Gujrat News: पैसों की चकाचौंध में बह गई भावना

Gujrat News: 30 जून, 2023 को गुजरात के जिला भरूच के थाना जंबुसर पुलिस को सूचना मिली कि पगरनाला में एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. लाश किसी पुरुष की थी, जिस की उम्र 36 साल के आसपास थी.

मरने वाले के शरीर पर कपड़े के नाम पर सिर्फ पैंट थी. पुलिस ने पैंट की तलाशी ली कि शायद उस की जेब से ऐसा कुछ मिल जाए, जिस से उस की पहचान हो जाए. पर उस की जेब से कुछ भी नहीं मिला. आसपास भी ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की पहचान हो पाती. तब पुलिस ने घटनास्थल की औपचारिक काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस के बाद थाने आ कर यह पता करने की कोशिश की जाने लगी कि जिले में कहीं कोई गुमशुदगी तो नहीं दर्ज है. पर जिले के किसी थाने में उस हुलिए के किसी व्यक्ति की कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं थी. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने लाश को बड़ौदा की मोर्चरी में रखवा दी. इस के बाद पुलिस यह पता करने की कोशिश करती रही कि मरने वाला कौन है?

10 दिन बाद हुई लाश की शिनाख्त

लाश मिलने के 10 दिनों बाद थाना जंबुसर से करीब 400 किलोमीटर दूर जिला बनासकांठा के थाना थराद के एसएचओ इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी ने फोन कर के जंबुसर पुलिस से पूछा, “पता चला है कि आप के थानांतर्गत एक पुरुष की लाश मिली है. मरने वाले की उम्र 36 साल के आसपास है.”

“जी, आज से 10 दिन पहले नाले में एक लाश मिली थी. मरने वाले की यही उम्र होगी, जितनी आप बता रहे हैं. मैं उस के फोटो भेज रहा हूं. लाश अभी मोर्चरी में रखी है.” थाना जंबुसर पुलिस ने कहा.

जंबुसर पुलिस ने लाश के फोटो भेजे तो पता चला कि वह लाश गुजरात के जिला बनासकांठा की तहसील थराद के गांव चोटपा के रहने वाले मारवाड़ी चौधरी पटेल शंकरभाई की थी. वह गांव में रह कर खेती करने के साथसाथ मकान बनाने के ठेके लेता था. उस के परिवार में पत्नी भावना पटेल के अलावा 3 बच्चे और बूढ़े मांबाप थे. पिता को लकवा मार दिया था, इसलिए वह चलफिर नहीं सकते थे.

29 जून, 2023 को साइट से आने के बाद शाम का खाना खा कर शंकर यह कह कर घर से निकला था कि वह पड़ोस में रहने वाले ऊदाजी के पास जा रहा है. वह घर से गया तो फिर लौट कर नहीं आया. घर वालों ने थोड़ी देर इंतजार किया. पर जब समय ज्यादा होने लगा तो उस के बारे में पता करने लगे. फोन किया गया तो पता चला फोन बंद है.

अगले दिन यानी 30 जून को थाना थराद पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन थाना थराद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय एकदो दिन और इंतजार करने के लिए कह कर सूचना देने गई शंकर की मां मीरादेवी को वापस भेज दिया था.

गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने की कार्यवाही

जब 2 जुलाई तक शंकर नहीं आया तो मीरादेवी दोबारा थाने जा पहुंची. इस बार इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी से उन की मुलाकात हो गई. उन्होंने तुरंत शंकर की गुमशुदगी दर्ज कराई और शंकर के बारे में पता कराने का आश्वासन दे कर मीरादेवी को घर भेज दिया.

इस के बाद एसएचओ ने शंकर की तलाश शुरू की. गांव वालों से पूछताछ में पता चला कि शंकर की पत्नी भावनाबेन का चरित्र ठीक नहीं है. इस के बाद उन्होंने भावना का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया. इस से उन्हें पता चला कि भावना लगातार पड़ोसी गांव कलश के रहने वाले शिवा पटेल के संपर्क में है.

जब उन्होंने शिवा पटेल के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह 29 जून को अंकलेश्वर से गांव आया तो था, पर अपने घर नहीं गया था. इस के अलावा 29 जून को उस ने शंकर को फोन भी किया था. 29 जून की शंकर और शिवा के फोन की लोकेशन निकलवाई गई तो पता चला कि दोनों के फोन की लोकेशन एक साथ थी.

इस से पुलिस को उस पर शक हुआ तो पुलिस ने उस की लोकेशन निकलवाई. उस की लोकेशन अंकलेश्वर की मिली. इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी की टीम अंकलेश्वर पहुंची और शिवा को गिरफ्तार कर के थाने ले आई.

थाने ला कर शिवा से पूछताछ शुरू हुई. शिवा पुलिस को गोलगोल घुमाता रहा. उस का कहना था कि वह 29 जून को गांव गया ही नहीं था. इधर शंकर से उस की मुलाकात ही नहीं हुई, लेकिन जब पुलिस ने उस के मोबाइल फोन की लोकेशन उस के सामने रखी तो उस ने शंकर के मर्डर में अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि भावना के साथ रहने के लिए उस ने शंकर की हत्या की है. इस के बाद उस ने भावना से प्यार होने से ले कर शंकर की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

मेले में मिल गए दोनों के दिल

शंकरभाई पटेल और भावनाबेन का विवाह करीब 14 साल पहले हुआ था. शंकर अपने परिवार के साथ चोटपा गांव में खेतों के बीच मकान बना कर रहता था. उस की दोस्ती कलश गांव के शिवाभाई पटेल से थी. वह भी मारवाड़ी चौधरी पटेल था. वह भी खेतों के बीच घर बना कर रहता था, शायद इसीलिए दोनों में कुछ ज्यादा पटती थी.

शिवा शंकर के घर भी खूब आताजाता था. शिवा अंकलेश्वर में मेटल का धंधा करता था. वह जब भी अंकलेश्वर से गांव आता, शंकर को अपनी क्रेटा गाड़ी में बैठा कर घुमाता था.

एक बार वह राजस्थान के बौर्डर पर लगने वाले लवाड़ा के मेले में घूमने जा रहा था तो शंकर के साथ उस की पत्नी भावना भी मेला देखने गई थी. उसी मेले में शिवा और भावना ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया था. बाद में दोनों के बीच फोन पर बातें होने लगीं. फोन पर बातें करतेकरते दोनों के बीच प्रेम संबंध बना तो फिर शारीरिक संबंध भी बन गए.

शिवा कुंवारा था, जवान था, अच्छा पैसा कमाता था, उसे एक महिला शरीर की जरूरत भी थी, जो भावना ने पूरी कर दी थी. शिवा के पास पैसों की कमी नहीं थी, वह दिल खोल कर भावना पर पैसे खर्च करता था तो भावना भी प्यार से उस की शारीरिक जरूरतें पूरी करती थी. यह अवैध संबंध इसी तरह चलते रहे.

यह लगाव जब गहराया तो भावना अकसर शिवा से शिकायत करने लगी, “मेरा पति शंकर मुझे बहुत परेशान करता है. जराजरा सी बात पर मुझे मारता है.”

शिवा के प्यार में डूब गई भावना

जब कभी भावना और शंकर में झगड़ा होता तो भावना शिवा को फोन कर के पति और अपना झगड़ा शिवा को सुनाती भी थी. शंकर भावना के साथ जो बरताव कर रहा था, वह शिवा को अच्छा नहीं लगता था. पर वह शंकर से कुछ कह भी नहीं सकता था.

शिवा भावना से बहुत प्यार करता था, इसलिए एक दिन उस ने कहा, “तुम शंकर को छोड़ कर मेरे साथ क्यों नहीं रहने आ जाती? मैं तुम्हें रानी की तरह रखूंगा.”

इस पर भावना ने कहा, “घर में बूढ़े मांबाप हैं, उन्हें छोड़ कर आऊंगी तो समाज मुझ पर थूकेगा. मेरी बहुत बदनामी होगी.”

“तब तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” शिवा ने कहा.

“कुछ तो करना ही होगा, मैं इस आदमी के साथ अब नहीं रह सकती.” भावना बोली.

28 जून, 2023 को किसी बात पर शंकर और भावना में झगड़ा हुआ. तब भावना ने शिवा को फोन कर के कहा, “शिवा, तुम किसी भी तरह मुझे इस आदमी से छुड़ाओ. अब मैं इस आदमी के साथ बिलकुल नहीं रह सकती.”

शिवा भावना से प्यार तो करता ही था. पर उस के लिए परेशानी यह थी कि उस की बिरादरी में पति या पत्नी को छोडऩा आसान नहीं है. इसलिए जब उस ने भावना से एक बार फिर शंकर को छोड़ कर आने को कहा तो भावना बोली, “अगर मैं शंकर को छोड़ कर आती हूं तो समाज में मेरी बहुत बदनामी होगी. इसलिए शंकर से छुटकारा पाने के लिए उस का कुछ करना होगा.”

“वही तो मैं पूछ रहा हूं कि शंकर का किया जाए?” शिवा ने पूछा.

“ऐसा है, अगर तुम मेरे साथ रहना चाहते हो तो उसे खत्म कर दो. वह नहीं रहेगा तो हम दोनों आराम से रह सकेंगे.” भावना ने कहा.

“ठीक है, जैसा तुम कह रही हो, वैसा ही करते हैं. आराम से बैठ कर योजना बनाते हैं, उस के बाद शंकर को खत्म कर देते हैं.” शिवा ने कहा.

शंकर की हत्या की हुई प्लानिंग

28 जून को यह बात हुई थी. इस के पहले भी दोनों में शंकर नाम के कांटे को निकालने की कई बार बात हो चुकी थी, लेकिन इस के पहले फाइनल योजना नहीं बनी थी. पर इस बार दोनों ने फोन पर ही शंकर को खत्म करने की फाइनल योजना बना डाली.

योजना बनाने के बाद किसी को शक न हो, इसलिए भावना 28 जून को ही मायके चली गई. 29 जून को शिवा ने एक दूसरे नंबर से अपने दोस्त शंकर को फोन कर के अच्छीअच्छी बातें करने के बाद विश्वास में ले कर कहा, “यार शंकर, तुम से एक जरूरी काम है. मैं गाड़ी ले कर आ रहा हूं. तुम ऐसा करो, सडक़ पर आ कर मुझ से मिलो.”

इस बीच भावना से भी शिवा की बातचीत होती रही. 2 महीने पहले भावना और शिवा के बीच शंकर को मारने की बात हुई थी, तब भावना ने कहा था कि शंकर को नींद की गोली खिला कर खत्म कर दो. इसलिए 2 महीने पहले ही उस ने भरूच सिटी से नींद की गोलियां खरीद कर रख ली थीं, जो उस की गाड़ी में ही रखी थीं. 2 महीने पहले हुई बातचीत के अनुसार शिवा अपनी योजना में आगे बढ़ रहा था.

कार में गला घोंट कर की थी हत्या

29 जून, 2023 की दोपहर को अपनी क्रेटा कार नंबर जीजे16डी के1389 ले कर शिवा अंकलेश्वर से निकला. उस ने अपने निकलने की बात शंकर को बता दी थी. चलने के पहले उस ने नींद की गोलियां पीस कर पानी की बोतल में मिला दी थीं.

रात करीब 9 बजे वह गांव चोटपा पहुंचा. उस ने शंकर से बता ही दिया था कि एक जरूरी काम से उसे साथ चलना है, इसलिए वह खाना खा कर तैयार था. गांव पहुंचते ही शिवा ने फोन किया तो शंकर आ कर उस की कार में बैठ गया. शिवा इधरउधर गाड़ी घुमाने लगा.

शिवा समय गुजार रहा था कि शंकर उस से पानी पीने के लिए मांगे. इसलिए वह शंकर को चोटपा से खोडा चरकपोस्ट, साचोर, ननेवा से घानेरा ले गया. जब वह काफी दूर निकल गया तो शंकर ने पानी पीने के लिए मांगा. शिवा ने तुरंत पानी की वही बोतल पकड़ा दी, जिस में उस ने नींद की गोलियां पीस कर मिलाई थीं.

वह पानी पीने के थोड़ी देर बाद शंकर को नींद आ गई. इस के बाद शिवा घानेरा से सीधे डीसा रोड पर गया. सडक़ पर सुनसान जगह देख कर शिवा ने कार रोकी और शंकर के मोबाइल को स्विच्ड औफ कर दिया कि किसी को पता न चल सके.

इस के बाद वह गाड़ी ले कर चल पड़ा. काफी दूर जाने के बाद सुनसान जगह देख कर उस ने सडक़ के किनारे गाड़ी रोक दी. शंकर गहरी नींद में था. शिवा ने कार में रखी रस्सी निकाली और शंकर के गले में लपेट कर कस दी. गला घोंटने से शंकर की सांस हमेशा हमेशा के लिए रुक गई.

बच्चों के अनाथ होने पर समाज ने की मदद

अब उसे शंकर की लाश को ठिकाने लगाना था. वह लाश को ऐसी जगह फेंकना चाहता था, जहां कोई उस की पहचान न कर सके. उस ने शंकर को आगे की सीट पर इस तरह बैठा दिया, जिस से लगे कि वह बैठेबैठे सो रहा हो.

शंकर की लाश को ले कर वह डीसा, पालनपुर, मेहसाणा, अहमदाबाद, बड़ौदा होते हुए वह जंबुसर गया. जंबुसर चौराहे से थोड़ी दूर आगे से सिंगल रोड गई थी. उसे वह रोड सुनसान दिखाई दी तो उस ने कार उसी रोड पर उतार दी. लगभग एक किलोमीटर जा कर शिवा को एक पगरनाला दिखाई दिया तो उस ने शंकर की लाश उसी पगरनाले में फेंक दी. उस समय सुबह के 6 बज रहे थे.

लाश को ठिकाने लगाने के बाद शिवा ने फोन कर के यह बात भावना को बताई और वहां से सीधे अंकलेश्वर चला गया. 2 दिन बाद भावना भी ससुराल आ गई, जिस से किसी को उस पर शक न हो.

हत्याकांड का खुलासा हो जाने के बाद थाना थराद पुलिस ने भावना को भी गिरफ्तार कर लिया. शिवा को थाने में देख कर उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. इस के बाद थाना थराद पुलिस ने शिवा और भावना को बनासकांठा की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों का 6 दिन का रिमांड लिया गया.

रिमांड के दौरान बनासकांठा के एसपी अक्षयराज मकवाना ने प्रैस कौन्फ्रैंस की. पत्रकारों के सामने भी प्रेमिका प्रेमी भावना और शिवा ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद सारे सबूत जुटा कर पुलिस ने दोनों को दोबारा अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

शंकर, जिस की हत्या हुई है, उस के पिता लकवाग्रस्त हैं, मां बूढ़ी है. 3 बच्चे हैं, जिस में सब से बड़ी बेटी 7 साल, उस से छोटा बेटा 4 साल और सब से छोटा बेटा 2 साल का है. पिता की हत्या हो गई है. पिता की हत्या के आरोप में मां जेल में है. बच्चों की हालत पर दया खा कर आजणा चौधरी समाज के बुजुर्गों ने बच्चों की मदद के लिए 15 लाख रुपए इकट्ठा कर के दिए हैं. Gujrat News

UP Crime News: विदेशी कौलगर्ल की हत्या का राज

UP Crime News: तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत नाजमुदिनोवा करीब 15 साल पहले इंडिया घूमने आई थी, लेकिन दलालों के चंगुल में फंस कर वह जिस्मफरोशी का धंधा करने लगी. उस की हत्या की गुत्थी सुलझाते समय पुलिस को ऐसी चौंकाने वाली जानकारी मिली कि…

21 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मवाना कोतवाली पुलिस को एक किसान ने फोन कर के जो सूचना दी, उस से पुलिस वाले हैरान हो गए. मवाना खुर्द के भगवती फार्महाउस के पास सरसों के खेत में एक महिला का शव पड़ा हुआ मिला था. यह फार्महाउस पौड़ी हाइवे पर पड़ता है. मवाना खुर्द चौकी के प्रभारी एसआई राजेश कुमार यादव को थाने से इस कौल की सूचना पर मौके पर तत्काल पहुंचने का आदेश मिला तो वह चौकी के स्टाफ को ले कर तत्काल वहां पहुंच गए, जहां महिला का शव पड़ा था.

महिला का चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था. ऐसा लगता था किसी ने उस के चेहरे पर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाला था. इतना ही नहीं, शरीर के 1-2 जगह और भी ज्वलनशील पदार्थ डाला गया था. यह तो समझ में आता था कि उस के चेहरे पर तेजाब शायद इसलिए डाला गया था ताकि मृतका की पहचान खत्म हो जाए, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों को क्यों जलाया गया था. यह जानने के लिए जब एसआई राजेश ने शरीर के उन हिस्सों का निरीक्षण किया तो पता चला कि उन सभी जगहों पर बड़ेबड़े टैटू बने हुए थे. लेकिन ज्वलनशील पदार्थ डाले जाने के बाद भी वे हिस्से पूरी तरह झुलस नहीं पाए थे.

एआई राजेश यादव जांचपड़ताल के काम में लगे ही थे कि तभी मवाना थाने की एसएचओ पूनम जादौन और सीओ पंकज लवानिया भी वहां पहुंच गए. एसएचओ और सीओ ने लाश के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. सवाल था कि मरने वाली कौन थी? यह पता लगाने के लिए जब कुछ महिलाकर्मियों की मदद से मृतका के शरीर पर पहने कपड़ों की तलाशी ली गई तो उस की जेब से एक ऐसी चीज मिली, जिस से मृतका की पहचान की गुत्थी भी सुलझ गई.

कपड़ों से एक आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अर्चिता अरोड़ा और पता दिल्ली का दर्ज था. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आधार कार्ड पर फोटो एक विदेशी युवती का लगा था. जबकि नाम एकदम देशी था. इसीलिए सीओ पंकज लवानिया को सहज विश्वास नहीं हुआ कि मृतका और उस की पहचान के बीच जो रिश्ता है वो एकदम सही है. इस दौरान एसपी (देहात) अभिजीत कुमार भी क्राइम व फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल की जांच व निरीक्षण का काम पूरा होने के बाद मवाना पुलिस ने कथित अर्चिता अरोड़ा के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

चूंकि मृतका अर्चिता अरोड़ा के शव का निरीक्षण सब से पहले एसआई राजेश यादव ने किया था, इसलिए सीओ पंकज लवानिया के निर्देश पर एक लिखित तहरीर थाने में दी और इसी के आधार पर मवाना थाने में बीएनएस की धारा 103(1), 238 के अंतर्गत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसपी (देहात) अभिजीत कुमार के निर्देश पर जांच का काम खुद एसएचओ पूनम जादौन ने अपने हाथ में ले लिया. एसपी (देहात) ने 2 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. एक टीम को घटनास्थल की जांच और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने का काम सौंपा गया.

दूसरी टीम को मृतका के बारे में पुख्ता जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया. सभी पुलिस टीमों की मौनिटरिंग और सर्विलांस का काम सीओ पंकज लवानिया को सौंपा गया.

पुलिस की एक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच शुरू कर दी. साथ ही उस जगह के आसपास की जगहों के सीसीटीवी फुटेज तलाशने का काम भी शुरू कर दिया, जहां अर्चिता अरोड़ा के शव को फेंका गया था. काम थोड़ा मशक्कत वाला और पेचीदा जरूर था, लेकिन जब पुलिस की टीम ने अपना काम शुरू किया तो अगले 24 घंटे में करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तलाश लिए, जिन से पुलिस को उन कातिलों तक पहुंचने का सुराग मिल गया, जिन्होंने अर्चिता का शव वहां ला कर फेंका था.

हाइवे पर बने भगवती फार्महाउस के सीसीटीवी कैमरे में पुलिस टीम को एक क्रेटा कार दिखी, जिस में कुछ लोग दिखे. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे लोगों की संख्या करीब 3 से 4 थी, जो कंबल में लिपटे एक मानव शरीर को ले कर उस स्थान की तरफ गए, जहां अर्चिता का शव मिला था. पुलिस ने तकनीकी सहायता से आखिरकार ये पता लगा लिया कि उस क्रेटा कार का नंबर क्या है और वह किस के नाम पर रजिस्टर्ड है.

मुहब्बत उर्फ अर्चिता अरोड़ाः सालों पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत घूमने आई थी, लेकिन यहां आ कर दलालों के जाल में फंस गई.

यह क्रेटा कार मेरठ के सिविल लाइन इलाके में प्रभात नगर कालोनी के रहने वाले संदीप उर्फ सिट्टू उर्फ राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पुलिस की एक टीम ने उसी दिन संदीप को हिरासत में ले लिया और उस से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस तो पुलिस होती है, वह जब अपने तरीके से पूछताछ करती है तो इंसान क्या पत्थर भी बोलने लगते हैं. संदीप उर्फ राहुल ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सका. संदीप ने पुलिस को बताया कि वह परतापुर के दिल्ली रोड स्थित अविका होटल में काम करता है. इस के बाद संदीप ने टेप रिकौर्ड की तरह बोलते हुए पुलिस को सब कुछ बता दिया कि उस ने क्यों और कैसे तथा किस के साथ मिल कर अर्चिता की हत्या की है.

संदीप से पूछताछ के बाद पुलिस ने अविका होटल के मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी निवासी न्यू देवपुरी थाना रेलवे रोड, मेरठ के अलावा वहां काम करने वाले एक अन्य  कर्मचारी गुरमुख उर्फ अरविंद उर्फ मोनू निवासी जौहड़ी बिनौली बागपत तथा विवेक उर्फ काका निवासी खजूरी वाली गली मलियाना, टीपीनगर मेरठ को ताबड़तोड़ छापेमारी कर हिरासत में ले लिया. संदीप समेत उन चारों से कड़ी पूछताछ हुई तो उन्होंने अर्चिता की हत्या का पूरा राज खोल कर रख दिया.

संदीप और उस के साथियों ने यह भी बताया कि पुलिस ने जिस महिला का शव बरामद किया है, उस का नाम अर्चिता अरोड़ा है, जो बैंक रोड अंबाला कैंट की रहने वाली है. हाल में वह दिल्ली के लोधी रोड स्थित कोटला मुबारकपुर में रहती थी. संदीप ने बताया कि अर्चिता जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी थी. वह अकसर मेरठ में आती थी, जहां वह अपने चाहने वालों का दिल बहला कर उन की जेब खाली कराती थी. इस काम के लिए अर्चिता अविका होटल में रूम बुक करती थी.

20 फरवरी, 2026 को भी उस ने रूम बुक किया था. रात के समय अर्चिता से होटल मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी का रूम के किराए को ले कर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि अर्चिता ने चंचल पर दुष्कर्म का आरोप लगाने की धमकी दे डाली. उस के बाद चंचल को इतना गुस्सा आया कि उस ने होटल के अपने 3 कर्मचारियों के साथ मिल कर अर्चिता के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस ने अर्चिता की इतनी पिटाई कर दी कि कि वह बेहोश हो गई.

चंचल कुमार उर्फ बंटी के सिर पर गुस्सा इस कदर सवार था कि उस वक्त उसे इस बात का होश ही नहीं था कि वह क्या कर रहा है. उस ने बेहोश अर्चिता के शरीर पर कंबल डाल दिया और उस के बाद गुस्से में ही उस की गरदन दबाते हुए चीखने लगा, ”साली वेश्या, तू मुझे झूठे केस में फंसाएगी. मुझे जेल भिजवाएगी. मेरे जरिए तूने लाखों रुपया कमाया और आज तू मुझे जेल भिजवाने की धमकी दे रही है. देखता हूं कि आज तुझे कौन बचाता है.’’

बाएं – मृतका के कपड़ों से बरामद अर्चिता अरोड़ा नाम का आधार कार्ड तथा नीचे उस का तुर्कमेनिस्तान का पासपोर्ट

चंचल कुमार को पता ही नहीं चला कि गुस्से की आग में उस ने कब कंबल के अंदर लिपटी अर्चिता की गला दबा कर हत्या कर दी है. अर्चिता के शरीर में जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो चंचल कुमार का गुस्सा भी थोड़ी ही देर में शांत हो गया. कुछ देर बाद जब चंचल का गुस्सा शांत हुआ तो उस ने सोचा एक बार अर्चिता से बात कर ली जाए. उस ने जब अर्चिता को हिला कर उस से बात करने की कोशिश की तो पता चला कि वह निर्जीव पड़ी है.

उस ने होटल के तीनों कर्मचारियों संदीप, गुरुमुख और विवेक को बुला कर अर्चिता को होश में लाने के लिए कहा. तीनों ने जब उस की नब्ज टटोली तो पता चला उस की नब्ज बंद हो चुकी थी. कई तरह से जांचपड़ताल करने के बाद वे समझ गए कि अर्चिता की मौत हो चुकी है. जैसे ही चंचल उर्फ बंटी को यह पता चला कि अर्चिता मर चुकी है तो उन सभी के होश उड़ गए. काफी देर तक वे समझ ही नहीं पाए कि अब वे क्या करें.

लेकिन करीब एक घंटा बीत जाने के बाद उन्हें समझ में आया कि अगर उन्हें इस मामले में बचना है और पुलिस की पकड़ से दूर रहना है तो उन्हें अर्चिता के शव को अपने होटल से कहीं दूर ले जा कर ठिकाने लगाना होगा. बहुत सोचनेविचारने और सलाहमशविरा करने के बाद उन्होंने तय किया कि वे रात में ही गाड़ी में डाल कर अर्चिता के शव को कहीं और फेंक आऐंगे. उन्होंने सब से पहले तेजाब डाल कर अर्चिता के चेहरे को जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. इतना ही नहीं, उस के शरीर के जिन हिस्सों में टैटू बने थे, वहां भी तेजाब डाल दिया गया.

चंडीगढ़ की एलिना से संपर्क करने पर उस ने मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना से वीडियो कौल पर पुलिस की बात कराई.

चंचल जानता था कि अर्चिता मेरठ की रहने वाली नहीं है, वह केवल अमीरजादों के जिस्म की भूख मिटा कर पैसा कमाने के लिए मेरठ आती थी. उसे शहर में ज्यादा लोग नहीं जानते हैं. अगर वे उस के चेहरे की पहचान मिटा कर उस के शव को अपने होटल से कहीं दूर डाल देंगे तो फिर उन के पकड़े जाने की संभावना नहीं है.

तेजाब से पहचान मिटा कर चंचल ने अपने तीनों साथियों के साथ मिल कर अर्चिता के शव को कंबल में लपेट कर संदीप उर्फ सिट्टू की क्रेटा कार में डाला. चंचल कुमार और उस के साथी अर्चिता की लाश को क्रेटा कार में डाल कर कारीब 45 किलोमीटर तक इधर से उधर भटकते रहे. इसी तरह वे मेरठ से होते हुए मवाना रोड निकल गए. कहीं चैकिंग नहीं हुई. वे मवाना खुर्द पुलिस चौकी के पास पौड़ी हाइवे पर स्थित भगवती फार्महाउस तक जा पहुंचे. फार्महाउस के पास पहुंच कर उन्हें लगा कि यहां लाश को ठिकाने लगाना उचित रहेगा.

वहां गाड़ी खड़ी कर के उस के बाद सभी चारों आरोपियों ने फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर सरसों के खेत में कंबल समेत अर्चिता का शव डाल दिया. इस के बाद चारों आरोपी मौके से वापस अपने घरों को लौट आए. लेकिन घर लौटने के बाद भी चारों आरोपी मवाना पुलिस की गतिविधियों पर नजर बनाए रहे. पूछताछ का काम पूरा होने पर पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग की गई क्रेटा कार, होटल का कंबल और तेजाब की खाली बोतल भी बरामद कर सीज कर दी गई.

पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों को जुटाने के बाद चारों आरोपियों चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक को सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथित अर्चिता अरोड़ा की शिनाख्त से ले कर हत्या के कारण व उस के कातिलों को गिरफ्तार करने की गुत्थी मवाना पुलिस ने सुलझा ली थी. लेकिन मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के साथ एसपी (देहात) अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया ने जब जांच अधिकारी पूनम जादौन के साथ हत्याकांड के एकएक बिंदु पर गहनता से चर्चा शुरू की तो सभी उच्चाधिकारियों को लगा कि कुछ ऐसा जरूर है, जो जांच में छूट रहा है.

पुलिस हिरासत में आरोपी चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक

विचारविमर्श के बाद तय हुआ कि अर्चिता के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करनी होगी, क्योंकि पुलिस ने अर्चिता का जो आधार कार्ड बरामद किया था, उस में भले ही उस का नाम अर्चिता अरोड़ा था, लेकिन उस में जो फोटो थी वह एक विदेशी महिला की लग रही थी, इसलिए उस के भारतीय होने पर संदेह था. पुलिस की टीमों को अब अर्चिता की सही पहचान स्थापित करने के काम पर लगाया गया. महिला की सही पहचान और उस के परिवार वालों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए टीमें गठित कर दी गईं.

पुलिस को मृतका का जो आधार कार्ड बरामद हुआ था, उस में उस का नाम अर्चिता अरोड़ा पुत्री सरबजीत अरोड़ा निवासी 1811, दूसरा फ्लोर, साउथ एक्सटेंशन, कोटला मुबारकपुर, लोधी रोड मध्य दिल्ली का पता दर्ज था. इस में जन्मतिथि 27 अप्रैल, 1984 दर्ज मिली. पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो जानकारी मिली कि वह इस पते पर नहीं रहती. थकहार कर पुलिस खाली हाथ लौट आई. जब अर्चिता के आधार वाले पते से कोई सुराग नहीं मिला तो जांच अधिकारी पूनम जादौन ने उस के मोबाइन नंबर का सहारा लिया.

दरअसल, अर्चिता के आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने अर्चिता का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. पुलिस ने अर्चिता के मोबाइल की 3 महीने की कौल डिटेल्स निकाली. उस में अर्चिता के मोबाइल काल डिटेल में आखिरी नंबर किसी एलिना का था, जिस का नाम उस की कौंटेक्ट लिस्ट में दर्ज था. एलिना से फोन पर बातचीत कर पुलिस ने उसे भगवती फार्महाउस में मिले एक महिला के शव और उस के पास से बरामद अर्चिता अरोड़ा के आधार कार्ड की बाबत जानकारी दी.

कौल डिटेल्स से यह भी पता चला कि अर्चिता की हत्या में पकड़े गए आरोपी चंचल कुमार से एक साल से संबंध थे. वह अकसर मेरठ आतीजाती रहती थी. हर बार उस के नाम पर एक रात या दिन के लिए अविका होटल का रूम बुक होता था. कौल डिटेल्स में चूंकि अर्चिता की आखिरी बार 20 फरवरी, 2026 को एलिना से बात हुई थी. पुलिस ने एलिना से अनुरोध किया कि वह अर्चिता के शव की पहचान करें.

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रेंस करते पुलिस अधिकारी

एलिना चूंकि चंडीगढ़ में रहती थी, इसलिए 25 फरवरी को मवाना थाने के एक एसआई सुमित कुमार ने एलिना से संपर्क किया. उन्होंने अर्चिता के शव के हर ऐंगल की फोटोग्राफ एलिना को दिखाई तो एलिना ने खुलासा हुआ कि मृतका अर्चिता अरोड़ा नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है. एलिना के इस खुलासे के बाद अचानक पूरे केस की थ्योरी ही बदल गई. एलिना ने बताया कि मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना तुर्कमेनिस्तान में रहती है. एलिना ने एसआई सुमित कुमार से ली गई फोटो मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना को भेजी.

मम्मी ने भी ईयरिंग, ब्लैकटौप और शरीर पर बने टैटू के आधार पर उस की पहचान अपनी बेटी मुहब्बत के रूप में की. उन्होंने एसआई सुमित कुमार से वीडियो कौल पर बातचीत में बताया कि मुहब्बत करीब 15 साल पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत आई थी और कथित रूप से दलालों के चंगुल में फंस गई थी. दलालों ने उस का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया और उन्होंने उसे नौकरी की जगह उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया.

एसएसपी अविनाश पांडेय

मुहब्बत ने अपनी पहचान के लिए दलालों के जरिए अर्चिता अरोड़ा के नाम पर आधार कार्ड बनवा लिया, लेकिन उस पर फोटो मुहब्बत का ही लगा था. मां नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना ने यह भी खुलासा किया कि मुहब्बत भारत में जिस्मफरोशी का काम कर रही थी. पासपोर्ट पर भी उस का नाम मुहब्बत नाजमुदिनोवा था, जोकि तुर्कमेनिस्तान की नागरिक थी. मुहब्बत लगभग 15 साल से भारत में रह रही थी. एसआई सुमित कुमार से बातचीत के बाद मुहब्बत की मम्मी ने भारत में रहने वाली अपनी दोस्त उज्बेकिस्तान की रहने वाली कलिचेवा अजीजा फैजुलेवना से बातचीत की. वह भी चंडीगढ़ में रहती थी.

सीओ पंकज उस ने जब भार लवानिया

अजीजा ने वीडियो कौल पर मुहब्बत की मम्मी से बातचीत की. अजीजा एलिना को साथ ले कर 25 फरवरी को मवाना थाने पहुंची. उस ने जांच अधिकारी पूनम जादौन, सीओ पंकज लवानिया और उस के बाद एसपी (देहात) अभिजीत कुमार से मुलाकात और बातचीत की.  दूसरी तरफ मुहब्बत की मम्मी गुलनारा ने तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को एक पत्र भेज कर बताया कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि खुद भारत आ सकूं. उस ने अजीजा के जरिए तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को यह लेटर भेजा, ताकि उस की गैरमौजूदगी में अजीजा ही पुलिस से संपर्क कर सके.

एसएचओ पुनम जादौन

गुलनारा ने दावा किया कि मृतका भारतीय नहीं, बल्कि उस की बेटी मुहब्बत है. एलिना और अजीजा के पुलिस से संपर्क करने तथा तुर्कमेनिस्तान एंबेसी के हस्तक्षेप के बाद मवाना पुलिस पूरी तरह ऐक्टिव हो गई. सीओ पंकज लवानिया को विश्वास हो गया कि अब कथित अर्चिता अरोड़ा की सही पहचान हो जाएगी. इस दौरान एंबेसी की मदद से पुलिस को मुहब्बत के पासपोर्ट की कौपी भी मिल गई. इसलिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय को पासपोर्ट और केस की डिटेल भेज दी है और अर्चिता उर्फ मुहब्बत का डीएनए टेस्ट कराने के लिए उस की मम्मी को एक अनुरोध पत्र भी भेज दिया.

पूछताछ में पता चला कि मृतका अर्चिता अरोड़ा का जन्मस्थान भले ही तुर्कमेनिस्तान था, लेकिन उस के पापा सरबजीत अरोड़ा भारत के ही निवासी हैं. जबकि मम्मी तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली थी. इसीलिए उस ने जब भारत आने पर अपना आधार कार्ड बनवाया तो उस में अपनी पहचान अर्चिता अरोड़ा के रूप में दी. पुलिस ने अर्चिता उर्फ मुहब्बत की हत्या और उस की पहचान की गुत्थी एक तरह से सुलझा ली थी.

लेकिन इस मामले की तह में एक बड़े ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट के जुड़े होने की बू आ रही थी. क्योंकि अर्चिता उर्फ मुहब्बत ही नहीं, देश में ऐसी बहुत सारी विदेशी महिलाएं हैं, जिन के पास भारत में फरजी पहचान पत्र हैं. फरजी आधार कार्ड तो हैं, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है. UP Crime News

 

 

 

UP Crime: शादी के बाद प्रेमी पर कितना हक

UP Crime: शिवानी निषाद की शादी देवरिया के युवक से हो जरूर गई थी, लेकिन वह किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी विनय उर्फ दीपक निषाद को छोडऩा नहीं चाहती थी. विनय ने उसे लाख समझाया, लेकिन वह प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी थी. एक दिन प्रेमी पर हक जमाना शिवानी को इतना भारी पड़ा कि…

अपनी प्रेमिका शिवानी की जिद से विनय उर्फ दीपक निषाद डर चुका था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे शिवानी से कैसे निबटा जाए? जिस तरह से वह अपनी जिद पर अड़ी हुई थी, सचमुच उस के गले की हड्डी बन गई थी, जो न तो निगली जा रही थी और न ही उगली ही जा रही थी. इसी उहापोह में उस ने शिवानी से निबटने के लिए एक खतरनाक रास्ता अख्तियार करने के लिए अपना मन मजबूत कर लिया था.

शिवानी उसे पहले ही बता चुकी थी कि वह 23 नवंबर, 2025 को अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने के लिए ससुराल से आ रही है. वह हमेशाहमेशा के लिए ससुराल छोड़ कर मायके रहने के लिए आ रही है. विनय के दिमाग में तभी एक खतरनाक प्लान ने जन्म ले लिया. काफी सोचविचार कर उस ने इसी मौके पर प्रेमिका शिवानी को मौत के घाट उतारने का प्लान बनाया. खतरनाक प्लान बना कर वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.

शादी से 3 दिन पहले यानी 21 नवंबर, 2025 को देवरिया में स्थित अपनी ससुराल से शिवानी चचेरी बहन की शादी में शरीक होने के लिए रसूलपुर अपने मायके पति के साथ आई. ससुराल के बाकी सदस्य शादी वाले दिन आने वाले थे. वह बहुत खुश थी. उस के खुश होने का सब से बड़ा कारण शादी में शरीक होना नहीं था, बल्कि वह इसलिए खुश हो रही थी कि उस का मिलन उस के प्रेमी विनय से होने वाला था, क्योंकि प्रेमी ने उसे वचन दिया था कि वह उसे हमेशा के लिए अपना लेगा. यही सोचसोच कर वह खुश हो रही थी.

23 नवंबर, 2025 की रात 8 बजे रसूलपुर गांव से 500 मीटर दूर शादी का कार्यक्रम था. कार्यक्रमस्थल पर सुबह से ही फेमिली वालों के आनेजाने का सिलसिला जारी था. घर वाले बेहद खुश थे. नियत समय पर रात में बारात दरवाजे पर लग गई थी. रात 10 बजे जयमाल का कार्यक्रम शुरू हो गया था. घर के सदस्य और नातेरिश्तेदार कार्यक्रम का लुत्फ उठा रहे थे. शिवानी भी वहां मौजूद थी और बेहद खुश नजर आ रही थी.

शिवानी निषादः विवाह हो जाने के बाद भी विनय के साथ रहने की जिद कर रही थी

उसी समय उस की नजर बाहर दरवाजे की ओर पड़ी तो उस की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. बाहर दरवाजे पर प्रेमी विनय खड़ा उसे ही देख रहा था और इशारा कर उसे अपने पास बुला रहा था. उसे देख कर ही इशारे से शिवानी ने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओ, जयमाला देख लूं, फिर आ रही हूं. विनय ने आंखें तरेर कर उसे तुरंत अपने पास आने का इशारा किया तो शिवानी न चाहते हुए भी उस से मिलने उस की ओर हो ली. विनय नजरें बचाते हुए वहां से शिवानी को ले कर उस के ही घर की ओर बढा. इतनी सफाई से दोनों वहां से घर की ओर निकले थे कि वहां से जाते हुए उन्हें किसी ने भी नहीं देखा.

विनय यही चाहता भी था कि उसे वहां से जाते हुए कोई न देख पाए और उस ने प्रेमिका शिवानी को मारने का जो फुलप्रूफ प्लान बनाया है, वह शतप्रतिशत कामयाब हो जाए. सब कुछ उस के प्लान के अनुसार चल रहा था. शिवानी नहीं जानती थी कि जिसे वह सच्चे दिल से प्यार करती है, वही फरेबी आशिक उस के जीवन का दीया बुझाने जा रहा है. उस के खतरनाक इरादों की उसे तनिक भी भनक होती तो वह उस के साथ कतई नहीं जाती. लेकिन वह तो ये सोच कर खुश हो रही थी कि जैसेतैसे कर के प्रेमी को अपने प्यार के तराजू पर तौल कर साथ रखने को मना ही लेगी, उसे पीछे हटने नहीं देगी.

रात लगभग साढ़े 10 बजे विनय शिवानी को ले कर उस के घर के वाशरूम में पहुंचा, क्योंकि घर के बाकी सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था, इसलिए उन्हें वाशरूम का चुनाव करना पड़ा था. खैर, कुछ देर वहां गहरी खामोश छाई रही, फिर शिवानी ने ही खामोशी तोड़ी, ”बताओ, तुम मुझे यहां क्यों ले कर आए हो?’’

”मैं तुम से खुल कर बात नहीं कर पा रहा था, जब से ससुराल से लौट कर आई हो.’’

”अच्छा, इतना मिस कर रहे थे मुझे. तो फिर फोन पर तो न जाने कैसीकैसी बातें कर रहे थे. लगता है मुझे खोने का एहसास हो गया है जनाब को.’’

”कुछ ऐसा ही सोच लो. मेरे दिल में तुम्हारे लिए जो प्यार है, इस जनम में तो क्या, जनमजनम तक कभी कम नहीं होगा. मैं भी तुम्हारे लिए उतना ही तड़पा हूं, जितना तुम मेरे लिए विरह की आग में जली हो.’’ शातिर विनय ने भावनाओं के तरकश से तीर निशाने पर लगाया. उस का निशाना ठीक जगह पर लगा था. वह आगे बोला, ”रियली मुझे अब अपने किए का बहुत पछतावा हो रहा है. सच कहूं तो मैं सचमुच कायर था, बुजदिल था, डरपोक था, जो तुम जैसी महबूबा के सच्चे प्यार को नहीं समझ सका. तुम्हारी सच्ची भावनाओं की कद्र नहीं कर सका. हो सके तो मुझे माफ कर देना शिवानी. आज के बाद तुम्हें कभी दुख नहीं होने दूंगा, तुम्हें इतना प्यार दूंगा कि बीते दिनों के जख्मों को भुला दोगी.’’

”सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते. आप को अपनी शिवानी की याद आई, उस का प्यार याद आया तो समझो कि मेरे सारे गिलेशिकवे मिट गए. अब दोनों मिल कर साथ रहेंगे और साथ जीएंगे भी, जमाना चाहे जो भी सोचे. हम दो जिस्म, एक जान थे, जान हैं और जान रहेंगे. हमें कोई अलग नहीं कर सकता.’’ शिवानी बोली.

शिवानी की बात सुन कर विनय के जिस्म में आग लग गई. वह उस से छुटकारा पाने के लिए पापड़ बेल रहा था और शिवानी थी कि उसे ले कर भविष्य की योजनाएं बना रही थी. तभी विनय ने अपने तरकश से भावनाओं का एक तीर निकाला और चलाते हुए बोला, ”आई लव यू मेरी जान. सच कहा तुम ने, हमें एकदूसरे से कोई जुदा नहीं कर सकता. हम 2 जिस्म एक जान हैं.’’ कह कर विनय ने शिवानी का  माथा चूमा और उसे सीने से आलिंगनबद्ध किया तो वह भी अपना प्यार लुटाने के लिए उस में समा गई और उसे प्यार करने लगी.

विनय इसी समय का इंतजार कर रहा था. शातिर विनय ने उसी समय अपनी कमर में खोंस रखा धारदार हंसिया निकाला और शिवानी की गरदन पर चला दिया. अचानक हुए हमले से शिवानी घबरा गई और उस की मजबूत पकड़ से दूर हो कर जान बचाने के लिए पीछे की तरफ भागी. आशिक से शैतान बना विनय उस पर शेर के मानिंद टूट पड़ा. दोनों के बीच में गुत्थमगुत्थी हो गई.

शिवानी विनय के चंगुल से खुद को आजाद कराने के लिए संघर्ष करती रही, लेकिन उस के वार से बच नहीं पाई और अपने ही खून से सनी शिवानी धीरेधीरे ठंडी पड़ती गई. जब उस ने उसे हिलाडुला कर देखा तो उस के शरीर में कोई हरकत होती नहीं दिखी तो वह समझ गया कि ये मर चुकी है. फिर उस ने वाशरूम में पड़े कपड़ों से खून से सना हंसिया साफ किया और बाल्टी में भरे पानी से अपना हाथमुंह धो कर अपने घर लौट गया और इत्मीनान से सो गया. घटनास्थल से 200 मीटर दूर उस का घर था. हंसिया उस ने बीच रास्ते की झाडिय़ों में छिपा दिया था.

शिवानी को शादी मंडप से निकले घंटों बीत चुके थे, उस की मम्मी नोहरी देवी बेटी को काफी देर से ढूढ रही थी. वह स्टेज से उतरने के बाद से दिखाई नहीं दे रही थी तो नोहरी देवी घर के सभी सदस्यों से उस के बारे में पूछ चुकी थी. किसी ने भी उस के बारे में ठीक से जवाब नहीं दिया, सभी यही कहते रहे कि काफी देर से वह यहां दिखाई नहीं दे रही है. शादी स्थल पर बेटी को न पा कर नोहरी देवी बुरी तरह परेशान हो गई थीं. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी रात में वह कहां जा सकती है?

पता नहीं क्यों नोहरी देवी का मन बेटी को ले कर बुरी तरह घबरा रहा था. अचानक मन में खयाल आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आराम करने के लिए घर चली गई हो. घर पर भी जा कर देख लेते हैं. यह सोच वह घर के लिए चल दीं. घर पर सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था. यह देख कर उस का मन किसी अनहोनी से भर गया और वह बुरी तरह परेशान हो गई. फिर बेटी को तलाशते हुए नोहरी देवी गुसलखाने में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर वह बुरी तरह चीख पड़ीं. शिवानी खून में सनी मरी पड़ी थी. उलटे पांव दौड़ती हुई नोहरा देवी शादी के मंडप में पहुंची, जहां शादी हो रही थी. सभी को उस ने शिवानी की हत्या की खबर दी.

फिर क्या था? पलभर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और शादी का कार्यक्रम बीच में छोड़ कर सभी लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. शादी के घर में खुशियों की जगह मातम छा गया था. घर में रोनापीटना शुरू हो गया. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह काम किस ने और क्यों किया? उसी रात घटना की सूचना ग्राम प्रधान शिवकरन ने थाना झंगहा को दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल की तरफ रवाना हो गई थी. उस समय रात के करीब 4 बज रहे थे. पुलिस टीम के पहुंचने के बाद मौके पर डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई थी.

पत्नी शिवानी की दुखद मृत्यु से आक्रोशित भीम निषाद

पुलिस घटना की जांच कर रही थी. घटनास्थल को देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतका अपनी जान बचाने के लिए कातिल से भिड़ गई होगी, क्योंकि मौके पर संघर्ष के संकेत मिले. खोजी कुत्ते को घटनास्थल सुंघा कर छोड़ दिया तो वह सूंघ कर घर के पीछे 200 मीटर दूर स्थित विनय के घर पहुंचा और वहां रुक कर भौंकने लगा. यह क्रिया 3 बार की गई. डौग ने तीनों बार यही क्रिया दोहराई. पुलिस को समझने में देर नहीं लगी कि इस घर के किसी सदस्य का घटना में हाथ हो सकता है. इस बारे में पुलिस ने मृतका के घर वालों से जानकारी ली तो पता चला कि गांव के विनय उर्फ दीपक निषाद और शिवानी के बीच में कई सालों से प्रेम संबंध चल रहा था.

शिवानी के मायके का वाशरूम जिस में उस के प्रेमी ने उस की जान ले ली

इस की जानकारी जब लड़की के घर वालों को हुई, तब दोनों के परिवार वाले खिलाफ हो गए थे. इसे ले कर दोनों परिवारों के बीच काफी झगड़ा भी हुआ था. बाद में शिवानी की शादी उस के पेरेंट्स ने देवरिया में कर दी थी. शादी के बाद भी विनय शिवानी से फोन पर बात करता था और उसे परेशान करता था. पुलिस के लिए इस क्लू ने अंधेरे में रोशनी की तरह काम कर गया. उस के बाद पुलिस ने शिवानी के फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई और उस का अध्ययन किया तो घटना वाली रात शिवानी के फोन पर विनय के नंबर से कौल आई थी.

इस के अलावा शादी की हो रही वीडियो रिकौर्डिंग की जांच की गई तो जयमाला के समय जब सारे लोग कार्यक्रम देखने में बिजी थे, तब शिवानी स्टेज से उतर कर विनय के साथ जाती हुई कैमरे में रिकौर्ड हो गई थी. फिर क्या था? पुलिस के लिए यह फुटेज कातिल तक पहुंचने में मददगार साबित हुई. इसी साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने 25 नवंबर, 2025 की रात विनय को उस के घर से दबोच लिया. उस से गहन पूछताछ की गई तो वह पुलिस के सामने टूट गया और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

विनय ने पूरी घटना पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर बिछिया मंडलीय जेल भेज दिया. इस के पहले मृतका की मम्मी नोहरी देवी की तहरीर पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत विनय उर्फ दीपक निषाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था. आरोपी विनय से पूछताछ के बाद शिवानी के मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है थाना झंगहा. इसी थानाक्षेत्र के जंगल रसूलपुर नंबर-2 स्थित लक्ष्मीपुर गांव पड़ता है. इसी गांव में नोहरी देवी अपने 4 सदस्यों वाले परिवार के साथ रहती थी. पति की सालों पहले स्वाभाविक मौत हो चुकी थी. पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी नोहरी देवी के कंधों पर आ गई थी. अपनी दिनरात की मेहनत से बच्चों की परवरिश में उस ने कोई कमी आने नहीं दी थी.

नोहरी की 2 बेटियां थीं सुमन और शिवानी. इन में शिवानी छोटी थी. वह सुंदर, चंचल और हंसमुख थी. हर किसी की बातों का मुसकरा कर जबाव देती थी. उस के इसी अंदाज के सभी कायल थे. जैसेजैसे वह सयानी होती गई, आवारा भौंरे उस की ओर आकर्षित होने लगे. उन्हीं भौरों में विनय उर्फ दीपक निषाद का था, जो उस के पड़ोस में रहता था. सुदर शिवानी नैनों के रास्ते उस के दिल में उतर गई थी. उस ने उसे अपने दिल की कोठरी में कैद कर लिया था. आलम यह था कि उसे बिना देखे रह नहीं पाता था. दिन का चैन और रातों की नींद गंवा चुका था वह. उठते, बैठते, सोते और जागते हर घड़ी उसे अपनी आंखों के सामने देखना चाहता था.

मोहब्बत की यह आग विनय के सीने में ही नहीं लगी थी. यह आग तो शिवानी के अंदर भी धधक रही थी. ऐसा नहीं था कि वह विनय की आशिकी से अंजान और बेपरवाह थी, बल्कि उस की हर हरकत पर अपनी नजरें गड़ाए हुई थी. वह भी चाहती थी कि वह पलभर के लिए भी उस की निगाहों से दूर न जाए. विनय से कहीं ज्यादा तड़पन शिवानी के दिल में थी. अपने कोरे दिल पर मोहब्बत की स्याही से उस ने विनय का नाम लिख लिया था.

दोनों दिलों में मोहब्बत की आग बराबर लगी हुई थी. समय देख कर विनय और शिवानी ने एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार कर दिया था. प्यार का इजहार करने के बाद दोनों मिल कर भविष्य के सपनों में खो गए थे. यह करीब 2 साल पहले की बात थी. धीरेधीरे 2 साल बीत गए थे. अपने प्यार को दोनों छिपा कर रखे थे. उन का प्यार अब परदों के पीछे और छिपा नहीं रह सकता था, क्योंकि फिजा में तैरती हुई यह खबर शिवानी के फेमिली वालों तक पहुंची तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई.

नोहरी देवी ने आव देखा न ताव शिवानी पर टूट पड़ी, ”करमजली, इसी दिन के लिए तुझे पालपोस कर बड़ा किया था कि परिवार का नाम मिट्टी में मिला दो.’’

”मम्मी, मुझे बताओ तो सही मैं ने क्या किया है? क्यों मुझ पर गुस्सा कर रही हो?’’ शिवानी ने सवाल किया.

”पूछती है मैं ने किया क्या है? तू तो ऐसे बन रही है जैसे तुझे अपनी करतूतों का ज्ञान ही नहीं है?’’

”सच मम्मी, मुझे नहीं पता कि आप मेरे से क्यों गुस्सा हो? आखिर मैं ने किया क्या है?’’

”तुझे सच में पता नहीं है, तूने क्या किया है? उस विनय के साथ तेरा क्या रिश्ता है? कब से तेरा उस के साथ चक्कर चल रहा है? देख, तू सचसच बता दे कि तूने कोई ऐसीवैसी हरकत तो नहीं की है जिस से हमें समाज में मुंह छिपाना पड़े?’’

”नहीं…नहीं मम्मी, तुम्हारी कसम, मैं ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया है, जिस से घर की बदनामी हो. मैं सच कहती हूं, पापा की कसम.’’ शिवानी ने कसम खाई.

”देख शिवानी, तू झूठ बोल रही है या नहीं, ये तो तू ही जानती है, लेकिन यदि मुझे पता चला कि तूने उस करमजले के साथ कुछ ऐसीवैसी नीच हरकत की है तो जान ले, तुझे जान से मार दूंगी.’’ नोहरी देवी ने शिवानी को धमकाया.

घटनास्थल की जांच करता डौग स्क्वायड

”नहीं मम्मी, मैं ने कोई नीच हरकत नहीं की है. मैं जानती हूं एक बार इज्जत चली जाने पर फिर दोबारा वापस नहीं लौटती है, फिर मैं ऐसी नीच हरकत क्यों करूंगी.’’ शिवानी ने मम्मी को सफाई दी.

”आज से तेरा घर से बाहर निकलना बंद. घर में पड़ी रह चुपचाप. देखती हूं कैसे इश्क लडाती है अपने यार से. उस की भी खबर लेती हूं मैं.’’

नोहरी देवी का गुस्से से चेहरा ऐसा तमतमाया हुआ था, जैसे बेटी को जिंदा खा जाएगी. उसी हाल में वह विनय के घर जा पहुंची और उस के फेमिली वालों से खूब झगड़ी. उन्हें धमकाते हुए कहा, ”अपने बेटे को समझा दो, मेरी बेटी से दूर रहे. इज्जत से न खेेले, वरना इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है. यह मत समझना कि मेरा आदमी (पति) नहीं है तो जो चाहे हमारी इज्जत से खेल लेगा, बोटीबोटी काट डालूंगी, समझे. फिर से कहती हूं अपने बेटे को समझा  देना, जाती हूं.’’

नोहरी देवी का रौद्र रूप देख कर विनय के फेमिली वालों का पसीना छूट गया था. बेटे की हरकतों से वे बुरी तरह शर्मिंदा थे. चूंकि खोट उन के बेटे में थी, इसलिए वे चुपचाप नोहरी देवी की जलीकटी सुनते रहे, एक बोल उन के मुंह से नहीं फूटा था और सारा गुस्सा विनय पर उतार दिया था. विनय के फेमिली वालों ने उसे समझाया, ”देख बेटा, तुम जिस काम में लगे हो उसे मन लगा कर पूरा करो. अच्छी नौकरी होते ही दरवाजे पर लड़कियों की लाइन लग जाएगी या तुम जिस लड़की से शादी करने को कहोगे, उसी से तुम्हारा ब्याह करा दूंगा, लेकिन तुम अपने भविष्य पर ध्यान दो.’’

फेमिली वालों की बात सुन कर वह एकदम चुप रहा, कुछ नहीं बोला. उस वक्त वह यही सोच रहा था कि आखिर शिवानी की मम्मी को हमारे प्यार के बारे में कैसे पता चला? हम शिवानी के बिना जिंदा नहीं रह पाएंगे. उस के बिना मर जाएंगे. इधर यही हाल शिवानी का था. वह विनय के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. जबकि उस की मम्मी तेजी से उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगी थी और जल्द ही लड़का भी मिल गया.

8 मई, 2025 को देवरिया के रहने वाले भीम निषाद के साथ बेटी के हाथ पीले कर  दिए. शिवानी ने अपनी हर ख्वाहिशों को अपने सीने में दफन कर के भीम के साथ शादी तो कर ली, लेकिन उसे दिल से पति नहीं माना. जिंदा लाश के समान वह खुद को तो पति के सामने बिस्तर पर बिछ जाती थी, लेकिन उस का सुख उसे पता नहीं चलता था. सिसकसिसक कर उस के दिन  कटते रहे और वह ससुराल वालों से चोरीछिपे दिन में एक बार फोन पर विनय से बात जरूर कर लेती थी तो उस का मन थोड़ा हलका हो जाता था.

शिवानी का ब्याह हो जाने से विनय उस से काफी नाराज हो गया था और उसे अब दूसरे की जूठन समझने लगा था. वह उस से धीरेधीरे दूरियां बढ़ाने लगा था. यह बात शिवानी जान चुकी थी कि विनय अब उस से दूर भाग रहा है, लेकिन वह उसे इतनी आसानी से छोडऩे वाली नहीं थी. बारबार वह फोन कर के उसे अपना कसम और वायदे याद दिलाती थी. गोरखपुर जिले के रसूलपुर गांव के रहने वाले रामवचन निषाद के तीनों बेटों में 25 वर्षीय विनय उर्फ दीपक निषाद काफी होशियार था.

जब किसी पुलिसकर्मी को वरदी में देखता तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह भी पुलिस विभाग में नौकरी करना चाहता था, इसीलिए वह अपने ऊपर यानी अपने शरीर पर खास ध्यान रखता था. वह जिम में खूब वर्जिश करता था. यह सब तो अलग था. लेकिन वह पिछले 6 महीने से काफी परेशान रह रहा था. उस की परेशानी का नाम था शिवानी निषाद, जो उस की प्रेमिका थी और पड़ोसन भी थी. दोनों के बीच करीब साढ़े 3 साल से प्रेम संबंध कायम था. हालांकि शिवानी के घर वालों ने उस की शादी देवरिया में कर दी थी, लेकिन इस के बावजूद दोनों के प्रेम संबंध चल रहे थे.

शिवानी विनय से बेइंतहा मोहब्बत करती थी. उस ने कसम भी खाई थी कि विनय के अलावा कोई और पुरुष उस के जीवन का हिस्सा नहीं बन सकता, अगर फेमिली वालों के दबाव में वह पति बन भी गया तो उसे वह अधिकार नहीं देगी जो उसे मिलना चाहिए. विनय ही उस का सब कुछ था, है और सब कुछ रहेगा. इसलिए वह उसे अकसर फोन करती थी. यही नहीं, उस पर शादी करने और साथ रहने के लिए दबाव भी बनाते हुए कहा, ”विनय, तुम यूं मुझ से आसानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते. मेरे जीते जी तो कतई नहीं. प्यार किया है मैं ने तुम से… फिर मुझ से अपना पीछा क्यों छुड़ा रहे हो.’’

”यार शिवानी, एक बात कहना चाहता हूं मैं तुम से…’’ विनय ने भी समझाते हुए आगे कहा, ”तुम्हारी शादी हो चुकी है, मुझ से ज्यादा प्यार करने वाला तुम्हारा पति है, सासससुर हैं, घरपरिवार है, सब कुछ तो है तुम्हारे पास, फिर मुझ बेचारे को क्यों परेशान किए जा रही हो. मेरी बात मानो, अपनी गृहस्थी पर ध्यान दो, परिवार पर ध्यान दो. मेरी दुआएं तुम्हारे साथ हमेशा हैं.

”रही बात प्यार करने की तो मैं तुम्हें बता दूं कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं, यह मैं तुम से बता नहीं सकता. जीते जी तो मैं तुम्हें अपने दिल से जुदा नहीं कर सकता. बस यही कहना चाहता हूं तुम से.’’

”कितनी आसानी से यह बात कह दी कि मैं तुम्हें परेशान करती हूं. मेरे पास पति है, घर परिवार है. है तो, लेकिन तुम नहीं हो न मेरे पास. मैं ने अपनी मरजी से यह शादी थोड़े ही न की थी. घर वालों ने जोरजबरदस्ती से मेरी शादी कराई थी. इस में मेरी क्या गलती है, तुम ही बताओ कि कहां गलत हूं मैं?’’

मृतका शिवानी निषाद की मम्मी नोहरी देवी

”दोष तो मैं तुम्हें दे ही नहीं रहा. बस यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि तुम्हारी शादी हो चुकी है. अच्छा घरपरिवार भी मिला हैं. क्यों अपनी बसीबसाई गृहस्थी में अपने ही हाथों से आग लगा रही हो. क्यों नहीं ख्वाब समझ कर पिछली बातों को भूल जाती हो?’’

”भूल तुम सकते हो, मैं नहीं.’’ शिवानी गुस्सा हो गई, ”मेरा प्यार कोई गुड्ïडेगुडिय़ा का खेल नहीं था, जिसे जब चाहा प्यार किया, जब चाहा भुला दिया. मेरा प्यार कोई मजाक भी नहीं था कि जब चाहा दिल लगाया, जब  चाहा रेत के घरौंदे की तरह तोडफ़ोड़ डाला.

”कहे देती हूं जो तुम मुझ से पीछा छुड़ा कर भागने की कोशिश कर रहे हो न, मैं तुम्हारी मंशा को समझ चुकी हूं. और ऐसा होने नहीं दूंगी मैं. किसी कीमत पर नहीं होने दूंगी. इसे अपने दिलोदिमाग में गांठ बांध लीजिएगा.’’

”क्यों खामख्वाह लालपीली हो रही हो यार. तुम से कहां भाग रहा हूं मैं और भाग कर जाऊंगा कहां? रहूंगा इसी धरती पर. बिलावजह उलझ रही हो मुझ से.’’

पुलिस हिरासत में आरोपी विवेक निषाद

”तुम भी इतना समझ लो कि अपने प्यार को पाने के लिए शिद्ïदत तक लड़ूंगी? लेकिन मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगी. इतने बुजदिल और कायर निकलोगे तुम, अगर पहले जानती तो तुम से कभी दिल न लगाती.’’

जोर से फोन पर विनय चिल्लाया, ”मैं कायर नहीं हूं शिवानी. मैं न तो कायर हूं, न डरपोक हूं और न ही बुजदिल. तुम मेरी परेशानियों को समझ नहीं रही हो. यार, क्यों अपना घर उजाडऩे पर तुली हुई हो? मेरे समझाने का कोई फायदा नहीं है क्या?’’

”नहीं, मुझे कुछ समझना नहीं है, मैं ने तय किया है मुझे तो बस तुम्हारे साथ रहना है. इसे मेरी जिद कह लो या जोरजबरदस्ती. इस के अलावा मैं कुछ नहीं जानती. इसी नवंबर में मेरी चचेरी बहन की शादी है, मैं उस में आ रही हूं. फिर लौट कर ससुराल नहीं जाऊंगी. तुम्हारे ही साथ रहूंगी, यह मैं ने फैसला कर लिया है.’’

इतना सुनते ही विनय ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. प्रेमिका शिवानी निषाद की बातों को ले कर विनय काफी परेशान रह रहा था. उस की बातें सोचसोच कर उस के दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. वह सोच रहा था कि कहीं सचमुच ही शिवानी अपनी ससुराल छोड़ कर साथ रहने आ गई तो उस की इज्जत मटियामेट हो जाएगी. गांवसमाज को वह क्या मुंह दिखाएगा. फेमिली वालों को क्या जबाव देगा. उस के करिअर का क्या होगा?

इस से पहले कि वह कोई ऐसावैसा कदम उठाए, उस का काम तमाम करना होगा. उस से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने मन बना लिया था. इस के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो गया था. आखिर में वही हुआ, जो विनय ने तय किया था. शिवानी से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उसे मौत के घाट उतार दिया और जेल के सलाखों के पीछे जा पहुंचा. विनय उर्फ दीपक निषाद जेल में बंद था. उस की निशानदेही पर पुलिस ने झाड़ी में छिपा कर रखा गया हंसिया बरामद कर लिया था. UP Crime

 

 

Love Story: जब कोई करे एकतरफा प्यार

Love Story: एकतरफा प्यार आमतौर पर सफल नहीं होता, क्योंकि रिश्ते के लिए दोनों तरफ से प्रयास और भावनाएं जरूरी होती हैं, लेकिन सलीम इस बात को नहीं समझता था. वह क्षमा शर्मा को एकतरफा प्यार करता था. एक दिन इसी एकतरफा प्यार में वह अपना आपा खो गया और फिर ऐसा कदम उठा बैठा कि…

उस दिन सलीम बहुत खुश था, इसलिए उस ने अपनी बहन रुखसाना और उस के पति सलीम को भी घर पर दावत के लिए बुलाया हुआ था. बुलंदशहर में स्थित सलीम पीरवाली गली में रहता था. उस की फेमिली में अब्बूअम्मी के अलावा 2 भाई सुभान और समीर व एक बहन रुखसाना थे.

रुखसाना की शादी हापुड़ निवासी सलीम से हो चुकी थी. सलीम अपने बहनोई, जिस का खुद का नाम भी सलीम ही था, के साथ बड़े दोस्ताना ढंग से रहता था. सलीम कबाड़ी का काम करता था, इस के लिए वह कबाड़ का सामान लेने पास के कस्बों में और गावों में जाया करता था, जिस से उसे काफी अच्छी आमदनी हो जाया करती थी. रात में जब जीजासाला साथ में बैठे और पार्टी शबाब पर चढऩे लगी तो जीजा सलीम ने अपने साले सलीम से पूछा, ”साले साहब, आज बहुत शानदार पार्टी रखी है’ इस की कोई खास वजह या फिर कोई बड़ा खजाना हाथ तो नहीं लग गया?’’

”यस जीजा साहब, दिल किया तो पार्टी रख ली. कभीकभी पार्टी भी करनी चाहिए, जिस से आपस में बातें भी हो जाती हैं.’’ साले ने बात का रुख पलटते हुए कहा.

उधर जीजा यह समझ चुका था कि आज कुछ न कुछ बात अवश्य है, मगर साले साहब के दिल की बात उस की जुबान से उगलनी भी तो चाहिए, इसलिए वह बोला, ”देखिए साले साहब, आप ने अपने दिल में काफी गहरी बात छिपा कर रखी हुई है. घर वाले तुम्हारे दिल की बात भले ही न समझ पाएं, मगर मैं तुम्हारा चेहरा देख कर तुम्हारे दिल की बात जान ही लेता हूं.’’ जीजा ने साले का नया पैग बनाते हुए कहा.

”देखिए जीजा साहब, मैं आप से अपने दिल को कोई बात छिपाता भी तो नहीं हूं, इसलिए आप को अंदाजा लगाना आसान हो जाता है. अच्छा तो जीजा साहब, बताइए कि आज मेरे दिल में ऐसी कौन सी बात है, जो मैं ने अभी तक छिपा रखी है.’’ सलीम ने गिलास से एक लंबा घूंट लगाते हुए कहा.

मृतका क्षमा शर्मा का भाई रामबाबू शर्माः देर रात तक बहन घर नहीं लौटी तो थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी

”बात और दूसरी क्या हो सकती है. तुम्हारी महबूबा है न, क्षमा नाम ही है न उस का, उस से प्रेम की शुरुआत हो चुकी होगी अब तुम्हारी. देखो, उस का नाम तुम्हीं ने मुझे उस दिन बताया भी था. अब बताओ, शादी कब करने वाले हो तुम अपनी प्रेमिका से?’’ जीजा ने एक बड़ा सिप गले के अंदर लेते हुए कहा.

सलीम ने एक और गहरा राज अपने मन में छिपाते हुए कहा, ”जीजा साहब, आप फिर भी सही बात तक नहीं पहुंच पाए हो. असल बात क्षमा से ही संबंधित तो है पर कुछ और है, इसलिए अब मैं ने अपना एक अंतिम फैसला भी कर लिया है. आप असल में मेरे जीजा साहब हो, पर मैं आप को अपने दोस्त से भी बढ़ कर मानता हूं.’’

”अब तो पानी सिर के ऊपर ही आ गया है,’’ सलीम ने कहा तो उस के जीजा की जिज्ञासा और बढ़ गई. वह बोला, ”देखिए साले साहब, अब बात को ज्यादा घुमाइएगा मत, क्या उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं रहा? मैं तुम्हारे लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं. तुम्हारी खुशी ही मेरे लिए सब कुछ है. इसलिए अब सीधेसीधे बताइए, तुम्हारे दिल में ऐसी क्या बात है जो तुम ने मुझ से भी छिपा कर रखी हुई है.’’

”जीजा साहब, मुझे सचमुच आप से यही उम्मीद भी थी कि आप मेरा साथ जरूर देंगे. आप को मैं ने पहले बताया था कि मैं क्षमा से बेइंतहा प्यार करता हूं. मुझे पहलेपहले ऐसा लगा भी था, लेकिन अब वह न तो मुझे देखती है, न मेरे मैसेज का उत्तर देती है और न ही मुझ से बात करती है.

मुझे ऐसा लग रहा है कि उस की जिंदगी में शायद कोई और युवक आ गया है, जिस के लिए वह अब मुझ से किनारा करने लग गई है.

”अब आप ही बताएं जीजा साहब कि भला मैं यह सब कैसे बरदाश्त कर सकता हूं.’’ सलीम अब यह सब कहतेकहते रुक गया था, क्योंकि उस की आंखों में आंसू आ गए थे.

”साले साहब, अब तुम मुझे बताओ कि तुम्हारा इरादा क्या है? क्या करना चाहते हो?’’ जीजा ने नशे की खुमार में कहा.

”जीजा साहब, क्षमा से मैं अब आखिरी बार मिल कर अपने दिल की बात कह कर उसे अपना बना लेना चाहता हूं.’’ सलीम कबाड़ी ने कहा.

”देखो सलीम, प्यार तो दोनों तरफ से होता है. वैसे भी हमारा और उस का धर्म एकदम विपरीत है. यदि वह तुम्हारा प्यार अपनाने से इंकार कर देती है तो बेहतर यही होगा कि तुम उस का खयाल ही अपने दिल से निकाल दो. हमारे समाज में भी तो तुम्हें कई अच्छे रिश्ते मिल सकते हैं,’’ जीजा ने साले सलीम को समझाते हुए कहा.

”जीजा साहब, मैं ने क्षमा से दिल से मोहब्बत की है. मैं उस का इंकार सहन नहीं कर सकता, अगर कुछ हो गया तो आप मेरी मदद करोगे न!’’ साले ने अपने जीजा को हाथ से पकड़ते हुए विनती करते हुए कहा.

”अब तुम मेरे साले भी हो और मेरे दोस्त भी. मैं हर परिस्थिति में तुम्हारे साथ रहूंगा,’’ जीजा ने अपने साले की हथेलियों को मसलते हुए कहा.

दूसरे दिन 27 नवंबर, 2025 की तारीख थी. अपनी योजना के अनुसार, सलीम कबाड़ी ने शाम को 6 बजे क्षमा को फोन किया और आखिरी बार मिलने के लिए बुलाया. क्षमा ने सोचा कि वह सलीम को किसी तरह समझा भी देगी कि वह उस का खयाल अपने दिल से निकाल दे. क्षमा पढ़ीलिखी समझदार थी, उस ने सोचा कि समझाने से तो बुरे से बुरा इंसान भी समझ जाता है. क्षमा ने भी यही सोचा कि घर में अगर कुछ बताऊंगी तो घर वाले सभी सलीम की जान के दुश्मन बन जाएंगे. यदि बात समझाबुझा कर हल कर ली जाए तो अच्छा रहेगा.

इसीलिए क्षमा सलीम के बताई जगह पर उस से मिलने अकेले चली गई. सलीम क्षमा को ले कर उस के गांव नैथला हसनपुर से 3 किलोमीटर दूर वलीपुर नहर के पुल पर जा पहुंचा.

”बोलो सलीम, मुझे यहां पर अकेले क्यों बुलाया है?’’ क्षमा ने पूछा.

”क्षमा, मैं तुम से बेइंतहा मोहब्बत करता हूं. पिछले कुछ दिनों से तुम न मेरे मैसेज का जवाब देती हो, न मुझ से मिलती हो, न मुझ से बात करती हो. यह बात बिलकुल भी ठीक नहीं है.’’ संलीम ने कहा.

”देखो सलीम, तुम हमारे घर कबाड़ खरीदने आते थे. तुम ने एक दिन मुझ से मेरा मोबाइल नंबर मांगा, मैं ने दे दिया. उस के बाद तुम सुबहशाम उलटेसीधे मैसेज भेजने लगे. यदि मेरे घर वाले देख लेते तो मैं कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहती.

”जहां तक प्यार का संबंध है, तुम मुझ से प्यार करते हो, लेकिन मैं तुम से प्यार नहीं करती, न ही कभी कर सकती हूं. बेहतर होगा कि आज के बाद तुम मेरा पीछा करना छोड़ दो. इसी में तुम्हारी भलाई है,’’ क्षमा ने उसे समझाते हुए कहा.

”क्षमा, मैं तुम्हें बेवकूफ नहीं बना रहा हूं. जब मैं ने तुम को देखा, तुम से मिला, तुम से मेरी बातचीत हुई, तब मेरे दिल के अंदर तक जो हलचल हुई थी, उस से मुझे यह महसूस हुआ कि मोहब्बत क्या होती है. इसीलिए मैं तुम से अपने से ज्यादा प्यार करने लगा हूं. मैं अब तुम से शादी करना चाहता हूं. मैं तुम्हारे प्यार के लिए अपने को एकदम बदल लूंगा. बस, तुम हां कर दो.’’ कहते हुए सलीम ने क्षमा का हाथ पकड़ लिया.

यह सुन कर क्षमा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था. वह उस का हाथ झटक कर गुस्से से बोली, ”सलीम, तू अपनी औकात में रह. अभी तक तो मैं तेरे साथ इज्जत से पेश आ रही थी, लेकिन तुम तो अब न जाने क्याक्या बकने लगे हो. आज के बाद यदि तुम कभी भी मेरे रास्ते में आए तो इस का परिणाम बहुत बुरा होगा.’’ यह कह कर क्षमा जैसे ही घर जाने के लिए पलटी तो उसी क्षण सलीम ने अपनी कमर में पहले से ही खोंसा हुआ चाकू निकाला और एक ही वार में उस ने क्षमा की गरदन को रेत कर वहां से फरार हो गया.

रोतेबिलखते मृतका क्षमा शर्मा के घर वाले तथा नीचे बाएं -चचेरा भाई अमित शर्मा

27 नवंबर, 2025 की रात तक भी जब क्षमा शर्मा घर नहीं लौटी तो उस के बड़े भाई रामबाबू शर्मा ने बुलंदशहर के चोला थाने में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. इधर पुलिस क्षमा को ढूढ रही थी तो दूसरी तरफ उस के फेमिली वाले उसे गांव से ले कर नातेरिश्तेदारों और सहेलियों के घर ढूंढने में दिनरात जुटे थे. किसी की समझ में यह नहीं आ पा रहा था कि रातोंरात क्षमा अचानक कहां गायब हो गई.

उस के फेमिली वाले किसी अनहोनी की आशंका से भी काफी डरे हुए थे. वह बारबार क्षमा को फोन कर रहे थे, लेकिन क्षमा का फोन बंद जा रहा था. उन्होंने क्षमा को हरसंभावित जगह, दोस्तों और रिश्तेदारियों में जा कर तलाश किया, परंतु क्षमा का कोई सुराग नहीं मिला. उधर बुलंदशहर कोतवाली नगर में धर्मेंद्र सिंह राठौर पहली दिसंबर, 2025 को अपने औफिस में बैठे ही थे कि तभी उन के मोबाइल पर किसी का फोन आ गया.

”कोतवाल साहब, मैं सुबहसुबह मौर्निंग वाक पर निकला था तो मुझे वलीपुरा नहर में एक शव तैरता हुआ दिखाई दे रहा है. कृपया आप यहां पर जल्दी आ कर मामले की जांच करें. मैं आप लोगों के आने तक यहीं पर खड़ा हूं.’’

यह सूचना मिलते ही कोतवाल धर्मेंद्र सिंह राठौर कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने शव को नहर से बाहर निकाला. वह किसी युवती का था, जिस की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष थी. वह बैंगनी रंग की हुडïडी, फिरोजी रंग का कुरता, फिरोजी रंग की सलवार, हलके बैंगनी रंग के जूते पहने हुए थी. उस के बाएं हाथ में कलावा और दाहिने हाथ में सफेद रंग की चूडिय़ां थीं. वहां मौजूद लोगों से पुलिस ने शव की शिनाख्त करने की कोशिश की, लेकिन वहां पर कोई भी शव की शिनाख्त नहीं कर सका.

इस के बाद कोतवाल धर्मेंद्र सिंह राठौर ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल बुलंदशहर भेज दिया और इस की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को भेज दी. इस के बाद कोतवाली पुलिस ने अज्ञात शव मिलने की जानकारी अपने आसपास के पुलिस स्टेशनों को देने के साथसाथ शव के हुलिया सहित इस की सूचना अपने प्रदेश और अन्य नजदीकी प्रदेशों को भी सूचित कर दिया.

इधर जब अज्ञात युवती का शव मिलने की सूचना चोला पुलिस को फोटो सहित मिली तो इंसपेक्टर बलराम सिंह सेंगर ने क्षमा शर्मा के फेमिली वालों को थाने पर बुला लिया. फेमिली वालों ने जब शव के फोटो और कपड़े देखे तो उन्होंने उस की शिनाख्त क्षमा शर्मा के रूप में कर दी. 2 दिसंबर, 2025 मंगलवार के दिन जब थाना चोला पुलिस क्षमा के शव को ले कर उन के गांव नैया हसनपुर पहुंची तो फेमिली वालों और ग्रामीणों ने शव को लेने से इंकार कर दिया. वे सब लोग पहले आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त काररवाई की मांग को ले कर अड़े रहे.

सभी लोग पुलिस प्रशासन और आरोपियों के खिलाफ नारे लगाने लगे थे. हंगामे और तनाव की सूचना मिलने पर सीओ (सिकंदराबाद) भास्कर कुमार मिश्रा मौके पर पहुंच गए. सीओ भास्कर कुमार मिश्रा ने ग्रामीणों और मृतका क्षमा शर्मा के फेमिली वालों को उचित काररवाई करने का पूरापूरा आश्वासन दिया, जिस के बाद उन्होंने क्षमा का शव ले कर उस का अंतिम संस्कार किया. यह मामला काफी संवेदनशील व 2 समुदायों से जुड़ा था, जिस की वजह से पूरे गांव नैथला हसनपुर व आसपास के इलाकों में काफी तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया था.

इसलिए बुलंदशहर पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना या अनहोनी से निपटने के लिए गांव नैथला हसनपुर में अतिरिक्त पुलिस बल बुला लिया. पुलिस अधिकारी वहां पर बारबार सभी ग्रामीणों और मृतका के परिजनों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहे थे. उसी दिन 2 दिसंबर, 2025 को मृतका क्षमा शर्मा के बड़े भाई रामबाबू शर्मा ने एक लिखित तहरीर जनपद बुलंदशहर के थाना चोला में दी, जिस में उन्होंने आरोप लगाया कि बुलंदशहर की ही पीरवाली गली निवासी सलीम कबाड़ खरीदने उन के घर पर अकसर आया करता था. सलीम कबाड़ी ने अपने अब्बू, भाइयों, बहन व बहनोई के साथ उस की बहन क्षमा शर्मा की सुनियोजित ढंग से हत्या कर दी थी.

रामबाबू शर्मा की लिखित तहरीर पर सलीम कबाड़ी और उस के परिजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. परिजनों की तहरीर के आधार पर थाना पुलिस अब अभियुक्त सलीम के पीछे पड़ गई थी. मुखबिर की निशानदेही पर मुख्य अभियुक्त सलीम को 3 दिसंबर, 2025 की देर रात पुलिस ने चोला चौराहे से गिरफ्तार कर लिया. अभियुक्त सलीम से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार एक स्थान पर छिपा कर रखा हुआ है.

पुलिस टीम जब आरोपी सलीम को ले कर उस स्थान पर पहुंची तो उस ने हथियार निकालने के बहाने उस स्थान से एक तमंचा निकाल लिया और पुलिस पर अंधाधुंध फायर करने लगा और वहां से भागने का प्रयास करने लगा. सलीम के तमंचे की फायरिंग के कारण वहां पर मौजूद पुलिस कांस्टेबल अंकुर के दाहिने हाथ में गोली लग जाने के कारण वह बुरी तरह से घायल हो गया. पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक गोली सीधे सलीम के पैर पर लग गई, जिस के कारण वह बुरी तरह से घायल हो गया.

पुलिस मुठभेड़ में घायल कबाड़ी सलीम को सहारा देकर ले जाते पुलिसकर्मी

पुलिस टीम तत्काल सलीम को गिरफ्तार कर उसे प्राथमिक उपचार के लिए बुलंदशहर के जिला अस्पताल में ले कर आ गई. पुलिस ने आरोपी सलीम कबाड़ी से अवैध हथियार और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया. इस के साथ ही घटना में प्रयुक्त कपड़े भी बरामद कर लिए. पुलिस पूछताछ में सलीम ने बताया कि वह और क्षमा एकदूसरे से परिचित थे. सलीम उसे पाना चाहता था, क्षमा से प्यार और शादी करना चाहता था, लेकिन क्षमा के इंकार करने पर उसे गुस्सा आ गया, जिस से क्षुब्ध हो कर 27 नवंबर, 2025 की शाम उस ने क्षमा की गला रेत कर हत्या कर दी और शव को वहां पर फेंक कर वहां से भाग गया.

अभियुक्त सलीम कबाड़ी से विस्तृत पूछताछ करने के बाद पुलिस जांच में यह सामने आया कि आरोपी सलीम कबाड़ी का पूरा परिवार इस मामले में शामिल रहा था. पुलिस के पास पुख्ता जानकारी थी कि इस प्रकरण में मुख्य अभियुक्त सलीम कबाड़ी के साथ उस की बहन रुखसाना, रुखसाना का पति सलीम और सलीम कबाड़ी के दोनों भाई सुभान और समीर भी शामिल थे.

5 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने सलीम की बहन रुखसाना को गिरफ्तार किया और आवश्यक पूछताछ करने के बाद जेल भेज दिया. उस के बाद 6 दिसंबर, 2025 एक सूचना के आधार पर वांछित अभियुक्तगण सुभान और समीर को वलीपुरा नहर से गंगेरुआ को जाने वाले रास्ते से गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के बाद दोनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

मृतका क्षमा शर्मा के बड़े भाई रामबाबू शर्मा की तहरीर के आधार पर थाना चोला में सलीम कबाड़ी व अन्य 4 अभियुक्तों के खिलाफ बीएनएस की धारा 87/103(3)/238/61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. जिन में से एक आरोपी जो सलीम कबाड़ी का बहनोई सलीम शहर व थाना हापुड़ फरार चल रहा था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए अपनी कई टीमें भी लगा रखी थीं. 10 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने उसे बुलंदशहर कलेक्ट्रेट गेट के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ करने के बाद उसे भी जेल भेज दिया गया. एकतरफा प्यार के कई बार बेहद घातक परिणाम देखने को मिलते हैं. यह प्यार सिर्फ एक तरफ से होता है.

एकतरफा प्यार आप की मेंटल हेल्थ को प्रभावित भी कर सकता है, क्योंकि यह प्यार आप को कभी खुशी नहीं देता है, बल्कि आप केवल इस के कारण दुखी ही होते हैं. जिस के कारण उस व्यक्ति की मेंटल हेल्थ, फिजिकल हेल्थ प्रभावित हो जाती है. ऐसे व्यक्ति खुद पर ध्यान देना एकदम से छोड़ देते हैं. मृतका क्षमा शर्मा के भाई रामबाबू शर्मा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन का कहना है कि चोला थाने के एसआई मोहम्मद असलम ने मामूली पूछताछ के बाद सलीम को निर्दोष कह कर छोड़ दिया था. यदि उसी दिन सलीम से कड़ी पूछताछ की जाती तो शायद आज हमारी बहन जिंदा होती.

वहीं एसपी ने लापरवाही बरतने के आरोप में एसआई मोहम्मद असलम को निलंबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि जो भी इस मामले में दोषी पाए जाएंगे, उन के खिलाफ काररवाई की जाएगी. Love Story

 

 

Crime Story: क्रूरता की इंतिहा

Crime Story: जमाना कितना भी आगे बढ़ गया हो, देश में कितना ही तकनीकि विकास हो गया हो, लोग चाहे कितने ही शिक्षित बन गए हों पर कुछ लोग अपनी मानसिकता से अंधविश्वासी बने हुए हैं. इसीलिए गलीनुक्कड़ पर दुकान जमाए बैठे नीमहकीम, मुल्लामौलवी और तांत्रिक उन्हें अब भी चंद पैसों के लिए अपने जाल में फंसा ही लेते हैं.

ये लोग अंधविश्वासी लोगों का न केवल शोषण करते हैं बल्कि कभीकभी उन के हाथों ऐसा अपराध करवा देते हैं, जिस की वजह से उन्हें अपनी सारी जिंदगी सलाखों के पीछे काटनी पड़ती है. हाल ही में पंजाब की एक महिला तांत्रिक ने एक महिला को अपने सम्मोहन के जाल में फांस कर ऐसा जघन्य अपराध करा दिया, जिसे सुन कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं.

पंजाब में थाना सदर बटाला के अंतर्गत एक गांव है काला नंगल. 32 वर्षीय बलविंदर सिंह उर्फ बिंदर अपनी 27 वर्षीय पत्नी जसबीर कौर के साथ इसी गांव में रहता था. वैसे बलविंदर सिंह मूलरूप से अमृतसर के गांव अकालगढ़ दपिया का निवासी था. लेकिन अपनी शादी के बाद वह अपनी पत्नी को साथ ले कर अपनी ननिहाल काला नंगल में रहने लगा था.

इस गांव में उस के नाना गुरनाम सिंह, मामा संतोख सिंह और बड़ा मामा जगतार सिंह रहते थे. उस के ननिहाल वाले कोई अमीर आदमी नहीं थे. बस मेहनतमजदूरी कर अपना परिवार चलाने वाले लोग थे. बिंदर भी उन के साथ खेतों में मेहनतमजदूरी करने लगा. बिंदर के मामा के साथ उन की पत्नियां भी खेतों में काम करने जाया करती थीं. ताकि घर में ज्यादा पैसे आए. उन के देखादेखी बिंदर की पत्नी भी उन के साथ काम करने जाती थी.

बिंदर के पड़ोस में पूर्ण सिंह का परिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी जोगिंदर कौर के अलावा बेटा हरप्रीत सिंह, उस की पत्नी रविंदर कौर, बेटी नीतू अमन और राजिंदर कौर थीं. हालांकि नीतू और राजिंदर कौर दोनों ही शादीशुदा थीं पर वह अधिकतर अपने मायके में ही डेरा जमाए रहती थीं. ये सब लोग उन्हीं के खेतों के साथ वाले खेत में काम करते थे, जिस में बिंदर और उस के मामामामी काम किया करते थे, यह भी कहा जा सकता है कि ये दोनों परिवार साथसाथ काम करते थे.

27 अप्रैल, 2019 की बात है. सुबह के लगभग 11 बजे का समय था. कुछ लोग उस समय खेतों में काम पर लगे हुए थे तो कुछ लोग पेड़ों के नीचे बैठे सुस्ता रहे थे.

बिंदर का मामा संतोख सिंह, उस की पत्नी कंवलजीत कौर, मामा जगतार सिंह और बिंदर की पत्नी जसबीर कौर साथ बैठे इधरउधर की बातें कर रहे थे कि उन के बीच बैठी जसबीर कौर अचानक गायब हो गई.

उन लोगों ने सोचा शायद वह लघुशंका के लिए गई होगी और किसी ने इस बात पर अधिक ध्यान नहीं दिया. सब अपनेअपने काम में व्यस्त हो गए थे. शाम के 5 बजे यानी छुट्टी का समय हो गया पर तब तक जसबीर कौर किसी को दिखाई नहीं दी. अब पूरे परिवार को चिंता ने घेर लिया कि आखिर सब के बीच जसबीर कहां गायब हो गई. जसबीर कौर इन दिनों गर्भवती थी. उसे सातवां महीना चल रहा था.

सब ने मिल कर सोचा कि कहीं तबीयत खराब होने के कारण वह घर तो नहीं चली गई. घर पहुंचने पर पता चला कि वह वहां भी नहीं थी. उसे फिर पूरे गांव में ढूंढा गया पर उस का कहीं पता नहीं चला.

जसबीर के मायके और अन्य रिश्तेदारियों में भी उसे तलाशा गया. कुल मिला कर रातभर की खोज के बाद भी जसबीर का कहीं सुराग नहीं लगा. अगली सुबह 28 अप्रैल को सब लोगों ने थाना सदर बटाला जा कर जसबीर कौर के रहस्यमय तरीके से लापता होने की सूचना दी. पुलिस ने जसबीर कौर का फोटो ले कर उस की तलाश शुरू कर दी.

जसबीर कौर के लापता होने की वजह किसी की समझ में नहीं आ रही थी, क्योंकि न तो वो पैसे वाले लोग थे जो कोई फिरौती के लिए उस का अपहरण करता और न ही जसबीर कौर चालू किस्म की औरत थी. वह बेहद शरीफ औरत थी.

सरपंच परजिंदर सिंह और साबका सरपंच नवदीप सिंह भी यही सोचसोच कर हैरान थे. पुलिस और बिंदर के परिजन अपनेअपने तरीके से जसबीर की तलाश में जुटे  थे. इसी दौरान किसी ने सरपंच नवदीप सिंह और बिंदर को बताया कि जसबीर के गायब होने वाले दिन यानी 27 अप्रैल को उसे पूर्ण सिंह की पत्नी जोगिंदर कौर और पड़ोसन राजिंदर कौर के साथ उन के घर की तरफ जाते देखा गया था.

इस बात का पता चलते ही सरपंच नवदीप सिंह कुछ गांव वालों के साथ पूर्ण सिंह के घर पहुंचे और जसबीर के बारे में पूछा.

उस समय घर पर पूर्ण सिंह, उस की पत्नी जोगिंदर कौर, बेटा गुरप्रीत, उस की बहू रविंदर कौर और दोनों बेटियां नीतू व राजिंदर कौर मौजूद थीं. उन्होंने बताया कि जसबीर कौर दोपहर को उन के घर आई तो जरूर थी पर 3 बजे वापस अपने घर चली गई थी. जसबीर कौर का पता लगने की जो आशा दिखाई दे रही थी वह जोगिंदर कौर के बताने से बुझ गई थी.

जसबीर की तलाश फिर से शुरू की गई. पर न जाने क्यों सरपंच नवदीप को ऐसा लगने लगा कि जसबीर के गायब होने का राज पूर्ण सिंह और उस का परिवार जानता है. यही बात बिंदर और उस के दोनों मामाओं को भी खटक रही थी. आखिर 29 अप्रैल, 2019 को शाम को सरपंच नवदीप और परजिंदर  के साथ पूरे गांव ने पूर्ण सिंह के घर पर धावा बोल दिया.

उन्होंने उस के घर के चप्पेचप्पे की तलाशी लेनी शुरू कर दी. उन्हें घर में एक जगह बड़ा संदूक दिखाई दिया. वह संदूक कमरों के पीछे पशुओं के बाड़े के पास पड़ा था. संदूक पर मक्खियां भिनभिना रही थीं और उस में से अजीब सी दुर्गंध आ रही थी.

सरपंच नवदीप ने बढ़ कर जब उस संदूक को खोल कर देखा तो उन के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. संदूक में जसबीर कौर की लाश थी जो जगहजगह से कटी हुई थी. थोड़ी ही देर में यह खबर गांव भर में फैल गई. पूरा गांव पूर्ण सिंह के घर की ओर दौड़ने लगा.

बिंदर ने सरपंच नवदीप सिंह के साथ थाना बटाला जा कर इस की सूचना एसएचओ हरसंदीप सिंह को दी. एसएचओ तुरंत एएसआई बलविंदर सिंह, सितरमान सिंह, लेडी एएसआई अंजू बाला, लेडी हवलदार जसविंदर कौर, बलजीत कौर, हवलदार दिलबाग, सुखजीत सिंह, लखविंदर सिंह, सिपाही जगदीप सिंह और सुखदेव सिंह को साथ ले कर पूर्ण सिंह के घर पहुंच गए.

मौके पर पहुंच कर पुलिस ने सब से पहले जसबीर कौर की लाश अपने कब्जे में ली. इस के बाद पूर्ण सिंह उस की पत्नी जोगिंदर कौर, बेटे की पत्नी रविंदर कौर तथा एक महिला तांत्रिक जगदीशो उर्फ दीशो को गिरफ्तार कर लिया.

इस हत्याकांड से जुड़े अन्य 3 आरोपी नीतू, अमन और राजिंदर कौर फरार होेने में कामयाब हो गए थे. एसएचओ हरसंदीप सिंह ने एसपी बटाला एच.एस. हीर, डीएसपी बलबीर सिंह को भी घटना की सूचना दे दी थी.

कुछ देर में दोनों पुलिस अधिकारी क्राइम टीम के साथ मौकाएवारदात पर पहुंच गए. मृतका जसबीर कौर का पेट चीरा हुआ था. वह 7 महीने की गर्भवती थी. पुलिस ने जब लाश बरामद की तो उस के पेट से बच्चा गायब था.

इस बारे में पुलिस के साथ आरोपियों से पूछताछ की गई तो प्रथम पूछताछ में ही रविंदर कौर ने अपना अपराध स्वीकर कर लिया. उस ने बताया कि उस के परिवार के लोगों ने मृतका का पेट चीर कर उस के गर्भ से बच्चा निकाला था. इन लोगों ने गर्भवती महिला के पेट को चीर कर गर्भ से बच्चा निकालने की जो कहानी बताई वह वास्तव में रोंगटे खडे़ कर देने वाली निकली.

इस कहानी की मुख्य अभियुक्ता रविंदर कौर की शादी लगभग 12 साल पहले हुई थी. उस के 4 बच्चे थे. रविंदर कौर बचपन से ही आजादखयाल की महत्त्वाकांक्षी औरत थी. वह अपनी जिंदगी अपनी तरह से जीना चाहती थी. उसे अपने ऊपर किसी भी तरह की बंदिश पसंद नहीं थी.

अपने स्वार्थपूर्ति के लिए रिश्ते बदलना, बनाना उस का मनपसंद खेल था. करीब 6 साल पहले जब उस की आंख पूर्ण सिंह के बेटे हरप्रीत सिंह के साथ लड़ीं तो वह अपने चारों बच्चों सहित अपने पुराने पति को अलविदा कह कर हरप्रीत सिंह की पत्नी बन उस के घर आ गई थी.

अब इसे रविंदर की बदकिस्मती कहें या उस की ढलती उम्र समझें अथवा नए पति हरप्रीत सिंह की शारीरिक कमी. बात कुछ भी रही हो पर हरप्रीत के साथ शादी के 5 साल बीत जाने के बाद भी वह उस के बच्चे की मां नहीं बन पाई थी. बच्चा न जनने के कारण उस की सास जोगिंदर कौर हर समय उसे कोसती रहती और ताने देती थी. जिस कारण रविंदर कौर बड़ी परेशान थी.

एक बार उस की एक खास सहेली ने उसे बताया कि पास के गांव में जगदीशो उर्फ दीशो नाम की महिला तांत्रिक रहती है, जिस के आशीर्वाद से कई बांझ औरतों की गोद हरी हुई है. तुम उस के पास चलो.

सहेली के कहने पर रविंदर कौर तांत्रिक दीशो से मिली. दीशो कुछ टाइम तक अपनी ढोंग विद्या से उस से पैसे ऐंठ कर उल्लू बनाती रही. अंत में उस ने स्पष्ट कह दिया ‘‘रविंदर तुम्हारी कोख पर ऐसे जिन्न का साया है जो अब कभी तुम्हें मां नहीं बनने देगा. हां एक तरीका है अगर तुम उसे कर सको तो मैं तुम्हें बताऊं?’’

‘‘मैं कुछ भी करने को तैयार हूं.’’ रविंदर कौर बोली.

‘‘तो सुनो, अपने अड़ोसपड़ोस में कोई ऐसी औरत तलाश करो जो गर्भवती हो और तुम अभी कुछ दिन अपने घर से बाहर मत निकलना. अपने बारे में यह बात भी फैला दो कि तुम गर्भ से हो. इस के बाद क्या करना है यह मैं तुम्हें बाद में बताऊंगी.’’ दीशो ने सलाह दी.

दीशो के कहने पर रविंदर कौर ने वैसा ही किया. साथ ही यह बात अपनी सास और ननदों को भी बता दी. उन्हीं दिनों जसबीर कौर गर्भवती थी. यह बात रविंदर कौर ने तांत्रिक दीशो को बता दी. दीशो ने फिर एक भयानक योजना बनाई.

घटना वाले दिन रविंदर कौर पड़ोस के खेतों में काम कर रही जसबीर को इशारे से बुला कर वह उसे अपने घर ले गई. उस ने जसबीर को बताया था कि एक बड़ी देवी उन के घर आई हुई है. वह उस से आशीर्वाद ले ले ताकि उस का बच्चा सहीसलामत पैदा हो.

जसबीर नीयत की साफ थी और भोली भी. रविंदर कौर की बातों को वह समझ नहीं पाई और उस के घर चली गई. वहां पहले से ही रविंदर कौर के परिवार के सब लोग मौजूद थे. सो समय व्यर्थ न करते हुए सब ने किसी तरह जसबीर को अपने कब्जे में ले कर दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया.

दम घुटते ही जसबीर एक ओर लुढ़क गई. वह मर चुकी थी. तभी तांत्रिक दीशो ने अपने साथ लाए सर्जिकल ब्लेड से उस का पेट चीर कर पेट का शिशु बाहर निकाल लिया. शिशु को गोद में ले कर जब देखा तो पता चला कि जसबीर कौर के साथसाथ वह भी मर चुका है. मां और बच्चे की मौत के बाद उन सब के हाथपैर फूल गए.

अब क्या किया जाए? सब के सामने अब यही एक प्रश्न था. काफी सोचविचार के बाद तय किया गया कि शिशु के शव को घर में बनी सीढि़यों के नीचे गाड़ दिया जाए और जसबीर की लाश कमरे के बाहर रखे संदूक में छिपा दिया जाए.

बाद में मौका मिलने पर जसबीर की लाश के टुकड़े कर नहर में बहा देंगे. किसी को कानोंकान खबर भी नहीं लगेगी कि जसबीर कहां गई. बाद में यह अफवाह फैला देंगे कि वह अपने किसी यार के साथ भाग गई होगी.

एसएचओ हरसंदीप सिंह ने भादंवि की धारा 302, 313, 316, 201 और 120 बी के तहत पूर्ण सिंह, जोगिंदर कौर, रविंदर कौर, गुरप्रीत सिंह, नीतू, अमन और राजिंदर कौर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर चारों अभियुक्तों पूर्ण सिंह, उस की पत्नी जोगिंदर कौर, बेटे की पत्नी रविंदर कौर और महिला तांत्रिक जगदीशो उर्फ दीशो को गिरफ्तार कर पहली मई को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी रविंदर कौर की निशानदेही पर ड्यूटी मजिस्ट्रैट अजय पाल सिंह और नायब तहसीलदार तथा पुलिस के उच्च अधिकारियों व गांव वालों की मौजूदगी में उन के घर में सीढि़यों के नीचे दफनाए गए मृतका जसबीर के शिशु को जमीन खोद कर बाहर निकला. फिर मांबेटे का शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया. अन्य 3 दोषियों की निशानदेही पर घर से खून सने कपडे़ और सर्जिकल ब्लेड बरामद कर लिया गया.

बहरहाल जो 4 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, उन्हें सीखचों के पीछे से बाहर आने का मौका कब मिलेगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. वह बाहर आ पाएंगे या नहीं, किसी को पता नहीं है. अदालत से उन्हें कितनी सजा मिलती है, यह भी अभी भविष्य के गर्भ में है.

लेकिन इतना तय है कि समाज में अंधविश्वास की जड़ें बहुत गहरे तक जमी हुई हैं. ये जड़ें कैसे और कब उखड़ सकेंगी, कोई नहीं जानता. Crime Story

Gujarat News: 2 निकाह के बाद भी करिश्मा रही अकेली

Gujarat News: अलगअलग धर्मों के होने की वजह से राजू शिंदे और करिश्मा भले ही विवाह नहीं कर सके, लेकिन 18 साल बाद नियति ने उन्हें जिंदगी के उस मोड़ पर मिलवा दिया, जब दोनों ही अपनेअपने जीवनसाथी को तलाक दे चुके थे. समय की नजाकत को देखते हुए दोनों ने निकाह तो कर लिया, लेकिन इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि 2-2 निकाह करने के बावजूद करिश्मा अकेली ही रह गई.

महाराष्ट्र के शिरडी का रहने वाला राजू शिंदे पिछले 16 सालों से गुजरात के शहर अहमदाबाद के नरोडा में रहता था. वह अपने पेरेंट्स की भले ही इकलौती संतान था, लेकिन कोई खास पढ़ालिखा नहीं था, इसलिए इलास्टिक की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था. उस समय राजू की उम्र यही कोई 25-26 साल रही होगी. फादर भी कमाते थे, इसलिए उसे किसी बात की चिंता नहीं थी. वह कमाता था और बनठन कर रहता था. खुद की कमाई खुद पर ही खर्च करता था. खानापीना घर से मिलता ही था, इसलिए किसी बात की फिक्र नहीं थी.

उस के पास सब कुछ था, लेकिन कोई ऐसा नहीं था, जो उसे प्यार करे. उसे किसी एक ऐसी लड़की की तलाश थी, जो उसे चाहे. वह जिस कंपनी में नौकरी करता था, उसी कंपनी में करिश्मा नाम की एक लड़की काम करती थी. राजू और करिश्मा एक साथ काम करते थे, इसलिए दोनों लगभग रोज ही मिलते थे और दोनों के बीच बातचीत भी होती रहती थी. इस तरह लगातार मिलने और बातचीत होने से जल्दी ही दोनों में दोस्ती हो गई. दोनों में दोस्ती भी हो गई. फिर वे एकदूसरे को चाहने भी लगे थे, पर उन का विवाह नहीं हो सका.

इस का कारण यह था कि दोनों ही अलगअलग धर्मों से थे. बहरहाल, बात विवाह तक पहुंच पाती, उस से पहले ही उसी दौरान साल 2006 में राजू शिंदे का विवाह गीता राठौड़ के साथ हो गया था. इस तरह करिश्मा राजू की सिर्फ दोस्त बन कर ही रह गई थी. राजू शिंदे की शादी होने के 3 साल बाद सन 2009 में करिश्मा का भी निकाह अजीज खान के साथ हो गया था. अजीज खान भी अहमदाबाद के नरोडा में ही रहता था और सोलर पैनल लगाने का काम करता था. शादी के साल भर बाद ही करिश्मा को बेटा हुआ तो उस ने नौकरी छोड़ दी और घर तथा बेटे को संभालने लगी. इस के बाद करिश्मा को 2 बच्चे हुए.

इस तरह वह 3 बच्चों की मां बन गई थी. दूसरी ओर राजू भी अपनी पत्नी गीता के साथ मजे से वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहा था. लेकिन बच्चे पैदा होने के बाद करिश्मा और अजीज खान में अकसर झगड़ा होने लगा था. इस की वजह यह थी कि अजीज शराब पीने लगा था. वह रोजाना शराब पी कर आता. करिश्मा उसे शराब पीने से रोकती, जिस की वजह से दोनों के बीच झगड़ा होता.

करिश्मा: 2 शादियों के बाद भी अकेली रह गई

पति की इस आदत से करिश्मा परेशान हो चुकी थी. आखिर पति की नशे की लत और रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर करिश्मा ने अजीज से तलाक ले लिया. इस के बाद वह वटवा में किराए का मकान ले कर अकेली ही रहने लगी थी. संयोग देखो कि शादी के 18 सालों बाद साल 2024 में किसी कारणवश राजू और गीता के बीच भी तलाक हो गया था. पत्नी से तलाक होने के बाद राजू नरोडा में ही अकेला रहता था.

शादी के बाद राजू शिंदे और करिश्मा की मुलाकात नहीं हुई थी, लेकिन तलाक के बाद अपना घर चलाने तथा अपना और अपने बच्चों का पेट भरने के लिए करिश्मा सालों पहले जिस इलास्टिक कंपनी में नौकरी करती थी, वहीं वह फिर से नौकरी करने लगी थी.

दूसरी ओर राजू साल 2016 से गांधीनगर के माणसा स्थित स्टेरीकोट हेल्थकेयर कंपनी में फिटर के रूप में नौकरी करने लगा था, लेकिन एक्स्ट्रा पैसे कमाने के लिए वह छुट्टियों के दिन या रात में अन्य कंपनियों में एक्स्ट्रा काम करने जाता था. इसी सिलसिले में एक बार वह उसी पुरानी इलास्टिक कंपनी में भी एक्स्ट्रा काम करने गया तो इत्तफाक से करिश्मा ने वहां राजू को काम करते देख लिया.

दोबारा जाग उठा प्यार

करिश्मा उस से मिलने उस के पास पहुंच गई. सालों बाद करिश्मा को देख कर राजू चौंका. लगभग डेढ़ दशक यानी 15 सालों बाद दोनों एकदूसरे से मिले थे. पुरानी यादें ताजी हुईं. शादी हुई या नहीं, कितने बच्चे हैं, इसी तरह की बातें शुरू हुईं. इन्हीं बातों में करिश्मा ने बताया कि उस का तलाक हो गया है और वह अपने बच्चों के साथ अकेली ही रहती है. घर चलाने के लिए वह फिर से यहां नौकरी कर रही है.

जवाब में राजू ने भी अपनी आपबीती सुनाई कि उस का भी तलाक हो गया है और वह भी अकेला रहता है. इस के बाद उस ने कहा, ”तू भी अकेली और मैं भी अकेला, बोल करेगी मुझ से शादी?’’

उस समय करिश्मा कुछ नहीं बोली, सिर्फ हंस कर रह गई थी. लेकिन दोनों के बीच फोन नंबरों का लेनदेन हो गया था, जिस से दोनों में बातें होने लगी थीं. धीरेधीरे यह बातचीत लंबी होती गई. इसी बातचीत के दौरान एक दिन करिश्मा ने राजू से कहा, ”यार राजू, तुम मेरे लिए कोई दूसरी नौकरी ढूंढ दो. यहां जो सैलरी मिलती है, उस में घर बड़ी मुश्किल से चलता है. 3 बच्चों का पेट बड़ी मुश्किल से भर पाती हूं.’’

इस पर राजू ने उसे एक व्यावहारिक रास्ता सुझाते हुए कहा, ”तू फिर से किसी से शादी कर के उसी के साथ सेट हो जा.’’

”तुम्हारी बात तो सही है राजू, लेकिन 3 बच्चों की मां से अब कौन शादी करेगा?’’ करिश्मा ने कहा. राजू को शायद ऐसे ही मौके की तलाश थी. क्योंकि शरीर की आग बुझाने के लिए उसे भी एक औरत की तलाश थी. करिश्मा ने जब कहा कि उस से कौन शादी करेगा तो जवाब में उस ने अपने दिल की बात कह दी, ”मैं करूंगा तुम से शादी. बोलो, करोगी मुझ से शादी?’’

राजू शिंदे की बात सुन कर करिश्मा को अपनी जिंदगी फिर से संवरती नजर आई. इस के बाद दोनों के बीच घंटों बातें होने लगीं. यही नहीं, दोनों नए प्रेमियों की तरह बाहर मिलने भी लगे. इस तरह बाहर मिलने में मजा नहीं आ रहा था, इसलिए साथ रहने के लिए साल 2023 में राजू ने करिश्मा से एक मसजिद में निकाह कर लिया.

निकाह के बाद राजू करिश्मा के साथ उस के वटवा वाले घर में रहने लगा. इस तरह दोनों ने एक बार फिर से नई जिंदगी शुरू की. राजू ने घर को व्यवस्थित करने यानी गृहस्थी बसाने के लिए लगभग 50 हजार रुपए का सामान भी खरीदा. लगभग 2 सालों तक राजू और करिश्मा का वैवाहिक जीवन हंसीखुशी से बीता, लेकिन धीरेधीरे दोनों के बीच विवाद होने लगा. राजू सुबह 5 बजे नौकरी के लिए निकल जाता था, इसलिए शुरूशुरू में वह बिना टिफिन लिए ही जाता था. इस के लिए वह करिश्मा से कुछ कहता भी नहीं था.

काफी दिनों बाद एक दिन राजू ने करिश्मा से कहा, ”हमारा निकाह हो गया है और हम पतिपत्नी हो गए हैं. पत्नी के होते हुए भी मुझे रोजाना बाहर का खाना खाना पड़ता है. तुम मुझे टिफिन बना कर दे दिया करो.’’

करिश्मा ने टिफिन बना कर देने से मना करते हुए कहा, ”तुम अपनी नौकरी पर 5 बजे जाते हो. तुम्हारा टिफिन बनाने के लिए मुझे सुबह 4 बजे उठ कर खाना बनाना होगा. मुझे घर भी संभालना होता है और बच्चों को भी देखना पड़ता है. इस के अलावा मुझे भी नौकरी पर जाना होता है. इतनी जल्दी उठ कर खाना बनाना मेरे लिए मुमकिन नहीं है.’’

टिफिन को ले कर शुरू हुई बातचीत घर के अन्य कामों तक फैल गई. धीरेधीरे दोनों के बीच झगड़े होने लगे. झगड़ों की वजह से राजू को शक होने लगा कि करिश्मा का जरूर किसी और के साथ अफेयर चल रहा है, इसीलिए वह उस में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं ले रही है. राजू इस बात को ले कर भी करिश्मा को ताने ही नहीं मारने लगा था, बल्कि झगडऩे भी लगा था.

दूसरी ओर करिश्मा राजू के शक्की स्वभाव से तंग आ कर उसे बिना बताए बाहर आनेजाने लगी थी. इस की वजह राजू को लगने लगा था कि करिश्मा अपने प्रेमी से मिलने जाती है. करिश्मा राजू से जब कुछ ज्यादा ही परेशान हो गई तो एक दिन उस ने राजू से साफसाफ कह दिया कि जब उसे उस पर विश्वास ही नहीं रह गया है तो वह कहीं और रहने चला जाए, अब वह उस के साथ नहीं रहना चाहती.

उसी दौरान एक घटना और घट गई. करिश्मा के पूर्व पति अजीज की अम्मी की मौत हो गई. इस बात की जानकारी करिश्मा को हुई तो पुराने रिश्ते के नाते वह अजीज के घर शोक व्यक्त करने गई. वहां करिश्मा और अजीज के बीच बातचीत हुई तो पुराने संबंध फिर से ताजे हो गए. राजू से परेशान करिश्मा ने अजीज से कहा कि अगर उसे कोई आपत्ति न हो तो वह फिर से उस के साथ रहना चाहती है, ताकि बच्चों का भविष्य संवारा जा सके.

अजीज को भी करिश्मा और बच्चों की बहुत याद आती थी. इसलिए पुराने झगड़े भुला कर उस ने करिश्मा के साथ नई जिंदगी की शुरुआत करने का फैसला किया. चूंकि अब वह अजीज खान के साथ फिर से निकाह करने जा रही थी, इसलिए उस ने राजू को घर से निकल जाने के लिए कह दिया था.

दूसरी ओर राजू किसी भी कीमत पर करिश्मा को छोडऩे के लिए तैयार नहीं था. अब वह करिश्मा के साथ ही रहना चाहता था, क्योंकि यहां उसे पत्नी का सुख मिलने के साथसाथ रहने के लिए घर भी मिला हुआ था, इसलिए उस ने करिश्मा से बहाना बनाया कि उस ने उस के घर के लिए जो 50 हजार रुपए का सामान खरीदा है, उस के वे सारे रुपए वापस कर दे तो वह उस का घर छोड़ कर चला जाएगा.

राजू को लग रहा था कि करिश्मा इतने रुपए कहां से लाएगी? न वह उस के रुपए वापस कर पाएगी, न उसे घर छोड़ कर जाना पड़ेगा. लेकिन राजू को तब झटका लगा, जब अजीज ने करिश्मा को 50 हजार रुपए दे दिए और उस ने वे रुपए ला कर राजू के मुंह पर दे मारे. उस के बाद वह बोली, ”अब चुपचाप यहां से चला जा और अब कभी मुझे अपना मुंह मत दिखाना.’’

रुपए मिलने के बाद राजू करिश्मा के घर से तो निकल गया, लेकिन उसे करिश्मा और उस के पति अजीज पर बहुत गुस्सा आया. उस का अहंकार (ईगो) बुरी तरह घायल हो गया था. उसे लगा कि यह अजीज उस के और करिश्मा के बीच कबाब में हड्ïडी बन गया है. अगर यह बीच में न आया होता तो करिश्मा उसी की होती, अगर करिश्मा को अपनी बनाए रखना है तो इस अजीज को बीच से हटाना होगा. दूसरी ओर करिश्मा से तलाक होने के बाद अजीज अपने बड़े भाई शब्बीर के साथ रहता था, क्योंकि उसी बीच उस की अम्मी की भी मौत हो गई थी. उन दिनों करिश्मा राजू के साथ रह रही थी.

मातम में बदली मोहब्बत

अजीज की अम्मी की मौत पर करिश्मा अजीज के यहां शोक व्यक्त करने आई थी, तभी उस ने अजीज के बड़े भाई शब्बीर से कहा था कि अब वह राजू के साथ नहीं रहना चाहती और अपने बच्चों के पिता अजीज के पास वापस आना चाहती है. तब शब्बीर ने सोचा था कि अगर करिश्मा वापस आ जाती है और बच्चों के साथ अजीज के साथ रहने लगती है तो यह उस की मेहरबानी होगी. उन्होंने भी हां कर दिया था और कहा था कि रमजान के बाद उन दोनों का फिर से निकाह करा दिया जाएगा.

दरअसल, करिश्मा के चली जाने के बाद अजीज शराब पी कर उसे याद कर के रोता रहता था, लेकिन जब से करिश्मा वापस मिल गई थी, तब से उस के चेहरे पर फिर से खुशी लौट आई थी. लेकिन उस की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी.

2 दिसंबर, 2025 की रात करीब 9 बजे अजीज नरोडा वाले घर से करिश्मा और बच्चों को कपड़े और रुपए देने वटवा गया था. उसी समय राजू अपनी बाइक से नरोडा की ओर खाना खाने जा रहा था. भारी ट्रैफिक के बीच भी वटवा की ओर जा रहे अजीज को राजू ने देख लिया. उसे समझते देर नहीं लगी कि वह करिश्मा से मिलने जा रहा है. यह सोच कर उस की आंखों में खून उतर आया था. उस का शरीर भी गुस्से से कांपने लगा था.

क्रोध की आग में जलता हुआ वह खाना खाना भूल गया. वह सीधे अपने घर गया और एक तेज धार वाला चाकू निकाला. चाकू की मूठ पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उस ने कुछ निश्चय कर लिया. उस ने चाकू को एक कागज में लपेटा. फिर उसे पीछे अपनी पैंट में खोंसा और दोबारा अपनी बाइक ले कर निकल पड़ा. उसे पता था कि वटवा से नरोडा आनेजाने वाले लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए उसे पूरा विश्वास था कि अजीज इसी रास्ते से लौटेगा. वह एक सुनसान जगह पर खड़े हो कर शांति से अजीज का इंतजार करने लगा.

मौत का किया इंतजार

एक घंटा, 2 घंटे, 3 घंटा बीत गया, लेकिन उस ने धैर्य नहीं खोया. रात के 12 बज गए. आखिरकार रात के साढ़े 12 बजे उस का इंतजार खत्म हुआ. उसे वटवा कैनाल के पास अजीज फिर से आता दिखाई दिया. अजीज को देख कर राजू शिंदे तुरंत अपने चेहरे पर मासूमियत के भाव ले आया और हाथ दे कर उसे रोका.

पुलिस गिरफ्त में आरोपी राजू शिंदे

अजीज के रुकते ही उस ने कहा, ”एक्सक्यूज मी, आप अजीज भाई हैं न? मेरा नाम राजू है. मैं यहीं नरोडा की ओर रहता हूं. दरअसल, मुझे अपने शेड पर सोलर पैनल लगवाना है. आप का नंबर नहीं था, इसलिए मैं आप के घर गया था. पर आप घर पर मिले नहीं. आप अचानक यहां दिखाई दे गए, इसलिए मैं ने आप को रोक लिया.’’

”आप की बात तो सही है राजूभाई, लेकिन अभी रात के साढ़े 12 बजे हैं और मैं थक भी गया हूं. इसलिए आप कल सुबह मुझे फोन कर लीजिएगा, मैं आप का काम कर दूंगा.’’

राजू ने मन ही मन सोचा कि काम तो बेटा तेरा तमाम करना है और वह भी अभी. इसलिए उस ने कहा, ”अरे अजीजभाई, मुझे थोड़ा अर्जेंट है. आप नरोडा की ओर ही जा रहे हैं, मेरा शेड भी वहीं है. मेरे पास कोई साधन भी नहीं है, इसलिए आप मुझे वहां तक छोड़ भी दीजिएगा और बाहर से शेड भी देख लीजिएगा. इस के बाद कल आ कर काम शुरू कर देना.’’

अजीज थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन फिर सोचा कि काम और पैसा खुद चल कर उस के पास तक आ रहा है और रास्ते में सिर्फ बाहर से ही तो शेड देखना है तो मना क्यों किया जाए? उस ने राजू को अपनी बाइक पर पीछे बैठाया और नरोडा की ओर चल पड़ा.अजीज ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह उस की जिंदगी की सब से बड़ी और आखिरी गलती होने वाली है. उसे क्या पता था कि काम के लालच में उस ने मौत पीछे बैठा ली है.

जैसे ही रास्ते में केडिला ब्रिज के पास अजीज की बाइक पहुंची, अंधेरे का फायदा उठाते हुए राजू बोला, ”अजीजभाई, गाड़ी यहीं साइड में ले लो, मेरा शेड यहीं है.’’

अजीज ने जैसे ही बाइक थोड़ी धीमी की. राजू को अजीज से इतनी नफरत थी कि उस ने बाइक रुकने का भी इंतजार नहीं किया. सुनसान और अंधेरा देख कर राजू ने पैंट में पीछे खोंसा चाकू निकाला और चलती बाइक पर ही अजीज का गला रेत दिया. उस ने इतनी नफरत से अजीज पर हमला किया था कि खून का फव्वारा फूट पड़ा और अजीज की श्वास नली तक कट गई थी. चीखते हुए अजीज बाइक समेत जमीन पर गिर पड़ा. अजीज के साथ राजू भी गिर पड़ा था. संयोग से उसे ज्यादा चोट नहीं लगी थी. उसे मामूली खरोंचें आई थीं. इसलिए वह तुरंत उठ कर खड़ा हो गया.

थोड़ी देर तड़प कर अजीज शांत हो गया. खून से लथपथ अजीज के शरीर को राजू ने पैर से हिला कर देखा कि वह मर चुका है या नहीं? उसे लगा कि अजीज का खेल खत्म हो गया है तो वह अंधेरे में गायब हो गया और घर जा कर इस तरह चैन से सो गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो. शायद उसे लगा था कि अंधेरे में किसी ने उसे देखा तो है नहीं, इसलिए पुलिस कभी उस तक पहुंच नहीं सकेगी. 3 दिसंबर की रात 2 से ढाई बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि घोडासर के केडिला ब्रिज के पास एक युवक की गला कटी लाश पड़ी है.

सूचना मिलने पर थाना इसनपुर के इंसपेक्टर बी.एस. जाडेजा अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. बाइक के नंबर से मरने वाले की पहचान नरोडा के रहने वाले अजीज खान के रूप में हो गई थी. इस के बाद लाश को जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया था. आगे की पुलिस जांच में पता चला कि अजीज का अपनी पत्नी करिश्मा से तलाक हो गया था. उस की पत्नी वटवा में अलग रहती थी. पुलिस करिश्मा के घर पहुंची.

करिश्मा से पूछताछ की गई तो पता चला कि उस ने अजीज से तलाक लेने के बाद राजू नाम के व्यक्ति से निकाह कर लिया था और दोनों साथ रह रहे थे. लेकिन इधर वह राजू को छोड़ कर फिर से अजीज से निकाह करने वाली थी. करिश्मा की इस बात से राजू शक के दायरे में आ गया, लेकिन पुलिस ने सीधे उसे हिरासत में नहीं लिया था.

रह गई अकेली

राजू ने ही यह कांड किया है, यह कंफर्म करने के लिए पुलिस ने उस जगह की सीसीटीवी फुटेज चेक की, जहां अजीज की हत्या हुई थी. पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति जाता दिखाई दिया, जिस की चाल और शरीर की बनावट राजू से हूबहू मेल खाती थी. इस के बाद पुलिस उसे थाने ले आई और सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि अजीज की हत्या उसी ने करिश्मा के लिए की थी.

दरअसल, राजू शिंदे के साथ रहते हुए ही करिश्मा अपने पूर्व पति अजीज से बातचीत करने लगी थी, जो राजू को बिलकुल पसंद नहीं था. यही नहीं, उस ने अजीज की ही वजह से उसे अपने घर से निकाल दिया था. इसलिए उसे लगा कि अगर अजीज नहीं रहेगा तो करिश्मा उस के पास फिर से वापस आ सकती है. यही सोच कर राजू ने नफरत से इस तरह बेरहमी से अजीज की हत्या कर दी थी.

राजू शिंदे की गिरफ्तारी के बाद करिश्मा ने पुलिस को बताया था कि अजीज से तलाक लेने के बाद उस ने राजू से निकाह कर लिया था. उस के बाद अजीज उसे धमकी दे कर जबरदस्ती अपने साथ ले जाने के लिए कह रहा था. वह कह रहा था कि ‘अगर मैं उस के साथ नहीं आई तो इस का अंजाम तू देखेगी.’

इसलिए वह डर गई थी कि कहीं वह कुछ उलटासीधा न कर बैठा तो नुकसान उसे ही होता, क्योंकि राजू और अजीज दोनों ही उस के थे. इसलिए उस ने अजीज के साथ जाने का फैसला किया था. अजीज की हत्या करने वाले अपने दूसरे पति राजू शिंदे के बारे में करिश्मा का कहना था कि राजू बहुत अच्छा इंसान था. वह किसी भी तरह का नशा नहीं करता था. उस ने उस के तीनों बच्चों को सगे पिता से भी ज्यादा प्यार दिया था. उस ने कभी बच्चों को पिता की कमी महसूस नहीं होने दी थी.

लेकिन अजीज उसे बारबार धमका रहा था. यह बात सिर्फ वह और अजीज ही जानते थे. मजबूरी में उसे अजीज के साथ जाना पड़ रहा था. फिलहाल करिश्मा अपने बच्चों के साथ अकेली रह रही है और उस का कहना है कि अब वह तीसरे निकाह के बारे में बिलकुल नहीं सोच रही है. पुलिस को अजीज की हत्या में करिश्मा के कहीं से भी शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला था.

राजू शिंदे से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल भेज दिया था. Gujarat News

 

 

UP News: मोहब्बत में क्राइम हरगिज नहीं

UP News: 35 साल की सुनीता भले ही 5 बच्चों की मां बन चुकी थी, लेकिन उस के गठीले बदन की कसावट पर गांव के अनेक युवा आहें भरते थे. गांव का 22 वर्षीय आशीष कुमार उर्फ अंशु तो उसे अपना दिल दे चुका था. अमरबेल की तरह दोनों की मोहब्बत बढ़ती गई. मोहब्बत के इसी समंदर में डूब कर एक दिन दोनों ऐसा खतरनाक क्राइम कर बैठे कि…

आशीष उर्फ अंशु और उस की प्रेमिका सुनीता ने वीरपाल की हत्या करने की ठान ली, क्योंकि वह उन दोनों की मोहब्बत में रोड़ा बन रहा था. वीरपाल सुनीता का पति था. वे दोनों यही सोच रहे थे कि उस की हत्या कब और कैसे की जाए? तय किया कि आधी रात के बाद वीरपाल की गोली मार कर हत्या घर में ही कर दी जाए. फिर शोर मचा दिया जाएगा कि बदमाश आए थे. घर का सामान भी बिखेर दिया जाएगा और लूट की घटना बनाने के लिए जेवर और नकदी लूट कर ले जाने का नाटक किया जाएगा.

तभी अंशु बोला, ”तमंचा और कारतूस का इंतजाम कहां से होगा?’’

सुनीता ने कहा, ”यह इंतजाम तुम्हें ही करना पड़ेगा. इस के लिए रुपयों की जरूरत भी पड़ेगी.’’

”रुपए का तो मैं इंतजाम कर लूंगा, लेकिन तमंचा और कारतूस मिलना इतना आसान नहीं है. चलो, मान लिया जाए कि ये चीजें मिल भी गईं तो वीरपाल को गोली कौन मारेगा?’’ अंशु बोला.

”तुम ठीक कह रहे हो. यदि उस समय बच्चे उठ गए, उन्होंने देख लिया तो हम दोनों पकड़े जाएंगे. फिर बिना सजा के नहीं बचेंगे. इस तरह हमारी प्रेम कहानी तो अधूरी रह जाएगी.’’ सुनीता ने आशंका जताई.

इस के बाद उन्होंने दूसरी योजना तैयार की. गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए सल्फास की गोलियों का प्रयोग होता है. अकसर यह सुनने में आता है कि लोग आत्महत्या के लिए इन गोलियों का सेवन करते हैं. उन्होंने सोचा कि क्यों न ये गोलियां किसी तरह वीरपाल को खिला दी जाएं.

यह तरीका दोनों को अच्छा लगा. फिर एक दिन सल्फास की गोलियों का पैकेट अंशु ने सुनीता को ला कर दे दिया. दोनों ने तय किया कि जब भी शराब के नशे में वीरपाल आएगा, खाने में मिला कर सल्फास की गोलियां उसे दे दी जाएंगी. इस से पहले कि योजना को अंजाम दिया जाता, सल्फास की गोलियों का पैकेट बच्चों के हाथ लग गया. बच्चे समझे कि पैकेट पापा लाए हैं. वीरपाल के सामने ले जा कर बच्चे पूछने लगे, ”पापा, ये गोलियां काहे की हैं?’’

वीरपाल गोलियों का पैकेट देख कर सन्न रह गया. वीरपाल ने पैकेट उलटपलट कर देखा तो उसे पता चला कि यह तो गेहूं को सुरक्षित रखने वाली सल्फास की गोलियां हैं.

गुस्से से आगबबूला होते हुए वीरपाल ने सुनीता से पूछा, ”सल्फास का पैकेट कौन लाया है?’’

सुनीता ने झूठ बोलते हुए कहा, ”गेहूं में घुन लगने लगे थे. इसलिए मैं ने ही यह पैकेट मंगाया है.’’

वीरपाल की हत्या करने का यह प्लान भी फेल हो गया. बात आईगई हो गई. कुछ समय बाद धान की फसल तैयार होने लगी. उस की रखवाली के लिए वीरपाल अकसर खेत पर जाया करता था. ग्रामीण क्षेत्र में कई तरह के जंगली जानवर फसलों को क्षति पहुंचाते हैं. उन से फसल को बचाने के लिए रात को भी अनेक किसान खेतों पर डेरा डाले रहते हैं.

वीरपाल भी धान की फसल की रखवाली के लिए खेत पर जाता था. नींद आने पर वह वहीं सो जाया करता था. शातिर दिमाग अंशु ने सुनीता से कहा, ”अब मौका आ गया है, वीरपाल को ठिकाने लगाया जा सकता है. जिस वक्त वीरपाल रात को खेत पर सोया हो, तभी उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया जाएगा.’’ सुनीता को योजना सही लगी और वह राजी हो गई. उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में थाना हयात नगर क्षेत्र में एक गांव स्थित है सहजना. इस गांव में दलवीर सिंह का परिवार निवास करता है. दलवीर सिंह के 5 बेटे और 5 बेटियां थीं. चौथे नंबर की बेटी सुनीता थी.

सुनीता का विवाह साल 2008 में जनपद मुरादाबाद के थाना बिलारी क्षेत्र के गांव अलेहदादपुर देवा नगला निवासी वीरपाल था. वीरपाल खेतीकिसानी के साथसाथ मजदूरी भी करता था. कभीकभी हरिद्वार में स्थित फैक्ट्री में मजदूरी करने भी चला जाता था. वीरपाल का एक बड़ा भाई है कुंवरपाल. वीरपाल की मां ज्ञानवती है, जो एक गृहिणी हैं. वीरपाल और सुनीता का वैवाहिक जीवन ठीकठाक गुजर रहा था. इस दौरान उन के 5 बच्चे हुए, जिन में 4 बेटियां और एक बेटा था.

5 बच्चों की मां होने के बावजूद सुनीता के हंसीमजाक में एक बेकाबू आग छिपी थी. उस के चेहरे पर जवानी की नैचुरल चमक थी. गालों की मुलायम लकीरों में मासूमियत और आत्मविश्वास दोनों एक साथ झलकते थे. उस की आंखें बड़ी साफ और गहरी थीं, मानो किसी के बोलने से पहले ही उस का मन पढ़ लेती हों. उस का शरीर किसी कठोर मेहनत से तराशा हुआ नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से सधे हुए अनुपातों वाला था. कंधे हलके चौड़े, कमर में नजाकत और चाल में लयबद्ध कोमलता, जिसे देख कर कोई भी तुरंत समझ जाए कि यह महिला तन से ही नहीं, मन से भी मजबूत है.

वह मध्यम कद की थी. उस का रंग गेहुंआ और चेहरा गोल था. उस की आंखें बड़ी और ध्यान खींचने वाली थीं, जिन में आत्मविश्वास का भाव दिखता था. बाल पूरी तरह से सिर को ढकने वाले दुपट्टे के नीचे छिपे रहते थे, जो पारंपरिकता और शालीनता दर्शाते थे. उस की नाक में एक छोटा नथ उस की पहचान को और उभारता था. होंठ थोड़े मोटे जरूर थे, लेकिन उन पर हलकी मुसकान दिखाई देती, जो उस में छिपी ममता और दृढ़ इच्छाशक्ति की झलक देती थी. उस की आंखों की चमक देखने वालों को भटकाने वाली पहेली सी लगती थी.

गांव की गलियों में जब भी सुनीता का नाम लिया जाता, लोग धीरे से मुसकरा देते. कोई जलन से, कोई तजुर्बे से. 5 बच्चों की मां होते हुए भी उस में कुछ ऐसा था, जो जवान दिलों को बेचैन कर देता था. उस की चाल, उस की बातों की मिठास और उस की आंखों में छिपी कामुक शरारत की वजह से 35 वर्षीय सुनीता गांव की अन्य महिलाओं से अलग पहचानी जाती थी. सब जानते थे कि वह साधारण महिला नहीं.

गांव में कुंवरपाल का परिवार भी निवास करता था. कुंवरपाल अलेहदादपुर गांव का दामाद था. करीब 2 दशक पहले इसी गांव में घरजमाई बन कर आया था. फिर गांव में ही बस गया था. उस के 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. एक बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी है. कुंवरपाल का बेटा आशीष कुमार उर्फ अंशु करीब 22 साल का एक कुंवारा नौजवान था. अंशु अपनी जवानी के चरम पर पहुंच चुका था. 22 साल की उम्र उस के चेहरे पर एक अलग ही चमक ले कर आई थी. वह चमक जो मेहनत, आत्मविश्वास और युवापन के मिलन से पैदा होती है.

उस के नैननक्श साधारण होते हुए भी बेहद आकर्षक थे. माथे पर गिरती हलकी बिखरी लटें और आंखों में मौजूद सहज चमक उसे अलग पहचान देती थी. उस का शरीर एकदम सधा हुआ था. न बहुत भारी, न बहुत पतला. छाती में कसावट और बांहों में हलकी उभरी नसें, उस के मेहनत भरे जीवन की गवाही देती थीं. चलते समय उस का आत्मविश्वास साफ दिखता था. कदमों में सधी हुई लय और शख्सियत में एक ऐसी गरिमा जो बिना बोले ही लोगों को उस की तरफ देखने पर मजबूर कर देती थी. अंशु की मुसकान उस के पूरे चेहरे को रोशन कर देती थी. उस की जवानी में एक तरह की साफगोई थी, वही मासूम पर दृढ़ ऊर्जा जो केवल 21-22 की उम्र में ही दिखाई देती है.

कुंवरपाल के साले का नाम भूप सिंह था. वह इस समय गांव के मौजूदा प्रधान है. असरदार व्यक्ति है. गांव में उस का काफी मानसम्मान भी है. अंशु का दिल किसी रिश्ते की बंदिश नहीं मानता था.

अंशु अपनी नानी के घर रहता था. उस की पैदाइश भी यहीं पर हुई थी, जहां उस की जवानी बेलगाम घोड़े सी दौड़ रही थी. उस के अय्याशी के किस्से भी कम न थे. मामला पकड़े जाने पर पंचायतें भी हुईं. उस के मामा को मामला लेदे कर निपटाना पड़ा. कई बार उस के मामा को काफी रकम मुआवजे के रूप में गांव की गरीब लड़कियों को देनी पड़ी. अकसर लड़की वाले बदनामी के डर से प्रधान के रुतबे और प्रभाव के कारण कानूनी काररवाई के लिए आगे नहीं बढ़े. इस का फायदा अंशु उठाता रहा और कई घटनाएं गांव में अंजाम दे दीं.

जब सुनीता और अंशु की राहें टकराईं, तो जैसे दो चिंगारियां एक ही पल में भड़क उठीं. फिर रिश्ता रिश्ता नहीं, एक अंधी ललक बन गया, जहां उम्र, रिश्तेदारी और समाज सब पीछे छूट गया. कहानी यहीं से मोड़ लेती है. प्यार और पागलपन के इस खेल में वह सुनीता अपने पति से तंग आ चुकी थी, और अंशु उस की चाहत में अंधा हो गया था. शाम का वक्त था. खेतों से किसानों की वापसी हो रही थी, ढलती धूप में चलती बकरियों की आवाजें, ऐसा लग रहा था कि उन्हें भी घर वापस ले जाया जा रहा है.

बीच में एक महिला जो अपने आंगन में पानी भर रही थी. उस के बच्चे पास ही खेल रहे थे, गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था, लेकिन इस शांति के पीछे एक तूफान पनप रहा था. अंशु गांव का मनचला, दुबलापतला मगर तेज नजर वाला जवान था. सब जानते थे कि अंशु की नजरें मासूम नहीं हैं और सुनीता भी यह बात समझती थी, मगर न जाने क्यों, उसे अब फर्क नहीं पड़ता था.

अंशु ने पहली बार बिना झिझक के उस से कहा, ”नानी, इतना पानी रोज क्यों भरती हो? कोई समंदर बनाना है क्या?’’

सुनीता मुसकराई, ”तेरे काम का समंदर नहीं है, डूब जाएगा तू इस में.’’

अंशु हंसा, ”डूबने का तो मन है ही, बस कोई मौका डूबने का मिल जाए.’’

उन के बीच का यह मजाक गांव के माहौल से ज्यादा गर्म था. दोनों जानते थे कि वो किस ओर बढ़ रहे हैं, मगर किसी को रोकने की हिम्मत न थी. धीरेधीरे ये मुलाकातें बढ़ीं. कभी खेत के किनारे, कभी सूनी पगडंडी पर तो कभी मकानों के पीछे के बाग में, जहां हवस और हंसी एक साथ घुलमिल जाती.

सुनीता अब अपने पति वीरपाल से ऊब चुकी थी. बच्चों और घर के झगड़ों ने उन के रिश्ते की जान निकाल दी थी. एक रात वीरपाल ने उसे रोकते हुए कहा, ”तू अब पहले जैसी नहीं रही, सुनीता.’’

तो उस ने ठंडे लहजे में जवाब दिया, ”हां, और तू भी मर्द जैसा नहीं रहा.’’

वीरपाल ने गुस्से में थप्पड़ मारा, मगर उस थप्पड़ की गूंज ने सुनीता के भीतर का सब कुछ तोड़ दिया. उसी रात वो चुपके से घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर निकली. अंशु उस का इंतजार कर रहा था.

”अंशु, मुझ से अब और नहीं सहा जाता,’’ सुनीता ने उस से कहा.

अंशु ने उस की आंखों में झांकते हुए फुसफुसाया, ”तो फिर खत्म कर देते हैं उसे, हमेशा के लिए.’’

सुनीता चौंकती हुई बोली, ”क्या मतलब?’’

”मतलब साफ है. तुम्हारे रास्ते में बस वो वीरपाल ही तो दीवार है. गिरा देंगे, उस दीवार को.’’

सुनीता चुप रही, मगर उस के दिल में डर और चाहत दोनों एक साथ पनपने लगे. बड़ी हिम्मत करने के बाद सुनीता सीधेसीधे प्रेमी को चुनौती देती हुई बोली, ”अगर तुम को मेरे साथ रहना है तो कुछ तो करना ही होगा, मगर उस के बाद क्या तुम मुझे पत्नी के रूप में स्वीकार करोगे?’’

”सुनीता, मैं ने तुम से प्यार किया है. पत्नी मान भी लिया है. अब तुम बताओ उस के बाद तुम्हारी क्या भूमिका होगी?’’

”मैं जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगी, तुम्हारा खयाल रखूंगी.’’

”अगर तुम मुझे पाना चाहते हो तो अब अपने नाना का काम तमाम कर ही दो.’’

अंशु का मामा प्रधान भूप सिंह जाति से जाटव है. एक ही बिरादरी के होने के नाते से प्रधान भूप सिंह, वीरपाल को गांव के रिश्ते में चाचा कहता था. इसी रिश्ते से अंशु वीरपाल को नाना और सुनीता को नानी कह कर संबोधित करता था. दोनों के संबंध जगजाहिर हो चुके थे. फिर भी गांव के लोगों को यकीन नहीं होता था कि दोनों की उम्र में इतना अंतर होने के बाद इन के बीच अवैध संबंध होंगे. वीरपाल 12 अक्तूबर, 2025 की रात को अपने धान के खेत पर सोने के लिए गए थे. अगले दिन जब गांव के लोग खेतों पर सुबहसुबह अपने काम के लिए निकले, तब उन्होंने देखा कि वीरपाल खेत में अपनी चारपाई पर लेटा हुआ था.

वीरपाल अकसर सुबहसुबह 5 बजे उठ कर घर आ जाता था. फ्रैश हो कर फिर से काम के लिए खेत पर आ जाता था, लेकिन उस दिन वह इतनी देर तक खेत में क्यों सो रहा है, लोग समझ नहीं पाए. पास जा कर लोगों ने देखा तो वह एकदम बेसुध सा लेटा हुआ था. उन्हें वीरपाल के शरीर पर कोई हरकत नहीं दिखी.  इस दौरान हड़कंप मच गया तो यह बात गांव तक पहुंची. काफी संख्या में ग्रामीण लोग उस के खेत पर पहुंच गए. गांव के एक डौक्टर को भी बुला लिया. उस ने नब्ज टटोलते ही वीरपाल को मृत घोषित कर दिया.

वीरपाल की पत्नी सुनीता भी खूब रोते हुए दहाड़े मारते हुए खेत पर पहुंच गई. पूरा चेहरा ढके हुए खूब रोए जा रही. उस को रोता देख कर लोगों का दिल पसीज गया कि अब इस बेचारी के बच्चों का क्या होगा? यह बात 13 अक्तूबर, 2025 की है. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को खबर देने की बात कही तो सुनीता कहने लगी कि मैं अपने पति की मिट्टी को खराब नहीं होने दूंगी. पुलिस हमारे पति का शरीर ले कर जाएगी. पोस्टमार्टम को भेजेगी. वहां चीरफाड़ होगी. पूरे शरीर को बरबाद कर देगी.

मैं अपने पति के साथ यह नहीं होने दूंगी. लेकिन कोई व्यक्ति पहले ही कोतवाली बिलारी में फोन कर के यह सूचना पुलिस को दे चुका था. सूचना पाते ही कोतवाल उदय प्रताप मलिक मय फोर्स के घटना स्तर पर पहुंच गए. शुरुआती जांच में मामला हत्या का प्रतीत हुआ, क्योंकि मृतक के गले पर दबाने के निशान थे. थोड़ीबहुत हलकीफुलकी छीनाझपटी जैसे निशान भी थे. इस से प्रतीत हो रहा था कि मृतक ने हत्यारों से थोड़ा बहुत संघर्ष भी किया है. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. घटनास्थल के आसपास का बड़ी बारीकी से मुआयना किया गया. आवश्यक सबूत इकट्ठे किए गए. मौके की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय मुरादाबाद भेज दिया.

कोतवाल उदय प्रताप मलिक ने मामले की जानकारी सीओ अशोक कुमार और एसपी (ग्रामीण) कुंवर आकाश सिंह को दे दी. अधिकारियों ने जांच के लिए पुलिस की दो टीमें गठित कर दीं. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी. गांव के लोगों ने पोस्टमार्टम से लाश आने के बाद वीरपाल का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस अपनी जांच कर ही रही थी. उसी दिन सुनने में आया कि वीरपाल की पत्नी सुनीता ग्रामीणों से लाश का पोस्टमार्टम कराने को मना कर रही थी. उस का कहना था कि ज्यादा शराब पी लेने से इस की स्वाभाविक मौत हुई होगी.

यह बात सुन कर पुलिस को वीरपाल की हत्या करने का शक उस की पत्नी सुनीता पर हो गया. सुनीता ने अपने पति की हत्या क्यों कराई? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए पुलिस ने जब छानबीन की तब पता चला कि गांव का ही एक युवक अंशु है, जिस से सुनीता का प्रेम प्रसंग चल रहा है. इतनी जानकारी मिलने पर अंशु भी पुलिस के शक के दायरे में आ गया. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया. इस के बाद उन से जब पूछताछ की गई तो उन्होंने पहले तो बातें गोलमोल करने की कोशिश की, लेकिन जब सख्ती की गई तब दोनों ने ही सच उगल दिया.

दोनों की उम्र में 13 से 14 साल का अंतर था. लोगों को जब इस बात का पता चला कि वास्तव में इन दोनों के बीच में प्रेम प्रसंग चल रहा था तो कोई इस बात को मानने को तैयार नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है, लेकिन जब सच सामने आया तो सब हैरान रह गए. इस दौरान सुनीता ने अपने आप को बचाने के लिए खूब प्लानिंग की थी. पहली प्लानिंग तो उस ने पुलिस को बुलाने से मना किया. लेकिन जब उसे लगा कि पुलिस आ गई है तो पोस्टमार्टम न हो पाए, इस के लिए उस ने पूरी कोशिश की.

पुलिस ने लाश को जब पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. तब सुनीता ने भागने का भी प्लान बना रखा था. जब उस के रिश्तेदार आए. दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक व झगड़ा चल रहा था तो एक रिश्तेदार सुनीता को अपनी बाइक पर बिठा कर वहां से निकलने वाला था, लेकिन जैसे ही सुनीता बाइक पर बैठी, गांव के लोगों ने देख लिया और उसे दौड़ कर पकड़ लिया. उस के बाद ग्रामीणों ने कहा कि जब तक पुलिस नहीं आएगी, तब तक कोई नहीं जाएगा. पुलिस को आने दो. उस के बाद जिस को जहां जाना हो, वो चला जाए.

पुलिस ने सुनीता और उस के प्रेमी आशीष कुमार उर्फ अंशु से पूछताछ की तो वीरपाल की हत्या के पीछे की ऐसी प्रेम कहानी सामने आई, जिस ने सभी को चौंका कर रख दिया. सुनीता गांव के रिश्ते में अंशु की नानी लगती थी. दोनों के खेत आसपास ही थे, इसलिए उन के बीच बातचीत होना आम बात थी. उसी दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया. और जल्द ही उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. सुनीता अंशु के प्यार की कायल हो गई थी. उस के सामने अपना पति वीरपाल फीका लगने लगा था. इसलिए जब भी उन का शारीरिक संबंध बनाने का मन होता था, तो सुनीता वीरपाल को शराब पिला कर धान की रखवाली करने के लिए रात को खेत पर भेज देती थी.

फिर अंशु को फोन कर के रात को अपने घर पर बुला लेती थी. फिर रात भर दोनों मौजमस्ती करते थे. इस तरह सुनीता अविवाहित अंशु के प्यार में डूब चुकी थी, लेकिन यह खेल ज्यादा दिनों तक छिप न सका. एक दिन इसी बीच रात में एक बार वीरपाल धान के खेत से घर वापस आया तो उस ने दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया. यह देख कर वीरपाल का खून खौल गया. अंशु तो फटाफट वहां से भाग गया, लेकिन सुनीता कहां जाती. तब वीरपाल ने उस दिन सुनीता की खूब पिटाई की. सुनीता ने उसी दिन सोच लिया था कि वीरपाल हमारे प्यार के बीच में रोड़ा बन रहा है. इसे तो निपटवाना ही पड़ेगा.

सुनीता ने उस समय तो पति से हाथ जोड़ कर माफी मांग ली थी. वीरपाल ने यह बात किसी को बदनामी की वजह से नहीं बताई. 2-4 दिन बाद सुनीता और अंशु का चोरीछिपे मिलनाजुलना जारी रहा. एक दिन सुनीता ने अशु को बताया कि वीरपाल हम दोनों के प्यार में रोड़ा बन रहा है. इसे ठिकाने लगाना है. इतना ही नहीं, उस ने धमकी भी दी कि अगर तूने इसे ठिकाने नहीं लगाया तो मैं जहर खा कर अपनी जान दे दूंगी, लेकिन तेरे बिना नहीं जी सकती.

यह सुन कर अंशु के जवान खून में उबाल आ गया. उसे लगा कि उस की प्रेमिका उस के लिए जान देने के लिए तैयार है. उस की जुदाई बरदाश्त नहीं कर पा रही. लिहाजा अंशु ने कहा, ”तुम ऐसा मत करो. हम वीरपाल को ठिकाने लगा देंगे.’’

12 अक्तूबर को सुबह करीब 8 बजे सुनीता अपने खेत पर धान झाड़ रही थी. वहां पर उस की फेमिली के कुछ लोग भी मौजूद थे. उस समय अंशु भी अपने खेत पर था. सुनीता ने अंशु को अपने पास बुलाया. उस के साथ वह बात कर रही थी, तभी वीरपाल वहां पर आ गया. उस ने दोनों को बात करते देखा तो वीरपाल दोनों पर आगबबूला हो गया गालीगलौज करने लगा. अंशु उसी समय वहां से अपने घर चला गया. उस के कुछ देर बात वीरपाल भी चला गया तो सुनीता ने अंशु को फिर से बुला लिया.

फिर दोनों ने मिल कर वीरपाल की हत्या करने की योजना बनाई. वारदात की अन्य योजना पर सहमति नहीं बनी तो सुनीता ने अंशु को बताया कि वीरपाल रात में धान की रखवाली करने के लिए खेत पर जा कर सोता है. वहीं पर उस की हत्या करना आसान रहेगा. अंशु उस की इस बात पर राजी हो गया. 13 अक्तूबर को रात में करीब साढ़े 12 बजे वीरपाल खेत पर सोने गया. तभी सुनीता ने यह जानकारी प्रेमी अंशु को दे दी.

इस के बाद जब अंशु रात में वीरपाल के खेत पर पहुंचा तो उस समय वीरपाल शराब के नशे में चारपाई पर सो रहा था. अंशु ने उस का गला दबाना शुरू कर दिया. तभी वीरपाल का एक हाथ अचानक अंशु के मुंह पर लगा तो वह घबरा गया. अंशु को लगा कि अब यदि वह जिंदा बच गया तो मामला बहुत गड़बड़ हो जाएगा. वीरपाल ने उठने की कोशिश की, लेकिन नशा अधिक होने के कारण वह उठ नहीं सका. अंशु ने फिर से वीरपाल को अपने काबू में किया और गला दबाने लगा. उस के गले को वह तब तक दबाए रखा, जब तक कि वीरपाल की सांसों की डोर हमेशा के लिए टूट नहीं गई.

जब वीरपाल निढाल हो गया, उस का छटपटाना बंद हो गया, उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई, तब कहीं अंशु को तसल्ली हुई. फिर भी अंशु ने उस की नाक पर हाथ रख कर एक बार चैककिया कि वह मर चुका है कि नहीं.

जब उसे विश्वास हो गया कि अब इस का काम तमाम हो गया है तो अंशु वहां से सीधे अपनी प्रेमिका सुनीता के घर पहुंचा. उस ने प्रेमिका को खुशखबरी देते हुए कहा कि तुम्हारे पति का मैं ने काम तमाम कर दिया है. अब वो तुम्हें कभी परेशान नहीं करेगा. इस मर्डर की खुशी में दोनों ने रात भर मौजमस्ती की. इस के बाद उन्होंने पुलिस से बचने का प्लान बनाया. फिर रात में ही अंशू अपने घर चला गया. दूसरे दिन अंशु भीड़ के साथ घटना स्थल पर पहुंचा और परिवार के लोगों के साथ रहा. पोस्टमार्टम से ले कर अंतिम संस्कार तक हर कार्यक्रम में वह वीरपाल के फेमिली वालों के साथ ही रहा, ताकि किसी को उस पर कोई शक न हो, लेकिन इस के बावजूद वह पुलिस के शक के दायरे में आ गया.

मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या कर देना आया. जिस के बाद मृतक के बड़े भाई कुंवरपाल की तहरीर के आधार पर धारा 103 (1)/61(2) (क) बीएनएस के तहत आशीष कुमार उर्फ अंशु और सुनीता को नामजद किया गया. 24 घंटे के भीतर पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझा दी. पूछताछ के बाद सुनीता और उस के प्रेमी आशीष कुमार उर्फ अंशु को जेल भेज दिया गया. बच्चों की परवरिश मृतक के बड़े भाई कुंवरपाल कर रहे हैं. कथा लिखे जाने तक अंशु और उस की प्रेमिका दोनों ही जेल में थे. UP News

 

 

Family Crime: प्यार में छली गई कांस्टेबल

Family Crime: पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की एक्सीडेंट में मृत्यु के बाद ओडिशा के कांस्टेबल दीपक राउत (39 वर्ष) ने बीमा कंपनी से डेढ़ करोड़ रुपए का क्लेम लिया. इस के बाद उस ने कांस्टेबल शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को प्रेम जाल में फांस कर उस से कोर्टमैरिज कर ली. फिर एक दिन उस ने शुभमित्रा को भी ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने जब जांच कर गड़े मुर्दे खोदे तो ऐसी सच्चाई जगजाहिर हुई कि…

महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपने दोस्त कांस्टेबल दीपक राउत के साथ गुपचुप तरीके से की गई कोर्ट मैरिज को जल्द से जल्द सार्वजनिक करना चाहती थी, जबकि 39 वर्षीय दीपक राउत अब शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को अपनी जिंदगी से हमेशाहमेशा के लिए निकालने का प्लान बना चुका था.

अपने इसी प्लान को आखिरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उस ने 6 सितंबर, 2025 की तारीख को चुना. शुभमित्रा साहू की ड्यूटी डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय में थी. शाम 7 बजे उस की ड्यूटी खत्म हुई तो दीपक राउत ने फोन कर के उसे एक अनजान जगह मिलने के लिए बुलाया. जब शुभमित्रा 7 बज कर 10 मिनट पर उस की बताई गई जगह पर पहुंची तो दीपक राउत अपनी होंडा सिटी कार से उस का इंतजार कर रहा था.

दीपक उसे कार में बिठा कर भीड़भाड़ से दूर एक सुनसान जगह पर ले गया और फिर जंगल के सुनसान इलाके में उस ने कार रोक दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक से अपने उधार के 20 लाख रुपयों की मांग की, क्योंकि वह अपनी शादी को सार्वजनिक कर एक ग्रांड पार्टी देना चाहती थी. जबकि दीपक शुभमित्रा को एक पाई तक देने के मूड में नहीं था. वह तो केवल कोर्ट मैरिज की आड़ में उस के शरीर और भावनाओं से खेल रहा था.

पैसे मांगने पर दोनों के बीच विवाद हो गया. कांस्टेबल दीपक ने उसे गालियां देनी शुरू कर दीं तो शुभमित्रा भी जवाब में उसे गालियां देने लगी. इस पर दीपक ने उस के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक को जोर से एक लात मार दी. गुस्से में आ कर दीपक ने शुभमित्रा का गला पकड़ लिया और तब तक दबाता रहा, जब तक वह बेसुध हो कर नीचे नहीं गिर गई. कुछ ही पलों में शुभमित्रा की मौत हो गई.

शुभमित्रा की हत्या करने के बाद दीपक ने उस का शव अपनी कार की डिक्की में रखा. पूरे एक दिन तक वह शुभमित्रा का शव अपनी कार की डिक्की में रख कर सामान्य तरीके से ही घूमता रहा. यहां तक कि वह अपनी ड्यूटी करने थाने भी गया. इस के बाद उस ने अपने चचेरे भाई को पैसे देने का लालच दे कर उसे और उस के ड्राइवर को जेसीबी ले कर शव को 170 किलोमीटर दूर क्योंझर जिले के घाटगांव क्षेत्र के पास जंगल में भेज दिया. वहां उन्होंने सुनसान जगह पर जेसीबी से गहरा गड्ढा खोद कर शुभमित्रा साहू को दफना दिया.

25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उस समय कोरडा टाउन, पिचकुली, सूर्यनगर, भुवनेश्वर में किराए के मकान में रहती थी. उस के औफिस से उस के कमरे का रास्ता बमुश्किल आधे घंटे का था. शुभमित्रा की मम्मी सुकीर्ति साहू उस के साथ में रहती थीं. जब शाम को 8 बजे तक भी शुभमित्रा साहू अपने घर नहीं पहुंची तो उस की मम्मी एकदम से घबरा गईं. उन्होंने तुरंत अपने पति और बेटी को इस बारे में सूचना दी और अपने पड़ोस की एक महिला के साथ शुभमित्रा का पता लगाने उस के औफिस में चली गईं.

औफिस से पता चला कि शुभमित्रा साहू तो रोजाना की तरह आज शाम को 7 बजे अपनी ड्यूटी खत्म कर के अपने घर की ओर निकल गई थी. अब तक पुलिस महकमे में भी इस खबर को सुन कर हड़बड़ी मच गई थी. शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू ने तुरंत कैपिटल थाने में अपनी बेटी शुभमित्रा साहू के लापता होने की सूचना दर्ज करा दी.

पुलिस अब तुरंत हरकत में आ गई थी. दूसरे दिन लापता शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू और पापा धुरयदान साहू ने पुलिस कमिश्नर (भुवनेश्वर) सुरेश देव दत्ता सिंह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बेटी को तलाशने में त्वरित जांच की मांग की. पुलिस कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को लापता ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की खोज के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए.

पुलिस टीमें लगातार शुभमित्रा साहू की तलाश में जुटी हुई थीं. इस के लिए पुलिस ने अपनी कई टीमें बना रखी थीं, लेकिन हफ्ता गुजरने के बाद भी पुलिस के पास कोई भी सुराग हाथ नहीं आ पाया था. पुलिस टीम को शुभमित्रा के किराए के घर पर उस का खुद का मोबाइल भी सुरक्षित हालत में बरामद हुआ था.

अब पुलिस टीम को यह बात साफ नहीं हो पा रही थी कि लापता महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपना मोबाइल अपने ही घर में जल्दबाजी में भूल गई थी या जानबूझ कर छोड़ गई थी. एक महिला कांस्टेबल रहस्यमय तरीके से ड्यूटी के स्थान से ले कर अपने किराए के मकान के बीच भला कैसे गायब हो सकती थी. यह प्रश्न अब ओडिशा पुलिस के लिए खुद एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था.

अपनी इसी प्रतिष्ठा को बरकरार रखने के लिए आखिरकार डीसीपी भुवनेश्वर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर शुभमित्रा की फोटो और उस की पूरी डिटेल्स को शेयर करते हुए एक पोस्ट में लिखना पड़ा था कि क्या आप ने हमारी महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू, जिस की उम्र 25 वर्ष और लंबाई लगभग 5 फुट है, जिस ने ड्यूटी से अपने घर को निकलते समय बैंगनी रंग का टौप और सफेद सलवार पहनी हुई थी, उसे कहीं पर देखा है?

यदि किसी ने इन महिला कांस्टेबल को कहीं पर भी आतेजाते या टहलते हुए कहीं पर देखा है तो कृपया हमें हमारे मोबाइल नंबर 7008264419 और 8280338022 पर सूचित करें. सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी. इस के अतिरिक्त भुवनेश्वर पुलिस ने लापता शुभमित्रा की सूचना देने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी कर दी थी.

भुवनेश्वर पुलिस पूरे जोरशोर से शुभमित्रा की तलाश कर रही थी. इस के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरे और शुभमित्रा के घर से बरामद उस के मोबाइल फोन को भी अनलौक करने में जुटी जुटी हुई थी, लेकिन पुलिस को अभी तक कोई भी सूत्र हाथ नहीं लग पाया था. शुभमित्रा अपने औफिस से शाम को 7 बजे के बाद अपने घर आने के रास्ते में अचानक कहां लापता हो गई थी, यह प्रश्न बारबार पुलिस को परेशान कर रहा था.

जांच के दौरान पुलिस के सामने यह बात साफ हो चुकी थी कि शुभमित्रा के गायब होने में उस के किसी खास परिचित, प्रेमी आदि का हाथ हो सकता है, इसलिए अब पुलिस इस केस की जांच ‘लव एंगल’ से भी करने लगी. आखिरकार, भुवनेश्वर पुलिस के कैपिटल पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों को अपनी विस्तृत जांच करने के दौरान यह पता चला कि भुवनेश्वर में शुभमित्रा साहू के साथ आखिरी बार पुलिस कमिश्नरेट में तैनात पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को देखा गया था.

पुलिस टीम ने तत्काल दीपक राउत को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. इसी दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि पिछले साल दीपक और शुभमित्रा ने गुपचुप कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिस के बारे में दोनों के फेमिली वालों को पता तक नहीं था. अब पुलिस का शक दीपक पर पूरी तरह से बढ़ गया था. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर संदिग्ध दीपक राउत शुभमित्रा के गायब होने के बाद दुखी होने का दिखावा करता रहा. यहां तक कि वह शुरू में परिवार और पुलिस के साथ उसे ढूंढने में मदद करने का झूठा दिखावा करता रहा.

पुलिस पूछताछ में दीपक राउत ने सामान्य स्थिति का दिखावा करते हुए यह बात स्वीकार की कि उस के और शुभमित्रा के बीच में प्रेम प्रसंग था और उस ने शुभमित्रा के साथ 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज भी छिप कर कर ली थी. दीपक राउत ने पुलिस पूछताछ में आगे बताया कि वह 6 सितंबर, 2025 को जब शुभमित्रा एकाएक लापता हो गई थी तो वह अपने एक रिश्तेदार से मिलने क्योंझर गया था और उस ने अपनी प्रेयसी और पत्नी शुभमित्रा साहू की सकुशल व सुरक्षित वापसी के लिए वहां के तारिणी मंदिर में प्रार्थना भी की थी.

इस बात की पुष्टि करते हुए उस ने पुलिस टीम को अपने मोबाइल में खींची गई तसवीरें और पूजापाठ करते हुए ली गई सेल्फी भी दिखाई. इस के साथ ही उस ने सोशल मीडिया पर किया गया अपना पोस्ट भी दिखाया, जिस में उस ने शुभमित्रा के लापता होने की जानकारी पोस्ट की थी और लोगों से अपील भी की थी कि उस के बारे में किसी भी किस्म की जानकारी होने पर तुरंत पुलिस को दिए गए मोबाइल फोन पर सूचना दें.

शुभमित्रा साहू की जांच में एक अहम मोड़ तब आया, जब पुलिस ने लापता शुभमित्रा का फोन अनलौक करने के बाद उस के वाट्सऐप चैट्स को एक्सेस किया. इस में इस बात का पता चला कि शुभमित्रा ने 10 लाख रुपए कोर्ट मैरिज से पहले दीपक राउत को उधार दिए थे. उस के बाद शुभमित्रा दीपक से अपने 10 लाख रुपए लौटाने के साथसाथ 10 लाख रुपए अतिरिक्त देने की डिमांड कर रही थी, ताकि वह धूमधाम के साथ अपनी शादी की पार्टी अपने फेमिली वालों व परिचितों के बीच कर सके.

लेकिन दीपक इस विवाह को सार्वजनिक किए जाने के खिलाफ था. वह शुभमित्रा से बारबार यही कहता था कि वह अभी तक अपनी पहली पत्नी अपर्णा की मृत्यु से ठीक तरह से उबर नहीं पाया है. इस के अलावा दीपक बारबार इस बात का उलाहना भी शुभमित्रा को देता रहता था कि उस ने शुभमित्रा का एक करोड़ रुपए का बीमा करा रखा है, जिस की किश्त देना उसे भारी पड़ता जा रहा है, इसलिए दीपक उस के 10 लाख रुपए लौटाने के एकदम खिलाफ हो गया था.

इन सभी बातों से शुभमित्रा काफी तनाव में आ गई थी, जिस के कारण उस के वाट्सऐप मैसेज में पुरी, मथुरा और वाराणसी जाने की इच्छा जताई थी. शुरू में दीपक राउत ने पुलिस को यह कह कर गुमराह करने की कोशिश की थी कि शुभमित्रा की अपने मम्मीपापा के साथ अनबन रहती थी, जिस के कारण वह अपना घर छोड़ कर चली गई होगी. उस के बाद पुलिस टीम ने पुरी, वाराणसी और मथुरा में जा कर भी शुभमित्रा की तलाश की, लेकिन पुलिस टीम को शुभमित्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया था.

फिर पुलिस ने आरोपी दीपक राउत का पौलीग्राफ टेस्ट कराया. पौलीग्राफ टेस्ट के दौरान दीपक राउत के जवाब भ्रामक पाए गए. उस के बाद पुलिस ने जब उस के साथ सख्ती की तो फिर उस ने शुभमित्रा साहू की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. शुभमित्रा साहू और दीपक राउत की पहली मुलाकात किसी फिल्मी सीन की तरह घटित हुई थी. उस दिन शुभमित्रा को औफिस में ज्यादा काम हो गया था, जिस की वजह से वह शाम को 7 बजे अपने घर लौटने के बजाय रात लगभग 9 बजे अपने औफिस से स्कूटी से घर के लिए निकली थी.

जैसे ही शुभमित्रा एक अंधेरी सी सड़क से गुजरी तो उसे एक लड़की की चीख सुनाई पड़ी. चीख सुनते ही शुभमित्रा ने अपनी स्कूटी तत्काल उस तरफ मोड़ दी, जिधर से चीखने की आवाज आई थी. तभी उस की नजर एक अंधेरे कोने पर पड़ी तो उस ने देखा कि एक युवती को 4 युवकों ने चारों ओर से घेर रखा था और वे सब उस युवती को पकड़ कर उस के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे. शुभमित्रा खुद एक पुलिस वाली थी, इसलिए उस ने अपनी स्कूटी साइड में खड़ी की और तुरंत उस युवती को बचाने चली गई. पहले तो उन चारों युवकों ने शुभमित्रा को धमकाया, लेकिन जब शुभमित्रा ने उन में से 2 युवकों के चेहरों पर थप्पड़ जड़े तो उन के होश ठिकाने आ गए.

अब चारों युवक उस युवती को छोड़ कर शुभमित्रा से मारपीट करने लगे. पहले तो कुछ देर तक शुभमित्रा चारों से मुकाबला करती रही, लेकिन एक युवती अकेली उन चारों का मुकाबला भला कैसे कर सकती थी. इसलिए धीरेधीरे वे चारों युवक उस पर अब भारी पड़ते जा रहे थे. तभी उन में से एक युवक बोल पड़ा, ”इस के कारण हमारा शिकार देखो भाग गया. इतने दिन से हम उस के पीछे पड़े थे, उस की एकएक गतिविधि को देख रहे थे, आज हमें मौका मिला तो यह समाज सुधारक न जाने कहां से बीच में टपक पड़ी. चलो, कोई बात नहीं, अब इसी से मजे ले लेते हैं.’’

यह सुन कर सुमित्रा की रूह भी एकबारगी कांप सी उठी थी. वह अब सोचने लगी थी कि उस ने तो एक असहाय युवती को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन अब तो यहां पर दांव उलटा ही पड़ गया. वह अपनी ओर से उन चारों दरिंदों से फिर भी भिड़ रही थी और बीचबीच में वह मदद के लिए चीखपुकार भी रही थी. तभी उस सड़क से अपनी बाइक पर दीपक गुजर रहा था, उस ने जब अपने सामने एक युवती को अकेले 4 युवकों से मुकाबला करते देखा तो वह दंग रह गया. दीपक ने तुरंत अपनी बाइक रोकी और युवकों को ललकारने लगा. युवकों ने जब देखा कि अब मुकाबले में एक और आदमी शामिल हो गया है तो उन में से 2 युवकों ने चाकू निकाल लिए थे.

लेकिन जब दीपक कयामत बन कर उन सड़कछाप शोहदों पर एकाएक कर टूट पड़ा तो वे चारों शोहदे उस के ताइक्वांडो और जूडो कराटे का सामना चाह कर भी नहीं कर सके. दोनों चाकू वाले गुंडे तो दीपक के हाथों में पड़ गए, जिन की उस ने दिल से कुटाई की, लेकिन 2 शोहदे वहां से भागने में कामयाब हो गए. वहां पर ऐसा भी नहीं था कि अन्य लोग नहीं थे. दूर से तमाशा देखने वाले और उस घटना का वीडियो बनाने वाले भी उस भीड़ में शामिल थे, लेकिन उन लोगों ने न तो उस युवती की मदद की और न ही दीपक की सहायता करने के लिए आगे आए.

शुभमित्रा इस युवक के समय पर किए गए इस साहसिक कार्य को देख कर एकदम कायल हो गई थी. वह उस अनजान युवक को धन्यवाद देने के लिए जब उस के पास गई तो वह युवक किसी को फोन कर रहा था. उस के फोन कटते ही वहां पर पुलिस भी आ गई थी, जो उन दोनों शोहदों को पुलिस की गाड़ी में बिठा कर वहां से चली गई थी.

शुभमित्रा यह समझ चुकी थी कि यह युवक अवश्य कोई पुलिस वाला हो सकता है. जब उस ने अपनी नजरें उठा कर युवक की ओर देखा और दोनों की आंखें मिलीं तो पहला खयाल शुभमित्रा के दिल में यही आया था कि काश! ऐसा निडर पति मुझे भी मिल जाता तो पूरी जिंदगी कितनी आसानी से और बेफिक्री से गुजर जाती.

अपने मन की भावनाओं को किसी तरह शुभमित्रा ने काबू किया और उस अनजान व्यक्ति का धन्यवाद करते हुए बोली, ”सर, आज रात यदि आप यहां पर समय से नहीं आते तो ये चारों शोहदे मेरी जान अवश्य ले लेते. पता नहीं मेरी क्या हालत कर डालते. कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रह पाती मैं. आप का मैं किन शब्दों में धन्यवाद करूं, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है सर! क्या मैं जान सकती हूं कि आप किस विभाग में काम करते हैं?’’

”जी, इस में धन्यवाद वाली भला क्या बात है. एक पुलिसकर्मी होने के नाते तो यह मेरा फर्ज बनता भी है. वैसे मुझे यह लग रहा है कि मैं ने आप को कहीं देखा जरूर है. क्या मैं आप का परिचय जान सकता हूं.’’ उस युवक ने कहा.

”जी सर, मेरा नाम शुभमित्रा साहू है, मैं ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल हूं और डीसीपी (ट्रैफिक) में आजकल कंप्यूटर का काम देखती हूं. आप ने मुझे अवश्य देखा होगा, आप कहां पर हैं सर!’’ शुभमित्रा ने पूछा.

”शुभमित्राजी, मैं कमिश्नर औफिस में लेखा विभाग में पोस्टेड हूं. देखिए, आप भी हमारे डिपार्टमेंट से ही हैं, इसलिए यदि आप मुझे सर कह कर न पुकारें तो मुझे अच्छा लगेगा. मेरा नाम दीपक राउत है, आप मुझे यदि दीपक नाम से संबोधित करेंगी तो मुझे अच्छा लगेगा,’’ दीपक ने मुसकराते हुए कहा.

”वैसे आप काफी बहादुर हैं. आप ने उन चारों को ऐसी मार लगाई, जिस से मेरा तो दिल खुश हो गया दीपकजी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक भी पहली नजर में शुभमित्रा का दीवाना सा हो गया था. उस का मन कर रहा था कि वह इस शुभमित्रा जैसी हसीन युवती को जी भर कर देखता रहे और उस के साथ ढेर सारी बातें करता रहे.

तभी शुभमित्रा ने कहा, ”दीपकजी, देखिए अब यहां पर भीड़ काफी अधिक हो चुकी है. लोग तो केवल तमाशबीन बन कर वीडियो बनाते फिरते हैं. किसी ने हम दोनों का ही वीडियो बना लिया तो हम दोनों के लिए यह ठीक नहीं हो सकता. ये तमाशबीन लोग अपने आप कुछ करते नहीं हैं, लेकिन बात का बतंगड़ बनाने में हमेशा आगे रहते हैं.’’

”आप वाकई बहुत समझदार हैं, लेकिन मैं तो आप की बहादुरी और खूबसूरती का पहली नजर में ही कायल हो गया हूं. आप से दोबारा कब मुलाकात होगी? क्या आप का मोबाइल नंबर ले सकता हूं?’’ दीपक ने सीधेसीधे कह दिया था.

”दीपकजी, आप से मिल कर मुझे आज सचमुच बहुत खुशी हो रही है, आप मेरा मोबाइल नंबर नोट कर लीजिए. आप कौल कीजिए, मैं भी आप का मोबाइल नंबर सेव कर लूंगी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक ने तुरंत ही उस मोबाइल नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ से शुभमित्रा के मोबाइल पर घंटी बजने लगी थी. शुभमित्रा ने भी दीपक का नंबर सेव कर लिया. 25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उड़ीसा के जगतपुर जिले के पारादीप की रहने वाली थी. उस के पापा का नाम धुरयदान साहू और मम्मी का नाम सुकीर्ति साहू था. शुभमित्रा अपने परिवार में सब से बड़ी थी. उस के 2 छोटे भाई और एक बहन थी. बचपन से ही शुभमित्रा का सपना पुलिस की नौकरी करने का था, इसलिए वह पढ़ाई के साथसाथ खेलकूद में भी स्कूल और कालेज में सब से आगे रहती थी.

उस के पापा एक किसान थे, इसलिए शुभमित्रा नौकरी कर अपने मम्मीपापा और दोनों छोटे भाइयों को एक सुखद भविष्य देना चाहती थी. सुभमित्रा की कोशिशें रंग लाईं और उस ने इधर बीए में प्रवेश प्रवेश लिया तो दूसरी तरफ उस की नियुक्ति ओडिशा पुलिस में हो गई. यह साल 2018 की बात है.

उस के बाद शुभमित्रा की पोस्टिंग जनवरी 2024 में भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल के रूप में हो गई. शुभमित्रा की उम्र भी तब 24 साल की हो गई थी, इसलिए उस के पेरेंट्स उस से शादी करने के लिए दबाव बनाते रहते थे, लेकिन शुभमित्रा का अपना यह मानना था कि अभी उस की शादी की उम्र भी नहीं है. दूसरा वह अपनी पसंद से ही शादी करना चाहती थी. शुभमित्रा साहू के दिल में दीपक राउत ने एक बौलीवुड हीरो की तरह एंट्री कर के ऐसी छाप छोड़ दी थी, जिसे वह भूल नहीं पा रही थी. एक ही दिन और एक ही पल में वह अपना दिल दीपक को न्यौछावर कर चुकी थी.

इस घटना को 2 दिन हो चुके थे, लेकिन शुभमित्रा सोच रही थी कि 2 दिन हो चुके हैं, दीपक ने अभी तक भी उसे फोन नहीं किया.

उस समय रात के लगभग 10 बजे थे. शुभमित्रा खाना खा कर अपने कमरे में बैठी एक किताब पढ़ रही थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने स्क्रीन देखी तो पता चला कि वह कौल दीपक की ही है. शुभमित्रा के चेहरे पर मुसकान तैर गई. दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई. उस के बाद दीपक ने उसे सीधासीधा कह दिया कि वह उस से दोस्ती कर उसे सदा के लिए अपनाना चाहता है.

शुभमित्रा भी यही चाहती थी. लिहाजा उस ने भी दीपक के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी. इस के बाद तो दोनों के बीच मुलाकातें भी होने लगी थीं. दीपक ने शुभमित्रा को यह भी बता दिया था कि 2018 में उस की शादी अपर्णा से हुई थी, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उस की जुलाई 2024 में मौत हो गई थी. दीपक की इस ईमानदारी पर शुभमित्रा बहुत प्रभावित हुई.

शुभमित्रा अब जल्द से जल्द धूमधाम से दीपक से शादी करना चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ दीपक ने उस से कहा कि अभी हम लोग कोर्ट मैरिज कर लेते हैं, क्योंकि अभी वह अपनी पहली पत्नी के दुख से पूरी तरह से उबर नहीं पाया है. कुछ समय बाद जब सब नारमल हो जाएगा तो धूमधाम से सब के सामने सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह कर लेंगे.

उस के बाद शुभमित्रा और दीपक राउत ने अपने फेमिली वालों, परिचितों से छिप कर 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज कर ली. कोर्ट मैरिज के बाद शुभमित्रा अपने पेरेंट्स के पास ही रह रही थी और दीपक भी अकेले अपने घर में रह रहा था. कभीकभार वह घूमने का प्लान बना कर दूसरे शहर में साथ रह लेते थे. एक कहावत भी है कि आज की मतलब की दुनिया में कौन किसी का होता है, आज तो धोखा वही देता है, जिस पर भरोसा होता है.

उन के आपसी संबंध अब भले ही चाहे दुनिया से दूर थे, पर अब बद से बदतर होते जा रहे थे. दीपक राउत के मन में लालच की बेल पूरी तरह फैल चुकी थी, इसलिए उस ने एक फुलप्रूफ प्लान बना कर शुभमित्रा साहू की हत्या कर उस का शव ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने दीपक से पूछताछ के बाद उस की निशानदेही पर 17 सितंबर, 2025 बुधवार को मजिस्ट्रैट की निगरानी में जेसीबी की मदद से उस जगह की खुदाई कराई, जहां पर शुभमित्रा साहू का शव सीमेंट के एक बैरल में बंद और लगभग 10 फीट नीचे जमीन में दबा हुआ था. जरूरी काररवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस के बाद पुलिस ने आरोपी दीपक राउत की होंडा सिटी कार नंबर ओडी02आर 8494 को भी जब्त कर लिया. दीपक राउत के कुबूलनामे और साक्ष्यों के आधार पर भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में उस के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. साथ ही पुलिस ने शव को छिपाने के लिए आरोपी दीपक रावत के चचेरे भाई विनोद बिहारी भुइयां (38 वर्ष) और जेसीबी चालक शंभूनाथ महंत (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया.

महिला पुलिस कांस्टेबल शुभमित्रा मर्डर केस जब ओडिशा के लोगों के सामने जगजाहिर हुआ तो आरोपी दीपक राउत की मुश्किलें अब और भी बढ़ गई हैं. दीपक की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी के पेरेंट्स ने भी अब पुलिस के समक्ष अपर्णा की हत्या किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है. मृतका अपर्णा प्रियदर्शिनी की छोटी बहन रोजलिन ने मीडिया को बताया है कि शुरुआत में हमें यह लगा था कि हमारी बहन की मौत महज एक दुर्घटना थी. अब दीपक राउत की दूसरी पत्नी शुभमित्रा साहू की हत्या के बाद हमें यह पूरा यकीन है कि दीपक ने मेरी बहन की भी हत्या की होगी और हत्या को दुर्घटना का रूप दे दिया. अपर्णा की मौत की दोबारा जांच की मांग को ले कर ढेंकनाल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.

रोजलिन ने यह आरोप भी लगाया है कि अपने पति दीपक के साथ अपर्णा का वैवाहिक जीवन शुरू से ही समस्याओं, परेशानियों और अथाह दुखों से भरा था. शादी के कुछ महीनों बाद ही दीपक ने अपर्णा को परेशान और प्रताडि़त करना शुरू कर दिया था. इस संबंध में अपर्णा ने पुलिस कमिश्नरेट में औनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने दीपक के खिलाफ कोई भी काररवाई नहीं की.

रोजलिन ने यह राज भी खोला कि दीपक ने उस की बहन का एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था, जोकि बहन की मृत्यु के बाद उसे मिल भी चुका है. अब हमें उस के ऊपर यह शक है कि दीपक ने इंश्योरेंस क्लेम पाने के लिए अपर्णा की हत्या की थी. शुभमित्रा साहू के हत्यारे कांस्टेबल दीपक राउत की पहली शादी अपर्णा प्रियदर्शिनी के साथ 25 अप्रैल, 2018 को हुई थी. दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) थी और ढेंकनाल जिले में तैनात थी.

19 मार्च, 2022 को दीपक राउत ने खुंटुनी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उस की पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी (31 वर्ष) की 2 दिन पहले ट्रक नंबर ओडी02 एस 3486 की चपेट में आने से मौत हो गई थी. कथित दुर्घटना एनएच-55 पर राधा किशोरपुर चौक के पास हुई थी. घटना के बारे में दीपक राउत ने तब पुलिस को बयान दिया था कि घटना के दिन अपर्णा उस (दीपक) के साथ अपनी गाड़ी से अपने गृहनगर लौट रही थी, तब एक जगह गाड़ी को रुकवा कर अपर्णा ने दीपक से कहा कि उसे टायलट जाना है.

जब वह सड़क पार टायलेट में जाने के लिए सड़क पार कर रही थी तो कथित तौर पर रात को 9 से साढ़े 9 बजे के बीच एक ट्रक ने अपर्णा को टक्कर मार दी, जिस से उस के सिर में गंभीर चोटें आ गई थीं. उस के बाद दीपक उसे ले कर अस्पताल गया, जहां पर इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. उस समय खुंटुनी पुलिस ने इस केस की जांच की थी. जांच के दौरान पुलिस ने उक्त पंजीकरण वाले ट्रक का पता लगा लिया और चालक को हिरासत में ले लिया था. लेकिन पुलिस जांच में यह पाया गया कि दुर्घटना वाले दिन वह ट्रक उस इलाके में नहीं था.

उस के बाद दीपक राउत ने दावा किया कि शायद अंधेरा होने के कारण उस ने ट्रक का गलत नंबर नोट कर लिया होगा. वह शायद कोई दूसरे नंबर का वाहन हो सकता है. रिपोर्ट लिखाने वाला एक पुलिसकर्मी था, इसलिए उस की बातों पर यकीन कर के जांच अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस दुर्घटना के लिए एक अज्ञात वाहन ही जिम्मेदार था. उस के बाद कोई अन्य सुराग न मिल पाने के कारण जांच अधिकारी द्वारा अदालत में एक अंतिम सत्य रिपोर्ट (एफटीआर) प्रस्तुत की गई, जिस में यह संकेत दिया गया कि यह घटना वास्तविक थी, लेकिन उस विशेष ट्रक को दोषी ठहराने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे.

अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या फिर शिकायतकर्ता पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत झूठ बोल रहे थे और क्या पुलिस को उस समय अपर्णा प्रियदर्शिनी की मौत में किसी गड़बड़ी का संदेह था. जांच अधिकारी ने तब अदालत में बताया था कि इन सभी सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल पाएंगे. इस मामले में मृतका अपर्णा की बहन रोजलिन ने मीडिया और पुलिस को दिए अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि अपर्णा के पति दीपक राउत ने उन्हें फोन पर बताया था कि खुंटुनी के राधा दामोदरपुर के पास अपर्णा का एक्सीडेंट हुआ था.

पहले तो दीपक राउत ने मृतका अपर्णा के परिजनों को यह बताया था कि अभी हम दोनों दुर्घटनास्थल पर ही हैं. उस के बाद में उन के द्वारा यह बताया गया था कि दीपक अपर्णा को एससीबी मैडिकल कालेज और अस्पताल ले कर गया है. बाद में हमें दीपक राउत का एक और कौल आया, जिस में बताया गया कि अपर्णा को वह कटक के एक निजी अस्पताल ले कर गया है. इस मामले में कटक (ग्रामीण) के एसपी विनीत अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि हम ने अपर्णा प्रियदर्शिनी की हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और इस की जांच के लिए एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को नियुक्त कर दिया है.

भुवनेश्वर पुलिस द्वारा 19 सितंबर, 2025 को बताया गया कि 25 वर्षीय महिला ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की हत्या को रैड फ्लैग घोषित कर दिया गया है. अब यह जांच क्राइम ब्रांच (सीबी) के डीजीपी की निगरानी में होगी. भुवनेश्वर के कमिश्नरेट पुलिस के समन्वित सहयोग के साथ, एजेंसी कैपिटल थाना पुलिस और खुंटुनी पुलिस द्वारा पहले एकत्र किए गए सभी साक्ष्यों और आंकड़ों की जांच करेगी. इस के साथ ही सीएडब्लू (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) और सीडब्लू (साइबर विंग) दोनों ही इकाइयां इस मामले की बारीकी से जांच और छानबीन करेंगी.

ओडिशा पुलिस ने वर्ष 2014 में जांच की रेड फ्लैग श्रेणी शुरू की थी, जिस के तहत मामलों की जांच सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाती है. इस रेड फ्लैग जांच में महिला कांस्टेबल शुभमित्रा की हत्या के साथसाथ 17 मार्च, 2022 को ओडिशा के कटक के आधागढ़ के पास एक सड़क दुर्घटना में आरोपी कांस्टेबल दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की मृत्यु के बीच संभावित संबंध का भी पता लगाया जाएगा, जिस के लिए दीपक राउत की जीवन बीमा पौलिसी से डेढ़ करोड़ रुपए का भुगतान मिला था.

18 सितंबर, 2025 को भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीणा ने आरोपी हत्यारे पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को उस की नौकरी से निलंबित कर दिया. उस के एक रिश्तेदार और एक अन्य सहयोगी को भी शुभमित्रा साहू के शव को ठिकाने लगाने में आरोपी दीपक राउत की मदद करने में गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी बीच मृतका शुभमित्रा के पोस्टमार्टम के नमूने भुवनेश्वर स्थित राज्य फोरैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं, क्योंकि क्योंझर जिला मुख्यालय अस्पताल में सड़ीगली लाशों की विस्तृत और सटीक रिपोर्ट देने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं.

मृतका कांस्टेबल शुभमित्रा साहू का पोस्टमार्टम उस के भाइयों का मौजूदगी में करा लिया गया है. पुलिस इस मामले की तफ्तीश गंभीरता से कर रही थी. Family Crime

 

UP Crime: पत्नी को बनाया वेश्या

UP Crime: अधिकांश लोगों के लिए अपने घरपरिवार की इज्जतआबरू सर्वोपरि होती है. इसे बचाने के लिए वह अपनी जान तक की परवाह नहीं करते, लेकिन सलमान ऐसा शख्स था, जो अपनी पत्नी नरगिस से देह व्यापार कराता था, उस के लिए वह खुद ग्राहक लाता था. इस घुटनभरी जिंदगी से निकलने के लिए एक दिन नरगिस ने ऐसा काम किया कि…

इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या उस की पत्नी सोनम ने कराई थी, उस के भांतिभांति के समाचार अभी भी आ रहे हैं. इधर कुछ महीनों में पत्नियों द्वारा पति की हत्या के अनेक मामले सामने आए हैं. औरैया की प्रगति ने विवाह के 15 दिनों बाद ही पति दिलीप की हत्या करा दी थी. कर्नाटक में अधेड़ पल्लवी ने अपने पति रिटायर्ड डीजीपी ओमप्रकाश को छुरी मार कर मार डाला. मेरठ की मुसकान ने अपने पति सौरभ की हत्या करवा दी. मुंबई की रूपाली ने अपने पति की हत्या करा दी.

ये बड़ी घटनाएं थीं, इसलिए सभी की नजरों में आ गईं. इस के अलावा भी अन्य तमाम घटनाएं हैं, जिन में पता चलता है कि पतिपत्नी एकदूसरे के लिए जान देने के बजाय जैसे जान लेने की प्रतियोगिता चला रहे हैं. इस में लिवइन में रहने वाली लड़कियों की हत्या के समाचार तो रोज ही अखबारों में आते हैं. यह कहानी भी इसी तरह की हत्या की है. लेकिन यह कहानी उन सभी कहानियों से अलग है. उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर की इस कहानी में पत्नी ने अपने हाथों से पति की हत्या कर दी. लेकिन इस कहानी में ऐसे अनेक सवाल हैं, जो समाज की आंखें खोलने वाले हैं.

दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले नैशनल हाईवे पर बीच में पड़ता है उत्तर प्रदेश का जिला मुजफ्फरनगर. 21 जून, 2025 की आधी रात को मुजफ्फरनगर के खाईखेड़ा इलाके के मदीना चौक के पास चमन कालोनी में शोर मचने से कालोनी वालों की आंखें खुल गईं. 24 साल की नरगिस घर से निकल कर चिल्ला रही थी कि ‘कोई मेरे शौहर को बचा लो, उस ने गले में फांसी लगा ली है. वह फडफ़ड़ा रहा है.’

पड़ोसी तुरंत भाग कर आ गए. नरगिस और सलमान की शादी के अभी साढ़े 5 साल ही हुए थे. उन का 4 साल का एक बेटा भी था. ये तीनों चमन कालोनी के उस मकान में किराए पर रहते थे. पड़ोसियों ने देखा कि ऊपरी मंजिल के कमरे में सलमान चित पड़ा था. पड़ोसियों ने उसे उठा कर रिक्शे में डाला और सरकारी अस्पताल ले गए. वहां नरगिस ने डौक्टर से कहा कि गले में दुपट्टा बांध कर सलमान पंखे से लटक गया था. किसी तरह उस ने पति को पंखे से उतारा. वह कैसे भी उस के पति को बचा लें.

सलमान की प्राथमिक जांच कर के डौक्टर ने सिर हिलाते हुए कहा कि यह मर चुका है, लेकिन यह आत्महत्या का मामला है, इसलिए पुलिस को सूचना देनी पड़ेगी. अस्पताल प्रशासन ने इस की सूचना पुलिस को दी तो थोड़ी ही देर में थाना कोतवाली पुलिस आ पहुंची. कोतवाली प्रभारी ने नरगिस से पूछा, ”रात को पति से तुम्हारा झगड़ा हुआ था क्या? इस ने मर जाने की धमकी देते हुए तुम से अपना इरादा व्यक्त किया था क्या?’’

जवाब में नरगिस ने कहा, ”साहब, छोटामोटा, खट्टामीठा झगड़ा तो सभी घरों में होता है. इस तरह का झगड़ा तो हमेशा होता रहता था. पर बात इस हद तक पहुंच जाए, इस तरह का झगड़ा तो कभी नहीं हुआ था. हां, इन की कोई नौकरी नहीं थी, सो बेरोजगार होने की वजह से इन के दिमाग पर बहुत टेंशन रहती थी. शायद उसी वजह से इन्होंने यह कदम उठाया होगा. बाकी आप सारे पड़ोसियों से पूछ लीजिए, कभी हमारा कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ था.’’

इस के बाद पुलिस ने लाश कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. मदीना चौराहे और मोहल्ले में रहने वाले सभी लोगों को नरगिस पर दया आ रही थी. सभी यही कह रहे थे कि सलमान तो आत्महत्या कर के छुट्टी पा गया, अब यह बेचारी अकेली 4 साल के बच्चे को कैसे पाल कर बड़ा करेगी? सलमान के अम्मीअब्बू फर्रुखाबाद में रहते थे. सलमान का छोटा भाई फैजल मुजफ्फरनगर में ही दूसरे इलाके में अलग रहता था.

सलमान के आत्महत्या का समाचार पा कर सभी मदीना चौक के पास स्थित चमन कालोनी में नरगिस के घर आ गए थे. पोस्टमार्टम के बाद लाश सलमान के फेमिली वालों को सौंप दी गई थी. लाश मिलने के बाद पिता और भाई ने मिल कर उस की लाश को दफना दिया था. पुलिस और फेमिली वालों ने मान लिया था कि सलमान ने आत्महत्या ही की है. अगले दिन थाना कोतवाली में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसे देख कर कोतवाल चौंके. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सलमान ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि गला दबा कर उस की हत्या की गई थी. कोतवाल पूरी टीम के साथ चमन कालोनी के सलमान के घर पहुंचे.

पुलिस ने जब सलमान के फेमिली वालों को बताया कि उस ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की गला दबा कर हत्या की गई है तो पूरा परिवार सन्न रह गया. सलमान के भाई फैजल ने तो जरा भी शरम संकोच किए बगैर तुरंत खड़े हो कर कहा, ”साहब, आप मेरी शिकायत दर्ज कर लीजिए. मेरे भाई सलमान की हत्या मेरी भाभी नरगिस ने ही की है.’’

वैसे भी जब सलमान की मौत हुई थी, उस समय घर में केवल नरगिस और उस का छोटा सा बच्चा ही था. इसलिए नरगिस पर ही सलमान की हत्या का पूरा शक जाता था. आत्महत्या के बजाय अब मामला हत्या का हो गया था, इसलिए इस घटना की सूचना कोतवाली पुलिस ने सीओ (सिटी) राजू कुमार साव और एसएसपी संजय वर्मा को भी दे दी थी. इस के बाद पुलिस अधिकारियों के डायरेक्शन में नरगिस से पूछताछ शुरू की गई.

शुरुआती पूछताछ में नरगिस ने कहा, ”भला कौन औरत विधवा बनना चाहेगी? किसी भी औरत को विधवा बनने का शौक नहीं होता. मैं अपने पति को क्यों मारूंगी? मैं तो अपने बेटे को गोद में ले कर सोई थी. उस के सो जाने के बाद घर में क्या हुआ, मुझे पता नहीं है.’’

पति को खोने वाली नरगिस के प्रति सहानुभूति रखते हुए पुलिस ने 3 दिनों तक साधारण पूछताछ की, परंतु नरगिस का एक ही जवाब था कि यह जो कुछ भी हुआ है, उस की उसे बिलकुल खबर नहीं है. इस के बाद 24 जून, 2025 को पुलिस ने अपने तरीके से नरगिस से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई. नरगिस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने अपने पति सलमान को मौत के घाट उतारा था. उस ने बताया कि उस ने उस दिन सुबह ही सलमान से कहा था कि उसे रात में नींद नहीं आती, जिस की वजह से पूरे दिन बेचैनी रहती है. किसी डौक्टर से लिखवा कर वह उस के लिए नींद की दवा ला दे.

दोपहर को सलमान बाहर गया और नींद की दवा ला कर नरगिस को दे दी. रात को खाने में नरगिस ने रोटी और कीमा बनाया था. उस ने नींद की 7 गोलियां अच्छी तरह पीस कर सलमान के कीमा में मिला दी. रात को खाना खाने के बाद सलमान की कोल्डड्रिंक पीने की आदत थी. बची 3 गोलियां नरगिस ने कोल्डड्रिंक में मिला दीं. पेट भर कीमा खाने के बाद सलमान ने कोल्डड्रिंक भी पी ली थी, जिस से उसे गहरी नींद आ गई. रात 2 बजे नरगिस ने सलमान को झकझोर कर देखा. उस समय सलमान जरा भी होश में नहीं था. इस के बाद उस ने सलमान के गले में दुपट्टा लपेट कर पूरी ताकत से कस दिया. 5 मिनट छटपटाने के बाद सलमान की सांसें थम गईं.

वह मर गया है, यह विश्वास होने के बाद नरगिस ने चीखतेचिल्लाते हुए पड़ोसियों से कहा कि सलमान ने पंखे से लटक कर आत्महत्या करने की कोशिश की है. उसे तुरंत अस्पताल ले जाना होगा. इस के बाद मोहल्ले के 2 लोग उसे अस्पताल ले गए थे. नरगिस द्वारा अपराध स्वीकार करने के बाद सीओ (सिटी) ने पूछा, ”तुम दोनों के बीच ऐसी क्या लड़ाई थी कि तुम्हें इस तरह का खतरनाक कदम उठाना पड़ा. पति से तुम्हारी ऐसी क्या दुश्मनी थी?’’

सहज संकोच के साथ नरगिस नीचे ताकने लगी. उस के बाद मन मजबूत कर के उस ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस वालों को जबरदस्त झटका लगा. उस ने एक भी शब्द छिपाए बगैर पति की हत्या की सही वजह बता दी. उस ने जो वजह बताई, वह इस तरह थी. मुजफ्फरनगर के मोरना ब्लौक के गांव ककराला का रहने वाला सलमान 3 भाइयों में सब से बड़ा था. उस की 4 बहनें हैं. अभी एक भाई और 2 बहनों की शादी नहीं हुई है. साल 2020 में इसी जिले ककरौली के खाईखेड़ा की रहने वाली नरगिस से उस का विवाह हुआ था. दोनों का इस समय 4 साल का एक बेटा है.

नरगिस को गांव में रहना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए शहर चल कर रहने के लिए वह अकसर सलमान से झगड़ती रहती थी. रोजरोज की किचकिच से तंग आ कर नरगिस के कहने पर सलमान 3 साल पहले नरगिस और बच्चे को ले कर मुजफ्फरनगर आ गया था. शहर के कई मोहल्लों में रहते हुए इस समय वह मदीना चौक के पास चमन कालोनी में किराए के मकान में पत्नी और बेटे के साथ रह रहा था.

उस की कोई नौकरी नहीं थी. वह इधरउधर मजदूरी करता था. खर्च ज्यादा था, जबकि कमाई कम थी. घर वाले चाहते थे कि वह गांव आ जाए, पर नरगिस गांव नहीं जाना चाहती थी. इसी बात को ले कर नरगिस नाराज हो कर डेढ़ साल तक मायके में रही थी. नरगिस ने बताया कि कामधंधा न होने की वजह से पैसों की तंगी रहती थी. उस का बेटा ढाई साल का हो गया था, उस के बाद यानी डेढ़ साल पहले सलमान ने उसे वेश्या बना दिया था. नएनए ग्राहक खोज कर वह नरगिस को उन के आगे परोसने लगा था. पति हो कर वह अपनी ही पत्नी की दलाली का धंधा करने लगा था.

पहली बार जब सलमान ने यह काम करने के लिए कहा था तो नरगिस ने जम कर विरोध किया था. पर सलमान ने मारपीट कर के उस से वही करवा लिया था, जो वह चाहता था. नरगिस के मायके में भी ऐसा कोई नहीं था, जो उस की मदद करता. इसलिए मार खा कर, बेबस हो कर नरगिस को सलमान का साथ देना पड़ रहा था, जिस से अंजान लोग उस की देह को नोच रहे थे.

सलमान ने दिल्ली, नोएडा से ले कर मणिपुर के इंफाल तक उस के लिए ग्राहक खोज रखे थे. वह नरगिस को ग्राहकों के पास ले जाता और बंद कमरे में जो प्रेमलीला होती, उस की वीडियो बनाता. अपनी ही पत्नी के उन वीडियो को बेच कर भी वह रुपए कमाता था. नरगिस की व्यथा सुन कर पुलिस वाले स्तब्ध थे. उस का कहना था कि इस तरह की घुटघुट कर जीने वाली जिंदगी जीने से तो मर जाना ही अच्छा था. लेकिन उसे अपने बेटे की चिंता थी कि उस के बाद उसे कौन संभालेगा?

उस का मुंह देख कर वह जलालतभरी जिंदगी जी रही थी, लेकिन धीरेधीरे उस की परेशानी बढ़ती ही जा रही थी और सहनशीलता घटती जा रही थी. फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब उस की सहनशीलता खत्म हो गई. इस की वजह यह थी कि पैसा देने वाले ग्राहक नरगिस को औरत नहीं, खिलौना मान कर उस के साथ तरहतरह की चित्रविचित्र हरकतें करते थे, जो उस के लिए असहनीय हो गई थीं. नरगिस को लगने लगा था कि वह इस यातना भरी जिंदगी से तभी छुटकारा पा सकती है, जब वह पति सलमान के शिकंजे से निकल पाए.

नरगिस ने इस के लिए बहुत सोचा. काफी सोचनेविचारने के बाद उसे लगा कि सलमान के शिकंजे से निकलने के लिए उस की मौत के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है. उस ने सोचा कि सलमान की हत्या तो उसे बहुत पहले ही कर देनी चाहिए थी. पर उस समय उस की मार के आगे उस की हिम्मत नहीं पड़ रही थी. नरगिस मानसिक और शारीरिक यातनाओं से तंग आ चुकी थी. शायद इसीलिए उस के अंदर पति सलमान की हत्या करने की हिम्मत आ गई थी. फिर उस ने सलमान से ही नींद की गोलियां मंगा कर उन्हें कीमा में मिला कर खिला दीं. उसे मौत के घाट उतार कर अपनी बेइज्जती का बदला ले लिया.

इस के बाद उस ने रोते हुए कहा था कि जेल की जिंदगी इस नरक भरी जिंदगी से सौ गुना अच्छी है. अपनी दुख भरी कहानी सुना कर नरगिस रो रही थी. पुलिस वाले मौन थे. 25 जून, 2025 को प्रेस कौंफ्रेंस में एसएसपी संजय वर्मा ने नरगिस द्वारा अपराध स्वीकार करने की बात कह कर हत्या करने की वजह बताई तो मीडिया वाले भी हैरान रह गए थे. सभी एकटक नरगिस को ताकते रह गए थे.

पुलिस ने बचा हुआ कीमा, वह गिलास, जिस में सलमान ने कोल्डड्रिंक पी थी, नींद की गोलियों का पत्ता, वह दुपट्टा, जिस से गला घोंटा गया था, कब्जे में ले लिया था. नरगिस को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. उस के बेटे को सलमान के पेरेंट्स अपने साथ फर्रुखाबाद ले गए थे. UP Crime

(कथा में नरगिस परिवर्तित नाम है)

 

 

Illicit Relationship: क्या करें जब पति बाहर मुंह मारे

Illicit Relationship: 33 साल की संगीता उर्फ पप्पी 35 वर्षीय महेंद्र गुर्जर की दूसरी पत्नी जरूर थी, लेकिन वह पूरी जिम्मेदारी के साथ घरगृहस्थी संभाले हुए थी. वह पति की इस आदत से परेशान रहती थी कि उस के दूसरी महिलाओं से भी अवैध संबंध थे. संगीता ने जब पति को समझाने की गुस्ताखी की तो…

रात के करीब 10 बजे महेंद्र गुर्जर जैसे ही अपने बैडरूम में दाखिल हुआ तो बिस्तर पर लेटी हुई पत्नी से बोला, ”पप्पी, मेरे पेट में बहुत दर्द हो रहा है.’’

”आप बिस्तर पर लेट जाइए, मैं तेल लगा कर मालिश कर देती हूं, इस से आराम मिल जाएगा,’’ कहते हुए संगीता उर्फ पप्पी अलमारी से तेल की शीशी निकालने चली गई.

”दर्द इतना तेज है कि मुझ से बरदाश्त नहीं हो रहा है, मालिश से कुछ नहीं होगा. जल्द ही मुझे डाक्टर को दिखाना होगा.’’ महेंद्र अपने पेट पर हाथ फेरते हुए बोला.

”रात के 10 बज रहे हैं, इतनी रात को शहर के हौस्पिटल कैसे जाओगे? हेमंत भैया को फोन लगा कर बुला लो, वह तुम्हें बाइक से डौक्टर के पास ले चलेंगे.’’ पत्नी ने सुझाव दिया.

”किसी को बुलाने की जरूरत नहीं है. तुम समझ नहीं रही हो पप्पी, यह दर्द साधारण पेट दर्द नहीं है, कोई गंभीर समस्या लग रही है. हो सकता है, डाक्टर मुझे एडमिट कर ले, इसलिए तुम मेरे साथ चलो.’’ महेंद्र ने कहा.

”लेकिन ऐसे में तुम बाइक चलाते हुए खंडवा तक कैसे चलोगे, रास्ते में तबियत और ज्यादा खराब हो गई तो क्या होगा?’’ पत्नी ने अंदेशा जताते हुए कहा.

”मैं बाइक चलाते हुए ले जाऊंगा, तुम तो कुछ पैसे रख कर जल्दी तैयार हो जाओ, तब तक मैं बाइक निकालता हूं.’’ महेंद्र पत्नी से बोला. संगीता उर्फ पप्पी ने जल्दी से अलमारी से कुछ पैसे निकाले और जरूरी सामान एक थैली में रख लिया. बगल के कमरे में पढ़ रहे बच्चों से पप्पी ने कहा, ”मैं पापा के साथ खंडवा इलाज के लिए जा रही हूं, तुम लोग अंदर से दरवाजा बंद कर ताला लगा कर सो जाना. हो सकता है, हम लोग सुबह लौटें.’’

इस के बाद वह तैयार हो कर घर से बाहर निकल आई. घर के बाहर महेंद्र बाइक ले कर खड़ा हुआ था. तब तक रात के करीब साढ़े 10 बज चुके थे. दोनों बाइक पर सवार हो कर खंडवा के लिए रवाना हो गए. यह 21 सितंबर, 2025 की बात है. महेंद्र ने रात करीब 11 बजे सब से पहले अपने साढ़ू विशाल को फोन कर के बताया, ”भैया, गांव के बाहर रास्ते में कुछ लोगों ने मुझे बंधक बना कर पप्पी को मार डाला है, आप तुरंत आ जाइए.’’

इतना सुनते ही विशाल के होश उड़ गए.  रात का वक्त होने से विशाल ने तुरंत गांव के कुछ लोगों को और फोन कर के बुला लिया और सभी मिल कर महेंद्र के बताई गई जगह पर पहुंच गए. घटनास्थल से ही विशाल ने 112 नंबर डायल कर के मर्डर होने की सूचना पुलिस को दी. इधर रात एक बजे खंडवा के पद्मनगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि डिगरीस और बावडिय़ाकाजी गांव के बीच एक महिला का कत्ल हो गया है. पद्मनगर थाने के टीआई प्रवीण आर्य ने तत्काल घटना की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी और पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

महेंद्र की बताई लोकेशन पर जब पुलिस टीम पहुंची तो महेंद्र बदहवास हालत में वहां मिला. सामने उस की पत्नी की लाश पड़ी हुई थी. महेंद्र ने पुलिस टीम को बताया कि वह बाइक से जिला अस्पताल जा रहा था. डिगरीस गांव के बाहर करीब 2 किलोमीटर निकले ही थे कि 3 बदमाश रास्ते में बाइक अड़ा कर शराब पी रहे थे. उस ने जैसे ही गाड़ी रोकी तो उन्हें देख कर पत्नी ने गुस्से में आ कर कहा, ”तुम लोगों को समझ नहीं आता कि रोड पर गाड़ी अड़ा कर बैठे हो.’’

इतना सुनते ही उन लोगों ने गालीगलौज शुरू कर दी. महेंद्र ने बताया कि रात के समय अंधेरे के कारण मैं उन लोगों को पहचान नहीं पाया और अनजान लोगों से मैं ने बहस करनी उचित नहीं समझी और पत्नी की तरफ से मैं ने उन से माफी मांगी, लेकिन वे लोग नहीं माने. वे लोग अलग ही भाषा बोल रहे थे, जो हमारी समझ से बाहर थी. इतने में 2 लोगों ने मुझे पकड़ा और एक व्यक्ति ने पत्नी को चाकू से गोदगोद कर मार डाला.

महेंद्र ने आगे बताया कि आंखों के सामने पत्नी का मर्डर होते देख मेरे हाथपांव फूल गए. मेरा मोबाइल भी कहीं गिर गया. इतना कहते ही महेंद्र फफकफफक कर रो पड़ा. सूचना मिलने पर एसपी मनोज कुमार राय समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस टीम ने घटनास्थल से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. मृतक महिला की पहचान 33 साल की संगीता उर्फ पप्पी  पति महेंद्र पटेल गुर्जर निवासी डिगरीस के रूप में हुई. पप्पी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उस के शरीर पर धारदार हथियार से करीब 40 बार वार किए गए थे.

35 साल के महेंद्र पटेल के पिता सखाराम पटेल की मौत के बाद महेंद्र ने अपने घर के बाड़े में एक मकान बना लिया था, जिस में वह अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ रहता था. महेंद्र की मां पास ही के पुश्तैनी मकान में अकेली रहती थी. महेंद्र की खंडवा जिले के डिगरीस गांव में किराना दुकान थी. महेंद्र किराना सामान के साथ अवैध रूप से शराब बेचने का काम भी करता है. संगीता महेंद्र के किराना व्यापार में हाथ बंटाती थी. संगीता आदिवासी समाज से थी. महेंद्र ने पहली पत्नी को तलाक दे कर उस से शादी की थी. पहली पत्नी से एक बेटी है, जो महेंद्र के साथ ही रहती है. संगीता से भी उस का एक बेटा है, जिस की उम्र करीब 11 साल है.

दोनों की शादी 2012 में हुई थी. महेंद्र से बेटे के अलावा संगीता की पहले पति से 12 साल की बेटी भी है. बेटी गर्भ में थी, तभी संगीता ने पहले पति से तलाक ले लिया था. महेंद्र की तहरीर पर थाना पद्मनगर में धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत रिपोर्ट दर्ज हो गई. इस मामले की जांच के लिए खंडवा जिले के एसपी मनोज कुमार राय ने एडिशनल एसपी (सिटी) महेंद्र तारनेकर के निर्देशन में 2 पुलिस टीमों का गठन कर दिया. एक टीम में पद्मनगर थाने के टीआई प्रवीण आर्य के साथ एसआई हर्ष सोनगरे, एएसआई केमर रावत, कांस्टेबल अजय एवं दूसरी टीम इंसपेक्टर धीरेश धारवाल के नेतृत्व में गठित की गई.

 

दूसरी टीम ने इस दौरान मुखबिर तंत्र और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के आधार पर जांच की, जिस के बाद एक संदेही हेमंत उर्फ कान्हा से पूछताछ की गई. गांव में रहने वाले सेवकराम पंचाल के 21 साल के बेटे हेमंत पंचाल की मम्मी डिगरीस गांव की थी, इस वजह से वह महेंद्र को मामा कह कर बुलाता था. हेमंत एक प्राइवेट हौस्पिटल में कंपाउंडर का काम करता था. गांव डिगरीस के लोगों ने पुलिस को बताया कि हेमंत अकसर महेंद्र के साथ ही रहता था. ताज्जुब की बात यह थी कि महेंद्र ने पेट दर्द होने पर हेमंत को क्यों नहीं बुलाया?

 

शक होने पर पुलिस ने हेमंत से पूछताछ की. पहले तो उस ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने में अनभिज्ञता व्यक्त की, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया और उस ने हत्या की पूरी कहानी बता दी. हत्या के पीछे की वजह सुन कर हर कोई हैरान रह गया. हेमंत ने सच उगलते हुए पुलिस को बताया कि मृतका के पति ने ही 50 हजार रुपए में सुपारी दे कर अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारने की साजिश रची थी, जिस में गांव जामली कलां के रहने वाले आर्यन यादव और राजेंद्र यादव के साथ मिल कर हत्या की थी.

हेमंत आर्यन के साथ पढ़ा था और उस से दांत काटी दोस्ती थी. आर्यन का दोस्त राजेंद्र था. इस वजह से तीनों आपस में संपर्क में थे. आर्यन और राजेंद्र के पास कोई काम नहीं था. आवारागर्दी करने और नशे की गिरफ्त में रहने की वजह से पैसों की तंगी बनी रहती थी, इसलिए पैसों की खातिर कोई भी काम करने को तत्पर रहते थे. 22 साल का आर्यन यादव और 35 साल का राजेंद्र रेलवे गेट के पास गांव जामली कलां के रहने वाले थे. पुलिस ने दोनों को 24 सितंबर, 2025 को गिरफ्तार कर लिया. इन के पास से सुपारी के 10 हजार रुपए भी बरामद कर लिए.

शुरुआत में पुलिस को मामला लूट का लग रहा था, लेकिन पुलिस ने जब बारीकी से पड़ताल की तो कई बातें मेल नहीं खा रही थीं. पत्नी की हत्या अपनी आंखों के सामने होते देखने वाले महेंद्र के शरीर पर किसी तरह की खरोंच तक का निशान नहीं था. पुलिस को सब से बड़ा सुराग तब मिला, जब हौस्पिटल के डौक्टरों ने साफ कर दिया कि महेंद्र को कोई पेट दर्द नहीं था. इसी से पुलिस का शक और गहरा हुआ. आगे की जांच में जब महेंद्र और उस के दोस्तों से पूछताछ की गई तो पूरा सच सामने आ गया. हत्या के पीछे का कारण पतिपत्नी के बिगड़े रिश्ते बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, महेंद्र का यह दूसरा विवाह था. वह पत्नी से बेहद परेशान था.

पत्नी अकसर उस से और परिवार वालों से झगड़ा करती थी. गालीगलौज भी करती थी. महेंद्र इस तनाव से बाहर निकलना चाहता था और आखिरकार उस ने अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने का खौफनाक रास्ता चुन लिया. उस ने अपने दोस्तों की मदद ली और सब ने मिल कर इस रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश को अंजाम दिया. फिर पत्नी को तड़पातड़पा कर मार डाला. पुलिस पूछताछ में उस ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस का शक यकीन में बदल गया. हेमंत के बताए अनुसार, पप्पी के पति महेंद्र ने ही एक लाख रुपए की सुपारी हेमंत को दी थी. हेमंत अकेले इस काम को अंजाम नहीं दे पा रहा था, लिहाजा उस ने 20-20 हजार रुपए दे कर गांव जामली कलां के रहने वाले आर्यन और राजेंद्र को भी इस में शामिल कर लिया.

महेंद्र का अपने गांव और आसपास की कई महिलाओं से अफेयर चल रहा था. युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही उसे अय्याशी का शौक चढ़ गया था. उस के पास पुश्तैनी करीब 10 एकड़ जमीन थी, इसी अय्याशी के चक्कर में उस ने धीरेधीरे कर के 8 एकड़ जमीन बेच दी. पहली पत्नी सजातीय थी, उस से तलाक के पीछे भी यही कारण था. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू और सुपारी के तौर पर दी गई 10 हजार रुपए की धनराशि आरोपियों से बरामद की. इस दौरान महेंद्र ने अपना मोबाइल आरोपी हेमंत को दे कर उस में दूसरी सिम डलवा कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की थी, उसे भी जब्त कर लिया गया.

महेंद्र गुर्जर टीवी पर ‘क्राइम पेट्रोल’ देख कर प्रभावित हुआ था और पत्नी से परेशान हो कर उस ने पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया. योजना के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह से ले कर रात तक महेंद्र और हेमंत एक साथ थे. हेमंत ने फोन कर के शाम को उस के दोस्तों को बुला लिया था और महेंद्र की दुकान से ही शराब और सिगरेट के पैकेट ले कर उन पर खर्च करने लगा था. इस के बाद रात 10 बजे महेंद्र ने पत्नी के सामने अपने पेट में दर्द होने का नाटक किया.  पति की लाचारी देख कर पत्नी भी साथ चलने को राजी हो गई.

हेमंत और उस के साथी आर्यन व राजेंद्र गांव से करीब एक किलोमीटर बाहर मेन रोड पर बाइक अड़ा कर बैठे हुए थे. महेंद्र और उस की पत्नी के आते ही वे उस की बाइक के आगे खड़े हो गए. फिर तीनों ने मिल कर महेंद्र की पत्नी के साथ मारपीट की और बारीबारी से चाकुओं से तब तक गोदा, जब तक उस की सांसें नहीं थम गईं. मुख्य रास्ता होने की वजह से आरोपियों ने वारदात में देरी नहीं की और महज 5 मिनट में ही संगीता उर्फ पप्पी का काम तमाम कर दिया. उस के बाद महेंद्र गुर्जर ने नाटकीय रूप से गांव के लोगों को फोन किया और कहा कि उस के साथ मारपीट हुई है. गांव वालों के पहुंचने पर पुलिस को इत्तला दी गई.

पुलिस ने हत्या के आरोपी हेमंत गुर्जर, उस के दोस्त आर्यन यादव और राजेंद्र यादव से संगीता उर्फ पप्पी के हत्या के बारे में विस्तार से पूछताछ कर जेल भेज दिया. Illicit Relationship