Crime Kahani : बूढ़े आशिक संग रहने की खातिर मां ने बेटी का मुंह दबाकर मार डाला

Crime Kahani : वासना की आग में सुलगने वाली औरत बड़े से बड़ा गुनाह कर जाती है. नंदिनी हत्याकांड इस का उदाहरण है. टीना अपने बूढ़े आशिक प्रह्लाद सहाय के प्यार में ऐसी अंधी हुई कि उस ने पति और उस का घर तो छोड़ा ही, अपनी बेटी के खून से भी हाथ रंग दिए.

राजस्थान के कोटा जिले के थाना बुढ़ादीव के गांव बोरखेड़ा में सुमित पुत्र हरदेव यादव अपनी पत्नी पुष्पा यादव उर्फ टीना (25 वर्ष) और इकलौती बेटी नंदिनी (4 साल) के साथ रहता था. सुमित सीधासादा इंसान था. वहीं उस की पत्नी टीना उर्फ पुष्पा रंगीनमिजाज युवती थी. सुमित का दिन जहां मेहनतमजदूरी करने में बीतता था, वहीं टीना का दिन मोबाइल देख कर गुजरता था. सुमित और टीना की शादी को करीब 6 साल हो चुके थे. इन 6 सालों में टीना एक बेटी नंदिनी की मां बन गई थी. उस का बदन कसा था और हसरतें उफान पर थीं. वह चाहती थी कि सुमित उसे सारी रात बांहों में भर कर जन्नत की सैर कराए.

मगर इस के उलट सुमित दिन भर कामधंधे में खपने के कारण इतना थक जाता था कि शाम को घर लौट कर खाना खा कर बिस्तर पर जा पड़ता था. टीना जब रसोई का काम निपटा कर पति के पास आती तो वह नींद में खर्राटे भरता मिलता था. यह देख कर टीना का मन कसैला हो जाता था. वह दिन भर इसी सोच में रहती कि आज पति उसे शारीरिक सुख देगा. मगर रात में थकामांदा पति उसे सोता मिलता. वह कभीकभी सोचा करती कि कैसे मर्द से ब्याह किया जो घोड़े बेच कर हर रात सो जाता है. उसे तनिक भी बीवी को प्यार करने की इच्छा नहीं होती. औरत भूखी रह सकती है मगर वह बिना शारीरिक प्यार के नहीं रह सकती.

सुमित कभीकभार ही टीना से शारीरिक संबंध बनाता था. मगर टीना चाहती थी कि उसे पति हर रात प्यार करे. वह पति से शर्म के मारे कह नहीं पाती थी. समय का पहिया घूमता रहा. एक दिन टीना किसी रिश्तेदार को मोबाइल पर फोन लगा रही थी. 3-4 बार घंटी बजने के बाद फोन उठा कर कोई शख्स बोला, ‘‘हैलो.’’

‘‘हां जी, आप कौन बोल रहे हैं?’’ टीना ने कहा तो फोन उठाने वाला बोला, ‘‘आप कौन हैं?’’

‘‘मैं तो टीना बोल रही हूं बोरखेड़ा, कोटा से.’’

‘‘टीना जी, मैं प्रह्लाद सहाय जयपुर से बोल रहा हूं. कहिए मैं आप की क्या सेवा करूं. फोन कैसे किया?’’ उस शख्स ने कहा.

सुन कर टीना बोली, ‘‘सौरी, आप को रौंग नंबर लग गया. मैं कहीं और फोन लगा रही थी.’’

‘‘रौंग नंबर लगा तो कोई बात नहीं. हम दोस्त तो बन ही सकते हैं. फोन पर बात कर के अच्छा लगा. वैसे आप की आवाज बड़ी मीठी और प्यारी है.’’ प्रह्लाद बोला.

‘‘तारीफ के लिए शुक्रिया. वैसे बातें आप भी बड़ी प्यारी करते हैं. मैं नंबर सेव कर लेती हूं. फुरसत में बात करते हैं.’’

‘‘ओके, मैं भी आप का नंबर सेव कर लेता हूं.’’ प्रह्लाद सहाय बोला. टीना ने काल डिसकनेक्ट कर दी. दोनों ने एकदूसरे के नंबर सेव कर लिए. रौंग नंबर से शुरू हुई इस बातचीत के बाद वह दोनों अकसर फोन पर करने लगे. बात नहीं करने पर उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. एक दिन दोनों ने फोन पर बातों ही बातों में प्यार का इजहार कर दिया और टीना ने प्रेम आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया. प्रह्लाद को टीना ने बता दिया था कि वह एक 6 साल की बेटी नंदिनी की मां है. प्रह्लाद ने टीना से कहा कि वह नंदिनी को अपनी बेटी बना लेगा और पालनपोषण करेगा. टीना यादव यह जान कर बहुत खुश हुई कि उस का प्रेमी उस की बेटी को अपना रहा है. वह उस की प्यार भरी बातों के जाल में उलझती चली गई. वह भूल गई कि वह शादीशुदा और एक बेटी की मां है.

टीना भूल गई कि उस के मातापिता ने उसे डोली में बिठा कर विदा करते हुए कहा था, ‘‘बेटी, सुखदुख, अमीरीगरीबी आतेजाते रहेंगे. मगर ससुराल के घर से तेरी अर्थी ही उठनी चाहिए. इस के अलावा ससुराल के घर से कभी कदम बाहर नहीं रखना.’’

टीना प्रह्लाद पर इतना विश्वास करने लगी कि वह पति का घर छोड़ कर उस के पास जाने को तैयार हो गई थी. पति के साथ अग्नि के समक्ष सात फेरे ले कर जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाने वाली टीना शादी के मात्र 6 साल बाद ही पति की पीठ में खंजर घोंप कर प्रेमी का घर आबाद करने को उतावली हो रही थी.  सुमित को तो अपने कामधंधे से ही फुरसत नहीं थी. उसे पता नहीं था कि जिस की खुशी के लिए वह मेहनतमजदूरी करता है कि उसे किसी तरह की परेशानी नहीं हो. लेकिन वही बीवी किसी गैरमर्द को अपना बना चुकी है और वह घर से फुर्र होने वाली है. सुमित तो सोचता था कि टीना उस के साथ खुश है. वह उस की खुशी के लिए क्या कुछ नहीं करता था.

11 नवंबर, 2020 को भी हर रोज की तरह सुमित काम पर निकल गया. शाम को घर लौटा तो उस की बीवी टीना और बेटी नंदिनी घर पर नहीं थी. आसपड़ोस में सुमित ने बीवी और बेटी की खोजबीन की मगर वे नहीं मिलीं. सुमित ने टीना के मोबाइल पर भी फोन किया. मगर मोबाइल स्विच्ड औफ था. सुमित कई दिन तक अपने स्तर पर बीवी और बेटी की खोजबीन करता रहा. जब उन की कोई खोजखबर नहीं मिली तो थकहार कर वह 16 दिसंबर, 2020 को बुढ़ादीत थाने पहुंचा. सुमित ने थानाप्रभारी अविनाश कुमार को सारी बात बता कर पत्नी और बेटी नंदिनी की गुमशुदगी लिखा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस की बहुत दिन तक नींद नहीं खुली.

जब सुमित थाने के चक्कर पर चक्कर काटने लगा तो पुलिस हरकत में आई. इस के बाद इटावा डीएसपी विजयशंकर शर्मा के निर्देशन व थाना बुढ़ादीत थानाप्रभारी  अविनाश कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की गई. इस पुलिस टीम में थानाप्रभारी अविनाश कुमार के अलावा हैडकांस्टेबल सुरेशचंद्र वर्मा, सतपाल, प्रह्लाद, पूरन सिंह, महिला कांस्टेबल माली को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने मामले की जांच शुरू की. तकनीकी जांच और मुखबिर से पता चला कि सुमित की पत्नी टीना उर्फ पुष्पा जयपुर जिले के थाना मनोहरपुर के गांव उदावाला में प्रेमी प्रह्लाद सहाय के साथ रह रही है.

पुलिस टीम ने 13 मई, 2021 को सुमित की पत्नी टीना और उस के प्रेमी प्रह्लाद सहाय को हिरासत में ले लिया. लेकिन टीना के साथ उस की बेटी नंदिनी नहीं थी. टीना और प्रह्लाद से पुलिस टीम ने नंदिनी के बारे में पूछताछ की. टीना ने बताया कि नंदिनी अपने दादादादी के पास है. पुलिस ने पता किया. दादादादी के पास नंदिनी नहीं थी. तब पुलिस ने प्रह्लाद सहाय से और टीना से अलगअलग पूछताछ की. टीना ने बताया कि नंदिनी को बसस्टैंड पर अकेली छोड़ दिया था. पुलिस को उस की बातों पर यकीन नहीं था. इस कारण पुलिस ने गुमराह कर रहे प्रह्लाद व टीना से कड़ी पूछताछ की तो दोनों ने नंदिनी की हत्या की बात कबूल ली.

टीना को जब पता चला कि उस के प्रेमी ने नंदिनी की हत्या की स्वीकारोक्ति कर ली है, तब टीना भी टूट गई. उस ने भी बेटी की हत्या का गुनाह कबूल कर लिया. प्यार की खातिर मासूम बेटी की हत्या की बात सुन कर पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई. पूछताछ करने पर टीना की एक ऐसी कुमाता वाली छवि उभर कर सामने आई, जिस ने अपने से 20 बरस बड़े प्रेमी प्रह्लाद की खातिर इकलौती बेटी की हत्या कर उस का शव सरिस्का जंगल में फेंक दिया. दोनों आरोपियों से की गई पूछताछ के बाद प्यार में अंधी एक औरत की जो कहानी प्रकाश में आई, इस प्रकार है—

राजस्थान के कोटा जिले के बुढ़ादीत थानांतर्गत बोरखेड़ा गांव निवासी सुमित यादव से टीना उर्फ पुष्पा की शादी हो जरूर गई थी, लेकिन वह उस से खुश नहीं थी. क्योंकि वह उस की शारीरिक जरूरत को नहीं समझता था. इसीलिए वह अपने पति को पसंद नहीं करती थी. मगर लोकलाज के कारण वह उसे ढो रही थी. टीना की हसरतें उफान मारती थीं. मगर सुमित को इस की परवाह नहीं थी. टीना 4 साल की बेटी की मां हो गई थी, लेकिन वह इतनी खूबसूरत थी कि उस का गदराया बदन देख कर कोई भी मर्द उसे पाने को बेताब हो उठता था.

ऐसे में जयपुर के गांव उदावाला, निवासी प्रह्लाद सहाय से रौंग काल के जरिए उस की बात हुई तो उसे लगा कि प्रह्लाद उस के लिए ही बना है. इसलिए उस ने उस से नजदीकी बढ़ा ली. बातोंबातों में दोनों इतने खुल गए कि फोन पर प्यार का इजहार हो गया. इतना ही नहीं, दोनों ने जीवन भर साथ निभाने का फैसला भी ले लिया. एक दिन उस से प्रह्लाद ने कहा, ‘‘मैं तुम्हारी बेटी को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार कर लूंगा. तुम उसे ले कर जयपुर के लिए निकल जाओ. मैं तुम दोनों को घर ले आऊंगा.’’

यह सुन कर टीना खुश हो गई. फिर वह 11 नवंबर, 2020 को पति सुमित के काम पर जाने के बाद अपनी बेटी नंदिनी को ले कर बोरखेड़ा से जयपुर आ गई, जहां से प्रह्लाद टीना और नंदिनी को ले कर अपने गांव उदावाला आ गया. टीना और प्रह्लाद पतिपत्नी की तरह रहने लगे. प्रह्लाद ने आसपड़ोस में कहा कि उस ने टीना से लव मैरिज की है. प्रह्लाद अधेड़ उम्र का था वहीं टीना जवान थी. टीना जैसी सुंदर प्रेमिका पा कर प्रह्लाद निहाल हो गया था. प्रह्लाद ने टीना को तनमनधन से सुख दिया. टीना अपने प्रेमी की दीवानी हो गई. प्रह्लाद भी स्त्री सुख से वंचित था. अधेड़ उम्र में जब जवान प्रेमिका मिली तो वह रोजाना अपनी हसरतें पूरी करता.

दोनों मौजमस्ती से दिन गुजार रहे थे. 9 जनवरी, 2021 की शाम नंदिनी सीढि़यों से गिर कर घायल हो गई. अगले दिन 10 जनवरी को नंदिनी को प्रह्लाद और टीना शाहपुरा अस्पताल ले गए. डाक्टर ने नंदिनी को देख कर कहा कि उसे जयपुर ले जाओ. इस पर प्रह्लाद व टीना नंदिनी को उदावाला घर ले आए. प्रह्लाद ने टीना से कहा, ‘‘टीना, अगर नंदिनी को जयपुर ले जाएंगे तो लाखों रुपए इलाज में खर्च होंगे. इस के बाद भी क्या पता नंदिनी बचे कि नहीं. ऐसा करते हैं कि पैसा बचाने के लिए नंदिनी को ही मार डालते हैं.’’

सुन कर मां की ममता पसीजने के बजाय बोली, ‘‘सही कह रहे हैं, आप. वैसे सुमित के खून को हमतुम क्यों पालेंपोसें.’’

उसी रात नंदिनी को सोते हुए शाल मुंह पर दबा कर टीना और प्रह्लाद ने मार डाला. रात भर लाश वहीं पड़ी रही. अगले दिन 11 जनवरी, 2021 को नंदिनी का शव ले कर प्रह्लाद और टीना अलवर जिले के सरिस्का जंगल में पहुंचे और सुनसान जगह पर डाल कर वापस उदावला लौट आए. शाम को उदावला आने पर प्रह्लाद के आसपड़ोस के लोगों ने जब नंदिनी के बारे में पूछा. तब उन से कहा कि नंदिनी को दादादादी के पास छोड़ आए हैं. टीना ने अपनी 4 बरस की बेटी को मारने के बावजूद टीना सामान्य बनी रही. उस के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी. उलटे वह तो अपने को आजाद महसूस कर रही थी. उधर टीना और नंदिनी के 11 नवंबर, 2020 को घर से गायब होने पर टीना का पति सुमित यादव दोनों की रिश्तेदारी में एक महीने से ज्यादा समय तक खोजबीन करता रहा.

जब कहीं भी बीवी और बेटी का पता नहीं चला तब वह थकहार कर 16 दिसंबर, 2020 को थाना बुढ़ादीत पहुंच कर बीवी टीना उर्फ पुष्पा और बेटी नंदिनी की गुमशुदगी दर्ज कराई. यानी गुमशुदगी दर्ज कराने से पहले ही नंदिनी की हत्या कर दी गई थी. गुमशुदगी के बाद भी पुलिस की नींद देर से खुली. टीना और नंदिनी के गायब होने के तुरंत बाद अगर सुमित पुलिस थाने में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज करा देता और पुलिस समय पर काररवाई करती तो नंदिनी जिंदा होती. प्रह्लाद सहाय और टीना उर्फ पुष्पा से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Crime Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime Story in Hindi : डैड किल्स डौटर टेनिस प्लेयर राधिका यादव

Crime Story in Hindi : राधिका यादव एक उभरती हुई टेनिस प्लेयर थी. वह गुरुग्राम में एक टेनिस एकेडमी चलाने के साथ म्यूजिक अलबम में भी काम कर चुकी थी. दिनोंदिन उस की पहचान बढ़ती जा रही थी. इसी बीच ऐसा क्या हुआ कि उस के पिता ने खुद उसे गोलियों से भून डाला?

राजधानी दिल्ली के एनसीआर गुरुग्राम सेक्टर 57 में स्थित सुशांत लोक एक पौश कालोनी है. इस के एक 3 मंजिला मकान को हर कोई जानता था. उस मकान में दीपक यादव अपने परिवार के साथ रहते थे. दीपक और मकान को लोग उन की 25 वर्षीया बेटी राधिका यादव की वजह से जानतेपहचानते थे. इस मकान में दीपक अपनी पत्नी, बेटे और बेटी राधिका के साथ रहते थे. साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर उन के छोटे भाई कुलदीप यादव अपने परिवार समेत रहते थे.

राधिका हरियाणा की राज्य स्तरीय टेनिस खिलाड़ी रह चुकी है. उस ने कई टूर्नामेंट जीते थे. इस के अलावा वह पिछले एक साल से गुरुग्राम के ही सेक्टर 56 में एक टेनिस एकेडमी चला रही रही थी. इलाके के बच्चे वहां उस से टेनिस सीखने आते थे, किंतु 10 जुलाई, 2025 की सुबह बच्चे एकेडमी में नहीं आए. उन्हें राधिका ने सुबह में ही आने से मना कर दिया था. कारण, उसे ग्राउंड कोऔर्डिनेटर ने मैसेज कर बता दिया था कि बारिश की वजह से सुबह ग्राउंड खेलने के लिए नहीं मिल पाएगा.

उस ने बड़ी मुश्किल से बच्चों को समझाया था कि वे आज एकेडमी नहीं आएं. इस पर कुछ अभिभावकों ने राधिका से शिकायत भी की थी कि ऐसे तो बच्चों की प्रैक्टिस छूट जाएगी. उन से राधिका ने सौरी बोल कर पीछा तो छुड़ा लिया था, लेकिन उस के बाद से ही उस का मन और ज्यादा खिन्न हो गया था. सुबह के करीब 10 बज चुके थे. राधिका किचन में अपने लिए एनर्जी ड्रिंक बना रही थी. उस की मम्मी मीनू यादव दूसरे कमरे में लेटी थीं. उन्हें बीती रात से ही हलकाहलका बुखार था. उस रोज उन का जन्मदिन भी था. राधिका मम्मी के लिए उन की पसंद का कुछ स्पैशल खाना बनाना चाहती थी. मम्मी की सेहत को ध्यान में रख कर उस ने स्पैशल आइटम बनाने की तैयारी भी करनी थी.

उस के पापा दीपक यादव ड्राइंग रूम में बैठेबैठे बड़बड़ा रहे थे. वह थोड़ी देर पहले मार्निंग वाक कर लौटे थे. काफी तनाव में थे. सोफे पर कभी पैर पसार कर बैठते तो कभी उठ कर हाल में ही चहलकदमी करने लगते. वह जो कुछ बोल रहे थे, हाल से लगी रसोई में राधिका को भी सुनाई दे रहा था. अधिकतर बातें उस के बारे में ही कह रहे थे. वो भी सभी जलीभुनी, दिल को छेद करने वाली, मन को कचोटती हुई थीं. उन्होंने शिकायतें और घरपरिवार की मानमर्यादा, समाजसंस्कार की बातों का मानो पुलिंदा ही खोल दिया था.

जब ये बातें राधिका के कानों में पड़ीं तो वह तिलमिला उठी. उस के हाथ से चम्मच छूट कर फर्श पर जा गिरी. उसे उठाने लगी तो दूसरा बरतन गिर पड़ा…

”पापा! अब चुप भी हो जाओ. बंद करो अपनी बकवास!’’ राधिका तीखे लहजे में बोली और मिक्सी का बटन दबा दिया. घर्र… कर मिक्सी चल पड़ी.

”मैं बकवास कर रहा हूं…मुझे तो रोक लोगी, लेकिन उन को कैसे रोकोगी, जो मैं सुन कर आया हूं.’’

”तुम सब की बातों पर ध्यान ही क्यों देते हो?’’ वह बोली.

”क्यों न ध्यान दूं. तू कौन मेरी बात पर ध्यान दे रही है…कब से कह रहा हूं एकेडमी बंद कर दे, लोग मुझे ताने मारते हैं. कहते हैं कि बेटी की कमाई खा रहा है…’’ दीपक बोलते चले जा रहे थे. बीचबीच में राधिका बोलने लगी थी.

”तो क्या करूं? म्यूजिक एलबम बनाऊं…उस पर भी आपत्ति है. शक करते हो. रील बनाने की सोचती हूं, वह भी पसंद नहीं. …और अब कह रहे हो एकेडमी बंद कर दूं…’’

”मैं सही कह रहा हूं. जो लोग कह रहे हैं, मुझे ताने दे रहे हैं, वही कह रहा हूं. तुम्हारे म्यूजिक वीडियो को ले कर मुझे काफी सुनने को मिल रहा है.’’ दीपक ने कहा.

”मैं किसी की परवाह नहीं करती. दुनिया कुछ भी कहे…मैं अपने मन की ही करूंगी.’’

”मैं अब और नहीं झेल सकता लोगों की तीखी बातें.’’

”नहीं झेल सकते तो चुप हो जाओ. मुझे काम करने दो.’’ राधिका ने एक तरह से अपने पापा को डपट दिया था और बंद मिक्सी को फिर से चला दिया. अचानक गूंज उठी मिक्सी की आवाज और राधिका की बहस से दीपक तिलमिला गए थे. उन्होंने महसूस कि राधिका पर उन की बातों का कोई असर नहीं हुआ. गुस्से से पैर कांपने लगे थे. वह तेजी से अपने कमरे में गए. अगले पल ड्राइंगरूम में पहुंचे और तब उन के हाथ में लाइसेंसी रिवौल्वर थी. गुस्से से कांपते हुए हाथों से दीपक ने गोली दागनी शुरू कर दी. निशाने पर राधिका थी. एक गोली चूक गई. दीपक ने दनादन 4 गोलियां चला दीं.  गोलियां लगते ही वह फर्श पर गिर गई. लगातार गोलियां चलने की आवाज पूरे मकान और आसपास गूंज गई.

नीचे ग्राउंड फ्लोर पर उन के छोटे भाई कुलदीप यादव ने भी गोलियां चलने की आवाज सुनी. वह दौड़ेदौड़े दीपक के घर के मेन गेट पर आए. संयोग से दरवाजा खुला था. उन के साथ उन का बेटा भी आया था. उन्होंने देखा, ड्राइंग रूम में दीपक सोफे पर पसर कर बैठे थे, रिवौल्वर बगल में रखा था. सामने किचन में राधिका खून से लथपथ फर्श पर गिरी पड़ी थी. कुलदीप तुरंत बेटे के साथ जख्मी राधिका को कार से सेक्टर 56 स्थित एशिया मारिंगो अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इस वारदात की सूचना गुरुग्राम थाने की पुलिस को हो गई. एसएचओ विनोद कुमार मौके पर पहुंच गए. शुरुआती जांच में मृतका राधिका की पहचान 25 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव के रूप में हुई. वह राज्य स्तरीय कई टूर्नामेंट में मेडल जीत कर राष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी बन चुकी थी.  यह वारदात गुरुग्राम की पौश सोसायटी सुशांत लोक फेस-2 के फ्लैट नंबर ई-157 में हुई थी. पुलिस जांच में पाया गया कि उसे गोली उस के पापा दीपक यादव ने ही मारी है. घटनास्थल पर दीपक यादव मौजूद थे. पुलिस ने उन की 0.32 बोर की रिवौल्वर को तुरंत जब्त कर दीपक को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में पता चला कि हत्या परिवार में महीनों से चल रहे तनाव के बाद हुई. इस के कारणों में उन की आर्थिक आजादी, इंस्टाग्राम रील्स, कारवां नाम का एक म्यूजिक वीडियो और टेनिस एकेडमी की भूमिका सामने आई. 49 वर्षीय दीपक यादव बैंक में क्लर्क की नौकरी करते थे. नौकरी से वीआरएस ले कर वजीराबाद गांव में अपनी जमीनजायदाद की देखभाल के काम में लग गए थे. उन की आमदनी किराए के रूप में होती थी. उन की आमदनी के बारे में बताते हैं कि वह महीने की 15 लाख रुपए से अधिक की थी.

वह अपनी बेटी के बढ़ते कद और आजादी को ले कर पिछले 2 हफ्तों से नाराज चल रहे थे. खासकर सेक्टर 57 में अपनी टेनिस एकेडमी खोलने के बाद वह बेटी के व्यवहार मे आए बदलाव पर अकसर आक्रामक हो जाते थे. पुलिस को शुरुआती पूछताछ में ही हत्या की बात कुबूलते हुए दीपक ने बताया कि उन्हें गांव वाले बारबार अपनी बेटी की कमाई पर निर्भर रहने के लिए ताना मारते थे. उन्होंने कई बार राधिका से अपनी टेनिस एकेडमी बंद करने का आग्रह किया था. इस कारण बापबेटी के बीच अकसर टकराव हो जाता था. वे इस पर घंटों बहस करते रहते थे. बड़ी मुश्किल से राधिका की मम्मी बीचबचाव कर बहस को बंद करवाती थी. राधिका के एक म्यूजिक वीडियो के चर्चा में आने पर घर में तनाव और बढ़ गया था.

इस वीडियो में मुंबई के कलाकार इनाम का ‘कारवां’ नामक एक गाना है, जिसे जीशान अहमद ने प्रोड्यूस किया है. इसे एक साल पहले एलएलएफ रिकौड्र्स लेवल के तहत रिलीज किया गया था. हालांकि इस का ठीक से प्रमोशन नहीं हो पाया था. वीडियो में कई दृश्यों में राधिका इनाम के साथ नजर आती है. पिछले दिनों राधिका ने इसे अपने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया था. यह भी कहा जाता है कि दीपक ने वीडियो पर आपत्ति जताई थी और उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इसे हटाने के लिए कहा था.

पुलिस का कहना है कि दीपक ने अपने गांव में अपनी बेटी की कमाई पर निर्भर रहने के बारे में टिप्पणी मिलने के बाद और भी आक्रामक तरीके से विरोध करना शुरू कर दिया था. उन्होंने पुलिस को बताया कि वह शर्मिंदा महसूस करता था और उस की बातों से ऐसा लगता था कि वह अपनी बेटी की कामयाबी पर जीता है. जब वह वजीराबाद गांव में दूध लेने जाते थे तो लोग उन्हें ताना मारते थे और कहते थे कि यह अपनी बेटी की कमाई पर जीता है.

इस तरह लोगों के तानों से उन्हें बहुत परेशानी होती थी और वह मानसिक तनाव में आ जाते थे. कुछ लोगों ने उन की बेटी के चरित्र पर भी सवाल उठाए थे. उन का यहां तक कहना था कि वह गैर जाति और गैरधर्म के लड़के के साथ फरार हो सकती है. इसी पर उन्होंने राधिका से कहा था कि वह अपनी टेनिस एकेडमी बंद कर दे, लेकिन उस ने साफसाफ मना कर दिया था. राधिका को पिछले दिनों एक मैच के दौरान कंधे में चोट लग गई थी, जिस के कारण उसे अपना खेल रोकना पड़ा था. हालांकि वह टेनिस से पूरी तरह दूर नहीं होना चाहती थी. इस कारण उस ने बच्चों को कोचिंग देने का काम चुना था.

दीपक ने यह भी कुबूल कर लिया कि 10 जुलाई, 2025 की सुबह उन्होंने अपनी लाइसेंसी 0.32 बोर की रिवौल्वर निकाली और बेटी राधिका को नाश्ता बनाते समय पीछे से गोली मार दी. 4 राउंड फायर किए गए, जिन में से 3 गोलियां उसे लगीं. इस मामले की रिपोर्ट राधिका के छोटे भाई और राधिका के चाचा कुलदीप यादव ने दर्ज कराई. कुलदीप ने रिपोर्ट में लिखवाया कि राधिका एक प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी थी. उस ने कई ट्राफी जीती थीं. उस की मौत से सभी स्तब्ध हैं. उन्होंने बताया कि जब मैं पहली मंजिल पर गया तो वहां सिर्फ मेरा भाई दीपक, भाभी मंजू यादव और राधिका ही मौजूद थे.

कुलदीप की तहरीर पर पुलिस ने दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 (1) और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया. गुरुग्राम पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने यह भी बताया कि हत्या में इस्तेमाल हथियार को जब्त कर लिया गया है और फोरैंसिक और बैलिस्टिक विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है. दीपक यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया था. उन की पत्नी मंजू यादव गोलीबारी के समय घर में मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने लिखित बयान देने से इनकार कर दिया. उन का कहना था कि उन्हें बुखार था और वह कमरे में थीं. उन का बेटा धीरज घटना के समय घर पर नहीं था.

जब यह घटना हुई, तब वह अपने कमरे में आराम कर रही थीं और कहा कि उन्हें ‘प्रेशर कुकर फटने’ जैसी आवाज सुनाई दी थी, तब वह कमरे से बाहर निकली थीं. उन्होंने यह भी कहा कि राधिका का चरित्र अच्छा था और उस ने कभी परिवार को बदनाम नहीं किया. राधिका यादव एक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी थी, जिस ने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई थी. इंटरनैशनल टेनिस फेडरेशन और वीमेंस टेनिस एसोसिएशन के कई टूर्नामेंट्स में उस ने भाग लिया था. जून 2024 में ट्यूनीशिया में आयोजित डब्लू 15 टूर्नामेंट में भी उतरी थी.

इस के अलावा उस का मुकाबला ताइवान, श्रीलंका और यूक्रेन की खिलाडिय़ों से भी हो चुका है. उस की आईटीएफ रैंकिंग 1600 के करीब रही थी, जो किसी भी उभरती भारतीय खिलाड़ी के लिए उपलब्धि मानी जाती है. राधिका केवल खिलाड़ी ही नहीं, एक कोच भी थी. उस ने गुरुग्राम में एक निजी टेनिस एकेडमी शुरू की थी, जहां वह दरजनों बच्चों को प्रशिक्षित कर रही थी. पुलिस ने राधिका की हत्या के आरोपी उस के पिता से पूछताछ करने के बाद उसे कोर्ट में पेश के जेल भेज दिया.

कथा लिखने तक पुलिस मामले की जांच कर रही थी. पुलिस राधिका के आईफोन को भी खंगाल रही है. शायद उस में कोई राज छिपा मिले. Crime Story in Hindi

 

Delhi News : प्रेमिका की हत्या के आरोपी ने अस्पताल में की आत्महत्या

Delhi News : एक चौंकाने वाले मामले में 22 अप्रैल, 2025 को प्रेमिका की हत्या के आरोप में पकड़े गए एक सख्स ने अस्तपाल में फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली. पुलिस जब अस्पताल में पहुंची तो वह  फंदे पर लटका हुआ था. पुलिस भी उसे देख कर दंग रह गई. सवाल उठता है आखिर इस शख्स ने खुदखुशी अस्पताल में ही क्यों की? पढ़ते हैं पूरी घटना विस्तार से-

यह घटना 13 जुलाई, 2025 को दिल्ली के तिहाड़ जेल की है, जहां रमेश करमाकर नामक एक मुलजिम ने जेल के अस्पताल की खिड़की पर लटक कर आत्महत्या कर ली. बताया गया कि 28 मई से रमेश करमाकर जेल नंबर 4 में बंद था.  उसे तिहाड़ की जेल नम्बर 3  में स्थित अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था. कर्मचारी जब 14 जुलाई को सुबह अस्पताल के कमरे में पहुंचे तो देखा कि कैदी फंदे पर लटका हुआ था. लटके हुए शव को देख पुलिस भी हैरान थी.

पुलिस ने तुंरत रमेश के शव को खिड़की से नीचे उतारा. घटना की जानकारी जब पुलिस प्रशासन को मिली तो पूरे जेल परिसर में हड़कंप मंच गया. पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम रमेश  करमाकर था, जो होटल में साफ सफाई का काम किया करता था. उसे अपनी प्रेमिका की हत्या के आरोप में  तिहाड़ की 4 नम्बर की जेल लाया गया था.  जेल में रमेश को चक्कर आने की शिकायत होने लगी और उस के दाएं कान में दर्द होने लगा था. उस की सुनने की क्षमता कम होने के कारण उसे 28 मई, 2025 को तिहाड़ जेल के अस्पताल मे इलाज के लिए भरती कराया गया. जहां उस का इलाज चल रहा था, लेकिन 13 जलाई की सुबह पुलिस ने देखा कि रमेश ने सुसाइड कर लिया है.

पुलिस ने बताया कि रमेश को 22 अप्रैल को अपनी पार्टनर की हत्या के आरोप में अरेस्ट किया गया था. जांच में सामने आया रमेश की पार्टनर यानि उस की प्रेमिका उसे बारबार धमकी दे रही थी कि वह उन के रिश्ते की सच्चाई उस की पत्नी को बता देगी. इसी डर के कारण रमेश ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी थी.

प्रशासन पर उठे सवाल

तिहाड़ जेल में सख्त सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद भी रमेश के सुसाइड ने पुलिस प्रशासन पर अब सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस अब हर पहलू पर जांच की कर रही है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रही है कि रमेश को खुदखुशी क्यों  करनी पड़ी. पुलिस अधिकारी अब यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी कौन सी वजह थी, जिस ने रमेश को आत्महत्या करने के लिए मजबूर  कर दिया था. पुलिस इस मामले की  गहराई से जांच कर रही है. Delhi News

UP Crime News : प्रेमी कर देते हैं प्रेमिका के जिस्म का सौदा

UP Crime News : संगीता 3 बच्चों की मां थी, लेकिन पति के दोस्त रोहित से प्रेम कर बैठी. ये प्रेम इतना गलत नहीं था, जितना रोहित का संगीता को अपने 2 दोस्तों को उपहार में देने की कोशिश करना. इस के बाद संगीता के साथ जो हुआ, वो हर औरत को याद रखना चाहिए.

20 मार्च, 2025 की रात 8 बजे रोहित वाल्मीकि 2 साथियों के साथ झांसी के लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला में रहने वाली अपनी प्रेमिका संगीता के घर पहुंचा. रोहित ने दरवाजा थपथपाया तो कुछ पल बाद संगीता ने दरवाजा खोला. सामने रोहित को देख कर संगीता का चेहरा खिल उठा. वह बड़ी अदा से बोली, ”बड़ी देर कर दी रोहित. कब से मैं तुम्हरा इंतजार कर रही थी. खैर, कोई बात नहीं, अंदर आओ.’’

रोहित व उस के दोनों साथी घर के अंदर पहुंचे और आंगन में बिछी चटाई पर जा कर बैठ गए. रोहित ने दाएंबाएं नजर दौड़ाई फिर पूछा, ”संगीता, रविंद्र भाई नजर नहीं आ रहे. क्या वह गला तर करने ठेके पर गए है?’’

”जेब गरम होती तो शायद चले भी जाते, लेकिन जेब खाली है तो कमरे में पड़े हैं. कई बार वह भी पूछ चुके हैं कि रोहित नहीं आया?’’

इस के बाद संगीता ने आवाज लगाई तो उस का पति रविंद्र कमरे से बाहर आ गया और रोहित को देख कर बोला, ”आ गए भाई. बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था. दारू के बिना गला सूख रहा था.’’

”रविंद्र भाई, अब इंतजार की घड़ी खत्म. छक कर दारू पियो और सब कुछ भुला दो. आज मैं एक नहीं, 4 बोतलें ले कर आया हूं.’’ कहते हुए रोहित ने शराब की 4 बोतलें व नमकीन झोले से निकाल कर सामने रख दी. शराब देख कर रविंद्र व संगीता की जीभ लपलपाने लगी.

इसी समय सामने बैठे 2 युवकों को देख कर संगीता ने पूछा, ”रोहित, ये दोनों कौन हैं? इस के पहले मैं ने इन को तुम्हारे साथ कभी नहीं देखा?’’

”संगीता, तुम इन्हें नहीं जानती हो. ये दोनों मेरे दोस्त हैं. जैसे तुम्हारे घर में महफिल जमती है, उसी तरह इन के साथ ठेके पर कभीकभी महफिल जमती है.’’ रोहित ने इशारे से बताया, ”यह पवन खटीक है और यह कल्लू है. आज की पार्टी इन्हीं की तरफ से है.’’

”किस खुशी में पार्टी कर रहे हैं?’’ संगीता ने दोनों पर निगाह जमाते हुए पूछा.

”इस बात की जानकारी हम बाद में देंगे. अभी तुम महफिल सजाओ.’’ रोहित बोला.

संगीता ने अपने बच्चों को मकान की दूसरी मंजिल पर रहने वाली किराएदार शकुंतला के कमरे में भेज दिया. इस के बाद संगीता ने गिलास व पानी का इंतजाम किया फिर उस ने अपने हाथों से 5 पैग बनाए और पति, प्रेमी व प्रेमी के साथ आए पवन व कल्लू को एकएक गिलास थमाया और स्वयं भी गिलास थाम कर उन के साथ शराब पीने लगी. इसी बीच रोहित रविंद्र को कमरे में ले गया और बोला, ”रविंद्र भाई, आज रात मेरे अलावा मेरे दोस्त पवन व कल्लू भी संगीता के साथ मौजमस्ती करेंगे. उन्होंने पार्टी का इंतजाम तो किया ही है. साथ में नजराना भी दिया है.’’ कहते हुए रोहित ने जेब से कुछ रुपए निकाले और रविंद्र के हाथ पर रख दिए.

रुपया जेब में रखते हुए रविंद्र बोला, ”रोहित, संगीता हम दोनों का साझा प्यार है. जब तुम्हें कोई ऐतराज नहीं तो मुझे भी कोई ऐतराज नहीं.’’

दारू पीने के बाद पवन व कल्लू घर से चले गए. जाते समय रोहित ने उन दोनों से कहा कि संगीता का पति मान गया है. कुछ देर में वह संगीता को भी राजी कर लेगा. तुम दोनों उस के फोन का इंतजार करना. उस के बाद आ जाना और रात भर मौजमस्ती करना.

पवन व कल्लू के जाने के बाद रोहित संगीता को कमरे में ले गया. यहां संगीता, रोहित व रविंद्र ने खूब जाम से जाम टकराए. शराब पीने के दौरान ही रोहित बोला, ”संगीता, तुम पूछ रही थी कि मेरे दोस्तों ने किस खुशी में पार्टी दी है? तो सुनो मैं ने उन से एक वादा किया है.’’

”कैसा वादा?’’ संगीता ने रोहित को घूरते हुए पूछा.

”यही कि वे रात भर तुम्हारे साथ मौजमस्ती करेंगे.’’

”क्या!’’ संगीता चौंकी. फिर नाराज हो कर बोली, ”देखो रोहित, मैं तुम से प्यार करती हूं, इसलिए तुम्हें जिस्म से खेलने देती हूं. मैं कोई वेश्या नहीं कि हर किसी को जिस्म सौंप दूं. मैं एक बार पति से विश्वासघात कर चुकी हूं. दोबारा नहीं करूंगी.’’

”मैं ने रविंद्र भाई से बात कर ली है. उन्हें कोई ऐतराज नहीं है.’’ रोहित बोला.

यह सुन कर संगीता पति पर बिफर पड़ी, ”कैसा मर्द है तू. अपनी पत्नी के तन का ही सौदा कर दिया. सौदा करते समय तुझे जरा भी शर्म नहीं आई. चुल्लू भर पानी में डूब मर.’’

रविंद्र दांत निपोरते हुए बोला, ”ज्यादा सतीसावित्री मत बन. जैसे रोहित को खुश करती है, वैसे ही उस के दोस्तों को भी खुश कर दे. इस में हर्ज ही क्या है?’’

रोहित और रविंद्र दोनों ने संगीता को जिस्म सौैंपने के लिए मनाने की कोशिश की. लेकिन जब वह राजी नहीं हुई तो दोनों ने मिल कर संगीता की जम कर पिटाई की. रोहित संगीता का सिर दीवार पर पटकने लगा. पति व प्रेमी की पिटाई से संगीता चीखने लगी, ”बेटी पिंकी, तुम कहां हो. मुझे बचा लो. ये राक्षस मुझे पीटपीट कर मार डालेंगे.’’

मम्मी की ‘बचाओ…बचाओ’ की चीखें सुन कर 12 वर्षीया पिंकी नीचे आई और कमरे का दरवाजा पीटना शुरू किया. कुछ देर बाद रोहित ने आधा दरवाजा खोला. पिंकी कमरे में घुसने को बढ़ी तो रोहित ने उसे बाहर ढकेल दिया और बोला, ”यह लो 100 का नोट और खानेपीने की चीज ले कर छत पर चली जाना.’’ लेकिन पिंकी ने पैसे नहीं लिए. उस के बाद रोहित ने कमरा अंदर से बंद कर लिया. कमरे में संगीता पलंग पर बैठी थी. रोहित ने उसे दबोच लिया और उस के साथ मनमानी की. रोहित ने एक बार फिर संगीता को मनाने की कोशिश की. इस पर वह बोली कि वह किसी कीमत पर अपने जिस्म का सौदा नहीं करेगी.

उस ने रोहित से यह भी कहा कि उसे दोस्तों को खुश करना है तो अपनी मांबहन का सौदा क्यों नहीं कर देता.

यह सुनते ही रोहित के तनबदन में आग लग गई. उस ने संगीता को फिर पीटा और तकिया से मुंह दबा कर उस की आवाज सदा के लिए बंद कर दी. उस के बाद बाकी बची शराब रोहित ने रविंद्र के साथ पी. फिर रविंद्र बेसुध हो कर सोफे पर लुढ़क गया और रोहित संगीता के पलंग पर पसर गया. इधर संगीता की बेटी पिंकी किराएदार शकुंतला के कमरे में पहुंची. वह बेहद डरी हुई थी. उस ने शकुंतला आंटी को बताया कि रोहित अंकल मम्मी को पीट रहे हैं. मम्मी बचाने की गुहार लगा रही हैं. उन्हें बचा लो.

मासूम पिंकी की बात सुन कर शकुंतला उसे साथ ले कर नीचे आई. लेकिन अब तक कमरे में चीखें बंद हो गई थीं. शकुंतला ने दरवाजा खटखटाया, आवाज भी लगाई. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. शकुंतला ने तब अड़ोसपड़ोस के लोगों को बुला लिया और डायल 112 नंबर पर फोन कर के पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पर पुलिस आ गई. एसआई ए.के. सिंह ने दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे. मामला संगीन समझ कर उन्होंने सूचना झांसी थाना कोतवाल को दी. यह मामला लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला का था.

खबर मिलते ही थाना कोतवाली के एसएचओ राजेश पाल पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंच गए. उस समय मकान के बाहर भीड़ जुटी थी. किराएदार शकुंतला ने इंसपेक्टर राजेश पाल को बताया कि घर के अंदर आंगन से सटे कमरे में रविंद्र उस की पत्नी संगीता तथा दोस्त रोहित मौजूद हैं. कमरा अंदर से बंद है. कुछ देर पहले संगीता की चीखें सुनी गई थीं. अब सब कुछ शांत है.

इंसपेक्टर राजेश पाल ने कमरे का दरवाजा खुलवाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन जब असफल रहे, तब सहयोगी पुलिसकर्मियों की मदद से दरवाजा तोड़ दिया और कमरे में प्रवेश किया. कमरे का दृश्य दिल कंपा देने वाला था. कमरे में पलंग पर संगीता मृत पड़ी थी. उसी के बगल में उस का प्रेमी रोहित नशे में धुत पड़ा था. सोफे पर संगीता का पति रविंद्र नशे की हालत में पसरा पड़ा था. नशे में धुत होने की वजह से दोनों को होश नहीं था. संगीता का शव अर्धनग्न अवस्था में था. देखने से ऐसा लग रहा था कि उस के साथ जोरजबरदस्ती की गई थी. संगीता की आंख, कान, सिर व गरदन पर चोटों के निशान थे. कमरे में शराब की दुर्गंध फैली हुई थी. सामान भी अस्तव्यस्त था.

ऐसा लग रहा था कि संगीता ने मृत्यु पूर्व संघर्ष किया था. कमरे में शराब की खाली बोतलें, डिसपोजल गिलास तथा प्लेट में कुछ नमकीन पड़ी थी. आंगन में चटाई बिछी थी और वहां भी शराब की एक खाली बोतल व गिलास पड़े थे. मामले की गंभीरता को समझते हुए एसएचओ राजेश पाल ने संगीता की हत्या की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद ही झांसी की एसएसपी सुधा सिंह, एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह तथा सीओ (सिटी) स्नेहा तिवारी घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फील्ड यूनिट को भी बुला लिया.

अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका का पति रविंद्र और प्रेमी रोहित इस हालत में नहीं थे कि वे कुछ भी बता सकें. अत: उन्हें थाना कोतवाली में भिजवा दिया. फील्ड यूनिट ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए. फील्ड यूनिट ने पलंग, दीवार आदि से फिंगरप्रिंट लिए तथा कमरे से शराब की 3 बोतलें तथा आंगन से एक बोतल तथा खाली गिलास सुरक्षित किए. यूनिट ने वह तकिया भी सुरक्षित किया, जिस पर खून लगा था. जांचपड़ताल के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए झांसी जिला अस्पताल भिजवा दिया.

घटनास्थल पर मृतका संगीता की बड़ी बेटी पिंकी मौजूद थी. उस ने सीओ (सिटी) स्नेहा तिवारी को बताया कि रात 8 बजे रोहित अंकल अपने साथी कल्लू व पवन के साथ घर आए थे. उन सब ने मम्मीपापा के साथ बैठ कर शराब पी. कुछ देर बाद कल्लू व पवन चले गए. रोहित अंकल मम्मी को साथ ले कर कमरे में चले गए. पापा भी कमरे में ही थे. कुछ देर बाद कमरे से मम्मी की चीखें सुनाई दीं तो वह उन्हें बचानेे पहुंची, लेकिन रोहित अंकल ने कमरे में अंदर नहीं जाने दिया. रोहित अंकल ने ही मम्मी की हत्या की है.

किराएदार शकुंतला ने बताया कि वह 15 दिन पहले ही यहां आई थी. यहां का माहौल ठीक नहीं था. संगीता पति व प्रेमी के साथ बैठ कर शराब पीती थी. आज रात भी पार्टी की गई थी. कुछ देर बाद संगीता की बेटी आई और बताया कि रोहित उस की मम्मी को पीट रहा है. मां चीख रही है. उस की गुहार पर वह नीचे गई. दरवाजा थपथपाया, नहीं खुला तो पुलिस को सूचना दी. इधर रोहित और रविंद्र रात भर हवालात में बंद रहे. सुबह जब नशा उतरा तो खुद को हवालात में पाया. दोनों समझ गए कि उन्हें क्यों हवालात में डाला गया है. हत्या का रहस्य जानने के लिए एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह कोतवाली पहुंचे.

संगीता

इंसपेक्टर राजेश पाल ने दोनों को हवालात से बाहर निकलवाया और एसपी साहब के समक्ष पेश किया. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने उन दोनों से पूछताछ की तो रोहित ने आसानी से संगीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. रविंद्र कुछ भी नहीं बोला. उस की आंखों सें आंसू टपकते रहे. अब तक बहू की हत्या व बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी पा कर मृतका की सास गिरजा देवी व ससुर तुलसीदास अहिरवार भी कोतवाली आ गए थे. एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पहले वे बेटेबहू के साथ ही रहते थे. लेकिन जब रविंद्र और संगीता शराब पीने लगे और संगीता अपने आशिक रोहित के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी, तब वे छोटे बेटे के साथ गांव में रहने लगे.

प्रेमी

तुलसीदास ने यह भी बताया कि उन के बड़े भाई रतनलाल अहिरवार बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे. पहले उन का घर आनाजाना बना रहता था, लेकिन जब बहू संगीता शराब पीने लगी और मर्यादाओं की सीमा लांघने लगी, तब मंत्रीजी ने नाता तोड़ दिया और दूरियां बना लीं. चूंकि रोहित व रविंद्र ने संगीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था. अत: इंसपेक्टर राजेश पाल ने संगीता के देवर अरविंद को वादी बना कर बीएनएस की धारा 103 के तहत रोहित वाल्मीकि व रविंद्र अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पति

पुलिस जांच तथा आरोपियों से की गई पूछताछ से संगीता हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है. उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है झांसी. इसी झांसी शहर के थाना कोतवाली अंतर्गत आता है लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला. तुलसीदास अहिरवार सपरिवार इसी मोहल्ला में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी गिरजा देवी के अलावा 2 बेटे थे रविंद्र व अरविंद. तुलसीदास अहिरवार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे. विश्वविद्यालय से मिलने वाले वेतन से वह परिवार का भरणपोषण करते थे. बड़े भाई रतनलाल अहिरवार बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे, इसलिए बिरादरी में मानसम्मान था.

तुलसीदास का बड़ा बेटा रविंद्र ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था. वह डेकोरेशन का काम करता था. वह शराब का लती था. वह अपनी कमाई का सारा पैसा शराब पीनेपिलाने में ही खर्च कर देता था. उस के मम्मीपापा ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उस की शराब की लत नहीं छूटी. तुलसीदास और उन की पत्नी गिरजा देवी का मानना था कि यदि रविंद्र के पैरों में शादी रूपी बेडिय़ां डाल दी जाए तो शायद वह सुधर सकता है. इसी उद्ïदेश्य से वह रविंद्र की शादी के लिए लड़की की तलाश में जुट गए. लेकिन सवाल था कि शराबीकबाबी को लड़की कौन दे? वह जहां भी जाते, मुंह की खाते, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आखिर उन्होंने रविंद्र का रिश्ता संगीता के साथ पक्का कर दिया.

संगीता के पापा कांशीराम अहिरवार कालपी कस्बा के रहने वाले थे. 3 बच्चों में संगीता सब से बड़ी थी. संगीता बेहद खूबसूरत, फैशनपरस्त व चंचल स्वभाव की थी. कांशीराम प्राइवेट नौकरी करते थे, इसलिए उन्होंने रविंद्र के संबंध में बिना कुछ जानेसमझे बेटी का रिश्ता मंजूर कर लिया. इस के बाद 5 फरवरी, 2011 को संगीता का विवाह रविंद्र के साथ हो गया. शादी के बाद संगीता रविंद्र की दुलहन बन कर ससुराल पहुंची तो सभी खुश थे, लेकिन संगीता खुश नहीं थी. संगीता ने किसी मजदूर को पति के रूप में पाने की कल्पना नहीं की थी. उस ने तो फिल्मी हीरो जैसे युवक की छवि मन में बसा रखी थी.

संगीता के दिल को दूसरी ठेस तब लगी, जब रविंद्र उस के थोड़ा और करीब आया. उस की सांसों से शराब की महक आ रही थी. संगीता ने मुंह दूसरी ओर घुमा लिया, ”तुम शराब पीए हो.’’

”आज खुशी का दिन है न, इसलिए दोस्तों के साथ हलक तर कर लिया.’’ रविंद्र बेहयाई से हंसने लगा, ”वैसे भी शराब के बिना शबाब का मजा थोड़े ही आता है.’’

संगीता कुढ़ गई और उस का मन पति से खट्टा हो गया. इस के बावजूद उसे पत्नी का धर्म निभाना पड़ा. संगीता को अपने सपने जैसा पति नहीं मिला था, इस के बावजूद उस ने नियति का लिखा मान कर संतोष कर लिया था. पति की नशे की लत छुड़ाने के लिए उस ने भरसक प्रयास किया, मगर रविंद्र ने शराब से तौबा नहीं की. शादी के एक साल बाद संगीता ने बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम पिंकी रखा. इस के बाद 4 सालों में वह एक बेटी व एक बेटे की मां और बनी. वर्तमान में पिंकी की आयु 12 वर्ष है. समय के साथ संगीता व रविंद्र की उम्र भी बढ़ती गई.

एक ओर जहां शराब की लत ने रविंद्र को खोखला कर दिया, वहीं संगीता की हसरतें अब भी जवान थीं. पहले वह खुशी का बहाना बना कर शराब पीता था, अब एक्स्ट्रा पावर अर्जित करने के लिए शराब को गले लगाने लगा. लेकिन हुआ इस के विपरीत. ज्यादा नशा करने से उस की सैक्स की उमंग जागनी लगभग बंद हो गई. इन्हीं दिनों रविंद्र की दोस्ती रोहित वाल्मीकि से हो गई. वह ओरछा गेट का रहने वाला था. वह भी डेकोरेशन का काम करता था. एक शादी समारोह में सजावट करने के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी. चूंकि रोहित भी शराब का आदी था. अत: दोनों में जल्दी ही यारी हो गई. पहले दोनों साथ में ठेके पर पीते थे, फिर उन की महफिल रविंद्र के घर भी जमने लगी.

रोहित वाल्मीकि मजबूत शरीर वाला बांका जवान था. संगीता से उस की उम्र भी कम थी. संगीता ने जब रोहित को पहली बार देखा, तभी मन में दबी हुई तमन्ना जोर मारने लगी, ‘मेरी शादी इस से हुई होती तो जिंदगी बहारों से भरी होती.’ यही कारण था कि रोहित का आना, उस को देखना, उस से बातें करना संगीता को अच्छा लगता था. वह उसे रिझाने का भी प्रयत्न करने लगी थी. रोहित का रविंद्र के घर आनाजाना शुरू हुआ तो संगीता से भी नजदीकियां बढऩे लगीं. संगीता से रिश्ता भी भाभी का था. 3 बच्चों की मां बन जाने के बाद भी संगीता का यौवन अभी ढला नहीं था. संगीता की आंखों में जब रोहित को एक मूक आमंत्रण दिखने लगा तो कामना की प्यास बढ़ गई.

रविंद्र की कमजोरी शराब थी. उसे अंगूर की बेटी सुहाती थी. अत: आए दिन शराब की महफिल रविंद्र के घर सजने लगी. रोहित उसे मुफ्त में शराब पिलाता और उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. रोहित का घर आनाजाना बढ़ा तो संगीता समझ गई कि रोहित पर उस के हुस्न का जादू चल गया है. दोनों ही समझ गए थे कि एक को हुस्न की तलब है तो दूसरे को इश्क की. बेताबी दोनों ओर बढ़ती गई. एक रोज रोहित ने संगीता को पाने का मन बनाया और वह काम पर न जा कर दोपहर को रविंद्र के घर पहुंच गया. संगीता उस वक्त घर मेें अकेली थी. बच्चे स्कूल गए थे और रविंद्र काम पर.

सासससुर गांव में थे. मौका अच्छा था. रोहित को देख कर संगीता के होंठों पर मानीखेज मुसकान बिखरी और उस ने पूछा, ”तुम तो शाम को अंगूर की बेटी को होंठों पर लगाने यहां आते थे, आज दिन में रास्ता कैसे भूल गए?’’

”संगीता भाभी, अंगूर की बेटी से होंठों की प्यास बुझती कहां है, उल्टा और भड़क जाती है. सोचा, आज शराब से भी ज्यादा नशीली, उस से ज्यादा मादक अपनी भाभी का नशा कर लूं.’’ रोहित ने उस के कंधों पर हाथ रख दिए. संगीता तो कामातुर थी ही. अत: वह भी रोहित की छाती सहलाने लगी. रोहित का हौसला बढ़ा तो उस ने संगीता को बांहों में भर लिया और उस के नाजुक अंगों को सहलाने लगा. इस छेड़छाड़ को संगीता ज्यादा देर तक सहन न कर सकी. वह भी उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. कुछ देर बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव थे.

उस रोज के बाद रोहित व संगीता मौका मिलते ही अपनी हसरतें पूरी कर लेते. पति व प्रेमी की शराब पार्टी में अब संगीता भी शामिल होने लगी. शाम को रोहित के आते ही संगीता महफिल सजाती फिर अपने हाथों से 3 पैग बनाती, एक पैग पति को दूसरा पैग प्रेमी को और तीसरा पैग स्वयं हाथों में थामती. फिर जाम से जाम टकरा कर तीनों शराब पीते. शुरू में संगीता कम पीती थी, लेकिन बाद में जम कर पीने लगी. रोहित की जिद पर संगीता शराब पीने लगी थी.

एक रोज गिरजा देवी ने बहू संगीता को बेटे व उस के दोस्त के साथ शराब पीते देखा तो उस के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. वह जान गई कि बेटाबहू बिगड़ गए हैं. उसे यह भी पता चल गया कि बहू मर्यादा की देहरी लांघ कर गैरमर्द के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी है. गिरजा देवी ने बेटेबहू को फटकार लगाई तो दोनों उसी पर हावी हो गए. उन दोनों ने साफ कह दिया कि वे रोज शराब पीएंगे. देख सको तो साथ रहो, वरना गांव चले जाओ. बेटेबहू के कारण जब बिरादरी में थूथू होने लगी, तब गिरजा देवी अपने पति तुलसीदास व छोटे बेटे अरविंद के साथ गांव दोन में रहने लगी. यहां पैतृक मकान व कुछ जमीन थी.

तुलसीदास अब तक रिटायर हो चुके थे. उन्हें 20 हजार रुपया पेंशन मिलती थी. संगीता ने सासससुर का पीछा यहां भी नहीं छोड़ा. वह हर महीने गांव आती और सासससुर से लड़झगड़ कर पेंशन के पैसे से 5 हजार रुपया ले जाती थी. सासससुर गांव में रहने लगे तो संगीता पूरी तरह से स्वच्छंद हो गई. शाम को रोहित आता फिर तीनों की महफिल जमती. संगीता और रोहित जानबूझ कर रविंद्र को ज्यादा शराब पिला देते. जब वह टुन्न हो कर सोफे पर लुढ़क जाता तो रोहित संगीता को ले कर कमरे में पहुंच जाता और दोनों मौजमस्ती करते.

रविंद्र ने अपनी अधखुली आंखों से कई बार रोहित और संगीता को रंगरलियां मनाते देखा था, लेकिन कभी टोकाटाकी नहीं की. कारण, रोहित मुफ्त में उसे शराब पिलाता था और उस की आर्थिक मदद भी करता था. विरोध करने पर यह सब बंद हो जाता और संगीता भी धोखा दे सकती थी. अत: मुंह बंद रखने में ही उस ने अपनी भलाई समझी. रोहित और संगीता इतने निर्लज्ज हो गए थे कि शराब पीने के बाद रविंद्र के सामने ही कमरे में पलंग पर लुढ़क जाते थे. रविंद्र तब आंगन में पड़े तख्त पर पसर जाता. रोहित वाल्मीकि, संगीता को पत्नी से कम नही समझता था. वह अपनी कमाई भी संगीता को देता था. संगीता भी उस की दीवानी थी, सो हर बात उस की मानती थी.

रोहित वाल्मीकि के 2 अन्य दोस्त पवन खटीक व कल्लू थे. ये दोनों उस के साथ ही काम करते थे. पीनेखाने के दौरान रोहित अपने व संगीता के अंतरंग क्षणों के बारे में दोस्तों को बताता था, जिस से वे दोनों भी संगीता के जिस्म को पाने के लिए लालायित रहते थे. एक रोज पवन खटीक ने रोहित से कहा कि उन दोनो की दोस्ती भी संगीता से करा दे. रोहित ने पहले तो साफ मना कर दिया, लेकिन बाद में शराब पार्टी व 5 हजार रुपया नकद देने पर रोहित ने संगीता के जिस्म का सौदा कर दिया.

रोहित को पक्का यकीन था कि संगीता उस की बात मान लेगी और उस के पति को भी रुपयों का लालच दे कर राजी कर लेगा. 20 मार्च, 2025 को रोहित ने पवन खटीक व कल्लू को साथ लिया और रात 8 बजे शराब की पार्टी के लिए प्रेमिका संगीता के घर पहुंच गया. वहां रविंद्र, संगीता, रोहित व उस के दोनों दोस्तों ने शराब पी. शराब पीने के बाद कल्लू व पवन, रोहित के इस आश्वासन पर वहां से चले गए कि संगीता को राजी करने के बाद वह फोन कर दोनों को बुला लेगा. रोहित ने दोस्तों के जाने के बाद संगीता से बात की. लेकिन संगीता दोस्तों का बिछौना बनने को राजी नहीं हुई. इसी बात को ले कर रविंद्र और रोहित ने संगीता की जम कर पिटाई की, फिर तकिए से मुंह दबा कर मार डाला.

22 मार्च, 2025 को पुलिस ने आरोपी रविंद्र अहिरवार तथा रोहित वाल्मीकि को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. मृतका संगीता के तीनों बच्चे अपनी दादी व बाबा के संरक्षण में रह रहे थे. UP Crime News

—कथा में पिंकी परिवर्तित नाम है.

 

 

Hindi Short Stories : सिरफिरे आशिकों से बचना जरूरी मोहब्बत हुई खूनी

Hindi Short Stories : 18 वर्षीय महक जैन दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए (आनर्स) इंगलिश की पढ़ाई कर रही थी. पहली जून 2025 को वह कालेज जाने के लिए घर से निकली थी, उसी दिन 22 वर्षीय अर्शकृत सिंह ने संजय वन में चाकू से गोद कर उस की हत्या कर दी. कौन है अर्शकृत सिंह और उस ने महक की हत्या क्यों की? पढ़ें, लव क्राइम की यह कहानी.

प्रीति जैन दोपहर से ही बहुत परेशान थी. उस की छोटी 18 वर्षीय बहन महक जैन सुबह अपने कालेज के लिए गई थी. उस ने 10 बजे प्रीति को फोन किया था कि वह जल्दी घर लौट आएगी. हमेशा महक एकडेढ़ बजे घर वापस आ जाती थी, लेकिन अब दोपहर बाद के 3 बजने को आ गए थे, महक का कोई अतापता नहीं था. उस का फोन भी बंद आ रहा था. प्रीति के लिए यही चिंता की बात थी. उसे मालूम था कि महक कभी भी अपना फोन स्विच्ड औफ नहीं करती थी, उस के फोन की बैटरी भी फुल रहती थी, इसलिए महक का फोन बंद होने की वजह वह नहीं समझ पा रही थी.

घड़ी की सूइयां जैसेजैसे आगे सरक रही थीं, प्रीति के दिल की धड़कनें वैसेवैसे बढ़ती जा रही थीं. कुछ सोच कर उस ने अर्शकृत सिंह को फोन लगाया. घंटी बजने के साथ ही अर्शकृत ने फोन उठा लिया, ”हैलो प्रीति. कैसी हो?’’ अर्शकृत के स्वर में अपनापन था.

”मैं ठीक हूं अर्श, मुझे महक के लिए बात करनी है, वह कहां पर है?’’ प्रीति ने गंभीर स्वर में पूछा.

”मुझे क्या मालूम प्रीति, मैं तो उस से 2 दिन से नहीं मिला हूं.’’ अर्शकृत ने बताया.

”बनो मत अर्श, परसों तुम ने महक का पीछा किया था.’’ प्रीति गुस्सा हो कर बोली, ”महक ने यह बात मुझे खुद बताई थी.’’

”ओह!’’ अर्श ने बड़े इत्मीनान से कहा, ”मैं क्यों महक का पीछा करूंगा प्रीति. हो सकता है जिस रास्ते से मैं जा रहा था, महक उसी रास्ते पर मुझ से आगे रही हो और उसे लगा कि मैं उस का पीछा कर रहा हूं तो यह उस की गलतफहमी रही है.’’

”चलो छोड़ो, अब ठीकठीक बता दो महक कहां है. प्लीज बता दो, मुझे और मम्मी को बहुत टेंशन हो रही है.’’

”मैं ने कहा न प्रीति, मैं महक के विषय में कुछ नहीं जानता, तुम उस की किसी सहेली से मालूम करो.’’ अर्श ने कहने के बाद अपनी तरफ से फोन काट दिया.

प्रीति ने गहरी सांस ली. उसे पूरा विश्वास था कि अर्शकृत महक के बारे में जरूर जानता होगा, लेकिन अर्श की ओर से इंकार कर देने के बाद प्रीति की चिंता और ज्यादा बढ़ गई.

वह अंदर मम्मी मधु जैन के कमरे में आ गई. उस वक्त मधु जैन फोन पर अपने पति राकेश जैन से बात कर रही थी. प्रीति को आया देख कर उस ने पूछा, ”कुछ पता लगा महक का?’’

”नहीं मम्मी. मैं ने अर्श से भी पूछा है, वह कह रहा है कि उस ने महक को नहीं देखा है.’’ प्रीति ने बताया.

”हे मालिक!’’ मधु परेशान स्वर में बोली, ”कहां रह गई यह लड़की आज. रोज तो दोपहर में ही घर आ जाती थी, कभी रुकना होता था तो फोन कर के बता भी देती थी. आज तो उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ आ रहा है. तेरे पापा को बताया तो वह भी परेशान हो गए हैं, वह घर लौट रहे हैं.’’

प्रीति कुछ नहीं बोली. वह सोफे पर सिर झुका कर बैठ गई. मधु उस के पास आ गई. उस के कंधे पर हाथ रख कर बोली, ”तूने उस की सहेलियों से मालूम किया है?’’

”मेरे पास महक की 3 सहेलियों के नंबर हैं, मैं तीनों से मालूम कर चुकी हूं. उन्होंने आज महक को कालेज के अंदर भी नहीं देखा है मम्मी.’’

”अगर महक कालेज ही नहीं गई तो फिर सुबहसुबह कहां चली गई?’’ मधु का स्वर भीगने लगा. उन की आंखें गीली हो गईं. प्रीति की भी आंखें भर आईं.

करीब आधे घंटे बाद राकेश जैन घर आ गए. पत्नी और बेटी को रोता देख कर वह विचलित हो गए. दोनों को ढांढस बंधाते हए वह बोले, ”रोओ मत. मैं कालेज जा कर देखता हूं.’’

”कालेज तो वह पहुंची ही नहीं है पापा.’’ प्रीति ने रोते हुए बताया, ”उस की एक सहेली ने यह बात बताई है.’’

”ओह!’’ राकेश जैन घबरा गए, ”फिर तो शायद रास्ते में ही महक के साथ कोई अनहोनी हुई होगी. मैं देखता हूं जा कर.’’ राकेश जैन ने कहा और जैसे ही उन्होंने बाहर जाने के लिए कदम बढ़ाया, उन का फोन बजने लगा.

”शायद महक का फोन है.’’ आशा भरे स्वर राकेश जैन के मुंह से निकले. उन्होंने मोबाइल निकाला तो उस पर एक नया नंबर देख कर चौंके.

मोबाइल की घंटी बज रही थी. उन्होंने उस नंबर की काल को रिसीव कर लिया, ”हैलो! मैं राकेश जैन बोल रहा हूं.. आप?’’

”मैं सुरजीत सिंह बोल रहा हूं.’’ दूसरी ओर से बोलने वाला बहुत घबराया हुआ लगा, ”आप की बेटी महक ने मेरे बेटे अर्शकृत पर अपने दोस्तों से हमला करवाया है.’’

”क्या बकवास कर रहे हैं आप?’’ राकेश जैन क्रोध से चीख पड़े, ”मेरी बेटी ऐसा क्यों करेगी?’’

”यह तो अपनी बेटी से पूछना तुम. मेरा बेटा अर्शकृत पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में घायल पड़ा है. यदि मेरे बेटे को कुछ हुआ तो मैं महक को जेल की चक्की पिसवा दूंगा राकेश जैन.’’ सुरजीत भी गुस्से में चीख पड़ा और उस ने फोन काट दिया.

”क्या हुआ जी?’’ मधु घबरा कर बोली, ”क्या किया महक ने?’’

”उस आवारा लड़के अर्श के बाप का फोन था. कह रहा था कि महक ने उस के बेटे अर्श पर अपने दोस्तों के द्वारा हमला करवाया है, उस का बेटा अर्श अस्पताल में है.’’

”बकवास कर रहे हैं अर्श के डैडी. महक इतनी शांत स्वभाव की है. वह भला अर्श पर क्यों हमला करवाएगी.’’ प्रीति सोफे से उठते हुए बोली.

”वह कहां है यह तो पूछते आप अर्श के डैडी से.’’ मधु जैन परेशान हो कर बोली, ”उन्हें फिर फोन लगाओ.’’

राकेश जैन ने कुछ देर पहले उन के मोबाइल पर आए नंबर को रिडायल किया. दूसरी तरफ से फोन सुरजीत सिंह ने ही अटेंड किया, ”हां बोलो.’’

”महक कहां है?’’

”मुझे नहीं मालूम.’’ सुरजीत सिंह ऐंठ कर बोला.

”आप के बेटे पर महक ने कहां हमला करवाया है, वह जगह तो आप बता ही सकते हैं?’’

”महरौली में संजय वन के पास महक ने अपने दोस्तों के साथ मेरे बेटे को घेर कर चाकू मारे हैं. मैं छोड़ूंगा नहीं महक को,’’ सुरजीत ने कहने के बाद काल डिसकनेक्ट कर दी.

”महरौली के संजय वन में अर्श पर हमला हुआ है. सुरजीत का कहना है कि महक ने अपने दोस्तों के साथ वहां अर्श को घेरा था.’’ राकेश जैन ने बताया फिर प्रीति से बोले, ”तुम साथ चलो बेटी. हम संजय वन जा कर हकीकत मालूम करते हैं. वहां ऐसा कुछ हुआ होगा तो वहां के आसपास पटरी पर खोमचा लगाने वाले बता ही देंगे. महक का भी पता चल जाएगा.’’

”ठीक है पापा,’’ प्रीति ने कहा और तुरंत तैयार हो कर वह अपने पापा के साथ घर से निकल गई.

राकेश जैन ने बेटी प्रीति के साथ महरौली पहुंच कर संजय वन के आसपास पटरी लगाने वालों से वहां आज हुई किसी वारदात के विषय में पूछताछ की. किसी ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की कि आज वहां किसी प्रकार की मारपीट या चाकूबाजी की घटना घटी है. सुबह से ही वहां का वातावरण और दिनों की तरह ही था.

”पापा. मुझे तो लगता है अर्श झूठ बोल रहा है. वह महक को फंसाना चाहता है.’’ प्रीति ने अपनी आशंका जाहिर की.

”इस के लिए महक का मिलना भी तो जरूरी है बेटी. वही बताएगी कि सच्चाई क्या है.’’

”मुझे तो अर्शकृत पर शक है. वह जानता है कि महक कहां है, लेकिन बता नहीं रहा है.’’

”हमें अर्शकृत से मिलना चाहिए बेटी.’’ राकेश जैन ने कहा.

”चलिए, हम पीतमपुरा चलते हैं. वह यदि किसी अस्पताल में होगा तो मालूम हो जाएगा, महक कहां है और उस ने कैसे हमला करवाया.’’ प्रीति बोली.

दोनों महरौली से पीतमपुरा के लिए निकले. रास्ते में ही राकेश जैन ने सुरजीत को फोन कर के मालूम कर लिया कि अर्शकृत किस अस्पताल में एडमिट है.

अस्पताल में राकेश जैन अपनी बेटी के साथ पहुंचे तो उन्हें अर्शकृत एक बैड पर पड़ा मिल गया. वह वहां अकेला था.

राजेश जैन ने देखा, उस के हाथों पर 1-2 जगह पट्टियां बंधी थीं. वह आराम से बैड पर लेटा हुआ था. उसे देख कर नहीं लग रहा था कि उस पर चाकुओं से जानलेवा हमला हुआ है. प्रीति को अपने पापा राकेश जैन के साथ देख कर उस ने जख्मी हाथ ऊपर उठा कर कहा, ”देख लो अपनी बेटी की करतूत. उस ने मुझ पर अपने दोस्तों से हमला करवाया है.’’

”महक कहां पर है?’’ राकेश जैन ने पूछा.

”मुझ पर हमला करवा कर भाग गई. कहां गई, मैं नहीं जानता.’’ अर्शकृत ने कहने के बाद चेहरा घुमा लिया.

कुछ सोच कर राकेश जैन बेटी प्रीति को साथ ले कर घर लौट आए. पत्नी से सलाह करने के बाद वह उसे साथ ले कर जहांगीरपुरी थाने पहुंच गए.

वहां उन्होंने एसएचओ सतविंदर सिंह को अपना परिचय दिया और बताया, ”सर, मैं जहांगीरपुरी के के-ब्लौक में अपनी पत्नी मधु और 2 बेटियों के साथ रहता हूं. मेरी छोटी बेटी दिल्ली यूनिवर्सिटी से ओपन लर्निंग कोर्स द्वारा इंगलिश आनर्स की पढ़ाई कर रही है. साथ ही वह मूलचंद में एक इंस्टीट्यूट से कोरियन लैंग्वेज भी सीख रही है.

”वह आज सुबह 8 बजे घर से यह कह कर निकली थी कि वह कालेज जा रही है. वह कालेज से एकडेढ़ बजे तक घर लौट आती थी. आज वह 3 बजे तक नहीं लौटी तो मधु और प्रीति ने उस के विषय में हर संभव जगह पर फोन कर के मालूम किया. चूंकि महक का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था, उस की सहेलियों से और अर्शकृत से भी मालूम किया.

”महक की सहेली का कहना था कि महक आज कालेज नहीं आई. जबकि अर्श पहले कहता रहा कि वह महक से 2 दिन से नहीं मिला है, लेकिन सर वह सुबह से महक के विषय में जानता रहा है. क्योंकि…’’

”यह अर्शकृत कौन है?’’ एसएचओ ने पूछा.

”यह महक को एकतरफा प्यार करने वाला सिरफिरा आशिक है. हम ने उसे कितनी ही बार महक से न मिलने और महक को तंग न करने की हिदायत दी थी, लेकिन वह बाज नहीं आया. वह महक के पीछे घर तक भी पहुंचने लगा था सर.’’

”आप कह रहे हैं अर्श आज सुबह महक के साथ था, आप यह बात किस अनुमान से कह रहे हैं?’’

”सर, आज जब हम महक की खोजखबर में परेशान थे, मुझे अर्श के पिता का फोन आया कि अर्श पर महक ने अपने दोस्तों के साथ जानलेवा हमला करवाया है. जगह के बारे में पूछने पर हमें बताया गया कि महरौली के संजय वन के पास यह घटना घटी है. मैं अपनी बेटी के साथ संजय वन गया. वहां पूछताछ की तो मालूम हुआ वहां ऐसी कोई वारदात नहीं हुई.’’

”इस का मतलब अर्श झूठ बोल रहा है.’’

”कह नहीं सकते सर, मैं ने बेटी के साथ पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में जा कर अर्श से मुलाकात की. उस के हाथ पर मामूली जख्म है, जिस की पट्टी करवा कर वह अस्पताल के बैड पर आराम से पड़ा हुआ है. वह महक के विषय में कुछ भी नहीं बता रहा है.’’

”ठीक है, मैं अर्शकृत से मिलता हूं. असलियत क्या है वही बताएगा.’’ एसएचओ ने कहने के बाद मधु जैन के द्वारा महक के लापता होने का मामला दर्ज कर लिया और उन का फोन नंबर नोट कर के उन्हें थाने से वापस घर भेज दिया.

जहांगीरपुरी पुलिस ने उसी शाम अर्शकृत से पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में जा कर पूछताछ की. अर्शकृत ने पुलिस को यही बताया कि महक ने अपने 2 दोस्तों द्वारा उस पर चाकुओं से हमला करवाया है.

”यह घटना कहां पर घटी है, बताओगे मुझे?’’ एसएचओ सतविंदर सिंह ने उस के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

”महरौली के संजय वन में सर.’’

”महक वहां कैसे पहंची, क्या उसे तुम ने बताया था कि तुम महरौली में खड़े हो?’’

इस प्रश्न पर अर्शकृत अचकचा गया. उस ने चेहरा झुका कर धीरे से कहा, ”यह तो महक ही जाने सर.. मैं आज सुबह महरौली गया था.’’

”तुम पर जिन 2 युवकों ने हमला किया, उन्हें पहचानते हो? उन के नामपते नोट करवाओ मुझे.’’

”म… मैं उन्हें नहीं जानता. यह महक जानती होगी, वही उन्हें वहां पर लाई थी.’’

”क्या महक उस वक्त उन युवकों के साथ थी, जिन्होंने तुम पर चाकुओं से हमला किया?’’

”जी हां सर. तभी तो मैं कह रहा हूं, यह महक की ओर से मुझ पर कातिलाना हमला था.’’

”महक ने ऐसा क्यों किया, क्या तुम से उस की दुश्मनी रही है?’’

”कह नहीं सकता सर.’’

”मुझे तो बताया गया है तुम महक से प्यार करते थे, यदि ऐसा था तो कोई लड़की अपने प्रेमी पर हमला क्यों करवाएगी?’’ एसएचओ ने पूछा.

”यह तो सर, महक ही जाने.’’

”मैं बताता हूं.’’ एसएचओ सतविंदर सिंह ने अर्शकृत को जलती आंखों से घूरते हुए कहा, ”तुम महक के पीछे पड़े हुए थे. वह तुम्हें नहीं चाहती थी, लेकिन तुम उसे हर रोज तंग करते थे. इसी से नाराज हो कर उस ने तुम पर हमला करवाया है.’’

”जी, वह भी मुझे प्यार करती थी,’’ अर्शकृत जल्दी से बोला, ”वह मेरी किस बात पर नाराज हो गई, मैं नहीं जानता.’’

”तुम पर जानलेवा हमला हुआ. वे 2 युवक थे, फिर भी तुम्हारे एक ही हाथ पर मामूली सा जख्म हुआ. कहीं किसी पर चाकू चलाने में तो यह हाथ घायल नहीं हुआ है? महक भी सुबह से लापता है, सच्चाई क्या है, बताओगे मुझे?’’

अर्शकृत का चेहरा सफेद पड़ गया. वह अपने को संभाल कर तुरंत बोला, ”आप मुझ पर ही संदेह कर रहे हैं सर, मुझ पर जानलेवा हमला हुआ है, मैं जख्मी हूं… आप जाइए और संजय वन में घटनास्थल देखिए. मैं आराम करना चाहता हूं.’’

एसएचओ मुसकराते हुए खड़े हो गए और मन ही मन बड़बड़ाए, ”बेटा, मैं ने कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं. तुम पर जानलेवा हमला नहीं हुआ है, तुम ने महक पर जानलेवा हमला किया है. हम संजय वन चेक कर लें, फिर तुम्हें हथकडिय़ां पहनाऊंगा.’’

एसएचओ सतविंदर सिंह उठ कर अपनी टीम के साथ अस्पताल से बाहर आ गए. अभी अंधेरा नहीं हुआ था. उन्होंने संजय वन जा कर देख लेना उचित समझा तो टीम के साथ महरौली निकल पड़े. महरौली में संजय वन पहुंच कर उन्होंने महक को तलाश किया. उन्हें संदेह था कि यदि अर्शकृत ने महक पर जानलेवा हमला किया होगा तो वह जीवित या मृत अंदर संजय वन में ही पड़ी मिलेगी. 2 घंटे तक अपनी टीम के साथ उन्होंने संजय वन में तलाशा, लेकिन महक उन्हें नहीं मिली.

अंधकार जमीन पर उतर आया था, इसलिए वह टीम के साथ थाने में लौट आए. एसएचओ सतविंदर सिंह ने यह जानकारी एसीपी प्रवीण कुमार को दी तो उन्होंने उन्हें यह केस महरौली थाने को देने के लिए कह दिया. यह दक्षिणी दिल्ली के थाना महरौली की घटना थी. इसलिए यहां की जांच का थाना महरौली ही पड़ता था. एसएचओ सतविंदर सिंह (जहागीरपुरी) ने सारी घटना की जानकारी महरौली थाने को दे कर महक की गुमशुदगी वाला केस उन को हैंडओवर कर दिया.

महरौली थाने में यह मामला बीएनएस की धारा 103 के तहत दर्ज कर के यहां के एसएचओ संजय कमार सिंह ने डीसीपी अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह को पूरी घटना की जानकारी दे दी. उन्होंने एसएचओ संजय कुमार सिंह को यह मामला हल करने का दायित्व सौंप दिया. दूसरी सुबह वह पीतमपुरा के अस्पताल में 22 वर्षीय अर्शकृत से मिलने पहुंचे तो वह वहां से डिसचार्ज हो चुका था.

अस्पताल से उन्हें उस के घर का पता मिल गया. अर्शकृत के पिता सुरजीत सिंह, डब्ल्यूजेड-1552, रानी बाग, दिल्ली में रहते थे. पुलिस टीम वहां पहुंच गई. अर्शकृत को उम्मीद नहीं थी कि पुलिस घर के दरवाजे तक पहुंच जाएगी. पुलिस का सामना उस के पिता सुरजीत सिंह ने किया.

”आप मेरे दरवाजे किसलिए आए हैं?’’ सुरजीत सिंह ने रौब से पूछा.

”आप कौन हैं, हमें अर्शकृत से मिलना है.’’ एसआई विनोद भाटी ने कहा.

”मैं अर्शकृत का फादर हूं. आप अर्शकृत से क्यों मिलना चाहते हैं?’’

”महक के विषय में उस से कुछ पूछताछ करनी है, बुलाइए उसे बाहर.’’

”महक ने तो मेरे बेटे पर जानलेवा हमला करवाया है. आप महक से मिलिए…’’

”आप उसे बुलाते हैं या मैं पुलिस को अंदर भेजूं.’’ विनोद भाटी इस बार कड़क लहजे में बोले तो सुरजीत सिंह की ऐंठन कम हो गई. उस ने अर्शकृत को बाहर बुला लिया.

एसआई भाटी ने उस का हाथ पकड़ लिया और पुलिस वैन में ले आए. पुलिस टीम उसे ले कर महरौली थाने में आ गई.

”अर्शकृत, तुम ने बहुत नाटक कर लिया. अब यदि तुम ने सीधी तरह सच्चाई नहीं उगली तो मुझे सख्ती से पूछताछ करनी पड़ेगी.’’ एसएचओ संजय कुमार सिंह ने रौबदार आवाज में कहा, ”बताओ, महक कहां है?’’

”मैं ने उसे मार डाला है.’’ अर्शकृत सिर झुका कर बोला.

उस की बात पर पुलिस चौंक पड़ी. एसएचओ संजय कुमार सिंह ने गहरी सांस ली, ”महक की लाश कहां है?’’

”संजय वन में मैं ने छिपा दी है सर.’’ अर्शकृत ने बताया.

”चलो, हमें महक की लाश बरामद करवाओ.’’ एसएचओ सिंह ने कहा.

अर्शकृत को संजय वन ले जाने से पहले श्री सिंह ने महक के पिता राकेश जैन को महक की हत्या अर्शकृत द्वारा किए जाने की जानकारी दे दी.

अर्शकृत को पुलिस टीम अपने साथ ले कर संजय वन आ गई. इस समय एसएचओ संजय कुमार सिंह के साथ इंसपेक्टर (कानून एवं व्यवस्था) अनुराग सिंह और एसआई विनोद भाटी भी थे.

अर्शकृत पुलिस को संजय वन के उस कोने में ले गया, जहां ज्यादा पेड़पौधे और जंगली घास थी. महक की लाश अर्शकृत ने जंगली घास में छिपा रखी थी. उस की लाश खून से पूरी तरह सनी हुई थी, खून सूख चुका था. महक का चेहरा और शरीर का कुछ हिस्सा जला हुआ था. महक के शरीर पर कई जगह चाकू के गहरे घाव देखे जा सकते थे. उस की आंखें फटी पड़ी थीं. उस का गला भी घोंटा गया था.

संजय सिंह ने फोन कर के महक की लाश संजय वन में मिलने की जानकारी डीसीपी (दक्षिणी दिल्ली) अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह को दे दी. उन्होंने घटनास्थल पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. आधे घंटे में उच्चाधिकारी और फोरैंसिक टीम संजय वन में आ पहुंचे. फोरैंसिक टीम अपने काम में लग गई. डीसीपी अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह ने महक की लाश का निरीक्षण किया, फिर वह इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह को कुछ निर्देश दे कर वहां से चले गए.

लाश की काररवाई पूरी कर के इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह निपटे ही थे कि महक के मम्मीपापा और बड़ी बहन प्रीति वहां आ गए. अपनी फूल जैसी बेटी का चाकू से गोदा गया जिस्म और जला हुआ चेहरा देख कर मधु जैन और प्रीति दहाड़े मार कर रोने लगीं. राकेश जैन भी फफक कर रोने लगे. उन्हें सांत्वना देते हुए एसएचओ संजय कुमार सिंह ने कहा, ”महक की हत्या हो जाने का मुझे भी दुख है. महक का हत्यारा हमारी पकड़ में है. मैं कोशिश करूंगा, इसे फांसी का फंदा मिले.’’

”मैं भी चाहता हूं सर,’’ राकेश जैन भर्राए स्वर में बोले, ”इसे फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए.’’

कागजी काररवाई करने के बाद महक का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया. उस के परिजन भी मोर्चरी के लिए चले गए. अर्शकृत को ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई.

पुलिस टीम ने संजय वन और बाहर लगे सभी सीसीटीवी चैक किए तो उन्हें अर्शकृत और महक संजय वन में जाते नजर आ गए. अर्शकृत के हाथ में बोतल भी दिखाई दे रही थी. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया गया था. यह अर्शकृत के खिलाफ पुख्ता सबूत थे कि उस ने महक का कत्ल किया है.

थाना महरौली में डीसीपी अंकित चौहान की उपस्थिति में अर्शकृत से महक की हत्या करने का कारण पूछा गया तो उस ने बताया, ”मेरी पहचान महक से कालेज में हुई थी. महक ओपन लर्निंग द्वारा इंगलिश आनर्स की पढ़ाई कर रही थी. मैं बीकाम फस्र्ट ईयर का स्टूडेंट था. महक और मैं पहले हायहैलो करते रहे, फिर धीरेधीरे हम प्यार करने लगे. महक मेरे बुलाने पर कहीं भी आ जाती थी. वह मुझे बहुत प्यार करती थी, लेकिन उस के पेरेंट्स मुझे पसंद नहीं करते थे. उन्होंने कई बार मुझे धमकाया कि मैं महक से न मिलूं. उन्होंने महक को भी मुझ से दूर करने की कोशिश की और वे कामयाब हो गए.’’

अर्शकृत ने रुक कर लंबी सांस ली, फिर बोला, ”सर, मैं महक को बहुत प्यार करता था. वह मुझ से कटने लगी तो मुझे बहुत बुरा लगता था. मैं जानता था महक मेरी है, मेरे लिए ही उस ने धरती पर जन्म लिया है. मैं तब बहुत तड़पा, जब महक ने मुझ से बोलना छोड़ दिया. मैं ने महक से कई बार मिलने की कोशिश की तो वह नहीं मिली. उस के घर गया तो घर वालों ने मेरी बेइज्जती कर के मुझे महक से मिलने नहीं दिया. इस से मेरे अंदर महक के प्रति गुस्सा भरता चला गया.

”मैं ने 2 दिन पहले इरादा बनाया कि महक मेरी नहीं होगी तो किसी दूसरे की नहीं होगी. मैं ने कल पहली जून को पेट्रोल खरीद कर बोतल में भर लिया. चाकू मैं ने पहले ही खरीद लिया था. मैं ने सुबह महक को फोन कर के कहा कि वह एक बार मुझ से मिल ले, फिर बेशक मुझ से किनारा कर लेना.

”महक मान गई. मैं ने महक को महरौली संजय वन में बुलाया. मैं सुबह सवा 8 बजे संजय वन पहुंच गया. महक 10 बजे के बाद आई. मैं ने महक को फिर से दोस्ती करने के लिए कहा, लेकिन उस ने मना कर दिया. हमारी इसी बात पर लड़ाई हो गई. मैं महक को घसीट कर संजय वन के कोने में ले आया.

”मैं गुस्से में था. मैं ने महक पर चाकू से हमला किया, मैं ने कितने चाकू मारे मुझे नहीं मालूम. महक मर गई तो मैं ने उस का गला घोंटा, फिर पेट्रोल डाल कर उस का चेहरा जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. मैं उस की लाश छिपा कर घर आ गया और फिर प्लान बना कर अस्पताल में एडमिट हो गया. मैं ने अपने पापा से कहा कि महक ने मुझ पर जानलेवा हमला किया है. मैं ने महक का कत्ल किया है. मैं कुबूल करता हूं.’’

अर्शकृत के कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसे उसी दिन कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक पुलिस उस के खिलाफ ठोस सबूत जुटा रही थी. Hindi Short Stories

 

 

 

Crime News : पिता ने प्रेमी संग बेटी को रंगेहाथों पकड़ा और कुल्हाड़ी से काट डाला

Crime News : सपना पड़ोस में रहने वाले शालू को न सिर्फ प्यार करती थी, बल्कि वह शादी भी करना चाहती थी. लेकिन इसे अपनी नाक का सवाल मान कर सपना के पिता शिवआसरे ने ऐसा नहीं होने दिया. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि सपना का प्यार बस अधूरा सपना बन कर रह गया. कानपुर जिले के घाटमपुर थाना अंतर्गत एक गांव है बिहारिनपुर. इसी गांव में शिवआसरे परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी मीना के अलावा 2 बेटियां सपना, रत्ना तथा 2 बेटे कमल व विमल थे. शिवआसरे ट्रक ड्राइवर था. उस के 2 अन्य भाई रामआसरे व दीपक थे, जो अलग रहते थे और खेतीबाड़ी से घर खर्च चलाते थे.

शिवआसरे की बेटी सपना भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह जैसेजैसे सयानी होने लगी, उस के रूपलावण्य में निखार आता गया. 16 साल की होतेहोते सपना की सुंदरता में चारचांद लग गए. मतवाली चाल से जब वह चलती, तो लोगों की आंखें बरबस उस की ओर निहारने को मजबूर हो जाती थीं. सपना जितनी सुंदर थी, उतनी ही पढ़नेलिखने में भी तेज थी. उस ने पतारा स्थित सुखदेव इंटर कालेज में 9वीं कक्षा में एडमिशन ले लिया था. जबकि उस की मां मीना उसे मिडिल कक्षा से आगे नहीं पढ़ाना चाहती थी, लेकिन सपना की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा. सपना के घर से कुछ दूरी पर शालू रहता था. शालू के पिता बैजनाथ किसान थे. उन के 3 बच्चों में शालू सब से बड़ा था.

17 वर्षीय शालू हाईस्कूल की परीक्षा पास कर चुका था और इंटरमीडिएट की पढ़ाई घाटमपुर के राजकीय इंटर कालेज से कर रहा था. शालू के पिता बैजनाथ और सपना के पिता शिवआसरे एक ही बिरादरी के थे, सो उन में गहरी दोस्ती थी. दोनों एकदूसरे का दुखदर्द समझते थे. किसी एक को तकलीफ हो तो दूसरे को दर्द खुद होने लगता. बैजनाथ और शिवआसरे बीते एक दशक से गांव में बटाई पर खेत ले कर खेती करते थे. हालांकि शिवआसरे ट्रक चालक था और खेतीबाड़ी में कम समय देता था. इस के बावजूद दोनों की पार्टनरशिप चलती रही. दोनों परिवारों में घरेलू संबंध भी थे. लिहाजा उन के बच्चों का भी एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था.

शालू सपना को चाहता था. सपना भी उस की आंखों की भाषा समझती थी. सपना के लिए शालू की आंखों में प्यार का सागर हिलोरें मारता था. सपना भी उस की दीवानी होने लगी. धीरेधीरे उस के मन में भी शालू के प्रति आकर्षण पैदा हो गया. सपना शालू के मन को भाई तो वह उस का दीवाना बन गया. सपना के स्कूल जाने के समय वह बाहर खड़ा उस का इंतजार करता रहता. सपना उसे दिखाई पड़ती तो वह उसे चाहत भरी नजरों से तब तक देखता रहता, जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो जाती. अब वह सपना के लिए तड़पने लगा था. हर पल उस के मन में सपना ही समाई रहती थी. न उस का मन काम में लगता था, न ही पढ़ाई में.

शालू का शिवआसरे के घर जबतब आनाजाना लगा ही रहता था. घर आनाजाना काम से ही होता था. लेकिन जब से सपना शालू के मन में बसी, शालू अकसर उस के घर ज्यादा जाने लगा. इस के लिए उस के पास बहाने भी अनेक थे. शिवआसरे के घर पहुंच कर वह बातें भले ही दूसरे से करता, लेकिन उस की नजरें सपना पर ही जमी रहती थीं. शालू की अपने प्रति चाहत देख कर उस का मन भी विचलित हो उठा. अब वह भी शालू के आने का इंतजार करने लगी. दोनों ही अब एकदूसरे का सामीप्य पाने को बेचैन रहने लगे थे. लेकिन यह सब अभी नजरों ही नजरों में था. शालू की चाहत भरी नजरें सपना के सुंदर मुखड़े पर पड़तीं तो सपना मुसकराए बिना न रह पाती.

वह भी उसे तिरछी निगाहों से घूरते हुए उस के आगेपीछे चक्कर लगाती रहती. अब शालू अपने दिल की बात सपना से कहने के लिए बेचैन रहने लगा. शालू अब ऐसे अवसर की तलाश में रहने लगा, जब वह अपने दिल की बात सपना से कह सके. कोशिश करने पर चाह को राह मिल ही जाती है. एक दिन शालू को मौका मिल ही गया. उस दिन सपना के भाईबहन मां मीणा के साथ ननिहाल चले गए थे और शिवआसरे ट्रक ले कर बाहर गया था. सपना को घर में अकेला पा कर शालू बोला, ‘‘सपना, यदि तुम बुरा न मानो तो मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’

सपना जानती थी कि शालू उस से क्या कहेगा. इसलिए उस का दिल जोरजोर धड़कने लगा. घबराई सी वह शालू की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देखने लगी. शालू ने हकलाते हुए कहा, ‘‘सपना वो क्या है कि मैं तुम्हारे बारे में कुछ…’’

‘‘मेरे बारे में…’’ चौंकने का नाटक करते हुए सपना बोली, ‘‘जो भी कहना है, जल्दी कहिए.’’ शायद वह भी शालू से प्यार के शब्द सुनने के लिए बेकरार थी.

‘‘कहीं तुम मेरी बात सुन कर नाराज न हो जाओ…’’ शालू ने थोड़ा झेंपते हुए कहा.

‘‘अरे नहीं…’’ मुसकराते हुए सपना बोली, ‘‘नाराज क्यों हो जाऊंगी. तुम मुझे गालियां तो दोगे नहीं. जो भी कहना है, तुम दिल खोल कर कहो, मैं तुम्हारी बातों का बुरा नहीं मानूंगी.’’

सपना जानबूझ कर अंजान बनी थी. जब शालू को सपना की ओर से कुछ भी कहने की छूट मिल गई तो उस ने कहा, ‘‘सपना, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं. मुझे तुम्हारे अलावा कुछ अच्छा नहीं लगता. हर पल तुम्हारी ही सूरत मेरी नजरों के सामने घूमती रहती है.’’

शालू की बातें सुन कर सपना मन ही मन खुश हुई, फिर बोली, ‘‘शालू, प्यार तो मैं भी तुम से करती हूं, लेकिन मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘कैसा डर सपना?’’ शालू ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘यही कि हमारेतुम्हारे प्यार को घर वाले स्वीकार करेगें क्या?’’

‘‘हम एक ही जाति के हैं. दोनों परिवारों के बीच संबंध भी अच्छे हैं. हम दोनों अपनेअपने घर वालों को मनाएंगे तो वे जरूर मान जाएंगे.’’

उस दिन दोनों के बीच प्यार का इजहार हुआ, तो मानो उन की दुनिया ही बदल गई. फिर वे अकसर ही मिलने लगे. सपना और शालू के दिलोदिमाग पर प्यार का ऐसा जादू चढ़ा कि उन्हें एकदूजे के बिना सब कुछ सूना लगने लगा. जब भी मौका मिलता, दोनों एकांत में एक साथ बैठते और अपने ख्वाबों की दुनिया में खो जाते. प्यार में वे इस कदर खो गए कि उन्होंने जीवन भर एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें भी खा लीं. एक बार मन से मन मिला तो फिर दोनों के तन मिलने में भी देर नहीं लगी. सपना और शालू ने लाख कोशिश की कि उन के संबंधों की जानकारी किसी को न हो. लेकिन प्यार की महक को भला कोई रोक सका है. एक दिन पतारा बाजार से लौटते समय गांव में ही रहने वाले उन्हीं की जाति के युवक मोहन ने उन दोनों को रास्ते में हंसीठिठोली करते देख लिया.

घर आते ही उस ने सारी बात शिवआसरे को बता दी. कुछ देर बाद जब सपना घर लौटी तो शिवआसरे ने सपना को डांटाफटकारा और पिटाई करते हुए हिदायत दी कि भविष्य में वह शालू से न मिले. सपना की मां मीना ने भी इज्जत का हवाला दे कर बेटी को खूब समझाया. सपना पर लगाम कसने के लिए मां ने उस का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. साथ ही उस पर कड़ी निगरानी रखने लगी. मीना ने शालू के घर जा कर उस के मांबाप से शिकायत की कि वह अपने बेटे को समझाएं कि वह उस की इज्जत से खिलवाड़ न करे. लेकिन कहावत है कि लाख पहरे बिठाने के बाद भी प्यार कभी कैद नहीं होता. सपना के साथ भी ऐसा ही हुआ. मां की निगरानी के बावजूद सपना और शालू का मिलन बंद नहीं हुआ. किसी न किसी बहाने वह शालू से मिलने का मौका ढूंढ ही लेती थी.

कभी दोनों नहीं मिल पाते तो वे मोबाइल फोन पर बतिया लेते और दिल की लगी बुझा लेते. सपना को मोबाइल फोन शालू ने ही खरीद कर दिया था. इस तरह बंदिशों के बावजूद उन का प्यार बढ़ता ही जा रहा था. दबी जुबान से पूरे गांव में उन के प्यार के चर्चे होने लगे थे. एक शाम सहेली के घर जाने का बहाना बना कर सपना घर से निकली और शालू से मिलने गांव के बाहर बगीचे में पहुंच गई. इस की जानकारी मीना को हुई तो सपना के घर लौटने पर मां का गुस्सा फट पड़ा, ‘‘बदजात, कुलच्छिनी, मेरे मना करने के बावजूद तू शालू से मिलने क्यों गई थी. क्या मेरी इज्जत का कतई खयाल नहीं?’’

‘‘मां, मैं शालू से प्यार करती हूं. वह भी मुझे चाहता है.’’

‘‘आने दे तेरे बाप को. प्यार का भूत न उतरवाया तो मेरा नाम मीना नहीं.’’ मीना गुस्से से बोली.

‘‘आखिर शालू में बुराई क्या है मां? अपनी बिरादरी का है. पढ़ालिखा स्मार्ट भी है.’’ सपना ने मां को समझाया.

‘‘बुराई यह है कि शालू तुम्हारे चाचा का लड़का है. जातिबिरादरी के नाते तुम दोनों का रिश्ता चचेरे भाईबहन का है. अत: उस से नाता जोड़ना संभव नहीं है.’’ मां ने समझाया.

मांबेटी में नोकझोंक हो ही रही थी कि शिवआसरे घर आ गया. उस ने पत्नी का तमतमाया चेहरा देखा तो पूछा, ‘‘मीना, क्या बात है, तुम गुस्से से लाल क्यों हो?’’

‘‘तुम्हारी लाडली बेटी सपना के कारण. लगता है कि यह बिरादरी में हमारी नाक कटवा कर ही रहेगी. मना करने के बावजूद भी यह कुछ देर पहले शालू से मिल कर आई है और उस की तरफदारी कर जुबान लड़ा रही है.’’ मीना ने कहा.

पत्नी की बात सुन कर शिवआसरे का गुस्सा बेकाबू हो गया. उस ने सपना की जम कर पिटाई की और कमरा बंद कर दिया. गुस्से में उस ने खाना भी नहीं खाया और चारपाई पर जा कर लेट गया. रात भर वह यही सोचता रहा कि इज्जत को कैसे बचाया जाए. सुबह होते ही शिवआसरे शालू के पिता बैजनाथ के घर जा पहुंचा, ‘‘तुम शालू को समझाओ कि वह सपना से दूर रहे. अन्यथा अंजाम अच्छा नहीं होगा. अपनी इज्जत के लिए वह किसी हद तक जा सकता है.’’

इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच दरार पड़ गई. शिवआसरे और बैजनाथ के बीच साझेदारी भी टूट गई. इधर चौकसी बढ़ने पर शालू और सपना का मिलनाजुलना लगभग बंद हो गया था. जिस से दोनों परेशान रहने लगे थे. अब दोनों की बात चोरीछिपे मोबाइल फोन पर ही हो पाती थी. 14 मई, 2021 को शिवआसरे के साले मनोज की शादी थी. शिवआसरे ने घर की देखभाल की जिम्मेदारी भाई दीपक को सौंपी और सुबह ही पत्नी मीना व 2 बच्चों के साथ बांदा के बरुआ गांव चला गया. घर में रह गई सपना और सब से छोटा बेटा विमल. दिन भर सपना घर के काम में व्यस्त रही फिर शाम होते ही उसे प्रेमी शालू की याद सताने लगी. लेकिन चाचा दीपक की निगरानी से वह सहमी हुई थी.

रात 12 बजे जब पूरा गांव सो गया, तो सपना ने सोचा कि उस का चाचा भी सो गया होगा. अत: उस ने शालू से मोबाइल फोन पर बात की और मिलने के लिए उसे घर बुलाया. शालू चोरीछिपे सपना के घर आ गया. लेकिन उसे घर में घुसते हुए दीपक ने देख लिया. वह समझ गया कि वह सपना से मिलने आया है. उस ने तब दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगा दिया और बड़े भाई शिवआसरे को फोन कर के सूचना दे दी. शिवआसरे को जब यह सूचना मिली तो वह साले की शादी बीच में ही छोड़ कर अकेले ही बरुआ गांव से चल दिया. 15 मई की सुबह 7 बजे वह अपने घर पहुंच गया. तब तक शालू के मातापिता सीमा और बैजनाथ को भी पता चल चुका था कि उन के बेटे शालू को बंधक बना लिया गया है.

वे लोग शिवआसरे के घर पहले से मौजूद थे. शिवआसरे घर के अंदर जाने लगा तो बैजनाथ ने पीछे से आवाज लगाई. इस पर शिवआसरे ने कहा कि वह बस बात कर मामला हल कर देगा और घर के अंदर चला गया. पीछे से बैजनाथ और सीमा भी घर के अंदर दाखिल हुए. लेकिन वे अपने बेटे शालू तक पहुंच पाते, उस के पहले ही शिवआसरे शालू और सपना को ले कर एक कमरे में चला गया और उस में लगा लोहे का गेट बंद कर लिया. शालू के पिता बैजनाथ व मां सीमा खिड़की पर खड़े हो गए, जहां से वे अंदर देख सकते थे. बैजनाथ ने एक बार फिर शिवआसरे से मामला सुलझाने की बात कही. इस पर उस का जवाब यही था कि बस 10 मिनट बात कर के मामला सुलझा देगा.

इधर पिता का रौद्र रूप देख कर सपना कांप उठी. शिवआसरे ने दोनों से सवालजवाब किए तो सपना पिता से उलझ गई. इस पर उसे गुस्सा आ गया. शिवआसरे ने डंडे से सपना को पीटा. उस ने शालू की भी डंडे से पिटाई की. लेकिन पिटने के बाद भी सपना का प्यार कम नहीं हुआ. वह बोली, ‘‘पिताजी, मारपीट कर मेरी जान भले ही ले लो, पर मेरा प्यार कम न होगा. आखिरी सांस तक मेरी जुबान पर शालू का नाम ही होगा.’’ बेटी की ढिठाई पर शिवआसरे आपा खो बैठा. उस ने कमरे में रखी कुल्हाड़ी उठाई और सपना के सिर व गरदन पर कई वार किए. जिस से उस की गरदन कट गई और मौत हो गई. इस के बाद उस ने कुल्हाड़ी से वार कर शालू को भी वहीं मौत के घाट उतार दिया.

यह खौफनाक मंजर देख कर शालू की मां सीमा की चीख निकल गई. सीमा और बैजनाथ जोरजोर से चिल्लाने लगे. सीमा ने मदद के लिए कई घरों के दरवाजे खटखटाए लेकिन कोई मदद को नहीं आया. प्रधान पति राजेश कुमार को गांव में डबल मर्डर की जानकारी हुई तो उन्होंने थाना घाटमपुर पुलिस तथा बड़े पुलिस अधिकारियों को फोन द्वारा सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी धनेश प्रसाद, एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रताप सिंह, एएसपी आदित्य कुमार शुक्ला तथा डीएसपी पवन गौतम पहुंच गए. शिवआसरे 2 लाशों के बीच कमरे में बैठा था. थानाप्रभारी धनेश प्रसाद ने उसे हिरासत में ले लिया. आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी कमरे में पड़ी थी. पुलिस ने उसे भी सुरक्षित कर लिया. जबकि शिवआसरे के अन्य भाई दीपक व रामआसरे पुलिस के आने से पहले ही फरार हो गए थे.

पुलिस अधिकारियों ने शिवआसरे से पूछताछ की तो उस ने सहज ही जुर्म कबूल कर लिया और कहा कि उसे दोनों को मारने का कोई गम नहीं है. पुलिस अधिकारियों ने गांव वालों तथा मृतक शालू के पिता बैजनाथ से पूछताछ की. बैजनाथ ने बताया कि वह और उस की पत्नी सीमा बराबर शिवआसरे से हाथ जोड़ कर कह रहे थे कि बेटे को बख्श दे. लेकिन वह नहीं माना और आंखों के सामने बेटे पर कुल्हाड़ी से वार कर उस की जान ले ली. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक शालू व सपना के शवों को पोस्टमार्टम हेतु हैलट अस्पताल, कानपुर भिजवा दिया.

चूंकि शिवआसरे ने डबल मर्डर का जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई थी, अत: थानाप्रभारी धनेश प्रसाद ने बैजनाथ की तरफ से भादंवि की धारा 302 के तहत शिवआसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे गिरफ्तार कर लिया. 16 मई, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त शिवआसरे को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Chhattisgarh News : पिकनिक पर ले जाकर पति ने पत्नी को बाल पकड़ कर पीटा फिर गला घोंटा

Chhattisgarh News : जय कुमार सिदार ने अपने घर वालों को बताए बिना सरस्वती मरांडी से प्रेम विवाह कर तो लिया, लेकिन सामाजिक रूढि़यों की वजह से उस के घर वाले उसे अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए. इस से बचने के लिए जय कुमार ने जो किया वह…

छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला आदिवासी बाहुल्य है. यहां का लैलूंगा शहर जिला मुख्यालय से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लैलूंगा घोर जनजातीय आदिवासी बाहुल्य विकास खंड है. धीरेधीरे यहां का मिश्रित माहौल अपने आप में एक आकर्षण का माहौल पैदा करने लगा है, क्योंकि यहां पर अब भले ही बहुतेरे मारवाड़ी, ब्राह्मण, कायस्थ समाज के लोग आ कर रचबस रहे हैं, लेकिन आदिवासी सभ्यता और संस्कृति की महक यहां आज भी स्वाभाविक रूप से महसूस की जा सकती है. लैलूंगा थाना अंतर्गत एक छोटे से गांव कमरगा में शदाराम सिदार एक सामान्य काश्तकार हैं. वह 2 बेटे और एक बेटी वाले छोटे से परिवार का बमुश्किल पालनपोषण कर रहे  थे.

शदाराम का बड़ा बेटा जय कुमार सिदार प्राइमरी तक पढ़ने के बाद पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटा रहा था. गरीबी और परिवार की दयनीय हालत देख कर के एक दिन 21 वर्ष की उम्र में वह अपने एक दोस्त रमेश के साथ छत्तीसगढ़ से सटे झारखंड राज्य के बोकारो शहर में रोजगार  के लिए चला गया. जल्द ही जय कुमार को स्थानीय राजू टिंबर ट्यूनिंग प्लांट में क्लीनर मशीन चलाने का काम मिल गया और जय का मित्र रमेश भी वहीं काम करने लगा. फिर उन्होंने बोकारो के एक मोहल्ले में कमरा किराए पर ले लिया. समय अपनी गति से बीत रहा था कि एक दिन जय और रमेश सुबह घर से अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे कि जय को साइकिल के साथ खड़ी एक परेशान सी लड़की दिख गई.

जय कुमार और रमेश थोड़ा आगे बढ़े तो जय ने रुक कर कहा, ‘‘यार, लगता है इस लड़की को कुछ मदद की जरूरत है.’’

दोनों  मुड़ कर वापस आए. तब युवती की ओर मुखातिब हो कर जय  ने कहा, ‘‘क्या बात है, आप क्यों परेशान खड़ी हो?’’

युवती थोड़ा सकुचाई  फिर बोली, ‘‘देखो न, साइकिल में पता नहीं क्या हो गया है, आगे ही नहीं बढ़ रही.’’

जय ने कहा, ‘‘लगता है साइकिल की चैन फंस गई है, किसी मिस्त्री को दिखानी होगी.’’

और नीचे बैठ कर वह साइकिल को ठीक करने की असफल कोशिश करने लगा. मगर चैन बुरी तरह फंस गई थी. थोड़ी देर तक प्रयास करने के बाद जय ने रमेश की ओर देखते हुए कहा, ‘‘चलो, इस की थोड़ी मदद कर देते हैं.’’

इस पर रमेश ने कहा, ‘‘यार, देर हो जाएगी, काम पर न पहुंचे तो प्रसादजी नाराज हो जाते हैं, तुम को तो पता ही है कि काम पर समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है.’’

इस पर सहज रूप से जय सिदार ने कहा, ‘‘बात तो सही है, ऐसा करते हैं, तुम काम पर चले जाओ और उन से बता देना कि आज मैं छुट्टी पर रहूंगा… मैं इन की साइकिल ठीक करा देता हूं.’’

जय को रमेश आश्चर्य से देखता हुआ ड्यूटी पर चला गया. इधर जय ने युवती की मदद के लिए साइकिल अपने कंधे पर उठा ली और धीरेधीरे साइकिल मिस्त्री के पास पहुंचा. थोड़ी ही देर में मिस्त्री ने साइकिल ठीक कर दी. युवती जय के व्यवहार और हमदर्दी को देख कर बहुत प्रभावित हुई. फिर दोनों ने बातचीत में एकदूसरे का नाम और परिचय पूछा. युवती ने अपना नाम सरस्वती मरांडी बताया. जब जय वहां से जाने लगा तो सरस्वती ने उसे अचानक रोक कर कहा, ‘‘आप ने मेरे कारण आज अपना बहुत नुकसान कर लिया है बुरा न मानें तो क्या आप मेरे साथ एक कप चाय पी सकते हैं?’’

जय सिदार 19 वर्षीय सरस्वती की बातें सुन कर हंसता हुआ राजी हो गया. अब वह उसे अच्छी लगने लगी थी. मंत्रमुग्ध सा जय उस के साथ एक रेस्टोरेंट में चला गया. बातोंबातों में सरस्वती ने उसे बताया कि वह अपने गांव ढांगी करतस, जिला धनबाद की रहने वाली है और यहां स्थानीय प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में शिक्षिका है. इस बीच जय ने सरस्वती का मोबाइल नंबर ले लिया और अपने बारे में सब कुछ बताता चला गया. अब अकसर जय सिदार सरस्वती से बातें करता. सरस्वती भी उसे पसंद करती और दोनों के बीच प्रेम की बेलें फूट पड़ीं. जल्द ही एक दिन जय कुमार ने सरस्वती से झिझकते हुए कहा, ‘‘सरस्वती, मैं तुम्हें चाहने लगा हूं. तुम प्लीज मना मत करना, नहीं तो मैं मर ही जाऊंगा.’’

इस पर सरस्वती मुसकराते हुए बोली, ‘‘अच्छा, बताओ तो इस का तुम्हारे पास क्या सबूत है.’’

‘‘सरस्वती, तुम्हारे लिए मैं सब कुछ करने को तैयार हूं. बताओ, मुझे क्या करना है.’’ जय सिदार ने हिचकते हुए कहा.

‘‘मैं तो मजाक कर रही थी, मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत पसंद करते हो.’’ सरस्वती बोली.

यह सुन कर जय की हिम्मत बढ़ गई. वह बोला, ‘‘…और मैं.’’

सरस्वती ने धीरे से  कहा, ‘‘लगता है तुम तो प्यार के खेल में अनाड़ी हो. अरे बुद्धू, अगर कोई लड़की मुसकराए, बात करे, इस का मतलब तुम नहीं समझते…’’

यह सुन कर जय खुशी से उछल पड़ा. इस के बाद उन का प्यार परवान चढ़ता गया. फिर एक दिन सरस्वती और जय ने एक मंदिर में विवाह कर लिया. सन 2017 से ले कर मार्च, 2020 अर्थात कोरोना काल से पहले तक दोनों ही प्रेमपूर्वक झारखंड में एक छत के नीचे रह रहे थे. इस बीच दोनों ने मंदिर में विवाह कर लिया और पतिपत्नी के रूप में आनंदपूर्वक रहने लगे. मार्च 2020 में जब कोविड 19 का संक्रमण फैलने लगा तो जय का काम छूट गया. घर में खाली बैठेबैठे जय को अपने गांव और मातापिता की याद आने लगी. एक दिन जय ने सरस्वती से कहा,

‘‘चलो, हम गांव चलते हैं, वहां इस समय रहना ठीक रहेगा, पता नहीं ये हालात कब तक सुधरेंगे. और जहां तक रोजीरोटी का सवाल है तो हम गांव में ही कमा लेंगे. फिर आज सवाल तो जान बचाने का है.’’

सरस्वती को बात पसंद आ गई. उस समय गांव जाने के लिए कोई साधन नहीं था. तब जय कुमार पत्नी सरस्वती को अपनी साइकिल पर बैठा कर जिला रायगढ़ के गांव कामरगा में स्थित अपने घर की ओर चल दिया. लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय कर के जय कुमार अपने घर पहुंच गया. घर में पिता शदाराम और परिजनों ने जब जय को देखा, सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. साथ में सरस्वती को देखा तो पिता शदाराम ने पूछा, ‘‘यह कौन है?’’

जय ने सकुचाते हुए सरस्वती का परिचय पत्नी के रूप में परिजनों को करा दिया. उस समय किसी ने भी कुछ नहीं कहा. लौकडाउन का यह समय सभी को चिंतित किए हुए था. मगर स्थितियां सुधरने लगीं तो जय कुमार से सवालजवाब होने लगा. एक दिन पिता शदाराम ने कहा, ‘‘बेटा जय, गांव के लोग पूछ रहे हैं कि तुम्हारी बहू कहां की है किस जाति की है? जब मैं ने बताया तो समाज के लोगों ने नाराजगी प्रकट की है. इस से शादी कर के तुम ने बहुत बड़ी भूल की है बेटा.’’

‘‘पिताजी, अब मैं क्या करूं, जो होना था, वह तो हो चुका है.’’ यह सुन कर जय बोला.

‘‘बेटा, हम को भी समाज में रहना है, यहीं जीना है. यह हाल रहेगा तो हम, हमारा परिवार भारी मुसीबत में पड़ जाएगा. कोई हम से रोटीबेटी का रिश्ता तक नहीं रखेगा. ऐसे में हो सके तो तुम लोग कहीं और जा कर के जीवन बसर करो, ताकि समाज के लोग अंगुली न उठा सकें.’’

जय ने कहा, ‘‘पिताजी, अब क्या हो सकता है, मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा.’’

एक दिन एक निकट के परिजन ने जय से कहा, ‘‘अब देख लो, सोचसमझ के कुछ निर्णय लो. वैसे, पास के गांव के हमारे परिचित रामसाय ने अपनी बेटी के साथ तुम्हारे विवाह का प्रस्ताव भेजा था. वह पैसे वाले लोग भी हैं और हमारे समाज के भी हैं. ऐसा करो, सरस्वती को तुम छोड़ दो. फिर हम बात आगे बढ़ाते हैं.’’

यह सुन कर जय का मन भी बदल गया. क्योंकि सुमन को वह बचपन में पसंद करता था. वह सोचने लगा कि काश! वह सरस्वती के चक्कर में नहीं पड़ता तो आज सुमन उस की होती. इसी दरमियान जय गांव में ही तेजराम के यहां ट्रैक्टर चलाने लगा था. नौसिखिए जय सिदार से एक दिन अचानक दुर्घटना हो गई तो तेजराम ने उस की पिटाई कर दी और उस से नुकसान की भरपाई मांगने लगा. परिस्थितियों को देख कर जय पत्नी सरस्वती को ले कर पास के दूसरे गांव सरकेदा में अपने जीजा रवि के यहां गुजरबसर करने आ गया. जय का रवि के साथ अच्छा याराना था. बातोंबातों में एक दिन रवि ने कहा, ‘‘भैया, यह तुम्हारे गले कैसे पड़ गई, इस से कितनी सुंदर लड़कियां हमारे समाज में हैं.’’

यह सुन कर के जय मानो फट पड़ा. बोला, ‘‘भाटो (जीजा), बस यह भूल मुझ से हो गई है, अब मैं क्या करूं, मुझे तो लगता है कि सरस्वती से शादी कर के मैं फंस गया हूं.’’

रवि ने जय कुमार को बताया कि परिवार में चर्चा हुई थी कि सुमन के पिता तुम्हारे लिए 2-3 बार आ चुके हैं. अब क्या हो.’’

‘‘क्या करूं, क्या इसे बोकारो छोड़ आऊं?’’ विवशता जताता जय कुमार बोला.

‘‘…और अगर कहीं फिर वापस आ गई तो..?’’  रवि कुमार ने चिंता जताई.

जय कुमार असहाय भाव से जीजा रवि की ओर देखने लगा.

रवि मुसकराते हुए बोला, ‘‘एक रास्ता है…’’

और दोनों ने बातचीत कर के एक ऐसी योजना बनाई, जिस ने आगे चल कर दोनों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. वह 7 जनवरी, 2021 का दिन था. एक दिन पहले ही जय और रवि ने सरस्वती से बात कर के पिकनिक के लिए झरन डैम चलने की योजना बना ली थी. एक बाइक पर तीनों सुबहसुबह पिकनिक के लिए निकल गए. लैलूंगा शहर घूमने, खरीदारी के बाद 7 किलोमीटर आगे खम्हार जंगल के पास झरन डैम में पहुंच कर तीनों ने खूब मस्ती की. मोबाइल से फोटो खींचे और खायापीया. इस बीच सरस्वती ने एक दफा सहजता से कहा, ‘‘कितना अच्छा होता, आज सारे परिवार वाले भी हमारे साथ होते तो पिकनिक यादगार हो जाती.’’

इस पर रवि ने बात बनाते हुए कहा, ‘‘भाभी, आएंगे आगे सब को ले कर के आएंगे. आज तो हम लोगों ने सोचा कि चलो देखें, यहां का कैसा माहौल है अगली बार  सब को ले कर के पिकनिक मनाएंगे.’’

आज जय सिदार कुछ उखड़ाउखड़ा भी दिखाई दे रहा था. इस पर सरस्वती ने कहा था, ‘‘पिकनिक मनाने आए हो या फिर किसी और काम से…’’

यह सुन कर अचकचाए जय कुमार ने मुसकरा कर कहा, ‘‘ऐसीवैसी कोई बात होती तो मैं भला क्यों आता. तुम गलत समझ रही हो. क्या है सारे कामधंधे रुके पड़े हैं. पैसा कहीं से तो आ नहीं पा रहा है, बस इसी बात की टेंशन है सरस्वती.’’

सरस्वती को लगा कि जय जायज बात कर रहा है. थोड़ी देर बाद जब वापस चलने का समय हुआ तो एक जगह रवि कुमार रुक गया और छोटी अंगुली दिखा कर बोला, ‘‘मैं अभी फारिग हो कर आता हूं.’’

रवि झाडि़यों के अंदर चला गया. सही मौका देख कर के जय ने अचानक सरस्वती पर हमला कर दिया और उस के बाल पकड़ कर उसे मारने लगा और एक रस्सी निकाल कर के गला घोंटने लगा. वह वहीं गिर पड़ी और फटी आंखों से उसे देखती रह गई. जय आखिरी तक सरस्वती पर प्राणघातक हमला भी करता रहा. इतनी देर में रवि भी दौड़ कर आ गया और जय का साथ देने लगा.  देखते ही देखते सरस्वती के प्राणपखेरू उड़ गए. सरस्वती की मौत के बाद रवि ने उस के गले में एक नीली रस्सी बांधी और झाडि़यों में घसीट कर सरस्वती की लाश छिपा दी. 12 जनवरी, मंगलवार को शाम लगभग 5 बजे थाना लैलूंगा मैं अपने कक्ष में थानाप्रभारी एल.पी. पटेल रोजमर्रा के कामों को निपटा रहे थे कि दरवाजे पर आहट सुनाई दी.

उन्होंने देखा 3-4 ग्रामीणों के साथ खम्हार गांव के सरपंच शिवप्रसाद खड़े हैं. थानाप्रभारी ने उन सभी को अंदर बुला लिया. तभी सरपंच ने उन से कहा, ‘‘सर, जंगल में एक महिला की लाश मिली है. कुछ लोगों ने देखा तो मैं सूचना देने के लिए आया हूं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआई व 2 कांस्टेबलों को थानाप्रभारी पटेल ने घटनास्थल की ओर रवाना किया और अपने काम में लग गए. लगभग एक घंटे बाद उन्हें सूचना मिली कि लाश किसी महिला की है. उन्होंने एसआई को स्थिति को देखते हुए सारे सबूतों को इकट्ठा करने और फोटोग्राफ लेने के निर्देश दिए और कहा कि वह स्वयं घटनास्थल पर आ रहे हैं.

थाने से निकलने से पहले एल.पी. पटेल ने एसपी (रायगढ़) संतोष सिंह और एएसपी अभिषेक वर्मा को महिला की लाश मिलने की जानकारी दी और घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. जब वह वहां पहुंचे तो थोड़ी देर में ही जिला मुख्यालय से डौग स्क्वायड टीम भी आ गई  और महिला की लाश को देख कर के उन्हें समझने में देर नहीं लगी कि यह सीधेसीधे एक ब्लाइंड मर्डर का मामला है. पुलिस विवेचना में जांच अधिकारी एल. पी. पटेल के सामने शुरुआती परेशानी मृतका की पहचान की थी, जिस के लिए मशक्कत शुरू कर दी गई. इस कड़ी में रायगढ़ जिले के सभी थानों के गुम इंसानों के हुलिया से मृतका का मिलान किया गया.

जब सफलता नहीं मिली तो छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस पोर्टल पर राज्य के लगभग सभी जिलों के गुम इंसानों से हुलिया का मिलान कराया गया. सभी सोशल मीडिया ग्रुप में मृतका के फोटो वायरल किया जाने लगा. मगर सुराग नहीं मिल रहा था. आखिरकार एक दिन पुलिस को अच्छे नतीजे मिले. सोशल मीडिया में वायरल की गई तसवीर के जरिए मृतका की शिनाख्त सरस्वती मरांडी, पुत्री सुजीत मरांडी, उम्र 23 वर्ष निवासी ढांगी करतस, जिला धनबाद (झारखंड) के रूप में हुई. मृतका की शिनाख्त के बाद मामले में नया पहलू सामने आया, जिस से अनसुलझे हत्याकांड की गुत्थी सुलझती चली गई. लैलूंगा पुलिस को हत्याकांड में कमरगा गांव, थाना लैलूंगा के जयकुमार सिदार के मृतका का कथित पति होने की जानकारी भी मिली.

लैलूंगा पुलिस द्वारा गोपनीय तरीके से जयकुमार सिदार का उस के गांव में पता लगाया गया तो जानकारी मिली कि वह तथा उस का जीजा रवि कुमार सिदार दोनों ही अपनेअपने गांव से गायब हैं. हत्या के इस गंभीर मामले में एसपी संतोष सिंह द्वारा अज्ञात महिला के वारिसों और संदिग्धों की तलाश के लिए थाना लैलूंगा, धरमजयगढ़, चौकी बकारूमा की 3 अलगअलग टीमें बनाई गईं. एक टीम में एसडीपीओ सुशील नायक, एसआई प्रवीण मिंज, हैडकांस्टेबल सोमेश गोस्वामी, कांस्टेबल प्रदीप जौन, राजेंद्र राठिया, दूसरी टीम में थानाप्रभारी लैलूंगा इंसपेक्टर लक्ष्मण प्रसाद पटेल, कांस्टेबल मायाराम राठिया, धनुर्जय बेहरा, जुगित राठिया, अमरदीप एक्का और तीसरी टीम में एसआई बी.एस. पैकरा, एएसआई माधवराम साहू, हैडकांस्टेबल संजय यादव, कांस्टेबल इलियास केरकेट्टा को शामिल किया गया.

पहली टीम को किलकिला, फरसाबहार, बागबाहर और तपकरा तथा दूसरी टीम को पत्थलगांव, घरघोड़ा, लारीपानी, चिमटीपानी एवं टीम नंबर 3 को बागबाहर, कांसाबेल, कापू, दरिमा, अंबिकापुर की ओर जांच के लिए लगाया गया था. तीनों टीमों के अथक प्रयास पर आरोपियों को जिला जशपुर के गांव रजौरी से 20 जनवरी को हिरासत में ले कर थाने लाया गया. दोनों आरोपी पुलिस से लुकछिप कर रजौरी के जंगल में लकड़ी काटने का काम कर रहे थे. दोनों ने कड़ी पूछताछ में अंतत: सरस्वती मरांडी की हत्या करने का अपना अपराध स्वीकार लिया. रोजगार के सिलसिले में वह बोकारो, झारखंड गया था. वहां राजू टिंबर ट्यूनिंग प्लांट में क्लीनर मशीन चलाता था और किराए के मकान में रहा करता था. वहीं सरस्वती मरांडी से उस की जानपहचान हुई.

जय कुमार परेशान था और उस ने अपने जीजा रवि के साथ सरस्वती की हत्या का प्लान बनाया और उसी प्लान के तहत 7 जनवरी, 2021 को पिकनिक का बहाना कर सरस्वती को मोटरसाइकिल पर बिठा कर लैलूंगा ले कर आए. लैलूंगा बसस्टैंड पर खानेपीने के सामान व सरस्वती ने कपड़े खरीदे. तीनों फिर खम्हार के झरन डैम गए, जहां सरस्वती ने वही पीले रंग की सलवारकुरती पहनी, जो उस ने गांव कमरगा की सुनीता सिदार (टेलर) से बनवाई थी. वहां उन्होंने मोबाइल पर खूब सेल्फी ली. शाम करीब 5 बजे भेलवाटोली एवं खम्हार के बीच पगडंडी के रास्ते में रवि सिदार पेशाब करने का बहाना कर रुका. उसी समय जयकुमार सिदार ने सरस्वती के बाल पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया और गला दबा कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद रवि और जयकुमार सिदार ने सरस्वती के गले में चुनरी से गांठ बांध कर खींचा और लाश सरई झाडि़यों के बीच छिपा दी. दोनों आरोपी भागने की हड़बड़ी में अपनी चप्पलें, गमछा भी घटनास्थल के पास छोड़ आए. लैलूंगा पुलिस ने आरोपी जय कुमार सिदार (25 साल) और रवि सिदार ( 30 वर्ष) को गिरफ्तार कर घरघोड़ा की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Chhattisgarh News

Crime Story Real : प्रेमिका के इशारे पर बच्चे का किडनैप करके मार डाला

Crime Story Real : कभीकभी कुछ लोग मामूली खुन्नस में एक बड़ा अपराध कर बैठते हैं. पार्वती और उस के प्रेमी संदीप चौहान ने अगर संयम से काम लिया होता तो शायद उन्हें…

मई महीने की 15 तारीख की सुबह करीब 10 बजे प्रेमा का ढाई साल का बड़ा बेटा रितेश चौहान अपने घर के बाहर खेल रहा था. प्रेमा जब घर से बाहर निकली तो उसे रितेश दिखाई न दिया. तब उस ने बेटे को आवाज लगाई, ‘‘रितेश, बेटा कहां हो?’’

लेकिन रितेश घर के आसपास कहीं न मिला. प्रेमा रितेश को घर के बाहर न पा कर घबरा गई. वह उसी समय अपने ससुर जगराम के पास गई, क्योंकि प्रेमा का पति जवाहर लाल एक दिन पहले ही गांव से दिल्ली गया था. प्रेमा रोते हुए ससुर जगराम से बोली, ‘‘बाबूजी, रितेश अभी कुछ देर पहले घर से बाहर खेल रहा था. लेकिन अब वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.’’

बहू प्रेमा की बात सुन कर जगराम भी घबरा गए और उन्होंने घर के आसपास अपने ढाई वर्षीय पोते रितेश को आवाज देनी शुरू कर दी, लेकिन रितेश का कहीं पता नहीं चला. इस के बाद प्रेमा देवी, ससुर जगराम और प्रेमा देवी के 2 देवर सहित परिवार के सभी सदस्य बदहवासी की अवस्था में उसे इधरउधर ढूंढने लगे. लेकिन रितेश का कहीं नहीं मिला. परिवार वालों ने उसे आसपास के खेतों, बागबगीचों में हर जगह ढूंढा, पर उस के बारे में कहीं कोई जानकारी नहीं मिली. रितेश के गायब होने की खबर एक दिन पहले दिल्ली गए उस के पिता जवाहरलाल को भी फोन द्वारा दे दी गई. बेटे के गायब होने की खबर पा कर जवाहर भी घबरा गया और वह उसी दिन दिल्ली से अपने घर के लिए चल पड़ा. इधर प्रेमा का रोरो कर बुरा हाल हो गया था.

रितेश के गायब होने की सूचना जंगल में आग की तरह आसपास के गांवों में भी फैल चुकी थी. लोग जी जान से रितेश को खोजने में लगे थे. तभी किसी ने रितेश के दादा जगराम को बताया कि चचेरा भाई संदीप चौहान रितेश को साइकिल पर बैठा कर कहीं ले जा रहा था. रितेश के परिजनों ने संदीप को पकड़ कर उस से कड़ाई से पूछा कि रितेश के साथ उस ने क्या किया है तो संदीप बोला, ‘‘मुझे नहीं पता और न ही मैं ने रितेश को देखा है.’’

लोग बारबार संदीप से रितेश के बारे में पूछते रहे लेकिन संदीप रितेश के बारे में अनभिज्ञता ही जाहिर करता रहा. इस के बाद लोगों के कहने पर जगराम ने स्थानीय थाने सोनहा पहुंच कर पोते के गायब होने की जानकारी देते हुए संदीप पर उसे गायब करने का आरोप लगाया. जगराम की शिकायत को थानाप्रभारी अशोक कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया. उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी. सूचना पा कर एसपी आशीष श्रीवास्तव, सीओ (रुधौली) धनंजय सिंह कुशवाहा, स्वाट, एसओजी और सर्विलांस और डौग स्क्वायड टीम के साथ पहुंच गए. इस के अलावा रुधौली सर्किल के सभी थानों को भी रितेश की खोज में लगा दिया गया.

पुलिस स्वाट और डौग स्क्वायड टीम के साथ रितेश को खोजने में लगी हुई थी, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चल रहा था और उधर पुलिस जगराम की शिकायत पर आरोपी संदीप के घर पहुंची तो वह भी घर पर नहीं मिला. अगले दिन 16 मई की सुबह पुलिस ने संदीप को गांव के पास से धर दबोचा. जब पुलिस ने उस से रितेश के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह रितेश को बिसकुट टौफी दिलाने ले गया था. जिस के बाद उस ने रितेश को उस के घर पर छोड़ दिया था. पुलिस को संदीप के बातचीत के लहजे से कुछ शक हुआ, फिर पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी, जिस से संदीप टूट गया. इस के बाद उस ने अपने रिश्ते के भतीजे ढाई वर्षीय रितेश की हत्या किए जाने की बात कबूल कर ली.

उस ने बताया कि रितेश की हत्या उस ने गांव की ही महिला पार्वती के कहने पर की थी. पार्वती उस की प्रेमिका है. उस ने पुलिस को बताया कि हत्या करने के बाद रितेश की लाश खाजेपुर के जंगल में छिपा दी थी. पुलिस ने हत्यारोपी महिला पार्वती को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. उस के घर से पुलिस को रितेश की चप्पलें और वारदात में प्रयुक्त साइकिल भी बरामद हो गई. रितेश की लाश बरामद करने के लिए पुलिस दोनों आरोपियों को खाजेपुर के जंगल में ले गई. वहां एक गड्ढे से रितेश की लाश बरामद कर ली गई. रितेश की हत्या और उस की लाश मिलने की जानकारी जैसे ही उस की मां प्रेमा को मिली तो वह बेसुध हो कर गिर पड़ी, उधर बाकी परिजनों का भी रोरो कर बुरा हाल था.

रितेश की लाश की बरामदगी के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. संदीप और पार्वती से विस्तार से पूछताछ की गई तो उन्होंने ढाई वर्षीय रितेश की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के सोनहा थाना क्षेत्र के दरियापुर जंगल टोला उकड़हवा की रहने वाली पार्वती देवी का पति अहमदाबाद में रह कर नौकरी करता था. पार्वती कुछ दिनों गांव में रहती तो कुछ दिनों अहमदाबाद में अपने पति के साथ गुजारती थी. शादी के बाद पार्वती 4 बेटियों और एक बेटे की मां बन चुकी थी. इस के बावजूद भी वह अपने पति से संतुष्ट नहीं थी. इसलिए वह किसी ऐसे साथी की तलाश में थी, जो उस की ख्वाहिशें पूरी कर सके. पार्वती अहमदाबाद से जब अपने गांव आती तो हरिराम का लड़का संदीप चौहान कभीकभार उस के घर आ जाता था. पार्वती जब हृष्टपुष्ट संदीप को देखती तो उस के दिल में चाहत की हिलारें उठ जाती थीं. उसे अपने जाल में फांसने के लिए वह उस से अश्लील मजाक करने लगती.

संदीप बच्चा तो था नहीं, इसलिए वह पार्वती के इशारों को समझने लगा था. आखिर एक दिन पार्वती ने मौका पा कर संदीप से अपने दिल की बात कह दी, ‘‘संदीप, तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. तुम्हें देख कर मुझे कुछकुछ होने लगता है.’’

पार्वती की तरफ से खुला आमंत्रण पा कर संदीप भी खुद पर काबू नहीं रख सका. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो उन्हें जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी कर लेते. इधर जब पार्वती गांव से अपने पति के पास अहमदाबाद चली जाती तो फिर उसे संदीप की याद सताती थी. इसलिए वह फिर से गांव भाग आती थी. कहा जाता है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता है, उसी तरह से पार्वती और संदीप के अवैध संबंध की बात धीरेधीरे आसपड़ोस में भी फैलने लगी थी. लोग जब भी दोनों को देखते तो कानाफूसी करने लगते थे. यह बात धीरेधीरे संदीप के घर वालों को भी पता चल चुकी थी. जिस के बाद संदीप के घर वालों ने उसे समझाया भी, लेकिन पार्वती पर कोई असर नहीं पड़ा.

रितेश की हत्या के लगभग 2 महीने पहले एक दिन संदीप चौहान के रिश्ते की भाभी प्रेमा की पार्वती के साथ किसी बात को ले कर कहासुनी हो गई. इसी दौरान तूतूमैंमैं के दौरान प्रेमा ने पार्वती और संदीप के संबंधों को ले कर कटाक्ष कर दिया. बात बढ़ी तो प्रेमा ने इस की शिकायत सोनहा थाने में कर दी, जहां पुलिस ने दोनों को बुला कर समझायाबुझाया. पार्वती को प्रेमा द्वारा थाने में बुलाया जाना नागवार लगा. उसे लगा कि उस ने कोई गलती नहीं की, उस के बावजूद भी उसे थाने बुला कर नीचा दिखाया गया. यह बात पार्वती के मन में गांठ कर गई और वह प्रेमा से बदला लेने की फिराक में लग गई.

थाने से आने के बाद पार्वती प्रेमा से बदले की फिराक में लगी रही. बदले की आग में झुलस रही पार्वती ने एक छोटी सी वजह से एक खौफनाक फैसला ले लिया था. उस ने इस के लिए अपने प्रेमी संदीप चौहान को मोहरा बनाने की चाल चली और संदीप के साथ मिल कर मासूम रितेश की हत्या की खौफनाक साजिश तैयार कर डाली. संदीप चौहान पार्वती के साथ मिल कर पूरी प्लानिंग के साथ इस घटना को अंजाम देना चाहता था. इस के लिए उस ने प्रेमा के घर आनाजाना शुरू कर दिया और वह रोज रितेश के साथ खेलता और साइकिल पर बैठा कर अकसर उसे टौफी, बिसकुट दिलाने दुकान तक ले जाता था. जब उसे लगा कि कोई उस पर शक नहीं करेगा तो पार्वती के साथ मिल कर रितेश की हत्या की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया.

संदीप ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह हर रोज की तरह 15 मई, 2021 की सुबह करीब 10 बजे प्रेमा के घर पहुंचा, जहां रितेश को बाहर अकेले खेलते देख मौका पा कर उसे टौफी और बिसकुट दिलाने के बहाने  साइकिल पर बैठा कर ले गया. अपनी प्रेमिका पार्वती के कहने पर वह उसे गांव से दूर खाजेपुर के जंगल में ले गया और वहीं उस की गला दबा कर हत्या कर दी. उस के शव को उस ने वहीं पर एक छोटे से गड्ढे में डाल कर पत्तियों से छिपा दिया. ढाई वर्षीय रितेश के गायब होने के बाद खोजबीन में लगे परिजनों को जब यह पता चला कि आखिरी बार रितेश को संदीप के साथ साइकिल पर बैठे देखा गया था तो लोगों के शक की सुई संदीप पर टिक गई. जिस के बाद पुलिस के हिरासत में आने के बाद संदीप ने सब कुछ सचसच बता दिया.

जब लोगों को यह बात पता चली कि पार्वती और उस के प्रेमी संदीप ने जघन्य तरीके से मासूम रितेश की हत्या की है तो लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा. पुलिस के उच्चाधिकारियों ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए कुछ दिनों के लिए गांव में पीएसी की प्लाटून के साथ पुलिस बल तैनात कर दिया था. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर घटना का परदाफाश कर हत्यारोपी पार्वती और संदीप चौहान के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 (अपहरण), 302 (हत्या), 201 (हत्या के बाद शव छिपाना), 120बी (वारदात की साजिश में सम्मिलित होने) का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. आरोपी पार्वती के गुनाहों के चलते जब उस की डेढ़ साल की बेटी को भी अपना समय जेल में बिताना होगा. Crime Story Real

Hindi Crime Story : लापता युवक का 10 साल बाद मिला कंकाल, नोकिया फोन से खुला मौत का राज

Hindi Crime Story : हाल ही में मौत का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिस ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. एक कमरे से आ रही तेज दुर्गंध ने इलाके में सनसनी फैला दी. जिसे देख आस पास के लोग हैरान हो गए और तुरंत पुलिस को सूचित किया. मौके पर पहुंची पुलिस ने एक कमरे में कंकाल बरामद किया. यह कंकाल किस का था? इस का हत्यारा कौन था? इन सभी सवालों ने पुलिस को भी उलझा कर रख दिया है. चलिए जानते हैं कि इस चौंकाने वाली घटना को विस्तार से

यह सनसनीखेज घटना हैदराबाद के नामपल्ली इलाके की है. जहां 14 जुलाई, 2025 को उस समय हड़कंप मच गया, जब लोगों को पता चला कि 10 साल से लापता अमीर खान का कंकाल एक बंद कमरे में पड़ा था. घटना तब सामने आई, जब स्थानीय युवक क्रिक्रेट खेल रहे थे तो उन की बौल उस घर में जा गिरी, जिस में कंकाल था. बौल लेने गया युवक कंकाल को घर में देखकर दंग रहा गया. उस के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई.

वह दौड़ता हुआ वहां से भागा और इस के बाद उस ने तुरंत आसपास के लोगों को यह बताया. पुलिस को सूचित किया गया. पुलिस टीम ने मौके पर पंहुच कर जांच शुरु कर दी. इस के बाद पुलिस घर के पास पहुंची और ताला तोड़ा तो अदंर एक कंकाल पड़ा हुआ था और उसके साथ एक पुराना नोकिया फोन भी मिला. इस फोन की मदद से पुलिस को मृतक की पहचान करने मे सफलता मिली.

पुलिस को बाद में जांच द्वारा पता चल सका कि यह कंकाल 55 साल के अमीर खान का है, जो 10 साल से लापता था. पुलिस की जांच के अनुसार घर करीब 7 साल से बंद था.

पुलिस को शुरुआत में लगा की किसी ने अमीर की हत्या की होगी. लेकिन फोन की जांच ने पूरा मामला बदल दिया. पुलिस ने जब फोन को चार्ज किया तो उस में करीब 84 मिस्ड कौल थीं, जो उस के दोस्तों और रिश्तेदोरों की थीं. पुलिस ने बताया की ये मिस्ड कौल 2015 के आसपास की गई थीं, जब अमीर खान लापता हुआ था.

पुलिस के अनुसार, अमीर खान घर नामपल्ली इलाके में अकेला रहा करता था. अमीर के अब्बू का नाम मुनीर खान था और उन के 10 बच्चे थे. इन में अमीर खान 10 तीसरे नंबर का था.
परिवार के सभी लोग अलग अलग जगह रहा करते हैं.

पुलिस को शक है कि अकेलेपन और किसी स्वास्थ्य प्रोब्लम के कारण उस की मौत हुई होगी. पुलिस ने कंकाल को फोरैंसिक जांच के लिए भेज दिया है. मामले की जांच गहराई से एसीपी (आसिफनगर) किशन कुमार की देखरेख में चल रही है. Hindi Crime Story

Hindi love Stories : एक्ट्रेस शनाया काटवे के प्यार में रोड़ा बना भाई तो करा दी हत्या

Hindi love Stories : शनाया काटवे एक उभरती हुई अभिनेत्री थी. उसे नियाज अहमद से मोहब्बत हो गई. उस की मोहब्बत में उस का भाई राकेश काटवे कांटा बना तो शनाया ने अपनी फिल्म की प्रमोशन वाले दिन ऐसी खूनी साजिश रची कि…

वह वर्गाकार बड़ा हाल था. हाल में मुख्यद्वार से सटे 3×6 के 2 मेज एकदूसरे को आपस में सटा कर बिछाए गए थे. नया और रंगीन कवर उन पर बिछाया गया था. मेज से सटी 4 कुरसियां थीं. कुरसियों पर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की उभरती हुई अभिनेत्री शनाया काटवे, फिल्म के डायरेक्टर राघवंका प्रभु और 2 अन्य मेहमान बैठे हुए थे. मेज के सामने करीब 4 फीट की दूरी पर कुछ और कुरसियां रखी हुई थीं. उन पर शहर के नामचीन, वीआईपी, रिश्तेदार, दोस्त और स्थानीय समाचारपत्रों के खबरनवीस बैठे हुए थे. हाल का कोनाकोना दुलहन की तरह सजा था. रंगीन और दूधिया रौशनी के सामंजस्य से पूरा हाल नहा उठा था. खूबसूरत और शानदार सजावट से किसी की आंखें हट ही नहीं रही थीं.

अभिनेत्री शनाया काटवे की ओर से यह शानदार पार्टी उस के फिल्म प्रमोशन ‘ओंडू घंटेया काठे’ के अवसर पर आयोजित की गई थी. पार्टी देर रात तक चलती रही. घूमघूम कर शनाया मेहमानों का खयाल रख रही थी. पार्टी में शामिल आगंतुकों ने वहां जम कर लुत्फ उठाया था. पार्टी खत्म हुई तो देर रात शनाया काटवे अपने मांबाप के साथ घर पहुंची. वह बहुत थक गई थी. कपड़े वगैरह बदल कर हाथमुंह धो कर अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी तो दिन भर की थकान के चलते लेटते ही सो गई. उस के मांबाप अपने कमरे में जा कर सो गए थे. यह बात 9 अप्रैल, 2021 की है. अगली सुबह जब शनाया और उस के मांबाप की नींद खुली और वे फ्रैश हो कर डायनिंग हाल में नाश्ता करने बैठे तो उन्हें अपने इर्दगिर्द एक कमी का एहसास हुआ.

जब वे देर रात घर वापस लौटे थे तो भी घर पर उन का बेटा राकेश काटवे कहीं नजर नहीं आया था. जब सुबह नाश्ता करने के लिए सभी एक साथ डायनिंग हाल में बैठे तो भी राकेश वहां भी मौजूद नहीं था. यह देख कर शनाया के पापा बलदेव काटवे थोड़ा परेशान हो गए कि आखिर वह कहां है, घर में कहीं दिख भी नहीं रहा है. ऐसा पहली बार हुआ था जब वह घर से कहीं बाहर गया और हमें नहीं बताया, लेकिन वह जा कहां सकता है. यह तो हैरान करने वाली बात हुई. बलदेव काटवे और उन की पत्नी सोनिया का नाश्ता करने का मन नहीं हो रहा था. दोनों एकएक प्याली चाय पी कर वहां से उठ गए. मांबाप को उठ कर जाते देख शनाया भी नाश्ता छोड़ कर उठ गई और उन के कमरे में जा पहुंची, जहां वे बेटे को ले कर परेशान और चिंतित थे.

बात चिंता करने वाली थी ही. जो इंसान घर छोड़ कर कहीं न जाता हो और फिर वह अचानक से गायब हो जाए तो यह चिंता वाली बात ही है. बलदेव, सोनिया और शनाया ने अपनेअपने स्तर से परिचितों और दोस्तों को फोन कर के राकेश के बारे में पता किया, लेकिन वह न तो किसी परिचित के वहां गया था और न ही किसी दोस्त के वहां ही. उस का कहीं पता नहीं चला. राकेश का जब कहीं पता नहीं चला तो बलदेव काटवे ने बेटे की गुमशुदगी की सूचना हुबली थाने में दे दी. एक जवान युवक के गायब होने की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य हरकत में आए और राकेश की खोजबीन में अपने खबरियों को लगा दिया. यह 10 अप्रैल, 2021 की बात है.

राकेश काटवे कोई छोटामोटा आदमी नहीं था. उस के नाम के पीछे अभिनेत्री शनाया काटवे का नाम जुड़ा था, इसलिए यह मामला हाईप्रोफाइल बन गया था. मुकदमा दर्ज कर लेने के बाद पुलिस राकेश काटवे का पता लगाने में जुटी हुई थी. 5 टुकड़ों में मिली लाश इसी दिन शाम के समय हुबली थाना क्षेत्र के देवरागुडीहल के जंगल में एक कटा हुआ सिर बरामद हुआ तो इसी थाना क्षेत्र के गदर रोड से एक कुएं में गरदन से पैर तक शरीर के कई टुकड़े पानी पर तैरते बरामद हुए. टुकड़ों में मिली इंसानी लाश से इलाके में दहशत फैल गई थी. जैसे ही कटा सिर और टुकड़ों में बंटे शरीर के अंग पाए जाने की सूचना थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य को मिली, वह चौंक गए. वह तुरंत टीम ले कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए थे.

चूंकि राकेश काटवे की गुमशुदगी की सूचना थाने में दर्ज थी, घर वालों ने उस की एक रंगीन तसवीर थाने में दी थी. कटा हुआ सिर तसवीर से काफी हद तक मेल खा रहा था, इसलिए थानाप्रभारी ने घटनास्थल पर बलदेव काटवे को भी बुलवा लिया, जिस से उस की शिनाख्त हो जाए. छानबीन के दौरान संदिग्ध अवस्था में घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक मारुति रिट्ज और एक हुंडई कार बरामद की थी. दोनों कारों की पिछली सीटों पर खून के धब्बे लगे थे, जो सूख चुके थे. पुलिस का अनुमान था कि हत्यारों ने कार को लाश ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया होगा. पुलिस ने दोनों कारों को अपने कब्जे में ले लिया.

दोनों कारों को कब्जे में लेने के बाद उन्होंने इस की सूचना एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और पुलिस कमिश्नर लभु राम को दे दी थी. दिल दहला देने वाली घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने घटनास्थल और कटे हुए अंगों का निरीक्षण किया. शरीर के अंगों को देखने से ऐसा लगता था जैसे हत्यारों ने बड़े इत्मीनान से किसी  धारदार हथियार से उसे छोटेछोटे टुकड़ों में काटा होगा. पुलिस उन तक पहुंच न पाए, इसलिए लाश जंगल में ले जा कर अलगअलग जगहों पर फेंक दी, ताकि लाश की शिनाख्त न हो सके. बहरहाल, थानाप्रभारी की यह तरकीब वाकई काम कर गई. उन्होंने जब बलदेव काटवे को सिर के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही बलदेव काटवे पछाड़ मार कर जमीन पर गिर गए.

यह देख कर पुलिस वालों को समझते देर न लगी कि कटे हुए सिर की पहचान उन्होंने कर ली है. थोड़ी देर बाद जब वह सामान्य हुए तो वह दहाड़ मारमार कर रोने लगे. वह कटा हुआ सिर उन के लाडले बेटे राकेश काटवे का था. पुलिस यह जान कर और भी हैरान थी कि कहीं गदग रोड स्थित कुएं से बरामद कटे अंग राकेश के तो नहीं हैं. लेकिन पुलिस की यह आशंका भी जल्द ही दूर हो गई थी. बलदेव काटवे ने हाथ और पैर की अंगुलियों से लाश की पहचान अपने बेटे के रूप में कर ली थी. 24 घंटे के अंदर पुलिस ने राकेश काटवे की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठा दिया था. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से उसे मौत के घाट उतारा था.

पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. लेकिन एक बात से राकेश के मांबाप और पुलिस हैरान थे कि राकेश की जब किसी से दुश्मनी नहीं थी तो उस की हत्या किस ने और क्यों की? इस का जबाव न तो पुलिस के पास था और न ही उस के मांबाप के पास. दोनों ही इस सवाल से निरुत्तर थे. किस ने और क्यों, का जबाव तो पुलिस को ढूंढना था. राकेश की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को अपना हथियार बनाया. पुलिस ने सब से पहले राकेश काटवे के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुट गई कि आखिरी बार राकेश से किस की और कब बात हुई थी?

जांचपड़ताल में आखिरी बार उस की बहन शनाया से बातचीत के प्रमाण मिले थे. रात में 7 और 8 बजे के बीच में शनाया और राकेश के बीच लंबी बातचीत हुई थी. उस के बाद उस के फोन पर किसी और का फोन नहीं आया था. इस का मतलब आईने की तरह साफ था कि राकेश की हत्या रात 8 बजे के बाद की गई थी. पुलिस के सामने एक और हैरानपरेशान कर देने वाली सच्चाई सामने आई थी. घटना वाले दिन शनाया ने अपने फिल्म के प्रमोशन पर एक पार्टी रखी थी. उस पार्टी में राकेश को छोड़ घर के घर सभी सदस्य शमिल थे तो उस का भाई राकेश पार्टी में शामिल क्यों नहीं हुआ? वह कहां था?

इंसपेक्टर एस. शंकराचार्य के दिमाग में यह बात बारबार उमड़ रही थी कि जब घर के सभी सदस्य पार्टी में शमिल थे तो राकेश किस वजह से घर पर रुका रहा? इस ‘क्यों’ का जबाव मिलते ही हत्या की गुत्थी सुलझ सकती थी. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई. घटनास्थल से बरामद हुई दोनों कारों में से एक मारुति रिट्ज कार मृतक राकेश काटवे की बहन शनाया काटवे के नाम पर रजिस्टर्ड थी. दूसरी हुंडई कार किसी अमन नाम के व्यक्ति के नाम पर थी. यह जान कर पुलिस के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई कि शनाया काटवे की कार घटनास्थल पर कैसे पहुंची? राकेश के मर्डर से शनाया का क्या संबंध हो सकता है? क्या शनाया का हत्यारों के साथ कोई संबंध है? ऐसे तमाम सवालों ने पुलिस कमिश्नर लभु राम, एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और थानाप्रभारी को हिला कर रख दिया था.

एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत के नेतृत्व में राकेश काटवे हत्याकांड की बिखरी कडि़यों को जोड़ने के लिए थानाप्रभारी बेताब थे. उन्होंने घटना का परदाफाश करने के लिए मुखबिरों को लगा दिया था. घटना के 4 दिनों बाद 14 अप्रैल को मुखबिर ने जो सूचना दी, उसे सुन कर थानाप्रभारी को मामले में प्रगति नजर आई. मुखबिर ने उन्हें बताया था कि भाईबहन शनाया और राकेश के बीच में अच्छे रिश्ते नहीं थे. बरसों से उन के बीच में छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ था. मुखबिर की यह सूचना पुलिस के लिए काम की थी. पुलिस ने दोनों के बिखरे रिश्तों का सच तलाशना शुरू किया तो जल्द ही सारा सच सामने आ गया. दरअसल, राकेश शनाया के प्रेम की राह में एक कांटा बना हुआ था. शनाया का नियाज अहमद काटिगार के साथ प्रेम संबंध था. इसी बात को ले कर अकसर दोनों भाईबहन के बीच में झगड़ा हुआ करता था.

राकेश को बहन का नियाज से मेलजोल अच्छा नहीं लगता था, जबकि शनाया को भाई की टोकाटोकी सुहाती नहीं थी. यही दोनों के बीच खटास की वजह थी. घटना के खुलासे के लिए इतनी रौशनी काफी थी. सबूतों के आधार पर 17 अप्रैल को हुबली पुलिस ने नियाज अहमद काटिगार को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई. अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थेथाने में कड़ाई से हुई पूछताछ में नियाज अहमद पुलिस के सामने टूट गया और राकेश की हत्या का अपना जुर्म कबूल कर लिया. आगे की पूछताछ में उस ने यह भी बताया कि इस घटना में उस के साथ उस के 3 साथी तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला शमिल थे. उस के बयान के आधार पर उसी दिन तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.

पुलिस पूछताछ के दौरान नियाज अहमद ने प्रेमिका शनाया काटवे के कहने पर राकेश की हत्या करना कबूल किया था. 5 दिनों बाद 22 अप्रैल, 2021 को राकेश हत्याकांड की मास्टरमाइंड शनाया काटवे को हुबली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. शनाया ने बड़ी आसानी से पुलिस के सामने घुटने टेक दिए. उस ने भाई राकेश की हत्या कराने का अपना जुर्म मान लिया था. पुलिस पूछताछ में राकेश काटवे हत्याकांड की कहानी ऐसे सामने आई—

25 वर्षीया शनाया काटवे मूलरूप से उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले की हुबली की रहने वाली थी. वह मां सोनिया काटवे और पिता बलदेव की इकलौती संतान थी. इस के अलावा काटवे दंपति की कोई और संतान नहीं थी. एक ही संतान को पा कर दोनों खुश थे और खुशहाल जीवन जी रहे थे. लेकिन बेटे की चाहत कहीं न कहीं पतिपत्नी के मन में बाकी थी. पतिपत्नी जब भी अकेले में होते तो एक बेटे की अपनी लालसा जरूर उजागर करते. आखिरकार उन्होंने फैसला किया कि वे एक बेटे को गोद लेंगे, अपनी कोख से नहीं जनेंगे. जल्द ही काटवे दंपति की वह मंशा पूरी हो गई. गोद लिया भाई था राकेश उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के बेटे को कानूनी तौर पर गोद ले लिया और पालपोस कर उसे बड़ा किया. तब राकेश साल भर का रहा होगा. काटवे दंपति के गोद में राकेश पल कर बड़ा हुआ.

उन की अंगुलियां पकड़ कर चलना सीखा. सयाना और समझदार हुआ तो मांबाप के रूप में उन्हें ही सामने पाया. वही उस के मांबाप थे, राकेश यही जानता था. उन्होंंने भी शनाया और राकेश के बीच कभी फर्क नहीं किया. लेकिन शनाया जानती थी कि राकेश उस का सगा भाई नहीं है, उसे मांबाप ने गोद लिया है. बचपन से ही शनाया राकेश से नफरत करती थी, उस से चिढ़ती थी. चिढ़ उसे इस बात से हुई थी कि उस के हिस्से की आधी खुशियां और सुख राकेश की झोली में जा रहे थे. शनाया फुरसत में जब भी होती, यही सोचती कि वह नहीं होता तो जो सारी खुशियां, लाड़प्यार राकेश को मिलता है, उसे ही नसीब होता. लेकिन उस के हिस्से के प्यार पर डाका डालने न जाने वह कहां से आ गया.

यही वह खास वजह थी जब शनाया बचपन से ले कर जवानी तक राकेश को फूटी आंख देखना नहीं चाहती थी. उस से नफरत करती थी. लेकिन इस से राकेश को कोई फर्क नहीं पड़ता था कि शनाया उसे प्यार करती थी या नफरत. वह तो उस की परछाईं को अपना समझ कर उस के पीछे भागता था, उसे बहन के रूप में प्यार करता था. क्योंकि उस के मांबाप ने उसे यही बताया था. खैर, शनाया और राकेश बचपन की गलियों को पीछे छोड़ अब जवानी की दहलीज पर खड़े थे. जिस प्यार को मांबाप ने दोनों में बराबर बांटा था, दोनों के अपने रास्ते अलगअलग थे. हुबली से ही स्नातक की डिग्री हासिल कर शनाया काटवे की बचपन से रुपहले परदे पर स्टार बन कर चमकने की दिली ख्वाहिश थी.

अपने सपने पूरे करने के लिए वह दिनरात मेहनत करती थी. इस के लिए उस ने मौडलिंग की दुनिया को सीढ़ी बना कर आगे बढ़ना शुरू किया. शनाया बला की खूबसूरत और बिंदास लड़की थी. अपनी सुंदरता पर उसे बहुत नाज था. आदमकद आईने के सामने घंटों खड़ी हो कर खुद को निहारना उस के दिल को सुकून देता था. यही नहीं, जीने की हसरत उस में कूटकूट कर भरी थी. उस के खयालों में नियाज अहमद काटिगार सुनहरे रंग भर रहा था. अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था नियाज हुबली का रहने वाला 22 वर्षीय नियाज अहमद अमीर मांबाप की बिगड़ी हुई औलाद था. बाप के खूनपसीने से कमाई दौलत यारदोस्तों में दोनों हाथों से पानी की तरह बहा रहा था. उन यारदोस्तों में एक नाम शनाया काटवे का भी था.

नियाज के दिल की धड़कन थी शनाया. उस के रगों में बहने वाला खून थी शनाया. शनाया के बिना जीने की वह कभी कल्पना नहीं कर सकता था. शनाया और नियाज एकदूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे. दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. शनाया की खूबसूरती देख कर नियाज घायल हो गया था. वह पहली नजर में ही शनाया को दिल दे बैठा था. उठतेबैठते, सोतेजागते, खातेपीते हर जगह उसे शनाया ही नजर आती थी. ऐसा नहीं था कि मोहब्बत की आग एक ही तरफ लगी हो. शनाया भी उसी मोहब्बत की आग में जल रही थी. मोहब्बत की आग दोनों ओर बराबर लगी थी. एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें दोनों ने खाईं और भविष्य को ले कर सपने देख रहे थे.

खुले आसमान के नीचे अपनी बांहें फैलाए नियाज और शनाया भूल गए थे कि उन का प्यार ज्यादा दिनों तक चारदीवारी में कैद नहीं रह सकता. वह फिजाओं में खुशबू की तरह फैल जाता है. शनाया और नियाज की मोहब्बत भी ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही. शनाया के भाई राकेश काटवे को बहन के प्रेम की सूचना मिली तो वह आगबबूला हो गया था. उस ने अपनी तरफ से सच्चाई का पता लगाया तो बात सच निकली. बहन को हिदायत दी थी राकेश ने शनाया एक मुसलिम युवक नियाज अहमद से प्यार करती थी. उस ने बड़े प्यार से एक दिन बहन से पूछा, ‘‘यह मैं क्या सुन रहा हूं शनाया?’’

‘‘क्या सुन रहे हो भाई, मुझे भी तो बताओ.’’ शनाया ने पूछा.

‘‘क्या तुम सचमुच नहीं जानती कि मैं क्या कहना चाहता हूं?’’ वह बोला.

‘‘नहीं, सचमुच मैं नहीं जानती, आप क्या कहना चाहते हो और मेरे बारे में आप ने क्या सुना है?’’ शनाया ने सहज भाव से कहा.

‘‘उस नियाज से तुम दूरी बना लो, यही तुम्हारी सेहत के अच्छा होगा. मैं अपने जीते जी खानदान की नाक कटने नहीं दूंगा. अगर  तुम ने मेरी बात नहीं सुनी या नहीं मानी तो यह नियाज मियां के सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा.’’ भाई के मुंह से नियाज का नाम सुनते ही शनाया के होश उड़ गए.

‘‘जैसा तुम सोच रहे हो भाई, हमारे बीच में ऐसी कोई बात नहीं है. हम दोनों एक अच्छे दोस्त भर हैं.’’ शनाया ने सफाई देने की कोशिश की, लेकिन वह घबराई हुई थी.

‘‘मेरी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश मत करना. तुम दोनों के बारे में मुझे सब पता है. कई बार मैं ने खुद तुम दोनों को एक साथ बांहों में बांहें डाले देखा है. जी तो चाहा कि तुम्हें वहीं जान से मार दूं, लेकिन मम्मीपापा के बारे में सोच कर मेरे हाथ रुक गए. तुम अब भी संभल जाओ. तुम्हारी सेहत के लिए यही अच्छा होगा. नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है, जो न मैं जानता हूं और न ही तुम, समझी.’’

‘‘प्लीज भाई, मम्मीपापा से कुछ मत कहना,’’ शनाया भाई के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘नहीं तो उन के दिल को बहुत ठेस लगेगी. वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे. मेरी उन की नजरों में सारी इज्जत खत्म हो जाएगी. प्लीज…प्लीज… प्लीज, मम्मीपापा से कुछ मत कहना, मेरे अच्छे भाई.’’

‘‘ठीक है, ठीक है, सोचूंगा. मुझे क्या करना होगा लेकिन तुम ने अपनी आदत में बदलाव नहीं लाया तो सोचना कि मैं तुम्हारे लिए कितना खतरनाक बन जाऊंगा, मैं खुद भी नहीं जानता.’’

राकेश ने शनाया को प्यार से समझाया भी और धमकाया भी. उस के बाद उस ने मम्मीपापा से बहन की पूरी हकीकत कह सुनाई. बेटी की करतूत सुन कर वे शर्मसार हो गए. मांबाप ने भी बेटी को समझाया और नियाज से दूर रहने की सलाह दी. वैसे भी शनाया भाई से छत्तीस का आंकड़ा रखती थी. उस के मना करने के बावजूद राकेश ने उस के प्यार वाली बात मांबाप से बता दी थी.  यह सुन कर उस के सीने में भाई के प्रति नफरत की आग धधक उठी थी. प्यार की राह का कांटा बना राकेश राकेश बहन के प्रेम की राह का कांटा बना हुआ था. राकेश के कई बार समझाने के बावजूद शनाया ने नियाज से मिलना बंद नहीं किया था. इसे ले कर दोनों में अकसर झगड़े होते रहते थे.

रोजरोज की किचकिच से शनाया ऊब चुकी थी. वह नहीं चाहती थी कि उस के और उस के प्यार के बीच में कोई कांटा बने. भाई की टोकाटोकी से तंग आ कर शनाया ने उसे रास्ते से हटाने की खतरनाक योजना बना ली. शनाया ने अपनी अदाओं से प्रेमी नियाज अहमद को उकसाया कि अगर मुझे प्यार करते हो तो हमारे प्यार के बीच कांटा बने भाई राकेश को रास्ते से हटा दो, नहीं तो मुझे हमेशा के लिए भूल जाओ. नियाज अहमद शनाया से दूर हो कर जीने की कल्पना भी कर नहीं सकता था. उस ने प्रेमिका का दिल जीतने के लिए राकेश को रास्ते से हटाने के लिए हामी भर दी. इस खतरनाक योजना को अंजाम देने के लिए उस ने अपने 3 साथियों तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला को शमिल कर लिया.

इस के बाद राकेश को रास्ते से हटाने की योजना बनी. खतरनाक योजना खुद शनाया ने ही बनाई. इसे 9 अप्रैल, 2021 को अंजाम देने की तारीख तय की गई. उस दिन उस ने अपनी नई फिल्म ‘आेंडू घंटेया काठे’ की प्रमोशन रखवाई थी. चतुर शनाया ने इसलिए यह तारीख निर्धारित की थी ताकि उस पर किसी का शक न जाए और रास्ते का कांटा सदा के लिए हट भी जाए. यानी सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे. योजना के मुताबिक, 9 अप्रैल, 2021 को शनाया काटवे फिल्म प्रमोशन के लिए जब पार्टी में पहुंची, तभी उस ने नियाज अहमद को फोन कर के बता दिया कि राकेश पार्टी में नहीं आएगा, वह घर पर अकेला है. मांबाप भी पार्टी में आए हुए हैं. यही सही वक्त है, काम को अंजाम दे दो.

घर पर ही किए थे राकेश के टुकड़े शनाया की ओर से हरी झंडी मिलते ही नियाज अहमद, साथियों के साथ अमन गिरनीवाला की हुंडई कार ले कर पार्टी वाली जगह पहुंचा. वहां से शनाया की मारुति रिट्ज कार ले कर रात साढ़े 8 बजे उस के घर पहुंचा. उस की कार नियाज अहमद खुद ड्राइव कर रहा था. उस कार में नियाज के साथ तौसीफ चन्नापुर बैठा था जबकि अमन गिरनीवाला की हुंडई कार में अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला सवार था. खैर, रात साढ़े 8 बजे जब नियाज शनाया के घर पहुंचा तो राकेश काटवे घर पर ही था. नियाज ने कालबैल बजाई तो राकेश ने दरवाजा खोल दिया. सामने नियाज को देख कर वह चौंक गया. इस से पहले कि वह सावधान हो पाता, नियाज और उस के साथी अचानक उस पर टूट पड़े.

नियाज ने गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया. फिर लाश को ठिकाने लगाने के लिए नियाज ने अपने साथ लाए धारदार चाकू से राकेश के शरीर को 5 टुकड़ों में काट दिया और फर्श पर पड़े खून को एक कपड़े से साफ कर साक्ष्य मिटा दिए. फिर एक पैकेट में सिर और दूसरे पैकेट में बाकी अंग रख कर चारों लोग 2 गाडि़यों में सवार हो कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए. नियाज ने राकेश का कटा सिर जंगल में फेंक दिया और दोनों कार वहीं छोड़ कर चारों गदग रोड जा पहुंचे. वहां एक कुएं में कटे अंग डाल कर सभी फरार हो गए.

शनाया काटवे ने मौत की परफैक्ट प्लानिंग की थी. लेकिन वह यह भूल गई थी कि अपराधी कितना ही चालाक क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है. शनाया ने भी वैसा ही किया. वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाई और पुलिस के हत्थे चढ़ गई. सभी अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. Hindi love Stories

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित