UP Crime: शादीशुदा से प्यार जरा सोचसमझ के

UP Crime: 4 बच्चों के पिता राजू गुप्ता ने पूजा से दूसरी शादी कर तो ली थी, लेकिन उस के नाजनखरे उठाना भारी पड़ रहा था. हद तो तब हो गई, जब वह उस की दिवंगत पत्नी के बच्चों से मिलने पर ही पाबंदी लगाने लगी और बारबार मोटी रकम की मांग करने लगी. फिर जो कुछ हुआ, उस में पूरा परिवार उलझ गया…

शाम होने को आई थी. राजू गुप्ता काफी निराश बैठा था. इस की वजह यह थी कि उस की दूसरी पत्नी पूजा उसे ब्लैकमेल कर रही थी. वह उसे अब ठिकाने लगाने का फैसला ले चुका था, लेकिन उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस काम को कैसे पूरा करे. राजू गुप्ता को उदास देख कर उस का सहयोगी अनीस पूछ बैठा, ”क्या बात है भाईजान, आज काफी उदास दिख रहे हो? दुकानदारी में घाटा हुआ है क्या?’’

राजू गुप्ता की लखनऊ की दुबग्गा सब्जीमंडी में दुकान थी.

”नहीं मेरे भाई, घाटावाटा कुछ नहीं… क्या बताऊं? बात ही कुछ ऐसी है, जो न कहते बनती है और न निगलते.’’

”मैं भी तो जानूं कि वह कौन सी बात है, जिसे ले कर परेशान दिख रहे हो…और मुझे नहीं बता सकते?’’

”बात ही ऐसी है कि मैं किसी से भी नहीं बताना चाहता. बस! समझो कि पानी सिर से ऊपर बहने की नौबत आ गई है.’’

”ऐं! यह क्या कह रहे हो मेरे भाई? इतना सब कुछ हो गया और मुझ से ही छिपा रहे हो? वह कौन सी बात है, जो तुम्हें भीतर ही भीतर खाए जा रही है?’’ अनीस ने पूछा.

”अरे, वही पूजा की डिमांड!’’ राजू निराश मन से बोला और सिर नीचे की ओर झुका लिया.

”उस के साथ फिर कोई बहस हुई क्या? अब क्या डिमांड है उस की?’’

”अरे क्या बताऊं तुम्हें, अभीअभी 10 लाख का प्लौट बेचा था, जो पूजा के नाम था…’’ राजू आगे कुछ बोल पाता कि अनीस उस का मुंह देखने लगा. थोड़ी देर चुप रहने के बाद पूछा, ”हां, तो क्या हुआ उस का? पैसे तो पूरे मिल गए न!’’

”अरे हां, पैसे तो मिल गए, किंतु उस पर पूजा नजर जमाए है. यह समझो कि वह पूरा पैसा हड़पना चाहती है.’’ राजू निराश मन से बोला.

”अब इस में मैं क्या कर सकता हंू, मैं ने तुम्हें पहले ही मना किया था, लेकिन तुम नहीं माने!’’ अनीस बोला.

”फिर भी तुम कुछ तो बताओ, मैं अब क्या करूं?’’ राजू ने हताशा के लहजे में पूछा.

वह मुसकराते हुए बोली, ”मैं पूजा के बारे में तुम्हारी बातें सुनतेसुनते थक चुका हंू. जब तुम ने उस से दूसरी शादी की है तो तुम ही उसे झेलो. तुम्हारा भी तो औरत के बगैर गुजारा नहीं हो रहा था. तुम जानते थे कि पूजा विवाहित है, फिर भी उस में तुम्हें न जाने क्या दिखा, जो तुम भी अपनी रातों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उस की खूबसूरती पर फिदा हो गए. तुम ने उस के चालचलन की तनिक भी खोजबीन नहीं की.’’ अनीस राजू का जिगरी दोस्त था.

”तुम्हारे पास कोई उपाय है तो बताओ, लेकिन जले पर नमक मत छिड़को.’’ राजू रूखेपन के साथ बोला.

”अरे, चिंता क्यों करते हो? सब ठीक हो जाएगा. कुछ खानेपीने को मंगवाते हो तो मंगवाओ, वरना मैं चलता हूं.’’ अनीस बोला.

”हांहां क्यों नहीं, अभी मंगवाता हंू. बैठो, आज कुछ जरूरी बात करनी है.’’ दुकान के नीचे सामने खड़े राजेश को पैसे देते हुए राजू बोला, ”ब्लैक हार्सपावर व्हिस्की की बोतल ले आओ… और सुनो प्याज की गरम पकौडिय़ां भी सामने की दुकान से ले आना.’’

राजेश कुछ देर में ही व्हिस्की की बोतल ले आया. राजू और अनीस दुकान के पीछे बने बैडरूम में चले. उन्होंने उस शाम छक कर शराब पी. मूड बनाने के बाद अनीस ने पूछा, ”अब बताओ, तुम्हारे दिल की क्या समस्या है? कैसा समाधान चाहते हो?’’

राजू ने राजेश को बुला कर बोतल की बची हुई व्हिस्की उसे दे कर बाहर आढ़त की दुकान पर बैठने को कहा. हिदायत भी दी कि जब तक वह वापस नहीं आए, किसी को अंदर नहीं आने दे.

राजेश जब चला गया, तब राजू लंबी सांस लेता हुआ अनीस से बोला, ”मेरी एक योजना है…तुम जरा ध्यान से सुनना और मुझे मदद करने के बारे में बताना.’’

”ठीक है भाई, जैसा कहोगे, वैसा मैं करूंगा, जितना हो सकेगा साथ दूंगा.’’ अनीस बोला.

”तो ठीक है, मेरी बात को ध्यान से सुनना, लेकिन इस से पहले मुझे वचन दो कि किसी को भी इस बारे में कभी नहीं बताओगे.’’ राजू बोला और वचन लेने के लिए अपनी हथेली अनीस की ओर बढ़ा दी. उस के बाद धीमी आवाज में अनीस से फुसफुसा कर बातें करने लगा.

जैसे ही राजू ने अपनी बात पूरी की, वैसे ही अनीस की आंखों में अजीब तरह की चमक दिखी. वह बोला, ”तू तो बहुत ही शातिर दिमाग रखता है यार, मैं ने तो कभी ऐसा सोचा ही नहीं था.’’

”तुम को मेरा साथ देना होगा.’’

”पक्का साथ दूंगा, लेकिन दूसरे सहयोगियों से भी तो बात कर लो.’’ अनीस बोला.

”पैसे के आगे वे भी साथ देंगे.’’

दरअसल, राजू ने एक योजना बनाई थी, जिस में अनीस के अलावा शकील, राजेश और सर्वेश नाम के युवकों को भी शामिल कर लिया था. सब की निगरानी की जिम्मेदारी अनीस को सौंप दी गई थी.

योजना के मुताबिक, राजू गुप्ता को सोनिया को ले कर किराए के मकान में रह रही उस की मम्मी पूजा के पास ले कर जाना था. सोनिया कोई और नहीं, बल्कि राजू की बेटी थी और पूजा उस की दूसरी पत्नी थी. सोनिया रामप्रकाश के हौस्टल में काम करती थी और वहीं रहती थी और पूजा अलग से किराए पर रहती थी. राजू 31 अक्तूबर, 2025 को दिन में 10 बजे सोनिया को ले कर नावल्टी सिनेमा के पास गया था. वहीं पूजा से मुलाकात के बाद सोनिया अपने हौस्टल लौट गई थी, जबकि राजू और पूजा अपनेअपने घरों की ओर जाने के लिए साथसाथ लौट आए.

कहने को दोनों पतिपत्नी थे, लेकिन उन के बीच अनबन सालों से बनी हुई थी. इस कारण पूजा अलग किराए के मकान में रहती थी. बात 3 नवंबर, 2025 की है. लखनऊ के थाना माल क्षेत्र के गांव बशहरी निवासी किसान राजपाल सुबहसुबह खेत में जुताई करने के लिए ट्रैक्टर ले कर गया था. वहां पर उसे झाडिय़ों के पास से तेज दुर्गंध आती हुई महसूस हुई. आशंका से घिरा राजपाल दुर्गंध आने वाली जगह पर गया. झाडिय़ों में एक महिला का नग्नावस्था में रक्तरजित शव देख कर चौंक पड़ा. वह तुरंत ट्रैक्टर ले कर सीधे थाना मौल गया.

उस ने इंसपेक्टर नवाब अहमद को लाश और उस से निकलने वाली दुर्गंध के बारे में बताया. उस ने महिला का हुलिया भी बताया, जो गोरी, मांसल देह वाली थी. उस की मांग में सिंदूर, पैरों में पाजेब और बिछुवा थे. इंसपेक्टर ने राजपाल की बात गौर से सुनने के बाद सामने बैठे एसएसआई मोहम्मद रोशन के साथ घटनास्थल पर चलने की तैयारी करने के लिए कहा. उन्होंने कांस्टेबल अर्जुन सिंह और संजय पाल को भी साथ ले लिया. बशहरी गांव के क्षेत्र से संबंधित पुलिस चौकी सैदापुर के बीट प्रभारी अभय कुमार बाजपेयी को भी वहां पहुंचने की सूचना दे दी गई. उन्हें भी घटनास्थल पर शीघ्र ही पहुंचने को कहा.

इंसपेक्टर राजपाल ने इस की सूचना मलीहाबाद के एसीपी सुजीत कुमार दुबे, एडिशनल डीसीपी और डीसीपी गोपालकृष्ण चौधरी को भी भेज दी गई. घटनास्थाल पर सर्विलांस की पूरी टीम पहुंच गई थी. टीम ने पहले घटनास्थल के चारों तरफ लोगों की भीड़ को हटा कर नाकेबंदी करा दी. टीम में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं. शव को एक कपड़े से ढंक दिया गया. इस से पहले महिला कांस्टेबल सपना ने शव की गहनता के साथ छानबीन की. उस ने एसएचओ को बताया कि मृतका की हत्या धारदार हथियार से की गई है. उस के साथ दुष्कर्म के निशान नहीं पाए गए हैं. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

लाश की पहचान के लिए ग्रामीणों से पूछताछ की गई. जल्द ही पता चला कि वह महिला दुबग्गा सब्जीमंडी में अकसर देखी गई थी. वह वहां सब्जी का काम करती थी. कुछ लोगों ने बताया कि वह सब्जी मंडी में आढ़ती राजू गुप्ता के संपर्क में थी. पुलिस राजू गुप्ता के पास गई और उसे शव की फोटो दिखा कर उस के बारे में पूछा. उस वक्त पूजा की बेटी सोनिया भी साथ थी. उस ने शव को देखते ही पहचान लिया. सैंडिल, बिछुआ और चेहरे को देखते ही वह बोली कि यह उस की मम्मी पूजा है.

सोनिया ने पुलिस को बताया कि राजू गुप्ता उस का सौतेला पिता है. उस ने मम्मी की मौत का जिम्मेदार राजू गुप्ता को ठहराया और उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा. इस संबंध में उस ने लिखित तहरीर दी. उस ने लिखा कि वह अपनी मम्मी से अलग रह कर गल्र्स हौस्टल में रहती है. वहां का काम करती है. कभीकभी उस की मम्मी उस से मिलने आया करती थी. वह सीता विहार कालोनी के एक किराए के मकान में रहती थी.

सोनिया ने बताया कि उस की मम्मी पूजा सीतापुर जनपद के असुवामऊ गांव की मूल निवासी थी. उन की पहली शादी सुरेश के साथ हुई थी. उस के असली पिता सुरेश ही हैं, लेकिन मम्मी की पापा से अनबन होने के बाद वह लखनऊ आ कर दुबग्गा सब्जी मंडी में आढ़त पर काम करने लगी थी. वहीं उस का संपर्क राजू गुप्ता से हुआ था. राजू गुप्ता की भी सब्जी की आढ़त थी. उन के संपर्क में आने के बाद वह दुबग्गा के ही निकट बालाजी के मंदिर में एक किराए के मकान पर आ कर रहने लगी थी. सोनिया ने बताया कि मम्मी ने राजू गुप्ता के साथ दूसरी शादी कर ली थी.

सोनिया की तहरीर, दिए गए बयानों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने राजू गुप्ता के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया. पूछताछ के लिए 5 नवंबर, 2025 को उसे थाने बुलाया गया. पूछताछ में वह पूजा की हत्या के बारे में ठोस जानकारी नहीं दे पाया. किंतु उस ने पूजा के साथ जब बिगड़े संबंधों के बारे में बताया, तब पुलिस सख्ती के साथ उस से पूछताछ करने लगी. जल्द ही वह टूट गया और उस ने पूजा की हत्या के बारे में पूरी बात बता दी. राजू गुप्ता ने यह भी बताया कि उस के अलावा मोहम्मद शकील (54), सर्वेश ( 40), राजेश कुमार (27) और अनीस (65) भी पूजा की हत्या में शामिल थे.

मृतका के पास से मिले मोबाइल की काल डिटेल्स से भी उस की राजू से बातचीत का विवरण मिल गया था. इन साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उस के बाद पूजा, उस का पहला पति और राजू के साथ के उलझे हुए संबंधों की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

पूजा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के गांव सदना की मूल निवासी थी. उस के पापा पुतान ने सामाजिक रीतिरिवाज के अनुसार 15 साल पहले सीतापुर जनपद के गांव असुवामऊ निवासी सुरेश के साथ उस का विवाह कर दिया था. सुरेश के साथ विवाह होने के बाद पूजा को पता चला कि वह शराब पीने का बुरी तरह आदी था. जो कुछ भी कमाता था, वह परिवार के पालनपोषण में खर्च न कर आवारागर्दी और दारू के शौक में बरबाद कर दिया करता था.

शादी के 2 साल तक पूजा ने अपने दांपत्य जीवन का जैसेतैसे निभाया. गांव में ही खेती बंटाई पर किसानी की फसल से मेहनतमजदूरी कर अपना जीवनयापन करती रही. पति के साथ आए दिन कलह के कारण उस ने गांव में ही अलग रह कर अपना जीवनयापन शुरू कर दिया. उन्हीं दिनों पूजा ने बेटी को जन्म दिया. उस का नाम रखा सोनिया. एक साल बाद सुरेश टीबी से ग्रसित हो गया. इलाज कराने में उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पति के इलाज में कोई कमी नहीं आने दी. वह स्वस्थ हो गया. कुछ दिन तक तो ठीक रहा, उस के बाद वह फिर पहले जैसा ही करने लगा. पति की प्रताडऩा से तंग आ कर वह दिनरात दुखी रहने लगी.

सुरेश रोजाना पूजा से दारू के लिए पैसे मांगने लगा. पैसे नहीं देने पर मारनेपीटने लगा. धीरेधीरे उस का मन सुरेश के प्रति खिन्न होता चला गया. पूजा का सुरेश ने जीना हराम कर रखा था. पूजा मानसिक प्रताडऩा से बुरी तरह त्रस्त हो गई थी. तंग आ कर उस ने सीतापुर के कमलापुर नामक कस्बे में एक फार्महाउस पर जा कर नौकरी करने का मन बना लिया था. वह अपनी ससुराल से अपने मायके सदना आ कर रहने लगी. वहीं से वह डेयरी फार्म पर काम के लिए जाने लगी. उस ने दिनरात मेहनत कर अपने काम में स्वयं को व्यस्त कर लिया था. एक दिन सुरेश ने उसे ढूंढ निकाला.

सर्दी की रात थी. पूजा उन दिनों अपने मायके सदना में थी. सुरेश पूजा से मिलने सदना पहुंच गया. उसे आया देख कर पूजा आगबबूला हो उठी. किसी तरह सुरेश ने उसे शांत किया. पूजा ने रात को त्रियाचरित्र का खेल खेला. जब सुरेश उस के साथ एक रात बिस्तर पर गहरी नींद में सो रहा था, तभी पूजा ने उस के गले में कपड़ा कस कर हत्या कर दी. उस की मौत हो जाने के बाद वह सोनिया को साथ ले कर दिन निकलने से पहले कमलापुर वापस चली आई.

सुबह सदना थाने की पुलिस ने उसे तलाश कर पति की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया. सीतापुर जिले के थाना सदना में उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. उस के बाद उसे जेल भेज दिया गया. लंबे समय तक पूजा जेल में रही. जेल से छूटने पर वह फिर से कमलापुर स्थित डेयरी मालिक के यहां रहने के लिए गई, लेकिन पूजा पर हत्या का आरोप लगने के बाद डेयरी मालिक के मातापिता ने उसे आश्रय देने से मना कर दिया.

आश्रय के लिए उस की काफी मिन्नतों के बाद डेयरी के मालिक ने लखनऊ स्थित दुबग्गा की सब्जी मंडी में काम दिलवा दिया. उस के पास ही वह बालाजी के मंदिर में एक कमरा किराए पर ले कर अपनी बेटी सोनिया के साथ रहने लगी. तब तक बेटी भी किशोरावस्था में पहुंच चुकी थी. सब्जी मंडी में धीरेधीरे काम करते उसे 2 साल बीत गए. इसी दौरान वह विशाल नामक आढ़ती के माध्यम से वहां के पुराने आढ़ती राजू गुप्ता के संपर्क में आ गई. पूजा के मंदिर में रहने के कारण आनेजाने वाले लोगों को सहानुभूति हो गई.

एक व्यक्ति ने बेटी सोनिया को कपूरथला स्थित राम प्रकाश के गल्र्स हौस्टल में उसे नौकरी पर लगवा दिया. सोनिया दिन भर हौस्टल में काम किया करती. उसे वहां रहने की जगह मिलने के कारण वह स्थाई रूप से हौस्टल में ही रहने लगी. छुट्टी के दिनों में वह अपनी मम्मी पूजा से बालाजी मंदिर परिसर में स्थित मकान पर मिल लेती थी. फिर वापस लौट जाती थी. एक दिन उस ने अपनी मम्मी पूजा से मजाकमजाक में कह दिया, ”मम्मी, तुम्हारी अभी उम्र ही क्या है? मेरी 2 बहनें और भी हैं, उन का भी भरणपोषण और शादी होनी है. तुम दूसरी शादी कर लो.’’

यह बात पूजा के दिमाग में घर कर गई. एक दिन शाम को पूजा राजू गुप्ता के घर पहुंची तो पाया कि वह अकेला बैठा शराब के पैग बना रहा था. पूजा को अकेली आया देख कर उस ने फुरती से उठ कर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. राजू के द्वारा दरवाजा बंद करने के कारण पूजा तुरंत ही भांप गई कि राजू के मन में क्या है. उस दिन पूजा ने भी नाजुक स्थिति को भांपते हुए राजू के आग्रह पर दारू का पैग गले के नीचे उतार लिया. उस रात पूजा और राजू एक साथ बिस्तर पर सो गए. दोनों ने अपनी जिस्मानी भूख शांत की.

पूजा सुबह राजू के यहां नहाधो कर खाना पकाया, वहीं साथ खाया और हर दिन की तरह आढ़त पर काम करने चली गई. उस के बाद पूजा राजू के बुलाने पर उस के घर आनेजाने लगी. कुछ दिनों बाद उस ने विशाल के कहने पर राजू के साथ लखनऊ के आर्यसमाज मंदिर में विवाह कर लिया. पूजा के पहले पति से 3 बच्चे थे, जिन में बेटी सोनिया 15 साल की थी. पूजा अपने बच्चों के साथ सीता विहार में अलग रहने लगी थी. यह बात सोनिया को ठीक नहीं लगी. उस ने राजू गुप्ता के यहां ही बच्चों के साथ रहने के लिए दबाव डाला. किंतु राजू इस पर राजी नहीं हुआ. उस ने पूजा के पहले पति के बच्चों को अपने घर पर नहीं रख कर अलग कमरे पर रहने की सलाह दी.

विवश हो कर पूजा के दोनों बच्चे सोनिया के पास रहने लगे और खुद बालाजी का मंदिर (मंगल) पर किराए के मकान में एक कमरा ले कर राजू के पास रहने लगी. धीरेधीरे दोनों के दांपत्य जीवन के 3 साल बीत गए. राजू ने इसी दौरान 3 प्लौट पूजा के नाम खरीदे. बीते वर्ष राजू ने एक प्लौट पूजा की सहमति से 10 लाख रुपए में बेच दिया. यही उन के बीच विवाद का कारण बन गया. पूजा ने बेचे गए प्लौट की आधी रकम 5 लाख रुपए की मांग की. इस पर राजू आगबबूला हो उठा.

पूजा अपनी मौत से 3 माह पहले रोजाना राजू से आधी रकम की मांग कर रही थी. जबकि राजू उसे फूटी कौड़ी तक नहीं देना चाहता था, जिस के चलते हर दिन घर में कलह का वातावरण बन गया था. राजू मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था. पूजा के द्वारा रकम मांगने पर पूजा के प्रति उस का रवैया ही बदल गया. राजू का कहना था कि वह उस रकम से उधारी की रकम चुकता करने के बाद बची रकम देने के बारे में सोचेगा.

बारबार पूजा द्वारा पैसे मांगने पर राजू ने एक दिन खतरनाक फैसला ले लिया. 30 अक्तूबर, 2025 को अपनी आढ़त पर अपने सब से करीबी दोस्त अनीस को बुला कर पूजा की हरकतों के बारे में बता कर उसे रास्ते से हटाने के लिए अपनी योजना बताई. साथ देने के लिए उस ने अनीस को एक लाख रुपए की सुपारी दे कर अन्य व्यक्तियों शकील, राजेश और सर्वेश को शामिल करने को कहा. राजू ने अनीस को 31 अक्तूबर की रात सीतापुर रोड से चंद्रिका देवी के मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर योजना को अंजाम देने के लिए सभी तरह का इंतजाम कर लिया.

शाम के वक्त जब राजू अपने घर पर आया तब पूजा भी वहीं थी. वह खाना बनाने में व्यस्त थी. राजू को देखते ही पूछ बैठी, ”आज काफी देर कर दी?’’

उस ने राजू को नशे में धुत्त देखा. नशे में ही राजू बोला, ”कल 31 अक्तूबर को वह सोनिया के यहां सीता विहार कालोनी मिलने जाएगा. सोनिया से मिलने के बाद चंद्रिका देवी मंदिर को बशहरी मड़वाना माल के रास्ते से दर्शन करने जाएगा. मंदिर से वापस आने के बाद वह दोनों बच्चों को सीता विहार के मकान से अपने यहां ले कर वापस आ जाएगा. कल तुम्हें आढ़त मंडी नहीं जाना है.’’

राजू की बात सुन कर पूजा मुसकरा दी. उस रात राजू ने दारू के नशे मेंं शारीरिक संबंध बनाए. सुबह 31 अक्तूबर, 2025 को राजू ने जैसा कहा था वैसा ही किया. ठीक 10 बजे पूजा राजू के साथ सोनिया के यहां मिलने सीता विहार कालोनी गई. वहां कुछ देर बैठने के बाद पूजा को साथ ले कर चंद्रिका देवी के सिद्धपीठ मंदिर दर्शन के लिए निकल गया. रवाना होने से पहले पूजा ने राजू से छिप कर सोनिया को बता दिया कि राजू की नीयत ठीक नहीं है. कई बार वह उस का गला दबा कर उसे जान से मारने का प्रयास कर चुका है. उस का जीवन खतरे में है.

राजू अपनी बनाई योजना के अनुसार, पूजा के साथ जब बशहरी मड़वाना गांव के रास्ते घनी बागायत के निकट पहुंचा, तब वहां अनीस का मैसेज आ गया. उस के बाद राजू लघुशंका करने के बहाने सड़क के किनारे घनी झाडिय़ों के पीछे चला गया. वहीं दूसरी तरफ पहले से छिपे शकील, अनीस, राजेश और सर्वेश ने मिल कर पूजा की गला दबा कर हत्या कर दी. उस के कपड़े को बुरी तरह फाड़ कर अलग कर दिए. वे उस हत्या का कारण दुष्कर्म की घटना से जोडऩा चाहते थे. किंतु डौक्टर की रिपोर्ट में पूजा के साथ कोई भी दुष्कर्म करने की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन उस के 5 माह के गर्भ का पता चला.

राजू गुप्ता पूजा द्वारा दी जाने वाली मानसिक प्रताडऩा से तंग आ चुका था. वह अपनी कमाई की पूंजी से पूजा के पहले पति से पैदा हुए बच्चों को कुछ भी नहीं देना चाहता था. राजू अपनी पहली पत्नी से पैदा हुए 4 बच्चों को पैसा देना चाहता था, जो अलग मकान में रह रहे थे. पुलिस इस हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों राजू गुप्ता, मोहम्मद शकील, सर्वेश, राजेश और अनीस को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी. UP Crime

—कथा में सोनिया परिवर्तित नाम है

 

 

MP Crime News: डौक्टर पति की आशिकी में भस्म सीमा

MP Crime News: सुबह तड़के एक कार का एक्सीडेंट हुआ और कार धूधू कर के जल गई थी. आश्चर्य की बात यह थी कि कार में सवार 4 लोगों में से 3 सुरक्षित थे, जबकि उसी कार में सवार डा. नीलेश कुर्मी की पत्नी सीमा कुर्मी जल कर राख हो चुकी थी. डा. नीलेश ने बताया कि कार एक ट्रक से टकराई और उस में ब्लास्ट हो कर आग लग गई. बर्निंग कार में जली सीमा की मौत की गुत्थी पुलिस ने सुलझाई तो एक ऐसी चौंकाने वाली कहानी सामने आई कि…

सीमा की आंखों से नींद आज भी बहुत दूर थी. हालांकि उस के लिए यह कोई नई बात नहीं थी. छोटे बेटे का जन्म होते ही उस के पति नीलेश का रवैया बदल गया था. नीलेश कुर्मी पेशे से बीएएमएस डौक्टर था और उस का अपना निजी क्लीनिक था. नीलेश रोज ही देर रात घर आने लगा था, जिस से सीमा की परेशानी बढ़ गई थी. उस की रातें बिस्तर पर करवटें बदलबदल कर बीतने लगी थीं. पति जब खूबसूरत पत्नी को नजरंदाज करने लगे तो पति पर शक होना लाजिमी है. सीमा को भी यही लगने लगा था कि नीलेश का कहीं अफेयर है.

इस बात को ले कर दोनों में अकसर विवाद भी होने लगा था. 20 मार्च, 2026 की रात तो हद हो गई. जब नीलेश के घर आने की आहट पा कर सीमा ने बैडरूम में लगी घड़ी पर नजर डाली, उस समय रात के 2 बज रहे थे.

दरवाजा खोलते हुए सीमा ने  सवाल दाग दिया, ”इतनी रात कैसे हो गई, तुम्हें तो बीवीबच्चों की खबर ही नहीं रहती.’’

”क्लीनिक पर आज मरीजों की भीड़ थी, इसलिए देर हो गई.’’ सोफे पर बैठ जूते उतारते हुए नीलेश ने जबाव दिया.

”आखिर 2 बजे रात तक कौन से मरीज क्लीनिक पर इलाज करा रहे थे?’’ सीमा ने गुस्से से उबलते हुए कहा.

”कह दिया न, मरीजों के इलाज की वजह से देर हो गई.’’ नीलेश ने भी तुनक कर जवाब दिया.

”कहीं वह करमजली तो इलाज के लिए नहीं आई थी या उस के दिल के इलाज के लिए डौक्टर साहब उस के घर तशरीफ ले गए थे?’’ सीमा तंज कसते हुए बोली.

”तुम्हारे अंदर तो हर समय शक का कीड़ा घुसा रहता है और मेरे पास इस का कोई इलाज भी नहीं है.’’ नीलेश भी गुस्से से बोला.

”शक का कीड़ा नहीं, मुझे पूरा भरोसा है तुम उस लड़की पर फिदा हो और तुम्हें इस नन्ही जान की भी कोई परवाह नहीं है.’’ बिस्तर पर सोती हुई बेटी की ओर इशारा करते हुए सीमा चिल्लाई. बस, फिर क्या था देखते ही देखते दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और नौबत हाथापाई पर आ गई. गुस्से में आ कर नीलेश ने दोनों हाथों से सीमा का गला दबा दिया. नीलेश के हाथों को अपने गले से छुड़ाने की कोशिश करते हुए वह बेहोश हो गई तो नीलेश बुरी तरह घबरा गया और घटना को छिपाने की साजिश रचने लगा.

उस ने तुरंत अपने किराएदार रामकृष्ण और शुभम को दरवाजा खटखटा कर और आवाज दे कर बुलाया. इतनी रात गए डा. नीलेश की आवाज सुन कर रामकृष्ण और शुभम आंखें मलते हुए बाहर निकल आए. रामकृष्ण ने पूछा, ”डौक्टर साहब, क्या बात है, इतनी रात गए हमें आवाज लगाई, सब ठीकठाक तो है.’’

”नहीं भाई, सीमा को हार्ट अटैक आया है और वह बेहोश हो गई है. जल्दी से मेरे साथ चलो, उसे तुरंत अस्पताल ले जाना है.’’ नीलेश ने हड़बड़ाते हुए कहा.

रामकृष्ण और शुभम 5 मिनट में ही कपड़े पहन कर डा. नीलेश के बैडरूम में आ गए. तीनों मिल कर सीमा को बिस्तर से उठा कर बाहर कार तक ले जाने वाले ही थे कि इसी दौरान घर में बाजू के कमरे में सो रही बेटी की नींद खुल गई तो उस ने पूछा, ”मम्मी को क्या हो गया और उसे कहां ले जा रहे हो पापा.’’

”मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है, उसे  डौक्टर के पास ले जा रहे हैं. अच्छी तरह से दरवाजा बंद कर लेना और भैया का ध्यान रखना.’’ नीलेश ने कहा.

गैरेज में खड़ी कार में सीमा को बिठा कर रामकृष्ण, शुभम और नीलेश सागर की ओर निकल गए. पीछे की सीट पर शिवम बैठ गया और उस ने सीमा के सिर को अपनी गोद में रख लिया, जबकि रामकृष्ण आगे की सीट पर बैठ गया और नीलेश कार चला रहा था. नीलेश ने रवाना होने से पहले अपने ससुर और साले को फोन करते हुए बताया कि सीमा की तबीयत खराब है, उसे ले कर सागर जा रहे हैं.

कार से रवाना होते ही डा. नीलेश कुर्मी ने अपने ससुर राधाचरण कुर्मी को फोन करते हुए बताया था कि सीमा को सीने में दर्द उठा है, हार्ट अटैक हो सकता है. उसे दिखाने के लिए हम कार से सागर के राय हौस्पिटल ले कर जा रहे हैं. यह सूचना मिलते ही राधाचरण ने अपने बेटे लोकेश को सोते से जगाया और सीमा को हार्ट अटैक आने की बात कहते हुए सागर चलने को कहा. कुछ ही देर में सीमा के मम्मीपापा और भाई भी अपने गांव जूना से रहली होते हुए सागर के लिए निकल पड़े.

मृतक सीमा कुर्मी – पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर वजह से सीमा पुरानी लगने लगी थी.

इसी दौरान रास्ते में नीलेश ने दोबारा ससुर को फोन करते हुए बताया कि रास्ते में एक ट्रक ने कार को कट मारा है और कार रोड से नीचे उतर गई है. इतना सुनते ही सीमा के फेमिली वाले परेशान हो गए. वह सागर की तरफ बढ़ रहे थे, तभी कुछ देर बाद फिर नीलेश ने फोन लगाया और बताया कि चनाटोरिया टोल प्लाजा के पास उस की कार में आग लग गई है और कार जल रही है. इस के बाद मायके पक्ष के लोगों ने किसी अनहोनी की आशंका में अपनी कार की रफ्तार बढ़ा दी.

गाड़ी चला रहे सीमा के भाई लोकेश को  याद आया कि उस के जीजा डा. नीलेश कुर्मी ने करीब एक महीने पहले ही नई टाटा पंच कार खरीदी थी, जो पेट्रोल और सीएनजी से चलती थी. अभी 2 दिन पहले नीलेश ससुराल गया था, जहां उस ने बताया था कि गाड़ी में सीएनजी नहीं है, वह पेट्रोल से चल रही है. गढ़ाकोटा में सीएनजी फिलिंग स्टेशन भी नहीं है. ऐसे में गाड़ी में आग लगने की बात लोकेश के मन में संदेह पैदा कर रही थी.

गांव जूना निवासी राधाचरण कुर्मी की 38 साल की बेटी सीमा की शादी 15 साल पहले 2011 में सिमरिया निवासी डा. नीलेश कुर्मी के साथ हुई थी. नीलेश का सागर जिले के गढ़ाकोटा में क्लीनिक था. इस वजह से वह गढ़ाकोटा में रहता था और उस के 2 बेटे व एक बेटी है. 21 मार्च, 2026 की सुबह करीब 4 बजे कार में आग लगी देख डायल-112 को किसी ने सूचना दी. पुलिस कंट्रोल रूम से सानौधा पुलिस थाने को सूचना मिली कि इलाके के सागर-गढ़ाकोटा रोड पर चना टोरिया टोल प्लाजा के पास एक कार में आग लग गई है.

सूचना मिलते ही एसएचओ भरत सिंह ठाकुर दलबल के साथ घटनास्थल पहुंच गए. तब तक सुबह हो चुकी थी. घटनास्थल पर पहुंच कर देखा कि फोर लेन के बाजू में एक कार जली हुई खड़ी थी. आगजनी में कार में सवार सीमा कुर्मी की जलने से मौत हो गई थी, जबकि उस का पति और अन्य युवक सुरक्षित बाहर निकल आए थे, इस हादसे में उन्हें खरोंच भी नहीं आई. सीमा का शव आग लगने से पूरी तरह जल कर राख हो चुका था. कंकाल के रूप में कार से शव बरामद किया गया था. शव पर हड्डियां, जांघ के पास थोड़ा मांस और मुंह के दांत नजर आ रहे थे.

घटना के समय कार में मृतका सीमा कुर्मी, उन के पति डा. नीलेश कुर्मी, रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी सवार थे. अब तक सीमा के मायके पक्ष के लोग भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. एसएचओ भारत सिंह ठाकुर ने एसपी, एएसपी को घटना की सूचना दी तो मौके पर उन के अलावा फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई  और जांच शुरू कर दी. शुरुआती जांच में फोरैंसिक एक्सपर्ट और पुलिस को कार में आग लगने की घटना संदेहास्पद लगी.

पुलिस हिरासत में आरोपी डा. नीलेश कुर्मी, रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी

घटनास्थल पर पहुंच कर राधाचरण ने जब अपनी लाडली बेटी सीमा का जला हुआ कंकाल देखा तो वह फूटफूट कर रोने लगे. मौके पर मौजूद पुलिस टीम को रोरो कर कह रहे थे, ”मेरी फूल सी बेटी को मरी हुई ला कर नामोनिशान मिटाने की कोशिश की है. कार में जब 3 लोग और थे और उन की हालत बिलकुल ठीक है तो यह कैसे संभव है कि वे सुरक्षित निकल आए. यह पूरी साजिश है, मेरी बेटी को जानबूझ कर मारा गया.’’

सीमा के पापा और भाई ने डा. नीलेश पर हत्या करने का आरोप लगाया. इस के बाद पुलिस ने डा. नीलेश और उस के दोनों साथियों को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. सीमा के पापा और भाई ने पुलिस को बताया कि डा. नीलेश का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. इसे ले कर सीमा और डौक्टर में विवाद होता था. पुलिस ने पंचनामा तैयार कर सीमा की राख हो चुकी बौडी के अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. नीलेश ने ससुर और सास को पहले सीमा को हार्ट अटैक आने, फिर एक्सीडेंट होने और आखिर में कार में आग लगने की कहानी बताई.

पुलिस ने इन तीनों कहानियों की जांच की तो कोई भी बात सिद्ध नहीं हुई. नीलेश की कार में सीएनजी होने से आग लगने की जांच में सामने आया कि कार में सीएनजी गैस ही नहीं थी. जली कार में सीएनजी का टैंक सहीसलामत था. घटनास्थल पर माचिस की एक जली हुई तीली मिली थी और कार गढ़ाकोटा की दिशा में खड़ी थी, जबकि नीलेश का कहना था कि वह सागर की तरफ उसे ले जा रहा था. मौके पर मिली कार की पोजीशन देख कर पता चला कि कार सड़क से अनियंत्रित हो कर वारदातस्थल पर नहीं पहुंच सकती, जबकि माचिस की जली हुई तीली ताजी थी.

आगजनी की इस घटना में सीमा का शव जिस रफ्तार से जला, उतनी कार नहीं जली. जांच में सामने आया कि कार में आग पीछे की सीट से लगी थी, आग लगाने के लिए पेट्रोल का उपयोग किया गया था. पेट्रोल प्लास्टिक के जिस कनस्तर में लाया गया था, उसे घटनास्थल पर पुलिस ने बरामद किया था. प्राथमिक जांच में पुलिस को संदेह हुआ कि आगजनी की इस घटना में किसी ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग हुआ है. कार में आग लगने पर ड्राइवर साइड और उस के ठीक पीछे वाला गेट लौक हो गए थे.

ऐसे में ड्राइवर सीट पर बैठे पति नीलेश और पीछे बैठा साथी बाजू के गेट से बाहर आ गए, लेकिन तीनों लोग सीमा को बाहर नहीं निकाल पाए, यह बात नीलेश को संदेह के घेरे में ला रही थी. थाना सानौधा के एसएचओ भरत सिंह ठाकुर ने फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच कर कार के अवशेषों की बारीकी से जांच कर जो साक्ष्य जुटाए थे, वह इस बात को पुख्ता कर रहे थे कि सीमा की मौत हादसा नहीं, बल्कि एक साजिश है. पुलिस के लिए बर्निंग कार में सीमा की मौत मर्डर मिस्ट्री बनी हुई थी.

डा. नीलेश कुर्मी – पुलिस ने जब नीलेश के मोबाइल की गैलरी को खंगालना तो एक लड़की के कुछ फोटो मिले, जो उस का दूसरी लड़की से प्रेम प्रसंग की तरफ इशारा कर रहे थे

पुलिस को कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे, मसलन जब कार में आग लगी तो पति और उस के 2 साथी सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन सीमा बाहर क्यों नहीं निकल पाई? सीमा यदि बेहोश थी तो कार में आग लगने पर पति और उस के साथियों ने उसे बचाने की कोशिश क्यों नहीं की? कार में आग लगने पर सीमा की जल कर मौत हो गई, मगर पति और 2 साथियों को कहीं कोई खरोंच भी नहीं आई? आग लगने के बाद कार में ब्लास्ट हुआ तो शव या कार के चिथड़े क्यों नहीं उड़े? आग लगने पर ड्राइवर साइड के दरवाजे लौक हो गए थे तो पति और साथी कैसे नीचे उतरे और सीमा को क्यों नहीं उतार पाए?

नीलेश, रामकृष्ण और शुभम के बयानों के आधार पर पुलिस उस के घर पहुंची. पुलिस ने जब डा. नीलेश के घर का डिजिटल वीडियो रिकौर्डर (डीवीआर) जब्त कर जांच की तो उस में उस रात के फुटेज नहीं मिले, इस से पुलिस को संदेह हुआ कि फुटेज रात में ही डिलीट कर दिए थे. शुरुआत में डा. नीलेश कुर्मी पुलिस को गुमराह करता रहा. उस के बयानों में काफी विरोधाभास था, जिस से पुलिस का शक और गहराता गया.

आरोपी शुभम कुर्मी – एक ही जाति और एक ही फिल्ड में काम करने की वजह से डा. नीलेश से उस की अच्छी बनती थी. 

पुलिस ने जब नीलेश के मोबाइल को जब्त कर उस की कौल डिटेल्स और गैलरी को खंगाला तो एक लड़की के कुछ फोटो मिले, जोकि उस का दूसरी लड़की से प्रेमप्रसंग की तरफ इशारा कर रहे थे. सीमा के परिजन भी इसी वजह से हत्या का आरोप लगा रहे थे. पुलिस की सूझबूझ के आगे शातिर आरोपी डा. नीलेश के मंसूबों पर पानी फिर गया. मोबाइल में मिले सबूतों के आधार पर नीलेश भी इस बात से इंकार नहीं कर पाया. पुलिस ने घर से डीवीआर जब्त कर जांच के लिए भेज दिया. पुलिस ने डा. नीलेश कुर्मी, रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी से सख्ती से पूछताछ की तो तीनों ने जो कहानी बताई, वह रोंगटे खड़े करने वाली थी.

नीलेश ने कुबूला कि उस ने पत्नी सीमा का गला दबाया था, जिस से उस की मौत हो गई थी. नीलेश को जानकारी थी कि गला दबाने से पत्नी सीमा की मौत हो गई है, ऐसे में यदि वह पत्नी को अस्पताल ले कर जाता तो वारदात उजागर हो सकती थी. इसलिए उस ने सबूतों को छिपाने के लिए एक्सीडेंट की साजिश रची. उस ने पहले किसी वाहन से कार की टक्कर करने का प्लान किया था, लेकिन उसे डर था कि इस में उस की जान को खतरा हो सकता है और वह भी उस की चपेट में आ सकता है. जिस के बाद उस ने सुनसान इलाके में कार खड़ी कर दी और सीमा पर पेट्रोल डाल कर कार में आग लगा दी और घटना को हादसे का रूप देने की कोशिश की.

आरोपी डौक्टर पति के साथ कार में मौजूद सहआरोपी रामकृष्ण पटेल और शुभम पटेल ने भी वारदात को छिपाने की पूरी कोशिश की. गढ़ाकोटा में मृत सीमा को कार में बैठाते समय दोनों को घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी, लेकिन कार में जब डौक्टर ने पेट्रोल डाल कर आग लगाई, तब दोनों मौके पर मौजूद थे. लेकिन उन्होंने सीमा को बचाने की कोशिश नहीं की. इस के अलावा दोनों ने पुलिस को भी घटनाक्रम की सूचना नहीं दी. संदेह होने पर पर पुलिस ने हिरासत में ले कर पूछताछ की तो शुरुआती पूछताछ में रामकृष्ण और शुभम ने वारदात को छिपाया.

रामकृष्ण कुर्मी – वारदात में डां नीलेश के साथ का आरोपी

जब सख्ती से पूछताछ की गई तो हत्याकांड की कहानी उगल दी थी. इसलिए पुलिस ने मामले में दोनों को भी आरोपी बना लिया. पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी डा. नीलेश कुर्मी बेहद शातिर है. वह कई वर्षों पहले बीएसएफ की ट्रेनिंग ले चुका है, लेकिन बीएसएफ की नौकरी करने के लिए नहीं गया था. जिस के बाद उस ने बीएएमएस की पढ़ाई की और डौक्टर बन गया. वर्तमान में गढ़ाकोटा में क्लीनिक खोल कर मरीजों का इलाज कर रहा था.

डा. नीलेश का अफेयर गढ़ाकोटा क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली युवती से चल रहा था. युवती क्लीनिक पर आती रहती थी, इसी दौरान उन की जानपहचान हुई थी, जिस के बाद दोनों फोन पर बात करने लगे थे. फोन पर बात करने और देर रात घर लौटने की बात को ले कर पत्नी सीमा को पति पर संदेह हुआ. दोनों के बीच अकसर विवाद होने लगे. बताया जा रहा है कि पत्नी सीमा ने पति की फोटो युवती के साथ देख ली थी, जिस के बाद से दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था. इन्हीं विवाद को ले कर आरोपी पति सीमा को रास्ते से हटाने की साजिश करने लगा.

वारदात की रात पति और पत्नी के बीच विवाद बैडरूम में हुआ था. इस दौरान घर में उन की 11 वर्षीय बेटी और 9 वर्षीय बेटा मौजूद था, लेकिन वे दोनों दूसरे कमरे में सो रहे थे. नीलेश का बड़ा बेटा हौस्टल में रहता था. जिस मकान में डौक्टर रहता था, उसी में कुमेरिया भटोली गांव का 25 साल का रामकृष्ण कुर्मी और सिंगपुर कलां गांव का 23 साल का शुभम कुर्मी किराए पर रहता था.

रामकृष्ण और शुभम गढ़ाकोटा में ही एक पैथोलौजी लैब चलाते थे. दोनों डा. नीलेश के क्लीनिक से ब्लड सैंपल लाते थे और लैब में जांच करने के बाद रिपोर्ट उस के क्लीनिक तक पहुंचा देते थे. एक ही जाति और एक ही फील्ड में काम करने की वजह तीनों में अच्छी बनती थी. घटना वाले दिन डा. नीलेश ने सीमा के साथ मारपीट कर उस का गला दबा दिया, जिस से वह अचेत हो गई थी. अचेत सीमा को कार में पटक कर वह रामकृष्ण और शुभम के साथ सागर की ओर निकल गया, तब तक दोनों को कुछ जानकारी नहीं थी.

चनाटोरिया के टोल प्लाजा से कार करीब 4 बजे निकली और टोल से करीब आधा किलोमीटर दूर डा. नीलेश ने सुनसान जगह पर कार रोकी और दोनों को घटना की सच्चाई बताते हुए कहा, ”मेरे और सीमा के बीच विवाद हो गया था और झूमाझटकी के दौरान मैं ने उस का गला दबा दिया, इस से सीमा की मौत हो गई है. अब यदि मैं इसे हौस्पिटल ले जाऊंगा तो पकड़ा जाऊंगा. तुम लोग मेरी मदद करो.’’

यह सुन कर पहले तो दोनों बुरी तरह घबरा गए और उन्होंने इंकार करते हुए साफतौर पर कह दिया, ”डौक्टर साहब, इस मामले में हम आप की कोई मदद नहीं कर सकते, यदि फंस गए तो जीवन भर जेल में चक्की पीसनी पड़ेगी.’’

”तुम दोनों साथ दो तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. पुलिस समझेगी कि एक्सीडेंट हुआ है और फिर मैं तुम्हें इस सच को छिपाने के लिए 2-2 लाख रुपए भी दूंगा.’’ नीलेश ने उन्हें जाल में फंसाते हुए कहा.

2 लाख रुपए के लालच में रामकृष्ण और शुभम नीलेश के बनाए प्लान में शामिल हो गए. तीनों कार से निकल कर बाहर आ गए. इस के बाद नीलेश ने कार में रखा पेट्रोल से भरा कंटेनर उठाया और ड्राइवर साइट से कार लौक कर दी. नीलेश ने पहले कार के पिछले टायर और फिर अंदर पत्नी पर पेट्रोल छिड़का और माचिस की तीली जला कर आग लगा दी.

आग लगाने के बाद तीनों ने कार को धक्का दे कर सड़क से नीचे उतार दिया. डौक्टर ने लैब कर्मचारियों से कहा, ”कोई पूछे तो बता देना कि कार का एक्सीडेंट हुआ था.’’

टीआई भरत सिंह

इस के बाद उस में आग लग गई. कार में आग लगते ही तीनों दूर खड़े हो गए. कार के अंदर पत्नी सीमा जलती रही और तीनों चुपचाप सड़क किनारे खड़े हो कर देखते रहे.  कार में आग लगी देख किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम के डायल-112 को सूचना दी. सूचना मिलते ही बहेरिया व सानौधा पुलिस मौके पर पहुंची. सागर के मकरोनिया से फायर ब्रिगेड बुलाई गई.

एएसपी लोकेश सिन्हा

एडिशनल एसपी लोकेश सिन्हा, रहली एसडीओपी प्रकाश मित्ता, गढ़ाकोटा थाने के एसएचओ शिवम दुबे व सानौधा थाने के एसएचओ भरत सिंह ठाकुर के साथ साइबर सेल ने इस मर्डर मिस्ट्री को 48 घंटों के अंदर सुलझा लिया. 25 मार्च, 2026 को सागर जिले के एडिशनल एसपी लोकेश सिन्हा ने प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर बर्निंग कार के रहस्य का खुलासा कर दिया. एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चक्कर में हंसताखेलता परिवार विखर गया और डा. नीलेश और सीमा के नाबालिग बच्चों के सिर से मांबाप का साया छिन गया. कथा लिखे जाने तक तीनों हत्यारोपी सागर जेल में बंद थे और डा. नीलेश और सीमा के बच्चे अपने नानानानी की कस्टडी में थे. MP Crime News

 

Family Dispute: बेरोजगार पति की खूनी कुल्हाड़ी

Family Dispute: 34 वर्षीय राहुल हरिभाऊ म्हस्के के जीवन में एक तरफ बेरोजगारी के ताने थे तो वहीं दूसरी तरफ बीवी की बेवफाई का संदेह. इसे ले कर पतिपत्नी के बीच अकसर जुबानी जंग छिड़ जाती थी. उन के मासूम बच्चे तमाशा देखते थे. एक रात बेरोजगार पति बेकाबू हो गया. फिर जो कुछ हुआ, वह कतई नहीं होना चाहिए था. क्या हुआ, पढ़ें इस डबल मर्डर की स्टोरी में…

रूपालीः बेरोजगार पति राहुल को कामधंधा करने के लिए ताने दिया करती थी, जो उसे नागवार लगता था. फिर तो एक दिन के लिए अपने फादर के पैसों पर ही निर्भर था. रूपाली पास के ही गांव मोला से व्याह कर आई थी.

राहुल हरिभाऊ म्हस्के 34 साल का युवक था. वह 2 बच्चों का बाप बन चुका था. सुंदर पत्नी और बच्चों के अलावा उस का अपने मम्मीपापा के साथ एक खुशहाल संयुक्त परिवार था. वे सभी महाराष्ट्र के अमरावती मंडल के तहत बुलढाना जिले में स्थित मेहकर की टीचर्स कालोनी में रहते थे. राहुल अपने पेरेंट्स का दुलारा था, लेकिन उस में एक ही ऐब था कि वह बेरोजगार था. उस की बेरोजगारी का कारण भी वह खुद था. उस का आलसी स्वभाव और कामचोरी के चलते वह कहीं काम नहीं कर पाता था या फिर इस वजह से उसे कहीं काम नहीं मिलता था.

यही बात उस की पत्नी रूपाली को चुभती थी. उसे उस का निकम्मापन खटकता था.  इस बात ले कर वह राहुल को बारबार टोकती थी. उसे कहीं काम करने की सलाह देती थी. अपनी मेहनत का पैसा कमाने के लिए कहती थी. इस पर वह चिढ़ जाता था. उल्टे पत्नी को ही भलाबुरा कहने लगता था. देखते ही देखते उन के बीच बहस होने लगती. बात इतनी बढ़ जाती कि वे गालीगलौज पर उतर आते थे और एकदूसरे के चरित्र पर लांछन लगाने लगते थे. ऐसा करते हुए उन्हें जरा भी खयाल नहीं आता था कि बच्चों पर उन के इन झगड़े का क्या असर होगा.

बच्चे उन को लड़तेझगड़ते देखते रहते थे. उन के झगडऩे के चलते उन्हें कई बार खाना तक नहीं मिल पाता था. वे बिस्तर पर दुबक कर चुपचाप सो जाते थे. उस के पापा हरिभाऊ राठौर आर्मी से रिटायर होने के बाद अपने निवास स्थान मेहकर में ही स्टेट बैंक औफ इंडिया की एक ब्रांच में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे. उन के परिवार में पत्नी, 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. राहुल उन में बड़ा बेटा था.

कहने को तो राहुल के पास एक गाड़ी थी, जिस की मदद से उस ने अपना धंधा शुरू किया था, लेकिन उसे कामचोरी के चलते चला नहीं पाया और गाड़ी बेचनी पड़ गई थी. गाड़ी के बिकते ही राहुल अपनी पत्नी की निगाह में पूरी तरह से बेरोजगार पति बन कर रह गया था. उस का बेरोजगार होना रूपाली की आंखों में चुभता था. इसे ले कर वह बारबार ताने मारती थी. राहुल अपने परिवार के लिए अपने फादर के पैसों पर ही निर्भर था. रूपाली पास के ही गांव मोला से ब्याह कर आई थी.

ताने नहीं हुए बरदाश्त

बात सर्दी की उस रात की है, तारीख थी 24 दिसंबर, 2025. रात के करीब डेढ़ बज रहे थे. रूपाली तेवर में थी. रात का खाना पकाते वक्त रसोई में सास से थोड़ी बहस हो गई थी. सास ने उसे तेल का सही इस्तेमाल करने की हिदायत दी थी. सास ने कहा था कि महीना खत्म होने में अभी हफ्ते बचे हैं. तेल हिसाब से खर्च किया करे. इसी बात पर वह बिफर गई थी. किसी तरह गुस्से को दबाए हुए थी. घरेलू काम निपटा कर जब वह बैडरूम में आई, तब उस ने बिस्तर पर बिखरे कपड़े देखे. सो रहे बच्चों के शरीर पर से कंबल हटे हुए थे. उसी कंबल में राहुल लेटालेटा मोबाइल देख रहा था.

कमरे में घुसते ही वह चिल्लाती हुई बोली, ”तुम कितने बेशर्म और कमीने इंसान हो? बच्चों का कंबल खुद ओढ़ रखा है…और बच्चे बेचारे ठंड से सिकुड़े हुए हैं.’’

पीछे से आई रूपाली की अचानक तेज आवाज से राहुल हड़बड़ा कर बैठ गया. उस ने बच्चों पर नजर दौड़ाई. वाकई बच्चे आधे कंबल में लेटे ठंड में सिकुड़े हुए थे.

”अरे! मैं ने ध्यान नहीं दिया…अभी ढंक देता हूं.’’ राहुल धीमी आवाज में बोला.

”तुम्हारा ध्यान तो मोबाइल पर पिक्चर और रील देखने में लगा रहता है. कुछ कामधाम तो है नहीं और न कुछ करना है. कम से कम घर का ही कुछ काम कर लिया करो.’’ रूपाली बोलने लगी. मगर राहुल चुप्पी साधे बच्चों को कंबल ओढ़ाने के बाद बैड पर बिखरे सामान को सहेजने लगा.

उस के हाथ से अपना स्वेटर छीनती हुई बोली, ”चलो, इधर दो मुझे…नामर्द… हरामजादे कहीं के… कोई काम करना है नहीं… घर में पूरे दिन रोटियां ठूंसना और तरहतरह की फरमाइश करना. बाप बेचारा दिन भर गार्ड की नौकरी कर 4 पैसे लाता है और बेटा 2 पैसा कमाने लायक भी नहीं है…’’

”देखो बहुत हो गया… गालियां मत बको… मेरा दिमाग मत खराब करो.’’ राहुल अब थोड़ा सख्ती से बोला.

”हां, दूंगी गालियां… तुम इसी लायक हो नामर्द, कमीना… हरामजादा. कुछ कमा कर लाओ, तब जानूं तुम मर्द कहलाने के लायक भी हो या नहीं?’’

”बकवास करने की जरूरत नहीं है…देख रहा हूं, जब से तुम ने घर से बाहर कदम रखा है, तब से तुम्हारे रंगढंग बहुत बदल गए हैं. बाहर क्या जाने लगी, पति को गालियां देने लगी हो!’’

”मेरा घर से बाहर जाना भी तुम्हारी नामर्दी की वजह से हुआ है…सिलाई सीखने जाती हूं. सीख लूंगी, तब घर पर ही कोई काम कर दोचार पैसे कमा लूंगी.’’

”मुझे सब मालूम है…तुम इसी बहाने बाहर क्या करती हो.’’

”मैं क्या करती हूं…सुनूं तो जरा…तुम्हारे दिमाग में क्या जहर भरा हुआ है.’’ रूपाली बोली.

”यही कि तुम किसी और के साथ देखी गई हो…सिलाई के बहाने से अपने पुराने प्रेमी से मिलने जाती हो.’’ राहुल बोला.

”तुम मुझ पर झूठा लांछन लगा रहे हो…शर्म नहीं आती है, अपनी पत्नी पर ऐसे शक करते हुए?’’

”शक नहीं कर रहा, सच्चाई बता रहा हूं… यह छिपाने के लिए तुम गालियां दे कर मुझे दबाना चाहती हो. छोटीछोटी बात पर आग उगलती हो.’’

”क्या सच्चाई बता रहे हो…मैं एक बार नहीं हजार बार कहूंगी… तुम हरामजादे हो तो हो. हरामजादे, कमीने किस्म के इंसान हो.  तुम्हारी कोई औकात नहीं है… जो मर्दानगी दिखा सको. अगर इतनी ही ताकत है तो पैसे कमा कर दिखाओ, अपनी कमी और नकारेपन का दोष छिपा कर मुझे दोषी मत ठहराओ.’’ रूपाली तेजतेज आवाज में बोलती चली गई.

इसी के साथ उस ने कमरे के दरवाजे की कुंडी भीतर से लगा दी, ताकि बाहर आवाज न निकले और घर में सो रहे दूसरे लोगों को उन के झगड़े के बारे में पता न चल पाए.

झगड़ा पहुंचा चरम पर

दोनों के बीच झगड़ा चरम पर पहुंच चुका था. उन की आवाज सुन कर सो रहे बच्चों की नींद खुल गई. उन्हें रूपाली ने तुरंत थपकी दे कर सुला दिया. कुछ मिनट में उन्हें नींद में आते ही रूपाली ने फिर से वही राग छेड़ दिया, लेकिन इस बार चीखनेचिल्लाने की बारी राहुल की थी.

वह शांत बैठा था, लेकिन उस के भीतर गुस्सा भर चुका था. जैसे ही रूपाली ने बोलना शुरू किया, ”तुम्हारे साथ निभाना बहुत मुश्किल हो गया है…अब और बरदाश्त नहीं करूंगी…’’

मासूम रियांशः पापा के वार से बचने के लिए मम्मी से लिपट गया, फिर भी बच नहीं पाया

और आगे बोलने से पहले ही राहुल ने उस के बाल खींचते हुए गरदन पकड़ ली. दूसरे हाथ से मुंह बंद कर दिया. उस के कानों के पास मुंह लगा कर चीखते हुए बोला, ”कुतिया कहीं की… जगहजगह मुंह मारती फिरती है कमीनी… हरामजादी! पुराने यार से मिलती है!… और मुझ पर ही ताने मारती है.’’

पति के हाथों में जकड़ी रूपाली ने किसी तरह से खुद को छुड़ाया और राहुल का कौलर पकड़ गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ दिया. थप्पड़ उस के कान पर भी लगा था. वह तिलमिला कर गिर गया. चोट लगे कान को सहलाने लगा. महसूस हुआ जैसे कान के परदे फट गए हों. सनसनाहट की आवाज आ रही थी. कुछ सुन नहीं पा रहा था. सामने तन कर खड़ी रूपाली नजर आ रही थी. उस के हाथ में कुल्हाड़ी थी. उस ने राहुल को धमकाने के लिए कमरे के कोने में रखी कुल्हाड़ी उठा ली थी.

ससुर राहुल हरिभाऊ की पत्नी की हत्या करने के बाद बेटे रियांश को भी कुल्हाड़ी से काट डाला. बाएं पेज पर – राहुल के घर के बाहर एकत्र भोड़

”तो…तो! तू अब इस हरकत पर उतर आई है?’’ राहुल बोला और एक झटके में उठ कर खड़ा हो गया. झट से रूपाली के हाथ से कुल्हाड़ी छीन ली और उसे धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया.

उस के गिरते ही राहुल ने उस पर उसी कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया. हमले से रूपाली बच नहीं पाई. उस की चीख निकल पड़ी थी. चीख इतनी तेज थी कि ठीक बगल में सोए 4 साल के  बेटे रियांश की नींद खुल गई. उस के सामने मम्मी खून से लथपथ पड़ी थी. सामने पापा के हाथ में कुल्हाड़ी से खून टपक रहा था. इस डरावने दृश्य को देख कर वह डर गया. न रो पा रहा था, न कुछ बोल पा रहा था.

जब बेटे की पड़ी नजर...

राहुल ने जब जाग उठे बेटे रियांश को देखा तो सहम गया. वह उसे आंखें फाड़े देख रहा था. आशंका से घिर गया, क्योंकि बेटा रियांश ही उस के कारनामे का एकलौता चश्मदीद था. इसलिए राहुल ने तुरंत कुल्हाड़ी का एक वार रियांश पर भी कर दिया. तब तक रूपाली की सांस चल रही थी और रियांश मम्मी से लिपटने के कारण हमले से बच गया था. राहुल और भी आक्रामक हो चुका था. उस ने पत्नी को जमीन पर गिरा दिया और उन पर कुल्हाड़ी से कई वार कर डाले.

रूपाली दर्द से कराहती, चिल्लाती रही. वह खून से लथपथ जमीन पर गिर कर तड़पने लगी. रियांश भी तड़पता हुआ कुछ सेकेंड में ही बिस्तर पर ढेर हो गया. उस के सिर पर कुल्हाड़ी लगी थी.  दोनों की मौत के बाद राहुल वहीं बगल में बैठ गया. तब तक इस का शोरगुल कमरे के बाहर राहुल के पेरेंट्स सुन चुके थे. वे दरवाजा खटखटा कर खोलने को कह रहे थे, किंतु राहुल दरवाजा नहीं खोल रहा था. मजबूरन उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया और दरवाजा तोड़ कर खोल दिया.

भीतर कमरे का दृश्य बेहद भयाभह था. वह नजारा जिस ने भी देखा, वह दहल गया. भारी ठंड में भी सभी पसीने से तरबतर हो गए थे. रूपाली खून से लथपथ जमीन पर मृत पड़ी थी, जबकि बेटा रियांश बिस्तर पर मृत था. उस के सिर से खून बह रहा था. वहीं राहुल पड़ा था. इस खूनखराबे को देख कर मौजूदा लोगों के साथ म्हस्के परिवार के लोग भी काफी सन्नाटे में आ गए. म्हस्के परिवार के घर के सारे लोग इस घटना से आक्रोशित भी हो उठे. तब तक कुछ पड़ोसी भी आ चुके थे. उन्हीं में से किसी ने इस वारदात की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 112 पर दे दी.

घायल रूपाली और उस के बेटे की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी फिर भी उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया

कुछ देर में ही पुलिस आ गई. साथ में एंबुलेंस भी थी. दोनों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया. किंतु वहां के डौक्टरों ने नन्हें बच्चे रियांश को मृत घोषित कर दिया. खून से लथपथ रूपाली की सांस चल रही थी. इसे देखते हुए उसे संभाजी नगर के अस्पताल में ले जाने को कहा गया. बुलढाना के मेहकर थाने के सीनियर इंसपेक्टर वेंकटेश मालेवार ने अपनी टीम के साथ मौकाएवारदात की जांच की. फोरैंसिक टीम को बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल पर पड़ी खून से सनी कुल्हाड़ी कब्जे में ली और राहुल म्हस्के को हिरासत में ले लिया गया. दूसरी तरफ संभाजी नगर के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाते समय घायल रूपाली ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

उन दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद उन के परिजनों को सौंप दिए गए. रूपाली और उस के बेटे रियांश की हत्या के मामले में रूपाली के फादर भास्कर शंकर वानखेड़े (55 वर्ष) ने अपने दामाद राहुल हरिभाऊ म्हस्के पर दफा 103 (1) भारतीय न्याय संहिता के तहत रिपोर्ट दर्ज करवा दी. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में राहुल ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. क्रूरता से भरी इस अपराध की जांच के लिए बुलढाना के एसपी निलेश तांबे ने एडिशनल एसपी अमोल गायकवाड़ के निर्देशन एवं डीवाईएसपी संतोष खाडे की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई.

टीम में मेहकर पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर वेंकटेश मालेवार, एपीआई अवचार नरवाड़े, बिरंजे, हैडकांस्टेबल लक्ष्मण कटक, रवि चिचोले, सुखदेव गव्हाणे एवं प्रभाकर शिवनकर को शामिल किया गया. हत्या की मुख्य वजह पत्नी के चरित्र पर शक करना सामने आया. आरोपी ने बताया कि पत्नी उस पर ताने मारती थी और वह उस पर लंबे समय से किसी और व्यक्ति से प्रेम करने का संदेह करता था, जिस से घर में विवाद होता था.

इस मामले में आरोपी की मानसिक स्थिति और पारिवारिक विवाद की भी जांच की गई.  इस डबल मर्डर केस की सभी तरह के जांच में पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बयान, मोबाइल कौल डिटेल्स और आरोपी की मानसिक स्थिति का आकलन शामिल था. इस की फोरैंसिक जांच रिपोर्ट में हथियार और घटनास्थल से मिले सबूत मैच कर गए. साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हथियार से गंभीर हमला  होने की पुष्टि कर दी.

पुलिस द्वारा तैयार की गई चार्जशीट की प्रक्रिया लिखे जाने तक जारी थी. इस के तहत आरोपी का कबूलनामा, हत्या का हथियार (कुल्हाड़ी), पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान, कौल रिकौर्ड और पारिवारिक विवाद के सबूत इकट्ठा किए जाने थे. पुलिस ने आरोपी राहुल हरिभाऊ म्हस्के से पूछताछ करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Family Dispute

 

UP Crime News: विदेशी कौलगर्ल की हत्या का राज

UP Crime News: तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत नाजमुदिनोवा करीब 15 साल पहले इंडिया घूमने आई थी, लेकिन दलालों के चंगुल में फंस कर वह जिस्मफरोशी का धंधा करने लगी. उस की हत्या की गुत्थी सुलझाते समय पुलिस को ऐसी चौंकाने वाली जानकारी मिली कि…

21 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मवाना कोतवाली पुलिस को एक किसान ने फोन कर के जो सूचना दी, उस से पुलिस वाले हैरान हो गए. मवाना खुर्द के भगवती फार्महाउस के पास सरसों के खेत में एक महिला का शव पड़ा हुआ मिला था. यह फार्महाउस पौड़ी हाइवे पर पड़ता है. मवाना खुर्द चौकी के प्रभारी एसआई राजेश कुमार यादव को थाने से इस कौल की सूचना पर मौके पर तत्काल पहुंचने का आदेश मिला तो वह चौकी के स्टाफ को ले कर तत्काल वहां पहुंच गए, जहां महिला का शव पड़ा था.

महिला का चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था. ऐसा लगता था किसी ने उस के चेहरे पर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाला था. इतना ही नहीं, शरीर के 1-2 जगह और भी ज्वलनशील पदार्थ डाला गया था. यह तो समझ में आता था कि उस के चेहरे पर तेजाब शायद इसलिए डाला गया था ताकि मृतका की पहचान खत्म हो जाए, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों को क्यों जलाया गया था. यह जानने के लिए जब एसआई राजेश ने शरीर के उन हिस्सों का निरीक्षण किया तो पता चला कि उन सभी जगहों पर बड़ेबड़े टैटू बने हुए थे. लेकिन ज्वलनशील पदार्थ डाले जाने के बाद भी वे हिस्से पूरी तरह झुलस नहीं पाए थे.

एआई राजेश यादव जांचपड़ताल के काम में लगे ही थे कि तभी मवाना थाने की एसएचओ पूनम जादौन और सीओ पंकज लवानिया भी वहां पहुंच गए. एसएचओ और सीओ ने लाश के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. सवाल था कि मरने वाली कौन थी? यह पता लगाने के लिए जब कुछ महिलाकर्मियों की मदद से मृतका के शरीर पर पहने कपड़ों की तलाशी ली गई तो उस की जेब से एक ऐसी चीज मिली, जिस से मृतका की पहचान की गुत्थी भी सुलझ गई.

कपड़ों से एक आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अर्चिता अरोड़ा और पता दिल्ली का दर्ज था. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आधार कार्ड पर फोटो एक विदेशी युवती का लगा था. जबकि नाम एकदम देशी था. इसीलिए सीओ पंकज लवानिया को सहज विश्वास नहीं हुआ कि मृतका और उस की पहचान के बीच जो रिश्ता है वो एकदम सही है. इस दौरान एसपी (देहात) अभिजीत कुमार भी क्राइम व फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल की जांच व निरीक्षण का काम पूरा होने के बाद मवाना पुलिस ने कथित अर्चिता अरोड़ा के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

चूंकि मृतका अर्चिता अरोड़ा के शव का निरीक्षण सब से पहले एसआई राजेश यादव ने किया था, इसलिए सीओ पंकज लवानिया के निर्देश पर एक लिखित तहरीर थाने में दी और इसी के आधार पर मवाना थाने में बीएनएस की धारा 103(1), 238 के अंतर्गत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसपी (देहात) अभिजीत कुमार के निर्देश पर जांच का काम खुद एसएचओ पूनम जादौन ने अपने हाथ में ले लिया. एसपी (देहात) ने 2 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. एक टीम को घटनास्थल की जांच और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने का काम सौंपा गया.

दूसरी टीम को मृतका के बारे में पुख्ता जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया. सभी पुलिस टीमों की मौनिटरिंग और सर्विलांस का काम सीओ पंकज लवानिया को सौंपा गया.

पुलिस की एक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच शुरू कर दी. साथ ही उस जगह के आसपास की जगहों के सीसीटीवी फुटेज तलाशने का काम भी शुरू कर दिया, जहां अर्चिता अरोड़ा के शव को फेंका गया था. काम थोड़ा मशक्कत वाला और पेचीदा जरूर था, लेकिन जब पुलिस की टीम ने अपना काम शुरू किया तो अगले 24 घंटे में करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तलाश लिए, जिन से पुलिस को उन कातिलों तक पहुंचने का सुराग मिल गया, जिन्होंने अर्चिता का शव वहां ला कर फेंका था.

हाइवे पर बने भगवती फार्महाउस के सीसीटीवी कैमरे में पुलिस टीम को एक क्रेटा कार दिखी, जिस में कुछ लोग दिखे. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे लोगों की संख्या करीब 3 से 4 थी, जो कंबल में लिपटे एक मानव शरीर को ले कर उस स्थान की तरफ गए, जहां अर्चिता का शव मिला था. पुलिस ने तकनीकी सहायता से आखिरकार ये पता लगा लिया कि उस क्रेटा कार का नंबर क्या है और वह किस के नाम पर रजिस्टर्ड है.

मुहब्बत उर्फ अर्चिता अरोड़ाः सालों पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत घूमने आई थी, लेकिन यहां आ कर दलालों के जाल में फंस गई.

यह क्रेटा कार मेरठ के सिविल लाइन इलाके में प्रभात नगर कालोनी के रहने वाले संदीप उर्फ सिट्टू उर्फ राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पुलिस की एक टीम ने उसी दिन संदीप को हिरासत में ले लिया और उस से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस तो पुलिस होती है, वह जब अपने तरीके से पूछताछ करती है तो इंसान क्या पत्थर भी बोलने लगते हैं. संदीप उर्फ राहुल ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सका. संदीप ने पुलिस को बताया कि वह परतापुर के दिल्ली रोड स्थित अविका होटल में काम करता है. इस के बाद संदीप ने टेप रिकौर्ड की तरह बोलते हुए पुलिस को सब कुछ बता दिया कि उस ने क्यों और कैसे तथा किस के साथ मिल कर अर्चिता की हत्या की है.

संदीप से पूछताछ के बाद पुलिस ने अविका होटल के मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी निवासी न्यू देवपुरी थाना रेलवे रोड, मेरठ के अलावा वहां काम करने वाले एक अन्य  कर्मचारी गुरमुख उर्फ अरविंद उर्फ मोनू निवासी जौहड़ी बिनौली बागपत तथा विवेक उर्फ काका निवासी खजूरी वाली गली मलियाना, टीपीनगर मेरठ को ताबड़तोड़ छापेमारी कर हिरासत में ले लिया. संदीप समेत उन चारों से कड़ी पूछताछ हुई तो उन्होंने अर्चिता की हत्या का पूरा राज खोल कर रख दिया.

संदीप और उस के साथियों ने यह भी बताया कि पुलिस ने जिस महिला का शव बरामद किया है, उस का नाम अर्चिता अरोड़ा है, जो बैंक रोड अंबाला कैंट की रहने वाली है. हाल में वह दिल्ली के लोधी रोड स्थित कोटला मुबारकपुर में रहती थी. संदीप ने बताया कि अर्चिता जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी थी. वह अकसर मेरठ में आती थी, जहां वह अपने चाहने वालों का दिल बहला कर उन की जेब खाली कराती थी. इस काम के लिए अर्चिता अविका होटल में रूम बुक करती थी.

20 फरवरी, 2026 को भी उस ने रूम बुक किया था. रात के समय अर्चिता से होटल मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी का रूम के किराए को ले कर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि अर्चिता ने चंचल पर दुष्कर्म का आरोप लगाने की धमकी दे डाली. उस के बाद चंचल को इतना गुस्सा आया कि उस ने होटल के अपने 3 कर्मचारियों के साथ मिल कर अर्चिता के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस ने अर्चिता की इतनी पिटाई कर दी कि कि वह बेहोश हो गई.

चंचल कुमार उर्फ बंटी के सिर पर गुस्सा इस कदर सवार था कि उस वक्त उसे इस बात का होश ही नहीं था कि वह क्या कर रहा है. उस ने बेहोश अर्चिता के शरीर पर कंबल डाल दिया और उस के बाद गुस्से में ही उस की गरदन दबाते हुए चीखने लगा, ”साली वेश्या, तू मुझे झूठे केस में फंसाएगी. मुझे जेल भिजवाएगी. मेरे जरिए तूने लाखों रुपया कमाया और आज तू मुझे जेल भिजवाने की धमकी दे रही है. देखता हूं कि आज तुझे कौन बचाता है.’’

बाएं – मृतका के कपड़ों से बरामद अर्चिता अरोड़ा नाम का आधार कार्ड तथा नीचे उस का तुर्कमेनिस्तान का पासपोर्ट

चंचल कुमार को पता ही नहीं चला कि गुस्से की आग में उस ने कब कंबल के अंदर लिपटी अर्चिता की गला दबा कर हत्या कर दी है. अर्चिता के शरीर में जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो चंचल कुमार का गुस्सा भी थोड़ी ही देर में शांत हो गया. कुछ देर बाद जब चंचल का गुस्सा शांत हुआ तो उस ने सोचा एक बार अर्चिता से बात कर ली जाए. उस ने जब अर्चिता को हिला कर उस से बात करने की कोशिश की तो पता चला कि वह निर्जीव पड़ी है.

उस ने होटल के तीनों कर्मचारियों संदीप, गुरुमुख और विवेक को बुला कर अर्चिता को होश में लाने के लिए कहा. तीनों ने जब उस की नब्ज टटोली तो पता चला उस की नब्ज बंद हो चुकी थी. कई तरह से जांचपड़ताल करने के बाद वे समझ गए कि अर्चिता की मौत हो चुकी है. जैसे ही चंचल उर्फ बंटी को यह पता चला कि अर्चिता मर चुकी है तो उन सभी के होश उड़ गए. काफी देर तक वे समझ ही नहीं पाए कि अब वे क्या करें.

लेकिन करीब एक घंटा बीत जाने के बाद उन्हें समझ में आया कि अगर उन्हें इस मामले में बचना है और पुलिस की पकड़ से दूर रहना है तो उन्हें अर्चिता के शव को अपने होटल से कहीं दूर ले जा कर ठिकाने लगाना होगा. बहुत सोचनेविचारने और सलाहमशविरा करने के बाद उन्होंने तय किया कि वे रात में ही गाड़ी में डाल कर अर्चिता के शव को कहीं और फेंक आऐंगे. उन्होंने सब से पहले तेजाब डाल कर अर्चिता के चेहरे को जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. इतना ही नहीं, उस के शरीर के जिन हिस्सों में टैटू बने थे, वहां भी तेजाब डाल दिया गया.

चंडीगढ़ की एलिना से संपर्क करने पर उस ने मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना से वीडियो कौल पर पुलिस की बात कराई.

चंचल जानता था कि अर्चिता मेरठ की रहने वाली नहीं है, वह केवल अमीरजादों के जिस्म की भूख मिटा कर पैसा कमाने के लिए मेरठ आती थी. उसे शहर में ज्यादा लोग नहीं जानते हैं. अगर वे उस के चेहरे की पहचान मिटा कर उस के शव को अपने होटल से कहीं दूर डाल देंगे तो फिर उन के पकड़े जाने की संभावना नहीं है.

तेजाब से पहचान मिटा कर चंचल ने अपने तीनों साथियों के साथ मिल कर अर्चिता के शव को कंबल में लपेट कर संदीप उर्फ सिट्टू की क्रेटा कार में डाला. चंचल कुमार और उस के साथी अर्चिता की लाश को क्रेटा कार में डाल कर कारीब 45 किलोमीटर तक इधर से उधर भटकते रहे. इसी तरह वे मेरठ से होते हुए मवाना रोड निकल गए. कहीं चैकिंग नहीं हुई. वे मवाना खुर्द पुलिस चौकी के पास पौड़ी हाइवे पर स्थित भगवती फार्महाउस तक जा पहुंचे. फार्महाउस के पास पहुंच कर उन्हें लगा कि यहां लाश को ठिकाने लगाना उचित रहेगा.

वहां गाड़ी खड़ी कर के उस के बाद सभी चारों आरोपियों ने फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर सरसों के खेत में कंबल समेत अर्चिता का शव डाल दिया. इस के बाद चारों आरोपी मौके से वापस अपने घरों को लौट आए. लेकिन घर लौटने के बाद भी चारों आरोपी मवाना पुलिस की गतिविधियों पर नजर बनाए रहे. पूछताछ का काम पूरा होने पर पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग की गई क्रेटा कार, होटल का कंबल और तेजाब की खाली बोतल भी बरामद कर सीज कर दी गई.

पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों को जुटाने के बाद चारों आरोपियों चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक को सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथित अर्चिता अरोड़ा की शिनाख्त से ले कर हत्या के कारण व उस के कातिलों को गिरफ्तार करने की गुत्थी मवाना पुलिस ने सुलझा ली थी. लेकिन मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के साथ एसपी (देहात) अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया ने जब जांच अधिकारी पूनम जादौन के साथ हत्याकांड के एकएक बिंदु पर गहनता से चर्चा शुरू की तो सभी उच्चाधिकारियों को लगा कि कुछ ऐसा जरूर है, जो जांच में छूट रहा है.

पुलिस हिरासत में आरोपी चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक

विचारविमर्श के बाद तय हुआ कि अर्चिता के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करनी होगी, क्योंकि पुलिस ने अर्चिता का जो आधार कार्ड बरामद किया था, उस में भले ही उस का नाम अर्चिता अरोड़ा था, लेकिन उस में जो फोटो थी वह एक विदेशी महिला की लग रही थी, इसलिए उस के भारतीय होने पर संदेह था. पुलिस की टीमों को अब अर्चिता की सही पहचान स्थापित करने के काम पर लगाया गया. महिला की सही पहचान और उस के परिवार वालों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए टीमें गठित कर दी गईं.

पुलिस को मृतका का जो आधार कार्ड बरामद हुआ था, उस में उस का नाम अर्चिता अरोड़ा पुत्री सरबजीत अरोड़ा निवासी 1811, दूसरा फ्लोर, साउथ एक्सटेंशन, कोटला मुबारकपुर, लोधी रोड मध्य दिल्ली का पता दर्ज था. इस में जन्मतिथि 27 अप्रैल, 1984 दर्ज मिली. पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो जानकारी मिली कि वह इस पते पर नहीं रहती. थकहार कर पुलिस खाली हाथ लौट आई. जब अर्चिता के आधार वाले पते से कोई सुराग नहीं मिला तो जांच अधिकारी पूनम जादौन ने उस के मोबाइन नंबर का सहारा लिया.

दरअसल, अर्चिता के आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने अर्चिता का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. पुलिस ने अर्चिता के मोबाइल की 3 महीने की कौल डिटेल्स निकाली. उस में अर्चिता के मोबाइल काल डिटेल में आखिरी नंबर किसी एलिना का था, जिस का नाम उस की कौंटेक्ट लिस्ट में दर्ज था. एलिना से फोन पर बातचीत कर पुलिस ने उसे भगवती फार्महाउस में मिले एक महिला के शव और उस के पास से बरामद अर्चिता अरोड़ा के आधार कार्ड की बाबत जानकारी दी.

कौल डिटेल्स से यह भी पता चला कि अर्चिता की हत्या में पकड़े गए आरोपी चंचल कुमार से एक साल से संबंध थे. वह अकसर मेरठ आतीजाती रहती थी. हर बार उस के नाम पर एक रात या दिन के लिए अविका होटल का रूम बुक होता था. कौल डिटेल्स में चूंकि अर्चिता की आखिरी बार 20 फरवरी, 2026 को एलिना से बात हुई थी. पुलिस ने एलिना से अनुरोध किया कि वह अर्चिता के शव की पहचान करें.

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रेंस करते पुलिस अधिकारी

एलिना चूंकि चंडीगढ़ में रहती थी, इसलिए 25 फरवरी को मवाना थाने के एक एसआई सुमित कुमार ने एलिना से संपर्क किया. उन्होंने अर्चिता के शव के हर ऐंगल की फोटोग्राफ एलिना को दिखाई तो एलिना ने खुलासा हुआ कि मृतका अर्चिता अरोड़ा नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है. एलिना के इस खुलासे के बाद अचानक पूरे केस की थ्योरी ही बदल गई. एलिना ने बताया कि मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना तुर्कमेनिस्तान में रहती है. एलिना ने एसआई सुमित कुमार से ली गई फोटो मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना को भेजी.

मम्मी ने भी ईयरिंग, ब्लैकटौप और शरीर पर बने टैटू के आधार पर उस की पहचान अपनी बेटी मुहब्बत के रूप में की. उन्होंने एसआई सुमित कुमार से वीडियो कौल पर बातचीत में बताया कि मुहब्बत करीब 15 साल पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत आई थी और कथित रूप से दलालों के चंगुल में फंस गई थी. दलालों ने उस का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया और उन्होंने उसे नौकरी की जगह उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया.

एसएसपी अविनाश पांडेय

मुहब्बत ने अपनी पहचान के लिए दलालों के जरिए अर्चिता अरोड़ा के नाम पर आधार कार्ड बनवा लिया, लेकिन उस पर फोटो मुहब्बत का ही लगा था. मां नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना ने यह भी खुलासा किया कि मुहब्बत भारत में जिस्मफरोशी का काम कर रही थी. पासपोर्ट पर भी उस का नाम मुहब्बत नाजमुदिनोवा था, जोकि तुर्कमेनिस्तान की नागरिक थी. मुहब्बत लगभग 15 साल से भारत में रह रही थी. एसआई सुमित कुमार से बातचीत के बाद मुहब्बत की मम्मी ने भारत में रहने वाली अपनी दोस्त उज्बेकिस्तान की रहने वाली कलिचेवा अजीजा फैजुलेवना से बातचीत की. वह भी चंडीगढ़ में रहती थी.

सीओ पंकज उस ने जब भार लवानिया

अजीजा ने वीडियो कौल पर मुहब्बत की मम्मी से बातचीत की. अजीजा एलिना को साथ ले कर 25 फरवरी को मवाना थाने पहुंची. उस ने जांच अधिकारी पूनम जादौन, सीओ पंकज लवानिया और उस के बाद एसपी (देहात) अभिजीत कुमार से मुलाकात और बातचीत की.  दूसरी तरफ मुहब्बत की मम्मी गुलनारा ने तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को एक पत्र भेज कर बताया कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि खुद भारत आ सकूं. उस ने अजीजा के जरिए तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को यह लेटर भेजा, ताकि उस की गैरमौजूदगी में अजीजा ही पुलिस से संपर्क कर सके.

एसएचओ पुनम जादौन

गुलनारा ने दावा किया कि मृतका भारतीय नहीं, बल्कि उस की बेटी मुहब्बत है. एलिना और अजीजा के पुलिस से संपर्क करने तथा तुर्कमेनिस्तान एंबेसी के हस्तक्षेप के बाद मवाना पुलिस पूरी तरह ऐक्टिव हो गई. सीओ पंकज लवानिया को विश्वास हो गया कि अब कथित अर्चिता अरोड़ा की सही पहचान हो जाएगी. इस दौरान एंबेसी की मदद से पुलिस को मुहब्बत के पासपोर्ट की कौपी भी मिल गई. इसलिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय को पासपोर्ट और केस की डिटेल भेज दी है और अर्चिता उर्फ मुहब्बत का डीएनए टेस्ट कराने के लिए उस की मम्मी को एक अनुरोध पत्र भी भेज दिया.

पूछताछ में पता चला कि मृतका अर्चिता अरोड़ा का जन्मस्थान भले ही तुर्कमेनिस्तान था, लेकिन उस के पापा सरबजीत अरोड़ा भारत के ही निवासी हैं. जबकि मम्मी तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली थी. इसीलिए उस ने जब भारत आने पर अपना आधार कार्ड बनवाया तो उस में अपनी पहचान अर्चिता अरोड़ा के रूप में दी. पुलिस ने अर्चिता उर्फ मुहब्बत की हत्या और उस की पहचान की गुत्थी एक तरह से सुलझा ली थी.

लेकिन इस मामले की तह में एक बड़े ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट के जुड़े होने की बू आ रही थी. क्योंकि अर्चिता उर्फ मुहब्बत ही नहीं, देश में ऐसी बहुत सारी विदेशी महिलाएं हैं, जिन के पास भारत में फरजी पहचान पत्र हैं. फरजी आधार कार्ड तो हैं, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है. UP Crime News

 

 

 

UP Crime: शादी के बाद प्रेमी पर कितना हक

UP Crime: शिवानी निषाद की शादी देवरिया के युवक से हो जरूर गई थी, लेकिन वह किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी विनय उर्फ दीपक निषाद को छोडऩा नहीं चाहती थी. विनय ने उसे लाख समझाया, लेकिन वह प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी थी. एक दिन प्रेमी पर हक जमाना शिवानी को इतना भारी पड़ा कि…

अपनी प्रेमिका शिवानी की जिद से विनय उर्फ दीपक निषाद डर चुका था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे शिवानी से कैसे निबटा जाए? जिस तरह से वह अपनी जिद पर अड़ी हुई थी, सचमुच उस के गले की हड्डी बन गई थी, जो न तो निगली जा रही थी और न ही उगली ही जा रही थी. इसी उहापोह में उस ने शिवानी से निबटने के लिए एक खतरनाक रास्ता अख्तियार करने के लिए अपना मन मजबूत कर लिया था.

शिवानी उसे पहले ही बता चुकी थी कि वह 23 नवंबर, 2025 को अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने के लिए ससुराल से आ रही है. वह हमेशाहमेशा के लिए ससुराल छोड़ कर मायके रहने के लिए आ रही है. विनय के दिमाग में तभी एक खतरनाक प्लान ने जन्म ले लिया. काफी सोचविचार कर उस ने इसी मौके पर प्रेमिका शिवानी को मौत के घाट उतारने का प्लान बनाया. खतरनाक प्लान बना कर वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.

शादी से 3 दिन पहले यानी 21 नवंबर, 2025 को देवरिया में स्थित अपनी ससुराल से शिवानी चचेरी बहन की शादी में शरीक होने के लिए रसूलपुर अपने मायके पति के साथ आई. ससुराल के बाकी सदस्य शादी वाले दिन आने वाले थे. वह बहुत खुश थी. उस के खुश होने का सब से बड़ा कारण शादी में शरीक होना नहीं था, बल्कि वह इसलिए खुश हो रही थी कि उस का मिलन उस के प्रेमी विनय से होने वाला था, क्योंकि प्रेमी ने उसे वचन दिया था कि वह उसे हमेशा के लिए अपना लेगा. यही सोचसोच कर वह खुश हो रही थी.

23 नवंबर, 2025 की रात 8 बजे रसूलपुर गांव से 500 मीटर दूर शादी का कार्यक्रम था. कार्यक्रमस्थल पर सुबह से ही फेमिली वालों के आनेजाने का सिलसिला जारी था. घर वाले बेहद खुश थे. नियत समय पर रात में बारात दरवाजे पर लग गई थी. रात 10 बजे जयमाल का कार्यक्रम शुरू हो गया था. घर के सदस्य और नातेरिश्तेदार कार्यक्रम का लुत्फ उठा रहे थे. शिवानी भी वहां मौजूद थी और बेहद खुश नजर आ रही थी.

शिवानी निषादः विवाह हो जाने के बाद भी विनय के साथ रहने की जिद कर रही थी

उसी समय उस की नजर बाहर दरवाजे की ओर पड़ी तो उस की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. बाहर दरवाजे पर प्रेमी विनय खड़ा उसे ही देख रहा था और इशारा कर उसे अपने पास बुला रहा था. उसे देख कर ही इशारे से शिवानी ने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओ, जयमाला देख लूं, फिर आ रही हूं. विनय ने आंखें तरेर कर उसे तुरंत अपने पास आने का इशारा किया तो शिवानी न चाहते हुए भी उस से मिलने उस की ओर हो ली. विनय नजरें बचाते हुए वहां से शिवानी को ले कर उस के ही घर की ओर बढा. इतनी सफाई से दोनों वहां से घर की ओर निकले थे कि वहां से जाते हुए उन्हें किसी ने भी नहीं देखा.

विनय यही चाहता भी था कि उसे वहां से जाते हुए कोई न देख पाए और उस ने प्रेमिका शिवानी को मारने का जो फुलप्रूफ प्लान बनाया है, वह शतप्रतिशत कामयाब हो जाए. सब कुछ उस के प्लान के अनुसार चल रहा था. शिवानी नहीं जानती थी कि जिसे वह सच्चे दिल से प्यार करती है, वही फरेबी आशिक उस के जीवन का दीया बुझाने जा रहा है. उस के खतरनाक इरादों की उसे तनिक भी भनक होती तो वह उस के साथ कतई नहीं जाती. लेकिन वह तो ये सोच कर खुश हो रही थी कि जैसेतैसे कर के प्रेमी को अपने प्यार के तराजू पर तौल कर साथ रखने को मना ही लेगी, उसे पीछे हटने नहीं देगी.

रात लगभग साढ़े 10 बजे विनय शिवानी को ले कर उस के घर के वाशरूम में पहुंचा, क्योंकि घर के बाकी सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था, इसलिए उन्हें वाशरूम का चुनाव करना पड़ा था. खैर, कुछ देर वहां गहरी खामोश छाई रही, फिर शिवानी ने ही खामोशी तोड़ी, ”बताओ, तुम मुझे यहां क्यों ले कर आए हो?’’

”मैं तुम से खुल कर बात नहीं कर पा रहा था, जब से ससुराल से लौट कर आई हो.’’

”अच्छा, इतना मिस कर रहे थे मुझे. तो फिर फोन पर तो न जाने कैसीकैसी बातें कर रहे थे. लगता है मुझे खोने का एहसास हो गया है जनाब को.’’

”कुछ ऐसा ही सोच लो. मेरे दिल में तुम्हारे लिए जो प्यार है, इस जनम में तो क्या, जनमजनम तक कभी कम नहीं होगा. मैं भी तुम्हारे लिए उतना ही तड़पा हूं, जितना तुम मेरे लिए विरह की आग में जली हो.’’ शातिर विनय ने भावनाओं के तरकश से तीर निशाने पर लगाया. उस का निशाना ठीक जगह पर लगा था. वह आगे बोला, ”रियली मुझे अब अपने किए का बहुत पछतावा हो रहा है. सच कहूं तो मैं सचमुच कायर था, बुजदिल था, डरपोक था, जो तुम जैसी महबूबा के सच्चे प्यार को नहीं समझ सका. तुम्हारी सच्ची भावनाओं की कद्र नहीं कर सका. हो सके तो मुझे माफ कर देना शिवानी. आज के बाद तुम्हें कभी दुख नहीं होने दूंगा, तुम्हें इतना प्यार दूंगा कि बीते दिनों के जख्मों को भुला दोगी.’’

”सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते. आप को अपनी शिवानी की याद आई, उस का प्यार याद आया तो समझो कि मेरे सारे गिलेशिकवे मिट गए. अब दोनों मिल कर साथ रहेंगे और साथ जीएंगे भी, जमाना चाहे जो भी सोचे. हम दो जिस्म, एक जान थे, जान हैं और जान रहेंगे. हमें कोई अलग नहीं कर सकता.’’ शिवानी बोली.

शिवानी की बात सुन कर विनय के जिस्म में आग लग गई. वह उस से छुटकारा पाने के लिए पापड़ बेल रहा था और शिवानी थी कि उसे ले कर भविष्य की योजनाएं बना रही थी. तभी विनय ने अपने तरकश से भावनाओं का एक तीर निकाला और चलाते हुए बोला, ”आई लव यू मेरी जान. सच कहा तुम ने, हमें एकदूसरे से कोई जुदा नहीं कर सकता. हम 2 जिस्म एक जान हैं.’’ कह कर विनय ने शिवानी का  माथा चूमा और उसे सीने से आलिंगनबद्ध किया तो वह भी अपना प्यार लुटाने के लिए उस में समा गई और उसे प्यार करने लगी.

विनय इसी समय का इंतजार कर रहा था. शातिर विनय ने उसी समय अपनी कमर में खोंस रखा धारदार हंसिया निकाला और शिवानी की गरदन पर चला दिया. अचानक हुए हमले से शिवानी घबरा गई और उस की मजबूत पकड़ से दूर हो कर जान बचाने के लिए पीछे की तरफ भागी. आशिक से शैतान बना विनय उस पर शेर के मानिंद टूट पड़ा. दोनों के बीच में गुत्थमगुत्थी हो गई.

शिवानी विनय के चंगुल से खुद को आजाद कराने के लिए संघर्ष करती रही, लेकिन उस के वार से बच नहीं पाई और अपने ही खून से सनी शिवानी धीरेधीरे ठंडी पड़ती गई. जब उस ने उसे हिलाडुला कर देखा तो उस के शरीर में कोई हरकत होती नहीं दिखी तो वह समझ गया कि ये मर चुकी है. फिर उस ने वाशरूम में पड़े कपड़ों से खून से सना हंसिया साफ किया और बाल्टी में भरे पानी से अपना हाथमुंह धो कर अपने घर लौट गया और इत्मीनान से सो गया. घटनास्थल से 200 मीटर दूर उस का घर था. हंसिया उस ने बीच रास्ते की झाडिय़ों में छिपा दिया था.

शिवानी को शादी मंडप से निकले घंटों बीत चुके थे, उस की मम्मी नोहरी देवी बेटी को काफी देर से ढूढ रही थी. वह स्टेज से उतरने के बाद से दिखाई नहीं दे रही थी तो नोहरी देवी घर के सभी सदस्यों से उस के बारे में पूछ चुकी थी. किसी ने भी उस के बारे में ठीक से जवाब नहीं दिया, सभी यही कहते रहे कि काफी देर से वह यहां दिखाई नहीं दे रही है. शादी स्थल पर बेटी को न पा कर नोहरी देवी बुरी तरह परेशान हो गई थीं. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी रात में वह कहां जा सकती है?

पता नहीं क्यों नोहरी देवी का मन बेटी को ले कर बुरी तरह घबरा रहा था. अचानक मन में खयाल आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आराम करने के लिए घर चली गई हो. घर पर भी जा कर देख लेते हैं. यह सोच वह घर के लिए चल दीं. घर पर सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था. यह देख कर उस का मन किसी अनहोनी से भर गया और वह बुरी तरह परेशान हो गई. फिर बेटी को तलाशते हुए नोहरी देवी गुसलखाने में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर वह बुरी तरह चीख पड़ीं. शिवानी खून में सनी मरी पड़ी थी. उलटे पांव दौड़ती हुई नोहरा देवी शादी के मंडप में पहुंची, जहां शादी हो रही थी. सभी को उस ने शिवानी की हत्या की खबर दी.

फिर क्या था? पलभर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और शादी का कार्यक्रम बीच में छोड़ कर सभी लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. शादी के घर में खुशियों की जगह मातम छा गया था. घर में रोनापीटना शुरू हो गया. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह काम किस ने और क्यों किया? उसी रात घटना की सूचना ग्राम प्रधान शिवकरन ने थाना झंगहा को दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल की तरफ रवाना हो गई थी. उस समय रात के करीब 4 बज रहे थे. पुलिस टीम के पहुंचने के बाद मौके पर डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई थी.

पत्नी शिवानी की दुखद मृत्यु से आक्रोशित भीम निषाद

पुलिस घटना की जांच कर रही थी. घटनास्थल को देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतका अपनी जान बचाने के लिए कातिल से भिड़ गई होगी, क्योंकि मौके पर संघर्ष के संकेत मिले. खोजी कुत्ते को घटनास्थल सुंघा कर छोड़ दिया तो वह सूंघ कर घर के पीछे 200 मीटर दूर स्थित विनय के घर पहुंचा और वहां रुक कर भौंकने लगा. यह क्रिया 3 बार की गई. डौग ने तीनों बार यही क्रिया दोहराई. पुलिस को समझने में देर नहीं लगी कि इस घर के किसी सदस्य का घटना में हाथ हो सकता है. इस बारे में पुलिस ने मृतका के घर वालों से जानकारी ली तो पता चला कि गांव के विनय उर्फ दीपक निषाद और शिवानी के बीच में कई सालों से प्रेम संबंध चल रहा था.

शिवानी के मायके का वाशरूम जिस में उस के प्रेमी ने उस की जान ले ली

इस की जानकारी जब लड़की के घर वालों को हुई, तब दोनों के परिवार वाले खिलाफ हो गए थे. इसे ले कर दोनों परिवारों के बीच काफी झगड़ा भी हुआ था. बाद में शिवानी की शादी उस के पेरेंट्स ने देवरिया में कर दी थी. शादी के बाद भी विनय शिवानी से फोन पर बात करता था और उसे परेशान करता था. पुलिस के लिए इस क्लू ने अंधेरे में रोशनी की तरह काम कर गया. उस के बाद पुलिस ने शिवानी के फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई और उस का अध्ययन किया तो घटना वाली रात शिवानी के फोन पर विनय के नंबर से कौल आई थी.

इस के अलावा शादी की हो रही वीडियो रिकौर्डिंग की जांच की गई तो जयमाला के समय जब सारे लोग कार्यक्रम देखने में बिजी थे, तब शिवानी स्टेज से उतर कर विनय के साथ जाती हुई कैमरे में रिकौर्ड हो गई थी. फिर क्या था? पुलिस के लिए यह फुटेज कातिल तक पहुंचने में मददगार साबित हुई. इसी साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने 25 नवंबर, 2025 की रात विनय को उस के घर से दबोच लिया. उस से गहन पूछताछ की गई तो वह पुलिस के सामने टूट गया और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

विनय ने पूरी घटना पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर बिछिया मंडलीय जेल भेज दिया. इस के पहले मृतका की मम्मी नोहरी देवी की तहरीर पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत विनय उर्फ दीपक निषाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था. आरोपी विनय से पूछताछ के बाद शिवानी के मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है थाना झंगहा. इसी थानाक्षेत्र के जंगल रसूलपुर नंबर-2 स्थित लक्ष्मीपुर गांव पड़ता है. इसी गांव में नोहरी देवी अपने 4 सदस्यों वाले परिवार के साथ रहती थी. पति की सालों पहले स्वाभाविक मौत हो चुकी थी. पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी नोहरी देवी के कंधों पर आ गई थी. अपनी दिनरात की मेहनत से बच्चों की परवरिश में उस ने कोई कमी आने नहीं दी थी.

नोहरी की 2 बेटियां थीं सुमन और शिवानी. इन में शिवानी छोटी थी. वह सुंदर, चंचल और हंसमुख थी. हर किसी की बातों का मुसकरा कर जबाव देती थी. उस के इसी अंदाज के सभी कायल थे. जैसेजैसे वह सयानी होती गई, आवारा भौंरे उस की ओर आकर्षित होने लगे. उन्हीं भौरों में विनय उर्फ दीपक निषाद का था, जो उस के पड़ोस में रहता था. सुदर शिवानी नैनों के रास्ते उस के दिल में उतर गई थी. उस ने उसे अपने दिल की कोठरी में कैद कर लिया था. आलम यह था कि उसे बिना देखे रह नहीं पाता था. दिन का चैन और रातों की नींद गंवा चुका था वह. उठते, बैठते, सोते और जागते हर घड़ी उसे अपनी आंखों के सामने देखना चाहता था.

मोहब्बत की यह आग विनय के सीने में ही नहीं लगी थी. यह आग तो शिवानी के अंदर भी धधक रही थी. ऐसा नहीं था कि वह विनय की आशिकी से अंजान और बेपरवाह थी, बल्कि उस की हर हरकत पर अपनी नजरें गड़ाए हुई थी. वह भी चाहती थी कि वह पलभर के लिए भी उस की निगाहों से दूर न जाए. विनय से कहीं ज्यादा तड़पन शिवानी के दिल में थी. अपने कोरे दिल पर मोहब्बत की स्याही से उस ने विनय का नाम लिख लिया था.

दोनों दिलों में मोहब्बत की आग बराबर लगी हुई थी. समय देख कर विनय और शिवानी ने एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार कर दिया था. प्यार का इजहार करने के बाद दोनों मिल कर भविष्य के सपनों में खो गए थे. यह करीब 2 साल पहले की बात थी. धीरेधीरे 2 साल बीत गए थे. अपने प्यार को दोनों छिपा कर रखे थे. उन का प्यार अब परदों के पीछे और छिपा नहीं रह सकता था, क्योंकि फिजा में तैरती हुई यह खबर शिवानी के फेमिली वालों तक पहुंची तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई.

नोहरी देवी ने आव देखा न ताव शिवानी पर टूट पड़ी, ”करमजली, इसी दिन के लिए तुझे पालपोस कर बड़ा किया था कि परिवार का नाम मिट्टी में मिला दो.’’

”मम्मी, मुझे बताओ तो सही मैं ने क्या किया है? क्यों मुझ पर गुस्सा कर रही हो?’’ शिवानी ने सवाल किया.

”पूछती है मैं ने किया क्या है? तू तो ऐसे बन रही है जैसे तुझे अपनी करतूतों का ज्ञान ही नहीं है?’’

”सच मम्मी, मुझे नहीं पता कि आप मेरे से क्यों गुस्सा हो? आखिर मैं ने किया क्या है?’’

”तुझे सच में पता नहीं है, तूने क्या किया है? उस विनय के साथ तेरा क्या रिश्ता है? कब से तेरा उस के साथ चक्कर चल रहा है? देख, तू सचसच बता दे कि तूने कोई ऐसीवैसी हरकत तो नहीं की है जिस से हमें समाज में मुंह छिपाना पड़े?’’

”नहीं…नहीं मम्मी, तुम्हारी कसम, मैं ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया है, जिस से घर की बदनामी हो. मैं सच कहती हूं, पापा की कसम.’’ शिवानी ने कसम खाई.

”देख शिवानी, तू झूठ बोल रही है या नहीं, ये तो तू ही जानती है, लेकिन यदि मुझे पता चला कि तूने उस करमजले के साथ कुछ ऐसीवैसी नीच हरकत की है तो जान ले, तुझे जान से मार दूंगी.’’ नोहरी देवी ने शिवानी को धमकाया.

घटनास्थल की जांच करता डौग स्क्वायड

”नहीं मम्मी, मैं ने कोई नीच हरकत नहीं की है. मैं जानती हूं एक बार इज्जत चली जाने पर फिर दोबारा वापस नहीं लौटती है, फिर मैं ऐसी नीच हरकत क्यों करूंगी.’’ शिवानी ने मम्मी को सफाई दी.

”आज से तेरा घर से बाहर निकलना बंद. घर में पड़ी रह चुपचाप. देखती हूं कैसे इश्क लडाती है अपने यार से. उस की भी खबर लेती हूं मैं.’’

नोहरी देवी का गुस्से से चेहरा ऐसा तमतमाया हुआ था, जैसे बेटी को जिंदा खा जाएगी. उसी हाल में वह विनय के घर जा पहुंची और उस के फेमिली वालों से खूब झगड़ी. उन्हें धमकाते हुए कहा, ”अपने बेटे को समझा दो, मेरी बेटी से दूर रहे. इज्जत से न खेेले, वरना इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है. यह मत समझना कि मेरा आदमी (पति) नहीं है तो जो चाहे हमारी इज्जत से खेल लेगा, बोटीबोटी काट डालूंगी, समझे. फिर से कहती हूं अपने बेटे को समझा  देना, जाती हूं.’’

नोहरी देवी का रौद्र रूप देख कर विनय के फेमिली वालों का पसीना छूट गया था. बेटे की हरकतों से वे बुरी तरह शर्मिंदा थे. चूंकि खोट उन के बेटे में थी, इसलिए वे चुपचाप नोहरी देवी की जलीकटी सुनते रहे, एक बोल उन के मुंह से नहीं फूटा था और सारा गुस्सा विनय पर उतार दिया था. विनय के फेमिली वालों ने उसे समझाया, ”देख बेटा, तुम जिस काम में लगे हो उसे मन लगा कर पूरा करो. अच्छी नौकरी होते ही दरवाजे पर लड़कियों की लाइन लग जाएगी या तुम जिस लड़की से शादी करने को कहोगे, उसी से तुम्हारा ब्याह करा दूंगा, लेकिन तुम अपने भविष्य पर ध्यान दो.’’

फेमिली वालों की बात सुन कर वह एकदम चुप रहा, कुछ नहीं बोला. उस वक्त वह यही सोच रहा था कि आखिर शिवानी की मम्मी को हमारे प्यार के बारे में कैसे पता चला? हम शिवानी के बिना जिंदा नहीं रह पाएंगे. उस के बिना मर जाएंगे. इधर यही हाल शिवानी का था. वह विनय के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. जबकि उस की मम्मी तेजी से उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगी थी और जल्द ही लड़का भी मिल गया.

8 मई, 2025 को देवरिया के रहने वाले भीम निषाद के साथ बेटी के हाथ पीले कर  दिए. शिवानी ने अपनी हर ख्वाहिशों को अपने सीने में दफन कर के भीम के साथ शादी तो कर ली, लेकिन उसे दिल से पति नहीं माना. जिंदा लाश के समान वह खुद को तो पति के सामने बिस्तर पर बिछ जाती थी, लेकिन उस का सुख उसे पता नहीं चलता था. सिसकसिसक कर उस के दिन  कटते रहे और वह ससुराल वालों से चोरीछिपे दिन में एक बार फोन पर विनय से बात जरूर कर लेती थी तो उस का मन थोड़ा हलका हो जाता था.

शिवानी का ब्याह हो जाने से विनय उस से काफी नाराज हो गया था और उसे अब दूसरे की जूठन समझने लगा था. वह उस से धीरेधीरे दूरियां बढ़ाने लगा था. यह बात शिवानी जान चुकी थी कि विनय अब उस से दूर भाग रहा है, लेकिन वह उसे इतनी आसानी से छोडऩे वाली नहीं थी. बारबार वह फोन कर के उसे अपना कसम और वायदे याद दिलाती थी. गोरखपुर जिले के रसूलपुर गांव के रहने वाले रामवचन निषाद के तीनों बेटों में 25 वर्षीय विनय उर्फ दीपक निषाद काफी होशियार था.

जब किसी पुलिसकर्मी को वरदी में देखता तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह भी पुलिस विभाग में नौकरी करना चाहता था, इसीलिए वह अपने ऊपर यानी अपने शरीर पर खास ध्यान रखता था. वह जिम में खूब वर्जिश करता था. यह सब तो अलग था. लेकिन वह पिछले 6 महीने से काफी परेशान रह रहा था. उस की परेशानी का नाम था शिवानी निषाद, जो उस की प्रेमिका थी और पड़ोसन भी थी. दोनों के बीच करीब साढ़े 3 साल से प्रेम संबंध कायम था. हालांकि शिवानी के घर वालों ने उस की शादी देवरिया में कर दी थी, लेकिन इस के बावजूद दोनों के प्रेम संबंध चल रहे थे.

शिवानी विनय से बेइंतहा मोहब्बत करती थी. उस ने कसम भी खाई थी कि विनय के अलावा कोई और पुरुष उस के जीवन का हिस्सा नहीं बन सकता, अगर फेमिली वालों के दबाव में वह पति बन भी गया तो उसे वह अधिकार नहीं देगी जो उसे मिलना चाहिए. विनय ही उस का सब कुछ था, है और सब कुछ रहेगा. इसलिए वह उसे अकसर फोन करती थी. यही नहीं, उस पर शादी करने और साथ रहने के लिए दबाव भी बनाते हुए कहा, ”विनय, तुम यूं मुझ से आसानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते. मेरे जीते जी तो कतई नहीं. प्यार किया है मैं ने तुम से… फिर मुझ से अपना पीछा क्यों छुड़ा रहे हो.’’

”यार शिवानी, एक बात कहना चाहता हूं मैं तुम से…’’ विनय ने भी समझाते हुए आगे कहा, ”तुम्हारी शादी हो चुकी है, मुझ से ज्यादा प्यार करने वाला तुम्हारा पति है, सासससुर हैं, घरपरिवार है, सब कुछ तो है तुम्हारे पास, फिर मुझ बेचारे को क्यों परेशान किए जा रही हो. मेरी बात मानो, अपनी गृहस्थी पर ध्यान दो, परिवार पर ध्यान दो. मेरी दुआएं तुम्हारे साथ हमेशा हैं.

”रही बात प्यार करने की तो मैं तुम्हें बता दूं कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं, यह मैं तुम से बता नहीं सकता. जीते जी तो मैं तुम्हें अपने दिल से जुदा नहीं कर सकता. बस यही कहना चाहता हूं तुम से.’’

”कितनी आसानी से यह बात कह दी कि मैं तुम्हें परेशान करती हूं. मेरे पास पति है, घर परिवार है. है तो, लेकिन तुम नहीं हो न मेरे पास. मैं ने अपनी मरजी से यह शादी थोड़े ही न की थी. घर वालों ने जोरजबरदस्ती से मेरी शादी कराई थी. इस में मेरी क्या गलती है, तुम ही बताओ कि कहां गलत हूं मैं?’’

मृतका शिवानी निषाद की मम्मी नोहरी देवी

”दोष तो मैं तुम्हें दे ही नहीं रहा. बस यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि तुम्हारी शादी हो चुकी है. अच्छा घरपरिवार भी मिला हैं. क्यों अपनी बसीबसाई गृहस्थी में अपने ही हाथों से आग लगा रही हो. क्यों नहीं ख्वाब समझ कर पिछली बातों को भूल जाती हो?’’

”भूल तुम सकते हो, मैं नहीं.’’ शिवानी गुस्सा हो गई, ”मेरा प्यार कोई गुड्ïडेगुडिय़ा का खेल नहीं था, जिसे जब चाहा प्यार किया, जब चाहा भुला दिया. मेरा प्यार कोई मजाक भी नहीं था कि जब चाहा दिल लगाया, जब  चाहा रेत के घरौंदे की तरह तोडफ़ोड़ डाला.

”कहे देती हूं जो तुम मुझ से पीछा छुड़ा कर भागने की कोशिश कर रहे हो न, मैं तुम्हारी मंशा को समझ चुकी हूं. और ऐसा होने नहीं दूंगी मैं. किसी कीमत पर नहीं होने दूंगी. इसे अपने दिलोदिमाग में गांठ बांध लीजिएगा.’’

”क्यों खामख्वाह लालपीली हो रही हो यार. तुम से कहां भाग रहा हूं मैं और भाग कर जाऊंगा कहां? रहूंगा इसी धरती पर. बिलावजह उलझ रही हो मुझ से.’’

पुलिस हिरासत में आरोपी विवेक निषाद

”तुम भी इतना समझ लो कि अपने प्यार को पाने के लिए शिद्ïदत तक लड़ूंगी? लेकिन मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगी. इतने बुजदिल और कायर निकलोगे तुम, अगर पहले जानती तो तुम से कभी दिल न लगाती.’’

जोर से फोन पर विनय चिल्लाया, ”मैं कायर नहीं हूं शिवानी. मैं न तो कायर हूं, न डरपोक हूं और न ही बुजदिल. तुम मेरी परेशानियों को समझ नहीं रही हो. यार, क्यों अपना घर उजाडऩे पर तुली हुई हो? मेरे समझाने का कोई फायदा नहीं है क्या?’’

”नहीं, मुझे कुछ समझना नहीं है, मैं ने तय किया है मुझे तो बस तुम्हारे साथ रहना है. इसे मेरी जिद कह लो या जोरजबरदस्ती. इस के अलावा मैं कुछ नहीं जानती. इसी नवंबर में मेरी चचेरी बहन की शादी है, मैं उस में आ रही हूं. फिर लौट कर ससुराल नहीं जाऊंगी. तुम्हारे ही साथ रहूंगी, यह मैं ने फैसला कर लिया है.’’

इतना सुनते ही विनय ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. प्रेमिका शिवानी निषाद की बातों को ले कर विनय काफी परेशान रह रहा था. उस की बातें सोचसोच कर उस के दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. वह सोच रहा था कि कहीं सचमुच ही शिवानी अपनी ससुराल छोड़ कर साथ रहने आ गई तो उस की इज्जत मटियामेट हो जाएगी. गांवसमाज को वह क्या मुंह दिखाएगा. फेमिली वालों को क्या जबाव देगा. उस के करिअर का क्या होगा?

इस से पहले कि वह कोई ऐसावैसा कदम उठाए, उस का काम तमाम करना होगा. उस से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने मन बना लिया था. इस के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो गया था. आखिर में वही हुआ, जो विनय ने तय किया था. शिवानी से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उसे मौत के घाट उतार दिया और जेल के सलाखों के पीछे जा पहुंचा. विनय उर्फ दीपक निषाद जेल में बंद था. उस की निशानदेही पर पुलिस ने झाड़ी में छिपा कर रखा गया हंसिया बरामद कर लिया था. UP Crime

 

 

Bihar Crime: सनकी आशिक से रहें अलर्ट

Bihar Crime: 18 वर्षीय आरती वरमाला के समय बेहद खुश थी. स्टेज पर जैसे ही उस ने अपने मंगेतर के गले में जयमाला डाली, उसी दौरान किसी ने उस के पेट में सटा कर गोली मार दी. एक झटके में ही 2 परिवारों की खुशियां जयमाला के टूटे फूलों की तरह बिखर गईं…ऐसा क्यों हुआ? किस ने किया? पढ़ें, इस सिरफिरे प्रेमी की कहानी में…

वैसे तो बिहार के शहर बक्सर के जर्रेजर्रे में आज भी वीरता का गौरवशाली इतिहास बोलता है. अंगरेजों से लोहा लेने वाली बंदूकों की आवाज की गूंज की कहानियां भी सुनीसुनाई जाती हैं. किंतु विवाह के मौके पर लोगों का बारात में बंदूक ले कर आना और आतिशबाजी की तरह आसमानी फायर करना सामान्य बात है. बक्सर के चौसा नगर पंचायत में 24 फरवरी, 2026 को नंद चौधरी के घर पर उन की 18 वर्षीय बेटी आरती की बारात आने वाली थी. रात के 10 बज चुके थे. घर पूरी तरह रोशनी से नहाया हुआ था. आवागमन के मुख्य रास्ते पर करीब 250 मीटर की दूरी तक और अगलबगल की गलियों में एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट्स और तेज रोशनी वाले वैपर लाइट की दिन के उजाले जैसी रोशनी फैली हुई थी.

वहां घर के लोगों का आनाजाना हो रहा था. बच्चे भी अपनी धुन में खेलकूद रहे थे. घर के पास में ही एक चौड़ी जगह पर जयमाला का इंतजाम किया गया था. इस के लिए एक किनारे पर टेंट के नीचे मंच सजा दिया गया था. उस पर मुश्किल से 8-10 लोग खड़े हो सकते थे. मंच के सामने कुछ कुरसियां लगाई जा चुकी थीं. वहां की भी सजावट जबदरस्त थी. फूलों की सजावट साथसाथ चौंधिया देने वाली रंगीन रोशनी से गजब का माहौल बन गया था.

घर के लोग बारात आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. हालांकि बलिया से आई बारात जनमासे में पहुंच चुकी थी. बारातियों को नाश्ता वगैरह भी करवाया जा रहा था. उन के तैयार हो कर निकालने की भी लगभग तैयारी हो चुकी थी. बारातियों में से एक व्यक्ति ने उस की कमान संभाल ली थी और सभी को जल्द कमरे और हौल से बाहर निकलने को कह रहे थे. कुछ इसी तरह का माहौल दुलहन के कमरे में भी बना हुआ था. ब्यूटी पार्लर द्वारा सजीधजी दुलहन अपनी सहेलियों और रिश्तेदारों से घिरी बैठी थी. उस की सुंदरता की तरीफें हो रही थीं. हंसीमजाक भी चल रही थी, जबकि घर में विवाह के मुख्य कर्ताधर्ता इस शादी के कार्यक्रम को तेजी से बढ़ाने में लगे हुए थे.

महिलाओं को द्वार पर जल्द बारात लगाए जाने का इंतजार था. वे बारातियों के स्वागत की थाली सजाए हुए थीं. थाली का दीपक बुझने नहीं पाए, इस के लिए साथ में माचिस भी रखी थी. उन में दूल्हे के साथ पारंपरिक रस्में निभाने की उत्सुकता थी. महिलाओं ने इस के लिए अपनेअपने काम बांट लिए थे. इसी बीच एक बुजुर्ग महिला बोली, ”अरे तुम सब यहीं हंसीठिठोली करती रहोगी, बाहर जा कर पता तो करो…बारात जनमासे से निकली भी है या अभी वहीं सज रही है?’’

”आंटी, बारात निकल चुकी है…बैंड की तेज आवाज सुनाई दे रही है.’’ दुलहन की एक सहेली बोली.

”ठीक है, दुलहन को छत पर ले जा, उसे बारात दिखा कर तुरंत ले आना…’’ महिला बोली.

”दुलहन को क्या आंटी?’’ सहेली ने प्रश्न किया.

”अरे, यह भी एक रस्म है…दुलहन को अपनी बारात देखने से उस के लिए शुभ होता है.’’

”अच्छा तो यह बात है…ठीक है आंटी… अरे, चलोचलो, दुलहन को ले चलते हैं छत पर…’’ यह कहती हुई लड़कियां दुलहन को छत पर ले गईं. वहां वे छत के मुंडेर के किनारे जा जा कर खड़ी हो गईं.

तब तक बैंडबाजे की आवाज काफी तेज हो चुकी था. इस का मतलब था कि बारात दरवाजे के नजदीक पहुंच चुकी थी.

घर की बड़ीबुजुर्ग महिलाएं हाथों में दीपबाती का थाल लिए हुए दूल्हे के स्वागत के लिए सजी गाड़ी के पास पहुंच गई थीं. कुछ मिनटों में ही दूल्हे की आरती और पूजन की रस्म अदायगी हो गई. दूल्हे को पास ही मंच पर ले जाया गया. इसी बीच एक महिला ने आवाज लगाई, ”दुलहन को जल्दी से ले कर आओ, जयमाला करनी है.’’

बैंड की तेज आवाज में कौन, क्या बोल रहा है, ठीक से किसी को समझ में नहीं आ रहा था. किंतु उपस्थित लोग इशारेइशारे में वहां के स्वागतसत्कार का काम निपटा रहे थे. फेमिली वालों की तरफ के लड़के बारातियों की आवभगत कर रहे थे. उन्हें कोल्डड्रिंक और नाश्ता परोसा रहे थे, जबकि घर की कुछ लड़कियां और औरतें दूल्हे के आसपास मंच पर जा पहुंची थीं. वे एक लय के साथ विवाह गीत में बारातियों के लिए गालियां गाए जा रही थीं.

दुलहन जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे से अपनी सहेलियों के साथ बाहर निकली, फोटाग्राफर और वीडियोग्राफर की लाइटें उस ओर फोकस हो गईं. तेज रोशनी में दुलहन का चेहरा और भी निखरा हुआ दिखने लगा था. वह धीरेधीरे मंच की ओर नजाकत के साथ चलती हुई दूल्हे के पास पहुंच चुकी थी. उन्हें दुल्हे के बगल में बिठाने से पहले जयमाला की रस्म निभानी थी, सो वह घर की 2 लड़कियों के साथ खड़ी हो गई थी. उन के सामने दूल्हा भी आ कर खड़ा हो गया था. उन के साथ भी कुछ लड़के थे. संभवत: वे उन के दोस्त और रिश्तेदार थे.

आरती – जयमाला के समय प्रेमी की गोली का शिकार

दोनों के हाथों में जयमाला पकड़ा दी गई थी. जयमाला पहनाने की पहल दुलहन की तरफ से की गई. उस की एक सहेली ने हाथ में वरमाला को अच्छी तरह पकडऩे को कहा, ”दूल्हा लंबा है, एक झटके में पैर उचका कर माला डाल देना. हम लोग भी तुम्हें सहारा देख थोड़ा उठा देंगे.’’

दुलहन ने इशारे में गरदन हां में हिला दी. एक सहेली बोली, ”लड़के वालो! रेडी हो जाओ… ठीक से जयमाला पकड़ लो…पहले दुलहन माला पहनाएगी, उस के बाद दूल्हे को माला पहनाना है. हां, कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए.’’

”आप जैसी खूबसूरत साली हो, तब तो गड़बड़ी हो कर ही रहेगी.’’ दूल्हे का एक दोस्त चुटकी लेते हुए बोला और लड़कियों की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया.

”जो कुछ बोलना है, मुंह से बोल लो… हमें टच करने की कोशिश भी नहीं करना!’’

”साली हो कर इतनी सख्ती ठीक नहीं है.’’

”क्या ठीक, क्या नहीं वह सब बाद में करना पहले लड़के को और पास लाओ!’’ लड़की बोली और दुलहन को एक कदम आगे बढ़ा कर वरमाला के लिए इशारा कर दिया.

दुलहन ने वरमाला दूल्हे की गरदन में डालने के हाथ उठाया, लेकिन यह क्या, दूल्हे को 2 लड़कों ने पैर पकड़ कर काफी ऊंचा उठा दिया… और दुलहन हाथ में वरमाला पकड़े ठगी सी उसे देखती रह गई.

”चालाकी खेलते हैं. अभी मैं भी दिखाती हूं. फेल करती हूं तुम्हारी चालाकी.’’

इसी बीच मंच पर लड़के वालों की तरफ से हलचल मच गई…’’अरेअरे, तू कौन है भाई? बारात का तो नहीं लगता. और…और यहां पिस्टल ले कर कैसे घुस गया दूल्हादुलहन के बीच में? फायरिंग करनी है, तो नीचे जा कर हवाई फायरिंग कर न! यहां जयमाला की रस्म होने दे.’’ दूल्हे का एक दोस्त नाराजगी के साथ बोला.

”मैं तो यहीं फायरिंग करूंगा…तू रोक सकता है तो रोक ले!’’ मंच पर अचानक चढ़ आया युवक भी उसी के लहजे में आक्रोश के साथ बोला और अपनी पिस्टल उस की ओर तान दी.

”अरे…अरे भाई! मजाक मत कर यार, गोली चल जाएगी…हटा ले इसे सामने से!’’ दूल्हे के साथ खड़ा दूसरा लड़का बोल पड़ा.

पिस्टल ताने लड़के ने उस की तरफ से पिस्टल हटा ली, किंतु अगले पल उस ने दुलहन आरती को निशाना बना लिया था. उस की यह हरकत स्टेज पर मौजूद सभी को अटपटी लगी. कई लोगों ने एक सुर में विरोध किया. बैंडबाजे और डेक स्पीकर की आवाज में सभी पिस्टल थामे लड़के को चिल्ला कर बोले जा रहे थे. इसी बीच कब गोली चलने की आवाज आई किसी को पता ही नहीं चला… मंच पर अफरातफरी मच गई. दुलहन वहीं गिर गई थी…उसे गोली लग गई थी.

जयमाला के समय दुलहन आरती की गोली मार कर हत्या का प्रयास करने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु

यह क्या हो गया? क्या हो गया दुलहन को?… उठाओ जल्दी…! अगले पल वह लड़का वहां से फरार हो गया था. मंच पर जयमाला के फूल बिखर गए थे. एक पल में गोली चलने की बात फैल गई. कुछ लोगों ने तुरंत दुलहन को हाथ और पैरों से टांग कर गाड़ी में डाला और अस्पताल ले गए. तुरंत अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उस की हालत नाजुक बनी हुई है. पेट से खून निकल रहा था. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डौक्टर जांच करने लगे. तब तक मुफस्सिल थाने की पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी. कानूनी काररवाई शुरू कर दी गई. पुलिस को डौक्टर से मालूम हुआ कि दुलहन को  पेट में सटा कर गोली दागी गई थी.

गोली मारते ही वैवाहिक कार्यक्रम में हड़कंप मच गया. शादी की खुशियां चीखपुकार में बदल गईं. दुलहन आरती को गंभीर हालत में वाराणसी रेफर कर दिया गया. गोली शरीर के नाजुक हिस्से में लगी थी, जिस से उस की स्थिति चिंताजनक बन गई थी. जबकि गोली मारने वाला युवक फरार हो गया था. इस मामले को मुफस्सिल थाना क्षेत्र में दर्ज कर लिया गया. बाराती और ग्रामीण भी जान बचाने के लिए इधरउधर भाग गए थे. पुलिस ने इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों और विवाह में आए लोगों से पूछताछ की.

बारात उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुलेमानपुर गांव से आई थी. पूरे विधिविधान के साथ विवाह की रस्मों के दरम्यान यह घटना हो गई. पूछताछ में मालूम हुआ कि अचानक जयमाला के मंच पर चढ़ आया युवक पड़ोस का ही दीनबंधु था. उस ने दुलहन को निशाना बना कर गोली चलाई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया गया. आरोपी युवक आरती का पड़ोसी था और दोनों के बीच पहले से संबंध होने की चर्चा गांव में थी. कुछ लोगों ने बताया कि आरती की शादी तय होने से युवक नाराज था और इसी रंजिश में उस ने यह खौफनाक कदम उठाया.

पुलिस ने जांच में इस जानकारी को नोट कर लिया. सवाल था कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक गुस्से में अंजाम दी गई. मुफस्सिल थाना पुलिस द्वारा मौके पर छानबीन के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने समारोह स्थल से साक्ष्य जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ पूरी हो जाने के बाद फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने लगी. इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था. ग्रामीणों में आक्रोश साफ देखा देखा जा रहा था. लोग कानूनव्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे. वहीं दुलहन की फेमिली पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. शादी की खुशियां पल भर में मातम में बदल गई थीं. इस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा था. यूट्यूबर अपनेअपने अंदाज में वारदात का विवरण दे रहे थे.

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दूल्हादुलहन स्टेज पर मौजूद दिखे और पूरा घर शादी की खुशियां मनाता नजर आ रहा था. इतने में जयमाला लाई जाती है और दू्ल्हादुलहन को दी जाती है, जैसे ही रस्म की बारी आती है वैसे ही एक सिरफिरा स्टेज पर आता है और दुलहन पर पिस्टल से फायर कर देता है. दुलहन को गोली लग जाती है. सभी दुलहन को संभालने लगते हैं. मेहमानों के होश उड़ जाते हैं. दुलहन भी बेहोश होकर वहीं स्टेज पर गिर जाती है. हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका था.

दुलहन की बारात लौट गई थी. बारात में आए लोगों की प्रतिक्रिया भी जले पर नमक छिड़कने जैसी ही थी. दूल्हे का कहना का कहना था कि अगर पहले पता होता तो वो कभी नहीं आते. घायल दुलहन का भी एक वीडियो आने से पता चल चुका था कि उसे गोली मारने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु था. वह लंबे से उस के पीछे पड़ा था. पुलिस उस की गिरफ्तारी में जुट गई थी.

जल्द ही आरोपी दीनबंधु गिरफ्तार भी कर लिया गया. जब उस की क्राइम हिस्ट्री की जांच की, तब पाया गया कि शराब तस्करी के मामले में 2021 में वह जेल जा चुका था. उस से पुलिस के लिए यह जानना भी आवश्यक था कि उस के पास हथियार कैसे आए और गोली मारने के पीछे उस की असली मंशा क्या थी? क्या यह सिर्फ प्रेम प्रसंग का मामला था या इस के पीछे कोई और भी कारण था?

आरती के फादर नंद मल्लाह का कहना है कि वह एकतरफा प्यार करता था. लड़की उसे पसंद नहीं करती थी, इसलिए उस ने गोली मार दी. उन्होंने बताया कि आरोपी एक बार पहले भी उन की बेटी की शादी तुड़वा चुका है.

जब शादी तय हुई थी, तब आरोपी ने लड़के के घर वालों को धमकाया था. धमकी से डर कर लड़के वालों ने वह रिश्ता तोड़ दिया था. इस के बाद गांव वालों ने पंचायत बिठाई थी. लड़के को गांव से बाहर भेज दिया गया वह उस पर नजर बनाए हुए था. पुलिस ने आरोपी दीनबंधु के पास से पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी. एसपी शुभम आर्य ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह एक से अधिक गोली मारना चाहता था, लेकिन पिस्टल फंस जाने के कारण वह दोबारा गोली नहीं चला सका. उस के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में हत्या या हत्या के प्रयास की बीएनएस की धारा 109 लगाई गई. भारतीय कानून के तहत किसी व्यक्ति को जान से मारने की कोशिश एक गंभीर अपराध माना जाता है.

इस मामले में दुलहन आरती का बयान भी महत्त्वपूर्ण था. उस ने गिरतेगिरते कहा था, ”दीनबंधु ने मुझे गोली मार दिया है.’’

गोली लगने के बाद आरती को तुरंत बक्सर सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां उस की हालत गंभीर बताई गई, जिस के बाद आरती को वाराणसी के बीएचयू में रेफर कर दिया गया. दीनबंधु ने पुलिस को बताया कि वह और आरती एक ही मोहल्ले में पलेबढ़े. बचपन में दोनों साथ खेलते थे. जब आरती सिर्फ 6 साल की थी, तब उस के परिवार ने उसे बाहर खेलने से मना कर दिया. इस के बाद वक्त का ऐसा पहिया घूमा कि अगले 15 सालों तक दीनबंधु ने आरती की झलक तक नहीं देखी. वह बस उस की यादों के सहारे बड़ा हुआ.

साल 2024 में दीनबंधु ने आरती को पहली बार सलवारसूट में देखा तो उसे लगा कि यही वो लड़की है जिस के साथ वह अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहता है. दीनबंधु ने हिम्मत जुटाई और अपने दोस्तों के उकसाने पर आरती का पीछा किया. उस ने बीच सड़क पर आरती को रोक कर अपने प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन आरती ने साफसाफ न कह दिया.

उस के बाद उस के दिल और दिमाग में जो हलचल हुई, उस बारे में दीनबंधु ने कहा कि आरती की न सुनने के बाद उसे लगा कि अब पूरी दुनिया खत्म हो गई है. एक बार न सुनने के बाद भी वो लगातार आरती को मनाने की कोशिश करता रहा. उसे लगा कि शायद उस के पुराने आपराधिक रिकौर्ड की वजह से आरती उसे पसंद नहीं कर रही है.

जब उसने दोबारा कोशिश की, तो आरती ने दोटूक शब्दों में कह दिया, ”मैं तुम जैसे लड़के से कभी शादी नहीं करूंगी.’’

आरती की यही बात उस के दिल में सूई की तरह चुभ गई और उस के प्यार को एक जिद में बदल दिया. आरती की शादी एक साल पहले कहीं तय हुई थी. यह खबर सुनते ही वह आपा खो बैठा. वह सीधे लड़के वालों के घर पहुंच गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी. डर के मारे लड़के वालों ने शादी तोड़ दी. इस हरकत से आरती के पापा ने समाज के सामने दीनबंधु के फेमिली वालों को काफी खरीखोटी सुनाई. बेइज्जती से तंग आ कर दीनबंधु के फादर ने उसे काम करने के लिए पंजाब भेज दिया, ताकि वह सुधर जाए, पर उस का दिमाग आरती में ही अटका था.

पंजाब में बैठ कर भी दीनबंधु अपने दोस्तों के जरिए आरती की हर हलचल पर नजर रखे हुए था. उसे पता चला कि अगस्त 2025 में आरती की शादी दोबारा तय हो गई है. यह सुनते ही उस के सिर पर खून सवार हो गया. वह पंजाब से 1300 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के गहमर गांव पहुंचा. यह गांव गाजीपुर जिले में गंगा किनारे स्थित है. इसे सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. यहां के लगभग हर घर से सेना में जवान हैं. यहां के एक परिचित से उस ने 32 हजार रुपए में एक पिस्टल खरीदी.

22 फरवरी, 2026 को वह चुपचाप अपने गांव पहुंचा और घर जाने के बजाय दोस्त के कमरे पर रुका, ताकि किसी को भनक नहीं लगे. फिर आरती की शादी के रोज वो स्टेज के पास गया और उसे गोली मार दी. उस ने सोचा कि आरती उस की नहीं तो किसी की नहीं हो सकती. संयोग से उस की घटनास्थल पर मौत नहीं हो सकी और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भरती करवा दिया गया. कथा लिखे जाने तक आरती का औपरेशन सफल हो गया था, लेकिन खतरा बना हुआ था. वह बोलने से असमर्थ थी.

आरती के पापा इस घटना से काफी आहत हैं. वह कहते हैं कि अभी भी उन की बेटी बोल नहीं पा रही है और डौक्टर की निगरानी में है. उस की सर्जरी हुई थी, उस के 12 घंटे बाद होश आया था. हम ने शादी के लिए भी काफी कर्ज लिया था और अब इलाज में भी कर्ज ले कर ही पैसा बहा रहे हैं. मुझे पैसों की चिंता नहीं है, मैं बस यह चाहता हूं कि आरोपी के खिलाफ सख्त काररवाई हो. Bihar Crime

 

 

Chhattisgarh Crime: प्रेमी को केवल – जिस्मानी प्यार तो नहीं

Chhattisgarh Crime: प्यार में अंधी हुई उर्मिला निषाद शादीशुदा विजय बांधे से प्यार कर बैठी. प्रेमी उस के जिस्म से खेलता रहा, लेकिन जैसे ही उर्मिला ने उस पर शादी का दबाव बनाने की भूल की तो विजय एक दिन इतना खूंखार बन गया कि…

अपनी प्रेमिका उर्मिला निषाद को ठिकाने लगाने के लिए विजय बांधे मौके की तलाश कर रहा था. योजना के मुताबिक उस ने पहले हार्डवेयर दुकान से सब्जी काटने वाला चाकू खरीदा और 7 दिसंबर 2025 रविवार की शाम उस ने उर्मिला को फोन लगाया तो उर्मिला ने उस से कहा, ”हां विजय, बोलो क्या बात है?’’

विजय एक कैटरर था, इसलिए उस ने उर्मिला को बताया, ”उर्मिला, बात दरअसल यह है कि आज रात एक प्रोग्राम में खाना बनाने के लिए और्डर बुक हुआ है, हमें वहां चलना पड़ेगा.’’ विजय ने बताया.

”लेकिन पहले तो तुम ने बताया नहीं कि आज का कोई कैटरिंग का और्डर है.’’ उर्मिला ने आशंका जताते हुए कहा.

”असल में क्या है उर्मिला, यह और्डर अर्जेंट में आज ही बुक हुआ है, इसलिए पहले से तुम्हें मैं कैसे बताता.’’ विजय ने सफाई देते हुए कहा.

”ठीक है, मैं तैयार होती हूं, मगर जाना कहां है, यह तो तुम ने बताया नहीं.’’ उर्मिला बोली.

”तुम्हें आम खाने हैं या पेड़ गिनने हैं, जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं.’’ उर्मिला पर अधिकार जमाते हुए विजय ने फोन काट दिया.

शाम का अंधेरा होते ही विजय ने अपनी बाइक निकाली और उर्मिला के घर की तरफ चल दिया. उर्मिला घर से निकलने को तैयार थी. जैसे ही विजय ने उस के घर के सामने बाइक रोक कर हार्न बजाया, उर्मिला अपने छोटे से बैग के साथ घर से बाहर निकल आई और झट से विजय की बाइक पर बैठ गई.

विजय ने रास्ते में एक रेस्टोरेंट के सामने बाइक रोकी तो उर्मिला ने सवाल किया, ”अब क्यों बाइक रोक दी?’’

इस पर विनोद बोला, ”खाना बनाते देर हो जाएगी, मोमोज और पकौड़ा पैक करवा लेता हूं, रास्ते में कहीं बैठ कर खा लेंगे.’’

मोमोज और पकौड़े पैक करवाने के बाद दोनों उतई गांव की तरफ निकल पड़े. रास्ते में नहर के पास खेल मैदान पर विनोद ने बाइक खड़ी करते हुए उर्मिला से कहा, ”शाम के समय यहां कोई नहीं है और लोगों का आनाजाना भी कम होता होगा, यहीं बैठ कर कुछ खा लेते हैं.’’

दोनों बीच मैदान खाने के लिए बैठ गए. पहले तो दोनों के बीच पहले से चल रहे विवादों पर बात शुरू हुई और थोड़ी ही देर में बहस गर्म हो गई. इसी बीच विजय ने बैग में रखे धारदार चाकू से अचानक उर्मिला पर वार कर दिए. पहले गले पर, फिर शरीर पर कई बार हमले किए. उर्मिला वहीं गिर गई. इस के बाद जिस साजिश की तैयारी विनोद ने पहले से की  थी, उसे अंजाम देने का वक्त आ गया था. विजय बोतल में अपने साथ पेट्रोल भी लाया था.

उस ने बाइक की डिक्की में रखी पेट्रोल की बोतल निकाली और उर्मिला के शरीर पर पेट्रोल उड़ेल दिया. इस के बाद उस ने जेब से माचिस निकाली और आग लगा दी. पास में रखी धान की पराली भी उस ने उसी आग में फेंक दी, ताकि शव पूरी तरह जल कर नष्ट हो जाए और कोई उसे पहचान न पाए. इस के बाद विजय सीधे अपने गांव करगाडीह लौट गया और ऐसे व्यवहार करने लगा, जैसे कुछ हुआ ही न हो. मगर पुलिस की नजरों से उस का कांड छिप नहीं सका और 24 घंटों के अंदर ही पुलिस ने अधजली लाश की गुत्थी सुलझाने में सफलता हासिल कर ली.

उतई पुलिस ने विजय बांधे को उर्मिला के कत्ल के जुर्म में उसे दुर्ग जिले की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में 8 दिसंबर की सुबह करगाडीह पऊवारा नहर किनारे बने खेल मैदान में गांव के कुछ लोग एक्सरसाइज करने पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर उन की आंखें खुली की खुली रह गईं. खेल मैदान के एक कोने में पड़े धान के पुआल के ढेर में एक महिला का अधजला शव पड़ा हुआ था. यह खबर पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई.

लोगों ने इस की सूचना सब से पहले गांव कोटवार को दी. गांव कोटवार केवल दास मानिकपुरी ने शव देख कर तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस टीम को जांच में शव के पास से आधा जला चप्पल और धारदार हथियार मिला, जिस से हत्या की आशंका गहरी हो गई. फोरैंसिक एक्सपर्ट को घटनास्थल पर मौजूद बड़े पत्थरों पर खून के निशान दिखे, जिस से यह संभावना और मजबूत होती गई कि हत्या के बाद शव को पत्थरों से भी कुचला गया है. शुरुआती जांच में यह अंदेशा व्यक्त किया गया है कि युवती की पहले धारदार हथियार से हत्या की गई, फिर सबूत मिटाने के लिए उस पर पराली या किसी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल कर शव को जला दिया गया हो.

फोरैंसिक टीम ने मिट्टी के नमूने, खून के धब्बे, जले हुए अवशेष और हथियार समेत कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्य वहां से जुटाए. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए, ताकि हत्या के समय क्षेत्र में आनेजाने वालों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके. उतई पुलिस ने आसपास के गांवों में ग्रामीणों से भी पूछताछ की, जिस से लाश की पहचान हो सके.

शुरुआती जांच में न तो मृतका की पहचान हो पाई, न ही कोई गवाह मिला. मौके पर पहुंची पुलिस टीम और फोरैंसिक एक्सपर्ट को पराली के बीच अधजला शव पड़ा मिला था, इसलिए यह साफ था कि हत्या कहीं और नहीं, इसी जगह की गई थी और पहचान छिपाने के इरादे से लाश जलाने की कोशिश भी की गई. एफएसएल टीम और डौग स्क्वायड मौके पर पहुंचे, लेकिन महिला की पहचान स्पष्ट नहीं थी, पुलिस ने इसे ‘ब्लाइंड मर्डर’ मानते हुए कई टीमें गठित कीं. एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर 6 विशेष टीमें रात भर जांच में लगी रहीं.

घटनास्थल से मिले मोमोज के टुकड़ों और मोजों के आधार पर पुलिस ने 5 किलोमीटर के दायरे में दुकानदारों से पूछताछ की और पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. 8 दिसंबर, 2025 की सुबह विजय बांधे सुपेला थाने पहुंचा. एसएचओ को अपना परिचय देते हुए उस ने कहा कि मेरे साथ काम करने वाली उर्मिला निषाद कल रात से घर नहीं पहुंची है.

”तुम उस से आखिरी बार कब मिले थे?’’ एसएचओ ने पूछा.

”सर, कल दिन में मेरी उस से फोन पर बात हुई थी, मगर रात से ही उस का फोन बंद आ रहा है. सुबह मैं ने उस के घर जा कर पता किया तो मालूम हुआ कि वह शाम को कहीं गई थी, मगर रात अपने घर नहीं लौटी.’’

बात महिला के लापता होने की थी, इसलिए उन्होंने उर्मिला निषाद की गुमशुदगी तुरंत दर्ज करा दी. एसएचओ ने इस की इत्तला एसएसपी विजय अग्रवाल को भी दे दी. एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने जिले के सभी थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की पड़ताल करनी शुरू कर दी. इस के अलावा गठित टीम ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले तो दूसरी टीम ने मोबाइल लोकेशन देखी. जांच की इसी कड़ी में एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में एक बाइक सवार युवक को पुलिस ने संदिग्ध मान कर जांच शुरू की.

दरअसल, उस युवक के पीछे बाइक पर एक महिला बैठी हुई थी और युवक ने बाइक में पेट्रोल डलवाने के बजाय बोतल में पेट्रोल लिया था. एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज में यही युवक मोमोज और चाइनीज पकौड़े पैक करवा रहा था. अंत में शक की सुई विजय बांधे नाम के उस व्यक्ति की ओर घूमी, जिस ने खुद को पीडि़त का परिचित बता कर सुपेला थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. पुलिस ने जब विजय बांधे को पूछताछ के लिए बुलाया तो उस की बातें शुरू से ही बेमेल लगीं. वह बारबार अपने बयान बदल रहा था और घटनाक्रम बताने में हिचक भी दिखाई दे रही थी.

तकनीकी टीम ने जब विजय का मोबाइल लोकेशन व मूवमेंट खंगाला तो पता चला कि घटना वाली शाम उस के मोबाइल की लोकेशन पुरई गांव की उसी नहर की थी, जहां पर अधजली लाश मिली थी. देर रात पूछताछ के दौरान जब विजय पर पुलिस के सवालों का दबाव और सख्ती बढ़ी तो आखिरकार वह टूट गया और उस ने पूरे मामले की कहानी पुलिस को साफसाफ बता दी. विजय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उस के घर और आसपास तलाशी ली. उस के कपड़ों पर खून के निशान मिले, जिन्हें उस ने छिपाने की कोशिश की थी. घटना में इस्तेमाल किया गया चापर भी बरामद हुआ. पेट्रोल डालने वाली बोतल और अन्य सामग्रियां भी पुलिस ने जब्त कीं.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले अवशेषों और आरोपी के कपड़ों का मिलान किया, जिस से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हो गई. पुलिस पूछताछ में विजय ने स्वीकार किया कि नहर के पास मिली अधजली लाश सुपेला की रहने वाली उर्मिला निषाद की थी, जिस का कई वर्षों से उस के साथ प्रेम प्रसंग था. उर्मिला उस के ऊपर शादी के लिए दबाव बना रही थी, जिस से परेशान हो कर उस ने हत्या की योजना बनाई.

24 साल का विजय बांधे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के करगाडीह गांव का रहने वाला था और कैटरिंग का काम करता था. 30 साल की उर्मिला निषाद भी पिछले कुछ सालों से उस के साथ काम कर रही थी. कैटरिंग के काम में अकसर रातरात भर दूसरे गांव कस्बों में जाना पड़ता था. साथ काम करतेकरते दोनों करीब आ गए और उन का रिश्ता भावनात्मक होतेहोते प्रेम संबंधों तक पहुंच गया. विजय शादीशुदा था और उस की पत्नी गर्भवती थी. इस के बावजूद उर्मिला उस पर विवाह का प्रेशर बना रही थी. इसी मुद्ïदे पर दोनों के बीच कई बार लड़ाईझगड़े हो चुके थे.

”विजय, आखिर तुम कब तक मेरी भावनाओं से खेलते रहोगे, मैं इस तरह अपनी जिंदगी बरबाद नहीं होने दूंगी.’’ एक दिन उर्मिला ने उलाहना देते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, तुम समझती क्यों नहीं. तुम्हें तो पहले ही मैं ने बता दिया था कि मैं शादीशुदा हूं, फिर भी तुम जिद कर रही हो.’’ विजय ने सफाई दी.

”तो क्या मैं जीवन भर तुम्हारी रखैल बन कर रहूंगी, तुम्हें मुझ से शादी करनी ही होगी.’’ उर्मिला गुस्से में तमतमा कर बोली.

”उर्मिला मैं ने तुम्हें धोखे में नहीं रखा, पत्नी के रहते तुम से मैं कैसे शादी कर सकता हूं. और मैं तुम्हारी जरूरतों का तो ध्यान रख रहा हूं.’’ विजय ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा.

”तुम्हें तो मेरे जिस्म से ही मतलब है, अगर तुम मुझे दिल से चाहते तो ऐसी बात कभी नहीं करते.’’ उर्मिला ने आंसू बहाते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, मेरी बीवी अभी प्रैग्नेंट है और मैं उसे किसी भी सूरत में छोड़ नहीं सकता. मुझे सोचने के लिए कुछ वक्त दो.’’ विजय ने मामले को शांत करने के लिहाज से कहा.

कैटरिंग के पैसों को ले कर भी विवाद खड़ा हो गया था. इसलिए धीरेधीरे उन के बीच का रिश्ता एकतरफा दबाव और आपसी मनमुटाव की भेंट चढऩे लगा था. कुछ समय से उर्मिला उसे सार्वजनिक रूप से लगातार अपमानित कर रही थी. इस बात को ले कर विजय के मन में इतना तनाव बढ़ गया था कि उस की स्थिति सांपछछूंदर जैसी हो गई थी. उर्मिला द्वारा की जा रही बारबार की बेइज्जती, गुस्से और शादी करने के दबाव से परेशान हो कर ही विजय के द्वारा उर्मिला को रास्ते से हटाने की साजिश रची जा रही थी. विजय को अपनी गलती का अहसास भी हो रहा था कि शादीशुदा होने के बावजूद उसे उर्मिला की बातों में नहीं आना था.

उर्मिला सुपेला गांव की रहने वाली थी. उस का विवाह करीब 10 साल पहले हो चुका था, पहले पति से उस का 8 साल का एक बेटा भी है. पति शराबी था, शराब पी कर उर्मिला के साथ मारपीट करता था. जब बेटा 3 साल का था, तभी उस ने पति को छोड़ दिया और अपनी सास और बेटे के साथ अलग रहने लगी. उर्मिला ने इस के बाद दूसरी शादी कर ली, लेकिन दूसरे पति के साथ भी वह ज्यादा दिनों तक रिश्ता नहीं निभा सकी. इस के बाद वह कैटरिंग का काम करने वाले विजय बांधे के संपर्क में आ गई.

उर्मिला ने शादी तो 2 बार कर ली, मगर उस के दिल पर राज करने वाला उसे कोई नहीं मिला. उस के दोनों पति न तो उस की जिस्मानी जरूरतों को पूरा कर सके और न ही उस के सपनों को साकार कर सके. यही वजह रही कि उर्मिला अपने से कम उम्र के विजय पर फिदा हो गई. विजय ने उर्मिला की कमजोरी का फायदा उठाते हुए उस से नजदीकियां बढ़ाईं और उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा. विजय उतई थान के अंतर्गत करगाडीह गांव का रहने वाला था. करगाडीह और सुपेला गांव के बीच की दूरी 15 किलोमीटर थी. कैटरिंग के काम के दौरान दोनों के बीच जिस ढंग से नजदीकियां बढ़ रही थीं, दोनों के बीच प्रेम की डोर मजबूत हो रही थी.

अकसर ही विजय उर्मिला को घुमाने ले जाता था और उस से कई बार शारीरिक संबंध भी बना चुका था. उर्मिला विजय पर दबाव बना रही थी कि वह भी सुपेला में उस के साथ रहे, मगर विजय शादीशुदा था और अपनी प्रैग्नेंट पत्नी की वजह से उर्मिला के साथ रहने को तैयार नहीं था. इसी बात पर दोनों के बीच मनमुटाव बढऩे लगा था और विवाद की स्थिति बनने लगी थी. उर्मिला निषाद की हत्या की घटना युवतियों को सचेत करती है कि प्रेम संबंध बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कोई पुरुष उन से केवल जिस्मानी संबंध बनाने के लिए तो प्रेम का नाटक नहीं कर रहा.

किसी शादीशुदा पुरुष से प्रेम करने की भूल से उन्हें जीवन भर का पछतावा ही मिल सकता है. यदि किसी मजबूरी के चलते ऐसे पुरुषों से प्रेम संबंध कायम भी हो जाएं तो इस बात का खयाल रखें कि उन पर शादी करने का दबाव कदापि न बनाएं, अन्यथा उन का हश्र भी उर्मिला निषाद की तरह होगा. Chhattisgarh Crime

 

 

Bihar News: रहस्य में उलझी नीट छात्रा की मौत

Bihar News: पटना के बहुचर्चित गल्र्स हौस्टल कांड के गुनहगारों में रेपिस्ट से ले कर पुलिस अधिकारी, 2 प्राइवेट अस्पताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डौक्टर तक शामिल पाए गए. लेकिन गिरफ्तारी केवल हौस्टल मालिक की हुई. मृतका नाबालिग थी, मामला पोक्सो का भी बन गया. पढ़ें, पूरी कहानी. कैसे, कब, क्या हुआ और कौनकौन हैं आरोपी?

बिहार के जहानाबाद की रहने वाली गायत्री भी त्रद्गठ्र्ठं श्रेणी की ही थी. करिअर और जीवन को बेहतर बनाने के सपने उस ने भी देखे थे. पटना में रह कर मैडिकल की पढ़ाई के लिए नीट की तैयारी कर रही थी. इंटरमीडियट की परीक्षा भी सिर पर थी. निश्चित तौर पर उस के जेहन में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी के अलावा और कुछ नहीं था.

वह 45 किलोमीटर की दूरी तय कर लोकल ट्रेन से 5 जनवरी, 2026 की शाम को 3 बजे के करीब अपने शंभु हौस्टल पहुंच गई थी, जो चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्नाचक में है. रात को 9 बजे अपनी मम्मी से उस की फोन पर बात भी हुई थी. उस ने ठीकठाक हौस्टल पहुंचने की जानकारी मम्मी को दे दी थी. अगले रोज 6 जनवरी, 2026 की शाम को गायत्री के फेमिली वालों को एक अनजाने फोन नंबर से कौल मिली कि उन की बेटी गायत्री की तबीयत खराब है. उसे डा. सहजानंद हौस्पिटल में भरती करवाया गया है.

फोन करने वाला न तो हौस्टल का कोई स्टाफ था और न ही उस का संचालक या मालिक ही था. इस पर गायत्री के पेरेंट्स को हैरानी हुई. वे घबरा गए. साइबर फ्रौड की आशंका से घिर गए कि किसी ने फोन गलत मकसद से तो नहीं किया है. फिर भी उस के फेमिली वालों ने पटना में रह रहे अपने एक परिचित को फोन कर हौस्पिटल भेज दिया. परिचित कुछ समय में ही हौस्पिटल पहुंच गए, जो हौस्टल के बगल में ही है. उन्होंने वहां गायत्री को एडमिट पाया, लेकिन वह बेहोश थी.

डा. सहजानंद ने गायत्री को सीरियस बता कर इलाज में असमर्थता जताई और उसे सेंट्रल हौस्पिटल, पटना रेफर कर दिया. वहां पर साथ में हौस्टल की एक केयर टेकर नीतू भी थी. वह उसे सेंट्रल हौस्पिटल न ले जा कर प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल ले कर गई. उस के साथ परिचित भी गए. रात के 8 बज चुके थे, तब तक गायत्री के फेमिली वाले भी प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल पहुंच गए. हौस्पिटल में गायत्री को भरती कर लिया गया था. उस की हालत नाजुक बनी हुई थी. उसे क्या हुआ है, फेमिली वालों को कुछ पता नहीं चल पा रहा था.

वे हैरानपरेशान थे कि आखिर उन की बेटी को अचानक क्या हो गया, जो उस की हालत सीरियस हो गई. उसे आईसीयू में रखा गया था और वहां डाक्टरों व नर्स के सिवाय किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं थी. लिहाजा ठंड की रात में फेमिली वाले हौस्पिटल के वेटिंग एरिया में बैठे थे. उन के पास उसी रात एक महिला पुलिस (एसआई) आई और उन्हें अपना नंबर दे कर बोली, ”कुछ भी शक हो या जरूरत पड़े तो फोन कीजिएगा.’’

उन की जैसेतैसे कर रात बीती. वे पूरी रात हौस्पिटल के डौक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ रूम का चक्कर लगाते रहे कि आखिर उन की बच्ची को हुआ क्या है, जो इतनी सीरियस हो गई. किंतु उन्होंने महसूस किया कि वहां उन की परेशानी समझने वाला कोई नहीं था.

सुबह हुई और 7 जनवरी को भी उन की बेटी दिन भर हौस्पिटल में एडमिट रही. उस रोज भी डौक्टर ने नहीं बताया कि लड़की के साथ क्या कुछ हुआ है. वे सिर्फ यही कहते रहे, ‘बस! इलाज चल रहा है. बच्ची बेहोश है, होश आने पर मिलवाया जाएगा.’

उसी दिन गायत्री के फेमिली वाले शंभु गल्र्स हौस्टल गए. उन्हें पहले तो उस के रहने वाले कमरे में जाने से मना कर दिया गया. काफी मिन्नतों के बाद उन्हें कमरे में जाने दिया गया. वह कमरा साफ था. उस वक्त हौस्टल में कई छात्राएं थीं, लेकिन किसी ने भी उन से बात नहीं की. उन्हीं में से उन्हें किसी ने फोन पर गायत्री के बीमार होने की सूचना दी थी.

क्यों छिपाया सच

उस रोज भी गायत्री आईसीयू में बेहोश पड़ी रही. अगले दिन 8 जनवरी, 2026 को प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल के ही एक डौक्टर ने शाम को बताया कि गायत्री के साथ फिजिकली कुछ हुआ है, चोट के निशान हैं, ब्लीडिंग हुई है. यह सुनते ही उस के फेमिली वाले परेशान हो गए. गायत्री के होश में आने के इंतजार में शाम हो गई. करीब 6 बजे उसे होश आया.

सामने अपनी मम्मी को देख कर वह रोने लगी. उस का रुदन तेज हो गया. रोते हुए उस ने बताया कि उस के साथ गलत हुआ है. उसी वक्त वहां डौक्टर आ गए और उन्होंने फेमिली वालों को बाहर निकाल दिया. उसी वक्त वे दोबारा हौस्टल गए. वहां मौजूद एक केयर टेकर के साथ कमरे में गए. बच्ची के कमरे से कुछ सामान निकाला. साथ में कुछ पैसे, जो करीब 11 हजार थे, निकाल लिए. उस वक्त कमरे का फर्श बिलकुल साफ था, लेकिन वहां का सामान इधरउधर बिखरा पड़ा था. उन्हें केयर टेकर की बातों से भी आभास हुआ कि बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है.

फेमिली वाले काफी परेशान हो गए थे. उन्होंने 9 जनवरी को उस नंबर पर कौल किया, जो 6 जनवरी की रात को महिला एसआई ने दिया था. उन्होंने बेटी की गंभीर हालत और उस के बारे जो कुछ मालूम हुआ, उस बारे में एसआई को बताया. कुछ समय में ही कदमकुआं थाने से पुलिस आई और बयान ले कर चली गई. कदमकुआं थाने ने इस मामले को चित्रगुप्त नगर थाने में भेज दिया. उस के बाद चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल आ गईं. वह भी गायत्री के फेमिली वालों के बयान और उस की तसवीर आदि ले कर चली गई. तब तक गायत्री फिर बेहोश हो गई थी. इस कारण उस का बयान नहीं लिया जा सका.

उसी दिन 9 जनवरी की शाम को एक महिला नीलम अग्रवाल प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल पहुंची. उस ने खुद को हौस्टल की मालकिन बताया और फेमिली वालों से बोली कि हौस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा, इसलिए केस को वापस ले लीजिए, मैनेज कर लीजिए. इस पर नीलम की फेमिली वालों के साथ बहस हो गई. वे तूतूमैंमैं करते हुए आपस में उलझ गए. उन के बीच काफी बकझक होने और बिगड़ती स्थिति को देख कर मौत से जूझ रही गायत्री के एक रिश्तेदार ने चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी को कौल कर दोबारा बुलाया.

(ऊपर) रोहित मैडिकल स्टोर का मालिक जहां से गायत्री द्वारा नींद की गोलियां खरीदे जाने की बात कही जा रही है और (दाहिने) शंभू हौस्टल का मालिक मनीष रंजन

रोशनी कुमारी तुरंत हौस्पिटल पहुंच गईं. नीलम अग्रवाल एसएचओ रोशनी कुमारी के साथ भी उलझ गई. उसे एसएचओ से झगड़ते देख साथ आई एक महिला कांस्टेबल ने नीलम अग्रवाल को एक थप्पड़ जड़ दिया. नीलम बौखला गई, लेकिन उसे पुलिस अपने साथ ले गई. बाद में फेमिली वालों को मालूम हुआ कि उसे थाने ले जा कर छोड़ दिया गया था.

शंभू गल्र्स हौस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल के बारे में बताया जाता है कि उस के पति शंभू अग्रवाल का निधन हो चुका है. उस के 2 बेटे श्रवण और अंशु हैं. जिस बिल्डिंग में शंभू गल्र्स हौस्टल चल रहा है, उस बिल्डिंग का मालिक मनीष रंजन है. वह हौस्टल में ही सब से ऊपर के फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहता है. 9 जनवरी, 2026 को पूरे दिन और पूरी रात गायत्री बेहोश रही. उस की स्थिर हालत हो देख कर फेमिली वालों की चिंता बढ़ती जा रही थी. उसे वे 10 जनवरी को इस अस्पताल से बाहर ले जाना चाहते थे, लेकिन प्रभात मेमोरियल का डा. सतीश उन्हें जाने नहीं दे रहा था.

मृतका गायत्री को फाइल फोटो और उस की मौत पर प्रदर्शन करते आक्रोशित स्थानीय लोग

तब फेमिली वाले आईसीयू में जबरन घुस गए. बेहोश बच्ची को वहां से डिस्चार्ज करने को ले कर फेमिली वालों की डा. सतीश के साथ जबरदस्त बहस हो गई. उन की कहासुनी के साथसाथ धक्कामुक्की भी हुई.

संदिग्ध रही पुलिस भूमिका

फेमिली वाले किसी तरह से गायत्री को 10 जनवरी, 2026 को ही दिन में 2-3 बजे के आसपास उसे मेदांता अस्पताल ले कर गए. तब तक गायत्री की हालत काफी बिगड़ चुकी थी. मेदांता में एडमिट करने से पहले ही डौक्टरों ने कहा कि इस की हालत काफी नाजुक है. बचने की संभावना सिर्फ एक फीसदी है, वे उसे नहीं बचा सकते हैं. फिर भी काफी मिन्नतों के बाद गायत्री को मेदांता में भरती कर लिया गया. वहां गायत्री का नए सिरे से इलाज शुरू हुआ. डौक्टरों ने उसे बचाने में पूरी ताकत झोंक दी, किंतु 11 जनवरी को दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे गायत्री को मृत घोषित कर दिया.

गायत्री की मौत का मामला पुलिस में जा चुका था, इसलिए मेदांता से पहले 2 अस्पतालों में उस के इलाज, हौस्टल में हालत बिगडऩे और असामयिक मौत की वजह से उस की लाश फेमिली वालों को तुरंत नहीं सौंपी जा सकी. प्रोटोकाल की प्रक्रिया के तहत 12 जनवरी, 2026 को गायत्री के शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना मैडिकल कालेज और हौस्पिटल (पीएमसीएच) भेज दिया गया. पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का पार्थिव शव शाम को बाहर निकाला गया. उसे फेमिली वालों का सौंप दिया गया. फेमिली वाले उस के अंतिम संस्कार के लिए गंगा किनारे पटना के गुलाबी घाट ले जाने लगे. इस दरम्यान फेमिली वालों को पीएमसीएच में पोस्टमार्टम टीम के एक डौक्टर से मालूम हुआ कि उन की बेटी के साथ रेप हुआ था. उस ने यहां तक कहा कि वे लाश को न जलाएं.

उस के बाद परिजन अचानक उस की लाश को गुलाबी घाट के गेट से वापस पटना के गांधी मैदान के एक किनारे कारगिल चौक पर ले आए. फेमिली वालों और उन के साथ कुछ लोगों ने कारगिल चौक पर ले जा कर शव को रख दिया. तभी एएसपी कुमार अभिनव ने वहां पहुंच कर बताया कि उन्हें बरगलाया गया है. गायत्री के साथ कोई रेप नहीं हुआ है. फेमिली वालों ने जब पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया तो पुलिस कारगिल चौक से उन्हें जबरन हटाने के लिए उन पर लाठीचार्ज करने लगी और जबरदस्ती एंबुलेंस से उस की लाश को गुलाबी घाट ले गई.

तब परिजन पीछेपीछे गए और गायत्री का अंतिम संस्कार कर दिया. तब तक हौस्टल में एक नीट की छात्रा के मौत की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी. फेमिली वाले दोहरे मानसिक तनाव में आ गए. एक तरफ वे अपनी मेधावी बेटी की असामयिक मौत और उस के साथ गलत किए जाने की पीड़ा के गम से घिरे हुए थे, दूसरी तरफ वे पुलिस की हर हिदायत और बात मानने के दबाव में भी आ गए. क्योंकि उन्हें गायत्री की मौत के संबंध में मुंह बंद रखने की सख्त हिदायत मिली थी.

उन्हें चित्रगुप्त थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए 15 जनवरी, 2026 को बुलाया गया था. वे वहां सुबह 10 बजे ही पहुंच गए. लंबे इंतजार के बाद रात के 8 बजे पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली. जिस में स्पष्ट कहा गया था कि ‘यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.’

कौन था रेपिस्ट

रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान, खरोंच, बल प्रयोग के संकेत और जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की आशंका जताई गई थी. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिस में लिखा था कि छात्रा की मौत स्वाभाविक नहीं थी. उस के शरीर पर कई जगहों पर चोट के निशान मिले हैं. साथ ही उस से रेप किया गया, इस की भी पुष्टि की गई है. पीडि़ता के प्राइवेट पार्ट में अंदरूनी चोटें पाई गई हैं. इसी आधार पर रेप की पुष्टि की गई है. पीडि़ता के शरीर और गरदन पर खरोंच व दबाव के निशान भी मिले हैं.

इस से यह साफ हो गया था कि घटना के समय छात्रा ने हरसंभव विरोध किया था. रिपोर्ट में मौत के कारणों का भी जिक्र किया गया था. बताया गया कि छात्रा की मौत गला दबाने या दम घुटने से होने के संकेत मिले हैं. इस से उस थ्योरी को भी बल मिल गया, जिस में कहा जा रहा था कि छात्रा की हत्या की गई है. दिलदिमाग को सुन्न कर देने वाली इस रिपोर्ट को पढऩे के बावजूद मृतका के फेमिली वाले अपने गम और पीड़ा को समेटे हुए बोझिल मन से जहानाबाद लौट गए, लेकिन वे आक्रोश से भरे हुए थे. जबकि स्थानीय पत्रकारों और विपक्ष के नेताओं के संपर्क में बने रहे.

गायत्री नीट की तैयारी कर रही थी. वह जहानाबाद की रहने वाली थी. पटना के एक कोचिंग सेंटर में वह नीट (राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रही थी. पटना के चित्रगुप्तनगर में ही वह शंभू गल्र्स हौस्टल में रहने लगी थी. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नए साल की छुट्टी होने पर अपने घर जहानाबाद चली गई थी. जहानाबाद से वह 5 जनवरी को पटना अपने हौस्टल में वापस लौटी थी, लेकिन इस के अगले ही दिन 6 जनवरी को जब वह ब्रेकफास्ट और लंच के लिए कमरे के बाहर नहीं आई, तब हौस्टल के स्टाफ को फिक्र हुई. इस के बाद जब वो कमरे में दाखिल हुए तो गायत्री बेहोश मिली.

बिहार की सोशल मीडिया के हर दूसरे न्यूज चैनल पर नीट छात्रा की मौत की चर्चा होने लगी. उन की खबरों में तरहतरह की बातें सामने आने लगीं. दूसरी तरफ पुलिस का कहना था कि छात्रा ने अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन किया था. उस के शरीर में टाइफाइड जैसे संक्रमण के लक्षण पाए गए थे, जिस से उस की हालत गंभीर हो गई थी. जब मीडिया ने इस पर सवाल उठाए और छात्रा के साथ रेप होने की आशंका जताई, तब पुलिस ने अपने दावे के साथ इसे गलत बताया. इस पर पुलिस का कहना था कि हौस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, हौस्टल स्टाफ के बयान और प्रारंभिक मैडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि छात्रा के साथ किसी प्रकार का यौनशोषण नहीं हुआ.

जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट की आशंका जताने वाली बात सामने आई, पुलिस की आत्महत्या वाले तथ्य का सड़कों पर विरोध शुरू हो गया. पुलिस के इस दावे के खिलाफ बड़ी संख्या में छात्रछात्राओं के अलावा विपक्ष ने सीधेसीधे बिहार सरकार के गृहमंत्री को चुनौती दे दी. हौस्टल और प्रभात अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन होने लगे. मोमबत्तियां जलाए हुए मृतका को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया. इसी के साथ ही मृतका के पापा ने भी मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि उन की बेटी पुलिस, अस्पताल और हौस्टल संचालक की मिलीभगत का शिकार हुई है.

उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को धमकाया गया और मामले को दबाने के लिए लाखों रुपए देने के प्रलोभन भी दिए गए. इसी के साथ मृतका के फादर ने अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से छात्रा के फादर ने चित्रगुप्त नगर थाने में 16 जनवरी, 2026 को एफआईआर (केस नंबर 14/26) दर्ज करवा दी. एफआईआर में हौस्टल में बेटी के साथ दुष्कर्म कर उस की हत्या किए जाने और पटना पुलिस की शुरुआती जांच में लापरवाही के कारण यह संदेह गहराने लगा कि पुलिस और प्रभात मेमोरियल अस्पताल  को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

एसआईटी के साथ पटना सेंट्रल रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने मामले की जांच शुरू कर दी

बढ़ते जनदबाव के कारण पुलिस ने तेजी से काररवाई शुरू कर दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हौस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष कुमार रंजन, जो उदल प्रसाद के बेटे और पटना के मुन्ना चौक, सहजानंद गली के रहने वाला है, को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. नीट छात्रा कांड में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन 16 जनवरी, 2026 को तब किया गया, जब इस मामले को ले कर कई नेताओं और स्थानीय लोगों द्वारा पटना में होहल्ला किया गया. गृहमंत्री को पत्र लिख कर जांच की गुहार लगाई गई.

उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि गायत्री के साथ गलत हुआ है और उसे अस्पताल ने ही इलाज के दौरान मौत की नींद सुला दिया. इस का जितना दोषी हौस्टल है, उतनी ही दोषी पुलिस और अस्पताल भी है.

फेमिली पर दबाव क्यों

एक राजनेता ने तो सीधेसीधे हौस्टल प्रशासन द्वारा देहव्यापार करवाए जाने तक का आरोप लगा दिया. जबकि एक अन्य नेता ने मृतका के पेरेंट्स से मिल कर पूरे मामले की तहकीकात की और दोषियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने इस बात का भी परदाफाश किया कि पीडि़ता के परिवार पर यौन शोषण और मामले को छिपाने के लिए दबाव बनाया गया था. उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और पीडि़त परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा, ‘परिवार का मानना है कि पहले जांच अधिकारी लापरवाह थे. वे अपनी बेटी के लिए विभागीय काररवाई और न्याय चाहते हैं.’

पीडि़ता के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि हौस्टल मैनेजमेंट ने मामले को दबाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने पहले अस्पताल के एक डौक्टर पर भी सबूत मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. गायत्री को बाद में जयप्रभा मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

इस के बाद बिहार पुलिस के डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी गठित करने का आदेश दिया. यह कदम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के एक दिन बाद उठाया गया, जिस में संकेत मिला था कि यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता, जो पुलिस के पहले के दावे के विपरीत था कि लड़की ने आत्महत्या की थी. पटना मैडिकल कालेज और अस्पताल में किए गए पोस्टमार्टम के अनुसार, शरीर पर कई नाखूनों के निशान, शारीरिक चोटें और संघर्ष के निशान पाए गए थे, जो हाल ही में उस के साथ किए गए जबरदस्ती के इस्तेमाल का संकेत देने वाले थे.

12 जनवरी की इस रिपोर्ट में कहा गया कि ‘यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता’ और आगे की जांच के लिए एआईआईएमएस को विशेषज्ञ राय के लिए भेजा गया है. इस रिपोर्ट के बाद पटना में जबरदस्त सार्वजनिक आक्रोश का माहौल बन गया. इसे देखते हुए पटना सेंट्रल रेंज के इंसपेक्टर जनरल (आईजी) जितेंद्र राणा ने नई बनी एसआईटी के साथ जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी. जांच कुल 5 बिंदुओं पर शुरू की गई. फोरैंसिक और तकनीकी जांच के लिए फोरैंसिक टीम ने छात्रा के कपड़ों, कमरे और हौस्टल से सबूत इकट्ठे किए. कपड़ों पर मिले नमूनों में पुरुष जैविक ट्रेस (जैसे स्पर्म) पाए गए, जिस से यौन हिंसा की संभावना जांच का अहम हिस्सा बनी.

एसएओ रोशनी कुमारी

दूसरी जांच डीएनए की थी. टीम ने संदिग्धों के डीएनए सैंपल लिए. संदिग्धों में मृतका के करीबी रिश्तेदार के अलावा हौस्टल में अकसर आनेजाने वाले लोगों के भी लिए गए. इन के नमूने को परीक्षण के लिए भेजा गया, ताकि उस के मिलान से यह पता चले कि किस का स्पर्म से लड़की के कपड़े पर पाए गए स्पर्म से मेल खाते हैं. इस आधार संदिग्ध दोषी तक पहुंचा जा सकता है. शुरू में कुल 6 लोगों के नमूने लिए गए थे, लेकिन 40 लोगों तक को इस जांच में शामिल किया जा सकता है. हालांकि यह भी विवाद का एक कारण बन गया.

जांच का तीसरा पहलू सर्विलांस के लिए सीसीटीवी और डिजिटल ट्रेल करना है. इस के लिए सीसीटीवी फुटेज, फोन डेटा (सीडीआर) और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जाने लगी, ताकि घटना के समय संदिग्धों की लोकेशन का पता लगाया जा सके. चौथे किस्म के जांच का बिंदु गवाह के बयान और पूछताछ को बनाया गया. लिखे जाने तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई और करीब 40 बयान दर्ज किए गए, जिन में परिवार के सदस्य भी शामिल थे. पांचवीं जांच हौस्टल और मैडिकल कालेज से संबंधित थी.

इस के लिए एसआइटी ने शंभू गल्र्स हौस्टल को सील कर दिया. मैडिकल रिकौर्ड, डौक्टरों और हौस्टल स्टाफ के बयान भी जांच में लिए गए. इसी दौरान मृतका द्वारा नींद की दवा खरीदने की भी चर्चा हुई. बाद में जहां से दवा खरीदी गई, उस की जांचपड़ताल की गई. इस के अलावा एसआईटी ने अतिरिक्त काररवाई कर पुलिस के प्रारंभिक रवैए पर भी सवाल उठाए. कुछ संदिग्ध पुलिस अधिकारियों को जांच में अनदेखी और जानबूझ कर मृतका के खिलाफ काम में लिप्त पाया गया. उस के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया.

सब से पहली गाज चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ पर गिरी. उसे सस्पेंड कर दिया गया. उस पर शुरुआती जांच में लापरवाही, समय पर काररवाई नहीं करने और सबूतों को सही तरीके से सुरक्षित नहीं करने का लगाया गया. निलंबित किए जाने वालों में कदमकुआं थाने के अतिरिक्त थानेदार हेमंत झा भी हैं, उन पर भी जांच में गंभीरता नहीं दिखाने और जरूरी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया गया. इन दोनों पुलिस अधिकारियों को लापरवाही और कर्तव्य में चूक के कारण निलंबित किया गया है, ताकि आगे की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हो सके.

इस तरह से एसआईटी की जांच इस मुकदमे को एक साधारण मौत के मामले से बदल कर एक संभावित यौन अपराध व हत्या की दिशा में ले गई. एफएसएल और डीएनए जैसे वैज्ञानिक सबूतों की मदद से यह समझने की कोशिश की गई कि इस पूरे मामले में किस का योगदान है? संदिग्ध कौन था? वास्तविक अपराध कैसे हुआ? Bihar News

 

Short Love Story in Hindi: प्रेमिका से मौजमस्ती तो शादी क्यों नहीं

Short Love Story in Hindi: काशीपुर के सलमान को मोहल्ले की ही रहने वाली शादीशुदा सीमा खातून से प्यार हो गया था. सीमा भी उस पर इस कदर फिदा हुई कि वह सलमान की खातिर अपने पति तक को छोडऩे के लिए तैयार हो गई. वह उस से शादी की जिद करने लगी. अविवाहित सलमान तो उसे केवल मौजमस्ती का साधन ही समझता रहा. फिर एक दिन सीमा की शादी करने की जिद उस मुकाम पर पहुंची कि…

सलमान और सीमा खातून के प्रेम संबंध पिछले 2 सालों से चले आ आ रहे थे. शादीशुदा सीमा उसे दिलोजान से चाहती थी. पिछले एक साल से सलमान सीमा से किनारा करना चाहता था, क्योंकि उस के फेमिली वाले किसी और लड़की से उस की शादी करना चाहते थे. लेकिन सीमा किसी भी हालत में उस से जुदा नहीं होना चाहती थी. जब वह नहीं मानी तो सलमान ने परेशान हो कर सीमा को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी. मोहल्ले की ही रहने वाली नशा तसकर मेहरुन्निसा भी सीमा से अपनी दुश्मनी का हिसाब पूरा करना चाहती थी, यह बात सलमान जनता था. इस के बाद सलमान और मेहरुन्निसा ने सीमा को ठिकाने लगाने की योजना बना ली.

योजना के मुताबिक 17 अक्तूबर, 2025 की शाम को मेहरुन्निसा ने फोन कर के सीमा को काशीपुर के केवीआर तिराहे पर बुलाया. सीमा वहां पहुंच गई. इस के बाद वे तीनों कंटेनर के केबिन में बैठ कर बातें करने लगे. उसी दौरान सीमा सलमान से उस के साथ शादी करने की जिद करने लगी. समझाने पर भी जब सीमा नहीं मानी तो सलमान ने पास बैठी मेहरुन्निसा को इशारा किया. तभी मेहरुन्निसा ने सीमा के दोनों हाथ पकड़ लिए. इस के बाद सलमान ने सीमा की चुन्नी से उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. मेहरुन्निसा सीमा को अपने हाथों से तब तक जकड़े रही, जब तक सीमा की मौत न हो गई.

सीमा के मरने के बाद मेहरुन्निसा वापस चली गई और सलमान कंटेनर में सीमा की लाश ठिकाने लगाने के लिए हरिद्वार की ओर निकल पड़ा. जब कंटेनर ले कर वह नगीना पहुंचा था तो उस ने एक जेरीकेन में कंटेनर के डीजल टैंक से 6-7 लीटर डीजल निकाल कर रख लिया था ताकि मौका मिलने पर सीमा की लाश को जला सके. फिर सलमान ने हरिद्वार की ओर कंटेनर को दौड़ा दिया. कंटेनर चलाते समय वह सीमा के शव को ठिकाने लगाने के लिए सुनसान जगह की भी तलाश कर रहा था.

रात 12 बजे के बाद उस का कंटेनर एक सुनसान जगह पर पहुंचा. इस के बाद उस ने कंटेनर को अंधेरे में एक साइड में खड़ा कर दिया. फिर अंधेरे में उस ने केबिन से सीमा की लाश नीचे उतारी. सीमा की लाश को वह खींच कर एक झाड़ी के पास ले गया. लाश के ऊपर उस ने एक दरी डालने के बाद जेरीकेन का सारा डीजल उस के ऊपर छिड़क कर उस में आग लगा दी. सीमा की लाश को आग के हवाले करने के बाद वह तुरंत कंटेनर ले कर देहरादून के लिए निकल गया.

डा. सुधांशु शुक्ला सुबह अपनी पत्नी के साथ गांव गजीवाली के जंगल में सुबह की सैर कर रहे थे. यह उन का रोज का नियम था. सैर करने के लिए वह सुबह लगभग 5 बजे अपनी पत्नी के साथ घर से निकल जाते थे. जिस क्षेत्र में डा. शुक्ला सैर करने के लिए निकलते थे, वहां यदाकदा बंदर, जहरीले सांप, जंगली हाथी, गुलदार आदि भी विचरण करते हुए दिखाई पड़ जाते थे. जंगली इलाका होने के कारण डा. शुक्ला वहां पर सदैव सतर्क हो कर पत्नी के साथ  सैर करते थे, लेकिन 18 अक्तूबर, 2025 को जब वह थोड़ी देर सैर करने के बाद एक झाड़ी के पास पहुंचे थे तो उन्हें वहां पर जलाई गई एक झाड़ी दिखाई दी. जब वह उस जली हुई झाड़ी के थोड़ा पास पहुंचे तो उन्होंने वहां पर एक जली हुई डैड बौडी देखी.

‘सुनसान जंगल में वह जली हुई डैड बौडी किस की होगी और उसे किस ने यहां ला कर जलाया होगा?’ यह सोच कर डा. शुक्ला घबरा गए. उन के साथ सैर कर रहीं उन की पत्नी भी डर गई थीं. तभी वहां से गुजर रहे लोगों को रोक कर उन्होंने डैड बौडी के बारे में बताया. कुछ ही देर में वहां पर काफी लोग इकट्ठे हो गए. सब ने देखा था कि वह डैड बौडी काफी हद तक जल चुकी थी, सिर्फ शव के दोनों पंजे तथा दोनों हाथों की कलाइयां ही जलने से बची हुई थीं. पैरों के बिछुओं से अंदाजा लगाया कि किसी शादीशुदा महिला को जलाया गया है. वहां पर उस समय दहशत का वातावरण था. अत: वहां पर मौजूद लोगों ने इस मामले की सूचना पुलिस को देने का फैसला किया. यह इलाका जिला हरिद्वार के नजीबाबाद रोड पर स्थित थाना श्यामपुर के अंतर्गत आता था, इसलिए एक व्यक्ति ने फोन द्वारा घटना की सूचना थाने में दे दी.

उस समय सुबह के 7 बजे थे. थाना श्यामपुर के एसएचओ मनोज शर्मा को जब यह सूचना मिली थी तो वह तत्काल ही एसएसआई मनोज रावत व कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को ले कर सूचना में बताए गए पते की तरफ निकल गए. उन्होंने यह सूचना सीओ एस.एस. नेगी, एसपी (सिटी) पंकज गैरोला, एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा तथा एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को दी थी. घटनास्थल वहां से मात्र 3 किलोमीटर दूर हरिद्वार नजीबाबाद रोड पर गांव गाजीवाली में खैरा ढाबे के पीछे झाडिय़ों का इलाका था, इसलिए एसएचओ थोड़ी देर में ही वहां पहुंच गए.

जब पुलिस वहां पहुंची तो उस समय वहां दरजनों लोगों की भीड़ थी. एसएचओ ने वहां पर जलाई गई लाश का निरीक्षण करना शुरू कर दिया. वैसे तो लाश पूरी जल गई थी, मगर लाश के पैरों के पंजे व कलाइयां नहीं जल सकी थीं. लाश के पैरों में बिछुए होने तथा पंजे में काला कपड़ा होने से श्री शर्मा को लगा कि यह लाश किसी महिला की है. अज्ञात हत्यारों ने जंगल में ला कर महिला के शव को इसलिए जलाया होगा, जिस से कि उस की पहचान न हो सके. इस के बाद श्री शर्मा ने डा. सुधांशु से इस शव के पहली बार देखे जाने के बारे में जानकारी ली थी. शव महिला का होने के कारण श्री शर्मा ने शव का पंचनामा भरने के लिए थाने से महिला थानेदार अंजना चौहान को मौके पर बुलवा लिया था.

घटनास्थल पर पुलिस की काररवाई चल ही रही थी कि सीओ एस.एस. नेगी, एसपी (सिटी) पंकज गैरोला, एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा तथा फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई थी. इस के बाद फोरैंसिक टीम व पुलिस ने शव के कई कोणों से फोटो खींचे तथा आसपास से अन्य सबूत भी जुटाए. मृतका की शिनाख्त न होने से पुलिस के लिए यह ब्लाइंड मर्डर था. महिला के इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाने के लिए एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा ने सीआईयू यूनिट प्रभारी नरेंद्र बिष्ट की टीम को भी मौके पर बुलवा लिया था.

इस मामले में मृतका की पहचान करना पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती थी. पुलिस ने वहां मौजूद स्थानीय लोगों से पहले मृतका के बारे में पूछताछ की थी, मगर अभी तक पुलिस को मृतका के बारे में कोई भी जानकारी हासिल नहीं हो सकी थी. इस के बाद एसपी जितेंद्र मेहरा के निर्देश पर महिला थानेदार अंजना चौहान ने मृतका की जली हुई डैडबौडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस के बाद एसएसपी प्रमेंद्र डोवाल ने ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने के लिए एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा के निर्देशन और सीओ एस.एस. नेगी की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम का गठन किया. टीम में एसएचओ मनोज शर्मा, सीआईयू इंसपेक्टर नरेंद्र बिष्ट, एसआई गगन मैठाणी, नवीन चौहान, मनोज रावत, कांस्टेबल राहुल देव आदि को शामिल किया गया. एसएसपी ने वहां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के आदेश टीम को दिए. उन के दिशानिर्देश पर पुलिस टीम जांच में जुट गई.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नजीबाबाद से हो कर हरिद्वार की ओर रास्ते में पहले पीनाक होटल व बाद में उमेश्वर धाम में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. पुलिस टीम ने दोनों स्थानों के बीती रात के कैमरों की फुटेज को चैक किया. पुलिस ने जांच में पाया कि उस रात लगभग 842 छोटेबड़े वाहन इस रास्ते से गुजरे थे. पुलिस को शक था कि किसी छोटे वाहन से मृतका को हत्यारों द्वारा यहां लाया गया होगा. इस के बाद अगले दिन भी पुलिस टीम ने हरिद्वार से रायवाला तक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की.

वैसे तो पुलिस टीम को विशेष जानकारी मृतका के बारे में नहीं मिली, मगर एक बात सीआईयू प्रभारी नरेंद्र बिष्ट के गले नहीं उतर रही थी कि पीनाक होटल व उमेश्वर धाम की दूरी लगभग 500 मीटर है. सभी वाहन पीनाक होटल से उमेश्वर धाम मात्र 2 या 3 मिनट में पहुंचे थे. मगर एक सफेद कंटेनर घटना वाली रात को पीनाक होटल से उमेश्वर धाम 19 मिनट में पहुंचता कैमरों में दिखाई दिया था. इस बात पर बिष्ट का शक सफेद कंटेनर पर गहरा गया था.

इस सफेद कंटेनर पर शक गहराने के कारण पुलिस ने इस केस को सुलझाने के लिए इस की डोर पकड़ ली थी. इस के बाद पुलिस ने कंटेनर के रजिस्ट्रैशन नंबर यूके18 सीए 4788 के मालिक की जानकारी की. पता चला कि यह कंटेनर जिंदल वेजिटेबल कंपनी, नारायण नगर इंडस्ट्रियल एरिया, काशीपुर उत्तराखंड के नाम से रजिस्टर्ड है. एक पुलिस टीम काशीपुर जाने के लिए निकल पड़ी. पुलिस टीम ने उत्तराखंड के ही शहर काशीपुर पहुंच कर उक्त नंबर के सफेद कलर के कंटेनर के स्वामी से संपर्क किया तो उन्हें जानकारी मिली कि घटना वाली रात को कंटेनर चालक सलमान निवासी मझरा लक्ष्मीपुर, कोतवाली काशीपुर ही देहरादून मंडी के लिए ले कर गया था. इस के बाद सलमान 2 दिनों के बाद वापस लौटा था. यह भी पता चला कि इस समय सलमान कंटेनर ले कर पानीपत (हरियाणा) गया हुआ है.

पुलिस टीम ने जब सलमान के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली तो कुछ हैरान करने वाली जानकारी मिली. पता चला कि सलमान का एक भाई व 2 बहनें हैं. सलमान के प्रेम संबंध मोहल्ले की ही सीमा खातून नाम की एक महिला से चल रहे हैं. इस के अलावा गत 17 अक्तूबर, 2025 से ही सीमा खातून यहां से लापता चल रही है. सीमा खातून की गुमशुदगी कोतवाली काशीपुर की पुलिस चौकी बासकुडाव में दर्ज थी. सीमा खातून अंतिम बार मोहल्ले की एक महिला मेहरुन्निसा के साथ देखी गई थी. उस के बाद से ही सीमा लापता हो गई थी. काशीपुर पुलिस द्वारा भी सीमा खातून की तलाश की जा रही है.

इस के बाद टीम ने लापता सीमा की फोटो देखी. फोटो में सीमा का चेहरा जली हुई महिला के शरीर से काफी मेल खा रहा था. अंत में पुलिस टीम ने लापता होने वाले दिन की वीडियो काशीपुर के एक सीसीटीवी कैमरे में देखी थी तो टीम को पूरा विश्वास हो गया कि श्यामपुर के जंगल में मिला जला हुआ शव सीमा खातून का ही था, क्योंकि उस समय सीमा खातून ने काला सूट पहन रखा था. बरामद जले हुए शव के पैरों के पास भी पुलिस ने अधजला काला कपड़ा बरामद किया था. अब श्यामपुर पुलिस टीम ने कोतवाली काशीपुर में ही मेहरुन्निसा से पूछताछ करने का मन बनाया था. कोतवाली में जब मेहरुन्निसा को बुलाया गया, तब उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. पुलिस ने जब मेहरुन्निसा से सीमा के लापता होने की बाबत पूछा तो वह पुलिस के सामने शांत खड़ी रही.

इस के बाद सीआईयू इंचार्ज श्री बिष्ट ने मेहरुन्निसा को सख्ती से फटकारते हुए कहा, ”तुम या तो सीधी तरह से सीमा के लापता होने की सच्चाई पुलिस को सचसच बता दो, वरना पुलिस के सामने मुर्दे भी बोलने लगते हैं, यह तुम जान लो.’’

बिष्ट की इस धमकी का मेहरुन्निसा पर  जादू की तरह असर हुआ. उस ने पुलिस को बताया कि उस ने व सलमान ने गत 17 अक्तूबर, 2025 को सीमा की हत्या कर दी थी. फिर सलमान ने उस की लाश ठिकाने लगाई थी. मेहरुन्निसा के ये बयान दर्ज करने के बाद पुलिस की टीम सीमा के कपड़े व फोटो से उस की शिनाख्त करने के लिए सीमा के शौहर शादाब, भाई मेहंदी हसन व मेहरुन्निसा को ले कर थाना श्यामपुर आ गई थी. यहां पहुंचने के बाद सीमा के शौहर शादाब ने उस के जले हुए शव से ही सीमा की पहचान कर ली थी. सीमा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण उस का गला घोंटा जाना बताया गया था.

मेहरुन्निसा की गिरफ्तारी के बाद उसी दिन शाम को ही श्यामपुर पुलिस ने चैकिंग के दौरान रसियाबड के पास से आरोपी सलमान को उस के कंटेनर सहित गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद सलमान को थाना श्यामपुर लाया गया. थाने में मेहरुन्निसा को देख कर सलमान समझ गया कि मेहरुन्निसा ने पुलिस को सब कुछ बता दिया होगा, इसलिए उस ने पुलिस के सामने सीमा की हत्या मेहरुन्निसा के साथ मिल कर करने का जुर्म कुबूल कर लिया था. पूछताछ में सलमान ने सीमा से प्रेम संबंध से ले कर उस की हत्या किए जाने तक की सारी कहानी उगल दी. सलमान और मेहरुन्निसा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने सलमान की निशानदेही पर डीजल की जेरीकेन भी बरामद कर ली.

एसएचओ मनोज शर्मा ने सलमान व मेहरुन्निसा की गिरफ्तारी की सूचना एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा व एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को दे दी. तब 24 अक्तूबर, 2025 की शाम को ही हरिद्वार के मायापुर स्थित एसपी (सिटी) कार्यालय में पुलिस अधिकारियों ने एक प्रैसवार्ता का आयोजन कर ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा कर दिया. इस के बाद पुलिस ने आरोपी सलमान व मेहरुन्निसा को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन दोनों को जेल भेज दिया गया. सीमा हत्याकांड की तफ्तीश एसएचओ मनोज शर्मा द्वारा की जा रही थी. श्री शर्मा शीघ्र ही आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य एकत्र कर के चार्जशीट कोर्ट में भेजने की तैयारी कर रहे थे. Short Love Story in Hindi

 

Love Story in Hindi: औनलाइन इश्क जरा सोचसमझ के

Love Story in Hindi: पांचवीं पास मसजिद का इमाम और 3 बच्चों का बाप शहजाद बहुत चालबाज था. उस ने उच्चशिक्षित असमिया युवती नईमा यासमीन से औनलाइन दोस्ती कर उसे न सिर्फ फरेबी इश्क के जाल में फांसा, बल्कि उस से औनलाइन निकाह भी कर लिया. एक दिन नईमा ने जब अपना मुंह खोला तो उसे ऐसी सजा दी गई कि…

असम की रहने वाली नईमा यासमीन पिछले 2 दिनों से नोएडा के वन बीएचके फ्लैट में उदास बैठी थी. उस की उदासी के कई कारण थे. उस ने मोबाइल से बैंक बैलेंस चैक किया था, जो जीरो पर आ गया था. कहीं भी कोई सेविंग्स नहीं बची थी. सारे पैसे खत्म हो गए थे. उसे अपना मेट्रो कार्ड रिचार्ज करवाने के लिए पैसे की जरूरत थी. मोबाइल का रिचार्ज भी 2 दिनों में खत्म होने वाला था. इस बारे में अपनी बहन को बताए भी काफी समय बीत चुका था. उस से कुछ पैसे अकाउंट में ट्रांसफर करने की उस ने मदद मांगी थी. यह बात सितंबर महीने की 16 तारीख दोपहर की है.

उसे जल्द ही कोई दूसरी नौकरी तलाशनी थी. दिल्ली के एनसीआर गुरुग्राम की नौकरी छोड़े 2 हफ्ते हो गए थे. वह कई दूसरी कंपनियों में अपना रिज्यूम दे चुकी थी, लेकिन कहीं से बुलावे का मेल नहीं आया था. वह पिछले साल 2024 में शादी के बाद गुरुग्राम के पीजी से शिफ्ट हो कर नोएडा में अपने पति शहजाद के साथ रह रही थी. कई बातें दिमाग में उमड़घुमड़ रही थीं. तभी कौल बेल बजने पर उस का ध्यान भंग हो गया. वह बेमन से दरवाजा खोलने के लिए उठ रही थी. तब तक 2-3 बार कौल बेल बज चुकी थी.

दरवाजे की कुंडी खोल कर अपने कमरे में जाने को मुड़ी ही थी कि पीछे से प्यार भरी आवाज आई, ”क्या बात है बेगम साहिबा!  पूछे बगैर कुंडी खोल दी! दरवाजे पर कोई और होता तो..? ऐसी भूल मत किया करो.’’

यह उस के पति शहजाद की आवाज थी, जिस का नईमा ने कोई जवाब नहीं दिया था और कमरे में चली गई थी. पीछेपीछे शहजाद भी आ गया. उस ने पूछा, ”नौकरी का कहीं से बुलावा आया?’’

”अभी नहीं,’’ नईमा उदासी से बोली.

”कोई बात नहीं, चलो जब तक कहीं से कोई बुलावा नहीं आता, तब तक तुम्हें सैर करवाने ले चलता हूं.’’ शहजाद बोला.

”मैं टेंशन में हूं और तुम्हें सैर की सूझ रही है.’’

”थोड़ा घूमोगी तभी तो तुम्हारा मन हलका होगा. आज नहीं तो कल नौकरी मिल ही जाएगी, चिंता क्यों करती हो?’’ शहजाद बोला.

नईमा को पति के बदले रूप पर हैरानी हुई. कुछ देर पहले वह उस से काफी झगड़ कर निकला था. फिर अचानक उस से प्यार जताने लगा, सैर पर जाने के लिए कह रहा है. वह बोली, ”पैसे कहां हैं?’’

”इस की चिंता मत करो…’’ शहजाद के आगे कुछ बोलने से पहले ही पास रखे नईमा के मोबाइल पर मैसेज आने की टोन सुनाई दी. वह यूपीआई द्वारा पैसे आने का मैसेज था.

टोन सुन कर शहजाद फोन की तरफ देखने लगा. वह बोला, ”यह लो, पैसे भी आ गए!’’

”नहींनहीं! इस पर नजर मत डालो. बड़ी मिन्नतों के बाद दीदी ने पैसे भेजे हैं. मेट्रो कार्ड और फोन रिचार्ज करवाना है.’’ नईमा तुनकती हुई बोली और पैसा ट्रांसफर का मैसेज पढऩे लगी.

उस में शहजाद भी झांकने लगा. अंगरेजी में लिखा मैसेज आसानी से नहीं समझ पाया. बैलेंस अमाउंट देखने से पहले ही नईमा ने मोबाइल बंद कर दिया.

”ठीक है मत बताओ, मेरी जेब में पैसे हैं. यह देखो.’’ कहते हुए शहजाद ने जेब से 500 रुपए के नोटों की एक गड्डी निकाल कर दिखा दी.

”इस में पूरे 30 हजार रुपए हैं. चलो, तुम्हें मेरठ घुमा लाता हूं. वहीं कुछ शौपिंग भी करवा दूंगा. बचे पैसे तुम रख लेना.’’

”इतने पैसे कहां से आए. अभी तो तुम्हारे पास एक रुपया नहीं था…सचसच बताना किस से कर्ज लिया है?’’ नईमा बोली.

”तुम बेकार की बातों में मत उलझो. तैयार हो जाओ, हमें जल्दी निकलना है.’’ शहजाद बोला और अपना सामान पैक करने के लिए बैग निकाल लिया.

नईमा शहजाद के इस रूप को देख कर हैरान थी. बातबात पर गालियां बकने और हाथ उठाने वाले में यह बदलाव कैसे आ गया. इस पर अधिक बात न करना ही उस ने मुनासिब समझा. उस की दिली तमन्ना को पूरा करने के लिए वह भी उस के साथ चलने की तैयारी करने लगी.

कुछ घंटे बाद शहजाद और नईम मेरठ के भीड़भाड़ वाले बाजार में थे. वहीं दोनों ने कुछ शौपिंग की. नईमा ने झिझकते हुए अपनी पसंद की एक ड्रैस ली, लेकिन नईम ने उस के लिए एक बुरका भी खरीद लिया. फिर दोनों ने एक साधारण से रेस्टोरेंट में खाना खाया.

वहीं शहजाद की मुलाकात नदीम से हुई. उस का परिचय नईमा से करवाया, ”यह मेरा खास दोस्त है. मुसीबत में मेरा साथ देता है.’’

”अच्छा!’’ नईमा इस से अधिक और कुछ नहीं बोली.

शहजाद उसे रेस्टोरेंट के बाहर तक छोड़ आया.

तब तक शाम घिरने लगी थी. नईम वापस दिल्ली लौटने को बोली. इस पर शहजाद ने अगले रोज लौटने के बारे में बोल कर अपने दोस्त नदीम घर ठहरने का आग्रह किया.

नईमा थकान महसूस कर रही थी. शहजाद के आग्रह को मान लिया. दोनों नदीम के घर की ओर चल पड़े. रास्ते में एक जूस की दुकान दिखी. शहजाद बोला, ”क्यों न एकएक गिलास जूस पी लिया जाए! जूस की यह बहुत फेमस दुकान है. तुम्हारे लिए कौन सा जूस बनवाऊं?’’

”अनार का बनवा लो,’’ वह बोली.

”ठीक है, मैं तो अनानास का लूंगा!’’ शहजाद बोला और जूस की दुकान की ओर चल पड़ा. नईमा थोड़ी दूरी पर खड़ी रही. कुछ मिनटों में ही शहजाद 2 गिलास जूस ले कर नईमा के पास आ गया. दोनों ने अपनीअपनी पसंद का जूस पीया और फिर वहां से चल पड़े. अगले रोज 17 सितंबर, 2025 को मेरठ में जानी थाने की पुलिस को सिवालखास जंगली इलाके में एक महिला की रक्तरंजित लाश मिली. लाश बुरके में थी. पुलिस लावारिस लाश की पहचान के लिए तहकीकात में जुट गई. महिला का गला रेता हुआ था.

इस की स्थिति देख कर पहली नजर में पुलिस ने अनुमान लगाया कि महिला की मौत गला रेतने से हुई होगी. किंतु हो सकता है उस की मौत के और भी कुछ कारण रहे हों. हो सकता है उस का गला घोंटा गया हो या फिर उसे जहर खिलाने के बाद मृत देह का गला रेता गया हो. कारण जो भी हो, वो तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा.  शक्ल और कदकाठी से महिला उत्तर पूर्व की लग रही थी, जिस की उम्र लगभग 35-36 साल थी.

मौत के कारण की जांच के लिए लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उस की रिपोर्ट में गला रेतने से मौत की पुष्टि हुई. किंतु उस की हफ्तों तक पहचान नहीं हो पाई. पुलिस को कोई सुराग भी हाथ नहीं लग रहा था. मेरठ की पुलिस तफ्तीश में जुटी हुई थी.

अचानक 8 अक्तूबर, 2025 को मेरठ पुलिस को एक गुमशुदा की रिपोर्ट पर ध्यान गया. दरअसल, वह रिपोर्ट मुजफ्फरनगर के चरथावल थाने में दर्ज की गई थी. करीब 35 वर्षीया नईमा यासमीन नामक महिला के बारे में बताया गया था कि वह 16 सितंबर से लापता है. गुमशुदमी दर्ज होते ही नईमा यासमीन का फोटो और पूरी डिटेल्स पुलिस के औनलाइन रिकौर्ड पर फीड हो गई. मेरठ पुलिस की नजर जब इस पर गई, तब वह चौंक गई. कारण गुमशुदा महिला की तसवीर 17 सितंबर को बरामद हुई लाश से मिलतीजुलती थी.

मेरठ पुलिस को गुमशुदा की रिपोर्ट से ही शिकायत दर्ज करवाने वाले के बारे में मालूम हो गया. वह पहले चरथावल थाने गई. वहां से रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले का पूरा विवरण ले लिया, जो उस लापता महिला नई यासमीन का पति शहजाद है. उस के ग्राम सैद नगला मुजफ्फरनगर का रहने की पुष्टि हुई. मेरठ पुलिस तुरंत शहजाद के घर गई. पुलिस को देखते ही शहजाद घबरा गया. उस की बौडी लैंग्वेज से पुलिस समझ गई कि जरूर दाल में कुछ काला है. पुलिस ने उसे उस की लापता पत्नी की लाश मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर शहजाद घडिय़ाली आंसू बहाने लगा. फिर पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले गई. थाने में उस से यासमीन की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो शहजाद पुलिस के सवालों के सही जवाब देने से कतराता रहा, किंतु जब पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया, तब  उस ने नईम की हत्या करना कुबूल कर लिया. उस ने यह भी बताया कि इस वारदात को अंजाम देने में उस ने अपने साथी नदीम अंसारी की मदद ली थी. दोनों ने मिल कर यासमीन की हत्या की थी. इस से पहले उस ने यासमीन को जूस में नींद की गोलियां मिला कर दी थीं. उस के बेहोश हो जाने के बाद दोनों उसे घटनास्थल तक ले गए थे.

हत्या के बाद किसी को शक नहीं हो, इसलिए उस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना चरथावल में दर्ज करवाई थी. यह उस तक पुलिस के पहुंचने का कारण बन गया. जांचपड़ताल के बाद जानी थाने की पुलिस ने शहजाद और नदीम को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरी व रस्सी भी बरामद कर ली. इस खुलासे पर एसएसपी डा. विपिन ताडा ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का इनाम दे कर पुरस्कृत किया. शहजाद ने नईम की हत्या करने का जो कारण बताया, इस में उस की मक्कारी, हैवानियत, अपनी पहली बीवी और इसलाम धर्म तक के साथ बेवफाई की हैरान करने वाली दर्दनाक दास्तान थी.

हत्या की शिकार होने वाली नईमा यासमीन और शहजाद एक बेमेल जोड़ा था. उन के बीच कुछ समय के लिए वैचारिक तालमेल बन गए थे और यही उन के बीच प्रेम संबंध और निकाह का कारण भी था. नईम यासमीन जितनी सच्ची और प्रतिभावान और पढ़ीलिखी थी, शहजाद उतना ही उस के उलट था. असम के शहर गुवाहाटी की रहने वाली नईमा ग्रैजुएट थी और दिल्ली एनसीआर में स्थित मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी करती थी. दूसरी तरफ 5वीं तक पढ़ाई करने वाला शहजाद मेरठ की एक मसजिद में इमाम की छोटी से नौकरी करता है. वह शादीशुदा है और 3 बच्चों का बाप भी था. वह सोशल मीडिया का दीवाना था.

साल 2024 में उस की नईमा से औनलाइन जानपहचान हो गई थी. नईमा एनिमल वेलफेयर एनजीओ से भी जुड़ी थी. जानवरों से उसे बेहद लगाव था. साथ ही उस के पास 5-6 बिल्लियां भी थीं. इसी एनजीओ के जरिए साल 2024 में उस की मुलाकात शहजाद से हुई थी. सोशल मीडिया के जरिए दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर धीरेधीरे दोस्ती आगे बढ़ी. शहजाद ने खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का ग्रैजुएट और कारोबारी बता कर नईमा का दिल जीत लिया था. साथ ही उस ने कहा था कि उसे भी बिल्लियों से बहुत प्यार है. उस ने नईमा से वही बातें कीं, जो उसे पसंद थीं.

कैट लवर बन कर शहजाद ने धीरेधीरे नईमा का भरोसा जीत लिया था और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हो गया था. सितंबर 2024 में दोनों ने औनलाइन निकाह भी कर लिया. निकाह के बाद दोनों दिल्ली में साथ रहने लगे, जिस की जानकारी नईमा की बहन को भी थी. नईमा खुश थी और अपने नए जीवन की बातें सिर्फ अपनी बहन के साथ साझा करती थी. निकाह के करीब 3 महीने बाद शहजाद ने नईमा से मुजफ्फरनगर में स्थित अपना पुश्तैनी घर दिखाने के लिए कहा. उस के कहने पर नईमा मुजफ्फरनगर पति के घर पहुंची. वहां उस के सपने टूट गए. खुद को बिजनैसमैन बताने वाला शहजाद बेहद साधारण परिवार से था और एक इमाम की नौकरी करता था. खुद मसजिद के राशन पर पलता था. उस का कोई कारोबार या व्यापार नहीं था. उस ने नईमा को झूठ बताया था.

सब से बड़ा झूठ तो उस ने अपनी शादी को ले कर कहा था. नईमा से उस ने बात छिपा ली थी कि वह पहले से विवाहित और 3 बच्चों का बाप भी है. नईमा को समझते देर नहीं लगी कि शहजाद ने उस से निकाह उस की नौकरी और सैलरी, सेविंग्स के लालच में किया था. इस सच्चाई के खुलते ही नईमा ने शहजाद का विरोध किया. बदले में शहजाद उस के साथ गालीगलौज और मारपीट  पर उतर आया. शहजाद की हकीकत जान कर नईमा यासमीन पूरी तरह टूट गई. उस ने अपना दुखड़ा बहन को सुनाया. अपनी सच्चाई का परदाफाश होते  ही शहजाद का चेहरा भी बदल गया. वह नईमा की सैलरी हड़पने लगा. उस की सारी सेविंग्स भी खत्म कर दी.

नईमा परेशान हो गई. उस ने शहजाद से पहली पत्नी और बच्चों से मिलने से मना किया. यह बात शहजाद को नागवार गुजरी. तब उस ने नईमा को ही रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया.  जिस के लिए उस ने अपने दोस्त नदीम को 12 हजार रुपए दे कर योजना में शामिल कर लिया. योजना के मुताबिक शहजाद 16 सितंबर, 2025 को शौपिंग के बहाने नईमा को मेरठ ले कर आया और रास्ते में उसे जूस में नींद की गोलियां दे कर बेहोश कर दिया. फिर दोनों उसे जंगली इलाके के एक खेत में ले गए. जहां नदीम ने रस्सी से उस का गला दबाया और शहजाद ने छुरे से गले को रेत दिया. फिर दोनों ने लाश को एक बुरके में लपेट कर फेंक दिया. फिर वापस घर लौट आए.

हफ्तों तक वे चुप्पी साधे रहे, लेकिन भीतरभीतर डरे हुए भी थे कि कहीं वे पकड़े न जाएं. इसी भय से शहजाद ने 8 अक्तूबर, 2025 को मुजफ्फरनगर में नईमा यासमीन की गुमशुदगी भी दर्ज करवा दी थी. पुलिस ने आरोपी शहजाद और उस के साथी नदीम से पूछताछ करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Love Story in Hindi