UP Crime News: विदेशी कौलगर्ल की हत्या का राज

UP Crime News: तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत नाजमुदिनोवा करीब 15 साल पहले इंडिया घूमने आई थी, लेकिन दलालों के चंगुल में फंस कर वह जिस्मफरोशी का धंधा करने लगी. उस की हत्या की गुत्थी सुलझाते समय पुलिस को ऐसी चौंकाने वाली जानकारी मिली कि…

21 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मवाना कोतवाली पुलिस को एक किसान ने फोन कर के जो सूचना दी, उस से पुलिस वाले हैरान हो गए. मवाना खुर्द के भगवती फार्महाउस के पास सरसों के खेत में एक महिला का शव पड़ा हुआ मिला था. यह फार्महाउस पौड़ी हाइवे पर पड़ता है. मवाना खुर्द चौकी के प्रभारी एसआई राजेश कुमार यादव को थाने से इस कौल की सूचना पर मौके पर तत्काल पहुंचने का आदेश मिला तो वह चौकी के स्टाफ को ले कर तत्काल वहां पहुंच गए, जहां महिला का शव पड़ा था.

महिला का चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था. ऐसा लगता था किसी ने उस के चेहरे पर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाला था. इतना ही नहीं, शरीर के 1-2 जगह और भी ज्वलनशील पदार्थ डाला गया था. यह तो समझ में आता था कि उस के चेहरे पर तेजाब शायद इसलिए डाला गया था ताकि मृतका की पहचान खत्म हो जाए, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों को क्यों जलाया गया था. यह जानने के लिए जब एसआई राजेश ने शरीर के उन हिस्सों का निरीक्षण किया तो पता चला कि उन सभी जगहों पर बड़ेबड़े टैटू बने हुए थे. लेकिन ज्वलनशील पदार्थ डाले जाने के बाद भी वे हिस्से पूरी तरह झुलस नहीं पाए थे.

एआई राजेश यादव जांचपड़ताल के काम में लगे ही थे कि तभी मवाना थाने की एसएचओ पूनम जादौन और सीओ पंकज लवानिया भी वहां पहुंच गए. एसएचओ और सीओ ने लाश के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. सवाल था कि मरने वाली कौन थी? यह पता लगाने के लिए जब कुछ महिलाकर्मियों की मदद से मृतका के शरीर पर पहने कपड़ों की तलाशी ली गई तो उस की जेब से एक ऐसी चीज मिली, जिस से मृतका की पहचान की गुत्थी भी सुलझ गई.

कपड़ों से एक आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अर्चिता अरोड़ा और पता दिल्ली का दर्ज था. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आधार कार्ड पर फोटो एक विदेशी युवती का लगा था. जबकि नाम एकदम देशी था. इसीलिए सीओ पंकज लवानिया को सहज विश्वास नहीं हुआ कि मृतका और उस की पहचान के बीच जो रिश्ता है वो एकदम सही है. इस दौरान एसपी (देहात) अभिजीत कुमार भी क्राइम व फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल की जांच व निरीक्षण का काम पूरा होने के बाद मवाना पुलिस ने कथित अर्चिता अरोड़ा के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

चूंकि मृतका अर्चिता अरोड़ा के शव का निरीक्षण सब से पहले एसआई राजेश यादव ने किया था, इसलिए सीओ पंकज लवानिया के निर्देश पर एक लिखित तहरीर थाने में दी और इसी के आधार पर मवाना थाने में बीएनएस की धारा 103(1), 238 के अंतर्गत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसपी (देहात) अभिजीत कुमार के निर्देश पर जांच का काम खुद एसएचओ पूनम जादौन ने अपने हाथ में ले लिया. एसपी (देहात) ने 2 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. एक टीम को घटनास्थल की जांच और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने का काम सौंपा गया.

दूसरी टीम को मृतका के बारे में पुख्ता जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया. सभी पुलिस टीमों की मौनिटरिंग और सर्विलांस का काम सीओ पंकज लवानिया को सौंपा गया.

पुलिस की एक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच शुरू कर दी. साथ ही उस जगह के आसपास की जगहों के सीसीटीवी फुटेज तलाशने का काम भी शुरू कर दिया, जहां अर्चिता अरोड़ा के शव को फेंका गया था. काम थोड़ा मशक्कत वाला और पेचीदा जरूर था, लेकिन जब पुलिस की टीम ने अपना काम शुरू किया तो अगले 24 घंटे में करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तलाश लिए, जिन से पुलिस को उन कातिलों तक पहुंचने का सुराग मिल गया, जिन्होंने अर्चिता का शव वहां ला कर फेंका था.

हाइवे पर बने भगवती फार्महाउस के सीसीटीवी कैमरे में पुलिस टीम को एक क्रेटा कार दिखी, जिस में कुछ लोग दिखे. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे लोगों की संख्या करीब 3 से 4 थी, जो कंबल में लिपटे एक मानव शरीर को ले कर उस स्थान की तरफ गए, जहां अर्चिता का शव मिला था. पुलिस ने तकनीकी सहायता से आखिरकार ये पता लगा लिया कि उस क्रेटा कार का नंबर क्या है और वह किस के नाम पर रजिस्टर्ड है.

मुहब्बत उर्फ अर्चिता अरोड़ाः सालों पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत घूमने आई थी, लेकिन यहां आ कर दलालों के जाल में फंस गई.

यह क्रेटा कार मेरठ के सिविल लाइन इलाके में प्रभात नगर कालोनी के रहने वाले संदीप उर्फ सिट्टू उर्फ राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पुलिस की एक टीम ने उसी दिन संदीप को हिरासत में ले लिया और उस से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस तो पुलिस होती है, वह जब अपने तरीके से पूछताछ करती है तो इंसान क्या पत्थर भी बोलने लगते हैं. संदीप उर्फ राहुल ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सका. संदीप ने पुलिस को बताया कि वह परतापुर के दिल्ली रोड स्थित अविका होटल में काम करता है. इस के बाद संदीप ने टेप रिकौर्ड की तरह बोलते हुए पुलिस को सब कुछ बता दिया कि उस ने क्यों और कैसे तथा किस के साथ मिल कर अर्चिता की हत्या की है.

संदीप से पूछताछ के बाद पुलिस ने अविका होटल के मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी निवासी न्यू देवपुरी थाना रेलवे रोड, मेरठ के अलावा वहां काम करने वाले एक अन्य  कर्मचारी गुरमुख उर्फ अरविंद उर्फ मोनू निवासी जौहड़ी बिनौली बागपत तथा विवेक उर्फ काका निवासी खजूरी वाली गली मलियाना, टीपीनगर मेरठ को ताबड़तोड़ छापेमारी कर हिरासत में ले लिया. संदीप समेत उन चारों से कड़ी पूछताछ हुई तो उन्होंने अर्चिता की हत्या का पूरा राज खोल कर रख दिया.

संदीप और उस के साथियों ने यह भी बताया कि पुलिस ने जिस महिला का शव बरामद किया है, उस का नाम अर्चिता अरोड़ा है, जो बैंक रोड अंबाला कैंट की रहने वाली है. हाल में वह दिल्ली के लोधी रोड स्थित कोटला मुबारकपुर में रहती थी. संदीप ने बताया कि अर्चिता जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी थी. वह अकसर मेरठ में आती थी, जहां वह अपने चाहने वालों का दिल बहला कर उन की जेब खाली कराती थी. इस काम के लिए अर्चिता अविका होटल में रूम बुक करती थी.

20 फरवरी, 2026 को भी उस ने रूम बुक किया था. रात के समय अर्चिता से होटल मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी का रूम के किराए को ले कर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि अर्चिता ने चंचल पर दुष्कर्म का आरोप लगाने की धमकी दे डाली. उस के बाद चंचल को इतना गुस्सा आया कि उस ने होटल के अपने 3 कर्मचारियों के साथ मिल कर अर्चिता के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस ने अर्चिता की इतनी पिटाई कर दी कि कि वह बेहोश हो गई.

चंचल कुमार उर्फ बंटी के सिर पर गुस्सा इस कदर सवार था कि उस वक्त उसे इस बात का होश ही नहीं था कि वह क्या कर रहा है. उस ने बेहोश अर्चिता के शरीर पर कंबल डाल दिया और उस के बाद गुस्से में ही उस की गरदन दबाते हुए चीखने लगा, ”साली वेश्या, तू मुझे झूठे केस में फंसाएगी. मुझे जेल भिजवाएगी. मेरे जरिए तूने लाखों रुपया कमाया और आज तू मुझे जेल भिजवाने की धमकी दे रही है. देखता हूं कि आज तुझे कौन बचाता है.’’

बाएं – मृतका के कपड़ों से बरामद अर्चिता अरोड़ा नाम का आधार कार्ड तथा नीचे उस का तुर्कमेनिस्तान का पासपोर्ट

चंचल कुमार को पता ही नहीं चला कि गुस्से की आग में उस ने कब कंबल के अंदर लिपटी अर्चिता की गला दबा कर हत्या कर दी है. अर्चिता के शरीर में जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो चंचल कुमार का गुस्सा भी थोड़ी ही देर में शांत हो गया. कुछ देर बाद जब चंचल का गुस्सा शांत हुआ तो उस ने सोचा एक बार अर्चिता से बात कर ली जाए. उस ने जब अर्चिता को हिला कर उस से बात करने की कोशिश की तो पता चला कि वह निर्जीव पड़ी है.

उस ने होटल के तीनों कर्मचारियों संदीप, गुरुमुख और विवेक को बुला कर अर्चिता को होश में लाने के लिए कहा. तीनों ने जब उस की नब्ज टटोली तो पता चला उस की नब्ज बंद हो चुकी थी. कई तरह से जांचपड़ताल करने के बाद वे समझ गए कि अर्चिता की मौत हो चुकी है. जैसे ही चंचल उर्फ बंटी को यह पता चला कि अर्चिता मर चुकी है तो उन सभी के होश उड़ गए. काफी देर तक वे समझ ही नहीं पाए कि अब वे क्या करें.

लेकिन करीब एक घंटा बीत जाने के बाद उन्हें समझ में आया कि अगर उन्हें इस मामले में बचना है और पुलिस की पकड़ से दूर रहना है तो उन्हें अर्चिता के शव को अपने होटल से कहीं दूर ले जा कर ठिकाने लगाना होगा. बहुत सोचनेविचारने और सलाहमशविरा करने के बाद उन्होंने तय किया कि वे रात में ही गाड़ी में डाल कर अर्चिता के शव को कहीं और फेंक आऐंगे. उन्होंने सब से पहले तेजाब डाल कर अर्चिता के चेहरे को जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. इतना ही नहीं, उस के शरीर के जिन हिस्सों में टैटू बने थे, वहां भी तेजाब डाल दिया गया.

चंडीगढ़ की एलिना से संपर्क करने पर उस ने मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना से वीडियो कौल पर पुलिस की बात कराई.

चंचल जानता था कि अर्चिता मेरठ की रहने वाली नहीं है, वह केवल अमीरजादों के जिस्म की भूख मिटा कर पैसा कमाने के लिए मेरठ आती थी. उसे शहर में ज्यादा लोग नहीं जानते हैं. अगर वे उस के चेहरे की पहचान मिटा कर उस के शव को अपने होटल से कहीं दूर डाल देंगे तो फिर उन के पकड़े जाने की संभावना नहीं है.

तेजाब से पहचान मिटा कर चंचल ने अपने तीनों साथियों के साथ मिल कर अर्चिता के शव को कंबल में लपेट कर संदीप उर्फ सिट्टू की क्रेटा कार में डाला. चंचल कुमार और उस के साथी अर्चिता की लाश को क्रेटा कार में डाल कर कारीब 45 किलोमीटर तक इधर से उधर भटकते रहे. इसी तरह वे मेरठ से होते हुए मवाना रोड निकल गए. कहीं चैकिंग नहीं हुई. वे मवाना खुर्द पुलिस चौकी के पास पौड़ी हाइवे पर स्थित भगवती फार्महाउस तक जा पहुंचे. फार्महाउस के पास पहुंच कर उन्हें लगा कि यहां लाश को ठिकाने लगाना उचित रहेगा.

वहां गाड़ी खड़ी कर के उस के बाद सभी चारों आरोपियों ने फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर सरसों के खेत में कंबल समेत अर्चिता का शव डाल दिया. इस के बाद चारों आरोपी मौके से वापस अपने घरों को लौट आए. लेकिन घर लौटने के बाद भी चारों आरोपी मवाना पुलिस की गतिविधियों पर नजर बनाए रहे. पूछताछ का काम पूरा होने पर पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग की गई क्रेटा कार, होटल का कंबल और तेजाब की खाली बोतल भी बरामद कर सीज कर दी गई.

पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों को जुटाने के बाद चारों आरोपियों चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक को सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथित अर्चिता अरोड़ा की शिनाख्त से ले कर हत्या के कारण व उस के कातिलों को गिरफ्तार करने की गुत्थी मवाना पुलिस ने सुलझा ली थी. लेकिन मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के साथ एसपी (देहात) अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया ने जब जांच अधिकारी पूनम जादौन के साथ हत्याकांड के एकएक बिंदु पर गहनता से चर्चा शुरू की तो सभी उच्चाधिकारियों को लगा कि कुछ ऐसा जरूर है, जो जांच में छूट रहा है.

पुलिस हिरासत में आरोपी चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक

विचारविमर्श के बाद तय हुआ कि अर्चिता के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करनी होगी, क्योंकि पुलिस ने अर्चिता का जो आधार कार्ड बरामद किया था, उस में भले ही उस का नाम अर्चिता अरोड़ा था, लेकिन उस में जो फोटो थी वह एक विदेशी महिला की लग रही थी, इसलिए उस के भारतीय होने पर संदेह था. पुलिस की टीमों को अब अर्चिता की सही पहचान स्थापित करने के काम पर लगाया गया. महिला की सही पहचान और उस के परिवार वालों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए टीमें गठित कर दी गईं.

पुलिस को मृतका का जो आधार कार्ड बरामद हुआ था, उस में उस का नाम अर्चिता अरोड़ा पुत्री सरबजीत अरोड़ा निवासी 1811, दूसरा फ्लोर, साउथ एक्सटेंशन, कोटला मुबारकपुर, लोधी रोड मध्य दिल्ली का पता दर्ज था. इस में जन्मतिथि 27 अप्रैल, 1984 दर्ज मिली. पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो जानकारी मिली कि वह इस पते पर नहीं रहती. थकहार कर पुलिस खाली हाथ लौट आई. जब अर्चिता के आधार वाले पते से कोई सुराग नहीं मिला तो जांच अधिकारी पूनम जादौन ने उस के मोबाइन नंबर का सहारा लिया.

दरअसल, अर्चिता के आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने अर्चिता का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. पुलिस ने अर्चिता के मोबाइल की 3 महीने की कौल डिटेल्स निकाली. उस में अर्चिता के मोबाइल काल डिटेल में आखिरी नंबर किसी एलिना का था, जिस का नाम उस की कौंटेक्ट लिस्ट में दर्ज था. एलिना से फोन पर बातचीत कर पुलिस ने उसे भगवती फार्महाउस में मिले एक महिला के शव और उस के पास से बरामद अर्चिता अरोड़ा के आधार कार्ड की बाबत जानकारी दी.

कौल डिटेल्स से यह भी पता चला कि अर्चिता की हत्या में पकड़े गए आरोपी चंचल कुमार से एक साल से संबंध थे. वह अकसर मेरठ आतीजाती रहती थी. हर बार उस के नाम पर एक रात या दिन के लिए अविका होटल का रूम बुक होता था. कौल डिटेल्स में चूंकि अर्चिता की आखिरी बार 20 फरवरी, 2026 को एलिना से बात हुई थी. पुलिस ने एलिना से अनुरोध किया कि वह अर्चिता के शव की पहचान करें.

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रेंस करते पुलिस अधिकारी

एलिना चूंकि चंडीगढ़ में रहती थी, इसलिए 25 फरवरी को मवाना थाने के एक एसआई सुमित कुमार ने एलिना से संपर्क किया. उन्होंने अर्चिता के शव के हर ऐंगल की फोटोग्राफ एलिना को दिखाई तो एलिना ने खुलासा हुआ कि मृतका अर्चिता अरोड़ा नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है. एलिना के इस खुलासे के बाद अचानक पूरे केस की थ्योरी ही बदल गई. एलिना ने बताया कि मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना तुर्कमेनिस्तान में रहती है. एलिना ने एसआई सुमित कुमार से ली गई फोटो मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना को भेजी.

मम्मी ने भी ईयरिंग, ब्लैकटौप और शरीर पर बने टैटू के आधार पर उस की पहचान अपनी बेटी मुहब्बत के रूप में की. उन्होंने एसआई सुमित कुमार से वीडियो कौल पर बातचीत में बताया कि मुहब्बत करीब 15 साल पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत आई थी और कथित रूप से दलालों के चंगुल में फंस गई थी. दलालों ने उस का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया और उन्होंने उसे नौकरी की जगह उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया.

एसएसपी अविनाश पांडेय

मुहब्बत ने अपनी पहचान के लिए दलालों के जरिए अर्चिता अरोड़ा के नाम पर आधार कार्ड बनवा लिया, लेकिन उस पर फोटो मुहब्बत का ही लगा था. मां नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना ने यह भी खुलासा किया कि मुहब्बत भारत में जिस्मफरोशी का काम कर रही थी. पासपोर्ट पर भी उस का नाम मुहब्बत नाजमुदिनोवा था, जोकि तुर्कमेनिस्तान की नागरिक थी. मुहब्बत लगभग 15 साल से भारत में रह रही थी. एसआई सुमित कुमार से बातचीत के बाद मुहब्बत की मम्मी ने भारत में रहने वाली अपनी दोस्त उज्बेकिस्तान की रहने वाली कलिचेवा अजीजा फैजुलेवना से बातचीत की. वह भी चंडीगढ़ में रहती थी.

सीओ पंकज उस ने जब भार लवानिया

अजीजा ने वीडियो कौल पर मुहब्बत की मम्मी से बातचीत की. अजीजा एलिना को साथ ले कर 25 फरवरी को मवाना थाने पहुंची. उस ने जांच अधिकारी पूनम जादौन, सीओ पंकज लवानिया और उस के बाद एसपी (देहात) अभिजीत कुमार से मुलाकात और बातचीत की.  दूसरी तरफ मुहब्बत की मम्मी गुलनारा ने तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को एक पत्र भेज कर बताया कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि खुद भारत आ सकूं. उस ने अजीजा के जरिए तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को यह लेटर भेजा, ताकि उस की गैरमौजूदगी में अजीजा ही पुलिस से संपर्क कर सके.

एसएचओ पुनम जादौन

गुलनारा ने दावा किया कि मृतका भारतीय नहीं, बल्कि उस की बेटी मुहब्बत है. एलिना और अजीजा के पुलिस से संपर्क करने तथा तुर्कमेनिस्तान एंबेसी के हस्तक्षेप के बाद मवाना पुलिस पूरी तरह ऐक्टिव हो गई. सीओ पंकज लवानिया को विश्वास हो गया कि अब कथित अर्चिता अरोड़ा की सही पहचान हो जाएगी. इस दौरान एंबेसी की मदद से पुलिस को मुहब्बत के पासपोर्ट की कौपी भी मिल गई. इसलिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय को पासपोर्ट और केस की डिटेल भेज दी है और अर्चिता उर्फ मुहब्बत का डीएनए टेस्ट कराने के लिए उस की मम्मी को एक अनुरोध पत्र भी भेज दिया.

पूछताछ में पता चला कि मृतका अर्चिता अरोड़ा का जन्मस्थान भले ही तुर्कमेनिस्तान था, लेकिन उस के पापा सरबजीत अरोड़ा भारत के ही निवासी हैं. जबकि मम्मी तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली थी. इसीलिए उस ने जब भारत आने पर अपना आधार कार्ड बनवाया तो उस में अपनी पहचान अर्चिता अरोड़ा के रूप में दी. पुलिस ने अर्चिता उर्फ मुहब्बत की हत्या और उस की पहचान की गुत्थी एक तरह से सुलझा ली थी.

लेकिन इस मामले की तह में एक बड़े ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट के जुड़े होने की बू आ रही थी. क्योंकि अर्चिता उर्फ मुहब्बत ही नहीं, देश में ऐसी बहुत सारी विदेशी महिलाएं हैं, जिन के पास भारत में फरजी पहचान पत्र हैं. फरजी आधार कार्ड तो हैं, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है. UP Crime News

 

 

 

Suspense Story: परफेक्ट मर्डर

Suspense Story: संविधा कोई साधारण नहीं, बल्कि खूबसूरती की ऐसी मूरत थी कि जो भी उसे देखता तो देखता ही रह जाता था. इस के विपरीत उस ने शादी कुरूप युवक हेमंत जोशी से की थी. दोनों की गृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी कि इसी बीच उन्हीं की सोसायटी में रहने वाले शरद दीवान नाम के व्यक्ति ने संविधा का परफेक्ट तरीके से मर्डर कर दिया. कौन था शरद दीवान और उस ने खूबसूरत अप्सरा संविधा का मर्डर क्यों किया?

अहमदाबाद के थाना नरोडा में तब सन्नाटा सा पसर गया, जब हेमंत जोशी ने एसआई हर्षद जाडेजा के सामने चीखते हुए कहा, ”मैं कल दोपहर से इस थाने के चक्कर काट रहा हूं, एक आप हैं कि मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे. कल सुबह से लापता हुई मेरी पत्नी आज तक नहीं लौटी. प्लीज साहब, कम से कम आप मेरी बात सुन तो लीजिए.’’

थाने में हेमंत की बात कोई सुनने के बजाय पुलिसकर्मी उस का मजाक उड़ा रहे थे. हेमंत ने एक बार फिर विनती करते हुए कहा, ”प्लीज सर, मैं आप से हाथ जोड़ कर रिक्वेस्ट कर रहा हूं. संविधा का पता लगा दीजिए. कहीं वह किसी मुसीबत में न हो?’’

”देखो भाई, पहली बात तो यह है कि अभी तुम्हारी पत्नी को घर से गए 24 घंटे भी नहीं हुए हैं. 24 घंटे पूरे होने के बाद ही हम तुम्हारी रिपोर्ट दर्ज कर के उस की तलाश शुरू करेंगे. कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारी पत्नी तुम से परेशान हो कर किसी के साथ भाग गई हो.’’ एसआई हर्षद जाडेजा ने हैडकांस्टेबल जिग्नेश पटेल की ओर देखते हुए कहा.

”सर, मैं एक बार आप से फिर कह रहा हूं, संविधा मेरे साथ बहुत खुश थी. हम दोनों में आज तक कभी कोई झगड़ा तक नहीं हुआ. ऐसे में वह मुझ से परेशान हो कर किसी के साथ क्यों भागेगी.’’ हेमंत हाथ जोड़ कर थोड़ी ऊंची आवाज में बोला.

”इतनी ऊंची आवाज में क्यों बोल रहा है भाई?’’ थोड़ी दूर पर बैठे एक सिपाही ने कहा.

”सौरी सर, आप लोग वह काम कीजिए, जिस काम के लिए मैं आया हूं. आप लोग हमारे व्यक्तिगत जीवन को बीच में क्यों ला रहे हैं?’’ हेमंत ने कहा.

”ऐसे मामलों में ऐसा ही होता है, जब दोनों में से कोई एक घर छोड़ कर चला जाता है. तुम खुद को देखो और अपनी पत्नी को देखो. ऐसे में वह भागेगी नहीं तो और क्या करेगी.’’ एसआई जाडेजा ने हंसते हुए कहा.

”अगर ऐसी कोई बात होती तो पहली बात तो वह मुझ से शादी ही न करती. फिर किसी कारणवश कर भी लेती तो पहले ही छोड़ कर चली गई होती. अब तो 2 बच्चे भी हो गए हैं.’’ हेमंत जोशी ने कहा.

”थोड़ी देर से अक्ल आई होगी. सर, मेरी तो समझ में यही नहीं आ रहा है कि इतनी खूबसूरत औरत ने 10 साल इस तरह की शक्लसूरत वाले आदमी के साथ कैसे बिता दिए.’’  कह कर हैडकांस्टेबल जोर से हंसा.

”तब न सही, अब मिल गया होगा बेचारी को उसे वह सुख देने लायक होगा, जो पति नहीं दे सका. इसलिए भाग गई.’’ एसआई जाडेजा ने कहा तो हेमंत को इन पुलिस वालों पर गुस्सा तो बहुत आया, पर वह मजबूर था. घर पर उस के 2 छोटेछोटे बच्चे इंतजार कर रहे थे.

वह तेजी से पलटा और दरवाजे की ओर बढ़ा. तभी एसएचओ मनोहर सिंह झाला ने थाने में प्रवेश किया. हेमंत के चेहरे को ही देख कर उन्होंने भांप लिया था कि इस आदमी के साथ कुछ गड़बड़ है. हेमंत को पीछे आने का इशारा कर वह अपने चैंबर की ओर बढ़े. एसएचओ को देख कर पूरे स्टाफ ने उन्हें सैल्यूट किया. अंदर अपनी कुरसी पर बैठ कर एसएचओ मनोहर सिंह ने हेमंत को सामने पड़ी कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए पूछा, ”कहिए, क्या बात है? आप काफी परेशान लग रहे हैं?’’

”जी सर, मेरी वाइफ कल दोपहर को घर से निकली है तो अभी तक लौट कर नहीं आई है. थाने में गुमशुदगी तो दर्ज कर ली गई है, पर कोई काररवाई नहीं हो रही है. सभी कह रहे हैं कि जो कुछ भी होगा 24 घंटे बाद ही होगा. सर, उसे तलाशने के बजाय यहां पर सभी मेरा और मेरी पत्नी का मजाक ऊपर से उड़ा रहे हैं.’’ बड़ी विनम्रता से हेमंत ने कहा.

”आप का नाम?’’ एसएचओ ने पूछा.

”हेमंत जोशी.’’

”रहते कहां हो?’’

”सर, हरियाली सोसायटी में.’’

”करते क्या हो?’’

”जी, एक मशीन बनाने वाली कंपनी में सुपरवाइजर हूं.’’

”रिपोर्ट तो दर्ज हो ही चुकी है. ऐसा करो, अपनी पत्नी की एक फोटो दे दो. मैं देखता हूं, क्या हो सकता है.’’ थानाप्रभारी ने कहा.

”सर, एक फोटो मैं दरोगाजी को दे चुका हूं,’’ उस ने शर्ट की जेब से पत्नी की एक फोटो निकाल कर एसएचओ को भी दी.

पलभर वह उस फोटो को देखते ही रह गए. फिर उन्होंने पूछा, ”यह तुम्हारी पत्नी की ही फोटो है?’’

”सर, कहीं आप भी तो वही नहीं सोच रहे हैं, जो बाकी लोग सोच रहे हैं कि इस लंगूर के हाथ यह हूर की परी कैसे लग गई.’’ हेमंत ने कहा.

”बात तो तुम ने सही कही, पर मैं ने अभी तक तो यह नहीं सोचा. फिर भी वाकई तुम्हारी पत्नी बहुत सुंदर है. इस के साथ कुछ भी हो सकता है. बहरहाल, मुझ से जो भी हो सकेगा, मैं वह करूंगा. पूरी कोशिश करूंगा कि तुम्हारी पत्नी तुम्हें मिल जाए.’’ कह कर एसएचओ ने हेमंत की पत्नी की फोटो अपने मोबाइल से खींच ली.

हेमंत उठने लगा तो उन्होंने कहा, ”अपना और अपनी पत्नी का मोबाइल नंबर तो लिखवा दो. तुम्हारी पत्नी तो अपना मोबाइल ले कर गई होगी.’’

”जी नहीं, वह अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ गई है.’’ कह कर हेमंत ने अपना और संविधा का मोबाइल नंबर एसएचओ को लिखवा दिया. उस के बाद वह उन से अनुमति ले कर बाइक से घर की ओर चल पड़ा.

रास्ते में आते हुए उस के दिमाग में पुरानी बातें घूमने लगीं. पौलीटेक्निक करने के बाद हेमंत जोशी को एक मशीन बनाने वाली कंपनी में नौकरी मिल गई तो उस के लिए रिश्ते आने लगे थे. वैसे तो उस के पास सब कुछ था, पर उस की शक्लसूरत ऐसी थी कि जल्दी कोई उसे पसंद ही नहीं करता था. पर संयोग से हेमंत को ऐसी खूबसूरत पत्नी मिली कि देखने वाले दांतों तले अंगुली दबा लेते थे. उसे शादी वाला दिन याद आ गया था. जब संविधा को देख कर उस के दोस्त हैरान रह गए थे. उस के दोस्तों ने उसे ताना मारते हुए कहा भी था कि उस की तो लौटरी लग गई. कहां कोई लड़की उसे पसंद ही नहीं कर रही थी और अब लंगूर के हाथ हूर की परी लग गई.

तभी संजय ने कहा, ”कुछ तो गड़बड़ है, तभी तो इतनी सुंदर भाभीजी ने इस लंगूर को गले लगाया है.’’

यह सुन कर हेमंत का खून खौल उठा था, क्योंकि उस ने सीधे उस की पत्नी पर लांछन लगाया था. हेमंत उठ कर संजय का कौलर पकडऩा चाहता था. पर संविधा ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ”छोडि़ए न, जिसे जो कहना है, कहने दीजिए. आप शांति से बैठिए.’’

संविधा के यह कहने पर हेमंत शांति से बैठ गया था. सुहागरात को जब हेमंत कमरे में आया तो उस के दिमाग में दोस्तों द्वारा कही बातें गूंज रही थीं. कमरे में आ कर वह संविधा के पास पलंग पर बैठने के बजाय खिड़की के पास जा कर खड़ा हो गया. उस के इस व्यवहार से संविधा घबरा गई. पलंग से उठ कर वह उस के पास जा कर बोली, ”क्या बात है, आप ठीक तो हैं न? मुझ से कोई गलती हो गई क्या?’’

पलट कर हेमंत ने संविधा की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ”संविधा, अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछूं?’’

संविधा ने मुसकराते हुए कहा, ”भला आप की बात का क्यों बुरा मानूंगी. आप को जो पूछना हो, पूछिए.’’

”आप इतनी खूबसूरत हैं. आप को तो कोई भी हैंडसम लड़का मिल सकता था. फिर आप ने मुझ से क्यों शादी की?’’

”आप हैंडसम नहीं हैं क्या?’’ हेमंत के करीब आ कर संविधा ने कहा.

”संविधा, मैं ने जो पूछा है, यह उस का जवाब नहीं है.’’

”खूबसूरती की परिभाषा सभी की अलगअलग होती है. कुछ लोगों को शरीर की खूबसूरती पसंद होती है तो कुछ लोग मन की खूबसूरती देखते हैं. मन की खूबसूरती ही, असली खूबसूरती है. शरीर की खूबसूरती तो सिर्फ देखने के लिए होती है. आप का मन खूबसूरत है, इसलिए मैं ने आप को चुना.

”पिछले साल आप ने अपनी बुआ की बेटी की शादी में जिस तरह मदद की थी, उस के बारे में जान कर लगा कि आप मन से बहुत दयालु हैं. इसलिए जब आप की बुआ ने आप के रिश्ते की बात की तो मैं मना नहीं कर सकी. क्योंकि आप जैसा सुलझा और समझदार पति जिसे मिल जाए, वह भाग्यशाली ही होगा.’’ संविधा बोली.

हेमंत ने गौर से संविधा को देखते हुए पूछा, ”आप पर किसी तरह का दबाव या मजबूरी तो नहीं थी न?’’

”दबाव था तो नहीं, पर अब है कि जिस का मन इतना खूबसूरत है, उस का प्यार करने का अंदाज कितना खूबसूरत है.’’ संविधा ने प्यार से मुसकराते हुए कहा.

हेमंत ने मुसकराते हुए संविधा को सीने से लगा लिया और फिर दोनों एकदूसरे में समा गए.

संविधा ने जैसे हेमंत की जिंदगी ही बदल दी थी. उस के प्यार ने हेमंत को जैसे एक नई दिशा दी थी. हेमंत जो अपनी शक्लसूरत की वजह से लोगों के बीच जाने से बचता था, अब वह बेझिझक लोगों के बीच आताजाता था. हालांकि उस की हंसी उड़ाने वाले अभी मौका नहीं छोड़ते थे. इस की सब से बड़ी वजह थी संविधा की खूबसूरती, जो उस के जाननेपहचानने वालों को अभी भी नहीं पच रही थी. पर अब इस बात को ले कर उस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

समय के साथ उस के घर 2 बच्चे पैदा हुए, बड़ी बेटी निकिता और छोटा बेटा नीतेश. दोनों ही बच्चे अपनी मम्मी पर गए थे, इसलिए वही नहीं, पूरा परिवार खुश था कि अच्छा हुआ कोई बच्चा हेमंत को नहीं पड़ा. दुनिया कुछ भी कहती रही हो, पर संविधा की समझदारी की वजह से सब बढिय़ा चल रहा था. आज भी लोग हेमंत को उस की पत्नी की खूबसूरती को ले कर ताने मारते थे और मजाक उड़ाते थे, पर अब वह खुश रहता था. किसी की बात को दिल पर नहीं लेता था.

पर उस की इस खुशी को न जाने किस की नजर लग गई. एक दिन संविधा घर से तैयार हो कर निकली तो लौट कर नहीं आई. दोपहर से ही हेमंत ने उस की तलाश शुरू कर दी, पर कहीं कोई पता नहीं चला. हेमंत ने तुरंत थाने जा कर उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा दी थी कि पुलिस भी उस की तलाश में लग जाएगी तो जल्दी उस का पता चल जाएगा. उसे चिंता थी कि संविधा किसी मुसीबत में तो नहीं फंस गई है, क्योंकि समय बहुत खराब चल रहा है.

अब तक हेमंत घर पहुंच गया था. दोनों बच्चे उसी का इंतजार कर रहे थे. पत्नी के गायब होने के बाद उस ने पेरेंट्स को भी फोन कर के बुला लिया था. दूसरी ओर इंसपेक्टर मनोहर सिंह झाला ने संविधा की गुमशुदगी को गंभीरता से लिया था. उन्होंने अपने स्टाफ के उन लोगों को खूब खरीखोटी सुनाई थी, जिन्होंने हेमंत की हंसी उड़ाई थी. औफिस का काम निपटा कर वह महिला सिपाही जयंती मेहता को साथ ले कर संविधा की गुमशुदगी वाले मामले की जांच के लिए निकल पड़े थे.

जब वह कृष्णानगर स्थित हरियाली सोसायटी के गेट पर पहुंचे तो गेट के बगल में स्थित किराने की दुकान के सामने गाड़ी रोक दी. गाड़ी से उतर कर वह जयंती के साथ किराने की दुकान पर पहुंचे तो पुलिस वालों को देख कर दुकानदार थोड़ा घबरा गया. इंसपेक्टर झाला ने मोबाइल में संविधा का फोटो दिखाते हुए पूछा, ”इन्हें पहचानते हो?’’

”जी सर, यह इसी सोसायटी में रहने वाली संविधा मैडम हैं. हेमंत जोशी की पत्नी.’’

”इन्हें आखिरी बार कब देखा था?’’ इंसपेक्टर झाला ने पूछा.

दुकानदार पहले ही घबराया था. इस सवाल पर वह डर गया. माथे पर आए पसीने को पोंछते हुए उस ने कहा, ”परसों सुबह, मैडम दुकान पर सामान लेने आई थीं.’’

”कितने बजे आई थी?’’ इंसपेक्टर ने अगला सवाल किया.

”यही कोई 10 बजे के आसपास. कुछ सामान खरीदना था, जिसे बंधवा कर रख गई थीं. थोड़ी देर बाद ले जाने के लिए कहा था.’’

”इस का मतलब वह कहीं बाहर जा रही थीं. वह अकसर इसी तरह सामान बंधवा कर रख जाती थीं?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

”सर, ऐसा लगभग सभी करते हैं. सामान बंधवा कर हम से पहुंचाने के लिए कह देते हैं. जब समय मिलता है, हम सामान पहुंचा देते हैं.’’ दुकानदार ने कहा.

दुकानदार के यह कहने पर जयंती ने मुसकराते हुए पूछा, ”क्या आप सभी के घर सामान पहुंचाने जाते हैं?’’

इंसपेक्टर झाला और दुकानदार जयंती की ओर देखने लगे. जयंती की इस बात पर जहां इंसपेक्टर झाला को हंसी आ गई थी, वहीं दुकानदार झेंप गया था. इस की वजह यह थी कि दुकानदार काफी मोटा था. जयंती ने विनम्रता से कहा, ”आप मेरी बात का बुरा मत मानना. मेरे कहने का मतलब यह है कि आप ने सामान पहुंचाने के लिए कोई लड़का रखा है?’’

”जी, एक लड़का है मगन. वह अभी किसी का सामान पहुंचाने गया है, पर देखो तो अभी लौट कर नहीं आया है. इस की बड़ी खराब आदत है, जहां जाता है, वहीं का हो कर रह जाता है. उस की बातें ही नहीं खत्म होतीं.’’ दुकानदार ने घड़ी की ओर देखते हुए कहा.

”उस की उम्र कितनी होगी?’’ जयंती ने पूछा.

”यही कोई 25 साल.’’ दुकानदार ने कहा.

”अच्छा, यह बताओ कि जब संविधा मैडम सामान लेने नहीं आईं तो तुम्हें अजीब नहीं लगा? फिर तुम ने क्या किया?’’ इंसपेक्टर झाला ने पूछा.

”सर, अजीब तो लगा था. क्योंकि वह जितनी देर में आने को कह कर जाती थीं, उस से पहले ही आ जाती थीं. पर जब कल वह नहीं आईं तो मैं ने सामान उन के पति हेमंतभाई को पकड़ा दिया था.’’

”इस का मतलब सामान हेमंत ले गए. क्या वह रोज दोपहर को घर आते हैं?’’ इंसपेक्टर झाला ने पूछा.

”नहीं सर, कल संविधा मैडम नहीं आई, इसलिए हेमंत सर घर आए होंगे.’’ दुकानदार ने बताया.

”मैडम नहीं आईं तो तुम ने उन्हें बताया था?’’

”नहीं सर, शायद मोनिका मैडम ने बता कर बुलाया होगा.’’ दुकानदार ने कहा.

”यह मोनिका कौन हैं?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

”सर, उन्हीं की लाइन में 2 घर छोड़ कर रहती हैं. दोनों परिवारों में खूब पटती है.’’

”ठीक है, और कुछ पूछना होगा तो फिर तुम्हारे पास आऊंगा.’’ कह कर इंसपेक्टर झाला सोसायटी के गेट की ओर बढ़ गए. 5 मिनट बाद वह हेमंत के घर के सामने खड़े थे.

घंटी बजाई तो दरवाजा हेमंत ने ही खोला. हेमंत का घर काफी सुंदर और सजा हुआ था. हर चीज बहुत व्यवस्थित ढंग से रखी थी. जयंती ने तारीफ करते हुए कहा, ”संविधा ने घर को बड़ी खूबसूरती से सजाया है.’’

”संविधा को इन चीजों का बहुत शौक था,’’ हेमंत ने कहा.

”हेमंतजी, आप को किस ने बताया कि संविधा घर लौट कर नहीं आई है, जिस की वजह से तुम्हें दोपहर को घर आना पड़ा?’’ इंसपेक्टर झाला ने पूछा.

”पड़ोस में रहने वाले मोनिका और शरद से हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं. हमारे और उन के बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, इसलिए मोनिका और संविधा साथ ही बच्चों को लेने स्कूल जाती हैं. उस दिन घर पर ताला लगा देख कर मोनिकाजी अकेली ही चली गईं. स्कूल की छुट्टी हुए घंटों बीत गए और संविधा नहीं आई तो मोनिकाजी ने मुझे फोन किया.’’ हेमंत ने उस दिन जो हुआ था, जानकारी दी.

”हेमंत क्या हम मोनिका और शरद से मिल सकते हैं?’’ इंसपेक्टर झाला ने कहा तो हेमंत ने तुरंत मोनिका और शरद को बुलाने के लिए बेटी को भेज दिया.

घर में तमाम फोटो लगे थे. जयंती वे फोटो देख रही थी. संविधा सचमुच बहुत खूबसूरत थी. हर फोटो में उस का चेहरा कुछ अलग ही चमक रहा था. फोटो से ही लग रहा था कि वह एक जिंदादिल महिला थी. जयंती ने थोड़ीबहुत पूछताछ हेमंत के बच्चों से की. उन से पूछताछ करने की वजह यह थी कि हेमंत पत्नी पर शक तो नहीं करता था और इस बात को ले कर दोनों में झगड़ा होता रहा हो. पर बच्चों ने उस के सवालों के जो जवाब दिए, उस से उसे लगा कि ऐसा कुछ भी नहीं था.

शरद और मोनिका आ गए थे. उन के साथ उन के बच्चे भी थे. मोनिका सामान्य कदकाठी वाली महिला थी. सांवला रंग, तीखे नैननक्श, लंबे बाल और वजन भी शरीर के हिसाब से ठीक ही लग रहा था. न वह मोटी थी और न ही छरहरी. उस का पति शरद दीवान लंबातगड़ा, सुगठित शरीर और साफ रंग का काफी हैंडसम था. उसे देख कर लग रहा था कि वह कहीं जाने की तैयारी में था. मोनिका और शरद के आते ही हेमंत ने कहा, ”सर, यह हमारे पड़ोसी शरद दीवान और यह उन की पत्नी मोनिकाजी हैं.’’

मोनिका और शरद ने हाथ जोड़ कर इंसपेक्टर मनोहर सिंह झाला और जयंती चौधरी को नमस्ते किया. इंसपेक्टर झाला ने दोनों को गौर से देखते हुए कहा, ”मैं आप लोगों का थोड़ा समय लूंगा. संविधा के गायब होने के सिलसिले में.’’

”सर, पहले से पता होता तो मैं आज मीटिंग का कार्यक्रम ही न बनाता. पर अब तो जाना ही पड़ेगा. फिर भी आप जो पूछना चाहते हैं, पूछ लीजिए.’’ शरद ने अपनी समस्या बताते हुए कहा.

”जिस दिन संविधा गायब हुई थी, आप कितने बजे घर आए थे?’’ इंसपेक्टर झाला ने पूछा.

”सर, इन लोगों ने मुझे शाम 5 बजे फोन किया था. उस के तुरंत बाद मैं औफिस से निकल गया था और पौने 6 बजे घर आ गया था.’’ शरद ने कहा.

”घर आ कर आप ने क्या किया?’’

”घर आते ही मैं हेमंत के साथ संविधा की तलाश में लग गया था. इन्होंने अपने सारे रिश्तेदारों और संविधा के परिचितों तथा सहेलियों को फोन कर ही लिया था. इसलिए हम दोनों पहले थाने गए. वहां संविधा के गायब होने की सूचना दे कर उस की तलाश में लग गए. पूरी रात हम दोनों इधरउधर दौड़ते रहे.’’ शरद ने कह कर हेमंत की ओर देखा तो उस ने हां में सिर हिलाते हुए कहा, ”जी सर, शरद और मोनिका ने मेरी मदद ही नहीं की, बल्कि मुझे और बच्चों को संभाला भी.’’

”ठीक है शरदजी, अब आप जा सकते हैं,’’ इंसपेक्टर झाला ने कहा.

”मोनिकाजी, पता चला है कि आप संविधा की बहुत अच्छी सहेली थीं?’’ इस बार सवाल कांस्टेबल जयंती मेहता ने किया था.

”जी, हम दोनों का रिश्ता बहन जैसा था. इसीलिए हम दोनों एकदूसरे के पति को जीजू कहते थे. हम दोनों हर त्योहार एक साथ मनाते थे. कहीं बाहर जाना होता था तो साथ ही जाते थे,’’ मोनिका ने कहा.

”तब तो शौपिंग भी साथसाथ करती रही होंगीं?’’

”जी हां, हम शौपिंग भी साथ ही करते थे,’’ मोनिका ने कहा.

”यह बात मैं ने इसलिए पूछी थी कि आप के कानों में जो झुमके हैं, वे संविधा की फोटो वाले झुमके से हूबहू मिलते हैं.’’ जयंती ने कहा तो मोनिका थोड़ा झेंप गई.

मोनिका के झुमकों को देख कर जयंती की नजरें ठिठक गईं. उस ने सहज स्वर में कहा, ”आप कह रही थीं कि ये झुमके आप ने बाजार से खरीदे हैं?’’

मोनिका ने मुसकराते हुए कहा, ”जी हां, बस यूं ही पसंद आ गए थे.’’

”कब खरीदे?’’

”यही… 2-3 दिन पहले.’’

इंसपेक्टर मनोहर सिंह झाला ने हलकी मुसकान के साथ जयंती की ओर देखा. दोनों को अब यह समझ में आ गया था कि कुछ न कुछ तो छिपाया जा रहा है.

”ठीक है,’’ इंसपेक्टर बोले, ”अगर कुछ और याद आए तो बताइएगा. वैसे आप दोनों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, संविधा जरूर मिल जाएगी.’’

जयंती ने शरद और मोनिका के बच्चों से भी बातचीत करतेकरते थोड़ीबहुत जानकारी ले ली थी. मोनिका के बच्चों ने बताया था कि संविधा आंटी और उन के पापा में खूब पटती थी. संविधा जब भी उन के घर आती थीं, पापा उन के पास ही बैठे रहते थे. उन से खूस हंसहंस कर बातें करते थे. मोनिका ने राहत की सांस ली. पर उस की आंखों में एक पल के लिए जो डर झलका था, उसे जयंती ने साफ भांप लिया था.

अगले दिन सुबहसुबह थाना नरोडा पुलिस को फोन द्वारा सूचना मिली थी कि शहर के बाहर बहने वाले नाले के किनारे की झाडिय़ों में किसी महिला का शव पड़ा है. वह इलाका थाना नरोडा के अंतर्गत ही आता था.  इंसपेक्टर झाला महिला सिपाही जयंती एवं कुछ अन्य सिपाहियों को साथ ले कर फौरन मौके पर जा पहुंचे थे. शव की हालत देख कर ही लग रहा था कि इस की मौत लगभग 3 दिन पहले हुई थी. चेहरा सूजा हुआ था, पर पहचान में आ रहा था. वह संविधा की लाश थी.

हेमंत को जब यह खबर दी गई तो वह बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़ा. दोनों बच्चे फूटफूट कर रोने लगे थे. पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर हेमंत और उस के बच्चों को सांत्वना दे कर घर भेजा. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल की जांच कर के जरूरी सबूत जुटा लिए थे. फोरैंसिक टीम को घटनास्थल पर जूतों के निशान के अलावा कार के पहियों के भी निशान मिले थे. इंसपेक्टर झाला को अब यह मामला मिसिंग का नहीं, बल्कि हत्या का लग रहा था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया था कि संविधा की मौत गला दबाने से हुई थी. जब उसे मारा गया था, समय दोपहर के 2 से 3 बजे के बीच का था. मजे की बात यह थी कि उस के शरीर पर किसी भी तरह के संघर्ष का कोई निशान नहीं था.

इस का मतलब था कि संविधा उस व्यक्ति को जानती थी, जिस ने उसे गला दबा कर मारा था. पुलिस की जांच शुरू हुई. संविधा का मोबाइल घर पर ही मिला था. इस के अलावा हेमंत के घर एक बटन वाला मोबाइल भी मिला था. इंसपेक्टर झाला ने संविधा के दोनों मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि संविधा के उस छोटे वाले मोबाइल से सिर्फ एक ही नंबर पर बात होती थी. इंसपेक्टर झाला ने जब उस नंबर के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह नंबर शरद का था. इस के बाद उन्हें संविधा की हत्या का रहस्य खुलता नजर आया.

उन्होंने शरद के मोबाइल की काल डिटेल्स और लोकेशन निकलवाई. जांच में पता चला कि वह नंबर शरद के नाम पर नहीं, बल्कि उस की पत्नी मोनिका के भाई विक्रम के नाम पर था, लेकिन उस का उपयोग शरद ही कर रहा था.

अब शक की सुई सीधे मोनिका और शरद की ओर घूम गई. इंसपेक्टर झाला ने दोनों को थाने बुलाया. उन्होंने शरद से पूछा, ”शरदजी, आप के दोस्त की पत्नी की हत्या हो गई है. आप ने बताया था कि आप उस की तलाश में रात भर हेमंत के साथ थे?’’

”जी हां सर, मैं उन के साथ ही था.’’

”तो फिर आप यह बताइए कि आप की लोकेशन उस दिन दोपहर सवा 2 बजे शहर के बाहर बहने वाले नाले के पास की क्यों थी?’’

शरद के चेहरे का रंग उड़ गया था. उस ने हकलाते हुए कहा, ”वह तो बस ऐसे ही. मैं उधर से गुजर रहा था तो मैं वहां पान खाने के लिए रुक गया था.’’

”पान खाने के लिए नहीं रुके थे शरद, आप के जूतों के निशान भी लाश के पास मिले हैं. यही नहीं, आप की कार के टायरों के निशान भी वहां मिले हैं.’’

शरद के पसीने छूट गए. जयंती ने हाथ में थामी फाइल बंद करते हुए कहा, ”आप का झूठ बोलना बेकार है. जो भी है, सचसच बता दो.’’

फिर पूछताछ शुरू हुई. शुरू में शरद ने कुछ नहीं कहा. लेकिन जब पुलिस ने मोनिका के झुमके, विक्रम का मोबाइल नंबर और गली के एक बच्चे का बयान (जिस ने देखा था कि मनीष की गाड़ी उसी दिशा में गई थी). इस के अलावा एक सबूत और था.

दरअसल, जयंती जब संविधा के फोटो देख रही थी, तभी उस ने उस के कानों में जो झुमके देखे थे, उन में सामने की एक लटकन टूटी थी. मोनिका से बात करते समय वही झुमका उस ने उस के कान में देखा था. जबकि मोनिका उस समय वे झुमके नहीं पहने थी. ये सारे सबूत इंसपेक्टर झाला ने शरद दीवान के सामने रखे तो वह टूट गया. उस ने कहा, ”हां, मैं ने ही संविधा की हत्या की थी.’’

”क्यों?’’ इंसपेक्टर झाला ने पूछा.

”क्योंकि वह मुझे छोडऩा चाहती थी. कालेज के समय से हमारा रिश्ता था. हम दोनों विवाह करना चाहते थे, पर हम दोनों के ही घर वाले नहीं माने. हम दोनों ने अलगअलग विवाह तो कर लिया, पर एकदूसरे को भुला नहीं सके. संविधा ने हेमंत से इसलिए विवाह किया था, ताकि उसे पति से कभी प्यार न हो.

”उसे हेमंत से कभी प्यार नहीं रहा, पर वह प्यार करने का ऐसा दिखावा करती रही कि हेमंत को कभी उस पर शक नहीं हुआ. हेमंत यही समझता रहा कि उस के कुरूप होने के बावजूद वह उस से बहुत प्यार करती है.

”हम दोनों को मिलने में परेशानी न हो, इसलिए मैं ने हेमंत के घर के पास ही हरियाली सोसायटी में अपने लिए घर खरीदा था. हमें मिलने में परेशानी न हो, इसलिए मैं ने मोनिका से संविधा की दोस्ती करा दी थी.

”लेकिन इधर वह मिलने से कतराने लगी थी. जबकि मैं उस के बगैर अब रह नहीं सकता था. मैं उस से कहने लगा था कि वह हेमंत को छोड़ दे. जबकि उस का कहना था कि बच्चों के लिए वह हेमंत को नहीं छोड़ सकती.

”उस दिन सोसायटी से निकलने के बाद मैं संविधा को अपने नए फ्लैट पर ले गया. हम दोनों वहीं मिलते थे. वहां जब मैं ने उस से साथ आने के लिए कहा तो उस ने मना करते हुए कहा, ‘शरद, अब बहुत हो गया. तुम अपनी पत्नी के पास लौट जाओ.’

”उस की इस बात पर मुझे गुस्सा आ गया. मैं ने उसे बांहों में भर लिया. वह खुद को छुड़ाने लगी. जबकि उस समय मेरी इच्छा उस के साथ सैक्स करने की थी. जिस के लिए वह राजी नहीं थी.

”मैं ने उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. इसी कोशिश में उस का गला दब गया और उस की मौत हो गई. उस के बाद उस की लाश को ले जा कर वहां फेंक दिया, क्योंकि वह जगह सुनसान थी.

”हत्या जैसा अपराध मैं ने कभी किया नहीं, इसलिए मुझे बहुत डर लग रहा था. मैं जल्दी से जल्दी लाश से छुटकारा पाना चाहता था, इसलिए उस के शरीर के सारे गहने उतार कर शहर के बाहर बहने वाले नाले की किनारे की झाडिय़ों में फेंक दिए थे. उस समय वहां बनी झोपडिय़ों में रहने वाले मजदूर काम पर होते हैं. झोपडिय़ों में केवल बच्चे ही रहते हैं.’’

मोनिका, जो अब तक चुप बैठी थी, यह सब सुन कर फूट पड़ी, ”मैं सब जानती थी. पर मैं अपने बच्चों की खातिर चुप रही. संविधा ने मेरा घर तोड़ा, मेरा पति छीना… कुदरत का न्याय देखो, वही मारी गई.’’

इंसपेक्टर झाला ने दोनों को हिरासत में ले लिया. क्योंकि मोनिका ने संविधा की हत्या वाली बात छिपाई थी. थाने से लौटते समय झाला ने कहा, ”हेमंत जोशी को सबूत चाहिए था कि उस की पत्नी उसे छोड़ कर नहीं गई, बल्कि मारी गई. पर शायद यह सच्चाई उस के लिए और ज्यादा दर्दनाक होगी.’’

जयंती ने धीरे से कहा, ”सर, परफेक्ट मर्डर कोई नहीं होता. झूठ चाहे कितना भी सुंदर हो, सच की एक किरण उसे चीर ही देती है.’’

2 हफ्ते बाद हेमंत अपने बच्चों के साथ घर के बाहर खड़ा था. संविधा की तसवीर के आगे दीया जल रहा था. उस की आंखों में आंसू थे, पर चेहरे पर सुकून था. अब उसे किसी जवाब की तलाश नहीं थी, क्योंकि वह जान चुका था कि सच चाहे जितना भयानक हो, सत्य ही सब से बड़ा न्याय है. Suspense Story

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Maharashtra News: भट्ठी में भस्म की बीवी

Maharashtra News: गैरमर्द से संबंध रखने वाली पत्नी जब रिश्ते की मानमर्यादा को भूल जाए, तब पति का खून खौलना लाजिमी है. जैसा पुणे के समीर के साथ हुआ. टीचर पत्नी को लाख समझाया, लेकिन वह नाजायज रिश्ते के सुख में खोई रही. फिर रोंगटे खड़े कर देने वाला जो क्राइम हुआ, उस की तुलना ‘दृश्यम’ फिल्म से होने लगी. आखिर क्यों और कैसे हुआ यह सब? पढ़ें, इस क्राइम स्टोरी में…

महाराष्ट्र में पुणे के शिवने इलाके में रहने वाला एक गैराज व्यवसायी समीर पंजाबराव जाधव अपनी टीचर पत्नी अंजलि को पा कर बेहद खुश था. उस की खूबसूरती और लुभावनी अदाओं पर मानो वह मर मिटने को हमेशा तैयार रहता था. एक खुशहाल दंपति की तरह वह अपनी गुजरबसर कर रहे थे. दोनों अपनीअपनी कमाई से घर में सुखसंपति से खुशहाल थे. सब कुछ सही चल रहा था. श्री स्वामी संकुल अपार्टमेंट के बगल में 304 नंबर के प्लौट पर उन का ठिकाना था.

दोनों का एकदूसरे पर भरोसा भी गजब का था. उन के बीच किसी भी तरह की शिकवाशिकायत नहीं थी. किसी से कोई भूल हो जाने पर वे तुरंत सौरी बोल देते थे. रात के वक्त अंजलि बाथरूम में थी, तब उस के मोबाइल पर एक वाट्सऐप मैसेज को पढ़ कर समीर चौंक पड़ा था. लिखा था, ‘हाय! हैलो सैक्सी डार्लिंग! कैसी हो?’’

उस के बाद लगातर 3-4 इमोजी के मैसेज भी आए. वे दिल बने हुए थे. मैसेज करने वाले का टाइटल नाम ‘पाटिल’ था. इस मैसेज ने समीर के दिमाग में खलबली मचा दी थी. वह इसे ले कर तरहतरह की बातें सोचने लगा था. उस का दिमाग जितना गलत और बेबुनियादी बातें सोच सकता था, सोच चुका था.

अंजलि के बाथरूम से आते ही उस ने पूछा, ”ये पाटिल कौन है?’’

अचानक पाटिल का नाम सुनते ही अंजलि चौंक पड़ी. डाइनिंग टेबल पर रखे पानी का गिलास उठाती हुई बोली, ”कौन पाटिल? मैं किसी पाटिलवाटिल को नहीं जानती हूं.’’

”तो यह मैसेज भेजने वाला कौन बदतमीज है? अश्लील इमोजी भेज रहा है, प्यार की बातें लिख रहा है, तुम्हें सैक्सी बुला रहा है…’’ समीर मोबाइल का स्क्रीन दिखाते हुए तीखेपन के साथ बोला.

अंजलि ने उस के सवाल का जवाब देने से पहले अपना सवाल दाग दिया, ”तुम ने मेरा मोबाइल खोला कैसे? तुम्हें इस का पासवर्ड पता है? बहुत गलत बात है.’’ इसी के साथ उस ने अपना मोबाइल समीर के हाथ से एक झटके में छीन लिया.

वह दूसरे कमरे में जाने लगी तो समीर ने फिर पूछा, ”तुम ने जवाब नहीं दिया, मैं जानना चाहता हूं कि कौन है ये पाटिल?’’

अंजलि ने कोई जवाब नहीं दिया और उस की बात अनसुनी कर दूसरे कमरे में चली गई, जो उस का स्टडीरूम था. वहां जा कर उस मोबाइल को चार्ज करने के लिए लगा दिया और वहीं बैठ कर उस का पासवर्ड बदलते हुए भुनभुनाने लगी. उस की भुनभुनाहट से साफ जाहिर हो रहा था कि वह समीर से नाराज थी. वह वहीं बैठी रही. जबकि समीर उसे पुकारता रहा. अंत में उस ने मोबाइल देखने के लिए सौरी बोल कर बात को खत्म करने की कोशिश की.

थोड़ी देर में अंजलि उस के पास आई. धीमी आवाज में बोली, ”सौरी समीर, मैं ने तुम से तेज आवाज में बात की. मैं ने तुम पर शक किया. मेरे मोबाइल का मैसेज पढऩे पर नाराज हुई, जबकि तुम तो मेरे अपने हो, तुम्हारा तो मुझ पर पूरा हक है…मुझे माफ कर दो, प्लीज!’’ इसी के साथ वह समीर से लिपट गई. समीर ने भी अनमनेपन के साथ उसे अपनी बाहों में समेट लिया. दोबारा कोई सवाल नहीं किया और सीधा बैड पर सोने चला गया. अंजलि ने गहरी सांस ली. कमरे की लाइट बुझाई और समीर की बगल में आ कर लेट गई.

अगले दिन दोनों सुबह होते ही सामान्य दिनचर्या में लग गए. समीर अपने कामकाज में व्यस्त हो गया, जबकि अंजलि अपनी ड्यूटी पर चली गई. हालांकि समीर का काम में जरा भी मन नहीं लग रहा था. बारबार पाटिल का मैसेज उस के दिमाग में कौंध जाता था.

उस बारे में अंजलि से कोई जवाब नहीं मिल पाया था. जबकि वह जानना चाहता था कि पाटिल कौन हो सकता है, जिस ने उसे प्यार के इजहार के साथ अश्लील मैसेज भेजा था. समीर का मन अशांत था. पूरे दिन उधेड़बुन में लगा रहा कि अगर मैसेज अंजलि को परेशान करने के लिए किया गया था तो वह मैसेज करने वाले पर नाराज होने के बजाय उस के साथ क्यों उलझ गई? उस ने बात क्यों बदल दी?

उस रोज जब वे घर पर साथ थे, तब उन के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही थी. वे अपनेअपने काम में लगे हुए थे. अंजलि ने चुपचाप समीर के लिए खाना परोस दिया था. समीर भी खाना खाने के बाद सीधा बैडरूम में चला गया था. ऐसा लग रहा था, मानो वे एकदूसरे से कुछ बोलना चाह रहे हों, लेकिन बीते रात की पाटिल के मैसेज वाली बातों से दोनों के मन में अशांति बनी हुई थी. किसी तरह अंजलि ने ही चुप्पी तोड़ी, ”समीर, मुझे गलत मत समझना. मैं तुम्हारी हूं और सिर्फ तुम्हारी! वो पाटिल मेरे कालेज के जमाने का बौयफ्रेंड था. उसे न जाने कहां से मेरा नंबर मालूम हो गया.’’

”कोई बात नहीं, जो बीत गई सो बीत गई. भूल जाओ कल रात की बातें, तुम पर मुझे पूरा भरोसा है!’’ समीर ने यह कहते हुए एक तरह से अंजलि के बोझिल मन को हलका कर दिया था. जबकि सच तो यह था कि समीर का भारी मन भी हलका हो गया था. समीर जाधव और अंजलि जाधव की शादी 2017 में हुई थी. उन्होंने कोरोना के दौर में एकदूसरे का साथ दिया था और उन के बीच प्रेम और भी गहरा हो चुका था. पिछले दिनों समीर 44 और अंजलि 38 साल के हो चुके थे. उन के 2 बच्चे हैं. एक बच्चा तीसरी और दूसरा पांचवीं क्लास में पढ़ता है. औटोमोबाइल डिप्लोमा करने के बाद समीर ने एक गैराज खोल लिया था. जबकि अंजलि एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थी.

समीर जाधव

अंजलि द्वारा पाटिल के बारे में बताने पर समीर संतुष्ट तो हो गया था, लेकिन उस के दिमाग में वही बात घूमती रहती थी कि उस का पुराना प्रेमी फिर से हाजिर हो चुका है. इस का अंजाम एक न एक दिन उस के लिए नुकसानदायक हो सकता है. हालांकि दोनों के बीच पहले जैसी सहजता बन गई थी. उन की दिनचर्या सामान्य हो चुकी थी. किंतु जब कभी समीर अंजलि को अकेले में मोबाइल पर बातें करते हुए या फिर मैसेज देखते हुए पाता था, तब उस के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगता था.

एक सच तो यह भी था कि शादी के बाद समीर का भी किसी अन्य महिला से अफेयर चल रहा था, जिस से वह शादी करना चाहता था. इस कारण उस ने अंजलि के अफेयर के बहाने से एक योजना बनाई. उस ने अपनी पत्नी को ही रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. दीवाली की छुट्टी होने वाली थी. उस ने बच्चों को पैतृक गांव भेज दिया था. योजना के मुताबिक 26 अक्तूबर, 2025 को दोपहर के सवा 2 बजे के करीब समीर अंजलि को अपनी कार नंबर एमएच12 एफयू 0864 में बैठा कर घर से नांदेड सिटी के नवले पुल पर से मुंबई बेंगलुरु हाइवे से पहले खेड़ शिवापुर के घाट पर गया था. वहां पर दोनों ने कुछ देर बातें कीं. चहलकदमी करते हुए कुछ समय बिताया. उस के बाद समीर शाम के करीब 5 बजे ब्राउनस्टोन एयरडाइन रेस्टोरेंट, खेड शिवापुर के पास वाशरूम के लिए रुका.

उस के बाद पुणे के गोगल, शिंदेवाडी के एक होटल से समीर ने भेल खरीदी. फिर शाम के करीब साढ़े 7 बजे के आसपास वह अंजलि को ले कर गोगलवाड़ी वाले किराए पर लिए गए सूरज इंडस्ट्रीज के गोदाम में पहुंचा. अंदर जाते ही अंजलि ने पहले गोदाम देखा. वहीं एक साफ जगह पर समीर ने चटाई बिछाई. चटाई पर बैठ कर वे दोनों भेल खाने लगे. भेल खातेखाते उन के बीच बहस होने लगी. दरअसल, समीर ने अचानक पाटिल की चर्चा छेड़ दी थी. उस ने अंजलि को हिदायत दी कि वह उस से अपना संबंध तोड़ दे, वरना अंजाम बुरा होगा.

इस पर अंजलि ने कोई जवाब नहीं दिया. वह शांत बनी रही. लेकिन जब उस ने जुबान खोली, तब फिल्मी अंदाज में बोली, ”क्या करूं दिल है कि मानता ही नहीं.’’

यह सुनते ही समीर को गुस्सा आ गया. गुस्से में वह पत्नी अंजलि के साथ गालीगलौज करने लगा. उन के बीच बातों का जब सिलसिला शुरू हुआ, तब उन के प्रेम संबंध को ले कर तूतूमैंमैं होने लगी. उस वक्त गोदाम में उन दोनों के अलावा कोई और नहीं था. उन के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई. इसी दौरान समीर ने अंजलि का गला दबा दिया. समीर आक्रामक हो चुका था. उस ने तब तक गला दबाए रखा रखा, जब तक कि अंजलि की सांसें बंद नहीं हो गईं.

अंजलि के बेजान होने पर समीर थोड़ा सहम गया. थोड़ी दूर बैठ कर सोच में पड़ गया कि अब वह क्या करे? उस के हाथों पत्नी का खून हो चुका था. उस की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा था. जेल, उम्रकैद और फांसी का फंदा तक उस के खयाल में आने लगे थे. इसी के साथ बच्चों का चेहरा भी उस के दिमाग में घूमने लगा था. वह इस आरोप से बचने के उपाय सोचने लगा. उस के द्वारा कत्ल के बारे में किसी को भी पता नहीं था. वहां कोई चश्मदीद नहीं था. इस कारण वह कत्ल के सबूत मिटाने की तैयारी में लग गया.

हालांकि इस की कुछ तैयारी उस ने पहले से ही कर रखी थी. गोदाम में लोहे की एक भट्ठी बनवा रखी थी. उस ने भट्ठी में अंजलि की लाश को रख कर उसे सुलगा दिया था. भट्ठी में लकडिय़ां और पेट्रोल डाल कर लाश को राख होने तक जलाता रहा, ताकि कोई सबूत न बचे. बची राख को उस ने पास की नदी में बहा दिया. हत्या के बाद उस ने एक और चालाकी की. अंजलि के फोन से अपने ही एक दोस्त को ‘आई लव यू’ का मैसेज भेज दिया. फिर उसी फोन से खुद ही जवाब भी लिख दिया.

ऐसा कर उस ने यह दिखाने की कोशिश की कि अंजलि किसी और के साथ प्रेम संबंध में थी और हत्या की वजह उस का अफेयर है. वारदात को अंजाम देने के बाद उस ने अंजलि की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. वह 28 अक्तूबर, 2025 को अचानक वारजे पुलिस थाने पहुंच गया. पुलिस से अपनी पत्नी अंजलि जाधव के गुम हो जाने की बात कही. इधर पुलिस अंजलि को ढूंढने में लग गई. एसआई नितिन गायकवाड़ ने अपनी टीम के साथ अंजलि को खोजना शुरू किया. अंजलि को आखिरी बार श्रीराम मिसल हाउस, गोगलवाड़ी फाटा, शिंदेवाड़ी के आसपास देखा गया था. इसलिए मामला राजगढ़ पुलिस थाने में ट्रांसफर कर दिया. इधर समीर बारबार वारजे पुलिस स्टेशन जाने लगा.

वहां वह पत्नी के बारे में बारबार पूछने लगा. पुलिस को इस तरह बारबार पूछना संदिग्ध लगने लगा. डिप्टी कमिश्नर संभाजी कदम की देखरेख में पूछताछ और गुमशुदा की जांच शुरू हो चुकी थी. इस सिलसिले में जब पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो अंजलि आखिरी बार पति समीर के साथ ही नजर आई. कई राउंड की पूछताछ में समीर के बयान भी उलटेपुलटे थे. जब पुलिस ने सख्ती की तो समीर टूट गया और अपना अपराध कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि पत्नी की हत्या कर उस की लाश भी वह ठिकाने लगा चुका है. उसे इस का आइडिया ‘दृश्यम’ फिल्म से मिला था.

इस के लिए उस ने अजय देवगन की ‘दृश्यम’ 4 बार देखी थी. समीर ने यह भी कुबूल कर लिया कि उस ने जानबूझ कर गोगलवाड़ी इलाके में 18 हजार रुपए महीने पर किराए पर एक गोदाम लिया था. इस में एक लोहे का बौक्स ले जा कर रखा था, जिसे भट्ठी के रूप में इस्तेमाल किया गया. वहां उस ने पहले से ही पेट्रोल और लकडिय़ां इकट्ठा कर रखी थीं. नितिन शिवाजी गायकवाड़ ने सरकार की ओर से पुलिस थाने में बीएनएस की धारा 103, 238 के तहत फरियाद दर्ज कर कानूनी रूप से समीर पंजाबराव जाधव को हिरासत में लिया.

समीर जाधव ने जिस जगह पत्नी का कत्ल करने का अपराध किया था, दरअसल वह क्षेत्र राजगढ़ पुलिस थाने का था. इसलिए वारजे मालवाडी थाना पुलिस के सीनियर पुलिस इंसपेक्टर विश्वजीत कायंगड़े ने पुणे में दर्ज कर लिया था. फिर इसे राजगढ़ (ग्रामीण) पुलिस थाने को कानूनन सौंप दिया. इस मामले में पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार, एडिशनल कमिश्नर रंजन कुमार शर्मा, डीसीपी संभाजी कदम, एसीपी (कोथरूड) भाऊसाहेब पठारे के मार्गदर्शन में केस का खुलासा हुआ. Maharashtra News

 

 

Short Love Story in Hindi: प्रेमिका से मौजमस्ती तो शादी क्यों नहीं

Short Love Story in Hindi: काशीपुर के सलमान को मोहल्ले की ही रहने वाली शादीशुदा सीमा खातून से प्यार हो गया था. सीमा भी उस पर इस कदर फिदा हुई कि वह सलमान की खातिर अपने पति तक को छोडऩे के लिए तैयार हो गई. वह उस से शादी की जिद करने लगी. अविवाहित सलमान तो उसे केवल मौजमस्ती का साधन ही समझता रहा. फिर एक दिन सीमा की शादी करने की जिद उस मुकाम पर पहुंची कि…

सलमान और सीमा खातून के प्रेम संबंध पिछले 2 सालों से चले आ आ रहे थे. शादीशुदा सीमा उसे दिलोजान से चाहती थी. पिछले एक साल से सलमान सीमा से किनारा करना चाहता था, क्योंकि उस के फेमिली वाले किसी और लड़की से उस की शादी करना चाहते थे. लेकिन सीमा किसी भी हालत में उस से जुदा नहीं होना चाहती थी. जब वह नहीं मानी तो सलमान ने परेशान हो कर सीमा को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी. मोहल्ले की ही रहने वाली नशा तसकर मेहरुन्निसा भी सीमा से अपनी दुश्मनी का हिसाब पूरा करना चाहती थी, यह बात सलमान जनता था. इस के बाद सलमान और मेहरुन्निसा ने सीमा को ठिकाने लगाने की योजना बना ली.

योजना के मुताबिक 17 अक्तूबर, 2025 की शाम को मेहरुन्निसा ने फोन कर के सीमा को काशीपुर के केवीआर तिराहे पर बुलाया. सीमा वहां पहुंच गई. इस के बाद वे तीनों कंटेनर के केबिन में बैठ कर बातें करने लगे. उसी दौरान सीमा सलमान से उस के साथ शादी करने की जिद करने लगी. समझाने पर भी जब सीमा नहीं मानी तो सलमान ने पास बैठी मेहरुन्निसा को इशारा किया. तभी मेहरुन्निसा ने सीमा के दोनों हाथ पकड़ लिए. इस के बाद सलमान ने सीमा की चुन्नी से उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. मेहरुन्निसा सीमा को अपने हाथों से तब तक जकड़े रही, जब तक सीमा की मौत न हो गई.

सीमा के मरने के बाद मेहरुन्निसा वापस चली गई और सलमान कंटेनर में सीमा की लाश ठिकाने लगाने के लिए हरिद्वार की ओर निकल पड़ा. जब कंटेनर ले कर वह नगीना पहुंचा था तो उस ने एक जेरीकेन में कंटेनर के डीजल टैंक से 6-7 लीटर डीजल निकाल कर रख लिया था ताकि मौका मिलने पर सीमा की लाश को जला सके. फिर सलमान ने हरिद्वार की ओर कंटेनर को दौड़ा दिया. कंटेनर चलाते समय वह सीमा के शव को ठिकाने लगाने के लिए सुनसान जगह की भी तलाश कर रहा था.

रात 12 बजे के बाद उस का कंटेनर एक सुनसान जगह पर पहुंचा. इस के बाद उस ने कंटेनर को अंधेरे में एक साइड में खड़ा कर दिया. फिर अंधेरे में उस ने केबिन से सीमा की लाश नीचे उतारी. सीमा की लाश को वह खींच कर एक झाड़ी के पास ले गया. लाश के ऊपर उस ने एक दरी डालने के बाद जेरीकेन का सारा डीजल उस के ऊपर छिड़क कर उस में आग लगा दी. सीमा की लाश को आग के हवाले करने के बाद वह तुरंत कंटेनर ले कर देहरादून के लिए निकल गया.

डा. सुधांशु शुक्ला सुबह अपनी पत्नी के साथ गांव गजीवाली के जंगल में सुबह की सैर कर रहे थे. यह उन का रोज का नियम था. सैर करने के लिए वह सुबह लगभग 5 बजे अपनी पत्नी के साथ घर से निकल जाते थे. जिस क्षेत्र में डा. शुक्ला सैर करने के लिए निकलते थे, वहां यदाकदा बंदर, जहरीले सांप, जंगली हाथी, गुलदार आदि भी विचरण करते हुए दिखाई पड़ जाते थे. जंगली इलाका होने के कारण डा. शुक्ला वहां पर सदैव सतर्क हो कर पत्नी के साथ  सैर करते थे, लेकिन 18 अक्तूबर, 2025 को जब वह थोड़ी देर सैर करने के बाद एक झाड़ी के पास पहुंचे थे तो उन्हें वहां पर जलाई गई एक झाड़ी दिखाई दी. जब वह उस जली हुई झाड़ी के थोड़ा पास पहुंचे तो उन्होंने वहां पर एक जली हुई डैड बौडी देखी.

‘सुनसान जंगल में वह जली हुई डैड बौडी किस की होगी और उसे किस ने यहां ला कर जलाया होगा?’ यह सोच कर डा. शुक्ला घबरा गए. उन के साथ सैर कर रहीं उन की पत्नी भी डर गई थीं. तभी वहां से गुजर रहे लोगों को रोक कर उन्होंने डैड बौडी के बारे में बताया. कुछ ही देर में वहां पर काफी लोग इकट्ठे हो गए. सब ने देखा था कि वह डैड बौडी काफी हद तक जल चुकी थी, सिर्फ शव के दोनों पंजे तथा दोनों हाथों की कलाइयां ही जलने से बची हुई थीं. पैरों के बिछुओं से अंदाजा लगाया कि किसी शादीशुदा महिला को जलाया गया है. वहां पर उस समय दहशत का वातावरण था. अत: वहां पर मौजूद लोगों ने इस मामले की सूचना पुलिस को देने का फैसला किया. यह इलाका जिला हरिद्वार के नजीबाबाद रोड पर स्थित थाना श्यामपुर के अंतर्गत आता था, इसलिए एक व्यक्ति ने फोन द्वारा घटना की सूचना थाने में दे दी.

उस समय सुबह के 7 बजे थे. थाना श्यामपुर के एसएचओ मनोज शर्मा को जब यह सूचना मिली थी तो वह तत्काल ही एसएसआई मनोज रावत व कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को ले कर सूचना में बताए गए पते की तरफ निकल गए. उन्होंने यह सूचना सीओ एस.एस. नेगी, एसपी (सिटी) पंकज गैरोला, एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा तथा एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को दी थी. घटनास्थल वहां से मात्र 3 किलोमीटर दूर हरिद्वार नजीबाबाद रोड पर गांव गाजीवाली में खैरा ढाबे के पीछे झाडिय़ों का इलाका था, इसलिए एसएचओ थोड़ी देर में ही वहां पहुंच गए.

जब पुलिस वहां पहुंची तो उस समय वहां दरजनों लोगों की भीड़ थी. एसएचओ ने वहां पर जलाई गई लाश का निरीक्षण करना शुरू कर दिया. वैसे तो लाश पूरी जल गई थी, मगर लाश के पैरों के पंजे व कलाइयां नहीं जल सकी थीं. लाश के पैरों में बिछुए होने तथा पंजे में काला कपड़ा होने से श्री शर्मा को लगा कि यह लाश किसी महिला की है. अज्ञात हत्यारों ने जंगल में ला कर महिला के शव को इसलिए जलाया होगा, जिस से कि उस की पहचान न हो सके. इस के बाद श्री शर्मा ने डा. सुधांशु से इस शव के पहली बार देखे जाने के बारे में जानकारी ली थी. शव महिला का होने के कारण श्री शर्मा ने शव का पंचनामा भरने के लिए थाने से महिला थानेदार अंजना चौहान को मौके पर बुलवा लिया था.

घटनास्थल पर पुलिस की काररवाई चल ही रही थी कि सीओ एस.एस. नेगी, एसपी (सिटी) पंकज गैरोला, एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा तथा फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई थी. इस के बाद फोरैंसिक टीम व पुलिस ने शव के कई कोणों से फोटो खींचे तथा आसपास से अन्य सबूत भी जुटाए. मृतका की शिनाख्त न होने से पुलिस के लिए यह ब्लाइंड मर्डर था. महिला के इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाने के लिए एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा ने सीआईयू यूनिट प्रभारी नरेंद्र बिष्ट की टीम को भी मौके पर बुलवा लिया था.

इस मामले में मृतका की पहचान करना पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती थी. पुलिस ने वहां मौजूद स्थानीय लोगों से पहले मृतका के बारे में पूछताछ की थी, मगर अभी तक पुलिस को मृतका के बारे में कोई भी जानकारी हासिल नहीं हो सकी थी. इस के बाद एसपी जितेंद्र मेहरा के निर्देश पर महिला थानेदार अंजना चौहान ने मृतका की जली हुई डैडबौडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस के बाद एसएसपी प्रमेंद्र डोवाल ने ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने के लिए एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा के निर्देशन और सीओ एस.एस. नेगी की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम का गठन किया. टीम में एसएचओ मनोज शर्मा, सीआईयू इंसपेक्टर नरेंद्र बिष्ट, एसआई गगन मैठाणी, नवीन चौहान, मनोज रावत, कांस्टेबल राहुल देव आदि को शामिल किया गया. एसएसपी ने वहां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के आदेश टीम को दिए. उन के दिशानिर्देश पर पुलिस टीम जांच में जुट गई.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नजीबाबाद से हो कर हरिद्वार की ओर रास्ते में पहले पीनाक होटल व बाद में उमेश्वर धाम में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. पुलिस टीम ने दोनों स्थानों के बीती रात के कैमरों की फुटेज को चैक किया. पुलिस ने जांच में पाया कि उस रात लगभग 842 छोटेबड़े वाहन इस रास्ते से गुजरे थे. पुलिस को शक था कि किसी छोटे वाहन से मृतका को हत्यारों द्वारा यहां लाया गया होगा. इस के बाद अगले दिन भी पुलिस टीम ने हरिद्वार से रायवाला तक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की.

वैसे तो पुलिस टीम को विशेष जानकारी मृतका के बारे में नहीं मिली, मगर एक बात सीआईयू प्रभारी नरेंद्र बिष्ट के गले नहीं उतर रही थी कि पीनाक होटल व उमेश्वर धाम की दूरी लगभग 500 मीटर है. सभी वाहन पीनाक होटल से उमेश्वर धाम मात्र 2 या 3 मिनट में पहुंचे थे. मगर एक सफेद कंटेनर घटना वाली रात को पीनाक होटल से उमेश्वर धाम 19 मिनट में पहुंचता कैमरों में दिखाई दिया था. इस बात पर बिष्ट का शक सफेद कंटेनर पर गहरा गया था.

इस सफेद कंटेनर पर शक गहराने के कारण पुलिस ने इस केस को सुलझाने के लिए इस की डोर पकड़ ली थी. इस के बाद पुलिस ने कंटेनर के रजिस्ट्रैशन नंबर यूके18 सीए 4788 के मालिक की जानकारी की. पता चला कि यह कंटेनर जिंदल वेजिटेबल कंपनी, नारायण नगर इंडस्ट्रियल एरिया, काशीपुर उत्तराखंड के नाम से रजिस्टर्ड है. एक पुलिस टीम काशीपुर जाने के लिए निकल पड़ी. पुलिस टीम ने उत्तराखंड के ही शहर काशीपुर पहुंच कर उक्त नंबर के सफेद कलर के कंटेनर के स्वामी से संपर्क किया तो उन्हें जानकारी मिली कि घटना वाली रात को कंटेनर चालक सलमान निवासी मझरा लक्ष्मीपुर, कोतवाली काशीपुर ही देहरादून मंडी के लिए ले कर गया था. इस के बाद सलमान 2 दिनों के बाद वापस लौटा था. यह भी पता चला कि इस समय सलमान कंटेनर ले कर पानीपत (हरियाणा) गया हुआ है.

पुलिस टीम ने जब सलमान के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली तो कुछ हैरान करने वाली जानकारी मिली. पता चला कि सलमान का एक भाई व 2 बहनें हैं. सलमान के प्रेम संबंध मोहल्ले की ही सीमा खातून नाम की एक महिला से चल रहे हैं. इस के अलावा गत 17 अक्तूबर, 2025 से ही सीमा खातून यहां से लापता चल रही है. सीमा खातून की गुमशुदगी कोतवाली काशीपुर की पुलिस चौकी बासकुडाव में दर्ज थी. सीमा खातून अंतिम बार मोहल्ले की एक महिला मेहरुन्निसा के साथ देखी गई थी. उस के बाद से ही सीमा लापता हो गई थी. काशीपुर पुलिस द्वारा भी सीमा खातून की तलाश की जा रही है.

इस के बाद टीम ने लापता सीमा की फोटो देखी. फोटो में सीमा का चेहरा जली हुई महिला के शरीर से काफी मेल खा रहा था. अंत में पुलिस टीम ने लापता होने वाले दिन की वीडियो काशीपुर के एक सीसीटीवी कैमरे में देखी थी तो टीम को पूरा विश्वास हो गया कि श्यामपुर के जंगल में मिला जला हुआ शव सीमा खातून का ही था, क्योंकि उस समय सीमा खातून ने काला सूट पहन रखा था. बरामद जले हुए शव के पैरों के पास भी पुलिस ने अधजला काला कपड़ा बरामद किया था. अब श्यामपुर पुलिस टीम ने कोतवाली काशीपुर में ही मेहरुन्निसा से पूछताछ करने का मन बनाया था. कोतवाली में जब मेहरुन्निसा को बुलाया गया, तब उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. पुलिस ने जब मेहरुन्निसा से सीमा के लापता होने की बाबत पूछा तो वह पुलिस के सामने शांत खड़ी रही.

इस के बाद सीआईयू इंचार्ज श्री बिष्ट ने मेहरुन्निसा को सख्ती से फटकारते हुए कहा, ”तुम या तो सीधी तरह से सीमा के लापता होने की सच्चाई पुलिस को सचसच बता दो, वरना पुलिस के सामने मुर्दे भी बोलने लगते हैं, यह तुम जान लो.’’

बिष्ट की इस धमकी का मेहरुन्निसा पर  जादू की तरह असर हुआ. उस ने पुलिस को बताया कि उस ने व सलमान ने गत 17 अक्तूबर, 2025 को सीमा की हत्या कर दी थी. फिर सलमान ने उस की लाश ठिकाने लगाई थी. मेहरुन्निसा के ये बयान दर्ज करने के बाद पुलिस की टीम सीमा के कपड़े व फोटो से उस की शिनाख्त करने के लिए सीमा के शौहर शादाब, भाई मेहंदी हसन व मेहरुन्निसा को ले कर थाना श्यामपुर आ गई थी. यहां पहुंचने के बाद सीमा के शौहर शादाब ने उस के जले हुए शव से ही सीमा की पहचान कर ली थी. सीमा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण उस का गला घोंटा जाना बताया गया था.

मेहरुन्निसा की गिरफ्तारी के बाद उसी दिन शाम को ही श्यामपुर पुलिस ने चैकिंग के दौरान रसियाबड के पास से आरोपी सलमान को उस के कंटेनर सहित गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद सलमान को थाना श्यामपुर लाया गया. थाने में मेहरुन्निसा को देख कर सलमान समझ गया कि मेहरुन्निसा ने पुलिस को सब कुछ बता दिया होगा, इसलिए उस ने पुलिस के सामने सीमा की हत्या मेहरुन्निसा के साथ मिल कर करने का जुर्म कुबूल कर लिया था. पूछताछ में सलमान ने सीमा से प्रेम संबंध से ले कर उस की हत्या किए जाने तक की सारी कहानी उगल दी. सलमान और मेहरुन्निसा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने सलमान की निशानदेही पर डीजल की जेरीकेन भी बरामद कर ली.

एसएचओ मनोज शर्मा ने सलमान व मेहरुन्निसा की गिरफ्तारी की सूचना एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा व एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को दे दी. तब 24 अक्तूबर, 2025 की शाम को ही हरिद्वार के मायापुर स्थित एसपी (सिटी) कार्यालय में पुलिस अधिकारियों ने एक प्रैसवार्ता का आयोजन कर ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा कर दिया. इस के बाद पुलिस ने आरोपी सलमान व मेहरुन्निसा को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन दोनों को जेल भेज दिया गया. सीमा हत्याकांड की तफ्तीश एसएचओ मनोज शर्मा द्वारा की जा रही थी. श्री शर्मा शीघ्र ही आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य एकत्र कर के चार्जशीट कोर्ट में भेजने की तैयारी कर रहे थे. Short Love Story in Hindi

 

UP Crime News : पत्नी की अनेदखी न बाबा न

UP Crime News : बलरामपुर की विनीता और उस का पति मदन कुमार आर्य दोनों ही सरकारी नौकरी पर थे. हर महीने मोटी सैलरी मिलती थी. कमाई के चक्कर में मदन कुमार पत्नी की शारीरिक जरूरत को तवज्जो नहीं देता था. ऐसे में 2 जवान बच्चों की 40 वर्षीय मां विनीता का अपने भांजे उमेश कुमार पर दिल आ गया. फिर एक दिन वही हुआ, जिस की…

विनीता आर्य 2 सप्ताह से अपने भांजे उमेश कुमार की काल रिसीव नहीं कर रही थी, जिस से उमेश की उलझन बढ़ती जा रही थी. इसी उलझन में वह शाम करीब 5 बजे विनीता के घर जा पहुंचा. उस ने डोरबैल बजाई तो चंद मिनट बाद विनीता ने दरवाजा खोला. सामने उमेश को देखते ही विनीता तल्ख स्वर में बोली, ”उमेश, तुम्हारे मामा तो घर में हैं नहीं. बेटा मनु भी कोचिंग गया है.’’

”मामी, मामा नहीं, आप तो हैं.’’ कहते हुए उमेश घर के अंदर आ गया और कमरे में पड़े सोफे पर आ कर बैठ गया. उमेश ने एक सरसरी नजर विनीता मामी पर डाली फिर बोला, ”मामी, वैसे भी मैं मामा से नहीं, तुम से मिलने आया हूं. तुम मेरी काल रिसीव क्यों नहीं कर रही थी.’’

”देखो उमेश, अब तुम शादीशुदा और एक बच्चे के बाप हो. इसलिए तुम से फोन पर बतियाना और तुम्हारा घर आना, दोनों ही ठीक नहीं है. वैसे भी पति और बेटा दोनों तुम्हें शक की नजरों से देखते हैं. तुम से नफरत करते हैं.’’

”मामी, मैं पहले भी तो घर आता था. तब तुम खूब हंसती थी, बोलती थी, बतियाती थी. मेरे आने का इंतजार करती थी. 2-4 दिन भी न आऊं तो उलाहना देती थी. अंतरंग क्षणों में तुम्हें सुख की अनुभूति भी होती थी, परंतु अब क्या हो गया है?’’

”तब की बात और थी उमेश. तब मैं तुम से प्यार करती थी. इसलिए खुल कर हंसतीबोलती थी. तुम्हारा बेसब्री से इंतजार भी करती थी. न आने पर बेचैन हो जाती थी. तुम्हारे साथ मिलन में मुझे सुख भी मिलता था. लेकिन अब बात कुछ और है. तुम्हारी खूबसूरत पत्नी है. बच्चा है. अब तुम पतिधर्म का पालन करो और मुझे भूल जाओ. वैसे भी अब मैं तुम से प्यार नहीं करती. मैं ने तुम्हें अपने दिल से निकाल दिया है.’’

”मामी, मैं मानता हूं कि मेरी पत्नी जवान है और खूबसूरत भी है. लेकिन तुम मेरा पहला प्यार हो. तुम्हारे साथ मिलन में मुझे जो सुख मिलता है, वह बीवी के साथ नहीं. वैसे मामी, मुझे पता है कि तुम मुझे क्यों नजरअंदाज कर रही हो और क्यों तुम ने मुझे अपने दिल से निकाल फेंका है. जवान और सुंदर बीवी तो बहाना है.’’

”क्या पता है तुम्हें?’’ विनीता ने अनजान बनते हुए उमेश से पूछा.

”यही कि अब तुम ने अपने दिल में किसी और को बसा लिया है. उसी के साथ गुलछर्रे उड़ा रही हो. इसलिए तुम ने मुझे अपने दिल से निकाल दिया है और मुझे नजरअंदाज कर रही हो. तुम मामा की आंखों में धूल झोंक सकती हो, मेरी आंखों में नहीं.’’

विनीता गुस्से से बोली, ”उमेश, तुम हदें पार कर रहे हो. तुम्हारा इलजाम सरासर गलत है. मैं ने किसी को दिल में नहीं बसाया है और न ही पति की आंखों में धूल झोंक रही हूं. तुम्हें नजरअंदाज करने लगी हूं. इसलिए तुम मेरे चरित्र पर अंगुली उठाने लगे हो.’’

उस रोज विनीता और उमेश के बीच नजर अंदाज को ले कर काफी देर तक नरमगरम बहस होती रही. उस के बाद उमेश वापस घर आ गया. दरअसल, उमेश को शक था कि विनीता ने अपने साथ नौकरी करने वाले एक टीचर से रिश्ता जोड़ लिया है. इसलिए वह उसे नजरअंदाज करने लगी है और उस से दूरी बना ली है. उमेश नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका विनीता उस के अलावा किसी और की बांहों में समाए. इसलिए उस ने विरोध जताया और समझाने का प्रयास भी किया. लेकिन विनीता जब नहीं मानी तो उस ने उसे सबक सिखाने की ठान ली. उमेश ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि विनीता उस की नहीं हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.

पहली अप्रैल, 2025 की शाम 5 बजे उमेश अपनी ब्रेजा कार से वीर विनय चौराहे की ओर जा रहा था, तभी उस की नजर विनीता पर पड़ी. वह बाजार की ओर शायद कुछ घरेलू सामान खरीदने जा रही थी. उमेश कार ले कर विनीता के पास पहुंचा और बोला, ”मामी, क्या बाजार जा रही हो? कार में बैठो, मैं तुम्हें बाजार तक छोड़ देता हूं. बाजार करने के बाद मैं तुम्हें घर भी छोड़ दूंगा.’’

”नहीं, नहीं उमेश, मैं बाजार चली जाऊंगी. तुम मेरे लिए परेशान मत हो. जहां जा रहे हो, जाओ.’’

लेकिन उमेश नहीं माना. उस ने फुरती से कार का दरवाजा खोला और विनीता को अगली सीट पर बिठा लिया. उस के बाद स्वयं ड्राइविंग सीट पर बैठ कर कार बढ़ा दी तो विनीता ने पूछा, ”उमेश, तुम मुझे कहां ले जा रहे हो?’’

उमेश मुसकराते हुए बोला, ”मामी, आज बहुत दिनों बाद मौका मिला है. इसलिए हम सैरसपाटे पर जा रहे है. घंटे दो घंटे में वापस आ जाएंगे.’’

”घर न पहुंची तो तुम्हारे मामा परेशान होंगे. इसलिए मैं घूमने नहीं जाऊंगी. तुम मुझे बाजार छोड़ दो. सामान ले कर मैं समय से घर पहुंच जाऊंगी. मुझे खाना भी बनाना है.’’

लेकिन उमेश ने विनीता की बात अनसुनी कर दी. वह उसे बलरामपुर शहर से श्रावस्ती ले गया, फिर वहां से बहराइच होता हुआ गोंडा जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र के गांव परसौनी पहुंचा. यहां उस ने गांव से कुछ दूर विसुहा नदी के पुल के किनारे कार रोक दी. अब तक रात का अंधेरा घिर आया था. आवाजाही न के बराबर थी. उमेश ने विनीता का हाथ अपने हाथ में ले कर पूछा, ”मामी, सचसच बताओ, क्या तुम मुझ से प्यार नहीं करती और तुम ने किसी और को अपने दिल में बसा लिया है?’’ कहते हुए उमेश ने विनीता को अपनी बांहों में भर लिया और मनमानी करने लगा. विनीता बचाव करने लगी.

बचाव के दौरान ही विनीता ने एक तमाचा उमेश के गाल पर जड़ दिया. तमाचा पड़ते ही उमेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उस ने विनीता के गले में पड़ा दुपट्टा उसी के गले में लपेटा और गला कसने लगा. कुछ ही देर में विनीता की जीभ और आंखें बाहर आ गईं और उस की मौत हो गई. हत्या करने के बाद उमेश ने विनीता का मोबाइल फोन व दुपट्टा सुरक्षित किया, फिर शव को कार से निकाल कर विसुहा नदी के पुल के नीचे फेंक दिया. वापस लौटते समय उस ने विनीता का मोबाइल फोन बंद कर दिया. फोन और दुपट्टा दुल्हिनपुर के जंगल में फेंक दिया. इस के बाद वह घर आ गया.

इधर विनीता अपने पति मदन कुमार आर्य से शाम 5 बजे यह कह कर घर से निकली थी कि वह घर का सामान खरीदने सिविल लाइंस बाजार जा रही है. सामान खरीद कर घंटे-दो घंटे बाद वापस आ जाएगी. इंतजार करतेकरते मदन कुमार को 3 घंटे से अधिक का समय बीत चुका था, लेकिन विनीता बाजार से खरीददारी कर वापस नहीं आई थी. पत्नी की खोज में मदन कुमार सिविल लाइंस स्थिति मार्केट भी गया और मार्केट का चप्पाचप्पा छान मारा, लेकिन विनीता उसे कहीं नहीं दिखी. अत: हताश हो कर वह वापस आ गया.

सुबह होते ही अड़ोसपड़ोस में भी विनीता के लापता होने की खबर फैल गई. फिर तो विनीता का लापता होना मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गया. मदन कुमार आर्य 2 अप्रैल, 2025 की सुबह 10 बजे थाना सिविल लाइंस पहुंचा. उस समय एसएचओ शैलेश सिंह थाने में मौजूद थे. मदन कुमार आर्य ने उन्हें बताया कि उन की पत्नी विनीता कंपोजिट विद्यालय में अनुदेशिका पद पर कार्यरत है. कल शाम 5 बजे वह सिविल लाइंस बाजार गई थी. तब से वह वापस नहीं आई. उस का फोन भी बंद है. उस की खोज हर संभावित स्थान पर की गई है. लेकिन उस का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि विनीता पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद की बेटी की बहू है.

चूंकि मामला पूर्व विधायक के परिवार से जुड़ा था, अत: एसएचओ शैलेश सिंह ने विनीता के लापता होने की जानकारी एसपी विकास कुमार को दी. साथ ही मदन कुमार की तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज कर ली. एसपी विकास कुमार ने विनीता की गुमशुदगी को गंभीरता से लिया और उस की खोज के लिए एएसपी नम्रता श्रीवास्तव की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित कर दी. इस टीम में एसएचओ शैलेश सिंह के अलावा कुछ तेजतर्रार पुलिसकर्मियों व सर्विलांस टीम को शामिल किया गया. साथ ही कुछ खास खबरियों को भी विनीता की टोह में लगाया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले विनीता के पति मदन कुमार व उन के बेटे मनु से पूूछताछ की, फिर सर्विलांस टीम की मदद से घर से ले कर बाजार तक सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला. टीम को एक बड़ी सफलता तब मिली, जब सिविल लाइंस बाजार के पहले सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे में विनीता दिखी. वह किसी कार सवार युवक से बात कर रही थी. फिर उसी युवक की कार में बैठ जाती दिखी. पुलिस टीम ने वह फुटेज विनीता के पति मदन कुमार आर्य को दिखाई तो वह चौंकते हुए बोला, ”अरे यह तो उमेश कुमार है. कार भी उसी की है. विनीता उसी से बात कर रही है.’’

”यह उमेश कुमार कौन है?’’ एसएचओ शैलेश सिंह ने मदन कुमार से पूछा.

”सर, उमेश कुमार हमारा भांजा है. वह देहात कोतवाली थाना क्षेत्र के गांव गजाधर सिंह डिडवा में रहता है. बलरामपुर शहर के वीर विनय चौराहा स्थित एचडीएफसी बैंक में सेल्स औफिसर के पद पर कार्यरत है. उस का मेरे घर खूब आनाजाना था. मामीभांजे में खूब पटती थी. परंतु इधर कुछ महीने से उस का घर आनाजाना बेहद कम हो गया है. विनीता भी उस से दूरियां बनाए हुए थी. लेकिन सर..?’’

”लेकिन क्या?’’ एसएचओ शैलेश सिंह ने मदन कुमार की आंखों में झांकते हुए पूछा.

”सर, कल हम ने उमेश को कौल लगा कर विनीता के लापता होने की जानकारी दी थी, लेकिन उस ने साफ मना कर दिया था कि विनीता के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है. आखिर उस ने झूठ क्यों बोला? जबकि विनीता उसी की कार में उसी के साथ बैठ कर फुटेज में जाती दिख रही है. सर, मुझे तो दाल में कुछ काला नजर आ रहा है.’’

सेल्स औफिसर उमेश कुमार शक के घेरे में आया तो पुलिस टीम ने उस के घर रात 11 बजे छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया. उसे थाना सिविल लाइंस लाया गया. थाने में एसएचओ शैलेश सिंह ने उमेश से पूछा, ”विनीता कहां है?’’

”सर, मुझे उस के बारे में कुछ भी पता नहीं है.’’ उमेश बोला.

”तुम सरासर झूठ बोल रहे हो. विनीता तुम्हारे साथ ही गई थी. यकीन नहीं तो यह सीसीटीवी फुटेज देख लो.’’ एसएचओ शैलेश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया.

उमेश ने सीसीटीवी फुटेज देखी तो वह हक्काबक्का रह गया और बगलें झांकने लगा. इसी समय शैलेश सिंह ने फिर से पूछा, ”अब बताओ, विनीता कहां है?’’

”सर, विनीता अब इस दुनिया में नहीं है.’’ उमेश ने विस्फोट किया.

”क्या तुम ने उसे मार डाला? उस की लाश कहां है?’’ शैलेश सिंह ने पूछा.

”सर, विनीता को मैं घुमाने के बहाने अपनी कार से ले गया था. फिर गोंडा जिले के गांव परसौना के पास कार में ही उस को गला घोंट कर मार दिया और लाश विसुहा नदी के पुल के नीचे फेंक दी थी.’’

एसएचओ शैलेश सिंह ने अनुदेशिका विनीता की हत्या होने व आरोपी के पकड़े जाने की खबर एसपी विकास कुमार को दी तो वह चौंक गए. उन्होंने तत्काल गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल से बात की और विनीता का शव विसुहा नदी के पुल के नीचे से बरामद करने को कहा. गोंडा एसपी विनीत जायसवाल की सूचना पर थाना खरगूपुर पुलिस घटनास्थल विसुहा नदी पुल पर पहुंची. एसएचओ शैलेश सिंह भी अपनी टीम तथा आरोपी उमेश को साथ ले कर घटनास्थल पहुंच गए. फिर उमेश की निशानदेही पर पुलिस की संयुक्त टीम ने मृतका विनीता का शव पुल के नीचे से बरामद कर लिया.

बलरामपुर के एसपी विकास कुमार, एएसपी नम्रता श्रीवास्तव तथा गोंडा एसपी विनीत जायसवाल भी घटनास्थल पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका विनीता की उम्र 40 साल के पार थी. उस की हत्या गला घोंट कर की गई थी. उस के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था. उस का रंग गोरा, औसत कद तथा शरीर स्वस्थ था. इधर पत्नी विनीता की हत्या की खबर पा कर मदन कुमार भी अपने बेटे मनु के साथ घटनास्थल पर पहुंच गया. पत्नी का शव देख कर मदन कुमार की भी आंखों से आंसू बहने लगे.

पुलिस अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद विनीता के शव को पोस्टमार्टम के लिए गोंडा के जिला अस्पताल भिजवा दिया. उस के बाद पुलिस टीम आरोपी उमेश को थाना सिविल लाइंस ले आई. थाने में एसपी विकास कुमार तथा एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने आरोपी उमेश कुमार से घटना के संबंध में पूछताछ की. उमेश कुमार ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि मामा मदन कुमार आर्य के घर उस का आनाजाना बना रहता था. इसी आनेजाने में उस का लव अफेयर मामी विनीता से बन गया. कुछ समय बाद मामी ने अपने विद्यालय के एक टीचर को अपने दिल में बसा लिया और उसे नजरअंदाज करने लगी.

मामी का दूसरे से संबंध बनाना उसे नागवार लगा. उस ने मामी को समझाया भी, लेकिन जब वह नहीं मानी तो घटना वाले दिन वह उसे घुमाने के बहाने ले गया और कार में उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया. उमेश ने हत्या में प्रयुक्त दुपट्टा, कार व मोबाइल फोन भी पुलिस को बरामद करा दिया. दुपट्टा व मोबाइल को उस ने दुल्हिनपुर के जंगल में छिपा दिया था.

चूंकि उमेश कुमार ने विनीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: पुलिस ने मृतका के पति मदन कुमार आर्य की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) तथा 238 के तहत उमेश कुमार निवासी गांव गजोधर सिंह डिडवा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में मामीभांजे के लव क्राइम की जो कहानी सामने आई, उस का विवरण इस प्रकार है.

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर शहर के सिविल लाइंस मोहल्ले में मदन कुमार आर्य सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी विनीता के अलावा बेटा मनु व एक बेटी थी. मदन कुमार बिजली विभाग में बाबू था. उस की पत्नी विनीता बलरामपुर जिला पंचायत स्थित आदर्श कंपोजिट विद्यालय में अनुदेशिका के पद पर थी. चूंकि पतिपत्नी दोनों सरकारी नौकरी करते थे, अत: उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. बेटी पढ़लिख कर जवान हुई तो उन्होंने उस का ब्याह रचा दिया था. वह सुखपूर्वक ससुराल में रह रही थी. मदन कुमार आर्य की मां गंगाजली पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद की बेटी थीं. सुखदेव प्रसाद बलरामपुर शहर की तुलसीपुर विधानसभा सीट से 2 बार विधायक चुने गए थे. सिविल लाइंस वाला बंगला विधायक कोटे के तहत आवंटित हुआ था. विधायक पिता सुखदेव की मृत्यु के बाद गंगाजली अपने बेटे मदन कुमार व बहू विनीता के साथ इसी बंगले में रहने लगी थी.

मदन कुमार व उस की पत्नी विनीता, बेटे मनु को बेहद प्यार करते थे. वह उसे अच्छी शिक्षा दिला कर प्रशासनिक सेवा में लाना चाहते थे. इसलिए वह उस की शिक्षा पर पूरा ध्यान दे रहे थे और पैसा भी खूब खर्च कर रहे थे. मनु भी पढऩे में तेज था. अत: वह पढ़ाई पर जोर दे रहा था. विनीता खुद अच्छा कमाती थी और उस के पति मदन कुमार की भी कमाई खूब थी. घर में किसी चीज की कमी न थी. दोनों खुशहाल थे, लेकिन विनीता को पति की कमी खलती थी. दरअसल, विनीता बलरामपुर शहर में कार्यरत थी, जबकि पति गोंडा शहर में बिजली विभाग में बाबू था.

उस का रोजाना घर आना संभव न था, इसलिए वह गोंडा में ही किराए के मकान में रहता था. महीने में एकदो बार ही घर आता था और 2-3 दिनों बाद वापस चला जाता था. विनीता उन दिनों उम्र के उस दौर से गुजर रही थी, जब औरत को पुरुष की नजदीकियों की ज्यादा जरूरत होती है. विनीता 2 जवान बच्चों की मां जरूर थी, लेकिन उस की उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था. वह खूब बनसंवर कर रहती थी. वह कुछ समय तक पति की कमी बरदाश्त करती रही. उस के बाद उस का जिस्म अंगड़ाइयां लेने लगा.

एक रोज विनीता सजधज कर घर से निकलने ही वाली थी कि मदन कुमार आर्य का भांजा उमेश कुमार आ गया. विनीता ने उसे आश्चर्य से देखते हुए पूछा, ”अरे तुम, इस तरह अचानक?’’

”मामी, अभीअभी गांव से आ रहा हूं.’’ उमेश कुमार ने मुसकरा कर जवाब दिया.

उस दिन उमेश को मामी बहुत ज्यादा खूबसूरत लगी. उस की निगाहें विनीता के चेहरे पर जम गईं. यही हाल विनीता का भी था. उमेश को इस तरह निगाहें जमाए देखा तो विनीता बोली, ”ऐसे क्या देख रहे हो मुझे? क्या पहली बार देखा है? बोलो, किस संकोच में डूबे हो?’’

”नहीं मामी, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं तो यह देख रहा था कि मेकअप में आप कितनी सुंदर लग रही हैं. खुले बालों में तो आप गजब ही ढा रही हो.’’

”बस… बस रहने दो. बहुत बातें बनाने लगे हो. तुम्हारे मामा तो कभी तारीफ नहीं करते. महीने में एक या 2 बार आते हैं. वह भी थकेथके से रहते हैं.’’

”अरे मामी, औरत की खूबसूरती सब को रास थोड़े ही आती है. मामा बिजली विभाग में हैं. ऊपरी कमाई में जुटे रहते हैं, इसलिए वह तुम्हारी कद्र नहीं करते.’’

”तू तो मेरी बहुत कद्र करता है. महीनों बीत जाते हैं, झांकने तक नहीं आता. जा बहुत देखे हैं, तेरे जैसे बातें बनाने वाले.’’

”मुझे सचमुच आप की कद्र है मामी. यकीन न हो तो परख लो. अब मैं तुम्हारी खैरखबर लेने आता रहूंगा. छोटाबड़ा जो भी काम कहोगी, करूंगा.’’ उमेश ने विनीता की चिरौरी सी की. उमेश की यह बात सुन कर विनीता खिलखिला कर हंस पड़ी. फिर बोली, ”तुम आराम से सोफे पर बैठो. मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.’’ कह कर विनीता ने रसोई का रुख किया.

थोड़ी देर में विनीता 2 कप चाय और नाश्ता ले आई. दोनों गपशप लड़ाते हुए चाय पीते रहे और चोरीछिपे एकदूसरे को देखते रहे. दोनों के ही दिलोदिमाग में हलचल सी मची हुई थी. सच तो यह था कि विनीता उम्र में कई साल छोटे स्मार्ट उमेश को देख कर उस पर फिदा हो गई थी. वह ही नहीं, उमेश भी मामी का दीवाना बन गया था. दोनों के दिल एकदूसरे के लिए धड़के तो नजदीकियां खुदबखुद बन गईं. इस के बाद उमेश कुमार हर सप्ताह विनीता से मिलने आने लगा. विनीता को उस का आना अच्छा लगता था. जल्द ही वे एकदूसरे से खुल गए और दोनों के बीच हंसीमजाक होने लगी. चूंकि दोनों के बीच मामीभांजे का रिश्ता था, इसलिए विनीता चाहती थी कि पहल उमेश कुमार करे. जबकि उमेश चाहता था कि जिस्म की भूखी मामी स्वयं उसे उकसाए.

आखिर जब विनीता से नहीं रहा गया तो एक रोज रात में उस ने उमेश को अपने घर रोक लिया. खाना खाने के बाद उमेश कमरे में जा कर पलंग पर लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा. थोड़ी देर बाद विनीता भी उसी पलंग पर उमेश के बगल में लेट गई और उस से लिपट गई. विनीता का स्पर्श पा कर उमेश सिहर उठा. लेकिन वह रिश्ते की मर्यादा समझता था. इसलिए चुपचाप लेटा रहा. विनीता उस वक्त अधोवस्त्र में थी, जिस से उस के कोमल उभार उमेश के शरीर को छू रहे थे. वह उस से सटती ही जा रही थी, लेकिन उमेश रिश्ते की मर्यादा सोच कर चुपचाप लेटा था.

लेकिन वह कब तक चुप रहता? विनीता ने उकसाया तो उस रात दोनों के बीच की हर दीवार टूट गई. मामीभांजे का रिश्ता टूट कर बिखर गया और एक नए रिश्ते ने जन्म लिया, वह था अवैध संबंधों का रिश्ता. उस दिन के बाद विनीता और उमेश अकसर देह सुख प्राप्त करने लगे. विनीता भूल गई कि वह 2 जवान बच्चों की मां है और पति से विश्वासघात कर रही है. उस ने पवित्र रिश्ते को भी ताख पर रख दिया. जवां भांजे की वह दीवानी बन गई.

30 वर्षीय उमेश कुमार बलरामपुर (देहात) कोतवाली के गांव गजोधर सिंह डिडवा का रहने वाला था. उस के पिता सालिक राम किसान थे. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ा था. उमेश पढ़ालिखा स्मार्ट था. वह बलरामपुर शहर के वीर विनय चौराहा स्थित एचडीएफसी बैंक में सेल्स औफिसर पद पर था. उस की कमाई अच्छी थी. अत: ठाट से रहता था. उस के पास बे्रजा कार थी, जिस से वह आताजाता था.

दबंग स्वभाव का उमेश अकसर कार से विनीता के घर आता था और मामी के जिस्म से खेल कर वापस चला जाता था. कभीकभी वह रात को भी वहीं रुक जाता था और दोनों रात भर रंगरलियां मनाते. चूंकि दोनों के बीच मामीभांजे का रिश्ता था, इसलिए कोई शक भी नहीं करता था. लेकिन ऐसे संबंध छिपते नहीं. धीरेधीरे मोहल्ले में उन दोनों के संबंधों की चर्चा होने लगी.

विनीता के पति मदन कुमार को जब विनीता और उमेश के संबंधों का पता चला तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उस ने इस बारे में पत्नी व भांजे से बात की तो दोनों ने साफ कह दिया कि ऐसी कोई बात नहीं है. लेकिन एक शाम जब उस ने अचानक दोनों को हंसीठिठोली करते देख लिया तो उस ने दोनों को फटकारा. पर उन पर इस का कोई असर नहीं हुआ. उन का मिलन जारी रहा. इसी बीच विनीता ने अपने रिश्तेदार की लड़की ज्योति से उमेश की शादी करा दी. सुंदर पत्नी पा कर उमेश पत्नी में रम गया. साल भर बाद उमेश एक बच्चे का बाप भी बन गया. पत्नी के आ जाने से उमेश का मामी से शारीरिक मिलन बंद सा हो गया. हां, इतना जरूर था कि उस की फोन पर मामी से बात होती रहती थी.

इधर विनीता पुरुष सुख की आदी बन गई थी, अत: जब उमेश से उस का शारीरिक मिलन बंद हुआ तो उस ने एक जवान टीचर से संबंध बना लिए. कुछ समय बाद नई बीवी का नशा उतरा तो उमेश मामी से संबंध स्थापित करने का प्रयास करने लगा. लेकिन विनीता ने तो किसी और को दिल में बसा लिया था, अत: उस ने उमेश को तवज्जो देनी बंद कर दी और उसे नजरअंदाज करने लगी. उमेश को पहले तो कुछ पता नहीं चला, लेकिन उस ने जब गुप्त रूप से जानकारी जुटाई तो उसे पता चला कि विनीता ने किसी और को दिल में बसा लिया है, जिस से वह उसे नजरअंदाज कर रही है. यही नहीं, उस ने उमेश की काल रिसीव करनी भी बंद कर दी.

मामी की बेवफाई से उमेश बौखला गया. आखिर उस ने विनीता को सबक सिखाने की ठान ली और उस की रेकी करने लगा. पहली अप्रैल, 2025 की शाम 5 बजे विनीता सामान लेने सिविल लाइंस बाजार की ओर गई, तभी उमेश की नजर उस पर पड़ी. इस के बाद वह उस के पास पहुंचा और घुमाने के बहाने विनीता को कार में बिठा लिया. देर रात उस ने विनीता को दुपट्टे से गला घोंट कर मार डाला और लाश को भी ठिकाने लगा दिया.

विस्तार से पूछताछ करने के बाद 4 अप्रैल, 2025 को पुलिस ने हत्यारोपी उमेश कुमार को बलरामपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उस की जमानत लोअर कोर्ट से खारिज हो गई थी. इस के बाद उस के फेमिली वाले जमानत के लिए हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे थे. UP Crime News

 

 

Hindi Story : अपमान का जलजला

Hindi Story : एक कारोबारी को अपने कर्जदार दोस्त की मदद करने के बजाय उस की सरेआम खिल्ली उड़ाना महंगा पड़ा. उस का खामियाजा न केवल कारोबारी को भुगतना पड़ा, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों में आग लग गई. सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर सबक देने वाली इस अपराध कथा से सबक मिलता है कि…

मुरादाबाद के रहने वाले कुलदीप गुप्ता की पत्नी सुनीता, बेटी इशिका और बेटे दिव्यांशु के लिए खुशी का दिन था. क्योंकि उस दिन यानी 4 जून, 2021 को कुलदीप गुप्ता का जन्मदिन था, इसलिए घर के सभी लोगों ने अपनेअपने तरीके से उन के जन्मदिन पर विश करने की योजना बना ली थी. पत्नी सुनीता शाम के वक्त इस मौके पर आने वाले मेहमानों की खातिरदारी के इंतजाम में जुटी हुई थी, जबकि बेटी इशिता और बेटा दिव्यांशु सजावट और केक के इंतजाम का जिम्मा उठाए हुए थे. सभी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं और उपहार देने के सरप्राइज एकदूसरे से छिपाए हुए थे.

दिन के ठीक 12 बजे सुनीता के पास कुलदीप का अचानक फोन आया. उन्होंने फोन पर कहा कि वह घर का सब काम छोड़ कर तुरंत बैंक जाए और 4 लाख रुपए निकाल कर दुकान में मुस्तफा को दे आए. सुनीता अभी इतने पैसे के बारे में पति से कुछ पूछती कि इस से पहले ही कुलदीप ने गंभीरता से कहा कि बहुत ही अर्जेंट है, वह देरी न करे. मुस्तफा घर से महज 500 मीटर की दूरी पर उन की आटो स्पेयर पार्ट्स हार्डवेयर की दुकान का विश्वस्त सेल्समैन था. सुनीता को पता था कि कारोबार के सिलसिले में पैसे की जरूरत पड़ती रहती थी, फिर भी कैश में इतनी बड़ी रकम ले कर सोच में पड़ गई.

फिर भी उस ने पैसे को ले कर अपने दिमाग पर जोर नहीं डाला, क्योंकि अचानक उसे ध्यान आया कि कुलदीप कुछ दिनों से एक सेकेंडहैंड कार खरीदने की बात कर रहे थे. उस ने सोचा शायद उन्होंने उस के लिए पैसे मंगवाए हों. सुनीता को भी जन्मदिन का गिफ्ट खरीदने के लिए जाना था, तय किया कि वह दोनों काम एक साथ कर लेगी और दोपहर डेढ़-दो बजे तक वापस घर लौट कर बाकी की तैयारियों में लग जाएगी.  सुनीता ने पति के कहे अनुसार ठीक साढ़े 12 बजे मुस्तफा को पैसे का थैला पकड़ाया और जाने लगी. मुस्तफा सिर्फ इतना बता पाया कि कोई पैसा लेने आएगा, उसे देने हैं. सुनीता ने कहा, ‘‘ठीक है, पैसे संभाल कर रखना. मैं चलती हूं मुझे बहुत काम है.’’

उस के बाद सुनीता ने पास ही एक शोरूम से कुछ शौपिंग की और घर आ कर बाकी का काम निपटाने में जुट गई. सुनीता के पास दिन में ढाई बजे के करीब कुलदीप का फोन आया. उन्होंने पैसे मिलने जानकारी दी थी. सुनीता ने शाम को जल्द आने के लिए कहा. लेकिन इस का कुलदीप ने कोई जवाब नहीं दिया. सुनीता से इसे अन्यथा नहीं लिया और अपना अधूरा काम पूरा करने लगी.

शाम के 4 बज गए थे. दिव्यांशु ने अपने पिता को फोन किया, लेकिन फोन बंद था. वह मां से बोला, ‘‘मम्मी, पापा का फोन बंद आ रहा है.’’

‘‘क्यों फोन करना है पापा को?’’ सुनीता बोली.

‘‘4 बज गए हैं. उन को जल्दी आने के लिए बोलना है.’’ दिव्यांशु कहा.

‘‘अरे आ जाएंगे समय पर… मैं मुस्तफा को बोल आई हूं जल्दी घर आने के लिए.’’ सुनीता बोली.

‘‘मगर मम्मी, पापा का फोन बंद क्यों है?’’ दिव्यांशु ने सवाल किया.

‘‘बंद है? अरे नहीं, बैटरी डिस्चार्ज हो गई होगी. थोड़ी देर बाद फोन करना.’’ सुनीता बोली.

दिव्यांशु ने मां के कहे अनुसार 10 मिनट बाद पापा को फिर फोन लगाया. अभी भी उन का फोन बंद आ रहा था. उस ने मां को फोन लगाने के लिए कहा. सुनीता ने भी फोन लगाया. उसे भी कोई जवाब नहीं मिल पाया. उस ने 2-3 बार फोन मिलाया मगर फोन नहीं लगा. उसे अब पति की चिंता होने लगी. वह 4 लाख रुपए को ले कर चिंतित हो गई. अनायास मन में नकारात्मक विचार आ गए. कहीं पैसे के कारण कुलदीप के साथ कुछ हो तो नहीं गया. देरी किए बगैर सुनीता ने फोन न लगने की बात अपने जेठ संजीव गुप्ता और दूसरे रिश्तेदारों को बताई. उन्हें भी चिंता हुई और कुलदीप के हर जानपहचान वाले को फोन लगाया गया. कहीं से उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई.

परिवार के लोग परेशान हो गए. जैसेजैसे समय बीतने लगा, वैसेवैसे उन की चिंता और गहरी होने लगी. सभी किसी अनहोनी से आशंकित हो गए. इशिका और दिव्यांशु रोनेबिलखने लगे. घर में खुशी के जन्मदिन की तैयारी का माहौल गमगीन हो गया. रात के 11 बज गए थे. कुलदीप के बड़े भाई संजीव गुप्ता ने कुलदीप के लापता होने की जानकारी मुरादाबाद के थानाप्रभारी योगेंद्र यादव को दी. सुनीता ने उन्हें दिन भर की सारी बातें बताई कि किस तरह से कुलदीप ने अचानक पैसे मंगवाए और उन के अलावा किसी की भी कुलदीप से फोन पर बात नहीं हो पाई.

पैसे की बात सुन कर पुलिस ने इस बात का अंदाजा लगा लिया कि लेनदेन के मामले में कुलदीप कहीं फंसा होगा या फिर उस की हत्या हो गई होगी. इस की सूचना थानाप्रभारी योगेंद्र ने अपने उच्चाधिकारियों को दी और आगे की काररवाई में जुट गए.  अगले दिन पुलिस ने कुलदीप की दुकान के खास कर्मचारी मुस्तफा से पूछताछ शुरू की. मुस्तफा ने बताया कि दुकान खोलने के कुछ समय बाद ही वह किसी के साथ एक मरीज देखने के लिए अस्पताल जाने की बात कहते हुए चले गए थे. उस वक्त साढ़े 9 बजे का समय था. मुस्तफा ने बताया कि जाते समय कुलदीप ने लौटने में देर होने की स्थिति में बाइक को वहीं किनारे लगा कर दुकान की चाबियां घर दे आने को कहा था.

थानाप्रभारी ने मुस्तफा से उस रोज की पूरी जानकारी विस्तार से बताने को कहा. मुस्तफा ने 4 जून, 2021 को दुकान खोले जाने के बाद की सभी जानकारियां इस प्रकार दी- सुबह के 9 बजे हर दिन की तरह कुलदीप पाकबाड़ा के डींगरपुर चौराहे पर स्थित अपी आटो स्पेयरपार्ट्स की दुकान पर पहुंच गए थे. उन्होंने कर्मचारियों को चाबियां दे कर दुकान खोलने को कहा था. उन का अपना मकान करीब आधे किलोमीटर दूरी पर मिलन विहार मोहल्ले में है. उन के भाई संजीव गुप्ता का मकान भी वहां से 500 मीटर की दूरी पर था.

चाबियां सौंपने के बाद कुलदीप ने अपने खास कर्मचारी मुस्तफा को अलग बुला कर बताया कि वह एक परिचित को देखने के लिए अस्पताल जा रहे हैं. इसी के साथ उन्होंने हिदायत भी दी कि उन्हें वहां से लौटने में देर हो सकती है, इसलिए आज दुकान की पूरी जिम्मेदारी उसी के ऊपर रहेगी. कुलदीप गुप्ता ऐसा पहले भी कर चुके थे. इस कारण मुस्तफा ने उस रोज की बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. उसी वक्त सड़क के दूसरी ओर बाइक पर एक आदमी आया. वह हेलमेट पहने हुए था. कुलदीप उस की बाइक पर बैठ कर चले गए. यह सब 5-7 मिनट में ही हो गया. दुकान के कर्मचारी अपनेअपने काम में लग गए. सेल्समैन का काम संभालने वाला मुस्तफा काउंटर पर आ गया. इस तरह दुकान की दिनचर्या शुरू हो गई.

मुस्तफा ने बताया कि दोपहर होने पर दुकान की चहलपहल थोड़ी कम हो गई. 12 बजे के बाद बगैर किसी सूचना के कुलदीप की पत्नी सुनीता जब दुकान पर पहुंची तो वह चौंक गया. उन्होंने अपने हैंडबैग से निकाल कर एक मोटा पैकेट पकड़ा दिया. पैकेट के बारे में पूछने से पहले ही सुनीता ने बताया कि उस के पति ने 4 लाख रुपए बैंक से निकलवाए हैं. इस में वही पैसे हैं. इतना कह कर सुनीता जाने की जल्दबाजी के साथ बोलीं कि उसे पास में कुछ खरीदारी करनी है और घर पर बहुत काम पसरा पड़ा है, इसलिए वह तुरंत दुकान से चली गईं.

उन के जाने के तुरंत बाद मुस्तफा के पास कुलदीप का फोन आया. उन्होंने फोन पर कहा कि एक आदमी बाइक पर पैसे लेने आएगा. सुनीता जो पैसे दे गई है वह उसे दे देना. मुस्तफा ने कुलदीप को बता दिया कि सुनीता मैडम पैसा अभीअभी दे गई हैं. इतनी मोटी रकम और उसे लेने के बारे में कुलदीप ने अधिक बातें नहीं बताई. दोपहर एक बजे के करीब कुलदीप के बताए अनुसार एक आदमी काले रंग की बाइक पर आया. उस में नंबर प्लेट नहीं लगी थी. मुस्तफा ने समझा कि बाइक मरम्मत के दौरान ट्रायल पर होगी. हेलमेट पहने मास्क लगाए व्यक्ति ने मुस्तफा से कहा कि उसे कुलदीप ने पैसा लेने के लिए भेजा है.

मुस्तफा ने इशारे से सामने बैठने को कहा और कुलदीप को फोन लगाया. तुरंत फोन रिसीव कर कुलदीप बोले, ‘‘इस आदमी को पैसे दे दो.’’

मुस्तफा ने कुछ पूछना चाहा, किंतु कुलदीप ने फोन कट कर दिया. लग रहा था, जैसे वह काफी हड़बड़ी में थे. तब तक वह व्यक्ति अपना हेलमेट उतार चुका था और मास्क हटा रहा था. मुस्तफा ने उस से बगैर कोई सवालजवाब किए पैसे का पैकेट उसे दे दिया. पैकेट से पैसे निकाल कर वह वहीं काउंटर पर गिनने लगा. पैकेट में 2 हजार और 5 सौ के नोटों के बंडल थे. बंडल के नोट गिनते समय उस के मोबाइल पर फोन आया. उस ने फोन का स्पीकर औन कर बोला, ‘‘हां, पैसे मिल गए हैं, मैं अभी गिन रहा हूं.’’

दूसरी तरफ से डांटने की आवाज आई, ‘‘मैं ने तुम्हें पैसे लेने भेजा है या गिनने? पैसा ले और  वहां से निकल.’’ यह आवाज कुलदीप की नहीं थी. उस के बाद मुस्तफा दुकान के कामकाज में लग गया.

उसे सुनीता का फोन शाम को 5 बजे के करीब आया. उन्होंने घबराई आवाज में कुलदीप का फोन बंद होने की बात बताई. यह सुन कर मुस्तफा कुछ समय में ही दुकान बंद कर कुलदीप के घर आ गया. उस दिन बिक्री का हिसाब और पैसे उन्हें दिए और कुछ देर रुक कर चला गया. इतनी जानकारी मिलने के बाद एसपी प्रभाकर चौधरी ने मामले को अपने हाथों में ले लिया और एसओजी टीम के प्रभारी अजय पाल सिंह एवं सर्विलांस टीम के प्रभारी आशीष सहरावत के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी. कुलदीप की गुमशुदगी की रिपोर्ट के आधार पर तलाशी की काररवाई की. शुरुआत फोन ट्रेसिंग से  की गई. इस जांच से संबंधित पलपल के जांच की जानकारी डीआईजी शलभ माथुर ले रहे थे..

कुलदीप के फोन की आखिरी लोकेशन बिजनौर के नजीबाबाद कस्बे की मिली. मुरादाबाद पुलिस तुरंत वहां रवाना हो गई. इस की जानकारी बिजनौर पुलिस को भी दे दी गई. प्रभाकर चौधरी ने 3 अन्य टीमों का भी गठन किया. बिजनौर जनपद की सीमाओं पर कुलदीप की आखिरी लोकेशन के आधार पर छानबीन जारी थी. फोन की लोकेशन कभी चांदपुर तो कभी नूरपुर और कभी नगीना की मिल रही थी. इस तरह से 5 जून का पूरा दिन निकल चुका था. रात के 8 बजे बिजनौर में कस्बा थाना स्यौहारा के गंगाधरपुर गांव में एक शव पड़े होने की सूचना मिली. इस की जानकारी स्यौहारा के थानाप्रभारी नरेंद्र कुमार को गांव वालों ने दी थी.

सूचना के आधार पर खून सनी लाश बरामद हुई. लाश सड़क के किनारे पड़ी हुई थी. उस के सिर और शरीर पर चोटों के निशान साफ दिख रहे थे. लाश बरामदगी की सूचना और हुलिया समेत तसवीरें तुरंत मुरादाबाद पुलिस को भेज दी गईं. लाश कुलदीप गुप्ता के होने की आशंका के साथ उन के भाई संजीव गुप्ता को तुरंत शिनाख्त के लिए बुला लिया गया. संजीव ने तसवीर और हुलिए के आधार पर लाश की पहचान अपने भाई कुलदीप के रूप में कर दी. इसी के साथ उन्होंने दुखी मन से इस की सूचना अपने परिवार वालों को भी दी.

कुलदीप की हत्या की सूचना से घर में कोहराम मच गया. सुनीता, इशिका, दिव्यांशु का रोरो कर बुरा हाल था. पूरे परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. मुरादाबाद की पुलिस के सामने अब सब से बड़ी चुनौती हत्या के बारे में पता लगाने और हत्यारे को धर दबोचने की थी. उसी रात लाश को पंचनामे के साथ बिजनौर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. पोस्टमार्टम के बाद लाश कुलदीप के घर वालों को सौंप दी गई. उन का मुरादाबाद के लोकोशेड मोक्षधाम में अंतिम संस्कार कर दिया गया. उधर बिजनौर और मुरादाबाद जिले की पुलिस ने दोनों जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. कुलदीप की दुकान के कर्मचारियों से एक बार फिर डिटेल में पूछताछ हुई. पैसा लेने आए व्यक्ति के हुलिए के आधार पर छानबीन शुरू की गई.

मुस्तफा ने घटना के दिन उस व्यक्ति और नंबर प्लेट के बगैर काली मोटरसाइकिल की मोबाइल से ली गई तसवीर पुलिस को उपलब्ध करवा दी. पुलिस को मृतक कुलदीप की काल डिटेल्स भी मिल चुकी थी. जल्द ही 2 व्यक्तियों नंदकिशोर और कर्मवीर उर्फ भोलू को गिरफ्तार कर लिया. उन से कुलदीप की हत्या के कारण की जो कहानी सामने आई, वह पैसा, दोस्ती, गुमान और अपमान से पैदा हुई परिस्थितियों की दास्तान निकली—

मुरादाबाद के कस्बा पाकबाड़ा के रहने वाले कुलदीप के 2 बड़े भाई संजीव गुप्ता और राजीव गुप्ता के अलावा उन का अपना छोटा सा परिवार था. पत्नी सुनीता और 2 बच्चों में बेटा दिव्यांशु और बेटी इशिका के साथ मिलन विहार कालोनी में रह रहे थे. 4 साल पहले मुरादाबाद के रहने वाले नंदकिशोर से कुलदीप की मुलाकात एक वैवाहिक आयोजन के दौरान हुई थी. उस के बाद से दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे. वैसे नंदकिशोर उर्फ नंदू चाऊ की बस्ती लाइनपार का रहने वाला था. उस के पिता मुरादाबाद रेलवे में टैक्नीशियन के पद पर थे, जो रिटायर हो चुके थे. नंदकिशोर खुद एमटेक की पढ़ाई पूरी कर एक दवा कंपनी में मैडिकल रिप्रजेंटेटिव का काम करता था. उस ने एक दवा कंपनी की फ्रैंचाइजी भी ले रखी थी और दवाओं का कारोबार शुरू किया था.

इस काम को शुरू करने के लिए उस ने 20 लाख का गोल्ड लोन ले रखा था. संयोग से लौकडाउन में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिस कारण वह लोन की किस्त नहीं जमा कर पाया था. इस वजह से वह काफी परेशान चल रहा था. वह अपनी सारी तकलीफें कुलदीप को बताया करता था. उस ने अपने कर्ज और किस्त नहीं जमा करने की मुसीबत भी बताई थी. उसे पता था कि कुलदीप का कारोबार अच्छी तरह से चल रहा है. इसे देखते हुए उस ने मदद के लिए उस के सामने हाथ फैला दिया. उस से 65 हजार रुपए उधार मांगे और उसे विश्वास दिलाया कि पैसे जल्द वापस कर देगा. ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का समय लगेगा. कुलदीप ने पैसे देने से इनकार तो नहीं किया, मगर वह कई दिनों तक उसे टालता रहा.

नंदकिशोर के बारबार कहने पर कुलदीप बोला, ‘‘यार तू तो पहले से ही कर्जदार है तो मेरा 65 हजार कैसे वापस कर पाएगा? तेरी इतनी औकात नहीं है.’’

यह सुन कर पहले से ही टूट चुका नंदकिशोर बहुत मायूस हो गया. उस ने केवल इतना कहा कि यदि तुम्हें नहीं देना था तो पहले दिन ही मना कर देता. यहां तक तो ठीक था. उन की दोस्ती पर जरा भी फर्क नहीं पड़ा. लेकिन कुलदीप बारबार उस के जले पर नमक छिड़कता रहा. एक दिन तो कुलदीप ने हद ही कर दी. एक पार्टी में नंदकिशोर की कई लोगों के सामने बेइज्जती कर दी. पार्टी छोटेबड़े कारोबारियों की थी. इस में शामिल लोगों की अपनीअपनी साख थी. कौन कितनी हैसियत वाला है और कौन किस कदर भीतर से खोखला, इसे कोई नहीं जानता था. कहने का मतलब यह था कि सभी एकदूसरे की नजर में अच्छी हैसियत वाले थे.

पार्टी के दरम्यान कोरोना काल में कई तरह के बिजनैस में नुकसान होने की बात छिड़ी, तब कुलदीप ने नंदकिशोर पर ही निशाना साध दिया. पहले तो उस ने सब के सामने कह दिया कि वह लाखों का कर्जदार बना हुआ है. यह बात कुछ लोगों को ही मालूम थी. इस भारी बेइज्जती से नंदकिशोर तिलमिला गया. उस वक्त तो खून का घूंट पी कर रह गया. ऐसा कुलदीप ने उस के साथ कई बार किया. नंदकिशोर ने अपना गुनाह कुबूल करते हुए पुलिस को बताया कि कुलदीप पैसे के घमंड में चूर था. बड़ेबड़े दावे करना, बेइज्ज्ती करना उस के लिए मनोरंजन का साधन बन गया था.

उस ने बताया कि इस से वह काफी तंग आ चुका था. तभी उस ने निर्णय लिया वह कुलदीप को सबक जरूर सिखाएगा. उस ने कसम खाई और योजना बना कर उस में अपने बुआ के लड़के कर्मवीर उर्फ भोलू और रणबीर उर्फ नन्हे को शामिल  कर लिया. कर्मवीर और रणबीर दोनों सगे भाई थे. योजना के अनुसार, कुलदीप की हत्या से कुछ दिन पहले नन्हे को बताया कि कुलदीप ने हाल में ही अपनी पोलो कार बेची है. उस से मिले 4 लाख रुपए उस के पास हैं. पैसा हड़पने में मदद करने पर उसे भी हिस्सेदार बनाया जाएगा. नन्हे इस के लिए तैयार हो गया. नंदकिशोर ने कुलदीप को अच्छी हालत में मारुति स्विफ्ट कार दिलवाने का सपना दिखाया.

उसी कार को दिखाने के बहाने से वह 4 जून, 2021 को अपनी बाइक से कुलदीप को ले कर कांठ में डेंटल हौस्पिटल के सामने पहुंच गया. वहां पहले से ही नन्हे और भोलू एंबुलेंस ले कर उस का इंतजार कर रहा था. एंबुलेंस भोलू चलाता था. वहां उस ने कहा कि आज ही बिजनौर जा कर पेमेंट करनी होगी. कुलदीप उस की बातों में आ गया. उस के साथ एंबुलेंस में बैठ गया. रास्ते में नंदकिशोर ने शराब की एक बोतल खरीदी. आगे चल कर स्यौहारा कस्बे में गाड़ी रोक कर तीनों ने शराब पी. कुलदीप जब शराब के नशे में धुत हो गया, तब नंदकिशोर ने उस के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस से बोला, ‘‘अगर वह अपनी जिंदगी बचाना चाहता है तो 4 लाख रुपए मंगवा ले.’’

मरता क्या न करता, कुलदीप ने अपनी पत्नी सुनीता को फोन कर पैसे दुकान पर मंगवा लिए. इधर नंदकिशोर ने कर्मवीर उर्फ भोलू को भेज कर दुकान से वह पैसे मंगवा लिए. पैसा मिल जाने पर भी नंदकिशोर ने उसे नहीं छोड़ा. एंबुलेंस में औक्सीजन सिलेंडर का मीटर खोलने वाले औजार से उस ने कुलदीप के सिर पर कई वार कर दिए. नशे की हालत में होने के कारण कुलदीप खुद को संभाल नहीं पाया. कुछ समय में ही उस की वहीं मौत हो गई. बाद में कुलदीप की लाश को एंबुलेंस में डाल कर धामपुर, नगीना, नजीबाबाद और भी कई जगह ले कर घूमते रहे. अगले दिन 5 जून को रात के 8 बजे उन्होंने लाश को गंगाधरपुर के पर सड़क पर डाल कर दोनों मुरादाबाद वापस लौट आए.

मुरादाबाद पुलिस ने नंदकिशोर और उस के साथी से साढ़े 3 लाख रुपए बरामद कर लिए. पूछताछ में नंदकिशोर ने इस योजना में शामिल 2 और लोगों के नाम बताए. उस के बताए सुराग से एक पकड़ा गया, लेकिन रणबीर उर्फ नन्हे 50 हजार रुपया ले कर फरार हो चुका था. बताते हैं कि कुलदीप के गले से हनुमान का 3 तोले का लौकेट भी गायब था. मुरादाबाद पुलिस ने 7 जून, 2021 को प्रैसवार्ता कर पूरी घटना की जानकारी दी. Hindi Story

Crime News Hindi : बेवफाई का बदनाम वीडियो

Crime News Hindi : इंट्रो : सोनू जिस तरह अंतरंग क्षण के वीडियो से अपनी प्रेमिका मधु को ब्लैकमेल कर रहा था, उस से वह बहुत परेशान हो गई थी. बेवफा प्रेमी से उस ने जिस तरीके से बदला लिया, ऐसा शायद किसी ने सोचा तक नही होगा. अनैतिक यौन संबंध बनाने की मनमरजी करने वाले प्रेमियों के लिए यह एक सबक

‘‘ देरी के लिए क्षमा चाहता हूं सर… कोरोना कर्फ्यू की चेकिंग पर बस पांच मिनट में निकलता हूं …. दोनों कास्टेबल लंच खत्म करने ही वाले हैं…. लेडी कांस्टेबल कोरोना सेफ्टी किट पहनने गई है…‘‘टीआई ने एसडीपीओ को बताया.

‘‘…ठीक है, जल्दी करो…. और हां, सुनो…’ एसडीपीओ साहब ने जबलपुर के थाना खितौली के टीआई से कहा.

‘‘ जी सर…’’ उसी समय टीआई के फोन पर कोई दूसरी काल आ रही थी.उन्होंने अपने अधिकारी से विनम्र अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘सर! प्लीज, एक मिनट होल्ड करें, एक अनजान काल आ रही है… लगता है कोई मुसीबत में है. उस की बारबार काल आ रही है ?’’ कहते हुए टीआई जगोतिन मसराम ने उन का फोन होल्ड कर दिया. वह दूसरी काल रिसीव करते हुए बोले, ‘‘हैलो, कौन बोल रहे हैं? बताएं क्या समस्या है?’’

‘‘ सर…सर! जंगल में लाश पड़ी है…जल्दी आ जाइए.’’ काल करने वाले ने बताया.

‘‘ कहां…? किस जंगल में ? ’’ टीआई ने उस से पूछा.

‘‘ ह…ह….हरग? जंगल में सर! ’’ हड़बड़ाहट से भरी आवाज में उस ने बताया. ‘‘ घबराओ नहीं, आराम से

पूरी बात बताओ… पहले 2 सकेंड के लिए होल्ड करो, लाइन पर ही रहना, फोन मत काटना.’’ यह कहते हुए टीआई ने पहले से होल्ड अपने अधिकारी की काल औन कर उन्हें बताया, ‘‘ सर, अभीअभी हरगढ़ जंगल में एक लाश होने की सूचना मिली है. वहां जाना पड़ेगा’’

‘‘ हरगढ़ जंगल तो शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर है. ऐसा करो कोरोना कर्फ्यू चेकिंग के लिए किसी और को भेज दो. तुम वहां क्राइम जांच टीम के साथ तुरंत निकलो. पर दिन रहते पहुंचना होगा. कैमरा, फोरैंसिक जांच टीम, एंबुलेंस आदि ले कर जाना. कोरोना किट जरूर पहन लेना…पता नहीं कोई अज्ञात व्यक्ति इसी बीमारी से ही मरा पड़ा हो.’’ उन्होंने कहा.

‘‘ यस सर!’’ कहते हुए टीआई ने अनजान काल को औन किया.

‘‘ हां भाई, अब बताओ,… लेकिन पहले अपना नामपता बताओ.’’

‘‘ सर, मेरा नाम नारायण पटेल है. सिहोरा थान में गुरजी गांव का रहने वाला हूं. मेरे पिता प्रेमनारायण पटेल के मोबाइल पर किसी ने सूचना दी थी कि पान उमरिया रोड किनारे उस की मोटरसाइकिल पड़ी है. उस के थोड़ी दूरी पर ही एक लाश से दुर्गंध आ रही है.’’ अनजान व्यक्ति ने बताया.

‘‘ ठीक है, तुम हरगढ़ जंगल पहुंचो, मैं एक घंटे में पहुंच रहा हूं.’’ टीआई बोले.

‘‘…मुझे डर लग रहा है सर, क्योंकि मेरा छोटा भाई सोनू 16 मई से ही लापता है.’’ कांपती आवाज में नारायण बोला.

‘‘ डरो मत. घबराने की बात नहीं है.’’ यह कहते हुए टीआई जगोतिन मसराम ने काल डिसकनेक्ट कर दी. यह बात 24 मई, की दोपहर करीब सवा बजे की थी. थानाप्रभारी अपनी जांच टीम के साथ साढ़े 3 बजे हरगढ़ जंगल में उसी झुरमुट से घिरे महुए के पेड़ के पास पहुंच गए, जहां लाश होने की सूचना मिली थी. वहां तक पहुंचने के लिए ऊंची झाडि़यों से हो कर आना पड़ा. पगडंडीनुमा रास्ते से वह जगह थोडी हट कर थी. एक कांस्टेबल गिरी हुई मोटरसाइकिल की तहकीकात में जुट गया, जबकि थानाप्रभारी 3 सहकर्मियों के साथ लाश के पास जा कर  मुआयना करने लगे.

सभी कोरोना किट में थे. वहां तेज दुर्गंध भी फैल रही थी. घटनास्थल से जांच टीम ने अधनंगी सड़ीगली लाश के पास से जूट की एकएक मीटर की 2 रस्सियां, नीले रंग का लोअर, टीशर्ट, बनियान, चमड़े के चप्पल और 2 मास्क बरामद किए. लाश और बरामद सामान पेड़ों की सूखी पत्तियों से ढंक से गए.  एक ही जगह पर अधिक संख्या में जमा कीड़ेमकोड़ों को देख कर उस जगह किसी लाश के होने का अंदाजा लगाया जा सकता था. जांचपड़ताल चल ही रही थी कि तभी नारायण भी भागता हुआ आया, ‘‘ सर…सर, वही मेरे पापा की मोटरसाइकिल है. आगे की नंबर प्लेट किसी ने निकाल दी है. पीछे वाला भी तोड़ी है.

… मैं अपनी मोटरसाइकिल अच्छे से पहचानता हूं. सर…..’’ वह बोला.

‘‘ सर जी, ये देखिए मोटरसाइकिल  की टूटी हुई नंबर प्लेट मिली है. ’’ अधूरी नंबर प्लेट को दिखाता हुआ कांस्टेबल बीच में ही टीआई से बोल पड़ा.

अभी टीआई कुछ बोलते कि इससे पहले ही नारायण तपाक से बोल पड़ा, ‘‘ सर, यह तो मेरी ही मोटरसाइकिल की नंबर है.’’

‘‘ ठीक है, ठीक है. इसे भी बरामद सामान के साथ रख लो.’’ थानाप्रभारी ने कांस्टेबल को निर्देश दिया.

लाश पर से जब सड़ेगले और सूखे पत्ते हटाए गए तब उस से और भी तेज दुर्गंध आने लगी. लाश बुरी तरह से सड़गल चुकी थी. चेहरा तो बिलकुल ही पहचान में नहीं आ रहा था. मांस से बाहर निकली कुछ हड्डियां दिख रही थीं. खून तो सूख कर काला पड़ चुका था. आंखों का पता नहीं चल रहा था. लगता था वह बुरी तरह से कुचल दी गई हों. पास में ही करीब 10-15 किलो का एक  पत्थर दिखा. उस पर चिपकी मिट्टी का नमूना ले लिया गया. उस पर भी कीड़े चल रहे थे और पास में मक्खियां भिनभिना रही थीं. जांचकर्मियों ने अनुमान लगाया कि इसी पत्थर से चेहरे पर कई बार हमला किया गया होगा. नारायण ने बरामद सामानों में कपड़े और चप्पल के आधार पर चेहरा कुचले जाने के बावजूद लाश की पहचान कर दी, जो उस के छोटे भाई सोनू की ही थी. सारे कपड़े वही थे, जो उसे शादी में मिले थे.

यहां तक कि उन पर लगे हल्दी के दाग भी वैसे के वैसे थे, जिसे नारायण ने ही उन पर मात्र एक सप्ताह पहले लगाए थे दागधब्बे काले अवश्य हो गए थे, लेकिन स्वास्तिक का निशान देख कर नारायण ने कपड़े सोनू के होने की पुष्टि कर दी. थोड़ी देर में ही जबलपुर के एडिशनल एसपी शिवेश सिंह बघेल, एसडीपीओ (सिहोरा) श्रूतिकीर्ति सोमवंशी और फोरैंसिक जांच टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. वहां से बरामद सारी सामग्री को जब्त कर मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल भेजने के निर्देश दे दिए गए. लाश बड़ी मुश्किल से सील पैक कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई.

टीआई मसराम अपने साथ नारायण को ले कर थाने पहुंचे. उन्होंने घर वालों को भी थाने बुलवा लिया. शाम 7 बजे के करीब घरवालों में उस के पिता और पत्नी गायत्री से मसराम ने पूछताछ की. शुरुआती जांच की पूरी रिपोर्ट तैयार कर आगे की जांच और काररवाई के लिए फाइल तैयार कर दी गई. उस में सोनू के गुमशुदगी की शिकायत को भी दर्ज कर लिया गया, जिस की तहकीकत जबलपुर जिले के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा के दिशानिर्देश पर की जा जारी थी. सोनू के गुमशुदगी की शिकायत 17 मई, 2021 को सिहोरा थाने में तुलसीराम के बड़े बेटे नारायण पटेल ने अपने भाई के लापता होने की लिखवाई थी.

उस शिकायत के अनुसार सोनू 16 मई की सुबह 10 बजे घर से अपनी नवविवाहिता पत्नी का मोबाइल ठीक कराने को कह कर सिहोरा गया था. उस के देर रात तक वापस नहीं लौटने पर रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां फोन कर के पूछताछ की गई, लेकिन जब उस का कोई पता नहीं चला, तब थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज की गई. सोनू की 4 दिन पहले ही 12 मई, 2021 को कटनी जिले में बहोरीबंद थानांतर्गत बासन गांव की गायत्री के साथ शादी हुई थी. इस बारे में पुलिस ने गायत्री से पूछताछ की तो गायत्री ने पुलिस को बताया कि पति के शाम तक वापस नहीं आने पर उस ने  पति के मोबाइल पर काल की थी, लेकिन फोन आउट औफ कवरेज मिला था.

उसे लगा कि वह रात तक वापस आ जाएंगे, लेकिन नहीं आए. उन के न आने पर मन कई तरह की आशंकाओं से घिर गया और फिर उस ने ही अगले दिन सुबह नारायण को गुमशुदगी की रिपर्ट लिखवाने के लिए कहा. जांच और दूसरे किस्म की तहकीकाती पूछताछ से यह साफ हो गया था कि बरामद लाश सोनू की ही थी, लेकिन अहम सवाल उस की मौत को ले कर बना हुआ था. पहला और ठोस कारण हत्या का ही सामने आ रहा था. यानी हत्या हुई थी तो क्यों और कैसे के सवालों के जवाब तलाशने बाकी थे. साथ ही जल्द से जल्द हत्यारे तक पहुंचने और उसे सजा दिलवानी भी जरूरी थी.10 दिन बाद ही मैंडिको लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल की रिपोर्ट भी आ गई थी.उस रिपोर्ट ने पुलिस को हैरत में डाल दिया.

रिपोर्ट के अनुसार गुरजी गांव से 15 किलोमीटर दूर हरगढ़ की बरामद लाश के गले में जूट की एक पतली रस्सी भी लिपटी थी, जो भीतर की ओर धंस गई थी. इस आधार पर ही उस की मौत को पहले आत्महत्या कहा गया था. हालांकि उसके दोनों हाथों की कलाइयां और पैरों को घुटने के ठीक ऊपर रस्सियों से बांधने के निशान पाए गए थे. ये सबूत सोनू की हत्या की ओर इशारा कर रहे थे, जिस में एक ही व्यक्ति के शामिल होने की भी बात कही गई थी. अब पुलिस के सामने सवाल था कि कोई एक व्यक्ति कैसे एक हष्टपुष्ठ नौजवान की रस्सियों से गला घोंट कर हत्या कर सकता है? किस तरह से उसने उस के हाथ और पैर बांधे होंगे?

इस मामले को खितौला पुलिस थाने में 10 जून को दर्ज किया गया. सिहोरा तहसील के एसडीपीओ की कमान संभाले 2018 बैच के आईपीएस श्रूतिकीर्ति सोमवंशी ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने सोनू के मोबाइल कौल की पूरी डिटेल्स निकलवाई. उस में पता चला कि सोनू के मोबाइल नंबर से 16 मई को किसी मधु पटेल नाम की लड़की से 4-5 बार बात हुई थी. उन के बीच बातचीत का समय सोनू के घर से निकलने के ठीक बाद साढ़े 10 और 12 बजे के बीच का था. उस के अलावा सोनू की किसी और से बात नहीं हुई थी.  पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सोनू की मौत दिन में 2 बजकर 32 मिनट पर हो चुकी थी. मधु के बारे में नारायण और गायत्री से अलगअलग पूछताछ की गई.

नारायण ने मधु के संबंध में इतना बताया कि वह उस की बहन की 20 वर्षीया अविवाहित ननद है. वह फिलहाल सिहोरा तहसील के ही मढ़ई गांव में अपने मातापिता और भाईबहनों के साथ रहती है. गायत्री से पूछने पर उस ने मधु के बारे में जो बताया उससे जांच को आगे बढ़ाते हुए मामले को सुलझाने की खास कड़ी मिल गई. हालांकि गायत्री ने बताया कि उस के पति और मधु के बीच प्रेमसंबंध थे. जबकि उस बारे में पति ने यह भी कहा था कि अब उन के बीच के सारे संबंध खत्म हो चुके हैं और मधु की भी शादी तय हो चुकी है.

पुलिस द्वारा बारबार गायत्री से सोनू के बारे में सवाल पूछे जा रहे थे. पुलिस को लग रहा था कि गायत्री कुछ बातें छिपा रही है. अंतत: वह अपनी पीड़ा ज्यादा समय तक छिपा नहीं पाई. एक बार पुलिस से गायत्री ने पूछ लिया, आखिर इस में उस की क्या गलती है? उन्होंने पुलिस से कहा कि वह बेहद दुखी है. एक तरफ उस की उजड़ी हुई जिंदगी है, दूसरी तरफ घरपरिवार वाले उसे अपशकुन, कुलच्छनी और न जाने क्याक्या कह कर दोषी ठहरा रहे हैं. उस ने अपने पति को मोबाइल ठीक करवाने को क्या कहा, वह सब के निशाने पर आ गई है. जबकि सच तो यह था उस ने ही मोबाइल ठीक कराने की जिद की थी. कुछ लोग तो उसे भी पति की हत्या में शामिल बता रहे थे. गायत्री ने बेहद दुखी हो कर पुलिस को पूछताछ में बताया कि उस की भावनाओं और दु:ख को समझने वाला कोई नहीं है.

दरअसल, गायत्री दुखी होने के साथसाथ अज्ञात आशंका को ले कर बेचैन हो गई थी. उस के मन पर एक बोझ बना हुआ था, जो सोनू ही लाद गया था. अब उस के लिए उस राज को मन में दबाए रखना मुश्किल हो रहा था, जो सोनू ने बताए थे. इसे ले कर शादी के दूसरे दिन ही सोनू से उस की तब कहासूनी हो गई थी. जब उस ने मधु के बारे में पूछ लिया था. जवाब में सोनू ने गुस्से में कह दिया था, ‘‘घर में आए एक दिन भी नहीं हुआ और जासूसी करने लगी हो?’’

इस का जवाब गायत्री ने सहजता से दिया था, ‘‘मधु कुछ देर पहले ही सबकुछ बता गई है.’’

‘‘ क्या कहा उस ने?… और, और…! तुम ने उसे अपने पास आने कैसे दिया?’’ वह बोला.

‘‘ क्यों? मैं उसे कैसे रोकती. वह आप की बहन की ननद है. हमारी रिश्तेदार है. उसे अपने पास नहीं बैठने देती तो परिवार वाले क्या कहते? ’’ गायत्री ने सफाई दी.

‘‘ खैर, बताओ उस ने क्या कहा?’’ सोनू अब थोड़ा नरम पड़ गया था.

‘‘ वह बहुत तेवर में मेरे साथ पेश आई थी. बातें गुस्से में करती हुई तुम से प्रेम करने की बात कह डाली.’’

यह सुन कर सोनू सन्न रह गया. गायत्री ने उसे बताया कि मधु उस के साथ किस तरह झगड़ा कर धमकियां देती हुई अपने घर गई. उस ने सोनू को यह भी बताया उसे हमारी शादी से उसे बेहद नाराजगी है. उस ने तुम पर बेवफाई का आरोप लगाया है. तुम्हें उस ने धोखेबाज प्रेमी कहा है. उस का कहना था कि तुम ने उस से शादी का वादा किया था. तुम ने मुझ से शादी की इसलिए मैं भी अब उस की दुश्मन हूं. सोनू और गायत्री की शादी के दूसरे दिन मधु को ले कर उन के बीच काफी नोकझोंक हुई. गायत्री ने सोनू को यहां तक कहा कि वह उस के बहन की ननद होने कारण चुप रही. उस के हर इलजाम को नजरंदाज किया.

खैर, सोनू ने गायत्री पर गुस्सा होने और मामले को आगे बढ़ने से रोकने के बजाय उस से माफी मांग ली. मधु से तमाम संबंध तोड़ने का वादा भी किया. बातोंबातों में सोनू ने बताया कि अब वह उस की ब्लैकमेल का शिकार हो रहा है. कुछ चीज मधु के पास है, जिस की वजह से उस के तेवर बदले हुए हैं. काफी पूछ ने पर भी सोनू ने उस राज के बारे में नहीं बताया और इसे अपने तक सीमित रखने की कसम खिलाई. ये सारी बातें गायत्री ने पूछताछ में पुलिस को भी बताईं.

पुलिस के लिए गायत्री द्वारा सोनू के साथ मधु के प्रेम संबंध की जानकारी हत्या की गुत्थी सुलझाने में काफी महत्वपूर्ण साबित हुई. हालांकि एक तरफ गायत्री के हाथों में लगी मेहंदी का रंग कम नहीं हुआ था कि उस की मांग का सिंदूर उजड़ गया था. उस के लिए सुहाग का जोड़ा 4 दिन की चांदनी बन कर रह गया था. शादी से पहले उस ने जो सपने देखे थे, वह रेत के महल साबित हुए. एक पल में शादी की खुशियां और विवाहित जीवन के सभी अरमान चकनाचूर हो गए. जिस घर में कल तक ढोलक की थाप पर वैवाहिक गीत गूंज रहे थे, वहां चीखपुकार और  सिसकियां पसरी हुई थीं.

पति को खो चुकी गायत्री अपनी पीड़ा और परिजनों के ताने से काफी तनाव में थी. दूसरी तरफ पुलिस ने संदेह के आधार पर 12वीं तक पढ़ी मधु पटेल को भी पूछताछ के लिए थाने बुलावा लिया. उस से महिला पुलिस ने पहले बातों से अपने जाल में उलझाया और अलग अंदाज में पूछताछ की.

‘‘ तुम सोनू को कब से जानती हो? ’’

‘‘ जब से उस की बहन की शादी मेरे भाई से हुई. 2 साल हो गए.’’ मधु बोली.

‘‘ तुम सोनू से प्रेम करती हो?’’ पुलिस ने पूछा.

‘‘ जी नही.’’ वह बोली.

‘‘ लेकिन तुम उस से शादी करना चाहती थी.’’ पुलिस ने अगले सवाल किया.

‘‘ किस ने बताया कि मैं उस से शादी करना चाहती थी?’’

‘‘ तुम ने ही तो कहा है.’’ यह कहते हुए पूछताछ करने वाली महिला पुलिस अधिकारी ने उसे एक आडियो सुनाया. आडियो में मधु तेज आवाज में बोल रही थी ‘तुम ने मुझ से शादी नहीं की तो मैं सब को बरबाद कर दूंगी. देख लेना…! तुम्हें भी नहीं छोडूंगी.’

‘‘यह धमकी तुम ने किसे दी थी, यह तुम बताओगी या मैं ही बताऊं.’’ पुलिस अधिकारी ने कहा.

‘‘ बताती हूं, बताती हूं! लेकिन सोनू को मैं ने नहीं मारा.’’

‘‘ अरे, मैं ने तो सोनू की हत्या के बारे में तुम से कुछ पूछा ही नहीं.’’

‘‘ गलती हो गई मैडम.’’

‘‘अच्छा चलो, उस की हत्या के बारे में ही कुछ बता दो, जो तुम जानती हो. किस ने मारा उसे?’’

‘‘ मुझे नहीं मालूम? मैं कुछ नहीं जानती.’’

‘‘ उस की मौत का तुम्हें तो जरा भी दुख नहीं हुआ. तुम उस की विधवा पत्नी को ढांढस बंधाने भी नहीं गई.’’

‘‘ मुझे कुछ नहीं मालूम… एक बार गायत्री से फोन पर बात करने की कोशिश की थी. बात नहीं हो पाई.’’

‘‘  जिस दिन सोनू की हत्या हुई उस के 2 घंटे पहले उस ने केवल तुम से ही फोन पर बात की थी.’’

‘‘ जी..जी….? मैं कुछ नहीं जानती…’’

‘‘ तुम सब जानती हो, उस का भी मेरे पास सबूत हैं.’’ यह कहते हुए पुलिस ने जब उस की टूटी हुई कलाई घड़ी का फीता दिखाया, तब वह सकपका गई. उस का चेहरा पसीने से भीग गया. उस ने पीने के लिए पानी मांगा.

‘‘ देखो तुम्हारी शादी होने वाली है. तुम सचसच बताओगी तब तुम्हे कुछ नहीं होगा. पुलिस जांच, सोनू की हत्या आदि के बारे में किसी को कुछ नहीं पता चलेगा. अभी मैं अकेले में सवाल कर रही हूं. कल को वकील भरी अदालत में सब के सामने करेंगे.’’

मधु पुलिस की बातों में आ गई और उस ने सोनू की हत्या करने की बात मान ली. उस ने जो बताया उस के अनुसार मधु और सोनू की प्रेम कहानी में पवित्र प्रेम की बुनियाद अनैतिक संबंध और बदले की आग पर टिकी हुई थी. मधु द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार सोनू की हत्या का पूरा मामला इस तरह से सामने आया—

मधु पटेल मढ़ई गांव के रहने वाले नारायण पटेल की बेटी थी. उन के बेटे साहिल की शादी प्रेमनारायण पटेल की बेटी निधि से 2019 में हुई थी. दोनों परिवारों की खेतीबाड़ी में काफी आपसी तालेमल था. वे एकदूसरे की मदद करने को हमेशा तैयार रहते थे. सरकारी अनाज खरीद केंद्र पर धान और गेंहू की बिक्री के सिलसिले में सोनू अकसर मधु के घर आताजाता रहता था. सोनू निधि का छोटा भाई था. इस कारण उस का बहन की ससुराल में आनाजाना शुरू हो गया था. साहिल की छोटी बहन मधु चंचल स्वभाव की खूबसूरत  लड़की थी. वह जितनी बातून थी, उतनी ही शरारत और आकर्षक. मजाक तो बातबात पर करती थी.

कुछ भी बोलने में वह नहीं हिचकती थी. सोनू जब भी अपनी बहन की ससुराल आता, मधु उस की खातिरदारी करती. मजाक का रिश्ता होने के कारण उन के बीच खूब हंसीमजाक चलता रहता था. इस सिलसिले में कब उन के बीच प्रेम का अंकुर फूट पड़ा उन्हें पता ही नहीं चला. एक बार मधु अपनी भाभी के साथ सोनू के घर आई हुई थी. संयोग से उस के आने के कुछ दिन बाद ही कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लौकडाउन हो गया. आवागमन के सारे साधन बंद हो गए. इस कारण मधु को अपनी भाभी के घर ही रुकना पड़ा. इस दौरान सोनू और मधु के बीच प्रेम की मधुरता और गहरी हो गई. उन पर घर के दूसरे लोगों की भी नजर बनी रहती थी, जिस से वे एकांत की ताक में रहने लगे. जब भी मौका मिलता खेतों की ओर साथ में निकल पढ़ते या फिर पास के जंगल की और चले जाते थे.

एक दिन दोपहर का समय था. घर के लोग पास के गांव में अपने रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे. निधि खाना बनाने में लगी थी. सोनू और मधु कमरे में बैठ कर टीवी देख रहे थे. उन के बीच हंसीमजाक का दौर भी चल रहा था. वे कोरोना काल में शादी को ले कर चर्चा कर रहे थे. उन के बीच विवाहित जोड़े द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग के पालन पर बहस हो रही थी. बातोंबातों में सोनू रोमांटिक मूड में आ गया था. मौका देख कर सोनू मधु के गाल और होंठ छूते हुआ बोला, ‘‘ अभी शादी करने वालों को सिर्फ इस से काम चलना होगा.’’

मधु उस की हरकत से शर्मसार हो गई. उस ने उस के हाथ को झटक दिया.

सोनू बोल पड़ा, ‘‘मैं तुम से प्यार करता हूं, मधु.’’

‘‘ मैं भी तुम्हें दिलोजान से चाहती हूं.’’ इतना कहना था कि सोनू ने मधु को गले लगा लिया. मधु भी खुद को नहीं रोक पाई. सोनू के गाल चूम लिए और उस की आगोश से छूट ने की कोशिश करने लगी.

‘‘ मधु मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’ कहते हुए सोनू ने आंख पर आ चुकी उस की बालों की लट को हटाया.

‘‘ चलो हटो भी, बड़े आए शादी करने वाले. पहले अपने परिवार को तो राजी कर लो. वह रीतिरिवाज के पक्के हैं. बातबात में गोत्र, संस्कार और समाज की बात करते हैं.’’ कहते हुए मधु ने धीरे से सोनू के गालों पर थपकी दी.

‘‘ वह तो मैं कर लूंगा, तुम्हें पाने के लिए सारे रीतिरीवाज तोड़ दूंगा. तुम भी अपने मांपापा से बात करना.’’ अब सोनू ने भावावेश में मधु के होंठ चूम लिए. फिर अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की, ‘‘तुम मेरा साथ दो तो हम दोनों शादी कर जीवन भर साथ रहेंगे.’’

इसी बीच सोनू की बहन ने आवाज लगाई, ‘‘सोनू देखना बाहर दरवाजे पर कौन है. और हां, बाथरूम में मेरे लिए 2 बाल्टी पानी भी रख देना.’’

अच्छा दीदी, बोलता हुआ सोनू चला गया और मधु उस की खयालों में खो गई. कहते हैं न कि इश्क का रोग लाख छिपाने पर भी नहीं छिपता है. सोनू और मधु के साथ भी ऐसा ही हुआ. उन के प्रेम की पहली भनक निधि को लगी. उस ने दोनों को शादी करने से मना कर दिया. साफसाफ लहजे में कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है. इस से 2 परिवारों की इज्जत समाज में गिर जाएगी. तुम दोनों की शादी गौत्र के नियम के अनुसार गलत होगी. जिस से भविष्य में परिवार के बीच कलह पैदा हो सकती है और मेरी शादीशुदा जिंदगी भी प्रभावित हो जाएगी.

उन के प्रेम संबंध और शादी की बात परिवार के सभी बड़े लोगों को हो गई. सब से पहले निधि  मधु को लेकर अपनी ससुराल चली गई. बदनामी के डर से उन्हें मिलनेजुलने पर रोक लगा दी गई. जब प्यार पर पाबंदी बढ़ने लगी तो दोनों ने मोबाइल फोन की वीडियो काल को अपने प्यार के इजहार का जरिया बना लिया. दूसरी तरफ दोनों के परिजन उन की अलगअलग शादी करने के इंतजाम में लग गए. जल्द ही मधु का रिश्ता पाटी गांव के विजय पटेल के साथ तय हो गया था. उस की सगाई भी हो गई. मधु की सगाई की रस्म होते ही सोनू गिरगिट की तरह रंग बदलने लगा. वह मधु से मिलनेजुलना तो दूर उस से बात करने तक से कतराने लगा. जबकि उस की शादी भी कटनी जिले के गांव बासना की रहने वाली गायत्री पटेल से तय हो गई थी.

मधु सोनू द्वारा उपेक्षा किए जाने से परेशान रहने लगी थी. उसे बहुत बुरा लग रहा था. कारण सोनू ने उस के साथ प्यारमोहब्बत की कसमें खाई थीं. खैर, किसी तरह से मधु ने अपने मन को समझा लिया था और सोनू के प्यार को भूल कर अपने नए रिश्ते के लिए खुद को तैयार करने लगी थी. विजय के साथ अपनी शादी के सपने सजाने लगी थी, लेकिन मधु के लिए सोनू को भूलना आसान नहीं था. उस की लुभावनी बातें, वीडियो कौलिंग में की गई ख्वाहिशें, मीठे चुंबनों की यादें, आगोश के चंद लमहों में लिपटा यौनसुख आदि को मधु चाह कर भी नहीं भूल पा रही थी.

हत्या की घटना के करीब 4 महीने पहले सोनू मधु के घर गया था. दोनों की शादी अलगअलग जगहों पर तय हो जाने के बाद उन के मिलनेजुलने पर पहले जैसी पाबंदी में थोड़ी ढील मिल गई थी. उन के बीच पहले की तरह मुलाकातें और बातें होने लगी थीं. एक दिन सोनू ने मौके का फायदा उठा कर मधु के साथ एक बार फिर शरीरिक संबंध बना लिए थे. यही नहीं इस का उस ने एक वीडियो भी बना लिया था, जो उस ने उस के वाट्सएप पर भेज दिया था. मधु सोनू की इस हरकत से दुखी हो गई. उस ने वीडियो हमेशा के लिए डिलीट करने की उस से विनती की, लेकिन सोनू के मन में तो कुछ और ही चल रहा था.

उस ने मधु के साथ अंतरंग रिश्ते की वीडियो को ब्लैकमेल का औजार बना लिया. वह उस वीडियो की आड़ में मधु से साथ लगातार यौन संबंध बनाने का दबाव बनाने लगा था. मधु बारबार समझाती थी कि उस की शादी होने वाली है इसलिए ऐसा नहीं करे. वह सोनू की शादी तय होने का भी हवाला देती थी. वह सोनू से बोली, ‘‘क्यों न हम अपनेअपने नए जीवन की शुरुआत करें.’’

उस के जवाब में सोनू धमकियां देने लगा. यह सब चलता रहा और सोनू की शादी 12 मई, 2021 को हो गई. दोबारा लौकउाउन लगने की वजह से मधु की शादी की तारीख पक्की नहीं हो पाई थी. मधु से अकेले में मिलने के लिए सोनू ने 14 और 15 मई को लगातार कई फोन किए. उस ने फोन पर ही कहा, ‘‘ तुम्हारी तो शादी होने वाली है, आखिरी बार मुझ से मिल लो.’’

‘‘ ठीक है, मैं तुम्हारे साथ आखिरी बार संबंध बना लूंगी, लेकिन वह मेरे अनुसार होगा. उस के लिए जगह भी मैं तय करूंगी और तरीका भी मेरे कहे का अपनाना होगा.’’ मधु ने शर्त रखी.

‘‘ कौन सी जगह? कैसा तरीका?’’ सोनू ने जिज्ञासवश पूछा.

‘‘ वह सब मैं 16 तारीख को बताउंगी. मैं चाहती हूं कि हमारी आखिरी मुलाकता यादगार बने.  दिन में साढ़े 10 बजे फोन करना, मिलने की जगह बता दूंगी. मेरे कहे अनुसार संबंध बनाने होंगे. जैसजैसा मैं कहूंगी, वैसावैसा करना होगा. और हां, पहले मेरे सामने ही पुराने सभी वीडियो डिलीट करने होंगे.’’ मधु ने चुहलबाजी के साथ आकर्षक अंदाज में कहा.  मधु का प्रस्ताव सुन कर सोनू काफी रोमांचित हो गया. उस ने झट से हां कह दी.

अगले रोज 16 मई, 2021 को ठीक 10 बजे सोनू अपने पिता की मोटरसाइकिल ले कर मधु द्वारा बताए गई जगह सिद्धम मंदिर के पास पहुंच गया. वहीं से उस ने मधु को फोन किया. 3 काल उस ने रिसीव नहीं किए. सोनू खीज उठा. उस ने फिर काल की. इस बार मधु ने काल रिसीव करते हुए कहा कि वह 8-10 मिनट में पहुंचने वाली है.

थोड़ी देर में ही मधु अपनी बुआ की 16 वर्षीया बेटी निमिषा ( बदला नाम) के साथ आ गई. सोनू ने पूछा, ‘‘कहां चलना है?’’

मधु बोली, ‘‘वहीं जहां पहले भी कई बार मिलते रहे हैं. हरगढ़ जंगल.’’इस के बाद तीनों मोटरसाइकिल पर आधे घंटे में ही हरगढ़ जंगल के पास पहुंच गए. सोनू ने सड़क के किनारे मोटरसाइकिल लगा दी और निमिषा को वहीं रुकने के लिए कहा. फिर वह मधु के साथ भीतर जंगल में चला गया. झाडि़यों के एक झुरमुट के बीच थोड़ी सी जगह पर दोनों बैठ गए. मधु ने अपने हैंडबैग में रखा दुपट्टे की तरह इस्तेमाल किया जाने वाला वही स्टाल निकाला और बिछा दिया, जिस पर बैठ कर वह अकसर रोमांटिक बातें किया करते थे. सोनू उसपर लेट गया. मधु ने रोमांटिक अंदाज में कहा, ‘‘आज मैं तुम्हारे हाथोंपैरों को रस्सी से बांधूंगी. आंखों पर भी पट्टी बांध दूंगी. उस के बाद हम संबंध बनाएंगे.’’

यह सुनकर सोनू को अजीब तो लगा, लेकिन वासना की आग में जलता हुआ मधु के कहे अनुसार पेट के बल लेट गया. इस से पहले मधु ने साथ लाई रस्सी से उस के हाथ और पैर बांध दिए थे. सोनू के लेटते ही मधु उस की पीठ पर सवार हो गई और पास पड़े एक वजनी पत्थर सिर पर दे मारा. सोनू अभी संभलता इस से पहले मधु ने पत्थर से 3-4 वार कर दिए. हाथपैर बंधे होने और आंखों पर पट्टी होने के कारण सोनू अपना बचाव नहीं कर पाया. मधु ने उस के गले को भी एक रस्सी से कस दिया. कुछ समय में ही सोनू के शरीर से हलचल बंद हो गई. उसे लात से पीठ के बल उलट दिया. मृत सोनू की आंखों की पट्टी खोली. हाथपैर की रस्सियां भी खोल दीं. गले की रस्सी लिपटी छोड़ दी.

बिछाया स्टाल निकाल कर अपने बैग में रख लिया. फिर उस ने पत्थर से उस के चेहरे पर जोर से कई वार किए. उस की जेब से एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल निकाल कर अपने बैग में रख लिया. सोनू को मौत के घाट उतारने के बाद मधु ने निमिषा को आवाज दे कर बुला कर कहा, ‘‘सोनू को हम ने मार दिया. आज मैं ने उस की बेवफाई और ब्लैकमेलिंग का बदला ले लिया है. हमेशा के लिए कांटा निकाल दिया है. इस बारे में तुम किसी से कुछ नहीं कहना.’’

दोनों जंगल से बाहर निकल आईं और मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट को पत्थर मारमार कर तोड़ डाला. ऐसा करते हुए मधु की कलाई घड़ी का फीता टूट गया उस ने घड़ी तो उठा कर अपने बैग में रख ली और टूटा हुआ फीता वहीं झाडि़यों में फेंक दिया. इस जुर्म को कबूलने  के बाद मधु ने पुलिस को बताया कि वह सोनू द्वारा बनाई गई उस की अश्लील वीडियो को ले कर परेशान थी. उस से बच ने का एक ही तरीका उस के दिमाग में आया कि उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया जाए. इस खुलासे के बाद मधु पटेल पर सोनू की हत्या के आरोप में आइपीसी की धाराएं 302 और 201 लगाई गई.

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया. निमिषा पर भी साक्ष्य छिपाने के जुर्म में आइपीसी की धारा 201 लगाकर उसे बाल कारागार गृह शहडोल भेज दिया गया, जबकि मधु पटेल को महिला जेल जबलपुर भेज दिया गया. Crime News Hindi

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

 

Hindi Crime Story : हनीमून में बीवी लाई मौत

Hindi Crime Story : 21 वर्षीय राज कुशवाहा इंदौर में स्थित सोनम रघुवंशी (24 वर्ष) के भाई की प्लाईवुड फैक्ट्री में नौकरी करता था. वहीं पर सोनम को राज कुशवाहा से प्यार हो गया. दोनों ने जीवन भर साथ रहने का वादा कर लिया. इसी दौरान फेमिली वालों ने सोनम की शादी राजा रघुवंशी से कर दी. फिर प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिल कर सोनम ने हनीमून के बहाने पति राजा रघुवंशी को ठिकाने लगाने की ऐसी योजना बनाई, जिस की गूंज पूरे देश में फैल गई.

सोनम रघुवंशी नहीं चाहती थी कि उस की शादी उस के प्रेमी राज कुशवाहा के अलावा किसी और के साथ हो, लेकिन उस के न चाहते हुए भी पेरेंट्स ने उस की शादी राजा रघुवंशी के साथ तय कर दी थी. शादी तय हो जाने के बाद वह बहुत परेशान थी, क्योंकि तनमन से वह प्रेमी राज की थी. इसलिए वह ताउम्र उसी के साथ रहना चाहती थी. उस ने प्रेमी को फोन कर कहा, ”राज, पापा ने मेरी शादी तय कर दी है. और मालूम है शादी की तारीख क्या है, 11 मई 2025.’’

”शादी से क्या होता है सोनम, कागज के एक टुकड़े और कुछ मंत्र पढ़ देने से कोई रिश्ता नहीं बनता.’’ राज ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा.

”राज, मैं किसी और की नहीं हो सकती. मैं सिर्फ तुम्हारी हूं और अगर तुम ने मुझे नहीं अपनाया तो मैं सच कह रही हूं, मैं मर जाऊंगी. आज वो जो लड़का मुझे देखने आया था राजा रघुवंशी, वो मुझे देख कर मुसकरा रहा था. जिसे देख कर मेरे अंदर ऐसी आग लग रही थी कि एक घूंसा मार कर उस की वो मुसकान वहीं दबा दूं. पर पापा वहीं थे, इसलिए कुछ कर नहीं पाई. लेकिन मेरी बात ध्यान से सुन लो राज, अगर तुम ने मेरा साथ नहीं दिया तो मैं दुनिया में ऐसा तूफान ला दूंगी कि लोग मेरे नाम से भी डरेंगे. मैं सब कुछ जला दूंगी खुद को, इस दुनिया को और हर रिश्ते को.’’

”तुम मेरी थी, मेरी हो और मेरी ही रहोगी सोनम,’’ राज ने कहा.

”मैं सिर्फ तुम्हारे लिए बनी हूं राज, किसी और के लिए नहीं.’’

”चिंता मत करो और विश्वास रखो सोनम, अगर उस की परछाई भी तुम्हें छुएगी तो मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’’

”मैं तुम्हें पहले ही बता चुकी हूं, पापा हार्ट के पेशेंट हैं. मैं ऐसा कोई भी कदम नहीं उठा सकती, जिस का उन की सेहत पर असर हो. घर से भाग कर कहीं और जा कर रहने का खयाल तो दिल से निकाल दो.’’

”फिर तुम ही कुछ बताओ कि क्या किया जाए?’’

”मेरा आइडिया यह है कि मेरी कदकाठी की कोई लड़की तलाश की जाए. उस की हत्या कर के जला दिया जाए. मेरी स्कूटी में भी वहीं आग लगा दी जाए. यह काम किसी ऐसी सुनसान जगह पर किया जाए, जिस से कि कोई देख न सके. तब यह साबित हो जाएगा कि सोनम मर गई. फिर हम दोनों किसी और शहर में जा कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे.’’

सोनम ने कहा कि घरों में काम करने वाली किसी लड़की की तलाश आसानी से हो सकती है. लेकिन काफी तलाश के बाद भी घर में साफसफाई चौकाबरतन करने के लिए ऐसी कोई लड़की हाथ नहीं लगी, जिस की कदकाठी सोनम जैसी हो. इस से राज ने राहत की सांस ली. इस की वजह यह थी कि इस से राज और उस के परिवार की जिंदगी ही तबाह हो जाती. घर में आर्थिक साधन जुटाने के लिए वह अकेला ही था. घर का खर्च उस के वेतन में मुश्किल से चल पाता था. सोनम अगर अपने घर वालों के लिए मर गई होती तो नई परेशानी ही खड़ी हो जाती. यदि वह घर से 30 या 40 लाख रुपए ले कर भी आ जाती तो भी कब तक उस से गुजारा होता.

सेफ गेम खेलना चाहता था राज कुशवाहा

दूसरी जगह दोनों को नौकरी मिलना भी आसान नहीं था. कोई बिजनैस करने के लिए बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता. इस तरह राज भी अपने परिवार के लिए एक तरह से मर ही चुका होता. राज कुशवाहा ने सोनम को समझाया कि इस तरह की दुर्घटना से तुम्हारे पापा तुम्हारी मौत का सदमा शायद बरदाश्त नहीं कर पाएंगे. अगर हार्टअटैक से बच भी जाएं तो जीते जी भी उन की मौत हो जाएगी. उस की पहली योजना घर से भागने की भी मेरी समझ से परे थी, क्योंकि उस का अंजाम भी वही होता. आर्थिक संकट से राज का परिवार ही नहीं, बल्कि राज और सोनम भी जूझ रहे होते.

यह सोच कर राज ने उस की दोनों ही योजनाओं को फेल करने में पूरा दिमाग लगा दिया. वह चाहता था कि सोनम से शादी कर के फैक्ट्री का मालिक बन जाएगा, जिस में अब तक नौकरी करता था. वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता था, जिस से कि सोने के अंडे देती मुरगी उस के हाथ से निकल जाए.

सोनम की शादी की तारीख करीब आ चुकी थी. उस की चिंता बढ़ती जा रही थी. सोनम की चिंता दूर करने के लिए राज ने एक ऐसा प्लान तैयार किया, जिसे सुन कर सोनम खुशी से उछल पड़ी. उस ने कहा, ”इस का मतलब यह है कि मैं विधवा हो जाऊंगी और बिरादरी का कोई व्यक्ति विधवा से शादी करने के लिए आसानी से तैयार नहीं होगा. फिर विधवा से शादी किसी और बिरादरी के युवक से करने के लिए मेरे पापा भी राजी हो जाएंगे. यानी हम दोनों पतिपत्नी के रूप में जिंदगी बिता कर अपने सपनों को साकार कर सकेंगे. बहुत बढिय़ा.’’

”लेकिन एक वादा करो,’’ राज ने कहा.

”क्या?’’

”शादी के बाद उस दुष्ट को सुहागरात की रस्म अदा करने नहीं दोगी.’’

”इस का मतलब यह कि मुझे सुहागन बनते ही यानी सुहागरात मनाने से पहले विधवा करना चाहते हो.’’ सोनम ने मुसकराते हुए कहा, ”यह पक्का वादा है, मुझे चाहे जो भी जतन करना पड़े, मैं उसे सुहागरात को हाथ नहीं लगाने दूंगी.’’

इंदौर मध्य प्रदेश का सब से बड़ा और सब से व्यस्त शहर है. यह ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है. यह शहर एक तरफ अपने गौरवशाली अतीत की गवाही देता है तो दूसरी ओर आधुनिकता और प्रगति का प्रतीक भी है. इस शहर का नाम इंद्रेश्वर महादेव मंदिर से लिया गया है, जो अब भी शहर के मध्य में स्थित है.

राजवाड़ा, इंदौर की 7 मंजिला ऐतिहासिक इमारत मराठा, मुगल और फ्रांसीसी वास्तुकला का अद्भुत संगम है. यह शहर के दिल में स्थित है. यह महल होलकर शासकों की विलासिता और कलात्मक रुचि का प्रतीक है. यूरोपीय शैली में बना यह महल अपने भव्य फरनीचर, दीवारों पर सुंदर चित्रों और विशाल गार्डन के लिए प्रसिद्ध है. इंदौर केवल एक शहर नहीं, बल्कि अनुभवों का संगम है, जहां इतिहास बोलता है, स्वाद महकता है, शिक्षा ऊंचाइयां छूती है और स्वच्छता संस्कृति बन जाती है.

इतनी खूबियों वाले इसी शहर में देवी सिंह नाम के एक व्यक्ति निवास करते हैं. उन का एक बेटा गोविंद रघुवंशी और बेटी सोनम रघुवंशी है. उन की पत्नी संगीता रघुवंशी घरेलू काम संभालती हैं. दरअसल, सोनम रघुवंशी का मूल निवास गुना जिला है. सोनम अपने भाई गोविंद से उम्र में छोटी है. गोविंद की शादी करीब 8 साल पहले विदिशा से हुई थी और उस के 2 बच्चे हैं. सोनम का परिवार पिछले कुछ सालों से इंदौर में रह रहा है. बताया जाता है कि उन्होंने गुना से इंदौर आने का फैसला उस वक्त लिया, जब गोविंद ने व्यापार में कदम रखा. शुरुआत में गोविंद एक निजी कंपनी में नौकरी करता था. लेकिन साल 2020 के आसपास उस ने माइका (सनमाइका) के व्यापार में कदम रखा और खुद की कंपनी खड़ी की.

शुरुआत में गोविंद केवल तैयार माल खरीद कर बेचने का काम करता था, लेकिन बाद में उस ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का फैसला लिया. अब उस की एक माइका मैन्युफैक्चरिंग यूनिट गुजरात में स्थापित है, जहां से वह माल तैयार कर विभिन्न शहरों में सप्लाई करता है. सोनम के परिवार का बिजनैस अग्रणी कारोबार में से एक था. परिवार की इंदौर में एक सनमाइका बनाने की यूनिट है. देवी सिंह को पैरालाइसिस का अटैक हुआ था, जिस के कारण वह फैक्ट्री में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाते. सोनम रघुवंशी और गोविंद रघुवंशी दोनों भाईबहन मिल कर कारोबार संभालते हैं. सोनम अपने ही पिता की कंपनी में बतौर एचआर काम करती थी.

इसी शहर में अशोक रघुवंशी का एक परिवार है. इन के 3 बेटे और एक बेटी है. एक बेटे का नाम सचिन रघुवंशी, दूसरे का विपिन रघुवंशी, तीसरा सब से छोटा 28 वर्षीय बेटा राजा रघुवंशी और बेटी सृष्टि है. उन का ट्रांसपोर्ट का प्रमुख व्यवसाय है. राजा रघुवंशी व 2 बड़े भाई सचिन और विपिन भी संयुक्त परिवार के रूप में रहते हैं.  ‘रघुवंशी ट्रांसपोर्ट’ नामक कंपनी परिवार के सभी लोग 2007 से संयुक्त रूप से चलाते थे. इस कंपनी का मुख्य काम स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को किराए पर बसें उपलब्ध कराना है. सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी दोनों के परिवार का आपस में कोई रिश्ता नहीं था. इन में से कोई एकदूसरे को जानता तक नहीं था. दोनों परिवारों की मुलाकात बहुत ही रोचक तरीके से हुई.

पहली अक्तूबर, 2024 को हर साल की तरह रामनवमी के दिन रघुवंशी समाज का सामूहिक भंडारा आयोजित हुआ था. यह कार्यक्रम इंदौर के रघुवंशी बिरादरी के लिए अपनेअपने बच्चे के लिए अपने ही समाज में लड़का और लड़की के विवाह के लिए रिश्ता तलाशने का एक बेहतरीन माध्यम है.

सामाजिक रीतिरिवाज से हुई शादी

रघुवंशी समाज के लोग रामनवमी के दिन एक स्थान पर एकत्रित होते हैं और यहां पर अपनेअपने बच्चों की जानकारी एक परची में लिख कर रख दिया करते हैं. इस में लड़के या लड़की का नाम, उम्र, पढ़ाई और काम के बारे में जानकारी लिखी होती है. एक तरह से इसे बायोडाटा कहा जा सकता है. रघुवंशी संस्थान बायोडाटा के आधार पर रजिस्ट्रैशन कर लेता है. इस डाटा को व्यवस्थित कर के रघुवंशी समाज की एक पत्रिका जारी की जाती है, जिस में रघुवंशी परिवारों द्वारा रजिस्ट्रैशन में दी गई जानकारी को प्रकाशित किया जाता है. इस पत्रिका में जिसे लड़की की तलाश है तो वो लड़की का बायोडाटा देखता है और जिसे लड़के की तलाश है, वो लड़के का.

यहां सोनम और राजा रघुवंशी के परिवार के लोगों ने भी इन दोनों का रजिस्ट्रैशन कराया था. यहीं से ही इन दोनों का परिवार आपस में मिला. दोनों के परिवार वालों को सब सही लगा. दोनों ही मांगलिक थे. कुंडली भी मिल गई, इसलिए बात शादी तक जा पहुंची. राजा रघुवंशी का एक संपन्न परिवार है. घर में सब से छोटा होने के कारण राजा रघुवंशी की शादी का सब को बहुत अरमान था. शादी समारोह को भव्य बनाने के लिए काफी तैयारी की गई. जम कर पैसा खर्च किया गया.

उधर सोनम का परिवार राजा की टक्कर का परिवार था. सोनम की शादी के भी उस के परिवारजनों को बहुत अरमान थे, लेकिन खर्च करने में काफी कंजूसी की गई और वह उत्साह सोनम की शादी में नजर नहीं आया, जिस की अपेक्षाएं की जा रही थीं. बहरहाल, 11 मई को एक भव्य शादी समारोह हुआ. सात फेरे हुए. सभी सामाजिक और धार्मिक रस्में पूरी की गईं. 12 मई, 2025 को सोनम दुलहन बन कर राजा रघुवंशी के घर आ गई. दोनों परिवार और पतिपत्नी सभी खुश थे. किसी तरह का कोई भी विवाद नहीं था. राजा रघुवंशी की ओर से दहेज की कोई मांग की ही नहीं गई थी.

सोनम 4 दिन ससुराल में रहने के बाद मायके चली गई. मायके से ही सोनम रघुवंशी ने हनीमून का कार्यक्रम भी अचानक बना लिया. सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी को इस बात के लिए राजी किया कि शारीरिक संबंधों के जरिए शादी को परिपूर्ण करने से पहले उन्हें कामाख्या देवी मंदिर में पूजाअर्चना करनी चाहिए. पहले तय हुआ कि दोनों असम के कामाख्या देवी मंदिर जाएंगे. फिर वहीं से कश्मीर के लिए निकल जाएंगे. सोनम अपने मातापिता के घर से सीधे एयरपोर्ट गई, जबकि राजा रघुवंशी अपने घर से 10 लाख रुपए से अधिक के गहने पहन कर निकला था. इस में एक हीरे की अंगूठी, एक चेन और एक ब्रेसलेट शामिल था.

दोनों 20 मई को पहले असम के कामाख्या देवी मंदिर पहुंचे. यह असम के गुवाहाटी शहर में नीलांचल पहाड़ी पर स्थित है. कामाख्या मंदिर से उन्होंने कश्मीर की जगह मेघालय जाने का प्रोग्राम बनाया. 20 मई, 2025 को ही दोनों मेघालय पहुंचे. 21 मई को राजा और सोनम रघुवंशी शिलांग पहुंचे थे और एक होमस्टे में रुके थे. 22 मई को उन्होंने एक स्कूटी किराए पर ली और सोहरारिम चले गए. शाम तक वे मावलखियात पहुंचे और एक गाइड लिया. गाइड की मदद से वे शिप्रा होमस्टे में रुके. इस के बाद गाइड को उन्होंने छोड़ दिया.

अगले दिन यानी 23 मई को सोनम और राजा रघुवंशी से उन के फेमिली वालों का कांटेक्ट बंद हो गया. दोनों के परिजन चिंतित हो गए और उन के लापता होने की खबरें आम हो गईं. सोनम का भाई गोविंद रघुवंशी और राजा का भाई विपिन रघुवंशी लापता पतिपत्नी की तलाश करने मेघालय पहुंचे. उन्होंने शिलांग की पुलिस से कांटेक्ट किया. उम्मीद के मुताबिक रिस्पौंस न मिलने पर दोनों वापस इंदौर लौट आए. इंदौर के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया से शिकायत की और बात मुख्यमंत्री तक भी पहुंच गई. यहां की सरकार ने मेघालय की सरकार से संपर्क साधा. इस बीच मामला बहुत तूल पड़ चुका था.

मेघालय सरकार की बदनामी होने लगी. यहां की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत पर्यटकों से है. इस घटना से पर्यटकों में दहशत का माहौल हो गया. पर्यटक देर शाम अपने होटल के कमरों से निकलने में डरने लगे. अफवाह यह थी कि कपल का अपहरण कर के बांग्लादेश ले जाया गया है और उन के सारे पैसे और ज्वैलरी लूट ली गई है. मध्य प्रदेश सरकार ने तो केंद्र सरकार को पत्र लिख कर मामले की सीबीआई जांच करने की सिफारिश भी कर दी. 2 जून, 2025 को फिर राजा रघुवंशी का शव वेईसावडांग झरने के पास गहरी खाई में मिला. शव बुरी तरह सड़ चुका था. राजा के भाई विपिन ने ही शव की पहचान की. वह भी उन के हाथ पर बने ‘राजा’ टैटू से. लेकिन सोनम नहीं मिली.

शुरुआत में लगा कि दोनों का एक्सीडेंट हुआ होगा, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि राजा की हत्या धारदार हथियार से की गई थी. इंदौर शहर के हर घर में इस घटना को ले कर अफसोस जताया जा रहा था, सब लोग सोनम के जिंदा मिल जाने की कामना कर रहे थे. मेघालय पुलिस सोनम को बरामद करने और मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए औपरेशन चला रही थी, जिस का नाम ‘औपरेशन हनीमून’ रखा गया. मेघालय सरकार ने एसआईटी गठित कर पुलिस की कई टीमें मामले का राज फाश करने के लिए लगा दीं.

पुलिस को जांच में पता चला कि 22 मई को राजा और सोनम शिलांग के मावलखियात गांव पहुंचे और वहां से नोंग्रियाट गांव में मशहूर ‘लिविंग रूट ब्रिज’ देखने गए. दोनों ने रात एक होमस्टे में बिताई. 23 मई की सुबह 6 बजे दोनों होटल से बाहर निकल आए. किराए की स्कूटी पर सैर के लिए निकले. इस के बाद दोनों रहस्यमय ढंग से लापता हो गए.

टूर गाइडों से मिली खास जानकारी

24 मई की रात को उन की स्कूटी ओसारा हिल्स की पार्किंग में लावारिस हालत में मिली, जो होमस्टे से 25 किलोमीटर दूर थी. 28 मई को जंगल में 2 बैग मिले. मावलाखियात से नोंग्रियात तक की यात्रा पर उन्हें ले जाने वाले गाइड भकुपर वानशाई थे. पुलिस को उन से महत्त्वपूर्ण सुराग हाथ लगे. गाइड ने पुलिस को बताया कि कपल ने 22 मई को फोन किया. उस समय शाम के करीब साढ़े 3 बजे थे, लेकिन मैं ने मना नहीं किया और उन्हें नोंग्रियात तक गाइड करने का फैसला किया. उन्हें शिपारा होमस्टे पर छोडऩे के बाद हम वहां से निकल पड़े.

एक अन्य गाइड अल्बर्ट पीडी भी उन के साथ थे. गाइड ने यह भी बताया कि 3 व्यक्ति इस कपल के साथ और थे. वे तीनों हिंदी में बात कर रहे थे. वह हिंदी कम जानता है, इसलिए समझ नहीं पाया. वानशाई ने कहा कि हम ने अगले दिन (23 मई) के लिए अपनी सेवा की पेशकश की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें रास्ता पता है. वानशाई ने अपने पुलिस बयान में कहा कि सोनम ने उन से ज्यादातर बातचीत अंगरेजी में की. केस को खोलने के लिए पुलिस पर बहुत दबाव था, पुलिस की टीमें अपना काम कर रही थीं. वह हत्यारों तक पहुंच गई थी. हत्या के 3 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया था. इस से पहले 8 मई की रात करीब 11 बजे मेघालय पुलिस पूरे लावलश्कर के साथ कोतवाली महरौनी के ग्राम चौकी पहुंची थी.

यहां राजा रघुवंशी हत्याकांड का आरोपी आकाश कमरे में सोते हुए मिला था. मेघालय पुलिस ने आकाश से पूछा कि सोनम रघुवंशी कहां है? उसे कहां छिपाया है. आकाश ने सोनम के बारे में कोई जानकारी होने से मना कर दिया था. तब परिजनों से सोनम के बारे में पूछताछ की. उन्होंने भी इंकार कर दिया था.  आकाश राजपूत (19 वर्ष) और उस के परिजन के इंकार करने के बाद भी मेघालय और जनपद की पुलिस ने मकान का चप्पाचप्पा छाना. यहां तक कि मकान के टपरे में रखे भूसे के ढेर के अंदर तक सोनम को तलाशा था.

पुलिस की यह काररवाई करीब एक घंटे तक चलती रही. जब पुलिस को यकीन हुआ कि सोनम यहां नहीं है, तब वह आकाश राजपूत और उस के 3 साथियों को अपने साथ ले गई थी. मध्य प्रदेश की पुलिस के सहयोग से मेघालय पुलिस ने इस हत्या में शामिल 3 हमलावरों आकाश राजपूत (19 वर्ष) के बाद विशाल सिंह चौहान (22 वर्ष) और राज सिंह कुशवाह (21 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया. इन की गिरफ्तारी के बाद ही नाटकीय ढंग से सोनम ने सरेंडर किया. आधी रात के बाद सोनम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में स्थित काशी चाय जायका होटल पर पहुंची. यह होटल रात भर खुलता है.

गाजीपुर के नंदगंज थाने के अंतर्गत आता है. होटल संचालक साहिल यादव उस समय मौजूद थे. साहिल यादव से उस ने मोबाइल मांगा. अपने भाई को फोन मिलाया, लेकिन रोती रही बात नहीं कर पाई. साहिल यादव ने सोनम के भाई गोविंद से बात की, उस ने इस होटल का पता बताया. आधे घंटे के भीतर नंदगंज थाना पुलिस वहां पहुंच गई. सोनम को हिरासत में ले लिया गया. मध्य प्रदेश और मेघालय पुलिस को इस की सूचना दी गई. सोनम ने दावा किया कि उसे अगवा करने के बाद उस के साथ क्या हुआ, इस बारे में उसे कुछ याद नहीं है. उस ने कहा कि उसे अंधेरे कमरे में रखा गया था, बाहर की दुनिया से उस का कोई संपर्क नहीं था. वह जैसेतैसे वहां से निकली.

सोनम से पूछताछ के बाद पुलिस ने आनंद कुर्मी को भी पकडऩे में सफलता हासिल की. आरोपी आनंद कुर्मी (23) खिमलासा थाना क्षेत्र के बसाहरी गांव में अपने चाचा भगवानदास कुर्मी के घर में छिपा हुआ था. मेघालय से आई पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को पकड़ा. डीएसपी एस.ए. संगमा के नेतृत्व में आई टीम ने आगासौद, खिमलासा और बीना थाना पुलिस के साथ मिल कर घेराबंदी की. आरोपी को पकडऩे के बाद खिमलासा थाने में पूछताछ की गई. एसडीओपी नितेश पटेल ने बताया कि आरोपी का पिता दौलतराम कुर्मी करीब 20-22 साल पहले परिवार के साथ इंदौर चला गया था. आनंद वहां जियोमार्ट में काम करता था. वह मुख्य आरोपी राज कुशवाहा के संपर्क में था. आनंद मूलरूप से भानगढ़ थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव का रहने वाला है.

पूछताछ में पता चला कि उस के पिता 4 भाई हैं. बड़े भाई हरिशंकर कुर्मी मिर्जापुर में रहते हैं. वहां 5 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं. देवाराम और दौलतराम इंदौर चले गए थे. भगवानदास अपनी ससुराल बसाहरी में रह रहे थे. मेघालय पुलिस यहां से कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पांचों को मेघालय ले गई. शिलांग में ही एफआईआर दर्ज कराई गई. इंदौर से शुरू हो कर शिलांग और फिर गाजीपुर तक राजा रघुवंशी हत्या कांड फैल गया. शिलांग की अदालत से आरोपियों का 8 दिन का रिमांड मिल गया तो फिर प्याज के छिलकों की तरह परतदरपरत मामला खुलता गया.

सोनम और राजा रघंवुशी चेरापूंजी में झरना देखने जा रहे थे. वक्त बीतने के साथ ही सोनम की बेचैनी बढऩे लगी, योजना के अनुसार वह जल्द से जल्द राजा को ठिकाने लगाना चाहती थी, लेकिन सही जगह नहीं मिल पा रही थी. दोपहर 12 बजते ही पीछे से तेजी से आए तीनों किलर्स राजा से अच्छे से बातचीत करने लगे, ऐसे में राजा को भी कोई शक नहीं हुआ. दोपहर करीब डेढ़ बजे सोनम ने राजा की हत्या के लिए अपना प्लान ऐक्टिव किया. इस के तहत उस ने सब से पहले अपनी सास यानी कि राजा की मम्मी को फोन लगाया. उन के साथ मीठीमीठी बातें कीं. इस का मकसद यही था कि वह परिवार को भरोसा दिला रही थी कि सब कुछ ठीक है.

फोन पर बातचीत के दौरान सोनम ने अपने उपवास की भी चर्चा की. सास के कहने पर उन के बेटे राजा से भी कुछ देर बाद बात कराई. चेरापूंजी की करीब 10 किलोमीटर ऊंची चढ़ाई पर एक सेल्फी स्पौट बना था. उस से पहले पार्किंग स्थल था, सोनम राजा एक स्कूटी से गए थे. तीनों किलर्स ने 2 दुपहिया वाहन किराए पर लिए थे. तीनों गाडिय़ां पार्किंग में खड़ी की गई थीं. उस के बाद किलर्स राजा के पीछे चल दिए. वहां पहुंच कर पतिपत्नी मौसम का नजारा कर रहे थे. तभी सोनम ने मौका पाते ही किलर्स को इशारा किया और अपने पति राजा रघुवंशी को सेल्फी के लिए तैयार करने लगी. इतने में पीछे से एक किलर ने कुल्हाड़ीनुमा एक तेज धार वाले हथियार से पूरी ताकत से राजा पर वार कर दिया. राजा नीचे गिर गया. राजा ने उठने की कोशिश की. तभी दूसरे ने दूसरे हथियार से सामने से उस के सिर पर जोरदार वार किया.

योजना के अनुसार की थी राजा की हत्या

राजा वहीं ढेर हो गया, उस के बाद भी मिनी कुल्हाड़ी से एक वार उस पर और किया गया. उस का काम तमाम हो जाने पर और शरीर का सारा खून निकल जाने पर तीनों ने सेल्फी पौइंट पर उसे उठा कर रखा. वहां  करीब 3 फीट ऊंची ग्रिल लगी हुई थी. राजा की लाश को उठा कर नीचे गहरी खाई में फेंकने की तीनों ने कोशिश की, मगर सफलता नहीं मिली. तब सोनम ने आगे बढ़ कर लाश को ऊपर उठा कर खाई में फेंकने के लिए मदद की. ऐसा करने से उन के कपड़ों पर खून लग गया तो उन्होंने खून में सने कपड़े उतार कर वहीं फेंक दिए. उस के बाद तीनों पार्किंग स्थल पर पहुंचे. वहां से तीनों किलर्स वाली 2 स्कूटियों पर बैठ कर चारों निकल लिए.

पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि एक बुरका, जो विशाल ले कर आया था, सोनम को दिया. सोनम वह बुरका पहन कर अकेले वहां से निकली, ताकि बीच में जो टोल आते हैं या सीसीटीवी में उस का चेहरा  कैद न होने पाए. उस के बाद सोनम वहां से गुवाहाटी पहुंची. वहां के आईएसबीटी से वह बस ले कर पटना के लिए और फिर पटना से वह आरा पहुंच गई. आरा से वह लखनऊ पहुंची और लखनऊ से 26 तारीख को इंदौर पहुंच गई. इंदौर में राज कुशवाहा से उस की मुलाकात हुई. देवास नाके के पास एक किराए के फ्लैट में वह 8 जून तक इंदौर में रही. इस बीच राज कुशवाहा ने सोनम की सहूलियत का पूरा खयाल रखा था.

4 जून, 2025 को राजा के शव को इंदौर लाया गया. सोनम ने अपने पति राजा की अर्थी के लिए कफन और फूल मालाओं का इंतजाम कर के अपने प्रेमी राज के हाथ अपनी ससुराल भिजवाया. राजा के परिवार में सब से ज्यादा उस की मम्मी और बहन सृष्टि का रोरो कर बुरा हाल था. पूरे इंदौर में रघुवंशी समाज में रोष व्याप्त था. शोक की लहर दौड़ गई थी. इस के लिए एक दिन कैंडल मार्च का आयोजन हुआ. इस में बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित हुए.

शिलांग के एसपी विवेक सिएम ने प्रैस कौन्फ्रेंस कर कहा कि पहले राजा के कत्ल करने का प्लान गुवाहाटी में था, लेकिन यह प्लान फेल होने पर शिलांग में राजा रघुवंशी मारा गया. 3 बार कत्ल करने का प्रयास किया गया, लेकिन किलर्स असफल हो गए और चौथी बार में हत्या कर पाए. उन्होंने बताया कि राजा मर्डर केस का मास्टरमाइंड राज कुशवाहा है, सोनम ने उस का साथ दिया. पहले दिन की पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. तीनों आरोपी राज कुशवाहा और सोनम के दोस्त हैं, जिस में एक राज का चचेरा भाई था. दोस्ती के कारण तीनों आरोपी हत्या में शामिल हुए. शिलांग एसपी विवेक सिएम ने आगे कहा कि यह मामला सुपारी का नहीं है. तीनों आरोपी भी 19 मई को गुवाहाटी आ गए थे.

पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि सोनम रघुवंशी और राज कुशवाहा राजा रघुवंशी की हर हालत में हत्या करना चाहते थे. उन्होंने इस के लिए एक पिस्टल खरीदी थी. यदि कुछ भी नहीं हो पाता तो सोनम सेल्फी देने के बहाने राजा को सेल्फी पौइंट से नीचे गहरी खाई में जिंदा ही धकेल देती. पुलिस को यह भी पता चला कि राज और सोनम ने हीराबाग के फ्लैट में एक बैग छिपाया था. इस बैग में कपड़ों के बीच देसी पिस्टल, 5 लाख रुपए, सोने की चेन, अंगूठी और राजा की हत्या से संबंधित कुछ अन्य सबूत वाली चीजें थीं. मेघालय पुलिस ने पांचों अपराधियों से पूछताछ कर उन्हें जेल भिजवा दिया.

अभी इंदौर में मेघालय पुलिस की टीम एक बैग की तलाश कर रही है. यह ट्रौली बैग मेघालय से विशाल चौहान ने देवास नाका के उस फ्लैट पर पहुंचाया था, जहां पर सोनम हत्या के बाद रुकी थी. अब एक प्रौपर्टी डीलर, जिस का नाम है सिलोन जेम्स, की गिरफ्तारी हुई है. यह वही प्रौपर्टी डीलर है, जिस ने सोनम को राजा रघुवंशी की हत्या के बाद जब सोनम इंदौर लौटी थी तो इंदौर में रेंट पर फ्लैट दिलाया था. गुना का एक सिक्योरिटी गार्ड भी अब शिलांग पुलिस के शक के घेरे में है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा गार्ड बलबीर अहिरवार उर्फ बल्लू को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी मामले में आठवें आरोपी की भी गिरफ्तारी हुई है.

प्रौपर्टी डीलर ने पुलिस को बताया कि किसी स्थान पर बैग जला दिया है. पुलिस ने  उस स्थान की भी जांच की. कुछ नमूने लिए हैं. पुलिस ने उसे मेघालय ले जा कर अदालत में पेश किया. आठवें आरोपी ग्वालियर निवासी लोकेंद्र सिंह तोमर को मेघालय पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जो उस फ्लैट का मालिक है जिस में हत्या के बाद फरार हुई सोनम रघुवंशी इंदौर में छिपी थी.

सोनम की फैक्ट्री में एंप्लाई था राज

राज कुशवाहा गाजीपुर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव का निवासी है. राज कुशवाहा के पापा 3 भाई थे. 2 भाई रामपुर सुकेति गांव में अभी भी रहते हैं. 15 साल पहले राज कुशवाहा के पिता की स्थिति अच्छी नहीं थी. वह इंदौर चले गए थे. वहां फल की दुकान लगाने लगे. परिवार की हालत सुधरने पर करीब 10 साल पहले परिवार को वहीं बुला लिया. राज कुशवाहा की मम्मी चुन्नीबाई, बड़ी बहन सुहानी और छोटी बहन प्रिया और राज कुशवाहा अपने पापा के पास इंदौर चले आए. कोरोना काल में उस के पापा परिवार के साथ गांव आ गए. उस समय राज कुशवाहा भी आ गया.

कोरोना काल में ही राज के पापा की मौत हो गई. राज कुशवाहा परिवार के साथ फिर इंदौर आ गया. यहां राज कुशवाहा  प्लाईवुड की एक कंपनी में काम करने लगा. यह कंपनी सोनम रघुवंशी की थी. सोनम के यहां पर राज प्लाईवुड का काम करता था. उस ने ज्यादा तो नहीं, लेकिन हाईस्कूल परीक्षा पास कर रखी थी. इस कंपनी में उसे अकाउंट के काम पर लगा लिया गया. एक दिन राज कुशवाहा सोनम रघुवंशी के केबिन में पहुंचा. उसे देखते ही सोनम रघुवंशी ने पूछा, ”हां बताओ, कैसे आना हुआ?’’

”मैडम, मुझे 5 हजार रुपए की जरूरत है.’’

सोनम मलिकाना तेवर में बोली, ”अभी एक हफ्ता पहले ही तो वेतन मिला है. अभी से एडवांस लेने आ गए.’’

कुछ और खरीखोटी सुनाई. राज कुशवाहा बड़ा निराश हुआ, उस की आंखें डबडबा गईं. औफिस से बाहर जाने के लिए राज कुशवाहा जैसे ही मुड़ा, सोनम की आवाज आई, ”रुपए किस काम के लिए चाहिए?’’

राज कुशवाहा ने कहा, ”मम्मी की तबीयत खराब है. उन के इलाज के लिए जरूरत है.’’ मासूम चेहरे पर बड़ीबड़ी आंखों में छलकते आंसू देख कर सोनम का दिल पसीज गया. सोनम ने दराज से 5 हजार रुपए निकाल कर राज को दे दिए. सोनम के अहसान के बोझ को सिर पर लिए डगमगाते कदमों से राज औफिस से बाहर आ गया. यहीं से उम्र में करीब 5 साल छोटे अपने कर्मचारी राज के लिए सोनम के दिल में हमदर्दी का बीज अंकुरित हो गया. दूसरे दिन फैक्ट्री की साप्ताहिक छुट्टी थी.

अगले दिन राज अपनी ड्यूटी पर समय से फैक्ट्री आ गया और अपने काम में जुट गया. अचानक कदमों की आहट उसे सुनाई दी. उस के टेबल के पास तक कोई आया. इस से पहले कि वह सिर उठा कर देखता, तभी उस के कानों में एक मधुर आवाज सुनाई दी, ”ये लो एक हजार रुपए. यह एडवांस में नहीं जुड़ेंगे. यह मेरी तरफ से अपनी मम्मी की दवाई में खर्च कर लेना. और हां, अब उन की तबीयत कैसी है?’’

इतना सुन कर राज अपनी सीट से उठ कर खड़ा हो गया. नजरें नीची रहीं. अपनी मम्मी की तबीयत के बारे में जानकारी दी. राज ने कहा, ”मैम, आप का दिल कितना बड़ा है, आप जैसे लोग समाज में अब कम ही मिलते हैं. यह एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता.’’

एक दिन इंदौर के खूबसूरत मार्केट में राज गया था, तभी अचानक किसी ने उसे आवाज दी. उस ने मुड़ कर देखा तो सोनम स्कूटी रोके खड़ी थी. उस ने पास की ही एक कौफी हाउस की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यहां आओ, मैं भी पहुंच रही हूं.

उस दिन फैक्ट्री का साप्ताहिक अवकाश था. कौफी हाउस पहुंच कर दोनों आमनेसामने की सीट पर बैठे. सोनम ने कोई बात नहीं की, बल्कि अपने मोबाइल में मगन रही. वेटर 2 कौफी टेबल पर रख गया. राज नजरें नीचे किए हुए बैठा था. राज को सोनम की उस बात का इंतजार था, जिस के लिए उसे यहां कौफी हाउस में बुलाया था.

अचानक सोनम ने कहा, ”हां राज, बताओ मम्मी की कैसी तबीयत है?’’

सिर झुकाए बैठे राज ने कहा, ”अब तो काफी ठीक है.’’

”चलो, कौफी पियो!’’

राज ने कौफी का कप उठाया. उस की नजर सोनम की तरफ गई तो उस के हाथ कांप गए. बड़ी मुश्किल से कप को गिरने से रोक पाया. फिर भी थोड़ी सी कौफी छलक कर गिरी. सोनम की नजरें उस पर गड़ी थीं, उस प्यार भरी नजरों को कोई भी आसानी से समझ सकता था. कातिलाना नजरें और जादुई मुसकराहट उस के दिल में उतर गई. राज ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला. इस तरह हमदर्दी के साथ प्रेम के बीज की भी बुवाई हो गई.

रातें अब ख्वाबों में और दिन उस की यादों में गुजरने लगे. प्रेम का ये अंकुर धीरेधीरे एक विशाल वृक्ष बनने को बेताब था. उस की बातें जैसे ठंडी हवा की तरह गर्म दुपहरी में सुकून दे रही हों. आंखों ही आंखों में जो बातें होतीं, वो लफ्जों से परे थीं. राज का दिल अब हर धड़कन में उस का नाम लेने लगा. वह साथ हो या न हो, उस की मौजूदगी हर पल महसूस होती. राज को अब समझ आने लगा कि ये सिर्फ आकर्षण नहीं, कुछ गहरा ताल्लुक है.

इस तरह हमदर्दी से शुरू हुआ रिश्ता अब इश्क की दहलीज पर दस्तक दे रहा था. राज के दिन अब मस्ती में गुजरने लगे. आर्थिक संकट भी दूर हो गया था, क्योंकि 20 हजार रुपए महीने की नौकरी में उस के परिवार का गुजारा करना मुश्किल होता था. अब तो ठाट ही ठाट थे. दिन गुजरते गए, प्यार की पींगें बढ़ती रहीं और फिर 2 जिस्म एक जान हो गए. साथ जीनेमरने की कसमें खाई गईं और एकदूसरे का साथ न छोडऩे का वादा किया गया.

राजा रघुवंशी हत्याकांड खुल जाने के बाद मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने  कहा कि जिन लोगों ने मेघालय को बदनाम किया है, उन्हें माफी मांगनी चाहिए, नहीं तो उन के खिलाफ काररवाई की जाएगी. मेघालय के गृहमंत्री बोले, ”हमारी पुलिस को बेवजह बदनाम किया गया.’’

पुलिस के गले की फांस बन गया था यह केस

मेघालय के गृहमंत्री प्रेस्टोन टेनसांग ने अपने बयान में कहा कि मेघालय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए. ये बात शुरू से हजम नहीं हो रही थी कि यहां के स्थानीय लोग लूटपाट के लिए किसी पर्यटक की हत्या कर दें. अब हमारी पुलिस ने सब दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया. इस केस में जल्दी से जल्दी तसवीर साफ होना इसलिए भी जरूरी था कि मेघालय में हर साल 11 लाख टूरिस्ट आते हैं. उन के भरोसे के लिए भी ये जरूरी था कि जल्द से जल्द इस केस का खुलासा हो. उधर सोनम रघुवंशी अपने प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य लोगों के पकड़े जाने पर इंदौर से गाजीपुर कैसे गई, उस रहस्य का भी पुलिस ने परदाफाश कर दिया. जिस टैक्सी से सोनम इंदौर से उत्तर प्रदेश रवाना हुई थी, उस के ड्राइवर पीयूष तक भी पुलिस पहुंच गई है.

टैक्सी ड्राइवर पीयूष से भी एक घंटे तक क्राइम ब्रांच थाने में पूछताछ की गई. उधर उजाला यादव ने यह दावा किया था सोनम मुझे वाराणसी कैंट स्टेशन पर मिली थी. एक ड्राइवर और एक व्यक्ति उसे वहां तक छोडऩे आए थे. तुरंत ट्रेन न होने पर सोनम वाराणसी के बस अड्डे पर आई और उसी बस में बैठ गई, जिस में वह बैठी थी. उजाला ने बताया कि वह गोरखपुर जाने के लिए कह रही थी. उस ने एक लड़के से फोन करने के लिए मोबाइल मांगा. उस ने नहीं दिया. मुझ से भी उस ने मोबाइल मांगा, मैं ने दिया. एक नंबर डायल कर के डिलीट कर दिया. काल नहीं की.

ऐसा हो सकता है कि उस के पास कोई मोबाइल होगा. कहीं बीच में उस के पास काल आई होगी कि सभी लोग पकड़े गए हैं. गाजीपुर ही उतर जाए. गाजीपुर उतर कर उस ने वह छोटा मोबाइल नष्ट कर दिया होगा. तभी वह रात के 2 बजे चाय की दुकान पर पहुंच गई. वरना राज और सोनम का इरादा गोरखपुर से नेपाल भाग जाने का था. राज इतना शातिरदिमाग होगा, यह अंदाजा किसी को नहीं था.  ऐसा प्लान पेशेवर अपराधी भी नहीं बना पाते. यदि मामला हाईप्रोफाइल नहीं बनता तो सोनम और राज अपनी योजना में सफल हो जाते. वह तो मेघालय की पुलिस ने ड्रोन कैमरे से रघुवंशी की डेडबौडी तलाश कर ली थी.

एक तरफ राजा की मम्मी हैं, जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को खोया है, उन पर क्या बीत रही होगी. दूसरी तरफ सोनम की मम्मी का दर्द है, जिसे मर्डर की मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. तीसरी मां उस आरोपी राज की है, जिसे सोनम का बौयफ्रेंड बताया जा रहा है. तीनों मां का अपना अलगअलग दर्द है. राज कुशवाह की मम्मी चुन्नीबाई, बड़ी बहन सुहानी और छोटी बहन प्रिया मानने को तैयार नहीं हैं कि राज कुशवाहा राजा रघुवंशी की हत्या कर सकता है. सुहानी ने कहा, ”मेरा भाई ऐसा कर ही नहीं सकता. वह तो सोनम को दीदी कहता था.’’

जहां मृतक राजा की बहन सृष्टि अपने भाई के खोने का दर्द बयां कर रही है, वहीं आरोपी सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा की बहन अपने भाई को बेगुनाह बताते हुए साजिश का आरोप लगा रही है. दोनों बहनों का दर्द, एक भाई की हत्या और दूसरे की गिरफ्तारी ने इस हनीमून मर्डर को और मार्मिक बना दिया है. Hindi Crime Story

 

 

Extramarital Affair : पत्नी के प्रेमी की हत्या कर लाश संदूक में छिपाई

Extramarital Affair : रौंग काल से पैदा हुआ प्यार शादीशुदा नरगिस और महबूब को उस मुकाम तक ले गया जिस की दोनों ने कल्पना तक नहीं की थी. फिर एक दिन ऐसा क्या हुआ कि नरगिस के घर संदूक में महबूब की लाश मिली…

18 सितंबर, 2020 को देर रात थाना कांठ के थानाप्रभारी अजय कुमार गौतम के मोबाइल पर किसी अंजान व्यक्ति का फोन आया. फोन करने वाले ने बताया, ‘‘सर, मैं ऊमरी कलां के पास पाठंगी गांव के प्रधान शहजाद का छोटा भाई नौशाद बोल रहा हूं. सर, हमारे घर में एक युवक की मौत हो गई है. आप जल्द आ जाइए.’’

‘‘मौत कैसे हो गई, क्या हुआ था उसे?’’ अजय कुमार गौतम ने उस युवक से पूछा.

‘‘सर, संदूक में दम घुटने से…’’ युवक ने जबाव दिया. यह जानकारी देने के बाद नौशाद ने काल डिसकनेक्ट कर दी. नौशाद की बात सुनते ही थानाप्रभारी को समझते देर नहीं लगी कि मामला कुछ गड़बड़ है. लिहाजा कुछ पुलिसकर्मियों को साथ ले कर वह पाठंगी गांव जा पहुंचे. जिस वक्त गांव में पुलिस पहुंची, अधिकांश लोग सो चुके थे. फिर भी गांव में देर रात पुलिस की गाड़ी देख कर कुछ लोग एकत्र हो गए. पुलिस की जिप्सी रुकते ही सब से पहले नौशाद पुलिस के सामने हाजिर हुआ. वह बोला, ‘‘सर, मेरा नाम ही नौशाद अली है. मैं ने ही आप को फोन किया था. आइए सर, मैं आप को युवक की लाश दिखाता हूं.’’ कह कर नौशाद अली पुलिसकर्मियों को अपने घर के अंदर ले गया.

घर के अंदर जाते ही नौशाद ने अपने घर में रखा संदूक खोला. संदूक खुलते ही बदबू का गुबार निकला. जिस की वजह से पुलिस का वहां रुकना मुश्किल हो गया. बदबू कम हुई तो पुलिस ने मृतक की लाश देखी. फिर लोगों की मदद से लाश को संदूक से बाहर निकलवाया. मृतक हृष्टपुष्ट युवक था. जांचपड़ताल के दौरान पता चला कि उस के शरीर पर तमाम चोटों के निशान थे. उस के सिर से काफी खून भी निकल कर जम गया था. संभवत: ज्यादा खून बहने से ही उस की मौत हुई थी. थानाप्रभारी गौतम ने इस मामले की जानकारी सीओ बलराम सिंह को भी दे दी थी. सूचना मिलते ही सीओ साहब भी पाठंगी गांव पहुंच गए और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंच कर साक्ष्य एकत्र किए.

नौशाद के घर से ही पुलिस को मृतक का एक बैग भी मिला, जिस में से पुलिस को शराब की एक बोतल के साथसाथ 2 बीयर की बोतलें, मृतक का आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज भी मिले. आधार कार्ड पर नाम महबूब आलम पुत्र शमशाद, निवासी मोड़ा पट्टी, कांठ लिखा था. पुलिस ने नौशाद से मृतक युवक के बारे में पूछा तो उस ने बताया, ‘‘सर, मैं पानीपत में काम करता हूं. घर पर मेरे बीवीबच्चे रहते हैं. इसलिए मैं इस के बारे में नहीं जानता. लेकिन पत्नी नरगिस ने बताया कि यह उस का दूर का रिश्तेदार है. मैं पानीपत में था तो आज सुबह मेरी बीवी नरगिस का फोन आया. उस ने फोन पर बताया कि घर पर कुछ अनहोनी हो गई है. इसलिए जितनी जल्दी हो सके, फौरन घर पहुंचो.’’

नौशाद ने बताया कि बीवी की बात सुनते ही वह अपना कामधंधा छोड़ कर तुरंत घर चला आया था. घर आने पर पत्नी ने बताया कि महबूब उस का दूर का रिश्तेदार था. 17 सितंबर, 2020 की देर रात वह हमारे घर पहुंचा. उस वक्त तीनों बच्चे सो चुके थे. लेकिन बड़ा बेटा अचानक जाग गया. बेटे के डर की वजह से महबूब घर में रखे संदूक में छिप कर बैठ गया. बेटा 2 घंटे बाद सोया तो मैं ने संदूक खोल कर देखा. तब तक दम घुटने से वह मर चुका था. नौशाद ने पुलिस को बताया कि घर में किसी व्यक्ति की मौत हो जाने की बात सुनते ही उस के हाथपांव फूल गए. संदूक में पड़ी लाश के बारे में सोचसोच कर उस का सिर फटा जा रहा था.

उसे अपनी बीवी पर भी कुछ शक हुआ. वह समझ नहीं पा रहा था कि अगर लड़का सोते से उठ गया तो उसे संदूक में छिपने की क्या जरूरत थी. इस घटना से उसे बीवी पर बहुत गुस्सा आया. लेकिन घर में जो बला पड़ी थी, पहले उस से कैसे निपटा जाए, वह उसे ले कर परेशान था. दोपहर से शाम तक उस ने कई बार उस की लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई, लेकिन वह किसी भी योजना में सफल नहीं हो पा रहा था. घर की बदनामी को देखते हुए वह न तो इस बात का जिक्र अपने घर वालों से कर सकता था और न ही खुद कोई निर्णय ले पा रहा था. जब इस मामले में उस के दिमाग ने बिलकुल काम करना बंद कर दिया तो उस ने पुलिस को सूचना देने का फैसला लिया. उस के बाद ही उस ने पुलिस को फोन कर घटना की जानकारी दी.

जब पुलिस इस मामले की जांचपड़ताल में लगी थी, नरगिस घर के आंगन में ही डरीसहमी सी बैठी थी. नौशाद की बताई कहानी से पुलिस को मामला समझने में देर नहीं लगी. लेकिन हैरत की बात यह थी कि 2 घंटे संदूक में बंद रहने से उस की मौत कैसे हो गई. क्योंकि बक्सा काफी बड़ा भी था और खाली भी था. सवाल यह था कि मृतक के शरीर पर चोटों के निशान कहां से आए. पुलिस को मृतक की जेब से एक मोबाइल मिला, जो उस वक्त बंद था. पुलिस ने उसे औन कर के उस की जांच की तो पता चला कि उस के फोन पर नरगिस ने ही आखिरी काल की थी.

इस मामले को ले कर पुलिस ने नरगिस से भी पूछताछ की. पुलिस पूछताछ के दौरान नरगिस ने अपने पति की बताई रटीरटाई बात दोहरा दीं. उस वक्त तक रात के 12 बज चुके थे. पुलिस युवक की मौत की जांच में लगी थी. उसी दौरान मृतक के मोबाइल पर शमशाद नामक व्यक्ति का फोन आया.

फोन थानाप्रभारी गौतम ने रिसीव किया. जैसे ही उन्होंने हैलो कहा तभी दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘अरे बेटा, मैं तुम्हारा अब्बू बोल रहा हूं. तुम कहां हो? कल से तुम्हारा फोन बंद आ रहा है.’’

‘‘शमशाद जी, आप कहां से बोल रहे हैं और आप का बेटा कहां गया हुआ है?’’ अजय कुमार गौतम ने शमशाद से प्रश्न किया. आवाज उन के बेटे की नहीं थी. मोबाइल किसी और के रिसीव करने से शमशाद हुसैन चिंतित हो उठे. वह तुरंत बोले, ‘‘आप कौन बोल रहे हैं? यह नंबर तो मेरे बेटे महबूब आलम का है. आप के पास कहां से आया?’’

‘‘मैं कांठ थाने का थानेदार अजय कुमार गौतम बोल रहा हूं.’’

पुलिस का नाम सुनते ही शमशाद अहमद घबरा गए. उन के दिमाग में तरहतरह शंकाएं घूमने लगीं. जब उन्हें यह जानकारी मिली कि बेटे का मोबाइल पुलिस के पास है तो वे किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हो गए. तभी अजय कुमार गौतम ने शमशाद हुसैन को बताया कि उन के बेटे के साथ एक अनहोनी हो गई है. वह तुरंत पाठंगी गांव आ जाएं. पुलिस द्वारा जानकारी मिलने पर शमशाद हुसैन अपने घर वालों के साथ पाठंगी गांव जा पहुंचे. वहां पहुंचने पर उन्हें जानकारी मिली कि उन का बेटा महबूब अब इस दुनिया में नहीं रहा. उस की संदूक में बंद होने के कारण दम घुटने से मौत हो गई है.

यह जानकारी मिलते ही शमशाद हुसैन के परिवार में मातम छा गया. घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की गला घोंट कर हत्या करने की बात सामने आई. मृतक के शरीर पर भी चोटों के काफी निशान पाए गए थे, जिन से साफ जाहिर था कि मृत्यु से पहले उस के साथ मारपीट की गई थी और मृतक ने हमलावरों से काफी संघर्ष किया था. इस केस में मृतक के पिता शमशाद हुसैन की तहरीर पर पुलिस ने नरगिस, उस के पति नौशाद, ग्रामप्रधान शहजाद और दिलशाद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस ने आरोपी नरगिस को उस के घर से ही गिरफ्तार कर लिया. नरगिस को थाने लाते ही पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. नरगिस और महबूब के घर वालों से पूछताछ के बाद इस केस की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

जिला मुरादाबाद में कांठ मिश्रीपुर रोड पर स्थित है गांव मोड़ा पट्टी. शमशाद हुसैन इसी गांव में अपने परिवार के साथ रहता था. शमशाद हुसैन पेशे से कारपेंटर था. उस की आर्थिक स्थिति शुरू से ही मजबूत थी. उस के 6 बच्चों में महबूब आलम तीसरे नंबर का था. इस समय उस के पांचों बेटे कामधंधा कर कमाने लगे थे. महबूब ने कांठ में ही स्टील वेल्ंडिग का काम सीख लिया था. काम सीखने के बाद उस ने ठेके पर काम करना शुरू किया. धीरेधीरे शहर के आसपास उस की अच्छी जानपहचान हो गई थी. लगभग 3 साल पहले की बात है. नरगिस अपने पति नौशाद को फोन मिला रही थी. लेकिन गलती से फोन किसी और के नंबर से कनेक्ट हो गया. बातों में पता चला कि वह नंबर गांव मोड़ा पट्टी निवासी महबूब का है. महबूब से बात करना उसे अच्छा लगा.

महबूब को भी उस की बातें अच्छी लगीं. बात खत्म हो जाने के बाद महबूब ने उसी वक्त नरगिस के नंबर को अपने मोबाइल में सेव कर लिया था. उस के कई दिन बाद महबूब ने फिर से वही नंबर ट्राई किया तो फोन नरगिस ने ही उठाया. उस के बाद महबूब ने नरगिस को विश्वास में लेते हुए उस के घर की पूरी हकीकत जान ली. एक बार दोनों के बीच मोबाइल पर बात करने का सिलसिला चालू हुआ तो दोस्ती पर ही जा कर रुका. दोनों के बीच प्रेम कहानी शुरू हुई तो महबूब नरगिस के घर तक पहुंच गया. महबूब पहली बार नरगिस के घर जा कर उस से मिला तो उस ने उस का परिचय अपने बच्चों व ससुराल वालों से अपने दूर के खालू के लड़के के रूप में कराया. उस के बाद महबूब का नौशाद की गैरमौजूदगी में आनाजाना बढ़ गया. उसी आनेजाने के दौरान महबूब और नरगिस के बीच अवैध संबंध भी बन गए.

नौशाद अकसर काम के सिलसिले में घर से बाहर ही रहता था. उस के तीनों बच्चे स्कूल जाने लगे थे. वैसे भी महबूब का घर नरगिस के गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर था. जब कभी नरगिस घर पर अकेली होती तो वह महबूब को फोन कर के बुला लेती. फिर दोनों मौके का लाभ उठाते हुए अपनी हसरतें पूरी करते. दोनों के बीच यह सिलसिला काफी समय तक चलता रहा. इसी दौरान महबूब कांठ छोड़ कर काम करने गोवा चला गया. महबूब के गोवा जाते ही नरगिस खोईखोई सी रहने लगी. इस के बाद भी दोनों के बीच मोबाइल पर प्रेम कहानी चलती रही. गोवा में स्टील वेल्डिंग का काम कर के महबूब ने काफी पैसे कमाए. उस कमाई का अधिकांश हिस्सा वह नरगिस पर खर्च करता.

महबूब जब कभी गोवा से अपने घर कांठ आता तो वह नरगिस के साथसाथ उस के बच्चों के लिए भी काफी गिफ्ट ले कर आता था. वह सारी रात उसी के पास सोता और फिर दिन निकलते ही अपने गांव मोड़ा पट्टी चला जाता था. महबूब का नरगिस के साथ करीब 3 साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन उस ने इस बात की भनक अपने परिवार वालों को नहीं लगने दी थी. लेकिन नरगिस के ससुराल वाले जरूर महबूब और नरगिस के रिश्ते को ले कर शक करने लगे थे. नौशाद का भाई शमशाद ग्रामप्रधान था. नरगिस के क्रियाकलापों की वजह से गांव में उस की बहुत बदनामी हो रही थी. उस के सभी भाई परेशान थे.

नौशाद का परिवार अलग घर में रहता था. उस के भाई अपनेअपने घरों में रहते थे. जिस के कारण वह महबूब और नरगिस को रंगेहाथों पकड़ने में असफल हो रहे थे. महबूब अगस्त के महीने में घर आया और फिर गोवा वापस चला गया था. गोवा जाते ही घर पर उस की शादी की बात चली. बात तय हो जाने के बाद 18 सितंबर को रिश्ता होने की बात पक्की हो गई. जिस के लिए मजबूरी में उसे फिर से गोवा से गांव आना पड़ा. 15 सितंबर, 2020 को महबूब ने अपने भाई शकील के मोबाइल पर बात कर कहा था कि 18 सितंबर की सुबह वह घर पहुंच जाएगा. 16 सितंबर को वह गोवा से चल कर देर रात दिल्ली पहुंचा. दिल्ली के कीर्ति नगर में उस के जीजा गुड्डू रहते थे. वह सीधे अपने जीजा के पास चला गया.

16 सितंबर की रात को उस ने नरगिस से फोन पर बात की तो उसे पता चला कि उस का पति पानीपत, हरियाणा काम करने गया हुआ है. यह जानकारी मिलने पर उस ने सीधे नरगिस के घर जाने की योजना बना ली. उसी योजना के मुताबिक महबूब 17 सितंबर की देर रात दिल्ली से नरगिस के गांव पाठंगी पहुंचा. उस वक्त तक उस के बच्चे सो चुके थे. लेकिन नौशाद के बड़े भाई ग्राम प्रधान शहजाद को इस बात का पता चल गया था. भले ही नरगिस ने महबूब को अपना रिश्तेदार बता रखा था. लेकिन उस का वक्तबेवक्त आनाजाना ससुराल वालों को खलने लगा था. गांव में हो रही बदनामी से बचने के लिए ग्राम प्रधान शहजाद और उस का छोटा भाई दिलशाद महबूब को सबक सिखाने का मौका तलाश रहे थे.

17 सितंबर की रात नरगिस के ससुराल वालों को महबूब के आने का पता चल गया था. वे देर रात तक नरगिस के बच्चों के सोने का इंतजार करते रहे. जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि बच्चे सो चुके हैं, दोनों भाई मौका पाते ही नौशाद के घर में घुस कर छिप गए. रात में उन्होंने नरगिस और महबूब को आपतिजनक स्थिति में देख लिया. दोनों को उस स्थिति में देखते ही शहजाद और दिलशाद का खून खौल उठा. नरगिस को उन्होंने बुरी तरह से मारापीटा. उस के बाद दोनों ने महबूब को डंडों से मारमार कर अधमरा कर दिया. कुछ ही देर में महबूब की मौत हो गई. इस के बाद उन्होंने उस की लाश छिपाने के उद्देश्य से घर में रखे संदूक में डाल दी. फिर वे उस की लाश ठिकाने लगाने की जुगत मे लग गए.

लेकिन उन्हें लाश ठिकाने लगाने का मौका नहीं मिला तो नरगिस को वही पाठ पढ़ा कर घर से गायब हो गए, जो उस ने अपने पति और पुलिस वालों को बताया था. उधर 17 सितंबर, 2020 को महबूब ने अपने घर फोन कर जानकारी दी थी कि वह गोवा से दिल्ली गुड्डू जीजा के घर आ गया है और कल सुबह गांव पहुंच जाएगा. उस के बाद उस का मोबाइल फोन बंद हो गया था. घर वालों ने सोचा कि शायद उस के मोबाइल की बैटरी डिस्चार्ज हो गई होगी. फिर भी उन्हें तसल्ली इस बात की थी कि वह गोवा से ठीकठाक दिल्ली पहुंच गया था. उस के बाद भी उस के परिवार वाले बीचबीच में उस का नंबर मिलाते रहे. लेकिन उस से बात नहीं हो पा रही थी.

जब काफी समय बाद भी महबूब से बात नहीं हो सकी. तो शमशाद हुसैन ने अपने दामाद गुड्डू को फोन किया. गुड्डू ने बताया कि महबूब उन के घर 16 सितंबर की रात पहुंचा था और 17 सितंबर की दोपहर में ही वह घर जाने की बात कह कर चला गया था. यह सुन कर घर वाले परेशान थे. पुलिस द्वारा फोन करने पर ही उन्हें हत्या की जानकारी हुई. इस केस के खुलते ही पुलिस ने शमशाद की तहरीर पर मृतक महबूब की प्रेमिका नरगिस, उस के पति नौशाद, जेठ शहजाद तथा दिलशाद के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया. हालांकि नरगिस और उस के पति नौशाद ने स्वयं स्वीकार किया था कि हत्या से उन का कोई लेनादेना नहीं है. नौशाद ने बताया कि हत्या वाली रात वह पानीपत में था. जांच में बेकुसूर पाए जाने पर पुलिस ने नौशाद को छोड़ दिया.

18 सितंबर को पुलिस ने नरगिस को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Madhya Pradesh Crime : इंस्टाग्राम प्रेमिका की दगाबाजी

Madhya Pradesh Crime : मुकेश लोधी ने अपनी 2 प्रेमिकाओं के साथ मिल कर पदम सिंह के इकलौते बेटे अभिषेक लोधी को प्यार के जाल में फांस कर बंधक बना लिया था. बेटे को रिहा करने के एवज में उस ने पदम सिंह से 20 लाख रुपए की फिरौती मांगी. मुकेश को यह रकम मिली या कुछ और? पढि़ए, यह दिलचस्प कहानी.

13 दिसंबर, 2024 को सुबह के यही कोई 6 बजे का समय रहा होगा. तभी मुरैना (मध्य प्रदेश) के कस्बा पोरसा के गांव परदूपुरा निवासी वीरपाल के मोबाइल की घंटी बज उठी. सिरहाने रखा मोबाइल फोन उठा डिसप्ले पर आए नंबर को ध्यान से देखा. वह नंबर पोरसा के परदूपुरा में रहने वाले रिश्तेदार पदम सिंह लोधी का था. फौरन वह काल रिसीव करते हुए बोला, ”हैलो पदम सिंहजी, इतनी सुबहसुबह कैसे याद किया?’’

अरे, कुछ जरूरी बात करनी थी आप से.’’ 

बताओ, क्या बात करनी है? आप की आवाज कुछ भर्राई हुई क्यों है?’’ 

अरे वीरपालजी, बड़ी परेशानी में हूं बेटे को ले कर. अभिषेक कहीं तुम्हारे घर तो नहीं आया?’’ 

वह अभी तक तो मेरे यहां पर नहीं आया.’’ वीरपाल ने बताया.

दरअसल, वह 11 दिसंबर की सुबह ग्वालियर से जरूरी काम से मुरैना जाने की बात कह कर निकला था. उस ने जाते समय अपने साथ रहने वाले रूममेट को बताया था कि वह शाम तक हर हाल में वापस आ जाएगा, लेकिन उसे गए 3 दिन बीत गए…’’ पदम सिंह ने बताया. पदम सिंह ने आगे कहा, ”वह कमरे पर वापस लौट कर नहीं आया और न ही उस से फोन पर संपर्क हो पाया तो उस के रूममेट ने इस की जानकारी मुझे दी. तभी से घर के सभी लोग दरवाजे की तरफ टकटकी लगा कर उस के लौट कर आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. उस का मोबाइल फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा है. इस वजह से मन में तरहतरह के खयाल आ रहे हैं.’’

वीरपाल ने अपने रिश्तेदार को तसल्ली देते हुए कहा, ”आप चिंता मत करो. अभिषेक जल्द ही घर लौट आएगा, वह कोई छोटा बच्चा नहीं है. फिर भी मैं अपने स्तर पर जानकारी जुटाता हूं.’’

इस के बावजूद अभिषेक के फेमिली वालों को चैन कहां था. वो अभिषेक को सगेसंबंधियों से ले कर रिश्तेदारियों और परिचितों में खोजते रहे. अभिषेक के दोस्तों से भी पदम सिंह ने पूछताछ कर ली थी.  दोस्तों ने एक ही उत्तर दिया कि 11 दिसंबर के बाद से उन की अभिषेक से कोई बात नहीं हुई. 3 दिन तक अभिषेक के पेरेंट्स ने अपने स्तर से उस का पता लगाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उन के बारे में जब कुछ भी पता नहीं चला तो वह 14 दिसंबर को दोपहर के डेढ़ बजे के करीब मुरैना के गोला का मंदिर थाने पहुंच गए.

पदम सिंह ने एसएचओ हरेंद्र शर्मा से मिल कर उन्हें अपने 25 वर्षीय बेटे अभिषेक के गायब होने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अभिषेक ग्वालियर की रणधीर कालोनी में किराए का कमरा लेकर पीजीडीसीए की पढ़ाई कर रहा था. एसएचओ हरेंद्र शर्मा ने पदम सिंह की बात गौर से सुनी. अभिषेक लोधी की गुमशुदगी दर्ज कर ली. अभिषेक का फोटो, मोबाइल नंबर और उस के हुलिए से संबंधित जानकारी लेने के बाद एसएचओ ने उन से कहा, ”यदि किसी प्रकार का धमकी भरा फोन आप के पास आए तो बिना घबराए इस की सूचना तुरंत थाने में देना.’’ 

एसएचओ से मिले आश्वासन के बाद पदम सिंह अपने घर तो लौट आए थे, लेकिन उन के मन में बेटे को ले कर एक भय बना हुआ था.

उधर गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पुलिस ने उस का पता लगाने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. इस की अहम वजह यह थी कि अभिषेक कोई मासूम बच्चा तो था नहीं, जो उस के किडनैप की आशंका होती. एसएचओ ने सोचा कि वह अपनी किसी सहपाठी के साथ कहीं प्रेम प्रसंग में डूबा होगा या फिर किसी के साथ बैठ कर अपनी पढ़ाई से संबंधित नोट्स आदि बना रहा होगा. वह अपने आप ही घर पर लौट आएगा.

किस की थी नहर में मिली लाश

इसी बीच 14 दिसंबर, 2024 की सुबह 10 बजे के करीब मुरैना जिले के  दिमनी थाना क्षेत्र में आने वाले बड़ागांव व महादेव पुरा के बीच बहने वाली नहर के किनारे बनी सड़क से हो कर गुजर रहे ग्रामीणों को बीच नहर में एक युवक की लाश तैरती हुई दिखाई दी, जिस के पैर और आंखें लाल रंग के स्टोल से बंधी हुई थीं. नहर में लाश पड़ी होने की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. लाश को करीब से देखने के लिए वहां पर लोगों का जमघट लगने लगा. इसी बीच किसी ने इस की सूचना दिमनी थाने को दे दी. कुछ ही देर में एसएचओ शशिकुमार कुछ सिपाहियों को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस के पहुंचने तक घटनास्थल पर अच्छाखासा जमावड़ा लग चुका था. मृतक को ले कर लोग तरहतरह की चर्चा कर रहे थे. मौके पर मौजूद लोगों में यह जानने की बेहद लालसा थी कि आखिरकार मृतक युवक कौन है?

एसएचओ शशिकुमार भीड़ को हटवा कर नहर के पास पहुंचे तो पता चला कि लाश किसी नवयुवक की है. शशिकुमार ग्रामीणों की मदद से युवक की डैडबौडी नहर से निकलवा कर उस का निरीक्षण कर ही रहे थे कि उन्हीं की सूचना पर एडिशनल एसपी गोपाल सिंह धाकड़, एसडीपीओ विजय सिंह भदौरिया भी घटनास्थल पर पहुंच गए. दोनों पुलिस अधिकारियों ने भी बारीकी से लाश का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 24-25 साल रही होगी. वह काले रंग की जैकेट और नीले रंग की जींस पहने हुए था. डैडबौडी देख कर ही लग रहा था कि यह हत्या का मामला है. क्योंकि उस के पैरों और आंखों पर लाल रंग का स्टोल बंधा था.

एसएचओ शशि कुमार ने वहां मौजूद भीड़ से लाश की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन कोई भी डैडबौडी की शिनाख्त नहीं कर सका. मृतक के पास से कोई पहचान पत्र, पर्स या और कोई ऐसी चीज बरामद नहीं हुई, जिस से उस की शिनाख्त करने में मदद मिलती. मौके की काररवाई निपटा कर एसएचओ ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए  भिजवा दिया. थाने लौट कर उन्होंने अज्ञात के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज करा कर मामले की जांच शुरू कर दी. 

हत्या के इस मामले की जांच के लिए लाश की शिनाख्त जरूरी थी, इसलिए जांच टीम ने मृतक की लाश के फोटो और उस का हुलिया ग्वालियर, चंबल संभाग के सभी पुलिस थानों में ईमेल और वायरलेस द्वारा भेज दिया और उन से पूछा कि इस तरह के हुलिया के किसी नवयुवक की गुमशुदगी किसी थाने में दर्ज तो नहीं है. यह सूचना जैसे ही गोला का मंदिर थाने के एसएचओ ने वायरलेस पर सुनी, उन्होंने टेबल की दराज में संभाल कर रखे गुमशुदा युवक के फोटो को निकाल कर देखा. वह फोटो पदम सिंह ने अपने 25 वर्षीय बेटे अभिषेक की गुमशुदगी की सूचना लिखवाते वक्त उन्हें दिया था. उस से उस की कदकाठी मेल खा रही थी.

उन्होंने तुरंत दिमनी थाने के एसएचओ को फोन कर बताया कि 14 दिसंबर, 2024 की दोपहर इस हुलिए के एक युवक, जिस का नाम अभिषेक लोधी है, की गुमशुदगी की सूचना मुरैना जिले के ही थाना गोला का मंदिर के गांव परदूपुरा निवासी पदम सिंह लोधी ने कराई थी. इस जानकारी के मिलते ही दिमनी थाने के एसएचओ शशिकुमार ने पोरसा के परदूपुरा निवासी पदम सिंह लोधी से उन के मोबाइल पर संपर्क कर एक युवक की लाश बरामद होने की सूचना देते हुए उन्हें थाने बुलाया. पदम सिंह अपने एक करीबी रिश्तेदार को ले कर दिमनी थाने पहुंच गए. एसएचओ शशिकुमार ने उन्हें नहर से बरामद लाश के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही वह फफक कर रोने लगे.

कौन निकला अभिषेक का हत्यारा

शशिकुमार ने किसी तरह उन्हें दिलासा दे कर शांत कराया. तब पदम सिंह लोधी ने एसएचओ को बताया कि जब मेरे बेटे की हत्या हो चुकी है तो फिर उस के मोबाइल से मेरे मोबाइल पर 20 लाख रुपए की फिरौती मांगने के मैसेज कौन भेज रहा है

शशिकुमार ने इस बात का जल्द पता लगाने का आश्वासन देते हुए एसआई और कांस्टेबल के साथ पदम सिंह को मुरैना के जिला चिकित्सालय की मोर्चरी भेज दिया. वहां डीप फ्रीजर में रखी डैडबौडी पदम सिंह को दिखाई तो उन्होंने उसे देखते ही कहा, ”हां, यह लाश मेरे बेटे अभिषेक की ही है.’’

लाश की शिनाख्त हो गई तो पुलिस को यह पता लगाना था कि हत्या किस ने और क्यों की? तथा मृतक के मोबाइल से उस के पापा को वाट्सऐप मैसेज कौन भेज रहा है?

उधर इस सनसनीखेज हत्या की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुरैना के एसपी समीर सौरभ द्वारा कत्ल की घटना का शीघ्र खुलासा करने के लिए 2 पुलिस टीमें गठित कर दीं. अभिषेक हत्याकांड का परदाफाश करने वाली टीम में एसएचओ शशिकुमार के साथ एसआई अभिषेक जादौन, सौरभ पुरी, प्रताप सिंह, हैडकांस्टेबल रघुनंदन, सुदेश, मंगल सिंह, योगेंद्र, रामकिशन, दुष्यंत, गिरजेश आदि को शामिल किया गया. दोनों टीमें एडिशनल एसपी गोपाल सिंह धाकड़ एवं एसडीपीओ (हैडक्वार्टर) विजय सिंह भदौरिया व दिमनी थाने के एसएचओ शशिकुमार के निर्देशन में इस मामले की तह में जा कर हत्यारे को खोजने में जुट गई. 

शशिकुमार मुखबिरों से पलपल की खबर ले रहे थे. इस काम में उन्हें एक सप्ताह का समय तो लगा, लेकिन उन्होंने इस ब्लाइंड मर्डर को हल करने के लिए जरूरी सबूत जुटा लिए. पुलिस ने अभिषेक लोधी का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा दिया. इसी के साथ उन्होंने उस की काल डिटेल्स भी निकलवा ली, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अंतिम बार उस की किस से बात हुई थी और उस की आखिरी लोकेशन कहां की थी. पुलिस ने काल डिटेल्स और इंस्टाग्राम अकाउंट को खंगाला तो पायल राजपूत नाम की किसी युवती से वक्तबेवक्त बात करने की जानकारी मिली. अभिषेक के लापता होने वाले दिन भी पायल राजपूत ने अभिषेक को इंस्टाग्राम पर मैसेज भेज कर अपने पास मुरैना बुलाया था, जिस पर वह राजी हो गया.

पुलिस टीम ने जांच का सिलसिला घटनास्थल से शुरू करते हुए मृतक के फेमिली वालों से पूछताछ करने के बाद हत्यारे तक पहुंचने के लिए तमाम तकनीकों का इस्तेमाल किया. इस से पुलिस टीम को जल्द ही सफलता मिल गई. मर्डर के इस मामले में 3 लोगों के नाम सामने आए, जिन में एक युवक मुकेश लोधी का भी नाम था. मुकेश का नाम ही नहीं आया, बल्कि पुलिस ने उसे ही अभिषेक हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया. लोगों को हैरानी तब हुई, जब पुलिस को मालूम हुआ कि इस वारदात को अंजाम देने में मुकेश की प्रेमिका शशि और पायल उर्फ काजल भी शामिल रहीं.

एसएचओ शशि कुमार अवंतीबाई कालोनी, रामनगर में इसी केस के सिलसिले में लोगों से पूछताछ कर रहे थे, उसी दौरान उन्हें एक व्यक्ति अपने गले में लाल रंग का स्टोल बांधे हुए दिखाई दिया. उक्त स्टोल देखने में मृतक के पैर और आंखों से बंधे स्टोल से मेल खा रहा था. इस के अलावा उस शख्स की गतिविधियां भी संदिग्ध लग रही थीं. क्योंकि वह लगातार पुलिस टीम की गतिविधियों पर चौकस निगाहें रखे हुए था. उक्त शख्स के बारे में मुखबिर से जानकारी लेने पर पता चला कि उस का नाम मुकेश लोधी है. वह अवंतीबाई कालोनी में शशि लोधी नाम की शादीशुदा युवती के साथ लिवइन रिलेशन में रह रहा है. क्योंकि शशि ने अपने पति को छोड़ रखा है. 

मुकेश कुछ साल पहले तक दिल्ली में रह कर ओला की टैक्सी चलाता था. दिल्ली से आने के बाद वह ग्वालियर के गोले का मंदिर इलाके में कियोस्क सेंटर चलाने लगा था. इसी दौरान उसे औनलाइन सट्टा खेलने का चस्का लग गया, जिस के चलते वह मोटी रकम सट्टे में हार गया तो उस ने कियोस्क सेंटर को बंद कर दिया और मुरैना में किराए पर कमरा ले कर प्रेमिका शशि के साथ रहने लगा. उस ने परिस्थितियों से निकलने का कतई प्रयास नहीं किया, बल्कि अपनी प्रेमिका शशि और पायल उर्फ काजल के साथ शानोशौकत से रहने के लिए ब्याज पर परिचितों से काफी पैसा ले लिया, जिस से वह कर्जदार हो गया था. इस कर्ज से छुटकारा पाने के लिए ही उस ने शशि और पायल के साथ मिल कर एक गंभीर अपराध को अंजाम दिया.

मर्डर के बाद क्यों मांगी जा रही थी फिरौती

14 दिसंबर, 2024 का दिन था. पदम सिंह लोधी अपने बेटे अभिषेक की तलाश में जाने के लिए तैयार हो रहे थे कि अचानक उन के मोबाइल फोन की घंटी बजने लगी. जब तक वह काल रिसीव करते, घंटी बंद हो गई थी. मोबाइल फोन की स्क्रीन पर उन्होंने नजर डाली तो पता चला कि काल बेटे के मोबाइल नंबर से आई थी. उन्होंने बेटे के नंबर पर कालबैक कर बात करना उचित समझा. उन्होंने जैसे ही काल रिसीव की, दूसरी तरफ से आवाज आई, ”हैलो, पदम सिंह लोधी बोल रहे हैं?’’

जी बोल रहा हूं. आप कौन?’’ पदम सिंह ने कहा.

काल करने वाले की बात उन्हें थोड़ी अटपटी लगी, फिर भी उन्होंने सोचा कि अभिषेक का कोई दोस्त होगा. इस से ज्यादा कुछ और पूछ पाते कि दूसरी तरफ से फोन करने वाले ने तपाक से अपनी बात कह डाली, ”सुनो, मैं कौन बोल रहा हूं, कहां से बोल रहा हूं, यह सब पता चल जाएगा. पहले जो मैं कह रहा हूं उसे ध्यान से सुनो. तुम्हारा बेटा अभिषेक हमारे कब्जे में है, यदि उस को सहीसलामत हमारी गिरफ्त से आजाद कराना चाहते हो तो 20 लाख रुपए का इंतजाम कर लो, वरना अंजाम बहुत बुरा होगा. हां, एक बात और याद रखना, ज्यादा चालाक बनने की कोशिश मत करना और पुलिस को भूल कर भी मत बताना अन्यथा अंजाम इतना बुरा होगा, जिस की कल्पना भी तुम नहीं कर सकते…’’

इतना सुनते ही सर्द मौसम के बावजूद पदम सिंह को पसीना आ गया. वह अपनी जेब से रूमाल निकाल कर पसीना पोंछ भी नहीं पाए थे कि बेटे के मोबाइल फोन से वाट्सऐप कालिंग करने वाले ने फिर धमकी देते हुए कहा, ”सुनो, फिरौती की रकम कब, कहां और कैसे देनी है, मैं तुम्हें बाद में वाट्सऐप काल कर के बताऊंगा. लेकिन एक बात ध्यान देना कि मैं ने जो भी कहा है, उसे हलके में मत लेना, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना.’’ इतना कह कर उस ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

अपने बेटे को बंधक बनाने और उस की सकुशल वापसी के एवज में 20 लाख रुपए की फिरौती मांगी जाने से पदम सिंह के होश उड़ गए. वह अपना माथा पकड़ कर बैठ गए. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उन के साथ यह हो क्या रहा है. उन्होंने और उन के बेटे अभिषेक ने तो किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं था और न ही उन का और बेटे का किसी से कोई झगड़ा हुआ था. फिर बेटे को बंधक बना कर क्यों रखा है.

सिर पकड़ कर वह इसी सोच में उलझे हुए थे कि तभी अचानक घर के भीतर से उन की पत्नी ने आवाज लगाई, ”अरे, आप अभी तक यहीं बैठे हुए हैं. आप तो बेटे को ढूंढने जा रहे थे फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि सिर पकड़ कर बैठ गए. कोई बात है क्या?’’ पत्नी का इतना कहना था कि पदम सिंह फफक पड़े और पूरी आपबीती सुना दी. पति के मुंह से बेटे के किडनैप की बात सुन कर पत्नी के भी होश उड़ गए. वह भी सिर पकड़ कर बैठ गई थी.

पतिपत्नी को अब कुछ सूझ नहीं रहा था कि वह क्या करें? काफी देर तक दोनों मौन रह कर एक ही कमरे में बैठे रहे. वे इसी सोच में उलझे हुए थे कि बेटे को बंधक बना कर रखने की हरकत किस ने की है?

यही सब सोच कर जहां उन का भीतर से तनमन कांपे जा रहा था, वहीं वे दोनों शंकाओंआशंकाओं से उलझे हुए थे. कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करें. फिरौती की मांग करने वाले ने कहा था कि पुलिस को इस बारे में कुछ बताया तो अपने इकलौते बेटे को हमेशा के लिए खो बैठोगे. इसलिए पदम सिंह ने बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराते वक्त वाट्सऐप पर हुई बातचीत का कतई जिक्र नहीं किया था.

उधर शातिरदिमाग मुकेश लोधी ने अभिषेक की हत्या के बाद उस का मोबाइल अपने पास रख लिया था. लेकिन जैसे ही  अभिषेक की लाश नहर से बरामद हुई और पुलिस ने उसके हत्यारे की तलाश तेज की तो  मुकेश लोधी ने मृतक के मोबाइल से पदम सिंह को वाट्सऐप मैसेज भेज कर बता दिया कि अभिषेक की हत्या हो चुकी है. यदि अब यह जानना चाहते हो कि उस की हत्या किस ने की और किस के कहने पर की है तो तुरंत 5 लाख रुपए अपने बेटे के मोबाइल पर फोनपे के माध्यम से भेज दो. ध्यान रहे, पुलिस हमारे बारे में कुछ भी पता नहीं कर सकती, क्योंकि हम सैकड़ों किलोमीटर दूर निकल चुके हैं. इस सनसनीखेज हत्याकांड के पीछे जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली थी.

प्रेमिका को योजना में क्यों किया शामिल

20 दिसंबर को मध्य प्रदेश के शहर मुरैना के एसपी समीर सौरभ और दिमनी के एसएचओ शशिकुमार ने पत्रकार वार्ता में घटना में शामिल तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए बताया कि अभिषेक लोधी की हत्या भिंड के रावतपुरा निवासी मुकेश लोधी (23 वर्ष) ने अपनी 2 प्रेमिकाओं शशि लोधी (21 वर्ष) निवासी परदूपुरा और पायल उर्फ काजल लोधी (23 वर्ष) निवासी सिरमिती हाल निवासी बड़ोखर के साथ मिल कर की थी. 

पायल लोधी ग्वालियर में अपने मामा के घर पर रह कर पीएससी की तैयारी कर रही थी. इसी दौरान मुकेश लोधी ने प्रेमिका पायल लोधी के माध्यम से पैसे वाले किसी युवक को प्रेम जाल में फंसा कर पैसा कमाने की योजना बनाई, क्योंकि उस पर 5 लाख रुपए का कर्ज हो गया था. अत: उस ने प्रेमिका काजल लोधी की पायल राजपूत के नाम से फरजी ईमेल आईडी बना कर इंस्टाग्राम के माध्यम से अभिषेक लोधी से जानपहचान की. फिर 8 दिसंबर, 2024 को काजल ने इंस्टाग्राम पर मैसेज भेज कर अभिषेक को मुलाकात के लिए मुरैना बुलाया. लेकिन उस दिन अभिषेक अपने एक फ्रेंड को साथ ले कर उस की कार से मुरैना पहुंचा तो पायल (काजल) ने उस फ्रेंड की मौजूदगी में अभिषेक से मुलाकात करने में असमर्थता जताई. तब अभिषेक उस से बिना मिले ही वापस लौट गया.

11 दिसंबर को पायल (काजल) ने फिर इंस्टाग्राम पर मैसेज भेज कर अभिषेक को अकेले में मिलने के बहाने मुरैना बुलाया. काजल ने अपने मैसेज में यह भी लिखा कि इस बार ग्वालियर से बस में बैठ कर मुरैना आना, मैं बसस्टैंड पर खड़ी मिल जाऊंगी. बसस्टैंड से मैं सीधे तुम्हें अपनी सहेली शशि के वडोखर स्थित कमरे पर ले चलूंगी. शशि इन दिनों अपने प्रेमी मुकेश के साथ मौजमस्ती करने मुरैना से बाहर गई हुई है, इसलिए उस के कमरे में एकांत में बैठ कर आराम से बिना किसी हिचकिचाहट के प्रेमालाप करेंगे. 

प्लान के अनुसार, शशि के कमरे में छिप कर पहले से ही शशि और उस का प्रेमी मुकेश रसोई घर में बैठ गए थे. अपनी प्रेमिका पायल का इंस्टाग्राम पर मैसेज देख कर अभिषेक बस में बैठ कर मुरैना पहुंच गया.  बस से उतर कर जैसे ही अभिषेक ने अपनी नजर घुमाई, पायल उर्फ काजल इंतजार में खड़ी दिखाई दे दी. वह अभिषेक को अपनी स्कूटी पर बैठा कर सीधे शशि के कमरे पर ले गई और कमरे का ताला खोल कर अभिषेक से कहा कि तुम तसल्ली के साथ पलंग पर बैठो, मैं तुम्हारे और अपने लिए गरमागरम चाय और नाश्ता ले कर आती हूं. फिर चाय की चुस्की के साथ नाश्ते का लुत्फ उठाते हुए जम कर मौजमस्ती करेंगे. 

पायल ने योजना को अंजाम देने के लिए मुकेश के कहने पर अभिषेक की चाय में नशीला पाउडर मिला दिया. चाय पीतेपीते कुछ देर तक तो अभिषेक पायल (काजल) से बातचीत करता रहा, लेकिन चाय खत्म होने से पहले ही उसे अपना सिर चकराता हुआ महसूस हुआ. उस के होश कब गुम हो गए, उसे पता ही नहीं चला. उस के बेहोशी की हालत में पहुंचते ही मुकेश और शशि ने अभिषेक के हाथपैर और आंखें काजल के स्टोल से बांध दीं. तकरीबन 3 घंटे बाद जैसे ही नशा कम हुआ, उस ने काजल से पूछा, ”क्या यही सब हरकतें करने के लिए तुम ने मुझे ग्वालियर से बुलाया था?’’ 

इसी बीच शशि का प्रेमी मुकेश कमरे में आ धमका. वह बोला, ”चल, तेरे हाथ खोले देता हूं. अपने बाप को फोन लगा कर बोल कि मुझे कुछ लोगों ने बंधक बना लिया है. आप मेरी जिंदगी बचाना चाहते हो तो मेरे फोनपे के माध्यम से फिरौती कि रकम 20 लाख रुपए भेज दो.’’ 

इतना सुनते ही अभिषेक ने शोर मचाना शुरू कर दिया. उस के ऐसा करने से घबरा कर शशि रसोई से बेलन उठा लाई और अभिषेक के सिर पर उस से ताबड़तोड़ वार कर दिए. तब अभिषेक अपनी जान बचाने के लिए जोरजोर से बचाओ…बचाओचिल्लाने लगा. मुकेश और काजल को लगा कि यदि कमरे से बाहर किसी ने अभिषेक की आवाज सुन ली तो उन की सारी योजना पर तो पानी फिर ही जाएगा, साथ ही उन सभी को जेल की हवा भी खानी पड़ेगी. अत: मुकेश और काजल ने ताकिए से अभिषेक का मुंह दवा दिया, जिस से उस की दम घुटने से उस की मौत हो गई. 

उस की मौत के बाद तीनों के हाथपांव फूल गए. डर के मारे मुकेश, शशि और काजल 12 नवंबर की रात तक अभिषेक की लाश के साथ कमरे में ही रहे. फिर लाश को ठिकाने लगाने के लिए ग्वालियर से सेल्फ ड्राइविंग पर 24 घंटे के लिए कार भाड़े पर ला कर 13 दिसंबर की रात को अभिषेक की लाश को इसी कार में रख कर बड़ागांव और महादेवपुरा के बीच बहने वाली नहर में फेंक दी. लाश ठिकाने लगाने के बाद मुकेश, शशि और काजल उसी कार से दिल्ली चले गए. फिर 14 दिसंबर की सुबह यह पता करने  के लिए मुरैना वापस लौट आए कि इस मामले में पुलिस क्या कर रही है. दिल्ली से लौट कर मुकेश लोधी और उस के साथ लिवइन में रहने वाली शशि ने वह कमरा खाली कर के दूसरी जगह कमरा ले लिया था.

वैसे मुकेश, शशि और पायल उर्फ काजल का जुर्म की दुनिया से कोई वास्ता नहीं था, लेकिन तीनों ने पेशेवर हत्यारों को भी मात दे दी थी. तीनों ने फुलप्रूफ मर्डर की प्लानिंग बड़ी होशियारी से की थी. लेकिन उन की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई. पुलिस ने 21 दिसंबर, 2024 को इस हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता मुकेश लोधी सहित इस अपराध में शामिल उस की प्रेमिका शशि लोधी और अभिषेक की इंस्टाग्राम प्रेमिका पायल उर्फ काजल लोधी को न्यायालय में पेश कर 3 दिनों के रिमांड पर लिया.

रिमांड अवधि में मुकेश के पास से अभिषेक का मोबाइल फोन सहित अन्य सबूत हासिल किए. फिर तीनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. 

डेटिंग ऐप का शौक पड़ा भारी

अभिषेक के रूम पार्टनर ने पुलिस को बताया कि अभिषेक अपने अकेलेपन और पढ़ाई के उबाऊ बोझ को कम करने के लिए डेटिंग ऐप का सहारा लिया करता था. कुछ वक्त के लिए औनलाइन डेटिंग की दुनिया में तफरीह कर वह अपने आप को तरोताजा महसूस करता था. दरअसल, उसे एक गर्लफ्रेंड की तलाश थी क्योंकि अभी तक उस की कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. इस के चलते उस ने तमाम सारे डेटिंग ऐप पर अपने अकाउंट खोल रखे थे. उन पर उस की प्रोफाइल के मुताबिक किसी वैसी लड़की से दोस्ती नहीं हो पाई थी, जिस की उस ने कल्पना कर रखी थी. 

एक दिन उस की नजर इंस्टाग्राम पर पायल राजपूत नाम से रजिस्टर्ड आईडी पर पड़ी. उस ने फटाफट पायल को अपने अकाउंट से जोडऩे के लिए रिक्वेस्ट भेज दी. कुछ ही सेकेंड में पायल ने उसे एक्सेप्ट भी कर लिया. अभिषेक ने उसे ओके कर दिया, फिर उस से उस की चैटिंग के साथ डेटिंग शुरू हो गई. वे डिजिटल जमाने के प्रेमी थे, अत: उन के डेटिंग मैसेज बौक्स में गुडमौर्निंग और गुडनाइट से होती थी. पायल और अभिषेक इंस्टाग्राम के माध्यम से अपने दिल की भावनाएं एकदूसरे से जाहिर करते रहते थे. दोनों में देर रात तक चैटिंग होती रहती थी. 2-3 दिनों की लुभावनी और मजेदार चैटिंग के बाद पायल ने अभिषेक को फंसाने के लिए एक साथ अपने तमाम सारे सैक्सी फोटो भी भेज दिए थे. 

पायल के जाल में अभिषेक के फंसते ही पायल बहुत खुश हुई. फिर पायल ने अपने प्रेमी मुकेश के कहने पर 11 दिसंबर की सुबह इंस्टाग्राम पर अभिषेक को मैसेज भेज कर कहा कि यदि मुझ से रूबरू मुलाकात करना चाहते हो तो बस में बैठ कर मुरैना आ जाओ. इस मैसेज को पढ़ कर अभिषेक पायल से मुलाकात के लिए मुरैना चला गया. मुरैना पहुंचने के बाद उस के संग जो कुछ घटा, उस का जिक्र कथा में किया जा चुका है.

कथा लिखे जाने तक मुकेश लोधी, शशि लोधी और पायल उर्फ काजल लोधी जेल की सलाखों के पीछे थे. उन्हें अभिषेक की हत्या का जरा भी मलाल नहीं था. दिमनी थाने के एसएचओ शशिकुमार द्वारा अभिषेक हत्याकांड की विवेचना की जा रही थी. वह जांच पूरी कर शीघ्र ही अदालत में चार्जशीट भेजने की तैयारी कर रहे थे.

पुलिस सूत्रों पर आधारित