Parivarik Kahani : ब्लेड से पत्नी के हाथों की काटी कलाई फिर रेत डाला गला

Parivarik Kahani  : अर्चना और चेतन के बीच का झगड़ा गंभीर नहीं था. दोनों चाहते तो समझदारी से निपटा सकते थे. लेकिन अर्चना के जिद्दी स्वभाव ने ऐसा नहीं होने दिया. इस का जो नतीजा निकला…

चेतन घोरपड़े और अर्चना घोरपड़े कोई नवदंपति नहीं थे. कई साल हो गए थे दोनों की शादी को. पतिपत्नी पिछले 3 सलों से कोल्हापुर जिले के तालुका शिरोल बाईपास स्थित जयसिंह सोसायटी में रह रहे थे. दोनों ही एमआईडीसी परिसर की एक गारमेंट कंपनी में काम करते थे. कंपनी 2 शिफ्टों में चलती थी इसलिए उन दोनों का काम अलगअलग शिफ्टों में था. अर्चना सुबह 8 बजे काम पर जाती और शाम 5 बजे तक घर आ जाती थी. लेकिन चेतन का काम ऐसा नहीं था. उस को कभीकभी दोनों शिफ्टों में काम करना पड़ता था. दोनों खुश थे. उन की लवमैरिज की जिंदगी सुकून से गुजर रही थी.

मगर इसी बीच कुछ ऐसा हुआ जो नहीं होना चाहिए था. दरअसल, 20 फरवरी, 2021 को अचानक 2 बजे के करीब एक ऐसी लोमहर्षक घटना घटी कि जिस ने भी देखा, उस का कलेजा मुंह को आ गया. कामकाज का दिन होने की वजह से सोसायटी के सभी पुरुष और महिलाएं अपनेअपने कामों के कारण घरों से बाहर थे. सोसायटी में सिर्फ बच्चे, कुछ बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष ही थे. दोपहर का खाना खा कर सभी अपनेअपने घरों में आराम कर रहे थे कि तभी चीखनेचिल्लाने और बचाओ… बचाओ की आवाजें आने लगीं. आवाजें पड़ोस के रहने वाले चेतन घोरपड़े के घर से आ रही थीं.

लोगों को आश्चर्य हुआ क्योंकि पतिपत्नी दोनों अकसर अपने काम पर रहते थे. अर्चना घोरपड़े के चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुन कर लोग अपनेअपने घरों से बाहर आए तो उन्होंने देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था. लोगों ने दरवाजा थपथपाया, आवाजें दीं. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. इस से लोगों ने समझा कि हो सकता है पतिपत्नी का कोई मामला हो, जिसे ले कर दोनों के बीच झगड़ा हो गया हो. वैसे भी पतिपत्नी के झगड़े आम बात होते हैं. बहरहाल, उन्होंने पतिपत्नी का आपसी मामला समझ कर खामोश ही रहना उचित समझा. तभी बाहर शांति देख कर चेतन घोरपड़े ने धीरे से दरवाजा खोला. उस के कपड़ों पर खून लगा था.

इस के पहले कि पड़ोसी कुछ समझ पाते, चेतन दरवाजे की कुंडी लगा कर तेजी से सोसायटी के बाहर निकल गया और वहां से सीधे शिरोल पुलिस थाने पहुंचा. थाने की ड्यूटी पर तैनात एपीआई शिवानंद कुमार और उन के सहायकों ने थाने में चेतन घोरपड़े को देखा तो वह स्तब्ध रह गए. उस का हुलिया और उस के कपड़ों पर पड़े खून के छींटे किसी बड़ी वारदात की तरफ इशारा कर रहे थे. एपीआई शिवानंद कुमार उस से कुछ पूछते, उस के पहले ही उस ने उन्हें जो कुछ बताया, उसे सुन कर उन के होश उड़ गए. मामला काफी गंभीर था. एपीआई शिवानंद कुमार और उन के सहायकों ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. साथ ही साथ उन्होंने इस की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों के साथ पुलिस कंट्रोल रूम जयसिंहपुर को भी दे दिया.

शिवानंद पुलिस टीम ले कर घटनास्थल की ओर निकल ही रहे थे कि अचानक चेतन घोरपड़े की तबीयत बिगड़ने लगी. उस की बिगड़ती तबीयत को देख कर एपीआई शिवानंद कुमार ने अपने सहायकों के साथ उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल भेज दिया और खुद हैडकांस्टेबल डी.डी. पाटिल और सागर पाटिल को ले कर घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. जिस घर में घटना घटी थी, वहां पर काफी भीड़ एकत्र थी, जिसे हटाने में पुलिस टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी. भीड़ को हटा कर इंसपेक्टर शिवानंद कुमार जब घर के अंदर गए तो वहां का दृश्य काफी मार्मिक और डरावना था.

फर्श पर एक लहूलुहान युवती का शव पड़ा था. उस के पास ही 2 महिलाएं बैठी छाती पीटपीट कर रो रही थीं. पूछताछ में मालूम हुआ कि वे दोनों महिलाएं मृतका की मां और सास थीं, जिन का नाम वसंती पुजारी और आशा घोरपड़े था. पुलिस टीम ने दोनों महिलाओं को सांत्वना दे कर घर से बाहर निकला और अपनी काररवाई शुरू कर दी. अभी पुलिस घटना के विषय में पूछताछ कर ही रही थी कि वारदात की जानकारी पा कर कोल्हापुर के एसपी शैलेश वलकवड़े मौकाएवारदात पर आ गए. उन के साथ 2 फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो के लोग भी थे.

घर के अंदर का मंजर दिल दहला देने वाला था. पूरे फर्श पर खून ही खून फैला हुआ था. बैडरूम में युवती का शव पड़ा था, जिस की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस की कलाई और गालों पर किसी तेज धारदार वाले हथियार से वार किए गए थे. गले में मोबाइल चार्जर का वायर लिपटा था, जिसे देख कर सहज अंदाजा लगाया जा सकता था कि उस का गला घोंटने में इसी वायर का इस्तेमाल किया गया था. फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो का काम खत्म होने के बाद एसपी शैलेश वलकवड़े ने अपने सहायकों के साथ घटनास्थल की बारीकी से जांच की. इस के बाद उन्होंने जांचपड़ताल की सारी जिम्मेदारी एपीआई शिवानंद कुमार को सौंपते हुए उन्हें जरूरी निर्देश दिए.

एपीआई शिवानंद कुमार ने अपने सहायकों के साथ घटनास्थल पर पड़े ब्लेड और मोबाइल चार्जर के वायर को अपने कब्जे में ले लिया और मृतका अर्चना घोरपड़े के शव को पोस्टमार्टम के लिए जयसिंहपुर के जिला अस्पताल भेज दिया. वहां की सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के शिवानंद पुलिस थाने आ गए. साथ ही घटनास्थल पर आई मृतका की मां बसंती पुजारी को भी पुलिस थाने ले आए और उन की शिकायत पर अर्चना घोरपड़े के पति चेतन घोरपड़े के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. आगे की जांच के लिए उन्हें चेतन घोरपड़े के बयान का इंतजार था जो अभी अस्पताल में डाक्टरों की निगरानी में था.

पत्नी की हत्या के बाद अपराधबोध के कारण उस ने आत्महत्या के लिए घर में रखा कीटनाशक फिनायल पी लिया था और फिर पुलिस थाने आ गया था. डाक्टरों के अथक प्रयासों के बाद चेतन घोरपड़े को जब होश आया तो उस से पूछताछ की गई. उस ने जो कुछ बताया, उस से घटना का विवरण सामने आया. 25 वर्षीय अर्चना पुजारी जितनी सुंदर और स्वस्थ थी, उतनी ही खुले मन और आधुनिक विचारों वाली थी. वह किसी से भी बेझिझक बातें करती और उस के साथ घुलमिल जाती थी, लेकिन अपनी हद में रह कर. उस की मीठी और सीधीसरल बातें हर किसी के मन को मोह लेती थीं.

यही वजह थी जो उस की मौत का कारण बनी. उस के पिता रामा पुजारी की मृत्यु हो गई थी. घर की सारी जिम्मेदारी मां बसंती पुजारी के कंधों पर थी. घर की आर्थिक स्थिति कुछ खास नहीं थी, इसलिए उस की शिक्षादीक्षा ठीक से नहीं हो पाई थी. 30 वर्षीय चेतन मनोहर घोरपड़े ने सजीसंवरी अर्चना पुजारी को अपने एक दोस्त की पार्टी में देखा था और उस का दीवाना हो गया था. जब तक वह उस पार्टी में रही, तब तक चेतन की आंखें उसी पर टिकी रहीं. देर रात पार्टी खत्म होने के बाद चेतन घोरपड़े ने जब घर के लिए आटो लिया तब अपने दोस्त के कहने पर अर्चना पुजारी को उस के घर तक छोड़ते हुए गया.

उस रात आटो के सफर में दोनों ने एकदूसरे को जानासमझा. दोनों ने बेझिझक एकदूसरे से बातें कीं. घर पहुंचने के बाद अर्चना पुजारी ने चेतन का शुक्रिया अदा किया और अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया और उस का भी ले लिया. घर पहुंचने के बाद दोनों की एक जैसी ही स्थिति थी. रात भर दोनों सोच के दायरे में एकदूसरे के व्यक्तित्व को अपनेअपने हिसाब से टटोलते, तौलते रहे. दोनों की ही आंखों से नींद कोसों दूर थी. सारी रात उन की आंखों के सामने एकदूसरे का चेहरा नाचता रहा, जिस का नतीजा यह हुआ कि वे दोनों जल्दी ही एकदूसरे के करीब आ गए.

फोन पर लंबीलंबी बातों के बाद मुलाकातों से शुरू हुई दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई और कुछ महीनों बाद दोनों ने शादी का निर्णय ले लिया. उन के इस निर्णय से अर्चना पुजारी की मां को तो कोई ऐतराज नहीं था लेकिन चेतन की मां को इस शादी से आपत्ति थी. वह गैरजाति की लड़की को अपनी बहू बनाने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन चेतन घोरपड़े की पसंद के कारण मां की एक नहीं चली. 2013 के शुरुआती महीने में अर्चना बहू बन कर चेतन के घर आ गई. चेतन ने अपने कुछ रिश्तेदारों की उपस्थिति में अर्चना से लवमैरिज कर ली. लवमैरिज के बाद दोनों का सांसारिक जीवन हंसीखुशी से शुरू तो जरूर हुआ लेकिन कुछ ही दिनों के लिए.

शादी के बाद से ही अर्चना और चेतन की मां की किचकिच शुरू हो गई थी. चेतन अकसर दोनों को समझाबुझा कर शांत कर देता था. लेकिन कब तक, आखिरकार उन के झगड़ों से परेशान हो कर चेतन घोरपड़े अपनी मां का घर छोड़ कर अर्चना के साथ जयसिंहपुर में किराए के घर में आ कर रहने लगा. किराए के घर में आने के बाद अर्चना भी उसी कंपनी में सर्विस करने लगी, जिस में चेतन काम करता था. इस घर में आने के कुछ दिन बाद ही अर्चना का रहनसहन बदल गया था. हाथों में महंगा मोबाइल फोन, महंगे कपड़े उस के शौक बन गए. घूमनाफिरना, शौपिंग करना, ज्यादा समय फोन पर बातें करना उस की हौबी बन गई थी. चेतन जब भी उसे समझाने की कोशिश करता तो वह उस से उलझ जाती और उस की बातों पर ध्यान नहीं देती थी.

अर्चना की आए दिन की इन हरकतों से परेशान हो कर चेतन को लगने लगा था जैसे वह अर्चना से शादी कर के फंस गया है. अर्चना जैसी दिखती थी, वैसी थी नहीं. यह सोचसोच कर उस का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा था, जिसे शांत करने के लिए वह दोस्तों के साथ शराब पीने लगा था. इस से उस के घर का माहौल और खराब होने लगा था. अर्चना का खुले विचारों का होना और कंपनी के लोगों से हिलमिल जाना आग में घी का काम कर रहा था, जो अर्चना के चरित्र को कठघरे में खड़ा करता था. इसी सब को ले कर चेतन घोरपड़े शराब के नशे में अर्चना के साथ अकसर झगड़ा और मारपीट करने लगा था. इस से परेशान हो कर अर्चना अपने मायके शिरोल चली जाती थी और वहीं से काम पर कंपनी आती थी.

यह दूरियां तब और बढ़ गईं जब अर्चना अपनी शादी की सालगिरह के एक हफ्ते पहले चेतन से लड़ कर अपनी मां के पास चली गई और फिर वापस नहीं आई. इस बार चेतन घोरपड़े ने अर्चना से माफी मांग कर उसे घर लौट आने के लिए कहा लेकिन अर्चना ने उसे इग्नोर कर दिया. वह अपने मायके शिरोल से लंबी दूरी तय कर के कंपनी आती थी लेकिन चेतन घोरपड़े की लाख मिन्नतों के बाद भी उस के पास नहीं आई और न ही शादी की सालगिरह की बधाई का फोन ही उठाया. लाचार हो कर चेतन घोरपड़े ने अर्चना को शादी की सालगिरह का मैसेज भेज कर शुभकामनाएं दीं. लेकिन उस का भी कोई जवाब नहीं आया तो मजबूरन शादी की सालगिरह के 2 दिन बाद वह अर्चना के मायके गया.

जहां उस का स्वागत अर्चना की मां बसंती पुजारी ने किया और चेतन को काफी खरीखोटी सुनाई. साथ ही उसे पुलिस थाने तक ले जाने की धमकी भी दी. फिर भी चेतन घोरपड़े ने अर्चना से अपनी गलतियों की माफी मांगते हुए उसे अपने घर चलने के लिए कहा. मगर अर्चना पर उस की माफी का कोई असर नहीं पड़ा. नाराज हो कर चेतन अपने घर लौट आया. जब इस बात की जानकारी उस के दोस्तों को हुई तो उन्होंने उस के जले पर नमक छिड़क दिया, जिस ने आग में घी का काम किया था. उन्होंने बताया कि अर्चना का किसी कार वाले से अफेयर चल रहा है जो उसे अपनी कार से कंपनी लाता और ले कर जाता है. इस से चेतन के मन में अर्चना के प्रति उपजे संदेह को और हवा मिल गई.

वह जितना अर्चना के बारे में गहराई से सोचता, उतना ही परेशान हो जाता. इस का नतीजा यह हुआ कि उस के मन में अर्चना के प्रति घोर नफरत भर गई. उसके प्यार का दर्द छलक गया और उस ने एक खतरनाक निर्णय ले लिया. अपने निर्णय के अनुसार, घटना वाले दिन चेतन कंपनी में गया और अर्चना को कंपनी के बाहर बुला कर कुछ जरूरी काम के लिए घर चलने के लिए कहा. कंपनी में तमाशा न बने, इसलिए अर्चना बिना कुछ बोले उस के साथ घर आ गई. घर आने के बाद दोनों के बीच जोरदार झगड़ा हुआ तो पहले से ही तैयार चेतन ने अपनी जेब से ब्लेड निकाल कर अर्चना के हाथों की कलाई काट दी.

जब अर्चना चिल्लाई तो उस के गालों पर भी ब्लेड मार कर पास पड़े मोबाइल चार्जर से उस का गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया. अर्चना घोरपड़े की जीवनलीला खत्म करने के बाद अब उस के जीने का कोई मकसद नहीं बचा था. उस ने अपने जीवन को भी खत्म करने का फैसला कर अपनी चाची को फोन कर सारी कहानी बताई. फिर साफसफाई के लिए घर में रखी फिनायल पी कर पुलिस थाने पहुंच गया. जांच अधिकारी एपीआई शिवानंद कुमार और उन की टीम ने चेतन मनोहर घोरपड़े से विस्तृत पूछताछ करने के बाद मामले को भादंवि की धारा 302, 34 के तहत दर्ज कर के चेतन को न्यायिक हिरासत में जयसिंहपुर जेल भेज दिया. Parivarik Kahani

UP News : 10 लाख रुपए के लिए बचपन के दोस्त का किया कत्ल

UP News :  दोस्ती में एक विश्वास होता है, भरोसा होता है. लेकिन शैलेश प्रजापति और अर्श गुप्ता ने पैसे के लिए उस विश्वास की धज्जियां उड़ा दीं, जिस की वजह से विनय…

19 मार्च, 2021 की रात 10 बजे शीला देवी अपने देवर आनंद प्रजापति के साथ जनता नगर चौकी पहुंचीं. उस समय इंचार्ज ए.के. सिंह चौकी पर मौजूद थे. उन्होंने शीला देवी को बदहवास देखा, तो पूछा, ‘‘क्या बात है, तुम घबराई हुई क्यों हो? कोई गंभीर बात है क्या?’’

‘‘हां सर. हमें किसी अनहोनी की आशंका है.’’

‘‘कैसी अनहोनी? साफसाफ पूरी बात बताओ.’’

‘‘सर, दरअसल बात यह है कि रात 8 बजे मेरा बेटा शैलेश, उस का दोस्त अर्श गुप्ता व विनय घर पर नीचे कमरे में शराब पी रहे थे. कुछ देर बाद कमरे से चीखनेचिल्लाने की आवाजें आईं. फिर वे लोग बाइक से कहीं चले गए.

‘‘उन के जाने के बाद मैं कमरे में गई, तो वहां खून से सनी चादर देखी. अनहोनी की आशंका से मैं घबरा गई. मैं ने इस की जानकारी पड़ोस में रहने वाले अपने देवर आनंद को दी, फिर उन के साथ सूचना देने आप के पास आ गई. आप मेरी मदद करें.’’

शीला देवी की बात सुनकर ए.के. सिंह को लगा कि जरूर कोई अनहोनी घटना घटित हुई है. उन्होंने यह सूचना बर्रा थानाप्रभारी हरमीत सिंह को दी फिर 2 सिपाहियों के साथ शीला देवी के बर्रा भाग 8 स्थित मकान पर पहुंच गए. उन के पहुंचने के चंद मिनट बाद ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह भी आ गए. हरमीत सिंह ने ए.के. सिंह के साथ कमरे का निरीक्षण किया तो सन्न रह गए. कमरे के फर्श पर खून पड़ा था और पलंग पर बिछी चादर खून से तरबतर थी. कमरे का सामान भी अस्तव्यस्त था. खून की बूंदें कमरे के बाहर गली तक टपकती गई थीं.

निरीक्षण के बाद हरमीत सिंह ने अनुमान लगाया कि कमरे के अंदर कत्ल जैसी वारदात हुई है या फिर गंभीर रूप से कोई घायल हुआ है. शैलेश और उस का दोस्त या तो लाश को ठिकाने लगाने गए हैं या फिर अस्पताल गए हैं. कहीं भी गए हों, वे लौट कर घर जरूर आएंगे. अत: उन्होंने घर के आसपास पुलिस का पहरा लगा दिया तथा खुद भी निगरानी में लग गए. रात लगभग डेढ़ बजे शैलेश और उस का दोस्त अर्श गुप्ता वापस घर आए तो पुिलस ने उन्हें दबोच लिया और थाना बर्रा ले आए. दोनों के हाथ और कपड़ों पर खून लगा था. इंसपेक्टर हरमीत सिंह ने पूछा, ‘‘तुम दोनों ने किस का कत्ल किया है और लाश कहां है?’’

शैलेश कुछ क्षण मौन रहा फिर बोला, ‘‘साहब, मैं ने अपने बचपन के दोस्त विनय प्रभाकर का कत्ल किया है. वह बर्रा भाग दो के मनोहर नगर में रामजानकी मंदिर के पास रहता था. उस की लाश को मैं ने अर्श की मदद से रिंद नदी में फेंक दिया है. पैट्रोल खत्म हो जाने की वजह से हम ने विनय की मोटरसाइकिल खाड़ेपुर-फत्तेपुर मोड़ पर खड़ा कर दी और वापस लौट आए.’’

‘‘तुम ने अपने दोस्त का कत्ल क्यों किया?’’ थानाप्रभारी हरमीत सिंह ने शैलेश से पूछा. इस सवाल पर शैलेश काफी देर तक हरमीत सिंह को गुमराह करता रहा. पहले वह बोला, ‘‘साहब, नशे में गलती हो गई. हम ने उस का कत्ल कर दिया.’’

फिर बताया कि उस के मोबाइल फोन में उस की महिला मित्र की कुछ आपत्तिजनक फोटो थीं. उन फोटो को विनय ने धोखे से अपने मोबाइल फोन में ट्रांसफर कर लिया था. वह उन फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे कर ब्लैकमेल कर रहा था, इसलिए हम ने उसे मार डाला. लेकिन थानाप्रभारी हरमीत सिंह को उस की इन दोनों बातों पर यकीन नहीं हुआ. सच्चाई उगलवाने के लिए उन्होंने सख्ती की तो दोनों टूट गए. फिर उन्होंने बताया कि उन्होंने 10 लाख रुपए की फिरौती मांगने के लिए विनय की हत्या की योजना बनाई थी. कुछ माह पहले संजीत हत्याकांड की तरह शव को ठिकाने लगाने के बाद उसी के मोबाइल फोन से उस के घर वालों को फोन कर फिरौती मांगने की योजना थी.

उस ने दौलत की चाहत में दोस्त की हत्या की थी. लेकिन फिरौती मांगने के पहले ही वे पकड़े गए. शैलेश व अर्श की जामातलाशी में उन के पास से 3 मोबाइल फोन मिले, जिस में एक मृतक विनय का था तथा बाकी 2 शैलेश व अर्श के थे. उन के पास एक पर्स भी बरामद हुआ जिस में मृतक का फोटो, आधार कार्ड तथा कुछ रुपए थे. बरामद पर्स मृतक विनय प्रभाकर का था. शैलेश व अर्श गुप्ता की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल बांका तथा लाश ठिकाने लगाने में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद कर ली. बांका उस ने अपने कमरे में छिपा दिया था और पैट्रोल खत्म होने से उस ने मोटरसाइकिल खाड़ेपुर मोड़ पर खड़ी कर दी थी.

फिरौती और हत्या के इस मामले में थानाप्रभारी हरमीत सिंह कोई कोताही नहीं बरतना चाहते थे. क्योंकि इस के पहले संजीत अपहरण कांड में बर्रा पुलिस गच्चा खा चुकी थी. अपहर्त्ताओं ने फिरौती की रकम भी ले ली थी और उस की हत्या भी कर दी थी. इस मामले में लापरवाही बरतने में एसपी व डीएसपी सहित 5 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था. अत: उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. सूचना पा कर रात 3 बजे एसपी (साउथ) दीपक भूकर तथा डीएसपी विकास पांडेय थाना बर्रा पहुंच गए. उन्होंने घटना के संबंध में गिरफ्तार किए गए शैलेश व अर्श गुप्ता से विस्तार से पूछताछ की.

फिर दोनों को साथ ले कर रिंद नदी के पुल पर पहुंचे. इस के बाद कातिलों की निशानदेही पर नदी किनारे पड़ा विनय प्रभाकर का शव बरामद कर लिया. विनय की हत्या बड़ी निर्दयतापूर्वक की गई थी. उस का गला धारदार हथियार से काटा गया था, जिस से सांस की नली कट गई थी और उस की मौत हो गई थी. मृतक विनय की उम्र 26 वर्ष के आसपास थी और उस का शरीर हृष्टपुष्ट था. 20 मार्च की सुबह 5 बजे बर्रा थाने के 2 सिपाही मृतक विनय के घर पहुंचे और उस की हत्या की खबर घर वालों को दी. खबर पाते ही घर व मोहल्ले में सनसनी फैल गई. घर वाले रिंद नदी के पुल पर पहुंचे.

वहां विनय का शव देख कर मां विमला तथा बहन रीता बिलख पड़ीं. पिता रामऔतार प्रभाकर तथा भाई पवन की आंखों से भी अश्रुधारा बह निकली. पुलिस अधिकारियों ने उन्हे धैर्य बंधाया. पवन ने एसपी दीपक भूकर को बताया कल शाम साढ़े 7 बजे किसी का फोन आने पर उस का भाई विनय यह कह कर अपनी पल्सर मोटरसाइकिल से घर से निकला था कि अपने दोस्त से मिलने जा रहा है. उस के बाद वह घर नहीं लौटा. रात भर हम लोग उस के घर वापस आने का इंतजार करते रहे. उस का फोन भी बंद था. सुबह 2 सिपाही घर आए. उन्होंने विनय की हत्या की सूचना दी. तब हम लोग यहां आए. लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि विनय की हत्या किस ने और क्यों की?

‘‘तुम्हारे भाई की हत्या किसी और ने नहीं, उस के बचपन के दोस्त शैलेश प्रजापति व उस के साथी अर्श गुप्ता ने की है. वह तुम लोगों से फिरौती के 10 लाख रुपए वसूलना चाहते थे. लेकिन शैलेश की मां ने ही उस का भांडा फोड़ दिया और दोनों पकड़े गए.’’

यह जानकारी पा कर पवन व उस के घर वाले अवाक रह गए. क्योंकि वे सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि शैलेश ऐसा विश्वासघात कर सकता है. निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम हाउस हैलट अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद वह शैलेश के उस कमरे में पहुंचे, जहां विनय का कत्ल किया गया था. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने जहां घटनास्थल का निरीक्षण किया, वहीं फोरैंसिक टीम ने भी बेंजाडीन टेस्ट कर साक्ष्य जुटाए. चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल बांका भी बरामद करा दिया था, अत: थानाप्रभारी हरमीत सिंह ने मृतक के भाई पवन को वादी बना कर भादंवि की धारा 302/201 तथा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत शैलेश प्रजापति तथा अर्श गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

उन्हें न्यायसम्मत गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस पूछताछ में दौलत की चाहत में दोस्त की हत्या की सनसनीखेज घटना का खुलासा हुआ. कानपुर शहर का एक बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है-बर्रा. इस क्षेत्र के बड़ा होने से इसे कई भागों में बांटा गया है. रामऔतार प्रभाकर अपने परिवार के साथ इसी बर्रा क्षेत्र के भाग 2 में मनोहरनगर में जानकी मंदिर के पास रहते थे. उन के परिवार में पत्नी विमला के अलावा 2 बेटे पवन कुमार, विनय कुमार तथा बेटी रीता कुमारी थी. रामऔतार प्रभाकर आर्डिनैंस फैक्ट्री में काम करते थे. किंतु अब रिटायर हो चुके थे. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी.

फैक्ट्री में रामऔतार प्रभाकर के साथ सोमनाथ प्रजापति काम करते थे. सोमनाथ भी बर्रा भाग 8 में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शीला देवी के अलावा एकलौता बेटा शैलेश था. सोमनाथ भी रिटायर हो चुके थे. सोमनाथ बीमार रहते थे. उन्हें सुनाई भी कम देता था और दिखाई भी. उन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. रामऔतार और सोमनाथ इस के पहले अर्मापुर स्थित फैक्ट्री की कालोनी में रहते थे. 3 साल पहले दोनों ने बर्रा क्षेत्र में जमीन खरीद ली थी और अपनेअपने मकान बना कर रहने लगे थे. मकान बदलने के बावजूद दोनों की दोस्ती में कमी नहीं आई थी. दोनों परिवार के लोगों का एकदूसरे के घर आनाजाना था.

रामऔतार का बेटा विनय और सोमनाथ का बेटा शैलेश बचपन के दोस्त थे. दोनों एकदूसरे के घर आतेजाते थे. विनय ने हाईस्कूल पास करने के बाद आईटीआई से मशीनिस्ट का कोर्स किया था. वह नौकरी की तलाश में था. जबकि शैलेश ड्राइवर बन गया था. वह बुकिंग की कार चलाता था. शैलेश का एक अन्य दोस्त अर्श गुप्ता था. वह फरनीचर कारीगर था और गुजैनी गांव में रहता था. अर्श और शैलेश शराब के शौकीन थे. अकसर दोनों साथ पीते थे और लंबीलंबी डींग हांकते थे. उन दोनों ने विनय को भी शराब पीना सिखा दिया था. अब हर रविवार को शैलेश के घर शराब पार्टी होती थी. तीनों बारीबारी से पार्टी का खर्चा उठाते थे.

एक शाम खानेपीने के दौरान विनय ने शैलेश व अर्श को बताया कि उस की बहन रीता की शादी तय हो गई है. 27 अप्रैल को बारात आएगी. शादी में लगभग 10-12 लाख रुपया खर्च होगा. पिता व भाई ने रुपयों का इंतजाम कर लिया है. शादी की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. शैलेश व अर्श मामूली कमाने वाले युवक थे. वह शार्टकट से लखपति बनना चाहते थे. इस के लिए शैलेश उरई में पान मसाला का कारोबार करना चाहता था. उरई में वह जगह भी देख आया था. लेकिन कारोबार के लिए उस के पास पैसा नहीं था. पैसा कहां से और कैसे आए, इस के लिए शैलेश और अर्श ने सिर से सिर जोड़ कर विचारविमर्श किया तो उन्हें विनय याद आया.

विनय ने बताया था कि उस के यहां बहन की शादी है और घर वालों ने 10-12 लाख रुपए का इंतजाम किया है. दौलत की चाहत में शैलेश व अर्श ने दोस्त के साथ छल करने और फिरौती के रूप में 10 लाख रुपया वसूलने की योजना बनाई. संजीत हत्याकांड दोनों के जेहन में था. उसी तर्ज पर उन दोनों ने विनय की हत्या कर के उस के घर वालों से फिरौती वसूलने की योजना बनाई. योजना के तहत 19 मार्च, 2021 की रात पौने 8 बजे शैलेश ने अर्श के मोबाइल से विनय प्रभाकर के मोबाइल पर काल की और पार्टी के लिए घर बुलाया. विनय की 5 दिन पहले ही लोहिया फैक्ट्री में नौकरी लगी थी. फैक्ट्री से वह साढ़े 7 बजे घर लौटा था कि 15 मिनट बाद शैलेश का फोन आ गया. पार्टी की बात सुन कर वह शैलेश के घर जाने को राजी हो गया.

रात 8 बजे विनय अपनी पल्सर मोटरसाइकिल से बर्रा भाग 8 स्थित शैलेश के घर पहुंच गया. उस समय कमरे में शैलेश व अर्श गुप्ता थे और पार्टी का पूरा इंतजाम था. इस के बाद तीनों ने मिल कर खूब शराब पी. विनय जब नशे में हो गया तो योजना के तहत अर्श व शैलेश ने उसे दबोच लिया और उस की पिटाई करने लगे. विनय ने जब खुद को जाल में फंसा देखा तो वह भी भिड़ गया. कमरे से चीखनेचिल्लाने की आवाजें आने लगीं. इसी बीच शैलेश ने कमरे में छिपा कर रखा बांका निकाला और विनय की गरदन पर वार कर दिया. विनय का गला कट गया और वह फर्श पर गिर पड़ा.

इस के बाद अर्श ने विनय को दबोचा और शैलेश ने उस की गरदन पर 2-3 वार और किए. जिस से विनय की गरदन आधी से ज्यादा कट गई और उस की मौत हो गई. हत्या करने के बाद उन दोनों ने शव को तोड़मरोड़ कर चादर व कंबल में लपेटा और फिर विनय की मोटरसाइकिल पर रख कर रिंद नदी में फेंक आए. वापस लौटते समय उन की बाइक का पैट्रोल खत्म हो गया, इसलिए उन्होंने बाइक को खाड़ेपुर मोड़ पर खड़ा कर दिया. फिर पैदल ही घर आ गए. घर पर उन के स्वागत के लिए बर्रा पुलिस खड़ी थी, जिस से वे पकड़े गए. दरअसल, शैलेश की मां शीला ने ही कमरे में खून देख कर पुलिस को सूचना दी थी, जिस से पुलिस आ गई थी.

21 मार्च, 2021 को थाना बर्रा पुलिस ने आरोपी शैलेश प्रजापति व अर्श गुप्ता को कानपुर कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. UP News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Crime News : तानों से तंग आकर चाकू से काटी मां की गरदन

Family Crime News : फौजी राजेंद्र शाही के पास रुपएपैसों की कमी नहीं थी. इस के बावजूद भी उन के घर में क्लेश रहता था. इस की वजह थी उन की पत्नी हीरा देवी का व्यवहार. हीरा देवी के इसी व्यवहार ने एक दिन बेटे राहुल के हाथ खून से रंग दिए. और फिर…

20 दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर अपनी मां को खाने के लिए देती थी. उस ने सब से पहले वही बादाम छीले और अपनी मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन उस की मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह सीधे उन्हीं के कमरे में चली गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी. मां को सोता देख कर उसे हैरानी भी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि वह तो हर रोज घर में सब से पहले उठ जाती थीं.

अपनी मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश फाख्ता हो गए. मां को इस हालत में देख कर उस की जोरदार चीख निकली. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी. सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए थे. लेकिन हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल.

उस रात हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे. हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग ही था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा हुआ था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. इस बात से सभी परेशान थे. तुरंत ही इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की. पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की भांति सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो वह अपनी मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे. मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर पर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.

घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल करते हुए नमूने ले कर पैक कर लिए थे. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की. घटनास्थल से सब साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू सिंह की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा कोतवाली हल्द्वानी में दर्ज कर लिया. केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई करते हुए फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था. इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा ही तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही तो उस का सहारा थी. उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था.

घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया. पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे तो उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर एक पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की एक पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी. पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के तुरंत बाद ही उस ने अपनी मां की हत्या की बात कबूल ली. जिस मां ने अपने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक निकली.

उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव पड़ता है करायल जौलासाल. इसी गांव में रहता था राजेंद्र शाही का परिवार. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था. राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी बच्चों ने मन लगा कर पढ़ाई की, उस की परिणति सभी कामयाब भी हो गए थे.

राजेंद्र शाही ने बहुत पहले ही बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के पहले छोर पर ही काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने ही एक प्लौट और खरीद लिया था. जिस को उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था. ममता अपनी मां के साथ ही रहती थी. उस के बाद दूसरे नंबर की बेटी मंजू की भी शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था. रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में ही रहने लगी थी.

पांचवीं नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर हो गई. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था. इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद भी एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने जो प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना. हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी.

इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया. उसी मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे. सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी को घर खर्च देना भी बंद कर दिया था. उस के बाद हीरा देवी ने अदालत में अपने पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के बाद हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे. जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.

सन 2005 से ही राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. उस के बाद अपना घर होने के बावजूद भी राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद राजेंद्र सिंह ने रामनगर में भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ ही रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था. राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद भी उसे कहीं पर कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी भी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती चली गई.

उस की दिमागी हालत के खराब चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की अपनी मां से भी नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात में जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद भी राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रहती थी. गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.

दिल्ली में नौकरी करने के दौरान ही उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता रहता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर से अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों से लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी. उस के बाद उस की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस के कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उस के मन में नफरत पैदा हो गई थी.

अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन इस के बावजूद भी उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन खराब हो चला था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी. चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था. घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने भी सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली.

रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. रवींद्र सिंह अपने परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद भी परिवार में खुशियां बिलकुल भी नही थीं. 20 दिसंबर, 2020 को राहुल ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने को आदत जो पड़ गई है.’’

हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद भी राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे. क्या किया जाए इस बुढि़या का. इस ने तो मेरा जीना हराम कर रखा है. शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में ही सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद उस के कमरे में सुला दिया था.

हीरा देवी इस वक्त बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई थी. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत हुआ था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी. तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी चालें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, उस ने अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह उस वक्त गहरी नींद में सोई पड़ी थी. घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरे में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से एक चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. जिस के कारण दवाओं का नशा उस पर फौरन ही हावी हो जाता था.

अपनी मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन बैठा. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां हीरा देवी के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उस के प्राणपखेरू उड़ गए. मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर पर लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा. उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उस को बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे. वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुला दिया.

हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं. इस दर्दनाक घटना के बाद भी परिवार वाले एकदूसरे पर आरोप लगा कर लड़झगड़ रहे थे.

 

Uttar Pradesh News : किस पारिवारिक दबाव से परेशान हो कर सिपाही ने किया सुसाइड

Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर नौकरी लग जाने के बाद मनीत के घर वालों ने तय कर लिया था कि वह उस की शादी किसी अच्छे परिवार में करेंगे. लेकिन मनीत संध्या से प्यार करता था और उसी से शादी करना चाहता था. मनीत के समझाने के बाद भी उस के घर वाले जब संध्या से शादी कराने को राजी नहीं हुए तो मनीत ने ऐसा कदम उठाया कि…

4 जून, 2020 की शाम 7 बजे 24 वर्षीय सिपाही मनीत प्रताप सिंह ड्यूटी कर के जब वापस अपने कमरे पर लौटा तो वह अकेला नहीं था, बल्कि उस के साथ उस की खूबसूरत और कमसिन प्रेमिका संध्या भी थी. उस के साथ संध्या को देख कर मनीत के दोनों दोस्त सिपाही जमील खान और सिपाही अनिल कुमार गौतम हौले से मुस्कराए तो वह भी मुसकरा दिया और संध्या को ले कर कमरे में चला गया. वे तीनों दोस्त मुरादाबाद के कटघर थाने की आदर्श नगर कालोनी में स्थित कमल गुलशन के मकान में किराए पर रहते थे. वे तीनों रूम पार्टनर थे और एक ही कमरे में रहते थे. जिन में जमील खान और अनिल गौतम कटघर थाने में तैनात थे और मनीत पुलिस लाइन में आमद था.

वैसे मनीत सिंह मूलरूप से बुलंदशहर के कोतवाली थाने के रसूलपुर का रहने वाला था. उस की जौइनिंग 2018 बैच की थी. हालफिलहाल उस की ड्यूटी मुरादाबाद (देहात) विधानसभा से विधायक हाजी इकराम कुरैशी की सुरक्षा में चल रही थी. बहरहाल, संध्या को ले कर पहुंचे मनीत ने वर्दी बदल कर सादे कपड़े पहन लिए और दोनों दोस्तों से कहा कि वह संध्या को ले कर शहर घूमने जा रहा है. लौटने में उसे देर हो सकती है. आप दोनों अपना खाना बना कर खा लेना. हम घूम कर वापस लौटने के बाद अपना खाना बना लेंगे. इतना कह कर उस ने बरामदे में खड़ी बाइक बाहर निकाली और संध्या को पीछे बिठा कर निकल गया.

करीब 3 घंटे दोनों बाहर घूमे और रात 10 बजे के करीब कमरे पर लौटे. चूंकि कमरा एक ही था. वहां संध्या रुकी हुई थी इसलिए मनीत के दोनों दोस्त उन्हें कमरे में छोड़ कर छत पर सोने चले गए. मनीत घर आ कर दुकान से 2 बड़े पैकेट मैगी और 1 लीटर वाली कोल्डड्रिंक की एक बोतल ले आया. संध्या ने मैगी बनाई और 2 कटोरियों में मैगी ले कर कमरे में आई, जहां मनीत उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. फिर मनीत ने पहले से ला कर रखी कोल्डड्रिंक स्टील के 2 खाली गिलासों में भर कर एक गिलास संध्या की ओर बढ़ा दिया और दूसरा गिलास खुद लिया.

दोनों ने मैगी खा कर कोल्डड्रिंक पी. थोड़ी भूख शांत हुई. मनीत और संध्या दोनों एकदूसरे के हाथों को थामे और आंखों में आंखें डाले नीचे फर्श पर चादर बिछा कर बैठे थे. एकदूसरे को करीब पा कर वे दोनों बेहद खुश थे. खुश होते भी क्यों नहीं, एक होने में उन के बीच में बस एक रात की दूरी थी. अगले दिन यानी 5 जून, 2020 को दोनों कोर्टमैरिज करने वाले थे. मैरिज के बाद दोनों जनमजनम के लिए एकदूसरे के हो जाने वाले थे. कहते हैं, आग और फूस पासपास हो, तो वहां अकसर आग लग ही जाती है. मनीत और संध्या सामाजिक मानमर्यादाओं की सीमाएं लांघते हुए जिस्मानी रिश्तों से एक हो चुके थे, इसीलिए संध्या प्रेमी मनीत पर शादी के लिए दबाव बनाए हुए थी.

दबाव में आ कर ही उस ने संध्या से शादी के लिए हामी भरी थी और उसे कमरे पर बुलाया था. खानेपीने के बाद नीचे फर्श पर बिछे चादर पर दोनों बैठे हुए थे. मनीत संध्या की हथेली थामे उस की झील सी गहरी आंखों में डूबता जा रहा था. संध्या के मखमली स्पर्श से मनीत का रोमरोम खिल उठा था. वे दोनों मर्यादाओं में बंधे थे, भविष्य के सपनों को ले कर दोनों देर तक बातें करते रहे. इस बीच मनीत फोन पर अपने घर वालों से अपनी शादी के सिलसिले में बात भी करता रहा. फोन पर बात करतेकरते मनीत अचानक से गंभीर हो गया और नीचे फर्श से उठ कर बैड पर बैठ गया. तो संध्या भी नीचे से उठ कर बैड पर बैठ गई और उस की गोद में अपना सिर रख कर बिस्तर पर पसर गई.

‘‘क्या हुआ? अचानक से गंभीर क्यों हो गए?’’ संध्या ने मनीत की आंखो में आंखें डाल कर सवाल किया.

‘‘कुछ नहीं, बस ऐसे ही…’’ कहतेकहते मनीत रुक गया.

‘‘मुझ से कोई भूल हो गई है क्या या मैं ने कुछ ऐसावैसा कह दिया, जिस से तुम्हें बुरा लग गया. अगर ऐसा है तो मुझे माफ कर दो. सौरी बाबा आइ एम वैरी सौरी.’’ दोनों कान पकड़ते हुए संध्या बोली.

‘‘तुम क्यों सौरी कह रही हो?’’ कान से संध्या का हाथ हटाते हुए उस ने आगे कहा, ‘‘मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है और न ही तुम ने कुछ कहा है. सौरी तो उन्हें बोलना चाहिए जो हमारे प्यार के दुश्मन हैं. माफी तो उन्हें मांगनी चाहिए, जो हमें एक होने से रोकते हैं. लेकिन संध्या तुम चिंता मत करना, हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता. चाहे हमें जमाने से ही क्यों न लड़ना पडे. हम लड़ेंगे और एक भी होंगे. मनीत ने कभी हारना नहीं सीखा है. दुश्मन चाहे हमारे अपने ही क्यों न हों, मोहब्बत की जंग हम उन से जीत के रहेंगे.’’

‘‘घर वालों से तुम्हारी बात हुई है क्या? उन्होंने तुम्हें कुछ कहा है?’’

‘‘वे हमारी शादी के खिलाफ हैं. कहते हैं ये शादी नहीं होने देंगे.’’

‘‘तो फिर क्या होगा?’’

‘‘होगा क्या, मैं ने जो निश्चय किया है, वही होगा. मेरा निश्चय पत्थर पर खींची लकीर जैसा है, उसे कोई भी नहीं मिटा सकता.’’

कहते हुए मनीत ने बैड पर पड़ी कारबाइन दोनों हाथों से उठाई, उसे देखा. संध्या कुछ समझ पाती इस से पहले मनीत ने कारबाइन अपने सीने से सटा कर उस का ट्रिगर दबा दिया. कारबाइन से निकली गोली मनीत के दिल और फेफड़े को चीरती हुई शरीर के पार निकल गई. मनीत बिस्तर से नीचे फर्श पर धड़ाम से जा गिरा. मनीत ने आत्महत्या कर ली थी. गोलियों की तड़तड़ाहट सुन कर मकान की छत पर सो रहे जमील और अनिल दौड़ेभागे नीचे कमरे में पहुंचे. कमरे का दृश्य देख कर दोनों हैरान रह गए. मनीत खून में डूबा बिलकुल शांत पड़ा था. उस से 2 कदम दूर खड़ी संध्या थरथर कांप रही थी. उस के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था.

उस के मुंह से कोई बोल नहीं फूट रहा था. जिस यार की बांहों में थोड़ी देर पहले वह झूल रही थी. जिन हाथों से अपने मांग में सिंदूर भरने के ख्वाब देख रही थी, वह सब रेत के मकान की तरह भरभरा कर ढह गया था. बदहवास संध्या मनीत को देखे जा रही थी. जमील और अनिल कमरे के अंदर दाखिल हुए तो संध्या डर गई, ‘‘मैं ने नहीं मारा इन्हें…मैं ने नहीं मारा.’’ कहती चली गई.

‘‘ये सब कैसे हुआ संध्या?’’ अनिल ने सवाल किया.

‘‘थोड़ी देर पहले मनीत ने फोन पर अपने घर वालों से बात की. उस के बाद न जाने ऐसा क्या हुआ, वह एकदम से गंभीर हो गया. जब मैं ने पूछा कि क्या बात है, तुम अचानक से क्यों गंभीर हो गए तो उस ने बताया उस के घर वाले शादी के खिलाफ हैं, वे शादी करने पर ऐतराज जता रहे हैं. उस के बाद मैं कुछ समझ पाती कि मनीत ने खुद को गोली मार ली.’’ कह कर संध्या बिलखबिलख कर रोने लगी. संध्या के कथनानुसार, मनीत ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. उसी वक्त जमील ने फोन कर के थानेदार (कटघर) विकास कुमार, सीओ (कटघर) पूनम सिरोही, एसपी (सिटी) अमित कुमार आनंद, एसएसपी अमित पाठक और आईजी रमित शर्मा को घटना की सूचना दी थी.

चूंकि मामला विभाग से जुड़ा हुआ था, इसलिए सूचना मिलते ही कुछ ही देर में एसओ (कटघर) विकास कुमार, सीओ (कटघर) पूनम सिरोही और एसपी (सिटी) अमित कुमार आनंद घटनास्थल पहुंच गए थे. मौके पर पहुंचे एसपी (सिटी) अमित आनंद और सीओ पूनम सिरोही ने दोनों सिपाहियों जमील खान, अनिल कुमार गौतम और युवती संध्या से पूछताछ करना शुरू किया. दोनों सिपाहियों जमील और अनिल ने अधिकारियों को बताया कि रात खाना खाने के बाद दोनों छत पर सोने चले गए थे.

कमरे में रात भर मनीत और संध्या ही थे. गोलियों की आवाज सुन क र नींद खुली तो उठ कर बैठ गए. मोबाइल औन किया तो उस समय रात के 2 बज रहे थे.  हम दोनों भागेभागे नीचे कमरे में आए तो देखा मनीत खून में डूबा नीचे फर्श पर पड़ा था. उस की कारबाइन बिस्तर पर पड़ी हुई थी. उस पर खून लगा था. एक किनारे दूर खड़ी बदहवास सी संध्या मनीत को देखे जा रही थी.

उस के बाद अधिकारियों ने संध्या से पूछताछ की तो उस ने भी वही बताया जो दोनों सिपाहियों ने कुछ देर पहले पुलिस अधिकारियों को बताया था. पूछताछ करने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. खून से सनी कारबाइन बिस्तर पर एक ओर पड़ी थी. प्रथमदृष्टया यह मामला आत्महत्या का लग रहा था. मामला हत्या का होता तो मौके पर संघर्ष के निशान जरूर मिलते, लेकिन ऐसा नहीं था. फिर क्या था, पुलिस अधिकारियों ने मनीत के घर वालों को बुलंदशहर फोन कर के घटना की जानकारी दी. सूचना मिलते ही उस के घर में कोहराम मच गया. घर में रोनापीटना जारी था. परिवार का कमाऊ बेटा था मनीत. मौत की खबर से उस की मां और भाई बुरी तरह टूट गए.

खैर, सूचना मिलते ही मां और बड़ा भाई बीरू सिंह बुलंदशहर से मुरादाबाद के लिए रवाना हो गए थे. करीब 2 घंटे बाद वे मुरादाबाद की आदर्श कालोनी पहुंच गए, जहां घटना घटी थी. तब तक सुबह का उजाला फैल चुका था. घटना की सूचना पा कर पासपड़ोस के लोग धीरेधीरे वहां एकत्र होने लगे थे. बेटे की लाश देख कर मांबेटे का कलेजा मुंह को आ गया था. मनीत द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम के बारे में जिस ने भी सुना अवाक रह गया. वह अपने उत्तम व्यवहार और शानदार व्यक्तित्व के लिए कालोनी में मशहूर था. अपने काम से काम रखने वाला युवक था वह. बहरहाल, पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजवा दिया.

बीरू सिंह भाई की आत्महत्या के लिए संध्या को दोषी ठहराने लगा कि उस ने शादी के लिए उस पर दबाव बना रखा था. वह उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रही थी. इसी के दबाव में आ कर भाई ने आत्महत्या की है. बीरू के बयान को पुलिस ने गंभीरता से लिया और पूछताछ के लिए संध्या को हिरासत में ले लिया. संध्या से की गई पूछताछ के आधार पर कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

24 वर्षीय मनीत प्रताप सिंह मूलरूप से बुलंदशहर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के रसूलपुर का रहने वाला था. उस के परिवार में मांबाप, 2 भाई और एक बहन थी. बहन बड़ी थी. उस की शादी हो चुकी थी. दूसरे नंबर पर बीरू सिंह और सब से छोटा मनीत प्रताप सिंह था. अमूमन परिवार के सब से छोटे बच्चे मांबाप और भाईबहनों के दुलारे होते हैं, मनीत भी पूरे परिवार का दुलारा था. कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं. ऐसा ही कुछ मनीत के साथ भी हुआ था. छरहरे बदन वाले मनीत को बचपन से ही खाकी वर्दी से बेहद प्रेम था. बालपन से ही वह मांबाप से पुलिस में जाने को कहता था. वह कहता था बड़ा हो कर पुलिस बनेगा और पीडि़तों के साथ न्याय करेगा.

ईश्वर ने उस के दिल की बात सुन ली थी. 22 साल की उम्र में पहुंचते ही मनीत की मुराद पूरी हो गई थी. साल 2018 में उस ने अपनी मेहनत और काबिलियत के चलते पुलिस की नौकरी हासिल कर ली. खुली आंखों से उस ने अपने लिए जो सपने देखे थे, वह पूरे हो गए थे. वह बेहद खुश था. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद मनीत की पहली पोस्टिंग मुरादाबाद में हुई थी. मनीत मुरादाबाद के कटघर थाने की आदर्श नगर कालोनी में कमल गुलशन के यहां किराए का कमरा ले कर रहता था. उस के साथ कटघर थाने के 2 और सिपाही जमील खान और अनिल कुमार गौतम भी रहते थे. तीनों एक ही कमरे में रहते थे. इन दिनों मनीत की ड्यूटी पुलिस लाइन में चल रही थी. वहीं से उस की तैनाती मुरादाबाद देहात के विधायक हाजी इकराम कुरैशी की सुरक्षा में लगाई थी.

बात घटना से करीब डेढ़ साल पहले की है. रात का खाना खा कर मनीत बिस्तर पर गया तो उसे नींद नहीं आ रही थी. सोचा थोड़ा मोबाइल चला लूं और फेसबुक वाले दोस्तों को मैसेज कर दूं. हो सकता है, नींद आ जाए. यही सोच कर वह फोन ले कर बिस्तर पर लेट गया और फेसबुक औन कर लिया. उस के कई दोस्तों के मैसेज आए थे. उस में कई लोगों के फ्रैंड रिक्वेस्ट भी थे. उन रिक्वेस्ट में एक नाम संध्या का भी था. संध्या की खूबसूरत तसवीर पर मनीत की नजर पड़ी तो कुछ पल के लिए उस की नजर ठहर गई. उस की तसवीर पर से नजर हट ही नहीं रही थी. फिर क्या था. मनीत ने संध्या के रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया. एकदो दिनों बाद उस ने ‘हाय’ लिख कर मैसेज किया तो मनीत ने भी उस के मैसेज का जवाब दे दिया.

धीरेधीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया. बातचीत के जरिए मनीत ने संध्या का पता और मोबाइल नंबर लिया और अपना पता तथा मोबाइल नंबर उसे दे दिया. संध्या पुत्री सुरेंद्र कुमार मुरादाबाद के गलशहीद इलाके के रुद्रपुर में रहती थी. मध्यमवर्गीय परिवार की संध्या 3 भाईबहनों में सब से बड़ी थी. उस के पिता दिल्ली में रह कर एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करते थे. बीचबीच में वह घर आ कर परिवार को देख जाते. वैसे भी पिता सुरेंद्र ने परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी संध्या के कंधों पर डाल दी थी ताकि वह अपनी जिम्मेदारियों को निभा सके. संध्या पिता के विश्वास पर पूरी तरह से खरी उतर रही थी. घर के राशन से ले कर भाईबहन के स्कूल की फीस, किताब तक का वह हिसाब रखती थी. मतलब संध्या समय से पहले समझदार और सयानी हो चुकी थी. उस के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है, सब समझती थी.

बातचीत के जरिए संध्या और मनीत के बीच दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई थी. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे थे. आगे चल कर दोनों ने एकदूसरे से शादी करने का फैसला कर लिया था. चूंकि संध्या और मनीत एक ही शहर में रहते थे. एक दिन संध्या ने मनीत को मिलने के लिए अपने घर बुलाया. इत्तफाक की बात यह थी कि उस दिन न तो उस की मां घर पर थी और न ही भाईबहन. मनीत सादे कपड़ों में अनिल को साथ ले कर संध्या के घर रुद्रपुर पहुंचा. दोपहर का समय हो रहा था. प्यार होने के बाद पहली बार दोनों आमनेसामने बैठे थे. संध्या ने दोनों का स्वागत किया. फिर बातों का सिलसिला शुरू हुआ. सामने बैठी संध्या को देख कर मनीत का दिल जोरजोर से धड़क रहा था.

वह आधुनिक विचारों वाली स्वच्छंद युवती थी. उस ने मनीत के साथ आए दूसरे युवक के बारे में पूछा तो मनीत ने उस का परिचय अपने रूम पार्टनर के रूप में दिया. फिर मनीत ने नजर उठा कर कमरे के चारों ओर दौड़ाया. जिस कमरे में वे बैठे थे, वह उन की बैठक थी. एकएक सामान औसत दर्जे वाले कमरे में अपनीअपनी जगह बड़े कायदे से सजा कर रखा हुआ था, जहां उसे होना चाहिए था. घर में कोई हलचल होती न देख मनीत से रहा नहीं गया. उस ने संध्या से पूछा, ‘‘घर में सन्नाटा फैला है. अंकलआंटी या कोई और नहीं है क्या?’’

‘‘फिलहाल, घर में सभी हैं लेकिन इस वक्त मम्मी किसी काम से बाहर गई हैं. उन्हीं के साथ भाईबहन भी गए हैं. और मैं आप के सामने बैठी हूं.’’ संध्या ने बिंदास हो कर जवाब दी.

‘‘ओह, तभी तो घर सूनासूना लग रहा है वरना हलचल तो जरूर रहती यहां.’’

‘‘जी, हलचल की बात कर रहे हैं. घर में भूचाल मची रहती है जब छोटी बहन यहां होती है.’’

‘‘वो कोई अफलातून है क्या?’’

‘‘नहीं, पर उस से कम भी नहीं है.’’

कुछ देर तक दोनों इधरउधर की बातें करते रहे. फिर वे अपने मुद्दे पर आ गए. संध्या ने ही बात आगे बढ़ाई, ‘‘जिंदगी के दोराहे पर ला कर मुझे तुम अकेला छोड़ तो नहीं दोगे?’’

‘‘ऐसे क्यों कह रही हो संध्या. क्या मैं तुम्हें छिछोरा दिखता हूं?’’

‘‘नहीं, बात छिछोरेपन वाली नहीं है मनीत. जमाना बहुत खराब चल रहा है और फिर किसी के चेहरे पर तो कुछ लिखा नहीं है.’’ संध्या ने आशंका जताई.

‘‘ऐसी बात नहीं है संध्या. मुझे ऐसा ही करना होता तो मैं तुम्हारा इतना इंतजार नहीं करता. और न मैं ऐसावैसा हूं. मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं संध्या. तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. तुम्हारे लिए जमाने से लड़ना भी पड़ा तो मैं उस में पीछे हटने वालों में से नहीं हूं. तुम्हारे लिए जमाने से भी लड़ जाऊंगा. लेकिन मुझे गलत मत समझना, प्लीज.’’ मनीत ने सफाई दी.

‘‘तुम तो बुरा मान गए.’’

‘‘इस में बुरा मानने वाली क्या बात है. जो सवाल तुम ने किया, उस का जवाब मैं ने दिया.’’

‘‘मेरी बातों को दिल पर मत लेना प्लीज. मेरे मन में जो आया, सो मैं ने कह दिया.’’

‘‘अब मुझे चलना चाहिए.’’ कलाई पर नजर डालते मनीत ने आगे कहा, ‘‘काफी देर हो गई है मुझे आए हुए.’’

‘‘अरे अभी तो आए हो और अभी जाने के लिए कह रहे हो. मैं अपने दिल के शहजादे को जाने के लिए कैसे कह दूं. अभी तो नजर भर आप को देखा तक नहीं.

कुछ देर और बैठो, तो मेरे दिल को सुकून मिल जाए. फिर चले जाइएगा.’’ ऐसी अनोखी अदा से संध्या ने मनीत के सामने बातों को परोसा कि मनीत चाह कर भी अपनी जगह से हिल नहीं सका. प्यार के निवेदन पर मनीत कुछ देर और बैठा रहा. थोड़ी देर दोनों प्यार भरी बातें करते रहे फिर मनीत अपने कमरे पर लौट आया. संध्या से विदा लेते वक्त उस ने उसे भी अपने कमरे पर आने के लिए कहा. मनीत के आग्रह पर एक दिन शाम के समय संध्या मनीत के कमरे पर उस के साथ पहुंची. उस समय कमरे पर उस के दोनों दोस्त अनिल और जमील थे. दोनों उन के प्यार के बारे में जानते थे. कुछ देर रुकने के बाद संध्या घर लौट गई थी. इस के बाद संध्या को जब भी मौका मिलता था, वह मनीत से मिलने उस के किराए के कमरे पर आ जाती थी. इसी दौरान दोनों सामाजिक मर्यादा तोड़ कर एक हो गए थे. उन के बीच में जिस्मानी संबंध बन चुके थे.

धीरेधीरे उन का प्यार दोनों के घर वालों तक पहुंच चुका था. संध्या और मनीत दोनों के घर वालों ने उन्हें चेतावनी दे दी थी कि वे एकदूसरे से मिलना बंद कर दें. मनीत के घर वालों ने साफ शब्दों में कह दिया था उस की शादी वहीं होगी, जहां वे लोग चाहेंगे. संध्या हरगिज इस घर की बहू नहीं बन सकती है. वह न तो हमारी जातिबिरादरी की है और न ही हमारे हैसियत की. मनीत और संध्या के बीच के रिश्ते इतने आगे बढ़ चुके थे कि वहां से वापस लौटना नामुमकिन था. संध्या मनीत से कह चुकी थी कि वह उसे धोखा नहीं देगा. अगर उस ने धोखा देने की कोशिश की तो इस का परिणाम भयानक हो सकता है, क्योंकि वह आज की नारी है. अपने हक के लिए वह कुछ भी कर सकती है.

मनीत रिश्तों के मकड़जाल में बुरी तरह उलझ कर रह गया था. वह समझ नहीं पा रहा था कि किस ओर जाए. संध्या को अपनाता है तो उस के घर वाले नाराज होते हैं और संध्या को छोड़ता है तो वह नाराज होती है. मनीत न तो घर वालों को नाराज करना चाहता था और न ही संध्या को. कई दिनों से वह इसी उलझन में जकड़ा हुआ था. मोहब्बत करना कोई गुनाह नहीं होता है, मोहब्बत में मर्यादा लांघना गुनाह होता है जो दोनों कर चुके थे. संध्या मनीत पर जल्द से जल्द शादी करने के लिए दबाव बनाने लगी थी. दोनों ने जो गुनाह किया था उस का बीज संध्या की कोख में पल रहा था. सामाजिक मर्यादा को बचाने के लिए उस के पास एक ही विकल्प था जल्द से जल्द शादी कर के गुनाह को छिपा लेना.

घर वालों के दबाव में आ कर मनीत संध्या से पीछा छुड़ाने के लिए उस से कट कर रहने लगा. संध्या मनीत के भाव समझ गई थी. संध्या ने मनीत को समझा दिया कि आसानी से पीछा छूटने वाला नहीं है. फिर क्या था 3 जून, 2020 को संध्या ने कटघर थाने में प्रेमी मनीत के खिलाफ शादी का झांसा दे कर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज करा दी. मनीत के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज होते ही हड़कंप मच गया. संध्या के उठाए कदम से मनीत डर गया था. उस ने जैसेतैसे कर के संध्या को मना लिया. उस ने उस से अपनी शिकायत वापस लेने को कहा. वह जानता था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है. जिस से उस के कैरियर पर एक बड़ा धब्बा लग जाएगा.

काफी मानमनौव्वल के बाद संध्या अपनी शिकायत वापस लेने के लिए तैयार हो गई. मनीत ने उस से वादा किया कि अगले 5 जून को दोनों कोर्टमैरिज कर लेंगे. शादी की बात सुन कर संध्या की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. वह बहुत खुश थी. 4 जून की शाम मनीत ने फोन कर के संध्या को अपने कमरे पर बुला लिया. संध्या घर वालों से यह झूठ बोल कर आई थी कि वह अपनी एक सहेली के घर जा रही है. रात वहीं रुकेगी, अगली सुबह घर वापस लौटेगी. शाम को जब संध्या कमरे पर आई तो दोनों शहर घूमने गए. रात को घर लौटे और मैगी बना कर खाई और कोल्डड्रिंक पी. पूरी रात बातें करते रहे. रात 2 बजे के करीब मनीत ने शादी के सिलसिले में बात करने के लिए घर फोन किया था.

घर वालों ने शादी करने से साफ मना कर दिया. इस बात को ले क र मनीत बुरी तरह नरवस हो गया और सरकारी कारबाइन से गोली मार कर आत्महत्या कर ली. बहरहाल, जांचपड़ताल में यह बात सिद्ध हो गई थी कि पारिवारिक दबाव और प्रेम उलझन में परेशान हो कर मनीत प्रताप सिंह ने सरकारी कारबाइन से गोली मार कर आत्महत्या की है. कटघर थाने में पुलिस ने आत्महत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच की काररवाई बंद कर दी थी. संध्या की जिंदगी एक चक्रव्यूह में उलझ कर रह गई है, जिसे सुलझाने की कोशिश में वह जुटी हुई है.

—कथा में संध्या नाम और स्थान परिवर्तित किया गया है. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Family Dispute : बहू ने सास को लोहे की पाइप से पीट पीट कर मार डाला

Family Dispute : निकिता और रेखाबेन का आए दिन का झगड़ा आम सास बहू के झगड़ों और कहासुनी से अलग नहीं था. लेकिन यह झगड़ा तब सीमाएं लांघ गया जब सास रेखाबेन ने गर्भवती बहू के गर्भ में ससुर का बच्चा होने का इलजाम लगाया. जाहिर है कोई भी औरत ऐसा झूठा आरोप नहीं सह सकती. निकिता भी नहीं…

परिवार में सासबहू के झगड़े सैकड़ों सालों से चले आ रहे हैं. ये विवाद कभी खत्म नहीं हुए और न ही हो सकते हैं. सासबहू की लड़ाई को टीवी की महारानी एकता कपूर ने सीरियल के रूप में घरघर तक नए रूप में पहुंचाया. संपन्न परिवारों में सास और बहू एकदूसरे को मात देने के लिए कुटिल चालों का तानाबाना बुनती रहती थीं, जिस के चलते टीवी सीरियल की कहानियां लंबी खिंचती जाती थीं. अब इन सीरियलों का दौर भले ही खत्म हो गया, लेकिन वास्तविक जीवन में सासबहू के झगड़े जारी हैं. आज भी कोई इक्कादुक्का परिवार ही ऐसे होंगे, जहां सास और बहू में आपस में प्रेमप्यार बना हुआ हो. आमतौर पर सास अपनी बहू पर मनमर्जी थोपना चाहती है और बहू आजादी चाहती है.

विवाद यहीं से शुरू होता है. यह विवाद कभीकभी इतना बढ़ जाता है कि या तो परिवार टूटने की नौबत आ जाती है या फिर अपराध की. कई बार ऐसे किस्से भी सुनने को मिलते हैं जब सास ने अपनी बहू को मार डाला. कभी इस के उलट कहानी भी सामने आती है. यह कहानी गुजरात की राजधानी अहमदाबाद शहर की है. अहमदाबाद के गोता इलाके में स्थित पौश आवासीय सोसायटी रौयल होम्स में फर्स्ट फ्लोर पर बने फ्लैट में रामनिवास अग्रवाल का परिवार रहता है. उन का शहर में पत्थर, टाइल्स का बड़ा कारोबार है. बेटा दीपक भी उनके साथ व्यापार में हाथ बंटाता है.

घरपरिवार में मौज थी. केवल 4 सदस्यों के इस परिवार में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. खुद रामनिवास अग्रवाल, उन की पत्नी रेखा बेन, बेटा दीपक और बहू निकिता उर्फ नायरा. रामनिवास की उम्र कोई 55 साल है. उन की पत्नी रेखा करीब 52 साल की थी. बेटा दीपक लगभग 30-32 साल का और बहू निकिता करीब 29 साल की. दीपक की शादी इसी साल 16 जनवरी को निकिता से हुई थी. निकिता राजस्थान के जिला अजमेर के ब्यावर निवासी सुरेशचंद्र अग्रवाल की बेटी है. रामनिवास भी मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले हैं. उन का परिवार पहले पाली जिले में सुमेरपुर के पास जवाई बांध इलाके में रहता था. बाद में रामनिवास व्यापार के सिलसिले में अहमदाबाद चले गए. वहां उन का कारोबार अच्छा चल गया.

रामनिवास भले ही गुजरात में बस गए थे, लेकिन राजस्थान की माटी से उन का मोह नहीं छूटा था. इसलिए बेटे दीपक के लिए जब राजस्थान के ब्यावर से निकिता का रिश्ता आया, तो उन्होंने घरपरिवार देख कर हामी भर दी. वैसे भी ब्यावर के रहने वाले सुरेशचंद्र अग्रवाल साधन संपन्न थे. उन का भी अच्छा कारोबार था. पैसों की कोई कमी नहीं थी. निकिता में भी कोई कमी नहीं थी. तीखे नाकनक्श वाली निकिता ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमकौम तक की पढ़ाई करने के बाद सिक्किम यूनिवर्सिटी से फायनेंस में एमबीए की डिगरी भी हासिल की थी. दीपक और निकिता की शादी हो गई. शादी में सुरेशचंद्र अग्रवाल ने दिल खोल कर पैसा खर्च किया. किसी बात की कमी नहीं छोड़ी. पत्नी के रूप में सुंदर और पढ़ीलिखी निकिता को पा कर दीपक भी निहाल हो गया.

दीपक भी हैंडसम था. निकिता भी पति के रूप में दीपक को पा कर खुद पर अभिमान करती थी. दोनों का दांपत्य जीवन खुशी से चलने लगा. निकिता की भले ही शादी हो गई थी, लेकिन पीहर से उस का मोह नहीं छूटा था. वह पीहर जाती, तो महीनेबीस दिन में आती. हालांकि इस बीच मार्च में लौकडाउन हो गया था. लौकडाउन के दौरान निकिता को करीब 3-4 महीने पीहर में ही गुजारने पड़े. उस का कहना था कि ट्रेन और बसें बंद होने तथा एक से दूसरे राज्य में लोगों की आवाजाही पर रोक होने से वह अहमदाबाद नहीं जा सकी थी. पढ़ीलिखी बहू और गृहिणी सास की नोंकझोंक बहू निकिता के ज्यादा समय पीहर में रहने से सास रेखा बेन को कोई सुख नहीं मिल पा रहा था. वैसे तो घर में कामकाज के लिए बाई आती थी. फिर भी रेखा बेन चाहती थी कि कोई उस की भी देखभाल करने वाला हो.

बहू उस के कामकाज में हाथ बंटाए. इस बात को ले कर रेखा और निकिता में कई बार खटपट हो जाती थी. दहेज को ले कर भी रेखा उसे ताने मारती और उस के कामकाज में मीनमेख निकालती रहती थी. वैसे भी आमतौर पर बढ़ती उम्र के लिहाज से हर महिला चाहती है कि जैसे उस ने घर को संवारा है, वैसे ही बहू भी घरपरिवार की जिम्मेदारी संभाले, लेकिन निकिता शादी के बाद आधे से ज्यादा समय पीहर में ही रही थी. ऐसी हालत में रेखा बेन को ही घरपरिवार में खटना पड़ता था. उसी पर पति की जिम्मेदारी थी और बेटे की भी. इसी बीच, अक्तूबर के महीने में निकिता के दादा का निधन हो गया, तो वह फिर अपने मायके चली गई. इस बार भी वह मायके में कुछ ज्यादा दिन रुक गई. ससुर और पति ने कई बार फोन किए, तो वह 21 अक्तूबर को अहमदाबाद लौट आई.

ससुराल आ कर निकिता ने पति और सास को अपने गर्भवती होने की बात बताई. यह सुन कर दीपक तो खुशी से झूम उठा, लेकिन रेखा बेन के माथे पर सिलवटें पड़ गई. रेखा बेन को बहू के गर्भवती होने से कोई खुशी नहीं हुई. उसे शक था कि निकिता के पेट में बेटे दीपक का नहीं बल्कि ससुर रामनिवास का गर्भ है. रेखा बेन को अपने पति पर भी शक था. उस का शक इसलिए भी था कि ससुर और बहू खूब हंसबोल कर बातें करते थे. मोबाइल पर चैटिंग भी करते थे. हालांकि रेखा बेन ने कभी ससुर और बहू को गलत हरकत करते हुए नहीं देखा, लेकिन उस के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाता रहता था. रेखा पहले से ही बहू से खुश नहीं थी. अब उसे उस के चरित्र पर भी शक होने लगा था.

शक ऐसा कीड़ा है, जिस का कोई इलाज नहीं है. रेखा पहले तो दहेज को ले कर और उस के कामकाज तथा पीहर में ज्यादा समय रहने पर ऐतराज उठाती थी. अब वह उस के चरित्र पर भी अंगुली उठाने लगी. इस से सासबहू के झगड़े बढ़ गए. रेखा को जब भी मौका मिलता, वह निकिता को ताने मारने से नहीं चूकती. रोजाना दिन में 2-4 बार किसी न किसी बात पर रेखा और निकिता में कहासुनी हो ही जाती थी. रेखा बहू की शिकायत अपने बेटे और पति से करती, तो वह हंस कर टाल देते थे. इस बीच, रामनिवास कोरोना से संक्रमित हो गया. उसे 24 अक्तूबर को निजी अस्पताल में भरती करा दिया गया. पति के कोरोना संक्रमित होने से रेखा बेन चिड़चिड़ी हो गई.

इस के बाद 27 अक्तूबर की रात करीब 8 बजे की बात है. घर पर केवल रेखा और निकिता ही थी. दीपक अपने टाइल्स, पत्थर के औफिस गया हुआ था. रेखा उस समय रसोई में रात के भोजन की तैयारी कर रही थी. इसी दौरान रेखा अपनी बहू को ताने मारने लगी. रेखा के हाथ में लोहे का एक पाइप था. वह उस पाइप को निकिता के पेट पर धंसा कर कहने लगी, तेरे पेट में ये जो बच्चा है, वह मेरे बेटे का नहीं बल्कि मेरे पति का है. निकिता बर्दाश्त नहीं कर पाई सास के मुंह से ऐसी बातें सुन कर निकिता को गुस्सा आ गया. उस ने रेखा के हाथ से वह पाइप छीन लिया और बिना सोचेसमझे उस के सिर में दे मारा.

50-52 साल की रेखा बेन जवान बहू का विरोध नहीं कर सकी. उस के सिर से खून बहने लगा. वह फर्श पर गिर पड़ी. इस के बाद भी निकिता का गुस्सा शांत नहीं हुआ. उस ने पाइप से सास के सीने, पेट और चेहरे पर कई वार किए. पाइप के लगातार हमलों को रेखा सहन नहीं कर सकी. उस के शरीर से कई जगह से खून रिसने लगा और थोड़ी ही देर में उस के प्राण निकल गए. जब निकिता का गुस्सा शांत हुआ, तो वह घबरा गई. उस की सोचनेसमझने की शक्ति जवाब दे गई थी. कुछ देर बैठ कर वह सोचती रही कि अब क्या करे? कुछ देर विचार करने के बाद उस ने सास की हत्या को आत्महत्या का रूप देने की योजना बनाई.

उस ने फ्लैट में ही रेखा के शव पर चादर डाल कर उसे जलाने का प्रयास किया. उसे यह नहीं पता था कि इंसान का शव इतनी आसानी से नहीं जलता. शव नहीं जला, तो वह हताश हो कर अपना सिर पकड़ कर बैडरूम में जा बैठी. इस बीच, पड़ोसियों ने सासबहू के बीच झगड़े और मारपीट की तेज आवाजें सुनीं, तो उन्होंने रामनिवास के फ्लैट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन निकिता ने दरवाजा नहीं खोला. कई बार घंटी बजाने और कुंडी खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों ने रामनिवास को फोन किया. रामनिवास अस्पताल में थे. पड़ोसी की बात सुन कर वे चिंतित हो उठे. उन्होंने बेटे दीपक को तुरंत घर जाने को कहा. दीपक उस समय अपना औफिस बंद कर चाणक्यपुरी ब्रिज स्थित मंदिर में हनुमानजी के दर्शन करने गया हुआ था. वह रात करीब साढ़े 9 बजे फ्लैट पर पहुंचा.

उस ने घंटी बजाई, लेकिन निकिता ने गेट नहीं खोला. उस ने गेट की कुंडी भी खटखटाई, लेकिन फिर भी दरवाजा नहीं खुला, तो उस ने मां और बीवी के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन दोनों ने ही फोन नहीं उठाया. उसे लगा कि निकिता ने मां से झगड़े के बाद गेट बंद कर लिया होगा और अब वह गुस्से में गेट नहीं खोल रही है. मां की लाश देख होश उड़े थकहार कर उस ने पड़ोसियों की सीढि़यों के रास्ते अपने फ्लैट में जाने की कोशिश की, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. बाद में उस ने पड़ोसियों से पाइप की बनी सीढ़ी का इंतजाम किया. इस सीढ़ी पर चढ़ कर वह रसोई के रास्ते अपने फ्लैट में पहुंचा. उस की मां का कमरा बंद था. उस ने कमरा खोला, तो मां की खून से लथपथ अधजली लाश देख कर दीपक सहम गया.

मां की लाश के पास ही खून से सना लोहे का एक पाइप पड़ा था. निकिता अपने बैडरूम में चुपचाप बैठी थी. उस ने उस से पूछा कि यह सब क्या और कैसे हुआ?  निकिता ने दीपक को बताया कि मम्मीजी ने पहले उस से झगड़ा किया. फिर वे अपने कमरे में चली गईं. पता नहीं उन्होंने खुद कैसे अपना यह हाल बना लिया? शायद उन्होंने सुसाइड कर लिया. दीपक को निकिता की बातें गले नहीं उतर रही थीं. अगर रेखा बेन सुसाइड करतीं, तो खून से लथपथ कैसे हो जातीं और फिर उन का शव कैसे जलता? दीपक ने निकिता से पूछा कि घर में कोई और आदमी आया था क्या? निकिता ने मना कर दिया.

दीपक ने रात को ही फोन नंबर 108 पर एंबुलेंस सेवा को फोन किया. एंबुलेंस के साथ आए डाक्टर और चिकित्साकर्मियों ने रेखा बेन की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया. इस के बाद दीपक ने पुलिस को फोन किया. पुलिस उस के फ्लैट में पहुंच गई. पुलिस ने दीपक से पूछताछ की. दीपक ने पिता का फोन आने से ले कर सीढ़ी के रास्ते फ्लैट में चढ़ने और मां का लहूलुहान शव पड़ा होने की सारे बातें बता दीं. पुलिस ने निकिता से पूछताछ की, तो उस ने वही बातें कहीं, जो दीपक को बताई थीं. मौके के हालात देख कर पुलिस को भी निकिता की कहानी पर भरोसा नहीं हुआ. रात ज्यादा हो गई थी. फिर भी पुलिस ने रात को ही घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी.

फुटेज में इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि दीपक के फ्लैट में बाहर से कोई आदमी आया था. पुलिस ने पंचनामा बना कर शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया. मामला संदिग्ध था. इस के लिए निकिता से पूछताछ जरूरी थी. पुलिस उसे थाने ले गई. दीपक की शिकायत पर सोला थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने मौके से खून से सना लोहे का पाइप बरामद कर लिया था. पुलिस ने थाने में निकिता से पूछताछ की. वह कहती रही कि सास और उस का झगड़ा हुआ था. इस के बाद सास अपने कमरे में चली गई और अंदर से कमरा बंद कर लिया. बाद में कैसे और क्या हुआ, इस का उसे कुछ पता नहीं है.

निकिता ने पुलिस को बताया कि उस की सास पिछले कुछ सालों से ऐसी बीमारी से पीडि़त थी कि कोई उसे छू ले, तो वह तुरंत नहाती थीं. मैडिकल की भाषा में इस बीमारी को औब्सेसिव कंपजिव डिसऔर्डर (ओसीडी) कहा जाता है. दीपक ने भी अपनी मां के ऐसी बीमारी से ग्रस्त होने की बात मानी. पुलिस ने दीपक से उस के घरपरिवार और सासबहू के रिश्तों के बारे में पूछा. इस में पता चला कि रेखा बेन और निकिता में दहेज और घरेलू कामकाज को ले कर झगड़े होते रहते थे. इस पर पुलिस अधिकारियों ने निकिता से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की.

आखिर दूसरे दिन 28 अक्तूबर को सुबह निकिता ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस के अधिकारी भी हैरान रह गए. निकिता ने बताया कि उस की सास पुराने खयालों की थी. वह उसे कभी दहेज पर तो कभी किसी दूसरी बात पर ताने मारती थी. शादी के बाद से ही सास से उस की पटरी नहीं बैठी थी. अभी जब वह पीहर से ससुराल आई और मम्मीजी को अपने गर्भवती होने की बात बताई, तो उन की त्यौरियां चढ़ गईं. उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा. ससुरजी के अस्पताल में भरती होने के बाद मम्मीजी मेरे गर्भ को ले कर अनापशनाप बातें कहने लगीं. उस दिन जब उन्होंने उस से गर्भ ससुर का होने की बात कही, तो गुस्से में वह अपना आपा खो बैठी और उन के हाथ से पाइप छीन कर ताबड़तोड़ हमले किए. इस से उन की मौत हो गई. निकिता ने सास की हत्या करने की बात कबूल कर ली थी.

उस ने पुलिस को बताया कि सास की हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उस ने वहां फैले खून को चादर से साफ किया. फिर शव पर चादर डाल कर आग लगा दी ताकि शव जल जाए, लेकिन शव नहीं जला. इस के बाद उस ने अपने मोबाइल से ससुर के वाट्सएप चैट और मैसेज डिलीट किए. मोबाइल से मैसेज डिलीट करने की बात सामने आने पर पुलिस ने निकिता के साथ परिवार के चारों लोगों के मोबाइल जब्त कर लिए. इन की जांच की, तो निकिता के मोबाइल में एक मैसेज मिला. 24 अक्तूबर के इस मैसेज में ससुर रामनिवास ने लिखा था कि तुम अभी दीपक से दूर ही रहना.

स्वीकारोक्ति के बाद निकिता की स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने निकिता और उस की सास के खून से सने कपड़े भी जब्त कर लिए. मोबाइल फोन के साथ इन कपड़ों को भी जांच के लिए विधिविज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया. एफएसएल टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने दूसरे दिन डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से रेखा बेन के शव का पोस्टमार्टम कराया. बाद में दीपक को शव सौंप दिया गया. घर वालों ने रेखा बेन का अंतिम संस्कार कर दिया. कोरोना जांच में निकिता निगेटिव मिली. इस के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया. पुलिस ने निकिता को उस के फ्लैट पर ले जा कर वारदात का सीन रिक्रिएट किया.

इस दौरान पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि निकिता और रेखा बेन के बीच झगड़ा कैसे शुरू हुआ होगा. इस के बाद निकिता ने कैसे उस की हत्या की होगी. सीन रिक्रिएट के जरिए पुलिस ने यह बात जानने की भी कोशिश की कि क्या निकिता ने अकेले ही सास की हत्या की या इस में किसी दूसरे आदमी ने भी उस की मदद की? हालांकि पुलिस को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला. बेटी के हाथों सास की हत्या की सूचना मिलने पर राजस्थान के ब्यावर शहर से निकिता के मातापिता अहमदाबाद पहुंचे. पहले वे समधन रेखा बेन की अंतिम क्रिया में शरीक हुए. बाद में वे सोला पुलिस स्टेशन जा कर हत्या आरोपी बेटी निकिता से मिले.

उसे पुलिस हिरासत में देख कर मांबाप के आंसू बह निकले. निकिता भी रो पड़ी. सुबकते हुए उस ने अपने मातापिता से केवल इतना ही कहा, ‘मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई.’ पुलिस ने जांचपड़ताल के दौरान पड़ोसियों से भी पूछताछ की. उन्होंने बताया कि रेखा और निकिता के बीच आमतौर पर रोजाना ही किसी ना किसी बात पर झगड़ा होता था. उस दिन भी उन्होंने दोनों के बीच झगड़े और मारपीट की तेज आवाजें सुनी थीं. इस के बाद ही रामनिवास को फोन किया था.

कथा लिखे जाने तक पुलिस ने निकिता को जेल भिजवा दिया था. पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही थी कि क्या निकिता के अपने ससुर से किसी तरह के संबंध थे? हालांकि पुलिस को एक मोबाइल चैटिंग के अलावा इस बारे में दूसरा कोई प्रमाण नहीं मिला. मोबाइल चैटिंग से भी यह बात साफ नहीं होती कि निकिता के ससुर से किसी तरह के संबंध थे. बहरहाल, 2 महीने की गर्भवती निकिता अपनी सास की हत्या के आरोप में जेल पहुंच गई. ससुर रामनिवास पर बहू से संबंधों का आरोप लग गया. पति दीपक बीच मंझधार में फंस गया.

उस के सामने संकट आ खड़ा हुआ कि वह पिता पर शक करे या पत्नी पर. निकिता के पेट में किस का गर्भ है, यह तो वही जाने. शक की बुनियाद पर एक खातेपीते संपन्न परिवार के रिश्तों में ऐसी दरार आ गई, जो जिंदगी भर नहीं पाटी जा सकती.

 

Rajasthan Crime : तीन बहुओं ने मिलकर सास की गला दबाकर की हत्या

Rajasthan Crime : एक जमाना था जब सास बहू पर रौब दिखाना अपना अधिकार समझती थी. इतना ही नहीं, वह उसे अपनी अंगुलियों पर नचाती थी. लेकिन आज की बहुएं पहले जैसी नहीं हैं. वह अपने जीवन में किसी की दखलअंदाजी पसंद नहीं करतीं. इस बात को कमला देवी समझ पाती तो शायद उस की 3 बहुओं को हत्या के आरोप में जेल नहीं जाना पड़ता. समाज में सास और बहू के संबंधों पर कई टीवी धारावाहिक बने हैं. सास बहू का रिश्ता हर परिवार में देखने  को मिलता है. ज्यादातर सास की अपनी बहुओं से कोई न कोई शिकायत रहती ही है. बहू भले ही कितनी भी सुघड़ और समझदार हो.

भले ही वह सास को अपनी जन्मदात्री मां के बराबर दर्जा दे कर उन के इशारों पर दिनरात काम करती रहे. मगर सास नामक प्राणी को बहू से इस के बाद भी शिकायत ही रहती है. कुछ ही सास होती हैं जो बहू को बेटी समझ कर लाड़प्यार से रखती हैं वरना तो अधिकांश सास अपनी बहू के काम में कोई न कोई मीनमेख निकालती ही रहती हैं. कहने का मतलब है कि ऐसी सास कभी भी अपनी आदत से बाज नहीं आती.  लेकिन अब जमाना काफी बदल गया है. आज की बहुओं को सास द्वारा उन के काम में मीनमेख निकालना पसंद नहीं है. वह अपनी लाइफ में पति के अलावा किसी और का हस्तक्षेप पसंद नहीं करतीं. इतने पर भी सास यदि तानाशाही दिखाती रहे तो परिणाम भयानक सामने आते हैं.

राजस्थान के जोधपुर जिले के थाना मतोड़ा के अंतर्गत एक गांव आता है हरलाया रामदेव नगर. इस में दमाराम मेघवाल अपने परिवार के साथ रहते हैं. उन के परिवार में पत्नी कमलादेवी के अलावा 5 बेटे हैं. उस ने अपने पांचों बेटों की शादियां कर दी थी. सभी बेटे अपने परिवार के साथ अलगअलग मकान बनवा कर रह रहे थे. दमाराम की बीवी कमलादेवी भी कड़क स्वभाव की सास थी. वह अपनी बहुओं को दबाव में रखना चाहती थी. उस ने ऐसा ही किया. बड़े और मंझले बेटे की शादी हुई तो इन दोनों बहुओं को उस ने अपने नियंत्रण में रखा. उन से सास कुछ भी कहती तो बहुओं की हिम्मत नहीं होती थी कि वे सास को पलट कर जवाब दें. सास द्वारा काम में टोकाटाकी व हायतौबा मचाने पर भी वे चुप रहती थीं.

जब छोटे 3 बेटों पुखराज, मिश्रीलाल व मदनराम के विवाह हो गए तब दोनों बड़े बेटे अलग हो गए. पुखराज व मिश्रीलाल की बीवियां प्रेमा एवं पिंटू सगी बहनें थीं. वहीं मदनराम की पत्नी ओमा इन की चचेरी बहन थी. तीनों बहनें एक ही परिवार के सगे भाइयों में ब्याही थीं.  पुखराज, मिश्रीलाल एवं मदनराम राजमिस्त्री का काम करते थे. ज्यादातर वे अपने गांव या आसपास के गांवों में काम करते थे. वे सुबह नाश्ता कर के अपने काम पर चले जाते और दोपहर में घर आ कर खाना खा कर थोड़ा सा आराम कर के पुन: काम पर चले जाते थे. दैनिक मजदूरी 7-8 सौ रुपए थी. इस से परिवार का भरणपोषण आराम से हो रहा था. इन तीनों भाइयों के घर आसपास ही थे जबकि बड़े भाइयों के घर थोड़े दूर थे.

तीनों बहनें ब्याही एक ही परिवार में तीनों बहनें प्रेमा, पिंटू व ओमा मिलजुल कर रहती थीं. ससुराल में अगर सगी बहन या चचेरी बहन ब्याही होती है तो उन में कुछ ज्यादा ही बनती है. इन तीनों के पति काम पर चले जाते, तो तीनों बहनें घर का काम निबटा कर एक जगह पर इकट्ठा हो कर बतियाती रहती थीं. जिस से इन का टाइम पास हो जाता था. मगर इन के टाइम पास में सास अकसर खलल डाल देती थी. सास कमला देवी उन को ताने देती कि घर के काम में मन नहीं लगता. जब देखो तब बैठ कर गप्पे मारती रहती हो. जब बहुएं कहतीं कि घर का सारा काम कर लिया है, तो सास उन पर चढ़ दौड़ती. वह उन्हें 10 काम और बता देती कि यह नहीं किया, वो नहीं किया. तीनों बहनों को सास गालीगलौज देने लगती तो रुकती ही नहीं.

वह पूरा घर सिर पर उठा लेती थी. तीनों बहनें परेशान हो जातीं. मगर कमला देवी को कोई फर्क नहीं पड़ता. उस के सामने प्रेमा पड़ती तो उसे गाली एवं काम में मीनमेख व टोकाटाकी. पिंटू पड़ती तो वही मीनमेख और हायतौबा. ओमा पड़ती तो उसे भी सास की बेवजह हायहाय सुननी पड़ती थी. अगर ये बहुएं अपनी सास से कुछ कहतीं तो वह उन पर बिफर जाती और अपने बेटों के घर आने पर बहुओं की शिकायत करती कि यह तीनों बैठ कर दिन भर गप्पें मारती रहती हैं. कामधाम कुछ नहीं करतीं. अगर मैं कुछ कहती हूं तो यह मुझे आंखें दिखाती हैं और जुबान लड़ाती हैं. मुझ से इस तरह बात करती हैं जैसे मैं इन की बहू हूं.

बेटे मां की बात सुन कर अपनी बीवियों को समझाते कि मां जो कुछ कहती है. उन के भले के लिए कहती है. वह बूढ़ी हो गई हैं अब कितने दिन की मेहमान हैं. उन का सम्मान किया करो. जुबान बंद रखा करो.  बेटे अपनी बीवियों को समझा कर जाते और मां से भी कहते कि वह भी क्यों बेवजह परेशान होती हैं. अगर बहुएं काम नहीं करें तो मत करने दो. उन का बिगड़ेगा, तुम्हारे ऊपर क्या फर्क पड़ेगा. तुम रामनाम की माला जपो. मगर बेटों के समझाने का भी कमला देवी पर कोई असर नहीं पड़ता. लिहाजा उस के और तीनों बहुओं के बीच हर रोज कलह और विवाद होता था. कलह के कारण सब परेशान थे. मगर कलह करने वाले अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे थे.

कमलादेवी 62 साल की थी फिर भी वह अपनी बकरियां ले कर जंगल में चराने के लिए हर रोज जाती थी. दोपहर तक बकरियां चरा कर वह घर आ जाती थी. घर आ कर बकरियों को बाड़े में बांध कर फिर वह आराम करती थी. बेटे जब दोपहर में खाने घर आते थे तो मां घर पर आराम करते मिलती थी. लेकिन 28 अगस्त, 2020 को दयाराम के तीनों बेटे पुखराज, मदन एवं मिश्रीलाल मेघवाल दोपहर को खाना खाने घर आए तो बकरियां घर के बाहर खुले में खड़ी थीं.

यह देख कर वे चौंके कि बकरियां आज खुली कैसे हैं. क्योंकि मां पहले बकरियां बाड़े में बांधती थी. मदन व पुखराज ने मां को आवाज लगाई. मगर कोई जवाब नहीं मिला. घर में देखा मां वहां भी नहीं थी. मा कहां चली गई. यह उन्होंने अपनी बीवियों से पूछा. बीवियों ने कहा कि हमें पता नहीं. वे कहां गईं. तब मदन, पुखराज मां को देखने घर के बाहर बने कमरे में गए. कमरे में देखते ही उन की चीख निकल गई. मां गले में फंदा डाल कर छत पर पंखे से लटकी हुई मरी पड़ी थी. यह नजारा देख कर बेटों के हाथपैर कांपने लगे. वे रोने लगे. दोपहर में रोने की आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग भी वहां आ गए. गांव वाले समझ नहीं पा रहे थे कि कमला देवी ने इस उम्र में आत्महत्या क्यों की? बहुएं तो बुक्का फाड़ कर रो रही थीं.

किसी ने मृतका के पीहर (मायके) हरिओमनगर भीकमकोर में सूचना दे दी. भीकमकोर से मृतका के पीहर से भाईभतीजे शाम होतेहोते हरलाया रामदेव नगर आ गए. पीहर वालों ने जब कमला देवी को पंखे से लटके देखा तो उन्हें लगा कि कमला देवी की हत्या कर के शव फंदे पर लटकाया गया है. मृतका के बेटे और बहुएं यह मानने को तैयार नहीं थे. मृतका के पीहर वालों के संदेह करने का कारण था फंदा पंखे के हुक से न बांध कर पंखे के पाइप से बांधना. प्लास्टिक का पाइप वजन से पंखे सहित सुसाइड करने की स्थिति में झटका लगने से टूट सकता था. मगर वह टूटा नहीं था. इस पर पीहर वालों ने शक जताया. उन्होंने मृतका की बहुओं प्रेमा, पिंटू, ओमा से पूछा तो वे कहती रहीं कि सास ने आत्महत्या की है.

जबकि मृतका कमला देवी के भतीजे प्रभुराम ने बताया कि वह 25 अगस्त, 20 को जब बुआ कमला से मिलने आया था. तब बुआ ने रोते हुए उसे बताया था कि पुखराज की पत्नी प्रेमा उर्फ प्रेमी उस की हत्या कर सकती है. वह मारने की धमकियां दे रही है. तब भतीजे प्रभुराम ने बुआ को दिलासा दिया था कि वह वापस आ कर बात उस के बेटों से करेगा. इसी बीच 28 अगस्त, 2020 की शाम को प्रभुराम को करनाणियों ढाणी के रिश्तेदार उस के पास हरिओमनगर भीकमकोर आए. उन्होंने बताया कि तुम्हारी बुआ कमला देवी का शायद काम तमाम कर दिया है. प्रभुराम ने अपनी बुआ के बेटों पर आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें घटना की जानकारी तक नहीं दी. रिश्तेदारों से सुन कर प्रभुराम अपने भाईभतीजों के साथ हरलाया रामदेवनगर आए.

प्रभुराम ने बुआ कमला देवी की हत्या कर के शव पंखे पर लटकाने का आरोप लगाया. रात भर इस हत्याकांड पर घर में चर्चा होती रही. मृतका की बहुओं से भी पूछताछ की गई और झांसा दिया गया कि वे सच बता दें. तब प्रेमा, पिंटू और ओमा ने सभी के सामने स्वीकार कर लिया कि उन तीनों ने ही अपनी सास की गला दबा कर हत्या करने के बाद शव पंखे से लटकाया था. अब सच सामने आ चुका था. 3 बहुओं ने मिल कर सास की सांस रोक दी थी. लिहाजा 29 अगस्त, 2020 को प्रभुराम मेघवाल ने थाना मतोड़ा जा कर थानाप्रभारी नेमाराम इनाणिया को अपनी बुआ कमला देवी की हत्या की सूचना दे कर मुकदमा दर्ज करा दिया. इस के बाद थानाप्रभारी प्रभुराम को ले कर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे.

कमला देवी का शव जिस स्थिति में था. देख कर संदेह स्वाभाविक था कि मारने के बाद शव फांसी पर लटकाया गया है. उन्होंने सूचना उच्चाधिकारियों को भी दे दी. एसपी (जोधपुर ग्रामीण) राहुल बारहठ से निर्देश प्राप्त कर थानाप्रभारी नेमाराम ने काररवाई शुरू कर मृतका का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मैडिकल बोर्ड बना कर मृतका का पोस्टमार्टम कराया गया. जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलती तब तक पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ सकती थी. पुलिस पूछताछ में मृतका के बेटे और बहुएं आदि कह रहे थे कि मां ने आत्महत्या की है. जबकि मृतका के पीहर वाले सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगा रहे थे.

पोस्टमार्टम के बाद कमला देवी का शव उस के परिजनों को सौंप दिया. उसी रोज मृतका का दाह संस्कार कर दिया गया. पुलिस को मृतका कमला देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबा कर हत्या की बात सामने आई. पोस्टमार्टम में हुआ हत्या का खुलासा  मामला अब एकदम साफ हो चुका था. पुलिस का मकसद अब हत्यारे तक पहुंचना था. इस के बाद थानाप्रभारी ने मृतका कमला देवी के घर जा कर कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में प्रेमा उर्फ पेमी पत्नी पुखराज, पिंटू पत्नी मिश्रीलाल, ओमा पत्नी मदनराम मेघवाल ने सास कमला देवी का गला दबा कर हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. तब पुलिस ने पहली सितंबर, 2020 को प्रेमा, पिंटू आर ओमा को गिरफ्तार कर लिया. इन्हें थाने मतोड़ा ला कर पूछताछ की गई.

पूछताछ में उन्होंने बताया कि सास उन के हर काम में टांग अड़ाती थी, हर काम में किचकिच करने और बेवजह लड़ाईझगड़ा करने के कारण वे बहुत परेशान हो गई थीं. इस के बाद उन्होंने सास की हत्या की योजना बना ली. फिर 28 अगस्त 2020 को दोपहर में सास जब बकरियां चरा कर घर लौटी तो आते ही उस ने तीनों बहुओं से झगड़ना शुरू कर दिया. तब तीनों ने पकड़ कर सास को गिरा दिया और गला दबा कर मार डाला. इस के बाद उन्होंने उस के गले में रस्सी का फंदा डाल कर उस का शव कमरे में लगे छत के पंखें पर लटका दिया. ताकि मामला आत्महत्या का लगे. लेकिन किसी के देख लेने के डर से जल्दबाजी में शव पंखे के ऊपर लगे हुक से बांधने के बजाय प्लास्टिक पाइप से बांध दी. शव जमीन को भी छू रहा था. उन्होंने बहुत कोशिश की मगर खून करने के बाद तीनों डर के मारे कुछ कर नहीं पा रही थीं.

इस कारण जब मृतका के पीहर वालों एवं पुलिस ने शव लटके देखा तो संदेह हो गया था. मगर बगैर किसी सबूत के किसी पर आरोप लगाना भी ठीक नहीं था. ऐसे में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने तक गुप्त रूप से इस घटना की तहकीकात की. इस जांच में सामने आया कि बहुओं ने सास की हर रोज की किचकिच से परेशान हो कर साजिश रच कर हत्या की थी.  वृद्ध सास अगर अपनी बहुओं को बेटियां मान कर हर काम में मीनमेख नहीं निकालती और बहुओं के साथ प्यार का बर्ताव करती तो शायद बहुएं उस का काल नहीं बनतीं. तीनों बहुओं प्रेमा उर्फ पेमी, पिंटू और ओमा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें पहली सितंबर 2020 को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन तीनों बहुओं को अजमेर जेल भेजने के कोर्ट ने आदेश दिए.

अजमेर जेल भेजने से पहले इन तीनों हत्यारोपी बहुओं की कोरोना जांच करवाई गई. अगर कमला देवी अपनी आदत सुधार लेती या फिर उन की तीनों बहुएं सास की आदत है कह कर या सुन कर आवेश में न आतीं तो उन्हें आज यह दिन नहीं देखना पड़ता. सास की हत्या कर की आरोपी तीनों बहुएं सैकड़ों किलोमीटर दूर अजमेर जेल में बंद हैं. इन तीनों के पति और बच्चे अपने हाल पर हैं. समाज में घरपरिवार की इज्जत गई सो अलग. कलह के कारण पूरा परिवार बिखर चुका है. गलत राह पकड़ने से पहले एक बार सोच लें तो कभी परिवार नहीं बिखरेगा. वरना गृहकलेश में ऐसा ही होता है.

 

Family Dispute : सास ने 10 लाख की सुपारी देकर कराई दामाद की हत्या

Family Dispute : यशवीर उर्फ कपिल ने पुलिस अधिकारी ममता पवार से अंतरजातीय विवाह किया था. लेकिन एक दिन अचानक ममता की मृत्यु हो गई. इस के बाद ममता की अकूत संपत्ति को ले कर कपिल और उस की सास शिमला पवार के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि…

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के असोड़ा गांव में बालकिशन सैनी रहते थे. वह खेतीकिसानी करते थे. परिवार में पत्नी निर्मला और 3 बेटे बिरजू, सुखबीर और यशवीर के अलावा 3 बेटियां थीं. सब से छोटा यशवीर था. यश पड़ने में काफी तेज था. उस का पढ़ाई में मन देख कर पिता बालकिशन और मां निर्मला काफी खुश होते थे कि कम से कम एक बेटा तो पढ़ कर अपनी जिंदगी संवार लेगा. आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद बालकिशन ने बेटे की पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आने दी. यश ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगा. बाद में उस ने वहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए कोचिंग देनी शुरू कर दी. दिल्ली में रहते यशवीर ने एलएलबी की और वकील बन गया.

कुछ ही दिनों में उस के कोचिंग सेंटर में काफी छात्रछात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने लगे. यश का पढ़ाने का तरीका काफी अच्छा था, जिस से छात्रछात्राएं उस से पढ़ने में रुचि लेते थे. उस के कोचिंग सेंटर में पढ़ने आने वाली छात्राओं में ममता पवार नाम की भी एक छात्रा भी थी. वह भी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लगी थी. ममता का परिवार बागपत जिले में रहता था. उस के पिता का नाम लक्ष्मीचंद्र पवार और मां का नाम शिमला पवार था. ममता 3 भाईबहनों में सब से बड़ी थी. पिता बड़े बिजनेसमैन थे. आगरा में उन की काफी संपत्ति थी, जिस वजह से ममता की मां शिमला आगरा में ही रहती थीं. उन का घर आगरा के थाना छत्ता अंतर्गत जाटनी के बाग के एक अपार्टमेंट में था. यह फ्लैट ममता और शिमला के संयुक्त नाम पर था.

ममता पढ़ने में काफी तेज थी. किसी भी प्रश्न के जवाब से जब तक वह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक उस का पीछा नहीं छोड़ती थी. इस में यश उस की मदद करता था. यश भी उस की उत्सुकता और पढ़ाई के प्रति अच्छा रुख देख कर खुश होता था. इसलिए वह उसे किसी भी प्रश्न का जवाब समझाने के लिए अतिरिक्त समय दे देता था. इस अतिरिक्त समय में वे दोनों ही होते थे. पढ़नेपढ़ाने के दौरान दोनों काफी खुल गए थे, इसलिए बेझिझक एकदूसरे से बातें करते थे. पढ़ाई के अलावा भी उन के बीच इधरउधर की बातें होने लगीं. दोनों को एक साथ रहना और बातें करना अच्छा लगने लगा. दोनों की उम्र में कोई खास अंतर नहीं था. इसलिए दोनों एकदूसरे से दोस्तों की तरह व्यवहार करने लगे. साथ समय बिताते, घूमने जाते और साथ खातेपीते.

दिल की बात की जाहिर इस सब के चलते दोनों के दिल काफी करीब आ गए. दोस्ती से वे कब प्यार में पड़ गए, उन्हें पता ही न चला. जब दिल की धड़कनें और निगाहें उन के प्यार को जताने लगीं तब उन्हें एहसास हुआ कि वे प्यार में आकंठ डूब गए हैं. दिल की बात जुबां पर लाने के लिए दोनों की जुबान कुछ कहने से पहले ही लड़खड़ा जाती थी. एक दिन एकांत के क्षणों में ममता मेज पर कोहनियों के बल दोनों हाथ टिकाए यश के सामने बैठी थी तो कपिल ने उस की मेज पर रखे दोनों हाथों के पंजे अपने हाथों में लिए और अपने होंठों से उन्हें चूमते हुए बोला, ‘‘ममता, मैं तुम से बेहद प्यार करता हूं. यह प्यार काफी दिनों से अपने दिल में छिपाए बैठा था, लेकिन तुम से इजहार करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था.

तुम भी मुझ से प्यार करती हो कि नहीं, बस इसी ऊहापोह में हर पल गुजारता था. अब रहा नहीं गया तो तुम से अपने दिल की बात कह दी. अब तुम मेरे प्यार को ठुकराओ या स्वीकार करो, यह फैसला तुम्हारा होगा. तुम जो भी फैसला करोगी, मुझे मंजूर होगा.’’

ममता तो जैसे इसी पल के इंतजार में थी. यश ने जब उस का हाथ चूमा था, तभी समझ गई थी कि आज यश उस से अपने दिल की बात कहने वाला है. वह जान गई थी कि यश भी उस से प्यार करता है. इसलिए मुसकराते हुए बोली, ‘‘सच कहूं, मैं तो कब से इसी इंतजार में थी कि कब तुम मुझ से अपने प्यार का इजहार करोगे. आज आखिर वह शुभ घड़ी आ गई. मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं.’’ कहते हुए ममता ने यश की आंखों में झांका तो यश ने उसे झट अपने सीने से लगा लिया. यश ने उसे सीने से लगा कर सुकून की सांस ली तो ममता भी अपनी आंखें बंद कर यश के सीने में कैद दिल की धड़कनें सुनने लगी. यश की हर धड़कन में उसे अपने लिए प्यार महसूस हुआ, जिस की वजह से उस के होंठों पर प्यारी सी मुसकराहट तैरने लगी.

उन का प्यार समय के साथ और प्रगाढ़ होता गया. इस दौरान यश की नौकरी लग गई. वह मेरठ की कोर्ट में पेशकार हो गया. उधर ममता भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सबइंस्पेक्टर के पद पर भरती हो गई. नौकरी करते हुए भी उन की बातचीत होती रहती थी. दोनों शादी करने का फैसला कर चुके थे. लेकिन इस में जाति आड़े आ रही थी. क्योंकि यश सैनी समाज से था और ममता जाट समाज की. ममता ने अपने घर वालों से बात की तो वे यश से अंतरजातीय विवाह करने की बात पर विरोध में आ गए. ममता ने घर वालों के विरोध के बावजूद यश से विवाह करने की ठान ली. लेकिन उसे और उस के परिवार को इस विवाह से परेशानी न उठानी पड़े, इस के लिए ममता ने यश के सामने शर्त रख दी कि उसे अपना सरनेम बदल कर पवार करना पड़ेगा और विवाह के बाद यश अपने परिवार से कोई संबंध नहीं रखेगा.

यश ने उस की शर्त मान ली और उस ने अपना नाम बदल कर कपिल पवार रख लिया. उस ने सरनेम के साथ नाम भी बदल लिया. 15 साल पहले दोनों ने विवाह कर लिया. ममता की पोस्टिंग आगरा में हो गई. दोनों के अलगअलग शहर में रहने पर परेशानी होने लगी तो कपिल अपनी नौकरी छोड़ कर आगरा आ गया. आगरा के जाटनी के बाग के जिस अपार्टमेंट में ममता की मां शिमला रहती थी, ममता कपिल उर्फ यश के साथ अपनी मां के फ्लैट से ऊपर वाली मंजिल पर स्थित फ्लैट में रहने लगी. यह फ्लैट ममता के नाम पर था. आगरा आ कर कपिल वकालत करने लगा. इस के अलावा वह प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी करता था. समय के साथ 8 साल पहले ममता ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उन्होंने कन्नू रखा. इस समय कन्नू सेंट पैट्रिक्स स्कूल में पहली कक्षा की छात्रा थी.

कपिल कुछ ही समय में वकालत के क्षेत्र में आगरा में छा गया. कई बड़े केस उस के हाथ में आ गए. उन में आगरा का बहुचर्चित जोंस मिल कंपाउंड भूमि घोटाले का मुकदमा भी था. जोंस मिल कंपाउंड की आखिरी महिला वारिस मौरिस जोन ने उसे अपना वकील बनाया था. वह कपिल को बेटे की तरह मानती थीं. दूसरी ओर कपिल का प्रौपर्टी डीलिंग का धंधा भी खूब फलफूल रहा था. जमीन का सौदा करवाने में कपिल को जबरदस्त महारत हासिल थी. उस ने कई ऐसे सौदे करवाए थे जो विवादित थे. ममता बन गई पुलिस इंसपेक्टर अब तक ममता इंसपेक्टर के पद पर प्रोन्नत हो चुकी थी. किसी ने कपिल से ईर्ष्या कर पुलिस विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर दी कि कपिल की पत्नी ममता आगरा में इंसपेक्टर है.

पत्नी के पुलिस इंसपेक्टर होने के बलबूते पर कपिल ने कई विवादित जमीन की खरीदफरोख्त की है. इस पर पुलिस अधिकारियों ने ममता पवार का स्थानांतरण आगरा से प्रयागराज कर दिया. ममता को अपने विभागीय अधिकारियों का आदेश तो मानना ही था, लिहाजा उसे मजबूरन प्रयागराज जाना पड़ा. प्रयागराज में तैनाती के दौरान 24 सितंबर, 2019 को ममता की तबियत खराब हुई. उस की गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीजीआई लखनऊ में भरती कराया गया. लेकिन 27 सितंबर, 2019 को ब्रेन हैमरेज के कारण उस की मृत्यु हो गई. ममता की मौत के बाद उस की मां शिमला कपिल से और बैर रखने लगी. अभी तक ममता के कारण वह कुछ नहीं कहती थी. लेकिन ममता की मौत के बाद शिमला का कपिल से विवाद रहने लगा. विवाद का कारण था ममता के नाम कई प्रौपर्टीज का होना.

ममता के नाम मेरठ के अंसल टाउन में एक प्लौट, आगरा के जाटनी के बाग में एक फ्लैट जिस में शिमला खुद रह रही थी, आस्था सिटी सेंटर के सामने एक प्लौट और एक बेकरी की दुकान थी. बेकरी की दुकान के किराएनामे में शिमला का नाम था. कपिल ने उस का बैनामा अपने नाम करा लिया था. प्लौट भी कपिल अपने नाम कराने की कोशिश कर रहा था. शिमला ने ममता को यह संपत्ति खरीदने के लिए अपनी जमापूंजी दी थी. अब उसे डर था कि उस का दामाद कपिल सारी संपत्ति पर कब्जा कर के उसे घर से बेदखल न कर दे. इसे ले कर उन के बीच बहुत गहरा विवाद था.

ममता की मौत के बाद कपिल के सामने उस की रखी शर्त की कोई बंदिश नहीं थी. वैसे भी कपिल अकेलापन महसूस करता था. इसलिए कपिल ने अपने परिवार से संपर्क रखना शुरू कर दिया. हालांकि फोन पर कपिल पहले भी जबतब बात कर लेता था, लेकिन ममता की वजह से न घर वालों को घर बुला पाता था और न ही उन से मिलने घर जाता था. बंदिश हटी तो कपिल के घर वाले उस के पास आनेजाने लगे. 26 अक्तूबर, 2020 की शाम कपिल अपने फ्लैट में था. 10 दिन पहले उस ने अपनी 90 वर्षीया मां निर्मला को अपने पास रहने के लिए बुला लिया था. वह शाम को अपनी मां से प्लौट पर जाने की बात कह कर घर से निकल गया. अपनी मारुति वैगनआर कार से वह आस्था सिटी सेंटर के पास वाले प्लौट पर गया था. लेकिन पूरी रात बीत गई, वह वापस नहीं लौटा.

सुबह निर्मला ने पड़ोसियों से कहा तो उन्होंने फोन मिलाने को कहा. निर्मला फोन मिलाना नहीं जानती थी, न ही उन के पास बेटे का नंबर था. पड़ोसियों ने नीचे की मंजिल पर रह रही कपिल की सास शिमला से कहा कि वह कपिल के बारे में पता करे. इस पर शिमला कपिल के फ्लैट में आई और निर्मला पर बरस पड़ी, ‘‘ड्रामा मत करो. यहां मजाक बनेगा. वह आ जाएगा, उसे कौन ले जाएगा. तुम चुप रहो बस.’’ कह कर शिमला चली गई. बाद में पड़ोसियों के दबाव में 27 अक्तूबर की शाम को ही शिमला ने स्थानीय छत्ता थाना पुलिस को कपिल के लापता होने की सूचना दी. जिस के बाद छत्ता थाने के इंसपेक्टर सुनील दत्त मय टीम के कपिल के फ्लैट पर पहुंचे.

वहां उन्होंने निर्मला से कपिल के संबंध में पूछताछ की. इस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने कपिल पवार उर्फ यश की थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी. कपिल की मिली लाश बाद में कपिल का कोई सुराग न लगने पर गुमशुदगी को भादंवि की धारा 364 में तरमीम कर दिया गया. इसी बीच इंसपेक्टर सुनील दत्त को 27 अक्तूबर की शाम को इटावा जिले के भरथना थाना क्षेत्र के मल्हौली नहर में एक लाश मिलने की सूचना मिली. उन्होंने इटावा पुलिस से संपर्क कर के लाश की फोटो मंगवाई. वह फोटो कपिल की मां और उस के दोनों भाइयों को दिखाई गई तो उन्होंने लाश की पहचान कपिल के रूप में कर दी. इस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने दोनों भाइयों को एसआई योगेश कुमार के साथ इटावा भेज दिया. दोनों भाइयों ने लाश की शिनाख्त अपने भाई यश उर्फ कपिल के रूप में की. इटावा पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद लाश दोनों भाइयों के सुपुर्द कर दी.

इंसपेक्टर दत्त ने कपिल के फोन नंबर की काल डिटेल्स की जांच की तो उस में एक नंबर पर उन की नजर टिक गई. उस नंबर की जानकारी की गई तो वह नंबर कपिल के दोस्त जीतू उर्फ हर्ष यादव का निकला. जीतू के नंबर की लोकेशन ट्रेस की गई तो 26 अक्तूबर की शाम को कपिल के प्लौट, फिर उस के घर से होती हुई इटावा तक मिली. इस के बाद उन्होंने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की तो उस में घटना की रात जीतू कपिल की कार के साथ आया दिखा. साथ में एक जाइलो कार भी थी, जिस में 2 व्यक्ति सवार थे. जीतू ने वहां कुछ देर रुक कर कपिल की सास शिमला से बात की. उस के बाद चला गया.

इस के बाद 30 अक्तूबर, 2020 को इंसपेक्टर दत्त ने कपिल की सास शिमला को हिरासत में ले कर पूछताछ की. पूछताछ में शिमला ने कपिल की हत्या जीतू और उस के 2 साथियों राहुल और अनवर से करवाने की बात स्वीकार कर ली. जिस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने अपने मुखबिरों को राहुल और अनवर की तलाश के लिए लगा दिया. जल्द ही एक मुखबिर ने सूचना दी कि राहुल और अनवर एत्मादपुर से मथुरा की ओर जाइलो कार नंबर यूपी75एन 0021 से जा रहे हैं. जिस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने अपनी टीम के साथ जा कर वाटर वर्क्स पुल के ऊपर से दोनों को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन से कड़ाई से पूछताछ की गई तो सारी कहानी सामने आ गई.

प्रौपर्टी के धंधे में काम करते हुए कपिल की जानपहचान जीतू उर्फ हर्ष यादव से हो गई थी, जोकि आगरा के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र में टेढ़ी बगिया में रहता था. दोनों में दोस्ती भी हो गई. जीतू का कपिल के घर आनाजाना हुआ. धीरेधीरे दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि कपिल ने उसे अपनी पत्नी ममता की सारी संपत्तियों की जानकारी उसे दे दी. उस ने यह भी बता दिया कि कई संपत्ति पत्नी ममता और सास शिमला के संयुक्त नाम से भी हैं. जीतू कहने को कपिल का दोस्त था, लेकिन वह मन ही मन उस से जलता था. कई जमीन के सौदे करवाने में दोनों लगे होते थे लेकिन हर बार कपिल बाजी मार ले जाता था. इस से जीतू को नुकसान उठाना पड़ता था.

कपिल से जीतू मानने लगा रंजिश करीब डेढ़ साल पहले जोंस मिल कंपाउंड में यमुना किनारे जीतू का डेढ़ हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन का इकरारनामा कपिल के माध्यम से हुआ था. मगर बाद में मौरिस जौन ने जमीन का बैनामा उस के नाम न कर के दूसरे किसी कारोबारी को कर दिया. मौरिस ने यह कदम जीतू के खिलाफ छत्ता थाने में रंगदारी का मुकदमा दर्ज होने के बाद उठाया था. इस मामले में जीतू ने कपिल से जमीन उस के नाम कराने को कहा लेकिन कपिल ने उस का इस मामले में कोई साथ नहीं दिया. लिहाजा दर्ज मुकदमे में जीतू को जेल जाना पड़ा. इस से वह कपिल से रंजिश मानने लगा. जीतू वैसे भी आपराधिक प्रवृत्ति का था. उस पर विभिन्न धाराओं में 5 मुकदमे दर्ज हैं.

जेल से छूटने के बाद वह कपिल को ठिकाने लगाने की सोचने लगा. लेकिन उस ने कपिल के साथ मिलनाजुलना, बातें करना पहले की तरह ही चालू रखा. जिस से कपिल को उस पर शक न हो. लौकडाउन के दौरान उस ने कपिल की हत्या करने की सोची लेकिन फिर यह सोच कर रह गया कि इस लौकडाउन में वह शहर से बाहर भाग कर कहीं नहीं जा सकेगा. लेकिन उस ने लौकडाउन खुलने के बाद किसी भी तरीके से कपिल की हत्या करने की ठान ली. इस के लिए उस ने हत्या के बाद अपने बचाव की भी तैयारी करनी शुरू कर दी. फिरोजाबाद के एक लूट के मामले में वह कई तारीखों पर कोर्ट नहीं गया तो उस के खिलाफ वारंट जारी हो गया. कपिल और शिमला के बीच विवाद किस हद तक पहुंच गया है, यह भी जीतू बखूबी जानता था.

घटना से 10 दिन पहले संपत्ति विवाद के चलते दोनों की पंचायत हुई. इस में कपिल की तरफ से जीतू और उस के दोस्त थे. शिमला ने अपने घर के लोगों को बुला लिया जोकि बागपत जिले में रहते थे. पंचायत में कोई नतीजा नहीं निकला. लेकिन जीतू ने भांप लिया कि कपिल की सास शिमला संपत्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. इस के लिए उस ने शिमला से बात करने की सोच ली. जीतू ने शिमला से पहले से ही काफी मेलजोल बढ़ा रखा था. जीतू कपिल के उठाए गए कदमों की जानकारी शिमला को देता रहता था. इसलिए शिमला उस पर विश्वास करने लगी थी. सास ने दी 10 लाख की सुपारी दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, इसी तर्ज पर जीतू ने अकेले में शिमला से बात की और कहा, ‘‘आंटीजी जिस संपत्ति के लिए आप परेशान हो रही हैं, वह तभी आप के हाथ आएगी, जब कपिल दुनिया में नहीं रहेगा.’’

इस पर शिमला ने बिना देर किए बोल दिया, ‘‘जो भी खर्चा आएगा, वह दे देगी लेकिन कपिल को रास्ते से हटा दो.’’

‘‘खर्चा 10 लाख रुपए आएगा. 2 सुपारी किलर हायर करने पड़ेंगे.’’ जीतू ने बताया.

‘‘ठीक है, शाम को आ कर मुझ से एक लाख रुपए ले जाना. बाकी 9 लाख रुपए मैं काम होने के बाद दूंगी.’’ शिमला ने कहा.

शिमला की बात सुन कर जीतू ने सहमति दे दी, फिर वहां से चला आया. जीतू तो वैसे भी कपिल को मारना चाहता था. ऐसे में शिमला के कहने पर हत्या करने पर सुपारी की रकम मिल रही थी. शाम को फिर वापस आ कर उस ने शिमला से एक लाख रुपए ले लिए. रकम मिलने के बाद उस ने टेढ़ी बगिया में ही रहने वाले अपने दोस्त अनवर और कालिंद्री विहार के राहुल को कपिल की हत्या करने के लिए तैयार कर लिया. उस ने उन दोनों को शिमला से मिलवा भी दिया. 26 अक्तूबर, 2020 की शाम को जीतू अपनी जाइलो कार में राहुल और अनवर को बैठा कर कपिल के प्लौट पर पहुंचा. वह जानता था कि इस समय कपिल अपने प्लौट पर बैठा शराब पी रहा होगा.

उस का सोचना सही था. कपिल प्लौट पर बैठा शराब पी रहा था. जीतू भी अपने साथियों के साथ उस के पास बैठ गया. जीतू ने कपिल के खाने के लिए अनवर से अंडे की भुजिया मंगवाई, जिस में अनवर ने योजनानुसार नशीला पदार्थ मिला दिया. कपिल ने वह भुजिया खाई तो कुछ ही देर में वह नशे से बेसुध हो गया. जीतू ने राहुल और अनवर की मदद से उसे कार में पिछली सीट पर डाला. इस के बाद राहुल और अनवर जीतू की कार और जीतू कपिल की वैगनआर कार से शिमला से मिलने अपार्टमेंट पहुंचे. वहां शिमला को पूरी बात बताई और बाकी पैसे मांगे. शिमला ने बाकी पैसे पूरा काम होने के बाद ही देने की बात कही.

इस के बाद जीतू अपने साथियों के साथ वहां से निकल आया. फिर तीनों ने कार की सीट बेल्ट से गला घोंट कर कपिल की हत्या कर दी और उस की लाश जाइलो कार से निकाल कर वैगनआर में रख ली. लाश को ले कर तीनों चल दिए. जीतू ने अनवर को रामबाग में छोड़ दिया. जीतू राहुल के साथ कपिल की लाश को इटावा के भरथना थाना क्षेत्र में मल्हौली नहर के पास ले कर गया. वहां नहर में कपिल की लाश डालने के बाद जीतू राहुल के साथ वापस लौट आया. फिरोजाबाद के पास उस ने राहुल को उतार दिया और घर चला गया. राहुल, अनवर और शिमला के गिरफ्तार होने का पता लगते ही जीतू ने फिरोजाबाद की कोर्ट में लूट के उसी मामले में आत्मसमर्पण कर दिया, जिन की तारीखों की पेशी में वह पहले से नहीं जा रहा था. उस के खिलाफ वारंट तक निकल गया था.

वह जानता था कि बडे़ मामलों में पुलिस गिरफ्तारी ऐसे ही नहीं दिखाती, पैर में गोली मार कर मुठभेड़ की बात कह कर दिखाती है. वह गोली नहीं खाना चाहता था, इसलिए उस ने अपने बचाव में यह रास्ता अपनाया था. राहुल और अनवर के पास से 2 तमंचे और 4 जिंदा कारतूस बरामद हुए. इंसपेक्टर सुनील दत्त ने मुकदमे में भादंवि धारा 302/201/120बी और बढ़ा दी. फिर आवश्यक कागजी खानापूर्ति करने के बाद तीनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक पुलिस जीतू को रिमांड पर लेने की बात कह रही थी. पुलिस कपिल की वैगनआर कार बरामद करने का भी प्रयास कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधार

Love Crime : मामा के प्यार में बेटी ने फावड़े से काटी मां और पापा की गर्दन

Love Crime : पिछले कुछ समय से करीबी रिश्तेदार ही अपनों के दुश्मन साबित हो रहे हैं. ऐसे में अपने स्वार्थों के चलते अगर घर का कोई सदस्य उन का साथ दे तो परिणाम बहुत घातक होते हैं. प्रवींद्र और संगीता सगे मामाभांजी थे, लेकिन जब उन्होंने मर्यादाएं लांघी तो अपने ही परिवार पर इतने भारी पड़े कि…

झा उस दिन जनवरी, 2020 की 2 तारीख थी. सुबह के 10 बज रहे थे. एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह अपने कक्ष में मौजूद थे. तभी उन के कक्ष में सर्विलांस टीम प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने प्रवेश किया. शैलेंद्र सिंह के अचानक आने पर वह समझ गए कि जरूर कोई खास बात है. उन्होंने पूछा, ‘‘शैलेंद्र सिंह, कोई विशेष बात?’’

‘‘हां सर, खास बात पता चली है, सूचना देने आप के पास आया हूं.’’ शैलेंद्र सिंह ने कहा.

‘‘बताओ, क्या बात है?’’ एसपी ने पूछा.

‘‘सर, 3 महीने पहले थाना गुरसहायगंज के गौरैयापुर गांव में जो डबल मर्डर हुआ था, उस के आरोपियों की लोकेशन पश्चिम बंगाल के हुगली शहर में मिल रही है. अगर पुलिस टीम वहां भेजी जाए तो उन की गिरफ्तारी संभव है.’’ शैलेंद्र सिंह ने बताया. शैलेंद्र सिंह की बात सुन कर एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह चौंक गए. इस की वजह यह थी कि इस दोहरे हत्याकांड ने उन की नींद उड़ा रखी थी. लोग पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहे थे. कानूनव्यवस्था को ले कर राजनीतिक रोटियां भी सेंकी जा रही थीं. दरअसल, गौरैयापुर गांव में रमेशचंद्र दोहरे और उन की पत्नी ऊषा की हत्या कर दी गई थी. उन की युवा बेटी संगीता घर से लापता थी. घर में लूटपाट होने के भी सबूत मिले थे. इसलिए यही आशंका जताई गई थी कि बदमाशों ने लूटपाट के दौरान दंपति की हत्या कर दी और उस की बेटी संगीता का अपहरण कर लिया.

लेकिन बाद में जांच से पता चला कि संगीता के अपने ममेरे भाई प्रवींद्र से नाजायज संबंध थे. इस से यह आशंका हुई कि कहीं इन दोनों ने ही तो इस हत्याकांड को अंजाम नहीं दिया. पुलिस उन की तलाश में जुटी थी और पुलिस ने उन दोनों की सही जानकारी देने वाले को 25-25 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर दिया था. उन के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगे थे, जिन की लोकेशन पश्चिम बंगाल के हुगली शहर की मिल रही थी. सर्विलांस टीम प्रभारी शैलेंद्र सिंह से यह सूचना मिलने के बाद एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने तत्काल एएसपी के.सी. गोस्वामी को कार्यालय बुलवा लिया. उन्होंने उन्हें दोहरे हत्याकांड के आरोपियों के बारे में जानकारी दी. फिर उन के निर्देशन में एसपी ने एक पुलिस टीम गठित कर दी.

टीम में गुरसहायगंज के थानाप्रभारी नागेंद्र पाठक, इंसपेक्टर विजय बहादुर वर्मा, टी.पी. वर्मा, दरोगा मुकेश राणा, सिपाही रामबालक तथा महिला सिपाही कविता को सम्मिलित किया गया. यह टीम संगीता और प्रवींद्र की तलाश में पश्चिम बंगाल के हुगली शहर के लिए रवाना हो गई. 4 जनवरी को पुलिस टीम पश्चिम बंगाल के हुगली शहर पहुंच गई और स्थानीय थाना भद्रेश्वर पुलिस से संपर्क कर अपने आने का मकसद बताया. दरअसल, प्रवींद्र के मोबाइल फोन की लोकेशन उस समय भद्रेश्वर थाने के आरबीएस रोड की मिल रही थी, जो झोपड़पट्टी वाला क्षेत्र था. झोपड़पट्टी में ज्यादातर मजदूर लोग रह रहे थे. पुलिस टीम ने थाना भद्रेश्वर पुलिस की मदद से छापा मारा और एक झोपड़ी से संगीता और प्रवींद्र को हिरासत में ले लिया. जिस झोपड़ी से उन दोनों को हिरासत में लिया था, वह झोपड़ी नगमा नाम की महिला की थी.

पकड़ में आए प्रवींद्र और संगीता नगमा ने पुलिस को बताया कि करीब ढाई महीने पहले प्रवींद्र और संगीता ने झोपड़ी किराए पर ली थी. प्रवींद्र ने संगीता को अपनी पत्नी बताया था. दोनों मजदूरी कर अपना भरणपोषण करते थे. नगमा को जब पता चला कि दोनों हत्यारोपी हैं तो वह अवाक रह गई. पुलिस टीम ने संगीता और प्रवींद्र को हुगली की जिला अदालत में पेश किया. अदालत से ट्रांजिट रिमांड पर ले कर पुलिस दोनों को कन्नौज ले आई. एएसपी गोस्वामी तथा एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने संगीता और प्रवींद्र से एक घंटे तक पूछताछ की. पूछताछ में दोनों ने सहज ही हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. हत्या का जुर्म कबूल करने के बाद एसपी अमरेंद्र प्रसाद ने प्रैसवार्ता कर दोहरे हत्याकांड का खुलासा किया.

प्रवींद्र और संगीता से की गई पूछताछ में मामाभांजी के कलंकित रिश्ते की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई—

उत्तर प्रदेश के कन्नौज का बड़ी आबादी वाला एक व्यापारिक कस्बा गुरसहायगंज है. यहां बड़े पैमाने पर आलू तथा तंबाकू का व्यवसाय होता है. बीड़ी के कारखानों में सैकड़ों मजदूर काम करते हैं. गुरसहायगंज कस्बा पहले फर्रुखाबाद जिले के अंतर्गत आता था लेकिन जब कन्नौज नया जिला बना तो यह कस्बा कन्नौज जिले का हिस्सा बन गया. इसी गुरसहायगंज कस्बे से करीब 5 किलोमीटर दूर सौरिख रोड पर बसा है एक गांव गौरैयापुर. कोतवाली गुरसहायगंज के अंतर्गत आने वाले इसी गांव में रमेशचंद्र दोहरे का परिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी ऊषा देवी के अलावा एक बेटी संगीता थी. रमेशचंद्र के पास 3 बीघा खेती की जमीन थी. उसी की उपज से वह परिवार का भरणपोषण करता था.

संगीता सुंदर थी. जब उस ने 17वां बसंत पार किया तो उस की सुंदरता में गजब का निखार आ गया, बातें भी बड़ी मनभावन करती थी. लेकिन पढ़ाईलिखाई में उस का मन नहीं लगता था. जिस के चलते वह 8वीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ सकी. इस के बाद वह घर के रोजमर्रा के काम में मां का हाथ बंटाने लगी. संगीता जिद्दी स्वभाव की थी. वह जिस चीज की जिद करती, उसे हासिल कर के ही दम लेती थी. संगीता के घर प्रवींद्र का आनाजाना लगा रहता था. वह संगीता की मां ऊषा देवी का सगा छोटा भाई था यानी संगीता का सगा मामा. वह हरदोई जिले के कतन्नापुर गांव का रहने वाला था और अकसर अपनी बहन ऊषा के ही घर पड़ा रहता था. जब भी आता हफ्तेदस दिन रुकता था. ऊषा का पति रमेशचंद्र इसलिए कुछ नहीं बोलता था क्योंकि वह उस का साला था.

संगीता और प्रवींद्र हमउम्र थे. प्रवींद्र उस से 2 साल बड़ा था. हमउम्र होने के कारण दोनों में खूब पटती थी. प्रवींद्र बातूनी था, इसलिए संगीता उस की बातों में रुचि लेती थी. ऊषा समझती थी कि प्रवींद्र को उस से लगाव है, इसलिए वह उस के घर आता है. लेकिन सच यह था कि प्रवींद्र की लालची नजर अपनी भांजी संगीता पर थी. वह उसे अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए आता था. प्रवींद्र ने अपने व्यवहार से बहन और बहनोई के दिल में ऐसी जगह बना ली थी कि वे उसे अपना हमदर्द समझने लगे थे. वे लोग उस से सुखदुख की बातें भी साझा करते थे. दरअसल, रमेशचंद्र उसे इसलिए वफादार समझने लगे थे क्योंकि प्रवींद्र उन के खेती के कामों में भी हाथ बंटाने लगा था. खाद बीज लाने की जिम्मेदारी भी वही उठाता था. इन्हीं सब कारणों से प्रवींद्र रमेश की आंखों का तारा बन गया था.

हमारे समाज में युवा हो रही लड़कियों के लिए तमाम बंदिशें होती हैं. वह किसी बाहरी लड़के से हंसबोल लें तो उन्हें डांट पड़ती है. यह उम्र जिज्ञासाओं की होती है. मन हवा में उड़ान भरने को मचलता है. पारिवारिक और सामाजिक वर्जनाओं की वजह से आमतौर पर देखा गया है कि लड़कियां अपने रिश्ते के करीबी युवक से ज्यादा घुल जाती हैं. वह उन का मामा, जीजा, चचेरा या मौसेरा या ममेरा भाई कोई भी हो सकता है. वे उसे ही अपना दोस्त बना लेती हैं. संगीता के सब से नजदीक मामा प्रवींद्र ही था, अत: उन दोनों में भी ऐसा ही रिश्ता था. प्रवींद्र की नजर थी खूबसूरत भांजी पर शुरुआती दिनों में जब प्रवींद्र ने बहन ऊषा के घर आना शुरू किया था, तब उस के मन में संगीता के लिए कोई गलत भावना नहीं थी. रिश्ते में वह उस की भांजी थी. किंतु भावनाओं में तूफान आते और रिश्ता बदलते कितनी देर लगती है.

संगीता से मेलमिलाप की वजह से प्रवींद्र की भावनाओं में भी तूफान आ गया और मामाभांजी के पवित्र रिश्ते पर कालिख लगनी शुरू हो गई. हुआ यह कि एक दिन प्रवींद्र ऊषा के घर पहुंचा तो वह परिवार सहित गांव में एक परिचित के घर समारोह में जाने को तैयार थी. संगीता भी खूब बनीसंवरी थी. उस ने गुलाबी सलवारसूट पहना था और खुले बाल कमर तक लहरा रहे थे. उस समय संगीता बेहद खूबसूरत दिख रही थी. संगीता का वह रूप प्रवींद्र की आंखों के रास्ते से दिल में उतर गया. प्रवींद्र के मन में कामना की ऐसी आंधी चली कि उस की धूल ने सारे रिश्तेनाते को ढक लिया. वह भूल गया कि संगीता उस की भांजी है. प्रवींद्र का मन चाह रहा था कि संगीता उस के सामने रहे और वह उसे अपलक देखता रहे, लेकिन ऐसा कहां संभव था. वे लोग तो समारोह में जाने को तैयार थे. प्रवींद्र को घर की तालाकुंजी दे कर वे सब चले गए. प्रवींद्र की नजरें तब तक संगीता का पीछा करती रहीं जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई.

उन के जाने के बाद प्रवींद्र खाना खा कर बिस्तर पर लेट गया. लेकिन नींद उस की आंखों से कोसों दूर थी. उस की आंखों में संगीता का अक्स बसा था और जेहन में उसी के खयाल उथलपुथल मचा रहे थे. कई बार प्रवींद्र की अंतरात्मा ने उसे झिंझोड़ा, ‘संगीता तुम्हारी भांजी है, उस के बारे में गंदे विचार तक मन में लाना पाप है. संगीता के बारे में गलत सोचना बंद कर दो.’  प्रवींद्र ने हर बार यह सोच कर अंतरात्मा की आवाज को दबा दिया कि हर लड़की किसी न किसी की भांजी होती है. अगर लोग मामाभांजी का ही रिश्ता निभाते रहे तो चल गई दुनिया. कहते हैं कि बुरे विचार अच्छे विचारों को जल्दी ही दबा देते हैं. प्रवींद्र की अच्छाई पर बुराई हावी हो गई.

इधर ऊषा और रमेश रात को काफी देर से लौटे. सुबह वे जल्दी उठ कर अपनेअपने काम से लग गए. रमेशचंद्र और ऊषा खेत पर चले गए थे, जबकि संगीता घरेलू कामों में व्यस्त थी. प्रवींद्र की आंखें खुलीं तो उस की नजर आंगन में काम कर रही संगीता पर पड़ी. वह मुंह से तो कुछ नहीं बोला लेकिन टकटकी लगाए संगीता को देखने लगा. प्रवींद्र को इस तरह अपनी ओर ताकते देख संगीता ने टोका, ‘‘क्या बात है मामा, तुम कुछ बोल क्यों नहीं रहे. बस टकटकी लगा कर मुझे ही देखे जा रहे हो.’’

‘‘इसलिए देख रहा हूं कि तुम बहुत खूबसूरत हो. जी चाहता है कि तुम सामने खड़ी रहो और मैं तुम्हें देखता रहूं. यह कमबख्त नजरें तुम्हारे चेहरे से हटने का नाम ही नहीं ले रही हैं.’’ वह बोला. संगीता मामा के मन का मैल न समझ कर उन्मुक्त हंसी हंसने लगी. हंसी पर विराम लगा तो बोली, ‘‘यह कौन सी नई बात है. गांव में भी सब कहते हैं कि संगीता तुम खूबसूरत हो.’’

फिर वह शरारत से उस की आंखों में देखने लगी, ‘‘कैसे मामा हो जिसे आज पता चला कि मैं खूबसूरत हूं.’’

‘‘आज नहीं, मैं ने कल जाना कि तुम खूबसूरत हो.’’ प्रवींद्र के मन की बात उस की जुबान पर आ गई, ‘‘गुलाबी रंग का सलवारसूट तुम्हारे गोरे बदन पर बेहद फब रहा था. ऊपर से तुम्हारा मेकअप तो मेरे दिल पर बिजली गिरा गया. किसी दुलहन से कम नहीं लग रही थी तुम…’’

संगीता अपने सौंदर्य की तारीफ सुन कर गदगद हो गई, उस ने शरम से नजरें झुका लीं. साथ ही उस के मन में कांटा सा चुभा. वह सोचने लगी कि क्या मामा के दिल में खोट आ गया है, जो ऐसी बातें उस से कर रहे हैं. वह अभी ऐसा सोच ही रही थी कि तभी प्रवींद्र 2 कदम आगे बढ़ कर संगीता की कलाई पकड़ कर बोला, ‘‘संगीता, तुम वाकई बहुत खूबसूरत हो. मैं तुम से प्यार करता हूं.’’

संगीता काफी दिनों से महसूस कर रही थी कि उस के मामा प्रवींद्र के मन में उस के लिए बेपनाह प्यार है. सच तो यह था कि संगीता भी मन ही मन मामा प्रवींद्र को चाहती थी. यही कारण था कि जब प्रवींद्र ने अपनी मोहब्बत का इजहार किया तो संगीता ने फौरन इकरार करते हुए कह दिया, ‘‘हां, मैं भी तुम्हें दिल की गहराइयों से चाहती हूं.’’

मोहब्बत को मिली जुबान खामोश मोहब्बत को जुबान मिली तो संगीता और प्रवींद्र की आशिकी के रंग निखरने लगे. प्रवींद्र का पहले से ही घर में आनाजाना था. रमेशचंद्र दोहरे भी उसे बेटे की तरह मानते थे, इसलिए संगीता से उस के मिलनेजुलने या एकांत में बातचीत करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं थी. प्रवींद्र जब अपने गांव कतरतन्ना में होता तब वे दोनों मोबाइल फोन पर देर तक बातें करते थे. संगीता उसे अपना हालेदिल सुनाया करती. बहन के घर जाने में भाई को बहाने की जरूरत नहीं होती. संगीता के बुलाने पर वह उस के यहां आ जाता. सब उसे देख कर खुश होते कि देखो भाईबहन में कितना प्यार है. लेकिन यह तो केवल संगीता जानती थी कि प्रवींद्र किसलिए आता है. ज्योंज्यों दिन गुजरते गए, संगीता और प्रवींद्र की मोहब्बत के तकाजे भी बढ़ते गए. उन की चाहत तनहाई और खुफिया मुलाकात की मांग करने लगी. यह तकाजा पूरा करने के लिए उन दोनों ने किसी तरह की कोताही नहीं की.

रात को जब सब लोग सो जाते, तब संगीता और प्रवींद्र चुपके से उठ कर छत पर चले जाते और वहां एकदूजे की बांहों में खो जाते. तनहाई और रात के सन्नाटे में 2 जिस्म मिले तो जज्बात भड़कते ही हैं. संगीता और प्रवींद्र भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं पा सके. पे्रमोन्माद में वे एकदूसरे को समर्पित हो गए. समय बीतता रहा. किसी को अब तक नहीं खबर नहीं थी कि संगीता और प्रवींद्र एकदूसरे से प्यार करते हैं. मन से ही नहीं, दोनों तन से भी एक हो चुके हैं. प्रवींद्र और संगीता के इश्क का खेल 2 सालों तक निर्बाध रूप से चलता रहा. लेकिन एक रोज उन का भांडा फूट ही गया. उस दिन शाम को प्रवींद्र आया तो पता चला रमेश जीजा रिश्तेदारी में उन्नाव गए हैं. वह 3 दिन बाद घर लौटेंगे. ऊषा आंगन में अकेली बैठी थी और संगीता रसोई में खाना बना रही थी. ज्यों ही प्रवींद्र ऊषा के पास आ कर बैठा, उस ने वहीं से रसोई की ओर मुंह कर आवाज दी, ‘‘बेटी संगीता, मामा आए हैं, इन के लिए भी खाना बना लेना.’’

प्रवींद्र चारपाई पर पसर गया और हंस कर बोला, ‘‘हां दीदी, मैं खाना भी खाऊंगा और रुकूंगा भी. जीजा बाहर गए हैं न इसलिए घर और तुम दोनों की देखभाल करना मेरा फर्ज है. वैसे भी दीदी तुम मुझे फोन पर बता देती तो मैं दौड़ा चला आता.’’

‘‘यह भी कोई कहने की बात है,’’ ऊषा भी हंसने लगी, ‘‘मैं खुद तुझ से यहीं रुकने को कहने वाली थी. लेकिन तूने मेरे मुंह की बात छीन ली.’’

संगीता को पता चला कि मामा आए हैं तो उस का शरीर रोमांच से भर गया. वह जान गई कि आज की रात रंगीन होने वाली है. उस ने खाना बना कर तैयार किया फिर मां और मामा को खिलाया. उस के बाद खुद खाना खा कर घर की साफसफाई की. प्रवींद्र छत पर सोने चला गया और संगीता मां के साथ नीचे कमरे में पड़ी चारपाई पर लेट गई. कुछ देर बाद ऊषा तो सो गई लेकिन संगीता की आंखों में नींद नहीं थी. ऊषा जब गहरी नींद सो गई तो संगीता दबेपांव उठी और प्रवींद्र के पास छत पर जा पहुंची. प्रवींद्र भी उस के आने का ही इंतजार कर रहा था. संगीता के पहुंचते ही उस ने उसे बांहों में भर लिया.

इधर आधी रात को ऊषा की आंखें खुलीं तो उस ने संगीता को चारपाई से नदारद पाया. वह उसे खोजते हुए आंगन में आई तो उसे छत पर खुसरफुसर की आवाज सुनाई दी. वह जीने की ओर बढ़ी, तभी संगीता जीने से नीचे उतरी. शायद उसे मां के जागने का आभास हो गया था. कमरे में पहुंचते ही ऊषा ने पूछा, ‘‘संगीता, तू आधी रात को छत पर क्यों गई थी?’’

‘‘मामा उल्टियां कर रहे थे. उन्हें पानी देने गई थी.’’ संगीता ने बहाना बना दिया. ऊषा ने संगीता की बात पर विश्वास तो कर लिया किंतु उस के मन में शक का बीज अंकुरित होने लगा. अब वह दोनों पर कड़ी नजर रखने लगीं. संगीता और प्रवींद्र कड़ी निगरानी के कारण सतर्कता बरतने लगे थे, लेकिन सतर्कता के बावजूद एक रात ऊषा ने संगीता और प्रवींद्र को रंगेहाथ पकड़ लिया. उस रात ऊषा ने संगीता की जम कर फटकार लगाई और उस की पिटाई भी कर दी. उस ने छोटे भाई प्रवींद्र को भी भलाबुरा कहा और रिश्ते को कलंकित करने का दोषी ठहराया. इज्जत के नाम पर दबा दी बात अपराधबोध के कारण प्रवींद्र ने सिर झुका लिया. फिर जब ऊषा का गुस्सा ठंडा पड़ गया तो प्रवींद्र ने बहन के पैर पकड़ लिए, ‘‘दीदी, जवानी के जोश में हम और संगीता बहक गए थे. इस बार माफ कर दो. आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी.’’

चूंकि बेटी का मामला था. ज्यादा शोर मचाने से उसी की बदनामी होती, इसलिए ऊषा ने हिदायत दे कर प्रवींद्र को माफ कर दिया. प्रवींद्र अपने घर चला गया. इस के बाद करीब 3 महीने तक प्रवींद्र बहन के घर नहीं आया. हां, इतना जरूर था कि संगीता और प्रवींद्र जबतब मोबाइल फोन पर बात कर लेते थे और अपने दिल की लगी बुझा लेते थे. 3 माह बाद जब प्रवींद्र को संगीता की ज्यादा याद सताने लगी तो वह एक रोज बहन के घर आ पहुंचा. ऊषा ने प्रवींद्र के आने पर ऐतराज तो नहीं जताया, लेकिन संगीता से दूर रहने की हिदायत दी. प्रवींद्र अब ऊषा के सामने ही संगीता से बात करता तथा रात को घर के अंदर के बजाए घर के बाहर सोता. इस तरह प्रवींद्र का आनाजाना फिर से शुरू हो गया.

कहावत है कि आग और फूस एक साथ होंगे तो धुआं तो उठेगा ही और जलेंगे भी. संगीता और प्रवींद्र भी आगफूस की तरह थे. कुछ दिनों तक तो वे दोनों सुलगते रहे. आखिर में जब नहीं रहा गया तो वे पुन: सतर्कता के साथ मिलने लगे. ऊषा और रमेश दोनों ही संगीता व प्रवींद्र पर नजर रखते थे, परंतु वे उन की पकड़ में नहीं आए. संगीता अब तक 20 साल की उम्र पार करचुकी थी और उस के कदम भी बहक गए थे. इसलिए ऊषा और रमेश चाहते थे कि जितना जल्दी हो, उस के हाथ पीले कर दिए जाएं. संगीता का विवाह करने के लिए दोनों ने उपयुक्त घरवर की तलाश भी शुरू कर दी. संगीता को शादी वाली बात पता चली तो वह प्रवींद्र की छाती से मुंह छिपा कर बिलख पड़ी, ‘‘कुछ करो मामा, किसी दूसरे से मेरी शादी हो गई तो मैं जहर खा कर मर जाऊंगी.’’

प्रवींद्र की आंखें भी बरसने लगीं, ‘‘तुम्हारे बगैर मैं भी कहां जिंदा रह सकता हूं. तुम ने जहर खाया तो मैं भी जहर खा कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लूंगा.’’

‘‘हमारी आशिकी का जनाजा निकलने में देर नहीं है, इसलिए कह रही हूं कि जल्दी ही कुछ करो.’’

‘‘करना तो चाहता हूं पर समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं.’’ प्रवींद्र उलझन में पड़ा हुआ था, ‘‘हम दोनों की शादी हो नहीं सकती और हमेशा के लिए तुम्हें अपना बनाने का रास्ता सूझ नहीं रहा है.’’

‘‘प्रवींद्र, मुझे एक तरकीब सूझी है,’’ संगीता अचानक उल्लास से भर गई, ‘‘अगर तुम उस पर अमल करने को राजी हो जाओ तो हम हमेशा के लिए एक हो सकते हैं.’’

‘‘कैसी तरकीब?’’ प्रवींद्र ने पूछा.

‘‘चलो हम भाग चलें,’’ संगीता ने राह सुझाई, ‘‘दिल्ली, मुंबई जैसे शहर में हम अपने प्यार की अलग दुनिया बसाएंगे. वहां इतनी भीड़ रहती है कि कोई भी हमें ढूंढ नहीं सकेगा.’’

प्रवींद्र कुछ देर सोचता रहा फिर बोला, ‘‘संगीता, तुम्हारी तरकीब तो सही है लेकिन मुझे डर सता रहा है.’’

‘‘कैसा डर?’’ संगीता ने अचकचा कर पूछा.

‘‘यही कि मैं तुम्हें ले कर भागा तो तुम्हारे घर वाले मेरे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देंगे. फिर पुलिस हमें पकड़ेगी. उस के बाद तुम अपने मातापिता के सुपुर्द कर दी जाओगी. और मैं जेल जाऊंगा. जब तक मैं जेल से बाहर आऊंगा, तब तक पता चलेगा कि घर वालों ने तुम्हें समझाबुझा कर किसी दूसरे से तुम्हारी शादी कर दी है. ऐसे मामलों में अकसर यही होता है.’’ प्रवींद्र बोला. प्रवींद्र की बात सुन कर संगीता के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं. अपनी बात का असर पड़ता देख प्रवींद्र आगे बोला, ‘‘दूसरी बात यह है कि घर से भाग कर दूसरे शहर में बसना आसान नहीं. उस के लिए पैसे चाहिए. और पैसे हमारे पास हैं नहीं.’’

संगीता कुछ देर सोच में डूबी रही. उस के बाद बोली, ‘‘प्रवींद्र, मुझे मातापिता का विरोध और तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं होती. हम हर हाल में अपना घर बसाना चाहते हैं. इस के लिए तुम कुछ भी करो, मैं तुम्हारा साथ दूंगी.’’

‘‘तो सुनो, एक तरकीब है मेरे पास. लेकिन उस के लिए तुम्हें अपना कलेजा मजबूत करना होगा. उस तरकीब से हमारी सारी समस्या हल हो जाएगी और धन भी मिल जाएगा.’’ प्रवींद्र ने कहा.

‘‘ऐसी कौन सी तरकीब है?’’ संगीता ने विस्मय से पूछा.

‘‘मुझे अपने बहनबहनोई और तुम्हें अपने मातापिता को मौत की नींद सुलाना होगा. फिर घर से नकदी और गहने ले कर फरार हो जाएंगे. इस तरकीब से किसी को हम पर शक भी नहीं होगा. लोग समझेंगे कि बदमाशों ने घर में लूट की और विरोध पर दोनों की हत्या कर दी और लड़की का अपहरण कर लिया.’’

बन गई खून बहाने की योजना संगीता, प्रवींद्र के प्यार में अंधी हो चुकी थी, इसलिए वह खूनी मांग सजाने को तैयार हो गई. उस ने प्रेमी मामा प्रवींद्र की तरकीब को मान लिया और अपनों का खून बहाने को राजी हो गई. इस के बाद प्रवींद्र और संगीता ने रमेशचंद्र और ऊषा के कत्ल की योजना बनाई. योजना के तहत प्रवींद्र अपने गांव चला गया ताकि बहन के पड़ोसियों को उस पर शक न हो. गांव में रहने के दौरान वह संगीता के संपर्क में बना रहा. 8 अक्तूबर, 2019 की सुबह प्रवींद्र ने संगीता से मोबाइल पर बात की और रात में घटना को अंजाम दे कर फरार होने की बात बताई. उस ने यह भी कहा कि वह रात 10 बजे उस के घर पहुंचेगा, दरवाजा खुला रखे. प्रेमी मामा से बात होने के बाद संगीता घर से भागने की तैयारी में जुट गई.

उस ने मां से चोरीछिपे बैग में अपने कपड़े तथा जरूरी सामान रख लिया. बैग को उस ने कमरे में रखे बड़े संदूक में छिपा दिया. अन्य दिनों के अपेक्षा उस शाम संगीता ने कुछ जल्दी खाना बना कर मांबाप को खिला दिया. खाना खा कर ऊषा और रमेश कमरे में पड़े तख्त पर जा कर लेट गए. कुछ देर बाद दोनों गहरी नींद सो गए. इधर रात 10 बजे प्रवींद्र संगीता के दरवाजे पर पहुंचा. उस ने दरवाजे पर दस्तक दी तो संगीता ने दरवाजा खोल कर उसे घर के अंदर कर लिया. वह बेसब्री से उसी का इंतजार कर रही थी. संगीता प्रवींद्र को कमरे में ले गई. एकांत पा कर प्रवींद्र का मन मचल उठा और वह संगीता से शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा. प्रवींद्र की छेड़छाड़ से संगीता भी रोमांचित हो उठी. उस ने भी अपनी बांहें फैला दीं. इस के बाद कमरे में सीत्कार की आवाजें गूंजने लगीं.

उसी समय ऊषा की आंखें खुल गईं. वह बाथरूम जाने को आंगन में आई तो उसे संगीता के कमरे से अजीब सी आवाजें सुनाई दीं. वह जान गई कि कमरे में बेटी के साथ कोई और भी है. वह दबेपांव कमरे में पहुंची और दोनों को रंगरलियां मनाते रंगेहाथ पकड़ लिया. ऊषा ने संगीता की चोटी पकड़ कर खींची और गाल पर तड़ातड़ तमाचे जड़ दिए. उसी समय प्रवींद्र ने बहन ऊषा का हाथ पकड़ लिया और बोला, ‘‘आज तुझे विरोध बहुत महंगा पड़ेगा.’’

इस के बाद प्रवींद्र और संगीता ने ऊषा को दबोच लिया और कमरे में पड़ी चारपाई पर गिरा कर उस के हाथपैर रस्सी से बांध दिए. फिर वे दोनों उस कमरे में पहुंचे, जहां रमेशचंद्र तख्त पर सो रहे थे. उन दोनों ने मिल कर रमेश के भी हाथपांव रस्सी से बांध दिए. इस के बाद संगीता फावड़ा ले आई. उस ने मां की गरदन पर फावड़े से कई वार किए, जिस से उस की गरदन कट गई और बिस्तर खून से तरबतर हो गया. ऊषा की हत्या करने के बाद दोनों रमेश के पास पहुंचे. वहां प्रवींद्र ने फावड़े से गरदन पर वार कर उसे भी मौत की नींद सुला दिया. 2-2 हत्याओं को अंजाम देने के बाद प्रवींद्र और संगीता ने मिल कर पूरे घर को खंगाला. कमरे में रखे बक्सों में लगे तालों की चाबी से खोला. फिर उस में रखी नकदी व जेवर को अपने कब्जे में कर लिए. इस के बाद दोनों इत्मीनान से घर से फरार हो गए.

दूसरे दिन सुबह 10 बजे तक जब रमेशचंद्र के घर में कोई हलचल नहीं हुई तो पड़ोसियों में चर्चा शुरू हुई. इसी बीच पड़ोसी राजू गौतम ने थाना गुरसहायगंज पुलिस को मोबाइल द्वारा सूचना दे दी. सूचना पाते ही कोतवाल नागेंद्र पाठक पुलिस टीम के साथ गौरैयापुर गांव स्थित रमेशचंद्र दोहरे के मकान पर आ गए. उन्होंने पुलिस के साथ घर में प्रवेश किया तो अवाक रह गए. 2 अलगअलग कमरों में ऊषा और रमेशचंद्र की निर्मम हत्या की गई थी. दोनों के हाथपैर भी बंधे हुए थे. खून से सना फावड़ा कमरे में पड़ा था. जाहिर था कि दोनों की हत्या फावड़े से वार कर के की गई थी. कमरे में रखे बक्सों के ताले खुले पड़े थे, सामान बिखरा था. ऐसा लग रहा था जैसे बदमाशों ने हत्या के बाद लूटपाट भी की थी. घर से मृतक दंपति की जवान बेटी संगीता गायब थी.

शुरू में पुलिस भी हुई गुमराह कोतवाल नागेंद्र पाठक ने डबल मर्डर की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ ही देर बाद एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह तथा एएसपी के.सी. गोस्वामी भी आ गए. उन्होंने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने जहां घटनास्थल का मुआयना किया वहीं फोरैंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए. पुलिस अधिकारियों ने मौकामुआयना कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए कन्नौज भिजवा दिया और हत्या में इस्तेमाल रस्सी व फावड़ा जाब्ते में शामिल कर लिए. एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह को जांच के बाद लगा कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम बदमाशों ने दिया है और उस की बेटी संगीता का अपहरण कर लिया है, अत: उन्होंने इसी दिशा में जांच शुरू कराई.

जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि मृतका ऊषा देवी के भाई प्रवींद्र का घर में आनाजाना था. यह भी पता चला कि प्रवींद्र भी घर से फरार है. एक बात और भी चौंकाने वाली पता चली. वह यह कि प्रवींद्र और संगीता, जो रिश्ते में मामाभांजी हैं, के बीच नाजायज रिश्ता था और रमेश इस का विरोध करते थे. प्रवींद्र और संगीता पुलिस की रडार पर आए तो उन की तलाश शुरू हुई. उन की लोकेशन पता करने के लिए पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा दिए. लेकिन मोबाइल बंद होने से उन की लोकेशन नहीं मिल पा रही थी. पुलिस ने उन की खोज दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि संभावित स्थानों पर की, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. तब पुलिस ने दोनों पर 25-25 हजार का ईनाम घोषित कर दिया.

इधर प्रवींद्र और संगीता डबल मर्डर करने के बाद बस द्वारा कानपुर आए. फिर ट्रेन से मुंबई पहुंचे. वहां वे एक हजार रुपए दे कर शमशाद नाम के  आटो ड्राइवर की झोपड़ी में रात भर रुके. फिर वहां से ट्रेन द्वारा हुगली शहर आए. हुगली शहर के भद्रेश्वर थानाक्षेत्र के आरबीएस रोड पर प्रवींद्र ने एक झोपड़ी किराए पर ले ली. झोपड़ी मालकिन नगमा को उस ने बताया कि वे दोनों पतिपत्नी हैं. प्रवींद्र वहां मेहनतमजदूरी कर अपना व संगीता का भरणपोषण करने लगा. धीरेधीरे 3 माह बीत गए. नए साल में प्रवींद्र ने अपने मजदूर साथी से 500 रुपए में एक मोबाइल फोन खरीदा और उस में अपना सिम कार्ड डाल कर चालू किया. मोबाइल फोन चालू होते ही पुलिस को उस की लोकेशन पता चल गई. उस की लोकेशन हुगली शहर की थी. यह जानकारी जब एसपी अमरेंद्र प्रसाद को मिली तो उन्होंने एक पुलिस टीम हुगली रवाना कर दी. वहां पुलिस ने प्रवींद्र व संगीता को हिरासत में ले लिया.

8 जनवरी, 2020 को थाना गुरसहायगंज पुलिस ने अभियुक्त प्रवींद्र तथा संगीता को जिला अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News : प्रेमिका की गला दबाकर हत्या की और लाश को कूड़े में दबाया

UP News : दो नावों की सवारी हमेशा ही खतरनाक होती है. सब कुछ जानते हुए भी धर्मवीर ऐसा ही कर रहा था. जब उसे इस बात का अहसास हुआ तो तब तक बहुत देर हो चुकी थी. और वह पहुंच गया जेल. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के पटवाई थानाक्षेत्र में पृथ्वीराज सपरिवार रहते थे.परिवार में पत्नी ऊषा देवी के अलावा 3 बेटियां और एक बेटा संजय था. पृथ्वीराज के पास जो कुछ खेती की जमीन थी, उसी पर खेती कर के वह अपने परिवार का पेट पालते थे.

बड़ी बेटी की वह शादी कर चुके थे. दूसरे नंबर की प्राची ने हाईस्कूल करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. प्राची खूबसूरत थी. उम्र के 16 बसंत पार करते ही प्राची के रूपलावण्य में जो निखार आया था, वह देखते ही बनता था. वह गांव की गलियों से गुजरती तो मनचलों के सीने पर सांप लोट जाया करते थे. प्राची को भी इस बात का अहसास था कि उस में कुछ बात तो है, तभी तो लोग उसे टकटकी लगा कर देखते हैं. वह उम्र के उस नाजुक दौर से गुजर रही थी, जहां लड़कियों के दिल की जवान होती उमंगें मोहब्बत के आसमान पर बिना नतीजा सोचे उड़ जाना चाहती हैं. ऐसी ही उमंगें प्राची के दिल में कुलांचे भरने लगी थीं. उम्र के इसी पायदान पर खड़ी प्राची ने कब अपना दिल धर्मवीर के हवाले कर दिया, इस का उसे पता भी नहीं लगा था.

धर्मवीर प्राची के घर के पड़ोस में ही रहता था. हाईस्कूल करने के बाद वह अपना पुश्तैनी खेतीबाड़ी का काम करने लगा. आसपड़ोस में घर होने के कारण अकसर प्राची और धर्मवीर का आमनासामना हो जाता था. जब भी प्राची धर्मवीर के सामने पड़ती तो धर्मवीर एकटक उसे देखता रहता था. पहले तो प्राची को यह बात बहुत खली लेकिन धीरेधीरे उसे भी धर्मवीर में रुचि आने लगी. इसी के चलते दोनों चुपकेचुपके एकदूसरे के आकर्षण में बंध गए. एक रोज शाम का समय था. गांव के बाहर एकांत में दोनों एकदूसरे के सामने पड़े तो धर्मवीर को लगा कि अपने दिल की बात कह देने का यही सब से उपयुक्त मौका है. वह प्राची से बोला, ‘‘प्राची, मैं तुम से एक बात कहना चाहता हूं.’’

‘‘कहिए…’’ प्राची ने सीधे तौर पर पूछ लिया तो धर्मवीर झेंप गया.

फिर धर्मवीर हिम्मत कर के बोला, ‘‘प्राची, मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. लगता है कि अब तुम्हारे बिना मेरा जीना मुश्किल है. क्या तुम मेरी मोहब्बत कबूल करोगी?’’

यह सुन कर प्राची का चेहरा शर्म से लाल हो गया. वह धीरे से बोली, ‘‘चाहती तो मैं भी तुम्हें हूं, लेकिन डर लगता है.’’

‘‘डर…कैसा डर?’’ धर्मवीर ने प्राची से पूछा.

‘‘कहीं हमारी मोहब्बत रुसवा हो गई तो?’’

‘‘मैं तुम्हारी कसम खा कर कहता हूं कि मैं मर जाऊंगा लेकिन तुम्हें रुसवा नहीं होने दूंगा. क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है?’’

‘‘भरोसा है, तभी तो जनाब से इश्क करने की जुर्रत की है.’’ कह कर अब तक संजीदा प्राची के चेहरे पर शरारती मुसकान आ गई. धर्मवीर ने उसे अपनी बांहों में ले कर घेरा और तंग कर दिया, जिस पर प्राची कसमसा कर रह गई. धर्मवीर ने आगे बढ़ कर प्राची के होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया.

‘‘उई मां, बड़े बेशर्म हो तुम.’’ कहते हुए प्राची ने धर्मवीर को परे हटा कर खुद को उस की कैद से आजाद किया और हंसती हुई वहां से चली गई.

धर्मवीर प्राची का प्यार पा कर झूम उठा. उसे लगा कि सारे जहां की खुशियां उस की झोली में सिमट आई हैं. कुछ यही हाल प्राची का भी था. धर्मवीर की हरकतों ने उस के बदन में अजीब सी मादकता भर दी थी. इस तरह धर्मवीर व प्राची की प्रेम कहानी शुरू हो गई. दोनों को जैसे ही मौका मिलता, उन के बीच प्यारमोहब्बत की बातें होतीं. उस समय दोनों को दीनदुनिया की खबर ही न रहती. दोनों ने एक साथ जीनेमरने की कसमें भी खा लीं. जैसेजैसे समय बीतता रहा, उन का इश्क परवान चढ़ता रहा. प्राची व धर्मवीर ने लाख कोशिश की कि उन के प्रेम संबंधों का किसी को पता न चले, लेकिन इश्क की खुशबू भला कौन रोक पाया है.

प्राची के रंगढंग देख कर उस के पिता पृथ्वीराज को शक हुआ तो उन्होंने उस पर नजर रखने के लिए अपनी पत्नी ऊषा को कह दिया. ऊषा ने उस पर नजर रखी तो उस ने प्राची को धर्मवीर से इश्क करते देख लिया. जब पृथ्वीराज को पता चला तो वह आगबबूला हो उठा. उस समय प्राची घर पर ही थी. उस ने प्राची को आवाज दे कर बुलाया, जब वह उस के पास आ गई तो वह बोला, ‘‘क्यों री, यह मैं क्या सुन रहा हूं कि तू धर्मवीर से इश्क लड़ाती घूम रही है.’’

पिता के मुंह से यह बात सुन कर प्राची चौंक गई. वह समझ गई कि किसी ने उस के पिता से उस की व धर्मवीर की चुगली कर दी है. फिर भी पिता से झूठ बोलना प्राची के बस में नहीं था, इसलिए वह पिता से बोली, ‘‘हां पापा, बात यह है कि हम दोनों आपस में मोहब्बत करते हैं और अगर आप की इजाजत हो तो विवाह करना चाहते हैं.’’

प्राची ने यह कहा तो मानो पूरे घर में भूचाल आ गया. पृथ्वीराज प्राची पर कहर बन कर टूट पड़ा. उस ने प्राची की खूब पिटाई की और उसे हिदायत दी कि अगर उस ने दोबारा धर्मवीर से मिलनेजुलने की कोशिश की तो उस का परिणाम अच्छा नहीं होगा. प्राची की मां ऊषा ने भी समाजबिरादरी का हवाला दे कर प्राची को समझाया. उधर प्राची व धर्मवीर के इश्क की बात धर्मवीर के घर वालों को पता चली तो उन्होंने भी धर्मवीर को प्राची से नाता तोड़ लेने का फरमान सुना दिया. प्राची व धर्मवीर पर सख्त पाबंदियां लगा दी गईं. वे जल बिन मछली की तरह तड़प उठे. दरअसल, प्राची धर्मवीर के दिलोदिमाग पर नशा बन कर छा चुकी थी. उस के सौंदर्य ने धर्मवीर पर जादू सा कर दिया था.

उधर प्राची का भी यही हाल था, उस के खयालों में धर्मवीर के अलावा और कुछ आता ही नहीं था. हर समय वह धर्मवीर से मिलने को बेकरार रहती थी. कहते हैं कि प्रेम में जितनी लंबी जुदाई होती है, प्यार उतना ही गहरा होता है. घर वालों की बंदिशें धर्मवीर व प्राची के प्यार को कम नहीं कर सकीं. जब उन की प्रेम अगन बढ़ती चली गई तो उन्होंने मिलने का एक अनोखा रास्ता खोज लिया. एक दिन धर्मवीर ने प्राची को संदेश भिजवाया कि वह दिन छिपने के बाद उस से जंगल में आ कर मिले. धर्मवीर का संदेश पा कर प्राची उस जगह दौड़ी चली गई, जहां धर्मवीर ने मिलने के लिए बुलाया था. दोनों ने गले मिल कर अपने गिलेशिकवे दूर किए. इस के बाद दोनों यही क्रम दोहराने लगे.

एक बार फिर से दोनों का मिलन बदस्तूर शुरू हो गया. इधर प्राची ने घर में धर्मवीर का नाम लेना तक बंद कर दिया था, जिस के चलते पृथ्वीराज ने सोच लिया कि बेटी के सिर से इश्क का भूत शायद उतर गया है. धर्मवीर के विवाह के लिए रिश्ते आने लगे तब धर्मवीर और प्राची को इस का पता चला तो उन के होश उड़ गए. धर्मवीर के घर वाले भी किसी कीमत पर प्राची को अपने घर की बहू स्वीकारने को तैयार नहीं थे. प्राची के पिता पृथ्वीराज ने भी साफसाफ कह दिया कि वह अपनी बेटी को कुएं में धक्का दे देगा लेकिन उस का हाथ धर्मवीर के हाथ में नहीं देगा.

अगले दिन प्राची जब धर्मवीर से मिली तो बोली, ‘‘कुछ करो धर्मवीर, अगर हम यूं ही खामोश बैठे रहे तो एकदूसरे से जुदा कर दिए जाएंगे और मैं तुम से जुदा हो कर जिंदा नहीं रहना चाहती. अगर तुम मुझे नहीं मिले तो मैं जहर खा कर जान दे दूंगी.’’

‘‘ऐसा नहीं कहते प्राची, हम ने पाक मोहब्बत की है. हमारी मोहब्बत जरूर कामयाब होगी.’’ धर्मवीर प्राची के हाथ को अपने हाथ में ले कर बोला तो प्राची के मन को तसल्ली हुई.

9 दिसंबर, 2019 की सुबह लगभग साढ़े 8 बजे प्राची घर का कूड़ा गांव के बाहर घूरे पर डालने गई. काफी समय बीत गया, वह नहीं लौटी तो उस के मातापिता ने उसे पूरे गांव में तलाशा, लेकिन उस का कोई पता नहीं लगा. काफी तलाशने के बाद भी जब प्राची का नहीं मिली तो 10 दिसंबर को पृथ्वीराज ने थाना पटवाई में बेटी के लापता होने की सूचना दी. साथ ही उन्होंने गांव के ही धर्मवीर पर शक जताया. इस सूचना पर थानाप्रभारी इंद्र कुमार ने थाने में प्राची की गुमशुदगी की सूचना लिखा दी. थानाप्रभारी ने धर्मवीर के बारे में पता करवाया तो वह भी घर से गायब मिला. उस की सुरागरसी के लिए उन्होंने अपने मुखबिरों को लगा दिया. 15 दिसंबर को पटवाई चौराहे से थानाप्रभारी इंद्रकुमार ने धर्मवीर को गिरफ्तार कर लिया.

थाने ला कर जब धर्मवीर से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उस ने प्राची की हत्या कर लाश छिपाने का जुर्म स्वीकार कर लिया. इतना ही नहीं पुलिस ने धर्मवीर की निशानदेही पर गांव के बाहर घूरे में दबी सीमा की लाश भी बरामद करा दी. प्राची की लाश क्षतविक्षत हालत में थी. उस का एक हाथ गायब था. अनुमान लगाया कि शायद कुत्तों ने उस की लाश को नोंच खाया होगा. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद पुलिस धर्मवीर को ले कर थाने आ गई. इस के बाद प्राची के पिता पृथ्वीराज की तरफ से भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. पूछताछ में हत्या की जो वजह निकल कर आई, वह कुछ इस तरह थी—

धर्मवीर और प्राची के घरवाले जब उन की शादी के लिए तैयार नहीं हुए तो इस प्रेमी युगल की चिंता बढ़ गई. तब धर्मवीर ने प्राची से वादा किया, ‘‘प्राची मैं घर वालों के कहने पर दूसरी लड़की से विवाह तो कर लूंगा लेकिन मैं सच्चे दिल से तुम्हारा ही रहूंगा. हमारा रिश्ता भले ही दुनिया की नजर में अलग हो जाए, लेकिन हम हमेशा एक रहेंगे. विवाह के बाद भी मैं तुम्हारा ही बना रहूंगा.’’

धर्मवीर के इस वादे पर प्राची को पूरा भरोसा था. इस के अलावा उन के पास अपने रिश्ते को बनाए रखने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा था. धर्मवीर के लिए जो रिश्ते आ रहे थे, उन में से धर्मवीर के परिजनों को एक रिश्ता भा गया. वह था रामपुर के मिलक थाना क्षेत्र के ऊंचा खाला निवासी नीलम का. नीलम अब अपने परिवार के साथ मुरादाबाद में रह रही थी. बात आगे बढ़ी तो दोनों का रिश्ता पक्का कर दिया गया. 19 अप्रैल, 2019 को धर्मवीर और नीलम का विवाह संपन्न हो गया. नीलम काफी सुंदर, शिक्षित व गुणवती थी. उस ने धर्मवीर के परिवार में आते ही अपनी बातों व कार्यों से सब का दिल जीत लिया.

उस में धर्मवीर भी था. नीलम के आने से धर्मवीर के दिलोदिमाग से प्राची के इश्क का भूत उतरने लगा था. लेकिन उस ने प्राची से संबंध खत्म नहीं किए थे. एक तरह से वह दो नावों की सवारी कर रहा था. ऐसे में उस का डूबना निश्चित था. नीलम को कुछ ही दिनों में पति की हकीकत पता लग गई कि वह कैसे उसे धोखा दे रहा है. कोई भी औरत सब कुछ बरदाश्त कर सकती है, लेकिन शौहर का बंटवारा बिलकुल बरदाश्त नहीं कर सकती. बीवी के रहते पति पराई औरत से इश्क लड़ाए, यह बात नीलम को पसंद नहीं थी. लिहाजा वह घर छोड़ कर मायके चली गई. धर्मवीर ने नीलम को काफी मनाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी.

इधर प्राची को पता चला तो वह धर्मवीर पर खुद से विवाह करने का दबाव बनाने लगी. इस से धर्मवीर परेशान हो गया. वह नीलम को हर हाल में घर वापस लाना चाहता था. इसी बीच 3 दिसंबर, 2019 को नीलम ने मुरादाबाद के महिला थाने में धर्मवीर के खिलाफ उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया. 8 दिसंबर को मुरादाबाद पुलिस धर्मवीर के घर आई, वह घर पर नहीं था. मुरादाबाद पुलिस पूछताछ कर के वापस लौट गई. सब कुछ धर्मवीर की बरदाश्त के बाहर हो गया. उस ने प्राची से हमेशा के लिए छुटकारा पाने का फैसला कर लिया. 9 दिसंबर की सुबह उस ने प्राची को मिलने के लिए गांव के बाहर बुलाया. प्राची घर का कूड़ा घूरे पर फेंकने के बहाने घर से निकली.

घूरे के पास धर्मवीर उसे खड़ा मिल गया. प्राची के आते ही धर्मवीर ने उसे दबोच लिया और हाथों से गला दबा कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद उस ने उस की लाश घूरे में दबा दी और वहां से फरार हो गया. लेकिन वह कानून की गिरफ्त से अपने आप को न बचा सका. कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इंसपेक्टर इंद्र कुमार ने उसे सीजेएम कोर्ट में पेश किया, वहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

प्राची परिवर्तित नाम है.

Love Crime Stories : प्रेमिका को सिंदूर भरने के बहाने बाग में ले गया और पैट्रोल डालकर जिंदा जलाया

Love Crime Stories : वंशिका गुप्ता और अतुल गुप्ता के परिवार की आर्थिक स्थिति में जमीनआसमान का अंतर था, इस के बावजूद भी दोनों एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे. लेकिन लालची स्वभाव के अतुल के पिता पारसनाथ गुप्ता ने अतुल की शादी वंशिका के बजाय किसी और लड़की से तय कर दी. इस के बाद जो हुआ वो…

दिलीप गुप्ता बहुत बेचैन थे. उन की नजरें बारबार कलाई घड़ी की ओर चली जाती थीं, समय देखते तो उन की बेचैनी बढ़ जाती. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वंशिका ने आने में इतनी देर कैसे कर दी. बेटी के बारे में सोचसोच कर उन के माथे की सिलवटें और भी गहरी होती जा रही थीं. उन की 21 वर्षीया बेटी वंशिका महावीर सिंह महाविद्यालय में बीएससी (तृतीय वर्ष) की छात्रा थी. 1 फरवरी, 2020 को वह सुबह 10 बजे कालेज जाने के लिए घर से निकली थी. उसे हर हाल में 3 बजे तक वापस घर आ जाना चाहिए था, लेकिन अब शाम के 5 बज चुके थे, वह घर नहीं लौटी थी. उस का मोबाइल फोन भी बंद था. दिलीप गुप्ता इसलिए बेचैन थे.

दिलीप गुप्ता की परेशानी तब और बढ़ गई, जब शाम 6 बजे उन के मोबाइल पर किसी अनजान फोन नंबर से एक एसएमएस आया. मैसेज में लिखा था, ‘अंकल, वंशिका का अपहरण हो गया है.’ मैसेज पढ़ कर दिलीप गुप्ता घबरा गए. उन की पत्नी रजनी ने तो रोना शुरू कर दिया. वह बारबार कह रही थी कि वंशिका जरूरी काम से कालेज गई थी. वह अपहर्त्ताओं के चक्कर में कैसे फंस गई. दिलीप गुप्ता ने मैसेज भेजने वाले मोबाइल फोन पर काल लगाई, लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ था. इस से पतिपत्नी की धड़कनें बढ़ गईं. वंशिका की वार्षिक परीक्षा सिर पर थी. ऐसे समय में उस का अपहरण हो जाने से अतुल गुप्ता का परिवार स्तब्ध रह गया.

दिलीप गुप्ता की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी, इसलिए उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उन की बेटी का फिरौती के लिए अपहरण हुआ है. इसी अविश्वास की वजह से वह अपने परिजनों के साथ बेटी की खोज में जुट गए. बछरावां कस्बे में वंशिका की कई सहेलियां थीं. वह उन के घर गए. कई से मोबाइल फोन पर जानकारी जुटाई. इस के अलावा उन्होंने बसअड्डे व नातेरिश्तेदारों के यहां वंशिका की खोज की, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. गुप्ता पूरी रात बेटी की खोज में जुटे रहे. 2 फरवरी की सुबह 8 बजे दिलीप गुप्ता बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने थाना बछरावां जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन की नजर अखबार में छपी एक खबर पर पड़ी. खबर पढ़ कर उन का दिल कांप उठा, मन में तरहतरह की आशंकाएं उमड़ने लगीं.

खबर के मुताबिक, रायबरेली के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के शोरा गांव स्थित एक ढाबे के पीछे यूकेलिप्टस के बाग में पुलिस को एक युवती की अधजली लाश मिली थी, जिस की पहचान नहीं हो पाई थी. खबर में कुछ पहचान वाली बातें भी छपी थीं. दिलीप गुप्ता को शक हुआ कि कहीं लाश उन की बेटी की तो नहीं. इस जानकारी के बाद वह पत्नी तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ थाना हरचंदपुर जा पहुंचे. थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह उस समय थाने में ही थे और सहयोगी पुलिसकर्मियों से अज्ञात लाश के बारे में चर्चा कर रहे थे. दिलीप गुप्ता ने उन्हें परिचय दिया और बेटी की गुमशुदगी की जानकारी दे कर बरामद शव को देखने की इच्छा जताई.

शिनाख्त हेतु युवती के शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया था. थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह दिलीप गुप्ता व उन के घर वालों को पोस्टमार्टम हाउस ले गए. युवती का अधजला शरीर सामने आया तो घर वाले चीख पड़े. थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह ने उन्हें सांत्वना दे कर लाश की पहचान कराई. परिवार के लोगों ने चेहरे से शिनाख्त करने में असमर्थता जताई. फिर उस के कपड़ों और पहनावे से अंदाजा लगाया. पैरों की नेल पौलिश, कान में सोने की बाली, जूड़ा बांधने का तरीका, नाक में छोटी नथुनी, जींस के कपड़े और जूतों से मातापिता ने लाश पहचान ली. मृतका उन की बेटी वंशिका ही थी.

अनिल कुमार सिंह मृतका के पिता दिलीप गुप्ता और मां रजनी गुप्ता को थाना हरचंदपुर ले आए. सब से पहले उन्होंने लाश की शिनाख्त हो जाने की जानकारी एसपी स्वप्निल ममगाई को दी. सूचना पाते ही वह थाने आ गए. उन्होंने मृतका के पिता दिलीप गुप्ता से विस्तृत पूछताछ की. दिलीप गुप्ता ने बताया कि उन्हें एक रिश्तेदार अतुल गुप्ता पर शक है, जो उन की बेटी वंशिका को परेशान करता था. कुछ दिन पहले उस ने वंशिका के कालेज में उस के साथ मारपीट भी की थी, साथ ही धमकी भी दी थी. यह मामला तूल पकड़ता, इस के पहले ही अतुल व उस के घर वालों ने माफी मांग कर मामले को रफादफा कर दिया था.

अतुल उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के शिवरतनगंज थाने के अहोरवा भवानी का रहने वाला था. वह धनाढ्य कपड़ा व्यवसायी पारसनाथ का बेटा है. शक है कि रंजिशन अतुल गुप्ता ने अपने अन्य साथियों के साथ मिल कर वंशिका की हत्या की है. दिलीप गुप्ता ने दूसरा शक वंशिका की सहेली अंजलि श्रीवास्तव पर जताया. उन्होंने बताया कि वंशिका उस के साथ खूब हिलीमिली थी. कल भी वह वंशिका के साथ ही कालेज गई थी. उस ने ही कल उस के मोबाइल पर वंशिका के अपहरण का मैसेज भेजा था. फिर उस ने अपना मोबाइल बंद कर लिया था. अंजलि श्रीवास्तव बछरावां कस्बे के शांतिनगर मोहल्ले में अपनी मां के साथ रहती थी. उस के पिता जयपुर में नौकरी करते थे.

3 फरवरी की सुबह लोगों ने अखबारों में बीएससी की छात्रा वंशिका को पैट्रोल छिड़क कर जिंदा जलाने की खबर अखबारों में पढ़ी तो बछरावां की जनता सड़कों पर उतर आई. सामाजिक संगठन, कालेज की छात्राएं, स्कूल छात्राएं और व्यापारी घटना के विरोध में धरनाप्रदर्शन करने लगे. मासूम बच्चों ने जहां रैली निकाल कर वंशिका के लिए न्याय की गुहार लगाई, जबकि कालेज की छात्राओं ने वंशिका के हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की. सामाजिक संगठन की महिलाओं ने भी सड़क पर जोरदार प्रदर्शन किया.

बछरावां की जनता और व्यापारियों ने तो राष्ट्रीय राजमार्ग-30 को जाम कर दिया. लोग सड़क पर लेट कर प्रदर्शन करने लगे. लोगों को सरकार और पुलिस पर गुस्सा था. वे नारे लगा रहे थे, ‘बिटिया हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं. पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद मुर्दाबाद.’ वे लोग जल्द से जल्द हत्यारों को गिरफ्तार कर के उन्हें फांसी पर लटकाने की मांग कर रहे थे. जाम तथा बड़े प्रदर्शन से पुलिस के हाथपांव फूल गए. इंसपेक्टर पंकज तिवारी भारीभरकम फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने उग्र प्रदर्शन की जानकारी एसपी स्वप्निल ममगाई को दी तो वह मौके पर आ गए. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया.

उन्होंने आश्वासन दिया कि हत्या से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं. हत्या का जल्द खुलासा होगा और कातिल पकड़े जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मारपीट या रेप की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन की बात पर भरोसा नहीं किया. लगभग 3 घंटे की जद्दोजेहद के बाद क्षेत्रीय भाजपा विधायक रामनरेश रावत को प्रदर्शनकारियों के बीच आना पड़ा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाया कि सरकार की ओर से मृतका के परिजनों को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी. साथ ही यह भी कि वंशिका के कातिल जल्द पकड़े जाएंगे. विधायक के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त हो गया.

चूंकि वंशिका हत्याकांड ने पुलिसप्रशासन की नींद हराम कर दी थी, इसलिए एसपी स्वप्निल ममगाई ने मामले को गंभीरता और चुनौती के रूप में स्वीकार किया. उन्होंने वंशिका हत्याकांड का परदाफाश करने के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में थाना हरचंदपुर इंसपेक्टर अनिल कुमार सिंह, थाना बछरावां इंसपेक्टर पंकज तिवारी, थाना शिवगढ़ इंसपेक्टर राकेश सिंह, महिला थानाप्रभारी संतोष कुमारी, सीओ (सिटी) गोपीनाथ सोनी, सीओ (महराजगंज) राघवेंद्र चतुर्वेदी और सर्विलांस टीम के आरक्षी रामनिवास को शामिल किया गया. पुलिस टीम की कमान एएसपी नित्यानंद राय को सौंपी गई.

पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर सर्विलांस टीम के आरक्षी रामनिवास ने पहली फरवरी को घटनास्थल पर सक्रिय 2 नंबरों को संदिग्ध पाया. इन नंबरों की जानकारी जुटाई गई तो इन में एक नंबर अतुल गुप्ता का था और दूसरा ललित गुप्ता का. दोनों अमेठी के कस्बा अहोरवा भवानी, थाना शिवरतनगंज के रहने वाले थे. अतुल गुप्ता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकाली गई तो पता चला कि घटना वाले दिन अतुल एक नंबर पर कई घंटे संपर्क में रहा. इस मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई गई तो वह नंबर अंजलि श्रीवास्तव, शांतिनगर, बछरावां (रायबरेली) के नाम था.

पुलिस टीम ने अंजलि श्रीवास्तव और अतुल के संबंध में मृतका के पिता दिलीप गुप्ता से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि अंजलि श्रीवास्तव उन की बेटी की फ्रैंड है और अतुल गुप्ता उन का रिश्तेदार. अतुल बेटी को परेशान करता था और अंजलि भी विश्वसनीय नहीं है. उन दोनों पर उन्हें शक है. अंजलि और अतुल पुलिस की रडार पर आए तो पुलिस टीम ने दोनों को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया और थाना हरचंदपुर ले आई. पुलिस टीम में शामिल महिला थानाप्रभारी संतोष कुमारी अंजलि श्रीवास्तव  को पूछताछ वाले कमरे में ले गईं और बोली, ‘‘अंजलि, सचसच बताओ, वंशिका को किस ने जला कर मारा. मुझे अच्छी तरह पता है कि तुम्हें सब मालूम है.’’

‘‘मुझे कुछ नहीं मालूम. कालेज में वह मिली जरूरी थी, पर उस का अपहरण किस ने किया या उसे किस ने जला कर मारा, मुझे पता नहीं.’’

‘‘चालाक मत बनो अंजलि, अतुल के मोबाइल से यह बात पता चल गई है कि तुम उस के संपर्क में थी और तुम्हें सब पता है.’’

यह सुन कर अजलि का चेहरा फक पड़ गया. वह सिर झुका कर बोली, ‘‘मैडम, मैं अतुल के संपर्क में जरूर रही, पर जो किया अतुल ने किया. वह वंशिका की मांग में सिंदूर भरने के बहाने उसे कार में बिठा कर ले गया था.’’

अंजलि के टूटने के बाद अब बारी अतुल की थी. पुलिस टीम अतुल को पूछताछ कक्ष में ले गई. उस से पूछा गया, ‘‘अतुल, तुम ने वंशिका की हत्या क्यों की? तुम्हारे साथ और कौन था? वैसे तो अंजलि ने सब कुछ बता दिया है, लेकिन हम तुम्हारे मुंह से जानना चाहते हैं.’’

पहले तो अतुल गुप्ता अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से मुकरता रहा, लेकिन पुलिस टीम ने जब सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. अतुल ने बताया कि वंशिका उस पर शादी करने का दबाव बना रही थी, जबकि उस की शादी 25 फरवरी, 2020 को किसी दूसरी लड़की से होनी तय हो गई थी. वंशिका जब उसे समाज में बदनाम करने तथा जिंदगी तबाह करने की धमकी देने लगी तो उस ने वंशिका की हत्या की योजना बनाई. इस योजना में उस ने वंशिका की खास सहेली अंजलि श्रीवास्तव व अपने चचेरे भाई ललित गुप्ता, ममेरे भाई कृष्णचंद गुप्ता उर्फ धीरू को भी शामिल कर लिया. धीरू महाराजगंज थाने के गांव डेपार मऊ का रहने वाला है.

4 फरवरी की रात पुलिस टीम ने अहोरवा भवानी स्थित ललित गुप्ता के घर छापा मारा. पुलिस को देख कर ललित कंबल ओढ़ कर तख्त के नीचे छिप गया लेकिन वह पुलिस की निगाह से नहीं बच सका. ललित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम ने सुबह 4 बजे महाराजगंज थाने के गांव डेपारमऊ में धीरू के घर छापा मारा. लेकिन वह घर से फरार था. धीरू के न मिलने पर पुलिस टीम थाना हरचंदपुर लौट आई. थाने में ललित ने अतुल को हवालात में देखा तो उस का चेहरा मुरझा गया. पूछताछ में ललित ने पहले तो गुनाह से इनकार किया, लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया. उस ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. धीरू को पुलिस काफी प्रयास के बाद भी गिरफ्तार नहीं कर पाई.

अभियुक्त अतुल गुप्ता और ललित गुप्ता की निशानदेही पर पुलिस टीम ने वह कार भी बरामद कर ली, जिस पर झांसा दे कर वंशिका को ले जाया गया था. यह कार दुर्गेश के नाम रजिस्टर्ड थी, जो अतुल का रिश्तेदार था. वह घूमने जाने का बहाना कर कार लाया था. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल रस्सी, पैट्रोल की 5 लीटर की खाली कैन, क्लोरोफार्म की खाली शीशी व सिंदूर की डब्बी भी कार से बरामद कर ली. इस के अलावा पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 मोबाइल फोन भी बरामद किए. पुलिस टीम ने वंशिका गुप्ता हत्याकांड का खुलासा करने तथा कातिलों को पकड़ने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दे दी. यह खबर मिलते ही एसपी स्वप्निल ममगाई व एएसपी नित्यानंद राय थाना हरचंदपुर आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की फिर खुलासा करने वाली टीम की पीठ थपथपाई, साथ ही टीम को 25 हजार रुपया पुरस्कार देने की घोषणा की. इस के बाद एसपी स्वप्निल ममगाई ने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता कर अभियुक्तों को मीडिया के सामने पेश कर घटना का खुलासा किया. चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया था, इसलिए थाना हरचंदपुर प्रभारी इंसपेक्टर अनिल कुमार सिंह ने मृतका के पिता दिलीप गुप्ता को वादी बना कर भादंवि की धारा 302, 201, 120बी तथा 34 के तहत अतुल गुप्ता, ललित गुप्ता, कृष्णचंद उर्फ धीरू गुप्ता और अंजलि श्रीवास्तव के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली. इन में अतुल, ललित तथा अंजलि श्रीवास्तव को विधिवत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में एक दिलजले प्रेमी की हैवानियत की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 50 किलोमीटर दूर लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर है कस्बा बछरावां. यह रायबरेली जिले का औद्योगिक कस्बा है. इसी बछरावां कस्बे के सब्जीमंडी में दिलीप कुमार गुप्ता अपने परिवार के साथ रहते हैं. उन के परिवार में पत्नी रजनी गुप्ता के अलावा 4 संतानों में से 2 बेटे और 2 बेटियां हैं. इन में वंशिका सब से बड़ी थी. दिलीप की पान की दुकान है. दुकान से होने वाली आय से ही परिवार का भरणपोषण करते थे. समाज में उन की अच्छी पैठ थी. दिलीप गुप्ता की बेटी वंशिका अपने अन्य भाईबहनों से कुछ ज्यादा ही तेजतर्रार थी. वह दिखने में सुंदर थी. उस का दूधिया गोरा रंग, नैननक्श, इकहरा बदन और लंबा कद सभी को आकर्षित करता था. उसे अच्छे और आधुनिक कपड़े पहनने का शौक था. उस के हंसमुख स्वभाव की वजह से उसे सभी पसंद करते थे.

दिलीप गुप्ता व उन की पत्नी रजनी, वंशिका को बहुत चाहते थे. उन की आर्थिक स्थिति भले ही अच्छी नहीं थी, लेकिन वह वंशिका की हर फरमाइश पूरी करते थे. वंशिका ने भी अपने मांबाप को कभी निराश नहीं किया था. वह पढ़ने में मेधावी थी. इंटर की परीक्षा पास करने के बाद मांबाप की इजाजत के बाद वंशिका ने बछरावां से 15 किलोमीटर दूर महावीर सिंह महाविद्यालय में बीएससी में प्रवेश ले लिया था. आवागमन के साधन होने की वजह से वंशिका को महाविद्यालय पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होती थी. उस के साथ कस्बे की अनेक लड़कियां पढ़ने जाती थीं.

वंशिका गुप्ता की वैसे तो कई फ्रैंड थीं, लेकिन उसी की क्लास में पढ़ने वाली अंजलि श्रीवास्तव ज्यादा घनिष्ठ थी. अंजलि बछरावां कस्बे के शांतिनगर मोहल्ले में अपनी मां व छोटी बहन के साथ किराए के मकान में रहती थी, उस के पिता जयपुर में नौकरी करते थे. वंशिका व अंजलि हमउम्र थीं. दोनों घर से ले कर पढ़ाईलिखाई तक की बातें एकदूसरे से शेयर करती थीं. दोनों का एकदूसरे के घर भी आनाजाना था.  वंशिका ने बीएससी की प्रथम वर्ष की परीक्षा पास कर के द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले लिया. वह प्रथम श्रेणी में डिग्री हासिल करना चाहती थी, सो वह खूब मना लगा कर पढ़ने लगी. उस ने कालेज जाना कम कर दिया था और घर में ही पढ़ाई करने लगी थी. उस ने कस्बे के कोचिंग में पढ़ना भी शुरू कर दिया था.

उन्हीं दिनों एक शादी समारोह में वंशिका की मुलाकात अतुल गुप्ता से हुई. वंशिका अपने मातापिता के साथ अमेठी के थाना शिवरतनगंज क्षेत्र के कस्बा अहोरवां भवानी निवासी रिश्तेदार के घर शदी में आई थी. अतुल गुप्ता भी शादी में आया था. वह अहोरवां भवानी का ही रहने वाला था. वह अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाता था. अतुल गुप्ता की नजर वंशिका पर पड़ी तो वह पहली ही नजर में उस के दिल में उतर गई. वह उस से बात करना चाहता था. जब उसे मौका मिला तो वह वंशिका की तारीफ करते हुए बोला, ‘‘आप अहोरवां भवानी की तो नहीं हैं, कहीं बाहर से आई हैं क्या?’’

‘‘मैं बछरावां की रहने वाली हूं. नाम है वंशिका. मैं अपने मातापिता के साथ शादी में शामिल होने आई हूं.’’ जब अतुल ने वंशिका का परिचय पूछा तो औपचारिक रूप से उस ने भी पूछ लिया, ‘‘आप ने तो मेरा परिचय जान लिया, लेकिन अपने बारे में कुछ नहीं बताया.’’

अतुल गुप्ता मुसकराते हुए बोला, ‘‘मैं अहोरवां भवानी का ही रहने वाला हूं. नाम है अतुल गुप्ता. पिता का नाम पारसनाथ गुप्ता. कपड़े के व्यवसायी हैं. मैं भी दुकान पर बैठता हूं.’’

ऐसी ही हलकीफुलकी बातों के बीच अतुल और वंशिका का परिचय हुआ, जो आगे चल कर दोस्ती में बदल गया. दोस्ती हुई तो दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर दे दिए. फुरसत में अतुल वंशिका के मोबाइल पर फोन कर के उस से बातें करने लगा. वंशिका को भी अतुल का स्वभाव अच्छा लगा, वह भी फोन पर उस से अपने दिल की बातें कर लेती थी. परिणाम यह निकला कि दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. अतुल गुप्ता ने इन नजदीकियों का भरपूर फायदा उठाया. वह वंशिका के कालेज पहुंचने लगा. कभीकभी वह उसे अपने साथ घुमाने के लिए बाहर भी ले जाने लगा. दोनों घूमने जाते तो अच्छे दोस्तों की तरह खुल कर दिल की बातें करते.

कुछ ही मुलाकातों में वंशिका को लगने लगा कि अतुल ही उस का भावी जीवनसाथी बनेगा. परिणामस्वरूप दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब तक वंशिका बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा पास कर अंतिम वर्ष में पहुंच गई थी. एक दिन वंशिका की सहेली अंजलि श्रीवास्तव ने उसे किसी युवक के साथ हंसतेबतियाते देखा तो बाद में उस ने पूछा, ‘‘वंशिका, वह लड़का कौन था, जिस से तुम हंसहंस कर बातें कर रही थी?’’

वंशिका हौले से मुरा कर बोली, ‘‘अंजलि, तू मेरी सब से अच्छी फ्रैंड है. तुझ से मैं कुछ नहीं छिपाऊंगी. उस का नाम अतुल गुप्ता है, धनाढ्य कपड़ा व्यापारी का बेटा है. हम दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं. मुझे लगता है अतुल ही मेरा भावी जीवनसाथी होगा.’’

बाद में वंशिका ने अतुल गुप्ता से अंजलि का भी परिचय करा दिया. अंजलि दोनों के प्यार की राजदार बनी तो वह उन दोनों का सहयोग करने लगी. वंशिका और अतुल का प्यार दिन पर दिन बढ़ने लगा. वंशिका को अतुल से बात किए बिना सकून नहीं मिलता था. अतुल का भी यही हाल था. वंशिका के मातापिता को जब दोनों के बढ़ते प्यार की जानकारी हुई तो उन्हें ताज्जुब हुआ कि वंशिका ने इस बारे में उन्हें बताया क्यों नहीं. पूछने पर वंशिका ने साफ कह दिया कि वह अतुल से प्यार करती है और उसी से शादी करेगी. दिलीप गुप्ता ने बेटी को समझाया, ‘‘बेटी, ठीक है कि अतुल अच्छा लड़का है. हमारा दूर का रिश्तेदार भी है. लेकिन हमारी और उन लोगों की हैसियत में जमीनआसमान का अंतर है. मेरी पान की छोटी सी दुकान है और वह धनाढ्य कपड़ा व्यवसायी.

मुझे डर है कि कहीं वह तुम्हें मंझधार में न छोड़ दे.’’ रजनी ने भी वंशिका को समझाया, लेकिन अतुल के प्यार में अंधी हो चुकी वंशिका को मांबाप की बात समझ में नहीं आई. दूसरी ओर पारसनाथ गुप्ता को जब पता चला कि उन का बेटा अतुल बछरावां के साधारण पान विक्रेता दिलीप गुप्ता की बेटी के प्यार में है तो उन का माथा ठनका. उन्होंने उसे समझाया, ‘‘बेटा, रिश्ता बराबरी का अच्छा होता है. तुम्हारी और उस की हैसियत में बड़ा अंतर है. हमें यह रिश्ता मंजूर नहीं है. तुम उसे भूल जाओ, इसी में सब की भलाई है.’’

अतुल ने पिता की बात पर गंभीरता से विचार किया तो उसे लगा कि वह ठीक कह रहे हैं. अत: उस ने वंशिका से दोस्ती खत्म करने का निश्चय कर लिया और उस से दूरियां बनानी शुरू कर दीं. अब वंशिका जब भी फोन करती तो वह रिसीव नहीं करता था. बारबार फोन करने पर वह रिसीव करता और वंशिका उलाहना देती तो वह कोई न कोई बहाना बना देता. पारसनाथ गुप्ता ने अतुल में परिवर्तन पाया तो उन्होंने उस का रिश्ता कहीं और तय कर दिया. 25 फरवरी, 2020 की शादी की तारीख भी तय कर दी गई. अतुल ने इस रिश्ते का कोई विरोध नहीं किया बल्कि मौन स्वीकृति दे दी.

नवंबर, 2019 में वंशिका को पता चला कि अतुल के मांबाप ने उस की शादी तय कर दी है और 25 फरवरी की शादी की तारीख भी तय हो गई है. यह पता चलते ही वंशिका के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे अपना सपना टूटता नजर आया तो उस ने अतुल से मुलाकात की और पूछा, ‘‘अतुल, जो बात मैं ने सुनी है, क्या वह सच है?’’

‘‘हां वंशिका, तुम ने जो सुना, वह सच है. मातापिता ने मेरा रिश्ता तय कर दिया है.’’

‘‘तुम पागल हो गए हो क्या?’’ उस की बात सुन कर वंशिका तीखे स्वर में बोली, ‘‘अगर यह सच है तो फिर मेरे साथ घंटों प्यार भी बातें करना, दिनदिन भर मेरे साथ घूमनाफिरना क्या था?’’

‘‘वह दोस्ती थी. तुम चाहो तो यह दोस्ती मेरी शादी के बाद भी जारी रख सकती है.’’

‘‘अतुल, तुम्हारे लिए यह दोस्ती भर होगी, मैं तो तुम से प्यार करती हूं. मैं शादी करूंगी तो सिर्फ तुम से वरना जिंदगी भर कुंवारी बैठी रहूंगी. तुम भी कान खोल कर सुन लो, अगर तुम ने मुझ से शादी नहीं की तो मैं तुम्हें समाज में बदनाम कर दूंगी. झूठे मामलों में फंसा दूंगी, समझे.’’

अतुल ने वंशिका से उलझना ठीक नहीं समझा. वह घर वापस आ गया. इस के बाद वह वंशिका की धमकी से परेशान रहने लगा. दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं और उन का प्यार नफरत में बदलने लगा. जनवरी, 2020 में पहले हफ्ते में एक रोज वंशिका ने अतुल को फोन कर धमकी दी कि अगर उस ने उस के प्यार को ठुकरा दिया तो वह उसे भी दूल्हा नहीं बनने देगी, शादी में हंगामा कर शादी तुड़वा देगी. उस रोज अतुल पहले से ही तनाव में था. गुस्से में वह वंशिका के कालेज पहुंचा. वहां वादविवाद हुआ तो उस ने वंशिका के गाल पर 2 थप्पड़ जड़ दिए. कालेज में सार्वजनिक अपमान से वंशिका तिलमिला उठी. उस ने घर आ कर यह जानकारी मांबाप को दी. दिलीप गुप्ता इस बारे में बात करने अतुल के घर पहुंचे और उस के पिता पारसनाथ गुप्ता से बेटी को प्रताडि़त करने की शिकायत की.

बेटे की गलती पर पारसनाथ गुप्ता ने दिलीप के आगे हाथ जोड़ कर माफी मांग ली. उन्होंने अतुल को भी माफी मांगने पर विवश कर दिया. इस के बाद मामला रफादफा हो गया. अतुल ने माफी मांग कर मामला रफादफा जरूर कर दिया था, लेकिन उस का तनाव कम नहीं हुआ था. वह जानता था कि वंशिका को समझाना आसान नहीं है. इसलिए वह वंशिका से निजात पाने की सोचने लगा. पिता द्वारा हाथ जोड़ कर माफी मांगना भी उस के क्रोध को बढ़ा रहा था. अतुल की अपने चचेरे भाई ललित तथा ममेरे भाई कृष्णचंद उर्फ धीरू से खूब पटती थी. अतुल ने जब यह बात उन्हें बताई तो तीनों ने मिल कर खूब सोचा कि वंशिका से कैसे पीछा छुड़ाया जाए. अंतत: तय हुआ कि वंशिका को ही मिटा दिया जाए.

इस के बाद तीनों ने मिल कर वंशिका की हत्या की योजना बनाई. इस योजना में वंशिका की सहेली अंजलि श्रीवास्तव को भी आर्थिक प्रलोभन दे कर शामिल किया गया. अंजलि को वंशिका की सुरागरसी का काम सौंपा गया ताकि वह उस की गतिविधियों की जानकारी देती रहे. पहली फरवरी, 2020 की सुबह 9 बजे अंजलि श्रीवास्तव ने अतुल को मैसेज किया कि वंशिका और वह महावीर सिंह महाविद्यालय जा रही हैं. वहीं से वह वंशिका को ले कर गंगागंज आएगी. वह वहीं आ जाए. अंजलि का मैसेज मिलते ही अतुल सक्रिय हो गया. वह घूमने जाने का बहाना कर अपने रिश्तेदार दुर्गेश की कार ले आया. फिर वह अपने चचेरे भाई ललित तथा ममेरे भाई धीरू के साथ अहोरा भवानी से कार से निकल पड़ा.

इन लोगों ने मैडिकल स्टोर से क्लोरोफार्म की शीशी तथा बाजार से रस्सी व सिंदूर की डब्बी खरीदी, साथ ही रतापुर स्थित पैट्रोलपंप से कैन में 5 लीटर पैट्रोल भरवा लिया. उस के बाद तीनों गंगागंज आ गए. वहां तीनों वंशिका और अंजलि का इंतजार करने लगे. दूसरी ओर वंशिका और अंजलि बछरावां से सुबह 10 बजे निकलीं और 11 बजे कालेज पहुंचीं. दोनों एक घंटा कालेज में रुकीं. दोनों 12 बजे कालेज से निकलीं. अंजलि घूमने के बहाने वंशिका को गंगागंज ले आई. इस बीच अंजलि फोन पर अतुल के संपर्क में रही और मैसेज भेजती रही. गंगागंज पहुंचने पर अंजलि ने अतुल को मैसेज किया तो वह उस के बताए होटल पर पहुंच गया. उस समय दोनों समोसा खा रही थीं.

अतुल को देख कर अंजलि बोली, ‘‘वंशिका, वह देखो अतुल कार में बैठा है. चलो उस से मिल लेते हैं.’’

वंशिका ने पहले तो मना किया फिर अंजलि के समझाने पर वह कार के पास जा पहुंची. वंशिका पहुंची तो अतुल बोला, ‘‘वंशिका, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं. मैं चाहता हूं कि आज ही तुम्हारी मांग भरूं. देखो, सिंदूर की डब्बी भी साथ लाया हूं. तुम मेरे साथ मंदिर चलो.’’

अतुल की बात पर वंशिका को विश्वास तो नहीं हुआ लेकिन सिंदूर देख कर उस का प्यार उमड़ पड़ा और वह उस की कार में बैठ गई. वंशिका के बैठते ही कार चल पड़ी. कार को ललित चला रहा था और वंशिका अतुल तथा धीरू पीछे की सीट पर बैठे थे. छलिया प्रेमी के खतरनाक इरादों से अनजान वंशिका जैसे ही अतुल के सीने से लगी, तभी उस की हैवानियत शुरू हो गई. उस ने क्लोरोफार्म की शीशी निकाली और वंशिका को सुंघा दी. कुछ क्षण बाद ही वंशिका बेहोश हो गई. इस के बाद अतुल और धीरू ने मिल कर वंशिका के हाथपैर रस्सी से बांध दिए. ललित ने गंगागंज से लगभग 3 किलोमीटर दूर शेरागांव के पास गोपाल ढाबे के पीछे सुनसान जगह पर कार रोकी.

सामने यूकेलिप्टस का बाग था. अतुल और धीरू हाथपैर बंधी बेहोश वंशिका को कार से उठा कर बाग में ले गए और पैट्रोल डाल कर उसे जिंदा जला दिया. बेहोशी के कारण वंशिका चिल्ला भी न सकी. घटना को अंजाम देने के बाद तीनों फरार हो गए. वंशिका की सहेली अंजलि गंगागंज से ही वापस अपने घर चली गई थी. शाम 4 बजे के लगभग शेरागांव के लोगों ने बाग में अधजली लाश देखी तो थाना हरचंदपुर को सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह पहुंचे तो युवती की अधजली लाश देख कर उन की रूह कांप उठी. सूचना पा कर एसपी स्वप्निल ममगाई, एएसपी नित्यानंद राय तथा सीओ गोपीनाथ सोनी भी घटनास्थल पर गए. शव की शिनाख्त न हो पाने पर शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया.

दूसरे रोज पोस्टमार्टम हाउस में बछरावां निवासी पान विक्रेता दिलीप गुप्ता ने शव की पहचान अपनी 21 वर्षीया बेटी वंशिका के रूप में कर दी. उस के बाद तो हड़कंप मच गया. पुलिस ने जांच शुरू की तो प्यार के प्रतिशोध में हुई हत्या का परदाफाश हुआ और कातिल पकड़े गए. 6 फरवरी, 2020 को थाना हरचंदपुर पुलिस ने अभियुक्त अतुल गुप्ता, ललित गुप्ता तथा दगाबाज सहेली अंजलि श्रीवास्तव को रायबरेली की जिला अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित