Parivarik Kahani : रस्सी का फंदा डालकर घोंट दिया पति का गला

Parivarik Kahani : 3 मासूम बच्चों की मां होने के बावजूद रजनी ने अजीत से अवैध सबंध बना लिए. प्रेमी के धमाल से रजनी इतनी प्रभावित हुई  कि पति उसे रास्ते  का रोड़ा लगने लगा. फिर उस ने…

रजनी उर्फ कुंजावती अपने भाईबहनों में सब से बड़ी ही नहीं बल्कि कदकाठी से भी ठीकठाक थी. इसलिए अपनी उम्र से काफी बड़ी लगती थी. उस का परिवार उत्तर प्रदेश के शहर इटावा में रहता था. उस के पिता किसान थे. जैसे ही वह जवान हुई तो उस के मातापिता उस के लिए योग्य वर की तलाश में लग गए. उन्हें इस बात का डर था कि कहीं रजनी के कदम बहक गए तो उन की इज्जत पर दाग लग जाएगा. उन्होंने रजनी की शादी के लिए ग्वालियर जिले के महाराजपुरा कस्बे के गांव गुठीना में रहने वाले सुलतान माहौर को पसंद कर लिया. फिर जल्द ही उन्होंने उस की शादी सुलतान के साथ कर दी.

रजनी सुंदर तो थी ही, दुलहन बनने के बाद उस की सुंदरता में पहले से ज्यादा निखार आ गया. रजनी जैसी सुंदर पत्नी पा कर सुलतान बेहद खुश था. दोनों के दांपत्य की गाड़ी खुशहाली के साथ चलने लगी. समय का पहिया अपनी गति से घूमता रहा और रजनी 3 बच्चों की मां बन गई. लेकिन कुछ दिनों बाद आर्थिक परेशानियों ने परिवार की खुशी पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया. शादी से पहले सुलतान छोटामोटा काम कर के गुजरबसर कर लेता था, लेकिन 3 बच्चों का बाप बन जाने से घर के खर्चे भी बढ़ गए थे. वहीं रजनी की बढ़ती ख्वाहिशों ने उस के खर्चों में काफी इजाफा कर दिया था.

आर्थिक परेशानी से उबरने के लिए  वह एक शोरूम में रात के समय चौकीदारी भी करने लग गया था. इस दौरान उसे शराब पीने की भी लत लग गई, जिस की वजह से वह पैसे शराबखोरी में उड़ा देता था. इस के चलते घर की माली हालत डांवाडोल होने लगी थी. यहां तक कि उस ने कई लोगों से कर्ज ले लिया था. उधर जब से कोविड के कारण लौकडाउन लगा, तब से सुलतान की मजदूरी और चौकीदारी का काम भी छूट गया था. इस के बावजूद वह लोगों से पैसा उधार ले कर शराब पी लेता था और हद तो तब हो गई जब अपनी पत्नी रजनी उर्फ कुंजावती को शराब के नशे में जराजरा सी बात पर पीटना शुरू कर देता था.

पति की ये आदतें रजनी को काफी सालती थीं. सुलतान के पड़ोस में अजीत उर्फ छोटू कोरी रहता था. वह रजनी को भाभी कहता था, इसलिए दोनों में हंसीमजाक होता रहता था. रजनी को अजीत से मजाक करने में किसी तरह का संकोच नहीं होता था. एक दिन दोनों हंसीमजाक कर रहे थे तो रजनी ने कहा, ‘‘देवरजी, कब तक इस तरह हंसीमजाक कर के दिन काटोगे? कहीं से घरवाली ले आओ.’’

‘‘भाभी, घरवाली मिलती तो जरूर ले आता. जब तक कोई नहीं मिल रही आप से हंसीमजाक कर संतोष करना पड़ रहा है.’’ अजीत ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘जब तक घरवाली नहीं मिल रही तो इधरउधर से जुगाड़ कर लो.’’ रजनी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अजीत की आंखों में आंखें डाल कर कहा.

‘‘कौन फिक्र करता है भाभी भूखे आदमी की. जिस का पेट भरा रहता है, उसे ही हर कोई पूछता है,’’ अजीत ने शरमाते हुए कहा.

‘‘क्या तुम ने कभी किसी से अपनी परेशानी का जिक्र कर के देखा है?’’

‘‘कोई फायदा नहीं भाभी, लोग मेरी हंसी ही उड़ाएंगे.’’ वह बोला.

‘‘अजीत, जब तक तुम किसी से कहोगे नहीं, कोई तुम्हारी मदद कैसे करेगा?’’ रजनी ने कहा.

‘‘भाभी, अगर आप से कहूं तो क्या आप मेरी मदद करना पसंद करेंगी? भलाबुरा कहते हुए गालियां जरूर देंगी,’’ अजीत ने रजनी के चेहरे पर नजरें गड़ा कर कहा.

रजनी ने चेहरे पर मुसकान लाते हुए कहा, ‘‘एक बार कह कर तो देखो. अरे, मैं तुम्हारी मुंहबोली भाभी हूं अजीत, भला पड़ोसी पड़ोसी की मदद नहीं करेगा तो क्या बाहर वाला मदद करने आएगा.’’

अब इस से भी ज्यादा रजनी क्या कहती. अजीत इतना भी नासमझ नहीं था कि वह रजनी की बात का मतलब न समझ पाता.

‘‘जरूर भाभी, मौका मिलने पर कह दूंगा.’’ वह मुसकराते हुए बोला.

संयोग से अगले दिन अजीत को पता चला कि सुलतान किसी काम से बाहर गया है. उस दिन अजीत का मन अपने काम में नहीं लगा रहा था. दिन भर उसे रजनी की याद सताती रही. शाम होने पर घर आने पर वह रजनी की एक झलक देखने को बेचैन हो उठा. रजनी भी पति की गैरमौजूदगी में अजीत को रिझाने के लिए जैसे ही सजसंवर कर दरवाजे पर आई  तो उस की नजर अजीत पर पड़ी. अजीत भी रजनी को देख कर बिना वक्त जाया किए उस के घर पर जा पहुंचा. अजीत को अचानक इस तरह आया देख कर रजनी ने हंसते हुए कहा, ‘‘देवरजी, आज आप अपने काम से जल्दी लौट आए?’’

‘‘क्या बताऊं भाभी, आज मेरा मन काम में जरा भी नहीं लगा.’’

‘‘क्यों?’’ रजनी ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘सच बताऊं?’’

‘‘हां, मुझे तो सचसच बताओ.’’

‘‘भाभी, जब से तुम्हें और तुम्हारी सुंदरता  को देखा है, मेरा मन किसी काम में लगता ही नहीं है. आप सच में बेहद खूबसूरत है.’’

‘‘ऐसी सुंदरता किस काम की, जिस की कोई कदर ही न हो,’’ रजनी ने लंबी सांस लेते हुए कहा.

‘‘क्या भैया तुम्हारी कोई कदर नहीं करते भाभी?’’

‘‘सब कुछ जानते हुए भी अनजान मत बनो, तुम तो जानते हो कि मेरे वो रात में चौकीदारी करते हैं, सो रात को घर से बाहर रहते हैं. ऐसे में मेरी रातें कैसे गुजरती हैं, वो तो मुझे ही पता है.’’

‘‘भाभीजी, जिस स्थिति से आप गुजर रही हैं, ठीक वही स्थिति मेरी है. मैं भी रात भर करवटें बदलता रहता हूं. अगर आप मेरा साथ दें तो हम दोनों की समस्या खत्म हो सकती है,’’ यह कहते हुए अजीत ने रजनी को अपनी बांहों में भर लिया.

पुरुष सुख से वंचित रजनी चाहती तो यही थी, मगर उस ने हावभाव बदलते हुए बनावटी गुस्से में कहा, ‘‘यह क्या कर रहे हो, छोड़ो मुझे. बच्चे देख लेंगे.’’

‘‘बच्चे तो अपनी मौसी के बच्चों के साथ बाहर खेल रहे हैं. भाभी, आप ने तो मेरा सुखचैन सब छीन रखा है,’’ अजीत ने कहा.

‘‘नहीं अजीत, छोड़ो मुझे. मैं बदनाम हो जाऊंगी, कहीं की नहीं रहूंगी मैं.’’ वह बनावटी बोली.

‘‘नहीं भाभी, अब यह संभव नहीं है. कोई बेवकूफ ही होगा जो रूपयौवन के इस प्याले के इतने नजदीक पहुंच कर पीछे हटेगा,’’ इतना कह कर अजीत ने बांहों का कसाव बढ़ा दिया. दिखाने के लिए रजनी न…न…न करती रही, जबकि वह स्वयं अजीत के जिस्म से बेल की तरह लिपटी जा रही थी. इस के बाद वह पल भी आ गया, जब दोनों ने मर्यादा भंग कर दी. एक बार मर्यादा मिटी तो यह सिलसिला चल निकला. जब भी उन्हें मौका मिलता, इच्छाएं पूरी कर लेते. दोनों पड़ोस में रहते थे, इसलिए उन्हें मिलने में कोई परेशानी भी नहीं होती थी. रजनी अब कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगी थी, क्योंकि उस का प्रेमी मौका मिलने पर बिस्तर पर धमाल मचाने आ जाता था.

अब उस की आर्थिक परेशानी भी दूर हो गई थी. रजनी खर्चे के लिए अजीत से जब भी रुपए मांगती, वह बिना नानुकुर के चुपचाप निकाल कर रजनी के हाथ पर रख देता था. रजनी और अजीत के बीच अवैध संबंध बने तो उन की बातचीत और हंसीमजाक का लहजा बदल गया. अब दोनों एकदूसरे का खयाल भी कुछ ज्यादा ही रखने लगे थे, इसलिए आसपड़ोस वालों को शक होने लगा. लोग इस बात को ले कर चर्चा करने लगे. नतीजा यह निकला कि इस बात की जानकारी सुलतान को भी हो गई. सुलतान ने लोगों की बातों पर विश्वास न कर के खुद सच्चाई का पता लगाने का निश्चय किया. वह जानता था कि यदि इस बारे में पत्नी से पूछताछ करेगा तो वह सच बात बताएगी नहीं, बल्कि होशियार हो जाएगी.

सच पता लगाने के लिए वह एक दिन बाहर जाने के बहाने घर से निकला और छिप कर रजनी और अजीत पर नजर रखने लगा. एक दिन दोपहर के समय उस ने रजनी और अजीत को रंगेहाथों पकड़ लिया. गुस्से में  उस ने रजनी की जम कर पिटाई कर दी. रजनी के पास सफाई देने को कुछ नहीं था, इसलिए वह भविष्य में कभी ऐसा न करने की कसम खाते हुए माफी मांगने लगी. गुस्से में सुलतान ने अजीत को भी कई थप्पड़ जड़ दिए. साथ ही चेतावनी दी कि आज के बाद वह उस के घर के आसपास भी दिखाई दिया तो ठीक नहीं होगा. रजनी सुलतान की सिर्फ पत्नी ही नहीं, उस के 3 बच्चों की मां भी थी, इसलिए बच्चों के भविष्य की फिक्र करते हुए उस ने दोबारा ऐसी गलती न करने की चेतावनी दे कर उसे माफ कर दिया.

यह बात सच है कि जिस महिला का पैर एक बार बहक चुका हो, उसे संभालना मुश्किल होता है. यही हाल रजनी का भी था. कुछ दिनों तक अपनी कामोत्तेजना पर जैसेतैसे काबू रखने के बाद वह फिर चोरीछिपे अजीत से मिलने लगी. इस का पता सुलतान को चला तो उस ने रजनी को काफी बुराभला कहा. इस के बाद रजनी का अजीत से मेलजोल कुछ कम हो गया, लेकिन बंद नहीं हुआ. जब मिलने में परेशानी होने लगी तो एक दिन रजनी ने अजीत से कहा, ‘‘मुझ से तुम्हारी दूरी बरदाश्त नहीं होती. अब मैं सुलतान के साथ नहीं रहना चाहती.’’

‘‘अगर ऐसा है तो उसे ठिकाने लगा देते हैं. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. वह शराब पीता ही है, खाना खा कर बेसुध हो जाता है, इसलिए उस की हत्या करना भी आसान है.’’

इसी के साथ दोनों ने सुलतान की हत्या की योजना बना ली. 5 जून, 2021 की रात सुलतान शराब पी कर बेसुध सो गया. सोने से कुछ समय पहले ही उस ने रजनी के साथ मारपीट की थी. पति के सोने के बाद रजनी ने प्रेमी अजीत को फोन कर के बुला लिया. मगर जैसे ही अजीत आया सुलतान की नींद खुल गई. रजनी और अजीत ने सुलतान को पकड़ा और उस के गले में रस्सी का फंदा बना कर उस का गला घोंट दिया. इस के बाद अजीत काफी डर गया तो वह अपने घर भाग गया, मगर रजनी कशमकश में फंस गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे?

आखिर उस का मन नहीं माना तो वह घर के पास में रहने वाली अपनी बहन के घर चली गई. यहां पर रजनी की मां भी आई हुई थी. उस ने हिचकियां लेले कर रोते हुए बहन और मां को बताया कि उस के पति ने आत्महत्या कर ली है. इन लोगों को रजनी की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था. शायद इसी वजह से एक बार तो लगा कि वह फूटफूट कर रो पड़ेगी, लेकिन किसी तरह खुद को संभालते हुए आखिर उस ने पूछ ही लिया, ‘‘क्या आप लोगों को मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है?’’  बाद में यह बात पूरे मोहल्ले में फैल गई. सुबह होते ही गंधर्व सिंह ने महाराजपुरा थानाप्रभारी प्रशांत यादव को फोन कर इस घटना की सूचना दे दी. थानाप्रभारी प्रशांत यादव ने इस घटना को काफी गंभीरता से लिया.

बात सिर्फ आत्महत्या कर लेने भर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इस से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि गुठीना जैसे छोटे से गांव में इस तरह की घटना घट गई और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं हुई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी प्रशांत यादव  एसआई जितेंद्र मवाई के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. चलने से पहले उन्होंने इस की सूचना सीएसपी रवि भदौरिया को भी दे दी थी. प्रशांत यादव घटनास्थल का निरीक्षण शुरू करने वाले थे कि सीएसपी भदौरिया भी आ पहुंचे. उन के साथ फोरैंसिक टीम भी आई थी. फोरैंसिक टीम का काम खत्म हो गया तो सीएसपी लौट गए. उन के जाने के बाद  थानाप्रभारी प्रशांत यादव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घटनास्थल की औपचारिक काररवाई निपटा कर सुलतान की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

रजनी और उस के प्रेमी ने जिस रस्सी से फंदा बना कर सुलतान का गला घोंटा था, वह भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली. उस के बाद थानाप्रभारी ने गंधर्व सिंह की तरफ से अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली. थानाप्रभारी इस केस की जांच में जुट गए. उन्होंने इस बारे में मृतक की पत्नी रजनी से पूछताछ की. थाने पहुंचते ही रजनी डर गई और उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपने प्रेमी अजीत के साथ मिल कर पति को ठिकाने लगाया था. पुलिस ने 6 जून, 2021 को ही रजनी के प्रेमी अजीत को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों ने ही सुलतान की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया.

इस के बाद दोनों ने सुलतान की हत्या की जो सनसनीखेज कहानी सुनाई, वह परपुरुष की बांहों में सुख तलाशने वाली औरत के अविवेक का नतीजा थी. पूछताछ  और सारे साक्ष्य जुटाने के बाद  पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. रजनी के साथ उस का 3 वर्षीय सब से छोटा बेटा भी जेल गया है. रजनी ने जो सोचा था, वह पूरा नहीं हुआ. वह एक हत्या की अपराधिन बन गई. उस के साथ उस का पे्रमी भी. जो सोच कर उन दोनों ने सुलतान की हत्या की, वह अब शायद ही पूरा हो, क्योंकि यह तय है कि दोनों को सुलतान की हत्या के अपराध में सजा होगी. Parivarik Kahani

Hindi love Story : अधेड़ उम्र का इश्क

Hindi love Story : 45 साल की जसवंती विधवा जरूर थी, लेकिन अपनी कदकाठी की वजह से वह 35 की दिखती थी. वह अपने दोनों बच्चों की शादी कर चुकी थी. इस के बावजूद भी मदन सेन से उस के संबंध हो गए. अधेड़ उम्र का यह इश्क जब सार्वजनिक हो गया तो एक दिन…

रवि को मदन सेन के साथ अपनी मां जसवंती के अवैध संबंधों की पूरी जानकारी थी. वह यह भी जानता था मदन अब उस की मां से तंग आ चुका था. इसलिए रवि ने अपनी मां को मौत के घाट उतारने के लिए मदन से संपर्क किया तो वह भी जसवंती की हत्या में शामिल हो गया. 15 मार्च, 2021 की सुबह 10 बजे का वक्त था. जब बैतूल जिले की मुलताई थाने की सीमा में बसे छोटे से गांव काथम की रहने वाली जसवंती और उस की 11 वर्षीया नातिन लविशा की हत्या की खबर गांव में आग की तरह फैली थी, जिस से घटना की जानकारी लगने पर टीआई मुलताई सुरेश सोलंकी भी कुछ देर में टीम ले कर मौके पर पहुंच गए.

कमरे के अंदर बिछे पलंग पर जसवंती और उस की नातिन के शव खून से लथपथ पडे़ थे. दोनों के सिर पर घातक चोटें थीं. टीआई सोलंकी ने घटना की जानकारी बैतूल एसपी सिमला प्रसाद के अलावा एएसपी श्रद्धा जोशी और एसडीपीओ नम्रता सोधिया को भी दे दी. जिस से कुछ ही देर में उक्त अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. शुरुआती पूछताछ में पता चला कि पति की मौत के बाद जसवंती अपने बेटे रवि और बहू के साथ रहती थी. वह स्थानीय कलारी की रसोई में खाना बनाने का काम करती थी. कुछ दिनों में उस की नातिन लविशा भी आ कर उस के साथ रहने लगी.

जबकि घटना से 4 दिन पहले ही जसवंती ने लड़झगड़ कर बेटेबहू को उन के ढाई महीने के बच्चे के साथ घर से निकाल दिया था. जिस से रवि अपनी पत्नी को ले कर पास के गांव परसोडी में रहने वाले अपने मामा ससुर के घर जा कर रहने लगा था. जसवंती का हालिया विवाद बेटे से हुआ था. इस के अलावा गांव में उस की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. लेकिन छोटी बात पर बेटा मां की हत्या करेगा, इस बात पर आसानी  से भरोसा नहीं किया जा सकता था. इसलिए पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड में दूसरे एंगल से जांच करनी शुरू कर दी, जिस में पता चला कि जसवंती 45 की जरूर थी, लेकिन शारीरिक बनावट और खूबसूरती के चलते वह 35 से अधिक नहीं दिखती थी.

उस के पति की मौत कई साल पहले हो चुकी थी. इसलिए पुलिस जसंवती के अवैध संबंधों की जानकारी जुटाने में लग गई. जांच में पता चला कि जसवंती का प्रेम प्रसंग कई सालों से कलौरी में काम करने वाले मदन सेन के साथ चल रहा था. मदन सेन मूलरूप से सागर जिले के बंडा का रहने वाला था. लेकिन कलारी में नौकरी के चलते यहां जसवंती के घर के पास ही किराए पर रहने लगा था. पूरे गांव को मदन और जसवंती के इश्क की जानकारी थी. लेकिन उन के बीच विवाद का कोई वाकया सामने नहीं आया था. पुलिस ने मदन से पूछताछ की, जिस में उस ने कबूल कर लिया कि उस के जसंवती से संबंध थे, किंतु उस की हत्या में उस ने अपना हाथ होने से मना कर दिया.

इसलिए एसपी सिमला प्रसाद ने इस दोहरे हत्याकांड को सुलझाने के लिए एएसपी श्रद्धा जोशी के निर्देशन में और एसडीपीओ सोधिया के नेतृत्व में थानाप्रभारी मुलताई सुरेश सोलंकी की एक टीम गठित कर दी. टीम ने जांच शुरू करते हुए चौतरफा प्रयास शुरू कर दिए, लेकिन जब इस में सफलता मिलती नहीं दिखाई दी तो एसपी सिमला प्रसाद ने साइबर सेल के एसआई राजेंद्र राजवंशी को मदन सेन के अलावा मृतक के बेटे रवि के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकालने के निर्देश दिए. काल डिटेल्स में चौंका देने वाली जानकारी निकल कर सामने आई कि घटना के 2 दिन पहले से ही अचानक जसवंती के प्रेमी मदन की उस के बेटे से फोन पर कई बार बात हुई थी.

इतना ही नहीं, घटना की रात को रवि और उस के मामा ससुर दिलीप के मोबाइल की लोकेशन गांव में मदन सेन के मोबाइल के पास मिल रही थी. उस रात भी मदन और रवि के बीच कई बार बात हुई थी. जबकि 15 मार्च के बाद से मदन और रवि के बीच इक्कादुक्का बार बात हुई थी, वह भी बहुत कम समय के लिए. साइबर सेल को रवि के मोबाइल की लोकेशन 15 मार्च को कामथ में मिली थी. इस का सीधा मतलब था कि वह घटना वाली रात को कामथ आया था. इसलिए रवि पर अपना शक पुख्ता करने के लिए टीआई सोलंकी ने रवि को थाने बुला कर बातोंबातों मे उस से पूछा, ‘‘जिस रात तुम्हारी मां का कत्ल हुआ, उस रात तुम कहां थे?’’

‘‘कहां होता साहब, मां ने घर से धक्का मार कर निकाल दिया था. इसलिए मैं अपने मामा ससुर के यहां जा कर रहने लगा. उस रात भी वहीं था.’’ रवि ने बताया.

‘‘ठीक है. इस मदन सेन के बारे में तुम्हारा क्या खयाल है? लोग बताते हैं कि मदन की तुम्हारी मां के साथ अच्छी दोस्ती थी.’’ टीआई ने कहा.

‘‘आप ने सही सुना है, साहब. मुझे तो अपनी मां कहने में भी शर्म आने लगी थी. मदन हमारे घर के पास ही रहता है. कई बार वही आधी रात में भी मेरी मां से मिलने आया करता था. यह सब मेरी पत्नी ने अपनी आंखों से देखा था. इसलिए वह इस बात को ले कमुझे ताने दिया करती थी.’’ रवि बोला.

‘‘तुम ने मदन को रोका नहीं?’’ टीआई ने पूछा.

‘‘रोका था साहब. हमारे बीच काफी झगड़ा भी हो चुका है. लेकिन खुद मेरी मां ही उसे घर बुलाती थी.’’ वह बोला.

‘‘मदन से तुम्हारी बात होती थी कभी?’’

‘‘पहले होती थी, लेकिन जब पता चला कि उस के मेरी मां से अवैध संबंध हैं, तब हमारे बीच झगड़ा हुआ था. फिर उस से बातचीत बंद हो गई थी.’’

‘‘फोन पर तो होती होगी बात तुम्हारी मदन से.’’

‘‘नहीं, कभी नहीं.’’

जैसे ही रवि ने मदन से फोन पर बात होने से इनकार किया. तभी पुलिस ने उस के साथ थोड़ी सख्ती दिखाई तो वह टूट गया. फिर उस ने इस दोहरे हत्याकांड का राज उगल दिया. उस ने बताया कि इस हत्याकांड में मामा ससुर दिलीप के अलावा मां का प्रेमी मदन भी शामिल था. रवि की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त मूसल एवं हथौड़ी भी बरामद कर ली. पुलिस ने रवि के मामा ससुर दिलीप व मां के प्रेमी मदन सेन को भी गिरफ्तार कर लिया. हत्या करने के बाद वह जसवंती का मंगलसूत्र और लविशा की पायल ले गए थे, इसलिए पुलिस ने आरोपियों से ये दोनों जेवर भी बरामद कर लिए. उन से पूछताछ के बाद इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

पति की मृत्यु के बाद जसवंती ने न केवल परिवार संभाला, बल्कि बेटे की शादी भी धूमधाम से की. रवि मां का हाथ बंटाने के लिए छोटामोटा काम किया करता था, लेकिन लौकडाउन में काम छूट जाने से वह घर में कुछ महीनों से बैठा था. जसवंती पिछले 5 सालों से कलारी के औफिस में खाना बनाने का काम करती थी. जसवंती सुंदर तो थी ही, साथ ही आकर्षक भी थी. कलारी में सागर जिले का मदन सेन मैनेजर की हैसियत से पूरा हिसाबकिताब देखता था. मदन यहां अकेला रहता था, इसलिए उसे एक औरत की और जवानी में पति की मौत हो जाने से जसवंती को एक मर्द की आवश्यकता यदाकदा महसूस होती रहती थी.

ऐसे में मदन की नजर जसवंती पर थी. वह जानता था कि जसंवती का पति नहीं है, इसलिए उस तक पहुंचना उस के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था. उस ने काफी सोचसमझ कर ही जसवंती के पड़ोस में किराए का मकान ले कर उस में रहना शुरू किया. कुछ समय बाद मदन ने धीरेधीरे जसवंती की तरफ बढ़ना शुरू किया तो अपनी खुद की जरूरतों से परेशान जसवंती ने भी अपने मन की लगाम ढीली छोड़ दी और मदन को अपनी मौन स्वीकृति दे दी, जिस से एक रोज आधी रात में मदन शराब पी कर जसवंती के घर पहुंचा तो जसवंती ने भी पहली मुलाकात में उस के सामने समर्पण कर दिया.

कहना नहीं होगा कि दोनों को एकदूसरे की जरूरत थी, इसलिए मदन और जसवंती दोनों ही कुछ दिनों बाद खुल कर अपनी प्रेम लीला करने लगे. जसवंती की बेटी की शादी पहले ही हो चुकी थी. सो वह अपनी ससुराल में थी. बेटा रवि अपनी मां के साथ रहता था, उसे काबू में रखने के लिए मदन ने रवि को शराब पीने की आदत डाल दी और रोज ही उसे कलारी में शराब पीने के लिए पैसे देने लगा. मदन के साथ मां के संबंध की बात पता होने के बाद भी शराब के लालच में रवि ने उस का कोई विरोध नहीं किया. यहां तक कि 2 साल पहले रवि की शादी हो जाने के बाद बहू के आ जाने पर भी मदन और जसवंती के संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

लेकिन कहते हैं कि अवैध संबंधों की एक उम्र होती है. क्योंकि वक्त के साथ जहां औरत अपने प्रेमी पर ज्यादा अधिकार जताने लगती है, वहीं पे्रमी का मन उस से ऊबने लगता है. यही इस मामले में होने लगा था. जसवंती मदन पर पूरा हक जमाने लगी थी. यहां तक कि वह उस पर दबाव बनाने लगी थी कि वह गांव में रहने वाली अपनी पत्नी को छोड़ कर उस के साथ उस के घर में पति की तरह रहे. लेकिन मदन इस के लिए राजी नहीं था. इस से मदन और जसंवती के बीच विवाद होने लगा. लौकडाउन में काम बंद हो जाने से रवि पूरी तरह मां पर निर्भर हो गया. इसलिए वह जब भी मां से खर्च के पैसे मांगता तो मां उसे खरीखोटी सुना देती थी.

ढाई महीने पहले ही रवि की पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया था, जिस से जसवंती रवि पर रोज कोई न कोई काम करने के लिए उस पर दबाव बनाने लगी थी. लेकिन रवि को कोई काम नहीं मिल पा रहा था. इस दौरान जसवंती की बेटी की बेटी लवीशा भी उस के साथ आ कर रहने लगी, जिस से जसंवती रवि को खर्च के पैसे देने में और आनाकानी करने लगी. इस से रवि अपनी भांजी से भी नफरत करने लगा. घटना के 4 दिन पहले रवि ने अपनी मां से खर्च के लिए पैसे मांगे तो जसवंती ने उसे बुरी तरह झिड़का ही नहीं, बल्कि पत्नी और बच्चे के साथ घर से निकलने का फरमान भी सुना दिया. जिस से गुस्से में आ कर रवि अपनी पत्नी और बच्चे को ले कर अपने मामा ससुर दिलीप के वहां चला गया.

रवि को इस बात का डर था कि कहीं मां पूरी जायदाद भांजी लवीशा के नाम न लिख दे, जो उस के साथ आ कर रहने लगी थी. इसलिए उस ने मामा ससुर के साथ मिल कर मां की हत्या की योजना बना कर मदन को फोन किया. वास्तव में रवि को पता था कि मां का प्रेमी मदन सेन भी अब उस से तंग आ चुका है. इसलिए रवि ने मदन को अपनी योजना बताई तो मदन इस में साथ देने को राजी हो गया. जिस के बाद घटना वाले दिन मामा ससुर दिलीप और रवि गांव पहुंचे तो वहां से मदन भी उन के साथ हो गया. आधी रात के बाद तीनों ने चुपचाप घर में घुस कर सो रही जसवंती और उस की नातिन के सिर पर मूसल और हथौड़ी से वार कर उन की हत्या कर दी.

पुलिस इस घटना को लूट की वारदात समझे, इसलिए रवि हत्या के बाद जसवंती का मंगलसूत्र और लविशा की पायल उतार कर साथ ले गया. तीनों को भरोसा था कि पुलिस उन पर कभी शक नहीं करेगी. लेकिन पुलिस ने 7 दिनों में ही मामले का खुलासा कर दिया. Hindi love Story

True Crime Stories Hindi : पत्नी और प्रेमी की साजिश

True Crime Stories Hindi : अपने साले रामविलास वर्मा की शादी में 25 वर्षीय हरेंद्र वर्मा ने बढ़चढ़ कर भाग लिया था. रिसैप्शन समारोह में भी वह सभी मेहमानों की गर्मजोशी से आवभगत कर रहा था. उसी दौरान किसी का हरेंद्र के मोबाइल पर फोन आया तो वह बात करने के लिए समारोह स्थल से बाहर निकला. कुछ देर बाद गरदन कटी उस की लाश मिली. किस ने और क्यों की हरेंद्र की हत्या? पढ़ें, लव क्राइम की यह दिलचस्प स्टोरी.

अप्रैल 2025 की बात है. 25 वर्षीय हरेंद्र वर्मा अपनी पत्नी को बुलाने के लिए बलरामपुर जिले के जुबरी कलां गांव में स्थित ससुराल आया हुआ था. ग्रामीण क्षेत्र में परंपरा होती है कि पत्नी के मायके में पति को उस से दूर ही सुलाया जाता है. हरेंद्र अपनी ससुराल में दालान में लेटा हुआ था. उसे नींद नहीं आ रही थी. उस के ससुर और सालों की खटिया भी उसी के पास बरामदे में पड़ी थी. वे लोग गहरी नींद में सो रहे थे.

रात के लगभग 12 बजे थे. मेन गेट खुला हुआ था. हरेंद्र वाशरूम जाने के लिए जैसे ही गेट के बाहर निकला, उस ने देखा कि उस की पत्नी उमा देवी एक युवक के साथ घर की ओर आ रही थी. यह देखते ही हरेंद्र चौंक गया और सोचने लगा कि यह युवक कौन है? और इतनी रात में यह इस के साथ कहां से आ रही है? हरेंद्र गेट के पीछे छिप गया. जैसे ही पत्नी गेट के अंदर घुसी तो हरेंद्र ने पत्नी का हाथ पकड़ा और पूछा, ”बताओ, आधी रात को कहां से आ रही हो और यह लड़का कौन है?’’

”अब आप ने सब कुछ देख ही लिया है तो सुनो, यह मेरा सब कुछ है. मैं इस से शादी से पहले से ही प्यार करती हूं. मैं इस को कभी नहीं भूल पाऊंगी और न ही इस का साथ छोड़ूंगी. अब फैसला आप के हाथ में है.’’ उमा देवी ने सच बता दिया.

इतना सुनते ही हरेंद्र का माथा ठनका, उसे चक्कर आने लगा. उस का हाथ कांप गया और पत्नी का हाथ उस के हाथ से छूट गया. बेशरमी की चादर ओढ़ उमा भी धीरेधीरे कदमों से घर के अंदर चली गई. हरेंद्र मूकदर्शक बना उसे जाते देखता रहा. फिर वह दलान में आ कर अपनी चारपाई पर लेट गया. पत्नी के बारे में तरहतरह के विचार उस के दिमाग में कौंधने लगे. उधर उमा देवी ने उसी दिन से हरेंद्र को रास्ते से हटाने की मन में ठान ली.

रात में ही उस ने अपने प्रेमी जितेंद्र वर्मा को मोबाइल फोन पर पूरी बात बताई और कहा कि तुम तो मुझे गेट तक छोड़ कर चले गए, मगर वह कमीना पति, पता नहीं कैसे गेट के पीछे ही छिपा हुआ था. उस ने सब कुछ देख लिया है. उसे ठिकाने लगाना होगा. जल्दी से जल्दी कोई प्लान बना लो. अगर तुम मुझ से वास्तव में सच्चा प्यार करते हो तो हरेंद्र को रास्ते से हटाना ही होगा. उसे सब कुछ पता चल गया है. मैं उसे अब आगे कैसे बरदाश्त करूंगी. वरना हमारे प्यार का ही नहीं, मेरे जीवन का भी अंत हो जाएगा.

”यह तो बहुत बुरा हुआ. मगर मैं ऐसा नहीं होने दूंगा. हमारा प्यार जिंदा रहेगा और परवान भी चढ़ता रहेगा. हमें दुनिया की कोई ताकत जुदा नहीं कर सकती. मैं तो आधी रात को अभी किसी समय उस को सोते में ही ठिकाने लगा देता, लेकिन यह संभव नहीं है. तुम ने बताया है कि तुम्हारे पापा और भाई भी उस के साथ ही दालान में लेटे हुए हैं.

”दूसरे यह कि किसी नौजवान युवक की हत्या करना अकेले आदमी का काम नहीं है, क्योंकि इतना सब कुछ देखने के बाद उसे नींद नहीं आ रही होगी. जागते हुए आदमी को मारना आसान नहीं होता.’’ जितेंद्र वर्मा बोला.

”कुछ और सोचो! तुम तो आसमान से तारे तोड़ के लाने की बातें करते थे. अब सिर्फ एक आदमी ठिकाने लगाने का साहस दिखाने की जरूरत है.’’ उमा ने उसे चुनौती दी.

”दूसरा रास्ता यह है कि जिस समय सुबह वह तुम्हारे घर से अपने घर जाने के लिए निकले तो उसे रास्ते में कहीं ठिकाने लगा दिया जाए, लेकिन अब इतना समय नहीं है. साथ देने के लिए 2 -4 लोग और होने चाहिए. इतनी आसानी से वह कब्जे में नहीं आएगा. तमंचे वगैरह का इंतजाम नहीं है. गोली मार के हत्या करने से दिन में तो बवाल हो जाएगा. कहीं आसपास के लोगों ने आ कर घेर लिया तो जान खतरे में पड़ जाएगी. वैसे भी इतनी जल्दी किसी हथियार का इंतजाम नहीं हो सकता.’’ जितेंद्र ने कहा.

”देखो, हरेंद्र कल किसी कीमत पर यहां नहीं रुकेगा. फिर उस के घर जा कर उस की हत्या करना आसान ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है. तुम्हारे अंदर बुद्धि नहीं है, मैं ही कोई प्लानिंग करती हूं. ऐसा करो तुम 1-2 अच्छे चाकू और 2-4 लोगों का इंतजाम कर के रखो.’’

उधर आधी रात के बाद जितेंद्र के साथ उमा को देखने के बाद हरेंद्र ससुराल नहीं आया. उमा देवी मायके में ही थी. अपनी योजना के अनुसार, उमा देवी ने अपना त्रियाचरित्र दिखाते हुए मोबाइल फोन से अपने पति हरेंद्र से माफी तलाफी की और कहा कि अब कभी कोई शिकायत नहीं मिलेगी. गलती इंसान से ही हो जाती है. आप मुझे क्षमा कर दें.

हरेंद्र के पास इस के अलावा कोई रास्ता भी नहीं था. दोनों में मोबाइल फोन पर प्यार भरी बातें होती रहतीं. उमा के भाई की मई 2025 में शादी थी. उधर अपने साले रामविलास वर्मा से हरेंद्र की खूब अच्छी दोस्ती हो गई थी. वैसे भी वह उस का साला था. वह अपनी शादी का कार्ड ले कर हरेंद्र के घर आया. बहुत अच्छे माहौल में बातचीत हुई. हरेंद्र और परिवार के सभी लोगों ने वादा किया कि शादी में जरूर आएंगे. दूसरे दिन उमा देवी का भी फोन आया. उस ने भी कहा कि सभी लोग शादी में जरूर आएं. उमा देवी ने यह भी वादा किया कि शादी के बाद वह भी साथ में ससुराल आ जाएगी.

29 अप्रैल, 2025 को तेल पूजन का कार्यक्रम था. हरेंद्र इस मौके पर अपनी ससुराल पहुंच गया. गांव में उत्सव का माहौल था. विजय वर्मा का घर सजा हुआ था. रंगबिरंगी लाइटें, फूलों की मालाएं और खाने की खुशबू सब कुछ ऐसा था, जैसे कोई त्यौहार हो. विजय वर्मा गांव में एक सम्मानित व्यक्ति थे, जिन का घर हमेशा मेहमानों से गुलजार रहता था.

सब कुछ ठीकठाक अच्छा व खूबसूरत था. 30 अप्रैल, 2025 को जुगली कलां में हरेंद्र के लिए बहुत ही खुशी का मौका था. हरेंद्र का साला रामविलास शादी के बंधन में बंधने जा रहा था. शादी का कार्यक्रम भी बहुत अच्छा और हंसीखुशी से बीत गया. हरेंद्र के घर वाले जो रामविलास की शादी में शिरकत करने आए थे, विवाह समारोह के बाद अपने घर वापस चले गए. शादी के बाद शुक्रवार 2 मई, 2025  को बहूभोज का आयोजन था. यह एक तरह से रिसैप्शन का कार्यक्रम था. इस क्षेत्र में इसे बहूभोज के नाम से जाना जाता है.

गांव के लोग रिश्तेदार और आसपास के इलाकों से मेहमान आए थे. विजय वर्मा ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. बड़ेबड़े शामियाने लगाए गए, पंडाल सजा था और तरहतरह के पकवान बन रहे थे. हरेंद्र हमेशा की तरह मेहमानों की आवभगत में जुटा था. वह कभी बच्चों के साथ मजाक करता तो कभी बड़ों के साथ गप्पें मारता. उस की हंसी उस रात की रौनक को और बढ़ा रही थी. बहूभोज का कार्यक्रम अपने चरम पर था. मेहमान खाना खा रहे थे. बच्चे इधरउधर दौड़ रहे थे और महिलाएं गीत गा रही थीं. तभी हरेंद्र के फोन की घंटी बजी. उस ने फोन उठाया और बात करते हुए धीरेधीरे पंडाल से बाहर निकल गया. कुछ लोगों ने उसे कंपोजिट विद्यालय की ओर जाते देखा.

इस के कुछ देर बाद जब कुछ मेहमान खाना खा कर घर लौट रहे थे तो उन की नजर सड़क किनारे गन्ने के खेत पर पड़ी. वहां खून से लथपथ हरेंद्र की लाश पड़ी थी. उस का गला इतनी बेरहमी से रेता गया था कि सिर शरीर से बस नाममात्र का जुड़ा था. चारों ओर खून बिखरा था. जैसे किसी ने जानबूझ कर उसे तड़पातड़पा कर मारा हो. पास में उस का मोबाइल फोन पड़ा था. स्क्रीन पर अब भी कोई नंबर चमक रहा था. हरेंद्र की लाश मिलने की खबर आग की तरह गांव में फैल गई. विजय वर्मा का घर जो कुछ देर पहले हंसीखुशी से गूंज रहा था, अब मातम में डूब गया. हरेंद्र की पत्नी उमा देवी बेसुध हो कर रो रही थी. गांव के लोग हैरान थे. कोई समझ नहीं पा रहा था कि आखिर यह हुआ कैसे?

सूचना मिलते ही यूपी डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची. महराजगंज तराई थाने के इंसपेक्टर अखिलेश पांडेय ने स्थिति को संभाला. जल्द ही हरैया और ललिया पुलिस की टीमें भी मौके पर आ गईं. एसपी विकास कुमार खुद फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. फोरैंसिक टीम ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने शुरू किए.

24 घंटे में ऐसे खुला हत्या का केस

खून से सने चप्पल के निशान, बिखरा हुआ खून और हरेंद्र का मोबाइल हर चीज को बारीकी से देखा गया. पुलिस ने घटनास्थल को पट्टिका से घेर कर सील कर दिया गया. घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने हरेंद्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. मृतक के चाचा लल्लू वर्मा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की गई. महाराजगंज तराई थाने के एसएचओ अखिलेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में स्वाट व सर्विलांस टीम ने छानबीन शुरू की. पता चला कि मृतक की पत्नी उमा का जितेंद्र वर्मा से चक्कर चल रहा है.

शुक्रवार की देर रात हरेंद्र की हत्या के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शनिवार को ही संदेह होने पर उस की पत्नी उमा देवी को हिरासत में ले लिया था. उसी से पूछताछ कर उस के प्रेमी जितेंद्र वर्मा व उस के 5 साथियों को भी उठाया. जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी जितेंद्र वर्मा ने उमा देवी वर्मा, मुकेश कुमार, सचिन यादव, अखिलेश यादव, संतोष व मुकेश साहू के साथ वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया.

पता चला कि घटना के पहले हरेंद्र वर्मा को मोबाइल से फोन कर के गांव के बाहर गन्ने के खेत के पास बुलाया गया. जितेंद्र वर्मा के साथ गांव के ही मुकेश कुमार, सचिन यादव, अखिलेश यादव, संतोष और मुकेश साहू वहां मौजूद थे. हरेंद्र शराब या किसी नशे का आदी नहीं था, इसलिए जितेंद्र ने इतने लोगों को इकट्ठा किया.

जैसे ही हरेंद्र घर से बाहर थोड़ी दूर आया तो इन सब ने उसे दबोच लिया और खींच कर गन्ने के खेत के पास ले गए. उसे वहीं गिरा लिया. हरेंद्र ने बहुतेरे हाथपैर फेंके, लेकिन इतने लोगों के सामने वह बेबस हो गया. एक ने उस की खोपड़ी पकड़ कर मुंह बंद कर रखा था, जिस से कि उस की चीखने की आवाज बाहर न निकल सके. बाकी लोगों ने इतना कस कर उसे दबोच लिया कि वह हाथपैर भी न हिला सका. जितेंद्र ने उस के गले पर बड़ी बेरहमी से चाकू रख दिया. इस तरह योजनाबद्ध तरीके से हरेंद्र वर्मा की चाकू से गला रेत कर निर्मम हत्या कर दी. आरोपियों से की गई पूछताछ के बाद हरेंद्र वर्मा की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली निकली—

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के खरबूपुर थाना क्षेत्र के देवरहना के युवक हरेंद्र वर्मा का विवाह करीब 4 साल पहले बलरामपुर जिले के महाराजगंज तराई थाना के गांव जुबली कलां की रहने वाली उमा वर्मा के साथ हुआ था. ग्रामीण परंपरा के अनुसार किशोर और किशोरी की उम्र परिपक्व न होने के कारण विवाह तो हो जाता है, लेकिन विवाह के समय दुलहन की विदाई नहीं होती. ग्रामीण भाषा में विदाई की इस रस्म को गौना कहते हैं. इन दोनों का भी 2 साल बाद गौना हुआ था.

गौना के बाद हरेंद्र वर्मा अपनी पत्नी को विदा करा के घर ले आया. वैवाहिक जीवन ठीकठाक गुजर रहा था, लेकिन पत्नी उस के प्रति इतनी गंभीर नहीं थी, जितनी कि एक नए शादीशुदा युवक को उस से अपेक्षाएं होती हैं. पत्नी का प्यार भरा रवैया न होने पर वह बड़ा मायूस रहता था. उमा देवी ज्यादातर खामोश रहती थी. उस का मुंह फूलाफूला रहता था. न घर के काम में उसे कोई दिलचस्पी थी, न ही पति के प्रति कोई दिलचस्पी दिखाई दी.

उमा देवी हमेशा मायके जाने के लिए तत्पर रहती. वह एक हफ्ता ससुराल में रहती तो 2 हफ्ते मायके में गुजारती. वैसे तो मायके वालों को भी उस का बारबार आना पसंद नहीं था, फिर भी औलाद तो औलाद ही होती है. उस के पेरेंट्स और भाई उस की इस हरकत पर उसे समझाते भी और जब वापस मायके आ जाती तो फिर निभाते भी थे. शादी हो जाने के बाद भी उमा अपने प्रेमी जितेंद्र वर्मा के टच में रहती थी. वह जब अपने मायके आती तो जितेंद्र वर्मा से उस की बराबर बातें होतीं. उमा ससुराल में पहुंचने के बाद भी चोरीछिपे मोबाइल से जितेंद्र से बात कर लिया करती थी. दोनों के इस रिश्ते की बात हरेंद्र को उड़तेउड़ते पता चली तो उस ने पत्नी को कई बार इधरउधर की मिसालें दे कर समझाया.

दिन गुजरते रहे. एक दिन उमा देवी अपनी ससुराल में थी, तभी प्रेमी जितेंद्र वर्मा उस की ससुराल पहुंच गया. हरेंद्र ने पत्नी से उस युवक की बाबत जानकारी की तो उमा देवी ने बताया कि यह उस का कजिन है. नाम है जितेंद्र वर्मा. अतिथि की तरह हरेंद्र ने उस की आवभगत की. उस दौरान हरेंद्र ने नोट किया कि जितेंद्र वर्मा का व्यवहार उमा देवी के प्रति भाईबहन जैसा नहीं था. वह अपने गांव के कजिन जितेंद्र वर्मा से बड़े खुल कर हंस कर इस तरह बात कर रही थी, जैसे अपने किसी प्रेमी से कर रही हो. उस समय उस ने पति को बिलकुल नजरअंदाज कर रखा था.

कुछ घंटे रुकने के बाद जितेंद्र वर्मा चला गया तो हरेंद्र को शक हुआ कि यही वह युवक है, जिस से उमा छिपछिप कर फोन पर बात करती है. उस के जाने के बाद पत्नी से हरेंद्र ने अपने शक का इजहार किया. इस पर उमा ने साफ इनकार कर दिया. कई तरह की कसमें खा कर उस ने पति को यकीन दिलाया कि उस का किसी से कोई चक्कर नहीं है. उस के बाद से उमा देवी का रवैय्या एकदम बदल गया. वह पति पर प्यार लुटाने लगी. घर वालों की सेवा में भी कोई कमी नहीं करती, इसलिए हरेंद्र ने जितेंद्र वर्मा की तसवीर दिमाग से निकाल दी. उसे ऐसा लगा कि यह उस के मन का वहम था. वह भी पत्नी का खयाल ठीक से रखने लगा. वह खुश भी दिखती. उस के इस तरह के बदलाव से हरेंद्र भी हैरान था.

जबकि असलियत कुछ और ही थी. दरअसल, उमा के लिए यह शादी सिर्फ एक ऐसा बंधन था, जिस में उसे जबरदस्ती उस की मरजी के खिलाफ बांधा गया था. लिहाजा वह अपना झूठा चेहरा पति के सामने दिखाने लगी थी कि वह खुश है. लेकिन अंदर ही अंदर वह अपने पति से बेइंतहा नफरत करती थी. वह एक मौके की तलाश में थी.

उस के दिल की धड़कनें शादी के 4 साल बाद भी अपने प्रेमी के लिए धड़कती थीं. कई बार मांबाप अपनी इज्जत अपने समाज के दिखावे और अपनी इच्छाओं के चलते अपनी संतान के दिल की आवाज को नजरअंदाज कर देते हैं. बलरामपुर जिले के महाराजगंज तराई थाना के गांव जुबली कलां के विजय वर्मा की बेटी उमा देवी की भी यही कहानी है. उमा देवी का गांव के ही एक युवक जितेंद्र से प्रेम प्रसंग चल रहा था.

फेमिली वालों ने क्यों नहीं मानी उमा की बात

एक ही गांव के जितेंद्र वर्मा और उमा देवी एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें खाते थे और दोनों ने यह कहा था कि वे एकदूसरे के बिना रह नहीं पाएंगे. लिहाजा दोनों ने अपने फेमिली वालों को इस बात की जानकारी दी. जितेंद्र के घर वाले इस शादी के लिए तैयार हो गए. उन्होंने सोचा कि जहां बेटे की खुशी वहीं हमारी खुशी. अगर बेटा यह चाहता है तो ठीक, यही सही, लेकिन उमा के घर वाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए.

उन का कहना था कि जिस तरह का लड़का वो चाहते हैं उस तरह का जितेंद्र नहीं है. इस पैमाने पर वह फिट नहीं बैठता. वह उन की बेटी को खुश नहीं रख सकता. दोनों के सामाजिक स्तर में जमीनआसमान का फर्क था. उमा इस दौरान अपनी मम्मी को लाख समझाती रही कि वह उस के साथ खुश रहेगी. जितेंद्र उसे खूब खुश रखेगा. जितेंद्र उस का ख्याल रखेगा, लेकिन उमा की हर बात को मम्मी ने दरकिनार कर दिया.

उन्होंने उसे समझाते हुए कहा कि बेटा, तुम्हें अभी जीवन का अनुभव नहीं है. तुम्हारी उम्र अभी 18-19 साल है. तुम्हें क्या पता जीवन में क्या होता है. जीवन की गाड़ी कैसे चलती है. तुम्हें कुछ नहीं पता है. तुम अपने फैसले नहीं ले सकतीं. इस तरह जबरदस्ती उमा की आवाज को हमेशा के लिए चुप करा दिया गया. उमा का जितेंद्र के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है, इस की चर्चा पूरे गांव में होते हुए विजय वर्मा के कानों तक भी पहुंची. उन में चिंता और आक्रोश का ज्वालामुखी अंदर ही अंदर धधकने लगा. अपने आक्रोश को दबाते हुए उन्होंने बेटी से बड़े प्यार से कहा कि बेटी यह मैं ने क्या सुना है कि तुम गांव के किसी लड़के के चक्कर में पड़ गई हो.

उमा अपने पापा के सामने बोलने का साहस नहीं जुटा पाई. बस नीचे सिर कर के गुमसुम बैठी रही. उस की आंखें नम हो गई थीं. इस से पहले कि वह बिलखबिलख कर रोने लगती, उस की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ता, विजय वर्मा स्थिति को भांप कर चुपचाप दूसरे कमरे में चले गए.

विजय वर्मा ने सोचा कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी उन की पत्नी को जरूर होगी. अपनी पत्नी के माध्यम से इस समस्या को सुलझाने का मन बनाया. उन्होंने पत्नी से कहा कि बेटी को समझाओ. हम गांव के सम्मानित और इज्जतदार लोग हैं. अगर ऐसे लुच्चेलफंगे के साथ हम ने अपनी बेटी का विवाह कर दिया तो हमारी समाज में क्या इज्जत रह जाएगी. वैसे भी पुरानी कहावत है, समधियाना और पाखाना दूर का ही सही रहता है. विजय वर्मा के स्वभाव को उन की पत्नी भलीभांति जानती थी. इस से पहले कि वह आक्रोश की आग में जल उठें, उन का ब्लड प्रैशर हाई हो. पत्नी ने कहा कि आप चिंता न करें, मैं उसे समझा दूंगी. इस के लिए कोई रिश्ता  ढूंढना शुरू कर दें. शादी हो जाएगी तो सब कुछ नारमल हो जाएगा. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.

उमा देवी की मम्मी उसे पहले ही अपना फैसला सुना चुकी थी. कह चुकी थी कि यह शादी हरगिज नहीं हो सकती. मम्मी ने बेटी उमा देवी को समझाया. कहा बेटी बचपन लड़कपन में बच्चों से ऐसा हो जाता है. किसी से ज्यादा बोलचाल दोस्ती एक लिमिट तक ही रहनी चाहिए. आजकल जमाना ठीक नहीं है. लड़के अपना काम निकाल कर भूल जाते हैं. ऐसी घटनाएं भी होती हैं कि फोटो या वीडियो बना कर ब्लैकमेल करते रहते हैं. आए दिन घटनाएं होती हैं. प्रेमव्रेम का चक्कर अच्छा नहीं है. मम्मीपापा जो शादी करते हैं, वह सब कुछ देखभाल कर करते हैं. अरेंज मैरिज ही ज्यादा कामयाब है. उमा देवी चुपचाप मम्मी की बात सुनती रही और कुछ नहीं बोली. अंत में उस ने कहा ठीक है मम्मी.

जितेंद्र वर्मा का उमा देवी से आमनासामना स्कूल आतेजाते हो जाता. गांव की और भी लड़कियां स्कूल आतीजाती थीं, लेकिन गांव के लड़के अपने गांव की लड़कियों से किसी तरह का कोई हंसीमजाक नहीं करते, बल्कि उन का मानसम्मान करते. आतेजाते सिर्फ इस तरह से एकदूसरे को देख लिया करते, जैसे राह चलते अनजान लोग एकदूसरे को देख कर अपनीअपनी मंजिल की तरफ आतेजाते हैं.

4 साल पहले की बात है. गांव में एक शादी समारोह चल रहा था. रात का समय था. सब अपनीअपनी प्लेट लिए खाना हासिल करने की जद्ïदोजहद कर रहे थे. भीड़ काफी थी. जो लोग प्लेट में खाना प्राप्त कर लेते, वह इस तरह से पीछे हटते जैसे कोई मुकाबला जीत लिया हो. उमा देवी भी प्लेट में खाना ले कर तेजी से बाहर निकली तो जितेंद्र वर्मा से टकरा गई. प्लेट में रखी सब्जियों ने जितेंद्र वर्मा की शर्ट से ले कर पैंट तक को अपनी चपेट में ले लिया. वह पछतावा भरी नजरों से जितेंद्र वर्मा को देख रही थी. जितेंद्र ने उमा देवी को देखा.

दोनों की नजरें एकदूसरे को काफी देर तक देखती रहीं. उस की आंखों में एक गहराई थी, जादू नहीं, बल्कि सुकून था. काजल से सजी वो नजरें कुछ कह नहीं रही थीं, बस चुपचाप दिल तक उतर गईं. वह मुसकराने लगी, उस की मुसकान में मासूमियत और शरारत का अजीब सा मेल था, जैसे सावन की पहली फुहारें किसी तपती दोपहर को छू जाएं. उस की गरदन की हलकी सी लचक, बालों को धीमे से झटकना और दुपट्टे का नजाकत से इस तरह संवारना कि स्तनों को पूरी तरह दिखा कर एक हाथ से ही दुपट्टे का एक पहलू सिर पर रखना, यह सब नजारे जितेंद्र वर्मा के दिल में बस गए. उस का रंग सांवला नहीं था, गोरा भी नहीं, लेकिन उस में वो चमक थी, जो उस की भरपूर जवानी का दस्तक दे रही थी.

जितेंद्र वर्मा ने चुप्पी तोड़ी, ”कोई बात नहीं भीड़भाड़ में ऐसा हो ही जाता है.’’

जवाब में उमा देवी ने कहा, ”नहीं, मेरी गलती है. सौरी… आप मुझे क्षमा कर दें.’’

इतनी देर में ही दोनों के बीच प्यार की नींव रख गई. उस समय उमा और जितेंद्र दोनों की उम्र 18 साल के आसपास ही रही होगी. उमा देवी के घर से 100 कदम की दूरी के बाद ही खेती की जमीनों का क्षेत्र शुरू हो जाता है. जितेंद्र वर्मा खेतों की तरफ आ जाता, उमा वायदे के अनुसार वहां मिल जाती. पेड़पौधों की आड़ में बैठ कर दोनों प्रेम की बातें करते और भविष्य की प्लानिंग बनाते. इश्क और मुश्क छिपता नहीं यह कहावत यहां भी चरितार्थ हो गई. दोनों के प्यार के चर्चे गांव में होने लगे. उमा देवी के फेमिली वालों को पता चला तो उन्होंने उस पर रोक लगा दी. निगरानी शुरू कर दी. समाज की ये दीवारें प्यार करने वालों को कहां रोक पाती हैं.

दोनों के बीच मोबाइल फोन पर बातें होती रहतीं. मौका मिलता, दोनों छिपछिप कर मिल लिया करते. जितेंद्र के फेमिली वालों को उन की प्रेम कहानी का पता चला. उस की मम्मी ने जितेंद्र को समझाते हुए कहा कि हमारा उमा देवी के परिवार से बिरादरी का रिश्ता तो है, लेकिन बराबरी का नहीं है. वे लोग शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. बेटा, ऐसा करो उसे भूल जाओ, वरना समस्याओं में ही घिरोगे. कोई हल नहीं निकलेगा. वे दबंग और असरदार लोग हैं. वे हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं.

जितेंद्र ने कहा, ”मम्मी, उन के घर एक बार रिश्ता भिजवा कर तो देख लो, कभी उमा की खुशी के लिए वे लोग शादी के लिए तैयार हो जाएं.’’

बेटे की जिद को देखते हुए जितेंद्र के फेमिली वालों ने शादी के लिए उमा के घर रिश्ता भेजा, लेकिन उन्होंने बेटी का शादी जितेंद्र के साथ करने से साफ मना कर दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने नाराजगी भी जताई. विजय वर्मा अपनी बेटी की शादी के लिए रिश्ते की तलाश कर ही रहे थे कि इसी बीच उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के खरबूपुर थाना क्षेत्र के देवरहना के युवक हरेंद्र वर्मा के बारे में उन्हें पता चला. उन के पिता चंद्रप्रकाश वर्मा गांव के सम्मानित व मेहनती किसान थे, उन्हें गांव में चंदू के नाम से जाना जाता था.

हरेंद्र की 3 बहनें थीं. एक हरेंद्र से बड़ी बहन और 2 उस से छोटी हैं. बड़ी बहन की शादी हो गई. हरेंद्र से छोटी 2 बहनों की शादी नहीं हुई थी. चंद्रप्रकाश वर्मा अपनी एक और बेटी का विवाह करने के बाद हरेंद्र की शादी करना चाहते थे. बिचौलिए की बातों में आ कर वह हरेंद्र की शादी के लिए तैयार हो गए. सभी तरफ से जानकारी करने पर परिवार को अच्छा ही बताया गया. हरेंद्र का बचपन गांव की गलियों में दोस्तों के साथ हंसतेखेलते बीता, वह पढ़ाई में ठीकठाक था. उस का असली हुनर लोगों से मिलनाजुलना था. उस से बात कर के कोई भी उदास नहीं रह सकता था, बल्कि प्रभावित हो जाता था. करीब 20 वर्षीय चंचल और लंबाचौड़ा हरेंद्र उमा देवी के फेमिली वालों को पसंद आ गया और आननफानन में दोनों का विवाह कर दिया.

हरेंद्र वर्मा से शादी हो जाने के बाद भी उमा ने अपने प्रेमी जितेंद्र वर्मा से मिलना जारी रखा. वह किसी भी हालत में जितेंद्र से दूर नहीं होना चाहती थी. बाद में जब हरेंद्र को पत्नी के अवैध संबंधों की जानकारी हो गई तो उमा ने प्रेमी के साथ मिल कर पति को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया. फिर मौका मिलने पर 2 मई, 2025 को पति की हत्या करा दी. पुलिस ने हत्यारोपी उमा देवी, उस के प्रेमी जितेंद्र वर्मा, मुकेश कुमार, सचिन यादव, अखिलेश यादव, संतोष और मुकेश साहू को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.

एसपी विकास कुमार ने 24 घंटे के अंदर ही घटना का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की. True Crime Stories Hindi

 

Online Crime Story : लव ट्राएंगल में ली गैंती से जान, मारते समय खून के छींटे दीवार पर फैल गए

Online Crime Story : छत्तीसगढ़ में एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के पति को गैंती से मार डाला. जब लोगों ने इस सनसनीखेज वारदात के बारे में सुना तो हैरान रह गए. प्रेमी को प्रेमिका के हसबैंड से किस तरह का खतरा महसूस हुआ कि वह उसे मार डाला, आइए जानते हैं पूरी घटना को विस्तार से

यह घटना छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले की है. जहां 25 जुलाई, 2025 को एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका ईश्वरी केवट के पति अमरनाथ का गैंती से मार कर कत्ल कर दिया. मृतक अमरनाथ कोटमीसानोर का रहने वाला था. ईश्वरी केवट का पिछले कई सालों से युवराज नामक शख्स के साथ प्रेम संबंध चल रहा था. युवराज और कोई नही हैं ईश्वरी का ही रिश्तेदार था और बिहार के मुंगेर जिले के महुआकापा गांव में रहता था.
युवराज एक मिस्त्री का काम करता था. ईश्वरी युवराज के प्रेम प्रसंग में ऐसे पागल थी कि 22 जुलाई, 2025 को अपने प्रेमी के घर भी चली गई, लेकिन 5 दिन बाद वापस पति के पास लौट आई और उसी के साथ रहने लगी.

मीडिया रिर्पोट के मुताबिक, 25 जुलाई को शुक्रवार के दिन अमरनाथ केवट और ईश्वरी घर ही मौजूद थे. तभी युवराज स्कूटी से अमरनाथ के घर पहुंचा और आते ही उस ने घर में रखी गैंती उठाकर अमरनाथ पर हमला कर दिया. युवराज ने अमरनाथ के सीने और चेहरे पर कई वार किए, जिस के खून के छींटे दीवार पर फैल गए. अमरनाथ चिल्लाता रहा और खून से लथपथ हो कर जमीन पर जा गिरा. वारदात के वक्त ईश्वरी घर ही मौजूद थी, लेकिन उस ने अपने पति को नही बचाया. इसके बाद घटना को अंजाम देकर युवराज फरार हो गया.

अस्पताल में तोड़ा दम

जब अमरनाथ की मां को पता चला कि उस का बेटा घायल अवस्था में घर में पड़ा हुआ है तो उन्होंने तुरंत आसपड़ोस के लोगों को बुलाया. उन की मदद से अमरनाथ को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान अस्पताल में ही उस ने दम तोड़ दिया.
वारदात की सूचना मिलते ही अकलतरा पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की छानबीन करने लगी. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

अलकतरा के सीएसपी कविता ठाकुर ने बताया कि अमरनाथ की हत्या के बाद आरोपी युवराज बिलासपुर के लिए भाग गया था, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद उसे 27 जुलाई, 2025 रविवार को अरेस्ट कर लिया. पुलिस ने युवराज से पूछताछ के बाद उस की प्रेमिका ईश्वरी को भी हिरासत में ले लिया. पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है.

MP Crime News : दगाबाज प्यार

MP Crime News : शादीशुदा 25 वर्षीय कविता गुप्ता के कदम पड़ोसी 25 वर्षीय नमन विश्वकर्मा की तरफ बहक गए. इस के बाद वह कविता को अपनी बाइक पर न सिर्फ घुमाता, बल्कि उस पर दिल खोल कर पैसे भी खर्च करने लगा. वह कविता पर शादी का दबाव बनाने लगा, लेकिन कविता इस के लिए तैयार नहीं थी. इसी जिद में नमन एक दिन ऐसा कांड कर बैठा कि उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा. आखिर क्या किया नमन ने?

25 मई, 2025 शाम का वक्त था, जब जबलपुर में बरगी डैम के किनारे बसे गांव बरबटी के लोगों ने डैम की तरफ से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी. पहले तो लोगों ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब बच्चे के रोने की आवाज लगातार आती रही तो कुछ लोग डैम की तरफ यह देखने चले गए कि पता नहीं कोई बच्चा इतनी देर से क्यों रो रहा है.

जब गांव वाले वहां पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर चौंक गए. डैम के किनारे एक युवती पड़ी थी. वह खून से लथपथ थी. उस घायल युवती के पास खड़ी 3-4 साल की बच्ची रो रही थी. इसी दौरान किसी ने इस की सूचना बरगी चौकी में फोन द्वारा दे दी. सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज एसआई सरिता पटेल मौके पर पहुंच गईं. उन्होंने देखा कि वहां लगभग 25 साल की निहायत ही खूबसूरत युवती गंभीर रूप से घायल पड़ी थी. जिस के पास खड़ी कोई 3-4 साल की एक बच्ची लगातार ‘मम्मी…मम्मी’ कहते हुए रोए जा रही थी.

एसआई पटेल ने बिना वक्त जाया किए घायल युवती को इलाज के लिए मैडिकल कालेज, जबलपुर भेज दिया. डाक्टरों ने तुरंत उस का इलाज शुरू कर दिया, लेकिन 27 मई को 2 दिन के उपचार के बाद घायल युवती ने दम तोड़ दिया. दम तोडऩे से पहले पुलिस को युवती अपना नाम कविता गुप्ता निवासी बलदेव बाग, जबलपुर बता चुकी थी. उस ने पुलिस को यह भी बताया कि उस के ऊपर हमला उस के पड़ोस में रहने वाले युवक नमन विश्वकर्मा ने किया था.

कविता गुप्ता की मौत के बाद पुलिस ने बलदेव बाग के ही रहने वाले नमन विश्वकर्मा के खिलाफ हत्या का मामला बीएनएस की धारा 109, 109 (1) के तहत दर्ज कर लिया. नमन आपराधिक प्रवृत्ति का युवक था. उस के खिलाफ थाने में कई मामले दर्ज थे. आरोपी नमन को गिरफ्तार करने के लिए एसपी (जबलपुर) संपत उपाध्याय ने एडिशनल एसपी (ग्रामीण) समर वर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में एसपी (सिटी) अंजुल अयंक मिश्रा, थाना बरगी के एसएचओ कमलेश चौरिया, बरगी नगर चौकी इंचार्ज सरिता पटेल, एसआई मुनेश लाल कोल, एएसआई भैयालाल वर्मा, हैडकांस्टेबल उदय प्रताप सिंह, कांस्टेबल अरविंद सनोडिया, मिथलेश जायसवाल, शेर सिंह बघेल, सतन मरावी, राजेश वरकडे, सत्येंद्र मरावी, सुखदेव अहाके, रवि शर्मा आदि को शामिल किया गया.

पुलिस के पास आरोपी का मोबाइल नंबर पहले से मौजूद था. उस घटना के बाद से वह बंद था, इसलिए पुलिस मुखबिरों की मदद से नमन की तलाश में जुटी थी. हफ्ते भर बाद पहली जून को पुलिस को खबर मिली कि नमन घटनास्थल के पास जंगल में छिपा कर रखी अपनी बाइक लेने बरगी डैम आया है. इस सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस चौकी में 25 वर्षीय नमन विश्वकर्मा से पूछताछ की तो वह कविता गुप्ता की हत्या में अपना हाथ होने से इंकार करता रहा, लेकिन पुलिस ने उस के मोबाइल की लोकेशन और घटना वाले दिन के कुछ सीसीटीवी फुटेज उस के सामने रखे, जिन में वह कविता गुप्ता को बाइक पर बैठा कर बरगी डैम की तरफ आता दिखाई दे रहा था. ये सारे सबूत देख कर उस ने कविता की हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने हत्या के पीछे की सारी कहानी पुलिस के सामने बयां कर दी. पुलिस ने आरोपी नमन विश्वकर्मा के पास से हत्या में प्रयुक्त चाकू और बाइक बरामद कर ली.

मध्य प्रदेश के जिला जबलपुर के कोतवाली थाना इलाके में स्थित संगम कालोनी, बलदेव बाग में रहने वाली कविता गुप्ता का पति पुनीत गुप्ता सिविक सेंटर चौपाटी पर पावभाजी का ठेला लगाता था. पति का सुबह का समय दुकान के लिए माल तैयार करने में निकल जाता था, जिस के बाद शाम को वह अपना ठेला ले कर सिविक सेंटर निकल जाता था. उस के बाद वह देर रात वापस आता था. कविता गुप्ता पढ़ीलिखी और खूबसूरत होने के अलावा माडर्न खयालों की युवती थी. वह जब जींसटौप पहन कर बाजार में निकलती तो न तो कोई उसे शादीशुदा कह सकता था और न किसी खोमचे वाले की पत्नी.

पति खूब प्यार करता था, कमाता भी अच्छा था, इसलिए कविता गुप्ता को पति से केवल एक ही शिकायत थी कि वह उस के लिए उतना समय नहीं निकाल पाता था, जितना वह चाहती थी. शहर में मनाए जाने वाले त्यौहार, उत्सव और दूसरे ऐसे मौकों पर जब लोग परिवार को ले कर घरों से बाहर निकलते थे, तब कविता गुप्ता को अकेले ही बेटी को ले कर उसे शहर की रौनक दिखाने जाना पड़ता था, क्योंकि ऐसे मौकों पर पति का धंधा ज्यादा चलने के कारण वह फ्री होने के बजाए और ज्यादा बिजी रहता था.

कोई 2 साल पुरानी बात है. एक रोज कविता गुप्ता अपनी बेटी को ले कर ग्वारी घाट जाने के लिए निकली, तभी पीछे से बाइक ले कर उस के पड़ोस में रहने वाला युवक नमन विश्वकर्मा आ कर उस से नमस्ते करते हुए बोला, ”भाभीजी, कहां जा रही हैं आप?’’

कविता गुप्ता उसे जानती थी. इसलिए उस ने छोटा सा जबाव दिया, ”ग्वारी घाट.’’

”मैं उसी तरफ जा रहा हूं. चलिए, मैं छोड़ देता हूं आप को.’’

कविता गुप्ता को नमन के साथ बाइक पर बैठने में कोई बुराई नजर नहीं आई, इसलिए अपनी 3 वर्षीय बेटी को गोद में लिए हुए वह नमन के साथ बाइक पर बैठ गई. ग्वारी घाट पर उतर कर उस ने नमन को धन्यवाद दिया. नमन बोला, ”अभी अपना धन्यवाद बचा कर रखिए. मैं 2 घंटे बाद इसी जगह मिलूंगा. आप को वापस ले चलूंगा, तभी धन्यवाद दे देना.’’ कहते हुए वह कविता गुप्ता का जवाब सुने बिना वहां से चला गया.

फिर 2 घंटे बाद नमन वहां आया तो कविता बेटी के साथ वहीं मिली. नमन ने उसे बाइक पर बिठाया और उसे वापस घर छोड़ दिया. उसी समय उस ने कविता को अपना फोन नंबर देते हुए कहा, ”जब भी कहीं जाना हो फोन कर दीजिए, आप की मदद कर के मुझे खुशी होगी.’’

कविता गुप्ता ने उस का नंबर घर जा कर मोबाइल में सेव कर लिया. लेकिन यह बात उसे परेशान कर रही थी कि आखिर नमन उस का इतना ध्यान क्यों रखना चाहता है. इसलिए घंटे भर बाद ही उस ने नमन को फोन लगा कर उस रोज की मदद के लिए धन्यवाद देते हुए उस की इस मेहरबानी का कारण भी पूछा.

नमन बोला, ”अरे, कोई खास कारण नहीं है भाभीजी. मैं जानता हूं कि भैया बिजी रहते हैं, इसलिए आप को अकेले परेशान होते देख कर मुझे अच्छा नहीं लगता.’’

कविता गुप्ता हाजिरजवाब थी, सो तुरंत बोली, ”इस अच्छा न लगने का कारण?’’

”कारण तो कई हो सकते हैं. वक्त आने पर बता भी दूंगा, लेकिन फिलहाल तो इसे पड़ोसी धर्म मान लो.’’

कविता गुप्ता को नमन का जवाब अच्छा लगा, जिस से दोनों काफी देर तक बातें करते रहे. इसी बीच कविता गुप्ता को मालूम चला कि नमन के खिलाफ मारपीट आदि के कई मामले थाने में दर्ज हैं. इस से उस ने सोच लिया कि वह नमन को समझाबुझा कर सही रास्ते पर चलने को प्रेरित करेगी. उसे भरोसा था कि नमन उस की बात नहीं टाल सकता.

इस के बाद एक रोज कविता गुप्ता ने उस से कहा, ”नमन, मैं ने सुना है कि तुम्हारे खिलाफ थाने में कुछ मामले दर्ज हैं. क्यों लड़तेझगड़ते हो? मेरी बात सुनो, आज से तुम अच्छे आदमी बनोगे.’’

”भाभीजी, मैं किस के लिए अच्छा बनूं, कोई तो ऐसा नहीं, जिस के लिए मैं खुद को बदलूं.’’

”मेरे लिए बदल लो खुद को, यह समझो कि आज से मैं तुम्हारी दोस्त हूं.’’

”ठीक है, इस बात पर भाभीजी आप को मेरे साथ कौफी पीने भेड़ाघाट चलना होगा.’’ नमन ने कहा.

कविता गुप्ता ने नमन की बात मान ली. जिस के बाद दोनों शाम तक भेड़ाघाट में घूमते रहे, फिर नमन ने उसे घर छोड़ दिया.

वास्तव में कविता गुप्ता उस रोज काफी खुश थी क्योंकि कोई था, जो उस के घूमनेफिरने का शौक पूरा करवाने को तैयार था. लेकिन रोजरोज नमन के साथ घूमने जाने का नतीजा यह हुआ कि दोनों एकदूसरे के बेहद करीब आ गए. पहली मुलाकात के 2 माह बीततेबीतते उन के बीच पनपा प्यार यहां तक पहुंच गया कि उन के बीच शारीरिक संबंध भी कायम हो गए. कविता गुप्ता के लिए यह कोई प्लानिंग का हिस्सा नहीं था, बल्कि बस सब कुछ यूं ही अचानक होता गया. फिर जैसा कि होता है, वक्त के साथ यह रिश्ता उस के मन को भाने भी लगा, जिस से वह नमन के साथ लगभग रोज ही एकांत में समय बिताने लगी.

बीचबीच में वह नमन को लड़ाईझगड़े से दूर रहने की हिदायत भी देती रहती, लेकिन वक्त के साथ नमन कविता गुप्ता के साथ शादी करने के सपने देखने लगा था. इसलिए साल भर के प्यार के बाद एक रोज नमन ने कविता के सामने प्रस्ताव रखा कि वह पति को छोड़ कर उस से शादी कर ले. यह सुन कर कविता गुप्ता चौंक गई. उस ने नमन को टालने के लिए बोल दिया कि ठीक है, मुझे सोचने का समय दो.

इसी बीच एक रोज वह शादी समारोह में शामिल होने गई थी. इसी दौरान नमन ने उसे फोन किया, लेकिन समारोह में शोरगुल होने की वजह से वह उस की काल रिसीव नहीं कर पाई तो नमन उस के घर आ धमका, जहां कविता का पति पुनीत गुप्ता मिला. नमन ने पुनीत से कविता के बारे में पूछा. इसी बात को ले कर उस का पुनीत से झगड़ा हो गया. तब नमन ने उस के पति के साथ मारपीट की और घर में तोडफ़ोड़ कर दी. कविता जब घर लौटी तो पुनीत ने उसे सारी बात बता दी कि यह सब नमन विश्वकर्मा ने किया है. इस घटना के बाद कविता गुप्ता समझ गई कि कितना भी घी गुड़ के साथ नीम खाओ वह कभी मीठा नहीं हो सकता, इसलिए उस ने नमन से फोन पर बात करना पूरी तरह बंद कर दी.

इस से नमन चिढ़ गया और कविता गुप्ता से आरपार का फैसला करने की बात सोच वह 25 मई, 2025 को उस के घर जा पहुंचा. उस समय पुनीत गुप्ता घर पर नहीं था. आखिरी बार बैठ कर बात करने की बात कह कर वह कविता गुप्ता को ले कर पल्सर बाइक से बरगी डैम पर बरबटी गांव के पास पहुंचा. उस ने कविता गुप्ता से शादी करने वाली बात दोहराई और उस से साथ में भाग चलने को कहा, लेकिन कविता गुप्ता ने साफ मना कर दिया कि वह पति को छोड़ कर नहीं जा सकती.

तब नमन उस से झगडऩे लगा और उस ने बटन वाला चाकू निकाल कर उस के ऊपर लगातार कई वार किए. उसे मरा जान कर वह वहां से भाग गया. जाते समय उस ने अपनी बाइक रमनपुर घाटी के पास जंगल में छिपा दी और कपड़े बदल कर बस से सिवनी, फिर रायपुर चला गया. 2 दिन बाद वह अपनी छिपाई हुई बाइक लेने आया, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपी नमन विश्वकर्मा की निशानदेही पर कत्ल में प्रयुक्त चाकू, खून सने कपड़े, बाइक बरामद करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. MP Crime News

 

 

Hindi love Story in Short : लव मैरिज और फिर सिर कलम

Hindi love Story in Short : बेंगलुरु के रहने वाले 28 वर्षीय शंकर और 24 वर्षीय मानसा ने 5 साल पहले लव मैरिज की थी. उन के एक बेटी भी थी. फिर एक दिन ऐसा क्या हुआ कि पत्नी को दिलोजान से चाहने वाला शंकर पत्नी की हत्या कर सिर थाने ले गया?

शंकर बस से अपने किराए के घर की तरफ लौट रहा था. शाम का वक्त था. वह एक कंपनी में काम करता था. उस रोज उस की स्कूटी खराब हो गई थी. उसे ठीक करवाने के लिए वह उसे सुबह ही मैकेनिक के पास छोड़ आया था. पहले उसे स्कूटी लेनी थी, फिर घर जाना था. वह थका हुआ था और परेशान भी था. भीड़भाड़ वाली बस में उसे बैठने की सीट नहीं मिली थी. किसी तरह सीट मिली तो बैठ गया था. दिमाग में कई बातें चल रही थीं. पत्नी मानसा के ताने, बढ़ा हुआ खर्च, ऊपर से अचानक स्कूटी ठीक कराने का खर्च…

वह अपने उलझे हुए विचारों में खोया था. मन में ही अचानक आए खर्च का हिसाबकिताब लगा रहा था. इसी साल किराए का कमरा लेने और बेटी को स्कूल में दाखिले पर भी काफी खर्च आ गया था. ऊपर से पत्नी की फरमाइशें कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं. अब नया खर्च स्कूटी मरम्मत का आ गया था. कंपनी से कर्ज भी ले चुका था. उस के पीछे सीट पर बैठी 2 औरतों की बातें सीधे उस के कानों तक आ रही थीं, जिस से उस का ध्यान पैसे का हिसाब लगाने में बंट रहा था. तभी बस में ब्रेक का झटका लगा. शंकर ने खुद को संभाला, लेकिन दोनों औरतें अपनी बातों में मशगूल थीं.

”अपने बच्चे को अकेली छोड़ कर गांव गई थी?’’ एक औरत बोली.

”हां, तो क्या हुआ? मैं अपनी बड़ी बेटी को अच्छी तरह समझा कर गई थी. कहीं इधरउधर मत जाना. जरूरत पडऩे पर आंटी से मदद मांग लेना.’’ दूसरी औरत बोली.

”कौन आंटी?’’ पहली औरत ने पूछा.

”अरे, वो हम लोगों की उम्र की है. आंटी तो मैं ने अपने बच्चों के लिए कहा. नई किराएदार है. पतिपत्नी दोनों ही सुबहसुबह काम पर जाते हैं. उस की भी एक बेटी है. मेरे बच्चों से घुलीमिली है.’’ दूसरी औरत समझाती हुई बोली.

”अरे, वह औरत! उसे कई बार मैं ने दिन में कमरे पर एक मर्द के साथ देखा है. पहली बार जब वह आया था, तब उस ने मुझ से ही उस औरत का पता पूछा था.’’

”तुम उस से मिल चुकी हो?’’

”हां, उसी रोज मिली थी पहली बार. पूछने पर उस ने बताया था कि वह उस के रिश्ते का भाई है.’’ पहली औरत बोली.

”अरे नहीं, वह कोई भाईवाई नहीं है.ऐसे ही उस के गांव का है. छोड़ो न, क्या करना उस के बारे में जान कर? क्या करना हमें दूसरों की जिंदगी में झांक कर?’’ दूसरी औरत बोली.

”मैं तो उस के मरद को पहचानती भी नहीं हूं.’’ पहली औरत बोली.

”मैं ने भी उसे कहां कभी देखा है.’’

शंकर को पत्नी पर हो गया शक

शंकर उन की बातों से इतना तो समझ ही गया था कि ये दोनों औरतें उस की पड़ोसी हैं. वे उस की और पत्नी मानसा के बारे में ही बातें कर रही हैं. शायद उसे नहीं पहचानती हैं या फिर वे उस की पीठ पीछे बैठी हैं, इसलिए पहचान न पाई हों. जो भी हो, उन की बातों से शंकर और भी विचलित हो गया था, यह सुन कर कि उस के पीछे पत्नी से मिलने कोई मर्द भी आता है. पड़ोसी उसे दूर का भाई समझते हैं. जल्द ही उस का बस स्टाप आ गया, जहां उस ने बाइक मरम्मत के लिए दी थी. वह बस से उतर गया.

उस रोज उसे कमरे पर पहुंचने में काफी देर हो गई थी. मनसा मुंह फुलाए बैठी थी. उसे देखते ही उस पर बरस पड़ी. दूध,चीनी, चाय, सब्जी के घर में नहीं होने से बात शुरू हुई और घरगृहस्थी की समस्याओं की शंकर पर बौछार होने लगी. बात बढ़तेबढ़ते तीखी बहस में बदल गई. काफी देर तक उन के बीच तूतूमैंमैं चलती रही. अंत में बात मनसा के मायके जाने पर रुक गई. शंकर के लिए उस के मायके जाने का मतलब था एक और खर्च. उस वक्त वह चुप लगा गया. मनसा से मिलने आने वाले किसी मर्द के बारे में जानने की शंका का समाधान नहीं निकल पाया.

घर में जो कुछ पका था, खा कर सोने चला गया. बैड के पास में अपनी बिछावन बिछा ली थी. काफी थका था, फिर भी नींद नहीं आ रही थी. दिमाग में एक ही बात घूम रही थी कि आखिर उस के घर में नहीं रहने पर कौन पत्नी मनसा से मिलने आता है?

28 वर्षीय शंकर बेंगलुरु जिले के हेन्नागारा गांव का निवासी था, जिस ने करीब 5 साल पहले 24 साल की मनसा से लव मैरिज की थी. वह उस के साथ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके हीलालिगे गांव, चंदापुरा (अनेकल तालुक) में किराए के मकान में रहता था. उस की एक 4 वर्षीय बेटी थी. घरपरिवार का खर्च चलाने के लिए दोनों पतिपत्नी अलगअलग कंपनियों में काम करते थे. शंकर को कुछ समय से पत्नी मनसा पर शक था कि उस के किसी और पुरुष से अवैध संबंध हैं. बस में 2 महिला यात्रियों की बातों से उस का शक और भी गहरा गया. इसी बात को ले कर दोनों के बीच अकसर झगड़ा होने लगा.

इस का पता लगाने के लिए शंकर ने एक योजना बनाई. वह झूठ बोल कर अपने काम पर चला गया कि रात को घर नहीं लौटेगा. किंतु रात को ही वापस लौट आया. उस रोज तारीख थी 3 जून. वहां उस ने मनसा को एक ही कमरे में गैरमर्द के साथ पकड़ लिया. उस वक्त मनसा ने उसे अपने दूर के रिश्तेदार का भाई बता कर उस के साथ के अवैध संबंध को सिरे से इनकार कर दिया. अगले रोज गुस्से में मनसा अपने मायके चली गई. किंतु 2 दिनों के बाद ही 6 जून की दोपहर को वह अपनी बेटी के साथ वापस शंकर के पास लौट आई. शाम को जब शंकर अपनी ड्यूटी से लौटा, तब मनसा को घर पर देख कर चौंक गया.

उस ने समझा कि मानसा अपनी गलती मान लेगी. किंतु उन के बीच तो फिर बहस होने लगी. मनसा ने अपनी बेटी का हवाला दे कर समझौता करने की कोशिश की और उस की कसम भी खाने लगी. जैसे ही मनसा ने खुद को दूध का धुला साबित करने के लिए अपनी बेटी के सिर पर हाथ रखा, शंकर आगबबूला हो गया. उस ने आव न देखा ताव, तुरंत घर में छिपा कर रखी दरांती निकाल लाया. शंकर के हाथ में दरांती देख कर मनसा सहम गई, लेकिन अगले पल अकड़ती हुई उस के सामने आ कर खड़ी हो गई. चीखती हुई बोली, ”तुम मुझे मार डालोगे क्या…मैं तुम्हारी बीवी हूं…हम ने इसी दिन के लिए अपनी मरजी से शादी की थी? मैं…मैं बेटी की कसम खा रही हूं, फिर भी मुझ पर शक करते हो!’’

पत्नी की हत्या कर सिर ले कर पहुंचा थाने

यह सुन कर शंकर आपे से बाहर हो गया था. उस ने तेजी से दरांती उस की गरदन पर चला दी. अगले पल मनसा का धड़ जमीन पर था और उस का सिर दूर जा गिरा था. उस का शक और गुस्सा मनसा पर भारी पड़ा था. कुछ समय तक हाथ में पकड़ी दरांती से टपकते खून को देखता रहा. उस वक्त वहां का माहौल ठीक दक्षिण भारतीय फिल्म के किसी भयावह हिंसक दृश्य की तरह बन गया था. जमीन पर खून ही खून फैला पड़ा था. एक कोने में उस का औंधा पड़ा सिर था. शंकर ने दोनों पर एक नजर डाली.

उस ने दरांती को एक किनारे फेंका और दूसरे हाथ से सिर के लंबे बालों को पकड़ कर कटा सिर उठा लिया. उसे एक थैले में रखा, फिर एक झटके में घर से बाहर निकला. उस की स्कूटी वहीं बाहर खड़ी थी, जिसे ले कर वह चल पड़ा. उस ने पत्नी की लाश को घर में ही छोड़ दिया. थोड़ी देर में ही वह सूर्य नगर थाने में था. सिर के थैले को थानेदार के सामने टेबल पर रख दिया और धीमी आवाज में बोला, ”साहब, मैं ने अपनी पत्नी का खून कर दिया है. यह है उस का कटा सिर.’’

उस वक्त रात के 11 बज चुके थे. थाने में मौजूद तमाम पुलिसकर्मी शंकर को आश्चर्य से देखने लगे थे.

सभी हैरान थे कि अपनी पत्नी का सिर काट कर वह आत्मसमर्पण करने आया था. उस के चेहरे पर उस वक्त भी आक्रोश की रेखाएं खिंची हुई थीं. अफसोस या पश्चाताप नाम की जरा भी झलक नहीं थी. पुलिस अधिकारी ने शंकर के आत्मसमर्पण के आधार पर उस के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया. साथ ही मनसा के फेमिली वालों को इस की सूचना दे दी. अगले दिन 7 जून की सुबह मनसा की मम्मी थाने आई. पुलिस की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि शंकर ने इस हत्या की पहले से ही योजना बना ली थी. हत्या से पहले ही उस ने पास की एक दुकान से दरांती खरीदी थी.

पूरे इलाके में दिल दहला देने वाली इस घटना की चर्चा होने लगी थी कि एक व्यक्ति ने प्रेम प्रसंग और शक के चलते अपनी पत्नी का सिर कलम कर दिया था. चौंकाने वाली चर्चा यह भी होने लगी थी कि हत्यारे ने कटा हुआ सिर पुलिस के पास ले जा कर आत्मसमर्पण कर दिया था. सूर्य नगर थाने की पुलिस ने घटनास्थल पर जा कर गहन जांच की. वहीं हत्या में इस्तेमाल दरांती भी बरामद कर ली गई. पासपड़ोस से पूछताछ पर मालूम हुआ कि उन के घर से अकसर झगडऩे की आवाजें आती रहती थीं, जिसे वे पतिपत्नी के बीच का निजी मामला समझ कर नजरंदाज कर दिया करते थे. इस पूरे मामले के संबंध में बेंगलुरु (ग्रामीण) के एसपी सी.के. बाबा ने मीडिया को विस्तार से जानकारी दी.

मनसा की मम्मी ने पुलिस को बताया कि शंकर हमेशा उन की बेटी से झगड़ता रहता था. वह शराब के नशे में गालियां देता था. मारतापीटता था. हत्या के 2 दिन पहले झगड़ कर मनसा उस के पास आई थी. उस ने अपने पति की बहुत शिकायत की थी. फिर भी उन्होंने उसे समझाबुझा कर वापस भेज दिया था.

कथा लिखे जाने तक शंकर से पूछताछ करने के बाद जेल भेज दिया था. उस की बेटी को मनसा की मम्मी अपने साथ ले गई थी. Hindi love Story in Short

 

 

Hindi Crime Story : जोंक बन गया शादी से पहले का प्यार

Hindi Crime Story : निरंजन कुमार से शादी हो जाने के बाद भी 22 वर्षीय मधु कुमारी का 21 वर्षीय प्रेमी रोशन कुमार से प्यार जारी रहा. किसी न किसी बहाने रोशन मधु की ससुराल भी आनेजाने लगा था. जोंक बन चुके इन के प्यार से निरंजन कुमार भी परेशान रहने लगा. आखिर अवैध संबंधों का यह मामला एक दिन ऐसा खूनी खेल बन गया कि…

निरंजन कुमार उर्फ अंकुश अपनी 22 वर्षीय पत्नी मधु कुमारी को बहुत ही प्यार करता था. इसी कारण वह उसे किसी भी गलती पर डांटताफटकारता नहीं था, लेकिन रोशन के कारण मियांबीवी के दिलों में खटास पैदा होने लगी थी. जिस के बाद वह मन ही मन रोशन से नफरत करने लगा था. इतना ही नहीं, वह रोशन को अपने और पत्नी बीच से निकाल फेंकने के लिए कोई रास्ता खोजने लगा था. रोशन को ले कर मियांबीवी के बीच तकरार बढ़ी तो यह बात निरंजन के परिवार के सामने भी आ गई.

एक दिन मधु कुमारी के ससुराल वाले किसी काम से बाहर गए हुए थे. उस दिन वह घर में अकेली थी. यह बात 21 वर्षीय रोशन कुमार को पता चली तो वह मधु से मिलने पहुंच गया. मौका पाते ही दोनों दुनियादारी को भूल कर मौजमस्ती में जुट गए. उस दिन इत्तफाक की बात यह रही कि उसी वक्त निरंजन अपने घर आ गया. निरंजन को आते देख रोशन तो किसी तरह से वहां से भाग गया, लेकिन उस का गुस्सा कहर बन कर मधु कुमारी पर टूट पड़ा. उस दिन उस ने पत्नी को लातघंूसों से खूब मारा. उस दिन मधु ने निरंजन को वचन दिया कि भविष्य में वह रोशन के साथ कोई संबंध नहीं रखेगी.

उस के बाद भी निरंजन ने रोशन की हत्या करने का प्लान बना लिया. इस के लिए उस ने पत्नी को भी अपनी योजना में शामिल करने की सोची. उस ने पत्नी से कहा, ”मधु, मैं तुझे पूरी तरह से माफ कर सकता हूं, लेकिन उस के बदले तुझे एक काम करना होगा. तुझे रोशन को फोन कर के मेरे द्वारा बताई जगह पर बुलाना होगा. अगर तूने इस में भी कोई चालाकी की तो मैं रोशन से पहले तेरी ही जान ले लूंगा.’’

मधु कुमारी को धमकाने के बाद उसी दिन निरंजन ने अपने कुछ साथियों को इस काम के लिए तैयार कर लिया था.

16 दिसंबर, 2024 को योजनानुसार निरंजन ने पत्नी से रोशन को फोन करने को कहा. मधु ने रोशन को फोन करते हुए कहा कि वह अपनी ससुराल से भाग कर बिहार के जिला मुंगेर के गांव नया रामनगर बनरघड़ पहाड़ी के पास पहुंच गई है. वह जितनी भी जल्दी हो सके, वहां पर पहुंचे.

पे्रमिका मधु का फोन सुनते ही रोशन उस से मिलने के लिए बेचैन हो उठा. उस ने तुरंत ही अपने कपड़े बदले और अपने फेमिली वालों को कुछ बताए बिना ही घर से निकल गया. घर से निकल कर जैसे ही वह पहाड़ी के पास पहुंचा, उसे वहीं पर मधु खड़ी मिली. जबकि उस का पति और उस के साथी पास में ही छिपे हुए थे. रोशन के आते ही सभी बाहर निकल आए और उस को पकड़ कर पीटने लगे. उन्होंने पत्थरों से कुचलकुचल कर उस की हत्या कर दी. उस के खत्म होते ही निरंजन और उस के साथियों ने उस की लाश पास की झाडिय़ों में फेंक दी. इस के बाद सभी अपनेअपने घर आ गए थे.

21 दिसबंर, 2024 को बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज थाना क्षेत्र के गांव सादपुर मासूमगंज निवासी ब्रह्मïदेव थाने पहुंचे. थाने पहुंचते ही उन्होंने पुलिस को बताया कि उन का 21 वर्षीय बेटा रोशन कुमार 16 दिसंबर को किसी का फोन आने के बाद घर से निकला था, लेकिन उस के बाद वह घर वापिस नहीं आया. ब्रह्मïदेव ने पुलिस को बताया कि उन्होंने उसे सब जगह ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता न चल सका. जिस के बाद असरगंज पुलिस ने ब्रह्मïदेव की तरफ से रोशन की गुमशुदगी दर्ज कर ली थी. तब पुलिस ने रोशन को हरसंभव स्थान पर खोजा, लेकिन कहीं से भी उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी.

24 दिसबंर 2024 को बिहार के नयारामनगर थाने के अंतर्गत कोल पहाड़ी पर कुछ चरवाहे जानवर चराने गए हुए थे. उसी दौरान उन को वहां पर एक व्यक्ति की लाश पड़ी नजर आई. पहाड़ी पर मिली लाश की जानकारी चरवाहों ने ग्रामीणों को दी. ग्रामीणों ने यह सूचना नया रामनगर थाने के एसएचओ विनोद कुमार झा को दी. सूचना पाते ही विनोद कुमार एफएसएल टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. सूचना पाते ही एसपी सैयद इमरान मसूद भी मौके पर पहुंच गए थे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने जांच पड़ताल की, जिस से पता चला कि मृतक कोई 21 वर्ष का रहा होगा. शव की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उस का चेहरा भी पहचान में नहीं आ रहा था. उस की हालत को देखते हुए पुलिस ने अनुमान लगाया कि वह शव 3 से 4 दिन पहले का था. घटनास्थल पर कोई साक्ष्य भी मौजूद नहीं थे, जिस से अंदाजा लगाया गया कि उस व्यक्ति की दूसरी जगह हत्या कर बाद में पहाड़ी पर ला कर डाल दिया था.

इस शव के पहाड़ी जंगल में पड़े होने के कारण उस की शिनाख्त भी नहीं हो पाई थी. साथ ही शव की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी, उस का सैंपल भी नहीं लिया जा सकता था. इसी कारण पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की. बाद में पुलिस ने उस शव को पोस्टमार्टम हेतु मुंगेर सदर अस्पताल भेज दिया था. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने उस शव को 72 घंटे के लिए मोर्चरी में रखवा दिया था.

अपनी काररवाई को पूरा करते ही पुलिस ने उस शव की पहचान करने के लिए जिले के सभी थानों को मृतक की फोटो भिजवा दी थी. उस के साथ ही पुलिस ने उस की फोटो को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर दिया. मृतक की तसवीर वायरल होते ही असरगंज थाना क्षेत्र के सादपुर मासूमगंज निवासी ब्रह्मïदेव ने उस की पहचान अपने 21 वर्षीय बेटे रोशन के रूप में की. मृतक की पहचान हो जाने के बाद असरगंज थाना पुलिस ने ब्रह्मादेव को उस की शिनाख्त करने के लिए नयारामनगर थाना भेज दिया, जहां पर मृतक के फेमिली वालों ने रोशन के हाथ में पहने मठिया, गमछा और उस के कपड़ों से उस की शिनाख्त रोशन के रूप में कर ली.

शव की शिनाख्त होते ही पुलिस ने उस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तो पता चला कि युवक के शरीर पर किसी भारी वस्तु से प्रहार कर हत्या की गई थी. उस के शरीर पर चोटों के अनेक निशान भी पाए गए थे. ब्रह्मïदेव ने भी पुलिस को बताया कि किसी का फोन आने के बाद ही वह घर से निकला था. जिस से साफ जाहिर था कि किसी ने उसे फोन कर के बुलाया और बाद में उस की हत्या कर पहाड़ी पर ले जा कर डाल दिया था. तब पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर मृतक के मोबाइल की लोकेशन और काल डिटेल्स को खंगाला.

इस जांच से पता चला कि मृतक रोशन और मधु कुमारी नाम की युवती दिन में कई बार बात करते थे. जिस दिन रोशन गायब हुआ था, उस दिन भी रोशन की उसी नंबर पर आखिरी बात हुई थी. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने मधु के फोन की लोकेशन पर उसे सफियाबाद थाना क्षेत्र के हेरूदियारा कासिम बाजार से गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तार करते ही पुलिस ने उस का मोबाइल जब्त कर लिया. थाने में उस से कड़ी पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में मधु ने बताया कि उस ने रोशन की हत्या अपने पति निरंजन के साथ मिल कर की थी. मधु कुमारी से पूछताछ के बाद इस केस में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी.

बिहार के जिला मुंगेर में एक गांव पड़ता है असरगंज सादपुर मासूमगंज. इसी गांव में रहता था ब्रह्मïदेव शाह का परिवार. ब्रह्मïदेव के 6 बच्चों में 3 बेटियां और 3 बेटे थे. बेटों में रोशन तीसरे नंबर का था. ब्रह्मïदेव मेहनतमजदूरी कर के अपने परिवार का लालनपालन करते आ रहे थे. उसी मेहनतमजदूरी के बल पर उन्होंने बच्चों को लिखायापढ़ाया भी था. रोशन शुरू से ही पढ़ाईलिखाई से मन चुराता था. पढ़ाई दौरान ही वह गलत संगत में पड़ गया. वह हर समय आवारा किस्म के लड़कों के साथ समय गुजारने लगा था.

ब्रह्मïदेव के घर से कुछ ही दूरी पर रहता था रामचंद्र का परिवार. मधु कुमारी उसी की बेटी थी. मधु कुमारी जैसे देखने भालने में सुंदर थी, उस से कहीं ज्यादा तेजतर्रार भी थी. उसे शुरू से ही सजसंवर कर रहने का शौक था. वह रोशन की हमउम्र ही थी. साथ ही उन का एकदूसरे के घर पर आनाजाना भी था.

जब कभी भी रोशन अकेला होता तो किसी भी बहाने से उस के घर पर चला जाता था. दोनों जवानी की दहलीज पर पांव रख चुके थे. दोनों के बीच शुरू से ही आकर्षण पैदा हो गया था. फिर जवानी की दहलीज पर पांव रखते ही दोनों के बीच कब चाहत पैदा हो गई, दोनों इस बात से अंजान थे.

एक दिन ऐसा भी आया कि दोनों का एकदूसरे को देखे बिना मुश्किल होने लगा था. उन के दिलों में प्यार पनपते ही एकदूसरे की चाहत में मर मिटने लगे.

एक दिन की बात है, दोपहर का समय था. मधु कुमारी अपने घर में अकेली थी. उस के घर के बाकी सदस्य किसी काम से बाहर गए हुए थे. रोशन अचानक उस से मिलने पहुंचा. उस वक्त मधु घर के काम में लगी हुई थी. मधु को घर पर अकेला पाते ही रोशन ने उसे पीछे से अपनी बांहों में भर लिया.

उस दौरान मधु भी उस की इस हरकत का विरोध नहीं कर सकी. शायद वह भी इस दिन का कब से इंतजार कर रही थी. उस की बाहों के आगोश में रहते हुए वह उस से प्यारभरी बातें करने लगी थी. वे खुद पर कंट्रोल नहीं कर सके और बातों ही बातों में दोनों सामाजिक मर्यादाओं को ताख पर रख कर एकदूसरे में समाते चले गए.

उस दिन दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते कायम हुए तो अकसर ही अवसर मिलते ही अपनी हसरतें पूरी करने लगे थे. हालांकि दोनों ही समाज की नजरों से छिपतेछिपाते अपने दिलों के अरमानों को ठंडा करते आ रहे थे, लेकिन यह बात एक दिन मधु के फेमिली वालों के सामने जा पहुंची थी.

इस जानकारी के मिलते ही मधु के फेमिली वालों ने उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी. उस वक्त उन्होंने मधु को काफी डांटफटकार भी लगाई. उस के साथ ही मधु के पापा रामचंद्र ने रोशन को खरीखोटी सुनाते हुए अपने घर आने से साफ मना कर दिया था.

अपनी बेटी की हरकतों को देखते ही रामचंद्र ने उस की शादी के लिए लड़के की तलाश शुरू कर दी थी. थोड़ी मेहनत के बाद जल्दी ही उन्हें एक लड़का भी मिल गया. वह साफियाबाद के हेरू निवासी निरंजन कुमार उर्फ अंकुश था. दोनों तरफ से बात पक्की होते ही वर्ष 2022 में सामाजिक रीतिरिवाज से मधु कुमारी की शादी निरंजन कुमार उर्फ अंकुश से हो गई थी.

उस वक्त निरंजन दिल्ली में नौकरी करता था. निरंजन खूबसूरत मधु को पा कर बेहद खुश था, लेकिन निरंजन से मधु बिलकुल खुश नहीं हुई थी. उस के खुश न होने का कारण रोशन था. उस के दिलोदिमाग पर प्रेमी रोशन की छवि ही छाई हुई थी. वह उस के साथ ही शादी कर के अपना घर बसाने का सपना देखती आ रही थी, जिस के बिना वह एक पल भी काटने के लिए राजी नहीं थी.

रोशन ने 12वीं तक पढ़ा था. उस के बाद उस ने कई जगह पर सरकारी नौकरियों के लिए एप्लाई किया, लेकिन उस को कहीं भी नौकरी नहीं मिली. मधु की शादी के बाद वह भी दिल्ली में काम करने के लिए चला गया. दिल्ली जाने के बाद रोशन एक कंपनी में काम करने लगा. लेकिन उस वक्त भी उस के दिल में मधु ही छाई हुई थी. वह भी उस का प्यार पाने के लिए दिनरात उस की विरह की अग्नि में तप रहा था. उस का मधु के बिना दिल्ली में मन नहीं लग रहा था. फिर वह किसी न किसी बहाने से दिल्ली से काम से छुट्टी ले कर घर चला आता था.

यही हाल मधु कुमारी के दिल का भी था. उस का पति निरंजन दिल्ली में काम करता था. उसे ससुराल में उस के बिना अकेले ही रहना पड़ता था. मधु भी पति के दिल्ली जाने के बाद ससुराल में कम मायके में ज्यादा समय बिताने लगी थी, लेकिन उस वक्त उस की मुलाकात रोशन से नहीं हो पाती थी.

एक दिन की बात है. रोशन को प्रेमिका मधु की कुछ ज्यादा ही याद सता रही थी. काफी दिन से उस ने मधु कुमारी को देखा नहीं था. एक दिन रोशन ने प्रण किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह मधु से उस की ससुराल मिलने जरूर जाएगा. यही सोचने हुए उस ने एक दिन हिम्मत की और मधु से मिलने उस की ससुराल जा पहुंचा. अचानक रोशन को अपने घर आया देख मधु का चेहरा खिल उठा. उस के दिल में तरहतरह के सपने आने लगे, लेकिन उसी दिन अचानक ही उस का पति निरंजन भी दिल्ली से छुट्टी ले कर घर आ गया. निरंजन को घर आया देख मधु का चेहरा ही उतर गया. फिर भी उस ने किसी तरह से अपने को संभाला.

उस रात रोशन उसी की ससुराल में रुक गया था. निरंजन, रोशन और मधु कुमार देर रात तक आपस में बातें करते रहे. अगले दिन सुबह होते ही रोशन अपने घर चला आया, लेकिन उस रात निरंजन को मधु और रोशन की बात सुन कर दोनों पर कुछ अजीब सा शक जरूर हो गया था. लेकिन यह बात उस ने मन ही मन में रखी.

कुछ समय के अंतराल पर एक दिन निरंजन मधु को साथ ले कर अपनी ससुराल गया हुआ था. मधु के मायके जाते ही रोशन ने भी उस के घर के कई चक्कर लगाए. उस के बाद निरंजन का शक और भी गहरा गया. दोनों के संबधों को ले कर निरंजन परेशान हो उठा था. तभी उस ने रोशन की हकीकत जानने के लिए एक अंजान बनते हुए गांव के ही एक व्यक्ति से उस के बारे में जानकारी ली. वह व्यक्ति शायद निरंजन से अंजान था. उस व्यक्ति ने रोशन और मधु कुमारी के बीच संबंधों की सारी पोल खोल कर रख दी. जिसे सुन कर वह बात उस ने अपने दिल में ही दबा ली थी. उस के अगले ही दिन निरंजन को साथ ले कर अपने घर चला गया था.

मधु की ससुराल जाने का रोशन के लिए एक बार रास्ता खुला तो वह अकसर ही जाने लगा था. उस के बारबार जाने से उस के ससुराल वाले भी उसे शक की निगाहों से देखने लगे थे. यह बात जल्दी ही निरंजन तक पहुंच गई थी. जिस को सुन कर निरंजन भी परेशान रहने लगा था. उस के बाद एक दिन निरंजन अपने गांव आया तो उस ने मधु कुमारी को समझाते हुए रोशन को अपने घर बुलाने से साफ मना कर दिया. इस बात को ले कर निरंजन और मधु के बीच हलका विवाद भी पैदा हो गया था.

रोशन के कारण ही उस की बसी बसाई गृहस्थी में आग लगने जा रही थी. अपनी गृहस्थी को बचाने के लिए एक दिन निरंजन ने अपनी बीवी को विश्वास में लेते हुए रोशन की हत्या को अंजाम दे दिया था.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मृतक रोशन की प्रेमिका मधु कुमारी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. उस का पति निरंजन और उस के साथी फरार थे, जिन की तलाश में पुलिस लगी हुई थी. Hindi Crime Story

 

 

Parivarik Kahani : भाभी के प्यार में छोटे भाई ने रची साजिश फिर कर डाला बड़े भाई का कत्ल

Parivarik Kahani : दिव्यांग सिकंदर शरीर से कमजोर था पर मेहनतकश था. लेकिन इस मेहनत में वह पत्नी ललिता की खुशियों का गला घोंटता रहा. सिकंदर की यह लापरवाही ललिता पर भारी पड़ने लगी. इसी दौरान ललिता ने अपने कदम देवर जितेंद्र की तरफ बढ़ा दिए. यहीं से ललिता की ऐसी खतरनाक लीला शुरू हुई कि…

32 वर्षीया ललिता झारखंड के कोडरमा जिले के गांव दौंलिया की रहने वाली थी. उस की मां का नाम राजवती और पिता का नाम दुल्ली था. वह 4 भाइयों की इकलौती बहन थी. इसलिए घर में सभी की लाडली थी. 16 साल की होते ही उस पर यौवन की बहारें मेहरबान हो गई थीं. बाद में समय ऐसा भी आया कि वह किसी प्रेमी की मजबूत बांहों का सहारा लेने की कल्पना करने लगी. गांव के कई नवयुवक ललिता पर फिदा थे. ललिता भी अपनी पसंद के लड़के से स्वयं नैन लड़ाने लगी. इस के बाद तो दिन प्रतिदिन उस की आकांक्षाएं बढ़ने लगीं तो अनेक लड़कों के साथ उस के नजदीकी संबंध हो गए.

दुल्ली के कुछ शुभचिंतक उसे आईना दिखाने लगे, ‘‘तुम्हारी बेटी ने तो यारबाजी की हद कर दी. खुद तो खराब है, गांव के लड़कों को भी खराब कर रही है. लड़की जब दरदर भटकने की शौकीन हो जाए तो उसे किसी मजबूत खूंटे से बांध देना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके, ललिता का विवाह कर दो, वरना तुम बहुत पछताओगे.’’

अपमान का घूंट पीने के बाद दुल्ली ने एक दिन ललिता को समझाया. उसी दौरान राजवती ने ललिता की पिटाई करते हुए चेतावनी दी, ‘‘आज के बाद तेरी कोई ऐसीवैसी बात सुनने को मिली तो मैं तुझे जिंदा जमीन में दफना दूंगी.’’

उस समय तो ललिता ने कसम खा कर किसी तरह अपनी मां को यकीन दिला दिया कि वह किसी लड़के से बात नहीं करेगी. ललिता बात की पक्की नहीं, बल्कि ख्वाहिशों की गुलाम थी. कुछ समय तक ललिता ने अपनी जवानी के अरमानों को कैद रखा, लेकिन अरमान बेलगाम हो कर उस के जिस्म को बेचैन करते तो वह अंकुश खो बैठी और फिर से लड़कों के साथ मटरगश्ती करने लगी. लेकिन यह मटरगश्ती अधिक दिनोें तक नहीं चल सकी. इस की वजह थी कि उस के पिता दुल्ली ने उस का रिश्ता तय कर दिया था. ललिता का विवाह कोडरमा जनपद के ही गांव करौंजिया निवासी काली रविदास के बेटे सिकंदर रविदास से तय हुआ था.

सिकंदर किसान था और काफी सीधासादा इंसान था. लेकिन एक पैर से दिव्यांग था. उस का एक छोटा भाई जितेंद्र रविदास था. सिकंदर की उम्र विवाह योग्य हो चुकी थी, इसलिए ललिता का रिश्ता सिकंदर के लिए आया तो काली रविदास मना नहीं कर सके. 12 साल पहले दोनों का विवाह बड़ी धूमधाम से हो गया. कालांतर में ललिता 3 बेटों की मां बन गई. विवाह के बाद से ही सिकंदर ललिता के साथ अलग मकान में रहने लगा था. सिकंदर का छोटा भाई जितेंद्र अपने मातापिता के साथ रहता था. सिकंदर पैर से दिव्यांग होने पर भी खेतों में दिनरात मेहनत करता रहता था. इसलिए जब वह घर पर आता तो थकान से चूर हो कर सो जाता था, जिस से ललिता की ख्वाहिशें अधूरी रह जाती थीं.

पति के विमुख होने से ललिता बेचैन रहने लगी. इस स्थिति में कुछ औरतों के कदम गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं, ऐसा ही ललिता के साथ भी हुआ. अब उसे ऐसे शख्स की तलाश थी, जो उसे भरपूर प्यार दे और उस की भावनाओं की इज्जत करे. उस शख्स की तलाश में उस की नजरों को अधिक भटकना नहीं पड़ा. घर में ही वह शख्स उसे मिल गया, वह था जितेंद्र. सिकंदर जहां अपने भविष्य के प्रति गंभीर तथा अपनी जिम्मेदारियों को समझने वाला था, वहीं जितेंद्र गैरजिम्मेदार था. जितेंद्र का किसी काम में मन नहीं लगता था. जितेंद्र की निगाहें ललिता पर शुरू से थीं. वह देवरभाभी के रिश्ते का फायदा उठा कर ललिता से हंसीमजाक भी करता रहता था.  जितेंद्र की नजरें अपनी ललिता भाभी का पीछा करती रहती थीं.

दरअसल जितेंद्र ने ललिता को विवाह मंडप में जब पहली बार देखा था, तब से ही वह उस के हवास पर छाई हुई थी. अपने बड़े भाई सिकंदर के भाग्य से उसे ईर्ष्या होने लगी थी. वह सोचता था कि ललिता जैसी सुंदरी के साथ उस का विवाह होना चाहिए था. काश! ललिता उसे पहले मिली होती तो वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाता और उस की जिंदगी इस तरह वीरान न होती, उस की जिंदगी में भी खुशियां होतीं. ललिता के रूप की आंच से आंखें सेंकने के लिए ही वह ललिता के घर के चक्कर लगाता. चूंकि वह घर का ही सदस्य था, इसलिए उस के आनेजाने और वहां हर समय बने रहने पर कोई शक नहीं करता था. जितेंद्र की नीयत साफ नहीं थी, इसलिए वह ललिता से आंखें लड़ा कर और हंसमुसकरा कर उस पर डोरे डाला करता था.

सिकंदर सुबह खेत पर जाता तो दीया बाती के समय ही लौट कर आता. जितेंद्र के दिमाग में अब तक ललिता के रूप का नशा पूरी तरह हावी हो गया था. इसलिए ललिता को पाने की चाह में उस के सिकंदर के घर के फेरे जरूरत से ज्यादा लगने लगे. ललिता घर पर अकेली होती थी, इसलिए जितेंद्र के पास मौके ही मौके थे. एक दिन जितेंद्र दोपहर के समय आया तो ललिता दोपहर के खाने में तहरी बनाने की तैयारी कर रही थी, जिस के लिए आलू व टमाटर काट रही थी. जितेंद्र ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘लगता है, आज अपने हाथों से स्वादिष्ट तहरी बनाने जा रही हो.’’

‘‘हां, खाने का इरादा है क्या?’’

‘‘मेरा ऐसा नसीब कहां, जो तुम्हारे हाथों का बना स्वादिष्ट खाना खा सकूं. नसीब तो सिकंदर भैया का है, जो आप जैसी रूपसी उन को पत्नी के रूप में मिलीं.’’

यह सुन कर ललिता मुसकान बिखेरती हुई बोली, ‘‘ठीक है, मुझ से विवाह कर के तुम्हारे भैया ने अपनी किस्मत चमका ली तो तुम भी किसी लड़की की मांग में सिंदूर भर कर अपनी किस्मत चमका लो.’’

‘‘मुझे कोई दूसरी नहीं, तुम पसंद हो. अगर तुम तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ अपना घर बसाने को तैयार हूं.’’

ललिता जितेंद्र के रोज हावभाव पढ़ती रहती थी. इसलिए जान गई थी कि जितेंद्र के दिल में उस के लिए नाजुक एहसास है. वह इस तरह चाहत जाहिर कर के उस से प्यार की सौगात मांगेगा, ललिता ने सोचा तक न था. अचानक सामने आई ऐसी असहज स्थिति से निपटने के लिए वह उस से आंखें चुराने लगी और कटी हुई सब्जी उठा कर रसोई की तरफ चल दी. तभी उस के बच्चे भी घर आ गए. प्यार में विघ्न पड़ता देख कर जितेंद्र भी वहां से उठ गया. उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, वह ललिता के पास पहुंच जाता और अपने प्यार का विश्वास दिलाता. धीरेधीरे ललिता को उस के प्यार पर यकीन होने लगा. उसे भी अपने प्रति जितेंद्र की दीवानगी लुभाने लगी थी. उस की दीवानगी को देख कर ललिता के दिल में उस के लिए प्यार उमड़ पड़ा. कल तक जो ललिता जितेंद्र के हवास पर छाई थी, अब जितेंद्र ललिता के हवास पर छा गया.

एक दिन जितेंद्र ने फिर से ललिता के सामने अपने प्यार का तराना सुनाया तो वह बोली, ‘‘जितेंद्र, मेरे प्यार की चाहत में पागल होने से तुम्हें क्या मिलेगा. मैं विवाहित होने के साथसाथ 3 बच्चों की मां भी हूं. इसलिए मुझे पाने की चाहत अपने दिल से निकाल दो.’’

‘‘यही तो मैं नहीं कर पा रहा, क्योंकि यह दिल पूरी तरह से तुम्हारे प्यार में गिरफ्तार है.’’

ललिता कुछ नहीं बोल सकी. जैसे उस के जेहन से शब्द ही मिट गए थे. जितेंद्र ने अपने हाथ उस के कंधे पर रख दिए, ‘‘भाभी, कब तक तुम अपने और मेरे दिल को जलाओगी. कुबूल कर लो, तुम्हें भी मुझ से प्यार है.’’

ललिता ने सिर झुका कर जितेंद्र की आंखों में देखा और फिर नजरें नीची कर लीं. प्रेम प्रदर्शन के लिए शब्द ही काफी नहीं होते, शारीरिक भाषा भी मायने रखती है. जितेंद्र समझ गया कि मुद्दत बाद सही, ललिता ने उस का प्यार कुबूल कर लिया है. उस ने ललिता के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. ललिता भी सुधबुध खो कर जितेंद्र से लिपट गई. उस समय मन के मिलन के साथ तन की तासीर ऐसी थी कि ललिता का जिस्म पिघलने लगा.  इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. यह बात करीब 6 साल पहले की है. बाद में यह मौका मिलने पर चलता रहा.

13 मई, 2021 को दोपहर करीब 12 बजे सिकंदर दास लोचनपुर गांव के निजी कार चालक विजय दास के साथ चरवाडीह के संजय दास के यहां शादी समारोह में गया. सिकंदर और विजय दोनों कार से गए थे. कार विजय की थी. साढ़े 3 बजे शादी समारोह से दोनों निकल आए. लेकिन सिकंदर दास घर नहीं लौटा. उस के नंबर पर सिकंदर के चाचा ने फोन किया गया तो विजय ने उठाया. उस से पूछा गया कि सिकंदर कहां है तो विजय द्वारा अलगअलग ठिकाने का पता बताते हुए फोन काट दिया. इस के बाद सिकंदर की काफी तलाश की गई, वह नहीं मिला. 16 मई को ललिता ने कोडरमा थाने और एसपी को एक पत्र दिया, जिस में उस ने अपने पति सिकंदर दास के लापता होने की बात लिखी. सिकंदर के गायब होने का आरोप उस ने कार चालक विजय दास पर लगाया था.

चूंकि मामला चांदवारा थाना क्षेत्र के करौंजिया गांव का था. इसलिए कोडरमा पुलिस ने मामला चांदवारा पुलिस को ट्रांसफर कर दिया. चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह ने पूरा मामला जान कर थाने में सिकंदर की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थानाप्रभारी सोनी प्रताप ने 20 मई को जामू खाड़ी से विजय दास को गिरफ्तार कर लिया. सख्ती से पुलिस ने पूछताछ की तो विजय ने सिकंदर की हत्या करने की बात स्वीकारी. उस ने इस हत्या में सिकंदर की पत्नी ललिता और भाई जितेंद्र का भी हाथ होने की बात बताई. 20 मई को विजय के बाद ललिता और जितेंद्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर रात में कोटवारडीह के बंद पड़े मकान से सिकंदर की लाश बरामद कर ली.

वह अर्द्धनिर्मित मकान सिकंदर का था. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह अभियुक्तों को ले कर थाने आ गए. थाने में सख्ती से की गई पूछताछ में उन्होंने हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयां कर दी. एक दोपहर को जितेंद्र और ललिता घर में बेधड़क रंगरलियां मना रहे थे कि अचानक किसी काम से सिकंदर खेतों से घर लौटा तो उस ने उन दोनों को रंगरलियां मनाते रंगेहाथों पकड़ लिया. यह देख कर उसे एक बार तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उस की पत्नी ऐसा भी कर सकती है. वह ललिता पर खुद से भी ज्यादा विश्वास करता था. लेकिन हकीकत तो सामने उस की दगाबाजी की तरफ इशारा कर रही थी. दूसरी ओर सगा छोटा भाई जितेंद्र था, जिसे वह बहुत प्यार करता था, उस का खूब खयाल रखता था.

वही उस की गृहस्थी में आग लगा रहा था. अपनों की इस दगाबाजी से सिकंदर इतना आहत हुआ कि उस ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया. ललिता और जितेंद्र ने भी उस से अपनी गलती की माफी मांग ली और भविष्य में ऐसा कुछ न करने का वादा किया तो सिकंदर शांत हुआ. जितेंद्र और ललिता ने उस समय तो अपनी जान छुड़ाने के लिए वादा कर दिया था, लेकिन वे इस पर अमल करने को कतई तैयार नहीं थे. लेकिन उन का भेद खुल चुका था, इसलिए मिलन में उन को बहुत ऐहतियात बरतनी पड़ती थी. वे चोरीछिपे फिर से मिल लेते थे. सिकंदर ने देखा तो उस ने विरोध किया. मामला घर की चारदीवारी से निकल कर गांव के लोगों तक पहुंच गया. पंचायत तक बैठ गई. भरी पंचायत में ललिता ने जितेंद्र के साथ रहने की बात कही. लेकिन फैसला हो न सका.

इस के बाद सिकंदर उन दोनों के बीच की एक बड़ी दीवार था, जिसे गिराए बिना वे हमेशा के लिए एक नहीं हो सकते थे. इसलिए ललिता और जितेंद्र ने सिकंदर की हत्या करने की ठान ली. सिकंदर दास ने विजय दास से लोन दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए लिए थे. सिकंदर ने जब लोन नहीं दिलाया तो विजय उस से अपने दिए रुपए वापस मांगने लगा. सिकंदर रुपए देने में टालमटोल कर रहा था. ऐसे में ललिता ने जितेंद्र से बात कर के विजय को अपने प्लान में शामिल करने की बात कही. उस ने यह भी कहा कि सिकंदर का काम तमाम होने के बाद वह अकेले विजय को उस की हत्या में फंसवा देगी, जिस से वे दोनों बच जाएंगे.

जितेंद्र को उस की बात सही लगी. दोनों ने विजय से बात की तो वह सिकंदर की हत्या में उन दोनों का साथ देने को तैयार हो गया. 13 मई, 2021 को एक शादी समारोह से लौटने के बाद विजय सिकंदर को ले कर कोटवारडीह में उस के अर्धनिर्मित मकान पर ले गया. वहां ललिता और जितेंद्र पहले से मौजूद थे. तीनों ने मिल कर सिकंदर की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश एक कमरे में डाल कर कमरा बंद कर दिया. लेकिन सिकंदर की हत्या में विजय को फंसाने की योजना ही ललिता और जितेंद्र को भारी पड़ गई. ललिता ने उस पर शक जताया तो पुलिस विजय को पकड़ कर उन तक पहुंच गई. तीनों अभियुक्तों के विरुद्ध हत्या व साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज कर के चांदवारा पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. Parivarik Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime News : फौजी पति के किए टुकड़ेटुकड़े

UP Crime News : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मेरठ के ड्रम कांड से भी बड़ा मामला सामने आया है. 45 वर्षीय माया देवी ने अपने 62 वर्षीय पति रिटायर्ड फौजी देवेंद्र राम की हत्या कर लाश के ऐसे टुकड़े किए कि सुनने वालों की भी रूह कांप उठे. आखिर माया क्यों बनी इतनी निर्दयीï? पढ़ें, यह सनसनीखेज कहानी.

जब भी माया देवी प्रेमी अनिल यादव से मिलती, उसे अपनी चोटें दिखाती थी. अनिल कहता था कि तुम अपने पति देवेंद्र राम को छोड़ क्यों नहीं देती. तब माया उस से कहती कि इस की भी उस के सामने मजबूरी है. उस के 4 बच्चे हैं, जिन की वजह से मैं पति को चाहते हुए भी नहीं छोड़ नहीं पा रही हूं. एक दिन की बात है. अनिल को ले कर माया और देवेंद्र के बीच झगड़ा ज्यादा बढ़ गया. दूसरे दिन ये सारी बातें माया देवी ने अनिल प्रेमी को बता दीं और कहा, ”अब मुझ से यह रोजरोज के लड़ाईझगड़े झेले नहीं जा रहे हैं. मैं उस से तंग आ चुकी हूं. तुम्हें कुछ न कुछ करना होगा वरना तुम मुझे भूल जाओ.’’

”जानू, मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करने को तैयार हूं. बताओ, क्या करना है?’’ अनिल बोला.

”करना क्या है, उसे ठिकाने लगाना होगा, तभी मैं चैन से रह सकती हूं.’’

”ठीक है, तुम ने कहा तो यह काम हो जाएगा.’’ अनिल ने उसे भरोसा दिया.

वारदात से करीब 20 दिन पहले ही माया ने अनिल के साथ मिल कर पति देवेंद्र को रास्ते से हटाने का पूरा प्लान बना लिया था. योजना यह बनाई कि देवेंद्र को मार कर उस की लाश को दूर ले जा कर जला देंगे. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी. इस वारदात को अंजाम देने के लिए माया ने 9 मई, 2025 का दिन चुना. क्योंकि उसी दिन उस की छोटी बेटी सुुप्रिया कोटा से घर आ रही थी. वह कोटा में नीट की कोचिंग कर रही थी. वह कोटा से बक्सर (बिहार) रेलवे स्टेशन आती. बलिया से बक्सर रेलवे स्टेशन करीब 35-36 किलोमीटर दूर था. बेटी को बक्सर रेलवे स्टेशन से लेने जाना था.

उस दिन देवेंद्र बलिया जिले के हरिपुर गांव वाले घर पर गए थे. जबकि माया देवी बहादुरपुर वाले मकान पर थी. कहां और कैसे देवेंद्र राम की हत्या करनी है, कौनकौन इस हत्या में शामिल रहेगा, हत्या कर शव को कहां ठिकाने लगाना है? इस का भी खाका खींच लिया गया था. प्रेमी अनिल यादव नशीला पदार्थ और चापड़ बाजार से खरीद कर ले आया था. प्लान के मुताबिक, माया देवी ने पति देवेंद्र को फोन कर के कहा, ”आप साक्षी को बक्सर रेलवे स्टेशन से लेने जाएंगे तो मैं भी आप के साथ स्टेशन चलंूगी. आप मुझे यहां घर से ले लेना.’’

देवेंद्र उस समय हरिपुर वाले मकान से निकले और बहादुरपुर वाले घर पर पत्नी के पास आ गए. घर आते ही योजना के अनुसार माया ने उन्हें नशीला पदार्थ मिली हुई कोल्ड ड्रिंक पीने को दी. कोल्डड्रिंक पीते ही देवेंद्र राम बेहोश हो गए. तब माया देवी ने प्रेमी अनिल यादव को फोन कर दिया. अनिल अपने साथी मिथिलेश और सतीश के साथ माया के घर पहुंच गया.  वहां देवेंद्र उन्हें गहरी नींद में मिले. चारों ने मिल कर चापड़ से बेहोशी की हालत में देवेंद्र राम की हत्या कर दी. अनिल ने पहले चापड़ से देवेंद्र का सिर धड़ से अलग किया. इस के बाद उस के दोनों हाथ, दोनों पैर काट दिए. कटे अंगों को अलगअलग काले रंग की पौलीथिनों में लपेट कर साथियों के साथ बोलेरो से अनिल यादव अपने गांव खरीद ले गया.

इधर माया देवी ने पति को ठिकाने लगाने के बाद घर को पूरी तरह से साफ कर दिया. इस के बाद बेटी साक्षी का फोन आने के बाद वह एक वाहन से बेटी को लेने बक्सर रेलवे स्टेशन चली गई और बेटी को ले कर घर आ गई. साक्षी ने मम्मी से पापा के बारे में पूछा भी था. तब माया ने झूठ बोलते हुए बेटी को बताया कि वो तो तुझे लेने के लिए घर से स्टेशन के लिए निकल चुके हैं, लेकिन पता नहीं कहां चले गए. साक्षी को क्या पता था कि उस की मम्मी पापा को ठिकाने लगा चुकी है. आधी रात बीतने के बाद प्रेमी अनिल यादव ने देवेंद्र राम के कटे हुए हाथपैर खरीद गांव के एक बगीचे में फेंक दिए. धड़ को बगीचे से लगभग 500 मीटर दूर कुएं में डाल दिया और सिर घाघरा नदी में फेंक दिया.

पुलिस ने देवेंद्र राम के सिर की तलाश में घाघरा नदी में अभियान भी चलाया, लेकिन सिर बरामद नहीं हुआ. फिर योजना के अनुसार 10 मई, 2025 को माया ने कोतवाली सिकंदरपुर पहुंच कर 62 वर्षीय पति देवेंद्र राम की गुमशुदगी दर्ज करा दी. उस ने इंसपेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह को बताया कि वह बेटी को बक्सर रेलवे स्टेशन से लेने के लिए गए थे, तभी से लापता हैं. उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गांव हरिपुर के रहने वाले देवेंद्र राम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में इलैक्ट्रिशियन थे. वह 2 साल पहले रिटायर हुए थे. देवेंद्र का परिवार डेढ़ दशक से बहादुरपुर स्थित मकान में रहता था. जबकि देवेंद्र राम हरिपुर गांव में ही रहते थे.

उन की शादी 28 साल पहले माया देवी के साथ हुई थी. दोनों की उम्र में 15 साल का अंतर था. वर्तमान में पत्नी माया देवी की उम्र 47 साल है. फौजी देवेंद्र राम के 3 बेटियां व एक बेटा है. सब से बड़ी बेटी जयपुर में रह कर प्राइवेट नौकरी कर रही थी. मझली बेटी नोएडा में रह कर नौकरी कर रही थी. जबकि सब से छोटी बेटी साक्षी कोटा में नीट की तैयारी कर रही थी. बेटा हौस्टल में रह कर पढ़ाई कर रहा था. देवेंद्र राम का परिवार करीब 15 साल से बहादुरपुर के मकान में रहता था. रिटायर होने के बाद देवेंद्र राम ज्यादातर गांव के मकान में ही रहते थे. उन्हें गांव का शांत माहौल पसंद था.

जबकि उन की पत्नी माया देवी को शहर वाले मकान में रहना पसंद था. देवेंद्र ने पत्नी माया से कई बार कहा कि तुम भी गांव के मकान में आ कर रहो. जब कभी मन हुआ करेगा, हम दोनों शहर के मकान में जा कर रह लिया करेंगे. लेकिन माया देवी को शहर के मकान में रहना अच्छा लगता था.

माया को 15 साल छोटे युवक से हुआ प्यार

वह वहां अकेली रहती थी. कभीकभी देवेंद्र राम ही गांव से शहर के मकान में रहने आ जाते और कुछ दिन रहने के बाद वापस गांव चले जाते. गांव में ही उन के भाई नगेंद्र का मकान भी था.  करीब 4 साल पहले 2021 में माया देवी की मुलाकात बलिया के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के खरीद गांव के रहने वाले ट्रक डाइवर 28 वर्षीय अनिल यादव से गांव हरिपुर में एक शादी कार्यक्रम में हुई. दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर दे दिए. अब दोनों एकदूसरे से बातचीत करने लगे. धीरेधीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और फिर वह माया देवी के घर आने लगा. कहने को दोनों की उम्र में खासा अंतर था, लेकिन उन के बीच उम्र का बंधन आड़े नहीं आया.

जल्द ही दोनों के बीच अफेयर शुरू हो गया. एक दिन अनिल ने माया देवी से मिलने की इच्छा जाहिर की. मौका देख कर माया देवी ने अनिल यादव को अपने घर बुला लिया. उस दिन पति देवेंद्र घर पर नहीं था. दोनों ने चाय पी और जी भर कर बातें कीं. इस के बाद अनिल यादव अकसर देवेंद्र के गांव जाने के बाद माया देवी के घर पर ही रहता था. धीरेधीरे यह बात मोहल्ले वालों को भी पता चल गई. माया देवी और अनिल यादव एकदूसरे के बहुत करीब आ चुके थे. दोनों में जिस्मानी रिश्ते बन चुके थे. दोनों बेखौफ बाइक पर घूमते थे. एकदूसरे के लिए कुछ भी कर सकते थे. यह सिलसिला पिछले 4 साल से बिना किसी विघ्नबाधा के बदस्तूर चल रहा था.

रिटायरमेंट के बाद माया का चालचलन देख कर देवेंद्र राम ने विरोध शुरू किया जो माया को नागवार लगता था. कई बार घर पर जब अनिल को देखा, तब देवेंद्र ने माया से अनिल के बारे में पूछा तो माया ने उसे अपना दोस्त बताया. देवेंद्र ने कई बार उसे डांटा कि उसे घर मत बुलाया करो. लेकिन माया नहीं मानी. वह अनिल के बिना नहीं रह पाती थी. मना करने के बावजूद वह अनिल से मिलती रही. यह बात मोहल्ले वालों को भी पता चल गई. लोगों ने देवेंद्र को दोनों के संबंधों के बारे में बता दिया.

माया देवी के अवैध संबंधों की जानकारी उस के बच्चों को भी हो गई. अब पति देवेंद्र राम पत्नी के इन क्रियाकलापों से परेशान रहने लगे. उन की मोहल्ले में बदनामी भी हो रही थी. लेकिन वह चाह कर भी अनिल और पत्नी को मिलने से नहीं रोक पा रहे थे. इस बात को ले कर माया और देवेंद्र राम के बीच अकसर लड़ाईझगड़ा होने लगा. जब पत्नी उन की बात नहीं मानती तो वह उसे मारतापीटता भी था. फिर रोजरोज की पिटाई से तंग आ कर माया ने एक प्लान बना कर प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या करा दी और अनिल ने अपने साथियों द्वारा डैडबौडी ठिकाने लगा दी.

10 मई, 2025 की बात है. बलिया जिले के गांव खरीद से दियारा की तरफ नदी घाट की ओर जाने वाले रास्ते के बगल में स्थित एक बगीचे से कुछ महिलाएं गुजर रही थीं, तभी एक महिला की नजर वहां पड़ी एक बड़ी सी पौलीथिन पर गई. उसे जिज्ञासा हुई कि पता नहीं इस पौलीथिन में क्या है? उस महिला ने जैसे ही पौलीथिन को खोला, उस के मुंह से चीख निकल गई. पौलीथिन में किसी इंसान के 2 हाथ और 2 पैर थे. इस के बाद उस महिला ने यह बात शोर मचा कर उधर से गुजरने वाल अन्य लोगों को बता दी.

मानव अंग मिलने की बात जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. लोग वहां एकत्र हो गए. इसी बीच किसी व्यक्ति ने फोन कर के इस की सूचना थाना सिकंदरपुर में दे दी. सूचना मिलते ही इंसपेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए. उन्होंने मौकामुआयना कर कटे हुए अंगों को अपने कब्जे में ले लिया. इन अंगों को देखने पर पता चला कि वह किसी आदमी के हैं. इंसपेक्टर ने इस की सूचना एसपी को दे दी तो उन्होंने कई थानों की पुलिस के अलावा फील्ड यूनिट टीम को भी मौके पर रवाना कर दिया. जांच टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए.

पुलिस टीम को यह समझते देर नहीं लगी कि मृतक की हत्या कहीं और करने के बाद शव को यहां बगीचे में ला कर डाला गया है. अब पुलिस सब से पहले मृतक के शेष शरीर को बरामद कर मृतक की पहचान उजागर करना चाहती थी, ताकि वह हत्यारों को पकड़ सके. एसपी ओमवीर सिंह के निर्देश पर इंसपेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह ने आसपास के थानों से यह पता करने का प्रयास किया कि कहीं किसी आदमी की गुमशुदगी या अपहरण की कोई घटना तो नहीं हुई या इस संबंध में कोई रिपोर्ट तो दर्ज नहीं है?

चूकि जिले में एक व्यक्ति के किडनैप की घटना चल रही थी, इसलिए उस के परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन परिजनों ने अंगों को देखने के बाद मना कर दिया. इस के बाद पुलिस टीम निराश नहीं हुई और घटनास्थल की सारी काररवाई पूरी करने के बाद अंगों को पोस्टमार्टम एवं डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित रखवा दिया.

किस के थे पौलीथिन में निकले कटे हाथपैर

पौलीथिन में हाथपैर मिलने के मामले में पुलिस छानबीन कर ही रही थी कि सोमवार 12 मई, 2025 को बगीचे से लगभग 500 मीटर दूर झाडिय़ों के पास कुएं से बदबू आ रही थी. वहां बकरी चराने पहुंची महिलाओं ने इस बात की पुलिस को सूचना दी. पुलिस मोके पर पहुंची और उस ने कुएं से बड़ी पौलीथिन को बाहर निकलवाया तो उस में बिना हाथपैर का किसी आदमी का धड़ मिला. इस से आशंका व्यक्त की जाने लगी कि यह धड़ शायद उसी व्यक्ति का होगा, जिस के हाथपैर बगीचे से बरामद हुए थे. इस के बाद पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस ने मृतक के हाथपैर और धड़ के फोटो सर्कुलेट किए. अब सवाल यह था कि मृतक का सिर कहां है? पुलिस ने अंग मिलने वाले क्षेत्र के चप्पेचप्पे को छान मारा, लेकिन सिर नहीं मिला.

इस के बाद पुलिस ने माया देवी को बुला कर पहचान कराई. क्योंकि 2 दिन पहले उस ने अपने पति की गुमशुदगी थाना सिकंदरपुर में दर्ज कराई थी. माया देवी ने कटा धड़ देख कर बताया कि यह धड़ उस के पति देवेंद्र राम का ही है. देवेंद्र राम के शव को उन के आवास से करीब 50 किलोमीटर दूर ठिकाने लगाया गया था. माया देवी के साथ मौजूद मृतक देवेंद्र राम के भतीजे अतुल कुमार ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार को देवेंद्र राम की छोटी बेटी साक्षी कोटा से आ रही थी. उसे लेने के लिए चाचा देवेंद्र राम बक्सर रेलवे स्टेशन जाने की बात कह कर सुबह साढ़े 8 बजे गांव हरिपुर से शहर वाले आवास के लिए निकले थे. देवेंद्र का एक मकान खेजुरी थाना क्षेत्र के हरिपुर गांव में तथा दूसरा नगर कोतवाली सिकंदरपुर के बहादुरपुर में स्थित है.

शाम को साक्षी जब बक्सर पहुंची तो स्टेशन पर उसे लेने पापा नहीं आए. तब साक्षी ने अपने पापा को फोन मिलाना शुरू किया. लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ होने के कारण बात नहीं हो सकी. करीब आधे घंटे बाद उस ने अपनी मम्मी माया को फोन किया और बताया कि वह बक्सर पहुंच गई है, लेकिन पापा उसे लेने नहीं आए और न उन से संपर्क हो पा रहा है. इस के बाद माया देवी किसी वाहन से बेटी साक्षी को लेने बक्सर रेलवे स्टेशन पहुंची.

माया देवी से पूछताछ करने के बाद एएसपी कृपाशंकर ने आरोपी अनिल यादव व अन्य की तलाश में पुलिस टीम लगाई गई थी. माया का प्रेमी अनिल यादव ट्रक ड्राइवर है. वह बलिया के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के खरीद गांव का रहने वाला था. जबकि उस का साथी मिथिलेश यादव बोलेरो चालक है. सतीश अनिल का दोस्त है. तीनों एक ही गांव के हैं.

आखिर एनकाउंटर में पकड़े गए आरोपी

इसी बीच खास मुखबिर की सूचना पर चैकिंग के दौरान टाउन पौलीटेक्निक के पास 13  मई की देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई. मुख्य आरोपी अनिल यादव ने पुलिस पर फायरिंग की. जवाब में पुलिस ने गोली चलाई. मुठभेड़ में अनिल यादव के पैर में गोली लगी. उसे जिला अस्पताल में भरती कराया गया. जबकि अनिल के साथी सतीश को दौड़ कर पकड़ लिया. सतीश के पास से तमंचा, 2 कारतूस, बाइक बरामद की.

अनिल ने बताया कि इस हत्याकांड में सतीश और मिथिलेश यादव ने उस की मदद की थी. हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल चापड़ तथा बोलेरो भी बरामद कर ली. बेटी ने मां और उस के प्रेमी पर पापा की हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी. इस पर प्रेमी अनिल यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस देवेंद्र राम का धड़ एक कुएं से बरामद कर चुकी थी, लेकिन सिर नहीं मिला था. आरोपियों ने बताया कि देवेंद्र राम का सिर उन्होंने बहादुरपुर से 38 किलोमीटर दूर घाघरा नदी में फेंक दिया था. पुलिस गोताखोरों की मदद से सिर की तलाश में जुटी, लेकिन सफलता नहीं मिली. तब पुलिस ने चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

अपराध की दुनिया में बलिया की माया ने मेरठ की मुसकान, इंदौर की सोनम को भी पीछे छोड़ दिया है. जहां मुसकान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिल कर अपने पति सौरभ की बेरहमी से हत्या करने के बाद लाश के कई टुकड़े कर प्लास्टिक के नीले ड्रम में भर कर सीमेंट से जमा दिए थे. वहीं इंदौर की सोनम ने शादी के 12 दिन बाद ही हनीमून पर ले जा कर पति राजा रघुवंशी की अपने प्रेमी राज कुशवाह की खातिर सुपारी दे कर शिलांग में हत्या करा दी थी.

वहीं अब बलिया में यह वीभत्स हत्याकांड सामने आया है. एक पत्नी ने खौफनाक तरीके  से वारदात को अंजाम दिया. इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी माया देवी की बेटी व जेठ ने पुलिस को उस की संदिग्ध हरकतों के बारे में बताया. इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना से हर इंसान हैरान था.

समाज जा किधर रहा है? पतिपत्नी एक दूसरे पर विश्वास न करें तो किस पर करें. फेरे लेते समय तो जीवन भर एकदूसरे का साथ निभाने की कसम ली जाती है, लेकिन जल्दी ही इन कसमों को भुला दिया जाता है. अवैध संबंधों का अंजाम क्या होता है, इस घटना से अच्छी तरह से समझा जा सकता है. UP Crime News

—कथा में साक्षी परिवर्तित नाम है.

 

 

Love Stories in Hindi Short : लव मैरिज बनी शक मैरिज

Love Stories in Hindi Short : 22 वर्षीय नेहा और 24 वर्षीय प्रशांत अलगअलग जाति के थे. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, इसलिए नेहा ने फेमिली की मरजी के खिलाफ जा कर प्रशांत से लवमैरिज की थी. इन की गृहस्थी 6 सालों तक हंसीखुशी से चलती रही. फिर बाद में ऐसा क्या हुआ कि प्रशांत ने ससुराल में जा कर नेहा का गला रेत दिया? पढ़ें, लव क्राइम की दिलचस्प कहानी.

शाम के 7 बज चुके थे और 28 वर्षीय नेहा अभी तक शोरूम से वापस नहीं लौटी थी. 30 वर्षीय प्रशांत वह अपने 4 साल के बेटे के साथ कैरम बोर्ड खेल रहा था.

”बेटा, निशाना ठीक से लगाया करो.’’ प्रशांत समझाते हुए स्ट्राइकर पर अंगुली रखने का तरीका बताने लगा.

”पापा, मम्मी कब आएगी? बोली थी कि शाम होते ही आ जाऊंगी?’’ बेटा शिकायती लहजे में बोला.

”हां बेटा, बोली तो मुझे भी थी, लेकिन 8 बजने वाले हैं और अभी तक नहीं लौटी है. आने दो, आज उस की अच्छी खबर लेता हूं.’’ प्रशांत बोला.

रोटी बेल रही प्रशांत की मम्मी बीच में ही बोल पड़ी थीं. उन्होंने एक तरह से अपनी बहू की शिकायत करते हुए कहा, ”हां बेटा, उसे अच्छे से समझा देना. जब से शोरूम में काम करने लगी है, तब से वह बहुत बदल गई है.’’

”देखना मम्मी, आज सब ठीक कर दूंगा. बहुत पंख निकल आए हैं न!’’ प्रशांत बोला.

”पंख? परी वाले…मम्मी परी बन गई!’’ बेटा बोला और हैरानी से प्रशांत की ओर देखने लगा. तभी नेहा कान से फोन सटाए कमरे में घुसी, ”चलो, फोन रखो…घर पहुंच गई हूं. बाद में बात करूंगी.’’

”कौन है? किस से बातें कर रही थी?’’ प्रशांत बोला.

”तु…तुम! कब आए? कोई तो नहीं.’’ नेहा अचानक प्रशांत को सामने देख कर चौंक गई. सकपकाती हुई बोलने लगी, ”तुम आज जल्दी आ गए?’’

”हां…हां, जल्दी आ गया, तुम्हारी वजह से! 300 रुपए की सवारी छोड़ कर आया हूं.’’ प्रशांत बोला.

दरअसल, आटो ड्राइवर प्रशांत किराए पर आटो चलाता था. कई दिनों से उसे नेहा के बारे में शिकायत मिल रही थी कि वह घर देर से लौटती है, जिस से कई घरेलू काम फैले रहते थे या उस की मम्मी कर रही होती थी. नेहा पहले घर पर ही ब्यूटीपार्लर चलाती थी, लेकिन कुछ महीनों से वह एक शोरूम में सेल्सगर्ल का भी काम करने लगी थी. वह घर पर फोन से ही चिपकी रहती थी. कभी धीमेधीमे बातें करती रहती या फिर वाट्सऐप पर मैसेज भेजती रहती थी.

नेहा कुछ बोले बगैर अपने कमरे में जाने लगी. उसी वक्त उस के मोबाइल पर मैसेज आने की हल्की सी रिंगटोन हुई और स्क्रीन चमक उठा. नेहा मोबाइल पर मैसेज पढऩे लगी. पीछे से प्रशांत भी आ गया. गरदन घुसा कर वह भी मैसेज पढऩे लगा. तब तक नेहा ने मोबाइल बंद कर दिया था. प्रशांत ने उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया. उस ने मोबाइल औन कर दिया, लेकिन मोबाइल के लौक होने के कारण वाट्सऐप मैसेज को नहीं खोल पाया. चीखता हुआ बोला, ”लौक लगा कर रखती है, दिखाओ किस का मैसेज है?’’

”नहीं दिखाऊंगी…लाओ मेरा मोबाइल!’’ नेहा भी उसी अंदाज में चीखती हुई प्रशांत के हाथ से मोबाइल छीनने लगी.

छीनाझपटी की नौबत आ गई. आखिरकार मोबाइल हाथ से छूट कर स्टूल पर जा गिरा. वहीं पानी रखा गिलास उस पर लुढ़क गया. मोबाइल पर पानी फैल गया.

”कर दिया न मोबाइल खराब. बहुत मुश्किल से पैसे जुटा कर खरीदा था…’’ चीखती हुई नेहा बोली.

प्रशांत को मोबाइल के खराब हो जाने की जरा भी चिंता नहीं हुई. उल्टे नेहा पर ही अनापशनाप बोलते हुए उस पर गैरमर्द से संबंध रखने का आरोप लगा दिया. यह सुन कर नेहा और भी तिलमिला गई. गुस्से में पैर पटकती हुई अपने कमरे में घुस गई. अपना बैग निकाला, अपने कपड़े ठूंसने शुरू कर दिए. प्रशांत दरवाजे से ही देखता रहा. किसी तरह उस वक्त प्रशांत की मम्मी ने मामले को शांत किया. अगले रोज सुबह होते ही नेहा अपने बेटे को ले कर मायके चली गई. सहारनपुर के गंगोह मोहल्ले की रहने वाली नेहा ने 6 साल पहले प्रशांत से लव मैरिज की थी. दोनों अलगअलग जाति के थे.

नेहा के पापा विनोद दिव्यांग हैं. वह न तो चलफिर सकते हैं. नेहा की मम्मी रंजीता पति के साथ बागपत के ठाकुरद्वारा मोहल्ले में किराए पर रहने लगी थी. जबकि प्रशांत बागपत के ही जैन मोहल्ले में रहता था. शादी के बाद दोनों एक बेटे के मम्मीपापा बन गए. जिंदगी सही से चल रही थी. घरगृहस्थी को अच्छी तरह चलाने के लिए नेहा भी अपने पति का सहयोग करने लगी थी. उस ने घर में ब्यूटीपार्लर का काम शुरू कर दिया था. जैसेजैसे समय बीता, घर की जरूरतें भी बढऩे लगीं. महंगाई बढऩे से घरेलू खर्च पूरे नहीं हो पा रहे थे. इस से निपटने के लिए नेहा ने किसी शोरूम में काम करने का मन बना लिया.

इस की प्रशांत ने परमिशन भी दे दी थी. नेहा के शोरूम में काम करने का रुटीन बन गया था. वहां कई दूसरी लड़कियां और 23 लड़के भी काम करते थे. उन से वह जल्द ही घुलमिल गई थी. उन से घर पर भी मोबाइल से बातें करती रहती थी. वाट्सऐप मैसेज भेजती रहती थी. यही बात प्रशांत को पसंद नहीं थी और उसे समझाता था. वह घर में घर की जरूरतों पर, बच्चे पर ध्यान देने को कहता था. गुस्से में बिफरी नेहा ने सारी बात अपनी मम्मी रंजीता को बता दी. वह रोने लगी. मम्मी ने उसे शांत किया और ढांढस बंधाते हुए कुछ दिनों तक अपने पास ठाकुरद्वारा में ही रहने की सलाह दी. उस के मायके के लोग किराए के मकान में रहते थे.

कुछ दिनों बाद ही होली का त्यौहार था. नेहा अपनी मम्मी के साथ ठाकुरद्वारा मोहल्ले में रह रही थी और प्रशांत अपने घर में अपनी मम्मी के साथ था. उसे नेहा की याद सताने लगी तो वह उस के पास चला गया. उस ने अपनी गलती मान ली और पिछले झगड़े की बात को भूल जाने के लिए कहा. साथ चलने का अग्रह किया, लेकिन नेहा ने उस के साथ जाने से इनकार कर दिया. उस ने कहा, ”हमें यहीं रहने दो, जब तक तुम्हारी मम्मी हैं, मैं यहीं ठीक हूं.’’

नेहा के इस फैसले में उस की मम्मी रंजीता ने भी हां में हां मिला दी. उन की ओर से प्रशांत को सिर्फ इतनी छूट मिली कि वह यहां आनाजाना कर सकता है. अपनी पत्नी और बच्चे से मिल सकता है. उस के बेटे का यहीं स्कूल में नाम लिखवा चुकी है. अपनी सास रंजीता और पत्नी की जिद के आगे प्रशांत की एक नहीं चली. वह मन मसोस कर अपने घर नेहा के बगैर तन्हाई की जिंदगी गुजारने लगा. काम में उस का मन नहीं लगता. कमाई कम हो गई. घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया. दूसरी तरफ नेहा को प्रशांत की रोजरोज की चिकचिक और सास के ताने से छुटकारा मिल गया था. वह आजादी से काम पर जाती थी. घर और बच्चे की देखभाल करने लगी थी. बच्चा स्कूल जाने लगा था.

बीचबीच में प्रशांत उस से मिलने आ जाता था. जब भी नेहा से उस के मायके में मिलता, साथ चलने को कहता, लेकिन वह उस के प्रस्ताव को कोई न कोई बहाना बना कर ठुकरा देती. बातोंबातों में प्रशांत अपना काम ठीक से नहीं चलने के बारे में भी बताता था. आर्थिक तंगी का रोना रोता था. नेहा उस की हालत पर तरस खा कर कुछ पैसे दे देती थी. कुछ महीने तक ऐसे ही चलता रहा. प्रशांत जब भी नेहा से मिलता, कोई न कोई समस्या ले कर आता. पैसे मांगता. नहीं मिलने पर झगडऩे लगता. इस से नेहा तंग आने लगी थी. फिर भी प्रशांत की पैसे की मांग पूरी करने को वह मजबूर थी.

दूसरी तरफ प्रशांत के दिमाग में भी अस्थिरता और मन में बेचैनी बनी हुई थी. नेहा के बदलते स्वभाव और विचार से वह बुरी तरह आहत था. उस के दिल को मानो गहरी चोट पहुंची थी. उस के मन में नेहा के बारे में जानने की भी बेचैनी थी. वह जानना चाहता था कि आखिर नेहा वाट्सऐप पर किस के साथ चैटिंग करती है? वह कौन है, जिसे नेहा चाहती है? पहले तो वह उस के साथ में रहती थी, तब वह उस का वाट्सऐप चैक कर लेता था, किंतु अब कैसे पता लगाए. इसी उधेड़बुन में उस ने वाट्सऐप हैक करने के बारे में पता करने लगा. इन सब में उलझा प्रशांत का ध्यान अपने काम पर से ध्यान हट गया था.

वह इसी चिंता में घुला जा रहा था कि उस की पत्नी गैरमर्द से क्यों बातें करती है, जबकि उस ने उस से प्रेम किया था. जाति बंधन को तोड़ कर शादी रचाई थी. दोनों की जातियां अलगअलग थीं. उसे इस बात की भी तकलीफ थी कि नेहा शादी के वक्त किया गया वादा तोड़ दिया. दोनों के दिल में एकदूसरे के प्रति काफी कटुता भर चुके थे. कई बार तो उन के बीच काफी तेज और तीखी बहस होने लगती थी, जिसे घर के लोगों के अलावा पासपड़ोस के लोग भी सुनते थे. कोई उन्हें समझाने की हिम्मत नहीं करता था. पतिपत्नी के बीच का सामान्य झगड़ा समझ कर नजरअंदाज कर देते थे.

नेहा के मायके में इसी बात को ले कर चिंता थी कि दोनों के बीच सुलह हो जाए. वे साथसाथ हंसीखुशी जीवन गुजारें. बच्चे का भविष्य बनाने पर ध्यान दें. किंतु, दिनप्रतिदिन उन के बीच  मनमुटाव बढ़ता ही जा रहा था. वे जब भी मिलते, तब किसी न किसी बात को ले कर झगड़ पड़ते थे. बात 7 मई, 2025 की है. प्रशांत सुबहसुबह नेहा के मायके जा धमका था. नेहा अपने काम पर जाने के लिए तैयार हो रही थी. घर में भी सारा काम पसरा पड़ा था, जिसे उस की मम्मी निपटाने में लगी हुई थी. वैसे तो प्रशांत का आना कोई नया नहीं था, लेकिन नेहा के लिए परेशानी की बात यह थी कि उसे काम पर निकलना था.

उस ने एक बार दीवार घड़ी पर नजर डाली और तपाक से पूछ लिया, ”आज इतना सवेरे क्यों आए? मुझे काम पर जाना है. कुछ जरूरी था तो फोन कर लेते!’’

”मैं जब चाहे तब आ सकता हूं. तुम्हारा पति हूं, कोई गैर नहीं!’’ प्रशांत कड़े लहजे में बोला.

”अपने काम पर ध्यान देते नहीं और मुंह उठाए यहां चले आते हो… शर्म नहीं आती! न खुद चैन से रहते हो और न मुझे रहने देते हो. मैं एकदम तंग आ चुकी हूं तुम से.’’ नेहा बोले जा रही थी. धीरेधीरे उस के तेवर रूखे होने लगे थे.

उन के बीच शुरू हुई बहस को नजरअंदाज करती हुई नेहा की मां रंजीता राशन का कुछ सामान खरीदने के लिए पास के मार्केट में चली गई. उन के जाते ही नेहा और प्रशांत के बीच बहस और तेज हो गई. उन की आवाज घर में आंगन के ऊपर लगे जाल से उसी मकान में रहने वाले दूसरे लोगों तक साफसाफ पहुंचने लगी थी. कुछ लोग वहां झांकने भी लगे थे. वह सब उन के लिए एक तमाशे की तरह ही था. नीचे प्रशांत और नेहा हाथ नचानचा कर बहस किए जा रहे थे. उन की बहस का अंत होने का नाम नहीं ले रहा था. वे आखिर चाहते क्या थे, यह किसी के भी समझ में नहीं आ रहा था.

उन के बीच झगड़े में सिर्फ एक ही बात स्पष्ट सुनाई दे रही थी. प्रशांत जोर दे कर बोल रहा था, ”तुम्हें आज हर हाल में ले कर जाऊंगा, देखता हूं आज मुझे कौन रोकता है.’’

”मैं भी देखती हूं…तुम मुझे किस दम पर ले कर जाते हो. जाओ यहां से मुझे ड्यूटी पर जाना है.’’

”तुम को आज पहले मेरे साथ चलना होगा, उस के बाद ड्यूटी कल से जाना.’’ प्रशांत बोला.

”नहीं, यह नहीं हो सकता है.’’

”तुम्हें तो ले कर ही जाऊंगा.’’ कहता हुआ प्रशांत कमरे में बैड पर जा बैठा. नेहा भी रसोई में जा कर बरतन साफ करने लगी. थोड़ी देर शांति रही. फिर अचानक उन के बीच झगड़ा शुरू हो गया. इस बार नेहा चीखने लगी. प्रशांत भी बहुत गुस्से में था. उस के हाथ में एक लंबा चाकू देख कर नेहा गुस्से में आ गई. बोली, ”चाकू दिखा कर धमकी दे रहा है.’’

”इसी चाकू की नोंक पर तुम्हें ले जाऊंगा यहां से.’’

”अरे जाजा! भाग जा यहां से… तुझ से कुछ नहीं हो सकता. कमाई तो करता नहीं है और चला है औरत के पैसे के बल पर ले जाने वाला.’’ ताना मारते हुए नेहा बोली.

नेहा का यह कहना था कि प्रशांत और भी तैश में आ गया. तुरंत चाकू से उस पर हमला कर दिया. नेहा ने बचाव में प्रशांत का हाथ पकडऩा चाहा, लेकिन चाकू की तेज धार से उस की अंगुली कट गई. उस ने हाथ पीछे खींच लिया. खून रिसने लगा. नेहा और भी तिलमिला उठी. निहत्थे ही उस पर हाथ से हमला करने लगी. देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी. प्रशांत के हाथ में चाकू था. आक्रामक बना हुआ था. चाकू चला रहा था. वार से नेहा बचाव कर रही थी, जबकि कई जगह चाकू लग चुका था.

नेहा और प्रशांत के बीच चल रहे झगड़े का आभास नेहा के दिव्यांग पिता विनोद कुमार को भी हो गया था. वह घर के एक कोने में पड़े रहते थे. न बोल सकते थे, न चलफिर सकते थे. रेंगते हुए किसी तरह से वहां पहुंच गए थे, जहां प्रशांत उन की बेटी पर चाकू से हमला कर रहा था. उन से 3 कदम की दूरी पर ही उन का दामाद बेटी का गला रेतने को तैयार था और वह एकदम लाचार थे. बोले जा रहा था, ”नया आशिक ढूंढ लिया है, उस के साथ मजे करना चाहती है… मेरी पत्नी हो कर.’’

”तुम बिलकुल गलत बोल रहे हो… मैं बच्चे की सौगंध खाती हूं.’’ नेहा बोली.

”गलत नहीं, सही बोल रहा हूं. बच्चा भी पता नहीं किसी और का होगा.’’

”मुझ पर इस तरह से बदचलनी का लांछन नहीं लगा सकते. क्या तुम दूसरी लड़कियों से नहीं मिलते हो?’’ नेहा ने जवाबी हमला किया.

इस के जवाब में प्रशांत बोला, ”मैं ने शादी के वक्त ही बोला था, मेरी हो कर रहना, किसी से बात मत करना. तू नहीं मानी तो अब भुगत.’’

इसी के साथ प्रशांत ने नेहा की गरदन पर चाकू का तेज वार कर दिया. इस वार को नेहा बरदाश्त नहीं कर पाई और वहीं जमीन पर गिर पड़ी. चीखने की तेज आवाज हुई. इस आवाज को सुन कर कुछ लोग घर की जाली के पास आ गए. नीचे देखने लगे. देखा, प्रशांत जमीन पर गिरी निशा पर चाकू से वार पर वार किए जा रहा था. कई वार करने के बाद उस ने घर के मेन गेट को जा कर बंद कर दिया और बेसुध पड़ी खून से सनी नेहा के पास जा कर तेज आवाज में बोलने लगा, ”मैं ने कहा था, किसी और से संबंध मत रखना. नहीं मानी तो देखा कर दिया न तेरा काम तमाम!’’

उस वक्त वहां का दृश्य भयावह था. जमीन पर गरदन कटी नेहा की लाश पड़ी थी और उस के हाथ में खून से सना चिकन काटने वाला चाकू था. वह वहीं इधरउधर टहलता रहा. एक ही बात को बोलता रहा. पास में ही नेहा के दिव्यांग पापा विनोद बैठे आंसू बहा रहे थे. उस वारदात के कई चश्मदीद गवाह थे. उन्हीं में से एक ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी. करीब 15 मिनट बाद शहर की कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई. घर का दरवाजा तोड़ कर घर में घुसी. दरवाजा तोड़ कर प्रशांत को बाहर निकाला गया.

इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह राणा ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल की और मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. सूचना पा कर एएसपी एन.पी. सिंह भी वहां पहुंच गए. फिर मौके की काररवाई पूरी कर नेहा की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. थाने पहुंच कर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. जांच की जिम्मेदारी इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह राणा के पास थी. प्रशांत को गिरफ्तार कर वहां मौजूद पड़ोसियों के अलावा नेहा की मम्मी रंजीता से भी गहन पूछताछ की गई. घटनास्थल से चाकू भी बरामद कर लिया गया. घटनास्थल पर ही प्रशांत के ससुर विनोद भी जख्मी हालत में मिले. उन्हें अधिक चोट नहीं आई थी. उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया गया.

 

प्रशांत ने पूछताछ में अपना जुर्म कुबूल कर लिया. इस हत्याकांड के पीछे के कारणों की जानकारी के लिए नेहा की मम्मी रंजीता से भी पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नेहा के शव पर चाकू के 19 जख्म मिले. प्रशांत ने स्वीकार कर लिया कि नेहा की चाकू से गले पर वार करने के बाद दिव्यांग ससुर विनोद को भी घायल कर दिया था. उस का बयान दर्ज कर पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, वहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उस का 4 वर्षीय बेटा अपनी नानी के पास था. उसे लेने के लिए प्रशांत की मम्मी गई थी, लेकिन रंजीता ने परवरिश के लिए उसे अपने पास रख लिया. love stories in hindi short