UP Crime News : बोरियों में मिला महिला का सिर विहीन धड़

UP Crime News : एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक कुएं में 2 बोरियां मिलीं. जिसे देख आसपास के लोग हैरान रह गए. इस की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कुएं में से दोनों बोरियां बाहर निकालीं. दोनों बोरियां में किसी महिला का शव था, जिस के कई अंग गायब थे. इस हत्या की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई. आखिर कौन थी वह महिला और उसे किस ने मार डाला? चलिए जानते हैं इस क्राइम से जुड़ी खबर को को विस्तार से-

यह घटना उत्तर प्रदेश के झांसी जिले की है, जहां 13 अगस्त, 2025 को पुलिस को सूचना मिली कि एक खेत के पास कुएं में 2 बोरियां पड़ी हैं, जिन में से तेज बदबू आ रही है. पुलिस मौके पर पहुंची और उन दोनों बोरियों को बाहर निकाला.

पुलिस ने उन दोनों बोरियों को खोला तो उन में एक महिला का शव था, जिसके हाथ पैर गायब थे. यह दृश्य देख इलाके में अफरातफरी मच गई. इस के बाद पुलिस ने आसपास इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया. ताकि महिला की पहचान हो और हत्यारोपी का पता लगया जा सके.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, झांसी जिले के एक गांव का रहने वाला किसान विनोद पटेल रोजाना की तरह महोबा रोड के पास अपने खेत की रखवाली के लिए गया हुआ था. विनोद खेत के पास पहुंचा तो उसे तेज बदबू आने लगी. बदबू कहां से आ रही है, खोजते हुए वह आगे गया तो वह कुएं के पास जा पहुंचा. कुएं में झांका तो उस में पानी में 2 बोरियां तैरती नजर आईं.

विनोद ने तुरंत गांव में इस की सूचना दी तो तमाम लोगों की भीड़ कुएं के पास जुट गई. बाद में गांव वालों ने पुलिस को भी फोन करके इस कि सूचना दे दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने बोरियों को बाहर निकाला तो उन में कमर से गरदन तक का हिस्सा था, जबकि बाकी शरीर के अंग गायब थे.

पुलिस अब तक पता नहीं कर पाई है कि मृतक महिला कौन है? मृतका कर शेष अंग ढूंढने के लिए पुलिस ने आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन सफलता नहीं मिली.

एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने बताया कि शव पुराना है और पहचान के लिए कई टीमें लगाई गई हैं. घटना स्थल की बारीकी से जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. जांच अभी जारी है. UP Crime News

Love Crime : पिता ने बेटी के प्रेमी के सीने में मारी गोली

Love Crime : अमित और बेबी का परचून की दुकान से शुरू हुआ प्यार पूरे गांव में आम हो गया था. दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन जाति की दीवार ने ऐसा रंग दिखाया कि दोनों के खून के छींटे पूरे गांव में फैल गए…

उत्तर प्रदेश के शहर बरेली का एक थाना है बिशारतगंज. इस्माइलपुर गांव इसी थाना क्षेत्र में आता है. गुड्डू अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा बेटी बेबी और एक बेटा प्रकाश था. बेटी बीए फाइनल में पढ़ रही थी. गुड्डू खेतीकिसानी करता था. इसी से उस के परिवार की गुजरबसर होती थी. बेबी के घर के पास गांव के 22 वर्षीय अमित गुप्ता की किराने की दुकान थी. बेबी घर का खानेपीने का सामान अमित की दुकान से लाती थी. इसी आनेजाने में वह मन ही मन अमित को पसंद करने लगी थी. लेकिन उस ने अपने मन की बात अमित पर जाहिर नहीं होने दी थी.

अमित के पिता रामकुमार का कई साल पहले निधन हो गया था, मां अभी थी. भाईबहनों से उस का परिवार भरा पूरा था. अमित का पढ़ाई में मन नहीं लगा तो उस ने परचून की दुकान खोल ली थी. एक दिन बेबी जब अमित की दुकान पर पहुंची, तो वहां उस के अलावा कोई ग्राहक नहीं था. सौदा लेने के बाद चलते समय उस ने अमित से कहा, ‘‘तुम बहुत सुंदर हो.’’

अकसर ऐसी प्यार भरी बातें चाहने वाले लड़के अपनी प्रेमिका से कहते हैं. जबकि यहां यह बात एक युवती कह रही थी. सुन कर अमित के शरीर में सिहरन सी दौड़ गई. उस ने भी मुसकरा कर कह दिया, ‘‘अच्छा…’’

और बेबी शरमा कर वहां से चली गई. दुकान पर आतेजाते उसे अमित अच्छा लगने लगा था. काफी दिनों तक तो उस ने अपने दिल पर काबू रखा था. लेकिन उस दिन उस ने हिम्मत कर के अमित से सुंदर लगने वाली बात कह ही दी थी. अब बेबी इसी ताक में रहने लगी कि जब अमित की दुकान पर कोई ग्राहक न हो तभी सामान लेने जाए. एक दिन उसे यह मौका मिल गया. सामान लेते समय अमित ने उस का हाथ पकड़ कर पूछा, ‘‘उस दिन तुम क्या कह रही थीं?’’

‘‘कुछ भी तो नहीं,’’ बेबी ने भोली बन कर हंसते हुए कहा, ‘‘तुम सच में बड़े भोले हो, तुम्हारी यह अच्छाई मुझे बहुत पसंद है.’’

अपनी प्रशंसा सुन कर अमित खुश हो गया. वह बोला, ‘‘बेबी तुम भी बहुत अच्छी लगती हो मुझे. जब भी तुम आती हो मेरे दिल की धड़कने बढ़ जाती हैं.

‘‘अच्छा…’’ इतना कह कर बेबी मुसकराती हुई वहां से चली गई.

बेबी और अमित करीबकरीब हमउम्र थे. दोनों के बीच बातचीत का दायरा बढ़ता गया और नजदीकियां सिमटती गईं. अमित जब भी बेबी को देखता, खुशी के मारे उस का दिल बागबाग हो उठता. बेबी भी अमित को देख कर खुश हो जाती थी. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. जब तक दोनों एकदूसरे को देख नहीं लेते, दिलों को चैन नहीं मिलता था. दोनों के इस प्रेमप्रसंग की किसी को कानोंकान खबर नहीं लगी. यहां तक कि उन के घर वालों तक को भी नहीं. बाद में दोनों दुकान के अलावा चोरीछिपे भी मिलने लगे. हालांकि दोनों की जाति अलगअलग थी, इस के बावजूद उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया था. एक बार बेबी ने अमित से पूछ लिया, ‘‘अमित, वैसे तो मैं जातपात में विश्वास नहीं करती, पर समाज से डर कर तुम मुझे कहीं भूल तो नहीं जाओगे?’’

इस पर अमित ने उस के होंठों पर हाथ रख कर चुप कराते हुए कहा, ‘‘बेबी, अगर हमारा प्यार सच्चा है तो चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, हम जुदा नहीं होंगे.’’

दोनों ने फैसला किया कि एकदूसरे के लिए ही जिएंगे. आखिर किसी तरह बेबी के घर वालों को पता चल गया कि उन की बेटी का गांव के ही दूसरी जाति के युवक से प्रेमप्रसंग चल रहा है. इस से घर वालों की चिंता बढ़ गई. गुड्डू ने पत्नी से कहा कि वह बेटी पर ध्यान दे. उस के पांव बहक रहे हैं. हाथ से निकल गई या कोई ऊंचनीच कर बैठी तो समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे. उसे अमित के करीब जाने से मना कर दे. बेबी की मां ने समझदारी दिखाते हुए यह बात बेटी को सीधे तरीके से न कह कर अप्रत्यक्ष ढंग से समझाई. वह जानती थी कि बेटी सयानी हो चुकी है. सीधेसीधे बात करने से उसे बुरा लग सकता था. वैसे भी बेबी जिद्दी स्वभाव की थी, जो मन में ठान लेती थी, उसे पूरा करती थी.

बेबी अपनी मां की बात को अच्छी तरह समझ गई थी कि वह क्या कहना चाहती है. लेकिन उस के सिर पर अमित के इश्क का भूत सवार था. उसे अमित के अलावा किसी और की बात समझ में नहीं आती थी. उस ने मां से साफसाफ कह दिया कि वह अमित से प्यार करती है और शादी भी  उसी से करेगी. अमित और बेबी जान चुके थे कि उन के प्यार के बारे में दोनों के घर वालों को पता लग चुका है. दोनों परिवार इस रिश्ते को किसी भी तरह स्वीकार नहीं करेंगे, इस बात को ले कर अमित काफी परेशान रहने लगा था. बेबी किसी भी तरह अपने मांबाप की बात मानने को तैयार नहीं हुई. अमित और बेबी के प्रेम प्रसंग के चर्चे अब गांव में भी होने लगे थे. बात जब हद से आगे निकलने लगी तो गुड्डू ने बिरादरी में होने वाली बदनामी से बचने के लिए अपने चचेरे भाई सचिन से इस संबंध में बात की.

निर्णय लिया गया कि बिना देरी किए बेबी के लिए लड़का तलाश कर उस के हाथ पीले कर दिए जाएं. इस की भनक जब बेबी को लगी तो उस ने विरोध किया. उस ने कह दिया कि अभी वह पढ़ रही है. पढ़ाई पूरी नहीं हुई है. इसलिए शादी नहीं करेगी. वह पढ़ाई कर के नौकरी करना चाहती है. लेकिन चाचा सचिन ने उस की बात का विरोध करते हुए कहा, ‘‘पढ़ाई का शादी से कोई संबंध नहीं होता. पढ़ने से तुम्हें ससुराल में भी कोई नहीं रोकेगा.’’

घर वालों ने भागदौड़ कर बदायूं के दातागंज में बेबी की शादी तय कर दी. एक माह बाद यानी 16 जून, 2020 को गांव में बेबी की बारात आनी थी. जब अमित को इस बात का पता चला, तो उस का दिल टूट गया. उस ने बेबी के साथ भविष्य के जो सपने संजोए थे, बिखरते दिखे. एक दिन अमित बेबी के घर जा पहुंचा. उस ने बेबी के घर वालों को बताया कि वह और बेबी एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं. घर में मौजूद बेबी ने भी अमित के अलावा किसी दूसरे के साथ शादी करने से इनकार कर दिया. लेकिन बेबी के घर वालों के सामने अमित और बेबी की एक नहीं चली. घर वालों ने अमित से बेबी की शादी से साफ मना कर दिया. उन्होंने कहा कि बेबी की शादी अपनी जाति के लड़के से ही करेंगे.

बेबी की शादी में मात्र 2 दिन शेष रह गए थे. 2 दिन बाद प्रेमिका के घर शहनाइयां बजने वाली थीं. अमित को कुछ सूझ नहीं रहा था. उस की हालत पागलों जैसी हो गई थी. अमित की दुकान भी कई दिनों से बंद थी. उस का मन बेबी में अटका हुआ था. वह किसी तरह एक बार बेबी से मिल कर दिल की बात कहना चाहता था. लेकिन बेबी पर उस के घर वालों का कड़ा पहरा था. बेबी के परिवार में खुशियों का माहौल था. शादी की तैयारियों में घर वालों के साथसाथ रिश्तेदार व गांव के परिचित भी लगे हुए थे. 14 जून की सुबह 5 बजे बेबी अपनी बुआ, तहेरी बहन और ताई के साथ खेतों की ओर निकली.

आधे घंटे बाद बेबी खेत से घर लौट रही थी. वह अपने घर के दरवाजे के पास पहुंची तभी अमित आ गया. उस ने बेबी से साथ चलने को कहा. पर बेबी ने उस के साथ जाने से मना कर दिया. अमित ने अपने प्यार की दुहाई दी, लेकिन बेबी पर कोई असर नहीं हुआ. इस से अमित आपा खो बैठा और साथ लाए तंमचे से बेबी के ऊपर फायर कर दिया. गोली बेबी की कमर व बांह में लगी, वह चीख कर वहीं गिर पड़ी. बेबी को गोली मारने के बाद अमित तमंचा लहराता हुआ गांव के बाहर भागा. कुछ देर बाद पता चला कि अमित ने बेबी के घर से लगभग 400 मीटर दूर ग्राम प्रधान के घर के पास खाली मैदान में खुद को गोली मार ली है.

सुबहसुबह गांव में गोली चलने की आवाज सुन कर गांव वाले एकत्र हो गए. अमित की रक्तरंजित लाश देख कर गांव में हड़कंप मच गया, जिस ने भी यह दृश्य देखा वह सन्न रह गया. किसी ने अमित के घर वालों को घटना की जानकारी दे दी. जानकारी मिलते ही अमित के घर वाले घटनास्थल की ओर दौड़े, अमित के सीने में गोली लगी थी. उस की मौत हो चुकी थी. लाश के पास ही तमंचा पड़ा था. अमित की मौत की खबर सुन कर उस की मां रोतेरोते बेहोश हो गई. चौकीदार नत्थूलाल की सूचना पर थाने से पुलिस टीम के साथ एसआई खेम सिंह गांव इस्माइलपुर पहुंच गए. गांव की सीमा पर भीड़ जुटी थी.

एसआई ने मैदान में युवक की लाश के पास सिपाही तैनात करने के साथ ही घायल बेबी को एंबुलेंस से मझगवां अस्पताल भिजवाया, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. इस बीच जानकारी होने पर थानाप्रभारी राजेश कुमार सिंह व सीओ आंवला रामप्रकाश भी घटनास्थल पर पहुंच गए. थानाप्रभारी ने पुलिस के आला अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दे दी. इस पर एसएसपी शैलेश पांडेय व एसपी (देहात) संसार सिंह भी घटनास्थल पर आ गए. फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया गया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. साथ ही गांव वालों से पूछताछ भी की. मृतक व घायल युवती के घर वालों से भी घटना के संबंध में जानकारी हासिल की गई.

युवक के घर वालों ने जहां युवती के घर वालों पर औनरकिलिंग का आरोप लगाया, वहीं युवती के घर वालों ने बताया कि मृतक ने हमारी बेटी को गोली मार कर घायल किया और फिर खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने मौकाएवारदात से 312 बोर का एक तमंचा बरामद किया. इस के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. फोरैंसिक टीम ने भी युवती के दरवाजे के पास से व युवक की लाश के आसपास जांच कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए. बेबी की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल से एक निजी मिशन अस्पताल में ले जाया गया. इस सनसनीखेज घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई थी. इसे देखते हुए गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई.

पुलिस भले ही प्रेमिका को गोली मार कर प्रेमी द्वारा खुदकुशी करने की बात कह रही थी, लेकिन गांव के बहुत से लोगों के गले यह बात नहीं उतर रही थी. उन का कहना था कि यदि अमित अपनी प्रेमिका को गोली मार कर उस के साथ अपना भी जीवन खत्म करना चाहता था तो उस ने खुदकुशी करने के लिए वहां से लगभग 400 मीटर दूर जगह क्यों चुनी. दूसरी बात खुदकुशी करने वाला तमंचे से गोली अकसर अपनी कनपटी पर मारता है, जबकि अमित के सीने में गोली लगी थी. तमंचा उस के शव से 3 मीटर दूर पड़ा मिला. वहीं खोखा भी एक ही मिला, जबकि गोली 2 चली थीं. गांव में प्रेमप्रसंग में हत्या किए जाने का शक जाहिर किया जा रहा था.

बेबी की मां का कहना था कि प्रेम प्रसंग नहीं था. उन की बेटी व मृतक की बहन पक्की सहेली थीं. नौकरी के लिए फार्म भरने को बेटी ने उसे अपने प्रमाणपत्र दिए थे. मृतक की बहन अब उन्हें नहीं लौटा रही थी. जिन्हें न देने की वजह से दोनों परिवारों में तनातनी थी. बेबी अमित से प्यार नहीं करती थी. अमित की मां के अनुसार युवती की शादी तय हो जाने व उस के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगाने से अमित मानसिक रूप से परेशान था. कुछ दिन पहले उस ने नींद की गोलियां खा कर भी जान देने की कोशिश की थी. वह बेबी से शादी करना चाहता था. लड़की भी अमित से शादी की जिद पर अड़ी थी. उस के घर वालों ने धमकी दी थी कि तुझे और अमित दोनों को मार देंगे. इस के बाद भी लड़की नहीं मान रही थी.

मां ने बताया कि सुबह अमित के पास वीरपाल प्रधान का फोन आया था. वह उसे बुला रहे थे, वह उसी समय घर से चला गया था. इस के बाद यह घटना हो गई. वहीं पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे अमित के बड़े भाई राजबाबू के अनुसार अमित पिछले 2 साल से बेबी के संपर्क में था, 3 माह पूर्व दोनों ने गुपचुप तरीके से कोर्टमैरिज कर ली थी. इस बात की जानकारी घटना से कुछ दिन पहले ही अमित ने घर वालों को दी थी. लेकिन हम ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया था. उधर युवती भी दूसरी जगह शादी नहीं करना चाहती थी. वह भी अमित से शादी की जिद पर अड़ी थी. उस ने अपने घर वालों से कह दिया था कि बारात लौटा दो. यह जानकारी मिलने पर बेबी के घर वालों ने प्रधान से साजिश कर पहले अपनी बेटी और फिर उस के भाई को गोली मार दी.

शाम को पोस्टमार्टम के बाद अमित के घर वालों ने मझगवां-आंवला मार्ग पर उस का शव रख कर हंगामा किया. घर वालों का आरोप था कि अमित की हत्या बेबी के घर वालों ने की है. पुलिस उन के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कर रही है. सूचना पर मौके पर पहुंचे एसडीएम कमलेश कुमार सिंह व सीओ रामप्रकाश ने उन्हें समझाया, लेकिन जब वे नहीं माने तब हलका बल प्रयोग कर उन्हें वहां से हटा दिया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. रिपोर्ट में अमित द्वारा सल्फास खाने की भी पुष्टि हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक गोली ऐन दिल पर लगी थी, छर्रे आसपास भी धंसे थे. घायल युवती के पिता गुड्डू ने थाने में मृतक अमित व उस के भाइयों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई.

बेबी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने आत्महत्या करने वाले प्रेमी अमित सहित उस के भाइयों राजबाबू, अजय, सुमित, कल्लू व विनोद गुप्ता के खिलाफ जान से मारने की नीयत से हमला करने की रिपोर्ट दर्ज कर ली. वहीं एसआई खेम सिंह की ओर से भी मृतक पर अवैध तमंचा रखने तथा खुदकुशी करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया. रिपोर्ट में मृतक पर एकतरफा प्यार करने का भी आरोप लगाया गया था.

इस तरह एक प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत हो गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Ki Kahani : औलाद की खातिर किया सास ससुर का कत्ल

Crime Ki Kahani :  सूरज की गरमी के बढ़ने के साथ ही गांव धनुहावासियों की चिंता भी बढ़ती जा रही थी. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि लल्लूराम और उन की पत्नी सुशीला देवी अभी तक सो कर क्यों नहीं उठे. जबकि गांव में वही दोनों सब से पहले उठते थे. बालबच्चे थे नहीं,

इसलिए दोनों रात को जल्दी सो जाते थे. यही वजह थी कि वे सुबह जल्दी उठ भी जाते थे. लेकिन उस दिन सुबह दोनों में से कोई दिखाई नहीं दिया तो पड़ोस में रहने वाले उन के बड़े भाई जमुना प्रसाद पता लगाने के लिए उन के घर जा पहुंचे. वह यह देख कर हैरान रह गए कि बाहर ताला लगा है.

इस की वजह यह थी कि लल्लूराम कभी बाहर दरवाजे में ताला लगाते ही नहीं थे. वैसे तो वह जल्दी कहीं आतेजाते नहीं थे. अगर कभी किसी के शादीब्याह में जाना भी होता था तो घरद्वार सब भाई को ही सौंप कर जाते थे. अब तक 9 बज चुके थे. बिना बताए कहीं बाहर जाने का सवाल ही नहीं था. अगर गांव या खेतों की ओर कहीं गए होते तो अब तक आ गए होते. यह खबर सुन कर पूरा गांव लल्लूराम के घर के सामने इकट्ठा हो गया था.

दरवाजे पर जो ताला लगा था, वह एकदम नया था, इसलिए लोगों को किसी अनहोनी की आशंका हो रही थी. लल्लूराम का घर सड़क के किनारे था. लोगों ने विचार किया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि रात में डकैतों ने इन के घर धावा बोल कर लूटपाट करने के साथ दोनों को खत्म कर दिया हो. यही सोच कर कुछ बुजुर्गों ने वहां खड़े लड़कों से कहा कि दरवाजे पर चढ़ कर ऊपर लगी जाली से देखो तो अंदर कोई दिखाई दे रहा है या नहीं?

बुजुर्गों के कहने पर 2 लड़कों ने दरवाजे पर चढ़ कर अंदर झांका तो उन के मुंह से चीख निकल गई. लल्लूराम और उन की पत्नी सुशीला देवी की रक्तरंजित लाशें अलगअलग चारपाइयों पर पड़ी थीं. तुरंत क्षेत्रीय थाना नैनी को फोन द्वारा इस घटना की सूचना दी गई.

सूचना मिलने के लगभग आधा घंटे बाद थाना नैनी के थानाप्रभारी रामदरश यादव सिपाहियों को साथ ले कर घटनास्थल पर आ पहुंचे. पुलिस ने ताला तोड़वा कर दरवाजा खोलवाया. अंदर जाने पर पता चला कि बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या बड़ी ही बेरहमी से की गई थी.

थानाप्रभारी ने इस घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को दे कर लाश तथा घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया. थोड़ी देर में डीआईजी एन.रवींद्र और एसएसपी मोहित अग्रवाल, एसपी यमुनापार लल्लन राय डाग स्क्वायड और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट टीम के साथ वहां पहुंच गए.

घटनास्थल पर पहुंचे फोरेंसिक एक्सपर्ट प्रेम कुमार भारती ने खून के धब्बों का नमूना उठाने के साथ वहां पड़े 2 पत्थरों से अंगुलियों के निशान उठाए. उन पत्थरों पर खून लगा था. पुलिस का अंदाजा था कि पत्थरों से बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या की गई थी. सारी औपचारिक काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दीं. यह 14 जून, 2013 की बात है.

काररवाई निपटा कर पुलिस ने मृतक लल्लूराम के बड़े भाई जमुना प्रसाद से पूछताछ शुरू की तो उन्होंने पुलिस को जो बताया, उस के अनुसार लल्लूराम निस्संतान थे. वह अपने काम से काम रखते थे. भाइयों में भी आपस में कोई झगड़ाझंझट नहीं था. हां, उन के पास रुपए पैसे की कोई कमी नहीं थी. इसलिए लगता यही है कि लूट के लिए पतिपत्नी को मारा गया है.

लल्लूराम के परिवार वालों के अनुसार, उन का मकान ही लगभग 20 लाख रुपए के आसपास था. इस के अलावा उन के पास कई बीघा जमीन थी, जो करोड़ों रुपए की थी. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अपना एक बीघा खेत 15 लाख रुपए में बेचा था. उन के पास लाखों के गहने भी थे. जबकि उन की करोड़ों की इस संपत्ति का कोई वारिस नहीं था. उन के बड़े भाई जमुना प्रसाद का बेटा रवि जरूर उन की तथा उन के खेतों की देखभाल के लिए उन्हीं के घर ज्यादा रहता था. दोनों भाइयों के घर अगलबगल ही थे, इसलिए रवि को चाचाचाची की देखभाल में कोई परेशानी नहीं होती थी.

लेकिन रवि एक नंबर का नशेड़ी था. वह हमेशा स्मैक के नशे में डूबा रहता था. उस की शादी भी हो चुकी थी और वह 3 बच्चों का बाप था. ये तीनों बच्चे उस की दूसरी पत्नी रेखा तिवारी से थे. उस की पहली पत्नी ने उस के नशेड़ीपने की वजह से ही तलाक ले लिया था. उस के बाद लल्लूराम की पत्नी यानी रवि की चाची सुशीला देवी ने उस की शादी अपनी बहन की बेटी रेखा से करा दी थी.

रेखा भी रवि के नशे से आजिज आ चुकी थी. यही वजह थी कि इधर वह बच्चों को ले कर करछना में रहने वाली अपनी बड़ी बहन के यहां रह रही थी.

एक तो रवि नशेड़ी था, दूसरे करता धरता भी कुछ नहीं था. इस के अलावा लल्लूराम के यहां रहने की वजह से उसे उन के घर के बारे में पूरी जानकारी थी, इसलिए पुलिस को पहले उसी पर संदेह हुआ. पुलिस ने उसे थाने ला कर हर तरह से पूछताछ की. लेकिन इस पूछताछ में रवि निर्दोष साबित हुआ. हत्याएं लूटपाट के इरादे से की गई थीं. लेकिन घर का कोई सामान गायब हुआ हो ऐसा लग नहीं रहा था.

अगर कुछ गायब हुआ भी था तो इस की जानकारी रवि की पत्नी रेखा से ही मिल सकती थी. क्योंकि लल्लूराम और सुशीला देवी के अलावा उस घर के बारे में सब से ज्यादा जानकारी रेखा को ही थी. पुलिस रेखा से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन वह कहीं नजर नहीं आ रही थी. वह सिर्फ क्रियाकर्म वाले दिन ही दिखाई दी थी. उस के बाद गायब हो गई थी.

मामले के खुलासे के लिए एसपी यमुनापार लल्लन राय ने सीओ राधेश्याम राम के नेतृत्व में इंस्पेक्टर नैनी रामदरश यादव, एसआई वी.पी. तिवारी, हेडकांस्टेबल शशिकांत यादव, कांस्टेबल मोहम्मद खालिद, शिवबाबू आदि को ले कर एक टीम बनाई. इस टीम ने पहले तो अपने मुखबिरों को सक्रिय किया.

अपने इन्हीं मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि नशेड़ी पति के अत्याचार से परेशान रेखा के संबंध धनुहा के ही रहने वाले बब्बू पांडेय से बन गए थे.

रेखा इस समय कहां है, पुलिस टीम ने यह पता किया तो जानकारी मिली कि उस का मंझला बेटा लक्ष्य काफी बीमार है, जिसे उस ने इलाहाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कर रखा है. उस के इलाज का सारा खर्च करछना का रहने वाला बब्बू पांडे का दोस्त रामबाबू पाल उठा रहा है.

पुलिस का माथा ठनका. रेखा के बेटे का इलाज एक गैर आदमी क्यों करा रहा है? पुलिस ने जब इस बारे में पता किया तो जो जानकारी मिली, उस के अनुसार पति की प्रताड़ना और ससुराल वालों की उपेक्षा से रेखा पति और ससुराल वालों से दूर होती चली गई थी. उसी बीच गांव के ही रहने वाले बब्बू पांडेय और उस के दोस्त रामबाबू पाल ने उस से सहानुभूति दिखाई तो दोनों से ही उस के घनिष्ठ संबंध बन गए थे.

इन बातों से पुलिस को लगा कि इस हत्याकांड में कहीं रेखा और उस से सहानुभूति दिखाने वालों का हाथ तो नहीं है. यह बात दिमाग में आते ही थाना नैनी पुलिस ने 18 जून की रात छापा मार कर बब्बू पांडेय और रामबाबू पाल को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर दोनों से पूछताछ की जाने लगी. पहले तो दोनों कहते रहे कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया.

लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि लल्लूराम तिवारी और उन की पत्नी सुशीला देवी की हत्या उन्हीं लोगों ने रेखा की मदद से की थी. रामबाबू पाल ने रेखा से अपने अवैध संबंध होने की बात भी स्वीकार कर ली. लेकिन बब्बू ने ऐसी कोई बात नहीं स्वीकार की. जबकि रेखा से उस के भी संबंध थे, क्योंकि उसी की वजह से रामबाबू पाल रेखा तक पहुंचा था.

रेखा को रामबाबू पाल और बब्बू पांडेय की गिरफ्तारी की सूचना मिली तो वह बच्चों को ले कर फरार हो गई. मगर जल्दी ही पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. तीनों से की गई पूछताछ में जो जानकारी मिली, उस के अनुसार यह कहानी कुछ इस प्रकार है.

मध्यप्रदेश के जिला रीवां के चाकघाट के गांव मरवरा की रहने वाली रेखा का विवाह सन 2010 में उस की सगी मौसी सुशीला देवी ने अपने जेठ जमुना प्रसाद के बेटे रवि से करा दिया था. रेखा विदा हो कर ससुराल आई तो उसे जल्दी ही पता चल गया कि उस का पति हद दर्जे का नशेड़ी है.  इस की वजह यह थी कि निस्संतान सुशीला देवी को रवि से सहानुभूति थी. इसीलिए वह उसे ज्यादातर अपने साथ रखती थीं.

रवि भी उन लोगों की हर तरह से देखभाल करता था. सुशीला देवी ने रेखा की शादी उस से यह सोच कर कराई थी कि रेखा अपनी है, इसलिए वह बुढ़ापे में उन की देखभाल ठीक से करेगी. लेकिन शादी के बाद मौसी को कोसने और अपनी बदकिस्मती पर आंसू बहाने के अलावा रेखा के पास कोई उपाय नहीं था.

समय धीरेधीरे बीतता रहा और रेखा अंश, लक्ष्य और सुख, 3 बेटों की मां बनी. 3 बेटों का बाप बनने के बाद भी रवि की नशे की आदत छूटने के बजाय बढ़ती ही गई. रेखा मना करती तो वह उसे जानवरों की तरह पीटता.

रेखा के लिए एक परेशानी यह थी कि रवि उस के पास के पैसे भी छीन लेता था. शादी में मिले गहने तो उस ने पहले ही नशे की भेंट चढ़ा दिए थे. पति के उत्पातों से आजिज आ कर रेखा कभीकभी करछना में रहने वाली अपनी बड़ी बहन के यहां चली जाती थी. वक्त जरूरत मौसी सुशीला भी मदद कर देती थी. लेकिन जिस तरह की मदद की उम्मीद रेखा उन से करती थी, वह भी नहीं करती थी.

सासससुर ने तो पहले ही हाथ खींच लिए थे. इस तरह रेखा और उस के बच्चे उपेक्षित सा जीवन जी रहे थे. इस के लिए वह अपनी मौसी सुशीला को ही दोषी मानती थी.

पति और ससुराल वालों से त्रस्त रेखा अकसर करछना में रहने वाली अपनी बहन के यहां आतीजाती रहती थी. इसी आनेजाने में उस की मुलाकात उस के बहनोई राजू पांडेय तथा गांव के बब्बू पांडेय के दोस्त रामबाबू पाल से हुई. रामबाबू पाल से रेखा ने अपनी परेशानी बताई तो वह रेखा से सहानुभूति दिखाने के साथसाथ वक्तजरूरत उस की मदद भी करने लगा. इसी का नतीजा था कि दोनों के बीच संबंध बन गए.

बब्बू की वजह से रेखा के संबंध रामबाबू पाल से बन गए, बब्बू रामबाबू का पक्का दोस्त था. यही नहीं, गांव का होने की वजह से बब्बू रेखा के घर भी आताजाता था और रवि का दोस्त होने की वजह से रेखा को भाभी कहता था. भले ही रेखा ने दोनों से मजबूरी में शारीरिक संबंध बनाए थे, लेकिन संबंध तो बन ही गए थे.

मई के अंतिम सप्ताह में रेखा का मंझला बेटा 7 साल का लक्ष्य अचानक बीमार पड़ा. रेखा ने मौसा लल्लूराम और मौसी सुशीला देवी से बच्चे की बीमारी के बारे में बताया. लेकिन किसी ने खास ध्यान नहीं दिया. झोलाछाप डाक्टर से दवा ला कर उसे दी जाती रही. फायदा होने के बजाए धीरेधीरे उस की बीमारी बढ़ती गई. रवि को बेटे की बीमारी से कोई मतलब नहीं था. वह स्मैक पिए पड़ा रहता था.

रेखा ने देखा कि लक्ष्य की बीमारी को ससुराल में कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है तो वह बेटों को ले कर अपनी बहन के यहां करछना चली गई. वहां उस ने बेटे की बीमारी के बारे में रामबाबू को बताया तो एक पल गंवाए बगैर वह उसे सीधे इलाहाबाद ले गया और एक प्राइवेट अस्पताल में भरती करा दिया.  जांचपड़ताल के बाद डाक्टरों ने लक्ष्य को जो बीमारी बताई, उस के इलाज पर लंबा खर्च आने वाला था.

डाक्टर की बात सुन कर रेखा रोने लगी. उसे रोता देख रामबाबू ने तड़प

कर कहा, ‘‘रेखा, तुम रो क्यों रही हो? मैं हूं न. मेरे रहते तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. चाहे जैसे भी होगा, मैं लक्ष्य का इलाज कराऊंगा.’’

रेखा जानती थी कि रामबाबू के पास भी उतने पैसे नहीं हैं, जितने लक्ष्य के इलाज के लिए जरूरत है. रामबाबू की करछना बाजार में चाय की एक छोटी सी दुकान थी. उसी की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चलता था. यही सब सोच कर रेखा ने कहा, ‘‘कहां से लाओगे इतने रुपए. यहां 10-20 हजार रुपए की बात नहीं है, डाक्टर ने लाख रुपए से ऊपर का खर्च बताया है. सासससुर के पास इतना पैसा है नहीं. पति बेकार ही है. जिन के पास पैसा है, उन से किसी तरह की उम्मीद नहीं की जा सकती.’’

‘‘रेखा, मन छोटा मत करो. मेरे खयाल से एक बार अपने मौसा मौसी से बात कर लो. पोते का मामला है, शायद वे इलाज के लिए पैसे दे ही दें.’’

‘‘वे लोग बहुत कंजूस है, फूटी कौड़ी नहीं देंगे,’’ रेखा ने कहा, ‘‘फिर भी तुम कह रहे हो तो गांव जा कर जरूर कहूंगी, बेटे के लिए उन के पैरों पर गिर कर रोऊंगीगिड़गिड़ाऊंगी. इस पर भी उन का दिल न पसीजा तो क्या होगा?’’

‘‘उस के बाद देखा जाएगा. कोई न कोई रास्ता तो निकालूंगा ही. वैसे भी तुम्हारी मौसी के पास पैसों की कमी नहीं है. करोड़ों की संपत्ति है उन के पास. कोई खाने वाला भी नहीं है. मुझे पूरा विश्वास है कि वह मना नहीं करेंगी.’’ रामबाबू ने कहा.

रामबाबू के कहने पर रेखा धनुहा जा कर लल्लूराम से मिली. उस ने रोते हुए उन से बेटे की बीमारी और इलाज पर आने वाले खर्च के बारे में बताया तो उन्होंने कहा, ‘‘इतनी बड़ी रकम मेरे पास नहीं है. तुम अपने ससुर से क्यों नहीं कहती.’’

सुशीला देवी ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया.

रेखा को पता था कि उस के ससुर जमुना प्रसाद की माली हालत जर्जर है. वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते. रेखा क्या करती, इलाहाबाद वापस आ गई. रेखा का उतरा चेहरा देख कर ही रामबाबू समझ गया कि उस के वहां जाने का कोई फायदा नहीं हुआ. उस ने कहा, ‘‘मैं ने वहां भेज कर तुम्हें बेकार ही परेशान किया.’’

रामबाबू की बात सुन कर रेखा रोते हुए बोली, ‘‘मेरे मौसा और मौसी कंजूस ही नहीं, बेरहम भी हैं. इतना पैसा जोड़ कर रखे हैं, न जाने किसे देंगे. कल को मर जाएंगे, सब यहीं रह जाएगा. उन की कोई औलाद तो है नहीं, वे औलाद का दर्द क्या जानें.’’

‘‘पैसा उन का है. नहीं दे रहे हैं तो कोई कर ही क्या सकता है.’’ रामबाबू ने कहा.

‘‘कर क्यों नहीं सकता. अगर तुम मेरा साथ दो तो उन की सारी दौलत हमारी हो सकती है. लक्ष्य का इलाज भी हो जाएगा और मैं उस नशेड़ी को तलाक दे कर हमेशा हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊंगी.’’ रेखा ने कहा.

‘‘इस के लिए करना क्या होगा?’’

‘‘हत्या, उन दोनों बूढ़ों की हत्या करनी होगी. आज नहीं तो कल, उन्हें वैसे भी मरना है. क्यों न यह शुभ काम हम लोग ही कर दें. बोलो, तुम मेरा साथ दे सकते हो?’’

‘‘तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं. मैं ही क्या, इस नेक काम में बब्बू भी हमारा साथ दे सकता है. इस के एवज में उसे भी कुछ दे दिया जाएगा.’’

‘‘ठीक है, बब्बू से बात कर लो. अब यह नेक काम हमें जल्द ही कर लेना चाहिए. ऐसे लोगों का ज्यादा दिनों तक जीना ठीक नहीं है. इस तरह के लोग इसी लायक होते हैं.’’ रेखा ने कहा.

रामबाबू ने फोन कर के बब्बू को भी वहीं बुला लिया. इस के बाद तीनों ने बैठ कर लल्लूराम और सुशीला देवी की हत्या कर के उन के यहां लूटपाट की योजना बना डाली.

उसी योजना के तहत रेखा अपनी ससुराल जा पहुंची. रात में खापी कर लल्लूराम और सुशीला गहरी नींद सो गए तो उस ने फोन कर के रामबाबू और बब्बू को बुला लिया. दरवाजा उस ने पहले ही खोल दिया था.

दोनों सावधानीपूर्वक अंदर पहुंचे और गहरी नींद सो रहे वृद्ध दंपत्ति के ऊपर भारीभरकम पत्थर पटक कर उन की जीवनलीला समाप्त कर दी. इस के बाद तीनों ने रुपए और गहने की तलाश में कमरों का एकएक सामान खंगाल डाला. लेकिन उन के हाथ कुछ भी नहीं लगा. रामबाबू और बब्बू लल्लूराम और सुशीला देवी की हत्या का पछतावा करते हुए भाग निकले.

अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने रेखा, रामबाबू पाल और बब्बू पांडेय के खिलाफ लल्लूराम और सुशीला देवी की हत्या का मुकदमा दर्ज कर के 21, जून को इलाहाबाद की अदालत में पेश किया. जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में नैनी जेल भेज दिया गया. इस हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी मोहित अग्रवाल ने 5 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की. Crime Ki Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Crime News : यूट्यूबर कंचन पर निहंगों का चाबुक

Family Crime News : लुधियाना की कंचन कुमारी सोशल मीडिया पर कमल कौर भाभी के नाम से मशहूर थी. उस के रील्स की सनसनी गजब की थी. लाखों फालोअर्स पंजाब से ले कर विदेशों तक के थे. हर रील पर मिले कमेंट में तारीफों के पुल बंधे होते थे तो भद्दी गालियां और धमकियां तक होती थीं. उस का कत्ल हो गया. उसे किस ने और क्यों मारा? आखिर क्या हुआ, जो इस कत्ल से हंगामा भारत से ले कर यूएई तक मच गया? पढ़ें, इस कहानी में सब कुछ.

पंजाब की बेहद फेमस इंफ्लुएंसर कमलजीत कौर उर्फ कंचन कुमारी की पहचान ‘कमल कौर भाभी’ के  रूप में थी. वह पिछले 7 सालों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर सनसनी बनी हुई थी. उस के ओनलीफैंस पर भी सब्सक्राइबर्स थे, जहां वह अपने वीडियो पोस्ट करती थी. बात दिसंबर 2024 की है. उसे उस के अश्लील वीडियो के लिए अर्श डल्ला नाम के व्यक्ति की धमकी मिली. उस ने चेतावनी दी कि अश्लील वीडियो बनाना बंद करे, वरना उसे जान से हाथ धोना पड़ेगा.

जबकि लुधियाना के लक्ष्मण नगर में अपनी मम्मी के साथ रह रही 27 वर्षीया कमलजीत कौर द्वारा  वीडियो बनाना रोजीरोटी से जुड़ा था. इस से वह पैसे कमाती थी. घर चलता था. परिवार को मदद मिलती थी. वह छोटेबड़े दुकानदारों के लिए प्रचार का काम करती थी. उन के सामान का वीडियो बना कर अपने सोशल मीडिया चैनल पर डालती थी. बदले में उन से पैसे मिलते थे. उस के द्वारा मौडलिंग में पहनी जाने वाली सैक्स अपील की ड्रेस, अदाएं आदि पर आपत्ति थी. इस तरह के कंटेंट बनाने वाली वह अकेली नहीं थी. पंजाब में कई लड़कियां सोशल मीडिया पर मौडलिंग कर पैसा कमाती हैं. उन्हें वीडियो शूट करने या फिर प्रमोशन के लिए बुलाया जाता है. क्लाइंट की जरूरत के मुताबिक वे वीडियो शूट करने  के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाती रहती हैं.

कमलजीत कौर को जब से जान से मारने की धमकी मिली थी, तब से वह परेशान रहने लगी थी. वह वीडियो बनाने के लिए मना करने वालों से दुखी थी. उसे जानने वाले लोग उसे शालीनता की नसीहत देते थे. अपने सिख समुदाय की गरिमा का पाठ पढ़ाते हुए उस के वीडियो को गलत बताते थे, जबकि उस के वीडियो उन्हें भी पसंद थे. जून के पहले सप्ताह में 3 तारीख को उस ने खिन्न मन से इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया था. उस पर हिंदी और अंगरेजी में कैप्शन लिखा था, ‘नो इमोशन, नो लव, नो एफ. ओनली डाउट, डाउट, डाउट इज लेफ्ट!’

इस पर 3,800 से ज्यादा कमेंट्स आए थे. कुछ में ‘वाहेगुरु’ कह कर शोक जताया गया तो कुछ में गुस्सा और सामाजिक टिप्पणियां की गईं. उस के बाद से वह एकांत में खो गई थी. उस की चंचलता और चपलता को मानो किसी की नजर लग गई हो. उसे उदास देख कर खाने के टेबल पर उस की मम्मी पूछ बैठीं, ”क्या बात है, तुम इतनी गुमसुम क्यों हो? किसी ने फिर कुछ कहा?’’

”कुछ नहीं मम्मी.’’

”क्या सब्सक्राइबर कम हो गए?’’

”नहीं.’’

”तो क्या बात है? मम्मी को नहीं बताएगी… किसी ने फिर धमकी दी? भाई ने कुछ कहा?’’ कमलजीत की मम्मी उस की चुप्पी तोडऩे का प्रयास करती रहीं.

”प्लीज मम्मा! मुझे कल एक इवेंट पर जाना है. उस की तैयारी करनी है.’’ कमलजीत धीमी आवाज में बोली.

”चलो अच्छा है, तुम पिछले 6 दिनों से घर में पड़ी थी… वैसे कहां जाना है?’’

”बठिंडा.’’

”संभल कर जाना.’’ मम्मी बोलीं.

अगले रोज 9 जून, 2025 को सुबह में ही कमलजीत कौर अपने घर से मम्मी को कह कर निकली थी कि वह एक प्रमोशनल इवेंट के लिए बठिंडा जा रही है. उस रोज शाम तक उस की मम्मी से फोन पर बात होती रही, किंतु रात होने तक उस का फोन बंद हो गया. मम्मी ने उस पर ध्यान नहीं दिया, किंतु जब देर रात तक वापस नहीं लौटी, तब उन को उस की चिंता सताने लगी. उन्होंने अपने बेटे को काल कर अपनी चिंता बताई. बेटे ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया. उस ने कहा, ”आ जाएगी.’’

अगले रोज 10 जून को भी कमलजीत घर नहीं लौटी. उस रोज सुबह से ही उस का फोन बंद आ रहा था. मम्मी ने अपने बेटे और बेटी को भी इस बारे में बताया. फिर उन्होंने अपनी जानपहचान वालों से संपर्क कर कमल के बारे में पता लगाने की कोशिश की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला

इंस्टाक्वीन की कार में मिली लाश

11 जून, 2025 की रात को एक समाजसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने पाया कि बठिंडाचंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित आदेश मैडिकल यूनिवर्सिटी की पार्किंग में खड़ी कार में से तेज दुर्गंध फैल रही है. उन्होंने पास जा कर देखा. कार के शीशे बंद थे और उस की पिछली सीट पर एक महिला का शव पड़ा था. उस से ही तेज बदबू फैल रही थी. उन्होंने घटना की सूचना बठिंडा कैंट थाने को दी. कैंट थाने के एसएचओ दलजीत सिंह पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अज्ञात महिला के शव की शिनाख्त के लिए जांच शुरू की.

जांच में गाड़ी की पहचान नहीं हो पाई. पुलिस ने घटनास्थल से कार को कब्जे में लिया, जिस पर लुधियाना का नंबर था, लेकिन पुलिस को उस के नकली नंबर होने का शक हुआ. शव 3 से 4 दिन पुराना लग रहा था. सूचना मिलने पर एसपी (सिटी) नङ्क्षरदर सिंह भी मौके पर पहुंच गए. वहां की काररवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया. गाड़ी में मिले सामान की जांच की गई, जिस से मृतका का नाम कंचन कुमारी पता चला. उस की पहचान सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के रूप में हुई. पता चला कि गाड़ी में मिली लाश ‘इंस्टाक्वीन’ कमल कौर भाभी की थी. उस के घर का फोन नंबर भी पुलिस को मिल गया तो फेमिली वालों को घटना की सूचना दे दी गई.

कमल कौर भाभी की मौत की खबर थोड़ी देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जिस ने भी सुना, हैरान रह गया. दूसरी तरफ बठिंडा की पुलिस इस की तहकीकात में जुट गई थी. तुरंत सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. पुलिस की 5 टीमें बनाई गईं. शुरुआती जांच में अस्पताल की सिक्योरिटी ने बताया कि गाड़ी 10 जून से वहां पार्किंग में खड़ी थी. बदबू आने पर कार के पास गए तो गाड़ी अंदर से लौक मिली. इस के बाद पुलिस को जानकारी दी गई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि गाड़ी वहां कौन लाया था? क्या कमलजीत कौर खुद गाड़ी चला कर आई थी या फिर उस की हत्या कर कोई और उसे गाड़ी के अंदर छोड़ कर चला गया था?

जांच में पुलिस को उस आडियो के बारे में पता चला, जिस में करीब 7 महीने पहले विदेश में बैठे आतंकी अर्श डल्ला द्वारा उसे जान से मारने की धमकी दी थी. इसी बीच कमल कौर भाभी की हत्या मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब एक शख्स ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इस हत्या की जिम्मेदारी ली. हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला वह व्यक्ति अमृतपाल सिंह मेहरों था. उस ने लिखा, ‘खालसा कभी भी महिलाओं पर हमला नहीं करता है, लेकिन जब एक महिला ने हमारे तख्तों पर हमला किया तो उसे मार दिया गया. कंचन, जिस ने सिख इतिहास और संस्कृति को बदनाम करने के लिए ‘कौर’ नाम का दुरुपयोग किया था, को सजा दी गई है.’

यानी कि कंचन कुमारी उर्फ कमलजीत कौर की हत्या के बाद अमृतपाल सिंह मेहरों ने एक वीडियो पोस्ट की, जिस में इस काररवाई के पीछे का कारण बताया गया. उस ने सबूत के तौर पर कंचन का एक अश्लील वीडियो दिखाया. अमृतपाल सिंह मेहरों ने अन्य इंस्टाग्राम यूजर्स को ऐसी सामग्री पोस्ट न करने की भी चेतावनी दी. मेहरों ने धमकी देते हुए कहा कि अगर ऐसे लोग ऐसा करना बंद नहीं करते तो उन का भी यही हाल होगा. उस ने कहा कि जब तक वह जिंदा है, वह पंजाब में ऐसी अश्लील सामग्री फैलने नहीं देगा.

जल्द ही इंस्टाक्वीन कमल कौर भाभी की हत्या के मामले में बठिंडा पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस बारे में बठिंडा की एसएसपी अमनीत कौंडल ने खुलासा किया कि उन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. अलगअलग टीमें बना कर जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान पता चला कि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता जसप्रीत सिंह है, जिस ने अपना नाम अमृतपाल सिंह मेहरों बताया था. वह 7-8 जून को कंचन के घर भी गया था, लेकिन कंचन घर पर नहीं मिली थी. वह कंचन को 9 जून को प्रमोशन के बहाने अपने साथ कार में ले गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक कमल कौर की हत्या बीती 9 व 10 जून, 2025 की मध्यरात्रि को की गई थी. अमृतपाल मेहरों ने अपने साथियों जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह के साथ मिल कर कंचन कुमारी की कार में गला घोंट कर हत्या कर दी थी. इस के बाद उस का शव भुच्चो स्थित आदर्श मैडिकल कालेज और अस्पताल की पार्किंग में कार छोड़ कर फरार हो गए थे. वही कार 11 जून की शाम को बरामद हुई थी. पुलिस ने जांच में पाया कि कंचन की सोशल मीडिया पोस्टों को ले कर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हवाला दे कर यह हत्या की गई थी, इसे ‘अनधिकृत नैतिक पुलिसिंग’ (मोरल पुलिसिंग) करार दिया गया.

पता चला कि रंजीत ने ही मेहरों को अमृतसर पहुंचाने में मदद की थी. साथ ही उसे अमृतसर छोडऩे में सहायता करने वाले पांचवें आरोपी की पहचान और बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानी थी. आरोपी रंजीत सिंह तरनतारन का रहने वाला है और निहंग पंथ से जुड़ा बताया जा रहा है. उस की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी गई.

सौफ्ट पोर्न’ जैसी अश्लील बताईं रील्स

कमल कौर की लाइफ बेहद लग्जरी थी. वह एक निजी बैंक में नौकरी करती थी, लेकिन कोरोना काल के दौरान उस ने नौकरी छोड़ दी थी. नौकरी छोडऩे के पीछे की वजह जो भी हो, वह महंगे कपड़े पहनने की शौकीन थी और अकसर बड़े होटलों व सैलून में जाती थी. वह सोशल मीडिया पर अकसर शौपिंग और जीवनशैली से जुड़ी रील्स पोस्ट करती थी. कई बार वह महिलाओं के अंडरगारमेंट्स पर भी कंटेंट बना कर पोस्ट करती थी. कंचन की कुछ रील्स में वह बारबार जस्सी नाम का जिक्र करती थी. यह जस्सी कौन है, इस पर भी पुलिस जांच कर रही है. साथ ही कंचन की काल डिटेल्स की भी गहराई से जांच की जा रही है, जिस से कुछ संदिग्ध नंबरों की सूची तैयार की जा रही है. उस की बहन नीतू ने बताया कि कमलजीत ही घर का पूरा खर्च उठाती थी.

उस का कमल कौर भाभी नाम का सोशल मीडिया पर वेरिफाइड अकाउंट था. इस में उस के 1,351 से अधिक तरहतरह के वीडियो पोस्ट थे. उन की वीडियो के दीवाने किस कदर थे, इस का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है. इंस्टाग्राम पर 4.27 लाख फालोअर्स थे, जिन की संख्या उस की मौत के बाद और बढ़ गई. यूट्यूब पर उस के 2.39 लाख सब्सक्राइबर थे और फेसबुक पर 7.7 लाख फालोअर्स. उस के कुछ वीडियो निहंग संप्रदाय के कुछ कट्टरपंथियों को फूटी आंख नहीं सुहाते थे. उन्हें उन में अश्लीलता नजर आई थी. हाल की पोस्ट्स में वह कार में अपने भतीजों के साथ मस्ती करती दिखी या किसी गाने पर डांस कर रही होती है.

उस का कंटेंट कभीकभी पीजी-रेटेड लेवल पर इशारों वाला होता था— जैसे कि डीप नेक ड्रेस पहन कर पोज करना या शाट्र्स पहन कर घूमना. लेकिन अब कुछ डिलीट हो चुकी पोस्ट्स इस से भी आगे ‘सौफ्ट पोर्न’ को दर्शाती थीं, जिन्हें कुछ लोग देसी ओनलीफैंस जैसा मानते हैं.

ओनलीफैंस (OnlyFans) लंदन, यूनाइटेड किंगडम में इंटरनेट कंटेंट की वेबसाइट है. इस सेवा का उपयोग मुख्य रूप से वैसे यौनकर्मी यानी सैक्सवर्कर करते हैं, जो अश्लील कंटेंट बनाते हैं. इस वेबसाइट पर पोस्ट किए जाने वाले कंटेंट यूजर्स द्वारा बनाए जाते हैं, जिस से उन की मासिक सदस्यता राशि, टिप और हर बार देखने के लिए ‘पे पर व्यू’ के जरिए आमदनी होती है. ओनलीफैंस का उपयोग मुख्यरूप से अश्लील सामग्री बनाने वालों द्वारा किया जाता है.

कमल कौर अकसर ऐसे परिधानों में नजर आती थी, जिन्हें पंजाब के रुढि़वादी मानकों के हिसाब से सही नहीं माना जाता. कमल कौर सिर्फ ध्यान खींचने के लिए ऐसा नहीं कर रही थी. यह उस के पेड सब्सक्राइबरों और फेसबुक पर ‘कस्टम वीडियो’ के जरिए एक बिजनैस की रणनीति थी. उल्लेखनीय है कि एडल्ट एंटरटेनमेंट का बाजार बहुत बड़ा है. इस की वैश्विक वैल्यू 71.95 बिलियन डालर है और 2034 तक इस के 100 बिलियन डालर पार करने का अनुमान है. भारत में इस का कोई सटीक आंकड़ा भले ही नहीं है, लेकिन स्टेटिस्टा के मुताबिक हर महीने 1.5 करोड़ भारतीय ओनलीफैंस पर लौगिन करते हैं, जहां यूजर्स अपने सब्सक्राइबरों के लिए विशेष तरह के कंटेंट पोस्ट करते हैं. भारत में अश्लील कंटेंट पोस्ट करना गैरकानूनी है, लेकिन ऐसा कंटेंट इंटरनेट पर आम है.

बताते हैं कि इसी में कमल कौर के वीडियो होते थे, जो मेहरों की नजर में सिख संप्रदाय की नैतिकता के खिलाफ था. कमल की हत्या के बाद मेहरों ने एक वीडियो बयान में कहा, ”तो क्या हुआ अगर वो मारी गई? अच्छा हुआ मारी गई. असल में उसे 5-7 साल पहले ही मार देना चाहिए था.’’

मेहरों के वीडियो में कमल कौर के कुछ पुराने वीडियो के क्लिप्स जोड़े गए हैं. एक में वह कहती है, ”गंदी बात करनी है तो काल करो.’’

दूसरे में वह चमकीला का एक गाना बजाते हुए शावर ले रही है. एक और में वह अपनी प्यूबिक हेयर शेव करने की बात कर रही है. मेहरों के अनुसार इसी तरह की वीडियो ने कमल कौर की हत्या करने के लिए मजबूर किया.

मेहरों का कहना है, ”मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मैं सही हूं या गलत. मुझे पंजाबी पीढ़ी को बचाना है, अगर पंजाब की धरती पर ऐसा कोई और वीडियो बना तो देख लेना!’’

कमल कौर भाभी की हत्या मामले में बठिंडा की एसएसपी अमनीत कोंडल ने बताया कि मुख्य आरोपी निहंग अमृतपाल सिंह मेहरों हत्या के कुछ घंटे बाद ही विदेश भाग गया था. पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कमल कौर की हत्या के बाद अमृतपाल अपने साथी रणजीत सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ उन की कार में बैठ कर सीधा अमृतसर के एयरपोर्ट गया और वहां से 10 जून की सुबह सवा 9 बजे फ्लाइट पकड़ कर यूएई भाग गया. इस की पुष्टि अमृतपाल के पासपोर्ट की डिटेल निकालने पर हो गई. उस के बाद पंजाब पुलिस ने अमृतपाल का लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है. उस के सभी सोशल मीडिया अकाउंट बैन करवा दिए हैं.

आरोपी के खिलाफ जारी हुआ लुकआउट सर्कुलर

अमृतपाल ने विदेश जाने के बाद भी पंजाब के अन्य सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को धमकियां दी हैं. इन में अमृतसर की इंफ्लुएंसर दीपिका लूथरा और तरनतारन की इंफ्लुएंसर प्रीत जट्टी को भी जान से मारने की धमकी मिली है. सिमरनजीत प्रीत जट्टी गांव बाणियां की रहने वाली है. इसी नाम से उन का सोशल मीडिया अकाउंट है, जिस में वह पोस्ट डालती है. शनिवार 14 जून, 2025 को उस ने एसएसपी कार्यालय जा कर शिकायत की कि विदेशी नंबरों से उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. उस का कहना था कि उस ने अभी तक कोई ऐसी आपत्तिजनक वीडियो बना कर पोस्ट नहीं की है.

सिमरनजीत के लिखित बयान के आधार पर एसपी (आई) अजयराज सिंह ने सब डिविजन गोइंदवाल साहिब के डीएसपी अतुल सोनी को जांच के आदेश दे दिए. इसी तरह दूसरे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर दीपिका लूथरा को निहंग अमृतपाल सिंह मेहरों ने ईमेल पर भी जान से मारने की धमकी दी थी. मेल से मिली इस धमकी में आतंकी संगठन बब्बर खालसा भी लिखा है. अमृतसर पुलिस साइबर सेल ने मेहरों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद दीपिका की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है. जिस ईमेल और मोबाइल नंबरों से धमकियां मिलीं, उन की भी जांच की जा रही है.

दीपिका लूथरा को वीडियो जारी कर कहा गया कि पार्किंग सिर्फ बठिंडा में नहीं होती और हर बार लाश मिले, यह भी जरूरी नहीं. उस के मन में खौफ का माहौल है. अमृतपाल सिंह मेहरों के नाम का डर ऐसा फैल गया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले कई इंफ्लुएंसर अब पंजाब पुलिस की शरण में हैं. धमकी के बाद अमृतसर पुलिस के साइबर सेल ने अमृतपाल सिंह मेहरों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 79, 351 (3), 324 (4) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है.

अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अनुसार दीपिका लूथरा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा मुहैया करा दी गई है. उन के घर के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है. लगातार मिल रही धमकियों के चलते उन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया है. अमृतसर की एक युवा कंटेंट क्रिएटर दीपिका लूथरा ने धीरेधीरे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान बनाई थी. वह अमृतसर और आसपास के जिलों में किसी कपड़ों के शोरूम या नए कैफे जैसे छोटे हाइपरलोकल ब्रांड्स का प्रचार कर के अतिरिक्त कमाई करती है.

इसलिए जब फरवरी के आखिरी सप्ताह में उसे तरनतारण के चीमा कलां गांव में एक नए मोबाइल फोन स्टोर का प्रचार करने के लिए काल आया तो यह उस के लिए कोई असामान्य बात नहीं थी. क्लाइंट ने एडवांस में 2 हजार रुपए भी भेजे. 2 मार्च, 2024 को वह तय जगह पर पहुंची, लेकिन यह एक बुरा सपना बन गया. लूथरा और उस के कैमरा परसन को कथित तौर पर अमृतपाल सिंह मेहरों और उस के साथियों ने बंधक बना लिया. उन की कार को लौक कर दिया गया, ताकि वे वहां से निकल न सकें और उन्हें घुटनों के बल बैठ कर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया.

लूथरा ने इस वारदात के बारे में पुलिस को बताया, ”7-8 लोग नीले (निहंग कपड़ों) में वहां मौजूद थे. उन्होंने मेरा फोन और कार की चाबियां छीन लीं और मेरा फोन चैक करने लगे. वे मेरी पोस्ट की गई कंटेंट को ले कर मुझ पर चिल्ला रहे थे.’’

माहौल को जल्दी शांत करने के लिए लूथरा ने वादा किया कि वह अपने पेज पर ‘डबल मीनिंग’ यानी अश्लील संकेत वाले पोस्ट करना बंद कर देगी, लेकिन उन लोगों ने इस पर जोर दिया कि वह अपनी पूरी सोशल मीडिया पर मौजूदगी हटा दे. यह उस के लिए संभव नहीं था, क्योंकि यही उस की आमदनी का जरिया है.

लूथरा ने कहा, ”उस ने भीड़ के बीच सड़क पर अपनी कृपाण रखी और मुझे कहा कि मैं उस पर झुक कर माफी मांगूं, पंजाब की जनता से माफी मांगूं कि मैं कैसी कंटेंट पोस्ट कर रही हूं. मैं ने लिखित रूप में भी माफी मांगी. मैं ने पूरा सहयोग किया, फिर भी उन की धमकियां बंद नहीं हुईं.’’

पंजाब पुलिस और साइबर सेल की काररवाई में अमृतपाल के ब्लौक किए गए इंस्टाग्राम हैंडल्स में amritpalsinghmehron, amritpalsingh_mehron, amritpal.singh.mehron ¥æñÚU kaum.de.rakhe हैं. ये 4 इंस्टाग्राम हैंडल्स मौजूदा समय में भारत में नहीं देखे जा सकते हैं.

इस से पहले मार्च 2023 में भी अमृतपाल के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आरोप लगा था, जिस में उस का व्यक्तिगत और संगठनात्मक द्मड्डह्वद्व.स्रद्ग.ह्म्ड्डद्मद्धद्ग अकाउंट शामिल था. साथ ही उसे टिंडर पर भी एक प्रोफाइल के आरोप में जांच के दायरे में लाया गया है. पंजाब पुलिस ने मई 2025 में टिंडर से उस के अकाउंट (स्थान, आईपी, चैट हिस्ट्री) की जानकारी मांगी थी.

मुसलिम से सिख बना था अमृतपाल

पंजाब पुलिस की निगाह में वही कमल कौर भाभी की हत्या का मास्टरमाइंड बताया जाता है. उस के बारे में छानबीन करने पर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में सामने आया है कि निहंग अमृतपाल मेहरों पहले से सिख नहीं था, बल्कि वह मुसलमान था. और तो और, भारतपाक बंटवारे के वक्त अमृतपाल के पूर्वज पाकिस्तान से भारत आए थे. अमृतपाल ने करीब 12 साल पहले पूरे परिवार समेत सिख धर्म अपना लिया था. 30 वर्षीय अमृतपाल सिंह मेहरों मोगा जिले के गांव मेहरों का रहने वाला है. उस ने 12वीं तक की स्कूली पढ़ाई की है, लेकिन 2014 में उस ने मोगा की आईटीआई से डीजल मैकेनिक का डिप्लोमा किया है.

उस का पूरा परिवार इसी गांव में रहता है. उस के परिवार में मातापिता और एक बड़ा भाई भी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृतपाल के अपने फेमिली वालों के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं. उस का एक बड़ा भाई परिवार से अलग रहता है. अमृतपाल की एक शादीशुदा बहन है, जो अपनी ससुराल में रहती है. वह वर्ष 2022 में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर तरनतारन के धर्मकोट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है. चुनाव के दौरान उस पर लुधियाना में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग को धमकाने के आरोप में मामला भी दर्ज किया गया था.

अमृतसर में मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 427 के तहत उस के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इस के अलावा बरनाला जिले के धनौला थाने में उस के खिलाफ धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 506 (आपराधिक धमकी), 148 (दंगा करने के लिए हथियारों से लैस होना), और 149 (गैरकानूनी जमावड़े के लिए जिम्मेदारी) सहित अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.

‘कौम दे राखे’ नामक कट्टरपंथी संगठन का मुखिया अमृतपाल सिंह मेहरों को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाने की प्रक्रिया पुलिस ने तेज कर दी है. बठिंडा पुलिस ने ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप कर मेहरों के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की है.

पुलिस ने 17 जून को स्थानीय अदालत से उस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी हासिल कर लिया. एसएसपी अमनीत कोंडल का कहना है कि उन्होंने ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआई) को जो पत्र भेजा है, उस में हत्या और आरोपी की भूमिका से जुड़ी तमाम जानकारियां दी गई हैं. यह पत्र इंटरपोल की मदद से उस की विदेश में गिरफ्तारी के लिए महत्त्वपूर्ण साबित होगा. इस के बावजूद पंजाब और हरियाणा के कई धार्मिक नेताओं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने मेहरों के पक्ष में बयान दिए हैं, लेकिन उन के खिलाफ अब तक कोई काररवाई नहीं की गई है.

जबकि कथा लिखे जाने तक इस मामले में 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एक अन्य आरोपी रंजीत सिंह तरनतारन का रहने वाला है, फरार था. उस के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है. पता चला है कि रंजीत ने ही मेहरों को अमृतसर पहुंचाने में मदद की थी.

लाखों फालोअर्स, लेकिन क्रियाकर्म में सिर्फ 3 लोग

सोशल मीडिया पर चमकने वाली कमल कौर के कत्ल के साथसाथ हैरान करने वाली एक बात और सामने आई. वह यह कि उन के अंतिम संस्कार के मौके पर केवल 3 लोग ही आए, जबकि इंस्टाग्राम पर लाखों फालोअर्स थे और उस की आकस्मिक मौत की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई थी. यानी कि लाखों चहेतों में से एक ने भी मशहूर कमल भाभी को अंतिम विदाई नहीं दी. बेरहमी से हत्या के बाद कमल कौर को पूरे मोहल्ले, यहां तक कि अपने परिवार ने भी ठुकरा दिया. अब कोई उस से जुडऩा नहीं चाहता. कोई भी उस की हत्या की निंदा नहीं करना चाहता.

उस का शव लुधियाना स्थित पुश्तैनी घर नहीं लाया गया. उस का अंतिम संस्कार बठिंडा में ही कर दिया गया. भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 103 (हत्या), 238 (लापता होना), और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. उस के अंतिम संस्कार के मौके सिर्फ उस का भाई, बहन और मम्मी ही शामिल हुए थे. उन्होंने मृतका का अंतिम संस्कार जनसेवा संस्था की सहायता से बठिंडा के श्मशान घाट में किया गया. वैसे उस की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार आरोपी सिख युवा हैं. बताते हैं कि आरोपियों ने अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को ले कर कमल कौर की हत्या की थी.

उन का आरोप है कि कमल कौर इंस्टाग्राम पर विवादित और अश्लील रील बनाती थी और वह अपनी मम्मी के साथ रहती थी. वह अकसर सोशल मीडिया पर लाइव आ कर परिवार के सदस्यों को गालियां देती थी. Family Crime News

 

 

True Crime Stories Hindi : पत्नी और प्रेमी की साजिश

True Crime Stories Hindi : अपने साले रामविलास वर्मा की शादी में 25 वर्षीय हरेंद्र वर्मा ने बढ़चढ़ कर भाग लिया था. रिसैप्शन समारोह में भी वह सभी मेहमानों की गर्मजोशी से आवभगत कर रहा था. उसी दौरान किसी का हरेंद्र के मोबाइल पर फोन आया तो वह बात करने के लिए समारोह स्थल से बाहर निकला. कुछ देर बाद गरदन कटी उस की लाश मिली. किस ने और क्यों की हरेंद्र की हत्या? पढ़ें, लव क्राइम की यह दिलचस्प स्टोरी.

अप्रैल 2025 की बात है. 25 वर्षीय हरेंद्र वर्मा अपनी पत्नी को बुलाने के लिए बलरामपुर जिले के जुबरी कलां गांव में स्थित ससुराल आया हुआ था. ग्रामीण क्षेत्र में परंपरा होती है कि पत्नी के मायके में पति को उस से दूर ही सुलाया जाता है. हरेंद्र अपनी ससुराल में दालान में लेटा हुआ था. उसे नींद नहीं आ रही थी. उस के ससुर और सालों की खटिया भी उसी के पास बरामदे में पड़ी थी. वे लोग गहरी नींद में सो रहे थे.

रात के लगभग 12 बजे थे. मेन गेट खुला हुआ था. हरेंद्र वाशरूम जाने के लिए जैसे ही गेट के बाहर निकला, उस ने देखा कि उस की पत्नी उमा देवी एक युवक के साथ घर की ओर आ रही थी. यह देखते ही हरेंद्र चौंक गया और सोचने लगा कि यह युवक कौन है? और इतनी रात में यह इस के साथ कहां से आ रही है? हरेंद्र गेट के पीछे छिप गया. जैसे ही पत्नी गेट के अंदर घुसी तो हरेंद्र ने पत्नी का हाथ पकड़ा और पूछा, ”बताओ, आधी रात को कहां से आ रही हो और यह लड़का कौन है?’’

”अब आप ने सब कुछ देख ही लिया है तो सुनो, यह मेरा सब कुछ है. मैं इस से शादी से पहले से ही प्यार करती हूं. मैं इस को कभी नहीं भूल पाऊंगी और न ही इस का साथ छोड़ूंगी. अब फैसला आप के हाथ में है.’’ उमा देवी ने सच बता दिया.

इतना सुनते ही हरेंद्र का माथा ठनका, उसे चक्कर आने लगा. उस का हाथ कांप गया और पत्नी का हाथ उस के हाथ से छूट गया. बेशरमी की चादर ओढ़ उमा भी धीरेधीरे कदमों से घर के अंदर चली गई. हरेंद्र मूकदर्शक बना उसे जाते देखता रहा. फिर वह दलान में आ कर अपनी चारपाई पर लेट गया. पत्नी के बारे में तरहतरह के विचार उस के दिमाग में कौंधने लगे. उधर उमा देवी ने उसी दिन से हरेंद्र को रास्ते से हटाने की मन में ठान ली.

रात में ही उस ने अपने प्रेमी जितेंद्र वर्मा को मोबाइल फोन पर पूरी बात बताई और कहा कि तुम तो मुझे गेट तक छोड़ कर चले गए, मगर वह कमीना पति, पता नहीं कैसे गेट के पीछे ही छिपा हुआ था. उस ने सब कुछ देख लिया है. उसे ठिकाने लगाना होगा. जल्दी से जल्दी कोई प्लान बना लो. अगर तुम मुझ से वास्तव में सच्चा प्यार करते हो तो हरेंद्र को रास्ते से हटाना ही होगा. उसे सब कुछ पता चल गया है. मैं उसे अब आगे कैसे बरदाश्त करूंगी. वरना हमारे प्यार का ही नहीं, मेरे जीवन का भी अंत हो जाएगा.

”यह तो बहुत बुरा हुआ. मगर मैं ऐसा नहीं होने दूंगा. हमारा प्यार जिंदा रहेगा और परवान भी चढ़ता रहेगा. हमें दुनिया की कोई ताकत जुदा नहीं कर सकती. मैं तो आधी रात को अभी किसी समय उस को सोते में ही ठिकाने लगा देता, लेकिन यह संभव नहीं है. तुम ने बताया है कि तुम्हारे पापा और भाई भी उस के साथ ही दालान में लेटे हुए हैं.

”दूसरे यह कि किसी नौजवान युवक की हत्या करना अकेले आदमी का काम नहीं है, क्योंकि इतना सब कुछ देखने के बाद उसे नींद नहीं आ रही होगी. जागते हुए आदमी को मारना आसान नहीं होता.’’ जितेंद्र वर्मा बोला.

”कुछ और सोचो! तुम तो आसमान से तारे तोड़ के लाने की बातें करते थे. अब सिर्फ एक आदमी ठिकाने लगाने का साहस दिखाने की जरूरत है.’’ उमा ने उसे चुनौती दी.

”दूसरा रास्ता यह है कि जिस समय सुबह वह तुम्हारे घर से अपने घर जाने के लिए निकले तो उसे रास्ते में कहीं ठिकाने लगा दिया जाए, लेकिन अब इतना समय नहीं है. साथ देने के लिए 2 -4 लोग और होने चाहिए. इतनी आसानी से वह कब्जे में नहीं आएगा. तमंचे वगैरह का इंतजाम नहीं है. गोली मार के हत्या करने से दिन में तो बवाल हो जाएगा. कहीं आसपास के लोगों ने आ कर घेर लिया तो जान खतरे में पड़ जाएगी. वैसे भी इतनी जल्दी किसी हथियार का इंतजाम नहीं हो सकता.’’ जितेंद्र ने कहा.

”देखो, हरेंद्र कल किसी कीमत पर यहां नहीं रुकेगा. फिर उस के घर जा कर उस की हत्या करना आसान ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है. तुम्हारे अंदर बुद्धि नहीं है, मैं ही कोई प्लानिंग करती हूं. ऐसा करो तुम 1-2 अच्छे चाकू और 2-4 लोगों का इंतजाम कर के रखो.’’

उधर आधी रात के बाद जितेंद्र के साथ उमा को देखने के बाद हरेंद्र ससुराल नहीं आया. उमा देवी मायके में ही थी. अपनी योजना के अनुसार, उमा देवी ने अपना त्रियाचरित्र दिखाते हुए मोबाइल फोन से अपने पति हरेंद्र से माफी तलाफी की और कहा कि अब कभी कोई शिकायत नहीं मिलेगी. गलती इंसान से ही हो जाती है. आप मुझे क्षमा कर दें.

हरेंद्र के पास इस के अलावा कोई रास्ता भी नहीं था. दोनों में मोबाइल फोन पर प्यार भरी बातें होती रहतीं. उमा के भाई की मई 2025 में शादी थी. उधर अपने साले रामविलास वर्मा से हरेंद्र की खूब अच्छी दोस्ती हो गई थी. वैसे भी वह उस का साला था. वह अपनी शादी का कार्ड ले कर हरेंद्र के घर आया. बहुत अच्छे माहौल में बातचीत हुई. हरेंद्र और परिवार के सभी लोगों ने वादा किया कि शादी में जरूर आएंगे. दूसरे दिन उमा देवी का भी फोन आया. उस ने भी कहा कि सभी लोग शादी में जरूर आएं. उमा देवी ने यह भी वादा किया कि शादी के बाद वह भी साथ में ससुराल आ जाएगी.

29 अप्रैल, 2025 को तेल पूजन का कार्यक्रम था. हरेंद्र इस मौके पर अपनी ससुराल पहुंच गया. गांव में उत्सव का माहौल था. विजय वर्मा का घर सजा हुआ था. रंगबिरंगी लाइटें, फूलों की मालाएं और खाने की खुशबू सब कुछ ऐसा था, जैसे कोई त्यौहार हो. विजय वर्मा गांव में एक सम्मानित व्यक्ति थे, जिन का घर हमेशा मेहमानों से गुलजार रहता था.

सब कुछ ठीकठाक अच्छा व खूबसूरत था. 30 अप्रैल, 2025 को जुगली कलां में हरेंद्र के लिए बहुत ही खुशी का मौका था. हरेंद्र का साला रामविलास शादी के बंधन में बंधने जा रहा था. शादी का कार्यक्रम भी बहुत अच्छा और हंसीखुशी से बीत गया. हरेंद्र के घर वाले जो रामविलास की शादी में शिरकत करने आए थे, विवाह समारोह के बाद अपने घर वापस चले गए. शादी के बाद शुक्रवार 2 मई, 2025  को बहूभोज का आयोजन था. यह एक तरह से रिसैप्शन का कार्यक्रम था. इस क्षेत्र में इसे बहूभोज के नाम से जाना जाता है.

गांव के लोग रिश्तेदार और आसपास के इलाकों से मेहमान आए थे. विजय वर्मा ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. बड़ेबड़े शामियाने लगाए गए, पंडाल सजा था और तरहतरह के पकवान बन रहे थे. हरेंद्र हमेशा की तरह मेहमानों की आवभगत में जुटा था. वह कभी बच्चों के साथ मजाक करता तो कभी बड़ों के साथ गप्पें मारता. उस की हंसी उस रात की रौनक को और बढ़ा रही थी. बहूभोज का कार्यक्रम अपने चरम पर था. मेहमान खाना खा रहे थे. बच्चे इधरउधर दौड़ रहे थे और महिलाएं गीत गा रही थीं. तभी हरेंद्र के फोन की घंटी बजी. उस ने फोन उठाया और बात करते हुए धीरेधीरे पंडाल से बाहर निकल गया. कुछ लोगों ने उसे कंपोजिट विद्यालय की ओर जाते देखा.

इस के कुछ देर बाद जब कुछ मेहमान खाना खा कर घर लौट रहे थे तो उन की नजर सड़क किनारे गन्ने के खेत पर पड़ी. वहां खून से लथपथ हरेंद्र की लाश पड़ी थी. उस का गला इतनी बेरहमी से रेता गया था कि सिर शरीर से बस नाममात्र का जुड़ा था. चारों ओर खून बिखरा था. जैसे किसी ने जानबूझ कर उसे तड़पातड़पा कर मारा हो. पास में उस का मोबाइल फोन पड़ा था. स्क्रीन पर अब भी कोई नंबर चमक रहा था. हरेंद्र की लाश मिलने की खबर आग की तरह गांव में फैल गई. विजय वर्मा का घर जो कुछ देर पहले हंसीखुशी से गूंज रहा था, अब मातम में डूब गया. हरेंद्र की पत्नी उमा देवी बेसुध हो कर रो रही थी. गांव के लोग हैरान थे. कोई समझ नहीं पा रहा था कि आखिर यह हुआ कैसे?

सूचना मिलते ही यूपी डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची. महराजगंज तराई थाने के इंसपेक्टर अखिलेश पांडेय ने स्थिति को संभाला. जल्द ही हरैया और ललिया पुलिस की टीमें भी मौके पर आ गईं. एसपी विकास कुमार खुद फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. फोरैंसिक टीम ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने शुरू किए.

24 घंटे में ऐसे खुला हत्या का केस

खून से सने चप्पल के निशान, बिखरा हुआ खून और हरेंद्र का मोबाइल हर चीज को बारीकी से देखा गया. पुलिस ने घटनास्थल को पट्टिका से घेर कर सील कर दिया गया. घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने हरेंद्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. मृतक के चाचा लल्लू वर्मा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की गई. महाराजगंज तराई थाने के एसएचओ अखिलेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में स्वाट व सर्विलांस टीम ने छानबीन शुरू की. पता चला कि मृतक की पत्नी उमा का जितेंद्र वर्मा से चक्कर चल रहा है.

शुक्रवार की देर रात हरेंद्र की हत्या के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शनिवार को ही संदेह होने पर उस की पत्नी उमा देवी को हिरासत में ले लिया था. उसी से पूछताछ कर उस के प्रेमी जितेंद्र वर्मा व उस के 5 साथियों को भी उठाया. जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी जितेंद्र वर्मा ने उमा देवी वर्मा, मुकेश कुमार, सचिन यादव, अखिलेश यादव, संतोष व मुकेश साहू के साथ वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया.

पता चला कि घटना के पहले हरेंद्र वर्मा को मोबाइल से फोन कर के गांव के बाहर गन्ने के खेत के पास बुलाया गया. जितेंद्र वर्मा के साथ गांव के ही मुकेश कुमार, सचिन यादव, अखिलेश यादव, संतोष और मुकेश साहू वहां मौजूद थे. हरेंद्र शराब या किसी नशे का आदी नहीं था, इसलिए जितेंद्र ने इतने लोगों को इकट्ठा किया.

जैसे ही हरेंद्र घर से बाहर थोड़ी दूर आया तो इन सब ने उसे दबोच लिया और खींच कर गन्ने के खेत के पास ले गए. उसे वहीं गिरा लिया. हरेंद्र ने बहुतेरे हाथपैर फेंके, लेकिन इतने लोगों के सामने वह बेबस हो गया. एक ने उस की खोपड़ी पकड़ कर मुंह बंद कर रखा था, जिस से कि उस की चीखने की आवाज बाहर न निकल सके. बाकी लोगों ने इतना कस कर उसे दबोच लिया कि वह हाथपैर भी न हिला सका. जितेंद्र ने उस के गले पर बड़ी बेरहमी से चाकू रख दिया. इस तरह योजनाबद्ध तरीके से हरेंद्र वर्मा की चाकू से गला रेत कर निर्मम हत्या कर दी. आरोपियों से की गई पूछताछ के बाद हरेंद्र वर्मा की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली निकली—

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के खरबूपुर थाना क्षेत्र के देवरहना के युवक हरेंद्र वर्मा का विवाह करीब 4 साल पहले बलरामपुर जिले के महाराजगंज तराई थाना के गांव जुबली कलां की रहने वाली उमा वर्मा के साथ हुआ था. ग्रामीण परंपरा के अनुसार किशोर और किशोरी की उम्र परिपक्व न होने के कारण विवाह तो हो जाता है, लेकिन विवाह के समय दुलहन की विदाई नहीं होती. ग्रामीण भाषा में विदाई की इस रस्म को गौना कहते हैं. इन दोनों का भी 2 साल बाद गौना हुआ था.

गौना के बाद हरेंद्र वर्मा अपनी पत्नी को विदा करा के घर ले आया. वैवाहिक जीवन ठीकठाक गुजर रहा था, लेकिन पत्नी उस के प्रति इतनी गंभीर नहीं थी, जितनी कि एक नए शादीशुदा युवक को उस से अपेक्षाएं होती हैं. पत्नी का प्यार भरा रवैया न होने पर वह बड़ा मायूस रहता था. उमा देवी ज्यादातर खामोश रहती थी. उस का मुंह फूलाफूला रहता था. न घर के काम में उसे कोई दिलचस्पी थी, न ही पति के प्रति कोई दिलचस्पी दिखाई दी.

उमा देवी हमेशा मायके जाने के लिए तत्पर रहती. वह एक हफ्ता ससुराल में रहती तो 2 हफ्ते मायके में गुजारती. वैसे तो मायके वालों को भी उस का बारबार आना पसंद नहीं था, फिर भी औलाद तो औलाद ही होती है. उस के पेरेंट्स और भाई उस की इस हरकत पर उसे समझाते भी और जब वापस मायके आ जाती तो फिर निभाते भी थे. शादी हो जाने के बाद भी उमा अपने प्रेमी जितेंद्र वर्मा के टच में रहती थी. वह जब अपने मायके आती तो जितेंद्र वर्मा से उस की बराबर बातें होतीं. उमा ससुराल में पहुंचने के बाद भी चोरीछिपे मोबाइल से जितेंद्र से बात कर लिया करती थी. दोनों के इस रिश्ते की बात हरेंद्र को उड़तेउड़ते पता चली तो उस ने पत्नी को कई बार इधरउधर की मिसालें दे कर समझाया.

दिन गुजरते रहे. एक दिन उमा देवी अपनी ससुराल में थी, तभी प्रेमी जितेंद्र वर्मा उस की ससुराल पहुंच गया. हरेंद्र ने पत्नी से उस युवक की बाबत जानकारी की तो उमा देवी ने बताया कि यह उस का कजिन है. नाम है जितेंद्र वर्मा. अतिथि की तरह हरेंद्र ने उस की आवभगत की. उस दौरान हरेंद्र ने नोट किया कि जितेंद्र वर्मा का व्यवहार उमा देवी के प्रति भाईबहन जैसा नहीं था. वह अपने गांव के कजिन जितेंद्र वर्मा से बड़े खुल कर हंस कर इस तरह बात कर रही थी, जैसे अपने किसी प्रेमी से कर रही हो. उस समय उस ने पति को बिलकुल नजरअंदाज कर रखा था.

कुछ घंटे रुकने के बाद जितेंद्र वर्मा चला गया तो हरेंद्र को शक हुआ कि यही वह युवक है, जिस से उमा छिपछिप कर फोन पर बात करती है. उस के जाने के बाद पत्नी से हरेंद्र ने अपने शक का इजहार किया. इस पर उमा ने साफ इनकार कर दिया. कई तरह की कसमें खा कर उस ने पति को यकीन दिलाया कि उस का किसी से कोई चक्कर नहीं है. उस के बाद से उमा देवी का रवैय्या एकदम बदल गया. वह पति पर प्यार लुटाने लगी. घर वालों की सेवा में भी कोई कमी नहीं करती, इसलिए हरेंद्र ने जितेंद्र वर्मा की तसवीर दिमाग से निकाल दी. उसे ऐसा लगा कि यह उस के मन का वहम था. वह भी पत्नी का खयाल ठीक से रखने लगा. वह खुश भी दिखती. उस के इस तरह के बदलाव से हरेंद्र भी हैरान था.

जबकि असलियत कुछ और ही थी. दरअसल, उमा के लिए यह शादी सिर्फ एक ऐसा बंधन था, जिस में उसे जबरदस्ती उस की मरजी के खिलाफ बांधा गया था. लिहाजा वह अपना झूठा चेहरा पति के सामने दिखाने लगी थी कि वह खुश है. लेकिन अंदर ही अंदर वह अपने पति से बेइंतहा नफरत करती थी. वह एक मौके की तलाश में थी.

उस के दिल की धड़कनें शादी के 4 साल बाद भी अपने प्रेमी के लिए धड़कती थीं. कई बार मांबाप अपनी इज्जत अपने समाज के दिखावे और अपनी इच्छाओं के चलते अपनी संतान के दिल की आवाज को नजरअंदाज कर देते हैं. बलरामपुर जिले के महाराजगंज तराई थाना के गांव जुबली कलां के विजय वर्मा की बेटी उमा देवी की भी यही कहानी है. उमा देवी का गांव के ही एक युवक जितेंद्र से प्रेम प्रसंग चल रहा था.

फेमिली वालों ने क्यों नहीं मानी उमा की बात

एक ही गांव के जितेंद्र वर्मा और उमा देवी एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें खाते थे और दोनों ने यह कहा था कि वे एकदूसरे के बिना रह नहीं पाएंगे. लिहाजा दोनों ने अपने फेमिली वालों को इस बात की जानकारी दी. जितेंद्र के घर वाले इस शादी के लिए तैयार हो गए. उन्होंने सोचा कि जहां बेटे की खुशी वहीं हमारी खुशी. अगर बेटा यह चाहता है तो ठीक, यही सही, लेकिन उमा के घर वाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए.

उन का कहना था कि जिस तरह का लड़का वो चाहते हैं उस तरह का जितेंद्र नहीं है. इस पैमाने पर वह फिट नहीं बैठता. वह उन की बेटी को खुश नहीं रख सकता. दोनों के सामाजिक स्तर में जमीनआसमान का फर्क था. उमा इस दौरान अपनी मम्मी को लाख समझाती रही कि वह उस के साथ खुश रहेगी. जितेंद्र उसे खूब खुश रखेगा. जितेंद्र उस का ख्याल रखेगा, लेकिन उमा की हर बात को मम्मी ने दरकिनार कर दिया.

उन्होंने उसे समझाते हुए कहा कि बेटा, तुम्हें अभी जीवन का अनुभव नहीं है. तुम्हारी उम्र अभी 18-19 साल है. तुम्हें क्या पता जीवन में क्या होता है. जीवन की गाड़ी कैसे चलती है. तुम्हें कुछ नहीं पता है. तुम अपने फैसले नहीं ले सकतीं. इस तरह जबरदस्ती उमा की आवाज को हमेशा के लिए चुप करा दिया गया. उमा का जितेंद्र के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है, इस की चर्चा पूरे गांव में होते हुए विजय वर्मा के कानों तक भी पहुंची. उन में चिंता और आक्रोश का ज्वालामुखी अंदर ही अंदर धधकने लगा. अपने आक्रोश को दबाते हुए उन्होंने बेटी से बड़े प्यार से कहा कि बेटी यह मैं ने क्या सुना है कि तुम गांव के किसी लड़के के चक्कर में पड़ गई हो.

उमा अपने पापा के सामने बोलने का साहस नहीं जुटा पाई. बस नीचे सिर कर के गुमसुम बैठी रही. उस की आंखें नम हो गई थीं. इस से पहले कि वह बिलखबिलख कर रोने लगती, उस की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ता, विजय वर्मा स्थिति को भांप कर चुपचाप दूसरे कमरे में चले गए.

विजय वर्मा ने सोचा कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी उन की पत्नी को जरूर होगी. अपनी पत्नी के माध्यम से इस समस्या को सुलझाने का मन बनाया. उन्होंने पत्नी से कहा कि बेटी को समझाओ. हम गांव के सम्मानित और इज्जतदार लोग हैं. अगर ऐसे लुच्चेलफंगे के साथ हम ने अपनी बेटी का विवाह कर दिया तो हमारी समाज में क्या इज्जत रह जाएगी. वैसे भी पुरानी कहावत है, समधियाना और पाखाना दूर का ही सही रहता है. विजय वर्मा के स्वभाव को उन की पत्नी भलीभांति जानती थी. इस से पहले कि वह आक्रोश की आग में जल उठें, उन का ब्लड प्रैशर हाई हो. पत्नी ने कहा कि आप चिंता न करें, मैं उसे समझा दूंगी. इस के लिए कोई रिश्ता  ढूंढना शुरू कर दें. शादी हो जाएगी तो सब कुछ नारमल हो जाएगा. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.

उमा देवी की मम्मी उसे पहले ही अपना फैसला सुना चुकी थी. कह चुकी थी कि यह शादी हरगिज नहीं हो सकती. मम्मी ने बेटी उमा देवी को समझाया. कहा बेटी बचपन लड़कपन में बच्चों से ऐसा हो जाता है. किसी से ज्यादा बोलचाल दोस्ती एक लिमिट तक ही रहनी चाहिए. आजकल जमाना ठीक नहीं है. लड़के अपना काम निकाल कर भूल जाते हैं. ऐसी घटनाएं भी होती हैं कि फोटो या वीडियो बना कर ब्लैकमेल करते रहते हैं. आए दिन घटनाएं होती हैं. प्रेमव्रेम का चक्कर अच्छा नहीं है. मम्मीपापा जो शादी करते हैं, वह सब कुछ देखभाल कर करते हैं. अरेंज मैरिज ही ज्यादा कामयाब है. उमा देवी चुपचाप मम्मी की बात सुनती रही और कुछ नहीं बोली. अंत में उस ने कहा ठीक है मम्मी.

जितेंद्र वर्मा का उमा देवी से आमनासामना स्कूल आतेजाते हो जाता. गांव की और भी लड़कियां स्कूल आतीजाती थीं, लेकिन गांव के लड़के अपने गांव की लड़कियों से किसी तरह का कोई हंसीमजाक नहीं करते, बल्कि उन का मानसम्मान करते. आतेजाते सिर्फ इस तरह से एकदूसरे को देख लिया करते, जैसे राह चलते अनजान लोग एकदूसरे को देख कर अपनीअपनी मंजिल की तरफ आतेजाते हैं.

4 साल पहले की बात है. गांव में एक शादी समारोह चल रहा था. रात का समय था. सब अपनीअपनी प्लेट लिए खाना हासिल करने की जद्ïदोजहद कर रहे थे. भीड़ काफी थी. जो लोग प्लेट में खाना प्राप्त कर लेते, वह इस तरह से पीछे हटते जैसे कोई मुकाबला जीत लिया हो. उमा देवी भी प्लेट में खाना ले कर तेजी से बाहर निकली तो जितेंद्र वर्मा से टकरा गई. प्लेट में रखी सब्जियों ने जितेंद्र वर्मा की शर्ट से ले कर पैंट तक को अपनी चपेट में ले लिया. वह पछतावा भरी नजरों से जितेंद्र वर्मा को देख रही थी. जितेंद्र ने उमा देवी को देखा.

दोनों की नजरें एकदूसरे को काफी देर तक देखती रहीं. उस की आंखों में एक गहराई थी, जादू नहीं, बल्कि सुकून था. काजल से सजी वो नजरें कुछ कह नहीं रही थीं, बस चुपचाप दिल तक उतर गईं. वह मुसकराने लगी, उस की मुसकान में मासूमियत और शरारत का अजीब सा मेल था, जैसे सावन की पहली फुहारें किसी तपती दोपहर को छू जाएं. उस की गरदन की हलकी सी लचक, बालों को धीमे से झटकना और दुपट्टे का नजाकत से इस तरह संवारना कि स्तनों को पूरी तरह दिखा कर एक हाथ से ही दुपट्टे का एक पहलू सिर पर रखना, यह सब नजारे जितेंद्र वर्मा के दिल में बस गए. उस का रंग सांवला नहीं था, गोरा भी नहीं, लेकिन उस में वो चमक थी, जो उस की भरपूर जवानी का दस्तक दे रही थी.

जितेंद्र वर्मा ने चुप्पी तोड़ी, ”कोई बात नहीं भीड़भाड़ में ऐसा हो ही जाता है.’’

जवाब में उमा देवी ने कहा, ”नहीं, मेरी गलती है. सौरी… आप मुझे क्षमा कर दें.’’

इतनी देर में ही दोनों के बीच प्यार की नींव रख गई. उस समय उमा और जितेंद्र दोनों की उम्र 18 साल के आसपास ही रही होगी. उमा देवी के घर से 100 कदम की दूरी के बाद ही खेती की जमीनों का क्षेत्र शुरू हो जाता है. जितेंद्र वर्मा खेतों की तरफ आ जाता, उमा वायदे के अनुसार वहां मिल जाती. पेड़पौधों की आड़ में बैठ कर दोनों प्रेम की बातें करते और भविष्य की प्लानिंग बनाते. इश्क और मुश्क छिपता नहीं यह कहावत यहां भी चरितार्थ हो गई. दोनों के प्यार के चर्चे गांव में होने लगे. उमा देवी के फेमिली वालों को पता चला तो उन्होंने उस पर रोक लगा दी. निगरानी शुरू कर दी. समाज की ये दीवारें प्यार करने वालों को कहां रोक पाती हैं.

दोनों के बीच मोबाइल फोन पर बातें होती रहतीं. मौका मिलता, दोनों छिपछिप कर मिल लिया करते. जितेंद्र के फेमिली वालों को उन की प्रेम कहानी का पता चला. उस की मम्मी ने जितेंद्र को समझाते हुए कहा कि हमारा उमा देवी के परिवार से बिरादरी का रिश्ता तो है, लेकिन बराबरी का नहीं है. वे लोग शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. बेटा, ऐसा करो उसे भूल जाओ, वरना समस्याओं में ही घिरोगे. कोई हल नहीं निकलेगा. वे दबंग और असरदार लोग हैं. वे हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं.

जितेंद्र ने कहा, ”मम्मी, उन के घर एक बार रिश्ता भिजवा कर तो देख लो, कभी उमा की खुशी के लिए वे लोग शादी के लिए तैयार हो जाएं.’’

बेटे की जिद को देखते हुए जितेंद्र के फेमिली वालों ने शादी के लिए उमा के घर रिश्ता भेजा, लेकिन उन्होंने बेटी का शादी जितेंद्र के साथ करने से साफ मना कर दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने नाराजगी भी जताई. विजय वर्मा अपनी बेटी की शादी के लिए रिश्ते की तलाश कर ही रहे थे कि इसी बीच उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के खरबूपुर थाना क्षेत्र के देवरहना के युवक हरेंद्र वर्मा के बारे में उन्हें पता चला. उन के पिता चंद्रप्रकाश वर्मा गांव के सम्मानित व मेहनती किसान थे, उन्हें गांव में चंदू के नाम से जाना जाता था.

हरेंद्र की 3 बहनें थीं. एक हरेंद्र से बड़ी बहन और 2 उस से छोटी हैं. बड़ी बहन की शादी हो गई. हरेंद्र से छोटी 2 बहनों की शादी नहीं हुई थी. चंद्रप्रकाश वर्मा अपनी एक और बेटी का विवाह करने के बाद हरेंद्र की शादी करना चाहते थे. बिचौलिए की बातों में आ कर वह हरेंद्र की शादी के लिए तैयार हो गए. सभी तरफ से जानकारी करने पर परिवार को अच्छा ही बताया गया. हरेंद्र का बचपन गांव की गलियों में दोस्तों के साथ हंसतेखेलते बीता, वह पढ़ाई में ठीकठाक था. उस का असली हुनर लोगों से मिलनाजुलना था. उस से बात कर के कोई भी उदास नहीं रह सकता था, बल्कि प्रभावित हो जाता था. करीब 20 वर्षीय चंचल और लंबाचौड़ा हरेंद्र उमा देवी के फेमिली वालों को पसंद आ गया और आननफानन में दोनों का विवाह कर दिया.

हरेंद्र वर्मा से शादी हो जाने के बाद भी उमा ने अपने प्रेमी जितेंद्र वर्मा से मिलना जारी रखा. वह किसी भी हालत में जितेंद्र से दूर नहीं होना चाहती थी. बाद में जब हरेंद्र को पत्नी के अवैध संबंधों की जानकारी हो गई तो उमा ने प्रेमी के साथ मिल कर पति को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया. फिर मौका मिलने पर 2 मई, 2025 को पति की हत्या करा दी. पुलिस ने हत्यारोपी उमा देवी, उस के प्रेमी जितेंद्र वर्मा, मुकेश कुमार, सचिन यादव, अखिलेश यादव, संतोष और मुकेश साहू को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.

एसपी विकास कुमार ने 24 घंटे के अंदर ही घटना का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की. True Crime Stories Hindi

 

UP News : फरजी कर्नल बन कर ठगी

UP News : फरजी कर्नल बन कर राहुल कुमार ने बेरोजगार युवकयुवतियों को आर्मी में नौकरी दिलाने का झांसा दे कर ठगना शुरू कर दिया. वह उन्हें जौइनिंग लेटर तक दे देता था. आखिर उस का यह फरजीवाड़ा पुलिस की पकड़ में गया. फिर उस की ठगी की जो कहानी सामने आई, वह…

उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर के थाना खतौली के अंतर्गत आने वाले गांव तकराला का रहने वाला राहुल कुमार सेना में नौकरी करना चाहता था, इसलिए आठवीं पास करने के बाद से ही वह सेना में जाने की तैयारी करने लगा था. रोजाना सुबह जल्दी उठ कर वह दौडऩे जाता, घर आ कर उठकबैठक करता. घर वाले भी उस के खानेपीने का खयाल रखते थे. इसलिए दसवीं पास करतेकरते उस का शरीर पहलवानों जैसा हो गया था. एक साल उस ने सेना में पूछे जाने वालों सवालों की जम कर पढ़ाई भी की. यही वजह थी कि पहले प्रयास में ही वह सेना में भरती हो गया था. यह साल 2019 की बात है.

राहुल सेना में भरती जरूर हो गया था, लेकिन अधिकारियों का रौबदाब और उन की सुखसुविधाएं देख कर वह हीनभावना का शिकार होने लगा. क्योंकि सेना में सिपाही और अधिकारियों के बीच का जो फासला होता है, वह बहुत बड़ा होता है. उस फासले को पार करना आसान नहीं होता. हीनभावना से ग्रसित हो कर वह सेना में होते हुए ही गलत काम करने लगा था. उन्हीं कामों में एक चोरी भी थी. आखिरकार एक दिन वह चोरी करते पकड़ा गया और नौकरी से निकाल दिया गया, जिस का केस आज भी चल रहा है. यह साल 2022 की बात है.

नौकरी से निकाले जाने के बाद वह बेरोजगार हो गया था. घर वाले भी उस से नाराज थे. क्योंकि अच्छीभली नौकरी उस की गलतियों की वजह से चली गई थी. जीना है तो पैसे चाहिए ही. क्योंकि बिना पैसों के कुछ हो ही नहीं सकता. राहुल कुमार की नौकरी छूट गई तो पैसे कहां से आते. घर वाले भी नाराज थे. इसलिए उन से भी कोई मदद नहीं मिल रही थी. ऐसे में राहुल को कुछ नहीं सूझा तो उस ने लोगो को ठगने का विचार बना लिया.

सेना में नौकरी पाने का हर मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चे का सपना होता है. इस की वजह यह होती है कि कम पढ़ाई में इस से बढिय़ा दूसरी कोई नौकरी नहीं है. रिटायर होने पर किसी अन्य नौकरी में पेंशन नहीं मिलती, जबकि सेना की नौकरी से रिटायर होने पर आजीवन पेंशन भी मिलती है. घर वाले भी खुश होते हैं कि उन्हें आगे की पढ़ाई का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा.

राहुल को यह बात पता थी, इसलिए उस ने इसी बात का फायदा उठाने का विचार किया. कर्नल की वरदी और बैज वह चुरा कर लाया ही था. इसलिए उस ने उस वरदी को पहन कर लोगों को ठगने का विचार किया. वह कर्नल की वरदी पहन कर कर्नल बन जाता और शिकार की तलाश में किसी इंटर कालेज के सामने पहुंच जाता, जहां वह दसवीं बारहवीं के बच्चों से मिलता. वह उन्हें सेना में नौकरी दिलाने का भरोसा देता और उन से मोटी रकम यानी डेढ़ से ढाईतीन लाख रुपए ले कर फरार हो जाता.

राहुल बहुत शातिर था. उस ने यह काम अपने गांव के आसपास करना उचित नहीं समझा. क्योंकि उसे पता था कि पैसे लेने के बाद वह नौकरी तो दिला नहीं पाएगा. लोग उस के घर तक आ जाएंगे. तब उस की और फजीहत होगी. इसलिए ठगी का यह काम करने के लिए वह लखनऊ के पास सीतापुर आ गया. सीतापुर के नारायणनगर में उस ने एक मकान किराए पर लिया और उसी में रह कर वह ठगी का अपना धंधा करने लगा. शिकार की तलाश में वह सीतापुर से लखनऊ आता और शिकार मिल जाता तो उस से मोटी रकम ले कर सीतापुर निकल जाता और आराम से रहता.

लड़कियों को भी दिया नौकरी का झांसा

ऐसे में ही उस की मुलाकात लखनऊ की रहने वाली मुसकान माहौर और कल्पना कुमारी से हुई. दोनों सहेलियां थीं और एक ही कालेज में पढ़ती थीं. एक दिन कालेज में जल्दी छुट्टी होने पर दोनों कालेज के बाहर पार्क की बेंच पर बैठी बातें कर रही थीं, तभी राहुल कुमार कर्नल की वरदी में आ कर उसी बेंच पर बैठ गया. थोड़ी देर वह चुपचाप बैठा रहा. उस के बाद मुसकान से पूछा, ”आप लोग क्या करती हैं?’’

 

”हम दोनों पढ़ती हैं.’’ मुसकान ने जवाब दिया.

”बीए कर रही हैं या बीएससी?’’

”मतलब?’’ जवाब देने के साथ मुसकान ने सवाल कर दिया.

”ऐसे ही पूछ लिया. वैसे अगर आप लोग नौकरी करना चाहें तो मैं आप लोगों को सेना में नर्सिंग असिस्टेंट की नौकरी दिलवा सकता हूं.’’ राहुल कुमार ने कहा, ”लेकिन इस के लिए आप लोगों को कुछ खर्च करना होगा.’’

राहुल कुमार की इस बात से मुसकान और कल्पना ने उसे गौर से देखा. उस की वरदी पर जो नेमप्लेट लगी थी, उस में राहुल कुमार लिखा था. कंधे पर अशोक चिह्न और 2 स्टार लगे थे. शरीर और बातचीत से भी वह फौजी जैसा लगता था. राहुल फौज में था ही, इसलिए उसे फौज के अधिकारियों के बात करने का लहजा एवं व्यवहार के बारे में पता ही था.

”मैं आप को जानती भी नहीं, फिर आप पर विश्वास कैसे करें?’’ मुसकान ने कहा, ”जमाना बहुत खराब है. रोजाना ठगी के तमाम किस्से अखबारों में पढऩे को मिलते हैं, इसलिए जल्दी से किसी पर विश्वास नहीं होता.’’

”मैं जिला मुजफ्फरनगर के थाना खतौली के अंतर्गत आने वाले गांव तकराला का रहने वाला हूं. लेकिन इस समय सीतापुर के नारायणनगर स्थित मकान नंबर 302 में रह रहा हूं.’’ इतना कह कर राहुल ने मुसकान को अपना सेना का आईडी कार्ड दिखाया.

इस के बाद मुसकान को थोड़ा विश्वास हुआ. उस ने कहा, ”पहले घर वालों से बात कर लूं. उस के बाद ही कुछ कह सकती हूं. क्योंकि नौकरी के लिए थोड़े पैसे तो लगेंगे नहीं.’’

”जी, कम से कम ढाईतीन लाख रुपए तो देने ही होंगे. इसलिए घर वालों से बात करनी ही पड़ेगी.’’

”ठीक है, बात कर लो. बात कर के जल्दी बताना.’’ राहुल ने कहा.

”कहां बताऊंगी? आप अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए. घर वालों से बात कर के आप को फोन कर दूंगी.’’ मुसकान बोली.

”इस तरह की बातें फोन पर नहीं की जातीं. आप बात कर लेना. मैं 2 दिन बाद इसी समय यहां आऊंगा. आप के घर वाले जो कहें, बता देना.’’ राहुल ने कहा.

इस के बाद थोड़ीबहुत औपचारिक बातें हुईं और फिर तीनों अपनेअपने रास्ते चले गए. मुसकान और कल्पना ने इस बारे में अपनेअपने घरों में बात की. राहुल ने नौकरी दिलाने के लिए जो रकम मांगी थी, वह कम नहीं थी. इतने रुपए हर किसी के घर में नहीं होते. फिर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए तो यह एक बड़ी रकम थी. लेकिन बेटी के भविष्य की बात थी, इसलिए मुसकान और कल्पना के घर वाले पैसों की व्यवस्था करने में लग गए. क्योंकि उन लोगों को यही लगता था कि आर्मी वाले ईमानदार होते हैं. वे किसी के साथ ठगी कर ही नहीं सकते. मुसकान की मम्मी ने तो पूरे ढाई लाख रुपयों की व्यवस्था कर ली थी. जबकि कल्पना के पेरेंट्स मात्र डेढ़ लाख रुपए ही इकट्ठा कर पाए थे. इस पर राहुल ने कहा था कि बाकी रकम वह जौइनिंग लेटर पाने के बाद दे देना.

पैसे देने के बाद मुसकान और कल्पना खुश थीं कि अब उन्हें सेना में नर्सिंग असिस्टेंट की नौकरी मिल जाएगी. इसी के साथ वे खुशहाल जीवन के तरहतरह के सपने देखने लगी थीं. इंतजार के दिन बहुत मुश्किल से कटते हैं. मुसकान और कल्पना का भी एकएक दिन बहुत मुश्किल से कट रहा था. इस की वजह यह थी कि वे चाहती थीं कि जल्दी से नौकरी मिल जाए और वे महीने में मिलने वाले वेतन से मजे करें, साथ ही घर वालों ने उन की नौकरी के लिए जो रुपए उधार लिए हैं, उन्हें भी अदा कर सकें.

आखिर उन के इंतजार की घडिय़ां खत्म हुईं और राहुल कुमार का फोन आ गया. उस ने मुसकान को फोन कर के लखनऊ के कैंट इलाके में बुलाया. उस ने कहा कि उन के जौइनिंग लेटर उस के पास हैं, आ कर ले लें और जल्दी से अपनी नौकरी जौइन कर लें. मुसकान कल्पना के साथ घर से निकलने की तैयारी कर रही थी कि राहुल का फिर फोन आ गया. इस बार उस ने कहा कि किसी जरूरी काम से वह सीतापुर आ गया है. उन के जौइनिंग लेटर उस के पास ही ही हैं. वे कैसरबाग बसस्टैंड से बस पकड़ कर सीतापुर आ जाएं. वह उन के जौइनिंग लेटर दे देगा.

ऐसे दबोचा फरजी कर्नल

सीतापुर पहुंच कर मुसकान ने राहुल को फोन किया. राहुल ने लालबाग चौराहे के पास स्थित आर्मी कैंटीन में बुलाया. मुसकान और कल्पना आर्मी कैंटीन पहुंचीं तो राहुल उन्हें वहां उन का इंतजार करते मिला. उस ने दोनों को नाश्ता करा कर चाय पिलाई. इस के बाद उस ने दोनों के जौइनिंग लेटर दे दिए. दोनों जौइनिंग लेटर ले कर घर तो आ गईं, पर घर आ कर जब दोनों ने अपने जौइनिंग लेटर देखे तो उन्हें संदेह हुआ. उन्हें लगा कि ये फरजी हैं. उन्होंने तुरंत राहुल कुमार को फोन किया. जब मुसकान और कल्पना ने उस से जौइनिंग लेटर फरजी होने की बात कही तो सीधे मुंह बात करने के बजाय वह नाराज हो कर बदतमीजी करने लगा.

दोनों से अभद्रता करते हुए धमकी देते हुए कहा कि जौइनिंग लेटर फरजी हैं तो क्या हुआ? उन्हें जो करना है, कर लें. उस की इतनी पहुंच है कि वे उस का कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं. मुसकान और कल्पना के पास पुलिस के पास शिकायत करने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं था. उन्होंने पुलिस में उस के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. यह शिकायत सीतापुर एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई. उत्तर प्रदेश एसटीएफ को पहले से ही शिकायत मिल रही थी कि सीतापुर में रह कर सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक फरजी कर्नल बन कर ठगी कर रहा है.

मुसकान और कल्पना से एसटीएफ को राहुल कुमार का नंबर और पता मिल गया था. फिर क्या था, एसटीएफ इंसपेक्टर संतोष कुमार सिंह ने रात को नारायणनगर स्थित राहुल के किराए के मकान पर छापा मार कर उसे गिरफ्तार कर लिया. एसटीएफ जब राहुल कुमार को गिरफ्तार करने पहुंची थी तो वह एसटीएफ की टीम से भिड़ गया था. वह उन से हाथापाई करने लगा था, लेकिन आरोपी भला पुलिस से कहां तक मुकाबला करता. एसटीएफ ने उसे दबोच कर गिरफ्तार कर लिया. तलाशी में पुलिस को उस के कमरे से कर्नल की वरदी, फरजी आईडी कार्ड, फरजी दस्तावेज और 4 लाख रुपए मिले थे, जो ठगी द्वारा राहुल कुमार को मिले थे.

एसटीएफ ने सीतापुर थाना कोतवाली में राहुल कुमार के खिलाफ बीएनएस की धारा 319(ठ), 318(4), 352, 351(2), 336(1), 338, 341(1), 205 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया तो सीओ (सिटी) अमन सिंह की उपस्थिति में उस से पूछताछ शुरू हुई. इस पूछताछ में राहुल कुमार ने बताया कि वह मुजफ्फरनगर का रहने वाला है. साल 2019 में वह सेना में भरती हुआ था. वह महार रेजिमेंट सागर, मध्य प्रदेश में सिपाही के पद पर तैनात था. तभी साल 2022 में उस की गलत हरकतों की वजह से उसे सेना से निकाल दिया गया था. उस का बैज नंबर 10391419एम था. उस का डीसीएम बौडी (सैन्य न्यायालय) केस चल रहा है.

इस का मतलब था कि इस समय वह ड्यूटी पर नहीं था. कर्नल की वरदी, बैज वगैरह वह सेना में नौकरी करने के दौरान चुरा लाया था. नौकरी से निकाले जाने के बाद वह वही कर्नल की वरदी पहन कर बेरोजगार लड़कों और लड़कियों को सेना के विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम ले कर फरजी दस्तावेज तैयार कर के ठग रहा था. पूछताछ के बाद कोतवाली पुलिस ने राहुल कुमार को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया और अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसे सेना से क्यों निकाला गया था? अब तक उस ने और कितने लोगों को ठगा है? कथा लिखे जाने तक पुलिस ने उसे फिर से अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था.

एक और फरजी कर्नल मेरठ से गिरफ्तार

इसी तरह मेरठ एसटीएफ ने भी कुछ दिनों पहले मेरठ के थाना गंगानगर निवासी एक फरजी कर्नल सतपाल सिंह यादव को गिरफ्तार किया था. मेरठ में सेना की छावनी है. वहां सेना को कहीं से जानकारी मिली थी कि कोई आदमी सेना का कर्नल बन बेरोजगार युवकों को सेना में भरती कराने के नाम पर ठगी कर रहा है. सेना ने यह सूचना एसटीएफ को दी तो एसटीएफ इंसपेक्टर एस.पी. सिंह ने छापा मार कर मेरठ के थाना गंगानगर के अंतर्गत रहने वाले सतपाल सिंह यादव को गिरफ्तार किया था.

सतपाल सिंह को गिरफ्तार करने के साथ एसटीएफ ने उस के घर से कई बैंकों की चेकबुकें, फरजी परिचय पत्र, फरजी नियुक्ति पत्र, स्टांप, प्रिंटर, भारतीय सेना के कर्नल की वरदी, फरजी पहचान पत्र, रसीदी टिकट, आर्मी कर्नल का आईडी कार्ड और अन्य तमाम फरजी दस्तावेज बरामद किए थे. आरोपी सतपाल सिंह यादव अपने बेटे के साथ मिल कर ठगी का धंधा चला रहा था. सतपाल साल 2003 में सेना से ड्राइवर के पद से रिटायर हुआ था. वह पुणे में तैनात एक कर्नल डी.एस. चौहान की गाड़ी चलाता था.

रिटायर होने के बाद सतपाल सिंह ने कर्नल डी.एस. चौहान के नाम की वरदी बनवाई और उन्हीं के नाम का फरजी आईडी कार्ड भी बनवाया. इस के बाद खुद को सेना का कर्नल बता कर बेरोजगार युवकों को सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने लगा था. पिछले 7 सालों से वह बेरोजगार युवकों को ठग रहा था. इस काम में उस का बेटा उस की मदद कर रहा था. अब तक वह करोड़ों की ठगी कर चुका है. बुलंदशहर से ले कर नोएडा और मेरठ ही नहीं, लखनऊ तक के युवकों को ठग चुका है.

एसपी कमलेश बहादुर सिंह के अनुसार, सतपाल सिंह लोगों को फरजी जौइनिंग लेटर दे कर मोटी रकम लेता था. उस ने कई युवकों को फरजी ट्रेनिंग भी करवाई है. उस के खिलाफ बुलंदशहर में शिकायत दर्ज कराई गई थी. बुलंदशहर के उस युवक से उस ने 16 लाख रुपए लिए थे. उसी के बाद एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था. फिलहाल सतपाल सिंह अपने बेटे के साथ जेल में है. UP News

 

 

UP Crime News : पूजा ने प्रौपर्टी के लिए सास को मरवाया

UP Crime News : पति को छोडऩे के बाद 28 वर्षीय पूजा को कल्याण राजपूत से प्यार हो गया. उस के साथ वह लिवइन रिलेशन में रहने लगी. एक्सीडेंट में कल्याण की मृत्यु हो जाने के बाद पूजा ने जेठ संतोष राजपूत को फांस लिया. खूबसूरत पूजा से शादी करने के बाद संतोष की पहली पत्नी रागिनी उपेक्षा के चलते मायके चली गई. इसी बीच पूजा की 55 वर्षीय सास सुशीला की हत्या हो गई. किस ने की यह हत्या और इस की क्या वजह रही?

पूजा अपनी मासूम बेटी रूबी के साथ बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी के घर ग्वालियर पहुंची तो कमला ने उसे हाथोंहाथ लिया और खूब खातिरदारी की. पूजा को बहन के घर रहते कई दिन बीत चुके थे, लेकिन वह खुश नहीं थी. वह हमेशा चिंता में डूबी रहती. न ढंग से खाना खाती और न ही चेहरे पर मुसकान होती.

कमला उर्फ कामिनी ने छोटी बहन को इस हाल में देखा तो एक रोज शाम को चाय पीने के दौरान उस ने पूछा, ”पूजा, तुम दिनरात किस चिंता में डूबी रहती हो. न ढंग से बात करती हो और न ही हंसतीमुसकराती हो. क्या पति से झगड़ कर आई हो या फिर ससुर ने कुछ कहा है. जो भी बात हो मुझे खुल कर बताओ.’’

”दीदी, ऐसी कोई बात नहीं है. न मैं पति से झगड़ कर आई हूं और न ही ससुर ने कुछ कहा है. वे दोनों तो मुझे खूब प्यार करते हैं और हर बात मानते हैं. उन से हमें कोई शिकवाशिकायत नहीं है.’’ पूजा बोली.

”फिर इतनी परेशान क्यों है?’’ कमला ने पूजा को बीच में ही टोका.

”दीदी, मेरी परेशानी की वजह मेरी सास सुशीला देवी है.’’

”वह कैसे?’’ कमला ने पूजा के चेहरे पर नजरें गड़ा दीं.

”दीदी, मैं अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेच कर ग्वालियर शहर में बसना चाहती हूं. मेरी बेटी अब सयानी हो रही है. उसे शहर में पढ़ालिखा कर उस का जीवन संवारना चाहती हूं. मेरे पति व ससुर तो जमीन बेचने को राजी हैं, लेकिन सास सुशीला देवी अड़चन बनी है.’’

कमला और पूजा अभी आपस में बातें कर ही रही थीं कि तभी कमला का प्रेमी अनिल वर्मा वहां आ गया. वह भी उन की बातों में शामिल हो गया. पूजा की समस्या को समझने के बाद अनिल वर्मा बोला, ”पूजा, यदि सासरूपी तुम्हारी बाधा को मैं दूर कर दूं तो मुझे और कमला को क्या हासिल होगा?’’

पूजा को बाधा यानी यह समस्या दूर होने की उम्मीद जागी तो वह बोली, ”जमीन बिकने पर जो पैसा मिलेगा, उस में से तुम दोनों को भी हिस्सा दूंगी. बस किसी तरह इस प्रौब्लम दूर कर दो.’’

पैसा मिलने के लालच में अनिल वर्मा व उस की प्रेमिका कमला उर्फ कामिनी, पूजा की सास सुशीला देवी की हत्या करने को राजी हो गए. इस के बाद पूजा, कमला व अनिल वर्मा ने कान से कान जोड़ कर सुशीला देवी की हत्या की योजना बनाई. साथ ही प्लान ए और बी भी बनाया. प्लान ए के तहत हत्या के आरोप में पूजा के ससुर को जेल भिजवाना तथा प्लान बी के तहत पुलिस से बचाव करना.

22 मई 2025 को पूजा की बेटी रूबी का जन्मदिन था. पूजा ने योजना के तहत अपने पति संतोष राजपूत व ससुर अजय प्रताप राजपूत से फोन पर बात की और उन्हें बेटी के जन्मदिन पर आने का न्योता दिया और ग्वालियर आने को कहा. उस ने ऐसा इसलिए किया ताकि घर में सास सुशीला अकेली पड़ जाए और उस की हत्या आसानी से की जा सके.

पूजा के बुलाने पर संतोष और उस के पापा अजय प्रताप राजपूत ग्वालियर आ गए. रूबी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया. जश्न में कमला का प्रेमी अनिल वर्मा भी शामिल हुआ. दूसरे रोज पूजा ने पति संतोष को यह कह कर रोक लिया कि वह पेट से है, लेकिन दूसरा बच्चा अभी नहीं चाहती. अत: अस्पताल चल कर गर्भपात कराना है. ससुर अजय प्रताप को भी पूजा ने बहाने से रोक लिया. ससुर ने उसे 5 हजार रुपए भी खर्च के लिए दिए. अजय प्रताप को क्या पता था कि उस की शातिर बहू उसी के साथ छल कर रही है और उस की पत्नी का काल बनने जा रही है.

पूजा का पति व ससुर ग्वालियर में थे और पूजा की सास सुशीला देवी गांव में अकेली थी, अत: उचित मौका देख कर योजना के तहत कमला और अनिल वर्मा 24 जून, 2025 की सुबह 5 बजे बाइक से कुम्हरिया गांव स्थित सुशीला देवी के घर पहुंचे. सुशीला घर पर ही थी. पूजा की बहन कमला को सुशीला जानती थी. अत: उस ने उसे घर के अंदर आदर भाव से बिठाया और चायनाश्ता कराया. दोनों ने आधेआधे कप चाय पी. फिर अनिल और कमला ने सुशीला को अचानक दबोच लिया और बैड पर गिरा कर रस्सी से उस के हाथपैर बांध कर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया.

सुशीला चीख न सके, इस के लिए उन दोनों ने उस के मुंह में कपड़ा ठूूंस दिया, फिर उसी की चुनरी से उसे गला घोंट कर मार डाला. हत्या करने के बाद कमला व अनिल ने घर में लूटपाट की और नकदी तथा सोनेचांदी के गहने ले कर फरार हो गए. 24 जून, 2025 को दोपहर बाद अजय प्रताप राजपूत ग्वालियर से कुम्हरिया गांव स्थित अपने घर पहुंचे तो घर के मुख्य दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद थी. वह कुंडी खोल कर घर के अंदर कमरे में पहुंचे तो कमरे का नजारा देख कर चौंक गए. बैड पर उन की पत्नी सुशीला देवी की लाश पड़ी थी. वह चीखते हुए बाहर आए.

चाचा की चीख सुन कर सौरभ राजपूत आ गया. उस ने चाची की हत्या की बात सुनी तो वह भी दंग रह गया. इस के बाद तो पूरे गांव में कोहराम मच गया और लोगों की भीड़ अजय प्रताप के घर जुटने लगी. इसी बीच सौरभ ने चाची सुशीला की हत्या की सूचना थाना टहरौली पुलिस तथा डायल 112 पर दे दी. हत्या की सूचना पाते ही एसएचओ सुरेश कुमार पुलिस टीम के साथ कुम्हरिया गांव पहुंच गए. उन की सूचना पर एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति, सीओ अरुण कुमार राय तथा एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया.

मृतका सुशीला का शव बैड पर पड़ा था. बैड के एक सिरे से उस के हाथ तथा दूसरे सिरे से रस्सी से उस के पैर बंधे थे. मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था. मृतका की उम्र 55 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या बेहोश कर गला घोंट कर की गई थी. बेहोशी का इंजेक्शन बेड के नीचे पड़ा था. साक्ष्य के तौर पर पुलिस ने उस खाली पड़े इंजेक्शन को सुरक्षित कर लिया. एक कमरे का ताला टूटा पड़ा था और बक्से का ताला भी टूटा पड़ा था. उस में रखा सामान कमरे में फैला था. जिस कमरे में बैड पर लाश पड़ी थी, उसी कमरे में छोटी सी मेज पर चाय के 2 कप तथा नमकीन, बिसकुट की प्लेटें रखी थीं. आधाआधा कप ही चाय पी गई थी.

निरीक्षण के बाद एसएसपी ने शव को झांसी के जिला अस्पताल पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दिया और एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह को हत्या के खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने तब एक स्पैशल टीम बनाई, जिस में एसएचओ के अलावा सर्विलांस तथा एसओजी के तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. साथ ही खास खबरियों को भी लगा दिया. पुलिस की इस स्पैशल टीम ने सब से पहले घर के मुखिया अजय प्रताप से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि हत्यारे एक लाख नकद तथा 8 लाख के जेवर भी लूट ले गए थे.

”तुम्हें किसी पर शक है?’’ एसपी ज्ञानेंद्र सिंह ने अजय राजपूत से पूछा.

”हां सर, मुझे बड़ी बहू रागिनी और उस के भाई आकाश पर शक है. रागिनी सुशीला से खुन्नस रखती थी. इसी खुन्नस में दोनों ने मिल कर मेरी पत्नी की हत्या की होगी.’’

अजय राजपूत के अलावा पुलिस टीम ने उस के बेटे संतोष व भतीजे सौरभ राजपूत से भी पूछताछ की.

ससुर को क्यों फंसाना चाहती थी पूजा

अजय के भतीजे सौरभ राजपूत ने बताया कि चाचा की चीख सुन कर वह घर आया तो चाची बैड पर मृत पड़ी थीं. उस ने ही पुलिस को सूचना दी थी. उस ने बताया कि सुबह 5 बजे एक युवक व एक युवती चाची के घर बाइक से आए थे. वे दोनों मुंह पर कपड़ा बांधे थे. उन्होंने घर से करीब 100 मीटर दूर अपनी बाइक खड़ी की थी. लगभग डेढ़ घंटा बाद वे चले गए थे. उस समय भी दोनों के मुंह पर कपड़ा बंधा था, इसलिए वह उन दोनों को पहचान नहीं पाया था. बाइक दूर खड़ी थी, इसलिए नंबर भी नोट नहीं कर पाया.

सौरभ ने यह भी बताया कि 3:10 बजे उस की पत्नी के मोबाइल फोन पर एक काल आई थी. यह काल पूजा ने अपने नंबर से न कर के दूसरे के मोबाइल नंबर से की थी और चाची का हालचाल पूछा था. सौरभ ने वह नंबर पुलिस को दे दिया. इधर संदेह के आधार पर पुलिस ने अजय प्रताप की तहरीर पर दतिया निवासी आकाश व उस की बहन रागिनी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच में जुट गई. पुलिस टीम दूसरे रोज रागिनी व आकाश की तलाश में दतिया को निकलने ही वाली थी कि आकाश और रागिनी स्वयं ही थाना टहरौली आ गए. उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि सुशीला देवी की हत्या हो गई है और रिपोर्ट उन के खिलाफ दर्ज की गई है तो वे घबरा गए और थाने आ गए.

रागिनी ने पुलिस के सामने कहा कि यह बात सही है कि वह पूरे परिवार से नफरत करती है, क्योंकि पति संतोष राजपूत ने विधवा देवरानी पूजा से शादी रचा कर उस के साथ छल किया तो दूसरी ओर सासससुर ने पूजा को जरूरत से ज्यादा प्यारदुलार दे कर उस के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई. वह सौतन को कब तक बरदाश्त करती. इसलिए ससुराल छोड़ कर मायके में आ कर रहने लगी. रागिनी ने कहा कि उस ने सास की हत्या नहीं की. उसे और उस के भाई को हत्या के मामले में झूठा फंसाया जा रहा है. सास की हत्या का राज ससुर अजय व उस की बहू पूजा के पेट में ही छिपा है.

रागिनी ने जिस बेबाकी से अपनी बात पुलिस को बताई, उस से पुलिस को लगा कि रागिनी व उस का भाई आकाश निर्दोष हैं. उन्हें थाने से जाने दिया. हां, इतना जरूर कहा कि सहयोग के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाए, वे थाने पर जरूर आएं. रागिनी के बयान के आधार पर अजय प्रताप की बहू पूजा शक के दायरे में आ गई थी. शक का दूसरा कारण यह भी था कि सास सुशीला की हत्या को 3 दिन बीत गए थे, लेकिन पूजा ग्वालियर से ससुराल नहीं आई थी. मोबाइल फोन के जरिए ही वह पति व ससुर के संपर्क में थी और पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी ले रही थी. जबकि सास की मौत की खबर पाते ही उसे ससुराल आ जाना चाहिए था.

27 जून, 2025 को पुलिस टीम ने शक के आधार पर पूजा को उस के पति संतोष के सहयोग से ग्वालियर स्थित घर से हिरासत में ले लिया और थाना टहरौली ले आई. थाने में उस से सास सुशीला की हत्या के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गई. बोली, ”साहब, मैं तो ग्वालियर में थी. पति व ससुर भी मेरे साथ थे. मुझे क्या पता कि सास को किस ने मारा?’’

”तुम ने सुशाीला की हत्या नहीं की तो फिर किस ने की?’’ टीम के एक दरोगा ने उस से पूछा.

”साहब, मुझे तो अपने ससुर अजय प्रताप राजपूत पर ही शक है. वह सास से खुन्नस रखते थे. सास को शक था कि ससुर मुझे चाहते हैं और संबंध बनाना चाहते हैं.’’

पूजा के बयान के आधार पर पुलिस टीम कुम्हरिया गांव पहुंची और अजय प्रताप राजपूत को पकड़ कर थाने ले आई. रात भर उन से सख्ती से पूछताछ की गई, लेकिन वह अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करते रहे.

सुबह पुलिस टीम ने पूजा व अजय प्रताप राजपूत को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की. पूजा ने अपनी बात दोहराई और ससुर अजय प्रताप से कहा कि वह सास की हत्या का जुर्म कुबूल कर लें. वह उन्हें जल्द ही जमानत पर छुड़ा लेगी.

पूजा की बात सुन कर अजय प्रताप सन्न रह गए. वह सोचने लगे जिस बहू को उन्होंने ससम्मान घर में रखा, लाड़प्यार दिया, वही बहू उसे हत्या जैसे मामले में फंसाना चाहती है. उन के दिमाग में विचार कौंधा कि कहीं पूजा ने ही तो सुशीला की हत्या नहीं कराई. क्योंकि पूजा जमीन बेचना चाहती थी और सुशीला विरोध करती थी.

अजय ने तब सारी बात पुलिस को बताई और अब हत्या का शक पूजा पर जताया. पूजा अब पूरी तरह से शक के घेरे में आ गई थी. अत: पुलिस टीम ने पूजा से सख्ती से पूछताछ की. पूजा ने तब सास की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. पूजा ने बताया कि मैं अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेच कर ग्वालियर में बसना चाहती थी. लेकिन सास सुशीला बाधक बन गई थी. इसी जमीन के लिए मैं ने सास की हत्या करवाई. हत्या के लिए मैं ने रुपयों का लालच दे कर बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी व उस के प्रेमी अनिल वर्मा को तैयार किया. ससुर को फंसाना भी साजिश का हिस्सा था. ससुर जेल चले जाते तो जमीन बिकने में कोई अड़चन नहीं आती. कमला व उस के प्रेमी अनिल वर्मा ने ही प्लान के तहत सास की हत्या की और घर में लूटपाट भी की.

पूजा ने गुनाह कुबूल किया तो पूजा की मदद से पुलिस टीम ने पूजा की बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी को भी ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया. लेकिन अनिल वर्मा पुलिस को चकमा दे गया. कमला उर्फ कामिनी को थाना टहरौली लाया गया. एसपी (सिटी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह व सीओ (टहरौली) अरुण कुमार राय ने जब कमला से सुशीला की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने सहज ही हत्या व लूटपाट का जुर्म कुबूल कर लिया, लेकिन उस के पास से लूटपाट की ज्वैलरी बरामद नहीं हुई. जेवर के बारे में पूछने पर कमला ने बताया कि लूटपाट के जेवर उस के प्रेमी अनिल वर्मा के पास हैं. वह जेवर को बेचने की फिराक में किसी ज्वैलर के संपर्क में है.

चूंकि पूजा और उस की बहन कमला उर्फ कामिनी ने सुशीला देवी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: पुलिस ने मृतका के पति अजय प्रताप की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) व (61) के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. दूसरे रोज (29 जून) को उन्हें झांसी की कोर्ट में पेश कर जिला जेल भेज दिया गया. चूंकि लूट का माल कमला के प्रेमी अनिल वर्मा के पास था. उस की खोज में पुलिस टीम जुट गई. पुलिस ने उस की टोह में खास खबरियों को भी लगा दिया.

30 जून, 2025 की रात 9 बजे एक खास मुखबिर से थाना टहरौली के एसएचओ सुरेश कुमार को सूचना मिली कि वांछित अपराधी अनिल वर्मा किसी रिश्तेदार के यहां लूटी गई ज्वैलरी पहुंचाने के इरादे से बघौरा के घुरैया तिराहे से निकलने वाला है. इस सूचना पर सीओ (टहरौली) अरुण कुमार राय, इंसपेक्टर सुरेश कुमार तथा उल्दन थाने के एसएचओ दिनेश कुमार पुलिस टीम के साथ घुरैया तिराहे पहुंचे और चैकिंग शुरू कर दी.

रात 10 बजे के लगभग पुलिस को एक संदिग्ध बाइक सवार आता दिखा. पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन उस ने बाइक दौड़ा दी और पुलिस पर फायर झोंक दिया. जवाबी काररवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई. गोली अनिल वर्मा के पैर में लगी और वह घायल हो गया. पुलिस ने तब अनिल वर्मा को दबोच लिया. पुलिस को उस के पास से 8 लाख रुपए कीमत के आभूषण बरामद हो गए, जो उस ने सुशीला देवी हत्या के बाद लूटे थे. पुलिस ने हत्या में प्रयोग उस की बाइक तथा तमंचा भी अपने कब्जे में ले लिया. उस ने हत्या में प्रयुक्त सीरिंज भी बरामद करा दी, जो उस ने बाइक की डिक्की में छिपा दी थी.

पुलिस जांच, आरोपियों के बयानों एवं मृतका के फेमिली वालों द्वारा दी गई जानकारी के तहत झांसी की कातिल हसीना की दिल को झकझोर देने वाली कहानी प्रकाश में आई. उत्तर प्रदेश के झांसी शहर के थाना प्रेमनगर अंतर्गत एक मोहल्ला है— नगरा महावीरन. इसी मोहल्ले में बोधराम जाटव परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी सरला के अलावा 2 बेटे निरपत, गणपत तथा 2 बेटियां कमला तथा पूजा थीं. बोधराम रेलवे में लोको पायलट थे. बड़ी बेटी कमला उर्फ कामिनी सयानी हुई तो उन्होंने उस का विवाह हजीरा (ग्वालियर) निवासी सूरज जाटव से कर दिया.

बोधराम की बेटी पूजा अपने भाईबहनों में सब से छोटी थी. जब वह 7 साल की थी, तभी उस की मम्मी सरला की मौत हो गई थी. पूजा की भाभी लीलावती ने उसे पालपोस कर बड़ा किया था. यौवन की दहलीज पर आते ही उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया था. जो भी उसे देखता, मंत्रमुग्ध सा हो जाता. घर के सभी लोग उसे बेहद प्यार करते थे. इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद पूजा की पढ़ाई पर विराम लग गया था. पूजा सयानी हुई तो बोधराम को उस के विवाह की चिंता सताने लगी. उस ने बेटी के लिए योग्य वर की खोज शुरू की तो उसे रमेश जाटव पसंद आ गया. रमेश जाटव रेलवे में नौकरी करता था और संयुक्त परिवार के साथ ओरछा में रहता था. रमेश पसंद आया तो बोधराम ने 4 मई, 2014 को पूजा का विवाह रमेश के साथ धूमधाम से कर दिया.

शादी के बाद कुछ माह तक दोनों का जीवन हंसीखुशी से बीता. उस के बाद दोनों के बीच कलह होने लगी. कलह का पहला कारण था संयुक्त परिवार में रहना. पूजा अपने सासससुर के साथ रहने के बजाय अलग रहना चाहती थी. लेकिन रमेश को अलग रहना पसंद न था. दूसरा कारण था पूजा की फैशनपरस्ती. वर्ष 2016 के जुलाई माह में रमेश पर किसी ने जानलेवा हमला किया. उस पर गोली चला दी, लेकिन उस की जान बच गई. उस रोज वह पूजा को मायके से ले कर अपने घर ओरछा जा रहा था. रमेश को शक हुआ कि गोली पूजा ने चलवाई थी, अत: उस ने थाना प्रेमनगर में पूजा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी.

पुलिस ने पूजा को आम्र्स एक्ट की धारा 25/4 व आईपीसी की धारा 506 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस के बाद पूजा व रमेश के बीच अलगाव हो गया. पूजा लगभग 6 माह तक जेल में रही. उस के बाद बोधराम ने पूजा की जमानत करा ली और वह मायके में रहने लगी. मुकदमे की पैरवी के लिए पूजा झांसी कोर्ट जाती थी. कोर्ट में ही एक रोज पूजा की मुलाकात कल्याण उर्फ लाखन राजपूत से हुई. कल्याण पर भी चोरी, लूट व मारपीट के लगभग आधा दरजन मुकदमे दर्ज थे. इन्हीं की पैरवी के लिए वह भी कोर्ट आता था.

कोर्ट की हुई मुलाकात ऐसे बदली प्यार में

कल्याण उर्फ लाखन के पापा अजय प्रताप राजपूत झांसी जिले के कुम्हरिया गांव के रहने वाले थे. परिवार में पत्नी सुशीला देवी के अलावा 2 बेटे संतोष व कल्याण थे. उन के पास खेती की 16 बीघा भूमि थी. बड़े बेटे संतोष की शादी हो चुकी थी. उस की पत्नी रागिनी सुंदर व सुशील थी. घरगृहस्थी वही संभालती थी. उन का छोटा बेटा कल्याण उर्फ लाखन अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए उस का विवाह नहीं हुआ था.  पूजा और कल्याण राजपूत पहली ही मुलाकात में एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए थे. उन के बीच दोस्ती हो गई और खुल कर बातचीत होने लगी. मोबाइल फोन पर भी वे घंटों बतियाने लगे. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई.

प्यार परवान चढ़ा तो पूजा झांसी के गुमनावारा में किराए के मकान में कल्याण के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. पूजा के भाई निरपत को कल्याण के साथ रहना अच्छा न लगा, इसलिए उस ने पूजा से रिश्ता खत्म कर लिया. बोधराम भी चिंता में लकवाग्रस्त हो गए. उन्होंने भी पूजा से नाता तोड़ दिया. 25 मई, 2019 को कोंछा झाबर के पास सड़क दुर्घटना में कल्याण की मौत हो गई. पूजा विधवा हो गई और उस पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा. बेटे की मौत का अजय व उन की पत्नी सुशीला को भी गहरा सदमा लगा.

कल्याण की तेरहवीं वाले दिन पूजा कुम्हरिया गांव ससुराल आ गई. वह सुशीला देवी की गोद में सिर रख कर रोने लगी और बोली, ”मम्मी, अब मैं कहां जाऊं. मेरा कोई नहीं है. बचपन में मम्मी मर गई और भाई व पापा ने भी नाता तोड़ लिया. अब मैं एक तरह से अनाथ हूं.’’

पूजा के आंसुओं ने सुशीला देवी का दिल पिघला दिया. उस ने पूजा को गले लगा कर उसे बहू के रूप में स्वीकार कर लिया. हालांकि फेमिली के लोगों ने विरोध किया और कहा कि वह छोटी जाति की है. लेकिन सुशीला के आगे किसी की नहीं चली.

पूजा अब ससुराल में खुशीखुशी रहने लगी. रागिनी ने भी पूजा को अपनी देवरानी के रूप में स्वीकार कर लिया. देवरानीजेठानी घर का काम मिलजुल कर करतीं और हंसीखुशी से रहतीं. पूजा ने अपनी सेवा से सासससुर का भी दिल जीत लिया था. पूजा खूबसूरत व जवान थी. उस ने जेठ संतोष पर नजरें गड़ानी शुरू कर दीं. संतोष भी पूजा की खूबसूरती का कायल था और मन ही मन उसे चाहता था. संतोष रंगीनमिजाज था. रिश्तेनाते उस के लिए कोई मायने नहीं रखते थे. बहू और जेठ का रिश्ता होने के बावजूद वह पूजा के जिस्म को पाने के लिए लालायित रहने लगा. पूजा को रिझाने के लिए उस ने तरहतरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए.

मर्द जिस नजर से औरत को देखता है, उस से वह उस के मन का भाव समझ जाती है. संतोष जिस तरह से ललचाई नजरों से उस के शबाब को निहारता था, उस से पूजा समझ गई कि जेठ की नीयत ठीक नहीं है. पूजा भी जेठ को अपना बनाना चाहती थी, इसलिए उस ने कभी टोकाटाकी नहीं की.

जेठ को फांस कर जेठानी को किया दूर

संतोष अब पूजा से बतियाने भी लगा था. बातचीत में वह पूजा के रूप की प्रशंसा तो करता ही, उस के व्यवहार की भी खूब तारीफ करता. पूजा भी उस की बातों में रस लेने लगी थी. धीरेधीरे दोनों के बीच का परदा हटता गया और फिर एक दिन उन के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. रागिनी मायके से वापस आई तो उसे पूजा की चालढाल पर शक हुआ. उस ने निगरानी शुरू की तो एक रात उस ने पति को पूजा की बांहों में झूलते देख लिया. वह समझ गई कि पूजा उस की सौतन बन गई है.

उस ने इस नाजायज रिश्ते का विरोध किया तो संतोष और पूजा उसी पर हावी हो गए. सास और ससुर ने भी चुप्पी साध ली. उन दोनों ने रागिनी को समझाया कि घर की बात है, घर में ही रहने दो. मजबूरन रागिनी ने पूजा को सौतन के रूप में स्वीकार कर लिया. कुछ दिनों बाद मामला ठंडा पड़ा तो संतोष ने पूजा के साथ शादी रचा ली और उसे पत्नी का दरजा दे दिया. शादी के एक साल बाद पूजा ने एक बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म से घर में खुशियां छा गईं. सभी उसे बेहद चाहते थे.

पूजा से शादी करने के बाद संतोष ज्यादा समय उसी के साथ बिताता था. वह पूजा की हर बात मानता था और उसे भरपूर प्यार देता था. जबकि रागिनी पति के प्यार के लिए तरसती रहती थी. संतोष उस की कोई बात नहीं मानता था और अकसर उसे अपमानित करता रहता था. वक्त के साथ पूजा की बेटी 3 साल की हो गई थी. पूजा को गांव में अच्छा नहीं लगता था. वह ग्वालियर शहर में बसना चाहती थी. एक रोज उस ने पति व ससुर के सामने इच्छा जताई कि वह अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेचना चाहती है. इस पर थोड़ा नानुकुर के बाद संतोष व अजय प्रताप राजी हो गए, लेकिन जब सास सुशीला को जमीन बेचने की बात पता चली तो उस ने पूजा को आड़े हाथों लिया और जमीन बेचने का विरोध किया.

इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. पूजा जब भी जमीन बेचने की बात करती, सास सुशीला विरोध करती. इस विरोध के कारण पूजा मन ही मन सास से नफरत करने लगी थी. हालांकि पूजा अपने लाड़प्यार तथा सेवा भाव से सास को पटाने की पूरी कोशिश करती थी. इधर घर में रागिनी की हैसियत एक दासी जैसी थी. उसे न कोई प्यार देता था न सम्मान. सास ने मंगलसूत्र भी उस से छीन लिया था. हताश रागिनी का ससुराल में जीना दूभर हो गया तो पिछले साल से वह अपने मायके दतिया में आ कर रहने लगी.

मई, 2025 के पहले सप्ताह में पूजा ने फिर से जमीन बेचने की बात चलाई तो सास सुशीला बाधा बन गई. उस ने पूजा को डांटफटकार भी लगाई. पूजा तब सास से लड़झगड़ कर 16 मई, 2025 को अपनी बड़ी बहन कमला उर्फ कामिनी के घर हजीरा (ग्वालियर) आ गई. बहन के घर रह कर पूजा ने सास सुशीला की हत्या की योजना बनाई.

3 जुलाई, 2025 को पुलिस ने आरोपी अनिल वर्मा को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. पूजा व कमला पहले ही जेल जा चुकी थीं.पूजा के जेल जाने के बाद उस की बेटी संतोष के घर पलबढ़ रही थी. UP Crime News

 

 

Social Crime Story : काल बन गई सुहागरात

Social Crime Story : 45 वर्षीय टीचर इंद्रकुमार तिवारी द्वारा कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के सामने अपनी शादी होने की बात कहने का वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो गया था. इस का नतीजा यह निकला कि उन के पास देवरिया से शादी का प्रस्ताव गया. वह बहुत खुश हुए. उन की शादी हो भी गई, लेकिन सुहागरात से पहले उन के साथ जो हुआ, उस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.

इंद्रकुमार तिवारी अपने घर पर दोपहर का खाना खा कर आराम कर रहे थे, तभी उन के मोबाइल की घंटी बजी. जैसे ही इंद्रकुमार ने काल रिसीव की, दूसरी तरफ से आवाज आई, ”हैलो, इंद्रकुमार तिवारीजी बोल रहे हैं क्या?’’

”जीहां, मैं इंद्रकुमार ही बोल रहा हूं, कहिए क्या काम है?’’ इंद्रकुमार ने जबाव दिया.

”देखिए, मैं उत्तर प्रदेश के देवरिया से संदीप तिवारी बोल रहा हूं. अपनी बहन खुशी के विवाह के लिए आप से मिलना चाहता हूं.’’ संदीप तिवारी ने कहा.

”आप अपनी बहन का फोटो और बायोडाटा भेज दीजिए, फिर इस के बाद आगे देखा जाएगा. संयोग बना तो रिश्ता बन सकता है.’’ इंद्रकुमार ने जवाब दिया.

”फोटो तो मैं भेज दूंगा, लीजिए मेरी बहन खुशी से बात कर लीजिए.’’ यह कह कर संदीप ने खुशी को मोबाइल पकड़ा दिया.

”हैलो, मैं खुशी बोल रही हूं. मैं ने आप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था, जिस में आप अनिरुद्धाचार्यजी से अपनी शादी के संबंध में बात कर रहे थे. वीडियो देख कर मैं आप के व्यक्तित्त्व से बहुत प्रभावित हुई और अपने भाई से शादी के बारे में बात की तो इन्होंने आप का मोबाइल नंबर खोज कर आप से बातचीत कर ली.’’

 

”अच्छा, मुझे जान कर बहुत खुशी हुई कि आप मुझ से शादी करना चाहती हैं, मगर हम गांव में रहने वाले गेस्ट टीचर हैं, थोड़ीबहुत खेतीबाड़ी भी है. मेरे परिवार में मेरे अलावा और कोई नहीं है. क्या यह सब जान कर भी तुम्हें रिश्ता मंजूर है?’’ इंद्रकुमार ने कहा.

”मैं भी ग्रैजुएट हूं, जनरल कोटा की वजह से कहीं नौकरी नहीं मिली तो घर संभाल रही हूं. मैं घर के सभी काम कर लेती हूं. मेरे भी मम्मीपापा नहीं हैं. मेरे भाई ही मेरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. माली हालत भी ठीक नहीं है. मेरी तरफ से तो हां है, बाकी फैसला भैया के हाथ है. लीजिए, भैया को फोन दे रही हूं. इन से बात कर लीजिए.’’ इतना कहते ही फोन संदीप तिवारी को दे दिया.

”हां तिवारीजी, मैं खुशी की फोटो आप को भेजता हूं और यदि आप की सहमति हो तो मैं आप से मिलने आ जाऊंगा.’’ संदीप तिवारी बोला.

”हां भाई, यहां आ कर मेरा घरद्वार जरूर देख लीजिए. आखिर आप की बहन की जिंदगी का सवाल है.’’ इंद्रकुमार ने सहमति देते हुए कहा. यह बात 17 मई, 2025 की है.

इंद्रकुमार तिवारी की उम्र करीब 45 साल हो चुकी थी, मगर उन की शादी नहीं हो पा रही थी. ऐसे में शादी का रिश्ता आते ही इंद्रकुमार का मन खुशी से उछल रहा था. गांव में थोड़ीबहुत जमीनजायदाद और सरकारी स्कूल में 14 हजार रुपए की नौकरी इंद्रकुमार की गुजरबसर के लिए काफी थी, मगर आसपास के इलाकों में कोई उन्हें लड़की ब्याहने को तैयार नहीं था. आसपड़ोस के लोग भी इंद्रकुमार की शादी में बांधा बने हुए थे, इस लिहाज से इंद्रकुमार ने लड़की वालों को जब घर बुलाया तो उन्होंने अपने चचेरे भाइयों तक को खबर नहीं दी थी.

26 मई, 2025 को खुशी का रिश्ता ले कर संदीप तिवारी मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचा और अपनी बहन खुशी के कुछ और फोटो मोबाइल में दिखाए. इंद्रकुमार को लड़की पसंद थी, इसलिए बातचीत के बाद दोनों तरफ से शादी पक्की हो गई. बातचीत के दौरान तय हुआ कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 जून, 2025 को खुशी के साथ इंद्रकुमार का विवाह होगा. इंद्रकुमार ने संदीप तिवारी को शगुन के रूप में 1100 रुपए भी दिए. इस के बाद संदीप जबलपुर से वापस लौट गया.

इंद्रकुमार शादी तय होने से इतना खुश थे कि वह अपनी शादी में सब कुछ लुटाने को तैयार थे. यही वजह थी कि इंद्रकुमार ने अपनी एक एकड़ जमीन गिरवी रख कर करीब डेढ़ लाख रुपए जुटा कर मझौली कस्बे के ही एक सुनार से गहने बनवाए. कुछ पुश्तैनी आभूषण भी उस के पास थे. सोनेचांदी के गहने के साथ कुछ कैश ले कर वह 2 जून को गोरखपुर रवाना हो गए. 3 जून को वह गोरखपुर के एक होटल में रुके. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 जून को एक होटल में खुशी के साथ उन की शादी कराई गई.

इंद्रकुमार ने शादी के बाद 5 जून को ही खुशी के साथ अपना फोटो अपने फेमिली वालों और पड़ोसियों को भेजते हुए कहा था कि विवाह के बाद दुलहन को ले कर 6 जून को गांव वापस आ जाएंगे, लेकिन 5 जून को विवाह के फोटो भेजने के बाद से ही इंद्रकुमार का फोन स्विच्ड औफ हो गया.

अनिरुद्धाचार्य से लगाई थी शादी कराने की गुहार

सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर के रूप में नौकरी करने वाले इंद्रकुमार तिवारी मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के छोटे से गांव पड़वार के रहने वाले थे. वह गांव में अकेले ही रहते थे. उन के पास 3 एकड़ जमीन थी. इंद्रकुमार ने बचपन में ही अपने मांबाप को खो दिया था. इंद्रकुमार से छोटे 4 भाई उन्हीं पर आश्रित थे. समय के साथ 3 भाइयों की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई. इंद्रकुमार के साथ एक छोटा भाई अभी भी रहता है, लेकिन वह भी कुछ करने में सक्षम नहीं है. उस की सारी जिम्मेदारी भी इन्हीं के ऊपर थी.

इंद्रकुमार सुबह जल्दी उठ कर खाना बना कर खेत चले जाते थे और वहां से आने के बाद स्कूल जाते थे और शाम को फिर खेत जा कर काम करते थे और रात को खाना बना कर भाई को भी खिलाते थे. इस तरह से उन का जीवन संघर्ष से भरा था. कथावाचक अनिरुद्धाचार्य भी इसी गांव के रहने वाले हैं. 2025 में 3 से 10 मई तक रिमझा गांव में अनिरुद्धाचार्य के प्रवचनों का आयोजन किया गया था. इसी दौरान शिक्षक इंद्रकुमार तिवारी इस शिविर में शामिल हुए थे. शिविर में उन्हें भी अनिरुद्धाचार्य से सवाल करने का मौका मिला था. तब उन्होंने माइक लेते हुए उन से सवाल पूछा, ”महाराजजी, मेरी शादी कब होगी?’’

”क्या करते हो तुम? कुछ कामधंधा करते हो कि नहीं?’’ अनिरुद्धाचार्य ने पूछा.

”महाराजजी,  मैं गांव के सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर हूं. मेरे पास 18 एकड़ जमीन है, अच्छी प्रौपर्टी है, लेकिन मेरी शादी नहीं हो पा रही है.’’ इंद्रकुमार ने अनिरुद्धाचार्य को बताया.

”कितनी उम्र हो गई है तुम्हारी?’’

”महाराजजी, 45 साल का हो गया हूं.’’

”तो फिर क्या जरूरत है शादी की, साधु बन जाओ और लोगों का कल्याण करो.’’ चुटकी लेते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा.

”महाराजजी, मेरा वंश कैसे चलेगा, इसलिए शादी करना जरूरी है.’’

”लोगों को पता है कि तुम्हारे पास 18 एकड़ जमीन है?’’

”हां महाराजजी, इस के बावजूद भी  कोई लड़की शादी के लिए राजी नहीं है.’’ इंद्रकुमार बोले.

”अब जब लड़कियों को पता चलेगा तो तुम से शादी करने को जरूर राजी होंगी.’’ अनिरुद्धाचार्य ने दिलासा देते हुए कहा.

बाद में सवालजवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था. इसी वीडियो को देख कर खुशी और कौशल ने इंद्रकुमार से शादी के लिए संपर्क किया था. मझौली से इंद्रकुमार के जाने के बाद पड़ोसी सुरेंद्र तिवारी ने अगले दिन 6 जून को इंद्रकुमार को फोन किया तो एक महिला ने फोन रिसीव करते हुए कहा, ”अभी वो बात नहीं कर पाएंगे, सो रहे हैं.’’

जब  दोबारा फोन करने पर पूछा गया तो वह महिला इंद्रकुमार से बात कराने की बात को टालती रही. जब इंद्रकुमार का फोन स्विच्ड औफ बताने लगा तो चचेरे भाइयों ने मझौली थाने में 8 जून को इंद्रकुमार की गुमशुदगी दर्ज करा दी. चचेरे भाइयों को इंद्रकुमार की खोजबीन करतेकरते लगभग 20 दिन बीत चुके थे. इसी दौरान पुलिस ने परिजनों को बताया कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक 40-45 साल के व्यक्ति का शव मिला है.

दरअसल, 6 जून, 2025  को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र के सुकरौली गांव में मझना नाले के पास झाडिय़ों में एक व्यक्ति की लाश मिली थी. लाश खून से सनी हुई थी और गले में चाकू फंसा हुआ था. लाश मिलने की सूचना बकरी चराने वाली महिलाओं ने पुलिस को दी थी. शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने उस का विवरण सेंट्रल पोर्टल पर अपलोड किया. इस के बाद मध्य प्रदेश के जिला जबलपुर की मझौली पुलिस ने कुशीनगर पुलिस से संपर्क साधा और इंद्रकुमार के फेमिली वालों को ले कर एक टीम कुशीनगर रवाना हो गई. कुशीनगर जा कर जब पुलिस ने शव की शिनाख्त कराई तो वह शव इंद्रकुमार तिवारी का ही निकला.

शव की पहचान इंद्रकुमार के रूप में होने के बाद कुशीनगर पुलिस मोबाइल काल डिटेल्स, सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से हत्याकांड का परदाफाश करने में जुट गई. इंद्रकुमार के पड़ोसी और चचेरे भाई के मोबाइल में मिली फोटो से पुलिस ने शादी करने वाली खुशी और संदीप तिवारी की तलाश शुरू कर दी. इस के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और 700 वाहनों को खंगालने के बाद  कुशीनगर पुलिस ने घटना का परदाफाश कर दिया.

पुलिस ने इस मामले में गोरखपुर, झंगहा के मीठाबेल गांव की साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी, बिछिया कालोनी में रहने वाले देवरिया, गौरीबाजार स्थित सांडा के मूल निवासी संदीप तिवारी उर्फ कौशल कुमार गौर तथा झंगहा के सोनबरसा स्थित कोनी के रहने वाले शमसुद्दीन अंसारी को तितला गांव के पास ढाबे से गिरफ्तार कर लिया. हत्यारोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने इंद्रकुमार की हत्या कर शव को झाडिय़ों में फेंकने का जुर्म स्वीकार कर लिया. घटना में प्रयुक्त चाकू भी बरामद हो गया है.

काल बन गई सुहागरात

पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि हत्या की मास्टरमाइंड खुशी तिवारी का असली नाम साहिबा बानो है और अपने आप को खुशी का भाई बताने वाला संदीप उस का प्रेमी कौशल गौर था. जिन्होंने ङ्क्षहदू नाम रख कर और उसी नाम का फरजी आधार कार्ड बनवा कर इंद्रकुमार को ठगने का प्लान  तैयार किया था. 5 जून को गोरखपुर मंडल के जिला कुशीनगर के कसया इलाके में एक होटल बुक हुआ. वहीं इंद्रकुमार तिवारी और खुशी तिवारी की शादी कराई गई. जयमाला पहनाई गई, मांग में सिंदूर भरा गया, फोटो और वीडियो शूट कर शादी को वैधता देने की कोशिश की गई.

 

इंद्रकुमार इस रिश्ते को ले कर पूरी तरह आश्वस्त थे. लेकिन सुहागरात की रात जब इंद्रकुमार अपनी नईनवेली दुलहन के साथ एक नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीद में होटल के कमरे में थे, उसी रात उन की पत्नी और उस के प्रेमी ने मौत की पटकथा पूरी कर ली. इंद्रकुमार तिवारी ने बड़े अरमानों के साथ अपनी होने वाली दुलहन खुशी तिवारी की मांग में सिंदूर भरा. जयमाला पहनाई, तसवीरें खिंचवाईं, वीडियो शूट हुआ. हर पल को उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत मान कर जी लिया. उन्हें क्या पता था कि यही पल उन की जिंदगी का आखिरी पल साबित होगा. शादी की तमाम रस्मों के बाद सुहागरात की तैयारी चल रही थी.

इंद्रकुमार तिवारी अपनी नईनवेली दुलहन के साथ भविष्य के सपनों में खोए हुए थे. एक तरफ वह शादी के सपनों में खोए थे तो दूसरी तरफ साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी और संदीप तिवारी उर्फ कौशल साजिश को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी में जुटे थे. खुशी तिवारी ने इंद्रकुमार से शादी से पहले ही एक हलफनामा बनवाया, जिस में लिखा गया कि इंद्रकुमार की मृत्यु के बाद उन की 18 एकड़ जमीन की मालिक खुशी और उस का भाई संदीप (असल में प्रेमी कौशल) होंगे. इंद्र ने इस पर भरोसे से इसलिए दस्तखत  कर दिए कि शादी के बाद उस की प्रौपर्टी की असली वारिस खुशी ही तो होगी.

सुहागरात से ठीक पहले, जब होटल में रात का भोजन होना था तो खुशी ने अपने प्रेमी कौशल के साथ मिल कर पनीर राइस में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के करीब घंटे भर बाद इंद्रकुमार जैसे ही बेहोश हुए, खुशी तिवारी ने अपने प्रेमी कौशल और ड्राइवर शमसुद्दीन अंसारी के साथ मिल कर इंद्रकुमार को कार में डाला और कुशीनगर के एक सुनसान इलाके में ले जा कर चाकू से गोदगोद कर बेरहमी से हत्या कर दी. इस के बाद शव को झाडिय़ों में फेंककर तीनों फरार हो गए.

इंद्रकुमार घर पर वह यही बोल कर निकले थे कि 4-5 दिन में बहू ले कर गांव वापस आ जाएंगे. शादी के लिए उन्होंने अपने हिस्से के जेवर और पैसे भी ले लिए थे. पड़ोसियों ने भी उन्हें समझाया कि किसी को पैसों का लालच दे कर शादी मत करो, लेकिन उन की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी. पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि कौशल और साहिबा का प्लान टीचर को तुरंत मारने का नहीं था. उन का इरादा था कि शादी के बाद खुशी टीचर के साथ मध्य प्रदेश के गांव में जाएगी और वहां कुछ दिन उन के साथ रहेगी. फिर इंद्रकुमार की हत्या कर उन्हें ठिकाने लगा दिया जाएगा, ताकि किसी को शक न हो और इंद्रकुमार की विधवा होने के नाते पूरी प्रौपर्टी उसी की हो जाएगी.

मगर बात तब बिगड़ गई, जब साहिबा ने अपने नाम पर जमीन का हलफनामा बनवाने के लिए इंद्रकुमार से जमीन के कागजात मंगवाए. कागजात देख कर पता चला कि टीचर के पास 18 एकड़ नहीं, सिर्फ 3 एकड़ ही जमीन है. इस के बाद खुशी और कौशल ने टीचर की लूट के बाद हत्या का प्लान बना लिया. हलफनामे पर साइन करने के बाद इन लोगों ने इंद्रकुमार तिवारी की हत्या कर दी.

इंद्रकुमार को मारने के बाद खुशी उस का सेलफोन इस्तेमाल कर रही थी. जब पुलिस ने जांचपड़ताल के बाद इंद्र के नंबर पर काल किया तो वह बंद मिला, जिस से पुलिस को शक हुआ. फोन की लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस खुशी तक पहुंची. खुशी से पूछताछ के बाद केस की सारी परतें खुलती चली गईं. फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. कौशल गौर और साहिबा बानो गोरखपुर के रहने वाले हैं. दोनों के प्रेम प्रसंग की वजह से इन के घर वालों ने भी इन से नाता तोड़ लिया था. इसलिए दोनों देवरिया में रहने लगे. यहां कौशल मजदूरी करता था और किराए के कमरे में साहिबा के साथ पतिपत्नी के रूप में रहता था.

साहिबा बानो और उस के प्रेमी ने देखा कि इंद्रकुमार के पास जमीन के साथसाथ नौकरी भी है और वह विवाह करने के लिए परेशान है. इसी बात का फायदा उठाते हुए दोनों ने फरजी शादी कर उस का धन हड़पने की योजना बनाई. सब से पहले साहिबा बानो ने इंद्रकुमार पर प्रभाव डालने और खुद को उस का सजातीय बताने के लिए खुशी तिवारी नाम से फरजी आधार कार्ड बनवाया. इस के बाद सोशल मीडिया पर खुशी तिवारी नाम से ही अपना अकाउंट बना कर इंद्रकुमार से चैटिंग शुरू की. जिस से इंद्रकुमार जल्द ही उस के झांसे में आ गए.

एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने 27 जून को प्रैस कौन्फ्रेंस कर केस का खुलासा किया. पुलिस ने महिला समेत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

 

 

Short Story : लड़के ने लड़की बनकर बनाई पहचान

Short Story : रेलवे के तकनीकी विभाग में कार्यरत राजेश पांडेय देखने में भले ही एक युवक था, लेकिन मानसिक रूप से वह बचपन से ही एक लड़की था. भावनाएं जाहिर न करने की वजह से घर वालों ने एक लड़की से उस की शादी भी कर दी. इस के बाद स्त्री बन कर अपनी अलग पहचान बनाने के लिए राजेश उर्फ सोनिया पांडेय ने जो संघर्ष किया वह…

काफी जद्दोजहद के बाद अब मैं असली जिंदगी जी रही हूं और जिंदगी के मजे ले रही हूं. इस के लिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा. संघर्ष भी किसी और से नहीं, बल्कि अपने परिवार से और समाज से, तब कहीं जा कर मैं अपनी असली पहचान बना पाई हूं. जिसे अब मेरा परिवार और समाज भी स्वीकार करने लगा है. मैं कौन हूं, क्या हूं और मेरे परिवार में कौनकौन हैं, इस के बारे में मैं बताए देती हूं. इस की शुरुआत मैं अपने घर से ही करती हूं. दरअसल, मेरे पिता ख्यालीराम पांडेय मूलरूप से उत्तराखंड के शहर अल्मोड़ा के रहने वाले थे. वह 1960 में उत्तर प्रदेश के शहर बरेली आ गए.

वह पूर्वोत्तर रेलवे में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे. बरेली की इज्जतनगर रेलवे की वर्कशाप में वह काम करते थे. परिवार में मेरी मां निर्मला और एक बड़ा भाई था. मेरा परिवार बरेली आ गया. बरेली में ही मेरा जन्म हुआ. मातापिता ने मेरा नाम राजेश रखा. मेरे बाद मेरी 2 छोटी बहनें हुईं. मैं कहने को तो लड़का थी, लेकिन मेरी आत्मा, मेरी भावना मुझे लड़की होने का एहसास कराती थी. जब मैं 5 साल की थी, तभी से मुझे लड़कियों की तरह रहना पसंद था, लड़कों की तरह नहीं. पापा मार्केट से मेरे लिए लड़कों वाली कोई ड्रेस ले कर आते तो मैं लड़कियों की डे्रस पहनने की जिद करती थी. मैं लड़कियों के कपड़े पहनना पसंद करती थी. कभी मां या बड़ी बहनें मुझे फ्रौक पहना देती थीं तो उन को उस फ्रौक को उतारना मुश्किल हो जाता था, मैं उन से बच के घर से बाहर भाग जाती थी.

तब शायद मुझे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि मेरी यह इच्छा आगे चल कर मजाक का सबब भी बनेगी. जैसेजैसे मेरी उम्र बढ़ती गई, मेरे अंदर की जो लड़की थी, उस की इच्छाएं भी जवान होती गईं. जब मैं 14 साल की थी तो किशोरावस्था में कदम रखते ही मेरे चेहरे पर हलकेहलके बाल आने लगे. चेहरे पर ये बाल मुझे किसी अभिशाप की तरह लगने लगे थे. आईने में चेहरा देखती तो बहुत गुस्सा आता था. मेरे पड़ोस में ही मेरे एक भाई जैसे रहते थे. मैं ने उन से इन बालों को हटाने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि हेयर रिमूवर क्रीम लगाओ. तब से मैं ने चेहरे पर हेयर रिमूवर क्रीम लगानी शुरू कर दी. मैं खुद ही हमेशा से एक लड़की की तरह दिखना चाहती थी.

उम्र का बहुत ही मुश्किल दौर था, जहां एक तरफ मेरी उम्र के लड़के लड़कियों की ओर आकर्षित होते थे, वहीं मैं लड़कियों के बजाय लड़कों की तरफ आकर्षित होती थी. समझ नहीं आता था कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा है, पर मैं ने अपनी भावनाओं को किसी को नहीं बताया. वह इसलिए कि मुझे पता था कि लोग मेरा मजाक बनाएंगे. मुझे बहुत अकेलापन महसूस होता था. एक अजीब सी घुटन होती थी. लड़कों से दोस्ती करने का मन होता था. मैं चाहती थी कि स्कूल में लड़कियों के साथ बैठ कर ही लड़कों को निहारूं, उन से बातें करूं, पर कुछ कह पाने की हिम्मत नहीं होती थी. कुछ कहती भी तो मेरी भावनाओं को समझने के बजाय मेरे ऊपर हंसते.

स्कूल में मिला नया साथी जब मैं सातवीं क्लास में थी, तभी मेरी दोस्ती योगेश भारती नाम के सहपाठी से हुई. प्यार से लोग उसे बिरजू भी कहते थे. जब बिरजू एडमीशन के बाद क्लास में आने लगा तो उसे देख कर लगा कि बिरजू और मेरी भावनाएं एक जैसी ही हैं. वह भी बिलकुल लड़की जैसा था. हम दोनों घंटों तक अकेले बातें करते, एक साथ स्कूल आते, एक साथ लंच करते. मानो जैसे हमें हमारी खुद की दुनिया मिल गई थी. हम दोनों बहुत खुश रहते थे. इसे ले कर हमारे सहपाठी हमारा मजाक भी बनाते थे. लेकिन जैसे हम दोनों को इस की परवाह ही नहीं थी.

मैं और बिरजू नौंवी क्लास तक साथ पढ़े. उस के बाद मेरा स्कूल बदल गया. मेरा दूसरे स्कूल में एडमीशन हो गया. जिंदगी फिर वैसी हो गई. नए स्कूल के माहौल में खुद को एडजस्ट कर पाना मुश्किल लगता था. इंटरमीडिएट तक मैं ने अपना स्कूली जीवन व्यतीत किया. फिर मैं ने बरेली कालेज में बीए में एडमीशन ले लिया. कालेज में आई तो लड़कियां मुझे प्रपोज करने लगीं, कई ने तो मुझे प्रेम पत्र भी दिए. मैं ने सब को यही कह कर टाल दिया कि हम अच्छे दोस्त बन सकते हैं. और उन को क्या बोलती. यह तो कह नहीं सकती थी कि मैं अंदर से एक लड़की हूं.

वैसे भी जिस लड़के को मैं पसंद करती थी, उस से अब तक अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाई, करती भी तो वह शायद मेरे ऊपर हंसता, पूरी क्लास को  बताता, सब मेरे ऊपर हंसते. मैं कभी खुद से खुद को मिला नहीं पा रही थी. मेरे दिमाग में हर पल यही बात घूमती रहती थी कि मैं लड़का क्यों हूं. भगवान ने मुझे इतनी बड़ी सजा क्यों दी. इसी घुटन के साथ मैं कब जवान हो गई, पता ही नहीं चला. फिर मेरी मुलाकात समाज में कुछ ऐसे लड़कों से हुई जो बिलकुल मेरे जैसी भावना रखने वाले थे. इस से लगने लगा कि चलो इस समाज में मैं ही अकेली ऐसी नहीं हूं, मेरे जैसे दुनिया में और लोग भी हैं.

जब और बड़ी हुई तो परिवार की जिम्मेदारियों का एहसास हुआ. मेरा परिवार बड़ा था. कमाने वालों में केवल मेरे पिता थे. मेरा बड़ा भाई बिलकुल गैरजिम्मेदार था. इसलिए मैं ने घरघर जा कर ट््यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया. बस जिंदगी यूं ही कट रही थी. कंधों पर आई जिम्मेदारी अचानक 2002 में मेरे पिता की मृत्यु हो गई. पिता की मृत्यु होने के कारण मृतक आश्रित कोटे में नौकरी की बात आई तो मेरी मां ने मुझे नौकरी करने को कहा तो मैं ने घर का जिम्मेदार बेटा होने का फर्ज निभाया. 2003 में मुझे इज्जतनगर रेलवे की वर्कशाप में ही तकनीकी विभाग में नौकरी मिल गई. उस समय मैं बीए की पढ़ाई कर रही थी और कत्थक नृत्य का प्रशिक्षण ले रही थी.

मेरा सपना था कि मैं कत्थक नृत्य में एमए करूं और उस के बाद उसी में अपना करियर बनाऊं. लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. मुझे रेलवे के कारखाने में नौकरी मिली, जहां मुझे एक आदमी की भांति ताकत का काम करना पड़ता था. बड़ेबड़े इंजनों के नट कसना होता था. पर शरीर इन सब को सहन नहीं कर पाता था. सब मजाक बनाते कि देखो कैसा नाजुक लड़का है. मैं उन को कैसे बताती कि मैं तन से न सही लेकिन मन से लड़की हूं, इसलिए शरीर भी वैसा ही ढल गया. मैं अकेले में बैठ कर खूब रोती थी कि मेरे साथ ये अन्याय क्यों हुआ. कभी मन करता कि मैं नौकरी छोड़ कर कहीं दूर भाग जाऊं, पर घर की जिम्मेदारी पर नजर डालती तो लगता पापा जो मेरे ऊपर जिम्मेदारी छोड़ गए हैं, उसे पूरा करना मेरा फर्ज है.

जैसेतैसे नौकरी करने लगी. पुरुषों से बात करने का मेरा मन नहीं होता था और स्त्रियों से मैं उतनी बात कर नहीं सकती थी क्योंकि उन की नजरों में भी तो मैं एक पुरुष ही थी. मेरे बड़े भाई का भी विवाह हो चुका था. नौकरी मिलने के बाद मैं ने बड़े भाई को रहने के लिए घर बनवा कर दिया. दोनों छोटी बहनों का विवाह किया. मेरे अंदर की जो लड़की थी, वह अंदर ही अंदर घुटती जा रही थी. समाज में मर्द बनने का नाटक करतेकरते मुझे खुद से चिढ़ सी होने लगी थी. वर्ष 2009 में बड़े भाई की अचानक मृत्यु हो गई. वह अपने पीछे पत्नी और 8 साल की बेटी छोड़ गए थे. उन दोनों की जिम्मेदारी भी मेरे कंधों पर आ गई. मेरे अंदर की लड़की पलपल अपनी खुशियों को मन में मार रही थी.

सोचती थी कि काश मेरा एक भाई और होता, जिस के ऊपर सारी जिम्मेदारियां डाल कर मैं कहीं अपनी दुनिया में भाग जाऊं, जहां खुल कर अपनी जिंदगी जी सकूं. अब मेरे अलावा घर में कोई लड़का नहीं था तो मां का, बहनों का और समाज का मुझ पर विवाह करने का दबाव बनाया जाने लगा. घर के लोगों को उम्मीद  थी कि मैं अपने वंश को आगे बढ़ाऊं. घर वालों ने कराया विवाह मेरे अंदर तब इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं खुल कर बता पाऊं कि मैं किसी लड़की के साथ विवाह कर के खुश नहीं रह पाऊंगी. न ही मैं विवाह कर के किसी लड़की की जिंदगी खराब करना चाहती थी. इसी बीच मेरा एक बौयफ्रैंड भी बना, पर समाज के डर से उस ने भी किसी लड़की से विवाह कर लिया.

2-3 सालों तक मैं अपने विवाह का मामला किसी तरह टालती रही. मैं अपने परिवार को अपने बारे में चाह कर भी बता नहीं पा रही थी. तब मैं ने सोचा कि मैं ने अपने परिवार के लिए जहां इतनी कुर्बानियां दी हैं, तो एक कुरबानी और दे देती हूं. शायद मेरा भी वंश बढ़ जाए और साथ ही साथ मैं अपने अंदर की लड़की को भी जीवित रख सकूंगी. परिवार और समाज को खुश करने के लिए मेरा भी सन 2012 में विवाह हो गया. मैं अंदर से रो रही थी और बाहर से खुश होने का नाटक कर रही थी. रत्ती भर खुशी नहीं थी मुझे अपने विवाह की. सुहागरात के समय भी मैं ने बहुत कोशिश की, लेकिन मुझे अपनी पत्नी के लिए कोई फीलिंग ही नहीं जगी. काली रात की तरह थी वह रात मेरे लिए, कुछ भी नहीं कर सकी.

हमारे संबंध नहीं बन सके. मैं समझ गई कि मैं किसी भी लड़की से संबंध नहीं बना सकती. जब तक मनमस्तिष्क में लड़की के लिए उत्तेजना या कामेच्छा पैदा नहीं होगी, कैसे कोई शारीरिक संबंध बना सकता है. मैं शारीरिक रूप से बिलकुल स्वस्थ थी. ऐसी कोई कमी नहीं थी, जिस से मैं अपने आप को नपुंसक समझती. क्योंकि जब मैं अपने पुरुष साथी के साथ शारीरिक संबंध बनाती तो मेरे शरीर के हर अंग में उत्तेजना होती थी. मैं उस रात बहुत रोई कि मैं ने यह क्या गलती कर दी, मेरी वजह से एक अंजान बेकसूर युवती की जिंदगी खराब हो गई थी. मेरी वजह से वह समाज की दिखावटी खुशियों की बलि चढ़ गई थी. मुझे खुद पर शर्म आने लगी.

तभी मैं ने फैसला किया कि मैं उस की जिंदगी में खुशियां लाऊंगी. क्योंकि उसे भी खुश रहने का, अपनी जिंदगी खुल कर जीने का हक था. कुछ महीने बीत जाने पर मैं ने धीरेधीरे उसे अपने बारे में बताना शुरू किया. हम अच्छे दोस्त बन गए. मैं ने उसे पूरी तरह से अपनी भावनाओं को खुल कर बताया. वह बहुत समझदार थी. मैं ने जब उसे बताया कि मैं अपने बारे में सब उस के परिवार को बताने जा रही हूं तो वह डर गई कि उस के परिवार को बहुत ठेस पहुंचेगी और गुस्से में आ कर उस के परिवार वाले उस पर पुलिस केस न कर दें. उस ने मुझे विश्वास दिलाया कि हम दोनों ऐसे ही पूरी जिंदगी काट लेंगे.

उसे भी समाज का डर सता रहा था कि लोग उस के परिवार के बारे में क्याक्या बातें करेंगे. लेकिन मुझे लगने लगा था कि मैं ने अब अगर अंदर से खुद को मजबूत नहीं किया तो उस की और मेरी जिंदगी घुटघुट कर कटेगी या तो वह आत्महत्या कर लेगी या मैं. मैं ने पत्नी के घर वालों को अपनी सच्चाई बताई तो पहले तो उन्हें बहुत गुस्सा आया, बाद में उन्हें यह जान कर सही लगा कि मैं ने उन से झूठ तो नहीं बोला, ईमानदारी से उन की बेटी की खुशियां चाहती हूं. 2014 में आपसी सहमति से मेरा पत्नी से तलाक हो गया. तलाक के पहले मेरी पत्नी के घर वालों ने मुझ से 8 लाख रुपए लिए, जिस से वे अपनी बेटी का विवाह कहीं और कर सकें. मैं ने वह रकम खुशीखुशी उन्हें दे दी, क्योंकि गलती तो मैं ने ही की थी, उस गलती के लिए यह बहुत छोटी रकम थी.

अब मैं फिर से आजाद थी, लेकिन इस के बाद तो मेरी जिंदगी और भी खराब हो गई. लोगों की नजरों में मेरी इमेज खराब हो गई थी. मेरी बहनों ने मुझ से बात करनी तक बंद कर दी. एक मेरी मां थी, जिन्होंने मुझे समझा. मैं ने सोचा कि अभी तक 32 साल मैं ने परिवार और समाज को खुश करने के लिए निकाल दिए, उस के बाद भी मुझे कुछ हासिल नहीं हुआ. बस फैसला कर लिया कि अब खुद के बारे में सोचना है. नौकरी से मैं ने लंबी छुट्टी ले ली. मैं पूरी तरह से लड़की बनना चाहती थी, लेकिन लड़की बनने से पहले मैं तीर्थस्थल गया में पिताजी का श्राद्ध करने गई. क्योंकि लड़की बनने के बाद मैं श्राद्ध कर नहीं सकती थी.

उस के बाद मैं ने इंटरनेट पर सर्च करना शुरू किया कि कोई डाक्टर मुझे लड़की का रूप दे सकता है कि नहीं. सर्च करने पर पता चला कि दिल्ली में बहुत से डाक्टर हैं, जो हारमोंस और सर्जरी के जरिए एक लड़के को लड़की जैसा शरीर दे देते हैं. औपरेशन के बाद बनी स्त्री काफी डाक्टरों के बारे में जानने के बाद मुझे दिल्ली में पीतमपुरा के एक हौस्पिटल में कार्यरत डा. नरेंद्र कौशिक सही लगे. मैं डा. कौशिक से मिली और पूरी बात बताई. उन्होंने मुझ से बात कर के जाना कि मैं इस इलाज के लिए किस हद तक तैयार हूं. मुझ से बात कर के जब वह संतुष्ट हुए, तब उन्होंने मेरा इलाज शुरू किया. यह सन 2016 की बात है. मैं ने हारमोंस की गोलियां और इंजेक्शन लेने शुरू कर दिए. लगभग 2 साल तक हारमोंस लेने के बाद मेरे शरीर में काफी बदलाव आ गए. इस पर दिसंबर 2017 में मेरी सैक्स चेंज की सर्जरी हुई.

डा. कौशिक के अलावा 2 और डाक्टर औपरेशन के समय मौजूद रहे. सर्जरी करने में लगभग 8 घंटे का समय लगा. इस पूरे इलाज का कुल खर्च करीब 7 लाख रुपए आया था. इलाज के बाद मैं पूरी तरह से लड़की बन गई थी. इस के बाद तो जैसे मेरी खुशियों को पंख लग गए. दूसरा जन्म हुआ था यह मेरा सोनिया पांडेय के रूप में. राजेश पांडेय नाम के लड़के की पहचान हटा कर मैं सोनिया पांडेय नाम की पहचान से जिंदगी जीने के लिए आगे बढ़ने को तैयार थी. बहुत खुश हूं जो खुद को पा लिया मैं ने. आत्मा और शरीर एक हो चुके थे मेरे. समय के साथसाथ समाज का नजरिया बदला और मुझे समाज से प्यार और इज्जत भी मिलने लगी है. नए मित्र बन गए हैं, जो हर कदम पर मेरे साथ खड़े हैं.

लोगों से मिल कर बताती हूं कि खुद को पहचानना सीखो. यह जिंदगी मिली है तो इसे खुल के जियो और जीने दो. अब एक नई जंग मेरा इंतजार कर रही थी. मैं खुद को पाने की लड़ाई में खुद से, परिवार से और समाज से तो लड़ चुकी थी, अब लड़ाई थी अपनी कानूनी पहचान पाने की क्योंकि मेरे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और सर्विस रिकौर्ड में मेरा नाम राजेश पांडेय ही था. 2018 में मैं ने रेलवे के प्रशासनिक अधिकारियों को अपने जेंडर में परिवर्तन करने के लिए एप्लीकेशन दी तो उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि रेलवे में ऐसा कोई नियम नहीं है, जिस के तहत रिकौर्ड में लिंग परिवर्तन कराया जा सके.

इस के बाद मैं ने पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर हैडक्वार्टर में 80 पेज की एक फाइल बना कर भेजी, जिस में उन्हें बताया गया कि भारत में कोई भी नागरिक स्वेच्छा से अपना लिंग चुनने के लिए स्वतंत्र है. मैं औफिस के चक्कर लगाती रही, क्योंकि मुझे जवाब चाहिए था रेलवे के अधिकारियों से. अगर रेलवे बोर्ड मेरे आवेदन को निरस्त कर देता तो मैं अपनी पहचान पाने के लिए हाईकोर्ट भी जाने को तैयार थी. बाद में इज्जतनगर के मुख्य कारखाना प्रबंधक एवं मुख्य कार्मिक अधिकारी ने मेरे मामले में दिलचस्पी ली. जिस में मेरे सीडब्ल्यूएम राजेश कुमार अवस्थी की मुख्य भूमिका रही.

तब कहीं जा कर सितंबर, 2019 में रेलवे ने मेरा मैडिकल कराया. मार्च 2020 में रिकौर्ड में मेरा नाम और लिंग बदल कर नाम सोनिया पांडेय कर दिया. अब मैं बहुत खुश हूं. मेरी अपनी आगे की जिंदगी में ईमानदारी और सम्मान से जीने की जंग जारी है. Short Story

UP Crime News : प्रेमी कर देते हैं प्रेमिका के जिस्म का सौदा

UP Crime News : संगीता 3 बच्चों की मां थी, लेकिन पति के दोस्त रोहित से प्रेम कर बैठी. ये प्रेम इतना गलत नहीं था, जितना रोहित का संगीता को अपने 2 दोस्तों को उपहार में देने की कोशिश करना. इस के बाद संगीता के साथ जो हुआ, वो हर औरत को याद रखना चाहिए.

20 मार्च, 2025 की रात 8 बजे रोहित वाल्मीकि 2 साथियों के साथ झांसी के लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला में रहने वाली अपनी प्रेमिका संगीता के घर पहुंचा. रोहित ने दरवाजा थपथपाया तो कुछ पल बाद संगीता ने दरवाजा खोला. सामने रोहित को देख कर संगीता का चेहरा खिल उठा. वह बड़ी अदा से बोली, ”बड़ी देर कर दी रोहित. कब से मैं तुम्हरा इंतजार कर रही थी. खैर, कोई बात नहीं, अंदर आओ.’’

रोहित व उस के दोनों साथी घर के अंदर पहुंचे और आंगन में बिछी चटाई पर जा कर बैठ गए. रोहित ने दाएंबाएं नजर दौड़ाई फिर पूछा, ”संगीता, रविंद्र भाई नजर नहीं आ रहे. क्या वह गला तर करने ठेके पर गए है?’’

”जेब गरम होती तो शायद चले भी जाते, लेकिन जेब खाली है तो कमरे में पड़े हैं. कई बार वह भी पूछ चुके हैं कि रोहित नहीं आया?’’

इस के बाद संगीता ने आवाज लगाई तो उस का पति रविंद्र कमरे से बाहर आ गया और रोहित को देख कर बोला, ”आ गए भाई. बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था. दारू के बिना गला सूख रहा था.’’

”रविंद्र भाई, अब इंतजार की घड़ी खत्म. छक कर दारू पियो और सब कुछ भुला दो. आज मैं एक नहीं, 4 बोतलें ले कर आया हूं.’’ कहते हुए रोहित ने शराब की 4 बोतलें व नमकीन झोले से निकाल कर सामने रख दी. शराब देख कर रविंद्र व संगीता की जीभ लपलपाने लगी.

इसी समय सामने बैठे 2 युवकों को देख कर संगीता ने पूछा, ”रोहित, ये दोनों कौन हैं? इस के पहले मैं ने इन को तुम्हारे साथ कभी नहीं देखा?’’

”संगीता, तुम इन्हें नहीं जानती हो. ये दोनों मेरे दोस्त हैं. जैसे तुम्हारे घर में महफिल जमती है, उसी तरह इन के साथ ठेके पर कभीकभी महफिल जमती है.’’ रोहित ने इशारे से बताया, ”यह पवन खटीक है और यह कल्लू है. आज की पार्टी इन्हीं की तरफ से है.’’

”किस खुशी में पार्टी कर रहे हैं?’’ संगीता ने दोनों पर निगाह जमाते हुए पूछा.

”इस बात की जानकारी हम बाद में देंगे. अभी तुम महफिल सजाओ.’’ रोहित बोला.

संगीता ने अपने बच्चों को मकान की दूसरी मंजिल पर रहने वाली किराएदार शकुंतला के कमरे में भेज दिया. इस के बाद संगीता ने गिलास व पानी का इंतजाम किया फिर उस ने अपने हाथों से 5 पैग बनाए और पति, प्रेमी व प्रेमी के साथ आए पवन व कल्लू को एकएक गिलास थमाया और स्वयं भी गिलास थाम कर उन के साथ शराब पीने लगी. इसी बीच रोहित रविंद्र को कमरे में ले गया और बोला, ”रविंद्र भाई, आज रात मेरे अलावा मेरे दोस्त पवन व कल्लू भी संगीता के साथ मौजमस्ती करेंगे. उन्होंने पार्टी का इंतजाम तो किया ही है. साथ में नजराना भी दिया है.’’ कहते हुए रोहित ने जेब से कुछ रुपए निकाले और रविंद्र के हाथ पर रख दिए.

रुपया जेब में रखते हुए रविंद्र बोला, ”रोहित, संगीता हम दोनों का साझा प्यार है. जब तुम्हें कोई ऐतराज नहीं तो मुझे भी कोई ऐतराज नहीं.’’

दारू पीने के बाद पवन व कल्लू घर से चले गए. जाते समय रोहित ने उन दोनों से कहा कि संगीता का पति मान गया है. कुछ देर में वह संगीता को भी राजी कर लेगा. तुम दोनों उस के फोन का इंतजार करना. उस के बाद आ जाना और रात भर मौजमस्ती करना.

पवन व कल्लू के जाने के बाद रोहित संगीता को कमरे में ले गया. यहां संगीता, रोहित व रविंद्र ने खूब जाम से जाम टकराए. शराब पीने के दौरान ही रोहित बोला, ”संगीता, तुम पूछ रही थी कि मेरे दोस्तों ने किस खुशी में पार्टी दी है? तो सुनो मैं ने उन से एक वादा किया है.’’

”कैसा वादा?’’ संगीता ने रोहित को घूरते हुए पूछा.

”यही कि वे रात भर तुम्हारे साथ मौजमस्ती करेंगे.’’

”क्या!’’ संगीता चौंकी. फिर नाराज हो कर बोली, ”देखो रोहित, मैं तुम से प्यार करती हूं, इसलिए तुम्हें जिस्म से खेलने देती हूं. मैं कोई वेश्या नहीं कि हर किसी को जिस्म सौंप दूं. मैं एक बार पति से विश्वासघात कर चुकी हूं. दोबारा नहीं करूंगी.’’

”मैं ने रविंद्र भाई से बात कर ली है. उन्हें कोई ऐतराज नहीं है.’’ रोहित बोला.

यह सुन कर संगीता पति पर बिफर पड़ी, ”कैसा मर्द है तू. अपनी पत्नी के तन का ही सौदा कर दिया. सौदा करते समय तुझे जरा भी शर्म नहीं आई. चुल्लू भर पानी में डूब मर.’’

रविंद्र दांत निपोरते हुए बोला, ”ज्यादा सतीसावित्री मत बन. जैसे रोहित को खुश करती है, वैसे ही उस के दोस्तों को भी खुश कर दे. इस में हर्ज ही क्या है?’’

रोहित और रविंद्र दोनों ने संगीता को जिस्म सौैंपने के लिए मनाने की कोशिश की. लेकिन जब वह राजी नहीं हुई तो दोनों ने मिल कर संगीता की जम कर पिटाई की. रोहित संगीता का सिर दीवार पर पटकने लगा. पति व प्रेमी की पिटाई से संगीता चीखने लगी, ”बेटी पिंकी, तुम कहां हो. मुझे बचा लो. ये राक्षस मुझे पीटपीट कर मार डालेंगे.’’

मम्मी की ‘बचाओ…बचाओ’ की चीखें सुन कर 12 वर्षीया पिंकी नीचे आई और कमरे का दरवाजा पीटना शुरू किया. कुछ देर बाद रोहित ने आधा दरवाजा खोला. पिंकी कमरे में घुसने को बढ़ी तो रोहित ने उसे बाहर ढकेल दिया और बोला, ”यह लो 100 का नोट और खानेपीने की चीज ले कर छत पर चली जाना.’’ लेकिन पिंकी ने पैसे नहीं लिए. उस के बाद रोहित ने कमरा अंदर से बंद कर लिया. कमरे में संगीता पलंग पर बैठी थी. रोहित ने उसे दबोच लिया और उस के साथ मनमानी की. रोहित ने एक बार फिर संगीता को मनाने की कोशिश की. इस पर वह बोली कि वह किसी कीमत पर अपने जिस्म का सौदा नहीं करेगी.

उस ने रोहित से यह भी कहा कि उसे दोस्तों को खुश करना है तो अपनी मांबहन का सौदा क्यों नहीं कर देता.

यह सुनते ही रोहित के तनबदन में आग लग गई. उस ने संगीता को फिर पीटा और तकिया से मुंह दबा कर उस की आवाज सदा के लिए बंद कर दी. उस के बाद बाकी बची शराब रोहित ने रविंद्र के साथ पी. फिर रविंद्र बेसुध हो कर सोफे पर लुढ़क गया और रोहित संगीता के पलंग पर पसर गया. इधर संगीता की बेटी पिंकी किराएदार शकुंतला के कमरे में पहुंची. वह बेहद डरी हुई थी. उस ने शकुंतला आंटी को बताया कि रोहित अंकल मम्मी को पीट रहे हैं. मम्मी बचाने की गुहार लगा रही हैं. उन्हें बचा लो.

मासूम पिंकी की बात सुन कर शकुंतला उसे साथ ले कर नीचे आई. लेकिन अब तक कमरे में चीखें बंद हो गई थीं. शकुंतला ने दरवाजा खटखटाया, आवाज भी लगाई. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. शकुंतला ने तब अड़ोसपड़ोस के लोगों को बुला लिया और डायल 112 नंबर पर फोन कर के पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पर पुलिस आ गई. एसआई ए.के. सिंह ने दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे. मामला संगीन समझ कर उन्होंने सूचना झांसी थाना कोतवाल को दी. यह मामला लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला का था.

खबर मिलते ही थाना कोतवाली के एसएचओ राजेश पाल पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंच गए. उस समय मकान के बाहर भीड़ जुटी थी. किराएदार शकुंतला ने इंसपेक्टर राजेश पाल को बताया कि घर के अंदर आंगन से सटे कमरे में रविंद्र उस की पत्नी संगीता तथा दोस्त रोहित मौजूद हैं. कमरा अंदर से बंद है. कुछ देर पहले संगीता की चीखें सुनी गई थीं. अब सब कुछ शांत है.

इंसपेक्टर राजेश पाल ने कमरे का दरवाजा खुलवाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन जब असफल रहे, तब सहयोगी पुलिसकर्मियों की मदद से दरवाजा तोड़ दिया और कमरे में प्रवेश किया. कमरे का दृश्य दिल कंपा देने वाला था. कमरे में पलंग पर संगीता मृत पड़ी थी. उसी के बगल में उस का प्रेमी रोहित नशे में धुत पड़ा था. सोफे पर संगीता का पति रविंद्र नशे की हालत में पसरा पड़ा था. नशे में धुत होने की वजह से दोनों को होश नहीं था. संगीता का शव अर्धनग्न अवस्था में था. देखने से ऐसा लग रहा था कि उस के साथ जोरजबरदस्ती की गई थी. संगीता की आंख, कान, सिर व गरदन पर चोटों के निशान थे. कमरे में शराब की दुर्गंध फैली हुई थी. सामान भी अस्तव्यस्त था.

ऐसा लग रहा था कि संगीता ने मृत्यु पूर्व संघर्ष किया था. कमरे में शराब की खाली बोतलें, डिसपोजल गिलास तथा प्लेट में कुछ नमकीन पड़ी थी. आंगन में चटाई बिछी थी और वहां भी शराब की एक खाली बोतल व गिलास पड़े थे. मामले की गंभीरता को समझते हुए एसएचओ राजेश पाल ने संगीता की हत्या की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद ही झांसी की एसएसपी सुधा सिंह, एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह तथा सीओ (सिटी) स्नेहा तिवारी घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फील्ड यूनिट को भी बुला लिया.

अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका का पति रविंद्र और प्रेमी रोहित इस हालत में नहीं थे कि वे कुछ भी बता सकें. अत: उन्हें थाना कोतवाली में भिजवा दिया. फील्ड यूनिट ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए. फील्ड यूनिट ने पलंग, दीवार आदि से फिंगरप्रिंट लिए तथा कमरे से शराब की 3 बोतलें तथा आंगन से एक बोतल तथा खाली गिलास सुरक्षित किए. यूनिट ने वह तकिया भी सुरक्षित किया, जिस पर खून लगा था. जांचपड़ताल के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए झांसी जिला अस्पताल भिजवा दिया.

घटनास्थल पर मृतका संगीता की बड़ी बेटी पिंकी मौजूद थी. उस ने सीओ (सिटी) स्नेहा तिवारी को बताया कि रात 8 बजे रोहित अंकल अपने साथी कल्लू व पवन के साथ घर आए थे. उन सब ने मम्मीपापा के साथ बैठ कर शराब पी. कुछ देर बाद कल्लू व पवन चले गए. रोहित अंकल मम्मी को साथ ले कर कमरे में चले गए. पापा भी कमरे में ही थे. कुछ देर बाद कमरे से मम्मी की चीखें सुनाई दीं तो वह उन्हें बचानेे पहुंची, लेकिन रोहित अंकल ने कमरे में अंदर नहीं जाने दिया. रोहित अंकल ने ही मम्मी की हत्या की है.

किराएदार शकुंतला ने बताया कि वह 15 दिन पहले ही यहां आई थी. यहां का माहौल ठीक नहीं था. संगीता पति व प्रेमी के साथ बैठ कर शराब पीती थी. आज रात भी पार्टी की गई थी. कुछ देर बाद संगीता की बेटी आई और बताया कि रोहित उस की मम्मी को पीट रहा है. मां चीख रही है. उस की गुहार पर वह नीचे गई. दरवाजा थपथपाया, नहीं खुला तो पुलिस को सूचना दी. इधर रोहित और रविंद्र रात भर हवालात में बंद रहे. सुबह जब नशा उतरा तो खुद को हवालात में पाया. दोनों समझ गए कि उन्हें क्यों हवालात में डाला गया है. हत्या का रहस्य जानने के लिए एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह कोतवाली पहुंचे.

संगीता

इंसपेक्टर राजेश पाल ने दोनों को हवालात से बाहर निकलवाया और एसपी साहब के समक्ष पेश किया. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने उन दोनों से पूछताछ की तो रोहित ने आसानी से संगीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. रविंद्र कुछ भी नहीं बोला. उस की आंखों सें आंसू टपकते रहे. अब तक बहू की हत्या व बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी पा कर मृतका की सास गिरजा देवी व ससुर तुलसीदास अहिरवार भी कोतवाली आ गए थे. एसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पहले वे बेटेबहू के साथ ही रहते थे. लेकिन जब रविंद्र और संगीता शराब पीने लगे और संगीता अपने आशिक रोहित के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी, तब वे छोटे बेटे के साथ गांव में रहने लगे.

प्रेमी

तुलसीदास ने यह भी बताया कि उन के बड़े भाई रतनलाल अहिरवार बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे. पहले उन का घर आनाजाना बना रहता था, लेकिन जब बहू संगीता शराब पीने लगी और मर्यादाओं की सीमा लांघने लगी, तब मंत्रीजी ने नाता तोड़ दिया और दूरियां बना लीं. चूंकि रोहित व रविंद्र ने संगीता की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था. अत: इंसपेक्टर राजेश पाल ने संगीता के देवर अरविंद को वादी बना कर बीएनएस की धारा 103 के तहत रोहित वाल्मीकि व रविंद्र अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पति

पुलिस जांच तथा आरोपियों से की गई पूछताछ से संगीता हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है. उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है झांसी. इसी झांसी शहर के थाना कोतवाली अंतर्गत आता है लक्ष्मी गेट बाहर मोहल्ला. तुलसीदास अहिरवार सपरिवार इसी मोहल्ला में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी गिरजा देवी के अलावा 2 बेटे थे रविंद्र व अरविंद. तुलसीदास अहिरवार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे. विश्वविद्यालय से मिलने वाले वेतन से वह परिवार का भरणपोषण करते थे. बड़े भाई रतनलाल अहिरवार बसपा सरकार में राज्यमंत्री थे, इसलिए बिरादरी में मानसम्मान था.

तुलसीदास का बड़ा बेटा रविंद्र ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था. वह डेकोरेशन का काम करता था. वह शराब का लती था. वह अपनी कमाई का सारा पैसा शराब पीनेपिलाने में ही खर्च कर देता था. उस के मम्मीपापा ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उस की शराब की लत नहीं छूटी. तुलसीदास और उन की पत्नी गिरजा देवी का मानना था कि यदि रविंद्र के पैरों में शादी रूपी बेडिय़ां डाल दी जाए तो शायद वह सुधर सकता है. इसी उद्ïदेश्य से वह रविंद्र की शादी के लिए लड़की की तलाश में जुट गए. लेकिन सवाल था कि शराबीकबाबी को लड़की कौन दे? वह जहां भी जाते, मुंह की खाते, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आखिर उन्होंने रविंद्र का रिश्ता संगीता के साथ पक्का कर दिया.

संगीता के पापा कांशीराम अहिरवार कालपी कस्बा के रहने वाले थे. 3 बच्चों में संगीता सब से बड़ी थी. संगीता बेहद खूबसूरत, फैशनपरस्त व चंचल स्वभाव की थी. कांशीराम प्राइवेट नौकरी करते थे, इसलिए उन्होंने रविंद्र के संबंध में बिना कुछ जानेसमझे बेटी का रिश्ता मंजूर कर लिया. इस के बाद 5 फरवरी, 2011 को संगीता का विवाह रविंद्र के साथ हो गया. शादी के बाद संगीता रविंद्र की दुलहन बन कर ससुराल पहुंची तो सभी खुश थे, लेकिन संगीता खुश नहीं थी. संगीता ने किसी मजदूर को पति के रूप में पाने की कल्पना नहीं की थी. उस ने तो फिल्मी हीरो जैसे युवक की छवि मन में बसा रखी थी.

संगीता के दिल को दूसरी ठेस तब लगी, जब रविंद्र उस के थोड़ा और करीब आया. उस की सांसों से शराब की महक आ रही थी. संगीता ने मुंह दूसरी ओर घुमा लिया, ”तुम शराब पीए हो.’’

”आज खुशी का दिन है न, इसलिए दोस्तों के साथ हलक तर कर लिया.’’ रविंद्र बेहयाई से हंसने लगा, ”वैसे भी शराब के बिना शबाब का मजा थोड़े ही आता है.’’

संगीता कुढ़ गई और उस का मन पति से खट्टा हो गया. इस के बावजूद उसे पत्नी का धर्म निभाना पड़ा. संगीता को अपने सपने जैसा पति नहीं मिला था, इस के बावजूद उस ने नियति का लिखा मान कर संतोष कर लिया था. पति की नशे की लत छुड़ाने के लिए उस ने भरसक प्रयास किया, मगर रविंद्र ने शराब से तौबा नहीं की. शादी के एक साल बाद संगीता ने बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम पिंकी रखा. इस के बाद 4 सालों में वह एक बेटी व एक बेटे की मां और बनी. वर्तमान में पिंकी की आयु 12 वर्ष है. समय के साथ संगीता व रविंद्र की उम्र भी बढ़ती गई.

एक ओर जहां शराब की लत ने रविंद्र को खोखला कर दिया, वहीं संगीता की हसरतें अब भी जवान थीं. पहले वह खुशी का बहाना बना कर शराब पीता था, अब एक्स्ट्रा पावर अर्जित करने के लिए शराब को गले लगाने लगा. लेकिन हुआ इस के विपरीत. ज्यादा नशा करने से उस की सैक्स की उमंग जागनी लगभग बंद हो गई. इन्हीं दिनों रविंद्र की दोस्ती रोहित वाल्मीकि से हो गई. वह ओरछा गेट का रहने वाला था. वह भी डेकोरेशन का काम करता था. एक शादी समारोह में सजावट करने के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी. चूंकि रोहित भी शराब का आदी था. अत: दोनों में जल्दी ही यारी हो गई. पहले दोनों साथ में ठेके पर पीते थे, फिर उन की महफिल रविंद्र के घर भी जमने लगी.

रोहित वाल्मीकि मजबूत शरीर वाला बांका जवान था. संगीता से उस की उम्र भी कम थी. संगीता ने जब रोहित को पहली बार देखा, तभी मन में दबी हुई तमन्ना जोर मारने लगी, ‘मेरी शादी इस से हुई होती तो जिंदगी बहारों से भरी होती.’ यही कारण था कि रोहित का आना, उस को देखना, उस से बातें करना संगीता को अच्छा लगता था. वह उसे रिझाने का भी प्रयत्न करने लगी थी. रोहित का रविंद्र के घर आनाजाना शुरू हुआ तो संगीता से भी नजदीकियां बढऩे लगीं. संगीता से रिश्ता भी भाभी का था. 3 बच्चों की मां बन जाने के बाद भी संगीता का यौवन अभी ढला नहीं था. संगीता की आंखों में जब रोहित को एक मूक आमंत्रण दिखने लगा तो कामना की प्यास बढ़ गई.

रविंद्र की कमजोरी शराब थी. उसे अंगूर की बेटी सुहाती थी. अत: आए दिन शराब की महफिल रविंद्र के घर सजने लगी. रोहित उसे मुफ्त में शराब पिलाता और उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. रोहित का घर आनाजाना बढ़ा तो संगीता समझ गई कि रोहित पर उस के हुस्न का जादू चल गया है. दोनों ही समझ गए थे कि एक को हुस्न की तलब है तो दूसरे को इश्क की. बेताबी दोनों ओर बढ़ती गई. एक रोज रोहित ने संगीता को पाने का मन बनाया और वह काम पर न जा कर दोपहर को रविंद्र के घर पहुंच गया. संगीता उस वक्त घर मेें अकेली थी. बच्चे स्कूल गए थे और रविंद्र काम पर.

सासससुर गांव में थे. मौका अच्छा था. रोहित को देख कर संगीता के होंठों पर मानीखेज मुसकान बिखरी और उस ने पूछा, ”तुम तो शाम को अंगूर की बेटी को होंठों पर लगाने यहां आते थे, आज दिन में रास्ता कैसे भूल गए?’’

”संगीता भाभी, अंगूर की बेटी से होंठों की प्यास बुझती कहां है, उल्टा और भड़क जाती है. सोचा, आज शराब से भी ज्यादा नशीली, उस से ज्यादा मादक अपनी भाभी का नशा कर लूं.’’ रोहित ने उस के कंधों पर हाथ रख दिए. संगीता तो कामातुर थी ही. अत: वह भी रोहित की छाती सहलाने लगी. रोहित का हौसला बढ़ा तो उस ने संगीता को बांहों में भर लिया और उस के नाजुक अंगों को सहलाने लगा. इस छेड़छाड़ को संगीता ज्यादा देर तक सहन न कर सकी. वह भी उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. कुछ देर बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव थे.

उस रोज के बाद रोहित व संगीता मौका मिलते ही अपनी हसरतें पूरी कर लेते. पति व प्रेमी की शराब पार्टी में अब संगीता भी शामिल होने लगी. शाम को रोहित के आते ही संगीता महफिल सजाती फिर अपने हाथों से 3 पैग बनाती, एक पैग पति को दूसरा पैग प्रेमी को और तीसरा पैग स्वयं हाथों में थामती. फिर जाम से जाम टकरा कर तीनों शराब पीते. शुरू में संगीता कम पीती थी, लेकिन बाद में जम कर पीने लगी. रोहित की जिद पर संगीता शराब पीने लगी थी.

एक रोज गिरजा देवी ने बहू संगीता को बेटे व उस के दोस्त के साथ शराब पीते देखा तो उस के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. वह जान गई कि बेटाबहू बिगड़ गए हैं. उसे यह भी पता चल गया कि बहू मर्यादा की देहरी लांघ कर गैरमर्द के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी है. गिरजा देवी ने बेटेबहू को फटकार लगाई तो दोनों उसी पर हावी हो गए. उन दोनों ने साफ कह दिया कि वे रोज शराब पीएंगे. देख सको तो साथ रहो, वरना गांव चले जाओ. बेटेबहू के कारण जब बिरादरी में थूथू होने लगी, तब गिरजा देवी अपने पति तुलसीदास व छोटे बेटे अरविंद के साथ गांव दोन में रहने लगी. यहां पैतृक मकान व कुछ जमीन थी.

तुलसीदास अब तक रिटायर हो चुके थे. उन्हें 20 हजार रुपया पेंशन मिलती थी. संगीता ने सासससुर का पीछा यहां भी नहीं छोड़ा. वह हर महीने गांव आती और सासससुर से लड़झगड़ कर पेंशन के पैसे से 5 हजार रुपया ले जाती थी. सासससुर गांव में रहने लगे तो संगीता पूरी तरह से स्वच्छंद हो गई. शाम को रोहित आता फिर तीनों की महफिल जमती. संगीता और रोहित जानबूझ कर रविंद्र को ज्यादा शराब पिला देते. जब वह टुन्न हो कर सोफे पर लुढ़क जाता तो रोहित संगीता को ले कर कमरे में पहुंच जाता और दोनों मौजमस्ती करते.

रविंद्र ने अपनी अधखुली आंखों से कई बार रोहित और संगीता को रंगरलियां मनाते देखा था, लेकिन कभी टोकाटाकी नहीं की. कारण, रोहित मुफ्त में उसे शराब पिलाता था और उस की आर्थिक मदद भी करता था. विरोध करने पर यह सब बंद हो जाता और संगीता भी धोखा दे सकती थी. अत: मुंह बंद रखने में ही उस ने अपनी भलाई समझी. रोहित और संगीता इतने निर्लज्ज हो गए थे कि शराब पीने के बाद रविंद्र के सामने ही कमरे में पलंग पर लुढ़क जाते थे. रविंद्र तब आंगन में पड़े तख्त पर पसर जाता. रोहित वाल्मीकि, संगीता को पत्नी से कम नही समझता था. वह अपनी कमाई भी संगीता को देता था. संगीता भी उस की दीवानी थी, सो हर बात उस की मानती थी.

रोहित वाल्मीकि के 2 अन्य दोस्त पवन खटीक व कल्लू थे. ये दोनों उस के साथ ही काम करते थे. पीनेखाने के दौरान रोहित अपने व संगीता के अंतरंग क्षणों के बारे में दोस्तों को बताता था, जिस से वे दोनों भी संगीता के जिस्म को पाने के लिए लालायित रहते थे. एक रोज पवन खटीक ने रोहित से कहा कि उन दोनो की दोस्ती भी संगीता से करा दे. रोहित ने पहले तो साफ मना कर दिया, लेकिन बाद में शराब पार्टी व 5 हजार रुपया नकद देने पर रोहित ने संगीता के जिस्म का सौदा कर दिया.

रोहित को पक्का यकीन था कि संगीता उस की बात मान लेगी और उस के पति को भी रुपयों का लालच दे कर राजी कर लेगा. 20 मार्च, 2025 को रोहित ने पवन खटीक व कल्लू को साथ लिया और रात 8 बजे शराब की पार्टी के लिए प्रेमिका संगीता के घर पहुंच गया. वहां रविंद्र, संगीता, रोहित व उस के दोनों दोस्तों ने शराब पी. शराब पीने के बाद कल्लू व पवन, रोहित के इस आश्वासन पर वहां से चले गए कि संगीता को राजी करने के बाद वह फोन कर दोनों को बुला लेगा. रोहित ने दोस्तों के जाने के बाद संगीता से बात की. लेकिन संगीता दोस्तों का बिछौना बनने को राजी नहीं हुई. इसी बात को ले कर रविंद्र और रोहित ने संगीता की जम कर पिटाई की, फिर तकिए से मुंह दबा कर मार डाला.

22 मार्च, 2025 को पुलिस ने आरोपी रविंद्र अहिरवार तथा रोहित वाल्मीकि को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. मृतका संगीता के तीनों बच्चे अपनी दादी व बाबा के संरक्षण में रह रहे थे. UP Crime News

—कथा में पिंकी परिवर्तित नाम है.