Agra News: प्यार ने कलंकित किया रिश्ता

Agra News: पंकज और रितु सगे मामाभांजी थे, इसलिए उन्होंने प्यार और शादी कर के जो सामाजिक अपराध किया, उस की सजा उन्हें मौत को गले लगा कर चुकानी पड़ी. उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर का एक छोटा सा कस्बा है खुतार. इसी कस्बे के रहने वाले प्रकाश नारायण श्रीवास्तव अध्यापक थे. उन की संतानों में एक बेटी मीना और 3 बेटे संतोष, राजीव तथा पंकज थे. बच्चों में मीना सब से बड़ी थी. उस के सयानी होते ही प्रकाश नारायण ने उस के विवाह के लिए भागदौड़ शुरू कर दी. काफी भागदौड़ के बाद प्रकाश नारायण को मीना के लिए लखीमपुर खीरी के गांव सैकिया का रहने वाला शांतिस्वरूप पसंद आ गया. वह किसान परिवार से था. इस तरह मीना की शादी शांतिस्वरूप के साथ हो गई.

मीना ससुराल में सुखी थी, इसलिए मांबाप निश्चिंत थे. कालांतर में मीना 1 बेटे बीरू और 3 बेटियों की मां बनी. लगभग 10 साल पहले मीना की बीमारी की वजह से मौत हो गई तो शांतिस्वरूप पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. बच्चे छोटेछोटे थे, इसलिए पत्नी के बिना वह घर संभाले या बाहर के काम देखें. बड़ी बेटी स्नेहा (बदला हुआ नाम) कुछ समझदार थी, इसलिए उस ने घर संभाल लिया था. सभी बच्चे अभी पढ़ ही रहे थे. सब से छोटी सुधा (बदला हुआ नाम) 6 साल की थी, जबकि मंझली रितु करीब 10 साल की. समय का पहिया अपनी गति से चलता रहा और जख्म धीरेधीरे भरते गए.

शांतिस्वरूप की ससुराल खुतार और उन के गांव सैकिया के बीच 10-12 किलोमीटर की दूरी थी, इसलिए दोनों ओर से लोगों का आनाजाना लगा रहता था. प्रकाश नारायण का बड़ा बेटा यानी शांतिस्वरूप का बड़ा साला संतोष परचून की दुकान करता था, उस से छोटा राजीव पढ़लिख कर एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहा था. सब से छोटा पंकज डेकोरेशन का काम करता था. कुल मिला कर प्रकाश नारायण का परिवार व्यवस्थित हो चुका था, लेकिन बेटी की मौत का सदमा उन्हें कुछ ऐसा लगा कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था.

कौन जानता था कि समय के साथ ऐसा जलजला आएगा कि दोनों परिवारों की इज्जत का जनाजा निकल जाएगा. पंकज घर का सब से छोटा बेटा था, इसलिए सभी का लाडला था. मीना अपने इस छोटे भाई से बहुत प्यार करती थी, इसलिए बहन की मौत से पंकज को गहरा आघात लगा था. बहन के जीवित रहने पर वह उस के यहां अकसर जाया करता था, इसलिए बहन के बच्चों को भी अपने छोटे मामा पंकज से काफी लगाव था. रितु को ननिहाल में कुछ ज्यादा ही अच्छा लगता था, क्योंकि उसे लगता था कि तीनों मामा उसे हाथोंहाथ लिए रहते हैं. छोटे मामा तो उस की हर इच्छा पूरी करने को तैयार रहते हैं.

रितु का मामा के यहां आनाजाना लगा रहा. रितु 15 साल की हो गई. इस उम्र में आतेआते वह काफी खूबसूरत लगने लगी थी. ननिहाल में ज्यादातर समय उस का टीवी देखने में गुजरता था. टीवी के छोटे परदे पर नजर आने वाले लड़के उसे बहुत अच्छे लगते थे. कभीकभी उन में कोई लड़का उसे पंकज मामा जैसा लगता था. एक दिन टीवी देखते समय अचानक पंकज आ गया तो उस ने कहा, ‘‘मामा, आप बहुत स्मार्ट हैं, एकदम टीवी सीरियलों में आने वाले हीरो जैसे लगते हैं.’’

रितु, जो पंकज के सामने अभी बच्ची थी, अचानक उसे वह हीरो जैसा लगने लगा था. पंकज ने ध्यान से देखा, तब उसे लगा कि रितु अब बच्ची नहीं रही, वह जवान हो गई है. वह ऐसा क्षण था, जब वह भूल गया कि रितु उस की सगी बहन की बेटी यानी सगी भांजी है. उसी एक क्षण में उस का दिमाग कुछ तरह बदला कि उस की सोच ही बदल गई. पंकज के दिलोदिमाग पर रितु कुछ इस कदर छाई कि वह यह भूल गया कि रितु उस की सगी भांजी है. रितु उम्र में भी उस से बहुत छोटी थी. वह क्षण ऐसा था, जिस ने रिश्तों में ही नहीं, जिदंगी में ही आग लगा दी. आखिर इस की परिणति वही हुई, जैसा ऐसे रिश्तों में होता है. इस रिश्ते ने खुतार के सीने पर एक ऐसी कलंक कथा लिख डाली, जिस ने रिश्तों को ही नहीं, समाज को भी शर्मसार कर दिया.

बड़ेबुजुर्गों ने कहा है कि कदम बढ़ाने से पहले खूब सोचविचार लेना चाहिए. कहीं वह कदम गलत राह पर तो नहीं ले जा रहा. रितु के पास से अपने कमरे में आने के बाद पंकज विचारों में ऐसा खोया कि उसे समय का पता ही नहीं चला. शाम को रितु ने आ कर उस का कंधा पकड़ कर हिलाते हुए कहा, ‘‘उठो मामा, आज खाना नहीं खाना क्या?’’

रितु के मुलायम स्पर्श ने आग में घी का काम किया. पंकज झटके से उठा और रितु को बांहों में भर कर सीने से लगा लिया. रितु हैरान रह गई. वह इतनी बड़ी और समझदार हो चुकी थी कि स्पर्श के मायने पहचानने लगी थी. यह स्पर्श मामा का नहीं, बल्कि एक मर्द का था. उस का तन ही नहीं, मन भी झनझना उठा था. वह एकदम से घबरा गई. उस ने खुद को मामा की बांहों से आजाद किया और हांफती हुई बाहर आ गई. बाहर आते ही सामने नानी पड़ गईं. उस की हालत देख कर उन्होंने पूछा, ‘‘क्या हुआ रितु, हांफ क्यों रही है?’’

‘‘कुछ नहीं नानी, ऐसे ही.’’ कह कर वह नानी के कमरे में चली गई.

रात जैसेतैसे बीती. सुबह होते ही रितु ने कहा, ‘‘नानी, मुझे अपने घर जाना है. आप भिजवा दीजिए.’’

‘‘तू तो कह रही थी कि अभी हफ्ते भर रहूंगी. अचानक जाने का मन कैसे हो गया?’’ नानी ने पूछा.

‘‘मेरा पढ़ाई का नुकसान हो रहा है नानी, इसलिए मैं जाना चाहती हूं.’’ रितु ने कहा.

‘‘ठीक है, पंकज से कह देती हूं, वह तुझे पहुंचा देगा.’’ नानी ने कहा.

‘‘नहीं नानी, मैं पंकज मामा के साथ नहीं, राजीव मामा के साथ जाऊंगी.’’ रितु ने कहा.

पंकज कमरे में बैठा रितु की बातें सुन रहा था. झट से बाहर आ कर बोला, ‘‘अम्मा, मुझे थोड़ा काम है, इसलिए मैं इसे छोड़ने नहीं जा सकता.’’

रितु ने राहत की सांस ली. रितु शरम और डर की वजह से मामा की हरकत के बारे में किसी को कुछ नहीं बता सकी थी. अगर उस दिन रितु जरा भी हिम्मत कर गई होती तो शायद आज यह कलंक कथा न लिखी जाती. रितु चली गई. उस के जाने के बाद पंकज को लगा कि रितु के लिए उस के दिल के किसी कोने में ऐसी जगह बन गई है, जिसे अब कोई दूसरा नहीं भर सकता. हालांकि दिल और दिमाग में भारी कशमकश चल रही थी, पर दिल था कि मान ही नहीं रहा था. रितु 15 साल की थी, जबकि वह 28 साल का था.

आखिर दिल के हाथों मजबूर पंकज एक दिन रितु के घर जा पहुंचा. संयोग से जब वह वहां पहुंचा था, रितु घर में अकेली थी. यह मौका रिश्तों को दलदल में घसीटने के लिए काफी था. मामा को देख कर रितु कांप उठी, लेकिन पंकज ने उसे पास बिठा कर प्यार से समझाया, ‘‘रितु, डरने की कोई बात नहीं है. मैं जो कहने जा रहा हूं, वह तुम्हें सुनना ही पड़ेगा. मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. मैं ने इस बात पर बहुत सोचाविचारा, लेकिन आखिर में यही लगा कि अगर तुम मुझे नहीं मिली तो मैं जिंदा नहीं रह पाऊंगा.’’

रितु घबरा गई, ‘‘नहीं मामा, ऐसा मत करना.’’

‘‘अगर तुम कहती हो तो ठीक है. लेकिन सच बताओ, क्या मैं तुम्हें अच्छा नहीं लगता, क्या तुम्हें मुझ से प्यार नहीं है?’’

‘‘मामा, आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन…’’

‘‘लेकिनवेकिन कुछ नहीं, हां या ना में जवाब दो. अभी कोई जल्दी नहीं है, खूब सोचविचार कर फैसला कर लेना. लेकिन फैसला लेने से पहले इस बात का ध्यान रखना कि तुम मेरी यादों के सहारे जीना चाहोगी या साक्षात देखते हुए. जो भी फैसला लेना, फोन कर के बता देना.’’ कह कर पंकज ने उसे बांहों में समेटा, प्यार किया और चला गया.

रितु स्तब्ध बैठी रही. इस बार मामा का स्पर्श उसे भी कुछ अच्छा लगा था. वह जिस उम्र में थी, उस में फिसलने की संभावनाएं बहुत होती हैं. बिना मां की बेटी थी, न कोई रोकनेटोकने वाला था, न कोई राह दिखाने वाला. ऐसे में मामा ही अंगुली पकड़ कर दलदल में खींच रहा था. रितु ने ज्यादा सोचनेविचारने की जहमत नहीं उठाई और जीवन की नाव को तूफान के हवाले कर दिया.

2-3 दिनों बाद पंकज ने फोन किया, ‘‘रितु, मैं तुम से मिलने आना चाहता हूं.’’

‘‘…तो आ जाओ न.’’ रितु ने चहक कर कहा.

पंकज को लगा, जैसे किसी ने कानों में शहद घोल दिया हो. वह तुरंत सैकिया आ गया. इस के बाद वह रितु को उस दलदल में घसीट ले गया, जिस में घुसना तो आसान है, पर निकलना बहुत मुश्किल. मामाभांजी के बीच ऐसा रिश्ता बन गया, जिस की भनक घर वालों को ही नहीं, किसी को भी लग जाती तो हायतौबा मच जाती. इस के बाद रितु और पंकज का एकदूसरे के घर आनाजाना कुछ ज्यादा ही हो गया. उन का रिश्ता ऐसा था कि कोई संदेह भी नहीं कर सकता था. रितु की हर चाहत पंकज पूरी कर रहा था. सब यही समझते थे कि मामा को भांजी से कुछ ज्यादा ही प्यार है.

लेकिन सच कितने दिनों तक छिपा रहता. एक न एक दिन तो उसे उजागर होना ही था. जब पंकज का शांतिस्वरूप के घर आनाजाना कुछ ज्यादा ही हो गया तो उसे लगा, यह ठीक नहीं है. घर में बिना मां की 3 बेटियां थीं, इसलिए उन्होंने टोका, ‘‘पंकज, तुम्हें कुछ कामधाम है या नहीं, जब देखो यहीं डेरा डाले रहते हो. तुम्हारी वजह से रितु भी बेलगाम होती जा रही है. जब देखो, तब नानी के यहां जाने के लिए तैयार रहती है. पढ़ाई पर भी ध्यान नहीं देती.’’

‘‘जीजाजी, दीदी की याद आ जाती है, इसलिए चला आता हूं. अगर आप को मेरा आना अच्छा नहीं लगता तो अब नहीं आऊंगा.’’

‘‘भई, ऐसी कोई बत नहीं है. मेरे कहने का मतलब यह है कि अपने कामधंधे पर भी ध्यान दो. फालतू घूमने से कोई फायदा नहीं है.’’

पंकज समझ गया कि अब लोगों को उस पर शक होने लगा है, इसलिए उसे सतर्क हो जाना चाहिए. घर आ कर वह अपने कमरे में बैठा देर तक सोचता रहा. उस का प्यार जुनूनी होता जा रहा था. लेकिन घरपरिवार और समाज का भी डर सता रहा था. रिश्ता इतना नाजुक था कि वह रितु को अपना भी नहीं सकता था. जबकि दिल उसे छोड़ने को तैयार नहीं था. प्रेम की एकएक सीढ़ी चढ़ते हुए रितु और पंकज जिस शिखर की ओर जा रहे थे, वहां से फिसल कर आने का ही अंदेशा था. उन्हें मंजिल मिलना लगभग असंभव था, पर वे मंजिल पाने के लिए बेताब थे. जबकि मंजिल पाने की कोई राह नहीं थी. पंकज की उम्र 30 साल से अधिक हो चुकी थी. उस का कामकाज भी ठीक चल रहा था. उस की शादी के लिए भी लोग आ रहे थे. लेकिन शादी में वह रुचि नहीं दिखा रहा था. बड़े भाई ने दबाव डाला तो उस ने एक दिन साफसाफ कह दिया, ‘‘भैया, मैं शादी नहीं करूंगा.’’

‘‘तो क्या अकेले ही जिंदगी बिताओगे?’’

‘‘नहीं, अकेला तो नहीं रहूंगा, पर आप लोग मेरे लिए परेशान न हों.’’

पंकज के इस जवाब से घर के सब लोग सोचने को मजबूर हो गए कि पंकज शादी के लिए मना क्यों कर रहा है? उसी बीच शांतिस्वरूप ने संतोष को फोन कर के पंकज की शादी के लिए एक रिश्ता बताया तो उस ने कहा कि पंकज शादी नहीं करना चाहता. संतोष की बात से पंकज को ले कर कुछ आशंका हुई तो उस ने कहा, ‘‘भई पंकज का इरादा मुझे कुछ ठीक नहीं लगता. जब देखो, तब वह मेरे यहां पड़ा रहता है. रितु भी उस के कुछ ज्यादा ही मुंहलगी हो गई है. इधर वह पढ़ाई में भी ध्यान नहीं दे रही है.’’

बहनोई की बात पर संतोष के मन में भी संदेह पैदा हो गया. कहीं उस के इस इरादे के पीछे रितु तो नहीं है. आखिर शादी से मना क्यों कर रहा है? रितु और पंकज की प्रेमकहानी अब तक 5 साल पुरानी हो चुकी थी. इस बेईमान प्यार का अंजाम क्या होगा, कोई नहीं जानता था. रितु भी अपने भविष्य को ले कर परेशान थी, इसलिए एक दिन उस ने पंकज से पूछा, ‘‘अब आगे क्या होगा मामा?’’

‘‘आगे से मतलब..?’’ पंकज बोला.

‘‘मतलब यह कि आखिर इस तरह कब तक चलता रहेगा. तुम्हारा मेरे घर आना पापा को अच्छा नहीं लगता. उन्होंने साफसाफ तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उन के मन में हम लोगों को ले कर कुछ संदेह जरूर है.’’

‘‘लगता तो मुझे भी कुछ ऐसा ही है. मैं जल्दी ही कुछ करने की सोचता हूं.’’

‘‘क्या सोचोगे, हमारे सामने एक ओर कुआं है तो दूसरी ओर खाई. हमारे दोनों ओर खतरा है. अभी तो हमारे संबंधों के बारे में कोई कुछ नहीं जानता, लेकिन जिस दिन इस का खुलासा होगा, पहाड़ टूट पड़ेगा.’’

पंकज और रितु की दीवानगी बढ़ती जा रही थी. दोनों ही एकदूसरे को अपने अस्तित्व का हिस्सा मानने लगे थे, इसलिए जिंदगी एक साथ बिताना चाहते थे. पर यह उन के लिए आसान नहीं था. रितु तो उतनी समझदार नहीं थी, पर पंकज समझदार था. वह हमेशा इसी चिंता में डूबा रहता कि घर वालों से कैसे बताए कि वह अपनी सगी भांजी से प्यार करता है और उसी से शादी करना चाहता है. वह जानता था कि घर वालों की छोड़ो, समाज भी उसे इस रिश्ते की अनुमति नहीं देगा. जो भी सुनेगा, वही धिक्कारेगा. कभीकभी उसे लगता कि उसी ने रितु को गुमराह किया है. उस ने उस के साथ शारीरिक संबंध बना कर पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है. लेकिन उस दिल का वह क्या करे, जिस ने मजबूर करा कर यह सब कराया है.

पंकज भांजी के साथ प्यार की राह में इतनी दूर आ चुका था कि किसी भी कीमत में वापस नहीं लौट सकता था. प्यार का जुनून सिर चढ़ कर बोल रहा था. आखिर एक दिन संतोष ने रितु को पंकज की बांहों में  देख लिया तो पूछा, ‘‘यह सब क्या हो रहा है?’’

‘‘भैया, मेरी जिंदगी का यही सच है. मैं रितु से प्यार करता हूं और इसी के साथ शादी करना चाहता हूं.’’

‘‘यह हरगिज नहीं हो सकता. हम समाज, अपने बहनोई और स्वर्गवासी बहन को क्या जवाब देंगे. तुम इतना नीचे गिर जाओगे, मैं ने सपने में भी नहीं सोचा था. अभी तो सिर्फ मुझे पता चला है, अगर घर के बाकी के लोगों को इस बारे में पता चलेगा तो वे क्या सोचेंगे. अच्छा होगा, तुम इस मामले को यहीं खत्म कर के हम सभी जिस तरह सिर उठा कर जी रहे हैं, उसी तरह जीने दो.’’ संतोष ने कहा. पंकज ने भाई को समझाने की बहुत कोशिश की कि वह रितु से बहुत प्यार करता है और उस के बिना जीवित नहीं रह सकता. पर वह बिलकुल नहीं माने. उन्होंने पंकज को खूब लताड़ा और उसी वक्त राजीव के साथ रितु को उस के घर भिजवा दिया. संतोष ने रितु को भले ही उस के घर भिजवा दिया, पर पंकज ने साफ कह दिया, ‘‘भले ही पूरी दुनिया उस की दुश्मन हो जाए, पर रितु से उसे कोई अलग नहीं कर सकता.’’

संतोष पंकज की इस धमकी से परेशान था. अगर किसी को भी उस की हरकत के बारे में पता चल गया तो उस का परिवार इस कदर बदनाम हो जाएगा कि कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा. लोग थूकेंगे उस के परिवार पर. उस की यह परेशानी उस के चेहरे पर साफ झलक रही थी. आखिर एक दिन पत्नी ने पूछ ही लिया. तब बेचैन संतोष ने मन हलका करने के लिए सारी बात पत्नी को बता दी. वह भी सन्न रह गई. धीरेधीरे घर में इस बात की जानकारी सब को हो गई. लेकिन पंकज का घर में दबदबा था, इसलिए कोई भी उसे इस रिश्ते को खत्म करने के लिए विवश नहीं कर सका. हां, घर वालों का व्यवहार उस के प्रति जरूर बदल गया. इस से पंकज ने इतना जरूर महसूस किया कि अब धीरेधीरे उस की परेशानी बढ़ती ही जाएगी.

उस की जिंदगी पतंग जैसी हो गई थी. पता नहीं कब कट जाए. इसलिए उस ने पक्का इरादा बना लिया कि चाहे कुछ भी हो, वह रितु से शादी करेगा और दूर कहीं जा कर अपनी गृहस्थी बसा लेगा. इस के बाद उस ने फोन कर के रितु को बता भी दिया कि 18 फरवरी को भैया के बेटे के मुंडन के बाद वह उस के साथ घर छोड़ देगा. राजीव के बेटे के मुंडन पर रितु खुतार आई. मुंडन के बाद उस ने नानी से घर भिजवाने को कहा. वहीं खड़े पंकज ने कहा, ‘‘चलो, मैं तुम्हें छोड़ आता हूं.’’

घर के सभी लोग थके थे, इसलिए पंकज को अनुमति मिल गई. किसी को क्या पता था कि उन के मन में क्या है. दोनों घर से बाहर निकले और सीधे बसअड्डे पहुंचे. वहां से बस पकड़ी और शाहजहांपुर आ गए, जहां से ट्रेन द्वारा आगरा पहुंच गए.

पंकज और रितु ने शादी करने के इरादे से घर छोड़ दिया था. ट्रेन से वे सुबह 7 बजे ईदगाह स्टेशन पर उतरे और स्टेशन के पास ही होटल डी-लौरेट में कमरा बुक करा लिया. उन्हें तीसरी मंजिल पर कमरा नंबर 310 मिला था. होटल में पंकज ने रितु को अपनी पत्नी बताया था और आईडी के रूप में अपना ड्राइविंग लाइसेंस की कौपी जमा कराई थी. जब दोनों होटल पहुंचे थे, रिसैप्शन पर मैनेजर संजय कश्यप मौजूद थे. नहाधो कर दोनों ने कपड़े बदले और नाश्ता कर के मोहब्बत की निशानी ताजमहल देखने चले गए. रितु पंकज के साथ ताजमहल के पास पहुंची तो बोली, ‘‘लगता है, शाहजहां मुमताज को बहुत प्यार करता था.’’

‘‘हां, एकदम मेरी तरह रितु. अगर शाहजहां की तरह मैं भी अमीर होता तो अपने प्यार को अमर करने के लिए इसी तरह का रितुमहल बनवाता.’’

यह सुन कर रितु को हंसी आ गई. इस के बाद दोनों ताजमहल के अंदर पहुंचे. शाहजहां और मुमताज की कब्रों को देख कर रितु ने कहा, ‘‘ये तो मर कर भी एक साथ हैं.’’

माहौल गमगीन हो गया. पंकज ने कहा, ‘‘चलो, बाहर चल कर साथसाथ फोटो खिंचवाते हैं, जो जिंदगी भर हमें याद दिलाएंगे.’’

इस के बाद दोनों ने ताज के साए में कुछ फोटो खिंचवाए. वहां से वे बाजार गए, जहां कपडे़ वगैरह खरीदे. रात 9 बजे तक उन के कमरे का दरवाजा खुला रहा. इस के बाद दरवाजा बंद हुआ तो जब सुबह 10 बजे तक उन के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो सर्विस बौय गब्बर ने कई बार दरवाजा खटखटाया. जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो वह मैनेजर संजय कश्यप के पास पहुंचा. गब्बर ने जब मैनेजर संजय कश्यप को बताया कि कमरा नंबर 301 का दरवाजा काफी खटखटाने पर भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है तो संजय घबरा गए. भाग कर वह ऊपर पहुंचे. उन्होंने दरवाजे के की-होल से झांक कर देखा तो लड़की के पैर लटके दिखाई दिए.

माजरा समझ में आते ही वह सन्न रह गए. उन्होंने तुरंत होटल की मालकिन शारदा रानी को सारी बात बताई. शारदा रानी ने थाना रकाबगंज पुलिस को फोन कर के घटना की सूचना दी. सूचना मिलने के बाद सीओ असीम चौधरी और थाना रकाबगंज के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सतीशचंद्र यादव पुलिस बल के साथ होटल पहुंच गए. दूसरी चाबी से दरवाजा खोला गया तो अंदर की स्थिति देख कर सभी स्तब्ध रह गए. हरे रंग की नई रस्सी के दोनों छोरों पर फंदे बना कर पंखे के सहारे एक ओर एक लड़की लटकी हुई थी तो दूसरी ओर एक लड़का.

पुलिस ने कमरे की तलाशी ली. पलंग पर कुछ फोटोग्राफ्स मिले, जो ताजमहल पर खिंचवाए गए थे. बैग से कुछ गहनों के साथ मंगलसूत्र, कुछ रुपए और एक सुसाइड नोट भी मिला. पुलिस ने मामले की वीडियोग्राफी करा कर दोनों लाशों को नीचे उतरवाया. लड़की की मांग में सिंदूर भरा था. वह पैरों में बिछिया भी पहने थी. पुलिस ने सुसाइड नोट देखा तो उस में लिखा था, ‘ये फोटो हमारे प्यार की निशानी हैं, जो हम ने ताजमहल पर साथसाथ खिंचवाए थे. आप ने हमें जिंदगी जीने का जो मौका दिया था, शायद हमारी किस्मत नहीं था.

‘हम लोगों के बारे में कोई नहीं जानता कि हम कहां हैं. फिर भी रितु का यही कहना है कि हम लोग किसी को मुंह नहीं दिखा सकते. जब उस का यही फैसला है तो हम भी उस के साथ हैं.

‘हमें 2 दिन की जो जिंदगी मिली, शायद वही हमारी किस्मत थी. जो भी चुरा के घर से ले गए थे, सब आप को लौटा रहे हैं. हम ने जिंदगी में जो गलत किया, उस की कीमत हम अपनी जान दे कर चुका रहे हैं. जब हम ही नहीं होंगे तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि कौन जीता है या मरता है. हमें माफ करना या न करना, आप की मरजी.’

उन्होंने अपने इस सुसाइड नोट में साथसाथ दफनाने के लिए भी लिखा था. उन का कहना था कि वे इस जन्म में नहीं मिल सके तो कम से कम साथसाथ मर कर अगले जन्म में तो एक हो सकेंगे. सुसाइड नोट में उन्होंने दस्तखत करने के साथ फोन नंबर भी लिखे थे. पुलिस ने सुसाइड नोट में दिए नंबरों पर फोन कर के पंकज और रितु के आत्महत्या करने की सूचना दी तो कोई कुछ कहने को ही तैयार नहीं हुआ. वे आगरा आने को भी राजी नहीं थे. लेकिन न जाने क्या सोच कर सभी आने को राजी हो गए.

पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. शाम तक घर वाले आगरा पहुंचे तो पता चला कि सुसाइड करने वाले दोनों सगे मामाभांजी थे. उन के रिश्ते के बारे में जान कर सभी दंग रह गए. पोस्टमार्टम के बाद पंकज और रितु के शव घर वालों को सौंप दिए गए. घर वालों ने लाशें ले जाने के बजाय आगरा के ही विद्युत शवदाह गृह में दोनों का अंतिम संस्कार करा दिया. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में संतोष ने बताया कि उस ने पंकज को फोन किया था. तब उस ने यह नहीं बताया कि वह आगरा है. उस ने अगले दिन घर आने को कहा था.

दरअसल, उस दिन रितु अपने घर नहीं पहुंची तो शांतिस्वरूप ने ससुराल फोन कर के पूछा. जब उन्हें बताया गया कि रितु तो पंकज के साथ कब का निकल चुकी है, तब उन्हें समझते देर नहीं लगी कि रितु पंकज के साथ भाग चुकी है. दोनों ने जो किया था, उस से दोनों के घर वाले काफी नाराज थे. लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि वे इस तरह मौत को गले लगा लेंगे. लेकिन आशंका तो थी ही. फिर वही हुआ भी. बदनामी से बचने के लिए सभी चुप थे, लेकिन पंकज और रितु ने आत्महत्या कर के रिश्ते को कलंकित करने का ढिंढोरा पूरी दुनिया में पीट दिया. दरअसल, पंकज और रितु ने शादी करने का निर्णय ले लिया था. वे शादी कर के घर वालों से इतनी दूर चले जाना चाहते थे, जहां उन्हें जानने वाला कोई न हो और वे खुशीखुशी रह सकें.

पंकज ने रितु की मांग में सिंदूर भर कर शादी भी कर ली. लेकिन शादी करने के बाद दोनों को लगा होगा कि वे चाहे जहां भी रहें, हमेशा अपराधबोध से ग्रसित रहेंगे. यही नहीं, उन के बच्चों को जब उन के असली रिश्ते के बारे में पता चलेगा तो वे भी उन्हें माफ नहीं करेंगे. घर से भागने के बाद उन के घर लौटने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो चुका था. आगे भी उन्हें कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया. घरपरिवार और समाज से कट कर जीना भी आसान नहीं था. उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो वे डरे कि अब क्या होगा? कोई रास्ता न देख उन का जिंदगी से मोह भंग हो गया होगा.

मन में एक ही बात आई होगी कि इस जन्म में साथ नहीं जी सके तो मर कर अगले जन्म में तो मिल सकेंगे. अगले जन्म में मिलने की उम्मीद में उन्होंने फांसी लगा ली. पंकज और रितु ने रिश्तों को कलंकित करने की लक्ष्मणरेखा लांघी तो उस की सजा उन्हें जान दे कर चुकानी पड़ी. उन्होंने तो जान दे कर मुक्ति पा ली, लेकिन घर वालों को तो इस की सजा कम से कम 2 पीढि़यों तक भोगनी पड़ेगी. Agra News

 

Love Story in Hindi: दूसरे की प्रेमिका

Love Story in Hindi: प्राची खूबसूरत भी थी और अल्हड़ भी. वह लंच बौक्स सप्लाई का काम करती थी. इसी बीच उस की मुलाकात समीर रोहितकर से हुई और वह अपने पति से तलाक ले कर उस की हो गई. लेकिन बाद में जब प्राची की जिंदगी में प्रसाद मांडवकर आया तो…

25 वर्षीय प्रसाद प्रकाश मांडवकर मराठी दैनिक अखबारों का फ्रीलांस रिपोर्टर और फोटोग्राफर था. काम की वजह से उस के घर आनेजाने का कोई निश्चित समय नहीं था. लेकिन जब कभी लौटने में देरी होती थी, तो वह फोन कर के अपनी मां राधा को घर लौटने का समय बता देता था. रोजाना की तरह उस दिन सुबह भी वह काम पर जाने के लिए घर से तो निकला लेकिन वापस नहीं लौटा. जब वह न खुद आया और न उस का कोई फोन आया तो उस की मां राधा ने उसे फोन किया. लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ था. प्रसाद प्रकाश जिस पेशे में था, उस में देरसवेर होना या फोन बंद मिलना आम बात थी. इसलिए उस की मां राधा ने उसे दोबारा फोन नहीं किया.

लेकिन जब रात के 12 बज गए तो राधा को चिंता हुई. उस ने दोबारा बेटे का फोन ट्राई किया, लेकिन उस का फोन अब भी बंद था. देरसवेर भले ही हो जाती थी लेकिन ऐसा कभी नहीं होता था कि लगातार फोन बंद रहे. ऐसी स्थिति में राधा की परेशानी स्वाभाविक ही थी. राधा का मन नहीं माना तो वह बेटे की तलाश में घर से निकल पड़ी. उस ने अपनी चाल और बस्ती के रहने वाले प्रसाद प्रकाश के सारे दोस्तों से उस के बारे में पता किया. उस के एक दोस्त समीर ने उसे बताया कि प्रसाद रात 8 बजे के करीब उसे मिला था. लेकिन उस के बाद वह कहां गया, इस की उसे कोई जानकारी नहीं है.

राधा ने अपनी जानपहचान वालों और नातेरिश्तेदारों से भी फोन पर संपर्क कर के बेटे के बारे में पूछताछ की. जब प्रसाद मांडवकर के बारे में कहीं से कोई खबर नहीं मिली तो उस की मां राधा बुरी तरह घबरा गई. उस की चिंता बढ़ गई और भूखप्यास मर गई. किसी अनहोनी की आशंका से राधा के दिमाग में तरहतरह के विचार आने लगे. उस की घबराहट बढ़ती जा रही थी, निगाहें घर के दरवाजे पर टिकी हुई थीं. बाहर जरा सी भी आहट होती तो वह लपक कर घर के दरवाजे पर आ जाती. लेकिन जब कोई दिखाई नहीं देता तो मायूस हो कर अंदर चली जाती.

बेटे के लौटने की आशा लिए प्रसाद की मां राधा ने जैसेतैसे रात बिताई. सुबह होते ही वह अपने घर वालों के साथ थाना ताड़देव पहुंची और वहां मौजूद पुलिस अफसर से सारी बात बता कर प्रसाद मांडवकर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. यह 7 जनवरी, 2015 की बात है. शिकायत दर्ज करने के बाद पुलिस ने वायरलेस से यह सूचना अन्य थानों को दे दी. 8 जनवरी, 2015 को सुबह लगभग 10 बजे मुंबई के उपनगर घाटकोपर स्थित तिलक नगर पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर भगवत सोनावले को किसी राहगीर ने फोन पर जानकारी दी कि घाटकोपर-मानखुर्द रोड स्थित पी.डब्ल्यू.डी. कंपाउंड, तिलक ब्रिज के पास एक अज्ञात युवक की लाश पड़ी है.

सूचना मिलते ही तिलक नगर पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर भगवत सोनावले ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया और यह खबर कंट्रोल रूम को देने के बाद पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. घटनास्थल थाने से महज एक किलोमीटर दूर था इसलिए पुलिस को वहां पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगी. इस बीच इस घटना की खबर पूरे इलाके में फैल गई थी और घटनास्थल पर काफी लोगों की भीड़ एकत्र हो चुकी थी. पुलिस ने भीड़ को वहां से हटा कर घटनास्थल का निरीक्षण किया. लाश को ठीक से देखने के बाद पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से उस की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई भी मृतक को नहीं पहचान सका.

इस से यह बात स्पष्ट हो गई थी कि मृतक उस इलाके का रहने वाला नहीं था. निस्संदेह हत्यारों ने कहीं दूसरी जगह से ला कर वहां उस की हत्या की थी. मृतक के सिर और गले पर किसी तेजधार वाले हथियार के गहरे घाव थे. सीनियर इंसपेक्टर भगवत सोनावले अभी घटना का निरीक्षण और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ कर ही रहे थे कि सूचना पा कर क्राइमब्रांच के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर सदानंद दाते, अपर पुलिस कमिश्नर के.एम. प्रसन्ना, एडिशनल पुलिस कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी, असिस्टैंट कमिश्नर प्रफुल्ल भोसले और क्राइम ब्रांच यूनिट-7 के सीनियर इंसपेक्टर वांकट पाटील, इंसपेक्टर संजय सुर्वे, असिस्टेंट इंसपेक्टर अनिल ढोले अपने सहायकों के साथ घटना पर पहुंच गए. सभी ने तिलकनगर पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया.

इंसपेक्टर भगवत सोनावले ने घटनास्थल की जांच पड़ताल और औपचारिक काररवाई पूरी कर के मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए घाटकोपर के राजावाड़ी अस्पताल भेज दिया. शव के कपड़ों की तलाशी ले कर उन्होंने सील कर के अपने कब्जे में ले लिया. तत्पश्चात वे थाने लौट आए. थाने लौट कर वह मृतक की शिनाख्त में जुट गए. क्योंकि बिना उस की शिनाख्त के तफ्तीश की दिशा तय करना संभव नहीं था. इधर क्राइम ब्रांच यूनिट-7 के सीनियर इंसपेक्टर व्यंकट पाटील अपने सहायकों के साथ मामले की तफ्तीश और उस के विषय में विचारविमर्श कर रहे थे तो उधर क्राइम ब्रांच के उच्चाधिकारी भी चुप नहीं बैठे थे. एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी को जब लगा कि मृतक की शिनाख्त जल्दी होना संभव नहीं है तो उन्होंने उस की लाश की फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी.

इस का जल्दी ही नतीजा निकला. मृतक का फोटो सोशल मीडिया पर आते ही दैनिक मराठी सामना के एक रिपोर्टर ने मृतक को पहचान कर क्राइम ब्रांच यूनिट-3 के सीनियर इंसपेक्टर अरविंद सावंत को बताया कि मृतक का नाम प्रसाद प्रकाश मांडवकर है और वह मुंबई सेंट्रल (पश्चिम) का रहने वाला है. रिपोर्टर ने यह भी बताया था कि उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट ताड़देव पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है. उस रिपोर्टर की सूचना पर क्राइम ब्रांच यूनिट-3 के सीनियर इंसपेक्टर अरविंद सावंत ने मामले को तफ्तीश के लिए इंसपेक्टर अविनाश धर्माधिकारी, इंसपेक्टर दीपक चव्हाण, इंसपेक्टर संजय तिकुंव, सिपाही हसन मुजावर, नंद कुमार आड़ावकर, प्रकाश कोठालकर आदि को नियुक्त कर के इस की जानकारी एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी और असिस्टेंट कमिश्नर प्रफुल्ल भोसले को दे दी.

इंसपेक्टर अविनाश धर्माधिकारी ने तुरंत अपने सहायकों को साथ लिया और ताड़देव पुलिस थाने से जानकारी ले कर मृतक प्रसाद मांडवकर के घर पहुंच गए. जब मृतक प्रसाद मांडवकर की फोटो उस की मां राधा को दिखाई गई तो वह सन्न रह गई और छाती पीटपीट कर रोने लगी. जांच अधिकारियों ने उसे सांत्वना दे कर समझाया और प्रसाद मांडवकर का शव लेने के लिए राजाबाड़ी अस्पताल भेज दिया. मृतक की शिनाख्त हो गई तो जांच अधिकारियों का आधा सिरदर्द खत्म हो गया. लेकिन अब जो समस्या सामने थी, वह मृतक प्रसाद मांडवकर के हत्यारों को ले कर थी. लेकिन यह समस्या भी शीघ्र ही हल हो गई. क्राइम ब्रांच ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए मृतक की मां राधा से पूछताछ करने का फैसला किया.

इस बारे में राधा से पूछा गया तो उस ने बताया कि प्रसाद प्रकाश का न तो किसी से कोई लड़ाईझगड़ा था और किसी की देनदारी. यहां तक कि उस का कोई दुश्मन भी नहीं था. इस पर क्राइम ब्रांच के अफसरों ने राधा से प्रसाद के दोस्तों और रिश्तेदारों के पते और फोन नंबर लिए. लेकिन इस का कोई नतीजा नहीं निकला. क्राइम ब्रांच के पास अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा था कि प्रसाद मांडवकर के मोबाइल की सीडीआर (कौल डिटेल्स रिकौर्ड) चेक करे. जब उस के नंबर की सीडीआर निकलवाई गई तो उस के कई दोस्तों के नंबर सामने आए. जब उन नंबरों की गहराई से जांच की गई तो उन की नजर एक नंबर पर ठहर गई. वह नंबर प्रसाद के पड़ोस में रहने वाले उस के दोस्त समीर का था, जिस से वह गायब होने के कुछ घंटों पहले मिला था. उस ने प्रसाद माडंवकर की मां राधा को भी यही बताया था.

समीर ब्रीच कैंडी अस्पताल के सामने वाली इमारत में कार ड्राइवर की नौकरी करता था. समीर की पूरी कुंडली निकालने के बाद क्राइम ब्रांच ने उसे 10 जनवरी, 2015 को हिरासत में ले लिया. क्राइम ब्रांच के औफिस में ला कर उस से प्रसाद मांडवकर की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो पहले तो वह खुद को प्रसाद की हत्या से अनभिज्ञ बताता रहा. लेकिन वह जांच अधिकारियों के सवालों के आगे ज्यादा देर तक नहीं ठहर सका. अंतत: उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए प्रसाद मांडवकर की हत्या में सामिल अपने सभी साथियों के नाम पते बता दिए. समीर ने प्रसाद मांडवकर हत्याकांड की जो कहानी बताई, वह काफी चौंकाने वाली थी.

31 वर्षीय समीर रोहितकर मुंबई सेंट्रल (पश्चिम) के जरीवाला चाल में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के पिता का नाम वसंत रोहितकर था. परिवार में उस के मातापिता के अलावा 2 बहने थीं. उस के पिता भी कार ड्राइवर थे. परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी. इसलिए समीर रोहितकर कुछ खास पढ़लिख नहीं पाया था. जब समीर जवान हुआ तो पिता वसंत रोहितकर ने उसे भी कार ड्राइवरी का लाइसेंस बनवा कर ब्रीच कैंडी अस्पताल के पास रहने वाले एक व्यापारी के यहां नौकरी पर रखवा दिया.

वह व्यापारी समीर रोहितकर को अपने बेटे की तरह मानता था. जब कभी वह मुंबई के बाहर जाता था, तो अपनी कार समीर रोहितकर की हिफाजत में छोड़ जाता था. समीर रोहितकर जिस चाल में रहता था, उसी चाल में प्रसाद मांडवकर और प्राची के परिवार भी रहते थे. प्राची का परिवार काफी गरीब था. उस के पति की कोई खास आमदनी नहीं थी. विवाह के बाद प्राची जब उस घर में आई थी तो घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. लेकिन शादी के बाद प्राची ने अपनी मेहनत और परिश्रम से घर की स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया था. अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए वह हाउस कैटरिंग का काम करने लगी थी. वह अपने घर में अच्छा और स्वादिष्ट खाना बनवा कर काम धंधे वालों को पहुंचाने लगी थी.

प्राची जितनी सुंदर थी, उस से कहीं अधिक चंचल थी. उस ने महानगर पालिका के स्कूल से 8वीं पास की थी. उस की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह बहुत मिलनसार थी. वह जिस से भी बातचीत करती खुल कर करती थी और अपनी बातों से किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेती थी. शादी के बाद जब प्राची अपनी ससुराल आई थी, उस के कुछ दिनों बाद ही समीर का दिल उस पर आ गया था. सोतेजागते वह प्राची को ही सपने में देखने लगा था. वह जब भी कमसिन अल्हड़ प्राची को देखता तो उस के दिल की धड़कनें बढ़ जाती थीं. वह उस की नजदीकी पाने के लिए छटपटा उठता था.

कहते हैं कि जहां चाह होती है, वहां राह निकल ही आती है. समीर रोहितकर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. प्राची एक कर्मठ महिला थी. वह अपने परिवार और घर की स्थिति को सुधारने के लिए हाउस कैटरिंग का काम करती थी, उसी हाउस कैटरिंग के सहारे समीर प्राची के करीब पहुंच गया. दरअसल समीर ने अपने घर का लंचबौक्स लाना बंद कर के प्राची का लंच बौक्स मंगवाना शुरू कर दिया. फिर इसी बहाने वह कभीकभी प्राची के घर भी खाना खाने जाने लगा. जल्दी ही वह उस के परिवार वालों से घुलमिल गया. जरूरत पड़ने पर वह उस के परिवार की आर्थिक मदद भी करने लगा था.

प्राची भी कोई बच्ची नहीं थी. वह समीर रोहितकर के मन की बातों को अच्छी तरह समझने लगी थी. समीर रोहितकर को अपनी तरफ आकर्षित होते देख कर धीरेधीरे वह भी उस की तरफ खिंचती चली गई. दोनों के दिलों में जब एकदूसरे के लिए प्रेम के अंकुर फूटे तो जल्दी ही वह समय भी आ गया, जब दोनों का एकदूसरे के बिना रहना मुश्किल हो गया. यह स्थित आई तो दोनों अपने आप को रोक नहीं पाए और मौका पाते ही एकदूसरे की बांहों में समा गए. दोनों ने एक ही झटके में सारी मर्यादाएं तोड़ डालीं. एक बार जब सीमाएं टूटीं तो फिर दोनों की नजदीकियां बढ़ती ही गईं. अब जब भी प्राची और समीर को मौका मिलता तो दोनों अपने तनमन की प्यास बुझा लेते. दोनों के बीच यह सिलसिला 2 साल तक चुपचाप चलता रहा. इस बीच उन के संबंधों के बारे में कोई नहीं जान सका.

इश्क और मुश्क अधिक दिनों तक छिपाए नहीं छिपता. धीरेधीरे पड़ोसियों में जब इस बात की चर्चा होने लगी तो उड़तेउड़ते यह खबर प्राची के परिवार और उस के पति के कानों तक भी जा पहुंची. हकीकत जान कर उस के पति के होश उड़ गए. प्राची के पति को यह बात तो मालूम थी कि समीर रोहितकर उस की पत्नी के हाथों के बने लंच बौक्स का खाना खाता है और उस के घर भी आताजाता है. लेकिन खाना खाने के बहाने समीर का उस की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध हो जाएगा, यह उस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था. मामला नाजुक था. शोरशराबे से बदनामी हो सकती थी. इसलिए उस ने प्राची को शांति से समझाना चाहा. लेकिन प्राची ने पति की बातों को न समझ कर पूरा घर सिर पर उठा लिया. वह उलटा अपने पति पर ही बरस पड़ी और उसे काफी खरीखोटी सुनाई. प्राची पर जब पति के समझाने का कोई असर नहीं हुआ तो उस के पति ने उसे तलाक दे दिया. यह बात 2005 की थी.

पति से तलाक होने के बाद प्राची भायखाला आ कर रहने लगी. यहां वह समीर रोहितकर से खुल कर मिलती थी. हालांकि समीर प्राची से शादी नहीं की थी, लेकिन दोनों पतिपत्नी की तरह रहने लगे थे. समीर प्राची की सभी जरूरतों को पूरी करता था. उस के अलावा प्राची ने अपना कैटरिंग का काम भी चालू रखा था. समय पंख लगा कर उड़ता रहा. धीरेधीरे प्राची और समीर को साथसाथ रहते और मौजमस्ती करते हुए 8 साल गुजर गए. लेकिन 2013 में इस हवा का रुख बदला और प्राची समीर की बांहों को छोड़ कर प्रसाद मांडवकर की बांहों में आ गई. यह बात जब समीर रोहितकर को पता चली तो उस का खून खौल उठा. वह प्रसाद मांडवकर के खून का प्यासा हो गया.

प्रसाद मांडवकर भी उसी चाल में रहता था, जिस चाल में समीर रोहितकर रहता था. दोनों बचपन के दोस्त थे. दोनों एक साथ खेलेकूदे और जवान हुए थे. प्रसाद मांडवकर के पिता प्रकाश मांडवकर की मृत्यु हो चुकी थी. मां राधा ने उसे मेहनतमशक्कत करके पालापोसा और उसे पढ़ायालिखाया था. प्रसाद मांडवकर महत्त्वाकांक्षी युवक था. वह पढ़लिख कर जवान हुआ तो उस का झुकाव नौकरी या किसी व्यवसाय की तरफ नहीं था. इस की जगह उस ने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया और मराठी दैनिक अखबारों में फ्रीलांस फोटोग्राफी और न्यूज रिपोर्टिंग करने लगा. धीरेधीरे उस की कई मराठी न्यूज रिपोर्टरों और फोटोग्राफरों से जानपहचान हो गई.

प्रसाद मांडवकर ने जब कई बार प्राची और समीर रोहितकर को एकदूसरे से मिलतेजुलते मौजमस्ती करते देखा, तो उस का दिल भी प्राची के लिए धड़कने लगा. न चाहते हुए भी वह धीरेधीरे प्राची की तरफ झुकने लगा. प्राची की सुंदरता और उस के व्यवहार से प्रसाद मांडवकर की भी वही हालत हुई जो कभी समीर रोहितकर की हुई थी. फलस्वरूप प्रसाद मांडवकर का दिल भी प्राची की नजदीकियां पाने के लिए तड़प उठा. उस ने भी प्राची को पाने के लिए वही रास्ता अपनाया जो कभी समीर रोहितकर ने अपनाया था.

उस ने समीर रोहितकर से प्राची का मोबाइल नंबर ले लिया और अगले दिन ही अपने लिए प्राची का लंच बौक्स मंगवाने के बहाने उस से बातचीत शुरू कर दी. शुरूशुरू में प्राची ने प्रसाद मांडवकर को लंच बौक्स भेजने के अलावा उस की और कोई ध्यान नहीं दिया. लेकिन जब प्रसाद उस के लंच बौक्स और उस के रूप सौंदर्य की खुल कर तारीफ करने लगा तो प्राची को भी उस की बातें अच्छी लगने लगीं. नतीजतन वह भी प्रसाद की बातों का जवाब उसी की तरह देने लगी.

औरत हमेशा अपने रूप सौंदर्य और अपनी तारीफों की भूखी होती है. प्रसाद मांडवकर ने इस का लाभ उठाया. प्राची का प्रोत्साहन मिलते ही वह उस के करीब आने की कोशिश करने लगा. धीरेधीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगीं. नजदीकियां बढ़ीं तो दोनों फोन पर खूब बातें करने लगे. इतना ही नहीं प्रसाद अब लंच बौक्स मंगाने के बजाए उसी के घर जा कर लंच करने लगा. कभीकभी वह उसे अपने साथ घुमाने भी ले जाने लगा. प्राची जब सुंदर स्वस्थ और मजबूत कदकाठी वाले प्रसाद मांडवकर की तरफ आकर्षित हुई तो समीर रोहितकर को वह नजरअंदाज करने लगी. प्राची को अब समीर रोहितकर की बांहों में वह आनंद नहीं मिलता था, जो प्रसाद मांडवकर की बांहों में मिलता था.

उसे अब समीर रोहितकर की बांहों से मजबूत बांहें प्रसाद मांडवकर की लगने लगी थीं. कुछ दिनों बाद जब समीर रोहितकर को प्रसाद मांडवकर और प्राची के मधुर संबंधों की जानकारी हुई तो वह बौखला उठा. इस बात को ले कर उस ने जब प्राची को आड़े हाथों लिया तो वह उस पर बरस पड़ी. उस ने समीर को बताया कि प्रसाद से उस का रिश्ता भाईबहन जैसा है. लेकिन समीर को प्राची की बातों पर जरा भी विश्वास नहीं हुआ. वह यह बात अच्छी तरह जान चुका था कि प्रसाद मांडवकर और प्राची के बीच कुछ अलग ही तरह के संबंध हैं.

आखिरकार उन दोनों के रिश्तों की सच्चाई जानने के लिए समीर प्रसाद मांडवकर से मिला और उस के व प्राची के संबंधों के बारे में पूछा. साथ ही उस ने उसे अपने और प्राची के बीच से निकल जाने के लिए भी कहा. लेकिन प्रसाद ने उस की बात मानने से इनकार करते हुए कहा कि प्राची अब उस की प्रेमिका है. प्रमाण के लिए प्रसाद ने उसे अपने नजदीकी संबंधों के कुछ फोटोग्राफ्स भी दिखाए जिनमें वे दोनें साथसाथ थे. यह देखकर समीर ने गुस्से में कहा, ‘‘प्रसाद, यह तुम ने ठीक नहीं किया. दोस्त हो कर दोस्त की पीठ में छुरा घोंपना ठीक नहीं है.’’

इस बात पर प्रसाद को भी गुस्सा आ गया. वह बोला, ‘‘यह सब कहने से पहले अपने गिरेबान में झांको. तुम ने कौन अच्छा किया था? एक सीधेसादे आदमी का घरबार बरबाद करने वाले तुम ही थे न? वह कौन सी तुम्हारी पत्नी है जो तुम उस के लिए मरे जा रहे हो. जो तुम कर रहे हो वही मैं भी कर रहा हूं. इस में बुरा मानने वाली बात क्या है?’’

अपने घर लौट कर प्रसाद मांडवकर तो रिलेक्श हो गया लेकिन समीर रोहितकर को रातभर नींद नहीं आई. उसे प्रसाद मांडवकर की कही बातें कांटों की तरह चुभ रही थीं. रातभर सोचने के बाद उस ने प्रसाद को अपने और प्राची के बीच से निकाल फेंकने का खतरनाक फैसला कर लिया. लेकिन यह काम उस के अकेले के बस की बात नहीं थी. इसलिए उस ने इस काम में अपने 2 दोस्तों की मदद लेने की सोची. इस काम के लिए उस ने अपने दोस्त रोहित वंगर और जार्ज फर्नांडीस से बात की. दोनों उस के खास दोस्त थे. उस की बात सुन कर वह खुशीखुशी उस का साथ देने के लिए तैयार हो गए. जार्ज फर्नांडीस मुंबई स्थित ब्रीच कैंडी अस्पताल के पास एक सैंडविच और जूस सेंटर पर नौकरी करता था, जहां समीर अकसर अपने मालिकों के लिए सैंडविच और जूस लेने आताजाता था.

यहीं पर रोहितकर से उस की दोस्ती हुई थी. जार्ज फर्नांडीस के पिता वहीं की एक इमारत में कार ड्राइवरी करते थे. वह अपने पिता के लिए उसी दुकान पर उन का लंच बौक्स ले कर आता था. सैंडविच और जूस सेंटर पर ही तीनों की मुलाकातें होती थीं. तीनों गहरे दोस्त बन गए थे. अब समीर रोहितकर को इंतजार था एक ऐसे मौके का जब वह अपना काम आसानी से कर सके. उसे यह मौका घटना वाले दिन मिल गया. संयोग से उस दिन समीर रोहितकर के मालिक किसी काम से मुंबई से बाहर चले गए थे. उन की कार 24 घंटों के लिए समीर के हाथों मे ंआ गई थी. निस्संदेह उस के लिए यह एक अच्छा मौका था. समीर रोहितकर ने जार्ज फर्नांडीस और रोहित वंगर से फोन पर बात की और प्रसाद मांडवकर को सारे गिले शिकवे भुला कर सैंडविच सेंटर पर आने के लिए कहा.

जिस वक्त प्रसाद मांडवकर सैंडविच सेंटर पर पहुंचा, उस समय समीर रोहितकर अपने मालिक की कार लिए खड़ा था. उस ने प्रसाद मांडवकर को बड़े प्यार से अपनी कार में बैठा लिया और इधरउधर की बातें करने लगा. इसी बीच समीर ने अपने दोस्त जार्ज फर्नांडीस को इशारा किया. जार्ज फर्नांडीस ने प्रसाद मांडवकर को पीने के लिए जूस का गिलास ला कर दिया जिस में योजनानुसार नींद की गोलियां मिली हुई थीं. जूस पीने के थोड़ी देर बाद जब उस पर खुमारी छाने लगी तो अपनी योजना के अनुसार समीर ने कपड़ा धोने वाले डिटर्जेंट के पाउडर और बोरिक ऐसिड से बनाया गया इंजेक्शन अपने दोस्तों की मदद से प्रसाद मांडवकर के गले में लगा दिया. उन का मानना था कि इस इंजेक्शन से प्रसाद मांडवकर की मौत हो जाएगी और किसी को उस की मौत के कारणों का पता भी नहीं चलेगा.

लेकिन जब उन की यह योजना फेल हो गई तो समीर बेहोश प्रसाद को देर रात गए अपने दोस्तों के साथ कार में ले कर चेंबूर, घाटकोपर, तिलक नगर इलाके की तरफ निकल गया. इन लोगों ने तिलक नगर पीडब्ल्यूडी कंपाउंड की सुनसान जगह पर जा कर प्रसाद मांडवकर को कार से बाहर निकाला और कंपाउंड की दीवार के सहारे सीधा खड़ा कर के उस के गले पर चापर से वार कर दिया. इस के बाद उन्होंने प्रसाद के कपड़ों की तलाशी ली. उन्होंने उस की जेब से शिनाख्त के सारे कागजात और उस का मोबाइल निकाल लिया और वहां से लौट आए.

समीर रोहितकर और उस के दोनों दोस्त यह मान कर चल रहे थे कि पहले तो प्रसाद मांडवकर की लाश किसी को मिलेगी ही नहीं और अगर मिल भी गई तो उस की शिनाख्त होनी असंभव थी. मगर यह उन की भूल थी. कुछ ही घंटों बाद किसी राहगीर ने लाश की सूचना तिलकनगर पुलिस थाने को दे दी थी. फलस्वरूप पुलिस ने उस की लाश बरामद कर ली थी. क्राइम ब्रांच ने समीर रोहितकर के साथसाथ उस के दोस्त रोहित वंगर ओर जार्ज फर्नांडीस को अपनी गिरफ्त में ले लिया. यह खबर जब प्राची को मिली तो वह सन्न रह गई. समीर बंसत रोहितकर, रोहित विश्वनाथ और जार्ज अरुण फर्नांडीस से विस्तृत पूछताछ करने के बाद क्राइम ब्रांच ने उन्हें महानगर मेटोपौलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इस केस की जांच तिलकनगर पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर भगवत सोनावले कर रहे हैं. तीनों अभियुक्त जेल में हैं. Love Story in Hindi

कथा में प्राची का नाम काल्पनिक है और कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है.

 

Extramarital Affair: पति बदलने की फितरत कहीं नहीं मिला सुकून

Extramarital Affair: सुबह का आगाज होते ही शिवनगर में  लोगों की दिनचर्या शुरू हो गई थी. सड़क पर लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी. इसी के साथ हत्या की एक सनसनीखेज घटना ने माहौल में गरमाहट पैदा कर दी. इस की सूचना पुलिस को दी गई तो थानाप्रभारी से ले कर एसपी तक हत्या की सूचना पा कर मौके पर पहुंच गए थे. दरअसल, 17 नवंबर, 2021 की सुबह जनकगंज थाने के अतंर्गत आने वाले शिवनगर में खबर फैली कि दुष्कर्म के बाद किसी ने बबली कुशवाहा की गला घोंट कर हत्या कर दी है. इस मामले में अफवाह जंगल की आग की तरह इतनी तेजी से फैली कि थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ लग गई.

इस भीड़ में क्षेत्रीय पार्षद से ले कर राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता तक शामिल थे, जो इस हत्या को ले कर आपस में कानाफूसी करने में मशगूल थे. लेकिन उन में से किसी में भी इतनी हिम्मत नहीं थी जो मकान मालिक से पूछता कि अचानक किस ने बबली की हत्या कर दी? इन सभी में इस घटना को ले कर काफी नाराजगी थी. वे सभी बबली के हत्यारे को तत्काल पकड़ने की मांग कर रहे थे.

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे थानाप्रभारी ने महिला की हत्या के मामले से पुलिस के आला अधिकारियों को अवगत करा दिया. इसी सूचना पर थोड़ी देर में एसपी अमित सांघी, एएसपी सतेंद्र सिंह तोमर, सीएसपी आत्माराम शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. मामला दुष्कर्म की आशंका और हत्या का था, पुलिस अफसरों ने सब से पहले बबली के कमरे के बाहर खड़ी भीड़ को हटाया और उस के बाद घटनास्थल का गहनता से निरीक्षण किया. एएसपी सतेंद्र सिंह तोमर और सीएसपी आत्माराम शर्मा ने जनकगंज थानाप्रभारी संतोष यादव के साथ कमरे के भीतर जा कर सब से पहले चारपाई पर अस्तव्यस्त हालत में पड़े बबली के शव को गौर से देखा तो पता चला कि मृतका की हत्या दुपट्टे से गला घोट कर की गई थी.

मृतका के गले में दुपट्टा कसा हुआ था. कमरे की तलाशी ली तो घटनास्थल पर नमकीन, चिप्स, कंडोम, बीयर की बोतल आदि के खुले पैकेट मिले. संदिग्ध वस्तुओं को देख कर पुलिस को कुछ संदेह हुआ. इसी के मद्देनजर एक महिला कांस्टेबल को बुला कर बबली के सारे शरीर का निरीक्षण कराया गया. पता चला कि मृतका के शरीर से कीमती जेवर गायब थे. घटनास्थल के निरीक्षण में सदिग्ध वस्तुएं मिलने से पुलिस टीम के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि बबली और हत्यारे के मध्य यौन संबंध रहे होंगे और किसी बात पर विवाद होने पर हत्यारे ने उस के दुपट्टे से उस का गला घोट दिया होगा.

बबली की हत्या का दुखद समाचार सुन कर उस की मां और भाई भी वहां पहुंच गए थे, उन्होंने बबली के शव को देखा तो पता चला कि उस के कान के बाले, मंगलसूत्र, मोबाइल और 5 हजार रुपए गायब हैं. चूंकि यह सब कीमती सामान था, इसलिए इस मामले में लूटपाट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था. कुल मिला कर यह मामला काफी उलझा हुआ लग रहा था. आगे बढ़ने के लिए थानाप्रभारी संतोष यादव ने बारीकी से घटनास्थल पर पड़ी एकएक चीज का जायजा लेना शुरू किया. बबली का अस्तव्यस्त हालत में शव चारपाई पर पड़ा था. शव के निकट ही संदिग्ध वस्तुएं पड़ी हुई थीं.

मृतका के गले में दुपट्टा लिपटा हुआ था, जिसे देख कर उन्होंने अनुमान लगाया कि हत्यारे ने दुपट्टे से बबली की हत्या की होगी. थानाप्रभारी ने क्राइम टीम को फोन कर के घटनास्थल पर बुला लिया था. इस के बाद बबली के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया. साथ ही घटनास्थल पर मौजूद संदिग्ध वस्तुओं को अपने कब्जे में ले कर संतोष यादव थाने लौट आए और हत्या के इस मामले के खुलासे के लिए एसपी अमित साहनी ने एसपी (सिटी) लश्कर आत्माराम शर्मा के निर्देशन में एक टीम बनाई. टीम में थानाप्रभारी संतोष यादव, एसआई पप्पू यादव आदि को शामिल किया गया.

थानाप्रभारी संतोष यादव ने हत्या की तह में जाने के लिए बबली की मकान मालकिन गीता से भी गहन पूछताछ की. उस ने बताया कि 13 नवंबर को ही बबली ने कमरा किराए पर लिया था. यहां वह अकेली रहती थी. उस का पति गांव में रहता था. उस से उस की अनबन चल रही थी. बबली की पहली शादी 2003 में लक्ष्मण कुशवाहा से हुई थी. शादी के 8 साल बाद ही उस का पति से तलाक हो गया था. पहले पति से उस के एक बेटी रितिका है. बेटी पहले पति के साथ ही रहती है. इस के बाद बबली ने 2015 में चीनौर के घरसौंदी में रहने वाले धर्मवीर कुशवाहा से दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन आजादखयालों की बबली की अपने दूसरे पति से भी नहीं बनी और झगड़े होने लगे. जिस वजह से उस ने दूसरे पति को भी छोड़ दिया था. उस का दूसरा पति बेटे कार्तिक के साथ घरसौदी में रहता है.

गीता ने आगे बताया कि सुबह उठने पर जब उन्हें बबली दिखाई नहीं दी तो उन्हें हैरानी हुई. क्योंकि रोजाना वह उन से पहले उठ कर नल पर पानी भरने आ जाती थी. उन की समझ में नहीं आया कि बबली को क्या हो गया, जो आज वह इतनी देर तक सो रही है? बबली को जगाने के लिए उन्होंने आंगन में खडे़ हो कर कई बार आवाज लगाई. बबली ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो वह उसे जगाने के लिए उस के कमरे के दरवाजे को धकेलते हुए जैसे ही कमरे के भीतर दाखिल हुई, वहां का नजारा देख कर उस के होश उड़ गए.

मकान मालकिन ने बताया कि बबली बिस्तर पर मृत पड़ी थी. उस के गले में दुपट्टा कसा हुआ था और मुंह व नाक से खून बह रहा था. यह देख कर वह चीखती हुई बाहर की तरफ दौड़ी. उस की चीख सुन कर आसपड़ोस के लोग आ गए. सभी ने कमरे के भीतर जा कर चारपाई पर बबली का शव पड़ा हुआ देखा. मगर किसी की समझ में नहीं आया कि आखिर हत्या किस ने कर दी. मकान मालकिन के बयान से पुलिस अधिकारियों ने अंदाजा लगाया कि बबली की हत्या करने वाला उस का कोई पूर्व परिचित था. इस की वजह यह थी कि बबली किसी अंजान के लिए दरवाजा नहीं खोलती थी. अत: थानाप्रभारी द्वारा अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 302 भादंवि के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

तहकीकात को गति देने  के लिए संतोष यादव ने सब से पहले साइबर सेल के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से बबली के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की तो पता चला कि एक ही नंबर से बबली के मोबाइल पर बारबार फोन किए गए थे. शक होने पर उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो पता चला वह मोबाइल नंबर डबरा के रहने वाले प्रेम कुशवाहा का था. उस का नाम और पता मिल गया तो संतोष यादव की टीम ने पे्रम के घर पर दबिश दी. लेकिन वह घर से गायब मिला. फिर उस के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया तो उस की लोकेशन मिल गई. पुलिस ने उसे लक्ष्मीगंज सब्जीमंडी के पीछे स्थित संजय नगर से हिरासत में ले लिया.

प्रेम कुशवाहा को जनकगंज थाने ला कर  थानाप्रभारी ने उस से कहा, ‘‘तुम ने सोचा कि तुम से चालाक इस शहर में कोई दूसरा नहीं है. बबली को मार कर इत्मीनान से उस के गहने आदि समेट कर वहां से निकल लिए.’’

सख्ती से पूछताछ की गई तो थोड़ी आनाकानी के बाद उस ने स्वीकार कर लिया कि बबली की गला घोट कर हत्या उसी ने की थी. पे्रम ने हत्या की जो कहानी बताई, वह कुछ इस प्रकार थी—

प्रेम कुशवाहा ने पुलिस को यह भी बताया कि उस की बबली से दोस्ती 5 महीने पहले एक मिस्ड काल के जरिए हुई थी. बबली का मिस्ड काल उस के पास आई तो उस ने पलट कर काल की. इस के बाद हम दोनों में बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया. इस तरह उन दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं. फिर जल्दी ही इश्क के मुकाम तक पहुंच कर अवैध संबंधों में बदल गई. उन्हें जब भी मौका मिलता, जिस्म की प्यास बुझा लेते थे. अपने प्रेमी प्रेम कुशवाहा से सहजता से मिलने के मकसद से बबली ने हाल ही में शिवनगर में गीता शर्मा के मकान में एक कमरा किराए पर लिया था.

16 नवंबर की रात को प्रेम बबली से मुलाकात करने उस के कमरे पर गया था. बातों ही बातों में बबली ने उस से कहा, ‘‘अगर तुम मेरे जिस्म का आनंद लेना चाहते हो तो तुम्हें आज ही 10 हजार रुपया देने होंगे.’’

बबली के मुंह से पैसों की बात सुन कर प्रेम चौंक गया. उस ने उस से कहा कि अभी तो उस के पास पैसे नहीं हैं तो वह कहने लगी कि यदि अभी रुपया नहीं दोगे तो वह रेप के आरोप में उसे आज ही जेल भिजवा देगी. उन दोनों में इसी बात को ले कर कुछ ज्यादा ही कहासुनी हो गई. बात इतनी बढ़ गई कि प्रेम को गुस्सा आ गया और उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया. जाते वक्तपुलिस को गुमराह करने के लिए बबली के कान के बाले, मंगलसूत्र, मोबाइल फोन और उस के पर्स से रुपए निकाल कर वहां से फरार हो गया था, जिस से पुलिस लूट के लिए हत्या मान कर पड़ताल करती रहे.

प्रेम कुशवाहा को क्या पता था कि वह  बबली के जेवर बेच कर मौज करने के बजाए जेल चला जाएगा. पुलिस ने बबली के प्रेमी की निशानदेही पर बबली के गहने, मोबाइल फोन बरामद कर उसे अदालत में पेश किया तो जज के सामने भी उसने अपना अपराध बिना किसी पछतावे के स्वीकार कर लिया. प्रेम कुशवाहा को अदालत में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया. भोलाभाला दिखने वाला शातिर हत्यारा प्रेम कुशवाहा अब सलाखों के पीछे है.द्य

Romantic Love Story: एक फूल दो माली – प्रेमियों की कुर्बानी

Romantic Love Story: उत्तर प्रदेश की मोहब्बत की नगरी आगरा का एक थाना है एत्माद्दौला. इसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत फाउंड्री नगर स्थित यमुना किनारे सुबह एक युवक का शव पड़ा मिला. देखतेदेखते वहां लोग एकत्र हो गए. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय मय पुलिस टीम के घटनास्थल पर पहुंच गए. यह बात 22 नवंबर, 2021 की है. थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय जिस समय वहां पहुंचे, उस समय वहां लोगों की भीड़ जुट चुकी थी. उन्होंने भीड़ को हटाते हुए शव व घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

मृतक युवक की उम्र 25-26 साल के लगभग थी. युवक के शरीर पर चोट के निशान थे. शव देखने से ऐसा लग रहा था कि युवक की मारपीट कर हत्या करने के बाद शव को यहां ला कर फेंका गया था. मृतक की जामातलाशी में उस की जेब से एक लव लैटर (प्रेमपत्र) व डाक्टर की परची मिली. लव लैटर पर मृतक का मोबाइल नंबर भी लिखा था. लेकिन मोबाइल नहीं मिला. मृतक के पास से ऐसा कुछ नहीं मिला, जिस से उस की शिनाख्त हो सके. पुलिस ने लोगों से शव की शिनाख्त कराने का भी प्रयास किया, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं सका.

थानाप्रभारी ने जानकारी दे कर उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया. मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने शव को मोर्चरी भिजवा दिया. अब पुलिस के सामने सब से बड़ा प्रश्न युवक की शिनाख्त का था. पुलिस की कोशिश थी कि जल्दी से शव की शिनाख्त हो जाए, ताकि हत्या का राज उजागर हो सके और हत्यारे पकड़े जा सकें. पुलिस ने लव लैटर पर अंकित मोबाइल नंबर की कालडिटेल्स निकलवाई. इस में कई नंबर मिले. एक नंबर आगरा निवासी मृतक के चाचा भोला का व एक नंबर जीजा अखिलेश कुमार का भी था. 23 नवंबर को पुलिस ने अखिलेश को फोन किया. इस संबंध में पूछताछ करने के बाद उन्हें थाने बुला लिया.

पुलिस ने उन्हें एक युवक का शव यमुना किनारे मिलने की जानकारी दी. बाद में परिजनों ने मोर्चरी जा कर शव की पहचान शाहगंज के नगला मोहन निवासी 25 वर्षीय सनी के रूप में की. शव की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने 24 नवंबर को शव का पोस्टमार्टम कराया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटना व चोटों से होना आया था. इस से स्पष्ट हो गया कि हत्यारों ने युवक के साथ मारपीट कर गला दबा कर हत्या कर दी थी. इस के बाद सनी के पिता मुकेश ने एत्माद्दौला थाने में 27 नवंबर को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बेटे को रेखा नाम की एक महिला ने फोन कर पार्टी के बहाने बुलाया था.

इस के बाद अपने साथी के साथ मिल कर हत्या कर दी. साक्ष्य मिटाने के लिए शव को ला कर यमुना किनारे फेंक दिया. इस संबंध में हत्या, साक्ष्य मिटाने और एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस इस हत्याकांड में साक्ष्य जुटाने के काम में लग गई. पता चला कि मृतक सनी के पिता मुकेश अपनी पत्नी के साथ हरियाणा में रहते हैं. आगरा में उन के बेटे सनी और विक्की रहते थे. सनी के लापता होने की जानकारी मिलने पर वे आगरा आ गए थे.

पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि 21 नवंबर की सुबह 11 बजे जब सनी अपने चाचा भोला के साथ बैठा था. तभी उस के मोबाइल पर बोदला निवासी रेखा ने काल की और पार्टी के लिए बोदला बुलाया था. रेखा ने सनी को अपने साथ मुकेश जाट के भी होने की जानकारी दी थी. फोन आने के बाद सनी चला गया था.

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21 नवंबर की शाम 6 बजे सनी ने मुकेश जाट के मोबाइल से अपनी मां से बात की थी. उस ने मां से हालचाल पूछने के बाद बताया था कि वह मुकेश और रेखा के साथ है. कुछ देर में घर आ जाएगा. उस ने मां को बताया कि उस के मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया है. आप भाई व चाचा को यह बात बता देना. दूसरे दिन दोपहर में रेखा सनी के घर पहुंची. उस ने भोला की पत्नी यानी सनी की चाची को सनी का कीपैड वाला मोबाइल दिया. उस मोबाइल में सिम और चिप नहीं थी. रेखा ने बताया कि सनी सिमकार्ड निकाल कर फैक्ट्री चला गया है. उस से यह मोबाइल घर पर देने को कहा.

जब सनी रात में घर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई. इस पर परिजनों ने फैक्ट्री जा कर सनी को तलाशा. लेकिन उन्हें सनी नहीं मिला. पुलिस ने पूछताछ करने के साथसाथ अपने तौर पर मामले की छानबीन शुरू की. पुलिस को कुछ लोगों ने बताया कि सनी को मुकेश जाट, रेखा व 2 अन्य युवकों के साथ घटना की शाम आटो में बैठे देखा था. इस पर उन्हें टोका भी था. तब मुकेश ने कहा था कि पार्टी करने जा रहे हैं. इस के बाद वे लोग आटो में बैठ कर चले गए थे.

शक की सुई रेखा पर आ कर टिक गई. फोन लोकेशन के आधार पर कई लोगों से पूछताछ की. 3 दिसंबर को पुलिस ने टेढ़ी बगिया स्थित अंबेडकर पार्क से महिला रेखा को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उस के पास से एक मोबाइल बरामद किया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस थाने लौट आई. थाने में उस से कड़ाई से पूछताछ की गई. तब रेखा ने सनी की हत्या का जुर्म कुबूल करते हुए हत्या में शामिल 3 अन्य लोगों के नाम बताए. इन में रेखा का प्रेमी मुकेश जाट के अलावा उस के 2 दोस्त विशाल व पवन राठौर भी शामिल थे.

तब इन में से एक आरोपी विशाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह निकली—

मुकेश जाट मूलरूप से भड़ाका, हाथरस का निवासी है. उस के मातापिता की मौत हो चुकी है. उस की एक बहन है. वह आगरा में नगला जगजीवनराम में रहता है. यहां आ कर आटो चलाने का काम करने लगा. उस की दोस्ती एक साल पहले बोदला निवासी रेखा से हुई थी. हुआ यह कि रेखा एक जूता फैक्ट्री में काम करती थी. मुकेश अपने आटो से रेखा को उस के घर से फैक्ट्री लाने ले जाने का काम करता था. इस के चलते दोनों में दोस्ती हो गई. जो धीरेधीरे प्यार में बदल गई. रेखा के पहले पति की मौत हो चुकी थी. पहले पति से 11 साल का एक बेटा है. पहले पति की मौत के बाद रेखा की दूसरी शादी रमेश से हो गई थी. रेखा अपने बेटे के साथ रमेश के साथ रहने लगी.

रेखा मनमौजी थी. वह रमेश का कहना भी नहीं मानती थी. उस के मन में जो आता, वह करती. रमेश रेखा की आदतों से परेशान रहता था. लेकिन चाह कर भी उस से कुछ कह नहीं पाता था. जिस जूता फैक्ट्री में रेखा काम करती थी, उसी में सनी भी दूसरे विभाग में काम करता था. एक महीने पहले सनी की नजर रेखा पर पड़ गई. चंचल और सुंदर रेखा सनी को भा गई. दोनों एक ही फैक्ट्री में काम करते थे. इसी दौरान दोनों में बातचीत हो जाती थी. इस के बाद दोनों की दोस्ती हो गई. दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. दोनों घंटों मोबाइल पर एकदूसरे से अपने दिल की बात करने लगे.

घटना से कुछ दिन पहले रेखा के प्रेमी मुकेश जाट ने अपनी प्रेमिका को फोन पर हंसहंस कर बात करते देख लिया. उस के तनबदन में आग लग गई. उस की प्रेमिका इतना हंसहंस कर किस के साथ बात कर रही है. उस ने रेखा से इस बारे में जब पूछा तो रेखा अंदर ही अंदर डर गई. बात घुमाते हुए उस ने बताया कि उसी की फैक्ट्री में काम करने वाला सनी था, जो उसे बारबार फोन करता है. वह उस से दोस्ती करना चाहता है. मुकेश रेखा से बहुत प्यार करता था. उस पर पैसा भी बहुत खर्च करता था. उस की हर फरमाइश पूरी करता था. उसे अपनी प्रेमिका के किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते देखना बहुत नागवार गुजरा. उस ने रेखा से कहा कि वह सनी से बात करना बंद कर दे. रेखा ने वायदा किया कि वह सनी से बात नहीं करेगी.

कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा, रेखा ने सनी से बात नहीं की. आग दोनों के दिलों में लगी हुई थी. रेखा और सनी आपस में फिर मिलने और बात करने लगे. इस पर मुकेश ने रेखा के जरिए सनी को पार्टी के बहाने बोदला बुलवाया. मुकेश ने सनी को रेखा से अपने संबंध की जानकारी दी. मुकेश ने सनी से रेखा से दूर रहने की हिदायत दी. इस पर सनी ने रेखा को छोड़ने से मना कर दिया. इस बात को ले कर दोनों में वादविवाद भी हुआ. मुकेश को यह बात बहुत बुरी लगी. लेकिन उस ने यह बात जाहिर नहीं होने दी. उस ने मन ही मन सनी को सबक सिखाने का फैसला ले लिया. इस बीच मुकेश ने अपने दोस्त आटो चालक विशाल और पवन राठौर को फोन कर के वहां बुला लिया.

मुकेश ने सनी की रेखा से दोस्ती कराने व इस खुशी में दारू पार्टी देने का झांसा देते हुए अपने दोस्तों के साथ आटो से गोकुल नगर ले गया. वहां सभी ने बैठ कर शराब पी. सनी को जम कर शराब पिलाई गई. उस समय रात घिर आई थी. इस के बाद आटो से उसे यमुना किनारे सुनसान रास्ते पर ले गए, सनी को ज्यादा नशा हो गया था. इस का फायदा उठाते हुए सनी को आटो से उतार कर मुकेश व उस के दोस्तों ने लातघूंसों से पीटा फिर उस की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश यमुना किनारे फेंक कर सभी लोग फरार हो गए.

सनी की हत्या के आरोप में रेखा व विशाल को 3 दिसंबर, 2021 को जेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच शुरू कर दी और अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई. सनी की हत्या को एक महीना बीत गया था. लेकिन पुलिस के हाथ खाली थे. जबकि नामजद मुख्य हत्यारोपी मुकेश जाट व उस के साथी पवन राठौर को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी थी. इस से मृतक के परिजनों में रोष बढ़ता जा रहा था. पुलिस ने अन्य हत्यारोपियों मुकेश जाट व पवन राठौर की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश भी दी. लेकिन मुकेश का कोई सुराग नहीं लग रहा था. इस पर पुलिस ने उसपर 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया.

25 दिसंबर, 2021 की रात लगभग ढाई बजे पुलिस टेढ़ी बगिया पर चैकिंग कर रही थी. तभी पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली कि सनी हत्याकांड को अंजाम देने वाला मुख्य हत्यारोपी मुकेश जाट शोभा नगर से अपने घर जगजीवनराम नगर बाइक से जा रहा है. इस पर एसओजी टीम को बुला लिया गया. कुछ देर बाद मुकेश जैसे ही वहां से गुजरा पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन उस ने बाइक की स्पीड बढ़ा दी. कच्चे रास्ते पर बाइक फिसल गई. पुलिस के घेरने पर मुकेश फायरिंग करने लगा. जवाबी काररवाई में उस के पैर में गोली लगने पर वह घायल हो गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उस के कब्जे से तमंचा, 3 कारतूस, 2 खोखा व बाइक बरामद कर ली. घायल मुकेश को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भरती कराया गया.

एसपी (सिटी) विकास कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस में ईनामी मुख्य हत्यारोपी की गिरफ्तारी की जानकारी दी. पता चला कि मुकेश जाट शातिर वाहन चोर है. उस पर विभिन्न थानों में 15 मुकदमे दर्ज हैं. थाना न्यू आगरा में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे में मुकेश वांछित था और 3 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था. उस पर 25 हजार का ईनाम भी घोषित था. पुलिस पूछताछ में मुकेश जाट ने अपने साथियों के साथ सनी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि उस की दोस्ती एक साल से रेखा से थी. बाद में सनी बीच में आ गया. वह रेखा से दोस्ती करना चाहता था. मुकेश को यह दोस्ती पसंद नहीं थी. उस ने सनी को रेखा से दूर रहने की हिदायत दी लेकिन वह नहीं माना. इस पर अपने 2 दोस्तों की मदद से उस की हत्या कर दी.

फरारी के दौरान मुकेश ने अपने साथी आशीष प्रजापति के साथ एग्रीकल्चर फैक्ट्री फाउंड्री नगर से 16 दिसंबर को बाइक चोरी कर ली थी. रुपए खत्म होने पर वह अपने घर जा रहा था. एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने सनी हत्याकांड का परदाफाश करते हुए बताया कि हत्याकांड में शामिल रेखा, पवन व मुकेश जाट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि मुकेश जाट के साथी पवन राठौर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है. इस प्रकार सनी हत्याकांड के सभी आरोपी जेल जा चुके हैं. सनी अविवाहित था. रेखा चंचल तितली की तरह थी. एक फूल से पराग लेने के बाद दूसरे फूल पर मंडराती थी. इसी के चलते उस ने अपने मोहपाश में सनी को बांध लिया था.

सनी को उस की फितरत की जानकारी नहीं थी. यदि वह दूसरे की प्रेमिका से दोस्ती के चक्कर में पड़ कर उस पर अपना अधिकार नहीं जमाता तो सनी को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती. Romantic Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime: झोपड़ी में बुझी तन की आग

Love Crime: बात मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थानांतर्गत धवई गांव की है. थानाप्रभारी अपने औफिस में दैनिक कामों में लगे हुए थे. तभी उन्हें चितरंगी-कर्थुआ रोड पर स्थित एक झोपड़ी में किसी महिला की लाश मिलने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ वह पर घटनास्थल के लिए रवाना हुए. उन के वहां पहुंचने से पहले ही काफी भीड़ वहां जुट चुकी थी. थानाप्रभारी ने भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति से इस बारे में बात की.

उस व्यक्ति ने बताया कि हम गांव वालों को काफी दिनों से आसपास में अजीब सी दुर्गंध आ रही थी. हमें लगा कि कोई जानवर मरा होगा, उसी से बदबू आ रही होगी. किंतु ऐसा नहीं था. यह बदबू तो रसवंती नामक महिला की झोपड़ी से आ रही थी. पुलिस द्वारा तुरंत मौके का बारीकी से निरीक्षण किया गया, वहां चारपाई के नीचे रसवंती की लाश पड़ी थी, जो पूरी तरह से सड़ चुकी थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी डी.एन. राज ने इस की सूचना अपने एसडीपीओ राजीव पाठक को दी. सूचना मिलते ही वह तत्काल मौके पर पहुंचे. यह बात 11 नवंबर, 2021 की थी.

लाश को देखने के बाद यह तय कर पाना काफी मुश्किल था कि यह मामला स्वाभाविक मौत का है या हत्या का. पुलिस ने सुराग तलाशने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. जिस के बाद गांव वालों से पूछताछ शुरू की, लेकिन कोई खास जानकारी हाथ नहीं लगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने पर पता चला कि रसवंती की मृत्यु गला घोटने से हुई थी. जिस के बाद एसडीपीओ राजीव पाठक के निर्देश पर चितरंगी थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी.

चूंकि महिला की सुरक्षा एवं उन से जुड़े मामले शासन के उच्च प्राथमिकता वाले विषयों में से हैं, जिस के कारण एसपी (सिंगरौली) वीरेंद्र कुमार सिंह स्वयं ही इस मामले की जांच को खुद आगे बढ़े. एसडीपीओ राजीव पाठक ने सब से पहले गांव वालों से पूछताछ की, जिस में पता चला कि रसवंती शादीशुदा और एक बच्चे की मां थी, मगर लंबे समय से अपने पति व बच्चे को छोड़ कर धवई गांव में अपने भाई के साथ रहती थी. जिस के बाद पारिवारिक झगड़ों के चलते वह गांव से बाहर चितरंगी और कर्थुआ रोड पर एक झोपड़ी बना कर अकेली ही रहने लगी थी.

चूंकि रसवंती अकेली रहती थी और काफी समय से गांव में ही रहती थी, इस कारण उस के बारे में जो भी जानकारी मिल सकती थी, वह गांव वालों से ही मिलती. लेकिन गांव वालों का सहयोग पुलिस को नहीं मिला. तब थानाप्रभारी ने अपने मुखबिरों को सक्रिय किया और अपने मुखबिरों द्वारा जानकारी हासिल करने का प्रयास शुरू कर दिया था. इस कोशिश में कई महत्त्वपूर्ण जानकारी पुलिस के हाथ लगी थीं. पता चला कि रसवंती कोई काम नहीं करती थी. वह केवल एक छोटी सी किराने की दुकान लगा कर अपना गुजारा करती थी, जोकि काफी नहीं था. पुलिस को पता चला कि वह इस दुकान की आड़ में अपना जिस्म बेच कर गुजारा चलाया करती थी.

इस की जानकारी मिलने पर थानाप्रभारी को यह मामला अवैध संबंधों का लगा. एसडीपीओ के निर्देश पर ऐसे लोगों की जानकारी जुटाने का काम शुरू किया गया जो अकसर रसंवती के संपर्क में रहते थे या उस से मिलने झोपड़ी में आया करते थे. जांच के दौरान पुलिस को इस बात की जानकारी मिली कि रसवंती की झोपड़ी में बिजली नहीं थी. उसे अपने काम के लिए प्राकृतिक रोशनी पर ही निर्भर रहना पड़ता था. जिस वजह से वह अपने पास टौर्च या मोबाइल तो रखती ही होगी, लेकिन पुलिस को ये दोनों की सामान मौके से नहीं मिले. इस से शक हुआ कि शायद मोबाइल और टौर्च दोनों ही हत्यारे अपने साथ ले गए होंगे. एसडीपीओ ने गांव वालों से पूछताछ करतेकरते इतना तो समझ लिया था कि हत्यारा इसी गांव का होगा.

इसलिए उन्होंने जांच के परिणामों को गांव वालों के बीच फैलाना शुरू कर दिया. इस का नतीजा भी जल्द ही सामने आ गया, जब 2 दिनों बाद गांव में एक जगह पर रसवंती की टौर्च पड़ी मिली, जो हत्या के बाद से ही गायब थी. टौर्च जिस स्थान पर मिली, उस के आसपास रहने वालों की सूची तैयार करवाई गई तथा इस बात की जानकारी जुटाई कि इन में से कौन रसवंती से रात में मिलने आया करते थे. इस में से एक नाम सामने आया 22 साल के प्रिंस यादव का.

पुलिस को जानकारी मिली कि भले ही प्रिंस रसंवती से आधे से भी कम उम्र का था, लेकिन रसवंती के पास उस का आनाजाना भी काफी था. यहां तक कि शादी होने के बाद भी प्रिंस ने रसवंती के यहां आनाजाना नहीं छोड़ा था. इस जानकारी के बाद पुलिस ने प्रिंस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस में पता चला कि प्रिंस और रसवंती के बीच अकसर फोन पर काफीकाफी देर तक बातचीत होती रहती थी. इतना ही नहीं, लाश मिलने के 15 दिन पहले जिस रोज रसवंती का फोन बंद हुआ था. तब उस के फोन पर आखिरी बार बात प्रिंस ने ही की थी. इसलिए पुलिस ने प्रिंस यादव को हिरासत में ले कर पूछताछ की, जिस में पहले तो वह पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करने लगा.

लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं पाया और उस ने अपने दोस्त गांव के ही युवक अजीत यादव के साथ मिल कर रसवंती की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. इस के बाद पुलिस ने गांव से अजीत यादव को भी गिरफ्तार कर लिया, जिस के बाद हत्या के पीछे की कहानी इस प्रकार सामने आई—

पति को छोड़ कर मायके लौटी रसवंती कुछ साल तक तो भाई के घर में आराम से रही, लेकिन समय के साथ उसे अपनी जिंदगी में एक पुरुष की कमी खलने लगी थी. पति को छोड़ कर अकेली रह रही रसवंती पर गांव के कुछ युवकों की भी नजर थी और यह बात रसवंती भी जानती थी. फिर उस ने उन्हीं युवकों में से एक को चुन लिया और अपने तन की प्यास बुझाने का रास्ता खोज निकाला. युवक से दोस्ती हुई तो वहां जरूरत पड़ने पर उसे खर्च करने के लिए पैसे भी देने लगा. यहीं से रसवंती को अपनी देह की कीमत का पता चला. उसे लगा कि यदि वह 2-4 युवकों को अपने पास आने का मौका दे तो उस की शारीरिक जरूरत तो पूरी होगी ही, साथ ही कुछ आमदनी भी हो जाया करेगी.

यही सोच कर उस ने गांव के कई युवकों से संबंध बना लिए थे. रसवंती के हरकतों की यह जानकारी जब उस के भाई को हुई तो उस ने उसे टोका तो 10 साल पहले रसवंती ने भाई का घर छोड़ दिया और खुद एक झोपड़ी बना कर रहने लगी. चूंकि यह झोपड़ी रसवंती की अपनी थी तो वह जिसे चाहे उसे वहां मिलने के लिए बुला लिया करती थी. इस के अलावा उस ने दिखावे के लिए वहां एक छोटी सी दुकान भी लगा ली थी. वक्त के साथ रसवंती की उम्र बढ़ने लगी, इसलिए गांव के युवकों ने उस में दिलचस्पी लेनी कम कर दी. जो उस की उम्र के थे, वे घरपरिवार वाले थे सो जब रसवंती के पास आने वाले मर्दों की संख्या घटने लगी तो रसवंती ने नया दांव खेला. उस ने कम उम्र के लड़कों को सैक्स का चस्का लगाना शुरू किया.

प्रिंस यादव भी रसवंती की इस योजना का शिकार 16 साल की उम्र में ही बन गया था. चूंकि उस वक्त तक प्रिंस के मन में सैक्स के प्रति एक नया ही नशा था, सो वह रसवंती को ही सब से बड़ा सुख मान कर उस के पास आने लगा. रसवंती इश्क तो किसी से करती नहीं थी. उस के लिए तो यह काम भी पैसा कमाने का एक जरिया था. इसलिए प्रिंस से भी वह अपनी पूरी कीमत वसूलती थी. वह रसवंती के पास केवल सैक्स का सुख लेने आया था, लेकिन धीरेधीरे वह उस का दीवाना हो गया. वह लगभग रोज ही उस से मिलने आने लगा.

कहना नहीं होगा कि अब रसवंती प्रिंस के लिए प्यार बन गई थी. जबकि प्रिंस, रसवंती के लिए एक सौदा था, इसलिए वह आए दिन उस से पैसों की मांग करती रहती थी. प्रिंस भी उसे यदाकदा खर्च के लिए पैसे देता रहता था. प्रिंस 21 साल का हो गया तो उस के घर वालों ने उस की शादी कर दी. लेकिन पत्नी के आने के बाद भी उस का रसवंती के पास जाना कम नहीं हुआ. दरअसल, रसवंती के लिए सैक्स एक धंधा था, इसलिए वह जानती थी कि उस के पास दूसरों से कुछ अलग नहीं होगा तब तक उस के पास ग्राहक क्यों आएगा. इसलिए प्रिंस जैसे युवकों को वह हर उस तरीके से संतुष्ट करने को राजी रहती थी. जिस की मांग युवा वर्ग में अधिक है.

इस की वह कीमत भी खूब वसूलती थी. लेकिन वह भूल चुकी थी कि प्रिंस के मन में जो पागलपन 16 साल में था, वह इन 6 सालों मे नहीं रह गया. दूसरा प्रिंस की शादी भी हो चुकी थी, इसलिए रसवंती उस की जरूरत भी नहीं रह गई थी. रसंवती द्वारा पैसों की मांग उस के लिए अब भारी पड़ने लगी थी. जबकि उम्र बढ़ने से दीवानों की संख्या कम हो जाने के कारण रसवंती प्रिंस से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलना चाहती थी. इसलिए दोनों के बीच पैसों को ले कर विवाद होने लगा था. इस से तंग आ कर प्रिंस ने रसवंती के पास जाना बंद कर दिया. रसवंती जवान होती तो दूसरा दीवाना खोज लेती. अब 48 साल की उम्र में उसे कोई प्रिंस के जैसा दीवाना तो मिलने से रहा, इसलिए वह प्रिंस पर मिलने के आने के लिए दबाव बनाने लगी.

उस का कहना था कि अगर प्रिंस उस से मिलने नहीं आएगा तो वह पूरे गांव में पिं्रस के साथ अपने संबंधों का ढिंढोरा पीट देगी. प्रिंस इस बात से परेशान हो गया तो उस ने अपने दोस्त अजीत यादव के साथ मिल कर रसवंती की आवाज हमेशा के लिए खामोश करने की ठान ली. इस के लिए योजना बना कर दोनों दोस्त 27 अक्तूबर, 2021 की शाम रसवंती के पास पहुंचे, जहां उसे कुछ रुपए दे कर दोनों ने बारीबारी से पहले तो रसवंती के साथ संबंध बनाए. फिर साथ में लाई जानवर बांधने की रस्सी से उस का गला दबा कर हत्या कर दी और लाश को वहीं चारपाई के नीचे डाल कर घर आ गए.

चूंकि रसवंती गांव में बदनाम थी, इसलिए उस के गांव में न दिखने पर भी किसी ने न तो उस की चर्चा की और न ही खोजखबर ली. रसवंती की हत्या का पता उस समय चला, जब उस की लाश सड़ जाने के कारण फैल रही बदबू से लोग परेशान हो गए और उन्होंने पुलिस को खबर दी. पुलिस ने आरोपी प्रिंस यादव और अजीत यादव से पूछताछ कर उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Love Crime

Hindi Stories: संबंधों की कच्ची दीवार : रिश्तें बने बोझ

Hindi Stories: 36 वर्षीया रीता मनचली भी थी और महत्त्वाकांक्षी भी. कस्बे के तमाम लोग उस से नजदीकियां बढ़ाना चाहते थे. मगर पिछले 4 सालों से उस के मन में बसा हुआ था, पड़ोस में रहने वाला 41 वर्षीय राजेंद्र सिंह. वह उस का रिश्तेदार भी था और हर समय उस का ध्यान भी रखता था. शादीशुदा होते हुए भी रीता और राजेंद्र के संबंध बहुत गहरे थे. राजेंद्र 3 बच्चों का बाप था तो रीता भी 2 बच्चों की मां थी. राजेंद्र और रीता का पति मनोज दोनों ईंट भट्ठे पर काम करते थे. वहीं पर दोनों के बीच नजदीकियां बनी थीं.

राजेंद्र व रीता के संबंधों की जानकारी रीता के पति मनोज को भी थी और कस्बे के लोगों को भी. इस बाबत रीता के पति मनोज ने दोनों को समझाने का काफी प्रयास भी किया था, मगर न तो रीता मानी और न ही राजेंद्र. उन दोनों का आपस में मिलनाजुलना चलता रहा. दोनों का लगाव इस स्थिति तक पहुंच गया था कि दोनों एकदूसरे के बगैर नहीं रह सकते थे.

इसी दौरान 16 मार्च, 2021 को रीता गायब हो गई. उस के पति मनोज ने उसे सभी संभावित जगहों पर ढूंढा. वह नहीं मिली तो वह झबरेड़ा थाने जा पहुंचा. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार को उस ने बताया, ‘‘साहब, कल मेरी पत्नी रीता काम से अपनी सहेली हुस्नजहां के साथ बैंक गई थी लेकिन आज तक वापस नहीं लौटी है. मैं उसे आसपास व अपनी सभी रिश्तेदारियों में जा कर तलाश कर चुका हूं, मगर उस का कुछ पता नहीं चल सका.’’

थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने रीता की बाबत मनोज से कुछ जानकारी ली. साथ ही उस का मोबाइल नंबर भी नोट कर लिया. पुलिस ने रीता की गुमशुदगी दर्ज कर मनोज को घर भेज दिया. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने रीता की गुमशुदगी को गंभीरता से लिया. उन्होंने रीता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई और इस प्रकरण की जांच थाने के तेजतर्रार थानेदार संजय नेगी को सौंप दी. मामला महिला के लापता होने का था, इसलिए रविंद्र कुमार ने इस बाबत सीओ पंकज गैरोला व एसपी (क्राइम) प्रदीप कुमार राय को जानकारी दी.

अगले दिन रीता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स पुलिस को मिल गई. संजय नेगी ने विवेचना हाथ में आते ही क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में रीता अपने पड़ोसी राजेंद्र के साथ बाइक पर बैठ कर जाती दिखाई दी.

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इस के बाद शक के आधार पर एसआई संजय नेगी ने राजेंद्र को हिरासत में ले लिया और उस से रीता के लापता होने के बारे में गहन पूछताछ की. पूछताछ के दौरान राजेंद्र पुलिस को बरगलाते हुए कहता रहा कि उस की रीता से रिश्तेदारी है और उस ने 2 दिन पहले रीता को थोड़ी दूर तक बाइक पर लिफ्ट दी थी. लेकिन अब रीता कहां है, उसे इस बाबत कोई जानकारी नहीं है. शाम तक राजेंद्र इसी बात की रट  लगाए रहा. शाम को अचानक ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी कि सैदपुरा के पास गंगनहर में एक महिला का शव तैर रहा है.

इस सूचना पर थानेदार संजय नेगी अपने साथ रीता के पति मनोज को ले कर वहां पहुंचे. संजय नेगी ने ग्रामीणों की मदद से शव को गंगनहर से बाहर निकलवाया. मनोज ने शव को देखते ही पहचान लिया कि वह शव उस की पत्नी रीता का ही है. शव के गले पर निशान थे. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर शव पोस्टमार्टम के लिए राजकीय अस्पताल रुड़की भेज दिया. रीता का शव बरामद होने की सूचना पा कर एसपी (क्राइम) प्रदीप कुमार राय थाना झबरेड़ा पहुंचे.

राय ने जब राजेंद्र से पूछताछ की तो वह अपने को बेगुनाह बताने लगा. राय व थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने जब सख्ती से राजेंद्र से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने रीता की हत्या करना स्वीकार कर लिया और उस से पिछले कई सालों से चल रहे आंतरिक संबंधों को भी कबूल कर लिया. रीता की हत्या करने की राजेंद्र ने पुलिस को जो जानकारी दी, वह इस तरह थी—

राजेंद्र जिला हरिद्वार के कस्बा झबरेड़ा स्थित एक ईंट भट्ठे पर पिछले 20 साल से काम कर रहा था. उस के परिवार में उस की पत्नी सुनीता, बेटी प्रिया (21), दूसरी बेटी खुशी (15) व बेटा कार्तिक (12) था. ईंट भट्ठे पर काम कर के राजेंद्र को 15 हजार रुपए प्रतिमाह की आमदनी हो जाती थी. इस तरह से राजेंद्र के परिवार की गाड़ी अच्छी से चल रही थी. उसी ईंट भट्ठे पर रीता का पति मनोज भी काम करता था.

साथ काम करतेकरते मनोज और राजेंद्र में दोस्ती हो गई. फिर दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना शुरू हो गया. इस आनेजाने में रीता और राजेंद्र के बीच नाजायज संबंध बन गए. वह दोनों आपस में दूर के रिश्तेदार भी थे. दोनों के संबंधों की खबर उन के घर वालों को ही नहीं बल्कि गांव वालों को भी हो गई थी. इस के बावजूद उन्होंने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा. उन के संबंध करीब 7 सालों तक बने रहे. पिछले साल अचानक राजेंद्र व रीता के जीवन में एक ऐसा मोड़ आ गया कि दोनों के बीच में दूरियां बढ़ने लगीं. 30 मार्च, 2020 का दिन था. उस समय देश में लौकडाउन चल रहा था. उस दिन जब राजेंद्र से रीता मिली तो उस ने राजेंद्र के सामने शर्त रखी कि वह उस के साथ शादी कर के अलग घर में रहना चाहती है.

रीता की बात सुन कर राजेंद्र सन्न रह गया. उस ने रीता को समझाया कि अब इस उम्र में यह सब करना हम दोनों के लिए ठीक नहीं होगा, क्योंकि हम दोनों पहले से ही शादीशुदा व बड़े बच्चों वाले हैं. अलग रहने से हम दोनों के परिवार वालों की जगहंसाई होगी. हम किसी परेशानी में भी पड़ सकते हैं. राजेंद्र के काफी समझाने पर भी रीता नहीं मानी और राजेंद्र से शादी करने के लिए जिद करने लगी. खैर उस वक्त तो राजेंद्र किसी तरह से रीता को समझाबुझा कर वापस आ गया. इस के बाद उस ने रीता से दूरी  बनानी शुरू कर दी. उस ने उस का मोबाइल अटैंड करना कम कर दिया और उस से कन्नी काटने लगा.

अपनी उपेक्षा से आहत रीता घायल शेरनी की तरह क्रोधित हो गई. उस ने मन ही मन में राजेंद्र से बदला लेने का निश्चय कर लिया. उस दौरान राजेंद्र अपनी बड़ी बेटी प्रिया की शादी के लिए वर की तलाश में था. राजेंद्र अपनी बिरादरी के लोगों से शादी के लिए प्रिया के संबंध में बात करता रहता था. जब इस बात का पता रीता को चला कि राजेंद्र अपनी बेटी के लिए लड़का तलाश रहा है तो उस ने राजेंद्र की बेटी की शादी में अड़ंगा लगाने का निश्चय किया. इस के बाद जो भी लोग प्रिया को शादी के लिए देखने आते रीता उन लोगों से संपर्क करती और उन्हें बताती कि राजेंद्र की बेटी प्रिया का किसी से चक्कर चल रहा है.

रीता के मुंह से यह सुन कर राजेंद्र की बेटी से शादी करने वाले लोग शादी का विचार बदल देते थे. इस तरह रीता ने प्रिया से शादी करने वाले 2 परिवारों को झूठी व भ्रामक जानकारी दे कर प्रिया के रिश्ते तुड़वा दिए थे. जब इस बात की जानकारी राजेंद्र को हुई तो वह तिलमिला कर रह गया. धीरेधीरे समय बीतता गया. वह 28 फरवरी, 2021 का दिन था. उस दिन अचानक एक ऐसी घटना घट गई, जिस से राजेंद्र तड़प उठा और उस ने रीता की हत्या करने की योजना बना डाली. हुआ यूं कि 28 फरवरी, 2021 को कस्बे में रविदास जयंती मनाई जा रही थी. उस समय राजेंद्र की छोटी बेटी खुशी ट्यूशन पढ़ कर वापस घर जा रही थी. तभी रास्ते में उसे रीता का बेटा सौरव खड़ा दिखाई दिया.

खुशी कुछ समझ पाती, इस से पहले ही सौरव ने खुशी के साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दीं. इस पर खुशी ने शोर मचा दिया. खुशी के शोर मचाने पर सौरव वहां से भाग गया. खुशी ने घर आ कर इस छेड़खानी की जानकारी अपने पिता राजेंद्र को दी. इस के बाद राजेंद्र ने रीता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. राजेंद्र रीता की हत्या का तानाबाना बुनने लगा. दूसरी ओर रीता राजेंद्र के इस खतरनाक इरादे से बेखबर थी. योजना के तहत राजेंद्र ने 15 मार्च, 2021 को रीता को फोन कर के कहा कि वह उसे 20 हजार रुपए देना चाहता है, इस के लिए उसे मंगलौर आ कर मिलना पड़ेगा.

उस की इस बात पर लालची रीता राजी हो गई. 16 मार्च को रीता उस के साथ बाइक पर बैठ कर मंगलौर के लिए चल पड़ी. जब दोनों सैदपुरा की गंगनहर पटरी पर पहुंचे तो राजेंद्र ने बाइक रोक कर रीता से कहा, ‘‘मैं तुम्हें सरप्राइज दे कर 20 हजार रुपए देना चाहता हूं, तुम जरा मुंह दूसरी ओर घुमा लो.’’

जैसे ही रीता ने मुंह दूसरी ओर घुमाया तो राजेंद्र ने रीता के गले में लिपटी चुन्नी से उस का गला घोंट दिया. रीता की हत्या के सबूत मिटाने के लिए उस ने उस का मोबाइल व चुन्नी गंगनहर के पानी में फेंक दिए. फिर वह बाइक से अपने घर लौट आया.

पुलिस ने राजेंद्र के बयान दर्ज कर लिए और इस प्रकरण में उस के खुलासे के बाद इस मुकदमे में धारा 302 व 201 बढ़ा दी. एसआई संजय नेगी ने अभियुक्त की निशानदेही पर गंगनहर की पटरी से सही झाडि़यों में फंसी रीता की चुन्नी बरामद कर ली. रीता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया. राजेंद्र से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Hindi Stories

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Story: दिल लगाने का अपराध

Love Story: मारपीट, चोरीडकैती, अपहरण और फिरौती वसूलने जैसे अपराध करने वाले वैभव को शादीशुदा ज्योत्सना से दिल लगा कर जिंदगी से हाथ क्यों धोना पड़ा. 23 अगस्त की रात के यही कोई 8 बजे महानगर मुंबई के व्यस्ततम थाना डोंगरी के चार्जरूम में ड्यूटी पर मौजूद महिला सबइंसपेक्टर गिरिजा मस्के के सामने रोनी सूरत लिए एक चेहरा अपने पूरे परिवार के साथ आ कर खड़ा हो गया. गिरिजा मस्के उस चेहरे और उस के परिवार वालों को अच्छी तरह से पहचानती थीं. वह विशाल आचरेकर था, जो आपराधिक प्रवृत्ति के वैभव आचरेकर का बड़ा भाई था.

भाई के मामलों में वह अकसर थाना डोंगरी आता रहता था, इसलिए सबइंसपेक्टर गिरिजा मस्के उसे और उस के घर वालों को अच्छी तरह से पहचानती थीं. इसी वजह से उन्होंने सीधे पूछा, ‘‘कहिए, क्या बात है, वैभव ने फिर कोई कांड कर दिया क्या?’’

‘‘नहीं मैडम, इस बार उस ने कोई कांड नहीं किया, बल्कि लगता है वह खुद ही किसी कांड का शिकार हो गया है.’’ विशाल आचरेकर ने भर्राई आवाज में कहा, ‘‘मैडम, 20 अगस्त की सुबह वह घर से निकला था, तब से उस का कुछ अतापता नहीं है. उस का मोबाइल फोन भी बंद है.’’

‘‘चिंता करने की कोई बात नहीं है. अपराध कर के कहीं छिपा होगा. 2-4 दिनों में अपने आप ही आ जाएगा.’’ सबइंसपेक्टर गिरिजा मस्के ने उस की शिकायत को हल्के में लेते हुए कहा, ‘‘हो सकता है, यारोंदोस्तों के साथ कहीं चला गया हो. ऐसे लोगों का क्या भरोसा.’’

‘‘नहीं मैडम, हम लोगों ने उसे हर जगह ढूंढ लिया है. पूरी तरह निराश हो कर ही आप के पास आए हैं. वह कहीं छिपा नहीं, उस के साथ जरूर कोई अनहोनी हो गई है. अब आप ही हमारी कुछ मदद कर सकती हैं.’’

विशाल और उस के घर वालों की विनती पर सबइंसपेक्टर गिरिजा मस्के ने वैभव की गुमशुदगी दर्ज करा कर इस बात की जानकारी अपने सीनियर इंसपेक्टर संदीप डाल को दे दी. इस के बाद उन्होंने विशाल और उस के घर वालों को आश्वासन दे कर घर भेज दिया. थाना डोंगरी के सीनियर इंसपेक्टर संदीप डाल ने तत्काल इस मामले की जानकारी अधिकारियों को देने के साथसाथ पुलिस कंट्रोल रूम को भी दे दी थी. इस के बाद अधिकारियों के दिशानिर्देश पर सीनियर इंसपेक्टर संदीप डाल ने सहायक इंसपेक्टर महादेव कदम और अंकुश काटकर के साथ जांच की रूपरेखा तैयार की और फिर उन्हीं को इस मामले की जांच सौंप दी.

जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद इंसपेक्टर महादेव कदम और अंकुश काटकर ने एक टीम बनाई, जिस में असिस्टेंट इंसपेक्टर शशिकांत यादव, सबइंसपेक्टर संतोष कांबले, महिला सबइंसपेक्टर गिरिजा मस्के, पुलिस नायक सैयद सांलुके, कांबले, धार्गे, कनकुटे और वोडरे को शामिल किया. इस टीम ने जांच तो तेजी से शुरू की, लेकिन कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई. 31 वर्षीय वैभव आचरेकर अपने मातापिता, भाईभाभी और बहनों के साथ मुंबई के डोंगरी इलाके में स्थित पोद्दार इमारत की दूसरी मंजिल पर रहता था. पिता का नाम देवीदास आचरेकर था. वैभव डोंगरी के जिस इलाके में रहता था, वह इलाका किसी जमाने में जानेमाने कुख्यात तस्कर करीम लाला और हाजी मस्तान का माना जाता था.

उस समय पठान भाइयों की इजाजत के बगैर इस इलाके का एक पत्ता भी नहीं हिलता था. शायद वैभव पर भी इलाके का असर पड़ गया था और वह भी अपराधी प्रवृत्ति का हो गया था. इलाके के सभी छोटेबड़े अपराधियों के बीच उस की अच्छी पैठ थी. उस के खिलाफ मारपीट, चोरीडकैती और अपहरणफिरौती जैसे कई अपराधों के मामले दर्ज थे, इसलिए थाना डोंगरी पुलिस उसे ही नहीं, उस के घर के हर सदस्य को पहचानती थी. शुरू में वैभव की अपराधी प्रवृत्ति को ध्यान में रख कर पुलिस टीम ने उस के बारे में पता लगाना शुरू किया. पुलिस को लगता था, कि अपने कारनामों की वजह से कहीं उसे मार न दिया गया हो. लेकिन इस बारे में कोई सुराग नहीं मिला.

धीरेधीरे दिन बीतते गए. वैभव को गायब हुए 4 महीने बीत गए और उस का कुछ पता नहीं चला. उस की लाश भी नहीं मिली कि मान लिया जाता कि उसे मार दिया गया है. अगर वह कोई अपराध कर के भी छिपा होता तो इतने दिनों तक न उस का अपराध छिपा रह सकता था और न वह खुद. जांच टीम वैभव के बारे में जो सोच कर जांच कर रही थी, उस से कोई फायदा नहीं हुआ, इसलिए जांच अधिकारी इंसपेक्टर महादेव कदम ने जांच की दिशा बदल दी. माना जाता है कि लड़ाईझगड़े या हत्या जैसे अपराधों की वजह जर, जमीन और जोरू होती है. यहां जर, जमीन का कोई कारण नहीं दिख रहा था, इसलिए उन का ध्यान जोरू की तरफ गया. वैभव जवान, सुंदर और अविवाहित युवक था, इसलिए उन्हें लगा कि कहीं वह किसी जोरू की वजह से तो नहीं गायब कर दिया गया.

इस की एक वजह यह भी थी कि जिस दिन वैभव गायब हुआ था, उस दिन की उस के मोबाइल फोन की लोकेशन मुंबई के उपनगर दहिसर की लाभदर्शन इमारत के आसपास की पाई गई थी. वहां उस के जाने की क्या वजह हो सकती थी? जांच टीम यह जानने के लिए उस के घर गई तो घर वाले इस बारे में कुछ खास नहीं बता सके. लेकिन जब इस टीम ने किसी महिला से संबंध के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि इसी इमारत में रहने वाली ज्योत्सना मोरे से वैभव के मधुर संबंध थे. उस के घर भी उस का खूब आनाजाना था.

पुलिस ने जब ज्योत्सना मोरे से पूछताछ की तो उस ने यह तो स्वीकार कर लिया कि पड़ोसी होने के नाते वैभव का उस के घर आनाजाना था. लेकिन न तो उस के उस से कोई गलत संबंध थे, न उसे उस की गुमशुदगी के बारे में कुछ पता है. इमारत में ईर्ष्या करने वाले लोगों ने उसे बदनाम करने के लिए उस का नाम वैभव के साथ जोड़ दिया होगा. पुलिस ने ज्योत्सना मोरे को गिरफ्तार तो नहीं किया, लेकिन वह संदेह के घेरे में आ गई थी, इसलिए उस का मोबाइल अपने पास रखने के साथ इस हिदायत के साथ घर जाने दिया कि वह पुलिस को बताए बिना मुंबई छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी. इस के बाद पुलिस ने ज्योत्सना के बारे में पता लगाना शुरू किया.

जुटाई गई जानकारियों के आधार पर पुलिस को ज्योत्सना मोरे के बारे में जो पता चला, वह चौंकाने वाला था. पुलिस को उस के नंबर की काल डिटेल्स में एक ऐसा नंबर मिला, जिस पर उस ने वैभव के गायब होने वाले दिन कई बार बात की थी. उस नंबर वाले फोन की लोकेशन भी उसी जगह की पाई गई थी, जहां की वैभव के मोबाइल फोन की मिली थी. ज्योत्सना के भी मोबाइल फोन की लोकेशन वहां की थी. तीनों मोबाइल फोनों की लोकेशन एक जगह की मिलने की वजह से ज्योत्सना मोरे संदेह के घेरे में आ गई. यह संदेह तब और गहरा गया, जब पुलिस ने उस से उस नंबर के बारे में पूछा तो उस ने साफ कहा कि वह उस नंबर के बारे में बिलकुल नहीं जानती.

जबकि उस नंबर पर उस की लगातार बातें हो रही थीं. पुलिस को अब तक यह भी पता चल चुका था कि दहिसर की लाभदर्शन इमारत में उस का मायका था. साफ था, ज्योत्सना ने ही वैभव को वहां बुलाया होगा. इस के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. 20 दिसंबर, 2014 को इंसपेक्टर महादेव कदम ने सीनियर अधिकारियों की उपस्थिति में जब ज्योत्सना से सुबूतों के आधार पर सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई. उस ने वैभव की हत्या का अपना अपराध तो स्वीकार कर ही लिया, उस मोबाइल नंबर के बारे में भी बता दिया, जिस के बारे में वह अनभिज्ञता प्रकट कर रही थी.

वह मोबाइल नंबर ज्योत्सना के पुराने प्रेमी प्रकाश पाटिल का था. उसी के साथ मिल कर उस ने वैभव आचरेकर को ठिकाने लगा दिया था. इस के बाद उस की निशानदेही पर इंसपेक्टर महादेव कदम ने उसी रात उस के साथी प्रकाश पाटिल को भी गिरफ्तार कर लिया था. थाने में दोनों से की गई पूछताछ में वैभव आचरेकर की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह प्रेम त्रिकोण में की गई हत्या की थी. 34 वर्षीय प्रकाश पाटिल महाराष्ट्र के जनपद पालघर की तहसील वसई के गांव ज्यूचंद्र का रहने वाला था. उस के पिता रामचंद्र  पाटिल गांव के सुखीसंपन्न किसान थे. बीए करने के बाद प्रकाश नगर महापालिका में ठेकेदारी करने लगा था, जिस से उसे ठीकठाक आमदनी हो रही थी.

जिन दिनों वह बीए कर रहा था, उन्हीं दिनों साथ पढ़ने वाली ज्योत्सना से उसे प्यार हो गया था. ज्योत्सना भी उसे प्यार करती थी, इसलिए दोनों शादी करना चाहते थे. लेकिन किन्हीं कारणों से यह शादी नहीं हो पाई. प्रकाश के घर वालों ने उस की शादी कहीं और कर दी थी तो ज्योत्सना के घर वालों ने भी उस उस की शादी मुंबई के रहने वाले अमित मोरे से कर दी थी. दोनों ही अपनेअपने घरसंसार में सुखी थे. प्रकाश जहां 2 बेटियों का बाप बन गया था, वहीं ज्योत्सना भी एक बेटे की मां बन चुकी थी. लेकिन जब कई सालों बाद बिछड़े हुए प्रेमी एक विवाह समारोह में मिले तो इन का प्यार एक बार फिर उमड़ पड़ा.

गिलेशिकवे दूर करने के बाद प्रकाश और ज्योत्सना ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए थे. फोन पर बातचीत करतेकरते धीरेधीरे दोनों एक बार फिर पुराने रंग में रंग गए. ज्योत्सना पति अमित मोरे और बेटे के साथ मुंबई के डोंगरी में रहती थी. दरअसल वह अपने पति अमित मोरे से खुश नहीं थी. अमित मोरे एक बीमा कंपनी का एजेंट था. वह ज्योत्सना जैसी सुंदर और पढ़ीलिखी पत्नी पा कर खुद को धन्य समझ रहा था. इसीलिए वह उसे खुश रखने और उस की सुखसुविधाओं का पूरा खयाल रखता था. पत्नी और बेटे को किसी तरह की कोई तकलीफ न हो, इस के लिए वह दिनरात मेहनत करता था.

इसी चक्कर में वह यह भूल भी गया था कि सुखसुविधा के अलावा पत्नी को पति का प्यार भी चाहिए. देर रात वह घर लौटता तो बुरी तरह थका होता. खापी कर वह बिस्तर पर पड़ते ही सो जाता. सुबह उठता और चायनाश्ता कर के काम पर निकल जाता. उस के पास ज्योत्सना के लिए समय ही नहीं होता था. पति की इसी उपेक्षा से ज्योत्सना अंदर ही अंदर सुलग रही थी, जिस का फायदा उसी इमारत में रहने वाले वैभव आचरेकर ने उठाया. वैभव आचरेकर और अमित मोरे के बीच अच्छी दोस्ती थी. दोनों बचपन के दोस्त थे. यह अलग बात थी कि अमित मोरे ईमानदारी और मेहनत की कमाई खाता था, जबकि वैभव आचरेकर अपराध की कमाई से मौज कर रहा था. दोनों की दिशाएं अलग थीं, इस के बावजूद उन की दोस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ा था.

वैभव कभी अमित मोरे के साथ उस के घर आया तो खूबसूरत ज्योत्सना को देख कर उस पर मर मिटा. कुंवारा होने की वजह से स्त्रीसुख से वंचित वैभव ज्योत्सना को पाने की कोशिश करने लगा. उस के हावभाव से जब उस के मन की बात ज्योत्सना को पता चली तो वह भी उस की ओर आकर्षित हो उठी. क्योंकि वह यही तो चाहती थी. धीरेधीरे ज्योत्सना वैभव की ओर खिंचने लगी. फिर तो वह स्वयं को संभाल नहीं सकी और वैभव की बांहों में समा गई. ज्योत्सना को वैभव की सशक्त बांहों का सुख मिला तो वह अमित मोरे को भूल कर उसी की हो गई. उसे जब भी मौका मिलता, वैभव को अपने फ्लैट पर बुला लेती. पहले तो वैभव ज्योत्सना के बुलाने का इंतजार करता था, लेकिन कुछ दिनों बाद जब भी उस का मन होता, वह खुद ही ज्योत्सना के फ्लैट पर पहुंच जाता.

धीरेधीरे वह ज्योत्सना को प्रेमिका कम, पत्नी ज्यादा समझने लगा. लेकिन जब ज्योत्सना की मुलाकात उस के पुराने प्रेमी प्रकाश से हुई तो वह वैभव से किनारे करने लगी. अपराधी प्रवृत्ति के वैभव को ज्योत्सना का यह व्यवहार पसंद नहीं आया. क्योंकि वह उसे किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं था. उसे जब जैसी जरूरत पड़ती थी, वह ज्योत्सना को उसी हिसाब से इस्तेमाल कर लेता था. यह बात ज्योत्सना को पसंद नहीं थी. प्रकाश से मिलने के बाद वह वैभव से संबंध नहीं रखना चाहती थी. ज्योत्सना जब वैभव की मनमानियों से तंग आ गई तो उस से मुक्ति पाने के लिए परेशान रहने लगी. जब उस की परेशानी के बारे में प्रकाश पाटिल को पता चला तो उस ने ज्योत्सना के साथ मिल कर वैभव को अपने बीच से निकाल फेंकने की खतरनाक योजना बना डाली.

लेकिन वैभव मजबूत कदकाठी और अपराधी प्रवृत्ति का युवक था, इसलिए उस से सीधे निपटना ज्योत्सना और प्रकाश के वश की बात नहीं थी. इसलिए प्रकाश ने अपनी योजना में अपने एक दोस्त माइकल को भी शामिल कर लिया. योजना के अनुसार, ज्योत्सना 19 अगस्त, 2014 को अपने मायके दहिसर आ गई. वहीं से उस ने वैभव को फोन कर के मिलने के लिए वसई के रेलवे स्टेशन नायगांव बुलाया. 20 अगस्त, 2014 की सुबह वैभव अपने घर वालों को बताए बगैर ज्योत्सना से मिलने नायगांव पहुंच गया. साढ़े 10 बजे वैभव नायगांव रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो पहले से ही इंतजार कर रहे प्रकाश और माइकल ने उसे पकड़ लिया. दोनों खुद को पालिका इंसपेक्टर बता कर वैभव को पूछताछ के बहाने नायगांव पूर्व मित्तल क्लब हाउस के पास ले गए.

वहां पहुंच कर प्रकाश पाटिल और माइकल ने वैभव की यह कर पिटाई शुरू कर दी कि वह डोंगरी में रहने वाली ज्योत्सना मोरे को परेशान करता है और उसे धमकी दे कर बिना उस की मरजी के उस के साथ शारीरिक संबंध बनाता है. प्रकाश पाटिल और माइकल ने वैभव की इस तरह पिटाई की कि थोड़ी देर में वह बेहोश हो गया. उस के बेहोश होने के बाद प्रकाश पाटिल ने वैभव के गले में रस्सी डाल कर कस दी, जिस से उस की मौत हो गई.

वैभव को मौत के घाट उतार कर उस की लाश एक चादर में लपेटी और रात में ही माइकल की मारुति कार में रख कर उसे ठिकाने लगाने के लिए मुंबई-अहमदाबाद एक्सप्रेस हाइवे पर चल पड़े. रात 12 बजे के आसपास वे मनोर के पास बह रही नदी के पुल पर पहुंचे. उन्होंने लाश कार से निकाली और तलाशी में उस का सारा सामान निकाल कर लाश को नदी में फेंक दिया. लाश ठिकाने लगाने के बाद प्रकाश ने फोन कर के ज्योत्सना को वैभव की हत्या के बारे में बता दिया. अगले दिन वैभव की लाश किसी मछुआरे के जाल में फंस गई तो उस ने इस बात की जानकारी थाना मनोर पुलिस को दी. पुलिस ने शव बरामद कर के शिनाख्त कराने की कोशिश की. शिनाख्त न होने पर पोस्टमार्टम के बाद थाना मनोर पुलिस ने उस का अंतिम संस्कार करा दिया.

वैभव की हत्या से ज्योत्सना तो खुश थी ही, प्रेमिका को खुश कर के प्रकाश भी खुश था. जिस तरह प्रकाश ने वैभव को अपने रास्ते से हटाया था, उस का सोचना था कि पुलिस उस तक कभी नहीं पहुंच पाएगी. 4 महीने बीत गए तो उसे पूरा विश्वास हो गया कि अब वह बच गया. लेकिन पुलिस खोजतेखोजते ज्योत्सना तक पहुंच गई तो वैभव आचरेकर की हत्या का रहस्य खुल गया और वह भी पकड़ा गया. पूछताछ के बाद पुलिस ने प्रकाश के दोस्त माइकल को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद वैभव की हत्या का मुकदमा प्रकाश पाटिल, ज्योत्सना और माइकल के खिलाफ दर्ज कर के महानगर मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक तीनों अभियुक्त जेल में ही थे. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime News: करवाचौथ पर मौत का उपहार – प्यार में ये क्या कर बैठा मंजीत

Crime News: 29अक्तूबर, 2018 को सुबह के करीब 8 बजे थे. तभी रोहिणी जिले के थाना बवाना के ड्यूटी अफसर हैडकांस्टेबल जितेंद्र कुमार मीणा को सूचना मिली कि दरियापुर-बवाना रोड पर वर्मी कंपोस्ट पोली फार्म के पास एक महिला को किसी ने गोली मार दी है. महिला स्कूटी से जा रही थी. ड्यूटी अफसर ने इस सूचना से इंसपेक्टर राकेश कुमार को अवगत करा दिया. इंसपेक्टर राकेश कुमार तुरंत एएसआई राजेश कुमार, कांस्टेबल यशपाल, अनिकेत आदि को ले कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

घटनास्थल थाने से पश्चिम दिशा में करीब 3 किलोमीटर दूर था, इसलिए वह जल्द ही वहां पहुंच गए. उन्हें वर्मी कंपोस्ट पोली फार्म के सामने सड़क पर सफेद रंग की स्कूटी नंबर डीएल 11 एसपी 7044 पड़ी मिली, जिस में चाबी लगी हुई थी.

वहीं पर 2 लेडीज बैग, एक हेलमेट और एक जोड़ी जूती पड़ी थी. पास में सड़क पर ही थोड़ा खून भी था और कारतूस का एक खोखा भी पड़ा था. आसपास के लोगों ने बताया कि एक महिला स्कूटी से जा रही थी, तभी किसी ने उसे गोली मार दी. कुछ लोग उसे महर्षि वाल्मीकि अस्पताल ले गए हैं. कांस्टेबल यशपाल को घटनास्थल पर छोड़ कर इंसपेक्टर राकेश कुमार महर्षि वाल्मीकि अस्पताल चले गए. वहां उन्होंने डाक्टरों से बात की तो पता चला, उस महिला की मौत हो चुकी है. महिला कौन है और कहां रहती है. पुलिस के लिए यह जानना जरूरी था.

इस के लिए पुलिस ने घटनास्थल से मिले बैगों की तलाशी ली तो पता चला मृतका का नाम सुनीता है और वह बवाना के दादा भैया वाली गली के रहने वाले मंजीत की पत्नी है. वह सोनीपत के फिरोजपुर गांव में गवर्नमेंट सीनियर सैकेंडरी गर्ल्स स्कूल में टीचर थीं. मृतका के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बवाना स्थित मृतका के ससुराल वालों को सूचना दे दी.

कुछ ही देर में मृतका का पति मंजीत और घर के अन्य लोग महर्षि वाल्मीकि अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने जब वहां सुनीता की लाश देखी तो फफकफफक कर रोने लगे. मृतका की शिनाख्त हो जाने के बाद इंसपेक्टर राकेश कुमार ने इस की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी और कांस्टेबल अनिकेत को अस्पताल में छोड़ कर वह फिर से घटनास्थल पर पहुंच गए. सबूत जुटाने के लिए उन्होंने क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी घटनास्थल पर बुला लिया. कुछ ही देर में डीसीपी (रोहिणी) रजनीश गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए. इस के बाद अस्पताल पहुंच कर उन्होंने मृतका  के ससुराल वालों से बात की.

मृतका के पति मंजीत ने बताया कि वह सोनीपत के एक सरकारी स्कूल में टीचर थी. रोजाना की तरह वह आज सुबह करीब 7 बजे अपनी स्कूटी से ड्यूटी के लिए निकली थी. पता नहीं किस ने उसे गोली मार दी. पूछताछ में मंजीत ने बताया कि उस की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है. माहौल गमगीन होने की वजह से उस समय उन्होंने मंजीत से ज्यादा पूछताछ करनी जरूरी नहीं समझी, लेकिन इतना तो वह जानते ही थे कि सुनीता की हत्या के पीछे कोई न कोई वजह जरूर रही होगी और वह आज नहीं तो कल जरूर सामने आ जाएगी.

इंसपेक्टर राकेश कुमार को कुछ निर्देश दे कर रजनीश गुप्ता वहां से चले गए. उन के जाने के बाद इंसपेक्टर राकेश कुमार ने मौके से बरामद सबूत अपने कब्जे में ले लिए और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर केस की जांच शुरू कर दी. राकेश कुमार ने जांच की शुरुआत मृतका सुनीता की ससुराल से ही की. पति मंजीत ने बताया कि घर में वह वह नौर्मल रहती थी. किसी को भी उस से किसी तरह की शिकायत नहीं थी. वह स्कूटी से ही स्कूल आतीजाती थी. पुलिस ने मंजीत से सुनीता के मायके वालों का पता और फोन नंबर ले कर उन लोगों को बवाना थाने बुला लिया.

पुलिस को मिली महत्त्वपूर्ण जानकारी

सुनीता के मातापिता थाना बवाना पहुंच गए. उन्होंने बताया कि मंजीत सुनीता को अकसर परेशान करता रहता था. साथ ही यह भी कि मंजीत का किसी मौडल के साथ चक्कर चल रहा था, जो मुंबई में रहती है. सुनीता इस का विरोध करती थी तो वह सुनीता को प्रताडि़त करता था. इसी के चलते मंजीत सुनीता पर तलाक लेने का दबाव डाल रहा था. ये बातें उस ने मायके वालों को बताई थीं.

पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. लिहाजा पुलिस ने सुनीता के पति मंजीत के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि मंजीत की मुंबई के किसी फोन नंबर पर अकसर बातें होती थीं. जांच में वह नंबर एंजल गुप्ता का निकला. एंजल गुप्ता कोई आम लड़की नहीं थी बल्कि एक मशहूर मौडल थी और बौलीवुड की कई फिल्मों में काम कर चुकी थी. काल डिटेल्स से केस की स्थिति साफ हो गई. साथ ही पुलिस को सुनीता के मातापिता के बयानों में भी सच्चाई नजर आने लगी. लिहाजा इंसपेक्टर राकेश कुमार ने मंजीत को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया.

मंजीत से उस की पत्नी सुनीता के मर्डर के बारे में पूछताछ की गई तो पहले वह इधरउधर की बातें कर के पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने अपना अपराध न केवल स्वीकारा बल्कि उस की हत्या में शामिल रहे लोगों के नामों का भी खुलासा कर दिया. उस से पूछताछ के बाद पता चला कि सुनीता की हत्या के मामले में मंजीत की प्रेमिका एंजल गुप्ता के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता का भी हाथ था. राजीव ने ही भाड़े के हत्यारों से 10 लाख रुपए में सुनीता की हत्या का सौदा किया था. मंजीत से हुई पूछताछ के बाद सुनीता की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह एक मौडल के प्यार की कहानी थी.

सीधीसादी जिंदगी थी सुनीता की

मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली सुनीता का विवाह दिल्ली के बवाना में रहने वाले मंजीत के साथ हुआ था. मंजीत प्रौपर्टी डीलर था. सुनीता पति से ज्यादा पढ़ीलिखी थी, इस के बावजूद उस ने खुद को ससुराल में ढाल लिया था. पति की आर्थिक स्थिति भी मजबूत थी और उस का प्रौपर्टी का काम भी अच्छा चल रहा था. लिहाजा सुनीता को ससुराल में किसी तरह की परेशानी नहीं थी. धीरेधीरे समय अपनी गति से बीतता रहा. सुनीता एक बेटी और एक बेटे की मां बन गई. फिलहाल उस की बेटी 16 साल की है और बेटा 12 साल का.

सुनीता सोनीपत के फिरोजपुर गांव स्थित गवर्नमेंट सीनियर सैकेंडरी गर्ल्स स्कूल में पढ़ाती थी. ससुराल बवाना से स्कूल की दूरी लगभग 20 किलोमीटर थी, इसलिए स्कूल आनेजाने के लिए सुनीता ने एक स्कूटी खरीद ली थी. उसी से वह स्कूल के लिए सुबह करीब 7 बजे घर से निकल जाती थी. सुनीता अपने गृहस्थ जीवन से खुश थी, लेकिन 2 साल पहले उस की खुशियों में ग्रहण लगना शुरू हो गया था. दरअसल, दिल्ली की एक पार्टी में मंजीत की मुलाकात एंजल गुप्ता नाम की एक मौडल से हुई. एंजल गुप्ता बेहद खूबसूरत थी और बौलीवुड की कई फिल्मों में छोटामोटा काम कर चुकी थी.

जसवीर भाटी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘भूरी’ के आइटम सांग ‘ओ मेरा झुमका..मेरा ठुमका बदनाम हो गया’ में भी एंजल गुप्ता ने अपने जलवे बिखेरे थे. वह एक्ट्रैस बनने की दौड़ में थी. एंजल गुप्ता का असली नाम शशिप्रभा था. बताया जाता है कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी. उस की मां दिल्ली में सीपीडब्ल्यूडी में नौकरी करती है और आर.के. पुरम सेक्टर-4 के सरकारी क्वार्टर में रहती है. उस के पिता का देहांत काफी दिनों पहले हो चुका था. मौडलिंग के क्षेत्र में आने के बाद शशिप्रभा एंजल गुप्ता के नाम से जानी जाने लगी थी. एंजल गुप्ता कुछ दिनों तक तो दिल्ली में ही मौडलिंग करती रही, फिर मन में बौलीवुड के हसीन सपने ले कर मुंबई चली गई.

मुंबई जाने के लिए एंजल गुप्ता के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता ने उस की हर तरह से मदद की. मुंबई में एंजल ने जो फ्लैट किराए पर लिया था, उस का हर महीने का किराया 50 हजार रुपए था, जो राजीव ही देता था. मुंबई जा कर एंजल फिल्मों में काम पाने के लिए संघर्ष करने लगी. उस की मेहनत रंग लाई और उसे कुछ फिल्मों में काम मिल गया. इस के बाद वह और ऊंचाई पर पहुंचने के सपने देखने लगी. एंजल के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता दिल्ली रोहिणी सैक्टर-3 में रहते थे. वह एक बिजनैसमैन हैं और दक्षिणी दिल्ली में उन के रेस्तरां और होटल हैं. वह एंजल गुप्ता को हर तरह से सपोर्ट करते थे.

आकर्षक कदकाठी वाला मंजीत पहली मुलाकात में ही एंजल का दीवाना हो गया था. पार्टी में मिलने के बाद से एंजल और मंजीत की फोन पर बातें होने लगीं. धीरेधीरे एंजल का झुकाव भी मंजीत की तरफ हो गया. समयसमय पर दोनों की मुलाकातें भी होने लगीं, जिस से दोनों और नजदीक आते गए. धीरेधीरे दोनों के संबंध इस स्थिति तक पहुंच गए कि वह शादी करने की सोचने लगे थे. लेकिन इस में सब से बड़ी समस्या मंजीत की पत्नी सुनीता थी. अपनी ब्याहता के रहते हुए एंजल से शादी नहीं कर सकता था.

सुनीता को पता चली हकीकत

पति पर आंखें मूंद कर विश्वास करने वाली सुनीता इस बात से काफी दिनों तक तो अंजान रही. बाद में जब मंजीत ने उसे मानसिक रूप से परेशान करना शुरू किया तब भी वह कुछ नहीं समझ पाई. उस की समझ नहीं आया कि अचानक मंजीत में यह बदलाव कैसे आ गया. सुनीता ने कई बार मंजीत को फोन पर बात करते देखा. फोन पर हो रही बातचीत सुनने के बाद सुनीता समझ गई कि मंजीत का जरूर किसी लड़की से चक्कर चल रहा है.

अंतत: जैसेतैसे सुनीता यह पता लगाने में सफल हो गई कि मुंबई में रहने वाली एक मौडल से मंजीत के प्रेमिल संबंध हैं. सुनीता ने इस बारे में मंजीत से पूछा तो पहले तो वह इस बात को टालने की कोशिश करता रहा लेकिन फिर बोला, ‘‘अगर तुम्हारे मन में इस तरह का कोई शक हो गया है तो मुझ से तलाक ले लो.’’

‘‘नहीं, मैं न तो तलाक नहीं दूंगी और नहीं लूंगी, तुम्हें उस लड़की से बात भी बंद करनी होगी.’’

सुनीता के इतना कहते ही मंजीत ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई. सुनीता समझ नहीं पा रही थी कि अपने घर को कैसे संभाले. विपरीत हालातों में मन को शांत रखने के लिए वह रोजमर्रा की डेली डायरी लिखती थी. तनाव की बातें वह डायरी में लिख देती थी. जब वह ज्यादा परेशान होती तो मायके में बात कर के अपना मन हलका कर लेती थी. मायके वालों ने भी मंजीत को बहुत समझाया लेकिन वह एंजल गुप्ता के प्यार में अंधा हो चुका था इसलिए किसी के समझाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ. नतीजा यह निकला कि मंजीत और उस के ससुराल वालों के बीच छत्तीस का आंकड़ा बन गया.

बताया जाता है कि एंजल मंजीत पर शादी करने का दबाव बना रही थी. इस बारे में उस ने अपने मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता से बात की. राजीव ने उसे भरोसा दिया कि वह उस की शादी मंजीत से कराने में पूरी मदद करेगा. मई, 2017 में सुनीता और एंजल के बीच फोन पर तीखी नोंकझोंक हुई, जिस में सुनीता ने एंजल को गुस्से में काफी कुछ कह दिया. बताया जाता है कि तब एंजल ने उसे अंजाम भुगतने की धमकी भी दी थी.

एंजल सुनीता द्वारा की गई इस बेइज्जती का बदला लेना चाहती थी, इसलिए उस ने बढ़ाचढ़ा कर यह बात मंजीत को बताई ताकि वह सुनीता पर भड़के. उस ने साफ कह दिया कि वह ऐसा अपमान बरदाश्त नहीं कर सकती. अगर मुझे चाहते हो तो या तो सुनीता को तलाक दो या फिर बेइज्जती का बदला लो. इस बात को ले कर एंजल, राजीव और मंजीत ने एक मीटिंग की. बताया जाता है कि इस मीटिंग में राजीव ने सुनीता को ठिकाने लगाने में 10 लाख रुपए खर्च करने को कह दिया. मंजीत इस के लिए तैयार हो गया. क्योंकि सुनीता तलाक देने को राजी नहीं थी, उस के पास उसे ठिकाने लगाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

राजीव जानता था कि उस के ड्राइवर दीपक के बदमाशों से संबंध हैं, इसलिए उस ने दीपक से सुनीता की हत्या के बारे में बात की. दीपक 10 लाख रुपए में यह काम कराने को तैयार हो गया. राजीव ने बतौर एडवांस उसे ढाई लाख रुपए दे दिए. दीपक ने मेरठ के रहने वाले शहजाद सैफी उर्फ कालू, धर्मेंद्र और विशाल उर्फ जौनी से बात की.

शूटर पहुंच गए दिल्ली

योजना को अंजाम देने के लिए 25 अक्तूबर, 2018 को राजीव गुप्ता, दीपक, धर्मेंद्र, शहजाद और विशाल बवाना पहुंचे. लेकिन तब तक सुनीता स्कूल के लिए निकल चुकी थी. 27 अक्तूबर को करवाचौथ का त्यौहार था. एकतरफ मंजीत जिस पत्नी की हत्या के तानेबाने बुन रहा था, तो पत्नी इस सब से अनभिज्ञ पति की लंबी आयु की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत रखे हुए थी. किराए के जो बदमाश बाहर से दिल्ली आए हुए थे, वह खाली हाथ अपने घर नहीं लौटना चाहते थे. लिहाजा उन्होंने हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास किराए का एक कमरा ले लिया. साथ ही सुनीता को स्कूल जाते वक्त उस की हत्या करने की योजना बना ली.

योजना के अनुसार, 29 अक्तूबर को अलसुबह राजीव गुप्ता अपनी डस्टर कार संख्या डीएल8सी जेड4306 से बदमाशों को हजरत निजामुद्दीन से बवाना ले गया. सुनीता किसी भी हालत में न बच पाए, इस के मद्देनजर दीपक और धर्मेंद्र वर्मी कंपोस्ट फार्म, दरियापुर के पास पोजीशन ले कर खड़े हो गए. जबकि शहजाद और विशाल गांव बवाना में राजीव गांधी स्टेडियम के पास बाइक ले कर खडे़ हो गए. उन के हाथों में .315 बोर के तमंचे थे.

सुबह 7 बजे के करीब सुनीता अपनी स्कूटी से जैसे ही स्कूल के लिए निकली तो उस के पति मंजीत ने इंतजार कर रहे बदमाशों को मिस्ड काल दी. यह उन के लिए एक इशारा था. इशारा पाते ही बदमाश सतर्क हो गए. तभी राजीव गुप्ता वहां से चला गया. उधर सुनीता घर से करीब 7 किलोमीटर दूर दरियापुर गांव के नजदीक पहुंची तो वहां घात लगाए बदमाशों ने सुनीता पर फायर कर दिया. उस समय करीब साढ़े 7 बजे थे. गोलियां लगते ही सुनीता गिर गई. वह सड़क पर तड़प रही थी, तभी उधर से गुजर रहे लोगों ने उसे महर्षि वाल्मीकि अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पता चला कि सुनीता के सीने पर 3 गोलियां मारी गई थीं.

मंजीत से पूछताछ के बाद उस के घर की तलाशी ली गई तो पुलिस को सुनीता की पर्सनल डायरी मिली, जिस में उस ने काफी कुछ लिखा था. मंजीत की निशानदेही पर पुलिस ने प्रेमिका एंजल गुप्ता उर्फ शशिप्रभा व उस के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने एंजल गुप्ता की निशानदेही पर मयूर विहार में रहने वाली उस की मौसी के घर से 2 मोबाइल फोन भी बरामद किए, जिन का इस्तेमाल वारदात में हुआ था. इन तीनों को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

इस के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने वारदात में शामिल रहे दीपक और शहजाद सैफी उर्फ कालू को गिरफ्तार कर लिया. इन दोनों ने भी पुलिस के सामने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस ने इन दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक धर्मेंद्र और विशाल पुलिस की पकड़ में नहीं आए थे. Crime News

  कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Rajasthan News: वासना की भेंट चढ़ा ससुर

Rajasthan News: अणछी और नाथू सिंह बेरोकटोक मजे से रंगरलियां मना रहे थे. अचानक ऐसा क्या हुआ कि अणछी और नाथू सिंह को हत्या जैसा अपराध करने को मजबूर होना पड़ा. राजस्थान के जिला राजसमंद के थाना खमनेर के एएसआई रामचंद्र औफिस के सामने गुनगुनी धूप में खड़े मौसम का आनंद ले रहे थे, तभी गांव ढीमड़ी से शंभू सिंह ने फोन द्वारा सूचना दी कि ग्रामपंचायत उनवास के गांव ढीमड़ी के एक बाड़े में एक बूढ़े की लाश पड़ी है.

घटना की गंभीरता को देखते हुए एएसआई रामचंद्र ने तत्काल हत्या की यह सूचना थानाप्रभारी रमेश कविया को दी. पुलिस अधिकारियों को सूचना दे कर थानाप्रभारी रमेश कविया पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. यह 23 जुलाई, 2014 की सुबह की बात थी. पुलिस जीप उनवास पहुंची तो घटनास्थल के बारे में पता लगाने के लिए थानाप्रभारी रमेश कविया ने गायभैंस का झुंड ले कर जा रहे एक बूढ़े से पूछा, ‘‘दादा, ये ढीमड़ी में लाश कहां मिली है?’’

‘‘सीधे चले जाओ, जहां भीड़ दिखाई दे, वहीं बाड़े में लाश पड़ी है.’’ बूढ़े ने कहा.

जीप थोड़ा आगे बढ़ी तो पुलिस को रोने की आवाज सुनाई दी. थानाप्रभारी ने जीप रुकवाई और पैदल ही वहां पहुंच गए, जहां से रोने की आवाज आ रही थी. लाश वहीं एक बाड़े में पड़ी थी. घटनास्थल के निरीक्षण में उन्होंने देखा कि जूते और कपड़े इधरउधर बिखरे पड़े थे. वहीं एक लाश पड़ी थी. पूछने पर पता चला कि मृतक का नाम किशन सिंह था. दीवार पर खून के छींटे पड़े थे. मृतक की उम्र 70 साल के आसपास थी. सिर पर किसी भारी चीज से वार कर के हत्या की गई थी. सिर फट जाने की वजह से उस का चेहरा काफी वीभत्स लग रहा था. थानाप्रभारी ने तुरंत लाश को कंबल से ढक दिया.

एफएसएल टीम अपना काम निपटा रही थी कि डीएसपी सिद्धांत शर्मा आ गए. घटनास्थल और लाश का निरीक्षण करने के बाद डीएसपी और थानाप्रभारी ने औपचारिक काररवाई निपटा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पुलिस ने मृतक किशन सिंह के घरपरिवार के बारे में तहकीकात शुरू की तो पता चला कि उस के बेटे मांगू सिंह की पत्नी अणछी का चरित्र ठीक नहीं था. उस का बगल के गांव के नाथू सिंह से प्रेम संबंध था. इस के बाद पुलिस को अणछी और उस के प्रेमी पर शक हुआ.

आसपड़ोस के लोगों ने भी इस बात का समर्थन किया तो थानाप्रभारी ने मृतक किशन सिंह की पत्नी वृद्धा सवाबाई से पूछताछ की. उस ने बताया कि अणछी का सोलंकियों की भागल (सेमा) निवासी नाथू सिंह राजपूत से अवैध संबंध था. इसी के चलते आए दिन परिवार में क्लेश होता रहता था. थानाप्रभारी ने बीट कांस्टेबल धीरचंद जांगिड़ से सोलंकियों की भागल के नाथू सिंह राजपूत के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘सर, यह वही नाथू सिंह है, जो कुछ दिनों पहले शांतिभंग के आरोप में पकड़ा गया था.’’

‘‘इस समय वह कहां मिलेगा?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘अभी पता किए लेते हैं सर.’’ कह कर कांस्टेबल धीरचंद ने मोटरसाइकिल उठाई और एक सिपाही को बैठा कर नाथू सिंह की तलाश में निकल पड़ा. वह सीधा बसअड्डे पहुंचा तो नाथू सिंह उसे दिखाई दे गया. बैग लिए वह कहीं जाने की तैयारी में था. कांस्टेबल धीरचंद को देख कर वह कांप उठा. वह भागने की सोच रहा था कि धीरचंद ने अपनी मोटरसाइकिल उस के सामने ला कर खड़ी कर दी. नाथू सिंह ने उस की ओर देखा तो उस ने पूछा, ‘‘इधर कहां?’’

‘‘साहब मुंबई जा रहा हूं. बस के इंतजार में खड़ा हूं.’’

‘‘फिलहाल तो तू मेरे साथ थाने चल, मुंबई जाना बाद में.’’ धीरचंद ने कहा.

‘‘साहब, थाने जाने में मेरी बस चली जाएगी.’’ नाथू सिंह हकलाया.

‘‘अब तुझे मुंबई नहीं, जेल जाना है. तू ने जो किया है, उस के लिए तुझे अब जेल जाना होगा.’’

कह कर धीरचंद ने नाथू सिंह को मोटरसाइकिल पर बैठाया और थाने आ गया. तब तक थानाप्रभारी रमेश कविया भी थाने आ गए थे. नाथू सिंह की हालत देख कर ही थानाप्रभारी समझ गए कि किशन सिंह की हत्या इसी ने की है. उस के सामने आते ही उन्होंने पूछा ‘‘किशन सिंह की हत्या तू ने ही की है न?’’

‘‘नहीं साहब, उस की हत्या मैं क्यों करूंगा?’’ नजरें चुराते हुए नाथू सिंह ने कहा.

‘‘अणछी ने तो कहा है कि किशन सिंह की हत्या तू ने ही की है.’’

अणछी का नाम सामने आते ही नाथू सिंह ढीला पड़ गया. उस ने सच बोलने में ही अपना भला समझा. इसलिए किशन सिंह की हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए उस ने कहा, ‘‘साहब, मैं अणछी से प्यार करता था. एक साल से हमारे बीच संबंध थे. किशन सिंह हमारे प्यार में रोड़ा अटका रहा था, इसीलिए मैं ने और अणछी ने पीटपीट कर उस की हत्या कर दी थी.’’

इस के बाद पुलिस ने किशन सिंह की बहू अणछी को भी गिरफ्तार कर लिया. थाने में की गई पूछताछ में दोनों ने किशन सिंह की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी. राजस्थान के जिला राजसमंद के थाना खमनेर के गांव ढीमड़ी की रहने वाली अणछी का पति मांगू सिंह राजपूत मुंबई में किसी कबाड़ी के यहां नौकरी करता था. उस का देवर मोहन सिंह भी भाई के साथ मुंबई में ही रहता था. मांगू सिंह मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर था. उस की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी. इसलिए अणछी भी इधरउधर मजदूरी कर के कुछ कमा लेती थी. पति और देवर मुंबई में रहते थे, जबकि अणछी ससुर किशन सिंह और सास सवाबाई की देखभाल के लिए उन के साथ गांव में रहती थी. उस की 3 बेटियां, ललिता, हंजा एवं सीता थीं.

अणछी शादीब्याह के मौके पर खाना बनाने वालों के साथ पूडि़यां बेलने भी जाती थी. इस में पैसा तो मिलता ही था, खाना भी मिल जाता था. ऐसे में ही अणछी की मुलाकात सोलंकियों की भागल के रहने वाले नाथू सिंह से हुई तो पहली ही मुलाकात में उस का दिल अणछी पर आ गया. नाथू सिंह खाना बनाने का कारीगर था. नाथू सिंह ने अणछी को चाहतभरी नजरों से देखा तो वह असहज हो गई. धीरेधीरे जानपहचान बढ़ी तो घरपरिवार के साथसाथ मन की बातें भी होने लगीं. ऐसे में नाथू सिंह ने कहा, ‘‘अणछी, तुम चाहो तो हमेशा के लिए मेरे साथ आ सकती हो.’’

‘‘क्या, क्या कहा तुम ने?’’ अनमने और रोबीले स्वर में अणछी बोली.

‘‘मेरा मतलब है कि मैं रसोइया हूं और आए दिन शादीब्याह में खाना बनाने जाता हूं. मुझे पूडि़यां बेलने के लिए औरतों की जरूरत होती ही है, इसलिए कहा कि तुम चाहो तो मेरे साथ हमेशा काम कर सकती हो.’’

‘‘ठीक है, तुम जब भी बुलाओगे, मैं आऊंगी.’’

इस के बाद अक्सर शादीब्याह में नाथू सिंह और अणछी की मुलाकातें होने लगीं. कभी देर हो जाती तो नाथू सिंह खुद ही उसे ढीमड़ी उस के घर पहुंचाने चला जाता. पति के दूर रहने की वजह से अणछी धीरेधीरे नाथू सिंह के नजदीक आती गई.

एक दिन शादी समारोह में खाना बनाने के बाद नाथू सिंह और अणछी बैठे बातें कर रहे थे तो नाथू सिंह ने कहा, ‘‘अणछी, मैं एक बात कहूं, बुरा तो नहीं मानोगी?’’

अणछी हंसते बोली, ‘‘ऐसी क्या बात हो गई, जो कहने के पहले पूछ रहे हो?’’

‘‘मैं तेरे साथ रहना भी चाहता हूं और सोना भी.’’

कुछ देर चुप रहने के बाद अणछी मंदमंद मुसकराते हुए बोली, ‘‘साथ तो रह ही रहे हो, जब मन हो, सो भी जाना.’’

यह सुन कर नाथू खुश हो गया. अब वह अणछी के साथ सोने के बारे में सोचने लगा. मजे की बात यह थी कि नाथू सिंह अणछी से उम्र में छोटा था. अणछी के पास नाथू सिंह के साथ सोने के बहुत मौके थे. घर में सासससुर बूढ़े थे और बच्चे छोटे. पति और देवर बहुत दूर रहते थे. इसलिए अणछी नाथू सिंह को घर पर ही बुलाने लगी. जल्दी ही दोनों वासना के तालाब में इस कदर डूब गए कि न उन्हें घरपरिवार की चिंता रह गई न इज्जत की. नाथू सिंह का जब मन होता, अणछी के घर पहुंच जाता. ढीमड़ी में अणछी के दो मकान थे. पुराने मकान में ससुर किशन सिंह और सास सवाबाई के साथ उस की 2 बड़ी बेटियां रहती थीं. जबकि दूसरे नए मकान में अणछी अपनी 5 साल की सब से छोटी बेटी सीता के साथ रहती थी. इसलिए नाथू सिंह को उस के घर आनेजाने में कोई परेशानी नहीं होती थी.

घर वाले भले ही अलग रहते थे, मगर गलीमोहल्ले के लोग तो दोनों को मिलतेजुलते देख ही रहे थे. उन्होंने ही यह बात किशन सिंह से बताई तो वह बहू पर नजर रखने लगा. एक दिन शाम को किशन सिंह ने नाथू सिंह को अणछी के घर से निकलते देखा तो चिल्लाया, ‘‘अरे नाथू, तेरे पास कोई कामधाम नहीं है क्या, जो दिनभर इधर ही भटकता रहता है?’’

यह सुन कर नाथू सकपकाया तो लेकिन जल्दी ही खुद को संभाल कर बोला, ‘‘मेरे पास बहुत काम है काका. काम के लिए ही तो अणछी को बुलाने आया था.’’

‘‘ठीक है, ऐसा कर तू अणछी की जगह किसी और को बुला ले. अब अणछी तेरे साथ नहीं जाएगी. और हां, अब तू इधर दिखाई भी मत देना, वरना मुझ से बुरा कोई और नहीं होगा.’’

किशन सिंह की इस धमकी से नाथू सिंह घबरा गया. वह समझ गया कि उन के संबंधों की जानकारी बूढे़ को हो गई है. वह उदास हो गया. क्योंकि अणछी से मिलना अब उस के लिए मुश्किल हो गया था. जब अणछी से मिले कई दिन हो गए तो वह परेशान रहने लगा. दूसरी ओर प्रेमी से न मिल पाने की वजह से अणछी भी बेचैन रहने लगी थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि प्रेमी से कैसे मिले. एक दिन मायके जाने के बहाने अणछी घर से निकली और सीधे प्रेमी नाथू सिंह के घर जा पहुंची. न जाने कैसे इस बात की भनक उस के ससुर किशन सिंह को लग गई. वह सीधे नाथू सिंह के घर पहुंचा और पूरी बात नाथू सिंह के पिता हिम्मत सिंह को बताई.

हिम्मत सिंह ने नाथू सिंह को डांटाफटाकारा ही नहीं, पिटाई भी की. इस के बाद नाथू सिंह और अणछी का मेलमिलाप एकदम बंद हो गया. लेकिन यह ज्यादा दिनों तक चल नहीं सका, क्योंकि दोनों ही एकदूसरे से मिले बिना रह नहीं सकते थे. मुलाकात को आसान करने के लिए नाथू सिंह ने एक मोबाइल फोन खरीद कर अणछी को दे दिया. इस के बाद उन के बीच रात में घंटोंघंटों बातें होने लगीं. चूंकि बात दोनों के परिवारों के सभी लोगों को पता चल चुकी थी, इसलिए वे जब भी मिलते, काफी चोरीछिपे मिलते थे. ऐसे में अणछी और नाथू सिंह को अपने ही दुश्मन लगने लगे थे. अणछी पर नजर रखने के लिए किशन सिंह उस के मकान के बाहर बाड़े में सोने लगा था.

22 जुलाई, 2014 की शाम किशन सिंह बाड़े में सोने आया तो अणछी और उस के बीच काफी कहासुनी हुई. गुस्से में किशन सिंह ने अणछी के साथ गालीगलौज की. तब गुस्से में अणछी ने नाथू सिंह को फोन कर के किशन सिंह को खत्म करने के लिए कह दिया. अणछी के प्यार में अंधा नाथू सिंह ठीक साढ़े 12 बजे ढीमड़ी पहुंच गया और दबे पांव अणछी के कमरे में जा पहुंचा. इस के बाद दोनों ने सलाहमशविरा कर के रात ठीक 3 बजे गहरी नींद में सो रहे किशन सिंह के सिर पर लाठियां बरसा कर उसे खत्म कर दिया. उस के चेहरे को भी पत्थर से कुचल दिया.

किशन सिंह की हत्या करने के बाद दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए, सुबह होने से पहले नाथू सिंह अपने घर चला गया. सवेरा होने पर किशन सिंह की हत्या की जानकारी शंभू सिंह को हुई तो उस ने पुलिस को फोन कर के घटना की सूचना दे दी. पुलिस ने वह लाठी और पत्थर बरामद कर लिया था, जिस से किशन सिंह की हत्या की गई थी. पूछताछ और सुबूत जुटाने के बाद थाना खमनेर पुलिस ने नाथू सिंह और अणछी को राजसमंद की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Rajasthan News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आध

UP Crime News: ईंट से लगातार प्रहार कर ली पत्नी की जान

UP Crime News: घरपरिवार और समाज की बंदिशें तोड़ कर बबलू ने शादीशुदा रूबी से प्रेमविवाह किया था. 2 बच्चों के मांबाप दोनों के बीच ऐसी कौन सी वजह पैदा हो गई कि बबलू को पत्नी का हत्यारा बनना पड़ा…

थाना बर्रा के रहने वाले विशाल रफूगर ने सीटीआई नहर के करीब से बहने वाले नाले में बोरे में भरी एक युवती की लाश देखी, जिस का सिर बाहर निकल गया था. उस का क्षतविक्षत चेहरा साफ दिखाई दे रहा था, जिसे चीलकौए नोचनोच कर खा रहे थे. विशाल ने शोर मचाया तो देखतेदेखते वहां भीड़ एकत्र हो गई. किसी राहगीर ने सीटीआई के पास वाले नाले में एक महिला की लाश पड़ी होने की सूचना 100 नंबर पर दे दी. पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना थाना गोविंदनगर को दी गई. थाना गोविंदनगर की पुलिस आई जरूर लेकिन शव थाना बर्रा क्षेत्र में पड़े होने की बात कह कर लौट गई. नतीजतन 2 घंटे तक लाश नाले में पड़ी रही.

मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में आया तो एसपी (पूर्वी) हरीशचंदर, सीओ (गोविंदनगर) ओमप्रकाश सिंह थाना बर्रा पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने साक्ष्य एकत्र करने के लिए फोरेंसिक टीम को भी फोन कर के मौके पर बुला लिया था. पुलिस ने लाश वाले बोरे को नाले से बाहर निकाला. बोरे से लाश निकलवा कर निरीक्षण शुरू हुआ. मृतका की उम्र 30-35 साल रही होगी. वह नीले रंग की सलवार, हरे रंग की लैगिग, लाल कुरता, गुलाबी रंग का स्वेटर पहने थी. उस के पैर की अंगुलियों में बिछिया थीं. दाएं हाथ पर बबलू और ॐ गुदा हुआ था. कपड़ों और रूपरंग से लग रहा था कि मृतका किसी अच्छे परिवार से रही होगी.

शव देख कर ही लग रहा था कि किसी धारदार हथियार से उस की गरदन काटी गई थी. पहचान छिपाने के लिए मृतका का चेहरा बुरी तरह कुचला गया था. यही नहीं, उस के चेहरे पर तेजाब भी डाला गया था. हत्यारों ने मृतका के स्तन और अन्य कोमल अंगों पर भी गंभीर चोटें पहुंचाई थीं. इस से यही अंदाजा लगाया गया कि महिला की हत्या घृणा एवं क्रोध में की गई थी. घटनास्थल की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने के बाद थाना बर्रा के प्रभारी रामबाबू सिंह उसे अज्ञात महिला के शव की शिनाख्त कराने में जुट गए. आननफानन में शहर के सभी थानों से गुमशुदा महिलाओं की दर्ज सूचनाएं एकत्र कराई गईं. लेकिन शहर के थानों में दर्ज अज्ञात महिलाओं की गुमशुदगी की जानकारियों से मृतका का कोई सुराग नहीं मिल सका.  6 फरवरी को अचानक किसी ने पुलिस को फोन कर के सूचना दी कि 3 फरवरी, 2015 को सीटीआई नहर के पास नाले में मिली लाश कानपुर के सीसामऊ के रहने वाले बबलू की पत्नी रूबी की है. उस की हत्या में उस के पति बबलू की मुख्य भूमिका है. इसीलिए उस ने थाने में अपनी पत्नी रूबी की गुमशुदगी दर्ज नहीं करवाई.

इस सूचना की पुष्टि करने के लिए थानाप्रभारी रामबाबू सिंह पुलिस टीम के साथ सीसामऊ स्थित बबलू के घर जा पहुंचे. लेकिन वहां ताला लटका हुआ था. मामले की तह तक पहुंचने के लिए उन्होंने बबलू के पड़ोसियों से पूछताछ की. मोहल्ले वालों ने बताया कि जितेंद्र शुक्ला उर्फ बबलू किसी बैंक में चपरासी है. उस की पत्नी रूबी का चालचलन ठीक नहीं था. बबलू की गैरमौजूदगी में उस के घर कई लोग आतेजाते थे. एक बार बबलू ने रूबी को एक युवक के साथ घर में रंगरलियां मनाते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया था. जिस के बाद मारपीट हुई थी और मामला थाने तक जा पहुंचा था. लेकिन रूबी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी. बबलू से उसे बच्चे थे, जिन के मोह की वजह से वह रूबी को छोड़ना नहीं चाहता था और उसे समझाबुझा कर लाइन पर लाना चाहता था.

लेकिन रूबी पर बबलू की बातों का कोई असर नहीं हो रहा था. वह बबलू के पीछे खुल कर रंगरलियां मनाती थी, जिस से वह काफी परेशान था. अचानक 31 जनवरी की रात को पता नहीं क्या हुआ कि रूबी और उस के बच्चे गायब हो गए. बबलू भी अपने घर पर ताला डाल कर कहीं चला गया. अब उस ने सिर मुड़वा लिया है और कभीकभी चोरीछिपे अपने घर आता है. मोहल्ले वालों से पूछताछ में यह बात भी सामने आई थी कि रूबी के हाथ पर बबलू का नाम और ‘ॐ’ गुदा हुआ था. इस से यह बात साफ हो गई कि सीटीआई नहर के पास नाले में मिली लाश रूबी की ही थी. मोहल्ले वालों से मिली जानकारी से पुलिस को पक्का विश्वास हो गया था कि रूबी की हत्या उस के पति बबलू ने ही करवाई है.

मोहल्ले वालों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस लाश की शिनाख्त करवाने के लिए वनखंडेश्वर मंदिर, पीरोड पहुंची. वहां से पुलिस मंदिर के पुरोहित गणेशशंकर जोशी को हिरासत में ले कर थाना बर्रा लौट आई. थाने ला कर गणेशशंकर जोशी को मृतका की लाश के फोटो और कपड़े दिखाए गए. सारी चीजें देखने के बाद बबलू के पिता गणेशशंकर ने पुलिस को बताया कि लाश उस की बहू रूबी की ही है. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने गणेशशंकर जोशी से रूबी की हत्या की सच्चाई जानने का प्रयास किया.

जोशी ने बताया कि उस के 2 बेटे हैं, बबलू और धर्मेंद्र. बबलू बैंक औफ बड़ौदा, पनकी में चपरासी था. उस के 2 बच्चे थे 11 वर्षीय बेटा शिवा और 9 साल की बेटी प्रियंका. वह स्वयं वनखंडेश्वर मंदिर, थाना बजरिया से पुरोहितगीरी करते थे और वहीं एक कमरे में रहते थे. करीब 12 वर्ष पहले जितेंद्र उर्फ बबलू ने रूबी से प्रेमविवाह किया था. इसलिए उस ने उस के साथ अपने संबंध तोड़ लिए थे. बबलू अपनी पत्नी रूबी को ले कर 104/313 बड़ा चौराहा, सीसामऊ में रहता था. उस का घर आनाजाना बहुत कम था. 31 जनवरी को बबलू रात 10 बजे के लगभग अपने दोनों बच्चों को ले कर उस के पास आया था और यह कह कर उन्हें रखने को कहा था कि उस के ऊपर एक बड़ी मुसीबत आ पड़ी है.

उस ने बताया कि रूबी बैंक से रुपए निकाल कर घरगृहस्थी का सामान खरीदने के लिए शाम 4 बजे सीसामऊ बाजार के लिए निकली थी. लेकिन इतनी रात होने पर भी वह वापस नहीं आई थी.  उस ने पूरे कानपुर में छानबीन कर डाली, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. शायद वह चेन्नई चली गई हो. वह अपने छोटे भाई धर्मेंद्र को ले कर उसे ढूंढने चेन्नई गया है. इस के अलावा रूबी की हत्या के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है.

गणेशशंकर से पुलिस को जो भी जानकारी मिली, उस से पुलिस को पक्का विश्वास हो गया कि बबलू रूबी की हत्या के बारे में अच्छी तरह जानता है. यह भी संभव था कि वह खुद भी हत्या में शामिल हो या फिर उस ने हत्या अन्य लोगों से करवाई हो? इसी कारण बबलू पुलिस के सामने आने में डर रहा है. पुलिस मृतका के पति जितेंद्र उर्फ बबलू की तलाश में जगहजगह दबिश देने लगी. पुलिस ने हत्या का खुलासा जल्द से जल्द करने के लिए बबलू के मिलने के संभावित स्थानों पर छापे डाले, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया. मजबूर हो कर पुलिस ने बजरिया थाना क्षेत्र में अपने मुखबिरों का जाल बिछा दिया.

9 फरवरी, 2015 की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि रूबी का पति बबलू शास्त्री चौक के पास किसी के इंतजार में खड़ा है. सूचना मिलते ही थान बर्रा पुलिस ने बबलू को घेर कर पकड़ लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई. उस से पूछताछ शुरू हुई तो वह काफी देर तक पुलिस को बरगलाता रहा. लेकिन जब उस से कड़ाई से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. उस ने जो कुछ बताया, वह इस तरह था.

जितेंद्र उर्फ बबलू 104/312 बड़ा चौराहा, सीसामऊ, थाना बजरिया, कानपुर में रहता था. वह बैंक औफ बड़ौदा में चपरासी था. करीब 12 साल पहले चंद मुलाकातों में ही उसे विजयनगर, कानपुर निवासी छोटे की पत्नी रूबी से प्यार हो गया था. धीरेधीरे जितेंद्र उर्फ बबलू और रूबी का प्यार ऐसे मुकाम पर पहुंच गया कि दोनों को एकदूसरे की दूरी खलने लगी. फलस्वरूप बबलू और रूबी ने घरपरिवार और सामाजिक मानमर्यादाओं को ताक पर रख कर घर से भाग कर प्रेमविवाह कर लिया. कुछ महीने लुकछिप कर रहने के बाद दोनों सीसामऊ मोहल्ले में खुल कर पतिपत्नी बन कर रहने लगे. कालांतर में दोनों के शिवा और प्रियंका 2 बच्चे हुए.

कुछ सालों तक रूबी ईमानदारी से जीवन जीती रही. उस के बाद उस के कदम बहकने लगे. उस ने पति की गैरमौजूदगी का लाभ उठा कर मोहल्ले के कुछ युवकों से अवैध संबंध बना लिए और घर में रंगरलियां मनाने लगी. इस से मोहल्ले में तरहतरह की चर्चाएं होने लगीं. जब पत्नी की चरित्रहीनता और नएनए लड़कों के साथ गुलछर्रे उड़ाने की खबर बबलू को हुई तो सच्चाई जानने के लिए एक दिन वह अपनी बैंक ड्यूटी छोड़ कर घर आ गया. घर में उस ने रूबी को मोहल्ले के एक युवक के साथ रंगरलियां मनाते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया.

उस दिन उस ने रूबी को जम कर मारापीटा और भविष्य में ऐसी कोई हरकत न करने की सख्त हिदायत दी, लेकिन इस से रूबी के चालचलन में कोई बदलाव नहीं आया. यह देख कर बबलू को रूबी से नफरत हो गई. बच्चों का भविष्य बरबाद न हो, यह सोच कर बबलू रूबी को हर तरह से समझाबुझा कर रास्ते पर लाने का प्रयास किया कि वह ईमानदारी भरा जीवन गुजारे, लेकिन रूबी पर इस का कोई असर नहीं हुआ. नतीजतन घरपरिवार और रिश्तेदारों के बीच बबलू की बदनामी होने लगी. दूसरी ओर रूबी स्वयं पर अंकुश लगाने को ले कर सख्त होने लगी और पति को मुंह पर जवाब देने लगी, जिस के चलते बबलू और रूबी में 2 बार जम कर मारपीट हुई.

रूबी ने इस की शिकायत थाने में की. लेकिन पुलिस ने इसे पतिपत्नी का मामला मान कर दोनों को समझाबुझा कर लौटा दिया. तीसरी बार बबलू ने बाहरी लड़कों को घर में बैठाने को ले कर रूबी को जम कर पीटा. इस बार भी पुलिस ने रूबी का पक्ष लिया और सही न्याय करने के बजाय दोनों का समझौता करा दिया. इस समझौते में तय हुआ कि रूबी अपने बच्चों के साथ अलग रहेगी और बबलू उसे 4 हजार रुपए महीने खर्च देगा. इस के बाद रूबी बबलू से 4 हजार रुपए प्रति माह लेती रही. इस के बाद रूबी ने बबलू को अपने पास रहने के लिए मजबूर कर दिया. इस तरह रूबी हर महीने बंधीबंधाई रकम ले कर पत्नी की तरह बबलू के साथ रहती भी रही और उसे पुलिस का डर दिखा कर पूरी तरह अपने कब्जे में किए रही. जरा भी कोई बात होती तो वह उसे जेल भिजवाने की धमकी दे देती.

इस सब के चलते बबलू गहरे तनाव में रहने लगा. इस स्थिति का फायदा उठा कर रूबी खुल कर मनमानी करने लगी. इतना ही नहीं, अब वह अपने चाहने वालों से पति के सामने ही मिलनेजुलने लगी. बबलू से जब पत्नी की हरकतें सही नहीं गईं तो उस ने रूबी को अपनी जिंदगी से हटाने का इरादा बना लिया. जितेंद्र शुक्ला उर्फ बबलू ने गोविंदनगर निवासी अपने खास दोस्त राधेश तिवारी से अपनी पत्नी रूबी की अय्याशी के बारे में पूरी बात बता कर कहा कि अब उस से रूबी की हरकतें बरदाश्त नहीं होतीं. घर में मेरी स्थित एक भड़ुए जैसी हो गई है. उस के कारनामे मुझ से देखे नहीं जा रहे हैं. मैं उस से अपना पिंड छुड़ाना चाहता हूं. वह उसे बातबात में जेल भिजवाने की धमकी देती है, अब वह उस की हत्या कर के ही जेल जाना चाहता है. बबलू की बात सुन कर राधेश तिवारी उस की मदद के लिए तैयार हो गया.

राधेश तिवारी समाचार पत्र विके्रता था. उस की काफी दूरदूर तक अच्छी जानपहचान थी. राधेश तिवारी ने गोविंदनगर में रहने वाले पेशेवर हत्यारे शुभम मौर्य से जितेंद्र जोशी उर्फ बबलू की मुलाकात करवा कर बातचीत करवाई. शुभम मौर्य से रूबी की हत्या का सौदा 30 हजार रुपए में तय हो गया. बबलू ने शुभम मौर्य को रूबी की हत्या के लिए 25 हजार रुपए एडवांस दे दिए. शेष 5 हजार रुपए रूबी की हत्या के बाद देना तय हुआ. योजना के मुताबिक, 31 जनवरी, 2015 की रात 10 बजे के लगभग राधेश तिवारी, शुभम मौर्य व उस का साथी विजय उर्फ पुच्ची बबलू के घर आ गए.

चारों ने घर पर ही देर रात तक शराब पी. उसी दौरान शुभम मौर्य के इशारे पर बबलू अपने बेटे शिवा और बेटी प्रियंका को यह कह कर घर के बाहर ले कर चला गया कि ‘आप लोग बैठो, मैं बच्चों को बाजार से नाश्ता दिलवा कर जल्द वापस आता हूं. जैसे ही बबलू बच्चों को ले कर घर से बाहर गया, शुभम मौर्य, राधेश तिवारी और विजय कमरे में बैठी रूबी के पास पहुंच गए और उसे दबोच कर उस का मुंह दबा लिया. विजय उस के सिर पर ईंट से वार करने लगा. विजय रूबी के सिर पर तब तक ईंट मारता रहा, जब तक वह मरणासन्न नहीं हो गई. इस के बाद विजय ने सूजे से रूबी के गले को बुरी तरह से गोद दिया.

बबलू बच्चों को पिता के घर छोड़ कर पुन: लौट आया. तब तक रूबी मर चुकी थी. योजना के मुताबिक रूबी की लाश की शिनाख्त मिटाने के लिए उस के चेहरे पर ईंटें मारमार कर बुरी तरह से कुचल दिया गया. चेहरे की शिनाख्त किसी परिस्थितियों में न हो सके, इस के लिए उस के चेहरे पर तेजाब भी डाला गया. इस के बाद रूबी के क्षतविक्षत शव को आननफानन में वाटरपू्रफ बोरे में भर कर अच्छी तरह सिल दिया गया. लाश को ठिकाने लगाने के लिए रात के अंधेरे में शुभम मौर्य फरजी नंबर की अपनी स्कूटी पर रूबी के लाश वाले बोरे को लाद कर विजय के साथ चला गया और उस बोरे को सीटीआई नहर के पास नाले में फेंक कर अपने घर चला गया.

जितेंद्र उर्फ बबलू ने पुलिस को बताया कि वह रूबी के मोहल्ले के लड़कों के साथ अवैधसंबंधों से त्रस्त था. रूबी तृप्ति इतनी कामांध हो गई थी कि समझाने के बाद भी वह नहीं मानती थी. इसलिए उस के सामने उस की हत्या करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था. इसलिए 30 हजार रुपए की सुपारी दे कर उस ने उस की हत्या करवा दी थी. पुलिस बबलू को अपने साथ गोविंदनगर के ब्लाक नंबर 10 ले गई. उस की निशानदेही पर राधेश तिवारी, विजय उर्फ पुच्ची, शुभम मौर्य को गिरफ्तार कर लिया गया. साथ ही लाश को ठिकाने लगाने में इस्तेमाल की गई स्कूटी, मृतका और उस के पति बबलू के मोबाइल भी बरामद कर लिए गए.

पूछताछ के बाद जांच अधिकारी ने उपर्युक्त चारों अभियुक्तों को भादंवि. की धारा 302, 201, 120बी के अंतर्गत चालान तैयार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इस तरह रूबी की बदचलनी की वजह से एक परिवार बरबाद हो गया. UP Crime News

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित