Extramarital Affair : पति की सेज पर यार का धमाल

Extramarital Affair : औरत कब और कहां बहक जाए, कहा नहीं जा सकता. सब कुछ ठीकठाक होते हुए भी मालती ने पति फेरन के दोस्त रामऔतार  से अवैध संबंध बना लिए थे. इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि मालती ने पति की सेज पर धमाल मचाने वाले यार रामऔतार के साथ मिल कर पति को कंकाल में बदल दिया…

माना कि शराब की लत बुरी होती है, लेकिन उस से भी बुरा होता है वासना का नशा. अगर पति और पत्नी दोनों इन आदतों के शिकार हो जाएं तब तो उन की जिंदगी की गाड़ी को पटरी से उतरने से कोई नहीं रोक सकता. ऐसा ही हुआ मालती और उस के पति फेरन के साथ. पति को नशे की लत थी और पत्नी अनैतिकता की मस्ती में ऐसी डूबी कि उस ने पतिपत्नी के रिश्ते को वासना की आग में झोंक दिया था. एक दिन बाजार से घर के कुछ जरूरी सामान की खरीदारी कर मालती तेज कदमों से अपने घर लौट रही थी. पीछे से साइकिल चला कर आते रामऔतार ने उसे रोका, ‘‘पैदल क्यों चल रही हो, पीछे कैरियर पर बैठ जाओ.’’ रामऔतार उस के गांव का ही रहने वाला युवक था.

‘‘अरे, नहींनहीं, तुम जाओ. गांव वाले देखेंगे तो गलत समझेंगे.’’ मालती ने उस से कहा.

‘‘गलत समझेंगे तो क्या हुआ. हम कौन भला सच्चे हैं.’’ रामऔतार बोला.

‘‘सब की नजरों में तो अच्छे हैं. पति घर आ चुका होगा. 2 हफ्ते बाद काम पर गया है.’’ मालती बोली.

‘‘अच्छा कोई बात नहीं. अपना थैला मुझे दे दो. और हां, फेरन को बोलना कि मैं शाम के 7 बजे तक आऊंगा. मैं ने उस के लिए एक बोतल खरीदी है.’’ कहते हुए रामऔतार ने मालती के हाथ से सब्जी और सामान का थैला ले लिया. उसे कैरियर पर एक हाथ से बांधने लगा, क्योंकि एक हाथ से वह विकलांग था.

‘‘तुम एक हाथ से कैसे सब काम कर लेते हो, मुझे देख कर हैरत होती है,’’ देख कर मालती बोली.

‘‘इस में हैरानी की क्या बात है, यह तो तुम्हारा प्यार है, जो तुम्हें देख कर हिम्मत आ जाती है.’’ रामऔतार उस के गाल को छूते हुए बोला.

मालती शरमा गई. बोली, ‘‘बसबस, मैं चलती हूं तुम कितना खयाल रखते हो मेरा.’’

‘‘मैं तुम्हारा सामान दरवाजे की बगल में रख कर टोकरी से ढंक कर रख दूंगा,’’ कह कर रामऔतार वहां से चला गया.

मालती खाली हाथ सड़क किनारे चलती हुई पैडल मारते रामऔतार को देखती रही. निश्चित तौर पर वह रामऔतार के बारे में ही सोचने लगी थी. मालती उसे पिछले 7 सालों से जानती थी. वह उस के पति फेरन का जिगरी दोस्त था. उस के घर से कुछ मकान छोड़ कर वह दूसरे टोले में रहता था. एक हाथ से विकलांग होने के बावजूद वह खेतीकिसानी से ले कर घर का सारा कामकाज खुद करता था. उस की शादी नहीं हुई थी. परिवार में वह अकेला था. उस की दूसरे रिश्तेदारों से जरा भी नहीं पटती थी. यही कारण था कि उस का दोस्त फेरन के घर निर्बाध रूप से आनाजाना लगा रहता था. मालती भी उस के घर बेरोकटोक आतीजाती थी. उस के यहां वह झाड़ू और साफसफाई जैसे घरेलू काम को अपने घर का कामकाज समझ निपटा दिया करती थी.

फेरन को इस का जरा भी बुरा नहीं लगता था. रामऔतार की एक ही लत थी शराब पीने की. कहते हैं कि यह लत फेरन ने ही उसे लगाई थी. हालांकि सालों से शराब का इंतजाम करने का काम रामऔतार ही करता आ रहा था. उस रोज भी वह अपने दोस्त के लिए एक बोतल शराब खरीद लाया था. मालती अंधेरा होने से पहले अपने घर पहुंच गई थी, उस का पति भी काम से लौट आया था.

‘‘कितने दिनों का काम मिला है?’’ मालती ने सामान का थैला उठाते हुए पति ने पूछा.

‘‘2 हफ्ते का है, लेकिन ठेकेदार पैसा कम दे रहा है. कहता है लौकडाउन में काम कम हो गया है.’’ फेरन ने बताया.

‘‘कोई बात नहीं, घर में कुछ तो आएगा, बैठे रहने से तो अच्छा है.’’ मालती लंबी सांस लेते हुई बोली.

‘‘आज कुछ अच्छा मसालेदार खाना पकाओ.’’ फेरन ने कहा.

‘‘हांहां, क्यों नहीं! तुम्हारा दोस्त भी आने वाला होगा, काम मिलने की खुशी में उस के साथ जश्न मनाना.’’ मालती ने चुटकी ली.

इसी बीच रामऔतार ने दरवाजे पर आवाज दी.

‘‘लो, आ गया तुम्हार यार!’’ मालती कह कर हंसने लगी.

रामऔतार के आने के बाद कुछ देर में ही घर के आंगन में फेरन और रामऔतार की दारू की महफिल सज गई थी. खाने को 3 तरह के नमकीन थे. बड़ी बोतल के साथ रखे 2 गिलासों में शराब खाली होने का नाम ही नहीं ले रहा था. जैसे ही फेरन का गिलास खाली होता, रामऔतार उस में और शराब डाल देता था. मक्के की मोटी रोटी के एक टुकड़े के साथ चटखारेदार सब्जी का आनंद लेते हुए सहज बोल पड़ता कि मीट होती तो और भी मजा आ जाता. मालती भी पति रामऔतार के गिलास से ही फेरन की नजर बचा कर एकदो घूंट पी लेती थी. धीरेधीरे दोनों दोस्त नशे में झूमने लगे थे, लेकिन फेरन पर नशा अधिक चढ़ गया था. वह एक ओर मुंह नीचे कर बड़बड़ाने लगा,

‘‘रामऔतार तू मेरा बहुत अच्छा यार है, इस कड़की में भी तूने मुझे अच्छी दारू पिलाई. मजा आ गया.’’

‘‘तू पैसे और काम की चिंता मत कर, जब तक तेरा दोस्त है तब तक दारू पिलाएगा. और अच्छीअच्छी विदेशी दारू भी पिलाएगा.’’ रामऔतार यह कहते हुए बगल में खड़ी मालती का हाथ खींच कर बिठा लिया. मालती के बैठने के धम्म की आवाज सुन कर फेरन बोला, ‘‘कौन मालती है? जरा मुझे पकड़ कर उठाना, पैर भर गया है. पेशाब करने जाना है.’’

मालती ने बैठेबैठे फेरन को हाथ का सहारा दिया. वह उठ कर कुछ पल खड़ा रह कर बोला, ‘‘अब ठीक है, मैं अभी आया.’’

यह कहता हुआ पेशाब करने के लिए घर से बाहर नाले के पास चला गया. उस के जाते ही रामऔतार ने ममता के कमर में हाथ डाल दिया. इस अंदेशे से बेखबर मालती बोल उठी, ‘‘अरे, क्या करते हो?’’

‘‘कुछ नहीं, थोड़ा प्यार करने का मन हो आया है. ये लो एक घूंट और पी लो.’’ रामऔतार ने कमर से हाथ निकाल कर अपने शराब का गिलास उस की होंठ से लगा दिया. मालती भी बिना किसी झिझक के घूंट पीने लगी. रामऔतार ने तुरंत उस का गाल को चूम लिया. मालती थोड़ी असहज हो गई.

‘‘इतना बेचैन क्यों हो रहे हो. 2 दिन पहले ही तो तुम ने…’’ मालती की बात पूरी करने से पहले ही फेरन ने आवाज दी. उस ने कहा कि वह सोने जा रहा है, अब और दारू नहीं पिएगा.

उस के बाद फेरन अपने कमरे की ओर चला गया. मालती उठी और बाहर का दरवाजा बंद कर लिया. रामऔतार ने अपने गिलास में कुछ और शराब डाली. ममता भी वहीं आ कर खाने के लिए रोटियां तोड़ने लगी. रामऔतार ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी और खींच लिया. बगैर विरोध किए मालती उस की ओर खिसक आई. दूसरे हाथ से उस ने पास जल रही लालटेन की लौ धीमी कर दी. अगले पल मालती का सिर रामऔतार की गोद में था और रामऔतार के हाथ उस के नाजुक शरीर पर रेंगने लगे थे. जल्द ही दोनों बेकाबू हो गए. वासना की आग में जल उठे.

कुछ समय में वे एकदूसरे की कामाग्नि शांत कर निढाल हो चुके थे. मालती को होश तब आया जब फेरन ने उसे लात मारी. हड़बड़ा कर उठी. कपड़े समेटने लगी. कुछ कपड़ों पर रामऔतार बेसुध लेटा हुआ था, ब्लाउज और ब्रा उस ने खींच कर निकाला. फेरन यह सब देख कर गुस्से में तमतमा रहा था, उस के उठते ही फेरन ने पत्नी मालती के बाल पकड़ लिए. गुस्से में बदजात, बेहया, बदलचन बोलता हुआ भद्दीभद्दी गालियां देने लगा. आधी रात का समय था. फेरन को गुस्से में देख कर रामऔतार मामला समझ गया. कुछ कहेसुने बगैर वह चुपके से निकल गया. उस के जाते ही फेरन ने लातघूंसों से मालती की जम कर पिटाई कर दी. उसे तब तक पीटता रहा जब तक वह थक नहीं गया.

अगले दिन सुबह मालती चुपचाप आंगन में पड़ी रात की गंदगी को साफ करने लगी. थोड़ी देर में रामऔतार भी आ गया. वह आते ही चुपचाप दातून करते फेरन के पैरों पर गिर पड़ा. फेरन ने उसे झटक दिया. गुस्से में बोला, ‘‘तूने मेरी पीठ में खंजर घोंपा. बहुत बुरा किया. अब देखना मैं तुम्हारे साथ क्या करता हूं.’’

रामऔतार ने मालती की ओर देखा. इस से पहले कि वह कुछ बोलता, मालती ने उसे चुप रहने और चले जाने का इशारा किया. थोड़ी देर में फेरन बिना कुछ खाएपिए घर से निकल पड़ा. भारत की आजादी के जश्न का दिन था. कोरोना काल की वजह से भितरवार थाने में सादगी के साथ 15 अगस्त 2020 का झंडा फहराने का कार्यक्रम संपन्न हो चुका था. दोपहर का समय था. थानाप्रभारी पंकज त्यागी रोजाना की तरह ड्यूटी पर मौजूद थे. मालती बदहवास घबराई हुई थाने आई. आते ही फफकफफक कर रोने लगी. पूछने पर उस ने बताया कि पिछले 9 दिन से उस के पति का कुछ पता नहीं चल पा रहा है, वह 6 अगस्त से ही लापता है. उस की कई जगहों पर  तलाश की जा चुकी है, लेकिन कोई पता नहीं चल पा रहा है.

उस ने बताया कि वह 6 अगस्त को काम पर निकले थे. उस के बाद वह घर नहीं लौटे. उस ने बताया कि उन के पास पुराना मोबाइल फोन था, लेकिन वह बंद आ रहा है. हो सकता है खराब हो गया हो. इसी के साथ मालती किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए थाने में रोने लगी. थाना प्रभारी ने उसे ढांढस बंधाते हुए जल्द ही पता लगाने का आश्वासन दिया. उन्होंने उस के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कर ली. इसी के साथ उसे भी कहा कि पति के बारे में जो भी बात मालूम हो, वह थाने में तुरंत बताए. उस के बाद हर दूसरे दिन मालती थाने आती और अपने पति के बारे में पूछती थी.

एक दिन थाने में मालती पति को ले कर जोरजोर से हायहाय कर रोने लगी. देर तक थाने में हंगामा होता रहा. महिला पुलिसकर्मी ने उसे चुप कराया, खाना खिलाया. थानाप्रभारी ने उसे बताया कि उन्होंने उस के पति की तलाश के लिए कई लोगों से पूछताछ की है. काम देने वाले ठेकेदार से भी फेरन के बारे में पूछा गया है, उस के एक खास दोस्त रामऔतार से पूछताछ बाकी थी. पुलिस ने तय कर लिया था कि कोई संदिग्ध सुराग हाथ लगते ही रामऔतार को भी थाने बुला कर उस से पूछताछ की जाएगी. इस काम के लिए थानाप्रभारी ने कई भरोसेमंद मुखबिर भी लगा दिए.

कई महीने बीतने पर भी फेरन का कुछ पता नहीं चला. धीरेधीरे उस की गुमशुदगी की फाइल पर धूल जम गई. उस के ऊपर कई दूसरी फाइलें रख दी गईं. किंतु मालती चुप नहीं बैठी. उस ने 14 सितंबर, 2020 को पुलिस पर पति को नहीं ढूंढने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी. इस पर कोर्ट ने ग्वालियर एसपी अमित सांघी को जांच के आदेश दिए. सांघी ने फेरन की गुमशुदगी के मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी (देहात) जयराज कुबेर के नेतृत्व में टीम गठित कर दी. इस के अलावा उन्होंने भितरवार एसडीओपी अभिनव बारंगे को भी इस केस को खोलने में लगा दिया.

यह मामला पुलिस के लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं था, क्योंकि पिछली तफ्तीश में पुलिस के हाथ कोई ऐसा तथ्य नहीं लग पाया था, जिस से पुलिस को कोई मदद मिल सके.  एसडीओपी  बारंगे ने इस सनसनीखेज मामले की 7 जुलाई, 2021 को नए सिरे से बारीकी से अध्ययन करते हुए जांच शुरू की. जांच की शुरुआत उस के अजीज दोस्त रामऔतार से हुई. थानाप्रभारी पंकज त्यागी को अपने साथ ले कर फेरन के गांव मोहनगढ़ गए. वहीं उस से फेरन के बारे में हर छोटीछोटी बातें पूछी गईं. उस से मिली कई जानकारियां काफी चौंकाने वाली थीं. उसी सिलसिले में मालूम हुआ कि फेरन की पत्नी मालती का चालचलन ठीक नहीं है.

फेरन के लापता होने वाले दिन से ही वह रामऔतार के घर पर रह रही है. जबकि इस बात का मालती ने पुलिस से जरा भी जिक्र तक नहीं किया था. यहां तक कि उस ने फेरन और रामऔतार के जिगरी दोस्त होने की बात तक नहीं बताई थी. पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. पंकज त्यागी ने 26 जुलाई, 2021 को रामऔतार को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. उस ने न तो फेरन के बारे में कोई खास नई जानकरी दी और न ही मालती से संबंध के बारे में कुछ बताया. उस ने अपने दोस्त के लापता होने पर काफी दुख भी जताया. मालती भी रामऔतार के फेरन का परम मित्र होने का वास्ता देती रही. दोनों की बातों पर भरोसा कर एसडीओपी ने उस दिन उन्हें छोड़ दिया, लेकिन टीआई भितरवार को दोनों पर चौकस नजर रखने को कहा.

दूसरे दिन एसडीओपी ने बिना वक्त गंवाए दूसरे राउंड की पूछताछ के लिए मालती और रामऔतार को फिर से बुलवा लिया. उन्होंने पूछताछ के लिए सब से पहले मालती को अपने कक्ष में बुलाया. उस से फेरन और रामऔतार के बारे में कई कोणों से पूछताछ की. हर सवाल का जवाब उस ने अपने सुहाग का हवाला दे कर कसम के साथ दिया. बातोंबातों में उस ने बोल दिया कि मैं अपने सुहाग को क्यों मिटाऊंगी? यही बात पुलिस के गले नहीं उतरी कि आखिर मालती के दिमाग में अपने सुहाग को मिटाने की बात क्यों आई? कहीं उस ने सच में ऐसा तो नहीं किया है? जरूर कुछ बात है, जो वह छिपा रही है.

2 दिनों बाद पुलिस ने मालती को फिर थाने बुलाया. वहां पहले से रामऔतार को देख कर वह चौंक पड़ी. उस के आते ही टीआई ने कड़कदार आवाज में कहा, ‘‘मुझे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ मालूम हो चुका है. अब तुम सब कुछ सचसच बता दो, वरना मुझे सच्चाई पता करने के लिए दूसरा रास्ता अख्तियार करना पडे़गा. और हां, तुम्हारे पति का सुराग मिल गया है.’’

‘‘क्या कहते हैं साहब, मेरा पति कहां है?’’ मालती खुद को संभालती हुई बोली. जब तक दूसरे पुलिसकर्मी ने रामऔतार को दूसरे कमरे में बुला लिया.

‘‘तुम्हारे बारे में रामऔतार ने बहुत सारी बातें बताई हैं.’’ यह कहते हुए जांच अधिकारी ने अंधेरे में तीर चलाया, जो निशाने पर जा लगा. मालती के चेहरे का रंग उड़ गया था.

‘‘क्या बोला साहब मेरे बारे में?’’ मालती डरती हुई बोली.

‘‘यह कि तुम पति से हमेशा झगड़ती रहती थी और वह उस की मारपीट से तुम्हें बचाया करता था.’’

‘‘किस मियांबीवी के बीच झगड़ा नहीं होता है, साहब?’’ मालती बोली.

‘‘तुम बातें मत बनाओ, सहीसही बताओ कि 6 अगस्त को तुम्हारा पति से झगड़ा हुआ था या नहीं?’’ जांच आधिकारी ने पूछा.

उसी वक्त एक पुलिसकर्मी आ कर बोला, ‘‘साब, रामऔतार ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है.’’

‘‘क्याऽऽ कैसा जुर्म?’’ मालती अचानक बोल पड़ी.

जांच अधिकारी बोले, ‘‘जुर्म कुबूला है रामऔतार ने तो तुम क्यों चौंक रही हो?’’ उस के बाद वह रामऔतार से पूछताछ करने चले गए. इधर मालती सिर झुकाए बैठी रही. एसडीओपी थोड़ी देर बाद रामऔतार को ले कर मालती के पास आए. उन्होंने मालती से कहा तुम्हारा सारा राज खुल गया है. उस का सबूत कुछ मिनटों में मिल जाएगा. इसलिए भलाई इसी में है कि तुम दोनों सब कुछ सचसच बता दो. कुछ देर में ही 2 पुलिसकर्मी एक ग्रामीण को ले कर आए. उसे देखते ही रामऔतार चौंक गया, लेकिन खुद को काबू में रखते चुप रहा. एसडीओपी रामऔतार से बोले, ‘‘इसे तो तुम पहचानते ही हो. शिवराज है. इस की एक गलती ने तुम्हारा भेद खोल दिया है.’’

मालती और रामऔतार चुप रहे. अब जांच अधिकारी ने कुछ बातें विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘इस के पास जो मोबाइल है, उस में तुम्हारे दोस्त और मालती के पति फेरन के मोबाइल का खास नंबर आ चुका है.  शिवराज का कहना है कि उस ने रामऔतार के साथ मिल कर फेरन की हत्या कर दी है. उस के बाद उस के मोबाइल के सिम को फेंक कर अपना नया सिम लगा लिया था, जिस से फेरन के मोबाइल का आईएमईआई नंबर एक्टिवेट हो गया और हमारी पहुंच उस तक हो गई.’’

इतना बताने के बाद जांच अधिकारी ने रामऔतार से कहा, ‘‘अब तुम सच बताओगे या मुझे कुछ और सख्ती दिखानी होगी.’’

‘‘तो फिर रामऔतार ने अभी तक जुर्म नहीं कुबूला था, आप लोगों ने मुझ से झूठ बोला.’’ मालती सहसा बोल पड़ी.

‘‘एक जुर्म करने वाला तुम्हारे सामने आ चुका है, दूसरा तुम्हारा प्रेमी रामऔतार है, जो अपनी सच्चाई बताएगा.’’

‘‘यदि पता होता तो मैं आप को अवश्य बता देता साहब. हम दोनों तो रोज मजदूरी करने साथ जाते थे. मेरी तो उस से खूब पटती थी.’’

रामऔतार का यह बोलना था कि थानाप्रभारी पंकज त्यागी का झन्नाटेदार थप्पड़ उस के गाल पर पड़ा. वह अपना गाल पकड़ कर बैठ गया. अभी बैठाबैठा कुछ सोच ही रहा था कि एसडीओपी अभिनव बारंगे बोले, ‘‘तुम्हारा इश्क किस से और किस हद तक है, यह सब मुझे जांच के दौरान पता चल चुका है. तुम ने फेरन को क्यों और किसलिए मारा, वह भी तुम्हारे सामने है.’’ उन्होंने मालती की ओर इशारा करते हुए कहा. यह सुन कर मालती ने शर्म से नजरें झुका लीं. उसे इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि टीवी पर क्राइम सीरियल देख कर बनाई कहानी का अंत इतनी आसानी से हो जाएगा और पुलिस उस से सच उगलवा लेगी.

तीर निशाने पर लगता देख एसडीओपी  ने बिना विलंब किए तपाक से कहा कि अब तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम दोनों साफसाफ बता दो कि फेरन की हत्या क्यों की? मुझे तुम्हारे मुंह से सच जानना है. मालती और रामऔतार लगातार पुलिस अधिकारियों द्वारा फेरन को ले कर पूछे जा रहे सवालों के जवाब देने में इस कदर उलझ गए कि उन्होंने उस की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करने में ही अपनी भलाई समझा. फेरन की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह पराए मर्द की चाहत में निर्दयता की पराकाष्ठा की कहानी बयां करती है. कोई सोच भी नहीं सकता था कि पत्नी अपने ही पति का अपने प्रेमी के साथ मिल कर कत्ल कर देगी. वह भी तब जब वह अपनी पत्नी को हर सुखसुविधाएं उपलब्ध कराता हो.

रामऔतार ने अपना गुनाह कुबूल करते हुए बताया कि उस ने अपनी प्रेमिका मालती के कहने पर अपने दोस्त शिवराज के साथ मिल कर  फेरन की हत्या की थी. पूछताछ में मालती ने बताया कि उस के और रामऔतार के बीच संबंध थे. पति ने उसे एक बार रंगेहाथों पकड़ लिया था. उस के बाद से उस के फेरन के साथ संबंध बिगड़ गए थे. इसे देख कर ही फेरन को रास्ते से हटाने के लिए उस की हत्या की योजना बनाई. योजना के तहत रामऔतार ने अपने दोस्त शिवराज को भी शामिल कर लिया. इस के लिए उस ने शिवराज को 5 हजार रुपए और शराब भी उपलब्ध कराई.

6 अगस्त, 2020 को फेरन अपने मामा के गांव निमाई गया हुआ था. वहां से उस के लौट कर घर आते समय रामऔतार और शिवराज ने उसे रास्ते में ही रोक लिया. फिर शराब पिलाने के बहाने से हस्तिनापुर क्षेत्र के चपरोली गांव के बाहर खेत में ले गए. वहीं तीनों ने शराब पी. रामऔतार और उस के दोस्त शिवराज ने जानबूझ कर फेरन को कुछ ज्यादा ही शराब पिला दी. जब उसे अधिक नशा हो गया, तब उन्होंने उस के सिर पर पत्थर और लोहे के पाइप से वार कर मौत के घाट उतार दिया. फिर उस की लाश शिवराज की बाइक पर ले जा कर कृपालपुर गांव में स्थित एक सूखे कुएं में फेंक दी. बाद में उस कुएं पर मिट्टी डाल कर पौधे लगा दिए गए.

तीनों को भरोसा था कि अब वे कभी भी फेरन की हत्या के मामले में पकडे़ नहीं जाएंगे. लेकिन इस बीच शिवराज ने यह गलती कर दी कि फेरन के मोबाइल में डाली सिम निकाल कर फेंक दी और उस में अपनी सिम डाल ली. मालती और रामऔतार की निशानदेही पर पुलिस द्वारा 26 जुलाई, 2021 को कुएं से फेरन का कंकाल बरामद कर लिया गया. बाद में वह डीएनए टेस्ट के लिए प्रयोगशाला भेज दिया. थाना हस्तिनापुर में हत्यारोपियों मालती, रामऔतार और शिवराज के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर तीनों अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया. Extramarital Affair

Love Story : इश्क का दरवाजा

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कर दी थी. करीब 25 वर्षीय विशाल एक बैंककर्मी था, जिस की लाश जिले में शारदा नहर के किनारे झाडि़यों में लावारिस हालत में पड़े ड्रम से मिली थी. लाश को एक प्लास्टिक के ड्रम में ठूंस कर पैक किया गया था. ड्रम पुरवा मार्ग पर स्थित बंद पड़ी एलए आयरन फैक्ट्री से एक किलोमीटर दूर सराय करियान गांव के पास गुजरने वाली नहर के किनारे पड़ा था. ड्रम से दुर्गंध आने की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी. सूचना के आधार पर ही खेड़ा चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह ने ड्रम को खुलवाया, जिस में से 25 वर्षीय युवक की रक्तरंजित लाश बरामद हुई.

वहीं पास में ही एक स्कूटी की चाबी भी मिली. पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और उस की शिनाख्त के लिए जिले के सभी थानों में सूचना प्रसारित करवा दी. उन्हीं दिनों नौबस्ता थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह विशाल अग्रवाल नामक युवक की तलाशी कर रहे थे. उस के लापता होने की सूचना अंशुल अग्रवाल ने दर्ज करवाई थी. वह अंशुल का छोटा भाई था. नौबस्ता थानाप्रभारी को दही थानाक्षेत्र में एक युवक की लाश बरामद होने की सूचना मिली तो वह अंशुल को साथ ले कर उन्नाव के थाना दही जा पहुंचे.

वहां पहुंच कर उन्होंने चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह से मुलाकात की. तब चौकीप्रभारी ने मोर्चरी ले जा कर बरामद लाश थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह और उन के साथ आए युवक अंशुल को दिखाई. अंशुल ने उस लाश की शिनाख्त अपने छोटे भाई विशाल अग्रवाल के रूप में की. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी नौबस्ता लौट आए. उन्होंने सब से पहले गुमशुदगी के मामले को हत्या में तरमीम कराया फिर वह हत्यारे की तलाश में जुट गए. उन्होंने पहले मृतक के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस का मोबाइल 7 सितंबर को रात 10 बजे के बाद स्विच्ड औफ हो गया था. उस मोबाइल से अंतिम बातचीत 8 बज कर 50 मिनट पर हुई थी, जबकि साढ़े 8 बजे उस पर एक मिस्ड काल भी आई थी. जांच का सिलसिला मोबाइल से मिली कुछ जानकारियों के साथ शुरू किया गया.

जिस नंबर से विशाल के मोबाइल पर काल की गई थी, वह नंबर सत्यम ओमर नाम के व्यक्ति का था. सत्यम कानपुर निवासी अनिल ओमर का बेटा था. पुलिस द्वारा उस मोबाइल नंबर पर काल की गई तो वह बंद मिला. फिर पुलिस ने नंबर से मिले पते पर दबिश दी, किंतु वहां सत्यम नहीं मिला. सिर्फ इतना मालूम हुआ कि वह इस पते पर ढाई साल पहले रहता था. हालांकि जल्द ही थानाप्रभारी को मुखबिरों से सत्यम के नए पते की जानकारी मिल गई. पता चला कि वह अब रामनारायण बाजार स्थित फ्लैट में रहता है. पुलिस को मुखबिर से उस के उस फ्लैट में उपस्थित रहने के समय का भी पता लग गया.

इस सूचना के आधार पर थानाप्रभारी ने क्राइम ब्रांच इंसपेक्टर छत्रपाल सिंह, उस्मानपुर चौकीइंचार्ज प्रमोद कुमार, बसंत विहार चौकीइंचार्ज मनीष कुमार, एसआई रवींद्र कुमार, हैडकांस्टेबल अरविंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, दीपू भारतीय, राजीव यादव, कांस्टेबल सौरभ पाडेय, महिला सिपाही पल्लवी के साथ उक्त फ्लैट पर दबिश दी. उस समय फ्लैट से 2 युवक सीढि़यों से उतर रहे थे. पुलिसकर्मियों को देखते ही दोनों भागने लगे, लेकिन वे पकड़ लिए गए. पुलिस दोनों को ले कर उस फ्लैट में गई. उन से पूछताछ करने पर एक युवक ने अपना नाम सत्यम ओमर, जबकि दूसरे ने सरवन बताया. वहीं 16-17 साल की एक लड़की भी मौजूद थी. उस ने पुलिस को बताया कि वह सत्यम की मौसेरी बहन है और पास ही दूसरे मकान में रहती है. उस का नाम राधा (परिवर्तित) था.

उन से पूछताछ के बाद पुलिस ने फ्लैट के बारीकी से निरीक्षण में पाया कि कमरे की दीवारों को जगहजगह खुरचा गया है. इस का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि डिस्टेंपर करवाना है. यह बात पुलिस को हजम नहीं हुई, क्योंकि वहां डिस्टेंपर के लिए किसी तरह के इंतजाम कहीं नहीं दिखा. दीवारों पर खुरचने के निशान भी जहांतहां मिले. उस बारे में सभी ने हिचकिचाट के साथ बताया. थानाप्रभारी ने राधा के चेहरे पर भी गौर किया, जिस का रंग अचानक तब फीका पड़ गया था, जब उन्होंने कहा कि वे विशाल अग्रवाल की हत्या के सिलसिले में पूछताछ करने आए हैं. इस में उस ने साथ नहीं दिया तो वह भी मुश्किल में पड़ जाएगी. इसी के साथ थानाप्रभारी दोनों युवकों को विशेष पूछताछ के लिए थाने ले आए. उन्होंने सत्यम से सीधा सवाल किया, ‘‘तुम ने 7 सितंबर की शाम साढ़े 8 बजे विशाल को मिस्ड काल क्यों की थी?’’

इस का जवाब देते हुए सत्यम हकबकाता हुआ बोला, ‘‘वह नंबर मैं नहीं, मेरी मौसेरी बहन इस्तेमाल करती है. उसी से पूछना होगा.’’

‘‘वह विशाल को कैसे जानती है?’’ सिंह ने सवाल किया.

‘‘मुझे नहीं मालूम,’’ सत्यम बोला.

उस के बाद थानाप्रभारी को उस की मौसेरी बहन राधा भी संदिग्ध लगी. उन्होंने उसे भी तुरंत थाने बुलाया और पूछताछ शुरू की. उस से फोन काल के बारे में नहीं पूछा, बल्कि सीधे लहजे में पूछ लिया कि विशाल से उस के क्या संबंध थे. यह सवाल सुन कर सामने बैठे अपने भाई और उस के दोस्त सरवन को देख कर घबरा गई. उस के कुछ बोलने से पहले ही थानाप्रभारी ने समझाया, ‘‘तुम्हारे विशाल से जो भी संबंध रहे, वे उस की मौत के साथ खत्म हो गए. तुम्हारे भाई ने भी मुझे कई बातें बताई हैं, जिस से तुम पर भी उस की हत्या में साथ देने का शक है. मुझे पता है कि विशाल ने तुम्हारे मिस्ड काल के थोड़ी देर बाद फोन किया था. तुम सिर्फ इतना बता दो कि उस से तुम्हारी क्या बात हुई थी.’’

यह सुन कर राधा कभी पुलिस को देखती, तो कभी इधरउधर देखने के बहाने से सत्यम को देखने लगती. वह यह सोच कर भीतर से डर गई कि लगता है सरवन ने पुलिस को सब कुछ बता दिया. कुछ सेकेंड बाद सिंह ने फिर सवाल किया, ‘‘बताया नहीं, तुम्हारे विशाल से क्या संबंध थे?’’

‘‘सर, मैं उसे प्यार करती थी,’’ राधा धीमी आवाज में बोली.

‘‘इस का सत्यम को पता था?’’ सिंह ने पूछा.

‘‘नहीं,’’ राधा बोली.

‘‘क्यों?’’

‘‘मैं डर गई थी.’’

‘‘भाई से डर कर कुछ नहीं बताया था या फिर कुछ और बात है?’’

‘‘सर, मैं भाई से डरती थी, इसलिए नहीं बताया.’’ राधा बोली.

‘‘अच्छा चलो, अब यह बता दो कि 7 सितंबर की शाम को तुम्हारी विशाल से क्या बात हुई थी?’’

अलगअलग तरह से बदले हुए सवालों को सुन कर राधा पसीनेपसीने हो गई थी, दुपट्टे से पसीना पोछती हुई बोली, ‘‘उस से मिलना चाहती थी.’’

‘‘वह भी रात में! मिलने के लिए कहां बुलाया था?’’ सिंह ने पूछा.

‘‘भाई के फ्लैट पर,’’ राधा ने बताया.

‘‘क्यों, क्या उसे भाई से मिलवाना था? लेकिन भाई तो बोला कि वह उस दिन कहीं गया हुआ था. घर पर था ही नहीं.’’ थानाप्रभारी के सवालों से राधा खुद को घिरा महसूस करने लगी. कुछ भी नहीं बोल पाई. बीच में सत्यम कुछ बोलने को हुआ, तब थानाप्रभारी ने उसे डपट दिया. उस के बाद राधा रोने लगी. थानाप्रभारी ने तुरंत महिला सिपाही को एक गिलास पानी लाने के लिए कहा और खुद उठ कर अलमारी खोलने लगे. महिला सिपाही से पानी पीने के बाद सिंह एक बार फिर बोले, ‘‘सचसच बताओ, 7 सितंबर को तुम्हारे और विशाल के साथ क्याक्या हुआ? अभी मैं तुम से प्यार से पूछ रहा हूं, लेकिन मुझे सच्चाई बाहर निकलवाना भी आता है. देखो उसे, जिस ने तुम्हें पानी पिलाया है, वही तुम्हारे मुंह में अंगुली डाल कर सारी बातें भी निकलवा लेगी.’’ यह कहते हुए थानाप्रभारी ने सत्यम और सरवन को दूसरे कमरे में भेज दिया.

अब तक पुलिस दबाव में आ कर राधा पूरी तरह से टूट गई थी. उस ने विशाल के साथ अपने अवैध संबंध को स्वीकार करते हुए 7 सितंबर की पूरी घटना बता दी. फिर क्या था, जो बातें थानाप्रभारी ने सत्यम और सरवन से भी नहीं पूछी थीं और उन पर विशाल की हत्या का सिर्फ संदेह था, उस की पुष्टि राधा ने ही कर दी. थानाप्रभारी के लिए राधा द्वारा दी गई जानकारी बेहद महत्त्वपूर्ण थी. वह मुसकराए और राधा को महिला सिपाही के साथ बैठा कर सत्यम व सरवन के पास जा पहुंचे. उन से भी उन्होंने विशाल अग्रवाल की हत्या के संबंध में घुमाफिरा कर कई सवाल पूछे.

कुछ सवाल उन्होंने हवा में तीर की तरह चलाए. जबकि कुछ सवालों के साथ सबूत होने के दावे और राधा द्वारा बताए जाने की बातें कह कर उन्हें उलझा दिया. नतीजा यह हुआ कि सत्यम और सरवन भी टूट गए और उन्होंने विशाल हत्याकांड से ले कर उस की लाश को ठिकाने लगाने तक की बात बता दी. राधा, सरवन और सत्यम के द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के बाद सरवन ने विशाल के शव को फेंकने का खुलासा कर दिया. इस तरह राधा ने विशाल के साथ अनैतिक संबंध बनाते हुए रंगेहाथों पकड़े जाने से ले कर उस की हत्या संबंधी साक्ष्य मिटाने का जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस ने साक्ष्य को मजबूत बनाने के लिए राधा का वैजाइनल टेस्ट करवाया. साथ ही आरोपियों की निशानदेही पर विशाल अग्रवाल की स्कूटी, लैपटाप तथा हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड बरामद कर ली. य्याशी के चक्कर में जान गंवाने वाले बैंककर्मी विशाल की प्रेम कहानी इस प्रकार सामने आई—

उत्तर प्रदेश जिला कानपुर के थाना नौबस्ता अंतर्गत संजय नगर कालोनी मछिरिया में विष्णु प्रसाद अग्रवाल के 2 बेटे अंशुल (26 वर्ष) औरविशाल (25 वर्ष) के अलावा बेटी दिव्या (23 वर्ष) थी. इन में से विशाल कुंवारा था. वह भी अपने भाई अंशुल की तरह ही  बैंक मैनेजर था और मातापिता के साथ ही रहता था. स्वभाव से वह आशिक मिजाज था. जल्द ही किसी लड़की के पीछे पड़ जाता था. आकर्षक और सैक्स अपील होने के कारण कोई भी लड़की पहली ही नजर में उस की ओर आकर्षित हो जाती थी. उस के दिलफेंक होने के कारण ही वह किसी के साथ भी यौन संबंध बनाने से परहेज नहीं करता था. उस ने मौका पा कर राधा को भी अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था. उसे शादी के सपने दिखाते हुए ऐशोआराम की जिंदगी देने के वादे किए थे. राधा भी उस के प्रेम में फंस चुकी थी.

सत्यम ओमर अपने मातापिता के साथ पहले माहेश्वरी मोहाल में रहता था. बाद में उन के देहांत के बाद वह घंटाघर स्थित अपने मामा के यहां रहने लगा था. हालांकि 6 साल पहले उस के मामा की भी मृत्यु हो गई थी. उस की मामी अपने मायके में रहती थी, जिस कारण उस ने घंटाघर में ही एक फ्लैट किराए पर ले लिया था. वहीं विशाल अग्रवाल भी आताजाता था. बताते हैं कि वहां दोनों के एक बैंक में इंश्योरेंस का काम करने वाली युवती के साथ अवैध संबंध हो गए थे. विशाल और सत्यम के लिए वह युवती केवल मौजमस्ती का साधन भर थी. दोनों बदले में युवती को कुछ पैसे या गिफ्ट दे दिया करते थे.

वह फ्लैट सत्यम और विशाल के लिए मौजमस्ती का अड्डा बन कर रह गया था. कई बार वहां सरवन के साथ भी बैठकें होती थीं और पार्टी का दौर चलता था. उस फ्लैट पर एक और लड़की राधा का भी अकसर आनाजाना लगा रहता था. वह वहां बेधड़क आती थी और अधिकार के साथ कुछ समय वहां गुजार कर चली जाती थी. हालांकि वह दूसरे मोहल्ल्ले मनीराम बगिया में रहती थी. वास्तव में वह सत्यम की मौसेरी बहन थी. सत्यम ने एक चाबी राधा को भी दे रखी थी. वहीं करीब 2 साल पहले एक बार उस की विशाल से मुलाकात हो गई थी. पहली नजर में ही दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए थे.

विशाल राधा की खिलती किशोरावस्था को देख कर हतप्रभ रह गया था, जबकि राधा उस की बातें और माचो बदन की दीवानी बन गई थी. उस के बाद से विशाल और राधा अकसर साथसाथ घूमनेफिरने लगे थे, लेकिन दोनों सत्यम की नजरों से बच कर भी रहते थे. वे नहीं चाहते थे कि उन के प्रेम संबंध के बारे में सत्यम को कोई जानकारी हो. जल्द ही विशाल ने मौका पा कर राधा से शारीरिक संबंध भी बना लिए. राधा की भी उस में स्वीकृति मिल गई थी. सत्यम की गैरमौजूदगी में राधा विशाल को उसी फ्लैट पर बुला लेती थी.  7 सितंबर, 2021 को सत्यम ओमर ने राधा को फोन पर बताया था कि वह आज वहां नहीं आएगा. बाहर बालकनी में उस के कपड़े सूख गए होंगे, उन्हें अलमारी में रख दे. किचन और दूसरे कमरे के बिखरे सामान आ कर ठीक कर दे.

अपने भाई की बातों पर अमल करते हुए राधा ने अपने प्रेमी विशाल के साथ मौज करने की भी योजना बना ली. उस ने तुरंत फोन कर इस की सूचना विशाल को दी और शाम को खानेपीने का सामान ले कर फ्लैट पर आने को कहा. शाम होने से पहले वह फ्लैट पर चली गई, किचन और कमरे को दुरुस्त किया. तब तक शाम के साढ़े 8 बज चुके थे. अब तक विशाल को आ जाना चाहिए था, क्योंकि उस ने 8 बजे तक आने को कहा था. देर होने पर राधा ने विशाल को फोन किया, जिसे विशाल ने रिसीव नहीं किया. करीब 20 मिनट बाद विशाल ने फोन कर राधा को बताया कि वह पहुंचने वाला है. और फिर वह ठीक 9 बजे फ्लैट पर पहुंच गया. वहीं अपार्टमेंट की पार्किंग में उस ने अपनी स्कूटी भी लगा दी.

राधा उस का बेसब्री से इंतजार कर रही थी. उसे देखते ही वह उस के गले लग गई. दोनों अकेले में कई हफ्तों बाद मिले थे. इस मौके को किसी भी सूरत में गंवाना नहीं चाहते थे. राधा के लिए पूरी रात थी. विशाल भी खानेपीने के सामान के साथ आया था. दोनों बेफिक्र थे. मौजमस्ती के लिए पूरी तरह से तैयार और तत्पर भी थे. इसी तत्परता में उन से एक भूल हो गई. मुख्य दरवाजे की अंदर से कुंडी लगाना भूल गए. वे बैडरूम में थे. ड्राइंगरूम की ओर उन का जरा भी ध्यान नहीं था.

दोनों एकदूसरे पर प्यार की बौछार करते हुए कब यौनाचार में लीन हो गए, पता ही नहीं चला. दूसरी ओर वाटर प्लांट में काम समाप्त हो जाने पर सत्यम फ्लैट पर अचानक आ गया. फ्लैट का दरवाजा खुला होने पर वह सीधे ड्राइंगरूम में दाखिल हुआ. बैडरूम में रोशनी देख कर चौंक गया और वहां जा कर दरवाजे पर लगे परदे को हटाया. बैड पर अपनी बहन राधा के साथ विशाल को लिपटा देख सन्न रह गया. वे दोनों आंखें मूंदे इतने बेफिक्र थे कि सत्यम के दरवाजे पर आने की जरा भी आहट नहीं हुई. गुस्से की ज्वाला को दबाए सत्यम चुपचाप फ्लैट के नीचे आया.

नीचे से लोहे की रौड निकाली और ऊपर पहुंच कर राधा के आलिंगन में बंधे विशाल के सिर पर दे मारी. एक ही वार में सिर से खून बहने लगा. राधा अपनी जान बचाते हुए दूसरे कमरे में भागी. गुस्से में सत्यम ने विशाल के सिर पर दनादन 3-4 और वार कर दिए. सिर पर ताबड़तोड़ वार से विशाल की वहीं मौत हो गई. राधा के सामने ही विशाल की मौत हो गई थी, लेकिन वह डर गई थी कि कहीं सत्यम उसे भी न मार डाले. सत्यम ने डपटते हुए इस बारे में किसी को बताने की उसे सख्त हिदायत दे दी. उसे जल्दी से दीवार पर लगे खून के दाग मिटाने को कहा. उस के बाद तुरंत अपने दोस्त सरवन को बुलाया.

सरवन भागाभागा आया. लाश देख कर उस के होश उड़ गए, लेकिन जल्द ही सामान्य होने पर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. तब तक रात के साढ़े 11 बज गए थे. इसलिए सरवन योजना के अनुसार अगले रोज 8 सितंबर को प्लास्टिक का एक ड्रम खरीद लाया. उस में विशाल की लाश ठूंस कर पैक कर दी. ड्रम को उस पर लगी स्टील की स्ट्रिप से पैक कर दिया. उस के बाद ड्रम को विशाल की स्कूटी पर लादकर कैंट होते हुए जाजमऊ गंगापुल से दही थाने की खेड़ा चौकी क्षेत्र जा पहुंचे. उन्होंने ड्रम को नहर के पास झाडि़यों में फेंक दिया. साथ ही विशाल का मोबाइल फोन भी नहर में फेंक दिया. उस की स्कूटी से वापस कानपुर आ गए.

सत्यम ने विशाल की स्कूटी अपने यशोदा नगर स्थित प्लौट के पास पेड़ के नीचे खड़ी कर दी. जबकि उस के खून से सने कपड़ों को कूड़ाघर में फेंक आया. आरोपियों द्वारा अपना जुर्म स्वीकार कर लेने के बाद थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह ने आईपीसी की धारा 302/201/120बी के तहत हत्यारोपी सत्यम ओमर, सरवन किशोरी राधा को न्यायालय में पेश किया. वहां से सत्यम और सरवन को कानपुर के जिला कारागार भेज दिया गया, जबकि साक्ष्य छिपाने के आरोप में राधा को नारी निकेतन के सुरक्षा गृह में भेज दिया गया. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है तथा किशोरी राधा का नाम कल्पनिक है

 

UP Crime News : दहेज का लालच जिंदा जली निक्की

UP Crime News : एक तरफ पूरे देश में दहेज हत्या के झूठे मामलों में परिजनों को फंसाने जैसे अपराधों पर बहस छिड़ी है, वहीं इसी बीच ग्रेटर नोएडा में विपिन भाटी और उस के फेमिली वालों पर 27 वर्षीय पत्नी निक्की को जला कर मारने का आरोप लगा है. क्या वास्तव में निक्की दहेज लोभियों के लालच में जलाई गई या इस के पीछे की सच्चाई कुछ और है? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली यह कहानी.

दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के रूपवास गांव की रहने वाली निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन की शादी 27 दिसंबर, 2016 में ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में एक ही परिवार के 2 भाइयों से हुई थी. बड़े भाई रोहित से भिखारी सिंह की बड़ी बेटी कंचन और छोटे भाई विपिन से छोटी बेटी निक्की की शादी हुई थी. भिखारी सिंह पायला कभी गांव के बड़े काश्तकार थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा के विकास के साथ उन की जमीनें ग्रेटर नोएडा अथौरिटी ने अधिग्रहीत कर लीं.

मुआवजे के रूप में मिली करोड़ों की रकम ने भिखारी सिंह के परिवार की जिंदगी का कायाकल्प कर दिया. परिवार में पत्नी वसुंधरी के अलावा 2 बेटियां और 2 बेटे रोहित व अतुल थे. रोहित की 2016 में शादी भी हो चुकी है, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण अब उस की पत्नी मीनाक्षी अपने मायके में है.

दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में रहने वाले सत्यवीर सिंह के परिवार में पत्नी दयावती के अलावा 2 बेटे हैं रोहित व विपिन. सत्यवीर सिंह अपने गांव के एक छोटे काश्तकार थे. उन की हैसियत भिखारी सिंह जैसी तो नहीं थी, लेकिन उन की जमीन का भी कुछ मुआवजा मिला था, जिस से उन्होंने गांव में अच्छा सा घर बनवा लिया. साथ ही घर के बाहरी इलाके में कुछ दुकानें बना कर किराए पर दे दीं. इस के अलावा उन्होंने एक किराना की दुकान खुद भी खोल ली. इसी दुकान पर सत्यवीर व उन के दोनों बेटे रोहित और विपिन भी बैठने लगे. उन की आमदनी के बस यही जरिया था.

निक्की (27 वर्ष) व कंचन (29 वर्ष)  की शादी दोनों सगे भाइयों से तब हुई, जब देश में नोटबंदी के बाद ज्यादातर लोगों के पास नकदी की कमी थी. इसीलिए उस वक्त दोनों बहनों की शादी सादगीपूर्ण तरीके से जरूर हुई, लेकिन नोटबंदी के बावजूद भिखारी सिंह ने दिल खोल कर पैसा खर्च किया.

बाद में हालात सामान्य होने पर निक्की के पिता भिखारी सिंह ने शादी में दिए जाने वाले सामान की भरपाई कर दी. निक्की के पति को शादी के बाद एक स्कौर्पियो कार के अलावा आभूषण, नकदी और भोग विलास की हर चीज दी. वक्त धीरेधीरे गुजरता गया. निक्की की बहन कंचन के 2 बच्चे हुए. बेटी लाव्या (7 साल) व बेटा विनीत (4 साल), जबकि निक्की का एक बेटा है जो अब करीब 6 साल का है.

विपिन कोई काम नहीं करता था,  इसलिए निक्की ने कुछ साल पहले अपनी बहन के साथ मिल कर ससुराल के घर की ऊपरी मंजिल पर एक ब्यूटी पार्लर खोला था. पार्लर का काम काफी अच्छा चल रहा था, लेकिन ससुराल वालों के दबाव में कुछ ही महीने पहले उन्हें ब्यूटी पार्लर बंद करना पड़ा.

शादी के 9 साल बाद अचानक 21 अगस्त, 2025 की देर शाम को बड़ी बहन कंचन ने ग्रेटर नोएडा के पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि शाम करीब साढ़े 5 बजे उस की सास दयावती और देवर विपिन ने उस की बहन निक्की को ज्वलनशील पदार्थ डाल कर जला दिया है. सास ने अपने हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लिया और विपिन को पकड़ाया, जिसे विपिन ने निक्की के ऊपर डाल दिया. साथ ही निक्की के गले पर हमला किया. जिस के बाद उस की बहन बेहोश हो गई. जब मैं ने इस का विरोध किया तो मेरे साथ भी मारपीट की गई. कंचन ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उस का पति रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर मौके पर मौजूद थे.

गंभीर हालत में निक्की को पड़ोसियों की मदद से वह फोर्टिस हौस्पिटल एच्छर, ग्रेटर नोएडा ले गई, जहां हालत बिगडऩे पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. कंचन ने पुलिस को बताया कि जिस समय उस की बहन की हत्या की गई, वह मौके पर थी, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी.

बहन की मौत से गुस्साई कंचन ने अगली सुबह ससुरालियों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए कासना कोतवाली में तहरीर दे कर पिता सतवीर भाटी, सास दयावती और दोनों बेटों रोहित व विपिन के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या), 115(2) (चोट पहुंचाना) और 61(2) के तहत केस दर्ज कर दिया.

ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग के लिए निक्की की जला कर हत्या करने की खबर अगली सुबह पूरे नोएडा व एनसीआर के साथ गुर्जर समाज के बीच जंगल की आग की तरह फैल गई थी. जगहजगह निक्की के हत्यारों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग के लिए धरनेप्रर्दशन होने लगे. हाथों में ‘जस्टिस फौर निक्की बहन’ की तख्ती और बैनर ले कर दरजनों  बसों, कारों, ट्रैक्टर ट्रौली, दोपहिया ले कर सैकड़ों ग्रामीणों के साथ परिजन कासना कोतवाली जा पहुंचे. इस दौरान उन के साथ किसान संगठन और समाजवादी छात्र से जुड़े लोग भी रहे.

मृतका की बहन कंचन का साफ कहना था कि उस की बहन को कई दिनों से परेशान किया जा रहा था. साजिश के तहत जला कर उस की हत्या की गई है. उस का पति विपिन उस से पूरी रात मारपीट करता था. वह अपनी बहन को इंसाफ दिलाना चाहती है. जिस तरह से उस की बहन तड़पतड़प कर मरी, उसी तरह से आरोपियों को भी फांसी की सजा मिलनी चाहिए.

कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ल व ग्रेटर नोएडा जोन के एडिशनल डीसीपी सुधीर कुमार पर आरोपियों को पकडऩे का दबाव लगातार बढ़ रहा था. फेमिली वालों का सीधा आरोप था कि विपिन भाटी व उस के घर वाले निक्की को दहेज के लिए लगातार परेशान कर रहे थे. पिछले कुछ समय से वे निक्की पर दबाव डाल रहे थे कि जो मर्सिडीज गाड़ी भिखारी सिंह ने अपने लिए खरीदी है, वह उसे गिफ्ट की जाए तथा कामधंधा शुरू करने के लिए 35 लाख रुपए नकद दिए जाएं.

परिजनों का साफ आरोप है कि शादी के बाद से ही विपिन लगातार कुछ न कुछ मांग करता रहता था, लेकिन शादी के 9 साल बाद अब उस की मांगें पूरी करना उन के वश से बाहर हो गया था.

वायरल वीडियो से पेचीदा हुआ मामला

घटना के दौरान घर में मौजूद कंचन ने अपनी छोटी बहन के साथ मारपीट और आग के हवाले करने का वीडियो भी बनाया था. इस दौरान निक्की का बेटा भी मौजूद था. महिला को आग लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अगले दिन जम कर वायरल हो गया. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि विपिन और मृतका की सास निक्की के बाल खींच कर मारपीट करते हैं. साथ ही एक दूसरे वीडियो में आग लगने के दौरान निक्की सीढिय़ों से उतरती हुई दिख रही है.

