Love Crime: छलिया आशिक से रहें अलर्ट

Love Crime: 22 वर्षीय तैयबा ने फैसल चौधरी से इसलिए कोर्ट मैरिज कर ली थी, क्योंकि उस ने खुद को कुंवारा बताया था, जबकि हकीकत में वह 2 बच्चों का बाप था. प्यार में छली गई तैयबा के सामने पछतावे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस के बावजूद तैयबा ने छलिया फैसल से जब उस के घर में जगह मांगी तो…

रात के 8 बज गए थे, लेकिन तैयबा अभी तक अपने काम से घर नहीं लौटी थी. उस की अम्मी के पेशानी पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं. वह अपने बड़े बेटे अदनान के कमरे में पहुंची और परेशान होते हुए बोली, ”अदनान, अभी तक तैयबा घर नहीं लौटी है.’’

”अरे!’’ अदनान हैरान होते हुए बोला, ”तैयबा तो 7-साढ़े 7 बजे तक घर आ जाती है, क्या तुम ने उसे फोन नहीं किया?’’

”किया था. मैं ने साढ़े 7 बजे उसे फोन किया था तो कह रही थी थोड़ा लेट हो जाऊंगी, मैं 9 बजे तक आ जाऊंगी, लेकिन अब तो साढ़े 9 बज गए.’’

अदनान ने तैयबा का नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ घंटी बजने के थोड़ी देर बाद ही तैयबा ने फोन उठा लिया. उस ने पूछा, ”कैसे फोन कर रहे हो भाई, सब ठीक तो है?’’

”सब ठीक है यहां. अम्मी तुम्हें ले कर परेशान हैं. तुम कहां पर हो?’’

”मैं अपने काम पर ही हूं भाईजान. मुझे यहां थोड़ा वक्त और लगेगा. आप लोग मेरी चिंता मत करो. खाना खा कर सो जाओ. मेरा खाना अम्मी ढक कर रख देगी. आऊंगी तो गरम कर के खा लूंगी.’’ तैयबा ने कहने के बाद कौल डिसकनेक्ट कर दी.

”तुम बेकार में परेशान हो रही हो अम्मी. तैयबा अपनी ड्यूटी पर ही है. उसे आने में देर हो जाएगी.’’ अदनान ने अम्मी को समझाया.

अदनान के अब्बू अहमद भी घर आ गए थे. तैयबा के अभी तक घर न आने पर उन्होंने लापरवाही से कहा, ”कंपनी में काम निकल आया होगा, तैयबा पहले भी कई बार देर से घर लौटी है. चिंता मत करो, आ जाएगी.’’

रात 11 बजे तक सभी खाना खा कर चारपाई पर आ गए और उन्हें नींद भी आ गई. केवल तैयबा की अम्मी की आंखों से नींद उड़ी हुई थी. तैयबा के लिए वह बेचैन थी. लेकिन नींद तो नींद होती है, रात को कब उसे भी नींद आ गई, मालूम ही नहीं चला, वह अधकच्ची नींद में सोती रही.

अचानक पौने 3 बजे उस की नींद खुल गई. वह घबरा कर बिस्तर पर उठ बैठी. तैयबा अभी भी घर नहीं आई थी. सिरहाने रखा मोबाइल उठा कर तैयबा की अम्मी ने उसे फोन लगाया. घंटी बजी और फोन को तैयबा ने उठा कर कहा, ”हैलो अम्मी! आप अभी तक सोई नहीं हैं क्या?’’

”तू कहां पर है तैयबा?’’ अम्मी ने पूछा.

”मैं यहां एक दोस्त के साथ होटल में चाय पीने आई हूं अम्मी, यह मेरा दोस्त मेरे साथ ही काम करता है. चाय पी कर मैं बस घर के लिए ही निकलूंगी. आप सो जाइए.’’ तैयबा ने बताने के बाद फोन काट दिया. अम्मी को तसल्ली हुई कि बेटी ठीकठाक है और अब जल्दी घर भी आ जाएगी. फोन सिरहाने रख कर उन्होंने आंखें बंद कर लीं तो फिर नींद ने उन्हें अपने आगोश में समेट लिया.

सुबह का उजाला फैला, तब तैयबा की अम्मी की आंखें खुलीं. तैयबा आ गई होगी. यह सोच कर उन्होंने तैयबा के बिस्तर पर नजर दौड़ाई. वह खाली था. अम्मी ने तैयबा को फिर फोन मिलाया, लेकिन तैयबा के फोन के स्विच औफ होने की रिकौर्डिंग सुनाई देने लगी. अम्मी ने कई बार ट्राई किया, किंतु तैयबा का फोन नहीं लगा. घबरा कर अम्मी ने अदनान और पति को जगा दिया. अदनान के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वह बोला, ”अब्बा! मुझे अब तैयबा के लिए ज्यादा चिंता हो रही है. पूरी रात वह घर नहीं आई. आखिर वह कहां रुक गई है. मालूम करना पड़ेगा.’’

अदनान ने दूसरे कपड़े पहने और बोला, ”मैं उस की कंपनी में जा कर पता करता हूं.’’

अदनान स्कूटी ले कर बहन तैयबा का पता लगाने दिलशाद गार्डन चला गया. तैयबा दिलशाद गार्डन में स्थित एक कंपनी में काम करती थी. अदनान ने तैयबा की कंपनी में जा कर मालूम किया तो उसे बताया गया कि तैयबा शाम को ही कंपनी से छुट्टी कर के चली गई थी. अदनान की चिंता बढ़ गई. इस का मतलब तैयबा झूठ बोल रही थी कि कंपनी में ओवरटाइम है, जबकि वह 5 बजे ही कंपनी से छुट्टी कर के निकल गई थी. आखिर वह कहां गई?

अदनान ने तैयबा की कुछ परिचित सहेलियों के यहां जा कर मालूम किया. तैयबा उन से नहीं मिली थी. हर संभावित जगहों पर तलाश करने पर भी जब वह नहीं मिली तो अदनान घर लौट आया और अब्बू को साथ ले कर उत्तरपूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाने में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने चला गया. तैयबा 22 साल की जवान युवती थी. थाना दयालपुर में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली गई. यह सूचना 28 नवंबर को तैयबा के अब्बा अहमद की तरफ से लिखवाई गई थी. उन्हें तैयबा के अपहरण होने का शक था.

दयालपुर थाने के एसएचओ परमवीर दहिया ने तैयबा के लापता होने की घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने यह जानकारी उत्तरपूर्वी डीसीपी आशीष मिश्रा को भी दे दी. इंसपेक्टर परमवीर दहिया डीसीपी के निर्देश पर तैयबा की कंपनी में पहुंच गए और वहां तैयबा के बारे में कंपनी के मालिक से पूछताछ न कर, वहां तैयबा के साथ काम करने वाली एक अन्य युवती को अपने पास बुला कर बड़े प्यार से पूछा, ”तुम तैयबा के साथ काम करती हो, तुम्हारा नाम क्या है?’’

”जी, मेरा नाम रुखसाना है.’’ युवती ने बताया फिर पूछा, ”तैयबा के विषय में क्यों छानबीन कर रहे हैं साहब?’’

”तैयबा कल से घर नहीं लौटी है रुखसाना. उस के अब्बू ने उस की गुमशुदगी थाने में लिखवाई है. क्या तुम्हें लगता है तैयबा का कोई अपहरण कर सकता है?’’

”नहीं साहब,’’ रुखसाना बोली, ”भला उस का अपहरण कोई क्यों करेगा. तैयबा खुद उस के साथ चली गई होगी.’’

”किस के साथ?’’ इंसपेक्टर दहिया ने चौंकते हुए पूछा.

”जिसे वह प्यार करती है. क्या आप ने उस की इंस्टाग्राम पर होटल वाली रील नहीं देखी साहब?’’ कहने के बाद रुखसाना ने अपने मोबाइल में इंस्टाग्राम खोल कर एक रील इंसपेक्टर दहिया के सामने कर दी.

इस रील में तैयबा किसी होटल में एक युवक के साथ बैठी चाय पीती नजर आ रही थी. तैयबा अपने मोबाइल से उस युवक के साथ विभिन्न पोज में रील बना रही थी. युवक का चेहरा इस रील में काफी स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

”इस का नाम तुम्हें मालूम है रुखसाना?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

”फैसल चौधरी है इस का नाम, मुस्तफाबाद में कहीं रहता है. मुझे तैयबा ने यह बात बताई थी.’’

इंसपेक्टर दहिया ने डीसीपी आशीष मिश्रा को यह जानकारी थाने लौट कर दे दी. उन्होंने अपनी देखरेख में थाने के तेजतर्रार इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद की एक टीम बना कर इंसपेक्टर परमवीर दहिया को फैसल चौधरी को ढूंढ निकालने का आदेश दे दिया.

इंसपेक्टर परमवीर दहिया ने इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद को साथ ले कर पहले तैयबा के परिजनों से फैसल चौधरी के विषय में पूछताछ की. उन्होंने तैयबा द्वारा होटल में चाय पीने की वह इंस्टाग्राम वाली रील तैयबा के परिजनों को दिखा कर पूछा, ”क्या इस युवक को आप जानते हैं?’’

”यह तो फैसल चौधरी है.’’ अदनान ने तुरंत कहा, ”मैं ने इसे पहले भी देखा है. यह मुस्तफाबाद में रहता है. इस के पिता आलम चौधरी प्रौपर्टी का काम करते हैं. मैं एक परिचित के साथ इन के औफिस में गया था, परिचित को एक मकान खरीदना था, लेकिन यह फैसल मेरी बहन तैयबा के साथ कैसे?’’

”यह रील देख कर अदनान तुम्हें समझ लेना चाहिए कि तैयबा इस के संपर्क में थी और इस से उस का प्रेम संबंध भी था. यह रील खुद तैयबा ने अपने मोबाइल से बनाई है.’’ इंसपेक्टर दहिया ने गंभीर स्वर में कहा तो अदनान ने सिर झुका लिया और धीरे से बोला, ”मैं इस विषय में नहीं जानता.’’

पुलिस टीम अदनान को साथ ले कर मुस्तफाबाद आलम चौधरी के प्रौपर्टी डीलर वाले औफिस में पहुंच गई. आलम चौधरी अपने औफिस में ही मिल गए. पुलिस को अपने औफिस में देख कर वह चौंकते हुए कुरसी से खड़े हो गए.

”आप फैसल को जानते हैं?’’ इंसपेक्टर राजेश ने पूछा.

”फैसल मेरा बेटा है तो मैं क्या अपने बेटे को नहीं जानंूगा साहब.’’ आलम मुसकराने का प्रयास करते हुए बोले, ”आप उस के विषय में क्यों पूछताछ कर रहे हैं.’’

”वह एक लड़की तैयबा को ले कर आया है. हमें फैसल से मिलवाइए.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कड़क स्वर में कहा.

आलम चौधरी चौंक कर बोले, ”मेरा बेटा फैसल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है जनाब. वह किसी लड़की को क्यों ले कर आएगा? आप लोगों को अवश्य गलतफहमी हुई है.’’

”हमें फैसल से मिलवाओ. उसी के मुंह से हम उस की करतूत आप को सुनवाएंगे. बुलाइए उसे.’’ इंसपेक्टर दहिया शुष्क स्वर में बोले.

आलम चौधरी का घर पास में ही था. वह घर गए और कुछ ही देर में वापस आ गए.

”सर, अभी फैसल घर पर नहीं है…’’

”क्या सुबह वह घर पर था?’’ इंसपेक्टर दहिया ने पूछा.

”मुझे मालूम नहीं. मैं सुबह ही फ्रेश हो कर औफिस में आ जाता हूं. जब मैं घर से निकला था, शायद फैसल सो रहा होगा.’’

”क्या मैं उस की बीवी से पूछताछ कर सकता हूं?’’ इंसपेक्टर दहिया ने आलम चौधरी से पूछा.

”बेशक, आप आइए मेरे साथ.’’ आलम ने कहा.

इंसपेक्टर दहिया अकेले आलम चौधरी के साथ उस के घर की तरफ चले आए. बाकी दोनों इंसपेक्टर और पुलिस कांस्टेबल वहीं औफिस में बैठ गए.

आलम चौधरी ने घर आ कर इंसपेक्टर दहिया के सामने अपनी बहू को हाजिर कर दिया.

इंसपेक्टर दहिया ने सीधा सवाल किया, ”तुम्हारा पति फैसल कहां पर है?’’

”ज…जी, वह कल से ही घर नहीं आए हैं. शाम को कह कर गए थे कि किसी जरूरी काम से जा रहा हूं. क्या काम है और कहां पर जा रहे हैं, यह मैं कभी नहीं पूछती हूं उन से.’’ फैसल की बीवी ने जवाब में कहा. फिर पूछा, ”आप उन के बारे में क्यों पूछताछ कर रहे हैं?’’

”फैसल एक लड़की को ले कर गायब हुआ है. लड़की का नाम तैयबा है. यदि फैसल घर आए तो तुम हमें फोन करोगी. मैं तुम्हें फोन नंबर दे कर जा रहा हूं.’’

इंसपेक्टर दहिया ने अपना मोबाइल नंबर एक कागज पर लिख पर फैसल की बीवी को थमाया तो उन्होंने महसूस किया कि फैसल की बीवी धीरेधीरे सिसक रही थी. शायद पति की करतूत सुनने के बाद वह नर्वस हो गई थी. इंसपेक्टर दहिया आलम चौधरी के साथ औफिस में लौट आए. आलम चौधरी से फैसल के दोस्तों और रिश्तेदारों के पते नोट कर के पुलिस टीम ने उसी वक्त से इन पतों पर दबिश देनी शुरू कर दी. फैसल चौधरी इन पतों पर नहीं था.

पुलिस टीम ने फैसल के संभावित उठनेबैठने की जगहों पर भी छापेमारी की, लेकिन फैसल कहीं भी नहीं मिला. निराश हो कर पुलिस टीम वापस हो गई. पुलिस की छापेमारी जारी थी, तभी उन्हें कड़कडड़ूमा कोर्ट से मैसेज मिला कि फैसल चौधरी ने 25 नवंबर, 2025 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. पुलिस टीम ने कोर्ट में जा कर फैसल चौधरी को अपनी कस्टडी में ले लिया. उस का 2 दिन का रिमांड पुलिस ने कोर्ट से प्राप्त कर लिया. फैसल चौधरी को अपने साथ ले कर पुलिस दयालपुर थाने में आ गई.

इंसपेक्टर दहिया, इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद ने डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में फैसल चौधरी से तैयबा के संबंध में पूछताछ शुरू की तो फैसल ने चौंकाने और होश उड़ाने वाला राज खोलते हुए कहा, ”तैयबा की मैं ने गोली मार कर हत्या कर दी है साहब. वह अब इस दुनिया में नहीं है.’’

फैसल चौधरी के मुंह से यह सच्चाई सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. इंसपेक्टर दहिया ने फैसल को घूरते हुए पूछा, ”तुम ने यदि तैयबा की गोली मार कर हत्या कर दी है तो उस की लाश कहां पर है?’’

”तैयबा की लाश बागपत के पास सरूरपुर कलां के जंगल में मैं ने फेंक दी थी साहब.’’

”चलो, हमें तैयबा की लाश बरामद करवाओ.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कहा.

”ठीक है साहब,’’ फैसल चौधरी ने कहा.

पुलिस टीम फैसल चौधरी को वैन में बिठा कर बागपत पहुंची. सरूरपुर कलां के जंगल में तैयबा की लाश फैसल चौधरी ने जहां फेंकी थी, वह अभी भी वहीं पड़ी हुई थी, लेकिन लाश 3 दिन में काफी खराब हालत में हो गई थी. तैयबा की कनपटी पर गोली का सुराख था, जहां से खून बह कर काला पड़ चुका था. इंसपेक्टर दहिया ने बागपत पुलिस थाने से संपर्क कर के वहां से पुलिस और फोरैंसिक टीम बुलवा कर तैयबा की लाश की जांच करवाई. फिर कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को बागपत पुलिस से अपने अंडर में ले लिया.

तैयबा की लाश ले कर दयालपुर थाने की पुलिस टीम थाने में लौट आई. तैयबा की फैसल चौधरी ने हत्या कर दी है, यह जानकारी तैयबा के फेमिली वालों को दे दी गई. थोड़ी ही देर में तैयबा के फेमिली वाले थाना दयालपुर आ गए. तैयबा की अम्मी, अब्बू अहमद और भाई अदनान का रोरो कर बुरा हाल था. उन के सामान्य होने पर डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में एक बार फिर फैसल चौधरी से पूछताछ की गई. उस की तैयबा से क्या दुश्मनी थी और उस ने तैयबा की हत्या क्यों की? यह पूछे जाने पर फैसल ने बताया, ”साहब, तैयबा मेरी दूसरी पत्नी थी.’’

इस जानकारी पर तैयबा के फेमिली हैरान रह गए. उन्हें यह विश्वास ही नहीं हुआ कि 2 बच्चों के बाप फैसल से तैयबा ने शादी कर ली थी.

”यह झूठ बोल रहा है साहब. मेरी बहन तैयबा इतनी नादान नहीं थी कि वह 2 बच्चों के पिता को अपना शौहर बनाएगी.’’ अदनान ने गुस्से में कहा.

”मेरे पास कोर्ट का सार्टिफिकेट है साहब.’’

उस ने पुलिस के सामने अपने अब्बा को फोन कर कहा कि उस ने तैयबा नाम की लड़की से दूसरी शादी कर ली थी और कोर्ट द्वारा जारी मैरिज सर्टिफिकेट अलमारी के लौकर में रखा है. वह आप थाना दयालपुर में ले कर आ जाएं. यह सुन कर आलम चौधरी सकते में आ गए. फैसल की पहली बीवी ने सिर पीट लिया.

आलम चौधरी आधे घंटे में साकेत कोर्ट द्वारा तैयबा और फैसल की कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट ले कर थाने में आ गए. डीसीपी मिश्रा ने सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच करने के बाद फैसल से पूछा, ”यदि तुम ने तैयबा से छिप कर शादी कर ली थी तो तुम ने उस की हत्या क्यों कर दी?’’

”साहब, मेरी मुलाकात तैयबा से क्लब में हुई थी. तैयबा पहले वहीं काम करती थी. तैयबा खूबसूरत नवयौवना थी. मैं उस की खूबसूरती पर मर मिटा. मैं ने रोज क्लब में जाना शुरू किया और तैयबा से जानपहचान बनाने की कोशिश करने लगा.

”तैयबा थोड़े ही दिनों में मेरी तरफ आकर्षित हो गई. मेरी उस की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. तैयबा को मैं ने बताया था कि मैं कुंवारा हूं. मैं तैयबा पर खूब पैसा खर्च करने लगा. तैयबा मुझे दिल से चाहने लगी. उस ने मेरे साथ शादी का प्रस्ताव रखा तो मैं ने उस के साथ अप्रैल, 2025 में साकेत कोर्ट में शादी कर ली. मैं ने तैयबा से कहा कि यह शादी मेरे परिवार से छिपा कर की गई है, इसलिए मैं उसे तुरंत घर नहीं ले जा सकता. घर वालों को धीरेधीरे मैं समझा लूंगा तो तुम्हें वहां बहू का दरजा दिलवा दूंगा.

”मैं तैयबा से बाहर होटलों में मिलता रहा. हम अपनी हसरतें इन होटलों में पूरी करते रहे. धीरेधीरे समय गुजरने लगा तो तैयबा मुझ पर घर ले चलने का दबाब बनाने लगी. मैं उसे बहाने बना कर टालता रहा. तैयबा को घर ले जाना नहीं चाहता था मैं, क्योंकि घर में मेरी बीवी और 2 बच्चे थे.’’

फैसल कुछ देर के लिए रुका फिर बताने लगा, ”तैयबा 10-12 दिन से ज्यादा जिद करने लगी थी कि मैं उसे घर ले चलूं. मैं परेशान हो गया तो मैं ने तैयबा से पीछा छुड़ाने का उपाय तलाशना शुरू कर दिया. बहुत सोचने के बाद मैं ने निर्णय लिया कि मैं तैयबा की हत्या कर के उस से पिंड छुड़ा लूं.

”मैं ने योजना बना कर एक देशी रिवौल्वर खरीदा, फिर 22 नवंबर को मैं ने अपने एक दोस्त से आई20 कार मांग ली और शाम से पहले तैयबा की कंपनी के सामने दिलशाद गार्डन पहुंच गया. तैयबा को मैं ने फोन कर के बता दिया कि मैं कार लाया हूं, आज हम सैरसपाटा करेंगे. तुम घर में कोई बहाना बना डालो.

”तैयबा शाम को कंपनी से निकल कर मुझ से मिली. उस ने घर में कह दिया था कि आज कंपनी में काम ज्यादा है, देर से घर आएगी. मैं तैयबा को ले कर फिल्म देखने एक थिएटर में गया. मैं ने उस के साथ रात का शो देखा. फिर इधरउधर घूमने के बाद मैं तैयबा को एक होटल में ले गया. वहां हम ने चाय पी. तैयबा बहुत खुश थी. उस की अम्मी का होटल में फोन आया तो तैयबा ने कह दिया वह होटल में चाय पी रही है, जल्दी घर लौटेगी.

”चाय पी लेने के बाद मैं तैयबा को कार में बिठा कर बागपत की तरफ ले गया. रात काफी निकल चुकी थी. सरूरपुर कलां के पास सन्नाटा मिला तो मैं ने पास में बैठी तैयबा के सिर में गोली मार दी. वह मर गई तो मैं ने उस की लाश जंगल में फेंक दी और घर लौट आया. मुझे तैयबा की हत्या करने का बहुत अफसोस है साहब.’’

पुलिस ने फैसल चौधरी से रिवौल्वर और आई20 कार बरामद कर ली. कार की सीट धो कर खून साफ कर दिया गया था, किंतु फोरैंसिक टीम ने कार से तैयबा के खून के नमूने उठा लिए. पुलिस ने फैसल चौधरी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) 3, 5 लगाई गई और उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

तैयबा की लाश का पोस्टमार्टम करवा कर लाश उस के फेमिली वालों को सौंप दी गई. उस के परिजन चाहते थे उन की बेटी को धोखे में रख कर उस से शादी करने और उस की हत्या करने वाले फैसल चौधरी को फांसी की सजा मिले. Love Crime

 

 

UP Crime: जब पति की उम्र में हो ज्यादा अंतर

UP Crime: बच्चे की डिलीवरी के समय मनीष बाजपेई की पत्नी रीति की मृत्यु हो जाने के बाद उस की छोटी बहन काजल मिश्रा मनीष से ब्याह दी गई. 18 वर्षीय काजल 33 वर्षीय जीजा मनीष की पत्नी जरूर बन गई थी, लेकिन वह उस से खुश नहीं थी. दोनों की उम्र के बीच 15 साल के अंतर ने एक दिन उन की गृहस्थी में ऐसा भूचाल खड़ा कर दिया कि…

लखीमपुर खीरी रेलवे स्टेशन से सटी मनीष बाजपेई की चाय की दुकान पर भीड़ काफी कम हो गई थी. इक्कादुक्का ग्राहक चाय पी रहे थे. वह थोड़ा सुस्ताने के लिए बेंच पर बैठ गया था. बीड़ी निकाल ली थी. बीड़ी अभी सुलगाई ही थी कि जेब में रखे मोबाइल की घंटी बज उठी. सुलगी हुई बीड़ी को होंठों से दबाते हुए मनीष ने जेब से मोबाइल निकाल लिया. स्क्रीन पर उभरे नाम को पढ़ते ही उस के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान फैल गई.

कौल उस की पत्नी काजल ने की थी. उस ने तुरंत कौल रिसीव करते हुए कहा, ”हलो! बड़ी लंबी उम्र है तुम्हारी…मैं तुम्हें कौल करने ही वाला था.’’

”चलो, अच्छी बात है, कम से कम मेरी याद तो आई. कई दिन हो गए घर आए, क्यों नहीं आए.’’ पत्नी काजल नाराजगी जताते हुए बोली.

”इधर काम कुछ ज्यादा था. इस वजह से आ नहीं पाया,’’ मनीष ने सरलता से जवाब दिया.

”देखो, आज आप घर जरूर आ जाना.’’ काजल दबाव बनाती हुई बोली.

”ठीक है, आज मैं जरूर आऊंगा,’’ इतना कह कर मनीष ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. यह बात 25 नवंबर, 2025 की सुबह की है. उस रोज मनीष ने अपने होटल का काम निपटाया और कुछ देर बाद बस पकड़ कर सीधा जलालपुर पुल के निकट पहुंच गया. वहां पहुंचने की खबर मनीष ने काजल को फोन से दे दी थी. थोड़े समय में ही काजल स्कूटी से जलालपुर पुल के पास आ गई. उस वक्त रात के 8 बज रहे थे. काजल और मनीष स्कूटी से सीतापुर जिले के गांव निजामाबाद में स्थित अपने घर आ गए.

दोनों ने रात का खाना इकट्ठे खाया और बातें करने लगे. थोड़ी देर बाद दोनों सो गए. अगले दिन 26 नवंबर की सुबह 6 बजे के करीब काजल अपने पति को स्कूटी पर बिठा कर जलालपुर पुल के पास छोडऩे के लिए निकल पड़ी.

बरईखेड़ा तिराहे के पास काजल ने अचानक स्कूटी रोक दी तो मनीष ने पूछा, ”क्यों रोकी स्कूटी?’’

”अरे कुछ नहीं, स्कूटी में किसी चीज के फंसने की आवाज आ रही थी, इसलिए… तुम बैठे रहो.’’

उसी समय अचानक एक मोटे बरगद के पेड़ की आड़ से 2 लोग निकले. एक के हाथ में धारदार गंडासा था. दूसरा लोहे की रौड लिए था. इस से पहले कि मनीष कुछ समझ पाता, दोनों ने उस पर हमला कर दिया. मनीष इस के लिए पहले से तैयार नहीं था. वह अपना बचाव नहीं कर पाया. लहूलुहान हो कर वह स्कूटी से नीचे गिर पड़ा. काजल अपनी जान बचाने के लिए स्कूटी छोड़ कर भागी. मनीष गिर कर तड़पने लगा, जबकि काजल हमलावरों की नजर से बच कर रोड के किनारे नीचे की ओर ओट में छिप गई.

दोनों हमलावर घटना को अंजाम दे कर फरार हो गए. ओट ले कर छिपी काजल डरीसहमी बाहर निकली. लहूलुहान पति को बीच सड़क पर गिरे देख कर घबरा गई. पसीने से नहा गई. उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे, क्या नहीं? इसी बीच एक राहगीर चीखा, ”अरे इसे अस्पताल ले जाओ. एंबुलेंस बुलाओ!’’ काजल ने एंबुलेंस के लिए मोबाइल से इमरजेंसी नंबर 108 पर कौल कर दिया. फिर अपने फेमिली वालों को कौल किया. उन्हें घटना की सूचना दे दी. कुछ मिनटों में ही घटनास्थल पर एंबुलेंस आ गई. लहूलुहान मनीष को जिला अस्पताल सीतापुर पहुंचाया गया. वहां मौजूद डौक्टरों ने मनीष की गंभीर हालत देख कर तुरंत लखनऊ ले जाने को कह दिया.

लखनऊ के मैडिकल कालेज में जैसे ही मनीष को इमरजेंसी में ले जाया गया, वहां के डौक्टरों ने शुरुआती जांच में ही उसे मृत घोषित कर दिया. इस वारदात की जानकारी से आसपास के इलाके में कोहराम मच गया. मौके पर पहुंची थाना कमलापुर पुलिस ने इस घटना की सूचना पुलिस के आलाधिकारियों को दे दी. कुछ समय में ही एडिशनल एसपी (दक्षिणी) दुर्गेश कुमार सिंह, सीओ (सिधौली) कपूर कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. हर कोण से पुलिस ने मौकामुआयना किया. पुलिस के आलाधिकारियों ने एसएचओ इतुल चौधरी को जांच संबंधी जरूरी निर्देश दिए.

एसएचओ चौधरी ने अपनी जांच शुरू की. मुखबिरों को सचेत किया. पुलिस हत्या की वजह और हत्यारों की तलाश में जुट गई. मरने वाले व्यक्ति की पहचान मनीष बाजपेई कमलापुर थाना निवासी के तौर पर हुई. इस बाबत मृतक के पिता दयाशंकर बाजपेई ने पुलिस को तहरीर दी. अपनी तहरीर में उन्होंने लिखा कि उन का बेटा मनीष बाजपेई अपनी ससुराल निजामाबाद में अपनी पत्नी काजल बाजपेई के साथ रहता था. उस की जनपद लखीमपुर खीरी में रेलवे स्टेशन गेट के पास चाय की गुमटी है.

26 नवंबर की सुबहसुबह मनीष को गांव के समीप ही हत्या कर दी गई. उन्होंने हत्या का संदेह उस की पत्नी काजल समेत उस के पिता कपिल मिश्रा व कुछ अज्ञात लोगों पर जताया. उन्होंने अपने बेटे की हत्या के लिए काजल पर शंका जाहिर की. काजल का चालचलन ठीक नहीं होने की बात बताई, जो मनीष ने बताई थी. दयाशंकर बाजपेई की तहरीर पर 27 नवंबर की दोपहर ढाई बजे काजल बाजपेई और उस के पिता कपिल मिश्रा समेत अन्य अज्ञात हत्यारों के खिलाफ पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत एसपी अंकुर अग्रवाल ने जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच प्रभारी इतुल चौधरी को सौंप कर सहयोग के लिए एसओजी टीम को भी लगा दिया.

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जांच की प्रक्रिया जैसे ही आगे बढ़ी, पुलिस को मुखबिर द्वारा हत्यारे के बरईखेड़ा मोड़ तिराहे के पास मौजूद होने की सूचना मिली. कमलापुर पुलिस ने क्राइम ब्रांच टीम के साथ मिल कर 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए लोगों में मृतक मनीष बाजपेई की पत्नी काजल बाजपेई और उस के पापा कपिल मिश्रा के साथसाथ 28 साल का युवक अजीत कुमार भी था. हालांकि काजल अपनी गिरफ्तारी को ले कर पुलिस से उलझ गई. पति से बेहद प्रेम करने का हवाला देती हुई खुद को उस की भरोसेमंद पत्नी बताया, लेकिन जब बताया गया घटना की जांच के लिए उस से भी पूछताछ की जानी जरूरी है, तब वह शांत हुई और पुलिस की जांच में साथ देने लिए तैयार हो गई.

थाने में पूछताछ की शुरुआत काजल से हुई. उस से पति के साथ मधुर संबंधों, कामधंधे और घरेलू बातों को ले कर कई सवाल पूछे गए. उस की और पति की उम्र में 15 साल से अधिक का अंतर था. मनीष बाजपेई करीब 35 वर्ष का था. 20 वर्षीय काजल ने इस पर अफसोस जताते हुए बताया कि मनीष से उस की शादी अचानक हो गई थी. इस में काजल की मरजी की एक नहीं चली थी. मनीष उस का जीजा था. उस की बड़ी बहन रीति उस से ब्याही गई थी. वर्ष 2018 में प्रसव के दौरान रीति की आकस्मिक मौत हो गई थी. फिर फेमिली वालों ने 2021 में उस की जीजा मनीष के साथ शादी कर दी. मनीष के पसंद नहीं होने का एक बड़ा कारण उस का एक पैर से विकलांग होना भी था.

मनीष एक साधारण कारोबार करता था. उस की लखीमपुर रेलवे स्टेशन गेट के पास चाय की छोटी सी दुकान थी. उस की इतनी आमदनी हो जाती थी, जिस से वह अपना घरपरिवार किसी तरह चला लेता था. मनीष काजल का पूरा खर्च उठाता था. उसे किसी भी तरह की कमी नहीं होने देता था. वह दुकान में ही रहता था और बीचबीच में काजल के पास घर आ जाया करता था. कभीकभी काजल के मायके में ही ठहर जाता था. काजल ने मनीष के साथ अपने दांपत्य संबंधों के बारे में बताया कि मनीष से एक बेटी पैदा हुई. वह ढाई साल की है. पति की शारीरिक कमजोरी की वजह से काजल का झुकाव अजीत कुमार की तरफ हो गया था. वह लखीमपुर खीरी जनपद के गांव मूड़ाधामू टिकरा का रहने वाला है.

पति के कभीकभार घर आने से काजल का लगाव अजीत से हो गया था. बाद में दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए. दोनों के ये संबंध छिपे रहे. पति की गैरमौजूदगी में काजल और अजीत का मनमानापन बढ़ता चला गया. जब इस बारे में मनीष को संदेह हुआ, तब उस ने इस पर आपत्ति जताई. काजल और मनीष के बीच आए दिन इस बात को ले कर तकरार होने लगी. रोजरोज की किचकिच से छुटकारा पाने के लिए अजीत ने मनीष को ही रास्ते से हटाने का उपाय सोचा. उस बारे में काजल को बताया. उपाय सुनते ही काजल की आंखों में चमक आ गई. वह इस के लिए तुरंत तैयार हो गई.

उपाय के लिए योजना बनाना जरूरी था. काजल और अजीत योजना बनाने लगे. आपसी रायमशविरा करने के बाद दोनों ने योजना बना डाली. काजल ने उसी योजना के तहत मनीष को घर बुलवाया. उस के बाद अगले दिन 26 नवंबर को वापस लौटते हुए मनीष को मौत के घाट उतार दिया. काजल के बाद पुलिस ने अजीत से भी पूछताछ की. उस ने भी काजल की तरह मनीष की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया गंड़ासा, एक स्कूटी, खून सने कपड़े, 3 अदद मोबाइल फोन बरईखेड़ा तिराहे के पास मौजूद बरगद के पेड़ के निकट से बरामद कर लिए गए.

मौके से पुलिस द्वारा खून आलूदा एवं सादी मिट्टी का भी नमूना इकट्ठा कर लिया गया. गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों से फरार तीसरे अभियुक्त के बारे में पूछताछ की गई. उस के बारे में उन्होंने बताया कि मौके से वह अकेला ही फरार हो गया था. कमलापुर पुलिस व क्राइम ब्रांच फरार तीसरे अभियुक्त की तलाश में जुट गई. कथा लिखे जाने तक तीसरे अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी. उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव निजामाबाद थाना कमलापुर क्षेत्र में आता है. काजल के पापा कपिल मिश्रा इसी गांव के निवासी हैं. वह खेतीकिसानी कर अपने परिवार का भरणपोषण करते हैं.

कपिल मिश्रा का भरापूरा परिवार है. परिवार में 5 बेटियों के अलावा एक बेटा है. उन्होंने अपनी तीसरी बेटी रीति की शादी मनीष के साथ की थी, जिस की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी. काजल उन की 5वीं बेटी है, जिस की मनीष के साथ शादी की गई गई थी. वह मनीष के साथ अवस्थी टोला गंज बाजार महोली में रहने लगी थी. काजल हाईस्कूल पास है. वह शुरू से ही काफी चंचल, हंसमुख और तीखे नैननक्श वाली थी. वह किसी से भी बेझिझक बातें कर लेती थी. उस की अदाओं से हर कोई उस का दीवाना बन जाता था.

यौवन की उम्र आतेआते वह और भी दिलकश बन गई थी. काजल के कजरारे नैन, गुलाबी गाल, लंबे खूबसूरत बाल, गोल खूबसूरत चेहरा एक झलक में ही किसी को भी आकर्षित कर लेता था. वह सभी बहनों से सुंदर जरूर थी, लेकिन शादी का योग नहीं बन पा रहा था. एक तरफ उस की सुंदरता और बिंदास हरकतों से चौतरफा बदनामी हो रही थी, दूसरी तरफ उस के पेरेंट्स को शादी की चिंता सता रही थी. इसी बीच रीति की अचानक मौत के बाद कुछ ऐसी परिस्थिति बनी कि वह विकलांग मनीष बाजपेई से ब्याह दी गई.

काजल जब ब्याह कर ससुराल आई, तब आसपास की औरतों ने उस की खूबसूरती की खूब चर्चा की. ससुराल में ससुर दयाशंकर बाजपेई के अलावा उस की सौतेली सास, पति मनीष, सौतेला देवर सुमित बाजपेई और देवरानी रहते थे. ननद प्रीति उर्फ जुगनू और नेहा थीं. प्रीति की लखीमपुर खीरी में शादी कर दी गई थी. देवर सुमित बाजपेई का भी ब्याह कर दिया गया था. ससुराल में केवल काजल, सौतेली सास, ससुर, देवर व देवरानी ही रह गए थे.

काजल कहने को तो ससुराल में रहती थी, लेकिन उस का रहनसहन और गांव और बाजारहाट में घुमानाफिरना मायके की तरह ही होता था. वह अकसर सजधज कर कभी बाजार तो कभी आसपास के घरों में आतीजाती रहती थी. काजल की इन आदतों को देख कर उस की सौतेली सास रोकटोक करती रहती थी. यहां तक कि उसे डांट भी देती थी. सास जब भी उसे मर्यादा का पाठ पढ़ाती थी, वह तुनक जाती थी और उसी के साथ झगड़ पड़ती थी. काजल अपनी मनमानी पर उतारू थी. धीरेधीरे सासबहू में लड़ाईझगड़ा बढऩे लगा. तब काजल पति पर दबाव बना कर मायके में रहने लगी. मायके में ही उस ने बेटी को जन्म दिया.

काजल के मायके में रहते हुए मनीष कभीकभार ससुराल में आ कर रुकने लगा. मायके में काजल पर टीकाटिप्पणी करने वाला कोई नहीं था. इसलिए वह और भी स्वच्छंद हो गई थी. हंसीमजाक तक करने लगी थी. इसी बीच उस ने अजीत को अपना दिल दे दिया था. काजल की जिद पर मनीष ने उसे स्कूटी खरीद दी थी. स्कूटी मिलते ही मानो उस के पंख लग गए थे. वह अपनी मरजी की मालिक बन गई थी. यहां तक कि अपने मम्मीपापा तक से जुबान लड़ाने लगी थी. कहते हैं न हर गलत और मनमानी करने का नतीजा गलत ही निकलता है, जो कुछ सालों में ही काजल के सामने आ चुका था.

काजल एवं अजीत से एएसपी (दक्षिणी) दुर्गेश कुमार सिंह, सीओ (सिधौली) कपूर कुमार ने भी पूछताछ की. इस के बाद दोनों आरोपियों को धारा 103(1) बीएनएस व 4/25 शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. UP Crime

लेखक – शरीफ अहमद

 

 

West Bengal News: गुस्सैल प्रेमी से रहें अलर्ट

West Bengal News: अधिकांश लड़कियां आजकल बहुत जल्द ही अपने प्रेमी पर विश्वास कर लेती हैं. बातचीत के दौरान वह उस के स्वभाव को नहीं समझ पातीं. नादिया की रहने वाली इशिता मलिक अपने क्लासमेट 23 वर्षीय देशराज सिंह के जिद और गुस्से वाले स्वभाव को पहचान लेती तो शायद उसे अपनी जान गंवानी नहीं पड़ती.

जब इशिता मलिक ने प्रेमी देशराज सिंह से दूरी बना ली और बात तक करने से मना कर दिया तो देशराज उस से चिढ़ गया और उस ने इशिता को देख लेने की धमकी तक दे डाली थी. इतना ही नहीं, देशराज ने इशिता को सदासदा के लिए हटा देने की एक भयंकर योजना भी बना ली थी. इस के लिए वह छिप कर इशिता की हर गतिविधि पर नजर रखने लगा था. इस काम के लिए उस ने हथियार और गोलियों की व्यवस्था भी कर ली थी.

25 अगस्त, 2025 की दोपहर को देशराज अपने इसी इरादे के साथ पश्चिम बंगाल के जिला नादिया के कृष्णानगर सिटी में रहने वाली प्रेमिका इशिता के घर के आसपास की रेकी कर रहा था, जब उसे इस बात की पुष्टि हो गई कि इस समय इशिता घर में अकेली है, उस के फेमिली वाले बाहर गए हुए हैं तो वह पिस्तौल ले कर सीधे उस के दोमंजिले घर में चला गया. इशिता उस समय कमरे में बैठी पढ़ाई कर रही थी.

देशराज को एकाएक अपने सामने देख कर इशिता ने उस से गुस्से में कहा, ”देशराज, अब तुम ने मेरे घर तक आने की हिम्मत भी कर डाली. निकल जाओ अभी मेरे घर से वरना मैं चिल्लाचिल्ला कर लोगों को यहां बुला लूंगी.’’

यह सुन कर देशराज ने अपनी कमर से पिस्तौल निकाल कर उसे धमकाते हुए कहा, ”इशिता, आखिरी फैसला करने आया हूं. तुम मुझ से फिर से दोस्ती कर लो या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ.’’

”देशराज, मैं तुम जैसे इंसान से प्यार करने की बात तो दूर, दोस्ती करना भी पसंद नहीं करती. मुझे तुम से और तुम्हारी सूरत तक से नफरत है. दफा हो जाओ अभी मेरी नजरों से.’’ इशिता ने चीखते हुए कहा.

यह सुन कर देशराज उस के पास आया और उस के सिर से सटा कर 2 गोलियां चला दीं. जब इशिता जमीन पर मुंह के बल गिर गई तो उस ने एक और गोली उस के सिर पर मार दी और वहां से भाग गया. इस प्रकार इस जुनूनी प्यार का भयंकर अंत हो गया.

इत्तफाक से उसी समय इशिता की मम्मी कुसुम मलिक अपने बेटे के साथ घर लौट रही थीं. उन्होंने जब अपने घर से धमाके की आवाजें सुनीं तो उन का दिल अनजानी आशंका से भयभीत हो गया था. उन्होंने उसी समय एक युवक को अपने घर से बाहर निकलते देखा. कुसुम ने उस युवक से पूछा, ”भाई, तुम कौन हो? हमारे घर में गोलियों की आवाज कैसे सुनाई दे रही है?’’

तब उस युवक ने कुसुम से कहा, ”देखो आंटी, अभी मुझ से बात मत करो. मैं अपने होशोहवास में नहीं हूं. इस के बाद कुसुम ने देखा कि उस के हाथ में एक पिस्तौल थी. उस युवक ने उस के बाद पिस्तौल से हवा में फायर करने के लिए 2 बार स्ट्रिगर दबाया, मगर शायद पिस्तौल में गोलियां खत्म हो चुकी थीं, इसलिए फायर नहीं हो सके.

तब तक कुसुम और प्रतीक समझ चुके थे कि कुछ अनहोनी सी बात हमारे घर में अवश्य हो चुकी है. इसलिए प्रतीक चाह रहा था कि उस की मम्मी कुसुम इस युवक से यदि दूर ही रहे तो अच्छा होगा. प्रतीक अपनी मम्मी को उस युवक से दूर ले जाने की कोशिश कर रहा था. जब सामने कोई नहीं रहा तो वह युवक अपनी पिस्तौल लहराता हुआ अगले ही पल वहां से फरार हो चुका था. कुसुम मलिक अब तेजी से जीना चढ़ कर जब ऊपर के कमरे में पहुंचीं तो दरवाजा आधा खुला हुआ था. उस के बाद जब उन की नजर अंदर कमरे में पड़ी तो खौफनाक दृश्य देख कर उन की आंखें फटी रह गई थीं.

वह जोरजोर से चिल्लाने लगीं. सामने उन की बेटी इशिता मलिक लहूलुहान पड़ी थी. कुसुम मलिक की दर्दनाक चीखों की आवाजों को सुन कर वहां पर आसपास के लोग अब तक काफी संख्या में एकत्रित हो चुके थे. तभी किसी ने कृष्णानगर कोतवाली में इस हादसे की सूचना दे दी थी. अगले ही पल पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की कोतवाली कृष्णानगर के एसएचओ अमलेंदु बिस्वास कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. दिन दोपहरी को हुई इस वारदात की सूचना पाते ही कृष्णानगर के एसपी के. अमरनाथ भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे.

ताज्जुब की बात तो यह थी कि जिस मकान में हत्या की गई थी, उस के बगल में ही एसपी और जिला मजिस्ट्रैट का औफिस था. दूसरी तरफ कृष्णानगर महाविद्यालय था. इतने हाईप्रोफाइल इलाके में घर में घुस कर की गई इस वारदात से स्थानीय निवासी आक्रोश और दहशत में आ गए थे. पुलिस ने विस्तृत छानबीन करनी प्रारंभ की तो उन्होंने देखा कि मृतका इशिता के सिर पर 3 गोलियां दागी गई थीं. 2 गोलियां दाईं ओर और एक गोली सिर के पीछे से मारी गई थी. एक घाव पर गन पाउडर स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि अन्य दोनों घावों पर गन पाउडर नहीं था.

अब तक घटनास्थल पर मृतका के पापा दुलाल मलिक भी पहुंच गए थे. पुलिस ने मृतका इशिता मलिक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और मृतका के फेमिली वालों से शुरुआती पूछताछ करनी शुरू कर दी. मृतका की मम्मी कुसुम ने गोलियों की आवाज और घर में मिले उस अनजान युवक के बारे में बता दिया. मृतका के भाई ने पुलिस को बताया कि वह उस युवक को पहचानता था. उस ने बताया कि पहले जब हम लोग कांचरापाड़ा में रहते थे तो वह युवक वहां मैदान में खेलने आया करता था. उस ने यह भी बताया कि वह युवक उस की बहन के साथ कांचरापाड़ा में एक ही स्कूल में पढ़ता था.

उस ने पुलिस को यह जानकारी भी दी कि उस युवक का नाम देशराज सिंह है. मृतका के पापा दुलाल मलिक ने पुलिस को बताया कि हमें इस बारे में कुछ भी पता नहीं था कि आरोपी हमारी बेटी का दोस्त था भी या नहीं. हमें इस बारे में भी कुछ पता नहीं कि लड़के ने हमारी लड़की को फोन किया था या नहीं या उन दोनों का पहले से एकदूसरे से कोई संपर्क या जानपहचान थी या नहीं. हम ने तो उन दोनों को कभी भी एकदूसरे के साथ नहीं देखा था. पुलिस ने दुलाल मलिक की ओर से धारा 103(1), 3 (5) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

कृष्णानगर के एसपी के. अमरनाथ इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करने के लिए तत्काल डीएसपी शिल्पी पाल के नेतृत्व में 15 सदस्यीय पुलिस टीम का गठन कर दिया और पूरी टीम को उचित दिशानिर्देश दे कर अपने खास मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. गठित टीम ने देशराज सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी एकत्रित की. जांच में पता चला कि उत्तर 24 परगना के जेठिया-धरमपुर में रहने वाला 23 वर्षीय देशराज सिंह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के करौता का रहने वाला था. उस के पापा राघवेंद्र प्रताप सिंह बीएसएफ में हैडकांस्टेबल हैं और वर्तमान में राजस्थान के जैसलमेर में पोस्टेड हैं. देशराज सिंह वर्तमान में अपनी मम्मी पूनम सिंह और बहन के साथ रहकर 24 परगना जेठिया-धरमपुर में पढ़ाई कर रहा था.

पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि देशराज के पापा राघवेंद्र प्रताप सिंह, चाचा सरजू सिंह तथा शैलेंद्र सिंह पर वर्ष 2020 में हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था. हालांकि जांच में आरोप सिद्ध न होने पर इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी. इस के बाद वर्ष 2024 में राघवेंद्र प्रताप सिंह और उस के भाई मनोज सिंह पर आईटी ऐक्ट के तहत 2 अलगअलग मुकदमे दर्ज हुए, जिस में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर रखा है. देशराज के पिता राघवेंद्र प्रताप सिंह 4 भाई हैं.

पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि आरोपी देशराज सिंह और इशिता मलिक सहपाठी थे. धीरेधीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए, लेकिन बाद में किसी बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया और वे अलग हो गए. शायद उसी प्रतिशोध की भावना से देशराज सिंह ने इस खूनी घटना को अंजाम दिया था. बंगाल के कृष्णानगर से 3 अलगअलग पुलिस टीमें उत्तर प्रदेश भेज दी गई. इस से पहले बंगाल पुलिस ने 29 अगस्त, 2025 को गुजरात के जामनगर से हत्यारे देशराज सिंह के मामा कुलदीप सिंह को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली थी. पता चला कि कुलदीप सिंह ने ही अपने जीजा राघवेंद्र प्रताप सिंह के कहने पर देशराज सिंह को हत्या के बाद फरजी दस्तावेजों के सहारे भागने में मदद की थी.

पुलिस ने कुलदीप सिंह से गहन पूछताछ की तो पुलिस को देशराज सिंह के ठिकाने के बारे में पता चला. इस के साथसाथ गहरे सदमे में होने के बावजूद भी मृतका इशिता मलिक के परिजन पुलिस को अपना पूरा सहयोग व कई जानकारियां उपलब्ध करा रहे थे. जिस के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश पुलिस के सहयोग से बंगाल पुलिस ने सोमवार पहली सितंबर, 2025 सुबहसुबह नेपाल सीमा के पास उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे से आरोपी देशराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

पकड़े जाने के समय हत्यारोपी देशराज सिंह फरजी दस्तावेजों के सहारे एक वाहन से नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था. पुलिस ने आरोपी देशराज सिंह को गिरफ्तार कर नादिया की अदालत में पेश किया. एसपी के. अमरनाथ ने मीडिया को बताया कि इशिता मलिक की हत्या करने के बाद देशराज सिंह अयोध्या गया और अपने अपराधी रिश्तेदारों की मदद से आधार कार्ड और सीमा सुरक्षा बल का एक फरजी पहचान पत्र जैसे कुछ फरजी दस्तावेज हासिल किए, ताकि नेपाल में शरण ले सके.

इस मामले में एक और नया मोड़ तब आया, जब आरोपी देशराज सिंह के पापा बीएसएफ के हैडकांस्टेबल राघवेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया. पुलिस इनवैस्टीगेशन में यह बात सामने आई कि राघवेंद्र ने अपने बेटे को पुलिस से छिपाने में मदद की थी. पुलिस को पूरा शक था कि हत्या के बाद भी बापबेटे के बीच में लगातार संपर्क बना हुआ था. राघवेंद्र प्रताप सिंह अपने साले कुलदीप सिंह के साथ लगातार फोन और वाट्सऐप पर संपर्क में रह कर आरोपी देशराज सिंह को भगाने में मदद कर रहा था.

इशिता मलिक हत्याकांड की जांच में ‘फ्री फायर’ नाम के एक मोबाइल गेम का खुलासा भी हुआ है. बंगाल पुलिस ने खुलासा किया कि आरोपी इस गेम के लिए जुनूनी हो गया था कि उस का मन हर समय एक आभासी दुनिया में भटकता रहता था. कल्पना और वास्तविकता की दुनिया उस के लिए इस कदर घुलमिल गई थी कि उसे अपनी प्रेमिका इशिता के सिर पर 3 गोलियां दागने में कोई दिक्कत नहीं हुई. इतना ही नहीं देशराज को वर्चुअल गेम्स में भी खून देखने की एक आदत सी हो गई थी. पुलिस इनवैस्टीगेशन और आरोपी देशराज सिंह से विस्तृत पूछताछ के बाद इशिता मर्डर की जो खौफनाक कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी.

पश्चिम बंगाल के जिला नादिया का कृष्णानगर एक बड़ी आबादी वाला शहर है. इसी शहर में मानिकपाड़ा के निवासी थे दुलाल मलिक. दुलाल मलिक पहले सेना में थे, जब उन के बच्चे स्कूल जाने के योग्य हुए तो उन्होंने कांचरपाड़ा के नजदीक एक मकान किराए पर ले लिया और वहां पर पत्नी कुसुम व बेटेबेटी के साथ रहने लगे. कांचरापाड़ा में केंद्रीय विद्यालय था, इसलिए दुलाल मलिक ने अपनी बेटी इशिता और प्रतीक का एडमिशन केंद्रीय विद्यालय कांचरापाड़ा में करा दिया था. वर्ष 2023 में इशिता जब हाईस्कूल में पढ़ रही थी, उसी समय उस की क्लास में देशराज सिंह ने भी एडमिशन लिया था.

देशराज के पापा बीएसएफ में थे, इसलिए उस का दाखिला भी केंद्रीय विद्यालय में आसानी से हो गया था. देशराज अपनी मम्मी पूनम सिंह व छोटी बहन सुहानी के साथ 24 परगना जेठिया धरमपुर में किराए के मकान में रहता था, जबकि उस के पापा बीएसएफ में हैडकांस्टेबल के पद पर सीमा पर तैनात थे. एक दिन इशिता की एक सहेली का जन्मदिन था, इसलिए उन्होंने एक कैफे में जन्मदिन की पार्टी रखी थी, जिस में क्लास के सभी लड़के और लड़कियां थे. वहां पर सहेली अपनी ओर से पार्टी दे रही थी.

थोड़ी देर के बाद जन्मदिन की पार्टी खत्म हो गई थी. सभी लड़केलड़कियां कैफे से बाहर निकल कर अपनीअपनी राह पर जाने लगे थे. कुछ के पास अपनी बाइक व स्कूटी थी. एकएक कर के सभी वहां से चले गए. वहां से इशिता का घर काफी दूरी पर था, इसलिए वह अपने घर जाने के लिए औटोरिक्शा तलाश करने लगी, लेकिन कोई औटो वाला नहीं मिल रहा था. इशिता को परेशान देख कर देशराज को लगा कि अभी इशिता से बात करने का सुनहरा अवसर है, इसे गंवाना नहीं चाहिए. इसलिए वह तुरंत इशिता के पास पहुंच गया और उस से बोला, ”इशिताजी, आप काफी परेशान दिखाई दे रही हैं, आखिर आप को अभी जाना कहा है?’’

”देशराजजी, आप यह बात खुद समझ सकते हैं कि अब शाम पूरी ढल चुकी है, लेकिन आटो वाले मेरे घर की तरफ जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं.’’ इशिता ने कहा.

”इशिताजी, आखिर आप रहती कहां पर हैं?’’ देशराज ने पूछा.

”वैसे तो हमारा पुश्तैनी घर कृष्णानगर मानिकपाड़ा में है. मेरे पापा आर्मी में थे, रिटायर हो गए हैं, इसलिए वहां पर पुराने घर को तोड़ कर नया घर बनवा रहे हैं. आजकल हम लोग कोचरापाड़ा में एक किराए के मकान में रह रहे हैं.’’ इशिता ने कहा.

अब देशराज का घर भी उसी तरफ था, इसलिए वह इस बात को सुन कर काफी खुश हो गया था. वह इशिता से बोला, ”अरे इशिताजी, यह तो सोने पे सुहागा जैसी बात हो गई है. देखो, कैसा संयोग है आप के पापा आर्मी में हैं दूसरी तरफ मेरे पापा बीएसएफ में हैं. मैं, मेरी मम्मी और मेरी छोटी बहन भी किराए पर जेठिया धरमपुर में रहते हैं. आप का घर पहले आएगा और मेरा बाद में. यदि आप को कोई आपत्ति न हो तो क्या आप मेरे साथ मेरी बाइक पर बैठ सकती हैं, मैं तुम्हें रास्ते में ही ड्रौप कर दूंगा.’’

”यह तो वाकई सोने में सुहागा हो गया है, जैसा कि अभीअभी आप ने भी कहा था. मुझे इस आप के नेक काम में भला क्या आपत्ति हो सकती है. आप की बाइक कहां है?’’ इशिता बोली.

”इशिताजी, मेरी बाइक देखिए, वह सामने खड़ी है. काले रंग की बुलेट है.’’ देशराज ने अपनी बाइक की तरफ बढ़ते हुए कहा.

”देशराजजी, आप तो बड़े दिलचस्प लगते हैं. बाइक चलाने के अलावा तुम्हारे और क्याक्या शौक हैं?’’ इशिता ने उस की बाइक पर बैठते हुए कहा.

”देखिए इशिताजी, अपना एक शौक तो आप जान ही चुकी हैं. दूसरा शौक ‘फ्री फायर’ वीडियो गेम है और तीसरा सब से महत्त्वपूर्ण शौक खूबसूरत लोगों से दोस्ती करना है.’’ यह कहते हुए देशराज ने अपनी बाइक आगे बढ़ा दी थी.

कुछ देर बाद इशिता ने बाइक रुकवाते हुए देशराज से कहा, ”देशराजजी, मेरा घर अब नजदीक में ही है, इसलिए मुझे आप यहीं पर उतार दीजिए.’’

”इशिता, मैं ने तो सोचा था कि तुम मुझे अपने घर में ले जाओगी, चायनाश्ता कराओगी, मगर तुम ने तो मेरा दिल ही तोड़ डाला.’’ देशराज ने कहा

”देशराजजी, यदि मेरे घर वालों ने या पड़ोसियों ने मुझे आप के साथ देख लिया तो लोग तरहतरह की बातें बनाएंगे. मैं क्या जवाब दूंगी उन सब को?’’ इशिता बोली

देशराज थोड़ी देर तक इशिता की आंखों में एकटक देखता रहा और उस के बाद उस ने अगले ही पल अपने दिल की बात जुबान से कह ही डाली, ”इशिता, तुम बहुत खूबसूरत हो, मुझे पहली ही नजर में तुम से प्यार हो गया है. आई लव यू इशिता.’’

यह सुनते ही इशिता के गोरेगोरे गालों पर लाज की एक अलग सी सुर्खी फैल गई. शरम के मारे उस की नजर झुक गई. वह धीमे से मुसकरा कर देशराज की बाइक से नीचे उतर गई.

”इशिता अब जातेजाते अपना मोबाइल नंबर तो बता दो,’’ देशराज ने विनयपूर्वक कहा.

इशिता ने जल्दी से अपना मोबाइल नंबर बताया, जिसे देशराज ने अपने मोबाइल में सेव कर लिया और इशिता मुसकराते हुए पलट कर तेजी से अपने घर की ओर बढ़ गई. देशराज उसे तब तक अपनी प्यासी नजरों से देखता रहा, जब तक इशिता उस की ओर से ओझल नहीं हो गई. उस दिन के बाद से क्लास में हो या कहीं बाहर अकेले, उन दोनों की नजदीकियां अब बढऩे लगी थीं. इधर इशिता अपनी पढ़ाई पर भी काफी फोकस बनाए रखती थी, क्योंकि 10+2 की परीक्षा पास करने के बाद उस का इरादा डौक्टरी की पढ़ाई करने का था, लेकिन दूसरी तरफ देशराज अपनी पढ़ाई की ओर अधिक ध्यान न दे कर मटरगश्ती करने में ज्यादा आगे रहा करता था.

इस के अलावा देशराज इशिता के प्रति कभीकभी काफी आक्रामक भी हो जाता था. वह चाहता था कि इशिता उस के अतिरिक्त किसी भी अन्य लड़के से दोस्ती करने की बात तो दूर बात भी न करे.

एक दिन की बात है. उस दिन शाम को इशिता लाइब्रेरी में जा कर अपनी पढ़ाई के लिए नोट्स तैयार कर रही थी. लाइब्रेरी में उस समय इशिता के अलावा और कोई नहीं था. देशराज उसे काफी समय से फोन कर रहा था, लेकिन उस ने अपना मोबाइल फोन पढ़ाई में व्यस्त होने के कारण साइलेंट मोड में रखा हुआ था. देशराज को पता था कि शाम को कभीकभी इशिता पढ़ाई करने लाइब्रेरी चली जाया करती है. इसलिए वह उसे ढूंढते हुए लाइब्रेरी पहुंच उस को पढ़ाई में व्यस्त देख कर देशराज उस पर भड़क गया.

”इशिता, मैं कब से तुम्हें फोन कर रहा हूं. क्या कर रही हो तुम यहां पर अकेले? चलो, मेरे साथ कहीं बाहर घूमने चलते हैं.’’

”देखो देशराज, हमारे फाइनल एग्जाम सिर पर हैं, इस के अलावा मैं नीट की परीक्षा की तैयारी में भी लगी हुई हूं. देख रहे हो न, मेरे आसपास किस तरह से किताबें फैली हुई हैं. तुम भी अभी अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो,’’ इशिता के उसे समझाते हुए कहा.

”अरे इशिता, क्या करोगी इतना सब पढ़लिख कर, हमारे पास में गांव में काफी खेती है. अपने घर का इकलौता बेटा हूं मैं, कोई बिजनैस कर लूंगा. ठाठ से रखूंगा तुम्हें, चलो तुम्हें चाट खिला कर लाता हूं.’’ देशराज ने कहा.

उस की इस बात को सुन कर इशिता को बड़ा गुस्सा आया, पर गुस्से पर काबू करते हुए वह बोली, ”देशराज, अब एग्जाम के केवल 5 दिन बाकी रह गए हैं. मुझे पढऩे दो, मैं अभी तुम्हारे साथ बिलकुल भी नहीं आ सकती.’’

”देखो इशिता, लोग इसलिए पढ़ाई करते हैं कि एक अच्छी नौकरी लग जाएगी ताकि ढेरों पैसे कमाए जा सकें, लेकिन मेरे घर में पैसों की कोई कमी नहीं है. जैसे ही मैं कोई नया बिजनैस शुरू करूंगा, तुम्हारे कदम पर दौलत का ढेर लगा दूंगा.’’ देशराज ने शेखी बघारते हुए कहा.

”देशराज, मेरे भी अपने खुद के सपने हैं, मैं अपने जीवन में अपने बलबूते पर कुछ बनना चाहती हूं. मेरी तो तुम से भी यही गुजारिश है कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो. अपने दम पर कुछ बन कर दिखाओ, फेमिली वालों के दम पर तो सभी शेखी बघारने लगते हैं.’’ इशिता ने उसे समझाया.

लेकिन दूसरी तरफ देशराज को इशिता की बात का बहुत बुरा लगा और उस ने अगले ही पल एक झन्नाटेदार थप्पड़ इशिता के गाल पर दे मारा. यह देखकर इशिता भी एक पल के लिए जैसे सहम सी गई थी. उस ने तुरंत वहां से अपनी किताबें इकट्ठा कीं और गुस्से से पैर पटकती हुई वहां से चली गई. रास्ते भर इशिता देशराज के इस कृत्य से रोती रही. बस उसी दिन और उसी पल मन देशराज के लिए खट्टा हो गया था. इशिता को उस समय इस बात का पूरापूरा अहसास हो चुका था कि देशराज को न तो इशिता की भावनाओं की चिंता है और न ही वह स्वयं कुछ करना चाहता है. उसे तो केवल अपने फेमिली वालों की दौलत का घमंड था.

वह अपने आप को एक ऐसे वीडियो गेम के दुष्चक्र में फंसा चुका था कि वह कभी भी अपना और अपने साथसाथ इशिता का जीवन भी तबाह कर सकता था. धीरेधीरे इस का नतीजा यह हुआ कि देशराज अब इशिता के मन से काफी दूर जा चुका था. अब इशिता को यह महसूस होने लगा था कि उस ने देशराज के साथ प्रेम संबंध बढ़ा कर बहुत ही जल्दबाजी कर दी थी, क्योंकि देशराज कहीं से भी उस के सपनों का राजकुमार तो बिलकुल भी नहीं था. देशराज के लिए तो वीडियो गेम और उस के घर वालों की जमीन और दौलत का महत्त्व सर्वोपरि था.

इस के बाद देशराज ने कई बार इशिता से मिलने और बात करने की कोशिश भी की थी, लेकिन इशिता ने तो यह सोच लिया था कि जिस जीवनसाथी की उस ने अपने मनमस्तिष्क में कल्पना कर रखी थी, वह किसी भी रूप में उस का एक आदर्श प्रेमी या जीवनसाथी तो कतई नहीं हो सकता था. इसलिए इशिता ने इस भ्रमित प्रेम संबंध को तोडऩे के लिए देशराज से दूरी बनानी शुरू कर दी. देशराज बारबार उसे परेशान करता रहता था, इसीलिए अब इशिता ने अपना पुराना वाला सिम भी तोड़ कर फेंक दिया था.

धीरेधीरे समय गुजरता गया. 10+2 पास करने के बाद इशिता ने विक्टोरिया कालेज में दाखिला ले लिया था. यहां देशराज ने कई बार इशिता से मिल कर बात करने की कोशिशें की, परंतु इशिता ने उस से अब सारे रिश्ते ही खत्म कर लिए थे. वह अब पढ़ाई के साथ ही साथ नोट तैयार करने में भी लगी थी. इधर देशराज ने इशिता की एक सहेली से इशिता का नया मोबाइल नंबर भी ले लिया था. देशराज बारबार इशिता से बात कर माफी मांगा करता था, वह उस से अपने रिश्ते को दोबारा से बनाने के लिए हमेशा कहता रहता था. इशिता ने उसे इग्नोर कर दिया तो जुनूनी आशिक देशराज सिंह ने गोली मार कर उस की हत्या कर दी.

उस के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद से देशराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उस की निशानदेही पर एक 7 एमएम का पिस्तौल भी बरामद कर लिया. कहानी लिखे जाने तक पश्चिम बंगाल पुलिस उस के पापा राघवेद्र प्रताप सिंह को भी गिरफ्तार कर चुकी थी और दोनों को जेल भेज दिया गया था.

बच्चों पर दुष्प्रभाव डाल रहा हैगरेना फ्री फायरगेम

गरेना फ्री फायर गेम जिसे ‘फ्री फायर बैटलग्राउंड’ या ‘फ्री फायर’ गेम के नाम से भी जाना जाता है, जो ऐक्शन-एडवेंचर बैटल रोयल गेम है, जो मोबाइल के लिए उपलब्ध कराया गया है. इस गेम को 111 डौट्स स्टूडियो द्वारा विकसित किया गया है और गारिना द्वारा प्रकाशित किया गया है. यह मोबाइल गेम 20 नवंबर, 2017 को बीटा रिलीज किया गया था और 4 दिसंबर, 2017 को आधिकारिक तौर पर एंड्राइड और आईओएस के जरिए जारी किया गया था. इस मोबाइल गेम के 500 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं.

इस खेल में 50 से अधिक खिलाड़ी होते हैं, जो दूसरे खिलाडिय़ों को मारने के लिए हथियारों और उपकरणों की तलाश में एक द्वीप पर पैराशूट के सहारे गिरते हैं. इस में खिलाडिय़ों को अन्य खिलाडिय़ों को मार कर जीतना होता है. जो खिलाड़ी जीत जाता है उसे बूयाह (क्चह्रह्रङ्घ ्र॥) दिया जाता है. इस खेल में 4 नक्शे होते हैं. पहले का नाम बरमुडा है, जो सब से पुराना नक्शा है. दूसरे नक्शे का नाम परगेटारी है, तीसरा नक्शा कलाहारी है, जो हाल ही में प्रकाशित किया गया था. इस के अलावा बरमुडा का नया संस्करण लाया गया है. इस चौथे नक्शे का नाम बरमुडा रीमास्टर्ड है.

फ्री फायर एक वीडियो गेम है, जिस में विभिन्न प्रकार के इन-गेम इवेंट्स शामिल हैं. ये इवेंट्स पेड के रूप में हो सकते हैं या फिर खिलाडिय़ों को गेम में इनाम और बोनस कमाने का मौका दे सकते हैं. पेड इवेंट, जैसे कि एलिट पास के बाद बैटल पास की जगह आया है. डायमंड रौयल खिलाडिय़ों को एक्सक्लूसिव कौस्मेटिक्स और अन्य आइटम्स खरीदने की अनुमति दे देते हैं, जबकि दूसरे इवेंट्स में आमतौर पर सभी खिलाडिय़ों के लिए उपलब्ध रहते हैं और उन्हें भाग लेने के लिए कोई भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है. इन इवेंट्स में खिलाडिय़ों को गेम में बिना भुगतान किए बेहतर आइटम्स को अनलौक करने का मौका मिलता है. इन आयोजनों का विषय और समय अलगअलग हो सकता है.

फायर गेम खेलने के कई दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. इस से फायर गेम खेलने की लत लग सकती है, जिस के कारण वास्तविक दुनिया की गतिविधियों की उपेक्षा होती है. गेम को खेलने के कारण बच्चे चिड़चिड़े, आक्रामक, सामाजिक रूप से अलगथलग होने लग जाते हैं. इस के अतिरिक्त गेमिंग में पैसे खर्च करने, आंखों की रोशनी कम होने और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पडऩे जैसे खतरे भी सामने आने लगते है.ल इस गेम की लत से बच्चे दिन भर पढ़ाई करने के बजाय गेम खेलते रहते हैं और खेलना व परिवार के साथ वक्त बिताना छोड़ देते हैं. इस गेम को लंबे समय तक खेलने से मानसिक संतुलन तक बिगड़ सकता है.

बच्चे अपनी मनपसंद चीजें खरीदने के लिए खुद ही पैसे इस गेम में खर्च कर सकते हैं, जिस के कारण परिवार में वित्तीय संकट पैदा होने की आशंका बनी रहती है. इस से बच्चों को दूर रखने के लिए मातापिता को अपने बच्चों पर निगरानी रखने व बच्चों को ऐसे हिंसक गेम खेलने से रोकने के लिए बच्चों को समझाने की आज विशेष आवश्यकता है.

14 फरवरी, 2022 को भारत सरकार के इलेक्टौनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारत के संविधान के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत भारत की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले 53 अन्य ऐप्स के साथ ‘गरेना फ्री फायर’ गेम पर प्रतिबंध लगा दिया था, प्रतिबंध लगाने के बावजूद यह गेम आज भी युवाओं और बच्चों के द्वारा खेला जा रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाए जाने की विशेष जरूरत है. West Bengal News

 

Rajasthan News: तीसरी शादी की चाहत

Rajasthan News: अनीता राज चंचल स्वभाव की थी. सासससुर के खिलाफ मुकदमा लिखवाने के बाद वह पति के साथ अलवर में रहने लगी. यहां मकान मालिक मानसिंह उर्फ वीरू से प्यार हो जाने के बाद वह पति को छोड़ वीरू जाटव के संग रहने लगी. इसी दौरान उस के नैन काशीराम प्रजापति से लड़ गए तो नए प्रेमी के साथ रहने के लिए उस ने ऐसी खूनी वारदात को अंजाम दिया कि…

काशीराम प्रजापति जब कई दिनों बाद अनीता राज से मिलने आया, तब वह उलाहना देती हुई बोली, ”लगता है अब तुम्हारा मुझ से मन भर गया है, कोई दूसरी फंसा ली क्या?’’

”अरे नहीं डार्लिंग, वैसा कुछ नहीं है मेरे मन में, तुम्हारा दूसरा पति वीरू ही अड़चन बना हुआ है. बड़ी मुश्किल से

मैं ने उस की टूटी दोस्ती में अपनी गांठ बांधी है.’’

”ऐसा क्यों किया?’’

”उसे हमारे संबधों पर शक हो गया है. हम पर निगरानी रखे हुए है. इस कारण मैं कई दिनों तक तुम से मिलने नहीं आया. उसे विश्वास में लेने के लिए ही उस के साथ दोबारा दोस्ती का हाथ मिलाया है.’’ काशीराम ने समझाया.

”मगर उसे दोबारा हमारे संबंधों पर शक हुआ तो?’’ अनीता चिंता जताती हुई बोली.

”तब मैं उस का परमानेंट इलाज कर दूंगा यानी खल्लास,’’ काशीराम तपाक से आक्रोश के साथ बोल पड़ा.

”तो देर किस बात की? जल्दी ही कर दो यह काम.’’ अनीता बोली.

अनीता की यह बात सुन कर काशीराम खुश हो गया, क्योंकि अब अनीता भी उस का साथ देने को तैयार हो गई थी. वह अनीता के चेहरे को चाहत भरी नजरों से निहारने लगा.

”मुझे क्या घूर रहे हो…मैं ने हां कह तो दिया, किंतु उस की मौत नैचुरल दिखनी चाहिए.’’

”वह कैसे होगा?’’ काशीराम बोला.

”और पास आओ बताती हूं… मैं ने सारा प्लान सोच रखा है!’’ अनीता काशीराम के शर्ट का कौलर अपनी ओर खींचती हुई बोली.

फिर दोनों के बीच आधे मिनट तक खुसरफुसर होती रही. भावावेश में काशीराम ने अनीता के होंठों को चूम लिया था. अलग होती हुई अनीता बोली, ”फिर उस के बाद हम लोग शादी कर लेंगे.’’

किंतु अभी भी काशीराम के मन में प्लान की सफलता को ले कर संदेह दूर नहीं हुआ था. उस ने अपनी शंका अनीता से जाहिर की.

”तुम्हें जरा भी संदेह है तो सुपारी किलर हायर कर लो, मैं 2 लाख रुपए देती हूं.’’ वह बोली.

उस के बाद अनीता उठ कर दूसरे कमरे में चली गई. जब वापस लौटी, तब उस की हाथ में 5-5 सौ के कुछ नोट थे. प्लान के मुताबिक तय तारीख 7 जून, 2025 को काशीराम ने अनीता को कौल किया. उसे आधी रात को घर का मुख्य दरवाजा खुला रखने को कहा. अनीता की हामी मिलने पर काशीराम रात के करीब 2 बजे भाड़े के 4 साथियों के साथ वीरू के घर के करीब पहुंच गया. वीरू राजस्थान के अलवर जिले के खेड़ली कस्बे में बाईपास रोड पर स्थित अपने घर में सोया हुआ था.

घर का मेन गेट खुला था. उस से पांचों अंदर दाखिल हो गए. सभी कमरे के बाहर बाउंड्री के भीतर चारपाई पर सो रहे वीरू के पास जा पहुंचे. काशी ने मानसिंह उर्फ वीरू के सिरहाने से तकिया एक झटके में खींच लिया और उस से वीरू का मुंहनाक दबा दिया. बाकी चारों ने और अनीता ने एक साथ वीरू के हाथपैर दबोच लिए. वीरू कुछ सेकेंड तक छटपटाया और उस की मौत हो गई.

तभी एक व्यक्ति की नजर एक 9 बच्चे पर पर गई, जो आंखें मलते हुए उन्हें देख रहा था.

”अरे यह तो वीरू का बेटा है… इस ने हमें देख लिया है. अब क्या होगा?’’

काशीराम के मुंह से अचानक चिंता के ये शब्द निकल पड़े.

वह अनीता के साथ उस के पास गया. उस के कानों में फुसफुसाया और उसे उस के कमरे में जा कर सुला दिया. अनीता अपने कमरे में चली गई. 9 वर्षीय बेटे को जागते हुआ देखा. वह गुमसुम था. कुछ बोल नहीं पा रहा था. उसे पुचकारते हुए समझाने लगी. उस ने कहा कि जो कुछ देखा, किसी को नहीं बताए. कोई पूछे भी तो कहना है कि वह सो रहा था, उसे कुछ नहीं मालूम. प्लान के मुताबिक 8 जून, 2025 की सुबह करीब साढ़े 4 बजे अनीता ने अपनी जेठानी को कौल कर कहा कि जल्दी आओ, वीरू की तबीयत खराब हो गई है. अस्पताल ले जाना होगा.

जल्द ही परिवार के कई लोग वहां पहुंच गए. उसे तुरंत खेड़ली के उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया. अस्पताल में कुछ दूसरे परिजन भी पहुंच गए. उन में वीरू का भाई खेमचंद उर्फ गब्बर जाटव भी था. डौक्टर ने स्ट्रेचर पर वीरू की नब्ज टटोली और तुरंत मृत घोषित कर दिया. यह सुनते ही वहां मौजूद वीरू के फेमिली वाले सन्न रह गए. अनीता सदमे में आ कर वहीं धम्म से जमीन पर बैठ गई. उस के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी. आंखें पथराई जैसी हो गई थीं. एक बूंद आंसू नहीं निकले थे. उसे फेमिली वालों ने संभाला. इसी बीच वहां काशीराम प्रजापति भी पहुंच गया.

वीरू के भाई गब्बर को यह बात गले नहीं उतर रही थी कि कुछ घंटे पहले ही रात के 10 बजे जब वह अपने नए घर में सोने गया था, तब तो वीरू एकदम भलाचंगा था. फिर अचानक उसे क्या हो गया? इस बारे में उस ने अनीता से जानना चाहा, किंतु वह कोई ठोस जवाब नहीं दे पाई. सकपकाती हुई सिर्फ इतना बताया कि खाना खाने के बाद वीरू सो गया था. आधी रात को उस की अचानक तबीयत बिगडऩे लगी थी. पहले तो उस ने गरमी से बेचैनी की शिकायत की थी. उसे खुली हवा में घर के बाहर बाउंड्री के खुले में सोने की इच्छा जताई और खुद वहां चारपाई पर जा कर लेट गया.

करीब 4 बजे उस ने आवाज लगाई और सीने में दर्द की शिकायत की. फिर उस ने अस्पताल ले जाने के लिए परिवार के सभी लोगों को फटाफट कौल कर बुलाया.  अनीता से बात करते हुए गब्बर वीरू की लाश को भी निहार रहा था. उसे उस के गले पर गहरा निशान नजर आया. जब इस बारे में अनीता से पूछा तो वह सकपका गई. उसी वक्त काशी का वहां पहुंचना भी गब्बर को कुछ अजीब लगा. उसे वीरू की मौत पर शक हो गया. उसे वीरू के चेहरे और गले पर जख्मों के निशान देख कर पहले ही उस की हत्या का संदेह हो गया था.

उस ने अस्पताल में मौजूद सभी लोगों के सामने एक तरह से अपना फरमान सुनाया, ”वीरू की लाश का पहले पोस्टमार्टम होगा, तभी उस का अंतिम संस्कार किया जाएगा.’’

इसी के साथ उस ने थाना खेड़ली को सूचना दे दी. सूचना पा कर एसएचओ धीरेंद्र सिंह गुर्जर अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने वीरू की लाश का मुआयना किया और वहां मौजूद फेमिली वालों से कुछ सवाल पूछे. गब्बर जाटव की शिकायत पर मानसिंह उर्फ वीरू की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया. उस के मुंह, नाक और गरदन पर चोट के निशान पाए गए. मुंह और नाक से बाहर निकला खून सूख चुका था. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

पुलिस टीम आगे की जांच के लिए मानसिंह उर्फ वीरू के घर यानी घटनास्थल पर भी गई. वहां से कई साक्ष्य जमा किए गए, जिस में वीरू के बिस्तर पर से मिला एक टूटा दांत भी था. पुलिस के लिए यह वीरू की हत्या का एक सबूत था. पुलिस टीम ने घटनास्थल के खड़ेली कस्बे में लगे करीब 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे गए. एक फुटेज में 7-8 जून की रात करीब 2 बजे एक बाइक पर कुछ लोग लद कर वीरू जाटव के घर की ओर जाते दिखाई दिए. उन में ही काशीराम प्रजापति भी नजर आया था. उसी रात 3 बजे के बाद वही लोग बाइक से वापस लौटते नजर आए.

वीरू के भाई गब्बर ने अपने भाई की हत्या का शक काशीराम और भाभी यानी वीरू की पत्नी अनीता पर ही जाहिर किया था. उस ने पुलिस को बताया था कि अनीता वीरू की दूसरी पत्नी है, जो बगैर ब्याहे उस के साथ कई सालों से रह रही थी. पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन की भी जांच की. काशीराम की लोकेशन घटनास्थल की मिली. कौल के डिटेल्स से पता चला कि अनीता और काशीराम के बीच हर रोज की तरह उस रात भी बातचीत हुई थी.

पुलिस ने इन तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने के बाद इस घटना की जानकारी अलवर जिले के आला पुलिस अधिकारियों को दे दी. एसपी संजीव नैन ने इस बाबत एडिशनल एसपी (रूरल) प्रियंका और सीओ (कठूमर) कैलाशचंद्र के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी. इस टीम में एसएचओ धीरेंद्र सिंह, एसएसआई रमेशचंद, कांस्टेबल राजवीर, भगत सिंह, प्रधान सिंह, सुरेश चंद, देवेंद्र सिंह शामिल किए गए थे. थाना खेड़ली की पुलिस टीम भी इस जांच में पहले से लगी हुई थी. जांच में अनीता और काशीराम के बीच लव अफेयर के बारे में भी पता चला, जबकि वह वीरू की दूसरी पत्नी थी.

वह करीब 4 साल से मानसिंह उर्फ वीरू के साथ खेड़ली कस्बे के बाइपास रोड पर वार्ड नंबर 19 स्थित नए मकान में रह रही थी. वहीं अनीता का 10 वर्षीय बेटा भी रहता था. जबकि वीरू की पहली पत्नी सपना देवी अपने 2 बेटों और एक बेटी के साथ खेड़ली में ही पुराने मकान में रहती थी. वीरू अपनी दोनों पत्नियों और उन के बच्चों का पूरा खयाल रखता था. हालांकि अपना अधिक समय अनीता के साथ ही गुजारता था. सपना से उस की बाकायदा शादी हुई थी, लेकिन अनीता के साथ वह लिवइन रिलेशनशिप में था.

अनीता पहले से शादीशुदा थी. उस का ससुराल राजस्थान के भरतपुर जिले में भुसावर के सेंदली गांव में थी. विवाह के कुछ समय बाद ही वह पति को अलवर जिले के खेड़ली कस्बे में ले आई थी. पति को अपने पक्ष में कर सासससुर एवं दूसरे परिजनों पर मुकदमा दर्ज कर दिया था. उस का पति फलों का ठेला लगता था. वहीं उस की मुलाकात वीरू से तब हुई थी, जब अनीता अपने पति के साथ उस के मकान में किराए पर रहने आई थी. वहीं रहते हुए अनीता के वीरू के साथ अवैध संबंध बन गए थे. पति को इस की जानकारी हुई तो उस ने विरोध किया, तब अनीता वीरू के साथ भाग गई. जिस से उस के पति की काफी जगहंसाई हुई.

अनीता भी एक बेटे की मां थी. उस ने पति के साथ अपने बेटे को भी ठुकरा दिया. वह 2 माह बाद वीरू के साथ गुजार कर वापस खेड़ली लौट आई थी. जबकि उस का पति अपने बेटे के साथ सेंदली लौट गया था. वीरू के एक गैरऔरत के साथ रहने का विरोध उस की ब्याहता सपना देवी और दूसरे करीबी परिजनों ने भी किया, लेकिन वह नहीं माना. वह अनीता के इश्क और हुस्न का दीवाना बना हुआ था. उस ने अपनी पत्नी सपना और भाई गब्बर की एक नहीं सुनी. यहां तक कि उस ने अनीता के लिए दूसरा घर दिलवा दिया और उस के साथ रहने लगा. आजीविका के लिए उस ने अनीता को जनरल स्टोर की दुकान भी खुलवा दी. अनीता वीरू से एक बेटे की मां भी बन गई.

वीरू और बेटे के साथ अनीता की जिंदगी मजे में गुजर रही थी. वह अपनी दुकान चलाती थी. जबकि वीरू अपने धंधे में घर से बाहर चला जाता था. एक बार अनीता की दुकान पर काशीराम आया. वह बातबात पर अनीता की दुकान, उस के काम करने के तौरतरीके, व्यवहार की तारीफ करता है. उस ने यह भी महसूस किया कि सामान खरीदने के बहाने से उस से दूसरी बातें भी करने लगा था, ताकि उस के साथ अधिक समय तक रह सके. अनीता को काशी की आंखों में अपने प्रति चाहत के डोरे नजर आए. जब कभी काशी उस के सामने होता तो उस के दिल की धड़कनें बढ़ जाती थीं. कई बार काशी सामान खरीदते हुए और पैसे के लेनदेन के बहाने से अनीता के हाथों को प्यार से छूनेसहलाने लगता था.

अनीता भी इस का बुरा नहीं मानती थी. एक बार तो हद हो गई, जब काशी उस की हथेली को पकड़ कर बोल पड़ा, ”इतनी अच्छी कलाई और हथेली है, छोडऩे को जी नहीं करता है.’’

इस तारीफ को सुन कर अनीता शरमा गई. उस ने झट से अपना हाथ खींच लिया और तेजी से मुड़ गई थी.

इस के जवाब में अनीता भी बोले बगैर नहीं रही, ”लगता है, तुम पहली बार किसी औरत को देख रहे हो?’’

यह कहना गलत नहीं था कि काशी ने अनीता के दिल में प्रेम की गुदगुदी के साथ देह में वासना की चिंगारी भड़का दी थी. आगे क्या होने वाला है, इस का उसे जरा भी अंदाजा नहीं था. दोनों जल्द ही एकदूसरे के साथ प्यार की रौ में बह गए. अनीता एक बार फिर गैरमर्द की बांहों में ऐसे समा गई थी, मानो उस का वीरू से मन भर गया हो. अनीता को उस वीरू का प्रेम फीका लगने लगा, जिस के साथ साल 2013 से ही रह रही थी. उसे छोड़ कर दमदार मर्दानगी वाले मर्द काशी के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी थी. करीब ढाई साल तो उन के अवैध रिश्ते वीरू की नजरों से छिपे रहे, लेकिन जब इस का उसे पता चला, तब उस ने विरोध जताना शुरू कर दिया.

विरोध में वह अनीता के साथ गालीगलौज और मारपीट करने लगा. यह सब अनीता के साथ आए दिन होने लगा था. यहां तक कि वीरू ने उस का मोबाइल फोन तक छीन लिया था और सिम तोड़ डाले थे, ताकि वह काशी से फोन पर भी बात नहीं कर सके. अनीता पर वीरू द्वारा की गई सख्ती को देखते हुए काशी ने एक तरीका निकाला. वह वीरू के पैरों पर जा गिरा और माफी मांग ली. कसम खाई कि वह अनीता से संबंध तोड़ लेगा. इसी के साथ उस ने वीरू के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया.

इस मेलमिलाप की खुशी में काशी ने वीरू को शराब की पार्टी दे डाली. वीरू ने पार्टी के जम कर मजे लिए और यह भूल गया कि काशी उस की प्रेमिका का प्रेमी है. वीरू को इस बात का जरा भी एहसास नहीं हुआ कि काशी की दोस्ती के पीछे अनीता की चाल है. पुलिस की जांच टीम ने वीरू के हत्यारों तक पहुंचने के लिए उस की पहली पत्नी सरिता देवी से भी पूछताछ की. उस ने बहुत दुखी मन से अपनी पीड़ा बताई, जिस से पुलिस को अंदाजा हुआ कि वीरू की हत्या में उस की भूमिका नहीं हो सकती है. जबकि पुलिस को अनीता में इस की कोई झलक नहीं दिखी. उसे वीरू की मौत का न कोई मलाल था और न ही कोई पीड़ा, सिर्फ चेहरे पर बनावटी उदासी थी.

पुलिस की पूछताछ का सिलसिला यहीं नहीं खत्म हुआ. घटना की रात घर में मौजूद अनीता के 9 वर्षीय बेटे से पूछताछ के लिए पुलिस उसे अकेले में ले गई और उसे हमदर्दी एवं प्यार दिखाते हुए वीरू के बारे में पूछताछ करने लगी. अनीता के बेटे ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस की आंखों में चमक आ गई. दरअसल, उस ने घटना की रात जो कुछ अनिद्रा में देखा था, सचसच बता दिया. यह भी बताया कि उसे किसकिस ने कुछ नहीं बोलने की हिदायत दी थी? किस ने धमकी दी थी और अनीता ने किस तरह से उसे चुप रहने के लिए समझाया था.

बच्चे ने 7 जून, 2025 की शाम की बात पापा से अखिर बार हुई बात बताई थी. उस ने बताया कि पापा जब उस रात काम से घर आए थे, तब उन्होंने उसे अपना मोबाइल फोन चार्ज के लिए बिजली बोर्ड के साकेट में लगाने के लिए दिया था. उसी रात मम्मी ने उस पर जल्द सोने का दबाव डाला था और वह सो गया था. आधी रात को अचानक उस की नींद खुल गई थी और उस ने पापा की हत्या करते हुए कई लोगों को देख लिया था. उन में उस की मम्मी भी थी.

पुलिस के लिए अनीता और वीरू का बेटा ही चश्मदीद गवाह निकला. उस ने हत्याकांड की बहुत सारी बातें बता दी थीं, जिस से अनीता और उस के नए प्रेमी काशीराम पर बना शक और मजबूत हो गया था. इस संबंध में पुलिस ने अनीता से सख्ती से पूछताछ की. तब उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया और दूसरे आरोपियों के बारे में बताया, जिस में मुख्य आरोपी काशीराम प्रजापति था. पुलिस ने काशीराम को 16 जून, 2025 को सुपारी किलर बृजेश जाटव के साथ गिरफ्तार कर लिया. दोनों से सख्ती के साथ पूछताछ से पहले पुलिस ने उन्हें बता दिया कि अनीता ने जुर्म मान लिया है और उस के बेटे ने सब कुछ बता दिया है, इसलिए उस के बचने की कोई गुंजाइश नहीं है. इतना सुनते ही काशीराम भी डर गया और घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बता दिया.

काशीराम प्रजापति पुलिस की सख्ती के आगे ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. उस ने बाकी 3 आरोपियों के नाम बताने के साथसाथ वीरू की हत्या करनी स्वीकार ली. उस ने सुपारी के लिए 2 लाख रुपए के बारे में भी बताया, जो अनीता ने देने का वादा किया था. एडवांस के रूप में उसे 40 हजार मिल गए थे. आरोपियों में बृजेश जाटव अलवर के कालवाड़ी का रहने वाला है. वह छोटामोटा कामधंधा करता है. पूछताछ के बाद अनीता, काशीराम प्रजापति और बृजेश को पुलिस ने अलवर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Rajasthan News

कथा संकलन तक पुलिस अन्य तीनों आरोपियों को सघनता से तलाश कर रही थी.

 

 

Love Crime: छलिया आशिक को कैसे पहचानें

Love Crime: 4 बच्चों की मां बनने के बावजूद 52 वर्षीय रानी सोमवंशी की हसरतें जवान थीं. वह बनसंवर कर रहती और इंस्टाग्राम पर अपने फोटो शेयर करती. यहीं पर 25 वर्षीय अरुण सिंह राजपूत उसे दिल दे बैठा. बाद में दोनों होटलों में भी मिलने लगे. शादीशुदा होते हुए भी रानी अरुण से शादी करने का ख्वाब संजोने लगी, लेकिन अरुण ऐसा छलिया आशिक निकला कि…

रानी सोमवंशी की धमकी से अरुण डर गया. उस की रातों की नींद व दिन का चैन छिन गया. आखिर उस ने रानी को खत्म करने का निश्चय कर लिया. उस ने रानी को विश्वास में ले कर उस की हत्या का तानाबाना बुन लिया. 8 अगस्त, 2025 को रानी सोमवंशी ने फोन पर अरुण से बात की और उसे धमकाया कि जल्द शादी करो या फिर पैसे वापस करो. इस पर अरुण ने उस से कहा कि वह उस से प्यार करता है और शादी को तैयार है. तुम 10 अगस्त को मैनपुरी आ जाओ और भांवत चौराहे पर मिलो. उस के बाद हम शादी करने का प्लान बनाएंगे.

रानी 9 अगस्त को अपनी ससुराल के गांव जिठौली से फर्रुखाबाद जिले के गांव खेड़ा में रहने वाली अपनी बहन के यहां आई थी. प्रेमी अरुण से बात होने के बाद वह 10 अगस्त को ही ससुराल जाने की बात कह कर वह मैनपुरी चली आई. प्रेमी की इस बात पर रानी खुश हो गई और 10 अगस्त, 2025 की दोपहर साढ़े 12 बजे वह मैनपुरी के भांवत चौराहे पहुंच गई. वहां अरुण पहले से ही रानी का इंतजार कर रहा था. रानी को देख कर वह मुसकरा उठा. रानी ने भी मुसकान बिखेरी. इस के बाद दोनों ने साथ बैठ कर एक रेस्टोरेंट में चायनाश्ता किया. फिर दोनों खरपरी बंबा के पास पहुंचे और सुनसान स्थान देख कर पेड़ के नीचे बैठ कर बतियाने लगे.

बातचीत के दौरान रानी ने शादी की जिद की और दिनतारीख बताने को कहा. यह सुनते ही अरुण को गुस्सा आ गया. उस ने रानी की चुन्नी को उसी के गले में लपेटा और गला कसने लगा. चुन्नी को वह तब तक कसता रहा, जब तक उस की मौत नहीं हो गई. रानी सोमवंशी की हत्या के बाद अरुण ने रानी के शव को झाडिय़ों में छिपा दिया. रानी के मोबाइल फोन का सिम निकाल क र तोड़ दिया और बंबा में फेंक दिया. मोबाइल कूच कर झाडिय़ों में छिपा दिया. चुनरी को पत्तों के नीचे छिपा दिया. उस के बाद वह फरार हो गया.

इधर रानी जब देर शाम तक घर नहीं पहुंची तो उस के पति राजपाल को चिंता हुई. उस ने रानी को कौल लगाई, लेकिन उस का फोन बंद था. वह रात भर चहलकदमी करता रहा. सुबह उस ने कुछ लोगों को रानी के लापता होने की जानकारी दी. उस के बाद वह कई दिनों तक पत्नी की खोज में भटकता रहा. जब कुछ पता नहीं चला, तब उस ने जिठौली थाने में पत्नी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. 11 अगस्त, 2025 की सुबह मैनपुरी कोतवाली के गांव खरपरी के कुछ किसान अपने खेतों की ओर गए तो उन्होंने बंबा के पास झाडिय़ों के बीच एक महिला की लाश देखी. लाश देख कर उन के होश उड़ गए. खबर गांव तक पहुंची तो वहां भीड़ जुट गई. इसी बीच किसी ग्रामीण ने इस लाश की सूचना थाना मैनपुरी कोतवाली को दे दी.

सूचना मिलते ही एसएसआई राजेंद्र सिंह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ खरपरी बंबा के पास पहुंच गए, जहां झाडिय़ों के बीच महिला की लाश पड़ी थी. उस समय वहां लोगों की भीड़ थी. चूंकि मामला एक महिला की हत्या का था, अत: एसएसआई राजेंद्र सिंह ने सूचना पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ देर बाद ही एसपी (सिटी) अरुण कुमार तथा डीएसपी संतोष कुमार सिंह घटनास्थल आ पहुंचे. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक व डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया. मृतक महिला की उम्र 50-52 वर्ष थी. वह लाल रंग का कुरता व पीले रंग की सलवार पहने थी. गले में पर्स लटका था. हाथ के पास रुमाल पड़ा था और हाथ में लाल रंग का धागा बंधा था.

मृतका के शरीर पर चोट आदि के निशान नहीं थे. देखने से ऐसा लग रहा था कि महिला की हत्या गला घोंट कर की गई थी. शरीर पर कोई आभूषण भी नहीं था. डौग स्क्वायड का खोजी कुत्ता महिला के शव को सूंघ कर झाडिय़ों के इर्दगिर्द घूमता रहा, फिर भौकता हुआ बंबा की पटरी पर आया. वह नगला गहियर जाने वाले मार्ग पर कुछ दूर तक गया, उस के बाद वापस आ गया. फोरैंसिक टीम ने भी जांच की, कुछ फोटो खींचे और सबूत जुटाए. अब तक महिला के शव को सैकड़ों लोग देख चुके थे, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं पाया था. इस से स्पष्ट था कि महिला पासपड़ोस के गांव की नहीं थी. दूरदराज से बुला कर उस की यहां हत्या की गई थी. हत्या किसी खास परिचित ने ही की थी.

जब शव की पहचान नहीं हो पाई, तब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल मैनपुरी भिजवा दिया. लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी जब शव की पहचान नहीं हुई, तब नियम के मुताबिक पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने अज्ञात में महिला के शव का दाह संस्कार कर दिया. एसपी अरुण कुमार ने इस ब्लाइंड मर्डर को बड़ी ही गंभीरता से लिया. उन्होंने महिला की शिनाख्त व हत्याकांड के खुलासे के लिए 2 टीमें गठित कीं. साथ ही हत्यारों की धरपकड़ के लिए एक पुलिस टीम डीएसपी संतोष कुमार सिंह की देखरेख में गठित की और दूसरी स्वाट प्रभारी जितेंद्र चंदेल के नेतृत्व में बनाई गई.

पुलिस टीमों ने महिला की खोज मैनपुरी के अलावा पड़ोसी जिला फर्रुखाबाद व इटावा में शुरू की. इन जिलों के थानों में महिला की हुलिया सहित फोटो चस्पा कराई गईं. गुमशुदा अधेड़ महिलाओं की सूचना भेजने को कहा गया. डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने सुरागसी के लिए अपनी विशेष टीम तथा मुखबिरों को भी लगा दिया. धीरेधीरे 10 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस की टीमें महिला के शव की पहचान न कर पाई. मुखबिरों ने भी पसीना बहाया, लेकिन वह भी नाकाम रहे. अखबारों में ब्लाइंड मर्डर की खबरें सुर्खियों में छप रही थीं, साथ ही पुलिस की नाकामी पर भी सवाल उठाए जा रहे थे. खबरों से पुलिस अधिकारी चिंतित थे.

23 अगस्त, 2025 को मैनपुरी कोतवाली के एसएसआई राजेंद्र सिंह को फर्रुखाबाद जिले के थाना राजेपुर से सूचना मिली कि उन के यहां रानी सोमवंशी नाम की महिला की गुमशुदगी दर्ज है. गुमशुदगी उस के पति राजपाल सिंह ने दर्ज कराई थी, जो जिठौली गांव का रहने वाला है. रानी 4 बच्चों की मां है. उस की उम्र 52 वर्ष है. इस सूचना पर पुलिस टीम गांव जिठौली पहुंची और राजपाल सिंह सोमवंशी को महिला की पहचान हेतु मैनपुरी कोतवाली ले आई. एसएसआई ने महिला के शव की फोटो राजपाल सिंह को दिखाई तो वह फफक पड़ा और बोला, ”साहबजी, यह फोटो उस की पत्नी रानी की है. वह 10 अगस्त की सुबह 9 बजे दवा लाने के लिए घर से निकली थी, उस के बाद घर वापस नहीं आई. तब से वह उस की खोज में जुटा था.’’

”क्या तुम बता सकते हो कि तुम्हारी पत्नी की हत्या किस ने की है?’’ एसएसआई राजेंद्र सिंह ने पूछा.

”नहीं साहब, मुझे पता नहीं कि रानी की हत्या किस ने और क्यों की है?’’ राजपाल ने जवाब दिया.

”गांव में तुम्हारी किसी से दुश्मनी या लेनदेन का झगड़ा तो नहीं था?’’

”साहब, मैं उम्रदराज सीधासादा किसान हूं. हमारा न तो किसी से झगड़ा है और न ही लेनदेन.’’

”कोई खास या बाहरी व्यक्ति घर में आता था, जिस से रानी का लगाव रहा हो.’’

”ऐसा कोई व्यक्ति घर में नहीं आता था, जिस से रानी का लगाव हो.’’

”रानी के पास मोबाइल फोन था?’’ राजेंद्र सिंह ने पूछा.

”हां साहब, था, लेकिन उस का फोन बंद है. मैं ने कई बार बात करने की कोशिश की थी.’’

राजपाल सोमवंशी से पूछताछ के बाद एसएसआई ने उस से मृतका रानी का मोबाइल फोन नंबर लिया और फिर उस नंबर की कौल डिटेल्स निकलवाई. कौल डिटेल्स से पता चला कि रानी एक खास नंबर पर अकसर बातें करती थी. आखिरी कौल उसी नंबर से उस के मोबाइल पर आई थी. रानी सोमवंशी के मोबाइल पर जो आखिरी कौल आई थी, पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया तो पता चला कि वह नंबर जनपद मैनपुरी के थाना एलाऊ के किशोरपुर गांव निवासी अरुण सिंह राजपूत के नाम दर्ज है.

यह पता चलते ही पुलिस टीम ने किशोरपुर गांव निवासी अरुण के घर छापा मारा, लेकिन वह घर पर नहीं था. अरुण के पापा मुन्ना राजपूत ने बताया कि अरुण गुरुग्राम (हरियाणा) में रहता है. वह टैंकर चलाता है. इस के बाद पुलिस टीम सर्विलांस की मदद से गुरुग्राम पहुंची और पहली सितंबर 2025 की रात अरुण को गिरफ्तार कर लिया. अरुण को थाना मैनपुरी कोतवाली लाया गया. थाने में अरुण राजपूत से रानी सोमवंशी की हत्या के बारे में पूछा गया तो वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करने लगा, लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया.

यही नहीं, पुलिस ने अरुण की निशानदेही पर मृतका रानी का टूटा हुआ मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया, जिस का सिम तोड़ कर अरुण ने बंबा में फेंक दिया था और टूटा हुआ मोबाइल झाडिय़ों में डाल दिया था. पुलिस ने वह चुनरी भी बरामद कर ली, जिस से अरुण ने रानी का गला घोंटा था. चुनरी उस ने पेड़ के पत्तों में छिपा कर ईंट से दबा दी थी. एसएसआई राजेंद्र सिंह ने ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने तथा कातिल को गिरफ्तार करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसपी (सिटी) अरुण कुमार व डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता कर रानी मर्डर केस का खुलासा कर दिया.

चूंकि अरुण कुमार राजपूत ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और हत्या में प्रयुक्त चुनरी भी बरामद करा दी थी, अत: बीएनएस की धारा 103(1), 228(4) के तहत अरुण राजपूत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में प्यार में छल की जो सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई, इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जिला कई मायनों में अपनी पहचान बनाए हुए है. यहां पर बीड़ी और तंबाकू का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है. आलू का उत्पादन भी भारी मात्रा में होता है. यहां की नमकीन पूरे उत्तर प्रदेश में मशहूर है. इसी फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर थाना अंतर्गत एक गांव है जिठौली. राजपाल सिंह सोमवंशी इसी गांव का निवासी था. उस की पत्नी का नाम रानी सोमवंशी था. उस के 4 बच्चों में 2 बेटे व 2 बेटियां थीं. राजपाल सिंह किसान था. उस के पास 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी, जिस में आलू, मूंगफली, मक्का और गेहंू की अच्छी उपज होती थी.

राजपाल व रानी अपने बच्चों से बेहद प्यार करते थे. बेटेबेटी में वह भेद भी नहीं करते थे. दोनों उन की हर जिद पूरी करते थे. पढ़ाईलिखाई का भी खूब खयाल रखते थे. उन के दोनों बेटे पढ़लिख कर टीचर बनना चाहते थे, जबकि बेटियां डाक्टर बनना चाहती थीं. राजपाल सीधासादा और कम पढ़ालिखा था. उस के रहनसहन और बोलचाल की भाषा भी साधारण थी. इस के विपरीत उस की पत्नी रानी पढ़ीलिखी थी. वह तेजतर्रार थी. सजसंवर कर रहती थी. जैसा उस का नाम था, वैसे ही वह रानी बन कर घर में रहती थी. राजपाल जो कमाता था, वह सब रानी के हाथ पर रख देता था. घर में उस की हैसियत कोल्हू के बैल की तरह थी. घर चलाने की जिम्मेदारी रानी की थी. बच्चों की पढ़ाई का खर्चा, खेत में बीजखाद का खर्चा, मजदूरों का खर्चा, सब रानी की जिम्मेदारी थी. राजपाल को तो बीड़ीतंबाकू का ही पैसा मिलता था.

राजपाल का पत्नी रानी पर कोई कंट्रोल नहीं था. वह उस की किसी बात का विरोध नहीं कर पाता था. रानी स्वच्छंद विचारों वाली थी. वह सामान खरीदने बाजारहाट भी जाती थी. घमंडी भी थी. इसी कारण अड़ोसपड़ोस के घरों से उस की दूरी बनी रहती थी. पड़ोस की महिलाएं उस से कम ही बातें करती थीं. समय बीतता रहा. समय के साथसाथ राजपाल उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच गया, जहां सारी इच्छाएं समाप्त हो जाती हैं. वह सारा दिन फसल की रखवाली में व्यतीत करता और रात को खाना खा कर चारपाई पर पसर जाता. दूसरी तरफ रानी सोमवंशी जो 4 बच्चों की मां थी, वह अब भी अपने को जवान समझती थी और खूब सजसंवर कर रहती थी. उसे घर में सब सुख था, लेकिन पति सुख से वंचित रहती थी.

उस के मन में प्रबल इच्छा होती कि कोई उस की जिंदगी में आए और उस के अरमानों की अलख जगाए. कभीकभी तो वह सोचती कि वह दूसरा विवाह कर ले. पर किस से? यह सोच कर दुखी हो जाती. रानी खाली समय मोबाइल फोन पर व्यतीत करती थी. उसे इंस्टाग्राम चलाने का शौक था. इंस्टाग्राम पर वह अपने एडिट किए हुए फोटो लगाती थी, ताकि वह कम उम्र की और खूबसूरत दिखे. वह चाहती थी कि कोई युवक उस की फोटो देख कर उसे पसंद करे और फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेजे. रानी को यकीन था कि एक न एक दिन उस की तमन्ना जरूर पूरी होगी. वह इंतजार में दिन गुजारती रही.

एक रोज अरुण राजपूत ने इंस्टाग्राम पर रानी सोमवंशी की फोटो देखी तो वह उसे पसंद आ गई. उसे लगा कि यही उस के सपनों की रानी है. अत: उस ने फालो कर उसे फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेज दी. रानी ने उस की रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली. इस के बाद दोनों की इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती हो गई और उन के बीच चैटिंग होने लगी. अरुण राजपूत उत्तर प्रदेश के ही मैनपुरी जिले के थाना एलाऊ के गांव किशोरपुर का रहने वाला था. उस के पिता मुन्ना राजपूत किसान थे. 3 भाईबहनों में अरुण सब से छोटा था. उस का मन न पढ़ाई में लगा और न किसानी में. अत: उस ने ड्राइवरी सीख ली और ड्राइवर बन गया. कुछ समय बाद वह गांव छोड़ कर गुडग़ांव (हरियाणा) चला गया और वहां टैंकर चलाने लगा.

अरुण राजपूत और रानी सोमवंशी की दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. दोनों एकदूसरे को मन ही मन चाहने लगे. इंस्टाग्राम पर दोनों हर रोज चैटिंग करते थे. रानी अपनी उम्र छिपाने के लिए फिल्टर ऐप का प्रयोग कर अरुण से बात करती थी. लगभग एक साल तक दोनों के बीच चैटिंग चलती रही. फिर चैटिंग के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल फोन नंबर शेयर कर लिए. अब इंस्टाग्राम पर चैटिंग के साथसाथ मोबाइल फोन पर भी उन की रसभरी बातें होने लगीं. रानी देर रात अरुण को कौल करती थी.

समय बीतते दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच एकदूसरे से रूबरू होने की तमन्ना जागी. एक रोज अरुण ने फोन पर बातचीत के दौरान रानी से कहा कि वह उस से मिलना चाहता है और आमनेसामने बैठ कर बात करना चाहता है. इस पर रानी ने जवाब दिया कि वह स्वयं भी उत्सुुक है. जब चाहो, तब आ जाओ. अरुण रानी से मिलने को उतावला था, अत: तीसरे रोज ही वह मैनपुरी से फर्रुखाबाद आ गया. उस के बाद उस ने रानी से फोन पर बात की और बताया कि वह फर्रुखाबाद आ गया है और यात्री होटल में ठहरा है. तुम कल मिलने आ जाना. मैं तुम्हारा बेसब्री से इंतजार करूंगा. जवाब में रानी ने कहा कि वह कल सुबह 10 बजे तक होटल पहुंच जाएगी. नाश्ता व लंच साथसाथ करेंगे.

वादे के तहत रानी सुबह 9 बजे ही फर्रुखाबाद स्थित यात्री होटल पहुंच गई. होटल रूम में जब पहली बार अरुण ने रानी को देखा तो वह ठगा सा रह गया. इंस्टाग्राम पर जिस रानी की फोटो को उस ने देखा था, सामने बैठी रानी वैसी नहीं थी. वह उस की उम्र से दोगुनी दिख रही थी. हालांकि रानी ने मेकअप कर उम्र छिपाने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन चेहरे की झुर्रियां उस की उम्र की चुगली कर रही थीं.

अरुण समझ गया कि रानी ने प्यार में उस के साथ छल किया है. इंस्टाग्राम पर एडिट फोटो लगा कर उस ने उसे छला है. उस के मन में रानी के प्रति नफरत भर गई, लेकिन उस ने अपनी नफरत को दबाए रखा और रानी से प्यार भरी बातें करता रहा. उस ने रानी को आभास नहीं होने दिया कि उस के मन में नफरत का कितना बड़ा तूफान उठ रहा है. अरुण जहां रानी को देख कर मायूस हुआ, वहीं रानी 25 वर्षीय युवक अरुण को देख कर गदगद हो उठी थी. वह सोचने लगी कि अरुण जैसे गबरू जवान से शादी कर वह अपने सारे अरमान पूरे कर लेगी. उस के नीरस जीवन में एक बार फिर बहार आ जाएगी.

उस रोज रानी ने अरुण से खूब बातें कीं, फिर उस के साथ शारीरिक भूख मिटाई. चंद घंटे होटल में रुकने के बाद रानी वापस घर आ गई. उस दिन वह बेहद खुश थी. रात में भी वह अरुण के बारे में सोचती रही और उस के साथ बिताए खुशी के पलों को याद करती रही. इधर अरुण घर आया तो उसे लगा कि जैसे उस का सब कुछ लुट गया है. रानी जैसी अधेड़ उम्र की महिला से वह शादी कभी नहीं कर सकता. रानी ने प्यार में उस के साथ छल किया था. अत: उस ने भी उस के साथ छल करने का निश्चय किया. प्यार के बदले वह उस से पैसा वसूल करेगा. इंकार किया तो दूरियां बना लेगा.

इस के बाद अरुण जब दोबारा होटल में रानी से मिला तो उस ने रानी से दिखावे के रूप में खूब प्यारभरी बातें कीं. शारीरिक संबंध भी बनाए, फिर जरूरत बता कर रानी से पैसे मांगे. शादी के लालच में रानी ने उसे पैसे दे दिए. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. जब भी अरुण आता, होटल रूम मेें रानी से संबंध बनाता और फिर पैसा मांगता. इस तरह रानी से वह लगभग 2 लाख रुपए ले चुका था. इधर कुछ दिनों से रानी अरुण पर शादी करने का दबाव बनाने लगी थी, लेकिन अरुण कोई न कोई बहाना बना कर टाल देता था.

रानी को उस पर शक हुआ तो उस ने अरुण को धमकाना शुरू कर दिया कि वह या तो उस से शादी करे या फिर पैसे वापस करे, अन्यथा वह पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा कर उसे परिवार सहित जेल भिजवा देगी. रानी सोमवंशी की धमकी से अरुण राजपूत डर गया और बोला, ”रानी, यह तुम क्या कह रही हो? तुम जैसा कहोगी, वैसा ही मैं करूंगा. थोड़ा समय दो. मैं तुम से शादी कर लूंगा.’’

”तब ठीक है, मुझे तुम से यही उम्मीद थी. वैसे भी मैं तुम से मजाक कर रही थी.’’ रानी बोली.

अरुण ने घबरा कर रानी से कह तो दिया कि वह उस से शादी रचा लेगा, लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकता था, क्योंकि रानी अधेड़ उम्र की थी. भला वह उस से शादी कैसे कर लेता. उस के पेरेंट्स भी रानी को बहू के रूप में स्वीकार नहीं करते. इज्जत उछलती सो अलग से.

इस तरह रानी की शादी की जिद, रुपया वापस करने की मांग तथा जेल भिजवाने की धमकी से अरुण बेचैन हो उठा. आखिर इस समस्या से निपटने के लिए अरुण ने रानी की हत्या की योजना बनाई. उस ने इस की भनक किसी के कानों में नहीं पडऩे दी. आरोपी अरुण सिंह राजपूत से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 3 सितंबर, 2025 को मैनपुरी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. Love Crime

 

 

Aligarh News: एक जुर्म दीवाने की खातिर

Aligarh News: पति यूसुफ के घर से निकलते ही तबस्सुम ने योजनानुसार प्रेमी दानिश को फोन कर दिया था. इस बात की जानकारी किसी को नहीं हो सकी. यूसुफ जब शाम को काम से वापस घर नहीं आया, तब फेमिली वालों को चिंता हुई. यूसुफ के साथ फिर क्या हुआ? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

दानिश और तबस्सुम का 4 सालों तक प्यार परवान चढ़ता रहा, लेकिन अब यूसुफ की दखलंदाजी से दोनों परेशान रहने लगे. फोन पर भी अब तबस्सुम दानिश से डरडर कर कम ही बात कर पाती थी. प्रेमी और प्रेमिका दोनों ही बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगे. जब दोनों को एकदूसरे की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो यूसुफ से छुटकारा पाने के लिए उस की हत्या करने का प्लान बनाया. 29 जुलाई, 2025 को यूसुफ घर से टिफिन ले कर मंडी जाने के लिए घर से निकला था, रास्ते में उसे दानिश ने रोक कर कहा, ”यूसुफ यहां पर सारे दिन काम करने पर भी मिलने वाले पैसों से तुम्हारा काम नहीं चलेगा. मेरे साथ चलो, कासगंज में मेरी जानपहचान है. वहां पर अच्छा काम दिलवा दूंगा.’’

अपने दोस्त दानिश की बातों में आ कर यूसुफ उस की स्कूटी पर बैठ गया. दानिश यूसुफ को अपनी स्कूटी पर बैठा कर कासगंज की ओर ले गया. रास्ते में टिफिन से खाना खाने के बहाने दानिश यूसुफ को विलराम क्षेत्र में स्थित बंद पड़े एक ईंट भट्ठे पर ले गया. दानिश ने अपने लिए खाना पहले ही एक होटल से ले लिया था. भट्ठे पर पहुंच कर दोनों ने वहां बैठ कर अपनाअपना खाना खाया. खाना खाने के बाद दोनों वहीं आराम करने लगे. खाना खाने के कुछ देर बाद ही यूसुफ बेहोश हो गया. तब दानिश ने उस के दोनों हाथ पीछे बांध दिए और अपने साथ लाए छुरे को स्कूटी से निकाल कर यूसुफ के पेट में वार कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद भी उसे तसल्ली नहीं हुई और अपने साथ लाए तेजाब से उस का चेहरा जला कर शव को वहां उगी झाडिय़ों में फेंक कर अपनी स्कूटी से भाग गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश ने काम होने की पूरी जानकारी मोबाइल से अपनी प्रेमिका तबस्सुम को दे दी. इस के बाद दानिश अपने घर आ गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश और तबस्सुम खुश थे. दोनों की फोन पर बातें होती रहती थीं. दोनों साथ रहने का प्लान बना रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

2 अगस्त, 2025 की शाम को कासगंज जिले की बिलराम पुलिस चौकी के गांव नगला छत्ता में बंद पड़े एक ईंट भट्ठे के पास झाड़ी में एक अज्ञात व्यक्ति का अधजला हुआ शव मिला. युवक का शव मिलने की जानकारी जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों की भीड़ एकत्र हो गई. कुछ लोग कह रहे थे कि यह आशिकी के चक्कर में मारा गया है, जबकि कुछ का कहना था कि पैसों के लेनदेन के पीछे हत्या हुई है. जितने मुंह उतनी बातें वहां होने लगी.

लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दी, पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. शव कई दिन पुराना होने के चलते उस में कीड़े पनप गए थे.  मृतक के दोनों हाथ पीछे रस्सी से बंधे हुए थे. शव को देखने से प्रतीत हो रहा था कि पेट में किसी धारदार हथियार से वार कर के मौत के घाट उतारा गया था. शव को पेट्रोल या तेजाब से जला दिया गया था, ताकि उस की शिनाख्त न हो सके. सूचना मिलने पर एसपी (देहात) अमृत जैन भी फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए. शव की पहचान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन शव की पहचान न होने पर पुलिस समझ गई कि युवक कहीं बाहर का है और उस की हत्या यहां ला कर की गई है.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को मोर्चरी भिजवा दिया. इस के बाद आसपास  के थानों व जिलों से लापता लोगों के बारे में जानकारी की गई. पुलिस को पता चला कि थाना छर्रा के धनसारी गांव का यूसुफ पिछले कई दिनों से लापता है. इस पर पुलिस ने बिना देर किए यूसुफ के फेमिली वालों से संपर्क किया. यूसुफ के फेमिली वाले जब थाने पहुंचे तो उन्होंने कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की शिनाख्त यूसुफ के रूप में की. 29 जुलाई, 2025 की शाम के 6 बज चुके थे और 27 वर्षीय यूसुफ अभी तक गल्ला मंडी से वापस नहीं लौटा था. यूसुफ गल्ला मंडी में काम करता था. दोनों बच्चे शाम होते ही बेसब्री से अपने पापा का इंतजार करने लगते थे, क्योंकि यूसुफ बच्चों के लिए खानेपीने और कभीकभी कोई खिलौना ले कर जरूर आता था.

सुबह से शाम हो गई और जब रात घिरने लगी तो बड़े बेटे असलान ने अपनी मम्मी तबस्सुम से पूछा, ”मम्मी, पापा अब तक क्यों नहीं आए हैं? वैसे तो वो शाम तक आ जाते थे.’’

”बेटा, पापा को आज ज्यादा काम मिल गया होगा, इसलिए उन्हें आने में देर हो गई है.’’ तबस्सुम ने कहा.

जब रात के 9 बज गए, तब यूसुफ के पिता भूरे खां ने बहू तबस्सुम से पूछा, ”बहू, यूसुफ सुबह जाते समय क्या कह गया था कि वह देर से घर आएगा?’’

इस पर तबस्सुम ने जबाव दिया, ”नहीं पापाजी, वह मुझ से तो कुछ कह नहीं गए थे. मैं ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. मुझे लगा कि कहीं काम में फंस गए होंगे. उन्होंने वापस कौल भी नहीं की.’’

यह सुन कर भूरे खां को चिंता हुई. यूसुफ सुबह गल्ला मंडी जा कर शाम को घर लौट आता था, लेकिन आज उस ने फोन कर के भी नहीं बताया कि वह देरी से आएगा. उन्होंने सोचा कि इस समय तो गल्ला मंडी भी बंद हो चुकी होगी. बेटे को तलाशें तो तलाशें कहां? फिर भी उन्होंने स्वजनों के साथ यूसुफ को ढंूढा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. अलीगढ़ के थाना छर्रा के गांव धनसारी निवासी भूरे खां व उन के फेमिली वालों ने यूसुफ के इंतजार में पूरी रात आंखों में काटी. सुबह होते ही भूरे खां ने फेमिली वालों के साथ गल्ला मंडी जा कर बेटे की तलाश की. साथ ही उस के साथ काम करने वाले अन्य लोगों से बेटे यूसुफ के बारे में जानकारी की. लोगों ने बताया कि यूसुफ कल तो मंडी आया ही नहीं था.

यह सुनते ही भूरे खां के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उन के मन में तरह तरह के विचार आने लगे कि कहीं बेटे के साथ कोई अनहोनी तो नहींं हो गई. कल से उस का कोई हालचाल नहीं मिला था. बेटे की तलाश में भूरे खां ने जहां भी संभव हो सकता था, वहां उस की तलाश की. दूसरे दिन यानी 30 जुलाई को भूरे खां ने थाना छर्रा में बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद  पुलिस और यूसुफ के फेमिली वाले उस की तलाश करते रहे, लेकिन 4 दिन तलाशने के बाद भी यूसुफ का कोई पता नहीं चला.

यूसुफ की नृशंस हत्या से घर में कोहराम मच गया. यूसुफ  के बच्चों के फूल से खिले चेहरे पिता की मौत से मुरझा से गए. पुलिस ने फेमिली वालों को ढांढस बंधाते हुए उन से हत्यारों की तलाश में मदद करने को कहा. कासगंज में यूसुफ के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव फेमिली वालों को सौंप दिया गया. 3 अगस्त को डैडबौडी शाम 5 बजे गांव पहुंची. परिजनों और ग्रामीणों ने घटना का खुलासा करने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छर्राकासगंज मार्ग पर जाम लगाने की कोशिश की. तब पुलिस ने उन्हें समझा कर सड़क से हटा दिया, इस के बाद गांव में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अपने पति की हत्या से यूसुफ की पत्नी तबस्सुम का रोरो कर बुरा हाल था. वह कभी अपने को संभालती तो कभी बच्चों को.  पुलिस ने मृतक यूसुफ की पत्नी के साथ ही घर के अन्य सदस्यों से गहनता से पूछताछ की. बच्चों से भी पुलिस ने जानकारी जुटाई. तबस्सुम ने बताया कि उस ने पति के वापस न आने पर उस ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच औफ आ रहा था. तब उस ने पति के दोस्त दानिश को फोन कर पति के बारे में पूछा था. दानिश ने पति यूसफ के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही थी. इस पर मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मृतक की पत्नी तबस्सुम के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच की. इस के अच्छे परिणाम शीघ्र ही सामने आ गए.

पुलिस ने गहनता से जांच कर इस हत्या की गुुत्थी सुलझा कर इस हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. जो सच्चाई सामने आई है, वो बेहद हैरान करने वाली थी. यूसुफ की दर्दनांक हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, उस ने सब को चौंका दिया. यूसुफ की पत्नी तबस्सुम ने अपने गांव में रहने वाले 28 वर्षीय प्रेमी दानिश के साथ मिल कर इस हत्या की साजिश रची थी. दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी होने पर जब यूसुफ ने इस का विरोध किया तो दोनों ने मिल कर अपने प्यार के रास्ते से हटाने की ठान ली.

पुलिस ने 3 अगस्त, 2025 को मृतक के पिता भूरे खां की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट  तबस्सुम, उस के प्रेमी दानिश व दानिश के  अज्ञात साथियों के खिलाफ दर्ज कर ली गई. कौल डिटेल्स में तबस्सुम और प्रेमी दानिश के बीच लंबेलंबे समय तक बातचीत के साक्ष्य मिले. इस के बाद तबस्सुम को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि यूसुफ को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. बेहोश होने के बाद पहले उस के हाथ पीछे बांधे गए. फिर धारदार हथियार से पेट पर वार किए गए. हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के शरीर पर तेजाब डाला गया.

जांच के बाद पुलिस ने 3 अगस्त को ही तबस्सुम को गिरफ्तार कर लिया. उस ने पूछताछ में सारा राज उगल दिया. प्रेम और वासना में अंधी हो कर तबस्सुम ने अपने पति से छुटकारा पाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की साजिश यूसुफ के दोस्त और अपने आशिक दानिश के साथ मिल कर रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस को 6 अगस्त, 2025 की शाम मुखबिर से सूचना मिली कि यूसूफ की हत्या का आरोपी दानिश जो कि यूसुफ का दोस्त भी है, रामपुर बंबा के निकट कहीं जाने की फिराक में है. सूचना मिलते ही पुलिस एलर्ट हो गई और बंबा के पास से दानिश को गिरफ्तार कर लिया.

दानिश को थाने ला कर उस से यूसुफ की हत्या के बारे में पूछताछ की गई. उस ने बताया कि गांव में उस का और यूसुफ का घर थोड़ी दूरी पर ही है. हम दोनों में दोस्ती थी. यूसुफ के घर आनाजाना रहता था. करीब 4 साल पहले एक दिन जब वह यूसुफ के घर गया था, उस की यूसुफ की पत्नी तबस्सुम से आंखें चार हो गईं. तबस्सुम बला की खूबसूरत थी. दानिश भी कसे शरीर का सुंदर युवक था. पहली ही मुलाकात में दोनों ने आंखों ही आखों में एकदूसरे के दिल पर मोहब्बत की दस्तक दे दी थी.

अब दानिश अकसर यूसुफ के घर आ जाता था. वह बच्चों के लिए कोई न कोई गिफ्ट या उन के पसंद की खानेपीने की चीजें ले कर आता. इस बीच दानिश ने यूसुफ की गैरमौजूदगी में तबस्सुम से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. यूसुफ के काम पर जाने के बाद दोनों प्रेमी प्रेमिका फोन पर घंटों बातें करते थे. पति यूसुफ के मंडी जाने के बाद वह बाजार जाने के बहाने घर से निकल जाती और अपने प्रेमी दानिश से मिलती. इस बीच दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते भी बन गए थे. जब भी तबस्सुम को मौका मिलता वह दानिश से मिल आती. तबस्सुम के खयालों में हरदम अपने प्रेमी दानिश की तसवीर रहती थी. वह चाहती थी कि उस का दीवाना हर पल उस की आंखों के सामने ही रहे.

पत्नी के बदलते व्यवहार पर यूसुफ को शक हुआ. फिर उसे दोस्त दानिश और पत्नी तबस्सुम के प्रेम प्रसंग की भनक लगी तो उस ने तबस्सुम का विरोध किया. दानिश को ले कर आए दिन उन के घर में कलह भी होने लगी. पूछताछ में पत्नी तबस्सुम ने पुलिस को बताया, वह अपने प्रेमी दानिश के साथ जाना चाहती थी. पति यूसुुफ इस का विरोध करता था. वह दानिश से बात करने और घर पर उस के सामने आने को मना करता था. पति यूसुफ मंडी के काम से इतना कमा नहीं पाता था, जिस से घर में तंगी बनी रहती थी. जबकि दानिश उस पर खूब खर्च करता था और उस की हर बात का खयाल रखता था.

योजना के अनुसार 29 जुलाई, 2025 को उस ने यूसुफ के खाने में नींद की गोलियां पीस कर मिला दी थीं. ये गोलियां दानिश ने ला कर दी थीं. इस के साथ ही पति के घर से गल्ला मंडी के लिए निकलते ही दानिश को फोन कर दिया था. बताते चलें कि भट्ठे पर जब यूसुफ ने टिफिन से खाना खाया तो नींद की गोलियों की मात्रा खाने में अधिक मिली होने से वह खाना खाने के कुछ समय बाद ही बेहोश हो गया. इस का फायदा उठाते हुए दानिश ने उस की नृशंस तरीके से हत्या कर दी. भूरे खां ने बताया कि बेटे यूसुफ की 7 साल पहले मडराक निवासी तबस्सुम से शादी हुई थी. यूसुफ के 6 साल और 4 साल के 2 बेटे हैं.

सब कुछ ठीक चल रहा था. 4 साल पहले जब से दानिश से यूसुफ की दोस्ती हुई तब से तबस्सुम फोन पर दानिश से बात किया करती थी. इस का यूसुफ विरोध किया करता था. इसी के चलते तबस्सुम ने दानिश के साथ मिल कर यूसुफ की बेहरमी से हत्या कर दी. उस ने अपने छोटे बेटों की भी चिंता नहीं की. थानाप्रभारी राजेश कुमार के अनुसार, जहां तबस्सुम और दानिश के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकाली गई, वहीं घटना में सीसीटीवी फुटेज की भी मदद ली गई.

घटना वाले दिन दानिश अपनी सफेद स्कूटी पर यूसुफ को बैठा कर अपने साथ ले जाता हुआ नजर आया. सभी सबूत एकत्रित कर घटना का परदाफाश किया गया है. आरोपी दानिश की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरा भी बरामद कर लिया गया है. सीओ (छर्रा) धनजंय सिंह के अनुसार, प्रेमिका ने ही प्रेमी के साथ मिल कर घटना का अंजाम दिया. दोनों जेल भेज दिए गए हैं. मृतक का चेहरा भी जलाया गया था. शिनाख्त कपड़ों व चप्पल से हुई. शव 4-5 दिन पुराना भी लग रहा था. अवैध संबंधों के चलते यूसुफ की हत्या की गई है.

पुलिस को इस मामले का परदाफाश करने में ज्यादा टाइम नहीं लगा. पत्नी को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. लेकिन उस की बात पूरी तरह पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. तब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स जांची तो पड़ोस में रहने वाला दानिश पुलिस के रडार पर आया. लव अफेयर के चलते पत्नी ने प्रेमी के साथ साजिश रच कर अपने ही जीवनसाथी को मार डाला. अब पत्नी तबस्सुम और प्रेमी दानिश अपने किए का फल भोगेंगे. Aligarh News

 

 

Bihar News: ट्यूटर के प्यार में लिपटी अस्मिता

Bihar News: समस्तीपुर (बिहार) की रहने वाली अस्मिता शराबी पति सोनू झा के जुल्मोसितम से ऊब चुकी थी. इसी बीच बेटे के ट्यूशन टीचर हरिओम को वह दिल दे बैठी. इन दोनों के प्यार ने एक ऐसे अपराध को जन्म दिया कि…

अपनी प्रेमिका अस्मिता झा को उस के पति सोनू झा द्वारा प्रताडि़त करने की बात सुन कर हरिओम का गुस्से में खून खौल गया. वह प्रेमिका को भरोसा देते हुए बोला, ”ठीक है भाभीजी, अब आप परेशान मत हो. मैं जल्दी ही इस का कुछ हल सोचता हूं. अगर तुम्हारे दिमाग में कोई आइडिया हो तो बताओ.’’

”अभी तो कोई आइडिया नहीं आ रहा, लेकिन तुम इस जालिम पति से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाओ, तभी हम आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं.’’ अस्मिता बोली.

”भाभीजी, आप चिंता न करो. अब यह काम मेरा है, बहुत जल्दी आप को उस से छुटकारा मिल जाएगा.’’ यह तसल्ली देने के बाद हरिओम अगले दिन आने को कह कर चला गया. लेकिन उस दिन अस्मिता के दिल में कुछ आस जरूर जागी थी. 25 जुलाई, 2025 की शाम को अस्मिता ने हरिओम को फोन पर बताया कि सोनू आज अभी थोड़ी देर पहले ही आटो ले कर घर से निकला है. वह रात देर से ही घर पहुंचेगा. वह तुरंत आ कर उस से मिले. इस जानकारी के मिलते ही हरिओम पागलों की तरह बिना देर लगाए अस्मिता के घर पर जा पहुंचा. उस वक्त अस्मिता का बेटा सो चुका था.

सोनू के घर के दरवाजे के पास ही एक छोटा सा कमरा बना हुआ था, जिस में उस के पापा टुनटुन झा अकेले ही सोते थे. उसी कमरे के पास एक ग्रिल लगा हुआ था, जिस पर रात में ताला लगाया जाता था. उस ताले की एक चाबी सोनू और दूसरी अस्मिता के पास होती थी. सोनू जब कभी भी आता तो वह उस ताले को खोल कर घर में चला जाता था. 25 जुलाई, 2025 को जब सोनू देर से निकला तो अस्मिता को उम्मीद थी कि वह सुबह तक ही घर वापस आ पाएगा, इसी कारण उस ने उस दिन उस ग्रिल में ताला ही नहीं लगाया. ताकि हरिओम बिना किसी आहट के घर में आ सके.

सोनू के घर से निकलते ही अस्मिता ने प्रेमी हरिओम को फोन कर सारी जानकारी दे दी, जिस के तुरंत बाद ही हरिओम दबेपांव उस के घर में प्रवेश कर गया. घर में अस्मिता को अकेला पा कर हरिओम जवानी के जोश में अपने होश खो बैठा था. अस्मिता को घर में अकेला पाते ही वह उस के साथ संबंध बनाने के लिए आतुर हो उठा, लेकिन इत्तफाक रहा कि सोनू को किसी काम से रास्ते से ही घर आना पड़ा. लेकिन घर में आते ही उस ने जो देखा, वह उस की कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था.

उस वक्त उस की पत्नी अस्मिता हरिओम के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी. पत्नी और हरिओम को ऐसी हालत में देखते ही सोनू अपना आपा खो बैठा. अस्मिता के पास पहुंचते ही सोनू ने उस के बाल पकड़ते हुए कहा, ”रंडी, मुझे तुझ से ऐसी उम्मीद नहीं थी. कुतिया अपने मर्द को तो पूरी तरह से संतुष्ट कर नहीं पाती, दूसरों के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है.’’

इतना कहते ही सोनू ने अस्मिता को बुरी तरह से पीटना शुरू कर दिया था. सोनू को घर आया देखकर पहले तो हरिओम ने घर से भागने की कोशिश की, लेकिन फिर उस ने अस्मिता को सोनू से बचाने की हिम्मत जुटाई. हरिओम को अस्मिता के बचाव में आते देख सोनू ने उस के साथ भी मारपीट शुरू कर दी थी.

प्रेमी के सामने बनाने लगा संबंध

सोनू को गुस्से में देखते ही हरिओम ने उस कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया, ताकि घर में हो रहे शोरशराबे की बाहर तक आवाज तक न जा सके. तभी गुस्से से तिलमिलाए सोनू ने अस्मिता की चोटी पकड़ कर उसे फर्श पर दे पटका. वह उस के प्रेमी के सामने ही उस से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा. अस्मिता उस का विरोध कर रही थी. फिर वह हैवान बन कर पत्नी के कपड़ों को फाडऩे लगा. देखते ही देखते वह पत्नी के सीने पर चढ़ बैठा. अचानक अस्मिता की चीखपुकार निकली. उस ने प्रेमी हरिओम को ललकारते हुए कहा, ”हरिओम, देख क्या रहे हो, कर दो इस का काम तमाम. इस से अच्छा मौका और कब मिलेगा.’’

अस्मिता को खतरे में देख कर हरिओम को पारा हाई हो गया. उस ने इधरउधर नजर दौड़ाई तो सामने एक केतली रखी नजर आई. उस ने केतली उठाई और फिर उसी केतली से सोनू के सिर पर लगातार कई वार कर डाले. पीछे से सिर पर केतली के बार होते ही सोनू अपना सिर पकड़े नीचे गिर गया. तभी फर्श पर पड़ी अस्मिता भी उठ गई. वह फुरती से घर में रखी लाठी और डंडा ले आई. उस के बाद दोनों ने लाठी और डंडों से पीटपीट कर सोनू को बुरी तरह से अधमरा कर दिया. जब सोनू बेहोशी की हालत में पहुंच गया तो हरिओम ने घर में रखे बिजली के तार से सोनू का गला भी घोंट दिया. बाद में उस की मौत को कंफर्म करने के लिए हरिओम ने सोनू के शरीर पर बिजली का करेंट भी लगाया, ताकि उस की मौत को बिजली का करंट लगने से मौत दिखाया जा सके.

सोनू की हत्या करने के बाद अस्मिता ने अपने कपड़े चेंज किए और फिर हरिओम की जिद के आगे उस के साथ संबंध भी बनाए. इस के बाद हरिओम वहां से चला गया.सोनू को मौत की नींद सुलाने के बाद अस्मिता और हरिओम पूरी तरह से बेफिक्र हो गए थे. उस की हत्या का शक किसी भी तरह से उन के ऊपर नही आने वाला. अगले दिल जैसे ही भोर हुआ, अस्मिता ने रोनाचिल्लाना शुरू कर दिया. उस ने रोते हुए ही लोगों को बताया कि सोनू को बिजली का करंट लग गया, जिस के कारण उस की मौत हो गई. सोनू की मौत की खबर पाकर उस के पापा टुनटुन झा मौके पर पहुंचे.

उन्होंने कमरे के अंदर जा कर देखा तो उन्हें तो मामला कुछ और ही नजर आया. सोनू का बिस्तर भी खून से सना था, साथ ही उस के बिस्तर के पास दीवार पर खून के छींटे भी लगे हुए थे. उस कमरे के फर्श पर भी खून लगा हुआ था. उस की आंखें भी सूजी हुई थीं. यह सब देख कर टुनटुन झा का माथा ठनक गया. उन्हें लगा कि उस की मौत बिजली के करंट से नहीं, बल्कि बुरी तरह से मारपीट कर उस की हत्या की गई है. देखते ही देखते यह चर्चा मोहल्ले में फैल गई. लोग तरहतरह की बातें बनाने लगे थे. तभी गांव वालों ने सोनू की हत्या की सूचना मुफ्फसिल थाने में दी.

इस घटना की जानकारी मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची. घटना स्थल पर पहुंचते ही एसएचओ अजीत प्रसाद सिंह ने मामले की जांचपड़ताल की तो पता चला कि मृतक सोनू झा की मौत बिजली के करंट से नहीं, बल्कि उस को बुरी तरह से पीटपीट कर मारा गया था. घटनास्थल से पुलिस ने एक 10 मीटर लंबा बिजली का तार भी बरामद किया था, जिस से बिजली का करंट लगाने की आशंका थी. मृतक के सिर पर गहरे चोट के निशान थे.

ससुर ने बताई बहू की सच्चाई

इस जानकारी के बाद एएसपी संजय कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. जिन्होंने घटनास्थल पर पहुंचते ही मृतक के फेमिली वालों से पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में मृतक के पापा टुनटुन झा ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि सोनू देर रात घर पहुंचा था. लेकिन अगली सुबह वह मृत हालत में घर में पाया गया. टुनटुन झा ने बताया कि सोनू के घर पर हरिओम का आना जाना था. कोई लगभग 6 महीने पहले सोनू ने हरिओम को अपनी पत्नी अस्मिता के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया था. तब से सोनू और उस की पत्नी के बीच मनमुटाव रहने लगा था, लेकिन हरिओम अभी भी उस के बेटे को ट्यूशन पढ़ाने आता था. हरिओम और अस्मिता के बीच लव अफेयर के कारण ही उस की हत्या की गई थी.

इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर सोनू की लाश को पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेज दिया. इस मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया था.   हालांकि अस्मिता और हरिओम ने इस घटना को दुर्घटना का रूप देने की काफी कोशिश की थी, लेकिन पुलिस के सामने उन की एक भी चाल सफल न हो सकी. सोनू के फेमिली वालों द्वारा दोनों पर शक जाहिर होते ही पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स भी निकलवाई, जिस से जानकारी मिली कि हर रोज अस्मिता और हरिओम के बीच काफी लंबी बातचीत होती थी. फिर सोनू के कमरे से मिले हत्या के साक्ष्य उस की हत्या करने की पूरी गबाही दे रहे थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी साफ हो गया था कि अस्मिता और हरिओम ने हत्या करने से पहले उसे बुरी तरह से मारापीटा था. उस के शरीर पर चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. उस की एक आंख के पास चोट का गहरा निशान और उस का एक हाथ भी टूटा हुआ पाया गया था. उस का दम घोंटते समय उस के मुंह और नाक से भी काफी खून निकला था.   अस्मिता को गिरफ्तार कर पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था. पुलिस पूछताछ में अस्मिता ने पति की हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

ट्यूटर से ऐसे मिले नैना

 

बिहार के समस्तीपुर जिले के थाना मुफ्फसिल के अंतर्गत एक गांव है लगुनियां रघुकंठ. इसी गांव में रहता था, टुनटुन झा का परिवार. टूनटून झा के 4 बेटे थे. साल 2017 में सोनू की शादी अस्मिता के साथ हुई थी. सोनू की शादी के बाद से दोनों भाई अलगअलग रहने लगे थे. सोनू झा ने अपना एक आटोरिक्शा ले रखा था, जिसे चला कर वह अपने परिवार की गुजरबसर करता था. सोनू में शराब पीने की लत थी, जिस के कारण आए दिन अस्मिता और उस के बीच लड़ाईझगड़ा होता रहता था.

शादी के बाद अस्मिता 2 बच्चों की मां बनी, जिस में उस की बेटी बड़ी और बेटा छोटा था. दोनों ही बच्चे स्कूल जाते थे. बच्चे होने के बाद अस्मिता को उम्मीद थी कि सोनू शराब पीना छोड़ देगा, लेकिन उस ने शराब पीनी नहीं छोड़ी, जिस के कारण पति और पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया. उसी विवाद के चलते अस्मिता कई बार सोनू से रूठ कर अपने मायके चली जाती थी. इन दोनों के रिश्तों को बनाए रखने के लिए कई बार सोनू की ससुराल में पंचायत भी हुई. कई बार पंचायत के फैसले पर अस्मिता अपनी ससुराल भी आई, लेकिन उस के बाद भी दोनों के बीच लड़ाईझगड़ा शांत नहीं हुआ.

उसी दौरान अस्मिता की मुलाकात कुंवारे हरिओम से हुई. हरिओम उस के दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर पर ही आता था. जिस वक्त हरिओम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था, उस वक्त घर पर उस की फेमिली का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं होता था. मौके का फायदा उठाते हुए अस्मिता ने हरिओम के साथ दोस्ती कर ली. दोस्ती के बाद दोनों के बीच मधुर संबंध बनते ही अबैध संबंध भी स्थापित हो गए थे. हरिओम और अस्मिता के बीच प्यार पनपा तो वह पति को कम चाहने लगी थी. अस्मिता झा को लगने लगा था कि हरिओम भी उसे बहुत ही चाहता है. अस्मिता ने उसी दिन फैसला लिया कि वह किसी भी तरह से हरिओम से अपने संबंध मजबूत करेगी.

हरिओम और अस्मिता को मिलनेजुलने में न तो कोई पाबंदी थी और न ही कोई रोकटोक. हरिओम के फेमिली वालों के साथसाथ गांव वाले भी जानते थे कि वह हर रोज सोनू के लड़के को ट्यूशन पढ़ाने के लिए उस के घर जाता है. इसी कारण कोई भी उन दोनों पर कोई शक नहीं करता था. दोनों के बीच प्यार की शुरुआत होते ही उन के बीच की दूरियां सिमटने लगी थीं. सोनू झा सुबह होते ही अपना आटोरिक्शा ले कर घर से निकल जाता. लेकिन घर आने का उस का कोई टाइम फिक्स नहीं था, जिस का लाभ उठाते ही अस्मिता हरिओम को फोन कर कभी भी बुला लेती थी.

बच्चों को बनाना चाहता था काबिल

गांव हो या शहर, यह प्यार करने की बीमारी सभी जगह पनप रही है. लेकिन उसे समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक छिपाया नहीं जा सकता. यही हरिओम और अस्मिता की लव स्टोरी में भी हुआ. हरिओम कुंवारा था, जबकि उस की पे्रमिका शादीशुदा. देखते ही देखते दोनों ही लोगों की नजरों में आ चुके थे. फिर जल्दी ही दोनों की प्रेम कहानी सोनू झा के पास भी जा पहुंची थी.

सोनू झा एक शराबी किस्म का युवक था. जैसे ही यह बात उसे पता लगी, उस का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उस ने घर पहुंचते ही अस्मिता को खरीखोटी सुनाते हुए उस के साथ मारपीट भी की. अगले दिन हरिओम बेटे को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर पहुंचा तो उसे भी काफी भलाबुरा कहा. साथ ही उस ने बेटे का ट्यूशन भी बंद कर दिया था. उस के बाद हरिओम का अस्मिता से मिलनाजुलना पूरी तरह से बंद हो गया था, जिस के बाद हरिओम और अस्मिता एक दूसरे के वियोग में तड़पने लगे.

ऐसे आगे बढ़ी लव स्टोरी

अस्मिता सोनू के व्यवहार से भलीभांति परिचित थी. शराब के नशे वह भले ही हैवान बन बैठता था. लेकिन जैसे ही उस का नशा उतरता, वह फिर से उसे प्यार जताने लगता था. सोनू ने हरिओम के अपने घर आने पर पावंदी लगा दी थी, लेकिन हरिओम अभी भी सोनू के बड़े भाई के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था. तब सोनू को लगा कि उस के बेटे की पढ़ाई खराब हो रही है. यही बात सोच कर एक दिन अस्मिता ने सोनू को समझाने की कोशिश की, ”देखो जी, गांव वाले हमारी खुशी देख कर जलने लगे हैं, इसीलिए वह मुझ पर मास्टर साहब को ले कर कीचड़ उछालने लगे हैं. जबकि यह तो मैं ही जानती हूं कि हरिओम और मेरे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है.

अगर हम ने बेटे का ट्यूशन हटाया तो वह पढ़ाई में बहुत कमजोर हो जाएगा. फिर हम तो कहीं के भी नही रहेंगे. मेरा तो आप को समझाने का काम था, बाकी आप की मरजी.’’

अस्मिता की बात सोनू के दिल में उतर गई. वह तो गांव वालों से पहले ही परेशान था, लेकिन उस ने बेटे के जन्म के बाद ही तय कर लिया था कि वह अपने बेटे को अपनी छाया से बहुत ही दूर रखेगा. वह दिनरात मेहनत कर के उसे उच्च शिक्षा दिलाने के बाद बड़ा आदमी बनाएगा. यही सोच कर उस ने फिर से हरिओम को राहुल को ट्यूशन पढ़ाने की इजाजत दे दी थी, जिस के बाद फिर से हरिओम और अस्मिता की लव स्टोरी चोरीछिपे आगे बढऩे लगी थी. हरिओम पहले की तरह फिर से सोनू के बेटे को उस के घर ट्यूशन पढ़ाने जाने लगा था, जिस के बाद फिर से अस्मिता और हरिओम के बीच अवैध संबधों का सिलसिला चालू हो गया.

हालांकि दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि दोनों के बीच यह पक रही खिचड़ी ज्यादा दिनों तक नहीं पक सकती. क्योंकि सोनू हर रोज देर रात शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर लौटता तो किसी भी बात पर अस्मिता से लडऩेझगडऩे लगता था. इस घटना से लगभग 6 महीने पहले एक दिन सोनू ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया, जिस के बाद सोनू ने अस्मिता को काफी मारापीटा भी. उस के बाद से सोनू ने अपने बेटे का ट्यूशन भी बंद कर दिया था, लेकिन घर की इज्जत की खातिर सोनू ने इस की कंपलेन थाने में नहीं की थी. इस छोटी सी भूल ने अस्मिता के हौसले बुलंद कर दिए थे. अस्मिता को लगा कि सोनू हरिओम से डरता है. इसी कारण उसने पुलिस से उन की शिकायत नहीं की.

यही कारण रहा कि हरिओम और अस्मिता के बीच फिर से मौजमस्ती का सिलसिला चालू हो गया, लेकिन यह बात जल्दी ही किसी तरह से सोनू के पास पहुंच गई. इस जानकारी के मिलते ही उसने फिर से पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी. सोनू के जुल्मों से तंग आ कर कर अस्मिता एक दिन अपने दोनों बच्चों को ले कर अपने मायके घटहो चली गई. फिर वह दोनों बच्चों को मायके में ही छोड़कर सोनू के साथ ससुराल आ गई.

घर पर बच्चों के न होने के कारण अस्मिता बिलकुल ही फ्री हो गई थी. वह हर रोज मौका पाते ही अपने प्रेमी हरिओम को अपने घर बुलाती और सारी रात उस के साथ मौजमस्ती करती थी. लेकिन सोनू झा के दिमाग में यह बात बैठ गई थी कि अस्मिता का हरिओम के साथ अभी भी चक्कर चल रहा है, इसलिए वह छोटीछोटी बातों को ले कर पत्नी से झगड़ता और बात बढऩे पर उस की पिटाई तक कर देता था.

एक गुनाह प्रेमिका की खातिर

एक दिन अस्मिता शायद घर के कामकाज में बिजी थी. उस का बेटा घर के आंगन में अकेला ही खेल रहा था. हालांकि अस्मिता ने हरिओम को घर में प्रवेश करते वक्त देख लिया था, लेकिन उस दिन पहली बार ऐसा हुआ कि अस्मिता हरिओम को देखते ही कमरे के अंदर चली गई थी. कमरे के अंदर से ही उस ने बेटे को आवाज लगाई थी, ”बेटा, मास्टर साहब आ गए. कमरे में जाकर ट्यूशन पढ़ लो.’’

थोड़ी देर में ही बेटा अपना बस्ता थामे बैठक में चला गया था. जहां पर बैठा हरिओम उस का इंतजार कर रहा था. बेटे के आते ही हरिओम ने उस की स्कूल की कौपी निकाल कर चैक की. उस दिन बेटे को काफी होमवर्क मिला था. हरिहोम ने सब से पहले उस का होमवर्क कराया, लेकिन उस वक्त भी उस का दिमाग अस्मिता में ही लगा हुआ था. डस दिन हरिओम को अस्मिता का व्यवहार कुछ बदला नजर आया तो उस के मन में उथलपुथल मचने लगी. एक रात ही राम में अस्मिता को क्या हो गया था, जो उस के घर आते ही कई बार बैठक में चक्कर लगाती थी, लेकिन आज वह एक बार भी उस के पास नहीं आई.

हरिओम अभी उस के बारे में सोच ही रहा था. तभी अस्मिता चाय ले कर बैठक में पहुंच गई. उस के आते ही सब से पहले हरिओम की नजर उस के चेहरे पर पड़ी. उस के चेहरे का एक हिस्सा सूझा हुआ दिख रहा था, जिस को अस्मिता बारबार ढंकने की कोशिश कर रही थी.

आंसुओं ने बयां की दास्तां

अस्मिता के चेहरे को देखते ही हरिओम को समझने में तनिक भी देर नही लगी कि जरूर अस्मिता के साथ कोई अनहोनी घट चुकी है, जिस के कारण वह अपने चेहरे को बारबार छिपाने की कोशिश कर रही है. इस से पहले कि अस्मिता वहां से जा पाती, हरिओम ने उस से पूछ ही लिया.’’ भाभीजी, यह आप के चेहरे पर क्या हुआ? कल तक तो आप ठीकठाक थीं. फिर यह अचानक क्या हुआ?’’

हरिओम के इस प्रश्न ने जैसे अस्मिता के जख्म को और भी कुरेद डाला था. देखते ही देखते अस्मिता की आंखें आंसुओं से सराबोर हो चुकी थीं. फिर भी उस ने जैसेतैसे कर अपने को संभाला और अपनी चुन्नी के पल्लू से अपने आंसुओं को पोंछने की कोशिश करते हुए बोली, ”नहींनहीं, कुछ भी तो नहीं. रात अचानक मेरा पैर फिसल गया और मेरे चेहरे पर चोट लग गई.’’

अस्मिता ने हरिओम के सामने अपने दर्द को छिपाने की कोशिश की, लेकिन हरिओम का दिल उस की इस बात को मानने को तनिक भी तैयार न था. उस के बाद हरिओम उस की सच्चाई जानने के लिए उस के पीछे ही पड़ गया, ”भाभीजी, अगर आप चलतेचलते ही गिरी हैं तो आप को कोई और भी चोट लगी होगी. भाभीजी, आप जरूर सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही हैं.’’

जब हरिओम अस्मिता की सच्चाई जानने के लिए हाथ धो कर उस के पीछे पड़ गया तो उस ने अपनी चुप्पी तोड़ दी. उस ने कहा, ”क्या बताऊं हरिओम,मेरी तो किस्मत ही फूट गई. मेरा इस शराबी इंसान ने जीना हराम कर रखा है. हर रोज शाम को शराब पी कर आता है, फिर रात में वह मेरे साथ गालीगलौज करते हुए मारपीट भी करता है. मैं उसे कहां तक झेलूं.

”हर रोज की तरह कल शाम भी मेरा पति सोनू दारू पी कर आया था. उस के बाद उस ने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी थी, जिस के कारण मेरे चेहरे पर भी चोट लग गई थी.’’ अपना दर्द सुनातेसुनाते अस्मिता फफकफफक कर रोने लगी थी. हरिओम अस्मिता को दिल से प्यार करने लगा था. जब अस्मिता ने उसे अपनी दुख भरी कहानी सुनाई तो उस के तनबदन में आग लग गई, लेकिन यह मामला मियांबीवी का था. इस में हरिओम कर भी क्या सकता था. उस के बाद भी उस ने किसी तरह से अस्मिता को समझा बुझा कर शांत कर दिया था, लेकिन उस दिन के बाद से उस के दिल में सोनू के प्रति नफरत पैदा हो गई थी.

उसी दौरान हर दिन की तरह हरिओम ट्यूशन पढ़ाने सोनू के घर पहुंचा. उस दिन सोनू के बेटे की तबियत कुछ ठीक नहीं थी. अस्मिता झा ने हरिओम के आने से पहले ही उसे दवा दे कर सुला दिया था. जैसे ही हरिओम ट्यूशन पढ़ाने के लिए अस्मिता के घर पहुंचा, वह उसे देखते ही फूटफूट कर रोने लगी, ”हरिओम, अब पानी सिर के उपर से गुजरने लगा है. सोनू ने रात भी बिना वजह मेरे साथ मारपीट की. अगर तुम मुझे सच्चा प्यार करते हो तो तुम ही मुझे किसी तरह से इस जंजाल से निकालो. कुछ ऐसा करो कि मैं उस की रोजरोज की मार से निजात पा सकूं. वरना मुझे एक दिन जहर खा कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने पर मजबूर होना पड़ेगा.’’

”नहींनहीं, भाभी यह आप क्या कह रही हो. ऐसा आप कभी सपने में भी नहीं सोचना. आप ने ऐसा कर लिया तो फिर मेरा क्या होगा. मैं आप के बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता. आप तो मुझे केवल आदेश करो. यह बंदा आप के लिए क्या कर सकता है. आप के लिए मेरी जान भी हाजिर है.’’ कहतेकहते हरिओम ने अस्मिता को अपने गले लगा लिया.

”हरिओम, तुम सही कह रहे हो. तुम्हारे बिना मैं भी एक पल के लिए जिंदा नहीं रह सकती. तुम्हारे साथ मुझे जो जिंदगी का सच्चा सुख प्राप्त होता है, वह सोनू न तो आज तक दे पाया और न ही दे सकता है. अब तो यह दिल भी केवल तुम्हारे लिए ही धड़कता है.’’ कहते हुए अस्मिता की आंखें आंसुओं से सराबोर हो गईं.

इस के बाद दोनों ने तय कर लिया कि सोनू को ठिकाने लगाए बगैर अब सुकून से नहीं जिया जा सकता. जल्द ही अब कुछ करना पड़ेगा. इस से पहले कि वह योजना बना कर उसे ठिकाने लगाते 25 जुलाई, 2025 को ऐसे हालात बन गए और मौका भी मिल गया, जिस से उन्होंने सोनू की हत्या कर दी. फिर उसे बिजली के करंट से दुर्घटना दिखाने की कोशिश की, लेकिन कमरे में मिले सबूतों और सोनू झा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन्हें कानून के शिकंजे में फांस लिया.

इस घटना में उस के प्रेमी हरिओम को भी काफी चोटें आई थीं. बाद में उस ने किसी अस्पताल में जा कर अपना इलाज कराया था. पुलिस ने अस्मिता झा और हरिओम की निशानदेही पर सोनू झा की हत्या में प्रयुक्त केतली और लाठीडंडे भी बरामद कर लिए थे. केस के खुलते ही पुलिस ने अस्मिता झा और हरिओम दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. Bihar News

 

 

Illicit Relationship: मामी से मोहब्बत

Illicit Relationship: लखनऊ के रेल कर्मचारी की हत्या का कारण उस का शराबी होना, गुस्सैल बने रहना या चालचलन था या फिर मामीभांजे के बीच नाजायज रिश्ते की नादानी. इन सब के अलावा एक सच्चाई यह भी थी कि मंजू अपने पति की बुरी आदतों से इतनी परेशान रहती थी कि…

मई, 2025 के अंतिम सप्ताह में मंजू की रिश्तेदारी में शादी थी. उस के सासससुर 24 मई, 2025 की रात को उसी शादी के लिए गए थे. पति ड्यूटी पर था. मंजू घर पर अकेली थी. शाम का वक्त था. इसी बीच एक कौल आ गई. स्क्रीन पर प्रेमी का नाम पढ़ कर उस के होंठों पर मुसकान बिखर गई. उस ने तुरंत कौल रिसीव कर ली. कौल उस के प्रेमी आकाश वर्मा की थी, जो रिश्ते में उस का भांजा लगता था.

”हैलो! मैं कब से तुम्हारे फोन का इंतजार कर रही हूं. तुम उस का काम तमाम कर दो, बहुत दिन हो गए,’’ मंजू शिकायती लहजे में उस से बोली.

”मैं ने फोन किया न! …मुझे तुम से अधिक बेचैनी है…मैं चाहता हूं कि जितना जल्द हो, काम निपटा लिया जाए. मुझे तुम्हारे पति सिद्धि प्रसाद का काम तमाम हर हालत में करना है.’’ आकाश बोला.

”अब यह बताओ कि तुम कितनी देर में आ रहे हो?’’ मंजू का सीधा सवाल था.

”पहले यह बताओ कि घर का क्या हाल है?’’ उस ने सवाल का जवाब सवाल से ही किया.

”अकेली हूं. सभी लोग रिश्तेदार की शादी में गए हैं. तुम्हारा मामा ड्यूटी पर है… आधी रात को आएगा.’’ मंजू बोली.

”चलो ठीक है, मैं आ जाऊंगा, तुम दरवाजा खुला रखना,’’ कह कर आकाश ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

रात गहराई. आकाश अपने दोस्त के साथ पूरी तैयारी के साथ प्रेमिका मंजू के घर आ गया. चुपके से घर में घुसने का इंतजाम मंजू पहले से ही कर चुकी थी. मंजू अपने कमरे में पति सिद्धि प्रसाद लोधी के साथ लेटी हुई थी, जबकि वह गहरी नींद में था. मंजू के घर में आने पर आकाश ने उस के इशारे पर अपने दोस्त के साथ कमरे में रखी प्लास्टिक की रस्सी से एक फंदा बना लिया. मंजू की मदद से फंदा गहरी नींद में सो रहे सिद्धि के गले में डाल दिया. दोनों ने मिल कर उस फंदे को कस दिया. थोड़ी देर सिद्धि प्रसाद छटपटाया, फिर शांत हो गया.

कुछ देर के बाद जब सिद्धि प्रसाद मरणासन्न हालत में पहुंच गया. वह जिंदा न बच जाए, इसलिए आकाश ने अपने दोस्त संजय के साथ उस के सिर पर हथौड़े से हमला कर दिया. उस वार से सिद्धि रक्तरंजित हो गया. लोहे के पाइप से भी उस के सिर पर कई हमले करने के बाद जब उस की मौत हो गई, तब आकाश ने अपने दोस्त की मदद से रात के अंधेरे में घर के पीछे एक तालाब के निकट सूखे गड्ïढे में उस की लाश फेंक दी. वह गड्ïढा झाडिय़ों की ओट में था. सिद्धि प्रसाद का मोबाइल, खून सने कपड़े भी वहीं झाडिय़ों में फेंक दिए.

25 मई, 2025 की सुबह लखनऊ-कानपुर रोड पर थाना बंथरा के एसएचओ राजेश कुमार सिंह को उसी थाने की पुलिस चौकी हरौनी के इंचार्ज एसआई अर्जुन राजपूत ने कौल कर बताया कि बीती रात सिद्धि प्रसाद लोधी नामक एक रेलकर्मी की हत्या हो गई है. उस की लाश उस के घर के ठीक पीछे तालाब के पास गड्ढे में पड़ी है. सिद्धि प्रसाद लोधी का घर दरियापुर मझरा गढ़ी चुनौटी में है. उस की लाश मिलने की सूचना पर चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार एसआई श्यामजी मिश्रा, कांस्टेबल देवेंद्र कुमार के अलावा एसएचओ भी घटनास्थल पर पहुंच गए. साथ ही इस की सूचना कृष्णा नगर के एसीपी विकास पांडेय को भी दे दी गई.

घटनास्थल पर उन के साथ एडिशनल डीसीपी अमित कुमावत भी घटनास्थल पर पहुंच गए. दोनों अधिकारियों ने सघन जांच के आदेश दिए. घटनास्थल पर मृतक की पत्नी मंजू देवी भी मौजूद थी. उसी ने अपने पति की हत्या की सूचना पुलिस को दी थी. मंजू रोरो कर पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताया, ”साहब, सुबह 6 बजे के करीब जब मैं सो कर उठी, तब पाया कि पति कमरे में नहीं हैं. इन्हें ढूंढते हुए मकान के बाहर निकल गई. घर के पीछे लगभग 50 मीटर दूर तालाब के पास झाडिय़ों में मुझे पति के कपड़े दिखाई दिए. पैंट और शर्ट वही थे, जो उन्होंने रात में पहने थे. पास ही पति औंधे मुंह पड़े थे.

”पास जा कर देखा तो देखते ही मेरे होश उड़ गए. मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई हो. पति के सिर पर गहरी चोट थी. काफी खून बह चुका था. वह एकदम से बेजान से थे. पति को इस हालत में देख कर ऐसा लगा, जैसे मेरी दुनिया ही उजड़ गई.’’

घटनास्थल पर नहीं मिली खून की एक भी बूंद

पुलिस ने मंजू से प्रारंभिक पूछताछ के बाद शव की जांचपड़ताल की. एसएचओ के साथ आई पुलिस टीम ने उस की चप्पल, मोबाइल, शर्ट और पैंट पास से ही बरामद कर ली. जांच में घटनास्थल पर खून की एक बूंद भी नहीं थी, जबकि मृतक के सिर से काफी खून बह चुका था. इस से पुलिस ने सहज अनुमान लगा लिया कि इस की हत्या किसी दूसरी जगह पर करने के बाद हत्यारों ने लाश यहां ला कर फेंकी है. उन्होंने अनुमान लगाया कि हत्या करने वाले 2-3 लोग हो सकते हैं. शव की हालत देख कर पुलिस ने रात 2 और 3 बजे हत्या होने का अनुमान लगाया.

शव को ध्यान से देखने पर उस के सिर से खून बहने और गले में किसी चीज से कसाव के निशान का पता चला. एसीपी विकास पांडेय के सामने बंथरा थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की औपचारिकताएं पूरी कीं. आगे की प्रक्रिया के लिए मृतक की पत्नी मंजू देवी को थाने बुलाया गया. उस की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ सिद्धि प्रसाद लोधी की हत्या का मुकदमा धारा-103 बीएनएस के तहत दर्ज कर लिया गया. मंजू देवी से जांच टीम की कांस्टेबल मनीषा रावत और सावित्री देवी ने पूछताछ की. साथ ही उस के घर जा कर भी तहकीकात की गई.

हरौनी के चौकीप्रभारी अर्जुन राजपूत, एसआई श्याम मिश्रा, अरविंद कुमार, संदीप सिंह और कांस्टेबल देवेंद्र के साथ देर रात तक ग्रामीणों से पूछताछ करते रहे. इस पूछताछ में हत्याकांड के संबंध में चौंकाने वाली बात सामने आई. पुलिस को विशेष सूत्रों से पता चला कि मंजू ने ही योजना बना कर अपने प्रेमी की मदद से पति की हत्या करवाई है. उस का प्रेमी आकाश वर्मा उर्फ लकी 25 साल का नवयुवक है और रिश्ते में उस के पति का भांजा है. वह जनपद लखनऊ के नरपतखेड़ा गांव का निवासी है. यह भी पता चला कि इस हत्याकांड में उस का दोस्त भी शामिल था.

आकाश वर्मा के संदिग्ध आरोपी होने की जानकारी मिलने पर पुलिस उसे घटना के एक हफ्ते बाद ही गिरफ्त में ले लिया. उसे बंथारा थाने लाया गया. खासकर उस के बारे में मंजू देवी को भनक तक नहीं लगने दी गई. पुलिस ने उस से सिद्धि प्रसाद की हत्या के बारे में कड़ाई से पूछताछ की. काफी समय तक आकाश वर्मा पुलिस को गुमराह करता रहा. सच उगलवाने के लिए आखिरकार पुलिस टीम ने उस पर थोड़ी सख्ती की. पुलिस के दबाव और पूछताछ के तरीके के आगे उस ने हार मान ली और सिद्धि प्रसाद की हत्या करने की बात कुबूल कर ली. उस ने यह भी बताया कि यह हत्या सिद्धि प्रसाद की पत्नी  मंजू देवी की शह पर की थी.

आकाश से पूछताछ पूरी होने के अगले दिन सुबहसुबह पुलिस मंजू देवी को थाने ले आई. जैसे ही उस की नजर थाने के हवालात में बंद आकाश वर्मा पर गई तो वह चौंक गई. उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया. महिला कांस्टेबल मनीषा रावत और सावित्री देवी उसे पकड़ कर एक कोने में ले गईं. जोरदार लहजे में उस से सवाल किया, ”सचसच बता, तूने ही अपने पति की हत्या की है न?’’

दूसरी सिपाही उस की आंखों के आगे बेंत घुमाने लगी. मंजू सिपाहियों के तेवर देख कर सहम गई. उस की जुबान खुल ही नहीं रही थी. वह एकदम से निस्तब्ध थी. तभी डंडे घुमाती सिपाही कड़कती हुई बोली, ”मंजू, तू सचसच सब कुछ बताती है या मुझे कोई दूसरा रास्ता अपनाना पड़ेगा..?’’

मंजू फिर भी कुछ नहीं बोली. दूसरी महिला सिपाही ने उस के ऊपर बेंत उठाया ही था कि मंजू बोल पड़ी, ”मुझे मारिए मत, मैं सारा सच बता दूंगी.’’

उस के बाद मंजू ने जो कहानी बताई, वह और भी चौंकाने वाली थी. उस की कहानी में पति की हत्या ही नहीं, बल्कि रिश्तों की मर्यादा को लांघने की भी बात थी. उस का प्रेमी रिश्ते में पति का भांजा था. इस नाते उस के साथ मांबेटा समान मामीभांजे का रिश्ता था. आकाश और मंजू देवी के बीच लव अफेयर के साथ हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

सिद्धि प्रसाद कैसे बना शराब का लती

उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के कानपुर रोड पर थाना बंथरा के अंतर्गत पुलिस चौकी हरौनी है. थाने से लगभग 12 किलोमीटर दूर बीहड़ जंगल का यह सुनसान इलाका भी है. यहीं दरियापुर गढ़ी चुनौटी नाम का गांव बसा हुआ है. सिद्धि प्रसाद लोधी अपनी फेमिली के साथ यहीं रहता था. सिद्धि प्रसाद की उम्र लगभग 40 वर्ष की हो चुकी थी. उस का विवाह मंजू देवी के साथ करीब 8 साल पहले हुआ था. मंजू खूबसूरत थी. सिद्धि प्रसाद मंजूू देवी को पा कर बहुत खुश था. वह उस की सुंदरता और यौवन का दीवाना बना हुआ था.

वह रेलवे विभाग में सम्पार (गेट कीपर) के पद पर नौकरी करता था. उसे अच्छी सैलरी मिलती थी. उस की संगत कुछ गलत लोगों के साथ थी, जिस से वह मांसाहारी होने के साथसाथ शराबी भी बन गया था. ड्यूटी पूरी करने के बाद वह जब थकामांदा लौट कर घर वापस आता था, तब अपनी थकान मिटाने के बहाने शराब पीता था. साथ में खूब मटन और चिकन उड़ाता था. उस के बाद बिस्तर पर जाते ही अपनी जिस्मानी भूख मिटाने के लिए मंजू को बांहों में दबोच लेता था. इस का वह जरा भी खयाल नहीं करता था कि पत्नी की इच्छा है भी या नहीं! कई बार वह उस की इच्छा के खिलाफ जिस्मानी भूख मिटाता था. ऐसा वह मंजू के साथ आए दिन करता था. उस की इस आदत से मंजू परेशान हो गई थी.

उस के 2 बच्चों में से एक की असामयिक मौत होने से एकमात्र बेटी ही बची थी. दूसरे बच्चे की चाहत में वह मंजू को अपनी हवस का शिकार बनाता था. जबकि मंजू पति के वहशी व्यवहार से तंग आ गई थी. उस से घृणा करने लगी थी. सिद्धि प्रसाद  की फिजूलखर्ची बढ़ती जा रही थी. मंजू देवी इस का विरोध करती थी. विरोध करने पर सिद्धि उसे प्रताडि़त करता था. मंजू कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह अपने पति की बढ़ती शराब की लत को कैसे रोके.

मंजू और आकाश ऐसे आए करीब

जनवरी, 2025 का महीना था. सिद्धि प्रसाद खाना खा कर ड्यूटी पर चला गया था. उस के जाने के बाद मंजू अपने कमरे में लेटी थी. अपनी मुसीबतों के बारे में सोच रही थी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. वह करवट लिए लेटी हुई थी. सिर पर हाथ रखे तकिए में मुंह छिपाए काफी समय तक सिसकती रही.  दिन के 11 बजने को आए थे. चारपाई पर लेटेलेटे उस की कब आंख लग गई, पता ही नहीं चला. जब आंखें खुलीं, तब उस ने अपने बगल में बैठे आकाश को पाया.

वह हड़बडाती हुई उठी और कपड़े संभालने लगी. उस ने महसूस किया कि आकाश की नजर उस की मांसल शरीर पर टिकी है. थोड़ी देर के लिए वह शरमा गई. फिर भी बोली, ”अरे आकाश, तू कब आया? …आ न! बैठ यहीं, तू कोई गैर थोड़े है.’’

”मैं अभीअभी आया मामी, तुम उदास दिख रही हो? क्या बात है फिर मामा से बहस हुई क्या?’’ आकाश ने हमदर्दी जताई.

”अच्छा, तुम्हें याद भी कर रही थी.’’

”सौरी मामी, मैं तुम्हें कुछ और नजरों से देख रहा था.’’

”अरे कुछ नहीं, तुम जैसा गबरू जवान मेरी जवानी को नहीं देखेगा तो और कौन..?’’ मंजू बोली.

”अच्छा! …तो आप ने मुझे माफ कर दिया.’’ झेंपता हुआ आकाश बोला.

उस के बाद दोनों के बीच हंसीमजाक और इधरउधर की बातें होती रहीं. बातोंबातों में मंजू ने अपनी पीड़ा भांजे आकाश वर्मा के सामने उड़ेल कर रख दीं. इस से उस ने महसूस किया कि गम थोड़ा हलका हो गया. फिर उस के कंधे पर अपना सिर टिका कर सिसकती हुई बोली, ”आकाश, तुम ही कोई तरीका निकालो!’’

”हां मामी, मैं कुछ करता हूं आप के लिए. थोड़ा वक्त दो… अभी चलता हूं. जब भी कोई जरूरत हो तो फोन कर देना.’’ आकाश बोला और वहां से चला गया.

आकाश वर्मा सिद्धि प्रसाद का रिश्ते में भांजा लगता था. वह मूलरूप से लखनऊ के ही थाना पारा के अंतर्गत नरपत खेड़ा गांव का रहने वाला था. अकसर खाली समय में अपने मामा सिद्धि प्रसाद के यहां मिलने आताजाता रहता था. मौका मिलने पर मंजू से आंखें छिपा कर अपने मामा सिद्धि प्रसाद के साथ शराब पीने का मौका भी निकाल लेता था. शराब के नशे में दोनों काफी देर तक गपशप किया करते थे. आकाश सरोजनी नगर के नादरगंज की एक नमकीन बनाने वाली कंपनी में काम करता था और समय मिलने पर सिद्धि प्रसाद के घर चला आता था.

हसरतों में बह गया रिश्ता

25 वर्षीय आकाश वर्मा मंजू देवी को बहुत प्यार करता था, किंतु उस ने अपने मन की बात का इजहार करने के लिए मंजू के सामने कभी पेशकश नहीं की थी. आकाश मंजू के सामने जब भी आता तो बैठ कर उसे हसरत भरी नजरों से देखा करता था. वह मंजूू से अपने दिल की बात उजागर करने का कोई अवसर भी नहीं ढूंढ पाया. मंजू को अपने दिल में बसाने के बाद उस की रातों की नींद उड़ चुकी थी. चाहत छिपती नहीं है, जब 2 प्रेमी सामने हों तो आंखों में समाई प्यार की भाषा को समझते देर भी नहीं लगती.

आकाश के अकसर घर आने के बाद मंजू भी उसे चाहत की नजरों से देखा करती थी, किंतु वह विवाहिता थी. उस के सामने समाज की कुछ मर्यादाएं भी थीं. आकाश को मन ही मन में चाहने के बाद मंजू भी अपने मन की भावना व्यक्त नहीं कर पा रही थी. धीरेधीरे मंजू के मन में आकाश के प्रति सम्मान व प्यार का दीप जल उठा था. दोनों उचित अवसर की तलाश में थे. जनवरी माह में उस दिन आकाश के समक्ष उस ने अपनी दुखती रग को व दर्द को बयान किया तो आकाश के मन में दया व प्यार का सागर उमड़ पड़ा, लेकिन समझदारी व अवसर की तलाश में उस दिन मंजू नेे अपनी आंखों की मूक भाषा से सब कुछ समझा दिया कि वह भी इस नरक से उसे छुटकारा दिला दे.

मार्च 2025 के अंतिम सप्ताह में मंजू ने फोन पर आकाश के पूछने पर बताया कि उस दिन सिद्धि प्रसाद रात की ड्यूटी पर घर से गया हुआ है, इसलिए वह घर पर आ जाए, कुछ जरूरी बात करनी है.   आकाश ड्यूटी की छुटटी के बाद मंजू के घर देर रात पहुंच गया. उस ने धीरेधीरे आहट पा कर जानने की कोशिश की कि घर की बगल की दूसरी कोठरी में मंजू के सासससुर अपने कमरे में लिहाफ ओड़े सो रहे हैं. मंजू ने आकाश को घर आया देख कर राहत की सांस ली और चुपके से अपनी कोठरी में आकाश को एकांत में बुला लिया. कमरे में पहुंचने के बाद आकाश ने जाते ही मंजूू को अपनी बाहों में भर लिया. जी भर गालों को चूमने व प्यार करने के बाद वह खाना खाने बैठ गया.

उस दिन आकाश मंजू को पाने को आतुर हो गया था. पति द्वारा प्रताडि़त करने की बात कहते हुए मंजू ने उसे अपनी पीठ पर चोट के निशान दिखाए. पीठ पर पिटाई के निशान देख कर आकाश ने हमदर्दी जताई. इसी हमदर्दी में दोनों प्रेम और सहानुभूति की भावना में बह गए थे. वे कब एकदूसरे की बाहों में आ गए, इस का उन्हें पता ही नहीं चला. फिर दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. थोड़ी देर में जब आकाश जाने लगा, तब मंजू उस का हाथ पकड़ कर बोली, ”आकाश, जल्द कुछ उपाय करो… अब छिपछिप कर रहना सहन नहीं होता…और उस का जुल्म भी बढ़ता जा रहा है.’’

”जल्द ही कुछ करूंगा. चिंता मत करो.’’

आकाश जब भी आता था, तब मंजू घर में अकेले होती थी. उसे नहीं पता था कि उस की गतिविधियों पर पासपड़ोस की नजर बनी हुई है. कई बार वह रात के अंधेरे में भी आने लगा था. उस का मंजू के साथ बेमेल ही सही, लेकिन नाजायज रिश्ता बन चुका था. आकाश उस से उम्र में करीब 10 साल छोटा था. मंजू के मन का दर्द आकाश के लिए भी असहनीय हो गया था. सिद्धि प्रसाद की हत्या के 2 दिन पहले जब आकाश आया था, तब घर में बिखरे हुए सामान को देख कर समझ लिया था कि सिद्धि ने उस पर किस तरह का जुल्म ढाया होगा. घर में चारपाई के नीचे शराब की खाली बोतलें पड़ी थीं.

अभी आकाश घर के चारों ओर नजरें दौड़ा ही रहा था कि उस ने मंजू की सिसकती आवाज सुनी, ”जी तो करता है कि मैं कहीं जा कर डूब मरूं और अपनी जान दे दूं.’’

आकाश तेजी से मंजू की ओर मुड़ा और उस के पास जा कर कान में कुछ फुसफुसाया. मंजू उस की बात सुन कर चौंकती हुई बोली, ”ऐसा हो सकता है तो जल्दी करो, मैं तुम्हारा साथ दूंगी. जितना भी खर्च आएगा, उस का भी इंतजाम करूंगी.’’

”मैं तुम्हें 24 मई को फोन करूंगा.’’ आकाश बोल कर वहां से जाने लगा. आकाश को जाता देख मंजू बड़ी हसरत भरी निगाहों से उसे देखने लगी. घर से निकलने से पहले आकाश ने एक बार फिर आश्वासन देते हुए कहा, ”मामी, आप को सब्र से काम लेना होगा. मुझे पूरी प्लानिंग बनाने का मौका दो. काम बहुत जोखिम भरा है.’’

प्रेमी के साथ मिल कर बनाया हत्या का प्लान

23 मई, 2025 की रात को आकाश और मंजू जब फोन पर बातें कर रहे थे, तभी  अचानक रात की ड्यूटी समाप्त कर सिद्धि प्रसाद घर लौट आया था. अचानक पति को घर आया देख कर मंजू सहम गई थी. तुरंत फोन कट कर दिया था. किंतु सिद्धि प्रसाद समझ गया था कि मंजू जरूर अपने प्रेमी से बात कर रही है. इस बारे में पड़ोसियों द्वारा उस के कान पहले से ही भरे जा चुके थे. उस ने तुरंत मंजू की जम कर पिटाई कर डाली. वह कहती रही कि उस की बात सहेली से हो रही थी, लेकिन सिद्धि ने पीटना नहीं छोड़ा.

राज खुलने के डर से मंजू एकाएक वह घबरा गई. परेशान सी हो उठी. किसी तरह उस ने दर्द से कराहते हुए रात बिताई. अगले रोज पति के ड्यूटी पर जाने के बाद आकाश को बीती रात की पूरी बात बता दी. अगले रोज 24 मई को उस का पति सो गया, तब आकाश का फोन आया. उस के बाद उस ने पहले तय प्लान के मुताबिक सिद्धि प्रसाद की प्लास्टिक की रस्सी के फंदे से पहले गला घोंट दिया, फिर उस के सिर पर भारी चीज से हमला कर मार डाला. इस काम में आकाश ने अपने दोस्त संजय निषाद की भी मदद ली थी.

अगले दिन ही मंजू द्वारा की गई पुलिस में शिकायत के बाद सिद्धि प्रसाद की लाश बरामद कर ली गई. इस की हफ्ते भर चली जांच में हत्या का न केवल खुलासा हो गया, बल्कि इस में शामिल आरोपियों में मंजू देवी, आकाश वर्मा और उस के दोस्त संजय निषाद की गिरफ्तारी भी हो गई. उत्तर प्रदेश के जिला गोंडा के रहने वाले संजय निषाद को 40 हजार रुपए देने का वादा किया था, उसे मात्र 5 हजार रुपए एडवांस में दिए थे. मंजू देवी ने पुलिस के सामने अपने पति की क्रूरता का जिक्र करते हुए पति की प्रताडऩा से परेशान रहने की बात कही.

 

उस ने पति पर अय्याशी करने का आरोप लगाया. उस ने यह भी बताया कि सिद्धि प्रसाद के गांव की एक विधवा महिला से कई सालों से  अवैध संबंध बने हुए थे. पुलिस ने आकाश से संजय निषाद का फोन नंबर ले कर उसे सर्विलांस पर लगा दिया. तकनीकी जांच से  वह 10 जुलाई, 2025 को उत्तर पूर्व दिल्ली के सोनिया विहार से पकड़ा गया. संजय वारदात के बाद लखनऊ से फरार हो कर दिल्ली चला गया था. वहां वह एक दुकान पर नौकरी करने लगा था. फोन की लोकेशन के आधार पर वह भी पुलिस की पकड़ में आ गया.

पुलिस ने आरोपी मंजू देवी, उस के प्रेमी आकाश वर्मा और संजय निषाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. Illicit Relationship

 

Extramarital Affair: दोस्त की पत्नी पर प्यार का पासा

Extramarital Affair: घर में आर्थिक तंगी क्या हुई, एक बच्चे की मां नेहा रौनियार ने पति नागेश्वर रौनियार को दरकिनार कर उस के दोस्त जितेंद्र का हाथ थाम लिया. वह प्रेमी जितेंद्र के साथ ही लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इन्हीं संबंधों ने एक दिन ऐसे अपराध को जन्म दिया कि…

नेहा पति को रास्ते से हटाने के लिए प्रेमी जितेंद्र पर दबाव डाल रही थी कि उसे जल्द से जल्द रास्ते से हटा दे, ताकि वे दोनों जल्द से जल्द एक हो जाएं. उसे अब उस की दूरी और जुदाई बरदाश्त नहीं होती.

”बताओ मुझे कि रास्ते से उसे कैसे हटाओगे?’’ नेहा ने प्रेमी से सवाल किया.

”तुम्हीं बताओ, रास्ते से हटाने के लिए मैं क्या करूं?’’ जितेंद्र ने उसी भाषा में उत्तर दिया.

”मार दो. मैं ने उस के नाम के सिंदूर को अपनी मांग से बहुत पहले ही धो डाला है. रही बात पछतावे की तो उस की मैयत पर घडिय़ाली आंसू बहा लूंगी. लोग तो यही कहेंगे कि बेचारी भरी जवानी में विधवा हो गई.’’

”कहती तो तुम ठीक ही हो, तलाक तुम्हें तो वो दे नहीं रहा है तो उसे रास्ते से हटाना ही अच्छा होगा. मगर कैसे? सोचना पड़ेगा. उस की मौत भी हो जाए और हम पर कोई आंच भी न आए.’’

”मैं भी यही सोचती हूं कि उसे ऐसी मौत दें, जिस से उस की मौत एक हादसा लगे. मगर कैसे होगा ये? मैं कुछ समझ नहीं पा रही.’’

”वो ऐसे बनाया जा सकता है कि वह एक नंबर का दारूबाज है. इसी का हम दोनों फायदा उठा सकते हैं. दारू पिला कर उस की हत्या कर देंगे और बाइक उसी के ऊपर गिरा देंगे. ऐसा लगेगा जैसे बाइक से गिर कर उस की मौत हुई हो?’’

”वाह! कमाल का आइडिया आया है तुम्हारे दिमाग में.’’ नेहा भी खुशी से झूम उठी.

नागेश्वर को अपने कमरे में बुलाने के लिए दोनों ने आपस में गुफ्तगू की. जितेंद्र जानता था कि उस के बुलाने पर नागेश्वर नहीं आएगा, लेकिन अगर नेहा बुलाए तो संभव है कि वह यहां (कमरे) आ जाए. यह घटना से करीब एक महीने पहले की बात थी.

पत्नी के जाल में ऐसे फंसा नागेश्वर

नागेश्वर पत्नी नेहा और बेटे से बेहद प्यार करता था. उस के रोमरोम में पत्नी नेहा रचीबसी थी. बेटा तो उस के दिल की धड़कन था. उस के बिना एक पल भी जीना उस के लिए गवारा न था. नेहा जब से बेटे को ले कर प्रेमी जितेंद्र के पास रहने चली गई थी, तब से ले कर अब तक हजारों बार उस ने फोन कर के उसे वापस घर लौट आने को कहा था. घर छोड़ कर प्रेमी के साथ चले जाने पर गांवसमाज में नागेश्वर और उस के फेमिली वालों की चारों ओर थूथू हो रही थी. नातेरिेश्तेदार उस पर हंस रहे थे, उस की खिल्ली उड़ा रहे थे, लेकिन उस के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही थी.

वह प्रेमी जितेंद्र को छोड़ कर उस के पास लौट कर आने के लिए तैयार नहीं थी. नागेश्वर के दबाव से जितेंद्र और नेहा दोनों डर गए थे कि कहीं वह उन्हें एकदूसरे से अलग न कर दे. इस से पहले कि नागेश्वर कोई ठोस कदम उठाए और वह अपने मकसद में कामयाब हो पाए, वे दोनों जल्द से जल्द नागेश्वर को खत्म कर देना चाहते थे.

”जितेंद्र, एक बात का डर मुझे खाए जा रहा है.’’ नेहा ने कहा.

”किस बात का डर?’’

”यही कि लाश को ठिकाने कहां लगाएंगे?’’ नेहा बोली.

”मैं ने पहले से सोच लिया है कि लाश का क्या करना है. अब सुनो मेरी प्लानिंग क्या है. उसे दारू पिलाने के बाद गला दबा कर मार डालेंगे. फिर उसी की बाइक पर बैठा कर यहां से कहीं दूर सुनसान जगह ले जाएंगे, जहां कोई आताजाता न हो और लाश नीचे गिरा कर उस पर बाइक पलट देंगे, ताकि लगे कि दारू पी कर बाइक चला रहा था, एक्सीडेंट हुआ और उस में इस की मौत हो गई. फिर हम दोनों सुरक्षित बच जाएंगे और हमारे रास्ते का कांटा हमेशाहमेशा के लिए साफ भी हो जाएगा. बोलो, कैसा लगा हमारा प्लान?’’

”क्या शैतानी दिमाग पाया है यार.’’

आया तो था संबंधों को सुलझाने लेकिन…

जितेंद्र और नेहा ने मिल कर नागेश्वर की हत्या की जो योजना बनाई थी, उसी के अनुसार सब कुछ चल रहा था. 12 सितंबर, 2025 की दोपहर में नेहा ने पति नागेश्वर को फोन कर महाराजगंज सिटी अपने किराए के कमरे पर समझौता करने के बहाने से बुलाया. नागेश्वर पत्नी नेहा को बहुत प्यार करता था. पहले तो उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि उसे मनाने के लिए नेहा ने फोन किया था. उस का फोन रिसीव कर के वह इतना खुश था कि उस के मुंह से बोल तक नहीं फूट रहे थे कि वह उस से क्या कहे. यही नहीं, पत्नी की बातों पर विश्वास कर के बात अपने तक ही सीमित रखी. फेमिली वालों को कुछ भी नहीं बताया था. उसे क्या पता था कि जिस नेहा से वह समुद्र की गहराइयों से भी ज्यादा प्यार करता था, उसी पत्नी नेहा ने उस के लिए मौत का जाल बिछाया है.

नागेश्वर ने उस दिन शाम 4 बजे अपने पापा केशवराज रौनियार से झूठ बोलते हुए कहा कि बाजार जा रहा हूं, थोड़ी देर में लौटता हूं और कह कर अपनी बाइक पर सवार हो कर निकला था. पत्नी से मिलन को ले कर वह इतना उतावला हुआ जा रहा था कि करीब 40 किलोमीटर की दूरी जान की परवाह किए बिना उस ने 40 मिनट में तय कर ली थी. इधर नेहा ने प्रेमी जितेंद्र को कुछ देर के लिए अपने कमरे में बैड के नीचे छिपा कर उस पर चादर इस तरह बिछा कर ढक दिया कि नीचे क्या है? कोई भी सामान किसी को आसानी से दिखाई न दे.

पत्नी नेहा के दिए एड्रेस पर नागेश्वर पहुंचा तो देखा नेहा दरवाजे पर खड़ी उसी के आने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करती खड़ी मिली. उसे देखते ही नागेश्वर ने अपनी सुधबुध खो दी थी. बाइक पर सवार ही उसे अपलक निहारता रहा. थोड़ी देर बाद जब वह होश में आया तो वह झेंप गया और बाइक से नीचे उतर कर उस के साथ कमरे में चला गया. कमरे में पहुंचते ही बैड पर बेटे को बैठा देख उस का प्यार जाग गया और झट उठा कर उसे अपने सीने से चिपका लिया. 6 महीने हो गए थे नेहा को पति नागेश्वर का घर छोड़े हुए. पत्नी और बेटे की याद में दिनरात वह तड़प रहा था.

नेहा पति की आवभगत में लगी हुई थी, ताकि उसे उस पर कहीं से शक न हो. और वह तो यह सोचसोच कर मन ही मन खुश हो रही थी. क्योंकि उस के रास्ते का बड़ा कांटा हमेशा के लिए साफ होने जा रहा है. इधर नागेश्वर सारे गिलेशिकवे भूल चुका था. वह नेहा को एक बार फिर समझाने की कोशिश में जुटा रहा कि जो हुआ, उसे अब से भुला दो. मम्मीपापा के साथ नहीं रहना चाहती हो, न सही. दोनों शहर में कहीं किराए का कमरा ले कर अलग रहेंगे, लेकिन एक बार मेरे लिए घर वापस लौट चलो. उस की बात सुन कर नेहा ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की थी, बल्कि इतना ही कहा कि आज अभी रुक तो रहे ही हो, सुबह होने दो, तब हम इस टौपिक पर बात करेंगे.

नागेश्वर पत्नी की बात मान गया. कब 3 घंटे बीत गए, नागेश्वर को पता ही नहीं चला. रात के समय नागेश्वर बाजार से आधा किलोग्राम चिकन खरीद कर ले आया. नेहा ने उसे पकाया. इधर पहले से नींद की गोली मिठाई में मिला कर बेटे को खिला दी. मिठाई खाने के थोड़ी देर बाद बेटे को गहरी नींद आ गई. वह जगा रहता तो शायद नेहा अपने बुरे मकसद में कामयाब नहीं हो पाती. नेहा ने चिकन के साथ अंगरेजी शराब की एक बोतल पति के सामने रख दी. मंहगी शराब देख नागेश्वर की आंखों में अजीब सी चमक जाग उठी थी. नेहा अपने हाथों से पैग बना कर पति को देती गई. देखते ही देखते नागेश्वर ने पूरी शराब की बोतल खाली कर दी. थोड़ी देर बाद वह नशे के आगोश में समा गया और शरीर बेकाबू होने लगा तो नेहा ने बैड के नीचे से प्रेमी जितेंद्र को बाहर निकलने का इशारा किया.

नागेश्वर बेसुध हो कर बिस्तर पर अचेतावस्था में गिर पड़ा था. फिर क्या था? उस ने छाती पर डाल रखा अपना दुपट्टा उतारा और पति के पैरों के पास जा कर खड़ी हो गई. फिर उसी दुपट्टे से उस के दोनों पैर बांध दिए, ताकि वह कोई हरकत न कर सके. जितेंद्र ने खा जाने वाली नजरों से उसे घूर कर देखा और कूद कर उस के सीने पर जा बैठा तो नेहा ने कस कर मजबूती के साथ उस के दोनों पैर पकड़ लिए तो जितेंद्र ने पूरी ताकत के साथ नागेश्वर का गला तब तक दबाए रखा, जब तक उस की मौत न हो गई. दोनों ने मिल कर उस की हत्या कर दी और लाश वहीं बिस्तर पर छोड़ दी थी. उस समय रात काफी हो चुकी थी.

उस समय रात का करीब एक बज रहा होगा. पहले से तय की गई योजना के अनुसार, रात डेढ़ बजे के करीब जितेंद्र ने कमरे से बाहर गली में निकल कर इधरउधर झांक कर देखा. उस समय चारों ओर गली में दूरदूर तक सन्नाटा पसरा हुआ था. फिर तेजी से वह भीतर कमरे की ओर लौट आया. नेहा से उस ने कहा कि रास्ता साफ है, लाश को ठिकाने लगा देते हैं. इस के बाद दबेपांव जितेंद्र ने नागेश्वर की बाइक बाहर निकाली. धीरे से उस पर नागेश्वर के शव को बैठाया. खुद बाइक को संभाला और नेहा से लाश को कस कर पकड़ कर बैठने को कहा. नेहा ने वैसा ही किया, जैसा उसे जितेंद्र ने करने को कहा.

केशवराज की टूट गई सहारे की लाठी

महाराजगंज शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर सिंदुरिया-निचलौल हाइवे पर स्थित दमकी गैस एजेंसी के सामने जितेंद्र ने बाइक रोक दी और लाश को सड़क की बाईं पटरी पर लिटा कर उस पर बाइक गिरा दी, ताकि यह एक्सीडेंट लगे. उस के बाद दोनों पैदल वापस लौटे तो कुछ दूरी पर एक टैक्सी खड़ी मिली. टैक्सी में सवार हो कर दोनों वापस कमरे पर लौट आए. दोनों खुश थे, क्योंकि उन के रास्ते का कांटा हमेशाहमेशा के लिए निकल चुका था. उस के बाद दोनों ने जिस्मानी संबंध बनाए और सो गए.

इधर 12/13 सितंबर, 2025 की रात 3 बजे निचलौल थाने के इंसपेक्टर अखिलेश कुमार वर्मा को किसी ने फोन कर के सूचना दी कि सिंदुरिया-निचलौल हाइवे पर एक्सीडेंट हुआ है, जिस में 25-26 साल के युवक की मौके पर ही मौत हो गई है. सूचना मिलते ही गश्त पर निकले एसएचओ अखिलेश कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे, जहां दुर्घटना होने की बात कही गई थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया तो उसे एक्सीडेंट जैसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, क्योंकि मृतक युवक के शरीर पर एक खरोंच तक नहीं आई थी. मामला पूरी तरह संदिग्ध लग रहा था. जामातलाशी लेने पर युवक की पैंट की जेब से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था. पुलिस ने उसे अपने कब्जे में ले लिया. फिर उसी रात लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया और बाइक को भी कब्जे में ले लिया.

बाइक के नंबर से मृतक की पहचान नागेश्वर रौनियार निवासी राजाबारी, थाना ठूठीबारी, जिला महराजगंज के रूप में हुई थी. पुलिस ने मृतक की जेब से जो मोबाइल फोन बरामद किया था, उस पर कई मिस्ड कौल पड़े थे. उसी में एक मिस्ड कौल पापा के नाम से भी थी. एसएचओ अखिलेश कुमार वर्मा ने उस नंबर पर कौल बैक की. मोबाइल की घंटी बजते ही केशवराज रौनियार की नींद उचट गई. बेटे के इंतजार में वह रात भर सो नहीं पाए थे. जैसे ही फोन बजा तो बिस्तर पर उठ कर बैठ गए और दीवार घड़ी की ओर देखा. उस समय सुबह के 5 बज रहे थे.

उन्होंने कौल रिसीव की तो दूसरी ओर से आवाज आई, ”हैलो! आप कौन साहब बोल रहें हैं?’’

”मैं केशवराज रौनियार, राजाबारी से बोल रहा हूं आप कौन?’’ केशवराज रौनियार ने सवाल किया.

”इंसपेक्टर अखिलेश कुमार वर्मा, निचलौल थाने से बोल रहा हूं.’’

”इंसपेक्टर…’’ पुलिस का नाम सुनते ही  केशवराज बुरी तरह चौंक पड़े, ”सुबहसुबह पुलिस का फोन. क्या बात है साहब, मुझ से कोई गुस्ताखी तो नहीं हुई है.’’

”नहीं…नहीं… दरअसल, बीती रात सिंदुरिया-निचलौल हाइवे स्थित दमकी गैस एजेंसी के सामने सड़क किनारे एक युवक की एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. जामातलाशी लेने पर उस की जेब से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था, उसी फोन से यह नंबर मिला था तो मैं ने कौल किया था. निचलौल थाने आ कर उस की पहचान कर लीजिए. मृतक का नाम नागेश्वर रौनियार पता चला है.’’

”क्याऽऽ नागेश्वर रौनियार.’’ इतना सुनते ही उन के मुंह से चीख निकल गई और फोन हाथ से छूट कर नीचे फर्श पर जा गिरा था.

पति की चीख सुनते ही ममता भी झट से बिस्तर पर उठ कर बैठ गईं और पति से पूछने लगी, ”ऐ जी क्या हुआ? सुबहसुबह किस का फोन था? क्या बात कर रहे थे उस से? सब ठीक तो है न. क्यों कुछ बोल नहीं रहे?’’ पत्नी ममता पति को जोरजोर से हिलाने लगीं.

लेकिन केशवराज को जैसे काठ मार गया हो. वह एकदम मौन से हो गए थे. थोड़ी देर बाद जब वह खुद से नारमल हुए तो दहाड़ मार कर रोने लगे, ”हम लो लुट गए नागेश्वर की मम्मी. अब हम कैसे जिएंगे. हमारे बुढ़ापे का सहारा छिन गया. हमारा बेटा नागेश्वर नहीं रहा. थाने से बड़े साहब का फोन आया था. उन्होंने निचलौल थाने लाश की शिनाख्त के लिए बुलाया है. हमारी तो कमर ही टूट गई. कैसे देखेंगे बचवा की लाश को. कैसी विपदा में आ गए हम?’’ कह कर केशवराज पत्नी से लिपट कर रोने लगे.

काम न आए घडिय़ाली आंसू

उधर पत्नी ममता बेटे की मौत की खबर सुनते ही दहाड़ मार कर रोने लगीं. सुबहसुबह केशवराज के घर में कोहराम सुन कर पड़ोसी भी हैरान रह गए थे कि आखिर क्या हो गया जो सब के सब रो रहे हैं. पड़ोसी जब वहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि नागेश्वर की एक्सीडेंट में मौत हो गई है. गांव के कुछ संभ्रात लोगों को साथ ले कर केशवराज सुबह निचलौल थाने पहुंचे. फोटो देख कर उन्होंने मृतक की अपने बेटे के रूप में शिनाख्त कर ली थी. इस बात से पुलिस को थोड़ी राहत मिली. उसी दिन यानी 13 सितंबर की शाम को पोस्टमार्टम रिपोर्ट इंसपेक्टर अखिलेश कुमार वर्मा की टेबल पर थी. रिपोर्ट पढ़ कर उन के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह एक्सीडेंट नहीं, दम घुटने से हुई दर्ज थी. यानी नागेश्वर की गला दबा कर हत्या की गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे केस को उझला कर रख दिया था.

इंसपेक्टर अखिलेश कुमार वर्मा ने फोन कर के केशवराज को दोबारा निचलौल थाने बुलाया और बताया कि तुम्हारे बेटे की मौत एक्सीडेंट से नहीं बल्कि गला घोंटने से हुई है. यह सुन कर केशवराज रौनियार एकदम से सन्न रह गए थे. इंसपेक्टर वर्मा ने उन से किसी पर शक होने की बात पूछी तो उन्होंने बिना सोचेसमझे अपनी बहू नेहा रौनियार और उस के प्रेमी जितेंद्र कुमार का नाम लिया और कहा कि इन्हीं दोनों ने मिल कर बेटे की हत्या की होगी. पीडि़त केशवराज रौनियार ने बहू नेहा रौनियार और उस के प्रेमी जितेंद्र कुमार के खिलाफ लिखित तहरीर दी.

तहरीर के आधार इंसपेक्टर अखिलेश कुमार वर्मा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या और साक्ष्य मिटाने की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया और आवश्यक काररवाई शुरू कर दी. इंसपेक्टर अखिलेश कुमार ने घटना से एसपी सोमेंद्र मीणा को भी अवगत करा दिया. एसपी सोमेंद्र मीणा के दिशानिर्देश पर जांच की काररवाई आगे बढ़ाई. पुलिस ने नेहा के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस में घटना वाले दिन पत्नी नेहा और नागेश्वर के बीच कई बार लंबीलंबी बातें हुई थीं. वैज्ञानिक साक्ष्य को ठोस आधार मान पुलिस आगे बढ़ती गई तो मामला लव अफेयर का नजर आया. यह भी शीशे की तरह साफ हो गया था कि घटना वाले दिन नागेश्वर नेहा से मिलने महराजगंज सिटी गया था.

15 सितंबर की भोर में इंसपेक्टर अखिलेश कुमार वर्मा अपनी टीम के साथ नेहा के कमरे पर पहुंचे और मौके से उसे और उस के प्रेमी जितेंद्र को हिरासत में ले कर थाना निचलौल लौट आए. थाने में दोनों से अलगअलग सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. एसपी सोमेंद्र मीणा ने उसी दिन शाम 3 बजे पुलिस लाइंस के मनोरंजन कक्ष में प्रैसवार्ता बुलाई और नागेश्वर रौनियार हत्या से परदा उठा दिया.

चट्टान जैसे इरादों वाली नेहा के चेहरे पर पति की मौत का जरा भी अफसोस नहीं था. गिरफ्तारी के समय वह मुसकरा रही थी. पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस पूछताछ में हत्या के पीछे की कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

दिल लगा बैठी नेहा

 

26 वर्षीय नागेश्वर रौनियार मूलरूप से उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के राजाबारी गांव का रहने वाला था. उस के पापा केशवराज रौनियार थे. 2 बेटों और एक बेटी में नागेश्वर सब से बड़ा था. था तो वह इकहरे बदन वाला, लेकिन उस में गजब का जोश और फुरती थी. केशवराज रौनियार प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे. वह इतना कमा लेते थे कि अपने 5 सदस्यों वाले परिवार का पालनपोषण बड़े मजे से कर लेते थे. नागेश्वर बड़ा था और काफी समझदार भी. वह बचपन की गलियों को पीछे छोड़ कर जैसेजैसे जवानी की दहलीज पर पांव रखता गया, उस में अपने पैरों पर खड़े होने और पिता का हाथ बंटाने की ललक जोर मारने लगी थी.

वैसे भी नागेश्वर जिस जगह रहता था, वहां से नेपाल करीब 10-15 किलोमीटर दूर था. नेपाल की खूबसूरत वादियां राजाबारी (ठूठीबारी) से साफ दिखती थीं तो उन्हें देखने के लिए वह हमेशा लालायित रहता था. उसी के गांव में जितेंद्र भी रहता था. उस से उस की काफी निभती थी. दोनों अच्छे दोस्त भी थे और हमराज और हमउम्र भी. जितेंद्र की ठूठीबारी कस्बे में बाइक के स्पेयर पाट्र्स की दुकान थी. दुकान अच्छीखासी चलती थी. आमदनी भी अच्छी होती थी. नागेश्वर उस की दुकान पर नौकरी करता था. पाट्र्स को बेचने के लिए वह अकसर नेपाल के खूबसूरत जिला नवलपरासी आताजाता रहता था. जातेआते वक्त इसी जिले के गोपालपुर की रहने वाली बेहद खूबसूरत युवती नेहा पर उस की नजर पड़ी तो वह उस पर मर मिटा था.

नागेश्वर पहली नजर में ही उसे अपना दिल दे बैठा था. इस के बाद उस का नवलपरासी आनाजाना और बढ़ गया था. धीरेधीरे दोनों में प्यार हो गया और फेमिली वालों की रजामंदी से प्रेम विवाह कर लिया था. यह करीब 6 साल पहले की बात है, तब उस की उम्र 20 साल के आसपास रही होगी. नागेश्वर अपने प्यार को पा कर बेहद खुश था. फेमिली वाले भी चांद सी बहू पा कर फूले नहीं समा रहे थे. शादी के 3 साल बाद नेहा ने एक बेटे को जन्म दिया. पोते के पैदा होने पर केशवराज में जीने की लालसा और बढ़ गई थी. बेटे के जन्म के बाद नागेश्वर के बाद उस के खर्चे बढ़ गए थे. वह जो कमाता था, उस से उस के खर्चे पूरे नहीं होते थे. धीरेधीरे उस का झुकाव नशीले पदार्थों की ओर बढ़ता गया और नशा बेचने का काम शुरू कर दिया.

जितेंद्र जब भी नागेश्वर से मिलने उस के घर जाता तो नेहा को जितेंद्र से बात करना अच्छा लगता था. इसी दरमियान नागेश्वर के साथ एक घटना घटी. वह नशीले पदार्थ के साथ पकड़ा गया. पुलिस ने गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया. नागेश्वर के जेल जाते ही जितेंद्र की तकदीर खुल गई. वह नेहा के साथ हमदर्दी दिखाता था. उस ने अपने दिल में नेहा के लिए जगह तो पहले ही बना ली थी, बस साक्षात उस के सामने होना शेष रह गया था. जितेंद्र के दिल में उसे पाने की हसरतें उमडऩे लगीं. जितेंद्र के सामने नेहा के करीब आने का एक ही रास्ता दिख रहा था, वह था उस का जमानत कराना.

जितेंद्र ने कुछ महीनों बाद नागेश्वर की जमानत करा कर नेहा के दिल पर कब्जा जमा लिया. धीरेधीरे वह भी जितेंद्र की ओर आकर्षित होती गई और दोनों एकदूसरे को अपना दिल दे बैठे. जमानत पर छूट कर जेल से आने के बाद नागेश्वर के व्यवहार में काफी बदलाव आ चुका था. नागेश्वर को पत्नी नेहा की हरकतों के बारे में पता चल गया था कि उस का जितेंद्र के साथ कुछ चक्कर चल रहा है. इस बात को ले कर दोनों के बीच तकरार होती गई और दांपत्य जीवन में दरारें बढ़ती गईं. नागेश्वर ने पत्नी को बहुत समझाने की कोशिश की कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता है. भले ही आज वह आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, कल उस के पास भी पैसे आ जाएंगे.

वह बुरी आदतों और बुरी लत से तौबा कर लेगा, अपनी बसीबसाई गृहस्थी में अपने हाथों आग न लगाओ. पर नेहा ने उस की एक नहीं सुनी और बेटे को साथ ले कर प्रेमी जितेंद्र के साथ रहने के लिए महाराजगंज सिटी में एक किराए का कमरा ले कर लिवइन रिलेशन में रहने लगी थी.

नागेश्वर नेहा पर घर वापस लौट आने का दबाव बनाने लगा था. नेहा उस के पास लौटने के लिए तैयार नहीं थी. नेहा रौनियार और जितेंद्र ताउम्र साथ रहना चाहते थे, लेकिन उन के लिए यह आसान नहीं था. नेहा का पति नागेश्वर अभी जिंदा था. उस के जीते जी उन के यह ख्वाब कभी पूरे नहीं हो सकते थे. पत्नी ने पति पर तलाक देने का दबाव डाला था. वह उस के साथ अब रहना नहीं चाहती थी. बाकी की जिंदगी वह अपने प्रेमी जितेंद्र के साथ उस की बांहों में बिताना चाहती थी. इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच कई बार झगड़े भी हुए थे और उस ने पत्नी नेहा को तलाक देने से साफतौर पर मना कर दिया था. इसी खुन्नस में नेहा और उस के प्रेमी जितेंद्र के साथ मिल कर पति नागेश्वर रौनियार की हत्या कर लाश ठिकाने लगा दी.

पुलिस को दिए बयान में नेहा ने बताया था कि पति पैसों के अभाव में गैरमर्दों के पहलू में भेज कर उस से धंधा कराना चाहता था. यह बात उसे गवारा नहीं थी. उस के जमीर को गहराइयों तक झकझोर दिया था, इसलिए उस का झुकाव जितेंद्र की ओर तेजी से बढ़ा था. और उस ने फैसला कर लिया कि वह जितेंद्र के साथ अपना बाकी का जीवन गुजारेगी. कथा लिखे जाने तक नागेश्वर रौनियार हत्याकांड के दोनों आरोपी नेहा रौनियार और उस का प्रेमी जितेंद्र जेल की सलाखों के पीछे कैद थे. पति की हत्या की नेहा के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी और न ही पश्चाताप का कोई भाव था.

जेल से छूटने के बाद नेहा ने प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई है. उस का बेटा अपने दादा केशवराज रौनियार के साथ रह रहा था. Extramarital Affair

 

Bihar News: मोहब्बत में जाति बंधन क्यों

लेखक – शंभु शरण सत्यार्थी

Bihar News: बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई करते समय अलगअलग जाति के राहुल मंडल और तनुप्रिया झा न सिर्फ एकदूसरे को दिल दे चुके थे, बल्कि कोर्ट मैरिज भी कर ली. तनुप्रिया के फेमिली वालों को यह बात इतनी नागवार लगी कि…

बिहार के सुपौल जिले का तुलापट्टी गांव, जहां खेतों की हरियाली और कोसी नदी की शांति जीवन को एक सादगी भरा रंग देती है, एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना, जिस ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि भारतीय समाज में गहरे जड़ जमाए जातिगत भेदभाव की क्रूर सच्चाई को भी उजागर किया.

यह कहानी राहुल कुमार मंडल और तनु प्रिया की प्रेम कहानी है. एक ऐसी कहानी, जो प्रेम की पवित्रता और समाज की रूढिय़ों के बीच टकराव की मार्मिक गाथा है. यह न केवल एक हत्याकांड की सच्चाई को बयान करती है, बल्कि उन सामाजिक पूर्वाग्रहों पर भी सवाल उठाती है, जो आज भी प्रेम और इंसानियत को कुचल देते हैं. इस कहानी को जातिगत भेदभाव के व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक समाज की इस बीमारी को गहराई से समझ सकें.

तुलापट्टी गांव की संकरी गलियों में गणेश मंडल का घर मेहनत और सादगी की मिसाल था. गणेश एक छोटेमोटे किसान, अपनी छोटी सी जमीन पर खेती कर के परिवार का गुजारा करते थे. उन की पत्नी सुशीला घर की धुरी थीं, जिन का एकमात्र सपना अपने इकलौते बेटे राहुल कुमार मंडल को पढ़ालिखा कर बड़ा आदमी बनाना था. राहुल, जो अतिपिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से था, बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल था. गांव के स्कूल में उस की मेहनत की चर्चा हर जुबान पर थी. शिक्षक अकसर कहते कि राहुल इस गांव का गौरव बनेगा.

राहुल ने अपनी मेहनत से दरभंगा मैडिकल कालेज  में बीएससी नर्सिंग में दाखिला लिया. सेकेंड सेमेस्टर में पढ़ते हुए उस का सपना था कि वह अपने गांव में एक छोटा सा अस्पताल खोले, जहां गरीबों का मुफ्त इलाज हो. कालेज में उस की मुलाकात तनु प्रिया से हुई. तनु प्रिया सहरसा के एक रूढि़वादी ब्राह्मïण परिवार से थी और बीएससी नर्सिंग के फस्र्ट सेमेस्टर की छात्रा थी. उस की मुसकान और सादगी ने राहुल का दिल जीत लिया. तनु का परिवार सामाजिक रुतबे और जातिगत श्रेष्ठता में विश्वास रखता था, लेकिन तनु ने अपनी पढ़ाई और सपनों के लिए घर की रूढिय़ों को चुनौती दी थी.

पहली मुलाकात कालेज की लाइब्रेरी में हुई. राहुल किताबों में खोया हुआ था, जब तनु ने उस से एक किताब मांगी.

”यह फार्माकोलौजी की किताब आप के पास है?’’ तनु की आवाज में मासूमियत थी. राहुल ने मुसकराते हुए किताब दी और यहीं से उन की दोस्ती की शुरुआत हुई. कालेज की कैंटीन में चाय की चुस्कियां, लाइब्रेरी में किताबों के बीच बातें और कालेज के मैदान में सैर, इन सब ने उन की दोस्ती को प्यार में बदल दिया. राहुल की सादगी और तनु की हंसी ने उन के रिश्ते को एक अनमोल बंधन में बांध दिया.

राहुल और तनु को पता था कि उन का प्यार समाज की जातिगत दीवारों को तोडऩे की चुनौती है. भारत में जाति व्यवस्था सदियों से सामाजिक संरचना को नियंत्रित करती आई है, जो आर्थिक, सामाजिक, और राजनीतिक अवसरों को प्रभावित करती है. तनु का परिवार ब्राह्मण था और उस के पापा प्रेमशंकर झा, सहरसा में एक रसूखदार व्यक्ति थे. उन के लिए बेटी की शादी अपनी ही जाति के अच्छे परिवार के लड़के से करना सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल था. दूसरी ओर, राहुल का परिवार साधारण और पिछड़ी जाति का था.

तनु ने हिम्मत जुटा कर अपने फेमिली वालों को राहुल के बारे में बताया. उस ने कहा, ”पापा, राहुल मेहनती और अच्छा इंसान है. हम एकदूसरे से प्यार भी करते हैं.’’

लेकिन प्रेम शंकर ने गुस्से में जवाब दिया, ”तूने हमारी इज्जत मिट्टी में मिला दी. उस नीची जाति के लड़के से शादी का खयाल तू मन से निकाल दे!’’

कमरे में ही मौजूद तनु की मम्मी गुंजन कुमारी ने भी उसे डराया, ”तू हमारे खानदान की इज्जत का कुछ तो खयाल कर.’’

इतना ही नहीं, तनु के भाई अवनीश वत्स और बहन प्रीति कुमारी ने भी उस का साथ नहीं दिया, लेकिन तनु अपने प्यार पर अडिग थी. उस ने राहुल से कहा, ”मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती राहुल, चाहे दुनिया मेरे खिलाफ हो जाए.’’

राहुल ने अपने परिवार को इस रिश्ते के बारे में बताया. गणेश मंडल ने बेटे की खुशी को देखते हुए उस का समर्थन किया. उस की मम्मी सुशीला ने तनु से फोन पर बात की और कहा, ”बेटी, तुम मेरे बेटे की पसंद हो तो मेरी भी बेटी हो.’’

दोनों ने गुपचुप तरीके से कोर्ट मैरिज करने का फैसला किया. 5 जुलाई, 2025 को दरभंगा के एक मंदिर में राहुल और तनु प्रिया ने सात फेरे लिए और कोर्ट में शादी रजिस्टर कराई. शादी के बाद दोनों कालेज के हौस्टल में रहने लगे. राहुल ने तनु को अपने गांव तुलापट्टी ले जाने का वादा किया. तनु के परिवार में उस के द्वारा राहुल से शादी करने की खबर आग की तरह फैल गई. पापा प्रेमशंकर झा के लिए यह शादी उन की इज्जत पर धब्बा थी. प्रेमशंकर ने अपने बेटे अवनीश, पत्नी गुंजन, बेटी प्रीति और मां अरुण देवी के साथ मिल कर राहुल को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली.

तनु को कई बार धमकी भरे फोन आए. अवनीश ने उसे फोन पर कहा, ”घर वापस आ जा, नहीं तो उस लड़के की लाश तेरे सामने होगी.’’

तनु ने डरते हुए पति राहुल को बताया, ”राहुल, मुझे लगता है कि मेरे फेमिली वाले कुछ गलत करने की सोच रहे हैं.’’

इस के बाद तनु ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिस में उस ने अपने फेमिली वालों की धमकियों का जिक्र किया. लेकिन पुलिस ने इसे पारिवारिक मामला कह कर टाल दिया. तनु और राहुल ने हिम्मत नहीं हारी. राहुल ने तनु से कहा, ”हमारा प्यार इन दीवारों को तोड़ देगा.’’

5 अगस्त, 2025 की रात दरभंगा मैडिकल कालेज के हौस्टल गेट पर सन्नाटा था. रात के 9 बजे राहुल अपनी बाइक लेने गया था. तनु अपने कमरे में थी और राहुल से फोन पर बात कर रही थी. दोनों अगले दिन तुलापट्टी जाने की योजना बना रहे थे. राहुल ने हंसते हुए कहा, ”तनु तुम्हें मालूम है कि मम्मी तुम्हारे स्वागत का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं, वह तुम्हारे लिए खीर बनाएंगी.’’

तनु ने जवाब दिया, ”बस तुम सुरक्षित आ जाओ, बाकी बातें हम बाद में करेंगे.’’

उसी समय अचानक एक नकाबपोश शख्स, जिस ने मास्क, रेनकोट, और दस्ताने पहने थे, राहुल के पास पहुंचा. उस ने पूछा, ”यह बाइक किस की है?’’

राहुल ने जवाब दिया, ”मेरी है.’’

इस से पहले कि राहुल कुछ समझ पाता, नकाबपोश ने देसी कट्टे से उस के सीने में गोली मार दी. गोली की आवाज सुन कर तनु का दिल धक से रह गया. वह दौड़ती हुई गेट की ओर भागी. वहां उस ने देखा कि राहुल खून से लथपथ जमीन पर गिरा है. तनु ने उसे गोद में लिया और चीखी, ”राहुल, जागो!’’ लेकिन राहुल की सांसें थम चुकी थीं. तनु ने देखा कि नकाबपोश कोई और नहीं, उस के पापा प्रेमशंकर झा थे. वह चिल्लाई, ”पापा, आप ने यह क्या किया?’’ प्रेमशंकर भागने की कोशिश में था, लेकिन छात्रों और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया और पिटाई कर दी.

इसी दौरान किसी ने पुलिस को फोन द्वारा सूचना दे दी. पुलिस ने प्रेम शंकर को हिरासत में लिया. तनु ने बताया कि उस के पापा, भाई, मम्मी, बहन, और दादी इस साजिश में शामिल थे. उस ने कहा, ”मेरे परिवार को मेरी अंतरजातीय शादी मंजूर नहीं थी. मैं ने पहले थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की.’’ सीसीटीवी फुटेज और फोरैंसिक साक्ष्यों ने प्रेम शंकर की संलिप्तता की पुष्टि की. राहुल और तनु की कहानी इस बात का सबूत है कि जातिगत मानसिकता आज भी समाज को बांट रही है.

राहुल का शव उस के गांव तुलापट्टी पहुंचा तो गांव मातम में डूब गया. सुशीला बारबार बेहोश हो रही थीं. गणेश ने कहा, ”मेरा बेटा बस अपने सपनों को जीना चाहता था.’’

तनु ने माफी मांगी, लेकिन सुशीला ने उसे गले लगा कर कहा, ”गलती तुम्हारी नहीं बेटा, समाज की है.’’ सोशल मीडिया पर JusticeForRahul ट्रेंड करने लगा. लोग पुलिस की लापरवाही और जातिगत हिंसा पर सवाल उठा रहे थे. तनु की गवाही ने सभी को झकझोर दिया. उस ने कहा, ”मेरे परिवार ने मेरे प्यार को अपराध माना.’’ भारत का संविधान जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को प्रतिबंधित करता है, लेकिन सामाजिक स्तर पर यह प्रथा आज भी जारी है. तनु ने फैसला किया कि वह राहुल के सपने को पूरा करेगी और तुलापट्टी में ‘राहुल स्मृति अस्पताल’ खोलेगी.

राहुल और तनु की कहानी जातिगत भेदभाव की क्रूरता को उजागर करती है. यह समाज से सवाल पूछती है कि क्या प्रेम अपराध है? क्या इज्जत के नाम पर हिंसा जायज है ? हमें शिक्षा, जागरूकता और सख्त कानूनी काररवाई के जरिए जातिगत भेदभाव को खत्म करना होगा, ताकि कोई और राहुल व तनु इस दर्द से न गुजरें. Bihar News