UP News : छलिया प्रेमी को पहचानना जरूरी

UP News : ज्यादातर महिलाएं प्यार की कद्रदान होती हैं. जब वह एक बार किसी पुरुष को अपने दिल में बसा लेती हैं तो उस का साथ ताउम्र चाहने की लालसा रखती हैं, लेकिन पुरुष उस के साथ दगा करने से नहीं चूकता. जब कभी उस महिला का दिल टूटता है तो वह कुछ भी करने से नहीं झिझकती. पढ़ें, हवस में अंधे पुरुषों से धोखा खाई महिलाओं की यह दिलचस्प कहानी…

उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना गुरबख्शगंज के एसएचओ प्रवीण गौतम ने गीता को समझाते हुए कहा, ”अगर तुम्हारे साथ कुछ गलत हुआ है तो मुझे बताओ. मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि मुझ से जितना हो सकेगा, मैं तुम्हारी मदद करूंगा.’’

एसएचओ का इतना कहना था कि गीता फफकफफक कर रोने लगी. रोते हुए ही उस ने कहा, ”क्या करती साहब, जवान बेटी की इज्जत का सवाल था. अगर मैं उसे मार न डालती तो वह मेरी बेटी की जिंदगी को नरक बना देता. मजबूर हो कर मुझे उस की हत्या करनी पड़ी.’’

एसएचओ ने गिलास का पानी गीता की ओर बढ़ाते हुए कहा, ”यह लो पहले पानी पियो. मन को थोड़ा शांत करो, उस के बाद बताओ कि मेड़ीलाल ने तुम्हारे साथ या तुम्हारी बेटी के साथ ऐसा क्या किया कि तुम्हें उस की हत्या करनी पड़ी?’’

एसएचओ के हाथ से पानी का गिलास ले कर गीता ने थोड़ा पानी पिया. खाली गिलास सिपाही को पकड़ा कर साड़ी के पल्लू से मुंह और आंखें पोंछ कर सिसकते हुए गीता अपनी दुखभरी कहानी सुनाने लगी. गीता ने एसएचओ को अपनी जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी. हरियाणा की रहने वाली गीता की शादी दयाशंकर से हुई थी. दयाशंकर ठीक आदमी नहीं था. इसलिए गीता पति से परेशान रहती थी, लेकिन कोई ढंग का सहारा न मिलने की वजह से वह किसी तरह उस से निभा रही थी. दूसरों के घर काम कर के वह किसी तरह जीवन काट रही थी. उसी बीच उसे एक बेटी हो गई, जिस का नाम उस ने रोशनी रखा.

उसे लगा कि रोशनी के आने के बाद शायद उस के जीवन में रोशनी आ जाए, पर उस के जीवन में वैसा ही अंधेरा बना रहा. धीरेधीरे रोशनी बड़ी होने लगी, पर गीता के जीवन में वैसा ही अंधेरा बना रहा. अचानक एक दिन उस के जीवन में उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना गुरबख्शगंज के गांव दाउदपुर रामनगर का रहने वाला मेड़ीलाल आया. रोजीरोटी की तलाश में मेड़ीलाल हरियाणा गया था. जबकि उस का परिवार गांव में ही रहता था. गीता ने जब अपनी दुखभरी कहानी मेड़ीलाल को सुनाई तो उसे गीता से सहानुभूति हो गई और वह गीता की हर तरह से मदद करने लगा.

मेड़ीलाल पत्नी और बच्चों से दूर अकेला रहता था. गीता से मुलाकात होने के बाद मेड़ीलाल जब काम से घर आता तो गीता उसे एक गिलास पानी ही नहीं चाय भी बना कर देने लगी. मेड़ीलाल भी हर तरह से गीता का खयाल रखने लगा था. गीता जहां पति के प्यार से वंचित थी, वहीं मेड़ीलाल भी पत्नी से दूर था. दोनों को प्यार की नहीं, शरीर की भूख सताती थी. इसलिए उन्हें नजदीक आने में देर नहीं लगी. नजदीकी बढ़ी तो दोनों एक साथ रहने लगे, जिसे आज लिवइन कहा जाता है. मेड़ीलाल गीता की बेटी का भी खयाल रखता था. उस की पढ़ाई का खर्च उठाने के साथसाथ उस की हर जरूरत पूरी करता था. गीता की बेटी तब यही कोई 14 साल की थी.

सब कुछ बढिय़ा चल रहा था. गीता का साथ पाने के बाद मेड़ीलाल घर और परिवार को लगभग भूल सा गया था. शायद वह गांव लौट कर आता भी न. पर जब देश में कोरोना फैला तो बहुत लोगों के रोजगार चले गए. उन्हीं में एक मेड़ीलाल भी था. कोरोना की वजह से काम बंद हुआ तो मेड़ीलाल ने गांव लौटने का विचार किया. जब वह गांव जाने के लिए तैयार हुआ तो गीता ने कहा, ”तुम गांव चले जाओगे तो मेरा क्या होगा? मैं अकेली पड़ जाऊंगी. इतने दिन साथ रहने के बाद अब में तुम्हारे बिना रह नहीं पाऊंगी.’’

मेड़ीलाल जहां 55 साल का था, वहीं गीता 35 साल की थी. उस की पत्नी भी बूढ़ी हो चुकी थी. इस के अलावा गीता उस की पत्नी से सुंदर भी थी. यही सब सोच कर उस ने गीता से कहा, ”तुम ने ऐसा कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हें छोड़ कर अकेला गांव जाऊंगा. अब तो जहां मैं रहूंगा, वहीं तुम्हें भी रखूंगा.’’

इस के बाद परिणाम की चिंता किए बगैर मेड़ीलाल गीता और उस की बेटी रोशनी को साथ ले कर गांव आ गया. मेड़ीलाल गीता के साथ घर पहुंचा तो घर में बवाल हो गया. फेमिली वालों ने गीता और रोशनी को घर में रखने से साफ मना कर दिया. मेड़ीलाल का गांव के बाहर थोड़ा खेत था, उसी में उस ने गीता के लिए झोपड़ी डाल दी. गीता के रहने की व्यवस्था हो गई. खर्च भी मेड़ीलाल ही उठाता था. वह कभी घर में रहता तो कभी गीता के साथ. इसी तरह समय बीतता रहा.

रोशनी का दाखिला यहां भी गीता ने एक स्कूल में करा दिया था. गीता अब तक 12वीं पास कर चुकी थी. उस की उम्र भी 19 साल हो गई थी. देखा जाए तो अब वह जवान हो गई थी. ऐसे में ही किसी दिन मेड़ीलाल की नजर उस पर पड़ी तो उस की नीयत बदल गई. फिर क्या था, वह बेटी की तो क्या पोती की उम्र की रोशनी के पीछे हाथ धो कर पड़ गया. मेड़ीलाल को लगता था कि वही उसे खिलातापिलाता है तो वह जो चाहेगा, उस के साथ कर लेगा. लेकिन रोशनी ने उसे छूने नहीं दिया. एक दिन तो उस ने हद ही कर दी. उस दिन उस ने उस के नाजुक अंगों पर हाथ लगा दिया.

मेड़ीलाल की इस हरकत पर रोशनी को गुस्सा आ गया. उस ने कह भी दिया, ”आज के बाद इस तरह की हरकत की तो ठीक नहीं होगा.’’

मेड़ीलाल को इस के बाद पीछे हट जाना चाहिए था. पर उस की मम्मी गीता को उस ने रखैल बना रखा था, इसलिए उसे लगता था कि बेटी भी वैसी ही होगी. आज नखरे कर रही है, पर कभी न कभी समर्पित ही हो जाएगी. पर ऐसा हुआ नहीं. उस ने उसी दिन मेड़ीलाल की शिकायत मम्मी से कर दी. प्रेमी की इस हरकत पर गीता सोच में पड़ गई. बेटी की जिंदगी का सवाल था. उसी का प्रेमी उस की बेटी की जिंदगी नरक बनाने पर तुला था. गीता जानती थी कि मेड़ीलाल समझाने से नहीं मानेगा. क्योंकि अब तक वह उस के स्वभाव से अच्छी तरह परिचित हो चुकी थी. इसलिए उस ने बेटी से सलाह कर के उसे खत्म करने का निर्णय ले लिया.

यह निर्णय लेने के बाद गीता मेड़ीलाल से मिली और उसे लालच दिया कि शाम को वह उस के घर आ जाए. रात में पार्टी करेंगे. उस के बाद रोशनी को समझाबुझा कर वह उस के पास भेज देगी. मेड़ीलाल तो यही चाहता था. रात होते ही वह शराब की बोतल ले कर गीता के घर पहुंच गया. गीता और रोशनी ने मेड़ीलाल को जम कर शराब पिलाई. जब वह विरोध करने की स्थिति में नहीं रहा तो गीता और रोशनी ने पहले तो लाठीडंडे से मेड़ीलाल की खूब पिटाई की. ज्यादा डंडे उस के सीने पर ही मारे, जिस से उस की पसलियां टूट गईं. उस के गुप्तांग पर भी डंडों से मारा. मार खातेखाते जब मेड़ीलाल बेहोश हो गया तो गीता और रोशनी ने चुन्नी से उस का गला घोंट दिया.

मेड़ीलाल का खेल खत्म कर गीता और रोशनी ने उस की लाश एक चादर में लपेटी और अपने घर से करीब 100 मीटर दूर ले जा कर झाडिय़ों में फेंक दी. इस के बाद अपने घर आ कर मांबेटी सो गईं. सवेरा होने पर देर तक मेड़ीलाल घर नहीं आया तो उस की खोज शुरू हुई. गांव में इधरउधर तलाशा गया, गीता के घर भी जा पर पूछा गया, लेकिन मेड़ीलाल का कुछ पता नहीं चला. दोपहर के करीब किसी व्यक्ति ने झाडिय़ों के बीच लाश देखी तो उस ने शोर मचाया तो गांव वालों ने उस लाश की शिनाख्त मेड़ीलाल के रूप में की. मेड़ीलाल के बेटे सुशील कुमार ने थाना गुरबख्शगंज जा कर पिता की हत्या की सूचना पुलिस को दी.

सूचना मिलते ही एसएचओ प्रवीण गौतम, सीओ (लालगंज) पुलिस बल एवं फोरैंसिक टीम के साथ गांव दाउदपुर रामनगर पहुंच गए. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया. उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर परिवार के लोगों तथा गांव वालों से पूछताछ शुरू की. जब उस के चरित्र के बारे में पूछा तो गीता का नाम पुलिस के सामने आया. तब पुलिस गीता से पूछताछ करने लगी. पहले तो गीता पुलिस को इधरउधर की कहानियां सुनाती रही, पर उस की बौडी लैंग्वेज और बारबार झूठ बोलने पर पुलिस को शक हुआ तो पुलिस ने उसे विश्वास में लेने की कोशिश की. उस से कहा गया कि अगर वह सब कुछ सचसच बता देगी तो जितना हो सकेगा, पुलिस उस की मदद करेगी. इस के बाद गीता ने रोते हुए मेड़ीलाल की हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए उस की हत्या की सारी कहानी सुना दी.

मेड़ीलाल की हत्या की सच्चाई जान कर पुलिस का मन भी द्रवित हो उठा, लेकिन अपराध तो अपराध है. गीता ने अपराध किया था, इसीलिए पुलिस ने उस के साथ उस की 19 साल की बेटी रोशनी को भी गिरफ्तार कर लिया. इसी के साथ वह चुन्नी भी बरामद कर ली, जिस से मेड़ीलाल का गला घोंटा गया था. उन डंडों को पुलिस ने बरामद कर लिया, जिन से मेड़ीलाल की पिटाई की गई थी. सारे सबूत जुटाने के बाद एसपी आलोक प्रियदर्शी ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर के पत्रकारों को मेड़ीलाल की हत्या का खुलासा करते हुए आरोपियों के गिरफ्तार करने की सूचना दी. अगले दिन मांबेटी को रायबरेली की अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

यह ऐसी सत्य घटना थी, जिस में एक मां गीता ने अपनी बेटी की इज्जत बचाने के लिए अपने प्रेमी और पालनहार की जान ले ली. लेकिन दूसरी जो घटना गोरखपुर की है, उस में अपनी हवस मिटाने के लिए एक सुनीता ने बेटी को फंदे से लटकाने वाले प्रेमी को बचाने की कोशिश की. गोरखपुर का एक थाना है कैंपियरगंज. इसी थाने के अंतर्गत एक परिवार रहता था, जिस के मुखिया मुंबई में रहते थे. पत्नी सुनीता और 15 साल की बेटी रजनी गांव में ही रहती थी. बेटी 9वीं क्लास में पढ़ती थी. पति के बाहर होने की वजह से घर और बाहर के सारे काम सुनीता ही देखती थी. इन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिस का दूध बेच कर कुछ पैसे कमा लेती थीं. इस के अलावा पति कुछ पैसे भेज देता था, जिस से मांबेटी का गुजारा आराम से हो जाता था.

गाय के लिए भूसे की जरूरत पड़ती थी. भूसा थाना पीपीगंज के अंतर्गत आने वाले गांव जंगल अगही के रहने वाले सुनील गौड़ से खरीदती थीं. जब भी इन्हें भूसे की जरूरत पड़ती, वह सुनील गौड़ को फोन कर देतीं, सुनील भूसा पहुंचा देता था. अगर पैसे होते तो उसी समय दे देतीं, न होते सुनील को बाद में ले जाने के लिए कह दिया जाता. सुनील को भी ऐतराज नहीं होता, क्योंकि वह हमेशा उसी से भूसा लेती थीं. सुनीता अभी जवान थी. पति परदेश में रहता था. साल, डेढ़ साल में महीने, 2 महीने के लिए आता था और फिर वापस चला जाता था. इतने दिनों में उस की पति के साथ रहने की हसरतें अधूरी ही रह जाती थीं. जबकि सुनीता चाहती थी कि उस का पति हमेशा उस के साथ रहे.

प्यार की भूखी सुनीता के घर जब सुनील का आनाजाना बढ़ा तो वह उस में पति वाला प्यार ढूंढने लगी. सुनील जवान और कुंवारा था, इसलिए वह किसी भी औरत के प्यार की तलाश में रहता था. सुनील को सुनीता की आंखों में अपने लिए प्यार दिखाई दिया तो उसे उस के करीब आते देर नहीं लगी. क्योंकि आग दोनों ओर लगी थी. सुनीता और सुनील के बीच संबंध बने तो जब देखो, तब सुनील सुनीता के घर आनेजाने लगा. घर में कोई मर्द तो था नहीं कि रोकटोक होती, इसलिए सुनील कभीकभी रात को भी सुनीता के घर रुक जाता.

सुनीता की बेटी रजनी नाबालिग जरूर थी, पर इतनी भी छोटी नहीं थी कि उसे यह न पता चलता कि उस की मम्मी और सुनील के बीच क्या चल रहा है. कुछ दिनों तो वह चुप रही, लेकिन जब बात हद से ज्यादा बढ़ी तो वह मम्मी के इस संबंध का विरोध करने लगी. वह सुनील को अपने घर आने से रोकने लगी. इस से सुनील को भी परेशानी होने लगी और सुनीता को भी. क्योंकि न तो सुनीता सुनील को छोडऩा चाहती थी और न ही सुनील सुनीता को. जब इस मामले पर सुनीता और सुनील ने सलाह की तो उन्होंने इस का एक ही हल निकाला कि रजनी को भी इस की लत लगा दी जाए. उस के बाद न तो वह किसी से इस बात की शिकायत कर सकेगी और न ही विरोध कर सकेगी.

फिर क्या था, सुनील तो चाहता ही यही था. रजनी अभी कुंवारी थी. हर मर्द ऐसी लड़कियों को पाना चाहता है. सुनील गौड़ प्रेमिका सुनीता की बेटी रजनी पर भी डोरे डालने लगा. सुनीता की ओर से उसे पूरी छूट थी, इसलिए वह उस से शारीरिक छेड़छाड़ भी करने लगा. इस तरह जल्दी ही रजनी सुनील के जाल में फंस गई और अपना सब कुछ सुनील को दे बैठी. फिर तो सुनील की चांदी हो गई. वह मांबेटी से संबंध बनाता. यह सब इसी तरह चलता रहा. सुनीता के सुनील से संबंध केवल शारीरिक भूख मिटाने के लिए थे. पर रजनी को तो सुनील से प्यार हो गया था. जबकि उसे पता था कि सुनील के उस की मम्मी से भी संबंध हैं.

इस के बावजूद वह सुनील को इस कदर चाहने लगी कि उसे लगने लगा कि वह सुनील के बगैर नहीं रह सकती. इसलिए वह सुनील पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. जबकि सुनील ने केवल मौजमजे के लिए मांबेटी से संबंध बनाए थे. रजनी पहले तो सुनील से ऐसे ही विवाह के लिए कहती रही. पर जब देखा कि सुनील गंभीर नहीं है तो वह उस के पीछे पड़ गई. जब सुनील के लिए रजनी गले की हड्डी बनने लगी तो वह परेशान रहने लगा. उस ने यह बात अपने ही टोले के रहने वाले अपने दोस्त दुर्गेश यादव को बताई तो उस ने साफ कहा, ”अगर प्रेमिका गले की हड्डी बन रही है तो निकाल फेंको, वरना तुम्हारी ही जान ले लेगी.’’

इस के बाद सुनील रजनी को रास्ते से हटाने के बारे में सोचने लगा. आखिर एक दिन उसे मौका मिल गया. सुनीता के किसी रिश्तेदार की मौत हो गई थी. पति बाहर था, इसलिए संवेदना व्यक्त करने उसे ही जाना पड़ा. बेटी को घर में अकेली छोड़ कर वह रिश्तेदार के यहां संवेदना व्यक्त करने चली गई. शाम को सुनीता लौट कर आई तो उसे बेटी रजनी की साड़ी से लटकी लाश मिली. रोते हुए उस ने यह बात पड़ोसियों को बताई तो मोहल्ले की तमाम महिलाएं व पुरुष संवेदना व्यक्त करने पहुंच गए. उसी दौरान किसी पड़ोसी ने यह जानकारी थाना कैंपियरगंज पुलिस को दे दी.

पहली नजर में पुलिस को लगा कि यह सुसाइड का मामला है, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि यह सुसाइड का मामला नहीं, बल्कि रजनी की गला दबा कर हत्या की गई थी. यही नहीं, हत्या से पहले उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाया गया था. पुलिस चौंकी, क्योंकि रजनी अभी नाबालिग थी. पुलिस को शुरुआती जांच में घर में जोरजबरदस्ती के कोई निशान नहीं मिले थे. मां सुनीता से भी पूछताछ की गई कि लड़की का किसी से प्रेमसंबंध तो नहीं था?

सुनीता ने भी मना कर दिया. तब पुलिस ने घर के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस काल डिटेल्स से पता चला कि इस नंबर से एक नंबर पर रोजाना लंबीलंबी बातें होती थीं. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर थाना पीपीगंज के गांव जंगल अगही के टोला भरवल के रहने वाले सुनील गौड़ का निकला. पुलिस ने सुनील को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू की तो हर अपराधी की तरह उस ने भी पहले इधरउधर की कहानियां सुनाईं. लेकिन जब पुलिस अपनी पर आई तो उस ने सारी सच्चाई उगल दी. उस ने रजनी की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया और रजनी से शारीरिक संबंध बनाने से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी सुना दी.

रजनी सुनील पर विवाह के लिए दबाव डाल रही थी, इसलिए सुनील अब उस से पीछा छुड़ाना चाहता था. 26 सितंबर को जब सुनील को पता चला कि रजनी घर में अकेली है तो वह अपने दोस्त दुर्गेश यादव के साथ उस के घर पहुंच गया. पहले तो उस ने रजनी के साथ शारीरिक संबंध बनाए. इस के बाद जब रजनी ने विवाह की बात की तो उस ने विवाह करने से साफ मना कर दिया. फिर तो रजनी बिफर उठी और सुनील से उलझ गई. पीछा छुड़ाने के लिए सुनील ने रजनी की गला दबा कर हत्या कर दी.

इस बीच दुर्गेश घर के बाहर बैठा निगरानी करता रहा. हत्या करने के बाद सुनील ने दुर्गेश को अंदर बुलाया और उस की मदद से आंगन में फैली सुनीता की साड़ी में फंदा बना कर रजनी की लाश को लटका दिया, ताकि लगे कि रजनी ने आत्महत्या की है. अपना काम कर के दोनों अपनेअपने घर चले गए. रजनी की मम्मी सुनीता को पता था कि यह काम कौन कर सकता है, पर अपना पाप छिपाने के चक्कर में उस ने यह बात पुलिस को नहीं बताई थी.

सुनील गौड़ के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने दुर्गेश यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद एसएसपी गोरखपुर डा. गौरव ग्रोवर ने पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता कर के इस बात की जानकारी दी और थाना कैंपियरगंज में आरोपियों के खिलाफ हत्या और पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर के अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. यह तीसरी घटना है गुजरात के जिला भुज की. भुज का एक थाना है मुंद्रा मरीन. इसी थाने के अंतर्गत आने वाले गांव हमीरमोरा के रहने वालों ने समुद्र के किनारे एक लाश पड़ी देखी. यह जानकारी उन्होंने थाना मुंद्रा मरीन पुलिस को दी तो थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई.

लाश की स्थिति काफी खराब थी. इस से साफ लग रहा था कि हत्या कई दिनों पहले की गई थी. पुलिस ने लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, पर पता चला कि यह महिला वहां की रहने वाली नहीं है. पुलिस ने लाश के फोटो करवा कर वह पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी और थाने आ कर उस की शिनाख्त की कोशिश करने लगी. काफी कोशिश के बाद भी जब लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने फोटो से महिला का स्केच बनवा कर उस के पैंफ्लेट छपवा कर सार्वजनिक स्थानों पर लगवाए, लेकिन इस का भी कोई फायदा नहीं हुआ.

पुलिस ने उस स्थान का मोबाइल का डंप डाटा निकलवाया, जहां वह लाश मिली थी. जब इस डंप डाटा की स्क्रीनिंग की गई तो उस में 2 नंबर ऐसे मिले, जो वहां के रहने वालों के नहीं थे. जब इस बारे में पुलिस ने गांव वालों से पूछताछ की तो गांव के एक आदमी ने बताया, ”जी साहब, कुछ दिनों पहले 3 लोग यहां दिखाई दिए थे, जो यहां के रहने वाले नहीं थे. उन लोगों ने यहां पार्टी वगैरह की थी. उस के बाद चले गए थे.’’

पुलिस को डंप डाटा से बाहर के 2 नंबर मिले थे. इस से पुलिस को लगा कि वे दोनों नंबर उन्हीं लोगों के हो सकते हैं, जो बाहर से आए थे.

इस के बाद पुलिस ने उन लोगों के बारे में पता कराया तो जानकारी मिली कि ये नंबर नवावास के रहने वाले योगेश और नारण के थे. इस के बाद पुलिस ने घटना के लगभग एक महीने बाद लोकेशन के आधार पर योगेश और नारण को उठा लिया. थाने में योगेश और नारण से पूछताछ की तो पहले तो दोनों पुलिस को घुमाने की कोशिश करते रहे. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उन्होंने लक्ष्मी की हत्या की बात स्वीकारते हुए असली कहानी सुनानी शुरू कर दी. पुलिस ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया. फिर जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस तरह थी.

इस कहानी को जानने के लिए 9 साल पीछे जाना होगा. मूलरूप से जूनागढ़ के रहने वाले जितेंद्र भट्ट को 9 साल पहले लक्ष्मी बेकरिया से प्यार हो गया. लक्ष्मी शादीशुदा ही नहीं, 3 बच्चों की मां थी, लेकिन पति से न पटने के कारण उस का झुकाव जितेंद्र की ओर हो गया तो वह पति को छोड़ कर जितेंद्र के साथ रहने लगी थी. उस ने एक बेटे को तो पति के पास छोड़ दिया था, जबकि एक बेटी और एक बेटे चेतन को साथ रख लिया था. बाद में उस ने पति से तलाक ले कर जितेंद्र से विवाह भी कर लिया था.

जब तक बच्चे छोटे थे, तब तक तो जितेंद्र की कमाई से घर का खर्च चलता रहा, लेकिन जब बच्चे बड़े हो गए तो घर का खर्च भी बढ़ गया. अब तक लक्ष्मी भी बच्चों की देखभाल से फुरसत पा गई थी. इस के बाद आमदनी बढ़ाने के लिए वह भी काम की तलाश में बाहर निकली. उसे कोई और काम नहीं मिला तो वह रंगरोगन का काम करने लगी. क्योंकि यह काम उसे आता था. इसी रंगरोगन का काम करने के दौरान उस की मुलाकात योगेश जोतियाना से हुई तो वह उसे दिल दे बैठी. इस के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. फिर तो योगेश लक्ष्मी के घर भी आनेजाने लगा.

जितेंद्र को पता चल गया कि उस की पत्नी का संबंध योगेश से हो गया है, लेकिन योगेश थोड़ा अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए जितेंद्र उस से कुछ कहने या उसे रोकने से घबराता था. दूसरी ओर लक्ष्मी भी पति का कहना नहीं मानती थी. ऐसे में योगेश का जब मन होता, लक्ष्मी के घर आ धमकता. लक्ष्मी के घर आनेजाने में योगेश की नजर लक्ष्मी की नाबालिग बेटी पर पड़ी तो वह अधेड़ लक्ष्मी के सहारे उसे पाने के रास्ता खोजने लगा. वह लक्ष्मी की बेटी पर भी डोरे डालने लगा. जिस घर में अनैतिक काम हो रहा हो, उस घर के बच्चों को बहकते देर नहीं लगती. लक्ष्मी की बेटी भी जल्दी ही योगेश के झांसे में आ गई और उसे अपना सब कुछ सौंप बैठी.

जल्दी ही बेटी और योगेश के संबंधों की जानकारी लक्ष्मी को तो हो ही गई, जितेंद्र को भी हो गई. तब जितेंद्र ने पत्नी को ताना मारा, ”देख लिया न अपनी अय्याशी का नतीजा. तुम्हारी ही वजह से आज नाबालिग बेटी की जिंदगी बरबाद हो रही है.’’

बेटी भले ही लक्ष्मी के पहले पति की थी, लेकिन जितेंद्र का अपना कोई बच्चा न होने की वजह से वह लक्ष्मी के पहले पति के बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानता था. इसलिए बेटी के गलत रास्ते पर जाने की वजह से वह परेशान तो था ही, इस की वजह भी पत्नी लक्ष्मी को मानता था. योगेश और बेटी के संबंधों के बारे में जान कर लक्ष्मी भी परेशान थी. उस ने बेटी को समझाया. पर बेटी नहीं मानी तो उस ने योगेश को घर आने से रोक दिया, लेकिन अब तक बेटी शारीरिक संबंधों की आदी हो चुकी थी और योगेश का भी वही हाल था. अब दोनों के बीच में लक्ष्मी कांटा बन रही थी, इसलिए दोनों ने सलाह की कि लक्ष्मी नाम के इस कांटे को ही निकाल फेंका जाए.

योगेश ने अपने एक दोस्त नारण से बात की तो वह योगेश का साथ देने को तैयार हो गया. 10 जुलाई, 2023 को योगेश ने लक्ष्मी को फोन कर के कहा, ”चलो, कहीं घूम कर आते हैं.’’

पहले तो लक्ष्मी ने मना किया, पर जब योगेश ने मिन्नतें की तो लक्ष्मी साथ चलने को तैयार हो गई. नारण के पास अपनी कार थी. योगेश नारण की कार में लक्ष्मी को बैठा कर थाना मुंद्रा मरीन के अंतर्गत आने वाले गांव हमीरमोरा पहुंचा. पहले तो तीनों ने शराब पी. उस के बाद योगेश ने लक्ष्मी के साथ संबंध बनाए और फिर गला दबा कर उस की हत्या कर दी. लक्ष्मी की हत्या कर उस की लाश को वहीं समुद्र किनारे बालू में दबा कर योगेश और नारण नवावास लौट आए.

समुद्र की लहरों की वजह से लाश के ऊपर की बालू हट गई तो गांव वालों की नजर उस पर पड़ गई और बात पुलिस तक जा पहुंची. इस के बाद काफी प्रयास कर महीनों बाद पुलिस ने लाश की शिनाख्त कर आरोपियों को पकड़ा. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मां की हत्या में नाबालिग बेटी का कितना हाथ है. पुलिस ने जब लक्ष्मी के पति जितेंद्र से पूछा कि उस ने पत्नी की गुमशुदगी क्यों नहीं दर्ज कराई तो जितेंद्र ने कहा, ”साहब, जब मैं ने पहले इसे योगेश से मिलनेजुलने से रोका था, तब इस ने मुझ से कहा था कि उसे मेरे साथ रहना हो तो रहे, वरना चला जाए. उस का जहां मन होगा जाएगी. साहब, इसीलिए मुझे लगा कि वह योगेश के साथ कहीं गई होगी. जब उस का मन भर जाएगा तो वापस आ जाएगी.’’

जितेंद्र के इस बयान में जो दर्द था, उसे सुनने वाले हर व्यक्ति ने महसूस किया. पुलिस ने पूछताछ के बाद योगेश और नारण को जेल भिजवा दिया है. UP News

—कथा में कुछ पात्रों के नाम परिवर्तित हैं

 

 

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8 जून, 2021 की बात है. आगरा के थाना सदर के सेवला में रात के 11 बजे एक आदमी कंधे पर बोरा ले कर जा रहा था. अचानक बोरे के वजन के कारण उस का पैर फिसला और वह बोरे सहित  गिर पड़ा. इस पर वहां से निकल रहे लोगों की नजरें उस आदमी की तरफ गईं. वह किसी तरह उठा और बोरे को उठाने का प्रयास करने लगा. उसी समय बोरा खुल गया और उस में से एक हाथ बाहर निकल आया. यह देखते ही लोग उस की ओर दौड़े और उसे पकड़ लिया. बोरे को खुलवा कर देखा तो उस में एक युवक का शव था जिसे देख कर सभी के होश उड़ गए. बोरे में युवक की लाश मिलने से वहां सनसनी फैल गई. इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दे दी गई.

सूचना मिलते ही थाना सदर के थानाप्रभारी अजय कौशल अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां लोग एक व्यक्ति को पकड़े हुए थे. यह माजरा देखते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों से जानकारी ली. लोगों ने बताया कि यही व्यक्ति कंधे पर बोरे में किसी की लाश ले कर जा रहा था. वजन के कारण वह बोरे सहित गिर गया. बोरा खुलने से लाश के बारे में पता चला. पुलिस ने देखा बोरे में एक युवक की लाश थी. शव की पहचान 40 वर्षीय जूता कारीगर संजय के रूप में हुई. पुलिस ने शव की पहचान होने के बाद उस के घरवालों को सूचना दी. जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया.

इस बीच घटना की जानकारी थानाप्रभारी द्वारा अपने उच्च अधिकारियों को दी गई. सूचना मिलते ही एसपी (सिटी) रोहन प्रमोद बोत्रे वहां पहुंच गए. उन्होंने लाश का निरीक्षण किया. युवक के गले  पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे. मौके की जरूरी काररवाई निपटा कर पुलिस ने शव को मोर्चरी भिजवा दिया. प्रेमी हुआ गिरफ्तार पुलिस पकड़े गए युवक मान सिंह को हिरासत में ले कर थाने लाई. थाने पर उस से पूछताछ की गई. जानकारी देने पर पुलिस ने रात में ही मृतक संजय के घर पहुंच कर उस की 35 वर्षीय पत्नी सुनीता उर्फ सुषमा से पूछताछ की.

सुनीता ने बताया कि वह दवा लेने गई हुई थी. जब लौट कर आई तो पति संजय घर पर नहीं मिले. उस ने सोचा कि कहीं गए होंगे. जब देर हो गई तो उस ने पति की तलाश शुरू की. बाद में पता चला कि उस के जाने के बाद पति की किसी ने हत्या कर दी थी. उधर हिरासत में लिए गए युवक ने बिना कुछ छिपाए पुलिस को सच्चाई बता दी. उस ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि मृतक संजय की पत्नी से उस के प्रेम संबंध हैं. पति विरोध करता था.  हम दोनों के प्यार के बीच संजय रोड़ा बना हुआ था. वह अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था. मुझे भी घर आने से मना करता था. इसलिए हम दोनों ने मिल कर उस की हत्या कर दी.

वह शव को बोरे में बंद कर ठिकाने लगाने ले जा रहा था. लेकिन बोरे के गिर जाने से भेद खुल गया. पुलिस समझ गई कि मृतक की पत्नी सुनीता इस हत्याकांड में शामिल होने के बावजूद अपने को निर्दोष बता रही है. जबकि उस के प्रेमी मान सिंह ने पुलिस को सारी हकीकत बता दी थी. पुलिस ने सुनीता को भी गिरफ्तार कर लिया और फोरैंसिक टीम को बुला लिया. टीम ने मृतक के घर से कई साक्ष्य जुटाए. 9 जून, 2021 को प्रैस कौन्फ्रैंस में एसएसपी मुनिराज जी. ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए हत्या में शामिल मृतक की पत्नी सुनीता उर्फ सुषमा व उस के 38 वर्षीय प्रेमी मान सिंह की गिरफ्तारी की जानकारी दी. संजय की हत्या के पीछे जो कहानी निकल कर आई वह 4 प्रेमियों के प्यार के बीच कांटा बनने की इस प्रकार निकली—

मृतक संजय आगरा की एक जूता फैक्ट्री में कारीगर था. वह मूलरूप से निबोहरा के मूसे का पुरा का रहने वाला है. देवरी रोड पर मकान ले कर वह परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी सुनीता सुषमा के अलावा 3 बच्चे भी हैं. कुछ समय पहले संजय ने अपना मकान बेच दिया. मकान बेचने के बाद वह सेवला में किराए का मकान ले कर रहने लगा. संजय शराब पीने का शौकीन था. वह शराब पी कर अकसर सुनीता से झगड़ा करता और उस के साथ मारपीट करता था. सुनीता की दोस्ती थाना सदर के ही टुंडपुरा के रहने वाले मान सिंह से थी. दोनों की मुलाकात कुछ महीने पहले हुई थी. दोस्ती गहरी हो गई. एकदूसरे को पसंद करने लगे.

धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. सुनीता मान सिंह के साथ कई बार पति की गैरमौजूदगी में घूमने जा चुकी थी. संजय को यह जानकारी हो गई. वह पत्नी को भलाबुरा कहता था. उस के पास कोई सबूत नहीं था. इसलिए वह मौके की तलाश में रहता था. जब संजय पत्नी के साथ मारपीट करता तो मानसिंह बीच में पड़ कर मामला शांत करा देता. कई बार उस ने सुनीता को बचाया भी था. संजय शराब पी कर सुनीता से अभद्रता करता था. मान सिंह ने इसी बात का फायदा उठाया. सुनीता के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उसे अपनी बातों के जाल में फंसा लिया.

पति संजय को पत्नी की मान सिंह से दोस्ती पसंद नहीं थी. वह इस का विरोध करता था. जबकि मान सिंह व सुनीता के बीच प्रेम संबंध दिनप्रतिदिन पुख्ता होते जा रहे थे. दोनों एकदूसरे के बिना रह नहीं पाते थे. पति की आदतों से अब सुनीता को वह अपना दुश्मन दिखाई देता था. प्रेमी संग पकड़ी गई सुनीता सुनीता और मान सिंह को जब भी मौका मिलता दोनों तनमन की प्यास बुझा लेते थे. संजय को दोनों पर शक हो गया. एक दिन संजय ने दोनों को घर में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. इस से मान सिंह तिलमिला कर रह गया. लेकिन वक्त की नजाकत को देखते हुए मान सिंह बिना कुछ बोले उस दिन वहां से चला गया. मान सिंह के जाने के बाद संजय ने सुनीता की पिटाई कर दी.

वह दोनों के संबंधों का विरोध करने लगा. सुनीता खून का घूंट पी कर रह गई थी. रंगेहाथों पकड़े जाने से वह विरोध की स्थिति में भी नहीं थी. संजय ने सुनीता को चेतावनी दी कि यदि मान सिंह से उस ने बात करते भी देख लिया तो दोनों को जान से मार देगा. सुनीता ने दूसरे दिन प्रेमी मान सिंह से पति द्वारा की गई पिटाई और धमकी के बारे में मोबाइल पर बताया. यह सुन कर मान सिंह का खून खौलने लगा. तब एक दिन सुनीता और मान सिंह ने अपने प्यार की राह के रोड़े को हटाने की योजना बनाई. सुनीता ने प्रेमी का प्यार पाने के लिए पति की हत्या की साजिश रची.

घटना वाले दिन सोमवार की शाम प्रेमी मान सिंह सुनीता से मिलने उस के घर गया. उस समय संजय भी घर पर मौजूद था. मान सिंह को देखते ही उस ने कहा, ‘‘जब मना कर दिया था फिर भी तू आ गया?’’

इस पर मानसिंह ने हंसते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे लिए तुम्हारी पसंद की चीज लाया हूं.’’ यह कहते हुए उस ने साथ लाई शराब की बोतल उसे दिखाई. मान सिंह जानता था कि संजय की कमजोरी शराब है. इसलिए वह बेधड़क घर आ गया था. मान सिंह और सुनीता ने  संजय को जम कर शराब पिलाई. जब वह नशे में बेसुध हो गया तब दोनों ने उस के गले में दुपट्टा डाल कर कस दिया. दोनों ने गला घोट कर उस की हत्या कर दी. इस से पहले सुनीता ने बच्चों को खाना खिलाया और उन्हें कमरे में टीवी चला कर बैठा दिया. कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी थी. हत्या के बाद दोनों ने शव को बोरे में बंद कर दिया. सुनीता ने प्रेमी मान सिंह से पति की लाश इलाके से दूर ले जा कर किसी तालाब में फेंकने को कहा. ताकि लोगों को लगे कि पानी में डूबने से उस की मौत हुई है.

तब मान सिंह शव को बोरे में भर कर कंधे पर रख उसे फेंकने के लिए रात में ही चल पड़ा. जब वह शव को ठिकाने लगाने जा रहा था तभी रास्ते में पैर फिसलने से बोरा गिर गया और हत्या का भेद खुल गया. प्रेमी मान सिंह द्वारा लाश फेंकने से पहले ही लोगों ने उसे रंगेहाथों दबोच लिया. आशिकी में पत्नी ने पति की हत्या करा दी थी. सुनीता को अपने पति की हत्या का कोई अफसोस नहीं था. अपने प्यार की खातिर प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या करने वाली सुनीता के चेहरे पर गिरफ्तारी के बाद भी पछतावे के भाव नहीं दिखाई दिए.

इतना ही नहीं, पति की हत्या के मामले में पकड़े जाने पर बच्चों का क्या होगा? उस ने इस बारे में भी नहीं सोचा. मगर जब उसे पता चला कि अब उस की और प्रेमी दोनों की बाकी जिंदगी जेल में कटेगी तो वह रोने लगी. सुनीता की शादी को 10 साल से अधिक हो गए थे. 3 बच्चों में सब से बड़ा बेटा 9 साल का है. लोगों की सतर्कता के चलते पुलिस ने एक हत्या का परदाफाश घटना के कुछ घंटे बाद ही कर दिया था. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फंदा लगाने वाला दुपट्टा, मृतक का मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद कर दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Agra Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

UP Crime News : बेवफा बीवी बरदास्त नहीं

UP Crime News : दीक्षा की खूबसूरती पर फिदा हो कर ही हरेंद्र ने उस से विवाह किया था. लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही हरेंद्र को शक हो गया कि पत्नी के अन्य कई लोगों के साथ संबंध हैं. इस की पुष्टि उसे पत्नी के फोन के काल रिकौर्डर की बातों से हो गई. फिर क्या था, उस ने बेवफा पत्नी को बीच सड़क पर ऐसी सजा दी कि…

हरेंद्र और दीक्षा की शादी के 2 साल हो चुके थे, मगर उन के बीच अटूट रिश्ता नहीं बन पाया था. वे पतिपत्नी जरूर थे, लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे एकदूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे. कारण हरेंद्र की कई आदतें दीक्षा को पसंद नहीं थीं और हरेंद्र को भी दीक्षा का बारबार मायके जाने की जिद करना अच्छा नहीं लगता था. एक तरफ दीक्षा की 17-18 साल की कच्ची उम्र थी तो वहीं दूसरी तरफ कामधंधे से बेफिक्र हरेंद्र को अपनी पुश्तैनी धनसंपत्ति पर बहुत ही गुमान था. रक्षाबंधन के एक सप्ताह पहले से ही दीक्षा मायके जाने की जिद करने लगी थी, जबकि हरेंद्र उस की बात को टालने लगा था. वह दीक्षा के मायके जाने का कारण जान गया था. उस के मोबाइल फोन में रिकौर्ड बातों से उस का संदेह और भी गहरा हो गया था.

‘‘मुझे मायके जाना है तो जाना है… मैं और कोई बहाना नहीं सुनूंगी.’’ दीक्षा अपनी बात पर अड़ती हुई बोली.

‘‘पिछले महीने ही तो तुम मायके गई थी…’’ हरेंद्र ने कहा.

‘‘गई थी, लेकिन 4 दिन बाद रक्षाबंधन है…राखी पर घर जाना है…सभी जाते हैं,’’ दीक्षा विफरती हुई बोली.

‘‘सभी जाते हैं तो क्या हुआ? आनेजाने में खर्च भी तो होगा.’’ हरेंद्र ने कहा.

‘‘तो मैं क्या करूं? कोई काम क्यों नहीं करते हो? कमातेधमाते क्यों नहीं हो?’’ दीक्षा बोली.

‘‘नहीं कमाता हूं तो क्या तुम्हें भूखा रखता हूं? खानेपहनने के लिए नहीं देता हूं? 2 महीने पहले ही तुम्हें 10 हजार रुपए का स्मार्टफोन खरीद कर दिया है.’’

‘‘वो तो तुम्हारा फर्ज बनता है पत्नी को खुश रखना और उस की अच्छी देखभाल करना,’’ दीक्षा बोली.

‘‘तुम हो तो पांचवीं फेल, पर बातें पढ़़ेलिखों जैसी करती हो. मुझे ही अधिकार और फर्ज का पाठ पढ़ा रही हो. तुम्हारा क्या कर्तव्य है, कभी समझा है?’’ हरेंद्र ने जवाबी हमला बोलते हुए ताना मारा.

‘‘तुम ने भी हमारी बात कभी नहीं मानी, जब देखो तब शराब के नशे में धुत रहते हो. बापदादा की कमाई पर गुजारा कर रहे हो, आवारा दोस्तों के साथ घूमतेफिरते रहते हो और कितने ऐब गिनवाऊं, बताओ…’’ दीक्षा लगातार बोलती जा रही थी. उस की एकएक बात हरेंद्र को चुभ रही थी. गुस्से में उस ने हाथ उठाया और एक थप्पड़ उस के गाल पर जड़ दिया. थप्पड़ खा कर दीक्षा तिलमिला गई. तन कर बोलने लगी, ‘‘ऐंऽऽ तुम ने मुझे थप्पड़ मारा. अब तो मैं यहां एक पल भी रुकने वाली नहीं हूं. अभी के अभी मायके जाऊंगी. देखती हूं कि तुम कैसे रोकते हो मुझे.’’ यह कहती हुई दीक्षा अपने कमरे से बाहर जा कर सूखने के लिए फैले कपड़े समेटने लगी.

हरेंद्र भी गुस्से से कमरे से बाहर निकल आया. बाइक स्टार्ट की और कहीं चला गया. कहां गया, इस की जानकारी केवल उस के यारों को ही थी. 2 घंटे बाद घर लौटा तो देखा, दीक्षा मायके जाने के लिए अपने सामान के साथ तैयार बैठी थी. हरेंद्र के हाथ में एक थैला था. उस का गुस्सा शांत हो चुका था. उस ने थैला उसे देते हुए सौरी बोला. फिर कहा, ‘‘इस में तुम्हारी छोटी बहन शीतल और तुम्हारे लिए सलवारसूट के कपड़े हैं, मायके में सिलवा लेना.’’

इसी के साथ उस के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर अगले दिन सुबहसुबह मायके छोड़ आने का वादा किया. सलवारसूट का कपड़ा देख कर दीक्षा पति का थप्पड़ भूल गई. खुश हो कर बोली, ‘‘बहुत सुंदर है, तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं.’’

दीक्षा चली गई मायके अगले रोज वह अपने मायके चली गई. दीक्षा का मायका मुरादाबाद जिले की तहसील बिलारी के गांव मुडि़या राजा का था. वह अरविंद कुमार की बेटी थी. अरविंद कुमार के 2 बेटियों दीक्षा व शीतल के अलावा 2 बेटे अभिषेक व आयुष थे. दीक्षा बड़ी बेटी थी. उन्होंने दीक्षा का विवाह 28 नवंबर, 2019 को पास के ही गांव ढकिया नरू निवासी भागीरथ के बेटे हरेंद्र के साथ किया था. बात 18 अगस्त, 2021 की है. रात के समय करीब साढ़े 9 बजे थे. अरविंद  कुमार के पिता अतर सिंह अपनी पोतियों शीतल और दीक्षा के साथ घर पर थे.

उन दिनों उन का बड़ा बेटा अपने परिवार के साथ हिमाचल के सोलन में रह रहा था. उस की रोजीरोटी वहीं से चलती थी. और छोटा बेटा राजकुमार अपनी रिश्तेदारी में गया हुआ था और रक्षाबंधन की वजह से उस की पत्नी अपने मायके गई हुई थी. इस तरह से उस समय घर में केवल दीक्षा और उस की छोटी बहन शीतल ही थी. रात को दरवाजा खटखटाने की आवाज सुन कर अतर सिंह ने अपनी पोती को आवाज दी, ‘‘शीतल बेटा, देखो तो इस वक्त कौन आया है?’’

शीतल दादा की आवाज सुन कर नीचे गई. दरवाजा खोला. देखा उस के जीजा हरेंद्र थे. शीतल वहीं से बोली, ‘‘दादाजी, जीजाजी आए हैं.’’

हरेंद्र सीढि़यां चढ़ता हुआ सीधे अतर सिंह के कमरे में जा पहुंचा. बोला, ‘‘रामराम बाबा, कैसे हैं?’’

‘‘रामराम बेटा, आओ बैठो. अच्छा हुआ तुम आ गए मैं घर में अकेला बैठा ऊब रहा था.’’ कहते हुए उन्होंने फिर शीतल को आवाज लगाई, ‘‘बेटा शीतल, दीक्षा को बोलो हरेंद्र के लिए पानी और कुछ खाने को ले कर आए.’’

‘‘अरे नहीं बाबाजी, मैं तो बस समझिए आप का हालचाल लेने आया हूं. कल रक्षाबंधन है. सुबहसुबह चला जाऊंगा.’’

अतर सिंह ने हरेंद्र को सम्मान के साथ बैठाया. वैसे भी दीक्षा रक्षाबंधन के त्यौहार की वजह से आई हुई थी. किसी तरह की कोई शिकायत नहीं थी.

‘‘बाइक से आए हो?’’ अतर सिंह ने पूछा.

‘‘नहीं कार से आया हूं.’’ थोड़ी देर में ही हरेंद्र ने अंग्रेजी शराब का एक अद्धा अपनी जेब से निकालते हुए बोला, ‘‘बाबाजी, गिलास मंगाओ. आज आप के साथ हो जाए एकएक पैग.’’

अतर सिंह हरेंद्र के इस व्यवहार को देख कर हतप्रभ रह गए.

फिर भी शांति से कहा, ‘‘बेटा तुम्हारी शादी को करीब 2 साल होने जा रहे हैं, आज तक तो तुम ने मेरे सामने कभी शराब नहीं पी. तो फिर आज तुम ऐसा कैसे कह रहे हो?’’

‘‘बाबाजी, यूं ही मूड हो आया. सोचा कि अपने दोस्तों के साथ तो पीता ही रहता हूं, क्यों न आप के साथ पी कर कुछ गिलेशिकवे दूर कर लिए जाएं.’’ हरेंद्र बोला.

‘‘लेकिन बेटा मेरी तबीयत ठीक नहीं है. ये देखो मेरी दवाई.’’ अतर सिंह ने जेब से दवाई निकाल कर दिखाते हुए कहा, ‘‘मैं शराब नहीं पीऊंगा.’’

उसी वक्त दीक्षा भी कमरे में पानी का गिलास और खाने की थाली ले कर आ गई. सामने शराब देख कर गुस्से भरी नजरों से हरेंद्र को घूरा. बोली कुछ नहीं. खाने की थाली सामने रखी और गिलास को रख कर तेजी से जाने लगी. गिलास का पानी छलक कर वहीं छोटे से स्टूल पर फैल गया.

‘‘दिखता नहीं है, यहीं मोबाइल रखा हुआ है, गीला हो गया तो..?’’ हरेंद्र की बात पूरी भी नहीं हुई कि उस के मोबाइल की रिंगटोन बजने लगी. उस ने काल रिसीव की, ‘‘हैलो…’’

उधर से जो आवाज आई, उसे सुन कर दीक्षा को आवाज लगाई, ‘‘…ये लो सुनो, तुम्हारा ही फोन है, मेरे जीजाजी हैं, तुम से ही बात करना चाहते हैं.’’

ननदोई की उस के लिए आई काल जान कर दीक्षा ने तुरंत हरेंद्र के हाथों से फोन ले लिया और नीचे सीढि़यों से उतरने लगी. हरेंद्र भी उस के पीछेपीछे आया और चुपके से दीक्षा और अपने बहनोई के बीच फोन पर हो रही बातों का अनुमान लगाने लगा. हरेंद्र ने दीक्षा को यह कहते हुए सुना, ‘‘मैं ने पहले मना किया है हरेंद्र के फोन पर मेरे लिए फोन नहीं   करें, क्योंकि उसे हम पर अब शक है.’’

वास्तव में हरेंद्र अपनी पत्नी को हमेशा ही शक की निगाह से देखता था. यहां तक कि उस ने दीक्षा को जो मोबाइल दिया था, उस में आटोमैटिक वायस रिकौर्डिंग का ऐप डाउनलोड कर दिया था. दीक्षा की गैरमौजूदगी में वह उस के सभी काल की रिकौर्डिंग सुनता था. उसी से उसे इस बात का पता चल गया था कि उस के कई चाहने वाले हैं. उन्हीं में एक उस का बहनोई भी था. उस की लच्छेदार बातों से हरेंद्र को अनुमान हो गया था कि दीक्षा उस के साथ बेवफाई कर रही है. यही नहीं हरेंद्र को यह भी शक था कि उस के मायके में भी कई प्रेमी हैं. ऐसा होना भी स्वाभाविक था. क्योंकि दीक्षा बला की खूबसूरत थी, उसे देख कर कोई भी उस पर मोहित हुए बिना नहीं रह सकता था. हरेंद्र भी उस की खूबसूरती को देख कर ही शादी करने के लिए राजी हुआ था.

दूसरी बात दीक्षा के बातें करने का लहजा और मजाक का जवाब मजाक में देने का अंदाज किसी को भी पसंद आ जाता था. वीडियो कालिंग की दीवानी थी. उस के कई वीडियो कालिंग की क्लिपिंग्स हरेंद्र भी देख चुका था. उसे देखते हुए हरेंद्र के सीने पर सांप लोटने लगते थे कि दीक्षा उस के साथ प्रेम से क्यों नहीं पेश आती है? वह उस से हमेशा रूखी बातें क्यों करती है. जबकि दूसरों के साथ वह दिल की बातें उड़ेल कर रख देती  थी. वीडियो कालिंग, फ्लाइंग किस तो ऐसे देती थी जैसै वह प्रेमी नहीं पति हो. यह सब बातें हरेंद्र को भीतर से खाए जा रही थीं. उस के वैवाहिक संबंध में मधुरता कम कड़वाहट अधिक भर गई थी.

ऊपर से दीक्षा द्वारा बारबार शराबीकबाबी कहना, नाकारा, नालायक मर्द कहते हुए ताने मारना हरेंद्र को काफी दुखी कर देता था. बातबात पर उस की दीक्षा से बहस हो जाती थी. ऐसी बहस रक्षाबंधन के कुछ रोज पहले भी हो गई थी. दीक्षा को मारी गोली कुछ समय बाद दीक्षा हरेंद्र के कमरे में आ कर उस का मोबाइल लौटाने आई. खाना स्टूल पर पड़ा देख कर बोली, ‘‘आप ने कुछ खाया नहीं?’’

‘‘अरे बेटी, इसे अपने कमरे में ले जा, वहीं तुम दोनों खाना खा लेना. और हां, शीतल को एक गिलास गर्म दूध ले कर भेज देना. सोने से पहले वाली दवाई खानी है.’’ अतर सिंह बोले.

उस के बाद दीक्षा और हरेंद्र नीचे के अपने कमरे में आ गए. अगले दिन अतर सिंह को जो सूचना मिली उस से पूरा परिवार सदमे में आ गया. बात ही कुछ ऐसी हुई कि अतर सिंह के परिवार से ले कर भागीरथ के परिवार में खलबली मच गई. हरेंद्र भागीरथ का सब से छोटा बेटा था. उन का पुश्तैनी मकान बिलारी से सिरसी जाने वाले मार्ग के किनारे ग्राम ढकिया नरू में है. भागीरथ का परिवार वहीं सालों से रहते आए हैं. सिरसी मार्ग पर सड़क के किनारे उन की अच्छी खेतीबाड़ी भी है. अतर सिंह की नींद सुबह देर से तब खुली, जब नीचे घर में कोई हलचल सुनाई दी. शीतल से कुछ लोग तेज आवाज में बातें कर रहे थे. आवाज सुन कर अतर सिंह भी नीचे गए. घर पर आए एक सिपाही को देख कर वह अचंभित हो गए.

जल्द ही उन्हें मालूम हो गया कि दीक्षा को गोली लगी है. वह मुरादाबाद अस्पताल में है. अतर सिंह अभी पूरा मामला समझ पाते इस से पहले ही सिपाही ने बताया कि दीक्षा की मौत हो चुकी है. वह बेहद घायलावस्था में थाना कुंदरकी क्षेत्र के बाईपास के किनारे पैट्रोलिंग पुलिस को मिली थी. वह खून से लथपथ तड़प रही थी. पुलिस ने इस की सूचना थानाप्रभारी संदीप कुमार को देने के बाद उसे निकट के अस्पताल पहुंचा दिया था. डाक्टर ने उस के सिर में गोली लगने की जानकारी दी और प्राथमिक उपचार के बाद जिला मुख्यालय रेफर कर दिया, परंतु उस ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

थाना कुंदरकी पुलिस मृतका की शिनाख्त में जुट गई. अभी वह इस केस की कागजी काररवाई कर ही रहे थे. तभी उन्हें कोतवाली बिलारी से सूचना मिली कि कुंदरकी बाईपास के किनारे घायलावस्था में जो युवती मिली थी, उस के हमलावर ने कोतवाली में सरेंडर कर दिया है. वह हमलावर कोई और नहीं बल्कि दीक्षा का पति हरेंद्र ही था. हरेंद्र ने ही अपनी पत्नी दीक्षा की हत्या की सूचना कोतवाली बिलारी को दे दी थी. बिलारी कोतवाली के प्रभारी आर.पी. सिंह  ने हरेंद्र से मामले की पूछताछ की. हरेंद्र ने अपना अपराध स्वीकारते हुए बताया कि उस का वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण था. विवाह के 2 महीने बाद ही उसे मालूम हो गया था कि उस की पत्नी के और भी प्रेमी हैं. इस कारण वह हमेशा मायके जाती रहती थी.

हरेंद्र ने अपनी मृतक बीवी पर यह भी आरोप लगाया कि वह किसी की चिकनीचुपड़ी बातों में तुरंत आ जाती थी और पति को छोड़ कर उस के ही प्रेम इजहार को महत्त्व देती थी. हरेंद्र का कहना था कि दीक्षा ही प्रेमी को फंसा कर रखती थी. इस कारण वह हमेशा पत्नी से नाराज रहता था. इस की वजह से घर में कलह काफी बढ़ गई थी. घटना के दिन भी रात को उस की ननदोई से फोन पर हुई बात को ले कर काफी बहस हो गई थी. उस रात बात इतनी बिगड़ गई कि जबरन रात को ही घर से बाहर उसे ले कर निकल पड़ा. उसे अपनी गाड़ी में बिठाया और बाईपास पर नीचे उतार कर उस के सिर में गोली मार दी.

उस के बाद कुछ दूर जा कर सोच में पड़ गया कि उसे अब क्या करना चाहिए. हालांकि गोली लगने से दीक्षा तड़पती हुई गिर पड़ी थी. पुलिस के आने तक उस की सांसें चल रही थीं. हरेंद्र के बयानों के आधार पर उस से पूछताछ थाना कुंदरकी में भी हुई. वहां उस ने पुलिस को घटनास्थल पर ले जा कर हत्या में इस्तेमाल तमंचा बरामद करा दिया, जो उस ने जंगल में फेंक दिया था. उस की बताई हुई जगह पर तलाशी के बाद एक बाइक भी कब्जे में ली गई. पुलिस ने दीक्षा के पिता अरविंद कुमार की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली. हरेंद्र से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर मोटरसाइकिल बरामद हुई है. यह सवाल बना रहा कि जब हरेंद्र अपनी ससुराल कार से आया था तब मोटरसाइकिल कहां से आ गई? क्या हत्या में हरेंद्र के साथ कोई और भी शामिल था? इस बारे में पुलिस कोई जवाब नहीं दे सकी थी. बहरहाल, थानाप्रभारी संदीप कुमार चार्जशीट तैयार करने से पहले इस बात की जांच कर रहे हैं कि मृतका के पति हरेंद्र ने पत्नी पर जो आरोप लगाए थे, उन में कितनी सच्चाई है? UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Story : इश्क का दरवाजा

Love Story : अनैतिक रिश्ते को अधिक दिनों तक परदे में नहीं छिपाया जा सकता. इस से परदा हटते ही भूचाल आ जाता है. कई बार इस कारण आक्रोश की भड़की ज्वाला में जीवनलीला ही भस्म हो जाती है. ऐसा ही कानपुर के एक बैंककर्मी के साथ हुआ. अवैध संबंध में न केवल उस की जान गई, बल्कि 3 जिंदगियां भी तबाह हो गईं गु मशुदा विशाल अग्रवाल की लाश बरामद होने पर उन्नाव के दही थाने की पुलिस ने पहली जांच में ही उस के हत्या किए जाने की पुष्टि

कर दी थी. करीब 25 वर्षीय विशाल एक बैंककर्मी था, जिस की लाश जिले में शारदा नहर के किनारे झाडि़यों में लावारिस हालत में पड़े ड्रम से मिली थी. लाश को एक प्लास्टिक के ड्रम में ठूंस कर पैक किया गया था. ड्रम पुरवा मार्ग पर स्थित बंद पड़ी एलए आयरन फैक्ट्री से एक किलोमीटर दूर सराय करियान गांव के पास गुजरने वाली नहर के किनारे पड़ा था. ड्रम से दुर्गंध आने की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी. सूचना के आधार पर ही खेड़ा चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह ने ड्रम को खुलवाया, जिस में से 25 वर्षीय युवक की रक्तरंजित लाश बरामद हुई.

वहीं पास में ही एक स्कूटी की चाबी भी मिली. पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और उस की शिनाख्त के लिए जिले के सभी थानों में सूचना प्रसारित करवा दी. उन्हीं दिनों नौबस्ता थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह विशाल अग्रवाल नामक युवक की तलाशी कर रहे थे. उस के लापता होने की सूचना अंशुल अग्रवाल ने दर्ज करवाई थी. वह अंशुल का छोटा भाई था. नौबस्ता थानाप्रभारी को दही थानाक्षेत्र में एक युवक की लाश बरामद होने की सूचना मिली तो वह अंशुल को साथ ले कर उन्नाव के थाना दही जा पहुंचे.

वहां पहुंच कर उन्होंने चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह से मुलाकात की. तब चौकीप्रभारी ने मोर्चरी ले जा कर बरामद लाश थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह और उन के साथ आए युवक अंशुल को दिखाई. अंशुल ने उस लाश की शिनाख्त अपने छोटे भाई विशाल अग्रवाल के रूप में की. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी नौबस्ता लौट आए. उन्होंने सब से पहले गुमशुदगी के मामले को हत्या में तरमीम कराया फिर वह हत्यारे की तलाश में जुट गए. उन्होंने पहले मृतक के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस का मोबाइल 7 सितंबर को रात 10 बजे के बाद स्विच्ड औफ हो गया था. उस मोबाइल से अंतिम बातचीत 8 बज कर 50 मिनट पर हुई थी, जबकि साढ़े 8 बजे उस पर एक मिस्ड काल भी आई थी. जांच का सिलसिला मोबाइल से मिली कुछ जानकारियों के साथ शुरू किया गया.

जिस नंबर से विशाल के मोबाइल पर काल की गई थी, वह नंबर सत्यम ओमर नाम के व्यक्ति का था. सत्यम कानपुर निवासी अनिल ओमर का बेटा था. पुलिस द्वारा उस मोबाइल नंबर पर काल की गई तो वह बंद मिला. फिर पुलिस ने नंबर से मिले पते पर दबिश दी, किंतु वहां सत्यम नहीं मिला. सिर्फ इतना मालूम हुआ कि वह इस पते पर ढाई साल पहले रहता था. हालांकि जल्द ही थानाप्रभारी को मुखबिरों से सत्यम के नए पते की जानकारी मिल गई. पता चला कि वह अब रामनारायण बाजार स्थित फ्लैट में रहता है. पुलिस को मुखबिर से उस के उस फ्लैट में उपस्थित रहने के समय का भी पता लग गया.

इस सूचना के आधार पर थानाप्रभारी ने क्राइम ब्रांच इंसपेक्टर छत्रपाल सिंह, उस्मानपुर चौकीइंचार्ज प्रमोद कुमार, बसंत विहार चौकीइंचार्ज मनीष कुमार, एसआई रवींद्र कुमार, हैडकांस्टेबल अरविंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, दीपू भारतीय, राजीव यादव, कांस्टेबल सौरभ पाडेय, महिला सिपाही पल्लवी के साथ उक्त फ्लैट पर दबिश दी. उस समय फ्लैट से 2 युवक सीढि़यों से उतर रहे थे. पुलिसकर्मियों को देखते ही दोनों भागने लगे, लेकिन वे पकड़ लिए गए. पुलिस दोनों को ले कर उस फ्लैट में गई. उन से पूछताछ करने पर एक युवक ने अपना नाम सत्यम ओमर, जबकि दूसरे ने सरवन बताया. वहीं 16-17 साल की एक लड़की भी मौजूद थी. उस ने पुलिस को बताया कि वह सत्यम की मौसेरी बहन है और पास ही दूसरे मकान में रहती है. उस का नाम राधा (परिवर्तित) था.

उन से पूछताछ के बाद पुलिस ने फ्लैट के बारीकी से निरीक्षण में पाया कि कमरे की दीवारों को जगहजगह खुरचा गया है. इस का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि डिस्टेंपर करवाना है. यह बात पुलिस को हजम नहीं हुई, क्योंकि वहां डिस्टेंपर के लिए किसी तरह के इंतजाम कहीं नहीं दिखा. दीवारों पर खुरचने के निशान भी जहांतहां मिले. उस बारे में सभी ने हिचकिचाट के साथ बताया. थानाप्रभारी ने राधा के चेहरे पर भी गौर किया, जिस का रंग अचानक तब फीका पड़ गया था, जब उन्होंने कहा कि वे विशाल अग्रवाल की हत्या के सिलसिले में पूछताछ करने आए हैं. इस में उस ने साथ नहीं दिया तो वह भी मुश्किल में पड़ जाएगी. इसी के साथ थानाप्रभारी दोनों युवकों को विशेष पूछताछ के लिए थाने ले आए. उन्होंने सत्यम से सीधा सवाल किया, ‘‘तुम ने 7 सितंबर की शाम साढ़े 8 बजे विशाल को मिस्ड काल क्यों की थी?’’

इस का जवाब देते हुए सत्यम हकबकाता हुआ बोला, ‘‘वह नंबर मैं नहीं, मेरी मौसेरी बहन इस्तेमाल करती है. उसी से पूछना होगा.’’

‘‘वह विशाल को कैसे जानती है?’’ सिंह ने सवाल किया.

‘‘मुझे नहीं मालूम,’’ सत्यम बोला.

उस के बाद थानाप्रभारी को उस की मौसेरी बहन राधा भी संदिग्ध लगी. उन्होंने उसे भी तुरंत थाने बुलाया और पूछताछ शुरू की. उस से फोन काल के बारे में नहीं पूछा, बल्कि सीधे लहजे में पूछ लिया कि विशाल से उस के क्या संबंध थे. यह सवाल सुन कर सामने बैठे अपने भाई और उस के दोस्त सरवन को देख कर घबरा गई. उस के कुछ बोलने से पहले ही थानाप्रभारी ने समझाया, ‘‘तुम्हारे विशाल से जो भी संबंध रहे, वे उस की मौत के साथ खत्म हो गए. तुम्हारे भाई ने भी मुझे कई बातें बताई हैं, जिस से तुम पर भी उस की हत्या में साथ देने का शक है. मुझे पता है कि विशाल ने तुम्हारे मिस्ड काल के थोड़ी देर बाद फोन किया था. तुम सिर्फ इतना बता दो कि उस से तुम्हारी क्या बात हुई थी.’’

यह सुन कर राधा कभी पुलिस को देखती, तो कभी इधरउधर देखने के बहाने से सत्यम को देखने लगती. वह यह सोच कर भीतर से डर गई कि लगता है सरवन ने पुलिस को सब कुछ बता दिया. कुछ सेकेंड बाद सिंह ने फिर सवाल किया, ‘‘बताया नहीं, तुम्हारे विशाल से क्या संबंध थे?’’

‘‘सर, मैं उसे प्यार करती थी,’’ राधा धीमी आवाज में बोली.

‘‘इस का सत्यम को पता था?’’ सिंह ने पूछा.

‘‘नहीं,’’ राधा बोली.

‘‘क्यों?’’

‘‘मैं डर गई थी.’’

‘‘भाई से डर कर कुछ नहीं बताया था या फिर कुछ और बात है?’’

‘‘सर, मैं भाई से डरती थी, इसलिए नहीं बताया.’’ राधा बोली.

‘‘अच्छा चलो, अब यह बता दो कि 7 सितंबर की शाम को तुम्हारी विशाल से क्या बात हुई थी?’’

अलगअलग तरह से बदले हुए सवालों को सुन कर राधा पसीनेपसीने हो गई थी, दुपट्टे से पसीना पोछती हुई बोली, ‘‘उस से मिलना चाहती थी.’’

‘‘वह भी रात में! मिलने के लिए कहां बुलाया था?’’ सिंह ने पूछा.

‘‘भाई के फ्लैट पर,’’ राधा ने बताया.

‘‘क्यों, क्या उसे भाई से मिलवाना था? लेकिन भाई तो बोला कि वह उस दिन कहीं गया हुआ था. घर पर था ही नहीं.’’ थानाप्रभारी के सवालों से राधा खुद को घिरा महसूस करने लगी. कुछ भी नहीं बोल पाई. बीच में सत्यम कुछ बोलने को हुआ, तब थानाप्रभारी ने उसे डपट दिया. उस के बाद राधा रोने लगी. थानाप्रभारी ने तुरंत महिला सिपाही को एक गिलास पानी लाने के लिए कहा और खुद उठ कर अलमारी खोलने लगे. महिला सिपाही से पानी पीने के बाद सिंह एक बार फिर बोले, ‘‘सचसच बताओ, 7 सितंबर को तुम्हारे और विशाल के साथ क्याक्या हुआ? अभी मैं तुम से प्यार से पूछ रहा हूं, लेकिन मुझे सच्चाई बाहर निकलवाना भी आता है. देखो उसे, जिस ने तुम्हें पानी पिलाया है, वही तुम्हारे मुंह में अंगुली डाल कर सारी बातें भी निकलवा लेगी.’’ यह कहते हुए थानाप्रभारी ने सत्यम और सरवन को दूसरे कमरे में भेज दिया.

अब तक पुलिस दबाव में आ कर राधा पूरी तरह से टूट गई थी. उस ने विशाल के साथ अपने अवैध संबंध को स्वीकार करते हुए 7 सितंबर की पूरी घटना बता दी. फिर क्या था, जो बातें थानाप्रभारी ने सत्यम और सरवन से भी नहीं पूछी थीं और उन पर विशाल की हत्या का सिर्फ संदेह था, उस की पुष्टि राधा ने ही कर दी. थानाप्रभारी के लिए राधा द्वारा दी गई जानकारी बेहद महत्त्वपूर्ण थी. वह मुसकराए और राधा को महिला सिपाही के साथ बैठा कर सत्यम व सरवन के पास जा पहुंचे. उन से भी उन्होंने विशाल अग्रवाल की हत्या के संबंध में घुमाफिरा कर कई सवाल पूछे.

कुछ सवाल उन्होंने हवा में तीर की तरह चलाए. जबकि कुछ सवालों के साथ सबूत होने के दावे और राधा द्वारा बताए जाने की बातें कह कर उन्हें उलझा दिया. नतीजा यह हुआ कि सत्यम और सरवन भी टूट गए और उन्होंने विशाल हत्याकांड से ले कर उस की लाश को ठिकाने लगाने तक की बात बता दी. राधा, सरवन और सत्यम के द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के बाद सरवन ने विशाल के शव को फेंकने का खुलासा कर दिया. इस तरह राधा ने विशाल के साथ अनैतिक संबंध बनाते हुए रंगेहाथों पकड़े जाने से ले कर उस की हत्या संबंधी साक्ष्य मिटाने का जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस ने साक्ष्य को मजबूत बनाने के लिए राधा का वैजाइनल टेस्ट करवाया. साथ ही आरोपियों की निशानदेही पर विशाल अग्रवाल की स्कूटी, लैपटाप तथा हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड बरामद कर ली. य्याशी के चक्कर में जान गंवाने वाले बैंककर्मी विशाल की प्रेम कहानी इस प्रकार सामने आई—

उत्तर प्रदेश जिला कानपुर के थाना नौबस्ता अंतर्गत संजय नगर कालोनी मछिरिया में विष्णु प्रसाद अग्रवाल के 2 बेटे अंशुल (26 वर्ष) औरविशाल (25 वर्ष) के अलावा बेटी दिव्या (23 वर्ष) थी. इन में से विशाल कुंवारा था. वह भी अपने भाई अंशुल की तरह ही  बैंक मैनेजर था और मातापिता के साथ ही रहता था. स्वभाव से वह आशिक मिजाज था. जल्द ही किसी लड़की के पीछे पड़ जाता था. आकर्षक और सैक्स अपील होने के कारण कोई भी लड़की पहली ही नजर में उस की ओर आकर्षित हो जाती थी. उस के दिलफेंक होने के कारण ही वह किसी के साथ भी यौन संबंध बनाने से परहेज नहीं करता था. उस ने मौका पा कर राधा को भी अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था. उसे शादी के सपने दिखाते हुए ऐशोआराम की जिंदगी देने के वादे किए थे. राधा भी उस के प्रेम में फंस चुकी थी.

सत्यम ओमर अपने मातापिता के साथ पहले माहेश्वरी मोहाल में रहता था. बाद में उन के देहांत के बाद वह घंटाघर स्थित अपने मामा के यहां रहने लगा था. हालांकि 6 साल पहले उस के मामा की भी मृत्यु हो गई थी. उस की मामी अपने मायके में रहती थी, जिस कारण उस ने घंटाघर में ही एक फ्लैट किराए पर ले लिया था. वहीं विशाल अग्रवाल भी आताजाता था. बताते हैं कि वहां दोनों के एक बैंक में इंश्योरेंस का काम करने वाली युवती के साथ अवैध संबंध हो गए थे. विशाल और सत्यम के लिए वह युवती केवल मौजमस्ती का साधन भर थी. दोनों बदले में युवती को कुछ पैसे या गिफ्ट दे दिया करते थे.

वह फ्लैट सत्यम और विशाल के लिए मौजमस्ती का अड्डा बन कर रह गया था. कई बार वहां सरवन के साथ भी बैठकें होती थीं और पार्टी का दौर चलता था. उस फ्लैट पर एक और लड़की राधा का भी अकसर आनाजाना लगा रहता था. वह वहां बेधड़क आती थी और अधिकार के साथ कुछ समय वहां गुजार कर चली जाती थी. हालांकि वह दूसरे मोहल्ल्ले मनीराम बगिया में रहती थी. वास्तव में वह सत्यम की मौसेरी बहन थी. सत्यम ने एक चाबी राधा को भी दे रखी थी. वहीं करीब 2 साल पहले एक बार उस की विशाल से मुलाकात हो गई थी. पहली नजर में ही दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए थे.

विशाल राधा की खिलती किशोरावस्था को देख कर हतप्रभ रह गया था, जबकि राधा उस की बातें और माचो बदन की दीवानी बन गई थी. उस के बाद से विशाल और राधा अकसर साथसाथ घूमनेफिरने लगे थे, लेकिन दोनों सत्यम की नजरों से बच कर भी रहते थे. वे नहीं चाहते थे कि उन के प्रेम संबंध के बारे में सत्यम को कोई जानकारी हो. जल्द ही विशाल ने मौका पा कर राधा से शारीरिक संबंध भी बना लिए. राधा की भी उस में स्वीकृति मिल गई थी. सत्यम की गैरमौजूदगी में राधा विशाल को उसी फ्लैट पर बुला लेती थी.  7 सितंबर, 2021 को सत्यम ओमर ने राधा को फोन पर बताया था कि वह आज वहां नहीं आएगा. बाहर बालकनी में उस के कपड़े सूख गए होंगे, उन्हें अलमारी में रख दे. किचन और दूसरे कमरे के बिखरे सामान आ कर ठीक कर दे.

अपने भाई की बातों पर अमल करते हुए राधा ने अपने प्रेमी विशाल के साथ मौज करने की भी योजना बना ली. उस ने तुरंत फोन कर इस की सूचना विशाल को दी और शाम को खानेपीने का सामान ले कर फ्लैट पर आने को कहा. शाम होने से पहले वह फ्लैट पर चली गई, किचन और कमरे को दुरुस्त किया. तब तक शाम के साढ़े 8 बज चुके थे. अब तक विशाल को आ जाना चाहिए था, क्योंकि उस ने 8 बजे तक आने को कहा था. देर होने पर राधा ने विशाल को फोन किया, जिसे विशाल ने रिसीव नहीं किया. करीब 20 मिनट बाद विशाल ने फोन कर राधा को बताया कि वह पहुंचने वाला है. और फिर वह ठीक 9 बजे फ्लैट पर पहुंच गया. वहीं अपार्टमेंट की पार्किंग में उस ने अपनी स्कूटी भी लगा दी.

राधा उस का बेसब्री से इंतजार कर रही थी. उसे देखते ही वह उस के गले लग गई. दोनों अकेले में कई हफ्तों बाद मिले थे. इस मौके को किसी भी सूरत में गंवाना नहीं चाहते थे. राधा के लिए पूरी रात थी. विशाल भी खानेपीने के सामान के साथ आया था. दोनों बेफिक्र थे. मौजमस्ती के लिए पूरी तरह से तैयार और तत्पर भी थे. इसी तत्परता में उन से एक भूल हो गई. मुख्य दरवाजे की अंदर से कुंडी लगाना भूल गए. वे बैडरूम में थे. ड्राइंगरूम की ओर उन का जरा भी ध्यान नहीं था.

दोनों एकदूसरे पर प्यार की बौछार करते हुए कब यौनाचार में लीन हो गए, पता ही नहीं चला. दूसरी ओर वाटर प्लांट में काम समाप्त हो जाने पर सत्यम फ्लैट पर अचानक आ गया. फ्लैट का दरवाजा खुला होने पर वह सीधे ड्राइंगरूम में दाखिल हुआ. बैडरूम में रोशनी देख कर चौंक गया और वहां जा कर दरवाजे पर लगे परदे को हटाया. बैड पर अपनी बहन राधा के साथ विशाल को लिपटा देख सन्न रह गया. वे दोनों आंखें मूंदे इतने बेफिक्र थे कि सत्यम के दरवाजे पर आने की जरा भी आहट नहीं हुई. गुस्से की ज्वाला को दबाए सत्यम चुपचाप फ्लैट के नीचे आया.

नीचे से लोहे की रौड निकाली और ऊपर पहुंच कर राधा के आलिंगन में बंधे विशाल के सिर पर दे मारी. एक ही वार में सिर से खून बहने लगा. राधा अपनी जान बचाते हुए दूसरे कमरे में भागी. गुस्से में सत्यम ने विशाल के सिर पर दनादन 3-4 और वार कर दिए. सिर पर ताबड़तोड़ वार से विशाल की वहीं मौत हो गई. राधा के सामने ही विशाल की मौत हो गई थी, लेकिन वह डर गई थी कि कहीं सत्यम उसे भी न मार डाले. सत्यम ने डपटते हुए इस बारे में किसी को बताने की उसे सख्त हिदायत दे दी. उसे जल्दी से दीवार पर लगे खून के दाग मिटाने को कहा. उस के बाद तुरंत अपने दोस्त सरवन को बुलाया.

सरवन भागाभागा आया. लाश देख कर उस के होश उड़ गए, लेकिन जल्द ही सामान्य होने पर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. तब तक रात के साढ़े 11 बज गए थे. इसलिए सरवन योजना के अनुसार अगले रोज 8 सितंबर को प्लास्टिक का एक ड्रम खरीद लाया. उस में विशाल की लाश ठूंस कर पैक कर दी. ड्रम को उस पर लगी स्टील की स्ट्रिप से पैक कर दिया. उस के बाद ड्रम को विशाल की स्कूटी पर लादकर कैंट होते हुए जाजमऊ गंगापुल से दही थाने की खेड़ा चौकी क्षेत्र जा पहुंचे. उन्होंने ड्रम को नहर के पास झाडि़यों में फेंक दिया. साथ ही विशाल का मोबाइल फोन भी नहर में फेंक दिया. उस की स्कूटी से वापस कानपुर आ गए.

सत्यम ने विशाल की स्कूटी अपने यशोदा नगर स्थित प्लौट के पास पेड़ के नीचे खड़ी कर दी. जबकि उस के खून से सने कपड़ों को कूड़ाघर में फेंक आया. आरोपियों द्वारा अपना जुर्म स्वीकार कर लेने के बाद थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह ने आईपीसी की धारा 302/201/120बी के तहत हत्यारोपी सत्यम ओमर, सरवन किशोरी राधा को न्यायालय में पेश किया. वहां से सत्यम और सरवन को कानपुर के जिला कारागार भेज दिया गया, जबकि साक्ष्य छिपाने के आरोप में राधा को नारी निकेतन के सुरक्षा गृह में भेज दिया गया. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है तथा किशोरी राधा का नाम कल्पनिक है

 

UP Crime News : दहेज का लालच जिंदा जली निक्की

UP Crime News : एक तरफ पूरे देश में दहेज हत्या के झूठे मामलों में परिजनों को फंसाने जैसे अपराधों पर बहस छिड़ी है, वहीं इसी बीच ग्रेटर नोएडा में विपिन भाटी और उस के फेमिली वालों पर 27 वर्षीय पत्नी निक्की को जला कर मारने का आरोप लगा है. क्या वास्तव में निक्की दहेज लोभियों के लालच में जलाई गई या इस के पीछे की सच्चाई कुछ और है? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली यह कहानी.

दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के रूपवास गांव की रहने वाली निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन की शादी 27 दिसंबर, 2016 में ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में एक ही परिवार के 2 भाइयों से हुई थी. बड़े भाई रोहित से भिखारी सिंह की बड़ी बेटी कंचन और छोटे भाई विपिन से छोटी बेटी निक्की की शादी हुई थी. भिखारी सिंह पायला कभी गांव के बड़े काश्तकार थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा के विकास के साथ उन की जमीनें ग्रेटर नोएडा अथौरिटी ने अधिग्रहीत कर लीं.

मुआवजे के रूप में मिली करोड़ों की रकम ने भिखारी सिंह के परिवार की जिंदगी का कायाकल्प कर दिया. परिवार में पत्नी वसुंधरी के अलावा 2 बेटियां और 2 बेटे रोहित व अतुल थे. रोहित की 2016 में शादी भी हो चुकी है, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण अब उस की पत्नी मीनाक्षी अपने मायके में है.

दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में रहने वाले सत्यवीर सिंह के परिवार में पत्नी दयावती के अलावा 2 बेटे हैं रोहित व विपिन. सत्यवीर सिंह अपने गांव के एक छोटे काश्तकार थे. उन की हैसियत भिखारी सिंह जैसी तो नहीं थी, लेकिन उन की जमीन का भी कुछ मुआवजा मिला था, जिस से उन्होंने गांव में अच्छा सा घर बनवा लिया. साथ ही घर के बाहरी इलाके में कुछ दुकानें बना कर किराए पर दे दीं. इस के अलावा उन्होंने एक किराना की दुकान खुद भी खोल ली. इसी दुकान पर सत्यवीर व उन के दोनों बेटे रोहित और विपिन भी बैठने लगे. उन की आमदनी के बस यही जरिया था.

निक्की (27 वर्ष) व कंचन (29 वर्ष)  की शादी दोनों सगे भाइयों से तब हुई, जब देश में नोटबंदी के बाद ज्यादातर लोगों के पास नकदी की कमी थी. इसीलिए उस वक्त दोनों बहनों की शादी सादगीपूर्ण तरीके से जरूर हुई, लेकिन नोटबंदी के बावजूद भिखारी सिंह ने दिल खोल कर पैसा खर्च किया.

बाद में हालात सामान्य होने पर निक्की के पिता भिखारी सिंह ने शादी में दिए जाने वाले सामान की भरपाई कर दी. निक्की के पति को शादी के बाद एक स्कौर्पियो कार के अलावा आभूषण, नकदी और भोग विलास की हर चीज दी. वक्त धीरेधीरे गुजरता गया. निक्की की बहन कंचन के 2 बच्चे हुए. बेटी लाव्या (7 साल) व बेटा विनीत (4 साल), जबकि निक्की का एक बेटा है जो अब करीब 6 साल का है.

विपिन कोई काम नहीं करता था,  इसलिए निक्की ने कुछ साल पहले अपनी बहन के साथ मिल कर ससुराल के घर की ऊपरी मंजिल पर एक ब्यूटी पार्लर खोला था. पार्लर का काम काफी अच्छा चल रहा था, लेकिन ससुराल वालों के दबाव में कुछ ही महीने पहले उन्हें ब्यूटी पार्लर बंद करना पड़ा.

शादी के 9 साल बाद अचानक 21 अगस्त, 2025 की देर शाम को बड़ी बहन कंचन ने ग्रेटर नोएडा के पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि शाम करीब साढ़े 5 बजे उस की सास दयावती और देवर विपिन ने उस की बहन निक्की को ज्वलनशील पदार्थ डाल कर जला दिया है. सास ने अपने हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लिया और विपिन को पकड़ाया, जिसे विपिन ने निक्की के ऊपर डाल दिया. साथ ही निक्की के गले पर हमला किया. जिस के बाद उस की बहन बेहोश हो गई. जब मैं ने इस का विरोध किया तो मेरे साथ भी मारपीट की गई. कंचन ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उस का पति रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर मौके पर मौजूद थे.

गंभीर हालत में निक्की को पड़ोसियों की मदद से वह फोर्टिस हौस्पिटल एच्छर, ग्रेटर नोएडा ले गई, जहां हालत बिगडऩे पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. कंचन ने पुलिस को बताया कि जिस समय उस की बहन की हत्या की गई, वह मौके पर थी, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी.

बहन की मौत से गुस्साई कंचन ने अगली सुबह ससुरालियों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए कासना कोतवाली में तहरीर दे कर पिता सतवीर भाटी, सास दयावती और दोनों बेटों रोहित व विपिन के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या), 115(2) (चोट पहुंचाना) और 61(2) के तहत केस दर्ज कर दिया.

ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग के लिए निक्की की जला कर हत्या करने की खबर अगली सुबह पूरे नोएडा व एनसीआर के साथ गुर्जर समाज के बीच जंगल की आग की तरह फैल गई थी. जगहजगह निक्की के हत्यारों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग के लिए धरनेप्रर्दशन होने लगे. हाथों में ‘जस्टिस फौर निक्की बहन’ की तख्ती और बैनर ले कर दरजनों  बसों, कारों, ट्रैक्टर ट्रौली, दोपहिया ले कर सैकड़ों ग्रामीणों के साथ परिजन कासना कोतवाली जा पहुंचे. इस दौरान उन के साथ किसान संगठन और समाजवादी छात्र से जुड़े लोग भी रहे.

मृतका की बहन कंचन का साफ कहना था कि उस की बहन को कई दिनों से परेशान किया जा रहा था. साजिश के तहत जला कर उस की हत्या की गई है. उस का पति विपिन उस से पूरी रात मारपीट करता था. वह अपनी बहन को इंसाफ दिलाना चाहती है. जिस तरह से उस की बहन तड़पतड़प कर मरी, उसी तरह से आरोपियों को भी फांसी की सजा मिलनी चाहिए.

कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ल व ग्रेटर नोएडा जोन के एडिशनल डीसीपी सुधीर कुमार पर आरोपियों को पकडऩे का दबाव लगातार बढ़ रहा था. फेमिली वालों का सीधा आरोप था कि विपिन भाटी व उस के घर वाले निक्की को दहेज के लिए लगातार परेशान कर रहे थे. पिछले कुछ समय से वे निक्की पर दबाव डाल रहे थे कि जो मर्सिडीज गाड़ी भिखारी सिंह ने अपने लिए खरीदी है, वह उसे गिफ्ट की जाए तथा कामधंधा शुरू करने के लिए 35 लाख रुपए नकद दिए जाएं.

परिजनों का साफ आरोप है कि शादी के बाद से ही विपिन लगातार कुछ न कुछ मांग करता रहता था, लेकिन शादी के 9 साल बाद अब उस की मांगें पूरी करना उन के वश से बाहर हो गया था.

वायरल वीडियो से पेचीदा हुआ मामला

घटना के दौरान घर में मौजूद कंचन ने अपनी छोटी बहन के साथ मारपीट और आग के हवाले करने का वीडियो भी बनाया था. इस दौरान निक्की का बेटा भी मौजूद था. महिला को आग लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अगले दिन जम कर वायरल हो गया. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि विपिन और मृतका की सास निक्की के बाल खींच कर मारपीट करते हैं. साथ ही एक दूसरे वीडियो में आग लगने के दौरान निक्की सीढिय़ों से उतरती हुई दिख रही है.

वीडियो में देखा जा सकता है कि आग में झुलसने के दौरान उस के शरीर के कपड़े भी जल जाते हैं. वह पूरी तरह से झुलसने के बाद बदहवास हालत में जमीन पर बैठी है. वहीं एक अन्य वीडियो में निक्की के बेटे को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उस के पापा ने मम्मा को लाइटर से जलाया.

कंचन के बयान और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस पर दबाव इस कदर बढ़ा कि पुलिस की कई टीमें गठित कर दबिशें शुरू की गईं. परिणामस्वरूप निक्की की हत्या में नामजद चारों आरोपियों विपिन भाटी, उस के पिता सत्यवीर भाटी, भाई रोहित भाटी व मां दयावती को अलगअलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन विपिन भाटी को जब पुलिस ज्वलनशील पदार्थ बरामद करने के लिए ले जा रही थी तो उस ने एक दरोगा का रिवौल्वर छीन कर भागने की कोशिश की. विपिन ने पुलिस टीम पर फायर किया तो आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी फायर किया, जिस में पुलिस की गोली विपिन की टांग में लगी. इस के बाद विपिन पर एक अन्य केस भी दर्ज हो गया. लेकिन पुलिस हिरासत में विपिन ने जो बयान मीडिया को दिया, वह इशारा करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है. उस ने मीडिया से कहा कि उस ने अपनी पत्नी को नहीं जलाया और मारा, बाकी लड़ाईझगड़ा तो हर फेमिली में होता है. इस से ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा.

एक कत्ल 2 कहानी से गहराता रहस्य

निक्की भाटी मर्डर केस की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, नए सबूत, लोगों के बयान और कुछ नए वीडियो सामने आ रहे हैं, वैसेवैसे कहानी एक रहस्यमयी पहेली में बदलती जा रही है. 27 वर्षीय निक्की की मौत के बाद आरोपप्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. मायके वाले इसे साफसाफ दहेज हत्या करार दे रहे हैं. दूसरी तरफ आरोपी विपिन भाटी तथा उस के कुछ पड़ोसियों का कहना है कि दोनों के बीच तनाव की असली वजह सोशल मीडिया पर निक्की और कंचन की मौजूदगी थी.

इस केस की जांच कर रही कासना पुलिस असमंजस में है. अभी पुलिस भी मिले सबूतों के आधार पर पैसों और गाड़ी की मांग को ही हत्या की वजह मान रही है, लेकिन साथ ही पुलिस नए सिरे से जांच भी कर रही है. दरअसल, जांच टीम के सामने अब 2 परस्पर विरोधी कहानियां हैं.

पहली कहानी यह कि निक्की भाटी को उस के पति और ससुराल वाले लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त करते थे. उस से 35 लाख रुपए की मांग की जा रही थी और यही प्रताडऩा उस की मौत का कारण बनी. दूसरी कहानी यह है कि निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन इंस्टाग्राम पर रील्स बनाया करती थीं. यह बात उन के पति और ससुराल वालों को बुरी लगती थी. इस वजह से उन के बीच अकसर तनाव होता था, जो खूनी अंजाम तक पहुंच गया.

निक्की भाटी की ससुराल सिरसा गांव में है. उस के ससुराल के आसपास के लोगों का कहना है कि निक्की और कंचन अपने घर से छोटा ब्यूटी पार्लर चलाती थीं. इस के साथ ही दोनों बहनें इंस्टाग्राम पर मेकओवर रील्स बना कर पोस्ट करती थीं. इन रील्स में वे साधारण लुक से ट्रांजिशन कर तैयार और स्टाइलिश अंदाज में नजर आती थीं. ये रील्स उन के पतियों, विपिन और रोहित भाटी को नागवार गुजरती थीं. एक पड़ोसी ने बताया, रील्स बनाने को ले कर उन के बीच अकसर झगड़ा हुआ करता था.

बताया जा रहा है कि इसी साल 11 फरवरी को निक्की व विपिन और कंचन व रोहित के बीच जम कर झगड़ा हुआ था. इस दौरान दोनों बहनों के साथ मारपीट भी हुई थी. इस वजह से दोनों बहनें अपने मायके रूपबास गांव चली गई थीं.

लड़कियों को मायके में देख कर आसपास के लोग आवाज उठाने लगे तो पंचायत बैठाई गई. 18 मार्च, 2025 को सुलह इस शर्त पर हुई कि दोनों बहनें आगे से रील्स नहीं बनाएंगी. वे मान भी गईं, लेकिन चंद दिनों बाद दोनों ने फिर से वीडियो पोस्ट करना शुरू किया और तनाव दोबारा गहराने लगा.

विपिन भाटी के चचेरे भाई देवेंद्र ने बताया कि जिस समय घटना हुई, उस समय विपिन घर पर नहीं था. इधर, निक्की को जिस अस्पताल में भरती कराया गया था, उस अस्पताल की रिपोर्ट भी सामने आ गई है. उस में बताया गया है कि निक्की की मौत सिलेंडर फटने के कारण आग लगने से हुई है. हालांकि जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां सिलेंडर फटने के कोई सबूत नहीं मिले. पर ज्वलनशील पदार्थ का डिब्बा और लाइटर मिला है. वहीं, जिस वक्त घर में निक्की को आग लगी, उस वक्त के सीसीटीवी में उस का पति विपिन घर के पास एक दुकान के बाहर खड़ा दिखाई दे रहा है. इन तमाम सबूतों ने निक्की की मौत को बुरी तरह उलझा दिया है.

मौत की जांच में आया नया मोड़

नया मोड़ लेती निक्की भाटी की मौत में निक्की के कमरे से बरामद ज्वलनशील पदार्थ और कई नए वीडियो क्लिप ने पुलिस जांच की दिशा ही बदल दी है. अब नए सिरे इस घटना की जांच की जा रही है. इस मामले की जांच कर रही पुलिस को निक्की के कमरे से ज्वलनशील तरल पदार्थ बरामद हुआ, जिसे फोरैंसिक जांच के लिए भेजा गया. इस के साथ ही 21 अगस्त की घटना से जुड़े कई छोटे वीडियो क्लिप भी सामने आए हैं.

इन की वजह से पूरी जांच की दिशा बदल गई है. एक नया वीडियो सामने आया है, जिस में सास दयावती अपने बेटे विपिन और बहू निक्की को झगड़े के दौरान अलग करती नजर आ रही है. एक दूसरा वीडियो, जिसे निक्की की बहन कंचन ने शूट किया था, उस में एक आवाज सुनाई देती है, ‘ये क्या कर लिया.’ इस बयान और वीडियो के सामने आने के बाद अब नए सिरे से केस जांच की जा रही है. पुलिस जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज भी मिला है. इस में विपिन घटना से ठीक पहले अपने घर के बाहर खड़ा नजर आया है. इस के अलावा ग्रेटर नोएडा के जारचा इलाके में पिछले साल अक्तूबर में दर्ज एक पुराने मामले की भी जांच की जा रही है, जिस में विपिन पर प्रीति नामक लड़की के साथ मारपीट करने और उसे धमकी देने का आरोप लगा था.

इस के साथ ही एक निजी अस्पताल के मेमो के अनुसार निक्की घर में गैस सिलेंडर फटने से झुलसी थी. उसे विपिन का चचेरा भाई देवेंद्र अस्पताल ले कर पहुंचा था. वहीं दूसरी ओर बहन कंचन का आरोप है कि यह सुनियोजित दहेज हत्या थी. देवेंद्र का बयान भी मामले को उलझा रहा है. उस का कहना है कि निक्की बारबार पानी मांग रही थी. उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसी बीच निक्की और कंचन के पिता भिखारी सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन की बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला दिया गया.

पुलिस की जांच अब 3 बिंदुओं पर टिक गई है. पहला ज्वलनशील पदार्थ की फोरैंसिक रिपोर्ट, नए वीडियो क्लिप और कंचन के बदलते बयान. यही 3 कडिय़ां यह तय करेंगी कि निक्की की मौत गैस सिलेंडर हादसा थी या एक साजिश के तहत की गई दहेज हत्या. निक्की भाटी की डेथ मिस्ट्री उलझती क्यों जा रही है, इस का जवाब सिर्फ निक्की की मौत के सच से ही नहीं लगेगा, बल्कि निक्की की भाभी यानी भाई की पत्नी के आरोप भी इस मामले को उलझा रहे हैं.

यह मामला अब महज एक केस नहीं, परिवार के भीतर छिपी 2 सच्चाइयों की जंग का रूप ले चुका है. दरअसल, निक्की की भाभी मीनाक्षी ने कहा कि दहेज की आग ने उस की शादी को भी खत्म कर दिया है. मीनाक्षी का कहना है कि साल 2016 में भिखारी सिंह पायला के बेटे रोहित पायला से उस की शादी हुई. पिता ने दहेज में सियाज कार और 20 तोला सोना दिया. लेकिन एक्सीडेंट का बहाना बना कर कार एक हफ्ते में बेच दी गई.

इस के बाद ताने, मारपीट और अपमान का सिलसिला शुरू हुआ और इस की रफ्तार बढ़ती गई. सास और दोनों ननद उस के बाल पकड़ कर घसीटती थीं. पति भी मारपीट करता था. एक बार तो उस ने गोली तक चला दी. मीनाक्षी का आरोप सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं है. वह दोहरी नीति की बात करती है. वह कहती है, ”मुझे फोन रखने तक की इजाजत नहीं थी, लेकिन बेटियों के लिए पार्लर, सोशल मीडिया पर रील्स, इंस्टाग्राम, सब मंजूर था. यदि बहू के लिए नियम थे तो बेटियों के लिए क्यों नहीं? एक जैसी सख्ती क्यों नहीं?’’

मीनाक्षी के मुताबिक उस की शादी के 9 साल हो गए, लेकिन वह मुश्किल से 9 महीने ही ससुराल में रह पाई. दहेज पर पंचायतें बैठीं. एक नहीं, 100 बार पंचायत हुई. हर बार नतीजा यही कि बहू घर छोड़ दे. साल 2018 में दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज हुआ, लेकिन साल 2020 में दबाव और समझौते की राजनीति के बीच केस वापस लेना पड़ा. उसी साल पिता चल बसे. मीनाक्षी कहती है, ”जिस दिन पापा गए, उसी दिन मेरे लिए सब कुछ खत्म हो गया. मुझे बेघर कर दिया गया. मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो गईं. तब से मैं अपने मायके में हूं.’’

मीनाक्षी के सारे आरोपों के बीच ससुर भिखारी सिंह पायला जवाब देते हुए कहते हैं, ”मेरे बेटे रोहित ने कभी मीनाक्षी पर हाथ नहीं उठाया. मेरे पास सारे सबूत हैं. हमारे दरवाजे हमेशा मीनाक्षी के लिए खुले हैं. मीनाक्षी कभी भी आ कर यहां रह सकती है.’’ वे अपने परिवार के पक्ष में खड़े दिखते हैं और मीनाक्षी की बातों को साफतौर पर खारिज करते हैं. फिलहाल ग्रेटर नोएडा पुलिस नए सबूतों और बयानों के आधार पर इस केस की जांच नए सिरे से कर रही है. कंचन व निक्की के तीनों बच्चे अपने नाना के पास हैं. परिवार अब कंचन को भी उस की ससुराल में भेजना नहीं चाहता.

विरोधाभासी सबूतों के कारण कासना पुलिस भले ही विपिन भाटी व उस के परिजनों को निक्की भाटी की दहेज के लिए हत्या करने के आरोप में जेल भेज कर उन पर मुकदमा चलाए. लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी हो सकती है कि निक्की की मौत एक सोचीसमझी साजिश है. हो सकता है यह एक हादसा भी हो.

दहेज ने ली संजू की जान, बच्ची संग जल मरी

राजस्थान के जोधपुर में ग्रेटर नोएडा जैसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. यहां दहेज प्रताडऩा से तंग आ कर एक स्कूल टीचर ने अपनी मासूम बच्ची के साथ जान दे दी. पीडि़ता की पहचान 32 वर्षीय संजू बिश्नोई के रूप में हुई है. उस ने अपनी 3 साल की बेटी को गोद में ले कर पेट्रोल डाला और खुद को आग के हवाले कर दिया. बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उस ने अस्पताल में दम तोड़ दिया.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना 22 अगस्त, 2025 की है. महिला ने जब खुद को और अपनी बेटी को आग लगाई, उस वक्त उस का पति दिलीप बिश्नोई घर पर मौजूद नहीं था. अचानक धुआं उठता देख पड़ोसी घबराए और तुरंत महिला के पापा को फोन किया. जब परिवार घर पहुंचा तो उन्होंने संजू को जलती हालत में पाया. बच्ची ने उन की आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. मंडोर के एसीपी नागेंद्र कुमार ने बताया कि बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि महिला का जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को निधन हो गया. उस के पिता ने 24 अगस्त को स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई. इस में साफतौर पर आरोप लगाया गया कि उस की बेटी को लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त किया जा रहा था. इस से तंग आ कर बेटी ने बच्ची सहित जान दे दी.

पुलिस ने पीडि़ता के पिता की शिकायत के आधार पर उस के पति दिलीप बिश्नोई, सास, ससुर और ननद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पीडि़ता के फेमिली वालों ने यह भी आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने मिल कर संजू को आत्महत्या के लिए उकसाया. पुलिस को घटनास्थल से एक नोट भी बरामद हुआ है, जिस में संजू ने अपने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एसीपी ने बताया कि मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और जांच के लिए फोरैंसिक साइंस लैब भेजा गया है. मोबाइल से कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है.

बताया जा रहा है कि संजू बिश्नोई साल 2021 से एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में टीचर के पद पर तैनात थी. 10 साल पहले उस की शादी दिलीप बिश्नोई के साथ हुई थी. उसी समय से उस का पति और ससुराल वाले उसे प्रताडि़त कर रहे थे. पिछले कुछ समय से ससुराल वालों के साथ झगड़ा ज्यादा बढ़ गया था. शनिवार को भी उन के बीच विवाद हुआ था. इस की वजह से संजू बहुत नाराज और दुखी थी. उस ने स्कूल से वापस आने के बाद अपनी बच्ची को गोद में लिया और अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली. दोनों शवों का महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया.

गाड़ी न मिलने पर शालवी की बलि

बीहार के पश्चिमी चंपारण में बगहा जिले के चौतरवा थाना क्षेत्र के अहिरवलिया गांव में 24 अगस्त की रात दहेज के लिए एक विवाहिता शालवी देवी की हत्या का मामला प्रकाश में आया है. मृतका लगुनाहा-चौतरवा पंचायत की मुखिया शैल देवी की 23 वर्षीय बहू शालवी देवी थी.  घटना के संबंध में बताया जाता है कि मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही की शादी जनवरी, 2023 में शालवी के साथ धूमधाम से हुई थी. शादी के बाद शालवी अपनी ससुराल अहिरवलिया आई, जहां कुछ दिनों तक उसे ठीक से रखा गया.

इधर, मृतका के चाचा व बेतिया के सिकटा थाने के जगीरहा निवासी तथा बलथर पंचायत के मुखिया सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि 27 जनवरी, 2023 को उन की भतीजी शालवी की शादी अहिरवालिया निवासी स्व. घनश्याम शाही एवं वर्तमान मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही से हुई थी. शादी के बाद से ही चार पहिया वाहन की मांग को ले कर शालवी को बारबार प्रताडि़त किया जा रहा था. बीच में कई बार मेरे द्वारा अहिरवलिया आ कर मामले में दोनों परिवार के बीच कई बार पंचायत भी हुई. शालवी द्वारा बारबार फोन पर कहा जाता था कि आप लोग गाड़ी दे दीजिए. नहीं तो ये लोग मुझे मार डालेंगे.

2 महीने पहले अहिरवलिया आ कर अमित शाही से उन्होंने खुद कहा था कि मुझे 6 महीने का समय दीजिए, आप को मैं स्वयं गाड़ी दूंगा. अभी 2 माह भी नहीं हुए कि ससुराल वालों ने मेरी भतीजी को बड़ी बेरहमी से प्रताडि़त कर मार डाला. आरोप लगाया कि मेरी भतीजी के हत्यारों ने आंखें फोडऩे के बाद उस का हाथ भी तोड़ दिया था. संभावना है कि उस की हत्या तकिया से मुंह दबा कर की गई थी. कारण कि ससुराल का कोई भी व्यक्ति घर पर नहीं है. लोगों ने पुलिस को फोन किया. तब पुलिस ने पहुंच कर शव को अपने कब्जे में लिया है.

शादी के अभी मात्र 17 महीने हुए हैं. उसे 7 माह की एक बच्ची भी है. अस्पताल में डौ. अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय टीम डौ. अरुण कुमार, डौ. तारिक नदीम ने मृतका का पोस्टमार्टम किया. मामले में एसएचओ राहुल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता लग पाएगा. UP Crime News

 

 

UP Crime News : मां का मदहोशी प्यार

UP Crime News : जवान बेटे होने के बावजूद 35 वर्षीय यशोदा शर्मा ने पति संजय शर्मा के होते हुए जेठ रामनिवास से शादी कर ली. तब वह रामनिवास के साथ ही रहने लगी. इस अपमान को संजय शर्मा बरदाश्त नहीं कर सका, उस की मौत हो गई. बेटों को भी समाज में जलालत भरी जिंदगी नासूर बनती दिखी तो उन्होंने ऐसा कदम उठाया कि…

जैसेजैसे समय बीतता जा रहा था, वैसेवैसे कौशल शर्मा की उलझन बढ़ती जा रही थी. कौशल एक टीचर था. उस का दिन तो स्कूल के बच्चों को पढ़ाने में बीत जाता था, लेकिन रातें करवटें बदलते बीतती थीं. उस की इस उलझन का कारण थी, उस की सगी मम्मी यशोदा देवी. दरअसल, यशोदा देवी ने पति संजय शर्मा का साथ छोड़ कर रिश्ते के जेठ लगने वाले रामनिवास शर्मा से शादी रचा ली थी. मम्मी के इस गलत कदम से कौशल शर्मा की पूरे समाज में घोर बदनामी हो रही थी. बिरादरी के कुछ परिवारों ने उस का हुक्कापानी भी बंद कर दिया था. उस के पापा संजय शर्मा तो इस बदनामी से इतना ज्यादा दुखी हुए कि मम्मी द्वारा शादी रचाने के एक माह बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया.

मम्मी की चरित्रहीनता ने कौशल को झकझोर कर रख दिया था. उस का गांव में सिर उठा कर चलना दूभर हो गया था. गांव के लोग मम्मी के चरित्र को ले कर उस पर कमेंट करते तो उस के दिल को गंभीर चोट लगती. हमउम्र युवक मम्मी को ले कर गंदी व अश्लील बातें करते तो कौशल तिलमिला उठता. कभीकभी कमेंट करने वालों से उस का झगड़ा व मारपीट भी हो जाती थी. कई साल बीत गए थे, लेकिन मम्मी की चरित्रहीनता उस का पीछा नहीं छोड़ रही थी. इसी के चलते कौशल अभी तक कुंवारा था. जो भी रिश्ता आता, मम्मी के चालचलन की वजह से टूट जाता. गांव के लोग भी आग में घी डालने का काम करते, जिस के कारण कोई भी बाप अपनी बेटी का हाथ देने को राजी न होता.

समय बीतते कौशल शर्मा के मन में मम्मी के प्रति नफरत पनपने लगी. नफरत पनपने का दूसरा कारण यह भी था कि वह कौशल से जमीन व मकान में अपना हिस्सा मांगने लगी थी. कौशल दिखावे के तौर पर तो मम्मी से मिलने उस के घर जाता था और बतियाता भी था, लेकिन सीने में नफरत की चिंगारी सुलगती थी. कौशल शर्मा अब तक अच्छी तरह समझ चुका था कि जब तक उस की मम्मी जीवित है, तब तक उस की जिंदगी में जहर घुला रहेगा. न उस का घर बसेगा, न ही उस के भाई का. मम्मी उस की जमीन भी हड़प लेगी, अत: मम्मी को सबक सिखाना ही पड़ेगा.

उस रोज कौशल की उलझन बढ़ी तो उस ने फोन कर दोस्तों को घर बुला लिया. थोड़ी देर बाद ही बौबी, रजत, सतबीर, कबीर व सौरभ उस के घर आ गए. कौशल ने दोस्तों से कहा कि मम्मी ने जीना हराम कर रखा है. इसलिए मैं मम्मी को सबक सिखाना चाहता हूं. इस में मुझे तुम सब का साथ चाहिए.

”कौशल भैया, आप ने अपनी मम्मी को सबक सिखाने में बहुत देर कर दी. तुम्हारी जगह मैं होता तो बदचलन मम्मी को कब का सबक सिखा दिया होता.’’ रजत बोला.

रजत की बात का उस के अन्य दोस्तों ने भी समर्थन किया और उस का साथ देने का वादा किया. इस के बाद कौशल ने दोस्तों के साथ मिल कर मम्मी को सबक सिखाने की योजना बनाई. 28 जुलाई, 2025 की रात 10 बजे थाना बलरई के एसएचओ दिवाकर सरोज को सूचना मिली कि यमुना नदी पर बने खंदिया पुल के पास सड़क किनारे एक महिला की लाश पड़ी है. यह सूचना इटावा जिले के फकीरे की मड़ैया गांव निवासी धीरेंद्र सिंह ने मोबाइल फोन के जरिए दी थी. प्राप्त सूचना से दिवाकर सरोज ने पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया, फिर पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उस समय पानी बरस रहा था और रात का अंधेरा छाया था, जिस से कोई भी काररवाई संभव न थी.

अत: महिला के शव को सुरक्षित कर घटनास्थल पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया. आसपास के गांवों में महिला की सड़क किनारे लाश पड़ी होने की खबर फैली तो वहां ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी. कुछ देर बाद इटावा के एसएसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी (सिटी) अभयनाथ त्रिपाठी तथा सीओ (जसवंत नगर) आयुषि सिंह भी घटनास्थल पर आ गईं. पुलिस अधिकारियों ने फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया. पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. सड़क किनारे पड़ी मृत महिला की उम्र 35 साल के आसपास थी.

उस के शरीर पर गुलाबी रंग की साड़ी लिपटी थी. साड़ी पर सफेद रंग के फूलों के प्रिंट थे. हाथों में सुनहरे रंग की चूडिय़ां पहने थी. उस के सिर व माथे पर चोट के निशान थे. खून जम चुका था. उस का रंग साफ तथा शरीर स्वस्थ था. जामातलाशी में उस के पास कोई भी सामान बरामद नहीं हुआ. फोरैंसिक टीम ने भी जांच कर साक्ष्य जुटाए. निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि महिला की मौत या तो सड़क दुर्घटना में हुई या फिर हत्या कर लाश यहां फेंकी गई. लूटपाट के साथ रेप की आशंका भी जताई. अब तक सैकड़ों ग्रामीण शव को देख चुके थे, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं पाया था.

अत: अधिकारियों ने यह भी अनुमान लगाया कि शायद मृतका दूरदराज के किसी गांव, शहर या कस्बे की रहने वाली है. चूंकि लाश की पहचान नहीं हो पाई थी, इसलिए पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर एसएचओ दिवाकर सरोज ने महिला के शव के फोटो हुलिए सहित सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. साथ ही आसपास के थानों में भी सूचना भेज दी. इस के अलावा इटावा सीमा से सटे आगरा जिले के थाना चित्राहट व जैतपुर को भी महिला का शव पाए जाने की जानकारी दे दी. इस के बाद शव का पंचनामा सीओ आयुषी सिंह की निगरानी में करा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए इटावा के जिला अस्पताल भेज दिया गया.

एसएचओ दिवाकर सरोज 30 जुलाई, 2025 की सुबह 10 बजे अपने कक्ष में मौजूद थे. तभी एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आया. उस ने कहा, ”हुजूर, मेरा नाम रामनिवास शर्मा है. मैं आगरा जिले के थाना जैतपुर के गांव बिठौना का रहने वाला हूं. मेरी पत्नी यशोदा दवा लेने जैतपुर कस्बा 28 जुलाई, 2025 की शाम गई थी. उस के बाद वापस घर नहीं आई. उस का मोबाइल फोन भी बंद है. बीती शाम हम गुमशुदगी दर्ज कराने थाना जैतपुर गए थे. वहां पता चला कि बलरई थाना क्षेत्र में एक महिला की लाश सड़क किनारे मिली है. कहीं वह लाश मेरी पत्नी यशोदा की तो नहीं? इसलिए थाने आया हूं.’’

उस की बात सुनने के बाद एसएचओ दिवाकर सरोज ने उसे लाश के फोटो दिखाए. फोटो देखते ही रामनिवास शर्मा की आंखों में आंसू छलक आए. बोले कि यह तो उस की बीवी यशोदा है. लाश की शिनाख्त होने पर एसएचओ ने राहत की सांस ली. क्योंकि अब अगला काम हत्यारों का पता लगाना था. वह उन्हें मोर्चरी ले गए. मोर्चरी में शव देखते ही रामनिवास रो पड़े और बोले, ”हुजूर, यह लाश मेरी पत्नी यशोदा की है. उस की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं हुई, बल्कि उस की हत्या की गई है. आप रिपोर्ट दर्ज कर काररवाई करें.’’

शव की शिनाख्त हो जाने पर एसएसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने केस के खुलासे के लिए एक पुलिस टीम एसपी (सिटी) अभयनाथ त्रिपाठी व सीओ (जसवंत नगर) आयुषी सिंह की निगरानी में गठित कर दी. इस गठित पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का फिर से निरीक्षण कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. रिपोर्ट के मुताबिक यशोदा देवी की मौत किसी वाहन से कुचलने से लग रही थी. सिर और माथे पर चोट लगना मौत का कारण बना था. उस के साथ बलात्कार करने जैसी बात सामने नहीं आई. टीम ने मृतका के पति रामनिवास शर्मा से भी पूछताछ की तथा उस का बयान दर्ज किया. उस ने बताया कि यशोदा के पास मोबाइल फोन था. वह नहीं मिला.

सीसीटीवी फुटेज से मिला हत्यारों का सुराग

पुलिस टीम ने खंदिया पुल के रास्तेे सड़क किनारे लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो बाइक से महिला को ले जाते एक युवक दिखा. इस फुटेज को पुलिस टीम ने मृतका के पति रामनिवास शर्मा को दिखाया तो उस ने बाइक चलाने वाले युवक को तुरंत पहचान लिया. उस ने पुलिस को बताया कि बाइक चलाने वाला युवक कोई और नहीं यशोदा का बड़ा बेटा कौशल शर्मा है और पीछे बैठी उस की मम्मी यशोदा है. रामनिवास शर्मा की बात सुन कर पुलिस टीम चौंक पड़ी. टीम ने फिर यशोदा के बेटे कौशल शर्मा को हिरासत में लेने का जाल बिछाया.

पुलिस टीम ने पहले उस के गांव खुरियापुर में छापा मारा, लेकिन वह घर से फरार था. उस के बाद पुलिस ने जैतपुर कस्बा स्थित मकान पर छापा मारा, वह पुलिस को चकमा दे गया. 2 अगस्त, 2025 की रात 8 बजे पुलिस टीम ने नाटकीय ढंग से कौशल शर्मा को जैतपुर कस्बा के बस स्टाप से गिरफ्तार कर लिया. उसे थाना बलरई लाया गया. थाने में जब पुलिस टीम ने कौशल शर्मा से यशोदा की हत्या के संबंध में पूछा तो वह साफ मुकर गया, लेकिन जब उस से पुलिसिया अंदाज में पूछताछ शुरू हुई तो वह ज्यादा देर तक टिक नहीं सका और अपनी मम्मी यशोदा की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. इतना ही नहीं, उस ने इस वारदात में शामिल लोगों के नाम भी बता दिए.

कौशल शर्मा के कुबूलनामे के बाद पुलिस टीम ने रात में ही उस के साथियों के घर दबिश दी और कौशल शर्मा की निशानदेही पर गड़ा रमपुरा थाना जैतपुर (आगरा) निवासी बौबी तथा इसी थानाक्षेत्र के गांव कमतरी गोपालपुरा थाना निवासी रजत को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन जैतपुर कस्बा निवासी सतबीर, कबीर और सौरभ पुलिस के हाथ नहीं आए. पुलिस ने उन की गिरफ्तारी के लिए मुखबिरों को लगा दिया. पुलिस टीम ने हत्यारोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त होंडा शाइन बाइक, स्कौर्पियो कार तथा 3 मोबाइल फोन बरामद किए.

इस के अलावा मृतका का मोबाइल फोन भी कौशल शर्मा की निशानदेही पर बरामद किया, जिसे उस ने तोड़ कर जला दिया था. बौबी व रजत ने भी बिना किसी दबाव के हत्या का जुर्म कुबूल किया. गिरफ्तारी व बरामदगी के बाद एसपी (सिटी) अभयनाथ त्रिपाठी व सीओ आयुषी सिंह ने पुलिस सभागार में संयुक्त प्रैसवार्ता की और मीडिया के समक्ष यशोदा देवी हत्याकांड का खुलासा किया. चूंकि हत्यारोपियों ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और हत्या में प्रयुक्त कार व बाइक को भी बरामद करा दिया था. अत: पुलिस ने मृतका के दूसरे पति रामनिवास शर्मा को वादी बना कर बीएनएस की धारा 103(1) तथा 201(3) (5) के तहत कौशल शर्मा, बौबी, रजत, सतबीर, कबीर व सौरभ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस जांच में कलियुगी बेटे द्वारा अपनी मम्मी की हत्या की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई.

घूंघट से ऐसे निकले मोहब्बत के तीर

उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के थाना जैतपुर अंतर्गत एक गांव है-खुरियापुर. इसी गांव में संजय शर्मा सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी यशोदा देवी के अलावा 2 बेटे कौशल व अनुपम थे. संजय शर्मा के पास लगभग 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी, जिस में अच्छी पैदावार होती थी. खेतीबाड़ी से ही वह परिवार का भरणपोषण करता था. संजय शर्मा स्वयं तो ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, लेकिन वह अपने दोनों बेटों को पढ़ालिखा कर अफसर बनाना चाहता था. इसी कारण वह घर खर्च में कटौती कर बेटों की पढ़ाई पर ध्यान देता था.

समय बीतते बड़े बेटे कौशल ने बीए पास कर लिया. उस का रुझान शिक्षा विभाग की ओर था. वह बीएड की परीक्षा पास कर अध्यापक बनना चाहता था. जबकि अनुपम का सपना अफसर बनने का था, अत: वह भी मन लगा कर पढ़ता था. उस ने भी इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर ली थी. संजय शर्मा किसान था. वह खेतों पर हाड़तोड़ मेहनत करता था. अधिक मेहनत करने से संजय शर्मा का शरीर कमजोर हो गया था और वह बीमार रहने लगा था. अब वह खेतों की उचित देखभाल नहीं कर पाता था, जिस से उपज कम होने लगी थी और उस की कृषि आय में कमी आ गई थी. उसे अब आर्थिक संकट से जूझना पड़ता था.

पापा की आर्थिक स्थिति खराब हुई तो कौशल व अनुपम ट्यूशन पढ़ा कर अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा करने लगे. साथ ही खेतों की भी देखभाल करने लगे. संजय शर्मा जितना सीधा था, उस की पत्नी यशोदा उतनी ही तेजतर्रार थी. वह बनसंवर कर रहती थी. उसे देख कर कोई कह नहीं सकता था कि वह 2 जवान बेटों की मां है. यशोदा घर की मालकिन थी. उसे घर में वैसे तो सब सुख था, लेकिन पति सुख से वंचित रहती थी. दरअसल, बीमारी के चलते वह पत्नी से दूरी बनाए रखता था. जबकि यशोदा अब भी पति का साथ चाहती थी.

35 वर्षीया यशोदा माथे पर बिंदी सजा कर और काला चश्मा लगा कर घर से बाजारहाट जाने को निकलती तो गांव के लोग उसे घूरघूर कर देखते. लोगों का घूर कर देखना यशोदा को मन ही मन तो अच्छा लगता, लेकिन दिखावे के तौर पर वह आंखें तरेरती. हालांकि कभीकभी कोई युवक फब्तियां भी कस देते, ”बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम.’’

यह कमेंट सुन यशोदा आपे से बाहर हो जाती और उस युवक को खूब खरीखोटी सुनाती. यशोदा अब ऐसे अधेड़ की तलाश में रहने लगी जो उस की कामनाओं को पार लगाए साथ ही आर्थिक मदद भी करे. उस के घर आनेजाने पर किसी को शक भी न हो और उस की इज्जत भी बरकरार रहे. उन्हीं दिनों एक रोज रामनिवास शर्मा यशोदा के घर आया. वह पड़ोस के गांव बिठौना का रहने वाला था. 40 वर्षीय रामनिवास रिश्ते में यशोदा का जेठ लगता था. वह अभी तक अविवाहित था. पेशे से वह भी किसान था. उस के पास 15-20 बीघा जमीन थी. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. शरीर से वह तंदुरुस्त था.

यशोदा का पति संजय शर्मा व रामनिवास रिश्ते में चचेरे भाई थे. बीमार चल रहे छोटे भाई संजय का हालचाल लेने ही रामनिवास उस के घर आया था. उस रोज दोनों भाइयों के बीच खूब बातें हुईं. यशोदा ने भी जेठ की खूब खातिरदारी की. यशोदा की खातिरदारी से रामनिवास खूब गदगद हुआ. उस ने खुशी जाहिर करते हुए यशोदा के हाथ पर चंद नोट रखे, जिन्हें यशोदा ने नानुकुर के बाद स्वीकार कर लिए.

इस के बाद रामनिवास बीमार भाई को देखने के बहाने अकसर यशोदा के घर आने लगा. घर आतेजाते ही रामनिवास की नजर छोटे भाई संजय की पत्नी यशोदा पर पड़ी. यशोदा रामनिवास से परदा करती थी. घूंघट के भीतर वह उसे हूर की परी लगती थी. रामनिवास यशोदा को मन ही मन चाहने लगा और उसे अपना बनाने के लिए जुगत भिड़ाने लगा. अब रामनिवास जब भी आता, यशोदा को रिझाने के लिए कोई न कोई सामान जरूर लाता. वह उस से खूब बतियाता और उस के रूप तथा व्यवहार की तारीफ करता. धीरेधीरे यशोदा को भी जेठ की बातों में रस आने लगा. घूंघट के भीतर वह तिरछी नजरों से जेठ को देखती और उस की रसभरी बातों का उसी अंदाज में जवाब देती.

कहते हैं मर्द की नजर को कोई भी औरत बहुत जल्दी भांप लेती है. यशोदा भी भांप गई थी कि जेठ रामनिवास की नजर में खोट है. उस की नजरें सदैव उस के जिस्म पर गड़ी रहती हैं. वह उस के जिस्म को पाने के लिए बेताब है. इसलिए वह उसे ललचाई नजरों से देखता है. उस से रसभरी बातें करता है और तोहफे लाता है.

ऐसे ढह गई रिश्तों की दीवार

एक रोज परखने के लिए यशोदा बोली, ”जेठजी, आप जब भी आते हैं, मेरे आगेपीछे घूमते रहते हैं. मुझ से मीठीमीठी बातें करने का प्रयास करते हैं. मेरे रूप की भी तारीफ करते हो और मेरे लिए तोहफे भी लाते हो. आखिर आप मुझ से चाहते क्या हो?’’

”मैं तुम्हें चाहने लगा हूं यशोदा और तुम्हें अपना बनाना चाहता हूं. तुम्हारे बिना अब मेरा जीवन अधूरा है. तुम ने मेरा प्यार स्वीकार न किया तो मैं तड़पता रहूंगा.’’ आखिर रामनिवास की दिल की बात जुबान पर आ ही गई.

जेठ रामनिवास की बात सुन कर यशोदा मन ही मन खुश हुई. लेकिन दिखावे के तौर पर बोली, ”जेठजी, आप यह क्या कह रहे हैं. मैं आप की बहू हूं. लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे. नहींनहीं, यह अनर्थ है.’’

”मैं कुछ नहीं जानता. मैं तो तुम्हें अपनी घरवाली बनाना चाहता हूं और वो सुख देना चाहता हूं, जो मेरा भाई संजय तुम्हें अभी तक नहीं दे पाया. वैसे भी हम दोनों का दर्द एक समान है. तुम पति सुख से वंचित हो और मैं स्त्री सुख से. हम दोनों मिल जाएं तो जीवन में बहार आ जाएगी.’’

यशोदा तो रामनिवास जैसे ही अधेड़ पुरुष की तलाश में थी, अत: उस ने रामनिवास को अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला कर लिया. फैसले के बाद यशोदा ने जेठ को खुली छूट दे दी. वह उस के समक्ष अपने सुघड़ अंगों का भी प्रदर्शन करने लगी. उस ने जेठ से परदा करना भी बंद कर दिया और खुल कर बतियाने लगी. एक दोपहर रामनिवास यशोदा के घर आया तो वह घर में अकेली थी. पति संजय दवा लेने जैतपुर गया था और दोनों बेटे कालेज में थे. सूना घर पा कर रामनिवास ने यशोदा को बांहों में भर लिया और शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा. यशोदा ने कुछ पल बनावटी विरोध किया, उस के बाद बिस्तर पर स्वयं ही सहयोग करने लगी. फिर तो उस रोज जेठबहू के रिश्ते की दीवार ढह गई. दोनों ने ही अपनी हसरतें पूरी कीं.

अवैध संबंधों का रिश्ता एक बार कायम हुआ तो वक्त के साथ बढ़ता ही गया. उन्हें जब भी मौका मिलता, एकदूसरे की बांहों में समा जाते. यशोदा ने सारी मर्यादाओं का ताक पर रख दिया और आए दिन जेठ के साथ रास रचाने लगी. वह भूल गई कि वह 2 जवान बेटों की मां है और परिवार की समाज में प्रतिष्ठा है.

यशोदा के दोनों बेटे कौशल व अनुपम, रामनिवास शर्मा को ताऊ कह कर बुलाते थे और पैर छू कर आशीर्वाद लेते थे. उन्हें पता ही नहीं था कि रिश्ते का ताऊ उन की इज्जत तारतार कर रहा है. संजय शर्मा भी बड़े भाई रामनिवास को अपना हमदर्द समझता था, इसलिए उस के आनेजाने पर कोई पाबंदी नहीं थी. संजय को भी पता नहीं था कि बड़ा भाई उस के साथ विश्वासघात कर रहा है और इज्जत का छुरा उस की पीठ में घोंप रहा है.

जब रामनिवास का उस के यहां आनाजाना बढ़ा और उस के द्वारा मदद शुरू की तो उसे उस पर शक हुआ. लेकिन यशोदा ने कोई ऐतराज नहीं जताया तो वह शांत हो गया. कहते हैं कि कोई भी गलत काम ज्यादा दिनों तक नहीं छिप सकता है. यशोदा और रामनिवास के साथ भी ऐसा ही हुआ. एक रात संजय शर्मा ने पत्नी यशोदा को रामनिवास के साथ रंगेहाथों पकड़ लिया. फिर तो उस रात घर में खूब कोहराम मचा. संजय ने रामनिवास को खूब खरीखोटी सुनाई और यशोदा की पिटाई की. मम्मी की करतूत की जानकारी बेटों को हुई तो उन्होंने शर्म से सिर झुका लिया.

इस घटना के बाद संजय व उस के बेटे कौशल ने रामनिवास के घर आने पर प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन प्रतिबंध के बावजूद यशोदा व रामनिवास का मिलन बंद नहीं हुआ. वह बहाने से घर से निकलती और पड़ोसी गांव बिठौना में रामनिवास के घर पहुंच जाती और मिलन कर वापस आ जाती. लेकिन यहां भी एक रोज हंगामा हो गया. अब तक यशोदा और रामनिवास एकदूसरे के इतने दीवाने बन गए थे कि उन्होंने शादी रचाने का निश्चय कर लिया, लेकिन शादी रचाने की भनक उन्होंने किसी को भी नहीं लगने दी. रामनिवास ने गुपचुप तरीके से शादी की पूरी तैयारी कर ली.

10 जनवरी, 2017 की दोपहर रामनिवास यशोदा को साथ ले कर गांव के बाहर स्थित शीतला माता के मंदिर पहुंचा. फिर एकदूसरे के गले में माला पहना कर शादी रचा ली. रामनिवास ने यशोदा की मांग में सिंदूर भर कर अपनी जीवनसंगिनी बना लिया. यशोदा ने भी रामनिवास को दूसरे पति के रूप में स्वीकार कर लिया. यशोदा रामनिवास की दुलहन बन कर उस के घर आई तो पूरे बिठौना गांव में चर्चाएं शुरू हो गईं. महिलाएं चटखारे ले कर बातें करतीं और हंसीठिठोली करती. शाम होतेहोते यशोदा की शादी की बात खुरियापुर गांव भी पहुंच गई. फिर तो गांव में कोलाहल मच गया.

यशोदा द्वारा दूसरा विवाह रचाने की बात संजय शर्मा के कानों में पड़ी तो उसे लगा जैसे उस के कानों में किसी ने गर्म शीशा उड़ेल दिया. वह अवाक रह गया. उस ने अपना माथा पीट लिया. उस के बेटे कौशल का भी सिर शर्म से झुक गया. दोनों कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले. पत्नी यशोदा के गलत कदम से संजय शर्मा को गहरा सदमा लगा. वह बीमार पड़ गया और कुछ दिनों में ही दम तोड़ दिया. पापा की मौत से कौशल और अनुपम को बड़ा दुख हुआ. पापा की मौत का दोषी उन दोनों ने मम्मी को ही ठहराया.

नासूर बन रही थी अपमान की जिंदगी

यशोदा द्वारा दूसरी शादी रचाने से परिवार की प्रतिष्ठा धूल में मिल गई थी. कौशल का भी गांव में सिर उठा कर चलना दूभर हो गया था. गांव के लोग उस की मम्मी के चरित्र को ले कर कमेंट करते तो वह तिलमिला उठता था. इस समस्या से निपटने के लिए कौशल ने कुछ समय बाद गांव छोड़ दिया और जैतपुर कस्बा में जा कर बस गया. कस्बे में उस ने स्कूल खोल लिया और कक्षा 8 तक के बच्चों को पढ़ाने लगा. उस ने गांव की जमीन को बंटाई पर दे दिया. वहीं यशोदा पति संजय शर्मा की जायदाद से भी हिस्सा मांग रही थी.

कौशल शर्मा कस्बे में रहता जरूर था, लेकिन मम्मी की चरित्रहीनता अब भी उस का पीछा नहीं छोड़ रही थी. जब भी गांव का कोई युवक या यारदोस्त उस के सामने पड़ता, वह कमेंट जरूर करता. मम्मी की चरित्रहीनता से उस का विवाह भी नहीं हो पा रहा था. इस सब के बावजूद कौशल ने मम्मी से रिश्ता जोड़ रखा था. वह दिखावे के तौर पर मम्मी से मिलने जाता, लेकिन दिल में नफरत की चिंगारी सुलगती रहती थी.

कौशल के 2 खास दोस्त थे— रजत और बौबी. रजत कमतरी गोपालपुरा का रहने वाला था, जबकि बौबी गढ़ी रमपुरा का था. इन दोनों के मार्फत ही कौशल की 3 अन्य जैतपुरा कस्बा निवासी सतबीर, कबीर व सौरभ से दोस्ती हो गई. रविवार वाले दिन सभी साथ घूमते और पार्टी करते. कौशल अपने दोस्तों से दुखदर्द साझा करता था. एक शाम कौशल ने अपने पांचों दोस्तों को अपने घर बुलाया और अपना दर्द बयां कर मम्मी को सबक सिखाने व साथ देने के लिए कहा. चूंकि उन में गहरी दोस्ती थी, अत: वे सब कौशल का साथ देने को राजी हो गए. इस के बाद कौशल ने दोस्तों के साथ मिल कर यशोदा की हत्या की योजना बनाई.

28 जुलाई, 2025 की शाम कौशल शर्मा अपनी मम्मी यशोदा से मिलने बिठौना गांव पहुंचा. गांव के बाहर सड़क पर उसे मम्मी दिखाई पड़ी. वह मम्मी के पास पहुंचा और पूछा, ”मम्मी, तुम कहां जा रही हो?’’

यशोदा ने जवाब दिया, ”बेटा, कई दिनों से बीमार हूं. दवा लेने जैतपुर कस्बे जा रही थी. टैंपो के इंतजार में खड़ी हूं.’’

”मम्मी, तुम बाइक पर बैठो. मैं तुम्हें इटावा के अच्छे डाक्टर को दिखाऊंगा. उस की दवा से तुम जल्दी ठीक हो जाओगी. फिर बारबार बीमार नहीं पड़ोगी.’’

यशोदा कौशल की चाल को समझ नहीं सकी और उस की बाइक पर बैठ कर चल दी. कुछ दूर जा कर कौशल ने बाइक रोकी और दोस्त सौरभ से फोन पर बात की, ”सौरभ, तुम अपनी कार से दोस्तों को साथ ले कर यमुना नदी के खंदिया पुल पर आ जाओ. मम्मी मेरे साथ में है.’’

सौरभ समझ गया कि कौशल मम्मी को सबक सिखाने ले गया है. अत: सौरभ ने अपनी स्कौर्पियो कार यूपी75एक्यू0876 निकाली फिर दोस्त रजत, बौबी, सतबीर व कबीर को कार में बिठा कर बलरई कस्बे की ओर चल पड़ा. लगभग एक घंटे बाद वह खंदई पुल पहुंच गया. खंदई पुल पर कौशल व उस की मम्मी यशोदा पहले से मौजूद थी. इशारा पा कर रजत व बौबी ने यशोदा को कार में बिठा लिया फिर कार धीमी गति से बढ़ा दी. कार के पीछे बाइक से कौशल चल रहा था. लगभग एक किलोमीटर दूर जा कर रजत व बौबी ने यशोदा को कार से सड़क पर फेंक दिया, फिर कार से कुचल कर मार डाला.

हत्या करने के बाद शव को खंदिया पुल के पास सड़क किनारे फेंक दिया. कौशल ने मम्मी के मोबाइल फोन को कूंच कर जला दिया. उस के बाद सड़क के रास्ते सभी फरार हो गए. इधर दवा लेने गई यशोदा देवी रात 10 बजे तक वापस घर नहीं आई तो रामनिवास को चिंता हुई. उस ने यशोदा को काल लगाई तो उस का फोन बंद था. दूसरे रोज रामनिवास पत्नी यशोदा की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना जैतपुर गया तो वहां बलरई थाना क्षेत्र के खंदिया पुल के पास सड़क किनारे अज्ञात महिला की लाश पाए जाने की जानकारी हुई.

तब रामनिवास थाना बलरई पहुंचा और मोर्चरी में रखी महिला की लाश को अपनी पत्नी यशोदा के रूप में शिनाख्त की. उस ने हत्या की आशंका जताई तो पुलिस ने गंभीरता से जांच कर हत्या का खुलासा किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया. 4 अगस्त, 2025 को पुलिस ने आरोपी कौशल शर्मा, रजत व बौबी को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा  संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी. फरार आरोपी सतबीर, कबीर व सौरभ की तलाश में पुलिस जुटी थी. UP Crime News

 

 

Love Story in Hindi : बेटी का मर्डर कर टू पीस पहन नाची मां

Love Story in Hindi : बार डांसर रोशनी खान उर्फ नाज 7 वर्षीय बेटी के पेट पर खड़े हो कर तब तक कूदती रही, जब तक बेटी के मुंह से खून नहीं निकल गया. इस के बाद उस ने लिवइन पार्टनर उदित जायसवाल के साथ शराब की पार्टी कर टू पीस कपड़ों में मदमस्त डांस किया. आखिर एक मां इतनी क्रूर क्यों हो गई? क्यों किया उस ने इकलौती बेटी का मर्डर? पढ़ें, लव क्राइम की यह सनसनीखेज कहानी.

बात 13 जुलाई, 2025 की है. शाम का वक्त था. बार डांसर रोशनी खान क्लब में थी. 2 आइटम सांग पर डांस पेश करने के बाद वह ड्रेसिंग रूम में आ गई थी. उस के बाद दूसरी डांसर की बारी थी. रोशनी ने अपना मोबाइल औन किया. उस पर 8 मिस काल थे. सभी काल उदित के थे. 2 वाट्सऐप मैसेज भी थे. पहले उस ने मैसेज पढ़ा, जिस में लिखा था, ”फ्री हो कर काल करना!’’

अगले मैसेज में लव के 3 इमोजी थे. इमोजी की संख्या देख कर ही रोशनी समझ गई कि उदित के दिमाग में क्या है? अभी वह कालबैक करने की सोच ही रही थी, तभी उदित की फिर से काल आ गई.

रोशनी ने 2 रिंग में ही काल रिसीव करते हुए कहा, ”हां, बोलो डार्लिंग!’’

”तुम्हारा आइटम हो चुका हो तो बोलो, आ जाऊं?’’

”अभी 10 मिनट बाद एक और होगा. फिर मैं फ्री हो जाऊंगी.’’

”ठीक है, अरे यार! मैं ने आज तुम्हारे लिए खास इंतजाम किए हैं. महंगी विदेशी वाइन की बोतल खरीदी है.’’ उदित बोला.

”आज पूरे मूड में लग रहे हो!’’ रोशनी मजे लेती हुई बोली.

”ऐसा ही समझो मेरी छम्मकछल्लो, आज घर पर ही तुम्हारा बार डांस होगा. वह भी सिर्फ मेरे लिए.’’ उदित बोला.

”नोट की गड्डियां भी उड़ाओ तब जानूं!’’ रोशनी मजाक के अंदाज में बोली.

”वह भी होगा, लेकिन तुम्हारी लाडली सायनारा सो जाएगी, तभी तो बात बनेगी. असली बार डांस का मजा आएगा.’’ उदित चिंता जताते हुए बोला.

”उस की फिक्र मत करो, उसे मैं सुला दूंगी. वैसे भी साढ़े 9 बजतेबजते वह सो जाती है. नहीं सोई तो उसे भी खांसी वाली सिरप में एकाध चम्मच वाइन मिला कर पिला दूंगी.’’

”मतलब तुम्हारा भी आज जश्न मनाने का पूरा इरादा है.’’ उदित बोला.

”अच्छा, अब फोन रखती हूं. मेरे शो का टाइम होने वाला है. तुम 15 मिनट बाद क्लब के बाहर मिलो.’’ रोशनी ने कहते हुए फोन कट कर दिया.

रात के 10 बजे रोशनी कैसरबाग के खंदारी बाजार स्थित अपने फ्लैट में उदित के साथ पहुंच गई थी. अपने साथ ले कर गई चाबी से बाहर का दरवाजा खोल लिया था. भीतर एक कमरे में उस की बेटी सायनारा सो रही थी. मात्र 7 साल की सायनारा काफी समझदारी से फ्लैट का दरवाजा भीतर चाबी से बंद रखती थी. दूसरी चाबी रोशनी हमेशा अपने पास रखती थी, ताकि जब चाहे वह दरवाजा खोल कर आनाजाना कर सके. उदित दबेपांव दूसरे कमरे में चला गया, जहां कभी रोशनी का पति शाहरुख हुआ करता था. रोशनी बाथरूम में अपना मेकअप उतारने के बाद कुछ मिनटों बाद वहीं आ गई थी. उदित बेड पर अधलेटा था. उस का चेहरा दरवाजे की तरफ था. दरवाजे से रोशनी आती दिखी.

उस के अस्तव्यस्त कपड़ों से झांकते यौवन की सराहना करते हुए वह बोल पड़ा, ”आज तो तुम गजब ढा रही हो!’’

जैसे ही रोशनी उस के बैड के पास आई, उदित ने उसे खींच लिया. वह धम्म से उस के फैलेपसरे बदन पर जा गिरी. उस के संभलने से पहले ही उदित ने बाहों में जकड़ लिया. भींच लिया. रोशनी ने भी ज्यादा विरोध नहीं किया. कुछ पल में उदित उसे बेतहाशा चूमने लगा था. रोशनी का साथ मिलने पर वह और भी वासना से भर चुका था. वासना की चिंगारी तो रोशनी के बदन में भी सुलग चुकी थी. उस की ज्वाला मानो भड़कने ही वाली थी. उन की तंद्रा तब अचानक भंग हो गई, जब दरवाजे की कुंडी के जोर से खटखटाने की आवाज सुनाई दी.

रोशनी ने चौंक कर बैड से ही दरवाजे की ओर सिर घुमा कर देखा. उस की नजर बेटी सायनारा पर गई. वह कह रही थी, ”अम्मी! क्या कर रहे हो? मैं अब्बू से शिकायत करूंगी.’’

रोशनी अपने कपड़ों को ठीक करती हुई दरवाजे पर खड़ी सायनारा के पास आ कर बोली, ”सायनारा, बेटा तुम ने खाना खाया? …मैं तुम्हारी पसंद की सब्जी पका कर गई थी.’’

सायनारा जब कुछ नहीं बोली, तब रोशनी ने प्यार से उस के सिर पर हाथ रख सहलाने लगी थी. अम्मी के दुलार भरे हाथ को सायनारा ने झटके में हटा दिया. वह गुस्से में थी. एक सुर में बोलने लगी, ”तुम गंदी हो, सब अब्बू को बताऊंगी. तुम्हारे बारे में कहूंगी…तुम बहुत गंदी अम्मी हो.’’

रोशनी उसे समझाने की कोशिश कर रही थी. दूसरीदूसरी बातों में उलझाने की कोशिश कर रही थी, जबकि सायनारा एक ही रट ‘शिकायत’ करने की लगाए हुए थी. उस की रट से रोशनी घबरा गई. किसी तरह से उसे मनाने की कोशिश की. कोई असर होता नहीं देख, रोशनी ने आपा खो दिया. गुस्से में 2-3 जोरदार थप्पड़ बेटी के गालों पर जड़ दिया. झन्नाटेदार थप्पड़ खा कर सायनारा रोने लगी. बिफरती हुई अपने कमरे की ओर भागती हुई फिर वही रट लगाने लगी, ”बोलूंगी… बोलूंगी…बोलंूगी…तुम दोनों की शिकायत करूंगी…’’

”ये ले…तू रहेगी तब न बोलेगी, अब्बू की चमची!’’

रोशनी ने बेटी सायनारा को फर्श पर गिरा दिया. इस के बाद उस के पेट पर खड़ी हो कर कूदने लगी. बेटी चीखती रही, लेकिन रोशनी का दिल नहीं पसीजा. सायनारा के मुंह से खून निकलनेलगा. इस के बाद रोशनी ने दोनों हाथों से बेटा का गला घोंट दिया. कुछ सेकेंड में ही सायनारा का शरीर ढीला पड़ गया था यानी उस की मौत हो गई थी. तब तक बैड पर तमाशबीन बना उदित उन के पास आ गया. सायनारा की हालत देख कर वह भी घबरा गया. उस की नाक के पास अपनी अंगुली ले गया. नब्ज देखने के बाद सहसा बोल पड़ा, ”ये तूने तो गजब कर डाला? अब क्या करें?’’

 

सामने पड़ी सायनारा को देख कर उदित की आंखें फैल गई थीं.

”घबराने की कोई जरूरत नहीं है. वह इस दुनिया से अलविदा हो चुकी है…अब आगे जो करूंगी, उसे सुन कर तुम्हारी बांछें खिल जाएंगीं.’’ रोशनी आंखें नचाती हुई बोली.

”अच्छा! मैं भी तो सुनूं तुम्हारी आगे की प्लानिंग.’’ उदित बोला.

”कान इधर लाओ.’’ उदित रोशनी की योजना जानने के लिए उस के काफी करीब आ गया.

उस के बाद रोशनी ने जो कुछ बताया, सुनते ही उदित ने उसे गले से लगा लिया. फिर बेतहाशा चूमने लगा. अलग होने के बाद बोला, ”तो फिर क्यों न हो जाए डांस पार्टी!’’

”जरूर, डार्लिंग जरूर… आज तो मैं तुम्हारे लिए केवल टू पीस पहन कर डांस करूंगी. पहले इसे ठिकाने लगाने में मेरी मदद करो.’’

क्लब और होटलों की बार डांसर रोशनी के माथे पर बेटी के मौत की शिकन तक नहीं थी. चेहरे पर नाम मात्र का भी गम नहीं था. उस ने डबल बैड की आधी खाली जगह में सायनारा की लाश ठूंस दी. उस के बाद उदित और रोशनी वहीं तेज म्यूजिक की धुन में जश्न मनाने में मग्न हो गए. रोशनी डांस करने लगी. उदित शराब का पैग बनाने लगा. एकदो पैग रोशनी को भी पिलाए. उन्होंने छक कर शराब पी. थोड़ी देर में ही रोशनी का टू पीस डांस और उदित की मस्ती का काकटेल बन गया था. मस्ती में डूबे दोनों ने वासना में उसी बैड पर गोते लगाए, जिस में सायनारा की लाश थी.

उस के बाद दोनों सुबह होने से पहले ही वहां से फरार हो गए. एक दिन बाद 14-15 जुलाई की रात 3 बजे रोशनी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन घुमाया. पुलिस से झूठी कहानी गढ़ दी. बताया कि उस के पति शाहरुख खान ने उस की बेटी की हत्या कर दी है. इस शिकायत की उस ने पहले ही योजना बना ली थी. इस के पीछे उस की मंशा शाहरुख को जेल भिजवाने की थी. सूचना पाते ही लखनऊ के थाना कैसरबाग की पुलिस 15 जुलाई की सुबह खंदारी बाग बाजार लेन की रहने वाली रोशनी खान उर्फ नाज के फ्लैट के बारे में पता लगाया.

उस के फ्लैट पर पहुंच कर पुलिस टीम ने पाया कि उस के एक कमरे से सड़ांध आ रही है. दुर्गंध बैड के पास अधिक तेज थी. पुलिस टीम ने बैड खोला तो वहां 7 साल की लड़की की लाश पड़ी थी. उस में सडऩ शुरू हो चुकी थी. कुछ कीड़े भी रेंग रहे थे. पासपड़ोसियों से उस फ्लैट में रहने वालों के बारे में मालूम करने पर रोशनी और उदित जायसवाल के बारे में पता चला. दोनों पिछले कुछ महीने से लिवइन में रह रहे थे, जबकि रोशनी शादीशुदा थी. उस का पति शाहरुख खान 2 माह पहले ही वहां से जा चुका था. वे दोनों 13 जुलाई, 2025 को ही दिखाई दिए थे. उस के बाद से घर में ताला लगा था.

इस मामले की जांच की शुरुआत एसआई ऋषिकेश राय ने की थी. उन्होंने इस की जानकारी थाना कैसरबाग के एसएचओ अश्विनी कुमार मिश्रा को दी. एसएचओ ने डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव, एडिशनल डीसीपी धनंजय कुमार सिंह और एसीपी रत्नेश सिंह को भी इस वारदात से अवगत करवा दिया. उन के साथ पुलिस टीम में एसआई रामकेश सिंह, प्रशांत कुमार, विशाल सिंह, सीमा यादव, लेडी कांस्टेबल राधा यादव और रूबी थीं. मामले की जांच करने पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की. इलाके के दुकानदार इस घटना के बारे में सुन कर चौंक गए. पुलिस जांच की काररवाई के दौरान शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

कमरे के माहौल को देख कर पुलिस ने सहज अंदाजा लगा लिया कि वारदात की रात वहां शराब पार्टी हुई होगी. घटना के पहलू को जानने के लिए फोरैंसिक टीम की मदद ली गई. जांच में आगे की काररवाई सीसीटीवी फुटेज से की गई. पाया गया कि रोशनी 13-14 जुलाई की आधी रात में ही अपने प्रेमी उदित जायसवाल के साथ फरार हो गई थी. तभी से उस के मकान में ताला लगा था. दोनों की तलाश में पुलिस जुट गई थी. मौके पर सर्विलांस और फोन काल्स का मिलान किया गया. उस से पता चला कि रोशनी हुसैनगंज के एक होटल में है.

पुलिस ने दबिश दी. 16 जुलाई, 2025 को ही रोशनी पुलिस की हिरासत में ले ली गई. सख्ती से पूछताछ की तो उस ने हत्या करना स्वीकर कर लिया कि बेटी सायनारा की हत्या उसी ने की थी. इस की पुष्टि सायनारा के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी हो गई. उसी रोज उस का प्रेमी उदित जायसवाल भी गिरफ्तार कर लिया गया. रोशनी पर दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक वह बार डांसर का काम करती थी. रोशनी उर्फ नाज शहर की पौश कालोनी थाना कैसरबाग स्थित खंदारी बाग की रहने वाली थी. वहीं उस का फ्लैट नंबर 119/52 चौथे तल पर है. उस ने ही अपनी मासूम बेटी का कत्ल किया था.

शाहरुख से शादी, उदित से प्यार और दिल दहला देने वाली एक कातिल मां की क्राइम स्टोरी काफी रोमांच से भरी हुई है. साथ ही इस कहानी में कई सवाल भी हैं कि पति को छोड़ कर प्रेमी उदित के संपर्क में वह कैसे आई? शाहरुख खान और रोशनी के रिश्ते किस कारण बिगड़ गए? इन सवालों का परतदरपरत खुलासा उस के बयानों से हुआ. वह सनसनीखेज कहानी इस प्रकार है—

रोशनी का निकाह लखनऊ के कैसरबाग के खंदारी बाग इलाके में रहने वाले शाहरुख खान से लगभग 10 साल पहले हुआ था. दोनों पारंपरिक मुसलिम समाज के मध्यमवर्गीय परिवार से थे. हालांकि दोनों ने शादी से पहले एकदूसरे को एक पार्टी के दौरान पसंद किया था. उस के बाद ही उन के फेमिली वालों की सहमति से दोनों का निकाह हुआ था. दोनों का दांपत्य जीवन सही तरह से शुरू हुआ. शाहरुख जहां सामाजिक और पारिवारिक बंधनों में बंधा मेहनतकश युवक था, जबकि रोशनी एक अतिमहत्त्वाकांक्षी युवती थी. वह कुछ नया और अपने मन का करने के सपने देखती थी.

वह आधुनिक जीवनशैली में जीने की तमन्ना रखती थी. सुंदर थी. ग्लैमर से लबालब थी. वैसा ही बने रहने की चाहत थी. इस के लिए उस ने ब्यूटीशियन का काम सीख लिया था. उसे डांस करने का भी शौक था. वह डांस सीखने के बाद बौलीवुड अभिनेत्री बनना चाहती थी. दूसरी तरफ शाहरुख को इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं थी. जल्द ही दोनों के विरोधाभासी विचार आपस में टकराने लगे. दांपत्य जीवन में खटपट होने लगी. बातबात पर मतभेद होने लगा. इसी बीच रोशनी एक बेटी की मां बन गई, जिस का नाम सायनारा रखा. जैसेजैसे बेटी बड़ी होती चली गई, वैसेवैसे उन के बीच झगड़े बढऩे लगे.

रोशनी शादी से पहले पढ़लिख कर नौकरी करना चाहती थी. ऐसा नहीं होने पर वह अपने करिअर को ले कर काफी चिंतित रहने लगी थी. आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी. वह सशक्त महिला कहलाना चाहती थी. उस ने लखनऊ में ही ब्यूटीशियन का कोर्स कर रखा था. साथ ही वह मौडलिंग करना भी चाहती थी. अपनी उमंगों को उड़ान देने के लिए समय के अनुकूल अवसर की तलाश में लगी रहती थी. उस के स्वभाव और दिली तमन्ना के अनुसार उसे अच्छे हमसफर की तलाश बनी हुई थी. वह अपनी महत्त्वाकांक्षी भावनाओं को पंख देना चाहती थी. उस के सहारे अपने सपने को साकार करना चाहती थी. वह सब नहीं होने के कारण घुटन महसूस किया करती थी.

उदित से मिलते ही पति से काटी कन्नी

उस ने ब्यूटीशियन और मौडलिंग के साथसाथ डांसर का कोर्स करने के लिए अकेली दिल्ली जाने का मन बना लिया. लखनऊ में उस के अम्मीअब्बू की काफी अच्छी हैसियत थी. रुपएपैसों की कमी नहीं थी. अच्छीखासी प्रौपर्टी होने के कारण आमदनी अच्छी होती थी. उसे एक अखबार में डांसर की ट्रेनिंग सेंटर के विज्ञापन से उस का पता मिल गया था. फिर क्या था, अपने रिश्ते की खाला के बेटे मोहसिन को साथ ले कर दिल्ली चली गई. वहां उस ने 2 साल तक मौडलिंग व डांसिंग की ट्रेनिंग ली. वहां का खर्च चलाने के लिए पार्टटाइम एक बार में नौकरी भी कर ली. वहां रह कर उस ने बार के तौरतरीके सीखे. उस समय वह 26 साल की हो चुकी थी.

शादी के बाद शाहरुख खान उस का नाम भर का पति था. वैसे सीधेसरल स्वभाव का शाहरुख भी रोशनी की आदतों से खुश नहीं था. वह अपने पेरेंट्स के साथ परिवार में खुश था. उस ने यह कभी जाना ही नहीं कि पत्नी सुख क्या होता है. उस का रोशनी से संबंध महज दैहिक सुख की खानापूर्ति के लिए ही था. वह रोशनी के दबाव में रहता था. उस के कहने पर ही शाहरुख रातें एक कमरे में गुजरती थीं. उस के बाद वह सास परवीन द्वारा बनाए गए फ्लैट पर चली जाती थी.

रोशनी को दिल्ली में एक ऐसे युवक की तलाश थी, जो उस के इशारे को समझते हुए उस की सभी बातों को माने. जिस बार में वह काम करती थी, वहां आनेजाने वाले युवकों पर उस की निगाह जमी रहती थी. उन में से ही किसी को अपने मनमुताबिक हमसफर की तलाश में लगी हुई थी. धीरेधीरे समय बीतता रहा. डांसिंग कोर्स पूरा होने का समय आ गया. वह लखनऊ वापसी की तैयारी में जुट गई. दरअसल, उस की नजर ससुराल में करोड़ों की प्रौपर्टी पर भी थी. लखनऊ वापस आने के बाद रोशनी ने जल्द ही एक बार में डांसर का काम ढूंढ लिया. अपने भरपूर यौवन और सुंदरता का डांस शो जबरदस्त प्रदर्शन किया. जल्द ही वह लोकप्रिय हो गई. अच्छा पैसा भी मिलने लगा. इसी दौरान उस ने लखनऊ में एक बड़ा ब्यूटीपार्लर ट्रेनिंग सेंटर खोलने का मन बनाया.

जब उस के पति को बार में नौकरी के बारे में मालूम हुआ, तब उस ने इस पर आपत्ति जताई. इसे ले कर रोशनी के साथ आए दिन विवाद होने लगा. इस बीच रोशनी ने एक बेटी को जन्म दिया. कुछ दिनों बाद वह फिर से डांस बार में सक्रिय हो गई. एक दिन अचानक उस की मुलाकात एक ऐसे युवक से हो गई, जिस की उसे वर्षों से तलाश थी. वह लखनऊ का उदित जायसवाल था. लखनऊ के उदयगंज पीपलपानी का रहने वाला उदित रुपएपैसे से उस की मदद करता था और हमेशा आत्मनिर्भर बनने का पाठ पढ़ाता रहता था. पति के विरोध के बावजूद रोशनी उदित से मिलने उदयगंज स्थित कंपनी के कार्यालय पर जानेआने लगी थी.

जब भी उदित को मौका मिलता, वह रोशनी को फोन कर के अपने पास बुला लेता था. दोनों के बीच पनपा प्रेम कितना अथाह था, नहीं कहा जा सकता. लेकिन रोशनी ने उदित से अपनी शादी का राज काफी दिनों तक छिपाए रखा. किंतु जब उस ने सायनारा को देखा, तब उसे पता चला कि सायनारा रोशनी की बेटी है और उस की पति से अनबन रहती है. उदित के पूछने पर रोशनी ने बताया कि वह खंदारी बाग में अपने अपार्टमेंट में अपने पति से अलग रहती है और उस का तलाक व संपत्ति को ले कर पति से मुकदमा चल रहा है. यह जानकारी उस के लिए राहत भरी थी. फिर उदित रोशनी से मिलने घर आने लगा.

उस के बाद रोशनी पति से और रूखा व्यवहार करने लगी. उधर पत्नी की ऊटपटांग हरकतों और बार में नौकरी करने को ले कर शाहरुख परेशान रहने लगा. घर में वह घंटों मोबाइल में उलझी रहती थी. बेटी की देखभाल भी उसे ही करनी होती थी. यह बात शाहरुख को काफी अखरने लगा था. शाहरुख पारिवारिक और सामाजिक मर्यादाओं में बंध कर रह गया था. उसे अपनी बेटी के जीवन और भविष्य की चिंता सताने लगी थी. धीरेधीरे वह 6 साल से अधिक की हो गई थी.

रोशनी का बाहरी युवकों से आए दिन संपर्क होने के कारण घर में कलह का वातावरण बन चुका था. मई 2025 में शाहरुख का रोशनी के साथ खूब झगड़ा हुआ. गुस्से में वह उसे छोड़ कर कहीं और रहने लगा. इस का फायदा उस ने लंबे समय से प्रेम में बंधे प्रेमी उदित जायसवाल को ले कर उठाया. वह उदित को अपने घर पर बेरोकटोक बुलाने लगी. उदित उस का एक तरह से लिवइन पार्टनर बन चुका था. वहीं रोशनी की बेटी सायनारा भी रहती थी. रात को सायनारा के सोने के बाद रोशनी और उदित रंगरलियां मनाते थे. रोशनी प्रेमी के सहयोग से ब्यूटीपार्लर खोलने की कोशिश में थी.

जल्द ही रोशनी को इस में सफलता मिल गई. उदित के सहयोग से उस ने उदयगंज लेन में एक ब्यूटीपार्लर खोल लिया. एक तरफ शाहरुख की जिंदगी उजड़ रही थी तो दूसरी तरफ रोशनी और उदित अपनी तरक्की की राह पकड़े हुए थे. 13-14 जुलाई, 2025 की रात  तीनों के लिए काल बन कर आई. शाहरुख अपने घर में बेचैनी भरी करवटें बदल रहा था, जबकि उदित और रोशनी अय्याशी में डूबे थे. इन सब से बेखबर 7 साल की सायनारा अपने कमरे में सो रही थी. अचानक घर में हुई खटपट से उस की नींद खुल गई. उस ने पाया बगल के कमरे में बत्ती जल रही है. जब वह वहां दरवाजे पर पहुंची तो वहां का नजारा देख कर चौंक गई.

उसे दरवाजे पर आया देख कर रोशनी भी चौंक गई. उस के आने से उस की वासना में खलल आ गई थी. उस ने वहां पर आपत्ति जताई. इस का जब सायनारा ने विरोध किया, तब रोशनी गुस्से में आ गई और गला दबा कर उसे मार डाला. खुद को बचाने के लिए वह सायनारा के पेट पर खड़ी हो गई, ताकि उस के मुंह से खून निकल आए. थोड़ी देर तक मासूम बच्ची दर्द से तड़पती रही. जब उस के प्राणपखेरू उड़ गए, तब रोशनी और उस के प्रेमी उदित ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. सफलता नहीं मिलने पर पकड़े जाने के डर से दोनों भयभीत हो गए. दोनों ने सबूत मिटाने शुरू किए और अपने मोबाइल सिमों को निकाल कर फेंक दिया.

मोबाइल सेट 8 हजार रुपए में एक दुकान पर जा कर बेच दिया, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया. रोशनी ने अगले रोज इस की सूचना पुलिस को दे कर इस का दोष पति शाहरुख पर मढ़ दिया. इस आरोप को पुलिस ने जांच के बाद खारिज कर दिया. रोशनी और उदित के द्वारा दिए गए अलगअलग बयानों में पुलिस ने विरोधाभास पाया. जांच में पुलिस ने पाया कि अप्रैल 2025 में रोशनी के ससुराल पक्ष से संपत्ति विवाद के कारण रोशनी के जेठ सलमान, सास परवीन और 2 ननदों के खिलाफ थाना कैसरबाग में रेप का मुकदमा रजिस्टर हुआ था, जिस में वे सभी जेल भेज दिए गए थे. इसी विवाद के चलते रोशनी का पति शाहरुख खान अमीनाबाद स्थित अपनी एक रिश्तेदारी में जा कर रहने लगा था. तब से वह अलग रह रहा था.

इंसपेक्टर अश्विनी कुमार मिश्रा के निर्देशन में कैसरबाग पुलिस द्वारा सायनारा की हत्या के आरोप में रोशनी व उदित जायसवाल के खिलाफ धारा-103(1) बीएनएस के अंतर्गत 15 जुलाई, 2025 को मुकदमा दर्ज करने के बाद उदित जायसवाल और रोशनी खान को जेल भेजने के लिए न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें दिनांक 16 जुलाई, 2025 को पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. Love Story in Hindi

कथा लिखे जाने तक मामले की विवेचना चल रही थी.

 

 

UP Crime News : प्यार को कायदों से बांधोगे तो अति होगी

UP Crime News : गुलफ्शां ने अपने निकाह से पहले ही प्रेमी संग मिल कर साजिश रची और मंगेतर निहाल को भरोसे में ले कर उस के साथ वही किया, जो पिछले दिनों सोनम ने हनीमून के दरम्यान अपने पति के साथ किया था. पढ़ें, इस कहानी में क्या प्रेम खून मांगता है? गुलफ्शां की शादी महीनों पहले तय हो गई थी. जबकि वह गांव के ही सद्दाम से मोहब्बत करती थी. सद्दाम भी उस से बेइंतहा मोहब्बत करता था. दोनों के परिवार गांवसमाज और परिवार के कायदेकानून में बंधे थे, लेकिन उन 2 प्रेमियों का दिल आजाद हो कर भी अपनेअपने परिवार के संस्कारों जुड़ा था.

जैसेजैसे विवाह की तारीख 15 जून नजदीक आ रही थी, वैसेवैसे सद्दाम की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. यही हाल गुलफ्शां का भी था. सद्दाम तो अपनी बेचैनी और मोहब्बत की दास्तां दोस्तों से शेयर कर लेता था, लेकिन गुल की तमाम प्यारमोहब्बत की बातें सिसकियां बन कर चारदीवारी से टकराती रहती थीं. सिर्फ एकमात्र सहारा मोबाइल का वाट्सऐप था. मन बहलाने के लिए मनोरंजक रील्स, फिल्मों के शार्ट वीडियो और छिटपुट खबरें थीं. पिछले दिनों सोनम और राजा रघुवंशी की खबरों से इंटरनेट मीडिया अटा पड़ा था. बारबार गुल के दिमाग पर वह घटना चोट पर चोट किए जा रहा था.

गुल परेशान हो गई थी. कभी सोनम के बारे में सोचने लगती तो कभी उस के गरीब प्रेमी के बारे में…जब नतीजे पर पहुंचती, तब उस के दिमाग में सद्दाम का चेहरा घूमने लगता. उस ने महसूस किया कि शायद सोनम भी उस की तरह मजबूर रही होगी. उस के बारे में सोचतेसोचते जब दिमाग खाली हो जाता, तब खुद के बारे में सोचने लगती. खयाल आता, ‘क्यों न वह अपनी लव स्टोरी को कायम रखने के लिए निकाह से पहले ही कोई तरीका अपनाए.’ अगले पल ही मन में सवाल आता, ‘कौन सा तरीका? सोनम वाला? नहींनहीं! वैसा नहीं कर सकती!…तो फिर क्या किया जाए?’

कुछ ऐसी ही ऊलजुलूल की उधेड़बुन में खोई थी. निकाह के सिर्फ 2 दिन बचे थे. अपने कमरे में दीवार की तरफ टकटकी लगाए हुए थी. उस वक्त कमरे में और कोई नहीं था. सामने अलमारी के बगल में मोबाइल चार्ज में लगा था. अचानक उस का स्क्रीन चमक उठा. छोटी सी कुछ सेकेंड का काल रिंग बजी. मोबाइल हाथ में ले कर पह देखने लगी. उस के मंगेतर निहाल का फोन था. वह चिढ़ गई, ‘निकाह हुआ नहीं…और अभी से ही बेचैन है!’

वह मोबाइल फिर से चार्ज के लिए लगाने ही वाली थी कि फिर से काल रिंग बजी. इस बार जो नंबर उभरा, उसे देख कर गुल की आंखों में चमक आ गई. चेहरा खिल उठा. काल उस के प्रेमी सद्दाम की थी, जिसे उस ने सलमान के नाम से सेव कर रखा था.

उस ने तुरंत काल रिसीव करते हुए कहा, ”हां बोलो.’’

”अब क्या बोलना बचा है… तुम ने मेरा वाट्सऐप नहीं देखा!’’ सद्दाम ने कहा.

”हां देखा, सलमान खान का फोटो है. क्यों भेजा, समझी नहीं.’’ गुल बोली.

”तुम नहीं मिलीं तो मेरी भी उसी जैसी हालत होगी!’’ सद्दाम बोला.

”ऐसा क्या? मेरे बिना कुंवारे बैठे रहोगे?’’ गुल हैरानी के साथ बोली.

”तुम मेरे बिना रह पाओगी…उस बावर्ची के साथ?’’ सद्दाम ने चुटकी ली.

”अब क्या करूं मेरी जान? किस से कहूं दिल की बात? यहां घर में कोई मेरी नहीं सुनने वाला.’’ गुल की आवाज में निराशा थी.

”मैं समझता हूं तुम्हारी मजबूरी. तुम से कुछ नहीं हो पाएगा. अब जो कुछ करूंगा, मैं ही करूंगा. तुम को सिर्फ मेरा साथ देना है.’’ सद्दाम समझाते हुए बोला.

”मुझे क्या करना होगा?’’ गुल का सवाल था.

”तुम्हें निहाल को अपने विश्वास में लेना है. आगे का काम मैं करूंगा.’’ सद्दाम बोला.

”ठीक है, तुम से पहले उस की ही काल आई थी.’’ गुल बोली.

”अभी उसे काल बैक करो. सब कुछ अच्छा रहा तो सब हमारी मरजी का होगा.’’ सद्दाम ने जैसा बोला वैसा ही गुल ने किया.

निहाल को काल बैक कर उस से प्यार भरी बातें कीं. उसे बताया कि अगले रोज उस का कोई रिश्तेदार काल करेगा. विवाह की रस्म का कुछ काम है. वह जैसा कहे, वैसा करना. उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर में भोट थाना क्षेत्र के धनुपुरा गांव की निवासी गुलफ्शां की शादी निहाल के साथ 6 महीने पहले ही तय हो गई  थी. वह थाना गंज क्षेत्र का रहने वाला था. बावर्ची का काम करता था. निहाल अपने परिवार में सब से छोटा था. उस के 2 भाई और 2 बहनें हैं, जिन में से एक भाई और एक बहन की शादी हो चुकी है.

दोनों के घरों में शादी की तैयारियां चल रही थीं. 14 जून, 2025 को दिन में ही निहाल के पास फोन आया. फोन करने वाले ने बताया कि वह उस का चचेरा साला लगेगा. कपड़े खरीदवाने के लिए उस के साथ बाजार चलना होगा. इस बारे में उस की गुलफ्शां से बीती रात बात हुई होगी. निहाल ने इस की हामी भरी, क्योंकि गुल ने उस की पसंद के कपड़े खरीदवाने के लिए रिक्वेस्ट किया था. निहाल घर से निकला. उसे लेने के लिए बाइक से 2 युवक आए थे. वह उन के साथ बीच में बैठ कर चला गया. देर शाम होने तक निहाल घर नहीं लौटा तो फेमिली वालों को चिंता होने लगी. उस के बड़े भाई नायब ने उस की खोजबीन के लिए कई जगह काल की.

सभी जगह से एक ही जवाब आया कि उन के पास निहाल आया ही नहीं था. काफी खोजबीन के बाद जब कुछ पता नहीं चला तो फेमिली वालों ने गंज थाने में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवा दी. निहाल के अचानक दिनदिन में ही लापता हो जाने की सूचना नायब ने गुलफ्शां के फेमिली वालों को भी दे दी. पुलिस ने निहाल की तलाशी के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया. तब पुलिस को बाइक पर 3 लोग बैठ कर जाते हुए दिख गए. सीसीटीवी के जरिए पुलिस को निहाल के अपहरण की पुष्टि हुई थी. फुटेज में 2 बाइक सवार युवक निहाल को बीच में बैठाए हुए कहीं ले जाते दिखे थे.

बाइक चला रहे युवक ने हेलमेट पहन रखा था, जबकि दूसरे ने चेहरा गमछे से ढक रखा था. हालांकि बाइक नंबर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया. इस की मदद से ही पुलिस आरोपियों तक पहुंच पाई थी. बाइक चलाने वाले की पहचान सद्दाम के रूप में हो गई. उस के साथ बैठा युवक सद्दाम का साथी फरमान था. तकनीकी सबूत के आधार पर सद्दाम और फरमान 15 जून, 2025 को गिरफ्तार कर लिए गए. पुलिस ने दोनों से निहाल के बारे में सख्ती से पूछताछ की. दोनों ने मार पडऩे के डर से स्वीकार कर लिया कि उन्होंने निहाल की हत्या कर दी है. उन के द्वारा अपराध कुबूल कर लेने के बाद पुलिस सद्दाम को हत्या वाली जगह पर ले गई. तभी उस ने एक कांस्टेबल की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की.

सद्दाम ने छीनी गई पिस्टल से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिस के जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई. इस मुठभेड़ में सद्दाम के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में जिला अस्पताल में भरती कराया गया. निहाल के परिजनों में उस के भाई नयाब की तहरीर पर सद्दाम, फरमान, अनीस और युवती यानी होने वाली दुलहन गुलफ्शां निवासी धनुपुरा रामपुर के खिलाफ अपहरण कर हत्या करने की रिपोर्ट लिखी गई. पुलिस ने फरमान को गिरफ्तार कर लिया. उस ने बताया कि निहाल का अपहरण कर गला घोंट कर हत्या की गई और शव को जंगल में एक मक्के के खेत में छिपा दिया था. उस का मोबाइल तोड़ दिया था.

दोनों आरोपियों की निशानदेही पर 16 जून, 2025 को अजीमनगर थाना क्षेत्र के रतनपुरा जंगल से निहाल का शव बरामद कर लिया गया. पूछताछ में सद्दाम ने निहाल की मंगेतर गुलफ्शां का भी नाम लिया. उस ने बताया कि उस के कहने पर ही उन्होंने निहाल की हत्या की है. सद्दाम ने यह भी स्वीकार किया कि वह गुलफ्शां से मोहब्बत करता है. पुलिस ने प्रेमी सद्दाम और फरमान को गिरफ्तार कर लिया तो गुलफ्शां और अनीस फरार हो गए थे. गुलफ्शां पर निहाल की हत्या की क्राइम स्टोरी की साजिश रचने का आरोप था. उस की भूमिका की पुलिस बारीकी से जांच में जुटी थी. इस के लिए सुबूत भी जुटाने के लिए उस की काल डिटेल्स भी खंगाली गई.

इस वारदात से 2 घरों में मातम का माहौल बन गया था. जबकि 6 महीने पहले रिश्ता तय होने के बाद से ही गूजर टोला स्थित फकीरों वाली मसजिद निवासी निहाल के घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं. निहाल ने निकाह के लिए खास ड्रेस बनवाई थी. घर मेहमानों से भरा था. निहाल की शादी को ले कर सभी खुश थे. 15 जून, 2025 रविवार को बारात जानी थी, लेकिन खुशियों को न जाने किस की नजर लग गई. शादी से महज एक दिन पहले ही निहाल का अपहरण कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया. दूल्हे की ड्रेस में निहाल को देखने के लिए आतुर अब्बूअम्मी ने जब उस का कफन में लिपटा शव देखा तो वे बेसुध हो गए. अन्य परिजनों का भी रोरो कर बुरा हाल हो गया.

फेमिली वालों ने गमगीन माहौल में 16 जून की देर रात उसे सुपुर्द ए खाक कर दिया. रामपुर के एसपी विद्यासागर मिश्र के अनुसार लिखे जाने तक गुलफ्शां से पूछताछ की जानी थी. वह अपने 32 वर्षीय पड़ोसी सद्दाम से एक साल से प्रेम संबंध कायम किए हुए थी. गुलफ्शां की शादी तय होने के बाद से वह नाराज था. इसे ले कर वह गुलफ्शां के घर जा कर झगड़ा भी कर चुका था. निहाल की हत्या की साजिश रचने के आरोप में घिरी गुलफ्शां के घर भी मातम छा गया. गुलफ्शां के अब्बू आशिक अली ने पुलिस से उसे बचाने की गुहार लगाई है. उन का कहना था कि वह बहुत गरीब हैं. उन के 9 बच्चे हैं. उधार ले कर बेटी की शादी कर रहे थे.

उन्होंने पुलिस को बताया कि हत्यारोपी सद्दाम अकसर उन की बेटी को शादी न करने के लिए धमकी देता था. उस ने परिवार तक को खत्म करने की धमकी दी थी.  सद्दाम से पुलिस द्वारा पूछताछ में जो क्राइम स्टोरी सामने आई, उस से पता चला कि दोनों एकदूसरे से प्यार करते थे. सद्दाम ने पुलिस को बताया है कि उस के और गुलफ्शां के बीच लव अफेयर चल रहा था. उस ने गुलफ्शां से शादी की इच्छा भी जताई थी, लेकिन गुलफ्शां के परिजनों ने उस का निकाह निहाल से तय कर दिया था.

गुलफ्शां के साथ ही उस की बहन की भी शादी थी. गुलफ्शां की बारात तो नहीं आई, लेकिन उस की बहन की बारात आई. गुलफ्शां की बहन का निकाह संपन्न हुआ, लेकिन गुलफ्शां व उस के फेमिली वाले दूसरी बारात का इंतजार ही करते रहे. देर रात जब पुलिस यहां पहुंची, तब उन्हें जानकारी हुई कि गुलफ्शां के होने वाले शौहर की हत्या हो चुकी है. UP Crime News

 

 

Hindi Story : ये तन मांगे मोर

Hindi Story : कुछ महिलाएं अपने घमंडी व जिद्दी स्वभाव की वजह से अपनी गृहस्थी में खुद ही आग लगा लेती हैं. 2 बच्चों की मां लता चौहान भी ऐसी ही थी. लड़झगड़ कर पति को घर से भगाने के बाद उस ने भांजे अंकित के साथ अवैध संबंध बना लिए. इस के बाद उस ने…

19 वर्षीया काजल उस समय बेचैन हो कर अपने घर में टहल रही थी. वह बारबार अपने रो रहे छोटे भाई शिवम को चुप कराती थी, मगर शिवम बारबार मां को याद कर के रोने लगता था. हरिद्वार जिले के गांव हेतमपुर की रहने वाली काजल व शिवम की मां लता चौहान (38) गत शाम को पास के ही कस्बे बहादराबाद में सब्जी खरीदने के लिए घर से निकली थी, मगर आज तक वह वापस घर नहीं लौटी थी. उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ आ रहा था. मां के वापस न लौटने व मोबाइल के स्विच्ड औफ होने से काजल व शिवम का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

दोनों भाईबहन पिछली शाम से ही अपने सभी रिश्तेदारों को फोन कर कर के अपनी मां के बारे में जानकारी कर रहे थे, मगर उन की मां के बारे में सभी रिश्तेदारों ने मोबाइल पर अनभिज्ञता जताई. इस के बाद सूचना पा कर कुछ रिश्तेदारों व कुछ पड़ोसियों का भी उन के घर पर आना शुरू हो गया था. सभी दोनों भाईबहन को दिलासा दे कर चले जाते. इसी प्रकार 3 दिन बीत गए थे तथा काजल व शिवम को अपनी मां के बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिली. इस के बाद अब उन के रिश्तेदार काजल पर लता की गुमशुदगी थाने में दर्ज कराने पर जोर देने लगे. लेकिन थाने जाने के नाम से काजल को एक अंजाना सा डर लग रहा था.

वह 14 जून, 2021 का दिन था. आखिर उस दिन काजल थाना सिडकुल पहुंच ही गई. वह थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला से मिली और उन्हें अपनी मां लता चौहान के गत 4 दिनों से लापता होने की जानकारी दी. जब थानाप्रभारी बुटोला ने काजल से उस के पिता के बारे में पूछा तो काजल ने बताया, ‘‘सर पिछले 2-3 सालों से मेरे पिता चंदन सिंह नेगी व मां लता चौहान के बीच अनबन चल रही है. मेरे पिता फरीदाबाद (हरियाणा) में रह कर ड्राइवरी करते हैं. यहां पर 2 साल पहले मेरे फुफेरे भाई अंकित चौहान ने हमें एक मकान खरीद कर दिया था. इस मकान में हम तीनों रहते हैं. घर से चलते समय मेरी मां हरे रंग का सूट सलवार व पैरों में सैंडिल पहने थी.’’

इस के बाद काजल ने मां का मोबाइल नंबर भी थानाप्रभारी बुटोला को नोट करा दिया. इस के बाद काजल वापस घर आ गई. काजल की तहरीर पर थानाप्रभारी बुटोला ने लता की गुमशुदगी दर्ज कर ली और इस केस की जांच एसआई अमित भट्ट को सौंप दी. लता की गुमशुदगी का केस हाथ में आते ही अमित भट्ट सक्रिय हो गए. उन्होंने सब से पहले लता के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने के लिए साइबर थाने से संपर्क किया था और थाने के 2 सिपाहियों को लता चौहान की डिटेल्स का पता करने के लिए सादे कपड़ों में गांव हेतमपुर में तैनात कर दिया. उसी दिन शाम को थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला ने लता की गुमशुदगी की सूचना एएसपी डा. विशाखा अशोक भडाने व एसपी (सिटी) कमलेश उपाध्याय को दी.

2 दिनों में पुलिस को लता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स मिल गई थी. काल डिटेल्स के अनुसार 10 जून, 2021 की शाम को लता चौहान व उस के भांजे अंकित चौहान की लोकेशन हेतमपुर से सलेमपुर की गंगनहर तक एक साथ थी. इस से पहले दोनों में बातें भी हुई थीं. इस के अलावा लता के मोबाइल पर अंतिम काल अंकित चौहान के ही मोबाइल से आई थी. इस के कुछ समय बाद लता चौहान व अंकित चौहान की लोकेशन भी अलगअलग हो गई थी. काल डिटेल्स की यह जानकारी तुरंत ही थानाप्रभारी ने एसपी (सिटी) कमलेश उपाध्याय को दी. इस के बाद उपाध्याय ने थानाप्रभारी बुटोला व एसआई अमित भट्ट को अंकित चौहान से पूछताछ करने के निर्देश दिए. बुटोला व भट्ट ने जब अंकित चौहान से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला.

पुलिस ने जब अंकित चौहान के बारे में जानकारी की तो पता चला कि वह लता का सगा भांजा था. अंकित मूलरूप से बिजनौर जिले के गांव मानपुर शिवपुरी का रहने वाला था. अंकित एमएससी करने के बाद किसी अच्छी नौकरी की तलाश में था. 3 साल पहले जब लता के अपने पति से संबंध बिगड़ गए थे, तब से अंकित की लता से नजदीकियां बढ़ गई थीं. इस दौरान अंकित लता व उस के दोनों बच्चों का पूरापूरा खयाल रखता था. लता के रहनेखाने से ले कर वह उन्हें हर चीज मुहैया कराता था. यह जानकारी प्राप्त होने पर बुटोला व अमित भट्ट ने अंकित की तलाश में धामपुर व हेतमपुर में कुछ मुखबिर सतर्क कर दिए थे. विवेचक अमित भट्ट ने भी अंकित की तलाश में उस के धामपुर स्थित गांव मानपुर शिवपुरी में कई बार दबिश दी, मगर अंकित उन्हें न मिल पाया.

इसी प्रकार 9 दिन बीत गए तथा पुलिस को अंकित चौहान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई. वह 27 जून, 2021 का दिन था. शाम के 7 बज रहे थे. तभी श्री बुटोला के मोबाइल पर उन के खास मुखबिर का फोन आया. मुखबिर ने उन्हें बताया कि सर, जिस अंकित को तलाश कर रहे हो, वह इस समय यहां हरिद्वार के रोशनाबाद चौक पर खड़ा है. यह सुनते ही बुटोला की बांछें खिल गईं. बुटोला ने इस मामले में विलंब करना उचित नहीं समझा. उन्होंने तुरंत अपने साथ विवेचक अमित भट्ट व फोर्स को साथ लिया और 5 मिनट में ही रोशनाबाद चौक पर पहुंच गए. मुखबिर के इशारे पर उन्होंने वहां से अंकित को हिरासत में ले लिया. वह उसे थाने ले आए.

यहां पर जब बुटोला व भट्ट ने उस से लता के लापता होने के बारे में पूछताछ की, तो पहले तो वह पुलिस को गच्चा देने की कोशिश करता रहा. वह पुलिस को बताता रहा कि लता उस की मामी अवश्य थी, मगर अब वह कहां है, उस की उसे कोई जानकारी नहीं है. लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और बोला, ‘‘साहब, अब लता इस दुनिया में नहीं है. 10 जून, 2021 की रात को मैं ने अपने दोस्त अमन निवासी कस्बा शेरकोट जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश के साथ मिल कर उस की गला घोंट कर हत्या कर दी थी तथा उस की लाश को हम ने गांव सलेमपुर स्थित गंगनहर में फेंक दी थी. लता को मैं घुमाने की बात कह कर सलेमपुर गंगनहर तक लाया था.’’

अंकित के मुंह से लता की हत्या की बात सुन कर थानाप्रभारी बुटोला तथा वहां मौजूद अन्य पुलिस वाले सन्न रह गए. पूछताछ में उस ने लता की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

गांव मानपुर में अपने बाप हरगोविंद, मां सरोज तथा छोटे भाई अनुज के साथ रहता था. उस ने बताया कि 3 साल पहले जब लता का अपने पति के साथ विवाद हुआ था तो उस दौरान अंकित ने ही लता की काफी मदद की थी. उसी दौरान लता उस की ओर आकर्षित हो गई थी. लता और अंकित के बीच अवैध संबंध बन गए थे. इस के बाद अंकित ने लता को हेतमपुर में एक मकान खरीद कर दे दिया था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि करीब 2 महीने पहले अंकित ने लता को उस के पड़ोसी के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया था, यह देख कर अंकित को गुस्सा आ गया था. गुस्से में उस ने लता को उसे खरीद कर दिया हुआ मकान अपने नाम वापस करने का कहा तो वह टालने लगी और 2 लाख रुपए की मांग करने लगी.

लता की इस हरकत से अंकित परेशान हो गया था और अंत में वह उस की हत्या की योजना बनाने लगा. यह बात उस ने अपने दोस्त अमन को बताई तो वह भी अंकित का साथ देने को राजी हो गया. दोनों ने इस की योजना बनाई. योजना के अनुसार 10 जून, 2021 को अंकित अमन के साथ रात 8 बजे लता के घर पहुंचा था. इस के बाद उसे घुमाने की बात कह कर वह लता को ले कर गंगनहर किनारे गांव सलेमपुर पहुंचा था. उस समय वहां रात का अंधेरा छाया था. मौका मिलने पर अमन ने तुरंत ही लता को पकड़ कर उस का गला घोंट दिया था. लता के मरने के बाद दोनों ने उस की लाश गंगनहर में फेंक दी थी. उस समय रात के 11 बज चुके थे. इस के बाद अमन वापस अपने घर चला गया था. लता का मोबाइल उस समय अंकित के पास ही था.

जब उस ने 12 जून 2021 को मोबाइल औन किया तो उस में कालें आनी शुरू हो गई थीं. तब अंकित ने उस में से सिमकार्ड निकाल कर मोबाइल व सिम को सिंचाई विभाग की गंगनहर में फेंक दिया था. इस के बाद पुलिस ने अंकित के बयान दर्ज कर लिए और लता की गुमशुदगी के मुकदमे को हत्या में तरमीम कर दिया. पुलिस ने इस केस में आईपीसी की धाराएं 302 व 120बी और बढ़ा दी थीं. 2 जुलाई, 2021 को पुलिस ने अंकित को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक आरोपी अंकित जेल में ही बंद था. थानाप्रभारी लखपत सिंह बुटोला द्वारा गंगनहर में लता के शव को तलाश किया जा रहा था. दूसरी ओर पुलिस दूसरे आरोपी अमन की तलाश में जुटी थी.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Love Crime : पिता ने बेटी के प्रेमी के सीने में मारी गोली

Love Crime : अमित और बेबी का परचून की दुकान से शुरू हुआ प्यार पूरे गांव में आम हो गया था. दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन जाति की दीवार ने ऐसा रंग दिखाया कि दोनों के खून के छींटे पूरे गांव में फैल गए…

उत्तर प्रदेश के शहर बरेली का एक थाना है बिशारतगंज. इस्माइलपुर गांव इसी थाना क्षेत्र में आता है. गुड्डू अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा बेटी बेबी और एक बेटा प्रकाश था. बेटी बीए फाइनल में पढ़ रही थी. गुड्डू खेतीकिसानी करता था. इसी से उस के परिवार की गुजरबसर होती थी. बेबी के घर के पास गांव के 22 वर्षीय अमित गुप्ता की किराने की दुकान थी. बेबी घर का खानेपीने का सामान अमित की दुकान से लाती थी. इसी आनेजाने में वह मन ही मन अमित को पसंद करने लगी थी. लेकिन उस ने अपने मन की बात अमित पर जाहिर नहीं होने दी थी.

अमित के पिता रामकुमार का कई साल पहले निधन हो गया था, मां अभी थी. भाईबहनों से उस का परिवार भरा पूरा था. अमित का पढ़ाई में मन नहीं लगा तो उस ने परचून की दुकान खोल ली थी. एक दिन बेबी जब अमित की दुकान पर पहुंची, तो वहां उस के अलावा कोई ग्राहक नहीं था. सौदा लेने के बाद चलते समय उस ने अमित से कहा, ‘‘तुम बहुत सुंदर हो.’’

अकसर ऐसी प्यार भरी बातें चाहने वाले लड़के अपनी प्रेमिका से कहते हैं. जबकि यहां यह बात एक युवती कह रही थी. सुन कर अमित के शरीर में सिहरन सी दौड़ गई. उस ने भी मुसकरा कर कह दिया, ‘‘अच्छा…’’

और बेबी शरमा कर वहां से चली गई. दुकान पर आतेजाते उसे अमित अच्छा लगने लगा था. काफी दिनों तक तो उस ने अपने दिल पर काबू रखा था. लेकिन उस दिन उस ने हिम्मत कर के अमित से सुंदर लगने वाली बात कह ही दी थी. अब बेबी इसी ताक में रहने लगी कि जब अमित की दुकान पर कोई ग्राहक न हो तभी सामान लेने जाए. एक दिन उसे यह मौका मिल गया. सामान लेते समय अमित ने उस का हाथ पकड़ कर पूछा, ‘‘उस दिन तुम क्या कह रही थीं?’’

‘‘कुछ भी तो नहीं,’’ बेबी ने भोली बन कर हंसते हुए कहा, ‘‘तुम सच में बड़े भोले हो, तुम्हारी यह अच्छाई मुझे बहुत पसंद है.’’

अपनी प्रशंसा सुन कर अमित खुश हो गया. वह बोला, ‘‘बेबी तुम भी बहुत अच्छी लगती हो मुझे. जब भी तुम आती हो मेरे दिल की धड़कने बढ़ जाती हैं.

‘‘अच्छा…’’ इतना कह कर बेबी मुसकराती हुई वहां से चली गई.

बेबी और अमित करीबकरीब हमउम्र थे. दोनों के बीच बातचीत का दायरा बढ़ता गया और नजदीकियां सिमटती गईं. अमित जब भी बेबी को देखता, खुशी के मारे उस का दिल बागबाग हो उठता. बेबी भी अमित को देख कर खुश हो जाती थी. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. जब तक दोनों एकदूसरे को देख नहीं लेते, दिलों को चैन नहीं मिलता था. दोनों के इस प्रेमप्रसंग की किसी को कानोंकान खबर नहीं लगी. यहां तक कि उन के घर वालों तक को भी नहीं. बाद में दोनों दुकान के अलावा चोरीछिपे भी मिलने लगे. हालांकि दोनों की जाति अलगअलग थी, इस के बावजूद उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया था. एक बार बेबी ने अमित से पूछ लिया, ‘‘अमित, वैसे तो मैं जातपात में विश्वास नहीं करती, पर समाज से डर कर तुम मुझे कहीं भूल तो नहीं जाओगे?’’

इस पर अमित ने उस के होंठों पर हाथ रख कर चुप कराते हुए कहा, ‘‘बेबी, अगर हमारा प्यार सच्चा है तो चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, हम जुदा नहीं होंगे.’’

दोनों ने फैसला किया कि एकदूसरे के लिए ही जिएंगे. आखिर किसी तरह बेबी के घर वालों को पता चल गया कि उन की बेटी का गांव के ही दूसरी जाति के युवक से प्रेमप्रसंग चल रहा है. इस से घर वालों की चिंता बढ़ गई. गुड्डू ने पत्नी से कहा कि वह बेटी पर ध्यान दे. उस के पांव बहक रहे हैं. हाथ से निकल गई या कोई ऊंचनीच कर बैठी तो समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे. उसे अमित के करीब जाने से मना कर दे. बेबी की मां ने समझदारी दिखाते हुए यह बात बेटी को सीधे तरीके से न कह कर अप्रत्यक्ष ढंग से समझाई. वह जानती थी कि बेटी सयानी हो चुकी है. सीधेसीधे बात करने से उसे बुरा लग सकता था. वैसे भी बेबी जिद्दी स्वभाव की थी, जो मन में ठान लेती थी, उसे पूरा करती थी.

बेबी अपनी मां की बात को अच्छी तरह समझ गई थी कि वह क्या कहना चाहती है. लेकिन उस के सिर पर अमित के इश्क का भूत सवार था. उसे अमित के अलावा किसी और की बात समझ में नहीं आती थी. उस ने मां से साफसाफ कह दिया कि वह अमित से प्यार करती है और शादी भी  उसी से करेगी. अमित और बेबी जान चुके थे कि उन के प्यार के बारे में दोनों के घर वालों को पता लग चुका है. दोनों परिवार इस रिश्ते को किसी भी तरह स्वीकार नहीं करेंगे, इस बात को ले कर अमित काफी परेशान रहने लगा था. बेबी किसी भी तरह अपने मांबाप की बात मानने को तैयार नहीं हुई. अमित और बेबी के प्रेम प्रसंग के चर्चे अब गांव में भी होने लगे थे. बात जब हद से आगे निकलने लगी तो गुड्डू ने बिरादरी में होने वाली बदनामी से बचने के लिए अपने चचेरे भाई सचिन से इस संबंध में बात की.

निर्णय लिया गया कि बिना देरी किए बेबी के लिए लड़का तलाश कर उस के हाथ पीले कर दिए जाएं. इस की भनक जब बेबी को लगी तो उस ने विरोध किया. उस ने कह दिया कि अभी वह पढ़ रही है. पढ़ाई पूरी नहीं हुई है. इसलिए शादी नहीं करेगी. वह पढ़ाई कर के नौकरी करना चाहती है. लेकिन चाचा सचिन ने उस की बात का विरोध करते हुए कहा, ‘‘पढ़ाई का शादी से कोई संबंध नहीं होता. पढ़ने से तुम्हें ससुराल में भी कोई नहीं रोकेगा.’’

घर वालों ने भागदौड़ कर बदायूं के दातागंज में बेबी की शादी तय कर दी. एक माह बाद यानी 16 जून, 2020 को गांव में बेबी की बारात आनी थी. जब अमित को इस बात का पता चला, तो उस का दिल टूट गया. उस ने बेबी के साथ भविष्य के जो सपने संजोए थे, बिखरते दिखे. एक दिन अमित बेबी के घर जा पहुंचा. उस ने बेबी के घर वालों को बताया कि वह और बेबी एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं. घर में मौजूद बेबी ने भी अमित के अलावा किसी दूसरे के साथ शादी करने से इनकार कर दिया. लेकिन बेबी के घर वालों के सामने अमित और बेबी की एक नहीं चली. घर वालों ने अमित से बेबी की शादी से साफ मना कर दिया. उन्होंने कहा कि बेबी की शादी अपनी जाति के लड़के से ही करेंगे.

बेबी की शादी में मात्र 2 दिन शेष रह गए थे. 2 दिन बाद प्रेमिका के घर शहनाइयां बजने वाली थीं. अमित को कुछ सूझ नहीं रहा था. उस की हालत पागलों जैसी हो गई थी. अमित की दुकान भी कई दिनों से बंद थी. उस का मन बेबी में अटका हुआ था. वह किसी तरह एक बार बेबी से मिल कर दिल की बात कहना चाहता था. लेकिन बेबी पर उस के घर वालों का कड़ा पहरा था. बेबी के परिवार में खुशियों का माहौल था. शादी की तैयारियों में घर वालों के साथसाथ रिश्तेदार व गांव के परिचित भी लगे हुए थे. 14 जून की सुबह 5 बजे बेबी अपनी बुआ, तहेरी बहन और ताई के साथ खेतों की ओर निकली.

आधे घंटे बाद बेबी खेत से घर लौट रही थी. वह अपने घर के दरवाजे के पास पहुंची तभी अमित आ गया. उस ने बेबी से साथ चलने को कहा. पर बेबी ने उस के साथ जाने से मना कर दिया. अमित ने अपने प्यार की दुहाई दी, लेकिन बेबी पर कोई असर नहीं हुआ. इस से अमित आपा खो बैठा और साथ लाए तंमचे से बेबी के ऊपर फायर कर दिया. गोली बेबी की कमर व बांह में लगी, वह चीख कर वहीं गिर पड़ी. बेबी को गोली मारने के बाद अमित तमंचा लहराता हुआ गांव के बाहर भागा. कुछ देर बाद पता चला कि अमित ने बेबी के घर से लगभग 400 मीटर दूर ग्राम प्रधान के घर के पास खाली मैदान में खुद को गोली मार ली है.

सुबहसुबह गांव में गोली चलने की आवाज सुन कर गांव वाले एकत्र हो गए. अमित की रक्तरंजित लाश देख कर गांव में हड़कंप मच गया, जिस ने भी यह दृश्य देखा वह सन्न रह गया. किसी ने अमित के घर वालों को घटना की जानकारी दे दी. जानकारी मिलते ही अमित के घर वाले घटनास्थल की ओर दौड़े, अमित के सीने में गोली लगी थी. उस की मौत हो चुकी थी. लाश के पास ही तमंचा पड़ा था. अमित की मौत की खबर सुन कर उस की मां रोतेरोते बेहोश हो गई. चौकीदार नत्थूलाल की सूचना पर थाने से पुलिस टीम के साथ एसआई खेम सिंह गांव इस्माइलपुर पहुंच गए. गांव की सीमा पर भीड़ जुटी थी.

एसआई ने मैदान में युवक की लाश के पास सिपाही तैनात करने के साथ ही घायल बेबी को एंबुलेंस से मझगवां अस्पताल भिजवाया, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. इस बीच जानकारी होने पर थानाप्रभारी राजेश कुमार सिंह व सीओ आंवला रामप्रकाश भी घटनास्थल पर पहुंच गए. थानाप्रभारी ने पुलिस के आला अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दे दी. इस पर एसएसपी शैलेश पांडेय व एसपी (देहात) संसार सिंह भी घटनास्थल पर आ गए. फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया गया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. साथ ही गांव वालों से पूछताछ भी की. मृतक व घायल युवती के घर वालों से भी घटना के संबंध में जानकारी हासिल की गई.

युवक के घर वालों ने जहां युवती के घर वालों पर औनरकिलिंग का आरोप लगाया, वहीं युवती के घर वालों ने बताया कि मृतक ने हमारी बेटी को गोली मार कर घायल किया और फिर खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने मौकाएवारदात से 312 बोर का एक तमंचा बरामद किया. इस के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. फोरैंसिक टीम ने भी युवती के दरवाजे के पास से व युवक की लाश के आसपास जांच कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए. बेबी की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल से एक निजी मिशन अस्पताल में ले जाया गया. इस सनसनीखेज घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई थी. इसे देखते हुए गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई.

पुलिस भले ही प्रेमिका को गोली मार कर प्रेमी द्वारा खुदकुशी करने की बात कह रही थी, लेकिन गांव के बहुत से लोगों के गले यह बात नहीं उतर रही थी. उन का कहना था कि यदि अमित अपनी प्रेमिका को गोली मार कर उस के साथ अपना भी जीवन खत्म करना चाहता था तो उस ने खुदकुशी करने के लिए वहां से लगभग 400 मीटर दूर जगह क्यों चुनी. दूसरी बात खुदकुशी करने वाला तमंचे से गोली अकसर अपनी कनपटी पर मारता है, जबकि अमित के सीने में गोली लगी थी. तमंचा उस के शव से 3 मीटर दूर पड़ा मिला. वहीं खोखा भी एक ही मिला, जबकि गोली 2 चली थीं. गांव में प्रेमप्रसंग में हत्या किए जाने का शक जाहिर किया जा रहा था.

बेबी की मां का कहना था कि प्रेम प्रसंग नहीं था. उन की बेटी व मृतक की बहन पक्की सहेली थीं. नौकरी के लिए फार्म भरने को बेटी ने उसे अपने प्रमाणपत्र दिए थे. मृतक की बहन अब उन्हें नहीं लौटा रही थी. जिन्हें न देने की वजह से दोनों परिवारों में तनातनी थी. बेबी अमित से प्यार नहीं करती थी. अमित की मां के अनुसार युवती की शादी तय हो जाने व उस के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगाने से अमित मानसिक रूप से परेशान था. कुछ दिन पहले उस ने नींद की गोलियां खा कर भी जान देने की कोशिश की थी. वह बेबी से शादी करना चाहता था. लड़की भी अमित से शादी की जिद पर अड़ी थी. उस के घर वालों ने धमकी दी थी कि तुझे और अमित दोनों को मार देंगे. इस के बाद भी लड़की नहीं मान रही थी.

मां ने बताया कि सुबह अमित के पास वीरपाल प्रधान का फोन आया था. वह उसे बुला रहे थे, वह उसी समय घर से चला गया था. इस के बाद यह घटना हो गई. वहीं पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे अमित के बड़े भाई राजबाबू के अनुसार अमित पिछले 2 साल से बेबी के संपर्क में था, 3 माह पूर्व दोनों ने गुपचुप तरीके से कोर्टमैरिज कर ली थी. इस बात की जानकारी घटना से कुछ दिन पहले ही अमित ने घर वालों को दी थी. लेकिन हम ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया था. उधर युवती भी दूसरी जगह शादी नहीं करना चाहती थी. वह भी अमित से शादी की जिद पर अड़ी थी. उस ने अपने घर वालों से कह दिया था कि बारात लौटा दो. यह जानकारी मिलने पर बेबी के घर वालों ने प्रधान से साजिश कर पहले अपनी बेटी और फिर उस के भाई को गोली मार दी.

शाम को पोस्टमार्टम के बाद अमित के घर वालों ने मझगवां-आंवला मार्ग पर उस का शव रख कर हंगामा किया. घर वालों का आरोप था कि अमित की हत्या बेबी के घर वालों ने की है. पुलिस उन के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कर रही है. सूचना पर मौके पर पहुंचे एसडीएम कमलेश कुमार सिंह व सीओ रामप्रकाश ने उन्हें समझाया, लेकिन जब वे नहीं माने तब हलका बल प्रयोग कर उन्हें वहां से हटा दिया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. रिपोर्ट में अमित द्वारा सल्फास खाने की भी पुष्टि हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक गोली ऐन दिल पर लगी थी, छर्रे आसपास भी धंसे थे. घायल युवती के पिता गुड्डू ने थाने में मृतक अमित व उस के भाइयों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई.

बेबी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने आत्महत्या करने वाले प्रेमी अमित सहित उस के भाइयों राजबाबू, अजय, सुमित, कल्लू व विनोद गुप्ता के खिलाफ जान से मारने की नीयत से हमला करने की रिपोर्ट दर्ज कर ली. वहीं एसआई खेम सिंह की ओर से भी मृतक पर अवैध तमंचा रखने तथा खुदकुशी करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया. रिपोर्ट में मृतक पर एकतरफा प्यार करने का भी आरोप लगाया गया था.

इस तरह एक प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत हो गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित