Rajasthan News : नीले ड्रम की मर्डर मिस्ट्री

Rajasthan News : शादी हो जाने के बाद हर पत्नी चाहती है कि वह अपने घर को अच्छे से संभाले और अपने पति व बालबच्चों की ठीक से देखभाल करे. 3 बच्चों की मां सुनीता भी ये सारी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही थी. फिर एक दिन ऐसा क्या हुआ कि सुनीता ने अपने पति हंसराम उर्फ सूरज की न सिर्फ हत्या कर दी, बल्कि उस की लाश को नीले ड्रम में डाल कर ऊपर से नमक भी डाल दी. आखिर सुनीता ने क्यों की पति की हत्या?

बरसात आते ही ईंटभट्ठे के मुनीम जितेंद्र शर्मा के कहने पर हंसराम उर्फ सूरज 3 महीने के लिए शाहजहांपुर में स्थित अपने घर लौटने के बजाए बीवीबच्चों के साथ उसी के साथ राजस्थान के अलवर जिले के किशनगढ़ वास कस्बा चला आया. उसे भट्ठे पर लोग सूरज के नाम से जानते थे. वह अपनी पत्नी सुनीता और 3 बच्चों के साथ वहां की आदर्श नगर कालोनी में जितेंद्र शर्मा की मां मिथिलेश शर्मा के मकान में किराए पर रहने लगा.

जितेंद्र ने सूरज को एक दुकान पर काम भी दिलवा दिया. इस तरह से सूरज की आमदनी का जरिया बन गया और उस की दिनचर्या शुरू हो गई. वह सुबह काम पर जाता और शाम तक घर वापस लौटता था. घर में उस के पीछे पत्नी सुनीता और 3 बच्चे होते थे. बड़ा बेटा 8 साल का, जबकि 2 अन्य बच्चे 4 साल और डेढ़ साल के थे.

सूरज और सुनीता एक तरह से जितेंद्र के एहसान तले आ गए थे. जितेंद्र जबतब छत पर बने घर में सुनीता के पास आनेजाने लगा था. वह सूरज के नहीं रहने पर भी सुनीता के पास चला जाता था. बच्चों से प्यारदुलार करता था. जल्द ही सुनीता जितेंद्र से भावनात्मक लगाव महसूस करने लगी थी. यह लगाव कब सैक्स अपील की भावना में बदल गया, उन्हें पता ही नहीं चला. यानी उन के बीच अवैध संबंध बन गए. दोनों को जब एकांत की चाहत होती, तब जितेंद्र बच्चों को गेम खेलने के लिए अपना मोबाइल फोन दे कर कमरे से बाहर भेज दिया करता था.

सुनीता और जितेंद्र के बीच एक अनैतिक रिश्ता कायम हो चुका था. जबकि सूरज इस से बेखबर था.  सुनीता शुरू से ही अपने पति से संतुष्ट नहीं थी. वह भले ही 3 बच्चों का बाप बन गया था, लेकिन सुनीता की शारीरिक भूख को नहीं मिटा पाता था.

सूरज उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का रहने वाला था, लेकिन रोजीरोटी की तलाश में राजस्थान के खैरथल तिजारा जिलांतर्गत सूर्या ईंटभट्ठे पर काम करने आ गया था. वहीं उस की भट्ठे के मुनीम जितेंद्र से अच्छी जानपहचान हो गई थी. उन्हीं दिनों रंगीनमिजाज जितेंद्र की निगाह सुनीता पर पड़ी थी. उस के खिलते यौवन और सौंदर्य को देख कर मन ही मन उसे पाने की लालसा से भर गया था.

शायद यही कारण था कि जितेंद्र ने सूरज को परिवार समेत अपने गांव वापसी से रोक दिया था. यही नहीं, उस ने सूरज को शराब की ऐसी लत लगा दी कि वह जितेंद्र का पक्का यार बन गया. यह सब जितेंद्र ने सुनीता को हासिल करने के लिए किया था.

जितेंद्र एक तरह से अपनी योजना में सफल हो गया था और उस ने सुनीता के साथ जैसा रिश्ता कायम करना चाहता था, उस में उसे सफलता मिल गई थी. उस की जब इच्छा होती तो मौका निकाल कर सुनीता को अपनी बाहों में दबोच लेता था.

हालांकि जितेंद्र भी शादीशुदा था. वह एक 8 साल के बेटे आदित्य का पिता भी था. उस की पत्नी की करीब 12 साल पहले करंट लगने से मौत हो गई थी. बेटे की देखभाल उस की मां करती थी और जितेंद्र विधुर की जिंदगी गुजार रहा था.

यही कारण था कि वह स्त्रीसुख की आग में बेचैन रहता था. जब से उस ने सुनीता को देखा था, तभी से उसे पाने के लिए तड़प उठा था. इस के प्रयास में लग गया था और उस ने सुनीता को भट्ठे पर कम काम करवाने और शराबी सूरज को मुफ्त शराब पिला कर संतुष्ट कर दिया था.

वैसे जितेंद्र और सुनीता के बीच अवैध संबंध किशनगढ़ आने के पहले से बने हुए थे. जुलाई में बारिश के दिनों में जब सूरज ने सुनीता से वापस गांव चलने की बात कही, तब उस ने जितेंद्र के प्रस्ताव के साथ हां में हां मिला कर सूरज को राजी कर लिया था.

जितेंद्र ने जानबूझ कर सूरज को अपने घर के छत पर बना कमरा मां से कह कर किराए पर दिलवा दिया था. वहां उस की मां कभीकभार जाती थी. वह जगह सुनीता और जितेंद्र दोनों के लिए महफूज थी. सूरज और सुनीता के वहां रहने पर एक तरह से जितेंद्र की मौज आ गई थी.

बदले में वह उस की मदद करने लगा. एक बार जितेंद्र ने किराया ही अपनी जेब से दे दिया था. जब इस की जानकारी सूरज को हुई, तब वह पत्नी से झगड़ पड़ा. उसे पहले से ही पत्नी के चालचलन और जितेंद्र से अधिक घुलनेमिलने से उस पर संदेह होने लगा था. किराए की बात पर उस का संदेह और गहरा हो गया. शराब के नशे में वह सुनीता पर सच उगलवाने का दबाव बनाने लगा था.

तब उलटे सुनीता पति सूरज से ही उलझ गई, गुस्से में बोली, ”तुम्हारे पास किराए का पैसा नहीं था और जब उस ने किराया चुका दिया है, तब उस का एहसान मानने के बजाए उसी पर लांछन लगा रहे हो.’’

”किराए में दोचार रोज देरी हो जाती तो इस से क्या हो जाता,’’ सूरज बोला.

”तुम्हें नहीं मालूम जितेंद्र की मां किराए के मामले में बहुत कड़क बुढिय़ा है. किराया नहीं मिलने पर तुरंत कमरा खाली करवा देती.’’ सुनीता बोली.

पत्नी के इस तर्क पर सूरज चुप लगा गया, किंतु कुछ दिनों बाद ही बेटे के एडमिशन को ले कर सुनीता पति से झगड़ पड़ी. दरअसल, उस के एडमिशन के लिए जितेंद्र ने पहल की थी. जब इस की जानकारी सूरज को हुई, तब वह गुस्से में आ गया और बोला, ”जितेंद्र कौन होता है मेरे बेटे का एडमिशन करवाने वाला?’’

इस पर फिर सुनीता पहले की तरह पति को ताना देती हुई बोली, ”अगर कोई तुम्हें मदद कर रहा है तो इस में बुराई क्या है?’’

”बुराई उस की मदद में नहीं, उस की नीयत में है. उस ने तुम्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया है…तुम मेरे कहने का मतलब अच्छी तरह से समझती हो,’’ सूरज नाराजगी के साथ बोला.

तभी जितेंद्र वहां आ गया. उस ने जब सुनीता और सूरज को तूतूमैंमैं करते देखा, तब माहौल को हलका बनाते हुए बोल पड़ा, ”तुम दोनों फिजूल में लड़ते रहते हो. इतना अच्छा मौसम है. चलो बाजार, आज दारू की बोतल और मछली लाते हैं. यहीं दारू पार्टी करेंगे. सुनीता मछली पकाएगी.’’

दारू और मछली का नाम सुनते ही सूरज के मुंह से लार टपकने लगी. वह तुरंत तैयार हो गया और उस के साथ दारू लाने के लिए बाजार चला गया. थोड़ी देर में जितेंद्र और सूरज दारू और मछली ले कर आ गए. दोनों वहीं दारू पार्टी करने लगे. मछली पका कर सुनीता लाई, तब जितेंद्र ने उसे भी एक पैग पीने को दे दिया. उस ने भी खुश हो कर 2-3 पैग दारू का आनंद लिया. शराब के नशे में जितेंद्र ने कहा कि उसे उस की माली हालत पर पर दया आती है, इसलिए वह उस की मदद करता है. अपनी बातों से उस ने सूरज को आश्वस्त किया कि सुनीता और उस के संबंधों को ले कर बेकार में संदेह करता है.

हालांकि यह कहना उस का एक झूठ ही था. हकीकत तो यह थी कि जितेंद्र अकसर सूरज को शराब पिलाता था. उस में सुनीता भी साथ देती थी और जब सूरज नशे में धुत हो जाता था, तब जितेंद्र उस की बीवी के साथ मौजमस्ती करता था. यह सब चलता रहा. सुनीता अपने अनैतिक संबंधों के बचाव में लोगों से पति को शराब की लत लग जाने का दुखड़ा सुनाने लगी थी. जब भी जितेंद्र की मां से मिलती, एक दुखड़ा सुनाती कि वह अपने शराबी पति से परेशान हो गई है. जितेंद्र की मां उसे नसीहत देती. समझाती थी कि वह पति से झगड़ा नहीं करे, बल्कि प्रेम से उसे समझाएबुझाए.

बात 15 अगस्त, 2025 की है. सूरज दुकान से घर लौट आया था. वह गुस्से से भरा हुआ कमरे में बैठा था. जैसे ही पत्नी आई, उस से झगड़ पड़ा. तभी मकान के नीचे बैठा जितेंद्र उस के कमरे में आ गया. वह बोला, ”क्यों झगड़ रहे हो?’’

”क्या करूं? मेरी जिंदगी नरक बन गई है. दारू पिलाओगे, तब बोलूंगा?’’ सूरज निराश भाव से बोला.

”हां, क्यों नहीं, लो अभी गया और ले कर आया.’’ जितेंद्र बोला.

”कहां से लाओगे, आज तो ड्राई डे है.’’

”तो क्या हुआ, मैं ने इंतजाम कर रखा है.’’ जितेंद्र बोला और वहां से चला गया. थोड़ी देर में लौटा, तब उस के हाथ में एक शराब की बोतल थी.

सूरज और जितेंद्र वहीं दारू पीने लगे. सुनीता गुमसुम उन्हें देखती रही. जितेंद्र ने इशारा किया, तब वह भी अपने लिए एक गिलास ले आई. सूरज उस रोज गुस्से में लगातार पैग पर पैग पिए जा रहा था. हर पैग के साथ सुनीता को गालियां बके जा रहा था. उस पर बदलचलनी का आरोप लगाए जा रहा था. हद तो तब हो गई, जब सूरज उस पर गिलास फेंक कर मार दिया. इस पर जितेंद्र बोला, ”क्यों उसे मारते हो? गलत बात है.’’

नशे में सूरज बोला, ”मैं उसे मारूं या प्यार करूं, तुम कौन होते हो इसे बचाने वाले?’’

”तुम्हें जो कुछ करना है वह मेरे सामने मत करो,’’ जितेंद्र डांटता हुआ बोला.

”मैं मारूंगा इसे, आज इस की सारी हेकड़ी निकाल दूंगा.’’ बोलते हुए उस ने सुनीता की गरदन पकड़ ली थी. सुनीता चीख पड़ी थी. चीख सुन कर जब उस का बेटा उसे बचाने आया था, तब सूरज ने बेटे की भी पिटाई शुरू कर दी. वह गुस्से में बावला हो गया था. बचाव करते हुए जितेंद्र बोल पड़ा, ”अरे बच्चे को मार डालेगा क्या? इतना क्यों पीट रहा है उसे?’’

तभी सूरज की नजर लोहे के एक औजार पर गई. उस ने झट से उसे उठा लिया. तब तक सुनीता और उस का बेटा बचाव में भागने लगे. वे सूरज के आक्रामक तेवर को देख कर समझ गए थे कि वह काफी गुस्से में है. कुछ भी कर सकता है. ऐसा ही जितेंद्र ने भी महसूस किया तो वह भी वहां से जाने को उठा. तब सूरज ने तीनों पर लोहे का औजार फेंक मारा.

उस ने अनापशनाप बकना शुरू कर दिया था. उस रोज नशे में उस ने यहां तक कह दिया कि उन के बीच नाजायज संबंध है. उसे अब खत्म कर के ही चैन लेगा. वह शराब के नशे में बकता हुआ इधरउधर चक्कर लगा रहा था. इसी बीच सुनीता ने जितेंद्र को इशारा किया. हाथों के इशारे से धीमी आवाज में बोली, ”अब क्या किया जाए? इस पर तो भूत सवार है.’’

”जो तुम को सही लगे.’’

फिर क्या था. जितेंद्र ने चक्कर काटते सूरज को दबोच लिया. सुनीता ने उस के पैर पकड़ लिए. सूरज के गरदन पर जितेंद्र की पकड़ मजबूत होती चली गई. सुनीता ने उस को छटपटाने का मौका तक नहीं दिया. जितेंद्र ने एक हाथ से गरदन और दूसरे हाथ से सूरज का मुंह नाक ऐसे दबाई कि वह कुछ मिनट में ही बेजान हो गया. उस वक्त रात हो चुकी थी. सुनीता और जितेंद्र आपस में विचार करने लगे कि अब आगे क्या किया जाए? शव को कैसे ठिकाने लगाया जाए?

तभी जितेंद्र को कमरे के बाहर छत पर रखे नीले ड्रम को देख कर एक आइडिया आया. क्यों न शव को ड्रम में डाल कर उस पर नमक डाल दिया जाए, ताकि शव जल्दी सडग़ल जाए. उसे यह आइडिया अचानक कुछ महीने पहले मेरठ के सौरभ हत्याकांड से आया. उस ने वही किया. फर्क इतना था कि सीमेंट का गाढ़ा घोल डालने के बजाय सूरज के शव को ड्रम में डाल कर उस में नमक का घोल डाल दिया. उस के मुंह को चादर से ढंक दिया.

संयोग से जब यह सब किया जा रहा था, तब सूरज का बेटा पेशाब के लिए उठा था. वह अर्धनिद्रा में था, उसे कुछ समझ में नहीं आया कि उस की मम्मी और जितेंद्र अंकल ड्रम के साथ क्या कर रहे हैं? जब उस ने पूछा कि वे क्या कर रहे हैं? तब अचानक जितेंद्र बोल पड़ा, ”तुम्हारे पापा को ठिकाने लगा रहे हैं. वह तुम्हें और मम्मी को मार रहा था न!’’

17 अगस्त, 2025 को जितेंद्र की मां मिथिलेश ने महसूस किया कि छत पर रहने वाले किराएदार सूरज के यहां सन्नाटा है, वहां से किसी की आवाज नहीं आ रही है. जबकि सुबह होते ही सुनीता और सूरज के बीच होने वाली बहस की आवाजें आने लगती थीं. कई बार बच्चों के रोने की भी आवाज सुनाई देती थी.

वह छत पर चली गई. कमरे में कोई नजर नहीं आ रहा था. वहां न तो सुनीता थी और न ही सूरज और उस के बच्चे. उस ने महसूस किया कि जितेंद्र भी बीती रात से अपने कमरे में नजर नहीं आया था. तभी वहां उसे अजीब सी दुर्गंध महसूस हुई. जो पास रखे नीले ड्रम से आ रही थी. उस ने तुरंत अपने पति राजेश शर्मा को यह बात बताई. पति ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर छत पर रखे ड्रम से दुर्गंध आने की सूचना पुलिस को दी.

पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना पा कर किशनगढ़ वास के एसएचओ जितेंद्र सिंह शेखावत, एसआई दिनेश कुमार मीणा, एएसआई ज्ञानचंद पुलिस दलबल के साथ आदर्शनगर कालोनी स्थित राजेश शर्मा के घर पहुंच गए. पुलिस टीम छत पर रखे नीले ड्रम के पास गई, जहां से दुर्गंध आ रही थी. एक पुलिसकर्मी ने उस का ढक्कन हटाया तो दुर्गंध और तेज हो गई. उस के भीतर चादर ठूंसी हुई थी. जब चादर बाहर निकली, तब दुर्गंध का तेज भभका निकला और अंदर लाश नजर आई.

लाश की पहचान सूरज के रूप में हुई, जो वहीं किराए पर रहता था. एसएचओ ने इस की सूचना किशनगढ़ वास के डीएसपी राजेंद्र सिंह निर्वाण को दे दी. वह थोड़ी देर में ही मौके पर पहुंच गए. उन्होंने उस के कमरे की तलाशी ली. वहां उन्हें सूरज का आधार कार्ड मिला, जिस पर उस का नाम हंसराज दर्ज था. उस पर उस के पिता का नाम खेमकरण और पता नवादिन नवाजपुर, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश लिखा था. मकान मालकिन को भी यह जान कर हैरानी हुई कि मृतक ने अपना असली नाम उसे नहीं बताया था.

उस वक्त सडऩे की स्थिति में आ चुके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस के सामने सवाल यह था कि मृतक की पत्नी सुनीता और बच्चे कहां गए? जांच और पूछताछ में यह भी मालूम हुआ कि मकान मालकिन का विधुर बेटा जितेंद्र शर्मा भी 16 सितंबर, 2025 से ही लापता है. उन का पता लगाने के लिए जांच टीमें गठित कर दी गईं. उन्हें पकडऩे के लिए टीमें पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश भेजी गईं. साथ ही सीसीटीवी के फुटेज निकलवाए गए.

दूसरी तरफ फरार जितेंद्र शर्मा 18 अगस्त को सुनीता और उस के तीनों बच्चों को ले कर अलवर जिले के रामगढ़ इलाके के आलावड़ा गांव जा पहुंचा. वहां लोगों ने एक ईंट भट्ठे पर काम मांगा. भट्ठे के मालिक को उन पर संदेह हो गया था. कारण उसे बीते दिनों किशनगढ़ वास में हत्या संबंधी जानकारी न्यूजपेपर और सोशल मीडिया के जरिए मिल चुकी थी, जिस में फरार लोगों के बारे में भी जिक्र किया गया था.

इस संदेह के आधार पर उस ने तुरंत स्थानीय पुलिस थाने को इस की सूचना दे दी. पुलिस वहां पहुंच गई और उन्हें वही हिरासत में ले लिया. इस के बाद उन्हें किशनगढ़ वास लाया गया. थाने में पहले से ही सूरज के परिजन मौजूद थे. उन्होंने सूरज की लाश की पहचान कर ली थी. सूरज के पेरैंट्स और भाईबहनों का रोरो कर बुरा हाल था. थाना किशनगढ़ वास की पुलिस ने हंसराज उर्फ सूरज की हत्या का मामला उस के परिजनों की शिकायत पर दर्ज कर लिया गया. हत्याकांड में जितेंद्र शर्मा और सुनीता मुख्य आरोपी बनाए गए.

दोनों ने गहन पूछताछ में हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उन्होंने हत्या किस तरह से की, पुलिस इस की जांच के लिए उन्हें घटनास्थल पर ले गई. वहां आरोपियों द्वारा क्राइम सीन क्रिएट किया गया. उन के बयान लिए गए. अपने बयान में जितेंद्र ने बताया कि सूरज की पत्नी सुनीता के प्रेम में वह अंधा हो गया था. सुनीता भी उसे पसंद करने लगी थी. सूरज उन के प्रेम संबंधों में बाधक था, इसलिए उस की हत्या कर दी थी.

पुलिस ने जितेंद्र शर्मा और सुनीता से गहन पूछताछ के बाद उन्हें मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर दिया. वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Rajasthan News

 

 

Love Stories in Hindi : प्रेमिका के चक्कर में शिकारी बन गया शिकार

Love Stories in Hindi : यह कहानी है पतिपत्नी और ‘वो’ के बीच एक लव ट्रायंगल की, जिस में सुनंदा नाम की महिला अपने प्रेमी सिद्धप्पा कटकरे के साथ मिल कर अपने पति बीरप्पा पुजारी की हत्या की कोशिश करती है. इस वारदात के बाद अचानक सिद्धप्पा गायब हो जाता है, लेकिन जब पुलिस उस की खोज करती है, तब पुलिस को सिद्धप्पा की लाश मिलती है. एक शिकारी खुद कैसे शिकार बन गया, यह हैरतअंगेज कहानी किसी फिल्म की नहीं, बल्कि एक ऐसी हकीकत है कि…

इस कहानी की शुरुआत होती है कर्नाटक के विजयपुरा जिले के इंडी टाउन के अक्क महादेवी नगर से. यहीं पर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहता था बीरप्पा पुजारी. बीरप्पा किसान था. उस का छोटा सा परिवार था. परिवार में पत्नी सुनंदा के अलावा २ बच्चे थे. बीरप्पा को कई बार अपनी पत्नी पर शक हुआ कि उस की पत्नी का किसी दूसरे मर्द के साथ चक्कर चल रहा है, लेकिन वह बिना किसी सबूत के उस पर इलजाम लगा कर अपनी गृहस्थी में आग नहीं लगाना चाहता था. उस ने कई बार पत्नी को रंगेहाथों पकडऩे की कोशिश की, लेकिन वह किसी भी सूरत में सफल नहीं हो सका.

सुनंदा बहुत ही तेज किस्म की थी. उसे भी आभास हो गया था कि उस का पति उस की जासूसी करने पर लगा हुआ है, लेकिन वह हर वक्त पूरी तरह से अलर्ट रहती थी. फिर भी बीरप्पा के मन में पत्नी के प्रति शक पैदा हुआ तो वह छोटीछोटी बातों को ले कर उस के साथ लड़ाईझगड़े पर उतारू हो उठता था, जिस के कारण दोनों के संबधों में जहर घुलना शुरू हो गया यानी एक बसीबसाई गृहस्थी में कलह शुरू हो गई. सुनंदा काफी दिनों बाद अपने खेतों पर गई थी, तभी उस का इंतजार कर रहा प्रेमी सिद्धप्पा कटकरे उस के पास आया और बोला, ”क्या बात है भाभी, आज बहुत दिनों बाद खेतों पर आना हुआ.’’

”आज तो आ भी गई, लेकिन आगे मेरा खेतों पर आने का रास्ता पूरी तरह से बंद होने वाला है. बीरप्पा ने मेरे खेतों पर आने पर पाबंदी लगा दी है. किसी गांव वाले ने उस के कान भर दिए कि तुम्हारी बीवी तुम्हारे पीछे खेतों पर जा कर सिद्धप्पा के साथ मौजमस्ती करती है.’’ सुनंदा ने बताया.

”अरे, भाभी, तुम बीरप्पा की धमकी से डर गई?’’ सिद्धप्पा बोला.

”’डरूं नहीं तो हर रोज उस की मार खाती रहंंू? सिद्धप्पा अब तुम मेरे खेतों पर मत आया करो, तुम्हारे कारण मेरे घर में कलह पैदा हो गई है.’’

”लेकिन भाभी, मैं तो तुम्हें बेइंतहा प्यार करता हंू. तुम से मिले बिना मुझे सब कुछ सूनासूना लगता है. तुम्हारे बिना मेरी जिंदगी अधूरी है.’’

”प्यार तो मैं भी तुम्हें बहुत करती हूं, लेकिन क्या करूं, बीरप्पा ने मेरा जीना हराम कर रखा है.’’ कहतेकहते सुनंदा की आंखें भर आईं.

तब सुनंदा गंभीर हो कर बोली, ”देखो सिद्धप्पा, अगर तुम चाहते हो कि मैं तुम से पहले की तरह ही मिलतीजुलती रहूं तो तुम्हें मेरा एक काम करना होगा. तुम्हें किसी भी तरह से हम दोनों के मिलन में बाधा बन रहे मेरे पति को हटाना होगा. तुम किसी भी तरह से बीरप्पा को खत्म कर दो. उस के बाद हम दोनों पतिपत्नी के रूप में गृहस्थ जीवन बिताएंगे.’’

”तुम ठीक कहती हो भाभी, मैं भी काफी समय से यही सोच रहा था, लेकिन तुम्हारे डर से अपना मुंह बंद किए हुए था. अगर तुम्हारी ऐसी ही मरजी है तो यह काम आप मुझ पर छोड़ दो. आप तो केवल मौका देख कर मुझे फोन कर देना. बाकी काम मैं अपने आप निपटा दूंगा.’’

उस दिन के बाद सुनंदा मौके की तलाश में जुट गई. फिर उसी दौरान ३१ अगस्त, २०२५ को उस योजना को अंजाम देने का प्लान तैयार कर लिया. उसी रात को कोई १२ बजे का वक्त था. बीरप्पा खापी कर गहरी नींद में सोया हुआ था. उसी दौरान उसे लगा कि उस के शरीर पर कोई बैठा हुआ है. अपने शरीर पर वजन महसूस होते ही बीरप्पा ने उठने की कोशिश की. लेकिन तब तक दूसरा आदमी उस के पैरों पर बैठ गया.

इस से पहले कि बीरप्पा कुछ माजरा समझ पाता, एक व्यक्ति ने उस का मुंह दबाते हुए उस का गला घोंटना शुरू कर दिया. वह बुरी तरह से छटपटाने लगा.

और सीने पर सवार हो गई पत्नी

तभी उस के पेट पर बैठे आदमी ने उस के गुप्तांगों को बुरी तरह से दबाना चालू किया. उस की सांसें बंद होती जा रही थीं. देखते ही देखते बीरप्पा बेहोशी की हालत में पहुंच गया.

जब उसे होश आया तो वह एक अस्पताल में भरती था. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि उस के साथ क्या हुआ और किस ने उसे अस्पताल में कब भरती कराया. उस के होश में आते ही पास में खड़ी नर्स ने उसे आश्वासन दिया कि अब आप पूरी तरह से सही हो, चिंता की कोई बात नहीं. इस बात को सुन कर बीरप्पा की आंखें आंसुओं से सराबोर हो आई थीं. अपने को ठीक हालत में देख बीरप्पा ने अपनी पत्नी के बारे में पूछा तो पता चला कि उस की पत्नी ३१ अगस्त, २०२५ से ही गायब है.

बीरप्पा के होश में आते ही पुलिस ने उस से पूछताछ की. तब बीरप्पा ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि ३१ अगस्त की रात को वह खाना खा कर सो गया था. उस के सोने के बाद कुछ आदमी उस के घर में घुसे और उन्होंने उस का गला व गुप्तांग दबा कर मारने की कोशिश की. उस दौरान उस की पत्नी सुनंदा भी घर पर ही मौजूद थी. अपने पति को इस हालत में देखते हुए न तो उस ने कोई शोरशराबा किया और न ही उस ने उन लोगों से उसे बचाने की कोशिश की. उस ने बताया कि उसी दौरान उस की पत्नी ने कहा, ”इसे छोडऩा मत सिद्धू, इस की गरदन जोर से दबाओ. यह किसी भी सूरत में बचना नहीं चाहिए.’’

सुनंदा की बात सुनते ही उस व्यक्ति ने मेरे गले पर अपनी पकड़ और भी मजबूत कर दी थी. बुरी तरह से गला दबते ही वह बेहोशी की हालत में चला गया था. बीरप्पा की बात सुनते ही पुलिस समझ चुकी थी कि उस के साथ घटित इस घटना में उस की पत्नी सुनंदा का ही हाथ था. इसी कारण वह घर से गायब हो गई थी. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने सुनंदा को हर जगह तलाशने की कोशिश की, लेकिन उस का कहीं भी अतापता न चल सका. पुलिस निरंतर सुनंदा की तलाश में जुटी थी. उसी दौरान पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

सुनंदा को गिरफ्तार करते ही पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने सहज ही अपना जुर्म कुबूलते हुए पुलिस को बताया कि काफी समय से उस की सिद्धप्पा से गहरी दोस्ती थी. जिस के कारण उस का पति उस पर शक करते हुए उस के साथ मारपीट करता था. उस की मारपीट से तंग आ कर ही उस ने प्रेमी सिद्धप्पा के साथ मिल कर पति को मारने की योजना बनाई थी.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने उस के प्रेमी सिद्धप्पा को गिरफ्तार करने के लिए कई जगह पर दबिश दी, लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा. उस के बाद पुलिस ने उस की खोज में अपने मुखबिर लगा दिए, लेकिन इस से पहले कि पुलिस सिद्धप्पा तक पहुंच पाती, उस ने एक वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी. उस ने उस वीडियो में जो कहा था, वह काफी हैरान कर देने वाला था. उस ने उस वीडियो के जरिए खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश की थी.

सिद्धप्पा ने कहा कि इस वारदात में मेरी कोई खास गलती नहीं. मैं ने जो भी किया, सुनंदा के कहने पर ही किया है. सुनंदा मुझे दिलोजान से चाहती थी. वह मेरे साथ श्रीशैलम मंदिर भी गई थी. वहां पर उस ने मेरे लिए मन्नत भी मांगी थी. वहां पर उस ने प्रार्थना की कि ३ महीने के भीतर हम पतिपत्नी की तरह साथ रहें. लेकिन इस वक्त वह उसे फंसाना चाहती है.

सिद्धप्पा ने वीडियो में कहा कि बीरप्पा को मौत की साजिश रचने में उस की पत्नी सुनंदा का हाथ था. जबकि वह इस मामले में खुद को निर्दोष साबित करना चाह रही है. वह जानता है कि उस के पास खुद को निर्दोष साबित करने का कोई सबूत नहीं है. फिर पुलिस प्रशासन भी महिलाओं का ही साथ देता है. अगर वह पुलिस के सामने हाजिर हो कर सब कुछ साफसाफ भी बता दे तो पुलिस सुनंदा का ही पक्ष लेगी. इसी कारण मेरे पास सिवाय अपनी जान देने के कोई दूसरा रास्ता नहीं.

सिद्धप्पा ने कहा कि सुनंदा कोई ढाई साल से उस के साथ रिलेशनशिप में थी. उस ने ही बीरप्पा को मौत की नींद सुलाने की साजिश रची थी. उस के दबाव में आ कर ही उस ने उस की पति को मौत की नींद सुलाने की कोशिश की थी. जब तक यह वीडियो पुलिस के हाथों तक पहुंचेगी, शायद तब तक मैं स्वयं भी मौत को गले लगा चुका होऊंगा. मेरी आत्महत्या की जिम्मेदारी भी सुनंदा की ही होगी. इस वीडियो ने सब को चौंका दिया था, क्योंकि वीडियो में सिद्धप्पा ने न सिर्फ खतरनाक साजिश का खुलासा किया था, बल्कि अपनी खुदकुशी का इशारा भी दे दिया था. इस वीडियो के जारी होते ही विजयपुरा के एसपी लक्ष्मण निंबर्गी की देखरेख में उस की तलाश शुरू की गई. फौरन ही सिद्धप्पा की तलाश में पुलिस की सक्रियता बढ़ गई थी.

वीडियो के जारी होते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया. उसे तलाशने में पुलिस बल को लगा दिया था. पुलिस और उस के मुखबिर अभी उस की तलाश में जुटे थे. उसी दौरान इस घटना के लगभग १० दिन बाद पुलिस को जानकारी मिली कि सुनंदा के प्रेमी सिद्धप्पा की लाश एक पेड़ से लटकी हुई है. पुलिस के हत्थे चढऩे से पहले ही उस ने यह खौफनाक कदम उठा लिया था.

शिकारी कैसे हो गया शिकार

सिद्धप्पा की लाश उस के गांव के बाहर जंगल में एक पेड़ से लटकी हुई थी. उस वक्त तक उस की लाश की हालत बहुत ही खराब हो चुकी थी. जिस से साफ जाहिर था कि सिद्धप्पा ने यह कदम कई दिन पहले ही उठा लिया था. जबकि पुलिस उसे किसी भी कीमत पर जिंदा गिरफ्तार करना चाहती थी. इस की जानकारी मिलते ही लोकल पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. जांचपड़ताल से पता चला कि सिद्धप्पा ने खुद ही पुलिस के डर की वजह से खुदकुशी कर ली थी. फिलहाल सिद्धप्पा की मौत के साथ ही इस लव ट्रायंगल की कहानी के सारे सबूत ही दफन हो गए थे, जिस के सबूत पुलिस जुटाना चाह रही थी.

पुलिस ने मृतक सिद्धप्पा का शव पेड़ से उतार कर अपनी काररवाई पूरी करते हुए उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. मृतक ने अपने गले में रस्सी का फंदा डाल कर सुसाइड की वारदात को अंजाम दिया था, जिसे देख कर यह आशंका भी नहीं की जा सकती थी कि उसे मार कर लटकाया गया हो. इस मामले में बीरप्पा की तरफ से अपनी पत्नी सुनंदा और उस के प्रेमी सिद्धप्पा को अपनी मौत की साजिश रचने का आरोप लगा कर पुलिस को लिखित तहरीर दी थी. जिस के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कई लोगों को इस मामले से जोड़ते हुए शक के आधार पर काररवाई करने की योजना बनाई थी.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस पूछताछ के दौरान सिद्धप्पा के फेमिली वालों के साथ ही सुनंदा के बयानों के आधार पर इस केस की जो हकीकत सामने आई, वह इस प्रकार थी. बीरप्पा मयप्पा पुजारी कर्नाटक के जिला विजयपुरा के अंजूतागी गांव का रहने वाला था. सिद्धप्पा कटकरे भी बीरप्पा का ही पड़ोसी था. बीरप्पा पुजारी को इतनी खास जानकारी मिल चुकी थी कि उस की पत्नी का उस के पड़ोसी सिद्धप्पा कटकरे के साथ चक्कर चल रहा है.

बीरप्पा और सिद्धप्पा के खेत पासपास में ही थे. बीरप्पा अपने खेतों पर कम ही जाता था. उस की पत्नी सुनंदा ही ज्यादातर खेतों पर काम करने जाती थी. खेतों पर काम करने के दौरान ही उस की दोस्ती सिद्धप्पा से हो गई. सुनंदा की दोस्ती सिद्धप्पा के साथ हो जाने के बाद वह हर वक्त ही अपने खेतों पर पड़ा रहता था. गांव में अधिकांश लोग दोपहर में अपने घरों पर चले आते हैं, लेकिन सिद्धप्पा फिर भी सुनंदा के साथ दोस्ती होने के कारण उस के मिलने की चाहत में वहीं पर पड़ा रहता था. उसी दोस्ती के सहारे जल्दी ही दोनों के बीच अवैध संबंध भी बन गए थे. सिद्धप्पा के साथ संबंध बनते ही सुनंदा उस के प्यार में पागल हो गई. फिर दोनों फोन पर बातें करने लगे थे. सिद्धप्पा जब कभी भी मौका पाता, फोन कर के सुनंदा को खेतों पर बुला लेता और उस के साथ मौजमस्ती करने लगा था.

लेकिन दोनों के बीच लुकाछिपी का यह खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका. जैसे ही दोनों गांव वालों की नजरों में चढ़े, उन की गांव में चर्चा होने लगी थी. यह बात धीरेधीरे बीरप्पा के सामने भी पहुंच गई. यह बात सुनते ही बीरप्पा को बहुत दुख हुआ. बीरप्पा ने सुनंदा के साथसाथ सिद्धप्पा को भी हड़काया, लेकिन सिद्धप्पा फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था.

बीरप्पा ने कई बार अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश भी की थी, लेकिन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला खत्म नहीं हुआ. यह बात बीरप्पा को नागवार गुजरती थी. कई बार दोनों के बीच इस मामले को ले कर मनमुटाव भी हुआ, लेकिन उस के पास कोई ऐसा ठोस सबूत नहीं था, जिस के आधार पर वह उस पर किसी प्रकार का लांछन लगा सके. पूरे गांव में सिद्धप्पा सुनंदा को ले कर चर्चे हो रहे थे. जिस के कारण गांव में बीरप्पा का रहना मुश्किल हो गया था.

जब गांव में उस की पत्नी के चरित्र को ले कर काफी चर्चा होने लगी तो पत्नी की हरकतों से तंग आ कर एक दिन बीरप्पा ने बहुत बड़ा कदम उठाया. उस ने अपनी बीवी की हरकतों से तंग आ कर अपनी जुतासे की जमीन बेचने का निर्णय लिया. गांव छोडऩे का पूरा मन बना कर उस ने अपने गांव की जमीन बेच दी. जमीन बेचते ही बीरप्पा ने अपना कुछ कर्ज भी चुकाया. फिर उस ने शहर की तरफ कदम बढ़ाया. वह अपनी गांव की जमीन बेच कर इंडी टाउन के अक्क महादेवी नगर में किराए के मकान में शिफ्ट हो गया.

प्रेमी के प्यार में पागल हो गई थी सुनंदा

अक्कमहादेवी नगर में आने के बाद बीरप्पा को उम्मीद थी कि वहां पर आ कर सब कुछ सही हो जाएगा. यही सोच कर उस ने वहां पर अपना काम भी लगा लिया था. लेकिन उसी दौरान उसे लगा कि सुनंदा गांव छोडऩे के बाद भी अपने पुराने रास्ते पर ही चल रही है. उस ने कई बार उसे फोन पर किसी से बात करते देखा तो उसे फिर से चिंता सताने लगी. उस ने सुनंदा का मोबाइल चैक किया तो पता चला कि वह फिर से सिद्धप्पा से संपर्क साधे हुए है. इसी बात पर दोनों के बीच जोरदार लड़ाई हुई. यह बात सुनंदा ने सिद्धप्पा से कही तो गुस्से में उस का पारा चढ़ गया. वह अपनी प्रेमिका के दर्द को सुन कर बौखला उठा. फिर उस दिन दोनों के बीच जो बात हुई, उस ने एक खतरनाक योजना को जन्म दिया.

सिद्धप्पा ने अपनी प्रेमिका के पति से छुटकारा पाने के लिए अपने साथ अपने एक दोस्त को भी शामिल कर लिया था. सिद्धप्पा ने सुनंदा के कमरे पर पहुंचने से पहले ही उसे सारी जानकारी दे दी थी. उसी जानकारी के बाद बीरप्पा के सोते ही सुनंदा ने अपने मकान का दरवाजा खुला छोड़ दिया था, ताकि बिना किसी शोरशराबे के प्रेमी सिद्धप्पा उस के घर में प्रवेश कर योजना को अंजाम दे सके. सिद्धप्पा अपने एक साथी के साथ प्रेमिका के घर पहुंच गया.

बीरप्पा को सोते देख सुनंदा ने सिद्धप्पा और उस के साथी को इशारा कर दिया. उस का इशारा पाते ही दोनों गहरी नींद में सो रहे बीरप्पा पर टूट पड़े, लेकिन बीरप्पा ने हिम्मत से काम लिया. उस ने दोनों के साथ डट कर मुकाबला किया.

बीरप्पा के सिर के पास ही दीवार से सटा हुआ फ्रिज रखा हुआ था. उस ने फुरती से अपने पैर बैड से सटा कर जोरदार धक्का मारा, जिस से वह सिरहाने रखे फ्रिज से टकराया. उस के टकराने से कमरे में एक जोरदार आवाज गूंजी, जिसे सुनते ही उस का मकान मालिक कमरे की तरफ आया. उसे देखते ही सिद्धप्पा अपने साथी के साथ घर से फरार हो गया, लेकिन उस के बाद भी वह जोरजोर से चीख रहा था. उस की चीख सुन कर सुनंदा ने उसी से सवाल किया कि आप चीख क्यों रहे हो.

तब तक शोरशराबा सुन कर आसपड़ोस के लोग उस के पास आ गए थे. उस के कुछ समय बाद बीरप्पा बेहोशी की हालत में चला गया. तब उस के किराएदार व पड़ोसियों ने उसे अस्पताल में भरती कराया. घटना के वक्त बीरप्पा की पत्नी उस की बगल में ही मौजूद थी, लेकिन उस ने एक बार भी हमलावरों से कुछ नहीं बोला.

बीरप्पा के बेहोश होते ही उस की पत्नी सुनंदा ने लोगों को बताया कि कुछ बदमाश घर में घुस आए थे. जिन्होंने घर में लूटमार करने के बाद बीरप्पा के साथ बुरी तरह से मारपीट भी की थी, लेकिन अस्पताल में बीरप्पा के होश में आते ही सब भेद खुल गया. बीरप्पा ने पुलिस को बताया कि घटना के वक्त उस की पत्नी ही उस के सीने पर चढ़ी बैठी थी. जबकि उस का प्रेमी सिद्धप्पा और उस का एक साथी उस का गला दबाने व उस के गुप्तांगों को दबा रहे थे.

सुनंदा ने प्लान बनाया था कि वह पति की हत्या कराने के बाद सिद्धप्पा के साथ मौजमस्ती मारेगी, लेकिन उस का फेंका पांसा उलटा पड़ गया. उस का पति तो किसी तरह से मौत के मुंह से वापस आ गया और उस का प्रेमी उसे छोड़ कर दुनिया से चला गया. स्टोरी लिखे जाने तक बीरप्पा एक निजी अस्पताल में भरती था. उस की हालत स्थिर बनी हुई थी. पुलिस की एक विशेष टीम ने बीरप्पा की पत्नी सुनंदा को गिरफ्तार कर लिया था. उस के बाद पुलिस ने उस से विस्तार से जानकारी जुटाने के बाद जेल भेज दिया था.

यह दुखद घटना टूटे हुए विश्वास और घरेलू अनसुलझे झगड़ों के गहरे परिणामों को उजागर करती है, जिस के कारण उन के २ बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया. Love Stories in Hindi

 

 

Crime Story in Hindi : योगा ट्रैनर मर्डर में किसे बचा रही है पुलिस

Crime Story in Hindi : अवैध संबंधों का आरोप लगाते हुए नैनीताल पुलिस ने 35 वर्षीय योगा ट्रैनर ज्योति मेर की हत्या के आरोपी 24 वर्षीय अभय यदुवंशी को गिरफ्तार कर के अपनी पीठ खुद थपथपा ली है. मृतका के फेमिली वालों का आरोप है कि इस हत्याकांड में अन्य कई रसूखदार लोग भी शामिल हैं. आखिर पुलिस के हाथ उन के गिरेबान तक क्यों नहीं पहुंच रहे?

योगा ट्रैनर ज्योति मेर ने हल्द्वानी में स्थित अजय योगा ऐंड फिटनैस सेंटर में आकर्षक वेतन पर महिला योग ट्रैनर के रूप में अपनी नौकरी शुरू की थी. नौकरी जौइन करते ही ज्योति के फेमिली वालों ने उसे जे.के. पुरम छोटी मुखानी में आशा पांडे के घर में किराए पर रूम दिला दिया था. वह वहां रह कर नौकरी कर रही थी. वैसे ज्योति शादीशुदा थी. मूलरूप से हल्दूचौड़, लालकुआं की निवासी ज्योति का विवाह जोधपुर, राजस्थान निवासी कमल सबलानी से हुआ था.

जब से 35 वर्षीय ज्योति मेर ने अजय योगा सेंटर में काम करना शुरू किया था, तभी से उसे अपने मायके की बचपन की एक फ्रेंड नीरा (परिवर्तित नाम) से भी परिचय हो गया था. एक दिन शाम के समय ज्योति को नीरा मिल गई. वह बाजार से सब्जी खरीद रही थी. इस के बाद जब इतने सालों के बाद दोनों एक बार फिर मिले तो दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए थे. इन का एकदूसरे के घर आनाजाना भी हो गया था.

ज्योति तो योगा सेंटर में जौब के कारण बिजी होने की वजह से नीरा के घर पर कम ही जा पाती थी, लेकिन नीरा हर तीसरे या चौथे दिन ज्योति से मिलने उस के कमरे पर चली जाया करती थी. उस के बाद वे दोनों सहेलियां बचपन की बातें करतेकरते अपने बचपन की दुनिया में जा पहुंचते थे. इस के अलावा नीरा हर रोज सुबह और शाम को ज्योति के साथ फोन पर बात कर के उस के हालसमाचार लेती रहती थी.

31 जुलाई, 2025 की सुबह 9 बजे नीरा ने रोज की तरह ज्योति को फोन किया. ज्योति के मोबाइल फोन पर घंटी तो जा रही थी, मगर वह फोन रिसीव नहीं कर रही थी. नीरा ने सोचा कि शायद ज्योति बाथरूम में होगी तो इसलिए फोन नहीं उठा रही होगी. उस के बाद नीरा ने हर 5 मिनट बाद ज्योति को कौल करनी शुरू की, मगर ज्योति ने फोन नहीं उठाया.

यह पहली बार था, जब ज्योति इतनी बार कौल करने के बाद भी उस का फोन नहीं उठा रही थी. नीरा ने अपने घर का काम जल्दी से किया और उस के बाद सीधे अपनी सहेली ज्योति मेर के कमरे पर जा पहुंची. जैसे ही नीरा ज्योति के कमरे में पहुंची तो वह फर्श पर बेदम और बेसुध पड़ी हुई थी. नीरा ने तुरंत ज्योति की मम्मी को इस घटना की सूचना दी और मकान मालिक व पड़ोसियों के सहयोग से थाना मुखानी में फोन कर इस घटना की सूचना दी.

शोर सुन कर अब तक घटनास्थल पर पासपड़ोस के काफी लोग भी पहुंच गए थे. थोड़ी ही देर बाद मुखानी थाने के एसएचओ दिनेश जोशी भी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. एसएचओ दिनेश जोशी ने ज्योति मेर को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां पर डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उस के बाद तो ज्योति मेर के फेमिली वाले भी पहुंच चुके थे. वहां पर लोग तरहतरह के कयास लगा रहे थे.

पुलिस क्यों मान रही थी आत्महत्या

शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का केस मान कर चल रही थी, मगर ज्योति के फेमिली वालों का आरोप था कि ज्योति के गले व शरीर के अन्य भागों पर चोट और किसी चीज द्वारा गला दबाए जाने के निशान थे, जिस से वह इसे हत्या का केस मान रहे थे. इस घटना के बारे में पुलिस का यह भी कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ पाएगी.

3 अगस्त, 2025 को मृतका ज्योति मेर की मम्मी दीपा मेर निवासी हल्दुचौड़, तुलारामपुर थाना, लालकुआं नैनीताल ने थाना सुखानी में आ कर एक लिखित तहरीर दी, जिस में उन्होंने बेटी ज्योति मेर की हत्या का शक योगा सेंटर के मालिक अजय यदुवंशी और उस के छोटे भाई अभय यदुवंशी उर्फ राजा पर लगाया. तहरीर के आधार पर एसएचओ दिनेश जोशी ने बीएनएस की धारा 103(1)/3(5) के तहत नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका ज्योति मेर के शव को डा. सुशीला तिवारी अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

घटना और केस की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल के एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा द्वारा घटना के खुलासे के लिए एक टीम गठित कर दी गई. टीम में अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को डा. जगदीश चंद्र एसपी (क्राइम), ट्रैफिक नैनीताल व प्रकाश चंद्र एसपी (सिटी) हल्द्वानी नितिन लोहनी (सीओ हल्द्वानी) एसएचओ मुखानी दिनेश चंद्र जोशी आदि को शामिल किया गया.

इस के अलावा इस विशेष पुलिस टीम में थाना मुखानी के एसआई वीरेंद्र चंद्र, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, नरेंद्र कुमार, हरजीत सिंह, कांस्टेबल सुनील आगरी, रोहित कुमार, सुरेश देवड़ी, रविंद्र खाती, बलवंत सिंह, धीरज सुगड़ा, शंकर सिंह, अनूप तिवारी, प्रवीण सिंह, महिला कांस्टेबल गंगा मठपाल एवं एसओजी के कांस्टेबल राजेश व अरविंद को शामिल किया गया.

पोस्टमार्टम में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

11 अगस्त, 2025 को योगा ट्रेनर ज्योति मेर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि ज्योति की मौत दम घुटने और सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण हुई थी. इस के अलावा उस के सीने में भी चोट के निशान पाए गए, जिस से यह आशंका व्यक्त की गई कि ज्योति की हत्या सुनियोजित तरीके से गला घोंट कर की गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक एवं महिला संगठनों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया और एक बड़े जुलूस के रूप में एसडीएम कोर्ट पहुंच कर इस जघन्य हत्याकांड के जल्द खुलासे की मांग की.

महिलाओं ने आरोप लगाया कि हल्द्वानी की कानूनव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक योगा ट्रैनर ज्योति मेर की हत्या के आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, आंदोलन और तेज किया जाएगा.

मीडिया से बातचीत करते हुए मृतका की मम्मी दीपा मेर ने कहा, ”मेरी बेटी को बेरहमी से मार डाला गया. अब तक भी आरोपी पकड़े नहीं गए हैं. क्या हमें इंसाफ नहीं मिलेगा?’’

लगातार हल्द्वानी में हो रहे अपराधों और हत्याओं के बीच अब नैनीताल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे थे. लोगों का कहना था कि हल्द्वानी में महिलाएं और बच्चे अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि पुलिस सख्त से सख्त त्वरित कारवाई करे और जनता का विश्वास बहाल करे. 21 दिन बाद भी जब ज्योति मेर हत्याकांड का खुलासा नहीं हुआ तो धरने के बीच पुलिस कार्यप्रणाली से क्षुब्ध युवक ने विरोधस्वरूप मुंडन करवा लिया.

इधर दिन गुजरते जा रहे थे, लेकिन पुलिस ज्योति मेर के हत्यारों को पकडऩे में कामयाब नहीं हो पा रही थी. पुलिस ने हत्या में नामजद आरोपी अजय यदुवंशी को गिरफ्तार भी कर लिया था, लेकिन पुलिस को उस का इस हत्या में कहीं से कहीं तक लिंक ही नजर नहीं आ रहा था, जबकि अजय का छोटा भाई अभय यदुवंशी फरार हो गया था, जिस का पता पुलिस नहीं लगा पा रही थी. योगा टै्रनर ज्योति मेर हत्याकांड का खुलासा न होने पर हल्द्वानी शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का आक्रोश दिनप्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था. लोगों का कहना था कि घटना के 21 दिन बाद भी हत्याकांड का खुलासा पुलिस द्वारा नहीं कर पाना पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली को दर्शा रहा है.

19 अगस्त, 2025 को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में एसएसपी को बरखास्त करने की मांग को ले कर लगातार पांचवें दिन लोगों का धरनाप्रदर्शन जारी रहा. धरने में मौजूद वक्ताओं ने मीडिया को बताया कि पुलिस पहले दिन से ही उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की तर्ज पर इस मामले को दबाना चाहती है और ढीली काररवाई कर रही है. इस से यह आशंका यहां पर भी प्रदर्शित हो रहा है कि अपराधी को किसी वीआईपी का संरक्षण प्राप्त है.

आखिरकार 20 अगस्त, 2025 को नैनीताल पुलिस ने 22 दिन पहले हुए योगा ट्रैनर हत्याकांड का खुलासा कर हत्या के मुख्य आरोपी को पकड़ लिया. पुलिस की विशेष टीम ने जांच के दौरान घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए और इस की स्कैनिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक कैमरे में ज्योति के कमरे की दिशा से निकलता दिखाई दिया था.

जिस कलाई पर बांधी राखी उसी ने घोंटा गला

उस संदिग्ध युवक के हावभाव और स्थानीय इनपुट के आधार पर उस की पहचान अभय कुमार यदुवंशी उर्फ राजा निवासी गोल, चौक, वाल्मिकी नगर, पश्चिमी चंपारण, बिहार के तौर पर हुई, जो वर्तमान में अजय योगा ऐंड फिटनैस सेंटर, हल्द्वानी परिसर में रहता था. मामले के तूल पकडऩे से पहले अभय यदुवंशी फरार हो गया और लंबे समय तक नेपाल में ही छिपा रहा. इधर दूसरी तरफ नैनीताल पुलिस की टीम उस की तलाश में लगातार दबिश देती रही और अंतत: 20 अगस्त, 2025 को मुख्य अभियुक्त अभय यदुवंशी को ऊधमसिंह नगर नगला तिराहे से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस पूछताछ में हत्या के मुख्य आरोपी अभय यदुवंशी उर्फ राजा ने बताया कि हल्द्वानी के चंदन डायग्नोसिस के टौप फ्लोर पर उस के बड़े भाई अजय यदुवंशी की अजय फिटनैस ऐंड योगा सेंटर के नाम से एकेडमी है. जिसे काफी सालों से दोनों भाई मिल कर चला रहे थे. अपने इस योगा सेंटर में मैनेजमेंट के सारे काम शुरू से ही अभय देख रहा था. वर्ष 2023 में ज्योति मेर उन के योगा सेंटर में काम करने आई.

कुछ समय के बाद ज्योति मेर और अजय के बीच में अवैध संबंध स्थापित हो गए, जिसे कई बार अभय ने खुद अपनी आंखों से देख लिया था. आरोपी अभय ने यह भी बताया कि उस के बड़े भाई अजय यदुवंशी की गर्लफ्रेंड माधवी (परिवर्तित नाम) भी उन के योगा सेंटर में काम करती थी. ज्योति और अजय की नजदीकियों की बात माधवी को पता चल चुकी थी और यह बात अभय ने भी अपनी भाभी माधवी को बताई थी, जिस बात से नाखुश हो कर माधवी ने सन 2023 में जहर खा लिया था. उस के बाद ही वर्ष 2024 में अजय ने माधवी से शादी कर ली, लेकिन अजय की नजदीकियां ज्योति मेर से फिर भी कम नहीं हुई थीं.

उस के बाद जब यह बात अजय को पता चली कि उस के छोटे भाई अभय ने उस के और ज्योति के अवैध संबंधों की बात उस की पत्नी माधवी को बता दी है तो अजय ने गुस्सा हो कर योगा सेंटर के मैनेजमेंट के सारे काम छोटे भाई अभय से छीन कर ज्योति मेर के हाथों में सौंप दिए थे. इसी बीच अभय को अपने किसी काम के लिए 10 लाख रुपए की जरूरत पड़ी तो उस ने अपने बड़े भाई अजय से रुपयों की मांग की, लेकिन अजय ने अभय को रुपए देने से साफसाफ मना कर दिया. इस के साथ ही अजय ने अभय को अपने घर से भी निकाल दिया, जिस के बाद अभय को पीजी में रहना पड़ रहा था.

अभय इन सब के पीछे ज्योति मेर को ही जिम्मेदार मानता था. इसलिए उस ने अब मन ही मन ज्योति को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया. अपने प्लान के मुताबिक आरोपी अभय यदुवंशी 30 जुलाई, 2025 की रात को ज्योति के कमरे में गया. थोड़ा बातचीत के बाद ज्योति रसोई से अभय के लिए नींबू पानी बना कर ले आई.

अभय ने ऐसे दिया हत्या को अंजाम

ज्योति तभी रसोई में सब्जी की कड़ाही की गैस बंद करने जैसे ही घुसी, तभी मौका पा कर अभय ने पीछे से जा कर फुरती से ज्योति को दबोच लिया और गले में पड़ी उसी की चुन्नी से उस का गला घोंट दिया.

इस से पहले अभय उस रात गुस्से से हैवान बन चुका था. उस की यह हैवानियत ज्योति मेर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी बयां की थी. ज्योति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ज्योति के सिर के बाएं हिस्से पर गहरा घाव, दाहिने हाथ की कोहनी के पास घाव, पैरों के निचले हिस्से पर घाव और पीठ की ऊपरी हिस्से की उस की त्वचा बुरी तरह से फटी हुई थी, जबकि अंदरूनी चोटों की बात करें तो ज्योति की खोपड़ी में फ्रैक्चर था. मस्तिष्क में खून भर चुका था. पसलियों में चोट व अंदर खून जमा था, जबकि पेट के अंदर के अंगों (जैसे लीवर आदि) में चोट और रक्तस्राव हुआ था.

अभय ज्योति के पर तब तक वार करता रहा, जब तक वह बेदम हो कर जमीन पर नहीं गिर गई. उस के बाद ज्योति को हिलाडुला कर जब उसे यकीन हो गया कि ज्योति अब मर चुकी है तो उस ने इत्मीनान से ज्योति का शव जमीन पर रखा और फिर वहां से आननफानन में नैनीताल चला गया. रात को नैनीताल में रुका और दूसरे दिन कुछ समय तक नैनीताल में अकेला घूमता रहा. फिर उसी दिन उस ने टैक्सी बुक की और बनबसा होते हुए सीधे नेपाल भाग गया.

योगा ट्रैनर ज्योति मेर को मौत के घाट उतारने का प्लान अभय यदुवंशी काफी पहले ही बना चुका था. वह रोज कुछ न कुछ प्लान बनाता और फिर आखिर में उस प्लान को कैंसिल कर देता था. 30 जुलाई, 2025 को ज्योति की हत्या के दिन भी उस ने काफी ऐहतियात से काम लिया था. उस ने अपने चेहरे और सिर को ढक लिया था, ताकि अगर वह कहीं सीसीटीवी पर नजर भी आए तो उस की पहचान न हो सके. हालांकि वह यहां पर एक बड़ी भूल यह कर गया कि वह अपनी चालढाल को बदलना ही भूल गया और पुलिस की नजरों में आ गया.

पुलिस ने आरोपी अभय यदुवंशी की फोटो नेपाल से ले कर बिहार तक के थानों में पहुंचा दी थी, लेकिन अभय यदुवंशी जानता था कि पुलिस उस के पीछे जरूर पड़ सकती है. इसलिए उस ने पुलिस को चकमा देने के लिए अपना सिर भी मुंडवा लिया था, ताकि पुलिस उस की पहचान न कर सके. लेकिन कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना ही शातिर क्यों न हो, वह एक न एक गलती अवश्य कर देता है. इसलिए बुधवार 20 अगस्त, 2025 को जब वह हल्द्वानी में अपनी पहचान छिपाए अपने वकील से मिलने आ रहा था तो वह ऊधमसिंह नगर में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया.

वर्ष 2023 में ज्योति मेर योगा ट्रैनर के तौर पर अजय योगा सेंटर में आई थी, तभी से उस की हत्यारोपी अभय यदुवंशी से अच्छी पहचान थी. ज्योति ने अभय को अपना भाई मान लिया था. वर्ष 2024 में उस ने अभय को राखी भी बांधी थी, ज्योति को क्या पता था कि जिस हाथ में वह राखी बांध रही है, उन्हीं हाथों से वह बेदर्दी से तड़पातड़पा कर, गला दबा कर उस की जान ले लेगा.

हल्द्वानी पुलिस की विशेष टीम ने अभियुक्त अभय कुमार यदुवंशी उर्फ राजा (24 वर्ष) को गिरफ्तार कर उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया दुपट्टा भी बरामद कर लिया है. पुलिस की इस विशेष टीम के उत्साहवर्धन हेतु उसे ढाई हजार रुपए के ईनाम से भी पुरस्कृत किया गया है. नैनीताल पुलिस ने योगा ट्रैनर ज्योति मेर हत्याकांड का खुलासा भले ही कर दिया है, मगर इस खुलासे से मृतका के फेमिली वाले बिलकुल भी संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने और सामाजिक संगठन पहाड़ी आर्मी ने इस हत्याकांड को कठघरे में ला कर खड़ा कर दिया है.

इस खुलासे को मृतका के फेमिली वालों ने एक नाटकीय एपिसोड करार दिया और कहा कि उन की बेटी के चरित्र पर लांछन लगा कर पुलिस हमारा और जनता का आक्रोश कम करना चाहती है. इस मामले में मृतका की मम्मी दीपा मेर ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इस खुलासे से वह बिलकुल भी संतुष्ट नहीं हैं. मेरी बेटी के चरित्र पर लांछन लगाया गया है. जबकि इस प्रकरण में शामिल अभय यदुवंशी के अलावा अजय यदुवंशी, शालिनी यदुवंशी और गुरमीत नाम के व्यक्तियों पर पुलिस ने कुछ भी कारवाई नहीं की. पुलिस इन लोगों को क्यों बचाना चाहती है. इन तीनों को भी जेल की सलाखों के पीछे डालना होगा. दीपा मेर ने पुलिस के खुलासे पर मुख्य रूप से 7 सवाल पूछे हैं.

पहला, यदि हत्यारा अभय यदुवंशी उर्फ राजा का अपने बड़े भाई से लड़ाईझगड़ा हुआ और उस ने अभय को कारोबार से निकाल कर उस का खानाखर्चा बंद किया तो उस को इस बात पर अपने भाई अजय से नाराजगी होनी चाहिए थी न कि ज्योति से. दूसरा कि यदि अजय यदुवंशी और ज्योति मेर के बीच अवैध संबंध थे तो अजय यदुवंशी की पत्नी माधवी ने चुप्पी क्यों साध रखी थी? इसलिए क्या इस मर्डर केस में वह अपने पति और देवर के साथ शामिल नहीं होगी? तीसरा सवाल यह है कि यदि अजय अपने छोटे भाई अभय को खर्चा नहीं दे रहा था तो इस में ज्योति को मारने का क्या लौजिक है?

चौथा सवाल पुलिस से यह है कि यदि ज्योति मेर की मृत्यु पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उस के सिर के अंदर रक्तस्राव से हुई थी, जबकि नैनीताल पुलिस ने अपने खुलासे में सिर्फ दुपट्टे से गला दबाने की बात कही है. आखिर इस चोट को मारने के लिए आरोपी ने किस हथियार से उस के सिर पर वार किया था, वह कौन सा हथियार था? वह पुलिस द्वारा क्यों बरामद नहीं किया गया?

दीपा मेर ने पांचवां सवाल यह पूछा कि यदि मुख्य आरोपी अभय यदुवंशी पूरे 22 दिनों तक फरार रहा तो आखिर इस समय उस की मदद कौन कर रहा था? जबकि पैसों के मामले में अभय यदुवंशी काफी लंबे समय से पैदल चल रहा था? छठां सवाल दीपा मेर ने पुलिस से यह पूछा कि यदि अभय यदुवंशी नेपाल भाग गया था तो वह नेपाल से वापस ऊधमसिंह नगर क्यों और कैसे आ गया? पुलिस ने कहा कि वह अपने वकील से मिलने आ रहा था तो इस मुफलिसी में उस की आर्थिक मदद कौन कर रहा था?

सातवां सवाल मृतका की की मम्मी दीपा मेर ने जो पूछा है वह बहुत गंभीर और दिल झकझोर देने वाला है. दीपा मेर ने पुलिस से यह पूछा है कि क्या उत्तराखंड पुलिस सिर्फ एक लड़की के चरित्र पर अंगुली उठा कर अपना काम पूरा करने का श्रेय ले कर जनता और मृतका के फेमिली वालों के आक्रोश को दबाना चाहती है और अन्य केसों की तरह इस में भी लीपापोती कर केस को ढीला और कमजोर करना चाहती है?

इन 7 सवालों और आरोपों के साथ मृतका ज्योति मेर की मम्मी दीपा मेर ने इस जघन्य हत्याकांड के सही खुलासे के लिए उत्तराखंड की धामी सरकार से एसआईटी जांच की मांग की है. उन का कहना है कि एसआईटी जांच से इन सारे पहलुओं पर जब दोबारा से जांच होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. पुलिस के इस खुलासे को ले कर सामाजिक संगठन पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत और सुराज सेवा दल कुमाऊं मंडल अध्यक्ष विशाल शर्मा का कहना है कि जिस प्रकार से नैनीताल पुलिस द्वारा सिर्फ एक या 2 पौइंट पर फोकस कर के निर्मम हत्याकांड का उत्तराखंड पुलिस द्वारा खुलासा किया गया है, वह वास्तव में अचंभित करने वाला और दिल को झकझोर देने वाला है.

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यदि इस जघन्य और निर्मम हत्याकांड की सूक्ष्मता और गहराई से जांच की जाए तो इस में कई सफेदपोश और रसूखदारों के शामिल होने की तो पूरीपूरी आशंका है. इस के लिए कई सामाजिक संगठनों ने कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से एसआईटी जांच की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि सरकार इस प्रकरण पर उचित काररवाई नहीं करेगी तो उन्हें फिर से आंदोलन करने के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. Crime Story in Hindi

 

 

 

UP Crime News : पत्नी की अनेदखी न बाबा न

UP Crime News : बलरामपुर की विनीता और उस का पति मदन कुमार आर्य दोनों ही सरकारी नौकरी पर थे. हर महीने मोटी सैलरी मिलती थी. कमाई के चक्कर में मदन कुमार पत्नी की शारीरिक जरूरत को तवज्जो नहीं देता था. ऐसे में 2 जवान बच्चों की 40 वर्षीय मां विनीता का अपने भांजे उमेश कुमार पर दिल आ गया. फिर एक दिन वही हुआ, जिस की…

विनीता आर्य 2 सप्ताह से अपने भांजे उमेश कुमार की काल रिसीव नहीं कर रही थी, जिस से उमेश की उलझन बढ़ती जा रही थी. इसी उलझन में वह शाम करीब 5 बजे विनीता के घर जा पहुंचा. उस ने डोरबैल बजाई तो चंद मिनट बाद विनीता ने दरवाजा खोला. सामने उमेश को देखते ही विनीता तल्ख स्वर में बोली, ”उमेश, तुम्हारे मामा तो घर में हैं नहीं. बेटा मनु भी कोचिंग गया है.’’

”मामी, मामा नहीं, आप तो हैं.’’ कहते हुए उमेश घर के अंदर आ गया और कमरे में पड़े सोफे पर आ कर बैठ गया. उमेश ने एक सरसरी नजर विनीता मामी पर डाली फिर बोला, ”मामी, वैसे भी मैं मामा से नहीं, तुम से मिलने आया हूं. तुम मेरी काल रिसीव क्यों नहीं कर रही थी.’’

”देखो उमेश, अब तुम शादीशुदा और एक बच्चे के बाप हो. इसलिए तुम से फोन पर बतियाना और तुम्हारा घर आना, दोनों ही ठीक नहीं है. वैसे भी पति और बेटा दोनों तुम्हें शक की नजरों से देखते हैं. तुम से नफरत करते हैं.’’

”मामी, मैं पहले भी तो घर आता था. तब तुम खूब हंसती थी, बोलती थी, बतियाती थी. मेरे आने का इंतजार करती थी. 2-4 दिन भी न आऊं तो उलाहना देती थी. अंतरंग क्षणों में तुम्हें सुख की अनुभूति भी होती थी, परंतु अब क्या हो गया है?’’

”तब की बात और थी उमेश. तब मैं तुम से प्यार करती थी. इसलिए खुल कर हंसतीबोलती थी. तुम्हारा बेसब्री से इंतजार भी करती थी. न आने पर बेचैन हो जाती थी. तुम्हारे साथ मिलन में मुझे सुख भी मिलता था. लेकिन अब बात कुछ और है. तुम्हारी खूबसूरत पत्नी है. बच्चा है. अब तुम पतिधर्म का पालन करो और मुझे भूल जाओ. वैसे भी अब मैं तुम से प्यार नहीं करती. मैं ने तुम्हें अपने दिल से निकाल दिया है.’’

”मामी, मैं मानता हूं कि मेरी पत्नी जवान है और खूबसूरत भी है. लेकिन तुम मेरा पहला प्यार हो. तुम्हारे साथ मिलन में मुझे जो सुख मिलता है, वह बीवी के साथ नहीं. वैसे मामी, मुझे पता है कि तुम मुझे क्यों नजरअंदाज कर रही हो और क्यों तुम ने मुझे अपने दिल से निकाल फेंका है. जवान और सुंदर बीवी तो बहाना है.’’

”क्या पता है तुम्हें?’’ विनीता ने अनजान बनते हुए उमेश से पूछा.

”यही कि अब तुम ने अपने दिल में किसी और को बसा लिया है. उसी के साथ गुलछर्रे उड़ा रही हो. इसलिए तुम ने मुझे अपने दिल से निकाल दिया है और मुझे नजरअंदाज कर रही हो. तुम मामा की आंखों में धूल झोंक सकती हो, मेरी आंखों में नहीं.’’

विनीता गुस्से से बोली, ”उमेश, तुम हदें पार कर रहे हो. तुम्हारा इलजाम सरासर गलत है. मैं ने किसी को दिल में नहीं बसाया है और न ही पति की आंखों में धूल झोंक रही हूं. तुम्हें नजरअंदाज करने लगी हूं. इसलिए तुम मेरे चरित्र पर अंगुली उठाने लगे हो.’’

उस रोज विनीता और उमेश के बीच नजर अंदाज को ले कर काफी देर तक नरमगरम बहस होती रही. उस के बाद उमेश वापस घर आ गया. दरअसल, उमेश को शक था कि विनीता ने अपने साथ नौकरी करने वाले एक टीचर से रिश्ता जोड़ लिया है. इसलिए वह उसे नजरअंदाज करने लगी है और उस से दूरी बना ली है. उमेश नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका विनीता उस के अलावा किसी और की बांहों में समाए. इसलिए उस ने विरोध जताया और समझाने का प्रयास भी किया. लेकिन विनीता जब नहीं मानी तो उस ने उसे सबक सिखाने की ठान ली. उमेश ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि विनीता उस की नहीं हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.

पहली अप्रैल, 2025 की शाम 5 बजे उमेश अपनी ब्रेजा कार से वीर विनय चौराहे की ओर जा रहा था, तभी उस की नजर विनीता पर पड़ी. वह बाजार की ओर शायद कुछ घरेलू सामान खरीदने जा रही थी. उमेश कार ले कर विनीता के पास पहुंचा और बोला, ”मामी, क्या बाजार जा रही हो? कार में बैठो, मैं तुम्हें बाजार तक छोड़ देता हूं. बाजार करने के बाद मैं तुम्हें घर भी छोड़ दूंगा.’’

”नहीं, नहीं उमेश, मैं बाजार चली जाऊंगी. तुम मेरे लिए परेशान मत हो. जहां जा रहे हो, जाओ.’’

लेकिन उमेश नहीं माना. उस ने फुरती से कार का दरवाजा खोला और विनीता को अगली सीट पर बिठा लिया. उस के बाद स्वयं ड्राइविंग सीट पर बैठ कर कार बढ़ा दी तो विनीता ने पूछा, ”उमेश, तुम मुझे कहां ले जा रहे हो?’’

उमेश मुसकराते हुए बोला, ”मामी, आज बहुत दिनों बाद मौका मिला है. इसलिए हम सैरसपाटे पर जा रहे है. घंटे दो घंटे में वापस आ जाएंगे.’’

”घर न पहुंची तो तुम्हारे मामा परेशान होंगे. इसलिए मैं घूमने नहीं जाऊंगी. तुम मुझे बाजार छोड़ दो. सामान ले कर मैं समय से घर पहुंच जाऊंगी. मुझे खाना भी बनाना है.’’

लेकिन उमेश ने विनीता की बात अनसुनी कर दी. वह उसे बलरामपुर शहर से श्रावस्ती ले गया, फिर वहां से बहराइच होता हुआ गोंडा जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र के गांव परसौनी पहुंचा. यहां उस ने गांव से कुछ दूर विसुहा नदी के पुल के किनारे कार रोक दी. अब तक रात का अंधेरा घिर आया था. आवाजाही न के बराबर थी. उमेश ने विनीता का हाथ अपने हाथ में ले कर पूछा, ”मामी, सचसच बताओ, क्या तुम मुझ से प्यार नहीं करती और तुम ने किसी और को अपने दिल में बसा लिया है?’’ कहते हुए उमेश ने विनीता को अपनी बांहों में भर लिया और मनमानी करने लगा. विनीता बचाव करने लगी.

बचाव के दौरान ही विनीता ने एक तमाचा उमेश के गाल पर जड़ दिया. तमाचा पड़ते ही उमेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उस ने विनीता के गले में पड़ा दुपट्टा उसी के गले में लपेटा और गला कसने लगा. कुछ ही देर में विनीता की जीभ और आंखें बाहर आ गईं और उस की मौत हो गई. हत्या करने के बाद उमेश ने विनीता का मोबाइल फोन व दुपट्टा सुरक्षित किया, फिर शव को कार से निकाल कर विसुहा नदी के पुल के नीचे फेंक दिया. वापस लौटते समय उस ने विनीता का मोबाइल फोन बंद कर दिया. फोन और दुपट्टा दुल्हिनपुर के जंगल में फेंक दिया. इस के बाद वह घर आ गया.

इधर विनीता अपने पति मदन कुमार आर्य से शाम 5 बजे यह कह कर घर से निकली थी कि वह घर का सामान खरीदने सिविल लाइंस बाजार जा रही है. सामान खरीद कर घंटे-दो घंटे बाद वापस आ जाएगी. इंतजार करतेकरते मदन कुमार को 3 घंटे से अधिक का समय बीत चुका था, लेकिन विनीता बाजार से खरीददारी कर वापस नहीं आई थी. पत्नी की खोज में मदन कुमार सिविल लाइंस स्थिति मार्केट भी गया और मार्केट का चप्पाचप्पा छान मारा, लेकिन विनीता उसे कहीं नहीं दिखी. अत: हताश हो कर वह वापस आ गया.

सुबह होते ही अड़ोसपड़ोस में भी विनीता के लापता होने की खबर फैल गई. फिर तो विनीता का लापता होना मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गया. मदन कुमार आर्य 2 अप्रैल, 2025 की सुबह 10 बजे थाना सिविल लाइंस पहुंचा. उस समय एसएचओ शैलेश सिंह थाने में मौजूद थे. मदन कुमार आर्य ने उन्हें बताया कि उन की पत्नी विनीता कंपोजिट विद्यालय में अनुदेशिका पद पर कार्यरत है. कल शाम 5 बजे वह सिविल लाइंस बाजार गई थी. तब से वह वापस नहीं आई. उस का फोन भी बंद है. उस की खोज हर संभावित स्थान पर की गई है. लेकिन उस का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि विनीता पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद की बेटी की बहू है.

चूंकि मामला पूर्व विधायक के परिवार से जुड़ा था, अत: एसएचओ शैलेश सिंह ने विनीता के लापता होने की जानकारी एसपी विकास कुमार को दी. साथ ही मदन कुमार की तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज कर ली. एसपी विकास कुमार ने विनीता की गुमशुदगी को गंभीरता से लिया और उस की खोज के लिए एएसपी नम्रता श्रीवास्तव की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित कर दी. इस टीम में एसएचओ शैलेश सिंह के अलावा कुछ तेजतर्रार पुलिसकर्मियों व सर्विलांस टीम को शामिल किया गया. साथ ही कुछ खास खबरियों को भी विनीता की टोह में लगाया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले विनीता के पति मदन कुमार व उन के बेटे मनु से पूूछताछ की, फिर सर्विलांस टीम की मदद से घर से ले कर बाजार तक सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला. टीम को एक बड़ी सफलता तब मिली, जब सिविल लाइंस बाजार के पहले सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे में विनीता दिखी. वह किसी कार सवार युवक से बात कर रही थी. फिर उसी युवक की कार में बैठ जाती दिखी. पुलिस टीम ने वह फुटेज विनीता के पति मदन कुमार आर्य को दिखाई तो वह चौंकते हुए बोला, ”अरे यह तो उमेश कुमार है. कार भी उसी की है. विनीता उसी से बात कर रही है.’’

”यह उमेश कुमार कौन है?’’ एसएचओ शैलेश सिंह ने मदन कुमार से पूछा.

”सर, उमेश कुमार हमारा भांजा है. वह देहात कोतवाली थाना क्षेत्र के गांव गजाधर सिंह डिडवा में रहता है. बलरामपुर शहर के वीर विनय चौराहा स्थित एचडीएफसी बैंक में सेल्स औफिसर के पद पर कार्यरत है. उस का मेरे घर खूब आनाजाना था. मामीभांजे में खूब पटती थी. परंतु इधर कुछ महीने से उस का घर आनाजाना बेहद कम हो गया है. विनीता भी उस से दूरियां बनाए हुए थी. लेकिन सर..?’’

”लेकिन क्या?’’ एसएचओ शैलेश सिंह ने मदन कुमार की आंखों में झांकते हुए पूछा.

”सर, कल हम ने उमेश को कौल लगा कर विनीता के लापता होने की जानकारी दी थी, लेकिन उस ने साफ मना कर दिया था कि विनीता के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है. आखिर उस ने झूठ क्यों बोला? जबकि विनीता उसी की कार में उसी के साथ बैठ कर फुटेज में जाती दिख रही है. सर, मुझे तो दाल में कुछ काला नजर आ रहा है.’’

सेल्स औफिसर उमेश कुमार शक के घेरे में आया तो पुलिस टीम ने उस के घर रात 11 बजे छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया. उसे थाना सिविल लाइंस लाया गया. थाने में एसएचओ शैलेश सिंह ने उमेश से पूछा, ”विनीता कहां है?’’

”सर, मुझे उस के बारे में कुछ भी पता नहीं है.’’ उमेश बोला.

”तुम सरासर झूठ बोल रहे हो. विनीता तुम्हारे साथ ही गई थी. यकीन नहीं तो यह सीसीटीवी फुटेज देख लो.’’ एसएचओ शैलेश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया.

उमेश ने सीसीटीवी फुटेज देखी तो वह हक्काबक्का रह गया और बगलें झांकने लगा. इसी समय शैलेश सिंह ने फिर से पूछा, ”अब बताओ, विनीता कहां है?’’

”सर, विनीता अब इस दुनिया में नहीं है.’’ उमेश ने विस्फोट किया.

”क्या तुम ने उसे मार डाला? उस की लाश कहां है?’’ शैलेश सिंह ने पूछा.

”सर, विनीता को मैं घुमाने के बहाने अपनी कार से ले गया था. फिर गोंडा जिले के गांव परसौना के पास कार में ही उस को गला घोंट कर मार दिया और लाश विसुहा नदी के पुल के नीचे फेंक दी थी.’’

एसएचओ शैलेश सिंह ने अनुदेशिका विनीता की हत्या होने व आरोपी के पकड़े जाने की खबर एसपी विकास कुमार को दी तो वह चौंक गए. उन्होंने तत्काल गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल से बात की और विनीता का शव विसुहा नदी के पुल के नीचे से बरामद करने को कहा. गोंडा एसपी विनीत जायसवाल की सूचना पर थाना खरगूपुर पुलिस घटनास्थल विसुहा नदी पुल पर पहुंची. एसएचओ शैलेश सिंह भी अपनी टीम तथा आरोपी उमेश को साथ ले कर घटनास्थल पहुंच गए. फिर उमेश की निशानदेही पर पुलिस की संयुक्त टीम ने मृतका विनीता का शव पुल के नीचे से बरामद कर लिया.

बलरामपुर के एसपी विकास कुमार, एएसपी नम्रता श्रीवास्तव तथा गोंडा एसपी विनीत जायसवाल भी घटनास्थल पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका विनीता की उम्र 40 साल के पार थी. उस की हत्या गला घोंट कर की गई थी. उस के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था. उस का रंग गोरा, औसत कद तथा शरीर स्वस्थ था. इधर पत्नी विनीता की हत्या की खबर पा कर मदन कुमार भी अपने बेटे मनु के साथ घटनास्थल पर पहुंच गया. पत्नी का शव देख कर मदन कुमार की भी आंखों से आंसू बहने लगे.

पुलिस अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद विनीता के शव को पोस्टमार्टम के लिए गोंडा के जिला अस्पताल भिजवा दिया. उस के बाद पुलिस टीम आरोपी उमेश को थाना सिविल लाइंस ले आई. थाने में एसपी विकास कुमार तथा एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने आरोपी उमेश कुमार से घटना के संबंध में पूछताछ की. उमेश कुमार ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि मामा मदन कुमार आर्य के घर उस का आनाजाना बना रहता था. इसी आनेजाने में उस का लव अफेयर मामी विनीता से बन गया. कुछ समय बाद मामी ने अपने विद्यालय के एक टीचर को अपने दिल में बसा लिया और उसे नजरअंदाज करने लगी.

मामी का दूसरे से संबंध बनाना उसे नागवार लगा. उस ने मामी को समझाया भी, लेकिन जब वह नहीं मानी तो घटना वाले दिन वह उसे घुमाने के बहाने ले गया और कार में उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया. उमेश ने हत्या में प्रयुक्त दुपट्टा, कार व मोबाइल फोन भी पुलिस को बरामद करा दिया. दुपट्टा व मोबाइल को उस ने दुल्हिनपुर के जंगल में छिपा दिया था.

चूंकि उमेश कुमार ने विनीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: पुलिस ने मृतका के पति मदन कुमार आर्य की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) तथा 238 के तहत उमेश कुमार निवासी गांव गजोधर सिंह डिडवा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में मामीभांजे के लव क्राइम की जो कहानी सामने आई, उस का विवरण इस प्रकार है.

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर शहर के सिविल लाइंस मोहल्ले में मदन कुमार आर्य सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी विनीता के अलावा बेटा मनु व एक बेटी थी. मदन कुमार बिजली विभाग में बाबू था. उस की पत्नी विनीता बलरामपुर जिला पंचायत स्थित आदर्श कंपोजिट विद्यालय में अनुदेशिका के पद पर थी. चूंकि पतिपत्नी दोनों सरकारी नौकरी करते थे, अत: उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. बेटी पढ़लिख कर जवान हुई तो उन्होंने उस का ब्याह रचा दिया था. वह सुखपूर्वक ससुराल में रह रही थी. मदन कुमार आर्य की मां गंगाजली पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद की बेटी थीं. सुखदेव प्रसाद बलरामपुर शहर की तुलसीपुर विधानसभा सीट से 2 बार विधायक चुने गए थे. सिविल लाइंस वाला बंगला विधायक कोटे के तहत आवंटित हुआ था. विधायक पिता सुखदेव की मृत्यु के बाद गंगाजली अपने बेटे मदन कुमार व बहू विनीता के साथ इसी बंगले में रहने लगी थी.

मदन कुमार व उस की पत्नी विनीता, बेटे मनु को बेहद प्यार करते थे. वह उसे अच्छी शिक्षा दिला कर प्रशासनिक सेवा में लाना चाहते थे. इसलिए वह उस की शिक्षा पर पूरा ध्यान दे रहे थे और पैसा भी खूब खर्च कर रहे थे. मनु भी पढऩे में तेज था. अत: वह पढ़ाई पर जोर दे रहा था. विनीता खुद अच्छा कमाती थी और उस के पति मदन कुमार की भी कमाई खूब थी. घर में किसी चीज की कमी न थी. दोनों खुशहाल थे, लेकिन विनीता को पति की कमी खलती थी. दरअसल, विनीता बलरामपुर शहर में कार्यरत थी, जबकि पति गोंडा शहर में बिजली विभाग में बाबू था.

उस का रोजाना घर आना संभव न था, इसलिए वह गोंडा में ही किराए के मकान में रहता था. महीने में एकदो बार ही घर आता था और 2-3 दिनों बाद वापस चला जाता था. विनीता उन दिनों उम्र के उस दौर से गुजर रही थी, जब औरत को पुरुष की नजदीकियों की ज्यादा जरूरत होती है. विनीता 2 जवान बच्चों की मां जरूर थी, लेकिन उस की उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था. वह खूब बनसंवर कर रहती थी. वह कुछ समय तक पति की कमी बरदाश्त करती रही. उस के बाद उस का जिस्म अंगड़ाइयां लेने लगा.

एक रोज विनीता सजधज कर घर से निकलने ही वाली थी कि मदन कुमार आर्य का भांजा उमेश कुमार आ गया. विनीता ने उसे आश्चर्य से देखते हुए पूछा, ”अरे तुम, इस तरह अचानक?’’

”मामी, अभीअभी गांव से आ रहा हूं.’’ उमेश कुमार ने मुसकरा कर जवाब दिया.

उस दिन उमेश को मामी बहुत ज्यादा खूबसूरत लगी. उस की निगाहें विनीता के चेहरे पर जम गईं. यही हाल विनीता का भी था. उमेश को इस तरह निगाहें जमाए देखा तो विनीता बोली, ”ऐसे क्या देख रहे हो मुझे? क्या पहली बार देखा है? बोलो, किस संकोच में डूबे हो?’’

”नहीं मामी, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं तो यह देख रहा था कि मेकअप में आप कितनी सुंदर लग रही हैं. खुले बालों में तो आप गजब ही ढा रही हो.’’

”बस… बस रहने दो. बहुत बातें बनाने लगे हो. तुम्हारे मामा तो कभी तारीफ नहीं करते. महीने में एक या 2 बार आते हैं. वह भी थकेथके से रहते हैं.’’

”अरे मामी, औरत की खूबसूरती सब को रास थोड़े ही आती है. मामा बिजली विभाग में हैं. ऊपरी कमाई में जुटे रहते हैं, इसलिए वह तुम्हारी कद्र नहीं करते.’’

”तू तो मेरी बहुत कद्र करता है. महीनों बीत जाते हैं, झांकने तक नहीं आता. जा बहुत देखे हैं, तेरे जैसे बातें बनाने वाले.’’

”मुझे सचमुच आप की कद्र है मामी. यकीन न हो तो परख लो. अब मैं तुम्हारी खैरखबर लेने आता रहूंगा. छोटाबड़ा जो भी काम कहोगी, करूंगा.’’ उमेश ने विनीता की चिरौरी सी की. उमेश की यह बात सुन कर विनीता खिलखिला कर हंस पड़ी. फिर बोली, ”तुम आराम से सोफे पर बैठो. मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.’’ कह कर विनीता ने रसोई का रुख किया.

थोड़ी देर में विनीता 2 कप चाय और नाश्ता ले आई. दोनों गपशप लड़ाते हुए चाय पीते रहे और चोरीछिपे एकदूसरे को देखते रहे. दोनों के ही दिलोदिमाग में हलचल सी मची हुई थी. सच तो यह था कि विनीता उम्र में कई साल छोटे स्मार्ट उमेश को देख कर उस पर फिदा हो गई थी. वह ही नहीं, उमेश भी मामी का दीवाना बन गया था. दोनों के दिल एकदूसरे के लिए धड़के तो नजदीकियां खुदबखुद बन गईं. इस के बाद उमेश कुमार हर सप्ताह विनीता से मिलने आने लगा. विनीता को उस का आना अच्छा लगता था. जल्द ही वे एकदूसरे से खुल गए और दोनों के बीच हंसीमजाक होने लगी. चूंकि दोनों के बीच मामीभांजे का रिश्ता था, इसलिए विनीता चाहती थी कि पहल उमेश कुमार करे. जबकि उमेश चाहता था कि जिस्म की भूखी मामी स्वयं उसे उकसाए.

आखिर जब विनीता से नहीं रहा गया तो एक रोज रात में उस ने उमेश को अपने घर रोक लिया. खाना खाने के बाद उमेश कमरे में जा कर पलंग पर लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा. थोड़ी देर बाद विनीता भी उसी पलंग पर उमेश के बगल में लेट गई और उस से लिपट गई. विनीता का स्पर्श पा कर उमेश सिहर उठा. लेकिन वह रिश्ते की मर्यादा समझता था. इसलिए चुपचाप लेटा रहा. विनीता उस वक्त अधोवस्त्र में थी, जिस से उस के कोमल उभार उमेश के शरीर को छू रहे थे. वह उस से सटती ही जा रही थी, लेकिन उमेश रिश्ते की मर्यादा सोच कर चुपचाप लेटा था.

लेकिन वह कब तक चुप रहता? विनीता ने उकसाया तो उस रात दोनों के बीच की हर दीवार टूट गई. मामीभांजे का रिश्ता टूट कर बिखर गया और एक नए रिश्ते ने जन्म लिया, वह था अवैध संबंधों का रिश्ता. उस दिन के बाद विनीता और उमेश अकसर देह सुख प्राप्त करने लगे. विनीता भूल गई कि वह 2 जवान बच्चों की मां है और पति से विश्वासघात कर रही है. उस ने पवित्र रिश्ते को भी ताख पर रख दिया. जवां भांजे की वह दीवानी बन गई.

30 वर्षीय उमेश कुमार बलरामपुर (देहात) कोतवाली के गांव गजोधर सिंह डिडवा का रहने वाला था. उस के पिता सालिक राम किसान थे. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ा था. उमेश पढ़ालिखा स्मार्ट था. वह बलरामपुर शहर के वीर विनय चौराहा स्थित एचडीएफसी बैंक में सेल्स औफिसर पद पर था. उस की कमाई अच्छी थी. अत: ठाट से रहता था. उस के पास बे्रजा कार थी, जिस से वह आताजाता था.

दबंग स्वभाव का उमेश अकसर कार से विनीता के घर आता था और मामी के जिस्म से खेल कर वापस चला जाता था. कभीकभी वह रात को भी वहीं रुक जाता था और दोनों रात भर रंगरलियां मनाते. चूंकि दोनों के बीच मामीभांजे का रिश्ता था, इसलिए कोई शक भी नहीं करता था. लेकिन ऐसे संबंध छिपते नहीं. धीरेधीरे मोहल्ले में उन दोनों के संबंधों की चर्चा होने लगी.

विनीता के पति मदन कुमार को जब विनीता और उमेश के संबंधों का पता चला तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उस ने इस बारे में पत्नी व भांजे से बात की तो दोनों ने साफ कह दिया कि ऐसी कोई बात नहीं है. लेकिन एक शाम जब उस ने अचानक दोनों को हंसीठिठोली करते देख लिया तो उस ने दोनों को फटकारा. पर उन पर इस का कोई असर नहीं हुआ. उन का मिलन जारी रहा. इसी बीच विनीता ने अपने रिश्तेदार की लड़की ज्योति से उमेश की शादी करा दी. सुंदर पत्नी पा कर उमेश पत्नी में रम गया. साल भर बाद उमेश एक बच्चे का बाप भी बन गया. पत्नी के आ जाने से उमेश का मामी से शारीरिक मिलन बंद सा हो गया. हां, इतना जरूर था कि उस की फोन पर मामी से बात होती रहती थी.

इधर विनीता पुरुष सुख की आदी बन गई थी, अत: जब उमेश से उस का शारीरिक मिलन बंद हुआ तो उस ने एक जवान टीचर से संबंध बना लिए. कुछ समय बाद नई बीवी का नशा उतरा तो उमेश मामी से संबंध स्थापित करने का प्रयास करने लगा. लेकिन विनीता ने तो किसी और को दिल में बसा लिया था, अत: उस ने उमेश को तवज्जो देनी बंद कर दी और उसे नजरअंदाज करने लगी. उमेश को पहले तो कुछ पता नहीं चला, लेकिन उस ने जब गुप्त रूप से जानकारी जुटाई तो उसे पता चला कि विनीता ने किसी और को दिल में बसा लिया है, जिस से वह उसे नजरअंदाज कर रही है. यही नहीं, उस ने उमेश की काल रिसीव करनी भी बंद कर दी.

मामी की बेवफाई से उमेश बौखला गया. आखिर उस ने विनीता को सबक सिखाने की ठान ली और उस की रेकी करने लगा. पहली अप्रैल, 2025 की शाम 5 बजे विनीता सामान लेने सिविल लाइंस बाजार की ओर गई, तभी उमेश की नजर उस पर पड़ी. इस के बाद वह उस के पास पहुंचा और घुमाने के बहाने विनीता को कार में बिठा लिया. देर रात उस ने विनीता को दुपट्टे से गला घोंट कर मार डाला और लाश को भी ठिकाने लगा दिया.

विस्तार से पूछताछ करने के बाद 4 अप्रैल, 2025 को पुलिस ने हत्यारोपी उमेश कुमार को बलरामपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उस की जमानत लोअर कोर्ट से खारिज हो गई थी. इस के बाद उस के फेमिली वाले जमानत के लिए हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे थे. UP Crime News

 

 

Bihar Crime : पत्नी पर बेवजह शक करना ठीक नहीं

Bihar Crime : समस्तीपुर से दुबई काम करने गए उदय कुमार राय को जब पत्नी रीना राय के अवैध संबंधों की खबर मिली तो वह दुबई से घर लौट आया. फिर वह मन में बैठ चुके शक को ले कर पत्नी से रोजाना झगडऩे लगा. इसी शक के चलते घर में ऐसा खून बहा कि…

बिहार के समस्तीपुर जिले की तहसील ताजपुर के हरिपुर भिंडी गांव का रहने वाला उदय कुमार राय काम करने के लिए दुबई गया हुआ था. इसी साल वह फरवरी में होली से पहले गांव आ गया था. उस के आने से परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ था. बच्चे खुश थे. उदय की मम्मी भी खुश थीं. पापा का निधन हो चुका था. विधवा मम्मी उस के आते ही बोलीं, ”बेटा, अब दुबई मत जाना, यहीं गांव में कुछ कामधंधा कर लो. उसी से परिवार का गुजारा हो जाएगा. ’ ’

”ठीकी कह हीं माई…अब हम एहिजे रह के कुछ करबै! ’ ’ उदय ने भी मम्मी की हां में हां मिला दी. उस वक्त उस की पत्नी रीना भी वहीं थी. वह तुरंत आंचल को दांतों तले दबाती हुई ‘हुंह! ’ कह कर से चली गई.

”हम्मे कुछ गलत कहलिया, जे तू मुंह चमका के चल गेलहू! हियां के खेतपथार कौन देखतय…अब हमरा ताकत है…बाबूजी जिंदा रहथुन हल तब कोनो बात नय हलै! उन कर पीछे में उदइये ने हय देखेभाले वाला. गोतिया खेत पर नजर लगैले है, से अलगे समस्या है. ’ ’

पत्नी के मुंह बिदका कर अचानक चले जाने पर उदय को भी बुरा लगा था. वह उस के चेहरे के भाव को देख कर उस के दिलोदिमाग में क्या है, समझने की कोशिश करने लगा था. मम्मी से बातें करते वक्त वह पत्नी को घूरता हुआ ऐसे देख रहा था, जैसे उस के मन में छिपी बात को जानना चाहता हो. शाम हुई. सालों बाद पूरे परिवार ने एक साथ बैठ कर खाना खाया. बच्चों के चेहरे खिले हुए थे. उस रोज कुछ खास पकवान खीर भी पकाई थी. खाना खाते वक्त अपने बच्चों को पुचकारते वक्त भी उस की नजर पत्नी के चेहरे पर ही जमी हुई थी. उस ने महसूस किया कि पत्नी के चेहरे पर खुशी की वह चमक नहीं है, जो उस के आने पर होनी चाहिए थी.

दरअसल, उदय के मन में भी शंका का कीड़ा कुलबुला रहा था. जब तक उसे खत्म नहीं कर लेता, तब तक उस के मन को चैन नहीं मिलने वाला था.

रात हुई. लंबे अरसे बाद वह देर रात को पत्नी के साथ बिस्तर पर था. रीना उसे परे धकेलती हुई बोली, ”दारू पी कर आए हो? ’ ’

”अरे का बताएं…विनोदवा जबरदस्ती पिला दिया. ’ ’

”दुन्हो जेल जैबा…हिंया दारू बंद है… जानत हो न कि..? ’ ’ रीना बोली.

”कोय पुलिस में बतयते तबे न! ’ ’ उदय बोला.

”हम्हीं बता देवो तब? ’ ’ मुसकराती हुई रीना बोली.

”सुबह से अब तुम्हारे चेहरे पर मुसकान दिखी है! ’ ’ चहकता हुआ उदय बोला और उसे अपनी ओर खींचने लगा.

”चलो हटो, दारूबाज से कोई समझौता नहीं! ’ ’ रीना तीखेपन के साथ बोली और वहां से बच्चों के कमरे में चली गई.

उस के जाने के बाद उदय कशमकश में आ गया. दारू का नशा कमजोर पडऩे लगा था. जब तक उस के दिमाग में कई बातें अचानक घूम गई थीं. वे बातें जो विनोद ने दारू पीते वक्त बताई थीं… और वे बातें भी जो उस के दुबई में रहते हुए उसी ने फोन पर बताई थीं… उन के तार रीना के पूरे दिन उस के साथ किए गए बरताव के साथ जोडऩे लगा… बुदबुदाया, ”…तो इस के सच का पता लगाना ही होगा? ’ ’

कब उसे नींद आ गई, इस का उसे पता ही नहीं चला. उस की नींद तब खुली, जब खिड़की से आने वाली सूरज की रोशनी उस की आंखों पर पड़ी. बच्चों ने उसे झकझोरते हुए उठाया था. उस के कानों में विनोद की भी आवाज सुनाई दी, ”का रे उदयवा…खेत पर चले के ना हव का! ’ ’

”हांहां, जाय के है कि…चल न कोय काम दिला दीहे. ’ ’

इस तरह दुबई से आने के बाद उदय की नई दिनचर्या शुरू हो गई थी. उस का हमउम्र चचेरा भाई विनोद दोस्त की तरह जो मिल गया था.

दोनों के बीच खुल कर बातें होती थीं. शराब की ललक दोनों को बनी रहती थी. ब्लैक में ही सही, लेकिन इस का इंतजाम विनोद करता था, लेकिन जेब ढीली उदय की होती थी. वह दुबई से कमा कर लाए पैसे दारू पर उड़ाने लगा था. आए दिन शराब पी कर ही घर आता था. इस पर उस की पत्नी रीना के साथ हमेशा तकरार होने लगी थी. रीना उदय को शराब पीने से रोकती थी, जबकि वह पत्नी की बात को अनसुनी कर देता था. रीना उस पर शराब में पैसे उड़ाने का आरोप लगा कर खूब खरीखोटी भी सुनाने लगी थी.

उस दिन 21 अगस्त की रात को तो हद ही हो गई थी. बरसात का मौसम था, लेकिन दिन में तेज धूप निकली थी, जिस से उस रात उमस भरी गरमी थी. रीना ने छत पर ही सोने का इंतजाम किया हुआ था. घर के नीचे बरामदे में बच्चे अपनी दादी के साथ सोए हुए थे. उसी घर के बरामदे में उदय का चाचा रामपुकार राय भी सोया हुआ था. उस की अपने बेटे विनोद राय और बहू से नहीं बनती थी, इस कारण वह उदय के परिवार के साथ ही रहता था. उदय के पापा की मृत्यु हो चुकी थी, इस कारण वह अपने चाचा को परिवार में एक सहारे के नजरिए से देखता था.

उसी के बारे में विनोद ने उदय को काफी अनापशनाप कान भर रखे थे. उस का कहना था कि उस के पापा रामपुकार के साथ उस की बीवी रीना राय के अवैध संबंध हैं. हालांकि इस में कितनी सच्चाई थी, इस का सबूत किसी के पास नहीं था, किंतु उदय के मन में इस बात का संदेह घर कर चुका था. उस रोज भी उदय नशे में जरूर था, लेकिन पूरी तरह से होशोहवास में बातें कर रहा था. रीना को प्यार से पुचकारते हुए अभद्र हरकत करने लगा था तो रीना ने उसे झिड़क दिया. फिर भी उस ने रीना की मरजी के बगैर उस से संबंध बनाए थे. इस में पत्नी ने बेमन से साथ दिया था और वह चिढ़ गई थी. चिढ़ती हुई गुस्से में बोल पड़ी, ”तुम्हारा यहां रहने से अच्छा है कि तुम फिर से दुबई ही चले जाओ. ’ ’

”हांहां, तुम तो चाहोगी ही…कि मैं यहां से चला जाऊं और तुम यहां बिना किसी रोकटोक के गुलछर्रे उड़ाओ! ’ ’

”मैं यहां गुलछर्रे उड़ाती हूं…और तुम क्या करते हो? दारू में पैसे कौन उड़ा रहा है? मैं या तुम? ’ ’

”मुझे सब पता है, तुम मेरे पीछे यहां क्या गुल खिला रही हो?…किस का बिस्तर गरम करती हो? मैं सब कुछ जान गया हूं! ’ ’ उदय बोला.

यह सुन कर रीना अवाक हो गई थी. उसे गुस्से में देखने लगी थी.

”मुझे क्या घूर रही हो…खा जाओगी? ’ ’

”तुम क्या सब गलतसलत बोले जा रहे हो नशे में…कोई सुनेगा, तब क्या कहेगा? ’ ’

दोनों के बीच बहस का दौर चलता रहा. काफी देर तक दोनों एकदूसरे पर कीचड़ उछालते रहे. थोड़े समय में उदय छत से नीचे आ कर अपने कमरे में सो गया. वैसे तो 22 अगस्त, 2025 की सुबह पिछली कुछ दिनों की सुबह जैसी ही थी. आसमान में बारिश के आसार नजर आ रहे थे, लेकिन सूर्योदय की धूप निकल चुकी थी. उदय अपने कमरे में अधूरे बिस्तर पर सोया हुआ था, लेकिन घर में रीना नजर नहीं आ रही थी. बच्चे अभी सो रहे थे, लेकिन उदय की मम्मी थारा देवी जाग चुकी थीं.

उन्होंने बहू को आवाज लगाई. उस की आवाज का कोई जवाब नहीं मिला…रीना को बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयारी करनी थी. वह बड़बड़ाती हुई धीरेधीरे सीढिय़ां चढ़ कर छत पर चली गईं. वहां उस ने जो देखा, उन की आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. कुछ पल में ही उन की चीख निकल गई. तेजी से उलटे पैर नीचे चली आईं और उदय को झकझोर कर जगाया. दरअसल, छत पर उन की 25 वर्षीय बहू रीना राय मृत पड़ी थी… उस के बिस्तर पर खून ही खून था, जो सूख चुका था. उस की किसी ने गरदन रेत कर हत्या कर दी थी.

रोती हुई थारा देवी छत पर बहू रीना का गला कटा देख कर विचलित हो गईं. उलटे पैर भागीभागी उदय के पास आईं. उसे झिंझोड़ कर जगाया. छत पर मृत पड़ी रीना के बारे में बताया. हड़बड़ाता हुआ उदय छत पर दौड़ता हुआ गया. वहीं से चिल्लाने लगा, ”माई रे! विनोदवा मरिये देल को! गरदन काटिए देल को रीनवा के! ’ ’

छत से नीचे आया. चीखनेचिल्लाने लगा. घर में चीखपुकार मच गई. पड़ोसियों की भीड़ जुट गई. रक्तरंजित लाश जिस ने भी देखी, दांतों तले अंगुली दबा ली. कुछ देर में पुलिस भी आ गई. काफी संख्या में लोग वहां जुट गए. साथ ही ताजपुर, हलई, मुसरीघरारी, सरायरंजन, वैनी, सहित अन्य कई थानों की पुलिस पहुंच गई.

ताजपुर थाने के एसएचओ शंकर शरण दास ने जांच के लिए पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दिए. एफएसएल की टीम ने मामले की जांच में स्पष्ट किया कि रीना की गला काट कर हत्या की गई है. मौके का मुआयना करने के बाद मृतका के पति उदय और उस की सास से पूछताछ की गई. उदय ने पत्नी की हत्या का आरोप सीधेसीधे अपने चचेरे भाई विनोद राय पर लगा दिया. मृतका के पापा अखिलेश कुमार, जो वैशाली में रहते थे, खबर सुन कर वहां आ चुके थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि 2018 में उन की बेटी रीना की शादी उदय कुमार राय से हुई थी. सब कुछ ठीक चल रहा था. सुबह उन्हें जानकारी मिली कि उन की बेटी की छत पर ही किसी ने गला काट कर हत्या कर दी. उन्होंने बताया कि उदय के साथ चचेरे भाई का जमीनी विवाद चल रहा था. इसलिए हो सकता है कि इसी कारण इस घटना को अंजाम दिया गया हो. छत बिलकुल सटी होने के कारण कोई भी उस छत से इस छत पर कूद सकता है.

रीना के 4-5 साल के 2 छोटेछोटे बच्चे हैं. शक के आधार पर पुलिस ने पूछताछ के लिए चचेरे देवर विनोद राय को हिरासत में लिया. पति उदय राय ने बताया कि गरमी के चलते रीना रात में छत पर सोई हुई थी. देर रात मैं शौच के लिए नीचे आया था. मोबाइल चार्ज भी नहीं था. इस वजह से मोबाइल चार्ज लगा कर नीचे ही सो गया था. सुबह पत्नी काफी देर तक नीचे नहीं उतरी. तब उस की मम्मी रीना को उठाने के लिए छत पर गई थीं, जहां उन्होंने उसे मृत पाया था. उस का गला रेता हुआ और आसपास खून पसरा हुआ था.

पुलिस ने उदय और विनोद राय के घर का मुआयना किया. पता चला कि उदय का चचेरे भाई विनोद राय से दरवाजे पर चारदीवारी  को ले कर झगड़ा चल रहा था. एक सप्ताह पहले भी मारपीट की घटना हुई थी. विनोद की रीना के साथ भी मारपीट हुई थी. इस संबंध में थाने में शिकायत भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की थी. इस आधार पर ही उदय ने दावा किया कि विनोद ने ही पत्नी को मारा है.

पुलिस को यह मालूम हुआ कि विनोद राय के पापा रामपुकार राय अपने बेटे और बहू को छोड़ कर उदय राय के साथ रहते थे. जब इस बारे में तहकीकात की गई, तब मालूम हुआ कि विनोद इस बात को ले कर भी अपने पापा से नाराज रहता था. कई बार इसे ले कर पंचायत भी हुई. इस के बाद भी रामपुकार राय अपने भतीजे उदय के साथ ही रह रहा था. पुलिस इस एंगल से भी हत्याकांड की छानबीन करने लगी. हालांकि पुलिस को कई अहम सुराग जल्द ही मिल गए थे. हत्याकांड में इस्तेमाल किया गया तेज धारदार चाकू बरामद कर लिया गया, जो लाश के पास ही बिस्तर के नीचे था.

इस मामले की रिपोर्ट रीना राय (25) के पिता अखिलेश कुमार राय द्वारा 22 अगस्त, 2025 को लिखवाई गई थी. मामले का पहला अभियुक्त विनोद राय (48) के अलावा उस के पापा रामपुकार राय (65), विनोद की पत्नी पानवती देवी (45) और उस की 18 वर्षीया बेटी सुष्मिता कुमारी को बनाया गया. उन्हें बीएनएस की धारा 103 (1) 3(5) के तहत आरोपी बनाया गया था.

रीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उदय को सौंप दिया गया था, जिस के अंतिम संस्कार के बाद 13 दिनों के श्रद्मद्धकर्म का अनुष्ठान किया गया था. हालांकि इस बीच पुलिस की छानबीन चलती रही. पुलिस ने विनोद को इसी शक के आधार पर हिरासत में ले रखा था कि उस का पहले उदय से विवाद हुआ था. इस संबंध में पुलिस ने विनोद से पूछताछ की. उस ने जो बयान दिया, उस से पूरी जांच की दिशा ही बदल गई. पुलिस ने खोजबीन की तो उदय पर ही शक गहरा गया.

उदय तो खुद को बेकसूर साबित करने में लगा था. लेकिन पुलिस ने रीना की तेरहवीं तक का इंतजार किया, क्योंकि वही सारे क्रियाकर्म कर रहा था. पुलिस चुपचाप घर के पास डेरा डाले रही और कर्मकांड पूरे होने का इंतजार करने लगी. जैसे ही तेरहवीं का काम पूरा हुआ, पुलिस ने उदय को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उदय कुमार राय ने आखिरकार अपनी पत्नी की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया और कहा कि शक और शराब के नशे में उस ने यह कर डाला.

उदय ने बताया कि 21 अगस्त की रात वह शराब पी कर घर लौटा और पत्नी को सोने के बहाने छत पर ले गया. उस ने फिर पत्नी से चाचा और उस के अवैध संबंधों के बारे में पूछा, लेकिन पत्नी से फिर वही जवाब मिला. इस के बाद उस ने पत्नी संग जबरन शारीरिक संबंध बनाए. जब पत्नी सो गई तो उस ने तकिए के नीचे से चाकू निकाला और पत्नी रीना का गला रेत दिया. रीना तड़पती रही तो उस ने उस का मुंह बंद कर दिया और हाथपैर जकड़ लिए.

हत्या को अंजाम देने के बाद वह चुपचाप छत से नीचे आ कर सो गया. सुबह जब उस की मम्मी छत पर गईं तो रीना की खून से सनी लाश दिखी. चीखपुकार सुन कर वह भी ऊपर पहुंचा और रोने का नाटक करने लगा. बाद में उस ने पत्नी के मर्डर का आरोप चचेरे भाई विनोद पर लगा दिया. वह खुद को मासूम साबित करने में लगा था, लेकिन पुलिस जांच में उस की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई. पुलिस ने जांच पूरी कर पत्नी की हत्या के आरोपी उदय कुमार राय को मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने विनोद राय, उस के पापा रामपुकार राय, पत्नी पानवती देवी और बेटी सुष्मिता कुमारी को बेकसूर मानते हुए छोड़ दिया था. Bihar Crime

 

 

UP Crime News : चाहत बनी आफत

UP Crime News : उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर के थाना संदना का एक गांव है हरिहरपुर. रामप्रसाद का परिवार इसी गांव में रहता था. खेती किसानी करने वाले रामप्रसाद के परिवार में पत्नी सोमवती के अलावा 2 बेटियां और 2 बेटे थे. उन में संगीता सब से बड़ी थी. सांवले रंग की संगीता का कद थोड़ा लंबा था. संगीता जवान हुई तो रामप्रसाद ने उस की शादी अपने ही इलाके के गांव रसूलपुर निवासी मुन्नीलाल के बेटे परमेश्वर के साथ कर दी. यह 6 साल पहले की बात थी.

परमेश्वर के पास 7 बीघा जमीन थी, जिस पर वह खेतीबाड़ी करता था. समय के साथ संगीता 3 बच्चों रजनी, मंजू और रजनीश की मां बनी. शादी के कुछ दिनों बाद ही परमेश्वर अपने घर वालों से अलग रहने लगा, इसलिए पत्नी और बच्चों के भरणपोषण और खेतीबाड़ी की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी. परमेश्वर खेतों पर जी तोड़ मेहनत करता तो संगीता बच्चों और घर की जिम्मेदारी संभालती. घरगृहस्थी के चक्रव्यूह में फंस कर परमेश्वर यह भी भूल गया कि उस की पत्नी अभी जवान है और उस की कुछ भी हैं.

यह मानव स्वभाव में है कि जब उस की शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं होतीं तो उस में चिड़चिड़ापन आ जाता है. ऐसा ही कुछ संगीता के साथ भी था. वह परमेश्वर से अपने मन की चाह के बारे में भले ही खुल कर बता नहीं पाती थी, लेकिन चिड़चिड़ेपन की वजह से लड़ जरूर लेती थी. इस तरह दोनों के बीच कहासुनी होना आम बात हो गई थी.

गांव में ही बाबूराम का भी परिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी, 2 बेटियां और 4 बेटे थे. इन में छोटू को छोड़ कर बाकी सभी भाईबहनों की शादियां हो चुकी थीं.19 वर्षीय छोटू वैवाहिक समारोहों में स्टेज बनाने का काम करता था. जब काम न होता तो वह गांव में खाली घूमता रहता था. छोटू परमेश्वर को बड़े भाई की तरह मानता था, इसलिए उस का काफी सम्मान करता था.

एक दिन परमेश्वर खेत पर काम कर रहा था तो छोटू वहां पहुंच गया. उसे वहां आया देख परमेश्वर ने उसे अपने घर से खाना लाने भेज दिया. छोटू परमेश्वर के घर पहुंचा तो वहां उस की मुलाकात संगीता से हुई. संगीता उसे नहीं जानती थी. उस ने अपने बारे में बता कर संगीता से खाने का टिफिन लगा कर देने को कहा तो संगीता टिफिन में खाना लगाने लगी.

छोटू जवान हो चुका था. इस मुकाम पर महिलाओं के प्रति आकर्षण स्वाभाविक होता है. वह चोर निगाहों से संगीता के यौवन का जायजा लेने लगा. छोटू कुंवारा था, इसलिए नारी तन उस के लिए कौतूहल का विषय था. संगीता के यौवन को देख कर छोटू के तन में कामवासना की आग जलने लगी. वह मन ही मन सोचने लगा कि अगर संगीता का खूबसूरत बदन उस की बांहों में आ जाए तो मजा आ जाए.

संगीता का भी यही हाल था. उसे परमेश्वर से वह सब कुछ हासिल नहीं हो रहा था, जिस की उसे चाह थी. छोटू के बारे में ही सोचतेसोचते उस ने टिफिन में खाना लगा कर उसे थमा दिया. जब छोटू खाना ले कर जाने लगा तो संगीता भी ठीक वैसा ही सोचने लगी, जैसा थोड़ी देर पहले छोटू सोच रहा था. छोटू शारीरिक रूप से हट्टाकट्टा नौजवान ही नहीं था, बल्कि कुंवारा भी था. पहली ही नजर में वह संगीता को भा गया था.

दूसरी ओर छोटू का भी वही हाल था. वह दूसरे दिन का इंतजार करने लगा. परमेश्वर ने जब दूसरे दिन भी उस से खाना लाने को कहा तो वह तुरंत परमेश्वर के घर के लिए रवाना हो गया. वह उस के घर पहुंचा तो संगीता घर के बाहर ही बैठी थी. छोटू को देखते ही संगीता खुश हो गई. वह उसे प्यार से अंदर ले गई. जवान छोटू उसे एकटक निहार रहा था.

छोटू को अपनी ओर एकटक देखते पा कर संगीता ने उस का ध्यान भंग करते हुए कहा, ‘‘ऐसे एकटक क्या देख रहे हो, कभी जवान औरत को नहीं देखा क्या?’’

छोटू तपाक से बोला, ‘‘देखा तो है, पर तुम्हारी जैसी नहीं देखी.’’

संगीता शरमाने का नाटक करती हुई अंदर चली गई और वहीं से उस ने छोटू को आवाज लगाई, ‘‘अंदर आ जाओ, आज खाना लगाने में थोड़ी देर लगेगी.’’

उस के आदेश का पालन करते हुए छोटू अंदर आ गया. दोनों बैठ कर बातें करते हुए एकदूसरे के प्रति आकर्षित होते रहे. अब यही रोज का क्रम बन गया. स्त्रीपुरुष एकदूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं तो मतलब की बातों का सिलसिला खुदबखुद जुड़ जाता है. मौका देख एक दिन छोटू ने संगीता की दुखती रग को छेड़ दिया, ‘‘भाभी, तुम खुश नहीं लग रही हो. लगता है, भैया तुम्हारा ठीक से खयाल नहीं रखते?’’

‘‘खुश होने की वजह भी तो होनी चाहिए. तुम्हारे भैया तो सिर्फ खेतों के हो कर रह गए हैं, घर में जवान बीवी है, इस की उन्हें कोई परवाह ही नहीं है.’’

‘‘भैया से इस बारे में बात करतीं तो तुम्हारी समस्या जरूर दूर हो जाती.’’

‘‘मैं ने कई बार उन्हें इस बात का अहसास दिलाया, लेकिन वह अपनी इस जिम्मेदारी को समझने को तैयार ही नहीं हैं. उन्हें पूरे घर की जिम्मेदारी तो दिखती है, लेकिन मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं दिखती.’’ संगीता ने बड़े ही निराश भाव से कहा. मौका देख कर छोटू ने अपने मन की बात उस के सामने रख दी, ‘‘भाभी, निराश मत हों. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें वह खुशियां दे सकता हूं, जो परमेश्वर भैया नहीं दे पा रहे हैं.’’

अपनी बात कह कर छोटू ने संगीता को चाहत भरी नजरों से देखा तो संगीता ने भी उस की आंखों में आंखें डाल दीं. उस की आंखों में जो जुनून था, वह उस की सुलगती कामनाओं को ठंडा करने के लिए काफी था. संगीता ने उस के हाथों में अपना हाथ दे दिया. छोटू उस की सहमति पा कर खुशी से झूम उठा. इस के बाद संगीता ने अपने तन की आग में सारी मर्यादाओं को जला कर राख कर दिया.

एक बार दोनों ने अपने नाजायज रिश्ते की इबारत लिखी तो वह बारबार दोहराई जाने लगी. इसी के साथ उन के रिश्ते में गहराई भी आती गई. रसूलपुर में ही प्रमोद नाम का एक युवक रहता था. उस के पिता हरनाम भी खेतीकिसानी करते थे. 23 वर्षीय प्रमोद अविवाहित था. वह भी परमेश्वर की पत्नी संगीता पर फिदा था और उसे अपने जाल में फांसने का प्रयास करता रहता था.

एक दिन मौका देख कर उस ने संगीता से अपने दिल की बात कह दी. लेकिन संगीता ने उस से संबंध बनाने से साफ इनकार कर दिया. प्रमोद इस से निराश नहीं हुआ. उस ने अपनी तरफ से कोशिश जारी रखी. इसी बीच उसे संगीता के छोटू से बने नाजायज संबंधों के बारे में पता चल गया. प्रमोद को यह बात बिलकुल पसंद नहीं आई कि संगीता उस के अलावा किसी और से संबंध रखे. उस ने परमेश्वर के सामने उन दोनों के नाजायज रिश्ते की पोल खोल दी. परमेश्वर को उस की बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन मन में शक जरूर पैदा हो गया.

अगले ही दिन परमेश्वर रोज की तरह छोटू से खाना लाने को कहा. छोटू खाना लाने चला गया तो परमेश्वर भी छिपतेछिपाते उस के पीछे घर की तरफ चल दिया. छोटू घर में जा कर संगीता के साथ रंगरलियां मनाने लगा. चूंकि दोपहर का समय था और किसी के आने का अंदेशा नहीं था, इसलिए दोनों बिना दरवाजा बंद किए ही एकदूसरे से गुंथ गए.

अभी कुछ पल ही बीते थे कि किसी ने भड़ाक से दरवाजा खोल दिया. अचानक दोनों ने घबरा कर दरवाजे की तरफ देखा तो सामने परमेश्वर खड़ा था. उस की आंखों से चिंगारियां फूट रही थीं. उस ने पास पड़ा डंडा उठाया तो छोटू वहां से भागा. लेकिन भागते समय परमेश्वर का डंडा उस की कमर पर पड़ गया. दर्द की एक तेज लहर उस के बदन में दौड़ गई, लेकिन वह रुका नहीं.

उस के जाने के बाद परमेश्वर ने संगीता की जम कर पिटाई की. संगीता ने परमेश्वर से किए की माफी मांग ली और आगे से कभी दोबारा ऐसा कदम न उठाने की कसम खाई. लेकिन एक बार विश्वास की दीवार में दरार आ जाए तो उसे किसी भी तरह भरा नहीं जा सकता.

ऐसे में परमेश्वर भला संगीता पर कैसे विश्वास करता? छोटू ने उस के परिवार की इज्जत से खेलने की जो हिमाकत की थी, उसे वह बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. इस आग में घी डालने का काम किया प्रमोद ने. वह परमेश्वर को छोटू से बदला लेने के लिए उकसाने लगा.

दरअसल प्रमोद यह सब सोचीसमझी साजिश के तहत कर रहा था. उस ने सोचा था कि परमेश्वर छोटू की हत्या कर देगा तो वह छोटू के परिजनों से मिल कर परमेश्वर को जेल भिजवा देगा. इस से छोटू और परमेश्वर नाम के दोनों कांटे उस के रास्ते से हट जाएंगे. फिर संगीता को पाने से उसे कोई नहीं रोक पाएगा.

आखिर प्रमोद ने परमेश्वर को छोटू को मार कर बदला लेने के लिए मना ही लिया. परमेश्वर के कहने पर इस साजिश में वह भी शामिल हो गया. परमेश्वर के कहने पर संगीता को भी इस साजिश में शामिल होना पड़ा. क्योंकि इस के अलावा उस के सामने कोई चारा नहीं था.

24 मार्च की रात परमेश्वर ने संगीता से कह कर छोटू को अपने घर बुलाया. परमेश्वर और प्रमोद घर में ही छिप कर बैठे थे. छोटू घर आया तो संगीता उस के पास बैठ कर मीठीमीठी बातें करने लगी. देर रात होने पर परमेश्वर और प्रमोद चुपचाप बाहर निकले और पीछे से छोटू के गले में अंगौछे का फंदा बना कर डाल कर पूरी ताकत से कसने लगे.

छोटू छूटने के लिए छटपटाने लगा. इस से वह जमीन पर गिर पड़ा. छोटू के जमीन पर गिरते ही संगीता ने उस के पैर कस कर पकड़ लिए तो परमेश्वर व प्रमोद ने पूरी ताकत से अंगौछे से छोटू का गला कस दिया. कुछ ही देर में उस का शरीर शांत हो गया. उस की मौत हो गई.

प्रमोद ने छोटू की जेब से उस का मोबाइल निकाल लिया. इस के बाद परमेश्वर और प्रमोद लाश को एक बोरी में भर कर पास के गांव मेदपुर में मुन्ना सिंह के खेत में ले जा कर डाल आए. बोरी को उन्होंने सरकंडे और घासफूस से ढक दिया था. दूसरे दिन छोटू दिखाई नहीं दिया तो घर वालों ने उस की तलाश शुरू की. लेकिन जब काफी कोशिशों के बाद भी उस का कुछ पता नहीं चला तो 26 मार्च, 2014 को उस के पिता बाबूराम ने थाना संदना में उस की गुमशुदगी लिखा दी.

28 मार्च को मेदपुर में गांव के कुछ लोगों ने मुन्ना सिंह के खेत में एक लाश पड़ी देखी तो यह खबर आसपास के गांवों तक फैल गई. बाबूराम को पता चला तो वह भी अपने घर वालों के साथ वहां पहुंच गया. वहां पड़ी लाश देख कर बिलखबिलख कर रोने लगे. लोगों द्वारा सांत्वना देने के बाद सभी किसी तरह शांत हुए तो लाश की सूचना थाना संदना पुलिस को दी गई.

सूचना पा कर थानाप्रभारी राजकुमार सरोज पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. मृतक छोटू के गले में अगौंछा पड़ा हुआ था. गले में उस के कसे जाने के निशान भी मौजूद थे. इस से यही लगा कि उसी अंगौछे से उस की गला घोंट कर हत्या की गई थी. प्राथमिक काररवाई के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय सीतापुर भिजवा दिया.

थाने लौट कर थानाप्रभारी राजकुमार सरोज ने बाबूराम की लिखित तहरीर पर परमेश्वर और संगीता के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. दूसरी ओर इस की भनक लगते ही पकड़े जाने के डर से परमेश्वर संगीता के साथ फरार हो गया.

30 मार्च की सुबह 8 बजे थानाप्रभारी राजकुमार सरोज ने एक मुखबिर की सूचना पर संदना-मिसरिख रोड पर भरौना पुलिया के पास से परमेश्वर और संगीता को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब पूछताछ की गई तो दोनों ने छोटू की हत्या की पूरी कहानी बयां कर दी.

31 मार्च को सुबह साढ़े 7 बजे पुलिस ने प्रमोद को भी गोपालपुर चौराहे से गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया.

दरअसल, प्रमोद छोटू की हत्या करवाने के बाद छोटू के घर वालों से जा कर मिल गया था. उसी ने ही उन्हें बताया था कि छोटू और संगीता के नाजायज संबंध थे, जिस के बारे में परमेश्वर को पता चल गया था. इसी वजह से परमेश्वर ने संगीता के साथ मिल कर छोटू की हत्या की थी. प्रमोद ही लाश मिलने की जगह भी बाबूराम को ले गया था. बाबूराम ने उसी की बातों के आधार पर परमेश्वर और संगीता के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी. इतनी चालाकी के बावजूद भी प्रमोद खुद को कानून के शिकंजे से नहीं बचा सका और पकड़ा गया. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime News : बदले की आग

Crime News : लखनऊ के थाना मडि़यांव के थानाप्रभारी रघुवीर सिंह को सुबहसुबह किसी ने फोन कर के सूचना दी कि ककौली में बड़ी खदान के पास एक कार में आग लगी है. सूचना मिलते ही रघुवीर सिंह ककौली की तरफ रवाना हो गए. थोड़ी ही देर में वह ककौली की बड़ी खदान के पास पहुंच गए. उन्होंने एक जगह भीड़ देखी तो समझ गए कि घटना वहीं घटी है. जब तक पुलिस वहां पहुंची, कार की आग बुझ चुकी थी. पुलिस ने देखा, कार के अंदर कोई भी सामान सलामत नहीं बचा था.

यहां तक कि कार की नंबर प्लेट का नंबर भी नहीं दिखाई दे रहा था. इसी से अंदाजा लगाया गया कि आग कितनी भीषण रही होगी. जली हुई कार के अंदर कुछ हड्डियां और 2 भागों में बंटी इंसान की एक खोपड़ी पड़ी थी. उन्हें देख कर थानाप्रभारी चौंके. हड्डियों और खोपड़ी से साफ लग रहा था कि कार के अंदर कोई इंसान भी जल गया था.

थानाप्रभारी ने अपने आला अधिकारियों को भी इस घटना की सूचना दे दी थी. इस के बाद थोड़ी ही देर में क्षेत्राधिकारी (अलीगंज) अखिलेश नारायण सिंह फोरेंसिक टीम के साथ वहां पहुंच गए. कार के अंदर जली अवस्था में एक छोटा गैस सिलेंडर और शराब की खाली बोतल भी पड़ी थी. फोरेंसिक टीम ने अपना काम निपटा लिया तो पुलिस ने अपनी जांच शुरू की.

कार की स्थिति देख कर पुलिस को यह समझते देर नहीं लगी कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि साजिशन इसे अंजाम दिया गया है. कार एक खुले मैदान में थी. आबादी वहां से कुछ दूरी पर थी. इसलिए हत्यारों ने वारदात को आसानी से अंजाम दे दिया था. यह 4 दिसंबर, 2013 की बात है.

कार में कोई ऐसी चीज नहीं मिली थी, जिस से जल कर खाक हो चुके व्यक्ति की शिनाख्त हो पाती. इसलिए पुलिस ने घटनास्थल की आवश्यक काररवाई निपटा कर बरामद हड्डियों और खोपड़ी को पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दिया, जहां से हड्डियों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया.

अब तक इस घटना की खबर जंगल की आग की तरह आसपास फैल चुकी थी. ककौली के ही रहने वाले सुरजीत यादव का छोटा भाई रंजीत यादव 3 दिसंबर को कार से कटरा पलटन छावनी एरिया में किसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए घर से निकला था. उसे उसी रात को लौट आना था. लेकिन वह नहीं लौटा तो घर वालों को उस की चिंता हुई. यही वजह थी कि यह खबर सुनते ही सुरजीत बड़ी खदान की तरफ चल पड़ा. वहां पहुंच कर कार देखते ही वह समझ गया कि यह कार उसी की है.

सुरजीत ने थानाप्रभारी रघुवीर सिंह को अपने भाई के गायब होने की पूरी बात बता कर आशंका जताई कि कार में जल कर जो व्यक्ति मरा है, वह उस का भाई रंजीत हो सकता है. इस के बाद सुरजीत की तहरीर पर थानाप्रभारी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रंजीत की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

सुरजीत से बातचीत के बाद थानाप्रभारी रघुवीर सिंह ने तहकीकात शुरू की तो पता चला कि रंजीत शादी समारोह में जाने के लिए घर से निकला तो था, लेकिन समारोह में पहुंचा नहीं था. अब सोचने वाली बात यह थी कि वह शादी समारोह में नहीं पहुंचा तो गया कहां था. यह जानने के लिए उन्होंने मुखबिर लगा दिए. एक मुखबिर ने बताया कि 3 दिसंबर की शाम रंजीत को देशराज और अजय के साथ देखा गया था. देशराज हरिओमनगर में रह कर सिक्योरिटी एजेंसी चलाता था. रंजीत उसी की सिक्योरिटी एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था.

देशराज से पूछताछ के बाद ही सच्चाई का पता चल सकता था, इसलिए पुलिस ने उस की तलाश शुरू कर दी. 5 दिसंबर, 2013 को सुबह 5 बजे के करीब उसे रोशनाबाद चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया गया. थाने ला कर जब देशराज से पूछताछ की गई तो उस ने सारा सच उगल दिया. इस के बाद उस ने रंजीत यादव को जिंदा जलाने की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी.

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर का रहने वाला देशराज लखनऊ के हरिओमनगर में एक सिक्योरिटी एजेंसी चलाता था. वहीं पर उस ने एक मकान किराए पर ले रखा था. वह लखनऊ में अकेला रहता था, जबकि उस की पत्नी और बच्चे सीतापुर में रहते थे. समय मिलने पर वह अपने परिवार से मिलने सीतापुर जाता रहता था. उस की एजेंसी अच्छी चल रही थी. जिस से उसे हर महीने अच्छी आमदनी होती थी. कहते हैं, जब किसी के पास उस की सोच से ज्यादा पैसा आना शुरू हो जाता है तो कुछ लोगों में नएनए शौक पनप उठते हैं. देशराज के साथ भी यही हुआ. वह शराब और शबाब का शौकीन हो गया था.

वह पास के ही ककौली गांव भी आताजाता रहता था. वहीं पर एक दिन उस की नजर रानी नाम की एक औरत पर पड़ी तो वह उस पर मर मिटा.

रानी की अजीब ही कहानी थी. उस का विवाह उस उम्र में हुआ था, जब वह विवाह का मतलब ही नहीं जानती थी. नाबालिग अवस्था में ही वह 2 बेटों अजय, संजय और एक बेटी सीमा की मां बन गई थी. उसी बीच किसी वजह से उस के पति की मौत हो गई. पति का साया हटने से उस के ऊपर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. जब कमाने वाला ही न रहा तो उस के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया. मेहनतमजदूरी कर के जैसेतैसे वह दो जून की रोटी का इंतजाम करने लगी.

देशराज ने उस की भोली सूरत देखी तो उसे लगा कि वह उसे जल्द ही पटा लेगा. रानी से नजदीकी बढ़ाने के लिए वह उस से हमदर्दी दिखाने लगा. रानी देशराज के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी. बस इतना ही जानती थी कि वह पैसे वाला है. एक पड़ोसन से रानी ने देशराज के बारे में काफी कुछ जान लिया था. इस के बाद धीरेधीरे उस का झुकाव भी उस की तरफ होता गया.

एक दिन देशराज रानी के घर के सामने से जा रहा था तो वह घर की चौखट पर ही बैठी थी. उस समय दूरदूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था. मौका अच्छा देख कर देशराज बोल पड़ा, ‘‘रानी, मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है. तुम्हारी कहानी सुन कर ऐसा लगता है कि तुम्हारी जिंदगी में सिर्फ दुख ही दुख है.’’

‘‘आप के बारे में मैं ने जो कुछ सुन रखा था, आप उस से भी कहीं ज्यादा अच्छे हैं, जो दूसरों के दुख को बांटने की हिम्मत रखते हैं. वरना इस जालिम दुनिया में कोई किसी के बारे में कहां सोचता है?’’

‘‘रानी, दुनिया में इंसानियत अभी भी जिंदा है. खैर, तुम चिंता मत करो. आज से मैं तुम्हारा पूरा खयाल रखूंगा. चाहो तो बदले में तुम मेरे घर का कुछ काम कर दिया करना.’’

‘‘ठीक है, आप ने मेरे बारे में इतना सोचा है तो मैं भी आप के बारे में सोचूंगी. मैं आप के घर के काम कर दिया करूंगी.’’

इतना कह कर देशराज ने रानी के कंधे पर सांत्वना भरा हाथ रखा तो रानी ने अपनी गरदन टेढ़ी कर के उस के हाथ पर अपना गाल रख कर आशा भरी नजरों से उस की तरफ देखा. देशराज ने मौके का पूरा फायदा उठाया और रानी के हाथ पर 500 रुपए रखते हुए कहा, ‘‘ये रख लो, तुम्हें इस की जरूरत है. मेरी तरफ से इसे एडवांस समझ लेना.’’

रानी तो वैसे भी अभावों में जिंदगी गुजार रही थी, इसलिए उस ने देशराज द्वारा दिए गए पैसे अपने हाथ में दबा लिए. इस से देशराज की हिम्मत और बढ़ गई. वह हर रोज रानी से मिलने उस के घर पहुंचने लगा. वह जब भी उस के यहां जाता, रानी के बच्चों के लिए खानेपीने की कोई चीज जरूर ले जाता. कभीकभी वह रानी को पैसे भी देता. इस तरह वह रानी का खैरख्वाह बन गया.

रानी हालात के थपेड़ों में डोलती ऐसी नाव थी, जिस का कोई मांझी नहीं था. इसलिए देशराज के एहसान वह अपने ऊपर लादती चली गई. पैसे की वजह से उस की बेटी सीमा भी स्कूल नहीं जा रही थी. देशराज ने उस का दाखिला ही नहीं कराया, बल्कि उस की पढ़ाई का सारा खर्च उठाने का वादा किया.

स्वार्थ की दीवार पर एहसान की ईंट पर ईंट चढ़ती जा रही थी. अब रानी भी देशराज का पूरा खयाल रखने लगी थी. वह उसे खाना खाए बिना जाने नहीं देती थी. लेकिन देशराज के मन में तो रानी की देह की चाहत थी, जिसे वह हर हाल में पाना चाहता था.

एक दिन उस ने कहा, ‘‘रानी, अब तुम खुद को अकेली मत समझना. मैं हर तरह से तुम्हारा बना रहूंगा.’’

यह सुन कर रानी उस की तरफ चाहत भरी नजरों से देखने लगी. देशराज समझ गया कि वह शीशे में उतर चुकी है, इसलिए उस के करीब आ गया और उस के हाथ को दोनों हथेलियों के बीच दबा कर बोला, ‘‘सच कह रहा हूं रानी, तुम्हारी हर जरूरत पूरी करना अब मेरी जिम्मेदारी है.’’

हाथ थामने से रानी के शरीर में भी हलचल पैदा हो गई. देशराज के हाथों की हरकत बढ़ने लगी थी. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों बेकाबू हो गए और अपनी हसरतें पूरी कर के ही माने.

देशराज ने वर्षों बाद रानी की सोई भावनाओं को जगाया तो उस ने देह के सुख की खातिर सारी नैतिकताओं को अंगूठा दिखा दिया. अब वह देशराज की बन कर रहने का ख्वाब देखने लगी. देशराज और रानी के अवैध संबंध बने तो फिर बारबार दोहराए जाने लगे. रानी को देशराज के पैसों का लालच तो था ही, अब वह उस से खुल कर पैसों की मांग करने लगी.

देशराज चूंकि उस के जिस्म का लुत्फ उठा रहा था, इसलिए उसे पैसे देने में कोई गुरेज नहीं करता था. इस तरह एक तरफ रानी की दैहिक जरूरतें पूरी होने लगी थीं तो दूसरी तरफ देशराज उस की आर्थिक जरूरतें पूरी करने लगा था. वर्षों बाद अब रानी की जिंदगी में फिर से रंग भरने लगे थे.

ककौली गांव में ही भल्लू का परिवार रहता था. पेशे से किसान भल्लू के 2 बेटे रंजीत, सुरजीत और 2 बेटियां कमला, विमला थीं. चारों में से अभी किसी की भी शादी नहीं हुई थी.

24 वर्षीय रंजीत और 22 वर्षीय सुरजीत, दोनों ही भाई देशराज की सिक्योरिटी एजेंसी में काम करते थे. रंजीत और देशराज की उम्र में काफी लंबा फासला था. देशराज की जवानी साथ छोड़ रही थी, जबकि रंजीत की जवानी पूरे चरम पर थी. वैसे भी वह कुंवारा था. देशराज और रंजीत के बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी. दोनों साथसाथ खातेपीते थे.

एक दिन शराब के नशे में देशराज ने रंजीत को अपने और रानी के संबंधों के बारे में बता दिया. यह सुन कर रंजीत चौंका. यह उस के लिए चिराग तले अंधेरे वाली बात थी. उसी के गांव की रानी अपने शबाब का दरिया बहा रही थी और उसे खबर तक नहीं थी. वह किसी औरत के सान्निध्य के लिए तरस रहा था. रानी की हकीकत पता चलने के बाद जैसे उसे अपनी मुराद पूरी होती नजर आने लगी.

रंजीत के दिमाग में तरहतरह के विचार आने लगे. वह मन ही मन सोचने लगा कि जब देशराज रानी के साथ रातें रंगीन कर सकता है, तो वह क्यों नहीं? वह देशराज की ब्याहता तो है नहीं.  अगले दिन रंजीत देशराज से मिला तो बोला, ‘‘रानी की देह में मुझे भी हिस्सा चाहिए, नहीं तो मैं तुम दोनों के संबंधों की बात पूरे गांव में फैला दूंगा.’’

देशराज को रानी से कोई दिली लगाव तो था नहीं, वह तो उस की वासना की पूर्ति का साधन मात्र थी. उसे दोस्त के साथ बांटने में उसे कोई परेशानी नहीं थी. वैसे भी रंजीत का मुंह बंद करना जरूरी था. इसलिए उस ने रानी को रंजीत की शर्त बताते हुए समझाया, ‘‘देखो रानी, अगर हम ने उस की बात नहीं मानी तो वह हमारी पोल खोल देगा. पूरे गांव में हमारी बदनामी हो जाएगी. इसलिए तुम्हें उसे खुश करना ही पड़ेगा.’’

रानी के लिए जैसा देशराज था, वैसा ही रंजीत भी था. उस ने हां कर दी. इस बातचीत के बाद देशराज ने यह बात रंजीत को बता दी. फलस्वरूप वह उसी दिन शाम को रानी के घर पहुंच गया. एक ही गांव का होने की वजह से दोनों न केवल एकदूसरे को जानते थे, बल्कि उन में बातें भी होती थीं. रंजीत उसे भाभी कह कर बुलाता था.

सारी बातें चूंकि पहले ही तय थीं, सो दोनों के बीच अब तक बनी संकोच की दीवार गिरते देर नहीं लगी. दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने तो रानी को एक अलग ही तरह की सुखद अनूभूति हुई. रंजीत के कुंवारे बदन का जोश देशराज पर भारी पड़ने लगा. उस दिन के बाद तो वह अधिकतर रंजीत की बांहों में कैद होने लगी. रंजीत भी रानी की देह का दीवाना हो चुका था. इसलिए वह भी उस पर दिल खोल कर पैसे खर्च करने लगा. रंजीत ने मारुति आल्टो कार ले रखी थी, जो उस के भाई सुरजीत के नाम पर थी. रंजीत रानी को अपनी कार में बैठा कर घुमाने ले जाने लगा. वह उसे रेस्टोरेंट वगैरह में ले जा कर खिलातापिलाता और गिफ्ट भी देता.

रानी की जिंदगी में रंजीत आया तो वह देशराज को भी और उस के एहसानों को भूलने लगी. रंजीत उस के दिलोदिमाग पर ऐसा छाया कि उस ने देशराज से मिलनाजुलना तक छोड़ दिया. इस से देशराज को समझते देर नहीं लगी कि रानी रंजीत की वजह से उस से दूरी बना रही है. उसे यह बात अखरने लगी. रानी को फंसाने में सारी मेहनत उस ने की थी, जबकि रंजीत बिना किसी मेहनत के फल खा रहा था.

इसी बात को ले कर रंजीत और देशराज में मनमुटाव रहने लगा. देशराज ने रंजीत से उस की कुछ जमीन खरीदी थी, जिस का करीब 5 लाख रुपया बाकी था. रंजीत जबतब देशराज से अपने पैसे मांगता रहता था. इस बात को ले कर रंजीत कई बार उसे जलील तक कर चुका था.

एक तरफ रंजीत ने देशराज की मौजमस्ती का साधन छीन लिया था तो दूसरी ओर उसे 5 लाख रुपए भी देने थे. इसलिए सोचविचार कर उस ने रंजीत को अपने रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने अपने यहां सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे अजय पांडेय को भी लालच दे कर अपनी योजना में शामिल कर लिया. अजय सीतापुर के कमलापुर थानाक्षेत्र के गांव रूदा का रहने वाला था.

3 दिसंबर की शाम को रंजीत को कटरा पलटन छावनी में एक वैवाहिक समारोह में जाना था. यह बात देशराज को पता थी. उस ने उसी दिन अपनी योजना को अंजाम देने के बारे में सोचा. उस दिन देर शाम रंजीत घर से तैयार हो कर कार से कटरा पलटन जाने के लिए निकला. रास्ते में एक जगह उसे देशराज और अजय पांडेय मिल गए. वहां से वे हाइवे पर ट्रामा सेंटर के पास गए और शराब खरीद कर बड़ी खदान के पास आ गए.

तीनों ने कार के अंदर बैठ कर शराब पी. देशराज और अजय ने खुद कम शराब पी, जबकि रंजीत को ज्यादा पिलाई. जब रंजीत नशे में धुत हो गया तो दोनों ने उसे पिछली सीट पर लिटा दिया. कार में एक छोटा गैस सिलेंडर भरा रखा था, जिसे रंजीत घर से गैस भराने के लिए लाया था. साथ ही कार में एक बोतल पेट्रोल भी रखा था. देशराज ने कार के सभी शीशे चढ़ा कर गैस सिलेंडर की नौब खोल दी, जिस से तेजी से गैस रिसने लगी.

देशराज पेट्रोल की बोतल उठा कर कार से बाहर आ गया और कार के सभी दरवाजे बंद कर दिए. इस के बाद उस ने कार के ऊपर सारा पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. चूंकि कार के अंदर गैस भरी थी, इसलिए आग की लपटें तेजी से बाहर निकलीं. देशराज का चेहरा और हाथ जल गए. गैस और पेट्रोल की वजह से कार धूधू कर के जलने लगी. नशे में धुत अंदर लेटे रंजीत ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह नाकामयाब रहा. अपना काम कर के देशराज और अजय वहां से भाग खडे़ हुए.

देशराज मौके से तो भाग गया, लेकिन कानून से नहीं बच सका. इंसपेक्टर रघुवीर सिंह ने रानी से भी पूछताछ की. हत्या के इस मामले में उस की कोई भूमिका नहीं थी. अलबत्ता जब गांव वालों को यह पता चला कि हत्या की वजह रानी थी तो लोगों ने उस के साथ भी मारपीट की.

पुलिस ने देशराज को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. कथा संकलन तक पुलिस अजय पांडेय को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी.v Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Hindi Story : गर्लफ्रेंड के लिए बना चोर

Hindi Story : रात के दस बजने वाले थे. वाराणसी जनपद के सिगरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली नगर निगम चौकी के प्रभारी सबइंसपेक्टर बसंत कुमार एसआई चंद्रकेश शर्मा और 2 सिपाहियों गामा यादव व बाबूलाल के साथ शिवपुरवा तिराहे के पास मौजूद थे. उसी समय एक मुखबिर ने आ कर बताया कि इलाके में पिछले कुछ महीनों से मोबाइल और लैपटाप वगैरह की जो चोरियां हुई हैं, उन का चोर चोरी का सामान बेचने के लिए खरीदार से संपर्क करने के लिए आने वाला है.

चौकीप्रभारी सबइंसपेक्टर बसंत कुमार के लिए सूचना काफी महत्त्वपूर्ण थी. मुखबिर से कुछ जरूरी जानकारी लेने के बाद उन्होंने उस चोर को पकड़ने के लिए व्यूह रचना तैयार कर अपने साथी पुलिस वालों को सतर्क कर दिया. मुखबिर को उन्होंने छिप कर खड़ा होने को कह दिया. थोड़ी देर बाद मुखबिर ने सनबीम स्कूल की ओर से पैदल आ रहे 2 युवकों की ओर इशारा कर दिया. उन दोनों की पहचान कराने के बाद मुखबिर वहां से चला गया.

सबइंसपेक्टर बसंत कुमार और उन के साथी चौकन्ने हो गए. दोनों युवकों में से एक के पास एक काले रंग का बड़ा सा बैग था, जिसे वह पीठ की तरफ टांगे हुए था. दोनों युवक जैसे ही रेलवे कालोनी जल विहार मोड़ के पास पहुंचे. सबइंसपेक्टर बसंत कुमार ने उन दोनों को रुकने का आदेश दिया. लेकिन पुलिस को देख कर दोनों तेजी से विपरीत दिशा की ओर भागने लगे. लेकिन पहले से तैयार पुलिस टीम ने दौड़ कर उन्हें पकड़ लिया.

पुलिस के शिकंजे में फंसते ही दोनों युवक गिड़गिड़ाए, ‘‘सर, आप हम लोगों को क्यों पकड़ रहे हैं, हम ने क्या किया है?’’

‘‘कुछ नहीं किया तो भागने की क्या जरूरत थी?’’

‘‘साहब, हम डर गए थे कि कहीं आप हमें किसी झूठे मुकदमे में न फंसा दें.’’

‘‘तुम्हें क्या लगता है कि पुलिस वाले यूं ही राह चलते लोगों को फंसा देते हैं. खैर, अपना बैग चेक कराओ.’’ कह कर बसंत कुमार ने सिपाही गामा यादव को आदेश दिया, ‘‘इन का बैग चेक करो.’’

‘‘साहब, बैग में कपड़ेलत्तों के अलावा कुछ नहीं है.’’ एक युवक ने कहा तो बसंत कुमार ने उसे डांटा, ‘‘अगर आपत्तिजनक कुछ नहीं है तो घबरा क्यों रहे हो?’’

सबइंसपेक्टर चंद्रकेश शर्मा ने युवक की पीठ पर टंगा काले रंग का बैग जबरदस्ती ले कर खोला तो उस में लैपटाप और नए मोबाइल सेट के डिब्बे दिखे. बैग में मोबाइल सेट और लैपटाप देखते ही बसंत कुमार समझ गए कि शिकार जाल में फंस चुका है.

बसंत कुमार ने बैग वाले युवक का नाम पूछा तो उस ने अपना नाम जयमंगल निवासी शिवपुरवा बताया. उस के साथी का नाम गुडलक था. वह सिगरा थानाक्षेत्र की महमूरगंज रोड स्थित संपूर्णनगर कालोनी में रहता था. विस्तृत पूछताछ के लिए दोनों युवकों को हिरासत में ले कर चौकीप्रभारी बसंत कुमार अपनी टीम के साथ सिगरा थाने आ गए.

सिगरा थाने में जयमंगल से विस्तृत पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस के बैग में सारा सामान चोरी का है. पुलिस को उस के बैग से 3 लैपटाप, 10 मोबाइल सेट, रितेश नाम से एक वोटर आईडी के अलावा 1560 रुपए और 1 किलो 100 ग्राम चरस मिली. जबकि गुडलक की तलाशी में उस की पैंट की जेब से प्लास्टिक की थैली में रखी 240 ग्राम चरस मिली.

जयमंगल और गुडलक से पूछताछ चल ही रही थी कि तभी गश्त पर गए थानाप्रभारी शिवानंद मिश्र थाने लौट आए. उन्हें जब पता चला कि पिछले दिनों इलाके में हुई चोरी की घटनाओं में शामिल 2 चोर पकड़े गए हैं तो वह भी पूछताछ में शामिल हो गए. जयमंगल से बरामद रितेश नाम से जारी वोटर आईडी को देखने पर पता चला कि उस पर फोटो जयमंगल का लगा था. इस का मतलब उस ने फरजी नाम से आईडी बनवा रखी थी.

थानाप्रभारी शिवानंद मिश्र ने इस बारे में जयमंगल से जब अपने तरीके से पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने रितेश नाम से फर्जी वोटर आईडी बनवाई थी, ताकि होटल वगैरह में ठहरने के लिए उस आईडी का इस्तेमाल कर के अपनी असली पहचान छिपा सके.

पूछताछ के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि वह शिवपुरवा (सिगरा क्षेत्र) स्थित अपने पैतृक घर में न रह कर पिछले तीन सालों से अपनी प्रेमिका पत्नी के साथ पड़ोसी जनपद भदोही के गोपीगंज थानाक्षेत्र स्थित खमरिया में किराए का मकान ले कर रह रहा था. जयमंगल ने गुडलक को अपना दोस्त बताया. जयमंगल पहले ही स्वीकार कर चुका था कि उस के बैग से बरामद सामान अलगअलग जगहों से चोरी किया गया था. चरस के बारे में उस का कहना था कि नशे के लिए चरस का इस्तेमाल वह खुद करता था.

पूछताछ चल ही रही थी कि तभी थानाप्रभारी शिवानंद मिश्र की नजर जयमंगल के हाथों पर पड़ी. उस के हाथों पर 2-3 लड़कियों के नाम गुदे हुए थे. एक साथ 2-3 लड़कियों के नाम हाथों पर गुदे देख शिवानंद मिश्र ने इस बारे में जयमंगल से पूछा. उस ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर न सिर्फ थानाप्रभारी बल्कि वहां मौजूद सभी पुलिस वाले आश्चर्यचकित रह गए.

जयमंगल ने बताया कि उस के हाथ पर ही नहीं, बल्कि शरीर के विभिन्न हिस्सों पर उस ने पच्चीसों लड़कियों के नाम गोदवाए हुए हैं. जयमंगल की टीशर्ट को पेट के ऊपर तक उठा कर देखा गया तो उस के सीने और पीठ पर दर्जनों लड़कियों के नाम गुदे मिले. दोनों हाथ, छाती और पीठ पर जिन लड़कियों के नाम गुदे थे, वे सब जयमंगल की प्रेमिकाएं थीं. पूछताछ में पता चला कि जयमंगल को नईनई लड़कियों से देस्ती करने का शौक था. वह उन से दोस्ती ही नहीं करता था, बल्कि उन से जिस्मानी संबंध भी बनाता था.

आर्थिक रूप से कमजोर घर की लड़कियों से जानपहचान बढ़ा कर उन से दोस्ती करना उस का शगल था. इस के लिए वह उन्हें उन की पसंद और जरूरत के मुताबिक तोहफे देता था. इतना ही नहीं, जिन लड़कियों से वह दोस्ती करता था, गाहेबगाहे उन के परिवार वालों की भी आर्थिक मदद कर के परिवार वालों की नजरों में शरीफजादा बन जाता था. इसी वजह से परिवार वाले जयमंगल के साथ अपनी लड़की के घूमनेफिरने पर ज्यादा बंदिशें नहीं लगाते थे.

लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए शुरूशुरू में जयमंगल उन का नाम अपने बदन पर गुदवा लेता था. लेकिन जब समय के साथ प्रेमिकाओं की संख्या बढ़ने लगी तो बदन में लड़कियों का नाम गुदवाना उस का शौक बन गया. पुलिस के समक्ष जयमंगल ने खुलासा किया कि अब तक वह 27 प्रेमिकाओं के नाम अपने बदन पर गुदवा चुका है.

जिन लड़कियों को किसी कारणवश वह छोड़ देता था या फिर लड़की ही उस से किनारा कर लेती थी, उस लड़की का नाम वह अपने बदन से मिटा देता था. नाम मिटाने के लिए वह उसे ब्लेड से खुरचने के साथसाथ कई बार गुदे हुए नाम को जला देता था. जयमंगल के हाथों में 3-4 जगहों पर जले के निशान भी दिखाई दिए, जिस के बारे में उस ने पुलिस को बताया कि जली हुई जगह पर उस की जिन प्रेमिकाओं के नाम गुदे थे, अब उन से उस का कोई रिश्ता नहीं रहा. इसलिए उस ने उन के नाम भी अपने बदन से मिटा दिए.

पुलिस की माने तो जयमंगल अब तक 30 से अधिक लड़कियों को अपनी प्रेमिका बना चुका था. जिन में से 2 दर्जन से अधिक प्रेमिकाओं के नाम उस ने अपने बदन पर भी गुदवाए थे. अपनी प्रेमिकाओं में से ही एक गुडि़या से उस ने 3 साल पहले एक मंदिर में शादी कर ली थी. फिलहाल वह उसी के साथ रह रहा था.

पूछताछ के दौरान चौंकाने वाली एक बात यह भी पता चली कि जयमंगल एक रईस खानदान का लड़का था. किशोरावस्था में उस के कदम बहक गए और ज्यादा से ज्यादा लड़कियों से दोस्ती करने की आदत ने उसे चोरी करने पर मजबूर कर दिया.

पुलिस की मानें तो बनारस के शिवपुरवा नगर निगम इलाके में जयमंगल का बहुत बड़ा पुश्तैनी मकान था, इस मकान के अलावा भी शहर के कई इलाकों में उस परिवार के कई मकान थे जिन्हें उन लोगों ने किराए पर उठा रखे थे. लेकिन जयमंगल की गलत हरकतों की वजह से परिवार वाले पिछले 5-6 सालों से उसे पैसा नहीं देते थे.  जयमंगल खुद भी परिवार वालों से किसी तरह की आर्थिक मदद लेने के बजाय चोरी कर के अपनी जरूरतें और शौक पूरा करने का आदी हो चुका था.

जयमंगल ने पुलिस को यह भी बताया कि वह चोरी की ज्यादातर घटनाओं को खुद ही अंजाम दिया करता था. हां, कभीकभार वह किसी जरूरतमंद दोस्त को चोरी में जरूर शामिल कर लेता था, ताकि उस की मदद हो सके. चोरी के लिए कई बार वह होटलों में भी ठहरता था. फरजी आईडी उस ने इसीलिए बनवा रखी थी.

पुलिस ने जयमंगल के पास से जो 10 मोबाइल सेट बरामद किए थे, उन में से 2 मोबाइलों की चोरी की रिपोर्ट सिगरा थाने में पहले से ही दर्ज थी. थाने में दर्ज मोबाइल चोरी की रिपोर्ट के अनुसार चोरी का माल उस के पास से बरामद हो गया था.

पुलिस ने जयमंगल के विरुद्ध भादंवि की धारा 419, 420, 468, 467, 471, 41, 411, 414 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया. इस के अलावा उस के पास से बरामद 1 किलो 100 ग्राम चरस के लिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के अंतर्गत अलग से मुकदमा दर्ज किया गया. जयमंगल के साथी गुडलक के पास से भी 240 ग्राम चरस बरामद हुई थी, इसलिए उस के खिलाफ भी एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया.

जयमंगल और गुडलक की गिरफ्तारी 17 जुलाई, 2014 को हुई थी. अगले दिन 18 जुलाई को दोनों को बनारस के नगर पुलिस अधीक्षक सुधाकर यादव ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर दोनों आरोपियों को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया.

जयमंगल ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उस ने जो भी चोरियां की थी, वे अपनी माशूकाओं को गिफ्ट देने और उन्हें खुश करने के लिए की थीं. इस के पहले भी वह 3-4 बार जेल जा चुका था और जब भी बाहर आता था, अपने पुराने धंधे में लग जाता था. पुलिस ने दोनों को वाराणसी के जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.  Hindi Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News : छलिया प्रेमी को पहचानना जरूरी

UP News : ज्यादातर महिलाएं प्यार की कद्रदान होती हैं. जब वह एक बार किसी पुरुष को अपने दिल में बसा लेती हैं तो उस का साथ ताउम्र चाहने की लालसा रखती हैं, लेकिन पुरुष उस के साथ दगा करने से नहीं चूकता. जब कभी उस महिला का दिल टूटता है तो वह कुछ भी करने से नहीं झिझकती. पढ़ें, हवस में अंधे पुरुषों से धोखा खाई महिलाओं की यह दिलचस्प कहानी…

उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना गुरबख्शगंज के एसएचओ प्रवीण गौतम ने गीता को समझाते हुए कहा, ”अगर तुम्हारे साथ कुछ गलत हुआ है तो मुझे बताओ. मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि मुझ से जितना हो सकेगा, मैं तुम्हारी मदद करूंगा.’’

एसएचओ का इतना कहना था कि गीता फफकफफक कर रोने लगी. रोते हुए ही उस ने कहा, ”क्या करती साहब, जवान बेटी की इज्जत का सवाल था. अगर मैं उसे मार न डालती तो वह मेरी बेटी की जिंदगी को नरक बना देता. मजबूर हो कर मुझे उस की हत्या करनी पड़ी.’’

एसएचओ ने गिलास का पानी गीता की ओर बढ़ाते हुए कहा, ”यह लो पहले पानी पियो. मन को थोड़ा शांत करो, उस के बाद बताओ कि मेड़ीलाल ने तुम्हारे साथ या तुम्हारी बेटी के साथ ऐसा क्या किया कि तुम्हें उस की हत्या करनी पड़ी?’’

एसएचओ के हाथ से पानी का गिलास ले कर गीता ने थोड़ा पानी पिया. खाली गिलास सिपाही को पकड़ा कर साड़ी के पल्लू से मुंह और आंखें पोंछ कर सिसकते हुए गीता अपनी दुखभरी कहानी सुनाने लगी. गीता ने एसएचओ को अपनी जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी. हरियाणा की रहने वाली गीता की शादी दयाशंकर से हुई थी. दयाशंकर ठीक आदमी नहीं था. इसलिए गीता पति से परेशान रहती थी, लेकिन कोई ढंग का सहारा न मिलने की वजह से वह किसी तरह उस से निभा रही थी. दूसरों के घर काम कर के वह किसी तरह जीवन काट रही थी. उसी बीच उसे एक बेटी हो गई, जिस का नाम उस ने रोशनी रखा.

उसे लगा कि रोशनी के आने के बाद शायद उस के जीवन में रोशनी आ जाए, पर उस के जीवन में वैसा ही अंधेरा बना रहा. धीरेधीरे रोशनी बड़ी होने लगी, पर गीता के जीवन में वैसा ही अंधेरा बना रहा. अचानक एक दिन उस के जीवन में उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना गुरबख्शगंज के गांव दाउदपुर रामनगर का रहने वाला मेड़ीलाल आया. रोजीरोटी की तलाश में मेड़ीलाल हरियाणा गया था. जबकि उस का परिवार गांव में ही रहता था. गीता ने जब अपनी दुखभरी कहानी मेड़ीलाल को सुनाई तो उसे गीता से सहानुभूति हो गई और वह गीता की हर तरह से मदद करने लगा.

मेड़ीलाल पत्नी और बच्चों से दूर अकेला रहता था. गीता से मुलाकात होने के बाद मेड़ीलाल जब काम से घर आता तो गीता उसे एक गिलास पानी ही नहीं चाय भी बना कर देने लगी. मेड़ीलाल भी हर तरह से गीता का खयाल रखने लगा था. गीता जहां पति के प्यार से वंचित थी, वहीं मेड़ीलाल भी पत्नी से दूर था. दोनों को प्यार की नहीं, शरीर की भूख सताती थी. इसलिए उन्हें नजदीक आने में देर नहीं लगी. नजदीकी बढ़ी तो दोनों एक साथ रहने लगे, जिसे आज लिवइन कहा जाता है. मेड़ीलाल गीता की बेटी का भी खयाल रखता था. उस की पढ़ाई का खर्च उठाने के साथसाथ उस की हर जरूरत पूरी करता था. गीता की बेटी तब यही कोई 14 साल की थी.

सब कुछ बढिय़ा चल रहा था. गीता का साथ पाने के बाद मेड़ीलाल घर और परिवार को लगभग भूल सा गया था. शायद वह गांव लौट कर आता भी न. पर जब देश में कोरोना फैला तो बहुत लोगों के रोजगार चले गए. उन्हीं में एक मेड़ीलाल भी था. कोरोना की वजह से काम बंद हुआ तो मेड़ीलाल ने गांव लौटने का विचार किया. जब वह गांव जाने के लिए तैयार हुआ तो गीता ने कहा, ”तुम गांव चले जाओगे तो मेरा क्या होगा? मैं अकेली पड़ जाऊंगी. इतने दिन साथ रहने के बाद अब में तुम्हारे बिना रह नहीं पाऊंगी.’’

मेड़ीलाल जहां 55 साल का था, वहीं गीता 35 साल की थी. उस की पत्नी भी बूढ़ी हो चुकी थी. इस के अलावा गीता उस की पत्नी से सुंदर भी थी. यही सब सोच कर उस ने गीता से कहा, ”तुम ने ऐसा कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हें छोड़ कर अकेला गांव जाऊंगा. अब तो जहां मैं रहूंगा, वहीं तुम्हें भी रखूंगा.’’

इस के बाद परिणाम की चिंता किए बगैर मेड़ीलाल गीता और उस की बेटी रोशनी को साथ ले कर गांव आ गया. मेड़ीलाल गीता के साथ घर पहुंचा तो घर में बवाल हो गया. फेमिली वालों ने गीता और रोशनी को घर में रखने से साफ मना कर दिया. मेड़ीलाल का गांव के बाहर थोड़ा खेत था, उसी में उस ने गीता के लिए झोपड़ी डाल दी. गीता के रहने की व्यवस्था हो गई. खर्च भी मेड़ीलाल ही उठाता था. वह कभी घर में रहता तो कभी गीता के साथ. इसी तरह समय बीतता रहा.

रोशनी का दाखिला यहां भी गीता ने एक स्कूल में करा दिया था. गीता अब तक 12वीं पास कर चुकी थी. उस की उम्र भी 19 साल हो गई थी. देखा जाए तो अब वह जवान हो गई थी. ऐसे में ही किसी दिन मेड़ीलाल की नजर उस पर पड़ी तो उस की नीयत बदल गई. फिर क्या था, वह बेटी की तो क्या पोती की उम्र की रोशनी के पीछे हाथ धो कर पड़ गया. मेड़ीलाल को लगता था कि वही उसे खिलातापिलाता है तो वह जो चाहेगा, उस के साथ कर लेगा. लेकिन रोशनी ने उसे छूने नहीं दिया. एक दिन तो उस ने हद ही कर दी. उस दिन उस ने उस के नाजुक अंगों पर हाथ लगा दिया.

मेड़ीलाल की इस हरकत पर रोशनी को गुस्सा आ गया. उस ने कह भी दिया, ”आज के बाद इस तरह की हरकत की तो ठीक नहीं होगा.’’

मेड़ीलाल को इस के बाद पीछे हट जाना चाहिए था. पर उस की मम्मी गीता को उस ने रखैल बना रखा था, इसलिए उसे लगता था कि बेटी भी वैसी ही होगी. आज नखरे कर रही है, पर कभी न कभी समर्पित ही हो जाएगी. पर ऐसा हुआ नहीं. उस ने उसी दिन मेड़ीलाल की शिकायत मम्मी से कर दी. प्रेमी की इस हरकत पर गीता सोच में पड़ गई. बेटी की जिंदगी का सवाल था. उसी का प्रेमी उस की बेटी की जिंदगी नरक बनाने पर तुला था. गीता जानती थी कि मेड़ीलाल समझाने से नहीं मानेगा. क्योंकि अब तक वह उस के स्वभाव से अच्छी तरह परिचित हो चुकी थी. इसलिए उस ने बेटी से सलाह कर के उसे खत्म करने का निर्णय ले लिया.

यह निर्णय लेने के बाद गीता मेड़ीलाल से मिली और उसे लालच दिया कि शाम को वह उस के घर आ जाए. रात में पार्टी करेंगे. उस के बाद रोशनी को समझाबुझा कर वह उस के पास भेज देगी. मेड़ीलाल तो यही चाहता था. रात होते ही वह शराब की बोतल ले कर गीता के घर पहुंच गया. गीता और रोशनी ने मेड़ीलाल को जम कर शराब पिलाई. जब वह विरोध करने की स्थिति में नहीं रहा तो गीता और रोशनी ने पहले तो लाठीडंडे से मेड़ीलाल की खूब पिटाई की. ज्यादा डंडे उस के सीने पर ही मारे, जिस से उस की पसलियां टूट गईं. उस के गुप्तांग पर भी डंडों से मारा. मार खातेखाते जब मेड़ीलाल बेहोश हो गया तो गीता और रोशनी ने चुन्नी से उस का गला घोंट दिया.

मेड़ीलाल का खेल खत्म कर गीता और रोशनी ने उस की लाश एक चादर में लपेटी और अपने घर से करीब 100 मीटर दूर ले जा कर झाडिय़ों में फेंक दी. इस के बाद अपने घर आ कर मांबेटी सो गईं. सवेरा होने पर देर तक मेड़ीलाल घर नहीं आया तो उस की खोज शुरू हुई. गांव में इधरउधर तलाशा गया, गीता के घर भी जा पर पूछा गया, लेकिन मेड़ीलाल का कुछ पता नहीं चला. दोपहर के करीब किसी व्यक्ति ने झाडिय़ों के बीच लाश देखी तो उस ने शोर मचाया तो गांव वालों ने उस लाश की शिनाख्त मेड़ीलाल के रूप में की. मेड़ीलाल के बेटे सुशील कुमार ने थाना गुरबख्शगंज जा कर पिता की हत्या की सूचना पुलिस को दी.

सूचना मिलते ही एसएचओ प्रवीण गौतम, सीओ (लालगंज) पुलिस बल एवं फोरैंसिक टीम के साथ गांव दाउदपुर रामनगर पहुंच गए. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया. उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर परिवार के लोगों तथा गांव वालों से पूछताछ शुरू की. जब उस के चरित्र के बारे में पूछा तो गीता का नाम पुलिस के सामने आया. तब पुलिस गीता से पूछताछ करने लगी. पहले तो गीता पुलिस को इधरउधर की कहानियां सुनाती रही, पर उस की बौडी लैंग्वेज और बारबार झूठ बोलने पर पुलिस को शक हुआ तो पुलिस ने उसे विश्वास में लेने की कोशिश की. उस से कहा गया कि अगर वह सब कुछ सचसच बता देगी तो जितना हो सकेगा, पुलिस उस की मदद करेगी. इस के बाद गीता ने रोते हुए मेड़ीलाल की हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए उस की हत्या की सारी कहानी सुना दी.

मेड़ीलाल की हत्या की सच्चाई जान कर पुलिस का मन भी द्रवित हो उठा, लेकिन अपराध तो अपराध है. गीता ने अपराध किया था, इसीलिए पुलिस ने उस के साथ उस की 19 साल की बेटी रोशनी को भी गिरफ्तार कर लिया. इसी के साथ वह चुन्नी भी बरामद कर ली, जिस से मेड़ीलाल का गला घोंटा गया था. उन डंडों को पुलिस ने बरामद कर लिया, जिन से मेड़ीलाल की पिटाई की गई थी. सारे सबूत जुटाने के बाद एसपी आलोक प्रियदर्शी ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर के पत्रकारों को मेड़ीलाल की हत्या का खुलासा करते हुए आरोपियों के गिरफ्तार करने की सूचना दी. अगले दिन मांबेटी को रायबरेली की अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

यह ऐसी सत्य घटना थी, जिस में एक मां गीता ने अपनी बेटी की इज्जत बचाने के लिए अपने प्रेमी और पालनहार की जान ले ली. लेकिन दूसरी जो घटना गोरखपुर की है, उस में अपनी हवस मिटाने के लिए एक सुनीता ने बेटी को फंदे से लटकाने वाले प्रेमी को बचाने की कोशिश की. गोरखपुर का एक थाना है कैंपियरगंज. इसी थाने के अंतर्गत एक परिवार रहता था, जिस के मुखिया मुंबई में रहते थे. पत्नी सुनीता और 15 साल की बेटी रजनी गांव में ही रहती थी. बेटी 9वीं क्लास में पढ़ती थी. पति के बाहर होने की वजह से घर और बाहर के सारे काम सुनीता ही देखती थी. इन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिस का दूध बेच कर कुछ पैसे कमा लेती थीं. इस के अलावा पति कुछ पैसे भेज देता था, जिस से मांबेटी का गुजारा आराम से हो जाता था.

गाय के लिए भूसे की जरूरत पड़ती थी. भूसा थाना पीपीगंज के अंतर्गत आने वाले गांव जंगल अगही के रहने वाले सुनील गौड़ से खरीदती थीं. जब भी इन्हें भूसे की जरूरत पड़ती, वह सुनील गौड़ को फोन कर देतीं, सुनील भूसा पहुंचा देता था. अगर पैसे होते तो उसी समय दे देतीं, न होते सुनील को बाद में ले जाने के लिए कह दिया जाता. सुनील को भी ऐतराज नहीं होता, क्योंकि वह हमेशा उसी से भूसा लेती थीं. सुनीता अभी जवान थी. पति परदेश में रहता था. साल, डेढ़ साल में महीने, 2 महीने के लिए आता था और फिर वापस चला जाता था. इतने दिनों में उस की पति के साथ रहने की हसरतें अधूरी ही रह जाती थीं. जबकि सुनीता चाहती थी कि उस का पति हमेशा उस के साथ रहे.

प्यार की भूखी सुनीता के घर जब सुनील का आनाजाना बढ़ा तो वह उस में पति वाला प्यार ढूंढने लगी. सुनील जवान और कुंवारा था, इसलिए वह किसी भी औरत के प्यार की तलाश में रहता था. सुनील को सुनीता की आंखों में अपने लिए प्यार दिखाई दिया तो उसे उस के करीब आते देर नहीं लगी. क्योंकि आग दोनों ओर लगी थी. सुनीता और सुनील के बीच संबंध बने तो जब देखो, तब सुनील सुनीता के घर आनेजाने लगा. घर में कोई मर्द तो था नहीं कि रोकटोक होती, इसलिए सुनील कभीकभी रात को भी सुनीता के घर रुक जाता.

सुनीता की बेटी रजनी नाबालिग जरूर थी, पर इतनी भी छोटी नहीं थी कि उसे यह न पता चलता कि उस की मम्मी और सुनील के बीच क्या चल रहा है. कुछ दिनों तो वह चुप रही, लेकिन जब बात हद से ज्यादा बढ़ी तो वह मम्मी के इस संबंध का विरोध करने लगी. वह सुनील को अपने घर आने से रोकने लगी. इस से सुनील को भी परेशानी होने लगी और सुनीता को भी. क्योंकि न तो सुनीता सुनील को छोडऩा चाहती थी और न ही सुनील सुनीता को. जब इस मामले पर सुनीता और सुनील ने सलाह की तो उन्होंने इस का एक ही हल निकाला कि रजनी को भी इस की लत लगा दी जाए. उस के बाद न तो वह किसी से इस बात की शिकायत कर सकेगी और न ही विरोध कर सकेगी.

फिर क्या था, सुनील तो चाहता ही यही था. रजनी अभी कुंवारी थी. हर मर्द ऐसी लड़कियों को पाना चाहता है. सुनील गौड़ प्रेमिका सुनीता की बेटी रजनी पर भी डोरे डालने लगा. सुनीता की ओर से उसे पूरी छूट थी, इसलिए वह उस से शारीरिक छेड़छाड़ भी करने लगा. इस तरह जल्दी ही रजनी सुनील के जाल में फंस गई और अपना सब कुछ सुनील को दे बैठी. फिर तो सुनील की चांदी हो गई. वह मांबेटी से संबंध बनाता. यह सब इसी तरह चलता रहा. सुनीता के सुनील से संबंध केवल शारीरिक भूख मिटाने के लिए थे. पर रजनी को तो सुनील से प्यार हो गया था. जबकि उसे पता था कि सुनील के उस की मम्मी से भी संबंध हैं.

इस के बावजूद वह सुनील को इस कदर चाहने लगी कि उसे लगने लगा कि वह सुनील के बगैर नहीं रह सकती. इसलिए वह सुनील पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. जबकि सुनील ने केवल मौजमजे के लिए मांबेटी से संबंध बनाए थे. रजनी पहले तो सुनील से ऐसे ही विवाह के लिए कहती रही. पर जब देखा कि सुनील गंभीर नहीं है तो वह उस के पीछे पड़ गई. जब सुनील के लिए रजनी गले की हड्डी बनने लगी तो वह परेशान रहने लगा. उस ने यह बात अपने ही टोले के रहने वाले अपने दोस्त दुर्गेश यादव को बताई तो उस ने साफ कहा, ”अगर प्रेमिका गले की हड्डी बन रही है तो निकाल फेंको, वरना तुम्हारी ही जान ले लेगी.’’

इस के बाद सुनील रजनी को रास्ते से हटाने के बारे में सोचने लगा. आखिर एक दिन उसे मौका मिल गया. सुनीता के किसी रिश्तेदार की मौत हो गई थी. पति बाहर था, इसलिए संवेदना व्यक्त करने उसे ही जाना पड़ा. बेटी को घर में अकेली छोड़ कर वह रिश्तेदार के यहां संवेदना व्यक्त करने चली गई. शाम को सुनीता लौट कर आई तो उसे बेटी रजनी की साड़ी से लटकी लाश मिली. रोते हुए उस ने यह बात पड़ोसियों को बताई तो मोहल्ले की तमाम महिलाएं व पुरुष संवेदना व्यक्त करने पहुंच गए. उसी दौरान किसी पड़ोसी ने यह जानकारी थाना कैंपियरगंज पुलिस को दे दी.

पहली नजर में पुलिस को लगा कि यह सुसाइड का मामला है, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि यह सुसाइड का मामला नहीं, बल्कि रजनी की गला दबा कर हत्या की गई थी. यही नहीं, हत्या से पहले उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाया गया था. पुलिस चौंकी, क्योंकि रजनी अभी नाबालिग थी. पुलिस को शुरुआती जांच में घर में जोरजबरदस्ती के कोई निशान नहीं मिले थे. मां सुनीता से भी पूछताछ की गई कि लड़की का किसी से प्रेमसंबंध तो नहीं था?

सुनीता ने भी मना कर दिया. तब पुलिस ने घर के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस काल डिटेल्स से पता चला कि इस नंबर से एक नंबर पर रोजाना लंबीलंबी बातें होती थीं. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर थाना पीपीगंज के गांव जंगल अगही के टोला भरवल के रहने वाले सुनील गौड़ का निकला. पुलिस ने सुनील को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू की तो हर अपराधी की तरह उस ने भी पहले इधरउधर की कहानियां सुनाईं. लेकिन जब पुलिस अपनी पर आई तो उस ने सारी सच्चाई उगल दी. उस ने रजनी की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया और रजनी से शारीरिक संबंध बनाने से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी सुना दी.

रजनी सुनील पर विवाह के लिए दबाव डाल रही थी, इसलिए सुनील अब उस से पीछा छुड़ाना चाहता था. 26 सितंबर को जब सुनील को पता चला कि रजनी घर में अकेली है तो वह अपने दोस्त दुर्गेश यादव के साथ उस के घर पहुंच गया. पहले तो उस ने रजनी के साथ शारीरिक संबंध बनाए. इस के बाद जब रजनी ने विवाह की बात की तो उस ने विवाह करने से साफ मना कर दिया. फिर तो रजनी बिफर उठी और सुनील से उलझ गई. पीछा छुड़ाने के लिए सुनील ने रजनी की गला दबा कर हत्या कर दी.

इस बीच दुर्गेश घर के बाहर बैठा निगरानी करता रहा. हत्या करने के बाद सुनील ने दुर्गेश को अंदर बुलाया और उस की मदद से आंगन में फैली सुनीता की साड़ी में फंदा बना कर रजनी की लाश को लटका दिया, ताकि लगे कि रजनी ने आत्महत्या की है. अपना काम कर के दोनों अपनेअपने घर चले गए. रजनी की मम्मी सुनीता को पता था कि यह काम कौन कर सकता है, पर अपना पाप छिपाने के चक्कर में उस ने यह बात पुलिस को नहीं बताई थी.

सुनील गौड़ के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने दुर्गेश यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद एसएसपी गोरखपुर डा. गौरव ग्रोवर ने पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता कर के इस बात की जानकारी दी और थाना कैंपियरगंज में आरोपियों के खिलाफ हत्या और पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर के अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. यह तीसरी घटना है गुजरात के जिला भुज की. भुज का एक थाना है मुंद्रा मरीन. इसी थाने के अंतर्गत आने वाले गांव हमीरमोरा के रहने वालों ने समुद्र के किनारे एक लाश पड़ी देखी. यह जानकारी उन्होंने थाना मुंद्रा मरीन पुलिस को दी तो थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई.

लाश की स्थिति काफी खराब थी. इस से साफ लग रहा था कि हत्या कई दिनों पहले की गई थी. पुलिस ने लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, पर पता चला कि यह महिला वहां की रहने वाली नहीं है. पुलिस ने लाश के फोटो करवा कर वह पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी और थाने आ कर उस की शिनाख्त की कोशिश करने लगी. काफी कोशिश के बाद भी जब लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने फोटो से महिला का स्केच बनवा कर उस के पैंफ्लेट छपवा कर सार्वजनिक स्थानों पर लगवाए, लेकिन इस का भी कोई फायदा नहीं हुआ.

पुलिस ने उस स्थान का मोबाइल का डंप डाटा निकलवाया, जहां वह लाश मिली थी. जब इस डंप डाटा की स्क्रीनिंग की गई तो उस में 2 नंबर ऐसे मिले, जो वहां के रहने वालों के नहीं थे. जब इस बारे में पुलिस ने गांव वालों से पूछताछ की तो गांव के एक आदमी ने बताया, ”जी साहब, कुछ दिनों पहले 3 लोग यहां दिखाई दिए थे, जो यहां के रहने वाले नहीं थे. उन लोगों ने यहां पार्टी वगैरह की थी. उस के बाद चले गए थे.’’

पुलिस को डंप डाटा से बाहर के 2 नंबर मिले थे. इस से पुलिस को लगा कि वे दोनों नंबर उन्हीं लोगों के हो सकते हैं, जो बाहर से आए थे.

इस के बाद पुलिस ने उन लोगों के बारे में पता कराया तो जानकारी मिली कि ये नंबर नवावास के रहने वाले योगेश और नारण के थे. इस के बाद पुलिस ने घटना के लगभग एक महीने बाद लोकेशन के आधार पर योगेश और नारण को उठा लिया. थाने में योगेश और नारण से पूछताछ की तो पहले तो दोनों पुलिस को घुमाने की कोशिश करते रहे. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उन्होंने लक्ष्मी की हत्या की बात स्वीकारते हुए असली कहानी सुनानी शुरू कर दी. पुलिस ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया. फिर जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस तरह थी.

इस कहानी को जानने के लिए 9 साल पीछे जाना होगा. मूलरूप से जूनागढ़ के रहने वाले जितेंद्र भट्ट को 9 साल पहले लक्ष्मी बेकरिया से प्यार हो गया. लक्ष्मी शादीशुदा ही नहीं, 3 बच्चों की मां थी, लेकिन पति से न पटने के कारण उस का झुकाव जितेंद्र की ओर हो गया तो वह पति को छोड़ कर जितेंद्र के साथ रहने लगी थी. उस ने एक बेटे को तो पति के पास छोड़ दिया था, जबकि एक बेटी और एक बेटे चेतन को साथ रख लिया था. बाद में उस ने पति से तलाक ले कर जितेंद्र से विवाह भी कर लिया था.

जब तक बच्चे छोटे थे, तब तक तो जितेंद्र की कमाई से घर का खर्च चलता रहा, लेकिन जब बच्चे बड़े हो गए तो घर का खर्च भी बढ़ गया. अब तक लक्ष्मी भी बच्चों की देखभाल से फुरसत पा गई थी. इस के बाद आमदनी बढ़ाने के लिए वह भी काम की तलाश में बाहर निकली. उसे कोई और काम नहीं मिला तो वह रंगरोगन का काम करने लगी. क्योंकि यह काम उसे आता था. इसी रंगरोगन का काम करने के दौरान उस की मुलाकात योगेश जोतियाना से हुई तो वह उसे दिल दे बैठी. इस के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. फिर तो योगेश लक्ष्मी के घर भी आनेजाने लगा.

जितेंद्र को पता चल गया कि उस की पत्नी का संबंध योगेश से हो गया है, लेकिन योगेश थोड़ा अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए जितेंद्र उस से कुछ कहने या उसे रोकने से घबराता था. दूसरी ओर लक्ष्मी भी पति का कहना नहीं मानती थी. ऐसे में योगेश का जब मन होता, लक्ष्मी के घर आ धमकता. लक्ष्मी के घर आनेजाने में योगेश की नजर लक्ष्मी की नाबालिग बेटी पर पड़ी तो वह अधेड़ लक्ष्मी के सहारे उसे पाने के रास्ता खोजने लगा. वह लक्ष्मी की बेटी पर भी डोरे डालने लगा. जिस घर में अनैतिक काम हो रहा हो, उस घर के बच्चों को बहकते देर नहीं लगती. लक्ष्मी की बेटी भी जल्दी ही योगेश के झांसे में आ गई और उसे अपना सब कुछ सौंप बैठी.

जल्दी ही बेटी और योगेश के संबंधों की जानकारी लक्ष्मी को तो हो ही गई, जितेंद्र को भी हो गई. तब जितेंद्र ने पत्नी को ताना मारा, ”देख लिया न अपनी अय्याशी का नतीजा. तुम्हारी ही वजह से आज नाबालिग बेटी की जिंदगी बरबाद हो रही है.’’

बेटी भले ही लक्ष्मी के पहले पति की थी, लेकिन जितेंद्र का अपना कोई बच्चा न होने की वजह से वह लक्ष्मी के पहले पति के बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानता था. इसलिए बेटी के गलत रास्ते पर जाने की वजह से वह परेशान तो था ही, इस की वजह भी पत्नी लक्ष्मी को मानता था. योगेश और बेटी के संबंधों के बारे में जान कर लक्ष्मी भी परेशान थी. उस ने बेटी को समझाया. पर बेटी नहीं मानी तो उस ने योगेश को घर आने से रोक दिया, लेकिन अब तक बेटी शारीरिक संबंधों की आदी हो चुकी थी और योगेश का भी वही हाल था. अब दोनों के बीच में लक्ष्मी कांटा बन रही थी, इसलिए दोनों ने सलाह की कि लक्ष्मी नाम के इस कांटे को ही निकाल फेंका जाए.

योगेश ने अपने एक दोस्त नारण से बात की तो वह योगेश का साथ देने को तैयार हो गया. 10 जुलाई, 2023 को योगेश ने लक्ष्मी को फोन कर के कहा, ”चलो, कहीं घूम कर आते हैं.’’

पहले तो लक्ष्मी ने मना किया, पर जब योगेश ने मिन्नतें की तो लक्ष्मी साथ चलने को तैयार हो गई. नारण के पास अपनी कार थी. योगेश नारण की कार में लक्ष्मी को बैठा कर थाना मुंद्रा मरीन के अंतर्गत आने वाले गांव हमीरमोरा पहुंचा. पहले तो तीनों ने शराब पी. उस के बाद योगेश ने लक्ष्मी के साथ संबंध बनाए और फिर गला दबा कर उस की हत्या कर दी. लक्ष्मी की हत्या कर उस की लाश को वहीं समुद्र किनारे बालू में दबा कर योगेश और नारण नवावास लौट आए.

समुद्र की लहरों की वजह से लाश के ऊपर की बालू हट गई तो गांव वालों की नजर उस पर पड़ गई और बात पुलिस तक जा पहुंची. इस के बाद काफी प्रयास कर महीनों बाद पुलिस ने लाश की शिनाख्त कर आरोपियों को पकड़ा. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मां की हत्या में नाबालिग बेटी का कितना हाथ है. पुलिस ने जब लक्ष्मी के पति जितेंद्र से पूछा कि उस ने पत्नी की गुमशुदगी क्यों नहीं दर्ज कराई तो जितेंद्र ने कहा, ”साहब, जब मैं ने पहले इसे योगेश से मिलनेजुलने से रोका था, तब इस ने मुझ से कहा था कि उसे मेरे साथ रहना हो तो रहे, वरना चला जाए. उस का जहां मन होगा जाएगी. साहब, इसीलिए मुझे लगा कि वह योगेश के साथ कहीं गई होगी. जब उस का मन भर जाएगा तो वापस आ जाएगी.’’

जितेंद्र के इस बयान में जो दर्द था, उसे सुनने वाले हर व्यक्ति ने महसूस किया. पुलिस ने पूछताछ के बाद योगेश और नारण को जेल भिजवा दिया है. UP News

—कथा में कुछ पात्रों के नाम परिवर्तित हैं

 

 

MP Crime News : बेदर्दी न समझा कोमल दिल की बात

MP Crime News : सैक्स की चाहत के लिए किया गया प्रेम न केवल अनैतिक और विरोध का तानाबाना बुन लेता है, बल्कि प्रेमी युगल को नाजायज और नापाक राह पर ले जाता है. ऐसा ही कुछ 21 वर्षीय रानू मेहर और रामनिवास सोलंकी के साथ हुआ, जिस के बाद…

रामनिवास सोलंकी अपने घर की छत पर अकेला बैठा था. शाम का अंधेरा घिरने में अभी वक्त था. एकदम तन्हाई में डूबा हुआ था. सामने दूर तक गांव का नजारा वहां से दिख रहा था. उस की पतली पगडंडियों पर गाहेबगाहे उस की नजर ठहर जाती थी. वहां इक्कादुक्का लोगों का आनाजाना हो रहा था. उन में अधिकतर गांव की ओर आने वाले ही थे.

अचानक उस की निगाह कंधे से बैग लटकाए एक युवती पर ठहर गई. वह उस की जानीपहचानी थी और गांव से बाहर जाती दिख रही थी. वह उस के बारे में सोचने लगा, ‘रानू मायके कब आई थी? अब कहां जा रही है?…शायद ससुराल?…आई थी तब उस ने मुझे कौल क्यों नहीं की?…पता लगाना होगा कि क्या बात है?’

रामनिवास चाहता तो वहीं से उसे आवाज दे सकता था, लेकिन उस ने अपने मोबाइल से उसे कौल कर दिया. कुछ सेकेंड तक रिंग जाने के बाद कौल डिसकनेक्ट हो गई. उस ने सोचा कि शायद उस का मोबाइल बैग में होगा. उस का अनुमान सही था. देखा युवती कुछ सेकेंड में ही अपने बैग से मोबाइल निकाल चुकी थी.

अगले पल रामनिवास के फोन पर रिंग बजने लगी थी. उस ने तुरंत कौल रिसीव कर ली.

”हां जानू! तुम कब आई…बताया नहीं… मिले बगैर जा रही हो!’’

”आज ही दिन में आई थी…जल्दी लौटना है…फिर आऊंगी.’’ जवाब देने वाली युवती रानू मेहर रामनिवास के गांव की ही थी. तालाब के दूसरी छोर पर उस का मायका था. उन की पुरानी और गहरी जानपहचान थी. उन के बीच सालों से प्रेम संबंध में ताजगी बनी हुई थी, जबकि युवती पास के ही गांव में ब्याही थी. शादीशुदा हो कर भी उस का दिल और दिमाग रामनिवास के दिल में ही अटका हुआ था.

”तो फिर मिली क्यों नहीं?’’ रामनिवास ने मायूसी से शिकायत की.

”क्या करती मिल कर, तुम मेरी बात मानते ही नहीं.’’

”कैसे मान लूं, तुम अब दूसरे की हो!’’

”चलो, अब फोन काटो,’’ बोलते हुए रानू ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

रानू का अचानक फोन कट जाने पर रामनिवास दुखी महसूस करने लगा. सोचने लगा कि आखिर वह उस से चाहती क्या है? मई की तपिश का महीना था. उस की इच्छा हुई कि तालाब के ठंडे पानी में नहा लिया जाए. इसी के साथ उस के मन में कई तरह के खयाल आते रहे. उन में बारबार रानू का चेहरा भी घूमता रहा. उस के साथ गुजारे गए हसीन लम्हों को याद करने लगा. तालाब में तैरते वक्त उसे याद आया कि कैसे उस ने इसी तालाब में रानू को तैरना सिखाने की पहल की थी.

बात 4 साल पहले की है. बरसात का मौसम था. रामनिवास सोलंकी गांव के तालाब में तैराकी कर रहा था. कुछ देर बाद जब वह तालाब से बाहर निकला, तब उस ने देखा कि उसे गांव की ही लड़की रानू मेहर निहार रही है. वह झेंप गया, लेकिन लड़की बोल पड़ी, ”तुम तो बहुत अच्छा तैरना जानते हो… मुझे भी तैरने का बहुत शौक है.’’

”तो सीख लो, किस ने रोका है.’’

”कैसे सीखूं…कोई लड़की तुम्हारी तरह अच्छी तैराक नहीं है.’’

”मैं सिखा दूं?’’

”हां, तुम सिखा दोगे मुझे तैरना!’’ रानू बोली.

”फीस लगेगी.’’ रामनिवास गमछे से अपना अधनंगा बदन पोंछता हुआ बोला.

”क्या फीस लोगे?’’

”तैराकी सिखाने के बाद बताऊंगा.’’

”बाद में मेरी जान मांग ली तो!’’

”तुम जैसी सुंदर लड़की की भला जान कौन मांगेगा?’’

”तो क्या मांगोगे?’’

”दिल?’’

”चल हट… बड़ा आया दिल लेने वाला!’’ रानू बोलती हुई शरमा गई थी.

”तैरना सीखना है तो बोलो, अभी से ही ट्रेनिंग शुरू कर देता हूं.’’

”हांहां सीखना है न, लेकिन डर लगता है…बाबू को मालूम हो गया तो वह मेरा गला घोंट देगा!’’ रानू आशंका जताती हुई बोली.

”बाबू को मालूम होगा तब न! दोपहर में सिखाऊंगा जब बाबू खेतों पर गए होंगे. चलो आ जाओ… पानी में उतरो.’’

”दूसरे कपड़े ले कर आती हूं.’’ रानू बोल कर अपने घर की ओर दौड़ पड़ी.

कुछ मिनटों में ही रानू पौलीथिन बैग में कपड़े ले कर तालाब के किनारे लौट आई थी. चंचल रानू को संभालता हुआ रामनिवास कमर तक पानी में उतर गया था. उस ने उस के दोनों हाथों को पकड़ कर एक झटके में डुबकी लगाई, जिस के लिए रानू शायद पहले से तैयार नहीं थी. जिस से उस के नाकमुंह में पानी घुस गया था. अपना हाथ छुड़ाती हुई दोनों हथेलियों से नाकमुंह में घुस आए पानी को साफ किया. चेहरा पोंछती हुई बोली, ”ऐसे तो तुम मुझे मार ही डालोगे…सांस नहीं ले पा रही थी.’’

”इतने में घबरा गई…यह तुम्हारा पहला सबक था. उस में पास हो गई…अब अगले स्टेप के लिए तैयार हो जाओ!’’ रामनिवास प्यार से बोला.

”लेकिन अचानक से पानी में डुबो दिया था!’’ रानू बोली. उस का कोई जवाब दिए बगैर रामनिवास ने उस की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी दोनों हथेलियों पर उठा लिया. अब उस का चेहरा आसमान की ओर था.

”अपना सिर पानी में डूबने से बचाना है और दोनों पैरों को पानी पर पटकना है…’’

रानू इस निर्देश का पालन करने लगी. कुछ देर बाद रामनिवास ने उसे अचानक छोड़ दिया. तब तक वह और गहरे पानी तक चली गई थी. सीने तक पानी में गिर पड़ी. किसी तरह उस ने खुद को संभाला और रामनिवास से लिपट गई. उसे अजीब सी अनुभूति हुई. किसी मर्द की बाहों में आना 17 साल की रानू का पहला अनुभव था. रामनिवास के लिए भी गीले बदन में रानू को पकड़े रहने का पहला अनुभव था. दोनों कुछ कम पानी में आ गए थे. रामनिवास उस की कमर और पीठ को सहला रहा था, किंतु जल्द ही रानू उस से अलग हो कर पानी से बाहर आ गई. अपने कपड़ों की थैली उठाई और पास की झाड़ी के पीछे चली गई. ओट में जा कर अपने कपड़े बदले और जाने लगी.

कपड़े बदल कर जब वह निकली तो रामनिवास बोला, ”अब और नहीं सीखना है?’’

”आज नहीं.’’ कहती हुई रानू चली गई. उस के जाने के काफी देर बाद तक रानू के शरीर स्पर्श को वह याद करता रहा.

इसी के साथ एक सच यह भी था कि रानू और रामनिवास के दिलों की धड़कनें एकदूसरे के लिए धड़कने लगी थीं.

उस के बाद दोनों का दोपहर में घंटे दो घंटे तक तालाब के पानी में तैरना सीखनेसिखाने का सिलसिला चल पड़ा. वह समय उन के लिए एकदूसरे के साथ पानी में रोमांस करने का भी था. रानू कुछ हफ्ते में ही तैरना सीख चुकी थी. वह रामनिवास की ऐहसानमंद थी कि बगैर कोई फीस दिए उस ने उस से तैरना सीख लिया है. उस के प्रति प्रेम की कोमलता के एहसास से भर गई थी. रामनिवास का भी कमोबेश यही हाल था, लेकिन उस के दिल में प्यार का मतलब रानू की कमसिन देह भर से था. वह उस मौके की ताक में रहने लगा था कि कब रानू उसे अपना सर्वस्व समर्पित कर दे.

जल्द ही उसे वह मौका भी मिल गया. एक दफा जब दोनों एकांत में एकदूसरे की तारीफ करते हुए रोमांस की बातों में मशगूल थे, तब रामनिवास ने अपनी वासना की प्यास बुझाने के लिए रानू को राजी कर लिया था. उस रोज दोनों ने साथ जिएंगे साथ मरेंगे की कसमें भी खाईं. रामनिवास ने रानू के सिर पर हाथ रख कर परिवार और गांव के समाज के विरोध का सामना कर शादी रचाने की सौंगंध ली. उन के बीच महीने 2 महीने नहीं, बल्कि 4 साल तक प्रेम संबंध कायम रहे. हालांकि उन के बारे में गांव में चर्चा भी होने लगी थी, लेकिन कोई खुल कर उन का विरोध नहीं जताता था.

इस दौरान जब भी रानू रामनिवास से मिलती, तब छूटते ही शादी की बात छेड़ देती थी…और फिर उन के बीच एक खटास की भावना भर जाती थी. हालांकि रामनिवास प्रेमिका रानू को शादी का आश्वासन दे कर नई उम्मीद से भर देता था.

इसी बीच दोनों के प्रेम संबंध की सूचना रानू के परिवार तक जा पहुंची. उस के मम्मीपापा रानू के इस व्यवहार से खफा हो गए और वे जल्द से जल्द उस की शादी रचाने की कोशिश में लग गए. पापा ने उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी. उन का प्रयास सफल हुआ और रानू की शादी पास के गांव गरोठ में रहने वाले एक युवक से कर दी गई. शादी के बाद भी विवाहिता रानू मेहर का दिल रामनिवास सोलंकी में लगा रहा.  वह चाहती थी कि वही उस का जीवनसाथी बने. जबकि रामनिवास गांव और परिवार में अपनी इज्जत बनाए रखना चाहता था. वह नहीं चाहता था कि उस के प्यारमोहब्बत के चलते 2 परिवारों के बीच तनाव का महौल कायम हो जाए.

रानू मेहर के मायके में सभी इस बात से निश्चिंत हो गए थे कि रानू का घर बस गया है. उस ने कुंवारेपन में जो गलतियां कीं, अब उस के गांव के रामनिवास से मिलने में किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. वह बेरोकटोक रामनिवास के घर चली जाती, उस की फेमिली वालों के साथ हंसीमजाक करती. इसी तरह रामनिवास भी रानू के मायके आने के बाद उस के घर जा कर एक बार जरूर मिल आता या फिर वे अपने पुराने प्रेम को ताजा करने के लिए तालाब के किनारे घंटों समय गुजार लते थे.

दूसरी तरफ रानू मेहर इसी उम्मीद में रहती थी कि एक न एक दिन रामनिवास सोलंकी जरूर उस के साथ शादी रचाएगा. इस उम्मीद के साथ वह अपने गांव आती रहती थी और रामनिवास से शादी करने का दबाव बनाती थी. जबकि वह कई बार उस से कन्नी काट चुका था. उस के रानू से बचने का कारण भी था. बातोंबातों में वह कई बार धमकी भी दे चुकी थी. वह बोल चुकी थी कि अगर उस ने शादी नहीं की, तब पुलिस के पास चली जाएगी. रेप का मुकदमा कर देगी. हालांकि उस ने बात को संभाल लिया और बोली कि वह मजाक कर रही है. ऐसा वह उस के साथ हरगिज नहीं करेगी.

उस रोज तो बात आईगई हो गई थी, लेकिन रामनिवास के दिमाग में रेप में फंसाए जाने की आशंका के कीड़े ने काटना शुरू कर दिया था. यही कारण था कि वह उस से दूरी बनाए रखना चाहता था. वह रानू को भूलने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन जब वह मायके आती थी, तब उस के उस साथ गुजारे हसीन रोमांस की यादें ताजा हो जाती थीं. उस रोज भी वैसा ही कुछ हुआ था, जब रामनिवास छत पर तन्हा बैठा था और उस से मिले बगैर रानू चली गई थी. वह मन मसोस कर रह गया था. उस के ठीक एक हफ्ते बाद ही 25 मई को रानू फिर मायके आई थी. आते ही सीधे रामनिवास को फोन किया. उसे तुरंत मिलने के लिए बुलाया.

उस वक्त रामनिवास गांव से बाहर गया हुआ था. उस ने 2 घंटे बाद आने को कहा, लेकिन रानू ने मिलने की बेसब्री दिखाई और कहा कि घर से बाहर किसी एकांत जगत पर मिलना चाहती है. इस पर रामनिवास ने तालाब के किनारे रात होने पर मिलने को कहा. उस ने समय तय कर लिया और छिप कर आने को कहा.

रानू ने ऐसा ही किया. वह गांव वालों की नजरों से बचती हुई 25 मई, 2025 की रात करीब 10 बजे तालाब के किनारे ओट ले कर बैठ गई. जल्द ही रामनिवास भी वहां पहुंच गया. आते ही मजाक किया, ”जानू! तैरने चलें!’’

”मजाक मत करो, आज में बहुत सीरियस मूड में हूं.’’

”क्यों, क्या बात हुई, पति से झगड़ कर आई हो?’’ रामनिवास बोला.

पति से तो नहीं, लेकिन तुम से जरूर झगडऩे आई हूं.’’ रानू बोली.

उस के बोलने के अंदाज से रामनिवास को लगा कि उस की मजाक का उस ने गंभीरता से जवाब दिया है. वह कुछ पल के सन्न सा रह गया.

”क्यों तुम से नहीं झगड़ सकती? मैं तुम से बहुत नाराज हूं. तुम से बहुत शिकायत है…’’ रानू बिफरती हुई बोली.

”शिकायत? किस बात की?…मेरी बीवी हो जो तुम्हारी शिकायतों को दूर करूं?’’ रामनिवास भी उसी के लहजे में बोला.

”तुम्हारी यही बात मुझे पसंद नहीं आती…मैं तुम्हारी प्रेमिका हूं…पहली प्रेमिका…मैं ने तुम्हें अपना सब कुछ सुपुर्द कर दिया…और तुम कहते हो मैं क्यों तुम्हारी शिकायत सुनूं?’’ रानू बोली.

”यही कहने के लिए बुलाया था?’’

”किस से कहूं अपने दिल की बात?’’

”पति से?’’

”उसे पसंद नहीं करती! तुम को मेरा पति बनना होगा, वरना मैं तूफान मचा दूंगी….अब और बहाना नहीं चलेगा? बहुत हो गया तुम्हारा आश्वासन!’’ रानू मेहर बोले जा रही थी.

”इस तरह से बात करने की जरूरत नहीं है. मेरी भी मजबूरी है. अभी तुम से शादी नहीं कर सकता. मेरा कोई ठोस काम नहीं है. मुझे गांव में ही रहना है. खेती से आमदनी करनी है. अगर कहीं दूसरे शहर में कामधंधा मिल जाए, तब शादी की बात सोची जा सकती है.’’

”आज तुम अपने वादे से भी मुकर गए.’’

”ऐसा ही समझो…इसी में हम दोनों की भलाई है. हम लोग एक ही गांव के हैं. हम लोगों का घर 10-12 घरों  के अंतर पर है. शादी कर हम लोग इसी गांव में कैसे रह पाएंगे? तुम अब शादीशुदा हो. मैं किसी ब्याहता को कैसे अपनी पत्नी बना सकता हूं. तुम्हारे मायके और ससुराल वाले हम पर मुकदमा ठोक देंगे, तब क्या होगा… कोर्टकचहरी के चक्कर में नहीं पडऩा चाहता.’’ रामनिवास ने अपने मन की बात कह दी. उस ने एक तरह से अपना फैसला ही सुना दिया कि वह अब उस के साथ शादी नहीं कर सकता.

”कोर्टकचहरी के चक्कर में तो ऐसे भी आ जाओगे…उस रोज मजाक में बोली थी, आज वैसा नहीं है…तुम पर रेप का मुकदमा कर दूंगी. सीधे जेल जाओगे.’’ रानू गुस्से में आ गई थी और वहां से जाने के लिए उठ खड़ी हुई थी.

उस की तल्ख बातें सुन कर रामनिवास का दिमाग भन्ना गया था. दिलोदिमाग में तेजाबी तूफान उमडऩे लगा था. उस ने महसूस किया कि उस के हाथपैर बेकाबू हो गए हैं. अगले ही पल रामनिवास के दोनों हाथ रानू मेहर की गरदन को दबोच चुके थे. अचानक इस हमले के लिए रानू तैयार नहीं थी. अपने दोनों हाथों से रामनिवास की पकड़ से मुक्त होने की कोशिश करने लगी, लेकिन उस की बलिष्ठ भुजाओं की मजबूती के आगे असफल रही.

कुछ सेकेंड में ही उस की गरदन झूल गई. उस की मिमियाती आवाज भी बंद हो गई. रामनिवास के हाथों की पकड़ ढीली हुई, तब रानू जमीन पर धड़ाम से गिर पड़ी. सामने गिरी रानू की लाश को रामनिवास ने 2 बार ठोकरें मारी और भुनभुनाया, ”बड़ा आई थी मुझे जेल भेजने…’’

अगले रोज रानू के अचानक लापता हो जाने पर उस के मायके वाले परेशान हो गए. उस के बारे में पता लगाना शुरू किया. उन्हें आश्चर्य हुआ कि वह कभी भी इस तरह घर से बिना कहे कहीं नहीं जाती थी. गांव वालों से पूछताछ की गई. किसी ने उस के बारे में कुछ नहीं बताया. उस के पापा को बहुत चिंता हुई. उन्होंने रानू की ससुराल वालों से उस की तहकीकात की. उन्होंने उस के ससुराल में नहीं होने की पुष्टि की. उस के पति ने गरोठ थाने पर रानू मेहर की गुमशुदगी की सूचना लिखवा दी. जिस के बाद फेमिली वाले और पुलिस उस की तलाश में जुट गए. रानू के घर से लापता होने के 4 दिन बाद भी कहीं पता नहीं चला.

अचानक 29 मई, 2025 को गांधी सागर जलाशय के बैकवाटर से एक अज्ञात महिला की लाश मिली. पुलिस को शक हुआ कि लाश मृतका रानू मेहर की हो सकती है. लाश की पहचान के लिए पुलिस ने मृतका के घर वालों को बुलाया, लेकिन शव की स्थिति इतनी खराब थी कि वे उसे नहीं पहचान पा रहे थे. इसलिए पुलिस ने फेमिली वालों के डीएनए से मृतका के डीएनए की जांच करवाई. रिपोर्ट आने के बाद मृतका की पहचान हो पाई. पहचान होते ही मृतका के पापा ने गांव के ही रामनिवास सोलंकी पर हत्या की आशंका जताई, क्योंकि रानू के गायब होने के बाद से वह भी गांव से गायब था. पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर उस से सख्ती से पूछताछ की, जिस पर आरोपी ने मृतका की हत्या करना कबूल किया.

आरोपी रामनिवास सोलंकी ने बताया कि रानू मेहर शादीशुदा होते हुए भी उस से शादी कर साथ रहने को कहती थी. जबकि वह अविवाहित था, लेकिन सामाजिक बंधन के चलते उस का रानू से शादी करना संभव नहीं था. इसलिए रानू की जिद से परेशान हो कर उस ने उस की हत्या कर दी. इस के बाद शव को पानी में फेंक दिया था. पुलिस ने आरोपी रामविलास सोलंकी पर हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस मामले की जांच गरोठ थाने के एसएचओ हरीश मालवीय कर रहे थे. MP Crime News