वीडियो में देखा जा सकता है कि आग में झुलसने के दौरान उस के शरीर के कपड़े भी जल जाते हैं. वह पूरी तरह से झुलसने के बाद बदहवास हालत में जमीन पर बैठी है. वहीं एक अन्य वीडियो में निक्की के बेटे को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उस के पापा ने मम्मा को लाइटर से जलाया.

कंचन के बयान और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस पर दबाव इस कदर बढ़ा कि पुलिस की कई टीमें गठित कर दबिशें शुरू की गईं. परिणामस्वरूप निक्की की हत्या में नामजद चारों आरोपियों विपिन भाटी, उस के पिता सत्यवीर भाटी, भाई रोहित भाटी व मां दयावती को अलगअलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन विपिन भाटी को जब पुलिस ज्वलनशील पदार्थ बरामद करने के लिए ले जा रही थी तो उस ने एक दरोगा का रिवौल्वर छीन कर भागने की कोशिश की. विपिन ने पुलिस टीम पर फायर किया तो आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी फायर किया, जिस में पुलिस की गोली विपिन की टांग में लगी. इस के बाद विपिन पर एक अन्य केस भी दर्ज हो गया. लेकिन पुलिस हिरासत में विपिन ने जो बयान मीडिया को दिया, वह इशारा करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है. उस ने मीडिया से कहा कि उस ने अपनी पत्नी को नहीं जलाया और मारा, बाकी लड़ाईझगड़ा तो हर फेमिली में होता है. इस से ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा.

एक कत्ल 2 कहानी से गहराता रहस्य

निक्की भाटी मर्डर केस की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, नए सबूत, लोगों के बयान और कुछ नए वीडियो सामने आ रहे हैं, वैसेवैसे कहानी एक रहस्यमयी पहेली में बदलती जा रही है. 27 वर्षीय निक्की की मौत के बाद आरोपप्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. मायके वाले इसे साफसाफ दहेज हत्या करार दे रहे हैं. दूसरी तरफ आरोपी विपिन भाटी तथा उस के कुछ पड़ोसियों का कहना है कि दोनों के बीच तनाव की असली वजह सोशल मीडिया पर निक्की और कंचन की मौजूदगी थी.

इस केस की जांच कर रही कासना पुलिस असमंजस में है. अभी पुलिस भी मिले सबूतों के आधार पर पैसों और गाड़ी की मांग को ही हत्या की वजह मान रही है, लेकिन साथ ही पुलिस नए सिरे से जांच भी कर रही है. दरअसल, जांच टीम के सामने अब 2 परस्पर विरोधी कहानियां हैं.

पहली कहानी यह कि निक्की भाटी को उस के पति और ससुराल वाले लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त करते थे. उस से 35 लाख रुपए की मांग की जा रही थी और यही प्रताडऩा उस की मौत का कारण बनी. दूसरी कहानी यह है कि निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन इंस्टाग्राम पर रील्स बनाया करती थीं. यह बात उन के पति और ससुराल वालों को बुरी लगती थी. इस वजह से उन के बीच अकसर तनाव होता था, जो खूनी अंजाम तक पहुंच गया.

निक्की भाटी की ससुराल सिरसा गांव में है. उस के ससुराल के आसपास के लोगों का कहना है कि निक्की और कंचन अपने घर से छोटा ब्यूटी पार्लर चलाती थीं. इस के साथ ही दोनों बहनें इंस्टाग्राम पर मेकओवर रील्स बना कर पोस्ट करती थीं. इन रील्स में वे साधारण लुक से ट्रांजिशन कर तैयार और स्टाइलिश अंदाज में नजर आती थीं. ये रील्स उन के पतियों, विपिन और रोहित भाटी को नागवार गुजरती थीं. एक पड़ोसी ने बताया, रील्स बनाने को ले कर उन के बीच अकसर झगड़ा हुआ करता था.

बताया जा रहा है कि इसी साल 11 फरवरी को निक्की व विपिन और कंचन व रोहित के बीच जम कर झगड़ा हुआ था. इस दौरान दोनों बहनों के साथ मारपीट भी हुई थी. इस वजह से दोनों बहनें अपने मायके रूपबास गांव चली गई थीं.

लड़कियों को मायके में देख कर आसपास के लोग आवाज उठाने लगे तो पंचायत बैठाई गई. 18 मार्च, 2025 को सुलह इस शर्त पर हुई कि दोनों बहनें आगे से रील्स नहीं बनाएंगी. वे मान भी गईं, लेकिन चंद दिनों बाद दोनों ने फिर से वीडियो पोस्ट करना शुरू किया और तनाव दोबारा गहराने लगा.

विपिन भाटी के चचेरे भाई देवेंद्र ने बताया कि जिस समय घटना हुई, उस समय विपिन घर पर नहीं था. इधर, निक्की को जिस अस्पताल में भरती कराया गया था, उस अस्पताल की रिपोर्ट भी सामने आ गई है. उस में बताया गया है कि निक्की की मौत सिलेंडर फटने के कारण आग लगने से हुई है. हालांकि जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां सिलेंडर फटने के कोई सबूत नहीं मिले. पर ज्वलनशील पदार्थ का डिब्बा और लाइटर मिला है. वहीं, जिस वक्त घर में निक्की को आग लगी, उस वक्त के सीसीटीवी में उस का पति विपिन घर के पास एक दुकान के बाहर खड़ा दिखाई दे रहा है. इन तमाम सबूतों ने निक्की की मौत को बुरी तरह उलझा दिया है.

मौत की जांच में आया नया मोड़

नया मोड़ लेती निक्की भाटी की मौत में निक्की के कमरे से बरामद ज्वलनशील पदार्थ और कई नए वीडियो क्लिप ने पुलिस जांच की दिशा ही बदल दी है. अब नए सिरे इस घटना की जांच की जा रही है. इस मामले की जांच कर रही पुलिस को निक्की के कमरे से ज्वलनशील तरल पदार्थ बरामद हुआ, जिसे फोरैंसिक जांच के लिए भेजा गया. इस के साथ ही 21 अगस्त की घटना से जुड़े कई छोटे वीडियो क्लिप भी सामने आए हैं.

इन की वजह से पूरी जांच की दिशा बदल गई है. एक नया वीडियो सामने आया है, जिस में सास दयावती अपने बेटे विपिन और बहू निक्की को झगड़े के दौरान अलग करती नजर आ रही है. एक दूसरा वीडियो, जिसे निक्की की बहन कंचन ने शूट किया था, उस में एक आवाज सुनाई देती है, ‘ये क्या कर लिया.’ इस बयान और वीडियो के सामने आने के बाद अब नए सिरे से केस जांच की जा रही है. पुलिस जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज भी मिला है. इस में विपिन घटना से ठीक पहले अपने घर के बाहर खड़ा नजर आया है. इस के अलावा ग्रेटर नोएडा के जारचा इलाके में पिछले साल अक्तूबर में दर्ज एक पुराने मामले की भी जांच की जा रही है, जिस में विपिन पर प्रीति नामक लड़की के साथ मारपीट करने और उसे धमकी देने का आरोप लगा था.

इस के साथ ही एक निजी अस्पताल के मेमो के अनुसार निक्की घर में गैस सिलेंडर फटने से झुलसी थी. उसे विपिन का चचेरा भाई देवेंद्र अस्पताल ले कर पहुंचा था. वहीं दूसरी ओर बहन कंचन का आरोप है कि यह सुनियोजित दहेज हत्या थी. देवेंद्र का बयान भी मामले को उलझा रहा है. उस का कहना है कि निक्की बारबार पानी मांग रही थी. उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसी बीच निक्की और कंचन के पिता भिखारी सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन की बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला दिया गया.

पुलिस की जांच अब 3 बिंदुओं पर टिक गई है. पहला ज्वलनशील पदार्थ की फोरैंसिक रिपोर्ट, नए वीडियो क्लिप और कंचन के बदलते बयान. यही 3 कडिय़ां यह तय करेंगी कि निक्की की मौत गैस सिलेंडर हादसा थी या एक साजिश के तहत की गई दहेज हत्या. निक्की भाटी की डेथ मिस्ट्री उलझती क्यों जा रही है, इस का जवाब सिर्फ निक्की की मौत के सच से ही नहीं लगेगा, बल्कि निक्की की भाभी यानी भाई की पत्नी के आरोप भी इस मामले को उलझा रहे हैं.

यह मामला अब महज एक केस नहीं, परिवार के भीतर छिपी 2 सच्चाइयों की जंग का रूप ले चुका है. दरअसल, निक्की की भाभी मीनाक्षी ने कहा कि दहेज की आग ने उस की शादी को भी खत्म कर दिया है. मीनाक्षी का कहना है कि साल 2016 में भिखारी सिंह पायला के बेटे रोहित पायला से उस की शादी हुई. पिता ने दहेज में सियाज कार और 20 तोला सोना दिया. लेकिन एक्सीडेंट का बहाना बना कर कार एक हफ्ते में बेच दी गई.

इस के बाद ताने, मारपीट और अपमान का सिलसिला शुरू हुआ और इस की रफ्तार बढ़ती गई. सास और दोनों ननद उस के बाल पकड़ कर घसीटती थीं. पति भी मारपीट करता था. एक बार तो उस ने गोली तक चला दी. मीनाक्षी का आरोप सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं है. वह दोहरी नीति की बात करती है. वह कहती है, ”मुझे फोन रखने तक की इजाजत नहीं थी, लेकिन बेटियों के लिए पार्लर, सोशल मीडिया पर रील्स, इंस्टाग्राम, सब मंजूर था. यदि बहू के लिए नियम थे तो बेटियों के लिए क्यों नहीं? एक जैसी सख्ती क्यों नहीं?’’

मीनाक्षी के मुताबिक उस की शादी के 9 साल हो गए, लेकिन वह मुश्किल से 9 महीने ही ससुराल में रह पाई. दहेज पर पंचायतें बैठीं. एक नहीं, 100 बार पंचायत हुई. हर बार नतीजा यही कि बहू घर छोड़ दे. साल 2018 में दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज हुआ, लेकिन साल 2020 में दबाव और समझौते की राजनीति के बीच केस वापस लेना पड़ा. उसी साल पिता चल बसे. मीनाक्षी कहती है, ”जिस दिन पापा गए, उसी दिन मेरे लिए सब कुछ खत्म हो गया. मुझे बेघर कर दिया गया. मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो गईं. तब से मैं अपने मायके में हूं.’’

मीनाक्षी के सारे आरोपों के बीच ससुर भिखारी सिंह पायला जवाब देते हुए कहते हैं, ”मेरे बेटे रोहित ने कभी मीनाक्षी पर हाथ नहीं उठाया. मेरे पास सारे सबूत हैं. हमारे दरवाजे हमेशा मीनाक्षी के लिए खुले हैं. मीनाक्षी कभी भी आ कर यहां रह सकती है.’’ वे अपने परिवार के पक्ष में खड़े दिखते हैं और मीनाक्षी की बातों को साफतौर पर खारिज करते हैं. फिलहाल ग्रेटर नोएडा पुलिस नए सबूतों और बयानों के आधार पर इस केस की जांच नए सिरे से कर रही है. कंचन व निक्की के तीनों बच्चे अपने नाना के पास हैं. परिवार अब कंचन को भी उस की ससुराल में भेजना नहीं चाहता.

विरोधाभासी सबूतों के कारण कासना पुलिस भले ही विपिन भाटी व उस के परिजनों को निक्की भाटी की दहेज के लिए हत्या करने के आरोप में जेल भेज कर उन पर मुकदमा चलाए. लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी हो सकती है कि निक्की की मौत एक सोचीसमझी साजिश है. हो सकता है यह एक हादसा भी हो.

दहेज ने ली संजू की जान, बच्ची संग जल मरी

राजस्थान के जोधपुर में ग्रेटर नोएडा जैसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. यहां दहेज प्रताडऩा से तंग आ कर एक स्कूल टीचर ने अपनी मासूम बच्ची के साथ जान दे दी. पीडि़ता की पहचान 32 वर्षीय संजू बिश्नोई के रूप में हुई है. उस ने अपनी 3 साल की बेटी को गोद में ले कर पेट्रोल डाला और खुद को आग के हवाले कर दिया. बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उस ने अस्पताल में दम तोड़ दिया.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना 22 अगस्त, 2025 की है. महिला ने जब खुद को और अपनी बेटी को आग लगाई, उस वक्त उस का पति दिलीप बिश्नोई घर पर मौजूद नहीं था. अचानक धुआं उठता देख पड़ोसी घबराए और तुरंत महिला के पापा को फोन किया. जब परिवार घर पहुंचा तो उन्होंने संजू को जलती हालत में पाया. बच्ची ने उन की आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. मंडोर के एसीपी नागेंद्र कुमार ने बताया कि बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि महिला का जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को निधन हो गया. उस के पिता ने 24 अगस्त को स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई. इस में साफतौर पर आरोप लगाया गया कि उस की बेटी को लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त किया जा रहा था. इस से तंग आ कर बेटी ने बच्ची सहित जान दे दी.

पुलिस ने पीडि़ता के पिता की शिकायत के आधार पर उस के पति दिलीप बिश्नोई, सास, ससुर और ननद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पीडि़ता के फेमिली वालों ने यह भी आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने मिल कर संजू को आत्महत्या के लिए उकसाया. पुलिस को घटनास्थल से एक नोट भी बरामद हुआ है, जिस में संजू ने अपने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एसीपी ने बताया कि मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और जांच के लिए फोरैंसिक साइंस लैब भेजा गया है. मोबाइल से कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है.

बताया जा रहा है कि संजू बिश्नोई साल 2021 से एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में टीचर के पद पर तैनात थी. 10 साल पहले उस की शादी दिलीप बिश्नोई के साथ हुई थी. उसी समय से उस का पति और ससुराल वाले उसे प्रताडि़त कर रहे थे. पिछले कुछ समय से ससुराल वालों के साथ झगड़ा ज्यादा बढ़ गया था. शनिवार को भी उन के बीच विवाद हुआ था. इस की वजह से संजू बहुत नाराज और दुखी थी. उस ने स्कूल से वापस आने के बाद अपनी बच्ची को गोद में लिया और अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली. दोनों शवों का महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया.

गाड़ी न मिलने पर शालवी की बलि

बीहार के पश्चिमी चंपारण में बगहा जिले के चौतरवा थाना क्षेत्र के अहिरवलिया गांव में 24 अगस्त की रात दहेज के लिए एक विवाहिता शालवी देवी की हत्या का मामला प्रकाश में आया है. मृतका लगुनाहा-चौतरवा पंचायत की मुखिया शैल देवी की 23 वर्षीय बहू शालवी देवी थी.  घटना के संबंध में बताया जाता है कि मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही की शादी जनवरी, 2023 में शालवी के साथ धूमधाम से हुई थी. शादी के बाद शालवी अपनी ससुराल अहिरवलिया आई, जहां कुछ दिनों तक उसे ठीक से रखा गया.

इधर, मृतका के चाचा व बेतिया के सिकटा थाने के जगीरहा निवासी तथा बलथर पंचायत के मुखिया सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि 27 जनवरी, 2023 को उन की भतीजी शालवी की शादी अहिरवालिया निवासी स्व. घनश्याम शाही एवं वर्तमान मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही से हुई थी. शादी के बाद से ही चार पहिया वाहन की मांग को ले कर शालवी को बारबार प्रताडि़त किया जा रहा था. बीच में कई बार मेरे द्वारा अहिरवलिया आ कर मामले में दोनों परिवार के बीच कई बार पंचायत भी हुई. शालवी द्वारा बारबार फोन पर कहा जाता था कि आप लोग गाड़ी दे दीजिए. नहीं तो ये लोग मुझे मार डालेंगे.

2 महीने पहले अहिरवलिया आ कर अमित शाही से उन्होंने खुद कहा था कि मुझे 6 महीने का समय दीजिए, आप को मैं स्वयं गाड़ी दूंगा. अभी 2 माह भी नहीं हुए कि ससुराल वालों ने मेरी भतीजी को बड़ी बेरहमी से प्रताडि़त कर मार डाला. आरोप लगाया कि मेरी भतीजी के हत्यारों ने आंखें फोडऩे के बाद उस का हाथ भी तोड़ दिया था. संभावना है कि उस की हत्या तकिया से मुंह दबा कर की गई थी. कारण कि ससुराल का कोई भी व्यक्ति घर पर नहीं है. लोगों ने पुलिस को फोन किया. तब पुलिस ने पहुंच कर शव को अपने कब्जे में लिया है.

शादी के अभी मात्र 17 महीने हुए हैं. उसे 7 माह की एक बच्ची भी है. अस्पताल में डौ. अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय टीम डौ. अरुण कुमार, डौ. तारिक नदीम ने मृतका का पोस्टमार्टम किया. मामले में एसएचओ राहुल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता लग पाएगा. UP Crime News

 

 

Bihar Crime News : स्कूली प्रेमी कातिल बना

Bihar Crime News : 19 वर्षीय पूजा कुमारी और 21 वर्षीय अमित कुमार की दोस्ती उस समय से थी, जब वे स्कूल में साथसाथ पढ़ते थे. बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई, दोनों शादी करना चाहते थे. न चाहते हुए भी पूजा के पेरेंट्स बेटी की शादी अमित से कराने को राजी हो गए. इसी बीच एक दिन पूजा की रक्तरंजिश लाश मिली. कौन था पूजा का हत्यारा? उस की हत्या क्यों की गई? पढ़ें, लव क्राइम की यह स्टोरी.

25 वर्षीय अमित कुमार बिहार में नालंदा जिले के नगर थानाक्षेत्र स्थित कागजी मोहल्ले के विजय कुशवाहा के मकान में किराए पर अकेला ही रहता था. यहां रह कर वह एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता था. वह कई दिनों से बुरी तरह से परेशान दिख रहा था, इस की वजह से नौकरी पर जा नहीं रहा था और वह इस से हमेशाहमेशा के लिए निजात पाना चाहता था, इसीलिए उस ने अपने दोस्त विशाल को कमरे पर बुलाया था. यह 10 जून, 2025 की बात है.

जैसे ही विशाल कमरे पर पहुंचा तो अमित बोला, ”यार, तू मेरा कैसा दोस्त है, जो मुसीबत में मेरा साथ नहीं दे सकता? यदि तेरी जगह मैं ने किसी और से मदद की गुहार लगाई होती तो वो अपना कलेजा निकाल कर अब तक मेरी हथेलियों पर रख दिया होता. और एक तू है कि मेरी मदद करने की बजाए मेरी खिल्ली उड़ा रहा है.’’

”नहीं यार, मैं खिल्ली नहीं उड़ा रहा हूं, बल्कि यह सोच रहा हूं कि मैं तेरी मदद कैसे करूं…’’ विशाल ने सोचने वाली मुद्रा में जवाब दिया.

”मैं कुछ नहीं जानता, बस तू इस मुसीबत की घड़ी में मेरा साथ देगा या नहीं?’’

”मैं साथ देने के लिए तैयार हूं, तू बता मुझे करना क्या होगा?’’

”देख भाई, तू जानता है कि पूजा से मैं कितना प्यार करता हूं, उस के बिना जी नहीं सकता.’’

”हुआ क्या यह तो बता..?’’ विशाल ने हैरानी से पूछा.

”उसे मेरे दूसरे प्यार वाली बात पता चल गई है. जब से उसे ये पता चला है कि मेरा अफेयर कंचन से भी था और मैं ने उसे यूज कर के छोड़ दिया, तब से वह विद्रोह पर उतर आई है. अगर उस ने कुछ ऐसावैसा कर दिया तो मैं अपने फेमिली वालों और कालेज में क्या मुंह दिखाऊंगा. जिस कालेज में मैं ने प्रोफेसरों के सामने अच्छी रेपुटेशन बनाई है, सब खत्म हो जाएगी. यही सोच कर मैं बहुत परेशान हूं. तभी मैं ने तुझ से हेल्प मांगी है.’’

”हंू तो यह बात है.’’ विशाल ने सिर हिलाते हुए कहा.

”हां, यह मुसीबत मेरे गले की हड्डी बनती जा रही है. इसे रास्ते से हटाया नहीं तो मैं बरबाद हो जाऊंगा. इसलिए अपनी सेफ्टी के लिए उसे मारना होगा. इस के अलावा और कोई दूसरा रास्ता बचा नहीं है.’’ अमित ने विशाल से मदद करने की रिक्वेस्ट की.

”जो करना है तुझे करना है, मैं तो तेरे साथ परछाई बन कर खड़ा रहूंगा. अब तू ही बता, उसे कैसे रास्ते से हटाएगा.’’ विशाल ने अमित के सवाल का जवाब सवाल में दिया.

”देख भाई, इस में कोई शक नहीं, आज भी पूजा मुझ से उतना ही प्यार करती है जितना कल करती थी. लेकिन यह सच है कि उस के यकीन का बांध थोड़ा डगमगा सा गया है, पर कोई बात नहीं. मैं उसे विश्वास में ले कर मजबूती से अपने प्यार के धागे से बांधने की कोशिश करूंगा. जब उसे मुझ पर पक्का यकीन हो जाएगा कि अमित मिस्टर फ्लर्ट नहीं रहा, वह सचमुच बदल गया है, तब मैं अपनी चाल चल दूंगा यानी उसे खलास कर दूंगा.’’ उत्साहित हो कर विशाल ने अपना प्लान समझाया.

”कह तो ठीक ही रहा है, लेकिन पूजा तेरी बातों पर यकीन करेगी, इस की गारंटी क्या है?’’

”वह तू मुझ पर छोड़ दो, मैं जानता हूं उसे कैसे यकीन दिलाना है. अब आगे सुन.’’

”बोल, सुन रहा हूं मैं.’’

”मेरा प्लान यह है कि उसे मौत के घाट उतारने के बाद लाश बोरे में भर सूटकेस में डाल कर किसी ऐसी जगह फेंक देंगे, जहां उस के फरिश्ते भी नहीं पहुंच पाएंगे.’’

20 वर्षीया पूजा कुमारी अमित के बगल वाले कमरे में किराए पर रहती थी. यहीं रह कर वह नर्सिंग की पढ़ाई करती थी. ये दोनों कालेज के दिनों से एकदूसरे को जानते थे. पहले दोनों के बीच में दोस्ती थी. दोस्ती ने कब उन के बीच प्यार का रूप ले लिया था, उन्हें पता नहीं चला.

धीरेधीरे 4 साल हो गए थे उन के प्यार को. पूजा के फेमिली वालों को बेटी के प्यार वाली बात पता चल चुकी थी. वे उसे अमित से मिलने से मना करते थे, लेकिन अमित के प्यार में अंधी और बहरी पूजा के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती थी.

पेरेंट्स की बातों का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था. यहां तक कि उस ने अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला कर लिया था. बेटी जब फेमिली वालों की बातें सुनने के लिए तैयार नहीं हुई तो उन्होंने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. पूजा यह नहीं जानती थी कि जिस प्यार के लिए वह अपनी फेमिली से बगावत पर उतर चुकी थी, जिस प्यार के लिए जेठ के महीने की तपती धूप में सावन की हरियाली देख रही थी, वह उस का आशिक नहीं, रसिकलाल है.

पूजा की हत्या करने के परफैक्ट प्लान को अमित ने पहले ही अंतिम रूप दे दिया था. बाजार से एक धारदार चापड़, जूट वाली 2 बड़ी बोरियां और लाश को ठिकाने लगाने के लिए एक बड़े साइज का नया मैरून कलर का सूटकेस खरीद कर कमरे में ला कर उसे तख्त के नीचे छिपा दिया, ताकि किसी को उस पर कोई संदेह न हो. उस ने जब पूरी तैयारी कर ली तो पूजा को उस के मोबाइल फोन पर काल की और घडिय़ाली आंसू बहाते हुए माफी मांगने का नाटक किया, ताकि उस का खतरनाक मकसद पूरा हो जाए, ”हैलो पूजा, मेरी पूरी बात सुने बगैर फोन मत काटना, प्लीज.’’

फोन पर अमित गिड़गिड़ाया. वह आगे कुछ और कहता, उस की बात सुने बगैर पूजा ने काल डिसकनेक्ट कर दी और अपने कामों में लगी रही. उस समय सुबह के साढ़े 10 बज रहे थे. पूजा अमित की बेवफाई और धोखेबाजी को भुला नहीं पाई थी. कैसे उस ने धोखा दिया था. वह कभी उस की बातों पर शायद यकीन नहीं करेगी, यही अमित सोच रहा था, लेकिन अमित अपनी योजना पर यूं ही पानी फिरने नहीं देना चाहता था. किसी भी हद तक जा कर पूजा को मनाने की अपनी जिद पर अड़ा रहा और 10-10 मिनट के अंतराल पर करीब 8 बार उसे फोन किया.

बारबार काल आने से पूजा परेशान हो गई थी. वह उस से बात करना नहीं चाहती थी. परेशान हो कर उसने काल रिसीव किया आर उसे झाड़ते हुए कहा, ”बारबार क्यों काल कर के मुझे परेशान कर रहे हो? जबकि मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी है.’’

”मैं जानता हूं कि तुम मुझ से बहुत नाराज हो, ऐसा काम ही मैं ने किया है, लेकिन मैं उस के लिए तुम से सौरी बोलता हूं. बस, एक बार मेरी पूरी बात सुन लो, फिर तुम्हें जो सही लगे वो करना. तब मैं तुम्हें कभी न ही रोकूंगा और न ही टोकूंगा, बस एक बार मेरी बात सुन लो, प्लीज.’’

अमित ने मीठी और चिकनीचुपड़ी बातों का ऐसा तीर फेंका, जो सीधा उस के दिल के पार हो गया और एक पल के लिए पूजा विचलित हो गई थी.

न चाहते हुए भी उस ने उस की बातों को दिल पर लेते हुए कहा, ”यह मत समझना कि मैं ने तुम्हें माफ कर दिया.’’ एक लंबीगहरी सांस लेती हुई फिर आगे बोली, ”बताओ, क्या कहना चाहते हो?’’

”बात कुछ ऐसी है, जो मैं फोन पर नहीं कह सकता, एक बार आ कर मिल लो तो सारी बातें क्लीयर हो जाएंगी.’’ अमित अपने होंठों पर जहरीली मुसकान लिए बोला.

”ठीक है, तुम इतना जिद कर ही रहे हो तो तुम से मिलना ही पड़ेगा.’’ पूजा ने जवाब दिया तो अमित की आंखों में शैतानी चमक जाग उठी. मतलब उस ने अंधेरे में जो तीर चलाया था, वह ठीक निशाने पर जा कर लगा था.

पूजा के मुंह से हां सुन कर अमित की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. दूसरी तरफ किसी अनहोनी से बेखबर पूजा अमित के किए को भुला कर उस से मिलने के लिए तैयार हो गई थी. उसी ने फोन पर 3 दिनों बाद यानी 17 जून, 2025 को मिलने के लिए कही. पूजा ने प्रेमी अमित से मिलने का वायदा कर दिया था. फेमिली वालों ने उस के घर से बाहर जाने पर सख्त पाबंदी लगा दी थी. यह कदम उन्होंने तब उठाया था, जब अमित के साथ उन्हें बेटी के अफेयर की जानकारी हुई थी.

बात 17 जून की है. पूजा जानती थी फेमिली वाले उसे आसानी से घर से बाहर अकेले निकलने नहीं देंगे. तब उस ने इस का एक आसान सा रास्ता निकाला. फेमिली वालों से उस ने झूठ बोला कि कल यानी 18 जून को उस की नर्सिंग की परीक्षा है, उस की ड्रेस कमरे पर है, बगैर ड्रेस के कालेज में एंट्री नहीं मिलेगी. उसे लेने कमरे पर जा रही है. फेमिली वालों ने पूजा की बातों पर यकीन कर लिया और उसे घर से अकेले जाने की परमिशन दे दी. जातेजाते उसे सख्त हिदायत भी दी कि ड्रेस ले कर जल्द से जल्द घर वापस लौट आना, वरना कभी घर से बाहर निकलने नहीं देंगे.

उस समय सुबह के करीब साढ़े 10 बज रहे थे. पूजा अपना मोबाइल साथ में ले कर निकली और फेमिली वालों को यकीन दिलाया था कि वह जल्दी घर वापस लौट आएगी. दोपहर करीब डेढ़ बजे पूजा अपने कमरे पर पहुंची, जहां अमित उस के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. उस ने पूजा को आते हुए जैसे देखा तो उस के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान थिरक उठी. उस वक्त कमरे में पूजा और अमित के सिवाय कोई और नहीं था. मकान मालिक विजय कुशवाहा भी ड्यूटी जा चुका था.

धूप की तपन से जली और थकी हुई पूजा कमरे में पहुंची तो उस के आवभगत में अमित जुट गया था. चाय और नाश्ता कर के जब दोनों फारिग हुए तो अमित पूजा की ओर मुखातिब हुआ और अपनी बातों में उलझा कर बड़ी चालाकी से उस का मोबाइल फोन स्विच औफ कर दिया. इस के बाद उस ने कहा, ”मुझे माफ कर दो पूजा. मैं तुम्हारा गुनहगार हूं. मैं ने तुम्हें धोखा दिया, फिर भी तुम मेरी बात सुन कर मुझ से मिलने आ गई. मैं कैसे बताऊं कि मैं कितना खुश हूं. हनुमान होता तो सीना चीर कर दिखा देता कि किस कदर तुम्हारी तसवीर अपने दिल में बसा रखी है.’’

”ठीक है अमित. बीती बातों को कुरेद कर जख्मों को हरा मत करो तो ही अच्छा होगा.’’ पूजा तड़प कर बोली, ”बड़ी मुश्किल से मैं उन बातों भुला पाई हूं और घर वालों से झूठ बोल कर यहां तक आई हूं. मुझे घर जल्दी पहुंचना भी है. जो बात हो फटाफट बताओ.’’

”इतनी जल्दी भी क्या है. अभी तो आई हो, अभी जाने की बात कर रही हो, इस का मतलब तुम ने मुझे माफ नहीं किया है.’’

”नहीं…नहीं…ऐसी बात नहीं है. मैं ने तुम्हें माफ नहीं किया होता तो यहां आती नहीं. बस मम्मीपापा तुम्हारे खिलाफ हैं. उन्हें पता न चले इसीलिए जल्द घर पहुंचना है, वरना वो मुझे कभी घर से बाहर निकलने नहीं देंगे.’’

”ठीक है, जब तुम इतनी जिद कर रही हो तो थोड़ी देर बाद चली जाना, रोकूंगा नहीं मैं. बस, तुम ने मेरी बात का मान रख लिया और मुझे माफ कर दिया तो समझो मेरे सीने से एक बड़ा बोझ उतर गया.’’

जिस पल का अमित को बेसब्री से इंतजार था, वह समय आ गया था. अमित ने अपनी भावनाओं के भंवर में पूजा को पूरी तरह से उतार लिया था. पूजा से बात करतेकरते वह तख्त के नीचे झुका और चुपके से धारदार चापड़ निकाला. उस के हाथ में चापड़ देख कर पूजा डर गई तो अमित के चेहरे पर शैतानियत साफ झलकने लगी थी. गुस्से से उस की आंखें लाल हो गईं और जबड़ा भिंच गया था. पूरी तरह दैत्य दिख रहा था वह. पूजा समझ गई थी कि अमित ने उसे धोखा दिया है.

पूजा कुछ कर पाती, इस से पहले ही अमित ने चापड़ से उस की गरदन पर जोरदार प्रहार किया. एक ही प्रहार से पूजा की गरदन धड़ से कट कर लटक गई और वह फर्श पर गिर कर अपने ही खून में लथपथ हो कर छटपटाने लगी. उसे छटपटाता देख अमित ने नफरत भरी हुंकार ली और होंठों पर बुदबुदाया, ”चली थी हरामजादी मेरा करिअर बरबाद करने, मुझे नंगा करने. अब ऊपर जा कर मेरे नाम की माला जपना. हुंह..’’

पूजा की हत्या करने के बाद अमित जब होश में आया तो उस की आखों के सामने जेल की सलाखें नजर आने लगी थीं. फटाफट उस ने लाश को बोरी में भरी और पूजा के मोबाइल को उसी बोरी में डाल दिया, ताकि कोई सबूत न बचे और पुलिस किसी कीमत पर उस तक न पहुंच सके. लाश बोरी में भरने के बाद उस ने लाल सूटकेस में बोरी को डाल कर अच्छी तरह बंद कर दिया. फिर फर्श पर फैले खून को साफ कर दिया. इस के बाद उस ने वाशरूम में जा कर अपने शरीर और कपड़ों को अच्छी तरह साफ किया. यह सब करतेकरते शाम के 5 बज गए थे.

सारी तैयारी करने के बाद उस ने विशाल को फोन कर के उस की कार मांगी. विशाल के पास उस के पापा की कार थी. उस ने कह भी रखा था कि जब भी कहीं घूमने जाना हो तो वह उस की कार बेझिझक ले जा सकता है. लेकिन विशाल के फेमिली वालों ने उसे कार देने से साफतौर पर मना कर दिया. इस से उस की योजना पर पानी फिर गया. समझ नहीं पा रहा था कि अब वह लाश का क्या करे. वह डरने लगा कि लाश ठिकाने नहीं लगाई तो वह बुरी तरह फंस सकता था. जब कुछ समझ नहीं आया तो शहर के बाहर स्थित नाला याद आया. उसी नाले में लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई.

जब उस बिल्डिंग के सभी लोग सो गए तो अमित दबे पांव अपने कमरे से बाहर निकला. घर का मुख्य दरवाजा आहिस्ता से खोला और चुपके से बाहर निकल गया. उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे. फिर वह भाड़े पर एक टोटो (टैंपो) ले आया और सूटकेस को उस में रख दिया. टोटो चालक से शहर से बाहर की ओर चलने को कहा. वह जब बड़े नाले के पास पहुंचा तो उस ने टोटो वहीं रोकवा दिया और सूटकेस ले कर उतर गया. टोटो वाले को तय भाड़े से कुछ ज्यादा पैसे दे कर उसे छोड़ दिया. ज्यादा पैसे पा कर टोटो चालक बहुत खुश हुआ और दूसरी ओर चला गया.

चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था. अमित ने इधरउधर चारों ओर देखा. वहां कोई आजा नहीं रहा था. जल्दीजल्दी उस ने सूटकेस खोला और बोरे में भरी लाश बाहर निकाली और बोरी कंधे पर उठा कर नाले में फेंक दी. सूटकेस वहीं सड़क पर ही छोड़ दिया था. फिर वहां से कमरे में आ कर सो गया, ताकि किसी को उस पर कोई शक न हो. इधर पूजा के फेमिली वाले उस के देर शाम तक घर वापस न लौटने पर परेशान हो गए थे. उस ने घर से निकलते वक्त उन से दोपहर तक वापस लौट आने को कहा था, लेकिन शाम के 6 बजे तक जब वह घर नहीं लौटी तो फेमिली वाले जवान बेटी को ले कर काफी परेशान थे.

उन के माथे पर चिंता की लकीरें तब और उभरी थीं, जब उस का मोबाइल लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था. अपनी तरफ से उन्होंने हर जानपहचान वालों के पास फोन कर के पूछा, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला. सभी ने एक ही जवाब दिया था कि वह हमारे यहां नहीं आई थी. रात जैसेतैसे फेमिली वालों की आंखों में कटी. सुबह होते ही वे गांव के कुछ लोगों को ले कर अस्थावा थाने पहुंच गए. उस समय थाने के औफिस में हैडकांस्टेबल दयाराम मौजूद थे. पूजा के पापा संजय कुमार ने बताया कि उन की बेटी कल सुबह शहर गई थी, लेकिन अभी तक वह घर नहीं लौटी है. उस का मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है.

हैडकांस्टेबल दयाराम ने यह बात एसएचओ सुशील कुमार को दी. इस के बाद संजय कुमार ने एसएचओ को बेटी पूजा के घर न लौटने की पूरी बात बता दी. तब एसएचओ ने पूजा की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसएचओ सुशील ने संजय कुमार से किसी पर शक होने की बात पूछी तो उन्होंने बेटी के प्रेमी अमित पर शक जताया और पूरी बात विस्तार से बताई. पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर ले कर जांच की तो संजय की बात सच निकली.

जांच में पता चला कि 17 जून, 2025 को सुबह के समय पूजा से अमित की आखिरी बार बात हुई थी और दोपहर बाद पूजा का फोन स्विच्ड औफ हो गया था. इस के बाद एक पुलिस टीम अमित की तलाश में भेज दी. वह कागजी मोहल्ले में स्थित अपने कमरे पर मिल गया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई. उस से सख्ती से पूछताछ शुरू की तो जल्द ही पुलिस के सामने उस ने घुटने टेक दिए और पूजा की हत्या का जुर्म आसानी से स्वीकार कर लिया.

एसएचओ ने यह जानकारी डीएसपी नुरुलहक को दी तो वह भी थाने में आ गए. डीएसपी ने भी पूजा की हत्या के बारे में कई सवाल किए. तब अमित ने घटना के बारे में तफसील से सारी जानकारी दे दी और जिस नाले में पूजा की लाश फेंकी थी, वहां ले कर गया. उस की निशानदेही पर पुलिस ने नाले में से मृतका की लाश बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. आरोपी अमित की निशानदेही पर उस के कमरे से हत्या में प्रयुक्त धारदार चापड़ और खून सने कपड़े बरामद कर लिए. जिस सूटकेस में लाश भर कर ले गया था, वह वहां नहीं मिला. उस टोटो (टैंपो) वाले की तलाश में जुटी थी, जिस में लाश ले कर वह गया था. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पूजा कुमारी के मर्डर के पीछे की जो सस्पेंस स्टोरी सामने आई, इस प्रकार निकली—

बिहार के नालंदा जिले के ओडा गांव के मूल निवासी संजय कुमार सरकारी प्राइमरी स्कूल के टीचर हैं. कुल 5 सदस्यों वाला उन का भरापूरा परिवार था, जिन में पतिपत्नी के अलावा 3 बेटियां थीं. 19 वर्षीय पूजा सब से बड़ी और समझदार थी. देखने में वह साधारण शक्लसूरत की थी, लेकिन उस की बोली में जैसे मिश्री घुली हुई थी. अपनी बातों से वह अपरिचितों को भी अपनी ओर खींच लेती थी. वह पढऩे में भी अव्वल थी. पढ़लिख कर वह डाक्टर बनना चाहती थी. जब वह डाक्टरों को सफेद पोशाक में देखती थी तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह यही सोचती थी कि एक दिन उस के भी बदन पर यह पोशाक झलकेगी.

बात साल 2022 के आसपास की है. हंसमुख और चंचल स्वभाव वाली पूजा जिस स्कूल में पढ़ती थी, उसी स्कूल में अमित भी पढ़ता था. पूजा 10वीं कक्षा की छात्रा थी. तब उस की उम्र 16 साल के आसपास रही होगी. उस समय 18 वर्षीय अमित भी इंटरमीडिएट में पढ़ रहा था. दोनों किशोरावस्था से जवानी की दहलीज की ओर कदम बढ़ा रहे थे. दोनों ही पैदल एक ही रास्ते से हो कर स्कूल जातेआते थे. अमित इसी नालंदा जिले के शेखपुरा गांव का रहने वाला था. 4 भाईबहनों में वह दूसरे नंबर पर था. उस के पापा रामबरन कुमार एक किसान थे.

खैर, उम्र के जिस पड़ाव पर पूजा और अमित खड़े थे, उस दौरान कइयों के कदम बहकने लगते थे. ऐसे में पूजा और अमित कहां अछूते रहने वाले थे यानी उन के भी कदम बहकने लगे थे. स्कूल से घर आतेजाते दोनों एकदूसरे को दिल दे बैठे. धीरेधीरे उन का प्यार समय के रथ पर सवार हो कर आगे बढ़ता रहा. बड़़े जतन से दोनों 3 सालों तक अपने प्यार को परदे के पीछे छिपाने में कामयाब रहे. आखिरकार बेटी पूजा की करतूतों की सच्चाई उस के पापा संजय कुमार के कानों तक पहुंची तो उन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह आगबबूला हो उठे. उन्होंने बेटी को खूब खरीखोटी सुनाई और पत्नी को भी आड़ेहाथों लिया. उन्होंने पूजा का घर से निकलना बंद कर दिया.

पूजा ने थोड़ी चालाकी और समझदारी से काम लिया. उस ने फेमिली वालों के सामने पैंतरा खेला और झूठ बोलते हुए मम्मी से कहा, ”मम्मी, मुझ से गलती हो गई थी. इस गलती के लिए सब से माफी मांग रही हूं. मुझे माफ कर दो. अमित से अब मैं कभी नहीं मिलूंगी और न बात करूंगी.’’

बेटी की बातों पर फेमिली वालों को विश्वास हो गया और उन्होंने उसे माफ कर दिया. फिर अपना ध्यान उस की ओर से हटा लिया. पूजा यही चाहती थी. फेमिली वालों की तरफ से पूजा एक तरह से आजाद हो गई थी. अब कोई रोकटोक करने वाला नहीं था. इंटरमीडियट पास करने के बाद उस ने मैडिकल कालेज में दाखिला लिया और एएनएम की पढ़ाई शुरू की. वहीं दूसरी ओर अमित प्राइवेट जौब करते हुए बीएड की पढ़ाई कर रहा था. उस ने कागजी कालोनी में विजय कुशवाहा के मकान में एक किराए का कमरा ले लिया था. चूंकि पूजा को गांव से शहर आ कर क्लास लेने आने में बहुत दिक्कत उठानी पड़ती थी तो पापा से परमिशन ले कर अमित के बगल में किराए का एक कमरा ले कर रहने लगी.

पेरेंट्स की नजरों में पूजा ने यह साबित कर दिया था कि अब अमित से उस का कोई संबंध नहीं है और न ही उस से कभी मिलती है. जबकि हकीकत में मामला इस के विपरीत था. अब दोनों खुल्लमखुल्ला आपस में मिलते थे और टूट कर एकदूसरे से प्यार करते थे. धीरेधीरे यह बात फिर से संजय कुमार को पता चल गई तो उन के दिल को बहुत ठेस पहुंचा और बेटी को वापस घर बुलाया और समाज के ऊंचनीच रीतिरिवाजों को समझाया. संजय कुमार एक सुलझे हुए इंसान थे. उन्होंने बेटी को अपने पास बैठा कर समझाया कि वह अपने करिअर पर ध्यान दे, समय आने पर अच्छा घरवर देख कर धूमधाम से उस की शादी कर देंगे.

इस पर पूजा ने खुले शब्दों में जबाव दिया कि वह अमित से प्यार करती है उसी से शादी करेगी. चाहे जो हो जाए, वह अपने फैसले पर अडिग है और कोई भी कुरबानी देने के लिए तैयार है. फेमिली वालों ने पूजा को बहुत समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ तो वो चुप हो गए, मगर विचलित नहीं हुए. आखिरकार संजय कुमार को भी बेटी की जिद के सामने झुकना पड़ा, लेकिन कोई फैसला लेने से पहले वह अमित के बारे में खूब जांचपरख लेना चाहते थे. आखिर बेटी के जीवन का सवाल था. इस बात को उन्होंने सिर्फ अपने तक ही सीमित रखा था.

संजय ने अमित के बारे में पड़ताल शुरू की तो वह हैरान रह गए. जानकारी मिली कि कई लड़कियों के साथ अमित के संबंध हैं. उस आवारा ने कंचन नाम की एक लड़की का जीवन बरबाद कर दिया था. यह बात महीनों तक सुर्खियों में छाई रही. अमित की यह सच्चाई सामने आने के बाद संजय ने बेटी का रिश्ता अमित से जोडऩे का अपना इरादा बदल दिया. और फिर बेटी के सामने उस के प्रेमी की कलई खोल दी. पापा के मुुंह से अमित की सच्चाई सुन कर पूजा को धक्का लगा था.

पूजा ने सपने में भी कभी नहीं सोचा होगा कि जिस अमित से वह अंधा प्यार करती थी, जिस के लिए अपनी फेमिली से बगावत पर उतर आई थी, वह इतना बड़ा दगाबाज निकलेगा. उस के सारे सपने चूर हो गए थे. उस दिन के बाद से पूजा ने अमित से बात करनी बंद कर दी थी. उसे देखते ही अपना रास्ता बदल लेती थी. उसे उस से नफरत हो गई थी. पूजा अमित से इतनी नफरत करने लगी थी कि उस की शक्ल तक नहीं देखना चाहती थी. उस ने अमित को किसी माध्यम से संदेश भिजवाया था कि जैसे उस ने उस की जिंदगी के साथ खेला है, उसे धोखा दे कर खून के आंसू रुलाया है, वह भी उसी तरह उस की जिंदगी तबाह और बरबाद कर के दम लेगी. किसी कीमत पर उसे नहीं छोड़ेगी.

आखिर अमित को पता चल ही गया था कि पूजा को उस के और लड़कियों के साथ चक्कर वाली बात पता चल गई थी, इसलिए उस ने उस से दूरी बना ली. वह यह भी जानता था कि पूजा बहुत जिद्दी किस्म की है, एक बार जो ठान लेती है, उसे पूरा कर के ही दम लेती है. अमित को लगने लगा कि पूजा उस के भविष्य के लिए खतरा बन सकती है. इस से पहले कि वह उस के लिए खतरा बने, इस खतरे को मिटा देगा. उसे जान से मार देगा. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. इस के बाद अमित पूजा को मनाने में लग गया. आखिरकार अमित ने अपनी खतरनाक साजिश में फांसने के बाद 17 जून, 2025 को पूजा की हत्या कर दी.

पूजा की हत्या करने के बाद वह भी कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सका और अपने असल ठिकाने तक पहुंच गया. पुलिस आरोपी अमित कुमार को गिरफ्तार कर उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त धारदार चापड़, फर्श पर फैले खून को साफ करने वाला कपड़ा बरामद कर उसे साक्ष्य के तौर पर अपने पास सुरक्षित कर लिया. मौके से गायब सूटकेस 2 दिन बाद उसी जगह से बरामद हो गया था, जहां से गायब हुआ था. जिस टोटो (टैंपो) से लाश ले जाई गई थी, 10 दिनों बाद उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया. Bihar Crime News

 

 

Crime ki Kahani : अवैध संबंध में पति की हत्या कर शव पौलीथिन में भरकर फेंका

Crime ki Kahani : ढेलाणा गांव के बहुचर्चित संतोष हत्याकांड की अदालत में करीब 2 साल तक चली सुनवाई के बाद  माननीय न्यायाधीश ने 10 जुलाई, 2017 को फैसला सुनाने का दिन मुकर्रर कर दिया. लिहाजा उस दिन जोधपुर के अपर सेशन न्यायाधीश नरेंद्र सिंह मालावत की अदालत दर्शकों से खचाखच भरी हुई थी. जज साहब के अदालत में बैठने के बाद लोग आपस में कानाफूसी करने लगे. जज साहब ने अपने सामने रखे फैसले के नोट्स व्यवस्थित किए तो फुसफुसाहटें थम गईं और अदालत में एक पैना सन्नाटा छा गया. सभी के दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था कि पता नहीं रामेश्वरी और उस के प्रेमी भोम सिंह को क्या सजा मिलेगी.

इन दोनों ने जिस तरह का अपराध किया था, उसे देखते हुए लोग चाह रहे थे कि उन्हें फांसी होनी चाहिए. आखिर रामेश्वरी और भोम सिंह ने ऐसा कौन सा अपराध किया था, जिस की सजा को जानने के लिए तमाम लोग अदालत में समय से पहले ही पहुंच गए थे. यह जानने के लिए हमें घटना की पृष्ठभूमि में जाना होगा. राजस्थान के जिला जोधपुर के लोहावट थाने में 12 फरवरी, 2015 को कुनकुनी दोपहरी में अच्छीखासी गहमागहमी थी. एडिशनल एसपी सत्येंद्रपाल सिंह एसडीएम राकेश कुमार के साथ थाने के दौरे पर थे. उस समय दोनों अधिकारी थाने में एक जरूरी मीटिंग ले रहे थे. मीटिंग इलाके में बढ़ती आपराधिक वारदातों को ले कर बुलाई गई थी.

मीटिंग में सीओ सायर सिंह तथा लोहावट के थानाप्रभारी निरंजन प्रताप सिंह भी मौजूद थे. मीटिंग के दौरान ही थाने के बाहर हो रहे शोर की ओर अचानक अधिकारियों का ध्यान गया. शोर थमने के बजाय तेज होता जा रहा था. एडिशनल एसपी ने थानाप्रभारी को शोर के बारे में पता लगाने का इशारा किया. थानाप्रभारी तुरंत यह कहते हुए बाहर की तरफ लपके, ‘‘सर, मैं पता करता हूं.’’

कुछ ही मिनटों में थानाप्रभारी बड़ी अफरातफरी में लौट आए. उन्होंने बताया, ‘‘सर, बाहर सुतारों की बस्ती के कुछ लोग हैं, जो किसी के कत्ल की रिपोर्ट लिखाने आए हैं. जब उन्हें कुछ देर इंतजार करने को कहा तो वे बुरी तरह उखड़ गए. वे मीटिंग से पहले रिपोर्ट लिखाने की मांग कर रहे हैं.’’

थानाप्रभारी की बात सुनने के बाद एडिशनल एसपी के चेहरे पर उत्सुकता जाग उठी. सहमति जानने के लिए उन्होंने एसडीएम राकेश कुमार की ओर देखा और फिर थानाप्रभारी से बोले, ‘‘ठीक है, उन में से 1-2 खास लोगों को बुला लाओ.’’

थानाप्रभारी भीड़ में से एक आदमी को बुला लाए. एएसपी ने उस अधेड़ शख्स को कुरसी पर बैठने का इशारा किया. उस के बैठने के बाद उन्होंने पूछा, ‘‘बताओ, क्या मामला है?’’

उस आदमी ने अपना नाम कैलाश बता कर बोला कि वह ढेलाणा गांव की सुतार बस्ती में रहता है. उस के घर के पास ही उस के चाचा संतोष का मकान है, जहां वह अपनी पत्नी रामेश्वरी और 3 बेटियों व एक बेटे के साथ रहते थे. चाची रामेश्वरी उर्फ बीबा के नाजायज संबंध गांव के ही भोम सिंह के साथ हो गए थे. इस की जानकारी संतोष को भी थी. 6 फरवरी से चाचा संतोष रहस्यमय तरीके से गायब हैं. चाचा के खून से सने अधजले कपड़े ग्रेवल रोड के पास पड़े हैं. इस से मुझे लगता है कि चाची ने भोम सिंह के साथ मिल कर चाचा की हत्या कर लाश को कहीं ठिकाने लगा दिया है.

एएसपी सत्येंद्रपाल सिंह कुछ देर तक फरियादी को इस तरह देखते रहे, जैसे उस की बातों की सच्चाई जानने का प्रयास कर रहे हों. इस के बाद एसडीएम राकेश कुमार से निगाहें मिला कर अपने मातहतों की तरफ देखते हुए बोले, ‘‘चलो, ग्रेवल रोड की ओर चल कर देखते हैं.’’

लगभग आधे घंटे में ही एएसपी पूरे अमले के साथ कैलाश द्वारा बताई गई जगह पर पहुंच गए. कैलाश ने हाथ का इशारा करते हुए कहा, ‘‘साहब, वो देखिए, वहां पड़े हैं कपड़े.’’

एएसपी समेत पुलिस अधिकारियों ने आगे बढ़ कर नजदीक से देखा तो उन्हें यकीन आ गया कि कैलाश ने गलत नहीं कहा था. वास्तव में ग्रेवल रोड की ढलान पर खून सने अधजले कपड़े पड़े थे. खून आलूदा कपड़ों से जाहिर था कि मामला हत्या का न भी था तो जहमत वाला जरूर था. पुलिस को देख कर वहां गांव वालों की भीड़ लगनी शुरू हो गई. एएसपी ने थानाप्रभारी से कपड़ों को सील करने के आदेश दिए. इस के बाद कैलाश को करीब बुला कर तसल्ली करनी चाही, ‘‘तुम पूरे यकीन के साथ कैसे कह सकते हो कि ये कपड़े तुम्हारे चाचा संतोष के ही हैं?’’

‘‘साहब, आप एक बार रामेश्वरी और भोम सिंह से सख्ती से पूछताछ करेंगे तो हकीकत सामने आ जाएगी. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.’’ कैलाश ने हाथ जोड़ कर विनती के स्वर में कहा, ‘‘आप रामेश्वरी की बेटियों से पूछताछ करेंगे तो इस मामले में और ज्यादा जानकारी मिल सकती है.’’

थाने पहुंच कर एएसपी ने रामेश्वरी और उस की बेटियों मनीषा, भावना और अंकिता को थाने बुलवा लिया. पुलिस ने रामेश्वरी को अलग बिठा कर उस की बेटियों से पूछताछ की तो उन्होंने अपने पिता की नृशंस हत्या किए जाने का आंखों देखा हाल बयां कर दिया. उन्होंने बताया कि पापा की हत्या मम्मी और भोम सिंह ने की थी. तीनों बहनों की बात सुन कर सभी अधिकारी सन्न रह गए.

रामेश्वरी थाने में ही बैठी थी. एएसपी के आदेश पर थानाप्रभारी भोम सिंह के घर पहुंच गए. वह घर पर ही मिल गया. वह उसे गिरफ्तार कर के थाने ले आए. थाने में रामेश्वरी और उस के बच्चों को देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया. वह समझ गया कि इन लोगों ने पुलिस को सब कुछ बता दिया होगा, इसलिए उस ने पुलिस पूछताछ में सारी कहानी बयां कर दी. उस ने बताया कि उसी ने तलवार से काट कर संतोष की हत्या की थी. भोम सिंह से पूछताछ के बाद हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

संतोष कुमार लकड़ी के इमारती काम का हुनरमंद कारीगर था. इस छोटी सी ढाणी में या आसपास उसे उस के हुनर के अनुरूप मजदूरी नहीं मिल पाती थी, इसलिए 2 साल पहले वह एक जानकार के बुलाने पर मुंबई चला गया था, जहां उसे अच्छाखासा काम मिल गया था. संतोष के परिवार में पत्नी रामेश्वरी के अलावा 3 बेटियां और एक बेटा था. बेटा सब से छोटा था, जबकि बड़ी बेटी मनीषा 13 साल की है, भावना 10 साल की और अंकिता 8 साल की. संतोष काम के सिलसिले में ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था.

इसी दौरान गांव के ही 28 साल के भोम सिंह के साथ 50 साल की रामेश्वरी का चक्कर चल गया. उस का रामेश्वरी के यहां आनाजाना बढ़ गया. भोम सिंह एक आवारा युवक था, इसलिए रामेश्वरी के ससुराल वालों ने उस के बारबार घर आने पर आपत्ति जताई. मोहल्ले के लोग भी तरहतरह की बातें करने लगे. डर की वजह से कोई भी सीधे भोम सिंह से कहने की हिम्मत नहीं कर पाता था. संतोष कुमार जब मुंबई से लौटा, तब उसे लोगों के द्वारा पत्नी के कदम बहक जाने की जानकारी मिली. नतीजा यह हुआ कि संतोष ने रामेश्वरी की जम कर खबर ली.

इत्तफाक से भोम सिंह एक दिन ऐसे वक्त में रामेश्वरी से मिलने उस के घर आ टपका, जब घर में संतोष मौजूद था. संतोष तो पहले ही उस से खार खाए बैठा था. उस ने भोम सिंह को बुरी तरह आड़े हाथों लिया और उसे चेतावनी दे दी कि आइंदा वह इस घर की ओर रुख करेगा तो अच्छा नहीं होगा. अच्छीखासी लानतमलामत होने के बावजूद भी भोम सिंह ने उस के घर आना न छोड़ा और न ही रामेश्वरी ने उसे घर आने से मना किया. संतोष की मजबूरी थी कि वह ज्यादा दिन छुट्टी नहीं ले सकता था और मुंबई में रिहायशी दिक्कत के कारण परिवार को साथ नहीं ले जा सकता था. लिहाजा उस की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे.

एक बार संतोष ने पत्नी और भोम सिंह को फिर रंगेहाथों पकड़ लिया. लेकिन भोम सिंह फुरती से वहां से भाग गया. जातेजाते वह कह गया कि वह इस बेइज्जती का बदला ले कर रहेगा. फरवरी, 2015 में संतोष मुंबई से घर लौटा. उस के आने के बाद रामेश्वरी की इश्क की उड़ान में व्यवधान पैदा हो गया. रास्ते में रोड़ा बने पति से छुटकारा पाने के बारे में उस ने प्रेमी से बात की. फिर दोनों ने संतोष को ठिकाने लगाने की योजना बना ली. उन्होंने तय कर लिया कि इस बार वे संतोष को ठिकाने लगा कर ही रहेंगे.

योजना के अनुसार 6 फरवरी, 2015 की आधी रात को भोम सिंह छिपतेछिपाते संतोष के घर पहुंच गया. उस समय संतोष गहरी नींद में सो रहा था, जबकि रामेश्वरी प्रेमी के आने के इंतजार में जाग रही थी. उसी समय भोम सिंह ने सोते संतोष के ऊपर तलवार से वार कर दिया. संतोष की मर्मांतक चीख सुन कर तीनों बेटियां हड़बड़ा कर उठ बैठीं. वे भाग की भीतरी चौक में पहुंचीं और जो भयानक नजारा देखा तो उन्हें जैसे काठ मार गया. भोम सिंह उन के पिता पर तलवार से वार कर रहा था और वह गिरतेपड़ते छोड़ देने की मिन्नतें कर रहे थे. लेकिन उस शैतान का दिल नहीं पसीजा.

रामेश्वरी पास में खड़ी सब कुछ देख रही थी. मनीषा ने पिता को बचाने की कोशिश की तो भोम सिंह ने धमका कर उसे परे धकेल दिया और कहा कि अगर किसी को भी बताया तो तीनों को तलवार से काट देगा. संतोष की हत्या के बाद भोम सिंह ने उस के कपड़े उतार दिए और लाश एक पौलीथिन में लपेट कर बोरी में भर दी. बाद में उस बोरी को एक ड्रम में डाल कर कमरे में रख दी.

इस के बाद भोम सिंह चला गया. अगले दिन रात को वह बैलगाड़ी ले कर आया, तब रामेश्वरी और भोम सिंह ने मिल कर ड्रम को गाड़ी में डाला. वे लाश को शिवपुरी रोड पर घने जंगल में दफन कर आए. रामेश्वरी ने घर लौटने के बाद रात को पति के खून सने कपड़े चूल्हे में डाल कर जलाने की कोशिश की, लेकिन कपड़े खून से गीले होने के कारण पूरी तरह से जल नहीं पाए. फिर 11 फरवरी की रात को रामेश्वरी अधजले कपड़ों को ग्रेवल रोड पर फेंक आई. बाद में वह शोर मचाने लगी कि मेरे भरतार (पति) के खून सने कपड़े ग्रेवल रोड पर पड़े हैं, लेकिन उन का कहीं पता नहीं चल रहा है. उस की चीखपुकार सुन कर अड़ोसीपड़ोसी भी आ गए. उसी दौरान संतोष का भतीजा कैलाश भी आ गया. उस ने ग्रेवल रोड पर चाचा के खून सने अधजले कपड़े देखे तो उसे शक हो गया.

इस से पहले कैलाश व अन्य पड़ोसियों को संतोष कई दिनों तक दिखाई नहीं दिया तो पड़ोसियों ने भी रामेश्वरी से पूछा. पर रामेश्वरी ने यह कह कर टाल दिया कि यहीं कहीं होंगे. पर उस के जवाब से कोई संतुष्ट नहीं था. बच्चों ने बताया कि डर की वजह से उन्होंने भी मुंह नहीं खोला. भोम सिंह और रामेश्वरी से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन की निशानदेही पर संतोष की लाश और तलवार बरामद कर ली. पुलिस ने सारे सबूत जुटा कर दोनों अभियुक्तों के खिलाफ भादंवि की धारा 450, 302, 201, 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया.

पुलिस ने फोरैंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट व अन्य साक्ष्यों के अलावा निर्धारित समय में आरोपपत्र तैयार कर कोर्ट में पेश कर दिया. करीब 2 सालों तक अदालत में केस की सुनवाई चली. तमाम साक्ष्य पेश करने के साथ गवाह भी पेश हुए. 10 जुलाई, 2017 को न्यायाधीश नरेंद्र सिंह मालावत ने केस का फैसला सुनाने का दिन निश्चित किया. सजा सुनाने के पहले माननीय न्यायाधीश नरेंद्र सिंह ने कहा कि अभियोजन पक्ष प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों एवं बरामदगियों से इस घटना की कड़ी से कड़ी जोड़ने में सफल रहा है. इसी प्रकार घटना से ताल्लुक रखती फोरैंसिक रिपोर्ट में मकतूल की पत्नी अभियुक्ता रामेश्वरी के कपड़ों पर पाए गए खून के छींटे भी मकतूल संतोष कुमार के खून से मिलते पाए गए.

ऐसी स्थिति में अभियुक्तों का बचाव संभव नहीं है. एक पल रुकते हुए विद्वान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मौकाएवारदात पर मौजूद मकतूल की तीनों बेटियां अंकिता, भावना और मनीषा प्रत्यक्षदर्शी थीं.

‘‘अंकिता और भावना ने अभियोजन पक्ष की कहानी की पूरी तस्दीक की है, इसलिए बचाव पक्ष की इस दलील पर घटना को झूठा नहीं माना जा सकता कि अभियोजन पक्ष ने मनीषा को पेश नहीं किया. लड़कियां मुलजिम भोम सिंह की इस धमकी से बुरी तरह डरी हुई थीं. उन्होंने पुलिस के आने के बाद ही मुंह खोला.’’

विद्वान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘कोर्ट इस सच्चाई से वाकिफ है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मकतूल की मौत की वजह सिर तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर घातक चोटें आना बताया गया है. वारदात में इस्तेमाल की गई तलवार की बरामदगी भी मुलजिम के कब्जे से होना उस के आपराधिक षडयंत्र को पुख्ता करती है.

‘‘हालांकि यह मामला विरल से विरलतम की श्रेणी में नहीं आता, किंतु ऐसे गंभीर अपराध की दोषसिद्धि में अपराधियों को कोई रियायत देना उचित नहीं है. इसलिए तमाम सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत मृतक की पत्नी रामेश्वरी और उस के प्रेमी भोम सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाती है.’’

सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने दोनों मुजरिमों को अपनी कस्टडी में ले लिया. अदालत में मौजूद लोगों और मृतक की बेटियों ने इस सजा पर तसल्ली व्यक्त की. Crime ki Kahani

Love Crime Story : प्यार हुआ खूंखार

Love Crime Story : बदले की भावना को ध्यान में रख कर गुस्से में उठाया गया कदम अकसर नुकसान ही कराता है. बंटी और परमजीत कौर ने भाग कर लवमैरिज की. जिस बंटी के लिए परमजीत कौर ने अपने घरपरिवार को छोड़ा था, वही इतना खूंखार बन जाएगा, परमजीत कौर ने इस की कल्पना तक नहीं की थी…

17 अगस्त, 2021 को सुबह के कोई 8 बजे का वक्त रहा होगा. एक 8 वर्षीय बच्ची को बदहवास स्थिति में भागते देख प्रधान सुखवीर सिंह से रहा नहीं गया. उन्होंने बच्ची को रोकने की कोशिश की तो बच्ची जोरजोर से चीखने लगी, ‘‘उन लोगों ने मेरी मम्मी और मेरी नानी को काट डाला. वे मुझे भी मार डालेंगे.’’

बच्ची की बात सुनते ही प्रधान सुखवीर हैरान रह गए. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह बच्ची किस की है और कहां रहती है? वह किस के मरनेमारने की बात कर रही थी.

Love became dangerous

‘‘बेटा, तुम्हारी मम्मी और नानी कहां पर हैं.’’ प्रधानजी ने प्यार से बच्ची से पूछा तो उस ने बताया कि वे दोनों नाले के पास पड़ी हुई हैं. यह सब जानकारी देने के बाद बच्ची अपने घर की ओर भागी. उस मासूम बच्ची की हालत देख कर प्रधान सुखवीर सिंह इतना तो समझ ही गए थे कि आज सुबहसुबह ही कोई न कोई बड़ी वारदात हो गई है. उस वक्त तक प्रधानजी के डेरे पर कुछ अन्य लोग भी आ कर खड़े हो गए थे. तभी प्रधानजी कुछ लोगों के साथ हकीकत जाने के लिए उस रास्ते की ओर बढ़ गए, जिधर से वह बच्ची थोड़ी देर पहले ही भागती हुई आई थी. कोई एकडेढ़ किलोमीटर चलने के बाद उन लोगों को रास्ते के किनारे ताजा खून के निशान दिखाई दिए.

लोगों ने आसपास छानबीन की तो वहीं पर सड़क किनारे रक्तरंजित 2 लाशें पड़ी मिलीं. दोनों लाशों की शिनाख्त भी तुरंत ही हो गई थी. दोनों लाशें भोगपुर फार्म निवासी 70 वर्षीय जीत कौर पत्नी स्व. दयाल सिंह व उन की बेटी परमजीत कौर की थी. लेकिन परमजीत कौर की 8 वर्षीय बेटी नैना किसी तरह हमलावरों को चकमा दे कर जान बचाने में सफल हो गई थी. इस सनसनीखेज हत्याकांड की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंम मच गया. ग्राम प्रधान सुखवीर सिंह ने इस घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस चौकी पतरामपुर प्रभारी दीवान सिंह बिष्ट को दी. सुबहसुबह ही क्षेत्र में डबल मर्डर केस की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई थी. डबल मर्डर की सूचना पाते ही जसपुर कोतवाल जगदीश सिंह देउपा व एएसपी प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने उस खौफनाक मंजर की जांचपड़ताल की. दोनों की किसी तेज धार वाले हथियार से गरदन रेत कर हत्या की गई थी. घटनास्थल ही इस बात का गवाह था कि हत्या होने से पहले दोनों ने हत्यारों से काफी संघर्ष किया था. लेकिन तेज हथियारों के सामने उन की एक न चली थी. जांचपड़ताल पूरी हो जाने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई कर दोनों लाशें पोस्टमार्टम हेतु काशीपुर सरकारी अस्पताल भेज दी. पुलिस ने गांव वालों से इस मर्डर केस के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि काफी समय से जीत कौर का उस के तलाकशुदा दामाद से विवाद चल रहा था.

पुलिस पूछताछ के दौरान जानकारी मिली कि बलविंदर कौर को काफी समय पहले जीत कौर ने गोद लिया था. 2 साल पहले जीत कौर ने उस की शादी टांडा प्रभापुर निवासी बंटी के साथ की थी. लेकिन एक साल बीततेबीतते किसी कारण उन का तलाक हो गया. इस जानकारी पर पुलिस ने मौके पर मौजूद 8 वर्षीय मासूम नैना से पूछताछ की तो उस ने रोते हुए बताया कि पैदल जाते वक्त झाडि़यों में छिपे बैठे उस के मौसा बंटी और उन के साथी ने उन की नानी और मम्मी को मार डाला. उस के बाद वह बुरी तरह से डरीसहमी सड़क पार कर के छिपतेछिपाते अपने घर पहुंची.

पुलिस ने उसी शाम भादंवि की धारा 34/302 के तहत नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए आरोपियों के घर दबिश दी. लेकिन दोनों ही आरोपी घर से फरार मिले. उस के बाद पुलिस ने उन के परिजनों को पूछताछ के लिए उठा लिया. इस मामले में पुलिस को उन लोगों से कोई जानकारी न मिल सकी. इस केस की तह तक पहुंचने के लिए जसपुर कोतवाली प्रभारी जगदीश सिंह देउपा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की, जिस के बाद पुलिस टीम द्वारा कई अज्ञात स्थानों पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की, लेकिन कहीं भी उन का का कोई सुराग नहीं लगा.

पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए हाथपांव मार ही रही थी कि 19 अगस्त, 2021 को पुलिस को एक मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि आरोपी बंटी और उस का चाचा बलविंदर सिंह कहीं जाने की फिराक में हैं. वे इस समय जसपुर काशीपुर रोड पर सतकार ढाबे के पास खड़े बस का इंतजार कर रहे हैं. यह सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया. दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस टीम जसपुर कोतवाली ले आई. दोहरे मर्डर का हुआ खुलासा कोतवाली लाते ही दोनों से कड़ी पूछताछ की तो दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस पूछताछ में बंटी ने बताया कि उस की सास और साली परमजीत कौर आए दिन उस से किसी न किसी बात पर झगड़ती रहती थी.

बंटी ने बताया कि उन का चाचा बलविंदर उन्हीं के पास रहता था. लेकिन मांबेटी उसे उस के चाचा के पास तक नहीं जाने देती थी, जिस से चिढ़ कर ही उस ने अपने चाचा के साथ मिल कर दोनों की हत्या कर दी. आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने बंटी और बलविंदर सिंह की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त पाटल, घटना के दौरान पहने गए खून सने कपड़े और घटना को अंजाम देने में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली थी. इस हत्याकांड के खुलासे के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह बहुत ही विचित्र दर्दभरी कहानी थी. जो प्रेम कहानी से शुरू हो कर तलाक तक पहुंची, लेकिन उस के बाद भी इस कहानी के कारण पूरे 6 मासूम बच्चे लावारिस हो गए थे.

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर का एक कस्बा है जसपुर. इसी कस्बे से 7 किलोमीटर उत्तर दिशा में एक गांव पड़ता है भोगपुर फार्म. यह गांव वन के किनारे बसा हुआ है, जहां पर कोई ज्यादा आबादी नहीं, लेकिन अपने खेतों पर ही घर बना कर कुछ रायसिक जाति के लोग रहते हैं. इस कहानी की शुरुआत इसी गांव से होती है. इसी गांव में रहता था दयाल सिंह का परिवार. दयाल सिंह के पास जुतासे की जमीन नहीं थी. वह गांव के अन्य लोगों के खेतों में काम कर के ही अपने परिवार की जीविका चलाते थे. उन्हीं के पास उन के छोटे भाई गुरबख्श सिंह भी रहते थे. दोनों भाइयों का अलगअलग रहना था. दोनों ही भाई बहुत पहले से शराब बेचने के धंधे से जुड़े थे, जिस के सहारे ही दोनों के परिवारों की गुजर होती थी.

दयाल सिंह के 2 बेटे और 2 बेटियां थीं, परमजीत कौर और बलविंदर कौर. परमजीत कौर उस की अपनी बेटी थी. जबकि बलविंदर कौर को उस ने अपने भाई से गोद लिया था. समय गुजरते चारों बच्चे जवान हुए तो दयाल सिंह ने जैसेतैसे कर 2 बेटों की शादी कर दी. लड़कों की शादी हो जाने के बाद दोनों अलगअलग रह कर अपनी गृहस्थी संभालने लगे थे. दयाल सिंह का बड़ा बेटा शुरू से ही बीमार रहता था. उस की बीमारी के कारण उस की बीवी उसे छोड़ कर चली गई. उस के चले जाने के बाद कुछ समय के बाद ही पूरन सिंह किसी बीमारी से मर गया.

राज कौर थी तेजतर्रार दयाल सिंह ने अपने दूसरे बेटे कुलवंत सिंह की शादी काशीपुर के नजदीक गांव रमपुरा की रहने वाली राज कौर से की थी. शादी के कुछ समय बाद तक तो राज कौर परिवार के साथ मिलजुल कर रही, लेकिन कुछ ही समय बाद सासबहू में अनबन रहने लगी. राज कौर तेजतर्रार थी. इसी कारण वह ज्यादा समय तक परिवार के साथ निभा नहीं पाई. उस ने पति कुलवंत को उल्टीसीधी पट्टी पढ़ा कर मांबेटी के प्रति कान भरने आरंभ कर दिए थे. जिस के कारण कुलवंत सिंह मांबहन की तरफ से लापरवाह हो गया. फिर राज कौर ने कुलवंत सिंह पर अलग रहने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था.

लेकिन कुलवंत सिंह का कहना था कि जब तक उस की दोनों बहनों की शादी नहीं हो जाती, वह परिवार से अलग नहीं हो सकता. उस वक्त तक परमजीत कौर भी जवान हो चुकी थी. उस की पत्नी राज कौर हर समय दयाल सिंह और उन की बीवी जीत कौर को ले कर झगड़ती रहती थी. जबकि दयाल सिंह अपनी बीवी जीत कौर के साथ अलग ही रहते और अपना खाना अलग ही बना कर खाते थे. इस के बावजूद भी कुलवंत सिंह और राज कौर के बीच मनमुटाव बना रहा था. उस वक्त तक परमजीत कौर भी जवानी के मुकाम पर आ खड़ी हुई थी. बेटे की शादी के बाद दयाल सिंह को परमजीत कौर की शादी की चिंता सताने लगी थी. लड़की की शादी की बात मन में उठते ही दयाल सिंह ने बेटी के लिए लड़का तलाशना शुरू कर दिया था.

प्रेमी के साथ भाग कर परमजीत कौर ने की लवमैरिज अभी दयाल सिंह उस के योग्य वर की तलाश कर भी नहीं पाए थे कि उसी दौरान एक दिन उन की बेटी परमजीत कौर अचानक घर से लापता हो गई. जवान बेटी के अचानक गायब होने से दयाल सिंह का परिवार परेशान हो उठा. दयाल सिंह ने अपने रिश्तेदारों की सहायता से उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता नहीं चला. उसी भागदौड़ के दौरान दयाल सिंह को पता लगा कि उन की बेटी उन के ही पड़ोसी भूपेंद्र उर्फ पप्पू के साथ गई है. घर से भागने के बाद दोनों ने शादी भी कर ली थी.

दयाल सिंह को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्हें दुख भी हुआ और गुस्सा भी आया. लेकिन दयाल सिंह जानते थे कि भूपेंद्र सिंह एक झगड़ालू किस्म का युवक है. उस से बात करना उचित नहीं. उस के बाद उन्होंने लड़की की किस्मत उसी के साथ जोड़ते हुए चुप रहने में ही भलाई समझी. कुछ दिन बाहर रह कर भूपेंद्र सिंह परमजीत कौर को साथ ले कर अपने घर आ गया. भूपेंद्र सिंह का घर दयाल सिंह के घर के नजदीक ही था. परमजीत कौर अपने मायके के सामने आ कर रहने लगी थी. यह कुलवंत सिंह को बहुत अखरता था. उस ने कई बार भूपेंद्र सिंह को वहां से कहीं चले जाने का दबाव भी बनाया, लेकिन वह कहीं भी जाने को तैयार न था.

बलविंदर सिंह भूपेंद्र सिंह के परिवार से ही था. इसी बात को ले कर भूपेंद्र सिंह और दयाल सिंह के परिवार में मनमुटाव चला आ रहा था. उसी मनमुटाव के चलते टूटते रिश्तों से जमीनजायदाद पर आ टिका था. दयाल सिंह और बलविंदर सिंह दोनों ही शराब बेचने का काम करते थे. उन दोनों के बीच एकदूसरे के ग्राहकों को तोड़ने का सब से बड़ा विवाद था. जिस के कारण दोनों परिवारों में आपस में लड़ाईझगड़ा होना आम बात हो गई थी. उसी समय की बात है एक दिन किसी बात पर दोनों परिवारों के बीच काफी लड़ाईझगड़ा हुआ. लड़ाईझगड़े के दौरान एक दिन बलविंदर सिंह ने जीत कौर को अकेला पा कर मारापीटा.

जीत कौर की उस वक्त एक न चली तो उस ने जसुपर थाने में बलविंदर सिंह के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज करा दी. जिस के कारण बलविंदर सिंह को जेल की हवा खानी पड़ी. उसी समय किसी बीमारी के चलते दयाल सिंह की भी मौत हो गई. दयाल सिंह की मौत के बाद कुलवंत सिंह अपने परिवार में अकेला ही रह गया था. समय के साथ कुलवंत सिंह की पत्नी राज कौर 3 बच्चों अभिजीत, चरण कौर व अमृत सिंह की मां बनी. वहीं कुलवंत सिंह की बहन परमजीत कौर भी विजय, हरमन कौर तथा नैना तीन बच्चों की मां बनी. दोनों भाईबहनों के 3-3 बच्चे वह भी लगभग एक ही उम्र के थे. भले ही दोनों परिवारों में कितना भी बड़ा विवाद चल रहा था. लेकिन बच्चे बच्चे ही होते हैं. उन्हें अपने परिवार की रंजिश से कोई लेनादेना नहीं था.

दोनों परिवारों के बच्चे एक ही साथ खेलते थे. दयाल सिंह के गुजर जाने के बाद जीत कौर भी अपनी बेटी परमजीत कौर के साथ मनमुटाव को भुला कर उस से बातचीत करने लगी थी. जिस के बाद दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना भी चालू हो गया था. लेकिन यह बात भूपेंद्र सिंह को अखरने लगी थी. उस ने अपने परिवार के दबाव में आ कर परमजीत कौर को उस की मम्मी के पास जाने से रोकने की काफी कोशिश की, लेकिन उस की एक न चली. उस वक्त तक बलविंदर सिंह भी जेल से छूट कर घर आ गया था. बलविंदर सिंह और जीत कौर थे दुश्मन जेल से आ कर बलविंदर सिंह जीत कौर का कट्टर दुश्मन बन गया था. वह हर समय उसी से बदला लेने की फिराक में लगा रहता था.

हालात यहां तक आ पहुंचे कि बलविंदर सिंह बिना किसी कारण जीत कौर के परिवार को मारने मरने पर उतारू हो जाता था. भूपेंद्र सिंह के सामने भी अजीब सी स्थिति पैदा हो गई थी. एक तरफ उस का परिवार खड़ा था तो दूसरी तरफ उस की बीवी. इस लड़ाईझगड़े से भूपेंद्र सिंह इतना परेशान हो उठा कि एक दिन वह घर से बिना बताए ही कहीं चला गया. उस के जाने के बाद परिवार ने उसे हर जगह खोजा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता न चल सका. उस के चले जाने पर परमजीत कौर के सामने 3 बच्चों के पालने की जिम्मेदारी आ खड़ी हुई थी. आर्थिक स्थिति सामने आ खड़ी हुई तो परमजीत कौर ने अपनी मां का दामन थाम लिया.

उस के बाद दोनों ही मांबेटी गांव के खेतों में कामकाज कर के अपनी रोजीरोटी चलाने लगी थीं. बलविंदर सिंह उस वक्त भी शराब बेचने का काम करता था. उसी शराब बेचने के धंधे से जुड़ा था उस का भतीजा बंटी. बंटी जसपुर कोतवाली के गांव टांडा प्रभापुर में रहता था. बंटी का बलविंदर सिंह के घर पर पहले से ही आनाजाना था. उसी आनेजाने के दौरान उस की नजर एक दिन जीत कौर की गोद ली हुई बेटी बलविंदर कौर पर पड़ी. परमजीत कौर की बहन बलविंदर कौर भी प्रेमी के साथ भाग गई बलविंदर कौर देखने में सुंदर थी. बंटी की शादी नहीं हो पा रही थी. उस ने बलविंदर कौर को देखा तो उस का मन मचल गया. बलविंदर कौर को देखते ही उस ने प्रण किया कि चाहे कुछ भी हो वह उसे पटा कर ही छोड़ेगा.

उस के बाद वह उसे पाने के लिए उस के पीछे हाथ धो कर ही पड़ गया. उस वक्त तक बलविंदर कौर भी जवानी के मुकाम पर आ खड़ी हुई थी. बंटी के मन में बलविंदर के प्रति प्यार उमड़ा तो उसे पाने की जुगत में लग गया था. कई बार बलविंदर कौर ने बंटी की नजरों को परखने की कोशिश की. वह हर बार ही उसे ताड़ता रहता था. उसे उस की निगाहों का खेल समझने में देर न लगी. उसे देख कर उस के मन में भी हलचल पैदा हो गई थी. जिस के बाद वह भी मन ही मन उसे चाहने लगी थी. दोनों के बीच इशारोंइशारों में बात आगे बढ़ी तो जल्दी ही दोनों एकदूसरे के दीवाने हो गए थे. बंटी ने बलविंदर कौर का मोबाइल नंबर ले लिया और फिर दोनों की बातचीत शुरू हो गई.

दोनों के बीच प्रेम कहानी शुरू हुई तो बात साथ जीनेमरने तक जा पहुंची थी. धीरेधीरे यह बात जीत कौर और उस की बेटी परमजीत कौर के सामने भी आ गई थी. यह जानकारी मिलते ही मां बेटी ने बलविंदर कौर को समझाने की कोशिश की. लेकिन बलविंदर कौर मौन साध गई थी. उसी दौरान एक दिन बलविंदर कौर भी अपनी बहन परमजीत कौर की तरह ही अपनी मां को छोड़ कर बंटी के साथ भाग गई. बलविंदर कौर के भागने की सूचना मिली तो जीत कौर को बहुत दुख हुआ. उसे अपनी गोद ली बेटी से ऐसी उम्मीद न थी. उस के बाद भी जीत कौर ने बलविंदर कौर से मिल कर उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उस ने अपनी मां की एक न मानी.

जीत कौर ने बंटी के गांव जा कर पंचायत तक की, लेकिन बात नहीं बनी तो उस ने भी बलविंदर कौर को उस के ही नसीब के सहारे छोड़ दिया. पंचायत ने तुरंत ही फैसला लेते हुए बलविंदर कौर की शादी बंटी के साथ करा दी थी. उस के बाद से ही वह अपनी ससुराल में रह रही थी. एक के बाद एक मिले सदमे बलविंदर कौर की शादी के बाद जीत कौर उस सदमे से उबर भी न पाई थी. उसी दौरान अब से लगभग एक साल पहले कुलवंत सिंह की किसी ने हत्या कर दी. कुलवंत सिंह की हत्या के बाद जीत कौर पूरी तरह से टूट चुकी थी. उस के जीने का इकलौता सहारा भी छिन गया था.

भाई की हत्या की खबर सुन कर बलविंदर कौर भी अपनी मां से मिलने आई थी. ऐसी दुख की घड़ी में बलविंदर कौर अपनी मां की खैरखबर लेने आई तो जीत कौर को भी अच्छा लगा. उस के बाद बलविंदर कौर ने अपने मायके आनाजाना चालू कर दिया था. कुलवंत सिंह के खत्म होते ही उस की बीवी राज कौर अपने मायके काशीपुर के रमपुरा में जा कर रहने लगी थी. जीत कौर को उम्मीद थी कि वह अपने पति के सदमे में आ कर अपना मन बहलाने के लिए अपने मायके चली गई होगी. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वह ससुराल नहीं आई तो जीत कौर को ही उसे बुलाने के लिए जाना पड़ा.

जीत कौर को देख कर भी वह उस के पास तक नहीं आई और न ही कोई बात की. राज कौर ने उस के साथ जाने से साफ मना कर दिया. उस का कहना था कि जब उस का पति ही नहीं रहा तो वह ससुराल जा कर क्या करेगी. उस ने अपने बच्चों को भी लाने से साफ मना कर दिया था. यह सब सुन कर जीत कौर हक्कीबक्की रह गई. उस के बाद वह अपना सा मुंह ले कर घर वापस चली आई. कुलवंत सिंह की मौत के बाद उस के बच्चों और उस की बेटी परमजीत कौर के बच्चों की परवरिश की समस्या पैदा हो गई थी. उसी समस्या से निपटने के लिए जीत कौर ने शराब बेचने का धंधा अपना लिया था. जिस के सहारे दोनों मांबेटी 6 बच्चों की गुजरबसर कर रही थीं.

बंटी करने लगा प्रताडि़त बलविंदर की शादी को अभी एक साल पूरा भी नहीं हो पाया था. उसी दौरान बंटी उसे परेशान करने लगा. बातबात पर बंटी उसे मारनेपीटने लगा था. इसी अनबन के चलते बलविंदर कई बार अपने मायके चली आती थी. बंटी अपनी ससुराल आता और उसे बुला कर ले जाता. लेकिन अपने घर जाते ही वह फिर से उसे प्रताडि़त करना शुरू कर देता था. जब दोनों के बीच बढ़ा विवाद चरम पर पहुंच गया तो गांव में पंचायत के जरिए मामला निपटाने की कोशिश की. उस दौरान बलविंदर कौर प्रेगनेंट थी. जब भरी पंचायत में भी दोनों के एक साथ रहने की सहमति नहीं बनी तो दोनों ने अलगअलग रहने का फैसला कर लिया. फिर भी बंटी ने बलविंदर कौर से तलाक लेने के लिए एक शर्त रखी.

शर्त के अनुसार बलविंदर कौर जिस बच्चे को जन्म देगी, उस पर केबल बंटी का ही अधिकार होगा. इस बात पर सहमति बनते ही दोनों ने एकदूसरे से तलाक ले लिया. बंटी से तलाक ले कर बलविंदर कौर अपने मायके आ कर रहने लगी थी. बलविंदर कौर से तलाक लेने के बाद बंटी परेशान रहने लगा. उस के बाद उसे अपने किए पर काफी अफसोस भी हुआ. लेकिन अब उस के पास पछताने के सिवा कोई अन्य रास्ता नहीं था. बंटी अभी भी अपने चाचा के पास शराब के धंधे के चक्कर में आताजाता रहता था. उस की निगाहें बलविंदर कौर पर पड़तीं तो पागलों की तरह देखता रहता था. वह अभी भी चाहता था कि बलविंदर कौर उस के पास चली आए. लेकिन बलविंदर कौर उस के साथ बिताए दिन भुला नहीं पाई थी. जिस के कारण वह उस की तरफ नजर भर के देखना भी नहीं चाहती थी.

बंटी और बलविंदर कौर के साथ जो भी हुआ, बंटी उस सब का दोषी अपनी सास जीत कौर और परमजीत कौर को मानता था. बंटी की सोच थी कि बलविंदर को चढ़ा कर इन मांबेटियों ने ही उस से तलाक दिला दिया था. जिस की वजह से वह दोनों से रंजिश रखता था. हालात से टूट चुकी थी जीत कौर जीत कौर अब तक घर के हालात से बुरी तरह से टूट चुकी थी. न तो इस वक्त उस के पास पैसा ही था और न ही किसी से लड़नेझगड़ने की शक्ति. बंटी उस की बेटी को तलाक देने के बाद फिर से उस के घर के इर्दगिर्द चक्कर काटने लगा था. जिस के कारण तीनों मांबेटी परेशान थीं. जीत कौर अपनी बेटी बलविंदर कौर को ले कर पहले ही परेशान थी. उस का इतनी सी कम उम्र में ही पति से तलाक हो गया था. वह अभी जवान ही थी.

जीत कौर ने कई बार बलविंदर के सामने उस की दूसरी शादी करने वाली बात रखी, लेकिन उस ने अपनी मां से साफ कह दिया था कि वह अब दूसरी शादी नहीं करेगी. फिर भी अपनी बेटी बलविंदर कौर की चोरीछिपे जीत कौर ने उस की जिंदगी संवारने के लिए एक अच्छे लड़के की तलाश शुरू की. कुछ ही दिनों में उस की मेहनत रंग लाई. उसे बेटी के योग्य एक लड़का मिल गया. सितारगंज निवासी एक युवक को पसंद करते ही उस ने उस की शादी भी तय कर दी थी. 28 अगस्त, 2021 को उस की बारात आनी थी. बलविंदर कौर की शादी की बात पक्की होने की खबर किसी तरह से बंटी तक भी पहुंच गई थी. बलविंदर कौर की दूसरे लड़के के साथ शादी वाली बात सुनते ही बंटी पागल सा हो गया. उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. यह सुनते ही उस के तनबदन में आग लग गई.

उस के बाद उस ने प्रण किया कि वह किसी भी कीमत पर बलविंदर की शादी किसी दूसरे लड़के के साथ नहीं होने देगा, चाहे उसे बलविंदर कौर की हत्या ही क्यों न करनी पड़े. उस के बाद उस ने कई बार बलविंदर कौर से मिलने की कोशिश की, लेकिन वह सफल न हो सका. 11 अगस्त, 2021 को बंटी भोगपुर डाम में शराब बेच कर अपने घर की ओर जा रहा था. उस दिन बलविंदर कौर की शादी को ले कर मांबेटी की बंटी से नोंकझोंक हो गई, जिस के बाद जीत कौर और परमजीत कौर ने उस की लाठीडंडों से पिटाई की थी. बंटी ने चाचा बलविंदर के साथ बनाई योजना बंटी ने उसी दिन मांबेटी को खत्म करने का फैसला ले लिया था. फिर जल्दी दोनों को मारने का प्लान बनाना भी चालू कर दिया था. इस प्लान की योजना उस ने अपने चाचा बलविंदर सिंह को भी बता दी थी.

बलविंदर सिंह खुद ऐसे मौके की तलाश में लगा हुआ था. वह दोनों से पुरानी दुश्मनी निभाने को तैयार था. बंटी की बात सुनते ही बलविंदर तुरंत ही उस का साथ देने के लिए तैयार हो गया. यह बात बलविंदर सिंह ने अपनी पत्नी को भी बता दी थी. बलविंदर सिंह ने अपनी पत्नी जसविंदर कौर को भी इस योजना में शामिल करते हुए कहा था कि उसे तो केवल उन का पीछा करना है. जिस दिन मांबेटी कहीं जाने की योजना बनाएं, वह फोन कर उन्हें जानकारी दे दे. 17 अगस्त, 2021 को जीत कौर अपनी बेटी परमजीत कौर को साथ ले कर जसपुर जाने वाली थी. इस की जानकारी मिलते ही यह सूचना जसविंदर कौर ने अपने पति बलविंदर सिंह को मोबाइल पर दे दी थी.

जिस वक्त जसविंदर कौर ने यह सूचना बलविंदर सिंह को दी, उस वक्त बंटी भी उस के साथ था. दोनों ही उस वक्त मोटरसाइकिल पर शराब ले कर बेचने जा रहे थे. इस जानकारी के मिलते ही दोनों ने शराब आसपास छिपा दी और फिर दोनों पाटल व अन्य धारदार हथियार ले कर जसपुर जाने वाली नहर के किनारे बने रास्ते पर चलने लगे. कुछ दूर पर ही जीत कौर अपनी बेटी परमजीत कौर के साथ आती दिखाई दी. उन्हें सामने से आते देख बलविंदर सिंह ने अपनी बाइक नहर के किनारे झाड़ी में खड़ी कर दी और स्वयं भी वही पर छिप गए. जैसे ही जीत कौर अपनी बेटी के साथ उन के सामने से गुजर रही थी, तभी मौका पाते ही दोनों ने पीछे से अचानक हमला बोल दिया. जिस के कारण मांबेटी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था.

उस वक्त परमजीत कौर की छोटी बेटी नैना भी उस के साथ थी. लेकिन उस ने हिम्मत से काम लिया और वह फुरती से नहर के किनारे खड़ी झाडि़यों के पीछे छिप गई. जैसे ही बलविंदर कौर और बंटी वहां से चले गए तो उस ने वहां से अपने घर की ओर दौड़ लगा दी. जिस के कारण ही इस घटना का खुलासा हो सका था. पुलिस ने इस मामले में जसविंदर कौर पत्नी बलविंदर सिंह उर्फ बिल्लू की संलिप्तता पाई जाने के कारण कोतवाली में दर्ज केस में धारा 120बी आईपीसी जोड़ कर अभियुक्ता जसविंदर कौर को भी गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. लेकिन मांबेटी के खत्म होने के कारण 6 मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया था.

जीत कौर की हत्या के बाद उस की भतीजी बलविंदर कौर को छोड़ बच्चों की देखरेख करने वाला कोई नहीं बचा था. Love Crime Story

Hindi Story : ये तन मांगे मोर

Hindi Story : कुछ महिलाएं अपने घमंडी व जिद्दी स्वभाव की वजह से अपनी गृहस्थी में खुद ही आग लगा लेती हैं. 2 बच्चों की मां लता चौहान भी ऐसी ही थी. लड़झगड़ कर पति को घर से भगाने के बाद उस ने भांजे अंकित के साथ अवैध संबंध बना लिए. इस के बाद उस ने…

19 वर्षीया काजल उस समय बेचैन हो कर अपने घर में टहल रही थी. वह बारबार अपने रो रहे छोटे भाई शिवम को चुप कराती थी, मगर शिवम बारबार मां को याद कर के रोने लगता था. हरिद्वार जिले के गांव हेतमपुर की रहने वाली काजल व शिवम की मां लता चौहान (38) गत शाम को पास के ही कस्बे बहादराबाद में सब्जी खरीदने के लिए घर से निकली थी, मगर आज तक वह वापस घर नहीं लौटी थी. उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ आ रहा था. मां के वापस न लौटने व मोबाइल के स्विच्ड औफ होने से काजल व शिवम का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

दोनों भाईबहन पिछली शाम से ही अपने सभी रिश्तेदारों को फोन कर कर के अपनी मां के बारे में जानकारी कर रहे थे, मगर उन की मां के बारे में सभी रिश्तेदारों ने मोबाइल पर अनभिज्ञता जताई. इस के बाद सूचना पा कर कुछ रिश्तेदारों व कुछ पड़ोसियों का भी उन के घर पर आना शुरू हो गया था. सभी दोनों भाईबहन को दिलासा दे कर चले जाते. इसी प्रकार 3 दिन बीत गए थे तथा काजल व शिवम को अपनी मां के बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिली. इस के बाद अब उन के रिश्तेदार काजल पर लता की गुमशुदगी थाने में दर्ज कराने पर जोर देने लगे. लेकिन थाने जाने के नाम से काजल को एक अंजाना सा डर लग रहा था.

वह 14 जून, 2021 का दिन था. आखिर उस दिन काजल थाना सिडकुल पहुंच ही गई. वह थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला से मिली और उन्हें अपनी मां लता चौहान के गत 4 दिनों से लापता होने की जानकारी दी. जब थानाप्रभारी बुटोला ने काजल से उस के पिता के बारे में पूछा तो काजल ने बताया, ‘‘सर पिछले 2-3 सालों से मेरे पिता चंदन सिंह नेगी व मां लता चौहान के बीच अनबन चल रही है. मेरे पिता फरीदाबाद (हरियाणा) में रह कर ड्राइवरी करते हैं. यहां पर 2 साल पहले मेरे फुफेरे भाई अंकित चौहान ने हमें एक मकान खरीद कर दिया था. इस मकान में हम तीनों रहते हैं. घर से चलते समय मेरी मां हरे रंग का सूट सलवार व पैरों में सैंडिल पहने थी.’’

इस के बाद काजल ने मां का मोबाइल नंबर भी थानाप्रभारी बुटोला को नोट करा दिया. इस के बाद काजल वापस घर आ गई. काजल की तहरीर पर थानाप्रभारी बुटोला ने लता की गुमशुदगी दर्ज कर ली और इस केस की जांच एसआई अमित भट्ट को सौंप दी. लता की गुमशुदगी का केस हाथ में आते ही अमित भट्ट सक्रिय हो गए. उन्होंने सब से पहले लता के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने के लिए साइबर थाने से संपर्क किया था और थाने के 2 सिपाहियों को लता चौहान की डिटेल्स का पता करने के लिए सादे कपड़ों में गांव हेतमपुर में तैनात कर दिया. उसी दिन शाम को थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला ने लता की गुमशुदगी की सूचना एएसपी डा. विशाखा अशोक भडाने व एसपी (सिटी) कमलेश उपाध्याय को दी.

2 दिनों में पुलिस को लता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स मिल गई थी. काल डिटेल्स के अनुसार 10 जून, 2021 की शाम को लता चौहान व उस के भांजे अंकित चौहान की लोकेशन हेतमपुर से सलेमपुर की गंगनहर तक एक साथ थी. इस से पहले दोनों में बातें भी हुई थीं. इस के अलावा लता के मोबाइल पर अंतिम काल अंकित चौहान के ही मोबाइल से आई थी. इस के कुछ समय बाद लता चौहान व अंकित चौहान की लोकेशन भी अलगअलग हो गई थी. काल डिटेल्स की यह जानकारी तुरंत ही थानाप्रभारी ने एसपी (सिटी) कमलेश उपाध्याय को दी. इस के बाद उपाध्याय ने थानाप्रभारी बुटोला व एसआई अमित भट्ट को अंकित चौहान से पूछताछ करने के निर्देश दिए. बुटोला व भट्ट ने जब अंकित चौहान से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला.

पुलिस ने जब अंकित चौहान के बारे में जानकारी की तो पता चला कि वह लता का सगा भांजा था. अंकित मूलरूप से बिजनौर जिले के गांव मानपुर शिवपुरी का रहने वाला था. अंकित एमएससी करने के बाद किसी अच्छी नौकरी की तलाश में था. 3 साल पहले जब लता के अपने पति से संबंध बिगड़ गए थे, तब से अंकित की लता से नजदीकियां बढ़ गई थीं. इस दौरान अंकित लता व उस के दोनों बच्चों का पूरापूरा खयाल रखता था. लता के रहनेखाने से ले कर वह उन्हें हर चीज मुहैया कराता था. यह जानकारी प्राप्त होने पर बुटोला व अमित भट्ट ने अंकित की तलाश में धामपुर व हेतमपुर में कुछ मुखबिर सतर्क कर दिए थे. विवेचक अमित भट्ट ने भी अंकित की तलाश में उस के धामपुर स्थित गांव मानपुर शिवपुरी में कई बार दबिश दी, मगर अंकित उन्हें न मिल पाया.

इसी प्रकार 9 दिन बीत गए तथा पुलिस को अंकित चौहान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई. वह 27 जून, 2021 का दिन था. शाम के 7 बज रहे थे. तभी श्री बुटोला के मोबाइल पर उन के खास मुखबिर का फोन आया. मुखबिर ने उन्हें बताया कि सर, जिस अंकित को तलाश कर रहे हो, वह इस समय यहां हरिद्वार के रोशनाबाद चौक पर खड़ा है. यह सुनते ही बुटोला की बांछें खिल गईं. बुटोला ने इस मामले में विलंब करना उचित नहीं समझा. उन्होंने तुरंत अपने साथ विवेचक अमित भट्ट व फोर्स को साथ लिया और 5 मिनट में ही रोशनाबाद चौक पर पहुंच गए. मुखबिर के इशारे पर उन्होंने वहां से अंकित को हिरासत में ले लिया. वह उसे थाने ले आए.

यहां पर जब बुटोला व भट्ट ने उस से लता के लापता होने के बारे में पूछताछ की, तो पहले तो वह पुलिस को गच्चा देने की कोशिश करता रहा. वह पुलिस को बताता रहा कि लता उस की मामी अवश्य थी, मगर अब वह कहां है, उस की उसे कोई जानकारी नहीं है. लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और बोला, ‘‘साहब, अब लता इस दुनिया में नहीं है. 10 जून, 2021 की रात को मैं ने अपने दोस्त अमन निवासी कस्बा शेरकोट जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश के साथ मिल कर उस की गला घोंट कर हत्या कर दी थी तथा उस की लाश को हम ने गांव सलेमपुर स्थित गंगनहर में फेंक दी थी. लता को मैं घुमाने की बात कह कर सलेमपुर गंगनहर तक लाया था.’’

अंकित के मुंह से लता की हत्या की बात सुन कर थानाप्रभारी बुटोला तथा वहां मौजूद अन्य पुलिस वाले सन्न रह गए. पूछताछ में उस ने लता की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

गांव मानपुर में अपने बाप हरगोविंद, मां सरोज तथा छोटे भाई अनुज के साथ रहता था. उस ने बताया कि 3 साल पहले जब लता का अपने पति के साथ विवाद हुआ था तो उस दौरान अंकित ने ही लता की काफी मदद की थी. उसी दौरान लता उस की ओर आकर्षित हो गई थी. लता और अंकित के बीच अवैध संबंध बन गए थे. इस के बाद अंकित ने लता को हेतमपुर में एक मकान खरीद कर दे दिया था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि करीब 2 महीने पहले अंकित ने लता को उस के पड़ोसी के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया था, यह देख कर अंकित को गुस्सा आ गया था. गुस्से में उस ने लता को उसे खरीद कर दिया हुआ मकान अपने नाम वापस करने का कहा तो वह टालने लगी और 2 लाख रुपए की मांग करने लगी.

लता की इस हरकत से अंकित परेशान हो गया था और अंत में वह उस की हत्या की योजना बनाने लगा. यह बात उस ने अपने दोस्त अमन को बताई तो वह भी अंकित का साथ देने को राजी हो गया. दोनों ने इस की योजना बनाई. योजना के अनुसार 10 जून, 2021 को अंकित अमन के साथ रात 8 बजे लता के घर पहुंचा था. इस के बाद उसे घुमाने की बात कह कर वह लता को ले कर गंगनहर किनारे गांव सलेमपुर पहुंचा था. उस समय वहां रात का अंधेरा छाया था. मौका मिलने पर अमन ने तुरंत ही लता को पकड़ कर उस का गला घोंट दिया था. लता के मरने के बाद दोनों ने उस की लाश गंगनहर में फेंक दी थी. उस समय रात के 11 बज चुके थे. इस के बाद अमन वापस अपने घर चला गया था. लता का मोबाइल उस समय अंकित के पास ही था.

जब उस ने 12 जून 2021 को मोबाइल औन किया तो उस में कालें आनी शुरू हो गई थीं. तब अंकित ने उस में से सिमकार्ड निकाल कर मोबाइल व सिम को सिंचाई विभाग की गंगनहर में फेंक दिया था. इस के बाद पुलिस ने अंकित के बयान दर्ज कर लिए और लता की गुमशुदगी के मुकदमे को हत्या में तरमीम कर दिया. पुलिस ने इस केस में आईपीसी की धाराएं 302 व 120बी और बढ़ा दी थीं. 2 जुलाई, 2021 को पुलिस ने अंकित को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक आरोपी अंकित जेल में ही बंद था. थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला द्वारा गंगनहर में लता के शव को तलाश किया जा रहा था. दूसरी ओर पुलिस दूसरे आरोपी अमन की तलाश में जुटी थी.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime News in Hindi : सोनल की जान ली लिवइन पार्टनर ने

Crime News in Hindi : बर्थडे पार्टी में सोनल और निखिल कुमार की नजरें ऐसी मिलीं कि दोनों एकदूसरे के दिल में उतर गए. फेमिली वालों से विद्रोह कर सोनल निखिल के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान एक दिन निखिल ने न सिर्फ सोनल बल्कि उस की सहेली की 6 महीने की बेटी की गला रेत कर हत्या कर दी. आखिर निखिल ने जान से ज्यादा प्यार करने वाली प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों कियाï?

वह पार्टी में सब से अलग नजर आ रही थी. निखिल की नजरें उस खूबसूरत हसीन युवती से हट ही नहीं रही थी, वह अपलक उसे ही देखे जा रहा था. पतलीदुबली छरहरी काया, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, कसा हुआ बदन और गोरा रंग. सब कुछ उस युवती की सब से अलग पहचान बना रहा था. निखिल अपने दोस्त के बेटे की बर्थडे पार्टी में शामिल होने आया था. पहली ही नजर में वह युवती उस के दिल में उतर गई थी और निखिल उसे पागलों की तरह घूरे जा रहा था.

केक काटने की घोषणा होने का उसे पता ही नहीं चला. वह तब चौंका, जब उस के दोस्त अभय ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया, ”खाना शुरू हो गया है निखिल, तुम कहां खो गए हो?’’

”अं…’’ वह चौंक कर बोला, ”कहीं भी तो नहीं अभय. अरे हां, क्या तुम्हारे बेटे का केक कट गया?’’

अभय मुसकराया, ”लगता है, तुम किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गए हो, केक कटे तो आधा घंटा हो गया है.’’

”ओह,’’ निखिल झेंप गया, ”भाभीजी कहां हैं, मैं बेटे यश के लिए एक गिफ्ट लाया हूं.’’

”हेमा वहां स्टेज पर है,’’ अभय हंस कर बोला.

निखिल तेजी से स्टेज की तरफ बढ़ गया. उस ने अपने हाथ का गिफ्ट हेमा के पास बैठे यश को थमा कर हेमा को हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा और फिर अभय के पास लौट आया.

अभय किसी अन्य मित्र से बतिया रहा था. निखिल उसे इशारे से बुला कर एक तरफ ले गया. अभय को आश्चर्य हुआ, वह हैरानी से बोला, ”क्या हुआ, तुम मुझे महफिल से अलग क्यों ले कर आए हो निखिल?’’

”अभय, यार तुम्हारी इस महफिल में एक खूबसूरत फूल मुझे पसंद आ गया है. तुम बताओगे, वह गुलाबी सूट वाली युवती कौन है?’’

”अरे वह!’’ अभय ने उस युवती की तरफ देख कर मुसकराते हुए कहा, ”वह मेरी मेहमान है. मेरी पत्नी हेमा की फ्रेंड है, नैनीताल से यहां हल्द्वानी आई है.’’

”नाम क्या है इस का?’’

”सोनल.’’ अभय ने बताया, ”वैसे इसे पटाना तेरे वश की बात नहीं है. वह बहुत नकचढ़ी है.’’

”देखता हूं.’’ निखिल मुसकराया और उस ओर बढ़ गया, जिधर वह युवती खाना खा रही थी.

निखिल ने अपने लिए खाने की प्लेट ली और उसे ले कर सोनल की तरफ आ गया. वह सोनल के पास खड़ा हो कर खाना खाने लगा. कनखियों से वह अभी भी सोनल को देख रहा था.

अचानक वह घबरा गया. सोनल उस के करीब आ रही थी. वह बगलें झांकने लगा तो सोनल की मीठी हंसी उस के कान में पड़ी, ”बस, हो गए अरमान ठंडे. मैं बहुत देर से देख रही हूं, तुम मुझे घूर रहे हो.’’

”नहीं तो.’’ निखिल जल्दी से बोला, ”मैं क्यों तुम्हें घूरूंगा मिस सोनल.’’

सोनल को हैरानी हुई, ”वाह! तुम ने तो मेरा नाम भी मालूम कर लिया. क्या इरादे हैं जनाब के?’’

निखिल ने हिम्मत जुटाई, ”तुम खूबसूरत हो सोनल. इस पार्टी में तुम ही तुम नजर आ रही हो, मेरा दिल तुम पर आ गया है.’’

सोनल के गालों पर लालिमा दौड़ गई. वह नीचे देखते हुए बोली, ”तुम भी हैंडसम हो, क्या नाम है तुम्हारा?’’

”निखिल कुमार. मैं यहीं हल्द्वानी में रहता हूं.’’ अपनी बात खत्म कर के उस ने पूछा, ”नैनीताल में तुम कहां रहती हो सोनल?’’

सोनल को गहरा आश्चर्य हुआ, ”मान गई तुम्हें. तुम ने तो यह भी जान लिया कि मैं नैनीताल में रहती हूं.’’

”क्या करता, तुम अच्छी लगी तो तुम्हारे बारे में जानना जरूरी हो गया. अब बताओ, नैनीताल में कहां रहती हो, घर में कौनकौन हैं?’’

सोनल कुछ कहती, तभी हेमा को अपनी तरफ आता देख कर वह जल्दी से बोली, ”खाना खा लो, मैं 2 दिन यहीं हूं. जाओगे तो मेरा मोबाइल नंबर लेते जाना.’’

”ठीक है.’’ निखिल ने कहा और खाना खाने लगा. सोनल अपनी प्लेट थामे दूसरी तरफ चली गई.

पार्टी खत्म कर के जब निखिल निकला तो उस की जेब में सोनल का मोबाइल नंबर था, जो सोनल ने चुपचाप एक कागज पर लिख कर उसे थमा दिया था.

8 जुलाई, 2025 को दिन के डेढ़ बजे थाना सिविल लाइंस में आए एक फोन ने खलबली मचा दी. फोन एक महिला की ओर से किया गया था, ”साहब, मैं मजनू का टीला से रश्मि बोल रही हूं. यहां मेरी सहेली और मेरी 6 महीने की बेटी की किसी से हत्या कर दी है, आप जल्दी से यहां आ जाइए.’’ महिला का स्वर भर्राया हुआ था. फोन थाने में मौजूद एसआई नितिन शर्मा ने अटेंड किया था. 2 कत्ल की वारदात से वह थोड़ा विचलित हो गए. उन्होंने गंभीर स्वर में पूछा, ”तुम मजनू का टीला में कहां से बोल रही हो रश्मि?’’

”मैं एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर रहती हूं. वारदात मेरे इसी घर में हुई है साहब.’’ रश्मि इस बार बताते हुए रोने लगी थी.

”हम आ रहेहैं. तुम वहां किसी भी सामान को नहीं छुओगी. जिस कमरे में ये कत्ल हुए हैं, उस से बाहर ही रहना है.’’ एसआई नितिन शर्मा ने रश्मि को हिदायत दी और फोन रख कर उन्होंने अपने कक्ष में मौजूद एसएचओ हनुमंत सिंह को जा कर इस दोहरे हत्याकांड की सूचना दी. एसएचओ हनुमंत सिंह अपने साथ एसआई रंजीत कुमार, नितिन शर्मा, हैडकांस्टेबल रनवीर, विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम को ले कर तुरंत घटनास्थाल के लिए निकल पड़े. रास्ते से उन्होंने फोरैंसिक टीम को भी वारदात वाले स्थान पर पहुंचने के लिए कह दिया.

घटनास्थल थाने से ज्यादा दूर नहीं था. पुलिस जब एफ-54 के पते पर पहुंची तो वहां आसपास के लोगों की अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई थी. हैडकांस्टेबल विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम ने भीड़ को वहां से हटाया. एसएसओ हनुमंत सिंह और एसआई नितिन कुमार वैन से उतर कर आगे बढ़े तो एक व्यक्ति उन के पास आ गया. वह रो रहा था, ”साहब, मेरी बेटी की हत्या हुई है, उस के साथ सोनल भी मृत पड़ी है.’’

”चलो, हम देखते हैं.’’ एसएचओ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले. वह उस व्यक्ति के साथ एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर आ गए. सामने ही वह कमरा था, जिस में एक युवती और 6 महीने की बच्ची की रक्तरंजित लाश पड़ी हुई थी.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने देखा. युवती और उस मासूम बच्ची का बड़ी बेरहमी से गला रेता गया था. बच्ची की लाश पलंग पर थी, जबकि युवती की लाश फर्श पर पड़ी हुई थी. पूरे कमरे में नजर दौड़ाने पर यह स्पष्ट हो गया कि युवती और हत्यारे में पहले जम कर संघर्ष हुआ है. इस के बाद हत्यारा उस का गला काटने में सफल हुआ. हत्यारे ने इस 6 माह की बच्ची की हत्या क्यों की, यह बात एसएचओ हनुमंत सिंह की समझ में नहीं आई.

उन्होंने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. चूंकि फोरैंसिक टीम वहां आ गई थी. उन्होंने टीम को बारीक से बारीक सबूत उठाने के लिए कहा और कमरे से बाहर आ गए. इस दोहरे हत्याकांड की सूचना उन्होंने उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी को दे दी. फिर वह मृत बच्ची के पिता के पास बाहर आ गए.

”रश्मि कहां है, जिस ने हमें फोन किया था?’’ उन्होंने प्रश्न किया.

उस व्यक्ति ने औरतों से घिरी अपनी पत्नी रश्मि को इशारे से पास बुला लिया. रश्मि का रोरो कर बुरा हाल था.

”यहां एक जवान युवती की लाश भी है, वह कौन है?’’ एसएचओ ने रश्मि से सवाल किया.

”साहब, इस युवती का नाम सोनल है. यह ए ब्लौक में रहती है, लेकिन कुछ दिनों से इस का अपने लिवइन पार्टनर से झगड़ा चल रहा था. चूंकि मेरी इस के साथ गहरी जानपहचान बन गई थी, मैं इसे अपनी सहेली मानने लगी थी. पार्टनर से झगड़े के चलते सोनल 4-5 दिन से हमारे घर में आ कर रह रही थी. यह लाश सोनल की है.’’

”इस की हत्या कैसे हुई, मेरे कहने का मतलब है कि जब यह वारदात हुई, तुम और तुम्हारे पति क्या घर पर ही थे?’’

”नहीं साहब, मेरे पति दुर्गेश अपनी दुकान चले गए थे सुबह. उन की मजनू का टीला में ही मोबाइल रिपेयरिंग की शौप है. मेरी 2 बेटियां हैं, बड़ी बेटी का नाम दीया है, वह स्कूल जाती है. छोटी अभी 6 माह की ही थी. हम ने प्यार से इस का नाम यशिका रखा था. आज मैं दीया को लाने के लिए दोपहर में स्कूल गई तो सोनल को उस की देखभाल का जिम्मा सौंप गई थी. मैं जब दीया को स्कूल से ले कर घर आई तो घर का दरवाजा बंद था. मैं ने धक्का दिया तो वह खुल गया.

”कमरे में खून से सनी मुझे सोनल की लाश दिखी तो मेरे मुंह से चीख निकल गई. मैं घबरा कर उसे देखने अंदर घुसी तो मुझे पलंग पर यशिका भी खून से तर हालत में पड़ी मिली. यशिका और सोनल का गला किसी ने काट डाला था. मैं बदहवास हालत में बाहर भागी और चिल्ला कर मैं ने पड़ोसियों को इकट्ठा किया, फिर किसी के कहने पर थाने में फोन कर दिया. मैं ने फोन कर के पति दुर्गेश को भी घर बुला लिया.’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने पूछा, ”यह माना जा सकता है कि सोनल की किसी के साथ रंजिश रही होगी, वह मौका देख कर यहां आया और उस ने सोनल का गला काट दिया. लेकिन तुम्हारी बेटी तो अभी 6 महीने की ही थी, उस की हत्या भला कोई क्यों करेगा.’’

”मैं क्या कहूं साहब,’’ रश्मि रोते हुए बोली, ”इस छोटी सी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था, वह इतनी समझदार भी नहीं थी कि हत्यारे द्वारा सोनल की हत्या करने की बात किसी को बता देती.’’

”यही तो मैं भी सोच रहा हूं.’’ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले, ”अगर हत्यारे को यह डर हो कि उसे हत्या करते हुए जिस ने देखा है, वह यह भेद किसी को बता देगा, हत्यारा ऐसी सूरत में उस प्रत्यक्षदर्शी की हत्या करता है. यहां ऐसी बात नहीं है, फिर यशिका की हत्या क्यों की गई?’’

”दुर्गेश, क्या तुम्हारी किसी से दुश्मनी वगैरह तो नहीं थी? संभव है तुम्हारा कोई दुश्मन तुम से बदला लेने घर में घुसा, तुम नहीं मिले तो उस ने तुम्हारी बेटी का कत्ल कर दिया. सोनल की हत्या इसलिए हो गई कि वह तुम्हारी बेटी के हत्यारे से भिड़ गई…’’

”नहीं साहब. मैं ने जिंदगी में दोस्त बनाए हैं, दुश्मन नहीं. मैं सीधासादा जीवन जीने वाला व्यक्ति हूं साहब.’’ दुर्गेश रुंधे स्वर में बोला, ”मेरी फूल सी बेटी का कातिल बचना नहीं चाहिए साहब, उसे गिरफ्तार कर के आप फांसी पर चढ़ा दीजिए.’’

”कातिल कोई भी हो दुर्गेश, उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’’ हनुमंत सिंह ने कहा.

डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी वहां आ पहुंचे थे. उन्हें हनुमंत सिंह ने दोनों लाशें दिखाईं. डीसीपी श्री बांटिया ने वहां निरीक्षण करने के बाद एसएचओ हनुमंत सिंह से पूछा, ”आप ने कुछ मालूम किया, ये दोनों लाशें किस की हैं?’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने दोनों अधिकारियों को सारी जानकारी संक्षिप्त में दे दी.

एसीपी विनीता त्यागी पूरी बात सुनने के बाद बोलीं, ”मुझे ऐसा लगता है, यह हत्या सोनल के बौयफ्रेंड ने की है. चूंकि सोनल उस से नाराज हो कर अपनी सहेली रश्मि के घर आ कर रह रही थी, यह बात उसे अच्छी नहीं लगी. वह गुस्से में रश्मि की गैरमौजूदगी में यहां आया. सोनल और उस में झगड़ा हुआ. इसी झगड़े में उस ने सोनल की जान ले ली.’’

”लेकिन मैडम, इस 6 माह की बच्ची को उस ने क्यों मारा?’’ हनुमंत सिंह ने प्रश्न कर दिया.

”कातिल को पकडि़ए, इस का जवाब आप को उस से मिल जाएगा. आप यहां के सीसीटीवी फुटेज चैक करिए. सोनल के लिवइन पार्टनर को चैक कीजिए. इन दोनों हत्याओं का रहस्य इन्हीं में छिपा मिलेगा.’’ एसीपी विनीता त्यागी ने गंभीर स्वर में निर्देश दिया.

”ठीक है मैडम!’’ एसएचओ हनुमंत सिंह सिर हिला कर बोले.

फोरैंसिक टीम वहां के साक्ष्य जुटा कर अपना काम खत्म कर चुकी थी. पुलिस टीम ने वहां की जरूरी कागजी काररवाई पूरी कर के दोनों लाशें पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दीं, फिर रश्मि और उस के पति से सोनल के लिवइन पार्टनर का पूरा एड्रैस ले कर उन्होंने एसआई नितिन शर्मा को सोनल के बौयफ्रैंड की जांच का कार्य सौंप कर वह थाने लौट गए. एसीपी विनीता त्यागी का अनुमान गलत नहीं था. उन्हें सोनल के लिवइन पार्टनर पर शक हुआ था. एसआई नितिन शर्मा ने जब ए ब्लौक में जा कर वह कमरा देखा, जिस में सोनल कई महीनों से अपने लिवइन पार्टनर के साथ रह रही थी तो वहां दरवाजे पर ताला लटका मिला.

उन्होंने फोन से यह जानकारी सिविल लाइंस थाने में दी तो थाने से उन की मदद के लिए एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार को मजनू का टीला भेज दिया गया. दोनों ने वहीं के पड़ोसियों से उस लिवइन पार्टनर का नाम और उस के व्यवहार के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली. उस का नाम निखिल कुमार था. वह कुछ महीनों से यहां कमरा ले कर सोनल के साथ रह रहा था.  पड़ोसियों के अनुसार निखिल शराबी था और वह वक्तबेवक्त सोनल से लड़ताझगड़ता भी रहता था. उन में मारपीट भी होती रहती थी.

एक खास बात यह भी मालूम हुई कि सोनल हालफिलहाल गर्भवती थी. निखिल बच्चा चाहता था, किंतु सोनल ने उस की मरजी के खिलाफ वह बच्चा गिरा दिया था. निखिल इस बात से बहुत नाराज था. 4 दिन पहले उन में जबरदस्त झगड़ा हुआ था, तब सोनल अपना बैग ले कर अपनी सहेली रश्मि के यहां रहने चली गई थी. निखिल के पिता, 2 भाई और बहन भी मजनू का टीला में ही रहते थे. दोनों पुलिस अधिकारी उन का पता ले कर उन तक पहुंच गए. निखिल के विषय में पूछने पर उस की बहन मीनाक्षी (12 वर्ष) ने उपेक्षित स्वर में कहा, ”सर, हम उस के रवैए से उस के साथ कोई वास्ता नहीं रखते. वह हमारे लिए मर गया है.’’

”वह घर से लापता है, हमें केवल यह बताओ कि इस समय वह कहां छिपा हो सकता है?’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार बोले.

”क्या उस ने कोई गुनाह किया है साहब?’’ निखिल के पिता मोहन राम ने पूछा.

”वह जिस लड़की के साथ लिवइन पार्टनर के रूप में रह रहा था, उस लड़की का आज दोपहर में कत्ल हो गया है. निखिल पर हमें शक है, इसलिए उस के बारे में हमें जानकारी चाहिए.’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार ने कहा.

इस बार निखिल के बड़े भाई करण (25 वर्ष) ने कहा, ”सर, हमारा पैतृक घर उत्तराखंड के हल्द्वानी में है. वह वहां जा सकता है.’’ करण ने हल्द्वानी का पता लिखवा दिया.

”देखो, यदि निखिल आप लोगों से फोन से बात करे तो तुरंत हमें आप लोग वह फोन नंबर और वह कहां से बात कर रहा है, बताएंगे.’’ एसआई नितिन शर्मा ने कहने के बाद अपना मोबाइल नंबर उन्हें नोट करवा दिया.

इधर एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि-दुर्गेश के घर के आसपास के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए थे. उन्हें एक सीसीटीवी की फुटेज में निखिल रश्मि के घर चोरों की तरह जाता हुआ दिखाई दे गया. यह इस बात का पुख्ता सबूत था कि निखिल ही आज दोपहर में रश्मि के घर में आया था.

एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार और एसआई नितिन शर्मा ने थाने पहुंच कर निखिल के लापता होने की और उस के हल्द्वानी भाग जाने की जानकारी दी तो डीसीपी राजा बांटिया के कहने पर पुलिस की 2 टीमें उत्तराखंड के हल्द्वानी और टनकपुर के बनबसा बौर्डर के लिए भेज दी गईं. पुलिस अधिकारियों को संदेह था कि निखिल नेपाल भाग कर खुद को सुरक्षित महसूस कर सकता है. इसलिए बनबसा बौर्डर के लिए एक टीम भेजी गई थी. पुलिस की तत्परता की वजह से लव क्राइम के आरोपी निखिल को 24 घंटे में ही हल्द्वानी से गिरफ्तार कर लिया गया. निखिल ने गलती यह कर दी थी. उस ने 8 जुलाई की रात को अपनी बहन मीनाक्षी को फोन कर के बता था कि वह हल्द्वानी में है और पैसा इकट्ठा कर के नेपाल भागने की तैयारी कर रहा है.

मीनाक्षी ने उस का यह फोन नंबर पुलिस को भेज दिया था. उसे ट्रैस कर के ही पुलिस ने निखिल को हल्द्वानी दबोच लिया था. उसे 9 जुलाई, 2025 को दिल्ली लाया गया.

सिविल लाइंस थाने में डीसीपी राजा बांटिया, एसीपी विनीता त्यागी और थाने की पुलिस टीम द्वारा निखिल से पूछताछ की गई तो उस ने कुबूल कर लिया कि सोनल और रश्मि की बेटी की हत्या उस ने की थी.

”तुम ने अपनी प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों किया? इस क्राइम स्टोरी की सच्चाई क्या है?’’ एसएचओ हनुमंत सिंह ने निखिल से प्रश्न किया.

”साहब, वह मुझ से लड़ कर रश्मि के घर रहने चली गई थी. मैं उसे बहुत प्यार करता था, उस के बगैर रह नहीं सकता था. मैं दोपहर रश्मि के घर उस वक्त गया, जब वह अपनी बेटी दीया को लाने स्कूल गई थी. मैं ने सोनल से कहा कि वह घर चले. सोनल ने मना कर दिया कि अब वह मुझ से कोई वास्ता नहीं रखेगी, वह घर नहीं आएगी, यहीं रहेगी तो मैं ने बहुत समझाया, लेकिन वह मुझ से झगडऩे लगी. मुझे गुस्सा आ गया तो मैं ने चाकू से सोनल का गला काट डाला.’’

”तुम ने रश्मि की बेटी की हत्या किस वजह से की? उस से तो तुम्हारा कोई झगड़ा नहीं था.’’ हनुमंत सिंह ने पूछा.

”साहब, मुझे शक था कि सोनल का रश्मि के पति दुर्गेश से नाजायज रिश्ता है. कुछ महीने पहले ही सोनल गर्भवती हुई थी, इस की सब से ज्यादा खुशी मुझे हुई थी. मैं सोनल से कहता था कि हम इस बच्चे को दुनिया में लाएंगे. हम शादी कर के घर बसा लें, लेकिन सोनल ने वह बच्चा गिरवा दिया.

”मुझे संदेह था यह बच्चा दुर्गेश का था और दुर्गेश बच्चा नहीं चाहता था, इसलिए उस के कहने पर सोनल ने एबौर्शन करवाया था. मुझे दुर्गेश दुश्मन नजर आता था. सोनल उसी के चक्कर मे फंसी थी, तभी मुझ से झगड़ कर के वह बारबार उस के घर चली जाती थी. सोनल की हत्या के बाद मुझे पलंग पर दुर्गेश की बेटी सोती दिखाई दी. दुर्गेश से बदला लेने के लिए मैं ने उस का भी गला काट डाला और घर भाग आया.

”मैं सोनल को मार कर पछता रहा था, मैं खुद मरना चाहता था, लेकिन फिर मैं ने विचार बदल दिया और घर पर ताला लगा कर बैग ले कर हल्द्वानी चला गया, वहां से मैं नेपाल भाग जाना चाहता था. इस के लिए मुझे पैसे चाहिए थे.

”मैं रिश्तेदारों, दोस्तों से फोन कर के पैसे इकट्ठे कर रहा था, मैं ने इसीलिए अपनी बहन मीनाक्षी को भी फोन किया था और पैसे मांगे थे. मीनाक्षी ने मना कर दिया. मैं कहीं और से पैसों का इंतजाम कर के नेपाल भाग पाता, उस से पहले ही पुलिस ने मुझे पकड़ लिया और दिल्ली ले आई. सोनल और रश्मि की बेटी यशिका की हत्या मेरे हाथ से हो गई. इस का मुझे दुख है. मैं सोनल से बहुत प्यार करता था साहब.’’

”सोनल से तुम्हारी मुलाकात कैसे हुई थी, तुम तो शराबी आवारा और निकम्मे व्यक्ति हो.’’

”साहब, मैं शराब पीता हूं, निकम्मा नहीं हूं. मैं हल्द्वानी में था, तब भी काम करता था. यहां भी मैं तिमारपुर के एक होटल में काम करता हूं. सोनल मुझे 4 साल पहले मेरे हल्द्वानी वाले दोस्त अभय के बेटे की जन्मदिन पार्टी में मिली थी. अभय की पत्नी उस की सहेली थी. वह उसी के कहने पर नैनीताल से हल्द्वानी आई थी. नैनीताल में उस के परिजन रहते हैं. मैं ने सोनल को पार्टी में देखा तो उसे दिल दे बैठा. सोनल ने भी मेरा प्यार स्वीकार कर लिया.

”वह हल्द्वानी में 2-3 दिन के लिए आई थी, लेकिन मुझ से मुलाकात होने पर वह वापस नैनीताल नहीं गई. मैं ने हल्द्वानी में सोनल को खूब सैरसपाटा करवाया. वह वहां मेरे साथ रहने लगी. हमारे अनैतिक संबंध इस बीच बन गए थे, जिस से सोनल गर्भवती हो गई.

”हम एबौर्शन करवाना चाहते थे, किंतु समय अधिक हो जाने से सोनल का एबार्शन नहीं हो सका. समय पर सोनल को एक बेटा हुआ. चूंकि हम अविवाहित थे, इसलिए हम ने अल्मोड़ा में वह बच्चा 2 लाख रुपए में एक जरूरतमंद दंपति को बेच दिया. हम 2 लाख रुपया ले कर दिल्ली आ गए.

”पहले हम वजीरपुर गांव में एक किराए का कमरा ले कर रहते रहे. फिर वहां से हम मजनू का टीला में रहने आ गए. तब से हम यहां ही रह रहे थे. मैं चाहता था कि मैं सोनल से शादी कर के घर बसा लूं, लेकिन सोनल पता नहीं क्यों मुझ से शादी नहीं करना चाहती थी.

”अब उस की मौत के बाद मैं सोचता हूं, सोनल ठीक ही सोचती थी. मैं तिमारपुर में वेटर का काम करने लगा था तो मुझे शराब की गंदी आदत पड़ गई थी. मैं बातबात पर सोनल से लड़ता भी था, इसलिए वह मेरे साथ गृहस्थी नहीं बसाना चाहती थी. आज मेरे हाथों ही वह मारी गई है साहब. मैं अच्छा प्रेमी साबित नहीं हो सका.’’ एकाएक निखिल फफकफफक कर रोने लगा.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि और दुर्गेश को थाने बुलाया और रश्मि को वादी बना कर निखिल के खिलाफ सोनल और यशिका की हत्या का केस बीएनएस की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज कर लिया. दूसरे दिन निखिल को कोर्ट मे पेश कर के 5 दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू और सोनल का मोबाइल नंबर पुलिस ने जब्त कर लिया.

सोनल के घर नैनीताल में उस की हत्या की सूचना भेज दी गई थी. उस के पापा गिरीश चंद आर्या अपनी बेटी से मुंह मोड़ चुके थे, लेकिन जब उन्हें सिविल लाइंस थाना, दिल्ली से सोनल की हत्या की सूचना दी गई तो परिवार सहित वह दिल्ली आ गए. पुलिस ने सोनल की लाश पोस्टमार्टम के बाद उन के हवाले कर दी. रश्मि और दुर्गेश की बेटी की डैडबौडी पुलिस ने उन्हें सौंपी तो वह फूटफूट कर रोने लगे. उन के रुदन ने पुलिस वालों की भी आंखें नम कर दीं. एक अधूरे प्रेम कहानी का यह बहुत दुखद अंत था. Crime News in Hindi

 

 

Extramarital Affair : पत्नी को फोन पर बॉयफ्रेंड से बातें करते पकड़ा तो पेचकस से कर दी हत्या

Extramarital Affair : 25 सितंबर, 2017 को सुबह के कोई 10 बजे तिमारपुर थाने के ड्यूटी औफिसर को सूचना मिली कि वजीराबाद में गली नंबर-6 में राजकुमार के मकान में एक लड़की की हत्या हो गई है. इस सूचना पर सबइंसपेक्टर मनीष कुमार कांस्टेबल धर्मेंद्र के साथ वजीराबाद में राजकुमार के मकान पर पहुंच गए. वहां कुछ लोग खड़े आपस में बातचीत कर रहे थे.

पुलिस को आया देख सब ने उन्हें अंदर जाने का रास्ता दे दिया. सबइंसपेक्टर मनीष कुमार कांस्टेबल के साथ मकान में पहुंचे तो वहां ड्राइंगरूम के आगे लौबी में एक औरत की लाश पड़ी थी. उस के मुंह में सफेद रंग का कपड़ा ठूंसा हुआ था. गले पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे. पास में एक चाकू भी पड़ा था. पुलिस ने अनुमान लगाया कि इसी चाकू से उसे घायल किया होगा. पास में रखी वाशिंग मशीन के ऊपर एक पेचकस भी पड़ा हुआ था, जिस पर खून लगा था.

एसआई मनीष कुमार जब घर का निरीक्षण करते हुए बाथरूम की तरफ गए तो बाथरूम में भी एक लड़की की लाश मिली. उस के गले पर भी धारदार हथियार से कई वार किए गए थे. घर में 2-2 लाशें मिलने पर वह हैरान रह गए.

मामले की गंभीरता को समझते हुए एसआई मनीष कुमार ने इस मामले की जानकारी थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिन्हा को देने के बाद सूचना क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और एफएसएल टीम को भी दे दी.

पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि मरने वालों में एक मकान मालिक राजकुमार यादव की बेटी सोनी तथा दूसरी उस के भांजे मोहित की पत्नी प्रेमलता है. इसी दौरान थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिन्हा, एसआई हरेंद्र कुमार और कांस्टेबल सुनील व विनोद के साथ वहां पहुंच गए.

एसआई मनीष कुमार ने उन्हें सारे घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी. इसी बीच क्राइम टीम और एफएसएल की टीम भी वहां आ गई. क्राइम टीम ने मौके के साक्ष्य उठाए और घटनास्थल की फोटोग्राफी की.

थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिन्हा ने लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि प्रेमलता अपने पति मोहित के साथ 8-9 दिन पहले ही सोनी की देखभाल करने के लिए यहां आई थी. पता चला कि सोनी के पिता राजकुमार यादव 2 दिन पहले अपने बेटे के साथ कानपुर स्थित अपने रिश्तेदार के यहां सगाई कार्यक्रम में गए हुए हैं. घर पर केवल सोनी, प्रेमलता और प्रेमलता का पति मोहित ही थे.

सोनी और प्रेमलता की हत्या हो चुकी थी और मोहित घर से फरार था. उस का फोन नंबर मिलाया गया तो फोन भी स्विच्ड औफ मिला. इस से पुलिस को उसी पर शक होने लगा. थानाप्रभारी ने सोनी के पिता राजकुमार को भी फोन कर के घटना की जानकारी दे दी. ड्राइंगरूम में बाईं ओर बैड के नीचे शराब की बोतल, बीयर की एक कैन और ग्रे रंग का एक बैग मिला. बैडरूम में टूटे हुए 2 मोबाइल फोन मिले, जिस में एक मोबाइल पर थोड़ा सा खून भी लगा था.

पुलिस ने सारे सबूत अपने कब्जे में ले लिए. फिर मौके की काररवाई पूरी कर के दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए सब्जीमंडी मोर्चरी भेज दीं. इस के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की काररवाई शुरू कर दी. आगे की जांच इंसपेक्टर संजीव वर्मा के हवाले कर दी. जांच हाथ में आते ही इंसपेक्टर संजीव वर्मा ने राजकुमार यादव को फोन किया तो उन्होंने बताया कि वह कानपुर से दिल्ली के लिए निकल चुके हैं. इस के बाद राजकुमार ने फरार हुए अपने भांजे का मोबाइल नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ मिला.

मोहित के फरार होने से साफ लग रहा था कि उसी ने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया है. राजकुमार ने एसआई मनीष कुमार को मोहित का मोबाइल नंबर दे दिया तब उन्होंने उस के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगाने के बाद उस की काल डिटेल्स निकलवा ली. मोहित के फोन की काल डिटेल्स का अध्ययन किया तो उस की पहली लोकेशन कश्मीरी गेट बसअड्डे की मिली. इस बीच राजकुमार यादव भी कानपुर से वजीराबाद स्थित अपने घर लौट आए. वह सीधे तिमारपुर थाने पहुंचे. बेटी और भांजे की पत्नी की हत्या पर उन्हें गहरा दुख हुआ. इंसपेक्टर संजीव वर्मा ने उन से कुछ देर बात की.

राजकुमार ने बताया कि मोहित उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के गांव पंचलखा का रहने वाला है. उस की तलाश के लिए इंसपेक्टर संजीव वर्मा राजकुमार को साथ ले कर उस के गांव के लिए निकल गए. वह रास्ते में ही थे कि उसी दौरान थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिन्हा ने उन्हें फोन कर के जानकारी दी कि मोहित के फोन की लोकेशन उस के गांव की ही आ रही है. इस से स्पष्ट था कि वह पुलिस से बचने के लिए अपने गांव पहुंच गया है.

देर रात को दिल्ली पुलिस टीम स्थानीय पुलिस को साथ ले कर मोहित के गांव पंचलखा पहुंच गई. पर उस के घर पर ताला बंद मिला. तब पुलिस ने उसे और भी कई जगहों पर खोजा पर उस का पता नहीं लगा. सुबह करीब 6 बजे गांव वालों से पुलिस को पता चला कि मोहित ने अपने ताऊ के ट्यूबवैल पर आत्महत्या कर ली है. वह ट्यूबवैल वहां से 2 किलोमीटर दूर गांव सट्टी के खेतों में था. दिल्ली पुलिस वहां पहुंची तो वह ट्यूबवैल की कोठरी के भीतर लटका हुआ मिला. वह अपनी पैंट गले में बांध कर लटक गया था. उस के कपड़ों पर खून लगा हुआ था और एक हाथ की नस भी कटी हुई थी. वहीं पर एक ब्लेड भी पड़ा मिला.

आत्महत्या की बात सुन कर मोहित के घर वाले भी वहां पहुंच गए. स्थानीय पुलिस ने जरूरी काररवाई कर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. दिल्ली पुलिस की टीम जिस मकसद से वहां गई थी, वह पूरा नहीं हो सका. दिल्ली पुलिस ने मोहित के घर वालों से बात की और दिल्ली लौट आई. राजकुमार और मोहित के घर वालों से बात करने के बाद इस मामले की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली.

उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद में राजकुमार यादव का एक 5 मंजिला मकान है, जिस में वह अपने परिवार के साथ रहते हैं. कुछ साल पहले राजकुमार की पत्नी की बीमारी के चलते मौत हो गई थी. अब उन के परिवार में एक बेटी सोनी और बेटा साहिल ही थे. वह अपने बच्चों के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे. उन्होंने ऊपर की मंजिलें किराए पर उठा रखी थीं. किराए से उन्हें अच्छीखासी रकम मिल जाती थी, जिस से घर का गुजारा बड़े आराम से चल जाता था.

घटना से करीब 10 दिन पहले सोनी का पथरी का औपरेशन हुआ था. चूंकि ऐसे समय में उस की देखभाल के लिए घर में कोई महिला नहीं थी, इसलिए राजकुमार ने अपने भांजे मोहित तथा उस की पत्नी प्रेमलता को सोनी की देखभाल के लिए दिल्ली बुला लिया. मोहित उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के गांव पंचलखा में रहता था. घटना से 2 दिन पहले राजकुमार अपने बेटे साहिल के साथ कानपुर स्थित अपने एक रिश्तेदार के यहां सगाई कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. घर पर सोनिया, मोहित और उस की पत्नी प्रेमलता ही रह गए थे.

12वीं पास मोहित की शादी साढ़े 3 महीने पहले एमए पास प्रेमलता के साथ सामाजिक रीतिरिवाज से हुई थी. प्रेमलता उस से ज्यादा पढ़ीलिखी थी इसलिए वह उसे ज्यादा अहमियत नहीं देती थी. पत्नी के इसी व्यवहार की वजह से उस की उस से कहासुनी होती रहती थी. वह अपना पत्नीधर्म भी नहीं निभा रही थी. पति की इच्छा को दरकिनार कर वह कभी सिरदर्द का बहाना बना देती तो कभी कुछ और. मोहित को उस की हरकतें नागवार लगतीं.

पत्नी के चालचलन को देख कर मोहित को उस पर शक होने लगा. वह किसी से फोन पर भी काफी देर तक बातें करती रहती थी. जब वह पूछता कि किस से बात करती है तो वह कोई न कोई बहाना बना देती थी. इस से मोहित को विश्वास हो गया कि जरूर किसी न किसी के साथ इस का चक्कर चल रहा है. जब किसी इंसान के दिमाग में कोई शक बैठ जाता है तो वह आसानी से दूर नहीं हो पाता बल्कि बढ़ता ही जाता है. मोहित अब यह पता लगाने में जुट गया कि आखिर वह कौन है, जिस की वजह से उस के घर में कलह होती है.

एक दिन उस ने पत्नी का फोन चैक किया तो उस ने वह नंबर हासिल कर लिया, जिस पर वह घंटों तक बातें करती थी. वह नंबर आगरा के किसी व्यक्ति का था. किसी तरह से मोहित ने आखिर पता लगा ही लिया कि उस व्यक्ति से प्रेमलता का आज से नहीं बल्कि करीब 4 साल पहले से अफेयर चल रहा है. मोहित को अब पता चला कि इसी वजह से पत्नी उसे नहीं चाहती. मोहित ने ये बातें अपने घर वालों तक को बता दीं. मोहित पत्नी को समझाने की बहुत कोशिश करता लेकिन वह उस की बातों को एक तरह से अनसुना कर देती थी. जिस से उन के संबंध असामान्य बनते चले गए. इसी बीच उन के दिल्ली के वजीराबाद में रहने वाले मामा राजकुमार ने सोनी की देखभाल के लिए उस की पत्नी प्रेमलता को बुलाया तो वह पत्नी को ले कर मामा के यहां दिल्ली आ गया.

सोनी और प्रेमलता में गहरी छनती थी, इसलिए प्रेमलता के आने पर वह बहुत खुश हुई. दोनों ननदभाभी खाली समय में हंसीठिठोली करते रहते. लेकिन मोहित पत्नी की बेवफाई से इतना आहत था कि यहां आ कर भी उस के दिलोदिमाग पर प्रेमलता की बदचलनी की बात हावी रहती. जिस की वजह से वह अधिकतर समय शराब के नशे में डूबा रहने लगा. दिल्ली में भी मौका मिलने पर प्रेमलता अपने प्रेमी से बात करती रहती. और तो और उस ने दिल्ली में भी पति को लिफ्ट नहीं दी. वह उसे अपने पास तक नहीं फटकने देती.

पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन भी रात को मोहित ने पहले शराब पी होगी. संभव है कि इसी दौरान प्रेमलता मोबाइल पर अपने प्रेमी से बातें कर रही हो. पत्नी को फोन पर बातें करते देख कर मोहित को गुस्सा आ गया होगा. इस के बाद उस ने किचन के चाकू और पेचकस से उस पर हमला कर दिया होगा. शोर सुन कर उस समय सोनी वहां आई होगी तो उस ने उस की भी हत्या कर डाली. क्योंकि कभीकभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि व्यक्ति एक हत्या के चक्कर में कई हत्याएं कर बैठता है.

पुलिस ने प्रेमलता के मोबाइल नंबर की भी काल डिटेल्स निकलवा कर अध्ययन किया तो उस में एक नंबर ऐसा मिला जिस पर वह ज्यादा देर तक बातें करती थी. यह नंबर आगरा के उस के प्रेमी का ही निकला. बहरहाल, मोहित की आत्महत्या और 2 हत्याओं का अध्याय बंद हो गया, जिस से 3 परिवारों की जिंदगियां प्रभावित हो गईं. Extramarital Affair

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime : जिस्म की खातिर किया इश्क

Love Crime : मीना अपने 3 भाईबहनों में सब से बड़ी ही नहीं, खूबसूरत भी थी. उस का परिवार औरैया जिले के कस्बा दिबियापुर में रहता था. उस के पिता अमर सिंह रेलवे में पथ निरीक्षक थे. उस ने इंटर पास कर लिया तो मांबाप उस के विवाह के बारे में सोचने लगे. उन्होंने उस के लिए घरवर की तलाश शुरू की तो उन्हें कंचौसी कस्बा के रहने वाले राम सिंह का बेटा अनिल पसंद आ गया.

जून, 2008 में मीना की शादी अनिल से हो गई. मीना सुंदर तो थी ही, दुल्हन बनने पर उस की सुंदरता में और ज्यादा निखार आ गया था. ससुराल में जिस ने भी उसे देखा, उस की खूबसूरती की खूब तारीफ की. अपनी प्रशंसा पर मीना भी खुश थी. मीना जैसी सुंदर पत्नी पा कर अनिल भी खुश था.

दोनों के दांपत्य की गाड़ी खुशहाली के साथ चल पड़ी थी. लेकिन कुछ समय बाद आर्थिक परेशानियों ने उन की खुशी को ग्रहण लगा दिया. शादी के पहले अनिल छोटेमोटे काम कर के गुजारा कर लेता था. लेकिन शादी के बाद मीना के आने से जहां अन्य खर्चे बढ़ ही गए थे, वहीं मीना की महत्त्वाकांक्षी ख्वाहिशों ने उस के इस खर्च को और बढ़ा दिया था. आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए वह कस्बे की एक आढ़त पर काम करने लगा था.

आढ़त पर काम करने की वजह से अनिल को कईकई दिनों घर से बाहर रहना पड़ता था, जबकि मीना को यह कतई पसंद नहीं था. पति की गैरमौजूदगी में वह आसपड़ोस के लड़कों से बातें ही नहीं करने लगी थी, बल्कि हंसीमजाक भी करने लगी थी. शुरूशुरू में तो किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. लेकिन जब उस की हरकतें हद पार करने लगीं तो अनिल के मातापिता से यह देखा नहीं गया और वे यह कह कर गांव चले गए कि अब वे गांव में रह कर खेती कराएंगे.

सासससुर के जाने के बाद मीना को पूरी आजादी मिल गई थी. अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए उस ने इधरउधर नजरें दौड़ाईं तो उसे राजेंद्र जंच गया. फिर तो वह उसे मन का मीत बनाने की कोशिश में लग गई. राजेंद्र मूलरूप से औरैया का रहने वाला था. उस के पिता गांव में खेती कराते थे. वह 3 भाईबहनों में सब से छोटा था. बीकौम करने के बाद वह कंचौसी कस्बे में रामबाबू की अनाज की आढ़त पर मुनीम की नौकरी करने लगा था.

राजेंद्र और अनिल एक ही आढ़त पर काम करते थे, इसलिए दोनों में गहरी दोस्ती थी. अनिल ने ही राजेंद्र को अपने घर के सामने किराए पर कमरा दिलाया था. दोस्त होने की वजह से राजेंद्र अनिल के घर आताजाता रहता था. जब कभी आढ़त बंद रहती, राजेंद्र अनिल के घर आ जाता और फिर वहीं पार्टी होती. पार्टी का खर्चा राजेंद्र ही उठाता था.

राजेंद्र पर दिल आया तो मीना उसे फंसाने के लिए अपने रूप का जलवा बिखेरने लगी. मीना के मन में क्या है, यह राजेंद्र की समझ में जल्दी ही आ गया. क्योंकि उस की निगाहों में जो प्यास झलक रही थी, उसे उस ने ताड़ लिया था. इस के बाद तो मीना उसे हूर की परी नजर आने लगी थी. वह उस के मोहपाश में बंधता चला गया था.

एक दिन जब राजेंद्र को पता चला कि अनिल 2 दिनों के लिए बाहर गया है तो उस दिन उस का मन काम में नहीं लगा. पूरे दिन उसे मीना की ही याद आती रही. घर आने पर वह मीना की एक झलक पाने को बेचैन था. उस की यह ख्वाहिश पूरी हुई शाम को. मीना सजधज कर दरवाजे पर आई तो उस समय वह उसे आसमान से उतरी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. उसे देख कर उस का दिल बेकाबू हो उठा.

राजेंद्र को पता ही था कि अनिल घर पर नहीं है, इसलिए वह उस के घर जा पहुंचा. राजेंद्र को देख कर मीना ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘आज तुम आढ़त से बड़ी जल्दी आ गए, वहां कोई काम नहीं था क्या?’’

‘‘काम तो था भाभी, लेकिन मन नहीं लगा.’’

‘‘क्यों?’’ मीना ने पूछा.

‘‘सच बता दूं भाभी.’’

‘‘हां, बताओ.’’

‘‘भाभी, तुम्हारी सुंदरता ने मुझे विचलित कर दिया है, तुम सचमुच बहुत सुंदर हो.’’

‘‘ऐसी सुंदरता किस काम की, जिस की कोई कद्र न हो.’’ मीना ने लंबी सांस ले कर कहा.

‘‘क्या अनिल भाई, तुम्हारी कद्र नहीं करते?’’

‘‘जानबूझ कर अनजान मत बनो. तुम जानते हो कि तुम्हारे भाई साहब महीने में 10 दिन तो बाहर ही रहते हैं. ऐसे में मेरी रातें करवटों में बीतती हैं.’’

‘‘भाभी जो दुख तुम्हारा है, वही मेरा भी है. मैं भी तुम्हारी यादों में रातरात भर करवट बदलता रहता हूं. अगर तुम मेरा साथ दो तो हमारी समस्या खत्म हो सकती है.’’ कह कर राजेंद्र ने मीना को अपनी बांहों में भर लिया.

मीना चाहती तो यही थी, लेकिन उस ने मुखमुद्रा बदल कर बनावटी गुस्से में कहा, ‘‘यह क्या कर रहे हो, छोड़ो मुझे.’’

‘‘प्लीज भाभी शोर मत मचाओ, तुम ने मेरा सुखचैन सब छीन लिया है.’’ राजेंद्र ने कहा.

‘‘नहीं राजेंद्र, छोड़ो मुझे. मैं बदनाम हो जाऊंगी, कहीं की नहीं रहूंगी मैं.’’

‘‘नहीं भाभी, अब यह मुमकिन नहीं है. कोई पागल ही होगा, जो रूपयौवन के इस प्याले के इतने करीब पहुंच कर पीछे हटेगा.’’ कह कर राजेंद्र ने बांहों का कसाव बढ़ा दिया.

दिखावे के लिए मीना न…न…न… करती रही, जबकि वह खुद राजेंद्र के शरीर से लिपटी जा रही थी. राजेंद्र कोई नासमझ बच्चा नहीं था, जो मीना की हरकतों को न समझ पाता. इस के बाद वह क्षण भी आ गया, जब दोनों ने मर्यादा भंग कर दी.

एक बार मर्यादा भंग हुई तो राजेंद्र को हरी झंडी मिल गई. उसे जब भी मौका मिलता, वह मीना के घर पहुंच जाता और इच्छा पूरी कर के वापस आ जाता. मीना अब खुश रहने लगी थी, क्योंकि उस की शारीरिक भूख मिटने लगी थी, साथ ही आर्थिक समस्या का भी हल हो गया था. मीना जब भी राजेंद्र से रुपए मांगती थी, वह चुपचाप निकाल कर दे देता था.

काम कोई भी हो, ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रहता. ठीक वैसा ही मीना और राजेंद्र के संबंधों में भी हुआ. उन के नाजायज संबंधों को ले कर अड़ोसपड़ोस में बातें होने लगीं. ये बातें अनिल के कानों तक पहुंची तो वह सन्न रह गया. उसे बात में सच्चाई नजर आई. क्योंकि उस ने मीना और राजेंद्र को खुल कर हंसीमजाक करते हुए कई बार देखा था. तब उस ने इसे सामान्य रूप से लिया था. अब पडोसियों की बातें सुन कर उसे दाल में काला नजर आने लगा था.

अनिल ने इस बारे में मीना से पूछा तो उस ने कहा, ‘‘पड़ोसी हम से जलते हैं. राजेंद्र का आनाजाना और मदद करना उन्हें अच्छा नहीं लगता, इसलिए वे इस तरह की ऊलजुलूल बातें कर के तुम्हारे कान भर रहे हैं. अगर तुम्हें मुझ पर शक है तो राजेंद्र का घर आनाजाना बंद करा दो. लेकिन उस के बाद तुम दोनों की दोस्ती में दरार पड़ जाएगी. वह हमारी आर्थिक मदद करना बंद कर देगा.’’

अनिल ने राजेंद्र और मीना को रंगेहाथों तो पकड़ा नहीं था, इसलिए उस ने मीना की बात पर यकीन कर लिया. लेकिन मन का शक फिर भी नहीं गया. इसलिए वह राजेंद्र और मीना पर नजर रखने लगा. एक दिन राजेंद्र आढ़त पर नहीं आया तो अनिल को शक हुआ. दोपहर को वह घर पहुंचा तो उस के मकान का दरवाजा बंद था और अंदर से मीना और राजेंद्र के हंसने की आवाजें आ रही थीं. अनिल ने खिड़की के छेद से अंदर झांक कर देखा तो मीना और राजेंद्र एकदूसरे में समाए हुए थे.

अनिल सीधे शराब के ठेके पर पहुंचा और जम कर शराब पी. इस के बाद घर लौटा और दरवाजा पीटने लगा. कुछ देर बाद मीना ने दरवाजा खोला तो राजेंद्र कमरे में बैठा था. उस ने राजेंद्र को 2 तमाचे मार कर बेइज्जत कर के घर से भगा दिया. इस के बाद मीना की जम कर पिटाई की. मीना ने अपनी गलती मानते हुए अनिल के पैर पकड़ कर माफी मांग ली और आइंदा इस तरह की गलती न करने की कसम खाई.

अनिल उसे माफ करने को तैयार नहीं था, लेकिन मासूम बेटे की वजह से अनिल ने मीना को माफ कर दिया. इस के बाद कुछ दिनों तक अनिल, मीना से नाराज रहा, लेकिन धीरेधीरे मीना ने प्यार से उस की नाराजगी दूर कर दी. अनिल को लगा कि मीना राजेंद्र को भूल चुकी है. लेकिन यह उस का भ्रम था. मीना ने मन ही मन कुछ दिनों के लिए समझौता कर लिया था.

अनिल के प्रति यह उस का प्यार नाटक था, जबकि उस के दिलोदिमाग में राजेंद्र ही बसता था. उधर अनिल द्वारा अपमानित कर घर से निकाल दिए जाने पर राजेंद्र के मन में नफरत की आग सुलग रही थी. उन की दोस्ती में भी दरार पड़ चुकी थी. आमनासामना होने पर दोनों एकदूसरे से मुंह फेर लेते थे. मीना से जुदा होना राजेंद्र के लिए किसी सजा से कम नहीं था.

मीना के बगैर उसे चैन नहीं मिल रहा था. अनिल ने मीना का मोबाइल तोड़ दिया था, इसलिए उस की बात भी नहीं हो पाती थी. दिन बीतने के साथ मीना से न मिल पाने से उस की तड़प बढ़ती जा रही थी. आखिर एक दिन जब उसे पता चला कि अनिल बाहर गया है तो वह मीना के घर जा पहुंचा. मीना उसे देख कर उस के गले लग गई. उस दिन दोनों ने जम कर मौज की.

लेकिन राजेंद्र घर के बाहर निकलने लगा तो पड़ोसी राजे ने उसे देख लिया. अगले दिन अनिल वापस आया तो राजे ने उसे राजेंद्र के आने की बात बता दी. अनिल को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन वह चुप रहा. उसे लगा कि जब तक राजेंद्र जिंदा है, तब तक वह उस की इज्जत से खेलता रहेगा. इसलिए इज्जत बचाने के लिए उस ने अपने दोस्त की हत्या की योजना बना डाली.

उस ने मीना को उस के मायके दिबियापुर भेज दिया. उस ने उसे भनक तक नहीं लगने दी थी कि उस के मन में क्या चल रहा है. मीना को मायके पहुंचा कर उस ने राजेंद्र से पुन: दोस्ती गांठ ली. राजेंद्र तो यही चाहता था, क्योंकि दोस्ती की आड़ में ही उस ने मीना को अपनी बनाया था. एक बार फिर दोनों की महफिल जमने लगी.

एक दिन शराब पीते हुए राजेंद्र ने कहा, ‘‘अनिलभाई, तुम ने मीना भाभी को मायके क्यों पहुंचा दिया? उस के बिना अच्छा नहीं लगता. मुझे आश्चर्य इस बात का है कि उस के बिना तुम्हारी रातें कैसे कटती हैं?’’

अनिल पहले तो खिलखिला कर हंसा, उस के बाद गंभीर हो कर बोला, ‘‘दोस्त मेरी रातें तो किसी तरह कट जाती हैं, पर लगता है तुम मीना के बिना बेचैन हो. खैर तुम कहते हो तो मीना को 2-4 दिनों में ले आता हूं.’’

अनिल को लगा कि राजेंद्र को उस की दोस्ती पर पूरा भरोसा हो गया है. इसलिए उस ने राजेंद्र को ठिकाने लगाने की तैयारी कर ली. उस ने राजेंद्र से कहा कि वह भी उस के साथ मीना को लाने चले. वह उसे देख कर खुश हो जाएगी. मीना की झलक पाने के लिए राजेंद्र बेचैन था, इसलिए वह उस के साथ चलने को तैयार हो गया.

5 जुलाई, 2016 की शाम अनिल और राजेंद्र कंचौसी रेलवे स्टेशन पहुंचे. वहां पता चला कि इटावा जाने वाली इंटर सिटी ट्रेन 2 घंटे से अधिक लेट है. इसलिए दोनों ने दिबियापुर (मीना के मायके) जाने का विचार त्याग दिया. इस के बाद दोनों शराब के ठेके पर पहुंचे और शराब की बोतल, पानी के पाउच और गिलास ले कर कस्बे से बाहर पक्के तालाब के पास जा पहुंचे.

वहीं दोनों ने जम कर शराब पी. अनिल ने जानबूझ कर राजेंद्र को कुछ ज्यादा शराब पिला दी, जिस से वह काफी नशे में हो गया. वह वहीं तालाब के किनारे लुढ़क गया तो अनिल ने ईंट से उस का सिर कुचल कर उस की हत्या कर दी. राजेंद्र की हत्या कर के अनिल ने उस के सारे कपडे़ उतार लिए और खून सनी ईंट के साथ उन्हें तालाब से कुछ दूर झाडि़यों में छिपा दिया. इस के बाद वह ट्रेन से अपनी ससुराल दिबियापुर चला गया.

इधर सुबह कुछ लोगों ने तालाब के किनारे लाश देखी तो इस की सूचना थाना सहावल पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी धर्मपाल सिंह यादव फोर्स ले कर घटनास्थल पहुंच गए. तालाब के किनारे नग्न पड़े शव को देख कर धर्मपाल सिंह समझ गए कि हत्या अवैध संबंधों के चलते हुई है.

लाश की शिनाख्त में पुलिस को कोई परेशानी नहीं हुई. मृतक का नाम राजेंद्र था और वह रामबाबू की आढ़त पर मुनीम था. आढ़तिया रामबाबू को बुला कर राजेंद्र के शव की पहचान कराई गई. उस के पास राजेंद्र के पिता रामकिशन का मोबाइल नंबर था. धर्मपाल सिंह ने उसी नंबर पर राजेंद्र की हत्या की सूचना दे दी.

घटनास्थल पर बेटे की लाश देख कर रामकिशन फफक कर रो पड़ा. लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. धर्मपाल सिंह ने जांच शुरू की तो पता चला कि मृतक राजेंद्र कंचौसी कस्बा के कंचननगर में किराए के कमरे में रहता था. उस की दोस्ती सामने रहने वाले अनिल से थी, जो उसी के साथ काम करता था.

राजेंद्र का आनाजाना अनिल के घर भी था. उस के और अनिल की पत्नी मीना के बीच मधुर संबंध भी थे. अनिल जांच के घेरे में आया तो धर्मपाल सिंह ने उस पर शिकंजा कसा. उस से राजेंद्र की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो पहले वह साफ मुकर गया. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया.

उस ने बताया कि राजेंद्र ने उस की पत्नी मीना से नाजायज संबंध बना लिए थे, जिस से उस की बदनामी हो रही थी. इसीलिए उस ने उसे ईंट से कुचल कर मार डाला है. अनिल ने हत्या में प्रयुक्त ईंट तथा खून सने कपड़े बरामद करा दिए, जिसे उस ने तालाब के पास झाडि़यों में छिपा रखे थे.

अनिल ने हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया था. इसलिए धर्मपाल सिंह ने मृतक ने पिता रामकिशन को वादी बना कर राजेंद्र की हत्या का मुकदमा दर्ज कर अनिल को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. Love Crime