UP Crime News : पूजा ने प्रौपर्टी के लिए सास को मरवाया

UP Crime News : पति को छोडऩे के बाद 28 वर्षीय पूजा को कल्याण राजपूत से प्यार हो गया. उस के साथ वह लिवइन रिलेशन में रहने लगी. एक्सीडेंट में कल्याण की मृत्यु हो जाने के बाद पूजा ने जेठ संतोष राजपूत को फांस लिया. खूबसूरत पूजा से शादी करने के बाद संतोष की पहली पत्नी रागिनी उपेक्षा के चलते मायके चली गई. इसी बीच पूजा की 55 वर्षीय सास सुशीला की हत्या हो गई. किस ने की यह हत्या और इस की क्या वजह रही?

पूजा अपनी मासूम बेटी रूबी के साथ बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी के घर ग्वालियर पहुंची तो कमला ने उसे हाथोंहाथ लिया और खूब खातिरदारी की. पूजा को बहन के घर रहते कई दिन बीत चुके थे, लेकिन वह खुश नहीं थी. वह हमेशा चिंता में डूबी रहती. न ढंग से खाना खाती और न ही चेहरे पर मुसकान होती.

कमला उर्फ कामिनी ने छोटी बहन को इस हाल में देखा तो एक रोज शाम को चाय पीने के दौरान उस ने पूछा, ”पूजा, तुम दिनरात किस चिंता में डूबी रहती हो. न ढंग से बात करती हो और न ही हंसतीमुसकराती हो. क्या पति से झगड़ कर आई हो या फिर ससुर ने कुछ कहा है. जो भी बात हो मुझे खुल कर बताओ.’’

”दीदी, ऐसी कोई बात नहीं है. न मैं पति से झगड़ कर आई हूं और न ही ससुर ने कुछ कहा है. वे दोनों तो मुझे खूब प्यार करते हैं और हर बात मानते हैं. उन से हमें कोई शिकवाशिकायत नहीं है.’’ पूजा बोली.

”फिर इतनी परेशान क्यों है?’’ कमला ने पूजा को बीच में ही टोका.

”दीदी, मेरी परेशानी की वजह मेरी सास सुशीला देवी है.’’

”वह कैसे?’’ कमला ने पूजा के चेहरे पर नजरें गड़ा दीं.

”दीदी, मैं अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेच कर ग्वालियर शहर में बसना चाहती हूं. मेरी बेटी अब सयानी हो रही है. उसे शहर में पढ़ालिखा कर उस का जीवन संवारना चाहती हूं. मेरे पति व ससुर तो जमीन बेचने को राजी हैं, लेकिन सास सुशीला देवी अड़चन बनी है.’’

कमला और पूजा अभी आपस में बातें कर ही रही थीं कि तभी कमला का प्रेमी अनिल वर्मा वहां आ गया. वह भी उन की बातों में शामिल हो गया. पूजा की समस्या को समझने के बाद अनिल वर्मा बोला, ”पूजा, यदि सासरूपी तुम्हारी बाधा को मैं दूर कर दूं तो मुझे और कमला को क्या हासिल होगा?’’

पूजा को बाधा यानी यह समस्या दूर होने की उम्मीद जागी तो वह बोली, ”जमीन बिकने पर जो पैसा मिलेगा, उस में से तुम दोनों को भी हिस्सा दूंगी. बस किसी तरह इस प्रौब्लम दूर कर दो.’’

पैसा मिलने के लालच में अनिल वर्मा व उस की प्रेमिका कमला उर्फ कामिनी, पूजा की सास सुशीला देवी की हत्या करने को राजी हो गए. इस के बाद पूजा, कमला व अनिल वर्मा ने कान से कान जोड़ कर सुशीला देवी की हत्या की योजना बनाई. साथ ही प्लान ए और बी भी बनाया. प्लान ए के तहत हत्या के आरोप में पूजा के ससुर को जेल भिजवाना तथा प्लान बी के तहत पुलिस से बचाव करना.

22 मई 2025 को पूजा की बेटी रूबी का जन्मदिन था. पूजा ने योजना के तहत अपने पति संतोष राजपूत व ससुर अजय प्रताप राजपूत से फोन पर बात की और उन्हें बेटी के जन्मदिन पर आने का न्योता दिया और ग्वालियर आने को कहा. उस ने ऐसा इसलिए किया ताकि घर में सास सुशीला अकेली पड़ जाए और उस की हत्या आसानी से की जा सके.

पूजा के बुलाने पर संतोष और उस के पापा अजय प्रताप राजपूत ग्वालियर आ गए. रूबी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया. जश्न में कमला का प्रेमी अनिल वर्मा भी शामिल हुआ. दूसरे रोज पूजा ने पति संतोष को यह कह कर रोक लिया कि वह पेट से है, लेकिन दूसरा बच्चा अभी नहीं चाहती. अत: अस्पताल चल कर गर्भपात कराना है. ससुर अजय प्रताप को भी पूजा ने बहाने से रोक लिया. ससुर ने उसे 5 हजार रुपए भी खर्च के लिए दिए. अजय प्रताप को क्या पता था कि उस की शातिर बहू उसी के साथ छल कर रही है और उस की पत्नी का काल बनने जा रही है.

पूजा का पति व ससुर ग्वालियर में थे और पूजा की सास सुशीला देवी गांव में अकेली थी, अत: उचित मौका देख कर योजना के तहत कमला और अनिल वर्मा 24 जून, 2025 की सुबह 5 बजे बाइक से कुम्हरिया गांव स्थित सुशीला देवी के घर पहुंचे. सुशीला घर पर ही थी. पूजा की बहन कमला को सुशीला जानती थी. अत: उस ने उसे घर के अंदर आदर भाव से बिठाया और चायनाश्ता कराया. दोनों ने आधेआधे कप चाय पी. फिर अनिल और कमला ने सुशीला को अचानक दबोच लिया और बैड पर गिरा कर रस्सी से उस के हाथपैर बांध कर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया.

सुशीला चीख न सके, इस के लिए उन दोनों ने उस के मुंह में कपड़ा ठूूंस दिया, फिर उसी की चुनरी से उसे गला घोंट कर मार डाला. हत्या करने के बाद कमला व अनिल ने घर में लूटपाट की और नकदी तथा सोनेचांदी के गहने ले कर फरार हो गए. 24 जून, 2025 को दोपहर बाद अजय प्रताप राजपूत ग्वालियर से कुम्हरिया गांव स्थित अपने घर पहुंचे तो घर के मुख्य दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद थी. वह कुंडी खोल कर घर के अंदर कमरे में पहुंचे तो कमरे का नजारा देख कर चौंक गए. बैड पर उन की पत्नी सुशीला देवी की लाश पड़ी थी. वह चीखते हुए बाहर आए.

चाचा की चीख सुन कर सौरभ राजपूत आ गया. उस ने चाची की हत्या की बात सुनी तो वह भी दंग रह गया. इस के बाद तो पूरे गांव में कोहराम मच गया और लोगों की भीड़ अजय प्रताप के घर जुटने लगी. इसी बीच सौरभ ने चाची सुशीला की हत्या की सूचना थाना टहरौली पुलिस तथा डायल 112 पर दे दी. हत्या की सूचना पाते ही एसएचओ सुरेश कुमार पुलिस टीम के साथ कुम्हरिया गांव पहुंच गए. उन की सूचना पर एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति, सीओ अरुण कुमार राय तथा एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया.

मृतका सुशीला का शव बैड पर पड़ा था. बैड के एक सिरे से उस के हाथ तथा दूसरे सिरे से रस्सी से उस के पैर बंधे थे. मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था. मृतका की उम्र 55 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या बेहोश कर गला घोंट कर की गई थी. बेहोशी का इंजेक्शन बेड के नीचे पड़ा था. साक्ष्य के तौर पर पुलिस ने उस खाली पड़े इंजेक्शन को सुरक्षित कर लिया. एक कमरे का ताला टूटा पड़ा था और बक्से का ताला भी टूटा पड़ा था. उस में रखा सामान कमरे में फैला था. जिस कमरे में बैड पर लाश पड़ी थी, उसी कमरे में छोटी सी मेज पर चाय के 2 कप तथा नमकीन, बिसकुट की प्लेटें रखी थीं. आधाआधा कप ही चाय पी गई थी.

निरीक्षण के बाद एसएसपी ने शव को झांसी के जिला अस्पताल पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दिया और एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह को हत्या के खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने तब एक स्पैशल टीम बनाई, जिस में एसएचओ के अलावा सर्विलांस तथा एसओजी के तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. साथ ही खास खबरियों को भी लगा दिया. पुलिस की इस स्पैशल टीम ने सब से पहले घर के मुखिया अजय प्रताप से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि हत्यारे एक लाख नकद तथा 8 लाख के जेवर भी लूट ले गए थे.

”तुम्हें किसी पर शक है?’’ एसपी ज्ञानेंद्र सिंह ने अजय राजपूत से पूछा.

”हां सर, मुझे बड़ी बहू रागिनी और उस के भाई आकाश पर शक है. रागिनी सुशीला से खुन्नस रखती थी. इसी खुन्नस में दोनों ने मिल कर मेरी पत्नी की हत्या की होगी.’’

अजय राजपूत के अलावा पुलिस टीम ने उस के बेटे संतोष व भतीजे सौरभ राजपूत से भी पूछताछ की.

ससुर को क्यों फंसाना चाहती थी पूजा

अजय के भतीजे सौरभ राजपूत ने बताया कि चाचा की चीख सुन कर वह घर आया तो चाची बैड पर मृत पड़ी थीं. उस ने ही पुलिस को सूचना दी थी. उस ने बताया कि सुबह 5 बजे एक युवक व एक युवती चाची के घर बाइक से आए थे. वे दोनों मुंह पर कपड़ा बांधे थे. उन्होंने घर से करीब 100 मीटर दूर अपनी बाइक खड़ी की थी. लगभग डेढ़ घंटा बाद वे चले गए थे. उस समय भी दोनों के मुंह पर कपड़ा बंधा था, इसलिए वह उन दोनों को पहचान नहीं पाया था. बाइक दूर खड़ी थी, इसलिए नंबर भी नोट नहीं कर पाया.

सौरभ ने यह भी बताया कि 3:10 बजे उस की पत्नी के मोबाइल फोन पर एक काल आई थी. यह काल पूजा ने अपने नंबर से न कर के दूसरे के मोबाइल नंबर से की थी और चाची का हालचाल पूछा था. सौरभ ने वह नंबर पुलिस को दे दिया. इधर संदेह के आधार पर पुलिस ने अजय प्रताप की तहरीर पर दतिया निवासी आकाश व उस की बहन रागिनी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच में जुट गई. पुलिस टीम दूसरे रोज रागिनी व आकाश की तलाश में दतिया को निकलने ही वाली थी कि आकाश और रागिनी स्वयं ही थाना टहरौली आ गए. उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि सुशीला देवी की हत्या हो गई है और रिपोर्ट उन के खिलाफ दर्ज की गई है तो वे घबरा गए और थाने आ गए.

रागिनी ने पुलिस के सामने कहा कि यह बात सही है कि वह पूरे परिवार से नफरत करती है, क्योंकि पति संतोष राजपूत ने विधवा देवरानी पूजा से शादी रचा कर उस के साथ छल किया तो दूसरी ओर सासससुर ने पूजा को जरूरत से ज्यादा प्यारदुलार दे कर उस के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई. वह सौतन को कब तक बरदाश्त करती. इसलिए ससुराल छोड़ कर मायके में आ कर रहने लगी. रागिनी ने कहा कि उस ने सास की हत्या नहीं की. उसे और उस के भाई को हत्या के मामले में झूठा फंसाया जा रहा है. सास की हत्या का राज ससुर अजय व उस की बहू पूजा के पेट में ही छिपा है.

रागिनी ने जिस बेबाकी से अपनी बात पुलिस को बताई, उस से पुलिस को लगा कि रागिनी व उस का भाई आकाश निर्दोष हैं. उन्हें थाने से जाने दिया. हां, इतना जरूर कहा कि सहयोग के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाए, वे थाने पर जरूर आएं. रागिनी के बयान के आधार पर अजय प्रताप की बहू पूजा शक के दायरे में आ गई थी. शक का दूसरा कारण यह भी था कि सास सुशीला की हत्या को 3 दिन बीत गए थे, लेकिन पूजा ग्वालियर से ससुराल नहीं आई थी. मोबाइल फोन के जरिए ही वह पति व ससुर के संपर्क में थी और पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी ले रही थी. जबकि सास की मौत की खबर पाते ही उसे ससुराल आ जाना चाहिए था.

27 जून, 2025 को पुलिस टीम ने शक के आधार पर पूजा को उस के पति संतोष के सहयोग से ग्वालियर स्थित घर से हिरासत में ले लिया और थाना टहरौली ले आई. थाने में उस से सास सुशीला की हत्या के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गई. बोली, ”साहब, मैं तो ग्वालियर में थी. पति व ससुर भी मेरे साथ थे. मुझे क्या पता कि सास को किस ने मारा?’’

”तुम ने सुशाीला की हत्या नहीं की तो फिर किस ने की?’’ टीम के एक दरोगा ने उस से पूछा.

”साहब, मुझे तो अपने ससुर अजय प्रताप राजपूत पर ही शक है. वह सास से खुन्नस रखते थे. सास को शक था कि ससुर मुझे चाहते हैं और संबंध बनाना चाहते हैं.’’

पूजा के बयान के आधार पर पुलिस टीम कुम्हरिया गांव पहुंची और अजय प्रताप राजपूत को पकड़ कर थाने ले आई. रात भर उन से सख्ती से पूछताछ की गई, लेकिन वह अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करते रहे.

सुबह पुलिस टीम ने पूजा व अजय प्रताप राजपूत को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की. पूजा ने अपनी बात दोहराई और ससुर अजय प्रताप से कहा कि वह सास की हत्या का जुर्म कुबूल कर लें. वह उन्हें जल्द ही जमानत पर छुड़ा लेगी.

पूजा की बात सुन कर अजय प्रताप सन्न रह गए. वह सोचने लगे जिस बहू को उन्होंने ससम्मान घर में रखा, लाड़प्यार दिया, वही बहू उसे हत्या जैसे मामले में फंसाना चाहती है. उन के दिमाग में विचार कौंधा कि कहीं पूजा ने ही तो सुशीला की हत्या नहीं कराई. क्योंकि पूजा जमीन बेचना चाहती थी और सुशीला विरोध करती थी.

अजय ने तब सारी बात पुलिस को बताई और अब हत्या का शक पूजा पर जताया. पूजा अब पूरी तरह से शक के घेरे में आ गई थी. अत: पुलिस टीम ने पूजा से सख्ती से पूछताछ की. पूजा ने तब सास की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. पूजा ने बताया कि मैं अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेच कर ग्वालियर में बसना चाहती थी. लेकिन सास सुशीला बाधक बन गई थी. इसी जमीन के लिए मैं ने सास की हत्या करवाई. हत्या के लिए मैं ने रुपयों का लालच दे कर बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी व उस के प्रेमी अनिल वर्मा को तैयार किया. ससुर को फंसाना भी साजिश का हिस्सा था. ससुर जेल चले जाते तो जमीन बिकने में कोई अड़चन नहीं आती. कमला व उस के प्रेमी अनिल वर्मा ने ही प्लान के तहत सास की हत्या की और घर में लूटपाट भी की.

पूजा ने गुनाह कुबूल किया तो पूजा की मदद से पुलिस टीम ने पूजा की बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी को भी ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया. लेकिन अनिल वर्मा पुलिस को चकमा दे गया. कमला उर्फ कामिनी को थाना टहरौली लाया गया. एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह व सीओ (टहरौली) अरुण कुमार राय ने जब कमला से सुशीला की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने सहज ही हत्या व लूटपाट का जुर्म कुबूल कर लिया, लेकिन उस के पास से लूटपाट की ज्वैलरी बरामद नहीं हुई. जेवर के बारे में पूछने पर कमला ने बताया कि लूटपाट के जेवर उस के प्रेमी अनिल वर्मा के पास हैं. वह जेवर को बेचने की फिराक में किसी ज्वैलर के संपर्क में है.

चूंकि पूजा और उस की बहन कमला उर्फ कामिनी ने सुशीला देवी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: पुलिस ने मृतका के पति अजय प्रताप की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) व (61) के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. दूसरे रोज (29 जून) को उन्हें झांसी की कोर्ट में पेश कर जिला जेल भेज दिया गया. चूंकि लूट का माल कमला के प्रेमी अनिल वर्मा के पास था. उस की खोज में पुलिस टीम जुट गई. पुलिस ने उस की टोह में खास खबरियों को भी लगा दिया.

30 जून, 2025 की रात 9 बजे एक खास मुखबिर से थाना टहरौली के एसएचओ सुरेश कुमार को सूचना मिली कि वांछित अपराधी अनिल वर्मा किसी रिश्तेदार के यहां लूटी गई ज्वैलरी पहुंचाने के इरादे से बघौरा के घुरैया तिराहे से निकलने वाला है. इस सूचना पर सीओ (टहरौली) अरुण कुमार राय, इंसपेक्टर सुरेश कुमार तथा उल्दन थाने के एसएचओ दिनेश कुमार पुलिस टीम के साथ घुरैया तिराहे पहुंचे और चैकिंग शुरू कर दी.

रात 10 बजे के लगभग पुलिस को एक संदिग्ध बाइक सवार आता दिखा. पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन उस ने बाइक दौड़ा दी और पुलिस पर फायर झोंक दिया. जवाबी काररवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई. गोली अनिल वर्मा के पैर में लगी और वह घायल हो गया. पुलिस ने तब अनिल वर्मा को दबोच लिया. पुलिस को उस के पास से 8 लाख रुपए कीमत के आभूषण बरामद हो गए, जो उस ने सुशीला देवी हत्या के बाद लूटे थे. पुलिस ने हत्या में प्रयोग उस की बाइक तथा तमंचा भी अपने कब्जे में ले लिया. उस ने हत्या में प्रयुक्त सीरिंज भी बरामद करा दी, जो उस ने बाइक की डिक्की में छिपा दी थी.

पुलिस जांच, आरोपियों के बयानों एवं मृतका के फेमिली वालों द्वारा दी गई जानकारी के तहत झांसी की कातिल हसीना की दिल को झकझोर देने वाली कहानी प्रकाश में आई. उत्तर प्रदेश के झांसी शहर के थाना प्रेमनगर अंतर्गत एक मोहल्ला है— नगरा महावीरन. इसी मोहल्ले में बोधराम जाटव परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी सरला के अलावा 2 बेटे निरपत, गणपत तथा 2 बेटियां कमला तथा पूजा थीं. बोधराम रेलवे में लोको पायलट थे. बड़ी बेटी कमला उर्फ कामिनी सयानी हुई तो उन्होंने उस का विवाह हजीरा (ग्वालियर) निवासी सूरज जाटव से कर दिया.

बोधराम की बेटी पूजा अपने भाईबहनों में सब से छोटी थी. जब वह 7 साल की थी, तभी उस की मम्मी सरला की मौत हो गई थी. पूजा की भाभी लीलावती ने उसे पालपोस कर बड़ा किया था. यौवन की दहलीज पर आते ही उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया था. जो भी उसे देखता, मंत्रमुग्ध सा हो जाता. घर के सभी लोग उसे बेहद प्यार करते थे. इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद पूजा की पढ़ाई पर विराम लग गया था. पूजा सयानी हुई तो बोधराम को उस के विवाह की चिंता सताने लगी. उस ने बेटी के लिए योग्य वर की खोज शुरू की तो उसे रमेश जाटव पसंद आ गया. रमेश जाटव रेलवे में नौकरी करता था और संयुक्त परिवार के साथ ओरछा में रहता था. रमेश पसंद आया तो बोधराम ने 4 मई, 2014 को पूजा का विवाह रमेश के साथ धूमधाम से कर दिया.

शादी के बाद कुछ माह तक दोनों का जीवन हंसीखुशी से बीता. उस के बाद दोनों के बीच कलह होने लगी. कलह का पहला कारण था संयुक्त परिवार में रहना. पूजा अपने सासससुर के साथ रहने के बजाय अलग रहना चाहती थी. लेकिन रमेश को अलग रहना पसंद न था. दूसरा कारण था पूजा की फैशनपरस्ती. वर्ष 2016 के जुलाई माह में रमेश पर किसी ने जानलेवा हमला किया. उस पर गोली चला दी, लेकिन उस की जान बच गई. उस रोज वह पूजा को मायके से ले कर अपने घर ओरछा जा रहा था. रमेश को शक हुआ कि गोली पूजा ने चलवाई थी, अत: उस ने थाना प्रेमनगर में पूजा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी.

पुलिस ने पूजा को आम्र्स एक्ट की धारा 25/4 व आईपीसी की धारा 506 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस के बाद पूजा व रमेश के बीच अलगाव हो गया. पूजा लगभग 6 माह तक जेल में रही. उस के बाद बोधराम ने पूजा की जमानत करा ली और वह मायके में रहने लगी. मुकदमे की पैरवी के लिए पूजा झांसी कोर्ट जाती थी. कोर्ट में ही एक रोज पूजा की मुलाकात कल्याण उर्फ लाखन राजपूत से हुई. कल्याण पर भी चोरी, लूट व मारपीट के लगभग आधा दरजन मुकदमे दर्ज थे. इन्हीं की पैरवी के लिए वह भी कोर्ट आता था.

कोर्ट की हुई मुलाकात ऐसे बदली प्यार में

कल्याण उर्फ लाखन के पापा अजय प्रताप राजपूत झांसी जिले के कुम्हरिया गांव के रहने वाले थे. परिवार में पत्नी सुशीला देवी के अलावा 2 बेटे संतोष व कल्याण थे. उन के पास खेती की 16 बीघा भूमि थी. बड़े बेटे संतोष की शादी हो चुकी थी. उस की पत्नी रागिनी सुंदर व सुशील थी. घरगृहस्थी वही संभालती थी. उन का छोटा बेटा कल्याण उर्फ लाखन अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए उस का विवाह नहीं हुआ था.  पूजा और कल्याण राजपूत पहली ही मुलाकात में एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए थे. उन के बीच दोस्ती हो गई और खुल कर बातचीत होने लगी. मोबाइल फोन पर भी वे घंटों बतियाने लगे. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई.

प्यार परवान चढ़ा तो पूजा झांसी के गुमनावारा में किराए के मकान में कल्याण के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. पूजा के भाई निरपत को कल्याण के साथ रहना अच्छा न लगा, इसलिए उस ने पूजा से रिश्ता खत्म कर लिया. बोधराम भी चिंता में लकवाग्रस्त हो गए. उन्होंने भी पूजा से नाता तोड़ दिया. 25 मई, 2019 को कोंछा झाबर के पास सड़क दुर्घटना में कल्याण की मौत हो गई. पूजा विधवा हो गई और उस पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा. बेटे की मौत का अजय व उन की पत्नी सुशीला को भी गहरा सदमा लगा.

कल्याण की तेरहवीं वाले दिन पूजा कुम्हरिया गांव ससुराल आ गई. वह सुशीला देवी की गोद में सिर रख कर रोने लगी और बोली, ”मम्मी, अब मैं कहां जाऊं. मेरा कोई नहीं है. बचपन में मम्मी मर गई और भाई व पापा ने भी नाता तोड़ लिया. अब मैं एक तरह से अनाथ हूं.’’

पूजा के आंसुओं ने सुशीला देवी का दिल पिघला दिया. उस ने पूजा को गले लगा कर उसे बहू के रूप में स्वीकार कर लिया. हालांकि फेमिली के लोगों ने विरोध किया और कहा कि वह छोटी जाति की है. लेकिन सुशीला के आगे किसी की नहीं चली.

पूजा अब ससुराल में खुशीखुशी रहने लगी. रागिनी ने भी पूजा को अपनी देवरानी के रूप में स्वीकार कर लिया. देवरानीजेठानी घर का काम मिलजुल कर करतीं और हंसीखुशी से रहतीं. पूजा ने अपनी सेवा से सासससुर का भी दिल जीत लिया था. पूजा खूबसूरत व जवान थी. उस ने जेठ संतोष पर नजरें गड़ानी शुरू कर दीं. संतोष भी पूजा की खूबसूरती का कायल था और मन ही मन उसे चाहता था. संतोष रंगीनमिजाज था. रिश्तेनाते उस के लिए कोई मायने नहीं रखते थे. बहू और जेठ का रिश्ता होने के बावजूद वह पूजा के जिस्म को पाने के लिए लालायित रहने लगा. पूजा को रिझाने के लिए उस ने तरहतरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए.

मर्द जिस नजर से औरत को देखता है, उस से वह उस के मन का भाव समझ जाती है. संतोष जिस तरह से ललचाई नजरों से उस के शबाब को निहारता था, उस से पूजा समझ गई कि जेठ की नीयत ठीक नहीं है. पूजा भी जेठ को अपना बनाना चाहती थी, इसलिए उस ने कभी टोकाटाकी नहीं की.

जेठ को फांस कर जेठानी को किया दूर

संतोष अब पूजा से बतियाने भी लगा था. बातचीत में वह पूजा के रूप की प्रशंसा तो करता ही, उस के व्यवहार की भी खूब तारीफ करता. पूजा भी उस की बातों में रस लेने लगी थी. धीरेधीरे दोनों के बीच का परदा हटता गया और फिर एक दिन उन के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. रागिनी मायके से वापस आई तो उसे पूजा की चालढाल पर शक हुआ. उस ने निगरानी शुरू की तो एक रात उस ने पति को पूजा की बांहों में झूलते देख लिया. वह समझ गई कि पूजा उस की सौतन बन गई है.

उस ने इस नाजायज रिश्ते का विरोध किया तो संतोष और पूजा उसी पर हावी हो गए. सास और ससुर ने भी चुप्पी साध ली. उन दोनों ने रागिनी को समझाया कि घर की बात है, घर में ही रहने दो. मजबूरन रागिनी ने पूजा को सौतन के रूप में स्वीकार कर लिया. कुछ दिनों बाद मामला ठंडा पड़ा तो संतोष ने पूजा के साथ शादी रचा ली और उसे पत्नी का दरजा दे दिया. शादी के एक साल बाद पूजा ने एक बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म से घर में खुशियां छा गईं. सभी उसे बेहद चाहते थे.

पूजा से शादी करने के बाद संतोष ज्यादा समय उसी के साथ बिताता था. वह पूजा की हर बात मानता था और उसे भरपूर प्यार देता था. जबकि रागिनी पति के प्यार के लिए तरसती रहती थी. संतोष उस की कोई बात नहीं मानता था और अकसर उसे अपमानित करता रहता था. वक्त के साथ पूजा की बेटी 3 साल की हो गई थी. पूजा को गांव में अच्छा नहीं लगता था. वह ग्वालियर शहर में बसना चाहती थी. एक रोज उस ने पति व ससुर के सामने इच्छा जताई कि वह अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेचना चाहती है. इस पर थोड़ा नानुकुर के बाद संतोष व अजय प्रताप राजी हो गए, लेकिन जब सास सुशीला को जमीन बेचने की बात पता चली तो उस ने पूजा को आड़े हाथों लिया और जमीन बेचने का विरोध किया.

इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. पूजा जब भी जमीन बेचने की बात करती, सास सुशीला विरोध करती. इस विरोध के कारण पूजा मन ही मन सास से नफरत करने लगी थी. हालांकि पूजा अपने लाड़प्यार तथा सेवा भाव से सास को पटाने की पूरी कोशिश करती थी. इधर घर में रागिनी की हैसियत एक दासी जैसी थी. उसे न कोई प्यार देता था न सम्मान. सास ने मंगलसूत्र भी उस से छीन लिया था. हताश रागिनी का ससुराल में जीना दूभर हो गया तो पिछले साल से वह अपने मायके दतिया में आ कर रहने लगी.

मई, 2025 के पहले सप्ताह में पूजा ने फिर से जमीन बेचने की बात चलाई तो सास सुशीला बाधा बन गई. उस ने पूजा को डांटफटकार भी लगाई. पूजा तब सास से लड़झगड़ कर 16 मई, 2025 को अपनी बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी के घर हजीरा (ग्वालियर) आ गई. बहन के घर रह कर पूजा ने सास सुशीला की हत्या की योजना बनाई.

3 जुलाई, 2025 को पुलिस ने आरोपी अनिल वर्मा को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. पूजा व कमला पहले ही जेल जा चुकी थीं.पूजा के जेल जाने के बाद उस की बेटी संतोष के घर पलबढ़ रही थी. UP Crime News

 

 

Crime Kahani : पैसों के लालच में दोस्त का गला दबा कर मार डाला

Crime Kahani : सुरेश चौहान और लेखराज चौहान की 35 साल पुरानी इतनी गहरी दोस्ती थी कि दोनों बिजनैस भी साझे में करते थे. पिता की तरह इन दोनों के बेटे सचिन और हर्ष में भी दांतकाटी दोस्ती थी. लेकिन मोटी रकम के लालच में लेखराज के बेटे हर्ष ने यह दोस्ती पीपीई किट में दफन कर दी

21 जून, 2021 की दोपहर करीब साढ़े 3 बजे सचिन अपने घर पर सो रहा था, तभी उस के मोबाइल पर वाट्सऐप काल आई. सचिन उठा और जाने के लिए तैयार हुआ. लेकिन वह गया नहीं, कुछ देर बाद कपड़े उतार कर वह लेट गया. बिस्तर पर लेटे हुए वह कुछ सोचने लगा, तभी उसे भूख लगी तो उस ने मां अनीता से खाने के लिए कुछ देने को कहा. मां ने उसे सैंडविच बना कर दिया. इसी बीच दोबारा फोन आया तो सचिन टीशर्ट और लोअर में ही सैंडविच खाते हुए चप्पलें पहने ही घर से जाने लगा. मां ने कहा, ‘‘बेटा, तुम ने अभी नाश्ता भी नहीं किया है, कहां जा रहे हो, पहले नाश्ता तो कर लो?’’

उस ने कहा, ‘‘मां, बस अभी लौट कर आता हूं.’’  सचिन ने कहा और वह घर से चला गया. काफी देर तक जब सचिन नहीं आया तो मां को चिंता हुई. वह उसे लगातार उसे फोन कर रही थी, लेकिन सचिन काल रिसीव करने के बजाय बारबार फोन काट देता था. अनीता समझ नहीं पा रही थीं कि सचिन ऐसा क्यों कर रहा है. उस के आने के इंतजार में रात हो गई. रात 11.37 बजे सचिन के पिता सुरेश चौहान के फोन की घंटी बजी. लेकिन नींद में होने के कारण वह फोन उठा नहीं सके. तब अनीता ने देखा तो वह मिस्ड काल उन के बेटे सचिन की ही थी. तब उन्होंने 11.55 बजे कालबैक की.

मगर सचिन की जगह कोई और फोन पर बात कर रहा था. अनीता ने पूछा कौन बोल रहे हो? इस पर उस ने कहा, ‘‘मैं सचिन का दोस्त हूं.’’

‘‘सचिन कहां हैं?’’ अनीता ने पूछा.

‘‘उस ने शराब ज्यादा पी ली है, इसलिए वह सो रहा है. वैसे सचिन इस समय नोएडा में है.’’ उस ने बताया.

‘‘नोएडा…वह वहां कैसे पहुंचा?’’ उन्होंने पूछा.

‘‘यह बात तो आप को सचिन ही बताएगा.’’

‘‘तुम मेरी सचिन से बात कराओ.’’

‘‘सचिन अभी बात करने की कंडीशन में नहीं है, आप सुबह बात कर लेना,’’ कहते हुए उस ने सचिन का फोन स्विच्ड औफ कर दिया.

उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा के थाना न्यू आगरा के दयालबाग क्षेत्र की जयराम बाग कालोनी निवासी कोल्ड स्टोरेज कारोबारी सुरेश चौहान के 25 वर्षीय इकलौते बेटे सचिन चौहान का घरवाले सारी रात बैचेनी से इंतजार करते रहे. लेकिन उस का फोन औन नहीं हुआ.  बेटे के बारे में कोई सुराग न मिलने पर दूसरे दिन मंगलवार को घर वालों ने आसपड़ोस के साथ ही रिश्तेदारी में तलाश किया. लेकिन सचिन का कोई सुराग नहीं मिला. पूरे दिन तलाश करने के बाद 22 जून की शाम तक जब सचिन नहीं लौटा और न उस का मोबाइल औन हुआ, तब पिता सुरेश चौहान अपने पार्टनर लेखराज चौहान के साथ थाना न्यू आगरा पहुंचे.

गंभीरता से नहीं लिया केस उन्होंने थानाप्रभारी को बेटे के लापता होने के बारे में बताया. पुलिस ने उन की तहरीर पर सचिन की गुमशुदगी दर्ज कर ली. पुलिस ने उन से फिरौती के लिए फोन आने के बारे में पूछा. सुरेश चौहान ने इस पर इनकार कर दिया. फिरौती के लिए फोन न आने की बात पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. कह दिया कि यारदोस्तों के साथ कहीं चला गया होगा और 1-2 दिन में आ जाएगा. पुलिस के रवैए से असंतुष्ट सुरेश चौहान तब खुद ही अपने बेटे की तलाश में जुट गए. उन्होंने कालोनी में रहने वाले एक सेवानिवृत्त अधिकारी से भी मदद ली. उन्हें सीसीटीवी की एक फुटेज मिली, जिस में बाइक सवार 2 युवक नजर आ रहे थे. इन में से पीछे बैठा युवक भी हेलमेट लगाए था.

यह सचिन ही था. यह जानकारी उन्होंने पुलिस को दी. फुटेज देखने के बाद पुलिस ने कहा कि इस में अपहरण जैसी कोई बात नहीं है. इस में तो आप का बेटा सचिन खुद अपनी मरजी से बाइक पर बैठा नजर आ रहा है. 3 दिन तक जब सचिन का कोई सुराग नहीं मिला तो घर वाले परेशान हो गए. पुलिस भी उन से परिचितों व रिश्तेदारी में तलाश करने की बात कहती रही. सुरेश चौहान के बिजनैस पार्टनर लेखराज चौहान के एक रिश्तेदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में तैनात हैं. लेखराज ने उन्हें फोन किया. फिर मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद मामला एसटीएफ के सुपुर्द किया गया. एसटीएफ ने 23 जून को इस मामले में छानबीन शुरू कर दी.

सब से पहले एसटीएफ ने सीसीटीवी वाली फुटेज देखी. जिस में सचिन बाइक पर पीछे हेलमेट लगाए बैठा था. एसटीएफ ने टेक्निकल रूप से जांच शुरू की. जांच शुरू की तो कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई और पुलिस केस के खुलासे के नजदीक पहुंच गई. पुलिस को पता चला कि सचिन का अपहरण कर लिया गया है. 27 जून की रात को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि इस घटना में शामिल एक आरोपी वाटर वर्क्स चौराहे पर मौजूद है. समय पर पुलिस वहां पहुंच गई और एसटीएफ ने उसे धर दबोचा. पकड़ा गया आरोपी हैप्पी खन्ना था. पता चला कि वह फरजी दस्तावेज से सिम लेने की फिराक में था. लेकिन सिम लेने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. उस ने बताया कि फरजी सिम से सचिन के पिता से 2 करोड़ की फिरौती मांगी जाती.

हैप्पी ने बताया कि सचिन अब इस दुनिया में नहीं है, उस की हत्या तो किडनैप करने वाले दिन ही कर दी थी. यह सुनते ही सनसनी फैल गई. पुलिस ने गुमशुदगी की सूचना को भादंवि की धारा 364ए, 302, 201, 420 में तरमीम कर दिया. दोस्त ही निकला कातिल हैप्पी से पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए ताबड़तोड़ दबिशें दे कर पुलिस ने 4 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया. इन में मृतक के पिता के बिजनैस पार्टनर लेखराज चौहान का बेटा हर्ष चौहान के अलावा सुमित असवानी निवासी दयाल बाग,  मनोज बंसल उर्फ लंगड़ा व रिंकू  निवासी कमलानगर शामिल थे.

चौंकाने वाली बात यह निकली  कि अपने दोस्त सचिन की तलाश में पुलिस और एसटीएफ की मदद करने का दिखावा करने वाला हर्ष चौहान स्वयं भी इस साजिश में शामिल था. 27 जून, 2021 को परिजनों को जैसे ही पता चला कि सचिन की हत्या उस के कुछ दोस्तों ने कर दी है तो घर में कोहराम मच गया. परिजनों का रोरो कर बुरा हाल  हो गया. सचिन अपने घर का इकलौता चिराग था, जिसे दोस्तों ने बुझा दिया था. पुलिस की कड़ी पूछताछ में सभी आरोपी टूट गए. सभी ने स्वीकार किया कि उन्होंने सचिन का अपहरण कर उस की हत्या कर लाश का अंतिम संस्कार पीपीई किट पहना कर करने के बाद उस की अस्थियां यमुना में विसर्जित करने का जुर्म कबूल कर लिया.

28 जून, 2021 को प्रैस कौन्फ्रैंस में एसएसपी मुनिराज जी. ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. सचिन की मौत की पटकथा एक महीने पहले ही लिख ली गई थी. आरोपियों ने पहले ही तय कर रखा था कि सचिन का अपहरण कर हत्या कर देंगे. उस के बाद 2 करोड़ रुपए की फिरौती उस के पिता से वसूलेंगे. पुलिस पूछताछ में हत्यारोपियों द्वारा सचिन के अपहरण और हत्या के बाद उस के शव का दाह संस्कार की जो कहानी सामने आई, वह बड़ी ही खौफनाक थी—

मूलरूप से बरहन कस्बे के गांव रूपधनु निवासी सुरेश चौहान आगरा के दयाल बाग क्षेत्र की जयराम बाग कालोनी में रहते हैं. उन का गांव में ही एसएस आइस एंड कोल्ड स्टोरेज है. इस के अलावा वह आगरा और हाथरस में जिला पंचायत की ठेकेदारी भी करते हैं. लेखराज चौहान भी उन के गांव का ही है. दोनों ने एक साथ काम शुरू किया. ठेकेदारी भी साथ करते हैं. उन दोनों के बीच पिछले 35 सालों से बिजनैस की साझेदारी चल रही थी. सुरेश चौहान का बेटा सचिन व लेखराज का बेटा हर्ष भी दोनों अच्छे दोस्त थे और एक साथ ही व्यापार व ठेकेदारी करते थे. दयाल बाग क्षेत्र की कालोनी तुलसी विहार का रहने वाला सुमित असवानी बड़ा कारोबारी है. 2 साल पहले तक वह अपनी पत्नी व 2 बेटों के साथ चीन में रहता था.

वहां उस का गारमेंट के आयात और निर्यात का व्यापार था. लेकिन 2019 में चीन में जब कोरोना का कहर शुरू हुआ तो वह परिवार सहित भारत आ गया. दयालबाग में ही सौ फुटा रोड पर उस ने सीबीजेड नाम से स्नूकर और स्पोर्ट्स क्लब खोला. सुमित महंगी गाड़ी में चलता था. वहीं वह रोजाना दोस्तों के साथ पार्टी भी करता था. उस के क्लब में हर्ष और सचिन भी स्नूकर खेलने आया करते थे. इस दौरान सुमित की भी उन दोनों से गहरी दोस्ती हो गई. बताया जाता है कि हर्ष चौहान के कहने पर सुमित असवानी ने धीरेधीरे कर के सचिन चौहान को 40 लाख रूपए उधार दे दिए. जब उधारी चुकाने की बारी आई तो सचिन टालमटोल कर देता. जबकि उस के खर्चों में कोई कमी नहीं आ रही थी.

कई बार तकादा करने पर भी सचिन ने रुपए नहीं लौटाए. यह बात सुमित असवानी को नागवार गुजरी. तब उस ने मध्यस्थ हर्ष चौहान पर भी पैसे दिलाने का दबाव बनाया, क्योंकि उस ने उसी के कहने पर सचिन को पैसे दिए थे. सुमित था मास्टरमाइंड  हर्ष के कहने पर भी सचिन ने उधारी की रकम नहीं लौटाई. यह बात हर्ष को भी बुरी लगी. इस पर एक दिन सुमित असवानी ने हर्ष से कहा, ‘‘अब जैसा मैं कहूं तुम वैसा करना. इस के बदले में उसे भी एक करोड़ रुपए मिल जाएंगे.’’

रुपयों के लालच में हर्ष चौहान सुमित असवानी की बातों में आ गया. दोनों ने मिल कर घटना से एक महीने पहले सचिन चौहान के अपहरण की योजना बनाई. फिर योजना के अनुसार, सुमित असवानी ने इस बीच सचिन चौहान से अपने मधुर संबंध बनाए रखे ताकि उसे किसी प्रकार का शक न हो. इस योजना में सुमित असवानी ने रुपयों का लालच दे कर अपने मामा के बेटे हैप्पी खन्ना को तथा हैप्पी ने अपने दोस्त मनोज बंसल और उस के पड़ोसी रिंकू को भी शामिल कर लिया. उन्होंने यह भी तय कर लिया था कि अपहरण के बाद सचिन की हत्या कर के उस के पिता से जो 2 करोड़ रुपए की फिरौती वसूली जाएगी. उस में से एक करोड़ हर्ष चौहान को, 40 लाख सुमित असवानी को और बाकी पैसे अन्य भागीदारों में बांट दिए जाएंगे.

षडयंत्र के तहत उन्होंने अपनी योजना को अमली जामा 21 जून को पहनाया. सुमित असवानी ने अपने मोबाइल से उस दिन सचिन चौहान को वाट्सऐप काल की. उस ने सचिन से कहा, ‘‘आज मस्त पार्टी का इंतजाम किया है. रशियन लड़कियां भी बुलाई हैं. बिना किसी को बताए, चुपचाप आ जा.’’

सचिन उस के जाल में फंस गया. घर पर बिना बताए वह पैदल ही निकल आया. वे लोग क्रेटा गाड़ी से आए थे. रिंकू गाड़ी चला रहा था. मनोज बंसल उस के बगल में बैठा था. वहीं सुमित और हैप्पी पीछे की सीट पर बैठे थे. सचिन बीच में बैठ गया. सुमित असवानी व साथी शाम 4 बजे पहले एक शराब की दुकान पर पहुंचे. वहां से उन्होंने शराब खरीदी. इस के बाद सभी दोस्त कार से शाम साढ़े 4 बजे सौ फुटा रोड होते हुए पोइया घाट पहुंचे. हैप्पी के दोस्त की बहन का यहां पर पानी का प्लांट है. इन दिनों वह प्लांट बंद पड़ा था. हैप्पी ने पार्टी के नाम पर प्लांट की चाबी पहले ही ले ली थी.

पीपीई किट से लगाई लाश ठिकाने वहां पहुंच कर सभी पहली मंजिल पर बने कमरे में पहुंचे. शाम 5 बजे शराब पार्टी शुरू हुई. जब सचिन पर नशा चढ़ने लगा, तभी सभी ने सचिन को पकड़ लिया. जब तक वह कुछ समझ पाता, उन्होंने उस के चेहरे  पर पौलीथिन और टेप बांध दिया, जिस से सचिन की सांस घुटने लगी. उसी समय सुमित असवानी उस के ऊपर बैठ गया और उस का गला दबा कर हत्या कर दी. इस बीच अन्य उस के हाथपैर पकड़े रहे. सचिन की हत्या के बाद उस के शव का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया. इस के लिए शातिर दिमाग सुमित असवानी ने पीपीई किट में लाश को श्मशान घाट पर ले जाने का आइडिया दिया ताकि पहचान न हो सके और कोई उन के पास न आए.

इस के लिए कमला नगर के एक मैडिकल स्टोर से एक पीपीई किट यह कह कर खरीदी कि एक कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार के लिए चाहिए. रिंकू शव को बल्केश्वर घाट पर ले जाने के लिए एक मारुति वैन ले आया. सचिन के शव को पीपीई किट में डालने के बाद वह बल्केश्वर घाट पर रात साढ़े 8 बजे पहुंचे. वहां उन्होंने बल्केश्वर मोक्षधाम समिति की रसीद कटवाई व अंतिम संस्कार का सामान खरीदा. उन्होंने मृतक का नाम रवि वर्मा और पता 12ए, सरयू विहार, कमला नगर लिखाया था. इस दौरान कर्मचारी ने मोबाइल नंबर पूछा. तब एक हत्यारोपी ने हड़बड़ी में अपने जीजा का मोबाइल नंबर बता दिया. उसे लगा कि यह गलती हो गई. तब उस ने वह नंबर कटवा दिया, बाद में परची पर फरजी मोबाइल नंबर लिखवा दिया.

यह भी बताया कि मृतक कोरोना पौजिटिव था, इस के चलते उस की मौत हो गई. शव को जलाने के बाद रात साढ़े 10 बजे सभी अपनेअपने घर चले गए.  हर्ष ने मनोज बंसल को सचिन का मोबाइल दे कर उसी शाम साढ़े 7 बजे ही खंदारी से इटावा की बस में बैठा दिया. उस से कहा गया कि इटावा पहुंच कर वह मोबाइल औन कर ले, जिस से लोकेशन इटावा की मिले. फिर इटावा से वह सचिन के घर फोन कर 2 करोड़ की फिरौती मांगे. फिरौती की काल करने के बाद वह मोबाइल औफ कर ले. इस के बाद वह वहां से कानपुर चला जाए. वहां मोबाइल चालू करे. ताकि पुलिस भ्रमित रहे और हम लोग पकड़ में न आएं.

पुलिस को भटकाने की साजिश रात 12 बजे इटावा पहुंच कर मनोज ने जैसे ही मोबाइल औन किया तो देखा मोबाइल पर सचिन की मां अनीता के लगातार फोन आ रहे थे. मनोज ने डर से फोन नहीं उठाया और न फिरौती मांगी. उस ने उसी समय फोन स्विच्ड औफ कर दिया. सुबह 4 बजे मनोज दूसरी बस पकड़ कर कानपुर पहुंचा. वहां पहुंच कर फिर से मोबाइल औन किया और बाद में उसे कानपुर के झकरकटी स्टैंड पर फेंक दिया. ऐसा इसलिए किया ताकि पुलिस सचिन की तलाश करे तो उस के मोबाइल की लोकेशन इटावा व कानपुर की मिले. पुलिस समझे कि अपहर्त्ता उसे कानपुर की तरफ से ले गए हैं. वह पुलिस को भ्रमित करना चाहते थे. पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी ने एकदूसरे से फोन पर बात तक नहीं की, ताकि पुलिस पकड़ न सके.

दूसरे दिन 22 जून की सुबह 8 बजे जा कर हैप्पी और रिंकू ने सचिन की अस्थियां यमुना में विसर्जित कर दीं. वे लोग दोपहर 12 बजे पानी के प्लांट से सचिन की चप्पलें उठा कर जंगल में फेंक आए. बताते चलें आरोपी मनोज एक पैर से विकलांग है. उस के 2 बच्चे हैं. पिता की दुकान थी, लेकिन बंद हो गई. लौकडाउन में ढाई लाख का कर्ज हो गया था. हैप्पी सुमित का ममेरा भाई था. उस की शादी नहीं हुई है. सुमित के साथ ही काम करता है. पिता की मौत हो चुकी है. उसे रुपयों की जरूरत थी. रिंकू एक स्कूल की वैन चलाता था. लौकडाउन के कारण स्कूल बंद होने से वह भी बेरोजगार था. इसलिए वे सभी पैसों के लालच में आ गए थे.

सचिन ने बीबीए तक की पढ़ाई की थी.  वह पिता के साथ उन के कारोबार में हाथ बंटाता था. जबकि उन के पार्टनर लेखराज चौहान का बेटा हर्ष सचिन से 2 साल छोटा था और बीबीए की पढ़ाई कर रहा था. वह भी पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाता था. 2 करोड़ की फिरौती के लालच में दोस्तों ने भरोसे को तारतार कर दिया. शातिरों ने अपहरण और हत्या की पूरी साजिश इस तरह रची कि पुलिस उलझ कर रह जाए. सामान्य काल की जगह वाट्सऐप काल की. फोन भी दूसरे शहर में ले जा कर फेंक दिया. सबूत मिटाने के लिए अंतिम संस्कार भी पीपीई किट में कर दिया ताकि कोई सवाल न उठाए. यहां तक कि अस्थियों को यमुना में विसर्जित कर दीं ताकि डीएनए टेस्ट भी न कराया जा सके.

पुलिस ने जुटाए सबूत लेकिन फिर भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बच न सके. अपहरण व हत्या के बाद फिरौती वसूलने का सारा तानाबाना सुमित व हर्ष ने ही बुना था. पुलिस ने गिरफ्तार किए गए हत्यारोपियों से 7 मोबाइल, 1200 रुपए नकदी के साथ ही 2 कारें भी बरामद कीं. इस के चलते पुलिस को न तो लाश मिली न ही अस्थियां मिलीं. ऐसे में केस में मजबूत साक्ष्य ही आरोपियों को सजा दिला पाएंगे. इस के लिए पुलिस ने फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम की मदद से 28 जून के बाद 29 जून को भी अन्य साक्ष्य जुटाए. जिस पानी के प्लांट में हत्याकांड को अंजाम दिया गया, वहां से फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को सचिन का एटीएम कार्ड मिला. यह सचिन की हत्या के दौरान संघर्ष में गिर गया होगा.

इस के अलावा टीम को वहां फिंगर और फुटप्रिंट भी मिले हैं, ये आरोपियों के अलावा सचिन के हो सकते हैं. वहीं कुछ बाल भी मिले हैं. यह आरोपियों के हो सकते हैं. इन्हें फोरैंसिक साइंस लैब भेजा गया है. यहां से पुलिस ने जली हुई सिगरेट, खाली गिलास और पानी की बोतल बरामद की है.  इन पर फिंगरप्रिंट थे. इन्हें लिया गया है. वहीं पुलिस ने श्मशान घाट पर रवि वर्मा के नाम से रसीद कटवाई गई थी. पता सरयू विहार, कमला नगर का लिखाया गया था, मगर यहां कोई रहता नहीं है. पुलिस ने घाट के कर्मचारी के बयान दर्ज किए हैं. कमला नगर में जिस मैडिकल स्टोर से पीपीई किट खरीदी थी, उस के मालिक के बयान के साथ ही दुकान में लगे कैमरों के फुटेज भी लिए गए हैं.

इस के साथ ही पुलिस को कमला नगर व बल्केश्वर क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी मिल गई है, जिस में आरोपी साफ नजर आ रहे हैं. उन की लोकेशन भी है, जो केस में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए साक्ष्य बनेंगे. आरोपियों की कार और वैन पुलिस ने बरामद कर ली है. कार में वे सचिन को ले गए थे, जबकि वैन में शव को ले कर गए थे. इस साल सचिन की शादी की तैयारी थी. उस के लिए कई रिश्ते आए थे. बात भी चल रही थी. सोचा था कि नवंबर में उस की शादी कर देंगे. बेटे की शादी कर बहू घर लाने की ख्वाहिश अब चौहान दंपति का सपना ही बन कर रह गई.

29 जून को पुलिस ने गिरफ्तार किए गए पांचों हत्यारोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. Crime Kahani

 

True Crime Stories : बॉयफ्रेंड संग मिलकर पत्नी ने चारपाई पर पति को पटक कर गला दबा डाला

True Crime Stories : दुलारी 2 बेटियों की शादी कर चुकी थी और बाकी बचे 2 बच्चे भी शादी लायक हो चुके थे. इस उम्र में अधेड़ उम्र का यह इश्क आगे चल कर किस खतरनाक मोड़ पर पहुंचेगा इस की उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी. फिर एक दिन…

बांदा जिले के बुधेड़ा गांव के रहने वाले शिवनारायण निषाद 18 जून, 2021 की रात गांव की में रामसेवक के घर एक शादी के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटे तो घर पर मौजूद पत्नी दुलारी की चिंता बढ़ने लगी. उस समय दुलारी घर पर अकेली थी. उस का 20 वर्षीय बेटा और 17 वर्षीय बेटी राधा गांव अलमोर में स्थित एक रिश्तेदारी में गए हुए थे. दुलारी ने पति की चिंता में जैसेतैसे कर के रात काटी. सुबह होने पर दुलारी ने अपने बेटे को फोन कर के रोते हुए कहा, ‘‘बेटा, तुम्हारे पिताजी गांव में ही रामसेवक चाचा के घर मंडप पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे, लेकिन अभी तक वह घर वापस नहीं लौटे हैं.’’

बेटे दीपक ने जब पिता शिवनारायण के गायब होने ही बात सुनी तो वह भी घबरा गया. फिर वह मां को समझाते हुए बोला, ‘‘घबराओ मत मां, मैं घर आ रहा हूं. हो सकता है पिताजी रात होने पर वहीं रुक गए हों. फिर भी आप उन के घर जा कर पूछ आओ.’’

‘‘ठीक है बेटा, मैं रामसेवक चाचा के घर पता करने जा रही हूं.’’ दुलारी ने दीपक से कहा. दुलारी जब रामसेवक के घर पहुंची तो रामसेवक ने बताया कि शिवनारायण गांव के ही 2 लोगों सूबेदार और चौथैया के साथ रात 10 बजे ही वहां से लौट गए थे. यह बात दुलारी ने दीपक को फोन कर के बताई तो दीपक के मन में तमाम तरह की आशंकाओं ने जन्म लेना शुरू कर दिया. उसी दिन दीपक अपनी बहन के साथ गांव अलमोर से घर वापस लौट आया. दुलारी और घर के लोग सोचने लगे कि जब वह रामसेवक चाचा के यहां से लौट आए तो कहां चले गए. अभी तक वह घर क्यों नहीं आए? उस दिन दीपक अपने ताऊ पिता रामआसरे, मां दुलारी और परिजनों के साथ पिता को आसपास खोजने में लगा रहा.

इस के बाद परिजनों ने सूबेदार और चौथैया से शिवनारायण के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि हम लोग रात में 10 बजे साथ ही लौटे थे और गांव के शिवलाखन की पान परचून की दुकान पर गए, लेकिन उस समय उस की दुकान बंद थी. तब हम लोग अलगअलग हो कर अपनेअपने घरों को वापस लौट गए थे. इस के बाद शिवनारायण कहां गया, हमें नहीं पता. शिवनारायण की 2 बेटियां, जो अपनी ससुराल में थीं, वह भी पिता के लापता होने की सूचना मिलने पर मायके आ चुकी थीं. अब शिवनारायण के घर वालों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं जन्म लेने लगी थीं. बेटे दीपक और बेटियों का रोरो कर बुरा हाल था.

इस दौरान बेटे ने अपने सभी रिश्तेदारियों में फोन कर उन के बारे में जानना चाहा. लेकिन सभी जगह निराशा ही हाथ लग रही थी. शिवनारायण को गायब हुए 2 दिन होने वाले थे, फिर भी घर वाले पुलिस के पास न जा कर इधरउधर खोजने में ही लगे हुए थे. इसी दौरान 20 जून, 2021 की सुबह गांव के सूबेदार और अन्य लोग जब यमुना नदी किनारे से जा रहे थे. तो उन्होंने हाथपैर बंधे घुटनों के बीच डंडा फंसे एक लाश पड़ी देखी. यह बात उन्होंने गांव के अन्य लोगों को बताई. इस के बाद वह लाश देखने के लिए यमुना किनारे गए. ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा होने लगी थी. गांव वालों ने वह लाश पहचान ली. मृतक और कोई नहीं 2 दिन से गायब हुआ शिवनारायण ही था.

इधर ग्रामीणों ने नदी के किनारे लाश मिलने की सूचना स्थानीय थाने जसपुरा के थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह को भी दे दी. थानाप्रभारी सुनील इस घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देने के बाद अपने मातहतों के साथ घटनास्थल पर रवाना हो गए. नदी के किनारे लाश मिलने की सूचना पा कर शिवनारायण निषाद के परिजन भी रोतेबिलखते वहां पहुंच चुके थे. पति की लाश देख कर दुलारी दहाड़ें मार कर रोने लगी. सूचना पा कर बांदा के एसपी अभिनंदन के अलावा एएसपी महेंद्र प्रताप सिंह चौहान, सीओ (सदर) सत्यप्रकाश शर्मा के साथ मौके पर पहुंच गए.

पुलिस नें अपनी जांच में पाया कि लाश पानी में फूल कर उतरा कर नदी के किनारे आई है. ऐसे में अनुमान लगाया कि शिवनारायण की हत्या 18 जून की रात में कर दी गई थी. क्योंकि पानी में पड़ा शव करीब 24 घंटे बाद ही उतरा कर ऊपर आता है. थानाप्रभारी ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. फोरैंसिक टीम ने वहां से कुछ सबूत भी जुटाए. पुलिस ने लाश को देख कर यह कयास लगाया कि हत्या में एक से ज्यादा लोग शामिल रहे होंगे. क्योंकि पुलिस को घटनास्थल पर ऐसा कोई निशान और न ही दोपहिया व चार पहिया वाहनों के टायरों के निशान मिले, जिस से यह कहा जा सके कि हत्या इसी जगह पर की गई थी.

इसी को आधार बना कर पुलिस यह मान रही थी कि हत्या कहीं और की गई है. लाश को नदी में ठिकाने लगाने के उद्देश्य से यहां ला कर फेंका गया था. जिस समय बुधेड़ा गांव में पुलिस अधिकारी व थाने की पुलिस घटनास्थल का मौकामुआयना कर रही थी, पुलिस को वहां जमीन पर खून पड़ा भी मिला. साथ ही कुछ दूरी पर चूडि़यों के टुकड़े भी बरामद हुए थे. जिन्हें फोरैंसिक टीम ने अपने कब्जे में ले लिया. मौके पर मौजूद गांव वालों ने बताया कि टूटी चूडि़यां मृतक की पत्नी दुलारी की हैं. उन का कहना था कि मामले की जानकारी होने पर दुलारी वहां बैठ कर रो रही थी. हो सकता है उस दौरान चूडि़यां टूट कर बिखर गई हों.

लेकिन पुलिस किसी भी साक्ष्य को हलके में नहीं ले रही थी, इसलिए वहां मौजूद हर संदिग्ध वस्तु को अपने कब्जे में ले रही थी. इस दौरान हत्या से जुड़े साक्ष्यों को इकट्ठा करने के लिए पुलिस ने शव मिलने वाले स्थान से पैदल ही नदी किनारे करीब डेढ़ किलोमीटर तक छानबीन की, लेकिन वहां से पुलिस को कोई अन्य और खास सबूत नहीं मिला. पुलिस ने जरूरी साक्ष्यों को इकट्ठा करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. इस दौरान पुलिस ने परिजनों से शिवनारायण के घर वालों से किसी से रंजिश होने की बात पूछी तो उन्होंने बताया कि उन की किसी से कोई रंजिश नहीं थी.

दोपहर तक पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंट कर हत्या करने और फेफड़ों में पानी न होने की पुष्टि हुई. इस के बाद पुलिस ने शिवनारायन बेटे दीपक की तहरीर पर शिवनारायण की हत्या का मुकदमा भादंवि की धारा 302 व 201  तहत दर्ज कर लिया. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह ने एसपी के निर्देश पर जांच के लिए एक टीम गठित की, जिस में कांस्टेबल शुभम सिंह, सौरभ यादव, अमित त्रिपाठी, महिला कांस्टेबल अमरावती व संगीता वर्मा को शामिल कर जांच शुरू की. थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह को शुरुआती पूछताछ में मृतक शिवनारायण के बड़े भाई रामआसरे और बेटे दीपक ने बताया कि 6 महीने पहले गांव के ही एक दुकानदार ने शिवनारायण से विवाद किया था और धमकी दी थी.

इस के बाद पुलिस ने दुकानदार और रात में दावत में साथ रहे व लाश मिलने की सूचना देने वाले सूबेदार सहित 4 लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले गई. लेकिन पुलिस को उन लोगों से पूछताछ में ऐसी कोई बात नहीं मिली, जिस से उन पर हत्या का शक किया जा सके. जसपुरा थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह शिवनारायण निषाद के हत्या की हर एंगल से जांच कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने मृतक के घर के हर सदस्य का बयान दर्ज किया था. उन्हें जांच में पता चला कि शिवनारायण रात के 9 बजे ही दावत से अपने घर के लिए वापस लौट लिए थे. चूंकि उस समय हलकी बारिश हो रही थी, ऐसे में 45 साल की उम्र में उन के कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता था.

ऐसे में पुलिस यह मान कर चल रही थी कि शिवनारायण घर लौटे थे और उन के साथ घर पर ही कोई घटना हुई थी. उस दिन घर पर मृतक शिवनारायण की पत्नी ही मौजूद थी. क्योंकि शिवनारायण के बच्चे रिश्तेदारी में पैलानी थानांतर्गत अमलोर गांव गए हुए थे. मौके पर मिली चूडि़यों के टुकड़े के आधार पर पुलिस का शक पत्नी दुलारी पर और भी पुख्ता होता जा रहा था. उधर पुलिस को मृतक के हाथपांव के बांधने और घुटनों के बीच डंडा बांधने की बात समझ आ चुकी थी. यह हत्या के बाद लाश को उठा कर ले जाने में उपयोग किया गया होगा. इसी दौरान पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि उसी गांव के रहने वाले जगभान सिंह उर्फ पुतुवा का अकसर शिवनारायण निषाद के घर आनाजाना था.

चूंकि शिवनारायण जगभान के खेत में बंटाई पर खेती करता था. इसी दौरान जगभान का  शिवनारायण की पत्नी दुलारी से अवैध संबंध हो गए थे. जिस की जानकारी होने पर शिवनारायण और जगभान के बीच खटास पैदा हो गई थी. अब पुलिस शिवनारायण की पत्नी दुलारी और जगभान पर अपनी जांच केंद्रित कर आगे बढ़ रही थी. इसी सिलसिले में थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह ने जगभान के घर जा कर पता करना चाहा तो वह घर पर नहीं मिला. लेकिन उस की पत्नी ने पुलिस को बताया कि वह शाम को 6 बजे पास के एक गांव में शादी में गया था. वहां से वह साढ़े 11 बजे रात में लौट कर आए थे. उस की पत्नी ने यह भी बताया कि उन के साथ ही गांव के भोला निषाद की 4 बेटियां भी शादी में गई थीं. जहां भोला की 3 लड़कियां वहीं रुक गई थीं, जबकि एक उन के साथ वापस आई थी.

इस के बाद थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह ने जहां शादी थी, वहां पता किया तो लोगों ने बताया कि जगभान वहां से साढ़े 8 बजे ही निकल  गया था. फिर पुलिस ने भोला निषाद के घर जा कर पूछताछ की तो  लड़कियों ने बताया कि जगभान उन के घर 9 बजे आए थे, उस के बाद तुरंत वह वापस चले गए. अब पुलिस के सामने सवाल यह था कि जगभान जब भोला के घर से 9 बजे चला आया तो वह अपने घर साढ़े 11 बजे रात में पहुंचा था. तो इन ढाई घंटों के दौरान वह कहां रहा. इस आशंका के आधार पर पुलिस ने जगभान सिंह से ढाई घंटे गायब रहने का कारण पूछा तो वह उस का सही जबाब नहीं दे पाया.

पुलिस ने जब कड़ाई से मृतक की पत्नी दुलारी और जगभान सिंह से पूछताछ की गई तो उन दोनों ने शिवनारायण की हत्या किए जाने की बात स्वीकारते हुए हत्या का राज उगल दिया. उन दोनों ने शिवनारायण की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी. उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के जसपुरा थाना क्षेत्र के बुधेड़ा गांव के निवासी शिवनारायण गांव में रह कर खेती करता था. वह दूसरों के खेत बंटाई पर ले कर भी खेती करता था. शिवनारायण ने गांव के ही जगभान सिंह का खेत भी बंटाई पर ले रखा था. खेत बंटाई में लेने के कारण खेत मालिक जगभान शिवनारायण के घर आनेजाने लगा था. इस बीच जगभान और शिवनारायण की पत्नी दुलारी के बीच नजदीकियां बढ़ाने लगी थीं.

दोनों की ये नजदीकियां कब शारीरिक संबंधों में बदल गईं, उन्हें पता ही नहीं चला. लेकिन एक दिन शिवनारायण ने जगभान और दुलारी को साथ में देख लिया तो वह आगबबूला हो गया और जगभान सिंह को घर न आने कि कड़ी हिदायत दे डाली. इस के बावजूद भी जगभान सिंह शिवनारायण के घर आता रहा. लेकिन बारबार शिवनारायण द्वारा जगभान को घर आने से मना करने की वजह से बीते साल जगभान ने शिवनाराण को अपना खेत बंटाई पर नहीं दिया, तभी से दोनों के बीच मनमुटाव हो गया था. इसी बात से जगभान और दुलारी शिवनारायण से खार खाए बैठे थे. वह इसी उधेड़बुन में थे कि किसी तरह शिवनारायण को ठिकाने लगाया जाए.

हत्यारोपी दुलारी ने बताया कि घटना वाले दिन उन का अविवाहित बेटाबेटी गांव अलमोर में अपने एक दिश्तेदार के घर गए हुए थे. उस दिन घर में कोई नहीं था. उसी दिन दोनों ने शिवनरायण को ठिकाने लगाने के लिए तानाबाना बुन लिया था. जगभान दावत से लौटने के बाद  रात के 9 बजे दुलारी के घर पहुंच गया. इधर मंडप कार्यक्रम से घर लौटे शिवनरायण ने दुलारी को जगभान के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा तो गुस्से में उस का खून खौल गया और वह पत्नी को मारनेपीटने लगा और जगभान से गालीगलौज करने लगा. तभी दुलारी ने प्रेमी जगभान के साथ मिल कर अपने पति को चारपाई पर पटक दिया और गला दबा कर उस की हत्या कर दी. उसी दौरान उन लोगों नें लाश को ठिकाने लगाने का प्रयास किया, लेकिन गांव के लोग उस समय जग रहे थे.

ऐसे में उन्होंने शिवनारायण की लाश चारपाई के नीचे छिपा दी. इस के बाद जगभान रात के 11 बजे अपने घर चला आया. जगभान ने बताया कि रात करीब 2 बजे जब मोहल्ले के लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तब वह रात के सन्नाटे में फिर से शिवनारायण के घर पहुंचा. जहां उस ने और दुलारी ने शिवनारायण के लाश के हाथपांव बांध कर दोनों पैरों के बीच डंडा डाल कर लाश को यमुना नदी में फेंक आए. इतना सब करने के बाद दुलारी और जगभान अपनेअपने घर चले गए. घर आने के बाद दुलारी ने पति के गायब होने की खबर पूरे गांव में फैला दी और जानबूझ कर पति को खोजने का नाटक करती रही. लेकिन पुलिसिया जांच में उन का जुर्म छिप नहीं सका.

पुलिस ने मृतक शिवनारायण की पत्नी दुलारी और उस के आशिक जगभान के से पूछताछ करने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया. वहीं एसपी अभिनंदन ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को ईनाम देने की घोषणा की है. True Crime Stories

 

UP Crime News : प्रेमिका संग बनाए संबंध फिर चाकू मारकर किया कत्ल

UP Crime News : बीएससी में पढ़ने वाली सीमा एक होशियार लड़की थी. वह मोहम्मद कैफ से बहुत प्यार करती थी. इसी प्यार और सैक्स के चक्कर में वह एक दिन ऐसी फंसी कि..

‘‘सी मा, देखो शाम का समय है. मौसम भी मस्तमस्त हो रहा है. घूमने का मन कर रहा है. चलो, हम लोग कहीं घूम कर आते हैं.’’ लखनऊ के स्कूटर इंडिया के पास रहने वाली सीमा नाम की लड़की से उस के बौयफ्रैंड कैफ ने मोबाइल पर बात करते हुए कहा.

‘‘कैफ, अभी तो कोई घर में है नहीं, बिना घर वालों के पूछे कैसे चलें?’’ सीमा ने अनमने ढंग से मोहम्मद कैफ को जबाव दिया.

‘‘यार जब घर में कोई नहीं है तो बताने की क्या जरूरत है? हम लोग जल्दी ही वापस आ जाएंगे. जब तक तुम्हारे पापा आएंगे उस के पहले ही हम वापस लौट आएंगे. किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.’’ कैफ को जैसे ही यह पता चला कि घर में सीमा अकेली है, वह जिद करने लगा. सीमा भी अपने प्रेमी कैफ को मना नहीं कर पाई. सीमा के पिता सीतापुर जिले के खैराबाद के रहने वाले थे. लखनऊ में इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्राइवेट कंपनी में वह शिफ्ट के हिसाब से काम करते थे. सीमा ने पिछले साल बीएससी में एडमिशन लिया था. इसी बीच कोरोना के कारण स्कूलकालेज बंद हो गए. इस के बाद वह अपने पिता रमेश कुमार के पास रहने चली आई थी. सीमा के एक छोटा भाई और एक बहन भी थी.

घर में वह बड़ी थी. इसलिए पिता की मदद के लिए उस ने पढ़ाई के साथ नादरगंज में चप्पल बनाने की एक फैक्ट्री में नौकरी कर ली. गांव और शहर के माहौल में काफी अंतर होता है. लखनऊ आ कर सीमा भी यहां के माहौल में ढलने लगी थी. चप्पल फैक्ट्री में काम करते समय वहां कैफ नाम के लड़के से उस की दोस्ती हो गई. यह बात फैक्ट्री के गार्ड को पता चली तो वह भी उसे छेड़ने की कोशिश करने लगा. यह जानकारी जब सीमा के पिता को हुई तो उन्होंने चप्पल फैक्ट्री से बेटी की नौकरी छुड़वा दी. नौकरी छोड़ने के बाद सीमा ज्वैलरी शौप पर नौकरी करने लगी. कैफ के साथ दोस्ती प्यार में बदल चुकी थी. अब वह घर वालों को बिना बताए उस से मिलने जाने लगी थी. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन चुके थे.

12 जून की शाम करीब साढ़े 7 बजे सीमा के पिता रमेश कुमार अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे. सीमा उस समय शौप से वापस आ चुकी थी. रमेश कुमार ने सीमा को समझाते कहा, ‘‘बेटी रात में कहीं जाना नहीं. कमरे का दरवाजा बंद कर लो. खाना खा कर चुपचाप सो जाना.’’

‘‘जी पापा, आप चिंता न करें. मैं कहीं नहीं जाऊंगी. घर पर ही रहूंगी.’’

इस के बाद पिता के जाते ही कैफ का फोन आ गया और सीमा उसे मना करती रही पर उस की जबरदस्ती के आगे वह कुछ कर नहीं सकी. शाम 8 बजे के करीब कैफ सीमा के घर के पास आया और उसे बुला लिया. मां ने शाम 5 बजे के करीब बेटी से फोन पर बात की थी. उसे हिदायत दी थी कि कहीं जाना नहीं. पिता ने भी उसे समझाया था कि घर में ही रहना, कहीं जाना नहीं. इस के बाद भी सीमा ने बात नहीं मानी. वह अपने प्रेमी मोहम्मद कैफ के साथ चली गई. पिता जब अगली सुबह 8 बजे ड्यूटी से वापस घर आए तो सीमा वहां नहीं थी. उन्होंने सीमा के फोन पर काल करनी शुरू की तो उस का फोन बंद था. यह बात उन्होंने अपनी पत्नी को बताई तो बेटी की चिंता में वह सीतापुर से लखनऊ के लिए निकल गई.

इस बीच पिपरसंड गांव के प्रधान रामनरेश पाल ने सरोजनीनगर थाने में सूचना दी कि गहरू के जंगल में एक लड़की की लाश पड़ी है. लड़की के कपडे़ अस्तव्यस्त थे. देखने में ही लग रहा था कि पहले उस के साथ बलात्कार किया गया है. गले में दुपट्टा कसा हुआ था. पास में ही शराब, पानी की बोतल, 2 गिलास, एक रस्सी और सिगरेट के टुकड़े भी पड़े थे. घटना की सूचना पुलिस कमिश्नर डी.के. ठाकुर, डीसीपी (सेंट्रल) सोमेन वर्मा और एडिशनल डीसीपी (सेंट्रल) सी.एन. सिन्हा को भी दी गई. पुलिस ने छानबीन के लिए फोरैंसिक और डौग स्क्वायड टीम को भी लगाया.

इस बीच तक सीमा के मातापिता भी वहां पहुंच चुके थे. पुलिस ने अब तक मुकदमा अज्ञात के खिलाफ कायम कर के छानबीन शुरू कर दी थी. सीमा के घर वालों ने पुलिस को बताया कि मोहम्मद कैफ नाम के लड़के पर उन्हें शक है. दोनों की दोस्ती की बात सामने आई थी. पुलिस ने मोहम्मद कैफ के मोबाइल और सीमा के मोबाइल की काल डिटेल्स चैक करनी शुरू की. पुलिस को कैफ के मोबाइल को चैक करने से पता चला कि उस ने सीमा से बात की थी. उस के बाद से सीमा का फोन बंद हो गया. अब पुलिस ने कैफ को पकड़ा और उस से पूछताछ की तो प्यार, सैक्स और हत्या की दर्दनाक कहानी सामने आ गई.

12 जून, 2021 की शाम मोहम्मद कैफ अपने 2 दोस्तों विशाल कश्यप और आकाश यादव के साथ बैठ कर ताड़ी पी रहा था. ये दोनों दरोगाखेड़ा और अमौसी गांव के रहने वाले थे. ताड़ी का नशा तीनों पर चढ़ चुका था. बातोंबातों में लड़की की बातें आपस में होने लगीं.  कैफ ने कहा, ‘‘ताड़ी पीने के बाद तो लड़की और भी नशीली दिखने लगती है.’’

आकाश बोला, ‘‘दिखने से काम नहीं होता. लड़की मिलनी भी चाहिए.’’

कैफ उसे देख कर बोला, ‘‘तुम लोगों का तो पता नहीं, पर मेरे पास तो लड़की है. अब तुम ने याद दिलाई है तो आज उस से मिल ही लेते हैं.’’

यह कह कर कैफ ने सीमा को फोन मिलाया और कुछ देर में वह सीमा को बुलाने चला गया. इधर आकाश और विशाल को भी नशा चढ़ चुका था. दोनों भी इस मौके का लाभ उठाना चाहते थे. उन को पता था कि कैफ कहां जाता है. ये दोनों जंगल में पहले से ही पहुंच गए और वहीं बैठ कर पीने लगे. सीमा और कैफ ने जंगल में संबंध बनाए. तभी विशाल और आकाश वहां पहुंच गए. वे भी सीमा से संबंध बनाने के लिए दबाव बनाने लगे. पहले तो कैफ इस के लिए मना करता रहा, बाद में वह भी सीमा पर दबाव बनाने लगा. जब सीमा नहीं मानी तो तीनों ने जबरदस्ती उस के साथ बलात्कार करने का प्रयास किया. अब सीमा ने खुद को बचाने के लिए शोर मचाना चाहा और कच्चे रास्ते पर भागने लगी. इस पर विशाल ने सीमा की पीठ पर चाकू से वार किया. सीमा इस के बाद भी बबूल की झडि़यों में होते हुए भागने लगी.

‘‘इसे मार दो नहीं तो हम सब फंस जाएंगे.’’ विशाल और आकाश ने कैफ से कहा.

सीमा झाडि़यों से निकल कर जैसे ही बाहर खाली जगह पर आई, तीनों ने उसे घेर लिया. ताबड़तोड़ वार करने के साथ ही साथ उस के गले को भी दबा कर रखा. मारते समय चाकू सीमा के पेट में होता हुआ पीठ में फंस गया और वह टूट गया. 15 से 20 गहरे घाव से खून बहने के कारण सीमा की मौत हो गई. पेट में चाकू के वार से सीमा का यूरिनल थैली तक फट गई थी. 2 महीने पहले जब सीमा ने मोहम्मद कैफ से दोस्ती और प्यार में संबंध बनाए थे, तब यह नहीं सोचा था कि एक दिन उसे यह दिन देखना पड़ेगा.

लखनऊ पुलिस ने एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह की अगुवाई में बनी पुलिस टीम को पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की. पुलिस ने मोहम्मद कैफ और उस के दोनों साथी विशाल और आकाश को भादंवि की धारा 302 में गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. UP Crime News

(कथा में सीमा और उस के परिजनों के नाम बदल दिए गए हैं

Ghar ki Kahaniyan : चाची के प्यार में भतीजे ने ताऊ की कर दी हत्या

Ghar ki Kahaniyan : रामपाल ने सविता से दूसरी शादी कर जरूर ली थी, लेकिन वह उस की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहा था. इसी दौरान सविता का दिल पति के भतीजे मंजीत पर आ गया. युवा मंजीत भी चाची की चाहत का ऐसा दीवाना हुआ कि रिश्ते की सारी दीवारें टूट गईं. और फिर…

14 जून, 2021 की सुबह के 5 बजे का वक्त रहा होगा. सचिन उठते ही सब से पहले अपने घेर की तरफ चला गया. सचिन के पिता चंद्रपाल घर के पीछे बने जानवरों के घेर में ही सोते थे. घेर में जाते ही सचिन की निगाह पिता की चारपाई पड़ी, तो उस की जोरदार चीख निकल गई. चंद्रपाल की चारपाई खून से लथपथ पड़ी थी. चंद्रपाल के ऊपर पड़ी चादर तो लहूलुहान थी ही, साथ ही तमाम खून उस की चारपाई के नीचे भी पड़ा था. सचिन की चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग भी जाग गए थे. देखते ही देखते चंद्रपाल के घेर में लोगों का जमावड़ा लग गया. चारपाई के पास खून से सनी एक ईंट भी पड़ी थी.

हालांकि चंद्रपाल की हालत देखते हुए कहीं से भी नहीं लग रहा था कि उस की सांसें अभी भी चल रही होंगी, इस के बावजूद भी सचिन पिता को अस्पताल ले गया. जहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था. इस घटना की जानकारी पुलिस को अस्पताल के द्वारा ही पता चली थी. यह घटना उत्तराखंड के शहर जसपुर के थाना कुंडा की थी. सूचना पाते ही कुंडा थानाप्रभारी अरविंद चौधरी कुछ कांस्टेबलों को साथ ले कर सीधे काशीपुर एल.डी. भट्ट अस्पताल पहुंचे. सरकारी अस्पताल में ही पुलिस ने मृतक के परिजनों से घटना की जानकारी जुटाई. इस के बाद एसआई महेश चंद ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. बाद में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर खून से सनी ईंट और अन्य सबूत जुटाए.

पुलिस केस की जांच में जुट गई. सचिन ने पुलिस को बताया कि 2 दिन पहले ही उस के पिता के साथ उस की चाची सविता की किसी बात को ले कर तूतूमैंमैं हुई थी. लेकिन उसे उम्मीद है कि उस की चाची इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकती. यह जानकारी भले ही सचिन के लिए कोई मायने नहीं रखती थी. लेकिन पुलिस के लिए यह सूत्र अहम मायने रखता था. पुलिस ने सविता को पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में ले लिया. पूछताछ के दौरान सविता ने साफ शब्दों में जबाव दिया कि वह अपने जेठ का खून क्यों करेगी. उस के जेठ तो उस के बच्चों को बहुत ही प्यार करते थे. उसी दौरान चंद्रपाल के छोटे भाई ने बताया कि सविता का चालचलन ठीक नहीं है. वह 2 दिन पहले ही अपने भतीजे मंजीत को ले कर मुरादाबाद भाग गई थी. उसी बात को ले कर चंद्रपाल ने उसे काफी डांटफटकार लगाई थी.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस समझ गई कि माजरा क्या है. इस से पहले मंजीत कहीं भाग पाता, पुलिस ने उसे भी अपनी कस्टडी में ले लिया और दोनों को थाने ले आई. थाने ला कर दोनों से कड़ी पूछताछ हुई. पुलिस ने मंजीत से इस मामले में पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस रात तो वह फैक्ट्री में काम करने गया हुआ था. ऐसे में वह अपने ताऊ की हत्या कैसे कर सकता है. इस सच्चाई को जानने के लिए पुलिस की एक टीम उस फैक्ट्री में भी गई. वहां पर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो सचमुच मंजीत की एंट्री वहां दर्ज थी. उपस्थिति वाले रजिस्टर पर उस के हस्ताक्षर भी मौजूद थे. यह सब देख कर पुलिस की जांच पर पानी फिर गया. पुलिस ने इस बारे में सविता के पति रामपाल से पूछताछ की. रामपाल ने बताया कि वह सारे दिन मेहनतमजदूरी कर इतना थक जाता है कि सोने के बाद उसे होशोहवास नहीं रहता.

उसी जांचपड़ताल के दौरान पुलिस की नजर रामपाल के दरवाजे पर पड़ी. जिस पर खून की अंगुलियों के निशान साफ नजर आ रहे थे. फिर पूरे घर की तलाशी ली गई. तभी पुलिस को बाथरूम में खून से सना एक कपड़ा भी मिला, जिस से खून साफ किया गया था. यह सब तथ्य जुटाने के बाद पुलिस ने मंजीत और सविता से अलगअलग पूछताछ की. जिस के दौरान थानाप्रभारी ने सविता से सीधा प्रश्न किया, ‘‘हमें तुम्हारी सारी सच्चाई पता चल गई है. हमें बाथरूम में वह कपड़ा भी मिल गया, जिस से खून साफ किया गया था. यह बात तो पक्की है कि चंद्रपाल की हत्या में तुम्हारा पूरा हाथ है. तुम्हारे लिए यही सही है कि सीधेसीधे सब कुछ बता दो. तुम ने चंद्रपाल की हत्या क्यों की.’’

पुलिस पूछताछ में सविता ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई. उस ने बता दिया कि उस ने ही भतीजे के साथ मिल कर अपने जेठ की हत्या की है. सविता के बाद पुलिस ने मंजीत को अलग ले जा कर कहा कि तुम्हारी प्रेमिका चाची ने हमें सब कुछ बता दिया है. लेकिन हम तुम से केवल इतना जानना चाहते हैं कि तुम ने फैक्ट्री में ड्यूटी करते हुए भी किस तरह से चंद्रपाल की हत्या की? मंजीत भी कच्चा खिलाड़ी था. उस ने भी पुलिस को सब कुछ साफसाफ बताते हुए अपना जुर्म कबूल कर लिया था. इस केस के खुलने के बाद जो चाचीभतीजे की प्रेम कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी. यह मामला उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के कुंडा थाना से उत्तर दिशा में लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित गांव टीले का है.

बहुत पहले गांव मैरकपुर पाकवाड़ा, मुरादाबाद निवासी सुमेर सिंह रोजीरोटी की तलाश में यहां आए और यहीं के हो कर रह गए. सुमेर सिंह के 4 बेटे थे, जिन में चंद्रपाल सब से बड़ा, उस के बाद विक्रम तथा रामपाल सब से छोटा था. समय के साथ तीनों की शादियां भी हो गईं. शादी होते ही सभी भाइयों ने अपनी गृहस्थी संभाल ली और अलगअलग मकान बना कर रहने लगे थे. अब से 5 साल पहले चंद्रपाल का चचेरा भाई करन अपने परिवार से मिलने आया था. करन ने यहां का रहनसहन देखा तो वह भी यहीं का दीवाना हो गया. करन के परिवार से संबंध रखने के कारण चंद्रपाल ने उसे रहने के लिए अपने ही घर में शरण दी थी. रामपाल की शादी काशीपुर के टांडा उज्जैन से हुई थी. रामपाल शुरू से ही सीधेसरल स्वभाव का था.

जबकि रामपाल की बीवी शहर की रहने वाली और तेजतर्रार थी. शादी के बाद गांव का रहनसहन उसे पसंद नहीं था. एक साल उस ने जैसेतैसे उस के साथ काटा और फिर उस ने रामपाल से संबंध विच्छेद कर लिया. उस समय तक उस की बीवी के कोई औलाद पैदा नहीं हुई थी. रामपाल की बीवी उसे छोड़ कर चली गई तो रामपाल उदास रहने लगा. इस के बाद भाइयों ने फिर से रामपाल की शादी मुरादाबाद जिले के टांडा स्वार के मानपुर की रहने वाली सविता से करा दी. सविता के साथ दूसरी शादी हो जाने से रामपाल खुश रहने लगा था. रामपाल सुबह ही मेहनतमजदूरी करने के लिए घर से निकल जाता, फिर देर शाम ही घर पहुंच पाता था. गुजरते समय के साथ सविता 2 बच्चों की मां भी बन गई. हालांकि सविता पहले से ही देखनेभालने में सुंदर थी, लेकिन 2 बच्चों को जन्म देने के बाद तो उस की देह और भी चमक उठी थी.

रामपाल के मकान के सामने ही करन सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. उस वक्त करन का बड़ा बेटा मंजीत जवानी के दौर से गुजर रहा था. मंजीत आवारा किस्म का था. हर समय वह अपनी चाची सविता के पास ही पड़ा रहता था. उस के साथ रहने से सविता को एक सब से बड़ा फायदा था कि वह उस के बच्चों को संभालने में उस की मदद करता था. सविता को जब कभी भी अपने घर का कामकाज निपटाना होता था तो वह अपने बच्चों को मंजीत के पास ही छोड़़ देती थी. कुसगंति से मंजीत के मन में गंदगी पनपनी शुरू हुई तो चाची के प्रति उस की सोच भी बदल गई थी. हालांकि सविता उसे अपने भतीजे के रूप में ही देखती आ रही थी. लेकिन जैसे ही मंजीत का बदलता नजरिया देख कर सविता के मन में भी उथलपुथल पैदा हो गई.

उसे अब पति रामपाल का शरीर कुछ थकाथका सा महसूस होने लगा था. कई बार सविता बच्चों को मंजीत को सौंप कर उसी के सामने नहाने लगती थी, जिसे आंख चुरा कर देखने में मंजीत की आंखों को बहुत ही सुख मिलता था. सविता नहाने के बाद अपने तन को तौलिए से ढंक कर कमरे में जाती तो मंजीत की हवस भरी निगाहें उस के शरीर का पीछा करती रहती थीं. फिर एक दिन ऐसा भी आया कि सविता कमरे में तौलिए से अपने तन का पानी पोंछ रही थी, उसी दौरान उस के हाथ से तौलिया छूटा और नीचे गिर गया. सविता ने बड़ी ही फुरती से तौलिया उठाने की कोशिश की तो सामने दरवाजे के सामने ही मंजीत खड़ा देख रहा था.

‘‘अरे मंजीत, तुम यहां? तुम ने कुछ देखा तो नहीं?’’

‘‘नहींनहीं चाची, मैं ने कुछ नहीं देखा.’’

मंजीत की बात सुनते ही सविता मुसकराई, ‘बुद्धू कहीं का, पूरा सीन हो गया, लेकिन ये कुछ समझने को तैयार ही नहीं.’

एक दिन मंजीत जुलाई महीने में अपनी सविता चाची के घर पहुंचा. उस के परिवार वाले खेतों पर काम करने गए हुए थे. सविता के बच्चे सोए पड़े थे. सविता बच्चों के पास ही सोई हुई थी. उस समय नींद की आगोश में उस के अंगवस्त्र अस्तव्यस्त हो चुके थे. मंजीत ने अपनी चाची को इस हाल में सोते देखा तो उस के तनमन के तार झनझनाने लगे. उसी समय सविता की आंखें खुलीं तो उस ने सामने मंजीत को बैठे देखा. वह पहल करते हुए बोली, ‘‘मंजीत तू कब आया? तेरे आने का तो मुझे पता ही नही चला.’’

‘‘बस चाची, यूं समझो कि अभीअभी आया था. घर पर नींद नहीं आ रही थी तो सोचा चाची के पास थोड़ा वक्त काट आऊं. लेकिन यहां आ कर देखा तो आप गहरी नींद में सोई पड़ी थीं.’’

‘‘अरे नहीं, आजकल मुझे गहरी नींद कहां आ रही है. मेरी कमर में दर्द है. उसी से परेशान रहती हूं. कई बार तेरे चाचा से तेल की मालिश करने को कहती हूं, लेकिन उन के पास टाइम ही नहीं है.’’

‘‘कोई बात नहीं, चाचा के पास टाइम नहीं है तो मैं तो हर वक्त खाली ही रहता हूं. अगर आप कहें तो मैं ही आप की मालिश कर देता हूं.’’

सविता का निशाना बिलकुल सही लक्ष्य भेदने को तैयार था. मंजीत की बात सुनते ही सविता उठ खड़ी हुई. उस ने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया. फिर उस ने तेल की शीशी उस के हाथ में थमा दी और कंधे पर मालिश करने को कहा. मंजीत ने हाथ में तेल ले कर सविता के कंधों से मालिश शुरू की तो उस के हाथ धीरेधीरे कंधे से नीचे फिसलने लगे. सविता को भी उन्हीं पलों का इंतजार था. सविता की बीमारी का इलाज होना शुरू हुआ तो वह इतनी मदहोश हो गई कि उस ने अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और सीने के बल चारपाई पर लेट गई. धीरेधीरे मंजीत का धैर्य जबाव दे चुका था. दोनों की रगों में खून गर्म हो कर दौड़ने लगा था. अंत में वह पल भी आ गया कि दोनों ही कामवासना की आग से गुजर गए.

मंजीत ने उस दिन जिंदगी में पहली बार किसी औरत के शरीर का सुख पाया था. वहीं सविता भी बहुत खुश थी. उस दिन दोनों के बीच चाचीभतीजे के रिश्ते तारतार हुए तो यह सिलसिला अनवरत चलता गया. दोनों के बीच लगभग 3 साल से अनैतिक रिश्ते चले आ रहे थे. लेकिन जब दोनों के बीच नजदीकियां ज्यादा ही बढ़ गईं तो उन की प्रेम कहानी की चर्चा पूरे गांव में फैल गई. इस बात की जानकारी परिवार तक पहुंची तो चंद्रपाल ने करन से वह मकान खाली करा लिया. करन ने गांव के पास ही थोड़ी सी जमीन खरीद रखी थी, वह उसी में बच्चों को ले कर झोपड़ी डाल कर रहने लगा. इस बात को ले कर पंचायत हुई. पंचायत में सविता को भी बुलाया गया था. भरी पंचायत में सविता ने अपने ही जेठ पर उसे बदनाम करने का आरोप लगाया था.

बातों ही बातों में चंद्रपाल सविता पर गर्म पड़ा तो करन ने उसे मारने के लिए घर से कुल्हाड़ी तक निकाल ली थी. जिस के बाद से चंद्रपाल उस से डर कर रहता था. उस के बाद उस ने न तो कभी मंजीत को ही टोका और न ही सविता को. उस के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच फिर से खिचड़ी पकने लगी थी. चंद्रपाल ने कई बार रामपाल को टोका कि तेरी बीवी जो कर रही है वह ठीक नहीं है. उसे थोड़ा समझा कर रख. इन दोनों के कारण पूरे गांव में उन के परिवार की बदनामी होती है. लेकिन रामपाल तो अपनी बीवी से इतना दब कर रहता था कि उसे कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं कर पाता था.

मंजीत और सविता के बीच जो कुछ चल रहा था, रामपाल भी जानता था. लेकिन वह मजबूर था. उस के बाद तो सविता रामपाल पर इस कदर हावी हो चुकी थी कि उस के सामने ही मंजीत को अपने घर पर बुला लेती थी. इस बार देश में फिर से लौकडाउन लगा तो दोनों ही एकदूसरे से मिलने के लिए परेशान रहने लगे थे. उस दौरान दोनों के बीच जो भी बात होती थी, वह मोबाइल पर ही होती थी. लेकिन दोनों ही एकदूसरे की चाहत में बुरी तरह से परेशान थे. जब मंजीत की जुदाई सविता से सहन नहीं हो पाई तो उस ने उस के सामने एक प्रश्न रखा. अगर तुम मुझे दिल से प्यार करते हो तो दुनिया की चिंता क्यों करते हो. मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं. लेकिन यह जुदाई अब मुझ से सहन नहीं

होती. मैं तुम्हारे लिए यह घर छोड़ने को तैयार हूं. लेकिन मंजीत हमेशा उस की हिम्मत तोड़ देता था. अगर हम दोनों घर से भाग कर शादी कर भी लें तो तुम्हारे बच्चों का क्या होगा? फिर उस के बाद तो हम समाज में मुंह दिखाने लायक भी नही रहेंगे. मंजीत इस वक्त काशीपुर की एक पेपर मिल में काम करता था. काम करते हुए उस ने कुछ पैसे भी इकट्ठा कर लिए थे. उस ने सोचा उन पैसों के सहारे वह सविता के साथ बाहर कुछ दिन ठीक से काट लेगा. सविता ने भी काफी समय से रामपाल की चोरी से कुछ पैसे इकट्ठा किए थे. 2 जून, 2021 को दोनों ने घर से भागने का पूरा प्लान तैयार किया और काशीपुर से ट्रेन पकड़ कर घर वालों की चोरीछिपे मुरादाबाद जा पहुंचे. मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही दोनों जीआरपी की निगाहों में संदिग्ध के रूप में चढ़ गए.

जीआरपी ने उन से पूछताछ की तो मंजीत ने साफसाफ बता दिया कि वह उस की चाची है. हम दोनों किसी बीमार रिश्तेदार को देखने के लिए आए हुए हैं. लेकिन पुलिस को उन की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो उन्होंने परिवार वालों से बात कराने को कहा. तब मंजीत ने अपनी बुआ की नातिन से जीआरपी वालों की बात करा दी. जिस के बाद पुलिस वालों ने उन्हें सीधे घर जाने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया. रेलवे पुलिस से छूटने के बाद भी मंजीत बुरी तरह से घबराया हुआ था. उसे पता था कि इस वक्त देश बुरे हालात से गुजर रहा है. घर से जाने के बाद न तो उन्हें कहीं भी इतनी आसानी से नौकरी ही मिलने वाली है और न ही उस के बाद उस के घर वाले उसे शरण देने वाले हैं.

यह सब मन में विचार उठते ही सविता ने मंजीत के सामने एक प्रश्न किया, ‘‘मंजीत, मैं तेरी खातिर अपना घरबार, बच्चों तक को छोड़ आई. लेकिन तेरे अंदर इतनी भी हिम्मत नहीं कि तू अपने ताऊ को सबक सिखा सके. उस ने ही हम दोनों का जीना हराम कर रखा है. अगर वह न हो तो हमें घर से भागने की जरूरत भी नहीं होती.’’

सविता की बात मंजीत के दिल को छू गई, ‘‘चाची, तुम अब बिलकुल भी चिंता मत करो. मैं घर वापस जाते ही उस ताऊ का ऐसा इलाज करूंगा कि वह कुछ कहने लायक भी नहीं रहेगा.’’

सविता को विश्वास में ले कर मंजीत अपने घर वापस चला गया. घर जाने के बाद वही सब कुछ हुआ, जिस की उम्मीद थी. दोनों के घर पहुंचते ही परिवार वालों ने उन्हें उलटासीधा कहा. चंद्रपाल ने सविता को घर तक में नहीं जाने दिया था. जिस के कारण मंजीत ने उसी रात अपने ताऊ को मौत की नींद सुलाने का प्रण कर लिया था. 14 जून, 2021 की शाम को मंजीत अपने काम पर चला गया. लेकिन फैक्ट्री में काम करते वक्त भी उस की निगाहों के सामने उस के ताऊ की सूरत ही घूमती रही. उसी वक्त मशीनों में कोई तकनीकी खराबी आ गई, जिस के कारण मशीन बंद करनी पड़ी. मंजीत को लगा कि वक्त उस का साथ दे रहा है. उस ने तभी सविता को फोन मिलाया और आधे घंटे बाद ताऊ के घेर के पास मिलने को कहा. मंजीत की बात सुनते ही सविता के हाथपांव थरथर कांपने लगे थे.

उसे लगा कि आज वह जो काम करने जा रही है वह ठीक से हो पाएगा भी या नहीं. उस की चारपाई के पास ही पति रामपाल खर्राटे मार कर सो रहा था. रामपाल को सोते देख उस ने किसी तरह से हिम्मत जुटाई और धीरे से घर का दरवाजा खोल कर दबे पांव चंद्रपाल के घेर की तरफ बढ़ गई. मंजीत किसी तरह से फैक्ट्री की पिछली दीवार फांद कर बाहर आया और सीधे अपने ताऊ चंद्रपाल के घेर में पहुंचा. उस वक्त सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे. सविता मंजीत के पहुंचने से पहले ही वहां पहुंच चुकी थी. घेर में पहुंचते ही मंजीत ने घेर में जल रहे बल्ब को उतार दिया, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके. चंद्रपाल भी सारे दिन मेहनतमजदूरी कर के थक जाता था.

उसी थकान को उतारने के लिए वह अकसर ही रात में शराब पी कर ही सोता था. जिस वक्त मंजीत और सविता उस के पास पहुंचे, वह गहरी नींद में सोया हुआ था. चंद्रपाल को सोते देख मंजीत ने सविता को उस का मुंह बंद करने का इशारा किया, फिर उस ने अपने हाथ में थामी ईंट से लगातार कई वार कर डाले. मुंह बंद होने के कारण चंद्रपाल की चीख तक न निकल सकी. थोड़ी देर तड़पने के बाद उस की सांसें थम गईं. इस के बावजूद भी मंजीत बेरहमी दिखाते हुए उस के चेहरे व सिर पर कई वार ईंट से प्रहार किया. जब चंद्रपाल का शरीर पूरी तरह से शांत हो गया तो दोनों वहां से चले गए. सविता के हाथों पर खून लगा हुआ था, जो उस के घर के दरवाजे पर भी लग गया था.

घर पहुंच कर सविता ने एक कपड़े से हाथों का खून पोंछा. वह कपड़ा उस ने बाथरूम में डाल दिया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया था. ताऊ को  मौत की नींद सुला कर मंजीत सीधा फैक्ट्री में पहुंच गया, जिस के बाद उस ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन पुलिस के आगे उस की सारी होशियारी धरी की धरी रह गई. चंद्रपाल के बेटे सचिन की तरफ से भादंवि की धारा 302 व 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया था. Ghar ki Kahaniyan

 

UP Crime News : सिर्फ संदेह पर खूनी हथौड़ा

UP Crime News : नोएडा की एक कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर था तो वहीं उस की पत्नी आसमां बेगम भी एक इंजीनियर थी. 2 बच्चों के साथ दोनों अपने मकान में हंसीखुशी से रहते थे. इसी बीच नुरुल्लाह की नौकरी छूट गई. फिर हालात ऐसे बने कि वह पत्नी से रोजाना ही क्लेश करने लगा. फिर एक दिन नुरुल्लाह ने वह कर डाला, जिस की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.

पापा को मम्मी के कमरे से तेजी के साथ दरवाजा बंद कर के निकलते देख जाहिदा को थोड़ा अटपटा लगा. आमतौर पर उदासीन और शांत रहने वाले अपने पापा का उस दिन ऐसा व्यवहार उसे कुछ अजीब लगा. उन्हें तेजी के साथ बिना कोई जवाब दिए सीढिय़ों से नीचे उतरते देख पता नहीं क्यों 14 साल की जाहिदा को लगा कि कोई न कोई गड़बड़ जरूर है. गड़बड़ क्या है, यह जानने के लिए जाहिदा तेजी से अपनी मां के कमरे की तरफ भागी. क्योंकि उसे पूरी आशंका थी कि पापा नुरुल्लाह हैदर के अपसेट होने की वजह कहीं न कहीं मम्मी के साथ उन का झगड़ा हो सकता है.

जाहिदा तेजी से चलते हुए अपनी मम्मी आसमां बेगम के कमरे तक पहुंची और दरवाजा खोल कर जैसे ही अंदर देखा तो उस के हलक से एक चीख निकली.

एक पल फटी आंखों से पलंग पर पड़े अपनी मम्मी के खून से लथपथ शरीर को देखने के बाद अगले ही पल ‘भैया…मम्मी’ चीखते हुए वह उलटे पांव अपने भाई के कमरे की तरफ दौड़ी.

जाहिदा की चीख इतनी तेज थी कि अपने कमरे में स्टडी टेबल पर बैठ कर पढाई कर रहा उस का बड़ा भाई नईम तेजी से दौड़ता हुआ अपने कमरे से बाहर निकला.

”क्या हुआ, चीख क्यों रही हैं? जाहिदा, क्या हुआ मम्मी को? इतनी हड़बड़ा क्यों रही हो?’’ नईम ने पूछा.

”भाई, वो मम्मी अपने कमरे में खून से लथपथ पड़ी हैं.’’ जाहिदा ने टूटेफूटे शब्दों में जैसेतैसे जवाब दिया.

”क्याऽऽ…’’ इतना सुनते ही नईम तेजी से अपनी अम्मी आसमां बेगम के कमरे की तरफ भागा और अंदर पहुंचते ही खंभे की तरह जड़वत हो गया. सामने बैड पर उस की अम्मी की खून से लथपथ लाश पड़ी थी.

रोतेबिलखते जाहिदा ने अपने भाई को बता दिया कि उस ने किस तरह कुछ देर पहले पापा को हड़बड़ी में मम्मी के कमरे से बाहर निकलते देखा था और उस के बाद उस ने मम्मी को कमरे में उस अवस्था में देखा. नईम समझ गया कि ये सब उस के पापा का ही किया धरा है, इसलिए उस ने तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर मम्मी के जख्मी होने की सूचना दे दी. यह मामला देश की राजधानी दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा शहर का है. 4 अप्रैल, 2025 को पुलिस कंट्रोल रूम को नईम खान की तरफ से जो फोन किया गया था, उस के बताए गए पते के मुताबिक ये घटनास्थल थाना फेज वन के अंतर्गत आता था.

थाने में काम निबटा कर फेज वन थाने के एसएचओ अनिल कुमार मान डीसीपी औफिस जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें बताया गया कि नोएडा के सेक्टर-15 में मकान नंबर सी 154 में आसमां नाम की एक महिला को उस के पति नुरुल्लाह हैदर ने हमला कर जख्मी कर दिया है. एसएचओ मान ने घटना के बारे में अपने उच्चाधिकारियों एसीपी विवेक रंजन राय और डीसीपी राम बदन सिंह को इत्तिला दे दी. अपने मातहतों को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंचने से पहले उन्होंने फोरैंसिक टीम और मैडिकल टीम को घटनास्थल पर पहुंचने के आदेश दिए.

एसएचओ मान को घटनास्थल तक पहुंचने में करीब 20 मिनट लगे, क्योंकि थाने से घटनास्थल की दूरी करीब ढाई किलोमीटर थी. पुलिस के वहां पहुंचने से पहले घटनास्थल पर आसपड़ोस के लोगों की भीड़ एकत्र हो चुकी थी. सेक्टर 15 नोएडा का पौश इलाका था और ब्लौक सी के जिस मकान में वारदात हुई थी, वहां बड़ीबड़ी कोठियां बनी हुई थीं. पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचते ही नईम और जाहिदा इंसपेक्टर मान को फस्र्ट फ्लोर पर बने अपनी मम्मी के कमरे में ले गए. फोरैंसिक एक्सपर्ट और मैडिकल टीम उन के आने से पहले ही वहां पहुंच चुकी थी और उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया था.

कातिल खुद पहुंचा थाने

मान ने आसमां बेगम के कमरे में जा कर देखा कि उन का खून से लथपथ शरीर डबल बैड पर इस तरह पडा था, मानो वह सोई हुई हों और उन पर सोते समय किसी भारी वस्तु से वार किया गया हो. वहां खून से सना हथौड़ा पड़ा था, शायद उसी से आसमां के सिर पर वार किया गया होगा. फोरैंसिक टीम ने उस हथौड़े को अपने कब्जे में ले लिया. पलंग पर ही सब्जी काटने वाला एक चाकू भी पड़ा था, जो खून से सना था. दोधारी चाकू एक तरफ से धार व दूसरी तरफ से कांटेदार था. आसमां के गले पर किसी धारदार हथियार से काटे जाने का भी निशान था. शायद उसी चाकू से उस का गला रेता गया होगा.

इंसपेक्टर मान के कहने पर फोरैंसिक टीम ने चाकू को भी बरामद कर लिया. कमरे में दीवारों पर खून के छींटों के अलावा और कोई खास चीज नहीं मिली. संभावित जगहों से फोरैंसिक टीम ने हाथ की अंगुलियों के निशान उठा लिए थे. मैडिकल व फोरैंसिक टीम वहां पहुंचते ही बता चुकी थी कि आसमां बेगम की मौत हो चुकी है. मान अपनी जांचपड़ताल और परिवार के लोगों से पूछताछ कर ही रहे थे कि एसीपी विवेक रंजन और डीसीपी रामबदन सिंह भी मौके पर पहुंच गए. सभी ने परिवार के लोगों से घटना के बारे में जानकारी हासिल की और शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी करने लगे.

उसी दौरान सेक्टर 20 थाने से वायरलैस के माध्यम से एक सूचना प्रसारित की गई कि सेक्टर 15 के सी ब्लौक में रहने वाला एक व्यक्ति नुरुल्लाह हैदर सेक्टर 20 थाने पहुंचा है और उस ने बताया है कि उस ने अपनी पत्नी का खून कर दिया है, उसे गिरफ्तार कर लो और जा कर उस की बीवी की लाश उठा लो.  जांच आगे बढ़ती, उस से पहले ही केस का खुलासा हो गया और कातिल खुद ही पुलिस के पास पहुंच गया. इंसपेक्टर मान के लिए यह सुकून देने वाली सूचना थी. जब नईम और जाहिदा से उन के पापा के बारे में पूछा गया तो पता चला कि उन के ही पापा का नाम नुरुल्लाह हैदर है.

डीसीपी राम बदन सिंह ने सेक्टर 20 थाने की पुलिस को निर्देश जारी करवाया कि जिस नुरुल्लाह ने अपनी पत्नी का मर्डर किया है, वह फेज वन थाने का मामला है और एसएचओ व अन्य पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर ही हैं. इसलिए पुलिस की एक टीम उसे फेज वन थाने पहुंचा दे. इधर सेक्टर 20 थाने की पुलिस नुरुल्लाह को फेज वन थाने में पहुंचा रही थी, उसी बीच मृतका आसमां बेगम के मायके वाले भी घटनास्थल पर पहुंच गए. एसएचओ मान ने उन से भी घटना के बारे में और आसमां बेगम व नुरुल्लाह के बारे में पूछताछ कर घटना के कारणों की टोह ली.

पूरी जांचपड़ताल के बाद आसमां के शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. उस के बाद पुलिस फेमिली वालों को साथ ले कर फेज वन थाने आ गई. एसीपी विवेक रंजन के आदेश पर इंसपेक्टर मान ने मृतका के बेटे नईम की तहरीर पर उस के पापा नुरुल्लाह हैदर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करवा कर जांच का काम अपने हाथ में ले लिया. उस के बाद नुरुल्लाह से वारदात के कारणों को ले कर गहन पूछताछ शुरू हुई. थाने में मौजूद फेमिली वालों से भी नुरुल्लाह के बयान की पुष्टि की गई.

विस्तार से पूछताछ के बाद आसमां बेगम हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस ने सभ्य समाज में पनप रही एक चिंताजनक समस्या के पहलू को उजागर कर दिया. समाज में पनप रही यह समस्या ऐसी है, जिस में पतिपत्नी के बीच एकदूसरे के चरित्र को ले कर किए जा रहे शक के कारण हजारों परिवार या तो बिखर रहे हैं या इस शक के जहर में पैदा हुई नफरत से एकदूसरे की जान ले रहे हैं. आसमां बेगम हत्याकांड की कहानी भी संदेह के उसी जहर से पैदा हुई एक ऐसी ही घटना निकली.

55 वर्षीय नुरुल्लाह हैदर मूलरूप से बिहार के चंपारण जिले का रहने वाला है. उस ने एमसीए की पढ़ाई की थी. उन दिनों वह दक्षिणी दिल्ली के ही जामिया नगर इलाके में रहता था. जामिया नगर इलाके में ही आसमां बेगम का परिवार भी रहता था. भरेपूरे और पढ़ेलिखे उस के परिवार में 3 भाई और 2 बहनें थीं. आसमां सब से छोटी थी. 22 की उम्र में जब उस ने बीटेक की पढ़ाई पूरी की तो परिवार के लोगों को उस के निकाह की चिंता सताने लगी. वैसे भी आम मुसलिम परिवारों में बच्चों की शादियां करने के लिए ये उम्र ही सही मानी जाती है.

लेकिन परिवार ने जब आसमां के लिए एक पढ़ेलिखे और काबिल लड़के की तलाश शुरू की तो उन के हाथ निराशा ही लगी. कहीं लड़का अच्छा था तो पढ़ालिखा नहीं था, कहीं परिवार प्रतिष्ठित नहीं था तो कहीं लड़के के परिवार की माली हालत आड़े आ जाती थी. कहीं सब चीजें ठीक हो जातीं तो लड़के के रूपरंग खूबसूरत आसमां से मैच नहीं करता था. परिवार निराश होने लगा था कि इसी बीच किसी जानकार ने आसमां के पापा को नुरुल्लाह हैदर के बारे में बताया.

नुरुल्लाह हैदर बिहार का रहने वाला था. वह पढ़ेलिखे परिवार से ताल्लुक रखता था. एमसीए करने के बाद ओखला की एक कंपनी में अच्छे पद और ऊंची तनख्वाह पर नौकरी करता था. उस के परिवार के ज्यादातर लोग या तो सऊदी अरब या विदेशों में नौकरी करते थे. परिवार में अम्मी और अब्बू ही चंपारण में अपने गांव में रहते थे. बस एक ही कमी थी कि नुरुल्लाह उम्र में आसमां बेगम से 13 साल बड़ा था. आसमां के फेमिली वालों ने नुरुल्लाह की फेमिली की बैकग्राउंड के साथ उस की शिक्षादीक्षा पर विचारविमर्श किया तो उन्हें लगा कि उम्र ज्यादा भले ही हो, लेकिन नुरुल्लाह के पास उन का जो फोटो था, उस के मुताबिक वह उतनी उम्र का लगता नहीं था.

इसलिए परिवार वालों ने बिचौलिए से बात आगे बढ़ाने के लिए कहा और जल्द ही आसमां के फेमिली वालों तथा नुरुल्लाह की एक मीटिंग हुई, जिस में दोनों पक्षों के बीच शादी के प्रस्ताव को ले कर बातचीत हुई. नुरुल्लाह से मुलाकात के बाद आसमां के फेमिली वालों को जो थोड़ीबहुत आशंका थी, वह भी दूर हो गई. क्योंकि नुरुल्लाह एक नेक और जहीन इंसान होने के साथ बेहद हैंडसम था. आसमां और नुरुल्लाह ने भी एकदूसरे को पहली ही मुलाकात में पसंद कर लिया. बातचीत आगे बढ़ी और नुरुल्लाह के फेमिली वालों ने भी आ कर आसमां के पेरेंट्स से बातचीत की, जिस के बाद निकाह की बात पक्की हो गई.

पति को ले कर क्यों बदला आसमां का नजरिया

एमसीए पास नुरुल्लाह हैदर की शादी 2004 में जामिया नगर दिल्ली निवासी आसमां से हो गई. शादी के बाद नुरुल्लाह ने जामिया नगर का अपना फ्लैट छोड़ कर नोएडा में बड़ा फ्लैट किराए पर ले लिया. कुछ समय बाद उस ने दिल्ली की नौकरी छोड़ कर नोएडा में ही एक दूसरी कंपनी में नौकरी भी तलाश कर ली. वक्त धीरेधीरे अपनी रफ्तार से गुजरने लगा. आसमां बेगम को भी नोएडा की एक कंपनी में बतौर इंजीनियर नौकरी मिल गई. पतिपत्नी दोनों कमाते थे. दोनों ने मिल कर नोएडा के सेक्टर 15 स्थित बी ब्लौक में 200 गज का प्लौट खरीद कर उस पर ढाई मंजिला मकान भी बनवा लिया. मकान बनवाने के लिए आसमां ने अपने परिवार से भी आर्थिक मदद ली.

कुछ समय बाद आसमां बेगम एक के बाद एक 2 बच्चों की मां बन गई. बड़ा बेटा नईम अब 21 साल का हो गया था और एमिटी यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहा था. जबकि छोटी बेटी 13 साल की जाहिदा एक प्राइवेट स्कूल में 8वीं क्लास में पढ़ रही थी. सब कुछ ठीक ही चल रहा था, अचानक नुरुल्लाह की जिंदगी में एक नया मोड़ आ गया. 10 साल पहले अचानक उस की नौकरी छूट गई. बिना नौकरी के 1-2 साल गुजर गए, लेकिन कहीं दूसरी नौकरी नहीं मिली.

थकहार कर नुरुल्लाह ने छोटेमोटे कुछ काम शुरू कर दिए, जैसे कुछ कंपनियों को कंसलटेंसी देना और औनलाइन शेयर ट्रेडिंग करना. इस से वह अपने निजी खर्चे तो निकाल लेता था, लेकिन परिवार को चलाने का सारा बोझ पत्नी आसमां के सिर पर ही था. घर के ग्राउंड फ्लोर पर चलने वाले पीजी से जो किराया आता, उस के कारण भी परिवार की काफी हद तक मदद हो जाती थी. नुरुल्लाह हैदर की स्थाई नौकरी नहीं थी, जिस के कारण घर में थोड़ीबहुत परेशानी तो थी, लेकिन इस के बावजूद परिवार में पतिपत्नी और बच्चों का एकदूसरे के लिए प्यार भरपूर था. यूं ही कई साल गुजर गए.

नुरुल्लाह का नौकरी की तलाश का संघर्ष कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गया. कोरोना महामारी के बाद तो नुरुल्लाह को नौकरी मिलना जैसे असंभव सा हो गया. जैसेजैसे वक्त बीता, इस का असर आसमां और नुरुल्लाह हैदर के संबधों पर भी पडऩे लगा. एक तरफ जहां नुरुल्लाह लंबे समय से बेरोजगार था तो अब आसमां सेक्टर- 62 की मल्टीनैशनल कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर काम कर रही थी. बतौर सिविल इंजीनियर मोटी पगार पर नौकरी करती थी. अचानक एक साल पहले नुरुल्लाह के मन में संदेह का एक ऐसा बीज अंकुरित हो गया, जो किसी भी इंसान के परिवार को बरबाद करने के लिए काफी होता है.

दरअसल, एक दिन जब आसमां बेगम कमरे में मौजूद नहीं थी तो उस की गैरमौजूदगी कमरे में रखे उस के फोन पर आए नोटिफिकेशन में लव यू और दिल का इमोजी बना संदेश पढ़ लिया. अब चूंकि आसमां एक मल्टीनैशनल कंपनी में बड़े ओहदे पर थी और हर रोज औफिस आतीजाती थी तो जाहिर है कि बनसंवर कर सलीके से अच्छे कपड़े पहन कर ही जाती होगी. आसमां के फोन पर आए उस मैसेज को देखने के बाद नुरुल्लाह को लगने लगा कि हो न हो अपने औफिस या बाहर के किसी शख्स से आसमां का अफेयर चल रहा है.

इस के बाद उस ने लगातार अपनी पत्नी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी. अब उस ने महसूस किया कि आसमां औफिस टाइम से ज्यादा वक्त काम की अधिकता का बहाना कर के बाहर गुजारती थी. औफिस के काल की बात कह कर देरदेर तक लोगों से फोन पर बात करती थी या वाट्सऐप पर चैट करती रहती थी. शुरू में बात ज्यादा आगे न बढ़ाते हुए नुरुल्लाह ने आसमां को बस इतना कहा कि औफिस के काम घर मत लाया करो. घर आने के बाद भी तुम औफिस के लोगों से काल या चैट करती रहती हो, यह ठीक नहीं है.

शुरू में आसमां ने भी यही कहा कि जब ज्यादा जरूरी होता है तो औफिस के लोग फोन करते ही हैं. नौकरी करनी है तो थोड़ा एडजस्टमेंट करना पड़ता है. कुछ दिनों बाद भी जब कुछ नहीं बदला तो नुरुल्लाह ने थोड़ा सख्ती के साथ यह बात कहनी शुरू कर दी. पहले कभी भी अपने पति से ऊंची आवाज में बात न करने वाली आसमां को भी अब पति की टोकाटाकी से चिढ़ होने लगी थी, इसलिए उस ने एक दिन थोड़ा सख्ती के साथ बोल दिया, ”हैदर मियां, आप तो 10 साल से खाली बैठे हो. इतने सालों में दुनिया कितनी बदल गई है, शायद आप को पता नहीं है.

आज की तारीख में औफिस की नौकरी के अलावा भी बहुत कुछ करना पड़ता है.भले ही आप घर में हो, काल भी लेने पर पड़ते हैं और वाट्सऐप मैसेज के जवाब भी देने पड़ते हैं. अगर ऐसा न करूं तो एक दिन में नौकरी चली जाएगी. फिर कैसे चलेगा घर. आप तो कुछ कमाते नहीं हो, मैं आप के हिसाब से चल कर नौकरी खो दूंगी तो किस के सामने हाथ फैलाएंगे.’’

आसमां का तर्क तो ठीक था, लेकिन उस शक का क्या करें जो नुरुल्लाह के दिलोदिमाग में बैठ चुका था. हर दिन उसे पत्नी के व्यवहार में अपने लिए बदलाव नजर आने लगा. पहले वह कभी उस की बात पर पलट कर जवाब नहीं देती थी. लेकिन अब वह न सिर्फ जवाब देती थी, बल्कि एक तरह से उस की उपेक्षा करती रहती थी. नुरुल्लाह की बातों को वह एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल देती थी. यह सब कुछ पिछले करीब 6 महीने से ज्यादा ही हो रहा था. हालांकि नुरुल्लाह को खुद ही भरोसा नहीं था कि आसमां के किसी से संबंध है तो किस तरीके के हैं और वो कौन है. लेकिन उस के व्यवहार और बदलते व्यवहार से नुरुल्लाह का शक हर रोज यकीन में बदलता जा रहा था.

इसी के साथ आसमां के ऊपर उस की टोकाटाकी भी बढ़ती जा रही थी. कुछ दिन पहले की ही बात है. जब नुरुल्लाह घर के बाहर गया हुआ था, अचानक बाहर से लौट कर वह अपने कमरे में आया तो देखा आसमां किसी से वाट्सऐप काल पर बात कर रही थी. उस के कमरे में घुसते ही आसमां ने काल डिसकनेक्ट कर दी. साथ ही उस ने अपने वाट्सऐप से कुछ चैट भी डिलीट कर दी. पत्नी का यह व्यवहार मन में संदेह पैदा करने वाला था, लिहाजा नुरुल्लाह ने पूछा, ”क्या बात है, काल क्यों काट दी? ऐसी क्या बात थी, जो मेरे सामने नहीं कर सकती थी? मुझे भी तो पता चलना चाहिए किस से बात कर रही थी?’’ कहते हुए नुरुल्लाह ने बीवी का फोन लेना चाहा.

आसमां ने झट से फोन दबाए अपना हाथ पीछे करते हुए झिड़कते हुए नुरुल्लाह से कहा, ”फिर शुरू हो गया तुम्हारा शक्की ड्रामा. खुद तो कोई कामधाम करते नहीं हो और मेरी जिंदगी को हर समय जहन्नुम बना रखा है.’’

”मेरे पास नौकरी नहीं है और तुम कमाती हो तो इस का मतलब यह तो नहीं कि पराए मर्दों के साथ अय्याशी करती रहोगी और मैं चुपचाप अपनी आंखों से देखता रहूंगा.’’ नुरुल्लाह गुस्से में बोला.

बस उस दिन बात इतनी बढ़ गई कि दोनों में जम कर झगड़ा हुआ और नुरुल्लाह ने बीवी पर हाथ तक छोड़ दिया.

पत्नी पर शक की क्या थी वजह

दिलोदिमाग में बीवी के खिलाफ फैला शक और संदेह का कीड़ा उस दिन के बाद खादपानी ले कर और ज्यादा मजबूत हो गया. उस के बाद नौबत यहां तक आ गई कि आसमां ने अपने भाइयों, मम्मीपापा और रिश्तेदारों को बुला लिया. अब चूंकि नुरुल्लाह का तो दिल्ली या आसपास कोई रहने वाला था नहीं, इसलिए आसमां के फेमिली वाले आए और नुरुल्लाह को ही भलाबुरा कहते हुए उस के ऊपर चढ़ गए. सब ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई, उस की बेरोजगारी पर जम कर तंज किए और यहां तक धमकी दी कि अगर अगली बार उस ने आसमां के साथ ज्यादा बदतमीजी की तो वे उसे जेल भिजवा देंगे. उस दिन नुरुल्लाह की खुद्ïदारी और आत्मसम्मान पर गहरी चोट लगी थी.

नुरुल्लाह ने यह बात नोटिस की कि उस घटना के बाद आसमां ने और ज्यादा सजसंवर कर रहना शुरू कर दिया था. औफिस जाते समय वह खासतौर से अच्छा दिखने का प्रयास करती थी. इतना ही नहीं, उस के फोन पर आने वाली काल और वाट्सऐप पर आने वाले मैसेज भी अब ज्यादा बढ़ गए थे. उसे लगने लगा कि आसमां ने अब उसे पूरी तरह इग्नोर करना शुरू कर दिया है और हर बात पर वह उसे पलट कर जवाब देने लगी है. नुरुल्लाह हैदर अपनी पत्नी के फोन पर आने वाले काल से और ज्यादा परेशान और खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा था. उस का शक दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा था. शक का यह जहर अब अपनी सीमा पार करने लगा था.

जिस दिन यानी 4 अप्रैल शुक्रवार को जब उस ने आसमां की हथौड़ा मार कर हत्या की तो उस से पहले वाली रात को भी दोनों के बीच बहुत झगड़ा हुआ था. दरअसल, उस दिन शाम को औफिस से आने के बाद आसमां किसी से वाट्सऐप पर वीडियो काल पर बात कर रही थी. नुरुल्लाह ने कमरे में आने से पहले हैदर ने दरवाजे पर कान लगा कर बात सुनी तो उस का पारा चढ़ गया. एक तो बेरोजगार इंसान वैसे ही खुद को उपेक्षित और असुरक्षित समझता है. उस पर अगर उसे कमाऊ बीवी का किसी इंसान से अफेयर होने का शक हो जाए तो वह और ज्यादा चिढ़चिढ़ा हो जाता है.

इसीलिए कमरे में घुसते ही उस ने बीवी से कहा, ”अभी थोड़ी देर पहले ही तो यारों से मिल कर आ रही हो. मन नहीं भरा था तो घर आते ही फिर शुरू हो गई.’’

”मैं ने तुम से पहले भी कहा था, जरा मुंह संभाल कर बात किया करो. अब तुम अपनी सारी हदें पार करते जा रहे हो.’’ आसमां ने जवाब दिया.

बस, उस के बाद क्या था घर में फिर से क्लेश हुआ और देर रात तक वही झगड़ा होता रहा, जो हर रोज होता था. दोनों बच्चों ने मिल कर किसी तरह अम्मी और अब्बू को शांत कराया.

लेकिन उस दिन आसमां ने भी ठान लिया कि वह अब नुरुल्लाह के आए दिन के तानों और शक करने को ज्यादा दिन नहीं सहेगी. इसलिए उस ने रात को ही अपने फेमिली वालों को सारी बात बताई और सुबह अपने घर आने के लिए कहा. सुबह 6 बजते ही आसमां की बहनबहनोई और अम्मीअब्बू उस के घर पहुंच गए. हमेशा की तरह इस बार भी सब ने मिल कर नुरुल्लाह को जम कर खरीखोटी सुनाई और वार्निंग दे दी कि अगर अगली बार ऐसा किया तो वे उसे जेल की हवा जरूर खिला देंगे.

उस के बाद बहनबहनोई और अब्बा तो चले गए, लेकिन आसमां की अम्मी तबियत खराब होने के कारण वहीं रुक गई. घर में हुई इस पंचायत के कारण आसमां भी उस दिन औफिस नहीं जा सकी थी. वैसे भी देर रात तक झगड़ा होने के कारण वह ठीक से सो नहीं सकी थी. खाना खाने के बाद सब अपने कमरों में आराम करने चले गए. दोनों बच्चे अपने कमरों में थे और आसमां की अम्मी गेस्टरूम में थीं. आसमां भी अपने कमरे में आ कर सो गई. लेकिन उस दिन नुरुल्लाह के दिलोदिमाग में अपमान और तिरस्कार के कारण विचारों के अंधड़ चल रहे थे.

नुरुल्लाह को लग रहा था कि बात अब सिर से ऊपर गुजर चुकी है. न तो आसमां मानने वाली है न ही उस के फेमिली वाले उस की बात पर यकीन करेंगे. वे हमेशा अपनी बेटी को ही सही मानते हैं. ऐसा अब शायद जिंदगी भर चलता रहेगा, लेकिन वह अपमान का घूंट अब आगे पीने के लिए तैयार नहीं था. उस ने फैसला कर लिया कि वह आज ही इस परेशानी को खत्म कर देगा. वह आज ही आसमां का काम तमाम कर देगा. न तो वह जिंदा रहेगी न ही अब ये किस्सा आगे चलेगा.

मन में चल रही विचारों की आंधियों के बीच नुरुल्लाह ने तय कर लिया कि आज वह आसमां को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला देगा.

नुरुल्लाह क्यों हो गया इतना खूंखार

दोपहर करीब एक बजे का समय था, जब आसमां अपने कमरे में गहरी नींद सो रही थी और घर में मौजूद अन्य तीनों सदस्य अपनेअपने कमरों में थे. उसी वक्त नुरुल्लाह किचन में गया और वहां रखा भारीभरकम हथौड़ा उठाया और किचन में रखा एक दुधारी चाकू, जो सब्जी व मांस की चौपिंग के काम आता है, उसे हाथ में ले कर आसमां के कमरे गया. आसमां के सोते समय ही उस ने हथौड़े से वार कर उस की हत्या कर दी. वह किसी भी हाल में जिंदा न बचे, इसलिए दोधारी चाकू से उस का गला भी रेत दिया.

चूंकि आसमां के सिर पर जब हथौड़े का भारीभरकम वार किया गया, उस वक्त वह गहरी नींद में थी, इसलिए हथौड़े के पहले भरपूर वार के बाद ही उस के सिर की हड्ïडी टूट गई और वह मुंह से हल्की सी भी चीख निकाले बिना कोमा में चली गई. इस वार के बाद नुरुल्लाह ने कई और वार उस के सिर पर किए, जिस से आसमां की मौत हो गई थी. चूंकि वह किसी भी हालत में आसमां को जिंदा नहीं छोडऩा चाहता था, इसलिए उस ने हथौड़ा जमीन पर रख दिया और किचन से लाए गए चाकू से उस की गरदन रेत दी.

काम पूरा होने के बाद नूर को जब यकीन हो गया कि उस की जिंदगी को नासूर बनाने वाली बीवी की मौत हो चुकी है तो वह हथौड़ा और चाकू वहीं छोड़ कर कमरे से बाहर निकल गया. लेकिन बाहर निकलने से पहले खून से सराबोर हो चुकी अपनी शर्ट उतार कर दूसरी टीशर्ट पहनी और उस के बाद कमरे से बाहर निकला. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी पता चला कि आसमां की मौत सिर में हथौड़े से किए गए वार से हुई थी. सिर की हड्डी टूटने और अत्यधिक खून निकल जाने के कारण उस की मौत हुई थी.

आसमां के कमरे से निकलते वक्त बेटी जाहिदा ने नुरुल्लाह को हड़बड़ी में जाते देख कर टोका था, लेकिन वह रुका नहीं और वहां से निकल कर सीधे थाना सेक्टर-20 पहुंचा. क्योंकि एकदो साल पहले तक उस का घर इसी थाने में आता था, लेकिन बाद में जब फेज वन नया थाना बना तो वह इलाका फेज वन में चला गया. इसीलिए वह गलती से सेक्टर 20 थाने में चला गया. आसमां का पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने उस के शव को उस के मायके वालों को सौंप दिया, जिन्होंने उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

पेरेंट्स के झगड़ों से परेशान आसमां के बेटे नईम ने अम्मी से कहा भी था कि वह कुछ दिन के लिए नानी के घर चली जाएं, लेकिन आसमां ने बेटे की बात नहीं मानी. हालांकि आसमां की जिद देख कर उस की अम्मी भी बेटी के घर पर ही रुक गई. अगर वह अपनी बहन या अम्मी के साथ उस दिन अपने मायके चली जाती तो शायद वो नुरुल्लाह के संदेह के जहर में गुस्से का शिकार होने से बच जाती.

जांच अधिकारी अनिल कुमार मान ने विस्तृत पूछताछ के बाद नुरुल्लाह हैदर को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. UP Crime News

(कथा में जाहिदा परिवर्तित नाम है)

 

 

Crime News : पिता ने प्रेमी संग बेटी को रंगेहाथों पकड़ा और कुल्हाड़ी से काट डाला

Crime News : सपना पड़ोस में रहने वाले शालू को न सिर्फ प्यार करती थी, बल्कि वह शादी भी करना चाहती थी. लेकिन इसे अपनी नाक का सवाल मान कर सपना के पिता शिवआसरे ने ऐसा नहीं होने दिया. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि सपना का प्यार बस अधूरा सपना बन कर रह गया. कानपुर जिले के घाटमपुर थाना अंतर्गत एक गांव है बिहारिनपुर. इसी गांव में शिवआसरे परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी मीना के अलावा 2 बेटियां सपना, रत्ना तथा 2 बेटे कमल व विमल थे. शिवआसरे ट्रक ड्राइवर था. उस के 2 अन्य भाई रामआसरे व दीपक थे, जो अलग रहते थे और खेतीबाड़ी से घर खर्च चलाते थे.

शिवआसरे की बेटी सपना भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह जैसेजैसे सयानी होने लगी, उस के रूपलावण्य में निखार आता गया. 16 साल की होतेहोते सपना की सुंदरता में चारचांद लग गए. मतवाली चाल से जब वह चलती, तो लोगों की आंखें बरबस उस की ओर निहारने को मजबूर हो जाती थीं. सपना जितनी सुंदर थी, उतनी ही पढ़नेलिखने में भी तेज थी. उस ने पतारा स्थित सुखदेव इंटर कालेज में 9वीं कक्षा में एडमिशन ले लिया था. जबकि उस की मां मीना उसे मिडिल कक्षा से आगे नहीं पढ़ाना चाहती थी, लेकिन सपना की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा. सपना के घर से कुछ दूरी पर शालू रहता था. शालू के पिता बैजनाथ किसान थे. उन के 3 बच्चों में शालू सब से बड़ा था.

17 वर्षीय शालू हाईस्कूल की परीक्षा पास कर चुका था और इंटरमीडिएट की पढ़ाई घाटमपुर के राजकीय इंटर कालेज से कर रहा था. शालू के पिता बैजनाथ और सपना के पिता शिवआसरे एक ही बिरादरी के थे, सो उन में गहरी दोस्ती थी. दोनों एकदूसरे का दुखदर्द समझते थे. किसी एक को तकलीफ हो तो दूसरे को दर्द खुद होने लगता. बैजनाथ और शिवआसरे बीते एक दशक से गांव में बटाई पर खेत ले कर खेती करते थे. हालांकि शिवआसरे ट्रक चालक था और खेतीबाड़ी में कम समय देता था. इस के बावजूद दोनों की पार्टनरशिप चलती रही. दोनों परिवारों में घरेलू संबंध भी थे. लिहाजा उन के बच्चों का भी एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था.

शालू सपना को चाहता था. सपना भी उस की आंखों की भाषा समझती थी. सपना के लिए शालू की आंखों में प्यार का सागर हिलोरें मारता था. सपना भी उस की दीवानी होने लगी. धीरेधीरे उस के मन में भी शालू के प्रति आकर्षण पैदा हो गया. सपना शालू के मन को भाई तो वह उस का दीवाना बन गया. सपना के स्कूल जाने के समय वह बाहर खड़ा उस का इंतजार करता रहता. सपना उसे दिखाई पड़ती तो वह उसे चाहत भरी नजरों से तब तक देखता रहता, जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो जाती. अब वह सपना के लिए तड़पने लगा था. हर पल उस के मन में सपना ही समाई रहती थी. न उस का मन काम में लगता था, न ही पढ़ाई में.

शालू का शिवआसरे के घर जबतब आनाजाना लगा ही रहता था. घर आनाजाना काम से ही होता था. लेकिन जब से सपना शालू के मन में बसी, शालू अकसर उस के घर ज्यादा जाने लगा. इस के लिए उस के पास बहाने भी अनेक थे. शिवआसरे के घर पहुंच कर वह बातें भले ही दूसरे से करता, लेकिन उस की नजरें सपना पर ही जमी रहती थीं. शालू की अपने प्रति चाहत देख कर उस का मन भी विचलित हो उठा. अब वह भी शालू के आने का इंतजार करने लगी. दोनों ही अब एकदूसरे का सामीप्य पाने को बेचैन रहने लगे थे. लेकिन यह सब अभी नजरों ही नजरों में था. शालू की चाहत भरी नजरें सपना के सुंदर मुखड़े पर पड़तीं तो सपना मुसकराए बिना न रह पाती.

वह भी उसे तिरछी निगाहों से घूरते हुए उस के आगेपीछे चक्कर लगाती रहती. अब शालू अपने दिल की बात सपना से कहने के लिए बेचैन रहने लगा. शालू अब ऐसे अवसर की तलाश में रहने लगा, जब वह अपने दिल की बात सपना से कह सके. कोशिश करने पर चाह को राह मिल ही जाती है. एक दिन शालू को मौका मिल ही गया. उस दिन सपना के भाईबहन मां मीणा के साथ ननिहाल चले गए थे और शिवआसरे ट्रक ले कर बाहर गया था. सपना को घर में अकेला पा कर शालू बोला, ‘‘सपना, यदि तुम बुरा न मानो तो मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’

सपना जानती थी कि शालू उस से क्या कहेगा. इसलिए उस का दिल जोरजोर धड़कने लगा. घबराई सी वह शालू की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देखने लगी. शालू ने हकलाते हुए कहा, ‘‘सपना वो क्या है कि मैं तुम्हारे बारे में कुछ…’’

‘‘मेरे बारे में…’’ चौंकने का नाटक करते हुए सपना बोली, ‘‘जो भी कहना है, जल्दी कहिए.’’ शायद वह भी शालू से प्यार के शब्द सुनने के लिए बेकरार थी.

‘‘कहीं तुम मेरी बात सुन कर नाराज न हो जाओ…’’ शालू ने थोड़ा झेंपते हुए कहा.

‘‘अरे नहीं…’’ मुसकराते हुए सपना बोली, ‘‘नाराज क्यों हो जाऊंगी. तुम मुझे गालियां तो दोगे नहीं. जो भी कहना है, तुम दिल खोल कर कहो, मैं तुम्हारी बातों का बुरा नहीं मानूंगी.’’

सपना जानबूझ कर अंजान बनी थी. जब शालू को सपना की ओर से कुछ भी कहने की छूट मिल गई तो उस ने कहा, ‘‘सपना, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं. मुझे तुम्हारे अलावा कुछ अच्छा नहीं लगता. हर पल तुम्हारी ही सूरत मेरी नजरों के सामने घूमती रहती है.’’

शालू की बातें सुन कर सपना मन ही मन खुश हुई, फिर बोली, ‘‘शालू, प्यार तो मैं भी तुम से करती हूं, लेकिन मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘कैसा डर सपना?’’ शालू ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘यही कि हमारेतुम्हारे प्यार को घर वाले स्वीकार करेगें क्या?’’

‘‘हम एक ही जाति के हैं. दोनों परिवारों के बीच संबंध भी अच्छे हैं. हम दोनों अपनेअपने घर वालों को मनाएंगे तो वे जरूर मान जाएंगे.’’

उस दिन दोनों के बीच प्यार का इजहार हुआ, तो मानो उन की दुनिया ही बदल गई. फिर वे अकसर ही मिलने लगे. सपना और शालू के दिलोदिमाग पर प्यार का ऐसा जादू चढ़ा कि उन्हें एकदूजे के बिना सब कुछ सूना लगने लगा. जब भी मौका मिलता, दोनों एकांत में एक साथ बैठते और अपने ख्वाबों की दुनिया में खो जाते. प्यार में वे इस कदर खो गए कि उन्होंने जीवन भर एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें भी खा लीं. एक बार मन से मन मिला तो फिर दोनों के तन मिलने में भी देर नहीं लगी. सपना और शालू ने लाख कोशिश की कि उन के संबंधों की जानकारी किसी को न हो. लेकिन प्यार की महक को भला कोई रोक सका है. एक दिन पतारा बाजार से लौटते समय गांव में ही रहने वाले उन्हीं की जाति के युवक मोहन ने उन दोनों को रास्ते में हंसीठिठोली करते देख लिया.

घर आते ही उस ने सारी बात शिवआसरे को बता दी. कुछ देर बाद जब सपना घर लौटी तो शिवआसरे ने सपना को डांटाफटकारा और पिटाई करते हुए हिदायत दी कि भविष्य में वह शालू से न मिले. सपना की मां मीना ने भी इज्जत का हवाला दे कर बेटी को खूब समझाया. सपना पर लगाम कसने के लिए मां ने उस का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. साथ ही उस पर कड़ी निगरानी रखने लगी. मीना ने शालू के घर जा कर उस के मांबाप से शिकायत की कि वह अपने बेटे को समझाएं कि वह उस की इज्जत से खिलवाड़ न करे. लेकिन कहावत है कि लाख पहरे बिठाने के बाद भी प्यार कभी कैद नहीं होता. सपना के साथ भी ऐसा ही हुआ. मां की निगरानी के बावजूद सपना और शालू का मिलन बंद नहीं हुआ. किसी न किसी बहाने वह शालू से मिलने का मौका ढूंढ ही लेती थी.

कभी दोनों नहीं मिल पाते तो वे मोबाइल फोन पर बतिया लेते और दिल की लगी बुझा लेते. सपना को मोबाइल फोन शालू ने ही खरीद कर दिया था. इस तरह बंदिशों के बावजूद उन का प्यार बढ़ता ही जा रहा था. दबी जुबान से पूरे गांव में उन के प्यार के चर्चे होने लगे थे. एक शाम सहेली के घर जाने का बहाना बना कर सपना घर से निकली और शालू से मिलने गांव के बाहर बगीचे में पहुंच गई. इस की जानकारी मीना को हुई तो सपना के घर लौटने पर मां का गुस्सा फट पड़ा, ‘‘बदजात, कुलच्छिनी, मेरे मना करने के बावजूद तू शालू से मिलने क्यों गई थी. क्या मेरी इज्जत का कतई खयाल नहीं?’’

‘‘मां, मैं शालू से प्यार करती हूं. वह भी मुझे चाहता है.’’

‘‘आने दे तेरे बाप को. प्यार का भूत न उतरवाया तो मेरा नाम मीना नहीं.’’ मीना गुस्से से बोली.

‘‘आखिर शालू में बुराई क्या है मां? अपनी बिरादरी का है. पढ़ालिखा स्मार्ट भी है.’’ सपना ने मां को समझाया.

‘‘बुराई यह है कि शालू तुम्हारे चाचा का लड़का है. जातिबिरादरी के नाते तुम दोनों का रिश्ता चचेरे भाईबहन का है. अत: उस से नाता जोड़ना संभव नहीं है.’’ मां ने समझाया.

मांबेटी में नोकझोंक हो ही रही थी कि शिवआसरे घर आ गया. उस ने पत्नी का तमतमाया चेहरा देखा तो पूछा, ‘‘मीना, क्या बात है, तुम गुस्से से लाल क्यों हो?’’

‘‘तुम्हारी लाडली बेटी सपना के कारण. लगता है कि यह बिरादरी में हमारी नाक कटवा कर ही रहेगी. मना करने के बावजूद भी यह कुछ देर पहले शालू से मिल कर आई है और उस की तरफदारी कर जुबान लड़ा रही है.’’ मीना ने कहा.

पत्नी की बात सुन कर शिवआसरे का गुस्सा बेकाबू हो गया. उस ने सपना की जम कर पिटाई की और कमरा बंद कर दिया. गुस्से में उस ने खाना भी नहीं खाया और चारपाई पर जा कर लेट गया. रात भर वह यही सोचता रहा कि इज्जत को कैसे बचाया जाए. सुबह होते ही शिवआसरे शालू के पिता बैजनाथ के घर जा पहुंचा, ‘‘तुम शालू को समझाओ कि वह सपना से दूर रहे. अन्यथा अंजाम अच्छा नहीं होगा. अपनी इज्जत के लिए वह किसी हद तक जा सकता है.’’

इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच दरार पड़ गई. शिवआसरे और बैजनाथ के बीच साझेदारी भी टूट गई. इधर चौकसी बढ़ने पर शालू और सपना का मिलनाजुलना लगभग बंद हो गया था. जिस से दोनों परेशान रहने लगे थे. अब दोनों की बात चोरीछिपे मोबाइल फोन पर ही हो पाती थी. 14 मई, 2021 को शिवआसरे के साले मनोज की शादी थी. शिवआसरे ने घर की देखभाल की जिम्मेदारी भाई दीपक को सौंपी और सुबह ही पत्नी मीना व 2 बच्चों के साथ बांदा के बरुआ गांव चला गया. घर में रह गई सपना और सब से छोटा बेटा विमल. दिन भर सपना घर के काम में व्यस्त रही फिर शाम होते ही उसे प्रेमी शालू की याद सताने लगी. लेकिन चाचा दीपक की निगरानी से वह सहमी हुई थी.

रात 12 बजे जब पूरा गांव सो गया, तो सपना ने सोचा कि उस का चाचा भी सो गया होगा. अत: उस ने शालू से मोबाइल फोन पर बात की और मिलने के लिए उसे घर बुलाया. शालू चोरीछिपे सपना के घर आ गया. लेकिन उसे घर में घुसते हुए दीपक ने देख लिया. वह समझ गया कि वह सपना से मिलने आया है. उस ने तब दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगा दिया और बड़े भाई शिवआसरे को फोन कर के सूचना दे दी. शिवआसरे को जब यह सूचना मिली तो वह साले की शादी बीच में ही छोड़ कर अकेले ही बरुआ गांव से चल दिया. 15 मई की सुबह 7 बजे वह अपने घर पहुंच गया. तब तक शालू के मातापिता सीमा और बैजनाथ को भी पता चल चुका था कि उन के बेटे शालू को बंधक बना लिया गया है.

वे लोग शिवआसरे के घर पहले से मौजूद थे. शिवआसरे घर के अंदर जाने लगा तो बैजनाथ ने पीछे से आवाज लगाई. इस पर शिवआसरे ने कहा कि वह बस बात कर मामला हल कर देगा और घर के अंदर चला गया. पीछे से बैजनाथ और सीमा भी घर के अंदर दाखिल हुए. लेकिन वे अपने बेटे शालू तक पहुंच पाते, उस के पहले ही शिवआसरे शालू और सपना को ले कर एक कमरे में चला गया और उस में लगा लोहे का गेट बंद कर लिया. शालू के पिता बैजनाथ व मां सीमा खिड़की पर खड़े हो गए, जहां से वे अंदर देख सकते थे. बैजनाथ ने एक बार फिर शिवआसरे से मामला सुलझाने की बात कही. इस पर उस का जवाब यही था कि बस 10 मिनट बात कर के मामला सुलझा देगा.

इधर पिता का रौद्र रूप देख कर सपना कांप उठी. शिवआसरे ने दोनों से सवालजवाब किए तो सपना पिता से उलझ गई. इस पर उसे गुस्सा आ गया. शिवआसरे ने डंडे से सपना को पीटा. उस ने शालू की भी डंडे से पिटाई की. लेकिन पिटने के बाद भी सपना का प्यार कम नहीं हुआ. वह बोली, ‘‘पिताजी, मारपीट कर मेरी जान भले ही ले लो, पर मेरा प्यार कम न होगा. आखिरी सांस तक मेरी जुबान पर शालू का नाम ही होगा.’’ बेटी की ढिठाई पर शिवआसरे आपा खो बैठा. उस ने कमरे में रखी कुल्हाड़ी उठाई और सपना के सिर व गरदन पर कई वार किए. जिस से उस की गरदन कट गई और मौत हो गई. इस के बाद उस ने कुल्हाड़ी से वार कर शालू को भी वहीं मौत के घाट उतार दिया.

यह खौफनाक मंजर देख कर शालू की मां सीमा की चीख निकल गई. सीमा और बैजनाथ जोरजोर से चिल्लाने लगे. सीमा ने मदद के लिए कई घरों के दरवाजे खटखटाए लेकिन कोई मदद को नहीं आया. प्रधान पति राजेश कुमार को गांव में डबल मर्डर की जानकारी हुई तो उन्होंने थाना घाटमपुर पुलिस तथा बड़े पुलिस अधिकारियों को फोन द्वारा सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी धनेश प्रसाद, एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रताप सिंह, एएसपी आदित्य कुमार शुक्ला तथा डीएसपी पवन गौतम पहुंच गए. शिवआसरे 2 लाशों के बीच कमरे में बैठा था. थानाप्रभारी धनेश प्रसाद ने उसे हिरासत में ले लिया. आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी कमरे में पड़ी थी. पुलिस ने उसे भी सुरक्षित कर लिया. जबकि शिवआसरे के अन्य भाई दीपक व रामआसरे पुलिस के आने से पहले ही फरार हो गए थे.

पुलिस अधिकारियों ने शिवआसरे से पूछताछ की तो उस ने सहज ही जुर्म कबूल कर लिया और कहा कि उसे दोनों को मारने का कोई गम नहीं है. पुलिस अधिकारियों ने गांव वालों तथा मृतक शालू के पिता बैजनाथ से पूछताछ की. बैजनाथ ने बताया कि वह और उस की पत्नी सीमा बराबर शिवआसरे से हाथ जोड़ कर कह रहे थे कि बेटे को बख्श दे. लेकिन वह नहीं माना और आंखों के सामने बेटे पर कुल्हाड़ी से वार कर उस की जान ले ली. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक शालू व सपना के शवों को पोस्टमार्टम हेतु हैलट अस्पताल, कानपुर भिजवा दिया.

चूंकि शिवआसरे ने डबल मर्डर का जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई थी, अत: थानाप्रभारी धनेश प्रसाद ने बैजनाथ की तरफ से भादंवि की धारा 302 के तहत शिवआसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे गिरफ्तार कर लिया. 16 मई, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त शिवआसरे को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Chhattisgarh News : पिकनिक पर ले जाकर पति ने पत्नी को बाल पकड़ कर पीटा फिर गला घोंटा

Chhattisgarh News : जय कुमार सिदार ने अपने घर वालों को बताए बिना सरस्वती मरांडी से प्रेम विवाह कर तो लिया, लेकिन सामाजिक रूढि़यों की वजह से उस के घर वाले उसे अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए. इस से बचने के लिए जय कुमार ने जो किया वह…

छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला आदिवासी बाहुल्य है. यहां का लैलूंगा शहर जिला मुख्यालय से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लैलूंगा घोर जनजातीय आदिवासी बाहुल्य विकास खंड है. धीरेधीरे यहां का मिश्रित माहौल अपने आप में एक आकर्षण का माहौल पैदा करने लगा है, क्योंकि यहां पर अब भले ही बहुतेरे मारवाड़ी, ब्राह्मण, कायस्थ समाज के लोग आ कर रचबस रहे हैं, लेकिन आदिवासी सभ्यता और संस्कृति की महक यहां आज भी स्वाभाविक रूप से महसूस की जा सकती है. लैलूंगा थाना अंतर्गत एक छोटे से गांव कमरगा में शदाराम सिदार एक सामान्य काश्तकार हैं. वह 2 बेटे और एक बेटी वाले छोटे से परिवार का बमुश्किल पालनपोषण कर रहे  थे.

शदाराम का बड़ा बेटा जय कुमार सिदार प्राइमरी तक पढ़ने के बाद पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटा रहा था. गरीबी और परिवार की दयनीय हालत देख कर के एक दिन 21 वर्ष की उम्र में वह अपने एक दोस्त रमेश के साथ छत्तीसगढ़ से सटे झारखंड राज्य के बोकारो शहर में रोजगार  के लिए चला गया. जल्द ही जय कुमार को स्थानीय राजू टिंबर ट्यूनिंग प्लांट में क्लीनर मशीन चलाने का काम मिल गया और जय का मित्र रमेश भी वहीं काम करने लगा. फिर उन्होंने बोकारो के एक मोहल्ले में कमरा किराए पर ले लिया. समय अपनी गति से बीत रहा था कि एक दिन जय और रमेश सुबह घर से अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे कि जय को साइकिल के साथ खड़ी एक परेशान सी लड़की दिख गई.

जय कुमार और रमेश थोड़ा आगे बढ़े तो जय ने रुक कर कहा, ‘‘यार, लगता है इस लड़की को कुछ मदद की जरूरत है.’’

दोनों  मुड़ कर वापस आए. तब युवती की ओर मुखातिब हो कर जय  ने कहा, ‘‘क्या बात है, आप क्यों परेशान खड़ी हो?’’

युवती थोड़ा सकुचाई  फिर बोली, ‘‘देखो न, साइकिल में पता नहीं क्या हो गया है, आगे ही नहीं बढ़ रही.’’

जय ने कहा, ‘‘लगता है साइकिल की चैन फंस गई है, किसी मिस्त्री को दिखानी होगी.’’

और नीचे बैठ कर वह साइकिल को ठीक करने की असफल कोशिश करने लगा. मगर चैन बुरी तरह फंस गई थी. थोड़ी देर तक प्रयास करने के बाद जय ने रमेश की ओर देखते हुए कहा, ‘‘चलो, इस की थोड़ी मदद कर देते हैं.’’

इस पर रमेश ने कहा, ‘‘यार, देर हो जाएगी, काम पर न पहुंचे तो प्रसादजी नाराज हो जाते हैं, तुम को तो पता ही है कि काम पर समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है.’’

इस पर सहज रूप से जय सिदार ने कहा, ‘‘बात तो सही है, ऐसा करते हैं, तुम काम पर चले जाओ और उन से बता देना कि आज मैं छुट्टी पर रहूंगा… मैं इन की साइकिल ठीक करा देता हूं.’’

जय को रमेश आश्चर्य से देखता हुआ ड्यूटी पर चला गया. इधर जय ने युवती की मदद के लिए साइकिल अपने कंधे पर उठा ली और धीरेधीरे साइकिल मिस्त्री के पास पहुंचा. थोड़ी ही देर में मिस्त्री ने साइकिल ठीक कर दी. युवती जय के व्यवहार और हमदर्दी को देख कर बहुत प्रभावित हुई. फिर दोनों ने बातचीत में एकदूसरे का नाम और परिचय पूछा. युवती ने अपना नाम सरस्वती मरांडी बताया. जब जय वहां से जाने लगा तो सरस्वती ने उसे अचानक रोक कर कहा, ‘‘आप ने मेरे कारण आज अपना बहुत नुकसान कर लिया है बुरा न मानें तो क्या आप मेरे साथ एक कप चाय पी सकते हैं?’’

जय सिदार 19 वर्षीय सरस्वती की बातें सुन कर हंसता हुआ राजी हो गया. अब वह उसे अच्छी लगने लगी थी. मंत्रमुग्ध सा जय उस के साथ एक रेस्टोरेंट में चला गया. बातोंबातों में सरस्वती ने उसे बताया कि वह अपने गांव ढांगी करतस, जिला धनबाद की रहने वाली है और यहां स्थानीय प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में शिक्षिका है. इस बीच जय ने सरस्वती का मोबाइल नंबर ले लिया और अपने बारे में सब कुछ बताता चला गया. अब अकसर जय सिदार सरस्वती से बातें करता. सरस्वती भी उसे पसंद करती और दोनों के बीच प्रेम की बेलें फूट पड़ीं. जल्द ही एक दिन जय कुमार ने सरस्वती से झिझकते हुए कहा, ‘‘सरस्वती, मैं तुम्हें चाहने लगा हूं. तुम प्लीज मना मत करना, नहीं तो मैं मर ही जाऊंगा.’’

इस पर सरस्वती मुसकराते हुए बोली, ‘‘अच्छा, बताओ तो इस का तुम्हारे पास क्या सबूत है.’’

‘‘सरस्वती, तुम्हारे लिए मैं सब कुछ करने को तैयार हूं. बताओ, मुझे क्या करना है.’’ जय सिदार ने हिचकते हुए कहा.

‘‘मैं तो मजाक कर रही थी, मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत पसंद करते हो.’’ सरस्वती बोली.

यह सुन कर जय की हिम्मत बढ़ गई. वह बोला, ‘‘…और मैं.’’

सरस्वती ने धीरे से  कहा, ‘‘लगता है तुम तो प्यार के खेल में अनाड़ी हो. अरे बुद्धू, अगर कोई लड़की मुसकराए, बात करे, इस का मतलब तुम नहीं समझते…’’

यह सुन कर जय खुशी से उछल पड़ा. इस के बाद उन का प्यार परवान चढ़ता गया. फिर एक दिन सरस्वती और जय ने एक मंदिर में विवाह कर लिया. सन 2017 से ले कर मार्च, 2020 अर्थात कोरोना काल से पहले तक दोनों ही प्रेमपूर्वक झारखंड में एक छत के नीचे रह रहे थे. इस बीच दोनों ने मंदिर में विवाह कर लिया और पतिपत्नी के रूप में आनंदपूर्वक रहने लगे. मार्च 2020 में जब कोविड 19 का संक्रमण फैलने लगा तो जय का काम छूट गया. घर में खाली बैठेबैठे जय को अपने गांव और मातापिता की याद आने लगी. एक दिन जय ने सरस्वती से कहा,

‘‘चलो, हम गांव चलते हैं, वहां इस समय रहना ठीक रहेगा, पता नहीं ये हालात कब तक सुधरेंगे. और जहां तक रोजीरोटी का सवाल है तो हम गांव में ही कमा लेंगे. फिर आज सवाल तो जान बचाने का है.’’

सरस्वती को बात पसंद आ गई. उस समय गांव जाने के लिए कोई साधन नहीं था. तब जय कुमार पत्नी सरस्वती को अपनी साइकिल पर बैठा कर जिला रायगढ़ के गांव कामरगा में स्थित अपने घर की ओर चल दिया. लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय कर के जय कुमार अपने घर पहुंच गया. घर में पिता शदाराम और परिजनों ने जब जय को देखा, सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. साथ में सरस्वती को देखा तो पिता शदाराम ने पूछा, ‘‘यह कौन है?’’

जय ने सकुचाते हुए सरस्वती का परिचय पत्नी के रूप में परिजनों को करा दिया. उस समय किसी ने भी कुछ नहीं कहा. लौकडाउन का यह समय सभी को चिंतित किए हुए था. मगर स्थितियां सुधरने लगीं तो जय कुमार से सवालजवाब होने लगा. एक दिन पिता शदाराम ने कहा, ‘‘बेटा जय, गांव के लोग पूछ रहे हैं कि तुम्हारी बहू कहां की है किस जाति की है? जब मैं ने बताया तो समाज के लोगों ने नाराजगी प्रकट की है. इस से शादी कर के तुम ने बहुत बड़ी भूल की है बेटा.’’

‘‘पिताजी, अब मैं क्या करूं, जो होना था, वह तो हो चुका है.’’ यह सुन कर जय बोला.

‘‘बेटा, हम को भी समाज में रहना है, यहीं जीना है. यह हाल रहेगा तो हम, हमारा परिवार भारी मुसीबत में पड़ जाएगा. कोई हम से रोटीबेटी का रिश्ता तक नहीं रखेगा. ऐसे में हो सके तो तुम लोग कहीं और जा कर के जीवन बसर करो, ताकि समाज के लोग अंगुली न उठा सकें.’’

जय ने कहा, ‘‘पिताजी, अब क्या हो सकता है, मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा.’’

एक दिन एक निकट के परिजन ने जय से कहा, ‘‘अब देख लो, सोचसमझ के कुछ निर्णय लो. वैसे, पास के गांव के हमारे परिचित रामसाय ने अपनी बेटी के साथ तुम्हारे विवाह का प्रस्ताव भेजा था. वह पैसे वाले लोग भी हैं और हमारे समाज के भी हैं. ऐसा करो, सरस्वती को तुम छोड़ दो. फिर हम बात आगे बढ़ाते हैं.’’

यह सुन कर जय का मन भी बदल गया. क्योंकि सुमन को वह बचपन में पसंद करता था. वह सोचने लगा कि काश! वह सरस्वती के चक्कर में नहीं पड़ता तो आज सुमन उस की होती. इसी दरमियान जय गांव में ही तेजराम के यहां ट्रैक्टर चलाने लगा था. नौसिखिए जय सिदार से एक दिन अचानक दुर्घटना हो गई तो तेजराम ने उस की पिटाई कर दी और उस से नुकसान की भरपाई मांगने लगा. परिस्थितियों को देख कर जय पत्नी सरस्वती को ले कर पास के दूसरे गांव सरकेदा में अपने जीजा रवि के यहां गुजरबसर करने आ गया. जय का रवि के साथ अच्छा याराना था. बातोंबातों में एक दिन रवि ने कहा, ‘‘भैया, यह तुम्हारे गले कैसे पड़ गई, इस से कितनी सुंदर लड़कियां हमारे समाज में हैं.’’

यह सुन कर के जय मानो फट पड़ा. बोला, ‘‘भाटो (जीजा), बस यह भूल मुझ से हो गई है, अब मैं क्या करूं, मुझे तो लगता है कि सरस्वती से शादी कर के मैं फंस गया हूं.’’

रवि ने जय कुमार को बताया कि परिवार में चर्चा हुई थी कि सुमन के पिता तुम्हारे लिए 2-3 बार आ चुके हैं. अब क्या हो.’’

‘‘क्या करूं, क्या इसे बोकारो छोड़ आऊं?’’ विवशता जताता जय कुमार बोला.

‘‘…और अगर कहीं फिर वापस आ गई तो..?’’  रवि कुमार ने चिंता जताई.

जय कुमार असहाय भाव से जीजा रवि की ओर देखने लगा.

रवि मुसकराते हुए बोला, ‘‘एक रास्ता है…’’

और दोनों ने बातचीत कर के एक ऐसी योजना बनाई, जिस ने आगे चल कर दोनों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. वह 7 जनवरी, 2021 का दिन था. एक दिन पहले ही जय और रवि ने सरस्वती से बात कर के पिकनिक के लिए झरन डैम चलने की योजना बना ली थी. एक बाइक पर तीनों सुबहसुबह पिकनिक के लिए निकल गए. लैलूंगा शहर घूमने, खरीदारी के बाद 7 किलोमीटर आगे खम्हार जंगल के पास झरन डैम में पहुंच कर तीनों ने खूब मस्ती की. मोबाइल से फोटो खींचे और खायापीया. इस बीच सरस्वती ने एक दफा सहजता से कहा, ‘‘कितना अच्छा होता, आज सारे परिवार वाले भी हमारे साथ होते तो पिकनिक यादगार हो जाती.’’

इस पर रवि ने बात बनाते हुए कहा, ‘‘भाभी, आएंगे आगे सब को ले कर के आएंगे. आज तो हम लोगों ने सोचा कि चलो देखें, यहां का कैसा माहौल है अगली बार  सब को ले कर के पिकनिक मनाएंगे.’’

आज जय सिदार कुछ उखड़ाउखड़ा भी दिखाई दे रहा था. इस पर सरस्वती ने कहा था, ‘‘पिकनिक मनाने आए हो या फिर किसी और काम से…’’

यह सुन कर अचकचाए जय कुमार ने मुसकरा कर कहा, ‘‘ऐसीवैसी कोई बात होती तो मैं भला क्यों आता. तुम गलत समझ रही हो. क्या है सारे कामधंधे रुके पड़े हैं. पैसा कहीं से तो आ नहीं पा रहा है, बस इसी बात की टेंशन है सरस्वती.’’

सरस्वती को लगा कि जय जायज बात कर रहा है. थोड़ी देर बाद जब वापस चलने का समय हुआ तो एक जगह रवि कुमार रुक गया और छोटी अंगुली दिखा कर बोला, ‘‘मैं अभी फारिग हो कर आता हूं.’’

रवि झाडि़यों के अंदर चला गया. सही मौका देख कर के जय ने अचानक सरस्वती पर हमला कर दिया और उस के बाल पकड़ कर उसे मारने लगा और एक रस्सी निकाल कर के गला घोंटने लगा. वह वहीं गिर पड़ी और फटी आंखों से उसे देखती रह गई. जय आखिरी तक सरस्वती पर प्राणघातक हमला भी करता रहा. इतनी देर में रवि भी दौड़ कर आ गया और जय का साथ देने लगा.  देखते ही देखते सरस्वती के प्राणपखेरू उड़ गए. सरस्वती की मौत के बाद रवि ने उस के गले में एक नीली रस्सी बांधी और झाडि़यों में घसीट कर सरस्वती की लाश छिपा दी. 12 जनवरी, मंगलवार को शाम लगभग 5 बजे थाना लैलूंगा मैं अपने कक्ष में थानाप्रभारी एल.पी. पटेल रोजमर्रा के कामों को निपटा रहे थे कि दरवाजे पर आहट सुनाई दी.

उन्होंने देखा 3-4 ग्रामीणों के साथ खम्हार गांव के सरपंच शिवप्रसाद खड़े हैं. थानाप्रभारी ने उन सभी को अंदर बुला लिया. तभी सरपंच ने उन से कहा, ‘‘सर, जंगल में एक महिला की लाश मिली है. कुछ लोगों ने देखा तो मैं सूचना देने के लिए आया हूं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआई व 2 कांस्टेबलों को थानाप्रभारी पटेल ने घटनास्थल की ओर रवाना किया और अपने काम में लग गए. लगभग एक घंटे बाद उन्हें सूचना मिली कि लाश किसी महिला की है. उन्होंने एसआई को स्थिति को देखते हुए सारे सबूतों को इकट्ठा करने और फोटोग्राफ लेने के निर्देश दिए और कहा कि वह स्वयं घटनास्थल पर आ रहे हैं.

थाने से निकलने से पहले एल.पी. पटेल ने एसपी (रायगढ़) संतोष सिंह और एएसपी अभिषेक वर्मा को महिला की लाश मिलने की जानकारी दी और घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. जब वह वहां पहुंचे तो थोड़ी देर में ही जिला मुख्यालय से डौग स्क्वायड टीम भी आ गई  और महिला की लाश को देख कर के उन्हें समझने में देर नहीं लगी कि यह सीधेसीधे एक ब्लाइंड मर्डर का मामला है. पुलिस विवेचना में जांच अधिकारी एल. पी. पटेल के सामने शुरुआती परेशानी मृतका की पहचान की थी, जिस के लिए मशक्कत शुरू कर दी गई. इस कड़ी में रायगढ़ जिले के सभी थानों के गुम इंसानों के हुलिया से मृतका का मिलान किया गया.

जब सफलता नहीं मिली तो छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस पोर्टल पर राज्य के लगभग सभी जिलों के गुम इंसानों से हुलिया का मिलान कराया गया. सभी सोशल मीडिया ग्रुप में मृतका के फोटो वायरल किया जाने लगा. मगर सुराग नहीं मिल रहा था. आखिरकार एक दिन पुलिस को अच्छे नतीजे मिले. सोशल मीडिया में वायरल की गई तसवीर के जरिए मृतका की शिनाख्त सरस्वती मरांडी, पुत्री सुजीत मरांडी, उम्र 23 वर्ष निवासी ढांगी करतस, जिला धनबाद (झारखंड) के रूप में हुई. मृतका की शिनाख्त के बाद मामले में नया पहलू सामने आया, जिस से अनसुलझे हत्याकांड की गुत्थी सुलझती चली गई. लैलूंगा पुलिस को हत्याकांड में कमरगा गांव, थाना लैलूंगा के जयकुमार सिदार के मृतका का कथित पति होने की जानकारी भी मिली.

लैलूंगा पुलिस द्वारा गोपनीय तरीके से जयकुमार सिदार का उस के गांव में पता लगाया गया तो जानकारी मिली कि वह तथा उस का जीजा रवि कुमार सिदार दोनों ही अपनेअपने गांव से गायब हैं. हत्या के इस गंभीर मामले में एसपी संतोष सिंह द्वारा अज्ञात महिला के वारिसों और संदिग्धों की तलाश के लिए थाना लैलूंगा, धरमजयगढ़, चौकी बकारूमा की 3 अलगअलग टीमें बनाई गईं. एक टीम में एसडीपीओ सुशील नायक, एसआई प्रवीण मिंज, हैडकांस्टेबल सोमेश गोस्वामी, कांस्टेबल प्रदीप जौन, राजेंद्र राठिया, दूसरी टीम में थानाप्रभारी लैलूंगा इंसपेक्टर लक्ष्मण प्रसाद पटेल, कांस्टेबल मायाराम राठिया, धनुर्जय बेहरा, जुगित राठिया, अमरदीप एक्का और तीसरी टीम में एसआई बी.एस. पैकरा, एएसआई माधवराम साहू, हैडकांस्टेबल संजय यादव, कांस्टेबल इलियास केरकेट्टा को शामिल किया गया.

पहली टीम को किलकिला, फरसाबहार, बागबाहर और तपकरा तथा दूसरी टीम को पत्थलगांव, घरघोड़ा, लारीपानी, चिमटीपानी एवं टीम नंबर 3 को बागबाहर, कांसाबेल, कापू, दरिमा, अंबिकापुर की ओर जांच के लिए लगाया गया था. तीनों टीमों के अथक प्रयास पर आरोपियों को जिला जशपुर के गांव रजौरी से 20 जनवरी को हिरासत में ले कर थाने लाया गया. दोनों आरोपी पुलिस से लुकछिप कर रजौरी के जंगल में लकड़ी काटने का काम कर रहे थे. दोनों ने कड़ी पूछताछ में अंतत: सरस्वती मरांडी की हत्या करने का अपना अपराध स्वीकार लिया. रोजगार के सिलसिले में वह बोकारो, झारखंड गया था. वहां राजू टिंबर ट्यूनिंग प्लांट में क्लीनर मशीन चलाता था और किराए के मकान में रहा करता था. वहीं सरस्वती मरांडी से उस की जानपहचान हुई.

जय कुमार परेशान था और उस ने अपने जीजा रवि के साथ सरस्वती की हत्या का प्लान बनाया और उसी प्लान के तहत 7 जनवरी, 2021 को पिकनिक का बहाना कर सरस्वती को मोटरसाइकिल पर बिठा कर लैलूंगा ले कर आए. लैलूंगा बसस्टैंड पर खानेपीने के सामान व सरस्वती ने कपड़े खरीदे. तीनों फिर खम्हार के झरन डैम गए, जहां सरस्वती ने वही पीले रंग की सलवारकुरती पहनी, जो उस ने गांव कमरगा की सुनीता सिदार (टेलर) से बनवाई थी. वहां उन्होंने मोबाइल पर खूब सेल्फी ली. शाम करीब 5 बजे भेलवाटोली एवं खम्हार के बीच पगडंडी के रास्ते में रवि सिदार पेशाब करने का बहाना कर रुका. उसी समय जयकुमार सिदार ने सरस्वती के बाल पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया और गला दबा कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद रवि और जयकुमार सिदार ने सरस्वती के गले में चुनरी से गांठ बांध कर खींचा और लाश सरई झाडि़यों के बीच छिपा दी. दोनों आरोपी भागने की हड़बड़ी में अपनी चप्पलें, गमछा भी घटनास्थल के पास छोड़ आए. लैलूंगा पुलिस ने आरोपी जय कुमार सिदार (25 साल) और रवि सिदार ( 30 वर्ष) को गिरफ्तार कर घरघोड़ा की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Chhattisgarh News

UP Crime : तकिए से मुंह तब तक दबाया जब तक पत्नी की सांसें थम नहीं जाएं

UP Crime : सरकारी स्कूल की शिक्षिका चंदा अय्याश पति संजय लूथरा को अपनी आदतें सुधारने के लिए समझाती थी, लेकिन संजय अपने दोस्त डा. रजत भारद्वाज के साथ घर में ही बाहरी लड़कियों को बुला कर अय्याशी करता था. एक दिन चंदा ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया. फिर…

उस समय सुबह के करीब 4 बज रहे थे. इतनी सुबह मोबाइल की घंटी बजने पर मोहित ने काल रिसीव करने से पहले सोचा कि सुबहसुबह किस का फोन आ गया? उस ने काल रिसीव कर जैसे ही हैलो कहा. दूसरी ओर से उस के जीजा संजय लूथरा की भर्राई आवाज सुनाई दी, ‘‘रात को चंदा का कोलेस्ट्राल बढ़ने से अटैक पड़ गया, जिस से उस की मौत हो गई.’’ चंदा मोहित की बहन थी. यह सुनते ही मोहित के मुंह से चीख निकल गई. मोहित की चीख सुन कर घर वालों की नींद टूट गई. पता नहीं सुबहसुबह मोहित क्यों रो रहा है, यह जानने के लिए सभी उस के कमरे की ओर दौड़े.

मोहित ने उन्हें बताया कि बहन चंदा की मौत हो गई है. संजय का फोन आया था. यह सुनते ही घर में कोहराम मच गया. यह बात 21 फरवरी, 2021 की है. यह दुखद खबर मिलने के बाद चंदा के पिता ओमप्रकाश अरोड़ा घर के अन्य लोगों के साथ सुबह ही खतौली से मेरठ के शास्त्रीगनर स्थित चंदा की ससुराल जा पहुंचे. वहां घर के बाहर टेंट लगा था और बैठने के लिए कुरसियां लगी थीं. 38 वर्षीय शिक्षिका चंदा का शव बैड पर पड़ा था. लाडली बेटी के शव को देखते ही मां सुनीता, पिता ओमप्रकाश, बहन ज्योति व भाई मोहित बिलखने लगे. मायके वालों ने शव को गौर से देखा. शव पर चोटों के निशान देखते ही घर वालों ने हंगामा कर दिया.

पति संजय पर चंदा की हत्या का आरोप लगाते हुए मोहित ने पुलिस को सूचना दे दी. कुछ देर में थाना नौचंदी पुलिस शास्त्रीनगर थानाप्रभारी प्रेमचंद्र शर्मा ने हंगामा कर रहे मृतका के घर वालों को शांत कराया. हंगामे की जानकारी होने पर सीओ (सिविल लाइंस) देवेश सिंह फोरैंसिक टीम के साथ  घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस बीच वहां काफी भीड़ जमा हो गई. चंदा के मायके वालों ने आरोप लगाया कि चंदा की उस के पति संजय ने पीटपीट कर हत्या की है. उस के शरीर पर चोट के निशान भी हैं. मायके वालों ने बताया कि पति संजय की गंदी आदतों का चंदा विरोध करती थी. इस बात को ले कर दोनों के बीच झगड़ा रहता था.

पुलिस ने किसी तरह समझाबुझा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पुलिस संजय को हिरासत में ले कर थाने लौट आई. चूंकि मृतका एक शिक्षिका थी, इसलिए सूचना मिलने पर मुजफ्फरनगर शिक्षक संघ के अध्यक्ष बालेंद्र सिंह अपने साथियों संजीव, ओमप्रकाश, अभिषेक, सुमित, नीतू, रजनीश, अशोक, मनीष आदि के साथ थाने पहुंच गए और दोषी के खिलाफ काररवाई की मांग की. पूछताछ में संजय ने पुलिस को बताया, ‘‘रात करीब ढाई बजे चंदा को हार्ट अटैक आया था. इस के चलते वह बैड से नीचे गिर गई और उस की मौके पर ही मौत हो गई.’’

पुलिस को मृतका की जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली, उस में हत्या का कारण स्पष्ट नहीं था. तब पुलिस ने संजय को निर्दोष मानते हुए क्लीन चिट दे दी और थाने से छोड़ दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई संदिग्ध  पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर की चोटों का कोई उल्लेख ही नहीं किया गया था. वहीं हत्या का कारण जानने के लिए मृतका के विसरा को सुरक्षित रखवा दिया गया. इस से नौचंदी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे. मृतका के मायके वालों का आरोप था कि चंदा के शरीर पर चोट के निशान थे. उन का जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्यों नहीं किया गया. और पूरी जांच किए बिना ही नौचंदी पुलिस ने उस के पति संजय को क्लीन चिट कैसे दे दी?

मृतका के पिता ओमप्रकाश अरोड़ा का आरोप था कि मर्डर प्रीप्लान हुआ है. क्योंकि चंदा की मौत होने के बाद उस का जल्दी अंतिम संस्कार करने की पूरी तैयारी संजय ने पहले से ही कर ली थी. यहां तक कि श्मशान घाट तक शव ले जाने के लिए शव वाहन भी मंगा लिया था. मायके वालों की शिकायत पर एसएसपी अजय साहनी ने मामला अपने हाथ में ले कर जांच शुरू कराई. उन्होंने संजय के जब्त किए गए मोबाइल की जांच की जिम्मेदारी नौचंदी थाने के इंसपेक्टर (क्राइम) राम सजीवन को सौंपी. उन्होंने इस मोबाइल को जांच के लिए फोरैंसिक लैब भेज दिया. फोरैंसिक जांच में खुलासा हुआ कि मोबाइल से फोटो घटना वाली रात ही डिलीट किए गए थे.

वह फोटो पुलिस ने रिकवर कराए तो पुलिस के पांव तले जमीन खिसक गई. उन फोटो से पूरे केस का परदाफाश हो गया. उन में से एक फोटो में एक व्यक्ति बैड पर लेटी चंदा का तकिए से मुंह दबाता हुआ नजर आ रहा था. इस के बाद एसएसपी ने चंदा के पति संजय को दोबारा हिरासत में ले कर उस से गहनता से पूछताछ की. संजय खुद को निर्दोष बताता रहा. वह एक ही राग अलापता रहा कि चंदा की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. पुलिस ने संजय को मोबाइल से रिकवर फोटो दिखाया, जिस में चंदा की तकिए से मुंह दबा कर हत्या की जा रही थी. फोटो देखते ही संजय के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं. पूछताछ के दौरान वह सवालों में घिर गया. आखिर में उस ने पत्नी चंदा की

हत्या का आरोप अपने दोस्त डा. रजत भारद्वाज पर लगाते हुए चंदा की हत्या की सच्चाई उगल दी. एसएसपी अजय साहनी ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का परदाफाश 24 फरवरी, 2021 को आयोजित प्रैस कौन्फ्रैंस में कर दिया. एसएसपी ने 2 हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर तकिया, नशीली गोलियां और कपड़े बरामद कर लिए. दोनों से चंदा हत्याकांड के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने चंदा की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. हत्याकांड के पीछे अपनी अय्याशी के रास्ते की कांटा बनी पत्नी चंदा को हटाने और उस के बीमे की धनराशि हड़पने की योजना थी.

इस षडयंत्र में जागृति विहार निवासी दोस्त डा. रजत भारद्वाज भी शामिल था. उसी ने हत्या की सुपारी ली थी.  इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह निकली—

टेंट कारोबारी संजय लूथरा की शादी करीब 9 साल पहले 2012 में खतौली के अशोक मार्केट निवासी ओमप्रकाश अरोड़ा की बेटी चंदा के साथ हुई थी. चंदा खतौली के लौहड्डा स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात थी. चंदा और संजय लूथरा के दांपत्य जीवन में काफी पहले खटास आ चुकी थी. वर्ष 2015 में दोनों के बीच संबंध काफी बिगड़ गए, तब दोनों के बीच तलाक भी हो गया था. तलाक के बाद चंदा अपने 3 साल के बेटे को ले कर मायके चली गई थी. 6 महीने तक दोनों अलग रहे. परिवार की पंचायत में समझौता होने और संजय द्वारा माफी मांगे जाने के बाद  फिर से दोनों ने कोर्ट मैरिज की और साथ रहने लगे.

कुछ दिन सब ठीकठाक रहा. इस के बाद संजय अपनी बुरी आदतों से बाज नहीं आया. वह अपने बचपन के दोस्त डा. रजत भारद्वाज के साथ घर पर फिर से बाहरी युवतियों को लाने लगा. एक दिन चंदा स्कूल से लौटी तो घर का नजारा देख कर शर्म से पानीपानी हो गई. घर में एक बाहरी युवती के साथ संजय और उस का दोस्त डा. रजत मौजूद था. उस ने दोनों को घर में अय्याशी करते रंगेहाथों पकड़ लिया. चंदा ने दोनों को जम कर खरीखोटी सुनाई. उस ने कहा, वह पहले भी इस गलत काम के लिए मना कर चुकी है लेकिन तुम लोगों पर इस का कोई असर नहीं हुआ.

चंदा बनी अय्याशी में रोड़ा उस समय तो संजय खून का घूंट पी कर रह गया, पर रात में उस ने चंदा की बेरहमी से पिटाई की. यह बात घटना से लगभग डेढ़ महीने पहले की थी. अपनी अय्याशी में रोड़ा बनने वाली पत्नी को उस ने रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. संजय ने चंदा की हत्या की योजना बनाने के बाद उस का 50 लाख रुपए का जीवन बीमा भी करा दिया था, ताकि उस की हत्या के बाद ऐश की जिंदगी जी सके. पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए संजय ने पूरी प्लानिंग की. संजय की अपने पड़ोसी और बचपन के दोस्त डा. रजत भारद्वाज पर 1.35 लाख की रकम उधार थी, जिसे माफ करने की एवज में संजय ने रजत को अपनी पत्नी चंदा की हत्या के लिए राजी कर लिया.

कुछ दिनों से चंदा बीमार चल रही थी. संजय डा. रजत से ही उस का इलाज करा रहा था. इस का फायदा उठाते हुए 20 फरवरी, 2021 को डा. रजत ने संजय को नशीली गोलियां देते हुए रात को दवा के बहाने खिलाने की सलाह दी. घटना वाली रात पौने 2 बजे डा. रजत उस के घर पहुंच गया. इस से पहले ही संजय अपनी पत्नी को नशीली गोलियां खिला कर सुला चुका था. डा. रजत ने बैड पर सो रही चंदा के मुंह पर तकिया रखा और फिर जान निकलने तक दबाए रखा. नींद व नशे में होने के कारण वह विरोध भी नहीं कर सकी. इस दौरान संजय ने घटना के फोटो खींच लिए थे. लेकिन जानकारी होने पर डाक्टर ने वे फोटो तत्काल डिलीट करा दिए. संजय को उम्मीद थी कि कत्ल का उस का मास्टर प्लान राज ही रहेगा. लेकिन कहते हैं न कि गुनाह कभी छिपता नहीं और गुनहगार कभी बचता नहीं. आखिर कत्ल

का राज उस की जेब में रखे मोबाइल में ही मिल गया. पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों संजय लूथरा और डा. रजत भारद्वाज को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. इसी के साथ इस मामले में आननफानन में मृतका के पति को क्लीन चिट देने वाले इंसपेक्टर नौचंदी प्रेमचंद्र शर्मा की भी एसएसपी द्वारा जांच कराई जा रही थी. कथा लिखने तक चंदा का 8 वर्षीय बेटा अपनी नानी के पास रह रहा था. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित