UP Crime: उजड़ गया आशियाना – बाप बना कातिल

UP Crime: गांवों में आज भी ज्यादातर घरों में दिन ढलते ही रात का खाना बन जाता है. शाम के यही कोई साढ़े 6 बजे खाना खा कर सुरेंद्र सोने के लिए जानवरों के बाड़े में चला गया था. उस के जाने के बाद सुरेंद्र की पत्नी ममता, बेटा कुलदीप, दीपक, रतन और बहू प्रभा खाना खाने की तैयारी करने लगी थी. सभी खाने के लिए बैठने जा रहे थे कि तभी प्रभा के पिता फूल सिंह पाल, चाचा रामप्रसाद, भाई लाल सिंह उस के मौसेरे भाई टुंडा के साथ उन के यहां आ पहुंचे.

किसी के हाथ में कुल्हाड़ी थी तो कोई चापड़ लिए था तो कोई डंडा. उन्हें इस तरह आया देख कर घर के सभी लोग समझ गए कि इन के इरादे नेक नहीं हैं. वे कुछ कर पाते, उस से पहले ही उन्होंने प्रभा को पकड़ा और कुल्हाड़ी से उस की हत्या कर दी. प्रभा की सास ममता बहू को बचाने के लिए दौड़ी तो हमलावरों ने उसे भी कुल्हाड़ी से काट डाला.

ममता प्रभा की 9 महीने की बेटी को लिए थी, हत्यारों ने उसे छीन कर एक ओर फेंक दिया था. 2 लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद हमलावरों ने कुलदीप को पकड़ कर जमीन पर गिरा दिया. कुलदीप जान की भीख मांगने लगा तो फूल सिंह ने कहा, ‘‘कुलदीप, तुझे हम जान से नहीं मारेंगे, तुझे तो अपाहिज बना कर छोड़ देंगे, ताकि तू उम्र भर चलने को तरसे और अपनी बरबादी पर रोता रहे.’’

इतना कह कर फूल सिंह ने कुलदीप के दोनों पैर कुल्हाड़ी से काट दिए. सुरेंद्र की बुआ श्यामा और छोटेछोटे बच्चे चीखतेचिल्लाते रहे और गांव वालों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन गांव का कोई भी उन की मदद को नहीं आया. लोग अपनीअपनी छतों पर खड़े हो कर इस वीभत्स नजारे को देखते रहे.

कुछ ही देर में इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे कर जिस तरह हमलावर आए थे, उसी तरह फरार हो गए. सुरेंद्र का घर खून से डूब गया था. 2 महिलाओं की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं, जबकि कुलदीप दर्द से तड़प रहा था. हमलावरों के जाने के बाद गांव वाले जुटने शुरू हुए. खबर सुन कर सुरेंद्र और उस के मातापिता, भाई, चाचा आदि आ गए. लोमहर्षक नजारा देख कर वे सन्न रह गए.

सुरेंद्र ने पुलिस चौकी साढ़ को फोन कर के इस घटना की सूचना दी. सूचना मिलते ही चौकीप्रभारी वीरेंद्र प्रताप यादव घटना की सूचना कोतवाली घाटमपुर को दे कर हेडकांस्टेबल अरविंद तिवारी, कांस्टेबल रईस अहमद, भीम प्रकाश, प्रवेश मिश्रा, संजय कुमार के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए.

घटना की सूचना पा कर कोतवाली घाटमपुर के प्रभारी गोपाल यादव और सीओ जे.पी. सिंह गांव ढुकुआपुर के लिए चल पड़े थे. ढुकुआपुर से पुलिस चौकी 8 किलोमीटर दूर थी इसलिए पुलिस टीम को वहां पहुंचने में पौन घंटा लग गया. 3 लोगों को खून में लथपथ देख कर पुलिस हैरान रह गई. देख कर ही लग रहा था कि कि यह सब दुश्मनी की वजह से हुआ है.

2 महिलाओं की मौत हो चुकी थी. कुलदीप दर्द से तड़प रहा था. पुलिस ने कुलदीप को स्वरूपनगर के एसएनआर अस्पताल भिजवाया. सूचना मिलने पर एसपी (देहात) अनिल मिश्रा भी वहां आ गए थे. पुलिस अधिकारियों ने आसपास के लोगों से घटना के बारे में जानना चाहा, लेकिन पुलिस के सामने किसी ने मुंह नहीं खोला. लोग अलगअलग बहाने बना कर वहां से खिसकने लगे. पुलिस समझ गई कि डर या किसी अन्य वजह से लोग कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं.

हमलावरों ने सुरेंद्र की पत्नी ममता और बहू प्रभा की हत्या कर दी थी, जबकि बेटे कुलदीप के दोनों पैर काट दिए थे. पुलिस ने जब सुरेंद्र से पूछताछ की तो उस ने बताया कि यह सब कुलदीप की ससुराल वालों ने किया है. पुलिस ने सुरेंद्र पाल की ओर से फूल सिंह, उस के बेटे, भाई रामप्रसाद पाल, लाल सिंह, टुंडा उर्फ मामा और रामप्रसाद उर्फ छोटे के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 307, 452, 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए कानपुर भिजवा दिया था.

इस लोमहर्षक कांड के बाद गांव में दहशत फैल गई थी. गांव वाले दबी जुबान से तरहतरह की बातें कर रहे थे. एसएसपी यशस्वी यादव ने सीओ जे.पी. सिंह को निर्देश दिए कि वह जल्द से जल्द हमलावरों को गिरफ्तार करें. सीओ ने तुरंत ही प्रभारी निरीक्षक गोपाल यादव और चौकीप्रभारी वीरेंद्र प्रताप यादव के नेतृत्व में 2 टीमें गठित कीं.

पहली टीम में एसआई अखिलेश मिश्रा, कांस्टेबल धर्मेंद्र सिंह, प्रवेश बाबू और इरशाद अहमद को शामिल किया गया, जबकि दूसरी टीम में हेडकांस्टेबल अरविंद तिवारी, कांस्टेबल रईस अहमद, अजय कुमार यादव और भीम प्रकाश को भी शामिल किया गया. चूंकि आरोपी अपने घरों से फरार थे, इसलिए पुलिस टीमें उन की तलाश में संभावित जगहों पर छापे मारने लगीं. आखिर सुबह होतेहोते पुलिस को सफलता मिल ही गई. पुलिस ने फूल सिंह, लाल सिंह और रामप्रसाद उर्फ छोटे को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उन से पूछताछ की गई तो इस खूनी तांडव की जो कहानी सामने आई, वह प्यार की प्रस्तावना पर लिखी हुई थी.

उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर की एक तहसील है घाटमपुर. यहां से लगभग 50 किलोमीटर दूर बसा है एक गांव ढुकुआपुर. इस गांव में वैसे तो सभी जाति के लोग रहते हैं, लेकिन गड़रियों की संख्या कुछ ज्यादा है. इसी गांव में सुरेंद्र सिंह पाल भी अपने परिवार के साथ रहता था. वैसे सुरेंद्र पाल का पुश्तैनी मकान गांव के बीचोंबीच था, लेकिन भाइयों में जब बंटवारा हुआ तो वह गांव के बाहर खाली पड़ी जमीन पर मकान बना कर रहने लगा.

सुरेंद्र के परिवार में पत्नी ममता के अलावा 3 बेटे, कुलदीप, दीपक और करण थे. कुलदीप पढ़ाई के साथ पिता के काम में भी हाथ बंटाता था.  सुरेंद्र के पड़ोस में ही फूल सिंह पाल का परिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटे और 1 बेटी प्रभा थी. प्रभा और कुलदीप एक ही स्कूल में पढ़ते थे. दोनों आसपास ही रहते थे, इसलिए स्कूल भी साथसाथ आतेजाते थे. दोनों साथसाथ खेलते और पढ़ते हुए जवान हुए तो उन की दोस्ती प्यार में कब बदल गई, उन्हें पता ही नहीं चला.

कुलदीप और प्रभा का प्यार कुछ दिनों तक तो चोरीछिपे चलता रहा, लेकिन वह इसे ज्यादा दिनों तक लोगों की नजरों से छिपा न सके. वैसे भी प्यार कहां छिप पाता है. दोनों के प्रेमसंबंधों की बात गांव के लोगों तक पहुंची तो लोग उन के बारे में चटखारे ले ले कर बातें करने लगे.

गांव वालों से होते हुए यह बात किसी तरह प्रभा और कुलदीप के घर वालों के कानों तक पहुंची तो फूल सिंह ने पत्नी रानी से बात कर के प्रभा पर पाबंदी लगा दी कि वह घर के बाहर अकेली नहीं जाएगी. कहते हैं, बंदिशें लगाने से मोहब्बत और बढ़ती है. प्रभा की कुलदीप से मुलाकात भले ही नहीं हो पा रही थी, लेकिन फोन के जरिए बात होती रहती थी.

चूंकि उन्होंने पहले से ही तय कर लिया था कि वे प्यार में आने वाली हर रुकावट का विरोध करेंगे, इसलिए वे बगावत पर उतर आए. जमाने की परवाह किए बगैर अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने के लिए वे जनवरी, 2012 में अपनेअपने घरों को छोड़ कर हरियाणा के गुड़गांव शहर चले गए. गुड़गांव में कुलदीप का एक दोस्त रहता था. कुलदीप ने उसी की मदद से आर्यसमाज रीति से प्रभा के साथ विवाह भी कर लिया. दोस्त की मदद से उसे दिल्ली की एक फैक्ट्री में नौकरी भी मिल गई. इस के बाद कुलदीप दिल्ली में किराए पर कमरा ले कर प्रभा के साथ रहने लगा.

प्रभा के इस तरह भाग जाने से फूल सिंह की बहुत बदनामी हुई. उस ने 16 जनवरी, 2012 को थाना घाटमपुर में कुलदीप के खिलाफ प्रभा को बरगला कर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. रिपोर्ट में उस ने प्रभा को नाबालिग बताया था. मामला नाबालिग लड़की का था, इसलिए पुलिस ने सुरेंद्र पाल और उस के परिवार वालों पर शिकंजा कसा. मजबूरन कुलदीप को वापस जाना पड़ा.

चूंकि कुलदीप के खिलाफ पहले से रिपोर्ट दर्ज थी, इसलिए पुलिस ने कुलदीप को गिरफ्तार कर के पूछताछ की. प्रभा का मैडिकल परीक्षण कराया. मैडिकल में प्रभा की उम्र 18 साल से ऊपर निकली. वह संभोग की अभ्यस्त पाई गई.  प्रभा ने कुलदीप की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा था कि उस ने कुलदीप के साथ अपनी मरजी से जा कर शादी की थी. प्रभा ने सुबूत के तौर पर अपने और कुलदीप के शादी के फोटो भी दिखाए. लेकिन पुलिस ने उस की एक न सुनी और कुलदीप को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया.

मजिस्ट्रेट के सामने प्रभा के बयान कराए गए तो प्रभा ने वही सब कहा जो उस ने पुलिस के सामने चीखचीख कर कहा था. प्रभा के बयान और उस के बालिग होने की रिपोर्ट के मद्देनजर मजिस्ट्रेट ने प्रभा को उस की मरजी के अनुसार जहां और जिस के साथ जाने व रहने की इजाजत दे दी.

अदालत के फैसले के बाद प्रभा ने अपने घर के बजाय सासससुर के साथ जाने की इच्छा जताई तो पुलिस ने उसे कुलदीप के घर पहुंचा दिया. बेटी के इस फैसले से फूल सिंह और उस के धर वालों ने बड़ी बेइज्जती महसूस की. कुछ दिनों बाद कुलदीप भी छूट कर घर आ गया. माहौल खराब न हो, इसलिए कुलदीप प्रभा को ले कर फिर से दिल्ली चला गया. जनवरी, 2013 में प्रभा ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने शिवानी रखा.

समय का पहिया अपनी गति से चलता रहा. शिवानी भी 9 महीने की हो गई. अपने मातापिता से भी कुलदीप के संबंध ठीक हो गए थे. वह अकसर घर वालों से फोन पर बातचीत करता रहता था. लेकिन फूल सिंह ने बेटी से हमेशा के लिए संबंध खत्म कर लिए थे. कुलदीप बेटी का मुंडन संस्कार कराना चाहता था, इसलिए घर वालों से बात कर के वह पत्नी और बेटी को ले कर 9 अक्तूबर, 2013 को अपने गांव ढुकुआपुर आ गया.

सुरेंद्र पाल ने मुंडन संस्कार की सारी तैयारियां पहले से ही कर रखी थीं. 10 अक्तूबर को बड़ी धूमधाम से शिवानी का मुंडन संस्कार हुआ. प्रभा के मातापिता ने कुलदीप को अपना दामाद स्वीकार नहीं किया था. वह कुलदीप से खुंदक खाए बैठा था. इसलिए सुरेंद्र ने मुंडन कार्यक्रम में फूल सिंह और उस के परिवार वालों को नहीं बुलाया था.

गांव वाले मुंडन की दावत खा कर जब लौट रहे थे तो तरहतरह की बातें कर रहे थे. वे बातें फूल सिंह ने सुनीं तो उस का खून खौल उठा. उस ने उसी समय कुलदीप और उस के घर वालों को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया. इस बारे में उस ने मोहद्दीपुर थाना बकेवर में रहने वाले अपने भाई रामप्रसाद से सलाह- मशविरा कर के उसे भी शामिल कर लिया. अब इंतजार था, सुरेंद्र के मेहमानों के चले जाने का. 13 अक्तूबर को उस के यहां से सभी मेहमान चले गए. केवल सुरेंद्र की बुआ श्यामा रह गई थीं.

14 अक्तूबर, 2013 की शाम सुरेंद्र खाना खा कर घर से करीब 50 मीटर दूर जानवरों के बाड़े में सोने चला गया. उस की पत्नी ममता बच्चों को खाना खिलाने की तैयारी कर रही थी तभी फूल सिंह, लाल सिंह, रामप्रसाद आदि कुल्हाड़ी, चापड़ और डंडे ले कर सुरेंद्र के घर में दाखिल हुए.

घर वाले कुछ समझ पाते उस से पहले उन्होंने प्रभा की हत्या की, क्योंकि उसी की वजह से समाज में उन की नाक कटी थी. ममता बहू को बचाने आई तो उन्होंने उसे भी काट डाला. उस के बाद कुलदीप के दोनों पैर काट दिए. इतना सब कर के वे फरार हो गए. पुलिस ने फूल सिंह, लाल सिंह, रामप्रसाद उर्फ छोटे पाल से पूछताछ कर के सभी को जेल भेज दिया.

पुलिस ने टुंडा उर्फ मामा से पूछताछ करने के बाद उसे छोड़ दिया. पुलिस का कहना था कि उस का एक हाथ कटा था. एक हाथ से वह किसी पर हमला नहीं कर सकता. दूसरे पुलिस जब उस के घर फरीदपुर पहुंची तो वह घर पर ही सोता मिला था. अगर वह हत्या जैसे जघन्य अपराध में शामिल होता तो अन्य हमलावरों की तरह वह भी घर से फरार होता. वह आराम से अपने घर में नहीं सो रहा होता.

उधर सुरेंद्र का कहना है कि टुंडा घटना में शामिल था. पुलिस ने जानबूझ कर उसे छोड़ दिया. सच्चाई जो भी हो, इस लोमहर्षक कांड ने यह तो साबित कर दिया है कि लोग खुद को कितना भी आधुनिक कहें, लेकिन अभी उन की सोच नहीं बदली है. अगर फूल सिंह बेटी की पसंद को स्वीकार कर लेता तो उसे इस जघन्य अपराध के आरोप में जेल न जाना पड़ता. कथा लिखे जाने तक कुलदीप अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्र और जनचर्चा पर आधारित

UP Crime: बेटी के प्यार में विलेन बने पापा

UP Crime: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का एक थाना है नौहझील. इस थाना क्षेत्र के गांव अड्डा मीना फिरोजपुर निवासी बदन सिंह उर्फ बलवीर सिंह ने 25 जनवरी, 2023 को अपनी 17 वर्षीय बेटी अनन्या को गांव के ही युवक रामगोपाल उर्फ गोपाल द्वारा भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. रिपोर्ट में बदन सिंह ने आरोप लगाया था कि 22 जनवरी को उन की बेटी अनन्या पशुओं के लिए चारा लेने खेत पर गई थी. उन के गांव का ही रहने वाला रामगोपाल उर्फ गोपाल उन की बेटी को वहां से बहलाफुसला कर अपने साथ भगा ले गया.

पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपी गोपाल को 27 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. लेकिन अनन्या का कोई पता नहीं चल सका. इस के बाद भी पुलिस उस की तलाश में जुटी रही. अनन्या की तलाश में पुलिस ने हर उस जगह दबिश दी, जहां उस के होने की संभावना थी.

मुखबिर ने दी पुलिस को जानकारी

अनन्या की तलाश में जुटी नौहझील पुलिस को मुखबिर ने सूचना दी कि उस की हत्या की जा चुकी है. अब पुलिस के सामने प्रश्न यह था कि अनन्या 22 जनवरी को अपने प्रेमी के साथ गई थी. 25 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 27 जनवरी को रामगोपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया तो उस के जेल जाने के बाद अनन्या की हत्या किस ने, कब और कहां की? पुलिस को यह भी शक हो रहा था कि प्रेमी गोपाल के जेल चले जाने से दुखी अनन्या ने कहीं आत्महत्या तो नहीं कर ली?

लेकिन बाद में मुखबिर ने पुलिस को यह भी सूचना दी कि अनन्या की हत्या उस के पापा बदन सिंह और चाचा ने षडयंत्र के तहत मिल कर की है. वे लोग अब अपने घर पर बेफिक्र हो कर बैठे हुए हैं. मुखबिर से मिली सूचना के बाद पुलिस ने अनन्या के पापा बदन सिंह उर्फ बलवीर व चाचा तेजपाल को थाने बुलाया. उन से पूछताछ की गई.

दोनों ने बताया कि वे पलवल में अनन्या के होने की सूचना पर उस की तलाश में गए थे. लेकिन वहां काफी तलाश करने के बाद भी वह नहीं मिली. इस के बाद वह वापस गांव आ गए. अनन्या के बारे में सही जानकारी रामगोपाल ही दे सकता है. पलवल से वापस आने के बाद गांव वालों को भी दोनों भाइयों ने यही बात बताई कि अनन्या का कोई सुराग नहीं मिला.

पलवल जाने के बाद बंद कर दी तलाश

पुलिस को जांच में पता चला कि अनन्या की तलाश में घर वाले पलवल गए जरूर थे, लेकिन इस के बाद उन्होंने उस की तलाश बंद कर दी है. इस जानकारी के मिलने के बाद एसएचओ धर्मेंद्र भाटी ने बलवीर व तेजपाल दोनों की कल डिटेल्स निकलवाई, जिस से हत्या का राज खुल गया. सबूत मिलने के बाद दोनों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. जब पुलिस ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो वे अपने गुनाह को ज्यादा देर तक छिपा नहीं सके. दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

दोनों ने बताया कि उन्होंने अनन्या की हत्या कर लाश अलीगढ़ की शिवाला नहर में फेंक दिया था. इस संबंध में पुलिस ने तहकीकात की तो पता चला कि अलीगढ़ जिले के थाना गोंडा पुलिस ने 31 जनवरी, 2023 को एक लडक़ी का शव बरामद किया था. पुलिस दोनों को थाना गोंडा ले गई. वहां लाश के फोटो और कपड़ों के आधार पर अनन्या के रूप में कर ली. इस के बाद उन्होंने अनन्या की हत्या किए जाने की बेहद चौंकाने वाली कहानी बताई—

अनन्या ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था कि उसी दौरान उस की मुलाकात रामगोपाल से हुई. उसी के गांव का रहने वाला 22 वर्षीय रामगोपाल उर्फ गोपाल एक निजी टेलीकाम कंपनी में काम करता है. गांव में आतेजाते समय अनन्या और रामगोपाल की नजरें अकसर मिल जातीं. अनन्या मुसकरा कर नजरें झुका लेती. गोपाल को अनन्या की यह अदा भा गई. उस दिन के बाद से दोनों जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, उन के दिलों को चैन नहीं मिलता था.

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दोनों के बीच हुई दोस्ती

दोनों के बीच मौन प्यार चल रहा था. रामगोपाल को अनन्या ने अपने मौन प्यार के बंधन में पूरी तरह बांध लिया था. आखिर एक दिन जब रास्ते में जाते हुए अनन्या मिली तो मौका देख कर रामगोपाल ने चुप्पी तोड़ी, ‘‘अनन्या, तुम मुझ से बात क्यों नहीं करती?’’

“तुम ही कौन सा मुझ से बात करते हो.’’ अनन्या ने जवाब दिया. यह सुन कर गोपाल निरुत्तर हो गया. कुछ पल बाद वह बोला, ‘‘अनन्या, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. क्या मुझ से दोस्ती करोगी?’’

“करूंगी, जरूर करूंगी,’’ कहते हुए वह तेजी से कदम बढ़ाते हुए अपने घर की ओर चली गई. उस दिन के बाद से दोनों चोरीचोरी मिल लेते थे. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए. अब दोनों घंटों तक एकदूसरे से बतियाते, अपने भविष्य के सुखद सपने संजोते हैं. रामगोपाल और अनन्या जमाने की सोच की परवाह किए बिना अपने प्यार की पींगें बढ़ाने में लगे हुए थे.

कहते हैं प्यार को चाहे लाख छिपाने की कोशिश की जाए, लेकिन वह उजागर हो ही जाता है. गांव के लोगों ने दोनों को एक साथ देख लिया. इस के बाद तो दोनों के घर वालोयं को उन के प्रेमप्रसंग के बारे में पता चल गया. अनन्या के घर वालों ने इस का विरोध किया. लेकिन अनन्या ने अपने घर वालों से साफ कह दिया कि रामगोपाल और वह एकदूसरे को प्यार करतेे हैं. वह उस के साथ शादी करेगी. बेटी की इस बेबाकी पर घर वाले सन्न रह गए. उन्होंने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं मानी.

तब घर वालों ने उस के रामगोपाल से मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी. पर अनन्या इस के बाद भी प्रेमी से फोन पर बातें करती रहती थी. अनन्या दिन और रात में अपने प्रेमी रामगोपाल उर्फ गोपाल से बात करती थी. इस की भनक अनन्या की दादी को लग गई. इस पर घटना से 2 महीने पहले दादी ने अनन्या से उस का फोन छीन लिया था. अनन्या तभी से फोन के लिए घर में झगड़ा करती रहती थी. उस के तेवर बगावती हो गए थे. उस ने अपने मम्मीपापा से साफ कह दिया था कि वह रामगोपाल के साथ ही शादी करेगी अन्यथा अपनी जान दे देगी.

प्रेमी के साथ भाग गई

22 जनवरी, 2023 को जब घर वाले गहरी नींद में सोए हुए थे, अनन्या सुबह के समय घर से अपने प्रेमी रामगोपाल के साथ भाग गई. दोनों ने एक दिन पहले ही भागने की योजना बना ली थी. इस बात का दोनों के घरवालों को पता नहीं चल सका था. अनन्या के घरवालों को बेटी के इस तरह घर से भाग जाना बेहद नागवार गुजरा. अनन्या के चले जाने पर घर वाले परेशान हो गए. अनन्या के प्रेमी के साथ भाग जाने की खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई. समाज में उन का सिर शर्म से झुक गया. उन्होंने अनन्या को काफी तलाशा, इस बीच उन्हें जानकारी मिली कि अनन्या अपने प्रेमी रामगोपाल के साथ पलवल चली गई है.

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एसएचओ धर्मेंद्र भाटी व एसआई मनोज चौधरी ने बताया कि अनन्या गोपाल के साथ ही शादी करने की जिद पर अड़ी थी. जबकि इस के लिए उस के घरवाले राजी नहीं थे. अनन्या के घर से भाग जाने की घटना ने आग में घी का काम किया. उस के पापा बदन सिंह उर्फ बलवीर सिंह का खून खौल उठा, क्योंकि उन का गांव में निकलना मुश्किल हो गया.

अनन्या के गायब होने के बाद जहां पुलिस उसे तलाश रही थी, वहीं घर वाले भी उस की तलाश में जुटे थे. पिता बदन सिंह को जानकारी मिली कि अनन्या हरियाणा के पलवल में मौजूद है. इस जानकारी पर बदन सिंह अपने छोटे भाई तेजपाल सिंह के साथ पलवल जा पहुंचा. दोनों ने अनन्या को ढूंढ लिया. लेकिन वह उन के साथ आने को तैयार नहीं हुई. आखिर गोपाल से शादी कराने की बात पर वह उन के साथ घर आने को तैयार हो गई.

झूठी आन की खातिर पिता बना हत्यारा

अनन्या को उस के पापा व चाचा बाइक पर बैठा कर टप्पल-जट्ïटारी मार्ग से होते हुए अलीगढ़ जिले के थाना खैर क्षेत्र में स्थित शिवाला नहर के पास पहुंचे. यहां दोनों भाइयों ने बाइक रोक ली. सुस्ताने के बहाने वे सब नहर किनारे बैठ गए. वहां पर पिता व चाचा ने अनन्या को एक बार फिर समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह रामगोपाल से शादी की बात पर अड़ी रही.

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फिर लोकलाज और समाज में अपनी इज्जत के डर से बदन सिंह ने अपने भाई तेजपाल की मदद से अनन्या का गला घोंट कर हत्या कर दी और शव नहर में फेंक दिया. नहर के गहरे पानी में वह डूब गई. यानी एक पिता ने ही बेटी की हत्या कर दी. दोनों भाई अनन्या को नहर में फेंक कर अपने गांव लौट आए. गांव में पूछने पर दोनों ने बताया कि उन्हें अनन्या का कोई सुराग नहीं मिला. इसलिए वे वापस आ गए. जबकि हकीकत यह थी कि दोनों ने उस की हत्या कर दी थी.

एसएचओ धर्मेंद्र भाटी के अनुसार, घर वालों ने अनन्या को 22 जनवरी को ही पलवल (हरियाणा) से बरामद कर लिया था. उसी दिन उन्होंने उस की हत्या कर लाश नहर में फेंक दी थी. इस घटना के 3 दिन बाद बदन सिंह ने प्रेमी रामगोपाल के खिलाफ बेटी को भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा उसे जेल भिजवा दिया था.

शव 15 किलोमीटर बह कर पहुंचा गोंडा क्षेत्र में

उधर अनन्या की लाश नहर में बहते हुए 15 किलोमीटर दूर अलीगढ़ जिले के थाना गोंडा क्षेत्र में पहुंच गई. नहर में एक युवती का शव मिलने की सूचना पर वहां की पुलिस ने गोताखोरों की मदद से शव को नहर से बाहर निकाला.

चूँकि शव नहर में कहीं से बह कर आया था, इस के चलते उस की पहचान नहीं हो सकी. पुलिस यह पता लगाने में जुट गई कि युवती ने आत्महत्या की है या यह औनर किलिंग का मामला तो नहीं है? थाना गोंडा पुलिस ने शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था.

पुलिस ने 72 घंटे इंतजार किया. लेकिन युवती की शिनाख्त नहीं हो सकी. इस पर उस का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस ने युवती के फोटो कराने के साथ ही उस के कपड़ों को सुरक्षित रख लिया था. इस के साथ ही आसपास के थानों से संपर्क किया. तब अनन्या की लाश मिलने की बात पुलिस के संज्ञान में आई.

बेटी के प्रेमप्रसंग में विलेन बना बाप

मोहब्बत के दुश्मन बने बलवीर सिंह ने अपनी बेटी अनन्या को बहलाफुसला कर भगा ले जाने की रिपोर्ट अनन्या के प्रेमी रामगोपाल के खिलाफ दर्ज कराई थी, वह अब भी इस आरोप में जेल में बंद है. अभी उस की जमानत नहीं हुई है.बेटी के प्रेम प्रसंग में हत्या कर के विलेन बने उस के पापा व चाचा यही सोच रहे थे कि उन की इस साजिश का किसी को पता ही नहीं चलेगा, लेकिन यह उस की भूल थी.

पुलिस ने अनन्या की हत्या की गुत्थी को सुलझा कर पिता बलवीर सिंह व चाचा तेजपाल सिंह को अनन्या की हत्या करने व सबूतों को छिपाने के आरोप में 21 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयोग की गई बाइक को भी बरामद कर ली. दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया.

अपराध करने वाला अपने आप को अपराध करते समय चाहे कितना भी होशियार समझे, लेकिन अंत में वह पकड़ा जरूर जाता है. झूठी आन की खातिर एक पिता ही अपनी बेटी का कातिल बन गया और एक प्रेमकहानी का दर्दनांक अंत हो गया. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में अनन्या नाम परिवर्तित है.

Love Story: बहन का प्यार – यार बना गद्दार

Love Story: निश्चित जगह पर पहुंच कर अखिलेश उर्फ चंचल को प्रियंका दिखाई नहीं दी तो वह बेचैन हो उठा. उस बेचैनी में वह इधरउधर  टहलने लगा. काफी देर हो गई और प्रियंका नहीं आई तो वह निराश होने लगा. वह घर जाने के बारे में सोच रहा था कि प्रियंका उसे आती दिखाई दे गई. उसे देख कर उस का चेहरा खुशी से खिल उठा. प्रियंका के पास आते ही वह नाराजगी से बोला, ‘‘इतनी देर क्यों कर दी प्रियंका. मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. अच्छा हुआ तुम आ गईं, वरना मैं तो निराश हो कर घर जाने वाला था.

‘‘जब प्यार किया है तो इंतजार करना ही पड़ेगा. मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं कि जब मन हुआ, आ गई. लड़कियों को घर से बाहर निकलने के लिए 50 बहाने बनाने पड़ते हैं.’’ प्रियंका ने तुनक कर कहा.

‘‘कोई बात नहीं, तुम्हारे लिए तो मैं कईकई दिनों तक इंतजार करते हुए बैठा रह सकता हूं. क्योंकि मैं दिल के हाथों मजबूर हूं,’’ अखिलेश ने कहा, ‘‘प्रियंका, मैं चाहता हूं कि तुम आज कालेज की छुट्टी करो. चलो, हम सिनेमा देखने चलते हैं.’’

प्रियंका तैयार हो गई तो अखिलेश पहले उसे एक रेस्टोरेंट में ले गया. नाश्ता करने के बाद दोनों सिनेमा देखने चले गए.

सिनेमा देखते हुए अखिलेश छेड़छाड़ करने लगा तो प्रियंका ने कहा, ‘‘दिनोंदिन तुम्हारी शरारतें बढ़ती ही जा रही हैं. शादी हो जाने दो, तब देखती हूं तुम कितनी शरारत करते हो.’’

‘‘शादी नहीं हुई, तब तो इस तरह धमका रही हो. शादी के बाद न जाने क्या करोगी. अब तो मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अखिलेश ने कान पकड़ते हुए कहा.

‘‘अब मुझ से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है. शादी तो मैं तुम्हीं से करूंगी.’’ प्रियंका ने कहा.

‘‘फिर तो मुझे यही गाना पड़ेगा कि ‘शादी कर के फंस गया यार.’’’ अखिलेश ने कहा तो प्रियंका हंसने लगी.

प्रियंका उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर के थाना सदर बाजार के मोहल्ला बाड़ूजई प्रथम के रहने वाले चंद्रप्रकाश सक्सेना की बेटी थी. वह ओसीएफ में दरजी थे. उन के परिवार में प्रियंका के अलावा पत्नी सुखदेवी, 2 बेटे संतोष, विपिन तथा एक अन्य बेटी कीर्ति थी. बड़े बेटे संतेष की शादी हो चुकी थी. वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ दिल्ली में रहता था.

कीर्ति की भी शादी शाहजहांपुर के ही मोहल्ला तारोवाला बाग के रहने वाले राजीव से हुई थी. वह अपनी ससुराल में आराम से रह रही थी. गै्रजएुशन कर के विपिन ने मोबाइल एसेसरीज की दुकान खोल ली थी. जबकि प्रियंका अभी पढ़ रही थी. प्रियंका घर में सब से छोटी थी, इसलिए पूरे घर की लाडली थी. विपिन तो उसे जान से चाहता था.

प्रियंका बहुत सुंदर तो नहीं थी, लेकिन इतना खराब भी नहीं थी कि कोई उसे देख कर मुंह मोड़ ले. फिर जवानी में तो वैसे भी हर लड़की सुंदर लगने लगती है. इसलिए जवान होने पर साधारण रूपरंग वाली प्रियंका को भी आतेजाते उस के हमउम्र लड़के चाहत भरी नजरों से ताकने लगे थे. उन्हीं में एक था उसी के भाई के साथ मोबाइल एसेसरीज का धंधा करने वाला अखिलेश यादव उर्फ चंचल.

अखिलेश उर्फ चंचल शाहजहांपुर के ही मोहल्ला लालातेली बजरिया के रहने वाले भगवानदीन यादव का बेटा था. भगवानदीन के परिवार में पत्नी सुशीला देवी के अतिरिक्त 3 बेटे मुनीश्वर उर्फ रवि, अखिलेश उर्फ चंचल, नीलू और 2 बेटियां नीलम और कल्पना थीं. अखिलेश उस का दूसरे नंबर का बेटा था. भगवानदीन यादव कभी जिले का काफी चर्चित बदमाश था. उस की और उस के साथी रामकुमार की शहर में तूती बोलती थी.

रामकुमार की हत्या कर दी गई तो अकेला पड़ जाने की वजह से भगवानदीन ने बदमाशी से तौबा कर लिया और अपने परिवार के साथ शांति से रहने लगा. लेकिन सन 2002 में उस के सब से छोटे बेटे नीलू की बीमारी से मौत हुई तो वह इस सदमे को बरदाश्त नहीं कर सका और कुछ दिनों बाद उस की भी हार्टअटैक से मौत हो गई.

बड़ी बेटी नीलम का विवाह हो चुका था. पिता की मौत के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी बड़े बेटे रवि ने संभाल ली थी. वह ठेकेदारी करने लगा था. हाईस्कूल पास कर के अखिलेश ने भी पढ़ाई छोड़ दी और मोबाइल एसेसरीज का धंधा कर लिया. एक ही व्यवसाय से जुड़े होने की वजह से कभी विपिन और अखिलेश की बाजार में मुलाकात हुई तो दोनों में दोस्ती हो गई थी.

दोस्ती होने के बाद कभी अखिलेश विपिन के घर आया तो उस की बहन प्रियंका को देख कर उस पर उस का दिल आ गया. फिर तो वह प्रियंका को देखने के चक्कर में अकसर उस के घर आने लगा. कहने को वह आता तो था विपिन से मिलने, लेकिन वह तभी उस के घर आता था, जब वह घर में नहीं होता था. ऐसे में भाई का दोस्त होने की वजह से उस की सेवासत्कार प्रियंका को करनी पड़ती थी. उसी बीच वह प्रियंका के नजदीक आने की कोशिश करता.

उस के लगातार आने की वजह से विपिन से उस की दोस्ती गहरी हो ही गई, प्रियंका से भी उस की नजदीकी बढ़ गई. इस के बाद विपिन और अखिलेश ने मिल कर मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली एक नामी कंपनी की एजेंसी ले ली तो उन का कारोबार भी बढ़ गया और याराना भी. इस से उन का एकदूसरे के घर आनाजान ही नहीं हो गया, बल्कि अब साथसाथ खानापीना भी होने लगा था.

अब अखिलेश को प्रियंका के साथ समय बिताने का समय ज्यादा से ज्यादा मिलने लगा था. उस ने इस का फायदा उठाया. उसे अपने आकर्षण में ही नहीं बांध लिया, बल्कि उस से शारीरिक संबंध भी बना लिए. वह विपिन की अनुपस्थिति का पूरा फायदा उठाने लगा. विपिन के चले जाने के बाद केवल मां ही घर पर रहती थी. वह घर के कामों में व्यस्त रहती थी. फिर उसे बेटी पर ही नहीं, बेटे के दोस्त पर भी विश्वास था, इसलिए उस ने कभी ध्यान ही नहीं दिया कि वे दोनों क्या कर रहे हैं.

प्रियंका अपने भाई और परिवार को धोखा दे रही थी तो अखिलेश अपने दोस्त के साथ विश्वासघात कर रहा था. वह भी ऐसा दोस्त, जो उस पर आंख मूंद कर विश्वास करता था. उसे भाई से बढ़ कर मानता था. प्रियंका और अखिलेश क्या कर रहे हैं, किसी को कानोकान खबर नहीं थी. जबकि जो कुछ भी हो रहा था, वह सब घर में ही सब की नाक के नीचे हो रहा था.

संतोष की पत्नी प्रीति को बच्चा होने वाला था, इसलिए संतोष ने प्रीति को शाहजहांपुर भेज दिया. डिलीवरी की तारीख नजदीक आ गई तो उसे जिला अस्पताल में भरती करा दिया गया. प्रीति के अस्पताल में भरती होने की वजह से विपिन और उस की मां का ज्यादा समय अस्पताल में बीतता था.

छुट्टी न मिल पाने की वजह से संतोष नहीं आ सका था. उस स्थिति में प्रियंका को घर में अकेली रहना पड़ रहा था. विपिन को अखिलेश पर पूरा विश्वास था, इसलिए प्रियंका और घर की जिम्मेदारी उस ने उस पर सौंप दी थी. अखिलेश और प्रियंका को इस से मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई थी. जब तक प्रीति अस्पताल में रही, दोनों दिनरात एकदूसरे की बांहों में डूबे रहे.

26 फरवरी, 2014 को प्रीति को जिला अस्पताल में बेटा पैदा हुआ था. खुशी के इस मौके पर अखिलेश ने 315 बोर के 2 तमंचे और 10 कारतूस ला कर विपिन को दिए थे. भतीजा पैदा होने पर दोनों ने उन तमंचों से एकएक फायर भी किए थे. बाकी 8 कारतूस और दोनों तमंचे अखिलेश ने विपिन से यह कह कर उस के घर रखवा दिए थे कि भतीजे के नामकरण संस्कार पर काम आएंगे. विपिन ने दोनों तमंचे और कारतूस अपने कमरे में बैड पर गद्दे के नीचे छिपा कर रख दिए थे.

विपिन पुलिस में भरती होना चाहता था, इसलिए रोजाना सुबह 5 बजे उठ कर जिम जाता था. वहां से वह 9 बजे के आसपास लौटता था. कभीकभी उसे देर भी हो जाती थी. 23 मार्च को विपिन 9 बजे के आसपास घर लौटा तो मां नीचे बरामदे में बैठी आराम कर रही थीं. भाभी प्रीति बच्चे के साथ सामने वाले कमरे में लेटी थी. उस ने कपड़े बदले और ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में सोने के लिए चला गया.

विपिन ने दरवाजे को धक्का दिया तो पता चला वह अंदर से बंद है. इस का मतलब अंदर कोई था. उस ने आवाज दी, लेकिन अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उस ने पूरी ताकत से दरवाजे पर लात मारी तो अंदर लगी सिटकनी उखड़ गई और दरवाजा खुल गया. अंदर अखिलेश और प्रियंका खड़े थे. दोनों की हालत देख कर विपिन को समझते देर नहीं लगी कि अंदर क्या कर रहे थे. उन के कपड़े अस्तव्यस्त थे और वे काफी घबराए हुए थे.

विपिन के कमरे में घुसते ही प्रियंका निकल कर नीचे की ओर भागी. विपिन का खून खौल उठा था. उस ने गुस्से में अखिलेश को एक जोरदार थप्पड़ जड़ते हुए कहा, ‘‘तुझे मैं दोस्त नहीं, भाई मानता था. मैं तुझ पर कितना विश्वास करता था और तूने क्या किया? जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया.’’

‘‘भाई, मैं प्रियंका से सच्चा प्यार करता हूं और उसी से शादी करूंगा.’’ अखिलेश ने कहा, ‘‘वह मुझ से शादी को तैयार है.’’

‘‘तुम दोनों को पता था कि हमारी जाति एक नहीं है तो यह कैसे सोच लिया कि तुम्हारी शादी हो जाएगी?’’ विपिन गुस्से से बोला, ‘‘तुम ने जो किया, ठीक नहीं किया. मेरी इज्जत पर तुम ने जो हाथ डाला है, उस की सजा तो तुम्हें भोगनी ही होगी.’’

अखिलेश को लगा कि उसे जान का खतरा है तो उस ने जेब से 315 बोर का तमंचा निकाल लिया. वह गोली चलाता, उस के पहले ही विपिन ने उस के हाथ पर इतने जोर से झटका मारा कि तमंचा छूट कर जमीन पर गिर गया. अखिलेश ने तमंचा उठाना चाहा, लेकिन विपिन ने फर्श पर पड़े तमंचे को अपने पैर से दबा लिया.

अखिलेश कुछ कर पाता, विपिन ने बैड पर गद्दे के नीचे रखे दोनों तमंचे और आठों कारतूस निकाल कर उस में से एक तमंचा जेब में डाल लिया और दूसरे में गोली भर कर अखिलेश पर चला दिया. गोली अखिलेश के सीने में लगी. वह जमीन पर गिर गया तो विपिन ने एक गोली उस के बाएं हाथ और एक पेट में मारी. 3 गोलियां लगने से अखिलेश की तुरंत मौत हो गई.

अखिलेश का खेल खत्म कर विपिन नीचे आ गया. प्रियंका बरामदे में दुबकी खड़ी थी. उस के पास जा कर उस ने पूछा, ‘‘मैं ने सही किया या गलत?’’

प्रियंका ने जैसे ही कहा, ‘‘गलत किया.’’ विपिन ने उस की कनपटी पर तमंचे की नाल रख कर ट्रिगर दबा दिया. प्रियंका कटे पेड़ की तरह फर्श पर गिर पड़ी. इस के बाद उस ने एक गोली और चलाई, जो प्रियंका के सीने में बाईं ओर लगी. प्रियंका की भी मौत हो गई. प्रियंका को खून से लथपथ देख कर उस की मां और भाभी बेहोश हो गईं.

अखिलेश और प्रियंका की हत्या कर विपिन घर से बाहर निकला तो सामने पड़ोसी सचिन पड़ गया. सचिन से उस की पुरानी खुन्नस थी. उस ने उस की ओर तमंचा तान दिया. विपिन का इरादा भांप कर सचिन अपने घर के अंदर भागा. विपिन भी पीछेपीछे उस के घर में घुस गया. सचिन कहीं छिपता, विपिन ने उस पर भी गोली चला दी. गोली उस की कमर में लगी, जिस से वह भी फर्श पर गिर पड़ा.

सचिन के घर से निकल कर विपिन अपने एक अन्य दुश्मन सतीश के घर में घुस कर 2 गोलियां चलाईं. लेकिन ये गोलियां किसी को लगी नहीं. अब तक शोर और गोलियों के चलने की आवाज सुन कर आसपड़ोस वाले इकट्ठा हो गए थे. लेकिन विपिन के हाथ में तमंचा देख कर कोई उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं कर सका. इसलिए विपिन एआरटीओ वाली गली में घुस कर आराम से फरार हो गया.

किसी ने कोतवाली सदर बाजार पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी थी. चंद मिनटों में ही कोतवाली इंसपेक्टर यतेंद्र भारद्वाज पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. इस के बाद उन की सूचना पर पुलिस अधीक्षक राकेशचंद्र साहू, अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) ए.पी. सिंह, फोरेंसिक टीम और डाग स्क्वायड की टीम भी वहां आ गई थी.

पुलिस तो आ गई, लेकिन अपनी नौकरी पर गए चंद्रप्रकाश को किसी ने इस बात की सूचना नहीं दी. काफी देर बाद सूचना पा कर वह घर आए तो बेटी की लाश देख कर बेहोश हो गए. एक ओर बेटी की लाश पड़ी थी तो दूसरी ओर उस की और उस के प्रेमी की हत्या के आरोप में बेटा फरार था.

सचिन की हालत गंभीर थी. इसलिए पुलिस ने उसे तुरंत सरकारी अस्पताल भिजवाया. उस की हालत को देखते हुए सरकारी अस्पताल के डाक्टरों ने उसे कनौजिया ट्रामा सेंटर ले जाने को कहा. लेकिन वहां भी उस की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. तब उसे वसीम अस्पताल ले जाया गया. डा. वसीम ने उस का औपरेशन कर के फेफड़े के पार झिल्ली में फंसी गोली निकाली. इस के बाद उस की हालत में कुछ सुधार हुआ.

फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य उठा लिए. डाग स्क्वायड टीम ने खोजी कुतिया लूसी को छोड़ा. वह विपिन के घर से निकल कर सतीश के घर तक गई, जहां विपिन ने 2 गोलियां चलाई थीं. घटनास्थल के निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों को समझते देर नहीं लगी कि मामला अवैध संबंधों में हत्या का यानी औनर किलिंग का है.

पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद थाने आ कर इंसपेक्टर यतेंद्र भारद्वाज ने अखिलेश के बड़े भाई मुनीश्वर यादव की ओर से विपिन सक्सेना के खिलाफ अखिलेश और प्रियंका की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के बाद विपिन की तलाश शुरू हुई.

26 मार्च की सुबह पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर विपिन को पुवायां रोड पर चिनौर से पहले हाइड्रिल पुलिया के पास से गिरफ्तार कर लिया. उस समय वह अपने चचेरे भइयों सुशील और लल्ला के पास चिनौर जा रहा था. कोतवाली ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

पूछताछ में विपिन ने पुलिस को बताया कि जिस यार को मैं भाई की तरह मानता था, उस ने मेरी इज्जत पर हाथ डाला तो मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं ने उस का खून कर दिया. घटना को अंजाम देने के बाद वह एआरटीओ वाली गली के पास से निकल रहे नाले में अखिलेश से छीना तमंचा और अपनी खून से सनी टीशर्ट निकाल कर फेंक दी थी.

खाली बनियान और जींस पहने हुए वह एआरटीओ गली से रोडवेड बसस्टैंड पहुंचा. यहां से उस ने निगोही जाने के लिए सौ रुपए में एक आटो किया. निगोही जाते समय रास्ते में उस ने दूसरा तमंचा फेंक दिया. निगोही से वह प्राइवेट बस से बरेली पहुंचा. बरेली में उस ने नई टीशर्ट खरीद कर पहनी. पूरे दिन वह इधरउधर घूमता रहा. रात को उस ने बरेली रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने के लिए टे्रन पकड़ ली.

दिल्ली में विपिन बड़े भाई संतोष के यहां गया. उसे उस ने पूरी बात बताई. संतोष को पता चल गया कि प्रियंका मर चुकी है, फिर भी वह उस के अंतिम संस्कार में शाहजहांपुर नहीं गया. संतोष को जब पता चला कि पुलिस विपिन की गिरफ्तारी के लिए घर वालों तथा रिश्तेदारों को परेशान कर रही है तो उस ने उसे घर भेज दिया.

26 मार्च को विपिन अपने चचेरे भाइयों के पास चिनौर जा रहा था, तभी पुलिस ने मुखबिरों से मिली सूचना पर गिरफ्तार कर लिया था. उस समय भी उस के पास एक तमंचा था.

पूछताछ में विपिन ने बताया था कि उस के पास कारतूस नहीं बचे थे. अगर कारतूस बचा होता तो वह खुद को भी गोली मार लेता. कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के पुलिस ने विपिन को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Story: प्यार के लिए दबंगई कहां तक जायज

Love Story: उत्तर प्रदेश के महानगर मुरादाबाद के लाइनपार इलाके के रहने वाले महावीर सिंह सैनी के परिवार में उस की पत्नी शारदा के अलावा एक बेटा अंकित और 3 बेटियां थीं. 2 बेटियों की शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर की बेटी पूनम 9वीं कक्षा में पढ़ रही थी. महावीर राजमिस्त्री था. रोजाना की तरह 10 दिसंबर, 2016 को भी वह अपने काम पर चला गया था. बेटा अंकित ट्यूशन पढ़ने गया था. घर पर शारदा और उस की बेटी पूनम ही थी. सुबह करीब 10 बजे जब शारदा नहाने के लिए बाथरूम में गई तब पूनम घर के काम निपटा रही थी. शारदा को बाथरूम में घुसे 5-10 मिनट ही हुए थे कि उस ने चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुनीं. चीख उस की बेटी पूनम की थी.

चीख सुन कर शारदा घबरा गई. उस ने बड़ी फुरती से कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर निकली तो देखा पूनम आग की लपटों से घिरी थी. उस के शरीर पर आग लगी थी. शोर मचाते हुए वह पूनम के कपड़ों की आग बुझाने में लग गई. उस की आवाज सुन कर पड़ोसी भी वहां आ गए. किसी तरह उन्होंने बुझाई. तब तक पूनम काफी झुलस चुकी थी और बेहोश थी. आननफानन में लोग उसे राजकीय जिला चिकित्सालय ले गए. बेटी के शरीर के कपड़ों में लगी आग बुझाने की कोशिश में शारदा के हाथ भी झुलस गए थे.

अस्पताल से इस मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई. कुछ ही देर में थाना मझोला के थानाप्रभारी नवरत्न गौतम पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए. खबर मिलने पर पूनम के पिता महावीर भी अस्पताल आ गए. डाक्टरों के इलाज के बाद पूनम होश में आ गई थी. पूनम के बयान लेने जरूरी थे. इसलिए पुलिस ने इलाके के मजिस्ट्रैट को सूचना दे कर अस्पताल बुलवा लिया.

पुलिस और मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में पूनम ने बताया कि शिवदत्त ने उस के ऊपर केरोसिन डाल कर आग लगाई थी. उस के साथ उस के पिता महीलाल भी थे. शिवदत्त पूनम के घर के पास चामुंडा वाली गली में रहता था. पता चला कि वह पूनम से एकतरफा प्यार करता था.

थानाप्रभारी नवरत्न गौतम ने यह जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी. मामला मुरादाबाद शहर का ही था इसलिए तत्कालीन एसएसपी दिनेशचंद्र दूबे और एएसपी डा. यशवीर सिंह जिला अस्पताल पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने पूनम का इलाज कर रहे डाक्टरों से बात की.

तब तक पूनम की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने लगी थी. डाक्टरों ने उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी. पूनम के घर वालों ने उसे दिल्ली ले जाने को कहा तो जिला अस्पताल से पूनम को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया.

महावीर की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली. चूंकि पूनम ने शिवदत्त और उस के पिता पर आरोप लगाया था, इसलिए पुलिस ने शिवदत्त के घर दबिश दी पर उस के घर कोई नहीं मिला. पुलिस संभावित जगहों पर उन्हें तलाश करने लगी, पर दोनों बापबेटों में से कोई भी पुलिस के हत्थे नहीं लगा.

उधर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती पूरम की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था. उस की हालत बिगड़ती जा रही थी. बर्न विभाग के डाक्टरों की टीम पूनम को बचाने में लगी हुई थी पर उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. आखिर 10 दिसंबर की रात को ही पूनम ने दम तोड़ दिया.

अगले दिन जवान बेटी की हृदयविदारक मौत की खबर जब उस के मोहल्ले वालों को मिली तो पूरे मोहल्ले में जैसे मातम छा गया. आरोपी को अभी तक गिरफ्तार न किए जाने से लोग आक्रोशित थे. कहीं लोगों का गुस्सा भड़क न जाए इसलिए उस इलाके में भारी तादाद में पुलिस तैनात कर दी गई.

रविवार होने की वजह से पूनम की लाश का पोस्टमार्टम सोमवार 12 दिसंबर को हुआ. दोपहर बाद उस की लाश दिल्ली से मुरादाबाद लाई गई. पुलिस मोहल्ले के गणमान्य लोगों से बात कर के माहौल को सामान्य बनाए रही. अंतिम संस्कार के समय भी भारी मात्रा में पुलिस थी.

उधर पुलिस की कई टीमें आरोपियों को तलाशने में जुटी हुई थीं. जांच टीमों पर एसएसपी का भारी दबाव था. आखिर पुलिस की मेहनत रंग लाई. 12 दिसंबर को पुलिस ने शिवदत्त को गिरफ्तार कर लिया. उस के गिरफ्तार होने के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ.

थाने ला कर एसएसपी और एएसपी के सामने थानाप्रभारी नवरत्न गौतम ने अभियुक्त से पूछताछ की तो पहले तो वह पुलिस को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता रहा पर उस का यह झूठ ज्यादा देर तक पुलिस के सामने नहीं टिक सका. उस ने पूनम को जलाने का अपराध स्वीकार कर उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

जिला मुरादाबाद के लाइनपार इलाके में मंडी समिति गेट के सामने की बस्ती में रहने वाला महावीर सिंह अपने राजगीर के काम से परिवार का पालनपोषण कर रहा था. इसी की कमाई से वह 2 बेटियों की शादी कर चुका था. पूनम 9वीं की पढ़ाई के साथ महिलाओं के कपड़े सिलती थी. घर के पास ही उस ने बुटीक खोल रखा था.

उस के घर के पास ही महीलाल का मकान था. महीलाल का बेटा शिवदत्त बदमाश प्रवृत्ति का था. उस की दोस्ती मंडी समिति के पास स्थित बिजलीघर में तैनात कर्मचारियों के साथ थी. उन्हीं की वजह से उसे ट्रांसफार्मर रखने के लिए बनाए जाने वाले चबूतरों का ठेका मिल जाता था.

चूंकि शिवदत्त का पड़ोसी महावीर राजमिस्त्री था, इसलिए उसी के द्वारा वह चबूतरे बनवा देता था. इस से कुछ पैसे शिवदत्त को बच जाते थे. काम की वजह से शिवदत्त का महावीर के घर आनाजाना शुरू हो गया था. महावीर की छोटी बेटी पूनम पर शिवदत्त की नजर पहले से ही थी. जब भी वह घर से निकलती तो वह उसे ताड़ता रहता था. पर पूनम ने उसे लिफ्ट नहीं दी. जब शिवदत्त का पूनम के घर आनाजाना शुरू हो गया तो उस ने पूनम के नजदीक पहुंचने की कोशिश की.

जब वह पूनम को ज्यादा ही परेशान करने लगा तो एक दिन पूनम ने इस की शिकायत अपनी मां से कर दी. इस के बाद शारदा ने यह बात पति को बताई तो महावीर ने शिवदत्त के पिता महीलाल से शिकायत करने के साथ शिवदत्त से बातचीत बंद कर दी. इस के अलावा उस ने अपने घर आने को भी उसे साफ मना कर दिया.

शिवदत्त दबंग था. महावीर द्वारा उस के पिता से शिकायत करने की बात उसे बहुत बुरी लगी. वह पूरी तरह से दादागिरी पर उतर आया और अब पूनम को खुले रूप से धमकी देने लगा कि वह उस से शादी करे नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. महावीर ने फिर से महीलाल से शिकायत की. इस बार महीलाल ने अपने बेटे शिवदत्त का ही पक्ष लिया.

महावीर कोई लड़ाईझगड़ा नहीं करना चाहता था. बात बढ़ाने के बजाय वह चुप हो कर बैठ गया. महावीर के रिश्तेदारों और मोहल्ले के कुछ लोगों ने उस से थाने में शिकायत करने का सुझाव दिया पर बेटी की बदनामी को देखते हुए वह थाने नहीं गया. महावीर के चुप होने के बाद शिवदत्त का हौसला और बढ़ गया. वह पूनम को और ज्यादा तंग करने लगा. इतना ही नहीं, वह कई बार पूनम के घर तमंचा ले कर भी पहुंचा.

हर बार वह उस से शादी करने की धमकी देता. घटना से एक दिन पहले भी वह पूनम के घर गया. तमंचा निकाल कर उस ने धमकी दी कि वह शादी के लिए अभी भी मान जाए वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे. 10 दिसंबर को शिवदत्त फिर से पूनम के घर जा धमका. उस दिन वह अपने साथ एक केन में केरोसिन भी ले गया था. पूनम उस समय घर में झाड़ू लगा रही थी, तभी उस ने उस पर केरोसिन उड़ेल कर आग लगा दी और वहां से भाग गया.

शिवदत्त से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है. तत्कालीन एसएसपी दिनेशचंद्र दूबे का कहना था कि इस मामले में शिवदत्त के अलावा और कोई दोषी पाया गया तो उस के खिलाफ भी कानूनी काररवाई की जाएगी. Love Story

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime News: विदेशी कौलगर्ल की हत्या का राज

UP Crime News: तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत नाजमुदिनोवा करीब 15 साल पहले इंडिया घूमने आई थी, लेकिन दलालों के चंगुल में फंस कर वह जिस्मफरोशी का धंधा करने लगी. उस की हत्या की गुत्थी सुलझाते समय पुलिस को ऐसी चौंकाने वाली जानकारी मिली कि…

21 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मवाना कोतवाली पुलिस को एक किसान ने फोन कर के जो सूचना दी, उस से पुलिस वाले हैरान हो गए. मवाना खुर्द के भगवती फार्महाउस के पास सरसों के खेत में एक महिला का शव पड़ा हुआ मिला था. यह फार्महाउस पौड़ी हाइवे पर पड़ता है. मवाना खुर्द चौकी के प्रभारी एसआई राजेश कुमार यादव को थाने से इस कौल की सूचना पर मौके पर तत्काल पहुंचने का आदेश मिला तो वह चौकी के स्टाफ को ले कर तत्काल वहां पहुंच गए, जहां महिला का शव पड़ा था.

महिला का चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था. ऐसा लगता था किसी ने उस के चेहरे पर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाला था. इतना ही नहीं, शरीर के 1-2 जगह और भी ज्वलनशील पदार्थ डाला गया था. यह तो समझ में आता था कि उस के चेहरे पर तेजाब शायद इसलिए डाला गया था ताकि मृतका की पहचान खत्म हो जाए, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों को क्यों जलाया गया था. यह जानने के लिए जब एसआई राजेश ने शरीर के उन हिस्सों का निरीक्षण किया तो पता चला कि उन सभी जगहों पर बड़ेबड़े टैटू बने हुए थे. लेकिन ज्वलनशील पदार्थ डाले जाने के बाद भी वे हिस्से पूरी तरह झुलस नहीं पाए थे.

एआई राजेश यादव जांचपड़ताल के काम में लगे ही थे कि तभी मवाना थाने की एसएचओ पूनम जादौन और सीओ पंकज लवानिया भी वहां पहुंच गए. एसएचओ और सीओ ने लाश के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. सवाल था कि मरने वाली कौन थी? यह पता लगाने के लिए जब कुछ महिलाकर्मियों की मदद से मृतका के शरीर पर पहने कपड़ों की तलाशी ली गई तो उस की जेब से एक ऐसी चीज मिली, जिस से मृतका की पहचान की गुत्थी भी सुलझ गई.

कपड़ों से एक आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अर्चिता अरोड़ा और पता दिल्ली का दर्ज था. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आधार कार्ड पर फोटो एक विदेशी युवती का लगा था. जबकि नाम एकदम देशी था. इसीलिए सीओ पंकज लवानिया को सहज विश्वास नहीं हुआ कि मृतका और उस की पहचान के बीच जो रिश्ता है वो एकदम सही है. इस दौरान एसपी (देहात) अभिजीत कुमार भी क्राइम व फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल की जांच व निरीक्षण का काम पूरा होने के बाद मवाना पुलिस ने कथित अर्चिता अरोड़ा के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

चूंकि मृतका अर्चिता अरोड़ा के शव का निरीक्षण सब से पहले एसआई राजेश यादव ने किया था, इसलिए सीओ पंकज लवानिया के निर्देश पर एक लिखित तहरीर थाने में दी और इसी के आधार पर मवाना थाने में बीएनएस की धारा 103(1), 238 के अंतर्गत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसपी (देहात) अभिजीत कुमार के निर्देश पर जांच का काम खुद एसएचओ पूनम जादौन ने अपने हाथ में ले लिया. एसपी (देहात) ने 2 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. एक टीम को घटनास्थल की जांच और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने का काम सौंपा गया.

दूसरी टीम को मृतका के बारे में पुख्ता जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया. सभी पुलिस टीमों की मौनिटरिंग और सर्विलांस का काम सीओ पंकज लवानिया को सौंपा गया.

पुलिस की एक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच शुरू कर दी. साथ ही उस जगह के आसपास की जगहों के सीसीटीवी फुटेज तलाशने का काम भी शुरू कर दिया, जहां अर्चिता अरोड़ा के शव को फेंका गया था. काम थोड़ा मशक्कत वाला और पेचीदा जरूर था, लेकिन जब पुलिस की टीम ने अपना काम शुरू किया तो अगले 24 घंटे में करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तलाश लिए, जिन से पुलिस को उन कातिलों तक पहुंचने का सुराग मिल गया, जिन्होंने अर्चिता का शव वहां ला कर फेंका था.

हाइवे पर बने भगवती फार्महाउस के सीसीटीवी कैमरे में पुलिस टीम को एक क्रेटा कार दिखी, जिस में कुछ लोग दिखे. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे लोगों की संख्या करीब 3 से 4 थी, जो कंबल में लिपटे एक मानव शरीर को ले कर उस स्थान की तरफ गए, जहां अर्चिता का शव मिला था. पुलिस ने तकनीकी सहायता से आखिरकार ये पता लगा लिया कि उस क्रेटा कार का नंबर क्या है और वह किस के नाम पर रजिस्टर्ड है.

मुहब्बत उर्फ अर्चिता अरोड़ाः सालों पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत घूमने आई थी, लेकिन यहां आ कर दलालों के जाल में फंस गई.

यह क्रेटा कार मेरठ के सिविल लाइन इलाके में प्रभात नगर कालोनी के रहने वाले संदीप उर्फ सिट्टू उर्फ राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पुलिस की एक टीम ने उसी दिन संदीप को हिरासत में ले लिया और उस से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस तो पुलिस होती है, वह जब अपने तरीके से पूछताछ करती है तो इंसान क्या पत्थर भी बोलने लगते हैं. संदीप उर्फ राहुल ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सका. संदीप ने पुलिस को बताया कि वह परतापुर के दिल्ली रोड स्थित अविका होटल में काम करता है. इस के बाद संदीप ने टेप रिकौर्ड की तरह बोलते हुए पुलिस को सब कुछ बता दिया कि उस ने क्यों और कैसे तथा किस के साथ मिल कर अर्चिता की हत्या की है.

संदीप से पूछताछ के बाद पुलिस ने अविका होटल के मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी निवासी न्यू देवपुरी थाना रेलवे रोड, मेरठ के अलावा वहां काम करने वाले एक अन्य  कर्मचारी गुरमुख उर्फ अरविंद उर्फ मोनू निवासी जौहड़ी बिनौली बागपत तथा विवेक उर्फ काका निवासी खजूरी वाली गली मलियाना, टीपीनगर मेरठ को ताबड़तोड़ छापेमारी कर हिरासत में ले लिया. संदीप समेत उन चारों से कड़ी पूछताछ हुई तो उन्होंने अर्चिता की हत्या का पूरा राज खोल कर रख दिया.

संदीप और उस के साथियों ने यह भी बताया कि पुलिस ने जिस महिला का शव बरामद किया है, उस का नाम अर्चिता अरोड़ा है, जो बैंक रोड अंबाला कैंट की रहने वाली है. हाल में वह दिल्ली के लोधी रोड स्थित कोटला मुबारकपुर में रहती थी. संदीप ने बताया कि अर्चिता जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी थी. वह अकसर मेरठ में आती थी, जहां वह अपने चाहने वालों का दिल बहला कर उन की जेब खाली कराती थी. इस काम के लिए अर्चिता अविका होटल में रूम बुक करती थी.

20 फरवरी, 2026 को भी उस ने रूम बुक किया था. रात के समय अर्चिता से होटल मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी का रूम के किराए को ले कर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि अर्चिता ने चंचल पर दुष्कर्म का आरोप लगाने की धमकी दे डाली. उस के बाद चंचल को इतना गुस्सा आया कि उस ने होटल के अपने 3 कर्मचारियों के साथ मिल कर अर्चिता के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस ने अर्चिता की इतनी पिटाई कर दी कि कि वह बेहोश हो गई.

चंचल कुमार उर्फ बंटी के सिर पर गुस्सा इस कदर सवार था कि उस वक्त उसे इस बात का होश ही नहीं था कि वह क्या कर रहा है. उस ने बेहोश अर्चिता के शरीर पर कंबल डाल दिया और उस के बाद गुस्से में ही उस की गरदन दबाते हुए चीखने लगा, ”साली वेश्या, तू मुझे झूठे केस में फंसाएगी. मुझे जेल भिजवाएगी. मेरे जरिए तूने लाखों रुपया कमाया और आज तू मुझे जेल भिजवाने की धमकी दे रही है. देखता हूं कि आज तुझे कौन बचाता है.’’

बाएं – मृतका के कपड़ों से बरामद अर्चिता अरोड़ा नाम का आधार कार्ड तथा नीचे उस का तुर्कमेनिस्तान का पासपोर्ट

चंचल कुमार को पता ही नहीं चला कि गुस्से की आग में उस ने कब कंबल के अंदर लिपटी अर्चिता की गला दबा कर हत्या कर दी है. अर्चिता के शरीर में जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो चंचल कुमार का गुस्सा भी थोड़ी ही देर में शांत हो गया. कुछ देर बाद जब चंचल का गुस्सा शांत हुआ तो उस ने सोचा एक बार अर्चिता से बात कर ली जाए. उस ने जब अर्चिता को हिला कर उस से बात करने की कोशिश की तो पता चला कि वह निर्जीव पड़ी है.

उस ने होटल के तीनों कर्मचारियों संदीप, गुरुमुख और विवेक को बुला कर अर्चिता को होश में लाने के लिए कहा. तीनों ने जब उस की नब्ज टटोली तो पता चला उस की नब्ज बंद हो चुकी थी. कई तरह से जांचपड़ताल करने के बाद वे समझ गए कि अर्चिता की मौत हो चुकी है. जैसे ही चंचल उर्फ बंटी को यह पता चला कि अर्चिता मर चुकी है तो उन सभी के होश उड़ गए. काफी देर तक वे समझ ही नहीं पाए कि अब वे क्या करें.

लेकिन करीब एक घंटा बीत जाने के बाद उन्हें समझ में आया कि अगर उन्हें इस मामले में बचना है और पुलिस की पकड़ से दूर रहना है तो उन्हें अर्चिता के शव को अपने होटल से कहीं दूर ले जा कर ठिकाने लगाना होगा. बहुत सोचनेविचारने और सलाहमशविरा करने के बाद उन्होंने तय किया कि वे रात में ही गाड़ी में डाल कर अर्चिता के शव को कहीं और फेंक आऐंगे. उन्होंने सब से पहले तेजाब डाल कर अर्चिता के चेहरे को जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. इतना ही नहीं, उस के शरीर के जिन हिस्सों में टैटू बने थे, वहां भी तेजाब डाल दिया गया.

चंडीगढ़ की एलिना से संपर्क करने पर उस ने मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना से वीडियो कौल पर पुलिस की बात कराई.

चंचल जानता था कि अर्चिता मेरठ की रहने वाली नहीं है, वह केवल अमीरजादों के जिस्म की भूख मिटा कर पैसा कमाने के लिए मेरठ आती थी. उसे शहर में ज्यादा लोग नहीं जानते हैं. अगर वे उस के चेहरे की पहचान मिटा कर उस के शव को अपने होटल से कहीं दूर डाल देंगे तो फिर उन के पकड़े जाने की संभावना नहीं है.

तेजाब से पहचान मिटा कर चंचल ने अपने तीनों साथियों के साथ मिल कर अर्चिता के शव को कंबल में लपेट कर संदीप उर्फ सिट्टू की क्रेटा कार में डाला. चंचल कुमार और उस के साथी अर्चिता की लाश को क्रेटा कार में डाल कर कारीब 45 किलोमीटर तक इधर से उधर भटकते रहे. इसी तरह वे मेरठ से होते हुए मवाना रोड निकल गए. कहीं चैकिंग नहीं हुई. वे मवाना खुर्द पुलिस चौकी के पास पौड़ी हाइवे पर स्थित भगवती फार्महाउस तक जा पहुंचे. फार्महाउस के पास पहुंच कर उन्हें लगा कि यहां लाश को ठिकाने लगाना उचित रहेगा.

वहां गाड़ी खड़ी कर के उस के बाद सभी चारों आरोपियों ने फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर सरसों के खेत में कंबल समेत अर्चिता का शव डाल दिया. इस के बाद चारों आरोपी मौके से वापस अपने घरों को लौट आए. लेकिन घर लौटने के बाद भी चारों आरोपी मवाना पुलिस की गतिविधियों पर नजर बनाए रहे. पूछताछ का काम पूरा होने पर पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग की गई क्रेटा कार, होटल का कंबल और तेजाब की खाली बोतल भी बरामद कर सीज कर दी गई.

पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों को जुटाने के बाद चारों आरोपियों चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक को सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथित अर्चिता अरोड़ा की शिनाख्त से ले कर हत्या के कारण व उस के कातिलों को गिरफ्तार करने की गुत्थी मवाना पुलिस ने सुलझा ली थी. लेकिन मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के साथ एसपी (देहात) अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया ने जब जांच अधिकारी पूनम जादौन के साथ हत्याकांड के एकएक बिंदु पर गहनता से चर्चा शुरू की तो सभी उच्चाधिकारियों को लगा कि कुछ ऐसा जरूर है, जो जांच में छूट रहा है.

पुलिस हिरासत में आरोपी चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक

विचारविमर्श के बाद तय हुआ कि अर्चिता के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करनी होगी, क्योंकि पुलिस ने अर्चिता का जो आधार कार्ड बरामद किया था, उस में भले ही उस का नाम अर्चिता अरोड़ा था, लेकिन उस में जो फोटो थी वह एक विदेशी महिला की लग रही थी, इसलिए उस के भारतीय होने पर संदेह था. पुलिस की टीमों को अब अर्चिता की सही पहचान स्थापित करने के काम पर लगाया गया. महिला की सही पहचान और उस के परिवार वालों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए टीमें गठित कर दी गईं.

पुलिस को मृतका का जो आधार कार्ड बरामद हुआ था, उस में उस का नाम अर्चिता अरोड़ा पुत्री सरबजीत अरोड़ा निवासी 1811, दूसरा फ्लोर, साउथ एक्सटेंशन, कोटला मुबारकपुर, लोधी रोड मध्य दिल्ली का पता दर्ज था. इस में जन्मतिथि 27 अप्रैल, 1984 दर्ज मिली. पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो जानकारी मिली कि वह इस पते पर नहीं रहती. थकहार कर पुलिस खाली हाथ लौट आई. जब अर्चिता के आधार वाले पते से कोई सुराग नहीं मिला तो जांच अधिकारी पूनम जादौन ने उस के मोबाइन नंबर का सहारा लिया.

दरअसल, अर्चिता के आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने अर्चिता का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. पुलिस ने अर्चिता के मोबाइल की 3 महीने की कौल डिटेल्स निकाली. उस में अर्चिता के मोबाइल काल डिटेल में आखिरी नंबर किसी एलिना का था, जिस का नाम उस की कौंटेक्ट लिस्ट में दर्ज था. एलिना से फोन पर बातचीत कर पुलिस ने उसे भगवती फार्महाउस में मिले एक महिला के शव और उस के पास से बरामद अर्चिता अरोड़ा के आधार कार्ड की बाबत जानकारी दी.

कौल डिटेल्स से यह भी पता चला कि अर्चिता की हत्या में पकड़े गए आरोपी चंचल कुमार से एक साल से संबंध थे. वह अकसर मेरठ आतीजाती रहती थी. हर बार उस के नाम पर एक रात या दिन के लिए अविका होटल का रूम बुक होता था. कौल डिटेल्स में चूंकि अर्चिता की आखिरी बार 20 फरवरी, 2026 को एलिना से बात हुई थी. पुलिस ने एलिना से अनुरोध किया कि वह अर्चिता के शव की पहचान करें.

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रेंस करते पुलिस अधिकारी

एलिना चूंकि चंडीगढ़ में रहती थी, इसलिए 25 फरवरी को मवाना थाने के एक एसआई सुमित कुमार ने एलिना से संपर्क किया. उन्होंने अर्चिता के शव के हर ऐंगल की फोटोग्राफ एलिना को दिखाई तो एलिना ने खुलासा हुआ कि मृतका अर्चिता अरोड़ा नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है. एलिना के इस खुलासे के बाद अचानक पूरे केस की थ्योरी ही बदल गई. एलिना ने बताया कि मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना तुर्कमेनिस्तान में रहती है. एलिना ने एसआई सुमित कुमार से ली गई फोटो मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना को भेजी.

मम्मी ने भी ईयरिंग, ब्लैकटौप और शरीर पर बने टैटू के आधार पर उस की पहचान अपनी बेटी मुहब्बत के रूप में की. उन्होंने एसआई सुमित कुमार से वीडियो कौल पर बातचीत में बताया कि मुहब्बत करीब 15 साल पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत आई थी और कथित रूप से दलालों के चंगुल में फंस गई थी. दलालों ने उस का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया और उन्होंने उसे नौकरी की जगह उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया.

एसएसपी अविनाश पांडेय

मुहब्बत ने अपनी पहचान के लिए दलालों के जरिए अर्चिता अरोड़ा के नाम पर आधार कार्ड बनवा लिया, लेकिन उस पर फोटो मुहब्बत का ही लगा था. मां नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना ने यह भी खुलासा किया कि मुहब्बत भारत में जिस्मफरोशी का काम कर रही थी. पासपोर्ट पर भी उस का नाम मुहब्बत नाजमुदिनोवा था, जोकि तुर्कमेनिस्तान की नागरिक थी. मुहब्बत लगभग 15 साल से भारत में रह रही थी. एसआई सुमित कुमार से बातचीत के बाद मुहब्बत की मम्मी ने भारत में रहने वाली अपनी दोस्त उज्बेकिस्तान की रहने वाली कलिचेवा अजीजा फैजुलेवना से बातचीत की. वह भी चंडीगढ़ में रहती थी.

सीओ पंकज उस ने जब भार लवानिया

अजीजा ने वीडियो कौल पर मुहब्बत की मम्मी से बातचीत की. अजीजा एलिना को साथ ले कर 25 फरवरी को मवाना थाने पहुंची. उस ने जांच अधिकारी पूनम जादौन, सीओ पंकज लवानिया और उस के बाद एसपी (देहात) अभिजीत कुमार से मुलाकात और बातचीत की.  दूसरी तरफ मुहब्बत की मम्मी गुलनारा ने तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को एक पत्र भेज कर बताया कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि खुद भारत आ सकूं. उस ने अजीजा के जरिए तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को यह लेटर भेजा, ताकि उस की गैरमौजूदगी में अजीजा ही पुलिस से संपर्क कर सके.

एसएचओ पुनम जादौन

गुलनारा ने दावा किया कि मृतका भारतीय नहीं, बल्कि उस की बेटी मुहब्बत है. एलिना और अजीजा के पुलिस से संपर्क करने तथा तुर्कमेनिस्तान एंबेसी के हस्तक्षेप के बाद मवाना पुलिस पूरी तरह ऐक्टिव हो गई. सीओ पंकज लवानिया को विश्वास हो गया कि अब कथित अर्चिता अरोड़ा की सही पहचान हो जाएगी. इस दौरान एंबेसी की मदद से पुलिस को मुहब्बत के पासपोर्ट की कौपी भी मिल गई. इसलिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय को पासपोर्ट और केस की डिटेल भेज दी है और अर्चिता उर्फ मुहब्बत का डीएनए टेस्ट कराने के लिए उस की मम्मी को एक अनुरोध पत्र भी भेज दिया.

पूछताछ में पता चला कि मृतका अर्चिता अरोड़ा का जन्मस्थान भले ही तुर्कमेनिस्तान था, लेकिन उस के पापा सरबजीत अरोड़ा भारत के ही निवासी हैं. जबकि मम्मी तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली थी. इसीलिए उस ने जब भारत आने पर अपना आधार कार्ड बनवाया तो उस में अपनी पहचान अर्चिता अरोड़ा के रूप में दी. पुलिस ने अर्चिता उर्फ मुहब्बत की हत्या और उस की पहचान की गुत्थी एक तरह से सुलझा ली थी.

लेकिन इस मामले की तह में एक बड़े ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट के जुड़े होने की बू आ रही थी. क्योंकि अर्चिता उर्फ मुहब्बत ही नहीं, देश में ऐसी बहुत सारी विदेशी महिलाएं हैं, जिन के पास भारत में फरजी पहचान पत्र हैं. फरजी आधार कार्ड तो हैं, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है. UP Crime News

 

 

 

UP Crime: भाई क्यों बनता है – प्यार का दुश्मन

UP Crime: 20 वर्षीय अनुराधा की खता इतनी थी कि वह फोन पर अपने किसी दोस्त से बात करती थी. केवल इसी बात पर उस के बड़े भाई मनीष ने अपनी मम्मी के साथ मिल कर बहन की हत्या कर दी. यहां सोचने वाली बात यह है कि भाई चाहे किसी भी लड़की से मटरगश्ती करे, लेकिन जब उस की बहन किसी दोस्त से बात भी करे तो भाई उस का दुश्मन क्यों बन जाता है?

बात 16 नवंबर, 2025 की है. उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के परसाजागीर गनेशपुर निवासी मनीष ने छोटी बहन अनुराधा को फोन पर किसी अनजान युवक से बात करते देख लिया था. जिस से वह गुस्से से तमतमा गया. वह बहन पर आगबबूला हो गया. उस ने अनुराधा से कहा, ”तू फोन पर किस से बात कर रही है. यह बात करना बंद कर दे. मैं इस बारे में पहले भी तुझ से कई बार मना कर चुका हूं.’’

अनुराधा – फोन पर बात करना जान पर भारी पड़ा

तभी मनीष की मम्मी निर्मला देवी ने उलाहना दिया, ”मैं ने भी कई बार इस से बात करने से मना किया है, लेकिन यह किसी की बात सुनती ही नहीं है, बल्कि मुझ से झगड़ती है. जो मन में आए, वह करती है. यह तो पूरी तरह अपनी मरजी की मालिक हो गई है.’’

मम्मी की इन बातों ने आग में घी डालने का काम किया. इस से मनीष का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. गुस्सा करने के साथ ही वह अपना आपा खो बैठा और उस ने अनुराधा की बुरी तरह पिटाई कर दी. अत्यधिक पिटाई से अनुराधा बेहोश हो गई. इस में मम्मी ने भी मनीष का साथ दिया. तब मनीष अपनी कार की डिक्की में बेहोश अनुराधा को डाल कर रात के अंधेरे में चल दिया. रास्ते में सुनसान इलाके में उस ने अनुराधा की रस्सी से गला घोंट कर हत्या कर दी. शव को ठिकाने लगाने के लिए ममेरे भाई मुसकान को ननिहाल से अपने साथ ले लिया था.

शव को ठिकाने लगाने के लिए दोनों अयोध्या की ओर कार ले कर निकल गए, लेकिन पुलिया का निर्माण होने के कारण लौट आए. दुबौलिया-विश्वेश्वरगंज होते हुए मनीष गोंडा पहुंचा. वहां नवाबगंज में कार में पेट्रोल भरवाया. बनगांव के पास पीडी बंधा पर सुनसान जगह देख कर मनीष और मुसकान ने अनुराधा की लाश को कार की डिक्की से बाहर निकाला और उस की मौत सुनिश्चित करने के लिए मनीष ने उसे कार से कुचल कर दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की.

अपनी सगी बहन को बेदर्दी से मारने के बाद शव को वहीं फेंक कर वे लोग मनकापुर-बभनान-गौरा मार्ग होते हए बस्ती की ओर फरार हो गए. बाद में मनीष ने ममेरे भाई मुसकान को उस के गांव छोड़ दिया और खुद अपने घर वापस आ गया. 17 नवबंर, 2025 को गोंडा पुलिस को थाना तरबगंज के अंतर्गत बनगांव के पास सिकरेटरीपुरवा और कंचनपुर के बीच पीडी बंधा पर सड़क किनारे एक अज्ञात युवती का शव मिला. इस की जानकारी बनगांव के ग्राम प्रधान मंजीत सिंह ने पुलिस को दी थी.

सूचना मिलने पर तरबगंज के एसएचओ कमलाकांत त्रिपाठी पुलिस बल सहित घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल का गहराई से निरीक्षण किया. जिस युवती की लाश मिली थी, उस के हाथ में रस्सी बंधी थी. फील्ड यूनिट, डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया गया. मौके से टीमों द्वारा साक्ष्य जुुटाए गए. ग्रामप्रधान की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया.

हत्या के बाद अनुराधा की लाश को इसी कार से ठिकाने लगाया गया था

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस के शरीर व गले पर चोटों के कई निशान मिले तथा मृत्यु का कारण हेमोरेजिक शाक व एंटीमार्टम इंजरी पाया गया. इस पर पुलिस ने थाना तरबगंज में हत्या का मामला दर्ज कर लिया. युवती की शिनाख्त न होने और उस के बारे में कोई सुराग न मिलने पर मामले को ब्लाइंड मर्डर घोषित कर जांच तेज कर दी गई. पुलिस टीमों ने लगातार तकनीकी इनपुट खंगालने और सीसीटीवी फुटेज चैक किए.

आरोपी मनीष – बहन की हत्या का मनीष को जरा भी अफसोस नहीं हुआ

इस ब्लाइंड मर्डर के खुलासे के लिए गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल ने तरबगंज क्षेत्र के एएसपी राधेश्याम राय के निर्देशन तथा सीओ (तरबगंज) उमेश्वर प्रभात सिंह की अध्यक्षता में एसओजी, सर्विलांस सहित 5 पुलिस टीमों का गठन कर दिया. पुलिस इस ब्लाइंड मर्डर के खुलासे के लिए 13 दिन तक जुुटी रही. उस की शिनाख्त कराने के साथ ही उस के हत्यारे की तलाश में जमीनआसमान एक कर दिया, इस के साथ ही अपने मुखबिरों को लगा दिया.

पुलिस टीमों ने लगातार टेक्निकल व मैनुअल इनपुट खंगाले और घटनास्थल के आसपास लगे कई सीसीटीवी चैक किए. पुलिस द्वारा तरबगंज और अयोध्या के सोहवल तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में एक सफेद रंग की कार जरूर दिखाई दी, लेकिन नंबर स्पष्ट न होने से कार के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी.

इस बीच पुलिस को पता चला कि जनपद बस्ती परसाजागीर गणेशपुर की एक 20-22 साल की युवती अनुराधा 13 दिन पहले लापता हो गई थी. पुलिस जांंच में पता चला कि इस संबंध में उस के फेमिली वालों ने थाने में कोई सूचना या रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है. इस पर पुलिस गांव परसाजागीर गणेशपुर जा पहुंची. पुलिस को गांव वालों से जानकारी हुई कि मनीष की बहन अनुराधा कई दिनों से घर से गायब है. वह गांव में किसी को दिखाई नहीं दे रही है.

वहां मनीष कुमार के घर पर ताला लगा था. पुलिस ने गांव वालों से परिवारीजनों के बारे में पूछताछ की. गांव वालों ने बताया कि पिछले कई दिनों से उन के घर पर ताला लगा हुआ है. गांव के लोगों ने बताया कि 16 नवंबर के बाद से अनुराधा को नहीं देखा. ग्रामीणों ने जब अनुराधा की मम्मी निर्मला देवी से अनुराधा के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि अनुराधा अपने मामा के घर गई हुई है. इस पर ग्रामीण संतुष्ट हो गए थे.

30 नवंबर को गोंडा पुलिस ने जब मृतका के फोटो निर्मला देवी के पड़ोसियों को दिखाए तो उन्होंने कपड़ोंं के आधार पर उस की शिनाख्त अनुराधा के रूप में की. अनुराधा की हत्या से गांव वाले सन्न रह गए. उन का कहना था कि फेमिली वाले संपन्न व प्रतिष्ठित हैं. इस के बाद पुलिस के अलावा गांव वालों को भी यही शक हो गया कि अनुराधा की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उस के फेमिली वालों ने ही की है, इसलिए वे फरार हो गए. उन के फोन नंबरों के आधार पर पुलिस उन्हें तलाशने लगी.

पुलिस की यह कोशिश रंग लाई. पुलिस ने मनीष कुमार और उस की मम्मी निर्मला को बस्ती के वाल्टरगंज थाना मोड़ के पास से 30 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपी से गांव से 100 किलोमीटर से अधिक दूर आने का कारण पूछा तो मनीष कोई जवाब नहीं दे सका. आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बलेनो कार भी पुलिस ने बरामद कर ली.

मृतका की मम्मी और भाई की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रैंस करते अधिकारी

मांबेटे से अनुराधा के बारे में सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

इस संबंध में जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के थाना वाल्टरगंज के परसाजागीर गनेशपुर की रहने वाली 20 वर्षीय अनुराधा ग्रैजुएशन कर रही थी. उस की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है. अनुराधा के 2 भाई मनीष कुमार और आशीष कुमार हैं. बड़ा भाई आशीष कुमार पुणे में पत्थर का काम करता है, जबकि मनीष घर पर ही रहता है. 16 नवबंर, 2025 को मनीष अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर गया था. घर लौटने पर उस ने बहन अनुराधा को किसी अनजान लड़के से मोबाइल पर बात करते देख लिया. उस ने गुस्से से कहा, ”कितनी बार तुझे मना किया कि बात करना बंद कर दे. लेकिन समझाने के बाद भी तू मानती नहीं है.’’

निर्मला देवी: बेटी की हत्या में बेटे मनीष का साथ दिया

मनीष को शक था कि अनुराधा का चालचलन ठीक नहीं है. प्रतिष्ठित परिवार होने के कारण गांव में उन के परिवार की इज्जत थी. मनीष को यह बरदाश्त नहीं हुआ. मनीष ने उस लड़के के बारे में पूछा, जिस से वह फोन पर बातें कर रही थी. इसी बात पर मनीष की अनुराधा से बहस होने लगी. इस के बाद मनीष से उस की मम्मी निर्मला देवी ने भी अनुराधा की शिकायत की. इस से बहन के प्रति मनीष का गुस्सा और बढ़ गया. उस समय तो मनीष ने किसी तरह अपने गुस्से पर काबू कर लिया.

देर रात भी मनीष का गुस्सा शांत नहीं हुआ. मन ही मन उस के अंदर उथलपुथल मचती रही. सोचने लगा कि यदि अनुराधा ने कोई गलत कदम उठा लिया तो फेमिली वाले मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे, क्योंकि उन के परिवार की गांव में बड़ी प्रतिष्ठा थी. मनीष ने अनुराधा से जब उस का मोबाइल मांगा तो उस ने मोबाइल फोन देने से साफ इंकार कर दिया. इसी बात को ले कर रात में मनीष का अनुराधा से फिर झगड़ा हुआ. तभी मनीष ने अनुराधा के हाथ से मोबाइल छीन कर तोड़ दिया.

इस पर अनुराधा भाई मनीष पर बिफर पड़ी. दोनों में एक बार फिर तकरार होने लगी. बात बढ़ गई और मनीष ने अनुराधा की बुरी तरह पिटाई कर दी. ज्यादा पिटाई के चलते अनुराधा बेहोश हो गई. तब बिना आगापीछा सोचे मनीष ने एक खतरनाक निर्णय ले लिया. उस ने अनुराधा को जान से मारने का प्लान बनाया ताकि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. फिर मनीष ने अपनी मम्मी निर्मला देवी से रस्सी मंगा कर मम्मी के साथ मिल कर बहन के हाथपैर रस्सी से बांध दिए. इस के बाद अनुराधा को बोरे में भर कर अपनी कार की डिक्की में डाल दिया. मम्मी को साथ ले कर मनीष अपने मामा के घर की ओर चल पड़ा. मनीष के मामा का गांव थाना दुबौलिया क्षेत्र में था.

मामा के गांव पहुंचने से पहले एक सुनसान जगह पर कार रोक कर मनीष ने रस्सी से अनुराधा का गला घोंट दिया. फिर मम्मी को मामा के घर छोड़ कर ममेरे भाई मुसकान को कार में साथ ले कर अकबरपुर टांडा की तरफ निकल पड़ा और तरबगंज के पीडी बांध मार्ग पर अनुराधा के शव को डिक्की से निकाल कर सड़क पर फेंका, फिर कार से कुचल दिया. मनकापुर-बभनान-गौरा होते हुए घर लौट गया.

बहन की हत्या का उसे कोई अफसोस नहीं था. पुलिस ने अनुराधा की हत्यारी मां निर्मला देवी व सगे भाई मनीष को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. तीसरे आरोपी मनीष के ममेरे भाई मुसकान की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश डाली गई, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा.

पुलिस हिरासत में आरोपी

इस ब्लाइंड मर्डर केस का परदाफाश कर आरोपी मनीष व उस की मां को गिरफ्तार करने वाली टीम में इंसपेक्टर (तरबगंज) कमलाकांत त्रिपाठी, एसओजी प्रभारी गौरव सिंह, एडिशनल इंसपेक्टर थाना तरबगंज राजकुमार यादव, एसआई उपेंद्र यादव, एसओजी के रणवीर, अरुण यादव, राकेश सिंह, राशिद अली, अमित पाठक, इमरान अली, कांस्टेबल अंकित राय प्रमोद वर्मा व शशिबाला शामिल थे. एसपी (गोंडा) विनीत जायसवाल ने इस ब्लाइंड मर्डर का परदाफाश करने गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम तथा एसओजी टीम को 25 हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया है.

अपनी बहन का गला घोंटते समय भाई को जरा भी मलाल नहीं हुआ. वह जल्लाद बन गया. मनीष और उस की मम्मी ने यह भी पता करने की कोशिश नहीं की कि अनुराधा किस युवक से बात करती है और वह युवक कौन है? अपनी कोख से जन्म देने वाली निर्मला ने भी उस की हत्या में अहम भूमिका निभाई, यदि वह चाहती तो अनुराधा की जान बच सकती थी. प्रश्न उठता है कि कब तक लोग कानून को अपने हाथ में लेते रहेंगे? कब तक निर्दोष लोग इस प्रकार अपनी जान से हाथ धोते रहेंगे? गांव के बुजुर्गों का कहना है कि मोबाइल कल्चर इस के लिए जिम्मेदार है, जिस ने एक हंसतेखेलते परिवार को उजाड़ दिया. UP Crime

 

UP Crime: कबाड़ी से कैसे बना हिस्ट्रीशीटर

UP Crime: शामली का समयदीन उर्फ सामा ऐसा खूंखार अपराधी था कि स्थानीय पुलिस को नाकों चने चबाए रखता था. पुलिस ने जब उस पर इनाम घोषित कर दिया तो वह तेलंगाना जा कर अपराध करने लगा, लेकिन एक बड़ी वारदात करने जब वह शामली आया तो पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया. आखिर एक फेरी वाले से इनामी हिस्ट्रीशीटर कैसे बना समयदीन? पढ़ें, उस के अपराध के किस्से.

शामली के थाना भवन के एसएचओ विजेंद्र सिंह रावत 8 दिसंबर, 2025 की रात 10 बजे के बाद थाने में अपने रोजमर्रा के जरूरी काम निपटा कर पुलिस टीम के साथ रात की गश्त के लिए जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी उन का मोबाइल बजने लगा. विजेंद्र रावत ने मोबाइल स्क्रीन पर नजर डाली तो उन के विश्वस्त मुखबिर दुर्जन सिंह (काल्पनिक नाम) का नंबर फ्लैश हो रहा था.

”हां भई दुर्जन सिंहजी, बहुत दिनों बाद याद आई? 2-3 महीनों से तो आप न जाने कहां गायब ही हो गए थे. बताओ, क्या खास खबर है?’’ विजेंद्र रावत ने पूछा.

”साहब, बहुत ही खास खबर है. कई महीनों से मैं इस गैंग के पीछे ही लगा हुआ था. इस खबर का इनाम ठीकठाक जरूर मिलेगा न!’’ दुर्जन ने कहा.

”दुर्जन सिंह, तुम अब इनाम की फिक्र बिलकुल मत करो. खबर सटीक होगी तो इनाम भी उतना अच्छा ही मिलेगा. तुम खबर जल्दी बताओ,’’ विजेंद्र रावत ने कहा.

उस के बाद मुखबिर दुर्जन सिंह ने बताया कि क्षेत्र के ही भैंसाली इसलामापुर गांव में काफी समय से बंद पड़े ईंट के एक भट्ठे पर नामीगिरामी हिस्ट्रीशीटर डकैतों का एक गैंग जमा है. यह गिरोह पास ही के किसी गांव में बड़ी डकैती डालने वाला है. सूचना बहुत खास और महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए एसएचओ विजेंद्र रावत ने इस घटना की सूचना तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को दे दी.

सूचना मिलते ही शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर थाना भवन और बाबरी थानों की एक संयुक्त पुलिस टीम गठित की गई. फिर एसपी साहब के निर्देश पर थाना भवन के एसएचओ विजेंद्र सिंह रावत और बाबरी थाने के एसएचओ राहुल सिसौदिया अपनीअपनी पुलिस टीमों को ले कर मौके पर पहुंच गए. पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित काररवाई करते हुए बदमाशों के गिरोह को चारों ओर से घेर लिया और माइक से ऐलान कर उन्हें सरेंडर करने को कहा.

इस बात को सुनते ही ईंट भट्ठे के अंदर छिपे हुए बदमाशों ने अचानक ही चारों तरफ से पुलिस के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस टीम भी तुरंत अपनी पोजीशन ले कर जवाबी फायरिंग करने लगी. दोनों ओर से फायरिंग होने लगी. गोलियों की ताबड़तोड़ आवाज से पूरा इलाका दहल गया था. इस बीच एक गोली सीधे पुलिस कांस्टेबल अनुज यादव को लग गई, जिस से वह बुरी तरह से घायल हो गए. बदमाशों के पास अत्याधुनिक हथियार होने के कारण पुलिस टीम को काफी मशक्कत उठानी पड़ रही थी.

इस बीच बाबरी थाने के एसएचओ अपनी पोजीशन ले कर ईंट के भट्ठे के और पास जाने लगे. तभी एक गोली उन की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगी. तभी पुलिस की ताबड़तोड़ गोलियां ईंट भट्ठे के अंदर से बाहर भागने की फिराक में एक बदमाश को लग गई, जिस के कारण वह जमीन पर गिर कर बुरी तरह से तड़पने लगा. उस के 5 साथी वहां से भागने में सफल हो गए थे. उस के बाद उस घायल बदमाश को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पर उपचार के दौरान उस की मौत हो गई.

मौत से पहले जब पुलिस ने उस से पूछताछ की तो बड़ी चौंकाने वाली बातें सामने आईं. उस बदमाश ने अपना नाम समयदीन उर्फ सामा बताया. समयदीन के पास मिले आधार कार्ड से उस का पता कर्नाटक का था. बाद में पता चला कि कर्नाटक में भी उस के खिलाफ कई मामले दर्ज थे. उत्तर प्रदेश पुलिस ने जब उस की कुंडली खंगाली तो जानकारी मिली कि जिला शामली, उत्तर प्रदेश में ही उस के खिलाफ 23 आपराधिक मामले दर्ज थे. उस पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था. इस के अलावा उस के खिलाफ कई राज्यों में भी केस दर्ज थे. 50 हजार का इनामी समयदीन उर्फ सामा मुकीम काला और नफीस गैंग का सक्रिय सदस्य रहा था.

समयदीन उर्फ सामा के खिलाफ कुल 32 संगीन मामले दर्ज थे और वह शामली जिले के थाना कांधला का हिस्ट्रीशीटर था. उस की उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ 18 अक्तूबर, 2025 को भी मुठभेड़ हुई थी, लेकिन इस मुठभेड़ में वह बच कर भाग निकला था. वहां से फरार होने के बाद वह पंजाब में छिप कर रहने लगा था.

बहनोई हुआ गिरफ्तार

पुलिस मुठभेड़ में घायल समयदीन को पुलिस अस्पताल ले जा रही थी, उसी दौरान पुलिस पूछताछ में समयदीन ने पुलिस को हाल ही में तेलंगाना में की गई लूट के बारे में भी जानकारी दी थी. उस समय समयदीन को लगने लगा था कि अब शायद वह बच नहीं पाएगा, इसलिए उस ने अपने सारे गुनाह पुलिस को बता दिए थे. समयदीन के मृत्यु पूर्व के दिए गए बयान को सुनने बाद कांधला पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से तेलंगाना पुलिस के साथ विस्तृत बातचीत कर समयदीन उर्फ सामा के मारे जाने के बारे में बताया.

पुलिस हिरासत में समयदीन का बहनोई उसमान

तेलंगाना पुलिस ने कांधला पुलिस को बताया कि पिछले एक साल में तेलंगाना में लूट और डकैती की 3 बड़ी घटनाएं हुई थीं. उस के बाद तेलंगाना पुलिस को शामली (उत्तर प्रदेश) बुलवाया गया. तेलंगाना पुलिस ने जानकारी दी कि इनामी बदमाश समयदीन उर्फ सामा एक सप्ताह पहले अपने एक साथी बदमाश समसू के साथ तेलंगाना गया था.

लूट में मिले जेवर और नकदी उसमान अपने पास ही रखता था समयदीन

समयदीन का साथी समसू उत्तर प्रदेश सहारनपुर के थाना गंगोह का रहने वाला है और वह भी एक हिस्ट्रीशीटर है और अभी भी फरार चल रहा है. तेलंगाना के कुरनूल के थाना कलवाकुर्ती में समयदीन उर्फ सामा और समसू ने एक मंदिर में लूट की घटना को अंजाम दिया था. उस लूट के बाद समसू तो भूमिगत हो गया, लेकिन समयदीन उर्फ सामा तेलंगाना से वापस शामली आ गया. समयदीन ने ज्वैलरी और लूटी गई पूरी की पूरी रकम अपने बहनोई उस्मान को यह कहते हुए दे दी कि वह ये गहने और पैसे बाद में उस से वापस ले लेगा. लेकिन इसी बीच समयदीन उर्फ सामा का पुलिस से एनकाउंटर हो गया.

इस के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस तेलंगाना पुलिस के साथ मिल कर समयदीन उर्फ सामा के नेटवर्क को खंगालने में जुट गई थी. जब सर्विलांस टीम ने समयदीन के मोबाइल नंबर की कौल डिटेल्स निकाली तो उस में उस के बहनोई उस्मान का मोबाइल नंबर मिला. समयदीन ने सब से ज्यादा कौल उस्मान के नंबर पर की थीं. पुलिस ने काल डिटेल्स के माध्यम से उस्मान को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने जब आरोपी उस्मान से विस्तृत बातचीत की तो उस्मान ने बताया कि बीती 8 दिसंबर, 2025 को समयदीन ने फोन कर के उसे करनाल, हरियाणा के बौर्डर पर किसी जरूरी काम के बहाने बुलाया था.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता सभांलने के साथ ही अपराधियों के प्रति कड़ा रूख अपनाया हुआ है

जब वह नियत स्थान पर पहुंचा तो समयदीन काफी हड़बड़ी में लग रहा था. समयदीन ने उसे लूटे गए गहने और नकदी ले कर घर जाने को कहा था. समयदीन ने तब उस्मान से कहा था कि ये गहने और नकद रकम वह उस से बाद में ले कर जाएगा, अभी वह किसी खास काम से कहीं पर जा रहा है. समयदीन अकसर लूटी गई चीजें और रकम अपने बहनोई उस्मान को दे दिया करता था और बाद में कुछ हिस्सा उस्मान को दे कर अपनी वस्तुएं और नकदी उस से वापस ले लिया करता था.

उस के बाद उस्मान ने गहने और नकद रकम अपने घर में छिपा कर रख दिए थे. समयदीन ने उस्मान से यह भी कहा था कि उसे अभी एक और घटना करनी है, बाद में काम पूरा होने के बाद वह ये जेवर और रुपए उन से वापस ले लेगा. पुलिस ने गिरफ्तार उस्मान निवासी नई बस्ती, मुस्तफाबाद से उस की निशानदेही पर 3 लाख 2 हजार 400 रुपए नकद और 265 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए.

एनकाउंटर से समय बदमाशों की गोली से घायल कांस्टेबल अनुज अस्पताल में

उस्मान को गिरफ्तार करने में एसएचओ सतीश कुमार, सीआई बी. नागार्जुन (थाना कलवाकुर्ती), इंसपेक्टर पी. शंकर, एसआई नरेंद्र कुमार वर्मा, हेडकांस्टेबल वेंकटरामुल, कांस्टेबल कपिल कुमार, कांस्टेबल सुमित कुमार, चिरंजीवी, मोहम्मद नजीरुद्ïदीन शामिल थे.

कौन था गैंगस्टर नफीस

समयदीन उर्फ सामा का विश्वस्त साथी और आका का नाम मोहम्मद नफीस था. मोहम्मद नफीस कांधला गांव के मोहल्ला रवैल का मूल निवासी था. मोहम्मद नफीस ही समयदीन को अपराध की दुनिया में ले कर आया था. मोहम्मद नफीस के अब्बा मोहम्मद मूदा हैं, जो अपने परिवार के साथ अभी भी कांधला गांव में रहते हैं. नफीस के ऊपर हत्या, लूट और डकैती के कुल 34 मुकदमे दर्ज थे. नफीस के ऊपर उत्तर प्रदेश की पुलिस की ओर से एक लाख रुपए का इनाम रखा गया था. उस ने 2 शादियां की थीं. उस की पहली पत्नी रुखसाना की 6 साल पहले एक लंबी बीमारी से मौत हो गई थी.

गैंगस्टर नफीस : इसी गैंगस्टर के गैंग का सदस्य था समयदीन उर्फ सामा

रुखसाना की मौत के बाद नफीस ने कोलकाता की रहने वाली शमा से दूसरी शादी की थी. वह अपनी दूसरी पत्नी शमा के साथ कोलकाता में ही रहने लगा था, लेकिन आपराधिक वारदातें और अपने गिरोह को संचालित करने के लिए वह शामली आताजाता रहता था. उत्तर प्रदेश पुलिस काफी समय से मोहम्मद नफीस को दबोचने में लगी हुई थी. इस के लिए पुलिस ने अपने मुखबिर भी लगा रखे थे. पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली थी कि नफीस अपनी साली की शादी में शामली आने वाला है, क्योंकि उस की साली की शादी 22 अक्तूबर, 2025 को थी. पुलिस ने अब चारों तरफ अपना जाल बिछा दिया था.

16 अक्तूबर, 2025 को उत्तर प्रदेश पुलिस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि नफीस शामली पहुंच चुका है तो पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी थी. नफीस के आने की सूचना मिलते ही शामली पुलिस ने जगहजगह अपनी चेकिंग लगा दी थी. तभी पुलिस को एक पुख्ता जानकारी मिली कि नफीस शनिवार सुबह करीब 4 बजे बुढ़ाना कांधला रोड पर निकलने वाला है.

शामली पुलिस ने बुढ़ाना कांधला रोड पर पहले से ही चैकिंग लगा कर घेराबंदी शुरू कर दी. तभी 4 बजे सुबह एक लाख का इनामी हिस्ट्रीशीटर मोहम्मद नफीस बुढ़ाना की तरफ बाइक से आता हुआ दिखाई दिया. बाइक खुद नफीस चला रहा था, जबकि उस के साथ बाइक के पीछे एक युवक बैठा हुआ था. पुलिस ने जब उसे रुकने का इशारा किया तो वह बाइक तेजी से चलाने लगा. पुलिस को उस के ऊपर शक हुआ तो पुलिस बाइक का पीछा करने लगी. पुलिस ने काफी बाइक का पीछा किया तो भाभीसा गांव के बाहर कीचड़ में उन की बाइक फिसल गई और दोनों बाइक से नीचे गिर गए. तभी नफीस का साथी वहां से निकल कर भाग निकला, जबकि दूसरी ओर नफीस ने .32 बोर पिस्टल से पुलिस के ऊपर फायरिंग शुरू कर दी.

जवाबी फायरिंग में एक गोली सीधे नफीस को लगी, परंतु उस ने फिर भी फायरिंग जारी रखी और उस की ओर से चली एक गोली कोयला थाने के एसएचओ सतीश कुमार की बुलेटप्रूफ जैकेट में फंस गई. उस के बाद तो पुलिस और अधिक सतर्क हो गई थी. उसी बीच पुलिस की ओर से चली एक गोली हिस्ट्रीशीटर नफीस के सीने में ही धंस गई, जिस के कारण उस एक लाख के इनामी बदमाश की मौके पर ही मौत हो गई.

पुलिस को मौके से एक .32 बोर पिस्टल, एक तमंचा .315 बोर, 7 कारतूस (2 खोखे और 5 जिंदा) और एक बाइक बरामद हुई. पुलिस के अनुसार हिस्ट्रीशीटर नफीस के खिलाफ लूट, हत्या और नकली नोटों की तस्करी के 34 मुकदमे दर्ज थे. नफीस जाली करेंसी का एक बहुत बड़ा तसकर भी था और उस ने जाली करेंसी का अपना एक बड़ा नेटवर्क भी खड़ा कर रखा था.

वहीं हिस्ट्रीशीटर नफीस के एनकाउंटर के बाद उस के मोहल्ला खेल, कांधला में इस के चाहने वालों और रिश्तेदारों की एक बहुत भीड़ एकत्रित हो गई थी. वहां पर जब मीडिया के लोग पहुंचे तो मृतक नफीस का छोटा भाई नदीम अपने घर में तख्त पर लेटा हुआ था. मीडिया से बातचीत करते हुए उस ने बताया कि 22 अक्तूबर, 2025 को नफीस की साली का निकाह होने वाला था, जिस के लिए वह कुछ दिन पहले शामली पहुंच गया था.

नदीम ने आगे बताया कि काफी समय से उस का बड़ा भाई नफीस अपनी दूसरी बीवी शमा के साथ कोलकाता में रह कर फेरी लगाने का काम करता था. उस ने काफी समय से सभी बुरे कामों से तौबा कर ली थी. नदीम ने पुलिस पर इलजाम लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस कई सालों से मेरे भाई के पीछे पड़ी थी और पुलिस ने पुराने मामलों में वांछित दिखा कर एनकाउंटर में मेरे भाई को मार डाला.

कौन था समयदीन

42 वर्षीय समयदीन उर्फ सामा मोहल्ला रायजादगान थाना कांधला, शामली (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला था. उस के अब्बू का नाम मेहरदीन और अम्मी का नाम सबीना है. समयदीन के 4 भाई फारुख, साबिर, हफीजी, इदरीश के अलावा 5 बहनें हैं. कुल 9 भाईबहनों में समयदीन दूसरे नंबर पर था. समयदीन का परिवार पहले कांधला नगर के मोहल्ला रायजादगान में जोगियों वाली मसजिद के पास रहता था. समयदीन बचपन में अपने पिता व भाइयों के साथ गलीगली फेरी लगा कर सामान बेचने का काम करता था.

पहलेपहले तो समयदीन अपने परिवार वालों के साथ फेरी लगाता था, लेकिन थोड़े दिनों के बाद उस ने अकेले में फेरी लगाने का काम शुरू दिया. इस के पीछे उस की एक गहरी चाल यह थी कि वह फेरी लगाते समय घरों का सूक्ष्मता के साथ जायजा ले लेता था और फिर रात को सेंध लगा कर उन घरों में चोरी भी कर लिया करता था. जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही समयदीन ने लूट और चोरी की वारदातें शुरू कर दी थीं. वह बचपन से ही अपराधी प्रवृत्ति का था. लोगों को धमकाना, उन से लूट करना और मारपीट करना उस ने अब अपना पेशा ही बना लिया था.

बेटा अपराध की ओर कदम बढ़ाने लगा तो उस के पेरेंट्स ने सोचा कि यदि इस की शादी कर दी जाए तो कंधे पर जिम्मेदारी आने के बाद शायद सुधर जाए, इसीलिए उन्होंने उस का जल्दी निकाह भी कर दिया था, लेकिन समयदीन शादी के बाद भी नहीं सुधर सका. समयदीन के फेमिली वालों ने उसे अपनी ओर से काफी नसीहतें दीं और अपराध की दुनिया से उसे बचाने की भरसक कोशिश भी की, लेकिन उस का परिचय अब धीरेधीरे बड़े अपराधियों से भी होने लगा था, जिन के साथ वह अब बड़ी वारदातों को भी अंजाम देने लगा था.

उस का अब अपराध की दुनिया से वापस लौटने का इरादा भी नहीं था. घर पर लगातार जब समयदीन की शिकायतें आने लगीं और पुलिस घर पर दबिश देने आने लगी तो उस के अब्बू मेहरदीन ने समयदीन और उस की पत्नी नजमा (परिवर्तित नाम) को अपने परिवार से कानूनी रूप से बेदखल कर दिया. घर से बेदखल किए जाने के बाद समयदीन ने नई बस्ती मुस्तफाबाद, कांधला देहात में अपना नया आशियाना बना लिया और अपनी पत्नी नजमा और अपने बच्चों के साथ वहीं पर रहने लगा.

धमकी का हुआ असर

समयदीन की आपराधिक वारदातों में सब से बड़ी और चर्चित घटना आज से एक दशक पहले हुई थी, जब उस का नाम अपराध की दुनिया में सुर्खियों में आया था. उस समय उस ने कांधला नगर में एक जानेमाने ज्वैलर्स के घर पर एक बड़ी डकैती को अंजाम दिया था. कांधला नगर मोहल्ला राजयादगान में मदन वर्मा नगर के एक प्रतिष्ठित और धनी ज्वैलर्स थे. उन के घर पर रात 11 बजे शादी का कार्ड देने के बहाने समयदीन ने मदन वर्मा के घर का गेट खुलवाया. ज्वैलर्स के परिवार वालों ने सहज में ही गेट खोल दिया.

उस के बाद समयदीन ने कार्ड की जगह पर तमंचा निकाल लिया और गोली मारने की धमकी दे कर मदन वर्मा को उस के परिवार सहित रस्सियों से बांध दिया. वह अपनी पूरी प्लानिंग के साथ आया था, अपने थैले में वह रस्सियां और तमंचा पहले से ही ले कर आया था. उस के बाद मदन वर्मा और उस के फेमिली वालों को धमकी देते हुए उस ने गुर्राते हुए कहा, ”देखो, ध्यान से मेरा चेहरा देख लो, मेरा नाम सामा है. मेरे नाम से ही आमजन के दिल में दहशत हो जाती है, क्योंकि जो मेरा हुक्म नहीं मानता, उसे मैं सीधे गोली मार कर दुनिया से हमेशाहमेशा के लिए विदा कर देता हूं.’’

उस के बाद उस ने परिवार वालों को तमंचा दिखा कर पैसे और ज्वैलरी रखने की जगह के बारे में पूछा. इस पर कुछ परिजनों ने हल्ला करने की कोशिश की तो उस ने विरोध करने वालों की जम कर पिटाई कर डाली और उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि लूट तो मैं कर के ही जाऊंगा, यदि जान की सलामती चाहते हो तो मुझे सहयोग करो. इस के बाद ज्वैलर्स के फेमिली वाले बुरी तरह से डर गए और भय के कारण थरथर कांपने लगे. उस के बाद उन्होंने वह जगह समयदीन को बता दी, जहां पर कैश और गहने रखे हुए थे.

एसएचओ सतीश कुमार

समयदीन बहुत शातिर था, वह अपने थैले में पहले से ही टेप रखे हुए था. उस ने ज्वैलर्स और उस के फेमिली वालों के मुंह पर अच्छी तरह से टेप लगा दिया, ताकि वे चिल्ला न सकें. फिर उस ने बड़े आराम और इत्मीनान से ज्वैलर्स के घर से ही एक बड़ा बैग लिया, उस में गहने और कैश रखा और बड़े आराम से वहां से चला गया. दूसरे दिन सुबह जब घर में नौकरनौकरानी आए तो इस बड़ी लूट के बारे में पता लगा.

इस लूट में समयदीन ने करोड़ों रुपए की लूट की थी. बाद में जब पुलिस ने बदमाश के हुलिए के अनुसार गहनता के साथ छानबीन करनी शुरू की तो तब समयदीन का नाम उजागर हुआ था. इस के बाद लगभग 2 वर्षों तक समयदीन उर्फ सामा जेल में रहा. जेल से छूटने के बाद उस ने फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा, उस के संबंध अब धीरेधीरे अपराध जगत के बड़ेबड़े हस्ट्रीशीटरों से होने लगे थे. समयदीन उर्फ सामा पहने मुकीम गैंग का सदस्य था और इस से पहले वह बागपत के राहुल खट्टू गैंग से भी काफी लंबे समय तक जुड़ा रहा, जहां उस ने एक से बढ़ कर एक आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया.

क्राइम में हुई ग्रोथ

समयदीन के अपराधों का ग्राफ तब एकदम से बढऩे लगा, जब वह गैंगस्टर नफीस के संपर्क में आया. नफीस के साथ में रह कर उस का दिल अपराधों के प्रति अब बहुत क्रूर हो गया था. लूट या डकैती के दौरान जब बंधक उस की बात नहीं मानते थे तो वह उन्हें गोली मारने में नहीं हिचकता था. 18 अक्तूबर, 2025 को शामली में जब एक लाख रुपए के इनामी मोहम्मद नफीस का पुलिस ने एनकाउंटर किया तो उस के बाद पूरे गिरोह की कमान समयदीन उर्फ सामा के हाथों में आ गई थी.

गिरोह की कमान हाथ में आते ही अब वह 20 से 30 साल तक के युवाओं को अपने गिरोह में शामिल कर लूट, फिरौती और डकैती की घटनाओं को अंजाम देने लगा था. समयदीन ने गिरोह के सदस्यों को अपराध के लिए अलगअलग क्षेत्रों में बांट दिया था. समयदीन उर्फ सामा के गिरोह का काम बहुत अच्छी तरह से हो रहा था. वह अपने गिरोह को बखूबी संचालित भी कर रहा था. लेकिन कहते हैं कि यदि किसी इंसान की कोई कमजोरी हो तो वह फिर इस दुनिया में अधिक दिनों तक जिंदा भी नहीं रह सकता है. समयदीन की भी एक बहुत बड़ी कमजोरी थी कि वह अय्याश हो गया था.

एसपी (कैराना) हैंमत कुमार

पुलिस को जब समयदीन उर्फ सामा की इस कमजोरी का पता चला तो पुलिस ने समयदीन और उस की ज्ञात प्रेमिकाओं के मोबाइल ट्रेसिंग के जरिए उसे पकडऩे की योजना बनाई. लगातार छापेमारी के बाद समयदीन ने अब अपना नया ठिकाना जनता कालोनी, उरुकेरे जनपद तुमकुर, कर्नाटक में बना लिया, जहां पर रह कर भी वह उस इलाके में अपराध की घटनाओं को संचालित कर रहा था. 8 दिसंबर, 2025 को मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली कि एक कुख्यात बदमाश अपने साथियों के साथ थाना भवन क्षेत्र में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने पहुंचा है. मुखबिर से यह सूचना थाना भवन के एसएचओ को भी मिल गई थी.

फिर पुलिस टीम ने भैंसाली इसलामपुर के जंगलों में बंद पड़े ईंट के भट्ठे के चारों ओर घेराबंदी कर मुठभेड़ के बाद इस हिस्ट्रीशीटर को मार गिराया. समयदीन उर्फ सामा के अब्बू मेहरदीन का कई साल पहले इंतकाल हो चुका है. उस के परिवार में अब उस की अम्मी सबीना, भाई फारुख, साबिर, हफीजी, इदरीश तथा 5 बहनें हैं.

भारतीय कानून में एनकाउंटर क्या है?

भारतीय कानून या भारतीय संविधान के अंतर्गत एनकाउंटर शब्द का कहीं जिक्र नहीं है. पुलिस की भाषा में इस का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब सुरक्षा बल और पुलिस की अपराधियों और चरमपंथी के बीच की भिड़ंत में चरमपंथियों या अपराधियों की मौत हो जाती है. भारतीय संविधान में कहीं पर भी एनकाउंटर को वैध ठहराने का कोई भी प्रावधान नहीं है, लेकिन कुछ नियम और कानून जरूर हैं जो पुलिस या सुरक्षा बलों को यह ताकत देते हैं कि वो अपराधियों पर हमला कर सकते हैं और उस दौरान अपराधियों की मौत को सही ठहराया जा सकता है.

आमतौर पर लगभग सभी तरह के एनकाउंटर में पुलिस या सुरक्षा बल आत्मरक्षा के दौरान काररवाई का ही जिक्र करते हैं. आपराधिक संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 46 के अनुसार अगर कोई अपराधी खुद को गिरफ्तार होने से बचाने की कोशिश करता है या पुलिस गिरफ्त से भागने की कोशिश करता है या पुलिस पर हमला करता है तो इन परिस्थितियों में पुलिस उस अपराधी के ऊपर जवाबी हमला कर सकती है. एनकाउंटर के दौरान हुई हत्याओं को एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग भी कहा जाता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने बिलकुल स्पष्ट शब्दों कहा कि इस के लिए पुलिस तय किए गए नियमों का ही पालन करे.

23 सितंबर, 2014 को इस संबंध में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा और जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन की बेंच ने एक महत्त्वपूर्ण फैसले के दौरान एनकाउंटर का जिक्र किया था. इस बेंच ने अपने फैसले में लिखा था कि पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई मौत की निष्पक्ष, प्रभावी और स्वतंत्र जांच के लिए इन विशेष नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है. UP Crime

 

 

UP Crime: चाइल्ड पोर्न केस – दंपति को सजा ए मौत

UP Crime: इंजीनियर राम भवन ने अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ मिल कर 33 मासूम बच्चों से ऐसी दरिंदगी की कि पोक्सो कोर्ट ने दोनों को मरते दम तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई. आखिर यह उच्चशिक्षित दंपति मासूमों को अपने जाल में किस तरह फांसता था और उन के साथ किसकिस तरह से शोषण किया जाता था, जिस से यह मामला इंटरनैशल  लेवल तक चर्चित हुआ और उन्हें मिली सजा ए मौत?

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले का विशेष पोक्सो कोर्ट 18 फरवरी, 2026 को खचाखच भरा हुआ था. बहुत ही खास केस की सुनवाई होनी थी, जो करीबकरीब अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. केस की जांच सीबीआई के जिम्मे थी. मामला दरजनों मासूम बच्चों के साथ यौनाचार का था, जिन की उम्र 3 साल से 15 साल तक की थी. यह अनोखा मामला भले ही 6 साल से पोक्सो कोर्ट में आया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में बच्चों के साथ यौनाचार और उन की अश्लील तसवीरें, वीडियो आदि इंटरनेट मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैलाने और बेचने की चर्चा साल 2010 से ही बनी हुई थी.

पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा कुछ मिनटों में ही आने वाले थे. हौल की 2 कतारों में लगी बेंचों पर सीबीआई के वकील, यूपी पुलिस, आरोपी, गवाह और बचाव पक्ष के वकील आ चुके थे. यानी कि कोर्ट में साक्ष्यों, सीबीआई के अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपनीअपनी बातें रखने के लिए पूरी तैयारी में थे. उन की तत्परता और उत्सुकता देखते बन रही थी. इस बारे में मीडियाकर्मी भी जानने को उत्सुक थे, लेकिन उन्हें वहां से दूर रखा गया था. हौल में तमाम तरह के मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल डिवाइसेस प्रतिबंधित थे.

दरअसल, इस मामले के आरोपी पतिपत्नी थे. मुख्य आरोपी सिंचाई विभाग का पूर्व जूनियर इंजीनियर राम भवन था, जबकि उस का साथ देने वाली उस की पत्नी दुर्गावती पर भी गंभीर आरोप लगे थे. उन दोनों को भारी सुरक्षा के साथ जेल से कुछ समय पहले ही कोर्ट में लाया जा चुका था. कोर्ट के हौल में गहमागहमी का माहौल था. लोग अपने बगल बैठे साथी से फुसफुसा कर बातें कर रहे थे. उन के चेहरे पर यह जानने की उत्सुकता बनी हुई थी कि बच्चों के साथ यौनाचार के मामले में क्या फैसला सुनाया जाता है. वहां कुछ पीडि़तों के परिजन भी चेहरा ढंक कर गुमसुम बैठे थे.

जैसे ही न्यायाधीश महोदय प्रदीप कुमार मिश्रा हौल में आए, वहां अचानक सन्नाटा छा गया. उपस्थित सभी लोग खड़े हो गए. श्री मिश्रा अपनी सीट पर बैठ गए. उन के सामने कई फाइलें पहले से ही रख दी गई थीं. उन में से उन्होंने एक फाइल खोलने के बाद पहले पन्ने को पढऩा शुरू किया. उस पर मोटे अक्षरों में लिखा था— ‘सैक्सुअली असाल्टिंग केस औफ 33 मेल चिल्ड्रेन’. केस सीबीआई बनाम राम भवन और दुर्गावती का था.

इस मामले की सुनवाई 12 फरवरी, 2021 को ही शुरू हो चुकी थी. कई दौर की सुनवाई के दरम्यान जैसेजैसे इस मामले में आरोपी के खिलाफ गवाहों की फेहरिस्त बढ़ती चली गई थी, वैसेवैसे मामला और भी पेचीदा हो चुका था. आरोपियों के खिलाफ प्याज के छिलके की तरह तथ्यों और तर्कों की परतें उतरने लगी थीं. बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलों के साथसाथ मामले की फाइल मोटी हो गई थी. पुलिस की उलझी हुई जांच में कई खामियां थीं. तथ्य थे, मगर उस के सबूत नहीं थे. नतीजे पर पहुंचने में उलझनें कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं.

न्यायाधीश ने अचानक अपने सामने रखे लकड़ी के हथौड़े से 3 बार ठकठक की आवाज की. पूरा हौल एकदम से एक बार फिर शांत हो गया. श्री मिश्रा पोक्सो कोर्ट के सरकारी वकील की तरफ मुखातिब होते हुए बोले, ”हां, तो कमल सिंहजी! आगे की सुनवाई के लिए आप तैयार हैं?’’

”जी जनाब! पहले मैं इस केस के बारे में थोड़ा ब्यौरा देना चाहता हूं.’’ एडवोकेट कमल सिंह ने अनुमति मांगी.

”इजाजत है…संक्षेप में बताइएगा.’’ श्री मिश्रा बोले.

”जी हुजूर! चाइल्ड पोर्न के इस मामले का खुलासा सीबीआई ने किया है. उसे इंटरपोल से केस के बारे में जानकारी मिली थी. 3 मोबाइल नंबरों से बने आईडी के जरिए बच्चों के यौन शोषण के वीडियो औनलाइन अपलोड किए गए थे और यह मटीरियल लगभग 40-45 देशों में बेचा गया था.

”इस बारे में सीबीआई द्वारा बरामद पेन ड्राइव में 36 बच्चों के यौन शोषण के 679 फोटो और वीडियो थे. वे सारे आरोपी राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती के घर से मिले थे. इस की जांच पहले ही की जा चुकी है. 4 साल तक चले ट्रायल के दौरान 74 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है.

”इस केस की मूल जड़ में राम भवन और उस की पत्नी है, जिन्होंने मासूम बच्चों को तरहतरह का लालच दिया. अपने घर पर बुलाया और उन के साथ यौनाचार किया.

”यही नहीं हुजूर, दोनों ने उन के साथ यौनाचार के वीडियो और तसवीरें भी बनाईं. उन का कामर्शियल यूज किया और इंटरनेट मीडिया के जरिए विदेशों में बेच दिया.’’

”औब्जेक्शन जज साहब!… पुरानी कहानी दोहरा कर बेवजह कोर्ट का समय बरबाद किया जा रहा है.’’ बचाव पक्ष के वकील बीच में बोल पड़े.

”उन्हें अपनी बात पूरी तरह से रखने दीजिए… आप को भी अपनी बात कहने का मौका दिया जाएगा…सिंह साहब, आगे बताइए.’’ न्यायाधीश महोदय हथौड़े से तख्ती को पीटते हुए बोले.

जेई राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती – कोर्ट ने सुनाई मरते दम तक फांसी की सजा

”राम भवन मूलरूप से बांदा जिले के नरैनी शहर के रहने वाले चुन्ना प्रसाद कुशवाहा का पुत्र है. उस ने अपनी पत्नी के साथ मिल कर जिस तरह के घिनौने अपराध किए हैं, उस की जितनी सख्त हो सके सजा दी जानी चाहिए.

”वह पड़ोस, रिश्तेदारों और आसपास के मासूम बच्चों को निशाना बनाते थे. बच्चों को पैसे, गिफ्ट्स और वीडियो गेम का लालच दे कर घर बुलाया जाता था. इस तरह पीडि़त बच्चों की कुल संख्या 33 थी. उन में नाबालिग लड़के थे.

”उन के साथ गंभीर यौन शोषण किया गया था. कई बच्चों को गंभीर चोटें आई थीं, कुछ को अस्पताल में भरती होना पड़ा था और कई मानसिक आघात के चलते शारीरिक समस्याओं की चपेट में आ चुके थे.

”राम भवन, दुर्गावती 10 साल तक बांदा और चित्रकूट घूमते रहते थे. वीडियो बनाने से पहले लड़कों को लुभाने के लिए तोहफों का इस्तेमाल किया था. हुजूर! एक दशक तक राम भवन ने अपना चाइल्ड पोर्न औपरेशन आराम से चलाया था.

”चित्रकूट में एक किराए का कमरा, राज्य के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की पोस्टिंग, एक आम जिंदगी जिस से कोई बाहरी संकेत नहीं मिलता था कि वह अपने आसपास के बच्चों के साथ क्या कर रहा है. सभी पीडि़त 18 साल से कम उम्र के लड़के थे, उन में 3 साल के भी थे.

”राम भवन और उस की पत्नी ने दरजनों पीडि़तों को शामिल करते हुए हैरान करने वाले 2 लाख वीडियो बनाए थे. वह बच्चों पर काम करने के अलगअलग तरीके अपनाता था, जिस में औनलाइन वीडियो गेम तक पहुंच और उन्हें लुभाने के लिए पैसे या गिफ्ट देना शामिल था. उन पर दया दिखा कर और लालच दे कर फंसाया जाता था, फिर उन के साथ गलत व्यवहार किया जाता था. उन्हें फिल्माया जाता था. वे उन्हें मोबाइल फोन, चौकलेट और घडिय़ां देने का भी वादा करते थे.’’

कोर्ट में स्पैशल पब्लिक प्रासिक्यूटर सौरभ सिंह ने भी इस केस में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फोटो और वीडियो के जरिए राम भवन कई सालों तक बच्चों को धमकाता रहा. इस का पता लगाने में सीबीआई को ग्लोबल पुलिस ग्रुप इंटरपोल से मदद मिली. वहीं से डार्क वेब पर पोर्न की बिक्री से जुड़े 3 मोबाइल नंबर मिले.

सीबीआई की गवाही

दोनों ने पीडि़तों के 2 लाख से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो और तसवीरें इंटरनेट के जरिए लगभग 47 देशों में सर्कुलेट कीं. जांच के दौरान मिली एक पेन ड्राइव में 34 साफ वीडियो और 679 तसवीरें थीं. कपल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म, वेबसाइट और डार्क वेब पर मटीरियल अपलोड करने, शेयर करने और बेचने के लिए कई मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया था. इलेक्ट्रौनिक डिवाइस की फोरैंसिक जांच से एक साफ डिजिटल ट्रेल मिला.

सरकारी वकीलों के बाद न्यायाधीश श्री मिश्रा ने उन के कहने के आधार पर सीबीआई अधिकारी को भी कठघरे में आ कर अपनी बात कहने के लिए बुलाया.

”जनाब, आप ने अपनी जांच में क्याक्या पाया, उस बारे में जज साहब को बताएं.’’ सरकारी वकील बोले.

”जी साहब, जरूर. मैं सब कुछ इस मामले की जांच के आधार पर ही बताऊंगा. जांच के दौरान मैं ने पाया कि आरोपियों ने 33 लड़कों के साथ कई तरह के गलत काम किए थे, जिन में से कुछ की उम्र 3 साल के आसपास थी. इस बारे में 74 गवाहों में से कम से कम 25 ने गवाही दी. पीडि़तों से दरिंदगी का अंदाजा इस बात से लग जाता कि कुछ अभी भी हौस्पिटल में भरती हैं. कुछ पीडि़तों की आंखें टेढ़ी हो गई हैं. पीडि़त अभी भी दरिंदों की वजह से हुए साइकोलौजिकल ट्रामा से जूझ रहे हैं.

”राम भवन ने गलत तरीके से वीडियो रिकौर्ड किए. यह उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि उन का कामर्शियल इस्तेमाल के लिए किया गया था. जांच में पाया गया कि राम भवन ने जो कुछ भी फिल्माया, उसे बेचने के लिए एक सिस्टमैटिक डिजिटल औपरेशन बनाया था. वे इस बात से बेखबर थे कि इन्वैस्टिगेटर्स इंटरनेट पर सर्कुलेट हो रहे बच्चों के यौन शोषण के मटीरियल पर नजर रख रहे थे. जब उन्हें कपल से जुड़ा कंटेंट मिला, तब वे इंटरपोल की निगाह में आ गए.’’

इस मामले की जांच अक्तूबर, 2020 में सीबीआई को सौंप दी गई. यह वह दौर था, जब पूरा देश कोविड 19 की चपेट में था. लौकडाउन का माहौल था. चौतरफा तरहतरह की सख्ती का आलम था.

हालांकि यह मामला साल 2010 से ही चल रहा था, जिस बारे में कई तरह के घिनौने खेल की बातें मीडिया में आती रहती थीं. मुख्य आरोपी रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था. वह बाहर से सामान्य दिखता था और किराए के घर में रहता था. उस के घर के अंदर एक भयानक खेल चल रहा था, इस बात से आसपास के लोग अनभिज्ञ थे, जबकि इस में जेई की पत्नी दुर्गावती भी पूरी तरह शामिल थी. बताते हैं कि 2010 से 2020 तक लगभग 10 सालों तक यह सिलसिला चल रहा था.

देश के कई हिस्सों में चाइल्ड पोर्न को ले कर सीबीआई कई सालों से सक्रिय थी. इसी सिलसिले में सीबीआई द्वारा सितंबर 2020 में अनपरा निवासी इंजीनियर नीरज यादव गिरफ्तार किया गया. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने सीबीआई को सूचना दी थी कि बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री से जुड़ा डिजिटल डेटा मिला है, जो डार्क वेब पर साझा किया जा रहा है और वहां से उसे बेचा जा रहा है. इस के बाद ही सीबीआई ने 30-31 अक्तूबर, 2020 को एफआईआर दर्ज की थी.

उस के बाद आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई. नीरज दिल्ली में रह कर औनलाइन संदिग्ध लिंक साझा करता था. इसी दौरान एक औनलाइन लिंक के आधार पर विशेष औनलाइन चाइल्ड सैक्सुअल एब्यूज एंड एक्सप्लाइटेशन (ह्रष्टस््रश्व) यूनिट की जांच में राम भवन का नाम सामने आया. सीबीआई ने लगभग डेढ़ महीने तक जाल बिछा कर 17 नवंबर, 2020 को कर्वी की एसडीएम कालोनी स्थित किराए के मकान से राम भवन और उस की पत्नी दुगार्वती को गिरफ्तार किया.

इस के लिए सीबीआई ने विदेशी एजेंसियों के साथ जानकारी शेयर की, जिन्होंने मटीरियल के खरीदारों और पाने वालों की भी पहचान की थी, जिस से यह केस और पक्का हो गया. इस की शिकायत मिलने पर 31 अक्तूबर, 2020 को सीबीआई ने राम भवन के खिलाफ केस दर्ज किया. उस के द्वारा बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बना कर डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया. इस के बाद 17 नवंबर, 2020 को सीबीआई ने राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया था.

दाखिल हुई चार्जशीट

गिरफ्तारी के 88 दिन बाद 12 फरवरी, 2021 को बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में मैडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया. इस दौरान सीबीआई की टीम ने 4 से 42 साल तक की उम्र के लोगों के बयान दर्ज किए. सभी का मैडिकल परीक्षण कराने के साथ डिजिटल सबूत को कनेक्ट किया गया था.

इस के बाद बच्चों से जुड़ा मामला होने के चलते सीबीआई ने पोक्सो कोर्ट में ट्रायल की शुरुआत जून, 2023 से करवाई. इस सिलसिले में सीबीआई ने 74 गवाह पेश किए. सरकारी वकील ने मांग करते हुए कहा कि डीएम को एक पत्र लिखा जाए, जिस में पीडि़त बच्चों को 10-10 लाख रुपए की राशि देने का काम किया जाए. बांदा के पोक्सो कोर्ट में 18 फरवरी, 2026 की सुनवाई करीबकरीब पूरी हो गई. दोनों आरोपियों राम भवन और दुर्गावती को दोषी ठहराया गया. उन के खिलाफ फैसला 20 फरवरी, 2026 को सुनाया गया, जो भारतीय कानून के इतिहास में काफी बड़ा था.

बांदा के स्पैशल पोक्सो कोर्ट में पेशी के लिए दंपति को ले जाती पुलिस

न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा, ”सीबीआई की विशेष जांच के बाद सिंचाई विभाग के पूर्व जूनियर इंजीनियर राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती को 33 बच्चों के यौन शोषण और उन के वीडियो बना कर डार्क वेब पर बेचने का दोषी पाया गया है. यह मामला ‘रेयरेस्ट औफ रेयर’ श्रेणी में रखा गया है.’’

उन्होंने कहा कि उन का अपराध इतना भयावह और योजनाबद्ध था कि सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची. दोनों दोषियों को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखने का आदेश दिया जाता है. उन्हें ‘मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाया जाए!’

फांसी की सजा के साथसाथ कोर्ट ने राम भवन पर 6.45 लाख रुपए और दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपए का जुरमाना भी लगाया.  साथ ही न्यायालय ने पीडि़त बच्चों के पुनर्वास के लिए महत्त्वपूर्ण आदेश दिए.

कानून और पीनल कोड

दंपति को इंडियन पीनल कोड और पोक्सो  ऐक्ट के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव सैक्सुअल असाल्ट, पोर्नोग्राफिक मकसद के लिए बच्चों का इस्तेमाल, बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफिक मटीरियल का स्टोरेज, उकसाना और क्रिमिनल कांसपिरेसी जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था. इस के 163 पेज के फैसले में, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज प्रदीप कुमार मिश्रा की कोर्ट ने ‘रेयरेस्ट औफ रेयर’ सिद्धांत लागू किया.

कोर्ट ने कहा कि कई जिलों में इस तरह के उत्पीडऩ का बड़ा पैमाना, दोषियों की बहुत ज्यादा नैतिक गिरावट के साथ मिल कर, इसे इतना असाधारण और घिनौना अपराध बनाता है कि इस में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, जिस से न्याय के मकसद को पूरा करने के लिए आखिरी न्यायिक रोकथाम की जरूरत है. इस फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार को 33 पीडि़तों में से हर एक को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया. साथ ही दंपति के घर से जब्त किया गया कैश 8 लाख रुपया भी पीडि़तों में बराबर बांटने के लिए कहा गया.

आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषी हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं. वहां से राहत नहीं मिलने की स्थिति में वे सुप्रीम कोर्ट और उस के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर सकते हैं. इस बारे में जानकार वकील का कहना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दंपति को उच्च अदालतों से राहत की संभावना कम है. भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड के मामलों की स्वचालित पुष्टि उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है, जिस के बाद ही सजा अंतिम रूप लेती है.

केस से जुड़े वकीलों ने दंपति को सजा ए मौत सुनाए जानें पर अपनी खुशी व्यक्त की

यह भी बताया जाता है कि जेई राम भवन अपनी अवैध कमाई को जमीन खरीद में निवेश करने की योजना बना चुका था, किंतु वह इस में सफल नहीं हो पाया. सीबीआई जांच में पता चला कि उस ने वर्ष 2018 में 21 बीघा जमीन खरीदने की कोशिश की थी. राम भवन ने शोभा सिंह का पुरवा स्थित एसडीएम कालोनी के पास यह जमीन खरीदने की योजना बनाई थी. इस सौदे के लिए उस ने 2 अन्य इंजीनियरों को भी अपने साथ शामिल कर लिया था. जमीन की शुरुआती मांग 18 करोड़ रुपए थी, जिस पर राम भवन ने लगभग 8 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी.

एक साल तक चली जमीन की सौदेबाजी के दौरान वर्ष 2019 में भूस्वामी ने 14 करोड़ रुपए की कीमत तय की थी, किंतु जेई राम भवन 10 करोड़ रुपए से अधिक देने को तैयार नहीं हुआ, जिस के कारण यह सौदा नहीं हो सका. इसी बीच रामभवन की अवैध गतिविधि से धन कमाने का पता चला, जिसे जमीन में निवेश कर वैध बनाना चाहता था. सीबीआई ने उस की गिरफ्तारी के बाद जमीन के सौदे से जुड़े लोगों से गहन पूछताछ की थी. जांच एजेंसी ने उस की संभावित अवैध आय के स्रोतों की भी पड़ताल की.

स्थानीय लोगों के अनुसार, तीनों साझेदार इस जमीन पर अपने लिए अलगअलग आवास भी बनवाना चाहते थे. सौदेबाजी के दौरान कीमत को ले कर भूस्वामी और जेई के बीच मतभेद बना रहा. अंतत: 10 करोड़ रुपए से अधिक न देने की जिद के कारण सौदा रद्द हो गया. सिंचाई विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि पुराने अफसरों ने कई बार राम भवन के काम में लापरवाही की शिकायत की, लेकिन उस पर कोई काररवाई नहीं हुई, क्योंकि राम भवन की सत्ता के गलियारों के साथ ही विभाग में तगड़ी पैठ थी. कभीकभी तो वह सप्ताहसप्ताह भर दफ्तर से गायब रहता था.

उस की पैठ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के 16 दिन बाद 18 नवंबर, 2020 को उसे निलंबित किया गया. उस का निलंबन उस समय के जिलाधिकारी शेषमणि त्रिपाठी व सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. निरंजन के आदेश पर हुआ था. यह मामला डिजिटल प्लेटफार्म के दुरुपयोग और डार्क वेब के जरिए संचालित अपराधों की गंभीरता को उजागर करता है. जांच एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय बेहद महत्त्वपूर्ण है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बाल यौन शोषण और औनलाइन आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कड़ा संदेश है. अदालत ने न केवल दोषियों को कठोर सजा दी, बल्कि पीडि़त बच्चों के पुनर्वास और क्षतिपूर्ति पर भी विशेष ध्यान दिया.

दिल्ली का इंजीनियर भी बेचता था पोर्न वीडियो

जेई समेत उस की पत्नी को यौनाचार और पोर्न वीडियो बेचने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सीबीआई इस तरह के मामले की तहकीकात काफी सक्रियता से करने लगी है. इस सिलसिले में दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिब भी निशाने पर आ चुका है. आकिब पर भी बच्चों के यौन शोषण के वीडियो विदेशों में बेचने का आरोप है. इस संबंध में सीबीआई ने गूगल के अधिकारियों समेत 8 लोगों के बयान दर्ज करने की तैयारी की है. जल्द ही आकिब भी सीबीआई के शिकंजे में कसा जा सकता है.

दरअसल, मासूम लड़कों के साथ यौन शोषण और वीडियो बना कर बेचने के मामले में जेई राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती के साथ तीसरा आरोपी आकिब ही है. वह दंपति से वीडियो मंगवाता था और फिर उन्हें विदेशों को भेज कर मोटी कमाई करता था. इस से होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा राम भवन को भी देता था. सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह मीणा के अनुसार सालों से चल रहे इस अपराध में आकिब भी पोर्न बाजार का एक शातिर खिलाड़ी है.

उस का दोष गूगल के अधिकारियों समेत एयरटेल कंपनी व एम्स के डाक्टरों से चिकित्सीय परीक्षण की रिपोर्ट समेज कुल 8 लोगों से पूछताछ के बाद ही तय हो पाएगा. मोहम्मद आकिब दिल्ली का रहने वाला पेशे से इंजीनियर है. उस के खिलाफ की गई जांच में पाया गया है कि वह जेई और उस की पत्नी से ईमेल के जरिए अश्लील सामग्री मंगवाता था. उस के बाद विभिन्न देशों में इसे भेज कर मोटी कमाई करता था. UP Crime

 

UP News: चांदनी की चाहत

UP News: चांदनी वास्तव में  इतनी खूबसूरत थी कि गोरखपुर का विश्वकर्मा चौहान उस पर मर मिटा था. जबकि वह एक बेटी का बाप था. पत्नी ममता उस पर जान छिड़कती थी, लेकिन प्रेमिका चांदनी के प्यार में विश्वकर्मा एक दिन ऐसा जघन्य अपराध कर बैठा कि न वह घर का रहा और न घाट का.

विश्वकर्मा ने प्रेमिका चांदनी से मिल कर पत्नी ममता के साथ हुए विवाद के बारे में सारी बातें बताईं और उसे रास्ते से हटाने के बारे में सुझाव भी मांगा तो उस ने बड़ी खूबसूरती के साथ अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा, ”जो भी करना है, आप को करना है. मुझे तो आप के पहलू में सिर रख कर सोना है बस.’’

उधर बेटी की परवरिश के लिए ममता पति विश्वकर्मा से अपने हक के लिए दबाव बनाए हुए थी. पत्नी के दबाव से वह परेशान हो गया था. इसी बीच उस ने अपने हिस्से की गांव वाली जमीन पापा से अपने नाम रजिस्ट्री करा कर वह 35 लाख रुपए में बेच दी. जब ममता को जानकारी हुई कि पति ने गांव वाली अपने हिस्से की जमीन 35 लाख रुपए में बेच दी है तो वह उन रुपयों में से आधा हिस्सा मांगने लगी. पति ने फिर वही रटारटाया जवाब दिया कि चाहे जो कुछ भी हो जाए, उसे एक फूटी कौड़ी नहीं देगा. इस के बाद पति और पत्नी के बीच विवाद और गहराता चला गया.

ममता और विश्वकर्मा के बीच विवाद इस कदर बढ़ता चला गया कि विश्वकर्मा को ममता के नाम से ही नफरत हो गई थी और उस के खून से अपने हाथ रंगने के लिए तैयार हो गया था. उस दिन के बाद से वह पत्नी की हर गतिविधि पर नजर रखने लगा. वह उस की रेकी करने लगा था. यह घटना से करीब एक महीने पहले की बात थी. ममता अपनी बेटी को साथ ले कर शाहपुर थानाक्षेत्र के गीता वाटिका मोहल्ले में किराए के कमरे में रहती थी. यहीं रह कर वह प्राइवेट जौब कर अपनी और बेटी की परवरिश करती थी. विश्वकर्मा ने पता लगा लिया था कि वह बेटी के साथ कहां रहती है.

बात 4 सितंबर, 2025 की है. शाम साढ़े 7 बजे ममता बेटी को साथ ले कर घरेलू सामान की खरीदारी और फोटो खिंचवाने के लिए बाजार गई थी. पत्नी को घर से बाहर निकलते देख पहले से घात लगाए बैठा विश्वकर्मा अलर्ट हो गया और उस के पीछे लग गया. जहांजहां वह जाती, विश्वकर्मा उस के पीछे था. इस बात से अंजान ममता अपनी धुन में खोई बेटी के साथ बाजार की ओर बढ़ती रही. उसे इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि पति उस का पीछा कर रहा है.

ममता बेटी को ले कर गीता वाटिका के आसपास की दुकानों से सामान खरीद कर जेल रोड के सामने स्थित राधिका स्टूडियो में दाखिल हुई तो स्टूडियो से थोड़ी पहले विश्वकर्मा अपनी बाइक खड़ी कर के उस के वहां से आने का इंतजार करने लगा. करीब 20 मिनट बाद ममता बेटी के साथ फोटो खिंचवा कर स्टूडियो से बाहर निकली तो उसे देखते ही विश्वकर्मा का जबड़ा गुस्से से भिंच गया.

ममता स्टूडियो से जैसे ही थोड़ी आगे बढ़ी, तभी विश्वकर्मा उस के सामने आ खड़ा हुआ. पति को सामने देख कर ममता सहम गई और वहीं खड़ी हो गई. बेटी भी पापा को देख कर सकते में आ गई. अभी वह कुछ कह या समझ पाती, तब तक उस ने हेलमेट में छिपा कर रखा तमंचा निकाला और एक गोली पत्नी ममता के सीने में और दूसरी गोली बाएं कंधे पर चला दी.

गोली लगते ही ममता लहराते हुए जमीन पर गिर पड़ी और तड़पने लगी. यह देख कर बेटी अपनी जान बचा कर वहीं आसपास छिप गई. विश्वकर्मा घुटने जमीन पर टिका कर नीचे बैठ कर तड़प रही पत्नी को गौर से देखने लगा और होंठों में बुदबुदाया, ”कहा था मैं ने कि मुझ से पंगा मत ले, मत ले, लेकिन तू नहीं मानी. तूने मेरी बात मान ली होती और आराम से तलाक दे दिया होता तो तू ऐसे सड़क पर नहीं पड़ी होती, जिंदा रहती. अपनी बेटी के साथ जीती, लेकिन अपनी अकड़ के आगे तूने झुकना नहीं सीखा तो मैं कहां तुझे बख्शने वाला था. हरामजादी कहीं की…’’

इधर गोली चलने की आवाज सुनते ही व्यापारी अपनी दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिराने लगे. कुछ ही देर में वहां सन्नाटा पसर गया. इसी बीच भीड़ में से किसी ने घटना की सूचना गोरखपुर के शाहपुर थाने के इंसपेक्टर नीरज राय को दे दी. घटना की सूचना मिलते ही इंसपेक्टर राय फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने देखा तमंचा हाथ में लिए हत्यारा विश्वकर्मा चौहान वहीं बैठा है. फिर क्या था, पुलिस ने उसे तमंचे सहित गिरफ्तार कर लिया.

आननफानन में घायल ममता को जीप में लाद कर जेल रोड स्थित विनायक नर्सिंगहोम ले जाया गया, जहां डौक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.

मम्मी की मौत की सूचना मिलते ही मासूम बेटी लडख़ड़ा कर फर्श पर जा गिरी. वह यह समझ नहीं पा रही थी कि उस के साथ ये क्या हो रहा है. ऐसा कौन सा गुनाह किया था, जो उसे इतनी बड़ी सजा दी है. सिर से मम्मी का साया छिन गया तो वह अब किस के सहारे जीएगी? वीरान सी जिंदगी अकेले कैसे जीएगी? पुलिस ने ममता के शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए गुलरिहा स्थित बाबा राघवदास मैडिकल कालेज भिजवा दिया. पुलिस ने ममता के मोबाइल फोन से उस के बड़े भाई संदीप चौहान, जो लुधियाना में परिवार सहित रहता था, को सूचना देते हुए मौके पर आने के लिए कहा.

बहन की हत्या की सूचना मिलते ही वह  उसी रात प्राइवेट वाहन से लुधियाना से गोरखपुर के लिए रवाना हो गया था. अगले दिन यानी 5 सितंबर, 2025 को संदीप चौहान परिवार सहित गोरखपुर पहुंचा और शाहपुर थाने आया तो वहां मामा संदीप को देखते ही उस की भांजी उस से लिपट कर फफकफफक कर रोने लगी. भांजी को रोता देख कर संदीप भावुक हो उठा. सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने बीती रात से ही मृतका की बेटी को अपनी सुरक्षा में ले रखा था, ताकि उसे कोई नुकसान न पहुंचा सके. क्योंकि इस घटना की वही एकमात्र चश्मदीद गवाह थी.

पोस्टमार्टम के बाद में पुलिस ने ममता चौहान की लाश उस के भाई संदीप को सौंप दी थी. जहां उन्होंने राजघाट श्मशान में अंतिम संस्कार कराया और उसे साथ ले कर अपने गांव खजनी के पुरैना कटया चला गया. आरोपी विश्वकर्मा चौहान से की गई पूछताछ में कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

36 वर्षीया ममता चौहान 3 भाइयों संदीप चौहान, सनी चौहान और सुभाष चौहान के बाद जन्मी थी. घर में वह सब से छोटी थी और सब की लाडली भी थी. सब से बड़े भाई संदीप से उस की काफी निभती थी. ममता पिता के समान बड़े भाई को सम्मान देती थी.

मन जैसा नहीं था पति

ममता नाम के अनुरूप ही थी. उस की वाणी से रस टपकता था. लोग उस की प्रशंसा किए बिना रहते नहीं थे, लेकिन जिद्ïदी तो इतनी थी कि एक बार किसी काम के लिए अपनी जिद पर अड़ जाती तो उसे पूरा किए बिना पीछे हटती नहीं थी. घर ही नहीं आसपास के सभी लोग उस के इस व्यवहार से वाकिफ थे. धीरेधीरे बचपन की गलियों को पीछे छोड़ उस ने जवानी की दहलीज पर पांव रखा तो फेमिली वालों को उस की शादी की चिंता सताने लगी थी. फेमिली वालों ने उस की शादी के लिए नातेरिश्तेदारों से अच्छे लड़के की तलाश करने के लिए कह रखा था.

ममता चौहान

जल्द ही फेमिली वालों की मनोकामना पूरी भी हो गई और ममता के लिए जैसा वर चाहते थे, उन्हें हरसेवकपुरम के रहने वाले विश्वकर्मा चौहान के रूप में मिल गया था. फिर जल्द ही उन की शादी हो गई. कसरती और गठीले बदन वाला विश्वकर्मा चौहान देखने में मेहनतकश तो लगता था, लेकिन वह वैसा था नहीं. ममता ने सपनों के जिस राजकुमार की कल्पना की थी, वह वैसा निकला नहीं. पति का चरित्र रसिक और आपराधिक था, क्योंकि अपने हार्डकोर क्रिमिनल भतीजे की संगत में रह कर वह भी छोटेमोटे अपराध करने लगा था.

जब तक ममता पति की पूरी सच्चाई जानती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि तब तक वह एक बेटी की मां बन चुकी थी. धीरेधीरे बेटी बड़ी हो रही थी. पिता की आपराधिक छाया बेटी पर न पड़ेे, इसलिए वह पति को आपराधिक छवि से दूर होने के लिए समझाती रही. एक दिन ममता ने पति को समझाते हुए कहा, ”ऐ जी, तुम यह काम छोड़ क्यों नहीं देते? देखो, अब तुम्हारा परिवार है. एक बेटी भी हो चुकी है. धीरेधीरे बड़ी होगी और जब मुझ से पापा के काम के बारे में पूछेगी तो मैं उसे क्या जवाब दूंगी. क्या कहूंगी उसे कि तेरे पापा अच्छा काम नहीं करते, वह बुरे इंसान हैं तो उस के बालमन को कितना गहरा आघात पहुंचेगा. इस बारे में कभी सोचा है?’’

”यार, तुम कितना बकबक करती हो. सोने भी नहीं देती, जा चुपचाप सो जा. रात काफी गहरी हो चुकी है. इस बारे में हम सबेरे बात करते हैं. मुझे जोर की नींद आ रही है.’’ पत्नी के सवालों को सुन कर विश्वकर्मा बात इधरउधर टालमटोल कर सोने का बहाना बनाने लगा था.

”एक नहीं सुनूंगी मैं आज तुम्हारी. क्यों न पूरी रात यंू ही आंखों में कट जाए, लेकिन अपने सवालों के जबाव सुने बगैर न खुद सोऊंगी और न ही सोने दूंगी. बताइए, ये गंदा काम छोड़ कर क्यों नहीं कोई दूसरा काम करते हैं, जिस में 2 पैसों की आमदनी हो और सम्मान से जीए भी.’’

”मेरे को गुस्सा मत दिला ममता. सोने दे. कहा न, इस बारे में कल सबेरे बात करते हैं. फिर सुनती क्यों नहीं?’’ उस ने पत्नी को डांटा.

”मेरे सवालों का जबाव दे दो, चुप हो जाऊंगी. तुम्हारा कल का सवेरा कभी आता ही नहीं. सवेरा हुआ नहीं कि तैयार हो कर बाहर निकल जाओगे और फिर रात में ही घर वापस लौटोगे. तो बताओ, मैं कब तुम से बात करूं?’’

”जिसे तुम गंदा काम कहती हो, वह मेरा प्रोफेशन है, अपने प्रोफेशन से अलग रह कर जिंदा नहीं रह सकता मैं. मेरे से पहले मुझे कोई टपका दिया तो करती रह जाना शृंगार. बेवा की जिंदगी ही नसीब होगी, इसलिए तुम भी सो जाओ और मुझे भी सोने दो. बेटी सो रही है, जग जाएगी. मेरे को भी पता है कि बेटी बड़ी होगी और मेरे पेशे के बारे में जानेगी तो उसे दुख होगा. तब की तब देखी जाएगी. तब के लिए रात क्यों खराब करती हो?’’ कहते हुए विश्वकर्मा खर्राटे भरने लगा और ममता उसे देखती रह गई.

सुबह होते ही फ्रैश हो कर विश्वकर्मा नाश्ता कर के बाहर निकल गया. रात का ममता का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था. नाश्ता बना कर पति को दे तो दिया था, लेकिन गुस्से से उस का नथुना अभी भी फूल और पिचक रहा था.

सौतन लाने की थी तैयारी

विश्वकर्मा के दिन का आधा समय सोशल मीडिया (फेसबुक) देखने में बीत जाता था. यही नहीं, फेसबुक पर लड़कियों से घंटों चैटिंग करता रहता था. यह देख कर ममता जलभुन जाती थी. चैटिंग करता था सो अलग की बात थी, कई लड़कियों से उस के अफेयर चल रहे थे, जिन में चांदनी नाम की एक युवती को तो पत्नी की सौतन बनाने की तैयारी में जुटा हुआ था. पति की करतूतों से ममता के सपने आहत हो चुके थे. जो सपने आंखों में सजाए पीहर से ससुराल आई थी, सासससुर और जेठ सब के सब मम्मीपापा और भाई जैसे ही मिले, लेकिन जिस के साथ जीवन बिताना था, वही छलिया निकला. अब बेटी ही उस के जीने का एकमात्र सहारा बची थी.

पत्नी के हत्या के आरोपों में सलाखों के पीछे विश्वकर्मा चौहान

जब से पति कि चरित्र की कलई उस के सामने खुली थी, तब से उस का मन पति के प्रति घृणा से भर गया था. नफरत हो गई थी उस की सूरत से. धीरेधीरे दोनों के बीच मनभेद ने अपना स्थान बनाना शुरू कर दिया था. ममता और विश्वकर्मा एक छत के नीचे रहते तो जरूर थे, लेकिन उन में अजनबियों जैसा व्यवहार था. उन के बीच में बातचीत कम होती थी, वाट्सऐप से बातें होती थीं. किसी चीज की जरूरत होती थी तो ममता उसे वाट्सऐप पर मैसेज भेज देती थी. विश्वकर्मा उसे पकड़ कर उस की जरूरतें पूरी कर देता था.

पत्नी करने लगी थी नफरत

पत्नी की नफरत भरी हरकतों से विश्वकर्मा का भी मन उस के प्रति नफरतों से भरता जा रहा था. इस का नतीजा यह हुआ कि पत्नी से दूरियां बना गर्लफ्रेंड चांदनी को घर की जीनत बनाने के ख्वाब देखने लगा. कल तक जो पति छिपछिप कर अपनी महिला दोस्तों से फेसबुक पर चैटिंग करता था, वह अब पत्नी के सामने उन से रोमांटिक बातें करता था. यह देख कर ममता जलभुन जाती थी. धीरेधीरे बेटी 10 साल की हो गई थी. मम्मी और पापा के बीच की दूरियों को समझ रही थी. उन के खटास रिश्तों को अपने प्यार की मिठास से सुंदर बनाने की अथाह कोशिश करती रही, लेकिन उस का यह प्रयास नाकाम साबित हुआ था.

दिन पर दिन पतिपत्नी के रिश्तों में खाई और गहराती जा रही थी. यह देख और सोच कर बेटी का हृदय आत्मग्लानि से भरा जा रहा था कि मेरा क्या कुसूर था, जो मम्मी और पापा के झगड़े के बीच वह पिस रही है. ममता के कंधे पर बेटी की जिम्मेदारी का बोझ आ गया था. पति इधरउधर से जो भी कमाता था, अपनी अय्याशी पर उड़ा देता था. बेटी से भी उस ने एक तरह से मुंह मोड़ लिया था. जबकि बेटी सयानी होती जा रही थी. उस का भविष्य दोनों की लड़ाईझगड़े के बीच पिसता जा रहा था. पति ने जब अपना हाथ खींच लिया तो ममता बेटी के जीवन संवारने के लिए प्राइवेट नौकरी करने लगी.

ममता के घर से बाहर नौकरी करने पर विश्वकर्मा को आपत्ति थी. पति के इस रवैए से नाखुश ममता बेटी को साथ ले कर मायके खजनी चली गई. वहां कुछ दिनों तक रही और बड़े भाई संदीप से अपना दुखड़ा रोती रही. भाई भी बहनोई के चरित्र से परेशान हो चुका था. वह भी नहीं समझ पा रहा था कि दोनों के रिश्ते को कैसे सही करूं. दोनों को समझासमझा कर थक चुका था, लेकिन इस का नतीजा सिफर ही निकला.

पत्नी ममता के मायके में रहने से विश्वकर्मा चौहान स्वच्छंद जीवन जी रहा था. उस के जीवन में कई लड़कियों ने अपना बसेरा डाल रखा था. समयसमय पर वह सभी के साथ फ्लर्ट करता था. उन लड़कियों में एक लड़की सब से अलग मिजाज की थी, जिस का नाम था चांदनी. बिलकुल चांदनी के माफिक उजली गोरीचिट्टी, मानो खुद चांदनी धरा पर अपनी छटा बिखेर रही हो. उस से टूट कर प्यार करता था विश्वकर्मा. वह भी उसे दिल की गहराइयों तक प्यार करती थी. उस के प्यार में अंधी थी वह.

विश्वकर्मा के जीवन में चांदनी के आने के बाद उस के जीने का तौरतरीका ही बदल गया था. पत्नी ममता तो उसे फूटी आंख नहीं भा रही थी. वह चाहता था कि पत्नी से जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी आजादी मिल जाए तो चांदनी के साथ शादी कर के आगे का जीवन मजे से जीए. लेकिन ममता एक पढ़ीलिखी, मेहनतकश और मजबूत इरादों वाली महिला थी. इतनी आसानी से वह पति को आजादी देने वाली नहीं थी. कसम खा ली थी कि शरीर के चाहे टुकड़ेटुकड़े हो जाएं, पति को आजादी नहीं दूंगी.

पति के चालचलन से खीझ कर ही वह बेटी को साथ ले कर मायके चली गई थी. पत्नी के मायके जाने से विश्वकर्मा चौहान की जिंदगी में जैसे बहार आ गई थी. पत्नी के इस फैसले से वह बेहद खुश था, जैसे उस की मुराद पूरी हो गई थी. विश्वकर्मा चौहान का मकान पूरी तरह से खाली था. मम्मीपापा गांव में रहते थे. एक भाई था, वह भी अपने परिवार के साथ अलग रहता था. पत्नी के मायके जाने के बाद उसे रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था.

पत्नी के जाने के बाद अपनी प्रेमिका चांदनी को वह अपने घर ले आया था. एक मेहमान की तरह उस ने उस की खूब आवभगत की. बढ़चढ़ कर उस की खातिरदारी की. अपनी शानदार आवभगत से चांदनी बहुत खुश हुई. अपनी भावनाओं को वह रोक नहीं पा रही थी. आखिरकार उस ने कह ही दिया, ”बहुत खुश हूं मैं आप की मेहमाननवाजी से. मेरा दिल भर गया. नहीं जानती थी कि आप मुझे से इतना प्यार करते हो. मेरे लिए आप के दिल में इतना सम्मान है, चाहत है, बेपनाह इश्क है.’’

”सो तो है,’’ विश्वकर्मा अपना अपना दायां हाथ बाएं सीने से सटा कर अदब से झुक कर बोला था, ”मैं चीज ही ऐसा हूं जनाबेआली. मेरी अनोखी खातिरदारी से अच्छेअच्छे लोग पिघल जाते हैं. फिर आप फिसली तो क्या फिसली.’’

”अच्छा!’’ चांदनी चहक कर बोली, ”जनाब को खुद के आदरसत्कार पर बड़ा नाज है, लगता है.’’

”जी, मोहतरमा. कोई शक.’’

”नहीं,’’ कह कर दोनों ने एकदूसरे को प्यारभरी नजरों से देखते हुए ठहाके लगाए.

हालांकि इस से पहले भी विश्वकर्मा चांदनी को अपने घर पर कई बार ले कर आ चुका था, मगर दोनों को जितना आनंद आज के दिन आया था, उतना आनंद इस से पहले कभी नहीं आया था.

खैर, ठहाका लगातेलगाते वह चांदनी के बगल में बैठ गया तो वह भी गंभीर हो

बिखरे आंचल को सहेजने लगी और सहज हो गई.

जेल रोड स्थिर राधिका स्टूडियो जहां बेटी के साथ फोटो खिचवाने पहुंची थी ममता चौहान

पलभर के लिए कमरे में गहरा सन्नाटा पसर गया था. दोनों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई थीं. प्रेम अग्नि में उन के तनबदन तपने लगे थे. एक अजीब सी ठंडीठंडी सुरहुरी चांदनी के बदन में उठ रही थी. उस का रोमरोम खिल उठा था. विश्वकर्मा धीरेधीरे बेकाबू हो रहा था. चांदनी भी उस की तपिश में पिघलती जा रही थी. इश्क की आग में दोनों बराबर जल रहे थे. विश्वकर्मा के छूते ही वह छुइमुई की तरह सिकुड़ती जा रही थी. उस के पूरे बदन में झुरझुरी पैदा हो गई थी. सांसें धौंकनी की तरह तेजतेज चलने लगी थी. वह बेकाबू होती जा रही थी, फिर भी खुद पर नियंत्रण रखे हुई थी. वह आहिस्ता से बोली, ”बस, मुझे और बेकाबू मत कीजिए, वरना जूठी हो जाऊंगी.’’

प्यार में हुआ अंधा

”रोको मत, मुझे. हो जाने दो बेकाबू मुझे. आज पूरी तरह समा जाना चाहता हूं मैं.’’ विश्वकर्मा मद्धिम स्वर में बोला.

”नही…नहीं.’’ चांदनी कसमसा उठी, ”अभी नहीं. आप जब पूरी तरीके से मुझे पूरा अधिकार देंगे, तभी मैं सौंपूंगी खुद को आप के हवाले.’’

”कैसी बातें करती हो मेरी जान. तुम तो मेरी हो और मैं तुम्हारा हूं. क्या मुझ पर और मेरे प्यार पर तुम्हें भरोसा नहीं है.’’

”पूरा भरोसा है, यकीन भी है, लेकिन…’’

”लेकिन क्या?’’

”अब और सहन किया नहीं जा रहा है, मुझ से. समा जाने दो मुझे तुम में.’’

”नहीं…नहीं…अभी नहीं. शादी से पहले नहीं.’’

”जिद मत करो, चांदनी. तुम्हारी दूरी तनिक भी बरदाश्त नहीं हो रही है. 2 जिस्म एक जान हो जाने दो हमें. अपने प्यार की एक नर्ह कहानी अपने जिस्म पर लिख लेने दो हमें.’’ वासना की आग में जलता हुआ विश्वकर्मा बोले जा रहा था. जबकि प्रेमिका चांदनी लगातार उस से दूरियां बनाए हुए थी.

”देखिए, इस वक्त आप पूरी तरह बहक रहे हैं. ऐसे में कोई ऊंचनीच हो जाएगी तो समाज हम पर थूकेगा. कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी मैं. सो प्लीज, मेरी बात मान जाइए और दूर हो जाइए.’’

प्रेमिका की बात सुन कर विश्वकर्मा के सिर से रोमांस का भूत उतर गया और वह बुरी तरह झल्ला उठा. वह बोला, ”अच्छेखासे मूड का तुम ने कचरा बना दिया.’’

”मैं ने क्या किया, जो आप इतना बिदक रहे हो.’’ चांदनी के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान थिरक रही थी, ”मैं ने थोड़ा सा सामाजिक आइना ही तो दिखाया आप को. यही कहा न कि अभी नहीं. जो करना है शादी के बाद करना है तो भला इस में क्या गलत कहा. इतने ही उतावले हो रहे हो मेरे जिस्म को पाने के लिए तो क्यों नहीं अपनी बीवी को तलाक दे रहे हो.’’ चांदनी के स्वर में अजीब सी तल्खी थी, जैसे सीधे छुरी उस के सीने में उतार दिया हो.

”क्या बेवकूफों की तरह बकवास करती हो तुम?’’

”आ…ह…हा… अब मेरी बात बेवकूफों की तरह लगने लगी.’’

”हां, तो…’’

”तो क्या? कुछ भी गलत तो नहीं कहा मैं ने. अपनी बीवी को तलाक दे दीजिए, मुझ से शादी कीजिए और मेरी जवानी के मजे लीजिए.’’

”तलाक…तलाक…तलाक… क्यों मेरे दिमाग का दही बना रही है. दे दूंगा, उसे तलाक भी दे दूंगा, पर आज का दिन तो मत खराब कर मेरी जान. मजे तो लूट लेने दे, क्यों तड़पा रही हो, क्यों सता रही हो अपने दीवाने को. बेचारा मुफ्त में मर जाएगा तेरी इस नानुकुर में.’’

”अपने राजा को ऐसे थोड़े ही न मरने दूंगी मैं,’’ शरारत भरे अंदाज में चांदनी बोली, ”अभी तो मेरे राजा को जन्नत की सैर करानी बाकी है.’’

”देख चांदनी, तू मेरे को ऐसे मत सता, मेरा मूड खराब हुआ तो…’’

ममता चौहान की मां

”तो…तो…क्या करोगे जानू.’’ चांदनी ने प्रेमी को जलाने के लिए उसे छेड़ा, ”जान से मार देंगे?’’

”अरे नहीं, यही तो नहीं कर सकता मैं. ऐसा करने से पहले मैं मर जाऊंगा. तू तो मेरी जान है. मेरे रगों में बहने वाला खून है. भला तुम्हें क्यों मारूंगा. अब तो कुछ न कुछ जल्द सोचना ही पड़ेगा.’’

”किस बारे में?’’

”तुम्हारे बारे में.’’

”मतलब?’’

”मतलब, तुम से दूर रह कर तो जी नहीं सकता और तू करीब आने नहीं देगी तो मुझे पत्नी के तलाक के बारे में सोचना ही पड़ेगा. जितनी जल्द उसे तलाक दूंगा, तभी तो तुम्हें अपने घर की जीनत बना सकंूगा.’’

”अब की है मुद्ïदे की बात. बीवी को तलाक दे दीजिए, ये जीनत उसी दिन आप की हो जाएगी.’’

”ठीक है, मैं ममता को तलाक देने के लिए किसी अच्छे वकील से मिल कर आगे की प्रोसेस करता हूं.’’

”ठीक है, चलती हूं मैं, बहुत देर हो चुकी है मेरे को आए, बाय…बाय…’’ कह कर चांदनी अपने घर के लिए रवाना हो गई तो विश्वकर्मा भी उसे बाय बाय बोल कर बाहर तक छोड़ कर आया और थोड़ा नाश्ता कर के फिर सो गया.

चांदनी से बात कर के विश्वकर्मा की खुशी का ठिकाना नहीं था तो चांदनी भी कुछ कम खुश नहीं थी. प्रेमी के साथ बिताए पल को सोचसोच कर उस का रोमरोम खिल उठा था और यही सोच रही थी कि काश! उस खूबसूरत पल को कैद कर लेती तो कितना अच्छा होता. कब मेरा प्यार, दुल्हनिया बना कर मुझे अपने घर ले जाएगा, वह पल कब आएगा.

तलाक को उकसाया

उस दिन के बाद से चांदनी दिन भर में विश्वकर्मा को 2-3 बार फोन कर के पत्नी को तलाक देने के लिए उकसा दिया करती थी. प्रेमिका का फोन आते ही वह विचलित हो जाता था. और उसे भरोसा दिलाता था कि जल्द से जल्द ममता को तलाक दे देगा और उसे अपनी दुल्हन बना कर ले आएगा. इस बारे में वकील से बात कर ली है. थोड़ा वक्त उसे और दे दे. विश्वकर्मा चांदनी को आश्वासन दे चुका था कि पत्नी ममता को जल्द ही तलाक दे देगा, लेकिन वह जानता था उसे तलाक दे पाना इतना आसान नहीं था, क्योंकि वह खुद ही इतनी आसानी से उसे आजाद नहीं कर रही थी.

विश्वकर्मा का एक भतीजा बदमाश था. लूट, हत्या, छिनैती, हत्या के प्रयास जैसे तमाम संगीन जुर्मों में वांछित चल रहा था. वह पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया था. भतीजे की धमक से विश्वकर्मा बेहद प्रभावित था. वह भी उसी ढर्रे पर चल निकला था. काफी सारे दुश्मन उस ने अपने आस्तीन में पाल लिए थे. अपनी सुरक्षा के मकसद से वह अपने पास एक अवैध तमंचा रखता था. चांदनी के प्यार में विश्वकर्मा इस कदर अंधा हो चुका था कि उसे पत्नी ममता और बेटी की सूरत दिखाई नहीं दे रही थी, उसे तो बस कपड़े की तरह औरतें बदलने की आदत बन चुकी थी.

वारदात की सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस

फ्लर्ट तो वह कई लड़कियों के साथ करता था, लेकिन चांदनी उसे इस कदर भा गई थी कि उसे पत्नी बनाने के लिए ठान लिया था, इसीलिए वह पत्नी को तलाक दे देना चाहता था. उस ने तलाक की अरजी न्यायालय में दाखिल भी कर दी थी. इस के बाद वह ममता से कोर्ट में गवाही देने के लिए दबाव बनाने लगा था, ताकि दोनों अपनी जिंदगी अपने तरीके से खुल कर जी सकें. पति विश्वकर्मा से ममता ने साफ शब्दों में कह दिया था कि न वह उसे तलाक देगी और न ही मनमानी करने देगी. भले ही जान ही क्यों न चली जाए.

आखिर एक बेटी है, जो सयानी हो रही है, उसे पढ़ाना है, उस का जीवन संवारना है. यदि पति गांव में स्थित अपने हिस्से वाला पूरा खेत मेरे नाम कर दे तो सोचूंगी.

पति कर बैठा क्राइम

विश्वकर्मा जानता था कि ममता उसे आसानी से तलाक नहीं देने वाली है. यानी  घी सीधी अंगुली से निकलने वाला नहीं है. फिर तो अंगुली टेढ़ी करनी ही पड़ेगी. उस ने तय कर लिया कि यदि ममता मेरी आजादी की राह में रोड़ा बन रही है तो इसे मौत के घाट उतारना ही पड़ेगा. ममता ने भी अदालत में खर्चे का दावा ठोक दिया था. पति की अय्याशी का जवाब देने के लिए सोशल मीडिया पर रोमांटिक रील बनाबना कर पोस्ट करने लगी थी. ममता का यह रुख देख कर वह और बौखला गया था, लेकिन खिसियानी बिल्ली की तरह सिर्फ खंभा नोच कर रह गया था. इधर ममता मायके से वापस लौट कर शाहपुर थानाक्षेत्र के गीता वाटिका मोहल्ले में एक किराए का कमरा ले कर बेटी के साथ रह रही थी. वहीं रह कर वह नौकरी पर जाती थी.

इधर विश्वकर्मा यह पता लगा रहा था कि ममता ने अपना नया ठिकाना कहां बनाया है. आखिरकार उस ने पता लगा ही लिया था कि वह गीता वाटिका कालोनी में किराए का कमरा ले कर रहती है. पते की बात तो यह थी कि जिस दिन से ममता ने बेटी को अपने साथ ले कर पति का घर छोड़ा था, उस के लिए दूसरी औरत को ले आने का रास्ता खुल गया था. दूसरी औरत यानी प्रेमिका चांदनी को घर ला कर उस के साथ रंगरेलियां मनाता था. वह अपने आशिक विश्वकर्मा पर पत्नी ममता से तलाक लेने के लिए बराबर दबाव बना रही थी.

विश्वकर्मा ममता के उस फैसले से और खार खाए हुए था, जिस में उस ने भरणपोषण के लिए अदालत में याचिका दायर की थी. और वह उसे अपने हिस्से में से एक फूटी कौड़ी देने के लिए तैयार नहीं था. और फिर 4 सितंबर, 2025 की रात जेल रोड के सामने उस की गोली मार कर हत्या कर दी. कथा लिखे जाने तक आरोपी विश्वकर्मा चौहान जेल की सलाखों के पीछे था. पत्नी की हत्या का उसे जरा भी मलाल नहीं था. इस बात की उसे खुशी थी कि अब उसे पैसे नहीं देने पड़ेंगे, लेकिन उस ने तनिक भी नहीं सोचा कि मासूम बेटी का क्या होगा? वह किस के सहारे जीएगी? उस का सहारा कौन बनेगा?

हैवानियत की पराकाष्ठा पर उतर आए विश्वकर्मा ने तनिक भी सोचा होता कि वह जो कर रहा है, गलत कर रहा है तो शायद उस की खुशहाल गृहस्थी बची रहती और बेटी अपने पेरेंट्स के प्यार से महरूम नहीं होती. UP News

(कथा में चांदनी परिवर्तित नाम है)

 

 

UP News: मोहब्बत में क्राइम हरगिज नहीं

UP News: 35 साल की सुनीता भले ही 5 बच्चों की मां बन चुकी थी, लेकिन उस के गठीले बदन की कसावट पर गांव के अनेक युवा आहें भरते थे. गांव का 22 वर्षीय आशीष कुमार उर्फ अंशु तो उसे अपना दिल दे चुका था. अमरबेल की तरह दोनों की मोहब्बत बढ़ती गई. मोहब्बत के इसी समंदर में डूब कर एक दिन दोनों ऐसा खतरनाक क्राइम कर बैठे कि…

आशीष उर्फ अंशु और उस की प्रेमिका सुनीता ने वीरपाल की हत्या करने की ठान ली, क्योंकि वह उन दोनों की मोहब्बत में रोड़ा बन रहा था. वीरपाल सुनीता का पति था. वे दोनों यही सोच रहे थे कि उस की हत्या कब और कैसे की जाए? तय किया कि आधी रात के बाद वीरपाल की गोली मार कर हत्या घर में ही कर दी जाए. फिर शोर मचा दिया जाएगा कि बदमाश आए थे. घर का सामान भी बिखेर दिया जाएगा और लूट की घटना बनाने के लिए जेवर और नकदी लूट कर ले जाने का नाटक किया जाएगा.

तभी अंशु बोला, ”तमंचा और कारतूस का इंतजाम कहां से होगा?’’

सुनीता ने कहा, ”यह इंतजाम तुम्हें ही करना पड़ेगा. इस के लिए रुपयों की जरूरत भी पड़ेगी.’’

”रुपए का तो मैं इंतजाम कर लूंगा, लेकिन तमंचा और कारतूस मिलना इतना आसान नहीं है. चलो, मान लिया जाए कि ये चीजें मिल भी गईं तो वीरपाल को गोली कौन मारेगा?’’ अंशु बोला.

”तुम ठीक कह रहे हो. यदि उस समय बच्चे उठ गए, उन्होंने देख लिया तो हम दोनों पकड़े जाएंगे. फिर बिना सजा के नहीं बचेंगे. इस तरह हमारी प्रेम कहानी तो अधूरी रह जाएगी.’’ सुनीता ने आशंका जताई.

इस के बाद उन्होंने दूसरी योजना तैयार की. गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए सल्फास की गोलियों का प्रयोग होता है. अकसर यह सुनने में आता है कि लोग आत्महत्या के लिए इन गोलियों का सेवन करते हैं. उन्होंने सोचा कि क्यों न ये गोलियां किसी तरह वीरपाल को खिला दी जाएं.

यह तरीका दोनों को अच्छा लगा. फिर एक दिन सल्फास की गोलियों का पैकेट अंशु ने सुनीता को ला कर दे दिया. दोनों ने तय किया कि जब भी शराब के नशे में वीरपाल आएगा, खाने में मिला कर सल्फास की गोलियां उसे दे दी जाएंगी. इस से पहले कि योजना को अंजाम दिया जाता, सल्फास की गोलियों का पैकेट बच्चों के हाथ लग गया. बच्चे समझे कि पैकेट पापा लाए हैं. वीरपाल के सामने ले जा कर बच्चे पूछने लगे, ”पापा, ये गोलियां काहे की हैं?’’

वीरपाल गोलियों का पैकेट देख कर सन्न रह गया. वीरपाल ने पैकेट उलटपलट कर देखा तो उसे पता चला कि यह तो गेहूं को सुरक्षित रखने वाली सल्फास की गोलियां हैं.

गुस्से से आगबबूला होते हुए वीरपाल ने सुनीता से पूछा, ”सल्फास का पैकेट कौन लाया है?’’

सुनीता ने झूठ बोलते हुए कहा, ”गेहूं में घुन लगने लगे थे. इसलिए मैं ने ही यह पैकेट मंगाया है.’’

वीरपाल की हत्या करने का यह प्लान भी फेल हो गया. बात आईगई हो गई. कुछ समय बाद धान की फसल तैयार होने लगी. उस की रखवाली के लिए वीरपाल अकसर खेत पर जाया करता था. ग्रामीण क्षेत्र में कई तरह के जंगली जानवर फसलों को क्षति पहुंचाते हैं. उन से फसल को बचाने के लिए रात को भी अनेक किसान खेतों पर डेरा डाले रहते हैं.

वीरपाल भी धान की फसल की रखवाली के लिए खेत पर जाता था. नींद आने पर वह वहीं सो जाया करता था. शातिर दिमाग अंशु ने सुनीता से कहा, ”अब मौका आ गया है, वीरपाल को ठिकाने लगाया जा सकता है. जिस वक्त वीरपाल रात को खेत पर सोया हो, तभी उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया जाएगा.’’ सुनीता को योजना सही लगी और वह राजी हो गई. उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में थाना हयात नगर क्षेत्र में एक गांव स्थित है सहजना. इस गांव में दलवीर सिंह का परिवार निवास करता है. दलवीर सिंह के 5 बेटे और 5 बेटियां थीं. चौथे नंबर की बेटी सुनीता थी.

सुनीता का विवाह साल 2008 में जनपद मुरादाबाद के थाना बिलारी क्षेत्र के गांव अलेहदादपुर देवा नगला निवासी वीरपाल था. वीरपाल खेतीकिसानी के साथसाथ मजदूरी भी करता था. कभीकभी हरिद्वार में स्थित फैक्ट्री में मजदूरी करने भी चला जाता था. वीरपाल का एक बड़ा भाई है कुंवरपाल. वीरपाल की मां ज्ञानवती है, जो एक गृहिणी हैं. वीरपाल और सुनीता का वैवाहिक जीवन ठीकठाक गुजर रहा था. इस दौरान उन के 5 बच्चे हुए, जिन में 4 बेटियां और एक बेटा था.

5 बच्चों की मां होने के बावजूद सुनीता के हंसीमजाक में एक बेकाबू आग छिपी थी. उस के चेहरे पर जवानी की नैचुरल चमक थी. गालों की मुलायम लकीरों में मासूमियत और आत्मविश्वास दोनों एक साथ झलकते थे. उस की आंखें बड़ी साफ और गहरी थीं, मानो किसी के बोलने से पहले ही उस का मन पढ़ लेती हों. उस का शरीर किसी कठोर मेहनत से तराशा हुआ नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से सधे हुए अनुपातों वाला था. कंधे हलके चौड़े, कमर में नजाकत और चाल में लयबद्ध कोमलता, जिसे देख कर कोई भी तुरंत समझ जाए कि यह महिला तन से ही नहीं, मन से भी मजबूत है.

वह मध्यम कद की थी. उस का रंग गेहुंआ और चेहरा गोल था. उस की आंखें बड़ी और ध्यान खींचने वाली थीं, जिन में आत्मविश्वास का भाव दिखता था. बाल पूरी तरह से सिर को ढकने वाले दुपट्टे के नीचे छिपे रहते थे, जो पारंपरिकता और शालीनता दर्शाते थे. उस की नाक में एक छोटा नथ उस की पहचान को और उभारता था. होंठ थोड़े मोटे जरूर थे, लेकिन उन पर हलकी मुसकान दिखाई देती, जो उस में छिपी ममता और दृढ़ इच्छाशक्ति की झलक देती थी. उस की आंखों की चमक देखने वालों को भटकाने वाली पहेली सी लगती थी.

गांव की गलियों में जब भी सुनीता का नाम लिया जाता, लोग धीरे से मुसकरा देते. कोई जलन से, कोई तजुर्बे से. 5 बच्चों की मां होते हुए भी उस में कुछ ऐसा था, जो जवान दिलों को बेचैन कर देता था. उस की चाल, उस की बातों की मिठास और उस की आंखों में छिपी कामुक शरारत की वजह से 35 वर्षीय सुनीता गांव की अन्य महिलाओं से अलग पहचानी जाती थी. सब जानते थे कि वह साधारण महिला नहीं.

गांव में कुंवरपाल का परिवार भी निवास करता था. कुंवरपाल अलेहदादपुर गांव का दामाद था. करीब 2 दशक पहले इसी गांव में घरजमाई बन कर आया था. फिर गांव में ही बस गया था. उस के 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. एक बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी है. कुंवरपाल का बेटा आशीष कुमार उर्फ अंशु करीब 22 साल का एक कुंवारा नौजवान था. अंशु अपनी जवानी के चरम पर पहुंच चुका था. 22 साल की उम्र उस के चेहरे पर एक अलग ही चमक ले कर आई थी. वह चमक जो मेहनत, आत्मविश्वास और युवापन के मिलन से पैदा होती है.

उस के नैननक्श साधारण होते हुए भी बेहद आकर्षक थे. माथे पर गिरती हलकी बिखरी लटें और आंखों में मौजूद सहज चमक उसे अलग पहचान देती थी. उस का शरीर एकदम सधा हुआ था. न बहुत भारी, न बहुत पतला. छाती में कसावट और बांहों में हलकी उभरी नसें, उस के मेहनत भरे जीवन की गवाही देती थीं. चलते समय उस का आत्मविश्वास साफ दिखता था. कदमों में सधी हुई लय और शख्सियत में एक ऐसी गरिमा जो बिना बोले ही लोगों को उस की तरफ देखने पर मजबूर कर देती थी. अंशु की मुसकान उस के पूरे चेहरे को रोशन कर देती थी. उस की जवानी में एक तरह की साफगोई थी, वही मासूम पर दृढ़ ऊर्जा जो केवल 21-22 की उम्र में ही दिखाई देती है.

कुंवरपाल के साले का नाम भूप सिंह था. वह इस समय गांव के मौजूदा प्रधान है. असरदार व्यक्ति है. गांव में उस का काफी मानसम्मान भी है. अंशु का दिल किसी रिश्ते की बंदिश नहीं मानता था.

अंशु अपनी नानी के घर रहता था. उस की पैदाइश भी यहीं पर हुई थी, जहां उस की जवानी बेलगाम घोड़े सी दौड़ रही थी. उस के अय्याशी के किस्से भी कम न थे. मामला पकड़े जाने पर पंचायतें भी हुईं. उस के मामा को मामला लेदे कर निपटाना पड़ा. कई बार उस के मामा को काफी रकम मुआवजे के रूप में गांव की गरीब लड़कियों को देनी पड़ी. अकसर लड़की वाले बदनामी के डर से प्रधान के रुतबे और प्रभाव के कारण कानूनी काररवाई के लिए आगे नहीं बढ़े. इस का फायदा अंशु उठाता रहा और कई घटनाएं गांव में अंजाम दे दीं.

जब सुनीता और अंशु की राहें टकराईं, तो जैसे दो चिंगारियां एक ही पल में भड़क उठीं. फिर रिश्ता रिश्ता नहीं, एक अंधी ललक बन गया, जहां उम्र, रिश्तेदारी और समाज सब पीछे छूट गया. कहानी यहीं से मोड़ लेती है. प्यार और पागलपन के इस खेल में वह सुनीता अपने पति से तंग आ चुकी थी, और अंशु उस की चाहत में अंधा हो गया था. शाम का वक्त था. खेतों से किसानों की वापसी हो रही थी, ढलती धूप में चलती बकरियों की आवाजें, ऐसा लग रहा था कि उन्हें भी घर वापस ले जाया जा रहा है.

बीच में एक महिला जो अपने आंगन में पानी भर रही थी. उस के बच्चे पास ही खेल रहे थे, गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था, लेकिन इस शांति के पीछे एक तूफान पनप रहा था. अंशु गांव का मनचला, दुबलापतला मगर तेज नजर वाला जवान था. सब जानते थे कि अंशु की नजरें मासूम नहीं हैं और सुनीता भी यह बात समझती थी, मगर न जाने क्यों, उसे अब फर्क नहीं पड़ता था.

अंशु ने पहली बार बिना झिझक के उस से कहा, ”नानी, इतना पानी रोज क्यों भरती हो? कोई समंदर बनाना है क्या?’’

सुनीता मुसकराई, ”तेरे काम का समंदर नहीं है, डूब जाएगा तू इस में.’’

अंशु हंसा, ”डूबने का तो मन है ही, बस कोई मौका डूबने का मिल जाए.’’

उन के बीच का यह मजाक गांव के माहौल से ज्यादा गर्म था. दोनों जानते थे कि वो किस ओर बढ़ रहे हैं, मगर किसी को रोकने की हिम्मत न थी. धीरेधीरे ये मुलाकातें बढ़ीं. कभी खेत के किनारे, कभी सूनी पगडंडी पर तो कभी मकानों के पीछे के बाग में, जहां हवस और हंसी एक साथ घुलमिल जाती.

सुनीता अब अपने पति वीरपाल से ऊब चुकी थी. बच्चों और घर के झगड़ों ने उन के रिश्ते की जान निकाल दी थी. एक रात वीरपाल ने उसे रोकते हुए कहा, ”तू अब पहले जैसी नहीं रही, सुनीता.’’

तो उस ने ठंडे लहजे में जवाब दिया, ”हां, और तू भी मर्द जैसा नहीं रहा.’’

वीरपाल ने गुस्से में थप्पड़ मारा, मगर उस थप्पड़ की गूंज ने सुनीता के भीतर का सब कुछ तोड़ दिया. उसी रात वो चुपके से घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर निकली. अंशु उस का इंतजार कर रहा था.

”अंशु, मुझ से अब और नहीं सहा जाता,’’ सुनीता ने उस से कहा.

अंशु ने उस की आंखों में झांकते हुए फुसफुसाया, ”तो फिर खत्म कर देते हैं उसे, हमेशा के लिए.’’

सुनीता चौंकती हुई बोली, ”क्या मतलब?’’

”मतलब साफ है. तुम्हारे रास्ते में बस वो वीरपाल ही तो दीवार है. गिरा देंगे, उस दीवार को.’’

सुनीता चुप रही, मगर उस के दिल में डर और चाहत दोनों एक साथ पनपने लगे. बड़ी हिम्मत करने के बाद सुनीता सीधेसीधे प्रेमी को चुनौती देती हुई बोली, ”अगर तुम को मेरे साथ रहना है तो कुछ तो करना ही होगा, मगर उस के बाद क्या तुम मुझे पत्नी के रूप में स्वीकार करोगे?’’

”सुनीता, मैं ने तुम से प्यार किया है. पत्नी मान भी लिया है. अब तुम बताओ उस के बाद तुम्हारी क्या भूमिका होगी?’’

”मैं जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगी, तुम्हारा खयाल रखूंगी.’’

”अगर तुम मुझे पाना चाहते हो तो अब अपने नाना का काम तमाम कर ही दो.’’

अंशु का मामा प्रधान भूप सिंह जाति से जाटव है. एक ही बिरादरी के होने के नाते से प्रधान भूप सिंह, वीरपाल को गांव के रिश्ते में चाचा कहता था. इसी रिश्ते से अंशु वीरपाल को नाना और सुनीता को नानी कह कर संबोधित करता था. दोनों के संबंध जगजाहिर हो चुके थे. फिर भी गांव के लोगों को यकीन नहीं होता था कि दोनों की उम्र में इतना अंतर होने के बाद इन के बीच अवैध संबंध होंगे. वीरपाल 12 अक्तूबर, 2025 की रात को अपने धान के खेत पर सोने के लिए गए थे. अगले दिन जब गांव के लोग खेतों पर सुबहसुबह अपने काम के लिए निकले, तब उन्होंने देखा कि वीरपाल खेत में अपनी चारपाई पर लेटा हुआ था.

वीरपाल अकसर सुबहसुबह 5 बजे उठ कर घर आ जाता था. फ्रैश हो कर फिर से काम के लिए खेत पर आ जाता था, लेकिन उस दिन वह इतनी देर तक खेत में क्यों सो रहा है, लोग समझ नहीं पाए. पास जा कर लोगों ने देखा तो वह एकदम बेसुध सा लेटा हुआ था. उन्हें वीरपाल के शरीर पर कोई हरकत नहीं दिखी.  इस दौरान हड़कंप मच गया तो यह बात गांव तक पहुंची. काफी संख्या में ग्रामीण लोग उस के खेत पर पहुंच गए. गांव के एक डौक्टर को भी बुला लिया. उस ने नब्ज टटोलते ही वीरपाल को मृत घोषित कर दिया.

वीरपाल की पत्नी सुनीता भी खूब रोते हुए दहाड़े मारते हुए खेत पर पहुंच गई. पूरा चेहरा ढके हुए खूब रोए जा रही. उस को रोता देख कर लोगों का दिल पसीज गया कि अब इस बेचारी के बच्चों का क्या होगा? यह बात 13 अक्तूबर, 2025 की है. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को खबर देने की बात कही तो सुनीता कहने लगी कि मैं अपने पति की मिट्टी को खराब नहीं होने दूंगी. पुलिस हमारे पति का शरीर ले कर जाएगी. पोस्टमार्टम को भेजेगी. वहां चीरफाड़ होगी. पूरे शरीर को बरबाद कर देगी.

मैं अपने पति के साथ यह नहीं होने दूंगी. लेकिन कोई व्यक्ति पहले ही कोतवाली बिलारी में फोन कर के यह सूचना पुलिस को दे चुका था. सूचना पाते ही कोतवाल उदय प्रताप मलिक मय फोर्स के घटना स्तर पर पहुंच गए. शुरुआती जांच में मामला हत्या का प्रतीत हुआ, क्योंकि मृतक के गले पर दबाने के निशान थे. थोड़ीबहुत हलकीफुलकी छीनाझपटी जैसे निशान भी थे. इस से प्रतीत हो रहा था कि मृतक ने हत्यारों से थोड़ा बहुत संघर्ष भी किया है. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. घटनास्थल के आसपास का बड़ी बारीकी से मुआयना किया गया. आवश्यक सबूत इकट्ठे किए गए. मौके की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय मुरादाबाद भेज दिया.

कोतवाल उदय प्रताप मलिक ने मामले की जानकारी सीओ अशोक कुमार और एसपी (ग्रामीण) कुंवर आकाश सिंह को दे दी. अधिकारियों ने जांच के लिए पुलिस की दो टीमें गठित कर दीं. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी. गांव के लोगों ने पोस्टमार्टम से लाश आने के बाद वीरपाल का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस अपनी जांच कर ही रही थी. उसी दिन सुनने में आया कि वीरपाल की पत्नी सुनीता ग्रामीणों से लाश का पोस्टमार्टम कराने को मना कर रही थी. उस का कहना था कि ज्यादा शराब पी लेने से इस की स्वाभाविक मौत हुई होगी.

यह बात सुन कर पुलिस को वीरपाल की हत्या करने का शक उस की पत्नी सुनीता पर हो गया. सुनीता ने अपने पति की हत्या क्यों कराई? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए पुलिस ने जब छानबीन की तब पता चला कि गांव का ही एक युवक अंशु है, जिस से सुनीता का प्रेम प्रसंग चल रहा है. इतनी जानकारी मिलने पर अंशु भी पुलिस के शक के दायरे में आ गया. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया. इस के बाद उन से जब पूछताछ की गई तो उन्होंने पहले तो बातें गोलमोल करने की कोशिश की, लेकिन जब सख्ती की गई तब दोनों ने ही सच उगल दिया.

दोनों की उम्र में 13 से 14 साल का अंतर था. लोगों को जब इस बात का पता चला कि वास्तव में इन दोनों के बीच में प्रेम प्रसंग चल रहा था तो कोई इस बात को मानने को तैयार नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है, लेकिन जब सच सामने आया तो सब हैरान रह गए. इस दौरान सुनीता ने अपने आप को बचाने के लिए खूब प्लानिंग की थी. पहली प्लानिंग तो उस ने पुलिस को बुलाने से मना किया. लेकिन जब उसे लगा कि पुलिस आ गई है तो पोस्टमार्टम न हो पाए, इस के लिए उस ने पूरी कोशिश की.

पुलिस ने लाश को जब पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. तब सुनीता ने भागने का भी प्लान बना रखा था. जब उस के रिश्तेदार आए. दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक व झगड़ा चल रहा था तो एक रिश्तेदार सुनीता को अपनी बाइक पर बिठा कर वहां से निकलने वाला था, लेकिन जैसे ही सुनीता बाइक पर बैठी, गांव के लोगों ने देख लिया और उसे दौड़ कर पकड़ लिया. उस के बाद ग्रामीणों ने कहा कि जब तक पुलिस नहीं आएगी, तब तक कोई नहीं जाएगा. पुलिस को आने दो. उस के बाद जिस को जहां जाना हो, वो चला जाए.

पुलिस ने सुनीता और उस के प्रेमी आशीष कुमार उर्फ अंशु से पूछताछ की तो वीरपाल की हत्या के पीछे की ऐसी प्रेम कहानी सामने आई, जिस ने सभी को चौंका कर रख दिया. सुनीता गांव के रिश्ते में अंशु की नानी लगती थी. दोनों के खेत आसपास ही थे, इसलिए उन के बीच बातचीत होना आम बात थी. उसी दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया. और जल्द ही उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. सुनीता अंशु के प्यार की कायल हो गई थी. उस के सामने अपना पति वीरपाल फीका लगने लगा था. इसलिए जब भी उन का शारीरिक संबंध बनाने का मन होता था, तो सुनीता वीरपाल को शराब पिला कर धान की रखवाली करने के लिए रात को खेत पर भेज देती थी.

फिर अंशु को फोन कर के रात को अपने घर पर बुला लेती थी. फिर रात भर दोनों मौजमस्ती करते थे. इस तरह सुनीता अविवाहित अंशु के प्यार में डूब चुकी थी, लेकिन यह खेल ज्यादा दिनों तक छिप न सका. एक दिन इसी बीच रात में एक बार वीरपाल धान के खेत से घर वापस आया तो उस ने दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया. यह देख कर वीरपाल का खून खौल गया. अंशु तो फटाफट वहां से भाग गया, लेकिन सुनीता कहां जाती. तब वीरपाल ने उस दिन सुनीता की खूब पिटाई की. सुनीता ने उसी दिन सोच लिया था कि वीरपाल हमारे प्यार के बीच में रोड़ा बन रहा है. इसे तो निपटवाना ही पड़ेगा.

सुनीता ने उस समय तो पति से हाथ जोड़ कर माफी मांग ली थी. वीरपाल ने यह बात किसी को बदनामी की वजह से नहीं बताई. 2-4 दिन बाद सुनीता और अंशु का चोरीछिपे मिलनाजुलना जारी रहा. एक दिन सुनीता ने अशु को बताया कि वीरपाल हम दोनों के प्यार में रोड़ा बन रहा है. इसे ठिकाने लगाना है. इतना ही नहीं, उस ने धमकी भी दी कि अगर तूने इसे ठिकाने नहीं लगाया तो मैं जहर खा कर अपनी जान दे दूंगी, लेकिन तेरे बिना नहीं जी सकती.

यह सुन कर अंशु के जवान खून में उबाल आ गया. उसे लगा कि उस की प्रेमिका उस के लिए जान देने के लिए तैयार है. उस की जुदाई बरदाश्त नहीं कर पा रही. लिहाजा अंशु ने कहा, ”तुम ऐसा मत करो. हम वीरपाल को ठिकाने लगा देंगे.’’

12 अक्तूबर को सुबह करीब 8 बजे सुनीता अपने खेत पर धान झाड़ रही थी. वहां पर उस की फेमिली के कुछ लोग भी मौजूद थे. उस समय अंशु भी अपने खेत पर था. सुनीता ने अंशु को अपने पास बुलाया. उस के साथ वह बात कर रही थी, तभी वीरपाल वहां पर आ गया. उस ने दोनों को बात करते देखा तो वीरपाल दोनों पर आगबबूला हो गया गालीगलौज करने लगा. अंशु उसी समय वहां से अपने घर चला गया. उस के कुछ देर बात वीरपाल भी चला गया तो सुनीता ने अंशु को फिर से बुला लिया.

फिर दोनों ने मिल कर वीरपाल की हत्या करने की योजना बनाई. वारदात की अन्य योजना पर सहमति नहीं बनी तो सुनीता ने अंशु को बताया कि वीरपाल रात में धान की रखवाली करने के लिए खेत पर जा कर सोता है. वहीं पर उस की हत्या करना आसान रहेगा. अंशु उस की इस बात पर राजी हो गया. 13 अक्तूबर को रात में करीब साढ़े 12 बजे वीरपाल खेत पर सोने गया. तभी सुनीता ने यह जानकारी प्रेमी अंशु को दे दी.

इस के बाद जब अंशु रात में वीरपाल के खेत पर पहुंचा तो उस समय वीरपाल शराब के नशे में चारपाई पर सो रहा था. अंशु ने उस का गला दबाना शुरू कर दिया. तभी वीरपाल का एक हाथ अचानक अंशु के मुंह पर लगा तो वह घबरा गया. अंशु को लगा कि अब यदि वह जिंदा बच गया तो मामला बहुत गड़बड़ हो जाएगा. वीरपाल ने उठने की कोशिश की, लेकिन नशा अधिक होने के कारण वह उठ नहीं सका. अंशु ने फिर से वीरपाल को अपने काबू में किया और गला दबाने लगा. उस के गले को वह तब तक दबाए रखा, जब तक कि वीरपाल की सांसों की डोर हमेशा के लिए टूट नहीं गई.

जब वीरपाल निढाल हो गया, उस का छटपटाना बंद हो गया, उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई, तब कहीं अंशु को तसल्ली हुई. फिर भी अंशु ने उस की नाक पर हाथ रख कर एक बार चैककिया कि वह मर चुका है कि नहीं.

जब उसे विश्वास हो गया कि अब इस का काम तमाम हो गया है तो अंशु वहां से सीधे अपनी प्रेमिका सुनीता के घर पहुंचा. उस ने प्रेमिका को खुशखबरी देते हुए कहा कि तुम्हारे पति का मैं ने काम तमाम कर दिया है. अब वो तुम्हें कभी परेशान नहीं करेगा. इस मर्डर की खुशी में दोनों ने रात भर मौजमस्ती की. इस के बाद उन्होंने पुलिस से बचने का प्लान बनाया. फिर रात में ही अंशू अपने घर चला गया. दूसरे दिन अंशु भीड़ के साथ घटना स्थल पर पहुंचा और परिवार के लोगों के साथ रहा. पोस्टमार्टम से ले कर अंतिम संस्कार तक हर कार्यक्रम में वह वीरपाल के फेमिली वालों के साथ ही रहा, ताकि किसी को उस पर कोई शक न हो, लेकिन इस के बावजूद वह पुलिस के शक के दायरे में आ गया.

मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या कर देना आया. जिस के बाद मृतक के बड़े भाई कुंवरपाल की तहरीर के आधार पर धारा 103 (1)/61(2) (क) बीएनएस के तहत आशीष कुमार उर्फ अंशु और सुनीता को नामजद किया गया. 24 घंटे के भीतर पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझा दी. पूछताछ के बाद सुनीता और उस के प्रेमी आशीष कुमार उर्फ अंशु को जेल भेज दिया गया. बच्चों की परवरिश मृतक के बड़े भाई कुंवरपाल कर रहे हैं. कथा लिखे जाने तक अंशु और उस की प्रेमिका दोनों ही जेल में थे. UP News