह खामोश रहा. होली के बहाने रामवीर ने कुसुमा को अपनी बाहों में भर लिया. रामवीर की इस हरकत से नाराज हो कर खन्ना ने रामवीर की पिटाई कर दी. रामवीर अपनी सफाई में यही कहता  रहा कि वह तो सलहज के साथ होली खेल रहा था. लेकिन खन्ना का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा था. आखिर में घर वालों ने बीचबचाव कर के रामवीर को छुड़ाया.

इस घटना से रंग में भंग पड़ चुका था. खन्ना ने तय किर लिया था कि अब वह रामवीर को किसी भी कीमत पर अपने घर नहीं आने देगा. रामवीर की पिटाई से कुसुमा भी डर गई थी. उस ने पहली बार पति का ऐसा गुस्सा देखा था. खन्ना ने उसे भी चेतावनी दी थी कि वह संभल जाए वरना बहुत पछताएगी. उस दिन कुसुमा को लगा कि अब वह रामवीर से कभी नहीं मिल पाएगी. लेकिन रामवीर ने तो कुछ और ही सोच लिया था. वह खन्ना से अपने अपमान का बदला लेना चाहता था. वह सोचने लगा कि ऐसा क्या किया जाए, जिस से वह खन्ना से बदला भी ले ले और कुसुमा भी हासिल हो जाए.

खन्ना को लगा कि रामवीर इतने अपमान के बाद अब उस के घर नहीं आएगा. वह अपने काम में मन लगाने लगा. कुसुमा का व्यवहार भी उसे सामान्य लगने लगा था. इस तरह वह बेफिक्र हो गया. लेकिन उस की यही लापरवाही आगे चल कर उस की मुसीबत बनने वाली थी. उस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पत्नी की आशिकी उसे कभी मौत की सौगात दे जाएगी. रामवीर और खन्ना के बीच हुए झगड़े के बाद कुसुमा भी सतर्क हो गई थी. उस का रामवीर से भले ही मिलना नहीं हो रहा था, पर वह उस से फोन पर बातें करती रहती थी. जब कभी उसे मौका मिलता, वह फोन पर बात कर के निश्चित जगह पर उस से मिल भी लेती थी.

27 अगस्त, 2015 को सवेरे शटरिंग ठेकेदार अजीत चौधरी ने खन्ना के घर का दरवाजा खटखटाया. खन्ना ने दरवाजा खोला तो अजीत ने कहा कि उसे अभी उस के साथ चलना होगा, क्योंकि पार्टी को अभी काम पूरा कर के देना है. अगर समय पर उस के शटर बना कर नहीं दिए तो परेशानी हो जाएगी.  खन्ना ने कहा, ‘‘ठीक है, तुम 2 मिनट ठहरो, मैं अभी तैयार हो कर आता हूं.’’

इस के बाद खन्ना ठेकेदार अजीत चौधरी के साथ चला गया. उस दिन अजीत चौधरी के साथ गया खन्ना फिर कभी वापस नहीं लौटा. खन्ना देर रात तक वापस नहीं लौटा तो घर वालों ने अजीत को फोन किया, क्योंकि वह उसी के साथ गया था. अजीत ने बताया कि खन्ना तो शाम को ही काम खत्म कर के घर चला गया था. जब काम खत्म कर के घर के लिए चला था तो रास्ते से कहां गायब हो गया? घर वालों ने रात में ही खन्ना की खोजबीन शुरू कर दी. लेकिन वह नहीं मिला. घर वाले रात भर उस की चिंता में परेशान रहे. जैसेतैसे उन की रात बीती. सवेरा होते ही वे सब फिर खन्ना को तलाशने लगे.

किसी ने चैतन्य अस्पताल के सामने खाली पड़े प्लौट में खन्ना की लाश देखी तो उस के घर वालों को बता दिया. वे वहां पहुंच गए. भागचंद ने जब बेटे की लाश देखी तो फूटफूट कर रोने लगा. खबर मिलने पर थाना यमुनापार के थानाप्रभारी संतोष कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने लाश का मुआयना किया तो उस के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला. गले में बनियान बंधा था. इस से अंदाजा लगाया गया कि इसी बनियान से उस का गला घोंटा गया था.

भागचंद का शक शटरिंग ठेकेदार अजीत चौधरी पर था, क्योंकि वही उसे अपने साथ घर से लिवा कर ले गया था. मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने खन्ना के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के बाद पुलिस ने भागचंद की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर ली. उन्होंने अपना शक अजीत चौधरी पर जताया था. अजीत चौधरी थाना मांट के कुढ़वारा गांव का रहने वाला था. दबिश दे कर पुलिस ने उसे उस के घर से हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने अजीत से पूछताछ की तो उस ने खुद को बेकसूर बताया. उस ने कहा कि खन्ना लंबे समय से उस के साथ काम कर रहा था. उस के साथ उस के काफी अच्छे संबंध थे. कोई ऐसी वजह नहीं थी, जिस से वह उस की हत्या करता. पुलिस ने उस से कई तरह से पूछताछ की. लेकिन कोई हल नहीं निकला. इस पूछताछ में अनुभवी थानाप्रभारी को वह वास्तव में बेकसूर लगा. उन्होंने उसे छोड़ दिया. मृतक खन्ना के परिवार वालों को जब इस बात का पता चला तो वे हंगामा करते हुए थाने पहुंच गए और अजीत को जेल भेजने की मांग करने लगे.

इस हंगामे में रामवीर बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहा था. थानाप्रभारी ने मृतक के परिजनों को समझाया कि वह खन्ना के हत्यारे को पकड़ कर जेल जरूर भेजेंगे. इस के बाद पुलिस ने खन्ना के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स का अध्ययन करने पर पता चला कि उस के मोबाइल पर आने वाली आखिरी काल खन्ना के बहनोई रामवीर की थी. पुलिस ने रामवीर के बारे में छानबीन शुरू की तो गांव वालों से पता चला कि होली वाले दिन रामवीर ने खन्ना की बीवी को छेड़ा था, तब खन्ना ने उस की पिटाई कर दी थी.

इस बात की पुष्टि के लिए पुलिस ने खन्ना के घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि रामवीर के साथ खन्ना का झगड़ा तो हुआ था, लेकिन वह झगड़ा ऐसा नहीं था कि रामवीर खन्ना की हत्या कर देता. फिर होली के बाद रामवीर उन के यहां आया भी नहीं था. पुलिस को अब तक पता चल चुका था कि खन्ना की बीवी कुसुमा से रामवीर का कोई चक्कर था. इस के बाद पुलिस के सामने तसवीर साफ हो गई.

दूसरी ओर रामवीर को किसी तरह पता चल गया कि पुलिस को उस पर शक हो गया है तो वह फरार हो गया. उस के फरार होने की जानकारी पुलिस को मिल गई. लिहाजा 2 सिपाहियों को उस के घर पर लगा दिया गया. जैसे ही वह घर लौटा, पुलिस ने उसे दबोच लिया. पुलिस रामवीर को पकड़ कर थाने ले आई और पूछताछ शुरू कर दी. रामवीर ने पहले तो पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने अपने साले खन्ना की हत्या की थी और उस की लाश को चैतन्य अस्पताल के सामने खाली पड़े प्लौट में फेंक दिया था.

रामवीर ने यह भी स्वीकार किया कि उस की सलहज कुसुमा से उस के नाजायज संबंध थे. कुछ समय तक तो सब कुछ ठीकठाक चला, लेकिन कुछ दिनों बाद खन्ना को उस पर शक होने लगा और उसे उस का आनाजाना अखरने लगा. वह किसी भी कीमत पर कुसुमा से संबंध तोड़ना नहीं चाहता था. कुसुमा भी अपने पति की पिटाई से तंग आ गई थी. वह हमेशा के लिए पति से छुटकारा चाहती थी. इस के बाद दोनों ने खन्ना को ठिकाने लगाने की योजना बना ली.

उस के बाद रामवीर खन्ना का विश्वास जीतने की कोशिश करने लगा. जब उसे उस पर विश्वास हो गया तो रामवीर ने घटना वाले दिन खन्ना को फोन कर के शाम का खाना किसी होटल में खाने की बात कही. खन्ना रामवीर को अपना दुश्मन नहीं बनाना चाहता था. उस ने सोचा कि अगर रामवीर सुधर रहा है तो उसे एक मौका अवश्य देना चाहिए. उस ने सोचा कि खाना खाते समय वह रामवीर को समझाएगा. उस दिन सुबह ही वह ठेकेदार अजीत चौधरी के साथ काम पर निकला था. काम खत्म करने के बाद वह शाम को रामवीर की बताई जगह पर पहुंच गया. रामवीर उसे एक ढाबे पर ले गया, जहां दोनों ने खाना खाया और शराब पी.

रामवीर ने खन्ना को खूब शराब पिलाई. जब खन्ना नशे में धुत हो गया तो वह उसे एक टैंपो में डाल कर सुनसान जगह पर ले गया और अपनी बनियान से उस का गला घोंट दिया. चूंकि उस दिन अजीत चौधरी खन्ना को घर से बुला कर ले गया था, इसलिए घर वालों का शक अजीत पर ही गया. पर पुलिस ने असली अपराधी को खोज निकाला. रामवीर से पूछताछ के बाद पुलिस ने कुसुमा को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. कुसुमा के घर वालों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कुसुमा ने ही अपने पति को मरवाया है. कुसुमा यही कहती रही कि न उस के रामवीर से संबंध हैं और न ही उस ने पति को मरवाया है.

बहरहाल, पुलिस ने रामवीर और कुसुमा को गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक दोनों जेल में थे. Love Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Emotional Story: शादी का सपना दरिया में दफन

Emotional Story: खातून को पाने के लिए राकेश ने  शादी का वादा ही नहीं किया, आर्टिफिशियल मंगलसूत्र भी पहना दिया.  या राकेश ने अपना यह वादा निभाया?   जमींदार राकेश कासनिया से फोन पर बात कर के टिल्लू खां बेहद खुश था. वजह यह थी कि जमींदार ने उसे अपने खेतों में काम करने के लिए बुलाया था. दरअसल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले जमींदार राकेश कासनिया के यहां बड़े स्तर पर कपास की खेती होती है.

कपास की चुगाई के लिए वह भरतपुर जिले के कैथवाड़ा गांव के रहने वाले टिल्लू खां और उस के साथियों को बुला लेता था. जो भी मजदूर उस के यहां आते थे, वे परिवार सहित आते थे. इस बार राकेश कासनिया ने टिल्लू खां से यह भी कह दिया था कि वह अपनी जानपहचान वाले कुछ और लोगों को भी साथ ले आए.

जमींदार के खेतों में परिवार सहित काम करने से जहां उन परिवारों को एकमुश्त मजदूरी मिल जाती थी, वहीं मालिक को भी मजदूरों के लिए दरदर भटकना नहीं पड़ता था. मजदूरों के आनेजाने का किराया भी जमींदार ही देता था. इसलिए मजदूर उस के यहां खुशीखुशी आते थे. भरतपुर हनुमानगढ़ से लगभग 450 किलोमीटर दूर है. टिल्लू खां ने अपने साथ चलने के लिए करीम खां, अख्तर खां और हबीब से बात की. जमींदार राकेश कासनिया ने सारे मजदूरों के किराए के पैसे टिल्लू खां के खाते में औनलाइन जमा करा दिए थे, जिस से मजदूरों को उस के गांव तक आने में परेशानी न हो.

जमींदार राकेश कासनिया के यहां जाने की बात से सारे मजदूर खुश थे. इस की वजह यह थी कि उन के यहां खानेपीने की कोई परेशानी नहीं होती थी. वहां खाने में घी, दूध और छाछ भी मिलती थी. कुल मिला कर बात यह थी कि जमींदार के खेतों में काम करने वाले मजदूरों की मेहमानों की तरह खातिरतवज्जो होती थी. इसलिए टिल्लू ने जिनजिन लोगों से चलने की बात की, वे सब जाने की तैयारी करने लगे. टिल्लू के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटियां थीं. बड़ी बेटी खातून महज 14 साल की थी. किसी वजह से इस साल उस की पत्नी उस के साथ जमींदार के यहां नहीं जा पा रही थी. तब टिल्लू ने अपनी तीनों बेटियों के साथ जाने का प्रोग्राम बनाया. अन्य मजदूर अपनी बीवीबच्चों के साथ जा रहे थे.

राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में कपास की खेती बहुत ज्यादा होती है. कपास उत्पादन की वजह से इन दोनों जिलों की श्वेत पट्टी के रूप में पहचान बन चुकी है. देशी व अमेरिकन कपास (नरमा) की फसल पकने पर पौधों से फाहों को अलग कराने का काम मजदूरों से कराया जाता है. इस प्रक्रिया को चुगाई या चुनाई कहा जाता है. इस साल 5-6 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चुनाई की रकम मजदूरों को अदा की गई थी. इस तरह एक मजदूर दिनभर में चुनाई कर के 500 से 600 रुपए तक कमा लेता है. ज्यादा कमाने के लिए लोग अपने परिवार के साथ यहां काम करने आते थे.

सितंबर, 2015 के पहले पखवाड़े में टिल्लू खां अन्य 15 मजदूरों को ले कर जमींदार राकेश कासनिया के गांव जाखड़ावाली पहुंच गया. राकेश के खेतों के पास ही रविंद्र, रणवीर, देवतराम आदि के भी खेत थे. राकेश के खेतों का काम निपटा कर इन मजदूरों को इन पड़ोसी किसानों के खेतों की भी कपास की चुगाई करनी थी. जैसे ही टिल्लू खां की मजदूर टोली राकेश कासनिया के घर पहुंची, उन की खूब आवाभगत हुई. सभी राकेश के ही घर ठहरे.

राकेश का घर काफी बड़ा था. घर के पिछवाड़े दरजन भर दुधारू पशु बंधे रहते थे. सुबह का सारा दूध डेयरी पर भिजवा दिया जाता था, जबकि शाम के दूध का दही जमाया जाता था. अगली सुबह मशीनों से दही मथ कर मक्खन व मट्ठा बनाया जाता था. 3 मजदूर इन पशुओं को संभालते थे. परिवार के मुखिया व राकेश के पिता चौधरी लालचंद की पहल पर पहले दिन सभी मजदूरों को खालिस घी का हलवा व हरी सब्जियों के संग भोजन परोसा गया. सभी मजदूर चौधरी परिवार की मेहमाननवाजी के कायल हो गए.

टिल्लू की बड़ी बेटी खातून तो बेहद खुश थी. खातून को राकेश और उस के भाई कुलदीप की पत्नियां दिखाई नहीं दीं. चुलबुली खातून खोजी निगाहों से उन के घर के कई चक्कर लगा चुकी थी, पर दोनों बहुएं उसे दिखाई नहीं दीं. उसी बीच शोख खातून राकेश की नजरों में जरूर चढ़ गई. अगली सुबह बड़े चौधरी लालचंद के कहने पर सभी मजदूरों को गांव के ही बृजलाल के खाली पड़े मकान में ठहरा दिया गया. अख्तर की बीवी और खातून खाना बनाने के लिए घर पर रुक गईं, जबकि अन्य सभी नरमा चुगाई के लिए राकेश के साथ ट्रैक्टर से खेतों पर चले गए.

आधे घंटे बाद राकेश अपने खेतों से सब्जियां तोड़वा कर ले आया और उसे अख्तर की बीवी को दे कर कहा, ‘‘भाभी, खातून को भेज कर घर से दही और छाछ मंगवा लेना.’’

दरअसल, राकेश का मन 14 साल की खातून पर आ गया था. इसलिए वह बहाने से उसे अपने यहां बुलाना चाह रहा था.

‘‘अरे, अंकल ठहरो. मैं दही और छाछ लेने आप के साथ ही चलती हूं. आप के साथ चलने से मुझे सहूलियत रहेगी.’’

कह कर खातून डोलची ले कर राकेश के पीछेपीछे चल पड़ी. खातून जैसे ही दालान से बाहर निकली, राकेश ने उसे रोक कर कहा, ‘‘खातून, तुम अंकल मत कहो, क्या मैं तुम्हारे अब्बू की उम्र का हूं?’’

‘‘गलती हो गई, अब खयाल रखूंगी. भैया कहूं तो चलेगा?’’ खातून ने कहा, ‘‘अरे भैया, एक बात बताओ, दोनों भाभियां दिखाई नहीं दे रही हैं, कहां छिपा दिया है आप ने उन्हें?’’

‘‘खातून, मैं ने अपनी बीवी को तलाक दे दिया है. अब दूसरी बीवी की तलाश में हूं. कोई लड़की पसंद आ गई तो शादी कर लूंगा. और हां सुन, अब तू बच्ची नहीं रही, मुझे अंकल या भैया कहा तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा. तुम मुझे राकेश कहो, प्यार से रौकी. समझ गई ना?’’ इतना कह कर राकेश आगे बढ़ गया.

डोलची उठाए खातून राकेश के पीछेपीछे चल रही थी. घर पहुंच कर राकेश ने खातून की डोलची छाछ से भर दी. खातून डोलची उठाने लगी तो राकेश ने उस का हाथ दबा दिया. इस पर नादान खातून ने मुसकरा दिया. उस रात न राकेश को नींद आई, न खातून को. दोनों ही सारी रात करवटें बदलते रहे. राकेश शातिर खिलाड़ी था, जबकि खातून प्रेम के इस खेल से अनाड़ी थी. शातिर राकेश ने खातून को फंसाने के लिए शब्दों का जाल बुन लिया. उसे फंसाने के लिए वह उस से लच्छेदार बातें करने लगा. उस की बातों का 14 साल की खातून पर ऐसा असर पड़ा कि वह भी उसे चाहने लगी.

राकेश और उस के बड़े भाई कुलदीप ने उच्चशिक्षा हासिल कर के वैज्ञानिक तरीके से खेती करानी शुरू की थी. जिस से उन्हें अच्छी पैदावार मिलने लगी थी. दोनों की शादी एक ही परिवार में सगी बहनों से हुई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से दोनों भाइयों के गृहस्थ जीवन में ऐसी खटास आई कि मामला अदालत की चौखट तक पहुंच गया. राकेश के परिवार की गिनती इलाके में रसूखदार व प्रभावशाली परिवारों में होती थी. उस के  परिवार का इलाके में अच्छाखासा दबदबा था. परिवार में सभी सुखसुविधाओं के साथ कई लग्जरी गाडि़यां व खेतीबाड़ी के लिए ट्रैक्टर था.

शहरी आबोहवा में पल रही गरीब परिवार की खातून 14 साल की उम्र में अपने तंदुरुस्त शरीर की वजह से जवान दिखती थी. गेहुंआ रंग व गठीले बदन की खातून पर राकेश इस कदर फिदा हुआ कि वह उस के लिए पागल सा हो गया था. राकेश सुबह के समय खुद ट्रैक्टर चला कर मजदूरों को खेतों पर ले जाता था. खातून राकेश के पास बैठ जाती थी, जबकि अन्य मजदूर पीछे ट्राली में बैठते थे. खातून की छोटी बहन सलमा भी राकेश की सीट के पास मडगार्ड पर बैठती थी. शाम को वापसी में भी ऐसा ही होता था. इस बीच मौका मिलने पर राकेश खातून से हंसीमजाक कर लिया करता था. एक दिन ट्रैक्टर पर आते समय राकेश ने खातून से धीरे से कहा, ‘‘आज रात को गली में मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’

मजदूरों को जाखड़ावाली आए मात्र 5 दिन ही हुए थे. इस तरह राकेश और खातून ने पलक झपकते ही दूरियां नाप ली थीं. सभी मजदूर थकेमांदे होने के कारण खाना खाने के तुरंत बाद नींद के आगोश में समा जाते थे. खातून ने इसी का फायदा उठाया.

जैसे ही सब लोग सो गए, खातून दबे पांव बाहर निकली. राकेश दीवार की ओट में पहले से ही खड़ा था. खातून के आते ही उस का हाथ पकड़ कर वह रुखीराम के खाली पड़े घर में घुस गया.

एकांत मिलते ही राकेश ने उसे बांहों में भर लिया और उस के साथ छेड़छाड़ करने लगा. खातून ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘यह आप क्या कर रहे हैं, यह सब ठीक नहीं है?’’

‘‘खातून, मैं तुम्हें हर तरह से खुश रखूंगा.’’ राकेश ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा.

‘‘नहीं, आप शादीशुदा हैं. आप तो मुझे बरबाद कर के चले जाएंगे. मैं जिंदगी भर रोती रहूंगी.’’ खातून ने कहा.

राकेश ने उस का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘खातून, मैं ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया है. अब मैं तुम से शादी कर के तुम्हें पत्नी बना कर रखूंगा. तुम मेरी बात पर यकीन करो. अब फैसला तुम्हें करना है कि शादी गुपचुप करोगी या ढोलधमाकों के साथ.’’

राकेश की बातों पर खातून ने यकीन कर लिया और उस के सामने समर्पण कर दिया. इच्छा पूरी कर के दोनों अपनेअपने बिस्तरों पर चले गए.

अगली सुबह खातून के बदन का पोरपोर दर्द कर रहा था. देर रात तक जागने से उसे सिरदर्द के साथ तेज बुखार भी हो गया था. जब सभी लोग खेतों में जाने लगे तो खातून ने पिता से कहा, ‘‘अब्बू, आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है. मुझे बुखार है, इसलिए आज मैं काम पर नहीं जा पाऊंगी.’’

‘‘कोई बात नहीं, तुम घर पर आराम करो. मैं दवा के लिए छोटे चौधरी (राकेश) को बोल दूंगा.’’ टिल्लू ने कहा.

कुछ देर बाद राकेश ट्रैक्टर ले कर मजदूरों को लेने आया तो टिल्लू ने कहा, ‘‘छोटे चौधरी, खातून को बुखार हो रहा है. उसे गांव के डाक्टर से दवा दिलवा देना. आज वह काम पर भी नहीं जा रही है.’’

‘‘अंकल, आज गांव के डाक्टर एक शादी में गए हैं. दोपहर के समय मैं शहर जाऊंगा तो वहां से दवा दिला दूंगा.’’ राकेश ने कहा.

मजदूरों को खेत में छोड़ कर राकेश जल्दी लौट आया और जिप्सी ले कर खातून के पास पहुंच गया. दवा दिलाने के बहाने उस ने खातून को जिप्सी में बैठा लिया. जिप्सी स्टार्ट करते हुए उस ने चुहलबाजी करते हुए कहा, ‘‘रानी, तबीयत सचमुच में खराब है या चालाकी से मिलने का उपाय ढूंढ़ा है.’’

‘‘देखोजी, आप को मजाक सूझ रहा है और मैं दर्द के मारे मरी जा रही हूं.’’ खातून ने कहा.

‘‘जानेमन, घबराओ मत, आज ससुरजी की इजाजत ले कर आया हूं. पूरे दिन घुमाऊंगा और तुम्हारे तनमन का दर्द निकाल कर ही दम लूंगा.’’ राकेश ने कहा.

कई घंटे घूमने के बाद राकेश की जिप्सी पीलीबंगा शहर से लौट आई. शहर में दोनों ने जी भर कर मस्ती की. मानमनुहार कर के राकेश ने खातून को बीयर भी पिला दी थी. राकेश का साथ मिलने पर बिना दवा के ही खातून ठीक हो गई थी. राकेश की पहल पर खातून ने एक आर्टिफिशियल मंगलसूत्र गले में पड़े पुराने काले धागे में बांध लिया था. खातून की पसंद का एक सुर्ख सूट भी राकेश ने खरीद दिया था. शहर में बिताए उन पलों में राकेश खातून को यह विश्वास दिलाने में सफल हो गया था कि वह उस का शौहर है और समय आने पर वह उस के साथ रीतिरिवाज से निकाह कर लेगा. राकेश ने यह भी कहा था कि उस की पहली पत्नी के जितने भी गहने हैं, वे सब अब उस के हैं.

इस के अलावा वह उस की पसंद के और गहने बनवा कर उसे गहनों से लाद देगा. इस तरह शातिर राकेश उसे लूटता रहा और शादी का सपना संजोए खातून लुटती रही. राकेश ने उस दिन भी रात में उस से मिलने का वादा करा लिया था. शाम को टिल्लू लौटा तो खातून ने राकेश द्वारा दिया सूट दिखाते हुए कहा, ‘‘अब्बा, यह सूट देखो, बड़ी चौधराइन ने दिया है. आप को पहन कर दिखाऊं.’’

सूट बढि़या और महंगा था. अब्बू के इशारे पर खातून ने सूट पहन लिया. कढ़ाईदार सुर्ख सूट में खातून नईनवेली दुलहन सी लग रही थी. रात को सभी सो गए तो खातून राकेश से मिलने उसी खाली मकान में जा पहुंची, जहां वह पहले मिली थी. वहां राकेश पहले से ही मौजूद था. उस समय उस के गले में राकेश के नाम का मंगलसूत्र व बदन पर वही सुर्ख सूट था. वह अप्सरा सी लग रही थी.

राकेश ने उस की सुंदरता की तारीफ की तो खातून ने कहा, ‘‘देखो रौकी, तुम मुझे धोखा मत देना. ऐसा हुआ तो मैं जीते जी मर जाऊंगी. जहर खा कर अपनी जान दे दूंगी.’’

‘‘हट पगली, तू ने ऐसा सोचा भी कैसे? और सुन, शहर से तुझे कल मोबाइल ला कर दे दूंगा.’’ राकेश ने कहा.

अगले दिन राकेश ने खातून को एक मोबाइल ला कर दे दिया. समय गुजरता रहा. राकेश का जब मन करता, वह खातून को मिसकाल कर देता. साइलैंट मोड पर मोबाइल पर आई मिसकाल के इशारे को खातून समझ जाती. उस के बाद शौच का बहाना कर के वह रणवीर जाट के खेत में बने कोठा में पहुंच जाती. वहां दोनों अपनी इच्छा पूरी करते. इस तरह पूरे महीने उन का यह खेल चलता रहा. कहते हैं, लाख कोशिशों के बाद भी इस तरह के संबंध छिपाए नहीं छिपते. राकेश और खातून के साथ भी ऐसा ही हुआ. एक रात लघुशंका के लिए अख्तर खां उठा तो उस ने राकेश और खातून को सुनसान पड़े घर में घुसते देख लिया.

हकीकत जानने के लिए छिप कर वह वहीं बैठ गया. घंटे भर बाद दोनों एक साथ बाहर निकले तो अख्तर पूरा मामला समझ गया. राकेश के बड़े भाई कुलदीप को भी राकेश और खातून के संबंधों को ले कर संदेह हो गया था. एक सुबह खातून नहाने के लिए गुसलखाने में घुसी तो उस के कपड़ों में लिपटा मोबाइल फोन छोटी बहन सलमा के हाथ लग गया. तब खातून ने वह फोन किसी सहेली का बता कर पिंड छुड़ाया. खातून ने यह बात अब्बू को न बताने के लिए सलमा को राजी भी कर लिया.

खातून और राकेश की हरकतों को जान कर अख्तर बेचैन हो उठा. वह पूरी रात इसी उधेड़बुन में लगा रहा. आखिर उस ने यह बात टिल्लू खां को बताने का निश्चय कर लिया. सुबह उठने पर वह टिल्लू को बाहर ले गया और राकेश तथा खातून के बीच पक रही खिचड़ी उसे बता दी. नाबालिग बेटी की हरकतें जान कर टिल्लू खां चौंका. इस के बाद दोनों ने पूरे मामले पर विचारविमर्श कर के फैसला लिया कि यह बात बड़े चौधरी लालचंद को बताई जाए. टिल्लू ने बहलाफुसला कर खातून से मोबाइल फोन ले कर उसे ईंट से चकनाचूर कर दिया.

अख्तर और टिल्लू खां उसी दिन लालचंद से मिले. उन्होंने कहा, ‘‘चौधरीजी, आप का लाडला राकेश मेरी नाबालिग खातून पर डोरे डाल रहा है. वह उस पर गंदी नजर रखता है. हुजूर, मेरी बेटी के साथ कुछ गलत हो गया तो मैं गरीब आदमी बरबाद हो जाऊंगा. आप उसे रोकिए अन्यथा बरबादी की आंच से आप का परिवार भी नहीं बचेगा.’’

टिल्लू खां के मुंह से बेटे की करतूतें सुन कर लालचंद को भी चिंता हुई. उन्होंने दोनों को कुछ करने का आश्वासन दे कर भेज दिया. लालचंद से शिकायत के बाद भी राकेश के व्यवहार में कोई तब्दीली नहीं आई. दीपावली नजदीक आ गई थी. मजदूर टिल्लू खां की इतनी औकात नहीं थी कि वह परदेश में चौधरी के परिवार से कोई पंगा लेता. इसलिए टिल्लू और अख्तर ने अपने गांव लौटने में ही अपनी भलाई समझी.

इस के बाद अख्तर और टिल्लू खां ने राकेश से कहा, ‘‘भैया, अब दीवाली नजदीक आ गई है. अब हम गांव जाना चाहते हैं, इसलिए हमारी अब तक की मजदूरी का हिसाब कर दो.’’

राकेश ने 8 नवंबर को सभी मजदूरों का हिसाब कर दिया. हिसाब हो जाने के बाद मजदूरों ने 9 नवंबर, 2015 को जाने की तैयारी कर ली. हिसाब होने व गांव जाने की बात की जानकारी खातून को हुई तो वह परेशान हो उठी. वह राकेश को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ना चाहती थी. राकेश के साथ भले ही उस का विधिवत निकाह नहीं हुआ था, पर राकेश ने उसे पत्नी बना रखा था. उसे मंगलसूत्र भी पहनाया था. खातून के पास राकेश से बात करने का सहारा मोबाइल था, जिसे उस के अब्बा ने ले कर तोड़ दिया था. अब उस के पास ऐसा कोई जरिया नहीं था कि वह राकेश से मिल कर मन की बात कहती.

उस की नजर में एक ही रास्ता था कि वह तुरंत राकेश से मिल कर इस विषय पर बात करे. 9 नवंबर को घर वालों से छिप कर वह राकेश के खेतों की ओर निकल गई. रास्ते में उसे आत्माराम मिला तो उस ने कहा, ‘‘अंकल, प्लीज अपना मोबाइल दे दीजिए. मुझे अब्बू से जरूरी बात करनी है.’’

आत्माराम ने उसे अपना फोन दे दिया. थोड़ा सा अलग हट कर खातून ने राकेश का नंबर मिला दिया. राकेश ने फोन रिसीव किया तो खातून बोली, ‘‘रौकी, मैं नरमा के खेत में जा रही हूं. इस समय मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं. मुझे अब्बू गांव ले जाना चाहते हैं, पर मैं आप को छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगी. तुम तुरंत मुझ से मिलो, नहीं मिले तो तुम्हें पछताना पड़ेगा.’’

खातून की चेतावनी सुन कर राकेश सन्न रह गया. वह जानता था कि खातून जिद्दी है, बिना सोचेसमझे वह किसी भी हद तक जा सकती है. वह उस के खिलाफ कोर्टकचहरी भी जा सकती है. पुलिस और कानूनी काररवाई की बात जेहन में आते ही राकेश परेशान हो उठा. उस का दिमाग घूम गया. परेशानी के इस आलम में उस ने अपने बड़े भाई कुलदीप को बुला लिया. दोनों भाइयों ने इस जटिल मुद्दे पर बात की, लेकिन उन्हें कोई राह नहीं सूझी. तब राकेश ने अपने जिगरी दोस्तों अशोक और पूनम शर्मा को खेत में बुला लिया. चारों राकेश के गले आ पड़ी इस परेशानी का तोड़ ढूंढ़ने में जुट गए. अंत में चारों ने परेशानी की मूल खातून को ही मिटाने का भयानक निर्णय ले लिया. उन्होंने इस का तरीका भी खोज लिया.

योजना को अंजाम देने के लिए राकेश ने अशोक को भेज कर अपने एक अन्य दोस्त दीनदयाल जाखड़ की बोलेरो जीप मंगवा ली. इस के बाद राकेश ने नरमा के खेत में खातून को आवाज दे कर कोठा पर बुला लिया. वहां 3 अन्य लोगों को देख कर खातून घबरा गई. राकेश ने उस के कंधे पर हाथ रख कर कहा, ‘‘घबराओ मत खातून, ये तीनों मेरे अपने हैं. आज मैं इन की मौजूदगी में तुम से शादी करूंगा. यहां तुम्हारे घर वाले आ सकते हैं, इसलिए दूसरी जगह चलने के लिए गाड़ी मंगवा ली है. आगे वाले गांव में शादी की पूरी व्यवस्था मैं ने करवा ली है, वहीं चल कर शादी कर लेंगे.’’

तब तक अंधेरा घिर चुका था. शादी की बात सुन कर खातून बहुत खुश हुई. अंजाम से अंजान खातून खुशीखुशी चारों के साथ बोलेरो में सवार हो गई. अशोक ने गाड़ी एशिया की सब से लंबीचौड़ी इंदिरा गांधी नहर की पटरी पर दौड़ा दी. लाखुवाली हैड के नजदीक सुनसान पटरी पर चारों ने गाड़ी रोकी. गाड़ी में रखी रस्सी से उन्होंने खातून के हाथपांव बांध दिए और किसी बंडल की तरह उसे नहर में उछाल दिया. मौत को सामने देख खातून रोईगिड़गिड़ाई और असफल विरोध भी किया, पर नौजवानों के आगे भला वह क्या कर सकती थी. नहर में गिरते ही वह अथाह जल में समा गई.

उधर घर में खातून के न मिलने से सभी घबरा गए. सांझ ढलने तक उस के न लौटने पर टिल्लू और अख्तर गांव की पुलिस चौकी पहुंचे और राकेश पर बेटी को भगाने का शक जाहिर करते हुए एक तहरीर दे दी. वहां उन की बात नहीं सुनी गई तो 15 नवंबर, 2015 को वे थाना पीलीबंगा पहुंचे और वहां बेटी के अगवा करने का आरोप लगाते हुए राकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. नाबालिग बच्ची का मामला था, वह भी सुदूर जिला की रहने वाली थी. मामला काफी संवेदनशील था. इसलिए मामले की जानकारी मिलते ही युवा पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने थानाप्रभारी विजय कुमार मीणा को मामले का खुलासा करने का आदेश दे दिया.

प्रभावी काररवाई का भरोसा मिलने पर रोताबिलखता मजदूर टोला भरतपुर लौट गया. विजय कुमार मीणा ने एएसआई प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की, जिस में कांस्टेबल अमर सिंह, ओम नोखवाल, अमनदीप, लक्ष्मण स्वामी और पीरूमल को शामिल किया गया. मुखबिर द्वारा पता चला कि राकेश और उस के 3 साथी गांव से लापता हैं, इस से ये चारों शक के दायरे में आ गए. मुखबिरों से यह भी पता चला था कि खातून ने आत्माराम के मोबाइल से राकेश से बात की थी. डीएसपी नारायण दान रतनू भी पुलिस काररवाई पर नजर रख रहे थे.

पुलिस को कोई सफलता मिलती, इस से पहले ही नहर से सटे थाना रावला की पुलिस ने नहर से 14-15 साल की एक लड़की की लाश बरामद की. लाश की शिनाख्त के लिए भरतपुर से टिल्लू खां और उस की बेगम को बुलवा लिया गया. मृतक लड़की के पैरों में 6-6 अंगुलियां होने से मांबाप ने उस की शिनाख्त अपनी बेटी खातून के रूप में कर दी. मुखबिरों की इत्तला पर पुलिस ने राकेश को पकड़ लिया. पूछताछ में उस ने अपना अपराध स्वीकार कर के साथियों के नाम बता दिए. पुलिस ने 4 दिसंबर, 2015 को पीलीबंगा के मुंसिफ कोर्ट में उसे पेश कर पूछताछ के लिए 5 दिनों के रिमांड पर ले लिया.

इस बीच पुलिस ने कुलदीप, राकेश, अशोक और पूनम शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया था. सभी से विस्तार से पूछताछ कर के उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Emotional Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime Story Hindi: सोनबाई का सनकी शौहर

Crime Story Hindi: बुढ़ापे में कदम रख चुके रामचंद्र को लगता था कि उस की पत्नी सोनबाई के अपने ही दामाद से अवैध संबंध हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था. तो क्या इस मामले में भी वैसा हुआ, जैसा ऐसे मामलों में होता है?

के कांत्रज गांव की सड़क पर चल रहे उस बूढ़े को जिस ने भी देखा, डर से उस का शरीर सिहर उठा. इस की वजह यह थी कि उस के एक हाथ में खून में डूबी कुल्हाड़ी थी तो दूसरे हाथ में एक महिला का सिर, जिस से उस समय भी खून टपक रहा था. वह तेजी से थाना भारती विद्यापीठ की ओर चला जा रहा था. बूढ़े को उस हालत में जाते देख कुछ लोग मोबाइल से उस की वीडियो बना रहे थे तो कुछ लोगों ने इस बात की सूचना पुलिस कंट्रौल रूम को दे दी थी.

वह थाना भारती विद्यापीठ के पास स्थित चौराहे पर पहुंचा तो चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोक लिया. लेकिन उन की हिम्मत उस बूढ़े के करीब जाने की नहीं हुई. इस की वजह यह थी उस समय वह बूढ़ा जिस हालत में था, उस की मानसिक स्थिति का पता लगाना मुश्किल था. ट्रैफिक पुलिस उसे समझाबुझा कर खून से सनी कुल्हाड़ी अपने कब्जे में लेने के बारे में सोच रही थी कि थाना भारती विद्यापीठ के असिस्टैंट इंसपेक्टर संजय चव्हाण, हैडकांस्टेबल राहुल कदम, कांस्टेबल मुकुंद पवार वहां पहुंच गए. संजय चव्हाण ने उस के करीब जा कर विनम्रता से उसे समझाते हुए कुल्हाड़ी और सिर को जमीन पर रखने को कहा तो उस ने कुल्हाड़ी तो जमीन पर रख दी, लेकिन सिर नहीं रखा. वह सिर को ले जा कर तालाब में फेंकना चाहता था.

काफी कोशिश के बाद भी जब बूढ़ा नहीं माना तो पुलिस ने कुल्हाड़ी कब्जे में ले कर उसे दबोच लिया और थाने ले आई. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने अपना नाम रामचंद्र उर्फ रामू चव्हाण बताया. उस ने जो सिर ले रखा था, वह उस की पत्नी सोनबाई का था. पत्नी की हत्या कर के वह उस का सिर काट कर तालाब में फेंकने जा रहा था. थाना भारती विद्यापीठ के थानाप्रभारी सीनियर इंसपेक्टर मछिंद्र चव्हाण को भी सूचना दे दी गई थी. वह तुरंत थाने आ गए और रामचंद्र से सरसरी तौर पर पूछताछ कर उस के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करा दिया.

इस के बाद वह संजय चव्हाण, इंसपेक्टर (क्राइम) श्रीकांत शिंदे, पुलिस नाइक राहुल कदम, कांस्टेबल मुकुंद पवार और असिस्टैंट इंसपेक्टर राहुल गौड के अलावा पत्नी की सिर काट कर हत्या करने वाले रामचंद्र को साथ ले कर उस के घर जा पहुंचे. रामचंद्र कांत्रज गांव में सुखसागर एशियन सोसायटी के सामने ओसवाल बिल्डर के एक खाली पड़े प्लौट के कोने में बने छोटे से मकान में रहता था. पुलिस के पहुंचने तक वहां काफी लोग जमा हो गए थे. पुलिस उन्हें हटा कर मकान के पास पहुंची तो 3 कमरों के उस मकान का मुख्य दरवाजा खुला था.

मकान के अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था. आगे वाले कमरे में सोनबाई की सिर कटी लाश 4 टुकड़ों में बंटी पड़ी थी. उस के आसपास खून ही खून फैला था. वहां का दृश्य बड़ा डरावना लग रहा था. उस के सामने जो कमरा था, उस की कुंडी बाहर से बंद थी. पुलिस ने उसे खोला तो पता चला कि रामचंद्र ने बहू और उस के बच्चों को हत्या से पहले उन्हें कमरे में बंद कर दिया था. मछिंद्र चव्हाण अभियुक्त रामचंद्र की बहू से घटना के बारे में पूछताछ कर ही रहे थे कि एडीशनल पुलिस कमिश्नर डा. सुधाकर पढारे और असिस्टैंट पुलिस कमिश्नर आत्माचरण शिंदे भी आ पहुंचे.

इन के साथ प्रैस फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो की टीम भी थी. इन लोगों का काम निपट गया तो पुलिस ने औपचारिक काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए पूना ससून डाक अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद थाने लौट कर रामचंद्र से विस्तार से की गई पूछताछ में सोनबाई की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी. 63 वर्षीय रामचंद्र मूलरूप से कर्नाटक के जिला गुलबर्गा का रहने वाला था. उस के पिता शिव चव्हाण गांव के सीधेसादे गरीब किसान थे. गरीबी की ही वजह से रामचंद्र पढ़ नहीं पाया. बचपन से ले कर जवान होने तक उस ने पिता के साथ काम किया.

लगभग 40 साल पहले उस की शादी हुई तो पत्नी सोनबाई को ले कर वह रोजीरोटी की तलाश में पूना आ गया. पूना शहर में कुछ दिनों तक वह इधरउधर छोटामोटा काम करता रहा, लेकिन जब उसे ओसवाल बिल्डर के यहां वाचमैनी की नौकरी मिल गई तो उस के जीवन में ठहरवा आ गया. बिल्डर की ओर से रहने के लिए उसे एक छोटा सा मकान भी मिल गया था. उसी मकान में वह पत्नी के साथ रहने लगा. वहीं उस के 4 बच्चे, 2 बेटियां और 2 बेटे हुए. उस ने बच्चों को पढ़ायालिखाया और जैसेजैसे वे शादी लायक होते गए, वह उन की शादियां करता गया. अब तक उस की दोनों बेटियों और एक बेटे की शादी हो चुकी है.

बड़ी बेटी गुलबर्गा में ब्याही है तो छोटी मुंबई में. बड़े बेटे राजेश की भी शादी हो चुकी है. उस के 2 बच्चे भी हो चुके हैं. राजेश पत्नी सुनीता और बच्चों के साथ पिता के साथ ही रहता था. उस से छोटे उमेश की अभी शादी नहीं हुई थी. दोनों भाइयों की बढि़या नौकरी थी. समय पंख लगा कर अपनी गति से बीतता रहा. रामचंद्र और सोनबाई उम्र के ढलान पर पहुंच चुके थे. सोनबाई वैसे तो अपने सभी बच्चों से बहुत प्यार करती थी, लेकिन छोटी बेटी और दामाद से उसे कुछ ज्यादा ही लगाव था. न जाने क्यों वह छोटे दामाद को कुछ ज्यादा ही मानती थी. वह जब भी उस के यहां आता, वह उस की सेवा में लग जाती, उस का ध्यान सब बच्चों से ज्यादा रखती. उस के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहती. उस से बातें भी खूब करती.

जबकि रामचंद्र को यह सब जरा भी पसंद नहीं था. उस ने इस के लिए सोनबाई को न जाने कितनी बार समझाया और मना किया, लेकिन बेटी और दामाद की ममता में वह कुछ इस तरह खोई थी कि मानी ही नहीं. वह बेटी और दामाद से फोन पर भी लंबीलंबी बातें करती थी. कई बार समझाने और मना करने पर भी जब सोनबाई नहीं मानी तो रामचंद्र के मन में दामाद और पत्नी को ले कर शक होने लगा. उस के मन में तरहतरह के गलत विचार आने लगे. उसे पत्नी पर से भरोसा उठने लगा.

दिमाग में संदेह का जहर भरा तो उसे पत्नी से नफरत होने लगी. उसे लगता था कि उस की पत्नी सोनबाई और दामाद के बीच गलत संबंध हैं. जबकि सोनबाई और उस के दामाद के बीच वैसा कुछ भी नहीं था. दोनों का चरित्र साफ था. लेकिन अगर किसी को संदेह हो जाए तो उस का इलाज ही क्या है, इसी संदेह की वजह से सोनबाई और रामचंद्र में पतिपत्नी जैसा मधुर संबंध नहीं रह गया. इस के बाद पतिपत्नी में लड़ाईझगड़ा और मारपीट आम बात हो गई. रामचंद्र के बच्चे और बहू उसे समझासमझा कर थक गए, लेकिन न उस का संदेह दूर हुआ और न लड़ाईझगड़ा बंद हुआ. उसे पत्नी से ऐसी नफरत हो गई कि वह पत्नी से लड़ने और उसे मारनेपीटने के बहाने खोजने लगा.

रामचंद्र की जब भी पत्नी से लड़ाई होती, उसे पीटते हुए उस का गला पकड़ कर कहता, ‘‘तू सचसच बता, तेरा दामाद के साथ क्या चल रहा है? तुझे बेटे की उम्र के दामाद से संबंध बनाते शरम नहीं आती.’’

पति के इस झूठे आरोप से सोनबाई का खून खौल उठता. जवाब में वह कहती, ‘‘बुढ़ापे में तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है. मुझे और मेरे बच्चों को देखो, मैं बूढ़ी हो गई हूं और वे जवान हो गए हैं. उन के बच्चे हो गए हैं. उन्हें मैं गोद में ले कर खिलाती हूं. मेरी यह उम्र इश्क करने की है. अगर इश्क ही करना होगा तो दामाद से ही करूंगी? अपनी ही बेटी के सुखी संसार में आग लगाऊंगी? तुम्हें तो लाजशरम रह नहीं गई है, मुझे भी इन बच्चों के सामने बेशरम बना दिया है. इस हालत में तो मेरी मौत हो जाए, यही मेरे लिए अच्छा है.’’

पत्नी की इन बातों का रामचंद्र पर कोई असर नहीं पड़ा. उस के दिमाग में संदेह का जो कीड़ा पैदा हो गया था, अब वह शांति से बैठ नहीं रहा था. आखिर एक दिन वह भी आ गया, जब उस के संदेह के उस कीड़े ने जहरीला नाग बन कर सोनबाई को इस तरह डसा कि वह हमेशाहमेशा के लिए इस नश्वर संसार से विदा हो गई. यह 9 अक्तूबर, 2015 की बात थी. वह दिन भी रोज की ही तरह शुरू हुआ था. राजेश और उमेश खापी कर अपनीअपनी नौकरी पर चले गए थे. घर में सिर्फ राजेश की पत्नी सुनीता और दोनों बच्चे ही रह गए थे. घर आते ही रामचंद्र किसी बात को ले कर सोनबाई से उलझ पड़ा.

बहू सुनीता ने झगड़ा शांत कराने की कोशिश की, लेकिन रामचंद्र चुप नहीं हुआ. धीरेधीरे यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि सोनबाई ने एक बार फिर कहा कि अगर मौत आ जाती तो इस झंझट से छुटकारा मिल जाता. इतना कह कर झगड़ा खत्म करने की गरज से वह बाहर जा कर बरतन साफ करने लगी. तभी रामचंद्र ने कहा, ‘‘तू मरना चाहती है न तो मैं तुझे मार ही देता हूं.’’

यह कह कर रामचंद्र घर के अंदर गया और कोने में लकड़ी काटने वाली कुल्हाड़ी ले कर बाहर आ गया. बच्चों को स्कूल के लिए तैयार कर रही सुनीता ने जब रामचंद्र के हाथों में कुल्हाड़ी देखी तो बुरी तरह डर गई. किसी अनहोनी की आशंका से वह अपने पति राजेश को फोन करने लगी. वह पति को ससुर के तेवर के बारे में बता रही थी कि रामचंद्र ने उस के पास आ कर कहा, ‘‘तू बच्चों को ले कर अंदर कमरे में जा.’’

ससुर के गुस्से को सुनीता जानती थी, इसलिए उस की बातों का विरोध किए बगैर वह बच्चों को ले कर चुपचाप अपने कमरे में चली गई. उस के कमरे में जाते ही रामचंद्र ने बाहर से कुंडी लगा दी. इस के बाद वह सीधे पत्नी के पास पहुंचा. सोनबाई बरतन साफ कर रही थी. रामचंद्र ने उस के पास आ कर कहा, ‘‘जब देखो, तब तुम मरने की बात करती रहती हो न, चलो आज तुम्हारी यह तमन्ना मैं पूरी ही कर देता हूं.’’

सोनबाई कुछ कह पाती, उस के पहले ही रामचंद्र ने कुल्हाड़ी से सोनबाई के सिर पर पूरी ताकत से वार कर दिया. सोनबाई जोर से चीखी और सिर पकड़ कर जमीन पर लोट गई. इस के बाद रामचंद्र उसे घसीट कर कमरे में ले आया और मानवता की सारी हदें पार कर के बेरहमी से उस के शरीर के 4 टुकड़े कर दिए. इस के बाद सोनबाई का कटा सिर और कुल्हाड़ी ले कर वह तालाब में फेंकने जा रहा था, तभी लोग उस के पीछे लग गए. आगे चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस मिल गई तो उस ने उसे रोक लिया. तब तक सूचना पा कर थाना पुलिस भी वहां पहुंच गई और उसे पकड़ लिया.

पूरी कहानी सामने आ गई तो मछिंद्र चव्हाण ने रामचंद्र के खिलाफ अपराध संख्या 350/2015 पर भादंवि की धारा 302, 201, 342 और मुंबई पुलिस एक्ट 37-स-135 के तहत मामला दर्ज कर के आगे की जांच असिस्टैंट इंसपेक्टर एस. शिंदे को सौंप दी. एस. शिंदे ने रामचंद्र की दिमागी जांच मनोचिकित्सक से कराई कि उस का कहीं मानसिक संतुलन तो नहीं बिगड़ गया है. डाक्टर ने उसे स्वस्थ बताया तो उसे मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट श्री टी.एन. चव्हाण की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में पूना की यरवदा जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में बंद था. Crime Story Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Gujarat News: 2 निकाह के बाद भी करिश्मा रही अकेली

Gujarat News: अलगअलग धर्मों के होने की वजह से राजू शिंदे और करिश्मा भले ही विवाह नहीं कर सके, लेकिन 18 साल बाद नियति ने उन्हें जिंदगी के उस मोड़ पर मिलवा दिया, जब दोनों ही अपनेअपने जीवनसाथी को तलाक दे चुके थे. समय की नजाकत को देखते हुए दोनों ने निकाह तो कर लिया, लेकिन इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि 2-2 निकाह करने के बावजूद करिश्मा अकेली ही रह गई.

महाराष्ट्र के शिरडी का रहने वाला राजू शिंदे पिछले 16 सालों से गुजरात के शहर अहमदाबाद के नरोडा में रहता था. वह अपने पेरेंट्स की भले ही इकलौती संतान था, लेकिन कोई खास पढ़ालिखा नहीं था, इसलिए इलास्टिक की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था. उस समय राजू की उम्र यही कोई 25-26 साल रही होगी. फादर भी कमाते थे, इसलिए उसे किसी बात की चिंता नहीं थी. वह कमाता था और बनठन कर रहता था. खुद की कमाई खुद पर ही खर्च करता था. खानापीना घर से मिलता ही था, इसलिए किसी बात की फिक्र नहीं थी.

उस के पास सब कुछ था, लेकिन कोई ऐसा नहीं था, जो उसे प्यार करे. उसे किसी एक ऐसी लड़की की तलाश थी, जो उसे चाहे. वह जिस कंपनी में नौकरी करता था, उसी कंपनी में करिश्मा नाम की एक लड़की काम करती थी. राजू और करिश्मा एक साथ काम करते थे, इसलिए दोनों लगभग रोज ही मिलते थे और दोनों के बीच बातचीत भी होती रहती थी. इस तरह लगातार मिलने और बातचीत होने से जल्दी ही दोनों में दोस्ती हो गई. दोनों में दोस्ती भी हो गई. फिर वे एकदूसरे को चाहने भी लगे थे, पर उन का विवाह नहीं हो सका.

इस का कारण यह था कि दोनों ही अलगअलग धर्मों से थे. बहरहाल, बात विवाह तक पहुंच पाती, उस से पहले ही उसी दौरान साल 2006 में राजू शिंदे का विवाह गीता राठौड़ के साथ हो गया था. इस तरह करिश्मा राजू की सिर्फ दोस्त बन कर ही रह गई थी. राजू शिंदे की शादी होने के 3 साल बाद सन 2009 में करिश्मा का भी निकाह अजीज खान के साथ हो गया था. अजीज खान भी अहमदाबाद के नरोडा में ही रहता था और सोलर पैनल लगाने का काम करता था. शादी के साल भर बाद ही करिश्मा को बेटा हुआ तो उस ने नौकरी छोड़ दी और घर तथा बेटे को संभालने लगी. इस के बाद करिश्मा को 2 बच्चे हुए.

इस तरह वह 3 बच्चों की मां बन गई थी. दूसरी ओर राजू भी अपनी पत्नी गीता के साथ मजे से वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहा था. लेकिन बच्चे पैदा होने के बाद करिश्मा और अजीज खान में अकसर झगड़ा होने लगा था. इस की वजह यह थी कि अजीज शराब पीने लगा था. वह रोजाना शराब पी कर आता. करिश्मा उसे शराब पीने से रोकती, जिस की वजह से दोनों के बीच झगड़ा होता.

करिश्मा: 2 शादियों के बाद भी अकेली रह गई

पति की इस आदत से करिश्मा परेशान हो चुकी थी. आखिर पति की नशे की लत और रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर करिश्मा ने अजीज से तलाक ले लिया. इस के बाद वह वटवा में किराए का मकान ले कर अकेली ही रहने लगी थी. संयोग देखो कि शादी के 18 सालों बाद साल 2024 में किसी कारणवश राजू और गीता के बीच भी तलाक हो गया था. पत्नी से तलाक होने के बाद राजू नरोडा में ही अकेला रहता था.

शादी के बाद राजू शिंदे और करिश्मा की मुलाकात नहीं हुई थी, लेकिन तलाक के बाद अपना घर चलाने तथा अपना और अपने बच्चों का पेट भरने के लिए करिश्मा सालों पहले जिस इलास्टिक कंपनी में नौकरी करती थी, वहीं वह फिर से नौकरी करने लगी थी.

दूसरी ओर राजू साल 2016 से गांधीनगर के माणसा स्थित स्टेरीकोट हेल्थकेयर कंपनी में फिटर के रूप में नौकरी करने लगा था, लेकिन एक्स्ट्रा पैसे कमाने के लिए वह छुट्टियों के दिन या रात में अन्य कंपनियों में एक्स्ट्रा काम करने जाता था. इसी सिलसिले में एक बार वह उसी पुरानी इलास्टिक कंपनी में भी एक्स्ट्रा काम करने गया तो इत्तफाक से करिश्मा ने वहां राजू को काम करते देख लिया.

दोबारा जाग उठा प्यार

करिश्मा उस से मिलने उस के पास पहुंच गई. सालों बाद करिश्मा को देख कर राजू चौंका. लगभग डेढ़ दशक यानी 15 सालों बाद दोनों एकदूसरे से मिले थे. पुरानी यादें ताजी हुईं. शादी हुई या नहीं, कितने बच्चे हैं, इसी तरह की बातें शुरू हुईं. इन्हीं बातों में करिश्मा ने बताया कि उस का तलाक हो गया है और वह अपने बच्चों के साथ अकेली ही रहती है. घर चलाने के लिए वह फिर से यहां नौकरी कर रही है.

जवाब में राजू ने भी अपनी आपबीती सुनाई कि उस का भी तलाक हो गया है और वह भी अकेला रहता है. इस के बाद उस ने कहा, ”तू भी अकेली और मैं भी अकेला, बोल करेगी मुझ से शादी?’’

उस समय करिश्मा कुछ नहीं बोली, सिर्फ हंस कर रह गई थी. लेकिन दोनों के बीच फोन नंबरों का लेनदेन हो गया था, जिस से दोनों में बातें होने लगी थीं. धीरेधीरे यह बातचीत लंबी होती गई. इसी बातचीत के दौरान एक दिन करिश्मा ने राजू से कहा, ”यार राजू, तुम मेरे लिए कोई दूसरी नौकरी ढूंढ दो. यहां जो सैलरी मिलती है, उस में घर बड़ी मुश्किल से चलता है. 3 बच्चों का पेट बड़ी मुश्किल से भर पाती हूं.’’

इस पर राजू ने उसे एक व्यावहारिक रास्ता सुझाते हुए कहा, ”तू फिर से किसी से शादी कर के उसी के साथ सेट हो जा.’’

”तुम्हारी बात तो सही है राजू, लेकिन 3 बच्चों की मां से अब कौन शादी करेगा?’’ करिश्मा ने कहा. राजू को शायद ऐसे ही मौके की तलाश थी. क्योंकि शरीर की आग बुझाने के लिए उसे भी एक औरत की तलाश थी. करिश्मा ने जब कहा कि उस से कौन शादी करेगा तो जवाब में उस ने अपने दिल की बात कह दी, ”मैं करूंगा तुम से शादी. बोलो, करोगी मुझ से शादी?’’

राजू शिंदे की बात सुन कर करिश्मा को अपनी जिंदगी फिर से संवरती नजर आई. इस के बाद दोनों के बीच घंटों बातें होने लगीं. यही नहीं, दोनों नए प्रेमियों की तरह बाहर मिलने भी लगे. इस तरह बाहर मिलने में मजा नहीं आ रहा था, इसलिए साथ रहने के लिए साल 2023 में राजू ने करिश्मा से एक मसजिद में निकाह कर लिया.

निकाह के बाद राजू करिश्मा के साथ उस के वटवा वाले घर में रहने लगा. इस तरह दोनों ने एक बार फिर से नई जिंदगी शुरू की. राजू ने घर को व्यवस्थित करने यानी गृहस्थी बसाने के लिए लगभग 50 हजार रुपए का सामान भी खरीदा. लगभग 2 सालों तक राजू और करिश्मा का वैवाहिक जीवन हंसीखुशी से बीता, लेकिन धीरेधीरे दोनों के बीच विवाद होने लगा. राजू सुबह 5 बजे नौकरी के लिए निकल जाता था, इसलिए शुरूशुरू में वह बिना टिफिन लिए ही जाता था. इस के लिए वह करिश्मा से कुछ कहता भी नहीं था.

काफी दिनों बाद एक दिन राजू ने करिश्मा से कहा, ”हमारा निकाह हो गया है और हम पतिपत्नी हो गए हैं. पत्नी के होते हुए भी मुझे रोजाना बाहर का खाना खाना पड़ता है. तुम मुझे टिफिन बना कर दे दिया करो.’’

करिश्मा ने टिफिन बना कर देने से मना करते हुए कहा, ”तुम अपनी नौकरी पर 5 बजे जाते हो. तुम्हारा टिफिन बनाने के लिए मुझे सुबह 4 बजे उठ कर खाना बनाना होगा. मुझे घर भी संभालना होता है और बच्चों को भी देखना पड़ता है. इस के अलावा मुझे भी नौकरी पर जाना होता है. इतनी जल्दी उठ कर खाना बनाना मेरे लिए मुमकिन नहीं है.’’

टिफिन को ले कर शुरू हुई बातचीत घर के अन्य कामों तक फैल गई. धीरेधीरे दोनों के बीच झगड़े होने लगे. झगड़ों की वजह से राजू को शक होने लगा कि करिश्मा का जरूर किसी और के साथ अफेयर चल रहा है, इसीलिए वह उस में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं ले रही है. राजू इस बात को ले कर भी करिश्मा को ताने ही नहीं मारने लगा था, बल्कि झगडऩे भी लगा था.

दूसरी ओर करिश्मा राजू के शक्की स्वभाव से तंग आ कर उसे बिना बताए बाहर आनेजाने लगी थी. इस की वजह राजू को लगने लगा था कि करिश्मा अपने प्रेमी से मिलने जाती है. करिश्मा राजू से जब कुछ ज्यादा ही परेशान हो गई तो एक दिन उस ने राजू से साफसाफ कह दिया कि जब उसे उस पर विश्वास ही नहीं रह गया है तो वह कहीं और रहने चला जाए, अब वह उस के साथ नहीं रहना चाहती.

उसी दौरान एक घटना और घट गई. करिश्मा के पूर्व पति अजीज की अम्मी की मौत हो गई. इस बात की जानकारी करिश्मा को हुई तो पुराने रिश्ते के नाते वह अजीज के घर शोक व्यक्त करने गई. वहां करिश्मा और अजीज के बीच बातचीत हुई तो पुराने संबंध फिर से ताजे हो गए. राजू से परेशान करिश्मा ने अजीज से कहा कि अगर उसे कोई आपत्ति न हो तो वह फिर से उस के साथ रहना चाहती है, ताकि बच्चों का भविष्य संवारा जा सके.

अजीज को भी करिश्मा और बच्चों की बहुत याद आती थी. इसलिए पुराने झगड़े भुला कर उस ने करिश्मा के साथ नई जिंदगी की शुरुआत करने का फैसला किया. चूंकि अब वह अजीज खान के साथ फिर से निकाह करने जा रही थी, इसलिए उस ने राजू को घर से निकल जाने के लिए कह दिया था.

दूसरी ओर राजू किसी भी कीमत पर करिश्मा को छोडऩे के लिए तैयार नहीं था. अब वह करिश्मा के साथ ही रहना चाहता था, क्योंकि यहां उसे पत्नी का सुख मिलने के साथसाथ रहने के लिए घर भी मिला हुआ था, इसलिए उस ने करिश्मा से बहाना बनाया कि उस ने उस के घर के लिए जो 50 हजार रुपए का सामान खरीदा है, उस के वे सारे रुपए वापस कर दे तो वह उस का घर छोड़ कर चला जाएगा.

राजू को लग रहा था कि करिश्मा इतने रुपए कहां से लाएगी? न वह उस के रुपए वापस कर पाएगी, न उसे घर छोड़ कर जाना पड़ेगा. लेकिन राजू को तब झटका लगा, जब अजीज ने करिश्मा को 50 हजार रुपए दे दिए और उस ने वे रुपए ला कर राजू के मुंह पर दे मारे. उस के बाद वह बोली, ”अब चुपचाप यहां से चला जा और अब कभी मुझे अपना मुंह मत दिखाना.’’

रुपए मिलने के बाद राजू करिश्मा के घर से तो निकल गया, लेकिन उसे करिश्मा और उस के पति अजीज पर बहुत गुस्सा आया. उस का अहंकार (ईगो) बुरी तरह घायल हो गया था. उसे लगा कि यह अजीज उस के और करिश्मा के बीच कबाब में हड्ïडी बन गया है. अगर यह बीच में न आया होता तो करिश्मा उसी की होती, अगर करिश्मा को अपनी बनाए रखना है तो इस अजीज को बीच से हटाना होगा. दूसरी ओर करिश्मा से तलाक होने के बाद अजीज अपने बड़े भाई शब्बीर के साथ रहता था, क्योंकि उसी बीच उस की अम्मी की भी मौत हो गई थी. उन दिनों करिश्मा राजू के साथ रह रही थी.

मातम में बदली मोहब्बत

अजीज की अम्मी की मौत पर करिश्मा अजीज के यहां शोक व्यक्त करने आई थी, तभी उस ने अजीज के बड़े भाई शब्बीर से कहा था कि अब वह राजू के साथ नहीं रहना चाहती और अपने बच्चों के पिता अजीज के पास वापस आना चाहती है. तब शब्बीर ने सोचा था कि अगर करिश्मा वापस आ जाती है और बच्चों के साथ अजीज के साथ रहने लगती है तो यह उस की मेहरबानी होगी. उन्होंने भी हां कर दिया था और कहा था कि रमजान के बाद उन दोनों का फिर से निकाह करा दिया जाएगा.

दरअसल, करिश्मा के चली जाने के बाद अजीज शराब पी कर उसे याद कर के रोता रहता था, लेकिन जब से करिश्मा वापस मिल गई थी, तब से उस के चेहरे पर फिर से खुशी लौट आई थी. लेकिन उस की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी.

2 दिसंबर, 2025 की रात करीब 9 बजे अजीज नरोडा वाले घर से करिश्मा और बच्चों को कपड़े और रुपए देने वटवा गया था. उसी समय राजू अपनी बाइक से नरोडा की ओर खाना खाने जा रहा था. भारी ट्रैफिक के बीच भी वटवा की ओर जा रहे अजीज को राजू ने देख लिया. उसे समझते देर नहीं लगी कि वह करिश्मा से मिलने जा रहा है. यह सोच कर उस की आंखों में खून उतर आया था. उस का शरीर भी गुस्से से कांपने लगा था.

क्रोध की आग में जलता हुआ वह खाना खाना भूल गया. वह सीधे अपने घर गया और एक तेज धार वाला चाकू निकाला. चाकू की मूठ पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उस ने कुछ निश्चय कर लिया. उस ने चाकू को एक कागज में लपेटा. फिर उसे पीछे अपनी पैंट में खोंसा और दोबारा अपनी बाइक ले कर निकल पड़ा. उसे पता था कि वटवा से नरोडा आनेजाने वाले लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए उसे पूरा विश्वास था कि अजीज इसी रास्ते से लौटेगा. वह एक सुनसान जगह पर खड़े हो कर शांति से अजीज का इंतजार करने लगा.

मौत का किया इंतजार

एक घंटा, 2 घंटे, 3 घंटा बीत गया, लेकिन उस ने धैर्य नहीं खोया. रात के 12 बज गए. आखिरकार रात के साढ़े 12 बजे उस का इंतजार खत्म हुआ. उसे वटवा कैनाल के पास अजीज फिर से आता दिखाई दिया. अजीज को देख कर राजू शिंदे तुरंत अपने चेहरे पर मासूमियत के भाव ले आया और हाथ दे कर उसे रोका.

पुलिस गिरफ्त में आरोपी राजू शिंदे

अजीज के रुकते ही उस ने कहा, ”एक्सक्यूज मी, आप अजीज भाई हैं न? मेरा नाम राजू है. मैं यहीं नरोडा की ओर रहता हूं. दरअसल, मुझे अपने शेड पर सोलर पैनल लगवाना है. आप का नंबर नहीं था, इसलिए मैं आप के घर गया था. पर आप घर पर मिले नहीं. आप अचानक यहां दिखाई दे गए, इसलिए मैं ने आप को रोक लिया.’’

”आप की बात तो सही है राजूभाई, लेकिन अभी रात के साढ़े 12 बजे हैं और मैं थक भी गया हूं. इसलिए आप कल सुबह मुझे फोन कर लीजिएगा, मैं आप का काम कर दूंगा.’’

राजू ने मन ही मन सोचा कि काम तो बेटा तेरा तमाम करना है और वह भी अभी. इसलिए उस ने कहा, ”अरे अजीजभाई, मुझे थोड़ा अर्जेंट है. आप नरोडा की ओर ही जा रहे हैं, मेरा शेड भी वहीं है. मेरे पास कोई साधन भी नहीं है, इसलिए आप मुझे वहां तक छोड़ भी दीजिएगा और बाहर से शेड भी देख लीजिएगा. इस के बाद कल आ कर काम शुरू कर देना.’’

अजीज थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन फिर सोचा कि काम और पैसा खुद चल कर उस के पास तक आ रहा है और रास्ते में सिर्फ बाहर से ही तो शेड देखना है तो मना क्यों किया जाए? उस ने राजू को अपनी बाइक पर पीछे बैठाया और नरोडा की ओर चल पड़ा.अजीज ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह उस की जिंदगी की सब से बड़ी और आखिरी गलती होने वाली है. उसे क्या पता था कि काम के लालच में उस ने मौत पीछे बैठा ली है.

जैसे ही रास्ते में केडिला ब्रिज के पास अजीज की बाइक पहुंची, अंधेरे का फायदा उठाते हुए राजू बोला, ”अजीजभाई, गाड़ी यहीं साइड में ले लो, मेरा शेड यहीं है.’’

अजीज ने जैसे ही बाइक थोड़ी धीमी की. राजू को अजीज से इतनी नफरत थी कि उस ने बाइक रुकने का भी इंतजार नहीं किया. सुनसान और अंधेरा देख कर राजू ने पैंट में पीछे खोंसा चाकू निकाला और चलती बाइक पर ही अजीज का गला रेत दिया. उस ने इतनी नफरत से अजीज पर हमला किया था कि खून का फव्वारा फूट पड़ा और अजीज की श्वास नली तक कट गई थी. चीखते हुए अजीज बाइक समेत जमीन पर गिर पड़ा. अजीज के साथ राजू भी गिर पड़ा था. संयोग से उसे ज्यादा चोट नहीं लगी थी. उसे मामूली खरोंचें आई थीं. इसलिए वह तुरंत उठ कर खड़ा हो गया.

थोड़ी देर तड़प कर अजीज शांत हो गया. खून से लथपथ अजीज के शरीर को राजू ने पैर से हिला कर देखा कि वह मर चुका है या नहीं? उसे लगा कि अजीज का खेल खत्म हो गया है तो वह अंधेरे में गायब हो गया और घर जा कर इस तरह चैन से सो गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो. शायद उसे लगा था कि अंधेरे में किसी ने उसे देखा तो है नहीं, इसलिए पुलिस कभी उस तक पहुंच नहीं सकेगी. 3 दिसंबर की रात 2 से ढाई बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि घोडासर के केडिला ब्रिज के पास एक युवक की गला कटी लाश पड़ी है.

सूचना मिलने पर थाना इसनपुर के इंसपेक्टर बी.एस. जाडेजा अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. बाइक के नंबर से मरने वाले की पहचान नरोडा के रहने वाले अजीज खान के रूप में हो गई थी. इस के बाद लाश को जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया था. आगे की पुलिस जांच में पता चला कि अजीज का अपनी पत्नी करिश्मा से तलाक हो गया था. उस की पत्नी वटवा में अलग रहती थी. पुलिस करिश्मा के घर पहुंची.

करिश्मा से पूछताछ की गई तो पता चला कि उस ने अजीज से तलाक लेने के बाद राजू नाम के व्यक्ति से निकाह कर लिया था और दोनों साथ रह रहे थे. लेकिन इधर वह राजू को छोड़ कर फिर से अजीज से निकाह करने वाली थी. करिश्मा की इस बात से राजू शक के दायरे में आ गया, लेकिन पुलिस ने सीधे उसे हिरासत में नहीं लिया था.

रह गई अकेली

राजू ने ही यह कांड किया है, यह कंफर्म करने के लिए पुलिस ने उस जगह की सीसीटीवी फुटेज चेक की, जहां अजीज की हत्या हुई थी. पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति जाता दिखाई दिया, जिस की चाल और शरीर की बनावट राजू से हूबहू मेल खाती थी. इस के बाद पुलिस उसे थाने ले आई और सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि अजीज की हत्या उसी ने करिश्मा के लिए की थी.

दरअसल, राजू शिंदे के साथ रहते हुए ही करिश्मा अपने पूर्व पति अजीज से बातचीत करने लगी थी, जो राजू को बिलकुल पसंद नहीं था. यही नहीं, उस ने अजीज की ही वजह से उसे अपने घर से निकाल दिया था. इसलिए उसे लगा कि अगर अजीज नहीं रहेगा तो करिश्मा उस के पास फिर से वापस आ सकती है. यही सोच कर राजू ने नफरत से इस तरह बेरहमी से अजीज की हत्या कर दी थी.

राजू शिंदे की गिरफ्तारी के बाद करिश्मा ने पुलिस को बताया था कि अजीज से तलाक लेने के बाद उस ने राजू से निकाह कर लिया था. उस के बाद अजीज उसे धमकी दे कर जबरदस्ती अपने साथ ले जाने के लिए कह रहा था. वह कह रहा था कि ‘अगर मैं उस के साथ नहीं आई तो इस का अंजाम तू देखेगी.’

इसलिए वह डर गई थी कि कहीं वह कुछ उलटासीधा न कर बैठा तो नुकसान उसे ही होता, क्योंकि राजू और अजीज दोनों ही उस के थे. इसलिए उस ने अजीज के साथ जाने का फैसला किया था. अजीज की हत्या करने वाले अपने दूसरे पति राजू शिंदे के बारे में करिश्मा का कहना था कि राजू बहुत अच्छा इंसान था. वह किसी भी तरह का नशा नहीं करता था. उस ने उस के तीनों बच्चों को सगे पिता से भी ज्यादा प्यार दिया था. उस ने कभी बच्चों को पिता की कमी महसूस नहीं होने दी थी.

लेकिन अजीज उसे बारबार धमका रहा था. यह बात सिर्फ वह और अजीज ही जानते थे. मजबूरी में उसे अजीज के साथ जाना पड़ रहा था. फिलहाल करिश्मा अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है और उस का कहना है कि अब वह तीसरे निकाह के बारे में बिलकुल नहीं सोच रही है. पुलिस को अजीज की हत्या में करिश्मा के कहीं से भी शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला था.

राजू शिंदे से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल भेज दिया था. Gujarat News