Aligarh News: एक जुर्म दीवाने की खातिर

Aligarh News: पति यूसुफ के घर से निकलते ही तबस्सुम ने योजनानुसार प्रेमी दानिश को फोन कर दिया था. इस बात की जानकारी किसी को नहीं हो सकी. यूसुफ जब शाम को काम से वापस घर नहीं आया, तब फेमिली वालों को चिंता हुई. यूसुफ के साथ फिर क्या हुआ? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

दानिश और तबस्सुम का 4 सालों तक प्यार परवान चढ़ता रहा, लेकिन अब यूसुफ की दखलंदाजी से दोनों परेशान रहने लगे. फोन पर भी अब तबस्सुम दानिश से डरडर कर कम ही बात कर पाती थी. प्रेमी और प्रेमिका दोनों ही बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगे. जब दोनों को एकदूसरे की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो यूसुफ से छुटकारा पाने के लिए उस की हत्या करने का प्लान बनाया. 29 जुलाई, 2025 को यूसुफ घर से टिफिन ले कर मंडी जाने के लिए घर से निकला था, रास्ते में उसे दानिश ने रोक कर कहा, ”यूसुफ यहां पर सारे दिन काम करने पर भी मिलने वाले पैसों से तुम्हारा काम नहीं चलेगा. मेरे साथ चलो, कासगंज में मेरी जानपहचान है. वहां पर अच्छा काम दिलवा दूंगा.’’

अपने दोस्त दानिश की बातों में आ कर यूसुफ उस की स्कूटी पर बैठ गया. दानिश यूसुफ को अपनी स्कूटी पर बैठा कर कासगंज की ओर ले गया. रास्ते में टिफिन से खाना खाने के बहाने दानिश यूसुफ को विलराम क्षेत्र में स्थित बंद पड़े एक ईंट भट्ठे पर ले गया. दानिश ने अपने लिए खाना पहले ही एक होटल से ले लिया था. भट्ठे पर पहुंच कर दोनों ने वहां बैठ कर अपनाअपना खाना खाया. खाना खाने के बाद दोनों वहीं आराम करने लगे. खाना खाने के कुछ देर बाद ही यूसुफ बेहोश हो गया. तब दानिश ने उस के दोनों हाथ पीछे बांध दिए और अपने साथ लाए छुरे को स्कूटी से निकाल कर यूसुफ के पेट में वार कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद भी उसे तसल्ली नहीं हुई और अपने साथ लाए तेजाब से उस का चेहरा जला कर शव को वहां उगी झाडिय़ों में फेंक कर अपनी स्कूटी से भाग गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश ने काम होने की पूरी जानकारी मोबाइल से अपनी प्रेमिका तबस्सुम को दे दी. इस के बाद दानिश अपने घर आ गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश और तबस्सुम खुश थे. दोनों की फोन पर बातें होती रहती थीं. दोनों साथ रहने का प्लान बना रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

2 अगस्त, 2025 की शाम को कासगंज जिले की बिलराम पुलिस चौकी के गांव नगला छत्ता में बंद पड़े एक ईंट भट्ठे के पास झाड़ी में एक अज्ञात व्यक्ति का अधजला हुआ शव मिला. युवक का शव मिलने की जानकारी जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों की भीड़ एकत्र हो गई. कुछ लोग कह रहे थे कि यह आशिकी के चक्कर में मारा गया है, जबकि कुछ का कहना था कि पैसों के लेनदेन के पीछे हत्या हुई है. जितने मुंह उतनी बातें वहां होने लगी.

लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दी, पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. शव कई दिन पुराना होने के चलते उस में कीड़े पनप गए थे.  मृतक के दोनों हाथ पीछे रस्सी से बंधे हुए थे. शव को देखने से प्रतीत हो रहा था कि पेट में किसी धारदार हथियार से वार कर के मौत के घाट उतारा गया था. शव को पेट्रोल या तेजाब से जला दिया गया था, ताकि उस की शिनाख्त न हो सके. सूचना मिलने पर एसपी (देहात) अमृत जैन भी फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए. शव की पहचान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन शव की पहचान न होने पर पुलिस समझ गई कि युवक कहीं बाहर का है और उस की हत्या यहां ला कर की गई है.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को मोर्चरी भिजवा दिया. इस के बाद आसपास  के थानों व जिलों से लापता लोगों के बारे में जानकारी की गई. पुलिस को पता चला कि थाना छर्रा के धनसारी गांव का यूसुफ पिछले कई दिनों से लापता है. इस पर पुलिस ने बिना देर किए यूसुफ के फेमिली वालों से संपर्क किया. यूसुफ के फेमिली वाले जब थाने पहुंचे तो उन्होंने कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की शिनाख्त यूसुफ के रूप में की. 29 जुलाई, 2025 की शाम के 6 बज चुके थे और 27 वर्षीय यूसुफ अभी तक गल्ला मंडी से वापस नहीं लौटा था. यूसुफ गल्ला मंडी में काम करता था. दोनों बच्चे शाम होते ही बेसब्री से अपने पापा का इंतजार करने लगते थे, क्योंकि यूसुफ बच्चों के लिए खानेपीने और कभीकभी कोई खिलौना ले कर जरूर आता था.

सुबह से शाम हो गई और जब रात घिरने लगी तो बड़े बेटे असलान ने अपनी मम्मी तबस्सुम से पूछा, ”मम्मी, पापा अब तक क्यों नहीं आए हैं? वैसे तो वो शाम तक आ जाते थे.’’

”बेटा, पापा को आज ज्यादा काम मिल गया होगा, इसलिए उन्हें आने में देर हो गई है.’’ तबस्सुम ने कहा.

जब रात के 9 बज गए, तब यूसुफ के पिता भूरे खां ने बहू तबस्सुम से पूछा, ”बहू, यूसुफ सुबह जाते समय क्या कह गया था कि वह देर से घर आएगा?’’

इस पर तबस्सुम ने जबाव दिया, ”नहीं पापाजी, वह मुझ से तो कुछ कह नहीं गए थे. मैं ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. मुझे लगा कि कहीं काम में फंस गए होंगे. उन्होंने वापस कौल भी नहीं की.’’

यह सुन कर भूरे खां को चिंता हुई. यूसुफ सुबह गल्ला मंडी जा कर शाम को घर लौट आता था, लेकिन आज उस ने फोन कर के भी नहीं बताया कि वह देरी से आएगा. उन्होंने सोचा कि इस समय तो गल्ला मंडी भी बंद हो चुकी होगी. बेटे को तलाशें तो तलाशें कहां? फिर भी उन्होंने स्वजनों के साथ यूसुफ को ढंूढा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. अलीगढ़ के थाना छर्रा के गांव धनसारी निवासी भूरे खां व उन के फेमिली वालों ने यूसुफ के इंतजार में पूरी रात आंखों में काटी. सुबह होते ही भूरे खां ने फेमिली वालों के साथ गल्ला मंडी जा कर बेटे की तलाश की. साथ ही उस के साथ काम करने वाले अन्य लोगों से बेटे यूसुफ के बारे में जानकारी की. लोगों ने बताया कि यूसुफ कल तो मंडी आया ही नहीं था.

यह सुनते ही भूरे खां के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उन के मन में तरह तरह के विचार आने लगे कि कहीं बेटे के साथ कोई अनहोनी तो नहींं हो गई. कल से उस का कोई हालचाल नहीं मिला था. बेटे की तलाश में भूरे खां ने जहां भी संभव हो सकता था, वहां उस की तलाश की. दूसरे दिन यानी 30 जुलाई को भूरे खां ने थाना छर्रा में बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद  पुलिस और यूसुफ के फेमिली वाले उस की तलाश करते रहे, लेकिन 4 दिन तलाशने के बाद भी यूसुफ का कोई पता नहीं चला.

यूसुफ की नृशंस हत्या से घर में कोहराम मच गया. यूसुफ  के बच्चों के फूल से खिले चेहरे पिता की मौत से मुरझा से गए. पुलिस ने फेमिली वालों को ढांढस बंधाते हुए उन से हत्यारों की तलाश में मदद करने को कहा. कासगंज में यूसुफ के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव फेमिली वालों को सौंप दिया गया. 3 अगस्त को डैडबौडी शाम 5 बजे गांव पहुंची. परिजनों और ग्रामीणों ने घटना का खुलासा करने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छर्राकासगंज मार्ग पर जाम लगाने की कोशिश की. तब पुलिस ने उन्हें समझा कर सड़क से हटा दिया, इस के बाद गांव में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अपने पति की हत्या से यूसुफ की पत्नी तबस्सुम का रोरो कर बुरा हाल था. वह कभी अपने को संभालती तो कभी बच्चों को.  पुलिस ने मृतक यूसुफ की पत्नी के साथ ही घर के अन्य सदस्यों से गहनता से पूछताछ की. बच्चों से भी पुलिस ने जानकारी जुटाई. तबस्सुम ने बताया कि उस ने पति के वापस न आने पर उस ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच औफ आ रहा था. तब उस ने पति के दोस्त दानिश को फोन कर पति के बारे में पूछा था. दानिश ने पति यूसफ के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही थी. इस पर मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मृतक की पत्नी तबस्सुम के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच की. इस के अच्छे परिणाम शीघ्र ही सामने आ गए.

पुलिस ने गहनता से जांच कर इस हत्या की गुुत्थी सुलझा कर इस हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. जो सच्चाई सामने आई है, वो बेहद हैरान करने वाली थी. यूसुफ की दर्दनांक हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, उस ने सब को चौंका दिया. यूसुफ की पत्नी तबस्सुम ने अपने गांव में रहने वाले 28 वर्षीय प्रेमी दानिश के साथ मिल कर इस हत्या की साजिश रची थी. दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी होने पर जब यूसुफ ने इस का विरोध किया तो दोनों ने मिल कर अपने प्यार के रास्ते से हटाने की ठान ली.

पुलिस ने 3 अगस्त, 2025 को मृतक के पिता भूरे खां की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट  तबस्सुम, उस के प्रेमी दानिश व दानिश के  अज्ञात साथियों के खिलाफ दर्ज कर ली गई. कौल डिटेल्स में तबस्सुम और प्रेमी दानिश के बीच लंबेलंबे समय तक बातचीत के साक्ष्य मिले. इस के बाद तबस्सुम को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि यूसुफ को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. बेहोश होने के बाद पहले उस के हाथ पीछे बांधे गए. फिर धारदार हथियार से पेट पर वार किए गए. हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के शरीर पर तेजाब डाला गया.

जांच के बाद पुलिस ने 3 अगस्त को ही तबस्सुम को गिरफ्तार कर लिया. उस ने पूछताछ में सारा राज उगल दिया. प्रेम और वासना में अंधी हो कर तबस्सुम ने अपने पति से छुटकारा पाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की साजिश यूसुफ के दोस्त और अपने आशिक दानिश के साथ मिल कर रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस को 6 अगस्त, 2025 की शाम मुखबिर से सूचना मिली कि यूसूफ की हत्या का आरोपी दानिश जो कि यूसुफ का दोस्त भी है, रामपुर बंबा के निकट कहीं जाने की फिराक में है. सूचना मिलते ही पुलिस एलर्ट हो गई और बंबा के पास से दानिश को गिरफ्तार कर लिया.

दानिश को थाने ला कर उस से यूसुफ की हत्या के बारे में पूछताछ की गई. उस ने बताया कि गांव में उस का और यूसुफ का घर थोड़ी दूरी पर ही है. हम दोनों में दोस्ती थी. यूसुफ के घर आनाजाना रहता था. करीब 4 साल पहले एक दिन जब वह यूसुफ के घर गया था, उस की यूसुफ की पत्नी तबस्सुम से आंखें चार हो गईं. तबस्सुम बला की खूबसूरत थी. दानिश भी कसे शरीर का सुंदर युवक था. पहली ही मुलाकात में दोनों ने आंखों ही आखों में एकदूसरे के दिल पर मोहब्बत की दस्तक दे दी थी.

अब दानिश अकसर यूसुफ के घर आ जाता था. वह बच्चों के लिए कोई न कोई गिफ्ट या उन के पसंद की खानेपीने की चीजें ले कर आता. इस बीच दानिश ने यूसुफ की गैरमौजूदगी में तबस्सुम से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. यूसुफ के काम पर जाने के बाद दोनों प्रेमी प्रेमिका फोन पर घंटों बातें करते थे. पति यूसुफ के मंडी जाने के बाद वह बाजार जाने के बहाने घर से निकल जाती और अपने प्रेमी दानिश से मिलती. इस बीच दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते भी बन गए थे. जब भी तबस्सुम को मौका मिलता वह दानिश से मिल आती. तबस्सुम के खयालों में हरदम अपने प्रेमी दानिश की तसवीर रहती थी. वह चाहती थी कि उस का दीवाना हर पल उस की आंखों के सामने ही रहे.

पत्नी के बदलते व्यवहार पर यूसुफ को शक हुआ. फिर उसे दोस्त दानिश और पत्नी तबस्सुम के प्रेम प्रसंग की भनक लगी तो उस ने तबस्सुम का विरोध किया. दानिश को ले कर आए दिन उन के घर में कलह भी होने लगी. पूछताछ में पत्नी तबस्सुम ने पुलिस को बताया, वह अपने प्रेमी दानिश के साथ जाना चाहती थी. पति यूसुुफ इस का विरोध करता था. वह दानिश से बात करने और घर पर उस के सामने आने को मना करता था. पति यूसुफ मंडी के काम से इतना कमा नहीं पाता था, जिस से घर में तंगी बनी रहती थी. जबकि दानिश उस पर खूब खर्च करता था और उस की हर बात का खयाल रखता था.

योजना के अनुसार 29 जुलाई, 2025 को उस ने यूसुफ के खाने में नींद की गोलियां पीस कर मिला दी थीं. ये गोलियां दानिश ने ला कर दी थीं. इस के साथ ही पति के घर से गल्ला मंडी के लिए निकलते ही दानिश को फोन कर दिया था. बताते चलें कि भट्ठे पर जब यूसुफ ने टिफिन से खाना खाया तो नींद की गोलियों की मात्रा खाने में अधिक मिली होने से वह खाना खाने के कुछ समय बाद ही बेहोश हो गया. इस का फायदा उठाते हुए दानिश ने उस की नृशंस तरीके से हत्या कर दी. भूरे खां ने बताया कि बेटे यूसुफ की 7 साल पहले मडराक निवासी तबस्सुम से शादी हुई थी. यूसुफ के 6 साल और 4 साल के 2 बेटे हैं.

सब कुछ ठीक चल रहा था. 4 साल पहले जब से दानिश से यूसुफ की दोस्ती हुई तब से तबस्सुम फोन पर दानिश से बात किया करती थी. इस का यूसुफ विरोध किया करता था. इसी के चलते तबस्सुम ने दानिश के साथ मिल कर यूसुफ की बेहरमी से हत्या कर दी. उस ने अपने छोटे बेटों की भी चिंता नहीं की. थानाप्रभारी राजेश कुमार के अनुसार, जहां तबस्सुम और दानिश के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकाली गई, वहीं घटना में सीसीटीवी फुटेज की भी मदद ली गई.

घटना वाले दिन दानिश अपनी सफेद स्कूटी पर यूसुफ को बैठा कर अपने साथ ले जाता हुआ नजर आया. सभी सबूत एकत्रित कर घटना का परदाफाश किया गया है. आरोपी दानिश की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरा भी बरामद कर लिया गया है. सीओ (छर्रा) धनजंय सिंह के अनुसार, प्रेमिका ने ही प्रेमी के साथ मिल कर घटना का अंजाम दिया. दोनों जेल भेज दिए गए हैं. मृतक का चेहरा भी जलाया गया था. शिनाख्त कपड़ों व चप्पल से हुई. शव 4-5 दिन पुराना भी लग रहा था. अवैध संबंधों के चलते यूसुफ की हत्या की गई है.

पुलिस को इस मामले का परदाफाश करने में ज्यादा टाइम नहीं लगा. पत्नी को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. लेकिन उस की बात पूरी तरह पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. तब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स जांची तो पड़ोस में रहने वाला दानिश पुलिस के रडार पर आया. लव अफेयर के चलते पत्नी ने प्रेमी के साथ साजिश रच कर अपने ही जीवनसाथी को मार डाला. अब पत्नी तबस्सुम और प्रेमी दानिश अपने किए का फल भोगेंगे. Aligarh News

 

 

UP News: चीटर कौन दरोगा या उस की बीवी

UP News: यूपी पुलिस के दरोगा आदित्य कुमार लोचन अपनी पत्नी दिव्यांशी चौधरी को लुटेरी दुलहन बता रहे हैं, जबकि दिव्यांशी ने भी पति पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं. यह हाईप्रोफाइल मामला अब कोर्ट में जा चुका है. कोर्ट के फैसले के बाद ही पता लगेगा कि दोनों में से चीटर कौन?

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के बी.बी. नगर का रहने वाला आदित्य कुमार लोचन यूपी पुलिस में दरोगा था. गांव के ही ताऊजी दिव्यांशी चौधरी नाम की युवती का रिश्ता आदित्य कुमार के लिए ले कर आए थे. जब आदित्य कुमार को पता चला कि उसे दहेज में स्कौर्पियो और लाखों के जेवर मिलने वाले हैं तो उस ने शादी के लिए हां कर दी. पर कहते हैं न कि लालच बुरी बला है और इसी बला ने दरोगाजी को घेर लिया.

फरवरी, 2024 की शाम थी. दिन में तेज धूप, शाम को मौसम सामान्य और रात में गुलाबी सर्दी. मौसम का यह मिजाज यहां अकसर देखने को मिलता है. 17 फरवरी, 2024 को भी ऐसा ही मौसम था, जब बुलंदशहर के बी.बी. नगर निवासी दरोगा आदित्य कुमार ने जीवनसाथी के रूप में दिव्यांशी का हाथ थामा था. यह 17 फरवरी,  2024 का वही दिन था, जब आदित्य ने दिव्यांशी से शादी की थी. वह मुसकराती हुई, हल्दी व मेहंदी की खुशबू और कंगनों की खनक के साथ उस के घर आई थी. आदित्य को लगा था कि उस की जिंदगी अब पटरी पर आ जाएगी.

पहली नजर में यह रिश्ता परिवारों के सपनों से सजा लगता था, लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह रिश्ता कुछ महीनों में सुर्खियों में बदल जाएगा. कुछ ही समय में इस रिश्ते की परतें खुलने लगीं. आदित्य का कहना है कि दिव्यांशी कभी घर रुकती नहीं थी, आए दिन पैसों की मांग करती थी. महीना बीता नहीं था कि तसवीर बदलने लगी. दिव्यांशी का मूड हर दिन कुछ नया बहाना ढूंढता. वह कहती कि यह घर ठीक नहीं, तुम मुझे समझते नहीं, मुझे मायके जाना है, पैसे भेज दो वगैरहवगैरह. आदित्य पहले समझने की कोशिश करता, फिर उसे समझाने की और आखिर में वह थक चुका था.

यूं शुरू हुई दोनों में अनबन

2019 बैच के सबइंसपेक्टर आदित्य कुमार लोचन के पापा ऋषिपाल किसान थे और मम्मी राजेश देवी घरेलू महिला थीं. पापा की मौत के बाद कैंसर से मम्मी की भी मौत हो गई थी. घर में एक भाई है. वह भी दिव्यांग है. यानी एक तरीके से कहें कि सिर्फ दरोगा आदित्य ही घर थे और वही परिवार. एक रिश्ते के ताऊ आदित्य के लिए 29 साल की दिव्यांशी का रिश्ता ले कर आए थे. बताया कि दिव्यांशी की कोठी आदित्य के घर से 50 किलोमीटर दूर मेरठ के मवाना में स्थित है. दहेज में स्कौर्पियो कार, लाखों के जेवर और धूमधाम से शादी की बात ताऊ ने कही. खूबसूरत दिव्यांशी को देख कर दरोगा आदित्य कुमार लोचन और उन के फेमिली वालों ने भी हामी भर दी थी.

शादी को अभी 4 महीने ही हुए थे, पर आदित्य के मन में कुछ खटकने लगा था. दिव्यांशी अकसर कहती, ”मैं बीएड और सीटेट की तैयारी कर रही हूं, मायके में पढ़ाई में ध्यान ज्यादा लगता है. मेरे मायके का घर में बना एक स्टडीरूम मुझे पहचानता है और मैं स्टडीरूम को जानती हूं. मुझे उस में पढऩे की आदत बनी हुई है.’’

पहले आदित्य ने भरोसा किया, फिर धीरेधीरे आदतें शक पैदा करने लगीं. वह मायके में रह कर औनलाइन पैसों की मांग करती, कभी कोचिंग की फीस, कभी किताबें तो कभी फार्म भरने के नाम पर. आदित्य बिना सवाल किए रुपए भेज देता, क्योंकि वह उस की पत्नी थी और भरोसा करना उस के संस्कारों का हिस्सा था, लेकिन हर बार जब वह ससुराल आती, कुछ अजीब करती. अपने मोबाइल से सारे यूपीआई ऐप डिलीट कर देती.

‘इतना क्यों छिपाती है? आखिर क्या है, जो दिखाना नहीं चाहती?’ यह सवाल आदित्य को हर दिन परेशान करता रहा.

एक दिन आदित्य ने उस से कहा, ”दिव्यांशी, अपना मोबाइल दिखाना जरा.’’

बस इतना कहना था कि दिव्यांशी के चेहरे की रंगत उड़ गई. उस ने मोबाइल पकड़ाया. आदित्य ने उस से फोन का पासवर्ड पूछ कर स्क्रीन खोली. जैसे ही उस ने चैक किया, उन की भौंहें सिकुड़ गईं. मोबाइल में एक भी यूपीआई ऐप नहीं था, सब डिलीट. वह धीरे से बोला, ”तैयारी करती हो तो फीस किस से भरी? फार्म किस से जमा किया? किताबें कैसे खरीदीं? इस मोबाइल में यूपीआई या बैंक से संबंधित कोई ऐप डाउनलोड है ही नहीं. जबकि तुम ने जितने भी रुपए मुझ से लिए हैं, सब औनलाइन ही लिए हैं, वो भी अपने फोन नंबर के जरिए.’’

दिव्यांशी कुछ बोल न पाई, बस बारबार होंठ भींचती रही. आदित्य की सारी शंकाएं अचानक आकार लेने लगीं. उस दिन से घर का माहौल ही बदल गया. विश्वास में दरारें साफ दिखने लगीं और दिव्यांशी के झूठ की परतें एकएक कर के खुलती चली गईं.

कमिश्नर औफिस में क्यों किया हंगामा

पिछले साल 25 नवंबर को कानपुर कमिश्नरी कार्यालय में दिव्यांशी ने हाईवोल्टेज ड्रामा किया था. वह एक ठंडी सुबह थी. कमिश्नरी कार्यालय के बाहर भीड़ जमा थी. आरोप है कि वह अपने साथ कई लोगों को ले कर आई थी. भीतर से आवाजें गूंज रही थीं. किसी के रोने की, किसी के समझाने की और किसी के गुस्से से कांपती आवाज थी. यही दिन था, जब दिव्यांशी ने अपने पति आदित्य के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी थी. सब के सामने सच उजागर करने का दावा किया था. वह इस समय कमिश्नर के दफ्तर में थी और आदित्य कुमार की शिकायत कर रही थी. रोरो कर अपना दुखड़ा सुना रही थी. चेहरे पर आंसू और आंखों में आग लिए वह पुलिस अधिकारी के सामने बोली, ”इस आदमी ने मेरा सब कुछ बरबाद कर दिया.’’

उस के शब्द हवा में तीर की तरह गूंजे. दिव्यांशी का आरोप था कि पति आदित्य ने उसे महीनों तक मानसिक रूप से परेशान किया और उस की मेहनत की कमाई के 14 लाख 50 हजार रुपए हड़प लिए. लेकिन यह केवल पैसों का मामला नहीं था. दिव्यांशी ने और भी गंभीर आरोप लगाए. उस ने कहा कि आदित्य सोशल मीडिया पर लड़कियों से दोस्ती करता है, मीठी बातें कर उन का भरोसा जीतता है, फिर उन्हें अपने जाल में फंसा लेता है. बाद में उन्हीं की तसवीरें और वीडियो का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाता और ब्लैकमेल करता है.

मामला पुलिस के एक दरोगा आदित्य से जुड़ा होने के कारण पत्रकारों की भीड़ कमिश्नरी के बाहर जमा हो गई. कमिश्नर कार्यालय से बाहर निकलते ही यूट्यूबर और चैनलों के पत्रकारों ने भी दिव्यांशी को घेर लिया. दिव्यांशी ने रोरो कर वो सारी बातें पत्रकारों को बताईं, जो शिकायत उस ने कमिश्नर साहब से लिखित में की थी. 14 लाख 50 हजार रुपए दिए जाने के मोबाइल ऐप गूगलपे व सबूत के तौर पर बैंक के लेनदेन के कागज भी पत्रकारों को दिखा रही थी. कमिश्नरी के गलियारों में यह मामला गूंजने लगा.

इस बीच दरोगा आदित्य कुमार भी अपनी सफाई देने कमिश्नर के पास पहुंच गया. यह देख कर मीडियाकर्मी वहीं रुक गए, जिस से कि उस का भी इंटरव्यू लिया जा सके. आदित्य कुमार भी पूरी तैयारी के साथ आया था. एक मोटी फाइल उस के हाथ में थी.

दरोगा ने कमिश्नर को बताई सच्चाई

आदित्य कुमार ने कमिश्नर साहब को सबूत के साथ पूरी जानकारी दी. उस ने कहा, ”मैं ने अपनी खुफिया जांच पत्नी दिव्यांशी घर के आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की थी. पता चला कि वह पहले से ही शादीशुदा है. पहले जिस से शादी हुई थी, दिव्यांशी ने उन लोगों पर मुकदमा दर्ज करा रखा है. इस के बाद मैं ने ई कोर्ट ऐप पर दिव्यांशी की डिटेल डाली तो एक मुकदमा दिव्यांशी वर्सेज प्रेमराज पुष्कर का सामने आ गया.

”मैं ने इस के दस्तावेज निकलवाए. पता चला कि दिव्यांशी ने मेरठ के थाना पल्लवपुर में दरोगा प्रेमराज पुष्कर और उस के भाई भूपेंद्र पुष्कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. फिर मैं ने मेरठ न्यायालय से इस मुकदमे के दस्तावेज निकलवाए. दिव्यांशी ने दरोगा प्रेमराज पुष्कर और उस के भाई भूपेंद्र पर एफआईआर दर्ज करवाई थी.

”कोर्ट में मजिस्ट्रैट के सामने बयान देते समय पलट गई. उस ने कहा था कि मेरा प्रेमराज पुष्कर से 3 जुलाई, 2019 को प्रेम विवाह हुआ था. मुझे इस के खिलाफ मेरठ के हस्तिनापुर थाने से भी एक रेप की एफआईआर मिली. इस में दिव्यांशी ने पंजाब नैशनल बैंक, हस्तिनापुर के मैनेजर आशीष राज और मवाना मेरठ के बैंक मैनेजर अमित गुप्ता पर भी एफआईआर दर्ज कराई थी. मुकदमे से अमित का नाम निकाल दिया गया था. नाम निकलवाने में भी मोटी रकम वसूले जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इस मामले में भी दिव्यांशी कोर्ट में अपने ही बयान से पलट गई. यहां पर बैंक मैनेजर से लाखों रुपए वसूला गया होगा.’’

दरोगा आदित्य कुमार लोचन ने आगे कहा कि मैं ने रेप के आरोप में जेल जा चुके प्रेमराज पुष्कर से बात की तो पता चला कि वह दिव्यांशी के अभी भी संपर्क में है. दिव्यांशी को उस ने मेरी गोपनीय जांच के बारे में बता दिया. इस से दिव्यांशी समझ गई कि अब उस की दाल नहीं गलने वाली है. इस के बाद दिव्यांशी अपने लाखों के जेवरात और कीमती सामान समेट कर मायके चली गई. कुछ दिनों बाद वह मेरे घर पहुंची और मेन गेट का ताला तोड़ कर घर में घुस गई. मकान पर कब्जा कर वहीं रहने लगी. जब मैं वहां नहीं गया तो उस ने संबंधित थाने में तहरीर दी, लेकिन जांच में उस के सभी आरोप झूठे पाए गए.

 

इस के बाद एक करोड़ रुपए की मांग करने लगी, पूरी नहीं होने पर पूरे परिवार को जेल भिजवाने की धमकी दी. इस के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो आज 25 नवंबर को दिव्यांशी कानपुर पहुंची और पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार को मेरे खिलाफ तहरीर दी. मैं ने दस्तावेज पेश किए तो वह भाग गई. आदित्य ने बताया कि जब मैं ने दिव्यांशी के फोन में डिलीट हो चुके सभी यूपीआई ऐप डाउनलोड कराए तो मेरे होश उड़ गए. ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में 10 से ज्यादा खातों में करोड़ों का ट्रांजैक्शन किया गया था. खातों के बारे में पूछने के बाद दिव्यांशी मुझ से झगड़ा कर के सब ज्वैलरी व कीमती सामान ले कर मायके चली गई.

पुलिस कमिश्नर ने एडीसीपी को सौंपी जांच

उधर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने तुरंत एडिशनल डीसीपी (महिला अपराध) को जांच सौंपी. इस के बाद पुलिस ने दिव्यांशी की जांच शुरू की. पुलिस ने जब दिव्यांशी के खाते की जांच की तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए. उस के बैंक खातों में करोड़ों का ट्रांजैक्शन मिला. शक हुआ कि इस के गैंग में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. दिव्यांशी के सनसनीखेज आरोपों के बाद मामले की जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी (महिला अपराध) को सौंपी गई थी.

यह एक जटिल जांच थी, क्योंकि इस में न केवल वित्तीय धोखाधड़ी शामिल थी, बल्कि ब्लैकमेलिंग और डिजिटल सबूतों का एक जाल भी था. सब से पहले, दिव्यांशी का विस्तृत बयान दर्ज किया गया. इस में 14.50 लाख रुपए के लेनदेन का ब्यौरा (बैंक रिकौर्ड, हस्तांतरित दस्तावेज) और पति आदित्य द्वारा किए गए कथित ब्लैकमेलिंग की पूरी जानकारी शामिल थी. उस ने उन सोशल मीडिया अकाउंट्स और चैट हिस्ट्री के स्क्रीनशौट्स भी उपलब्ध कराए, जिन से आदित्य कथित तौर पर अन्य युवतियों को फंसाता था.

पुलिस ने आदित्य के बैंक खातों और संपत्ति के रिकौर्ड की जांच शुरू की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 14.50 लाख रुपए कहां गए? क्या वे किसी अन्य खाते में स्थानांतरित किए गए या किसी संपत्ति की खरीद में इस्तेमाल हुए? पुलिस ने आदित्य को पूछताछ के लिए बुलाया तो उस ने सभी आरोपों से इनकार किया. आदित्य के मोबाइल फोन, लैपटाप और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया गया. फोरैंसिक टीम ने डिलीट की गई चैट्स, वीडियो और फोटो को रिकवर करने का प्रयास किया.

पुलिस ने आदित्य के सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की और उन युवतियों को तलाश किया. यह जांच का सब से नाजुक हिस्सा था, क्योंकि कई पीडि़त बदनामी के डर से सामने आने को तैयार नहीं होते हैं. असली झटका तब लगा था, जब आदित्य कुमार ने ग्वालटोली थाने में दिव्यांशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर देने की हिम्मत जुटाई. यह बात नवंबर 2024 की है. करीब एक साल तक पुलिस काररवाई में ढील देती रही. कभी दोनों का पारिवारिक मामला आपसी समझौते से ही तय हो जाए. मामला उलझता ही जा रहा था.

17 नवंबर, 2025 की बात है. आदित्य थाने में अपने औफिस में बैठा था. पत्नी दिव्यांशी की फाइल उन के सामने रखी थी. कागज पर लिखे शब्द जैसे उस के सपनों को चीरते जा रहे थे. उस का दिमाग अभी भी उस दिन की यादों में ही उलझा था कि तभी गेट पर जोरजोर से बातें होने लगीं. ड्यूटी पर मौजूद सिपाही ने आ कर बताया, ”सर, दिव्यांशी को गिरफ्तार कर लिया गया है.’’

यह सुन कर आदित्य का दिल एक धड़कन के लिए रुक गया. पुलिस जीप के पीछे से उतारी गई दिव्यांशी का चेहरा वैसा ही शांत था, मानो उसे पता ही हो कि ये सब होने वाला है, पर असली तूफान वो नहीं था. तूफान था उस की फाइल. दिव्यांशी उस से पहले 2 बैंक मैनेजरों से शादी कर चुकी थी, एक दरोगा को भी अपने जाल में फंसा चुकी थी और उन तीनों पर बलात्कार जैसे संगीन मामलों के फरजी मुकदमे लिखा कर मोटी रकम ऐंठ चुकी थी. औफिस के बाहर मीडिया का शोर बढ़ता जा रहा था. कितने लोग फंसे इस में? कौन है इस खेल का असली मास्टरमाइंड? क्या दिव्यांशी अकेली है या किसी और के इशारों पर चल रही है? और सब से बड़ा सवाल कि क्या अगला शिकार आदित्य ही था?

दिव्यांशी को सुरक्षित करते हुए पत्रकारों को पूरी जानकारी डीसीपी (सेंट्रल) श्रवण कुमार सिंह ने दी. डीसीपी श्रवण कुमार सिंह ने प्रैसवार्ता में पत्रकारों को बताया कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है. यह बात सोमवार 17 नवंबर, 2025 की है. उस को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस से पहले थाने आने पर आदित्य ने दिव्यांशी की ओर देखा. वह शांत खड़ी थी, जैसे किसी बात का इंतजार कर रही हो. फिर उस ने हलकी मुसकान दी. ऐसी मुसकान, जिस में डर नहीं, बल्कि रहस्य छिपे थे.

पर सवाल अभी भी हवा में लटका था कि क्या यह उस की आखिरी शादी थी या सिर्फ आखिरी गिरफ्तारी? दरोगा के साथ हुए हैरेसमेंट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस ने 2 बार सुसाइड करने का भी प्रयास किया था. यह पुलिसकर्मी दिव्यांशी के गिरफ्तार हो जाने के बाद दरोगा आदित्य पर समझौते का दबाव बना रहे थे. कहानी कुछ ऐसी निकली कि पुलिस अफसरों तक के होश उड़ गए. यह हैरानी की बात नहीं सच है, क्योंकि यहां पकड़ी गई दिव्यांशी 8 करोड़ के गेम को अकेले खेलने वाली ऐसी खिलाड़ी निकली, जिस ने कोई 1-2 नहीं बल्कि  4-4 शादियां कीं.

थाने का माहौल उस दिन बेहद तनावपूर्ण था. पुलिस दिव्यांशी को सीधे थाने ले आई, यह जानते हुए कि मामला हाईप्रोफाइल है और हंगामे की पूरी संभावना है.

दिव्यांशी के पक्ष में वकील पहुंचे थाने में

दिव्यांशी चौधरी, जिसे कुछ दिन पहले तक लोग एक सम्माननीय घर की बहू समझ रहे थे, अब सलाखों के पीछे खड़ी थी. उस की गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद, थाने के बाहर अचानक भीड़ जुटने लगी. यह भीड़ थी वकीलों की, जो दिव्यांशी का पक्ष लेने के लिए वहां पहुंचे थे. वकीलों का एक समूह थाने के गेट पर पहुंचा. उन के चेहरे पर गुस्सा और आत्मविश्वास झलक रहा था. उन्होंने दिव्यांशी से मिलने की कोशिश की, लेकिन एसएचओ ने उन से कोर्ट में मिलने को कहा. यह सुन कर वकील एकएक कर लौट गए. थाने के बाहर सन्नाटा छा गया.

अंदर लौकअप में दिव्यांशी चौधरी चुपचाप दीवार से सिर टिकाए बैठी थी. उस के चेहरे पर अब वो मुसकान भी नहीं थी. शादी के नाम पर ठगी करने के आरोप में मेरठ के बड़ा मवाना से गिरफ्तार कर लाई गई दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ ग्वालटोली पुलिस ने 18 नवंबर, 2025 दिन मंगलवार को एसीजेएम-7 अमित सिंह की कोर्ट में पेश किया. पुलिस कोर्ट में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी. पुलिस की रिमांड शीट में कई कमियां थीं, जिन का दिव्यांशी के वकील ने विरोध किया. कानपुर पुलिस ने दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ बीएनएस की 12 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था और आगे की पूछताछ के लिए 8 धाराओं में रिमांड की प्रशस्ति मांगी थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि रिमांड देने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिमांड जैसी कठोर प्रक्रिया के लिए आवश्यक साक्ष्य और आधार पुलिस द्वारा प्रस्तुत नहीं किए गए. कोर्ट ने दिव्यांशी को अरेस्ट करने में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन पाया. इस के बाद दिव्यांशी को रिहा कर दिया गया. अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ‘मात्र आरोप और अनुमानों’ के आधार पर रिमांड नहीं दी जा सकती. रिमांड खारिज करते हुए अदालत ने दिव्यांशी चौधरी को व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश जारी किया. साथ ही निर्देश दिया गया कि आरोपी जांच में सहयोग करेगी और किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव नहीं डालेगी.

पुलिस की किरकिरी होने पर फौरन डीसीपी (सेंट्रल) श्रवण कुमार सिंह ने अपने औफिस में एक मीटिंग बुलाई. इस में डीसीपी (सेंट्रल), एडीसीपी अर्चना सिंह, विवेचक शुभम सिंह और शिकायत करने वाले दरोगा आदित्य लोचन को बुलाया गया. कानपुर में दरोगा की लापरवाही की वजह से दिव्यांशी चौधरी कोर्ट से रिहा हो गई. इस वजह से आरोपी दिव्यांशी को कोर्ट ने छोड़ दिया. जांच में पता चला कि एक रिटायर सीओ दिव्यांशी की पैरवी में कानपुर पहुंचे थे. वह शुभम के साथ कई घंटे तक रहे.

जौइंट पुलिस कमिश्नर आशुतोष कुमार ने दरोगा शुभम पर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही दिव्यांशी के पूरे सिंडिकेट का परदाफाश करने के लिए एक जांच कमेटी बनाई है.

आईओ शुभम से उच्चाधिकारी हुए नाराज

जौइंट सीपी आशुतोष कुमार ने विवेचक शुभम से पूछा कि जब इतने पुलिसकर्मियों का दिव्यांशी से संबंध है तो इन लोगों के बयान क्यों नहीं लिए गए? इन पुलिसकर्मियों और बैंक अफसर की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई? आखिर दिव्यांशी से इन सभी का क्या कनेक्शन है, जो लाखों का ट्रांजैक्शन है? दरोगा शुभम कोई जवाब नहीं दे सका? इस पर जौइंट सीपी ने शुभम को जम कर फटकार लगाई.

जौइंट पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच में अब एक इंसपेक्टर को भी शामिल किया है. उन्होंने कहा है कि अब इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा होना चाहिए. जिन पुलिस अफसरों और बैंक अफसर समेत अन्य की कौल डिटेल्स और लाखों का ट्रांजैक्शन मिला है, एकएक व्यक्ति की जांच होगी. जांच के बाद सिंडिकेट में शामिल सभी के खिलाफ काररवाई की जाएगी. डीसीपी (सेंट्रल) श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि अब डीजे कोर्ट में दोबारा सभी साक्ष्यों के साथ अपील करेंगे, ताकि आरोपी को दोबारा अरेस्ट कर के जेल भेजा जाए. पुलिस टीम अब नए सिरे से दोबारा जांच कर के एकएक साक्ष्य जुटा रही है. जल्द ही पूरे सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस कड़ी काररवाई करेगी.

दिव्यांशी चौधरी ने रिहा होने के बाद इसे सच्चाई की जीत बताया. कहा, ”मुझे मीडिया में बदनाम किया कि मैं लुटेरी दुलहन हूं. मेरे हसबैंड, जो उसी थाने में पोस्टेड है और जो आईओ है, वो उन का दोस्त है, कहां से फेयर इनवेस्टिगेशन हो जाएगी.’’

दिव्यांशी ने कहा कि मैं थाने खुद गई थी. यह कहने कि आप मेरा भी पक्ष सुनिए, लेकिन उन्होंने उस चीज का फायदा उठाया और मेरे को वहीं से अरेस्ट कर लिया. कौन सी लुटेरी दुलहन शादी में स्कौर्पियो गाड़ी देती है. कौन सी लुटेरी दुलहन 25 लाख की एफडी देगी? मुझ पर सब मनगढ़ंत आरोप हैं. आप शादी से डेढ़ साल पहले से मेरे को जानते हैं.

उस ने बताया कि दरोगाजी मेरे साथ डेढ़ साल से रिलेशन में थे. आप ने मुझ से 14 लाख 50 हजार औनलाइन लिया है. औफलाइन तो जितना लिया है, उस को छोडि़ए. शादी के बाद भी वसूली का रवैय्या खत्म नहीं हुआ. आप की डिमांड खत्म नहीं होती है. आप दरोगा हैं तो इस का मतलब ये थोड़ी न है कि आप कुछ भी करेंगे. अपनी पत्नी को आप ने इस हद तक पहुंचा दिया था कि शायद सुसाइड ही एकमात्र रास्ता रह गया था. अगर मुझे सच्चे वकील वरुण सर न मिलते तो शायद मैं तो मर ही गई होती.

एडवोकेट वरुण ने कहा कि दिव्यांशी पर उस के दरोगा पति ने पैसे के लेनदेन का आरोप लगाया था, उन के ऊपर भी जांच होनी चाहिए. 58 हजार की तनख्वाह है, एक दरोगा की एवरेज महीने की. ढाई-3 करोड़ का दरोगा आदित्य के अकाउंट में ट्रांजैक्शन हुआ है. यह कैसे संभव है? इस की जांच जरूर होनी चाहिए. अदालत के दरवाजे पर सच्चाई और साजिश का दावा करने वाले दोनों पक्ष खड़े हैं, दोनों अपनी बात पर अडिग हैं. कहानी अभी खत्म नहीं हुई, बल्कि न्याय की तलाश में आगे बढ़ चुकी है. अपील की फाइल तैयार हो रही है, साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं. एक तरफ दिव्यांशी का दावा, फंसाई गई हूं. उन के वकील साहब का विश्वास है कि दिव्यांशी मासूम है, निर्दोष है. वकील को उम्मीद है कि सच्चाई की जीत होगी.

दूसरी तरफ पुलिस का दावा दुलहन लुटेरी है, सबूत मजबूत हैं, अपील मंजूर होगी, दिव्यांशी जेल जाएगी. न्याय की जीत होगी. अब यह जंग कोर्ट के फैसले पर टिकी है. क्या दिव्यांशी का जाल फिर बचेगा या सिंडिकेट ढह जाएगा?

उत्तर प्रदेश की यह कहानी अभी अधूरी है. सच्चाई का इंतजार है, कानून का इम्तिहान है. लेकिन एक बात साफ है, प्यार के नाम पर ठगी का खेल अब लंबा नहीं चलेगा. न्याय की घंटी बजनी बाकी है. इस समय न कोई विजेता, न कोई स्पष्ट दोषी है. बस 2 सच, 2 दावे और एक ऐसी लड़ाई जिस का फैसला अब कोर्ट करेगी न कि भावनाएं.

कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से शुरू होती है, जहां कानून आखिरी शब्द बोलता है और सच अपनी अगली परत खोलता है. UP News

 

Illicit Relationship: मामी से मोहब्बत

Illicit Relationship: लखनऊ के रेल कर्मचारी की हत्या का कारण उस का शराबी होना, गुस्सैल बने रहना या चालचलन था या फिर मामीभांजे के बीच नाजायज रिश्ते की नादानी. इन सब के अलावा एक सच्चाई यह भी थी कि मंजू अपने पति की बुरी आदतों से इतनी परेशान रहती थी कि…

मई, 2025 के अंतिम सप्ताह में मंजू की रिश्तेदारी में शादी थी. उस के सासससुर 24 मई, 2025 की रात को उसी शादी के लिए गए थे. पति ड्यूटी पर था. मंजू घर पर अकेली थी. शाम का वक्त था. इसी बीच एक कौल आ गई. स्क्रीन पर प्रेमी का नाम पढ़ कर उस के होंठों पर मुसकान बिखर गई. उस ने तुरंत कौल रिसीव कर ली. कौल उस के प्रेमी आकाश वर्मा की थी, जो रिश्ते में उस का भांजा लगता था.

”हैलो! मैं कब से तुम्हारे फोन का इंतजार कर रही हूं. तुम उस का काम तमाम कर दो, बहुत दिन हो गए,’’ मंजू शिकायती लहजे में उस से बोली.

”मैं ने फोन किया न! …मुझे तुम से अधिक बेचैनी है…मैं चाहता हूं कि जितना जल्द हो, काम निपटा लिया जाए. मुझे तुम्हारे पति सिद्धि प्रसाद का काम तमाम हर हालत में करना है.’’ आकाश बोला.

”अब यह बताओ कि तुम कितनी देर में आ रहे हो?’’ मंजू का सीधा सवाल था.

”पहले यह बताओ कि घर का क्या हाल है?’’ उस ने सवाल का जवाब सवाल से ही किया.

”अकेली हूं. सभी लोग रिश्तेदार की शादी में गए हैं. तुम्हारा मामा ड्यूटी पर है… आधी रात को आएगा.’’ मंजू बोली.

”चलो ठीक है, मैं आ जाऊंगा, तुम दरवाजा खुला रखना,’’ कह कर आकाश ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

रात गहराई. आकाश अपने दोस्त के साथ पूरी तैयारी के साथ प्रेमिका मंजू के घर आ गया. चुपके से घर में घुसने का इंतजाम मंजू पहले से ही कर चुकी थी. मंजू अपने कमरे में पति सिद्धि प्रसाद लोधी के साथ लेटी हुई थी, जबकि वह गहरी नींद में था. मंजू के घर में आने पर आकाश ने उस के इशारे पर अपने दोस्त के साथ कमरे में रखी प्लास्टिक की रस्सी से एक फंदा बना लिया. मंजू की मदद से फंदा गहरी नींद में सो रहे सिद्धि के गले में डाल दिया. दोनों ने मिल कर उस फंदे को कस दिया. थोड़ी देर सिद्धि प्रसाद छटपटाया, फिर शांत हो गया.

कुछ देर के बाद जब सिद्धि प्रसाद मरणासन्न हालत में पहुंच गया. वह जिंदा न बच जाए, इसलिए आकाश ने अपने दोस्त संजय के साथ उस के सिर पर हथौड़े से हमला कर दिया. उस वार से सिद्धि रक्तरंजित हो गया. लोहे के पाइप से भी उस के सिर पर कई हमले करने के बाद जब उस की मौत हो गई, तब आकाश ने अपने दोस्त की मदद से रात के अंधेरे में घर के पीछे एक तालाब के निकट सूखे गड्ïढे में उस की लाश फेंक दी. वह गड्ïढा झाडिय़ों की ओट में था. सिद्धि प्रसाद का मोबाइल, खून सने कपड़े भी वहीं झाडिय़ों में फेंक दिए.

25 मई, 2025 की सुबह लखनऊ-कानपुर रोड पर थाना बंथरा के एसएचओ राजेश कुमार सिंह को उसी थाने की पुलिस चौकी हरौनी के इंचार्ज एसआई अर्जुन राजपूत ने कौल कर बताया कि बीती रात सिद्धि प्रसाद लोधी नामक एक रेलकर्मी की हत्या हो गई है. उस की लाश उस के घर के ठीक पीछे तालाब के पास गड्ढे में पड़ी है. सिद्धि प्रसाद लोधी का घर दरियापुर मझरा गढ़ी चुनौटी में है. उस की लाश मिलने की सूचना पर चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार एसआई श्यामजी मिश्रा, कांस्टेबल देवेंद्र कुमार के अलावा एसएचओ भी घटनास्थल पर पहुंच गए. साथ ही इस की सूचना कृष्णा नगर के एसीपी विकास पांडेय को भी दे दी गई.

घटनास्थल पर उन के साथ एडिशनल डीसीपी अमित कुमावत भी घटनास्थल पर पहुंच गए. दोनों अधिकारियों ने सघन जांच के आदेश दिए. घटनास्थल पर मृतक की पत्नी मंजू देवी भी मौजूद थी. उसी ने अपने पति की हत्या की सूचना पुलिस को दी थी. मंजू रोरो कर पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताया, ”साहब, सुबह 6 बजे के करीब जब मैं सो कर उठी, तब पाया कि पति कमरे में नहीं हैं. इन्हें ढूंढते हुए मकान के बाहर निकल गई. घर के पीछे लगभग 50 मीटर दूर तालाब के पास झाडिय़ों में मुझे पति के कपड़े दिखाई दिए. पैंट और शर्ट वही थे, जो उन्होंने रात में पहने थे. पास ही पति औंधे मुंह पड़े थे.

”पास जा कर देखा तो देखते ही मेरे होश उड़ गए. मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई हो. पति के सिर पर गहरी चोट थी. काफी खून बह चुका था. वह एकदम से बेजान से थे. पति को इस हालत में देख कर ऐसा लगा, जैसे मेरी दुनिया ही उजड़ गई.’’

घटनास्थल पर नहीं मिली खून की एक भी बूंद

पुलिस ने मंजू से प्रारंभिक पूछताछ के बाद शव की जांचपड़ताल की. एसएचओ के साथ आई पुलिस टीम ने उस की चप्पल, मोबाइल, शर्ट और पैंट पास से ही बरामद कर ली. जांच में घटनास्थल पर खून की एक बूंद भी नहीं थी, जबकि मृतक के सिर से काफी खून बह चुका था. इस से पुलिस ने सहज अनुमान लगा लिया कि इस की हत्या किसी दूसरी जगह पर करने के बाद हत्यारों ने लाश यहां ला कर फेंकी है. उन्होंने अनुमान लगाया कि हत्या करने वाले 2-3 लोग हो सकते हैं. शव की हालत देख कर पुलिस ने रात 2 और 3 बजे हत्या होने का अनुमान लगाया.

शव को ध्यान से देखने पर उस के सिर से खून बहने और गले में किसी चीज से कसाव के निशान का पता चला. एसीपी विकास पांडेय के सामने बंथरा थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की औपचारिकताएं पूरी कीं. आगे की प्रक्रिया के लिए मृतक की पत्नी मंजू देवी को थाने बुलाया गया. उस की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ सिद्धि प्रसाद लोधी की हत्या का मुकदमा धारा-103 बीएनएस के तहत दर्ज कर लिया गया. मंजू देवी से जांच टीम की कांस्टेबल मनीषा रावत और सावित्री देवी ने पूछताछ की. साथ ही उस के घर जा कर भी तहकीकात की गई.

हरौनी के चौकीप्रभारी अर्जुन राजपूत, एसआई श्याम मिश्रा, अरविंद कुमार, संदीप सिंह और कांस्टेबल देवेंद्र के साथ देर रात तक ग्रामीणों से पूछताछ करते रहे. इस पूछताछ में हत्याकांड के संबंध में चौंकाने वाली बात सामने आई. पुलिस को विशेष सूत्रों से पता चला कि मंजू ने ही योजना बना कर अपने प्रेमी की मदद से पति की हत्या करवाई है. उस का प्रेमी आकाश वर्मा उर्फ लकी 25 साल का नवयुवक है और रिश्ते में उस के पति का भांजा है. वह जनपद लखनऊ के नरपतखेड़ा गांव का निवासी है. यह भी पता चला कि इस हत्याकांड में उस का दोस्त भी शामिल था.

आकाश वर्मा के संदिग्ध आरोपी होने की जानकारी मिलने पर पुलिस उसे घटना के एक हफ्ते बाद ही गिरफ्त में ले लिया. उसे बंथारा थाने लाया गया. खासकर उस के बारे में मंजू देवी को भनक तक नहीं लगने दी गई. पुलिस ने उस से सिद्धि प्रसाद की हत्या के बारे में कड़ाई से पूछताछ की. काफी समय तक आकाश वर्मा पुलिस को गुमराह करता रहा. सच उगलवाने के लिए आखिरकार पुलिस टीम ने उस पर थोड़ी सख्ती की. पुलिस के दबाव और पूछताछ के तरीके के आगे उस ने हार मान ली और सिद्धि प्रसाद की हत्या करने की बात कुबूल कर ली. उस ने यह भी बताया कि यह हत्या सिद्धि प्रसाद की पत्नी  मंजू देवी की शह पर की थी.

आकाश से पूछताछ पूरी होने के अगले दिन सुबहसुबह पुलिस मंजू देवी को थाने ले आई. जैसे ही उस की नजर थाने के हवालात में बंद आकाश वर्मा पर गई तो वह चौंक गई. उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया. महिला कांस्टेबल मनीषा रावत और सावित्री देवी उसे पकड़ कर एक कोने में ले गईं. जोरदार लहजे में उस से सवाल किया, ”सचसच बता, तूने ही अपने पति की हत्या की है न?’’

दूसरी सिपाही उस की आंखों के आगे बेंत घुमाने लगी. मंजू सिपाहियों के तेवर देख कर सहम गई. उस की जुबान खुल ही नहीं रही थी. वह एकदम से निस्तब्ध थी. तभी डंडे घुमाती सिपाही कड़कती हुई बोली, ”मंजू, तू सचसच सब कुछ बताती है या मुझे कोई दूसरा रास्ता अपनाना पड़ेगा..?’’

मंजू फिर भी कुछ नहीं बोली. दूसरी महिला सिपाही ने उस के ऊपर बेंत उठाया ही था कि मंजू बोल पड़ी, ”मुझे मारिए मत, मैं सारा सच बता दूंगी.’’

उस के बाद मंजू ने जो कहानी बताई, वह और भी चौंकाने वाली थी. उस की कहानी में पति की हत्या ही नहीं, बल्कि रिश्तों की मर्यादा को लांघने की भी बात थी. उस का प्रेमी रिश्ते में पति का भांजा था. इस नाते उस के साथ मांबेटा समान मामीभांजे का रिश्ता था. आकाश और मंजू देवी के बीच लव अफेयर के साथ हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

सिद्धि प्रसाद कैसे बना शराब का लती

उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के कानपुर रोड पर थाना बंथरा के अंतर्गत पुलिस चौकी हरौनी है. थाने से लगभग 12 किलोमीटर दूर बीहड़ जंगल का यह सुनसान इलाका भी है. यहीं दरियापुर गढ़ी चुनौटी नाम का गांव बसा हुआ है. सिद्धि प्रसाद लोधी अपनी फेमिली के साथ यहीं रहता था. सिद्धि प्रसाद की उम्र लगभग 40 वर्ष की हो चुकी थी. उस का विवाह मंजू देवी के साथ करीब 8 साल पहले हुआ था. मंजू खूबसूरत थी. सिद्धि प्रसाद मंजूू देवी को पा कर बहुत खुश था. वह उस की सुंदरता और यौवन का दीवाना बना हुआ था.

वह रेलवे विभाग में सम्पार (गेट कीपर) के पद पर नौकरी करता था. उसे अच्छी सैलरी मिलती थी. उस की संगत कुछ गलत लोगों के साथ थी, जिस से वह मांसाहारी होने के साथसाथ शराबी भी बन गया था. ड्यूटी पूरी करने के बाद वह जब थकामांदा लौट कर घर वापस आता था, तब अपनी थकान मिटाने के बहाने शराब पीता था. साथ में खूब मटन और चिकन उड़ाता था. उस के बाद बिस्तर पर जाते ही अपनी जिस्मानी भूख मिटाने के लिए मंजू को बांहों में दबोच लेता था. इस का वह जरा भी खयाल नहीं करता था कि पत्नी की इच्छा है भी या नहीं! कई बार वह उस की इच्छा के खिलाफ जिस्मानी भूख मिटाता था. ऐसा वह मंजू के साथ आए दिन करता था. उस की इस आदत से मंजू परेशान हो गई थी.

उस के 2 बच्चों में से एक की असामयिक मौत होने से एकमात्र बेटी ही बची थी. दूसरे बच्चे की चाहत में वह मंजू को अपनी हवस का शिकार बनाता था. जबकि मंजू पति के वहशी व्यवहार से तंग आ गई थी. उस से घृणा करने लगी थी. सिद्धि प्रसाद  की फिजूलखर्ची बढ़ती जा रही थी. मंजू देवी इस का विरोध करती थी. विरोध करने पर सिद्धि उसे प्रताडि़त करता था. मंजू कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह अपने पति की बढ़ती शराब की लत को कैसे रोके.

मंजू और आकाश ऐसे आए करीब

जनवरी, 2025 का महीना था. सिद्धि प्रसाद खाना खा कर ड्यूटी पर चला गया था. उस के जाने के बाद मंजू अपने कमरे में लेटी थी. अपनी मुसीबतों के बारे में सोच रही थी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. वह करवट लिए लेटी हुई थी. सिर पर हाथ रखे तकिए में मुंह छिपाए काफी समय तक सिसकती रही.  दिन के 11 बजने को आए थे. चारपाई पर लेटेलेटे उस की कब आंख लग गई, पता ही नहीं चला. जब आंखें खुलीं, तब उस ने अपने बगल में बैठे आकाश को पाया.

वह हड़बडाती हुई उठी और कपड़े संभालने लगी. उस ने महसूस किया कि आकाश की नजर उस की मांसल शरीर पर टिकी है. थोड़ी देर के लिए वह शरमा गई. फिर भी बोली, ”अरे आकाश, तू कब आया? …आ न! बैठ यहीं, तू कोई गैर थोड़े है.’’

”मैं अभीअभी आया मामी, तुम उदास दिख रही हो? क्या बात है फिर मामा से बहस हुई क्या?’’ आकाश ने हमदर्दी जताई.

”अच्छा, तुम्हें याद भी कर रही थी.’’

”सौरी मामी, मैं तुम्हें कुछ और नजरों से देख रहा था.’’

”अरे कुछ नहीं, तुम जैसा गबरू जवान मेरी जवानी को नहीं देखेगा तो और कौन..?’’ मंजू बोली.

”अच्छा! …तो आप ने मुझे माफ कर दिया.’’ झेंपता हुआ आकाश बोला.

उस के बाद दोनों के बीच हंसीमजाक और इधरउधर की बातें होती रहीं. बातोंबातों में मंजू ने अपनी पीड़ा भांजे आकाश वर्मा के सामने उड़ेल कर रख दीं. इस से उस ने महसूस किया कि गम थोड़ा हलका हो गया. फिर उस के कंधे पर अपना सिर टिका कर सिसकती हुई बोली, ”आकाश, तुम ही कोई तरीका निकालो!’’

”हां मामी, मैं कुछ करता हूं आप के लिए. थोड़ा वक्त दो… अभी चलता हूं. जब भी कोई जरूरत हो तो फोन कर देना.’’ आकाश बोला और वहां से चला गया.

आकाश वर्मा सिद्धि प्रसाद का रिश्ते में भांजा लगता था. वह मूलरूप से लखनऊ के ही थाना पारा के अंतर्गत नरपत खेड़ा गांव का रहने वाला था. अकसर खाली समय में अपने मामा सिद्धि प्रसाद के यहां मिलने आताजाता रहता था. मौका मिलने पर मंजू से आंखें छिपा कर अपने मामा सिद्धि प्रसाद के साथ शराब पीने का मौका भी निकाल लेता था. शराब के नशे में दोनों काफी देर तक गपशप किया करते थे. आकाश सरोजनी नगर के नादरगंज की एक नमकीन बनाने वाली कंपनी में काम करता था और समय मिलने पर सिद्धि प्रसाद के घर चला आता था.

हसरतों में बह गया रिश्ता

25 वर्षीय आकाश वर्मा मंजू देवी को बहुत प्यार करता था, किंतु उस ने अपने मन की बात का इजहार करने के लिए मंजू के सामने कभी पेशकश नहीं की थी. आकाश मंजू के सामने जब भी आता तो बैठ कर उसे हसरत भरी नजरों से देखा करता था. वह मंजूू से अपने दिल की बात उजागर करने का कोई अवसर भी नहीं ढूंढ पाया. मंजू को अपने दिल में बसाने के बाद उस की रातों की नींद उड़ चुकी थी. चाहत छिपती नहीं है, जब 2 प्रेमी सामने हों तो आंखों में समाई प्यार की भाषा को समझते देर भी नहीं लगती.

आकाश के अकसर घर आने के बाद मंजू भी उसे चाहत की नजरों से देखा करती थी, किंतु वह विवाहिता थी. उस के सामने समाज की कुछ मर्यादाएं भी थीं. आकाश को मन ही मन में चाहने के बाद मंजू भी अपने मन की भावना व्यक्त नहीं कर पा रही थी. धीरेधीरे मंजू के मन में आकाश के प्रति सम्मान व प्यार का दीप जल उठा था. दोनों उचित अवसर की तलाश में थे. जनवरी माह में उस दिन आकाश के समक्ष उस ने अपनी दुखती रग को व दर्द को बयान किया तो आकाश के मन में दया व प्यार का सागर उमड़ पड़ा, लेकिन समझदारी व अवसर की तलाश में उस दिन मंजू नेे अपनी आंखों की मूक भाषा से सब कुछ समझा दिया कि वह भी इस नरक से उसे छुटकारा दिला दे.

मार्च 2025 के अंतिम सप्ताह में मंजू ने फोन पर आकाश के पूछने पर बताया कि उस दिन सिद्धि प्रसाद रात की ड्यूटी पर घर से गया हुआ है, इसलिए वह घर पर आ जाए, कुछ जरूरी बात करनी है.   आकाश ड्यूटी की छुटटी के बाद मंजू के घर देर रात पहुंच गया. उस ने धीरेधीरे आहट पा कर जानने की कोशिश की कि घर की बगल की दूसरी कोठरी में मंजू के सासससुर अपने कमरे में लिहाफ ओड़े सो रहे हैं. मंजू ने आकाश को घर आया देख कर राहत की सांस ली और चुपके से अपनी कोठरी में आकाश को एकांत में बुला लिया. कमरे में पहुंचने के बाद आकाश ने जाते ही मंजूू को अपनी बाहों में भर लिया. जी भर गालों को चूमने व प्यार करने के बाद वह खाना खाने बैठ गया.

उस दिन आकाश मंजू को पाने को आतुर हो गया था. पति द्वारा प्रताडि़त करने की बात कहते हुए मंजू ने उसे अपनी पीठ पर चोट के निशान दिखाए. पीठ पर पिटाई के निशान देख कर आकाश ने हमदर्दी जताई. इसी हमदर्दी में दोनों प्रेम और सहानुभूति की भावना में बह गए थे. वे कब एकदूसरे की बाहों में आ गए, इस का उन्हें पता ही नहीं चला. फिर दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. थोड़ी देर में जब आकाश जाने लगा, तब मंजू उस का हाथ पकड़ कर बोली, ”आकाश, जल्द कुछ उपाय करो… अब छिपछिप कर रहना सहन नहीं होता…और उस का जुल्म भी बढ़ता जा रहा है.’’

”जल्द ही कुछ करूंगा. चिंता मत करो.’’

आकाश जब भी आता था, तब मंजू घर में अकेले होती थी. उसे नहीं पता था कि उस की गतिविधियों पर पासपड़ोस की नजर बनी हुई है. कई बार वह रात के अंधेरे में भी आने लगा था. उस का मंजू के साथ बेमेल ही सही, लेकिन नाजायज रिश्ता बन चुका था. आकाश उस से उम्र में करीब 10 साल छोटा था. मंजू के मन का दर्द आकाश के लिए भी असहनीय हो गया था. सिद्धि प्रसाद की हत्या के 2 दिन पहले जब आकाश आया था, तब घर में बिखरे हुए सामान को देख कर समझ लिया था कि सिद्धि ने उस पर किस तरह का जुल्म ढाया होगा. घर में चारपाई के नीचे शराब की खाली बोतलें पड़ी थीं.

अभी आकाश घर के चारों ओर नजरें दौड़ा ही रहा था कि उस ने मंजू की सिसकती आवाज सुनी, ”जी तो करता है कि मैं कहीं जा कर डूब मरूं और अपनी जान दे दूं.’’

आकाश तेजी से मंजू की ओर मुड़ा और उस के पास जा कर कान में कुछ फुसफुसाया. मंजू उस की बात सुन कर चौंकती हुई बोली, ”ऐसा हो सकता है तो जल्दी करो, मैं तुम्हारा साथ दूंगी. जितना भी खर्च आएगा, उस का भी इंतजाम करूंगी.’’

”मैं तुम्हें 24 मई को फोन करूंगा.’’ आकाश बोल कर वहां से जाने लगा. आकाश को जाता देख मंजू बड़ी हसरत भरी निगाहों से उसे देखने लगी. घर से निकलने से पहले आकाश ने एक बार फिर आश्वासन देते हुए कहा, ”मामी, आप को सब्र से काम लेना होगा. मुझे पूरी प्लानिंग बनाने का मौका दो. काम बहुत जोखिम भरा है.’’

प्रेमी के साथ मिल कर बनाया हत्या का प्लान

23 मई, 2025 की रात को आकाश और मंजू जब फोन पर बातें कर रहे थे, तभी  अचानक रात की ड्यूटी समाप्त कर सिद्धि प्रसाद घर लौट आया था. अचानक पति को घर आया देख कर मंजू सहम गई थी. तुरंत फोन कट कर दिया था. किंतु सिद्धि प्रसाद समझ गया था कि मंजू जरूर अपने प्रेमी से बात कर रही है. इस बारे में पड़ोसियों द्वारा उस के कान पहले से ही भरे जा चुके थे. उस ने तुरंत मंजू की जम कर पिटाई कर डाली. वह कहती रही कि उस की बात सहेली से हो रही थी, लेकिन सिद्धि ने पीटना नहीं छोड़ा.

राज खुलने के डर से मंजू एकाएक वह घबरा गई. परेशान सी हो उठी. किसी तरह उस ने दर्द से कराहते हुए रात बिताई. अगले रोज पति के ड्यूटी पर जाने के बाद आकाश को बीती रात की पूरी बात बता दी. अगले रोज 24 मई को उस का पति सो गया, तब आकाश का फोन आया. उस के बाद उस ने पहले तय प्लान के मुताबिक सिद्धि प्रसाद की प्लास्टिक की रस्सी के फंदे से पहले गला घोंट दिया, फिर उस के सिर पर भारी चीज से हमला कर मार डाला. इस काम में आकाश ने अपने दोस्त संजय निषाद की भी मदद ली थी.

अगले दिन ही मंजू द्वारा की गई पुलिस में शिकायत के बाद सिद्धि प्रसाद की लाश बरामद कर ली गई. इस की हफ्ते भर चली जांच में हत्या का न केवल खुलासा हो गया, बल्कि इस में शामिल आरोपियों में मंजू देवी, आकाश वर्मा और उस के दोस्त संजय निषाद की गिरफ्तारी भी हो गई. उत्तर प्रदेश के जिला गोंडा के रहने वाले संजय निषाद को 40 हजार रुपए देने का वादा किया था, उसे मात्र 5 हजार रुपए एडवांस में दिए थे. मंजू देवी ने पुलिस के सामने अपने पति की क्रूरता का जिक्र करते हुए पति की प्रताडऩा से परेशान रहने की बात कही.

 

उस ने पति पर अय्याशी करने का आरोप लगाया. उस ने यह भी बताया कि सिद्धि प्रसाद के गांव की एक विधवा महिला से कई सालों से  अवैध संबंध बने हुए थे. पुलिस ने आकाश से संजय निषाद का फोन नंबर ले कर उसे सर्विलांस पर लगा दिया. तकनीकी जांच से  वह 10 जुलाई, 2025 को उत्तर पूर्व दिल्ली के सोनिया विहार से पकड़ा गया. संजय वारदात के बाद लखनऊ से फरार हो कर दिल्ली चला गया था. वहां वह एक दुकान पर नौकरी करने लगा था. फोन की लोकेशन के आधार पर वह भी पुलिस की पकड़ में आ गया.

पुलिस ने आरोपी मंजू देवी, उस के प्रेमी आकाश वर्मा और संजय निषाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. Illicit Relationship

 

Love Story in Hindi: प्यार में न बनें बौयफ्रेंड का खिलौना

Love Story in Hindi: एक निजी अस्पताल में नर्स 24 वर्षीय समरीन की दिनचर्या भले ही व्यस्त थी, लेकिन उस के दिल का कोना खाली था. अपने सपनों के राजकुमार की उसे भी तलाश थी. इंस्टाग्राम के जरिए उस की जिंदगी में 25 वर्षीय गौसे आलम ने एंट्री तो की, लेकिन उस ने समरीन को एक ऐसा खिलौना समझा कि…

समरीन ने इंस्टाग्राम पर अपनी जो फोटो पोस्ट की थी, उस में उस का चेहरा आधा दिखता, आधा छिपा हुआ था. उस का हिजाब उस की पहचान बन चुका था. लोग यही समझते थे कि वह एक शरीफ मुसलिम लड़की है, परदे में रहती है. वह जनपद मुरादाबाद के गांव रुस्तम नगर सहसपुर में स्थित अपने घर से करीब 12 किलोमीटर दूर सेफनी कस्बे के एक अस्पताल में नर्स थी. समरीन अस्पताल की लंबी शिफ्ट से थक जाती थी, लेकिन मरीजों की देखभाल में अपना सारा दर्द भूल जाती थी, परंतु रात में अकेलापन उसे घेर लेता.

वह अस्पताल में हर दिन मौत और जिंदगी की जंग देखती थी. रोजाना घर से अस्पताल जाना और वापस घर आना सफर की थकान, साथ में अस्पताल के काम की थकान यह सब समरीन की जिंदगी का हिस्सा था. फिर भी उस के दिल में प्यार की गहराई, भावनाओं का सैलाब, दर्द, तड़प सब कुछ अनुभव करने की अपार क्षमता थी. अपने सपनों के राजकुमार की उसे भी तलाश थी. समरीन को इंस्टाग्राम पर नएनए लोगों से दोस्ती करना अच्छा लगता था. वह फोटोग्राफी और किताबों की तसवीरें डालती, छोटेछोटे कैप्शन में अपने दिल की बातें लिखती.

एक दिन उसे एक युवक का मैसेज मिला. उस की प्रोफाइल खंगाली तो वहां थोड़ेबहुत सुंदर फोटो थे, गौसे आलम नाम था उस का. नाम ऐसा था जो सुनने में सुकून दे रहा था. शुरुआत में तो बस सामान्य ‘हाय’ लिखा मैसेज देखा तो नसरीन ने भी उस का उत्तर ‘हाय’ में ही दे दिया. गौसे आलम एक 25 साल का ट्रक ड्राइवर था, जो लंबी दूरी की सड़कों पर जीवन बिताता था. अकेलापन, परिवार की जिम्मेदारी और जीवन की कठोर सच्चाइयां उस की साथी थीं. गौसे आलम की जिंदगी ट्रक की स्टीयरिंग और राजमार्गों पर लंबीलंबी दूरी तक माल ढोते हुए ही गुजर रही थी. कहीं वह रात में विश्राम करता तो वह रातों में खुद को अकेला महसूस करता. परिवार के लिए पैसा कमाता, लेकिन दिल खाली था. रात में मोबाइल की स्क्रीन पर दुनिया घूमना उस का शौक था.

वह जनपद मुरादाबाद के ही थाना कुंदरकी के चकफाजलपुर गांव का निवासी था. उस का इंस्टाग्राम अकाउंट जैसे उस की छोटी सी दुनिया था. तसवीरें, शायरी और कभीकभी दिल की बातें. हर रात वह अपनी किसी पोस्ट के नीचे लिखता, ‘कोई तो होगी, जो मेरे दिल की बात समझेगी’. वह चाहता था कोई ऐसी लड़की, जो उस की पोस्टों में छिपे जज्बात को महसूस कर सके, उस की अकेली जिंदगी में रंग भर सके. धीरेधीरे उसे समझ आया कि तमाम लड़के आजकल इंस्टाग्राम पर किस तरह की मोहब्बत ढूंढते हैं. कभी लाइक के जरिए, कभी कमेंट से बात शुरू कर के तो कभी किसी की स्टोरी पर रिप्लाई दे कर. गौसे आलम भी वही करने लगा. हर नई तसवीर पर मुसकराहट के साथ एक दिल भेज देता, कभी किसी शायरी पर ‘वाह!’ लिख देता.

एक रात ट्रक सड़क किनारे खड़ा कर के  उस ने इंस्टाग्राम ओपन किया. उस की निगाहें हिजाब पहने हुए एक फोटो पर टिक गईं. उस का नाम था समरीन. वह काफी देर चेहरे को देखता रहा. उस की एक पोस्ट ने गौसे आलम का ध्यान खींचा. अस्पताल की बालकनी से ली गई तसवीर, जहां वह मास्क लगाए एक बच्चे को गोद में ले कर मुसकरा रही थी. यह पोस्ट उस की भावनात्मक थकान दिखाती थी. नर्स की जिम्मेदारी में छिपा दर्द उस की आंखों से छलक रहा था. फिर उस ने समरीन की प्रोफाइल देखी. उस की प्रोफाइल की तसवीर में हल्की मुसकान थी और बायो में लिखा था, ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए.’

गौसे आलम ने हिम्मत की और उस की  शायरी पर कमेंट किया, ‘लफ्ज तो बहुत लोग लिखते हैं, पर एहसास सिर्फ तुम लाती हो.’ समरीन ने भी उसे ‘शुक्रिया’ लिखा, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. धीरेधीरे चैट शुरू हुई, फिर देर रात तक चलने लगी. दोनों अपनीअपनी जिंदगी की खाली जगहों को एकदूसरे के शब्दों से भरने लगे. गौसे आलम अब हर सुबह उस की ‘गुड मार्निंग’ का इंतजार करता. समरीन उसे अपने कालेज की बातें बताती और गौसे आलम अपने लंबे सफर की दास्तान सुनाता. अपनी दिन भर की थकान के बीच उस की हंसी में सुकून ढूंढता. उस दिन के बाद से इंस्टाग्राम अब सिर्फ एक ऐप नहीं रहा, वो उन की मोहब्बत की गवाही देने वाला आईना बन गया.

गौसे आलम अब रोज नई तसवीर नहीं डालता, बस एक ही कैप्शन लिखता है ‘मिल गई वो, जिस से जिंदगी रंगीन हो गई.’ इस तरह दोनों तरफ से मैसेज का सिलसिला शुरू हो गया. समरीन हर रोज सुबहशाम 1-2 लाइनें हंसीमजाक, मजहबी और कभी गहराई की बातें पोस्ट किया करती थी. जैसे कोई साथी मिल गया हो. गौसे आलम ने एक दिन दिल  की गहराई से एक पोस्ट लिखी, ‘तुम्हारी मुसकराहट तो मेरी रातों की थकान मिटा देती है. तुम्हारे जैसे लोगों को सलाम, जो दूसरों के लिए हर वक्त लगे रहते हैं. मैं एक ट्रक ड्राइवर हूं, इसलिए मेरी सड़कें भी बहुत तनहा होती हैं.’

गौसे आलम की यह पोस्ट समरीन के दिल में उतर गई. गौसे आलम एक आम युवक था. उम्र बस 25 की, पर सपने बहुत बड़े. समरीन और गौसे आलम एकदूसरे के मोबाइल फोन नंबर ले ही चुके थे. इसलिए दिल खोल कर प्यारमोहब्बत की बातें होने लगीं. जिंदगी भर साथ निभाने की कसमें भी खाई जाने लगीं. गौसे आलम का कहना था कि जल्दी एक मुलाकात हो जाए तो हमारा प्यार और भी परवान चढऩे लगेगा.

समरीन ने महसूस किया कि गौसे आलम उस के लिए बेहद समझदार है और सहानुभूति दिखाने लगा है. उस की बातों पर समरीन का दिल खोयाखोया सा रहने लगा. वह सोचती कि कोई तो है, जो उस की बात ध्यान से सुनता है, उस की परेशानी पर संवेदना दिखाता है और मुश्किल में साथ देने का वादा करता है. वह कहता कि समरीन मैं तुम से शादी करूंगा. तुम मेरी जिंदगी हो. समरीन भी उस की बातों पर गहरा विश्वास करने लगी थी. वह सोचती कि गौसे आलम दिल का सच्चा है. भले ही वह एक ट्रक ड्राइवर है, लेकिन दिल का अच्छा है.

 

इन दोनों की कहानी में पहला मोड़ तब आया, जब वह अकसर ‘सिर्फ तुम्हारे लिए’ जैसी बातें करता. वह कहता कि समरीन मेरा साथ कभी मत छोडऩा, मेरा इस दुनिया में तुम्हारे अलावा कोई नहीं है. मैं तुम्हें दिल से प्यार करता हूं. मुझे कभी किसी से कोई प्यार नहीं मिला. यदि तुम ने मेरा दिल तोड़ दिया तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा. इसलिए समरीन को यह अहसास होता कि उन दोनों का यह रिश्ता कुछ खास है. उस ने अपनी सब से करीबी सहेली को ये सारी बातें बताईं.

तब सहेली ने कहा, ”तेरी बातों से तो ऐसा लगता है कि वह तुझ से सच्चा प्यार करता है.’’

कुछ दिनों में उन का रिश्ता इंस्टाग्राम की स्क्रीन से निकल कर असल जिंदगी में उतरने लगा. उन का प्यार परवान चढऩे लगा.

पहली मुलाकात में जब गौसे आलम ने समरीन को देखा तो कहा, ”समरीन, तुम तो तसवीरों से ज्यादा हसीन हो और हकीकत में ज्यादा सच्ची भी.’’

समरीन भी मुसकराती हुई बोली, ”और तुम इंस्टाग्राम से ज्यादा शरमीले हो.’’

फिर दोनों हंस पड़े.

गौसे आलम को जब यकीन हो गया कि समरीन अब उस के फरेबी प्यार के जाल में फंस चुकी है तो  एक दिन वह अपने असली रूप में आ गया. उस ने ‘ओयो होटल’ में एक कमरा बुक किया. फोन कर के उस ने होटल में समरीन को भी बुला लिया.

जनपद मुरादाबाद में ‘ओयो’ जैसे और भी बहुत से केंद्र काफी चर्चित हो चुके हैं, जहां प्रेमी युगल दिन में 2-4 घंटे के लिए कमरा बुक करते हैं और मौजमस्ती कर के चले जाते हैं. होटल में पहुंच कर समरीन को जब गौसे आलम के इरादे का पता चले तो उस ने साफ इनकार किया. उस ने कहा कि शादी से पहले प्यार की अंतिम चरम सीमा पर नहीं पहुंचना चाहिए. तब गौसे आलम ने कहा, ”प्यार में सब जायज है. शादी तो होगी ही. जब हमें जिंदगी भर साथ ही रहना है तो फिर हम दोनों के बीच में किसी भी तरह की यह दूरी क्यों?’’

इस तरह हमबिस्तरी के पक्ष और विपक्ष में दोनों के बीच काफी चर्चा हुई और अंत में वह सब कुछ हो गया, जो सिर्फ सुहागरात को होना चाहिए था. समय बीतता रहा, समरीन ने महसूस किया कि गौसे आलम पहले की तरह प्यारमोहब्बत के लिए नहीं मिलता है. वह तो सिर्फ अंतिम प्यार का मौका देखता है. बस अपनी हवस मिटा लेता है. जब उसे शक हुआ तो समरीन ने उस से शादी के लिए कहा. शादी की बात सुनते ही गौसे आलम का तो नजरिया बदल गया. वैसे तो इन दोनों के प्यार के किस्से दोनों के फेमिली वालों और रिश्तेदारियों में आम हो चुके थे. समरीन ने उस के फेमिली वालों से भी कहा कि उस की शादी अब जल्द करा दी जाए. उन दोनों के प्यार को अब कई महीने बीत चुके हैं.

चारों तरफ से घिरता देख 25 वर्षीय गौसे आलम अब प्रेमिका समरीन से पीछा छुड़ाने के तरीके सोचने लगा. इस का एक कारण दोनों की जातियों का अलगअलग होना भी था. गौसे आलम की जाति के लोग इस क्षेत्र में अपने आप को उच्च जाति का समझते हैं. जबकि समरीन सलमानी यानी पिछड़ी जाति की थी.

 

‘एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद ओ अयाज, न कोई बंदा रहा, न कोई बंदा नवाज.’ यह कहावत यहां शादीविवाह में लागू नहीं होती. खासकर तो तुर्क बिरादरी के लोगों के लड़के तो अपनी बिरादरी में ही शादी करते हैं.

सलमानी बिरादरी के लोग भी जनपद में निवास करते हैं. ये लोग अभी तक अपने पारंपरिक कार्य को अंजाम दे रहे हैं. दूसरों के सिर के बाल, दाढ़ी और मूंछें संभालना इन का पेशा है. इन्हें अभी समानता का दरजा इस क्षेत्र में नहीं मिला है. जाति को ले कर भी गौसे आलम के फेमिली वाले समरीन से शादी करने के लिए राजी नहीं थे. समरीन को ले कर गौसे आलम की चिंता अब बढ़ती जा रही थी. इसलिए उसे लगा कि अब इसे ठिकाने लगा कर ही वह पीछा छुड़ा सकता है.

गौसे आलम को समरीन के व्यवहार से ऐसा लग रहा था कि वह शादी न करने पर उसे कानूनी पेंच में फंसा कर जेल भिजवा सकती है. समरीन पढ़ीलिखी थी. एक नर्स का काम करती है. समाज में अच्छेबुरे सभी तरह के लोगों से उस की डीलिंग अस्पताल में रहती है. इसलिए वह भी बड़ी दिलेरी से शादी  करने  के लिए अड़ी हुई थी. अधिकतर ड्राइवरों के चेहरे पर हमेशा एक मुसकान, लेकिन आंखों में हवस की चमक छिपी होती है. ऐसा ही गौसे आलम था. वह खुद को प्यार का पुजारी कहता, लेकिन सच तो यह थी कि वह हवस का गुलाम था.

छोटेछोटे गांवों और शहरों में उस की कई कहानियां बिखरी पड़ी थीं. लड़कियां जो उस के मीठे व झूठे वादों में फंसतीं और फिर छोड़ दी जातीं. लेकिन समरीन की कहानी अलग थी. यह कहानी प्यार की नहीं, बेवफाई की थी, जो दिल को छलनी कर देती है. इस से पहले कि समरीन नाम की फांस गौसे आलम के लिए नासूर बन जाए, उस ने एक दिन अपने इरादे को अंजाम दे दिया. यह काम गौसे आलम ने इतनी चालाकी और प्लानिंग के साथ किया कि पुलिस के हाथ उस की गरदन तक न पहुंचें. समय बलवान होता है. अपराधी कोई न कोई सबूत छोड़ जाता है. अब तो डिजिटल युग है. कोई न कोई सबूत कहीं न कहीं से मिल ही जाता है. आखिरकार वही हुआ यह सब उस ने कैसे किया? यह घटना बहुत ही दिल दहलाने वाली है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है तहसील बिलारी. इसी तहसील का एक गांव रुस्तम नगर सहसपुर है. यह बिलारी से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है. बिलारी और सहसपुर के बीच की इस दूरी में भी मकान बन रहे हैं. आबादी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि कुछ ही सालों में गांव सहसपुर भी बिलारी का एक मोहल्ला जैसा हो जाएगा. रुस्तम नगर सहसपुर तहसील क्षेत्र का सब से बड़ा गांव है. इस को नगर पंचायत बनाने की बात भी चल रही है. इस का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. इसी गांव के मोहल्ला साहूकारा में रियासत हुसैन का परिवार निवास करता है. नर्स समरीन इन्हीं की बेटी थी. अपने 4 भाईबहनों में वह सब से छोटी थी. इस की बड़ी बहन फरहा की शादी हो चुकी है. जबकि 2 बड़े भाई सुहेल और रिजवान दिल्ली में सैलून पर काम करते हैं. उस की अम्मी शाहिदा परवीन की 10 साल पहले मौत हो चुकी है.

रियासत हुसैन शादीविवाह में कौफी मशीन चलाते हैं. सर्दियों में अधिकांश समारोह में कौफी की व्यवस्था मेहमानों के लिए की जाती है. कौफी का स्टाल लगाने वाले अलग लोग होते हैं. इन का हलवाइयों के स्टाल से कोई मतलब नहीं होता है. एक तरह की मजदूरी का काम है. रियासत हुसैन ने भी एक कौफी मशीन ले रखी है. सर्दियों में अधिकांशत: रात में ही बुकिंग मिलती है. यह अपनी कौफी मशीन ले जा कर अपनी स्टाल सजा कर शादी समारोह में बैठ जाते हैं. दूध और काफी बाकी सामान की व्यवस्था समारोह के आयोजकों द्वारा की जाती है. इन की तो सिर्फ मशीन और खुद की मेहनत होती है.

रियासत हुसैन की बेटी समरीन रामपुर जिले के सेफनी कस्बे में स्थित इनाया हेल्थकेयर क्लीनिक में नर्स का काम करती थी. उस से परिवार को बहुत सारी उम्मीदें थीं. सेफनी जिला रामपुर की तहसील शाहबाद के अंतर्गत एक नगर पंचायत है, यानी सेफनी जिला मुरादाबाद की सीमा से एकदम सटा हुआ है. 22 वर्षीय समरीन 24 अगस्त, 2025 की सुबह 10 बजे रोजाना की तरह घर से नर्सिंग होम जाने की बात कह कर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वह वापस नहीं लौटी. रियासत हुसैन ने उस के क्लीनिक पर कौल की तो पता चला कि समरीन क्लीनिक पर आज नहीं पहुंची थी.

यह जानकारी मिलने पर फेमिली वालों के होश उड़ गए. इस के बाद परिजन उस की तलाश में जुट गए. अपने सभी रिश्तेदारों और परिचितों को मोबाइल फोन पर संपर्क कर के समरीन के बारे में पूछा गया, लेकिन कहीं से भी यह जवाब नहीं मिला कि समरीन को उन्होंने कहीं देखा है या उन के घर आई है. तब रियासत हुसैन ने दिल्ली में रह रहे अपने दोनों बेटों को फोन से सूचना दी कि समरीन आज सुबह से लापता है. दोनों बेटे भी रात में ही दिल्ली से घर के लिए रवाना हो गए. सुबह रियासत हुसैन और उन के बेटों ने अपने सभी रिश्तेदारों और परिचितों से राय ली. सब की सहमति के बाद उन्होंने 25 अगस्त, 2025 को बिलारी कोतवाली में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

समरीन के मोबाइल की पुलिस ने कौल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि वह बिलारी से 7 किलोमीटर दूर थाना कुंदरकी क्षेत्र के रहने वाले गौसे आलम नाम के युवक से बात करती थी. पुलिस गौसे आलम की तलाश में जुट गई. गौसे आलम ट्रक ले कर कहीं गया हुआ था. उस की लोकेशन पुलिस लगातार ट्रेस कर रही थी. पुलिस की कई टीमें इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए लगाई गईं. आखिरकार 30 अगस्त, 2025 दिन शनिवार को गौसे आलम पुलिस के हत्थे चढ़ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. चूंकि घटना थाना कुंदरकी क्षेत्र की थी, इसलिए गौसे आलम से कुंदरकी पुलिस ने पूछताछ शुरू की. पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा. यह साबित करने की कोशिश करता रहा कि उसे समरीन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वह ट्रक ले कर बाहर गया हुआ था, लेकिन पुलिस द्वारा थोड़ी सख्ती करने पर गौसे आलम टूट गया. उस ने समरीन की हत्या करना कुबूल कर लिया.

इस के बाद गौसे आलम की निशानदेही पर पुलिस ने 30-31 अगस्त की रात को थाना कुंदरकी क्षेत्र के चकफजालपुर गांव के गन्ने के खेत से समरीन का सड़ागला शव बरामद कर लिया. समरीन की लाश मिलने की सूचना पर उस के अब्बू, भाई और रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटना की सूचना जंगल की आग की तरह आसपास के गांवों में फैल गई. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए. थाना कुंदरकी के एसएचओ प्रदीप सहरावत मय फोर्स के घटना स्थल पर मौजूद थे. सूचना पर एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह भी घटनास्थल का मुआयना करने पहुंच गए. गौसे आलम को थाने भेज दिया गया. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. उस ने मौके पर जांच कर के साक्ष्य जुटाए.

मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय मुरादाबाद भेज दिया. थाना कुंदरकी के एसएचओ प्रदीप सहरावत की गहन पूछताछ के बाद हत्या का एक दिल दहलाने वाला खुलासा हुआ. समरीन का यह कोई पहला मौका नहीं था, जो उस ने किसी युवक पर भरोसा किया था. पहले भी एक युवक उस की जिंदगी में आया था. उस ने भी उस से कहा था, ”चेहरा क्या है, मैं तुम्हारे दिल से प्यार करता हूं.’’ जब शादी की बात आई तो वही आशिक उस के चेहरे व गले पर स्पष्ट दिखाई देने वाले जलने के निशान देख कर पीछे हट गया.

समरीन ने उस से लाख कहा कि इन दागों के नीचे भी मैं वही लड़की हूं. पर उस युवक और उस के फेमिली वालों ने उसे ‘अधूरी’ कह दिया. इसी तरह गौसे आलम ने उसे स्वीकार नहीं किया तो वह टूट गई. उस ने जिद की कि तुम शादी नहीं करोगे तो मैं खुद को खत्म कर दूंगी. इन बातों का समरीन के प्रेमी पर कोई असर नहीं हुआ. उस के फेमिली वालों ने भी समरीन की विनती को ठुकरा दिया. मामला पुलिस तक भी पहुंचा. मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला. मजबूरन समरीन और उस के परिवार को समझौता करना पड़ा.

दरअसल, कुछ साल पहले समरीन ने किसी कलह के चलते खुद को आग लगा दी थी. आग की चपेट में आ जाने से वह काफी झुलस गई थी. उस के चेहरे पर आग से जले हुए निशान अब भी स्पष्ट दिखाई देते थे. उस की गरदन पर भी जले हुए के निशान थे. शरीर के और भी हिस्सों पर निशान थे, जो कपड़ों से दब जाया करते थे. जबकि गरदन और चेहरे के निशान ढकने के लिए वह अकसर हिजाब पहना करती थी. समरीन की जले हुए की घटना की जिन्हें जानकारी नहीं थी, वो यही समझते थे कि बहुत ही मजहबी लड़की है. इसलाम और शरीयत की रोशनी में घर से हिजाब पहन कर ही निकलती है. बाहर के लोगों ने कभी उसे बिना हिजाब के नहीं देखा.

गौसे आलम ने जब पहली मर्तबा समरीन के चेहरे और गरदन के जले हुए निशान देखे थे, तब एकदम उस के चेहरे की रंगत बदल गई थी. वह उदास हो गया था. समरीन उस की हालत देख कर घबरा गई थी. वह रोने लगी थी. कहने लगी कि शायद मेरे चेहरे के निशान देख कर आप मायूस हो रहे हैं. निराश हो रहे हैं. आप मुझ से नहीं मेरे चेहरे से मोहब्बत करते हैं. गौसे आलम ने कहा कि ऐसी बात नहीं है. उस ने एकदम अपने चेहरे की रंगत बदली. चेहरे पर शगुफ्तगी लाने की कोशिश की और कहा कि मैं तुम्हें दिल से चाहता हूं. ऐसा कभी मत सोचना. मैं तुम्हारा जिंदगी भर साथ निभाऊंगा.

कस्बा बिलारी से करीब 7 किलोमीटर दूर बिलारी तहसील का ही एक कस्बा कुंदरकी है. गौसे आलम  कुंदरकी कस्बे से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित चकफाजलपुर गांव का निवासी है. यह 3 भाई और 2 बहनें हैं. गौसे आलम बीच का है. एक बहन की शादी हो चुकी है. एक बहन मानसिक रूप से विकलांग है. गौसे आलम के चेहरे पर मासूमियत और बातों में जादू होता था. गांव में उसे सब ‘आशिक आलम’ कह कर चिढ़ाते थे. असली दुनिया उस की इंस्टाग्राम थी. हर शाम हाथ में मोबाइल आता और फिर शुरू होती उस की औनलाइन मोहब्बत की दुनिया.

गौसे आलम का अंदाज ऐसा कि कोई भी लड़की उस की बातों में जल्दी बहक जाती. सिर्फ दोस्ती के नाम पर शुरू होने वाली बातें धीरेधीरे रोमांस में बदल जातीं. शेर ओ शायरी लिखता और हर चैट के अंत में दिल का इमोजी डाल देता. वह कई लड़कियों से चैट करता था. हर किसी से वही बातें ‘तुम बहुत अलग हो’, ‘काश तुम मेरे शहर में होतीं’, ‘तुम्हारी मुसकान दिल में उतर जाती है’.

उस के चेहरे पर एक ऐसी मासूमियत थी, जो किसी भी इंसान के दिल में भरोसा जगा दे. बड़ीबड़ी आंखों में अजीब सी शांति थी, जैसे उस में कभी तूफान उठा ही न हो. चेहरे की वो हलकी मुसकान, मानो किसी दर्द को छिपाने का हुनर हो. कोई पहली नजर में उसे देखे तो कहेगा ‘इतना सादा, इतना खूबसूरत चेहरा कैसे किसी का खून कर सकता है?’ लेकिन वही चेहरा था, जिस ने मोहब्बत की आड़ में मौत की कहानी लिखी थी.

एक दिन गलती से उस ने सना को वही मैसेज भेज दिया जो किसी और को भेजना था. ‘कह दो न, तुम भी मुझ से प्यार करती हो, शाइस्ता?’

मैसेज पड़ कर सना चौंक गई, ”शाइस्ता..? मैं तो सना हूं!’’

गौसे आलम की पोल खुल गई. उस दिन के बाद सना ने उसे ब्लौक कर दिया, उस के बाद से गौसे आलम ने बड़ी ऐहतियात बरतनी शुरू कर दी. इस तरह समरीन उस के प्यार के जाल में तो फंस गई, लेकिन बाद में गले की हड्ïडी भी बन गई. गौसे आलम ने यह एहसास समरीन को होने नहीं दिया. हमेशा की तरह उस ने समरीन को फोन कर के कहा कि बह बिलारी के महाराणा प्रताप चौक पर आ जाए. गौसे आलम बाइक ले कर वहीं खड़ा था. बिलारी का यह वही स्थान था, जहां से अकसर गौसे आलम अपनी बाइक पर बैठा कर समरीन को ले जाया करता था.

उस समय सुबह के लगभग 10 बजे थे. यही वह समय था, जब समरीन अपनी ड्यूटी करने जाया करती थी. अपने गांव रुस्तम नगर सहसपुर से समरीन बैटरी रिक्शा में बैठ कर आई थी. बैटरी रिक्शा से उतर कर समरीन गौसे आलम की बाइक पर बैठ गई और दोनों मौजमस्ती करने मुरादाबाद चले गए. गौसे आलम ने वादा किया था कि आज घर वालों से मिल कर शादी की बात करेंगे और जल्दी ही तारीख भी तय कर लेंगे. समरीन भी चाहती थी कि फेमिली वालों की मंजूरी व सामाजिक नियमकानून के अनुसार शादी होगी तो समाज में दोनों के फेमिली वालों की इज्जत बनी रहेगी.

गौसे आलम की योजना के अनुसार रास्ते में एक निश्चित स्थान पर उस का दोस्त मिल गया, जो जवानी की दहलीज पर कदम रखने  वाला था, लेकिन अभी नाबालिग था. गौसे आलम ने अपने मित्र से ऐसे अनजान बन कर बात की जैसे पहले से कोई प्लानिंग न हो. समरीन ने पूछा कौन है तो उस ने बताया कि यह मेरा कजिन है. उसे भी बाइक पर बैठा लिया. अपने गांव चकफाजलपुर और रूपपुर के बीच रेलवे ट्रैक के पास बाइक रोकी. उस की आंखों में वही मोहब्बत थी, वही भरोसा, जो समरीन को इस जंगल तक लाया था.

अभी तक समरीन को गौसे आलम पर किसी तरह का कोई शक नहीं था. वो नहीं जानती थी कि उसी के साथ में उस का कातिल भी है. गौसे आलम के मन में कुछ और ही तूफान उमड़ रहा था. विश्वास की नींव पर खड़ी उन की कहानी, अब धोखे की चट्टानों से टकराने वाली थी. समरीन बाइक से नीचे उतर गई. गौसे आलम ने मुसकरा कर उस की ओर देखा. वह उसे यहां लाया था, प्रेम की मिठास का वादा कर के.

नीचे उतर कर समरीन ने पूछा, ”क्या हुआ?’’

गौसे आलम ने कहा, ”कुछ नहीं, बस हलका होना है.’’

इस से पहले कि समरीन कुछ समझ पाती गौसे आलम ने उसे वहीं गिरा लिया. उस के साथी ने दबोच लिया. फिर उन्होंने उस की हत्या कर दी. उस की चीख सुनने वाला भी वहां कोई नहीं था. दोनों ने लाश को उठा कर गन्ने के खेत में डाल दिया. प्यार के वादों से शुरू हुई कहानी, उस शाम विश्वासघात की आग में जल कर राख हो गई. गौसे आलम की दास्तान सुन कर पुलिस भी दंग रह गई. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया. अदालत ने गौसे आलम को जेल भेज दिया और उस के नाबालिग दोस्त को बाल सुधार गृह के हवाले कर दिया.

पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद कर ली. समरीन के मोबाइल को गौसे आलम ने तोड़ कर फेंक दिया था, जो कहानी लिखने तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी. Love Story in Hindi

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Love Story in Hindi: औनलाइन इश्क जरा सोचसमझ के

Love Story in Hindi: पांचवीं पास मसजिद का इमाम और 3 बच्चों का बाप शहजाद बहुत चालबाज था. उस ने उच्चशिक्षित असमिया युवती नईमा यासमीन से औनलाइन दोस्ती कर उसे न सिर्फ फरेबी इश्क के जाल में फांसा, बल्कि उस से औनलाइन निकाह भी कर लिया. एक दिन नईमा ने जब अपना मुंह खोला तो उसे ऐसी सजा दी गई कि…

असम की रहने वाली नईमा यासमीन पिछले 2 दिनों से नोएडा के वन बीएचके फ्लैट में उदास बैठी थी. उस की उदासी के कई कारण थे. उस ने मोबाइल से बैंक बैलेंस चैक किया था, जो जीरो पर आ गया था. कहीं भी कोई सेविंग्स नहीं बची थी. सारे पैसे खत्म हो गए थे. उसे अपना मेट्रो कार्ड रिचार्ज करवाने के लिए पैसे की जरूरत थी. मोबाइल का रिचार्ज भी 2 दिनों में खत्म होने वाला था. इस बारे में अपनी बहन को बताए भी काफी समय बीत चुका था. उस से कुछ पैसे अकाउंट में ट्रांसफर करने की उस ने मदद मांगी थी. यह बात सितंबर महीने की 16 तारीख दोपहर की है.

उसे जल्द ही कोई दूसरी नौकरी तलाशनी थी. दिल्ली के एनसीआर गुरुग्राम की नौकरी छोड़े 2 हफ्ते हो गए थे. वह कई दूसरी कंपनियों में अपना रिज्यूम दे चुकी थी, लेकिन कहीं से बुलावे का मेल नहीं आया था. वह पिछले साल 2024 में शादी के बाद गुरुग्राम के पीजी से शिफ्ट हो कर नोएडा में अपने पति शहजाद के साथ रह रही थी. कई बातें दिमाग में उमड़घुमड़ रही थीं. तभी कौल बेल बजने पर उस का ध्यान भंग हो गया. वह बेमन से दरवाजा खोलने के लिए उठ रही थी. तब तक 2-3 बार कौल बेल बज चुकी थी.

दरवाजे की कुंडी खोल कर अपने कमरे में जाने को मुड़ी ही थी कि पीछे से प्यार भरी आवाज आई, ”क्या बात है बेगम साहिबा!  पूछे बगैर कुंडी खोल दी! दरवाजे पर कोई और होता तो..? ऐसी भूल मत किया करो.’’

यह उस के पति शहजाद की आवाज थी, जिस का नईमा ने कोई जवाब नहीं दिया था और कमरे में चली गई थी. पीछेपीछे शहजाद भी आ गया. उस ने पूछा, ”नौकरी का कहीं से बुलावा आया?’’

”अभी नहीं,’’ नईमा उदासी से बोली.

”कोई बात नहीं, चलो जब तक कहीं से कोई बुलावा नहीं आता, तब तक तुम्हें सैर करवाने ले चलता हूं.’’ शहजाद बोला.

”मैं टेंशन में हूं और तुम्हें सैर की सूझ रही है.’’

”थोड़ा घूमोगी तभी तो तुम्हारा मन हलका होगा. आज नहीं तो कल नौकरी मिल ही जाएगी, चिंता क्यों करती हो?’’ शहजाद बोला.

नईमा को पति के बदले रूप पर हैरानी हुई. कुछ देर पहले वह उस से काफी झगड़ कर निकला था. फिर अचानक उस से प्यार जताने लगा, सैर पर जाने के लिए कह रहा है. वह बोली, ”पैसे कहां हैं?’’

”इस की चिंता मत करो…’’ शहजाद के आगे कुछ बोलने से पहले ही पास रखे नईमा के मोबाइल पर मैसेज आने की टोन सुनाई दी. वह यूपीआई द्वारा पैसे आने का मैसेज था.

टोन सुन कर शहजाद फोन की तरफ देखने लगा. वह बोला, ”यह लो, पैसे भी आ गए!’’

”नहींनहीं! इस पर नजर मत डालो. बड़ी मिन्नतों के बाद दीदी ने पैसे भेजे हैं. मेट्रो कार्ड और फोन रिचार्ज करवाना है.’’ नईमा तुनकती हुई बोली और पैसा ट्रांसफर का मैसेज पढऩे लगी.

उस में शहजाद भी झांकने लगा. अंगरेजी में लिखा मैसेज आसानी से नहीं समझ पाया. बैलेंस अमाउंट देखने से पहले ही नईमा ने मोबाइल बंद कर दिया.

”ठीक है मत बताओ, मेरी जेब में पैसे हैं. यह देखो.’’ कहते हुए शहजाद ने जेब से 500 रुपए के नोटों की एक गड्डी निकाल कर दिखा दी.

”इस में पूरे 30 हजार रुपए हैं. चलो, तुम्हें मेरठ घुमा लाता हूं. वहीं कुछ शौपिंग भी करवा दूंगा. बचे पैसे तुम रख लेना.’’

”इतने पैसे कहां से आए. अभी तो तुम्हारे पास एक रुपया नहीं था…सचसच बताना किस से कर्ज लिया है?’’ नईमा बोली.

”तुम बेकार की बातों में मत उलझो. तैयार हो जाओ, हमें जल्दी निकलना है.’’ शहजाद बोला और अपना सामान पैक करने के लिए बैग निकाल लिया.

नईमा शहजाद के इस रूप को देख कर हैरान थी. बातबात पर गालियां बकने और हाथ उठाने वाले में यह बदलाव कैसे आ गया. इस पर अधिक बात न करना ही उस ने मुनासिब समझा. उस की दिली तमन्ना को पूरा करने के लिए वह भी उस के साथ चलने की तैयारी करने लगी.

कुछ घंटे बाद शहजाद और नईम मेरठ के भीड़भाड़ वाले बाजार में थे. वहीं दोनों ने कुछ शौपिंग की. नईमा ने झिझकते हुए अपनी पसंद की एक ड्रैस ली, लेकिन नईम ने उस के लिए एक बुरका भी खरीद लिया. फिर दोनों ने एक साधारण से रेस्टोरेंट में खाना खाया.

वहीं शहजाद की मुलाकात नदीम से हुई. उस का परिचय नईमा से करवाया, ”यह मेरा खास दोस्त है. मुसीबत में मेरा साथ देता है.’’

”अच्छा!’’ नईमा इस से अधिक और कुछ नहीं बोली.

शहजाद उसे रेस्टोरेंट के बाहर तक छोड़ आया.

तब तक शाम घिरने लगी थी. नईम वापस दिल्ली लौटने को बोली. इस पर शहजाद ने अगले रोज लौटने के बारे में बोल कर अपने दोस्त नदीम घर ठहरने का आग्रह किया.

नईमा थकान महसूस कर रही थी. शहजाद के आग्रह को मान लिया. दोनों नदीम के घर की ओर चल पड़े. रास्ते में एक जूस की दुकान दिखी. शहजाद बोला, ”क्यों न एकएक गिलास जूस पी लिया जाए! जूस की यह बहुत फेमस दुकान है. तुम्हारे लिए कौन सा जूस बनवाऊं?’’

”अनार का बनवा लो,’’ वह बोली.

”ठीक है, मैं तो अनानास का लूंगा!’’ शहजाद बोला और जूस की दुकान की ओर चल पड़ा. नईमा थोड़ी दूरी पर खड़ी रही. कुछ मिनटों में ही शहजाद 2 गिलास जूस ले कर नईमा के पास आ गया. दोनों ने अपनीअपनी पसंद का जूस पीया और फिर वहां से चल पड़े. अगले रोज 17 सितंबर, 2025 को मेरठ में जानी थाने की पुलिस को सिवालखास जंगली इलाके में एक महिला की रक्तरंजित लाश मिली. लाश बुरके में थी. पुलिस लावारिस लाश की पहचान के लिए तहकीकात में जुट गई. महिला का गला रेता हुआ था.

इस की स्थिति देख कर पहली नजर में पुलिस ने अनुमान लगाया कि महिला की मौत गला रेतने से हुई होगी. किंतु हो सकता है उस की मौत के और भी कुछ कारण रहे हों. हो सकता है उस का गला घोंटा गया हो या फिर उसे जहर खिलाने के बाद मृत देह का गला रेता गया हो. कारण जो भी हो, वो तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा.  शक्ल और कदकाठी से महिला उत्तर पूर्व की लग रही थी, जिस की उम्र लगभग 35-36 साल थी.

मौत के कारण की जांच के लिए लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उस की रिपोर्ट में गला रेतने से मौत की पुष्टि हुई. किंतु उस की हफ्तों तक पहचान नहीं हो पाई. पुलिस को कोई सुराग भी हाथ नहीं लग रहा था. मेरठ की पुलिस तफ्तीश में जुटी हुई थी.

अचानक 8 अक्तूबर, 2025 को मेरठ पुलिस को एक गुमशुदा की रिपोर्ट पर ध्यान गया. दरअसल, वह रिपोर्ट मुजफ्फरनगर के चरथावल थाने में दर्ज की गई थी. करीब 35 वर्षीया नईमा यासमीन नामक महिला के बारे में बताया गया था कि वह 16 सितंबर से लापता है. गुमशुदमी दर्ज होते ही नईमा यासमीन का फोटो और पूरी डिटेल्स पुलिस के औनलाइन रिकौर्ड पर फीड हो गई. मेरठ पुलिस की नजर जब इस पर गई, तब वह चौंक गई. कारण गुमशुदा महिला की तसवीर 17 सितंबर को बरामद हुई लाश से मिलतीजुलती थी.

मेरठ पुलिस को गुमशुदा की रिपोर्ट से ही शिकायत दर्ज करवाने वाले के बारे में मालूम हो गया. वह पहले चरथावल थाने गई. वहां से रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले का पूरा विवरण ले लिया, जो उस लापता महिला नई यासमीन का पति शहजाद है. उस के ग्राम सैद नगला मुजफ्फरनगर का रहने की पुष्टि हुई. मेरठ पुलिस तुरंत शहजाद के घर गई. पुलिस को देखते ही शहजाद घबरा गया. उस की बौडी लैंग्वेज से पुलिस समझ गई कि जरूर दाल में कुछ काला है. पुलिस ने उसे उस की लापता पत्नी की लाश मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर शहजाद घडिय़ाली आंसू बहाने लगा. फिर पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले गई. थाने में उस से यासमीन की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो शहजाद पुलिस के सवालों के सही जवाब देने से कतराता रहा, किंतु जब पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया, तब  उस ने नईम की हत्या करना कुबूल कर लिया. उस ने यह भी बताया कि इस वारदात को अंजाम देने में उस ने अपने साथी नदीम अंसारी की मदद ली थी. दोनों ने मिल कर यासमीन की हत्या की थी. इस से पहले उस ने यासमीन को जूस में नींद की गोलियां मिला कर दी थीं. उस के बेहोश हो जाने के बाद दोनों उसे घटनास्थल तक ले गए थे.

हत्या के बाद किसी को शक नहीं हो, इसलिए उस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना चरथावल में दर्ज करवाई थी. यह उस तक पुलिस के पहुंचने का कारण बन गया. जांचपड़ताल के बाद जानी थाने की पुलिस ने शहजाद और नदीम को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरी व रस्सी भी बरामद कर ली. इस खुलासे पर एसएसपी डा. विपिन ताडा ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का इनाम दे कर पुरस्कृत किया. शहजाद ने नईम की हत्या करने का जो कारण बताया, इस में उस की मक्कारी, हैवानियत, अपनी पहली बीवी और इसलाम धर्म तक के साथ बेवफाई की हैरान करने वाली दर्दनाक दास्तान थी.

हत्या की शिकार होने वाली नईमा यासमीन और शहजाद एक बेमेल जोड़ा था. उन के बीच कुछ समय के लिए वैचारिक तालमेल बन गए थे और यही उन के बीच प्रेम संबंध और निकाह का कारण भी था. नईम यासमीन जितनी सच्ची और प्रतिभावान और पढ़ीलिखी थी, शहजाद उतना ही उस के उलट था. असम के शहर गुवाहाटी की रहने वाली नईमा ग्रैजुएट थी और दिल्ली एनसीआर में स्थित मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी करती थी. दूसरी तरफ 5वीं तक पढ़ाई करने वाला शहजाद मेरठ की एक मसजिद में इमाम की छोटी से नौकरी करता है. वह शादीशुदा है और 3 बच्चों का बाप भी था. वह सोशल मीडिया का दीवाना था.

साल 2024 में उस की नईमा से औनलाइन जानपहचान हो गई थी. नईमा एनिमल वेलफेयर एनजीओ से भी जुड़ी थी. जानवरों से उसे बेहद लगाव था. साथ ही उस के पास 5-6 बिल्लियां भी थीं. इसी एनजीओ के जरिए साल 2024 में उस की मुलाकात शहजाद से हुई थी. सोशल मीडिया के जरिए दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर धीरेधीरे दोस्ती आगे बढ़ी. शहजाद ने खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का ग्रैजुएट और कारोबारी बता कर नईमा का दिल जीत लिया था. साथ ही उस ने कहा था कि उसे भी बिल्लियों से बहुत प्यार है. उस ने नईमा से वही बातें कीं, जो उसे पसंद थीं.

कैट लवर बन कर शहजाद ने धीरेधीरे नईमा का भरोसा जीत लिया था और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हो गया था. सितंबर 2024 में दोनों ने औनलाइन निकाह भी कर लिया. निकाह के बाद दोनों दिल्ली में साथ रहने लगे, जिस की जानकारी नईमा की बहन को भी थी. नईमा खुश थी और अपने नए जीवन की बातें सिर्फ अपनी बहन के साथ साझा करती थी. निकाह के करीब 3 महीने बाद शहजाद ने नईमा से मुजफ्फरनगर में स्थित अपना पुश्तैनी घर दिखाने के लिए कहा. उस के कहने पर नईमा मुजफ्फरनगर पति के घर पहुंची. वहां उस के सपने टूट गए. खुद को बिजनैसमैन बताने वाला शहजाद बेहद साधारण परिवार से था और एक इमाम की नौकरी करता था. खुद मसजिद के राशन पर पलता था. उस का कोई कारोबार या व्यापार नहीं था. उस ने नईमा को झूठ बताया था.

सब से बड़ा झूठ तो उस ने अपनी शादी को ले कर कहा था. नईमा से उस ने बात छिपा ली थी कि वह पहले से विवाहित और 3 बच्चों का बाप भी है. नईमा को समझते देर नहीं लगी कि शहजाद ने उस से निकाह उस की नौकरी और सैलरी, सेविंग्स के लालच में किया था. इस सच्चाई के खुलते ही नईमा ने शहजाद का विरोध किया. बदले में शहजाद उस के साथ गालीगलौज और मारपीट  पर उतर आया. शहजाद की हकीकत जान कर नईमा यासमीन पूरी तरह टूट गई. उस ने अपना दुखड़ा बहन को सुनाया. अपनी सच्चाई का परदाफाश होते  ही शहजाद का चेहरा भी बदल गया. वह नईमा की सैलरी हड़पने लगा. उस की सारी सेविंग्स भी खत्म कर दी.

नईमा परेशान हो गई. उस ने शहजाद से पहली पत्नी और बच्चों से मिलने से मना किया. यह बात शहजाद को नागवार गुजरी. तब उस ने नईमा को ही रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया.  जिस के लिए उस ने अपने दोस्त नदीम को 12 हजार रुपए दे कर योजना में शामिल कर लिया. योजना के मुताबिक शहजाद 16 सितंबर, 2025 को शौपिंग के बहाने नईमा को मेरठ ले कर आया और रास्ते में उसे जूस में नींद की गोलियां दे कर बेहोश कर दिया. फिर दोनों उसे जंगली इलाके के एक खेत में ले गए. जहां नदीम ने रस्सी से उस का गला दबाया और शहजाद ने छुरे से गले को रेत दिया. फिर दोनों ने लाश को एक बुरके में लपेट कर फेंक दिया. फिर वापस घर लौट आए.

हफ्तों तक वे चुप्पी साधे रहे, लेकिन भीतरभीतर डरे हुए भी थे कि कहीं वे पकड़े न जाएं. इसी भय से शहजाद ने 8 अक्तूबर, 2025 को मुजफ्फरनगर में नईमा यासमीन की गुमशुदगी भी दर्ज करवा दी थी. पुलिस ने आरोपी शहजाद और उस के साथी नदीम से पूछताछ करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Love Story in Hindi

 

Crime News: नोएडा में सनसनी – नाले से मिली सिर कटी महिला की निर्वस्त्र लाश

Crime News: एक ऐसी हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिस ने हर किसी को चौंका कर रख दिया है. नोएडा में एक महिला की सिर कटी निर्वस्त्र लाश नाले में मिली. आखिर किस की थी यह लाश और किस ने इस महिला को इतनी बेरहमी से मार डाला. क्या है इस हत्याकांड का पूरा सच, चलिए पढ़ते हैं, इस क्राइम से जुड़ी स्टोरी को विस्तार से.

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-82 से सामने आई है. यहां 6 नवंबर, 2025 दिन गुरुवार को एक महिला का सिर कटा हुआ शव मिला. पुलिस को सूचना मिली तो वह मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया.पुलिस के द्वारा शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस जांच कर रही है कि मृतका कौन है.

पुलिस के अनुसार, यह मामला थाना सेक्टर-39 में दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने कहा है कि यह महिला का शव सेक्टर-82 नोएडा के कट के पास नाले में मिला. महिला का सिर और हाथ गायब थे. जिस से लग रहा है कि महिला की हत्या कहीं और की गई थी. सबूत मिटाने के लिए शरीर को यहां फेंका गया होगा. पुलिस सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर जांच कर रही है. Crime News

UP Crime News: 8 करोड़ के लालच में अस्पताल संचालक किडनैप

UP Crime News: गोरखपुर में स्थित एक अस्पताल के संचालक अशोक जायसवाल के दिलोदिमाग से किडनैप की छाप मिटने का नाम ही नहीं ले रही थी. पहले उन के बिजनैसमैन पिता को किडनैपर्स ने मोटी रकम ले कर छोड़ा. उस के बाद उन के बड़े भाई का किडनैप हो गया. उन्हें भी मोटी रकम दे कर किडनैपर्स से छुड़ाया गया. इन दोनों घटनाओं से वह उबर पाते, उस से पहले ही 8 करोड़ रुपए की फिरौती के लिए अशोक जायसवाल का ही किडनैप हो गया. क्या उन की पत्नी डा. सुषमा जायसवाल ने किडनैपर्स को यह रकम दी या फिर…

गोरखपुर मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर स्थित है थाना सिकरीगंज. गांव अबू पट्टी इसी थानाक्षेत्र के अंतर्गत पड़ता है. यह गांव मुसलिम बाहुल्य के रूप में जाना जाता है. गांव के अधिकांश युवा खाड़ी देशों में जौब कर के अच्छा पैसा कमाते हैं. यही देख इसी गांव का रहने वाला 35 वर्षीय कमालुद्दीन अहमद उर्फ कमालु का भी सपना ढेरों पैसे कमाने का था. अमीर बनने के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहता था. छोटीमोटी चोरियां कर के उस ने जरायम की दुनिया के रोजनामचे पर अंगद की तरह मजबूती से पांव जमा कर पुलिस की नाक में दम कर दिया था.

खतरनाक असलहों और लड़कियों के शौकीन कमालु ने 3 शादियां की थीं, जिन में 2 लड़कियां हिंदू और एक मुसलिम थी. दोनों हिंदू लड़कियों में से एक कमालु की छाया बन कर हर वक्त उस के साथ रहती थी. वही उस के नाम से इंस्टाग्राम चलाती और उस के गुनाहों का बहीखाता संभालती. वह लड़कियों की तस्करी भी करता था, तभी तो उस की पुलिस से ले कर राजनेताओं के बीच में गहरी पैठ बन गई थी. इसलिए वह पुलिस के चंगुल में आसानी से फंसता नहीं था.

बात मई, 2025 की है. शाम के 5 बजे का वक्त था. कमालु अपने घर के डाइनिंग रूम में सोफे पर बैठा हुआ था. सामने लकड़ी की बनी छोटी मेज पर कांच की प्याली में चाय रखी थी, जिसे वह चुस्की ले कर पी रहा था. तभी उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उस ने दाहिने हाथ में मोबाइल उठा कर नंबर को गौर से देखा, वह उस के परिचित प्रदीप सोनी का था. काल रिसीव कर वह अदब से बोला, ”बताएं सोनीजी, आज इस नाचीज की कैसे याद आई?’’

”कुछ खास काम था तुम से.’’

”मेरे से खास काम..!’’ चौंकते हुए कमालु ने सवाल किया, ”बताएं…बताएं, क्या खास काम है?’’

”एक मोटी आसामी कटने को तैयार है. बोलो, टास्क पूरा करोगे?’’

”कीमत?’’

”8 करोड़.’’

”8 करोड़.’’ सुन कर कमालु ऐसे चौंका, जैसे उसे सैकड़ों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मारे हों.

”आसामी मोटी और बड़ी है. 8 करोड़ की रकम उस के घर में रखी है, मगर मेरी एक शर्त है.’’ प्रदीप शख्स ने कहा.

”हां, बोलो भाईजान. कैसी शर्त है?’’

”पहली शर्त तो यह कि कुछ भी हो जाए, इस में मेरा नाम सामने नहीं आना चाहिए. दूसरी शर्त टास्क पूरी होने के बाद फिरौती की रकम में से आधा हिस्सा मेरा. बोलो, मेरी दोनों शर्तें मंजूर हैं तुम्हें?’’

”हां, 100 फीसदी डील पक्की समझो. बस मुझे मेरे शिकार का पता दे दो.’’

”वह है पादरी बाजार स्थित अंशुमान हौस्पिटल का डायरेक्टर और सेना से रिटायर जवान अशोक जायसवाल. उस की पत्नी डा. सुषमा जायसवाल है. एक बेटी और एक बेटा है, जो शहर से बाहर रहते हैं. घर पर मियांबीवी के अलावा तीसरा कोई नहीं रहता है. अपनी फिटनैस के लिए वह रोज सुबह साढ़े 5 बजे साइकिल से जेल रोड बाईपास से होते हुए रेलवे स्टेडियम में जौगिंग और स्वीमिंग करने अकेला जाता है.’’

प्रदीप सोनी ने शिकार का पूरा हुलिया और उस के आनेजाने की पूरी खबर कमालु को दे दी. सारी जानकारी पा कर कमालु की खुशियों का ठिकाना नहीं था. वह इस टास्क को पूरा करने लिए जीजान लगाने के लिए तैयार था. कमालु के पास 8-10 सदस्यों का गैंग था. करुणेश कुमार दुबे उस का सब से विश्वासपात्र था. यूं कहें कि वह उस का दाहिना हाथ था. करुणेश बेलाघाट थाने के शंकरपुर स्थित चौतरा पट्टी का रहने वाला था. कमालु की तरह वह भी कम समय में अमीर बनने के सपने देखा करता था. बाद में वह कमालु के गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया.

ऐसे किया किडनैप

अस्पताल के डायरेक्टर अशोक जायसवाल का किडनैप करने का टास्क मिलने के बाद कमालु करुणेश के साथ उस की रेकी के काम में जुट गया. पूरे 2 महीने तक रेकी करने के बाद जब उन्हें लगा कि अब टास्क पूरा करने का समय आ चुका है, तब कमालु ने इस काम को अंजाम देने के लिए अपने और साथियों श्याम सुंदर उर्फ गुड्डू यादव, जनार्दन गौड़, प्रीतम कुमार, अंश कुमार और शेरू सिंह को सक्रिय किया.

योजना तैयार होने के बाद 25 जुलाई, 2025 को शिकार को टारगेट बनाने की बुनियाद रखी. शातिर कमालु ने गिरोह के सदस्यों को 2 टीमों में बांट दिया, ताकि कोई मुसीबत आने पर सभी साथी सुरक्षित निकल कर भागने में सफल रहें. पहली टीम में उस ने श्यामसुंदर, जनार्दन गौड़ और करुणेश दुबे को रखा था. जबकि दूसरी टीम में वह खुद, प्रीतम कुमार, शेरू सिंह और अंश कुमार को रखा था.

25 जुलाई, 2025 की भोर के 4 बजे एक कार में सवार हो कर श्यामसुंदर, जनार्दन गौड़ और करुणेश दुबे कौआबाग अंडरपास पहुंचे. कार श्यामसुंदर चला रहा था. कार एक साइड में लगा कर तीनों उस में से निकल कर थोड़ीथोड़ी दूरी पर फैल गए थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो. अंडरपास के दूसरी ओर कमालु कार ले कर खड़ा था, जिस में प्रीतम कुमार, शेरू सिंह और अंश कुमार सवार थे.

ठीक साढ़े 5 बजे साइकिल पर सवार हो कर अशोक जायसवाल कौआबाग पुलिस चौकी होते हुए अंडरपास की ओर आते दिखाई दिए. उन्हें आते हुए देख कर करुणेश, जनार्दन और श्यामसुंदर सतर्क हो गए. जैसे ही अशोक अंडरपास के पास पहुंचे, अचानक उन की साइकिल के सामने करुणेश आ गया और उन की साइकिल रोक कर पता पूछने के बहाने अपनी बातों में उलझा लिया. तब तक वहां श्यामसुंदर और प्रीतम भी पीछे से आ गए और अशोक को धक्का दे कर साइकिल से नीचे गिरा दिया.

अशोक जायसवाल साइकिल सहित नीचे गिर गए. वह खुद को संभाल पाते या कुछ समझ पाते, इतने में तीनों ने उन्हें दबोच कर कार की पिछली सीट पर डाल दिया. अशोक को बीच में बैठा कर उन्होंने उन की आंखों पर पट्टी बांध दी. टारगेट पूरा होने की सूचना जैसे ही कमालु को मिली, वह खुशी से झूम उठा और अपनी कार ले कर करुणेश की कार के पीछे लगा दी. इधर अशोक जायसवाल को घर से निकले करीब 4 घंटे बीत चुके थे. वह अब तक घर नहीं पहुंचे थे. यह देख कर उन की पत्नी डा. सुषमा जायसवाल परेशान हो गई थीं कि कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्हें घर लौटने में इतनी देर लगे. जौगिंग कर के वह 2 घंटे में घर लौट आते थे, फिर आज कहां रह गए. उन का फोन भी लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था.

पति का फोन लगातार बंद आने पर डा. सुषमा को किसी अनहोनी की आशंका हुई. मन में बुरेबुरे खयालों के काले बादल उमडऩे लगे. अभी वह इन्हीं खयालों के मकडज़ाल में उलझी हुई थीं कि उन के फोन की घंटी घनघना उठी. डिसप्ले पर उभर रहा नंबर अननोन था. हिम्मत कर के डा. सुषमा ने वह कौल रिसीव किया, ”हैलो! कौन?’’

”क्या मेरी बात डौक्टर सुषमा जायसवाल से हो रही है?’’ दूसरी ओर से रौबीली आवाज कान के परदे से टकराई.

”हां, मैं सुषमा जायसवाल हूं. बताइए, क्या बात है?’’

”सुन डौक्टरनी, तेरा पति अशोक मेरे कब्जे में है. उसे जिंदा और सहीसलामत देखना चाहती है तो 8 करोड़ रुपए तैयार कर के रखना. दोबारा फोन करूंगा तो बताऊंगा कि रुपए कब और कहां ले कर आना है. और हां, जरा भी होशियारी करने की कोशिश मत करना, वरना तेरे पति को खलास कर दूंगा, रोती रहना जिंदगी भर. समझी. यह भी सुन ले, पुलिस के पास जाने की गलती कतई मत करना, वरना इस के शरीर के इतने टुकड़े करूंगा कि तेरे को जोडऩे में जिंदगी बीत जाएगी, समझी. चल, पैसों के इंतजाम में जुट जा.’’ फोन करने वाले ने सुषमा को धमकी दी. धमकी करुणेश ने दी थी.

8 करोड़ की मांगी फिरौती

पति के किडनैप होने की सूचना पाते ही डा. सुषमा घबरा गईं. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें? किडनैपर ने पति को आजाद करने के बदले में 8 करोड़ रुपयों की डिमांड की थी. ये 8 करोड़ रुपए कहां से आएंगे? काफी सोचविचार कर डा. सुषमा जायसवाल अपने बहनोई को साथ ले कर शाहपुर थाने पहुंचीं. इंसपेक्टर नीरज राय को उन्होंने पति के किडनैप से ले कर बदमाशों द्वारा फिरौती में 8 करोड़ की रकम मांगने की बात बताई.

डा. सुषमा के मुंह से किडनैपर्स द्वारा फिरौती की 8 करोड़ की रकम सुन कर इंसपेक्टर नीरज राय चौंक पड़े. यह सूचना उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को दी तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और आननफानन में सीमा के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को सील करा कर बैरिकेड्स लगा कर वाहनों की जांच शुरू करने के आदेश दे दिए गए, लेकिन बदमाश पुलिस की पकड़ से बहुत दूर जा चुके थे. रिटायर्ड एयरफोर्स जवान और अस्पताल संचालक अशोक जायसवाल के किडनैप केस को एसएसपी राजकरन नैयर ने गंभीरता से लिया. उन्होंने एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी के नेतृत्व में पुलिस की 4 टीमें बनाईं और उन्हें बदमाशों को पकडऩे के लिए रवाना किया.

पुलिस के लिए यह घटना चुनौतीपूर्ण थी और वे किडनैप किए गए अशोक जायसवाल को सकुशल बचाना चाहते थे. बदमाशों ने जिस नंबर से फिरौती की रकम के लिए कौल की थी, एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी ने सब से पहले उसे सर्विलांस पर लगा दिया और बदमाशों के लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने डा. सुषमा से यह भी कह दिया कि बदमाशों का फिर से फोन आए तो उसे अपनी लंबी बातों में देर तक उलझाए रखें. उसी शाम 4 बजे के करीब बदमाशों का फोन डा. सुषमा जायसवाल के फोन पर आया. 8 करोड़ की फिरौती की मांग पर सौदेबाजी करतेकरते बदमाश 15 लाख की रकम पर आ कर टिक गए.

पति की सलामती के लिए वह जैसेतैसे 8 लाख रुपयों का इंतजाम कर सकीं और बदमाशों के बताए गीडा थानाक्षेत्र के कालेसर नामक स्थान पर रकम पहुंचाने के लिए तैयार हुईं. दूसरी तरफ सर्विलांस के जरिए पुलिस दोनों की बातों को सुन भी रही थी. इस के अलावा डा. सुषमा ने एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी को फोन कर के किडनैपर्स से हुई सारी बात बता दी. सादे कपड़ों में पुलिस टीम ने कालेसर एरिया को चारों ओर से घेर लिया था. किडनैपर्स ने पैसे लेने के लिए यही जगह डा. सुषमा जायसवाल को बताई थी. शाम 7 बजे के करीब एक नीले रंग की कार कालेसर आ कर रुकी तो सादे कपड़ों में चारों ओर फैली पुलिस पोजीशन ले कर सतर्क हो गई. उन्हें यकीन था कि इसी कार में बदमाश अशोक जायसवाल को ले कर आए होंगे.

पलभर बाद कार में से 3 व्यक्ति बाहर निकले, जबकि कार के अंदर एक व्यक्ति बैठा नजर आ रहा था. इस के कुछ दूरी पर एक और कार आ कर खड़ी हो गई. पहली वाली कार से उतरे 3 व्यक्तियों में से एक ने चारों तरफ का जायजा लेने के बाद अपनी जेब से फोन निकाला और वह कोई नंबर लगाने के बाद फोन पर बात करने लगा. एसपी (सिटी) त्यागी को विश्वास हो गया कि ये शायद बदमाश ही हैं, जो फिरौती की रकम लेने यहां आए हैं. इसलिए उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस टीम को फोन कर के सतर्क किया और किसी भी तरह बदमाशों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

आदेश मिलते ही घात लगाए बैठी पुलिस टीम बदमाशों की ओर बढ़ी तो तीनों बदमाश खतरे को भांप कर मौके से भागने लगे. बदमाशों को भागता देख कार में बैठा व्यक्ति भी दरवाजा खोल कर कार में से निकल कर भागने लगा. वह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि अपहृत किए गए अशोक जायसवाल ही थे. पुलिस ने अशोक को सकुशल बरामद कर लिया.

भावुक हो पत्नी से लिपट गए अशोक जायसवाल

पुलिस के साथ पत्नी सुषमा जायसवाल को देख कर अशोक जायसवाल को सहसा यकीन नहीं हुआ. पत्नी को देखते ही उन की आंखें डबडबा गईं और वह उन से जा लिपटे. पति को सहीसलामत देख कर सुषमा का भी गला रुंध गया था. भावुक हो कर कुछ पलों तक दोनों एकदूसरे को अपलक देखते रहे. इधर पुलिस ने भागने वाले तीनों किडनैपर्स को कुछ दूर जा कर पकड़ लिया, जिन में 2 किडनैपर्स जनार्दन गौड़ और श्यामसुंदर उर्फ गुड्ïडू यादव भागते समय सड़क पर गिर गए थे, जिस से दोनों के पैरों में गंभीर चोटेें आई थीं. वे लंगड़ा कर चल रहे थे. पुलिस ने करीब 15 घंटों में अपहृत अशोक जायसवाल और किडनैपर्स को सकुशल पकडऩे में कामयाबी हासिल कर ली थी.

पुलिस तीनों किडनैपर्स को ले कर थाना शाहपुर पहुंची. इधर इंसपेक्टर नीरज राय ने कप्तान राजकरन नैय्यर और एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी को सूचना दे दी थी. अशोक जायसवाल की सकुशल बरामदगी और 3 किडनैपर्स की गिरफ्तारी की सूचना पाते ही दोनों अधिकारी थाने पहुंचे और तीनों किडनैपर्स से सख्ती से पूछताछ की तो करुणेश दुबे ने बताया कि घटना का मास्टरमाइंड कमालुद्ïदीन अहमद उर्फ कमालु है. कमालु के अलावा घटना में प्रीतम, शेरू सिंह और अंश तिवारी भी शामिल थे. कुल मिला कर इस घटना में 7 किडनैपर्स के नाम सामने आए, जिन में 4 मौके से गाड़ी ले कर फरार हो गए थे.

अगले दिन 26 जुलाई, 2025 को एसएसपी राजकरन नैय्यर ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता आयोजित की और तीनों किडनैपर्स को गिरफ्तार करने और अशोक जायसवाल को सहीसलामत बरामद करने की जानकारी पत्रकारों को दी. जांच में सामने आया कि परिवार की गतिविधियों पर कोई नजर बनाए हुए था, जिस की वजह से पूरे औपरेशन को बहुत गोपनीय रखा गया था. फिर तीनों को अदालत में पेश कर के 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में गोरखपुर मंडलीय कारागार, बिछिया भेज दिया. फरार चारों बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए उन के ठिकानों पर दबिश देने लगे, लेकिन बदमाश पुलिस की पकड़ से दूर थे.

27 जुलाई, 2025 को डीआईजी डा. एस. चनप्पा ने घटना के मास्टरमाइंड कलामुद्ïदीन उर्फ कमालु के ऊपर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया. इनाम घोषित होते ही अगले दिन 28 जुलाई को कमालु रायबरेली की कोर्ट में एक पुराने केस में आत्मसमर्पण कर जेल चला गया. ऐसा करना कमालु की मजबूरी थी, उसे डर सता रहा था कि कहीं उस का एनकाउंटर न हो जाए. एनकाउंटर के डर से ही उस ने खुद को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था. गोरखपुर पुलिस ने कमालु से पूछताछ के लिए न्यायालय में ट्रांजिट रिमांड की मांग कर दी थी.

24 अगस्त, 2025 को पुलिस की मेहनत रंग लाई और कमालु 48 घंटे की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया गया. कड़ी सुरक्षा के बीच कमालु रायबरेली जेल से गोरखपुर लाया गया. पुलिस अधिकारियों ने गुप्त स्थान पर रख कर उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने रट्टू तोते की तरह सारा राज उगल दिया था और परतदरपरत राज खुलता चला गया. पूछताछ में कमालु ने बताया कि अशोक जायसवाल के अपहरण की सुपारी उन्हीं के पड़ोसी ज्वैलर प्रदीप सोनी ने दी थी.

उस ने आगे बताया कि गोला थाने का गैंगस्टर मोनू त्रिपाठी, तरुण त्रिपाठी का दोस्त था. क्रिमिनल्स से उस की अच्छी दोस्ती थी. यह बात तरुण जानता था. उस ने लाखों रुपए मिलने का लालच दे कर इसे भी अपनी योजना में मिला लिया था. मोनू का दोस्त करुणेश दुबे था, जो मेरा (कमालुद्दीन उर्फ कमालु) गैंग चलाता था. मोनू त्रिपाठी के जरिए प्रदीप सोनी और तरुण त्रिपाठी मुझ तक पहुंचे और अशोक जायसवाल के किडनैप सुपारी दी. पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी कमालु को 26 अगस्त, 2025 को रायबरेली जेल पहुंचा दिया. इस के बाद पुलिस ने आरोपी प्रदीप सोनी, देवेशमणि त्रिपाठी उर्फ तरुण त्रिपाठी और मोनू त्रिपाठी को गिरफ्तार कर उस से भी पूछताछ की.

पिता और भाई भी हो चुके थे किडनैप

अशोक जायसवाल किडनैप केस में अब तक 10 आरोपी अरेस्ट किए जा चुके थे. 2 आरोपी पुलिस की पकड़ से अभी भी दूर थे. पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था और फरार चल रहे 2 आरोपियों प्रीतम और अंश तिवारी की तलाश तेज कर दी थी. अशोक जायसवाल मूलरूप से बिहार के बेतिया जिले के रहने वाले थे. वह व्यापार घराने से ताल्लुक रखते थे. उन के पिता बड़ेलाल जायसवाल एक बड़े व्यापारी थे. एक दिन में लाखों का कारोबार होता था. बात सन 1993 की है. तब बिहार में अपहरण कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा था. एक शाम बदमाशों ने अशोक के पिता का किडनैप कर लिया और फिरौती की बड़ी रकम दे कर उन्हें मुक्त कराया था.

पिता के साथ घटी घटना की छाप अभी पूरी तरह से अशोक जायसवाल के जहन से उतरी नहीं थी कि 1995 में उन के बड़े भाई मुरारी लाल का अपहरण हो गया. इस बार भी बदमाशों ने बड़ी फिरौती ले कर मुरारी लाल को आजाद किया था. बारबार परिवार में घट रही घटनाओं से अशोक जायसवाल इस कदर डर गए थे कि अब बेतिया में रहना नहीं चाहते थे. इसे इत्तफाक ही कहा जाएगा कि व्यापारी घराने में होते हुए वह व्यापार के धंधे से दूर रहे थे. इसी दौरान उन्हें एयरफोर्स में नौकरी मिल गई. साल 2000 में उन का ट्रांसफर गोरखपुर हो गया और परिवार के साथ गोरखपुर आ गए.

यहीं रह कर कई साल नौकरी की. साल 2003 में वह एयरफोर्स से रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद वह शाहपुर थानाक्षेत्र के पादरी बाजार इलाके में जमीन ले कर बस गए थे. पत्नी सुषमा जायसवाल भी बस्ती जिले के एक सरकारी अस्पताल में डौक्टर थी. समय अपनी रफ्तार आगे बढ़ता रहा. रिटायरमेंट में अशोक को अच्छीखासी रकम मिली थी और पत्नी भी सरकारी मुलाजिम थीं. दोनों को मिला कर उन के पास अच्छा बैंक बैलेंस था. वे जहां रहते थे, उसी जमीन पर उन्होंने ‘आयुष्मान हौस्पिटल’ बनाया. अस्पताल के निचले हिस्से में वे परिवार सहित रहते थे. ऊपर अस्पताल चलता था.

अशोक जायसवाल के पास जब पैसे आने लगे तो उन्होंने एक स्कूल खोलने की योजना बनाई. यह बात 2017-18 की थी. अपनी योजना को पूरी करने के लिए उन्होंने करोड़ों रुपए की पिपराइच में जमीन खरीदी. जमीन खरीद कर उसे वैसे ही छोड़ दी, ताकि वक्त आने पर उस का सही से इस्तेमाल किया जा सके. यह बात उन के करीबी जानते थे. यही नहीं, उन्होंने अपने बड़बोलेपन में अपने करीबियों और दोस्तों के बीच में यह बात फैला दी थी कि उन को और जमीन की तलाश है. मिल जाए तो खड़ेखड़े नकद खरीद लेंगे. 8-10 करोड़ रुपए तो घर के कैशबौक्स में हमेशा पड़े रहते हैं.

लालच में ज्वैलर ने रची किडनैप की साजिश

यह बात उन का पड़ोसी और बस्ती जिले का रहने वाला प्रदीप सोनी उर्फ पिंटू को भी पता चल गई. हाल में वह पादरी बाजार में किराए का कमरा ले कर परिवार के साथ रहता था. वह उन्हीं के आयुष्मान हौस्पिटल के निचले वाले हिस्से में बनी दुकानों में एक दुकान किराए पर ले कर ज्वैलरी का शोरूम खोल रखा था. अशोक ने सुरक्षा के लिहाज से अस्पताल में कई सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिस का एक्सेस अशोक जायसवाल के मोबाइल में था तो वही एक्सेस प्रदीप के मोबाइल में भी था, जिस की जानकारी अशोक को नहीं थी. उसी एक्सेस के जरिए वह उन की हरेक गतिविधियों पर नजर गड़ाए हुए था.

पड़ोसी प्रदीप सोनी की नीयत में खोट आ गई थी. दरअसल, वह इन दिनों काफी परेशान चल रहा था. उस की परेशानी का कारण था कर्ज का लेना. प्रदीप ने यहां से पहले पादरी बाजार से जेल बाईपास रोड पर एक दुकान ली थी. वह दुकान अच्छीभली चल रही थी. जब जेल बाईपास रोड का चौड़ीकरण हुआ तो उस की दुकान टूट गई थी, जिस से उसे बड़ा नुकसान हुआ था. उस ने अशोक से 5 लाख रुपए कर्ज ले रखा था. अशोक पैसे लौटाने के लिए उस पर बारबार दबाव बनाने लगे थे. उन के तकादे से वह बुरी तरह परेशान रहने लगा था.

प्रदीप सोनी को पता चल चुका था कि अशोक जायसवाल के कैश बौक्स में 8 से 10 करोड़ रुपए नकद पैक हैं. इस के बाद उस ने अशोक जायसवाल को किडनैप कराने का प्लान बनाया और सोचा कि 8 करोड़ की फिरौती में से वह उन के 5 लाख रुपए भी लौटा देगा. इस प्लान को अंजाम देने के लिए उस ने अपने खास दोस्त देवेशमणि त्रिपाठी उर्फ तरुण त्रिपाठी और इंद्रेश तिवारी उर्फ मोनू को शामिल कर लिया और उन्हें लालच दिया कि फिरौती की रकम में से एकएक करोड़ आपस में बांट लेंगे और अपना देश छोड़ कर नेपाल में शिफ्ट हो जाएंगे, जहां मजे से जिंदगी कटेगी और पुलिस कभी उन तक पहुंच भी नहीं पाएगी.

उसी प्लान के तहत 25 जुलाई, 2025 को सुबह के समय अशोक जायसवाल का अपहरण करा लिया. लेकिन उन के ख्वाब अधूरे के अधूरे रह गए. डा. सुषमा जायसवाल की समझदारी के चलते घटना में लिप्त सभी आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए. 2 आरोपियों प्रीतम और अंश तिवारी कथा संकलन तक फरार चल रहे थे. UP Crime News

 

 

UP Crime News: ईंट से लगातार प्रहार कर ली पत्नी की जान

UP Crime News: घरपरिवार और समाज की बंदिशें तोड़ कर बबलू ने शादीशुदा रूबी से प्रेमविवाह किया था. 2 बच्चों के मांबाप दोनों के बीच ऐसी कौन सी वजह पैदा हो गई कि बबलू को पत्नी का हत्यारा बनना पड़ा…

थाना बर्रा के रहने वाले विशाल रफूगर ने सीटीआई नहर के करीब से बहने वाले नाले में बोरे में भरी एक युवती की लाश देखी, जिस का सिर बाहर निकल गया था. उस का क्षतविक्षत चेहरा साफ दिखाई दे रहा था, जिसे चीलकौए नोचनोच कर खा रहे थे. विशाल ने शोर मचाया तो देखतेदेखते वहां भीड़ एकत्र हो गई. किसी राहगीर ने सीटीआई के पास वाले नाले में एक महिला की लाश पड़ी होने की सूचना 100 नंबर पर दे दी. पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना थाना गोविंदनगर को दी गई. थाना गोविंदनगर की पुलिस आई जरूर लेकिन शव थाना बर्रा क्षेत्र में पड़े होने की बात कह कर लौट गई. नतीजतन 2 घंटे तक लाश नाले में पड़ी रही.

मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में आया तो एसपी (पूर्वी) हरीशचंदर, सीओ (गोविंदनगर) ओमप्रकाश सिंह थाना बर्रा पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने साक्ष्य एकत्र करने के लिए फोरेंसिक टीम को भी फोन कर के मौके पर बुला लिया था. पुलिस ने लाश वाले बोरे को नाले से बाहर निकाला. बोरे से लाश निकलवा कर निरीक्षण शुरू हुआ. मृतका की उम्र 30-35 साल रही होगी. वह नीले रंग की सलवार, हरे रंग की लैगिग, लाल कुरता, गुलाबी रंग का स्वेटर पहने थी. उस के पैर की अंगुलियों में बिछिया थीं. दाएं हाथ पर बबलू और ॐ गुदा हुआ था. कपड़ों और रूपरंग से लग रहा था कि मृतका किसी अच्छे परिवार से रही होगी.

शव देख कर ही लग रहा था कि किसी धारदार हथियार से उस की गरदन काटी गई थी. पहचान छिपाने के लिए मृतका का चेहरा बुरी तरह कुचला गया था. यही नहीं, उस के चेहरे पर तेजाब भी डाला गया था. हत्यारों ने मृतका के स्तन और अन्य कोमल अंगों पर भी गंभीर चोटें पहुंचाई थीं. इस से यही अंदाजा लगाया गया कि महिला की हत्या घृणा एवं क्रोध में की गई थी. घटनास्थल की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने के बाद थाना बर्रा के प्रभारी रामबाबू सिंह उसे अज्ञात महिला के शव की शिनाख्त कराने में जुट गए. आननफानन में शहर के सभी थानों से गुमशुदा महिलाओं की दर्ज सूचनाएं एकत्र कराई गईं. लेकिन शहर के थानों में दर्ज अज्ञात महिलाओं की गुमशुदगी की जानकारियों से मृतका का कोई सुराग नहीं मिल सका.  6 फरवरी को अचानक किसी ने पुलिस को फोन कर के सूचना दी कि 3 फरवरी, 2015 को सीटीआई नहर के पास नाले में मिली लाश कानपुर के सीसामऊ के रहने वाले बबलू की पत्नी रूबी की है. उस की हत्या में उस के पति बबलू की मुख्य भूमिका है. इसीलिए उस ने थाने में अपनी पत्नी रूबी की गुमशुदगी दर्ज नहीं करवाई.

इस सूचना की पुष्टि करने के लिए थानाप्रभारी रामबाबू सिंह पुलिस टीम के साथ सीसामऊ स्थित बबलू के घर जा पहुंचे. लेकिन वहां ताला लटका हुआ था. मामले की तह तक पहुंचने के लिए उन्होंने बबलू के पड़ोसियों से पूछताछ की. मोहल्ले वालों ने बताया कि जितेंद्र शुक्ला उर्फ बबलू किसी बैंक में चपरासी है. उस की पत्नी रूबी का चालचलन ठीक नहीं था. बबलू की गैरमौजूदगी में उस के घर कई लोग आतेजाते थे. एक बार बबलू ने रूबी को एक युवक के साथ घर में रंगरलियां मनाते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया था. जिस के बाद मारपीट हुई थी और मामला थाने तक जा पहुंचा था. लेकिन रूबी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी. बबलू से उसे बच्चे थे, जिन के मोह की वजह से वह रूबी को छोड़ना नहीं चाहता था और उसे समझाबुझा कर लाइन पर लाना चाहता था.

लेकिन रूबी पर बबलू की बातों का कोई असर नहीं हो रहा था. वह बबलू के पीछे खुल कर रंगरलियां मनाती थी, जिस से वह काफी परेशान था. अचानक 31 जनवरी की रात को पता नहीं क्या हुआ कि रूबी और उस के बच्चे गायब हो गए. बबलू भी अपने घर पर ताला डाल कर कहीं चला गया. अब उस ने सिर मुड़वा लिया है और कभीकभी चोरीछिपे अपने घर आता है. मोहल्ले वालों से पूछताछ में यह बात भी सामने आई थी कि रूबी के हाथ पर बबलू का नाम और ‘ॐ’ गुदा हुआ था. इस से यह बात साफ हो गई कि सीटीआई नहर के पास नाले में मिली लाश रूबी की ही थी. मोहल्ले वालों से मिली जानकारी से पुलिस को पक्का विश्वास हो गया था कि रूबी की हत्या उस के पति बबलू ने ही करवाई है.

मोहल्ले वालों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस लाश की शिनाख्त करवाने के लिए वनखंडेश्वर मंदिर, पीरोड पहुंची. वहां से पुलिस मंदिर के पुरोहित गणेशशंकर जोशी को हिरासत में ले कर थाना बर्रा लौट आई. थाने ला कर गणेशशंकर जोशी को मृतका की लाश के फोटो और कपड़े दिखाए गए. सारी चीजें देखने के बाद बबलू के पिता गणेशशंकर ने पुलिस को बताया कि लाश उस की बहू रूबी की ही है. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने गणेशशंकर जोशी से रूबी की हत्या की सच्चाई जानने का प्रयास किया.

जोशी ने बताया कि उस के 2 बेटे हैं, बबलू और धर्मेंद्र. बबलू बैंक औफ बड़ौदा, पनकी में चपरासी था. उस के 2 बच्चे थे 11 वर्षीय बेटा शिवा और 9 साल की बेटी प्रियंका. वह स्वयं वनखंडेश्वर मंदिर, थाना बजरिया से पुरोहितगीरी करते थे और वहीं एक कमरे में रहते थे. करीब 12 वर्ष पहले जितेंद्र उर्फ बबलू ने रूबी से प्रेमविवाह किया था. इसलिए उस ने उस के साथ अपने संबंध तोड़ लिए थे. बबलू अपनी पत्नी रूबी को ले कर 104/313 बड़ा चौराहा, सीसामऊ में रहता था. उस का घर आनाजाना बहुत कम था. 31 जनवरी को बबलू रात 10 बजे के लगभग अपने दोनों बच्चों को ले कर उस के पास आया था और यह कह कर उन्हें रखने को कहा था कि उस के ऊपर एक बड़ी मुसीबत आ पड़ी है.

उस ने बताया कि रूबी बैंक से रुपए निकाल कर घरगृहस्थी का सामान खरीदने के लिए शाम 4 बजे सीसामऊ बाजार के लिए निकली थी. लेकिन इतनी रात होने पर भी वह वापस नहीं आई थी.  उस ने पूरे कानपुर में छानबीन कर डाली, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. शायद वह चेन्नई चली गई हो. वह अपने छोटे भाई धर्मेंद्र को ले कर उसे ढूंढने चेन्नई गया है. इस के अलावा रूबी की हत्या के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है.

गणेशशंकर से पुलिस को जो भी जानकारी मिली, उस से पुलिस को पक्का विश्वास हो गया कि बबलू रूबी की हत्या के बारे में अच्छी तरह जानता है. यह भी संभव था कि वह खुद भी हत्या में शामिल हो या फिर उस ने हत्या अन्य लोगों से करवाई हो? इसी कारण बबलू पुलिस के सामने आने में डर रहा है. पुलिस मृतका के पति जितेंद्र उर्फ बबलू की तलाश में जगहजगह दबिश देने लगी. पुलिस ने हत्या का खुलासा जल्द से जल्द करने के लिए बबलू के मिलने के संभावित स्थानों पर छापे डाले, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया. मजबूर हो कर पुलिस ने बजरिया थाना क्षेत्र में अपने मुखबिरों का जाल बिछा दिया.

9 फरवरी, 2015 की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि रूबी का पति बबलू शास्त्री चौक के पास किसी के इंतजार में खड़ा है. सूचना मिलते ही थान बर्रा पुलिस ने बबलू को घेर कर पकड़ लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई. उस से पूछताछ शुरू हुई तो वह काफी देर तक पुलिस को बरगलाता रहा. लेकिन जब उस से कड़ाई से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. उस ने जो कुछ बताया, वह इस तरह था.

जितेंद्र उर्फ बबलू 104/312 बड़ा चौराहा, सीसामऊ, थाना बजरिया, कानपुर में रहता था. वह बैंक औफ बड़ौदा में चपरासी था. करीब 12 साल पहले चंद मुलाकातों में ही उसे विजयनगर, कानपुर निवासी छोटे की पत्नी रूबी से प्यार हो गया था. धीरेधीरे जितेंद्र उर्फ बबलू और रूबी का प्यार ऐसे मुकाम पर पहुंच गया कि दोनों को एकदूसरे की दूरी खलने लगी. फलस्वरूप बबलू और रूबी ने घरपरिवार और सामाजिक मानमर्यादाओं को ताक पर रख कर घर से भाग कर प्रेमविवाह कर लिया. कुछ महीने लुकछिप कर रहने के बाद दोनों सीसामऊ मोहल्ले में खुल कर पतिपत्नी बन कर रहने लगे. कालांतर में दोनों के शिवा और प्रियंका 2 बच्चे हुए.

कुछ सालों तक रूबी ईमानदारी से जीवन जीती रही. उस के बाद उस के कदम बहकने लगे. उस ने पति की गैरमौजूदगी का लाभ उठा कर मोहल्ले के कुछ युवकों से अवैध संबंध बना लिए और घर में रंगरलियां मनाने लगी. इस से मोहल्ले में तरहतरह की चर्चाएं होने लगीं. जब पत्नी की चरित्रहीनता और नएनए लड़कों के साथ गुलछर्रे उड़ाने की खबर बबलू को हुई तो सच्चाई जानने के लिए एक दिन वह अपनी बैंक ड्यूटी छोड़ कर घर आ गया. घर में उस ने रूबी को मोहल्ले के एक युवक के साथ रंगरलियां मनाते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया.

उस दिन उस ने रूबी को जम कर मारापीटा और भविष्य में ऐसी कोई हरकत न करने की सख्त हिदायत दी, लेकिन इस से रूबी के चालचलन में कोई बदलाव नहीं आया. यह देख कर बबलू को रूबी से नफरत हो गई. बच्चों का भविष्य बरबाद न हो, यह सोच कर बबलू रूबी को हर तरह से समझाबुझा कर रास्ते पर लाने का प्रयास किया कि वह ईमानदारी भरा जीवन गुजारे, लेकिन रूबी पर इस का कोई असर नहीं हुआ. नतीजतन घरपरिवार और रिश्तेदारों के बीच बबलू की बदनामी होने लगी. दूसरी ओर रूबी स्वयं पर अंकुश लगाने को ले कर सख्त होने लगी और पति को मुंह पर जवाब देने लगी, जिस के चलते बबलू और रूबी में 2 बार जम कर मारपीट हुई.

रूबी ने इस की शिकायत थाने में की. लेकिन पुलिस ने इसे पतिपत्नी का मामला मान कर दोनों को समझाबुझा कर लौटा दिया. तीसरी बार बबलू ने बाहरी लड़कों को घर में बैठाने को ले कर रूबी को जम कर पीटा. इस बार भी पुलिस ने रूबी का पक्ष लिया और सही न्याय करने के बजाय दोनों का समझौता करा दिया. इस समझौते में तय हुआ कि रूबी अपने बच्चों के साथ अलग रहेगी और बबलू उसे 4 हजार रुपए महीने खर्च देगा. इस के बाद रूबी बबलू से 4 हजार रुपए प्रति माह लेती रही. इस के बाद रूबी ने बबलू को अपने पास रहने के लिए मजबूर कर दिया. इस तरह रूबी हर महीने बंधीबंधाई रकम ले कर पत्नी की तरह बबलू के साथ रहती भी रही और उसे पुलिस का डर दिखा कर पूरी तरह अपने कब्जे में किए रही. जरा भी कोई बात होती तो वह उसे जेल भिजवाने की धमकी दे देती.

इस सब के चलते बबलू गहरे तनाव में रहने लगा. इस स्थिति का फायदा उठा कर रूबी खुल कर मनमानी करने लगी. इतना ही नहीं, अब वह अपने चाहने वालों से पति के सामने ही मिलनेजुलने लगी. बबलू से जब पत्नी की हरकतें सही नहीं गईं तो उस ने रूबी को अपनी जिंदगी से हटाने का इरादा बना लिया. जितेंद्र शुक्ला उर्फ बबलू ने गोविंदनगर निवासी अपने खास दोस्त राधेश तिवारी से अपनी पत्नी रूबी की अय्याशी के बारे में पूरी बात बता कर कहा कि अब उस से रूबी की हरकतें बरदाश्त नहीं होतीं. घर में मेरी स्थित एक भड़ुए जैसी हो गई है. उस के कारनामे मुझ से देखे नहीं जा रहे हैं. मैं उस से अपना पिंड छुड़ाना चाहता हूं. वह उसे बातबात में जेल भिजवाने की धमकी देती है, अब वह उस की हत्या कर के ही जेल जाना चाहता है. बबलू की बात सुन कर राधेश तिवारी उस की मदद के लिए तैयार हो गया.

राधेश तिवारी समाचार पत्र विके्रता था. उस की काफी दूरदूर तक अच्छी जानपहचान थी. राधेश तिवारी ने गोविंदनगर में रहने वाले पेशेवर हत्यारे शुभम मौर्य से जितेंद्र जोशी उर्फ बबलू की मुलाकात करवा कर बातचीत करवाई. शुभम मौर्य से रूबी की हत्या का सौदा 30 हजार रुपए में तय हो गया. बबलू ने शुभम मौर्य को रूबी की हत्या के लिए 25 हजार रुपए एडवांस दे दिए. शेष 5 हजार रुपए रूबी की हत्या के बाद देना तय हुआ. योजना के मुताबिक, 31 जनवरी, 2015 की रात 10 बजे के लगभग राधेश तिवारी, शुभम मौर्य व उस का साथी विजय उर्फ पुच्ची बबलू के घर आ गए.

चारों ने घर पर ही देर रात तक शराब पी. उसी दौरान शुभम मौर्य के इशारे पर बबलू अपने बेटे शिवा और बेटी प्रियंका को यह कह कर घर के बाहर ले कर चला गया कि ‘आप लोग बैठो, मैं बच्चों को बाजार से नाश्ता दिलवा कर जल्द वापस आता हूं. जैसे ही बबलू बच्चों को ले कर घर से बाहर गया, शुभम मौर्य, राधेश तिवारी और विजय कमरे में बैठी रूबी के पास पहुंच गए और उसे दबोच कर उस का मुंह दबा लिया. विजय उस के सिर पर ईंट से वार करने लगा. विजय रूबी के सिर पर तब तक ईंट मारता रहा, जब तक वह मरणासन्न नहीं हो गई. इस के बाद विजय ने सूजे से रूबी के गले को बुरी तरह से गोद दिया.

बबलू बच्चों को पिता के घर छोड़ कर पुन: लौट आया. तब तक रूबी मर चुकी थी. योजना के मुताबिक रूबी की लाश की शिनाख्त मिटाने के लिए उस के चेहरे पर ईंटें मारमार कर बुरी तरह से कुचल दिया गया. चेहरे की शिनाख्त किसी परिस्थितियों में न हो सके, इस के लिए उस के चेहरे पर तेजाब भी डाला गया. इस के बाद रूबी के क्षतविक्षत शव को आननफानन में वाटरपू्रफ बोरे में भर कर अच्छी तरह सिल दिया गया. लाश को ठिकाने लगाने के लिए रात के अंधेरे में शुभम मौर्य फरजी नंबर की अपनी स्कूटी पर रूबी के लाश वाले बोरे को लाद कर विजय के साथ चला गया और उस बोरे को सीटीआई नहर के पास नाले में फेंक कर अपने घर चला गया.

जितेंद्र उर्फ बबलू ने पुलिस को बताया कि वह रूबी के मोहल्ले के लड़कों के साथ अवैधसंबंधों से त्रस्त था. रूबी तृप्ति इतनी कामांध हो गई थी कि समझाने के बाद भी वह नहीं मानती थी. इसलिए उस के सामने उस की हत्या करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था. इसलिए 30 हजार रुपए की सुपारी दे कर उस ने उस की हत्या करवा दी थी. पुलिस बबलू को अपने साथ गोविंदनगर के ब्लाक नंबर 10 ले गई. उस की निशानदेही पर राधेश तिवारी, विजय उर्फ पुच्ची, शुभम मौर्य को गिरफ्तार कर लिया गया. साथ ही लाश को ठिकाने लगाने में इस्तेमाल की गई स्कूटी, मृतका और उस के पति बबलू के मोबाइल भी बरामद कर लिए गए.

पूछताछ के बाद जांच अधिकारी ने उपर्युक्त चारों अभियुक्तों को भादंवि. की धारा 302, 201, 120बी के अंतर्गत चालान तैयार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इस तरह रूबी की बदचलनी की वजह से एक परिवार बरबाद हो गया. UP Crime News

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

UP News: रिश्तों की कच्ची डोर

UP News: घर वालों ने मनोज की शादी कर के सोचा था कि पत्नी के आने पर वह अपनी भाभी के प्रेमजाल से निकल जाएगा. लेकिन क्या ऐसा हो पाया? त्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद के कस्बा मोदीनगर के निकट गांव सीकरी खुर्द में हर साल चैत महीने की नवरात्र में एक विशाल मेला लगता है. इस मेले में आसपास के लोग तो आते ही हैं, अगलबगल के जिलों के भी काफी लोग आते हैं. उसी मेले में मेरठ के थाना रसूखपुर जाहिद का रहने वाला मनोज भी पत्नी संगीता और बेटी अनुष्का के साथ मेला देखने जाना चाहता था. इसलिए उस ने संगीता से कहा, ‘‘संगीता, कल सुबह जल्दी तैयार हो जाना, हम सीकरी का मेला देखने चलेंगे.’’

मनोज संगीता से अकसर लड़नेझगड़ने के साथ मारपीट करता रहता था, इसलिए संगीता ने कहा, ‘‘मुझे तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाना है, मैं ऐसे ही ठीक हूं. मुझे मेलाठेला देखने का शौक नहीं है.’’

‘‘तुम भी जराजरा सी बात का बतंगड़ बना देती हो. अरे रात गई बात गई. रात में जो हुआ, उसे भूल जाओ. एक ओर तो कहती हो कि मैं तुम्हारे लिए कुछ करता नहीं, तुम्हें कहीं ले नहीं जाता. अब चलने को कह रहा हूं तो नखरे दिखा रही हो.’’ मनोज ने संगीता की खुशामद करते हुए कहा. संगीता कुछ कहती, उस के पहले ही मनोज की मां यानी संगीता की सास शकुंतला ने कहा, ‘‘अरे इतने प्यार से कह रहा है तो चली जा , मेला ही दिखाने तो ले जा रहा है. कुएं में धकेलने थोड़े ही ले जा रहा है.’’

‘‘इन का क्या भरोसा. मेला दिखाने के बहाने ले जा कर कहीं कुएं में ही धकेल दें. लेकिन आप कह रही हैं, इसलिए चली जाती हूं. कितने बजे निकलना है?’’ संगीता ने पूछा.

  ‘‘9 बजे तक निकलेंगे. नहाधो कर आराम से तैयार हो जाना.’’ मनोज ने कहा.

 अगले दिन रविवार था. संगीता ने बेटी अनुष्का को भी तैयार किया और खुद भी तैयार हो गई. मनोज तैयार ही बैठा था. पत्नी और बेटी को ले कर वह बस से मोदीनगर के लिए रवाना हो गया. मोदीनगर के सीकरी खुर्द पहुंच कर दिन भर वह संगीता के साथ मेले में घूमता रहा. इस बीच मनोरंजन के साथसाथ घर के लिए कुछ खरीदारी भी की. छुट्टी का दिन होने की वजह से मेले में भीड़भाड़ ज्यादा थी, डेढ़ साल की बेटी अनुष्का को मनोज खुद ही लिए था. अंधेरा होने लगा तो मनोज घर लौटने की तैयारी करने लगा. उस ने संगीता से मेले से बाहर चलने को कहा. वह तो बेटी को ले कर मेले के बाहर गया, लेकिन संगीता नहीं पाई.

कुछ देर बाहर खड़े हो कर मनोज ने संगीता का इंतजार किया. जब काफी देर तक संगीता नहीं आई तो वह उसे तलाशने के लिए फिर मेले में घुस गया. काफी देर तक वह उसे ढूंढ़ता रहा. जब रात ज्यादा होने लगी तो उस ने इस बात की जानकारी घर वालों के साथ ससुराल वालों को दी. रात ज्यादा हो गई थी और बेटी रो रही थी, इसलिए वह पत्नी के मेले में खो जाने की सूचना थाना पुलिस को दिए बगैर ही घर गया. लेकिन अगले दिन सवेरा होते ही वह थाना मोदीनगर पहुंचा और पत्नी की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

मनोज ने संगीता के मेले में खो जाने की जानकारी ससुराल वालों को भी दे दी थी. इसलिए अगले दिन संगीता के पिता जयपाल सिंह भी थाना मोदीनगर पहुंच गए थे. लेकिन उन के पहुंचने तक मनोज संगीता की गुमशुदगी दर्ज करा कर जा चुका था. जयपाल सिंह ने थानाप्रभारी दीपक शर्मा से मिल कर बेटी के गायब होने का आरोप उस की ससुराल वालों पर लगाते हुए एक प्रार्थना पत्र दिया, जिस के आधार पर थानाप्रभारी ने संगीता के पति मनोज सिंह तथा उस के घर वालों के खिलाफ अपराध संख्या 237/2014 पर भादंवि की धाराओं 498, 420 एवं 364 के तहत मुकदमा दर्ज करा कर इस मामले की जांच सबइंसपेक्टर रोशन सिंह को सौंप दी. चूंकि रिपोर्ट नामजद दर्ज थी, इसलिए सबइंसपेक्टर रोशन सिंह ने मनोज के घर छापा मारा.

शायद रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मनोज और उस के घर वालों को हो गई थी, इसलिए घर पर कोई नहीं मिला. पूरा परिवार भूमिगत हो गया था. फिर भी कोशिश कर के किसी तरह उन्होंने मनोज को हिरासत में ले ही लिया. उसे थाने ला कर पूछताछ शुरू हुई. पहले तो मनोज यही कहता रहा कि संगीता मेले में कहीं खो गई है. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती के साथ सवालों की झड़ी लगा दी तो पुलिस के सवालों के जाल में फंसे मनोज ने स्वीकार कर लिया कि उस ने संगीता की हत्या कर के उस की लाश नहर में फेंक दी है. इस के बाद उस ने संगीता की हत्या के पीछे की जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ के थाना सरूरपुर खुर्द के गांव रसूखपुर जाहिद में रहते थे देवकरण सिंह. उन के पास मात्र 5 बीघा खेती की जमीन थी, जिस पर वह परिवार की मदद से मेहनत से खेती करते थे. यही खेती उन की आजीविका का साधन थी. इसी की कमाई से परिवार का गुजरबसर होता था. देवकरण सिंह के परिवार में पत्नी शकुंतला के अलावा 2 बेटे, सुरेश और मनोज थे. सुरेश ज्यादा पढ़लिख नहीं सका तो पिता के साथ खेती के कामों में मदद करने लगा. पढ़ालिखा तो मनोज भी ज्यादा नहीं था, लेकिन खेती के काम में उस का मन नहीं लगा. उस ने भी पढ़ाईलिखाई छोड़ दी तो देवकरण सिंह ने उसे गांव में ही जनरल स्टोर की दुकान खुलवा दी, जिसे वह अकेला ही संभालता था.

 देवकरण सिंह ने मरने से पहले अपने बड़े बेटे सुरेश की शादी बुलंदशहर के कस्बा स्यान के रहने वाले क्षेत्रपाल सिंह की बेटी शशि से कर दी थी. शशि तीखे नैननक्श वाली खूबसूरत लड़की थी. इसलिए आते ही उस ने ससुराल के सभी लोगों का मन मोह लिया था. वह व्यवहारकुशल के साथसाथ घर के कामों में भी निपुण थी, इसलिए घर का हर आदमी उस से खुश रहने लगा था. इस के बाद जल्दी ही गांव में उस के रूप और गुण की चर्चा होने लगी.

शशि के आगे उस का पति सुरेश कहीं नहीं ठहरता था. सुरेश को भी इस बात का अहसास था. शशि और सुरेश को देख कर कोई अंधा भी कह सकता था कि लंगूर के हाथ अंगूर लगने वाली कहावत यहां पूरी तरह चरितार्थ हो रही है. शशि को अपनी सुंदरता पर गुमान था, इसलिए अपनी उसी सुंदरता के बल पर वह पति सुरेश पर पहले ही दिन से हावी हो गई थी. शशि को सुरेश बिलकुल पसंद नहीं था, लेकिन अब वह कर भी क्या सकती थी. घर वालों ने ब्याह दिया था, इसलिए तकदीर मान कर उस ने उसे गले लगा लिया था. उस ने जैसेतैसे उस के साथ निर्वाह करने का मन बना लिया था. जिस दिन उस ने ससुराल में कदम रखा था, उसी दिन से वह देख रही थी कि उस का देवर मनोज उस का कुछ ज्यादा ही खयाल रखता था.

वह जब भी घर में अकेली होती, मनोज उसे चाहत भरी नजरों से ताकते हुए उस के आगेपीछे नाचता रहता. शुरुआत में तो शशि को लगा कि वह नईनई आई है, इसलिए आकर्षणवश मनोज उस के आगेपीछे घूमता है. लेकिन जब मौका मिलने पर मनोज उस से छेड़छाड़ करने लगा तो शशि को समझते देर नहीं लगा कि उस का प्यारा देवर क्या चाहता है. क्योंकि अब वह बच्ची नहीं रही थी कि मनोज के दिल की बात समझती.

सच भी है, जो बातें जुबान नहीं कह पाती, आंखें उन्हें इशारोंइशारों में कह देती हैं. मनोज भी भले ही दिल की बात मुंह से नहीं कह सका था, लेकिन आंखों ने इशारोंइशारों में कह दिया था. शशि को भी मनोज अच्छा लगता था, क्योंकि वह बड़े भाई सुरेश से काफी ठीकठाक था. लेकिन वह मन की बात देवर से कह नहीं सकती थी. इसलिए वह चाहती थी कि पहल देवर ही करे. इस के लिए वह मनोज को देख कर अकसर मुसकराती तो रहती ही थी, उस की हंसीमजाक और छेड़छाड़ का जवाब भी उसी के अंदाज में देती थी.

समझदार के लिए इशारा काफी होता है. मनोज भी जवान हो चुका था. स्त्रीसुख के लिए बेचैन भी रहता था. इसलिए भाभी की ओर से इशारा मिला तो एक दिन दोपहर में जब घर में शशि और उस के अलावा कोई और नहीं था तो उचित मौका देख कर वह शशि के कमरे में घुस गया. उसे अपने कमरे में देख कर शशि ने कहा, ‘‘इस समय तो तुम्हें दुकान पर होना चाहिए, यहां मेरे कमरे में क्या कर रहे हो?’’

‘‘तुम से एक बात कहनी थी, इसलिए दुकान छोड़ कर चला आया.’’

‘‘कहो, क्या कहना है?’’ शशि ने मुसकराते हुए पूछा.

‘‘भाभी, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.’’

‘‘सिर्फ अच्छी लगती हूं, और कुछ नहीं?’’

शशि ने यह कहा तो मनोज का हौसला बढ़ा. उस ने कहा, ‘‘भाभी, अच्छा लगने का मतलब है कि मैं तुम से प्यार करता हूं.’’

‘‘तो करो प्यार, मना किस ने किया है. मैं तो कब से तुम्हारे मुंह से यह बात सुनने का इंतजार कर रही हूं. क्योंकि मुझे तो बहुत पहले ही तुम्हारे दिल की बात का पता चल गया था. मैं इशारे भी कर रही थी. इस के बावजूद तुम ने यह बात कहने में इतने दिन लगा दिए.’’

‘‘तुम्हारे इशारों की वजह से ही तो हिम्मत कर सका हूं. नहीं तो किसी की पत्नी से भला यह कहने की हिम्मत कहां थी.’’ कह कर मनोज ने शशि का हाथ पकड़ा तो वह उस की बांहों में समा गई.

 मनोज ने शशि को बांहों में भर लिया. इस के बाद देवरभाभी का पवित्र रिश्ता कलंकित होने से कैसे बच सकता था. रिश्तों की परिभाषा बदली तो आयाम भी बदल गए. एक ही घर में रहने की वजह से मर्यादा तोड़ने में दिक्कत भी नहीं होती थी. घर वालों के खेतों पर जाते ही देवरभाभी पतिपत्नी बन जाते. यह ऐसा काम है, जिसे लोग करते तो बहुत चोरीछिपे हैं, इस के बावजूद लोगों की नजरों में ही जाता है. मनोज और शशि के मामले में भी ऐसा ही हुआ. घर वालों को जब मनोज और शशि के बदले संबंधों की जानकारी हुई तो दोनों को रोकने की कोशिश शुरू कर दी गई. इसी के मद्देनजर फैसला लिया गया कि अब जितनी जल्दी हो सके, मनोज की शादी कर दी जाए. पत्नी के आने से वह शशि से संबंध तोड़ लेगा.

शादी की बात रिश्तेदारों के बीच पहुंची तो दौराला के गांव पनवाड़ी के रहने वाले जयपाल सिंह बड़ी बेटी संगीता का रिश्ता ले कर उस के यहां पहुंच गए. बातचीत के बाद शादी तय हो गई. 25 जनवरी, 2012 को मनोज और संतीगा का विवाह भी हो गया. संगीता दुलहन बन कर रसूलपुर गई. मनोज की शादी पर शशि ने खूब हंगामा किया. लेकिन मनोज ने कहा था कि कुछ ही दिनों की तो बात है, बाद में सब ठीक हो जाएगा तो वह मान गई थी. संगीता के ससुराल आने के बाद कुछ दिनों तक तो सब ठीकठाक रहा, लेकिन अचानक मनोज संगीता में कमियां निकालने लगा. यही नहीं, कम दहेज लाने के ताने मार कर उस के साथ मारपीट भी करने लगा. इस बात में घर वाले भी उस का साथ दे रहे थे, खासकर शशि.

शुरूशुरू में तो संगीता की समझ में नहीं आया कि अचानक मनोज को ऐसा क्या हो गया कि उस में उसे इतनी सारी कमियां नजर आने लगीं. लेकिन जैसे घर वालों को देवरभाभी के रिश्ते की जानकारी हो गई थी, उसी तरह कुछ दिनों में संगीता को भी पति की असलियत का पता चल गया था. दरअसल एक दिन उस ने पति को भाभी के साथ रंगरलियां मनाते देख लिया था. संयोग से अब तक संगीता एक बेटी अनुष्का की मां बन चुकी थी. उसे लग रहा था कि बेटी का मुंह देख कर ही शायद मनोज का व्यवहार बदल जाए, लेकिन जब उस ने देवरभाभी को रंगेहाथों पकड़ लिया तो समझ गई कि अब कुछ नहीं हो सकता.

 मनोज लगातार संगीता पर मायके से 50 हजार रुपए नगद, अंगूठी और फ्रिज लाने की बात कह कर जुल्म ढा रहा था. 1 मार्च, 2013 को मनोज और उस के घर वालों ने संगीता को मायके भेज दिया और साफसाफ कह दिया कि जितना कहा जा रहा है, उतना सामान और रुपए ले कर ही वह ससुराल आएं, तभी उसे रहने दिया जाएगा. जयपाल ने पंचायत में गुहार लगाई. 24 जून, 2013 को गांव में हुई पंचायत ने फैसला किया कि भविष्य में मनोज के घर वाले कोई दानदहेज नहीं मांगेगे और संगीता को ठीक से रखेंगे. उसे परेशान नहीं करेंगे. समझौते के बाद 2-3 महीने तक तो मनोज और उस के घर वालों ने संगीता को कुछ नहीं कहा. उस के बाद वे अपनी पुरानी हरकतों पर उतर आए.

संगीता मायके वालों से शिकायत करती और वे कुछ करते, उस के पहले ही 6 अप्रैल, 2014 को मनोज ने ससुर जयपाल सिंह को फोन कर के बताया कि संगीता सीकरी के मेले से गायब हो गई है. हैरानपरेशान जयपाल सिंह बेटों के साथ थाना मोदीनगर पहुंचे और मनोज तथा उस के घर वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, अपहरण और हत्या का आरोप लगा कर रिपोर्ट दर्ज करा दी. थाना मोदीनगर पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में मनोज ने बताया कि पहले से बनाई गई योजना के तहत मेला दिखाने के बहाने वह संगीता को सीकरी खुर्द ले गया. पूरे दिन मेला देखते हुए वह खरीदारी करता रहा. शाम का धुंधलका हो गया तो वह उसे साथ ले कर गंगनहर के चित्तौड़ा पुल की ओर चल पड़ा. तब संगीता ने उस से पूछा, ‘‘इधर कहां जा रहे हो, हमारा घर तो उस ओर है.’’

‘‘यहीं पास के गांव में मेरा एक दोस्त रहता है, इधर आया हूं तो चलो उस से भी मिल लेते हैं.’’ मनोज ने कहा.

इस के बाद संगीता ने कोई सवाल नहीं किया और उस के साथ चल पड़ी. जब संगीता पुल पर पहुंची तो उस ने गोद में ली बेटी को उतार कर खड़ी कर दिया और लापरवाह खड़ी संगीता को एकदम से गिरा दिया. संगीता कुछ कह पाती, उस के पहले ही उस के गले में पड़े दुपट्टे को लपेट कर कस दिया. संगीता छटपटा कर मर गई. संगीता की हत्या कर मनोज ने उस की लाश को गंगनहर में फेंक दिया और वापस गया. उस ने फोन कर के संगीता के गायब होने की सूचना ससुराल वालों को भी दे दी थी और अगले दिन थाने में उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा दी थी. लेकिन उस की चालाकी चली नहीं और पकड़ा गया.

अगले दिन मनोज को गाजियाबाद की जिला अदालत में पेश कर के लाश बरामद करने के लिए 3 दिनों के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया. घटनास्थल पर मनोज को ले जा कर पुलिस ने संगीता की लाश बरामद करने की बहुत कोशिश की, लेकिन लाश बरामद नहीं हो सकी. रिमांड अवधि खत्म होने पर मनोज को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस के बाद पुलिस ने मनोज के घर वालों को भी गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. कथा लिखे जाने तक सभी अभियुक्त जेल में बंद थे. पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया था. UP News

Hindi Stories Love : प्रेम में दुश्मन बनते भाई

Hindi Stories Love : लड़की के प्यार का जुनून और भाई की जिद में भाईबहन का प्यार और खून का रिश्ता दुश्मनी में बदल रहा है, जो कभीकभी जान पर भी भारी पड़ जाता है. वे एक ही छत के नीचे साथसाथ रह कर, खेलकूद कर, पढ़लिख कर बड़े होते हैं, इस के

बावजूद उम्र के नाजुक पायदान पर कदम पड़ने पर जब कोई लड़की दिल की उमंगों से अपने अंदाज में बेहतर जिंदगी की ख्वाहिश में मोहब्बत का तराना गुनगुनाती है तो उस के खून के रिश्ते का भाई ही उस के प्यार के बीच दीवार बन कर खड़ा हो जाता है. लड़की की मोहब्बत के जुनून और भाई की जिद में प्यार और खून का रिश्ता दुश्मनी में बदल जाता है. यही दुश्मनी एक दिन जान पर भारी पड़ जाती है और सगे भाई ही बहनों का कत्ल कर देते हैं.

मोहब्बत और कत्ल का यह सिलसिला चलता ही रहता है. कानून तो अपना काम करता है, लेकिन समाज खामोशी से देखता रहता है. ऐसा करने वाले यूं तो सलाखों के पीछे होते हैं, लेकिन उन्हें इस का जरा भी मलाल नहीं होता. बात अगर गैरमजहबी युवक से मोहब्बत की हो तो अंजाम और भी दिल दहला देने वाले होते हैं. हापुड़ जनपद के स्याना रोड निवासी इंसाफ अली की 20 साल की बेटी दानिश्ता ने जमाने में देखा, फिल्मों में देखा और कानून की यह बात भी पता चली कि लड़कालड़की बालिग हो जाएं तो अपनी मरजी से जिंदगी जीने के लिए आजाद हैं.

वक्त की बदलती चाल ने दानिश्ता के दिलोदिमाग पर छाप छोड़ी तो वह दूसरे मजहब के सोनू के साथ मोहब्बत का तराना गुनगुनाने लगी. उम्र की दहलीज पर उस ने अपनों से नाफरमानी कर दी. मोहब्बत का जुनून ही था कि उस ने अंजाम की परवाह किए बगैर खूबसूरत भविष्य का ख्वाब संजोया. लेकिन उस के ख्वाबों के महल तब बिखर गए, जब न सिर्फ उस के सगे भाई खलनायक बन कर उभरे, बल्कि परिवार भी उस के खिलाफ हो गया.

29 नवंबर, 2014 की सुबह का वक्त था. दानिश्ता का प्रेमी सोनू किसी काम से जा रहा था कि दानिश्ता के भाइयों तालिब, आसिफ और तसलीम ने उसे घेर लिया और उस के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी. दानिश्ता ने अपनी मोहब्बत को दम तोड़ते देखा तो वह बचाव के लिए आगे बढ़ी और घर वालों से भिड़ गई. इस पर दानिश्ता और उस के प्रेमी सोनू को धारदार हथियारों से बेरहमी से काट कर मौत की नींद सुला दिया गया.

भाइयों में गुस्सा इस कदर था कि कोई उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं कर सका. हत्याओं में भाइयों का साथ उन के दोस्तों और मां नूरजहां खातून ने भी दिया. हत्याएं करने के बाद तालिब और नूरजहां खुद ही थाने पहुंच गए और आत्मसमर्पण कर दिया. दानिश्ता और सोनू का प्रेमसंबंध काफी समय से चल रहा था. उन के प्रेमसंबंधों की जानकारी दानिश्ता के घर वालों को हुई तो उन्होंने उसे समझाया कि वह गैरमजहबी लड़के से कोई रिश्ता न रखे. लेकिन प्यार करने वाले ऐसे किसी बंधन को कहां मानते हैं. वे तो जातिधर्म, ऊंचीनीच की दीवारों को गिराने का दम भरते हैं. प्यार के लिए वे जमाने से भी टकराने को तैयार रहते हैं. वे जानते हैं कि प्रेम में ऐसी बाधाएं आएंगी और उन्हें उन का सामना करना पड़ेगा.

लेकिन उन्हें यह उम्मीद होती है कि एक दिन जीत उन के प्यार की ही होगी. यह बात अलग है कि बड़े शहरों की बात छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्रों में हर कोई ऐसा खुशनसीब नहीं होता. दानिश्ता और सोनू की सोच भी यही थी कि एक दिन उन का प्यार जीत जाएगा. वे विवाह कर के जीवन भर साथ रहने का निर्णय ले चुके थे. जबकि दानिश्ता के भाई इस के लिए तैयार नहीं थे. वह जब भी सोनू से विवाह की बात घर में करती, उस के साथ मारपीट की जाती. दानिश्ता और सोनू दोनों ही समझ गए कि घर वालों की मरजी से वे कभी शादी नहीं कर पाएंगे.

दोनों ने कानून का सहारा लिया और गुपचुप कोर्टमैरिज कर ली. यह बात दोनों ने ही घर वालों से छिपाए रखी और अपनेअपने घर यह सोच कर रहते रहे कि अच्छे वक्त पर घर वालों को मना कर एक हो जाएंगे. जब इस बात का खुलासा हुआ तो हंगामा मच गया. दानिश्ता की शामत आ गई. इस मुद्दे पर हत्या से एक दिन पहले स्थानीय पंचायत भी हुई. दानिश्ता के भाइयों ने ऐलान कर दिया कि वे बहन की मोहब्बत को कुबूल नहीं करेंगे. पंचायत में कथित समाज के ठेकेदारों का भी फरमान था कि दोनों हमेशा अलग ही रहेंगे. जबकि यह फरमान न दानिश्ता को मंजूर था और न सोनू को. नतीजतन मौका पा कर उन की हत्या कर दी गई.

पुलिस गिरफ्त में हत्यारोपी भाई का कहना था, ‘‘बिरादरी में हमारी बदनामी हो रही थी. हमारा घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था. अब घर वाले समाज में सिर उठा कर जी सकेंगे, क्योंकि हम ने अपनी इज्जत बचा ली है.’’

नूरजहां का बयान भी कुछ ऐसा ही था. उसे भी बेटी की मौत का कोई अफसोस नहीं था. इस दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस ने ऐसे प्रेमी युगलों की सूची बनाई, जिन्होंने अपनी मरजी से विवाह किए थे. पुलिस अधीक्षक आर.पी. पांडे ने कहा, ‘‘हम प्रेमियों को सुरक्षा देने के लिए तत्पर हैं. हमारी कोशिश है कि घृणित कृत्य करने वालों को सख्त सजा मिले.’’

औनर किलिंग की यह पहली वारदात नहीं थी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अकसर भाईबहन की मोहब्बत के दुश्मन बन जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि अपनों के खून से हाथ रंगने वालों को अपने किए पर अफसोस नहीं होता. शान के लिए लड़कियों और उन के प्रेमियों की हत्या कर दी जाती है. मेरठ की रहने वाली फुरकानी ने भी गैरमजहब के लड़के रविंद्र से मोहब्बत करने का गुनाह किया था. प्रेमसंबंध की जानकारी होने पर जम कर हंगामा हुआ. उस के इस कदम से घर वाले गुस्से में आ गए. दूसरे संप्रदाय के लड़के ने उन की बेटी को दुलहन बना लिया था. उस ने प्रेमी के लिए धर्म ही नहीं, नाम भी बदल लिया था. उस ने अपना नाम निशू रख लिया था.

फुरकानी के घर वालों ने इस बात को आन का सवाल बना लिया. टकराव को टालने के लिए दोनों शहर जा कर रहने लगे. काफी दिनों बाद वे दोनों गांव आ कर रहने लगे तो फुरकानी के घर वाले खफा हो गए. 25 नवंबर को फुरकानी के भाई निजाम और फुरकान उस के घर पहुंचे और उस के सिर में गोली मार कर फरार हो गए.  समय पर उपचार मिलने से निशू की जान तो बच गई, लेकिन उस की एक आंख हमेशा के लिए चली गई. उस के भाइयों को भी गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन निशू के भाई निजाम को उस के जिंदा बच जाने का बहुत अफसोस है.

उस का कहना है कि अगर उसे पता होता कि बहन जिंदा बच जाएगी तो वह उसे एक और गोली मार देता. जब तक वह मरेगी नहीं, उसे चैन नहीं मिलेगा. गैरसमुदाय के लड़के से शादी कर के उस ने उस के परिवार की बहुत बदनामी कराई है, इसलिए उस ने उसे गोली मारी थी. मुजफ्फरनगर के लोई गांव के रहने वाले इलियास की बेटी शाइमा का 2 साल से गांव के ही एक लड़के से प्रेमसंबंध चल रहा था. जब घर वालों को इस बात की खबर हुई तो उन्होंने उस पर बंदिशें लगा दीं. शाइमा लड़के से विवाह करने की जिद पर अड़ गई. बंदिशों को तोड़ कर एक दिन वह घर से भाग गई. शाइमा की इस हरकत से घर वाले आगबबूला हो गए.

कुछ दिनों बाद शाइमा को उन्होंने ढूंढ निकाला और घर ला कर उस के भाई इंतजार ने उसे गोली मार दी. अमित को भी अपनी बहन मोना का प्यार मंजूर नहीं था. वह किसी लड़के से मोबाइल फोन पर बातें किया करती थी. अमित इस बात से बेहद नाराज रहता था. उसे लगता था कि इस से एक दिन परिवार की इज्जत चली जाएगी. एक दिन उस ने बहन को फोन पर बातें करते पकड़ लिया तो उस ने उसे गोली मार दी. मोना किसी तरह बच गई. पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सामाजिक परिवेश ऐसा है, जहां प्रेमिल रिश्तों का खुलेआम विरोध है. इस के बावजूद चोरीछिपे रिश्ते पनपते हैं. तेजी से होते शिक्षा और आर्थिक विकास के बीच यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है.

प्रेमसंबंधों को आन से जोड़ कर देखा जाता है. घर की बेटी प्रेम संबंध में अपनी मरजी से विवाह जैसा कदम उठाए, यह किसी भी दशा में मंजूर नहीं होता और अपने ही मरनेमारने पर उतारू हो जाते हैं. समाज की टीका टिप्पणियां आग में घी डालने का काम करती हैं. जिस परिवार की लड़की को ले कर इस तरह के मामले सामने आते हैं, उन्हें तरहतरह के ताने दिए जाते हैं. ऐसे में नौजवानों को यह बरदाश्त नहीं होता. मानसिकता ऐसी होती है कि उन्हें लगता है कि हत्या कर देने से उन की इज्जत बच जाएगी और वह शान की जिंदगी जी सकेंगे.

ऐसा करने वाले प्रेम करने वाली लड़की को अपने परिवार के लिए कलंक मानते हैं. कातिल मानते हैं कि सामाजिक तानों व बेइज्जती से बचने के लिए अब यही करना आवश्यक हो गया है. दुखद यह है कि ऐसा कर के भी उन की इज्जत नहीं बचती. समाज भी खुले तौर पर ऐसी हत्याओं का विरोध नहीं करता. कानून का काम लाशों के पंचनामे और हत्यारों की गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाता है. Hindi Stories Love