Actress News : होटल में फांसी लगाने वाली एक्ट्रेस की सनसनीखेज कहानी

Actress News : 29 वर्षीय वी.जे. चित्रा तमिल सीरियलों की मशहूर अदाकारा थी. उसे एक व्यवसायी हेमंत रवि से प्यार हो गया, जिस से उस ने सगाई भी कर ली. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि एक पुलिस अफसर की एकलौती बेटी वी.जे. चित्रा को आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा?

अगर कोई नामचीन एक्टर अपनी अदाकारी छोड़ दे तो उस का महत्त्व खुदबखुद खत्म हो जाएगा. उस की एक्टिंग ही तो उसे सितारा बनाती है. एक्टिंग छोड़ कर उस की महत्त्वाकांक्षाओं का क्या होगा, वह तो जिंदा रह कर भी मर जाएगा. उस के जीने का मकसद ही खत्म हो जाएगा. शायद ऐसा ही कुछ दक्षिण भारत की सुप्रसिद्ध टीवी स्टार और एंकर वी.जे. चित्रा के साथ भी था, जो उस ने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया. होटल के कमरे में उन का शव पंखे से लटकता हुआ पाया गया.

9 दिसंबर, 2020 की सुबह के करीब 4 बजे थे. चेन्नै के नाजरथपेठ स्थित एक अस्पताल में कुछ लोग एक महिला को ले कर गए. डाक्टरों ने उस महिला का परीक्षण किया तो वह मृत पाई गई. जो लोग उस महिला को अस्पताल लाए थे, उन्होंने डाक्टरों को बताया कि वह टीवी स्टार वी.जे. चित्रा है. इस ने होटल के कमरे में फांसी लगा ली थी. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए अस्पताल की तरफ से इस की खबर थाने में दे दी गई. अस्पताल नाजरथपेठ थाने से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए सूचना के 10 मिनट बाद ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंच गई.

मृतका एक हाईप्रोफाइल टीवी स्टार और एंकर थी. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया तो उस के गले पर हलके काले रंग का निशान मिला. डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि इन की मौत शायद फंदे से लटक कर दम घुटने की वजह से हुई है. शव का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने अस्पताल में ही मौजूद मृतका के मंगेतर हेमंत रवि से पूछताछ की. हेमंत रवि ने बताया  कि कल रात करीब ढाई बजे चित्रा चेन्नै के ईवीपी फिल्म सिटी से शूटिंग खत्म कर उस के साथ लौटी थी. होटल के कमरे में आने के बाद चित्रा कुछ मिनटों बाद नहाने के लिए बाथरूम चली गई थी.

उस के बाथरूम जाने के बाद वह भी अपना समय व्यतीत करने के लिए होटल के कमरे से बाहर निकल गया था. लगभग आधा घंटे बाद जब वह होटल के कमरे में आया तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. कई बार कमरे का दरवाजा खटखटाने और कालबैल बजाने के बाद जब दरवाजा नहीं खुला और अंदर कोई आहट भी नहीं हुई तो वह घबरा गया. किसी अनहोनी की आशंका से वह भाग कर होटल की लौबी में गया और होटल मैनेजर को सारी बात बताई. होटल मैनेजर भी उस की बातें सुन कर परेशान हो गया. वह कुछ कर्मचारियों के साथ तुरंत होटल के कमरे पर पहुंचा.

जब मैनेजर ने डुप्लीकेट चाबी से कमरे का दरवाजा खोला तो कमरे के अंदर का दृश्य देख कर उस के होश उड़ गए. चित्रा पंखे से लटकी हुई थी. किसी करिश्मे की उम्मीद से उस ने होटल कर्मचारियों के सहयोग से पंखे से लटकी चित्रा को नीचे उतारा और स्थानीय अस्पताल ले गया. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. हेमंत रवि से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने शव का पुन: निरीक्षण किया और साथ आए पति का सरसरी तौर पर बयान ले कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल को सौंप दिया और सीधे घटनास्थल पर आ गई. घटनास्थल चेन्नै नाजरथपेठ इलाके का एक जानामाना फाइवस्टार होटल था. उस होटल में इस प्रकार की यह पहली घटना थी, जिसे ले कर होटल का मैनेजमेंट काफी परेशान था.

इस होटल में अपने कारोबार के सिलसिले में शहर के संपन्न लोग ही आ कर ठहरते थे. टीवी स्टार और एंकर वी.जे. चित्रा भी एक टीवी सीरियल की शूटिंग के बाद अपने मंगेतर हेमंत रवि के साथ आ कर वहां ठहरी थी. पुलिस ने होटल के कमरे का बारीकी से निरीक्षण कर होटल के स्टाफ से पूछताछ की और मामले की सारी औपचारिकताएं पूरी कीं. मशहूर अभिनेत्री और एंकर चित्रा ने कदमकदम पर कामयाबी की सीढि़यां चढ़ कर बहुत कम समय में लाखों लोगों के दिलों में अपनी एक खास जगह बना ली थी. पता नहीं क्यों वह दुनिया को छोड़ कर अलविदा कह गई थी. सुबह जैसे ही टीवी और अखबारों में अभिनेत्री वी.जे. चित्रा की मौत की खबर सामने आई, चेन्नै के साथ पूरे दक्षिण भारत में आग की तरह फैल गई.

वी.जे. चित्रा के अनगिनत चाहने वालों को गहरा सदमा लगा. लोग समझ नहीं पा रहे थे कि चित्रा ने खुदकुशी की थी या फिर उस की हत्या की गई थी. यही सवाल पुलिस के लिए भी पहेली बना हुआ था. पुलिस भी मृतका के मंगेतर हेमंत रवि और होटल वालों के बयानों से सहमत नहीं थी. वी.जे. चित्रा की मौत की सुई सिर्फ उस के मंगेतर हेमंत रवि की तरफ घूम रही थी. वजह यह थी कि उस रात चित्रा के साथ मंगेतर हेमंत रवि के अलावा होटल के कमरे में और कोई नहीं था. सवाल यह भी उठ रहा था कि चित्रा को अकेला छोड़ कर होटल के बाहर क्यों गया था. हेमंत रवि के होटल के बाहर जाने के बाद ही चित्रा रहस्यमयी हालत में होटल के कमरे के पंखे से लटकी मिली थी.

जरूर कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ थी. पुलिस जांच टीम ने अपनी जांच की शुरुआत वी.जे. चित्रा के मंगेतर हेमंत रवि से पूछताछ के साथ ही की. उधर वी.जे. चित्रा के पिता जो रिटायर्ड पुलिस इंसपेक्टर थे और परिवार यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि उन की बेटी ने बिना किसी वजह खुदकुशी की होगी. उन का तो यहां तक कहना था कि उन की बेटी की हत्या कर उसे खुदकुशी का रूप देने की कोशिश की है. लेकिन सवाल यह था कि आखिर वी.जे. चित्रा की मौत के पीछे कौन था. कुल मिला कर पुलिस टीम किसी भी नतीजे पर पहुंचने के पहले सारे पहलुओं को पूरी तरह से खंगाल लेना चाहती थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि चित्रा की मौत स्वाभाविक तौर पर पंखे के फंदे से लटकने की वजह से दम घुट कर हुई थी.

उस के गले और गालों पर आए नाखूनों के जख्म उस के खुद के हाथों के ही पाए गए. कुल मिला कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट वी.जे. चित्रा को ही अपनी मौत का जिम्मेदार बता रही थी, जबकि बाकी परिस्थितिजन्य साक्ष्य कुछ अलग ही कहानी कह रहे थे कि खुदकुशी के पीछे कहीं न कहीं उस के मंगेतर हेमंत रवि का रोल जरूर रहा होगा. इन सब के आधार पर पुलिस टीम ने लगभग 6 दिनों तक लगातार हेमंत रवि से पूछताछ करने के बाद सच्चाई का पता लगा लिया. पता चला कि हेमंत रवि ने ही चित्रा को मानसिक रूप से इतना प्रताडि़त किया था कि उसे आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़ा.

इस के बाद पुलिस ने हेमंत रवि को आईपीसी की धारा 306 के तहत चित्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ के बाद जो कहानी उभर कर सामने आई थी, वह चौंका देने वाली थी. तमिल सीरियल और रियल्टी शोज की जान वी.जे. चित्रा की खुदकुशी सुशांत सिंह राजपूत की मर्डर मिस्ट्री की याद दिला रही थी. उस के चाहने वालों को भी यह यकीन नहीं हो रहा था कि चित्रा खुदकुशी कर सकती है. सवाल यह भी उठ रहा था कि आखिर उस की मौत की वजह क्या थी? जिस के आने से रुपहले परदे पर नूर आ जाए, जिस के नशीले नैन चाहने वालों को मदहोश कर दें, जिस की दिलकश मुसकान दिल थामने के लिए विवश कर दे, ऐसी अभिनेत्री आखिर दुनिया को छोड़ कर क्यों चली गई.

तमिल इंडस्ट्री की जान वी.जे. चित्रा अपने आप में अदाकारी का एक कंप्लीट पैकेज थी. जब वह नाचती थी तो डांसर बन जाती थी. जब किसी किरदार में आती थी तो अदाकारा बना जाती थी और जब वह निजी जिंदगी में किसी से मिलती थी तो उसे अपना बना लेती थी. 28 वर्षीय वी.जे. चित्रा का जन्म 2 मई, 1992 को तमिलनाडु के चेन्नै में हुआ था. उन के पिता चेन्नै शहर के एक सशक्त छवि वाले पुलिस इंसपेक्टर थे. जबकि मां कुशल गृहिणी थीं. वी.जे. चित्रा उन की एकलौती और लाडली बेटी थी. परिवार साधारण व सुखीसंपन्न था. वी.जे. चित्रा बचपन से ही होनहार थी. उस के दिल में फिल्म और टीवी कलाकार बनने की चाह थी. वह अकसर टीवी के सामने बैठ कर उस पर आने वाले सभी शोज को बड़े ध्यान से देखती थी. उस की नकल करती थी.

चहेती बेटी होने के कारण उस के मांबाप उस पर ध्यान नहीं देते थे, क्योंकि उन के सपने बेटी के सपनों से अलग थे. वे चाहते थे कि उन की बेटी उच्चशिक्षा पा कर किसी उच्चपद पर काम करे. लेकिन बेटी की पसंद के कारण उन्हें उस के सामने झुकना पड़ा था. चित्रा ने चेन्नै कालेज से बीएससी करने के बाद चेन्नै माइकल टीवी से अदाकारी और एंकरिंग का डिप्लोमा ले कर उसी चैनल से अपना कैरियर शुरू कर दिया था. टीवी की एंकर और शोज को होस्ट करतेकरते जब चित्रा ने टीवी सीरियल की तरफ कदम बढ़ाया तो उसे हर कदम पर कामयाबी मिली. देखते ही देखते उस की झोली में कई तमिल सीरियल आ गए थे.

चिन्ना पापा पेरिया पापा, वेलुनाची और पंडियन स्टोर में मुल्लई की भूमिका में आई वी.जे. चित्रा ने पूरे तमिलभाषियों के दिलों में अपनी एक जगह बना ली और रातोंरात वह सुपर तमिल स्टारों की श्रेणी में आ खड़ी हुई थी. उसे अदाकारी में इज्जत और मानसम्मान सब मिलने लगा. बेटी सुपरस्टार बन गई थी. इस बात की खुशी सब से अधिक उस के मांबाप और नातेरिश्तेदारों को हुई थी. थोड़े ही दिनों में चित्रा बुलंदियों के उस मुकाम पर पहुंच गई थी, जहां पर लोगों को पहुंचने के लिए लंबा वक्त लगता है. जैसेजैसे चित्रा के स्टारडम का दायरा बढ़ता गया, वैसेवैसे तमिल टीवी स्टार और रियल्टी शोज की होस्ट के कदम भी बढ़ते गए. टीवी रियल्टी शोज की पार्टियों में चित्रा का आनाजाना भी बढ़ गया था.

इसी तरह लौकडाउन के पहले की एक पार्टी में उस की मुलाकात उस के होने वाले हमसफर हेमंत रवि से हो गई. 32 वर्षीय हेमंत रवि वैसे तो एक साधारण परिवार से संबंध रखता था, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उस ने शहर में एक कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना ली थी. दोनों की पहले नजरें मिलीं और धीरेधीरे दिल भी मिल गए. हेमंत रवि के व्यवहार को देख कर चित्रा भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उस से आकर्षित हो कर उस की तरफ खिंची चली गई. यही हाल हेमंत रवि का भी था. चित्रा के बिना उसे एकएक पल भारी लगता था. उसे जब भी मौका मिलता था, वह चित्रा से मिलने के लिए उस के शूटिंग सेट पर पहुंच जाता और उस की शूटिंग खत्म होने तक इंतजार करता रहता.

शूटिंग खत्म होने के बाद दोनों मन बहलाने के लिए लंबी ड्राइव पर चले जाते, घूमतेफिरते खातेपीते थे. यह सिलसिला कुछ दिनों तक चलने के बाद जब हेमंत रवि को लगने लगा कि अब बिना चित्रा के नहीं रह सकता तो मौका देख कर उस ने शादी का प्रपोजल रख दिया. चित्रा को भी हेमंत रवि की आंखों में अपने लिए मोहब्बत दिखाई दी तो उस ने भी हां कर दी. एक उभरती हुई अदाकारा और टीवी रियल्टी शोज की होस्ट चित्रा ने अगस्त 2020 में जब अपने होने वाले हमसफर हेमंत रवि का हाथ दुनिया के सामने थामा तो उस के लाखों चाहने वालों ने अपना दिल थाम लिया था. दोनों ने इस रिश्ते को एक नाम देने का फैसला किया और उन्होंने सगाई कर ली. दोनों परिवार इस रिश्ते से बेहद खुश थे, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई.

वी.जे. चित्रा और हेमंत रवि की जिंदगी में वैसे तो कोई ट्विस्ट नहीं था, जैसा कि आमतौर पर लवस्टोरीज में हुआ करता है. और तो और दोनों ने यह भी तय कर लिया था कि लौकडाउन की पाबंदियों से आजाद होने के बाद जनवरी 2021 में शादी कर के एक शानदार रिसैप्शन पार्टी आयोजित करेंगे, लेकिन उन का यह सपना पूरा नहीं हुआ. कारण यह था कि सगाई हो जाने के 2-3 महीने बाद ही हेमंत रवि का व्यवहार चित्रा के प्रति बदलने लगा था. इस की वजह यह थी कि उसे चित्रा द्वारा सीरियलों में दिए इंटीमेट सीनों से चिढ़ थी. सीरियल और रियल्टी शोज में इंटीमेट रोमांटिक सीनों को ले कर हेमंत ने कई बार टोका और मना भी किया था. वह चाहता था कि वह इंटीमेट सीन दुनिया के सामने न आए, पर यह बात चित्रा को पसंद नहीं थी. वह हेमंत के मना करने के बावजूद ऐसे एसाइनमेंट करती रही.

इसी बात को ले कर दोनों के बीच कहासुनी हो जाती जो झगड़े तक पहुंच जाती थी. हेमंत की इस तरह की टीकाटिप्पणी से चित्रा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी. घटना वाली रात भी शूटिंग से लौटने के बाद होटल के कमरे में दोनों में इंटीमेट सीनों को ले कर कहासुनी हुई थी. जिस से नाराज हो कर चित्रा ने हेमंत से पीछा छुड़ाने के लिए नहाने की इच्छा जाहिर की और बाथरूम में चली गई. यह देख कर हेमंत होटल के कमरे से बाहर चला गया. इतनी कहासुनी के बाद  चित्रा अपने आप को नौर्मल नहीं रखपाई और होटल के कमरे के पंखे से लटक कर सदासदा के लिए ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया. हेमंत रवि से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

 

Murder News : जीजा और साले की मिलीभगत से हत्या

Murder News : आकाश से शादी हो जाने के बाद भी प्रीति अपने प्रेमी संजू मंसूरी को भुला नहीं पाई थी. पति आकाश को जब सच्चाई पता लगी तो उस ने प्रीति को तलाक देने की धमकी दी. तलाक की इस धमकी ने संजू के भाई गुड्डू को ऐसा कातिल बना दिया कि…

‘‘सं जू, मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि तुम ने मुझ पर ऐसा कौन सा जादू कर दिया है, जो मेरा किसी भी काम में मन नहीं लगता. अब तो तुम्हारे बिना न दिन को चैन आता है और न रातों को नींद.’’ प्रीति ने प्रेमी संजू से कहा.

‘‘यह कोई जादू नहीं है बल्कि इसी को प्यार कहते हैं. सच कहूं, प्रीति ऐसा ही तो हाल मेरा है. तुम सामने होती हो तो सब कुछ सतरंगी सा लगता है और तुम से जुदा होते ही चारों ओर वीरानी नजर आती है. प्रीति, कभीकभी तो मैं यह सोच कर ही डरता हूं कि कहीं हमारे प्यार को किसी की नजर न लग जाए. क्योंकि मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता.’’ प्रीति का हाथ अपने हाथों में लेते हुए संजू बोला.

‘‘संजू, जुदाई की सोचते ही मेरी तो रूह कांप जाती है. मैं यही सोच कर परेशान हूं कि कहीं मेरे घरवालों को हम दोनों के प्यार के बारे में पता चल गया तो उन का मेरे प्रति व्यवहार कैसा होगा. क्योंकि हम दोनों नदी के दो किनारों की तरह हैं, जो कभी आपस में मिल नहीं सकते. बताओ, ऐसे में हमारे प्यार को मंजिल कैसे मिलेगी?’’ यह कहते ही प्रीति के चेहरे पर गंभीरता छा गई. वह एक पल के लिए रुकी और फिर बोली, ‘‘मेरी एक बात मानोगे, संजू? क्यों न हम यहां से कहीं दूर जा कर अपने प्यार की नई दुनिया बसा लें, जहां हमें किसी का डर न हो. जब हम एकदूजे के हो जाएंगे तो उस के बाद किसी में इतनी ताकत नहीं होगी कि कोई हमें अलग कर पाए.’’

प्रीति ने कहा तो संजू भी सोच में डूब गया. उसे भी महसूस हुआ कि प्रीति की सोच अपनी जगह ठीक है. प्यार के एक नहीं, लाखों दुश्मन होते हैं. फिर प्रीति ने उस से जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया है. उसे अपना बनाने के लिए अगर हिम्मत कर के यह कदम उठा भी ले तो कौन सी बुराई है. जिला शाहजहांपुर के सिधौली थाना के गांव रामपुर में रहता था 35 वर्षीय संजू मंसूरी. वह ईरिक्शा चालक था. उस के पिता का नाम शेर मोहम्मद और मां का नाम रजिया था. पिता खेतीकिसानी करते थे. संजू की 2 बड़ी बहनें व एक छोटा भाई इस्लामुद्दीन था. दोनों बहनों का निकाह हो चुका था. इसी गांव में रामविलास परिवार सहित रहता था. परिवार में पत्नी सुधा और एक बेटा गुड्डू और 2 बेटियां प्रिया और प्रीति थीं.

रामविलास खेती करता था, जिस से होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलता था. उस के सभी बच्चों ने गांव के सरकारी स्कूल से 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी. प्रिया का विवाह हो चुका था. प्रीति अभी अविवाहित थी. स्वभाव से वह काफी चंचल थी. घर के कामों में उस का मन नहीं रमता था. प्रीति हमेशा बनठन कर रहती और टीवी से ही चिपकी रहती. मां की डांट के बावजूद प्रीति टीवी पर आने वाली फिल्में देखे बगैर नहीं रहती थी. टीवी पर फिल्मों और फिल्मी गानों का इतना प्रभाव प्रीति पर पड़ा था कि वह अपने आप को फिल्मी हीरोइन से कम नहीं समझती थी.

चूंकि फिल्मों में प्यारमोहब्बत का हमेशा महिमामंडित किया जाता है, इसलिए प्रीति को भी ऐसे युवक की तलाश थी, जो फिल्मी हीरो की तरह उस के सामने प्यारमोहब्बत का प्रस्ताव रखे. उसे चाहे और उसे सराहे. उस के हुस्न की तारीफ करे और उस की याद में तड़प सके. दूसरी ओर संजू अधिक पढ़लिख नहीं सका था, लेकिन वह अपने पहनावे से पढ़ालिखा और हैंडसम युवक नजर आता था. अपने शरीर पर वह विशेष ध्यान देता था. वह हमेशा आधुनिक फैशनेबल कपड़े पहनता था. संजू को भी फिल्में देखने का शौक पागलपन इस हद तक था कि उस का बात करने और चलने का स्टाइल भी फिल्मी हो गया था.

संजू अपनी उम्र के उस मोड़ पर था, जहां आशिकी स्वभाव में अपने आप आ कर शामिल हो जाती है. संजू भी इस का अपवाद नहीं था. लव स्टोरी वाली फिल्में देखदेख कर संजू का मिजाज भी आशिकाना हो गया था. वह मोहल्ले की लड़कियों पर अकसर नजर रखने की कोशिश किया करता था. लेकिन कोई लड़की उस की तरफ आकर्षित नहीं हुई थी. संजू की दोस्ती रामविलास के बेटे गुड्डू से थी. इस वजह से उस का उस के घर आनाजाना था. आनेजाने में गुड्डू की बहन प्रीति से उस की मुलाकात हो जाती. प्रीति की सुंदरता संजू के मन को भा गई. बारबार आनेजाने से उन के बीच बातचीत भी होने लगी. प्रीति संजू की निगाहों को भांप कर उस के दिल का हाल जान चुकी थी. उसे संजू पसंद आया था, इसलिए वह भी संजू से बात करने में गुरेज नहीं करती थी.

दोनों एक ही शौक के शिकार थे. उन के बीच फिल्मों को ले कर ही अधिक बातचीत होती थी. इस तरह दोनों एकदूसरे के साथ काफी समय बिताते थे. इस के लिए वे घर के बाहर भी मिलते थे. क्योंकि ज्यादा देर तक वह घर में एक साथ बैठ कर बात नहीं कर सकते थे. ऐसा करने पर घर वाले उन पर शक करने लगते. समय के साथसाथ दोनों को एकदूसरे का संग खूब भाने लगा. दोनों साथ में मोबाइल पर रोमांटिक मूवी भी देखते. फिर फिल्म के कलाकारों की नकल करते हुए दोनों उन के डायलौग बोलते और उसी अंदाज में एकदूसरे के पास आ कर बांहों में भर कर आंखों में आंखें डाल कर उसी तरह बात करते जैसे कलाकार फिल्म में करते थे. इस से दोनों एकदूसरे के काफी नजदीक आते चले गए.

वे दोनों दिल की धड़कनों की आवाज और सांसों की सरगम को भी बखूबी महसूस करते थे. ये नजदीकियां दोनों को अच्छी लगने लगी थीं. जब वे नजदीक होते तो अलग होने की बात दिमाग में लाने ही नहीं देते थे. लेकिन मजबूर हो कर उन को एकदूसरे से अलग होना ही पड़ता. फिल्मी कलाकारों के लव सीन की एक्टिंग करतेकरते वे दोनों भी एकदूसरे से प्यार कर बैठे. अब प्यार का इजहार करना बाकी था. एक दिन लव सीन की एक्टिंग करतेकरते संजू ने प्रीति को अपनी बांहों में लिया तो फिल्म के डायलौग न बोल कर उस ने अपने दिल की बात कहनी शुरू कर दी, ‘‘प्रीति, देखता तो मैं तुम्हें बचपन से आया हूं. लेकिन जब से हम एक्टिंग के जरिए एकदूसरे के नजदीक आए हैं, तब से मैं ने तुम्हें बेहद करीब से देखा तब से ये नजरें तुम्हारे सिवा कुछ और देखना ही नहीं चाहतीं.

तुम्हारी झील सी आंखों की गहराइयों में डूब कर तुम्हारे दिल का हाल जाना तो यही लगा कि तुम्हारा दिल भी मेरे पास आना चाहता है. इस बात की गवाही तुम्हारे दिल की धड़कनें देती हैं. मैं तो तुम्हें दिलोजान से चाहता हूं. मुझे अपने प्यार पर भी पूरा भरोसा है कि वह भी मुझे बेइंतहा चाहता है, बस देर है तो उसे तुम्हारे द्वारा जुबां से कुबूल करने की.’’

प्रीति तो जैसे उस के पे्रम से सराबोर हो गई और उस की आंखों में देखती हुई फिल्मी स्टाइल में बेसाख्ता बोली, ‘‘कुबूल है…कुबूल है…कुबूल है मेरे महबूब.’’

यह सुनते ही संजू की खुशी का ठिकाना न रहा. उस ने प्रीति को अपने सीने से लगा लिया और बोल उठा, ‘‘आई लव यू…आई लव यू प्रीति.’’

उस के प्यार भरे शब्द प्रीति के कानों में रस घोल रहे थे. उसे एक मीठा सुखद एहसास हुआ तो उस ने अपनी आंखें बंद कर लीं और संजू के कंधे पर अपना सिर रख दिया. काफी देर तक वे दोनों उसी स्थिति में रहे. उस के बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे खिले हुए थे. इस के बाद तो प्रीति और संजू की तूफानी मोहब्बत बड़ी तेजी के साथ अपनी बुलंदियों की तरफ बढ़ने लगी. अब तो रोज ज्यादा से ज्यादा वह एकदूसरे के पास रहने की कोशिश करते. कभी घर पर, कभी खेत पर. इस चक्कर में संजू अपने काम से जी चुराने लगा था. उसे रोज घर में डांट खाने को मिलती थी. लेकिन संजू पर तो प्रीति की मोहब्बत का भूत सवार हो गया था. वह प्रीति के लिए हर किसी से बगावत करने को तैयार था.

दरअसल ग्रामीण परिवेश में प्यारमोहब्बत के मामले अधिक दिनों तक छिप नहीं पाते हैं. प्रीति और संजू की मोहब्बत के साथ भी यही हुआ. उन दोनों की अपनी दीवानगी की वजह से ही पूरा गांव इस प्रेम प्रकरण के बारे में जान गया था. उधर उन दोनों प्रेमियों की हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें एकदूसरे को देखे बिना करार नहीं आता था. लोगों को पता लग जाने के बाद दोनों हर समय चोरीछिपे की मुलाकातों का जुगाड़ बैठाने की जुगत में लगे रहते थे. गांव के बाहर एक खंडहरनुमा मकान उन की मिलनस्थली बन गया था. इसी दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए.

एक दिन गांव में रह रहे बिरादरी के कुछ लोगों ने प्रीति के पिता रामविलास को बताया कि उस की लड़की गलत रास्ते पर जा रही है. यह सब सुन कर रामविलास आगबबूला हो उठा. उस ने अपनी पत्नी सुधा को हड़काया कि वह प्रीति को खेतों और बाजार में न जाने दे. इसी दौरान सुधा ने अपनी आंखों से एक ऐसा नजारा देखा, जिसे देखने के बाद उस ने प्रीति की खूब पिटाई की. दरअसल, संजू प्रीति के घर के सामने से निकल रहा था तो प्रीति दरवाजे पर खड़ी थी. संजू के देखने पर प्रीति उसे बारबार फ्लाइंग किस देने लगी. संजू उस किस को अपने हाथ में लेने का प्रयत्न करता दिखाई दे रहा था. यह सब होते हुए सुधा ने अपनी आंखों से देख लिया था. यह देख कर ही सुधा ने प्रीति की पिटाई की थी.

इस दृश्य को देखने के बाद सुधा ने अपने पति रामविलास से स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि वह अपनी लाडली के हाथ पीले कर दें, वरना वह किसी दिन वह इस परिवार की नाक कटवा कर रहेगी. रामविलास सचमुच इस मामले में गंभीर हो उठा था. उस ने उसी रोज से प्रीति के लिए बिरादरी में कोई लड़का ढूंढना शुरू कर दिया. अंतत: उस की मेहनत रंग लाई. उसे शाहजहांपुर के ही जसनपुर गांव निवासी रामवीर का बेटा आकाश प्रीति के लिए उपयुक्त लगा. वह खेती करता था. आकाश देखने में सुंदर और अच्छी कदकाठी का था और खेती भी अच्छीखासी थी. सब कुछ देखजान कर रामविलास ने रिश्ते की बात चलाई तो जल्द ही बात बन गई.

प्रीति ने विरोध करना चाहा, लेकिन पिता का गुस्सा देख कर वह कुछ न कर पाई. उसे धमकी भी मिली थी कि अगर वह शादी के लिए तैयार न हुई तो उसे वह जिंदा मार देंगे. प्रीति बेबस हो गई. वह तो संजू के साथ भाग जाने की सोच रही थी, लेकिन पिता को संबंधों का पता चलने के बाद मारने की धमकी देने पर वह कुछ न कर पाई. एक साल पहले प्रीति का विवाह आकाश से हो गया. वह मायके से ससुराल आ गई. यहां आ कर वह किसी तरह संजू को भूलने की कोशिश करने लगी, लेकिन वह जितना उसे भूलने की कोशिश करती, उतना ही वह ज्यादा उसे याद आता. आकाश ने उसे अपनी तरफ से भरपूर प्यार दिया, उस का खयाल रखा.

दूसरी ओर संजू अपने आप को प्रीति से दूर होने के बाद संभाल नहीं पा रहा था. रहरह कर उठतेबैठते उस के खयालों में प्रीति ही छाई रहती थी. जब बरदाश्त की हद पार हुई तो वह एक दिन प्रीति की ससुराल पहुंच गया. प्रीति उस की हिम्मत देख कर चौंक गई. लेकिन काफी अरसे बाद उसे देख कर उस के दिल को सुकून भी पहुंचा. उस से मिलने के बाद फोन पर बात करने की बात कह कर वापस आ गया. इस के बाद उन दोनों की चोरीछिपे फोन पर बातें होने लगीं. जब भी प्रीति मायके आती तो संजू के साथ खूब समय बिताती. एक दिन आकाश ने अपनी पत्नी प्रीति को संजू से बातें करते पकड़ लिया. आकाश ने प्रीति को जम कर पीटा. उस के बाद वह प्रीति पर नजर रखने लगा.

16 नवंबर, 2020 की रात संजू ने खाना खाया. उस के बाद वह घर से निकल गया. काफी देर तक नहीं लौटा तो उसे तलाशा गया लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. 17 नवंबर की सुबह फिर संजू की तलाश शुरू हुई तो गांव के बाहर सेठपाल के खेत में पराली के ढेर के पास संजू की चप्पलें पड़ी मिलीं. पराली हटाने पर उस के नीचे संजू की लाश मिली. लाश मिलते ही कोहराम मच गया. घरवाले वहां पहुंच कर रोनेपीटने लगे. संजू के भाई इस्लामुद्दीन को गांव के लोगों से पता चला कि रात में उन लोगों ने संजू को गुड्डू के साथ जाते देखा था. संजू की लाश मिलने पर गुड्डू वहां नहीं पहुंचा, न ही वह घर पर था, इसलिए पूरा शक गुड्डू  पर गया.

स्थानीय सिधौली थाने की पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई. थाने के इंसपेक्टर जगनारायण पांडेय सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. मृतक के गले पर गहरे निशान थे.  शरीर पर और किसी प्रकार के निशान नहीं थे. संभवत: गला दबा कर हत्या की गई थी. इस के बाद इंसपेक्टर पांडेय ने इस्लामुद्दीन से आवश्यक पूछताछ की. इसी बीच एसपी (ग्रामीण) अपर्णा गौतम भी मौके पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर के पूछताछ की फिर आवश्यक दिशानिर्देश दे कर चली गईं. चूंकि मामला 2 संप्रदायों से जुड़ा था. इस वजह से उपजे तनाव को देखते हुए गांव में पीएसी तैनात कर दी गई. लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजने के बाद इंसपेक्टर जगनारायण पांडेय इस्लामुद्दीन को साथ ले कर थाने आ गए.

इस्लामुद्दीन की तहरीर पर इंसपेक्टर पांडेय ने गुड्डू, सेठपाल, विमल, अंगद और एक अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 147/302/201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. इस्लामुद्दीन ने इन लोगों पर संजू के मोबाइल और 80 हजार रुपए के लालच में हत्या करने का आरोप लगाया था. 21 नवंबर, 2020 को सुबह 10 बजे इंसपेक्टर पांडेय ने गुड्डू और उस के बहनोई आकाश को नियामतपुर मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. उन के पास से संजू का वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी बरामद हो गया. थाने ला कर जब दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या की वजह बता दी.

उन्होंने बताया कि प्रीति संजू से बात करना बंद नहीं कर रही थी. इस वजह से आकाश और उस के बीच विवाद हो जाता था. आकाश अपनी पत्नी की चरित्रहीनता बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. इसी साल भैयादूज पर वह प्रीति को ले कर उस के मायके आया. प्रीति के भाई गुड्डू से कहा कि उस की बहन प्रीति का चरित्र ठीक नहीं है. उस के संजू से अवैध संबंध हैं. अब वह प्रीति को अपने साथ नहीं रखेगा, उस से तलाक ले लेगा. इस पर गुड्डू ने उसे समझाया कि ऐसा कुछ करने की जरूरत ही नहीं पडे़गी. हम लोग संजू को ही ठिकाने लगा देते हैं. आकाश ने भी आवेश में उस की हां में हां मिला दी.

16 नवंबर की शाम को संजू खाना खा कर घर से निकला तो उसे निकलता देख कर गुड्डू उस के पास आ गया और बातोंबातों में उसे गांव के बाहर सेठपाल के खेत पर ले गया. वहां आकाश पहले से मौजूद था. दोनों ने मिल कर संजू को दबोच लिया और हाथों से गला दबा कर उस की हत्या कर दी. गुड्डू ने संजू के पैंट की जेब से उस का मोबाइल निकाल लिया. फिर संजू की लाश को पराली के ढेर में दबा दिया. लेकिन दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ ही गए. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों हत्याभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Extramarital Affair : प्रेमी से कराई पति की हत्या, वजह सुनकर उड़ जाएंगे होश

Extramarital Affair : अलगअलग धर्मों के होने के बावजूद भी संजय और रेशमा ने प्रेम विवाह किया था. शादी के 11 साल बाद 3 बच्चों की मां रेशमा के पैर बहक गए. इस के बाद रेशमा ने प्रेमी सचिन के साथ मिल कर ऐसा खेल खेला कि…

संजय उर्फ कल्लू शाहजहांपुर के सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला महमंद जलालनगर में रहता था. उस के पिता अनिल प्राइवेट नौकरी करते थे. मां रमा देवी गृहिणी थीं. संजय का एक छोटा भाई दीपक भी था. करीब 11 साल पहले संजय ने रेशमा नाम की युवती से प्रेम विवाह किया था, वह दूसरे धर्म की थी. कालांतर में रेशमा ने 2 बेटों अंशू (10 वर्ष), अजय (4 वर्ष) और एक बेटी चांदनी (डेढ़ वर्ष) को जन्म दिया. संजय मैडिकल कालेज में प्राइवेट तौर पर लगी बोलेरो को चलाता था. संजय चूंकि संयुक्त परिवार में रहता था, इसलिए रेशमा की आजादी पर बंदिशें थीं. उस ने संजय से कहना शुरू कर दिया,

‘‘आखिर कब तक तुम अपने पिता के बताए रास्ते पर चल कर दिन भर की गाढ़ी कमाई उन के हाथों में थमाते रहोगे. अब हमारा भी तो परिवार है, क्या हम अपने परिवार के लिए कुछ भी जमा कर के नहीं रखेंगे? तुम कहीं और मकान देख लो, अब हम यहां नहीं रह सकते.’’

रेशमा की बातों को एकाध बार तो संजय ने नजरअंदाज कर दिया और रेशमा को समझाया भी लेकिन वह नहीं मानी और बारबार उस पर अलग होने का दबाव बनाने लगी. आखिर संजय ने रेशमा की इच्छा के सामने घुटने टेक दिए. इस के बाद संजय रेशमा और तीनों बच्चों के साथ कांशीराम कालोनी में रहने चला गया. यहां वे सब मजे से रहने लगे. कालोनी की जिस बिल्डिंग में संजय रहता था, उसी बिल्डिंग में भूतल पर सचिन नाम का एक 19 वर्षीय युवक रहता था. सचिन शहर के ही अजीजगंज मोहल्ले में रहने वाले सुमित कुमार का बेटा था. कांशीराम कालोनी में भी उसे आवास आवंटित हो गया था. सचिन का परिवार अजीजगंज में तो सचिन कांशीराम कालोनी में रहता था. सचिन ईरिक्शा चलाता था. वह अविवाहित था.

सचिन कम पढ़ालिखा था, लेकिन उस के व्यक्तित्व और बात करने के अंदाज से कभी यह नहीं लगता था कि वह अधिक पढ़ा नहीं है. देखने में भी काफी सुंदर था. उस का मन होता तो ईरिक्शा ले कर काम पर चला जाता, मन नहीं होता तो घर पर ही पड़ा रहता. एक ही बिल्डिंग में होने के कारण सचिन की नजर रेशमा पर पड़ गई थी. रेशमा भी सचिन के सामने आने पर एकटक उसे निहारती रहती थी. निगाहें मिलतीं तो दोनों के होंठ मुसकराने लगते. उन के बीच परिचय हुआ तो बातें भी होने लगीं. सचिन के पास एक कुत्ता था जो रेशमा को बहुत अच्छा लगता था. उसी कुत्ते की वजह से ही सचिन और रेशमा में परिचय और बातें होनी शुरू हुई थीं. रेशमा के नजदीक बने रहने के लिए सचिन को कुत्ते से बढि़या कोई तरीका नहीं लगा.

सचिन ने संजय से भी दोस्ती कर ली. रेशमा ने संजय से सचिन का कुत्ता मांग लेने की जिद की तो संजय ने उसे कई बार समझाया लेकिन रेशमा नहीं मानी. रेशमा की जिद के आगे संजय को झुकना पड़ा. एक दिन संजय ने सचिन से बात की कि अगर उसे बुरा न लगे तो वह उस का कुत्ता लेना चाहता है. इस पर सचिन ने अपना कुत्ता उसे दे दिया. सचिन ने उस से इस की कोई कीमत भी नहीं ली. संजय के दिमाग में यह कभी नहीं आया कि यह भेंट उस पर कितनी भारी पड़ेगी. जिस फ्लोर पर संजय रहता था, वहां तक पानी आसानी से नहीं पहुंचता था. इसलिए संजय ने सचिन से कह दिया कि वह अपनी मोटर से पाइप लगा कर पानी भरवा दिया करे. सचिन ने हामी भर दी.

सचिन काफी खुश था, वह जानता था कि संजय सुबह का निकला शाम को ही घर में घुसता था, पूरे दिन उस की पत्नी रेशमा घर में अकेली रहती थी. बच्चे तो उस के छोटे थे. ऐसे में रेशमा को अपने रंग में रंगने का उसे अच्छा मौका मिला था. जब से उस ने रेशमा को देखा था, उस का सौंदर्य उस की आंखों में रचबस गया था. संजय तो उस के सामने पानी भरता था, मतलब लंगूर के हाथ हूर लग गई थी. अब हर रोज किसी भी समय पानी खत्म हो जाता तो रेशमा आवाज दे कर सचिन को पानी का पाइप लगाने को कह देती. पहले कुत्ते के बहाने से और अब पानी भरवाने के बहाने से सचिन रेशमा के पास उस के कमरे में जाने लगा. इस के बाद उन के बीच बातचीत का सिलसिला और तेजी से बढ़ने लगा. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे से काफी खुल गए. उन के बीच हंसीमजाक भी शुरू हो गया.

दिन भर अकेले रहने के कारण रेशमा का मन नहीं लगता था. लेकिन जब से सचिन ने उस के यहां आनाजाना शुरू किया था, तब से उस का अकेलापन दूर हो गया था. वह अब दिन भर हंसतीमुसकराती रहती थी. उस के खिले चेहरे को देख कर सचिन को भी अच्छा लगता था. रेशमा सचिन से 12 साल बड़ी थी. रेशमा की उम्र 31 साल थी तो सचिन की 19 साल. सर्दी का समय था. घना कोहरा छाया था. ऐसे में सचिन ने रेशमा के घर का पानी भरवाया तो उस में वह भीग गया, जिस से वह सर्दी से और कांपने लगा. उस ने जा कर कपड़े चेंज किए और रेशमा के पास उस के कमरे में पहुंच गया. उसे सर्दी से कंपकंपाते हुए रेशमा ने देखा तो उस से कहा, ‘‘बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं.’’ कह कर रेशमा रसोई में चाय बनाने चली गई. सचिन भी उस के साथ पीछेपीछे रसोई में पहुंच गया.

‘‘अरे तुम क्यों आ गए, वहीं कुरसी पर बैठते. और कुछ खाना हो तो बताओ?’’

‘‘जो चाहो, खिला दो. मैं तो तुम्हारे इन कोमलकोमल हाथों से जहर खाने के लिए भी तैयार हूं.’’ कह कर सचिन ने रेशमा का हाथ अपने हाथ में ले कर चूम लिया.

‘‘हाय राम, ये क्या कर रहे हो.’’ रेशमा ने झट से अपना हाथ छुड़ा लिया.

‘‘क्यों, कुछ गलत कर दिया क्या? तुम भी तो मुझे प्यार करती हो, मैं यह अच्छी तरह से जानता हूं.’’ सचिन ने कहा.

‘‘किस ने कहा?’’ रेशमा इठलाते हुए बोली.

‘‘तुम्हारी आंखों ने…क्यों सच कह रही हैं न तुम्हारी आंखें?’’ सचिन ने रेशमा की आंखों में आंखें डाल कर कहा.

‘‘तुम बड़े बेशर्म हो.’’ रेशमा ने इतरा कर बोली..

‘‘वह कैसे?’’

‘‘इतना भी नहीं जानते कि दरवाजा खुला है और इस बीच कोई आ गया तो आफत आ जाएगी.’’ वह मुसकरा कर बोली.

‘‘अरे हां, मैं तो भूल ही गया था. क्या करूं, तुम्हारा रूप ही ऐसा है कि देखते ही सब भूल जाता हूं. संजय भाई की तो पांचों अंगुलियां घी में तैरती हैं.’’

रेशमा ने ठंडी सांस ले कर कहा, ‘‘उन की छोड़ो वह जैसे हैं वैसे ही रहेंगे जिंदगी भर. तुम अपनी बताओ कि तुम्हारे दिल में क्या है मेरे रूप का नशा तुम पर किस हद तक चढ़ा है.’’ रेशमा ने कहा. रेशमा की बात सुन कर सचिन को इस बात का एहसास हो गया कि रेशमा को भी उस से लगाव हो गया है. वह भी उस के सान्निध्य में आना चाहती है. उस ने देर न करते हुए रेशमा को बांहों में भर लिया. रेशमा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि मंदमंद मुसकराने लगी. क्योंकि वह भी यही चाहती थी. दरअसल, जब से उस ने सचिन को देखा था तब से वह उस के मन को भा गया था. संजय से मिलने वाले सुख की उसे कमी नहीं थी, लेकिन वह उतना उसे पसंद नहीं था जितना सचिन. सचिन के आगे संजय कहीं नहीं ठहरता था.

जब आंखें किसी को देखना पसंद करने लगें तो दिल भी उसे चाहने लगता है. दिल की चाहत में वह बहकती चली गई और सचिन ने भी अपना हाथ बढ़ा कर उसे पाना चाहा तो वह उस के आगोश में जाने से अपने आप को रोक न सकी. सचिन ने उसे गोद में उठा कर बैड पर लिटाया और उस के दिल के अरमानों को हवा देनी शुरू कर दी. थोड़ी ही देर में दोनों के निर्वस्त्र शरीर एकदूसरे से गुंथे हुए थे. उस दिन रेशमा ने मानमर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ कर नाजायज रिश्तों के दलदल में पैर डाले तो उस में धंसती चली गई. अब हर रोज संजय की गैरमौजूदगी में सचिन उस के घर में ही पड़ा रहता और रेशमा भी उस की बांहों का हार बनी रहती.

इस की जानकारी कालोनी के लोगों को भी हो गई. वे तरहतरह की बातें करने लगे. जल्द ही यह बात संजय के कानों तक भी पहुंच गई. संजय ने जब रेशमा से इस बारे में बात की तो वह संजय से बोली कि सचिन के साथ भाईबहन के रिश्ते के अलावा कोई रिश्ता नहीं है. संजय को पत्नी रेशमा की बात पर यकीन करना ही पड़ा. लेकिन उस के मन से शक का बीज नहीं निकला. फिर एक दिन उस ने अचानक घर पहुंच कर दोनों को रंगेहाथ पकड़ा तो उस ने रेशमा की जम कर पिटाई की.  रेशमा नाराज हो कर अपने मायके चली गई. बाद में संजय उसे मायके से बुला कर ले आया. पर रेशमा के दिल से सचिन के लिए मोहब्बत कम न हुई.

3/4 दिसंबर, 2020 की रात चौक कोतवाली की अजीजगंज चौकी के इंचार्ज जितेंद्र प्रताप सिंह रात्रि गश्त पर निकले. रात करीब साढ़े 12 बजे आवास विकास कालोनी पावर हाउस के सामने एक बोलेरो खड़ी मिली, जिस में ड्राइविंग सीट पर एक व्यक्ति था जो बाईं ओर लुड़का हुआ था. जब पास जा कर जांच की तो उस व्यक्ति की कनपटी के पीछे गोली लगने का निशान था. गोली कनपटी से लग कर माथे के पास से निकल गई थी. चौकी इंचार्ज सिंह घायल व्यक्ति को तुरंत जिला अस्पताल ले गए. वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृत व्यक्ति की जेब से मिले मोबाइल फोन में सेव नंबरों पर पुलिस ने बात की तो उन्हीं नंबरों में उस की पत्नी रेशमा का फोन नंबर मिल गया. पुलिस ने रेशमा को जिला अस्पताल बुलाया. लाश देख कर रेशमा ने इस की शिनाख्त अपने पति संजय के रूप में की.

चौक थानाप्रभारी प्रवेश सिंह को चौकी इंजार्ज जितेंद्र प्रताप सिंह ने सूचना दे दी थी. सूचना पा कर वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. बोलेरो का निरीक्षण किया तो बाईं ओर खिड़की के पास पायदान पर हत्या में प्रयुक्त गोली पड़ी मिली, जिसे उन्होंने अपने कब्जे में ले लिया. ड्राइविंग सीट के पास वाली सीट पर खून फैला हुआ था. इस का मतलब यह था कि किसी ने दाईं ओर से ड्राइविंग सीट पर बैठे संजय को गोली मारी थी और गोली काफी नजदीक से मारी गई थी. हत्यारा संजय का परिचित था, जिस के कहने पर या उसे देख कर संजय ने गाड़ी रोक ली होगी. गाड़ी रुकते ही हत्यारे ने तमंचे से संजय पर फायर कर दिया होगा.

इस के बाद जिला अस्पताल जा कर उन्होंने संजय की लाश का निरीक्षण किया. निरीक्षण कर डाक्टरों से बात करने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी. रेशमा से थानाप्रभारी ने पूछताछ की तो उस ने बताया कि रात साढ़े 11 बजे पति के मोबाइल पर किसी का फोन आया था, जिस के बाद वह बोलेरो ले कर घर से निकल गए थे. इस के बाद क्या हुआ, उसे कुछ नहीं पता. कोतवाली आ कर इंसपेक्टर प्रवेश सिंह ने रेशमा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. संजय के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो रात साढे़ 11 बजे गुड्डू नाम के व्यक्ति द्वारा काल करने की बात पता चली. गुड््डू संजय का दोस्त था. इंसपेक्टर सिंह ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि एक काम के सिलसिले में उस ने संजय को बुलाया था.

संजय के घर आनेजाने वाले लोगों के बारे में पूछने पर गुड्डू ने बताया कि 2 महीने पहले तक कांशीराम कालोनी की उसी बिल्डिंग में रहने वाले सचिन का संजय के घर काफी आनाजाना था. संजय की पत्नी रेशमा से सचिन के अवैध संबंध थे. लेकिन संजय ने उसे रंगेहाथों पकड़ा, तब से वह अपने अजीजगंज के पुराने घर में रहने लगा था. यह जानकारी पुलिस के लिए बड़े काम की थी. इंसपेक्टर सिंह ने रेशमा के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस की सचिन से रोज घंटों बातें होने की बात पता चली. यह भी पता चला कि संजय के घर से निकलने के समय पर ही रेशमा ने सचिन को काल भी की थी, शायद संजय के घर से बाहर निकलने की बात बताने के लिए. उस ने सचिन को फोन किया होगा. साक्ष्य मिले तो इंसपेक्टर सिंह ने सचिन के घर पर दबिश दी, लेकिन वह घर से फरार मिला.

9 दिसंबर, 2020 को दोपहर लगभग 2 बजे इंसपेक्टर प्रवेश सिंह ने चांदापुर तिराहे से सचिन को गिरफ्तार कर लिया. उस के बाद रेशमा को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया गया. कोतवाली में जब उन दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो दोनों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयां कर दी. घटना से 2 महीने पहले रंगेहाथों पकड़े जाने के बाद से रेशमा और संजय में अकसर विवाद होने लगा. यहां तक कि संजय ने रेशमा का मोबाइल भी तोड़ दिया था. इस पर सचिन ने उसे बात करने के लिए दूसरा मोबाइल ला कर दे दिया था. सचिन अब कांशीराम कालोनी में नहीं रहता था, लेकिन वहां रोज आताजाता था.

अपने बीच संजय को आया देख कर रेशमा बौखला उठी. वह पति को छोड़ कर सचिन से शादी कर के उस के साथ रहना चाहती थी. इस के लिए रेशमा ने सचिन पर दबाव बनाया कि वह संजय की हत्या कर दे. उस के बाद वह शादी कर के उस के साथ रहने लगेगी. संजय के जीवित रहते यह  संभव नहीं होगा. प्रेमिका की सलाह पर अमल करने के लिए सचिन तैयार हो गया. इस के बाद उस ने तमंचे व कारतूस का इंतजाम किया. उस ने एकदो नहीं 4 बार संजय को मारने की कोशिश की थी, लेकिन तमंचा चलाने की उस की हिम्मत नहीं हुई. इस पर रेशमा ने सचिन को धमकी दी कि यदि उस में यह थोड़ा सा काम करने की हिम्मत नहीं है तो वह उसे छोड़ देगी. इस से सचिन ने अगली बार हर हाल में संजय को मारने का वादा किया.

3 दिसंबर को रात साढ़े 11 बजे जब गुड्डू का फोन आया तो संजय बोलेरो से उस से मिलने के लिए निकला. संजय के घर से निकलते ही रेशमा ने सचिन को फोन किया और संजय के घर से निकलने की बात बताई. सचिन उस समय कांशीराम कालोनी में ही था. सचिन के पास बजाज पल्सर बाइक थी. सचिन संजय को ओवरटेक करते हुए आगे निकला और गोल चक्कर से मुड़ कर वापस आते हुए संजय को रुकने का इशारा किया. उस के इशारे को समझ कर संजय ने गाड़ी रोक दी. संजय ने जैसे ही कार का शीशा नीचे किया. सचिन ने साथ लाए तमंचे से संजय पर फायर कर दिया. गोली संजय की कनपटी के पास लग कर माथे से निकल गई. गोली लगते ही संजय बाईं ओर लुढ़क गया और उस की मौत हो गई.

गोली मारने के बाद सचिन ने तमंचा और 2 कारतूस गर्रा नदी के किनारे फेंक दिए. इस के बाद रेशमा को संजय का काम तमाम होने की बात पता चली तो उस ने भी अपना मोबाइल तोड़ दिया. लेकिन दोनों के गुनाह छिप न सके और पकड़े गए. इंसपेक्टर सिंह ने सचिन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, 2 जिंदा कारतूस, पल्सर बाइक नंबर यूपी27यू1043, सचिन का मोबाइल 2 सिम सहित और रेशमा का टूटा मोबाइल एक सिम सहित बरामद कर लिया. मुकदमे में रेशमा को धारा 120बी का अभियुक्त बना दिया गया. आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी करने के बाद पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश किया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधार

Family Crime News : तानों से तंग आकर चाकू से काटी मां की गरदन

Family Crime News : फौजी राजेंद्र शाही के पास रुपएपैसों की कमी नहीं थी. इस के बावजूद भी उन के घर में क्लेश रहता था. इस की वजह थी उन की पत्नी हीरा देवी का व्यवहार. हीरा देवी के इसी व्यवहार ने एक दिन बेटे राहुल के हाथ खून से रंग दिए. और फिर…

20 दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर अपनी मां को खाने के लिए देती थी. उस ने सब से पहले वही बादाम छीले और अपनी मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन उस की मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह सीधे उन्हीं के कमरे में चली गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी. मां को सोता देख कर उसे हैरानी भी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि वह तो हर रोज घर में सब से पहले उठ जाती थीं.

अपनी मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश फाख्ता हो गए. मां को इस हालत में देख कर उस की जोरदार चीख निकली. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी. सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए थे. लेकिन हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल.

उस रात हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे. हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग ही था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा हुआ था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. इस बात से सभी परेशान थे. तुरंत ही इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की. पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की भांति सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो वह अपनी मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे. मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर पर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.

घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल करते हुए नमूने ले कर पैक कर लिए थे. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की. घटनास्थल से सब साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू सिंह की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा कोतवाली हल्द्वानी में दर्ज कर लिया. केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई करते हुए फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था. इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा ही तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही तो उस का सहारा थी. उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था.

घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया. पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे तो उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर एक पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की एक पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी. पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के तुरंत बाद ही उस ने अपनी मां की हत्या की बात कबूल ली. जिस मां ने अपने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक निकली.

उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव पड़ता है करायल जौलासाल. इसी गांव में रहता था राजेंद्र शाही का परिवार. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था. राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी बच्चों ने मन लगा कर पढ़ाई की, उस की परिणति सभी कामयाब भी हो गए थे.

राजेंद्र शाही ने बहुत पहले ही बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के पहले छोर पर ही काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने ही एक प्लौट और खरीद लिया था. जिस को उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था. ममता अपनी मां के साथ ही रहती थी. उस के बाद दूसरे नंबर की बेटी मंजू की भी शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था. रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में ही रहने लगी थी.

पांचवीं नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर हो गई. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था. इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद भी एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने जो प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना. हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी.

इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया. उसी मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे. सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी को घर खर्च देना भी बंद कर दिया था. उस के बाद हीरा देवी ने अदालत में अपने पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के बाद हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे. जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.

सन 2005 से ही राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. उस के बाद अपना घर होने के बावजूद भी राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद राजेंद्र सिंह ने रामनगर में भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ ही रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था. राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद भी उसे कहीं पर कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी भी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती चली गई.

उस की दिमागी हालत के खराब चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की अपनी मां से भी नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात में जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद भी राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रहती थी. गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.

दिल्ली में नौकरी करने के दौरान ही उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता रहता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर से अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों से लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी. उस के बाद उस की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस के कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उस के मन में नफरत पैदा हो गई थी.

अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन इस के बावजूद भी उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन खराब हो चला था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी. चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था. घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने भी सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली.

रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. रवींद्र सिंह अपने परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद भी परिवार में खुशियां बिलकुल भी नही थीं. 20 दिसंबर, 2020 को राहुल ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने को आदत जो पड़ गई है.’’

हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद भी राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे. क्या किया जाए इस बुढि़या का. इस ने तो मेरा जीना हराम कर रखा है. शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में ही सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद उस के कमरे में सुला दिया था.

हीरा देवी इस वक्त बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई थी. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत हुआ था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी. तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी चालें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, उस ने अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह उस वक्त गहरी नींद में सोई पड़ी थी. घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरे में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से एक चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. जिस के कारण दवाओं का नशा उस पर फौरन ही हावी हो जाता था.

अपनी मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन बैठा. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां हीरा देवी के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उस के प्राणपखेरू उड़ गए. मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर पर लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा. उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उस को बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे. वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुला दिया.

हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं. इस दर्दनाक घटना के बाद भी परिवार वाले एकदूसरे पर आरोप लगा कर लड़झगड़ रहे थे.

 

Extramarital Affair : प्रेमिका के लिए पति ने 10 लाख की सुपारी देकर कराई पत्नी की हत्या

Extramarital Affair : रोनी लिशी ने तेची मीना से प्रेम विवाह किया था, दोनों की एक बेटी भी हुई. जब मीना दूसरी बार गर्भवती हुई तो रोनी की जिंदगी में चुमी ताया आ गई. बड़े बाप के बेटे और बिजनैसमेन ने चुमी से गुपचुप शादी कर ली और पत्नी मीना को रास्ते से हटाने के लिए ऐसी साजिश रची कि…

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर 5 नवंबर के बाद से कई दिनों तक ‘हत्यारों को फांसी दो.. जस्टिस फौर मीना…’ के नारों से गूंजती रही. जिस के लिए जस्टिस मांगा जा रहा था, उस का नाम था तेची मीना लिशी, उम्र 28 वर्ष. तेची की हत्या हुई थी पर खुलासा कई दिन बाद हुआ. उस की हत्या का खुलासा होने के बाद से सामाजिक संगठनों में आक्रोश की आग सुलगने लगी थी. सामाजिक संगठन तेची मीना लिशी को न्याय दिलाने के लिए कभी कैंडिल मार्च तो कभी शांतिपूर्ण जुलूस निकाल कर इस हत्याकांड के आरोपियों को कठोर दंड देने की मांग कर रहे थे.

कोई मामूली शख्सियत नहीं थी. वह मिस अरुणाचल नाम की एक बड़ी संस्था में लेखा और वित्त विभाग की सचिव थी. वह प्रदेश के एक बड़े बिजनैसमैन रोनी लिशी की पत्नी थी. उस के ससुर लेगी लिशी कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों में रहे थे. वह ईटानगर से 3 बार विधायक व एक बार मंत्री रह चुके थे. अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर के उन राज्यों में से है, जहां अपराध की वारदातें बहुत कम होती हैं और साजिश कर के हत्या की वारदात को अंजाम देने के मामले तो अपवाद ही होते हैं. लेकिन नौर्थ ईस्ट के इस छोटे से खूबसूरत राज्य की राजधानी ईटानगर में 5 नवंबर को एक ऐसी वारदात हुई, जिस के बाद पूरे ईटानगर के शांत माहौल को गर्म कर दिया.

क्योंकि इस वारदात को इस तरह की साजिश के तहत अंजाम दिया गया था कि पिछले 2 दशकों में इस राज्य के लोगों ने इस तरह के अपराध की कोई वारदात न देखी थी न सुनी थी. राजधानी ईटानगर के विधायक रहे लेगी लिशी के रसूख और शहर के सब से पौश इलाके नाहारलागुन के सेक्टर-1 में बने उन के आवास लेगी कौंप्लेक्स को शहर का हर बांशिदा जानता था. 5 नवंबर की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे लेगी लिशी की बहू तेची मीना लिशी अपनी इनोवा एसयूवी कार में घर से निकली थी. मीना की गाड़ी को 2 दिन पहले ही नियुक्त हुआ ड्राइवर दाथांग सुयांग चला रहा था. गाड़ी ईटानगर से कारसिंगा की तरफ जा रही थी.

दरअसल, मीना को उस के पति रोनी लिशी ने सड़क बनाने के लिए अधिग्रहीत अपनी जमीन के मुआवजे के लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने हेतु संबंधित सरकारी विभाग में जानकारी लेने भेजा था. चूंकि मीना 7 महीने की गर्भवती थी, इसलिए रोनी ने 2 दिन पहले ही पत्नी की गाड़ी चलाने के लिए एक ड्राइवर रखा था. हालांकि मीना पहले अपनी सैंट्रो कार खुद चला कर अपने दफ्तर जाती थी. लेकिन 7 महीने की गर्भवती होने के कारण मीना के पति लिशी लेगी ने मीना के लिए अपनी बहन के घर पर खड़ी अपनी इनोवा कार मंगवा ली थी और उस के लिए 2 दिन पहले ही एक एक ड्राइवर दाथांग सुयांग को नियुक्त कर दिया था.

दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ड्राइवर दाथांग सुयांग इनोवा कार से मीना को ले कर कारसिंगा रोड पर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर ही चला था कि उस की कार जब कूड़ा डंपिंग जोन के पास बने मंदिर के पास पहुंची तो दुर्घटनाग्रस्त हो कर खाईं में लुढ़क गई. मीना की मौत किसी तरह दाथांग सुयांग तो बाहर निकल आया, लेकिन उस ने देखा कि बीच की सीट पर पड़ी मीना मृतप्राय थी. हैरानी यह थी कि ड्राइवर दाथांग किसी तरह दरवाजा खोल कर गाड़ी से बाहर निकल आया था और पूरी तरह से कुछ लोगों ने देखा कि गाड़ी के भीतर एक महिला खून से लथपथ घायल अवस्था में पड़ी है तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को दुर्घटना की सूचना दे दी. साथ ही मीना को पास के अस्पताल भिजवा दिया.

जिस स्थान पर ये दुर्घटना हुई थी, वह इलाका राजधानी ईटानगर के बांदरदेवा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता था. जब पता चला कि एक्सीडेंट हुई कार में पूर्व विधायक लेगी लिशी की पुत्रवधू मीना सवार थी तो खुद थानाप्रभारी गोशम ताशा पुलिस टीम को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. इंसपेक्टर गोशम यह देख कर हैरान थे कि गाड़ी का ड्राइवर दाथांग सुयांग एकदम सहीसलामत था. उसे खरोंच तक नहीं आई थी. सड़क से 3 मीटर नीचे खाई में लुढ़की गाड़ी भी एकदम सहीसलामत थी. उस के न तो शीशे टूटे थे, न ही गाड़ी कहीं से डैमेज हुई थी. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि गाड़ी की बीच वाली सीट पर बैठी मीना बुरी तरह खून से लथपथ थी और उस के सिर, कंधों व गरदन पर काफी चोटें आई थीं.

पुलिस के आने से पहले ही लोगों ने मीना को पास के एक अस्पताल भिजवा दिया था. इंसपेक्टर गोशाम ने दुघर्टना को पूर्व विधायक लेगी लिशी की पुत्रवधू से जुड़ा होने के कारण नाहारलागुन के सीओ रिक कामसी के अलावा ईटानगर कैपिटल रीजन के एसपी जिमी चिराम को भी दुर्घटना की जानकारी दे दी थी, जो सूचना मिलने के कुछ देर बाद घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने यह सूचना पूर्व विधायक लेगी लिशी और उन की पति रोनी लिशी को दे दी थी. उन्हीं की सूचना से यह जानकारी पा कर कारसिंगा में रहने वाले मीना के मातापिता, भाईबहन व अन्य रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. एसपी जिमी चिराम ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो पहली ही नजर में उन्हें दुर्घटना संदिग्ध लगी.

इसलिए फोरैंसिकटीम ने गाड़ी व घटनास्थल का निरीक्षण कर ऐसे साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए, जिस से पता चल सके कि दुर्घटना किन कारणों से हुई. ड्राइवर दाथांग सुयांग घटनास्थल पर ही मौजूद था, इसीलिए पूछताछ की शुरुआत उसी से हुई. दाथांग ने बताया कि गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए थे, जिस से गाड़ी संतुलन खो कर खाईं में लुढ़क गई और मालकिन मीना बुरी तरह जख्मी हो गईं. लेकिन पुलिस यह देख कर हैरान थी कि दाथांग एकदम सहीसलामत था, उसे खरोंच तक नहीं आई थी. मीना का बयान लेने के लिए पुलिस की एक टीम अस्पताल भेजी गई थी, लेकिन वहां पता चला कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उस की मौत हो गई थी. अस्पताल में मीना के परिजन, जिन में मायके व ससुराल के लोग भी शामिल थे, भी अस्पताल पहुंच चुके थे जिस से वहां का माहौल परिजनों के मार्मिक विलाप के कारण बेहद गमगीन हो गया था.

पुलिस टीम ने दुर्घटना में घायल हुई मीना के शरीर पर आई चोटों की फोटोग्राफी कराई. एसपी जिमी चिराम ने ये फोटो देखे तो पूरी तरह साफ हो गया कि दुर्घटना का यह मामला सिर्फ दिखाने के लिए था. मीना के मातापिता व रिश्तेदारों के साथ पूर्व विधायक लिशी लेगी भी अस्पताल से दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए थे. गाड़ी और उस का ड्राइवर जिस तरह सहीसलामत थे और मीना की दुर्घटना में जो हालत हुई थी, उसे देख कर उन्होंने भी यहीं आशंका जताई कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि मीना को दुर्घटना में इतनी गंभीर चोटें लगी हों. मीना के पिता तेची काक ने एसपी जिमी चिराम को एकांत में ले जा कर जो कुछ बताया, उस ने अचानक दुर्घटना के इस मामले को नया रंग दे दिया.

इस के बाद तो पुलिस की जांच करने का तरीका ही बदल गया. पुलिस ने उसी दिन मीना का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. ड्राइवर ने बताया ब्रेक फेल होना ड्राइवर दाथांग ने चूंकि बताया था कि गाड़ी के ब्रेक फेल होने के कारण वह असंतुलित हो कर खाई में गिरी थी. इसीलिए पुलिस ने पुलिस लाइन से मोटर इंजीनियर एक्सपर्ट को मौके पर बुलवा लिया. उन्होंने जांचपड़ताल की तो यह देख कर दंग रह गए कि गाड़ी के ब्रेक एकदम सहीसलामत थे. इस के बाद 2 दिन पहले ही मीना की गाड़ी पर ड्राइवर की नौकरी करने आए दाथांग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. साथ ही उस के मोबाइल को भी अपने कब्जे में ले लिया गया.

नाहरलगुन पुलिस स्टेशन में उसी दिन इंसपेक्टर गोशाम ने भादंसं की धारा 279/304 (ए) आईपीसी के तहत लापरवाही से गाड़ी चला कर दुर्घटना करने का मामला दर्ज करवा दिया और जांच का काम स्वयं शुरू किया. दाथांग सुयांग से कड़ी पूछताछ की जाने लगी. उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गईं. पूछताछ में पता चला कि नया मोबाइल व नंबर उस के मालिक लिशी रोनी ने ही उसे खरीद कर दिया था. 3 दिन पहले एक्टिव हुए इस नंबर की काल डिटेल्स खंगालते हुए पुलिस ने उन लोगों को चैक करना शुरू कर दिया, जिन्होंने इस नंबर पर काल की थी या इस नंबर से उन के नंबर पर काल किए गए थे.

अगली सुबह मीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उन के घरवालों को सौंप दिया गया. पूरे ईटानगर में मीना की संदिग्ध मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैल चुकी थी. मीना के ससुर लेगी लिशी एक बड़ी राजनीतिक हस्ती थे. खुद मीना भी सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी थी. इसलिए शवयात्रा में मीना के घर वालों के अलावा बड़ी संख्या में राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए. इधर पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि मीना की जांघ, हथेली, सिर और गरदन पर किसी भारी चीज से प्रहार हुआ था और वहां गहरे कट के निशान थे, बायां हाथ सूजा हुआ था. मैडिकल जांच करने वाले विशेषज्ञों और गाड़ी का मुआयना करने वाले एक्सपर्ट ने साफ कर दिया था कि दुर्घटना में इस तरह की चोट नहीं आ सकती.

दुर्घटना के बाद मीना के ससुर पूर्व विधायक लेगी लिशी ने भी दुर्घटना के संदिग्ध हालात के मामले की गहनता से सही जांच के लिए कहा था. पुलिस को इस मामले में शुरुआती जांच से ही जिस तरह से गहरी साजिश और इस में कई लोगों के शामिल होने के सबूत मिले थे. उसी के मद्देनजर आईजीपी (कानून एवं व्यवस्था) चुखू अपा ने ईटानगर कैपिटल रीजन के एसपी जिमी चिराम के नेतृत्व में इस मामले का खुलासा करने के लिए एक बड़ी टीम का गठन कर दिया. इस टीम में नाहारलागुन सर्किल के सीओ रिक कामसी व जांच अधिकारी इंसपेक्टर गोशाम के अलावा इंसपेक्टर मिनली गेई, खिकसी यांगफो व तिराप जिले के एसपी कारदक रिबा तथा खोंसा पुलिस थाने के इंसपेक्टर वांगोई कामुहा को शामिल किया गया. इस टीम को बंट कर काम करना था.

पुलिस की टीमों ने इस दौरान मीना के घर से ले कर घटनास्थल तक पहुंचने के तक जिन मार्गों से गाड़ी गुजरी थी, उन सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज चैक करने शुरू कर दिए. इस के अलावा पुलिस ने घटनास्थल के एक किलोमीटर के दायरे में सड़क किनारे बनी दुकानों व रेहड़ी वालों से पूछताछ करनी शुरू कर दी. पुलिस ने छानबीन शुरू की तो उसे जल्द ही चश्मदीद के रूप में कुछ राहगीर व रेहड़ी वाले मिल गए, जिन्होंने कार के ब्रेक फेल होने की ड्राइवर दाथांग सुयांग की कहानी को झूठा साबित कर दिया. एक चश्मदीद ने कार नीचे गिरने के बाद 50 मीटर की दूरी से देखा था कि उस का ड्राइवर गाड़ी से बाहर निकला था और पिछली सीट पर पड़ी महिला को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था.

जबकि कारसिंगा ब्लौक बिंदु पर सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले एक रेहड़ी वाले ने बताया कि उस के सामने से कार सामान्य गति से गुजरी थी, इस से यह कहना गलत था कि उस के ब्रेक फेल हुए होंगे. तब तक पुलिस को ड्राइवर दाथांग की संदिग्ध गतिविधियों के कुछ दूसरे साक्ष्य भी मिल गए थे. इसीलिए 6 नंवबर की सुबह उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर के कड़ी पूछताछ शुरू कर दी गई. मुंह खोलना पड़ा ड्राइवर दाथांग को ड्राइवर दाथांग ने शुरू में तो एक ही रट लगाए रखी कि गाड़ी के ब्रेक नहीं लगे थे. लेकिन जब पुलिस ने उस के खिलाफ एकत्र सारे सबूत एकएक कर के उस के सामने रखने शुरू किए तो वह जल्द ही टूट गया. उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. दाथांग के मुंह खोलते ही साजिश के तहत मीना की हत्या की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई.

पुलिस को एक बार अपराध का सिरा हाथ लग जाए तो उस के अंतिम छोर तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगती. पुलिस ने उसी दिन शाम तक ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए तिरप जिले से दाथांग सुयांग के साथ मीना की हत्या की साजिश में शामिल रहे 3 सहआरोपियों कपवांग लेटी लोवांग (40) के साथ ताने खोयांग (33) और दामित्र खोयांग (29) को गिरफ्तार कर लिया. कपवांग पूर्वोत्तर भारत के एक विद्रोही गुट एनएससीएन (यू) का सक्रिय कार्यकर्ता रह चुका था. उसी ने मीना की हत्या की सुपारी ली थी. हैरानी की बात यह थी कि मीना की हत्या की सुपारी उस के पति रोनी लिशी ने ही दी थी. कपवांग रोनी का पुराना जानकार था. उसी ने सुपारी लेने के बाद हत्यारों का इंतजाम किया था. बाद में पूरी योजना के तहत इस वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया ताकि यह हत्या एक दुर्घटना लगे.

पुलिस ने पूछताछ के लिए आरोपियों को अदालत से रिमांड पर ले लिया. उस के बाद उन के बयानों की तस्दीक की जाने लगी. क्योंकि हत्या का आरोप मृतका के पति और एक प्रभावशाली पूर्व विधायक के बेटे पर था. इसलिए पुलिस आरोपों को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य एकत्र कर लेना चाहती थी. इस दौरान जब यह बात सार्वजनिक हो गई कि मीना की हत्या उस के पति रोनी ने ही भाड़े के हत्यारों से करवाई है तो राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने धरने, प्रदर्शन व कैंडिल मार्च के जरिए पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. परिवार के लोग भी अब पूरी तरह रोनी के खिलाफ बोलने लगे. तब तक पुलिस ने कई साक्ष्य एकत्र कर लिए थे. जिस के बाद 10 नवंबर को रोनी लेशी को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन पुलिस को इस हत्याकांड की जो थ्योरी अब तक पता चली थी, उस के मुताबिक उसे मामले में 2 अन्य लोगों की तलाश थी. उस के लिए साक्ष्य एकत्र करने का काम शुरू कर दिया गया. आखिरकार 18 नवंबर को पुलिस ने रोनी की प्रेमिका व दूसरी पत्नी चुमी ताया (26) व उस की कंपनी में काम करने वाले मैनेजर विजय बिस्वास (30) को भी हत्याकांड की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इन सभी की गिरफ्तारी के बाद जांच अधिकारी ने दुर्घटना के इस मामले को हत्या व साजिश की धाराएं लगा कर हत्या में परिवर्तित कर दिया. इस के बाद मीना हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस ने पूर्वोत्तर के खूबसूरत राज्य अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर शहर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.

लोग सोच रहे थे कि एक इंसान केवल दूसरी लड़की से शादी करने के लिए अपनी पहली पत्नी की बेरहमी से हत्या करा सकता है, जिस से न सिर्फ उस ने प्रेम विवाह किया था बल्कि जिस के पेट में उस का बच्चा भी पल रहा था. रोनी लिशी एक संपन्न परिवार का युवक था. परिवार में 2 छोटे भाई व एक बहन थी. पिता लेगी लिशी प्रतिष्ठित राजनीतिक व्यक्ति होने के साथ अथाह संपत्ति के मालिक थे. उन्होंने सभी बच्चों के नाम पर संपत्तियां खरीदी हुई थीं. रोनी कोई अशिक्षित भी नहीं था. उस ने इंजीनियरिंग की थी. कालेज में पढ़ते हुए हुआ प्यार पिता लेगी लिशी ने रोनी को 2 कंपनियां खुलवा कर दी थीं. ईटानगर में उन की पहली कंपनी लिशी वन होम मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड थी, जिस की स्थापना उन्होंने 2012 में की थी.

जबकि 3 साल पहले रोनी ने अपनी बेटी के नाम पर यामिको ग्लोबल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दूसरी कंपनी शुरू की थी. उस की प्रेमिका व दूसरी पत्नी चुमी ताया इसी कंपनी में काम करती थी. रोनी व मीना की दोस्ती 2008 में कालेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी, जो बाद में प्यार में बदल गई. मीना कारसिंगा में रहने वाले एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेहद खूबसूरत व घरेलू लड़की थी. मीना की इसी खूबसूरती पर रोनी मर मिटा था और उस से प्यार करने लगा था. बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था. मीना चूंकि मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी, इसलिए पहले उस के घर वाले संकोच करते रहे कि रोनी एक संपन्न व बड़े परिवार का लड़का है. कहीं ऐसा न हो कि उस के परिवार वाले शादी के लिए राजी न हों.

क्योंकि उन की हैसियत रोनी के परिवार के सामने कुछ भी नहीं थी. ऐसा न हो कि दोनों की शादी बेमेल संबंध बन जाए और मीना को बाद में परेशानी उठानी पड़े. लेकिन मीना व रोनी के कई बार समझाने के बाद परिवार की झिझक दूर हुई और दोनों के मिलन का रास्ता साफ हो गया. लिहाजा सन 2012 में दोनों परिवारों की सहमति से रोनी और मीना ने शादी कर ली. शादी के 2 साल बाद 2014 में दोनों के प्यार की निशानी के रूप में एक बेटी हुई, जिस का नाम लेसी यामिको रखा गया. साल 2017 में अचानक मीना के परिजनों को पता चला कि रोनी ने मीना को तलाक देने के लिए अदालत में अरजी दी है. यह पता चला तो परिवार के लोग बेचैन हो गए.

क्योंकि जिस लड़की से विवाह करने के लिए रोनी उन के सामने मिन्नतें कर रहा था, वह उसी को तलाक क्यों देना चाह रहा था, यह उन की समझ से परे था. पूरा मामला जानने के लिए मीना के घर वाले रोनी के पास पहुंचे. मीना से पता चला कि रोनी कुछ दिनों से चुमी ताया नाम की एक लड़की के प्यार में पागल है. जब से वह रोनी की जिंदगी में आई है, तब से उन दोनों के प्यार में न सिर्फ दरार आ गई थी बल्कि रोनी अब छोटीछोटी बातों पर उस के साथ मारपीट भी करने लगा था और परेशान भी. परेशानी भी कोई बड़ी नहीं होती थी. कभी वह खाने में खराबी बता कर उस से मारपीट करता तो कभी घर में सफाई न होने को ले कर झगड़ा करता था.

मीना के घर वालों को जब यह बात पता चली तो उन्होंने रोनी के मातापिता व भाईबहनों के साथ मिलबैठ कर इस मसले को सुलझाना चाहा. रोनी के मातापिता को जब इस बात का पता चला कि उस की जिंदगी में किसी दूसरी महिला ने जगह बना ली है तो उन्होंने भी रोनी को बहुत समझाया. उन्होंने उसी साल 2017 में रोनी की मांग पर उसे एक नया घर ले कर दे दिया और उस से वायदा लिया कि वह मीना के साथ उस घर में प्यार से रहेगा. दोनों परिवारों को उम्मीद थी कि अलग रहने के बाद दोनों के बीच खोया हुआ प्यार शायद फिर से पनप जाए. लेकिन कुछ दिन सामान्य रहने के बाद रोनी फिर से अपनी नई गर्लफ्रैंड की बांहों में खो गया. वह कईकई दिनों तक घर से गायब रहता. मीना ऐतराज करती तो वह उस के साथ मारपीट करता और कहता कि अगर मेरे साथ नहीं रहना चाहती तो मुझे तलाक दे दो.

एक तरह से रोनी ने मन बना लिया था कि किसी भी तरह मीना उस की जिंदगी से चली जाए. सन 2018 में एक बार फिर बात मीना के घर वालों तक पहुंच गई. मीना के घर वाले उस के नए घर पहुंचे, जहां एक बार फिर से दोनों परिवारों के सभी लोगों की पंचायत हुई. मीना ने परिवार वालों को रोनी की जिन हरकतों के बारे में बताया था, उस के बाद परिवार वालों को भी लगा कि अगर रोनी के दिल से मीना के लिए प्यार ही खत्म हो गया है तो ऐसे में यातना सहने के लिए बेटी को उस घर में छोड़ने से क्या फायदा. इसीलिए उन्होंने मीना को अपने साथ ले जाने के लिए कहा. लेकिन रोनी के पिता ने मीना को भेजने से मना कर दिया और रोनी को पूरे परिवार के सामने बहुत डांटाफटकारा.

नतीजा यह निकला कि रोनी को अपनी हरकतों पर पछतावा हुआ और उस ने दोनों परिवारों के सामने अपने किए पर शर्मिंदगी जताते हुए स्वीकार किया कि मीना ही उस की असली और इकलौती मोहब्बत है तथा उस की बेटी की मां भी है. उस दिन रोनी ने दोनों परिवारों के बीच वादा किया कि भविष्य में मीना को उस की तरफ से किसी तरह की शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा. अगर पतिपत्नी के बीच कोई छोटीमोटी प्रौब्लम होगी भी तो वे उसे खुद बैठ कर सुलझाएंगे, परिवार के दूसरे लोगों को शिकायतें सुनने का मौका नहीं मिलेगा. दोनों के बदले हुए व्यवहार से दोनों परिवारों ने सोचा कि शायद सुबह का भूला शाम को घर आ गया है. बेटी का टूटता घर बचने की आस में मीना के घर वाले वापस लौट गए.

लगा सब ठीक हो गया इस के बाद वक्त तेजी से बीतने लगा. मीना के घर वाले उस की गृहस्थी के बारे में फोन कर के पूछते रहते थे. लेकिन मीना ने परिवार वालों से कभी भी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी, जिस से उन्हें पता चलता कि रोनी उसे फिर से परेशान कर रहा है. वक्त बीता और साल 2020 शुरू हो गया. इसी बीच फरवरी में मीना के घर वाले यह जान कर खुशी से फूले नहीं समाए कि मीना फिर से गर्भवती है और रोनी के दूसरे बच्चे की मां बनने वाली है. इस के बाद उन्हें यकीन हो गया कि रोनी और मीना के बीच का प्यार मजबूत हो चुका है.

लेकिन 5 नंवबर को अचानक परिवार के लोगों को सूचना मिली कि मीना कारसिंगा में एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल हुई है और उसे अस्पताल में भरती कराया गया है. जब तक परिवार वहां पहुंचा, तब तक उस की मौत हो चुकी थी. इधर चुमी ताया (26) मूलरूप से कामले जिले की रहने वाली खूबसूरत और महत्त्वाकांक्षी युवती थी. वह पिछले 3 साल से रोनी की कंपनी में काम करती थी. यहीं पर रोनी उस की तरफ आकर्षित हुआ. दोनों के बीच प्यार हुआ और बाद में दोनों लिवइन में रहने लगे. चुमी को पता था कि कि रोनी शादीशुदा है और एक बच्ची का पिता भी. इस के बावजूद कुछ समय पहले रोनी के साथ उस ने गुपचुप तरीके से शादी भी कर ली. चुमी ताया धीरेधीरे रोनी पर दबाव बनाने लगी कि वह मीना को तलाक दे कर उसे सामाजिक रूप से अपनी पत्नी घोषित करे.

हालांकि रोनी जब से चुमी ताया के प्यार में डूबा था तभी से मीना के साथ उस के रिश्तों में कड़वाहट भर गई थी. लेकिन चुमी से शादी के बाद यह कड़वाहट एक जहरीले रिश्ते के रूप में बदल गई. रोनी लगातार मीना पर दबाव बनाने लगा कि वह एक मकान और कुछ पैसा ले ले लेकिन उसे तलाक दे दे. लेकिन मीना इस के लिए तैयार नहीं थी. इसीलिए रोनी ने मीना को अपनी जिंदगी से हटाने के लिए भाड़े के हत्यारों का सहारा ले कर उस की हत्या कराने की साजिश तैयार की. कारसिंगा में ही रोनी का एक फार्महाउस था, जहां वह अकसर अपनी दूसरी पत्नी चुमी ताया के साथ रहता था. रोनी ने हत्याकांड को इस तरह से अंजाम दिलाने की साजिश रची थी कि लोग इसे दुर्घटना समझ लें. मीना की हत्या के लिए उस ने अपने एक पुराने दोस्त कपवांग लेटी से संपर्क किया.

क्योंकि उसे पता था कि कपवांग विद्रोही संगठन एनएससीएन (यू) का पुराना कार्यकर्ता है और उस के पास पैसा ले कर किसी की हत्या करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं होगी. रोनी ने जब उस से कौन्ट्रैक्ट किलर की व्यवस्था करने के लिए कहा तो कापवांग ने कहा कि वह काम तो करा देगा, लेकिन इस के लिए 10 लाख रुपए लगेंगे. रोनी तैयार हो गया, लेकिन उस ने शर्त रख दी कि काम इस तरह होना चाहिए कि किसी को मीना की हत्या का पता न लगे बल्कि लोग इसे दुर्घटना समझें. कपवांग ने आश्वासन दिया कि ऐसा ही होगा. इस के बाद साजिश तैयार होने लगी. 27 अक्तूबर की शाम कपवांग लेटी लोवांग अपने साथ दाथांग सुयांग और ताने खोयांग को ले कर खोंसा जिले से राजधानी ईटागनर पहुंचा और वे तीनों होटल सू पिंसा में रुके.

28 अक्तूबर को रोनी उन से मिलने होटल पहुंचा और अपनी पत्नी को कपवांग के साथ मारने की योजना को अंतिम रूप दिया. बनाई गई योजना के अनुसार दाथांग सुयांग को इस हत्या को अंजाम दे कर दुर्घटना का रूप देना था. रोनी ने तय किया था कि इस काम के लिए वह 5 लाख रुपए एडवांस देगा. लिहाजा उसी दिन रोनी ने 5 लाख रुपए का नकद भुगतान कर दिया. बाकी की रकम काम होने पर 15 दिनों में 3 लाख और 2 लाख रुपए की 2 किस्तों में देना तय हुआ था. कपवांग और ताने खोयांग 30 अक्तूबर को खोंसा वापस चला गए. जबकि दाथांग अगले ही दिन वापस आ गया. रोनी ने जो साजिश तैयार की थी, उस के मुताबिक दाथांग को वारदात को अंजाम देने के लिए रोनी की पत्नी मीना का ड्राइवर बन कर रहना था.

साजिश का पहला कदम एक दिन मीना के ड्राइवर के रूप में काम करने के बाद उसे लगा कि काम को वह जितना आसान समझ रहा था उतना आसान नहीं है. इसीलिए 2 नवंबर को दाथांग ने रोनी से एक साथी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया. क्योंकि उसे लगा कि वह खुद मीना की हत्या करने में समर्थ नहीं होगा. रोनी ने फिर से कापवांग से फोन पर संपर्क कर के दाथांग की तरफ से एक और साथी उपलब्ध कराने की बात बताई तो विचारविमर्श के बाद कपवांग ने अपने दूसरे सहयोगी दामित्र खोयांग को इस साजिश को अंजाम देने के लिए ईटानगर के लिए रवाना कर दिया.

दामित्र खोयांग उस वक्त दोइमुख में किसी के यहां ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था. आदेश मिलते ही वह राजधानी ईटानगर पहुंच गया और रोनी से मिला. खोयांग के आ जाने पर 4 नवंबर की सुबह रोनी और दाथांग ने एक बार फिर उस रूट का जायजा लिया, जो कारसिंगा में ब्लौक पौइंट के पास था. यहीं पर उस ने मीना की हत्या कराने की योजना को अंजाम देने का प्लान तैयार किया था. उसी दिन रोनी ने एक बार फिर से पूरी योजना को अंजाम देने वाली हर बात को अंतिम रूप दिया और तय हुआ कि अगले दिन यानी 5 नवंबर, 2020 को मीना को ठिकाने लगाने की योजना को अंजाम दिया जाएगा.

जैसी योजना बनी थी, उसी के मुताबिक काम शुरू कर दिया गया. 5 नवंबर की सुबह रोनी जब अपने फार्महाउस में था, उस ने वहीं से मीना को फोन कर के कहा कि कारसिंगा में जो भूमि सरकार ने अधिग्रहित की है, उस के मुआवजे के मामले पर सरकारी विभाग में मीटिंग है. इसलिए वह ड्राइवर को साथ ले कर उस के पास आ जाए, जिस के बाद दोनों साथ चलेंगे. सुबह करीब 12 बजे बेटी को नौकरानी के पास छोड़ कर मीना इनोवा कार में ड्राइवर दाथांग के साथ कारसिंगा के लिए निकल पड़ी. जैसी कि योजना बनाई गई थी रास्ते में दाथांग ने बांगे तीनाली में पहले से इंतजार कर रहे अपने साथी दामित्र को साथ ले लिया. मीना के पूछने पर दाथांग ने बताया कि वह उस का दोस्त है और उसे भी कारसिंगा तहसील दफ्तर जाना है.

मीना दाथांग के साथ ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर बैठी थी जबकि दामित्र सब से पीछे की सीट पर बैठ गया था. जैसे ही उन की गाड़ी ने मंदिर (कूड़ा डंपिंग जोन) पार किया, दामित्र ने अपने साथ छिपा कर लाए हथौड़े से मीना पर पीछे से पहले सिर पर वार किया, उस के बाद ताबड़तोड़ उस के कंधों, कनपटी और गरदन के पीछे वार किए. इस काम में मुश्किल से 3 से 4 मिनट का समय लगा. लहूलुहान और अपने ही खून से कार की सीट पर सराबोर हुई मीना ने अगले चंद मिनटों में ही दम तोड़़ दिया. दामित्र को जब यकीन हो गया कि मीना मर चुकी है तो उस ने दाथांग से कह कर ब्लौक पौइंट के पास गाड़ी रुकवाई और जैसे गाड़ी में सवार हुआ था, वैसे ही चुपचाप उतर गया.

दाथांग ने गाड़ी को थोड़ा आगे बढ़ाया और उसे मोड़ के पास सड़क के बाएं किनारे तिरछा खड़ा कर के चाभी लगी छोड़ नीचे उतर गया. इस के बाद उस ने न्यूट्रल में खड़ी गाड़ी को जोर लगा कर धक्का दे दिया. गाड़ी खाई में लगभग 2 से 3 मीटर नीचे चली गई. लेकिन 3 मीटर नीचे जा कर टायर के नीचे एक बड़ा पत्थर आने से गाड़ी ज्यादा आगे नहीं जा सकी. इसलिए दुर्घटना साबित करने की थ्योरी कमजोर पड़ गई. पुलिस ने जब जांच की तो पाया कि न तो कार के कहीं से शीशे टूटे थे और न ही कहीं से गाड़ी में टूटफूट हुई थी. फिर भी गाड़ी में बीच की सीट पर बैठी मीना की मौत हो गई थी. निरीक्षण के दौरान पता चला कि कार में कहीं भी कोई अंदरूनी क्षति नहीं पहुंची थी.

पुलिस ने ड्राइवर दाथांग से जब पूछताछ की तो उस ने बताया था कि ब्रेक फेल होने के कारण गाड़ी खाई में लुढ़की थी. लेकिन पुलिस ने अपने मोटर एक्सपर्ट को बुला कर गाड़ी की जांच करवाई तो गाडी के ब्रेक सही पाए गए. पत्नी के चक्कर में बच्चा भी गया इसी के बाद पुलिस को दाथांग पर शक होने लगा और उसे हिरासत में ले लिया गया. बाद में दाथांग के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गई तो उस में कपवांग से ले कर दामित्र तक से बातचीत के रिकौर्ड मिले. हैरानी की बात यह थी कि दाथांग ने पुलिस पूछताछ में यह बात छिपा ली थी कि उन के साथ दामित्र भी था. पुलिस को दामित्र के मोबाइल फोन की जांच में मौके पर उस की मौजूदगी का सबूत मिल गया था. दोनों के फोन की काल डिटेल्स से पुलिस को कपवांग लेटी लोवांग और ताने खोयांग के इस साजिश से जुड़े होने के सबूत मिल गए.

मोबाइल फोन के जरिए इन सभी की कडि़यां जब रोनी लिशी से जुड़ी पाई गईं तो एकएक कर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती गई. जांच आगे बढ़ी तो पाया गया कि विजय बिस्वास जो मूलरूप से असम के नागांव का रहने वाला था, रोनी की इंफ्रा कंपनी में काम करता था. उसे इस हत्याकांड की साजिश की पूरी जानकारी थी. मीना की हत्या को जिस अनोखी साजिश से अंजाम दिया गया था, उस का खुलासा शायद ही होता, अगर मीना के परिजनों के खुल कर सामने आने और ईटानगर में लोगों ने ‘जस्टिस फौर मीना’ की मुहिम शुरू न की होती. इसीलिए पुलिस ने दबाव में आ कर गहन छानबीन करनी शुरू की. कडि़यों से कडि़यां जोड़ते हुए पुलिस इस साजिश के सूत्रधार और मीना के पति रोनी तक पहुंच गई और उसे गिरफ्तार कर लिया.

बाद में पुलिस ने चुमी ताया को भी गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि जांच में पाया गया कि उसे पूरी वारदात की जानकारी थी, भले ही वह इस वारदात में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थी. लेकिन उसी के उकसावे के कारण रोनी ने हत्या का कठोर फैसला लिया था. चुमी ताया के अलावा पुलिस ने इस हत्याकांड में विजय बिस्वास नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया. विजय रोनी की कंपनी में काम करते हुए रोनी का सब से वफादार और भरोसेमंद आदमी बन गया था. वह उस के निजी कामों को संभालता था. रोनी के कहने पर विजय ने ही 3 मोबाइल खरीद कर वारदात में शामिल दोनों हत्यारों दाथांग सुयांग, दामित्री खोयांग और हत्याकांड की सुपारी लेने वाले कपवांग लेटी लोवांग तक पहुंचाए थे.

पुलिस ने इन तीनों मोबाइल फोनों के साथ एक नहर में फेंके गए उस हथौडे़ को भी बरामद कर लिया, जिस से मीना की हत्या की गई थी. रोनी ने साजिश तो रची थी दूसरी पत्नी के लिए पहली पत्नी को रास्ते से हटाने की, लेकिन एक कत्ल के चक्कर में वह दूसरी हत्या के रूप में अपने अजन्मे बच्चे की हत्या का पाप भी करा बैठा.

—कहानी पुलिस की जांच व परिजनों के कथन पर आधारित

 

Love Crime : प्रेमिका का गला तब तक दबाया जब तक उसकी सासें थम नहीं जाएं

Love Crime : घरपरिवार से अलग स्वच्छंद जीवन जीने की इच्छुक लड़कियों का कमोबेश रश्मि जैसा ही हाल होता है. चिराग पटेल ने भले ही हत्या का अपराध किया, लेकिन उस की हत्या की भूमिका तभी बननी शुरू हो गई थी जब रश्मि ने जानबूझ कर शादीशुदा चिराग के साथ रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था. काश! रश्मि ने अपने पिता परिवार…

60 वर्षीय जयंतीभाई वनमाली कटारिया अपनी दोनों बेटियों तनु और रश्मि के साथ गुजरात के सूरत जिले के बारदोली कस्बे के रोहितफालिया इलाके में रहते थे. वह गांव के प्रतिष्ठित काश्तकार थे. परिवार संपन्न और इज्जतदार था. किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. उन की ख्वाहिश थी कि वह अपनी दोनों बेटियों को उच्चशिक्षा दिलाएं ताकि वे पढ़लिख कर समाज और बिरादरी में अपना एक अलग स्थान बनाएं. अपनी दोनों बेटियों के साथ वह बेटों जैसा व्यवहार करते थे. उन्होंने उन्हें अपनी तरफ से पूरी आजादी दे रखी थी. लेकिन जयंती भाई को यह पता नहीं था कि उन की आजादी एक दिन उन्हें बहुत भारी पड़ेगी. उन की बड़ी बेटी तो सरल स्वभाव की थी, लेकिन छोटी बेटी रश्मि काफी तेज और चंचल थी.

23 वर्षीय रश्मि कटारिया आधुनिक और ब्रौड माइंडेड युवती थी. वह जितनी शोख चंचल थी, उतनी ही सुंदर और स्मार्ट भी थी. फैशनपरस्त होने के साथसाथ वह पुराने दकियानूसी रस्मोरिवाजों को नहीं मानती थी. उस का कहना था कि जब तक खूबसूरती और जवानी है, एंजौय करो. शादीविवाह तो बंधन है, जिस की समय के साथ जरूरत पड़ती है. इसी वजह से रश्मि चिराग पटेल नाम के युवक के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी. 15 नवंबर, 2020 दीपावली का दूसरा दिन था. लोग खुशियां मना रहे थे. अपने जानपहचान वालों, नातेरिश्तेदारों को दीपावली की बधाइयों केसाथ गिफ्ट दे रहे थे. कटारिया परिवार भी इस सब में पीछे नहीं था.

उन्होंने भी अपनी बेटी रश्मि को गिफ्ट देने के लिए फोन कर के घर बुलाया. फोन रश्मि के साथ लिवइन में रहने वाले चिराग पटेल ने रिसीव किया और कहा, ‘‘अंकल रश्मि तो नहाने के लिए बाथरूम गई है.’’

‘‘ठीक है बेटा, नहाने के बाद तुम लोग घर आ जाना.’’ रश्मि के पिता जयंतीभाई कटारिया ने अनुरोध किया. दूसरी तरफ से संतोषजनक जवाब पाने के बाद जयंतीभाई कटारिया ने फोन रख दिया और उन के आने का इंतजार करने लगे. लेकिन पूरा दिन निकल जाने के बाद भी न तो बेटी रश्मि आई और न ही उस का कोई फोन आया. इस से उन्हें रश्मि की चिंता हुई. उन्होंने रश्मि और चिराग को कई बार फोन लगाया लेकिन कोई रिस्पौंस नहीं मिला. हर बार दोनों का फोन स्विच्ड औफ मिला. फिर आउट औफ कवरेज एरिया बताने लगा. बेटी की चिंता में जयंतीभाई कटारिया की रात जैसेतैसे बीत गई. पर सुबह होते ही उन्होंने रश्मि और चिराग के फोन फिर ट्राई किए. लेकिन नतीजा वैसा ही रहा. ऐसे

में कटारिया और उन के परिवार का धैर्य टूट गया. ऐसा कभी नहीं हुआ था कि रश्मि के मांबाप, बहन फोन करें और उस का उन्हें जवाब न मिले. दिन में एक 2 बार तो रश्मि का उन के साथ संपर्क हो ही जाता था. लंबी बातें भी हुआ करती थीं. भले ही उन की बेटी लंबे समय से एक गैरजाति वाले चिराग के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी, लेकिन परिवार के लोगों को उस के प्रति किसी प्रकार की नाराजगी नहीं थी. 17 नवंबर, 2020 को जब रश्मि की चिंता हद से गुजर गई तो जयंतीभाई कटारिया अपने भतीजे हीरेन कटारिया के साथ सुबहसुबह रश्मि के फ्लैट पर पहुंच गए. वहां उन्हें न तो रश्मि मिली और न ही चिराग पटेल मिला.

वहां सिर्फ उस की नौकरानी और रश्मि का 3 साल का बेटा मिला. पूछताछ में नौकरानी ने उन्हें बताया कि रश्मि और चिरागभाई कहीं बाहर घूमने गए हैं. नौकरानी से बातचीत करने केबाद जयंतीभाई कटारिया अपने नाती को साथ ले कर घर आ गए. नौकरानी और  पड़ोसियों ने जो बताया उसे ले कर उन का मन अशांत था. कुछ सवाल थे जो बारबार खटक रहे थे. उन का मानना था कि अगर रश्मि और चिराग बाहर घूमने गए थे तो बेटे को क्यों नहीं ले गए. इतने छोटे बच्चे को छोड़ कर मां कभी बाहर नहीं जाती. दूसरी बात यह थी कि उन दोनों के मोबाइल क्यों बंद थे. यह सब सोच कर उन का माथा ठनका तो उन्होंने अपनी जानपहचान और नातेरिश्तेदारों के यहां उन की तलाश शुरू कर दी.

जल्दी ही इस का नतीजा भी सामने आ गया. चिराग कहीं नहीं गया था, वह अपने रिश्तेदारों के यहां था. अगर कोई गया था तो वह थी रश्मि, उन की बेटी. उन्होंने इस बारे में जब चिराग से पूछा तो उस का कहना था कि रश्मि कहां गई, उसे नहीं पता. संदेह का सूत्र इस पर जयंतीभाई कटारिया परिवार का संदेह बढ़ गया. उन्होंने बिना किसी विलंब के 20 नवंबर को थाना बारदोली के थानाप्रभारी से मिल कर बेटी रश्मि की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाते हुए डीवाईएसपी रूपल सोलंकी को सारी बात बताई. साथ ही बेटी की तलाश करने का अनुरोध किया. जयंतीभाई कटारिया के अनुरोध पर डीवाईएसपी रूपल सोलंकी ने मामले को गंभीरता से लिया और बारदोली थानाप्रभारी को जांच के निर्देश दे दिए.

मामला एक बड़े किसान परिवार से जुड़ा और काफी जटिल था, जिसे सुलझाने के लिए सावधानी की जरूरत थी. इस के लिए थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ विचारविमर्श कर संदिग्ध चिराग को थाने बुला कर फौरी तौर पर पूछताछ की. चिराग ने जिस तरह रश्मि की गुमशुदगी में अनभिज्ञता जाहिर की, वह थानाप्रभारी और उन के सहायकों के गले नहीं उतरी. उन्हें दाल में कुछ काला नजर आ रहा था. इस के लिए थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ चिराग के जानपहचान और उस के परिवार की कुंडली खंगाली तो चिराग रडार पर आ गया. पुलिस ने चिराग को जब दूसरी बार पूछताछ के लिए थाने बुलाया तो वह घबरा गया और सच बोलने के सिवा उस के पास और कोई चारा नहीं बचा. उसे रश्मि की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठाना ही पड़ा.

चिराग के बयान और पुलिस जांच के अनुसार रश्मि की गुमशुदगी और लिवइन रिलेशनशिप की जो कहानी सामने आई, उस की पृष्ठभूमि काफी सनसनीखेज थी, जिसे जान कर लोगों का कलेजा मुंह को आ गया. 32 वर्षीय चिराग पटेल उसी तालुका बारदोली का रहने वाला था, जहां की रश्मि रहने वाली थी. उस के पिता का नाम सुरेशभाई पटेल था. सुरेशभाई की गिनती वहां के धनी और संपन्न किसानों में की जाती थी. उन की अच्छी उपजाऊ जमीन थी, जिस पर वह आधुनिक तरीके से खेती करवाते थे. तैयार होने पर उन की फसल सीधे शहर की बड़ी मंडियों में जाती थी.

स्वस्थ, सुंदर और महत्त्वाकांक्षी चिराग पटेल उन का एकलौता बेटा था, जिसे परिवार से खूब लाड़प्यार मिला था. पिता की तरह उसे भी खेतीबाड़ी से प्यार था. इसी के चलते उस ने अपनी पढ़ाई कृषि विज्ञान से पूरी की और घर आ कर पूरी तरह काश्तकारी संभाल ली. चिराग को अपने पैरों पर खड़ा देख परिवार वालों को उस की शादी की चिंता हुई तो उन्होंने उस के लिए लड़की की तलाश शुरू कर दी. उन्होंने अपनी जानपहचान और नातेरिश्तेदारों में उस की शादी की बात चलाई. फलस्वरूप उन्हें अपने ही रिश्तेदारी के बालोद गांव की रहने वाली सुंदर, सुशिक्षित, सुशील लड़की पसंद आ गई. उसी के साथ उन्होंने चिराग पटेल की शादी पूरे रस्मोरिवाज के साथ धूमधाम से कर दी.

चिराग अपनी शादी से बहुत खुश था. जल्दी ही वह एक बच्चे का पिता भी बन गया. पिता बन गया चिराग समय अपनी गति से चल रहा था. चिराग अपने परिवार में खुश था कि अचानक उस की जिंदगी में उस की पुरानी क्लासमेट रश्मि कटारिया दाखिल हो गई. खेती के कामों से शहर आतेजाते जब चिराग की नजर रश्मि से टकराई तो आधुनिक पोशाक में स्मार्ट और मौडर्न रश्मि को देख कर उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. यही हाल रश्मि का भी था. वह भी स्मार्ट और सुंदर चिराग को अचानक देख कर स्तब्ध रह गई. थोड़ी सी औपचारिकता के बाद दोनों खुल गए. उन्होंने अपने जीवन और दिल की बातें शेयर की और एकदूसरे के सामने जिंदगी की पूरी किताब खोल कर रख दी.

अपनी शादी और जीवनसाथी के बारे में रश्मि ने बताया कि उस ने अभी इस बारे में सोचा ही नहीं है. वैसे भी यह एक बेकार का काम है, क्योंकि उस के नजरिए से जीवन मौजमजे का नाम है. रश्मि की बेबाक बातें सुन कर चिराग उस की तरफ आकर्षित हो गया. उसे एक ऐसी ही सुंदर पार्टनर की जरूरत थी, जिस के साथ वह मौजमजा कर सके. यह सोच कर चिराग ने जब रश्मि की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो रश्मि ने भी देरी नहीं की. पहले दोनों में दोस्ती हुई और फिर उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब चिराग जबजब शहर जाता, अपने साथ रश्मि को भी ले कर जाता. दोनों शहर के होटलों में मौजमस्ती करते. मौलों में शौपिंग करते, घूमतेफिरते.

यह बात जानते हुए भी कि चिराग शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है, रश्मि कटारिया चिराग के प्यार में आकंठ डूब गई. वह उस के साथ आजादी से घूमतीफिरती. चिराग का रहनसहन और वैभव देख कर उसे अहसास हो रहा था कि उस के साथ उस का भविष्य और सपने दोनों सुरक्षित रहेंगे. इसी वजह से परिवार वालों के रोकने और समझाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ. रिलेशनशिप की शुरुआत चिराग के परिवार वालों को उस का रश्मि के साथ मिलनाजुलना पसंद नहीं था. इस के पहले कि वे चिराग को समझा कर रश्मि से अलग कर पाते, रश्मि लिवइन रिलेशन में रहने के लिए उन के बंगले पर आ गई और घरपरिवार वालों से कहा कि चिराग को वह अपना पति मानती है, उस से शादी करेगी.

इस बात को चिराग ने भी स्वीकार किया. उस का भी यही कहना था कि वह रश्मि को बहुत प्यार करता है, उस के बिना नहीं रह सकता. परिवार वालों को चिराग और रश्मि से यह उम्मीद नहीं थी. इस बात का परिवार और गांव वालों ने कड़ा विरोध किया. उन्होंने चिराग और रश्मि को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर उन दोनों ने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा तो उन्हें गांव में नहीं रहने दिया जाएगा. वह किसी दूसरे गांव में जा कर रहें. आखिरकार पत्नी, मां और गांव परिवार के विरोध के चलते चिराग और रश्मि को गांव छोड़ना पड़ा और वे वागेन तालुका सूरत आ कर वहां के एक लग्जरी अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट लेकर रहने लगे. लिवइन रिलेशनशिप के इस सफर को 5 साल कैसे बीत गए उन्हें पता ही नहीं चला.

इस बीच रश्मि एक स्वस्थ सुंदर बच्चे की मां बन चुकी थी. बीतते वक्त के साथ धीरेधीरे दोनों का पारिस्पारिक आकर्षण खत्म होने लगा. 5 सालों में चिराग के इश्क का भूत उतर चुका था. अब रश्मि उसे बोझ लगने लगी थी. वह उस से छुटकारा पाना चाहता था. ऐसे में रश्मि जब दोबारा गर्भवती हुई तो वह चिड़चिड़ा हो गया. जब यह बात चिराग की पत्नी और मां तक पहुंची तो वे आगबबूला हो गईं. दोनों ने रश्मि के फ्लैट पर पहुंच कर उन्हें आड़े हाथों लिया. खरीखोटी सुनाते हुए रश्मि के साथ मारपीट की, जिस से वह बुरी तरह डर गई थी. इस घटना से रश्मि को अपने और अपने बच्चे के भविष्य की चिंता सताने लगी.

उस का और बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो, इस के लिए रश्मि चिराग पर शादी का दबाव बनाने लगी, जो उसे मान्य नहीं था. दूसरी ओर रश्मि शादी को ले कर अड़ गई थी.  इस से दोनों के बीच कहासुनी होने लगी. कभीकभी स्थिति मारपीट तक भी पहुंच जाती थी. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद जब रश्मि ने शादी की बात उठाई तो दोनों के बीच तकरार बढ़ गई और चिराग आपा खो बैठा. गुस्से में वह रश्मि का गला पकड़ कर तब तक दबाता रहा जब कि उस के प्राण नहीं निकल गए. इस तरह उसे रश्मि से छुटकारा तो मिल गया, लेकिन अब वह उस के शव का क्या करे, यह उस की समझ में नहीं आ रहा था.

मिल ही गई कब्र की जगह काफी सोचविचार के बाद चिराग को अपनी ससुराल के गांव बालोद की याद आई, जहां सरकारी पाइप डालने का काम चल रहा था और गहरे गड्ढे खोदे गए थे. वहां पाइपलाइन किसानों के खेतों से जा रही थी. यह खयाल आते ही चिराग ने रश्मि का शव बैडशीट में लपेट कर अपनी कार  में डाला और बालोद गांव पहुंच गया. वहां उस ने एक जेसीबी मशीन के ड्राइवर से बात कर के रश्मि के शव को दफन करवा दिया और अपने रिश्तेदारों के यहां चला गया. चिराग से पूछताछ के बाद बारदोली पुलिस ने मामले की जानकारी बालोद पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को दी. घटनास्थल पर पहुंच कर अधिकारियों ने एफएसएल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन की सहायता से रश्मि कटारिया का शव बाहर निकलवाया.

शव को बाहर निकलवा कर उस का बारीकी से निरीक्षण किया और पोस्टमार्टम के लिए स्थानीय अस्पताल भेज कर चिराग पटेल और जेसीबी के ड्राइवर को हिरासत में ले कर जेल भेज दिया. पोसटमार्टम रिपोर्ट में रश्मि 4 महीने की गर्भवती पाई गई. पुलिस के अनुसार भले ही चिराग ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, लेकिन पुलिस उस के बयानों से संतुष्ट नहीं थी. उन का मानना था कि इस हत्याकांड में वह अकेला नहीं रहा होगा. परदे के पीछे और लोग भी हो सकते हैं. वे लोग कौन हैं, यह जांच का विषय है. चूंकि रश्मि कटारिया अनुसूचित जाति की थी, इसलिए आगे की जांच अनुसूचित जाति/जनजाति सेल के डीवाईएसपी भार्गव पंडया को सौंप दी गई.

Crime News : प्रिंसिपल की डर्टी फिल्म

Crime News : पूर्व प्रिंसिपल श्यामलाल राठौर के 2 बेटियां थीं. वंश चलाने के लिए वह बेटा चाहते थे, लेकिन पत्नी की मौत हो चुकी थी. इस के लिए उन्होंने गीता नाम की महिला से संबंध बना लिए, लेकिन शातिर गीता ने अपने पति हिमांशु चौधरी के साथ मिल कर प्रिंसिपल साहब की ऐसी डर्टी फिल्म बनाई कि…

हिमांशु चौधरी देहरादून के एक प्रतिष्ठित मैडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. पढ़ाई के दौरान ही उसे विवाहिता गीता से प्यार हो गया. फिर बाद में पिछले साल 2024 के मई महीने में उस ने उस के साथ मंदिर में लव मैरिज कर ली थी. उस की एक प्यारी सी बेटी भी थी. गीता पहले पति से 3 साल पहले ही संबंध तोड़ चुकी थी. वह बेटी और हिमांशु के साथ देहरादून के किशननगर क्षेत्र के सिरमौर मार्ग पर रहने लगी थी. जल्द ही हिमांशु को यह भी जानकारी मिल गई कि गीता के किसी और से भी अवैध संबंध हैं. इस का उस ने विरोध जताने के बजाय अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना ली.

दरअसल, हिमांशु मैडिकल की अपनी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहा था. वह कई बार पेपरों में फेल भी हो चुका था. दूसरी तरफ उस ने गीता से शादी रचा कर अपना खर्च और बढ़ा लिया था. उसे अब भी पढ़ाई के लिए फीस देनी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा था. इसी बीच उस ने पाया कि गीता से मिलने के लिए एक बुजुर्ग श्यामलाल अकसर आते हैं. जल्द ही उसे यह भी मालूम हो गया कि गीता और उस बुजुर्ग के संबंध काफी पुराने और गहरे हैं. उन के बीच लंबे समय से नाजायज रिश्ता बना हुआ है. संभवत: गीता के पूर्व पति से संबंध खत्म होने के यही कारण रहे होंगे.

गीता के बुजुर्ग के साथ अवैध संबंध को नजरंदाज करते हुए हिमांशु चौधरी के दिमाग में एक योजना कौंध गई. उस ने श्यामलाल राठौर को ब्लैकमेल कर उन से पैसे ऐंठने का प्लान बना डाला. इस बारे में उस ने गीता से बात की. वह भी इस के लिए सहमत हो गई. योजना के अनुसार, गीता ने 2 फरवरी, 2025 को श्यामलाल को फोन किया, ”हैलो डार्लिंग, तुम कहां हो? कई दिनों से मिले नहीं.’’

”अरे वाह! क्या बात है? मैं भी तुम्हें ही याद कर रहा था. सोच रहा था कि इस वैलेंटाइन डे पर तुम्हारी पसंद का कोई गिफ्ट दूं.’’ श्यामलाल की आवाज सुन कर गीता भी खुश हो गई.

वह चहकती हुई सैक्सी अंदाज में बोली, ”तो फिर आज ही मिलो न! अपनी पसंद भी बता दूंगी और तुम्हारी चाहत भी पूरी कर दूंगी.’’

”चलो, आता हूं, लेकिन वादे से मुकर मत जाना.’’ श्यामलाल बोले.

”अरे, आओ तो सही डार्लिंग. आज की पूरी रात तुम्हारे नाम है. पति को हौस्टल भेज दिया है. तुम से मालिश करवाने की इच्छा हो रही है.’’ गीता रामांटिक अंदाज में बोली

”ठीक है, कहो तो कुछ खानेपीने के लिए ले कर आऊं.’’ श्यामलाल की आवाज में रूमानीपन आ गया था.

”जो तुम्हारा दिल करे. तुम्हें तो मेरी पसंद का ब्रांड मालूम है. बाकी नानवेज यहीं पका लूंगी.’’ गीता बोली.

इस तरह से 2 प्रेमी युगल के बीच कुछ देर तक रोमांटिक बातें होती रहीं. जबकि दोनों की उम्र में काफी अंतर था. गीता एक खिली हुई गुलाब थी, जबकि श्यामलाल उम्र की ढलान पर दिमाग में यौवन का जोश भरे हुए थी. उन्होंने पाया कि काफी समय बाद गीता ने फोन पर ऐसी सैक्सी बातें की थीं. इसीलिए उन के दिमाग में मधुर घंटियां बज उठी थीं. देह में सिहरन पैदा हो गई थी. दैहिक मिलन का खुला निमंत्रण जो मिल चुका था. गीता ने अपने 12 साल पुराने आशिक श्यामलाल राठौर को सिरमौर मार्ग स्थित अपने घर बुलाया. वह एक रिटायर प्रिंसिपल थे. इलाके में लोग उन्हें गुरुजी कह कर बुलाते थे.

वहां पहले से ही हिमांशु चौधरी मौजूद था. उन की योजना थी कि गीता और श्यामलाल की अश्लील वीडियो हिमांशु रिकौर्ड कर लेगा. फिर उस वीडियो द्वारा उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम ऐंठ लेंगे. गीता और श्यामलाल जैसे ही एक साथ आए. हमबिस्तर होते ही किसी तरह श्यामलाल को अहसास हो गया कि कोई कमरे में छिपा हुआ है. खुद के पकड़े जाने की आशंका को भांप कर वह चिल्लाने लगे. तभी गीता और कमरे में छिपे हिमांशु चौधरी ने श्यामलाल का मुंह दबा दिया. दोनों ने हाथपांव पकड़ कर श्यामलाल को किसी तरह काबू में किया. गीता और हिमांशु भीतर से घबरा गए कि कहीं श्यामलाल उन दोनों के बारे में लोगों को बता न दें, इसलिए उन्होंने गला दबा कर उन की हत्या कर दी. इस के बाद शव को वहीं बैड के नीचे डाल कर छिपा दिया.

हिमांशु चौधरी एमबीबीएस की चतुर्थ वर्ष की पढ़ाई कर रहा था. उस ने गीता से कहा था कि वह काफी समय तक सर्जरी विभाग में रहा है. ऐसे में उसे पता है कि यदि 24 घंटे बाद शव को काटा जाए तो खून नहीं निकलेगा. लिहाजा दोनों ने इंतजार किया और शव को अगले दिन काटने की योजना बनाई. इस तरह से 3 फरवरी, 2025 की रात को हिमांशु ने रसोईघर के चाकू से ही शव को जोड़ के हिस्सों से काट डाला. पहले शव के कंधों से हाथ काटे गए. इस के बाद दोनों पैर अलग किए गए. बाद में सिर को काट कर प्लास्टिक के बोरे में बांध दिया. आगे की योजना के तहत गीता हिमांशु को शव ठिकाने लगाने के लिए कह चुकी थी.

दूसरी तरफ श्यामलाल की बेटी निधि राठौर 5 दिनों से परेशान हो रही थी. उसे रात को नींद नहीं आ रही थी. अपने पापा के अचानक लापता होने से निधि बेहद चिंता में थी. वह 7 फरवरी, 2025 को देर तक सोई हुई थी. सुबह के 9 बज चुके थे. बिस्तर से उठी थी. उस वक्त उस के सिर में दर्द हो रहा था. वह उस समय चाय बना कर पीने के मूड में थी, लेकिन मूड खराब था. उस के मन में बारबार एक ही विचार आ रहा था कि अब क्या करे? पापा को कहां ढूंढे?

देहरादून के पटेल नगर की रहने वाली निधि राठौर के पापा पूर्व प्रिंसिपल श्यामलाल उर्फ गुरुजी को लापता हुए 5 दिन गुजर चुके थे. उन्हें ढूंढने के लिए निधि समेत उन के कई रिश्तेदार लगे हुए थे. मगर उन के बारे में किसी को भी कुछ पता नहीं चल पाया था कि वे आखिर गए तो कहां गए?

अंत में निधि राठौर ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर उन की गुमशुदगी देहरादून की पटेल नगर कोतवाली में दर्ज करा दी. कोतवाली पटेल नगर के एसएचओ प्रदीप सिंह राणा ने तत्काल बुजुर्ग श्यामलाल की गुमशुदगी दर्ज कर उन की तलाश करने के निर्देश जारी कर दिए थे. बेटी निधि ने रिपोर्ट में लिखवाया कि उस के पापा श्यामलाल 2 फरवरी को किसी काम की बात बोल कर घर से अपनी स्पलेंडर बाइक से निकले थे. पुलिस ने मामले में जांच शुरू की. जांच की शुरुआत उन के फोन की अंतिम लोकेशन से शुरू की. यह लोकेशन सिरमौर मार्ग की निकली. उन के फोन में गीता नाम की महिला से कई बार बातचीत की जानकारी मिली, जो सिरमौर में रहती थी.

श्यामलाल की गुमशुदगी की जांच का काम कोतवाली के एसएसआई योगेश दत्त के जिम्मे थी, जिन्होंने इस गुमशुदगी के बारे में सीओ अंकित कंडारी और एसपी (सिटी) प्रमोद कुमार से जांच का आदेश हासिल कर लिया था. फिर लापता श्यामलाल राठौर के बारे में जानकारी करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए गए थे. सीसीटीवी फुटेज में श्यामलाल अपनी स्पलेंडर बाइक यूके07डी टी1685 से कृष्णा नगर चौक होते हुए सिरमौर रोड पर स्थित किशन नगर में स्थित एक मकान में जाते दिखाई दिए थे. पुलिस ने जब उस मकान के बारे में छानबीन की, तब पता चला कि वह मकान गीता नामक महिला का है. जांच टीम को सीसीटीवी फुटेज में श्यामलाल को गीता के घर से लौटने की एक भी तसवीर नहीं मिली.

पुलिस ने श्यामलाल के बारे में और अधिक जानकारी जुटाई. पता चला कि उन के 2 बेटियां हैं. उन्हें लोगों ने गीता से हमेशा मिलतेजुलते देखा है. वह गीता के घर मिलने के लिए जाते रहते थे. गीता का मायका जिला सहारनपुर के कस्बा देवबंद में है. पुलिस ने जब गीता और हिमांशु के मोबाइल नबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो उन के द्वारा 2 मोबाइल नंबरों पर बहुत देर तक बातें करना रिकौर्ड हुआ था. वे मोबाइल नंबर जांच में गीता के भाई अजय और हिमांशु के बहनोई धनराज निवासी कैलाश कालोनी, देवबंद के थे.

पुलिस टीम ने इन दोनों से पूछताछ करने का फैसला लिया. एसएसपी अजय सिंह ने इस जांच के लिए कोतवाल प्रदीप सिंह राणा, एसएसआई योगेश दत्त, प्रभारी विनोद गोसाईं, थानेदार विनोद राणा व कांस्टेबल आशीष शर्मा, विपिन व महिला कांस्टेबल मोनिका को भी इस टीम में शामिल कर लिया. इस के बाद पुलिस की टीम अजय और धनराज की तलाश के सिलसिले में देवबंद के लिए निकल गई. देवबंद पहुंच कर पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर अजय और धनराज को गिरफ्तार कर लिया.

दोनों को पटेलनगर कोतवाली ला कर सख्ती से पूछताछ की गई. अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि 2 फरवरी को उस के पास उस की बहन गीता ने फोन कर बताया कि उन्होंने किसी की हत्या कर दी है. अब उस की लाश ठिकाने लगाने में मदद चाहिए. यह सुनने के बाद उस ने अपने जीता धनराज चावला को बुलाया. फिर दोनों गीता के घर पहुंच गए. वहां लाश के टुकड़े बोरे में बंद थे. उन्होंने वह बोरा उठाया और उसे 4 फरवरी को मिनी ट्रक से देवबंद लाया गया. देवबंद के गांव साखन की नहर में रात के अंधेरे में शव को फेंक दिया गया था.

इस के बाद देवबंद की साखन नहर से श्यामलाल के शव की तलाशी अभियान शुरू किया गया, लेकिन गोताखोरों को वहां शव के टुकड़े नहीं मिले. तब पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. सहारनपुर पुलिस को 20 फरवरी, 2025 को किसी इंसान की लाश के टुकड़े मिले. यह जानकारी मीडिया के द्वारा देहरादून पुलिस को मिली तो कोतवाल श्यामलाल के फेमिली वालों को ले कर सहारनपुर पहुंचे तो निधि ने उन की पहचान अपने पापा श्यामलाल के रूप में की. बरामद लाश के टुकड़ों का पंचनामा भर कर पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया.

हिमांशु और गीता तब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आए थे. पुलिस के साइबर विभाग ने उन के मोबाइलों के लोकेशन के आधार पर बताया कि वे मुंबई में हैं. पुलिस जब मुंबई पहुंची, तब तक वे वहां से भी फरार हो चुके थे. इस के बाद पुलिस को इन दोनों की लोकेशन जयपुर की मिलने लगी. पुलिस जब वहां पहुंची, तब उन की लोकेशन प्रयागराज के महाकुंभ की मिलने लगी. वहां 4 दिनों तक दोनों की लोकेशन मिली, लेकिन उस भीड़ में उन्हें ढूंढा नहीं जा सका.

इस चूहेबिल्ली के खेल में गीता और हिमांशु पलिस की पकड़ में नहीं आ पा रहे थे. उन पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया. उन की लोकेशन 24 फरवरी को अमृतसर, पंजाब की मिली. इस लोकेशन के मुताबिक उन्होंने ट्रेन से यात्राएं की थीं. बाद में उन की लोकेशन गोल्डन टेंपल के पास आ कर ठहर गई थी. आखिरकार 26 फरवरी, 2025 की रात में पुलिस टीम को सफलता मिल गई. गीता और हिमांशु चौधरी को अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों को देहरादून लाया गया. उन के सारे कारनामों की जानकारी पहले गिरफ्तार किए गए अजय कुमार और धनराज से मालूम हो चुकी थी. फिर तो गीता ने भी पुलिस के सामने सारे राज खोल दिए. उस के बाद जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

पत्नी की मौत के बाद 2 बेटियों के पिता श्यामलाल को सब से बड़ी चिंता यह थी कि उन के बाद वंश आगे नहीं बढ़ पाएगा. इसी कारण वह गीता के साथ अपने संबंधों से एक बेटा पैदा करना चाहते थे. पुलिस के मुताबिक श्यामलाल ने इस काम के लिए गीता को 20 लाख रुपए तक देने का वादा किया था. इस औफर के बाद ही गीता और हिमांशु ने अनुमान लगाया कि श्यामलाल के पास काफी रुपया है. गीता भी एकमुश्त रकम ऐंठ कर श्यामलाल से पीछा छुड़ाने की फिराक में थी. ऐसे में गीता और हिमांशु ने श्यामलाल की अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने और रुपए ऐंठने का प्लान बनाया था. गीता ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उस के श्यामलाल के साथ पिछले 12 सालों से अनैतिक संबंध थे.

श्यामलाल उसे हर माह 50 हजार से एक लाख रुपए खर्चा दे रहे थे. बुजुर्ग श्यामलाल की एक संस्था थी. वहीं दोनों की मुलाकात हुई थी. श्यामलाल की पत्नी का लगभग 20 साल पहले निधन हो गया था. उन की 2 बेटियों में से एक की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी अविवाहित थी. ऐसे में श्यामलाल अपने वंश को ले कर चिंतित रहते थे. 7 महीने पहले गीता की मुलाकात हिमांशु चौधरी से हुई, जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. वे दोनों करीब आ गए और शादी कर ली. इस के बाद श्यामलाल से गीता का मिलनाजुलना कम हो गया, जिस से श्यामलाल परेशान हो गए. जबकि वह अकसर गीता पर मिलने का दबाव डाल रहे थे.

उन्होंने बेटा देने के बदले गीता को 20 लाख रुपए देने की पेशकश कर दी थी. यही एक वजह श्यामलाल की मौत का कारण भी बन गई. किंतु जब हत्या के बाद श्यामलाल के मोबाइल फोन से खाते की डिटेल खंगाली तो उन के बैंक खाते खाली मिले. इस हत्याकांड में पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि जरूरत पूरी करने की चाहत में ही श्यामलाल, गीता और हिमांशु एकदूसरे के करीब आए थे. श्यामलाल को बेटा पैदा करने की चाहत थी तो गीता श्यामलाल से रुपए ऐंठना चाहती थी. वहीं हिमांशु भी गीता के जरिए अपनी आर्थिक तंगी दूर करना चाहता था.

गीता पहले ब्यूटीपार्लर चलाती थी, लेकिन एक बेटी की मां बनने के बाद उस ने काम बंद कर दिया था. रुपए की जरूरत वह श्यामलाल से पूरी करती रही. वैसे गीता जानती थी कि रुपए की जरूरत तो श्यामलाल ही पूरी कर सकते थे. इस मामले की जांच के समय गीता 5 महीने की गर्भवती पाई गई. उस के गर्भ में पल रही संतान हिमांशु की है या श्यामलाल की, इस संबंध में पुलिस ने मैडिकल जांच कराने की तैयारी कर ली थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गीता अब तक श्यामलाल से करीब 10 लाख रुपए से अधिक धनराशि ले चुकी थी. मृतक के नाम पर दून में करोड़ों की जमीन भी है.

श्यामलाल की हत्या के बाद जब रुपए भी नहीं मिले तो गीता और हिमांशु को अपने अपराध का बोध हुआ. इसी अपराध का पश्चाताप करने के लिए दोनों प्रयागराज गए थे. उन्होंने महाकुंभ में संगम में डुबकी लगाई. 4 दिनों तक साधुसंतों की शरण में रहे. वहीं खाना खाया और रातें गुजारीं. इस बीच दोनों दिल्ली पहुंचे और वहां से कुरुक्षेत्र होते हुए अमृतसर चले गए. उन के पास से तब तक बहुत सारे पैसे खर्च हो गए थे. रुपए न होने के चलते 200 रुपए में किराए का कमरा ले कर रहने लगे. कथा लिखे जाने तक एसएसआई योगेश दत्त द्वारा मामले की जांच जारी थी. योगेश दत्त द्वारा गीता व हिमांशु के खिलाफ सबूत एकत्र कर के अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई.

 

 

Love Affair : इश्क में पति की आहुति

Love Affair : मीना के संजय कुशवाहा से अवैध संबंध बने तो उसे अपना पति कांटे की तरह चुभने लगा. संजय के हाथों पति की हत्या कराने के बाद मीना और उस के प्रेमी ने यही सोचा था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे, लेकिन पुलिस ने ऐसी युक्ति अपनाई कि वह हत्यारों तक पहुंच गई…

मीना ने अपने प्रेमी संजय कुशवाहा के साथ पति चरण सिंह को मौत के घाट उतारने की योजना बना ली थी. इस के बाद चरण सिंह की हत्या करने का दिन और स्थान भी तय कर लिया गया, लेकिन चरण सिंह इस बात से पूरी तरह बेखबर था. वह तो अपनी पत्नी का मोबाइल तोड़ कर निश्चिंत था कि मीना अब अपने प्रेमी संजय कुशवाहा से बात नहीं कर पाएगी, लेकिन चरण सिंह नहीं जानता था कि घायल शेरनी कितनी खूंखार और खतरनाक होती है.

 

प्लान के अनुसार, मीना अपने व्यवहार में बदलाव ला कर पति का भरोसा जीतने का प्रयास कर रही थी. इस से चरण सिंह को लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है. जबकि हकीकत में मामला और बिगड़ गया था. मीना अपने पति को प्रेमी संजय के हाथों मरवाने के बाद निश्चिंत हो कर उसी के साथ मौजमस्ती करना चाहती थी. 20 दिसंबर, 2024 को चरण सिंह के इकलौते बेटे का जन्मदिन था. अत: वह अपने गांव जारह से 19 दिसंबर की सुबह जन्मदिन के लिए जरूरी सामान लेने मुरैना आया था. योजनाबद्ध ढंग से मुरैना में बस स्टैंड पर उसे संजय खड़ा मिल गया.

संजय ने उस से कहा, ”चरण सिंह, तुम बेटे के जन्मदिन का सामान बाद में खरीद लेना, आज मौसम बहुत ही बेहतरीन है. चलो, पहले बाइक से पगारा डैम पर चलते हैं. वहीं बैठ कर तसल्ली के साथ 2-2 पैग लगा लेते हैं.’’

आने वाली आफत से बेखबर चरण सिंह संजय के कहने पर बसस्टैंड से संजय की बाइक पर बैठ कर पगारा डैम चला आया. पगारा डैम पर दोनों ने बैठ कर शराब पी. इस दौरान संजय ने चरण सिंह से उधार लिए डेढ़ लाख रुपए लौटाने को कहा. पैसे मांगने की बात पर उन के बीच झगड़ा हो गया. दोनों में जम कर मारपीट हुई. चरण सिंह समझ गया कि उस के साथ धोखा हुआ है. उस ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन नशा चढऩे के कारण वह भाग नहीं सका, वहीं मारपीट में सिर में चोट लगाने से चरण सिंह बेहोश हो गया तो संजय ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए उसे उठा कर पगारा डैम में फेंक दिया और अपने घर लौट आया.

चरण सिंह की मौत के बाद संजय और मीना ने राहत की सांस ली, लेकिन जेल जाने और सजा पाने का डर दोनों की आंखों में साफ नजर आ रहा था. उन के इश्क की दीवानगी का सुरूर उतर चुका था. इधर 4 दिन गुजर जाने के बावजूद भी जब चरण सिंह मुरैना से लौट कर घर नहीं आया तो फेमिली वाले चिंतित हो गए. उस का मोबाइल फोन भी स्विच औफ आ रहा था. यह देख कर कर फेमिली वालों का माथा ठनका तो चरण सिंह का छोटा भाई रामचंद्र थाना सराय छौला में उस की गुमशुदगी की सूचना लिखाने चला गया. रामचंद्र ने अपने भाई की गुमशुदगी की सूचना लिखाते हुए शक अपनी भाभी मीना और उस के प्रेमी संजय कुशवाहा पर जताया.

एसएचओ के.के. सिंह ने रामचंद्र को भरोसा दिया कि वह जल्दी ही चरण सिंह का पता लगाने का प्रयास करेंगे. इस के बाद रामचंद्र ने अपनी रिश्तेदारियों में भी फोन किए, लेकिन चरण सिंह का कुछ पता नहीं चला. 26 दिसंबर, 2024 को जिला मुरैना के गांव लख्खा का पुरा निवासी श्याम सुंदर ने जौरा थाने के एसएचओ उदयभान सिंह यादव को फोन कर के सूचना दी कि गुमशुदा चरण सिंह की लाश पगारा डैम में पड़ी हुई है. यह सूचना मिलते ही उदयभान सिंह यादव तुरंत मौके पर पहुंच गए. उन्होंने ग्रामीणों की मदद से पगारा डैम से चरण सिंह की लाश को डैम से निकलवाने के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली.

इस के बाद जौरा थाने के एसएचओ उदयभान सिंह यादव द्वारा वायरलैस से चरण सिंह की लाश पगारा डैम में पड़ी मिलने की सूचना प्रसारित करवाई. इस सूचना को सुन कर सराय छौला के एसएचओ के.के. सिंह ने चरण सिंह के भाई रामचंद्र को थाने बुलाया, क्योंकि रामचंद्र ने सराय छौला थाने में चरण सिंह की गुमशुदगी दर्ज करा रखी थी. इस के बाद वह रामचंद्र को ले कर जौरा के पगारा डैम पहुंच गए. रामचंद्र ने जैसे ही वह लाश देखी तो वह दहाड़ें मार कर रोने लगा. रामचंद्र ने पगारा डैम से बरामद हुई लाश की शिनाख्त अपने बड़े भाई चरण सिंह के रूप में की. इस के बाद एसएचओ ने लाश को अपने कब्जे में ले कर धारा 103 (1) बीएनएस के तहत रिपोर्ट तरमीम कर दी.

जैसे ही पगारा डैम से चरण सिंह की लाश मिलने की खबर इलाके के लोगों को हुई तो वे हैरान रह गए. सराय छौला पुलिस को अब कातिलों की तलाश थी. चरण सिंह के भाई ने अपनी भाभी  मीना और उस के प्रेमी संजय पर अपना शक जताया था, लिहाजा पुलिस उन दोनों के पीछे लग गई. काफी कोशिश के बाद पुलिस के लंबे हाथ आखिर संजय कुशवाहा तक पहुंच गए. 27 दिसंबर, 2024 को मुखबिर की सूचना पर संजय कुशवाहा को जौरा में नए अस्पताल के पास से पुलिस ने दबोच लिया. पुलिस उसे थाने ले आई. सख्ती से पूछताछ करने पर संजय ने स्वीकार कर लिया कि चरण सिंह की हत्या उस ने ही की थी. हत्या की साजिश में मृतक की पत्नी और उस की प्रेमिका मीना भी शामिल थी.

संजय से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने मृतक चरण सिंह की पत्नी मीना को गांव जारह से गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. दोनों से पूछताछ के बाद चरण सिंह की हत्या की चौंकाने वाली कहानी सामने आई—

मध्य प्रदेश के जिला मुरैना के थाना सराय छौला के अंतर्गत आने वाले गांव जारह का रहने वाला चरण सिंह जब मेहनतमजदूरी कर के ठीकठाक पैसे कमाने लगा तो उस के विवाह के लिए समाज के लोग आने लगे. तमाम लड़कियां देखने के बाद फेमिली वालों ने उस के लिए जौरा के नयापुरा इलाके की रहने वाली मीना नाम की युवती को पसंद किया. फिर उस के साथ चरण सिंह की शादी कर दी. शादी के बाद मीना ससुराल आई तो जल्द ही उस ने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल ली. जिस से घरपरिवार में उस की गिनती अच्छी बहू के रूप में होने लगी. धीरेधीरे चरण सिंह का परिवार बढऩे लगा. चरण सिंह और मीना 3 बच्चों के मातापिता बन गए, जिन में 2 बेटियां और एक बेटा था. सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन वक्त कब बदल जाए, कहा नहीं जा सकता.

एक सप्ताह पहले चरण सिंह ने एक प्लौट का बयाना दे कर सौदा कर लिया था. शेष डेढ़ लाख रुपए उसे एक पखवाड़े के भीतर चुकाने थे, लेकिन काफी भागदौड़ के बाद जब चरण सिंह पैसों का इंतजाम करने में नाकाम रहा तो उस की पत्नी मीना ने अपने पुराने परिचित संजय कुशवाहा को फोन कर कहा कि मेरे पति ने एक प्लौट का सौदा कर लिया है, अत: उन्हें डेढ़ लाख रुपए की जरूरत है. यदि तुम कुछ समय के लिए डेढ़ लाख रुपए उधार दे दोगे तो मेहरबानी होगी. संजय कुशवाहा ने कुछ सोचविचार कर कहा, ”देखो मीना, इस तरह की बातें मोबाइल फोन पर नहीं हो सकतीं, ऐसा करता हूं कि मैं तुम्हारे घर पर आ जाता हूं. वहीं बैठ कर आराम से इस बारे में बात करेंगे.’’

मीना को लगा कि संजय उस के पति को पैसे उधार देना चाहता है, इसीलिए वह घर पर आना चाहता है. अगले दिन संजय चरण सिंह के घर पहुंच गया. इत्तफाक से जिस वक्त संजय आया, चरण सिंह घर पर नहीं था. मीना ने संजय से पूछा, ”तुम ने कुछ सोचा?’’

”किस बारे में?’’ संजय बोला.

”अरे, पैसे उधार देने के बारे में. मैं ने तुम से डेढ़ लाख रुपए उधार देने के लिए कहा था न…’’

”अच्छा, वह तो मैं तुम्हारे पति को दे दूंगा, लेकिन जो पैसे मैं उधार दूंगा, वह जल्द से जल्द लौटाने की कोशिश करना.’’ संजय कुशवाहा ने कहा.

”संजय, इस बात से तुम बेफिक्र रहो, मैं पूरापूरा प्रयास करूंगी कि जितनी जल्दी हो सके, तुम्हारा पैसा अदा करवा दूं.’’

अगले दिन संजय ने लिखापढ़ी करके चरण सिंह को डेढ़ लाख रुपए दे दिए. चरण सिंह को संजय से डेढ़ लाख रुपए उधार मिल गए तो वह खुश हो गया और खुशीखुशी प्लौट वाले को वायदे के मुताबिक डेढ़ लाख रुपए दे दिए. चरण सिंह को रुपए उधार देने के कारण संजय कुशवाहा का चरण सिंह के यहां आनाजाना शुरू हो गया. चरण सिंह तो सुबह होते ही नाश्तापानी करने के बाद टिफिन ले कर मजदूरी करने निकल पड़ता था और अकसर देर रात को ही घर लौटता था. इस बीच घरगृहस्थी के काम मीना को देखने पड़ते थे, लेकिन जब से संजय उस के घर आनेजाने लगा था, जरूरत पडऩे पर वह मीना की मदद कर देता था. इस के बदले में मीना उसे चायनाश्ता करा देती थी. यदि खाने का समय होता तो खाना भी खिला देती.

ऐसे में ही एक दिन संजय ने कहा, ”मीना, तुम सारे दिन कितना काम करती हो. इस के बाबजूद चरण सिंह तुम्हारी जरा भी फिक्र नहीं करता.’’

मीना ने उसे तिरछी नजरों से देखते हुए कहा, ”यह तुम कैसे कह सकते हो कि वह हमारी फिक्र नहीं करते. मेरे और बच्चों के लिए सुबह से शाम तक मेहनतमजदूरी करते हैं. जब तुम्हारी शादी हो जाएगी

तो तुम्हें भी अपने बालबच्चों के लालनपालन के लिए इसी तरह भागदौड़ करनी पड़ेगी.’’

दरअसल, चरण सिंह के घर आतेजाते संजय कुशवाहा का दिल मीना पर आ गया था, इसलिए वह उसे अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए चारा डालने लगा था. मीना की इस बात से वह निराश तो हुआ, लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी. संयोग से एक दिन मीना को घर की जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार जाना था. वह तैयारी कर ही रही थी कि तभी संजय आ गया. मीना को तैयार होते देख उस ने पूछा, ”कहीं जा रही हो मीना?’’

”गृहस्थी का सामान खरीदना है, इसलिए बाजार जा रही हूं. उन के पास तो इस काम के लिए वक्त है नहीं, इसलिए मुझे ही जाना पड़ रहा है.’’ मीना ने कहा.

” तुम अकेली मत जाओ, मैं तुम्हारे साथ चलता हूं.’’ संजय बोला.

मीना को भला क्यों ऐतराज होता. वह संजय के साथ बाइक से बाजार पहुंच गई. सामान खरीदने के बाद थैला संजय ने उठाया तो मीना हंसते हुए बोली, ”मेरी शादी को 10 साल हो गए, लेकिन वो कभी मेरे साथ बाजार तक नहीं आए.’’ मीना बोली.

”मीना, एक बात बताऊं, यदि तुम्हारे साथ चरण सिंह की शादी नहीं हुई होती तो उसे घर में रोटी भी नसीब नहीं होती. तुम ही हो जो पूरा घर चला रही हो.’’

इस पर मीना कुछ नहीं बोली, लेकिन मुसकरा पड़ी. संजय मीना को ले कर घर पहुंचा तो मीना ने कहा, ”मैं खाना बना रही हूं, अब तुम खाना खा कर जाना.’’

संजय कुशवाहा दालान में पड़े तख्त पर जा कर लेट गया. मीना ने उसे पहले चाय बना कर पिलाई. उस के बाद खाना बना कर खिलाया. संजय मन ही मन सोचने लगा कि मीना के दिल में जरूर ही उस के लिए कोई नरम कोना है, तभी तो वह उस का इतना खयाल रखती है. अब सवाल यह था कि वह उस के दिल की बात जाने कैसे?

उसी दौरान संजय हरियाणा के सूरजकुंड में लगे हस्तशिल्प मेले में गया. वहां हाथ से बनी चीजों की प्रदर्शनी लगी थी. वह प्रदर्शनी देखने गया तो वहां उसे एक दुकान पर एक जोड़ी झुमके पसंद आ गए तो संजय ने वह खरीद लिए. अगले दिन दोपहर को वह चरण सिंह के घर पहुंचा तो मीना घर पर अकेली मिल गई. मीना ने संजय को बैठाया, चायनाश्ता कराया. इस के बाद उस ने झुमके की डब्बी मीना के हाथ में थमा दी. मीना ने डब्बी खोली तो झुमके देख कर बोली, ”झुमके तो बहुत ही शानदार हैं. किस के लिए लाए हो?’’

”मीना, तुम भी कमाल करती हो. जब तुम्हारे हाथ में दिए हैं तो तुम्हारे लिए ही होंगे. कौन मेरी घरवाली बैठी है, जिस के लिए लाऊंगा.’’

”संजय, मेरे लिए तुम इतने महंगे झुमके क्यों खरीद कर लाए हो?’’ मीना ने कहा.

”मुझे अच्छे लगे, इसलिए खरीद लाया. अब जरा पहन कर तो दिखाओ.’’

मीना मुसकराते हुए भीतर कमरे में गई और थोड़ी देर में झुमके पहन कर बाहर दालान में आई तो संजय बोला, ”अरे मीना, झुमके पहन कर तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो.’’

”क्यों झूठी तारीफ करते हो.’’ शरमाते हुए मीना ने कहा.

”तुम्हारी कसम मीना, सच कह रहा हूं, रात को घर लौटने पर जब चरण सिंह देखेगा तो वह भी यही बात कहेगा.’’

मीना ने आह भरते हुए कहा, ”उन के पास इतना टाइम कहां है कि वह मुझे झुमके पहने हुए देख कर मेरी तारीफ करें. काम से लौट कर उन्हें तो दारू पीने से फुरसत ही कहां मिलती है.’’

संजय मुसकराया, क्योंकि मीना की कमजोर नस अब उस के हाथ में आ गई थी. उस की समझ में आ गया कि पतिपत्नी के बीच पतली सी दरार है, जिसे वह प्रयास कर चौड़ी कर सकता है. इस के बाद संजय कुशवाहा मीना के करीब आने की कोशिश करने लगा. मीना को भी उस का आनाजाना और उस से बातचीत करना अच्छा लगने लगा था, लेकिन संजय को अपनी मंजिल नहीं मिल रही थी. उसी बीच संजय ने चरण सिंह से अपने डेढ़ लाख रुपए वापस लौटाने को कहा. चरण सिंह इस बात से काफी परेशान हो गया, क्योंकि उस के पास लौटाने के लिए रुपए नहीं थे.

कड़वा सच तो यह था कि अब उस की नीयत खराब हो गई थी. वह संजय से उधार लिया रुपया लौटाना नहीं चाहता था. एक दिन दोपहर को संजय चरण सिंह के घर पहुंचा तो मीना ने कहा, ”क्या इधरउधर मारेमारे फिरते हो, शादी क्यों नहीं कर लेते?’’

”शादी..? अभी कुछ महीने पहले ही तो मैं ने तुम्हारे कहने पर चरण सिंह को डेढ़ लाख रुपए बैंक से निकाल कर बिना ब्याज के उधार दिया था, लेकिन कई बार तकादा करने के बावजूद भी तुम्हारा पति मेरे पैसे लौटा नहीं रहा है. वह मेरा रुपया लौटाए, तब मैं शादी करने के बारे में सोचूं. क्योंकि वह मेरी अब तक की कुल कमाई का हिस्सा है.

”मेरे कहने पर जो डेढ़ लाख रुपए तुम ने मेरे पति को उधार दिया है, उस की बिलकुल भी चिंता मत करो.’’ मीना ने तिरछी नजरों से संजय को देखते हुए कहा, ”संजय, तुम मुझे बहुत डरपोक लगते हो. जो तुम्हारे मन में है, वह भी नहीं कह पा रहे.’’

”मीना, मैं ने तुम्हारी बात का मतलब नहीं समझा.’’ संजय अनभिज्ञ बनते हुए बोला.

”तुम ऐसा करो कि आज रात को आना, चरण सिंह आज रिश्तेदारी में शादी में जाएगा. मैं घर पर अकेली ही रहूंगी, तब अच्छे से समझा दूंगी.’’ मीना ने मुसकराते हुए कहा.

इतना सुनते ही संजय कुशवाहा का दिल एकदम से धड़क उठा. वह भाग कर घर गया और नहाधो कर रात होने का इंतजार करने लगा, लेकिन सूरज था कि अस्त होने का नाम ही नहीं ले रहा था. किसी तरह शाम हुई तो वह अपने गांव नयापुरा से जारह के लिए चल दिया. जारह पहुंचतेपहुंचते अधेरा हो चुका था. चरण सिंह के घर पहुंच कर संजय ने धीरे से दरवाजा खटखटाया. मीना ने जैसे ही दरवाजा खोला, वह फुरती से घर के भीतर घुस गया कि कोई उसे देख न ले.

घर में सन्नाटा पसरा हुआ था. बच्चे सो चुके थे. मीना संजय का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गई. वासना से वशीभूत मीना भूल गई कि वह अपने पति से बेवफाई करने जा रही है. संजय को अंदाजा लग गया था कि मीना ने अपने पति की गैरमौजूदगी में उसे क्यों बुलाया है. वह बिना किसी हिचकिचाहट के पलंग पर बैठ गया तो उस से सट कर बैठते हुए मीना ने कहा, ”संजय, मुझे तुम से इश्क हो गया है संजय.’’

”यदि तुम्हारे पति को यह सब पता चल गया तो…?’’

”किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. तुम भी तो मुझ से इश्क फरमाना चाहते हो, बोलो?’’

संजय ने कुछ कहने के बजाय मीना को अपनी बाहों में समेट लिया तो वह उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. उन्होंने वह गुनाह कर डाला, जिस का अंजाम आगे चल कर बुरा ही होता है. रात दोनों की अपनी थी. क्योंकि मीना का पति घर पर नहीं था, इसलिए दोनों को किसी तरह का कोई डर नहीं था. लेकिन वे जिस दलदल में उतर गए थे, उस से वे चाह कर भी बाहर नहीं आ सकते थे. भोर होने से पहले ही संजय अपने गांव लौट गया. दोपहर को जब चरण सिंह घर लौट कर आया, मीना बिस्तर पर औंधे मुंह लेटी हुई थी. उसे समझते देर नहीं लगी कि पत्नी की तबियत ठीक नहीं है. उसे क्या पता था कि वह रात की थकावट उतार रही है.

हौलेहौले मीना और संजय का प्यार परवान चढऩे लगा. अवसरों की कोई कमी नहीं थी. चरण सिंह मजदूरी करने गांव से बाहर निकल जाता था. उसी बीच मीना संजय को अपने घर पर बुला कर रंगरलियां मना लिया करती थी. चरण सिंह को भले ही उन दोनों की कारगुजारियों की भनक अभी तक नहीं लग सकी थी, लेकिन पड़ोसी तो देख ही रहे थे. पड़ोसियों को समझते देर नहीं लगी कि चरण सिंह की गैरमौजूदगी में संजय के आने का मतलब क्या हो सकता है. आखिर एक दिन एक बुजुर्ग ने चरण सिंह को रोक कर कह ही दिया, ”चरण सिंह, मेहनतमजदूरी में इतना ज्यादा व्यस्त रहते हो, अपनी घरवाली का भी खयाल रखा करो.’’

”दादाजी मैं समझा नहीं, आप कहना क्या चाहते हैं?’’ चरण सिंह ने पूछा.

”मेरा मतलब संजय से है, आजकल वह तुम्हारी गैरमौजूदगी में तुम्हारे घर कुछ ज्यादा ही आ रहा है.’’

पड़ोसी बुजुर्ग की बात सुन कर चरण सिंह सन्न रह गया. वह सब काम छोड़ कर अपने घर पहुंचा और अपनी पत्नी से पूछा, ”मेरी गैरमौजूदगी में संजय यहां क्यों आता है?’’

”नहीं तो, किस ने कहा?’’ मीना ने लापरवाही से कहा.

”आगे से अब मेरी गैरमौजूदगी में संजय यहां आए तो उसे साफ मना कर देना, क्योंकि आसपड़ोस में उसे ले कर तरहतरह की चर्चा हो रही है. मैं नहीं चाहता कि बिना मतलब के हमारी बदनामी हो.’’

मीना ने कोई उत्तर नहीं दिया. चरण सिंह इस बात को ले कर काफी परेशान था. वह खुद भी महसूस कर रहा था कि पिछले कुछ दिनों से मीना का व्यवहार उस के प्रति लापरवाह सा रहने लगा है. कहीं वह गुमराह तो नहीं हो गई, लेकिन उस ने अपनी आंखों से अभी तक दोनों को कोई गलत हरकत करते हुए नहीं देखा था, इसलिए कोई निर्णय कैसे ले सकता था. उधर मीना ने भी फोन कर के संजय कुशवाहा को सचेत कर दिया कि वह कुछ दिनों तक उस के पति की गैरमौजूदगी में मिलने न आए, क्योंकि चरण सिंह और पड़ोसियों  को शक हो गया है. इस के बाद 2 हफ्ते तक संजय ने चरण सिंह के घर की तरफ रुख नहीं किया.

जब मीना ने देखा कि इस मामले में उस का पति लापरवाह हो गया है तो उस ने एक दिन संजय को फोन कर के घर पर बुला लिया, क्योंकि उस दिन चरण सिंह मथुरा जाने को कह कर गया हुआ था. लेकिन जैसे ही वह टिकट लेने के लिए कतार में खड़ा हुआ, तभी उस के पड़ोसी का उस के मोबाइल पर फोन आ गया. वह बोला, ”तुम कहां पर हो? तुम्हारी पत्नी तुम्हारी गैरमौजूदगी में संजय के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है. संजय घर पर आया हुआ है.’’

पत्नी को रंगेहाथों पकडऩे के लिए चरण सिंह मथुरा जाने का इरादा त्याग कर घर लौट आया और पड़ोस की छत से घर के भीतर पहुंचा तो मीना को संजय की बाहों में पाया. चरण सिंह ने संजय को पकडऩा चाहा, लेकिन वह उसे धक्का दे कर भाग गया. इस के बाद चरण सिंह ने मीना की जम कर ठुकाई कर दी. जब कुछ गुस्सा शांत हुआ तो वह इस सोच में लग गया कि वह इस चरित्रहीन पत्नी का क्या करे. यदि वह उसे तलाक दे देता है तो उस के तीनों बच्चों का क्या होगा, अपनी मेहनतमजदूरी छोड़ कर वह उन की देखभाल भी नहीं कर सकता था.

मीना ने स्वयं को संभाला और सोचने लगी कि उसे क्या करना चाहिए? पति के द्वारा आपत्तिजनक हालत में रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद वह संजय को किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी और चरण सिंह का घर भी नहीं छोडऩा चाहती थी. क्योंकि जो सुखसुविधा चरण सिंह के घर में थी, वह संजय नहीं दे सकता था. फिर कुछ सोच कर उस ने पति के पैरों में सिर रख कर माफी मांगते हुए कहा, ”मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई, अब मैं कसम खाती हूं कि आगे से ऐसी गलती कभी नहीं होगी.’’

चरण सिंह के पास पत्नी को माफ करने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं था, इसलिए उस ने पत्नी को माफ कर दिया. दूसरी ओर संजय की अब मीना से मिलने के लिए उस के पास जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, लेकिन मीना ने उस से कहा कि वह उस के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. उस के बिना उस का जीवन नीरस हो जाएगा. दोनों ने अब घर के बाहर मेलमिलाप का कार्यक्रम तय किया. बहाना बना कर मीना अपने मायके नयापुरा चली जाती थी, जहां उस से मिलने के लिए संजय आ जाता था.

लेकिन वहां भी वे कई लोगों की निगाहों में आ गए. जिस से चरण सिंह को इस मेलमिलाप के बारे में पता चल गया. उस का भरोसा अपनी पत्नी से उठ गया था, वह शराब पी कर उस के साथ आए दिन मारपीट करने लगा. चरण सिंह से एक दिन बाजार में अचानक मुलाकात होने पर संजय ने उस से अपने डेढ़ लाख रुपए लौटाने को कहा. जबकि चरण सिंह अब उस के रुपए लौटाने के मूड में नहीं था. एक दिन मीना और संजय मिले तो मीना ने कहा, ”संजय, चलो हम कहीं दूर जा कर अपनी दुनिया बसा लेते हैं.’’

”देखो, हम अपनी दुनिया तो बसा लेंगे, लेकिन खाएंगेपहनेंगे क्या? मीना, इस के लिए हमें कुछ और सोचना होगा.’’ संजय बोला.

चरण सिंह की गृहस्थी में ग्रहण लग चुका था. आसपड़ोस के लोग उस की पत्नी की चुगली करते रहते थे, लेकिन चरण सिंह की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी बेहया पत्नी का क्या करे. उसे अपने बच्चों का भविष्य बरबाद होता दिखाई दे रहा था. पतिपत्नी के बीच आए दिन होने वाले झगड़ों का असर बच्चों पर भी पड़ रहा था. जबकि मीना पति से छुटकारा पाना चाहती थी. उसी बीच एक रात चरण सिंह ने मीना को मोबाइल फोन पर बातें करते हुए देखा तो उस के हाथ से मोबाइल फोन छीन कर नंबर चैक किया तो वह नंबर संजय का निकला. चरण सिंह ने कहा, ”इतना सब होने के बावजूद तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही हो?’’

 

जब मीना ने कोई उत्तर नहीं दिया तो चरण सिंह को गुस्सा आ गया. उस ने मीना के गाल पर थप्पड़ जड़ते हुए कहा, ”चरित्रहीन औरत, अब तू बिलकुल भी भरोसे लायक नहीं रही.’’

इस के बाद उस ने मोबाइल छीन कर तोड़ दिया.

इस पर मीना ने कहा, ”यह तुम ने अच्छा नहीं किया.’’ पति के द्वारा मोबाइल फोन तोड़ देने से तिलमिलाई मीना ने तय कर लिया कि अब वह अपने पति को जिंदा नहीं छोड़ेगी. अगले दिन उस ने अपनी सहेली के मोबाइल से संजय को फोन किया और पूछा, ”अब तुम्हारा क्या इरादा है, मुझे आज साफसाफ बताओ?’’

”मेरी माली स्थिति के बारे में तुम सब कुछ जानती हो. अब मीना तुम्हीं बताओ कि मैं क्या करूं? मैं तुम्हारे पति को उधार दिए डेढ़ लाख रुपए लौटाने के लिए अनेक बार कह चुका, लेकिन वह देने का नाम नहीं ले रहा है. मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं?’’

”देखो संजय, मैं तुम्हारी वजह से रोजरोज तो पिट नहीं सकती, इसलिए अब फैसला लेने का वक्त आ गया है. या तो तुम मुझे छोड़ दो या फिर कुछ ऐसा करो कि हम दोनों सुकून से जी सकें.’’

”अब तुम ही बताओ मीना कि मुझे क्या करना चाहिए?’’

”तुम कुछ ऐसा करो कि मुझे हमेशाहमेशा के लिए चरण सिंह से छुटकारा मिल जाए. उस के बाद हम दोनों सुकून की जिंदगी गुजार सकेंगे.’’

”लेकिन यह सब कैसे होगा?’’

”सब आराम से हो जाएगा, क्योंकि यह हमारे बीच दीवार की तरह है. यह अब मुझे सहन नहीं हो रहा है.’’

”चरण सिंह को ठिकाने लगाने के लिए पैसों की जरूरत होगी, जो मेरे पास हैं नहीं.’’

”पैसे में दे दूंगी. पति का डेढ़ लाख रुपया मेरे पास सुरक्षित रखा हुआ है.’’

सौदा कहीं से भी घाटे का नहीं था. संजय मन ही मन खुश हो गया. उधार दिए डेढ़ लाख रुपए भी वापस मिल जाएंगे और प्रेमिका मीना के साथ उस की संपत्ति भी मिल जाएगी. वह मौज करेगा. लेकिन ऐसा नहीं जो सका. उन का गुनाह छिप न सका और दोनों ही पुलिस की पकड़ में आ गए. हत्या के बाद हर कातिल कानून से बचना चाहता है. इश्क में अंधी मीना पति की हत्या के बाद अधूरी खुशियों को पूरा करना चाहती थी, लेकिन उस के यह अरमान धरे के धरे रह गए. उसे क्या पता था कि वह मौज करने के बजाय प्रेमी संजय कुशवाहाा के साथ जेल चली जाएगी. पुलिस ने दोनों आरोपियों को चरण सिंह की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

 

 

Rajasthan News : रोज के झगड़ों से परेशान होकर पत्नी को टुकड़ों में काट डाला

Rajasthan News : बिना छानबीन के हुई शादी के बाद जब पति या पत्नी की हकीकत सामने आनी शुरू होती है तो विवाद बढ़ना स्वाभाविक होता है. कई बार इस विवाद में किसी एक की जान भी दांव पर लग जाती है. अमित और कोमल के मामले में भी…

भिवाड़ी राजस्थान ही नहीं, उत्तरी भारत का प्रमुख औद्योगिक इलाका है. भिवाड़ी और हरियाणा के बीच केवल एक सड़क का फासला है. भिवाड़ी में सुई से ले कर अंतरिक्ष यान तक के कलपुर्जे बनाने वाले उद्योग हैं. भिवाड़ी वैसे तो अलवर जिले में आता है, लेकिन अपराधों के नजरिए से महत्त्वपूर्ण होने के कारण साल भर पहले अलवर जिले में भिवाड़ी को नया पुलिस जिला बना दिया गया था. राजस्थान में केवल अलवर ही ऐसा जिला है, जहां अलगअलग जिलों के नाम से 2 एसपी हैं. राज्य के कुछ जिलों में ग्रामीण और शहर एसपी हैं. जबकि जयपुर और जोधपुर शहर में पुलिस कमिश्नरेट है. अपराधों के लिहाज से 2 महीने पहले भिवाड़ी में दबंग और इंटेलीजेंट एसपी के रूप में राममूर्ति जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

बात 14 अगस्त की है. एसपी साहब जब अपने औफिस में स्वतंत्रता दिवस पर पुलिस की ओर से किए जाने वाले इंतजामों की फाइल देख रहे थे, तभी उन के मोबाइल पर यूआईटी फेज थर्ड थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार का फोन आया. थानाप्रभारी ने कहा, ‘‘सर, खिदरपुर गांव के सरकारी स्कूल के पास सड़क किनारे एक महिला के शव के अलगअलग टुकड़े मिले हैं.’’

महिला के शव के टुकड़े मिलने की बात सुन कर एसपी साहब चौंके. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने थानाप्रभारी को कुछ जरूरी निर्देश दे कर कहा, ‘‘आप शव के बाकी टुकड़े तलाश कराओ, मैं मौके पर आता हूं.’’

एसपी साहब ने अपने पीए को एडिशनल एसपी अरुण माच्या से बात कराने और तुरंत गाड़ी लगवाने को कहा. पीए ने फोन पर लाइन दी, तो एसपी साहब ने एडिशनल एसपी को महिला के शव के टुकड़े मिलने की बात बता कर तुरंत मौके पर चलने को कहा और खुद औफिस के बाहर खड़ी गाड़ी में सवार हो कर खिदरपुर स्कूल की ओर चल दिए. कुछ ही देर में वह खिदरपुर गांव पहुंच गए. स्कूल के पास तमाशबीन खड़े थे. वहां सड़क किनारे झाडि़यां उगी हुई थीं. थानाप्रभारी और कई पुलिसकर्मी भी वहां मौजूद थे. एसपी जोशी के पहुंचने के 2-4 मिनट बाद ही एडिशनल एसपी अरुण माच्या भी पहुंच गए. पुलिस के आला अधिकारियों को देख कर लोगों की भीड़ एक तरफ हट गई.

थानाप्रभारी ने आगे आ कर एसपी और एडिशनल एसपी को सैल्यूट किया. फिर बताया कि सब से पहले कमर से नीचे और जांघों से ऊपर का हिस्सा मिला. इस के बाद आसपास तलाश कराई गई तो कुछ दूर झाडि़यों में अलगअलग जगह पर दोनों हाथ मिले. एक जगह पर बालों में उलझा इंसानी मांस का टुकड़ा मिला. शव के ये अलगअलग टुकड़े महिला के थे, जो करीब 200 मीटर के दायरे में मिले थे. टुकड़ों से पता लगाना मुश्किल था एसपी राममूर्ति जोशी ने शव के टुकड़ों का निरीक्षण किया. वे 4-5 दिन पुराने लग रहे थे. जांघ और कमर से नीचे के हिस्से पर कोई कपड़ा नहीं था. शव के टुकड़े आवारा जानवरों के नोंचने और फूल जाने के कारण उम्र का अंदाज भी नहीं लग सका.

जहांजहां शव के टुकड़े मिले, वहां तेज बदबू आ रही थी. मौकामुआयना कर जोशी समझ गए कि महिला की बेरहमी से हत्या कर उस के शव को टुकड़ों में काट कर अलगअलग जगह फेंका गया है. यह भी आशंका थी कि महिला के साथ दुष्कर्म किया गया हो. चिंता की बात यह थी कि सिर सहित शव के अन्य टुकड़े नहीं मिले थे. जोशीजी ने थानाप्रभारी और एडिशनल एसपी को आसपास के इलाकों में शव के बाकी हिस्से तलाशने के निर्देश दिए. इसी के साथ उन्होंने अलवर से विधि विज्ञान विशेषज्ञों और डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया. अलवर से एफएसएल के विशेषज्ञ और डौग स्क्वायड मौके पर पहुंच गया. पुलिस ने खोजी कुत्ते को शव के टुकड़े सुंघा कर बाकी टुकड़ों की तलाश कराई, लेकिन पुलिस को शव का कोई अन्य हिस्सा नहीं मिला. इस का कारण यह था कि 2-3 दिन से हो रही बारिश ने सुराग मिटा दिए थे.

फोरैंसिक विशेषज्ञों ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए, लेकिन 8-10 घंटे की खोजबीन के बाद भी पुलिस को न तो महिला के बारे में कोई सुराग मिला और न ही कातिलों के बारे में कोई जानकारी. पुलिस ने जगहजगह से एकत्र किए शव के टुकड़े सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिए. भिवाड़ी के यूआईटी फेज थर्ड पुलिस थाने में इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर रेंज के आईजी एस. सेंगाथिर के निर्देश पर एसपी (भिवाड़ी) राममूर्ति जोशी के निर्देशन में विशेष जांच टीम का गठन किया गया. इस टीम को एडिशनल एसपी अरुण माच्या के नेतृत्व में काम करना था. टीम में डीएसपी (भिवाड़ी) हरिराम कुमावत और यूआईटी फेज थर्ड थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार सहित कई अफसरों और जवानों को शामिल किया गया.

पुलिस ने तेजी से जांचपड़ताल शुरू की, लेकिन कहीं कोई ओरछोर नहीं मिल पा रहा था. इस का कारण यह था कि औद्योगिक इलाका होने के कारण भिवाड़ी में रोजाना राजस्थान के ही नहीं बल्कि हरियाणा के गुड़गांव, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, बावल, फरीदाबाद, पलवल और दिल्ली तक के रोजाना हजारों लोग नौकरी और कामकाज के सिलसिले में भिवाड़ी आतेजाते हैं. यह भी आशंका थी कि हरियाणा में हत्या करने के बाद शव के टुकड़े राजस्थान के भिवाड़ी में फेंके गए हों. हत्या के ऐसे एकदो मामले पहले भी सामने आए थे. दूसरी बड़ी समस्या यह थी भिवाड़ी में देश के विभिन्न राज्यों के लाखों श्रमिक काम करते हैं, इन श्रमिकों की भिवाड़ी सहित आसपास के गांवों में बड़ीबड़ी बस्तियां हैं. साथ ही भिवाड़ी में भी सैकड़ों बहुमंजिला सोसायटियां हैं. इन सभी इलाकों में एक महिला के बारे में खोजबीन करना चुनौती भरा काम था.

एसपी राममूर्ति जोशी पहले भी अलवर में विभिन्न पदों पर रह चुके थे. इसलिए उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर भिवाड़ी और आसपास के इलाकों से पिछले दिनों लापता हुई महिलाओं का रिकौर्ड मंगवाया. इन महिलाओं की गुमशुदगी के बारे में जांचपड़ताल की गई, लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिस से पुलिस को शव के टुकड़ों की शिनाख्त में मदद मिलती. इलाके की सोसायटियों में पिछले दिनों मकान खाली कर जाने वाले किराएदारों का भी पता लगाया गया. इस के अलावा घटनास्थल के निकटवर्ती सांथलका गांव में पिछले दिनों मकान खाली करने वाले किराएदारों और कंपनियों से अचानक नौकरी छोड़ने वाले महिलापुरुषों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए डोर टू डोर सर्वे किया गया.

यह काम भूसे के ढेर में सूई खोजने जैसा था. पचासों पुलिस वाले इस काम में सुबह से शाम तक जुटे रहते. एसपी साहब इस काम में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते थे. वह हर संभव प्रयास से मृतका की शिनाख्त और कातिलों तक पहुंचना चाहते थे. इसलिए रोजाना शाम को एडिशनल एसपी और डीएसपी से रिपोर्ट लेते और उन्हें जरूरी निर्देश देते. पुलिस को मिली जांच की राह 2 सप्ताह से भी ज्यादा समय तक चली इस भागदौड़ में पुलिस को पता चला कि गांव सांथलका की विनोद कालोनी में रहने वाले अमित गुप्ता और उस की पत्नी कोमल पिछले कुछ दिनों से बिना किसी को बताए अचानक कमरा खाली कर चले गए.

पुलिस ने कालोनी के दूसरे लोगों से पूछताछ की, तो जानकारी मिली कि अमित और कोमल में आपस में झगड़ा होता रहता था. दोनों अलगअलग फैक्ट्रियों में काम करते थे. पुलिस को अमित का पता तो नहीं मिला. अलबत्ता यह जरूर पता लगा कि वह भरतपुर का रहने वाला है. यह सुराग मिलने पर पुलिस को उम्मीद की कुछ किरण नजर आई. अब पुलिस अमित और कोमल को तलाशने में जुट गई. इसी दौरान 3 सितंबर को यूआईटी फेज थर्ड पुलिस थाने पर डाक से एक पत्र आया. पत्र में अमित गुप्ता ने अपनी पत्नी कोमल के गायब होने की बात लिखी थी. पत्र में अमित का मोबाइल नंबर और कोमल का कानपुर का पता लिखा था.

पुलिस ने मामले की पड़ताल करने के लिए अमित के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन वह स्विच्ड औफ मिला. चूंकि अमित और उस की पत्नी अचानक मकान खाली कर के गए थे और अब अमित ने खुद थाने आने के बजाय पत्र लिख कर अपनी पत्नी की गुमशुदगी की बात कही थी. इस से पुलिस को संदेह हुआ. थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार ने एसपी राममूर्ति जोशी को पूरी बात बताई. जोशी को भी मामले में संदेह नजर आया. उन्होंने भी अमित के मोबाइल नंबर पर कई बार काल की. लेकिन उस का फोन हर बार स्विच्ड औफ मिला. मोबाइल स्विच्ड औफ होने से उस की लोकेशन का भी पता नहीं चल पा रहा था. सच्चाई का पता लगाने के लिए एसपी ने थानाप्रभारी को पत्र में लिखे कोमल के कानपुर के पते पर पुलिस टीम भेजने के निर्देश दिए.

भिवाड़ी से पुलिस टीम कानपुर में मीरपुर कैंट स्थित कोमल के घर पहुंची. वहां पूछताछ में पता चला कि कोमल की अपने परिजनों से 11 अगस्त के बाद से कोई बात नहीं हुई थी. उन्हें न तो कोमल का कुछ पता था और न ही अमित का. कोमल के परिजनों ने पुलिस को बताया कि दोनों मियांबीवी में आए दिन झगड़ा होता था. यह भी बताया कि अमित ने कोमल से धोखे से शादी की थी. उन से यह जानकारी भी मिली कि अमित ने अपनी किसी महिला दोस्त की हत्या भी की थी. उन्हें शंका थी वह कोमल की भी हत्या कर सकता है. कानपुर में कोमल के घर वालों से मिली जानकारी के बाद अमित पर पुलिस का शक पक्का हो गया.

साथ ही यह अनुमान भी लग गया कि 14 अगस्त को खिदरपुर स्कूल के पास मिले शव के टुकड़े कोमल के ही हो सकते हैं. अब अमित को तलाशना जरूरी था, क्योंकि उसी से सारी सच्चाई का पता लग सकता था. एसपी राममूर्ति जोशी ने भिवाड़ी पुलिस की साइबर सेल को अमित गुप्ता के मोबाइल नंबर का तकनीकी अनुसंधान करने का निर्देश दिया. साइबर सेल के हैड कांस्टेबल मोहनलाल, कांस्टेबल संदीप और नीरज ने अमित का मोबाइल लगातार स्विच्ड औफ मिलने पर उस की पुरानी काल डिटेल्स निकलवा कर उन का विश्लेषण किया. पुलिस ने इन काल डिटेल्स के आधार पर पहले से अमित के संपर्क में रहे लोगों से उस की पूरी जन्मकुंडली हासिल की.

तमाम प्रयासों के बाद पुलिस ने 7 सितंबर को अमित गुप्ता को भिवाड़ी के ही सांथलका इलाके से गिरफ्तार कर लिया. उसे पुलिस थाने ला कर पूछताछ की गई. पहले तो वह पुलिस को यह कह कर गुमराह करता रहा कि कोमल लापता है. मैं उस की तलाश कर रहा हूं. लेकिन कड़ाई से पूछताछ में उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस पूछताछ में कोमल की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

अमित गुप्ता राजस्थान के भरतपुर शहर का रहने वाला था. उस की शादी 13 दिसंबर, 2019 को कानपुर निवासी हरिप्रसाद गुप्ता की बड़ी बेटी कोमल से भरतपुर में हुई थी. कोमल की यह दूसरी शादी थी. उस की पहली शादी 2004 में कानपुर के संजय से हुई थी, लेकिन टीबी की बीमारी के कारण उस के पति संजय की 4 साल बाद 2008 में मौत हो गई थी. लौकडाउन में भुखमरी की नौबत ले आई भिवाड़ी अमित भरतपुर में ई मित्र की दुकान करता था. अमित और कोमल भरतपुर में कुम्हेर गेट पर रहते थे. कोमल अपने पहले पति संजय के भांजे लाली गुप्ता से फोन पर बात करती थी. इस पर अमित को ऐतराज था. इसी बात पर दोनों में आए दिन झगड़ा होता था.

कोरोना संक्रमण के कारण लौकडाउन होने से अमित का ई मित्र का कामकाज ठप हो गया. वह बेरोजगार हुआ, तो रोजीरोटी की तलाश में भरतपुर से भिवाड़ी आ गया. अमित और कोमल भिवाड़ी में सांथलका गांव की विनोद कालोनी में किराए का कमरा ले कर रहने लगे. अमित सेंट गोबेन कंपनी में नौकरी करने लगा. केवल अमित की नौकरी से घर का खर्च नहीं चल पाता था. इसलिए उस ने कोमल को भी नौकरी करने को कहा. कोमल ने प्रयास किया, तो उसे भिवाड़ी के पास चौपानकी में क्लच वायर बनाने वाली कंपनी में नौकरी मिल गई. भले ही पतिपत्नी दोनों नौकरी करने लगे थे, लेकिन उन के बीच झगड़े खत्म नहीं हुए. परेशान हो कर कोमल ने 11 अगस्त को अमित को कमरे से निकाल दिया. अमित कमरे से चला गया, उस के कुछ देर बाद कोमल अपनी नौकरी पर चली गई.

पत्नी से झगड़े के बाद अमित ने एक बार तो अपने घर भरतपुर जाने का विचार बनाया. फिर उस ने रोजरोज का झगड़ा खत्म करने के लिए कोमल का ही खेल खत्म करने की योजना बना डाली. उस ने बाजार से एक लुहार से तेज धारदार वाला बड़ा चाकू खरीदा और वापस कमरे पर आ गया. कमरे की एक चाबी अमित के पास पहले से ही रहती थी. इसलिए उसे कोई परेशानी नहीं हुई. शाम को कोमल अपनी नौकरी से वापस कमरे पर लौटी, तो अमित ने कमरे का गेट बंद कर उसे तरंग नामक भांग की गोलियां खिला दीं. भांग के नशे में कोमल को कुछ होश नहीं रहा. अमित ने उस के हाथपैर बांध दिए और गला दबा कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद उस ने तेज धार वाले लंबे चाकू से उस के शरीर के अलगअलग टुकड़े किए. टुकड़े करने के दौरान कमरे के फर्श पर बिछी दरी पर खून फैल गया. इस पर उस ने दरी को एक तरफ रख कर बाकी खून के निशान पानी से धो दिए. इस काम में उसे करीब 3 घंटे लगे. कोमल के शव के टुकड़ों को प्लास्टिक के 3 अलगअलग बोरों में भर कर वह रात को कमरे पर ही सो गया. दूसरे दिन सुबह जब कालोनी के लोग अपनेअपने कामों पर चले गए, तब वह कमरे से एकएक बोरा निकाल कर ले गया और कच्चे रास्ते से हो कर खिदरपुर स्कूल के पास अलगअलग जगहों पर फेंक दिए. उस ने खून से लथपथ वह दरी भी फेंक दी.

दूसरे दिन वह अपना थोड़ाबहुत घरेलू सामान ले कर बिना किसी को कुछ बताए किराए का कमरा खाली कर फरार हो गया. बाद में 7 सितंबर को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. फरारी के दौरान वह भिवाड़ी के अलावा पलवल, भरतपुर और जयपुर में रहा. अमित की गिरफ्तारी के बाद उस की निशानदेही पर पुलिस ने 7 सितंबर को ही कोमल के सीने से ऊपर का हिस्सा बरामद कर लिया. इस के अगले दिन 8 सितंबर को पुलिस ने खिदरपुर गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर झाडि़यों से वह दरी भी बरामद कर ली, जिस पर कोमल की हत्या की गई थी. दरी पर खून के निशान सूख चुके थे. 9 सितंबर को पुलिस ने अमित की निशानदेही पर सिर का हिस्सा भी बरामद कर लिया.

पुलिस की सूचना पर कोमल के घर वाले 8 सितंबर को कानपुर से भिवाड़ी पहुंचे. पुलिस ने कोमल के भाई और बहन के डीएनए के सैंपल लिए ताकि कोमल के शव की अधिकृत पुष्टि की जा सके. पूछताछ में यह भी पता चला कि अमित ने सन 2013 में भरतपुर में दुष्कर्म करने के बाद एक महिला होमगार्ड की हत्या कर दी थी. इस मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. करीब डेढ़ साल तक वह भरतपुर जिले की सेवर जेल में बंद रहा. इस मामले में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा दी थी. सन 2014 में हाईकोर्ट से उस की जमानत हो गई थी. अमित ने जो अपराध किया, उस की सजा उसे कानून देगा. लेकिन कोमल की मौत से उस के पिता हरिप्रसाद टूट गए हैं.

कानपुर में चाय की थड़ी लगाने वाले हरिप्रसाद की 3 बेटियों में कोमल सब से बड़ी थी. पहले पति की मौत के बाद से कोमल कानपुर में अपने पिता के पास रह कर जौब करती थी. सुमन ने फंसाया था कोमल को हरिप्रसाद का कहना है कि इस दौरान कोमल के संपर्क में सुमन नाम की महिला आई. सुमन धीरेधीरे उन के घर भी आने लगी. फिर वह कोमल का रिश्ता भरतपुर के अच्छे परिवार में कराने की बात कहने लगी. भरतपुर ज्यादा दूर होने के कारण उन्होंने मना कर दिया. फिर भी सुमन ने पता नहीं कब कोमल का भरतपुर के अमित से संपर्क करा दिया. जल्दी ही अमित ने कोमल को पूरी तरह अपने झांसे में ले लिया. इस का उन्हें पता भी नहीं चला. बाद में सुमन ने कहा कि एक बार भरतपुर जा कर लड़का देख आओ, पसंद आए तभी रिश्ता करना.

बेटी की खुशी के लिए हरिप्रसाद भरतपुर गए. वहां देखा तो पहले से ही शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी. अनजान शहर में वे अकेले पड़ गए. बेटी की सहमति से उन्होंने अगले ही दिन 13 दिसंबर, 2019 को भरतपुर में कोमल की शादी अमित से कर दी. बाद में उन्हें पता चला कि यह शादी कराने के एवज में सुमन ने अमित से एक लाख रुपए लिए थे. कोमल शादी के बाद केवल एक बार होली पर अपने घर कानपुर गई थी. कोमल अपनी छोटी बहन काजल को फोन पर बताती थी कि अमित का चालचलन ठीक नहीं है. वह उस पर शक करता है और आए दिन झगड़ता है. कोमल की छोटी बहन काजल की 10 अगस्त को अमित से फोन पर बात हुई थी, तब अमित ने कहा था कि आज के बाद तुम से हमारा कोई रिश्ता नहीं रहेगा और न ही तुम कोमल से बात कर सकोगी.

इस के बाद से लगातार संपर्क करने के बाद भी जब परिजनों की कोमल से बात नहीं हुई तो हरिप्रसाद ने अमित के पिता को फोन किया. उन्होंने कहा कि उन का बेटे और बहू से कोई संबंध नहीं है. इस संबंध में वे अखबार में विज्ञापन भी छपवा चुके हैं. हरिप्रसाद का कहना है कि बेटी तो चली गई, लेकिन अमित जैसे जल्लाद से कोमल का रिश्ता कराने वाली सुमन के खिलाफ भी काररवाई हो, जो पैसे कमाने के लिए जरूरतमंद युवतियों को झांसे में ले कर उन की जिंदगी बरबाद कर देती हैं.

 

महिलाओं ने रची साजिश : ब्याज देने वाली सिंघम चाची की कराई हत्या

MP Crime News : राधा यादव ब्याज पर पैसे देने का धंधा करती थी. इस धंधे में उस ने 50 लाख रुपए से ज्यादा की रकम बांट रखी थी. इसलिए क्षेत्र के लोग उसे सिंघम चाची कहते थे. आखिर ऐसा क्या हुआ कि यही पैसा उस की जान का दुश्मन बन बैठा?

घटना मध्य प्रदेश के भोपाल जिले की है. शाम के कोई 7 साढ़े 7 का समय था. भोपाल के चूना भट्ठी थाने की ट्रेनी एसडीपीओ रिचा जैन अपने चैंबर में किसी केस की फाइल देख रही थीं, तभी उन्हें कोलार सोसायटी में किसी महिला का कत्ल कर दिए जाने की सूचना मिली. महिला की हत्या का मामला गंभीर होने से एसडीपीओ रिचा जैन सीएसपी भूपेंद्र सिंह को ले कर तुरंत ही मौके पर पहुंच गईं. कोलार सोसायटी की एक संकरी गली में लगभग 45-50 साल की एक महिला का खून से सना शव पड़ा हुआ था. उक्त महिला के कपड़े और पहने हुए जेवर से यह साफ लग रहा था कि महिला का संबंध किसी अच्छे परिवार से है.

महिला के जेवर देख कर एसडीपीओ जैन ने अंदाजा लगाया कि हत्या लूट की गरज से नहीं की गई है. वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि मृतका का नाम राधा यादव है, जो करोद क्षेत्र की रहने वाली है. पता चला कि राधा ने कोलार कालोनी की गरीब बस्ती में रहने वाले सैकड़ों लोगों को कर्ज दे रखा था, इसलिए वह अपने कर्ज व ब्याज की वसूली के लिए अकसर वहां आतीजाती रहती थीं. सीएसपी भूपेंद्र सिंह ने अनुमान लगा लिया कि राधा के कत्ल के पीछे लेनदेन का मामला हो सकता है. यह बात 18 मार्च, 2020 की है.

लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद एसडीपीओ एक टीम को कालोनी में रहने वाले राधा के कर्जदारों की सूची बनाने के काम में लगा दिया. जिस से अगले ही दिन यह बात सामने आई कि लगभग पूरी बस्ती राधा की कर्जदार थी. राधा यादव ने यहां 20 लाख रुपए से अधिक की रकम ब्याज पर दे रखी थी. साथ ही यह भी पता चला कि राधा काफी दबंग किस्म की महिला थी. वह अपना पैसा वसूलने के लिए कर्जदार की सार्वजनिक बेइज्जती करने से भी पीछे नहीं हटती थी, जबकि अधिकांश लोगों का कहना था कि कितना भी चुकाओ मगर राधा का कर्ज हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ता ही जाता था.

इन सब बातों के सामने आने से पुलिस के सामने यह बात तो लगभग तय हो गई थी कि राधा की हत्या लेनदेन के विवाद में ही हुई थी, इसलिए राधा के मोबाइल फोन के रिकौर्ड के आधार पर पुलिस ने उन लोगों से पूछताछ शुरू कर दी, जिन्होंने घटना वाले दिन राधा से फोन पर बात की थी. लेकिन इस से कोई खास जानकारी पुलिस के सामने नहीं आई. हां, यह जरूर पता चला कि राधा की हत्या में 2 युवक शामिल थे, जो घटना के बाद अलगअलग दिशा में भागे थे. इन में से एक बदमाश का स्थानीय लोगों ने पीछा भी किया था, मगर वह चारइमली की तरफ भागते हुए एकांत पार्क के पास बहने वाले नाले में कूद कर फरार हो गया था.

पुलिस की जांच चल ही रही थी कि इसी बीच 21 मार्च, 2020 को जनता कर्फ्यू लगा दिया गया. जबकि लौकडाउन से ठीक पहले 23 मार्च को एक कबाड़ का व्यापार करने वाले व्यक्ति ने हबीबगंज पुलिस को एकांत पार्क के पास नाले में लाश पड़ी होने की खबर दी थी. एकांत पार्क के पास बहने वाला नाला चूना भट्ठी और हबीबगंज थाने की सीमा बांटता है. ऐसे में हबीबगंज पुलिस ने जा कर नाले से लाश बरामद की, जिस के पास एक मोबाइल फोन भी मिला. लाश कीचड़ में सनी हुई थी और वह लगभग सड़ने की स्थिति में आ चुकी थी. इसलिए जब पुलिस ने उस के मोबाइल में पड़ी सिम के आधार पर पहचान करने की कोशिश की तो जल्द ही उस की पहचान अभिषेक पुत्र कालू कौशल के रूप में हो गई.

बाबानगर शाहपुरा का रहने वाला अभिषेक हिस्ट्रीशीटर बदमाश था, इसलिए पुलिस को लगा कि उस की हत्या की गई होगी. शव की कलाई पर धारदार हथियार के चोट के निशान भी थे. साथ ही जहां लाश मिली थी, वहां नाले की दीवार के पास चूनाभट्ठी थाने की सीमा में खून भी गिरा था. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि नाले में अभिषेक चूनाभट्ठी की तरफ से गिरा है. इसलिए जब चूनाभट्ठी थाने से संपर्क किया गया तो एसडीपीओ रिचा जैन को 18 मार्च की वह घटना याद आ गई, जिस में लोगों ने बताया था कि राधा यादव का एक हत्यारा पीछा कर रही भीड़ से बचने के लिए नाले में कूद गया था.

कहीं अभिषेक कौशल ही तो राधा का हत्यारा नहीं? यही सोच कर सीएसपी भूपेंद्र सिंह ने नाले के पास मिले खून के नमूनों को घटनास्थल के पास गली में मिले खून से मिलान के लिए भेज दिया. जिस में पता चला कि गली में मिला खून और नाले के पास गिरा खून एक ही व्यक्ति का है. इस से यह साफ हो गया कि 18 मार्च की रात राधा यादव की हत्या कर फरार होने के लिए नाले में कूदने वाला बदमाश कोई और नहीं, बल्कि अभिषेक ही था जो दलदल में फंस कर मर गया था. इसलिए पुलिस ने अभिषेक के मोबाइल की कालडिटेल्स निकाली, जिस में पता चला कि घटना वाले दिन उस की कई बार कोलार कालोनी निवासी अजय निरगुडे से बात हुई थी.

यही नहीं, घटना के समय अजय और अभिषेक दोनों के फोन की लोकेशन एक साथ उसी स्थान की थी, जहां राधा यादव का कत्ल हुआ था. अजय की तलाश की गई तो पता चला कि अजय 18 मार्च, 2020 से लापता है. 18 मार्च को ही राधा की हत्या हुई थी. इस से पुलिस को पूरा भरोसा हो गया कि अजय ही अभिषेक के साथ राधा की हत्या में शामिल था. चूंकि घटना के 4 दिन बाद से ही देश में लौकडाउन लग गया था, इस से पुलिस का काम थोड़ा मुश्किल हो गया. लेकिन एसपी (साउथ) साई कृष्णा के निर्देश पर चूनाभट्ठी पुलिस दूसरी जिम्मेदारियों के साथ अजय की तलाश में जुटी रही.

क्योंकि उसे भरोसा था कि जब तक नाले में अभिषेक की लाश बरामद नहीं हुई थी, तब तक अजय ने भोपाल से भागने की कोई जरूरत ही नहीं समझी होगी. फिर अभिषेक की लाश मिलने के साथ ही देश में ट्रेन बस सब बंद हो गई थी, इसलिए अजय कहीं बाहर नहीं गया होगा, शायद वह भोपाल के आसपास ही कहीं छिपा होगा. उस का पता लगाने के लिए पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी लगा दिया. इस कवायद का नतीजा यह निकला कि घटना के 7 हफ्ते बाद पुलिस को खबर मिली कि अजय ईदगाह हिल्स पर अपनी ससुराल पक्ष के एक रिश्तेदार के घर पर छिपा है.

पुलिस टीम ने वहां छापामारी कर आराम से सो रहे अजय को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में अजय पहले तो इस मामले में कुछ भी जानने से इंकार करता रहा लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सी ही सख्ती दिखाई तो उस ने सुपारी ले कर राधा की हत्या करने की बात कबूल कर ली. उस ने बताया कि 4 महिलाओं रेखा हरियाले, सुनीता प्रजापति, गुलाबबाई प्रजापति और सुलोचना ने राधा की हत्या के लिए उसे एक लाख 80 हजार रुपए की सुपारी देने के साथ 20 हजार रुपए एडवांस में भी दिए थे. पूरे मामले में कोलार कालोनी में राधा के एजेंट के तौर पर काम करने वाला ताराचंद मेहरा एवं उस का भतीजा मनोज भी शामिल था,

सो पुलिस ने तत्काल छापामारी कर सभी को गिरफ्तार कर लिया. जिस के बाद राधा हत्याकांड की कहानी इस प्रकार सामने आई. पंचवटी कालोनी करोंद निवासी राधा यादव कई साल से भोपाल की गरीब बस्तियों में ब्याज पर पैसा देने का काम करती थी. उस का पति एलआईसी में नौकरी करता था. लेकिन किसी वजह से उस की नौकरी छूट गई. राधा के 2 बेटे हैं, जिन की उम्र इस समय 16 और 18 साल है. राधा का पति शराब था, जिस की वजह से पति का उस से झगड़ा होता रहता था. फिर एक दिन ऐसा आया कि पति उसे छोड़ कर कहीं चला गया तो अब तक नहीं लौटा. अपने एकलौते बेटे के घर छोड़ कर चले जाने पर ताराचंद को गहरा सदमा लगा जिस से उन की भी मृत्यु हो गई.

ससुर ताराचंद की मृत्यु के बाद राधा ने उन की खेती की 10-12 बीघा जमीन बेच कर ब्याज पर पैसे देने शुरू कर दिए. लोगों की मानें तो राधा का पूरे भोपाल में 50 लाख से अधिक और अकेली कोलार कालोनी में 20 लाख से अधिक रुपया ब्याज पर चल रहा था. इलाके के लोग राधा को सिंघम चाची कहते थे. राधा अपने दिए पैसों पर मोटा ब्याज वसूलती थी. उसे अपना पैसा वसूल करना भी अच्छी तरह से आता था. लोगों का कहना है कि जो एक बार राधा का कर्जदार हो गया, वह फिर उस कर्ज से नहीं उबर पाया. कर्ज वसूलने का उस का अपना हिसाब था, जिस के अनुसार आदमी का कर्ज कभी पूरा नहीं हो पाता था. इस पर कोई अगर उस का विरोध करता तो राधा गुंडई करने से भी बाज नहीं आती थी.

कर्जदार की कार, आटो भी वह खड़ेखड़े नीलाम कर देती थी और कोई उस का कुछ नहीं कर पाता था. पकड़े गए आरोपियों में से ताराचंद मेहरा कोलार कालोनी में राधा के एजेंट के तौर पर काम करता था. जानकारी के अनुसार राधा ने अकेले उस के माध्यम से ही इस कालोनी में 8 लाख से ज्यादा का कर्ज बांट रखा था. बाकी सभी आरोपी राधा के कर्जदार हैं, जो उस के हाथ कई बार जलील भी किए जा चुके थे. आरोपी महिलाओं ने बताया कि राधा से उन्होंने जितना पैसा कर्ज में लिया था, उस का कई गुना अधिक वे ब्याज के तौर पर वापस कर चुकी थीं.

लेकिन इस के बाद भी राधा आए दिन पैसे वसूलने उन के दरवाजे पर आ कर गालीगलौज करती थी. इस से वे तंग आ चुकी थीं. उन्होंने जब तक राधा जिंदा है, तब तक उस का कर्ज कभी नहीं चुका सकतीं. यही सोच कर उन्होंने राधा की हत्या करवाने की सोच कर अजय से बात की. शाहपुरा का नामी बदमाश अभिषेक अजय निरगुड़े का मुंहबोला साला था. अजय ने अभिषेक से बात की, जिस से एक लाख 80 हजार रुपए में राधा की हत्या का सौदा तय कर दिया. इस काम में राधा का एजेंट ताराचंद और उस का भतीजा मनोज भी साथ देने को राजी हो गए.

योजनानुसार घटना वाले दिन रेखा ने राधा को फोन कर चाय पीने के लिए अपने घर बुलाया. राधा लगभग रोज ही ब्याज की वसूली करने के लिए कालोनी में आती थी, सो रेखा का फोन सुन कर वह उस के घर पहुंच गई, जहां चाय पीने के दौरान ताराचंद ने रेखा को फोन कर ब्याज का पैसा लेने के लिए बुलाया. इसलिए रेखा के घर से उठ कर राधा ताराचंद के घर की तरफ जाने लगी. वास्तव में आरोपियों को मालूम था कि राधा, रेखा के घर से ताराचंद के घर जाने के लिए संकरी गलियों से हो कर गुजरेगी. इसलिए रास्ते में अजय और अभिषेक घात लगा कर बैठ गए और रेखा के वहां आते ही दोनों ने मिल कर चाकू से उस की हत्या कर दी.

रेखा की चीखपुकार सुन कर कालोनी के लोग बाहर निकल आए, लेकिन गलियों से परिचित होने के कारण अजय तो आसानी से मौके से फरार हो गया, जबकि अभिषेक को पकड़ने के लिए भीड़ उस के पीछे पड़ गई. भीड़ ने अभिषेक को पकड़ लिया. भीड़ में मौजूद किसी व्यक्ति ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया, जिस से उस की कलाई कट गई. उसी दौरान किसी तरह अभिषेक भीड़ से भाग गया और नाले के पास एक पेड़ के पीछे छिप गया. जब भीड़ उस की तरफ आई तो वह पकड़े जाने से बचने के लिए नाले में कूद गया, जहां नाले के दलदल मे फंस कर उस की मौत हो गई. बाद में पुलिस को मिली अभिषेक की लाश ही राधा यादव के हत्यारों तक पहुंचने की सीढ़ी बनी.