UP News : देवर के साथ मिलकर पति का कराया कत्ल

UP News : 4 बच्चों की मां बनने के बाद भी कुसुम की हसरतें उफान पर थीं. ऐसे में उस के पैर बहक गए और उस का झुकाव कलंदर नाम के युवक की ओर हो गया. इस बात का गांव, समाज में विरोध हुआ तो कुसुम ने पति मुकेश को रास्ते से हटाने की ऐसी चाल चली कि…

उस रोज सुबह से ही कुसुम का मन उल्लास से भरा हुआ था. उस की एक खास वजह थी. उस सुबह नाश्ता करने के बाद मुकेश आंगन में हाथ धोने, कुल्ला करने के बाद रोज की तरह सीधे काम पर नहीं गया था. बल्कि अंगोछे से हाथमुंह पोंछते हुए वह रसोई में चला आया था. पास में पति के आते ही रोटी बेल रही कुसुम के हाथ रुक गए. सिर उठा कर उस ने पति को देखा, फिर पूछा, ‘‘कुछ चाहिए?’’

मुकेश कुसुम के पास बैठ गया. वह इतनी धीमी आवाज में बोला कि कोई तीसरा न सुन सके, ‘‘हां चाहिए, लेकिन अभी नहीं रात को.’’

इस के बाद वह सीधा खड़ा हुआ, मुसकरा कर दाहिनी आंख दबाई और चला गया. पति की यह शरारत देख कर कुसुम के मन की कलियां खिल गईं. किसी भी पत्नी के लिए समझना बहुत आसान होता है कि रात को पति उस से क्या चाहता है. कुसुम का दिल बागबाग हो गया कि देर से ही सही, पतिदेव की कामनाएं तो जागीं. पूरे दिन कुसुम प्रफुल्लित रही. दौड़दौड़ कर उत्साह से सारे काम करती रही. पड़ोसन ने उस का यह जोश देखा तो पूछा, ‘‘क्या बात है कुसुम, आज बहुत जोश में हो और तुम्हारी खुशी भी छलक रही है.’’

नहाधो कर कुसुम ने सुर्ख साड़ी पहनी, फिर शृंगार किया. उस के बाद शाम होने पर आंगन में बैठ कर अपने पति के आने का इंतजार करने लगी. कुछ देर में मुकेश आ गया. पानी गरम हो गया तो मुकेश नहा लिया. इस के बाद कुसुम ने उसे खाना परोस कर दिया. खाना खाने के बाद मुकेश ने अपनी मासूम बेटी दीक्षा को गोद में उठाया और अपने कमरे में चला गया. कुसुम ने निखरे हुए अपने रूप का बहाने से पति के सामने प्रदर्शन भी किया लेकिन मुकेश के मुख से तारीफ के दो मीठे बोल भी न निकले. खैर, कुसुम ने झटपट जूठे बरतन मांजे और कमरे में पहुंच गई. आजमगढ़ जिले का एक गांव है असाढ़ा. यहीं रहता था मुक्खू. उस के परिवार में पत्नी सुखवती देवी के अलावा 4 बेटियां और इकलौता बेटा मुकेश था.

मुक्खू ने अपनी सभी बेटियों का विवाह कर दिया था, वे सभी अपनी ससुराल में हंसीखुशी से रह रही थीं. इस के बाद इकलौते बेटे मुकेश के विवाह की बारी आई. तो 14 साल पहले करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित गोढाव गांव निवासी सुभाष की बेटी कुसुम से मुकेश का विवाह हो गया. कुसुम मायके से ससुराल आ गई. कालांतर में कुसुम ने 3 बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया. परिवार बढ़ा तो खर्च भी बढ़े. खेती के नाम पर मुकेश के पास केवल 4 विसवा जमीन थी, उस से कुछ होने वाला नहीं था. मुकेश बढ़ईगिरी का काम भी करता था. लेकिन उसे रोजरोज काम नहीं मिलता था तो वह मनरेगा में मजदूरी का काम करने लगा.

काम में व्यस्तता अधिक होने के कारण अगले 2-3 साल में हाल यह हो गया कि थकान और जीवन की एकरसता ने मुकेश को उत्साहहीन कर दिया. रासरंग में भी उस की रुचि नहीं रह गई. खाना खाने के कुछ देर बाद ही वह गहरी नींद में सो जाता. कुसुम की ख्वाहिशें मचलती रह जातीं. कामनाओं को काबू में रख पाना कठिन हो जाता. देर रात तक वह गीली लकड़ी की तरह सुलगती रहती. कुसुम असंतोष भरा जीवन जीने लगी थी. कुसुम की उमंगों को एक बार फिर तब पर लगे, जब उस दिन नाश्ता करने के बाद मुकेश रसोई में उस के पास आया था. कुसुम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस ने सोचा कि वह आज पिछली कसर भी पूरी कर लेगी.

उमंगों के हिंडोले में झूलती कुसुम कमरे में पहुंची तो पिताबेटी को सोते हुए देखा. उस रात पति को सोया देख कर कुसुम को झुंझलाहट नहीं हुई बल्कि होंठों पर मुसकान खेलने लगी कि बेटी परेशान न करे, इसलिए उसे सुलातेसुलाते वह खुद भी सो गए. बाकी बच्चे भी दूसरे कमरे में सो चुके थे. कुसुम ने पति के पास सो रही बेटी को उठा कर अलग सुला दिया. इस के बाद वह स्वयं मुकेश की बगल में आ कर लेट गई और उसे जगाने के लिए प्यार से छेड़ने लगी. मुकेश कच्ची नींद में था. वह कुनमुनाया, ‘‘क्या है…?’’

‘‘और क्या होना है,’’ कुसुम धीमी आवाज में बोली, ‘‘आज रतजगा है.’’

मुकेश ने आंखें खोल कर पत्नी की ओर देखा, उस के बाद फिर से आंखें बंद कर लीं. कुसुम ने हलके से उसे फिर हिलाया, ‘‘मुझे ठीक से देख कर बताओ, कैसी लग रही हूं.’’

‘‘जब से शादी हुई है, तब से देख ही तो रहा हूं.’’

‘‘पहले की छोड़ो, आज की बात करो,’’ कुसुम अपनी सांसों से पति के चेहरे को गरमाने लगी, ‘‘आज मैं ने तुम्हारे लिए विशेष रूप से शृंगार किया है. देख कर बताओ न कि मैं कैसी लग रही हूं.’’

मुकेश ने ऐसे हावभाव से आंखें खोलीं, मानो कोई आफत टूट पड़ी हो. कुसुम को देखा, फिर टालने के अंदाज में बोला, ‘‘अच्छी लग रही हो.’’

‘‘अच्छी लग रही हूं तो सो क्यों रहे हो,’’ कुसुम ने उसे उकसाया, ‘‘नींद भगाओ और तुम भी कुछ अच्छा करो. इतना अच्छा कि मुझे भी फौरन नींद आ जाए.’’

‘‘क्या करूं…’’

‘‘वही, जो सुबह नाश्ता करने के बाद रात को करने को कह गए थे.’’

‘‘यार, सुबह मन था, अब नहीं है. बहुत थका हूं, मैं सोना चाहता हूं. आज का प्रोग्राम फिर कर लेंगे. तुम भी सो जाओ और मुझे भी सोने दो.’’

‘‘रात होने का मैं ने भी पूरा इंतजार किया है, इसलिए कैसे सो जाऊं,’’ कुसुम शरारत पर उतारू हो गई. वह उसे बेतहाशा चूमने लगी. मुकेश के तेवर तीखे हो गए. उस ने झल्ला कर पत्नी को कुछ गालियां दीं और उस की ओर पीठ कर ली. पति के व्यवहार से कुसुम की हसरतों पर तो मानो बर्फ पड़ गई. उस ने भी पति की ओर पीठ कर ली. उस रात कुसुम का विश्वास मजबूत हो गया कि वास्तव में उस की किस्मत फूट गई थी. उसी रात कुसुम के विद्रोही मन ने फैसला कर लिया कि यदि उसे यौवन का सुख पाना है तो मुकेश के भरोसे नहीं रहा जा सकता. खुद ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी.

अतृप्ति एवं असंतोष के पलों में कुसुम ने जो निर्णय लिया, रात बीतने के बाद उसे भूली नहीं. सुबह होते ही उस की आंखों ने ऐसे साथी को तलाशना आरंभ कर दिया जो उस की हसरतें पूरी कर सके. नियति ने कुसुम को यह अवसर भी दे दिया. असाढ़ा गांव से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर गांव उबारसेपुर है. इसी गांव में 30 वर्षीय कलंदर रहता था. वह अविवाहित था और आटो चलाता था. कलंदर का मुकेश के घर आनाजाना था. एक दिन चबूतरे पर बैठ कर कलंदर मुकेश से बातें कर रहा था. कुसुम को न जाने क्या सूझा कि खिड़की के पास खड़े हो कर वह उन दोनों की बातें सुनने लगी. खिड़की की ओर मुकेश और कलंदर की पीठ थी. इसलिए दोनों को पता नहीं था कि कुसुम उन की बातें सुन रही है. वे दोनों रसीली बातें कर रहे थे.

कुसुम का यह सोच कर जी जल गया कि रात होते ही मुकेश रूखाफीका हो जाता है और बाहर रसीली बातें करता है, लानत है ऐसे पति पर. बातोंबातों में कलंदर मुकेश से बोला, ‘‘मुकेश, सच कहूं तो तुम मुकद्दर के सिकंदर हो. क्या पटाखा बीवी पाई है, जो देखे देखता रह जाए.’’

यह सुन कर कुसुम का दिमाग कलंदर में उलझ गया. वह सोचने लगी कि निश्चित रूप से कलंदर उस पर दिल रखता होगा, इसीलिए तो वह उसे पटाखा नजर आती है. उस दिन हंसीमजाक में कलंदर का पटाखा कहना कुसुम के मन में एक नई सोच को जन्म दे गया. कुसुम को भी कलंदर अच्छा लगता था. कलंदर कुसुम को भाभी कह कर बुलाता था. देवरभाभी का रिश्ता बनने के कारण कुसुम से हंसीमजाक भी कर लेता था. अलबत्ता उस का दिल कुसुम के लिए बेईमान हो गया. कलंदर को ले कर कुसुम की सोच बदली तो उस के हावभाव भी बदल गए. वह चुपकेचुपके कलंदर से आंखें लड़ाने लगी. कलंदर को कुसुम अपनी तरफ आकर्षित होती हुई महसूस हुई तो वह ऐसे मौके की तलाश में रहने लगा, जब कुसुम घर में अकेली हो.

एक दिन अश्लील मजाक करतेकरते एकाएक कलंदर ने कुसुम की कलाई पकड़ ली, ‘‘भाभी बहुत तरसा चुकीं, अब तो रहम करो.’’

कुसुम ने नारीसुलभ नखरा किया, ‘‘कलंदर, यह पाप है. इस पाप में न खुद गिरो और न मुझे गिराओ.’’

‘‘भाभी, मुझे आज मत रोको.’’ कहते हुए उस ने कुसुम को बांहों में समेट कर चुंबनों की झड़ी लगा दी. अपेछा के अनुरूप कुसुम ने मामूली विरोध किया, कुछ नखरे दिखाए. फिर मन का काम होते देख उस ने विरोध और नखरे छोड़ दिए. कलंदर के बाजुओं में कसमसाते हुए बोली, ‘‘जरा ठहरो, दरवाजा तो बंद कर लूं.’’

‘‘तुम्हें छोड़ दिया तो फिर हाथ नहीं आने वाली.’’

‘‘विश्वास करो मैं कहीं भागूंगी नहीं, लौट कर तुम्हारे पास आऊंगी.’’

कलंदर ने कुसुम को बांहों के बंधन से मुक्त कर दिया. कुसुम ने जल्दी से दरवाजा बंद किया और कलंदर के पास लौट आई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. एक बार सीमाएं टूटीं फिर तो उन का यह रोज का यह नियम बन गया. कुसुम के दिल और तन पर कलंदर के जोश की ऐसी छाप पड़ी कि कलंदर के आगे वह सब कुछ भूल गई. अब जो कुछ था उस के लिए कलंदर ही था. वह भी कुसुम की भावनाओं का पूरा खयाल रखता था. किसी चीज की जरूरत होती तो वह झट से ला देता. कलंदर के लिए दिल में प्यार बढ़ रहा था तो मुकेश के लिए मन में नफरत. 7 मई, 2020 की शाम को कुसुम ने मुकेश से सब्जी लाने को कहा तो मुकेश सब्जी लेने चला गया.

लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी मुकेश घर नहीं लौटा तो कुसुम को चिंता हुई. उस ने गांव के प्रधान को सूचना दी. मुकेश को तलाशा गया लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. अगले दिन 8 मई को कुसुम सरायमीर थाने गई और इंसपेक्टर अनिल सिंह को अपने पति के गायब होने की सूचना दी. उस ने पति के गायब होने का आरोप गांव के कुछ लोगों पर लगाया. साथ ही पति के गायब होने की सूचना मीडिया को भी दे दी. मीडिया में मामला तूल पकड़ा तो पुलिस भी सक्रिय हो कर मुकेश को तलाशने लगी. 9 मई को लोगों ने मुकेश की लाश नरईपुर पुल के पास पड़ी देखी. कुसुम को इस की सूचना दे दी गई. प्रधान मौके पर पहुंचा तो उस ने घटना की सूचना सरायमीर थाने को दे दी. सूचना पर इंसपेक्टर अनिल सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए.

लाश झाडि़यों में औंधे मुंह पड़ी थी. मृतक की गरदन पर तेज धारदार हथियार से काटने के निशान मौजूद थे. डौग स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया. इंसपेक्टर सिंह ने कुसुम और मृतक की मां सुखवती से जरूरी पूछताछ की. इस के बाद उन्होने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी और सुखवती की ओर से अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. केस की जांच शुरू करते हुए इंसपेक्टर अनिल सिंह ने कुसुम से पूछताछ की तो उस ने गांव के कुछ लोगों पर आरोप लगाया कि वे लोग उस के पति से दुश्मनी मानते थे. इस के बाद इंसपेक्टर सिंह ने गांव के लोगों व प्रधान से पूछताछ की तो केस की गुत्थी सुलझने लगी.

इंसपेक्टर अनिल सिंह को पता चला कि कुसुम के उबारसेपुर गांव के कलंदर के साथ अवैध संबंध थे. यह भी पता चला कि इस मामले को ले कर गांव में पंचायत भी हुई थी. गांव के जिन लोगों ने पंचायत में कुसुम और कलंदर का विरोध किया था, कुसुम ने उन पर ही मुकेश की हत्या का आरोप लगाया था. इस का मतलब यह था कि सारा रचारचाया खेल कुसम और कलंदर का है, मुकेश की हत्या में इन दोनों का ही हाथ है. इस के बाद इंसपेक्टर अनिल सिंह ने कुसुम और कलंदर के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स में दोनों की रोज घंटों बात करने के साक्ष्य मिले. घटना की रात भी कलंदर के नंबर से कुसुम के नंबर पर काल की गई थी. जिस समय कलंदर ने काल की थी उस के नंबर की लोकेशन भी घटनास्थल की थी.

पुख्ता साक्ष्य मिलते ही इंसपेक्टर अनिल सिंह ने 11 मई को कुसुम और कलंदर को गिरफ्तार कर लिया. थाने में ला कर जब उन से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए घटना में शामिल साथियों के नाम भी बता दिए. घटना में साथ देने वालों में कलंदर की बहन शकुंतला, रविंद्र उर्फ छोटू, बिरेंद्र उर्फ करिया व धीरेंद्र निवासी गांव ऊदपुर और मिथिलेश उर्फ पप्पू निवासी महराजपुर थे. इन सभी को भी उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया. अभियुक्तों से पूछताछ के बाद मुकेश की हत्या की कहानी कुछ इस प्रकार निकली—

कुसुम से संबंध बन गए तो कलंदर का मुकेश के घर आनाजाना भी बढ़ गया. इस से उन के संबंध गांव वालों से छिपे न रह सके. गांव वालों ने इस का विरोध करना शुरू कर दिया. इतने पर भी ये दोनों नहीं माने तो गांव में इस को ले कर पंचायत बुलाई गई. पंचायत में कलंदर के गांव आने पर पाबंदी लगा दी गई. इस से कुसुम बिफर पड़ी. मुकेश ने उस की लानतमलानत की तो उस की नफरत ने विद्रोह का रूप ले लिया. कुसुम वैसे भी कलंदर की हो चुकी थी और शादी कर के उस के साथ घर बसाना चाहती थी. ऐसे में कुसुम और कलंदर ने मुकेश की हत्या करने का फैसला कर लिया.

4 फरवरी, 2020 को कुसुम के मायके में शादी थी. वहां पर कलंदर और कलंदर की बहन शकुंतला भी मौजूद थी, वहीं पर मुकेश को मारने का प्लान बना. इस के बाद शकुंतला के घर पर कुसुम और कलंदर बैठे. वहीं पर शकुंतला ने अपने देवरों रविंद्र, वीरेंद्र, धीरेंद्र और उन के साथी मिथलेश को बुला लिया. ये सभी कुछ पैसों के लालच में उन का साथ देने को तैयार हो गए थे. सभी ने साथ बैठ कर यह समझा कि प्लान को कैसे अमल में लाना है. 5 मई को मुकेश की हत्या करने के इरादे से सभी निकले लेकिन अचानक आंधीबारिश आने के कारण प्लान टल गया. फिर 7 मई की शाम को प्लान के मुताबिक कुसुम ने मुकेश को सब्जी लाने के लिए भेज दिया.

शाम साढ़े 6 बजे मुकेश पोखरा पहुंचा तो वहां कलंदर, शकुंतला और उस के साथी एक टैंपो में पहले से बैठे थे. कलंदर ने तेरही खाने के लिए चलने की बात कह कर मुकेश को टैंपो में बैठा लिया. मुकेश को सभी के साथ ले कर छित्तेपुर गया. वहां शराब खरीद कर मुकेश को पिलाई और खुद पी. सभी अंधेरा होने का इंतजार कर रहे थे. योजना के मुताबिक सभी लोग अपने मोबाइल अपने घरों में ही रख कर आए थे, केवल कलंदर ही अपना मोबाइल साथ लाया था. अपने मोबाइल से वह कुसुम को लगातार काल कर रहा था. कुसुम अपने पति को मौत के मुंह में भेजने को बहुत आतुर थी. वह कलंदर के साथ में तो नहीं थी. लेकिन उस से फोन पर पलपल की जानकारी ले रही थी. उन के बीच क्या बात हो रही है, यह भी कुसुम सुन रही थी. एक बीवी अपने ही पति के मर्डर का लाइव ब्राडकास्ट सुन रही थी.

रात साढे़ 8 बजे सभी मुकेश को टैंपो से ले कर तेजपुर में मघई नदी पर नरईपुर पुल के पास पहुंचे. मुकेश को नीचे उतारा और मुकेश की गले में गमछा डाल कर दबाने में सभी टूट पड़े. नशे की हालत में मुकेश की आंखें बंद हो गईं और वह बेसुध हो गया. सभी उसे मरा हुआ समझ कर झाडि़यों में छिपा आए. इस के बाद कलंदर ने कुसुम से बात की तो कुसुम ने कहा कि वह मुकेश का चाकू से गला काटे, जिस से वह उस के चीखने की आवाजें सुन सके. इस पर वापस पहुंच कर कलंदर ने जैसे ही मुकेश की गरदन पर चाकू रखा. मुकेश चिल्ला उठा. सभी ने उस को दबोचा तो कलंदर कसाई की तरह मुकेश का गला चाकू से रेतने लगा, इस से मुकेश की चीखें निकलने लगीं, जिसे मोबाइल पर सुन कर कुसुम ठहाके मार कर हंसती रही.

मुकेश को मौत के घाट उतारने के बाद कलंदर ने मुकेश का मोबाइल फोन उस की जेब से निकाल लिया और उसे ले कर काफी देर तक इधरउधर घूमता रहा. इस के बाद कुसुम अपने मोबाइल से बात न हो पाने का बहाना बना कर आसपड़ोस के लोगों से मोबाइल ले कर मुकेश के मोबाइल पर फोन मिलाती, दूसरी ओर से कलंदर मुकेश बन कर उस से बात करता. बात करने के बाद कुसुम उन्हें मोबाइल वापस कर देती और कह देती कि मेरे पति कह रहे हैं कि कुछ देर में वापस आ जाएंगे. कुसुम पड़ोसियों को दिखाने के लिए यह नाटक कर रही थी. देर रात योजनानुसार कुसुम प्रधान के पास गई और पति के गायब होने की सूचना दी. अगले दिन थाने जा कर उस ने पति की गुमशुदगी लिखाई लाश मिलने पर वह बराबर पंचायत में कलंदर और उस का विरोध करने वालों पर मुकेश की हत्या का आरोप लगाती रही.

वह एक तीर से 2 शिकार करना चाहती थी. मुकेश को रास्ते से हटाने के बाद उस की हत्या करने के आरोप में अपने विरोधियों को जेल भेजना चाहती थी. लेकिन उस की चाल धरी की धरी रह गई. पति की हत्या के समय चीखें सुनना उसे भारी पड़ गया. इंसपेक्टर अनिल सिंह ने अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू व टैंपो और कुसुम, कलंदर और मुकेश का मोबाइल बरामद कर लिए. मुकदमे में धारा 147/404/34 और बढ़ा दी गईं. सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सातों अभियुक्तों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, वहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Murder Story : सब्जी काटने वाले चाकू से सोई पत्नी का काटा गला

Murder Story : सरिता से लवमैरिज करने के बाद अजय साहू की गृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. लेकिन साली कविता के सौंदर्य में फंस कर उस ने न सिर्फ अपनी गृहस्थी उजाड़ी, बल्कि साली के साथ उसे जाना पड़ा जेल…

9 साल पहले जब अजय साहू उर्फ मोहित ने सरिता से विवाह किया था, तब सरिता से छोटी साली कविता 15 साल की थी. इस के 3 साल बाद 18 साल की उम्र में वह भरीपूरी युवती लगने लगी थी. ससुराल में अजय के सासससुर के अलावा उस की 2 सालियां कविता और सविता थीं, कोई साला नहीं था. सविता काफी छोटी थी, इसलिए अजय को खिलानेपिलाने व उस की सुखसुविधा का खयाल रखने की जिम्मेदारी बड़ी साली कविता की थी. कविता भी अपने जीजा का हुक्म मानने के लिए एक पैर पर खड़ी रहती थी.

जीजा की जरूरतों का खयाल रखना साली का कर्त्तव्य होता है, इस में कोई नई बात नहीं है. अजय भी इन बातों को सामान्य रूप से लेता था. लेकिन एक दिन अचानक ही वह कविता के अद्भुत सौंदर्य की तेज रोशनी में चौंधिया गया. एक दिन जब अजय ससुराल पहुंचा तो कविता किसी परिचित के यहां मांगलिक समारोह में जाने के लिए तैयार हो रही थी. कविता ने सुर्ख लाल जोड़ा पहन रखा था और अपने बाल खुले छोड़ रखे थे. कलाई में चूडि़यां और चेहरे पर सादगी भरा शृंगार. आंखों में काजल की रेखा और होंठों पर हलकी सी लिपस्टिक. उसे देख कर अजय की नजरें ऐसी चिपकीं कि हटने को ही तैयार नहीं हुईं.

कविता ने अजय को मीठा और पानी ला कर दिया, फिर चाय बना कर पिलाई. कुछ देर उस के पास बैठ कर अपनी बहन की खैरियत पूछी. फिर उस के पास से उठते हुए बोली, ‘‘जीजाजी, आप आराम करो, मैं जल्दी ही लौट आऊंगी.’’

कविता चली गई और वह देखता रह गया. अजय बैड पर लेट गया और कविता के बारे में सोचने लगा कि इतनी सुंदर तो सरिता तब भी नहीं लगी थी, जब दुलहन बन कर उस के घर आई थी. अजय ने अपने मन से कविता का खयाल निकालने की बहुत कोशिश की, पर कामयाब नहीं हो सका. कविता के सौंदर्य की तेज रोशनी से उस ने जितना दूर जाना चाहा, उतना ही मस्तिष्क से अंधा होता गया. अजय सोचने लगा कि मेरी शादी भले ही सरिता से हो गई पर कविता भी तो उस की साली ही है. साली यानी आधी घरवाली.

अजय के मन में पाप समाया तो वह कविता को पाने की जुगत में लग गया. उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के गांव पूरब थोक में राजेश चंद्र अपने परिवार के साथ रहते थे. वह खेतीबाड़ी का काम करते थे. परिवार में पत्नी उषा और 3 बेटियां सरिता, कविता और सविता थीं. बेटा न होने का राजेश को कतई गम नहीं था. उन्होंने तीनों बेटियों की बेटों से बढ़ कर परवरिश की थी. सरिता ने इंटर की पढ़ाई पूरी कर ली थी. कौशांबी के ही कुम्हियवा गांव में रामहित साहू रहते थे. वह भी खेतीकिसानी करते थे. उन के 3 बेटे थे, जिस में अजय उर्फ मोहित सब से बड़ा था. अजय ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने के बाद अपना खुद का काम करने का निर्णय लिया.

काफी सोचविचार के बाद उस ने डीजे संचालन का काम शुरू किया. उस का यह काम अच्छा चल गया. अपने इसी काम के दौरान एक वैवाहिक समारोह में उस की मुलाकात सरिता से हुई. सरिता उस समारोह में काफी सजधज कर आई थी. इस वजह से वह काफी खूबसूरत दिख रही थी. डीजे पर डांस करने के दौरान सरिता ने ‘डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो’ गाना चलाने की मांग की. अजय औपरेटर के पास ही खड़ा था. उस की पीठ सरिता की तरफ थी. मधुर आवाज सुनते ही अजय पलटा तो पलटते ही सरिता को देखा तो देखता ही रह गया.

अजय काफी स्मार्ट था. उसे अपनी तरफ देखते पा कर सरिता भी लजा गई और बोली, ‘‘सौरी, मैं आप को डीजे वाला समझ बैठी. इसलिए अपनी पसंद का गाना चलाने के लिए कह दिया.’’

अजय उस के भोलेपन पर मुसकराते हुए बोला, ‘‘आप से कोई गलती नहीं हुई, मैं डीजे वाला बाबू ही हूं यानी इस डीजे का मालिक.’’

‘‘ओह…तो यह बात है, तो मेरा पसंदीदा गाना लगवा दें, जिस से मैं डांस कर सकूं.’’ सरिता ने तिरछी नजरों से अजय को निहारते हुए कहा.

अजय ने औपरेटर को बोल कर ‘डीजे वाले बाबू…’ गाना लगवा दिया. गाना भारीभरकम स्पीकरों पर गूंजने लगा तो सरिता अपनी सहेलियों के साथ डांस करने लगी. वह डांस कर जरूर रही थी, लेकिन उस का सारा ध्यान अजय पर ही था. अजय भी उसे देखते हुए मुसकरा रहा था. वह इशारे से बारबार सरिता की तारीफ भी कर रहा था. उस की तारीफ पा कर सरिता लजा कर दूसरी ओर देखने लगती थी. डांस खत्म होने के बाद भी दोनों वहां से हटने को तैयार नहीं थे. उन की निगाहें मिलने के बाद अब उन के दिल मिलने को तड़प रहे थे. वह तड़प उन की निगाहों में बखूबी नजर आ रही थी.

आखिर अजय ने उसे इशारे से अपने पीछेपीछे आने को कहा तो सरिता उस का इशारा समझ कर दिल के हाथों मजबूर हो कर उस के पीछेपीछे चली गई. अजय एकांत में सुनसान जगह पर खड़ा हुआ तो शरमातेसकुचाते सरिता भी वहां पहुंच गई और पूछने लगी, ‘‘आप ने मुझे इशारे से अपने पीछे आने को क्यों कहा?’’

‘‘क्यों…क्या तुम्हें वास्तव में नहीं पता?’’ अजय उस की आंखों में देखते हुए बोला, ‘‘जरा अपने दिल पर हाथ रख कर अपनी धड़कनों को सुनो, जवाब मिल जाएगा.’’

‘‘सब दिल का ही तो मामला है, ये ऐसा मजबूर कर देता है कि इंसान अपनी सुधबुध खो बैठता है. और इंसान वही करने लगता है जो यह चाहता है. मैं भी दिल के हाथों मजबूर हो कर यहां आ गई हूं.’’ सरिता अपने दिल की व्यथा उजागर करती हुई बोली.

‘‘ये दिल ही तो है जब इस के अपने मन का मीत मिल जाता है तो प्यार की घंटी बजा कर आगाह कर देता है. देखो न, जब तुम्हारे दिल को मेरे दिल ने पुकारा तो तुम्हारा दिल मेरे पीछेपीछे खिंचा चला आया. कहने को हम अजनबी हैं, लेकिन हमारे दिलों ने हमारे बीच प्यार के रिश्ते की नींव रख दी है, जिस पर हमें मिल कर प्यार की इमारत खड़ी करनी है. अगर मेरा प्यार मेरा साथ मंजूर हो तो मेरे पास आ कर गले लग जाओ.’’ कहते हुए अजय ने बड़ी चाहत भरी नजरों से देखा तो सरिता उस की ओर खिंची चली गई और उस के गले लग गई.

यह ऐसा प्यार था, जिस ने बिना एकदूसरे के बारे में जाने उन के दिलों को मिला दिया था. उस के बाद उन दोनों ने एकदूसरे के बारे में जाना, खूब ढेर सारी बातें कीं. मोबाइल नंबर एकदूसरे को दिए. फिर मिलने का वादा कर के जुदा हो गए. उस दिन के बाद उन में बराबर बातें और मुलाकातें होने लगीं. करीब 9 साल पहले दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया. सरिता के घर वालों को कोई ऐतराज नहीं था लेकिन अजय के घर वाले इस प्रेम विवाह के खिलाफ थे. अजय विवाह करने के बाद कौशांबी के सिराथू कस्बे में सैनी रोड पर किराए का कमरा ले कर सरिता के साथ रहने लगा. अजय अपनी जिंदगी से काफी खुश था.

सरिता की छोटी बहन कविता की खूबसूरती अजय का मन लुभाती तो थी, पर उस की नजरें बेईमान नहीं थीं. लेकिन उस दिन कविता को सुर्ख लाल जोड़े में सजासंवरा देखा तो वह उसे दुलहन सी हसीन लगी. बस, जीजा के मन में साली के लिए फितूर समा गया. कविता के बारे में सोचते हुए अजय सो गया और सपने में भी कविता उस का चैन हरती रही. सुखद सपनों में खोया अजय न जाने कब तक सोया रहता कि उस की सास उषा ने आ कर जगा दिया, ‘‘अजय बेटा उठो, शाम हो गई है.’’

अजय हड़बड़ा कर उठ बैठा, ‘‘मैं दोपहर को सोया था और अब शाम ढल रही है. मम्मी, आप ने मुझे जगाया क्यों नहीं.’’

‘‘तुम्हारे आराम में विघ्न न पड़े, इसलिए मैं ने नहीं जगाया.’’ उषा बोली, ‘‘तुम उठ कर हाथमुंह धो लो, तब तक कविता चाय बना कर ले आएगी.’’

अजय ने बाथरूम में जा कर हाथमुंह धोया और तौलिए से पोंछने के बाद कुरसी पर आ कर बैठ गया. सामने किचन में कविता खड़ी चाय बना रही थी. अब उस के शरीर पर लाल जोड़े की जगह सफेद सलवारसूट था. कलाई में चूडि़यां भी नहीं थीं. उस ने चेहरा पानी से जरूर धो लिया था, पर मेकअप की मौजूदगी अब भी नुमायां हो रही थी. आंखें मिलते ही कविता मुसकराई, ‘‘जीजाजी, खूब मजे से सोए.’’

अजय ने मन ही मन में जवाब दिया, ‘सपने में बिजली गिरा कर मासूम बन रही हो.’ लेकिन जुबान से बोला, ‘‘मजा ले कर सो रहा था या कजा से गुजर रहा था, बाद में बताऊंगा. पहले तुम बताओ, कब आईं?’’

‘‘थोड़ी ही देर में आ गई थी. घर आ कर देखा तो आप सो गए थे. इसलिए मैं भी घर के कामों मे लग गई थी.’’ कविता ने मुसकरा कर कहा और उस के सामने टेबल पर चाय का कप रख दिया. फिर उसी के पास बैठ गई.

अजय को उस समय वहां अपनी सास की मौजूदगी खल रही थी. कविता अकेली होती तो वह उसे रिझाने का प्रयास करता. अजय की मजबूरी यह थी कि वह न सास को वहां से जाने को कह सकता था और न कविता का हाथ पकड़ कर अकेले में बात करने के लिए ले जा सकता था. रात को खाना खाने के बाद अजय को कविता के कमरे में सोने के लिए पहुंचा दिया गया. और कविता सविता के कमरे में उस के साथ सो गई. अगले दिन सुबह होने पर अजय के सासससुर खेतों पर चले गए. सविता स्कूल चली गई. इस से अजय को कविता से बात करने का मौका मिल गया. उस समय कविता नहाने जा रही थी. अजय ने उस से पूछा, ‘‘कविता, नहाने के बाद तुम कौन से कपड़े पहनोगी?’’

कविता ने सहजता से उत्तर दिया, ‘‘मुझे कहीं जाना तो है नहीं, इसलिए घर में जो पहनती हूं, वही पहन लूंगी.’’

‘‘घर में पहनने वाले नहीं,’’ अजय ने मन की परतें उस के सामने खोलनी शुरू कर दीं, ‘‘तुम वही लाल जोड़ा पहनो, जो तुम ने कल पहना था.’’

‘‘वह रोज पहनने के लिए थोड़े ही है,’’ कविता मुसकरा कर बोली,‘‘ वह लाल जोड़ा विशेष अवसरों पर पहनने के लिए बनवाया है. कहीं विशेष प्रोग्राम होता है, तभी पहनती हूं.’’

अजय कविता के सामने आ कर खड़ा हो गया और उस की आंखों में आंखें डाल कर बोला, ‘‘तुम मुझे चाहती हो न?’’

कविता जीजा के मन का मैल नहीं समझ सकी. उस ने सहजता से जवाब दिया, ‘‘हां, चाहती हूं.’’

‘‘अगर तुम मुझे चाहती होगी तो वही लाल जोड़ा पहनोगी.’’

‘‘जीजाजी, मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तुम लाल जोड़े को पहनने की जिद क्यों कर रहे हो?’’ वह बोली.

‘‘इसलिए कि उसे पहन कर तुम दुलहन जैसी लगती हो.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि आप लोग मेरा विवाह कर के मुझे इस घर से निकालने पर तुले हैं.’’ कविता हंसी, ‘‘अब तो मैं उसे हरगिज नहीं पहनने वाली.’’ कह कर कविता तेजी से बाथरूम की ओर बढ़ गई.

लड़की ‘न’ कहे तो उस की ‘हां’ समझना चाहिए, सोच कर अजय के होंठों पर मुसकान फैल गई. अजय पहले ही तैयार हो चुका था. इसलिए वह बैठ कर अखबार पढ़ने लगा. कुछ देर बाद जब कविता नहा कर तैयार हुई तो मन ही मन खयाली पुलाव पका रहे अजय ने देखा तो जैसे उस के अरमान बिखर कर रह गए. कविता ने लाल जोड़ा नहीं पहना था. उस ने मेहंदी कलर का सलवारसूट पहन रखा था. उस सलवार सूट में भी उस का सौंदर्य कयामत ढा रहा था. भीगे बालों से टपकती बूंदें उस के चेहरे पर आ कर ठहर गई थी, जिस से भीगाभीगा उस का सौंदर्य दिल को लुभाने वाला था. अजय बेकाबू हो उठा और उस ने कविता को बांहों में भर लिया और उस के गालों को चूम लिया.

कविता स्तब्ध रह गई. जीजा ने यह क्या गजब कर डाला. किसी तरह उस ने स्वयं को अजय के चंगुल से आजाद किया और कमरे से निकल भागी. तभी सास भी घर लौट आई. जीजा की हरकत से कविता का दिल खिल गया. वह सोचने लगी कि मैं इतनी गजब की सुंदर हूं कि जीजा को अपनी बीवी फीकी लगती है. जबकि उन्होंने दीदी से प्रेम विवाह किया है. दोपहर को अजय को भोजन कराने के बाद उषा किसी काम से बाजार चली गई. अजय कविता के कमरे में गया और उस के पास बैठते हुए बोला, ‘‘कविता जब से तुम को लाल जोड़े में देखा है, दिल वश में नहीं है. कुछ करो कविता, वरना मैं तुम्हारे वियोग में तड़पतड़प कर मर जाऊंगा.’’

‘‘अब मैं क्या कर सकती हूं, आप की शादी तो सरिता दीदी से हो गई और वह भी आप ने लव मैरिज की है.’’

‘‘तुम पहले मिल जाती तो सरिता से बिलकुल शादी नहीं करता. लेकिन अब भी देर नहीं हुई है शादी टूटने में कितनी देर लगती है. तुम हां बोलो तो मैं सरिता को तलाक दे कर तुम से विवाह करने का जतन करूं.’’ अजय बेबाकी से बोला.

‘‘धत्त,’’ कविता हंसते हुए बैड से उठ खड़ी हुई, ‘‘जीजा, तुम पागल हो गए हो.’’

उस के बाद उस ने हाथ छुड़ाया और कमरे से जाने लगी तो अजय बेसब्र हो उठा और उस का हाथ पकड़ कर खींच कर बैड पर गिरा लिया. इस के बाद वह उसे पागलों की तरह चूमने लगा. कविता के कुंवारे बदन को परपुरुष का कामुक स्पर्श मिला तो वह भी बहक गई. उस के बाद उन के बीच अनैतिक रिश्ता कायम हो गया. कविता को अपने जीजा के प्यार में गजब का न भूलने वाला आनंद मिला. इस के बाद जब तक अजय रहा, वह कविता के साथ मजे लेता रहा. संबंधों का यह सिलसिला चलता रहा. दूसरी ओर सरिता ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम तनु रखा गया. लेकिन अजय तो कविता के प्यार में पागल था. अब वह ससुराल के अधिक चक्कर लगाने लगा.

ससुराल वालों का माथा ठनका. जब नजर रखी तो उन्होंने कविता के साथ अजय की खिचड़ी पकती देखी. इस से पहले कि कोई अनर्थ हो जाए राजेश चंद्र ने बेटी कविता का विवाह कौशांबी के चरवा गांव निवासी नीरज से कर दिया. यह 5 साल पहले की बात है. विवाह का एक साल बीततेबीतते कविता भी एक बेटी की मां बन गई. अब वह कभीकभार ही मायके आ पाती थी. उस के आने पर अजय ससुराल पहुंच जाता था. दोनों की चाहत तन मिलने से कुछ समय के लिए पूरी हो जाती, लेकिन फिर वही पहले जैसा हाल हो जाता.  दोनों को अपने बीच की दूरी बहुत अखर रही थी. कविता पूरी तरह से अजय के प्यार में रंगी थी. इसलिए उस का ससुराल में मन नहीं लगता था. एक साल पहले वह ससुराल से मायके आई तो वापस लौट कर ससुराल नहीं गई.

अजय की खुशी का ठिकाना न रहा. वह पहले की भांति उस से मिलने जाने लगा. अजय की ससुराल वाले सब जान कर भी कुछ न कर पाते. वह चुपचाप तमाशा देखते रहे. सरिता को भी अपने पति के अपनी बहन कविता से संबंध की जानकारी हो गई. इस के बाद अजय और सरिता में विवाद होने लगा. अजय एक बहन का पति था तो दूसरे का प्रेमी. वह दोनों के जीवन से खेल रहा था. 13 अक्तूबर को अजय इलैक्ट्रौनिक्स का सामान खरीदने के लिए सुबह प्रयागराज चला गया. शाम 6 बजे जब वह घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद नहीं था, धक्का देते ही खुल गया. जैसे ही वह अंदर पहुंचा तो कमरे में उस की पत्नी सरिता और 7 वर्षीय बेटी तनु की लाशें पड़ी थीं. यह देख कर वह चीखनेचिल्लाने लगा.

शोर सुन कर आसपास के लोग वहां आ गए. घटना की खबर मिलने पर क्षेत्र के विधायक शीतला प्रसाद पटेल भी वहां पहुंच गए. अजय के कमरे में उस की पत्नी व बेटी की लाशें देखने के बाद उन्होंने सैनी कोतवाली के इंसपेक्टर प्रदीप सिंह को घटना की सूचना दे दी. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह ने अपने उच्चाधिकारियों को दोहरे हत्याकांड की सूचना दे दी. फिर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने लाशों का निरीक्षण किया. सरिता की लाश कमरे में मेज के पास जमीन पर पड़ी थी. उस के गले को चाकू से रेता गया था. शरीर पर भी 4-5 घाव के निशान थे.

लाश के पास काफी खून पड़ा था, जो सूख चुका था. लाश अकड़ी हुई थी. दरवाजे के पास सरिता की बेटी तनु की लाश पड़ी थी. उस के गले पर दबाए जाने के निशान मौजूद थे. तनु की लाश में काफी चींटियां लग गई थीं. निरीक्षण करने के बाद अनुमान लगाया गया कि दिन में किसी वक्त दोनों को मारा गया है. घर में किसी व्यक्ति द्वारा जबरन घुसने का कोई सबूत नहीं मिला. न ही आसपास पड़ोस में किसी ने घटना को अंजाम देने के समय किसी प्रकार का शोरशराबा सुना था. इस का मतलब यह कि हत्यारा कोई परिचित व्यक्ति है. इसी बीच एसपी अभिनंदन, एएसपी समर बहादुर सिंह और सीओ (सिराथू) श्यामकांत भी डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए. फोरैंसिक टीम साक्ष्य जुटाने में लग गई.

उच्चाधिकारियों ने लाश व घटनास्थल का निरीक्षण किया. तत्पश्चात अजय साहू से पूछताछ की तो उस ने सुबह प्रयागराज जाने और शाम 6 बजे घर आने पर घटना का पता होने की बात बताई. सीसीटीवी फुटेज देखी गई. लेकिन कोई संदेहास्पद व्यक्ति नहीं दिखा. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह को अजय पर ही शक था. उन्होंने अपना शक एसपी अभिनंदन को बताया. एसपी अभिनंदन की सोच भी वही थी. अजय ने बताया था कि वह दोपहर 12 बजे के करीब प्रयागराज गया था. उस के बाद ही लगभग 2-3 बजे घटना हुई होगी. लेकिन 3-4 घंटे में लाश अकड़ नहीं सकती.

ऐसा तभी होता है, जब घटना हुए 10-12 घंटे का समय हो जाए. यानी सुबह के समय तब अजय घर पर ही था. अजय ने ही हत्या कर के सारी कहानी गढ़ी है, इस का विश्वास हुआ तो अजय से और सख्ती से पूछताछ के लिए उसे थाने ले जाया गया. लेकिन इस से पहले दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया. अजय के ससुर राजेश चंद्र और छोटी साली सविता आई तो इंसपेक्टर प्रदीप सिंह ने उन से पूछताछ की. राजेश चंद्र काफी दुखी थे. उन्होंने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पूछताछ करने पर वह चुप ही रहे लेकिन सविता फट पड़ी. उस ने बताया कि कविता दीदी और जीजा का आपस में काफी लगाव था. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह का शक सही साबित हुआ.

इस के बाद अजय से थाने में सख्ती से उन्होंने पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और इस जुर्म में उस ने साली कविता के भी शामिल होने की बात स्वीकारी. दोनों ने ही मिल कर सरिता की हत्या की साजिश रची थी. इस के बाद कविता को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. पूछताछ में पता चला कि अजय और कविता एकदूसरे से विवाह कर के साथ रहना चाहते थे. सरिता उन के संबंधों का विरोध कर रही थी, वह उन के रास्ते में आ रही थी. इसलिए कविता और अजय ने मिल कर सरिता की हत्या की योजना बनाई. अजय ने कविता से बात करने के लिए दूसरा नंबर ले रखा था, उसी से बराबर कविता से बात करता था.

उसी नंबर से बात कर के उन्होंने हत्या का षडयंत्र रचा. 13 अक्तूबर की सुबह 6 बजे अजय ने घर में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से नींद में सोई सरिता का गला काट दिया. सरिता चीख भी न सकी, जमीन पर गिर कर तड़पने लगी. अजय ने फिर उस के शरीर पर कई वार किए, जिस से सरिता की मौत हो गई. अपने पिता के हाथों मां को मरता देख कर मासूम तनु जाग गई और डर की वजह से रोते हुए बाहर की तरफ भागने लगी. अजय ने दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही उसे पकड़ लिया और उस का सिर दीवार पर पटक दिया.

सिर में लगी चोट से तनु बेहोश हो गई. अजय ने फिर उस का गला घोंट कर उस की भी हत्या कर दी. अजय तनु को मारना नहीं चाहता था लेकिन भेद खुलने के डर से उसे बेटी की हत्या करनी पड़ी. उस ने हत्या के बाद कविता से मोबाइल पर बात की और दोनों की हत्या करने की बात बता दी. इस के बाद वह बाजार गया और कई जगह जानबूझ कर गया, जिस से वह सीसीटीवी कैमरों में कैद में आ जाए. एक जगह उस ने समोसा खरीद कर भी खाया. इस के बाद वह प्रयागराज चला गया. वहां वह शाहगंज इलाके में कई उन इलैक्ट्रौनिक सामानों की दुकानों पर गया, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे. अपने प्रयागराज में होने के सबूत छोड़ कर शाम को वह कौशांबी लौट

आया. यहां लौटने के बाद भी कुछ जगहों पर गया. शाम 6 बजे वह कमरे पर पहुंचा और लाश देख कर शोर मचाने लगा. लेकिन काफी होशियारी के बाद भी वह कविता के साथ कानून के शिकंजे में फंस गया. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारि

UP News : पिटाई से तंग आकर पत्नी ने प्रेमी से कराया पति का कत्ल

UP News : दंपति के बीच आपसी विवाद होना एक आम बात होती है. लेकिन समझदार लोग पहल कर के खुद ही विवादों को निपटा लेते हैं. अवतार सिंह और अंजना यादव भी अगर अपना अहंकार छोड़ कर घरेलू विवाद निपटाने की कोशिश करते तो शायद…

उत्तर प्रदेश का एक मशहूर जिला है ललितपुर. यह झांसी डिवीजन के तहत आता है. महाराजा सोमेश सिंह ने अपनी पत्नी ललिता देवी की यादगार में इस का नाम ललितपुर रखा था. साल 1974 में यह जिले के रूप में अस्तित्व में आया. जिले की सीमाएं झांसी व दतिया से जुड़ी हैं. झांसी जहां ऐतिहासिक क्रांति के लिए मशहूर है तो दतिया दूधदही व खोया व्यापार के लिए. जबकि ललितपुर उधार व्यापार के लिए चर्चित है. इन 3 जिलों को मिला कर एक कहावत बहुत मशहूर है ‘झांसी गले की फांसी, दतिया गले का हार. ललितपुर न छोडि़ए, जब तक मिले उधार.’

ललितपुर जिला ऐतिहासिक तथा धर्मस्थलों के लिए भी मशहूर है. यहां कई प्रसिद्ध मंदिर हैं. भारत के 3 बांधों में प्रमुख गोविंद सागर बांध इसी ललितपुर में स्थित है. इस बांध को लव पौइंट के नाम से भी जाना जाता है. इसी ललितपुर शहर में एक गांव है जिजयावन. यादव बाहुल्य इस गांव में शेर सिंह यादव अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी कमला के अलावा एक बेटी रामरती और बेटा अवतार सिंह था. शेर सिंह की आजीविका खेती थी. उसी की आय से उस ने बेटी का ब्याह कर उसे ससुराल भेजा था. शेर सिंह यादव खुद तो जीवन भर खेत जोतता रहा, लेकिन वह अपने बेटे अवतार सिंह को पढ़ालिखा कर अच्छी नौकरी दिलवाना चाहता था.

लेकिन उस की यह तमन्ना अधूरी ही रह गई. क्योंकि अवतार सिंह का मन पढ़ाई में नहीं लगा. हाईस्कूल में फेल होने के बाद उस ने पढ़ाई बंद कर दी और खेती के काम में पिता का हाथ बंटाने लगा. अवतार सिंह का मन खेतीकिसानी में लग गया तो शेर सिंह ने उस का विवाह भसौरा गांव निवासी राजकुमार यादव की बेटी अंजना उर्फ सुखदेवी के साथ कर दिया. अंजना थी तो सांवली, लेकिन उस का बदन भरा हुआ और नाकनक्श सुंदर थे. अवतार सिंह उस की अदाओं पर फिदा था, इसी कारण वह धीरधीरे जोरू का गुलाम बन गया. दोनों की शादी को 5 साल बीत गए. इस बीच अंजना 2 बेटियों की मां बन गई.

अंजना की सास कमला की दिली तमन्ना थी कि उस का एक पोता हो. लेकिन जब अंजना ने एक के बाद एक 2 बेटियों को जन्म दिया तो कमला गम में डूब गई. इसी गम से वह बीमार रहने लगी और फिर एक दिन उस की मृत्यु हो गई. पत्नी छोड़ कर चली गई तो शेर सिंह को भी संसार से मोह नहीं रह गया. उस ने साधु वेश धारण कर लिया और तीर्थस्थानों के भ्रमण करने लगा. वह महीने दो महीने में घर आता, हफ्तादस दिन रहता, उस के बाद फिर भ्रमण पर निकल जाता. ससुर के घर छोड़ने से जहां अंजना खुश थी, वहीं अवतार सिंह को इस बात का गहरा सदमा लगा था. अवतार सिंह का मानना था कि मां की मौत की जिम्मेदार उस की पत्नी अंजना ही है.

पिता भी उसी के कारण घर छोड़ कर गए हैं. कभीकभी वह अंजना को इस बात का ताना भी देता था. इसे ले कर दोनों में झगड़ा होता, फिर अंजना रूठ कर मायके चली जाती. अवतार सिंह के मनाने पर ही वह घर वापस आती थी. पतिपत्नी के बीच तनाव बढ़ा, तो उन के अंतरंग संबंधों पर भी असर पड़ने लगा. जब मन में दूरियां पैदा हो जाएं तो तन अपने आप दूर हो जाते हैं. अब महीनों तक दोनों देह मिलन से भी दूर रहते. अंजना चाहती थी कि प्रणय की पहल अवतार सिंह करे, जबकि अवतार सिंह चाहता था कि अंजना खुद उस के पास आए. इसी जिद पर दोनों अड़े रहते. तनाव पैदा होने से, घर में एक बुराई और घुस आई. अवतार सिंह को शराब पीने की आदत पड़ गई. वह शराब पी कर आने लगा. इस से मनमुटाव और बढ़ गया.

अवतार सिंह की जानपहचान कल्याण उर्फ काले कुशवाहा से थी. कल्याण पड़ोस के गांव मिर्चवारा का रहने वाला था और काश्तकार था. अवतार और कल्याण के खेत मिले हुए थे सो दोनों की खेतों पर अकसर मुलाकात हो जाती थी. कल्याण की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. उस के पास बुलेरो कार भी थी, जिसे मोहन कुशवाहा चलाता था. बोलेरो कार बुकिंग पर चलती थी, जिस से कल्याण को अतिरिक्त आय होती थी. मोहन कुशवाहा ड्राइवर ही नहीं बल्कि उस का दाहिना हाथ था. कल्याण उर्फ काले कुशवाहा शराब व शबाब का शौकीन था. अवतार सिंह को भी शराब पीने की लत थी, सो उस ने कल्याण से दोस्ती कर ली. अब दोनों की महफिल साथसाथ जमने लगी. चूंकि अवतार सिंह को पैसा खर्च नहीं करना पड़ता था सो वह उस के बुलावे पर तुरंत उस के पास पहुंच जाता था.

एक रोज कल्याण शराब की बोतल ले कर अवतार सिंह के घर आ पहुंचा. उस रोज पहली बार कल्याण की नजर अवतार की पत्नी अंजना पर पड़ी. पहली ही नजर में अंजना उस के दिल में रचबस गई. अंजना भी हृष्टपुष्ट कल्याण को देख कर प्रभावित हुई. दरअसल अंजना अपने पति अवतार सिंह से संतुष्ट नहीं थी. उस का जिस्मानी रिश्ता खत्म सा हो गया था. अत: उस ने मन ही मन कल्याण को अपने प्यार के जाल में फंसाने का निश्चय कर लिया. कल्याण कुशवाहा का अंजना के घर आनाजाना शुरू हुआ, तो दोनों के बीच नजदीकियां भी बढ़ने लगीं. 2 बेटियों की मां बन जाने के बाद भी अंजना का यौवन अभी ढला नहीं था. अंजना की आंखों में जब उसे मूक निमंत्रण दिखने लगा, तो कामना की प्यास भी बढ़ गई.

अंजना की नजदीकियां पाने के लिए कल्याण ने अवतार सिंह को ज्यादा भाव देना शुरू कर दिया. वह उसे मुफ्त में शराब तो पिलाता ही था, अब उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. कल्याण का घर आना बढ़ा तो अंजना समझ गई कि कल्याण पर उस के हुस्न का जादू चल गया है. वह अपने हावभाव से उस की प्यास और भड़काने लगी. बेताबी दोनों ओर बढ़ती गई. अब उन्हें मौके का इंतजार था. एक रोज कल्याण ने अंजना को पाने का मन बनाया और दोपहर को अवतार सिंह के घर पहुंच गया. अंजना उस समय घर में अकेली थी. बच्चे स्कूल गए थे और अवतार सिंह खेतों पर.

मौका अच्छा था. कल्याण को देख अंजना के होंठों पर शरारती मुसकान बिखरी और उस ने पूछा, ‘‘तुम तो शाम को अंगूर की बेटी को होंठों पर लगाने यहां आते थे, आज दिन में रास्ता कैसे भूल गए?’’

‘‘अंजना, अंगूर की बेटी से होंठों की प्यास कहां बुझती है, उल्टा और भड़क जाती है. सोचा कि आज शराब से भी ज्यादा नशीली, उस से ज्यादा मादक अपनी अंजना का नशा कर लूं.’’ कहते हुए कल्याण ने उस के कंधे पर हाथ रख दिए.

‘‘तुम ने न मुझे हाथ लगाया, न होंठ लगाए. फिर कैसे कह सकते हो कि मैं शराब से ज्यादा मादक और नशीली हूं.’’ अंजना ने अपनी अंगुलियों से कल्याण की छाती सहलानी शुरू कर दी. यह मिलन का साफ आमंत्रण था. कल्याण का हौसला बढ़ा. उस ने अंजना को अपनी बांहों में भर लिया. इस के बाद दोनों ने हसरतें पूरी कीं. उस रोज के बाद कल्याण तथा अंजना के बीच अकसर यह खेल खेला जाने लगा. दोनों को न मर्यादा की परवाह थी, न रिश्तेनातों की. अंजना अब खूब बन संवर कर रहने लगी. अकसर दोपहर को कल्याण का अवतार सिंह के घर आना, लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बनना ही था. धीरेधीरे पासपड़ोस वाले समझ गए कि दोनों के बीच कौन सी खिचड़ी पक रही है.

चर्चा फैली तो बात अवतार सिंह के कानों तक पहुंची. उस ने पत्नी से जवाबतलब किया तो अंजना बोली, ‘‘कल्याण तो तुम्हारे साथ पीनेखाने के लिए आता है. इसी बात की जलन लोगों को होती है. तुम्हें अगर उस के आने से परेशानी है, तो तुम ही उसे मना कर देना. मैं बेकार में क्यों बुरी बनूं.’’

पत्नी की बातों से अवतार सिंह को लगा कि गांव वाले बिना वजह बातें कर रहे हैं. अंजना गलत नहीं है. वह शांत हो कर चारपाई पर जा लेटा. अवतार सिंह ने अंजना की बात पर यकीन तो कर लिया, लेकिन मन का शक दूर नहीं हुआ. इधर अंजना ने सारी बात कल्याण को बताई. इस के बाद दोनों मिलन में बेहद सतर्कता बरतने लगे. अब जब अंजना फोन पर उसे सूचना देती, तभी कल्याण घर आता. उस रोज अवतार सिंह ललितपुर जाने की बात कह कर घर से निकला, लेकिन किसी वजह से 2 घंटे बाद ही घर वापस आ गया. वह घर के अंदर कमरे के पास पहुंचा तभी उसे कमरे के अंदर से खुसरफुसर की आवाज सुनाई दी.

आवाज सुन कर वह समझ गया कि कमरे में अंजना के साथ कोई मर्द भी है. उस की आंखों में खून उतर आया. उस ने पूरी ताकत से दरवाजे पर लात मारी. भड़ाक से दरवाजा खुला, सामने बिस्तर पर कल्याण और अंजना आपत्तिजनक हालत में थे. अवतार सिंह पूरी ताकत से दहाड़ा, ‘‘हरामजादे तेरी यह हिम्मत कि तू मेरे ही घर में घुस कर मेरी इज्जत लूटे. मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा.’’

गुस्से से आग बबूला अवतार सिंह आंगन के कोने में रखा डंडा लेने लपका. तब तक कल्याण और अंजना संभल चुके थे. कल्याण तो भाग गया, लेकिन अंजना कहां जाती. अवतार सिंह ने उस की जम कर पिटाई की, और गालियां बकता रहा. फिर वह सीधा देशी शराब के ठेके पर चला गया. वहां से वह धुत हो कर लौटा, फिर पत्नी की खबर लेनी शुरू कर दी. उस रोज पूरा गांव जान गया कि अंजना का कल्याण से गलत रिश्ता है. अंजना तो कल्याण की दीवानी बन चुकी थी. अत: पिटाई के बावजूद भी उस ने कल्याण का साथ नहीं छोड़ा. अब वह घर के बजाए खेतखलिहान व बागबगीचे में प्रेमी से मिलने लगी. इस की जानकारी जब अवतार सिंह को हुई तो उस ने फिर अंजना को पीटा और चेतावनी दी कि आज के बाद जिस दिन वह उसे रंगे हाथ पकड़ लेगा, उस दिन बहुत बुरा होगा. पति की इस चेतावनी से अंजना बुरी तरह डर गई थी.

11 अगस्त, 2020 को अचानक अवतार सिंह लापता हो गया. कई दिन बीत जाने के बाद जब गांव वालों को अवतार सिंह नहीं दिखा तो लोगों ने अंजना से उस के बारे में पूछा. उस ने लोगों को बताया कि उस के पति मथुरा वृंदावन गए हैं. हफ्तादस दिन में वापस आ जाएंगे. अंजना का जवाब पा कर लोग संतुष्ट हो गए. लगभग एक हफ्ते बाद अंजना का ससुर शेर सिंह तीर्थ स्थानों का भ्रमण कर घर लौटा तो अंजना ने उसे भी बता दिया कि अवतार सिंह मथुरा गया है. इधर 15 अगस्त, 2020 को वानपुर थानाप्रभारी राजकुमार यादव को सूचना मिली कि खिरिया छतारा गांव के पास नहर की पटरी के किनारे झाडि़यों में एक आदमी की लाश पड़ी है. जिस से दुर्गंध आ रही है.

सूचना से राजकुमार यादव ने अपने अधिकारियों को अवगत कराया फिर चौकी इंचार्ज कृष्ण कुमार, एसआई दया शंकर, सिपाही रजनीश चौहान और देवेंद्र कुमार को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. उस समय वहां गांव वालों की भीड़ जुटी थी. थानाप्रभारी ने झाडि़यों से शव बाहर निकलवाया, जो एक चादर में लिपटा था. चादर से शव निकाला तो वह 34-35 साल के युवक का था. शव की हालत देख कर अनुमान लगाया जा सकता था कि उस की हत्या 4-5 दिन पहले की गई होगी. बरसात के कारण शव फूल भी गया था. देखने से प्रतीत हो रहा था कि युवक की हत्या गला घोंट कर की गई थी.

थानाप्रभारी राजकुमार यादव अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी एस.एस. बेग, एएसपी बृजेश कुमार सिंह तथा डीएसपी केशव नाथ घटनास्थल आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो पता चला कि युवक की हत्या कहीं और की गई थी और शव को नहर किनारे झाडि़यों में फेंका गया था. पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में सैकड़ों लोग शव को देख चुके थे. पर कोई भी उसे पहचान नहीं पा रहा था. इस से अधिकारियों ने अंदाजा लगाया कि मृतक आसपास के गांव का नहीं बल्कि कहीं दूरदराज का है. तब अधिकारियों ने शव का फोटो खिंचवा कर पोस्टमार्टम के लिए ललितपुर के जिला अस्पताल भिजवा दिया.

एसपी एम.एम. बेग ने इस ब्लाइंड मर्डर का परदाफाश करने की जिम्मेदारी थानाप्रभारी राजकुमार यादव को सौंपी. सहयोग के लिए एसओजी व सर्विलांश टीम को भी लगाया. पूरी टीम की कमान एएसपी बृजेश कुमार सिंह को सौंपी गई. थानाप्रभारी राजकुमार यादव ने इस केस को खोलने के लिए पूरी ताकत झोंक दी. मुखबिरों को गांवगांव भेजा. पासपड़ोस के कई थानों से गुमशुदा लोगों की जानकारी जुटाई पर उस अज्ञात शव की किसी ने शिनाख्त नहीं की. तब यादव को शक हुआ कि मृतक किसी दूरदराज गांव का हो सकता है. इस पर थानाप्रभारी ने दूरदराज के गांवों में अज्ञात युवक की लाश बरामद करने की मुरादी कराई.

जिजयावन गांव का शेर सिंह यादव उस समय खेत पर जा रहा था. अपने गांव में डुग्गी पिटती देख वह रुक गया. ऐलान सुना तो वह अंदर से कांप सा गया. क्योंकि उस का बेटा अवतार सिंह भी 11 अगस्त से घर से लापता था. खेत पर जाना भूल कर शेर सिंह ने पड़ोसी रामसिंह को साथ लिया और थाना वानपुर पहुंच कर थानाप्रभारी राजकुमार यादव से मिला. थानाप्रभारी ने जब शेर सिंह को लाश के फोटो, कपड़े, चादर आदि दिखाई तो उन दोनों ने उस की शिनाख्त अवतार सिंह के तौर पर कर दी. पड़ोसी रामसिंह ने थानाप्रभारी राजकुमार यादव को यह भी जानकारी दी कि अवतार सिंह के घर मिर्चवारा गांव के कल्याण उर्फ काले का आनाजाना था. काले तथा अवतार सिंह की बीवी अंजना के बीच नाजायज रिश्ता था. अवतार सिंह इस का विरोध करता था. संभव है, इसी विरोध के कारण उस की हत्या की गई हो.

अवतार सिंह की हत्या का सुराग मिला तो पुलिस टीम अंजना से पूछताछ करने उस के घर पहुंच गई. अंजना ने पूछताछ में बताया कि उस के पति मथुरा गए हैं. वहां से कहीं और चले गए होंगे. 2-4 दिन बाद आ जाएंगे. लेकिन जब पुलिस ने बताया कि उस के पति की हत्या हो गई है और उस के ससुर शेर सिंह ने फोटो चादर से उस की शिनाख्त भी कर ली है. तब अंजना ने जवाब दिया कि उस के ससुर वृद्ध हैं. बाबा बन गए हैं. उन की अक्ल कमजोर हो गई, इसलिए उन्होंने हत्या की बात मान ली और उन की गलत शिनाख्त कर दी. पर सच्चाई यह है कि पति तीर्थ करने गए हैं. आज नहीं तो कल आ ही जाएंगे. बिना सबूत के पुलिस टीम ने अंजना को गिरफ्तार करना उचित नहीं समझा. पुलिस ने पूछताछ के बहाने उस का मोबाइल फोन जरूर ले लिया तथा उस की निगरानी के लिए पुलिस का पहरा बिठा दिया.

पुलिस ने अंजना का मोबाइल फोन खंगाला तो पता चला कि अंजना एक नंबर पर ज्यादा बातें करती है. पुलिस ने उस नंबर का पता किया तो जानकारी मिली कि वह नंबर अंजना के प्रेमी कल्याण उर्फ काले का है और वह हर रोज उस से बात करती है. फिर क्या था, पुलिस टीम ने 3 सितंबर, 2020 की सुबह अंजना को उस के घर से हिरासत में ले लिया और थाना वानपुर ले आई. फिर अंजना की ही मदद से पुलिस टीम ने कल्याण उर्फ काले को भी भसौरा तिराहे से गिरफ्तार कर लिया. उस समय वह अपनी बोलेरो यूपी94एफ 4284 पर सवार था और ड्राइवर मोहन कुशवाहा का इंतजार कर रहा था. उसे मय बोलेरो थाना वानपुर लाया गया.

थाने पर जब उस ने अंजना को देखा तो समझ गया कि अवतार सिंह की हत्या का राज खुल गया है. जब पुलिस ने कल्याण से अवतार सिंह की हत्या के बारे में पूछा तो उस ने सहज ही हत्या का जुर्म कबूल कर लिया और अपनी बोलेरो से तार का वह टुकड़ा भी बरामद करा दिया जिस से उस ने अवतार सिंह का गला घोंटा था. कल्याण के टूटते ही अंजना भी टूट गई और पति की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. कल्याण उर्फ काले कुशवाहा ने पुलिस को बताया कि अवतार सिंह की पत्नी अंजना से उस के नाजायज संबंध हो गए थे. इस रिश्ते की जानकारी अवतार को हुई तो वह विरोध करने लगा और अंजना को पीटने लगा.

अंजना की पिटाई उस से बरदाश्त नहीं हो रही थी. इसलिए उस ने अंजना और अपने ड्राइवर मोहन कुशवाहा के साथ मिल कर अवतार की हत्या की योजना बनाई और सही समय का इंतजार करने लगा. 11 अगस्त, 2020 की रात 8 बजे अंजना ने फोन कर के कल्याण को जानकारी दी कि अवतार सिंह फसल की रखवाली के लिए खेत पर गया है. वह रात को ट्यूबवैल वाली कोठरी में सोएगा. यह पता चलते ही वह अपनी बोलेरो यूपी94एफ 4284 से ड्राइवर मोहन कुशवाहा के साथ जिजयावन गांव के बाहर पहुंचा. वहां योजना के तहत अंजना उस का पहले से ही इंतजार कर रही थी. उस के बाद वह तीनों खेत पर पहुंचे. जहां अवतार सिंह कोठरी में जाग रहा था.

वहां पहुंचते ही तीनों ने अवतार सिंह को दबोच लिया, फिर बिजली के तार से अवतार सिंह का गला घोंट दिया. हत्या के बाद तीनों ने शव चादर में लपेटा और बोलेरो गाड़ी में रख कर वहां से 20 किलोमीटर दूर खिरिया छतारा गांव के बाहर नहर की पटरी वाली झाडि़यों के बीच फेंक दिया. शव ठिकाने लगाने के बाद सभी लोग अपनेअपने घर चले गए. चूंकि कल्याण उर्फ काले ने ड्राइवर मोहन कुशवाहा को भी हत्या में शामिल होना बताया था, अत: पुलिस ने तुरंत काररवाई करते हुए 4 सितंबर की दोपहर 12 बजे मोहन कुशवाहा को भी ललितपुर बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार कर लिया. थाना वानपुर की हवालात में जब उस ने कल्याण को देखा तो सब कुछ समझ गया. पूछताछ में उस ने सहज ही हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

पुलिस ने हत्यारोपित कल्याण उर्फ काले, मोहन कुशवाहा तथा अंजना यादव के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201/120बी के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें 5 सितंबर 2020 को ललितपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Mumbai Crime News : पत्नी पर शक था इसलिए दुपट्टे से गला घोंटकर की हत्या

Mumbai Crime News : संदेह और कलह ऐसी चीजें हैं, जो हंसतेखेलते परिवार को बरबादी के कगार पर ले जा कर खड़ा कर देती हैं. अंबुज ने तो दोनों को ही प्यार से पाल रखा था, नतीजा यह…

नवी मुंबई के उपनगर घनसोली के रहने वाले महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी की बहू नीलम और बेटा अंबुज तिवारी 22 जुलाई, 2020 की शाम साढ़े 5 बजे बिना किसी को बताए घर से निकल गए. पतिपत्नी थे, कहीं भी घूमने जा सकते थे, इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया. घर वाले तब परेशान हुए, जब दोनों शाम को लौट कर नहीं आए. परेशानी तब हदें पार कर गई जब अगले दिन भी दोनों न तो घर लौटे और न ही फोन किया. दोनों के फोन भी स्विच्ड औफ थे, सो उन से बात भी नहीं हो पा रही थी. मामला जवान बहू और बेटे का था, इसलिए घर वाले सोच रहे थे कि दोनों जवान हैं, कहीं दूर घूमने भी जा सकते हैं. फिर भी जैसेजैसे समय बीत रहा था, घर वालों की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, इस की खास वजह थी उन के मोबाइल स्विच्ड औफ होना.

हैरानपरेशान महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी पूरी रात पूरे दिन 10 बजे तक उन की तलाश जानपहचान वालों और नातेरिश्तेदारों के यहां करते रहे. जब कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली तो उन के मन में किसी तरह की अनहोनी को ले कर तरहतरह के विचार आने लगे. जब सारी कोशिशें बेकार गईं तो महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी रात साढ़े 10 बजे कुछ नातेरिश्तेदारों के साथ थाना रबाले पहुंचे और थानाप्रभारी योगेश गावड़े को सारी बातें बता दीं. योगेश गावड़े ने उन के बेटे और बहू की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होते ही थानाप्रभारी योगेश गावड़े हरकत में आ गए.

उन्होंने इस मामले की जानकारी पहले पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, जौइंट सीपी राजकुमार व्हटकर, डीसीपी जोन-1 पंकज दहाणे, एसीपी (वाशी डिवीजन) विनायक वस्त के साथ नवी मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. इस के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इस की जांच की जिम्मेदारी इंसपेक्टर गिरधर गोरे को सौंप दी. उन की सहायता के लिए इंसपेक्टर उमेश गवली, सहायक इंसपेक्टर तुकाराम निंबालकर, प्रवीण फड़तरे, संदीप पाटिल और अमित शेलार को नियुक्त किया गया. जांच की जिम्मेदारी मिलते ही इंसपेक्टर गिरधर गोरे ने अपने सहायकों के साथ मामले पर गहराई से विचार कर के जांच की रूपरेखा तैयार की ताकि जांच तेजी से हो सके.

सब से पहले उन्होंने गुमशुदा अंबुज तिवारी और उस की पत्नी नीलम तिवारी के हुलिए सहित उन की फोटो नवी मुंबई के सभी पुलिस थानों को भेजे. साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि उन के बारे में कहीं से कोई सूचना मिले तो जानकारी दें. साथ ही तेजतर्रार मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया था. इस के बाद इंसपेक्टर गिरधर गोरे ने अंबुज और नीलम के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए. जहांजहां उन के मिलने की संभावना थी, गिरधर गोरे ने वहांवहां अपनी टीम भेजी. लेकिन अंबुज और नीलम के बारे में कहीं से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली, जिस के सहारे उन तक पहुंचा जा सके. उन के पड़ोसियों ने यह जरूर बताया कि अंबुज और नीलम की अकसर तकरार होती थी. लेकिन दोनों घर छोड़ कर कहां गए होंगे, किसी को कोई जानकारी नहीं थी. जिस फर्म में अंबुज काम करता था, वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

इंसपेक्टर गिरधर गोरे अपनी टीम के साथ जांच तो कर रहे थे, लेकिन उन की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि पतिपत्नी दोनों वयस्क थे, जहां जाना चाहते, आजा सकते थे. फिर लौकडाउन में उन का बिना किसी को कुछ बताए घर से निकल जाना और पूरे दिनरात घर न आना, रहस्यमय था. कहां गए होंगे और क्यों गए होंगे, यह गुत्थी सुलझ नहीं रही थी. इस गुत्थी को सुलझाने में पुलिस टीम को 4 से 5 दिन लग गए. जब यह गुत्थी सुलझी तो जांच टीम अवाक रह गई. मुखबिर ने दिया सूत्र 28 जुलाई, 2020 को इंसपेक्टर गिरधर गोरे को एक मुखबिर ने खबर दी कि जिस अंबुज और नीलम तिवारी को वह खोज रहे हैं, उन्हें घनसोली की अर्जुनवाड़ी में देखा गया है. यह खबर मिलते ही इंसपेक्टर गिरधर गोरे ने अपनी काररवाई के लिए टीम को सजग कर दिया.

उन की टीम ने छापा मार कर अंबुज तिवारी को अपनी गिरफ्त में लिया और उसे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ले जाया गया. अधिकारियों ने उस से फौरी तौर पर पूछताछ कर के जांच टीम के हवाले कर दिया.  जांच टीम ने जब उस से नीलम के बारे में पूछताछ की तो उस ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन जांच टीम उस की बातों से सहमत नहीं थी. उस के चेहरे से मक्कारी साफ झलक रही थी, वह कुछ छिपा रहा था. सच की तह में जाने के लिए जब उसे रिमांड पर लिया तो उसे बोलना पड़ा. अंबुज ने बताया कि उस ने अपने दोस्त के साथ मिल कर नीलम की हत्या कर दी है. उस ने आगे बताया कि नीलम के शव को प्लास्टिक के ड्रम में डाल कर वह और उस का दोस्त टैंपो से मुंबई-पुणे हाइवे होते हुए लोनावला के पास गांव दापोली के पास पहुंचे और लाश घनी झाडि़यों में छिपा दी.

पुलिस टीम को नीलम तिवारी का शव बरामद करना था. अंबुज तिवारी के बयान पर पुलिस टीम ने अपराध में शामिल उस के दोस्त श्रीकांत चौबे को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने अंबुज तिवारी की बातों की पुष्टि की. श्रीकांत चौबे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम दोनों को ले कर मुंबई-पुणे हाइवे के लोनावला, दापोली के बीच पहुंची और प्लास्टिक का वह ड्रम बरामद कर लिया. ड्रम का ढक्कन खोल कर नीलम तिवारी का शव बाहर निकाला गया फिर बारीकी से उस का निरीक्षण कर के पंचनामा बनाया गया. शव को पोस्टमार्टम के लिए मुंबई के गांधी अस्पताल भेज कर पुलिस टीम थाने लौट आई. पूछताछ में नीलम तिवारी हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस की पृष्ठभूमि कुछ इस तरह थी—

65 वर्षीय महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के लालगंज बाजार के रहने वाले थे. अच्छे काश्तकार होने के साथ वह एक उच्चकुल के ब्राह्मण थे. गांव में उन की काफी इज्जत थी. उन का पूरा परिवार गांव में रहता था. महेंद्रनाथ सालों पहले मुंबई आ बस गए. वह करीब 30 सालों से महानगर नवी मुंबई के घनसोली इलाके में रहते आ रहे थे और फलों का व्यवसाय करते थे. 28 वर्षीय अंबुज तिवारी उन का बेटा था, जिसे वह बहुत प्यार करते थे. स्वस्थ, सुंदर अंबुज तिवारी ने साइंस से अपनी पढ़ाई पूरी की थी. फलस्वरूप उसे मुंबई जैसे महानगर में नौकरी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ा. पढ़ाई पूरी कर के वह सन 2010 में नौकरी के लिए पिता के पास मुंबई आ गया था.

मुंबई में उसे कुर्ला की एक जानीमानी सीमेंट मिक्सिंग कंपनी में क्वालिटी सुपरवाइजर की नौकरी मिल गई. अंबुज तिवारी जिस फर्म में काम करता था, उसी में श्रीकांत चौबे भी नौकरी कर रहा था. वह फर्म में टैंपो ड्राइवर था. वह माल डिलिवरी करता था. 23 वर्षीय श्रीकांत जयनारायण चौबे भी मूलरूप से आजमगढ़ का ही रहने वाला था. जल्दी ही दोनों की जानपहचान दोस्ती में बदल गई. जब भी मौका मिलता, दोनों घूमनेफिरने निकल जाते थे.

 

अच्छी नौकरी और अंबुज की बढ़ती उम्र को देखते हुए महेंद्रनाथ तिवारी अंबुज की शादी कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना चाहते थे. उन्होंने जानपहचान और नातेरिश्तेदारी में अंबुज की शादी की बात चलाई तो उन्हें नीलम के बारे में जानकारी मिली. बातचीत के बाद 2016 में नीलम और अंबुज की शादी हो गई. शादी के बाद अंबुज ने कुछ दिनों के लिए नीलम को अपनी मां की सेवा के लिए गांव में छोड़ दिया था. वह खुद पिता के साथ मुंबई में रहता रहा. बीचबीच में वह छुट्टी ले कर गांव जाता रहता था. मगर नीलम इस से संतुष्ट नहीं थी. वह उस से इस बात की शिकायत करती थी कि उस के बिना उसे गांव अच्छा नहीं लगता. वह सारी रात उस को याद करकर के करवटें बदलती है. वैसे भी तुम्हें और पापा को खाना बनाने में तकलीफ होती होगी.

नीलम की शिकायत वाजिब थी. क्योंकि वह जवान और नईनवेली दुलहन थी. उस के भी अपने सपने और अरमान थे. उस का भी दिल पति के साथ रहने के लिए मचलता था, पर अंबुज की अपनी कुछ विवशताएं थीं. उस की मां बूढ़ी हो चली थी. मुंबई में वह पिता के साथ रहता था. घर छोटा था, ऐसे में वह घर में कैसे रहेगी. काफी सोचविचार के बाद उसे नीलम की जिद पर उसे मुंबई ले कर आना पड़ा. नीलम को अपने पति और ससुर के साथ रहते हुए लगभग एक साल से अधिक हो गया था. मुंबई आ कर नीलम ने घर और रसोई का सारा काम संभाल लिया था. पति के साथ नीलम बहुत खुश थी. मगर उस की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रही. उस के सुखी जीवन में परेशानी कुछ इस कदर आ कर बैठ गई कि उस का मानसम्मान सब रेत की दीवार की तरह ढह गया.

फोन बना परेशानी नीलम का कुसूर सिर्फ इतना था कि वह चंचल स्वभाव और खुले विचारों वाली हंसमुख और मिलनसार युवती थी. घर का कामकाज निपटा कर वह दिल बहलाने के लिए फोन पर अपनी फ्रैंड्स और मायके वालों के साथ चिपक जाती थी. इस बीच जब अंबुज को नीलम से बात करने की इच्छा होती थी तो उस का फोन बिजी रहता था, जिसे ले कर अंबुज के मन में तरहतरह के खयाल आने लगे थे. धीरेधीरे यही खयाल संदेह का वायरस बन कर अंबुज के दिमाग में बैठ गया. उसे लगा कि नीलम का गांव में किसी युवक के साथ चक्कर है. इस बारे में अंबुज ने जब नीलम से बात की तो वह स्तब्ध रह गई. फिर उस ने अपने आप को संभाल लिया और कहा कि यह सब उस के मन का वहम है.

नीलम के लाख सफाई देने के बाद भी संदेह का वायरस अंबुज के दिमाग से नहीं गया. वह बातबात पर अकसर नीलम से लड़ाई और मारपीट करने लगा. संदेह का वायरस उस के दिमाग में कुछ इस प्रकार घुसा था कि उस ने नीलम को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया. घटना वाली रात अंबुज पिता महेंद्रनाथ तिवारी को बिना बताए नीलम को यह कह कर साथ ले गया कि उस के दोस्त की बर्थडे पार्टी है. दोनों श्रीकांत चौबे के घर अर्जुनवाड़ी आ गए. अर्जुनवाड़ी में श्रीकांत चौबे के घर कोई पार्टी न देख नीलम को ठीक नहीं लगा क्योंकि अंबुज उसे झूठ बोल कर लाया था. इसलिए वह अंबुज से घर लौटने की जिद करने लगी. इस पर अंबुज ने उस के दुपट्टे से गला कस दिया और तब तक कसता रहा जब तक नीलम के प्राणपखेरू नहीं उड़ गए.

अंबुज की इस हरकत से श्रीकांत चौबे बुरी तरह डर गया. श्रीकांत को अंबुज तिवारी की यह योजना मालूम नहीं थी. उस ने अंबुज को खाना खाने के लिए बुलाया था. नीलम की हत्या करने के बाद अंबुज ने उस के शव को ठिकाने लगाने के लिए श्रीकांत चौबे से मदद मांगी. दोस्ती के नाते श्रीकांत उस की मदद करने को तैयार हो गया. उस की मजबूरी यह भी थी कि लाश उस के घर में पड़ी थी. दोनों ने नीलम के शव को प्लास्टिक के ड्रम में डाल कर टैंपो पर लाद दिया और मुंबई-पुणे हाइवे के दोपाली और लोनावला के बीच घनी झाडि़यों में डाल आए, जहां से पुलिस ने शव बरामद कर लिया.

अंबुज महेंद्रनाथ तिवारी और श्रीकांत जयनारायण चौबे से विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. बाद में दोनों को अदालत पर पेश कर के तलोजा जेल भेज दिया गया. वारदात में इस्तेमाल टैंपो को पुलिस ने कब्जे में ले लिया था.

 

UP News : प्रेमी ने विवाहिता प्रेमिका की गमछे से गला दबाकर की हत्या

UP News : 2 बच्चों की मां होने के बावजूद ननकी अपने प्रेमी छत्रपाल के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी. इस बेहयाई से तंग आ कर उस का पति अंबिका प्रसाद घर छोड़ कर चला गया. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि प्रेमी छत्रपाल ही ननकी का कातिल बन गया.

सुबह होते ही गांव में शोर मचने लगा कि छत्रपाल अपनी प्रेमिका ननकी की हत्या कर फरार हो गया है, उस की लाश कमरे में पड़ी है. हल्ला होते ही गांव वाले ननकी के मकान की ओर दौड़ पड़े. गांव का प्रधान भी उन में शामिल था. गांव के पूर्वी छोर पर ननकी का मकान था. वहां पहुंच कर लोगों ने देखा, सचमुच ननकी की लाश कमरे में जमीन पर पड़ी थी. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि छत्रपाल ने ननकी की हत्या क्यों कर दी. इसी बीच ग्राम प्रधान रामसिंह यादव ने थाना बिंदकी में फोन कर के इस हत्या की खबर दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी नंदलाल सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. उन्होंने महिला की हत्या किए जाने की खबर पुलिस अधिकारियों को दी फिर निरीक्षण में जुट गए.

वह उस कमरे में पहुंचे जहां ननकी की लाश पड़ी थी. लाश के पास कुछ महिलाएं रोपीट रही थीं. पूछने पर पता चला कि मृतका अपने प्रेमी छत्रपाल के साथ रहती थी. उस का पति अंबिका प्रसाद करीब 5 साल पहले घर से चला गया था और वापस नहीं लौटा. मृतका के 2 बच्चे भी हैं, जो अपनी ननिहाल में रहते हैं. मृतका ननकी की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी. उस के गले में गमछा लिपटा था. लग रहा था जैसे उसी गमछे से गला कस कर उस की हत्या की गई हो. कमरे का सामान अस्तव्यस्त था. साथ ही टूटी चूडि़यां भी बिखरी पड़ी थीं. इस से लग रहा था कि हत्या से पहले मृतका ने हत्यारे से संघर्ष किया था.

थानाप्रभारी नंदलाल सिंह अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी प्रशांत कुमार वर्मा, एएसपी राजेश कुमार और सीओ योगेंद्र कुमार मलिक घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा मौके पर मौजूद मृतका के घरवालों तथा पासपड़ोस के लोगों से घटना के बारे में पूछताछ की. मौके पर शारदा नाम की लड़की मिली. मृतका ननकी उस की मौसी थी. शारदा ने पुलिस को बताया कि वह कल शाम छत्रपाल के साथ मौसी के घर आई थी. खाना खाने के बाद वह कमरे में जा कर लेट गई. रात में किसी बात को ले कर मौसी और छत्रपाल में झगड़ा हो रहा था. सुबह 5 बजे छत्रपाल बदहवास हालत में निकला और घर के बाहर चला गया.

कुछ देर बाद मैं ननकी मौसी के कमरे में गई तो कमरे में जमीन पर मौसी मृत पड़ी थी. मैं बाहर आई और शोर मचाया. मैं ने फोन द्वारा अपने मातापिता और नानानानी को खबर दी तो वह सब भी आ गए. मृतका की मां चंदा और बड़ी बहन बड़की ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि छत्रपाल ननकी के चरित्र पर शक करता था. मायके का कोई भी युवक घर पहुंच जाता तो वह उसे शक की नजर से देखता था और फिर झगड़ा तथा मारपीट करता था. इसी शक में छत्रपाल ने ननकी को मार डाला है. उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जाए.

अधिकारियों ने दिए निर्देश पूछताछ के बाद एएसपी ने थानाप्रभारी को निर्देश दिया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद हत्यारोपी छत्रपाल को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें. इस के बाद थानाप्रभारी नंदलाल सिंह ने मौके से सबूत अपने कब्जे में लिए और ननकी का शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल फतेहपुर भिजवा दिया. फिर थाने आ कर शारदा की तरफ से छत्रपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. रिपोर्ट दर्ज होते ही थानाप्रभारी ने हत्यारोपी छत्रपाल की तलाश शुरू कर दी. उन्होंने उस की तलाश में नातेरिश्तेदारों के घर सरसौल, बिंदकी, खागा और अमौली में छापे मारे, लेकिन छत्रपाल वहां नहीं मिला. तब उस की टोह में मुखबिर लगा दिए.

29 मई, 2020 की शाम 5 बजे खास मुखबिर के जरीए थानाप्रभारी नंदलाल सिंह को पता चला कि हत्यारोपी छत्रपाल इस समय बिंदकी बस स्टैंड पर मौजूद है. शायद वह कहीं भागने की फिराक में किसी साधन का इंतजार कर रहा है. यह खबर मिलते ही थानाप्रभारी आवश्यक पुलिस बल के साथ बस स्टैंड पहुंच गए. पुलिस जीप रुकते ही बेंच पर बैठा एक युवक उठा और तेजी से सड़क की ओर भागा. शक होने पर पुलिस ने उस का पीछा किया और रामजानकी मंदिर के पास उसे दबोच लिया.

उस ने अपना नाम छत्रपाल बताया. पूछताछ के लिए पुलिस उसे थाने ले आई. थानाप्रभारी नंदलाल सिंह ने जब उस से ननकी की हत्या के बारे में पूछा तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब थोड़ी सख्ती बरती तो वह टूट गया और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उस से की गई पूछताछ में ननकी की हत्या के पीछे की कहानी अवैध रिश्तों की बुनियाद पर गढ़ी हुई मिली—

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद का एक व्यापारिक कस्बा है अमौली. इसी कस्बे में चंद्रभान अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी चंदा के अलावा 2 बेटियां बड़की व ननकी और एक बेटा मोहन था. चंद्रभान कपड़े का व्यापार करता था. इसी व्यापार से होने वाली कमाई से वह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. चंद्रभान की बड़ी बेटी बड़की जवान हुई तो उस ने उस का विवाह खागा कस्बा निवासी हरदीप के साथ कर दिया. बड़की से 4 साल छोटी ननकी थी. बाद में जब वह भी सयानी हुई तो वह उस के लिए भी सही घरबार ढूंढने लगा. आखिर उन की तलाश अंबिका प्रसाद पर जा कर खत्म हो गई.

अंबिका प्रसाद के पिता जगतराम फतेहपुर जनपद के गांव शाहपुर के रहने वाले थे. उन के 2 बेटे शिव प्रसाद व अंबिका प्रसाद थे. शिव प्रसाद की शादी हो चुकी थी. वह इलाहाबाद में नौकरी करता था और परिवार के साथ वहीं रहता था. उन का छोटा बेटा अंबिका प्रसाद उन के साथ खेतों पर काम करता था. चंद्रभान ने अंबिका को देखा तो उस ने उसे अपनी बेटी ननकी के लिए पसंद कर लिया. बात तय हो जाने के बाद 10 जनवरी, 2004 को ननकी का विवाह अंबिका प्रसाद के साथ हो गया. अंबिका प्रसाद तो सुंदर बीवी पा कर खुश था, लेकिन ननकी के सपने ढह गए थे. क्योंकि पहली रात को ही वह पत्नी को खुश नहीं कर सका. वह समझ गई कि उस के पति में इतनी शक्ति नहीं है कि वह उसे शारीरिक सुख प्रदान कर सके.

समय बीतता गया और ननकी पूजा और राजू नाम के 2 बच्चों की मां बन गई. बच्चों के जन्म के बाद परिवार का खर्च बढ़ गया. पिता जगतराम की भी सारी जिम्मेदारी अंबिका प्रसाद के कंधों पर थी, अत: वह अधिक से अधिक कमाने की कोशिश में जुट गया. अंबिका ने आय तो बढ़ा ली, लेकिन जब वह घर आता, तो थकान से चूर होता. ननकी पति का प्यार चाहती थी. लेकिन अंबिका पत्नी की भावनाओं को नहीं समझता. कुछ साल इसी अशांति एवं अतृप्ति में बीत गए. इस के बाद ननकी अकसर पति को ताने देने लगी कि जब तुम अपनी बीवी को एक भी सुख नहीं दे सकते तो ब्याह ही क्यों किया.

बीवी के ताने सुन कर अंबिका कभी हंस कर टाल देता तो कभी बीवी पर बरस भी पड़ता. इन सब बातों से त्रस्त हो कर ननकी ने आखिर देहरी लांघ दी. उस की नजरें छत्रपाल से लड़ गईं. छत्रपाल ननकी के घर से 4 घर दूर रहता था. उस के मातापिता का निधन हो चुका था. वह अपने बड़े भाई के साथ रहता था और मेहनतमजदूरी कर अपना पेट पालता था. ननकी के पति अंबिका प्रसाद के साथ वह मजदूरी करता था, इसलिए दोनों में दोस्ती थी. दोस्ती के कारण छत्रपाल का अंबिका के घर आनाजाना था. वह ननकी को भाभी कहता था. हंसमुख व चंचल स्वभाव की ननकी छत्रपाल से काफी हिलमिल गई थी. देवरभाभी होने से उस का मजाक का रिश्ता था. ननकी का खुला मजाक और उस की आंखों में झलकता वासना का आमंत्रण छत्रपाल के दिल में उथलपुथल मचाने लगा.

वह यह तो समझ चुका था कि भाभी उस से कुछ चाहती है, लेकिन अपनी तरफ से पहल करने की उस की हिम्मत नहीं हो रही थी. दोनों खुल कर एकदूसरे से छेड़छाड़ व हंसीमजाक करने लगे. इसी छेड़छाड़ में एक दोपहर दोनों अपने आप पर काबू न रख सके और मर्यादा की सीमाएं लांघ गए. उस रोज छत्रपाल पहली बार नशीला सुख पा कर फूला नहीं समा रहा था. ननकी भी कम उम्र का अविवाहित साथी पा कर खुश थी. बस उस रोज से दोनों के बीच यह खेल अकसर खेला जाने लगा. कुछ समय बाद छत्रपाल रात को भी चुपके से ननकी के पास आने लगा. ननकी के लिए अब पति का कोई महत्त्व नहीं रह गया था. उस की रातों का राजकुमार छत्रपाल बन गया था. छत्रपाल जो कमाता था, वह सब ननकी पर खर्च करने लगा था.

साल सवासाल तक ननकी व छत्रपाल के अवैध संबंध बेरोकटोक चलते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी. अपनी मौज में वह भूल गए कि इस तरह के खेल ज्यादा दिनों तक छिपे नहीं रहते. इन के मामले में भी यही हुआ. हुआ यह कि एक रात पड़ोसन रामकली ने चांदनी रात में आंगन में रंगरलियां मना रहे छत्रपाल और ननकी को देख लिया. फिर तो उन दोनों की चर्चा पूरे गांव में होने लगी. अंबिका प्रसाद पत्नी पर अटूट विश्वास करता था. जब उसे ननकी और छत्रपाल के नाजायज रिश्तों की जानकारी हुई तो वह सन्न रह गया. इस बाबत उस ने ननकी से जवाब तलब किया. ननकी भी जान चुकी थी कि बात फैल गई है, इसलिए झूठ बोलना या कुछ भी छिपाना फिजूल है. लिहाजा उस ने सच बोल दिया. ‘‘जो तुम बाहर से सुन कर आए हो, वह सब सच है. मैं बेवफा नहीं हुई बस छत्रपाल पर मन मचल गया.’’

‘‘ननकी, शायद तुम्हें अंदाजा नहीं कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं.’’ अंबिका प्रसाद बोला,  ‘‘मैं तुम्हारी गली माफ कर दूंगा बस, तुम छत्रपाल से रिश्ता तोड़ लो.’’

‘‘बदनाम न हुई होती तो जरूर रिश्ता तोड़ लेती. अब मैं गुनहगार बन चुकी हूं, इसलिए अब उसे नहीं छोड़ सकती.’’

शरम से अंबिका ने छोड़ा घर अंबिका प्रसाद ने पत्नी को सही राह पर लाने की बहुत कोशिश की, मगर कामयाब नहीं हुआ. एक रात तो अंबिका ने ननकी और छत्रपाल को अपने घर में ही आपत्तिजनक हालत में देख लिया. अंबिका ने इस का विरोध किया तो शर्मसार होने के बजाय ननकी और छत्रपाल उसी पर हावी हो गए. ‘‘जो आज देखा है, वह हर रात देखोगे. देख सको तो घर में रहो, न देख सको तो घर छोड़ कर कहीं चले जाओ.’’

ननकी की सीनाजोरी पर अंबिका प्रसाद दंग रह गया. वह घर के बाहर आ गया और माथा पकड़ कर चारपाई पर बैठ गया. इस वाकये के बाद अंबिका को पत्नी से नफरत हो गई. अंबिका आंखों के सामने पत्नी की बदचलनी के ताने भला कब तक बरदाश्त करता. अत: जनवरी 2015 में ऐसे ही एक झगड़े के बाद उस ने घर छोड़ दिया और गुमनाम जिंदगी बिताने लगा. अंबिका प्रसाद के घर छोड़ने के बाद छत्रपाल उस के घर पर कुंडली मार कर बैठ गया. उस ने उस की जर, जोरू और जमीन पर भी कब्जा कर लिया. ननकी अभी तक उस की प्रेमिका थी किंतु अब उस ने ननकी को पत्नी का दरजा दे दिया. यद्यपि छत्रपाल ने ननकी से न तो कोर्ट मैरिज की थी और न ही प्रेम विवाह किया था.

ननकी की बेटी अब तक 10 साल की उम्र पार कर चुकी थी, जबकि बेटा 5 साल का हो गया था. दोनों बच्चे छत्रपाल की अय्याशी में बाधक बनने लगे थे. अत: वह दोनों को पीटता था. ननकी को बुरा तो लगता था, पर वह मना नहीं कर पाती थी. बच्चों पर बुरा असर न पड़े, इसलिए ननकी ने दोनों बच्चों को अपनी मां के पास भेज दिया. बच्चे चले गए तो ननकी और छत्रपाल के मिलन की बाधा दूर हो गई. अब वे स्वतंत्र रूप से रहने लगे. ननकी और छत्रपाल को साथसाथ रहते 4 साल बीत चुके थे. इस बीच न तो ननकी का पति अंबिका प्रसाद वापस घर लौटा और न ही ननकी ने उस की कोई सुध ली. वह कहां है, किस परिस्थिति में है. इस की जानकारी न तो ननकी को थी और न ही किसी सगेसंबंधी को.

ननकी बच्चों से मिलने मायके अमौली जाती थी. फिर वहां कई दिन तक रुकती थी. इस से छत्रपाल को शक होने लगा था कि ननकी का मन उस से भर गया है और अब उस ने मायके में कोई नया यार बना लिया है. इस कारण वह मायके में डेरा जमाए रहती है. इसे ले कर अब ननकी और छत्रपाल में झगड़ा होने लगा था. मायके का कोई भी व्यक्ति घर आता तो छत्रपाल उसे शक की नजर से देखता और उस के जाने के बाद ननकी के चरित्र पर लांछन लगाते हुए झगड़ा करता. ननकी की बड़ी बहन बड़की खागा कस्बे में ब्याही थी. उस की बेटी का नाम शारदा था. शारदा अपनी मौसी से ज्यादा हिलीमिली थी सो उस ने ननकी से उस के घर आने की बात कही. ननकी ने शारदा की बात मान ली और उसे जल्द ही बुलाने की बात कही.

25 मई, 2020 की सुबह ननकी ने छत्रपाल को पैसे दे कर शारदा को बुलाने खागा भेज दिया. छत्रपाल खागा के लिए निकला तो ननकी के मायके से उस का पड़ोसी गोपाल आ गया. ननकी ने उसे घर के अंदर कर दरवाजा बंद कर लिया. ननकी का दरवाजा बंद हुआ तो पड़ोसी आपस में कानाफूसी करने लगे. शाम 5 बजे छत्रपाल शारदा को साथ ले कर वापस आ गया. कुछ देर बाद छत्रपाल घर से निकला तो चुगलखोरों ने चुगली कर दी, ‘‘छत्रपाल तुम घर से निकले तभी कोई सजीला युवक आया. ननकी ने उसे घर के अंदर बुला कर दरवाजा बंद कर लिया था. बंद दरवाजे के पीछे क्या गुल खिला होगा, इसे बताने की जरूरत नहीं.’’

छत्रपाल पहले से ही ननकी पर शक करता था, पड़ोसियों की चुगली ने आग में घी डालने जैसा काम किया. गुस्से में छत्रपाल शराब ठेका गया और शराब पी कर घर लौटा. रात में कमरे में जब उस का सामना ननकी से हुआ तो उस ने ननकी के चरित्र पर अंगुली उठाई और उसे बदचलन, बदजात और वेश्या कहा. इस पर दोनों में जम कर झगड़ा हुआ. झगड़े के दौरान ननकी के ब्लाउज से 5-5 सौ के 2 नोट नीचे गिर गए जो छत्रपाल ने उठा लिए थे. अब उसे पक्का विश्वास हो गया कि यह नोट अय्याशी के दौरान घर पर आए उस युवक ने दिए होंगे. शक का कीड़ा दिमाग में कुलबुलाया तो छत्रपाल का गुस्सा सातवें आसमान जा पहुंचा. उस ने ननकी को जमीन पर पटक दिया और फिर गमछे से गला कसने लगा. ननकी कुछ देर तड़पी फिर सदा के लिए शांत हो गई. हत्या करने के बाद छत्रपाल कमरे से निकला और फरार हो गया.

छत्रपाल से पूछताछ करने के बाद थानाप्रभारी नंदलाल सिंह ने 30 मई, 2020 को छत्रपाल को फतेहपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट पी.के. राय की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया. कथा संकलन तक उस की जमानत स्वीकृत नहीं हुई थी. मृतका के बच्चे अपने नानानानी के पास रह रहे थे.

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

 

 

Murder Story : गन्ने के खेत में लेकर क्यों पत्नी ने पति को मरवाया

Murder Story : पतिपत्नी के बीच सब से बड़ी डोर विश्वास होती है, जिस के सहारे घरगृहस्थी चलती है. इसी विश्वास के नाते लाखों लोग घर से सैकड़ोंहजारों किलोमीटर दूर नौकरियां करते हैं. लेकिन जब किसी तीसरे की वजह से विश्वास की डोर कमजोर पड़ती है तो कई जिंदगियों में जलजला सा…

जिला मुरादाबाद से करीब 19 किलोमीटर दूर है थाना मूंढापांडे. इसी थाना क्षेत्र का एक गांव है जैतपुर विशाहट. रोहित सिंह इसी गांव का मूल निवासी था. वैसे वह अपनी पत्नी अन्नू के साथ मुरादाबाद शहर में रहता था. मुरादाबाद की पीतल बस्ती के कमल विहार में उस ने 400 वर्गगज में अपना मकान बनवा रखा था. रोहित पेशे से ट्रक ड्राइवर था और बरेली की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी करता था. रोहित हफ्ते में कम से कम एक बार अपने गांव जैतपुर जरूर जाता था. गांव में उस के पिता सत्यभान सिंह परिवार के साथ रहते थे.

रोहित का गांव मूंढापांडे कस्बे से करीब 6 किलोमीटर दूर था, इसलिए वह गांव से बाइक से मूंढापांडे तक आता था और वहां पर भारतीय स्टेट बैंक के पास एक मोटर मैकेनिक की दुकान पर बाइक खड़ी कर के बस से बरेली चला जाता था. 23 अगस्त, 2020 को रोहित बरेली जाने के लिए अपने गांव जैतपुर विशाहट से दोपहर करीब 12 बजे बाइक ले कर  निकला. रात करीब 8 बजे रोहित के पिता सत्यभान सिंह ने रोहित को फोन किया तो उस का फोन बंद मिला. पिता ने उसे कई बार फोन मिलाया लेकिन हर बार फोन बंद मिला.

ऐसा कभी नहीं होता था, इसलिए फोन न मिलने से सत्यभान सिंह चिंतित हुए. उन्होंने बरेली की उस ट्रांसपोर्ट कंपनी में फोन किया, जहां रोहित नौकरी करता था. पता चला रोहित उस दिन अपनी ड्यूटी पर पहुंचा ही नहीं था.  सत्यभान परेशान हो गए. उन्होंने मुरादाबाद में रह रही रोहित की पत्नी अन्नू से पूछा तो उस ने  बताया कि वह मुरादाबाद नहीं आए, अपनी ड्यूटी पर ही होंगे. जबकि रोहित ड्यूटी पर नहीं पहुंचा था. बेटे की चिंता में सत्यभान और उन के घर वालों को रात भर नींद नहीं आई. सुबह होने पर वह उस मोटर मैकेनिक की दुकान पर पहुंचे, जहां रोहित अपनी बाइक खड़ी किया करता था. मैकेनिक ने बताया कि रोहित ने उस के यहां बाइक खड़ी नहीं की थी और न ही आया था.

उधर अन्नू भी पति का फोन बंद मिनने से परेशान थी. अपनी चिंता वह ससुर से व्यक्त कर रही थी. सत्यभान ने अपने तमाम रिश्तेदारों के यहां भी फोन कर के रोहित के बारे में  पता किया, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. अंतत: सत्यभान ने 24 अगस्त, 2020 को थाना मूंढापांडे में बेटे रोहित की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थानाप्रभारी नवाब सिंह ने गुमशुदगी दर्ज होने के बाद जरूरी काररवाई  शुरू कर दी. 2 दिन हो गए, रोहित का कहीं पता नहीं चला. घरवाले उस की चिंता में परेशान थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें.

25 अगस्त, 2020 मंगलवार  के अखबारों में अमरोहा देहात थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति की लाश मिलने की खबर छपी. लाश गांव कंकरसराय के गन्ने के एक खेत से मिली थी. उस का सिर कुचला हुआ था. सत्यभान के एक रिश्तेदार अमरोहा में रहते थे. रिश्तेदार ने सत्यभान को गन्ने के खेत में लाश मिली होने की जानकारी दी. साथ ही यह भी बताया कि मृतक के हाथ पर रोहित लिखा हुआ है, इसलिए आप अमरोहा देहात थाने आ कर लाश देख लें. खबर मिलते ही सत्यभान सिंह 26 अगस्त को परिवार के लोगों के साथ अमरोहा देहात थाने पहुंच गए. थानाप्रभारी ने सत्यभान को बरामद लाश के फोटो व कपड़े दिखाए. कपड़ों से सत्यभान ने पहचान लिया कि कपड़े उन के बेटे रोहित के हैं.

थानाप्रभारी लाश की शिनाख्त के लिए उन्हें जिला अस्पताल ले गए. मोर्चरी में रखी लाश देखते ही सत्यभान फूटफूट कर रोने लगे. वह लाश उन के बेटे रोहित की ही थी. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी ने राहत की सांस ली. पोस्टमार्टम हो जाने के बाद लाश उसी दिन मृतक के घर वालों को सौंप दी गई. पोस्टमार्टम में पता चला कि रोहित की मौत गला दबाने से हुई थी. इस के अलावा उस के सिर और लिंग को ईंट से बुरी तरह कुचला गया था. चूंकि गुमशुदगी का मामला थाना मूंढापांडे में दर्ज हुआ था, इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट थाना मूंढापांडे पुलिस के पास आ गई.

थानाप्रभारी नवाब सिंह मामले को सुलझाने में जुट गए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि हत्यारे की मृतक रोहित से कोई गहरी दुश्मनी थी, इसलिए उस ने इतनी क्रूरता दिखाई. उन्होंने मृतक के पिता से पूछा कि उन की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है? अगर उन्हें किसी पर कोई शक हो तो बता दें. सत्यभान सिंह ने मुरादाबाद की पीतल बस्ती के कमल विहार निवासी अजय पाल व 2 अन्य लोगों पर शक जताया. इस के बाद थानाप्रभारी ने एक टीम गठित की और 28 अगस्त को नामजद आरोपी अजय पाल और उस के साथी कुलदीप सैनी को मुरादाबाद स्थित उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया.

उन दोनों से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने मान लिया कि रोहित की हत्या उन्होंने ही की थी और यह सब कुछ मृतक की पत्नी अन्नू के इशारे पर किया था. पुलिस ने अन्नू और अजय पाल के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि घटना के दिन दोनों ने आपस में कई बार बात की थी और एकदूसरे को मैसेज भी भेजे थे. दोनों से पूछताछ के बाद रोहित की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह काफी दिलचस्प थी. करीब 10 साल पहले रोहित सिंह की शादी संभल जिले के गांव भोजपुर की अन्नू के साथ हुई थी. उस समय रोहित मुरादाबाद में आटोरिक्शा चलाया करता था.

रोहित का गांव मुरादाबाद शहर से करीब 19 किलोमीटर दूर था, इसलिए उसे रोजाना आनेजाने में परेशानी होती थी. इस परेशानी से बचने के लिए उस ने मुरादाबाद की पीतल बस्ती में 400 वर्गगज का एक प्लौट खरीद लिया. 5 साल पहले उस ने प्लौट पर अपना मकान बनवा लिया. उस की गृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. उस के 2 बच्चे थे, एक बेटा और एक बेटी. रोहित का एक दोस्त था अजय पाल. वह भी मुरादाबाद में आटोरिक्शा चलाता था. इसलिए दोनों की दोस्ती हो गई थी. शाम को दोनों अकसर साथ बैठ कर शराब पीते थे. अजय पाल का रोहित के घर आनाजाना लगा रहता था.

बाद में रोहित सिंह की बरेली की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी लग गई. वह ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रक चलाता था, जिस की वजह से वह कईकई दिन बाद घर लौटता था. उसी दौरान अजय पाल के रोहित की पत्नी अन्नू से अवैध संबंध बन गए. पति की गैरमौजूदगी में अन्नू अपने प्रेमी के साथ खूब मौजमस्ती करती थी. उसे रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था, इसलिए किसी का डर भी नहीं था. रोहित जब बरेली से घर लौटता तो पत्नी को फोन कर के सूचना दे देता था. अन्नू सतर्क हो जाती और प्रेमी से भी सतर्क रहने के लिए कह देती थी. घर लौटने के बाद रोहित की अपने दोस्त अजय पाल के साथ महफिल सजती थी. रोहित दोस्त पर विश्वास करता था, यह अलग बात थी कि वही दोस्त विश्वास की आड़ में उस के घर में सेंध लगा चुका था.

2-3 दिन घर रुकने के बाद रोहित मातापिता से मिलने अपने गांव जैतपुर वशाहट जाता और फिर अगले दिन वहीं से ड्यूटी पर बरेली चला जाता था. उधर अन्नू और अजय पाल के संबंध गहरे होते जा रहे थे. उन्होंने जीवन भर साथ रहने की कसम खा ली थी. अजय अन्नू पर घर से भाग चलने का दबाव डालता था, लेकिन अन्नू घर से भागने को मना कर देती. वह कहती थी कि घर से भागने की जरूरत क्या है, यदि रोहित का काम तमाम कर दो तो रास्ता अपने आप साफ हो जाएगा.

अन्नू के प्यार में अंधे हो चुके अजय पाल को प्रेमिका की यह सलाह बहुत अच्छी लगी. उस ने अन्नू से वादा कर दिया कि वह रोहित का काम तमाम करा देगा. इस के बाद अन्नू और अजय पाल ने रोहित को ठिकाने लगाने की योजना बनानी शुरू कर दी. अजय ने इस बारे में अपने दोस्त कुलदीप सैनी से बात की. वह भी अजय का साथ देने को तैयार हो गया. फिर वे उचित मौके का इंतजार करने लगे. 23 अगस्त, 2020 को उन्हें यह मौका मिल गया. क्योंकि उस दिन रोहित ड्यूटी से अपने घर मुरादाबाद आया हुआ था और उसी दिन उसे मुरादाबाद से अपने गांव जैतपुर वशाहट जाना था. सुबह 9 बजे नाश्ता करने के बाद वह बाइक से गांव जाने के लिए निकल गया.

अन्नू ने यह जानकारी फोन से अजय को दे दी. योजना के अनुसार अजय पाल अपने साथी कुलदीप सैनी को ले कर पीतल बस्ती के आगे गुलाबबाड़ी में सड़क किनारे खड़े हो कर रोहित के आने का इंतजार करने लगा. रोहित वहां पहुंचा तो अजय ने हाथ दे कर उस की बाइक रुकवाई. अजय ने कुलदीप का परिचय रोहित से कराते हुए कहा कि इस की बहन मूंढापांडे में रहती है. हम लोग वहीं जा रहे हैं. तुम हमें मूंढापांडे छोड़ कर अपने गांव निकल जाना. रोहित दोस्त की बात नहीं टाल सका. वह दोनों को अपनी बाइक पर बैठा कर चल दिया. अजय पाल और कुलदीप को मूंढापांडे छोड़ने के बाद रोहित अपने गांव जैतपुर विशाहट चला गया.

उस ने अजय को बता दिया कि वह मातापिता से मिलने के बाद आज ही ड्यूटी पर बरेली चला जाएगा. उस का गांव मूंढापांडे से करीब 6 किलोमीटर दूर था. अजय पाल को अपनी योजना को अंजाम देना था, इसलिए वह मूंढापांडे में ही रोहित के लौटने का इंतजार करने लगा. अजय को यह बात पता थी कि रोहित अपनी बाइक मूंढापांडे में एक मैकेनिक के पास खड़ी कर के बस से बरेली जाता है, इसलिए अजय और कुलदीप उस के आने का इंतजार करने लगे. मातापिता से मिलने के बाद रोहित ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकल गया. उसे अपनी बाइक मैकेनिक के पास खड़ी करनी थी, लेकिन उस से पहले ही रास्ते में उसे अजय पाल और कुलदीप  खड़े मिले. उन्हें देखते ही रोहित ने बाइक  रोक दी. उस ने पूछा, ‘‘तुम लोग अभी तक यहीं हो.’’

‘‘हां, हम तुम्हारे आने का इंतजार कर रहे थे.’’ अजय बोला.

‘‘क्यों, क्या कोई खास बात है?’’ रोहित ने पूछा.

‘‘हां भाई, बात खास है तभी तो तुम्हारा इंतजार कर रहे थे.’’ अजय ने कहा.

‘‘बताओ क्या बात है?’’

‘‘रोहित बात यह है कि यहां पर कुलदीप के किसी के पास मोटे पैसे फंसे हुए थे. आज सारे पैसे मिल गए. इसलिए हम लोग बहुत खुश हैं और इसी खुशी में आज पार्टी करना चाहते हैं.’’ अजय बोला.

‘‘नहीं यार, अभी तो मैं ड्यूटी पर जा रहा हूं. फिर कभी पार्टी कर लेंगे.’’

‘‘अरे यार, एकएक पेग लेने में क्या बुराई है.’’ अजय ने जोर डाला.

रोहित अपने दोस्त की बात को टाल नहीं सका. तभी अजय का दोस्त कुलदीप सैनी एक बोतल और पकौड़े ले आया. तीनों ने पकौड़े के ठेले पर ही शराब पीनी शुरू कर दी. रोहित पर नशा ज्यादा चढ़ गया तो वह बोला, ‘‘आज मैं ड्यूटी नहीं जाऊंगा.’’ वे तीनों बाइक से दलपतपुर जीरो पौइंट हाइवे पर आ गए. हाइवे से सटा हुआ एक गांव है मछरिया. वहीं पर कुलदीप ने रोहित का मोबाइल ले कर उस की बैटरी निकाल दी, ताकि उस का किसी से संपर्क न हो सके.

इस के बाद तीनों हाइवे से होते हुए कस्बा पाकवड़ा पहुंचे. पाकवड़ा में तीनों ने फिर शराब पी और खाना खाया. खाना खाने के बाद रोहित ने घर चलने को कहा तो अजय बोला, ‘‘अभी चलते हैं. हमें अमरोहा में कुछ जरूरी काम है. अमरोहा यहां से थोड़ी ही दूर है. बस, काम निपटा कर आ जाएंगे.’’

अजय और कुलदीप अपनी योजना के अनुसार रोहित को अमरोहा ले गए. रात करीब 10 बजे तीनों अमरोहा देहात के गांव कंकरसराय पहुंचे. उस समय तक रोहित को ज्यादा नशा चढ़ चुका था. नशे की हालत में दोनों उसे गन्ने के खेत में ले गए और गला दबा कर उस की हत्या कर दी. रोहित की हत्या करने के बाद उन्होंने उस का सिर ईंट से कुचल दिया, जिस से उस का चेहरा पहचान में न आ सके. इस के अलावा उन्होंने उस के लिंग को भी ईंट से कुचल दिया. हत्या से पहले अजय के मोबाइल पर रोहित की पत्नी अन्नू का फोन आया था. अंजू ने उस से कहा था कि किसी भी हालत में रोहित को जिंदा मत छोड़ना.

मरने से पहले रोहित दोनों के सामने गिड़गिड़ाया था कि यार मुझ से क्या गलती हो गई, मुझे क्यों मार रहे हो लेकिन उन का दिल नहीं पसीजा. कुलदीप ने रोहित की टांगें पकड़ लीं और अजय ने गला दबा कर उस की हत्या कर दी थी. अजय ने हत्या की जानकारी अन्नू को दे दी थी. हत्यारों को  विश्वास था कि यहां रोहित की लाश कुछ दिनों में सड़गल जाएगी और पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंचेगी लेकिन उन की यह सोच गलत साबित हुई. वे पुलिस के हत्थे चढ़ ही गए. अभियुक्त अजय पाल और कुलदीप सैनी से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें रोहित की हत्या कर शव छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर 28 अगस्त, 2020 को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया.

इस मामले में मृतक रोहित की पत्नी अन्नू का भी हाथ था, इसलिए पुलिस ने 29 अगस्त को अन्नू को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में अन्नू ने भी अपना गुनाह कबूल कर लिया. पुलिस ने उसे भी न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime News : दोस्त की पत्नी का गला साड़ी से क्यों घोंटा

Crime News : ओवरडोज नशे का हो, पैसे का हो, पौवर का हो, जवानी का हो या फिर हुस्न का, हमेशा हानिकारक होता है. शालू को भी कुछ ऐसा ही ओवरडोज था, जिस की वजह से वह खुद तो जान से गई ही पति को भी…

रामदीन मूलरूप से बस्ती जिले के रिउना गांव का रहने वाला था. बरसों पहले  रोजीरोटी की तलाश में वह कानपुर शहर आया, तो फिर यहीं का हो कर रह गया. रामदीन रेलवे में संविदा कर्मचारी था. वह परिवार सहित लोको कालोनी के पास रामलीला ग्राउंड के अंदर 2 कमरों वाले मकान में रहता था. उस का भरापूरा परिवार था. पत्नी कुसुम, 4 बेटे और 2 बेटियां. भारीभरकम परिवार के भरणपोषण की जिम्मेदारी रामदीन की ही थी. रामदीन की संतानों में विष्णु सब से बड़ा था. पहली संतान होने की वजह से उसे मांबाप का अधिक लाड़प्यार मिला, जिस से वह बिगड़ता गया. पढ़ाई छोड़ कर वह हमउम्र लड़कों के साथ आवारागर्दी करने लगा. उन के साथ वह नशा और चोरीचकारी भी करता था.

किशोेरावस्था पार कर के विष्णु युवा तो हो गया, पर उस ने अपने दायित्वोें को कभी नहीं समझा. काम में पिता का हाथ बंटाना तो उस ने सीखा ही नहीं था. घर वालों के लिए स्थिति तब बदतर हो गई, जब उसे शराबखोरी और जुआ खेलने की लत लग गई. रामदीन विष्णु को ले कर चिंतित रहने लगा. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह उसे कैसे सुधारे. ऐसे में हर मांबाप की तरह उस ने सोचा कि अगर उस की शादी कर दी जाए तो शायद वह सुधर जाए. लेकिन रामदीन के तमाम प्रयासों के बावजूद कोई भी विष्णु जैसे नकारा युवक को अपनी बेटी देने को राजी नहीं हुआ. विष्णु को अपनी कमजोरी और मातापिता की परेशानियों का आभास था. पर वह अपनी आदतों से मजबूर था.

लेकिन वक्त के साथ उसे अपने दायित्वों का बोध हुआ तो उस ने एकएक कर आवारा लड़कों का साथ छोड़ कर पिता के काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया. रामदीन को बेटे का सहयोग मिला तो वह रंगाईपुताई के बड़े ठेके लेने लगा. इस काम में बापबेटे मिल कर अच्छी कमाई कर लेते थे. रामलीला ग्राउंड के बाहर जीटी रोड पर सड़क किनारे एक महिला पान मसाले की दुकान चलाती थी, नाम था जानकी. जानकी बाबूपुरवा क्षेत्र के मुंशीपुरवा में रहती थी. उस का पति मंगली प्रसाद एक रिक्शा कंपनी में रिक्शा मरम्मत का काम करता था. जिस दिन उस की कंपनी बंद रहती थी, उस दिन पान की दुकान पर मंगली प्रसाद बैठता था.

विष्णु जानकी की दुकान पर अकसर पान मसाला खाने आता था. पैसे कभी नकद तो कभी उधार. दोनों में अच्छी जानपहचान थी, सो वह उसे सामान देने को मना नहीं करती थी. एक रोज विष्णु जानकी की दुकान पर पहुंचा तो उस की आंखें चुंधिया गईं. दुकान पर सजीसंवरी एक युवती बैठी थी. पहली ही नजर में वह विष्णु के मन भा गई. वह उसे एकटक देखने लगा. युवती ने विष्णु को अपनी ओर टकटकी लगाए देखा तो टोका, ‘‘ ऐसे घूरघूर कर क्या देख रहे हो, क्या पहली बार किसी औरत को देखा है.’’

विष्णु झेंप कर बोला, ‘‘ऐसी बात नहीं है. मैं तुम्हें घूर नहीं रहा था, बल्कि तुम्हारी खूबसूरती के बारे में सोच रहा था. वैसे मैं ने कभी तुम्हें दुकान पर बैठे नहीं देखा. जानकी चाची कहां गई? आप उन की रिश्तेदार हैं क्या?’’

‘‘नहीं, मैं उन की बेटी हूं, नाम है शालू. मां मुझे पूजा कह कर बुलाती है.’’ शालू मुस्कराते हुए बोली.

शालू और विष्णु अभी आपस में बात कर ही रहे थे तभी दुकान का सामान ले कर जानकी आ गई. विष्णु उसे उलाहना देते हुए बोला, ‘‘चाची, आप ने कभी बताया नहीं कि आप की एक खूबसूरत बेटी भी है.’’

जानकी बोली, ‘‘विष्णु बेटा, पूजा शक्ल से तो अच्छीभली है. लेकिन भाग्य की खोटी है. पता नहीं अपने भाग्य में क्या लिखा कर लाई है?’’

विष्णु ने अचकचा कर पूछा, ‘‘पूजा और भाग्य की खोटी. यह आप क्या कह रही हैं चाची?’’

‘‘मैं सही कह रही हूं. लगभग 2 साल पहले हम ने पूजा का विवाह हंसीखुशी से कन्नौज जिले के कस्बा गुरसहायगंज निवासी रामू के साथ किया था. लेकिन उस की पति से नहीं बनी. ससुराल छोड़ कर मायके में आ कर रहने लगी. इस ने पति से तलाक भी ले लिया है. समझ में नहीं आता, जवान बेटी का बोझ कैसे उठाऊं.’’ जानकी लंबी सांस लेते हुए बोली.

‘‘चाची, आप नाहक चिंता कर रही हो. आप की बेटी पूजा सुंदर भी है और जवान भी. उस के लिए लड़कों की क्या कमी, बस आप हां भर कह दो.’’ विष्णु पूजा की ओर देखते हुए मुसकरा कर बोला.

उस रात विष्णु को नींद नहीं आई. वह रात भर शालू के बारे में ही सोचता रहा. उस ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह पूजा को अपना जीवनसाथी बना कर रहेगा. विष्णु घर से काम के लिए निकलता तो उस की नजरें शालू की नजरों से टकरा जातीं. नजरें मिलते ही दोनों के चेहरे पर मुसकान बिखर जाती. जल्दी ही शालू ने उस के मन की बात भांप ली. शालू उर्फ पूजा विष्णु की बातचीत से प्रभावित थी, वह उसे अच्छा लगने लगा था. लेकिन वह अपने मन की बात उस से नहीं कह पा रही थी. दूसरी ओर विष्णु उस के आकर्षण में इस कदर डूब चुका था कि उसे शालू के बिना सब सूनासूना लगने लगा था.

जब विष्णु से नहीं रहा गया तो एक दिन दोपहर में वह दुकान पर पहुंचा पता चला शालू घर पर है. तब वह उस के घर पहुंच गया. उस ने दरवाजा खटखटाया तो शालू ने ही खोला. उसे देख कर वह घबरा गई. उस ने कहा, ‘‘घर में कोई नहीं है.’’

‘‘पता है, तभी तो आया हूं. मुझे किसी और से नहीं तुम से बात करनी है.’’ विष्णु ने कहा.

‘‘कहो क्या कहना है?’’ शालू सकुचाते हुए बोली.

‘‘मैं तुम से प्यार करता हूं, बस यही कहने आया था.’’

‘‘तुम मुझ से प्यार करते हो, यह ठीक है, पर मैं एक तलाकशुदा महिला हूं. क्या तुम्हें यह बात पता है? तुम्हारे घरवाले तलाकशुदा से शादी करने को राजी हो जाएंगे?’’

‘‘तुम्हारी पिछली जिंदगी से मुझे कुछ लेनादेना नहीं. मैं तुम से प्यार करता हूं और अपना जीवनसाथी बनाना चाहता हूं. रही बात घर वालों की, तो वे मान जाएंगे.’’

इस तरह अपनी बात कह कर विष्णु ने शालू के तनमन में खुशी भर दी. अब वह हर समय इसी सोच में डूबी रहने लगी कि विष्णु के प्यार को स्वीकार करे या ठुकरा दे. काफी सोचविचार के बाद उस ने विष्णु को जीवनसाथी बनने का निर्णय कर लिया. अपना निर्णय उस ने अपने मातापिता को भी बता दिया. जानकी तो रातदिन बेटी के भविष्य को ले कर चिंतित रहती थी, उस ने बेटी के निर्णय को मान लिया. दोनों के मातापिता की रजामंदी से शादी उधर विष्णु ने जब अपने मातापिता को शालू के बारे में बताया और उस से विवाह करने की बात कही तो वे राजी हो गए.

कुसुम अपनी बेटी प्रीति व नंदनी के साथ शालू से मिलने उस के घर गई और नेग दे कर शालू को पसंद कर लिया. दोनों तरफ की रजामंदी के बाद विष्णु ने एडवोकेट ताराचंद्र के माध्यम से 6 जनवरी, 2018 को कानपुर कोर्ट में शालू से कोर्टमैरिज कर ली. शादी के बाद शालू पति विष्णु के साथ रामलीला ग्राउंड में बने मकान में रहने लगी. लगभग एक साल तक दोनों हंसीखुशी से रहे, फिर परिवार में झगड़ेझंझट शुरू हो गए. दरअसल शालू को संयुक्त परिवार में रहना अच्छा नहीं लगता था. उसे सासससुर, देवर व ननदें कांटे की तरह चुभती थीं. भारीभरकम परिवार के लिए खाना बनाना भी उसे बोझ लगता था.

कभी खाने को ले कर तो कभी साफसफाई को ले कर कभी सास कुसुम तो कभी ननद प्रीति व नंदनी से शालू का झगड़ा होने लगा. शालू ने पति को मुट्ठी में कर रखा था, सो वह कुछ बोल ही नहीं पाता था. शालू अलग रहने की चेतावनी देने लगी थी. परिवार में कलह शुरू हुई तो बढ़ती ही गई. आखिर कलह से आजिज आ कर रामदीन ने परिवार के लिए चकेरी क्षेत्र के श्यामनगर में किराए पर एक मकान ले लिया. इस मकान में रामदीन की पत्नी कुसुम, 3 बेटे सूरज, शिवा, नंदी तथा 2 बेटियां प्रीति व नंदनी रहने लगी. रामदीन परिवार के साथ इसलिए नहीं गया, क्योंकि उस के जाने से रामलीला ग्राउंड का सरकारी मकान उसे खाली करना पड़ता. अब रामलीला ग्राउंड वाले मकान में शालू, उस का पति विष्णु तथा ससुर रामदीन रह गए. बड़े वाले कमरे में शालू ने अपना सामान सजा लिया तथा छोटा कमरा ससुर को दे दिया.

अब शालू बनसंवर कर रहने लगी. उस ने पति से लड़झगड़ कर महंगा टचस्क्रीन मोबाइल फोन भी खरीदवा लिया. मोबाइल फोन को उस ने चलाना भी सीख लिया. शालू सप्ताह में एक दिन पति के साथ घूमने जरूर जाती थी. उस दिन वह खाना नहीं बनाती थी. पतिपत्नी स्वयं तो खापी कर आते, लेकिन रामदीन को भूखे पेट सोना पड़ता था. रामलीला ग्राउंड काफी बड़ा था. चारों ओर बाउंड्री वाल थी और अंदर आनेजाने के 2 बड़े तथा 2 छोटे गेट थे. रामलीला मंचन के लिए अंदर काफी बड़ा मंच बना था. इस ग्राउंड पर शाम को नशेबाजों का जमावड़ा शुरू हो जाता था. ये नशेबाज चरस, गांजा तथा शराब पीते और कभीकभी उपद्रव भी करते. कभी पुलिस का छापा पड़ता तो ये भाग जाते, लेकिन पुलिस के जाते ही फिर आ जाते.

विष्णु के कई दोस्त भी ग्राउंड पर आते थे. विष्णु कभीकभी उन के साथ नशेबाजी कर लेता था. जरूरत होती तो ये नशेड़ी दोस्त विष्णु के घर पर कभी गिलास तो कभी पानी मांगने आ जाते. ये नशेबाज विष्णु की पत्नी शालू को ललचाई नजरों से देखते थे. वह शालू को महंगा फोन चलाते देखते तो समझते कि शालू के पास बहुत पैसा है. शालू को दिखावे की लत थी. इस के चलते उसे बनसंवर कर फोन पर बतियाते हुए ग्राउंड में घूमना अच्छा लगता था. 2 अगस्त, 2020 की रात किन्हीं अज्ञात लोगों ने शालू और उस के पति विष्णु की हत्या कर दी. बेटेबहू की हत्या की खबर रामदीन ने थाना रेल बाजार पुलिस को दी तो थाने में हड़कंप मच गया.

रक्षाबंधन के दिन डबल मर्डर की सूचना पा कर पुलिस अधिकारी भी दहल उठे. अत: कुछ ही देर में एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल तथा एसपी (साउथ) दीपक भूकर रामलीला ग्राउंड पहुंच गए. रेल बाजार थानाप्रभारी दधिबल तिवारी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहले से मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम तथा डौग स्क्वायड टीम को भी बुलवा लिया था. घटनास्थल का दृश्य बड़ा ही वीभत्स था, जिसे देख कर पुलिस अधिकारी सहम गए. घर के बाहर जमीन पर बिछे बिस्तर पर 24-25 वर्षीय विष्णु का शव पड़ा था. उस की हत्या सिर को ईंट से कूच कर की गई थी. पूरा बिस्तर खून से तरबतर था. पास ही खून से सनी 2 ईंटें पड़ी थीं. विष्णु के चेहरे पर भी जख्म थे.

कमरे के अंदर का दृश्य शर्मसार करने वाला था. अंदर शालू का शव नग्नावस्था में पड़ा था, उस की हत्या साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर की गई थी. देखने से ऐसा लग रहा था जैसे उस के साथ हत्या से पहले दुष्कर्म किया गया हो. कमरे का सामान उलटपुलट पड़ा था. बक्सा भी खुला था, जिस से चोरी से भी इनकार नहीं किया जा सकता था. हालांकि मृतका कान में झुमकी तथा पैर में पायल पहने थी, उन्हें नहीं उतारा गया था. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर बारीकी से जांच की तथा साक्ष्य जुटाए. टीम ने ईंट तथा बिस्तर से फिंगरप्रिंट लिए और खून का नमूना सुरक्षित किया. टीम ने खून सनी ईंटों को भी साक्ष्य के तौर पर जाब्ते में शामिल किया गया.

डौग स्क्वायड टीम भी घटनास्थल पर मौजूद थी. टीम ने कुत्ता छोड़़ा तो वह घटनास्थल पर पड़े शव और खून को सूंघ कर भौंकता हुआ ग्राउंड के बाहर आया और जीटी रोड पर आ कर भटक गया. वह हत्या का कोई भी सबूत नहीं जुटा पाया. घटनास्थल पर मृतक का पिता रामदीन तथा उस का पूरा परिवार मौजूद था. मृतक के बहनभाई रो रहे थे, मां कुसुम का भी रोरो कर बुरा हाल था. शालू की मां तथा पिता भी मौजूद थे. वह भी बेटी की मौत पर आंसू बहा रहे थे. हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने मृतक के पिता रामदीन से घटना के संबंध में पूछताछ की तो उस ने बताया कि 3 अगस्त की सुबह जब वह सो कर उठा तो कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था. उस ने बेटेबहू को कई आवाजें दीं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई.

उस ने दरवाजे पर जोर से दस्तक दी तो कुंडी सरक गई और दरवाजा खुल गया. वह कमरे से निकल कर बाहर आया तो सामने बिस्तर पर विष्णु की लाश पड़ी थी. वह घबरा गया और श्यामनगर में रह रहे अपने परिवार के पास पहुंचा. वहां उस ने विष्णु की हत्या की जानकारी दी. साथ ही संदेह भी जताया कि बहू शालू विष्णु की हत्या कर घर से भाग गई है. इस के बाद पूरा परिवार रोतापीटता रामलीला ग्राउंड स्थित मकान पर आ गया. जब हम सब शालू के कमरे में पहुंचे तो सब की आंखें शर्म से झुक गईं. कमरे के अंदर शालू का शव नग्नावस्था में पड़ा था. हमें शक हुआ कि चोरबदमाश घर में घुसे, फिर शालू के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और विरोध करने पर शालू व विष्णु की हत्या कर फरार हो गए.

वे नकदी, आभूषण के साथ शालू का कीमती मोबाइल फोन तथा विष्णु का मोबाइल भी ले गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण तथा पूछताछ के बाद विष्णु और शालू के शव पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिए. इस के बाद एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने इस डबल मर्डर के खुलासे के लिए एक विशेष टीम का गठन किया, जिस की कमान एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल को सौंपी गई. इस विशेष टीम में थाना रेलबाजार प्रभारी निरीक्षक दधिबल तिवारी, एसएसआई संतोष ओझा, एसओजी प्रभारी दिनेश कुमार तथा सर्विलांस प्रभारी सतीश सिंह को शामिल किया गया.

विशेष पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार विष्णु की मौत सिर फटने तथा अधिक रक्त होने से हुई थी. उस के सिर की हड्डियां टूटी पाई गईं, जबकि शालू की मौत गला घोंटने से हुई थी. दुष्कर्म की आशंका के चलते स्लाइड भी बनाई गईं. इस के बाद पुलिस टीम ने मृतक के पिता रामदीन तथा मृतका की मां जानकी से पूछताछ की. जिस से पता चला कि शालू ने पहले पति रामू से तलाक ले कर विष्णु से दूसरी शादी की थी. उस की अपने ससुराल वालों से नहीं पटती थी, जिस से वे लोग अलग मकान ले कर रहने लगे थे. यह भी पता चला कि शालू का पति विष्णु नशाखोर था. कई नशेबाज उस के दोस्त थे.

पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने अपनी जांच 3 बिंदुओं पर केंद्रित की. पहली नशेबाजी, दूसरी पारिवारिक कलह और तीसरी आशनाई. पुलिस टीम ने त्वरित काररवाई करते हुए मृतक विष्णु के कई नशेबाज दोस्तोंं को पकड़ा और उन से कड़ी पूछताछ की. लेकिन उन्होंने हत्या करने की बात स्वीकार नहीं की. पारिवारिक कलह की जांच में भी हत्या का कोई कारण या सबूत नहीं मिला. अब पुलिस टीम ने अपना सारा ध्यान आशनाई पर केंद्रित किया. इस दिशा में जांच से पता चला कि शालू की पहली शादी कन्नौज जनपद के कस्बा गुरसहायगंज निवासी रामू के साथ हुई थी, लेकिन साल भर बाद ही शालू ने उस से तलाक ले लिया था. पुलिस को शक हुआ कि कहीं खुन्नस में रामू ने ही तो दोनों का मर्डर नहीं कर दिया.

सर्विलांस टीम ने दिखाई राह पुलिस टीम ने रामू को उस के घर से हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की. रामू ने बताया कि दोनों का तलाक आपसी सहमति से हुआ था. तलाक के बाद शालू ने विष्णु से शादी कर ली थी और उस ने भी दूसरा विवाह कर लिया था. शालू और उस के बीच किसी प्रकार का कोई मनमुटाव नहीं था. उन दोनों की हत्या किस ने और क्यों की उसे कोई जानकारी नहीं है. पूछताछ के बाद पुलिस को लगा कि रामू निर्दोष है, अत: उसे थाने से जाने दिया.

दूसरी ओर सर्विलांस प्रभारी सतीश सिंह ने मृतक विष्णु व शालू के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लिया. लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिल पा रहा था. यही नहीं उन्होंने घटनास्थल के पास स्थित टावर से डेटा डंप करा कर कुछ संदिग्घ नंबर निकाले और जांच टीम को सौंप दिए. पुलिस ने नंबरों के आधार पर कुछ लोगों को पकड़ा भी और उन से सख्ती से पूछताछ भी की. लेकिन हत्या के संबंध में कोई जानकारी नही मिली. एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल डबल मर्डर के खुलासे के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा रहे थे. साथ ही वह पुलिस टीम को दिशानिर्देश भी दे रहे थे. पर सफलता नहीं मिल पा रही थी.

इसी बीच सर्विलांस प्रभारी सतीश सिंह ने मृतक विष्णु व शालू के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो चौंकाने वाली जानकारी मिली. पता चला कि शालू के फोन से 3 अगस्त की प्रात: 8 बज कर 44 मिनट पर काल की गई थी. पुलिस टीम ने जब उस नंबर को खंगाला तो पता चला यह नंबर सुजातगंज निवासी शबीना का है. पुलिस टीम शबीना के घर सुजातगंज पहुंची और उस से मोबाइल फोन नंबर के संबंध में पूछताछ की. शबीना ने बताया कि यह नंबर उसी का है लेकिन मोबाइल का इस्तेमाल उस का भांजा जमशेद करता है, जो उसी के साथ रहता है. उस ने यह भी बताया कि जमशेद 2 अगस्त की पूरी रात घर नहीं आया था.

जमशेद पुलिस की रडार पर आया तो पुलिस टीम ने उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाया. इस के बाद 7 अगस्त, 2020 की रात उसे नाटकीय ढंग से सुजातगंज मोड़ पर पकड़ लिया गया. फिर उसे थाना रेलबाजार लाया गया. थाने पर जब उस से रामलीला ग्राउंड के अंदर हुए डबल मर्डर के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब सख्ती की गई तो वह टूट गया और डबल मर्डर का अपराध कबूल कर लिया. उस ने बताया कि हत्या में उस का मामा मो. दानिश तथा उस का साथी विकास गौतम भी शामिल थे. मो. दानिश गम्मू खां का हाता का रहने वाला था, लेकिन वर्तमान में वह मीरपुर (तलउवा) में रहता था. विकास गौतम कानपुर देहात के रामनगर (रूरा) का रहने वाला था. फिलहाल वह श्यामनगर (चकेरी) में रहता था.

इस के बाद पुलिस टीम ने जमशेद की निशानदेही पर मो. दानिश तथा विकास गौतम को भी पकड़ लिया. उन दोनों ने भी सहज ही हत्या का जुर्म कबूल लिया. यही नहीं उन तीनों ने पुलिस को शालू का मोबाइल फोन 4 हजार रुपए नकद, सोने की चेन तथा उस के पति विष्णु का मोबाइल फोन बरामद करा दिया. पुलिस ने जब तीनों से मृतका शालू के साथ दुष्कर्म करने की बाबत पूछा तो तीनों ने साफ इनकार कर दिया. पुलिस की मेहनत पुलिस टीम ने डबल मर्डर का परदाफाश करने तथा माल बरामद करने की जानकारी एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह को दी, तो उन्होंने आननफानन में पुलिस लाइन सभागार में प्रैसवार्ता की और हत्यारोपियों को मीडिया के सामने पेश कर डबल मर्डर का खुलासा किया.

उन्होंने खुलासा करने वाली टीम को पुरस्कार स्वरूप 75 हजार रुपए देने की घोेषणा भी की. पुलिस खुलासे से जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है. मो. दानिश चमनगंज थाना क्षेत्र के गम्मू खां के हाता में रहता था. वह अपने भांजे जमशेद तथा साथी विकास गौतम के साथ चोरियां करता था. तीनों नशेबाज थे और नशेबाजी करने रामलीला ग्राउंड जाते थे. यहीं एक रोज उन की नजर ग्राउंड में रहने वाले विष्णु की पत्नी शालू पर पड़ी. शालू टहलते हुए महंगे मोबाइल पर बात कर रही थी. उस का पहनावा भी रईसों जैसा था.

शालू को देख कर दानिश को लगा कि वह मालदार औरत है. उस ने अपने साथियों के साथ उस का घर साफ करने की योजना बनाई और उस के घर की रैकी करने लगा. 2 अगस्त, 2020 की रात 10 बजे मो. दानिश अपने साथी जमशेद व विकास के साथ रामलीला ग्राउंड में छिप कर बैठ गया. रात लगभग 12 बजे लाइट चली गई तो विष्णु और शालू कमरे के बाहर आ गए और खुले में बिस्तर लगा कर सो गए. कुछ देर बाद वे तीनों वहां पहुंचे और शालू के तकिया के नीचे से चाबी निकालने लगे. तभी शालू जाग गई और चीख पड़ी. इस पर विकास ने उसे दबोच कर उस का मुंह दबा दिया.

लेकिन शालू की चीख से विष्णु जाग गया था वह उन से भिड़ गया. इस पर मो. दानिश व जमशेद ने पास पड़ी ईंट उठा ली और दोनों विष्णु के सिर पर प्रहार करने लगे. विष्णु का सिर फट गया और वह बिस्तर पर ही ढेर हो गया. विष्णु की हत्या के बाद विकास गौतम और जमशेद शालू को कमरे में घसीट ले गए. वहां उसे निर्वस्त्र किया, कामेच्छा पूरी की फिर उस का गला उसी की साड़ी से घोंट दिया. हत्या करने के बाद उन्होंने कमरे का सामान बिखेरा, बक्से का ताला खोल कर नकद रुपया, आभूषण कब्जे में किए और दोनों के मोबाइल फोन ले कर फरार हो गए.

ये तीनों पुलिस के हत्थे कभी नहीं चढ़ते यदि जमशेद के नाबालिग भाई ने शालू के फोन से जमशेद को फोन न किया होता. उस 13 सेकेंड की काल ने ही पुलिस को जमशेद तक पहुंचा दिया और तीनों पकड़े गए. थाना रेलबाजार पुलिस ने मृतक विष्णु के पिता रामदीन को वादी बना कर भादंवि की धारा 302/380/411 के तहत मो. दानिश, जमशेद व विकास गौतम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और तीनों को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों ने वारदात के दौरान शालू से दुष्कर्म की बात नकार दी थी. लेकिन पुलिस ने उन की बात पर यकीन नहीं किया. अत: आरोपी दानिश, जमशेद व विकास का पुलिस ने मैडिकल कराया. अगर शालू की स्लाइड रिपोर्ट से आरोपितों की मैडिकल रिपोर्ट का मिलान होता है तो दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म की धारा बढ़ा दी जाएगी. 9 अगस्त, 2020 को थाना रेलबाजार पुलिस ने अभियुक्त मो. दानिश, जमशेद तथा विकास गौतम को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

UP News : सुहागसेज पर मौत

UP News : 24 वर्षीय प्रदीप कुमार पासवान और 22 वर्षीय शिवानी की सुहागसेज फूलों से सजाई गई थी. उन्हें हंसीखुशी से कमरे में भेजा गया था, लेकिन सुबह को सुहागसेज पर दोनोंं की लाशें मिलीं. शादी की पहली रात को दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ? किस ने छीन ली दोनों की जिंदगी? पढ़ें, सुहागरात को दोनों की मौत की सच्चाई को बयां करने वाली यह कहानी…

9 मार्च, 2025 को सुबह लगभग 6 बजे दीपक कुमार पासवान सब्जी मंडी जाने के लिए तैयार हो गया. रात को उस के छोटे भाई प्रदीप ने कह दिया था कि वह भी सुबह मंडी उस के साथ चलेगा. मंडी जाते समय दीपक ने प्रदीप कुमार पासवान के कमरे का दरवाजा खटखटाया और कहा कि प्रदीप मैं तो मंडी जा रहा हूं, तुम भी आ जाना.

अयोध्या के थाना कैंट क्षेत्र के सहादतगंज मुरावन टोला निवासी 24 वर्षीय प्रदीप कुमार पासवान की शादी खंडासा थाना क्षेत्र के डीली सरैया के मजरा (मौजा) मोहलिया निवासी मंतूराम पासवान की बेटी 22 वर्षीय शिवानी से 7 मार्च, 2025 को हुई थी. 8 मार्च को दूल्हा बना प्रदीप अपनी नईनवेली दुलहन को विदा करा कर अपने घर लाया था. 9 मार्च को प्रीतिभोज का कार्यक्रम होना था.

रिसैप्शन के लिए हलवाई को खाना बनाने की तैयारी करनी थी, इसलिए दीपक अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ सब्जी खरीदने के लिए मंडी आया था. मंडी पहुंचने पर जब उस का भाई प्रदीप नहीं आया तो भाई दीपक ने सोचा रात को शादी की थकान के चलते प्रदीप सो रहा होगा, इसलिए आंख नहीं खुली होगी. दीपक ने अपने रिश्तेदारों के साथ सब्जी खरीदना शुरू की ही थी कि उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. फोन घर से ही उस की बहन अनीता ने किया था. वह हड़बड़ाते हुए बोली, ”भैया, घर जल्दी आ जाओ.’’

इतना कह कर उस ने काल डिसकनेक्ट कर दी. इस पर दीपक हड़बड़ा गया. वह यह भी नहीं पूछ सका कि बात क्या है? आननफानन में दीपक उल्टे पैर घर लौट आया. घर में घुसते ही महिलाओं के रोनेचीखने की आवाजें सुन कर दीपक के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई. पता चला कि नवविवाहित जोड़े की सुहागसेज पर ही मौत हो गई है. यह कैसे हो गया?

पता चला कि 9 मार्च की सुबह 7 बजे तक प्रदीप और नवविवाहिता शिवानी सो कर नहीं उठे. इस पर प्रदीप की मां ने बेटी से प्रदीप को जगाने और मंडी भेजने के लिए कहा. नवविवाहित जोड़े के कमरे का दरवाजा काफी देर तक खटखटाने और प्रदीप और शिवानी को कई आवाजें देने के बाद भी जब अंदर से कोई जबाव नहीं मिला और दरवाजा नहीं खुला, तब परिजन व रिश्तेदार कमरे के बाहर जमा हो गए. सभी डर गए थे. मां ने बेटी अनीता से कमरे की पीछे की खिड़की से देखने को कहा.

इस पर अनीता ने खिड़की के पल्लों को धकेल कर खोला तो अंदर का सीन देखते ही उस की चीख निकल गई. प्रदीप पंखे से लटका हुआ था. सभी ने मिल कर तय किया कि अब और देर नहीं की जाए. तब खिड़की तोड़ कर खिड़की के रास्ते कमरे में घुसा गया और कमरे का दरवाजा खोला. कमरे के अंदर का नजारा देख कर फेमिली वालों के साथसाथ सभी रिश्तेदार सन्न रह गए. प्रदीप का शव बंद कमरे में फंदे से लटका हुआ था जबकि दुलहन शिवानी मृत अवस्था में सुहाग सेज पर पड़ी थी.

सुहागसेज पर मिलीं नवविवाहित जोड़े की लाशें

प्रदीप की बहन

रहस्यमय तरीके से दोनों की मौत से शादी के घर में कोहराम मच गया. जहां कल तक शहनाई बज रही थी, वहीं अब महिलाओं की चीखें सुनाई दे रहीं थीं. इन में प्रदीप की मम्मी की भी आवाज थी, ‘नागिन मेरे बेटे को खा गई.’

ऐसा क्या हुआ, जो कुछ घंटों में ही दोनों की मौत हो गई? क्या किसी ने दोनों की हत्या तो नहीं कर दी? लेकिन दरवाजा तो अंदर से बंद था, फिर ऐसा होना कैसे संभव था?

नवविवाहित युगल की मौत का रहस्य गहराता जा रहा था. हर कोई चाहता था कि दोनों की मौत के रहस्य से जल्द से जल्द परदा उठे. फेमिली वाले भी कुछ समझ नहीं पा रहे थे. यह सब कैसे और क्यों हो गया?

मामले की गंभीरता को देखते हुए दीपक ने पुलिस के साथ ही दुलहन शिवानी के फेमिली वालों को भी घटना की जानकारी दे दी. खबर मिलते ही शिवानी के मायके में भूचाल सा आ गया. ऐसी क्या बात हो गई, जो दुलहन और दूल्हे की शादी के कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई? पड़ोसी भी शिवानी के घर पर जा पहुंचे. थाना कैंट के एसएचओ पंकज सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने आते ही कमरे का निरीक्षण किया. इस के बाद प्रदीप के शव को फंदे से उतारा. प्रदीप ने अपनी शेरवानी के दुपट्टे से फांसी लगाई थी. घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई.

सूचना मिलते ही एसएसपी राज करण नैय्यर, सीओ शैलेंद्र सिंह भी वहां पहुंच गए. पुलिस का कहना था कि फोरैंसिक टीम ने सैंपल लिए हैं. कमरा अंदर से बंद था, ऐसे में मामला सुसाइड का लग रहा है. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा. पुलिस को कमरे के अंदर से प्रदीप का मोबाइल भी मिला, जिसे कब्जे में ले लिया गया. फेमिली वालों ने पुलिस को बताया कि 8 मार्च को सुबह 11 बजे दुलहन शिवानी विदा हो कर राजीखुशी से अपनी ससुराल पहुंची थी. शाम होतेहोते घर और रिश्ते की महिलाएं ढोलक ले कर बैठ गईं और फिर देर रात तक शादी के गीत गाए जाते रहे.

पूजापाठ के साथ जरूरी रस्में निभाई गईं. सभी ने खाना खाया और हंसीठिठोली के बीच रात लगभग 11 बजे के बाद दूल्हादुलहन को भाभी व बहनों ने कमरे में छोड़ा था. कमरे को फूलों की लडिय़ों तथा सुहागसेज को गुलाब की पंखुडिय़ों से सजाया गया था. शादी में कामकाज के चलते सभी थके हुए थे, इसलिए सोने चले गए थे. रात को घर में सो रहे मेहमानों व परिजनों ने किसी प्रकार की कोई आवाज या शोर भी नहीं सुना.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के साथ ही दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने अपनी जांच कई एंगल से शुरू की. सुहागरात पर दोनों के बीच किसी बात पर विवाद हुआ हो. इस के बाद प्रदीप ने दुलहन की हत्या कर दी, फिर खुद फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली. अथवा दोनों के बीच विवाद के बाद दुलहन ने आत्महत्या कर ली. इस के बाद डर कर प्रदीप ने भी फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. पुलिस के पहुंचने से पहले ही घर वालों ने खिड़की का दरवाजा तोड़ कर कमरे में प्रवेश किया था. ऐसे में पुलिस हत्या के एंगल से भी जांच में जुटी और घर में कौनकौन रिश्तेदार थे, उन के बारे में फेमिली वालों से पूछताछ शुरू की.

9 मार्च को शाम 3 बजे शिवानी और प्रदीप का पोस्टमार्टम हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाक्टरों ने शिवानी की मौत का कारण उस की गला दबा कर हत्या करना बताया. वहीं प्रदीप की मौत हैंगिग से होना बताया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इस बात का भी खुलासा हुआ कि शिवानी का गला जोर से दबाया गया था.

हत्या और आत्महत्या बनी पहेली           

              

अब प्रश्न यह था कि नईनवेली दुलहन शिवानी की हत्या किस ने की और प्रदीप को पंखे से किस ने लटकाया? यह सभी के लिए पहेली बनी हुई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शिवानी की मौत रात 3 बजे हुई थी, जबकि उस के लगभग एक घंटे बाद प्रदीप की मौत हुई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट की खास बात यह थी कि मरने से पहले सुहागरात पर दोनों के रिलेशन बने थे. दोनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मौत की उलझी गुत्थियों को कुछ हद तक सुलझा दिया था.

फोरैंसिक टीम की जांच से एक फैक्ट और सामने आया. प्रदीप ने शिवानी की हत्या करने के बाद करीब 45 मिनट तक यह सोचा कि वह खुद की जिंदगी को कैसे खत्म करे. शिवानी की लाश के पास बैठ कर वह सोचता रहा. कमरे में एक चाकू भी मिला था. हालांकि उस पर खून के निशान नहीं थे. कमरे में बैड पर प्रदीप ने कुरसी और स्टूल रख कर पंखे तक पहुंचने की कोशिश की थी, क्योंकि ये सब सामान बिखरा हुआ था.

अब सवाल यह था कि जब दोनों हंसीखुशी अपने कमरे में गए थे. तब देर रात ऐसा क्या हुआ? रात को उन के कमरे में कौन आया, जिस से दूल्हे प्रदीप को सुहागरात मनाने के बाद अपनी नवविवाहिता पत्नी शिवानी की गला घोंट कर हत्या करनी पड़ी? और लगभग एक घंटे के अंतराल में ही प्रदीप को फंदे पर लटक कर आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा?

जबकि कुछ घंटे पहले अपनी शादी में प्रदीप दोस्तों के साथ डांस कर रहा था. प्रदीप और शिवानी अपनी शादी से खुश थे. दोनों के बीच कोई अनबन नहीं थी.

मोबाइल के मैसेज में छिपा राज

शादी तय होने के बाद पिछले एक साल से दोनों एकदूसरे से मोबाइल पर दिल खोल कर बातें करते थे. दोनों को अपनी शादी के दिन का बेसब्री से इंतजार था. दोनों को एकएक दिन भारी पड़़ रहा था. फिर ऐसा क्या हुआ, जो विवाहित जीवन शुुरू होने से पहले ही खत्म हो गया.

पुलिस ने बताया कि दुलहन शिवानी का गला इतनी जोर से दबाया गया कि वह चिल्ला भी नहीं सकी. उस की आवाज गले में घुट कर रह गई. ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि जिस कमरे में प्रदीप और दुलहन शिवानी मौजूद थे, उस कमरे की खिड़की से सिर्फ 5 फीट की दूरी पर बाकी परिजन सोए हुए थे. अगर शिवानी की आवाज बाहर तक पहुंचती तो शिवानी को बचाने के लिए फेमिली वाले आ जाते, लेकिन उन्हें घटना के बारे में सुबह 7 बजे ही पता चला.

पुलिस ने कमरे में मिले प्रदीप के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. बताया जाता है कि मोबाइल में ज्यादातर काल शादी से संबंधित ही थे. एक मैसेज आया था. इस मैसेज में लिखा था, ”तुम कैसी हो… मुझे छोड़ कर अच्छा नहीं किया…’’

सीओ शैलेंद्र सिंह ने बताया, ”प्रदीप के मोबाइल पर एक अधूरा मैसेज मिला. उस मैसेज की भाषा कुछ ऐसी है, जैसे प्रदीप पत्नी शिवानी से कुछ सवाल पूछना चाहता है. ऐसा अनुमान है कि उसी मैसेज को दिखा कर दोनों में विवाद हुआ होगा. फिर प्रदीप ने शिवानी की हत्या कर दी और खुद फंदे पर लटक गया.’’

उन का मानना था कि प्रदीप ने खुद ही अपने दूसरे नंबर से इस मैसेज को किया था. वह इस मैसेज के जरिए नवविवाहिता पत्नी शिवानी के पुराने रिलेशनशिप के बारे में जानना चाहता था. उन्होंने बताया कि इस मामले में अभी जांच जारी है. दोनों परिवारों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है. कोई शिकायत मिलेगी, तब उसी के अनुसार काररवाई की जाएगी.’’

मोबाइल के मैसेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से धीरेधीरे इस वारदात से परदा उठता चला गया. प्रदीप ने शिवानी का गला जिस समय दबाया, उस समय शिवानी गहरी नींद में थी. दम घुटने से उस की नींद टूट गई. आंखें खुलीं तो उस ने प्रदीप को देखा होगा. शिवानी के गले पर जितने गहरे नीले रंग के निशान बने थे, उस से स्पष्ट है कि प्रदीप ने दोनों हाथों से शिवानी का गला दबा रखा होगा. शिवानी ने बचने के लिए ताकत लगाई, लेकिन प्रदीप की पकड़ से वह छूट नहीं पाई.

जिंदगी के लिए जुझते हुए उस ने प्रदीप के चेहरे और सीने पर हाथ मारे. प्रदीप के हाथों पर नोचा, लेकिन 3 मिनट में उस की सांसें घुट गईं. डाक्टर को शिवानी के हाथ के नाखूनों से प्रदीप के शरीर की स्किन मिली थी. वहीं प्रदीप का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर को उस की बौडी पर भी नोचे जाने के निशान मिले थे. डाक्टर के अनुसार शिवानी और प्रदीप के खून की जांच में किसी तरह का कैमिकल नहीं मिला. यानी दोनों ने कोई नशा नहीं किया था और न कोई दवा ली. प्रदीप ने पूरे होशोहवास में घटना को अंजाम दिया था.

मोहलिया निवासी शिवानी सिलाई का काम करती थी और अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती थी. वह 8वीं कक्षा तक पढ़ी थी. उस के पिता  मंतूराम पासवान भी दिल्ली में सिलाई का काम करते थे. मंतूराम शिवानी के लिए लड़का तलाश रहे थे. किसी ने उन्हें प्रदीप के बारे में बताया.

तब मंतूराम प्रदीप के घर मुरावन टोला पहुंचे. मुरावन टोला और मोहनिया गांव के बीच 25 किलोमीटर की दूरी है. मंतूराम ने प्रदीप की फेमिली से रिश्ते की बात की. प्रदीप टाइल्स लगाने का काम करता था. वह दसवीं पास था. उस के पिता भग्गन पासवान की मौत हो चुकी थी. बड़ी बहन अनीता और भाई दीपक की शादी हो चुकी थी. प्रदीप सीधासादा युवक था. गौसेवक था. उस ने एक गाय भी पाल रखी थी. उस का चारापानी प्रदीप ही करता था. घर के सभी फैसले वही करता था. बड़ा भाई दीपक ट्रक मैकेनिक है.

शिवानी की मरजी से हुई थी शादी

दोनों ही परिवार शादी के लिए तैयार हो गए. इस के बाद लड़की को दिखाया गया. दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर लिया. शादी अप्रैल, 2025 में करना तय हुआ था, लेकिन प्रदीप की मम्मी की तबियत खराब रहती थी, इसलिए शादी की तारीख अप्रैल की जगह 7 मार्च, 2025 रखी गई. मंतूराम शादी से एक महीने पहले अपने पुश्तैनी गांव के मकान पर परिवार सहित आ गए थे. शिवानी के पिता मंतूराम पासवान जानकारी मिलने पर अपने परिवार के साथ शिवानी की ससुराल पहुंचे. उन्होंने बताया कि शादी बेटी शिवानी की मरजी से ही की थी.

8 मार्च को सुबह 11 बजे बारात को हंसीखुशी विदा किया था. सभी बाराती और दूल्हादुलहन खुश थे. बारात विदा हो कर जब मुरावन टोला आई तो 4-5 घंटे में क्या हुआ, यह पता नहीं है. शिवानी की मम्मी सुमन देवी ने भी यही बात बताई और कहा कि हम किसी पर आरोप नहीं लगाएंगे. शिवानी दिल्ली में रहती थी. पुलिस के अनुसार उस का रहनसहन भी ठीक था. उस के फेमिली वालों से पुलिस ने संपर्क किया. शिवानी अपना मोबाइल मायके में ही छोड़ आई थी. पुलिस को शिवानी का मोबाइल रिकवर करना था.

सुमन देवी ने बताया कि शिवानी डेढ़ साल की थी, तब उसे दिल्ली ले गए थे और वहीं बस गए. पति लोहा फैक्ट्री में और मैं भी पास की एक कंपनी में काम करती थी. शिवानी घर पर ही सिलाई का काम करती थी. एक दिन काम करते हुए शिवानी का मोबाइल पानी में गिर गया था. इस के बाद उस के पास कोई मोबाइल नहीं था. मेरे ही मोबाइल से प्रदीप से बात करती थी.’’

प्रदीप ने वारदात से लगभग 2 घंटे पहले अपने भांजे अनुज को फोन किया था. पुलिस ने इस संबंध में अनुज से पूछताछ की. अनुज ने बताया कि मामा प्रदीप ने रविवार यानी 9 मार्च को उस से नया मोबाइल फोन खरीदने को कहा था. माना जा रहा है कि पत्नी शिवानी के पास कोई फोन न होने पर प्रदीप उसे नया फोन देना चाह रहा था. फैजाबाद के समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद घटना की जानकारी मिलने पर प्रदीप पासवान के घर पहुंचे. उन्होंने प्रदीप के परिजनों को सांत्वना दी. उन्होंने कहा कि पीडि़त परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी.

फेमिली वालों ने शिवानी का शव लेने से क्यों किया इंकार

मायका पक्ष ने अंतिम संस्कार के लिए शिवानी के शव को लेने से इंकार कर दिया. उन का कहना था कि हम ने लड़की की शादी कर दी. लड़की अब आप के परिवार की हो गई. आप ही अब उस का क्रियाकर्म करें. इस बात ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि शिवानी के परिजनों को उस से जरा भी प्यार नहीं था, जो उस के शव को भी अपने गांव नहीं ले गए. यह बात भी चर्चा का विषय बनी रही. शिवानी के ससुराल वालों ने एक ही चिता पर दोनों के शव रख कर उन का अंतिम संस्कार किया. नवविवाहित युगल की चिता को जलते देख सभी की आंखें भर आईं. जहां कुछ घंटों पहले खुशी का माहौल था, वहीं अब मातम पसरा हुआ था.

अयोध्या के जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डा. आलोक मनदर्शन का मानना है कि पत्नी की हत्या के बाद प्रदीप के सुसाइड के पीछे 3 कारण हो सकते हैं. बेवफाई, सामाजिक डर और तीसरा तुम नहीं तो मैं भी नहीं. उन का कहना था कि प्रदीप सुसाइड मामले में ऐसा नहीं हो सकता कि अचानक कुछ बड़ा हो गया हो. प्रदीप के मन में पहले से कुछ शंकाएं रहीं होंगी. सुहागरात में प्रदीप को और क्लीयरेंस मिल गया होगा कि उस का शक सही है. इस के बाद ही प्रदीप ने ऐसा निर्णय लिया होगा.

फिलहाल नवविवाहिता युगल की मौत को ले कर चर्चाओं का बाजार गरम है. जितने मुंह उतनी बातें. शिवानी अपना मोबाइल मायके में क्यों छोड़ आई? शिवानी का मोबाइल पानी में गिरने पर खराब हो जाने की बात कही जा रही है तो क्या उसे अब तक सही नहीं कराया जा सका? आजकल कौन लड़की अपना मोबाइल मायके में छोड़ कर आती है. सुहागरात वाले दिन प्रदीप ने शिवानी का पास्ट जानने का प्रयास किया और स्वयं ही अपने मोबाइल पर मैसेज भेजा. इस के पीछे उस की नीयत थी कि वह पहली ही रात में यह जान लेना चाहता था कि शिवानी शादी से पहले किसी से प्यार करती थी और उस के साथ रिलेशन बना चुकी थी या नहीं? उस का अनुमान रहा होगा कि हड़बड़ी में शिवानी कुछ न कुछ बात जरूर कहेगी.

माना जाता है कि मैसेज दिखाने पर शिवानी ने विरोध किया होगा और दोनों के बीच झगड़ा हुआ होगा. गुस्से में उस ने शिवानी का गला घोंट दिया. शिवानी की हत्या करने के बाद लगभग 45 मिनट प्रदीप जिंदा रहा. आंकलन लगाया जा रहा है कि इस अंतराल में प्रदीप को यह एहसास हुआ होगा कि अब पत्नी की हत्या के आरोप में पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी. वह परिवार और समाज को क्या मुंह दिखाएगा? बहरहाल, शक, अविश्वास और रिश्तों की उलझन में दोनों की जिंदगी छिन गई.

 

 

UP Crime News : दुबई से लौटे पति को काट कर सूटकेस में फेंका

UP Crime News : पिछले एक महीने में प्रेमिका के साथ मिल कर पति द्वारा पत्नी को ठिकाने लगाने या पत्नी द्वारा प्रेमी के साथ मिल कर पति का कत्ल करने की अलगअलग राज्यों में 20 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं. इन में जहां मेरठ की ड्रम वाली घटना में क्रूरता की पराकाष्ठा थी तो देवरिया की यह घटना भी उस से किसी मामले में कम नहीं है.

नौशाद के दुबई जाने के बाद रजिया सुलतान पूरी तरह रोमान के वश में आ गई थी. अब उस के लिए अलग घर बन ही गया था. नौशाद यहां जो पैसे भेजता था, उसी के अकाउंट में आता था. इसलिए उस के अकाउंट में काफी रकम जमा हो गई थी. यही वजह थी कि अब उसे लगने लगा था कि अगर नौशाद नहीं भी रहेगा तो वह रोमान के साथ आराम से गुजारा कर लेगी. क्योंकि रोमान भी तो कमाता था. उस के साथ वह सुखी रहेगी, क्योंकि वह उस के साथ रहेगा.

अब वह बाकी की जिंदगी अपने प्रेमी रोमान के साथ बिताना चाहती थी. लेकिन इस के लिए नौशाद से छुटकारा चाहिए था. नौशाद से वह तलाक लेना नहीं चाहती थी. इस की वजह यह थी कि अगर वह नौशाद से तलाक लेती तो उस के हाथ कुछ न लगता. घर भी छोडऩा पड़ता और नौशाद के रुपए भी देने पड़ते. जबकि वह यह सब हड़पने के चक्कर में थी.

अब नौशाद से छुटकारा पाने का एक ही तरीका बचा था कि उसे ठिकाने लगा दिया जाए यानी उस की हत्या कर दी जाए. लेकिन यह काम उस के अकेले के वश का नहीं था. अभी यह भी कंफर्म नहीं था कि रोमान नौशाद की हत्या के लिए तैयार होगा भी या नहीं. रजिया दुविधा में फंसी थी. लेकिन उस ने यह तय कर लिया था कि अब वह नौशाद के साथ नहीं, प्रेमी रोमान के साथ रहेगी. यह निर्णय लेने के बाद अब उसे रोमान को अपने मामा की हत्या के लिए तैयार करना था, साथ ही इस के लिए भी मनाना था कि सारा मामला शांत होने के बाद वह उस के साथ निकाह करेगा. इस के बाद उस ने धीरेधीरे रोमान को मनाना शुरू किया कि नौशाद के न रहने पर दोनों सुख और शांति से रह सकेंगे.

रोमान को भी मामी रजिया से जो सुख मिल रहा था, उसे वह किसी भी हालत में छोडऩा नहीं चाहता था. इस के लिए उसे चाहे कुछ भी करना पड़े. आखिर वह रजिया की देह के चक्कर में उस के लपेटे में आ ही गया और नौशाद की हत्या के लिए राजी हो गया. रोमान के राजी होने के बाद नौशाद की हत्या की योजना बनने लगी, क्योंकि इसी अप्रैल महीने में वह आने वाला था. हत्या करना तो आसान था, लेकिन मुश्किल काम था लाश को ठिकाने लगाना. फिर यह काम रोमान के अकेले के वश का भी नहीं था. इस काम में रजिया किसी तरह की मदद भी नहीं कर सकती थी.

काफी सोचविचार और सलाहमशविरे के बाद तय हुआ कि लाश का चेहरा बिगाड़ कर कहीं दूर ले जा कर फेंक दिया जाएगा, जहां कोई उसे पहचान नहीं पाएगा. उस के बाद दोनों निकाह कर के आराम से रहेंगे. रजिया और रोमान नौशाद के आने से पहले पूरी तैयारी कर लेना चाहते थे. क्योंकि इस बार रजिया नौशाद से छुटकारा पा लेना चाहती थी.

अपनी इस योजना को साकार करने के लिए रोमान को एक साथी की जरूरत थी. रोमान ड़ाइवर था. उस की तमाम ड्राइवरों से दोस्ती थी. लेकिन गांव विशौली के रहने वाले हिमांशु से उस की कुछ ज्यादा ही पटती थी. दोनों का अकसर रात का खानापीना साथ होता था. उसे रोमान और रजिया के संबंधों के बारे में पता भी था. इसलिए जब रोमान ने पूरी बात बता कर सहयोग मांगा तो हिमांशु हर तरह से उस की मदद करने को तैयार हो गया.

अब रजिया और रोमान को नौशाद के आने का इंतजार था. 10 अप्रैल, 2025 को जब नौशाद दुबई से घर आया तो रजिया ने बड़े जोश के साथ उस का स्वागत किया. नौशाद को लगा कि पत्नी अब सुधर गई है. वह बहुत खुश हुआ. वह भी एक साल पत्नी से अलग रहा था, इसलिए उस ने पत्नी को खूब प्यार किया. इस बीच रजिया सुलतान और रोमान की फोन पर बातें होती रहीं. नौशाद को कैसे मारा जाए, इस की योजना बनती रही. बात गला दबा कर मारने की आई तो नौशाद इतना हट्टाकट्टा था कि तीनों मिल कर उसे काबू नहीं कर सकते थे. किसी हथियार से मारने की बात चली तो चीखपुकार होती और सभी जान जाते.

इसलिए तय हुआ कि नौशाद को पहले नशे की दवा दे कर सुला दिया जाए. उस के बाद गला दबा कर हत्या कर दी जाए. फिर लाश को किसी चीज में लपेट कर कहीं दूर फेंक दिया जाए. इस बीच नौशाद दुबई जाने की तैयारी करने लगा था. वह हवाई टिकट की कोशिश में लगा था. नौशाद दुबई वापस चला जाए, उस के पहले ही उस का काम तमाम करना था. रोमान ने नशे की दवा की व्यवस्था कर दी तो 19 अप्रैल, 2025 की शाम रजिया ने रात के खाने में नींद की दवा नौशाद को खिला दी. दवा देने के बाद रजिया ने इस बात की जानकारी रोमान को दे दी.

रजिया की बेटी सो गई तो उसे उस ने अलग कमरे में सुला कर दरवाजा बंद कर दिया. अब्बू बाहर के कमरे में सोए थे. घर के अंदर रजिया और नौशाद ही थे. रात 11 बजे के आसपास रोमान और हिमांशु बोलेरो ले कर आ गए. रजिया ने पीछे का दरवाजा खोल कर दोनों को अंदर बुला लिया.

गहरी नींद में सोए शौहर को लगाया ठिकाने

नौशाद नशे में गहरी नींद सो रहा था. रजिया ने नौशाद के पैर पकड़ लिए तो हिमांशु ने सिर. इस के बाद रोमान ने नौशाद के सीने पर बैठ कर उस का गला दबा दिया. नौशाद थोड़ा छटपटाया, फिर शांत हो गया. नौशाद कहीं जीवित न रह जाए, रजिया ने मूसल से उस के सिर पर कई वार किए. जब उसे विश्वास हो गया कि नौशाद अब जीवित नहीं हो सकता तो उस की पहचान न हो सके, इस के लिए रजिया ने चापर की नोंक से उस का पूरा चेहरा गोद दिया.

अब बारी थी लाश को ठिकाने लगाने की. वे लाश को ले जा कर कहीं दूर फेंक आना चाहते थे, जहां लाश की शिनाख्त न हो सके. रजिया के घर में 2 सूटकेस थे. पहले उन्होंने लाश को छोटे सूटकेस में भरने की कोशिश की. लेकिन उस में लाश नहीं आई. तब रजिया ने बड़ा सूटकेस खाली किया और उसे ला कर रोमान को दिया.

रोमान और हिमांशु ने नौशाद के शव को बड़े सूटकेस में भरना चाहा तो लाश उस में भी नहीं आई. इस के बाद रोमान और हिमांशु ने नौशाद की लाश को कुल्हाड़ी और चापर से 2 हिस्सों में काट कर सूटकेस में भरा. तब भी पैर अंदर नहीं जा रहे थे. तब पैरों को तोड़ कर अंदर डाला और सूटकेस बंद कर दिया. रजिया ने सूटकेस खाली करते समय उस में से एकएक कागज तक निकाल लिया था, जिस से पता न चल सके कि सूटकेस किस का है.

इस के बाद रोमान और हिमांशु सूटकेस बोलेरो में रख कर चल पड़े. वे सूटकेस को ले कर वहां से 55 किलोमीटर दूर थाना तरकुलवा के अंतर्गत आने वाले गांव छापर पटखौली पहुंचे और एक खाली पड़े खेत में उसे फेंक दिया. उस समय सुबह के 4 बज रहे थे. लाश से भरा सूटकेस फेंक कर दोनों अपनेअपने घर चले गए. लाश फेंकने की सूचना रोमान ने रजिया को फोन द्वारा दे दी थी. उस के बाद वह निश्चिंत हो गई थी. उसे पूरा विश्वास था कि पुलिस किसी भी हालत में उस तक पहुंच नहीं पाएगी.

दूसरी ओर गांव छापर पटखौली के रहने वाले किसान जितेंद्र गिरि कंबाइन मशीन ले कर गेहूं कटवाने पहुंचे तो उन्हें बगल वाले खेत में एक बड़ा सा सूटकेस पड़ा दिखाई दिया. सूटकेस में खून लगा था, इसलिए उन्होंने इस बात की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. थोड़ी ही देर में थाना तरकुलवा पुलिस वहां आ गई. घटनास्थल की स्थिति देख कर थाना तरकुलवा के एसएचओ ने यह जानकारी पुलिस अधिकारियों को दे दी थी. थाना पुलिस ने आते ही सब से पहले लोगों को वहां से हटा कर आसपास के इलाके को बैरिकेड्स करवा दिया था.

थोड़ी ही देर में एएसपी अरविंद वर्मा, सीओ (सिटी) संजय रेड्डी, स्वाट टीम के प्रभारी दीपक कुमार, डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम के साथ आ गए थे. अरविंद वर्मा ने सूटकेस खुलवाया तो उस में 2 टुकड़ों में एक युवक की लाश थी. सिर से कमर तक का हिस्सा प्लास्टिक में लिपटा था तो कमर से पैर तक का हिस्सा बोरे में भरा था. सिर पर चोट के तथा धारदार हथियार के निशान थे.

कैसे हुई लाश की पहचान

पुलिस ने इकट्ठा लोगों से लाश की शिनाख्त करानी चाही, पर कोई मरने वाले युवक को पहचान नहीं सका. तब सूटकेस की तलाशी ली गई कि उसी से ऐसा कुछ मिल जाए, जिस से मरने वाले के बारे में कुछ पता चल जाए. पर यह कोशिश भी बेकार गई. तलाशी के दौरान ही अरविंद वर्मा की नजर सूटकेस पर लगे एक स्टिकर पर पड़ी, जो एयरपोर्ट का बारकोड था. सूटकेस से थोड़ी दूरी पर पुलिस को एक विदेशी सिम भी मिला.

तब उन्होंने वह बारकोड एयरपोर्ट पर भेज कर पता करवाया. उस बारकोड से पता चला कि वह सूटकेस देवरिया के ही थाना मईल के अंतर्गत आने वाले गांव भटौली के रहने वाले नौशाद का है. पुलिस को लगा कि यह लाश नौशाद की हो सकती है या फिर उस के किसी रिश्तेदार की. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर पुलिस भटौली गांव के लिए रवाना हो गई.

भटौली पहुंच कर पुलिस को पता चला कि वह लाश नौशाद की ही थी. नौशाद की पत्नी से नौशाद के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि वह रात को कहीं चले गए थे. पुलिस ने जाने का कारण और कहां गए होंगे, पूछा तो वह पुलिस को गुमराह करने लगी. पुलिस को उस की बातों से शक हुआ तो उस के घर की तलाशी ली. इस तलाशी में पुलिस को एक सूटकेस मिला, जिस में खून लगा था. यह वही सूटकेस था, जिस में पहले लाश रखने की कोशिश की गई थी.

इस के बाद पुलिस ने रजिया सुलतान से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने पति की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करते हुए हत्या के पीछे की पूरी कहानी सुना दी. पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और थाने ले आई. पूछताछ में पता चला कि रजिया ने बेहद चालाकी से नौशाद को ठिकाने लगाने की साजिश रची थी. जबकि वह ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी. शायद इसीलिए सूटकेस में लगे बारकोड का मतलब वह समझ नहीं सकी थी. उस ने सूटकेस का एकएक सामान तो निकाल लिया था, पर जल्दबाजी में वह बारकोड नहीं निकाल पाई थी.

सुबह जब नौशाद के पिता ने बेटे के बारे में पूछा था, तब उस ने कहा था कि रात में वह कहीं चले गए थे. इस के बाद पूरा परिवार उस की तलाश में लग गया था. दोपहर को पुलिस पहुंची तो पता चला कि उस की हत्या हो चुकी है.

आरोपियों से पूछताछ करने के बाद नौशाद की हत्या के पीछे की जो दिलचस्प कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के थाना मईल के अंतर्गत आने वाले गांव भटौली का रहने वाला नौशाद अहमद और देवरिया से लगे जिला बलिया की रहने वाली रजिया सुलतान उर्फ शिबा एकदूसरे को तब से जानते थे, जब से वे समझने लायक हुए थे. इस की वजह यह थी कि रजिया नौशाद की फूफी यानी बुआ की बेटी थी. रजिया जब भी ननिहाल आती, हमउम्र होने की वजह से रजिया और नौशाद साथसाथ खेलते. ऐसे में ही एक दिन दरवाजे पर खेलने के बाद दोनों एकदूसरे का हाथ थामे घर में घुसे तो बरामदे में चारपाई पर बैठी नौशाद की अम्मी के मुंह से अचानक निकल गया,

”हाय रब्बा, दोनों की कितनी सुंदर जोड़ी है. एकदम गुड्डेगुडिय़ा की जोड़ी लग रही है. अगर इन दोनों का निकाह कर दिया गया तो बहुत सुंदर जोड़ी लगेगी.’’

बात सच भी थी. जितनी गोरीचिट्टी रजिया सुलतान उर्फ शिबा थी तो उस से जरा भी कम गोराचिट्टा नौशाद भी नहीं था, इसलिए रजिया की अम्मी को भी यह जोड़ी भा गई थी. उन्होंने उस समय तो कुछ नहीं कहा था, पर मन ही मन तय कर लिया था कि अगर उस के भाई मबू अहमद नौशाद के लिए रजिया का हाथ मांगने आएंगे तो वह खुशीखुशी बेटी का निकाह नौशाद के साथ कर देगी.

रजिया की अम्मी ने उस समय भले ही कोई जवाब नहीं दिया था, पर नौशाद की अम्मी रजिया को बहू बनाने का ख्वाब मन ही मन पालने लगी थीं. रजिया जब भी अपनी अम्मी के साथ मामा के घर आती, नौशाद की अम्मी ननद को यह बात जरूर याद दिलातीं. जब तक नौशाद और रजिया नासमझ थे, तब तक तो कोई बात नहीं थी. लेकिन जब दोनों समझदार हो गए तो एकदूसरे को देख कर लजाने लगे.

फुफेरी बहन रजिया से हुई नौशाद की शादी

रजिया सुलतान थोड़ा और बड़ी हुई तो उस ने शर्म की वजह से मामा के घर आनाजाना बंद कर दिया. उस की अम्मी कहती भी थीं कि इस में शरमाने की क्या बात है, पर रजिया किसी भी हालत में मामा के घर आने के लिए राजी नहीं होती थी. जबकि नौशाद रजिया से मिलने के लिए बेचैन रहता था. मबू अहमद ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं थे. उन की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी, इसलिए जब उन का बड़ा बेटा कमाने लायक हुआ तो उन्होंने उसे ड्राइविंग सिखवा दी. कुछ दिनों तक उस ने यहीं किसी की गाड़ी चलाई. फिर उस ने पासपोर्ट बनवाया और जुगाड़ लगा कर दुबई चला गया. दुबई जाने से पहले ही मबू अहमद ने उस का निकाह जैतून से कर दिया था.

बड़े भाई की ही तरह नौशाद भी दुबई जाना चाहता था, इसलिए उस ने भी ड्राइविंग सीख ली थी. कुछ दिनों तक यहां इधरउधर गाड़ी चलाते हुए उस ने अपना पासपोर्ट बनवा लिया. अब तक वह शादी लायक भी हो चुका था. मबू अहमद ने उस के लिए अपनी बहन से रजिया का हाथ मांगा तो उन्होंने खुशीखुशी इस रिश्ते को मंजूरी दे दी. क्योंकि नौशाद हर तरह से रजिया के लायक था. उसे यह भी पता था कि आज नहीं तो कल नौशाद दुबई चला ही जाएगा. फिर उस की बेटी राज करेगी. जल्दी ही घर वालों की मरजी से रजिया और नौशाद का निकाह हो गया. यह करीब 10 साल पहले की बात है.

निकाह के बाद नौशाद दुबई जाने की तैयारी में लग गया. वहां उस का बड़ा भाई भले ही रहता था, लेकिन अच्छी कंपनी में ड्राइवर का वीजा मिलने में उसे 3 साल लग गए. इस बीच वह एक बेटी का बाप भी बन गया. इस समय उस की वह बेटी 8 साल की है. नौशाद को वीजा मिल गया तो वह नौकरी करने दुबई चला गया. नौशाद को दुबई की जिस कंपनी में नौकरी मिली थी, उस में साल में केवल 15 दिन की ही छुट्टी मिलती थी. इसलिए नौशाद साल में केवल 15 दिनों के लिए ही परिवार के साथ रह पाता था. बाकी का समय वह अकेला दुबई में रहता था तो उस की पत्नी रजिया यहां गांव में परिवार के साथ रहती थी.

पति के विदेश चले जाने के बाद रजिया आजाद हो गई. सास थी नहीं, जेठानी से कोई मतलब नहीं था. देवर भी मुंबई कमाने चला गया था. घर में केवल ससुर था और एक बेटी. इसलिए काम भी ज्यादा नहीं होता था. सुबह नाश्ता और खाना एक साथ बना कर रख देती. इस तरह पूरा दिन खाली रहती. इस खाली समय को बिताने के लिए जैसा आजकल हो रहा है, वैसे ही वह भी मोबाइल का सहारा लेती या अगलबगल वालों के यहां जा कर गप्पें मारती. पैसे की कमी थी नहीं, नौशाद दुबई से भेजता ही था. इसलिए रजिया ठाठ से रहती थी. रजिया सुलतान शुरू से ही थोड़ा चंचल स्वभाव की थी. मनमाना खर्च मिलने लगा तो विलासी भी हो गई.

उसे सारे सुख तो मिल रहे थे, लेकिन पति से अलग रहने की वजह से उसे शारीरिक सुख यानी सैक्स का सुख नहीं मिल रहा था, जिस के लिए वह छटपटाती रहती थी. पति साल भर में केवल 15 दिनों के लिए ही आता था. साल भर की सैक्स की भूखी रजिया का 15 दिनों में कुछ नहीं होता था. उस की देह की आग बुझने के बजाय और भड़क उठती थी.

रजिया का दिल आया जवान भांजे पर

कुछ दिनों तक तो रजिया ने खुद को संभाला. पर जब उस का मन नहीं माना तो वह अपने लिए एक ऐसे पुरुष की तलाश में लग गई, जो उस की कामना पूरी कर सके. उस की यह तलाश पति नौशाद के ही भांजे रोमान सिद्दीकी पर जा कर ठहर गई. दरअसल, नौशाद की एक बहन नूनहार गांव में ही ब्याही थी. रोमान उसी बहन का बेटा था. उस की शादी अभी नहीं हुई थी. वह ज्यादा पढ़ालिखा भी नहीं था. आठवीं तक पढ़ाई कर के उस ने अपने मामा की तरह ड्राइविंग सीख ली थी और पहले छोटी गाडिय़ां चलाने लगा था. जब हाथ साफ हो गया तो ट्रक चलाने लगा. भांजा होने की वजह से वह बेरोकटोक रजिया यानी नौशाद के घर आताजाता था.

रोमान सिद्दीकी अजीब शख्सियत वाला था. कुंवारा होने की वजह से उस पर कोई जिम्मेदारी नहीं थी. इसलिए जो कमाता था, उस में से थोड़ा घर वालों को दे कर बाकी खुद पर खर्च करता था. इस में उस के कुछ आवारा दोस्त भी शामिल थे, जिन के पास कोई कामधंधा नहीं था. रोमान जब भी गांव आता, उस के वे दोस्त रातदिन उस के आगेपीछे घूमा करते. रोमान जो कमा कर लाता था, अपने साथ उन पर भी खर्च करता. जेब में पैसे होते ही थे, इसलिए रोजाना रात को मुर्गा और शराब की पार्टी होती.

पार्टी कर के रोमान कभीकभी मामी के घर आ जाता. नशे में होने पर रोमान को मामी भी अच्छी लगती और उस से बातें करना भी. पुरुष की संगत को तरस रही रजिया को भी उस से बातें करना अच्छा लगने लगा था. इसलिए वह भी उस से खूब मजे ले कर बातें करती थी. कभीकभी नशा ज्यादा हो जाता तो रोमान रजिया के यहां ही सो जाता था. ऐसे में रजिया को ही उस के लिए बिस्तर की भी व्यवस्था करनी पड़ती और उस के जूते और कपड़े भी उतारने पड़ते. कपड़े उतारने में रोमान का शरीर उस के शरीर से छू जाता या रगड़ जाता तो वह रोमांचित हो उठती. मन भटकने लगता और जी करता कि उस से लिपट जाए. लेकिन संकोचवश वह ऐसा कर नहीं पाती थी.

रोमान भी जवान था, इसलिए किसी महिला का सान्निध्य पाने के लिए वह भी लालायित रहता था. जब कभी जवानी ज्यादा उफान मारती तो सड़क के किनारे ढाबों पर मिलने वाली औरतों के साथ इच्छा पूरी कर लेता था. पर उन के साथ वह मजा नहीं आता था, जिस की कामना रोमान करता था. इसलिए जवान मामी की ओर उस का भी झुकाव होने लगा था. इस की वजह यह थी कि उस ने रजिया की बातों से महसूस किया था कि वह सैक्स की भूखी है. क्योंकि कभीकभी बातचीत में वह रोमान से ऐसी बात कह देती, जो औरत किसी पराए मर्द से नहीं कह सकती.

इन्हीं बातों से रोमान को लगने लगा था कि अगर वह मामी से अपने मन की बात कहे तो मामी बुरा मानने के बजाय उस की इच्छा पूरी कर देगी. लेकिन मुंह से ऐसी बात कहना आसान नहीं होता. रोमान सोचता कुछ भी रहा हो, लेकिन रजिया मामी से दिल की बात कह नहीं सका. फिर इस के लिए उस ने एक नाटक किया. एक रात को जब वह रजिया के घर पहुंचा तो चल नहीं पा रहा था. लडख़ड़ाते हुए वह रजिया के दरवाजे पर पहुंचा और किसी तरह धीमे से दरवाजा खटखटाया. उस समय तक रजिया की छोटी सी बेटी सो चुकी थी. बूढ़ा ससुर घर के बाहर सोता था, इसलिए उसे पता नहीं चल सकता था.

रजिया ने दरवाजा खोला तो सामने नशे में धुत रोमान खड़ा था. दरवाजा खुलने पर वह घर में दाखिल होने लगा तो लडख़ड़ाया. रजिया ने झट उसे दोनों बांहों भर लिया कि कहीं वह गिर न पड़े. रोमान को ऐसे ही मौके की तलाश थी. उस ने भी अपनी दोनों बांहें फैला कर रजिया के दोनों कंधों पर रख दीं और अपना पूरा शरीर उस के ऊपर डाल दिया. रजिया उसे ले कर बैड के पास पहुंची तो रोमान रजिया को ले कर बैड पर गिरा तो उसे तभी उठने दिया, जब उस की इच्छा पूरी हो गई. सब कुछ होने के बाद दोनों के चेहरों पर मलाल होने के बजाए खुशी और संतुष्टि थी.

इस के बाद तो दोनों का जब मन होता, अपनी इच्छाएं पूरी कर लेते. रोमान रजिया का भांजा था, इसलिए उस का जब मन होता यानी जब उसे मौका मिलता, वह मामी के पास पहुंच जाता और फिर वही होता, जिस के बारे में कोई अन्य सोच भी नहीं सकता था. दोनों की उम्र में ज्यादा फर्क भी नहीं था, इसलिए दोनों एकदूसरे का पूरा साथ देते थे और शारीरिक सुख का पूरा आनंद उठाते थे.

रोमान अच्छाखासा कमाता था.  इसलिए वह पहले जो रुपए दोस्तों पर खर्च करता था, रजिया मामी से प्यार मिलने के बाद उस पर खर्च करने लगा. नौशाद दुबई से रजिया के लिए पैसे भेजता ही था. इसलिए अब उस के मजे ही मजे थे. वह ठाठ से रहती और खूब पैसे खर्च करती. बढिय़ाबढिय़ा कपड़े और गहने पहनती. जब मन होता, खरीदारी के लिए शहर चली जाती. शहर में रोमान मिलता तो सिनेमा दिखाता, होटल में खाना खिलाता और शौपिंग कराता.

बहू के चालचलन पर ससुर को कैसे हुआ शक

लेकिन यह सब ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रहा. जिस तरह रोमान रजिया के घर आनेजाने लगा था और रातदिन उस के घर में पड़ा रहने लगा था, उस से जल्दी ही वे लोगों की नजरों में चढ़ गए. अगलबगल वाले कानाफूसी करने लगे. फिर रजिया के ससुर मबू अहमद खुद ही अनुभवी थे. उन्होंने दुनिया देख रखी थी. घर में जवान बहू अकेली रहती थी. उस का पति परदेस में रहता था. ऐसे में किसी जवान आदमी का घर बेरोकटोक आना खतरे से खाली नहीं था.

वह सीधे बहू से कुछ कह नहीं सकते थे. क्योंकि अपनी आंखों से कुछ देखा तो था नहीं. फिर भी इशारोंइशारों में उस ने बहू को समझाया और रोमान को भी टोका. पर दोनों को जो सुख मिल रहा था, वे उसे छोडऩा नहीं चाहते थे. इसलिए नौशाद के पिता मबू अहमद की बातों का न तो रजिया सुलतान पर कोई असर पड़ा न तो नाती रोमान पर.

मबू अहमद ज्यादा कुछ कह नहीं सकते थे, क्योंकि बात खुलती तो बदनामी उन्हीं की होती. जब रजिया ने उन की बात पर ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने बड़ी बहू जैतून से इशारे में कहा कि वह अपनी देवरानी को समझाए. क्योंकि अब लोग उन से खुलेआम कहने लगे थे कि रोमान उन के घर कुछ ज्यादा ही आताजाता है. कभीकभी वह रात में भी उन के घर रुकता है. बेटा बाहर रहता है, कहीं बहू के पैर न फिसल जाएं. अगर ऐसा हो गया तो ऐसे संबंधों का परिणाम अच्छा नहीं होता.

मबू अहमद ने बड़ी बहू से देवरानी को समझाने को कहा था. ससुर के कहने पर जब जैतून ने देवरानी रजिया को समझाने की कोशिश की तो वह उस से लडऩे लगी. तब जैतून ने देवरानी से अपनी बेइज्जती कराने से अच्छा चुप रहना ही समझा. अंतत: मबू अहमद को ही खुल कर सामने आना पड़ा. उन्होंने रोमान को अपने घर आने से साफ मना कर दिया. रजिया को भी बाहर जाने से रोका, पर उस ने उन की बात नहीं मानी. अब रजिया रोमान से बाहर मिलती या फिर रात को चोरी से घर पर बुलाती. इस का भी पता घर वालों को चल गया. तब मजबूर हो कर मबू अहमद ने दुबई में रह रहे बेटे को इस बारे में बता दिया. यह करीब डेढ़ साल पहले की बात है.

अब्बू ने जो बताया था, नौशाद से हजम नहीं हुआ. उस ने तुरंत रजिया को फोन किया. वह ससुर को झूठा साबित करने के लिए हजार कसमें खाने लगी. पर नौशाद इतना भी बेवकूफ नहीं था कि वह पत्नी की बात पर विश्वास कर लेता और अब्बू की बात को नकार देता. उस ने छुट्टी ली और गांव आ गया. गांव में घर वालों ने ही नहीं, उस के यारदोस्तों और कुछ बुजुर्गों ने भी उसे बताया कि रजिया के कदम बहक गए हैं. उस का भांजा भी नालायक है. उस ने रिश्ते का भी लिहाज नहीं किया. इन बातों से नौशाद को बहुत तकलीफ पहुंची कि जिस पत्नी के लिए वह घरपरिवार छोड़ कर हजारों मील दूर पड़ा है, वही पत्नी उस के साथ विश्वासघात कर रही है.

उस ने रजिया सुलतान को समझाना चाहा तो वह अपनी जिद पर अड़ी रही कि सभी उस पर झूठा आरोप लगा रहे हैं. तब उसे रजिया पर गुस्सा आ गया और उस ने तलाक देने का फैसला कर लिया. पर रजिया इस के लिए तैयार नहीं थी. क्योंकि नौशाद जैसा कमाऊ पति जल्दी कहां मिलता. उस ने नौशाद से माफी मांगी और कसम खाई कि अब वह रोमान से कभी नहीं मिलेगी. पंचायत भी बुलाई गई थी. सभी के सामने रजिया और रोमान ने वचन दिया कि अब वे एकदूसरे से कभी नहीं मिलेंगे.

नौशाद भी रजिया से बहुत प्यार करता था, इसलिए उस ने अपना तलाक देने वाला फैसला रद्द कर दिया. इस के बाद रजिया ने नौशाद से अपना अलग घर बनवाने के लिए कहा तो नौशाद ने गांव के बाहर थोड़ी जमीन खरीदी और उस घर बनवाने की सारी व्यवस्था कर के अपनी नौकरी पर चला गया, क्योंकि उसे केवल 15 दिनों की ही छुट्टी मिली थी.

रजिया का गांव के बाहर अलग घर बन कर तैयार हो गया तो वह उसी में आ कर रहने लगी. उस का घर गांव से थोड़ा बाहर पड़ता था, इसलिए मबू अहमद उसी के घर रात को सोते थे. लेकिन इस का रजिया पर कोई असर नहीं पड़ता था. यहां आ कर उस का रोमान से मिलना और आसान हो गया था. इस घर में वह अकेली ही रहती थी. ससुर भले ही रात को उस के घर सोने आते थे. पर पीछे भी तो दरवाजा था. रोमान पीछे के दरवाजे से आता और जो करना होता, कर के पीछे से ही निकल जाता.

अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने नौशाद की बहन निशात द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर नौशाद की हत्या का मुकदमा रजिया सुलतान, रोमान और हिमांशु के खिलाफ दर्ज कर लिया था. रजिया को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. जबकि रोमान और हिमांशु फरार थे. अगले दिन फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने रोमान को भी गिरफ्तार कर लिया था. जबकि कहानी लिखे जाने तक हिमांशु नहीं पकड़ा जा सका था.

पुलिस ने उन हथियारों चापर, कुल्हाड़ी और मूसल को बरामद कर लिया था, जिन से नौशाद की हत्या की गई थी. पुलिस को उस बोलेरो की भी तलाश है, जिस से नौशाद की लाश को ठिकाने लगाने के लिए उतनी दूर ले जाया गया था.

UP Crime News : धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर प्रेमिका के सिर को धड़ से अलग किया

UP Crime News : एजाज ने जिस तरह प्रिया को अपने जाल में फांसा, उस से शादी की और धर्म परिवर्तन की बात न मानने पर मार डाला, उसे भले ही लव जेहाद न कहा जाए, लेकिन समाज का एक बड़ा हिस्सा तो इसे जरूर…

जि ला: सोनभद्र, उत्तर प्रदेश. तारीख: 21 सितंबर 2020. वक्त: अपराह्न 3 बजे. स्थान: वाराणसी-शक्ति नगर राजमार्ग. इस राजमार्ग पर वन विभाग के एक भुखंड की झाडि़यों में किसी युवती की सिर कटी लाश मिली. जिस झाड़ी में लाश पड़ी थी, वह मुख्य मार्ग से 10 मीटर अंदर थी. यह खबर तेजी से फैली. कुछ ही देर में स्थानीय लोगों का वहां जमावड़ा लग गया. वहां के चौकीदार ने लाश देखी तो तत्काल स्थानीय थाना चोपन को लाश मिलने की सूचना दे दी. सूचना मिलते ही चोपन थाना इंसपेक्टर नवीन तिवारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. लाश घासफूस से ढकी हुई थी, जिसे हटवा कर उन्होंने लाश का निरीक्षण किया.

मृतका की उम्र लगभग 20-25 साल के बीच रही होगी. उस के धड़ पर जींस पैंट, टीशर्ट और पैरों में जूते थे. कपड़ों के साथ जूते भी काले रंग के थे. इंसपेक्टर तिवारी ने आसपास सिर की तलाश कराई, लेकिन सिर कहीं नहीं मिला. वहां मौजूद लोगों में से कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर पाया. लाश के फोटो आदि करवाने के बाद इंसपेक्टर तिवारी ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी. फिर थाने वापस लौट गए. थाने में चौकीदार को वादी बना कर अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

लाश की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. वह फोटो देखने के बाद मोहल्ला प्रीतनगर के वार्ड नंबर-7 निवासी लक्ष्मी नारायण सोनी अपनी छोटी बेटी शर्मिला के साथ थाना चोपन पहुंचे. जिस वन भूखंड में लाश मिली थी, वह प्रीतनगर में ही आता था. थाने पहुंचे लक्ष्मी नारायण ने मृतका के कपड़ों, जूतों व शरीर की बनावट के आधार पर लाश की शिनाख्त कर दी. वह उन की 21 वर्षीया बेटी प्रिया सोनी थी. लक्ष्मी नारायण ने बताया कि प्रिया ने उन की मरजी के बिना पड़ोसी युवक एजाज अहमद उर्फ आशिक से प्रेम विवाह कर लिया था और फिलहाल वह ओबरा में रह रही थी.

शिनाख्त होने के बाद मृतका के संबंध में कुछ अहम बातें पता चलीं तो इंसपेक्टर तिवारी ने राहत की सांस ली. लेकिन अभी तक प्रिया का सिर बरामद नहीं हुआ था. देर रात एएसपी (मुख्यालय) ओ.पी. सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. जबकि एसपी आशीष श्रीवास्तव ने मोर्चरी पहुंच कर प्रिया की लाश का निरीक्षण किया. इस के बाद उन्होंने स्वाट टीम प्रभारी प्रदीप सिंह को और सर्विलांस प्रभारी सरोजमा सिंह को थाना पुलिस की मदद के लिए लगा दिया ताकि जांच तेजी से और जल्दी हो. अगले दिन यानी 22 सितंबर को फिर से घटनास्थल पहुंच कर सिर की तलाश शुरू की गई. तलाशी के दौरान एक झाड़ी से लोहे की रौड और एक फावड़ा मिला.

फावड़ा मिलने से यह संभावना बढ़ गई कि हत्यारों ने सिर को कहीं जमीन में गड्ढा खोद कर दफनाया होगा. फावड़ा मिलने से तलाश तेज की गई तो एक झाड़ी से प्रिया का सिर मिल गया. सिर लाश मिलने वाली जगह से 150 मीटर की दूरी पर मिला. इंसपेक्टर नवीन तिवारी ने प्रिया के पति एजाज अहमद और उस के संपर्क में रहने वालों की लिस्ट बनाई. उन के मोबाइल नंबरों का पता लगा कर सारे नंबर सर्विलांस प्रभारी सरोजमा सिंह को सौंप दिए गए. सरोजमा सिंह और स्वाट प्रभारी प्रदीप सिंह ने उन सभी नंबरों की लोकेशन व काल रिकौर्ड की जांच की तो प्रिया का पति एजाज शक के घेरे में आ गया.

संदेह के फंदे में एजाज प्रिया और एजाज के मोबाइल नंबरों के काल रिकौर्ड की जांच की गई तो घटना के दिन दोपहर में दोनों के बीच बातचीत होने के सुबूत मिले. बातचीत के समय प्रिया की लोकेशन ओबरा में थी. बात होने के बाद प्रिया की लोकेशन ओबरा से होते हुए घटनास्थल तक आई. सड़क किनारे जिस जगह प्रिया की लाश मिली. उस के दूसरे किनारे पर एजाज की टायर रिपेयरिंग की दुकान थी. पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद इंसपेक्टर नवीन तिवारी ने 24 सितंबर को शाम साढ़े 5 बजे बग्घा नाला पुल के नीचे से एजाज अहमद को उस के साथी शोएब के साथ गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और हत्या की वजह भी बयां कर दी.

लक्ष्मीनारायण सोनी का परिवार जिला सोनभद्र के थाना चोपन के मोहल्ला प्रीतनगर के वार्ड नंबर 7 में रहता था. उन की पत्नी सुमित्रा का देहांत हो चुका था. उन की 4 बेटियां थीं— प्रीति, शीना, प्रिया और शर्मिला. प्रीति और शीना का विवाह हो चुका था. लक्ष्मी नारायण ‘कन्हैया स्वीट हाउस ऐंड रेस्टोरेंट’ पर काम करते थे. इसी नौकरी से वह घर का खर्च चलाते थे. उन की सभी बेटियां होनहार और समझदार थीं. उन्होंने दिल लगा कर पढ़ाई की और जब कुछ करने लायक हुई तो नौकरी करने लगीं, जिस से खुद का खर्च स्वयं उठा सकें. प्रिया ने स्नातक तक शिक्षा ग्रहण कर ली थी. गोरा रंग, आकर्षक चेहरा और छरहरा बदन प्रिया की अलग पहचान बनाते थे. इसीलिए वह आसानी से किसी की भी नजरों में चढ़ जाती थी.

महत्त्वाकांक्षी प्रिया फैशनेबल कपड़े पहनती थी, मौडर्न बनने की चाह में वह अपने बालों को अलगअलग रंगों में रंगवा लेती थी. उस का रहनसहन हाईसोसायटी की लड़कियों की तरह था. जब फैशन उन की तरह था तो प्रिया की सोच भी उन की तरह ही थी. वह हर किसी से आसानी से हंसबोल लेती थी. शर्मसंकोच से वह कोसो दूर थी. प्रिया के घर से कुछ ही दूरी पर एजाज अहमद उर्फ आशिक का मकान था. उस के पिता जाकिर हुसैन टायर रिपेयरिंग का काम करते थे. एजाज भी पिता की दुकान पर बैठ कर उन के काम में हाथ बंटाता था. वह 4 भाईबहनों में दूसरे नंबर का था. प्रिया पर एजाज की नजर भी थी. उस की खूबसूरती को देख वह पागल सा हो गया था. यह जान कर भी कि वह उस के धर्म की नहीं है, इस के बावजूद वह उस की चाहत को पाने के लिए आतुर था.

पड़ोसी होने की वजह से प्रिया और एजाज एकदूसरे को जानते तो थे ही, जबतब बातचीत भी हो जाती थी. लेकिन जब से प्रिया ने अपने रूपयौवन को आधुनिक रूप से सजाना शुरू किया था, तब से वह कयामत ढाने लगी थी. प्रिया का यौवन जब कदमताल पर थिरकता तो एजाज का दिल तेजी से धड़कने लगता. एजाज अब प्रिया के नजदीक रहने की कोशिश करता. उस से किसी न किसी बहाने से बात करने की कोशिश करता. जब बारबार ऐसा होने लगा तो प्रिया भी समझ गई कि एजाज उस के नजदीक रहने और बात करने के बहाने ढूंढढूंढ कर पास आता है, ऐसा तभी होता है जब दिल में चाहत होती है.

वह समझ गई कि एजाज उसे चाहने लगा है, इसलिए उस के नजदीक रहने की कोशिश करता है. यह सब जान कर भी न जाने क्यों प्रिया को खराब नहीं लगा. बल्कि उस के दिल में भी कुछ कुछ होने लगा. इस का मतलब था कि उस के दिल में एजाज के लिए सौफ्ट कौर्नर था, जो उसे बुरा मानने नहीं दे रहा था. प्रिया ने एजाज को यह बात जाहिर नहीं होने दी कि वह उस की हरकतों को जान गई है. अपनी धुन में डूबा एजाज उस के नजदीक रह कर अपने दिल को तसल्ली देता रहता था. वह सोचता था कि एक न एक दिन अपनी बातों से प्रिया का दिल जीत ही लेगा. प्रिया भी उस की बातों में दिलचस्पी लेने लगी थी. बातों में वह भी पीछे नहीं रहती थी. बातें बढ़ीं तो दोनों एकदूसरे से काफी खुल गए.

अब दोनों को कोई भी बात कहने में संकोच नहीं होता था. दोनों साथ घूमने भी जाने लगे थे. दोनों खातेपीते और मौजमस्ती करते. इस से दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. अब प्रिया एजाज पर विश्वास करने लगी थी. साथ ही वह यह भी सोचने लगी थी कि एजाज उसे हमेशा खुश रखेगा, कभी कोई कष्ट नहीं होने देगा. एजाज बड़ी ऐहतियात से कदम दर कदम आगे बढ़ रहा था. वह प्रिया के दिल में अपनी जगह बनाने के लिए वह सब कर रहा था, जो उसे करना चाहिए था. जब उसे लगा कि प्रिया उस के रंग में पूरी तरह रंग गई है, तो उस ने प्रिया से प्रेम का इजहार करने का फैसला कर लिया.

एजाज की दुकान के सामने सड़क पार किनारे पर वन विभाग की जमीन का छोटा सा टुकड़ा था. प्रिया से वह वहीं मिलता था. प्रिया भी जानती थी कि वह सुरक्षित जगह है, वहां कोई आताजाता नहीं था. उन दोनों को साथ देख बात मोहल्ले में फैल सकती थी. इसलिए प्रिया को एजाज से वहां मिलने से कोई गुरेज नहीं था. पहली मुलाकात में जब दोनों वहां बैठे थे, तो एजाज ने प्यार से प्रिया को निहारते हुए उस का हाथ अपने हाथ में ले लिया और बोला, ‘‘प्रिया,  मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं जो काफी दिन से मेरे दिल में कैद है.’’

‘‘कहो, तुम कब से अपनी बात कहने में संकोच करने लगे.’’ प्रिया ने उस की आंखों में देखते हुए मुसकरा अपनी भौंहें उचकाईं. इस से एजाज की हिम्मत बढ़ गई और वह बेसाख्ता बोल पड़ा, ‘‘प्रिया, आई लव यू… आई लव यू प्रिया.’’ कह कर एजाज ने बड़ी उम्मीद से प्रिया की ओर देखा. प्रिया को पहले ही एजाज से ऐसी उम्मीद थी. क्योंकि वह जो भूमिका बना रहा था, उस से ही जाहिर हो गया था कि एजाज अपने प्यार का इजहार करेगा. प्रिया ने भी बिना देरी लगाए प्यार का जवाब प्यार से दे दिया, ‘‘लव यू टू एजाज.’’

प्रिया के मुंह से प्यार के मीठे शब्द निकले तो एजाज ने खुशी से उसे अपनी बांहों में भर लिया. प्रिया ने भी उस की खुशी देख कर उस का साथ दिया. उस का जवाब सुन एजाज ने उस के होंठों को चूम लिया. प्रिया ने उस में भी उस का साथ दिया. लेकिन एजाज जब इस से आगे बढ़ने लगा तो प्रिया ने उसे रोक दिया, ‘‘इतने तक ठीक है, इस के आगे नहीं.’’ एजाज ने मन मसोस कर उस की बात मान ली. इस के बाद दोनों का प्यार दिनोंदिन परवान चढ़ने लगा. प्रिया अच्छी तरह जानती थी कि एजाज से प्यार की बात जानते ही घर में कोहराम मच जाएगा.

उस के पिता लक्ष्मी नारायण कभी भी गैरधर्म के युवक से शादी को तैयार नहीं होंगे. इसलिए उस ने एजाज से बात की. सलाह मशवरे के बाद दोनों ने घरवालों की बिना मरजी के शादी करने का मन बना लिया. धर्म के नाम पर पंगा घटना से डेढ़ महीने पहले दोनों ने चोरीछिपे शादी कर ली. शादी के बाद एजाज ने प्रिया को ओबरा के एक महिला लौज में ठहरा दिया. उस ने प्रिया से कहा कि जब मामला ठंडा हो जाएगा, तब उसे घर ले जाएगा. इस बीच वह अपने घर वालों को भी मना लेगा.

प्रिया ने उस की बात मान ली. वह महिला लौज में रहने लगी. उस ने पास की ही कपड़े की एक दुकान में नौकरी जौइन कर ली. शादी के कुछ ही दिन बीते थे कि एजाज प्रिया पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा. प्रिया इस के लिए तैयार नहीं थी. उस ने एजाज से कहा, ‘‘मैं ने तुम से प्यार किया है, तुम्हारे साथ रहने को तैयार हूं. लेकिन मैं अपना धर्म नहीं बदल सकती. जैसे तुम को अपने धर्म से प्यार है, वैसे ही मुझे अपना धर्म प्यारा है. जैसे मैं ने तुम्हें तुम्हारे धर्म के साथ स्वीकारा है, वैसे ही तुम मुझे मेरे धर्म के साथ स्वीकार करो. इस में दिक्कत क्या है. हमारे प्यार के बीच धर्म को क्यों ला रहे हो.’’

‘‘प्रिया, हमारे यहां गैरधर्म की लड़की को उस के धर्म के साथ नहीं स्वीकारा जाता. उसे अपना धर्म परिवर्तन करना ही पड़ता है. तुम मेरा धर्म स्वीकार कर लो तो मैं तुम्हें अपने घर ले चलूं.’’

‘‘मैं किसी भी हालत में अपना धर्म नहीं बदलूंगी. यह बात तुम्हें शादी और प्यार करने से पहले सोचना चाहिए था. मुझ से ही पूछ लेते तो ये नौबत न आती.’’

‘‘मैं ने सोचा जब तुम मुझ से प्यार कर सकती हो, शादी कर सकती हो तो मेरा धर्म भी स्वीकार कर लोगी.’’

‘‘सब तुम ने अपने आप ही सोच लिया, मुझ से एक बार भी पूछने की जहमत नहीं उठाई. इस में गलती तुम्हारी है, मेरी नहीं.’’

दोनों के बीच इस बात को ले कर काफी देर तक बहस होती रही लेकिन प्रिया नहीं मानी. फिर दो दोनों के बीच जबतब इस बात को ले कर विवाद होने लगा.

19 सितंबर को शाम 6:05 बजे प्रिया की एजाज से बात हुई. प्रिया ने उस से मिलने आने की बात कही. एजाज ने आने के लिए हां कर दी. प्रिया से बात होने के बाद एजाज ने फोन कर अपने दोस्त शोएब को बुला लिया. उस के साथ मिल कर उस ने योजना बनाई. प्रेमी का असली रूप कुछ देर बाद प्रिया ओबरा से आटो ले कर आई और एजाज की दुकान के सामने उतरी. एजाज ने उसे आते देख लिया था. वह उसे सड़क के दूसरी ओर वन विभाग की जमीन पर ले गया, जहां दोनों शादी से पहले मिला करते थे. एजाज और प्रिया लगभग 10 मीटर अंदर जा कर एक जगह बैठ गए. दोनों में बात हुई. एजाज ने एक बार फिर प्रिया से धर्म परिवर्तन करने की बात छेड़ी लेकिन प्रिया ने दोटूक जवाब दे दिया, ‘‘नहीं.’’

एजाज गुस्से से भर उठा, लेकिन उस ने प्रिया पर जाहिर नहीं होने दिया. एक मिनट में आने की बात कह कर वह दुकान पर आ गया. वहां से उस ने एक लीवर रौड और चाकू उठाया और शोएब को पीछे आने को कहा. एजाज फिर वहां पहुंचा, जहां प्रिया बैठी थी. प्रिया की पीठ उस की तरफ थी. एजाज ने प्रिया के सिर पर पीछे से लीवर रौड से तेज प्रहार किया. उस का वार इतने जोरों का था कि प्रिया चीख भी न सकी और वहीं ढेर हो गई. इस के बाद शोएब के वहां पहुंचने पर एजाज ने तेज धारदार चाकू से प्रिया का गला काट कर सिर धड़ से अलग कर दिया. फिर सिर को वहां से डेढ़ सौ मीटर दूर एक झाड़ी में फेंक दिया. इस के बाद धड़ को जमीन में दफनाने के लिए एजाज अपनी मारुति आल्टो कार से फावड़ा लेने चला गया.

बाजार से फावड़ा खरीद कर लाने के बाद दोनों ने जमीन को खोदने का प्रयास किया, लेकिन जमीन पथरीली होने के कारण दोनों गड्ढा नहीं खोद पाए. लाश को दफना नहीं सके तो दोनों ने आसपास उगी घास और पौधों से लाश ढक दी. प्रिया का मोबाइल उस की जींस की जेब में था. एजाज ने उस का मोबाइल निकाल कर अपनी जेब में रख लिया. लोहे की रौड, चाकू और फावड़ा झाडि़यों में छिपाने के बाद दोनों वापस लौट आए. अगले दिन 20 सितंबर को एजाज ने प्रिया के मोबाइल में उस का वाट्सऐप एकाउंट खोल कर प्रिया की तरफ से अपने नंबर पर न मिलने आने का मैसेज भेज दिया, जिस से उस पर शक न जाए. फिर उस ने प्रिया का मोबाइल स्विच्ड औफ कर के अपनी दुकान के पीछे फेंक दिया.

लेकिन उस का गुनाह छिप न सका. आखिर वह और शोएब कानून की गिरफ्त में आ ही गए. एजाज की निशानदेही पर प्रिया का मोबाइल और आल्टो कार भी पुलिस ने बरामद कर ली. हत्या में इस्तेमाल बाकी हथियार घटनास्थल से बरामद हो चुके थे. जरूरी कानूनी लिखापढ़ी के बाद दोनों को सीजेएम कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित