UP Crime: बेटी के प्यार में विलेन बने पापा

UP Crime: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का एक थाना है नौहझील. इस थाना क्षेत्र के गांव अड्डा मीना फिरोजपुर निवासी बदन सिंह उर्फ बलवीर सिंह ने 25 जनवरी, 2023 को अपनी 17 वर्षीय बेटी अनन्या को गांव के ही युवक रामगोपाल उर्फ गोपाल द्वारा भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. रिपोर्ट में बदन सिंह ने आरोप लगाया था कि 22 जनवरी को उन की बेटी अनन्या पशुओं के लिए चारा लेने खेत पर गई थी. उन के गांव का ही रहने वाला रामगोपाल उर्फ गोपाल उन की बेटी को वहां से बहलाफुसला कर अपने साथ भगा ले गया.

पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपी गोपाल को 27 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. लेकिन अनन्या का कोई पता नहीं चल सका. इस के बाद भी पुलिस उस की तलाश में जुटी रही. अनन्या की तलाश में पुलिस ने हर उस जगह दबिश दी, जहां उस के होने की संभावना थी.

मुखबिर ने दी पुलिस को जानकारी

अनन्या की तलाश में जुटी नौहझील पुलिस को मुखबिर ने सूचना दी कि उस की हत्या की जा चुकी है. अब पुलिस के सामने प्रश्न यह था कि अनन्या 22 जनवरी को अपने प्रेमी के साथ गई थी. 25 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 27 जनवरी को रामगोपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया तो उस के जेल जाने के बाद अनन्या की हत्या किस ने, कब और कहां की? पुलिस को यह भी शक हो रहा था कि प्रेमी गोपाल के जेल चले जाने से दुखी अनन्या ने कहीं आत्महत्या तो नहीं कर ली?

लेकिन बाद में मुखबिर ने पुलिस को यह भी सूचना दी कि अनन्या की हत्या उस के पापा बदन सिंह और चाचा ने षडयंत्र के तहत मिल कर की है. वे लोग अब अपने घर पर बेफिक्र हो कर बैठे हुए हैं. मुखबिर से मिली सूचना के बाद पुलिस ने अनन्या के पापा बदन सिंह उर्फ बलवीर व चाचा तेजपाल को थाने बुलाया. उन से पूछताछ की गई.

दोनों ने बताया कि वे पलवल में अनन्या के होने की सूचना पर उस की तलाश में गए थे. लेकिन वहां काफी तलाश करने के बाद भी वह नहीं मिली. इस के बाद वह वापस गांव आ गए. अनन्या के बारे में सही जानकारी रामगोपाल ही दे सकता है. पलवल से वापस आने के बाद गांव वालों को भी दोनों भाइयों ने यही बात बताई कि अनन्या का कोई सुराग नहीं मिला.

पलवल जाने के बाद बंद कर दी तलाश

पुलिस को जांच में पता चला कि अनन्या की तलाश में घर वाले पलवल गए जरूर थे, लेकिन इस के बाद उन्होंने उस की तलाश बंद कर दी है. इस जानकारी के मिलने के बाद एसएचओ धर्मेंद्र भाटी ने बलवीर व तेजपाल दोनों की कल डिटेल्स निकलवाई, जिस से हत्या का राज खुल गया. सबूत मिलने के बाद दोनों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. जब पुलिस ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो वे अपने गुनाह को ज्यादा देर तक छिपा नहीं सके. दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

दोनों ने बताया कि उन्होंने अनन्या की हत्या कर लाश अलीगढ़ की शिवाला नहर में फेंक दिया था. इस संबंध में पुलिस ने तहकीकात की तो पता चला कि अलीगढ़ जिले के थाना गोंडा पुलिस ने 31 जनवरी, 2023 को एक लडक़ी का शव बरामद किया था. पुलिस दोनों को थाना गोंडा ले गई. वहां लाश के फोटो और कपड़ों के आधार पर अनन्या के रूप में कर ली. इस के बाद उन्होंने अनन्या की हत्या किए जाने की बेहद चौंकाने वाली कहानी बताई—

अनन्या ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था कि उसी दौरान उस की मुलाकात रामगोपाल से हुई. उसी के गांव का रहने वाला 22 वर्षीय रामगोपाल उर्फ गोपाल एक निजी टेलीकाम कंपनी में काम करता है. गांव में आतेजाते समय अनन्या और रामगोपाल की नजरें अकसर मिल जातीं. अनन्या मुसकरा कर नजरें झुका लेती. गोपाल को अनन्या की यह अदा भा गई. उस दिन के बाद से दोनों जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, उन के दिलों को चैन नहीं मिलता था.

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दोनों के बीच हुई दोस्ती

दोनों के बीच मौन प्यार चल रहा था. रामगोपाल को अनन्या ने अपने मौन प्यार के बंधन में पूरी तरह बांध लिया था. आखिर एक दिन जब रास्ते में जाते हुए अनन्या मिली तो मौका देख कर रामगोपाल ने चुप्पी तोड़ी, ‘‘अनन्या, तुम मुझ से बात क्यों नहीं करती?’’

“तुम ही कौन सा मुझ से बात करते हो.’’ अनन्या ने जवाब दिया. यह सुन कर गोपाल निरुत्तर हो गया. कुछ पल बाद वह बोला, ‘‘अनन्या, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. क्या मुझ से दोस्ती करोगी?’’

“करूंगी, जरूर करूंगी,’’ कहते हुए वह तेजी से कदम बढ़ाते हुए अपने घर की ओर चली गई. उस दिन के बाद से दोनों चोरीचोरी मिल लेते थे. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए. अब दोनों घंटों तक एकदूसरे से बतियाते, अपने भविष्य के सुखद सपने संजोते हैं. रामगोपाल और अनन्या जमाने की सोच की परवाह किए बिना अपने प्यार की पींगें बढ़ाने में लगे हुए थे.

कहते हैं प्यार को चाहे लाख छिपाने की कोशिश की जाए, लेकिन वह उजागर हो ही जाता है. गांव के लोगों ने दोनों को एक साथ देख लिया. इस के बाद तो दोनों के घर वालोयं को उन के प्रेमप्रसंग के बारे में पता चल गया. अनन्या के घर वालों ने इस का विरोध किया. लेकिन अनन्या ने अपने घर वालों से साफ कह दिया कि रामगोपाल और वह एकदूसरे को प्यार करतेे हैं. वह उस के साथ शादी करेगी. बेटी की इस बेबाकी पर घर वाले सन्न रह गए. उन्होंने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं मानी.

तब घर वालों ने उस के रामगोपाल से मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी. पर अनन्या इस के बाद भी प्रेमी से फोन पर बातें करती रहती थी. अनन्या दिन और रात में अपने प्रेमी रामगोपाल उर्फ गोपाल से बात करती थी. इस की भनक अनन्या की दादी को लग गई. इस पर घटना से 2 महीने पहले दादी ने अनन्या से उस का फोन छीन लिया था. अनन्या तभी से फोन के लिए घर में झगड़ा करती रहती थी. उस के तेवर बगावती हो गए थे. उस ने अपने मम्मीपापा से साफ कह दिया था कि वह रामगोपाल के साथ ही शादी करेगी अन्यथा अपनी जान दे देगी.

प्रेमी के साथ भाग गई

22 जनवरी, 2023 को जब घर वाले गहरी नींद में सोए हुए थे, अनन्या सुबह के समय घर से अपने प्रेमी रामगोपाल के साथ भाग गई. दोनों ने एक दिन पहले ही भागने की योजना बना ली थी. इस बात का दोनों के घरवालों को पता नहीं चल सका था. अनन्या के घरवालों को बेटी के इस तरह घर से भाग जाना बेहद नागवार गुजरा. अनन्या के चले जाने पर घर वाले परेशान हो गए. अनन्या के प्रेमी के साथ भाग जाने की खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई. समाज में उन का सिर शर्म से झुक गया. उन्होंने अनन्या को काफी तलाशा, इस बीच उन्हें जानकारी मिली कि अनन्या अपने प्रेमी रामगोपाल के साथ पलवल चली गई है.

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एसएचओ धर्मेंद्र भाटी व एसआई मनोज चौधरी ने बताया कि अनन्या गोपाल के साथ ही शादी करने की जिद पर अड़ी थी. जबकि इस के लिए उस के घरवाले राजी नहीं थे. अनन्या के घर से भाग जाने की घटना ने आग में घी का काम किया. उस के पापा बदन सिंह उर्फ बलवीर सिंह का खून खौल उठा, क्योंकि उन का गांव में निकलना मुश्किल हो गया.

अनन्या के गायब होने के बाद जहां पुलिस उसे तलाश रही थी, वहीं घर वाले भी उस की तलाश में जुटे थे. पिता बदन सिंह को जानकारी मिली कि अनन्या हरियाणा के पलवल में मौजूद है. इस जानकारी पर बदन सिंह अपने छोटे भाई तेजपाल सिंह के साथ पलवल जा पहुंचा. दोनों ने अनन्या को ढूंढ लिया. लेकिन वह उन के साथ आने को तैयार नहीं हुई. आखिर गोपाल से शादी कराने की बात पर वह उन के साथ घर आने को तैयार हो गई.

झूठी आन की खातिर पिता बना हत्यारा

अनन्या को उस के पापा व चाचा बाइक पर बैठा कर टप्पल-जट्ïटारी मार्ग से होते हुए अलीगढ़ जिले के थाना खैर क्षेत्र में स्थित शिवाला नहर के पास पहुंचे. यहां दोनों भाइयों ने बाइक रोक ली. सुस्ताने के बहाने वे सब नहर किनारे बैठ गए. वहां पर पिता व चाचा ने अनन्या को एक बार फिर समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह रामगोपाल से शादी की बात पर अड़ी रही.

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फिर लोकलाज और समाज में अपनी इज्जत के डर से बदन सिंह ने अपने भाई तेजपाल की मदद से अनन्या का गला घोंट कर हत्या कर दी और शव नहर में फेंक दिया. नहर के गहरे पानी में वह डूब गई. यानी एक पिता ने ही बेटी की हत्या कर दी. दोनों भाई अनन्या को नहर में फेंक कर अपने गांव लौट आए. गांव में पूछने पर दोनों ने बताया कि उन्हें अनन्या का कोई सुराग नहीं मिला. इसलिए वे वापस आ गए. जबकि हकीकत यह थी कि दोनों ने उस की हत्या कर दी थी.

एसएचओ धर्मेंद्र भाटी के अनुसार, घर वालों ने अनन्या को 22 जनवरी को ही पलवल (हरियाणा) से बरामद कर लिया था. उसी दिन उन्होंने उस की हत्या कर लाश नहर में फेंक दी थी. इस घटना के 3 दिन बाद बदन सिंह ने प्रेमी रामगोपाल के खिलाफ बेटी को भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा उसे जेल भिजवा दिया था.

शव 15 किलोमीटर बह कर पहुंचा गोंडा क्षेत्र में

उधर अनन्या की लाश नहर में बहते हुए 15 किलोमीटर दूर अलीगढ़ जिले के थाना गोंडा क्षेत्र में पहुंच गई. नहर में एक युवती का शव मिलने की सूचना पर वहां की पुलिस ने गोताखोरों की मदद से शव को नहर से बाहर निकाला.

चूँकि शव नहर में कहीं से बह कर आया था, इस के चलते उस की पहचान नहीं हो सकी. पुलिस यह पता लगाने में जुट गई कि युवती ने आत्महत्या की है या यह औनर किलिंग का मामला तो नहीं है? थाना गोंडा पुलिस ने शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था.

पुलिस ने 72 घंटे इंतजार किया. लेकिन युवती की शिनाख्त नहीं हो सकी. इस पर उस का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस ने युवती के फोटो कराने के साथ ही उस के कपड़ों को सुरक्षित रख लिया था. इस के साथ ही आसपास के थानों से संपर्क किया. तब अनन्या की लाश मिलने की बात पुलिस के संज्ञान में आई.

बेटी के प्रेमप्रसंग में विलेन बना बाप

मोहब्बत के दुश्मन बने बलवीर सिंह ने अपनी बेटी अनन्या को बहलाफुसला कर भगा ले जाने की रिपोर्ट अनन्या के प्रेमी रामगोपाल के खिलाफ दर्ज कराई थी, वह अब भी इस आरोप में जेल में बंद है. अभी उस की जमानत नहीं हुई है.बेटी के प्रेम प्रसंग में हत्या कर के विलेन बने उस के पापा व चाचा यही सोच रहे थे कि उन की इस साजिश का किसी को पता ही नहीं चलेगा, लेकिन यह उस की भूल थी.

पुलिस ने अनन्या की हत्या की गुत्थी को सुलझा कर पिता बलवीर सिंह व चाचा तेजपाल सिंह को अनन्या की हत्या करने व सबूतों को छिपाने के आरोप में 21 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयोग की गई बाइक को भी बरामद कर ली. दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया.

अपराध करने वाला अपने आप को अपराध करते समय चाहे कितना भी होशियार समझे, लेकिन अंत में वह पकड़ा जरूर जाता है. झूठी आन की खातिर एक पिता ही अपनी बेटी का कातिल बन गया और एक प्रेमकहानी का दर्दनांक अंत हो गया. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में अनन्या नाम परिवर्तित है.

Love Story: बहन का प्यार – यार बना गद्दार

Love Story: निश्चित जगह पर पहुंच कर अखिलेश उर्फ चंचल को प्रियंका दिखाई नहीं दी तो वह बेचैन हो उठा. उस बेचैनी में वह इधरउधर  टहलने लगा. काफी देर हो गई और प्रियंका नहीं आई तो वह निराश होने लगा. वह घर जाने के बारे में सोच रहा था कि प्रियंका उसे आती दिखाई दे गई. उसे देख कर उस का चेहरा खुशी से खिल उठा. प्रियंका के पास आते ही वह नाराजगी से बोला, ‘‘इतनी देर क्यों कर दी प्रियंका. मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. अच्छा हुआ तुम आ गईं, वरना मैं तो निराश हो कर घर जाने वाला था.

‘‘जब प्यार किया है तो इंतजार करना ही पड़ेगा. मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं कि जब मन हुआ, आ गई. लड़कियों को घर से बाहर निकलने के लिए 50 बहाने बनाने पड़ते हैं.’’ प्रियंका ने तुनक कर कहा.

‘‘कोई बात नहीं, तुम्हारे लिए तो मैं कईकई दिनों तक इंतजार करते हुए बैठा रह सकता हूं. क्योंकि मैं दिल के हाथों मजबूर हूं,’’ अखिलेश ने कहा, ‘‘प्रियंका, मैं चाहता हूं कि तुम आज कालेज की छुट्टी करो. चलो, हम सिनेमा देखने चलते हैं.’’

प्रियंका तैयार हो गई तो अखिलेश पहले उसे एक रेस्टोरेंट में ले गया. नाश्ता करने के बाद दोनों सिनेमा देखने चले गए.

सिनेमा देखते हुए अखिलेश छेड़छाड़ करने लगा तो प्रियंका ने कहा, ‘‘दिनोंदिन तुम्हारी शरारतें बढ़ती ही जा रही हैं. शादी हो जाने दो, तब देखती हूं तुम कितनी शरारत करते हो.’’

‘‘शादी नहीं हुई, तब तो इस तरह धमका रही हो. शादी के बाद न जाने क्या करोगी. अब तो मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अखिलेश ने कान पकड़ते हुए कहा.

‘‘अब मुझ से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है. शादी तो मैं तुम्हीं से करूंगी.’’ प्रियंका ने कहा.

‘‘फिर तो मुझे यही गाना पड़ेगा कि ‘शादी कर के फंस गया यार.’’’ अखिलेश ने कहा तो प्रियंका हंसने लगी.

प्रियंका उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर के थाना सदर बाजार के मोहल्ला बाड़ूजई प्रथम के रहने वाले चंद्रप्रकाश सक्सेना की बेटी थी. वह ओसीएफ में दरजी थे. उन के परिवार में प्रियंका के अलावा पत्नी सुखदेवी, 2 बेटे संतोष, विपिन तथा एक अन्य बेटी कीर्ति थी. बड़े बेटे संतेष की शादी हो चुकी थी. वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ दिल्ली में रहता था.

कीर्ति की भी शादी शाहजहांपुर के ही मोहल्ला तारोवाला बाग के रहने वाले राजीव से हुई थी. वह अपनी ससुराल में आराम से रह रही थी. गै्रजएुशन कर के विपिन ने मोबाइल एसेसरीज की दुकान खोल ली थी. जबकि प्रियंका अभी पढ़ रही थी. प्रियंका घर में सब से छोटी थी, इसलिए पूरे घर की लाडली थी. विपिन तो उसे जान से चाहता था.

प्रियंका बहुत सुंदर तो नहीं थी, लेकिन इतना खराब भी नहीं थी कि कोई उसे देख कर मुंह मोड़ ले. फिर जवानी में तो वैसे भी हर लड़की सुंदर लगने लगती है. इसलिए जवान होने पर साधारण रूपरंग वाली प्रियंका को भी आतेजाते उस के हमउम्र लड़के चाहत भरी नजरों से ताकने लगे थे. उन्हीं में एक था उसी के भाई के साथ मोबाइल एसेसरीज का धंधा करने वाला अखिलेश यादव उर्फ चंचल.

अखिलेश उर्फ चंचल शाहजहांपुर के ही मोहल्ला लालातेली बजरिया के रहने वाले भगवानदीन यादव का बेटा था. भगवानदीन के परिवार में पत्नी सुशीला देवी के अतिरिक्त 3 बेटे मुनीश्वर उर्फ रवि, अखिलेश उर्फ चंचल, नीलू और 2 बेटियां नीलम और कल्पना थीं. अखिलेश उस का दूसरे नंबर का बेटा था. भगवानदीन यादव कभी जिले का काफी चर्चित बदमाश था. उस की और उस के साथी रामकुमार की शहर में तूती बोलती थी.

रामकुमार की हत्या कर दी गई तो अकेला पड़ जाने की वजह से भगवानदीन ने बदमाशी से तौबा कर लिया और अपने परिवार के साथ शांति से रहने लगा. लेकिन सन 2002 में उस के सब से छोटे बेटे नीलू की बीमारी से मौत हुई तो वह इस सदमे को बरदाश्त नहीं कर सका और कुछ दिनों बाद उस की भी हार्टअटैक से मौत हो गई.

बड़ी बेटी नीलम का विवाह हो चुका था. पिता की मौत के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी बड़े बेटे रवि ने संभाल ली थी. वह ठेकेदारी करने लगा था. हाईस्कूल पास कर के अखिलेश ने भी पढ़ाई छोड़ दी और मोबाइल एसेसरीज का धंधा कर लिया. एक ही व्यवसाय से जुड़े होने की वजह से कभी विपिन और अखिलेश की बाजार में मुलाकात हुई तो दोनों में दोस्ती हो गई थी.

दोस्ती होने के बाद कभी अखिलेश विपिन के घर आया तो उस की बहन प्रियंका को देख कर उस पर उस का दिल आ गया. फिर तो वह प्रियंका को देखने के चक्कर में अकसर उस के घर आने लगा. कहने को वह आता तो था विपिन से मिलने, लेकिन वह तभी उस के घर आता था, जब वह घर में नहीं होता था. ऐसे में भाई का दोस्त होने की वजह से उस की सेवासत्कार प्रियंका को करनी पड़ती थी. उसी बीच वह प्रियंका के नजदीक आने की कोशिश करता.

उस के लगातार आने की वजह से विपिन से उस की दोस्ती गहरी हो ही गई, प्रियंका से भी उस की नजदीकी बढ़ गई. इस के बाद विपिन और अखिलेश ने मिल कर मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली एक नामी कंपनी की एजेंसी ले ली तो उन का कारोबार भी बढ़ गया और याराना भी. इस से उन का एकदूसरे के घर आनाजान ही नहीं हो गया, बल्कि अब साथसाथ खानापीना भी होने लगा था.

अब अखिलेश को प्रियंका के साथ समय बिताने का समय ज्यादा से ज्यादा मिलने लगा था. उस ने इस का फायदा उठाया. उसे अपने आकर्षण में ही नहीं बांध लिया, बल्कि उस से शारीरिक संबंध भी बना लिए. वह विपिन की अनुपस्थिति का पूरा फायदा उठाने लगा. विपिन के चले जाने के बाद केवल मां ही घर पर रहती थी. वह घर के कामों में व्यस्त रहती थी. फिर उसे बेटी पर ही नहीं, बेटे के दोस्त पर भी विश्वास था, इसलिए उस ने कभी ध्यान ही नहीं दिया कि वे दोनों क्या कर रहे हैं.

प्रियंका अपने भाई और परिवार को धोखा दे रही थी तो अखिलेश अपने दोस्त के साथ विश्वासघात कर रहा था. वह भी ऐसा दोस्त, जो उस पर आंख मूंद कर विश्वास करता था. उसे भाई से बढ़ कर मानता था. प्रियंका और अखिलेश क्या कर रहे हैं, किसी को कानोकान खबर नहीं थी. जबकि जो कुछ भी हो रहा था, वह सब घर में ही सब की नाक के नीचे हो रहा था.

संतोष की पत्नी प्रीति को बच्चा होने वाला था, इसलिए संतोष ने प्रीति को शाहजहांपुर भेज दिया. डिलीवरी की तारीख नजदीक आ गई तो उसे जिला अस्पताल में भरती करा दिया गया. प्रीति के अस्पताल में भरती होने की वजह से विपिन और उस की मां का ज्यादा समय अस्पताल में बीतता था.

छुट्टी न मिल पाने की वजह से संतोष नहीं आ सका था. उस स्थिति में प्रियंका को घर में अकेली रहना पड़ रहा था. विपिन को अखिलेश पर पूरा विश्वास था, इसलिए प्रियंका और घर की जिम्मेदारी उस ने उस पर सौंप दी थी. अखिलेश और प्रियंका को इस से मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई थी. जब तक प्रीति अस्पताल में रही, दोनों दिनरात एकदूसरे की बांहों में डूबे रहे.

26 फरवरी, 2014 को प्रीति को जिला अस्पताल में बेटा पैदा हुआ था. खुशी के इस मौके पर अखिलेश ने 315 बोर के 2 तमंचे और 10 कारतूस ला कर विपिन को दिए थे. भतीजा पैदा होने पर दोनों ने उन तमंचों से एकएक फायर भी किए थे. बाकी 8 कारतूस और दोनों तमंचे अखिलेश ने विपिन से यह कह कर उस के घर रखवा दिए थे कि भतीजे के नामकरण संस्कार पर काम आएंगे. विपिन ने दोनों तमंचे और कारतूस अपने कमरे में बैड पर गद्दे के नीचे छिपा कर रख दिए थे.

विपिन पुलिस में भरती होना चाहता था, इसलिए रोजाना सुबह 5 बजे उठ कर जिम जाता था. वहां से वह 9 बजे के आसपास लौटता था. कभीकभी उसे देर भी हो जाती थी. 23 मार्च को विपिन 9 बजे के आसपास घर लौटा तो मां नीचे बरामदे में बैठी आराम कर रही थीं. भाभी प्रीति बच्चे के साथ सामने वाले कमरे में लेटी थी. उस ने कपड़े बदले और ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में सोने के लिए चला गया.

विपिन ने दरवाजे को धक्का दिया तो पता चला वह अंदर से बंद है. इस का मतलब अंदर कोई था. उस ने आवाज दी, लेकिन अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उस ने पूरी ताकत से दरवाजे पर लात मारी तो अंदर लगी सिटकनी उखड़ गई और दरवाजा खुल गया. अंदर अखिलेश और प्रियंका खड़े थे. दोनों की हालत देख कर विपिन को समझते देर नहीं लगी कि अंदर क्या कर रहे थे. उन के कपड़े अस्तव्यस्त थे और वे काफी घबराए हुए थे.

विपिन के कमरे में घुसते ही प्रियंका निकल कर नीचे की ओर भागी. विपिन का खून खौल उठा था. उस ने गुस्से में अखिलेश को एक जोरदार थप्पड़ जड़ते हुए कहा, ‘‘तुझे मैं दोस्त नहीं, भाई मानता था. मैं तुझ पर कितना विश्वास करता था और तूने क्या किया? जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया.’’

‘‘भाई, मैं प्रियंका से सच्चा प्यार करता हूं और उसी से शादी करूंगा.’’ अखिलेश ने कहा, ‘‘वह मुझ से शादी को तैयार है.’’

‘‘तुम दोनों को पता था कि हमारी जाति एक नहीं है तो यह कैसे सोच लिया कि तुम्हारी शादी हो जाएगी?’’ विपिन गुस्से से बोला, ‘‘तुम ने जो किया, ठीक नहीं किया. मेरी इज्जत पर तुम ने जो हाथ डाला है, उस की सजा तो तुम्हें भोगनी ही होगी.’’

अखिलेश को लगा कि उसे जान का खतरा है तो उस ने जेब से 315 बोर का तमंचा निकाल लिया. वह गोली चलाता, उस के पहले ही विपिन ने उस के हाथ पर इतने जोर से झटका मारा कि तमंचा छूट कर जमीन पर गिर गया. अखिलेश ने तमंचा उठाना चाहा, लेकिन विपिन ने फर्श पर पड़े तमंचे को अपने पैर से दबा लिया.

अखिलेश कुछ कर पाता, विपिन ने बैड पर गद्दे के नीचे रखे दोनों तमंचे और आठों कारतूस निकाल कर उस में से एक तमंचा जेब में डाल लिया और दूसरे में गोली भर कर अखिलेश पर चला दिया. गोली अखिलेश के सीने में लगी. वह जमीन पर गिर गया तो विपिन ने एक गोली उस के बाएं हाथ और एक पेट में मारी. 3 गोलियां लगने से अखिलेश की तुरंत मौत हो गई.

अखिलेश का खेल खत्म कर विपिन नीचे आ गया. प्रियंका बरामदे में दुबकी खड़ी थी. उस के पास जा कर उस ने पूछा, ‘‘मैं ने सही किया या गलत?’’

प्रियंका ने जैसे ही कहा, ‘‘गलत किया.’’ विपिन ने उस की कनपटी पर तमंचे की नाल रख कर ट्रिगर दबा दिया. प्रियंका कटे पेड़ की तरह फर्श पर गिर पड़ी. इस के बाद उस ने एक गोली और चलाई, जो प्रियंका के सीने में बाईं ओर लगी. प्रियंका की भी मौत हो गई. प्रियंका को खून से लथपथ देख कर उस की मां और भाभी बेहोश हो गईं.

अखिलेश और प्रियंका की हत्या कर विपिन घर से बाहर निकला तो सामने पड़ोसी सचिन पड़ गया. सचिन से उस की पुरानी खुन्नस थी. उस ने उस की ओर तमंचा तान दिया. विपिन का इरादा भांप कर सचिन अपने घर के अंदर भागा. विपिन भी पीछेपीछे उस के घर में घुस गया. सचिन कहीं छिपता, विपिन ने उस पर भी गोली चला दी. गोली उस की कमर में लगी, जिस से वह भी फर्श पर गिर पड़ा.

सचिन के घर से निकल कर विपिन अपने एक अन्य दुश्मन सतीश के घर में घुस कर 2 गोलियां चलाईं. लेकिन ये गोलियां किसी को लगी नहीं. अब तक शोर और गोलियों के चलने की आवाज सुन कर आसपड़ोस वाले इकट्ठा हो गए थे. लेकिन विपिन के हाथ में तमंचा देख कर कोई उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं कर सका. इसलिए विपिन एआरटीओ वाली गली में घुस कर आराम से फरार हो गया.

किसी ने कोतवाली सदर बाजार पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी थी. चंद मिनटों में ही कोतवाली इंसपेक्टर यतेंद्र भारद्वाज पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. इस के बाद उन की सूचना पर पुलिस अधीक्षक राकेशचंद्र साहू, अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) ए.पी. सिंह, फोरेंसिक टीम और डाग स्क्वायड की टीम भी वहां आ गई थी.

पुलिस तो आ गई, लेकिन अपनी नौकरी पर गए चंद्रप्रकाश को किसी ने इस बात की सूचना नहीं दी. काफी देर बाद सूचना पा कर वह घर आए तो बेटी की लाश देख कर बेहोश हो गए. एक ओर बेटी की लाश पड़ी थी तो दूसरी ओर उस की और उस के प्रेमी की हत्या के आरोप में बेटा फरार था.

सचिन की हालत गंभीर थी. इसलिए पुलिस ने उसे तुरंत सरकारी अस्पताल भिजवाया. उस की हालत को देखते हुए सरकारी अस्पताल के डाक्टरों ने उसे कनौजिया ट्रामा सेंटर ले जाने को कहा. लेकिन वहां भी उस की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. तब उसे वसीम अस्पताल ले जाया गया. डा. वसीम ने उस का औपरेशन कर के फेफड़े के पार झिल्ली में फंसी गोली निकाली. इस के बाद उस की हालत में कुछ सुधार हुआ.

फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य उठा लिए. डाग स्क्वायड टीम ने खोजी कुतिया लूसी को छोड़ा. वह विपिन के घर से निकल कर सतीश के घर तक गई, जहां विपिन ने 2 गोलियां चलाई थीं. घटनास्थल के निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों को समझते देर नहीं लगी कि मामला अवैध संबंधों में हत्या का यानी औनर किलिंग का है.

पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद थाने आ कर इंसपेक्टर यतेंद्र भारद्वाज ने अखिलेश के बड़े भाई मुनीश्वर यादव की ओर से विपिन सक्सेना के खिलाफ अखिलेश और प्रियंका की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के बाद विपिन की तलाश शुरू हुई.

26 मार्च की सुबह पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर विपिन को पुवायां रोड पर चिनौर से पहले हाइड्रिल पुलिया के पास से गिरफ्तार कर लिया. उस समय वह अपने चचेरे भइयों सुशील और लल्ला के पास चिनौर जा रहा था. कोतवाली ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

पूछताछ में विपिन ने पुलिस को बताया कि जिस यार को मैं भाई की तरह मानता था, उस ने मेरी इज्जत पर हाथ डाला तो मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं ने उस का खून कर दिया. घटना को अंजाम देने के बाद वह एआरटीओ वाली गली के पास से निकल रहे नाले में अखिलेश से छीना तमंचा और अपनी खून से सनी टीशर्ट निकाल कर फेंक दी थी.

खाली बनियान और जींस पहने हुए वह एआरटीओ गली से रोडवेड बसस्टैंड पहुंचा. यहां से उस ने निगोही जाने के लिए सौ रुपए में एक आटो किया. निगोही जाते समय रास्ते में उस ने दूसरा तमंचा फेंक दिया. निगोही से वह प्राइवेट बस से बरेली पहुंचा. बरेली में उस ने नई टीशर्ट खरीद कर पहनी. पूरे दिन वह इधरउधर घूमता रहा. रात को उस ने बरेली रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने के लिए टे्रन पकड़ ली.

दिल्ली में विपिन बड़े भाई संतोष के यहां गया. उसे उस ने पूरी बात बताई. संतोष को पता चल गया कि प्रियंका मर चुकी है, फिर भी वह उस के अंतिम संस्कार में शाहजहांपुर नहीं गया. संतोष को जब पता चला कि पुलिस विपिन की गिरफ्तारी के लिए घर वालों तथा रिश्तेदारों को परेशान कर रही है तो उस ने उसे घर भेज दिया.

26 मार्च को विपिन अपने चचेरे भाइयों के पास चिनौर जा रहा था, तभी पुलिस ने मुखबिरों से मिली सूचना पर गिरफ्तार कर लिया था. उस समय भी उस के पास एक तमंचा था.

पूछताछ में विपिन ने बताया था कि उस के पास कारतूस नहीं बचे थे. अगर कारतूस बचा होता तो वह खुद को भी गोली मार लेता. कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के पुलिस ने विपिन को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Agra Crime: मोहब्बत पर पहरा कहां तक वाजिब

Agra Crime: अंशू और अनुराग एकदूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे और शादी करना चाहते थे. लेकिन अंशू के पापा रिटायर्ड दारोगा रनवीर सिंह यादव गांव के नाते से अनुराग से भतीजे का रिश्ता जोड़ बैठा था. उस ने शादी की इजाजत नहीं दी. बल्कि अपनी झूठी शान की खातिर ऐसा अपराध कर बैठा कि…

प्यार का रंग हलका हो या गाढ़ा, यह एक बार जिस पर चढ़ जाता है, अपना असर आसानी से नहीं छोड़ता. आगरा के थाना मलपुरा की विनायक गार्डन कालोनी में रहने वाली 34 वर्षीय अंशू अपने गांव के 32 वर्षीय अनुराग यादव से प्यार करती थी. फेमिली वालों के ज्यादा अंकुश लगाने का नतीजा यह हुआ कि प्रेमी युगल पर प्यार का ऐसा खुमार चढ़ा कि उन्होंने जान की बाजी लगा कर हर हालत में शादी करने का फैसला ले लिया. अंशू के फेमिली वालों ने उसे काफी समझाया और प्रेमी अनुराग से मिलने और मोबाइल पर बात न करने की कड़ी हिदायत दी. ऐसा न करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई.

फेमिली वाले चाहते थे कि अंशू अपने दिल से अनुराग को पूरी तरह भुला दे, ताकि वह उस की शादी किसी दूसरी जगह कर दें. फेमिली वालों का मानना था कि गांव के रिश्ते के भतीजे से शादी करने से उन की गांव व समाज में बहुत बदनामी होगी. इस के साथ ही अन्य बेटेबेटियों की शादी में अड़चन आएगी. फेमिली वालों के लाख समझाने के बाद भी अंशू ने उन से साफ कह दिया कि वे लोग बचपन से ही एकदूसरे से प्यार करते हैं और वह अनुराग के साथ ही शादी करेगी. बेटी की जिद के आगे परिजनों की एक न चली. जबकि दोनों ही सजातीय थे.

अंशू के पापा रनवीर सिंह यादव (रिटायर्ड दरोगा) गांव के नाते बेवजह अनुराग से भतीजे का रिश्ता जोड़े बैठे थे. भतीजे से प्रेम सबंधों से वह बेटी से बेहद नाराज थे. दोनों के लव अफेयर के चलते रनवीर सिंह यादव से विवाद भी हुआ. इस के बाद अंशू को अपने ही फेमिली वालों से अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा. इसलिए अंशू ने 24 अक्तूबर, 2025 की रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर अपने प्यार का सार्वजनिक रूप से इजहार कर दिया. इस की जानकारी प्रेमी अनुराग को भी मोबाइल पर दे दी.

एक ही गांव व जाति के होने के कारण अंशू यादव के फेमिली वाले अनुराग यादव को रिश्ते का भतीजा मानते थे, जबकि उन का दूरदूर तक का संबंध नहीं था. अनुराग से प्रेम प्रसंग और उस से शादी करने की बात सार्वजनिक होने से पिता रनवीर सिंह व उन के फेमिली वालों को बेटी की यह करतूत नागवार गुजरी. इस बात ने आग में घी का काम किया. अब बदनामी से बचने का उन्हें एक ही उपाय सूझा कि बेटी अंशू की हत्या कर दी जाए. रनवीर सिंह यादव ने बेटी अंशू की हत्या की प्लानिंग पत्नी सुधा, बेटे गौरव व अन्य परिजनों व रिश्तेदारों के साथ मिल कर बनाई.

25 अक्तूबर, 2025 की सुबह अंशू अपने कमरे में थी. कुछ देर पहले ही उस की गुपचुप तरीके से प्रेमी अनुराग से मोबाइल पर बात हुई थी. अंशू अपने बिस्तर से उठती, इस से पहले ही उस के कमरे में पापा रनवीर सिंह घुस आए. उन्होंने फुरती से बिस्तर पर लेटी बेटी अंशू को दबोच लिया, जबकि मम्मी सुधा ने बेटी के पैर पकड़ लिए. रनवीर सिंह ने उसी के दुपट्टे से उस का गला कस दिया. इस बीच अंशू की चीख सुन कर छोटा भाई लकी कमरे में आया तो उसे रनवीर सिह ने डांट कर भगा दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद अंशू की मौत हो गई.

अंशू की हत्या करने के बाद रनवीर सिंह ने टूंडला में रहने वाले अपने बड़े बेटे गौरव यादव, जो प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता है, को फोन कर बताया कि हम ने अपना काम कर दिया है. अब लाश को ठिकाने लगाने का काम तुम्हें करना है. जानकारी मिलते ही गौरव आगरा की विनायक गार्डन कालोनी आ गया और दोपहर के समय अपनी कार की डिक्की में अंशू की डैडबौडी को डाल कर मम्मीपापा के साथ लाश को ठिकाने लगा आया. अंशू यादव का हत्यारा पिता रिटायर्ड दारोगा रनवीर सिंह यादव मूलरूप से फिरोजाबाद जिले के थाना जसराना के नगला अवाजी का रहने वाला है. कांस्टेबल के पद पर उत्तर प्रदेश पुलिस में भरती होने के बाद रनवीर सिंह की तैनाती कई सालों से आगरा जिले में थी.

देहात क्षेत्रों के थानों में कई सालों तक रहा. हैडकांस्टेबल के रूप में खेरागढ़ थाने में कई वर्ष गुजारे और वहीं उसे दारोगा पद पर प्रमोशन मिला. रिटायर्ड होने के बाद वह आगरा में ही ग्वालियर रोड रोहता स्थित विनायक गार्डन कालोनी में रहने लगा. उस के 5 बच्चे हैं. इन में 3 बेटियां और 2 बेटे थे. अंशू यादव दूसरे नंबर की थी. रनवीर सिंह यादव ने बेटी की हत्या करने व उस की लाश को ठिकाने के बाद पुलिसिया तौरतरीकों का भरपूर इस्तेमाल किया.

अंशू की हत्या करने और लाश को ठिकाने लगाने के 37 दिन बाद पुलिस को गुमराह करने व स्वयं को बचाने के लिए आगरा के थाना मलपुरा में 30 नवंबर, 2025 को बेटी अंशू की गुमशुदगी दर्ज करा दी, जिस में कहा गया था कि 30 अक्तूबर की शाम 5 बजे उन की बेटी अंशू बिना बताए घर से कहीं चली गई है. अंशू की गुमशुदगी की सूचना दर्ज होने के बाद पुलिस उस की तलाश में जुट गई. यहां तक कि उस के पैंफ्लेट भी चस्पा करा दिए. अंशू को मौत के घाट उतारने के बाद दारोगा और उस की पत्नी सुधा सहित फेमिली के अन्य सदस्य सामान्य दिख रहे थे. गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद घर के सभी लोग पड़ोसियों के सामने परेशान दिखने का नाटक करते रहे.

आरोपी इतने शातिर थे कि हत्या के बाद मृतका अंशू का भाई गौरव मोहल्ले मेें लगे सीसीटीवी के बारे में जानकारी जुटाने लगा. उस ने पड़ोस में लगे सीसीटीवी की फुटेज के बारे में पता किया कि डेटा कितने दिन स्टोर रहता है, ताकि थाने में अगर गुमशुदगी दर्ज कराएं तो सबूत न मिल सके.

उधर अंशू का प्रेमी अनुराग 25 अक्तूबर, 2025 की सुबह से ही परेशान था. बात यह थी कि 25 अक्तूबर को सुबह उस की अंशू से मोबाइल पर बात हुई थी. अंशू ने अनुराग को बताया था कि कुछ गड़बड़ है. फेमिली वाले मेरी हत्या करना चाहते हैं. तुम मुझे बचा सको तो बचा लो. इस के बाद अंशू का मोबाइल स्विच्ड औफ हो गया. परेशान अनुराग ने अंशू की छोटी बहन अनीता को फोन किया, लेकिन उस ने कौल रिसीव नहीं की.

तब उस ने अपने गांव के रिश्तेदारों के माध्यम से अंशू से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. अनुराग समझ गया कि अंशू की परिजनों ने मिल कर हत्या कर दी है. आखिर में कुछ दिन बाद ही अनुराग को रिश्तेदारों की मदद से अंशू के बारे में जानकारी हुई. मध्यस्थों के माध्यम से लगातार मामले को शांत करने का दबाव बनाने पर अनुराग को शक हो गया. अनुराग को पता था कि यदि वह पुलिस के पास जाएगा तो फंस जाएगा. इसलिए स्वयं ही उस ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हैवियस कार्पस) दायर कर दी. सबूत के तौर पर अंशू के 24 अक्तूबर के वीडियो को प्रस्तुत किया.

6 दिसंबर, 2025 को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के मामले में जांच थाना आगरा के मलपुरा को मिली, जिस में फिरोजाबाद जनपद के थाना जसराना के नगला अवाजी निवासी अनुराग यादव ने अंशू यादव के पापा रिटायर्ड दारोगा रनवीर सिंह यादव व उस के फेमिली द्वारा अंशू यादव को घर में कैद कर के रखे जाने के बारे में बताया. उस ने अंशू को उस के फेमिली वालों से मुक्त करा कर उस की सुपुर्दगी में देने की गुहार हाईकोर्ट में लगाई.

इस पर पुलिस को शक हुआ. 13 दिसबंर, 2025 को पुलिस ने रिटायर्ड दारोगा रनवीर सिंह यादव और उस के फेमिली वालों से जब लापता अंशू के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि अंशू अपने मामा के यहां इटावा गई हुई है. जबकि इस से पहले रनवीर सिंह यादव थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज करा चुका था. इस पर पुलिस ने रनवीर सिंह व उस की पत्नी सुधा से सख्ती से पूछताछ करने के साथ ही अंशू का वीडियो भी दिखाया. लेकिन दोनों ने इंकार कर दिया. उन का कहना था कि अंशू कहीं चली गई है, उस की तलाश की जाए. पतिपत्नी पुलिस को गुमराह करते रहे, लेकिन भाई टूट गया. उस ने बताया कि बहन अंशू की 25 अक्तूबर को हत्या कर दी गई है.

फिर क्या था, पुलिस ने मृतका अंशू के शव को बरामद कराने के लिए रनवीर सिंह और उस के बेटे गौरव को हिरासत में ले लिया. दोनों से कड़ाई से पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म कुबूल करते हुए पुलिस को बताया कि अंशू की हत्या 25 अक्तूबर को करने के बाद उसी दिन लाश को उन्होंने इटावा मेंं यमुना नदी में फेंक दिया था. इस पर पुलिस लाश बरामद करने के लिए 13 दिसंबर, 2025 को आरोपियों को इटावा ले गई. पूछताछ में पता चला कि हत्या के बाद अपनी कार की डिक्की में अंशू की डैडबौडी  को डाल कर पिता रनवीर सिंह यादव के साथ गौरव यादव अपने मामा के घर गांव पीपरीपुरा, इटावा ले गए थे.

वहां पहुंच कर रनवीर सिंह ने अपने साले रक्षपाल के बेटे सतीश व सतीश की पत्नी किरन देवी को लाश ठिकाने लगाने के लिए साथ ले लिया. सभी लोग कार से इटावा के आगे भिंड बाइपास गांव सुनवारा यमुना पुल पर जा पहुंचे और कार की डिक्की में छिपाई अंशू की लाश निकाल कर यमुना नदी में फेंक दी. इस के बाद सभी लोग वहां से चले गए. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने मृतका अंशू की लाश की तलाश शुरू कर दी. लाश की तलाश में इटावा के 3 थानों की पुलिस, एसडीआरएफ और आगरा पुलिस द्वारा संयुक्त औपरेशन चलाया गया.

यमुना के किनारे झाडिय़ों से एक कंकाल और हड्डियों के अवशेष व एक बांह के कपड़े मिले, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. इस के साथ ही फोरैंसिक टीम ने सैंपल एकत्र किए, जो डीएनए के लिए भेजे गए. थाना मलपुरा के एसएचओ विवेक कुमार मिश्रा ने बताया कि रनवीर सिंह यादव की बेटी अंशू की लाश उस की हत्या के लगभग डेढ़ माह बाद कंकाल के रूप में मिली थी. अंशू यादव की पहचान पुलिस ने कपड़ों से की. उस की एक बांह का कपड़े का टुकड़ा मिला. पुलिस को जो वीडियो मिला था, उस में वह वही कपड़े पहने थी, जो घटनास्थल पर मिले.

उन्होंने बताया, आरोपियों द्वारा पुल से नदी में लाश फेंकने पर वह पानी में बहती हुई आगे झाडिय़ों में अटक गई, जिसे जंगली जानवर खाते रहे. आरोपी यह समझते रहे कि लाश पानी में बह गई है और वे बेखौफ हो कर वहां से चले गए.  अंशू हत्याकांड की उस के प्रेमी अनुराग यादव ने थाना मलपुरा में रिपोर्ट दर्ज करा दी है. रिपोर्ट में 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आरोप लगाया गया है कि उस की दोस्ती अपने गांव की अंशू यादव से बचपन से चली आ रही थी. दोनों एकदूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे. लेकिन इस बात से अंशू यादव के फेमिली वाले सहमत नहीं थे.

अनुराग ने रिपोर्ट में लिखवाया कि अंशू ने अपने घर से 24 अक्तूबर, 2025 को मुझे एक 29 सेकेंड का वीडियो बना कर मेरे वाट्सऐप पर भेजा, जिस में वह कह रही है, ‘मेरे प्यार को उस के परिवार वाले नहीं मान रहे हैं. मम्मीपापा, बड़ा भाई गौरव व छोटी बहन अनीता व गांव का रामनरेश और फूफा मुरारी व उस की पत्नी बीना मुझे मारना चाहते हैं. जब अंशू से मैं ने संपर्क करना चाहा तो उस से संपर्क नहीं हो पाया. इस के बाद न्यायालय का सहारा लिया और उक्त लोगों के खिलाफ हैवियस कार्पस याचिका दायर की. अब जानकारी हुई है कि अपने मकान पर सभी ने मिल कर अंशू की हत्या कर लाश को कार सेे इटावा ले जा कर लाश को यमुना में फेंक दिया है.

इस पर थाना मलपुरा में रिटायर्ड दरोगा रनवीर सिंह, उस की पत्नी सुधा, सतीश, किरन देवी, गौरव, अनीता, रामनरेश, फूफा मुरारी, बुआ बीना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), साक्ष्य मिटाने की धारा 238 तथा आपराधिक षडयंत्रों में शामिल होने की धारा 61(2) के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. प्रेमिका अंशू को जब 24 अक्तूबर, 2025 को यह अंदेशा हो गया कि फेमिली वाले उस की हत्या की योजना बना रहे हैं तो उस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला.

अनुराग के अनुसार गांव में अंशू और उस के मकान 100 फीट से अधिक दूरी पर स्थित हैं. बचपन में हम दोनों गांव के एक ही स्कूल में पढ़ते थे. सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान वह अपने पापा के पास उत्तराखंड चला गया, जबकि अंशू अपने पिता का ट्रांसफर मथुरा होने पर वहां चली गई. बचपन से ही हम दोनों में दोस्ती थी. हाईस्कूल हम दोनों ने शिकोहाबाद से ही किया. अंशू और अनुराग दोनों ही जवानी की दहलीज पर कदम रख चुके थे. इस उम्र में लड़कियों का लड़कों के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक बात है. अंशू के साथ भी यही हुआ, फिर अनुराग तो उस का बचपन का दोस्त था.

धीरेधीरे अंशू को अनुराग और अनुुराग को अंशू अच्छी लगने लगी. दोनों एकदूसरे को प्यार करने लगे. इस बीच अंशू के पापा रनवीर सिंह यादव का ट्रांंसफर मथुरा हो गया. इस के बाद आगरा, रकाबगंज, खैरागढ़ में वह तैनात रहे. इस बीच दोनों की फोन पर बात होती रहती थी. वर्ष 2018 में अंशू और अनुराग दोनों ने डीएलएड साथसाथ किया. कहने को इस बीच अनुराग का पीएसी और पुुलिस में चयन भी हुआ, लेकिन दोनों ने निर्णय लिया था कि वे शादी करने के साथ ही साथसाथ टीचिंग करेंगे. अनुराग ने पीएसी और पुलिस की नौकरी नहींं की.

रिटायर्ड दारोगा रनवीर सिंह ने पुलिस से पूछताछ में बताया कि अनुराग गांव के रिश्ते से अंशू का भाई लगता था. उस का तथा अनुराग का गोत्र एक ही था. रिश्तेदार अनुराग के साथ शादी पर बेटी अड़ी थी. इस से हमारी बदनामी होती. अन्य बच्चों की शादी में भी परेशानी होती. समझाने पर बारबार कह रही थी, मार दो मुझे. बस, मुझे गुस्सा आ गया. मेरी पत्नी ने उस के पैर पकड़े और मैं ने उसी के दुपट्टे से उस का गला दबा दिया. गुस्से में मैं दुपट्टा कसता चला गया. बेटी जमीन पर गिर गई, इस के बाद भी वह नहीं रुका और आखिर में उस की सांसें थम गईं.

अनुराग ने बताया कि उस की मम्मी रिश्ता ले कर अंशू के घर गई थी, वहां अंशू की मम्मी ने सहमति जताई थी. उन्होंने मुझ से भी कसम ली थी कि दोनों कोई ऐसा कदम नहीं उठाएंगे, जिस से समाज में बदनामी हो. वह सही समय पर दोनों की शादी कर देंगे. मैं ने भी कसम दी थी. इस के बाद हम दोनों का मिलनाजुलना और बातचीत होती थी. अनुराग के अनुसार, कुछ समय पहले अंशू के फेमिली वालों के तेवर बदल गए. वे लोग अंशू से बात नहीं करने देते थे. उस के साथ मारपीट करते थे. उस का मोबाइल भी छीन लिया था. तब अंशू ने अपनी आईडी से चोरीछिपे सिम ली थी. वह घर में पड़े पुराने मोबाइल में सिम डाल कर मुझ से बात कर लेती थी.

24 अक्तूबर को अंशू ने मेरे मोबाइल पर एक वीडियो भेजा. इस के बाद 25 अक्तूबर की सुबह अंशू ने अपनी मम्मी के मोबाइल से फोन किया. उस ने कहा कि ये लोग मुझे मार रहे हैं. मुझे बचा सकते हो तो बचा लो. इस के बाद उस का फोन कट गया. अनुराग ने थोड़ी देर बाद कौल बैक किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया. इस के बाद मोबाइल स्विच औफ हो गया. अंशू की बुआ से बात करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया, मुझे अनहोनी की आशंका हुई. तब अंशू की छोटी बहन अनीता का नंबर ले कर उस से बात की. कहा कि अंशू से बात कराओ, लेकिन उस ने नहीं कराई.

इतना ही नहीं, अंशू की हत्या के बाद रनवीर सिंह यादव ने मध्यस्थों के माध्यम से मुझ पर चुप रहने का दबाव भी बनाया. इस पर अनुराग को शक हो गया. इस के बाद ही मैं ने हाईकोर्ट की शरण ली. बेटी के प्रेम संबंधों की परिजनों को जानकारी थी. इस पर रनवीर सिंह यादव व अन्य ने अंशू को धमकाना शुरू कर दिया, लेकिन वह किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हो रही थी. फेमिली वालों ने अनुराग से मोबाइल पर बातचीत करने पर भी पाबंदी लगा दी.

 

डीसीपी (पश्चिमी जोन) अतुल शर्मा ने इस पूरे हत्याकांड का परदाफाश करते हुए बताया कि वर्तमान में रिटायर्ड दारोगा रनवीर सिंह यादव थाना मलपुरा की विनायक गार्डन कालोनी मे परिवार सहित रहता है. वह वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुआ था. उस की बेटी अंशू यादव डीएलएड कर रही थी और शिक्षक भरती की तैयारी कर रही थी. रिपोर्ट में 9 लोगों को नामजद किया गया है. इन में से 3 आरोपियों पिता रनवीर सिंह यादव, बेटा गौरव यादव व रनवीर के साले के बेटे सतीश को पुलिस ने गिरफ्तार कर 14 दिसंबर को जेल भेज दिया गया है. शेष नामजद परिवार वालों की भूमिका की जांच की जा रही है. Agra Crime

 

 

UP News : हत्या को बना न पाए आत्महत्या

UP News : 15 साल की आशू और 19 साल के राहुल निषाद को साथसाथ पढ़ते हुए ही प्यार हो गया था. कई साल बाद जब उन के प्यार की पोल खुली, तब तक उन के संबंध बहुत गहरे हो चुके थे. घर वालों ने उन के प्यार पर नकेल कसने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. अंत में यह जोड़ा भी औनर किलिंग के गर्त में इस तरह समा गया कि…

उत्तर प्रदेश का कुशीनगर जिला एक पर्यटनस्थल के रूप में जाना जाता है. यहां देशविदेश से बौद्ध भिक्षु घूमने आया करते हैं. बताया जाता है कि यहीं पर गौतम बुद्ध ने अपनी अंतिम सांस ली थी, इसलिए यह जिला देशविदेश में काफी प्रसिद्ध है. इसी जिले के तमकुहीराज थाना अंर्तगत परसौनी गांव में 58 वर्षीय रामदेव कुशवाहा अपने परिवार के साथ रहता था. परिवार में 3 बेटियां थीं. पत्नी की कई साल पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी. बेटियों के अलावा रामदेव के कोई बेटा नहीं था.

रामदेव के बड़े भाई के 3 बेटे थे, इसलिए उन्हें कभी इस बात का मलाल नहीं हुआ कि उन्हें बेटा क्यों नहीं पैदा हुआ. बड़े भाई के दूसरे नंबर का बेटा, जिस का नाम सिकंदर कुशवाहा था, दुखसुख में चाचा रामदेव के पास हर घड़ी खड़ा रहता था. उन की एक आवाज पर कड़ी धूप हो या चाहे तूफान आ जाए, उन का आदेश सिरआंखों पर रख पहले फरमाइश पूरी करता था.

रामदेव सिकंदर को बेटे की तरह मानते थे और उस के लिए हमेशा समर्पित रहते थे. उस की बातों और भावनाओं को सिर माथे लगाए रखते थे. बेटियां भी सिंकदर को अपने सगे भाई से कम नहीं समझती थीं. हर साल रक्षाबंधन के त्योहार पर सिकंदर की कलाई पर राखी बांध कर उस से ढेरों आशीर्वाद लेती थीं. इस दिन सिकंदर दिल खोल कर बहनों को आशीर्वाद देता था.

बात 30 जून, 2025 की रात की है. गांव के पट्टीदारी में एक बारात आई थी. उस बारात में रामदेव कुशवाहा भी पूरे परिवार के साथ आमंत्रित थे. वह तीनों बेटियों विमला, सुमन, आशू और बेटे सिकंदर के साथ लड़की के घर बारात में पहुंचे थे. वहां पहुंच कर सभी पार्टी एंजौय करने में मशगूल हो गए थे. सिकंदर अपने हमजोलियों के साथ मस्त था तो रामदेव की सब से छोटी बेटी आशू कुशवाहा अपनी बहनों और सहेलियों के साथ पार्टी एंजौय करने में मस्त थी.

पार्टी एंजौय करतेकरते आशू कहीं नजर नहीं आ रही थी. चचेरा भाई सिकंदर भले ही पार्टी एंजौय कर रहा था, लेकिन उस का पूरा ध्यान पार्टी नहीं सिर्फ आशू पर था. वह क्या कर रही है, किस से मिल रही है, उन के बीच क्या बातचीत कर रही है, घूमघूम कर यही निगरानी वह कर रहा था. अचानक से जब आशू पार्टी में कहीं नहीं दिखी तो उस का माथा ठनक गया. पागल कुत्ते के माफिक वह आशू को पार्टी में इधरउधर ढूंढने लगा. वह कहीं नहीं दिखी. चाचा रामदेव ने भी सिकंदर को हिदायत दी थी कि आशू पर निगरानी रखे. इतना समझाने के बावजूद अगर उस के पांव उस के बस में नहीं होते हैं तो इज्जत बचाने के लिए जो अच्छा लगे, फैसला कर सकते हो.

रंगेहाथों पकड़ी गई आशू

बहन आशू को ढंूढतेढूंढते सिकंदर पार्टी वाली जगह से थोड़ा बाहर निकला तो अंधेरे में उसे किसी के फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी. वह दबे पांव और आहिस्ताआहिस्ता वहां पहुंचा तो उसे आशू दिख गई. वह अपने प्रेमी राहुल निषाद से बातें कर रही थी. पास खड़े चचेरे भाई को देख कर आशू एकदम सकपका गई. उस का चेहरा पीला पड़ गया था. बहन की इस हरकत पर सिकंदर गुस्से से लाल हो गया. उस ने आव देखा न ताव, बहन की बाजू पकड़ कर खींचता हुआ वहां से ले कर घर चल दिया.

”क्या कर रहे हो भैया?’’ आशू दर्द से बिलबिलाई और भाई की मजबूत पकड़ से छूटने की कोशिश की, ”दर्द हो रहा है, छोड़ो मेरा हाथ. टूट जाएगा.’’

”तुझे दर्द हो रहा है, हाथ टूट जाएगा तेरा, चल घर चल.’’ घसीटते हुए सिकंदर आगे बोला, ”बताता हूं तुझे. घर की इज्जत डुबोते हुए तुझे तब दर्द नहीं हो रहा था, बेशरम कहीं की.’’

”मेरा हाथ छोड़ दो.’’

”तू घर तो चल पहले, फिर तेरा हाथ भी छोड़ दूंगा और तेरी अच्छे से खातिर भी करूंगा. तूने समझ क्या रखा है हमें. इतना समझाने के बाद भी तेरे कान पर जूं तक नहीं रेगती और तू फिर उस लुच्चे से चोंच मिलाने चली गई. तेरी इस गुस्ताखी की तो आज सजा मिल कर ही रहेगी. थोड़ी देर तू और रुक जा. चाचा को आ जाने दे. उस के बाद बताता हूं तेरे को.’’ कहता हुआ सिकंदर आशू को कमरे में धकेल कर बाहर से दरवाजे पर सिटकनी लगा दी.

गुस्से के मारे सिकंदर का नथुना फूलपिचक रहा था और बदन थरथरा रहा था. उस समय वह अपने काबू में नहीं था. क्षण भर बाद जैसेतैसे उस ने खुद पर काबू पाया और मोबाइल निकाल कर चाचा रामदेव को फोन कर के फौरन घर आने को कह दिया. जिस लहजे में सिकंदर ने बात की थी, उस से रामदेव को समझने में देर नहीं लगी थी कि वह बहुत गुस्से में है. फिर वह सोचने लगे, अभी तो वह यहीं था, कब घर चला गया और ऐसी क्या बात हो गई कि उस ने तुरंत घर पहुंचने को कहा है.

रामदेव खाना बीच में छोड़ कर बहू रामदुलारी और बेटियों को साथ ले कर लंबेलंबे डग भरते हुए घर निकल पड़े. थोड़ी देर में वह अपने घर पहुंचे तो देखा कि सिंकदर दरवाजे पर खड़ा था और लंबीलंबी सांसें ले रहा था, ”सिकंदर, क्या बात हो गई, जो तुम ने फौरन घर बुला लिया, खाने भी नहीं दिया. आखिर क्या बात है?’’

”आप को खाना खाने की पड़ी है? सुनोगे तो आप के पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी.’’

”बात बताओ, जलेबी की तरह गोलगोल मत घुमाओ, आसमान टूट पड़ा या जमीन फट गई? बात क्या है, जो तुम इतने गुस्से में हो.’’

”न आसमान टूट पड़ा और न ही जमीन फट पड़ी, सुनोगे तो आप भी गुस्से से दहकने लगोगे.’’

”अब मुझ से और सब्र नहीं हो रहा, जो कहना है जल्दी कह.’’ रामदेव ने इधरउधर देखते हुए भतीजे सिकंदर से सवाल किया, ”यहां सब तो दिख रहे हैं, लेकिन आशू कहीं दिख नहीं रही है, कहां है? पार्टी से आई नहीं क्या?’’

”अरे चाचा, जब हम पार्टी में मशगूल थे तब वह घर के पिछवाड़े अपने यार की बाहों में चिपकी झप्पी ले रही थी. वहां जब कहीं नहीं दिखी तो मैं ने उसे ढूंढना शुरू किया, तब वह पकड़ में आई थी. उसे पकड़ कर घर लाया और कमरे में बंद कर दिया हूं. फडफ़ड़ा रही है, बंद कमरे में आजाद होने के लिए.’’

”क्या कह रहे हो?’’ रामदेव भतीजे की बात सुन कर गुस्से से तमतमा उठा, ”उस बेशरम नालायक की इतना मजाल, बारबार समझाने के बावजूद भी उस के सिर से राहुल के इश्क का भूत उतर नहीं रहा है, आज तो उस ने सारी हदें ही पार कर दीं, इस गुस्ताखी की सजा तो उसे जरूर मिलेगी. खोल री दरवाजा. जवानी का सारा पानी नींबू की तरह निचोड़ नहीं दिया तो… रोजरोज की बदनामी का किस्सा ही खत्म कर देते हैं,  खोल दरवाजा सिकंदर, जल्दी खोल.’’

चाचा रामदेव का आदेश पा कर सिकंदर ने दरवाजा खोल दिया. एलईडी की सफेद रोशनी से कमरा नहा रहा था और आशू दीवार के एक कोने से दुबकी, डरीसहमी घुटने मोड़ कर बैठी हुई थी. रामदेव की नजर जैसे ही उस की नजर से टकराई, गुस्से से लाल हो गया. उस ने आव देखा न ताव, उस पर लातघूसों की बरसात शुरू कर दी.

डरीसहमी आशू अपनी जान की भीख मांगती रही, उन के सामने गिड़गिड़ाती रही, लेकिन इंसान से हैवान बन चुके रामदेव ने उस की एक न सुनी. कल तक जिस बेटी की एक आवाज पर सारी दुनिया को सिर पर उठा लेने को तैयार था, आज वही पिता पूरी तरह शैतान बन चुका था, ”तुझे बारबार समझाया था बेशरम, उस आवारा राहुलवा से दूर रहना, मत करना नैन मटक्का. तेरे चलते गांव में मेरी कितनी बदनामी हो रही है, लेकिन तूने मेरी एक न सुनी, करती रही नैन मटक्का तो ले भुगत.’’

पीटपीट कर मार डाला फेमिली वालों ने

रामदेव, चचेरा भाई सिकंदर और उस की पत्नी रामदुलारी तीनों मिल कर आशू पर हैवानों की तरह टूट पड़े और जिसे जो हाथ मिला, उसी से तब तक मारते रहे, जब तक उस की मौत न हो गई. लहूलुहान आशू अपने ही खून में डूबी फर्श पर औंधे मुंह निढाल पड़ी हुई थी. थोड़ी देर बाद जब उन का गुस्सा शांत हुआ और होश में आए तो तीनों में से सिकंदर ने उसे हिलाडुला कर देखा. उस के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी. वह मर चुकी थी. इस के बाद उन्होंने लाश पर चादर डाल दी और दरवाजे पर ताला जड़ दिया.

फिर तीनों एक पेट हो हत्या की बात हजम कर गए. घर के सभी सदस्यों को धमका दिया था कि किसी ने भी इस घटना को घर से बाहर किया तो उस का भी वही हाल होगा, जो आशू का हुआ है. इसलिए चुप रहने में सब की भलाई है आशू की निर्मम हत्या करने बाद भी तीनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था. उसी रात उन्होंने आशू के प्रेमी राहुल को भी जान से मार डालने की योजना को अंतिम रूप दे दिया. योजना के अनुसार, अगली सुबह यानी पहली जुलाई के दिन सुबह से ही सिकंदर राहुल को गांव में यहांवहां ढंूढता रहा, लेकिन वह उसे कहीं नजर नहीं आया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर गया तो गया कहां? कहीं दिख क्यों नहीं रहा है वह उसे.

इकहरे बदन वाला सिकंदर था तो एकदम दुबलापतला, लेकिन दिमाग से शातिरों का शातिर था. काफी देर तक मंथन करने के बाद उस ने राहुल तक पहुंचने का एक नायाब और आसान सा रास्ता निकाल ही लिया. उसे पता था विनय और विकास नाम के 2 युवक उस के जिगरी यार थे. तीनों में गहरी छनती थी. किसी तरह उन्हें अपनी ओर मिला लें तो काम आसान हो सकता है. फिर क्या था, यह सोच कर वह मन ही मन गदगद हो उठा और विनय और विकास से जा मिला.

”हैलो विनय, कैसे हो?’’ मुसकराते हुए सिकंदर आगे बोला, ”आओ, चलो चाय पीते हैं.’’

उस समय विनय अपने दोस्त विकास के साथ गांव के बीच स्थित चाय की दुकान पर खड़ा था और राहुल का इंतजार कर रहा था.

”नहीं भैया, मैं चाय नहीं पीता.’’ विनय ने सामान्य तरीके से उत्तर दिया.

”तो बिसकुट ही खा लो,’’ कह कर सिकंदर ने डिब्बे में रखे 4 बिसकुट निकाले और 2 बिसकुट विनय की ओर और 2 बिसकुट विकास की ओर बढ़ाए. दोनों ने बिसकुट पकड़ लिए और खाने लगे. फिर बड़ी चालाकी से अपनी बातों में दोनों को उलझाते हुए वहां से बाहर ले गया और बातों बातों में उस से राहुल के बारे में पूछा कि राहुल कहां है, आज दिख नहीं रहा. आशू उसे याद कर रही थी, मिलना चाहती थी उस से, तभी तो मैं तुम्हारे पास मिलने आया हूं. तुम दोनों उस के सब से अच्छे दोस्त हो, मेरी बात उस से करा सकते हो क्या? तुम उसे यहां बुला दो. बड़ा एहसान होगा तुम दोनों का.’’

”इस में एहसान की क्या बात है भैया,’’ इस बार विकास बोला था, ”मैं अभी फोन कर के बुला देता हूं. दोस्त दोस्त के काम न आए तो फिर दोस्ती किस काम की.’’

सिकंदर ने दोनों की थोड़ी तारीफ क्या कर दी थी, वे चने के झाड़ पर चढ़ गए. वाहवाही में विकास ने फोन कर के राहुल को चाय की दुकान पर बुला लिया. लोमड़ी से ज्यादा शातिर सिकंदर तो यही चाहता था, किसी तरह राहुल बिल से बाहर निकले. उस के बाद क्या करना है, पहले से सोच रखा था. विनय और विकास शातिर सिकंदर के दिमाग को पढ़ नहीं सके और दोनों उस के चक्रव्यूह में फंस गए. दोस्त विकास का फोन रिसीव करते ही राहुल चाय की दुकान पर पहुंच गया. जैसे ही उस की नजर सिकंदर पर पड़ी तो वह घबरा गया और वापस मुडऩे लगा. बड़ी मुश्किल से शिकार चंगुल में फंसा था और उस के हाथों से फिसल रहा था. वह उसे हाथों से फिसलने देना नहीं चाहता था.

वह राहुल के नजदीक जा कर बोला, ”डरो मत भाई, जो होना था सो हो गया. मुझे अपनी गलतियों का पश्चाताप है, माफी चाहता हूं. आशू तुम से मिलना चाहती है. मैं तुम्हें उस से मिलाना चाहता हूं. मिलना चाहोगे?’’

कह कर सिकंदर ने राहुल के चेहरे को पढऩे की कोशिश की कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है. राहुल कुछ सोच कर आशू से मिलने के लिए तैयार हो गया था. उस ने अपने साथ विनय और विकास को भी चलने के लिए तैयार कर लिया था. आगेआगे सिकंदर और राहुल चल रहे थे, पीछेपीछे विनय और विकास. उस ने राहुल को भरोसा दिला दिया था कि घर पर चाचा रामदेव नहीं हैं, किसी काम से बाहर गए हुए हैं और शाम तक आएंगे. तभी वह प्रेमिका आशू से मिलने के लिए तैयार हुआ था.

इधर बातोंबातों में उस ने कब चाचा रामदेव को फोन कर ‘शिकार खुद बलि चढऩे के लिए आ रहा है, सतर्क हो जाएं.’ कह कर उन्हें अलर्ट कर दिया था. इस की भनक न तो राहुल को लगी थी और न ही विनय और विकास को ही. राहुल निषाद को देखते ही सिकंदर का खून खौल उठा था, लेकिन अपनी भावनाओं को उन के सामने जाहिर नहीं होने दिया था. उस के दिल में कसक तो इस बात की थी कि इसी कमीने के चलते बहन को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था तो ये कैसे जिंदा रहे. इसे भी बहन की तरह तड़पतड़प कर मरना होगा, बस किसी तरह घर तक पहुंच जाए, फिर देखेंगे क्या होता है.

इधर भतीजे से सूचना मिलते ही रामदेव सतर्क हो गया था और बहू को भी सतर्क कर दिया था ताकि शिकार चंगुल से छूट कर भाग न सके. उसे भी जान से मार देना होगा. इस कमीने की वजह से इज्जत तारतार हुई है, किसी कीमत पर जिंदा बच कर जाना नहीं चाहिए.

एक ही कमरे में मार डाला प्रेमीप्रेमिका को

घर पहुंचते ही सिकंदर के शरीर में जैसे शैतानी ताकत कुलांचे मारने लगी. गजब की फुरती आ गई थी उस में. उस ने राहुल को अपनी दोनों मजबूत भुजाओं में कस कर जकड़ लिया. जोरजोर से आवाज दे कर चाचा रामदेव को बाहर बुलाया. राहुल खुद को सिकंदर की भुजाओं में जकड़ा देख समझ गया कि उस के साथ बड़ा धोखा हुआ है. उस ने दोस्तों के साथ मिल कर धोखा किया है. राहुल ने सिकंदर की मजबूत बाहों से आजाद होने के लिए बहुत दम लगाया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उस की मजबूत पकड़ से वह आजाद नहीं हो सका. चाचाभतीजा दोनों मिल कर उसे उसी कमरे में धकेल कर ले गए थे, जहां पहले से आशू की लाश पड़ी थी.

इधर सिकंदर ने विनय और विकास को धमका कर अपने पक्ष में मिला लिया था कि अगर किसी से कुछ भी कहा तो दोनों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है, इसलिए भलाई इसी में है कि हमेशा के लिए अपनी जुबान बंद कर लें. सिकंदर की धमकियों से दोनों बुरी तरह डर गए और चुप हो गए. उस ने दोनों को दूसरे कमरे में बंद कर दिया था. भतीजा सिकंदर, चाचा रामदेव और बहू रामदुलारी तीनों मिल कर उस पर टूट पड़े. लाठी, डंडे और लातघंूसों से उसे मारने लगे.

राहुल जान बचाने के लिए भीख मांग रहा था. कमरे में चीखताचिल्लाता इधरउधर भाग रहा था, लेकिन उन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. गुस्से से लाल हुए तीनों बस लाठी, डंडे की बरसात करते रहे. इस से भी जब उन का मन नहीं भरा तो सिकंदर दरवाजे पर रखी एक ईंट उठा लाया और उसी ईंट से राहुल के सिर के पीछे जोरदार वार किया. ईंट का वार इतना जोरदार था कि पल भर में उस की आवाज शांत हो गई और उस का शरीर निढाल हो कर शांत हो गया.

सिकंदर ने राहुल को हिलाडुला कर देखा. उस की सांसें टूट चुकी थीं. शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी. वह मर चुका था. सिर से खून का रिसाव हो रहा था. लाश देख कर तीनों नफरत भरी हुंकार भर और लाश वहीं छोड़ कर कमरे से बाहर निकल आए और फिर उस कमरे में दाखिल हुए, जहां मृतक राहुल के दोस्तों विनय और विकास को बंद कर के रखा था. शातिर सिकंदर ने दोनों को धमकाते हुए इस शर्त पर वहां से जाने दिया कि वह जब भी उसे बुलाएगा, दोनों को आना होगा और यहां जो कुछ भी हुआ है, अगर किसी से भी कुछ कहा तो उन्हें भी जान से मार देंगे, इसलिए चुप रहने में ही दोनों की भलाई है.

रामदेव के घर में 2 लाशें पड़ी हुई थीं. इस के बावजूद उन के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी. तीनों खुद को बचाते हुए कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहते थे, जिस में यह घटना मर्डर के बजाए आत्महत्या की लगे. इस के लिए मतबूत और लंबी रस्सी की जरूरत थी. सिकंदर बाजार से नायलोन की 2 बंडल मजबूत और मोटी रस्सी खरीद कर ले आया और घर में छिपा कर रख दी और रात होने का इंतजार करने लगे.

इधर राहुल को घर से निकले 4 घंटे बीत चुके थे. वह तक घर वापस नहीं पहुंचा था. यह देख कर उस के फेमिली वाले परेशान हो गए थे. राहुल की मम्मी ने फोन कर के पति अशरफी निषाद को बताया कि 10 बजे का निकला बेटा अभी तक घर नहीं लौटा है, मेरा दिल बैठा जा रहा है. उस समय अशरफी अपनी नौकरी पर थे. बेटे के गायब होने की सूचना मिलते ही वह बुरी तरह परेशान हो गए और ड्यूटी से छुट्टी ले कर वापस घर आ गए.

अशरफी ने अपने गांव और आसपास के गांवों में बेटे की तलाश की, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. देखते ही देखते गांव में राहुल के गायब होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई थी. बेटा जब कहीं नहीं मिला तो शाम को थाना तमकुहीराज में गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. उसी दौरान रामदेव तक खबर पहुंची तो उस के हाथपांव फूल गए. आननफानन में उस ने भी बेटी आशू के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबर गांव में फैला दी, ताकि उस पर किसी का शक न जाए.

अचानक आशू और राहुल दोनों के एक साथ गायब होने से गांव में यही चर्चा होने लगी कि कहीं दोनों गांव से भाग तो नहीं गए. यह बात सभी पहले से जानते थे कि दोनों के बीच में 4 सालों से लव अफेयर है. इसे ले कर 2 बार पंचायत भी बुलाई गई थी. दोनों के अचानक गायब हो जाने से गांव में खुसरफुसर शुरू हो गई. मामले की नजाकत को समझते हुए उसी शाम रामदेव भतीजे सिकंदर के साथ तमकुहीराज थाने पहुंचा और बेटी आशू के रहस्यमय तरीके से गायब होने की सूचना दर्ज करा दी, ताकि वह ऐसा कर के खुद सुरक्षित रह सके.

तमकुहीराज के इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला को जब परसौनी गांव की आशू और राहुल के गायब होने की तहरीर मिली थी. छानबीन में पता चला कि दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. इस के अलावा कोई और खास जानकारी नहीं मिल सकी थी. पुलिस अपनी आगे की काररवाई में जुटी रही. पुलिस रामदेव कुशवाहा तक पहुंच पाती, इस से पहले वे दोनों लाशों को ठिकाने लगा देना चाहता था. क्योंकि 2-2 लाशों को हजम कर पाना रामदेव के बस की बात नहीं थी. वह रात गहराने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. रात जैसे गहराई, सिकंदर ने विनय को काल कर के उस की स्कूटी मंगाई.

हत्या को दे दिया आत्महत्या का रूप

विनय और विकास चुपके से उस समय अपने घर से स्कूटी ले कर निकले थे, जब घर वाले गहरी नींद में जा चुके थे. सिकंदर की धमकी से दोनों बुरी तरह डरे हुए थे. अगर वे उस का साथ नहीं देंगे तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता था. सिकंदर, विनय और विकास के सहारे स्कूटी पर पहले आशू की लाश घर से करीब 400 मीटर दूर आम के घने बगीचे में पहुंचा दी. वहां पहले से रामदेव मौजूद था. फिर चाचा रामदेव को वहीं छोड़ कर विनय और विकास को साथ ले कर वापस घर आया और राहुल की लाश को स्कूटी पर लाद कर बगीचे में पहुंचा दी.

फिर साथ लाई रस्सी को 2 बराबर टुकड़ों में काट कर बारीबारी से दोनों लाशें आम की मजबूत डाली से लटका दी, ताकि देखने से लगे कि दोनों ने आत्महत्या की है, इस काम को अंजाम देने में सिकंदर का साथ चाचा रामदेव, विनय और विकास तीनों ने बराबरबराबर साथ दिया था. लाश ठिकाने लगाने के बाद चारों ने राहत भरी सांसें लीं और मोबाइल की टौर्च के उजाले में बगीचे के चारों ओर देखा. जब चारों आश्वस्त हो गए कि उन्हें कोई देख नहीं रहा है, तब वहां से अपनेअपने घरों को लौट गए और घर जा कर इत्मीनान से सो गए.

अगले दिन यानी 2 जुलाई, 2025 की सुबह परसौनी गांव का तापमान उस समय बढ़ गया था, जब गांव से 400 मीटर दूर आम के बगीचे में आशू और राहुल की पेड़ से लटकती हुई लाशें मिलने की खबर गांव वालों को मिली. खबर मिलते ही गांव वाले मौके पर पहुंच गए थे. बेटे की लाश मिलने की सूचना जैसे ही अशरफी को मिली तो उन के तो हाथपांव ढीले हो गए और गश खा कर नीचे गिर गए और घर में कोहराम मच गया था. लाश की सूचना मिलते ही दिखावे के तौर पर रामदेव और सिकंदर भी मौके पर पहुंच गए थे, ताकि किसी को उन पर कोई शक न हो.

थोड़ी देर में ये खबर तमकुहीराज थाने तक पहुंच गई. सूचना मिलते ही इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला आननफानन में पुलिस टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे और निरीक्षण में जुट गए. प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का नहीं, मर्डर का लग रहा था. पेड़ की जिस ऊंचाई से मृतक लटक कर आत्महत्या किए थे, उन के घुटने जमीन पर मुड़े हुए थे और दोनों की जीभ भी बाहर नहीं निकली थी. अमूमन आत्महत्या के केस में मृतक की जीभ बाहर निकल जाती है, यही बात इंसपेक्टर शुक्ला को खटक रही थी. घटनास्थल की छानबीन के दौरान मौके से एक ईंट बरामद हुई थी. ईंट पर खून लगा हुआ था, जो सूख चुका था. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर वह अपने कब्जे में ले ली.

इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला ने घटना की सूचना एसपी संतोष कुमार मिश्रा और एएसपी निवेश कटियार को दे दी. सूचना पा कर दोनों पुलिस अधिकारी और फोरैंसिक टीम मौके पर पहुंच गई थी. एजेंसी अपनी जांच में जुट गई थी. कागजी काररवाई पूरी कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल कुशीनगर भेज दिया और आगे की काररवाई में जुट गई थी. अगले दिन 3 जुलाई, 2025 को आशू और राहुल की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला के सामने थी. जिसे पढ़ कर वह चौंके बिना नहीं रहे. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि जो उन की आंखें देख रही हैं, वो सच हो सकता है. रिपोर्ट में उल्लेख था कि दोनों मौतों के बीच में करीब 8 से 10 घंटे का अंतर है.

दोनों ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उन की मौतें सिर पर लगे गहरे जख्म की वजह से हुई थीं. जिस का मतलब शीशे की तरह साफ था कि दोनों की हत्या कर के उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद इंसपेक्टर शुक्ला की जांच की दिशा तेज हो गई थी. वैज्ञानिक साक्ष्य, कौल डिटेल्स और मुखबिर की निशानदेही ने पुलिस के शक की सूई रामदेव कुशवाहा की ओर घुमा दी थी. तब उन का शक और पुख्ता हो गया था, जब घटनास्थल से बरामद ईंट रामदेव के दरवाजे पर रखे ईंट के मार्का आपस में मेल खा लिए थे. फिर क्या था? पुलिस अधिकारियों के दिशानिर्देश से सप्ताह के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो गया.

शक के आधार पर तमकुहीराज पुलिस 9 जुलाई, 2025 की दोपहर रामदेव कुशवाहा को उस के घर से हिरासत में ले लिया. उस से कड़ाई से पूछताछ की तो उस ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और अपना जुर्म कुबूल कर लिया कि उस ने अपने भतीजे सिकंदर, बहू रामदुलारी देवी, राहुल के दोस्तों विनय और विकास की मदद से बेटी आशू और उस के प्रेमी राहुल को मौत के घाट उतारा था. बेटी और उस के प्रेमी ने इज्जत का बट्टा लगा दिया था. गांव और इलाके में थूथू हो रही थी. बेटी को बहुत समझाया, लेकिन उस के सिर से राहुल के इश्क का भूत उतर ही नहीं रहा था तो क्या करता? इज्जत की खातिर उसे ये खौफनाक कदम उठाना ही पड़ा.

किशोर उम्र में हो गया आशू और राहुल को प्यार

रामदेव कुशवाहा कुशीनगर जिले के तमकुहीराज थानाक्षेत्र के परसौनी गांव में परिवार सहित रहता था. परिवार में 3 बेटियां ही थीं. तीनों बेटियों में सब से छोटी बेटी आशू थी. आशू गजब की खूबसूरत थी. उस पर किसी की नजर पड़ जाती तो उस के सुंदर चेहरे से जल्दी नजर हटती नहीं थी. आशू थी तो 15 साल की. उस का अंगअंग विकसित हो चुका था. देखने से कोई नहीं कह सकता था कि पूरी तरह परिपक्व नहीं है. औसत कदकाठी की आशू नागिन सी लहराती कालीकाली जुल्फें खुली छोड़ कर जब घर से बाहर निकलती थी, मनचलों के दिलों पर छुरियां चल जाती थीं. बिलकुल कीचड़ में खिली कमल जैसी थी.

राहुल निषाद आशू का पड़ोसी था. वह 19 साल का था और 10वीं में उसी स्कूल में पढ़ता था, जहां आशू पढ़ती थी. वह 8वीं क्लास की छात्रा थी. करीब 4 साल पहले ही राहुल आशू के जुल्फों में इस कदर कैद हो चुका था कि अपना दिल उस के नाम कुरबान कर दिया था. तब उस की उम्र 15 साल के करीब रही होगी और आशू यही कोई 12 साल के करीब रही होगी, जिस ने अपने दिल के कोरे पन्ने पर प्रेमी राहुल का नाम लिख दिया था. कच्ची उम्र में आशू राहुल को दिल दे बैठी थी.

समय के साथ दोनों ने अपने प्यार का इजहार कर दिया था. उम्र के साथसाथ दोनों का प्यार भी प्रगाढ़ होता चला गया था. जिस कच्ची उम्र में दोनों ने प्यार की दहलीज पर पांव रखा था, उस उम्र में उन्हें प्यार का मतलब समझ में आ रहा था या नहीं, ये बता पाना मुश्किल होगा, लेकिन उन के बीच में गजब का आकर्षण था. आलम यह था कि एक दिन वे एकदूसरे को देखे बिना रह नहीं पाते थे.

चूंकि दोनों के घर अगलबगल थे, इसलिए वे एकदूसरे के घरों को आतेजाते भी थे. घंटों बैठ कर वे आपस में प्रेमभरी मीठी बातें करते थे. घर वालों को उन पर शक नहीं हुआ कि उन के बीच में क्या खिचड़ी पक रही है. घर वाले यही समझते थे कि दोनों बच्चे हैं, एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, साथसाथ आतेजाते हैं तो आपस में स्कूल को ले कर बातचीत करते होंगे, इसलिए उन पर कोई खास तवज्जो नहीं देते थे.

धीरेधीरे 3 साल बीत गए थे. आखिरकार उन के प्यार की गगरी फूट ही गई. इश्क का भांडा फूटते ही घर वालों की चिंता बढ़ गई. रामदेव कुशवाहा को तो ऐसा लगा, जैसे उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. जिस बेटी को वह अभी छोटी सी बच्ची समझ रहा था, वह तो प्रेम की पाठशाला में अव्वल निकली. माथे पर हाथ रख कर रामदेव जमीन पर बैठ गया था. बेटी ने इज्जत की धज्जियां उड़ा दी थीं. गांव में रामदेव की किरकिरी मची हुई थी. उस का घर से निकलना मुश्किल हो गया था. वह जहां जाता था, वहीं बेटी के प्यार के चर्चे चटखारे ले कर होते थे. सुनसुन कर रामदेव के कान पक गए. अब और बदनामी उस से बरदाश्त नहीं हो पा रही थी, इसलिए उस ने कारगर फैसला करने का निर्णय ले लिया था.

रामदेव कुशवाहा ने बेटी को समाज की ऊंचनीच का पाठ तो पढ़ाया ही, साथ ही भतीजे सिकंदर को साथ ले कर उस के प्रेमी राहुल के घर पहुंच कर पिता अशरफी निषाद से राहुल की शिकायत करते हुए आड़े हाथों लेते हुए उसे समझाया, ”देख अशरफी, तुम से या तुम्हारे परिवार से मेरा कोई बैर नहीं है. पड़ोसी होने के नाते हमारे रिश्ते अच्छे हैं. हम दोनों एकदूसरे के दुखसुख में बराबर खड़े रहते हैं. बता, सच है कि नहीं.’’

”सच तो है.’’ असमंजस की स्थिति में अशरफी ने उत्तर दिया, ”लेकिन बात क्या है, रामदेव भाई. आज आप ये कैसी बात कर रहे हैं? मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है. क्या कहना चाहते हो?’’

”सब समझ में आ जाएगा अशरफी, चिंता मत कर. तुझे सब समझाता हूं. लगता है, इसी उमर में तेरा बेटा जवान हो गया है.’’

”मतलब?’’

”मतलब यह कि आजकल तेरा बेटा राहुल मेरी बेटी के पीछे हाथ धो कर पड़ा है.’’

”मेरा बेटा तुम्हारी बेटी के पीछे हाथ धो कर पड़ा है, अभी भी मैं समझा नहीं. जो कहना है, खुल कर कर कहो भाई.’’

”लगता है तुम्हारी खोपड़ी में बात उतरी नहीं.’’ इस बार रामदेव का भतीजा सिकंदर गुर्राते हुए बोला था, ”चाचा कह रहे हैं कि तुम्हारा बेटा राहुल मेरी बहन के पीछे हाथ धो कर पड़ा है तो बात समझ में नहीं आ रही है या समझाऊं तुम्हें. देखो अशरफी चाचा, मैं तुम्हें हिंदी में समझा रहा हूं कि अपने बेटे को समझा लो. उस से कह दो कि आशू से दूरी बना ले, अगर वह दूरी नहीं बनाता है तो उस की सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा. मैं आप को समझा कर जा रहा हूं, दोबारा उस से बातें करते या उस से मिलते देख लिया तो जान से मार दूंगा. समझा देना अपने बेटे को.’’

चेतावनी से बुरी तरह डर गए थे अशरफी

सिकंदर अशरफी निशाद को चेता कर चाचा रामदेव के साथ घर वापस लौट गया, लेकिन उस के कानों में सिकंदर की धमकी भरी बातें गंूजती रहीं. उस की धमकी से वह बुरी तरह डर गया था. राहुल उस का इकलौता बेटा था. सचमुच उस के साथ कुछ अनहोनी हो गई तो वह तो जीते जी मर जाएगा. उस शाम उस ने बेटे को बुलाया और अपने पास बैठा कर उसे समझाया कि अभी ये उम्र पढऩेलिखने की है. मन लगा कर पढ़ाई करो, जब समय आएगा तो अच्छी सी लड़की देख कर उस से तुम्हारा ब्याह रचा दूंगा. तुम आशू से दूरियां बना लो, इसी में हम सभी की भलाई है.

आशू के पापा रामदेव और उस का भाई सिकंदर धमकी दे कर गए हैं कि अगर तुम ने उस से बात की या उस से मिला तो तुम्हें जान से मार देंगे. इसलिए मेरा कहना मान ले बेटा, तू आशू नाम की उस बला से दूरियां बना ले, नहीं तो कोई अनहोनी तुम्हारे साथ हो गई तो जीवन भर हम रोते रहेंगे. मेरी बात मान ले और उस से दूरी बना ले.’’

सिर नीचे झुकाए राहुल अपने पापा की बातें ध्यान से सुनता रहा, मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे धरती फटे और वह उस में समा जाए. उस समय उस ने पापा को भरोसा दिलाया कि दोबारा उन्हें शिकायत का मौका नहीं देगा. राहुल ने अपने पापा से झूठ बोल कर खुद को बचा लिया था. अगले दिन किसी तरह वह आशू से मिला और सारी बातें उसे बता दीं कि उस के पापा को हमारे प्यार वाली बात पता चल गई. और तुम से मिलने से मना कर रहे थे. ऐसे में आशू ने भी उसे बता दिया कि उस के घर वालों ने इज्जत की दुहाई देते हुए तुम से मिलने से मना किया है.

”चाहे कुछ भी हो जाए आशू, हमें प्यार करने से कोई रोक नहीं सकता. हमारा प्यार अमर है, क्या हुआ अगर जमाने वाले हमारे प्यार को नहीं समझते. वक्त आने दो, मैं जैसे ही अपने पैरों पर खड़ा होऊंगा, भाग कर हम दोनों शादी कर लेंगे. फिर घर लौट कर कभी नहीं आएंगे.’’ राहुल बोला.

मांबाप के समझाने का आशू और राहुल दोनों पर कोई असर नहीं हुआ था. दोनों छिपछिप कर मिलते रहे और प्यार की गाड़ी मजे से चलती रही, लेकिन उन की ज्यादा दिनों तक फर्राटे नहीं भर सकी थी. घरवालों को पता चल गया कि आशू उन की आंखों में धूल झोंक कर अपने प्रेमी से छिपछिप कर मिलती है. यह बात न तो रामदेव को हजम हुई और न ही भतीजे सिकंदर को ही. दोनों का खून खौल उठा और राहुल को सबक सिखाने की ठान लिया.

इस के बाद रामदेव कुशवाहा और सिकंदर दोनों ने मिल कर गांव में पंचायत बुलाई. पंचायत में अशरफी निषाद और राहुल को खड़ा किया. घंटों पंचायत चली. इस दौरान पंचों ने निर्णय लिया कि राहुल को समझाबुझा कर छोड़ दिया जाए, दोबारा गलती करते पकड़े जाने पर पंचायत सख्त काररवाई करने के लिए बाध्य होगी. पंचों का निर्णय सुन कर रामदेव और सिकंदर अंदर ही अंदर झुलस कर रह गए. उन्हें इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि पंचायत ऐसा छोटा निर्णय ले कर राहुल को छोड़ देगी. लेकिन उन्हें पंचों के निर्णय के आगे झुकना पड़ा. सिकंदर भी चुप रहने वालों में से नहीं था. उस दिन के बाद से वह दोनों पर और कड़ी नजर रखने लगा था, ताकि मौका मिलते ही राहुल को सजा दे सके.

पंचायत में बदनामी होने के बाद अशरफी निषाद ने बेटे को टाइट कर के रखा और आशू से मिलते पर सख्त पाबंदी लगा दी. बेटे की करतूत से उसे काफी बदनामी झेलनी पड़ी थी. अब और बदनामी झेलने की क्षमता नहीं थी. लेकिन राहुल पर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा था और वह आशू से मिलताजुलता रहा. फिर यह खबर रामदेव तक पहुंच गई थी. खबर मिलते ही वह आगबबूला हो गया था और एक बार फिर पंचायत बुलाई गई. उस पंचायत में राहुल के साथसाथ आशू को भी पेश किया गया था. पंचायत के दौरान काफी हंगामा हुआ और गुस्साए सिकंदर ने भरी पंचायत में राहुल को ललकारा, जहां देखेंगे, उसे जान से मार देंगे. इस ने हमारी इज्जत की छिछालेदर मचा दी है, छोड़ूंगा नहीं किसी कीमत पर, चाहे कुछ भी हो जाए. मरना है तो उसे मरना है.

बात आई गई, खत्म हो गई. पंचायत की यह बात घटना से 2 दिन पहले यानी 28 जून, 2025 की थी. 2 दिन बाद यानी 30 जून को गांव में एक लड़की की शादी थी. शादी का कार्यक्रम रात में होना तय था. शादी में गांव के सभी लोग आमंत्रित थे. उस में रामदेव और अशरफी दोनेां का परिवार भी आमंत्रित था. सभी के साथ दोनों परिवार वाले पार्टी का आनंद ले रहे थे. इसी बीच आशू और राहुल दोनों के घर वाले जब पार्टी में व्यस्त हो गए थे, तभी मौका देख कर आशू और राहुल घर के पिछवाड़े जा पहुंचे और प्यार भरी बातें करने लगे थे. सिकंदर ने उन दोनों को पकड़ लिया. इस के बाद दोनों की हत्या कर दी गई.

पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले रामदेव कुशवाहा के इकरारेजुर्म के बाद उस के भतीजे सिकंदर, रामदुलारी, विनय और विकास को गिरफ्तार कर लिया. पहले से दी गई अशरफी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103/238/61 (2)/315 के तहत रामदेव कुशवाहा, सिकंदर कुशवाहा, रामदुलारी देवी को जेल और नाबालिग विनय और विकास को बाल सुधार गृह भेज दिया. UP News

(कथा में विनय और विकास परिवर्तित नाम है.)

 

 

Uttar Pradesh Crime : रहस्य में उलझी प्रेमी युगल की मौत

Uttar Pradesh Crime : प्यार की खातिर पेरेंट्स को खाने में नींद की गोलियां दे कर रजनी प्रेमी सनी पाल के साथ चली गई. 3 दिन बाद प्रेमी युगल के शव एक निर्माणाधीन मकान में मिले. उन्होंने आत्महत्या की या उन की हत्या की गई? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

रजनी ने अपने मम्मीपापा के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के बाद जैसे ही दोनों गहरी नींद में सोए, इस के बाद उस ने घर से कपड़े, रुपए व जेवरात एक बैग में रखे और अपने प्रेमी सनी पाल के साथ बाइक पर बैठ कर रफूचक्कर हो गई. 22 नवंबर, 2024 की सुबह जब मम्मीपापा सो कर उठे, तब उन्हें बेटी रजनी (परिवर्तित नाम) के घर से भाग जाने और अपने साथ नकदी व जेवरात ले जाने की बात मालूम हुई. उन्हें इस बात का भी एहसास हो गया कि उन की बेटी ने उन्हें खाने में नींद की गोलियां मिला दी थीं, जिस के चलते उन्हें पता ही नहीं चला कि वह कब घर से चली गई. बेटी की काफी देर तक गांव में तलाश करने के बाद उन्होंने थाना मऊ दरवाजा में तहरीर दी.

उत्तर प्रदेश का एक जिला है फर्रुखाबाद. इसी जिले के थाने मऊदरवाजा क्षेत्र के नगला खैरबंद गांव के रहने वाले थे प्रेमी युगल 22 वर्षीय सनी पाल और 15 वर्षीय रजनी. ये दोनों 21 नवबंर, 2024 की रात को अचानक अपनेअपने घरों से गायब हो गए. 24 नवंबर रविवार की सुबह कुइयांबूट गांव के एक युवक ने एक निर्माणाधीन मकान के सामने झाड़ी में एक बाइक खड़ी देखी. उस ने देखा कि काफी देर तक वहां कोई नहीं आया. लावारिस हालत में बाइक को वहां खड़ा देख कर उसे आश्चर्य हुआ. युवक उस मकान के अंदर गया तो वहां युवक व लड़की अद्र्धनग्न अवस्था में मृत पड़े थे. शवों को देख कर युवक डर गया और वहां से सिर पर पैर रख कर गांव की ओर भागा.

रास्ते में खेतों की ओर जा रहे लोगों को उस ने आंखों देखा हाल बता दिया. यह सुनते ही लोग उस निर्माणीधीन मकान पर पहुंचे. वहां का नजारा देख कर उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. युवक का शव मकान में बने कमरे के बाहर हैंडपंप के पास तथा लड़की का शव कमरे के अंदर पड़ा था. शव के पास कुछ सामान भी पड़ा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने मऊ दरवाजा थाने में फोन कर के यह सूचना दे दी. सूचना मिलते ही एसएचओ बलराज भाटी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. दोनों के शव अद्र्धनग्न अवस्था में थे. उन्होंने कपड़ा मंगा कर लड़की के शव को ढका. इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया.

मौके पर एसपी (फर्रुखाबाद) आलोक प्रियदर्शी, एएसपी डा. संजय कुमार, सीओ (सिटी) ऐश्वर्या उपाध्याय भी मौके पर पहुंच गईं. उसी दौरान सीओ की नजर झाड़ी में पड़े गुलाब के फूल पर पड़ी. इस पर सिपाही से फूल उठवाया, उसे देखा और फिर झाड़ी में फेंक दिया. समझा जाता है कि प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए गुलाब का फूल ले कर गया था.

आत्महत्या से पहले रजनी क्यों बनी दुलहन

घटना की जानकारी होते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई. आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ मृतकों को देखने के लिए इकट्ठी हो गई. लोगों ने मृतकों की शिनाख्त 22 वर्षीय सनी पाल व 15 वर्षीय रजनी के रूप में की. दोनों एक ही गांव नगला खैरबंद के रहने वाले थे. बढ़ती भीड़ के कारण पुलिस ने शवों को देखने के लिए आने वाले लोगों को काफी दूर ही रोक दिया. घटनास्थल को सुरक्षित करने के बाद फोरैंसिक टीम को जानकारी दी गई. फोरैंसिक टीम ने घटना की जांचपड़ताल कर मौके से सबूत जुटाए.

रजनी की डैडबौडी के पास दोनों के बैग रखे थे और चप्पलें पड़ी थीं. वहीं पर सिंदूर की डब्बी, कंगन, नमकीन और 2 खाली पैकेट सल्फास के पड़े थे. वहीं पर 2 मोबाइल फोन, पानी की खाली बोतल और प्लास्टिक के 2 गिलास पुलिस को मिले थे. रजनी के हाथों में लगी मेहंदी उस के अटूट प्यार की कहानी बयां कर रही थी. उस ने मरने से पहले लिपस्टिक लगा कर मांग में सिंदूर भरा और पैरों में बिछिया पहन कर गले में मंगल सूत्र डाला. लोगों का कहना था कि आत्महत्या करने से पहले दोनों ने शादी रचाई और सुहागरात मनाई. क्योंकि दोनों ही अद्र्धनग्न अवस्था में थे.

जांच के दौरान पता चला कि सल्फास की करीब 30 गोलियों को प्लास्टिक के गिलास में घोल कर पिया था. घातक जहर के तेज असर से लड़की ने तुरंत ही दम तोड़ दिया. जहर खाने के बाद जब प्रेमी सनी का गला सूखने लगा, तब वह हैंडपंप से पानी पीने के लिए कमरे से बाहर निकला होगा और हैंडपंप के पास ही उस की मौत हो गई. प्रेमी युगल अलगअलग जाति के थे. दोनों मऊ दरवाजा थाना क्षेत्र के गांव नगला खैरबंद के निवासी थे. रजनी और सनी की मौत की खबर से दोनों घरों में कोहराम मच गया. दोनों के फेमिली वाले घटनास्थल पर पहुंच गए. रजनी के पापा ने सनी, उस के पिता प्रमोद व भाई बौबी पर अपनी बेटी का अपहरण कर उस की हत्या करने का आरोप लगाया.

घटनास्थल पर पहुंची, रजनी की चाची रेखा सब से अधिक आरोपप्रत्यारोप लगा रही थी. उस ने आरोप लगाया कि रजनी के लापता होने की शिकायत लिखित में की थी. वहां मौजूद एक दरोगा ने उस से अभद्रता की और उस की रिपोर्ट दर्ज नहीं की. पुलिस ने शिकायत पर कोई काररवाई नहीं की. बताया जाता है कि चाची का पति घटना के बाद से नहींं दिख रहा है. सनी के फैमिली वालों को कई दिन से सब से अधिक वही धमका रहा था. पुलिस भी इस मामले में गंभीरता से जांच में जुट गई. एसपी अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि सनी व रजनी ने जहर खा कर जान दी है. दोनों का विसरा सुरक्षित कर स्लाइड बनाई गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

रजनी के फैमिली वालों द्वारा पुलिस पर लगाए आरोपों की जांच कराई जाएगी. घटना के संबंध में लड़की के फैमिली वालों की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है. इस मामले में आगे की कानूनी काररवाई की जाएगी. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया.

दोनों के पेरेंट्स ने क्यों लगाए आरोप

रजनी की हत्या के संबंध में थाने में उस के फादर द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सनी ने अपने पिता व भाई के सहयोग से साजिश के तहत 21 नवबंर, 2024 की रात 11 बजे उसे व उस की पत्नी को नींद की गोलियां खाने में खिला दीं, जिस से वे बेहोश हो गए. इस के बाद वे सभी रजनी को बहलाफुसला कर अपने साथ ले गए. वे लोग घर में रखे 48 हजार रुपए व 2 लाख रुपए की ज्वेलरी भी अपने साथ ले गए. घटना के बारे में उन्हें 22 नवंबर की सुबह जानकारी हुई. इस घटना की सूचना सुबह होने पर पुलिस चौकी बघार पर दी थी, लेकिन कोई काररवाई नहीं हुई. पिछले 2 दिनों से सनी के फेमिली वाले भी फरार हो गए थे.

सनी के पिता प्रमोद ने भी रजनी के घर वालों पर बेटे ही हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी, जिस में कहा गया है कि 20 दिन पहले लड़की के पापा फेमिली के कुछ लोगों के साथ उस के घर आए थे. उन्होंने गालीगलौज कर सनी की हत्या करने की धमकी दी थी. यही नहीं, करीब 10 दिन पहले उन्होंने फोन किया. धमकी दी कि सनी के हाथपैर तोड़ कर उसे अपाहिज कर देंगे. उन्होंने पुलिस को बताया कि धमकी देने की उन के पास रिकौर्डिंग भी है.

एसएचओ बलराज भाटी ने बताया कि 24 नवंबर की शाम को ही लड़की का शव उस के फैमिली वाले ले कर चले गए. मगर युवक सनी के फैमिली वालों के न पहुंचने पर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था. हुआ यह कि सनी के पापा अपने व बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने से गिरफ्तारी के डर से मोर्चरी नहीं जा रहे थे. बाद में थाने से आश्वासन मिलने के बाद 25 नवबंर को सनी के पापा प्रमोद अन्य फैमिली वालों और रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने साथ ले गए. एसएचओ का कहना था कि शुरुआती जांच से लग रहा है कि दोनों ने आत्महत्या की है. हत्या का आरोप निराधार है.

पहले प्रेमिका बाद में प्रेमी की मौत हुई

24 नवबंर को शाम करीब 4 बजे पोस्टमार्टम की काररवाई शुरू हुई. दोनों ही शवों का पोस्टमार्टम डा. नीरज कुमार ने किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि प्रेमिका की मौत पहले हुई और उस के प्रेमी सनी पाल की मौत प्रेमिका की मौत के 2 घंटे बाद हुई थी. दोनों के पेट में कोई ठोस खाद्य पदार्थ नहीं मिला है. केवल तरल पदार्थ ही पाया गया है. इस से यह स्पष्ट है कि जहरीला पदार्थ खाने के बाद पानी पिया गया है. पोस्टमार्टम के दौरान मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण दोनों का विसरा सुरक्षित किया गया. रजनी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, फिर भी स्लाइड बना कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, झांसी भेजी गई है.

सपने क्यों न हुए हकीकत

मृतक सनी पाल पीओपी (प्लास्टर औफ पेरिस) का कारीगर था. घटनास्थल से बरामद बाइक गांव देवरामपुर निवासी पीओपी ठेकेदार सनी बाथम की थी. मृतक 21 नवंबर को अपने ठेकेदार की बाइक मांग कर ले आया था. पुलिस ने बाइक अपने कब्जे में ले ली. इस संबंध में पुलिस ने ठेकेदार बाथम से भी पूछताछ की. पुलिस द्वारा इस सनसनीखेज कांड की जांच के दौरान घटना की जो कहानी सामने आई, उसे जान कर हर कोई सन्न रह गया. सनी और रजनी एक ही गांव के रहने वाले थे. गांव में दोनों के घर कुछ दूरी पर थे. रजनी दसवीं में पढ़ती थी. जब स्कूल जाती, रास्ते में उसे गांव का युवक सनी पाल मिल जाया करता था.

रजनी और सनी की नजरें अकसर मिल जातीं. उस समय रजनी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था. उसे मालूम था कि सनी उस की जाति का नहीं है, लेकिन वह उसे भा गया था. उस का सनी के प्रति आकर्षण बढऩे लगा. यही हाल सनी का भी था. उसे रजनी अच्छी लगती थी. अकसर दोनों स्कूल के रास्ते में मिल जाया करते थे. दोनों ही एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार करने में सकुचा रहे थे, क्योंकि दोनों का ही यह पहलापहला प्यार था. आखिर एक दिन सनी ने हिम्मत कर रजनी से पूछ ही लिया, ”रजनी, तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?’’

रजनी को तो जैसे इसी पल का ही इंतजार था. उस ने मुसकराते हुए कहा, ”मेरी पढ़ाई तो ठीक चल रही है, पर तुम कैसे हो?’’

”मैं अच्छा हूं.’’

इस मुलाकात के बाद दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए.

अब जब भी रजनी स्कूल जाती, सनी उसे रास्ते में इंतजार करता मिल जाता. फिर दोनों साथ चलतेचलते प्यार की बातें करते. कभीकभी रजनी पड़ोस में जाने की बात कह कर घर से निकल जाती और सनी से चोरीछिपे मिल आती थी. कुछ दिनों में ही दोनों का हाल ऐसा हो गया था कि जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, दोनों को चैन नहीं मिलता था. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. अब दोनों चोरीछिपे मिल लेते थे. जब भी रजनी और सनी मिलते, भविष्य के सपने संजोते. रजनी शाक्य समाज की थी जबकि सनी पाल समाज से था. रजनी कहती, ”सनी, समाज से डर कर तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे? मैं जातपात में विश्वास नहीं करती हूं और शादी करूंगी तो तुम्हीं से, अन्यथा अपनी जान दे दूंगी.’’

इस पर सनी ने उस के होठों पर हाथ रख उसे चुप कराते हुए कहा था, ”2 सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. समय आने पर मैं तुम्हारे साथ ही शादी रचाऊंगा.’’

प्रेमी युगल अपने भविष्य के सुखद सपने संजोते हैं, दिल कुछ चाहता है और हो कुछ और जाता है. रजनी और सनी भी सपने संजो रहे थे. गांव के लोगों ने दोनों को एक साथ देख लिया. धीरेधीरे दोनों परिवारों को रजनी और सनी के लव अफेयर के बारे में पता चल गया.

दोनों की मौत औनर किलिंग तो नहीं

सनी व रजनी के शव मिलने की सनसनीखेज घटना के बाद नई बात निकल कर सामने आई. गांव वालों के अनुसार, प्रेम प्रसंग की जानकारी होने के बाद रजनी के फैमिली वालों ने उसे काफी समझायाबुझाया. वहीं सनी पर रजनी से दूर रहने का दबाव बनाया, लेकिन जब इस का कोई असर दोनों पर नहीं हुआ तो आननफानन में फेमिली वालों ने रजनी की शादी कन्नौज में तय कर दी थी. 19 नवबंर को ही रजनी की गोदभराई हुई थी. विवाह मैच्योर होने के इंतजार में रुका था. मृतका रजनी के एक भाई और एक बहन हैं.

रजनी के फैमिली वालों ने आरोप लगाया था कि रजनी घर से जाते समय जेवर व नकदी अपने साथ ले गई थी. जबकि गांव के बाहर निर्माणाधीन मकान में मिले दोनों की डैडबौडी के पास ऐसा कोई भी सामान नहीं मिला. तब क्या रजनी के फेमिली वाले सनी के घर वालों को झूठा फंसा रहे हैं?

दोनों एकदूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे. दोनों ने एक साथ जीने और मरने की कसमें खाई थीं. प्रेमी जोड़े का हंसनामुसकराना समाज को मंजूर नहीं हुआ. लड़की के फैमिली वाले इस प्रेम कहानी के आड़े आ गए और आखिर में प्रेमी युगल को एक ऐसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा, जिस से हर कोई हैरान रह गया. दोनों एकदूसरे को पाने के लिए तिलतिल तड़प रहे थे. शादी कर एकदूसरे के बनना चाहते थे, लेकिन उन की मोहब्बत के बीच जाति और समाज की कुरीतियां आड़े आ गईं.  रजनी सनी के प्यार में इतनी पागल हो चुकी थी कि उस ने गले में मंगलसूत्र पहन कर मांग भी भर ली थी.

इस से साफ दिखाई दे रहा था कि वह सनी से शादी की रस्म भी पूरी कर चुकी थी. रजनी के फैमिली वाले खासे प्रभावशाली बताए जाते हैं. सनी के घर वाले दबी जुबान से इसे औनर किलिंग भी मान रहे हैं. पुलिस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए थी. प्रेमी युगल चांदनी रात में मोहब्बत के अफसाने बुनते थे. पानी की लहरों पर प्रेम का गीत लिखते थे. दोनों ही एकदूसरे पर जान छिड़कते थे. जहां इस लव स्टोरी का अंत रामलीला और इश्कजादे मूवी की तर्ज पर दोनों ने अपनी कुरबानी दे कर किया, वहीं मौत को गले लगाने से पहले दोनों ने अपनी शादी का जश्न भी मनाया.

बेदर्द दुनिया से हार कर दोनों ने मौत का दामन थाम लिया. ये प्रेमी युगल जीते जी अपने प्यार को पा न सके. मौत भी ऐसी चुनी कि अपनी मौत की कहानी अमर कर गए. हर जुबां पर गांव के प्रेमी युगल की मोहब्बत की दास्तां थी.

वैसे आत्महत्या जैसा निर्णय प्रेमी युगल तनाव के चलते लेते हैं. जब उन्हें आगे कोई रास्ता दिखाई नहीं देता, तब ऐसा कदम उठाने को वे मजबूर हो जाते हैं. पेरेंट्स को अपने बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए, ताकि उन के मन की बात जान कर ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार

दूसरे धर्म में शादी मौत को बुलावा

पेरुमल ने तिरुपुर पुलिस स्टेशन से घर पहुंचने के तुरंत बाद बेटी ऐश्वर्या को फांसी पर लटका दिया था. पेरुमल ने अपनी पत्नी से रस्सी और कुरसी लाने को कहा था. इस के बाद उस ने बेटी से खुद गले में फंदा डाल कर माफी मांगने के लिए कहा. उस ने उसे भरोसा दिया कि उस के माफी मांगने पर वह उस के फंदे पर झूलने से पहले रस्सी को काट देगा.

ऐश्वर्या ने ऐसा ही किया, किंतु जब पेरुमल ने रस्सी को काटा तो ऐश्वर्या को जिंदा पाया. इस के बाद पेरुमल ने उस का गला घोंट दिया, ताकि वह जीवित न बचे.

दक्षिण भारत बहुत ही खास अंदाज, मिजाज और रुतबे का प्रदेश है तमिलनाडु. यहां के लोग खेती किसानी से ले कर कल कारखाने तक में काम करने वाले पारंपरिक रीतिरिवाजों को भी काफी अहमियत देते हैं. हर परिवार और समाज के संस्कार में आन, बान और शान शीर्ष पर होता है. किंतु दूसरे प्रदेशों की तरह वहां के लोग भी जाति, धर्म, ऊंचनीच और अमीरी गरीबी के जाल में उलझे रहते हैं.

वहीं तंजावुर जिले में पट्टूकोट्टई के नेवविदुथी गांव का रहने वाला कल्लार समुदाय का पेरुमल और उस के परिवार के लोग बीते साल 2023 के आखिरी दिन से ही परेशान थे. इस की वजह यह थी कि उस की बेटी ऐश्वर्या बिना कहे घर से लापता थी. वह मात्र 19 साल की थी.

परिवार के लोग उस की तलाश अपने लोगों के बीच गुपचुप तरीके से कर रहे थे. वे समझ नहीं पा रहे थे कि ऐश्वर्या कहां गई होगी. रिश्तेदारी में पता किया, लेकिन उस के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई थी.

ऐश्वर्या 10वीं तक पढ़ाई पूरी करने के बाद तिरुपुर में एक पावरलूम में नौकरी पर लग गई थी. जब उस का कोई पता नहीं चला, तब उस के मम्मी पापा ने पल्लदम थाने में पहली जनवरी, 2024 को उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी.

हालांकि ऐश्वर्या के पापा पेरुमल और मम्मी रोजा को उस के सालों से चल रहे प्रेम संबंध के बारे में पता था. उन्हें पक्का विश्वास था कि ऐश्वर्या अपने प्रेमी संग ही होगी. लेकिन कहां मिलेगी, किस हाल में होगी, नहीं मालूम था. इस बारे में उन्होंने एसएचओ को बता दिया.

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया. वह वीडियो ऐश्वर्या की शादी का था. उस के साथ दूल्हा बने नवीन को सभी ने पहचान लिया. इस की गांव के दूसरे लोग कानाफूसी करने लगे थे. कोई सामने खुल कर कुछ नहीं बोल रहा था, लेकिन ऐश्वर्या के मम्मी पापा को दुत्कारने की नजरों से देखने लगे थे. यही बात उन्हें भीतर ही भीतर तकलीफ देने लगी थी.

मन कचोटने लगा था और वे बेटी की अपनी मरजी से की गई शादी से दुखी हो गए थे. वह सामाजिक उपेक्षा महसूस करने लगे थे. उन्हें लगने लगा था कि उस के कल्लार समाज के लोग ऐश्वर्या की हरकत से बेहद नाराज हो चुके हैं.

नए साल के मौके पर ऐश्वर्या की मम्मी रोजा गांव के मंदिर से पूजा कर लौट रही थी. अपने घर से कुछ कदम की दूरी पर ही थी कि पड़ोस की एक औरत तपाक से बोल पड़ी, ”तुम्हारी बेटी ने तो पूरे कल्लार समाज की नाक कटा दी है… उसे अपने समाज में कोई नहीं मिला जो उस दलित के साथ भाग गई!”

ताने से क्यों तिलमिलाया पेरुमल

रोजा यह सुन कर तिलमिला गई. ताने सुनती हुई तेज कदमों से अपने घर चली आई. पति के सामने रोने लगी. पति पेरुमल कल्लार ने पूछा तो उस ने पड़ोसी महिला के ताने की बात बता दी. साथ ही उस ने कहा कि चाहे जैसे भी हो ऐश्वर्या को पहले घर लाएं. पत्नी की बात सुन कर पेरुमल तुरंत थाने गया. उस ने ऐश्वर्या की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई.

पुलिस को उस ने वायरल हो रहे वीडियो की बात बताई, जो उस के गांव के लोगों के पास पहुंच चुका था. उस ने यह भी कहा कि वीडियो के फैलने से ऐश्वर्या की दलित लड़के के साथ शादी की चारों ओर चर्चा होने लगी है. लोग उसे और उस की पत्नी को नफरत की नजरों से देखने लगे हैं. ताने तक मारने लगे हैं. ऐश्वर्या को जल्द घर वापस लाना जरूरी है. लड़के के खिलाफ काररवाई करने में देरी होने पर सामाजिक तनाव बढ़ जाएगा.

इसी के साथ उस ने पुलिस को यह भी बताया कि इलाके में इस तरह के प्रेम संबंध और शादी को लोग बहुत ही गलत मानते हैं. उस ने कहा कि हम लोग पिछड़े समाज के हैं, जबकि बेटी ऐश्वर्या ने जिस के साथ शादी की है, वह दलित समाज का है.

दलितों और पिछड़े समुदाय के बीच ऐसे प्रेम विवाह पहले भी हुए हैं. उन में अधिकांश कभी गांव नहीं लौटे, लेकिन उन के घर वालों को लोगों ने गांव में जीना दूभर कर दिया था. हमारे गांव के बहुत से लोगों को ऐसी शादियों के बारे में पता तक नहीं है, हमारे मामले में वाट्सऐप वीडियो से यह बात सभी को पता चल गई है.

ऐश्वर्या के पिता ने उस लड़के के बारे में भी बता दिया. उस ने बताया कि ऐश्वर्या से शादी रचाने वाला लड़का नवीन भी 19 साल का है. वह वेल्लालर समुदाय से आता है, जो प्रदेश की एक अनुसूचित जाति है.

पुलिस को यह बात न केवल चौंकाने वाली लगी, बल्कि इसे सामाजिक तनाव बनाने का बड़ा कारण समझते हुए जल्द से जल्द सुलझाना जरूरी समझा. एसएचओ ने इस की जानकारी डीएसपी को देते हुए ऐश्वर्या की तलाशी संबंधी आवश्यक अनुमति भी मांग ली.

इस के बाद पुलिस ने ऐश्वर्या को तलाशना शुरू कर दिया. उन्हें जल्द ही नवीन के ठिकाने के बारे में मालूम हो गया. उस ने 31 दिसंबर को आवरापलयम के विनयागर मंदिर में जयमाला डाल कर अंतरजातीय शादी कर ली थी. शादी करने के बाद पहली जनवरी को जोड़े ने वीरापंडी इलाके में एक घर किराए पर लिया था. वहां से उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की थी.

इस मामले में पुलिस से कहां हुई चूक

2 जनवरी, 2024 की दोपहर पल्लदम पुलिस उन के घर पहुंच चुकी थी. उन्होंने ऐश्वर्या को पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा. उन से पुलिस अधिकारी ने कहा कि दोनों की उम्र के अनुसार उन की शादी अवैध मानी जाएगी. ऐश्वर्या के पापा ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई है, इसलिए भलाई इसी में है कि वे दूसरी कानूनी धाराओं में दोषी बनाए जाएं, इस से बचने के लिए अपने घर वालों से विवाह की सहमति ले लें.

ऐश्वर्या पुलिस के कहे अनुसार तुरंत उन के साथ थाने आ गई. वहां पहले से ही उस के पापा कुछ लोगों के साथ मौजूद थे. पुलिस ने ऐश्वर्या की बरामदगी मात्र घंटे भर में कर ली थी. मामले को सुलझा लिया गया था. ऐश्वर्या को उस के पापा घर ले आए.

हालांकि पीछेपीछे नवीन भी थाने आया. वह थाने के बाहर ही ऐश्वर्या का इंतजार करने लगा, लेकिन दोपहर करीब 2 बजे ऐश्वर्या के पापा पेरुमल और उन के साथ आए लोग उसे थाने से घर ले कर चले गए. उस से उन्होंने कोई बात नहीं की. यहां तक कि उस के सवालों का भी कोई जवाब नहीं दिया. उन के जाने के बाद नवीन ने पुलिस स्टेशन के अंदर जा कर ऐश्वर्या के बारे में पूछा. उसे बताया गया कि ऐश्वर्या को उस के पापा अपने गांव ले गए हैं.

नवीन को यह बात अटपटी लगी, क्योंकि ऐश्वर्या उस की ब्याहता थी. उस की अनुमति और मरजी के बगैर कोई कैसे कहीं ले कर जा सकता है. वह पुलिस पर नाराजगी दिखाने लगा. किंतु उल्टा उसे पुलिस ने ही चेतावनी दी. कहा कि अगर उस ने ऐश्वर्या से दोबारा मिलने की कोशिश की तो उस के घर वाले उसे पीटेंगे. इसलिए उस की भलाई इसी में है कि वह ऐश्वर्या को हमेशा के लिए भूल जाए.

नवीन को पुलिस की चेतावनी धमकी की तरह लगी. उस वक्त तो वह अपने गुस्से को काबू में रखता हुआ घर चला आया. वह पट्टूकोट्टाई के इलाके में पुवलूर गांव का रहने वाला था. ऐश्वर्या को स्कूल के समय से जानता था. दोनों अलगअलग स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन स्कूल आतेजाते उन की मुलाकातें हो जाती थीं.

इसी सिलसिले में उन के बीच प्रेम संबंध बन गए. यह जानते हुए कि उन की जातियां अलग हैं और समुदाय में भी अंतर है. दोनों समुदायों के बीच शादीविवाह कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन के परिवार और समाज उन के रिश्ते को सिरे से खारिज कर देंगे और उन्हें जबरन जुदा कर दिया जाएगा.

नवीन ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था और तिरुपुर में एक कपड़ा फैक्ट्री में नौकरी कर ली थी. वहां वह कंपनी द्वारा दिए गए आवास में रहता था. ऐश्वर्या भी अपने पैरों पर खड़ी थी. वह तिरुपुर में एक पावरलूम में नौकरी करती थी.

इस की शुरुआत हो चुकी थी. ऐश्वर्या को नवीन के सामने से ही उस के घर वाले ले कर चले गए थे. फिर भी उस ने हिम्मत नहीं हारी, लेकिन वह दुविधा में था.

अगले रोज 3 जनवरी को वह भागा भागा ऐश्वर्या के घर गया. दरअसल, उसे सूचना मिली कि ऐश्वर्या की आकस्मिक मृत्यु हो गई है और उस के शव का तुरंत अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है.

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ऐश्वर्या की मौत के बारे में वट्टाथिकोट्टई पुलिस से जानकारी मिली कि वह 3 जनवरी को अपने कमरे में मृत पाई गई थी. इस से आहत नवीन ने 7 जनवरी को ऐश्वर्या के घर वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी. शिकायत में उस ने आरोप लगाया कि उस की पत्नी ऐश्वर्या की उस के घर वालों ने हत्या कर दी है.

भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत मामला दर्ज किया गया. उल्लेखनीय है कि धारा 201 उस व्यक्ति के लिए सजा निर्धारित करती है, जो जानता है कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के सबूतों को नष्ट कर देता है या अपराधी को कानूनी सजा से बचाने के लिए गलत जानकारी देता है.

ऐश्वर्या की अचानक मौत हो जाने से लोगों के जेहन में साल 2014 की एक घटना ताजा हो गई, जो उसिलामपट्टी की सी. विमला देवी की मौत थी. वह भी ऐश्वर्या की तरह कल्लार जाति की थी और एक दलित व्यक्ति से शादी की थी. उसे अपनी जान बचाने के लिए केरल के एक पुलिस स्टेशन में शरण लेनी पड़ी थी.

बाद में विमला के पिता द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर जांच पूरी करने के लिए जोड़े को तमिलनाडु लाया गया. उस के मातापिता पुलिस को यह आश्वासन दे कर घर ले गए कि मामले को ठीक कर लिया जाएगा. लेकिन अगले ही दिन वह मृत पाई गई थी और पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही उस के अवशेष जल कर राख हो गए थे.

नवीन द्वारा दर्ज की गई शिकायत में कहा गया कि उस के और ऐश्वर्या के बीच पिछले 5 साल से प्रेम चल रहा था.अपनी शिकायत में नवीन ने यह भी कहा किया वह 2 जनवरी को 2 बजे ऐश्वर्या के पिता अन्य रिश्तेदारों के साथ पुलिस स्टेशन गया. आधे घंटे बाद ही पल्लदम पुलिस स्टेशन से ऐश्वर्या को उस के पिता और रिश्तेदारों ने अपने साथ ले कर पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी कार में बैठ कर चले गए.

नवीन ने बताया कि उसे सूचना मिली थी कि 3 जनवरी की सुबह ऐश्वर्या की हत्या कर दी गई थी और स्थानीय लोगों से छिपा कर शव को तत्काल श्मशान में जला दिया गया था.

इस संबंध में पुलिस ने अपनी जांच में कहा कि ऐश्वर्या को उस के मम्मी पापा ने नेवाविदुति गांव के इमली के पेड़ से लटका कर मार डाला गया था. हालांकि इस बारे में ऐश्वर्या के गांव वाले कुछ भी खुल कर बात करने को तैयार नहीं थे. फिर भी कुछ लोगों ने दबी जुबान से दिल दहला देने वाली इस घटना के बारे में कई संदिग्ध बातें बताईं. उन्हीं में से एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उस ने ऐश्वर्या को उस के पापा द्वारा जबरदस्ती ले जाते हुए देखा था.

इसी तरह एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि उस के घर के बाहर बहुत शोर हो रहा था, जिसे सुन कर हम बाहर निकले. ऐश्वर्या के घर वाले उसे घसीटते हुए इमली के पेड़ तक ले कर जा रहे थे. इस आधार पर पुलिस का कहना था कि ऐश्वर्या के पापा ने ही इमली के पेड़ के नीचे उस की हत्या कर दी.

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इस जांच की अगुवाई करने वाले एसआई नवीन प्रसाद ने ऐश्वर्या की क्रूर तरीके से हत्या होने की पुष्टि की. इस आधार पर ही औनर किलिंग के आरोपी पेरुमल और उस की पत्नी रोजा को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान पेरुमल ने बताया कि उस ने इमली के पेड़ के नीचे अपनी बेटी की हत्या की थी.

पुलिस ने पेरुमल और उस की पत्नी रोजा से पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया.

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार – भाग 3

बाप बेटे क्यों बने जल्लाद

बेटी की इस गुहार पर भी पिता कृपाराम व भाई राघवराम का दिल नहीं पसीजा. आरती जब बीच में आई तो राघव ने डंडे से उसे भी मारना शुरू कर दिया. सिर में डंडा लगने से वह बेहोश हो गई. फिर रस्सी से बापबेटे ने उस का गला कस दिया.

आरती को मारने के बाद उन दोनों ने सतीश को भी पीटपीट कर अधमरा कर दिया. आपत्तिजनक हालत में आरती व सतीश  के पकड़े जाने से दोनों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. गुस्से में उन्होंने रस्सी से सतीश का गला भी कस दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद सतीश ने वहीं दम तोड़ दिया.

इस सनसनीखेज डबल मर्डर के बाद दोनों पुलिस की गिरफ्त से बचने की जुगत करने लगे. वहीं लाशों को ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगे. सतीश के शव को जंगल में छिपाने व आरती के शव को अयोध्या ले जा कर दफनाने की योजना बनाई गई. तय किया गया कि आरती के बारे में कोई पूछेगा तो कह देंगे कि रिश्तेदारी में गई है.

दोनों बापबेटे रात में ही एक चारपाई पर सतीश के शव को रख कर गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक गन्ने के खेत में ले गए. दोनों ने शव को गन्ने के खेत में छिपा दिया. जिस रस्सी से सतीश का गला कस कर हत्या की थी, उसे भी चारपाई के साथ ही खेत में फेंक आए.

सतीश के शव को छिपाने के बाद अब रात में ही आरती का शव ठिकाने लगाना था. कृपाराम और राघवराम आरती के शव को कार से ले कर गांव से 20 किलोमीटर दूर अयोध्या पंहुचे. अयोध्या में सरयू नदी के किनारे श्मशान घाट पर एक बालू के टीले में शव को दफन कर गांव वापस आ गए और घर में शांत हो कर बैठ गए. ताकि किसी को दोहरे हत्याकांड का पता न चल सके.

लेकिन मंगलवार 21 अगस्त को सुबह सतीश के नहीं मिलने पर उस के घर वालों ने उसे बहुत तलाशा. जब उन्हें जानकारी हुई कि आरती भी घर पर नहीं है तो उन लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी. क्योंकि वे लोग भी आरती और सतीश के रिश्ते के बारे में जानते थे.

थाने में आरती के पिता कृपाराम चौरसिया ने कहा कि हमारे यहां गांव के लड़के से शादी नहीं होती है. सतीश भले ही हमारी जाति का था, लेकिन वह था तो हमारे गांव का ही. ऊपर से वह आरती का भाई लगता था. आरती किसी दूसरे गांव के लड़के से बोलती तो हम लोग उसकी शादी करवा देते.

हमारे घर से 20 मीटर की दूरी पर ही सतीश का घर था. रोज का आमनासामना होता था. वह बचपन से घर आताजाता था. दोनों साथ खेले, हम लोग उसे आरती का बड़ा भाई कहते थे. हम लोग आरती के साथ उस का रिश्ता कैसे मंजूर कर लेते?

3-4 महीने पहले दोनों को गांव के एक युवक ने साथसाथ देख लिया था. दोनों बाहर कहीं साथ में बैठे थे. इस बात की जानकारी उस ने हमें दी थी. जब आरती की घर पर बहुत पिटाई की थी. उस को सख्ती से मना किया था कि वह कभी सतीश से न मिले, लेकिन हफ्ते भर पहले वह सतीश से मिलने फिर चली गई.

इस के बाद आरती के घर से  निकलने पर  पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी, लेकिन उस ने सतीश को 20-21 अगस्त की रात को घर बुला लिया. अगर हम अपनी बेटी को नहीं मारते तो वह हमें मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ती.

सतीश की निर्मम हत्या किए जाने पर उस के घर में कोहराम मच गया. मां प्रभावती और भाई बहनों का रोरो कर बुरा हाल हो गया. सतीश के घर वाले और रिश्तेदार गम के साथ गुस्से में दिखे.

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सतीश की मां प्रभावती का कहना था कि आरती के पिता कृपाराम चौरसिया, भाई राघवराम के साथ ही उस का चाचा आज्ञाराम और उस का बेटा विजय भी इस हत्याकांड में शामिल हैं. कृपाराम व राघवराम ने भी थाने में पुलिस को उन के नाम बताए थे. लेकिन पुलिस ने केवल बापबेटे को ही गिरफ्तार किया है.

आरती के पिता व भाई ने जुुर्म कुबूल कर लिया. इस से आरती के चाचा आज्ञाराम और उस के बेटे विजय को राहत मिली है. मगर सतीश की मां अपने बेटे को न्याय दिलाने की खातिर अभी भी मामले में आज्ञाराम व विजय को आरोपी बनाए जाने की मांग कर रही है.

उस का आरोप है कि जिस तरह से दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया है और दोनों की लाशों को घटनास्थल से हटाया गया है, उस में सिर्फ 2 लोग ही शामिल नहीं हो सकते. प्रभावती अंतिम सांस तक सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी काररवाई के लिए संघर्ष करने की बात कहती है.

गांव में हुए दोहरे हत्याकांड के खुलासे व आरती के पिता व भाई द्वारा हत्या करने का जुर्म कुबूल करने तथा दोनों की गिरफ्तारी से गांव के लोग सन्न रह गए. गिरफ्तारी के बाद आरती के अन्य परिजन घर में ताला लगा कर भाग गए थे. पूरे गांव में इसी घटना की चर्चा हो रही थी.

वहीं सतीश की हत्या की सूचना सोमवार को ही मोबाइल से पिता बिंदेेश्वरी प्रसाद चौरसिया को दी गई. वे ट्रेन से मुंबई से गांव पहुंच गए. वे अपने बेटे की हत्या पर फफकते हुए बोले, ”पता होता कि उस की हत्या कर दी जाएगी तो उसे भी अपने साथ मुंबई ले जाते. बेटे को तो न खोना पड़ता.’’

बिंदेश्वरी ने रोते हुए कहा कि फांसी की सजा देने का अधिकार तो सिर्फ अदालत को है, लेकिन बाप बेटे ने मिल कर जल्लाद की तरह मेरे जिगर के टुकड़े सतीश को फांसी दे दी.

औनर किलिंग के हत्यारों कृपाराम व राघवराम को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में एसएचओ सत्येंद्र वर्मा, एसआई विजय प्रकाश, हैडकांस्टेबल दया यादव, कुषार यादव, आशुतोष पांडे, अमरीश मिश्रा व कांस्टेबल रिषभ शामिल थे. एसपी अंकित मित्तल ने 24 घंटे में डबल मर्डर का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत किया.

गुमशुदगी की रिपोर्ट को भादंवि की धारा 302, 201 में तरमीम कर प्रेमी युगल आरती चौरसिया व सतीश चौरसिया की हत्या के आरोपी कृपाराम चौरसिया व उस के बेटे राघवराम चौरसिया को गिरफ्तार कर 23 अगस्त, 2023 को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया. जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

एएसपी शिवराज

हंसते खेलते युवा प्रेमी युगल को मौत की नींद सुला दिया गया, जहां आदमी चांद पर पहुंच रहा है. जमाना चाहे कितना भी आगे बढ़ गया हो, लेकिन दकियानूसी सोच उन्हें आगे नहीं बढऩे दे रही. कृपाराम और राघवराम जैसे लोग समाज में नासूर बने हुए हैं, जो झूठी आन, बान और शान के लिए औनर किलिंग जैसे अपराध करते हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार – भाग 2

गन्ने के खेत में मिला सतीश का शव

हत्या का जुर्म कुबूल करने के बाद पुलिस ने आरती के भाई राघवराम की निशानदेही पर गन्ने के खेत से सतीश का शव, चारपाई व रस्सी बरामद कर ली. फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड को भी बुला लिया गया था. खोजी कुत्ता गन्ने के खेत के बाद दौड़ता हुआ राघवराम के घर पर जा पहुंचा.

फोरैंसिकटीम ने भी घटनास्थल से कुछ साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. वहीं आरती को बालू के टीले में दफन किए जाने की जानकारी पर एसएचओ सत्येंद्र वर्मा ने डीएम से अनुमति ली.

इस के बाद पुलिस टीम के साथ अयोध्या जा कर वहां के अधिकारियों से बात कर के सरयू नदी के किनारे बालू के टीले में दफन आरती का शव निकलवाया. मौके की काररवाई के बाद उस का अयोध्या में ही पोस्टमार्टम कराया गया.

सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही परदाफाश कर दिया. इस डबल मर्डर की दिल दहलाने वाली जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

19 वर्षीय सतीश चौरसिया का गांव की ही रहने वाली 18 साल की आरती चौरसिया से पिछले लगभग 2 सालों से अफेयर चल रहा था. दोनों एक ही जाति के थे. गांव के नाते सतीश का आरती के घर आनाजाना था. दोनों ही जवानी की दहलीज पर कदम रख चुके थे.

सतीश कदकाठी का कसा हुआ नौजवान था. वह सुंदर भी था. आरती उस की ओर आकर्षित हो गई. जब भी सतीश घर पर आता, आरती उसे कनखियों से देखा करती थी. इस बात का आभास सतीश को भी था. वह भी मन ही मन आरती को चाहने लगा था.

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अब दोनों का बचपन का प्यार जवान हो गया था. जब कभी दोनों की नजरें मिलतीं तो दोनों एकदूसरे को देख कर मुसकरा देते थे. दोनों के बीच घर वालों के सामने सामान्य बातचीत होती थी.

धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब दोनों की मोबाइल पर प्यार भरी बातें होने लगीं. फिर उन की अकसर गांव के बाहर चोरी छिपे मुलाकातें होने लगीं. प्रेमीयुगल एकदूसरे का हाथ थाम कर शादी करने का फैसला भी ले चुके थे.

सतीश ने आरती से साफ लहजे में कह दिया था, ”आरती, दुनिया की कोई ताकत हम दोनों को शादी करने से नहीं रोक सकती है. मैं ने तुम से सच्चा प्यार किया है और आखिरी सांस तक करता रहंूगा.’’

आरती ने भी मरते दम तक साथ निभाने का वादा किया.

आरती और सतीश खुश थे. दोनों अपने भावी जीवन के सपने देखते. दुनिया से बेखबर वे अपने प्यार में मस्त रहते थे. पर गांवदेहात में लव स्टोरी ज्यादा दिनों तक नहीं छिप पाती. यदि किसी एक व्यक्ति को भी इस की भनक लग जाती है तो कानाफूसी से बात गांव भर में जल्द ही फैल जाती है.

किसी तरह आरती के घर वालों को भी इस बात का पता चल गया कि आरती का सतीश के साथ चक्कर चल रहा है. इस बात की जानकारी मिलने के बाद आरती के घर वाले कई बार विरोध कर चुके थे. विरोध के बाद सतीश का आरती के घर जाना बंद हो गया, लेकिन मौका मिलने पर दोनों चोरीछिपे मुलाकात जरूर कर लेते थे.

घर से निकलने पर क्यों लगाई पाबंदी

20-21 अगस्त, 2023 की रात को जब राघवराम घर आया, उस समय आरती और उस की मम्मी खाना बना रही थीं. पिता पास ही बैठे हुए थे. राघव पिता के पास जा कर बैठ गया. दोनों बाप बेटे कामकाज की बातें करने लगे. कुछ देर बाद खाना बन कर तैयार हो गया. तब मां ने आवाज लगा कर राघव व अपने पति को बुला लिया. दोनों खाना खाने किचन के पास पहुंच गए. किचन के पास ही बैठ कर चारों ने खाना खाया. ये लोग आपस में बात कर रहे थे, लेकिन आरती कुछ बोल नहीं रही थी.

आरती उन लोगों से नाराज थी. क्योंकि घर वाले एक हफ्ते से उसे घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे थे. दरअसल, आरती अपने प्रेमी सतीश से चोरीछिपे मिलती थी. जिस की जानकारी होने पर उस पर रोक लगाई गई थी.

आरती और सतीश के प्रेम प्रसंग की वजह से गांव में उन की बदनामी हो रही थी. जो घर वालों को बरदाश्त नहीं थी, लेकिन यह बात आरती नहीं समझ पा रही थी. वह तो सतीश के साथ शादी करने की जिद पर अड़ी हुई थी.

करीब एक हफ्ते से आरती घर वालों के डर से अपने प्रेमी सतीश से मिलने नहीं जा पा रही थी. उसे उन का यह फरमान नागवार गुजर रहा था. उधर सतीश भी आरती से मिलने के लिए बेचैन था. दोनों ही जल बिन मछली की तरह एकदूसरे के लिए तड़प रहे थे.

इस के चलते आरती ने फोन कर के सतीश को 20-21 अगस्त की रात को मिलने के लिए अपने घर के पीछे बुला लिया.

रंगेहाथों पकड़ा गया प्रेमी युगल

अपनी प्रेमिका आरती से मोबाइल पर बात होने के बाद सतीश ने घर वालों के सोने का इंतजार किया. रात साढ़े 12 बजे जब घर वाले सो गए तो वह बाहर की बैठक (कमरे) से निकल कर आरती के घर जा पहुंचा. उस समय आरती के घर वाले भी गहरी नींद में सोए हुए थे. आरती बेसब्री से उसी के आने की बाट जोह रही थी. उसे एकएक पल काटना भारी हो रहा था.

सतीश जैसे ही आरती के घर के पास पहुंचा, फोन करने पर आरती दरवाजा खोल कर बाहर आ गई. दोनों एकदूसरे का हाथ थामे वहीं घर के पीछे झाडिय़ों की आड़ में चले गए. वहां पहुंचते ही दोनों ने एकदूसरे को अपनी बांहों के घेरे में कस लिया. दोनों एकदूसरे से पूरे एक हफ्ते बाद मिले थे.

घर वालों से बेपरवाह हो कर युगल प्रेमी कानाफूसी में इतने मगन हो गए कि उन्हें किसी बात का अहसास ही नहीं हुआ. दोनों ही तनमन से प्यासे थे. वे अपने जज्बातों पर काबू नहीं कर पाए और दो तन एक हो गए.

रंगेहाथों पकड़े जाने पर डर की वजह से सतीश प्रेमिका के घर वालों से अपनी गलती की माफी मांगने लगा. मगर आरती के पिता व भाई के सिर पर खून सवार था. घर वाले दोनों को पकड़ कर पीटते हुए घर में ले आए. बापबेटे डंडे  से सतीश की जम कर पिटाई करने लगे.

अपने प्रेमी की हालत देख कर आरती रो पड़ी. प्रेमी के साथ पकड़े जाने पर आरती ने पिता और भाई से उसे छोडऩे की काफी विनती की. आरती ने उन के सामने हाथ जोड़ कर कहा, ”मैं सतीश के साथ ही जीना और मरना चाहती हंू. इसलिए मारना है तो हम दोनों को ही मार दो, एक को नहीं.’’

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार – भाग 1

उस रात सभी लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए. आधी रात को राघव को कुछ उलझन महसूस हुई  तो वह बाहर आ गया. बाहर टहलने के बाद राघव आरती के कमरे की ओर गया तो वह वहां नहीं थी. तब राघव मम्मी के पास गया, आरती वहां भी नहीं थी. इस के बाद राघव ने घर में सभी को उठा दिया. लेकिन बदनामी के डर से घर वालों ने शोर नहीं मचाया.

पहले तो आरती की घर में ही तलाश की फिर बाहर गांव में निकल गए, लेकिन  आरती कहीं नहीं मिल रही थी. घर वाले समझ गए कि वह सतीश चौरसिया के साथ ही होगी. उसे तलाशता हुआ राघव जब अपने घर के पीछे पहुंचा तो वहां का दृश्य देख कर उस का खून खौल उठा. आरती और सतीश आपत्तिजनक स्थिति में थे. राघव इसे बरदाश्त नहीं कर पाया. उस ने अपने पापा मम्मी को मौके पर बुला लिया.

उत्तर प्रदेश के जनपद गोंडा का एक थाना है धानेपुर. इस थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव मेहनौन आता है. इसी गांव के रहने वाले हैं बिंदेश्वरी चौरसिया. उन के 5 बेटे व एक बेटी थी. अपने 3 बेटों लवकुश, संजय और हरिश्चंद्र के साथ बिंदेश्वरी मुुंबई में रहते थे.

संजय व हरिश्चंद्र अपने पिता के साथ वहां पावरलूम में काम करते थे, जबकि लवकुश चाय की दुकान चलाता था. बिंदेश्वरी के 2 बेटे सतीश व विशाल गांव में ही अपनी मां के साथ रह रहे थे. जबकि बेटी की वह शादी कर चुके थे.

गांव में सब कुछ ठीक चल रहा था. अचानक बिंदेेश्वरी  का 19 वर्षीय बेटा सतीश चौरसिया 20-21 अगस्त, 2023 की रात घर से अचानक लापता हो गया. घर वाले सारी रात उस का इंतजार करतेे रहे. सुबह होने पर उन्होंने अपने तरीके से खोजबीन की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. इस पर सतीश की मां प्रभावती ने थाना धानेपुर में 21 अगस्त की सुबह सतीश की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

गुमशुदगी दर्ज हो जाने के बाद 22 अगस्त, 2023 को थाना धानेपुर के एसएचओ सत्येंद्र वर्मा जांच के लिए  पुलिस टीम के साथ गांव मेहनौन पहुंचे. सतीश के घर वालों से उन्होंने पूछताछ की.

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एसएचओ सत्येंद्र वर्मा

सतीश की मां प्रभावती ने उन्हें बताया कि 20-21 अगस्त की देर रात खाना खा कर सतीश घर के बाहरी हिस्से में बनी बैठक (कमरे) में सोने चला गया था. आधी रात को जब उस की आंखें खुलीं तो सतीश बैठक में नहीं दिखाई दिया.

उस ने सोचा कि शायद वह टायलेट के लिए खेत में गया होगा. लेकिन काफी देर बाद भी वह नहीं लौटा. सुबह होते ही सतीश को सभी ने गांव में तलाशना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिला.

पुलिस ने गांव में अपने स्तर से जांचपड़ताल करने के साथ ही सतीश के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि रात को सतीश की गांव की रहने वाली एक युवती से फोन पर बात हुुई थी. वह रात को उस से मिलने गया था. इस के बाद से ही वह लापता हो गया था.  सतीश की मां ने बताया कि उसे पता चला है कि गांव की आरती भी अपने घर पर नहीं है.

सतीश और आरती अपने घरों में नहीं थे. दोनों के इस तरह गायब हो जाने पर गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. सभी दबी जुबान से कह रहे थे कि दोनों गांव से भाग गए हैं. अब कहीं जा कर शादी कर लेंगे. कोई कह रहा था कि आरती सतीश पर जान छिड़कती थी. 2 साल से चल रहे उन के प्रेम प्रसंग के बारे में कौन नहीं जानता. जितने मुंह उतनी बातें.

घर वालों ने पुलिस को क्यों उलझाया

इस जानकारी के बाद पुलिस आरती के घर पहुंची. घर पर आरती के पिता कृपाराम चौरसिया और भाई राघवराम चौरसिया मिले. आरती के घर वाले शांति से अपने घर पर बैठे थे. आरती के पिता कृपाराम से एसएचओ ने आरती के बारे में पूछताछ की.

पहले तो उन लोगों ने पुलिस को अपनी बातों में उलझाया. कई तरह की बातें बनाईं. कृपाराम चौरसिया ने बताया कि गांव का सतीश चौरसिया उन की बेटी आरती को बहलाफुसला कर रात को अपने साथ भगा ले गया है. जिस से गांव में उन की बहुत बदनामी हो रही है.

तब एसएचओ सत्येंद्र वर्मा ने कहा कि आप लोग दोनों की तलाश क्यों नहीं कर रहे? अब तक थाने में रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं कराई?

बापबेटे इस बात पर बगलें झांकने लगे. अपनी बातों से पुलिस को उन्होंने हरसंभव उलझाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के तर्कों के आगे उन की एक नहीं चली.

पुलिस को पहले ही इस मामले में मुखबिर से महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल गई थी. सतीश के मोबाइल की काल डिटेल्स से यह पता चल गया था कि रात को सतीश आरती के घर गया था.

पुलिस ने अनहोनी का शक होने पर कृपाराम व उस के बेटे राघवराम को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने दोनों से कहा, ”सीधेसीधे सच बता दो, नहीं तो पुलिस फिर अपने तरीके से पूछेगी.’’

तब दोनों कहने लगे कि आरती की कई दिनों से तबियत खराब चल रही थी. हम लोग इलाज के लिए उसे अयोध्या ले जा रहे थे. रास्ते में उस की मौत हो गई. तब हम ने अयोध्या में ही उस का अंतिम संस्कार कर दिया. सतीश के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

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एसपी अंकित मित्तल

बापबेटे पलपल में बयान बदल रहे थे. तब पुलिस ने दोनों से सख्ती की इस पर वे टूट गए और सतीश और आरती की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया.  इस के बाद एसएचओ एएसपी शिवराज व सीओ शिल्पा वर्मा को घटना से अवगत करा दिया. दोनों पुलिस अधिकारी गांव पहुंच गए. दोनों ने पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसपी अंकित मित्तल को दी.